पारिवारिक चुदाई की कहानी
04-13-2020, 05:11 PM,
#11
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
रवि के जाने के थोड़ी ही देर बाद रोहन भी आ गया।
मैं तब बाथरूम में थी।
डोरबेल बजने पर मैं बाहर जाने लगी, मुझे पता था कि दरवाजे पर रोहन ही है तो मैं पैंटी पहने हुए ही दरवाजे की तरफ जाने लगी।

मैं बिल्कुल नंगी थी, बस पूरे शरीर पर एक पैंटी थी जो मेरी गांड और चूत को ढकी हुई थी।
मेरे कसे हुए गोल मम्मे बिल्कुल नंगे और तने हुए थे।

जब दरवाजे की तरफ जाते हुए मैंने खुद को देखा तो मैं खुद अपने नंगे जिस्म को देखकर उत्तेजित होने लगी थी।

मेरे मम्मे जो मेरे चलने की वजह से हिल रहे थे, मुझे काफी उत्तेजित कर रहे थे।

मेरी पतली कमर के नीचे ऊपर नीचे होते हुए मेरे गोल बड़े कूल्हे… आहह… पता नहीं आज मुझे यह क्या हो रहा था, खुद को इस तरह देख कर!
मैंने अपने मम्मों को हाथों से ढक लिया ताकि वो हिले भी ना और किसी को दिखे भी ना।

मैं अब दरवाजे पर पहुच चुकी थी। मैंने दरवाजा खोला और रोहन अंदर आ गया। अंदर आते ही रोहन मुझे ऐसी हालत में देखते हुए बोला – क्या हुआ मम्मी आपने कपड़े क्यों नही पहने।

मैंने बोला – अभी बाथरूम में नहाने ही जा रही थी की तू आ गया।

फिर रोहन बोला – चलो अच्छा है आज हम दोनों साथ में नहाएंगे।

मेने बोला – आज सुबह ही तो तू नहा कर गया था।

रोहन बोला – तो क्या हुआ आज तो मैं फिर से नहाऊंगा और आप के ही साथ नहाऊंगा।

मैंने बोला – हां ठीक है नहा लेना मेरे साथ भी , कभी मना किया है तुझे मैंने।

मेरेे इतना बोलते ही रोहन ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और फिर मेरे होंठो को चूमने लगा।

फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और सीधे बाथरूम की तरफ जाने लगा। बाथरूम पहुँचते ही उसने मुझे उतार दिया। अब मैं उसके सामने बस पैंटी में ही खड़ी हुई थी। रोहन ने अपने कपड़े उतार लिए और अब वी सिर्फ चड्डी में ही मेरे सामने खड़ा था।

उसने मुझे हल्का सा धक्का देकर दीवार से टिका दिया और मेरे होठों को फिर से चूमना शुरू कर दिया। उसके दोनों हाथ मेरे चुच्चों पर थे और वो अब अपने हाथों से मेरे मम्मों का मर्दन कर रहा था।

रोहन के कड़क हाथ मेरे मुलायम और कसे हुए मम्मों को बेरहमी से मसल रहे थे। रोहन बीच बीच में मेरे निप्पल को भी खींच और दबा देता था जो की उसे काफी मजा दे रहा था और मुझे एक प्यारा सा दर्द।

रोहन ने अब मेरे होठों को चूमना बंद कर दिया और अपने हाथों को मेरे मम्मों से हटा दिया।
वह अब अपने मुंह को मेरे सीने पर लेकर आया और मेरे मम्मों के बीच में अपना मुंह रगड़ने लगा।

उसने मेरे मम्मों को जोरो से पकड़ा और उन्हें चाटने लगा। बीच बीच में वो मेरे निप्पल को मुंह में लेकर चूसने भी लगता था और कभी कभी उनके हल्के से काट भी लेता था, जिससे मैं सिहर उठती थी।

थोड़ी देर तक इसी तरह चूमने के बाद रोहन अपने घुटनों के बल बैठ गया और मैं अभी भी दीवार के सहारे खड़ी हुई थी।

रोहन अब अपनी जीभ से मेरी कमर और नाभि को चाट रहा था।
रोहन के यह सब करने से मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरा बदन और पेट काँपने लगा।

रोहन अपनी जीभ से मेरी नाभि को कुरेद रहा था।
उसने ऐसा करते हुए ही मेरी पैंटी को नीचे करना शुरू कर दिया, मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे कर दिया।

फिर रोहन ने मुझे पलट कर घोड़ी बनने के लिए बोला।

तो मैं भी बिना किसी सवाल के फर्श पर बैठकर घोड़ी बन गई।

झुकने की वजह से मेरे मम्मे नीचे की तरफ लटक रहे थे तो मैं अपने एक हाथ से अपने मम्मों को सहलाने लगी थी।

रोहन ये सब देख रहा था और फिर हमारी नज़रें आपस में मिली और हम दोनों एक दूसरे को देख कर हँसने लगे।

रोहन अब पीछे से आकर मेरी चूत को सहलाने लगा, वो बड़ी ही तेजी से अपनी उंगलियों से मेरी चूत के दाने को रगड़ रहा था।

थोड़ी देर इसी तरह सहलाने के बाद मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई तो उसने अपनी जीभ मेरी चूत की दरार पर लगा दी।

रोहन अब अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल कर मेरी चूत को सहला रहा था और मेरी चूत के पानी को चाट रहा था।

अब रोहन उठा और उसने मुझे भी उठा दिया, उसने मुझे 69 की पोजीशन में आने के लिए बोला।
मैंने भी हां में सिर हिला दिया।

रोहन नीचे लेट गया, मैं उसके ऊपर आ गई।
मैंने अपनी पैंटी जो रोहन ने घुटनों तक ही उतारी थी, उसे उतार दिया।
फिर मैंने अपनी चूत को रोहन के मुंह के ऊपर रख दिया और अपना मुँह रोहन के लंड के पास ले आई।

रोहन अभी भी चड्डी में ही था तो मैंने उसकी चड्डी उतार कर अलग रख दी।

रोहन का लंड पूरा खड़ा था और वो हल्का सा गीला भी था। सैयद आज ज्यादा उत्तेजना के कारण उसके साथ ऐसा हुआ था।
मैंने रोहन के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी।

चूत गांड लंड चुसाई

तभी रोहन ने मेरी चूत और गांड को चाटना शुरू कर दिया।
अब वो अपनी जीभ से मेरी गांड के छेद को भी कुरेदने लगा पर फिर थोड़ी देर बाद ही वो वापस मेरी चूत को चाटने लगा।

मैं अभी भी रोहन के लंड को अपने हाथों से सहला रही थी। रोहन के लंड के गीला होने की वजह से मेरा हाथ भी गीला हो गया था। फिर मैंने रोहन के लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद हम दोनों के बदन साथ में अकड़ने लगे और हम साथ में ही झड़ने लगे।
झड़ते वक्त मैंने रोहन के लंड को अपने मुख से निकाल दिया था जिससे उसके वीर्य की धार मेरे चेहरे और हाथ पर जा गिरी।

मेरा पूरा चेहरा रोहन के वीर्य से गीला हो गया था। और मैंने भी झड़ते समय अपनी चूत को रोहन के मुँह पर लगा दिया था जिससे रोहन का मुँह भी गीला हो गया था।

अब हम दोनों उठे और उठकर अपना चेहरा साफ करने लगे।
मैंने रोहन से बोला- आज तो तूने मुझे पूरा बिगाड़ कर रख दिया।

रोहन भी मेरी बात का जवाब देते हुए बोला- मम्मा… आपने ही मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दिया था तो इसमें मेरी क्या गलती है? और आपने भी तो मेरा चेहरा बिगाड़ दिया है।

फिर रोहन ने मुझे उठा कर सिंक के पास लगे स्टैंड पर बैठा दिया। जो कि उसकी कमर के बराबर लंबाई में था। मैं वहाँ पर ठीक से बैठ गई पर नंगी होने के कारण मेरी गदराई हुई गांड स्टैंड के ठंडा होने के कारण ठंडी होने लगी।

मैंने रोहन से बोला- रोहन, ये स्टैंड मुझे बहुत ठंडा सा लग रहा है।

रोहन बोला- मम्मी आप इतनी गर्म हो फिर भी स्टैंड के कारण ठंडी हो रही हो? अभी शुरू में थोड़ा ठंडा लगेगा बस।

फिर रोहन वैसे ही मुझसे लिपट गया और मुझे चूमने लगा।

रोहन का लंड जो बैठ चुका था, फिर से खड़ा होने लगा था।
मैंने रोहन के लंड को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया, फिर मैं लंड पर थूक लगाकर उसे मलने लगी।


जब रोहन का लंड पूरा तन गया तो वो अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
मैंने स्टैंड पर बैठे हुए ही अपने दोनों हाथों से रोहन के कंधों को पकड़ लिया।

मेरी चूत झड़ने के कारण पहले से ही काफी गीली थी और रोहन ने भी एक ही धक्के के साथ अपने लंड को मेरी चूत में उतार दिया।
मैं दर्द के कारण कराहने लगी- आहह हहह… उहह हहह… रोहन… आराम से कर ना… मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ… ओहहह…

रोहन ने मेरी बात मानते हुए फिर आराम से धक्के देने शुरू कर दिए।

मैं भी रोहन का खुलकर साथ दे रही थी- आह… उफ़्फ़… रोहन… चोद… मुझे… फ़क मी… आहहह.. चोद… अपनी… माँ… को… आहाह…

रोहन भी पूरे जोश के साथ मेरी चुदाई कर रहा था, वो अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे वापस चूत की गहराई में उतार देता था।

रोहन के लगातार चोदने की वजह से हमारे शरीर काफी गर्म होने लगे थे और रोहन भी काफी गर्म हो रहा था तो उसने ऊपर लगे शावर को चला दिया और उसे हमारी तरफ कर दिया।

पानी की गिरती हुई ठंडी बूँदे हमारे शरीर को भिगो रही थी।
मेरे गोरे बदन पर पानी की बूंदों से धार बहने लगी थी। मेरे नंगे बदन को गीला देखकर रोहन काफी उत्तेजित हो गया था।

थोड़ी देर तक इसी तरह चुदने के बाद मेरा बदन अकड़ने लगा, मैं अपने चरम पर थी और अब झड़ने वाली थी।
मैंने अपने दोनों हाथों से रोहन की पीठ को जकड़ लिया और अपनी कमर को स्टैंड से ऊपर उठाते हुए झड़ने लगी- आहह… रोहन… मैं… झड़ने.. वाली.. हूँ… बेटे..

रोहन ने भी अपने धक्कों को और बढ़ा दिया और मैं चिल्लाते हुए झड़ने लगी- रोहन… मैं… गई… आहाहह हहह… उफ्फ…
मैं अभी भी स्टैंड पर ही बैठी थी और मेरी चूत से मेरा पानी बाहर आ रहा था जो पानी के कारण बहने लगा था।

रोहन अभी भी पूरे दम से मुझे चोद रहा था, बाथरूम भी अब फच…फच…की आवाज से गूँजने लगा था।
चुदाई के कारण बाथरूम में एक अजीब सी खुशबू आने लगी थी।

मैं भी रोहन के हर धक्के का जवाब अपनी कमर उचका कर दे रही थी।
मैंने भी अपनी कमर से रोहन के लंड पर दबाब बनाना शुरू कर दिया था।

थोड़ी देर तक चोदने के बाद रोहन बोला- मम्मी मैं भी झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ अपना पानी…
मैंने कहा- अंदर ही निकाल दे अपना पानी!

फिर रोहन ने तेज धक्कों के साथ ही मेरी चूत में झड़ना शुरू कर दिया- ये… लो.. मम्मी… आहहह… मेरा… वीर्य… अपनी.. चूत.. के अंदर… आहाहहह…

रोहन का गर्म वीर्य मेरी चूत को सराबोर कर रहा था और वो मुझसे लिपट कर मेरी चूत में झड़ रहा था।

थोड़ी देर वैसे ही हम एक दूसरे से लिपट रहे और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के बदन को साफ किया और फिर आपस में चिपक कर नहाने लगे।
हम अभी भी एक दूसरे के बदन के साथ खेल रहे थे।

फिर हम दोनों नहाकर मेरे बैडरूम में आए, हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।

मैं अलमारी की तरफ जाकर कपड़े पहनने लगी, रोहन अभी भी नंगा बेड पर लेटा हुआ था तो उसने मुझे कपड़े पहनने से रोक लिया और अपनी तरफ खींच लिया।

उसने मुझे बेड पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे मम्मों को दबाते हुए बोला- मम्मी… अब अगले सात दिन तक जब तक मैं घर पर रहूँगा आप नंगी ही रहोगी बिना कपड़ों के…

मैंने कहा- अच्छा ठीक है पर अन्नू भी तो रहेगी ना घर पर…
तो रोहन बोला- जब अन्नू आ जाया करे तब आप कपड़े पहन सकती हो।

रोहन का लंड फिर से खड़ा हो चुका था और वो अगली चुदाई के लिए भी तैयार था तो उसने ज्यादा देर ना करते हुए मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया।

रोहन ने मुझे दो बार चोदा और रात को भी वो मेरे साथ सोता था और पूरी रात हम मस्ती करते थे।
कभी वो मेरी चूत में तो कभी गांड में लंड डाल कर चुदाई करता था और कभी मेरे मम्मों को भी चोदता था।

दो दिन की चुदाई के बाद मुझे याद आया कि हमने बिना कंडोम के सेक्स किया, अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो?



मैंने रोहन को सारी बात बताई तो वो मेरे लिए टेबलेट ले आया और फिर हम वापस वैसे ही एन्जॉय करने लगे।
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04-14-2020, 05:22 PM,
#12
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
आप लोग आलोक के बारे में तो जानते ही होंगे वो रवि के बड़े भाई मतलब मेरे जेठ का लड़का है।

आलोक की बड़ी बहन मतलब मेरी भतीजी स्वाति का रिश्ता पक्का हुआ था, कुछ ही दिनों बाद उनकी सगाई का फंक्शन था तो मुझे और मेरे परिवार को वहाँ जाना था पर अपनी जेठानी की जिद पर मुझे तीन दिन पहले ही वहाँ जाना पड़ा।

मैंने रोहन, अन्नू और रवि के लिए सभी जरूरी सामान की व्यवस्था कर दी और फिर रोहन मुझे स्टेशन तक छोड़ने गया।
मैंने हल्के स्किन कलर का सूट पहना हुआ था।

स्टेशन पहुँच कर मैंने रोहन की तरफ देखा तो मुझे उसका मन बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था तो मैंने उससे पूछा- तुझे क्या हुआ, तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है?
रोहन बोला- मम्मी, मैं आपके बिना इतने दिनों तक कैसे रह पाऊँगा।

मैं रोहन के बालों पर हाथ फेरते हुए बोली- अरे बस चार पांच दिन की ही तो बात है और फिर तीन दिन बाद तुम भी तो वहीं आ रहे हो।

मेरी ट्रेन का टाइम हो चुका था, मैं रोहन के माथे पर एक प्यारा सा चुम्बन देते हुए बोली- अब जल्दी से तुम भी अपने ताऊजी के घर आ जाना।

फिर रोहन मुझे ट्रेन में बिठाकर घर निकल गया। शाम पांच बजे मैं वहाँ पहुँच गई।
स्टेशन पर पहुँचकर मैंने आलोक को कॉल किया तो वो मुझे स्टेशन पर लेने आ गया।

हम दोनों बहुत दिनों बाद मिल रहे थे तो नज़रें मिलते ही हम एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे।
मेरे पास आते ही आलोक मुझे देखकर बोला- चाची जी, आप तो बहुत सुंदर लग रही हो!
मैंने शरमाते हुए उसे कहा- अरे पागल है क्या? स्टेशन पर क्या कोई ऐसी बातें करता है भला!

रोहन भी उत्सुकता में बोला- क्यों, स्टेशन पर क्या किसी खूबसूरत औरत को खूबसूरत नहीं बोलते?
मैं आलोक की बात काटते हुए बोली- तुझसे तो बहस करना ही गलत है।

आलोक ने मेरा सामान उठाया और हम कार में बैठकर घर की तरफ जाने लगे।
स्टेशन से उनका घर ज्यादा दूर नहीं था। मैं रोहन के पास आगे वाली सीट पर बैठी थी और रोहन कार चला रहा था।

रास्ते में आलोक ने अपने एक हाथ को मेरे हाथों पर रख दिया और मैंने भी उसके हाथ को अपने दोनों हाथों के बीच थाम लिया।
हम दोनों चुपचाप बैठे हुए थे।

रोहन ने ख़ामोशी तोड़ते हुए कहा- चाची, मुझे आपकी बहुत याद आती है। पर आप तो मुझे भूल ही गई थी।

मैंने आलोक से बोला- नहीं आलोक ऐसी बात नहीं है। उस दिन के बाद से मुझे तुमसे नज़र मिलाने और बात करने में बड़ा अजीब सा लगता था।

आलोक बोला- अरे चाचीजी आप भी ना…
और फिर आलोक ने मेरे हाथ को ऊपर उठाया और मेरे हाथ को चूमने लगा।

थोड़ी देर बाद हम लोग घर पहुँच गये, वहाँ मेरे सास ससुर, जेठ और जेठानी सब साथ में रहते थे। मेरे घर पहुँचते ही सब लोग खुश हो गये।
मैं अपने परिवार में सबकी बहुत चहेती हूँ, मेरी जेठानी तो मुझे अपनी बहन मानती है इसलिए उन्होंने मुझे इतना जल्दी बुला लिया था।
मेरे जेठ भी मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, वे मुझे सोना या सोनू कहकर बुलाते थे।

सभी सदस्य घर पर ही थे और स्वाति भी घर पर ही थी, सब लोग सगाई की तैयारियों में ही जुटे थे।
फिर मैं उठकर बाथरूम गई और हाथ मुह धोकर आलोक के रूम में गई। वो वहाँ बैठकर लैपटॉप पर कुछ कर रहा था।
मेरे आते ही उसने लैपटॉप बन्द कर दिया और हम दोनों बातें करने लगे।

रात को हम सब लोगों ने खाना खाया और फिर हम लोग आलोक के रूम में ही बैठकर बातें करने लगे।
घर वालों से बात करते करते कब मुझे नींद आ गई पता ही नहीं चला।

थोड़ी देर बाद मेरी जेठानी ने मुझे उठाया पर गहरी नींद में होने के कारण मैं नहीं उठी। फिर आलोक के बोलने पर उन्होंने मुझे वहीं सोने दिया और फिर सब लोग उठकर अपने अपने रूम में चले गए।

आलोक ने उठकर दरवाजा बंद किया और वो भी मेरे पास में आकर सो गया।

करीब एक घंटे बाद आलोक ने अपने हाथों से मेरे सिर को सहलाना शुरू कर दिया।
मुझे नींद में जब इस बात का अनुभव हुआ तो मेरी नींद खुल गई, मैंने अपनी आँखों को हल्का सा खोलकर देखा तो आलोक बड़े ही प्यार से अपने हाथ से मेरे चेहरे और बालों को सहला रहा था, वो बिना अपनी पलकें झपकाये मुझे ही देख रहा था।

मैंने आलोक से बोला- तुम अब तक सोये नहीं?
आलोक बोला- चाची, आपके पास होते हुए मुझे नींद आ सकती है क्या? मैं तो आपके जागने का ही इंतजार कर रहा था।

इतना बोलते ही वो उठा और मेरे माथे पर चुम्बन करने लगा।
अब आलोक ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया, मेरे मम्मे आलोक के सीने से चिपके हुए थे और दबे जा रहे थे।

आलोक ने देर न करते हुए मेरे होंठों पर चूमना शुरू कर दिया, हम दोनों एक दूसरे का मिल कर साथ दे रहे थे, मैंने भी अपनी जीभ को आलोक के मुँह में डाल दिया जिसे आलोक चूमने लगा।

मेरे होंठों को चूमते वक्त आलोक ने मेरे शर्ट को मेरी कमर के ऊपर से पकड़कर उसे मेरे सीने तक ला दिया जिससे मेरे आधे मम्मे शर्ट के नीचे से बाहर आने को फड़फड़ाने लगे।

अब आलोक ने पलटा कर मुझे नीचे कर दिया और फिर मेरे कमीज को उतार दिया, फिर उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया।
मैं अब केवल ब्रा और पैंटी में ही उसके नीचे थी।
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आलोक ने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए और केवल चड्डी में ही मेरे ऊपर आकर लेट गया।
मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी।

आलोक अपना मुंह मेरे कान की तरफ लाकर हल्के से बोला- चाची… बड़े इंतजार के बाद आप मुझे वापस मिली हो!
मैंने भी आलोक की बात पर मुस्कुराते हुए आँखें खोल दी।
अब आलोक मुझे और मेरे शरीर को निहार रहा था।

आलोक ने मेरी ब्रा के हुक को खोलकर उसे मेरे गदराए बदन से अलग कर दिया। आलोक की नज़र मेरे मम्मों पर पड़ते ही वो उन पर टूट पड़ा और उन्हें जोर से दबाने लगा।
मेरे मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी।

आलोक लगातार मेरे मम्मों का मर्दन कर रहा था जिससे मेरे गोरे और गोल कसे हुए मम्मे एकदम लाल और कड़े हो गए।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।

फिर आलोक ने अपने हाथों को मेरे बूब्स से अलग किया और उन्हें चाटने और चूसने लगा।
मेरे मम्मों को दबाते वक्त मुझे दर्द भी होता था पर मजा भी बहुत आता था। शायद इसलिए मेरे स्तन अभी तक इतने टाइट और गोल थे।

आलोक अपने मुँह से मेरे निप्पल चूस रहा था और फिर साथ में ही उसने अपने एक हाथ को मेरी पैंटी के अंदर डाल दिया, उस ने अपनी उंगलियों से मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया, वो अपनी दो उंगलियों से मेरी चूत के होठों को खोलता और फिर अपनी उंगलियों को बीच में ले जाकर मेरी चूत के दाने को सहला देता था।

आलोक ने मुझे काफी उत्तेजित कर दिया था, उसकी इन हरकतों से मेरी चूत गीली हो गई थी।
मेरी चूत से निकलते पानी से आलोक की उंगलियाँ भी भीग गई थी।


आलोक ने देर ना करते हुए मेरी पैंटी को भी मेरे शरीर से अलग कर दिया।
अब मैं आलोक के सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी।
आलोक ने अपनी दोनों गीली उंगलियों को मेरी चूत में डाल दिया और उन्हें अंदर बाहर करने लगा।
मेरे मुंह से उम्म्म… आहहह…उफ्फ्फ… की आवाजें निकलने लगी।

थोड़ी देर बाद जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ तो मैंने आलोक की कमर को भींचते हुए उसे कहा- आहहह… आलोक, थोड़ा रुको, मैं झड़ने वाली हूँ।

आलोक ने मेरी बात मानते हुए अपनी उंगलियों को मेरी चूत से बाहर निकाल लिया।

आलोक भी काफी उत्तेजित हो गया था… उसने देर ना करते हुए अपनी अंडरवियर को उतार फेंका, उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था और एकदम सख्त और मोटा लग रहा था।
वह आगे बढ़ते हुए अपने लंड को मेरी चूत पर लाकर उसे चूत के ऊपर रगड़ने लगा।

मेरी चूत पहले से ही काफी गीली थी जिस वजह से आलोक का लंड भी रगड़ने के कारण गीला हो गया।
अब आलोक ने मुझे बेड पर बैठने के लिए बोला और खुद खड़ा हो गया।

मैं भी अपने घुटनों के बल बेड पर बैठ गई और आलोक मेरे सामने खड़ा हो गया। आलोक का लंड मेरे मुख के सामने ही था, वह अपने लंड को लाकर मेरे होठों पर फेरने लगा।


मैंने भी अपना मुख खोलते हुए उसके
 उसके लंड को मुँह के अंदर लेकर चूसना शुरू कर दिया। मेरी चूत के लगे हुए पानी के कारण मुझे आलोक का लंड नमकीन लग रहा था पर इसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मेरा भतीजा मेरे बालों को पकड़कर अपने लंड से मेरे मुंह को चोद रहा था।
थोड़ी देर बाद आलोक ने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर निकाल दिया, उसका लंड पूरी तरह से मेरे थूक से भीगा हुआ था।

अब आलोक ने मुझे पीठ के बल लेटा दिया और खुद मेरी टांगों के बीच आकर बैठ गया। उसने मेरी दोनों टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर फैला दिया और फिर अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत पर लाकर रख कर दिया।

आलोक ने फिर हल्के हल्के धक्के लगाना शुरू कर दिए। पहले धक्के में उसके लंड का सुपारा मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया। और फिर अगले ही दो तीन धक्कों में आलोक का पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक समा गया।

अब आलोक ने जोरदार धक्कों के साथ मेरी चूत चुदाई शुरू कर दी। आलोक का लंड मेरी चूत के अंदर तक जाकर हलचल मचा रहा था। मेरे मुँह से हल्की हल्की सी ‘आआहह… ऊऊहह… आआहह.. आआऊहह.. ओह आलोक.. और जोर से चोदो मुझे… फ़क मी हार्डर…’ की सीत्कारें निकल रही थीं।

आलोक भी ‘आहहहह… चाची… आज तो आपको जी भर के चोदूँगा… आहहह… आपकी याद में मुठ मारते मारते मैं थक चुका… था… मेरी… प्यारी… सोना… चाची!

कुछ देर बाद मैं अपने चरम पर पहुँच गई। मैं अब झड़ने वाली थी और फिर मैं ‘उफ्फ़… ओह्ह… माय्य… गॉड… फ़क्क… मीईई… आलोक… उफ्फ़… अहह… मैं… गई… आहहह… ‘ कहते हुए झड़ने लगी।

आलोक अभी तक मुझे चोद रहा था। मेरे झड़ने के कारण अब आलोक के हर धक्के पर फच…फच.. की आवाज आ रही थी जिसे आलोक बहुत एन्जॉय कर रहा था।

थोड़ी देर बाद आलोक भी झड़ने वाला हुआ तो वह अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल कर उसे मेरी जांघों के बीच डालकर आगे पीछे करने लगा और एकाएक वो झड़ने लगा।

आलोक ने अपना सारा वीर्य मेरी जांघों पर उड़ेल दिया और फिर उठकर मेरे पास आकर लेट गया।
शायद इस लम्बी चुदाई के बाद वो काफी थक गया था।

मैं उठकर बाथरूम गई जो आलोक के रूम में ही था, वहाँ जाकर अपनी जांघों और चूत को साफ किया और वापस आकर अपने कपड़े पहन कर बेड पर लेट गई।
आलोक ने भी तब तक अपना लोअर और टीशर्ट पहन लिया था।

आलोक के चेहरे पर मुझे संतुष्टि के भाव साफ दिखाई दे रहे थे, वो खुश भी बहुत लग रहा था, मुझसे बोला- चाची, आप बहुत सेक्सी हो और बहुत अच्छी भी… आई… लव… यू… सोना चाची..
मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी।


थोड़ी देर बात करने के बाद फिर हम दोनों आपस में लिपट कर सो गए।
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04-14-2020, 05:27 PM,
#13
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
अगले दिन सुबह उठकर हम दोनों फिर से घर के कामों में लग गए और आज शाम तक तो रवि रोहन और अन्नू भी आने वाले थे क्योंकि अगले दिन ही सगाई का फंक्शन था।

सुबह से आलोक और मेरे बीच किसी भी प्रकार की कोई बात नहीं हुई थी। दिन में हम घर के काम कर रहे थे, तब मेरी जेठानी मुझसे बोली- आज शाम को तू मेरे साथ बाजार चलना, मुझे कुछ खरीददारी करनी है।
मैंने हाँ बोल दिया।

हम लोगों ने जल्दी से अपने घर के काम ख़त्म किये और बाजार जाने के लिए तैयार हो गए। मैंने नीले रंग का प्रिंटेड सूट पहना था जिसमें मेरी खूबसूरती अलग ही छा रही थी।
स्वाति और आलोक भी हमारे ही साथ जाने वाले थे।

शाम को साढ़े चार या पांच बजे हम घर से बाजार के लिए निकल लिए। हम लोग कार में बैठ कर बाजार गये थे जिसे आलोक चला रहा था और मैं उसी के बगल वाली सीट पर बैठी थी।

हम लोग काफी घूमे और खरीददारी भी की।
अभी स्वाति को भी कुछ ख़रीदना था पर ज्यादा घूमने की वजह से मैं थक गई थी।

मैंने जेठानी से कहा- भाभी, मैं थक गई, अब मुझसे नहीं चला जाएगा।
तो जेठानी बोली- तुम आलोक के साथ यही कार में रुको, हम लोग थोड़ी देर से आते हैं।
इतना कहकर वो स्वाति के साथ चली गई।

मैं और आलोक कार में बैठ गए, आलोक बोला- चलो थोड़ी देर के लिए ही सही… हमें हमारी चाची के अकेले में दीदार हुए, वरना आप तो बहुत व्यस्त हो गई हो।

मैं आलोक से बोली- तू तो पागल हो गया है, घर पर इतना टाइम ही नहीं मिला कि तेरे साथ बात हो पाए।
आलोक बोला- अब तो टाइम मिल गया ना?
इतना बोलते ही आलोक ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपनी जीन्स की ज़िप के ऊपर रख दिया और मेरे हाथों से अपने लंड को दबाने, सहलाने लगा।

मैं आलोक से बोली- आलोक, पागल हो गए हो क्या? ऐसे कार में कोई ऐसी हरकत करता है क्या? किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा वो!

तो आलोक बोला- अच्छा तो यह बात है, फिर तो कहीं सेफ जगह ढूंढनी पड़ेगी।
इतना कहकर आलोक ने कार स्टार्ट की और फिर पास ही में एक अंडरग्राउंड पार्किंग में ले जाकर कार को एक कम लाइट वाली जगह पर पार्क कर दिया।

मैंने आलोक से कहा- तू तो पूरी तैयारी के साथ आया है, इतना दिमाग कैसे चला लेता है।
मुझे बोलते हुए ही आलोक ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

बस फिर क्या था आलोक ने अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए और फिर हम दोनों के बीच एक प्यारा सा चुम्बन हुआ।
हमारे पास समय कम था तो आलोक ने देर ना करते हुए मुझसे कहा- चाची, आप पीछे की सीट पर चली जाओ।

मैं उठकर पीछे की सीट पर चली गई, आलोक भी उठ कर पीछे आ गया, उसने कार को लॉक कर दिया और खिड़कियों को विंडो कवर से ढक दिया।
आलोक ने सीट पर बैठ कर मुझे सीट पर लेटा दिया।

आज मैं कार के अंदर चुदने वाली थी और यह मेरी जिंदगी की पहली कार चुदाई थी।

मैंने आलोक से कहा- आलोक, आज नहीं, फिर कभी! कार में मैंने कभी नहीं किया, मुझे डर लग रहा है, किसी ने देख लिया तो?
आलोक बोला– मेरा भी तो पहली बार है चाची! हम पहली बार ट्राई करते हैं, काफ़ी चीज़ें ज़िन्दगी में पहली बार ही होती हैं।

मैं घबरा रही थी तो मुझे देखकर आलोक बोला– चाची हम केवल अपने नीचे के कपड़े ही उतारेंगे ताकि हम आराम से चुदाई कर सकें। अगर अचानक कोई आ गया तो ऊपर के कपड़े पहने होने की वजह से हम नंगे नहीं दिखेंगे।

मैंने आलोक की बात मान ली इसलिए ऊपर के कपड़े बदन पर पहन कर चुदवाने को राज़ी हो गई।

उसने अपने हाथों से ही मेरी सलवार के नाड़े को खोल दिया और उसे मेरे घुटनों तक नीचे कर दिया। फिर आलोक ने मेरी पैंटी जो मेरी चूत से बिल्कुल चिपकी हुई थी, उसको भी उतार कर मेरी जांघों तक सरका दिया।

मेरी चूत अभी तक गीली नहीं हुई थी तो आलोक ने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
आलोक अपनी जीभ से मेरी चूत को रगड़ रहा था, हालांकि मेरी चूत पर हल्के हल्के रेशमी बाल थे जो की उसे बहुत ही मादक लग रहे थे।
आलोक बार बार मेरी चूत पर थूक कर उसे गीला कर रहा था।

अब आलोक उठा और फिर अपनी उंगलियों से मेरी चूत को सहलाने लगा। वो तेजी के साथ मेरी चूत को सहला रहा था, मैं काफी उत्तेजित हो रही थी पर मेरी सिसकारियाँ मेरे अंदर ही घुट रही थी क्योंकि मुझे आवाज़ नहीं करनी थी।

जब मेरी चूत से हल्का हल्का पानी बाहर आने लगा तो आलोक उठ गया, अब उसने अपनी जीन्स को उतार दिया और फिर अपनी चड्डी को भी अपने घुटनों तक कर लिया।

आलोक का लंड जो लगभग सात इंच लम्बा था बिल्कुल कड़क हो चुका था। आलोक के लंड का टोपा बाहर को निकल आया था।

मैं अभी भी बैक सीट पर लेटी हुई थी, आलोक ने मेरी टांगों के बीच आकर मेरी सलवार और पैंटी को उतार कर अलग कर दिया और
खुद टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया, उसने मेरे दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनों तरफ रख लिया।

आलोक ने देर ना करते हुए अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और उसे अपने लंड पर मलने लगा, उसका लंड अब मेरी चुदाई के लिए बिलकुल तैयार था।

आलोक अपने लंड को मेरी चूत पर लाकर रगड़ने लगा और फिर मेरी चूत के छेद पर लाकर रख दिया और फिर हौले से पहले अपने लंड का सुपारा अन्दर घुसाया और फिर अगले धक्के में आलोक ने आधा लंड अन्दर मेरी चूत में पेल दिया।

मैं सिसकार उठी ‘ऊऊह्ह माँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
तो आलोक ने कहा- दर्द हुआ क्या चाची?
तो मैं बोली- हाँ जरा आराम से कर ना!

मैं हल्की आवाज़ों में सीत्कार कर रही थी।
फिर आलोक ने एक और धक्का मारा और फिर उसका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर चला गया तो अब उसने मेरी चूत में धक्के देना शुरू कर दिए।

पहले तो आलोक धीरे धीरे धक्के दे रहा था पर फिर मौके की नजाकत और वक्त को देख़ते हुए आलोक ने जोर जोर से धक्के देना चालू कर दिए।

मैं उसके हर धक्के पर सीत्कार कर रही थी और कमर उठा उठा कर आलोक का पूरा साथ दे रही थी।

कुछ देर बाद आलोक के धक्कों की गति कम हो गई क्योंकि देर तक एक ही पोजीशन की वजह से वो थक गया था और यह जगह भी तो ऐसी थी को यहाँ कोई और पोजीशन नहीं बन सकती थी।


तब आलोक बोला उठा और उसने मुझे घोड़ी बनने के लिए बोला, मैं भी बिना किसी सवाल के अपने घुटनों और हाथों के बल खड़ी होकर घोड़ी बन गई।
फिर आलोक अपना लंड पीछे से मेरी चूत में डालने लगा और अगले तीन चार धक्कों में आलोक का पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया।
आलोक तेजी के साथ अपने लंड से मेरी चुदाई किये जा रहा था, उसके दोनो हाथ मेरी गदराई हुई गांड को सहला रहे थे।
थोड़ी देर की चुदाई के बाद में अपने चरम पर आ गई, मैं ‘आहाहाहा… अहहाह… अहहाह… अहह… आलोक… मेरा होने वाला है… आलोक…’ बोलते हुए सिसकार उठी और फिर अपनी कमर को सीट पर झुकाते हुए जोर से झड़ने लगी।

आलोक अभी भी मैदान में था, वो अभी भी लगातार धक्कों से अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करके मुझे चोद रहा था। मैं अपने स्तनों के बल सीट पर झुकी हुई थी मेरी चूत से निकलता हुआ पानी मेरी कमर से बहता हुआ मेरे सूट को गीला करने लगा पर इस बात का मुझे कोई आभास नहीं था, मैं तो बस अपनी चूत चुदाई में मगन थी।

आलोक के धक्कों से मैं लगातार आगे पीछे हो रही थी। फिर एकाएक आलोक ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी, शायद वह भी अब झड़ने वाला था।
कुछ ही पलों में आलोक ने मुझे जकड़ लिया और देखते ही देखते वो ‘आहहहह… सोना… चाची…’ बोलते हुए मेरी चूत के अंदर ही झड़ने लगा।
मैं उससे छूटना चाहती थी पर वो मुझे एकदम कस कर पकड़े हुए था।

आलोक के लंड से लगातार वीर्य की बारिश से मेरी चूत अंदर तक गीली हो गई थी, मेरे भतीजे के गर्म वीर्य से मेरे शरीर मैं एक अलग ही सरसराहट हो रही थी।

झड़ने के बाद आलोक मुझसे ही लिपट गया और अब हम दोनों सीट पर लेट गए, उसका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया था।

मैं आलोक से बोली- तूने अपना पानी अंदर क्यों छोड़ा? अगर कुछ हो गया तो?
आलोक बोला- सॉरी चाची, मैं खुद को रोक ही नहीं पाया और कुछ नहीं होगा चाची, मैं आपको टेबलेट ला कर दे दूँगा। आप चिंता मत करो।

फिर हम लोग उठकर अपने कपड़े पहनने लगे।

आलोक का वीर्य मेरी चूत से बाहर आ रहा था जिसे मैंने अपनी पैंटी से साफ कर लिया और फिर उसे पहन लिया।
हम दोनों ने कपड़े पहने और वापस मार्केट आ गए।

थोड़ी देर बाद भाभीजी और स्वाति भी आ गई और फिर हम सब घर की तरफ जाने लगे।

रास्ते में आलोक ने एक मेडिकल पर कार रोक ली और फिर वहाँ से कुछ लेकर आया।
मैं समझ चुकी थी कि वो मेरे लिए एंटी प्रेगनेंसी टेबलेट लाया है।

रात के आठ बजे हम लोग घर पहुँच गये। घर पहुँच कर आलोक ने मुझे चुपके से वो दवाई दे दी।

घर के अंदर जाने पर मैंने देखा कि रवि रोहन और अन्नू सब लोग आ चुके हैं, मैं उन्हें देख कर बहुत खुश हो गई।
मुझे देखते ही रोहन मेरे गले से आकर लग गया, मैंने भी उसे प्यार से अपने सीने से लगा लिया। रोहन मुझसे बोला- मम्मी, मैंने आपको बहुत मिस किया।

मैंने भी कहा- मम्मी ने तुझे बहुत याद किया।

फिर हम लोग रात को खाना खा कर सो गए। रात को रोहन आलोक के साथ और अन्नू स्वाति के रूम में जाकर सो गए।
मैं रवि और भाभीजी हम लोग एक ही रूम में सोए थे।

जेठ जी सगाई की तैयारियों के लिए घर से बाहर थे।
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04-14-2020, 05:29 PM,
#14
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
आज स्वाति की सगाई थी तो सभी लोग आज सुबह से ही तैयारी और भाग दौड़ में लगे थे। मैं भी आज सुबह से काफी व्यस्त थी।
घर के सभी आदमी बाहर के कामों में लगे थे।

सगाई के लिए एक बैंक्वेट गार्डन बुक किया गया था, रोहन और आलोक भी सुबह से वही थे।

शाम तक सभी लोग घर आ चुके थे और तैयार होकर वापस गार्डन जाने लगे। घर के सभी लोग कार में बैठकर चले गए थे। घर पर अब मैं और रोहन ही रह गए थे क्योंकि हम दोनों बाइक से जाने वाले थे।

सभी के जाते ही रोहन कमरे के अंदर आ गया।

उस वक्त मैं तैयार हो रही थी, मैं लाल रंग की साड़ी पहन रही थी, रोहन को देखकर मैं मुस्कुरा दी।

रोहन भी पीछे से आकर मुझसे लिपट गया और बोला- मम्मी, लाल साड़ी में आप बहुत हॉट लग रही हो और सेक्सी तो आप पहले से ही बहुत हो!
रोहन की इस बात पर हम दोनों मां बेटे हंसने लगे।

रोहन ने अपने हाथों को मेरे बूब्स पर रख दिया, उन्हें मसलना शुरू कर दिया।

रोहन का लंड पूरी तरह से तन चुका था और वो उसे मेरी गांड पर रगड़ रहा था।
मैंने रोहन को कहा- ओहह… रोहन अभी रूक जाओ… हम सगाई के लिए लेट हो जाएंगे… बाद में आकर ये सब करेंगे वरना मुझे फिर से तैयार होने में बहुत टाइम लग जाएगा।

पर रोहन कहाँ मानने वाला था… वो भी मेरी ही तरह जिद्दी और चुदासा था, रोहन बोला- मम्मी इतने दिनों से मैं आपसे दूर हूँ पर आपको तो मेरी जरा भी चिंता नहीं है।

बेटे का लंड चूस कर वीर्यपान किया
रोहन अपना लंड बाहर निकाल कर बोला- आप इसका पानी तो निकाल ही सकती हो।
तो मैं भी उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देखने लगी और फिर सोफे पर जाकर बैठ गई।

रोहन मेरे सामने आकर खड़ा हो गया और मैं अपने बेटे के लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। रोहन के लंड को देखकर मैं भी उत्तेजित हो रही थी, मैंने रोहन के लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर तक रोहन के लंड को हाथों से सहलाने के बाद मैं उसे मुँह में लेकर चूसने लगी। रोहन भी मेरे सर को पकड़कर अपने लंड को मेरे गले तक उतार रहा था।

लंड चूसने के कारण मेरे मुंह से अलग ही आवाजें आ रही थी। रोहन भी सिसकारियाँ भर रहा था- आहहहह… मम्मा… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह… बड़ा मजा आ रहा है… चूसती रहो मॉम इसी तरह से… मम्ममाहहह…

कुछ ही देर बाद रोहन झड़ने लगा और उसके लंड से वीर्य की नदी बहने लगी। रोहन के मीठे पानी से मेरा मुँह सराबोर हो गया था जो की धीरे धीरे मेरे गले से नीचे उतर रहा था।
मेरी चूत भी उत्तेजना के कारण पानी छोड़ रही थी जिससे मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी।

मैंने रोहन के लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया।
रोहन बोला- मम्मी.. अब रात का कोई बहाना नहीं चलेगा।

मैंने रोहन से कहा- हाँ ठीक है… अगर रात में समय और मौका मिला तो मैं और मेरा राजा बेटा जरूर कुछ करेंगे… पर पूरी तैयारी के साथ आना!
तैयारी से रोहन समझ चुका था कि मैंने उसे कंडोम लेकर आने का बोला है।

फिर हम हम दोनों बाइक पर बैठकर गार्डन की तरफ चल पड़े। रात को करीब डेढ़ बजे प्रोग्राम खत्म होने के बाद हम सब लोग घर पहुँचे।

मैंने और रोहन ने जल्दी आने की कई कोशिश की पर बात नहीं बनी। रोहन का चेहरा भी उतरा हुआ सा था जिसे देखकर मुझे बार बार हँसी आ रही थी।

सब लोग सोने की तैयारी करने लगे, आलोक बाहर ही था… इसलिए मैं आलोक के रूम में ही सोने के लिए चली गई, रवि भी मेरे साथ ही थे।
घर पर मेहमान ज्यादा थे तो मैंने रोहन को भी अपने साथ सोने के लिये बुला लिया।

मैंने कपड़े बदल कर गाउन पहन लिया और बेड पर जाकर लेट गई।
रवि मेरे बायीं और रोहन दायीं ओर लेटे हुए थे और मैं उनके बीच में थी। ठंडी का समय था तो हम सब लोग अलग अलग कम्बल लेकर लेटे हुए थे।

रवि काफी थके हुए थे तो जाते ही सो गए… पर रोहन और मैं अभी तक जगे हुए थे, हम दोनों को नींद नहीं आ रही थी।
जब रोहन को लगा कि उसके पापा सो चुके हैं तो वह हल्के से सरक कर मेरे बगल में आ गया।

रोहन ने दोनों कम्बल आपस में मिला दिए और मुझे अपनी तरफ खींच लिया।
मैं रोहन से हल्की आवाज़ में बोली- जरा आराम से… अगर तेरे पापा जाग गए तो?

मैं आगे कुछ बोलती, उससे पहले रोहन ने मेरे होठों को अपने मुंह में भर लिया और उन्हें चूमने लगा।
वैसे तो रवि काफी गहरी नींद में सोते थे पर फिर भी मुझे ध्यान रखना था कि कहीं वे जाग ना जाएँ।

मैंने भी अपने बेटे रोहन के होठों को चूमना शुरू कर दिया, अब हम दोनों आपस में एक दूसरे को चूम रहे थे।
फिर रोहन ने अपने हाथ मेरे बूब्स पर रख दिए और उन्हें हल्के हल्के से दबाने लगा।

मेरे बेटे ने मेरे गाउन के ऊपर के बटन खोल दिए… जिससे मेरे मम्मे ब्रा में ही बाहर आ गए। रोहन ने मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और अब मेरे कसे हुए गोल मम्मे बिल्कुल नंगे थे और गाउन के बाहर थे।

रोहन ने उन्हें काफी देर तक चूमा और दबाया, वह बीच में मेरे निप्पल भी दबा देता था जिस वजह से मेरे मम्मे लाल हो गये थे और निप्पल कड़क हो गए थे।


मैंने रोहन से धीमी आवाज़ में कहा- रोहन बेटा, जो भी करना है जल्दी कर, हमारे पास इतना वक्त नहीं है!

रोहन ने अपने इस खेल को आगे बढ़ाया, उसने मेरे गाउन को कमर तक ऊपर कर दिया और फिर अपने पाजामे से अपना लंड बाहर निकाल कर मेरे हाथों में थमा दिया।

फिर मेरे बेटे ने अपनी जेब से कॉन्डोम निकाला और अपने लंड पर चढ़ा लिया… मेरी चूत भी तब तक गीली हो चुकी थी।

तब रोहन ने मेरी पेंटी को मेरी जांघों तक नीचे कर दिया और अपने लंड को मेरी गीली चूत पर रगड़ने लगा। धीरे धीरे उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया और हल्के हल्के से धक्के देना शुरु कर दिया।

मैंने पलट कर रवि को देखा तो ये अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे… ये मेरी तरफ पीठ करके सो रहे थे।

और फिर मैं और मेरा बेटा रोहन अपने काम यानि चुदाई में लग गए। रोहन बड़े ही आराम से अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था।

हम दोनों के बदन आपस में चिपके हुए थे जिस कारण हम बेहद गर्म हो रहे थे। रोहन अभी भी मेरे होंठों को चूम रहा था, जिस कारण हम दोनों की सिसकारियाँ हमारे अंदर ही घुट रही थी।

फिर रोहन ने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे पलट दिया… अब मैं रोहन की तरफ पीठ करके लेटी हुई थी, उसने मेरी पेंटी को ऊपर वाली टांग से निकाला और टांग को अपने हाथ से उठा कर ऊपर कर दिया और फिर पीछे से अपने लंड को मेरी चूत पर रख कर अगले चार पांच धक्कों में मेरी चूत की गहराइयों में उतार दिया।

मैं बहुत उत्तेजित थी पर अपनी उत्तेजना को सिसकारियों में व्यक्त नहीं कर सकती थी… घुटन के कारण मैंने कम्बल को कस कर अपने हाथों में जकड़ लिया।
मेरे बेटे ने मेरी चूत में अपने धक्कों को और बढ़ा दिया और अब पहले से थोड़ी तेज गति से मुझे चोदने लगा।

मैं अब झड़ने वाली थी तो मैंने रोहन के लंड पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
मैंने अपने शरीर को कस लिया जिस वजह से मेरी चूत भी काफी कस गई थी… जिसे मेरा बेटा भी समझ चुका था… उसका लंड मेरी चूत के अंदर ही जकड़ रहा था पर वो लगातार मुझे चोदे जा रहा था।

अब मेरा बेटा भी मुझे चोद कर शायद झड़ने वाला था तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और फिर हम दोनों मां बेटा एक साथ ही चरम पर आकर झड़ने लगे।

झड़ते वक्त भी रोहन ने अपने लंड से मुझे चोदना जारी रखा, फिर हम दोनों थोड़ी देर आपस में लिपटकर वैसे ही पड़े रहे।
कुछ देर बाद रोहन ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और धीरे से उठकर बाथरूम में चला गया।

रोहन के लंड बाहर निकालते ही मेरी चूत से पानी की धार बाहर निकलने लगी जिसे मैंने अपनी पेंटी अपनी एक टांग से निकाली और उससे अपनी चुदी हुई चूत को साफ किया और पेंटी तकिये के पास रख दी।

फिर मैं अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। तब तक रोहन भी आ चुका था… उसने मेरी पेंटी को उठाया और सूंघने लगा और फिर अपने अंडरवियर के अंदर रख लिया।


यह देखकर हम दोनों फिर से मुस्कुराने लगे और मैं बिना पेंटी के ही रवि के साथ चिपक कर सोने लगी।
थोड़ी देर बाद मैं और रोहन दोनों सो गए।

सुबह जब नींद खुली तो मैं रवि से लिपटी हुई थी।


फिर दोपहर तक हम लोग वहां से अपने घर के लिए रवाना हुए और शाम तक घर पहुँच गये।
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04-14-2020, 05:32 PM,
#15
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
स्वाति की शादी के बाद स्वाति और उसके पति अनिल ने हनीमून ट्रिप प्लान किया था, उनके साथ आलोक, रोहन, अन्नू और मेरी बड़ी बहन का लड़का रोहित भी जा रहे थे। क्योंकि इस फैमिली ट्रिप में केवल बच्चे ही थे तो परिवार वालों ने उनके साथ किसी बड़े सदस्य को भी भेजना जरूरी समझा तो उन्होंने बच्चों के साथ मेरे और रवि के जाने की बात कही… पर रवि अपने ऑफिस के काम के चलते हुए बिजी थे तो उन्होंने जाने से मना कर दिया।

अब मुझे ही उन लोगों के साथ जाना था क्योंकि बच्चों ने ही मुझे ले जाने के लिए परिवार वालों से जिद की थी.
मैं आप सबको बता चुकी हूँ कि मैं अपने घर वालों की हमेशा से ही लाडली रही हूँ… खासकर के बच्चों की… क्योंकि मैं उन पर किसी भी तरह की रोक टोक नहीं लगाती हूँ!

अगले दिन सुबह हम लोगों की ट्रेन थी… तो रात को सब लोग मेरे घर पर आ गए, हम लोगों ने खाना खाया और फिर सब लोग सोने चले गए।

रोहित और आलोक, रोहन के साथ उसके कमरे में सो गए और स्वाति अनिल के साथ हॉल में सो गई.

मेरा रूम उनके बाजू में ही था… रात को जब सामान पैक करने के बाद मैं बिस्तर पर लेटी, तभी आलोक आ गया।
उस वक्त मैं नाइटी में थी… और जैसा आप लोगों को पता ही है कि मैं नाइटी के अंदर कुछ नहीं पहनती हूँ, जिस वजह से मेरा एक एक अंग गाउन में उभर रहा था।

मैं और आलोक एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे… वह भी केवल हाफ पैंट में ही था.
रवि भी हमारे बगल से ही बैठे हुए थे.
तभी आलोक बोला- चाची, मुझे थोड़ा दूध चाहिए!
तो मैं उठ कर किचन की तरफ जाने लगी।

आलोक भी मेरे पीछे-पीछे किचन में आ गया. मैं आलोक के लिए दूध गर्म कर रही थी, तभी आलोक ने पीछे से आकर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे गाउन के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को मसलने लगा।

आलोक का लंड बिल्कुल तन चुका था और मेरी गांड की दरार से टकरा रहा था.
तभी मैं पीछे पलटी और आलोक से कहा- अभी नहीं आलोक, कोई देख लेगा!
तो आलोक बोला- ठीक है चाची जी… पर एक गुड नाईट किस तो मिल ही सकती है ना?
और इतना बोलकर आलोक ने अपने होंठ मेरे होंठों के ऊपर रख दिए और मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

हम दोनों एक दूसरे होठों का रसपान कर रहे थे… एक दूसरे को चुंबन करने में हम इतने मशगूल हो गए कि गैस पर रखा हुआ दूध भूल गए, तभी दूध गर्म होकर बाहर गिरने लगा और फिर हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए.
जाते-जाते आलोक ने मेरी चूत को सहला दिया जिससे मेरे अंदर चुदाई का कीड़ा गुनगुनाने लगा।

आलोक को दूध दे कर मैं वापस कमरे में आ गई और गेट बंद कर लिया.
इससे पहले कि मैं बिस्तर पर जाती, रवि मेरे पास आए और मुझे गेट के सहारे टिका कर मेरे होठों को चूमने लगे।
मैंने कहा- आराम से करो, बच्चे भी पास में ही हैं, कुछ सुन लिया तो जाने क्या सोचेंगे!
रवि ने कहा- बच्चे क्या सोचेंगे… वे भी अब समझदार हो गए हैं, उन्हें पता है कि एक पति और पत्नी बंद कमरे में क्या करते हैं!

मैंने रवि को पीछे धक्का देते हुए खुद से अलग कर दिया और बिस्तर पर जाकर लेट गई। मैंने रवि से कहा- तुम्हें शर्म नहीं आती… खुद इतने बड़े हो गए हो और बच्चों जैसी बातें करते हो… स्वाति और अनिल अभी हॉल में सो रहे हैं, वे सुन लेंगे तो क्या सोचेंगे?

रवि ने कहा- कुछ नहीं सोचेंगे… बल्कि हमारी चुदाई की आवाज सुनकर उनकी चुदाई शुरू हो जाएगी।
मैंने रवि को हल के स्वर में डांटते हुए कहा- चुप रहो तुम…
रवि भी बिस्तर पर आकर मेरे पास लेट गए और कहने लगे- अब ज्यादा नखरे मत दिखाओ… वैसे भी अब अगले 10 दिन तक में बिना तुम्हारी चुदाई के ही रहने वाला हूँ…

मेरा भी चुदने का मूड था तो मैंने कहा- ठीक है बाबा… नाराज मत हो… कर लो अपनी मन की इच्छा पूरी… पर आराम से करना।
मेरे इतना बोलते ही रवि मेरे गाउन को उतारने लगे और अगले ही पल में उन्होंने मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक पूरी नंगी कर दिया… और खुद भी बिल्कुल नंगे होकर मेरे ऊपर लेट गए।

रवि इतने उत्तेजित थे कि कुछ सुनना ही नहीं चाहते थे, मेरे ऊपर लेटते ही उन्होंने मेरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया. पहले तो रवि ने मेरे गालों पर किस करना शुरू किया और फिर जैसे ही उन्होंने मेरे होंठों को चूमा तो मैं भी उत्तेजित होने लगी।

काफी देर तक रवि ने मेरे होंठो को चूमा, इस बीच रवि के हाथ लगातार मेरे मम्मों का मर्दन किए जा रहे थे. इस लगातार मर्दन से मेरे मम्मे एकदम सख्त और लाल पड़ गए थे, मैं कराह रही थी।

रवि का लंड खड़ा हो चुका था और मेरी चूत पर रगड़ खा रहा था जिससे मेरी चूत गीली होने लगी.
जैसा कि आप सब लोगों को पता ही है कि मेरे मम्में मेरे शरीर का मुख्य आकर्षण केंद्र हैं तो इसलिए चुदाई के दौरान सबसे पहले मेरे मम्मों पर ही जोर आजमाइश की जाती है और मुझे भी यह पसंद है।

रवि ने मेरे मम्मों को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगे, जब रवि ने मेरे निप्पल काटे तो मैं सनसना गई… मैं सिसकार कर बोली- और जोर से काटो!
फिर रवि के हाथ धीरे धीरे मेरी टांगों की तरफ बढ़ने लगे और जब रवि ने मेरी गोल मोते चूतड़ पकड़ कर दबाए तो मैं बोली- मेरी चूचियों को और जोर से चूसो।

मुझे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि रवि मुझे बहुत ही प्यार से चोदते हैं, वे मुझे चोदते समय बिल्कुल भी दर्द का अनुभव नहीं होने देते.
कुछ देर तक रवि ने मेरे मम्मों को भरपूर तरीके से चूसा और दबाया. मेरे पति को चूत चाटना पसंद नहीं है और ना ही वह मुझसे अपना लंड चूसवाते हैं।


फिर रवि मेरे ऊपर से उठ गए और गद्दे के नीचे से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगे पर मैंने उन्हें कंडोम चढ़ाने से रोक दिया… आज मेरा मूड कुछ अलग ही था आज मैं रवि के लंड को चूसकर उनको बहुत मजा देना चाहती थी।

रवि कंडोम का पैकेट लेकर मेरे पास आए और मुझसे कहने लगे- क्या हुआ सोना… मुझे रोक क्यों दिया?
मैंने हंसते हुए उनकी बात को अनसुना कर दिया और फिर उनका हाथ पकड़ कर रवि को बिस्तर पर लेटा दिया।

रवि पीठ के बल बिस्तर पर लेटे हुए थे, मैंने उनके होठों पर एक किस की और फिर उनकी टांगों के बीच में आकर घोड़ी बनकर बैठ गई. मेरे भरे हुए नग्न शरीर के कारण रवि का लंड सातवें आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था. मैंने रवि के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे अपने हाथों से सहलाते हुए अपने मुंह में ले लिया।

रवि को मेरा ऐसा करना बड़ा ही अजीब लगा क्योंकि मैं बहुत कम ही उनका लंड चूसती थी. पर रवि समझ गए थे कि मैं यह सब इसलिए कर रही हूँ ताकि अगले कुछ दिनों तक रवि को मेरी कमी ना खले।

मैं रवि के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी, मेरे थूक की वजह से रवि का लंड पूरा गीला हो चुका था जिस कारण गूँ-गूँ और फिचर-फिचर की आवाज़ आ रही थी.
जवाब मैं रवि ने भी अपने लंड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।

फिर रवि ने कहा- मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता सोना… मैं बहुत उत्तेजित हूँ… अब मुझे चोदने दो!
मैंने भी देर ना करते हुए रवि के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और उनके बगल में जाकर सीधी लेट गई.


हालांकि मेरे चूसने की वजह से रवि का लंड बिल्कुल गीला था…पर फिर भी उन्होंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया… चुदाई के दौरान रवि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं।
फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से मेरी टांगों को फैलाया और अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखकर अंदर की तरफ धक्का देने लगे.
रवि का लंड रोहन और आलोक की अपेक्षा थोड़ा बड़ा और मोटा है इसीलिए मुझे रवि के साथ चुदाई के दौरान थोड़ा सा मीठा दर्द महसूस होता है। रवि का लंड मेरी चूत में घुसते ही मैं कराह उठी और बोली- उईईई… माँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… जरा धीरे… रवि… आवाजें बाहर जा रही होंगी.

रवि को इन सब से कुछ लेना-देना नहीं था, वे बेफिक्र होकर मेरी चुदाई कर रहे थे।
उत्तेजना के कारण मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बाहर बहने लगी पर रवि का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था.
चुदाई के कारण हो रही ‘फच-फच’ की आवाजों से पूरे रूम का वातावरण गर्म होने लगा.

तभी रवि ने मुझे उठाया और उठाकर घोड़ी बना दिया।

हमारे बेड के सामने ही ड्रेसिंग टेबल रखी हुई थी, जब मैं घोड़ी बनी तब मेरा मुंह ड्रेसिंग टेबल के ही सामने था और मैं शीशे में ऐसे ही अपने नंगे बदन को निहारने लगी.
मेरे बाल खुले हुए थे और मेरे बाए कंधे की तरफ थे… मेरे दोनों मम्मे मेरे वक्ष से नीचे की तरफ लटक रहे थे।
बीवी की चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

तभी रवि पीछे से मेरी गांड की तरफ गए, अपने लंड को मेरी चूत पर रख दिया और अपना पूरा लंड एक ही बार में मेरी गुलाबी चूत में पेल दिया.
‘हाय…! रवि…’ मेरे मुँह से आनन्द भरी सीत्कार निकल गई और मैं उस धक्के से आगे की तरफ हो गई।

रवि मुझे चोदते हुए बोले- सोना… तुम्हारी चूत तो बहुत गर्म हो रही है.
और फिर अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर घुसेड़ने लगे और मैं अपने नंगे मम्मे और कमर को हिलते हुए शीशे में देख रही थी… मैं आह भरते हुए कराहने लगी- हाँ… और अंदर… रवि!
रवि भी अपने लंड को हर धक्के के साथ मेरी चूत की गहराइयों में उतार रहे थे.

लगातार चुदाई के कारण मैं दोबारा झड़ने लगी और चिल्लाते हुए बोली- चोदो… मुझे… आहहहह… मेरी चूत…
हम चुदाई में इतने लीन हो गए थे कि यह भी भूल गए थे कि हमारे घर पर मेहमान आए हुए हैं।

रवि ने पीछे से अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसलना शुरू कर दिया… मुझे रवि के हाथ अपनी छाती पर आग की तरह महसूस हो रहे थे जिस वजह से मैं और गर्म होने लगी। मेरी चूत के अंदर रवि के लंड के झटके और तेज़ हो गए और मैं फिर से चीखने लगी- और… जोर से चोदो मुझे रवि… आहहहह… मैं फिर से झड़ रही हूँ… जानू… अपना यह पूरा लंड मेरी चूत में पेल दो!

मेरी बेहद गर्म और टाइट चूत उनके लन्ड को कसकर जकड़े हुए थी… पर वे अभी तक झड़े नहीं थे और उनका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था।

थोड़ी देर तक धक्के मारने के बाद रवि बोले- मैं झड़ रहा हूँ…
और फिर रवि अपने गर्मागर्म रस की पिचकारी चूत के अंदर कंडोम में ही छोड़ने लगे.
जब रवि पूरी तरह से स्खलित हो गए तो उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल दिया और फिर उठकर बाथरूम चले गए।

मैं वैसे ही नंगी बिस्तर पर उल्टी लेटी रही.
मैं बहुत थक चुकी थी.

जब रवि बाथरुम से बाहर आए तो उन्होंने मुझे उठाया और फिर मैं भी उठकर बाथरूम जाकर अपनी चूत को साफ करने लगी।
वापस आकर मैंने केवल अपना गाउन पहना और फिर यह देखने के लिए कि सब लोग सो गए या नहीं… मैं दरवाजा खोल कर बाहर गई.
और सब तो सो गए थे… पर स्वाति और अनिल अभी तक नहीं सोए थे… वे कुछ बातें कर रहे थे।

मैंने उन दोनों से कहा- साढ़े बारह बजने को हैं… और तुम लोग अभी तक नहीं सोए? हमें कल जल्दी जाना है…
तो वे दोनों मुस्कुराने लगे और स्वाति मुझसे हंसते हुए बोली- चाची… आप क्यों नहीं सोई अभी तक?
उनकी मुस्कुराहट देखकर मैं सब समझ गई, मैंने स्वाति से कहा- बस थोड़ा सामान पैक कर रही थी… अब सोने ही जा रही हूँ!


और फिर मैं उन लोगों को गुड नाइट बोलकर रूम में आ गई और सो गई।
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04-22-2020, 03:34 PM,
#16
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गई और फिर सब लोगों को उठा दिया, हम सब लोग तैयार हुए और फिर रवि हम सब को रेलवे स्टेशन छोड़ आए.
हमारी ट्रेन सुबह छह बजे थी.

थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई और हम लोग ट्रेन में बैठ गए।
रात को दस बजे हमारी ट्रेन नैनीताल पहुँच गई… हमने वहां से टैक्सी बुक की और अपने होटल में पहुंच गए. अनिल ने होटल ऑनलाइन ही बुक किये थे तो हमें जाते ही वहाँ तीन कमरे मिल गए।


हमने अपने अपने कमरे चुन लिए. स्वाति और अनिल एक कमरे में… आलोक और रोहित एक कमरे में थे और रोहन, अन्नू और मैं… हम तीनों एक ही कमरे में रुक गए क्योंकि हमारा रूम थोड़ा बड़ा था।

सफर के कारण हम लोग पसीने से नहा रहे थे… तभी आलोक हमारे कमरे में आया, बोला- चलो, सब लोग स्वीमिंगपूल में नहाने चलते हैं।
मैंने आलोक से कहा- कहाँ है पूल… और इतनी रात को कौन-कौन जा रहा है?
आलोक ने कहा- अरे चाची जी… यहीं होटल में ही है… और सब लोग नहाने जा रहे हैं… आप भी चलो।
मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं जा रही… तुम लोग जाओ।

सब लोग जाने के लिए तैयार हो गए और मुझसे भी चलने के लिए जिद करने लगे तो मैंने सभी को समझाते हुए कहा- ना ही मेरे पास स्विमिंग कॉस्ट्यूम है और ना ही मुझे तैरना आता है..
तभी स्वाति और अनिल मेरे रूम में आ गए।

अनिल ने मुझसे कहा- आपको जो ठीक लगे… आप वह पहन कर चल सकती हैं… और हम लोग तो बस वहां मस्ती करने जा रहे हैं!
अनिल के कहने पर मैं भी चलने के लिए तैयार हो गई।

सब लोग चलने के लिए तैयार थे… रोहन, आलोक, रोहित और अनिल सभी ने केवल हाफ पैंट ही पहने हुए थे… अन्नू ने भी एक टी-शर्ट और एक हॉट पैंट पहना हुआ था… स्वाति भी टी-शर्ट और कैपरी में थी।

मेरे पास पहनने के लिए केवल एक गाउन ही था जो मुझे रात मैं पहनना था. मैंने स्वाति को अपनी यह दुविधा बताई तो स्वाति ने अपनी एक नाइटी लाकर मुझे दे दी और मुझे वह पहनने के लिए कहा।

स्वाति की नाइटी केवल घुटनों तक ही थी और आर्मलेस थी… उस नाइटी को कमर पर बांधने के लिए एक रिबन लगी हुई थी.
बच्चों के सामने इसे पहनने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी… पर बच्चों को इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

हम सब रूम से निकलकर स्विमिंग पूल पहुंच गए और फिर सब लोग पूल में उतर कर नहाने लगे… रात के समय केवल हम लोग ही पूल में नहा रहे थे, और कोई नहीं था… बस पास में बेंच पर एक आदमी बैठा हुआ था.
हम सब लोग पूल में नहाने लगे, हम सब लोग साथ में ही नहा रहे थे।

सब लोग पूरी तरह से गीले थे… गीली होने की वजह से मेरी नाइटी मेरे शरीर से बिल्कुल चिपक गई… मेरे साथ साथ अन्नू और स्वाति दोनों की टीशर्ट भी उनके मम्मों से चिपकी हुई थी जिसमें से हम सभी के उभार साफ नजर आ रहे थे.

तभी आलोक और रोहन दोनों ने हम लोगों के पास आकर हमें पानी में इधर-उधर खींचना शुरू कर दिया और मेरे साथ मस्ती करने लगे।

रोहन भी मेरे पास आया और मुझसे कहा- मम्मी… मैं आपको तैरना सिखाता हूँ।

मैंने कहा- हां… ठीक है.. जब तक हम इस होटल में हैं, तुम लोग मुझे तैरना सिखा दो।

रोहन मेरे पीछे आ गया और वह मुझसे चिपक कर खड़ा हो गया. रोहन का लंड भी टाइट हो गया था और फिर वो अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगा… हम लोग चार फीट गहरे पानी में थे… पानी में होने की वजह से ना किसी को कुछ दिख रहा था… ना ही कुछ समझ आ रहा था।

रोहन ने मुझे मेरे हाथ फैलाने के लिए कहा… फिर रोहन ने अपने एक हाथ को मेरी कमर पर रखा और दूसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया… फिर वह मुझे तैरना सिखाने लगा… रोहन पीछे से अपने लंड से बॉक्सर में ही मेरी गांड पर झटके देने लगा।
मैंने रोहन से धीरे से कहा- अभी रुक जाओ…यह सही वक्त नहीं है कोई देख लेगा…
रोहन भी हल्के स्वर में बोला- मम्मी, आप बस तैरने पर अपना ध्यान लगाओ बाकी सब मुझ पर छोड़ दो…
और फिर वो झटकों के साथ साथ मुझे पानी के अंदर हाथ पैर चलाना सिखाने लगा।

तभी मेरी नज़र सामने बैंच पर बैठे उस आदमी पर गई जो कि शुरू से ही हम लोगों को नहाते हुए देख रहा था… उस आदमी की नज़र मेरी और और लड़कियों की तरफ ही थी।

तभी हम दोनों की नज़रें आपस मे टकरा गई… और वो मेरी तरफ घूरते हुए मुस्कुरा दिया.
जवाब में मैंने उस आदमी से नज़र हटा ली.

रोहन मेरे पीछे ही था और मेरे हाथों को पकड़ा हुआ था…तभी उसके झटके तेज हो गए और वो झड़ने लगा।
मैंने रोहन से कहा- रोहन खाली हो गया क्या तेरा?
तो रोहन ने कहा- हाँ मम्मी, मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ…

उत्तेजना के कारण मेरी चूत भी पानी छोड़ रही थी।
ग्यारह बजने को थे… फिर हम लोग पूल से वापस अपने अपने रूम में आ गए. अन्नू रोहन और मैं तीनों ही गीले थे. रूम में आकर हम लोग खुद को पौंछने लगे. तब तक अन्नू बाथरूम से कपड़े बदलकर आ गई और फिर स्वाति के रूम में चली गई।

अब मैं और रोहन ही रूम में बचे थे, रोहन ने अन्नू के जाते ही गेट को लॉक कर दिया और मेरे हाथ से टॉवल लेकर बिस्तर पर फेंक दिया.
मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही रोहन ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया… फिर रोहन ने मेरी नाइटी को खोलकर उतार दिया।

मैं बस ब्रा और पैंटी में ही खड़ी थी. मेरे होंठ रोहन की गिरफ्त से छूटते ही मैंने रोहन से कहा- रोहन बेटा, तू तो इतना उतावला हो रहा है जैसे मैंने कभी तुझे चोदने ही नहीं दिया ।
रोहन बोला- ऐसी बात नहीं है मम्मी… आज जब से आपको पूल में नहाती हुई देखा है.. मुझसे रहा ही नहीं जा रहा।

मैंने हँसते हुए रोहन को अपने गले से लगा लिया. रोहन के दोनों हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी पीठ पर लिपटे हुए थे, मैंने रोहन से कहा- मेरा राजा बेटा अपनी मम्मी से इतना प्यार करता है?
रोहन ने हां में सर हिला दिया।

तभी रोहन ने पीछे से ही मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा को खींचता हुआ मुझसे दूर हो गया. मैं अधनंगी थी और अपने स्तनों को देखने लगी… फिर मैंने रोहन की तरफ देखते हुए उसे कहा- रोहन, बहुत शरारती हो गया है तू?
और फिर हम दोनों हँसने लगे।

हम दोनों अभी भी गीले थे… रोहन मेरे पास आया और मेरे मम्मों पर एक चुम्मी देते हुए मेरी पैंटी को भी उतार दिया… मेरी नाइटी, ब्रा और पैंटी वही जमीन पर पड़ी हुई थी… मैं बिल्कुल नंगी रोहन के सामने खड़ी थी और फिर रोहन टॉवल लेकर मेरे नंगे शरीर को पौंछने लगा.
फिर मैंने भी झुककर रोहन की हाफ पैंट को उतार दिया… और फिर रोहन की चड्डी को भी उतार दिया.

कपड़ों से आजाद होते ही रोहन का लण्ड फनफनाने लगा।
पूल में झड़ने की वजह से रोहन की चड्डी और उसका लण्ड दोनों ही उसके वीर्य से लथपथ थे.

मैं जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और मैंने रोहन के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया… वीर्य के कारण लण्ड का स्वाद काफी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों उठ कर बिस्तर पर लेट गए, रोहन मेरे ऊपर आकर आकर 69 की पोजीशन में लेट गया… फिर रोहन ने मेरी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.
रोहन का लण्ड मेरे मुंह के सामने था तो मैंने भी रोहन के लण्ड को अपने मुंह मे भर लिया और उसे चूसने लगी.
रोहन ने उत्तेजित होकर अपने लण्ड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।

रोहन अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… मेरी चूत काफी देर से पानी छोड़ रही थी तो मैं ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बहने लगी जिसे रोहन ने चाटना शुरू कर दिया।

चूत चाटने के बाद रोहन मेरे ऊपर से उठ गया और अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथों से पकड़कर सहलाते हुए मुझसे बोला- मम्मी… अब बताओ, किस पोजीशन में चुदना पसंद करोगी आप?

मैंने रोहन से बिना कुछ कहे अपनी दोनों टांगों को फैला दिया… रोहन को मैंने चुदाई का काफी ज्ञान दिया है… अब वो काफी अनुभवी हो गया है.
मेरे टाँगें फैलाते ही वो मुस्कुराते हुए मेरी टांगों के बीच आकर घुटनों के बल बैठ गया और फिर मेरी दोनों टाँगों को पकड़कर अपनी कमर के बगल में ले गया. इससे मेरी दोनों जाँघें रोहन की कमर पर टिक गई और मेरी कमर बिस्तर से थोड़ी ऊपर हवा में झूलने लगी।

रोहन ने देरी न करते हुए अपने लण्ड को मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्के के साथ अपना करीब सात इंच लम्बा और दो इंच मोटा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया जो सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया.
रोहन के इस धक्के के साथ मैं भी चीखते हुए आगे गिर पड़ी।

मैंने दर्द में चीखते हुए रोहन से कहा- उइईईई…माँ… मर गई…मैं… रोहन… तेरी माँ हू मैं… कोई किराये की वेश्या नहीं हूँ जो इतनी बेदर्दी से धक्के मार रहा है… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह…मम्मा…

रोहन ने कहा- सॉरी मम्मी… आज मैं बहुत हॉर्नी हो रहा हूँ… अगर मुझे पता होता कि आपको दर्द होगा तो मैं धीरे से ही धक्के मारता!

इतना बोलकर रोहन ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

रोहन का लण्ड मेरी चूत की गहराई को छूता हुआ वापस बाहर आकर दोबारा मेरी चूत की गहराई में उतर जाता. मैं भी रोहन के हर धक्कों पर अपनी कमर उछाल कर रोहन को ओर उत्तेजित कर रही थी।

रोहन लगातार मेरी चूत के अंदर अपने लण्ड से वार कर रहा था… मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सिसकार रही थी- आहह… रोहन… बस ऐसे ही… चोद मुझे…चोद दे… मेरी चूत को अपने इस मोटे लंड से… और ज़ोर से… और ज़ोर से… हाँ बेटा.. ऐसे ही… बस ऐसे ही चोद मुझे… आहहहह… रोहन.. मेरे लाल… चोद डाल अपनी मम्मी को… आहह…

तभी रोहन ने मेरे मटकते हुए पेट को चाटना शुरू कर दिया और फिर मेरी नाभि में थूक दिया और फिर मेरी नाभि को चाटते हुए नाभि को जीभ से कुरेदने लगा.
ये सब मुझे काफी उत्तेजित कर रहा था।


कुछ देर की चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुई तो मैं रोहन से बोली- उफफ्फ़… रोहन… ओह्ह… माय्य… गॉडड… फ़क्क… मीईई… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ़… आहह… चोद दे अपनी माँ की चूत…
और फिर मैं झड़ने लगी।

रोहन अभी तक मेरी चुदाई कर रहा था पर मैं थक चुकी थी, मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.
रोहन समझ गया था कि मैं अब थक चुकी हूँ तो उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया।

रोहन मुझसे बोला- मम्मी… बहुत दिनों से मैंने आपकी गांड नहीं मारी है…
और फिर उसने अपना लण्ड वैसे ही मेरी चूत से निकालकर मेरी गांड के छेद पर लगाया और फिर अपने लण्ड को मेरी गांड में डालने लगा।

रोहन का लण्ड गीला था… पर मेरी गांड भी कसी हुई थी क्योंकि मैं कभी कभार ही अपनी गांड के अंदर लण्ड लेती हूँ।

गीला होने की वजह से रोहन के लण्ड का सुपारा तो अंदर चला गया पर मेरी कसी हुई गांड में लंड को और अंदर डालने के चक्कर में रोहन झड़ने लगा… झड़ते वक्त रोहन ने अपना शरीर मेरे ऊपर रख दिया और ऊपर से ही गांड पर झटके देने लगा।

सुपारा अंदर होने की वजह से रोहन का वीर्य मेरी गांड के अंदर ही भर गया. झड़ने के बाद रोहन ने अपने लंड को बाहर खींच लिया और मेरी बगल में आकर लेट गया.
रोहन के लंड निकालते ही उसका वीर्य मेरी गांड से बहकर बाहर आने लगा जिसे रोकने के लिए मैं उलटी होकर लेट गई।

हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेटे हुए थे… रोहन मुझसे आकर चिपक गया और मेरे बालों को हाथ से सहलाने लगा।

मैंने रोहन से कहा- रोहन… भर गया तेरा मन… या अभी भी कुछ बचा है… और आज तो गांड मारने से पहले ही तू आउट हो गया।
रोहन ने कहा- आपकी गांड बहुत कसी हुई है मम्मी… और मैं तब ही झड़ने वाला था जब मैंने आपकी चूत से लण्ड निकाला था।

फिर मैंने रोहन से कपड़े पहनने के लिए कहा और मैं खुद को साफ करने के लिए नंगी ही उठकर बाथरूम जाने लगी।

रोहन ने अपने साफ कपड़े पहन लिए और मैं जमीन से सभी कपड़े उठाकर बाथरूम चली गई.
रोहन का वीर्य मेरी गांड से निकलकर मेरी जांघों पर आ रहा था.

मैं शावर चालू करके उसके नीचे नहाने लगी.
तभी मुझे रूम की घंटी की आवाज़ सुनाई दी.. पर मैंने उस पर गौर नहीं किया।

मुझे नहाने में थोड़ी देर लग गई… नहाने के बाद मुझे याद आया कि जल्दी में मैं अपनी ब्रा, पैंटी और गाउन बाहर ही छोड़ आई हूँ…
तो मैंने रोहन को आवाज़ लगाते हुए कहा- रोहन, मेरे कपड़े बैग पर ही रह गए है… जरा मुझे दे तो जा?

मैं बिल्कुल नंगी गीली ही खड़ी थी… अपने बदन को पौंछने के लिए मेरे पास टॉवल भी नहीं था… तभी बाथरूम के गेट पर दस्तक हुई।

मैंने तुरंत ही दरवाज़ा खोल दिया…और सामने रोहित मेरे कपड़े लिए हुए खड़ा था… मैं बिल्कुल नंगी उसकी आँखों के सामने खड़ी थी और उसकी नज़र मेरे नंगे बदन पर टिकी थी।

रोहित को सामने देख मैं घबरा गई और गेट के पीछे चली गई… मैंने गेट के पीछे से ही अपने एक हाथ से रोहित से कपड़े ले लिए और फिर गेट बंद कर दिया।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई.
रोहित वहीं बेड पर बैठा हुआ था.

अभी जो हुआ था… उसके बारे में कुछ भी बात करने के लिए नहीं था… और हम दोनों नज़रें भी नहीं मिला पा रहे थे पर फिर भी मैंने रोहित से पूछा- रोहन कहाँ है?
रोहित ने कहा- वो आलोक भैया के साथ गया है।

इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहती, रोहन और अन्नू रूम में आ गए… फिर मैंने रोहित से कोई बात नहीं की.
कुछ देर बाद रोहित अपने रूम में चला गया और फिर हम तीनों भी सो गए.

मैं बिस्तर के कोने से सो रही थी… अन्नू बीच में थी और रोहन दूसरे कोने पर!


मुझे नींद नहीं आ रही थी… मैं तो बस यही सोच रही थी ‘जाने रोहित क्या सोच रहा होगा…उसे भी खुद पर ग्लानि हो रही होगी?’
वैसे रोहन और रोहित हर बात आपस मे शेयर करते है तो मैंने सोचा कि कल में रोहन से इस घटना के बारे में बात करुँगी.

यही सब सोचते सोचते मैं सो गई।
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04-22-2020, 03:36 PM,
#17
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
अगले दिन सुबह दस बजे तक हम सब लोग नहा धोकर तैयार हो गए, फिर हमने होटल में नाश्ता किया और फिर हमने होटल से ही एक एक्स यू वी कार बुक कर ली… जो हमने वहाँ की ज्यादातर जगह घूमने के लिए बुक की थी।

कैब अपने सही समय पर हमें लेने पहुंच गई, हम उसमें नैनीताल घूमने निकल गए।
आलोक सबसे आगे बैठा हुआ था… अनिल, स्वाति, अन्नू और रोहित बीच वाली सीट पर बैठे थे… और मैं और रोहन सबसे पीछे बैठे हुए थे… बिल्कुल आमने सामने वाली सीट पर!


मैं रोहन से कल रोहित और मेरे साथ हुई घटना के बारे में बात करना चाहती थी… वैसे तो रोहित मुझसे बहुत मस्ताता था पर कल हुई घटना के बाद से रोहित ने मुझसे बात नहीं की थी।

शायद रोहित ग्लानि के कारण कुछ बोल नहीं पा रहा था और मैं भी उसे कुछ कहने में असमर्थ थी… यह तो हम दोनों ही जानते थे कि जो कुछ भी हुआ अनजाने में ही हुआ था।

रोहन और रोहित दोनों हम उम्र थे और वे मौसेरे भाई होने से ज्यादा अच्छे दोस्त थे… इसीलिए मैंने रोहन को इस बारे में बताना उचित समझा। मैंने रोहन को इशारे से अपनी तरफ बुलाया तो वो अपनी सीट से उठकर मेरे बगल में आकर बैठ गया और बोला- क्या बात है मम्मी?

मैंने उसे धीमी आवाज़ में बोलने का इशारा किया और फिर रोहन को कल उसके जाने के बाद हुई घटना के बारे में बताया…
यह सब सुनकर रोहन बोला- मम्मी… मैं रोहित को समझाऊँगा कि वो यह सब ज्यादा सिरियस ना ले… यह सब बस एक भूल थी।
मैंने रोहन से कहा- रोहन… कहीं वो यह न समझे कि मैं तुझे दिखाने के लिए बाथरूम में नंगी खड़ी थी।

रोहन ने कहा- मम्मी… मैं कुछ समझा नहीं?
मैंने रोहन से कहा- रोहित ये ना सोचे कि अगर मेरी जगह रोहन होता तो वो भी मुझे नंगी देख लेता।
रोहन ने कहा- आप चिंता मत करो मम्मी… हम दोनों काफी फ्रैंक हैं… मैं उससे सीधा यही पूछ लूंगा।

मैंने कहा- अच्छा… कितने फ्रैंक हो तुम लोग?
रोहन बोला- इतने कि हम एक दूसरे से सभी बाते शेयर करते हैं… चाहे वो चुदाई की हो या लड़की बाजी की… हम लोग साथ में पोर्न देखते हैं… और कभी कभी एक दूसरे की मुठ भी मार देते हैं।
मैंने चौंक कर रोहन से कहा- क्या… मैं तो उसे बहुत भोला समझती थी.. और तुम दोनों ये गलत हरकतें भी करते हो?

रोहन ने कहा- मैंने कहा था ना आपसे कि हम बहुत फ्रैंक हैं… और इसमें गलत क्या है मम्मी… आप ही कहती हो कि कभी कभी मुठ भी मार लेनी चाहिए।
मैंने रोहन से कहा- जैसा तुम्हे ठीक लगे करो… पर उससे इस बारे में बात जरूर कर लेना…
रोहन हाँ बोल कर सामने अपनी सीट पर बैठ गया।

रोहित के बारे में यह सुनकर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि वो मेरे साथ बिल्कुल बच्चों वाली हरकतें करता था जो मुझे काफी पसंद था… पर अब मेरा रवैया भी रोहित के प्रति बदल गया।

थोड़ी देर बाद हम लोग गोरखालैंड पहुंच गए… और सब लोग वहाँ घूमने लगे.
उसके बाद भी हमने दो तीन जगह घूमी और फिर शाम को छह बजे तक हम वापस होटल आ गए।

होटल से आने के बाद हम लोग फ्रेश हुए और फिर सब लोगों का मार्किट जाने का प्लान बना.
पर मैंने उनके साथ जाने से मना कर दिया क्योंकि कार में सफर करते करते मेरा मन भारी हो गया था।

सब लोग बाजार घूमने चले गए… मैं अपने रूम में अकेली ही थी और बोर हो रही थी तो मैंने एक स्लीवलेस और डीप नैक ब्लाउज वाली साड़ी पहनी जिसमें से मेरे आधे मम्मे बाहर को आ रहे थे और फिर मैं नीचे जाकर होटल रिसेप्शन के पास पड़े हुए सोफे पर बैठ गई।
मैं वहाँ पर रखी हुई मैगज़ीन पढ़ने लगी.

तभी एक आदमी मेरे पास आकर बैठ गया… मैंने उसकी तरफ देखा भी नहीं था।
उस अनजान आदमी ने मुझे ‘हैलो’ कहा…
मैंने नज़र उठा कर उसकी तरफ देखा… यह वही आदमी था जो हमें कल पूल में नहाते वक्त घूर रहा था… उसकी उम्र कुछ तेंतीस-चौंतीस के आसपास थी और देखने में भी वह काफी आकर्षक था।

मैंने भी प्रतिउत्तर में उसे ‘हैलो’ बोला.
फिर उसने मुझे पूछा- आप यहाँ घूमने आए हैं क्या?
मैंने कहा- हाँ… मैं अपने बच्चों के साथ आई हूँ… और आप?

तो उसने कहा- मैं काम के सिलसिले से यहाँ आया हूँ और आज रात को ही वापस जा रहा हूँ.
फिर वो बोला- वैसे मेरा नाम आदित्य है!
और अपना एक हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मैंने उससे हाथ मिलाते हुए कहा- मैं सोनाली हूँ… और हाउसवाइफ हूँ।

आदित्य की नज़र मेरे अधनंगे मम्मों पर ही थी… जिसे मैंने नोटिस कर लिया.
उसका इस कदर मुझे घूरना मुझे उत्तेजित करने लगा.

तभी आदित्य बोला- वैसे आप काफी खूबसूरत हैं… और कल स्विमिंग पूल में तो आप और भी ज्यादा क़यामत लग रही थी।

एक अजनबी के मुख से ऐसा सुनना मुझे काफी अजीब लग रहा था पर साथ ही उसके शब्द मुझे काफी उत्तेजना दे रहे थे… मैंने आदित्य की बात पर मुस्कुराते हुए उसे धन्यवाद कहा। मैं समझ रही थी कि ये मेरे कामुक बदन का भोग लगाना चाहता है और शायद मैं भी यही चाहती थी और इसके लिए तैयार थी.

मेरी साड़ी मेरी नाभि से काफी नीचे बंधी हुई थी जिससे आदित्य मेरी नाभि के साफ दर्शन कर रहा था.
मेरा सर चकरा रहा था तो मैं अपने माथे को हाथ से दबाने लगी।

आदित्य ने मुझसे पूछा- सोनाली जी, आप ठीक तो हैं ना?
मैंने कहा- मेरा सर चकरा रहा है और थोड़ा दर्द भी हो रहा है।

तो आदित्य ने कहा- आप मेरे रूम में चलिए… मेरे पास टेबलेट रखी हुई है.
तो मैंने मना कर दिया।
आदित्य ने कहा- सोनाली जी… मुझ पर विश्वास रखिये… और आपको दवा की जरूरत है… आपके साथ वाले लोग भी बाहर गए हुए हैं और आप बिल्कुल अकेली हैं तो इसी बहाने हम लोग थोड़ी और बातें कर लेंगे।

आदित्य के ज्यादा जोर देने पर मैंने उसे कहा- आदित्य आप सेकण्ड फ्लोर पर मेरे ही रूम में आ जाइये… तब तक मैं अपने कपड़े भी चेंज कर लूँगी।
आदित्य वहाँ से उठकर अपने रूम में चला गया और मैं अपने रूम में आ गई.

मैं रूम में जाकर बिस्तर पर अपने हाथों को फैलाकर से उल्टी होकर गिर पड़ी।
मैंने गेट लॉक नहीं किया था.

तभी दरवाज़े पर एक दस्तक देते हुए आदित्य ने दरवाजा खोल दिया… दरवाज़ा खुलते ही मैंने तिरछी नज़र से देखा तो आदित्य मेरी गांड के उभार को घूर रहा था.
मैं उठकर बैठ गई और आदित्य से बोली- आ गए आप…!
मैंने आदित्य को अपने साथ बेड पर बिठा लिया.

तभी आदित्य ने मुझे एक टेबलेट देते हुए कहा- सोनाली जी… आप ये टैबलेट खा लीजिये।
मैंने वो टेबलेट खा ली और फिर हम दोनों लोग बातें करने लगे.

मैंने आदित्य से पूछा- क्या तुम शादीशुदा हो?
आदित्य ने कहा- हाँ… मेरी शादी अभी एक साल पहले ही हुई है।

टैबलेट खाने के बाद मेरा सर और भारी होने लगा… मैंने आपना गाउन उठाया और बाथरूम जाते हुए आदित्य से कहा- दो मिनट रुको… मैं अभी चेंज करके आती हूँ.
आदित्य ने कहा- ठीक है।

मैंने बाथरूम में जाकर साड़ी, ब्लाउज उतार दिया और गाउन पहन लिया.
मुझे हल्का नशा सा होने लगा… बाथरूम से बाहर आते ही मेरे कदम डगमगाने लगे… जैसे तैसे मै बिस्तर पर आकर लेट गई।

मैंने आदित्य से कहा- आदित्य, ये तुमने मुझे कोन सी टेबलेट खिला दी… मेरा सर बहुत भारी हो रहा है.
आदित्य ने कुछ नहीं कहा.
थोड़ी देर में मुझे पूरी तरह से नशा हो गया… मुझे कुछ भी होश नहीं था, मैं कुछ भी बड़बड़ाने लगी।

आदित्य उठकर मेरे पास आया और बोला- आप ठीक तो हैं ना?
मुझे नहीं पता कि मैंने उसकी बात का क्या जवाब दिया… मेरे साथ जो हो रहा था… मैं वो सब देख तो रही थी… पर कुछ समझ नहीं पा रही थी, ना ही कुछ बोल पा रही थी।

तभी आदित्य ने मेरे गाउन को उतारना शुरू कर दिया… उसने मेरे गाउन को उतार कर नीचे फेंक दिया… मैं बस ब्रा पैंटी में ही थी.
फिर आदित्य ने मेरी ब्रा उतार दी और मेरे मम्मों को मसलने लगा… वो अपने एक हाथ से मेरे मम्मे मसल रहा था. उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी पैंटी को मेरी जांघों तक नीचे कर दिया।

मैं किसी लाश की तरह पड़ी हुई थी.
आदित्य ने मेरे मम्मे अपने मुँह में लिए और उन्हें काटने लगा… जैसे ही उसने मेरे निप्पल को काटा, मैं दर्द के मारे ‘आईई… ‘ करते हुए चीख पड़ी।

आदित्य ने मेरी तरफ देखा, उठ कर मेरे मुँह के पास आ गया और फिर उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में रखकर चूमना शुरू कर दिया… वो मेरे मुँह के अंदर थूककर मेरी जीभ को चाटने लगा।


फिर आदित्य खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया… फिर उसने अपने खड़े लंड को अपने हाथों में लिया और मेरे होंठों पर अपने लण्ड का सुपारा रगड़ने लगा।

थोड़ी देर तक अपना सुपारा रगड़ने के बाद आदित्य ने मेरे मुँह को खोला और अपने लण्ड को मेरे मुँह में डालकर मेरे मुँह को चोदने लगा… मैं नीचे थी और आदित्य मेरे ऊपर… उसका लंड मेरे मुंह को गले तक चोद रहा था… थूक में लिसने की वजह से मेरे मुँह से ‘गूँ… गूँ…’ की आवाज़ आ रही थी.

तभी आदित्य में अपना पूरा लंड मेरे गले में उतार दिया और वहीं रुक गया।
उसका लण्ड बहुत लम्बा था.. और काफी मोटा भी… मेरे गले में लंड अटकने की वजह से मैं सांस नहीं ले पाई और अपने हाथ पैरों को पटकने लगी… ना मैं चीख पा रही थी और ना ही उसे रोक पा रही थी… मेरी आँखों से आंसुओं की धार बहने लगी।

जब आदित्य को लगा कि अब मैं और नहीं सह सकती तो उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर खींच लिया… लण्ड बाहर निकलते ही मैं बिस्तर पर झटके खाते हुए… .लम्बी लंबी सांसें लेने लगी। मेरे लिए यह अनुभव किसी मृत्यु से कम नहीं था।

आदित्य ने उठकर मुझे पलटा दिया… अब मेरी गांड आदित्य के सामने थी… वो उठकर मेरी गांड की तरफ आया और मेरे चूतड़ों को मसलने लगा… फिर उसने मेरे चूतड़ों पर जोर जोर से थप्पड़ मारना शुरू कर दिया… पर मुझे इस दर्द का कोई अनुभव नहीं हो रहा था।

आदित्य ने उठकर मेरी कमर के नीचे तीन तकिये लगा दिए… जिससे मेरी गांड ऊपर को उठ गई… पर मेरे मम्मे बिस्तर पर ही थे और मेरा मुँह बाएं तरफ था… गांड उठने के साथ ही मेरी चूत भी पीछे की तरफ उभर आई।

आदित्य ने भी जल्दबाजी करते हुए मेरी चूत में अपनी दो उंगलियां घुसेड़ दी और बहुत ही तेजी से वो मेरी चूत को उंगलियों से चोदने लगा.
तभी उसने अपने दूसरे हाथ की दो उंगलियों को थूक लगाते हुए मेरी गांड के छेद में डाल दिया।

आदित्य के दोनों हाथ मेरी गांड और चूत की चुदाई कर रहे थे… इस दोहरी उंगली चुदाई में मुझे बस हल्का दर्द हो रहा था… जिसे मैं झेल रही थी… कुछ देर की चुदाई के बाद मैंने झड़ना शुरू कर दिया… आदित्य अभी भी अपनी उंगलियां चूत और गांड के अंदर बाहर कर रहा था… इसी कारण जब मैं झड़ने लगी तो मेरी चूत से रस बाहर गिरने लगा… और फिर आदित्य ने अपनी उंगलियों को बाहर निकाल कर मेरी चूत का रस चाटना शुरू कर दिया।

अब आदित्य उठा और अपने दोनों हाथों से मेरी गांड के छेद को खोलने लगा… जब मेरी गांड का गुलाबी छेद हल्का सा खुल गया तो उसने अपने लण्ड के सुपारे को मेरी गांड के छेद में फंसा दिया और फिर मेरे दोनों चूतड़ों को आजाद कर दिया।

फिर आदित्य ने मेरी कमर को दोनों तरफ से अपने हाथों से पकड़ा और फिर जोर लगाया… उसका आधे से ज्यादा लण्ड मेरी गांड के अंदर समा गया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… तभी उसका लण्ड दूसरे जोरदार धक्के के साथ मेरी गांड को भेदता हुआ पूरा अंदर घुस गया.
मुझे असहनीय पीड़ा हुई पर… इस बार मेरे शरीर ने मेरा साथ छोड़ दिया था… मैं चीख तक नहीं पाई… बस मेरी आँखों से आंसुओं की मोटी धार बहे जा रही थी।

मेरी गांड चुदाई आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

गोली के नशे के कारण ना तो मैं कुछ बोल पा रही थी… और ना ही कुछ होने से रोक सकती थी… मेरे शरीर के साथ साथ… मेरी जुबान को भी लकवा मार गया था।
आदित्य अपने पूरे जोर से मेरी गांड को चोद रहा था… उसका लण्ड मेरी गांड के अंदर तक जा रहा था… थोड़ी देर बाद उसने अपना लण्ड गांड से बाहर निकाला और फिर एक धक्के के साथ ही मेरी चूत में उतार दिया… रोज की चूत चुदाई के कारण मुझे चूत के अंदर लण्ड लेने में ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

आदित्य घुटनों के बल बैठकर अपना लण्ड मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… इस एक तरफा चुदाई में आदित्य किसी सांड की भांति मुझे चोद रहा था… उसका लंड बड़ी तेजी के साथ मेरी चूत की चुदाई कर रहा था।

काफी देर की चुदाई के बाद उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर ही झटके खाने लगा… आदित्य मेरी चूत के अंदर ही झड़ने लगा… उसका गरम वीर्य सीधा मेरी बच्चेदानी में ही जा रहा था… इतनी देर की चुदाई में शायद मैं भी झड़ चुकी थी।

जब आदित्य का पूर्ण रूप से वीर्य स्खलन हो गया… तो उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया… फिर वो उठा और उसने दो टैबलेट निकाल कर मेरे मुँह में डाल दी. उनमें से शायद एक पेनकिलर थी और एक नींद की… और फिर ऊपर से मुझे पानी पिला दिया।

मैं अभी ही उसी अवस्था मे लेटी हुई थी… उल्टी और कमर के नीचे तकिये लेकर!
आदित्य मेरे बगल में आकर लेट गया… मेरी नज़रें उसी की तरफ थी… और फिर मैं वैसे ही पड़े पड़े सो गई।

अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अन्नू और रोहन के साथ सो रही थी… मैंने खुद को देखा तो मैं गाउन पहने हुए थी और अंदर ब्रा पैंटी भी पहनी थी।



पर फिर मैं वैसे ही लेटी रही और पिछली रात के बारे में सोचने लगी… मुझे कल के बारे में कुछ भी स्पष्ट याद नहीं था और न ही मुझे कोई दर्द हो रहा था… बस कुछ तस्वीरें सी चल रही थी दिमाग के अंदर… और यह कहानी उन्ही तस्वीरों के आधार पर है।
जो भी हुआ… गत रात में हुई मेरी गांड और चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मेरे लबों पर एक मुस्कान सी आ गई…
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04-22-2020, 03:40 PM,
#18
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अन्नू और रोहन के साथ सो रही थी… मैंने खुद को देखा तो मैं गाउन पहने हुए थी और अंदर ब्रा पैंटी भी पहनी थी।
पर फिर मैं वैसे ही लेटी रही और पिछली रात के बारे में सोचने लगी।


मुझे कल के बारे में कुछ भी स्पष्ट याद नहीं था और न ही मुझे कोई दर्द हो रहा था… बस कुछ तस्वीरें सी चल रही थी दिमाग के अंदर… और यह कहानी उन्ही तस्वीरों के आधार पर है।
जो भी हुआ… गत रात में हुई मेरी गांड और चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मेरे लबों पर एक मुस्कान सी आ गई।

थोड़ी देर बाद रोहन भी जाग गया. मैं रोहन और अन्नू के बीच में ही सो रही थी तो रोहन मुझसे लिपट गया, उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये और मैंने रोहन की तरफ करवट ले ली।
करवट लेते ही रोहन ने मेरे होंठों पर एक चुम्मी दी और मुझसे बोला- गुड मॉर्निंग मम्मी…
मैंने भी मुस्कुराते हुए रोहन को गुड मोर्निंग कहा।

फिर रोहन ने कहा- मम्मी कल आपकी तबियत ठीक तो थी ना?
मैंने उसे पूछा- क्यों.. क्या हुआ?
तो रोहन ने कहा- कल जब हम लोग वापस आए थे..तो आप बहुत गहरी नींद में सो रही थी.. और दरवाज़ा भी लॉक नहीं था।
मैंने कहा- मैं बस थोड़ा थक गई थी शायद… इसलिए गहरी नींद में सोई हुई थी।

रोहन ने कहा- मम्मी.. कल मैंने रोहित से बात की थी।
मैंने पूछा- अच्छा.. क्या बात हुई तुम लोगों के बीच में?
रोहन ने कहा- मम्मी मैंने उससे बातों में पूछा कि तूने कभी किसी नंगी औरत या नंगी लड़की को देखा है.. तो रोहित बोला कि उसने कई बार अपनी मम्मी (यानि कि मेरी बहन) को नंगी देखा है।

मैंने रोहन से कहा- तो तूने क्या कहा रोहित से?
रोहन ने कहा- मम्मी फिर मैंने भी उसे बता दिया कि मैंने भी आपको कई बार नंगी देखा है।
मैंने रोहन पर गुस्सा करते हुए कहा- रोहन पागल हो गया है क्या तू… ऐसा बोलने की क्या जरूरत थी तुझे?
रोहन ने कहा- मम्मी, जरूरत थी तभी तो मैंने उसे यह सब बोला। उसके बाद रोहित ने खुद ही मुझसे बोल दिया कि परसों उसने गलती से आपको नंगी देख लिया था… तो मैंने उसे समझा दिया कि आप भी उसकी माँ जैसी हो.. और इतनी छोटी सी बात का कोई बुरा नहीं मानता है।
मैंने रोहन से कहा- चल ठीक है.. अब जो हुआ उसे भूल जाओ.. अब आगे के बारे में सोचो।

तभी अन्नू भी सोकर उठ गई, उसके बाद हम लोग तैयार होने लगे।

जब मैं नहाने जा रही थी तभी रोहित रूम में आ गया। हम दोनों की नज़रें आपस में टकरा गई..अब रोहित मुझे एक लड़के की तरह नहीं बल्कि एक मर्द के रूप में नज़र आ रहा था क्योंकि जब से रोहन ने मुझे उन दोनों के कारनामे बताये हैं तब से मेरा नजरिया रोहित के प्रति पूर्ण रूप से बदल चुका है।

तभी रोहित ने मुझसे कहा- मौसीजी… मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं आप लोगों के साथ घूमने नहीं चल पाऊँगा।
सब लोग तैयार हो चुके थे.. आलोक, स्वाति और अनिल बाहर हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे… क्योंकि रोहित की तबियत ठीक नहीं थी तो मुझे भी उसकी देखभाल के लिए वही रुकना पड़ा।

सब लोगों के जाने के बाद रोहित मेरे ही रूम में आ गया. मैं अभी भी कल रात वाला गाउन और कपड़े पहने हुए थी। मैंने उसे एक टेबलेट लाकर दी और उसे वही आराम करने के लिए कहा।
रोहित वहीं सो गया.

मैं भी अकेली बोर हो रही थी तो मैं भी रोहित के साथ बेड पर लेट गई और थोड़ी देर बाद मैं भी सो गई।

करीब दो बजे मेरी नींद खुली… रोहित उस वक्त अपना मोबाइल चला रहा था… मैंने रोहित से पूछा- रोहित, अब तबियत कैसी है?
रोहित ने मेरी तरफ देखा और कहा- अब मैं ठीक हूँ मौसी!
तभी रोहित की नज़र मेरी जाँघों की तरफ गई और उसने अपनी नजरें झुका ली… तभी मुझे पता लगा कि लेटने की वजह से मेरा गाउन मेरी जाँघों तक चढ़ा हुआ था जिसके अंदर से मेरी पैंटी भी आराम से देखी जा सकती थी।

मैं रोहित की तरफ देखते हुए खुद को ठीक करते हुए बिस्तर से उठ गई. मेरी नज़र रोहित की पैंट की तरफ गई क्योंकि उसका लंड खड़ा हो चुका था और वो उसे अपने हाथों से छिपाने की नाकाम कोशिशें कर रहा था। शायद वो काफी देर से मेरी जांघों और पैंटी को निहार रहा था।

रोहित का खड़ा लंड देखकर मुझे कल की चुदाई की याद आने लगी… और अब मेरी भी चूत में खुजली होने लगी।
रोहित भी काफी सुंदर और आकर्षक लगता है पर वो रोहन से भी करीब एक साल छोटा है।

उसके बाद हम दोनों आपस में बाते करने लगे। जब रोहित को लगा कि मैं परसो के बारे में उससे नाराज़ नहीं हूँ तो उसने मुझसे कहा- मौसीजी उस दिन के लिए सॉरी… वो सब एक गलतफहमी की वजह से हुआ था।
मैंने रोहित से कहा- कोई बात नहीं…
और हंसते हुए रोहित से बोली- अब जो देखना था… वो तो तूने देख लिया।
मेरी बात सुनकर रोहित भी मुस्कुरा दिया और बोला- मौसी वैसे आप अभी तक बहुत सुंदर और सेक्सी हो… काश आपको फिर से एक बार और उस हालत में देख सकूं।

रोहित की बात सुनकर मेरे ऊपर भी चुदास हावी होने लगी और मैंने कहा- अच्छा… बड़ा देखने का मन है तेरा… अभी ही दिखा दूँ क्या और वैसे मेरे अलावा किस किस को नंगी देख लिया है तूने?
रोहित ने कहा- कभी कभी मम्मी जब नहाकर आती है तो मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती हैं… तभी उनको देख लेता हूँ और मैं भी नहाकर उनके सामने ही कपड़े बदल लेता हूँ।

तो मैंने कहा- मुझे पूजा (मेरी बहन और रोहित की माँ) से तेरी शिकायत करनी पड़ेगी… बहुत गलत बातें सीखने लगा है तू!
फिर मैंने रोहित से कहा- रोहित मैं नहाने जा रही हूँ… अगर कहीं जाना हो तो बता कर जाना… नहीं तो किसी और की नज़र मुझ पर पड़ जाएगी।
रोहित ने कहा- मौसीजी चलिए ना हम पूल में नहाएंगे!

मेरा भी पूल में नहाने का मन था तो मैंने उसे हाँ बोल दिया।

फिर रोहित ने मुझे कहा- मौसी पर मेरी एक शर्त है… आप पूल में गाउन पहन कर नहीं जाओगी।
मैंने रोहित से कहा- तो फिर मैं क्या पहनूँगी रोहित?
रोहित ने वही दीवार पर टंगी अन्नू की स्कर्ट और लो टीशर्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा- आज आप ये कपड़े पहनोगी।


मैंने उसे मना कर दिया.

पर फिर रोहित ने मुझे अपनी कसम दे दी तो ना चाहते हुए भी मुझे वो कपड़े पहनने के लिए हाँ बोलना पड़ा।
मैं उन कपड़ो को लेकर बाथरूम जाने लगी तो रोहित ने मुझे रोक लिया और बोला- यहीं बदल लीजिये ना मौसी प्लीज?

रोहित के ज्यादा जोर देने पर मैं मान गई… वैसे भी वो मुझे नंगी देख ही चुका था और मैं भी गर्म हो रही थी।
मैंने कहा- चल ठीक है… अब तुझसे भी क्या शर्माना… तू भी अपने कपड़े बदल ले।
रोहित ने कहा- मौसीजी… पहले आप बदलिए फिर मैं अपने रूम में जाकर बदल लूंगा।
मैंने कहा- तेरे कहने पर मैं तेरे सामने ही कपड़े पहन रही हूँ और तू मुझसे शर्मा रहा है… मैं भी तेरी माँ जैसी हूँ… तुम मेरे सामने भी बदल सकते हो… चलो यहीं बदलो… देखो, मैं भी तुम्हारे सामने ही बदल रही हूँ।

मैंने रोहित का जवाब सुने बिना ही अपने गाउन को खोल दिया जो मेरे हाथों और पैरों से सरकता हुआ जमीन पर गिर पड़ा। मैंने अंदर काले रंग की ब्रा पैंटी पहनी हुई थी, गाउन के उतरते ही मेरा चमकदार संगमरमरी बदन रोहित के सामने उजागर हो गया, रोहित बिना अपनी आँखें बंद किये मेरे बदन को टकटकी लगाए घूर रहा था।

मैंने देर न करते हुए अन्नू की स्कर्ट और टीशर्ट को पहन लिया। अन्नू की स्कर्ट तो मुझे जाँघों तक आ गई पर उसकी टीशर्ट मेरे स्तनों को मुश्किल से ढक पा रही थी और मेरे पेट तक ही आ रही थी।
काली स्कर्ट और सफेद टीशर्ट के बीच में मेरी नंगी कमर किसी चांद से कम नहीं लग रही थी.

यह सब देखकर रोहित का लंड अपने उफान पर आ गया और पैंट के ऊपर से उसका उभार साफ दिख रहा था।

कपड़े पहनकर मैंने रोहित से कहा- मेरा तो हो गया… अब तेरी बारी है।
रोहित ने कहा- मौसी, मैंने अंदर चड्डी नहीं पहनी है।
मैंने कहा- अच्छा तो ये बात है, तूने भी तो मुझे नंगी देखा है… अब शर्मा मत… मैं भी तुम्हारी मम्मी जैसी हूँ और तुम मेरे बेटे जैसे हो… हमें एक दूसरे को नंगा देखने में शर्म कैसी?

रोहित ने मेरी बात सुनते ही अपना लोवर उतार दिया… लोवर उतरते ही उसका खड़ा मोटा लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया… मेरी नज़र तो रोहित के लंड पर ही टिकी रह गई… इतने मोटे लंड को देखकर मेरी चुदाई करने की इच्छा फिर से जागृत हो गई।
रोहित ने अपना बॉक्सर उठाया और पहनने लगा.

मैंने छेड़ते हुए रोहित से कहा- तुम तो काफी बड़े हो गए हो रोहित!
और अपने होठों पर जीभ फिरते हुए एक चुदासी मुस्कान रोहित को दे दी।

फिर हम लोग पूल में आ गए… थोड़ी भीड़ थी इसलिए हम लोग ज्यादा देर वहाँ नहीं रुके और वापस अपने रूम में आ गए।
हम दोनों बिल्कुल खामोश थे।

मैंने रोहित से कहा- हमें यहाँ फिर से नहा लेना चाहिए रोहित…
और इतना बोलते ही मैंने अपनी टीशर्ट और स्कर्ट उतार दी। मैंने रोहित से कहा- रोहित क्या तुम मेरे साथ नहाना चाहोगे क्योंकि मुझे अपनी पीठ पर साबुन लगवाना है तो बेहतर होगा हम दोनों साथ में ही नहा लेते हैं।

रोहित भी मेरे नंगे जिस्म को देखने के लिए काफी उत्तेजित था… उसने तुरंत हाँ कर दी।
पर मैंने कहा- रोहित तुम ये बॉक्सर पहनकर मेरे साथ ठीक से नहीं नहा पाओगे।
रोहित ने भी चतुराई दिखाते हुए कहा- हाँ.. मौसी पर आप भी अपनी ब्रा पैंटी पहनकर मेरे साथ ठीक ने नहीं नहा पाओगी.. आपको भी ये उतारनी पड़ेंगी।

मैंने कहा- ठीक है… मैं भी उतार देती हूँ!

और इतना बोलकर मैंने अपनी ब्रा का हुक खोलकर उसे नीचे गिरा दिया और फिर अपनी उंगलियों से खींचकर पैंटी को भी उतार दिया.
रोहित मेरे नंगे जिस्म, मेरी नंगी चुची, मेरी नंगी चुत को देखकर बिल्कुल ठगा सा रह गया। मैंने उसे होश दिलाते हुए कहा- अब तू अपना बॉक्सर खुद उतारेगा या मैं उतारूं?
रोहित अभी भी थोड़ा शर्मा रहा था पर फिर उसने अपना बॉक्सर उतार दिया.

उसका लंड अभी भी खड़ा था… जाहिर सी बात थी यह सब मेरे नंगे बदन के कारण ही था। उसका खड़ा लंड देखकर मैं समझ गई कि रोहित क्यों इतना शर्मा रहा है.

मैंने रोहित से उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा- तो क्या तुम इसलिये इतने शर्मा रहे हो… अरे बेटा यह तो प्राकृतिक है… और मुझे खुशी है कि ये सब मेरी वजह से हो रहा है… मतलब अब तुम बिल्कुल जवान हो चुके हो।

फिर हम दोनों बाथरूम में आ गए. आते ही मैं सीधा बाथटब में लेट गई और हाथ देकर रोहित को भी अंदर बुला लिया. मैंने रोहित के हाथ में साबुन देते हुए कहा- मेरी पीठ पर मल दो इसे!
मैं अपना चेहरा पानी से बाहर निकालकर टब में उल्टी लेट गई और रोहित मेरी कमर को अपनी टाँगों के बीच में रखकर मेरी गांड पर बैठ गया.. रोहित का लंड तो शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था… ऊपर से मेरी नंगी पीठ का स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। उसका लंबा लंड उचक-उचक कर अपनी मौसी की गांड को छूने की कोशिश कर रहा था।

तभी उसका लंड मेरी गांड के छेद पर टकरा गया…जिस कारण मैं चिहुँक गई और रोहित से बोली- अभी मुझे पीछे कुछ टकराया है।
रोहित सकपका गया और उसने अपना लंड पीछे लेते हुए कहा- माफ करना मौसीजी…गलती से टच हो गया।
मैंने रोहित को समझाते हुए कहा- इसमे कोई गलत बात नहीं है कि हमारे शरीर के हिस्से आपस में टकरा जाए।

मैं भी अब सीधी बैठ गई और रोहित के हाथों से साबुन लेकर बोली- लाओ मैं भी तुम्हारी पीठ पर साबुन लगा देती हूँ!
फिर मैंने रोहित की पीठ और फिर उसकी छाती पर भी साबुन मल दिया.
साबुन लगते वक्त मेरे मम्मे रोहित के शरीर से रगड़ खा रहे थे।

मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब मेरी छाती पर साबुन लगाने की तुम्हारी बारी है.
तो रोहित शर्मा गया पर उसने अपने हाथों में साबुन ले लिया और फिर उसने मेरे उरोजों को अपने हाथों में भर लिया और उन पर साबुन लगाने लगा.
रोहित का सपना आज सच हो रहा था।

हम दोनों बिल्कुल नंगे तो थे ही और अब आपस में काफी खुल चुके थे, मैंने रोहित के खड़े लंड को अपने हाथों से टटोलते हुए कहा- तुम अपने सामान को ठीक से साफ नहीं करते क्या… देखो तो ये कितना काला हो रहा है…लाओ मैं इसे साफ कर देती हूँ।

मैंने अपने हाथों में साबुन लगाया और अपने दोनों हाथों से रोहित के लंड को अपने हाथों में भर लिया और उसे रगड़ने लगी.

रोहित काफी उत्तेजित हो गया, उसने भी अपने हाथों से मेरी चूचियों को उमेठना शुरू कर दिया. हम दोनों भली भांति जानते थे कि अब हम दोनों रुकने वाले नहीं है।

रोहित के लंड को सहलाने से उसने सिसकारियां भरनी शुरू कर दी- आहहहहह मौसी… रूक्को… मैं झड़ने वाला हूँ… आपके हाथ गंदे हो जाएंगे।
मैंने रोहित से कहा- रोहित अगर तुम चाहो तो मेरे मुँह में भी झड़ सकते हो।
रोहित ने कहा- क्या सच में मौसी… आप मेरा वीर्य अपने मुँह के अंदर लेना चाहोगी?

मैंने तुरंत अपनी जीभ बाहर निकालते हुए रोहित के लंड को चाटना शुरू कर दिया और फिर उसके लंड को मुँह के अंदर भर लिया ‘उमम्म… उम्म…’ की आवाज़ के साथ रोहित का लंड मेरे मुँह को चोदने लगा.
रोहित अपने चरम पर ही चल रहा था, उसने मेरे चूचों को जोर से खींचते हुए मेरे मुँह में ही झड़ना शुरू कर दिया ‘आहह… मममा… सस्सी… ये लो… मैं तो गया…
और फिर उसके लंड से पिचकारियां निकलने लगी, मेरा मुँह रोहित के स्वादिष्ट वीर्य से पूरा भर गया, जिसे मैंने अंदर गटक लिया।

झड़ने के बाद रोहित ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बोला- मौसी… जिंदगी में पहली बार मैं किसी के मुंह में झड़ा हूँ… और मजा भी बहुत आ रहा था।
मैंने रोहित की बातों को सुनकर उसके माथे पर एक चुम्बन दिया और उससे कहा- ये तो अभी मजे की शुरूआत है… अगर तुम चाहो तो आगे और भी मजा आएगा तुम्हें!
रोहित ने कहा- सच मौसी… आप बहुत अच्छी और सेक्सी हो, काश हम लोग हमेशा ऐसे ही रह सकते साथ में… तो कितना मजा आता।

मैंने रोहित से पूछा- रोहित कभी सेक्स किया है तूने… या किसी को करते हुए देखा है?
रोहित ने कहा- कभी किया तो नहीं है पर मम्मी पापा को कई बार करते हुए देखा है मैंने!
मैंने रोहित को हल्की सी चिमटी काटते हुए कहा- सच में बहुत बदमाश है तू… अपने मम्मी पापा को भी नहीं छोड़ा।

रोहित का लंड फिर से खड़ा हो गया, उसने अपने लंड को हाथ में लेकर कहा- मौसीजी अब आगे का मजा भी दे दीजिए ना मुझे!
मैंने कहा- अब क्या सारे मजे यही टब में लेगा… चल अंदर चलते हैं।

फिर मैंने अपने नंगे जिस्म को टब से बाहर निकाला और रोहित मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले गया।

रूम में जाकर मैं गीली ही बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई, मैंने रोहित को मेरी तरफ बुलाया और अपनी टाँगें फैलाते हुए कहा- अब चूसने की बारी तेरी है।

रोहित मेरी टाँगों के बीच आकर बैठ गया और अपने होठों को मेरी चूत पर रख कर चुम्मियां देने लगा… और फिर रोहित अपनी जीभ से मेरी चूत को कुरेदने लगा।

जैसे ही रोहित ने अपनी जीभ से मेरी चूत को रगड़ा, मैं चिल्लाई- और जोर से चूस मेरी चूत… को…
रोहित अभी नया खिलाड़ी था तो उसे तैयार करने के लिए उसका आत्मबल भी बढ़ाना जरूरी था।

कुछ देर बाद मैं भी अपने चरम पर आ गई और मेरी चूत से पानी का ज्वालामुखी फट पड़ा, मैं भी चिल्लाते हुए बोल रही थी- रोहित… मैं झड़ी.. उइई… माँआआआँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी… चूस ले मुझे… पी जा मेरा पानी… आआहहह…

जब मैं पूरी तरह से झड़ गई तो रोहित ने अपना मुँह मेरी चूत पर से हटाया, उसका चेहरा मेरे पानी से सन चुका था, उसने भी जी भरकर मेरा पानी पिया था।

मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दो।

रोहित ने वैसा ही किया, वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा. मैं अपने हाथों से रोहित के लंड को पकड़कर अपनी चूत पर सेट कर अंदर डालने लगी और फिर रोहित से धक्का देने के लिए कहा।
रोहित ने अपने लंड पर दबाव देते हुए कहा- मौसी… आपकी चूत बहुत टाइट है और मुझे भी हल्का दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- तुम्हारा लंड है ही इतना मोटा… कि तुम्हें मेरी चूत इतनी कसी हुई लग रही है… और फिर पहली बार करने में थोड़ा दर्द तो होता ही है… और मेरी चूत भी अंदर से फटे जा रही है।

मैंने फिर से रोहित से कहा- अब रुको मत रोहित… अपना लंड मेरी चूत की गहराइयों में उतार दो…. एक ही बार में घुसेड़ दो इसे मेरी चूत के अंदर!
यह सुनकर रोहित ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
मैंने चीखते हुए रोहित से कहा- और अंदर तक डाल अपने लंड को!

रोहित ने भी अब मेरी जोरदार चुदाई शुरू कर दी, वो अपने गहरे और लंबे धक्कों के साथ मेरी चूत को चोद रहा था।
कुछ देर की जोरदार चुदाई के बाद मैं भी झड़ने को हुई तो मेरे मुंह से बस सिसकारियां ही निकल रही थी ‘आआआअह्ह्ह.. चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल… अपना लंड… चोद मुझे… चोद मुझे… आआआह्ह्ह… डाल अपना मोटा लंड अपनी मौसी की चूत में… आहहह… आहह्ह… मैं भी झड़ने वाली हूँ… आहह… पेल दे और अंदर…’
और फिर मैंने भी झड़ना शुरू कर दिया।

रोहित भी फिर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया और उसने भी जोरदार धक्कों के साथ मेरी चूत में झड़ना शुरू कर दिया। जब उसका पूरा गर्म वीर्य मेरी चूत में समा गया तो उसने अपना लंड बाहर खींच लिया… मेरी चूत के पानी की वजह से वो किसी तारे के समान चमक रहा था।

हम दोनों शांत होकर बिस्तर पर लेट गए.

रोहित ने मुझे चूमते हुए कहा- मौसी, काश मैं आपको रोज चोद सकता… तो कितना मजा आता।
रोहित की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बिस्तर से उठ कर बाथरूम चली गई और खुद को साफ करने लगी। रोहित ने भी तब तक अपने कपड़े पहन लिए।

शाम के सात बजने को थे और सब लोग भी आने वाले थे… मैं भी कपड़े पहनकर तैयार हो गई… फिर हम दोनों आपस में बातें करने लगे।

मैंने रोहित से पूछा- तूने अपने मम्मी पापा की चुदाई करते हुए देखा है… तो फिर तेरा भी मन होता होगा ना अपनी माँ की चुदाई करने का?
रोहित ने कहा- हाँ होता तो बहुत है… पर मम्मी के साथ ये सब कर पाना नामुमकिन है… तो बस हिला कर ही काम चला लेता हूँ।



हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तब तक सब लोग आ गए… और फिर हम सब लोग खाना खाकर अपने अपने रूम में चले गए।
Reply
05-16-2020, 05:04 PM,
#19
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
Aap ki kahani mujhe bahut pasand aai thanks mujhe bhi aap ko chodne ka dil kar ne ga or tin baar muthi maari hai
Reply

05-16-2020, 09:13 PM,
#20
RE: पारिवारिक चुदाई की कहानी
रोहित के साथ चुदाई करने के बाद हम लोग तैयार होकर कमरे में बैठकर बाते करने लगे।
मैंने रोहित से पूछा- तूने अपने मम्मी पापा की चुदाई करते हुए देखा है… तो फिर तेरा भी मन होता होगा ना अपनी माँ की चुदाई करने का?
रोहित ने कहा- हाँ होता तो बहुत है… पर मम्मी के साथ ये सब कर पाना नामुमकिन है… तो बस हिला कर ही काम चला लेता हूँ।


हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तब तक सब लोग आ गए और फिर हम सब लोग खाना खाकर अपने अपने कमरों में चले गए।
रात को रोहन और अन्नू रूम में आकर मेरे साथ बेड पर लेट गए।

तभी रोहन ने पूछा- मम्मी आपका आज का दिन कैसा रहा? आप तो यहां पर बोर होती रही होंगी और हम लोगों ने तो आज बहुत मस्ती की… मैं तो इतना थक गया था कि चल भी नहीं पा रहा हूं सही से।
अन्नू भी बोली- मम्मा सच में आज तो आपको चलना ही था… आपने मिस कर दिया आज।

मैं उन दोनों के बीच में लेटी हुई थी। मैंने अपने दोनों हाथो से अपने बच्चों के सर को सहलाया और उनसे कहा- तुम लोग अच्छे से एन्जॉय करो। रोहित की तबियत ठीक नहीं थी वरना मैं भी चल देती।
थोड़ी देर तक इधर उधर की बाते करने के बाद अन्नू और रोहन सो गए।

मेरी भी नींद लगने ही वाली थी कि तभी मेरे फोन पर एक मैसेज आया। मैंने फ़ोन उठाकर देखा तो वो मैसेज आलोक का था, उसने मुझे गुड़ नाईट विश किया था। फिर मैंने भी आलोक को मेसेज किया।
आलोक- गुड़ नाईट चाची।
मैं- गुड नाईट।
आलोक- आपको जगा तो नहीं दिया मैंने?
मैं- अभी तो मैं सोई भी नहीं हूं… तो तू जगाएगा कैसे।
आलोक- मुझे भी नींद नहीं आ रही… क्या हम लोग होटल की छत पर चल सकते हैं, थोड़ी फ्रेश हवा भी मिल जाएगी।

मैंने मोबाइल में समय देखते हुए उसे रिप्लाई किया- अभी एक बजने वाला है इतनी रात को ऊपर जाना ठीक नहीं होगा।
आलोक- अरे मैं हूं ना चाची… आप तो बेवजह डर रही हो।

आलोक के मनाने पर मैं मान गयी और अपने बच्चों को देखते हुए धीरे से बेड से उठकर रूम के बाहर आई और दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया। आलोक रूम के बाहर खड़ा हुआ मेरा ही इन्तजार कर रहा था।
फिर हम दोनों लिफ्ट से टॉप फ्लोर पर गए, और वहाँ से सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर छत पर पहुँच गए।

होटल सिटी से थोड़ा दूर था और सात फ्लोर का था तो आसपास कोई घर या होटल इतने ऊंचे नहीं थे। छत पर हम दोनों के अलावा कोई नहीं था तो छत पर आते ही आलोक ने एक बार छत का मुआयना लिया और फिर उसने छत के दरवाजे को लॉक कर दिया ताकि कोई ऊपर ना आने पाए।

छत पर बिल्कुल अंधेरा था तो मैं आलोक से साथ ही खड़ी थी। बरसात का सीजन चल रहा तो आसमान में बादल छाए हुए थे जिस वजह से चंद्रमा की रोशनी भी नहीं आ रही थी।
आलोक को गेट बंद करते देख मैंने कहा- आलोक क्या कर रहे हो? अगर किसी को ऊपर आना हुआ हो तो?
आलोक ने कहा- इतनी रात को सब अपनी पत्नी और गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स कर रहे होंगे… कोई आएगा तो खोल देंगे।

फिर आलोक मुझे वहाँ से एक कोने में ले आया। वहाँ से नीचे देखने पर आसपास का नज़ारा स्ट्रीटलाइट की पीली रोशनी में बड़ा ही प्यारा लग रहा था।

मैं बॉउंड्री से टिककर बाहर के नजारे देख रही थी, तभी आलोक ने पीछे से आकर मुझे जोर से जकड़ लिया, उसका जकड़ना इतना तेज था कि मेरे मुंह से ‘आआ आआहहह हहह…’ निकल गयी।
आलोक का लंड बिल्कुल खड़ा हो चुका था जो कि मुझे साफ-साफ मेरी गांड की दरार में महसूस हो रहा था, आलोक ने मेरी गर्दन को पीछे से चूमना शुरू कर दिया।

मैंने सिसकारियां भरते हुए उसे कहा- इतना जोर से क्यूँ पकड़ा है मुझे… आआहहह…
आलोक ने कहा- चाची, आप इतने दिनों बाद मुझे मिली हो इसीलिए आज मैं आपको अपनी बांहों में कस कर रखना चाहता हूं.
और इतना बोलते ही उसने अपने दोनों हाथों से मेरे गोल चूचों को मसलना शुरू कर दिया।

मैं उस समय नाईट गाउन पहनी हुई थी जो की बूब्स से लेकर कमर तक चैन के साथ अटैच थी और अंदर केवल पैंटी ही पहनी हुई थी क्योंकि सोने के लिए मैंने अपनी ब्रा निकाल दी थी। आलोक भी टीशर्ट और कैप्री में था।

गर्दन पर चुम्बन की वजह से मैं काफी गर्म हो गयी थी। तभी आलोक ने मेरे गाउन की चैन को खोलकर बूब्स तक नीचे कर दिया और अपने दोनों हाथ मेरे गाउन के अंदर डाल कर मेरे मम्मों का मर्दन करने लगा।
आलोक अपने हाथों से मेरे निप्पल्स को मरोड़ रहा था और मेरी गर्दन को चूम रहा था।

फिर आलोक ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे होंठों को चूमने लगा। मेरे मम्में मेरे गाउन से बाहर निकले हुए थे जो कि अब आलोक की छाती में समा रहे थे। आलोक ने भी अपनी टीशर्ट उतार दी और फिर से मुझे अपनी बांहों में जकड़ कर मेरे होंठों को चूमने लगा।

मुझे आलोक का गठीला बदन अपने मम्मों पर महसूस हो रहा था।

आलोक ने मुझे किस करते हुए अपने हाथों को मेरी कमर पर लपेट लिया और मेरे गाउन को मेरी जांघों के ऊपर की तरफ खींचने लगा। आलोक ने मेरे गाउन को मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया औऱ फिर अपने एक हाथ को मेरी पैंटी के अंदर डालकर मेरी गांड की गोलाई और चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

आलोक ने फिर आगे से अपने दूसरे हाथ से मेरी पैंटी को नीचे सरका दिया और अपनी सीधे हाथ की दो उंगलियों को मेरी चूत में डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरे जेठ के बेटे आलोक ने मेरे होंठों को छोड़कर अब मेरे मम्मों से रसपान करना शुरू कर दिया। आलोक किसी जानवर की भांति मेरे मम्मों को चूस रहा था और मेरे निप्पल्स भी चबा रहा था।
मैं बस ‘आआहहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊऊह…’ ही कर रही थी क्योंकि अब और कुछ मेरे बस में नहीं था।

तभी आलोक ने अपने दूसरे हाथ से मेरी गांड के छेद को चौड़ाया और अपनी बडी उंगली को मेरी गांड के अंदर डाल दिया जिस वजह से मैं थोड़ा ऊपर की तरफ उछल गयी। मैं काफी उत्तेजित हो गयी थी क्योंकि मेरे दोनो छेद आलोक की उंगलियों द्वारा चोदे जा रहे थे।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद उसने मेरी चूत से अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल ली पर मेरी गांड को वह अभी थी अपनी उंगली से चोद रहा था। फिर आलोक ने मुझे बाउंड्री वॉल से टिकाया और मेरे उठे हुए गाउन को मेरे हाथों में पकड़ा दिया और खुद घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा।

आलोक की जीभ का स्पर्श मेरी चूत के अंदर होते ही मैंने झड़ना शुरू कर दिया और मैंने गाउन को अपने हाथों से छोड़कर आलोक के सिर को पकड़ लिया और अपनी चूत को झटकों के साथ आलोक के मुँह पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मैंने सिसकारते हुए अपना सारा पानी आलोक के मुंह पर छोड़ दिया जिसे आलोक ने बिल्कुल चाटकर साफ कर दिया।

आलोक उठ कर खड़ा हो गया और मेरी गांड से अपनी उंगली निकालकर मुझसे बोला- आई लव यू चाची… आपका पानी बड़ा ही स्वादिष्ट है आज बड़े दिनों बाद पीने का मौका मिला।

मैंने भी हँसते हुए उसे कहा- लव यू टू आलोक… अब जो भी करना है जल्दी कर… काफी रात हो गयी है।

मेरी टाँगें और मम्मे अभी भी खुले हुए थे और रात के समय ठंडी हवा लगने के कारण मैं कांपने लगी। आलोक ने बिल्कुल भी देरी ना करते हुए अपनी कैप्री उतार दी। उसने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी। कैप्री उतरते ही उसने अपना खड़ा लंड मेरे हाथ में थमा दिया जिसे मैंने सहलाना शरू कर दिया।

मैंने भी आलोक के लंड को गीला करने के लिए नीचे बैठकर उसे चूसना शुरू कर दिया। आलोक के लंड से वीर्य जैसा चिपचिपा पानी निकल रहा था जिसे मैंने अपने मुंह में लेकर सोख लिया। करीब दो मिनट तक लंड चूसने के बाद मैंने उसके लंड को अपने मुंह से निकाल दिया।

मेरी चूत भी पानी छोड़ने की वजह से काफी गीली हो चुकी थी। फिर आलोक ने मुझे दीवाल से टिकाया और मेरे गाउन की पूरी चैन को खोल दिया जिससे मेरा गाउन मेरी टांगों से नीचे गिर गया।
अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और बाहर चल रही ठंडी हवा मेरे रोम रोम को उत्तेजित कर रही थी। मुझे ऐसा करते हुए डर भी लग रहा था क्योंकि खुले में चुदाई करने का ये मेरा पहला अनुभव था… पर जब कामुकता हावी हो जाती है तो क्या सही है और क्या गलत… कुछ समझ नहीं आता है।

आलोक ने मुझे टिकाकर खड़ा किया और फिर मुझसे सटकर ही उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और फिर धीरे धीरे उसने अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के अंदर कर दिया।

आलोक ने मेरे होंठों को अपने होंठों से बांध लिया और पूरी दम के साथ उसने अगले धक्के में अपना पूरा लंड मेरी चूत में भर दिया। मेरे होंठों को चूमने की वजह से में चीख नहीं पाई लेकिन मेरी घुटी हुई आवाज भी आसपास गूंज गयी और अपने पैर की उंगलियों के बल खड़ी हो गई।

मैं आलोक के होंठों को चूमना छोड़कर दर्द से सिसकार उठी- ऊऊह्ह माँ… उम्म्ह… अहह… हय… आआहह…
मैंने आलोक को हल्की आवाज में डाँटते हुए कहा- पागल हो गया है क्या… अभी मैं चीख पड़ती तो किसी को पता चल जाता।
पर आलोक ने मेरी बातों को अनसुना कर दिया और फिर से मेरे होंठों को चूमना शुरु कर दिया।


आलोक अब जोर जोर के धक्कों के साथ अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा, मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर आलोक के लंड से चुद रही थी।
हम दोनों के नंगे बदन की गर्मी उस ठंडी हवा में एक दूसरे को साफ महसूस हो रही थी।
थोड़ी देर तक इसी तरह लगातार चोदने के बाद मैं थक गई तो मैंने आलोक से पोजीशन बदलने के लिए कहा।

आलोक ने वैसे ही अपना लंड मेरी चूत में झटके मरते हुए कहा- चाची, छत ज्यादा साफ नहीं है, वरना हम यहीं लेट कर चुदाई करते। पर तुरंत ही उसके मन मैं एक विचार आया और उसने मुझसे बाउंडरी पर हाथ रखकर खड़े होने के लिए कहा।
मैं आलोक की बात मानते हुए अपने दोनों हाथों को सामने बाउंडरी के ऊपर रख कर खड़ी हो गयी। इस वज़ह से मेरी गांड और कमर पीछे की तरफ को उभर आई ऒर सामने से मुझे बाहर का सारा नजारा दिखाई दे रहा था।

अगर ऊँचाई ज्यादा न होती और दिन का समय होता तो सड़क चलते आदमी मेरे नंगे झूलते हुए मम्मों को देख सकता था। पर अभी अंधेरा इतना था कि किसी को कुछ दिखाई नहीं दे सकता था।

इस तरह झुककर खड़े होने की वजह से मैं किसी डॉगी की पोजीशन में थी। अब आलोक ने पीछे से आकर अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया और इस बार उसने हल्के हल्के धक्कों के साथ अपने लंड से मेरी चूत को अंदर तक चीर दिया।

आलोक ने अपने धक्कों की गति को बढ़ा दिया… जिस वजह से मेरा शरीर उसके हर धक्कों के साथ आगे पीछे होने लगा और मेरे कसे हुए मम्मे भी मेरे शरीर के साथ झूलने लगे। आलोक ने अपने हाथों को आगे बढ़ाकर मेरे दोनों मम्मों को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से हल्की हल्की सीत्कार ‘आआहहह… आआऊऊहहह… ओह आलोक… और जोर से चोदो मुझे… फ़क मी हार्डर..’ आसपास के माहौल को और भी गर्म कर रही थी।

काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद मैं अपने चरम पर पहुँच गई और मैंने अपनी चूत से आलोक के लंड पर दबाव बनाते हुए झड़ना शुरू कर दिया। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी मेरी टांगों से बहता हुआ नीचे तक पहुँच रहा था। आलोक अभी भी मेरी चूत मार रहा था पर अब चुदाई की आवाज़ें कुछ बढ़ सी गयी थी।

तभी आलोक ने मेरी चूत से अपना लंड निकाला और नीचे झुककर मेरी रिसती हुई चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ का स्पर्श मेरी चूत को अलग ही शांति प्रदान कर रहा था। उसने मेरी जांघों को भी चाटकर साफ कर दिया।

आलोक ने अपने मुँह को मेरी चूत से हटाते हुए मेरी गांड के पास लाया और अपने थूक से मेरी गांड को गीला करना शुरू कर दिया।
मैं समझ गयी कि अब आगे क्या होगा।
मैंने पीछे मुड़कर आलोक को मुस्कुराते हुए कहा- आगे से मन नहीं भरा जो अब पीछे की तरफ जा रहे हो?

आलोक ने कहा- चाची… अगर आपकी गांड नहीं चोद पाया तो फिर मेरे इतने दिनों का इन्तजार बेकार ही रह जाएगा।
मैंने उसकी बात पर हँसते हुए कहा- हां कर ले… पर जरा आराम से करना!
और फिर वापस उसी अवस्था में आ गयी।

आलोक ने आगे बढ़ते हुए अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर टिकाया और बड़े ही प्यार के साथ उसे अंदर डालने लगा। मेरी गांड के लाल छेद को भेदते वक्त मेरी आँखें बंद हो गईं और मेरे माथे पर दर्द के कारण शिकन आने लगी क्योंकि मैं जब कभी ही अपनी गांड चुदवाया करती थी और आलोक का लंड भी कुछ ज्यादा ही मोटा था।

आलोक ने धीरे धीरे से अपना लंड मेरी गाण्ड में डाल दिया और फिर उसने धक्के देना शरू कर दिये. आलोक का लंड जितनी गति से मेरी गांड के अंदर होता मैं उतना मस्त हो जाती।
उसने काफी देर तक मेरी गांड को उसी अवस्था में चोदा। फिर जब वो झड़ने को हुआ तो उसने अपने धक्कों को दोगुनी रफ्तार के साथ मेरी गांड मारने लगा और अंततः उसने ‘आआहहह… चाची… मैं गया… आपकी… गांड… के… अंदर…’ कहते हुए अपना गर्म वीर्य कई पिचकारियों के साथ मेरी गांड के अंदर त्याग दिया।

झड़ने के बाद आलोक अकड़कर मुझसे वैसे ही लिपट गया। कुछ ही देर बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल लिया। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और खुद को ठीक किया.
आलोक का वीर्य मेरी गांड से रिसकर बाहर आने लगा. पर मैं इतना थक चुकी थी कि खुद को साफ करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी।

उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए और अपने अपने रूम में आकर सोने लगे। मैं भी धीरे से बेड पर जाकर रोहन और अन्नू के बीच लेट गयी। थोड़ा हलचल होने की वजह से रोहन ने नींद में करवट लेते हुए मुझे खुद से लिपटा लिया और फिर मैं भी वैसे ही सो गई।



उस रात के बाद हम लोगो को चुदाई करने का समय ही नहीं मिल पाया और फिर सफर के खत्म होने के बाद हम लोग वापस अपने घर आ गए। अब बस मैं थी, रोहन था और मेरे पति।
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