पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
01-25-2023, 06:38 AM,
#91
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

VOLUME II

विवाह

CHAPTER-1

PART 11

मानसिक  नियंत्रण



ड्रेसिंग रूम में  एक अलमारी थी और ये कक्ष  मुख्या कक्ष के  कोने में था था और इसमें कोई दीवार नहीं थी.  कामिनी ने अलमारी  में से  एक पोशाक चुनी जिसे उसने बिस्तर पर रख साइड में होकर उसने कपड़े उतारे और आईने में देखा वो कुछ इस तरह  से खड़ी  थी के उस कोण से वो तो नहीं पर उसका   प्रतिबिंब आईने  में  देख  मुझे पता चला कि उसका फिगर असाधारण  है ।  उसका रंग गोरा   उसके नयन और नक्श बहुत ही तीखें थे ।


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उसके स्तन नुकीले  और उसके निप्पल के चारों ओर काले घेरे थे, उसकी कमर संकरी थी और उसके कूल्हे  बड़े और गोल थे, उसकी जांघों के बीच  के क्षेत्र में उसके बाल  बड़े करीने से छंटे हुए   थे .   संक्षेप में,  आईने  में  उसकी छवि देख मैं उसपे विमोहित हो गया। . उसके काले बाल उसके कंधों पर लटके हुए थे और उसके प्यारे चेहरे को उभारते हुए उसे सुंदरता की तस्वीर बना रहा था। कामिनी  जल्दी से  उस ड्रेसिंग रूम के साथ वाले स्नानागार  में चली गयी और शॉवर लेने लगी बाथरूम अर्धदर्शी शीशे का था और उसमे भी उसकी छवि नजर आ रही थी, अपने बालों को गीला न करने की सावधानी रखते हुए उसने अपने शरीर को धोया.[/url]
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कामिनी ने  खुद को जल्दी से सुखा लिया,  उसने ब्रा और पेंटी नहीं पहनी और उस ब्लाउज की बांहें नहीं थीं और सीने के हिस्सा अत्यधिक खुला था. ब्लाउज थोड़ा कसा सा था, जिसकी वजह से  स्तन उभर कर बाहर निकलने जैसे हो रहे थे. इस ब्लाउज में से  उसके स्तनों के बीच की दरार की गहराई साफ झलक रही थी.   पीठ पर ब्लाउज की पतली डोरो थी  और ऐसे ब्लाउज में ब्रा नहीं पहनी जाती है क्योंकि ये ब्लाउज था ही ऐसा कि उसकी ब्रा साफ दिख जाती.
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पतली सुलाबी रंग  की  साडी उसने अपने नितम्बो पर लपेटी . साड़ी को कमर से बांध कर उसने आगे का हिस्सा एकदम नाभि के नीचे खौंस दिया. जिस तरह से साड़ी बंधी थी उसमें आगे का  हिस्सा, उसकी योनि से केवल 3 इंच ऊपर था  उसने  चूतड़ के ऊपर  साड़ी का पल्लू लपेट कर   कंधों पर  इस तरह रखा कि स्तन, पेट और पीठ का भाग ज्यादातर खुला ही रहे. इसके बाद उसने  कमर पर अपनी  पतली सी चैन लपेट दी. 

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कामिनी ने  जिस तरह से  कपड़े पहने थे, वो उसके गोरे सुन्दर  कामुक बदन पर बहुत  जंच  रहे थे.. फिर उसने  थोड़ा सा इत्र लगाया और मेरे  पास  आयी  । उसकी चोली  उसके स्तनों की वक्रता को  बढ़ा रही थी और उसके तने हुए  निपल्स उस  पोशाक के रेशमीपन में  रेखांकित थे,   जिसका परिणाम आश्चर्यजनक था।


पूरा माहौल उसकी उपस्थिति के कारण वाकई में कामोतेजना से भरपूर था..

वो अदा से चलती हुई मेरे पास आयी तो मैंने उसे बोला आप बहुत सेक्सी हो ..

वो निडरता से मुस्कुरायी। मेरी निगाह उसके फिगर पर केंद्रित थी, उसके कूल्हे उसकी साडी  के नरम  कपडे  में  बड़े और उभरे हुए दिख रहे थे और ये स्पष्ट दिख रहा था  उसने  ब्रा और पेंटी नहीं पहनी हुई है, मेरा ध्यान इस विशेष बात पर गया की  कैसे उसकी साड़ी उसके नितंबों की चिकनी त्वचा को सहला रही थी। मैंने उसे अपने  पास  बैठने के लिए आमंत्रित किया और शराब की एक बोतल खोली ।

मैंने  मोहिनी का  हाथ पकड़ कर अपने पास बैठने के लिए आमंत्रित किया तो वो मेरे पास आ कर बैठ गयी और ऐसा करते हुए मैंने उस पल का फायदा उठाया और अपनी  बांह उसके गले के पार  उसके दूर वाले कंधों पर रख दी, उसने अपना सिर मेरी छाती पर रख दिया और मैंने अपनी बांह का दबाव बढ़ाया और उसे अपने पास खींच लिया।

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मैं इस बात से पूरी तरह वाकिफ था कि उस आवाज ने और दिव्य पुरुष ने मुझे जो कुछ भी बताया था,  अगर  वह सब सच था तो रिंग की ताकतें यह सुनिश्चित कर सकती थीं कि मैं उसे अपनी  इच्छाओं के अधीन कर सकता हूँ.  लेकिन मेरे मन में इसके प्रति के संदेह के कारण  मैंने ऐसा कुछ भी करने के खिलाफ फैसला किया। ये जानने के लिए  की मेरा अपने मन पर कितना नियंत्रण है, उस समय मैंने अपने मन के द्वारा इस तरह की शक्तिशाली ताकतों का  उपयोग  करने से बचने के लिए दृढ़ संकल्प किया, इसलिए मैंने जानबूझकर उसके दिमाग में  ऐसा कोई विचार नहीं डाला  और  इंतजार करना और यह देखना पसंद किया कि शाम बिना किसी   दिव्य  शक्ति का  उपयोग किये कैसे विकसित होगी।

कामिनी पर तो मैंने पहले से ही अंगूठी की शक्ति  आजमा कर उसकी कामुक  भावनाओ  को  भड़का दिया था . उसका सिर झुका हुआ  था और हमारे होंठो ने  एक सौम्य चुंबन में मुलाकात की।  फिर मैंने  उसके होंठो के ऊपरी  हिस्से को  धीरे-धीरे   महसूस किया और उसके बाद हमारा चुंबन  गहरा हो गया.  उसने अपने ओंठ खोलकर मेरी जीभ को  अपनी और आमंत्रित किया तो मेरी जीभ उसके मुँह में प्रवेश कर गयी ।


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उस नगूठी की अपनी  शक्ति के प्रभाव  से चुम्बन ने पूरी तरह से आसानी और हमारे जनून में तेजी से वृद्धि हुई  तो कामिनी मुझ से चिपक गयी और  मेरी छाती पर खुद को दबाया। उसकी सांसें और तेज हो गईं और मैंने अपना  दूसरा हाथ सावधानी से उसके स्तन  की ओर बढ़ाया, जो उसकी रेशमी चोली में  स्पष्ट रूप  इस तथ्य को प्रदर्शित कर  रहा थे  कि उसके निप्पल उत्तेजित हो गए थे और पूरी तरह से खड़े हो गए थे।

उसकी बढ़ती हुई उत्तेजना से मुझे ये आभास  हो रहा था   कि किसी भी समय मैं उसकी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए  अंगूठी की दिव्य शक्ति का उपयोग कर सकता हूं और उसकी इच्छा को मैं प्रभावित कर बढ़ा  या घटा सकता हूँ  पर मैंने ऐसे किसी भी  प्रलोभन  का  से फिलहाल बचने का फैसला किया और  इस मामले को अपनी स्वाभाविक गति  से आगे बढ़ने दिया।

जारी रहेगी
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01-25-2023, 06:41 AM,
#92
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

VOLUME II

विवाह

CHAPTER-1

PART 12

मानसिक नियंत्रण



कामिनी उत्तेजित  थी और गहरी साँस ले रही थीं, उसके स्तनों पर मेरे हाथ लगते ही उसकी आह निकली , इस कराह  ने उसकी उत्तेजना की स्थिति का संकेत दिया, और वो अपने  पैर अपनी जांघों के बीच की खुजली को शांत करने के प्रयास में एक दूसरे के खिलाफ रगड़  रही  थी । मैंने उसका हाथ अपनी जाँघ पर महसूस किया; वह धीरे-धीरे अपने हाथ  को  मेरे  पायजामा के अंदर ले गई और अपना हाथ धीरे-धीरे लंड के ऊपर की ओर तब तक खिसकाती रही जब तक कि उसके हाथ की उंगलियो ने  मेरे उत्तेजित लिंग को पूरा अपनी गरिफ्त  में नहीं ले लिया ।

मैंने  उसे धीरे-धीरे पीछे की ओर धकेल दिया और वह सोफे पर अधलेटी हो गयी, और मैंने उसके ऊपर होकर  उसे नीचे की ओर दबाकर  उसे चूमा। उसके पैर मेरी टांगो की हलचल से अलग हो गए . 

मैंने अपनी आँखें नीची करके देखा कि उसकी नाभि में एक छल्ला  डला हुआ  था ।  और नीचे देखने पर मैंने देखा कि उसकी साडी  उसके पैरों के ऊपर तक खिसक गई थी और उसके घुटने स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे ।


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मैंने बड़े ही इत्मीनान से पूरे बदन को लिपट  कर  टटोला. फिर  आगे  होकर   उसकी साडी का पल्लू हटा दिया.   स्तनों को दबाने लगा . 

मैंने  अपना हाथ उसकी चोली  के अंदर डाल कर चोली को ऊपर सरकाकर उसके नग्न निप्पल पर  अपना अंगूठा  रगड़ा । उसने हांफते हुए गहरी सांस ली और मैंने महसूस किया कि उसकी आह के साथ ही उसकी अंगुलियों का दबाव  अब पूरी तरह से मेरे उत्तेजित लिंग पर कस गया । मैंने उसकी चोली  के कपड़े को तब तक ऊपर की ओर धकेला जब तक कि उसके स्तन खुल कर नग्न  नहीं हो  गए और धीरे से अपने होंठों को उसकी गर्दन को चूमते हुए  नीचे उसके निप्पल तक ले गया और मसलते हुए  ब्लाउज खोल का उतार दिया .  

मैंने अपने  होठों से  उसके  निप्पल   सहलाये तो  आहओह्ह्हहाय्यय   करते हुए  उसने गहरी आह भरी,  फिर मैंने  बारी बारी से   स्तनों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.  कामिनी के  मन में एक संशय उठा कि यह सब  इतनी जल्दी कैसे हो सकता है, उसने अपने जीवन में कभी चीजों को इतनी तेजी से नहीं बढ़ने गया था यहाँ तक की उस वृद्ध  हीरा  के साथ भी पहली बार चीजे इतनी जल्दी नहीं हुई थी,  और मुझसे तो आज यह पहली बार ही  मिली थी। 

वो बोली हम  कुछ ज्यादा तेज नहीं जा रहे .. तो मैंने  उसके मन में झाँक कर उसके  इस संशय को पढ़ा और   पाया  की निश्चित रूप से उसे बाबा की अंगूठी  के बारे में नहीं पता था .  और शायद  बाबा  ने उन्हें कामिनी   के साथ इस्तेमाल भी नहीं किया था .जल्द ही मैंने उसकी  कराह सुनी  . 

वह जोर से कराह रही थी क्योंकि  मैं उसके निप्पल के सिरे को चूस रहा था  मैं  बारी बारी से उसके दोनों स्तन  पीने लगा और वो मुझे बच्चे की तरह एक हाथ से  मेरा  सिर सहलाती रही.

 और अपनी जीभ को धीरे से निप्पल के  चारों ओर घुमाने के बाद धीरे से उसे कुतरने लगा , कामिनी मेरी गतिविधियों का विरोध करने में सक्षम नहीं थी। मैंने उसके निप्पल को  काटने या उसे कोई दर्द देने  से परहेज किया। 

मेरे कुतरने से उसकी उत्तेजना बढ़ गई और उसका हाथ मेरे पायजामा की डोरी तक चला गया, उसकी उंगलियां उस डोरी  के चारों ओर बंद हो गईं और उसने पाजमा के साथ उसे नीचे खींच लिया। मैंने उसे अपने हाथों से काम करने के लिए जगह  देने के लिए खुद  को उससे दूर कर दिया।  उसकी उंगलियां अंदर की ओर बढ़ी  और  उसने मेरे अंडरवियर को नीचे की तरफ  खींच दिया । 

मेरे लंड को देख कर उसकी आह निकली ,, उसने मेरे अंकोशों पर अपनी कलाई लगा और कर मेरे लंड की लम्बाई का अंदाजा लगाया और उसके मुँह से निकला .. उफ़ ,, ये तो बहुत लम्बा  है ..


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कामिनी की उँगलियों ने फिर से मेरे लिंग को पकड़ लिया और उसने अपना हाथ ऊपर की ओर बढ़ा दिया, उसकी उँगलियाँ मेरे लंडमुंड  को महसूस कर रही थीं जो उत्तेजना से नम था। उसने धीरे-धीरे मेरे गर्म लंड की पूरी लंबाई पर  अपना हाथ ऊपर-नीचे किया, वह उसकी त्वचा की बनावट की कोमलता के साथ उसकी कठोरता   का आनंद ले रही थी, उसकी सांस तेज हो गई और उसने गहरी सांस ली।

 जी भर के स्तनपान करने के बाद  मैं उसके  पेट को चूमते हुए नाभि को चाटने लगा  करने लगा. मैंने अपने होठों को धीरे-धीरे नीचे की ओर उसकी  नाभि में डाली हुई  रिंग  के चारो ओर घुमाया  वो काफी देर तक   नाभि में अपनी जीभ फिराता रहा.  उसकी हालत बुरी  हो गयी और वो आह्हः  ओह्ह उफ़ क्या कर रहे हो कह कर तड़पने लगी ..

इस तरह उसकी नाभि को चाटते  हुए  मैंने उसकी साड़ी पर हाथ फेरते हुए   खींच कर खोला और  टांगों के नीचे से निकाल कर उसे नीचे से  बिल्कुल नंगा कर दिया.  उसने भी इस प्रक्रिया में अपनी जाँघे उठा कर मुझे सहयोग दिया . फिर मेरी जीभ उसकी नाभि के चारों ओर घूम गई और अपने होठों को नीचे की ओर ले गया और मेरी जीभ तब तक कुछ खोजती रही जब तक कि मैं उसे उसकी जाँघि के जोड़  तक  नहीं पहुँच गया . 

जैसे ही मेरी जीभ ने उसकी योनि के आसपास के क्षेत्र को छुआ  उसकी तेज कराह  निकली ..उसके पैर जुदा हुए ; मुझे उसकी  योनी की पहली झलक देते हुए उसके कूल्हे चौड़े हो गए।  उस रोशनी में वो बिल्कुल चमक सी रही थी और उसका  पूरा बदन एकदम चिकना दिख रहा था. योनि के बालों  की करीने से कटे होने हे कारन  सब और भी ज्यादा मस्त लग रहा था. उसकी योनि के बालों की भी इस तरह से छंटनी की गई थी कि कोई भी मर्द आकर्षित हो जाए. मैंने उसकी  टांगें पकड़ उन्हें फैला दिया और बहुत चाव से उसकी  योनि देखते हुए एक हाथ फेरने लगा. मेरे छूते ही वो  कांप सी गई, पर मैंने  उसकी  एक जांघ पर हाथ  रख कर सोफे पर दबा दिया था.

उसकी योनि की पंखुड़ियों को अपनी उंगलियों से फैला कर मैं  बोला- वाह कितनी प्यारी, सुंदर और कामुक चुत है तुम्हारी  … चलो दोनों मिल कर  इस रास्ते से स्वर्ग के आनंद लेने चले ...

कामिनी  का मन बहुत रोमांचित हुआ जा रहा था. मैं योनि के इर्द गिर्द चूमते हुए जांघें कमर और टांगों को चूमने लगा फिर मैंने  झुक कर उसकी  योनि को चूमा. वह गीली थी, बहुत गीली थी; जैसे ही मेरी घूमती हुई जीभ ने उसके योनी के बाहरी होठों को छुआ , उसने अपने आप को ऊपर की ओर उठा दिया और मेरे मुंह के खिलाफ अपनी योनि को दबा दिया। 

वो  इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि मुझे लगा अभी  अपना पानी छोड़ देगी  उसके लिए खुद को रोक पाना चुनौती सा लगने लगा था. पर अभी तो शुरूआत ही हुई थी. मैंने उसे थोड़ी देर चाटा और लगा वो अब रुक नहीं पायेगी तो  मैंने उसे  पलट दिया और वो  पेट के बल हो गई. मैं उसकी  टांगों को चूमता हुआ चूतड़ तक पहुंच गया और किसी भूखे   की तरह चूमता  चाटता   हुआ मे उसकी  पीठ और पीठ से दोबारा चूतड़ों तक चूमता रहा. वो  अपने आप में सिकुड़ कर  उलटी लेटी हुई थी. और मैंने उसके चूतड़ों को ऐसे चूमना और काटना शुरू कर दिया कि कामिनी  की  सिसकियां रोके नहीं रुक रही थीं. मेरी इन हरकतों  से वो बिलकुल बेकाबू हो हिल रही थी .. .

मैंने  अब उसके  चूतड़ों को दोनों हाथों से फैलाना शुरू कर दिया और अपना मुँह बीच में डाल  योनि जीभ से टटोलनी शुरू कर दी.

वो पेट के बल सोफे पर लेट गयी थी और उसकी  योनि बिस्तर की तरफ थी और उसके  बड़े और मोटे मांसल चूतड़ों के बीच उसकी  योनि इतनी आसानी से मिलनी मुश्किल थी. मैं  प्रयास करके भी उसकी योनि तक जीभ नहीं पहुंचा पा रहा था. पर मैं  भी  हार मानने वालों में से नहीं था. मैं  थोड़ा थोड़ा जीभ से टटोलता रहा और धीरे धीरे उसे  खींचते हुए उसके चूतड़ उठाने लगा. कुछ कामिनी ने भी मेरी मदद की और अपने घुटने मोड़ अपने चूतड़ पीछे से उठा दिए.


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अब उसकी  योनि खुलकर मेरे  सामने आ गई. मैंने तुरंत अपना मुँह उसकी  योनि से चिपका लिया और ऐसे चाटने लगा, जैसे  योनि कोई खाने की वस्तु हो. उसकी  योनि अब बिल्कुल ही चिपचिपी हो गई थी.

जारी रहेगी

दीपक कुमार
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01-26-2023, 05:22 PM,
#93
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

VOLUME II

विवाह

CHAPTER-1

PART 13

मानसिक नियंत्रण



 मैंने  अपनी जीभ उसकी  योनि के भीतर घुसाने का प्रयास शुरू कर दिया.  और वो  मादक सिसकियां भरने लगी थी और मेरे लंड को जोर से अपने हाथ में दबाने  लगी,  उसे  समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ किसे पकड़ूँ और किसे छोड़ूँ. आखिरकार वो  सोफे के बाजुओं  को पकड़ कराहने लगी. मैं पूरी ताकत से उसके चूतड़ों को फैला ज्यादा से ज्यादा अपनी जीभ भीतर घुसाने का प्रयास करने लगा.

वो बस हाय हाय करते हुए  विनती करती हुई बोलने लगी- प्लीज छोड़ दो …पता नहीं मुझे क्या हो रहा है  मुझे लगा है  मैं  मर जाऊंगी. उसकी ये बात सुन कर मैं हैरान रह गया .. वो तो  उस वृद्ध  हीरा की पत्नी थी जो मुझ से पहले  उस अंगूठी का मालिक था .. क्या उसके साथ में सम्भोग के दौरान  कामिनी ने कभी भी ओर्गास्म का अनुभव नहीं किया है ..  क्या  सच में अंगूठी के पास वो शक्तिया है जो वृद्ध और दिव्य पुरुष ने मुझे बतायी हैं .. 

मैंने कामिनी के मन में झांका  और उसके सेक्स के इतिहास पर गया तो पता चला वो और उसकी तीनो बहने  हीरा के मित्र स्वर्गीय मोती की बेटीया  थी  और  उन सबका  विवाह वृद्ध हीरा  के साथ एक महीने  पहले ही हुआ था वो भी तब जब  विवाह के कुछ समय पहले हीरा  की पत्नी और पुत्र का एक दुर्घटना में निधन हो गया था.  उनके निधन के बाद से हीरा बहुत दुखी रहने लगा था.

  उसी दुर्घटना   में हीरा  का मित्र  मोती   भी बुरी तरह  से घायल हो गया था  और  कुछ दिन बाद  मोती का भी निधन हो गया था  .. अपने निधन से पहले  मोती ने अपनी हालत देख और हीरा का दुःख देख कर हीरा  से अपनी चारो बेटियों से विवाह करने का वादा ले लिया था जिसके कारण हीरा ने कामिनी और उसकी बहनों  से विवाह  तो कर लिया था  पर हीरा को तो अपनी प्रिय पत्नी और पुत्र की मृत्यु के बाद  वैराग्य हो गया था  .. पहले वो बिलकुल जवान दीखता था पर अपनी पत्नी और पुत्र के निधन के बाद उसका शरीर बहुत तेजी से ढल गया था ..   और उसने सिर्फ कामिनी के  साथ ही सुहाग रात में  चुदाई की थी  इसीलिए कामिनी  प्यासी थी और  वो आकर्षित हो कर मेरे पास  आ  गयी थी . 

 फिर   हीरा  के साथ ये हादसा हो गया था .. और वो अपने चारो  पत्निया  और  बेटियां मुझे सौंप गया था .. सब की सब  बहुत सुंदर और  सेक्सी . ये सोच कर ही मेरा लंड एक बार और  तन  कर तुनक गया  ..


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उह  अह्ह्ह  करते हुए कामिनी  जोर जोर से कराह रही थी  और  बोली प्लीज रुको ..  मैं रुका नहीं और  वो जितना मना करती, मैं  उतना ही जोर और ताकत लगाता. अब उसकी  बेचैनी इतनी बढ़ गई कि वो पूरा जोर लगा पलटकर सीधी हो गई और बोली  .

वो  बोली- प्लीज अब मत तड़पाओ अब जल्दी से मेरे अन्दर आ जाओ … वरना मैं ऐसे ही झड़ जाऊंगी.
उस पर मैंने  कहा- हां झड़ जाओ … यही तो मैं भी चाहता हूँ,  मुझे तुम्हें  झड़ते हुए देखना है. 


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 वो बड़े कामुक और लुभावने अंदाज में बोली- तो देख लेना .. मना किसने किया है पर  मुझे तुम्हारे लंड से झड़ना है  मैंने भी उसके  अंदाज में ही  बोला- इतनी भी क्या जल्दी है जान … अभी तो पूरी रात बाकी है.

इतना कह कर मैंने उसकी  जांघें फैला दी  और फिर   झुक कर उसकी  योनि से अपना मुँह चिपका लिया.


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कामिनी की  हालत जो पहले ही ख़राब थी अब  इतनी बुरी हो गई थी कि वो पहले तो मेरा सिर अपनी योनि से हटाने का प्रयास करने लगी.  अपनी जांघें भी चिपकाना चाहती थी, मगर मेरा सिर बीच में था और अब वो  बहुत अधिक व्याकुल होने लगी थी. पर जब उसने देखा  वो मुझे हटा नहीं पा रही है  तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से उंगलियों में उंगलियां फंसा मुझे कसके पकड़ लिया. और अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए जिससे मेरी जीभ और अंदर चली गयी और  उसकी योनि आग उगल  रही थी और   ऐसा लग रहा था मानो योनि में कोई आग लगी हो, और मैं चाट रहा था  बीच बीच में उसके दाने को छेड़ता था तो वो  पगला जाती थी  और योनि  से बराबर पानी रिस रहा था मैं  योनि के दाने को जोर से काटता, तो वो  हाय हाय करती रह जाती. मैं कभी योनि के दोनों पंखुड़ियों को होंठों से पकड़ खींचता, कभी योनि की छेद में अपनी जीभ घुसाने लगता.

अब उससे और नहीं रहा जा रहा था. उसने  फिर कहा- प्लीज मुझे छोड़ दो … उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मैं झड़ रही हूँ.

इतना कहते ही वो अपने चूतड़ों को उचकाने लगी. और   उसका पूरा बदन ऐंठने लगा और उसने मेरे हाथ छोड़ दिए  और   तेज पिचकारी  उसकी  योनि से  निकली 
उसकी   जाँघे पकड़ मैं  तेज़ी से   योनि चाटने लगा. कामिनी  झड़ गई थी और हल्का महसूस करने लगी थी.

वो अपने बदन को ढीला करते हुए उससे बोली- प्लीज  अब रुक जाइए … थोड़ा सुस्ता लूँ मैं.
पर मैंने बोला- अभी तो शुरू हुआ है … इतनी जल्दी कैसे छोड़ दूं.

ये कह कर मैं  फिर से  उसकी  योनि चाटने में लग गया.  वो सुस्त पड़ गई थी, मैं उसकी  योनि में अपनी बीच वाली उंगली घुसा कर उसे तेज़ी से अन्दर बाहर करते हुए मजा ले रहा था और मैंने  योनि के दाने को मुँह में भरते हुए चूसना और काटना शुरू कर दिया. .


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थोड़ी ही  देर में वो दुबारा गर्म हो गयी और मेरे लगातार चाटने से वो स्वयं अपनी जांघें चौड़ी कर मुहे अपनी योनि से खेलने देने लगी. थोड़ी देर में मैं  योनि चाटते हुए हाथ ऊपर कर उस के स्तनों को मसलने लगा. मुझे  और उसे बहुत आनन्द आ रहा था और वो मेरे  खुद अपने स्तन भी सहला रही थी .

 मैं अपना  हाथ उसके  मुँह के पास ले आया और अपनी एक उंगली उसके  मुँह में डाल दी. वो मेरी उंगली को  चूसने लगी. अब मेरी  एक उंगली   योनि में चल रही थी दूसरी उसके  मुँह में. बहुत कामुक और उत्तेजना से भरा पल लग रहा था. 

थोड़ी देर मेरी जीभ उसकी  योनि पर  चली और वो  कांपते हुए झड़ने लगी. इस  बार फिर उसकी योनि ने ढेर सारा पानी छोड़ा और  मेरा मुँह पूरा भीग गया और बिस्तर भी गीला हो गया .

थोड़ी देर के बाद मैंने सोचा अब ये लंड चूसे तो महज आ जाए और वो तुरंत मेरे मानसिक आदेश के अनुसार नीचे घुटनों के बल हो गई और   लिंग को देखते हुए उसे हाथों में लेकर हिलाने लगी. मेरा  लिंग तनतना रहा था और  सच में बहुत मस्त आकार में था और लंबाई और मोटाई  बढ़ गयी थी और किसी भी स्त्री को चरम सीमा तक पहुंचाने के लिए बड़ा मजबूत दिख रहा था. 

लिंग सख्त  हो गया  था. थोड़ा और हिलाने से वो और थोड़ा सख्त हुआ और  उसने  लिंग को पकड़ कर हाथ से ऊपर नीचे किया, तो सुपारा खुलकर निकल आया. फिर  उसने मेरे सुपारे  पर अपनी जुबान फिरानी शुरू कर दी. मुझे  वाकयी बहुत आनन्द आने लगा और उसके चेहरे पर वासना की आग बढ़ती हुई दिखने लगी. 

उसने  पहले तो सुपारे को थूक से गीला कर दिया और सुपाड़े पर जीभ फिरानी शुरू की. लंड में का सुपारा ही सबसे अधिक संवेदनशील हिस्सा होता है. वो  जीभ फिराने के साथ साथ उसे अपने हाथ से हिला भी रही थी.


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थोड़ी देर और चूसते हुए मेरा  लिंग अब पूरी तरह से कड़क हो गया. वो  पूरा मुँह में भर  चूसते हुए जीभ से सुपारे को भी सहलाने लगी. लेकिन लिंग उसके मुँह में आधे  से भी कम अंदर  गया था .

उसके दिमाग में अब ये था कि  कैसे  मुझे  इतना उत्तेजित हो जाए  की अब मैं  सीधा संभोग करने लगूँ   इसलिए वो धीरे धीरे  लिंग को हिलाते हुए  चूसने के बाद  थोड़ी देर बाद लंड को  तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया और हाथ से भी तेजी से हिलाना शुरू कर दिया.

मैं  आनन्द से भर गया और  मजे से कराहने लगा.  वो जितना अधिक चूस रही थी, उतना ही अधिक मेरी  उत्तेजना बढ़ रही थी.


मैंने  जोश में आकर उसे  अपने पास  खींचा और उसकी जांघें फैला कर उसकी योनि अपने मुँह के ऊपर ले आया. मैं उसकी  योनि को फिर से चाटने लगा. और वो मेरा लंड चूस  रही थी .


इधर वो मेरा  लिंग चूस रही थी और मैं उसकी योनि   में उंगली डाल चाट रहा था और वो  एक हाथ से उसका लिंग हिला रही थी, दूसरे हाथ से मेरे अंडकोषों को सहला रही थी.


  मैंने उसके योनि और  गुदा द्वार के बीच वाले हिस्से की नसों को हल्के हल्के दबाते हुए सहलाना शुरू कर दिया. इससे  कामिनी  इतना जोश में आ गया कि उसने लिंग को चूसना छोड़ दिया और बोली बस अब आ जाओ .

मैंने उसे अपने ऊपर से नीचे किया और फ़िर उसे  सीधा लिटा कर  टांगें पकड़ अपनी ओर खींचता हुआ कामिनी  को  पूरा फैला दिया. मेरा  लिंग अब  गर्म रोड जैसा हो गया था .

मैं उसके  ऊपर जांघों के बीच आकर बोला-  … अब तो और मजा आएगा  तो जान अब चलें जन्नंत की सैर के लिए .

मैं उसे बिस्तर पर ले गया और  उसे लिटा कर मैंने अपनी जीभ उसके स्तनों की ओर बढ़ा दी और उसके हाथ मेरे लंड पर पहुँच गए  उसके हाथ ने मेरे  स्पंदनशील खड़े हुए कड़े लंड को अपनी उत्तेजित और मेरे लंड के लिए व्यग्र  योनि की तरफ  खींच लिया। 

जैसे ही मेरा लिंग का  उसकी  योनि के  नम बाहरी होंठों से  संपर्क हुआ ,  लंड ऊपर की ओर उसके भगशेफ की ओर बढ़ा,   कामिनी ने मन ही मन सोचा "हे भगवान ! मैं ये क्या कर रही हूँ?"  पर जैसे ही लंड का संपर्क उसके भगशेफ से हुआ  उसने महसूस किया   बहुत अधिक शक्तिशाली  वासना  ने   उसकी क्षीण  प्रतिरोध पर कब्ज़ा कर लिया । 

ओह्ह्ह्हह ह्ह्ह्हआयईई   वह जोर से कराह  उठी  तब मैं उसके  ऊपर आ गया और उसके  होंठों को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लिंग को उसकी  योनि के द्वार की दिशा देने लगा. मेरा  सुपारा  योनि के छेद में मुझे महसूस हुआ, तो उसकी  सांस रुकती सी महसूस हुई. इसी वक्त पर मैंने  अपना लिंग का सुपाड़ा हल्के से धकेल कर योनि पर   दबाब  दिया. जैसे ही लंड ने उसकी योनी के प्रवेश द्वार को खोला तो  मैंने फिर  हल्का सा दबाब  दिया और  मेरे लिंगमुंड  ने उसकी आंतरिक प्रवेश द्वार को अलग कर दिया .  लंड  का सुपारा अंदर दर प्रवेश कर गया और ऐसा करते ही लंड  उसकी योनि की मखमली कोमलता में आ गया। योनि के भीतरी भाग से संपर्क  से मेरा लंड उसके योनि स्राव के साथ लेपित हो गया और  फिर जब  लंड  उसके भगशेफ को दुबारा छुआ तो उसकी पूरी योनि में आग लग गयी , 

फिर मैं  धीरे धीरे लिंग आगे को सरकाता हुआ  योनि में घुसाने लगा.उसकी  योनि पहले से इतनी गीली थी कि मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही थी. पर  चुकी वो अभी तक एक ही बारी चुदी  थी इसलिए अभी बिलकुल नयी जैसी टाइट थी . पर मेरा लंड बहुत सख्त था इसलिए  और  मुझे अंदेशा हो रहा था कि उसे थोड़ा  दर्द  होने वाला है. मेरा  लिंग आधा घुस चुका था कि तभी मैंने  वापस सुपाड़े तक लिंग बाहर खींच लिया और पूरी ताकत लगा कर उसने ऐसा धक्का मारा कि वो चीख पड़ी.

ओह्ह्ह  मर गयी .. आराम से करो .. इतना दर्द तो पहली बार  सुहाग रात को भी नहीं हुआ था  जितना  अब हुआ है ..   

वो  अपनी टांगें बिस्तर पर पटकने लगी और दर्द से छटपटाने लगी.  वो सिर पटकने लगी. उसे  इतनी जोर दर्द हुआ उसे  पेट में ऐसा लगा कि  उसके अंदर  जैसे कुछ बहुत सख्त  और गर्म  गर्म है जो धड़क रहा है  वो अभी संभल भी नहीं पाई थी कि मैंने एक   उसी तरह के लगातार तीन छार  धक्के मार कर अपना लिंग उसकी  योनि के अंतिम छोर तक पेला और उसके  ऊपर रुक गया..   अब उसकी योनि की मांसपेशिया मेरे लंड के आकार और लम्बाई के लिए समायोजित हो रही थी , मांसपेशिया खींच रही थी इसलिए दर्द होना  ही था . ..

वो दर्द से छटपटा भी नहीं कर पा रही थी … क्योंकि मैंने उसे  अपनी पूरी ताकत से पकड़ रखा था. उसकी सांस जैसे रुक सी गई थी और मुँह से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी क्योंकि मुँह में मेरे ओंठ उसके ओंठो को चूस रहे थे ..  बस  गु  गऊ की अव्वज आ रही थी . वो दर्द के कारण  अपने पैर घुटनों से मोड़ जांघें चिपकाने जैसे करने लगी. और उसकी आँखे बंद थी 


मं उसे  तड़पता हुआ देखता रहा और कुछ  समय के बाद जब उसने आंखें खोलीं, तो उसने मेरी और देखा और पाया मैं उसे  मुस्कुराते हुए देख रहा था. उसके निचले हिस्से में योनि से लेकर  पेट में नाभि के पास दर्द था, पर अब कम हो रहा  था.

वो  सुबकते हुए  बोली -  छोड़ो मुझे , हटो मेरे ऊपर से …   बेरहम इंसान , मुझे मार डालना चाहते हो तुम तो  आराम से नहीं कर सकते . . और ऊपर से मुस्कुरा रहे हो .. 

पर मैंने उसके  हाथों को और जोर से दबाया और धीरे धीरे लिंग अन्दर बाहर करता हुआ बोला- दर्द में ही तो मजा है कामिनी, अभी ये दर्द तुम्हें खुद मजेदार लगने लगेगा.



[Image: BR9R.jpg]

वो गुस्से से मुझे अपने ऊपर से हटाने का प्रयास करते हुए बोली- कोई इतनी बेरहमी से चोदता है क्या, मैंने क्या मना किया था आपको … मैं आपको सम्भोग तो खुद मर्जी से करने दे रही थी.

मैं बोला- अच्छा माफ कर दो, अब आराम से करूंगा. क्या करूं, तुम हो इतनी सेक्सी  तुम्हे नहीं पता इतनी देर से मैंने खुद  को कैसे रोका हुआ था 

तो  पहले क्यों नहीं  डाल दिया पहले तो तुम्हे चूमने चाटने से ही फुर्सत नहीं थी ..  

अरे  तुम हो ही  इतनी  सेक्सी की यही समझ नहीं आ रहा है की क्या पहले करून ..तम्हारा हरेक अंग बहुत शानदार है   भगवान ने तुम्हे बहुत फुर्सत में बनाया है ..  और  पता नहीं हीरा बाबा  ने तुम्हे  देख खुद पर क ऐसे नियंत्रण किया हुआ था ..  में बोला 

वो बोली उन्हें तो अब ये सब अच्छा ही नहीं लगता था .. 

तुम  छोड़ो उनको अब वो  साधना  करेंगे  ये  कहते हुए मैंने उसके हाथ पड़के और  धीरे धीरे  धक्के देते हुए लिंग अन्दर बाहर करने लगा. पर मैं अभी भी वो अपने ऊपर से हटाने का प्रयास कर रही थी. मैं  धक्के मारे जा रहा था और वो  बिना कुछ बोले मुझे  अपने ऊपर से हटाने का जोर लगा रही थी.

करीब 5 मिनट तो ऐसे ही हम दोनों में लड़ाई चलती रही. फ़िर मैंने उसके  हाथ छोड़ दिए और हाथ उसके  सिर के पास रख उसे  कंधों से पकड़ लिया. अब वो मुहे हटा नहीं सकती थी. मेरे  धक्के अब उसके मन को कमजोर करने लगे थे और जैसे जैसे  मैं उसके  गले को चूमता हुआ धक्कों की गिनती और गति  बढ़ाने लगा, उसका दर्द कम होने लगा और वो सम्भोग के का आनन्द लेने लगी.


जैसे जैसे धक्के बढ़ते गए, वैसे वैसे हमारी  गर्माहट भी बढ़ती गई और वो मस्ती में आ गयी  और  मुझे अपनी बांहों में जकड़ने लगी. कुछ ही पलों मैं  लिंग से   योनि में हो रही रगड़ से मजा आने लगा .और खुद ही अपनी पूरी जांघें खोल कर मुहे  भरपूर जगह देने लगी जिससे  मैं  आराम से धक्के मार  पा रहा था .


वो अब तेज़ी से सांसें लेने लगी थी  और मेरे धक्कों  की गति और  जोर बढ़ रहा था और  उसकी  भी उत्तेजना में कोई कमी नहीं थी. वो अब  हर धक्के के साथ  आह आह ओह ओह करती हुई साथ दे रही थी.

मेरे लंड ने उसकी योनि की सभी मासपेशिया जो सुकड़ी हुई थी उन्हें खोल उसकी योनि को और गहरा कर दिया। वह कराहते हुए अपना सिर अगल-बगल से फेंक रही थी.

"ओह हाँ!", "ओह हाँ!", "ओह हाँ!" उसके बाद "हे भगवान! आपका लंड  तो अंदर जा कर और  लंबा हो  रहा है, "  ये तो   मेरी योनि  को पूरा खोल कर रख देगा   हाययययय  ..  , वह कराह उठी  कामिनी अब चाहती  थी ये  चुदाई का सिलसिला चलता  ही रहे  

इसलिए उसने मेरे  चूतड़ों को अपनी टांगों से लपेट कर और हाथों से मुझे  पीठ को पकड़ अपनी ओर खींच कर बोल पड़ी-   आह आह और तेज़ चोदो और तेज़ धक्के मारो … रुकना मत.

वह मेरे साथ अपने पूरी ताकत  से चिपक गयी और  मेरा लंड उसकी  योनि में  और गहरा डूब गया, अगले  धक्के   के साथ, लंड  उसके गर्भशय से  टकराया और  लंड का सर के धक्के का असर  उसकी कूल्हे कीआंतरिक  मांपेशियों  तक गया  । हमारा जुनून बढ़ गया और  हमारे शरीर पूरी तरह से  मेल खाते हुए दिखाई दिए। मैं अपने लिंग के अंत को उसकी योनि की दीवारों से रगड़ खाता  हुआ  महसूस कर रहा था, जो अविश्वसनीय रूप से   प्रवेश करने के बाद से लंबा और मोटा हो गया था, और हर धक्के के साथ उसके गर्भाशय की ग्रीवा  का चुम्बन कर रहा था । वह अपनी  कामोत्तेजना के चरम  के  बहुत करीब  पहुँच चुकी थी, मैंने महसूस किया कि उसकी लय बदल रही है और उसकी योनि की रेशमी कोमलता मेरे लंड को मजबूती से जकड़ रही थी । वह मेरे लिंग की लंबाई के साथ-साथ ताल मिला कर अपने कूल्हे हिला रही थी ;और ठप ठप की आवाज  के साथ  उसके आह आह की आवाज आ रही थी  कामिनी को लगा कि वह बिना किसी पूर्वाग्रह के मुझ पर भरोसा कर सकती है, और वह चिल्लाई

 "हे भगवान रुको मत, चलते रहो, और  तेज  अजोर से लगे रो हे भगवान! हे भगवान।" 



मैंने उसे इस कामुक अवस्था में पाते ही उसके  होंठों से अपने  होंठ चिपका लिया. टांगें अपनी सीधी कर और हाथों को बिस्तर पर टिका कर  तेज तर्रार धक्के मारे कि एक पल में ही मैं सिसकते, कराहते हुए मुझे  पकड़ कर नीचे से उछलती हुई वो  झड़ने लगी.

उसका  शरीर थरथरा रहा था और  मैं अब और पीछे नहीं रह सकता था  मुझे लगा कि मेरा स्पर्म मेरे अकड़े हुए  लिंग से निकल कर उसकी ऐंठन वाली योनि में चला गया है;  मेरा   लिंग धड़क रहा था और पिचकारियां मार कर कर मेरे उपजाऊ वीर्य की   उसके योनि को भर दिया । दोनों का मिला जुला  काम रास इतना अधिक था की वो उसकी योनि से बाहर निकर कर चादर पर फैल गया  और हम दोनों नए  प्रेमी धीरे-धीरे अपनी  कामुक और उत्तेजित  अवस्था से निकले  और  एक-दूसरे के साथ  चिपक कर लेट गए और एक दुसरे को चूमने और सहलाने लगे l

मैंने अपनी उंगली पर देखा कि अंगूठी फिर से प्रकट हो गई थी  और ऐसा लग रहा था कि यह पहले से कहीं ज्यादा चमक रही थी । उसी समय मुझे पता चला,  मेरा  लिंग झड़ने के बाद भी शिथिल नहीं हुआ था और मैं अभी भी उसकी योनि के अंदर  खड़ा हुआ था  और सख्त था।

जारी रहेगी

दीपक कुमार

[Image: MISSIN3.jpg]
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