पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
08-20-2021, 08:11 AM,
#51
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे


CHAPTER-5


रुपाली-मेरी पड़ोसन


PART-6


विवाह प्रस्ताव

दोपहर का खाना खाने के बाद मैं सोने की तयारी करने लगा तभी मेरे मोबाइल फ़ोन पर किसी अनजान फ़ोन नंबर के कॉल आयी ... एक दो बार घण्टी बजी और फिर फ़ोन कट गया ...l

मैं देख रहा था किसका फ़ोन हो सकता है पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आया ... मैंने सोचा फ़ोन मिला कर पूछता हूँ फिर लगा शायद किसी से ग़लत फ़ोन लग गया होगा इसलिए काट दिया ... ... तभी फ़ोन की घंटी बजी और ऐना का फ़ोन आया और उसने कहा क्या आपने राजकुमारी ज्योत्सना से बात की है ... मैंने बोला नहीं अभी नहीं की है ... तो वह बोली मैंने उसे भी आपका नंबर दिया है ... ... तो आप उससे बात कर लेना और उसने दुबारा नंबर भेज दिया ... मैंने अब जैसे ही नंबर सेव किया तो पता लग गया वह मिस काल राजकुमारी ज्योत्सना की ही थी l

मैं उसे फ़ोन मिलाने ही जा रहा था कि पिता जी का फ़ोन आ गया l

मैंने उन्हें प्रणाम कहा l

तो उन्होंने मुझे आयुष्मान और खुश रहने का आशीर्वाद दिया l

फिर बोले कैसे हो और भाई महाराज हरमोहिंदर की शादी के लिए परसो ही वह दिल्ली से गुजरात आ रहे है और मुझे उनके साथ महाराज हरमोहिंदर के घर ही चलना होगा और उन्होंने मुझे ऑफिस से छुट्टी लेने को भी बोल दिया ...l

फिर पिताजी ने पुछा कुमार एक बात बताओ क्या तुमने अपने लिए कोई लड़की पसंद की हुई है या तुमने किसी को शादी के लिए वादा किया हुआ है l

तो मैंने कहा पिता जी नहीं ऐसा अभी कुछ नहीं है l

तो वह बोले ठीक है अपने माता जी से बात करो l

उसके बाद फ़ोन माता जी ने ले लिया तो मैंने उन्हें प्रणाम किया उनशो ने भी आशीर्वाद दिया और बोली महर्षि ने तुम्हारे भाई महाराज हरमोहिंदर के द्वारा सन्देश भिजवाया है ही उनके ससुर हिमालय की रियासत के महाराज वीरसेन के मित्र कामरूप क्षेत्र के (आसाम) के महाराज उमानाथ अपनी राजकुमारी ज्योत्सना का विवाह तुम से करना चाहते है ... तो तुम्हारी क्या राय है?

मेरे तो मन में लडू फुट पड़े और लगा ख़ुशी से नाचने लग जाऊँ पर मैंने भावनाओ पर नियंत्रण किया और मैंने कहाः आप जो करेंगे मुझे मंजूर होगा l

तो पिताजी बोले फिर तुम्हे ये विवाह जल्द ही करना होगा ऐसा महाराज और महृषि की आज्ञा है ... तो मैंने कहा मैं एक बार राजकुमारी ज्योत्सना से भी सहमति लेना चाहूंगा और मुझे महर्षि के आश्रम से उनकी शिष्य ऐना का फ़ोन भी आया था कि राजकुमारी ज्योत्सना भी मुझ से बात करना चाहती है l

तो पिताजी ने बोलै ठीक है तुम राजकुमारी ज्योत्सना से बात कर लो हम परसो शाम को गुजरात आ रहे है फिर आगे बात करेंगे l

फिर पिताजी बोले महर्षि अमर गुरुदेव ने कुछ काम करने को बोले है उन्हें ध्यान से नॉट करलो और वह हररोज बिना भूल के करने हैं l

महर्षि अमर गुरुदेव ने अंजाने में हुए पापों से मुक्ति के लिए रोज़ प्रतिदिन 5 प्रकार के कार्य करने की सलाह दी। ये 5 कार्य मनुष्य को अनजाने में किए गए बुरे कृत्यों के बोझ से राहत दिलाते हैं।

पहला-आकाश-यदि अनजाने में हम कोई पाप कर देते हैं तो हमें उसके प्रायश्चित के लिए रोजाना गऊ को एक रोटी दान करनी चाहिए। जब भी घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ के लिए निकाल देना चाहिए।

दूसरा पृथ्वी-प्राश्चित करने के लिए चींटी को 10 ग्राम आटा रोज़ वृक्षों की जड़ों के पास डालना चाहिए। इससे उनका पेट तो भरता ही है, साथ ही हमारे पाप भी कटते हैं।

तीसरा वायु-पक्षियों को अन्न रोज़ डालना चाहिए और जल की व्यवस्था भी करनी चाहिए। ऐसा करने से उनके भोजन की तलाश ख़त्म होती है और व्यक्ति को अपनी गलतियों का अहसास होने के साथ ही उसके दोषों से बचने का एक मौका मिलता है। -

चौथा जल आटे की गोली बनाकर रोज़ जलाशय में मछलियों को डालना चाहिए। इसके अलावा मछलियों का दाना भी डाला जा सकता है।

पांचवां अग्नि महर्षि के अनुसार, रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमें घी-चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाएँ। उन्होंने कहा कि यदि कोई रोजाना ये 5 कार्यसम्पन्न करता है तो वह अंजाने में हुए पापों के बोझ से मुक्ति पाता है और अंजाने में हुए पापों से मुक्ति होती है l

इसके इलावा अब तुमने हर रोज़ मंदिर में जाकर दूध फल फूल और मिठाई अर्पण करनी है और आज ही से करना है और अभी चले जाओ और फ़ोन बंद हो गया l

मैं तो ख़ुशी से नाचने लगा और मैंने राजकुमारी ज्योत्सना को फ़ोन मिला दिया ... उसने बहुत मीठी आवाज़ में हेलो कुमार कहा l

तो मैंने कहा राजकुमारी मैं भी आपसे बात करना चाहता था । आपके पिताजी हमारा विवाह करना चाहते है ... आपकी रजामंदी है ... क्या मैं आपको पसंद हूँ l

तो ज्योत्सना बोली जी, आप ...?

मैंने कहा आयी लव यू ... मैंने जब से आपको देखा है तब आपसे बात करना चाहता था ... l

उसके बाद मैंने कहा और आप ... वह बोली मैं भी ...l

और उसके बाद मैंने कहा मैं भाई महाराज हरमोहिंदर के विवाह के लिए महर्षि के आश्रम में जल्द ही आऊँगा आप वहाँ कब आएँगी तो वह बोली हम तो तब से हिमालय राज के यहाँ पर ही हैं उनकी राजकुमारी मेरी मित्र हैं l
फिर हमने मिलने की बात की और उसके बाद मैंने सोनू को बुलाया और मैं मंदिर गया और वहाँ पुजारी से मिला। उन्होंने महर्षि अमर गुरुवर के निर्देशानुसार मुझे पूजा करने में मदद कीl उस समय कुछ भजनों को वहाँ समृद्ध संगीत की धुन के साथ बजाया जा रहा था, जिसने मुझे भक्ति भाव और प्रशंसा से भर दिया, वहाँ थोड़ी भीड़ थी। तभी वह एक युवा लड़की मुझसे टकरा गई जब मैंने उसे देखा। वह लगभग अठारह वर्ष की एक युवा लड़की थी जिसका बदन गदराया हुआ और सेक्सी था, लेकिन वह-वह बहुत शांत और मिलनसार थी, क्योंकि वह मुस्कुरायी और क्षमा मांगने लगी। मैं उसके पास चला गया उसे ध्यान से देखा तो मुझे याद आया वह मेरे पड़ोसी जिनसे मैंने बंगलो खरीदा है उनकी भतीजी ईशा थी।

ईशा के पास ही वहाँ बैठ गया और वहाँ भजनों को सुना। जल्द ही ईशा खड़ी हुई और वह चलने लगी तो मैंने
उसके पीछे चलने का दृढ़ निश्चय कर लिया।

रास्ते में मैंने देखा वह भीड़ से गुजरी तो एक युवा लड़के ने सफेद काग़ज़ के एक छोटे से मुड़े हुए टुकड़े को युवती के सुंदर हाथों में फंसा दिया। वह अपनी मौसी के साथ थी l

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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08-20-2021, 08:15 AM,
#52
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER-5

रुपाली-मेरी पड़ोसन

PART-7

ईशा

ईशा सिर्फ़ अठारह साल की एक सुंदर लड़की थी और यद्यपि इतनी उम्र में, उसकी कोमल छाती पूरी तरह से उन अनुपातों में विकसित हुई थी, जो पुरुषो को प्रसन्न करती है। उसका चेहरा सुंदर और आकर्षक था; अरब के इत्र के रूप में उसकी सांस मीठी और जैसा कि मैंने उसके टकराने पर मह्सूस किया था उसकी त्वचा मखमल की तरह नरम थी।

ईशा को उसके अच्छे रूप के बारे में अच्छी तरह से पता था और वह अपने सिर को गर्व से रानी की तरह उठा कर मटक-मटक कर चलती थी और उसका ये रूप युवाऔ और पुरुषों को लालसाओं को बढ़ाता था और वह अक्सर उस पर प्रशंसात्मक टिप्पनिया करते थे। सुंदर ईशा सभी दिलों की वांछित थी और उसको क़ाफी लड़के हासिल करना चाहते थे और मंदिर में भी उसे काफ़ी लड़के उसकी तरफ़ आकर्षित नज़र आये थे ।

जब ईशा की मौसी मंदिर के जूता घर से जूते वापिस लेने गयी तो ईशा ने एक कोने में खड़ी हो चुपके से उस काग़ज़ के टुकड़े को देखा, जिसे उस युवा लड़के ने उसे चुपके से उसके हाथ में दिया था। उसे पढ़ने के बाद कुछ देर तक कुछ सोचने की मुद्रा में कड़ी रही । तभी उसकी मौसी ने ईशा को बुलाया चलो ईशा चलें और ईशा अपनी चाची की ओर अनमने ढंग से दौड़ी और उसका वह कागज़ का टुकड़ा नीचे गिर गया या उसने जानभूझ कर फेंक दिया । मैं उसके पीछे ही था तो मैंने फट से उस काग़ज़ के टुकड़े को उठाया और खुला होने के कारण, मैंने उसे पढ़ने के लिए आज़ादी ले ली।

"मैं आज शाम चार बजे पुराने स्थान पर रहूंगा," केवल वही शब्द उस काग़ज़ में निहित थे, लेकिन वे ईशा के लिए कुछ विशेष रुचि और मतलब रखते थे जिसे वह गुप्त रखना चाहती थी और मुझे तुरंत समझ आ गया इसीलिए वह कुछ समय के लिए एक ही विचारशील मुद्रा में कड़ी हुई कुछ सोच रही थी।

वो जब मंदिर से बाहर निकली तो कुछ मनचलो ने सीटिया मारी और फब्तियाँ भी कसी पर उसने इसे हर रोज़ होने वाली घटना के तौर पर लिया और उन पर ध्यान न देकर अपनी मॉडसि के साथ-साथ मंदिर से बाहर निकल गयीl

हालाँकि वह मेरे पास कुछ बार छोटी बीमारियों के लिए आयी थी अपर आज मेरी उत्सुकता जाग उठी की वह कहाँ जा रही थी और मेरे मन में उस दिलचस्प युवा लड़की के बारे में और अधिक जानने की इच्छा थी, जिसके साथ मैं मंदिर में सुखदायक संपर्क में आया था, मैंने घड़ी पर नज़र डाली और पाया कि 4 बजने में ज़्यादा समय नहीं था उसके बाद की घटनाओं की प्रगति चुपके से देखने के लिए मैंने उसका अनुसरण करने का फ़ैसला किया।
रास्ते में वह अपनी चाची से कुछ बहाने बनाकर अपनी चाची से अलग हो गई और मैं उसका पीछा करता रहा। ईशा ने अपने आप को बहुत सावधानी से तैयार किया था और वह उस बगीचे की ओर बढ़ गई, जहाँ मैं मनवी भाभी के साथ टहलने जाया करता थाl


मैं उसके पीछे गया।

एक लंबे और छायादार रास्ते के अंत में पहुँचने पर युवा लड़की ईशा झाड़ियों के झुरमुट के बीच एक छुपी हुई बेंच पर बैठ गयी ये एक ऐसी जगह गुप्त थी जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था और मुझे अंदाजा भी नहीं था के इस झाड़ियों में ऐसी गुप्त जगह हो सकती हैl मैंने मन में सोचा अगली बार मानवी भाभी के साथ यहाँ पर ज़रूर आऊँगाl

ईशा वहाँ उस व्यक्ति के आने का इंतज़ार कर रही थी और मैं उन झाड़ीयो के बीच इस तरह से छिपा गया की मैं किसी को नज़र नहीं आओ और साथ ही साथ ईशा को स्पष्ट रूप से देख सको और उनकी बाते सुन सकू।


सौम्य लड़की ईशा ने अपनी एक टांग को ऊपर उठाया और अपनी दूसरी टांग पर रख दिया, उसने मिनी स्कर्ट पहनी कोई थी और मैंने उसकी गदरायी हुई जंघे जो उसकी तंग फिटिंग मिनी स्कर्ट के ऊपर उठने से उजागर हो गयी थी उन पर ध्यान दिया, मेरे आँखे उसकी स्कर्ट के अंदर तक देख पा रही थी और उसकी जाँघे एक बिंदु पर एक साथ मिल गयी थी, उसे स्थान पर उसकी पतली और झीनी-सी पैंटी से पतली और आड़ू की तरह तिरछी, उसकी योनि का आभास हो रहा था कि उसकी योनि के ओंठ आपस में चिपके हुए थे और उन बंद होंठो के बीच में उसकी टाइट योनी छुपी हुई थी।

कुछ की मिनटों में वह युवक भी वहाँ आ गया और ौसे आते ही ईशा को वहाँ आने का धन्यवाद दिया और दोनों बाते करने लगे की मंदिर में क्या हो रहा था तभी थोड़ी हवा चली और अचानक चारों तरफ़ बादल छा गए और अँधेरा हो गया और हवा गर्म और तेज हो गई और युवा जोड़ा बेंच पर एक दुसरे के करीब से बैठ गया।

"ईशा तुम नहीं जानती कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ," लड़के ने फुसफुसाया और उसने नम्रता से अपनी साथी के होंठ पर एक चुंबन कर दिया।

"हाँ, मैं भी करती हूँ" लड़की ने भोलेपन से कहा, "पर ये तो तुम हमेशा ही बोलते रहते हो? मैं इसे सुनकर थक गयी हूँ।" और वह नीचे की और देखने लगी और विचारशील दिखी।

"आप मुझे उन सभी मज़ेदार चीज़ों के बारे में कब और समझाएंगे जो आपने मुझे बताई हैं?" उसने पूछा, एक तेज नज़र दे रही है और फिर तेजी से उसने नीचे बजरी पर अपनी आँखें झुका ली।

"अब," युवा ने उत्तर दिया। "अभी मेरी प्रिय ईशा, जबकि अब हम अकेले है और रुकावट से मुक्त है तो ये एक अच्छा मौका है। आप जानती हैं, ईशा, अब हम कोई बच्चे नहीं रहे?"

ईशा ने सहमति में सिर हिलाया।


"ये ऐसी चीजें हैं जो बच्चों को नहीं पता हैं और जो प्रेमियों के लिए हैं जिन्हे न केवल जानना आवश्यक है, बल्कि अभ्यास करना भी ज़रूरी है।"

"ओह डियर," लड़की ने गंभीरता से कहा।


"हाँ," उसके साथी ने जारी रखा, "ऐसे रहस्य हैं जो प्रेमियों को खुश करते हैं, जिनसे प्रेमी प्यार करते और प्यार करने का आनंद देते हैं।"

"भगवान!" ईशा ने कहा, "कैसे, अरे आप तो वैसे ही भावुक हो गए हैं, जीतू जैसे आप तब थे जब आपने मुझे पहली बार मेरे लिए अपना प्यार व्यक्त किया था।"

"मैं सच कहता हूँ मैं हमेशा ही तुमसे प्यार करता रहूंगा," युवा ने जवाब दिया।


"बकवास मैंने देखा है आप मंदिर में दूसरी लड़कियों को भी देख रहे थे," ईशा को जारी रखा, "लेकिन जीतू और मुझे बताएँ कि आपने क्या वादा किया था।"

जीतू ने कहा, "मैं आपको कर के दिखा सकता हूँ।" "ज्ञान केवल अनुभव द्वारा सीखा जा सकता है।"


"ओह, तब आओ और मुझे दिखाओ," लड़की बोली, जिसकी उज्ज्वल आँखों और चमकते गाल में मुझे लगा कि मैं जिस तरह का निर्देश दे सकता हूँ और जिस ज्ञान को येपाना चाहती हैं उसके बारे में बहुत सचेत ज्ञान का मैं पता लगा चूका हूँ और उसे भी सीखा सकता हूँ।

मुझे लड़की अधीर लगी और लड़के ने इसका फायदा उठाया और लड़की के मुँह और ओंठो पर अपने ओंठ लगा कर उसने सुन्दर और अधीर ही चुकी ईशा के मुंह से चिपका कर उसे हर्षातिरेक से चूमा।

ईशा ने इसका कोई प्रतिरोध नहीं किया; उसने भी इसमें भाग लिया और अपने प्रेमी के दुलार को उसी हर्ष और उत्सुकता के-के साथ चूमते हुए वापस कर दिया।

फिर जीतू थोड़ा हिला और थोड़ा वह ईशा के पास आया और उसने ईशा को अपने और खींचा और फिर बिना किसी विरोध के उसने सुंदर ईशा की स्कर्ट के नीचे से अपना हाथ घुसा दिया और दुसरे हाथ को ईशा के स्तनों पर ले गया चमचमाते रेशम स्टॉकिंग्स के भीतर जो आकर्षण उन्हें मिला, उससे वे संतुष्ट नहीं हुआ और अपने हाथ और आगे ले गया और उसकी भटकती उंगलियाँ अब ईशा की युवा जांघों के नरम और मांस को छू गईं और दुसरे हाथ उसके टॉप केअंदर घुस गया l

कहानी जारी रहेगी
दीपक कुमार
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08-20-2021, 08:20 AM,
#53
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे


CHAPTER-5


रुपाली-मेरी पड़ोसन


PART-7


ईशा-माफ़ी की प्राथना



मैंने ग़ौर से देखा तो मैंने पहचान लिया जीतू मंदिर के सेवादार का पुत्र था और दसवीं क्लास में तीन साल लगातार फेल होने के बाद उसे स्कूल से निकाल दिया गया था और उसका पिता मेरे पास मंदिर के लिए चंदा लेने आता था और मैं उसके पिता की थोड़ी बहुत मदद कर दिया करता था । जीतू बेरोजगार था और सारा दिन आवारागर्दी करता हुआ इधर उधर घूमता रहता था और उसके पिता ने एक बार उसे कोई नौकरी दिलवाने को भी कहा था l
मैं सोच रहा था कि ईशा जैसी खूबसूरत और बढ़िया लड़की इस फुकरे क़िस्म के लड़के को कैसे मिल गयी फिर सोच रहा था और मुझे लग रहा था जीतू किसी भी हिसाब से ईशा के लिए योग्य नहीं था और अब मुझे इनका मक़सद पता लग हो गया था तो यहाँ रुकने का कोई ज़्यादा औचित्य समझ नहीं आ रहा थाl साथ ही मुझे अपन समय याद आ गया जब मैंने अपनी फूफेरी बहन जेन को भी ऐसे ही पटाया थाl जिसे आप मेरे अंतरंग हमसफ़र कहानी में पढ़ सकते हैंl

उधर बादल गहरे हो रहे थे और रौशनी भी काफ़ी कम हो गयी थी और तेज हवा चलने लगी थी।

मैं असमंजस में था कि मुझे अब क्या करना चाहिए पर मेरा ध्यान बार-बार ईशा की ख़ूबसूरती पर जा रहा था और मुझे वह पका हुआ आम लग रहे थी जिसका रस जीतू चूसने जा रहा थाl (वैसे आम मेरा सबसे पसन्ददीदा फल है) और मैं इस आम को छोड़ना ही नहीं चाहता था l उधर जीतू के हाथ ने ईशा के ड्रेस के टॉप के ऊपर के बटन खोल दिए और उसने उसके स्तनों और चुचकों को ज़ोर से दबाया इससे ईशा हलके से कराह उठी अब मैं इस असमंजस में था कि मैं आगे क्या करून और तभी वहाँ पर एक तेज हवा का झोंका आया और एक पका आम आकर पहले ईशा पर गिरा और फिर मेरे ऊपर आ गिरा l

मैंने आसपास देखा तो मुझे दूर एक पेड़ नज़र आया और हवा के झोंके ने आम के मौसम में एक पका हुआ आम मेरी झोली में डाल दिया थाl मैंने इसे अपने लिए कुदरत का इशारा समझाl आम उसके ऊपर गिरने से ईशा एकदम घबरा गयी और उसकी हलकी-सी चीख निकली और उसने जीतू को दूर झटक दिया और बोली लगता है कोई आ गया है l

इस तरह से ये चीख और रुकावट मेरे लिए भी सन्देश था और मैं अप्रत्याशित रूप से अचानक उस बेच के आसपास की सीमावर्ती झाड़ियों से मैं उठकर उन किशोर प्रेमियों के सामने खड़ा हो गया।

मुझे यु अचानक देख डर के मारे दोनों के खून जम गया। कोमल ईशा के लिए ये बहुत बड़ा झटका था उसने मुझसे नज़र नहीं मिलाई और अपंने चेहरे को अपने हाथों से ढँक दियाl वह उस सीट पर सिकुड़ कर बैठ गयी गई, जो उनके प्रेम सम्बंध की मूक गवाह थी l

वो आम गिरने से अपनी चीख का तेज उच्चारण करने के बाद मुझे देख कर से बहुत डरी हुई थी, अब उसकी आवाज़ ही नहीं निकल रही थी और मेरा सामना करने के लिए बिलकुल भी त्यार नहीं थी और उसे डर लग रहा था कि वह पकड़ी गयी है l

मैंने भी उनके सस्पेंस को बहुत लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा। जल्दी से उस दंपति की ओर बढ़ते हुए मैंने हाथ लड़के की बाजू सख्ती से पकड़ लिया और मैंने उन्हें उसकी ड्रेस ठीक करने का निर्देश दिया।

"असभ्य लड़का," मैंने गुस्से के साथ जीतू को कहा तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो और किस हद तक जा चुके हो? तुम्हारी वासना और जुनून में तुमने इस लड़की के साथ अभद्र व्यवहार किया है? तुमने करने से पहले ये नहीं सोचा जब भी तुम्हारे पिता को तुम्हारे इस आचरण का पता चलेगा तो कैसे तुम अपने पिता के गुस्से का सामना करोगे?
और क्या तुम्हारे पिता की मंदिर की नौकरी तुम्हारे ऐसे आचरण से बची रहेगी ... उनका पुत्र अगर लड़कियों से ऐसा आचरण करेगा तो उन्हें कौन सेवा में रहने देगा? " तुम तो कुछ कमाते नहीं हो और इसके बाद तुम्हारे परिवार का क्या होगा ये कभी सोचा है तुमने l

हम सब की जिम्मेदारी है लड़किया और स्त्रिया सुरक्षित रहे और जब मैं अपने इस कर्तव्य के पालन करते हुए प्रबंधंन को और तुम्हारे पिताजी को उनके इकलौते बेटे की इस करतूत के बारे में बताऊंगा तो तुमने सोचा है तुम कैसे उनका सामना करोगे और वह तुम्हे जेल भी भिजवा सकते हैंl

अपने इस कर्तव्य के पालनकरते हुए मैं तुम्हारे पिता को उसके इकलौते बेटे के हाथों से हुए कुकृत्यों से अवगत कराऊंगा। "ये बोलकर जीतू को कलाई से पकड़कर, मैं प्रकाश में आया और ख़ुद को उनके सामने प्रकट किया, मेरा निश्चित रूप से सुंदर रौबदार चेहरा, आकर्षक शानदार काली आंखों में भयंकर जोशीला आक्रोश देखकर जीतू घबरा गया। मैंने एक सफ़ेद पोशाक पहनी हुई थी, जिसमें से साफ-सुथरापन केवल मेरी उल्लेखनीय मांसपेशियl और लम्बे शरीर को देख जीतू ने आज़ाद होने की असफल कोशिश की । वह अभी भी असमंजस में था क्योंकि मैंने उसकी कामवासना के भोग को भंग कर दिया था।"

और ईशा तुम्हारे लिए, मैं केवल अपने अत्यंत डरावने आक्रोश को व्यक्त कर सकता हूँ। अपने परिवार और अपने स्वयं के सम्मान के लिए लापरवाह, तुमने इस दुष्ट और अनुमानी लड़के को निषिद्ध काम करने की अनुमति दी है? ट्युमने सोचा है अब तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारे साथ अब क्या करेंगे? हो सकता तुम्हे घर से निकाल दे... तुम्हारी पढाई छूट जाए तुम्हारे माता पिता पहले ही नहीं हैं तुम अपने चाचा और मौसी पर आश्रित हो सोचो अब तुम्हारे पास क्या है?

अब तुम्हारा भविष्य मुझे अंधकारमय नज़र आ रहा है तुम्हारी पढाई छूट जायेगी और तुम्हारे इस दुष्कर्म का पता चलने के बाद कोई भी अच्छा युवा लड़का तुम्हे अपनी पत्नी के रूप में भी स्वीकार नहीं करेगा और तुम्हे भीख मांगनी पड़ सकती है और ये नालायक तो ख़ुद ही अभी कुछ नहीं करता है तो तुम्हारा ख़र्चा और भार कैसे उठाएगा, अब तुम्हे भीख मांग कर ही गुज़ारा करना पडेगा और हो सकता है तुम किसी ग़लत हाथ में पड़ जाओ ... नहीं-नहीं ये तुम्हारी जैसी सुन्दर अच्छे घर के लड़की के लिए ये सब बिलकुल उपयुक्त नहीं है ... दुर्भाग्यपूर्ण लड़की ये तुमने क्या किया करने से पहले कुछ तो सोचा होता l

ये सुन कर ईशा उठी और गंभीर रवैये के साथ उसने ख़ुद को मेरे पैरों पर फेंक दिया, उसके साथ ही उसका किशोर प्रेमी भी मेरे पैरो में गिर पड़ा और ईशा अपने युवा प्रेमी के लिए माफी के लिए आंसू बहती हुई प्रार्थना करने लगी ... प्लीज हमे माफ़ कर दो हम से बहुत बड़ी गलती हो गयी है l

"और न कहो," मैंने जारी रखा " इस बातो का अब कोई फायदा नहीं है और इसमें आप अपमान करते हैं और मुझे अपने अपराध में मत जोड़ो मेरा मन तुम्हारे इस दुख के चक्कर में मुझे अपने कर्तव्य में गुमराह करता है, मुझे तुरंत सीधे आपके प्राकृतिक अभिभावकों के पास जाना चाहिए और उन्हें मेरे आपके इस दुष्कर्म जो मुझे अचानक पता चला है उससे तुरंत परिचित करवाना चाहिए चाहिए।

"ओह, डॉक्टर साहब प्लीज हम पर दया कीजिये, मुझ पर दया करो," ईशा ने निवेदन किया, जिसके आँसू अब उसके सुंदर गालों पर बह रहे थे वह गिड़गिड़ा रही थी प्लीज " हमें छोड़ दो, डॉकटर अंकल हम दोनों को छोड़ दो।

तभी जीतू बोला हम प्रायश्चित करने के लिए सर आप जो भी कहेंगे वह करेंगे। मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ, मैं कुछ भी त्याग कर सकता हूँ, अगर आप इस प्रिय ईशा को छोड़ दोगे। " मैंने उसे रुकने को कहा।

तभी हलकी-हलकी बारिश की बूंदे पड़नी शुरू हो गयी तब स्वाभाविक रूप से कठोर और दृढ़ तरीके और दया के लहजे में मैं बोला। "बहुत हो गया," मैंने कहा, " मुझे तुम्हारे लिए सजा निर्धारण करने के लिए समय चाहिए और इसके लिए मुझे धरम शास्त्रों को पढ़ना होगा ईशा तुम कल मेरे पास दोपहर 2 बजे अपने पुराने घर के पास आ जाओ वहीँ मैं तुम्हारी सजा के बारे में कुछ भी कहूंगा। मैं आपसे उम्मीद करूंगा आप वहाँ समय पर आ जाएंगी।
और जीतू आप के लिए, मैं अपने फैसले को आरक्षित रखूंगा और सभी कार्रवाई, अगले दिन शाम 6 बजे तक निलंबित रहेगी और उस समय मैं उम्मीद करता हूँ आप वह आ जाएंगे और उम्मीद है आप ख़ुद के लिए भी तब तक कोई सजा सोच लेंगे। उस पर विचार करके आगे का फ़ैसला लेंगे । उन्दोनो ने मेरा धन्यवाद दिया और मैंने उन्हें ना आने पर फिर चेतावनी दी।

फिर पहले मैंने ईशा को जाने को बोला और उसके बाद लगभग 15 मिनट के बाद मैंने जीतू को जाने दिया "और उनके कहा कल जब तक हम फिर से नहीं मिलते हैं तब तक के लिए आपका रहस्य मेरे साथ सुरक्षित है, ," और फिर घर लौट आया।

जब मैं वापस घर पहुँचा तो रूपाली मेरा इंतज़ार कर रही थी और मेरे साथ ही उसने मेरे घर में चाय का कप लेकर प्रवेश किया और कहा, "काका क्या आप तैयार नहीं हैं? मैं पहले से ही तैयार हूँ। मुझे बस अपनी साड़ी बदलनी है। आज हम दोनों को फ़िल्म देखने जाना है। आपको याद होगा पिछले हफ्ते हम फ़िल्म देखने नहीं जा पाए थे क्योंकि आप अपने दोस्त से मिलने गए थे।" मुझे याद आया कि मैंने पिछले हफ्ते गोरा रूसी एना को कैसे चोदा था।
"ओह ... हाँ ... हाँ, 10 मिनट के भीतर, मैं तैयार कर आता हूँ तब तक आप भी त्यार हो जाओ," मैंने कहा। मैंने सिनेमाघर जाने के लिए अपने चालक सोनू को गाडी त्यार करने को कहा।

जींस और टी-शर्ट में डालने के बाद, मैं बाहर आया और रूपाली के दरवाजे पर दस्तक दी। रूपाली मेरा इंतज़ार कर रही थी और वह बाहर आ गई। उसे देखने के बाद, भगवान! मेरी आँखें चकाचौंध हो गईं, आज तो मैं उसकी सुंदरता देखकर दंग रह गया।

उसने एक मैचिंग पारदर्शी ब्लाउज के साथ गुलाबी साड़ी पहनी थी जहाँ से उसकी ब्रा की पट्टियाँ और कप साफ़ दिखाई दे रहे थे। साडी का पल्लू उसके कंधे पर अलग रखा हुआ था, उसकी पतली कमर से पूरी तरह से उसकी नाभि उजागर थी पतली कमर के सुडौल शरीर के साथ आकर्षक त्वचा के साथ उसकी चमकदार गोरी त्वचा उसकी साड़ी के रंग के साथ अद्भुत रूप से मेल खा रही थी। उसकी गढ़ी हुई आकृति पतली थी। उसके पास एक गोरा रंग मेल खाते मेकअप और साडी के रंग के कारण गुलाबी रंग का लग रहा था।

उसके चेहरे पर मखमली पलकें, पतली सुन्दर नाक और उसके प्यारे और मीठे होठों पर हल्के गुलाबी रंग के लिपस्टिक लगी हुई थी जहाँ से उसके सफ़ेद दाँत चमक रहे थे। उसके नाखूनों को लाल रंग से रंगा गया था। उसके खुले काले लंबे बाल उसकी कमर पर गिर रहे थे। माथे पर एक गहरी सिंदूर की लकीर के साथ, उसकी बड़ी, मछली जैसी बड़ी-बड़ी आँखें बड़ी सुंदर थीं। कौन-सा आदमी उन गहरी काली आँखों के सागर में खो जाना पसंद नहीं करेगा? उसकी आँखों में एक नज़र डालने से ही व्यक्ति को पता चल जाएगा कि वह ही उसके सपनो की रानी है। वह आँखें मेरे लिए कुछ ज़्यादा ही बोल रही थीं। मेरे लिए उसकी सुंदरता उसकी बड़ी सुंदर आँखों की रहस्यमय अभिव्यक्ति में थी। मैं उसकी आँखों में खो गया l

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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