पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
04-11-2021, 10:07 AM,
#11
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER- 2

एक युवा के अपने पड़ोसियों और अन्य महिलाओ के साथ कारनामे

मानवी- मेरी पड़ोसन

PART 2


दीवानी


उस दिन मानवी भाभी ने लंबे समय के बाद, हस्तमैथुन किया था और वह 3 बार झड़ गयी । उसे बहुत आराम मिला और उस दिन दोपहर में वो 2 घंटे तक गहरी नींद में सोती रही। शाम की सैर के दौरान, जब वह मेरे साथ पार्क की बेंच में बैठी , और उसका शरीर मेरे साथ लगा तो उसे अपने शरीर के अंदर गर्मी महसूस हुई ।

अगले दिन भी मानवी ने मेरा लंड देखा और एक दो दिन में ही ये अब मानवी भाभी के लिए हर सुबह की आदत बन गयी कि वह हर रोज सुबह सुबह मेरा पूरा सीधा और सख्त लंड देख ले, यहाँ तक के वो मेरे लंड की दीवानी हो गई थी। लेकिन मेरी लुंगी की स्थिति और नींद में मेरे लेटने की स्थिति और मेरे लंड की स्तिथि हमेशा समान नहीं होती थी , कभी-कभी लंड लुंगी के अंदर ही होता था और वह लुंगी के अंदर विशाल लंड की रूपरेखा देखती, और किसी दिन, मेरा लंड उसे आंशिक रूप से दीखता था । और किसी दिन वो पूरा बाहर खाद हुआ होता था दिन पर दिन लंड को ऐसे देखने से वह मेरे लंड की दीवानी हो गई।

एक सुबह लंड खड़ा हुआ लुंगी के बाहर था और फिर मानवी खुद को रोक नहीं सकी।

और वह हिम्मत कर के देखने से कुछ आगे करने के लिए तैयार हो गई। वह जानती था कि सुबह के इस घंटे में, मैं गहरी नींद में था क्योंकि मैं हल्की आवाज में खर्राटे ले रहा था।

वह धीरे से मेरे बिस्तर के पास पहुंची और धीरे से लुंगी को इस तरह हटाया के पूरा लंड दिखने लगा अपने हाथ से उसने मेरी बालों वाली जांघ की छुआ। मुझे बेडरूम में नग्न देखकर उसके बदन में उत्तेजना बढ़ गयी । उसने तब धीरे-धीरे अपना हाथ मेरे जांघो पर तब तक घुमाया, जब तक कि उसका हाथ मेरे लंड और अंडकोषों को छूने नहीं लगा। बहुत धीरे-धीरे, उसने अपना हाथ तब तक ऊपर किया, जब तक कि मेरे सीधे खड़े लंड को उसने अपने हाथ में लेकर पकड़ न लिया ।

उसने हाथ ऊपर नीचे करना शुरू किया, कभी इतना धीरे-धीरे, तो कभी उसे स्ट्रोक करने के लिए और ऐसा करते हुए वो मेरे लंड को ही देखती रही । मैंने बिल्कुल कोई भी हलचल नहीं की क्योंकि उस समय मैं गहरी नींद में आशा की चुदाई का सपना ले रहा था और मेरा नींद में नियमित सांस लेना जारी था। मानवी ने अपनी हाथों को मेरे लौड़े पर चलाना शुरू कर दीया । उसे डर भी लग रहा था कि वह मुझे जगा देगी क्योंकि उसका हाथ उत्तेजना और घबराहट से बहुत हिल रहा था। थोड़ी देर तक मेरे लंड को रगड़ने के बाद, उसे और हिम्मत मिली और उसने सोचा कि वह मेरे लंड के और करीब आ कर उसे महसूस करेगी और थोड़ा करीब आ गयी ।

मुझे धीरे से सहलाते हुए, उसने मेरे लंड के सिर पर तब तक हाथ फेरा जब तक मेरा लंड मेरे पेट पर पूरी तरह से टिक नहीं गया ,वो अपना मुँह मेरे लंड के चार इंच करीब तक ले आयी और फिर मैंने नींद में अपने कूल्हों को ऊपर उछाला तो मेरा लंड उसकी आँख के ठीक नीचे, उसके गाल को छू रहा था,

वो घबरा गयी पर उसने देखा मैं अ्भी भी नींद में ही था तो उसने लंड को फिर से पकड़ा और उसका हाथ मेरी बड़ी बड़ी गेंदों को सहला रहा था।

उसका मुँह खिड़की की और था और उसकी खुली आँखे मेरे लंड पर केंद्रित थी, इसलिए उसकी आँखें खुली थीं, और खिड़कियों से परदे हेट हुए थे और कमरे में सुबह की हल्की रोशनी थी, जिसमे वह मेरे उभरे हुए विशाल खड़े हुए कठोर लंड और विशाल गेंदों को देख रही थी ।

मैं स्पष्ट रूप से गहरी नींद में था, इसलिए वह मेरे लंड के साथ वहां खेल रही थी। वह अपने गाल के से टच हो रहे लंड की गरमी और चिकनाहट को महसूस कर रही थी, वह कैद थी।

तभी मानवी ने मेरे लंड को हाथ में लिया फिर वो नीचे पहुँची और अपना मुँह खोल दिया। और अपने होंठों से दबा लिया। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मेरे लंड को अपनी जीभ से चख रही है। मैं नींद में सपने में अपने लंड को आशा की गहरी चूत में आगे-पीछे करते हुए अपने लंड को दबा रहा था । जबकि असलियत में लंड मानवी के मुँह में था.

मेरे लंड को मुँह में भरते समय इस तरह की हरकत करने के डर से, और पकड़े जाने के डर से उसे जो उत्तेजना महसूस हुई, उससे वह बेकाबू होकर कांप रही थी।

उसने मेरे लंड के आधे हिस्से को मुँह में भर लिया और उसने लंड मुंह से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, थोड़ी देर के बाद, मेरे लंड ने लावा उसके मुँह पर उगल दिया और वो उसके मुँह चेरे पर फ़ैल गया , मानवी को मेरे वीर्य का स्वाद थोड़ा लगा और वो सब चाट कर वहां से चुपचाप खिसक गयी और मेरे वीर्य का स्वाद उसको अप्रिय नहीं लगा.

अगले 2-3 दिनों तक उसने वही प्रक्रिया दोहराई और सोते हुए मेरा लंड चूसा

2-3 दिनों के बाद, मैंने महसूस किया कि मुझे पिछली कुछ सुबह के घंटे में लगातार कई दिन आईएस सपना आया जिसमे मई स्खलित हो गया था । मुझे शक हुआ कि कुछ गड़बड़ चल रही है।


कहानी जारी रहेगी


दीपक कुमार
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04-14-2021, 07:46 PM,
#12
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER- 2

एक युवा के अपने पड़ोसियों और अन्य महिलाओ के साथ कारनामे

मानवी- मेरी पड़ोसन

PART 3

सोनू के लिए बड़े दिनों में ख़ुशी का दिन आया

जब मैंने सोनू और आशा को नौकरी पर रखा था तो उन्हें मैंने मोबाइल और सिम कार्ड खरीद कर दिए ताकि जब भी मुझे उनकी आवश्यकता हो मैं उनसे संपर्क कर सकूं।


गुरूवार की शाम सोनू बहुत प्रसन्नचित मूड में मेरे पास आया और मुझसे 2 दिनों के लिए छुट्टी मांगी। वह अपनी पत्नी आशा को देखने बड़ौदा जाना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि आशा और उसकी माँ कैसी हैं? सोनू ने सूचित किया कि अब आशा की देखभाल के कारण उनकी सास बेहतर हैं। और फिर शरमाते हुए सोनू ने मेरे पैर को छुआ, मिठाई का डिब्बा निकाला और बताया कि आशा की मां ने उसे फोन किया है और उसे बताया है कि आशा एक महीने की गर्भवती है और वह जल्द ही पिता बन जाएगा।

मैं भी इस खबर को सुनकर बहुत खुश हुआ लेकिन उस पल में मैंने अपनी खुशी छिपा ली। मैंने सोनू को बधाई दी और सोनू को कुछ पैसे दिए और उसे मिठाई लाने को कहा जो मैं मानवी और रूपाली के परिवार को देना चाहता था क्योंकि मुझसे आशा को बच्चा होने वाला था। मैं इतना खुश था कि मैं गाना और नृत्य करना चाहता था . मैं अपनी ख़ुशी सबसे बांटना चाहता था पर मैंने किसी तरह खुद को नियंत्रित किया।

जब सोनू मिठाई लेकर आया, तो मैंने सोनू को पूजा करने के लिए एक स्थानीय मंदिर में जाने के लिए कहा और भगवान को उसे पिता बनाने के लिए धन्यवाद देने को कहा और फिर मंदिर से वापिस आने पर सोनू को रूपाली और मानवी को मिठाई देकर उनका आशीर्वाद लेने को कहा ।

फिर मैंने सोमू को कुछ पैसे दिए और उससे कहा कि आशा के लिए कपड़े और उपहार लाए और उसे उसकी वांछित छुट्टी दे दी।

मैंने सोनू को आशा को जल्द से जल्द वापस सूरत लाने के लिए भी कहा ताकि उसकी गर्भावस्था में नियमित मेडिकल जाँच हो सके। सोनू ने कहा कि वह अपनी गर्भावस्था के दौरान आशा की देखभाल के लिए अपनी सास से सूरत आने का अनुरोध करेगा । मैं भी आशा से मिलने और बधाई देने के लिए काफी उत्सुक था।

जब हम बात कर रहे थे तो आशा ने सोनू को उसके मोबाइल पर फोन किया और सोनू ने मुझे मोबाइल दिया ताकि मैं उसे बधाई दे सकूं। मैंने उसे बधाई दी तो आशा बोली ये आपका ही आशीर्वाद है जिससे वो माँ बनने वाली है . मैंने उसे कहा कि वह खुद की देखभाल करे और नियमित रूप से चिकित्सा जांच करवाए। मैं उस पल बहुत खुश थी और आशा और सोनू भी बहुत खुस थेl

मंदिर से आने के बाद जब सोनू मानवी और रुपाली भाभी को मिठाई देने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उनके पास गया और उन्हें खुशखबरी सुनाई तो वे भी उसके लिए बहुत खुश हुई और फिर सोनू ने उन्हें बताया कि वह आशा से मिलने बड़ौदा जा रहा है और मैंने 2-3. उसे छुट्टी दे दी है । रूपाली उसकी बेटियों, मानवी और उसके बच्चे राजन और चंदा भी अपने एक पुराने दोस्त और उनके परिवार जो कभी इन अपार्टमेंट में रहते थे से मिलने बरोदा जाना चाहते थे l

दोनों मेरे पास आयी और बोली वो भी सोनू के साथ बरोदा अपने मिटो से मिलने जान चाहती हैं लेकिन इसमें मुद्दा यह था कि उनकी अनुपस्थिति में मेरे खाने का ख्याल कौन रखेगा चूँकि उस दौरान मानबी भाभी की बारी थी मेरी और मेरे घर की देखरेख करने की तो उसने रुकने का फैसला किया । मैंने कहा आप मेरी कार ले कर चले जाओ और सोनू को कार ले जाने की इजाजत दे दी ।

मैंने सोनू को जाने से अफ्ले एक बार फिर सख्त हिदायत दी के वो ख़ुशी मेंशराब न पिए और न ही शराब पीकर गाडी चलाये तो सोनू बोला उसने जिस दिन से मुझ से मिला है तब से शराब को हाथ नहीं लगाया है और अब कभी नहीं पियेगा और अपने होने वाले बच्चे की कसम खाने लगा l

तो मैंने कहा कार ठीक से चलाना अब तुम परिवार वाले हो गए हो तुम्हारी जिम्मेदारी बढ़ने वाली है।

उसके बाद सोनू रूपाली और बच्चों के साथ उसी शाम कार से बड़ौदा के लिए रवाना हो गया ।


कहानी जारी रहेगी


दीपक कुमार
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04-15-2021, 02:15 PM,
#13
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CHAPTER- 2

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मानवी- मेरी पड़ोसन

PART4

स्वपनदोष


पहली मंजिल पर अब सिर्फ हम दोनों ही थे और अगली सुबह किस्मत ने मेरा साथ दिया । उस सुबह मैं जल्दी उठ गया और फिर जब मानवी भाभी ने मेरे घर के मुख्य प्रवेश द्वार खोलने के धक्का दिया और उसके खुलने की आवाज आयी और मैंने देखा कि मानवी भाभी मेरे बिस्तर के पास आ रही थी। मैंने तुरंत, गहरी नींद में होने का नाटक किया ताकि पता चले मुझे रोज स्वपन दोष क्यों हो रहा है. मैं नकली खर्राटे लेने लगा ।

अगले कुछ ही सेकंड बाद मैंने लंड पर कुछ महसूस किया और मेरी अधखुली आँखों के कोने से, मैंने ध्यान से देखा कि मानवी भाभी के होंठ मेरे बड़े मोटे लंड के आस-पास तक फैले हुए थे उसके गर्म और नम मोटे होठों के बीच से मेरा लंड उसके मुँह के अंदर और बाहर हो रहा था हैं। क्योंकि मेरा लंड बहुत लंबा है (लगभग 8 इंच), और इसकी मोटाई के कारण जिसने मानवी का मुँह पूरा खुला हुआ था.

मैंने झूठे खर्राटे लेना शुरू कर दिया, और मानवी के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर मेरे लंड की तरफ जोर से दबा दिया। एक सेकंड के लिए, मानवी भाभी को लगा मैं जाग गया हूँ वो घबराई, पर लेटी रही, लेकिन फिर मेरे खर्राटे की आवाज सुन उसे एहसास हुआ कि मैं गहरी नींद में सपने देख रहा था और ये एक्शन भी मैंने सपना देखते हुए ही किया था । वो मुझे गहरी नींद में देख आश्वस्त हो गयी.

दो तीन दिन से ऐसा करते हुए वो अभ्यस्त हो गयी थी इसलिए बहुत जल्द उसने मेरे लंड को अपने मुँह से अन्दर-बाहर करते हुए एक अच्छी गति विकसित कर ली. उसने देखा कि मैं भी सपने में अपने लंड को उसके मुँह में अन्दर बाहर कर उसकी ताल से ताल मिला रहा था . वो साथ साथ मेरे अंडकोषों को अपने हाथ से सहला रही थी और लंड को चूस रही थी।

उसके ऐसा करने से मेरा लंड पूरा कठोर हो गया और और मेरे अंडकोषों पर मेरी पर त्वचा कस गयी। कुछ देर वो ऐसे ही चूसती रही और फिर मुझे लगा की मैंने अपने पैरों पर पूरी तरह से नियंत्रण खो दिया क्योंकि वे बुरी तरह से हिलने लगे थे । जिस तरह से मानवी भाभी मेरे लंड पर अपने सिर को घुमा कर अपनी जीभ घुमा घुमा कर चूस रही थी उससे मेरा लंड का अगर भाग लंडमुंड बेहद संवेदनशील हो गया ।

फिर मेरा लंड उसके मुँह में धँसने और फूलने लगा और फिर अचानक ही लंड ने पिचकारी मार दी , मोटे, अकड़े हुए मेरे लंड ने वीर्य को इतने वेग से निकाल दिया गया की वीर्य सीधा मानवी भाभी के गले पे पहुँच गया. गले में जा लगी पहली धार से उबरने की कोशिश करते समय उसे घुटन और खांसी हो गई और इसके कारण मेरा वीर्य उसकी नाक से बाहर आ गया। यह बिलकुल नाक से पानी निकलने जैसा था।

मैंने एक बार फिर भाभी का सर पकड़ लिया तो उसने एक सेकंड के लिए सोचा मैं उसका सर लंड से हटाने वाला हूँ । पर मेरा सोने का नाटक यथावत चालू था इसलिए अपने स्खलित हो रहे लंड को उसके मुँह से बाहर निकालने के लिए मैंने कुछ नहीं किया ।

मानवी सोच रही थी आज से पहले तो मैंने कभी इतना वीर्य उत्सर्जित नहीं किया तो उसे समझ आया की आज से पहले तो केवल मेरे लंड से केवल उतसर्जन पूर्व चिकनाई ही निकली थी वीर्य तो आज ही निकला है और वो भी मोटी धार में इतना गाढ़ा. मुझे भी रोज हो रहे गीले सपनो का राज समझ आ गया था पर अभी खत्म नहीं हुआ था . वो पहले उत्सर्जन से उबर पाती इससे पहले ही लंड ने अगली धार मार दी और ये पहली से भी जोरदार थी.

इसी तरह, मानवी ने मेरी पिचकारी की अगली 2-३ शॉट को अपने मुँह ने लिया लेकिन यह अंतहीन लग रहा था। वो अपने हाथो से लंड को जोर जोर से हिला रही थी । मैं बस उसके मुँह में वीर्य डाल रहा था।

मनवी को आखिरकार एहसास हुआ कि वह अब वीर्य निगलने लगी है। उसे वीर्य निगलने से कोई समस्या नहीं थी लेकिन यहाँ मेरा वीर्य इतना गाढ़ा और इतना ज्यादा था कि उसे निगलना उसके लिए लगभग असंभव था। आखिरकार उसने नली को टटोलते हुए अपने सिर को इस तरह से मोड़ा की उसके मुँह से लंड की नली जहाँ खुलती है वो उसके मुँह से बाहर हो गया और फिर मैंने तीन चार शॉट और मारे , पहला उसकी आंख में सीधे गया उसके छींटे गाल पर पड़े और मेरा वीर्य उसकी आँखों नाक बालो और गालो पर फ़ैल गया। फिर मेरे लंड ने शुक्राणु को पंप करना बंद कर दिया।

मैंने भी उसका सर छोड़ दिया और मानवी तुरंत इस डर से उठी कि मैं किसी भी समय जाग सकता हूँ और फिर उसके चेहरे पर और उसके मुंह में शुक्राणु डेल्ह लूँगा । मेरा गाढ़ा वीर्य उसके लिए निगलना असंभव था। यह उसके गले में ही रह गया ठगा । यह उसके पूरे जीवन में सबसे रोमांचक अनुभवों में से एक था क्योंकि उसने मेरे स्खलन का आनंद लिया था

मुझे जगाने से पहले मनवी बाथरूम में भाग गई। मेरे गधा वीर्य उसके चेहरे पर फैला हुआ था और ऐसा चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे उसके मुँह पर गोंड की शीशी गिर गयी हो और उसके बालो पर मेरा वीर्य सूख गया था और उसके बाल कड़े और नुकीले हो गयी थे । उसके मेरे वीर्य का हल्का नमकीन स्वाद पसंद आया था. उसका मुँह मेरे वीर्य से सना और भरा हुआ था जिसे वो निगल नहीं पा रही थी उसे लगा जैसे वह सुबह के बाकी समय में भी अपना गला साफ नहीं कर पाएगी । यह उसे अभी भी उसे चकित कर रहा था की मैंने कितना ज्यादा वीर्य छोड़ा और मेरा वीर्य कितना गाढ़ा था।

उसने किसी तरह खुद को साफ़ किया और फिर उसने मुझे उठाया l मैं उस सुबह रहस्यमय तरीके से बहुत खुश और मुस्कुरा रहा था।

"रात को फिर स्वपनदोष हो गया,

तुम्हारी भी इज्जत रह गयी,
हमारा भी काम हो गयाl"

अगले दिन, जो दूसरा शनिवार था, एक छुट्टी का दिन, इसलिए मैं अपने फ्लैट में रहा। मंजिल पूरी तरह से सुनसान थी। प्रवेशद्वार ग्रिल में सुरक्षित रूप से बंद था। हम दो हमारे संबंधित फ्लैटों में रहने वाले बाशिंदे थे।

मानवी सुबह की चाय ले कर आई और मैंने फिर से गहरी नींद में सोने का नाटक किया और उसने मेरे लंड को चूसा और मैंने इनाम के तौर पर उसे शुक्राणु की क्रीम दी। उसके बाद में मैं इत्मीनान से अपने बिस्तर पर लेट गया क्योंकि उस दिन छुट्टी थी। मानवी भाभी अपने फ्लैट में थी। अचानक, मुझे कॉफ़ी लेने की इच्छा हुई; मैं अपने फ्लैट से बाहर आया और मानवी के घर के दरवाजे को खटखटायाl

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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