पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
08-20-2021, 08:11 AM,
#51
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे


CHAPTER-5


रुपाली-मेरी पड़ोसन


PART-6


विवाह प्रस्ताव

दोपहर का खाना खाने के बाद मैं सोने की तयारी करने लगा तभी मेरे मोबाइल फ़ोन पर किसी अनजान फ़ोन नंबर के कॉल आयी ... एक दो बार घण्टी बजी और फिर फ़ोन कट गया ...l

मैं देख रहा था किसका फ़ोन हो सकता है पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आया ... मैंने सोचा फ़ोन मिला कर पूछता हूँ फिर लगा शायद किसी से ग़लत फ़ोन लग गया होगा इसलिए काट दिया ... ... तभी फ़ोन की घंटी बजी और ऐना का फ़ोन आया और उसने कहा क्या आपने राजकुमारी ज्योत्सना से बात की है ... मैंने बोला नहीं अभी नहीं की है ... तो वह बोली मैंने उसे भी आपका नंबर दिया है ... ... तो आप उससे बात कर लेना और उसने दुबारा नंबर भेज दिया ... मैंने अब जैसे ही नंबर सेव किया तो पता लग गया वह मिस काल राजकुमारी ज्योत्सना की ही थी l

मैं उसे फ़ोन मिलाने ही जा रहा था कि पिता जी का फ़ोन आ गया l

मैंने उन्हें प्रणाम कहा l

तो उन्होंने मुझे आयुष्मान और खुश रहने का आशीर्वाद दिया l

फिर बोले कैसे हो और भाई महाराज हरमोहिंदर की शादी के लिए परसो ही वह दिल्ली से गुजरात आ रहे है और मुझे उनके साथ महाराज हरमोहिंदर के घर ही चलना होगा और उन्होंने मुझे ऑफिस से छुट्टी लेने को भी बोल दिया ...l

फिर पिताजी ने पुछा कुमार एक बात बताओ क्या तुमने अपने लिए कोई लड़की पसंद की हुई है या तुमने किसी को शादी के लिए वादा किया हुआ है l

तो मैंने कहा पिता जी नहीं ऐसा अभी कुछ नहीं है l

तो वह बोले ठीक है अपने माता जी से बात करो l

उसके बाद फ़ोन माता जी ने ले लिया तो मैंने उन्हें प्रणाम किया उनशो ने भी आशीर्वाद दिया और बोली महर्षि ने तुम्हारे भाई महाराज हरमोहिंदर के द्वारा सन्देश भिजवाया है ही उनके ससुर हिमालय की रियासत के महाराज वीरसेन के मित्र कामरूप क्षेत्र के (आसाम) के महाराज उमानाथ अपनी राजकुमारी ज्योत्सना का विवाह तुम से करना चाहते है ... तो तुम्हारी क्या राय है?

मेरे तो मन में लडू फुट पड़े और लगा ख़ुशी से नाचने लग जाऊँ पर मैंने भावनाओ पर नियंत्रण किया और मैंने कहाः आप जो करेंगे मुझे मंजूर होगा l

तो पिताजी बोले फिर तुम्हे ये विवाह जल्द ही करना होगा ऐसा महाराज और महृषि की आज्ञा है ... तो मैंने कहा मैं एक बार राजकुमारी ज्योत्सना से भी सहमति लेना चाहूंगा और मुझे महर्षि के आश्रम से उनकी शिष्य ऐना का फ़ोन भी आया था कि राजकुमारी ज्योत्सना भी मुझ से बात करना चाहती है l

तो पिताजी ने बोलै ठीक है तुम राजकुमारी ज्योत्सना से बात कर लो हम परसो शाम को गुजरात आ रहे है फिर आगे बात करेंगे l

फिर पिताजी बोले महर्षि अमर गुरुदेव ने कुछ काम करने को बोले है उन्हें ध्यान से नॉट करलो और वह हररोज बिना भूल के करने हैं l

महर्षि अमर गुरुदेव ने अंजाने में हुए पापों से मुक्ति के लिए रोज़ प्रतिदिन 5 प्रकार के कार्य करने की सलाह दी। ये 5 कार्य मनुष्य को अनजाने में किए गए बुरे कृत्यों के बोझ से राहत दिलाते हैं।

पहला-आकाश-यदि अनजाने में हम कोई पाप कर देते हैं तो हमें उसके प्रायश्चित के लिए रोजाना गऊ को एक रोटी दान करनी चाहिए। जब भी घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ के लिए निकाल देना चाहिए।

दूसरा पृथ्वी-प्राश्चित करने के लिए चींटी को 10 ग्राम आटा रोज़ वृक्षों की जड़ों के पास डालना चाहिए। इससे उनका पेट तो भरता ही है, साथ ही हमारे पाप भी कटते हैं।

तीसरा वायु-पक्षियों को अन्न रोज़ डालना चाहिए और जल की व्यवस्था भी करनी चाहिए। ऐसा करने से उनके भोजन की तलाश ख़त्म होती है और व्यक्ति को अपनी गलतियों का अहसास होने के साथ ही उसके दोषों से बचने का एक मौका मिलता है। -

चौथा जल आटे की गोली बनाकर रोज़ जलाशय में मछलियों को डालना चाहिए। इसके अलावा मछलियों का दाना भी डाला जा सकता है।

पांचवां अग्नि महर्षि के अनुसार, रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमें घी-चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाएँ। उन्होंने कहा कि यदि कोई रोजाना ये 5 कार्यसम्पन्न करता है तो वह अंजाने में हुए पापों के बोझ से मुक्ति पाता है और अंजाने में हुए पापों से मुक्ति होती है l

इसके इलावा अब तुमने हर रोज़ मंदिर में जाकर दूध फल फूल और मिठाई अर्पण करनी है और आज ही से करना है और अभी चले जाओ और फ़ोन बंद हो गया l

मैं तो ख़ुशी से नाचने लगा और मैंने राजकुमारी ज्योत्सना को फ़ोन मिला दिया ... उसने बहुत मीठी आवाज़ में हेलो कुमार कहा l

तो मैंने कहा राजकुमारी मैं भी आपसे बात करना चाहता था । आपके पिताजी हमारा विवाह करना चाहते है ... आपकी रजामंदी है ... क्या मैं आपको पसंद हूँ l

तो ज्योत्सना बोली जी, आप ...?

मैंने कहा आयी लव यू ... मैंने जब से आपको देखा है तब आपसे बात करना चाहता था ... l

उसके बाद मैंने कहा और आप ... वह बोली मैं भी ...l

और उसके बाद मैंने कहा मैं भाई महाराज हरमोहिंदर के विवाह के लिए महर्षि के आश्रम में जल्द ही आऊँगा आप वहाँ कब आएँगी तो वह बोली हम तो तब से हिमालय राज के यहाँ पर ही हैं उनकी राजकुमारी मेरी मित्र हैं l
फिर हमने मिलने की बात की और उसके बाद मैंने सोनू को बुलाया और मैं मंदिर गया और वहाँ पुजारी से मिला। उन्होंने महर्षि अमर गुरुवर के निर्देशानुसार मुझे पूजा करने में मदद कीl उस समय कुछ भजनों को वहाँ समृद्ध संगीत की धुन के साथ बजाया जा रहा था, जिसने मुझे भक्ति भाव और प्रशंसा से भर दिया, वहाँ थोड़ी भीड़ थी। तभी वह एक युवा लड़की मुझसे टकरा गई जब मैंने उसे देखा। वह लगभग अठारह वर्ष की एक युवा लड़की थी जिसका बदन गदराया हुआ और सेक्सी था, लेकिन वह-वह बहुत शांत और मिलनसार थी, क्योंकि वह मुस्कुरायी और क्षमा मांगने लगी। मैं उसके पास चला गया उसे ध्यान से देखा तो मुझे याद आया वह मेरे पड़ोसी जिनसे मैंने बंगलो खरीदा है उनकी भतीजी ईशा थी।

ईशा के पास ही वहाँ बैठ गया और वहाँ भजनों को सुना। जल्द ही ईशा खड़ी हुई और वह चलने लगी तो मैंने
उसके पीछे चलने का दृढ़ निश्चय कर लिया।

रास्ते में मैंने देखा वह भीड़ से गुजरी तो एक युवा लड़के ने सफेद काग़ज़ के एक छोटे से मुड़े हुए टुकड़े को युवती के सुंदर हाथों में फंसा दिया। वह अपनी मौसी के साथ थी l

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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08-20-2021, 08:15 AM,
#52
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CHAPTER-5

रुपाली-मेरी पड़ोसन

PART-7

ईशा

ईशा सिर्फ़ अठारह साल की एक सुंदर लड़की थी और यद्यपि इतनी उम्र में, उसकी कोमल छाती पूरी तरह से उन अनुपातों में विकसित हुई थी, जो पुरुषो को प्रसन्न करती है। उसका चेहरा सुंदर और आकर्षक था; अरब के इत्र के रूप में उसकी सांस मीठी और जैसा कि मैंने उसके टकराने पर मह्सूस किया था उसकी त्वचा मखमल की तरह नरम थी।

ईशा को उसके अच्छे रूप के बारे में अच्छी तरह से पता था और वह अपने सिर को गर्व से रानी की तरह उठा कर मटक-मटक कर चलती थी और उसका ये रूप युवाऔ और पुरुषों को लालसाओं को बढ़ाता था और वह अक्सर उस पर प्रशंसात्मक टिप्पनिया करते थे। सुंदर ईशा सभी दिलों की वांछित थी और उसको क़ाफी लड़के हासिल करना चाहते थे और मंदिर में भी उसे काफ़ी लड़के उसकी तरफ़ आकर्षित नज़र आये थे ।

जब ईशा की मौसी मंदिर के जूता घर से जूते वापिस लेने गयी तो ईशा ने एक कोने में खड़ी हो चुपके से उस काग़ज़ के टुकड़े को देखा, जिसे उस युवा लड़के ने उसे चुपके से उसके हाथ में दिया था। उसे पढ़ने के बाद कुछ देर तक कुछ सोचने की मुद्रा में कड़ी रही । तभी उसकी मौसी ने ईशा को बुलाया चलो ईशा चलें और ईशा अपनी चाची की ओर अनमने ढंग से दौड़ी और उसका वह कागज़ का टुकड़ा नीचे गिर गया या उसने जानभूझ कर फेंक दिया । मैं उसके पीछे ही था तो मैंने फट से उस काग़ज़ के टुकड़े को उठाया और खुला होने के कारण, मैंने उसे पढ़ने के लिए आज़ादी ले ली।

"मैं आज शाम चार बजे पुराने स्थान पर रहूंगा," केवल वही शब्द उस काग़ज़ में निहित थे, लेकिन वे ईशा के लिए कुछ विशेष रुचि और मतलब रखते थे जिसे वह गुप्त रखना चाहती थी और मुझे तुरंत समझ आ गया इसीलिए वह कुछ समय के लिए एक ही विचारशील मुद्रा में कड़ी हुई कुछ सोच रही थी।

वो जब मंदिर से बाहर निकली तो कुछ मनचलो ने सीटिया मारी और फब्तियाँ भी कसी पर उसने इसे हर रोज़ होने वाली घटना के तौर पर लिया और उन पर ध्यान न देकर अपनी मॉडसि के साथ-साथ मंदिर से बाहर निकल गयीl

हालाँकि वह मेरे पास कुछ बार छोटी बीमारियों के लिए आयी थी अपर आज मेरी उत्सुकता जाग उठी की वह कहाँ जा रही थी और मेरे मन में उस दिलचस्प युवा लड़की के बारे में और अधिक जानने की इच्छा थी, जिसके साथ मैं मंदिर में सुखदायक संपर्क में आया था, मैंने घड़ी पर नज़र डाली और पाया कि 4 बजने में ज़्यादा समय नहीं था उसके बाद की घटनाओं की प्रगति चुपके से देखने के लिए मैंने उसका अनुसरण करने का फ़ैसला किया।
रास्ते में वह अपनी चाची से कुछ बहाने बनाकर अपनी चाची से अलग हो गई और मैं उसका पीछा करता रहा। ईशा ने अपने आप को बहुत सावधानी से तैयार किया था और वह उस बगीचे की ओर बढ़ गई, जहाँ मैं मनवी भाभी के साथ टहलने जाया करता थाl


मैं उसके पीछे गया।

एक लंबे और छायादार रास्ते के अंत में पहुँचने पर युवा लड़की ईशा झाड़ियों के झुरमुट के बीच एक छुपी हुई बेंच पर बैठ गयी ये एक ऐसी जगह गुप्त थी जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था और मुझे अंदाजा भी नहीं था के इस झाड़ियों में ऐसी गुप्त जगह हो सकती हैl मैंने मन में सोचा अगली बार मानवी भाभी के साथ यहाँ पर ज़रूर आऊँगाl

ईशा वहाँ उस व्यक्ति के आने का इंतज़ार कर रही थी और मैं उन झाड़ीयो के बीच इस तरह से छिपा गया की मैं किसी को नज़र नहीं आओ और साथ ही साथ ईशा को स्पष्ट रूप से देख सको और उनकी बाते सुन सकू।


सौम्य लड़की ईशा ने अपनी एक टांग को ऊपर उठाया और अपनी दूसरी टांग पर रख दिया, उसने मिनी स्कर्ट पहनी कोई थी और मैंने उसकी गदरायी हुई जंघे जो उसकी तंग फिटिंग मिनी स्कर्ट के ऊपर उठने से उजागर हो गयी थी उन पर ध्यान दिया, मेरे आँखे उसकी स्कर्ट के अंदर तक देख पा रही थी और उसकी जाँघे एक बिंदु पर एक साथ मिल गयी थी, उसे स्थान पर उसकी पतली और झीनी-सी पैंटी से पतली और आड़ू की तरह तिरछी, उसकी योनि का आभास हो रहा था कि उसकी योनि के ओंठ आपस में चिपके हुए थे और उन बंद होंठो के बीच में उसकी टाइट योनी छुपी हुई थी।

कुछ की मिनटों में वह युवक भी वहाँ आ गया और ौसे आते ही ईशा को वहाँ आने का धन्यवाद दिया और दोनों बाते करने लगे की मंदिर में क्या हो रहा था तभी थोड़ी हवा चली और अचानक चारों तरफ़ बादल छा गए और अँधेरा हो गया और हवा गर्म और तेज हो गई और युवा जोड़ा बेंच पर एक दुसरे के करीब से बैठ गया।

"ईशा तुम नहीं जानती कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ," लड़के ने फुसफुसाया और उसने नम्रता से अपनी साथी के होंठ पर एक चुंबन कर दिया।

"हाँ, मैं भी करती हूँ" लड़की ने भोलेपन से कहा, "पर ये तो तुम हमेशा ही बोलते रहते हो? मैं इसे सुनकर थक गयी हूँ।" और वह नीचे की और देखने लगी और विचारशील दिखी।

"आप मुझे उन सभी मज़ेदार चीज़ों के बारे में कब और समझाएंगे जो आपने मुझे बताई हैं?" उसने पूछा, एक तेज नज़र दे रही है और फिर तेजी से उसने नीचे बजरी पर अपनी आँखें झुका ली।

"अब," युवा ने उत्तर दिया। "अभी मेरी प्रिय ईशा, जबकि अब हम अकेले है और रुकावट से मुक्त है तो ये एक अच्छा मौका है। आप जानती हैं, ईशा, अब हम कोई बच्चे नहीं रहे?"

ईशा ने सहमति में सिर हिलाया।


"ये ऐसी चीजें हैं जो बच्चों को नहीं पता हैं और जो प्रेमियों के लिए हैं जिन्हे न केवल जानना आवश्यक है, बल्कि अभ्यास करना भी ज़रूरी है।"

"ओह डियर," लड़की ने गंभीरता से कहा।


"हाँ," उसके साथी ने जारी रखा, "ऐसे रहस्य हैं जो प्रेमियों को खुश करते हैं, जिनसे प्रेमी प्यार करते और प्यार करने का आनंद देते हैं।"

"भगवान!" ईशा ने कहा, "कैसे, अरे आप तो वैसे ही भावुक हो गए हैं, जीतू जैसे आप तब थे जब आपने मुझे पहली बार मेरे लिए अपना प्यार व्यक्त किया था।"

"मैं सच कहता हूँ मैं हमेशा ही तुमसे प्यार करता रहूंगा," युवा ने जवाब दिया।


"बकवास मैंने देखा है आप मंदिर में दूसरी लड़कियों को भी देख रहे थे," ईशा को जारी रखा, "लेकिन जीतू और मुझे बताएँ कि आपने क्या वादा किया था।"

जीतू ने कहा, "मैं आपको कर के दिखा सकता हूँ।" "ज्ञान केवल अनुभव द्वारा सीखा जा सकता है।"


"ओह, तब आओ और मुझे दिखाओ," लड़की बोली, जिसकी उज्ज्वल आँखों और चमकते गाल में मुझे लगा कि मैं जिस तरह का निर्देश दे सकता हूँ और जिस ज्ञान को येपाना चाहती हैं उसके बारे में बहुत सचेत ज्ञान का मैं पता लगा चूका हूँ और उसे भी सीखा सकता हूँ।

मुझे लड़की अधीर लगी और लड़के ने इसका फायदा उठाया और लड़की के मुँह और ओंठो पर अपने ओंठ लगा कर उसने सुन्दर और अधीर ही चुकी ईशा के मुंह से चिपका कर उसे हर्षातिरेक से चूमा।

ईशा ने इसका कोई प्रतिरोध नहीं किया; उसने भी इसमें भाग लिया और अपने प्रेमी के दुलार को उसी हर्ष और उत्सुकता के-के साथ चूमते हुए वापस कर दिया।

फिर जीतू थोड़ा हिला और थोड़ा वह ईशा के पास आया और उसने ईशा को अपने और खींचा और फिर बिना किसी विरोध के उसने सुंदर ईशा की स्कर्ट के नीचे से अपना हाथ घुसा दिया और दुसरे हाथ को ईशा के स्तनों पर ले गया चमचमाते रेशम स्टॉकिंग्स के भीतर जो आकर्षण उन्हें मिला, उससे वे संतुष्ट नहीं हुआ और अपने हाथ और आगे ले गया और उसकी भटकती उंगलियाँ अब ईशा की युवा जांघों के नरम और मांस को छू गईं और दुसरे हाथ उसके टॉप केअंदर घुस गया l

कहानी जारी रहेगी
दीपक कुमार
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08-20-2021, 08:20 AM,
#53
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे


CHAPTER-5


रुपाली-मेरी पड़ोसन


PART-7


ईशा-माफ़ी की प्राथना



मैंने ग़ौर से देखा तो मैंने पहचान लिया जीतू मंदिर के सेवादार का पुत्र था और दसवीं क्लास में तीन साल लगातार फेल होने के बाद उसे स्कूल से निकाल दिया गया था और उसका पिता मेरे पास मंदिर के लिए चंदा लेने आता था और मैं उसके पिता की थोड़ी बहुत मदद कर दिया करता था । जीतू बेरोजगार था और सारा दिन आवारागर्दी करता हुआ इधर उधर घूमता रहता था और उसके पिता ने एक बार उसे कोई नौकरी दिलवाने को भी कहा था l
मैं सोच रहा था कि ईशा जैसी खूबसूरत और बढ़िया लड़की इस फुकरे क़िस्म के लड़के को कैसे मिल गयी फिर सोच रहा था और मुझे लग रहा था जीतू किसी भी हिसाब से ईशा के लिए योग्य नहीं था और अब मुझे इनका मक़सद पता लग हो गया था तो यहाँ रुकने का कोई ज़्यादा औचित्य समझ नहीं आ रहा थाl साथ ही मुझे अपन समय याद आ गया जब मैंने अपनी फूफेरी बहन जेन को भी ऐसे ही पटाया थाl जिसे आप मेरे अंतरंग हमसफ़र कहानी में पढ़ सकते हैंl

उधर बादल गहरे हो रहे थे और रौशनी भी काफ़ी कम हो गयी थी और तेज हवा चलने लगी थी।

मैं असमंजस में था कि मुझे अब क्या करना चाहिए पर मेरा ध्यान बार-बार ईशा की ख़ूबसूरती पर जा रहा था और मुझे वह पका हुआ आम लग रहे थी जिसका रस जीतू चूसने जा रहा थाl (वैसे आम मेरा सबसे पसन्ददीदा फल है) और मैं इस आम को छोड़ना ही नहीं चाहता था l उधर जीतू के हाथ ने ईशा के ड्रेस के टॉप के ऊपर के बटन खोल दिए और उसने उसके स्तनों और चुचकों को ज़ोर से दबाया इससे ईशा हलके से कराह उठी अब मैं इस असमंजस में था कि मैं आगे क्या करून और तभी वहाँ पर एक तेज हवा का झोंका आया और एक पका आम आकर पहले ईशा पर गिरा और फिर मेरे ऊपर आ गिरा l

मैंने आसपास देखा तो मुझे दूर एक पेड़ नज़र आया और हवा के झोंके ने आम के मौसम में एक पका हुआ आम मेरी झोली में डाल दिया थाl मैंने इसे अपने लिए कुदरत का इशारा समझाl आम उसके ऊपर गिरने से ईशा एकदम घबरा गयी और उसकी हलकी-सी चीख निकली और उसने जीतू को दूर झटक दिया और बोली लगता है कोई आ गया है l

इस तरह से ये चीख और रुकावट मेरे लिए भी सन्देश था और मैं अप्रत्याशित रूप से अचानक उस बेच के आसपास की सीमावर्ती झाड़ियों से मैं उठकर उन किशोर प्रेमियों के सामने खड़ा हो गया।

मुझे यु अचानक देख डर के मारे दोनों के खून जम गया। कोमल ईशा के लिए ये बहुत बड़ा झटका था उसने मुझसे नज़र नहीं मिलाई और अपंने चेहरे को अपने हाथों से ढँक दियाl वह उस सीट पर सिकुड़ कर बैठ गयी गई, जो उनके प्रेम सम्बंध की मूक गवाह थी l

वो आम गिरने से अपनी चीख का तेज उच्चारण करने के बाद मुझे देख कर से बहुत डरी हुई थी, अब उसकी आवाज़ ही नहीं निकल रही थी और मेरा सामना करने के लिए बिलकुल भी त्यार नहीं थी और उसे डर लग रहा था कि वह पकड़ी गयी है l

मैंने भी उनके सस्पेंस को बहुत लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा। जल्दी से उस दंपति की ओर बढ़ते हुए मैंने हाथ लड़के की बाजू सख्ती से पकड़ लिया और मैंने उन्हें उसकी ड्रेस ठीक करने का निर्देश दिया।

"असभ्य लड़का," मैंने गुस्से के साथ जीतू को कहा तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो और किस हद तक जा चुके हो? तुम्हारी वासना और जुनून में तुमने इस लड़की के साथ अभद्र व्यवहार किया है? तुमने करने से पहले ये नहीं सोचा जब भी तुम्हारे पिता को तुम्हारे इस आचरण का पता चलेगा तो कैसे तुम अपने पिता के गुस्से का सामना करोगे?
और क्या तुम्हारे पिता की मंदिर की नौकरी तुम्हारे ऐसे आचरण से बची रहेगी ... उनका पुत्र अगर लड़कियों से ऐसा आचरण करेगा तो उन्हें कौन सेवा में रहने देगा? " तुम तो कुछ कमाते नहीं हो और इसके बाद तुम्हारे परिवार का क्या होगा ये कभी सोचा है तुमने l

हम सब की जिम्मेदारी है लड़किया और स्त्रिया सुरक्षित रहे और जब मैं अपने इस कर्तव्य के पालन करते हुए प्रबंधंन को और तुम्हारे पिताजी को उनके इकलौते बेटे की इस करतूत के बारे में बताऊंगा तो तुमने सोचा है तुम कैसे उनका सामना करोगे और वह तुम्हे जेल भी भिजवा सकते हैंl

अपने इस कर्तव्य के पालनकरते हुए मैं तुम्हारे पिता को उसके इकलौते बेटे के हाथों से हुए कुकृत्यों से अवगत कराऊंगा। "ये बोलकर जीतू को कलाई से पकड़कर, मैं प्रकाश में आया और ख़ुद को उनके सामने प्रकट किया, मेरा निश्चित रूप से सुंदर रौबदार चेहरा, आकर्षक शानदार काली आंखों में भयंकर जोशीला आक्रोश देखकर जीतू घबरा गया। मैंने एक सफ़ेद पोशाक पहनी हुई थी, जिसमें से साफ-सुथरापन केवल मेरी उल्लेखनीय मांसपेशियl और लम्बे शरीर को देख जीतू ने आज़ाद होने की असफल कोशिश की । वह अभी भी असमंजस में था क्योंकि मैंने उसकी कामवासना के भोग को भंग कर दिया था।"

और ईशा तुम्हारे लिए, मैं केवल अपने अत्यंत डरावने आक्रोश को व्यक्त कर सकता हूँ। अपने परिवार और अपने स्वयं के सम्मान के लिए लापरवाह, तुमने इस दुष्ट और अनुमानी लड़के को निषिद्ध काम करने की अनुमति दी है? ट्युमने सोचा है अब तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारे साथ अब क्या करेंगे? हो सकता तुम्हे घर से निकाल दे... तुम्हारी पढाई छूट जाए तुम्हारे माता पिता पहले ही नहीं हैं तुम अपने चाचा और मौसी पर आश्रित हो सोचो अब तुम्हारे पास क्या है?

अब तुम्हारा भविष्य मुझे अंधकारमय नज़र आ रहा है तुम्हारी पढाई छूट जायेगी और तुम्हारे इस दुष्कर्म का पता चलने के बाद कोई भी अच्छा युवा लड़का तुम्हे अपनी पत्नी के रूप में भी स्वीकार नहीं करेगा और तुम्हे भीख मांगनी पड़ सकती है और ये नालायक तो ख़ुद ही अभी कुछ नहीं करता है तो तुम्हारा ख़र्चा और भार कैसे उठाएगा, अब तुम्हे भीख मांग कर ही गुज़ारा करना पडेगा और हो सकता है तुम किसी ग़लत हाथ में पड़ जाओ ... नहीं-नहीं ये तुम्हारी जैसी सुन्दर अच्छे घर के लड़की के लिए ये सब बिलकुल उपयुक्त नहीं है ... दुर्भाग्यपूर्ण लड़की ये तुमने क्या किया करने से पहले कुछ तो सोचा होता l

ये सुन कर ईशा उठी और गंभीर रवैये के साथ उसने ख़ुद को मेरे पैरों पर फेंक दिया, उसके साथ ही उसका किशोर प्रेमी भी मेरे पैरो में गिर पड़ा और ईशा अपने युवा प्रेमी के लिए माफी के लिए आंसू बहती हुई प्रार्थना करने लगी ... प्लीज हमे माफ़ कर दो हम से बहुत बड़ी गलती हो गयी है l

"और न कहो," मैंने जारी रखा " इस बातो का अब कोई फायदा नहीं है और इसमें आप अपमान करते हैं और मुझे अपने अपराध में मत जोड़ो मेरा मन तुम्हारे इस दुख के चक्कर में मुझे अपने कर्तव्य में गुमराह करता है, मुझे तुरंत सीधे आपके प्राकृतिक अभिभावकों के पास जाना चाहिए और उन्हें मेरे आपके इस दुष्कर्म जो मुझे अचानक पता चला है उससे तुरंत परिचित करवाना चाहिए चाहिए।

"ओह, डॉक्टर साहब प्लीज हम पर दया कीजिये, मुझ पर दया करो," ईशा ने निवेदन किया, जिसके आँसू अब उसके सुंदर गालों पर बह रहे थे वह गिड़गिड़ा रही थी प्लीज " हमें छोड़ दो, डॉकटर अंकल हम दोनों को छोड़ दो।

तभी जीतू बोला हम प्रायश्चित करने के लिए सर आप जो भी कहेंगे वह करेंगे। मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ, मैं कुछ भी त्याग कर सकता हूँ, अगर आप इस प्रिय ईशा को छोड़ दोगे। " मैंने उसे रुकने को कहा।

तभी हलकी-हलकी बारिश की बूंदे पड़नी शुरू हो गयी तब स्वाभाविक रूप से कठोर और दृढ़ तरीके और दया के लहजे में मैं बोला। "बहुत हो गया," मैंने कहा, " मुझे तुम्हारे लिए सजा निर्धारण करने के लिए समय चाहिए और इसके लिए मुझे धरम शास्त्रों को पढ़ना होगा ईशा तुम कल मेरे पास दोपहर 2 बजे अपने पुराने घर के पास आ जाओ वहीँ मैं तुम्हारी सजा के बारे में कुछ भी कहूंगा। मैं आपसे उम्मीद करूंगा आप वहाँ समय पर आ जाएंगी।
और जीतू आप के लिए, मैं अपने फैसले को आरक्षित रखूंगा और सभी कार्रवाई, अगले दिन शाम 6 बजे तक निलंबित रहेगी और उस समय मैं उम्मीद करता हूँ आप वह आ जाएंगे और उम्मीद है आप ख़ुद के लिए भी तब तक कोई सजा सोच लेंगे। उस पर विचार करके आगे का फ़ैसला लेंगे । उन्दोनो ने मेरा धन्यवाद दिया और मैंने उन्हें ना आने पर फिर चेतावनी दी।

फिर पहले मैंने ईशा को जाने को बोला और उसके बाद लगभग 15 मिनट के बाद मैंने जीतू को जाने दिया "और उनके कहा कल जब तक हम फिर से नहीं मिलते हैं तब तक के लिए आपका रहस्य मेरे साथ सुरक्षित है, ," और फिर घर लौट आया।

जब मैं वापस घर पहुँचा तो रूपाली मेरा इंतज़ार कर रही थी और मेरे साथ ही उसने मेरे घर में चाय का कप लेकर प्रवेश किया और कहा, "काका क्या आप तैयार नहीं हैं? मैं पहले से ही तैयार हूँ। मुझे बस अपनी साड़ी बदलनी है। आज हम दोनों को फ़िल्म देखने जाना है। आपको याद होगा पिछले हफ्ते हम फ़िल्म देखने नहीं जा पाए थे क्योंकि आप अपने दोस्त से मिलने गए थे।" मुझे याद आया कि मैंने पिछले हफ्ते गोरा रूसी एना को कैसे चोदा था।
"ओह ... हाँ ... हाँ, 10 मिनट के भीतर, मैं तैयार कर आता हूँ तब तक आप भी त्यार हो जाओ," मैंने कहा। मैंने सिनेमाघर जाने के लिए अपने चालक सोनू को गाडी त्यार करने को कहा।

जींस और टी-शर्ट में डालने के बाद, मैं बाहर आया और रूपाली के दरवाजे पर दस्तक दी। रूपाली मेरा इंतज़ार कर रही थी और वह बाहर आ गई। उसे देखने के बाद, भगवान! मेरी आँखें चकाचौंध हो गईं, आज तो मैं उसकी सुंदरता देखकर दंग रह गया।

उसने एक मैचिंग पारदर्शी ब्लाउज के साथ गुलाबी साड़ी पहनी थी जहाँ से उसकी ब्रा की पट्टियाँ और कप साफ़ दिखाई दे रहे थे। साडी का पल्लू उसके कंधे पर अलग रखा हुआ था, उसकी पतली कमर से पूरी तरह से उसकी नाभि उजागर थी पतली कमर के सुडौल शरीर के साथ आकर्षक त्वचा के साथ उसकी चमकदार गोरी त्वचा उसकी साड़ी के रंग के साथ अद्भुत रूप से मेल खा रही थी। उसकी गढ़ी हुई आकृति पतली थी। उसके पास एक गोरा रंग मेल खाते मेकअप और साडी के रंग के कारण गुलाबी रंग का लग रहा था।

उसके चेहरे पर मखमली पलकें, पतली सुन्दर नाक और उसके प्यारे और मीठे होठों पर हल्के गुलाबी रंग के लिपस्टिक लगी हुई थी जहाँ से उसके सफ़ेद दाँत चमक रहे थे। उसके नाखूनों को लाल रंग से रंगा गया था। उसके खुले काले लंबे बाल उसकी कमर पर गिर रहे थे। माथे पर एक गहरी सिंदूर की लकीर के साथ, उसकी बड़ी, मछली जैसी बड़ी-बड़ी आँखें बड़ी सुंदर थीं। कौन-सा आदमी उन गहरी काली आँखों के सागर में खो जाना पसंद नहीं करेगा? उसकी आँखों में एक नज़र डालने से ही व्यक्ति को पता चल जाएगा कि वह ही उसके सपनो की रानी है। वह आँखें मेरे लिए कुछ ज़्यादा ही बोल रही थीं। मेरे लिए उसकी सुंदरता उसकी बड़ी सुंदर आँखों की रहस्यमय अभिव्यक्ति में थी। मैं उसकी आँखों में खो गया l

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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09-27-2021, 03:30 PM,
#54
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER- 5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-8

फिल्म


रुपाली भाभी का ऐसा कल्पना से भी परे अतुलनीय रूप देखकर मुझे पूर्णता की संभावना पर दृढ़ता से विश्वास हुआ और आश्चर्य भी हुआ की कैसे किसी की कम दूरी से देखना कितना अच्छा लग सकता है।

और एक चीज जिसने उसे इतना अकल्पनीय रूप से आकर्षक बना दिया था वह उसकी आँखों थी उसकी बड़ी बड़ी और अभिव्यंजक निगाहों ने मुझे गर्व महसूस कराया कि वह मेरी साथी थी । इस महिला की अध्भुत सुंदरता ने मुझे विश्वास दिलाया कि इस दुनिया में वास्तविक सुंदर महिलाएं मौजूद हैं। मैंने सोच में था कोई व्यक्ति सचमुच इतना सुंदर कैसे दिख सकता है?

मैं खुद से यही सवाल करता हुआ पूछता रहा कि कोई कैसे सभी मुसीबतो के बीच में भी इतनी शानदार रूप से शानदार दिख सकता है। जाहिर है, वह इतनी सुंदर लग रही थी कि इसने मुझे इस सवाल का जवाब देने के लिए मजबूर किया। उसकी ऐसी सुंदरता को सराहना की जरूरत थी। उसकी सुंदरता इतनी अतुलनीय और आश्चर्यजनक थी कि मैं सन्न हुआ उसे देखता ही रह गया ।

अचानक, मैं उसकी आवाज़ से वास्तविकता की दुनिया में आया, "काका, कहाँ खो गए ? आप क्या सोच रहे हैं? हमें देर हो रही है।"

मैंने सोमू को अपनी कार लाने के लिए कहा और उसमे बैठ कर हम थिएटर पहुँच गए । दोनों ऐसे अभिनय कर रहे थे जैसे कि दोपहर में कुछ भी नहीं हुआ हो । हम थोड़ा देरी से पहुंचे थे बॉक्स ऑफिस बिकुल खाली था मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ की बॉक्स ऑफिस कहली कैसे है फिर भी मैं बॉक्स ऑफिस के टिकर काउंटर पर गया और मैंने दो टिकट मांगे।

"सर, आपको कौन सी मूवी का टिकट चाहिए?" बुकिंग क्लर्क से पूछा।

मैंने कैमरून की "अवतार" मूवी के लिए मुझसे अनुरोध किया।

क्लर्क ने विनम्रता से जवाब दिया, "सर, जिस फिल्म का आपने उल्लेख किया है, वह ऑडी 1 में शाम के शो में फुल हाउस चला रही है। अब शाम के शो के लिए," लवर्स " ( बदला हुआ नाम) नामक एक और हॉलीवुड फिल्म ऑडी 2 में दिखाई जाएगी।"

मैं निराश हुआ की रुपाली को बहुत बुरा लगेगा और मैंने तदनुसार रूपाली भाभी को सूचित किया। दोनों ने चर्चा की। वह फिल्म देखने के लिए बहुत उत्सुक थी और बोली अब आये हैं तो कोई और फिल्म देख लेते हैं और बोली काका हम अवतार फिल्म फिर कभी देख लेंगे आप अभी जो फिल्म की टिकट मिल रही है वो ले ले । जैसा कि वह शनिवार को थिएटर में एक फिल्म देखने का आनंद लेने के लिए रुपाली के दिमाग में एक पूर्व धारणा थी, मैंने बालकनी की अंतिम पंक्ति में दो कोने की सीटों के लिए बुकिंग क्लर्क से अनुरोध किया, और " लवर्स " के लिए शाम के शो के लिए टिकट मांगे।

बुकिंग क्लर्क ने हमें बताया कि हम हॉल में किसी भी स्थान पर बैठ सकते हैं क्योंकि हॉल पूरी तरह से खाली है क्योंकि लोगों की भीड़ केवल 3 डी अवतार देखने के लिए है और जनता दूसरी फिल्म देखने के लिए इच्छुक नहीं हैं। तब बुकिंग क्लर्क ने कहा कि स आप थोड़ी देर इंतजार कर ले फिर आपको बताते हैं की हम शो चलाएंगे या नहीं क्योंकि अभी क इस शो के लिए आप ही अकेले दर्शक हैं

मैंने कहा ठीक है . कुछ देर बाद हाल का एक कर्मचारी मुझे बुलाने आया और मुझे हॉल के मैनेजर के कक्ष में ले गया .. वहां मैनेजर ने मुझ से माफ़ी मांगते हुए कहाः महोदय आज चूँकि इस शो के केवल दो ही टिकट बाइक हैं इसलिए हम ये शो रद्द कर रहे है न .. मैनजर बोलै हम आपका पैसा वापिस कर रहे हैं

तो मुझे मालूम था ये जान कर रुपाली बहुत निराश होगी और आज वो इतनी खुश और सुंदर लग रही थी की मैं उसे आज निराश और दुखी नहीं देखना चाहता था तो मैंने उसका मूड देख कर मैनेजर से बोला कुछ कीजिये मैनेजर साहब हम तो अवतार देखने आये थे पर वो हाउस फुल थी तो हमने इस फिल्म के टिकट ले लिए , अब आप उसे भी रद्द कर रहे हैं हमे बहुत निराशा हो रही है .. हम आपके नियमित ग्राहक है अगर आप पहले बता देते तो हम अन्यत्र चले जाते उसका भी समय बीत गया है अब आप कृपया कुछ कीजिये के तो अवतार फिल्म के हाल में ही दो कुर्सियां डलवा दे हमे वो भी स्वीकार है तो मैनेजर बोला नहीं ये संभव नहीं है.

फ़ित्र मैंने पुछा प्रबंधक महोदय आप कम से कम कितने ग्राहक होने पर शो चालते हैं तो प्रबधक बोलै १० टिकट बिकने पर हमे शो चलाना ही पड़ता है ऐसा हमने नियम बना रखा है

फिर मैनेजर बोला आप शो के 10 टिकट खरीद ले और अपने मित्रो या परिवार के लोगो को बुला ले तो में सिर्फ आपके लिए एक विशेष शो चला सकता हूँ और आपको इसके साथ हम पॉप कॉर्न और कोल्ड ड्रिंक हम आपको फ्री में दे देंगे और उसमे मूवी हॉल में केवल आप ही संरक्षक होंगे। मैंने तुरंत एक विशेष शो के लिए सिर हिलाया और भुगतान किया। मुझे इस कामुक फिल्म लवर्स के कथानक का थोड़ा-सा अंदाजा था और मैं कामुक दृश्य देखते हुए रूपाली भाभी की प्रतिक्रिया देखना चाहता था।


फिर जब हमने थिएटर में प्रवेश किया। हालाँकि यह शनिवार का दिन था, लेकिन उस फ़िल्म को देखने वाले हमारे अतिरिक्त कोई नहीं थे क्योंकि यह एक हॉलीवुड फ़िल्म थी तो भीड़ कम ही होती थी , ज़्यादा भीड़ हिंदी और गुजराती फ़िल्मों में ही होती थी लेकिन इस फ़िल्म "अवतार" ने सभी भारतीय और विदेशी फ़िल्मों को पछाड़ दिया है। जब हमने प्रवेश किया तब थिएटर में कोई नहीं था। रुपाली को भी पता था की ये वयस्क फिल्म थी।

जल्द ही थिएटर के हॉल में अंधेरा हो गया मूवी हॉल के अंदर हम दोनों के अतिरिक्त कोई और नहीं थी। हम बालकनी के पिछले भाग के केंद्र में बैठे, मेरा हाथ उसके बगल में आराम से कुर्सी की बाजु पर रखा हुआ हमारी कोहनी भी हल्के से आपस में छू रही थी। रूपाली भाभी ने तब महसूस किया कि कुछ उनके पैर को छू रहा है, और महसूस किया कि मैंने अपने पैर फैला दिये थे और मेरा पैर उनके पैर को लापरवाही से छू रहा था। हमारे शरीर बारीकी से स्टे हुए थे और इससे हम दोनों के पूरे शरीर में विद्युत प्रवाह को महसूस किया। मुझे उसके शरीर की खुशबू से नशा हो रहा था।

मैंने रूपाली भाभी को एक पॉपकॉर्न का पैकेट दिया, और कहा, "भाभी ये कुछ पॉपकॉर्न हैं।"

और साथ में दो कोल्ड ड्रिंक भी थी। फिल्म स्क्रीन पर शत्रु हुई हो और रूपाली भाभी ने अपने रसभरे होंठों को पॉपकॉर्न का स्वाद चखाया।

"उम्म्म ... यह स्वादिष्ट है!" वह कराह उठी।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "भाभी जब आपका मन करे तो आप कोक पी लेना ; मैंने हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक खरीदी है। बहुत सारे पॉपकॉर्न खाने केबाद बहुत जोर से प्यास लगती है ।"


कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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10-11-2021, 11:53 AM,
#55
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे



CHAPTER-5



रुपाली-मेरी पड़ोसन



PART-9



कामुक फ़िल्म

पड़ोसन के साथ कामुक फ़िल्म देखना.

थोड़ी देर तक हम चुपचाप फ़िल्म देखते रहे। कुछ मिनटों के बाद मेरी दायी कोहनी उसकी बायीं कोहनी के साथ रगड़ खाने लगी। मैंने अपनी कोहनी ने उसकी कोहनी को हलके से दबा दिया और इससे पहले कि वह अपनी कोहनी को दूर ले जा सके, मैंने दबाव और बढ़ा दिया। फिर उसे लगा कि मेरा पैर जानबूझकर उसके पैर को छू रहा है। रूपाली भाभी को अब थोड़ा अजीब लगा।

रूपाली भाभी ने मेरे साथ सिनेमाघरों में काफ़ी फ़िल्में देखी थीं और इस दौरान हमारे शरीर आपस में कई बार छुए थे, लेकिन उन्होंने पहले कभी कुछ भी असामान्य महसूस नहीं किया था। हालाँकि वह मेरे सामने सामान्य लग रही थी पर दोपहर की घटना और हमारी यौन मुठभेड़ अभी भी उसके दिमाग़ में मँडरा रही थी। मैंने या उसने दोपहर की घटना का कभी अनुमान नहीं लगाया था, वह मानती थी कि यह एक दुर्घटना थी और मामला वहीं समाप्त हो गया। लेकिन उसने मुझे अपनी उंगलियों को उसकी चूत के अंदर डालने अनुमति देकर और मेरे लंड को चूस कर उसने मुझे प्रोत्साहित किया था।

वह सोच रही थी हो सकता है कि यह हमारे दोनों में सेक्स के आवेग के कारण हुआ हो, क्योंकि मैं युवा था, वह भी एक यौन रूप से भूखी महिला थी और इसमें हम दोनों बराबर के दोषी थे।

उसने सोचा कि वह मुझे पूरी तरह से दोष नहीं दे सकती, लेकिन उसने अपने मन में ख़ुद को सांत्वना दी कि भविष्य में वह मुझे अपने साथ किसी भी यौन क्रिया करनी के लिए कोई गुंजाइश नहीं देगी। वह मानती थी मैं सज्जन पुरुष था और वह मेरी प्रसंसक थी और मेरे तरफ़ आकर्षित भी हुई थी लेकिन वह एक गुणी महिला, सम्बंधित गृहिणी और दो बच्चों की माँ भी थी। वह एक आसानी से बहक जाने वाली महिला नहीं थी। उसके मन में ये सारे विचार आ रहे थे।

लेकिन? उसे मेरे स्पर्श से अजीब क्यों लग रहा था? क्या मेरा स्पर्श जानबूझकर था?

अतीत में, फ़िल्मों को देखते समय कई बार मेरा शरीर उसे बहुत करीब से छू गया था, तब उसे कभी भी ऐसा नहीं लगा था?

वह अपने इन विचारो से में बहुत परेशान थी, फिर उसे अपने अंदर से जवाब मिला कि ये सभी नकारात्मक विचार केवल दोपहर में मेरे साथ बने यौन सम्बंध के कारण आ रहे थे और जो अभी भी उसके दिमाग़ में ताज़ा थे।

उसके मन में उलझन थी कि क्या वह एक गुणी गृहिणी थी, या वह गुप्त सेक्स की इच्छा रखने वाली एक पाखंडी स्त्री थी।

स्क्रीन पर चल रही फ़िल्म यह एक टीन एज रोमांस की फ़िल्म थी। प्रमुख अभिनेता और अभिनेत्री किशोर थे। नियमित रोमांस के दृश्यों के बाद, दोनों ने बेडरूम में प्रवेश किया। लड़के ने कसकर महिला को गले लगा लिया और पूरी भावना के साथ, उसके होंठ पर अपने गर्म चुंबन शुरू कर दिए कि उसके बाद में उसने एक के बाद महिला से कपड़ो को हटाना शुरू कर दिया और उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया। कैमरा उस समय नाइका के छोटे गोल बूब्स पर केंद्रित था उसके निप्पल चेरी। की तरह लाल रंग की थी फिर कैमरा उसके निचले गोल चूतड़ पर केंद्रित करते हुए, उसके निचले हिस्से पर चला गया, फिर उसकी निचली तरफ़ जांघो के बीच में छोटे और कम जघन बालों से घिरी हुई चूत के बाहरी होंठ दिखाई दिए। इस बीच, लड़की ने भी लड़के के पूरे कपड़े भी उतार दिए थे। लड़के के झूलते औसत आकार के लंड के साइड व्यू पर कैमरा केंद्रित हुआ।

लड़की बिस्तर पर उसकी पीठ पर लेट गई; लड़का उसके ऊपर आया और अपने लंड को उसके मुँह में डाल दिया। कैमरे ने लड़की की पीठ पर ध्यान केंद्रित करते हुए दिखाया कि वह लंड को चूस रही थी, लेकिन लंड को के प्रत्यक्ष दृश्य में दिखाया नहि गया था। फिर लड़के ने लड़की के निपल्स को चूसना शुरू कर दिया ज और कैमरा इस तरह से केंद्रित था जो लड़के के होंठ और लड़की के निपल्स को साफ़ दिखा रहा था। कुछ सेकंड के बाद, लड़के ने लड़की को चोदना शुरू कर दिया।

चुदाई का दृश्य को स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया गया था बल्कि स्क्रीन पर कैमरे ने दूर से दोनों के जघन बालों को केंद्रित किया और लड़के को दोनों तरफ़ से जंगली आवाजों और कराहो के साथ ज़ोर से धक्के लगाए जा रहे थे। थिएटर में केवल स्क्रीन पर दिखाए गए प्रेमियों की कराहती आवाजें ही गूंज रही थीं। तभी उसे छिरर्र की आवाज़ सुनाई दी जिस पर उसने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि स्क्रीन पर बहुत गरम दृश्य चल रहा था और भाभी उसे बहुत मस्त होकर देख रही थीl

इस दृश्य को देखते हुए मैंने फिर से, उसकी कोहनी को अपनी कोहनी से दबाने और ढीला छोड़ने का क्रम 2-3 बार दोहराया और फिर उसने महसूस किया कि मेरी कोहनी एक प्रकार की लय में चल रही थी। यह कुछ मिनटों के लिए जारी रहा और मैं अपने कोहनी उसकी कोहनी पर रगड़ रहा था, उसने सोचा कि मैं ये क्या कर रहा था और मैंने मुस्कुराते हुए दाईं ओर उसे देखा। तो उसने भी अपनी बायीं और मुझे देखा l

रूपाली भाभी ने आश्चर्य के साथ देखा कि मैंने अपनी जीन की ज़िप को खोल कर, (वह आवाज़ जो उसने सुनी थी-वह तब आयी थी जब मैंने अपनी जीन की ज़िप खोली थी) अपना लंड निकाल लिया था। मैं अपने हाथ से लंड पकड़ कर धीरे से ऊपर और नीचे रगड़ रहा था जिस से मेरे कोहनी उसकी कोहनी से रगड़ खा रही थी (और उसने उसे सिर्फ़ मेरी कोहनी की रगड़ समझा था) ।

वह कुछ भी कहने से कतरा रही थी और पलट कर जल्दी से स्क्रीन पर देखने लगी। रूपाली भाभी बड़ी दुविधा में थीं कि अब क्या किया जाए। अपने शर्मीले स्वभाव के कारण भाभी बहुत घबराई हुई थी। उसने इसे अनदेखा करने का फ़ैसला किया और उसने सोचा कि मैं जो करना चाहू वह कर सकता हूँ पर वह इसका हिस्सा नहीं बनेगी। कुछ मिनटों के बाद, वह फिर से अपने बायीं ओर मुड़ी और देखा कि मैं क्या कर रहा हूँ तो उसने पाया मैंने अपनी पैंट उतार दी थी और मेरे दाए हाथ से मेरा अकड़ा हुआ लंड था। यह बहुत कठोर, सीधा, लम्बा और यह वास्तव में काफ़ी बड़ा दिखता था।

रूपाली भाभी ने देखा और मेरी साँसें बहुत तेज चल रही थी। यह उसके लिए काफ़ी आश्चर्यजनक था क्योंकि उसने पहले कभी किसी पुरुष को हस्त मैथुन करते हुए नहीं देखा था इस तरह का कोई अनुभव नहीं था। वह डर गई और घबरा गई। उसने धीरे से अपनी बांह हटाई और फिर से अपनी दाईं ओर देखा और मुझे अपने उभरे हुए और विशाल लंड के साथ खेलते हुए देखा।

मैंने रूपाली भाभी की तरफ़ देखा और देखा कि उसने भी मेरी तरफ़ देखा है, लेकिन हम चुप रहे।

मेरी इस हरकत से नाराज हो कर उसने जल्दी से गुस्से में दूसरी तरफ़ देखा और साथ ही वह शरमा गई क्योंकि मैंने उसे अपने लंड को देखते हुए पकड़ लिया था। वह अब इतनी उलझन में थी। स्क्रीन पर दृश्य प्रत्येक मिनट में गर्म से गर्मतर हो रहा था। मैंने अपनी बाए हाथ कि उंगलिया रूपाली भाभी के जांघो पर फिसलाने के लिए रुपाली भाभी की तरफ़ बढ़ा दी और इससे पहले हमारी नज़रें एक बार और मिलीं, मेरे दाए घुटने ने उनकी बायीं जाँघ को रगड़ का ब्रश किया। रूपाली भाभी कांप गई और मेरे इस तरह छूने पर वैसे ही शरमा गई जैसे एक नयी दुल्हन अपनी सुहागरात में उसके पति के पहली बार छूने पर शर्माती है।

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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10-29-2021, 05:48 AM,
#56
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER- 5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-10

हस्तमैथुन




मैंने अपनी बाए हाथ कि उंगलिया रूपाली भाभी के जांघो पर फिसलाने के लिए रुपाली भाभी की तरफ बढ़ा दी और इससे पहले हमारी नज़रें एक बार और मिलीं, मेरे दाए घुटने ने उनकी बायीं जाँघ को रगड़ का ब्रश किया। रूपाली भाभी कांप गई, और मेरे इस तरह छूने पर वैसे ही शरमा गई जैसे एक नयी दुल्हन अपनी सुहागरात में उसके पति के पहली बार छूने पर शर्माती है.

उसके बाद कुछ मिनटों के लिए कुछ नहीं हुआ, लेकिन रुपाली भाभी का दिल एक ड्रम की तरह तेजी से धड़क रहा था। रूपाली भाभी को एक झटका तब लगा जब उसे महसूस हुआ कि मैंने अपना कोई अंग उसकी जांघ पर रख दिया था तो उन्होंने अपने जांघ हटाने को कोशिश की तो उनकी जांघ उनकी दूसरी टांग से रगड़ गयी फिर रूपाली भाभी को अगला झटका जब उन्हें मह्सूस हुआ की वो मेरा हाथ था जो उसकी दाहिनी जाँघ पर ऊपर की और आ रहा है ,और जहाँ जाँघे मिलती है और उसकी चूत के प्रवेश द्वार था उसके पास आकर रुक गया।

उसने मेरे हाथ को पीछे धकेल दिया, मेरे हाथ को छूने से एक कंपकंपी उसकी रीढ़ के नीचे तक हुई।

उसके इस इनकार ने मुझे उकसा दिया और मेरी उँगलियाो ने उसकी जांघो को जोर से दबाया और उसकी साड़ी की तह के माध्यम से उसकी टांगो की और बढ़ गयी । मेरा हाथ धीरे-धीरे उसके पैर तक पहुँच गया । अब वह प्रतिक्रिया देने में भी डरने लग गयी और उसकी अब कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आयी ; मैंने उसकी साडी को उठाया और अपना हाथ अंदर लेजा कर धीरे से उसकी टांग पर रखा और उसे धीरे से उसे निचोड़ दिया।

उसकी टाँगे सच मे बहुत चिकनी और नरम थी और मेरा हाथ बार बार फिसल रहा था वह नहीं जानती थी कि उसे क्या करना है और यद्यपि उसने अपने पैर आगे बढ़ाए, लेकिन वह मेरा हाथ नहीं हिला पा रही थी।

मैं अपना हाथ वापिस उसकी जांघ पर ले आया और कुछ मिनटों तक मैं धीरे से उसकी जाँघ (अपने बाएँ हाथ से) सहला रहा था। रूपाली भाभी स्क्रीन पर बड़ी मुश्किल से घूर रही थी और अभिनय कर रही थी जैसे कि कुछ भी नहीं हो रहा हो, लेकिन वह गर्म महसूस कर रही थी और अपने होंठ अपने दांतो के नीचे दबा रही थी क्योंकि लड़का स्क्रीन पर लड़की को चोद रहा था और स्क्रीन पर लड़के के हाथ लड़की की जांघो को सहला रहे थे , जबकि उस समय मेरा हाथ भी रुपाली भाभी की चिकनी जांघ पर टिका हुआ था, और अब धीरे-धीरे इसे ऊपर-नीचे घुमाते हुए मैं उसकी जांघ को दबाते और सहलाते हुए निचोड़ रहा था, । वह नहीं जानती थी कि उसे क्या करना है और उसे घबराहट हो रही थी । उसने आँखों के कोने के माध्यम से, उसने फिर से अपनी बाईं ओर देखा, और देखा कि मैं भी स्क्रीन पर देख रहा था, लेकिन मेरा हाथ उसकी जांघ को सहला रहा था। मेरा लंड सख्त और सीधा खड़ा था, और मैं लंड को अपने दाहिने हाथ से सहला रहा था।

मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ को उसकी जांघ पर ऊपर की ओर ले जा रहा था, और फिर उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और अपने पैर से मेरे पैर को धक्का दे दिया। मेरा हाथ उसे निष्चित ही बहुत गर्म लगा होगा । कुछ मिनटों के लिए मैं रुका तो उसने अपना हाथ मेरे हाथ से हटा लिया और र इस बीच वह स्क्रीन पर कड़ी मेहनत कर रहे युगल की यौन क्रियाये देख रही थी, उसका दिमाग सोच रहा था और मेरी अगली चाल का इंतजार कर रहा था। फिर उसने मेरा हाथ एक बार फिर से उसकी जाँघ पर हिलता हुआ महसूस किया और मैंने उसे एक बार फिर से सहलाना शुरू कर दिया और वो निश्चल बैठ गई।

मैंने अब अपना हाथ पूरी तरह से उसकी जाँघ पर रख दिया, और मैंने उसे और अधिक तात्कालिकता से सहलान शुरूकर दिया उसके बाद मैंने उसकी जंघा को कस कर दबा कर निचोड़ दिया और धीरे से उसके पैरों को फैलाने की कोशिश कर रहा था। उसने इसका विरोध किया, और फिर से उसे धक्का देने के लिए अपना बाया हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। लेकिन इस बार मैं इसके लिए तैयार था, और इससे पहले कि वह मेरा हाथ हटा देती , मैंने दाए हाथ से उसका हाथ पकड़ लिया, उसने छूटने की कोशिश की तो मैंने हाथ और दृढ़ता से पकड़ लिया। वह भी इस बात से अचंभित थी, और मैं उसके हाथ को, मानो उसे आश्वस्त करने के लिए धीरे से सहलाने लगा तो उसने अपना हाथ दूर खींचने की कोशिश की, लेकिन मेरी पकड़ काफी मज़बूत थी और फिर मैंने उसका हाथ तेज़ी से अपनी और खींच लिया, और मज़बूती से पकड़ कर अपने सख्त लंड के ऊपर रख दिया।

रूपाली भाभी को इस साहसिक कदम से वास्तव में बहुत चकित हुई और मुझे रोकने में हुई उसे अपनी असफलता पर निराशा भी हुई । उसका हाथ मेरे लंड पर था, मेरे बड़े हाथ में मैंने उसका हाथ पकड़ा हुआ था और मैंने अब अपने हाथ से उसके हाथ को अपने लंड पर ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। रूपाली भाभी दंग रह गई, उसे मेरा लंड बहुत बड़ा लग रहा था, और उसके हाथ कांप रहा था और मुझे लंड पर उसकी दिल की तेज धड़कन उसके हाथ के माध्यम से महसूस हुई । उसने हाथ छुड़ाने का असफल प्रयास फिर किया पर मेरी पकड़ दृढ़ थी, और वह अपना हाथ नहीं हटा पायी थी। वह आश्चर्यचकित थी कि उसने मेरे खड़े हुए कठोर लंड को पकड़ा हुआ था और मेरे हाथ की गति से अपने हाथ को मेरे लंड पर ऊपर-नीचे कर रही थी ।

मैंने फिर अपनी स्थिति को थोड़ा सा बदल दिया, मोड़ कर और थोड़ा झुक कर उसकी ओर बढ़ा, और अपने बाए हाथ को मैंने उसे धीरे से उसके कंधे पर रखा, फिर पेट पर, और धीरे से सहलाने लगा । जब उसने मेरे हाथ को हटाने के लिए के लिए अपना बायाँ हाथ आगे बढ़ाया, तो मैंने उसके हाथ को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ को सहलाने लगा। रूपाली भाभी तो उलझन में थी, लेकिन बहुत कोमलता के साथ उसका बायाँ हाथ मेरे सख्त और गर्म लंड को पकड़ रहा था।


उसने अपना बाय हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो अपने बाए हाथ से उसके हाथ को छोड़ दिया, धीरे-धीरे उसके ऊपरी पेट को सहलाया, तेजी से अपना हाथ से उसके पल्लू के नीचे सरका दिया और अब मेरा हाथ उसके बाएँ स्तन पर था। मैंने धीरे से उसके स्तन को सहलाना और दबाना शुरू किया। रूपाली भाभी अब विरोध करने से कतरा रही थीं क्योंकि पहले बार जब उसने विरोध किया था तो मैंने उसे अपना लंड पकड़ा दिया था अब इस डर के मारे उसने विरोध ही नहीं किया की पता नहीं उसके विरोध की प्रतिक्रिया में मैं उससे क्या करवाने लगू , और मैंने उनके स्तन को दृढ़ता से दबाना जारी रखा, और फिर मैंने अपना हाथ उसके दूसरे स्तन पर स्थानांतरित कर दिया, और दृढ़ता से इसे दबाने लगा ।

उसकेबाए हाथ पर मेरी पकड़ उतनी ही दृढ़ थी, और मेरा कठोर लंड उसके हाथ में ही था। मैंने फिर अपना हाथ उसके स्तनों पर, उसकी गर्दन पर ऊपर की ओर बढ़ाया, और फिर अपना हाथ उसके ब्लाउज के अंदर सरका दिया, और मेरा हाथ अब उसकी ब्रा के अंदर जाने की कोशिश करने लगा ।

मेरा गर्म और मरदाना हाथ जल्द ही उसके स्तन की कोमल त्वचा पर पहुँचने ही वाला था और उसे समझ नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे .. उसकी आँखे अभी भी स्क्रीन पर थी जिसमे नायक नायिका के स्तन अपने हाथो से दबा रहा था .इन घटनाओं के कारण वह बहुत अभिभूत थी। मैंने उसकी ब्रा के अंदर एक दो उंगलियाँ घुसा दी और उसके निप्पल को सहलाया। रूपाली भाभी के शरीर में अनैच्छिक कंपकंपी आयी क्योंकि यह बहुत अधिक हो गया था, वह नहीं जानती थी कि उसे अब आगे क्या करना है, मैंने बस अपने प्रयासों को जारी रखा है। मेरे मूवमेंट बोल्डर निडर और तेज हो गए।

उसने एक बार अपने बाए हाथ को जो मेरे लंड को पकड़े हुए था उसे छुड़ाने की कोशिस की तो मैंने उसके हाथ को जाने दिया और तुरंत अपने आज़ाद हाथ से उसके दूसरे स्तन को बहुत मजबूती से सहलाना शुरू कर दिया। मैंने फिर अपने हाथ को स्थानांतरित कर दिया, और एक हाथ फिर से उसकी जांघ पर लेजा कर उसे कस कर दबाया और जांघो के अंदरूनी भाग पर ले गया और टाँगे खोलने की कोशिश कर थोड़ा जगह बनाने की कोशिश करने लगा । उस बार मैं उसकी जांघो के बीच एक हाथ लाने में कामयाब रहा और दोनों जाँघि के बीच में मेंने अपने हाथ की एक उंगली दबा दी।

मैंने फिर अपना दूसरा हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से, उसके पेट पर, और फिर उसके स्तनों पर टिका दिया और उसके ब्रा के कप में से एक स्तन को बाहर निकालने में कामयाब हो गया और उसे अपने हाथ में भर लिया और धीरे से सहलाने लगा फिर मैंने उसके निप्पल को सहला दिया जो पहले से ही उभरा हुआ था, और फिर मैंने धीरे से अपनी उंगलियों से उसके निप्पल पर थपकी दी । उसके बाद मैंने उसके दूसरे स्तन को भी बाहर निकाल लिया और अब उसे सहला रहा था .

मैं अब उसके बूब्स को बहुत ही जोश से सहला रहा था और सहला रहा था। आआ आह ओह्ह वो कराहने लग लगी

उसका दाहिना हाथ, जिसे मैंने छोड़ दिया था मेरे लंड पर था, वो भाबी ने ढीला छोड़ा और फिसल कर अब मेरी जांघो पर टिका हुआ था। मैंने उसका हाथ फिर से पकड़ा, एक बार फिर से अपने लंड पर रखा और उसे वहीं रहने दिया, इस बार जब मैंने उस हाथ को छोड़ा तो रुपाली भाभी ने उसे नहीं हटाया तो मैंने उसके दोनों स्तनों को फिर से मसलना शुरू कर दिया। उसका हाथ मेरे धड़कते हुए लंड पर आराम कर रहा था, और उसके शुरुआती डर और घबराहट के बावजूद, उसने अपना हाथ मेरे लंड पर ही रहने दिया, धीरे से सहलाने लगी और उसे महसूस करने लगी । वो वास्तव अब आनंद ले रही थी और उसने चारों ओर देखा तो पाया कि थिएटर में कोई और नहीं था और किसी को भी पीछे की पंक्ति में हमारे कामुक कार्यों के बारे में पता नहीं था।

मैंने फिर उसके ब्लाउज की डोरियों को खोलना शुरू किया और ब्लाउज को उतार दिया और इसकी पीठ को सहलाया उसके ब्रा के हुक खोले और ब्रा को भी उतार दिया,और उसके बड़े गोल सुडोल और शानदार स्तन अब पूरी तरह से खुल गए और फिर उसे ये महसूस होने से पहले कि मैं क्या कर रहा हूँ , मैं आगे झुक गया , और उसके स्तन को चाटने लगा । और फिर उसके निपल्स और स्तन को चूसना शुरू कर दिया ।

मैंने उसके बाए निप्पल को पूरी तरह से अपने मुँह में ले लिया और उनको चूसने लगा .. वह आनंद से कराह उठी । आआहह ओह्ह प्लीज रुक जाओ, लेकिन उसकी हरकतों ने बता दिया वो गर्म हो गयी है . उसका शरीर अब मेरे द्वारा की गई उत्तेजनाओं का जवाब देने लगा था। जल्द ही उसे एहसास हुआ कि अब मेरी हरकतों का विरोध करना बेकार है, इसलिए उसने आत्मसमर्पण कर दिया . रूपाली भाभी ने भी मेरे लंड को पकड़ कर अपना हाथ ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया शुरू कर दिया, और उसे अच्छी तरह से सहलाया, और उसे जोर से सहलाना शुरू कर दिया।

मैं अब उसके स्तनों को हॉल के शांत एयर कंडीशनिंग में उजागर करने में सफल हो गया था , और निप्पलों के बीच चूमते हुए करते हुए उसके दोनों स्तनों को बारी बारी से पर मज़बूती से और लालच भरी कामवासना के साथ चूस रहा था। फिर मैंने अपना हाथ उसके पेट पर ले गया , उसके साडी के अंदर ले जाकर, उसके पेटीकोट के नाड़े तक पहुँच गया और जल्दी से उसे ढीला कर दिया और अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर सीधा उसकी योनि पर सरका दिया। मैंने धीरे से उसे सहलाना शुरू किया, फिर उसे उँगलियों से दबाया, एक उंगली अंदर सरका दी और धीरे से उसे उसकी योनि के साथ हस्तमैथुन करने लगा । रूपाली भाभी ने स्वेच्छा से अपने पैर फैला दिए ताकि मैं उसकी योनि तक और बेहतर पहुँच पाऊँ और वो मेरे लंड को सहलाती रही (जबकि मैं अभी भी उसके स्तनों को चूस रहा था), वह भी मेरे खड़े हुए कठोर लंड को सहला रही थी।

यह कुछ मिनटों तक जारी रहा, मेरी हरकतें तेज़ हो गईं, और उसे पता था कि वह बहुत जल्द अपने कामोन्माद तक पहुँच जाएगी। जल्द ही मुझे उसकी शरीर की अनियंत्रित कंपकंपी महसूस हुई, जैसे कि उसके शरीर के माध्यम से भावनाएं एक मजबूत बिजली के झटके के माध्यम से चली गईं, उसके पूरे शरीर में लाखों झुनझुनी सनसनी फैल गईं, और उसके शरीर के प्रत्येक तंत्रिका को गहन संभोग के रूप में उत्कर्ष पर ले गयी । यह 2-3 मिनट तक चला, उसकी योनि काम रस से भर गयी और वो पूरी तरह से तृप्त हो गयी।

मैं जानता था कि उसे संभोग सुख मिल गया है, और मेरा हाथ उसकी योनी से हटा दिया, मेरा हाथ उसके एक स्तन पर वापस चला गया, और दूसरे स्तन को मैं मेरी जीभ और मुंह से चूस रहा था। मैंने अपना हाथ उसके उस हाथ पर रख दिया जो मेरे लंड को सहला रहा था, और उसे पकड़ लकर तेजी से हिला कर उसे तेज़ी से करने का इशारा किया और उसने मेरे लंड पर अपनी हरकत की रफ़्तार बढ़ा दी। रूपाली भाभी ने मेरे लंड को जोर से पकड़ लिया और तेजी से अपने हाथ को ऊपर-नीचे करने लगीं, जिससे जल्द ही उसने मेरे शरीर को तनावग्रस्त कर दिया, इससे पहले कि एक बार वह अपना हाथ हटा पाती , मेरा लंड उसके हाथ में अनियंत्रित रूप से मुड़ गया, और मेरा वीर्य बाहर आने लगा, क्योंकि वह मेरे लंड को सहलाती रही, और उसका पूरा हाथ मेरे वीर्य से भीग गया और वीर्य उसके पूरे हाथ से टपकने लगा।

रूपाली भाभी को उम्मीद नहीं थी की वीर्य बाहर निकल कर उसके हाथ पर टपक जाए। मैंने संतुष्ट आहें दीं, और रूपाली भाभी ने अपने हाथ को मेरे लंड से हटा दिया, और कहाँ से सारे वीर्य को पोंछ दिया। उसने फिर अपना पल्लू लिया और उसे पोंछा। उसने जल्दी से और चुपचाप अपने कपड़े समेट लिए और ब्लाउज और ब्रा पहन कर बंद कर ली मैंने भी उसकी बगल में बैठे हुए अपनी पेण्ट और अंडरवियर को ऊपर कर लिया ।

ये बिकुल सही समय पर निपट गया था क्योंकि इसके बाद मुश्किल से 5 -10 मिनट बाद रोशनी हो गयी फील में अंतराल हो गया । हमने इस बीच आपस में एक शब्द भी नहीं बोला था। मैं जल्दी से उठ गया, और उसकी तरफ देखे बिना भी टॉयलेट चल गया और मेरे पीछे पीछे वो भी लेडीज टॉयलेट में चली गयी ..

यह खत्म हो गया था, और यद्यपि उसका मन अभी भी भ्रमित था; उसे ये भी राहत मिली कि यह आखिकार खत्म हो गया था। वह वास्तव में पूरी तरह से घबरा गई थी । आखिरकार यह सब एक सार्वजनिक स्थान पर हुआ, और अगर किसी ने हमें देखा / पकड़ा तो क्या होता ये सोच कर उसे डर लग रहा था ।

वापिस आ कर रूपाली भाभी ने अपनी सीट पर खुद को जितना संभव हो सके, उतने इधर-उधर करने की कोशिश की, और देखा कि हॉल बिल्कुल खाली था। उसने पिछले 90 मिनट या उसके बाद की घटनाओं के बारे में सोचा, और जो कुछ हुआ, उस पर वह स्तब्ध थी की उसने मुझे ऐसा करने की अनुमति कैसे दी, उसने कैसे मुझे उसे उत्तेजित करने की , उसकी ब्रा खोलने, उसके स्तनों को छूने और उसके स्तनों को चूसने की अनुमति दी। कैसे यहाँ तक की उसने हस्तमैथुन के लिए मेरा लंड भी पकड़ लिया । रूपाली भाभी ने किस तरह अपनी स्वाभाविक शर्म और डर को दूर किया और जोश के साथ आखिरकार उसने मेरा साथ दिया। निश्चित तौर पे यह जंगली और पागलपन भरा उत्तेजक अनुभव था ,,

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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