पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
01-08-2022, 09:00 PM,
#61
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-15

सुपर संडे - ईशा 



संडे का दिन था और मैंने पिताजी के कहे हुए काम सुबह सुबह ही करने का निश्चय किया और नहा कर मंदिर चला गया . महर्षि अमर मुनि गुरूजी ने बताया था गुरु आज्ञा अनुसार विधि पूर्वक पूजन करने से -मनुष्य -संतान ,धन ,धन्य ,विद्या ,ज्ञान ,सद्बुधी ,दीर्घायु ,और मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापो का नाश भी होता है | मंदिर में विधि पूर्वक पूजन कर दूध और दही चढ़ाया और पांचो यज्ञ जो गुरुदेव ने बताये थे - गऊ को रोटी दान दिया , चींटी को 10 ग्राम आटा वृक्षों की जड़ों के पास दाल , पक्षियों को भोजन और जल की व्यवस्था करवाई आटे की गोली बनाकर जलाशय में जल के जीवो के लिए डाली और रोटी के टुकड़े करके उसमें घी-चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाया..

मुझे वहां जीतू भी नजर आया वो किसी लड़की के साथ हस हस कर बात कर रहा था और मुझे देख उस लड़की से अलग ही गया और हाथ जोड़ने लगा वहीं मुझे उसके पिताजी भी नजर आये तो वो मेरे पास आ गए और जीतू की नौकरी के बारे कुछ बात करने लगे .. फिर मुझे सामने ही जीतू भी नजर आया जो हाथ जोड़ रहा था की मैं उनसे कल ईशा के साथ जब मैंने उसे पकड़ा था उसके बारे में उन से कुछ न कहूँ.

11. बजे के आसपास पूजा होने के बाद मैं वापिस आया तो रास्ते में ईशा मेरा इंतजार कर रही थी और माफ़ी मांगने लगी तो मैंने कहा ऐसे सड़क पर मत शुरू हो जाओ .. तुम १५ मिनट के बाद अपने पुराने घर में चलो . आज वहां कोई नहीं है पीछे की तरफ एक दरवाजा खुला रखा होगा उसमे से अंदर चली जाओ ..

उस घर की मुरम्मत चल रही थी और रविवार के कारण लेबर की भी छुट्टी थी और वहां एक कमरे में वहां एक टेबल पर अपने डॉक्टरी के कुछ साजो सामान जो रोजी ले कर आयी थी उसे रखा हुआ था ..

कमरे में एक बड़ी एग्जामिनेशन टेबल थी. एक और टेबल में डॉक्टर के उपकरण जैसे स्टेथेस्कोप, चिमटे , वगैरह रखे हुए थे.

15 मिनट के बाद कांपते कदमों के साथ और भयभीत आँखों के साथ भयभीत ईशा पिछले दरवाजे पर आयी और दस्तक दी। मैंने दरवाजा खोला और ईशा को अंदर जाने का इशारा किया। वह मेरे सामने बिकुल पास आकर खड़ी हो गई।

उसे देखते हुए मैंने अपने मन को भविष्य के उन सुखों का अनुमान लगाया जो ऐसी आकर्षक कामुक स्वभाव लड़की के साथ अपने घर में एकांत में ले सकता था . मैं वहां एक लम्बी सीट परबैठ गया और मैंने उसका सिर से पांव तक सर्वेक्षण किया। उसने छोटी लाल रंग की स्कर्ट और बिना बाजू का सफ़ेद टॉप पहना हुआ था और गहरे गले में से उसकी स्तनों की दरार दिख रही थी .. वह मेरी टकटकी से बुरी तरह से घबरा और शरमा गयी,

कुछ सेकंड चुप्पी छायी रही और मैंने सबसे पहले इस छुपी के जादू को तोड़ा । इस सेक्सी कमसिन कन्या की अपनी आँखों से ताकते हुए मैंने मेरे हाथ जोड़कर उसे संबोधित किया: " तो "ईशा आपने ये बिलकुल सही किया है, मेरे पास इतनी जल्दी आना यह आपकी ईमानदारी और आपकी गलतियों के लिए पश्चाताप करने की आपकी इच्छा को दर्शाता है जिससे आपको जरूर क्षमा और शांति प्राप्त होगी ।"

मेरे इन शालीन शब्दों में ईशा को साहस किया, और उसे लगा उसके दिल से कुछ भार उतर गया है ।

"पहले," मैंने कहा, कुछ सख्ती से, "कुछ मामले हैं जिन पर हमें चर्चा करनी चाहिए।"

मैंने लंबी-गद्दी वाली सीट पर बैठे हुए बोला ईशा मैंने आपके बारे में बहुत सोचा है । कुछ समय के लिए ऐसा कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया जिसमें मैं अपने विवेक को छोड़ कर इस बात को छुपा लू बल्कि मुझे यही लगा मुझे आपके अंकल के पास जाकर उन्हें सब कुछ बता देना चाहिए या फिर मुझे उन्हें सच नहीं बताना चाहिए मैं इसे संशय में था ।

यहाँ मैं रुका और ईशा की और देखा, ईशा अपने चाचा के गुस्से को अच्छी तरह से जानती थी, वो अपने चाचा पर वह पूरी तरह से निर्भर थी, वो इसके बाद क्या होता ये सोच कर ही मेरे इन शब्दों पर कांप गई।

फिर मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए, और धीरे से ईशा को अपने तरफ खींचा, जिससे उसने मेरे सामने घुटने टेक दिए , फिर मैंने मेरे दाहिने हाथ ने उसके गोल कंधे को दबाया. उसके बाद मैं आगे बोला : "लेकिन मैं ऐसा करने पर इसके तुम्हारे साथ होने वाले भयानक परिणामों के बारे में सोचकर परेशान हो गया हूँ जो इस तरह के एक खुलासा होने पर हो सकते है और फिर मैंने कुछ पवित्र ग्रंथों का अध्यन्न किया और मंदिर में इसके बारे में पंसित जी से ज्ञान प्राप्त किया और आपके लिए प्रार्थना की उसके बाद अब मैं वहाी से आ रहा हूँ ..

मुझे आशा है कि हम आपके अपराध के बारे में आपके चाचा को बताने से बचना चाहिए और इससे हम आप पर आने वाले बुरे परिणामो को रोक सकेंगे । हालांकि, इस की लिए आपको एक प्रक्रिया से गुजरना होगा और उस प्रक्रिया को लागू करने के लिए पहली आवश्यकता, आज्ञाकारिता है। "

ईशा अपनी परेशानी से बाहर निकलने के तरीके के बारे में सुनकर बहुत खुश हुई, आसानी से मेरी आज्ञा का अंध पालन करने का उसने तुरंत वादा किया।

"थैंक्यू डॉक्टर अंकल," उसने जवाब दिया, उसकी आँखों से निकले आँसू बहते हुए गाल पर आ गए और उसने अपना सिर झुका लिया " मैं जानती हूँ कि आप हमारा अच्छा ही सोच रहे हैं क्योंकि आप बहुत अच्छे हैं और मैं आपको बताना चाहती हूँ कि आप ये जान ले की मैं और मेरा परिवार आपकी बहुत सराहना और इज्जत करते हैं ।"

"मुझे खुशी है, ईशा, कि तुम्हें इसका एहसास है," मैंने कहा। “मुझे डर था कि आप जिस स्थिति में हैं, उसकी पूरी तरह से समझने के लिए आप बहुत छोटे हो और इसी कारण से है मैं आज आपसे बात कर रहा हूं। आपका आचरण न केवल आपके भाग्य को बल्कि आपके परिवार के भविष्य को भी संचालित करेगा। ईशा, मुझे यकीन है कि मैं आप मुझे निराश नहीं करेंगी। ”

"मुझे आशा है, डॉक्टर अंकल ," उसने जवाब दिया, "आपको मेरी रक्षा करने और मुझे अपनी देख्भाल के तहत मेरी गलतियों को पश्चाताप करने और मुझे सुधारने का मौका देने के आपके निर्णय पर कभी भी पछतावा नहीं होगा;" मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि मैं आपका सम्मान और आज्ञा पालन दोनों करूंगी और आपको हर संभव तरीके से खुश करने की पूरी कोशिश करूंगी । ”

"एक कंगाल और एक सार्वजनिक आरोप वास्तव में एक अप्रिय बात है, और एक दुखद बात है," मैंने कहा, जैसे कि खुद से बात कर रहा हूँ लेकिन मैं अपने आँखिो के निचले हिस्से के बीच ईशा के चरे पर चरम आतंक देख रहा था . मैं बोला ईशा प जो कह रही है उसका मतलब भी समझ्ती है ? क्या आपको यकीन है कि इस परोपकारी कार्य को करने में, आपकी मदद करने में, मैं सभी मामलों में आप मुझे सम्मान देंगी और मेरे हर आज्ञा का पूर्ण पालन करेंगी इस बारे में मैं कैसे सुनिश्चित हो सकता हूं? "

"ओह, अंकल ," वो व्यथित हो कर बोली "आप मुझ पर कैसे शक कर सकते हैं? आपने मुझे मेरी गलती का अहसास कराने में मदद की है और अब आप मुझे पछतावा करने का और गलतियों को सुधारने में नेरी मदद कर रहे हैं और ये काम आप अपनी अद्भुत देखरेख में करेंगे और निश्चित रूप से आपको यह नहीं कभी सोचना चाहिए कि मैं कभी भी इसके लिए आपकी कृतज्ञ नहीं रहूंगी । "

आप जो कहेंगे मैं वो सब करूंगी उसके बाद वो धन्यवाद कहते हुए मेरे पैरो में गिर पड़ी । मैंने अपना सिर उसके ऊपर झुका दिया। मेरे गाल उसके गर्म गालों को छुए, और उसे ऐसे मेरी आज्ञा मानने के लिए राजी होते देख मेरी आँखों में एक अजीब सी रौशनी चमकने लगी, मैंने अपना संयम बना कर रखा और उसके कंधों पर हाथ फेरा तो मेरे हाथ थरथरा उठे।

निस्संदेह मेरी मन विचलित था और मन में आ रहा था उसे अप्निबाहो में लकड़ कर चुम्बन कर दू अपर मैंने फिर खुद को रोका और संयमित किया और फिर मैंने आज्ञाकारिता के आधार पर लंबा व्याख्यान दिया और उसने कहा अंकल मैं आपके मार्गदर्शन में वो सब करूंगी जिसकी आप आज्ञा देंगे ।

ईशा ने पूरे धैर्य से मेरा लेक्चर सुना और म मेरे प्रति आज्ञाकारिता के अपने आश्वासन को दोहराया।
उसकी चमकती आँखों और गर्म जोशीले होंठों को देख मेरी वासना मेरे भीतर भड़क उठी।

मैंने सुंदर ईशा के कंधो और कमर पर हाथ रख कर ऊपर उठाया और अपने और नजदीक किया और उसे नजदीक से देखा, मेरे हाथ उसके गोरी बाहें पर टिक गए फिर मैंने उसका नीचे झुका हुआ चेहरा अपने हाथो में लेकर ऊपर उठाया । मैं अभी और पका करना चाहता था की वो मुझे समर्पित हो गयी है

"ईशा यह कहना काफी आसान है कि आप अपने आप को मेरे आज्ञाकारिता और सम्मान के लिए समर्पित करने की प्रतिज्ञा करती हैं, लेकिन अगर आपके विचार और मेरे विचार किसी मुद्दे पर अगर सहमत नहीं हुए तो और फिर ऐसे समय पर ईशा आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी?"

"ओह, अंकल ," उसने उत्तर दिया, "मुझे यकीन है कि जब मैं ये कहती हूं कि हम आपकी थोड़ी सी इच्छा के अनुसार सब कुछ करूंगी तो आप मेरा विश्वास कर सकते हैं ।"

“ठीक है, इस मामले का फायदा उठाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मैं आपको उसी आधार पर मदद करने के लिए सहमत हूं, जैसे कि आप मेरे दिवंगत मित्र की बेटी हैं और मैं आपको अपनी शिष्य स्वीकार करता हूँ लेकिन आप मेरी इच्छा या योजना से बाहर जाकर कुछ भी कभी भी नहीं करेंगी .. मैं ही आपके आचरण का अंतिम निर्णायक रहूंगा कि आप क्या करेंगी या क्या नहीं करेंगी ; आपकी हर योजना में मुझ से सलाह ली जानी चाहिए और आप कभी भी मेरी अवज्ञा नहीं करेंगी; आपको मेरी हर इच्छा के अनुरूप सहमत होना होगा।

इधर मैं सदा आपसे विनम्र व्यवहार करूंगा और आपकी सबसे अच्छी देखभाल करूंगा और आपको पश्चाताप करने में मदद करूंगा, अपने आचरण को सही करूंगा और आपके इस रहस्य को मेरे पास सुरक्षित रखूंगा।

अन्यथा आपका रास्ता आपके लिए खुला है; आप उन शर्तों के तहत मेरे साथ बनी रह सकती हैं, या आप जो भी अन्य व्यवस्थाएं फिट देखते हैं, अपने लिए कर सकती हैं। और मैं भी तब आज़ाद रहूँगा आपके आचरण के बारे में आपके परिवार को साथ बात करने के लिए ,,

“ओह, अंकल । निश्चित रूप से मैं आपके पास आपकी शिष्या की तरह रहूंगी और आपकी हर बात मानूंगी और मुझे यकीन है कि आप हमे प्यार करेंगे और मैं आपकी अच्छी और सबसे प्रिय शिष्या बनूंगी। ”

"तो ठीक है, यह तय हो गया है," मैंने कहा। अब मुझे तुम्हारी प्रतिबद्धता की जांच करने दो "ईशा इधर आओ और मेरे घुटने पर बैठो," मैंने उसे आज्ञा दी। वह जाहिरा तौर पर उलझन में थी और उसे शर्म आ रही थी, लेकिन मेरे साथ अनुबंध करने के बाद और मेरे सभी आदेशों और इच्छाहो का पालन करने के लिए सहमत होने के बाद मेरे द्वारा किए गए पहले अनुरोध को वो मना नहीं कर सकती थी, उसके पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं था, वह तुरंत उठी और बड़ी नाजुक अदा से मेरे घुटने पर बैठ गयी । ।

"और प्यारी ईशा" मैंने जारी रखा, " अब आप मुझे बताइये कि आप किस तरह से उस आवारा लड़के जीतू के साथ उस पार्क में चली गयी और वहां आपने क्या किया ताकि मुझे आपके अपराध की गंभीरता का पता चल सके और मैं आपकी उचित मदद कर सकूं।

उसने मुझे बताया वो रोज मंदिर जाती थी तो वहां जीतू प्रसाद बांटता था और जब लाइन में मेरी बारी आती थी तो उसे औरो से अधिक प्रसाद दे देता था .. फिर धीरे धीरे वो दर्शनों में भी मेरी मदद कर देता था जिससे मुझे लाइन में नहीं लगना पड़ता था और मेरा समय बच जाता था . फिर एक दिन उसने मुझे उस पार्क मेंएकांत में मिलने को बोला तो मैं भी जिज्ञासा के कारण वहां चली गयी जहाँ उसने मुझे मंदिर से मिले फल और फूल दिए और बोला उसने मेरे लिए ख़ास पूजा की है इससे मेरे परीक्षा अच्छी होंगी .. उस बार मेरी परीक्षा अच्छी हुई और मेरे अच्छे नंबर आये ..

तो वो हर बार मुहे वहां बुला कर कुछ न कुछ फल फूल देने लगा फिर एक दिन उसने मुझे कहा वो मुझे बहुत पसंद करता है और मुझ से दोस्ती करना चाहता है .. तो मैंने इसकी दोस्ती कबूल कर ली . फिर एक दिन उसने मुझे आई लव यू बोल दिया और मैंने भी उसे आयी लव यू बोल दिया

फिर वो मुझ से रोज किस मांगने लगा और एक दिन मैंने उसे किश करने दी तो अगले दिन उसने किश करते हुए मेरे स्तन भी दबा दिए फिर कल उसने मुझे मंदिर में यहाँ बुलाया और मुझे किश किया और उसने मेरे स्तनों को दबाया और फिर मेरी टांगो के बीच हाथ ले गया था . और तभी आप मेरी चीख सुन कर वहां आ गए थे .. इससे ज्यादा उसने कुछ नहीं किया था ..

तो मैंने बोलै ठीक हैं मुझे इसकी जांच करने दो टेबल में लेट जाओ. मैं चेकअप के लिए उपकरणों को लाता हूँ.


कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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01-08-2022, 09:03 PM,
#62
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CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-16

सुपर संडे - ईशा की परख
 





ईशा टेबल के पास गयी पर वो थोड़ी ऊँची थी. चेकअप करने की सुविधा के लिए वो टेबल ऊँची बनाई गयी थी , पर ईशा के लिए तंग और छोटी स्कर्ट में उसपर चढ़ना मुश्किल था. उसने दोनों हाथों से टेबल को पकड़ा , फिर अपना दायां पैर टेबल पर चढ़ने के लिए ऊपर उठाया. लेकिन मैंने देखा ऐसा करने से उसकी स्कर्ट बहुत ऊपर उठ जा रही है और उसकी गोरी टाँगें नंगी हो गयी थी और उसे डर था कही ये स्कर्ट फट ही ना जाए तो ईशा ने टेबल में चढ़ने की कोशिश बंद कर दी. फिर ईशा कमरे में इधर उधर देखने लगी शायद कोई स्टूल मिल जाए पर वहां कुछ नहीं था.

मैंने कहा ईशा रूको पहले मुझे तुम्हारा माप लेने दो और मैंने एक मापने का फीता (इंचीटेप) उठाया और उसके पास गया और बोला अब मुझे तुम्हरा माप पता होना चाहिए मेरे अनुमान से तुम्हारे छाती का साइज 34 होना चाहिए .. तो ईशा शर्माते हुए बोली जी डॉक्टर साहिब 34C. है

मैंने कहाः ठीक है इसे पक्का कर लेते हैं मैंने नाप लेते समय उसकी गोरी रसीली चूचियों का ऊपरी हिस्सा टॉप के कट से दिखने लगा था.मेरी नजरें ईशा की रसीली चूचियों पर ही थी और मैंने अपनी अंगुलियों से उसके टॉप के बाहर से उसकी चूचियों को छुआ और टॉप की फिटिंग देखने के बहाने चूचियों को दबा भी दिया. उसकी चूचियाँ बड़ी सुदृढ़ और कसी हुई थी.. मैंने नाप लेने के बहाने दायीं चूची के निप्पल और फिर बाए निप्पल को अंगूठे से दबाया.

फिर मैंने टेप लिया और झुककर ईशा क पेट की नाप लेने लगा. मैंने उसे टॉप के आधार पर नाप लीया और बोला तुम्हारी कमर 24. इंच है

मुझे उसके स्कर्ट में कुछ वास्तु मह्सूस हुई तो मैंने कहा ईशा अपने स्कर्ट की जेब खाली कर दो इससे तुम्हारा सही माप लेने में सुविधा होगी उसने जेब में से अपना पर्स निकाल कर मुझे दे दिया मैंने देखा उसमे उसके स्कूल का आइडेंटिटी कार्ड था जिससे मुझे ये पक्का हो गया वो 18 साल की कुछ दिन पहले ही हो गयी है फिर उसकी गोल नितम्बो पर अपने हाथ फिराते हुए उसके नितम्बो का साइज माप कर मैं बोला ये 36. है और उसके नितम्बो को दबा दीया और बोलै ईशा अब तुम टेबल पर चढ़ जाओ

“ईशा: डॉक्टर , ये टेबल तो बहुत ऊँची है और यहाँ पर कोई स्टूल भी नहीं है.”

मैं – ओह…..तुम ऊपर चढ़ नहीं पा रही हो. असल में ये एग्जामिनेशन टेबल है इसलिए इसकी ऊँचाई थोड़ी ज़्यादा है. ….ईशा , एक मिनट रूको.

ईशा टेबल के पास खड़ी रही और कुछ पल बाद मैं उसके पास आ गया .

मैं – ईशा तुम चढ़ने की कोशिश करो, में मदद करूँगा.

ईशा “ठीक है डॉक्टर अंकल .”

ईशा ने दोनों हाथों से टेबल को पकड़ा और अपने पंजो के बल ऊपर उठने की कोशिश की. मैंने उसकी जांघों के पिछले हिस्से पर अपने हाथ रख कर वहाँ पर पकड़ा और ईशा को ऊपर को उठाया . इस समय उसकी सुंदर गांड ठीक मेरे चेहरे के सामने थी. इसके बाद मैंने ईशा को और ऊपर उठाना बंद कर दिया और ईशा उसी पोज़िशन में रह गयी. अगर ईशा अपना पैर टेबल पर रखती तो उसकी स्कर्ट बहुत ऊपर उठ जाती इसलिए वो बोली डॉक्टर अंकल मुझे थोड़ा और ऊपर उठाइए, मैं ऊपर नहीं चढ़ पा रही हूँ.”

मैंने उसके दोनों नितंबों को पकड़कर उसके सुन्दर मांसल नितंबों को दोनों हाथों में पकड़कर ज़ोर से दबा दिया.

फिर मैंने उसे पीछे से धक्का दिया और ईशा टेबल तक पहुँच गयी. जब तक ईशा पूरी तरह से टेबल पर नहीं चढ़ गयी तब तक मैं ने उसके नितंबों से अपने हाथ नहीं हटाए और मेरे हाथ स्कर्ट से ढके हुए उसके निचले बदन को महसूस करते रहे.

मैं नितंबों को धक्का देकर ईशा को ऊपर चढ़ा रहा था. शरम से उसके कान लाल हो गये और उसकी साँसें भारी हो गयी थीं.

अब ईशा टेबल में बैठ गयी और मैंने उसे लेटने को बोला

ईशा की चूचियाँ दो बड़े पहाड़ों की तरह ,उसकी साँसों के साथ ऊपर नीचे हिल रही हैं.

मैं – ईशा तुम तैयार हो ?

“हाँ जी .”

मैं – अब तुम्हारी नाड़ी देखता हूँ.

ऐसा कहते हुए मैंने उसकी बायीं कलाई पकड़ ली. मेरे गरम हाथों का स्पर्श उसकी कलाई पर हुआ , तो ईशा का दिल जोरों से धड़कने लगा .शायद कल जीतू ने उसे कल गरम करके अधूरा छोड़ दिया था उस वजह से ऐसा हुआ हो.

मैं – अरे ….. ईशा , तुम्हारी नाड़ी तो बहुत तेज चल रही है , जैसे की तुम बहुत एक्साइटेड हो . लेकिन तुम तो अभी अभी मंदिर से पूजा करके आई हो , ऐसा होना तो नहीं चाहिए था…...फिर से देखता हूँ. अब तो तुम को कोई डर नहीं लगना चाहिए .. अगर तुम्हे कोई डर है तो उसे मन से निकाल दो

मैं ने उसकी कलाई को अपनी दो अंगुलियों से दबाया.

मैं – क्या बात है ईशा ? तुम शांत दिख रही हो पर तुम्हारी नाड़ी तो बहुत तेज भाग रही है.

“मुझे नहीं मालूम मैं .”

ईशा झूठ बोलने की कोशिश की पर मैं सीधे उसकी आँखों में देख रहा था .

मैं – तुम्हारी हृदयगति देखता हूँ.


कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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06-05-2022, 07:46 PM,
#63
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पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-18

सुपर संडे - जाल में ईशा



अब मुझे सब समझ आ गया था की जीतू और ईशा के बीच उस दिन क्या हुआ था

पहले जीतू ने ईशा को चुंबन किये थे फिर उसके स्तन दबाये थे और अपनी पेण्ट खोल कर जब उसने अपना लंड बाहर निकाला था तो ईशा ने लंड देख कर शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर ली थी और जीतू ने जल्दबाजी में लंड ईशा की योनि में अंदर डालना चाहा था पहली बार लंड इतनी आसानी से अंदर नहीं जाता इस बीच लंड अंदर डालने के चक्कर में उसका उत्तेजित लंड बाहर ही स्खलित हो गया था और जब जीतू अपना लंड ईशा की योनि के अंदर डालने के कोशिश कर रहा था तो ईशा क बहुत दर्द हुआ और साथ ही उसी समय हवा के कारण वो पका हुआ आम उसी समय ईशा के ऊपर गिरा और ईशा जोर से किल्ला पड़ी थी .. और मैं वहां झाड़ियों से निकला आया था ..

मैंने उसे कहा ईशा अब टेबल से नीचे उतर कर इधर आओ और मेरे घुटने पर बैठो," मैंने उसे एक बार फिर आज्ञा दी। अब वो इस उलझन में थी की उसकी जांच के क्या नतीजे आये हैं लेकिन अब उसे शर्म नहीं आ रही थी क्योंकि मैं उसके गुप्तांगो को देख चूका था , उसके पास अब कोई दूसरा विकल्प बिलकुल नहीं था, वह तुरंत उठी और बड़ी नाजुक अदा से मेरे घुटने पर बैठ गयी । और उसने पेंटी पहनने में कोई रूचि नहीं दिखाई .

मैं उसे अपनी बाहो में ले कर उसे अपने पास खिंचा और उसे प्यार के साथ चूमा वो पहले तो निष्क्रिय रही और मुझे आलिंगन करने दिया लेकिन उसने चुम्बन का गर्मजोशी से जबाब नहीं दिया ।

मेरा हाथ उसके घुटने पर आ गया और वो अपने पैर को ऊपर-नीचे करने लगी। उसका चेहरा लाल हो गया, उसकी आँखें बंद हो गईं और वह धीरे से बोली , "ओह, डॉक्टर अंकल, मुझे नहीं लगता कि आपको ऐसा करना चाहिए; कॉन्वेंट में सिस्टर्स ने हमें सिखाया कि किसी लड़की को किसी पुरुष को अपना शरीर छूने की अनुमति नहीं देनी चाहिए । ”

ईशा, "मैंने एक हंसी के साथ कहा," आप पहले से ही उस बदमाश जीतू को आपको छूने की अनुमति दे चुके हैं। इसलिए इस दलील को आप अब छोड़ दे और अब हम जो पहला काम करने जा रहे हैं, वह यह है कि आपकी कान्वेंट की सिस्टर्स के द्वारा आपको सिखाई गई कुछ महान चीजों को आप अपने दिमाग से निकाल दीजिये । मैं आपका डॉक्टर और गुरु हूं और जैसा की आपने अभि थोडी देर पहले ही मुझ से वादा किया है आप मेरी हर बात मानने के लिए बाध्य हैं और इसलिए मुझे आप पर पूर्ण अधिकार है और मैंने उसकी चिकनी और खूबसूरत जांघ पर चुटकी ली

उसका कोमल शरीर मेरी बाहों में समा गया और मैंने उसके नितंबों का नरम दबाब अपने पैर पर महसूस किया क्योंकि वह घुटने के बल मेरी टैंगो पर बैठी थी। मैं उसे बार-बार गर्म, भावुक, कामुक चुंबन करने लगा जिससे उसकी कामुक भावनाये भड़क जाए और वो मेरा साथ देने लगे.

मैंने उसका चेहरा पकड़ कर उसकी माथे फिर उसकी आँखों फिर पलके फिर उसकी नाक और , उसके गुलाबी गालो मुँह ओंठो को चूम लिया, उसके बाद मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा । अंत में, उसकी गर्दन से मेरी बांह को ढीला करते हुए, मैंने उसके सिर को उठाया, और उसकी आँखे में दख कर मुस्कुराया और ईशा को आराम करने दिया ।

“ओह, डॉक्टर आपकी चुम्बन से मुझे कुछ होता है ।" उसकी कामुक भावनाये भी जगने लगी थी मैंने कोमल और कमसिन ईशा के टॉप पर अपना हाथ रख दिया और उसके विकसित स्तनों पर ले गया जो उसके शानदार जिस्म के सबसे आकर्षक आभूषण थे और उन्हें हलके से सहलाया

फिर मेरे हाथों ने उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें उसकी सिल्की टॉप के कपडे के ऊपर से दबाया. ईशा ने इस घुसपैठिये को उसके नारीत्व की शान से दूर धकेलने के लिए अपने कमजोर हाथ से कोशिश की , लेकिन उसकी छोटी उंगलियाो वाले सुन्दर हाथ को मेरे बड़े और मजबूत हाथ ने पकड़ लिया ।

“नहीं, डॉक्टर अंकल ! नहीं न! नहीं न! मैं आपसे विनती करती हूं, '' वह धीमी आवाज में बड़बड़ायी क्योंकि उसने मेरी पकड़ से छूटने का असफल प्रयास किया । “ प्लीज नहीं-आप मुझे वहाँ नहीं छुओ ओह, कृपया वहां नहीं! ”

“ईशा! क्या तुम मेरा संरक्षण और मेरी देखभाल से दूर जाने का बहाना ढूंढ रही हो? तुम मुझे अपने चाचा को आपने जीतू के साथ क्या किया है बताने के लिए बाध्य तो नहीं कर रही हो ? ” मैंने साँस ली, मेरी आवाज़ गूंज उठी और उसका प्रतिरोध ये सुनते ही दब गया और मैंने उसके स्तनों को कस के पकड़ किया और दबा दिया ।

"नहीं न! नहीं न!" प्लीज आप ऐसा मत करना ईशा गिड़गिड़ाई आप प्लीज मेरे अंकल को कुछ मत बताना, उसे फिर अपने चाचा के गुस्से और अंजाम याद आ गया जिसके भय के कारण वो सिहरने लगी . " मैं चाहती हूं कि आप ऐसा न करें और कृपया मेरे चाचा को कुछ भी न बताये लेकिन डॉक्टर, आप जानते हैं कि इस तरह से मेरे अंगो को महसूस करना आपके लिए सही नहीं है। कृपया मुझे जाने दीजिये।"

" ईशा देखो मैं तुम्हारे साथ बहुत ही सौम्य रहूँगा और वादा करता हूँ कि मैं तुम्हें कोई चोट नहीं पहुँचाऊँगा। मैं केवल यह देखना चाहता हूँ कि तुम्हारे अंगो का विकास कैसा हुआ है और तुम कितनी सुन्दर हो ।"

"लेकिन, डॉक्टर -" और इस बीच मैंने उसके टोप की डोरियों को खोल दिया और उसे नीचे गिरने दिया जिससे अब उसके ऊपरी बदन पर सिर्फ लाल रेशमी ब्रा रह गयी और मैंने उसकी ब्रा के अंदर अपना हाथ डालकर, उसकी कोमलता को कोमलता से सहलाते हुए गर्म करने लगा । । "ओह प्लीज, डॉक्टर, मैं आपसे भीख माँगती हूँ," वह रो पड़ी, और अपना हाथ बढ़ाते हुए, उसने अपनी ड्रेस को वापस ऊपर करने का प्रयास किया, और मैंने उसके स्तनों को अपने हाथ से पकड़ लिया और दबाया ।

मैंने उस संघर्षरत लड़की की एक स्तन को पकड़ कर ब्रा के कप से बाहर निकाल दिया और उसके सुंदर चेहरे पर झुकते हुए उसे बार-बार चूमा। उसके होठों पर मेरे ध्यान को स्थानांतरित करते हुए, फिर अमिन उसके ओंठ चूसने लगा और मैंने हाथो से उसके स्तनों को बार-बार सहलाया; अपनी उँगलियों से मसलते हुए, मैंने मजबूती से उसके उरोजों के पास उसके हाथ को पकड़ लिया।

फिर मैंने उसकी छाती पर मेरे सिर को दफ़न कर उसके स्तनों के बीच की दरार को चूमा

उस युवा लड़की ईशा ने मुझ से बचने के लिए संघर्ष किया और अपनी आंनद लेने की उभरती हुए इच्छा को लात मारी और उसके गर्म शरीर में दबे हुए मेरे सिर को उसके छोटे हाथों से हटाने की कोशिश की.. उस समय मेरे होंठ, उसके खड़े होकर बाहर को निकल रहे निप्पल की स्ट्रॉबेरी रंग की टिप को कोमलता से चूस रहे थे । मैंने एक पल के लिए उसे मेरे आलिंगन से निकलने दिया और वह उछली और मुझ से दूर छिटकी और सोफे पर लेट गयी और सुबकते हुए बेतहाशा आंसू बहाने लगी जिसे देखकर किसी का भी दिल पिघल जाता ।

मुझे उस पर दया आयी और साथ ही उसे देख कर मेरी आवेशपूर्ण इच्छाओंने मुझे मजबूर किया और मैंने उसकी अश्रुपूर्ण सुंदरता का सर्वेक्षण किया जैसे वह वहाँ लेटी हुई थी उसने मेरे कामुक दिमाग में उसकी प्यारी सी कामुक तस्वीर पेश की क्योंकि उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे, उसका टॉप उतरा हुआ था और उसके स्तन उसकी ब्रा से बाहर झाँक रहे थे उसकी छोटी स्कर्ट उसकी जंघाओं से ऊपर उठी हुई थी और उसकी सुंदर और केले के तने जैसी चिकनी जांघों का विस्तार प्रदर्शित कर रही थी और एक-दो पल इस दृश्य को देखने के बाद मैंने उस रोती हुए सुंदर कमसिन युवती से धीरे से बात की।

“ ईशा ! मुझे देखो, मैं तुमसे बात करना चाहता हूं। ”
"ओह, डॉक्टर अंकल," उसने सर हिलाया। "मैंने कभी नहीं सोचा था कि आप मेरे साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे।"

उसकी बात सुन कर मैंने एक बार फिर कड़क आवाज में कहा। “मूर्ख लड़की की तरह की बात मत करो; ईशा ! क्या तुम चाहती हो कि मैं तुरंत आपके चाचा के पास जाऊं और उन्हें कल शाम की घटना की सूचना दू ताकि वो आपको घर से निकाल कर इस निर्दयी दुनिया में अकेला छोड़ दे और उसके बाद आप अगर मेरे पास आएँगी तो भी मैं आपकी कोई मदद नहीं कर पाऊँगा ? या आप अभी मेरी इच्छानुसार चलना पसंद करोगी ? मुझे जवाब दो। क्या आप मेरा साथ चाहती हो या जाना चाहती हो ? "

"हाँ, डॉक्टर अंकल ," वह कुछ लम्बे अंतराल के बाद सोच कर बोली । " हाँ , मैं आपका साथ चाहती हूं, लेकिन ओह, मैं ये भी चाहती हूं कि आप मुझे ऐसे शर्मिंदा न करें ताकि मैं वो सब करूं जो आप मेरे साथ अब करना चाहते हैं-आप जानते हैं कि मैं यहां से नहीं जा सकती क्योंकि , अगर आप मेरे चाचा को कुछ बताते हैं तो मैं कहीं की नहीं रहूंगी और वास्तव में आपको इस तरह से मेरा फायदा नहीं उठाना चाहिए।


कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
Reply
06-24-2022, 09:00 AM,
#64
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे



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CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-19

सुपर संडे - इजहार 



"अच्छा बहुत अच्छा," मैं बोला , "अब तुम एक समझदार लड़की की तरह वर्ताव कर रही हो ।अब रोना बंद करो आँसुओं को पूछो और मेरे पास यहाँ आओ।

ईशा धीरे-धीरे कड़ी हुई और मेरे पास आयी उसके आँसू अभी भी उसकी लाल हो चुकी आँखों से छलक रहे थे। मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और मैंने हाथ बढ़ा कर उसके आंसू पूंछे

"यहाँ खड़ी रहो," मैंने आदेश दिया, "सीधे मेरे सामने।" मैंने अपने पैर फैलाए और उसे अपने पास खींच लिया। मेरे हाथ उसके स्तनों पर चले गए और मैंने फिर से सुंदर गोल स्तनों को खींचा, जिससे वे अपनी खुली पोशाक से पूरे बाहर निकल आये । शर्म के मारे ईशा ने अपनी आँखें बंद करके अपना सिर घुमा लिया, और धीरे से मुझ से दूर हो गई । उसे अपने सौंदर्य के इस प्रदर्शन पर उसे बहुत शर्म आ रही थी.

मैं बोलै ईशा तुम क्या कर रही हो और मैंने फिर उसकी पतली कमर में एक हाथ डालते हुआ अपने पास मौजूद उस अनमोल सौंदर्य के खजाने वाली लड़की को अपने पास खींचा इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया । उसने अपनी भुजाओं से अपने स्तनों को ढकने की कोशिश की और अपने हाथो से अपने स्तनों के कस कर ढक लिया और उसके स्तन उसकी मुट्ठियाँ में दब गए लेकिन जब मेरा गर्म हाथ उसके जांघो को सहलाने लगा तो उसके पैर अकड़ने लगे, तो उसने वापिस पीछे हटने का प्रयास किया।

"नहीं, ईशा," मैंने कहा, "मेरा सब्र अब खत्म हो रहा है । अब, ध्यान में रखना अगर मेरा धैर्य समाप्त हो गया है, तो इसका कुछ गंभीर परिणाम होगा; मेरे करीब खड़ी रहो और मुझे इस खूबसूरती का आनंद लेने दो । ” वो पीछे तो नहीं हटी पर फिर कुछ सोच कर ईशा विरोध करते हुए बोली लेकिन कल आप ही कह रहे थे मैंने जीतु के साथ जो भी किया वो उचित नहीं किया है ऐसे काम से मुझे और मेरे परिवार को बदनामी और दुखो से सिवा कुछ नहीं मिलेगा और अब आप मेरे साथ वही करना चाहते हैं ..

मैंने कहा उस समय में और आज बहुत अंतर है एक तो तुम ये सब उस आवारा जीतू के साथ कर रही थी जो किसी भी तरह से तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की का साथ पाने योग्य नहीं है, और तुम्हारी जांच करने के बाद मुझे ज्ञात हो गया है तुम इस आनद का कुछ मजा ले चुकी हो.

और फिर मैंने तुम्हारे स्कूल के आइडेंटिटी कार्ड में पढ़ा है की तुम जीव विज्ञानं की छात्रा हो और निश्चित रूप से डॉक्टर बनना चाहती हो पर शायद तुम्हारे चाचा इसके लिए तुम्हारा खर्चा न उठा पाए तो तुम डॉक्टर नहीं बन पाओगी और इसमें मैं तुम्हारी मदद करूंगा .. तुम्हे कॉलेज में एडमिशन दिलवाने और तुम्हारी पढाई का पूरा खर्च उठाने में मैं तुम्हारी मदद करूंगा और इस दुनिया में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता है इसके बदले में तुम मुझे अपना प्यार दो मैंने उसे एक नया प्रस्ताव दिया मैं तुम तब से प्यार करता हूँ जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था और तुम्हे पाना चाहता था

मैंने उसे कहा " ईशा आपने एक बार पहले ही जीतू के साथ इस आनंद का थोड़ा सा स्वाद चख लिया है अब मैं आपको उन अध्भुत उल्लासपूर्ण प्रसन्नताओ, मजो और आनद का का पूरा स्वाद चखाउंगा जिनके बारे में शायद आपने सुना भी नहीं होगा और मेरी बाहों में इस क्रिया में उत्साहपूर्ण आनंद की वो संवेदनाओं आपको शीग्र ही मिलेंगी, जिसके बाद आप मेरेइनके बिना रह नहीं पाओगी । आप मेरे साथ कामुक आनंद के समुद्र में तैरोगी । आप अपने मधुर शरीर को मेरे सान्निध्य में ले जाने के हर समय उत्सुक रहोगी और हम दोनों अपनी तीव्र भावनाओं को साझा करते हुए इस स्वादिष्ट आनंद का लाभ लेते रहेंगे । "

ईशा अब तुम ध्यान से मेरी तरफ देखो और ध्यान से सुनो ये मैं तुम्हे आखिरी बार बोल रहा हूँ अब या तो तुम मेरा प्रताव स्वीकार कर मेरे पास आओगी या फिर अपनी पैंटी उठा कर बाहर चली जाओगी पर उस से पहले ये देख लो ताकि तुम्हे ये नदाजा लग जाए की मेरा प्रस्ताव ठुकरा कर तुम किन मजो और आंनद के अनुभवों से वंचित रह जाओगी जो तुम्हे मेरे साथ मिल सकते हैं और जिनके बारे में तुम ने श्याद ना तो सुना हो न ही देखा हो और ना ही पढ़ा हो वैसे भी तुम्हे किसी की तो होना ही है .. तो वो कोई मैं होना चाहता हूँ

ये बोल कर मैंने अपनी टांगो को थोड़ा खोला और अपनी ज़िप को नीचे कर उसे अपने अंडरवियर के नीचे अपने लंड के उभार की एक झलक दिखाई और उसे बोला तुमने जीतू के लंड का उभार कल देखा था और जिसके बाद तुमने अपनी आँखे बंद कर ली थी अब इस उभार कर देख कर अंदाजा कर लो तुम क्या खो रही हो .. और अगर मुझे स्वीकार करोगी तो तुम्हे क्या मिलेगा और मैं तुम्हे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता था और मुझे लग रहा था इस तरह तुम मुझे मिल सकती हो इसलिए ही मैंने ये सब किया था और तुम्हे कोई तकलीफ हो ये तो बिलकुल भी नहीं देख सकूंगा इसलिए कल क्या हुआ ये किसी से भी नहीं कहूंगा पर ये तुम्हारे लिए बेहतर होगा अगर तुम उस आवारा जीतू से दूर रहो क्योंकिउसके साथ तुम्हे दुःख के सिवा कुछ नहीं मिलेगा और वो किसी भी तरह से तुम्हारे लायक नहीं है

मेरी वजह से जो तुम्हे दुःख हुआ है .. आशा है तुम मुझे उसके लिए माफ़ कर दोगी .. ये सिर्फ मेरे मन में जो तुम्हारे प्रति प्यार है जो मैं ये सब कह रहा हूँ

ईशा ने आश्चर्य और खुशी की भावनाओं के साथ मेरे इस प्रस्ताव को सुना। मेरे लंड के उभार के नज़ारे और मेरी बातो ने उसकी गर्म कामुक भावनाओ को जगा दिया .. उसका डर गायब हो गया उसने मेरे साथ मिलने वाले आंनद की कल्पना की और उसे वो कहानिया याद आयी जो उसने अपने साहेर्लियो से उनके यौन अनुभवों के बारे में सुना था .. उसे मेरे उभार के देख कर अंदाजा हुआ की मेरा लंड निश्चित रूप से उसकी सभी सहेलियों के साथियो के लंड से लम्बा मजबूत और बड़ा था और फिर मैं उसका भार उठाने में सक्षम तह और उसे बहुत प्यार भी करता था .. ये सब सोच कर वो मुस्कुरायी और अब उसने मेरे साथ खेल खेलना का निर्णय लिया वो कुछ नहीं बोली

वो मुड़ी और मुस्कुराती हुई दूसरी मेज जहाँ पर उसकी पेंटी पड़ी थी उस तरफ बढ़ गयी .. मेरा दिल मेरे मुँह तक आ गया की मेरी पूरी मेहनत के बाद भी ये मछली मेरे जाल से निकल गयी थी और अब कभी भी मैं इस से नहीं मिल पाऊँगा .. वो मेज के पास पहुँच कर पीछे की और मुड़ी और मुझे देखने लगी और गंभीरता से कुछ सोचने लगी तो मैंने अपनी बाहे फैला कर उसे मेरे पास आने का निमंत्रण दिया पर वो फिर वापिस अपनी पैंटी की तरफ मुड़ गयी और नीचे झुकी तो मुझे लगा अब ये पैंटी उठा कर बाहर चली जायेगी . और मैंने सर नीचे झुका लिया .. तभी उसके चलने की आवाज आयी तो मैंने देखा उसने पैंटी अपने मुँह में पकड़ी हुए थी और उसका मुँह मेरी तरफ था और वो बड़े शरारती तरीके से मुस्कुरा रही .. मैं उछला और उसकी तरफ लपका और उसे बाहों में भर लिया और फिर उसकी पैंटी को अपने मुँह में लिया और उसे बाहो मिलकर गोल घूमने लगा और .. फिर पता नहीं पैंटी कब नीचे कहाँ गिर गयी फिर उसके गुलाबी होंठो पर एक लम्बा गर्म चुम्बन किया


कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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06-24-2022, 09:01 AM,
#65
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-20

सुपर संडे ईशा की तयारी 



अब ईशा ने होले से अपने कांपते हुए अधरों को मेरे होंठों पर रख दिया। मिन्ट की मीठी और ठंडी खुशबू मेरे अन्दर तक समा गई। संतरे की फांकों और गुलाब की पत्तियों जैसे नर्म नाज़ुक रसीले होंठ मेरे होंठों से ऐसे चिपक गए जैसे कि कोई चुम्बक हों। फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे होंठों पर फिराई। पता नहीं कितनी देर मैं तो मंत्रमुग्ध सा अपने होश-ओ-हवास खोये खड़ा रहा।
मेरा मुंह अपने आप खुलता गया और ईशा की जीभ तो मानो इसका इन्तजार ही कर रही थी। उन्होंने गप्प से अपनी लपलपाती जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मैंने भी मिश्री और शहद की डली की तरह उनकी जीभ को अपने मुंह में भर लिया और किसी कुल्फी की तरह चूसने लगा। फिर उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाल ली और मेरा ऊपर का होंठ अपने मुंह में भर लिया। ऐसा करने से उनका निचला होंठ मेरे मुंह में समा गया। जैसे किसी ने शहद की कुप्पी ही मेरे मुंह में दे दी हो। मैं तो चटखारे लेकर उन्हें चूसता ही चला गया। ऐसा लग रहा था जैसे हमारा यह चुम्बन कभी ख़त्म ही नहीं होगा।

एक दूसरे की बाहों में हम ऐसे लिपटे थे जैसे कोई नाग नागिन आपस में गुंथे हों। उनकी चून्चियों के चुचूकों की चुभन मेरी छाती पर महसूस करके मेरा रोमांच तो जैसे सातवें आसमान पर ही था। फिर उन्होंने मेरे गालों, नाक, ठोड़ी, पलकों, गले और माथे पर चुम्बनों की जैसे झड़ी ही लगा दी। अब मेरी बारी थी मैं भला पीछे क्यों रहता मैं भी उनके होंठ, गाल, माथे, थोड़ी, नाक, कान की लोब, पलकों और गले को चूमता चला गया। उनके गुलाबी गाल तो जैसे रुई के फोहे थे। सबसे नाज़ुक तो उनके होंठ थे बिल्कुल लाल सुर्ख।

मैंने ईशा की चूसने लग और ईशा मेरी जीब चूसने लगी फिर ईशा मेरी झीब से खेलने लगी और मैं ईशा की झीभ से खेलने लगा जो ईशा करती थी मैं भी वही कर उसका जवाब देता था वह जीभ फिराती मैं जीभ फिराता वह ओंठ चूसती मैं ओंठ चूसता वह मेरे साथ लिपट गयी उसका बदन मेरे बदन से चिपक गया उसके दूध मेरी छाती में दब गए थे ईशा के हाथ भी मेरे बदन पर फिर रहे थे. हम दोनों एक दुसरे को बेकरारी से चूमने लगी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। कम से कम 15 मिनट हम एक दुसरे के लबों को चूमते रहे मैं तो इतना उत्तेजित हो गया था कि मुझे तो लगने लगा था मैं पैन्ट में ही झड़ जाऊँगा। फिर ईशा रुक कर सांस लेती हुई बोली सच मजा आ गया l

उसने मेरे गालो पर एक किश कर दी .मेरा लंड सलामी देने लगा पर मैंने उसे दबा दिया पर मुझे लगा ईशा ने मेरा खड़ा लंड महसूस कर लिया था और वह मुझे देख कर मुस्कुरा दी तो मैं भी मुस्कुरा दिया

उसने मेरे लंड पर हाथ रख कर बोली चलो टेबल पर चलते हैं तो मैंने कहा ईशा रुको मेरी बात सुनो

ईशा तुम कुंवारी हो और मेरा मानना है पहला मिलन हर लड़की के लिए ख़ास होना चाहिए ताकि वो से हमेशा याद रहे और उसकी मीठी यादें उसके जहाँ में हमेशा बनी रहें तो मैं चाहता हूँ इस मौके को ख़ास बनाया जाए

तो ईशा बोली फिर आप क्या करना चाहते हैं मैंने कुछ सोचा और सोफे पर बैठ गया और ईशा को अपनी टांगो पर बिठा कर चूमा और अपना मोबाइल फ़ोन उठा कर कुछ फ़ोन मिलाये और .. फिर मैंने ईशा के माप के कपड़ो के लिए एक दूकानदार को बोला और उसने ईशा और मेरे कपडे होटल में पहुंचा दिए फिर फिर ईशा से बोला मैंने होटल में कमरा बुक करवा दिया है और उसको सजाने को भी बोल दिया वही चलते हैं उसके बाद मैंने ईशा से पुछा तुम किसी पारलर वाली को जानती हो

तो ईशा बोली मैं अपनी पहचान वाले ब्यूटी पारलर वाली को वहीँ बुला लेती हूँ

फिर मैंने टैक्सी बुलाई और दोनों चुपके से उसमे बैठ कर होटल में चले गए वह ब्यूटी पारलर वाली भी आगयी थी और होटल वालो ने उसे उस कमरे में जाने दिया था और वहां उसने अपना सब सामन सजा कर त्यार कर लिया था .. उस समय घड़ी में १२ बजे थे

वो वहां ईशा की त्यार करने ले गयी . ये हनीमून सूट के नाम का स्पेशल कमरा था जिसमे एक बैडरूम .. एक त्यार होने का कमरा और बाकी बहुत सारी अन्य सुविधाएं थी ..

.वह पारलर वाली की शक्ल जीतू से बिलकुल मिलती थी तो मैंने उससे पुछा तुम क्या जीतू को जानती हो तो वो मुस्कुरा दी . इस मुस्कराहट की कहानी ईशा की कहानी के बाद ...

पारलर वाली ने एक लड़की को मेरे पास भेजा .. बोली मैंने इसे सब समझा दिया है ये जो तुम चाहोगे वह सब करेगी .. वो मेरे पास आयी और मुझे दुसरे कमरे में ले गयी जहाँ से मैं ईशा को त्यार देख सकता था पर ईशा को नहीं मालूम था मैं उसे देख रहा हूँ .. वह लड़की जिसका नाम रीती था बहुत सुन्दर थी .. पर अभी मेरे दिल दिमाग में ईशा ही घूम रही थी .. तो मैंने अपने सब बाल साफ़ करने को कहा .. तो मेरा लंड देख कर वह बोली सर मैडम ने आपका ख़ास ख्याल रखने को कहा है म

तो मैंने कहा रीती अभी सिर्फ बाल साफ़ कर दो .. बाकी काम जल्द ही करेंगे . सफाई करवाने के बाद रीती ईशा के पास चली गयी . और ईशा और अपने सब कपडे उतार कर उसके पूरे शरीर की मालिश की ,, रीती और ईशा का गोरा नंगा बदन देख मेरा लंड खड़ा हो गया तो तभी पारलर वाली लड़की जिसका नाम हेमा था मेरा लंड सहलाने लगी तो मैंने उसे आँख मारी और तौलिए लपेट कर जहाँ ईशा के मालिश हो रही थी वही चला गया और फिर हेमा ने रीती को मेरे पास भेज दिया और उसने मेरी भी मालिश कर दी ,, उसके बाद हम चारो नेमिल कर हल्का सा भोजन किया

फिर हेमा बोली अब आप बाहर जाओ और नहा कर त्यार हो जाओ और बोली रीती आपको त्यार कर देगी और उसके बाद मैं बाहर आ या तो हेमा बाहर छोड़ने आयी और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी तो मैंने उसे रोक दिया अभी नहीं चार बजे आना और रीती को भी सजा कर त्यार कर ले कर आना ..उसके बाद हेमा ने ईशा को नहलाया और रीती ने मुझे नहलाया और त्यार कर दिया और मेरा खड़ा लंड फुफकारता रहा ..

इतने में ईशा त्यार हो कर आयी तो वह लहंगा चोली , गहने नाक में नथ, माथे पर टीका पट्टी बालो में गजरा, मेकअप में गजब की लग रही थी.

ईशा मेरे गले लग गयी और बोली आपने मेरा सपना पूरा कर दिया है अगर आप न होते तो मैं कभी भी इतनी सुन्दर दुल्हन न बन पाती तो मैंने कहा ईशा तुम हो ही इतनी सूंदर के कुछ भी पहन लो सुन्दर हो लगती हो और बिना कपड़ो के और भी सुन्दर लगती हो . तो वो शर्मा गयी तो ईशा ने मुझे एक कातिल स्माइल दी और मेरे को एक मुक्का मारा और बोली बहुत मस्ती सूझ रही है आपको फिर पारलर वाली हेमा ने ईशा को एक फूलो हार दिया जो उसने मेरे गले में डाल दिया और मेरे चरण छु कर बोली मैंने आज से आपको आपने सब कुछ मन लिया है तो मैंने उसे उठाया वो हार उतार कर उसके गले में डाला और उसे अपने गले से लगा कर बोलै तुम्हारी जगह पैरो में नहीं मेरे दिल में है

फिर हेमा ईशा को ले गयी और बोली आप थोड़ी देर यही रुको .. फिर वो मेरे पास आयी तो मैंने उसे उसकी फीस अदा की और इनाम भी दिया और हेमा बोली आप ईशा के पास जा सकते हो.. फिर वो दोनों चार बजे आने का वादा कर चली गयी ..

ईशा १८ साल की थी पर लगती थी जैसे १६ साल की कमसिन कली हो , लेकिन वो बला की खूबसूरत थी, हाईट 5 फुट 9 इंच, गोरी, भूरे बाल, पतली पर सही जगहों पर भरा हुआ मजबूत मांसल बदन, वो एकदम पोर्नस्टार जैसी लगती थी. मेरी उससे बहुत कम बात हुई थी, लेकिन मुझे मालूम था कि आज इस जन्नत की सैर करने का मौका भगवान् ने दे ही दिया है. में आज लंबी नाजुक ईशा को जी भर कर प्यार कर्रूँगा ऐसी लड़की नसीब वाले को ही मिलती है कमरा गुलाब के फूलों से सज़ा था और सेज़ पर दुल्हन बानी ईशा बैठी थी.

उसके जाने के बाद मैं उस कमरे में चला गया जहाँ ईशा दुल्हन बनी मेरा इंतज़ार कर रही थी
वो कमरा जिसे सुहागरात का कमरा आप कह सकते हैं उसे को बहुत शानदार तरीके से सजाया था - पूरे कमरे में फूल ही फूल। बिस्तर पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ। पूरे कमरे में फूलों की ही महक! टी-स्टैंड पर स्पार्कलिंग शैम्पेन की बोतल एक कूलिंग बकेट में रखी थी, और उसके साथ दो शंपाइओं ग्लास रखे हुए थे। दूसरे टी-स्टैंड पर चॉकलेट का डब्बा रखा हुआ था। कमरे में मूड लाइट्स थीं, और कमरे में पहले से ही एक धीमा, रोमांटिक संगीत बज रहा था। स्टाफ की शरारत थी या कि दूर की सोच, लेकिन वहाँ पर कंडोम का एक पैकेट भी रखा हुआ था। उस बितर पर एक कोने में ईशा बैठी हुई थी उस समय दोपहर के लगभग 1 बज रहे थे कमरे के फल मिठाईया खाने पीने का सामान और केक भी रखा हुआ था .

मुझे आया देख ईशा खड़ी हो गयी और फिर अचानक ही ईशा मेरे पैरों में गिर पड़ी। एक पल को मुझे लगा कि ईशा को शायद चक्कर आ गया। लेकिन जब उसके बाद ईशा को मैंने अपने पैर छूते महसूस किया, तो मैंने ईशा को कंधों से पकड़ कर उठा लिया और कहा,

“अरे! आप यह क्यों कर रही हैं?”

“इसलिए कि मैंने मन से आपको अपना पति और सब कुछ माना है!”

“अरे पगली, तो फिर उसके लिए पैर पड़ने की क्या ज़रुरत है? मैंने आपसे पहले भी कहाः था आप तो मेरे दिल की रानी हैं! आपकी जगह मेरे दिल में है! पैर में नहीं!

इतना सुनते ही ईशा मेरे से लिपट गई। सुहाग के सेज सजी हुई थी ..तो ईशा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे किश किया और बोली आप बहुत अच्छे हो आपने कितना अच्छा इंतजाम किया है वो भी सिर्फ मेरे लिए .. मुझे लगता है मैं कोई सपना देख रही हूँ ..

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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06-24-2022, 09:02 AM,
#66
RE: पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे
पड़ोसियों के साथ एक नौजवान के कारनामे

CHAPTER-5

रुपाली - मेरी पड़ोसन

PART-21

सुपर संडे - ईशा का कौमार्य भेदन
 



ईशा धीरे से बोली अपने बहुत देर लगा दी मैंने आपकी आँखो में मेरे लिए बहुत प्यार देखा है . .आप बहुत अच्छे इंसान हो आपको पाकर मैं बहुत खुश हूँ के मुझे आप जैसा चाहने वाला मिला है .. ईशा बोली अब मैं आपकी हूँ अब मैं आपको पूरा पाना चाहती हूँ .. आप मुझे जी भर कर प्यार करो ..

मैं ईशा को सुहाग के सेज़ पर ले गया और उसे बिठा दिया ..ईशा ने भी चुनरी को ओढ़ कर घूंघट कर लिया मैं बैड के पास आया और ईशा के पास बैठ गया। और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर उनसे बातें करने लगा और बोला मेरी जान मैं तो तुम्हे पहली बार देख कर ही तुम्हारा दीवाना हो गया था

तो ईशा बोली हाँ मैंने भी देखा था आप मुझे मंदिर में ही घूरे जा रहे थे ..आपकी आँखे मेरे एक एक अंग को बहुत गौर से देख रही थी ऐसा लग रहा था आप मुझे जैसा नंगी कर देख रही थे ..

वो बोली जब आप पार्क में मेरी मदद को त्यार आये गए तभी आप मुझे पसंद आ गए थे इसीलिए मैं आप से लिपट गयी थी .. और सोच रही थी काश आप मुझे मिल जाओ तो मजा आ जाए . उसकी बाते सुन मेरा लंड कड़ा हो गया मैंने उससे पुछा तुम तो मान नहीं रही थी फिर मान गयी ?

तो वह बोली उसके बाद जब आपने अपना लंड का उभार दिखाया तो मैंने कहाः अब तड़पना ठीक नहीं है

तो मैंने कहा जब आप मेरा आखिरी प्रस्ताव सुन कर और मुस्कुराती हुई मुड़ कर दूसरी मेज जहाँ पर उसकी पेंटी पड़ी थी उस तरफ बढ़ गयी थी तो . मेरा दिल मेरे मुँह तक आ गया की मेरी पूरी मेहनत के बेकार हो गयी और मैं यही सोच रहा था की अब कभी भी मैं आप से नहीं मिल पाऊँगा .. मैं बहुत निराश हो गया था

फिर जब तुम मेज के पास पहुँच कर पीछे की और मुड़ी थी और मुझे देखने लगी तो मुझे फिर उम्मीद बंधी थी तो मैंने अपनी बाहे फैला कर उसे मेरे पास आने का निमंत्रण दिया था लेकिन जब तुम फिर मुड गयी और फिर वापिस अपनी पैंटी उठाने के नीचे झुकी तो मुझे लगा और ये किस्सा यही ख़त्म हो गया अब तुम पैंटी उठा कर बाहर चली जायेगी . और निराश होकर अपना सर नीचे झुका लिया था ..


फिर जब मैंने तुम्हारे चलने की आवाज सुनी तो मैंने सर उठाया और देखा तुमने बड़े सेक्सी अंदाज में अपनी पैंटी अपने मुँह में पकड़ी हुए मेरी तरफ देख रही थी कर बड़े शरारती तरीके से मुस्कुरा रही थी

तुमने मुझ से पूरा बदला लिया है तो ईशा बोली इसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहती हूँ और प्यार में थोड़ी छेड़छाड़ और सतां तडपाना तो चलता है इसीसे प्यार का पता भी चलता है और प्यार का मजा बढ़ जाता है .. आपने भी तो मुझे कैसे कैसे डराया था ..

..और फिर आप ही बताइये जब आपको पता चाला मैं राजी हूँ तो आपको कितना अच्छा लगा था और आप कैसे उछल गए थे और मुझे अपनी बाहों में भर लिया था ..

मैं बोला बिलकुल अंत भला तो सब भला अब तुम यह बताओ कि मुझे आपके साथ करना क्या है? तो उन्होंने शरमाते हुए मुझे अपनी बाहों में लिया और कहने लगी कि मेरे दीवाने आपको सब मालूम है
मैंने पुछा तुम त्यार हो .. तो वो बोली आप ही देर लगा रहे हो मैं तो कब से त्यार हूँ .. उसकी बात सुन कर मेरा लंड पूरा तन गया .

. ईशा लाल रंग के लहंगे चोली चुनरी और पूरी गहनों से लदी हुई थी. मैंने एक गुलाब का फूल दिया और कहा तुम्हारी खिदमत में पेशे खिदमत है गुलाब

बातें करते करते मैने अपना हाथ ईशा की जाँघ पर रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, फिर ईशा का घूंघट उठा कर मैंने बिस्तर से एक गजरा उठाया और उसको मसल कर उसके ओंठो पर अपने ऊँगली फेरने लगा ईशा मदहोश होने लगी .. अब मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा उठाया और उसके गालों पर चूम लिया। उसने अपनी आँखे बन्द कर लीं। अब मैंने उसके होंठों पर चूमा।

उफ़ऽऽ !!

क्या गुलाब की पंखुड़ी जैसे मलाईदार होंठ थे। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु किया
फिर मैंने धीरे से उसके होंठो को चूमा, उफ उनकी खुशबू ही क्या सेक्सी थी? और मेरे चूमते ही उसकी सिहरन और उनके सोने के कंगनो की टकराहट से छन की आवाज़ मेरे लंड को फौलादी बना गयी थी. और धीरे धीरे अपने हाथ उसके शरीर पर चलाने लगा। उसकी साँसें तेज होने लगी। मैंने उसके उरोजों पर हाथ रखा और उनको दबाने लगा उसके मुँह से सी...। सी...॥ की अवाजें निकलने लगी।
फिर मैंने धीरे से उन्हें अपनी बाहों में लिया और उनके होंठो पर चूमना और अपनी जीभ से गीली चटाई शुरू कर दी. अब ईशा सिहरकर मुझसे लिपट गयी थी और उसकी 34D साईज की चूचीयां मेरे सीने से दब गयी थी.

फिर मैंने उत्तेजना में उन्हें जकड़कर अपनी बाहों में मसल डाला. तो ईशा ने कहा कि मेरी जान धीरे करो बहुत दर्द होता है. आज तक मुझे ऐसे किसी ने नहीं छुआ है .. भगवान् ने मेरा ये सब तुम्हारे लिए ही बचा कर रखा था फिर मैंने उनके गालों पर अपनी जीभ फैरनी चालू कर दी और फिर उसके ऊपर के होठों को चूमता हुआ, उनके नाक पर अपनी जीभ से चाट लिया. अब ईशा उत्तेजित हो चुकी थी और सिसकारियां भरती हुई मुझसे लिपटी जा रही थी. अब में उनके चेहरे के मीठे स्वाद को चूसते हुए उनकी गर्दन को चूमने, चाटने लगा था और मेरे ऐसा करते ही वो सिसकारी लेती हुई मुझसे लिपटी जा रही थी.

अब में ईशा के चोली के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा था. अब उनके मांसल बूब्स दबाने से वो सिहरने, सिकुड़ने और छटपटाने लगी थी

जिससे मैंने जोश में आकर उसकी चुनरी और चोली को उतार दिया उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी भगवान् ने उसे क्या खूबसूरती से बनाया था? अब मेरा लंड तनकर पूरा खड़ा हो गया था और उसका सुडोल, चिकना, गोरा बदन, मेरी बाहों में सिर्फ़ लहंगे में था.

अब उनके होंठो को किस करते हुए उनके मुँह का स्वाद और उनके थूक का मीठा और सॉल्टी टेस्ट मुझे मदधहोश कर रहा था. अब उनकी आहें भरने की सेक्सी आवाज़ और नंगे जिस्म पर आभूषण मेरे लंड के लिए एक वियाग्रा की गोली से कम नहीं थे. फिर वो उत्तेजना से सिसकारी भरते हुए बोली कि ओह मेरे राजा मुझ पर ये क्या हुआ? मुझे मसल दो, मुझ पर छा जाओ, मुझे अब और मत तड़पाओ, आओ मेरे राजा मेरी प्यास बुझा दो.

अब उनकी हालत देखकर मैंने भी सोचा कि देर करना उचित नहीं है और उसके कपडे उतार दिए , क्या मस्त माल था? थैंक यू गॉड , शुक्रिया. फिर मैंने सिर्फ़ गहनों में लदी ईशा के पेट की अपनी जीभ से ही चुदाई कर डाली, सपाट पेट, लहराती हुई कमर, गहरी नाभि और बूब्स पर तनी हुई निपल्स, आँखे अधमुंदी चेहरा और गला मेरे चाटने के कारण गीला और शेव्ड हल्के गुलाबी रंग की चूत, केले के खंभे जैसी जांघे और गोरा बदन.

फिर ०वो बोली ये गहने तो मैंने चूमते चूमते सारे गहने भी उतार दिए अब वो बिलकुल नग्न थे मेरे सामने और स्तनों की गोलाइयाँ, चूचकों का गुलाबी रंग, शरीर का कटाव, कमर का लोच, नितंब का आकार - कुछ भी नहीं छुप रहा था

अब मेरा मन तो कर रहा था कि बस चूमता, चाटता रहूँ और अपनी बाहों में जकड़ कर मसल डालूँ और जिंदगी भर ऐसे ही पड़ा रहूँ और उफ क्या-क्या नहीं करूँ? और फिर अपनी जीभ उनकी चूत पर लगाकर उनकी चूत को चाटने लगा. तो वो उछल पड़ी और मेरे बालों को अपने हाथ में लेकर सिसकारी भरने लगी और बड़बडाने लगी मेरी 18 साल की कुँवारी चूत की प्यास तूने आज और भड़का दी है.

फिर वो मेरी जीभ की मस्त चटाई में ही झड़ गई और मेरे बालों को कसकर पकड़कर मेरे होठों को चूसने लगी. फिर में उठकर उनकी जाँघो के बीच में आ गया और अपने मुँह में उनकी निपल्स लेते हुए अपनी एक उंगली उनकी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा, लेकिन उनकी टाईट चूत बहुत सख्त और तंग थी और मेरी कोशिश पर ईशा चीखने लगती थी, लेकिन बड़ी मुश्किल से मेरी 1-2 उंगली उनकी चूत में अंदर जा पाई.

मैंने अपने कपडे उतार डाले और ईशा मेरा बड़ा लंड देख कर बोली अरे ये तो बहुत बड़ा है ये तो मेरी दुर्गति कर देगा .. तो मैंने कहा दुर्गति नहीं ईशा बहुत मजे देगा .

फिर मैंने ईशा से कहा कि बस एक बार दर्द होगा, मैं भी आराम से करूंगा और तुम जो दर्द हो उसको बर्दाश्त कर लेना फिर सारी जिंदगी मस्ती ले पाओगी. फिर मैंने उनको चूमते हुए और बूब्स दबाते हुए अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर सेट किया और उसकी चूमता चाटता रहा. अब उसकी सुगंध से मेरा लंड जो कि अब पूरा 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा हो गया था, फंनफना कर ईशा की चूत में घुसने की कोशिश करने लगा था.

फिर बड़ी मुश्किल से धक्का लगाने पर मेरा लंड 2 इंच अंदर घुसा तो ईशा की चीख निकल पड़ी, रज्जज्ज आईईईईईईईई दर्द उउउउइईईईईई हो रहा है और और उसकी हथेलियों को अपनी हथेली से दबाते हुए उनकी चूत पर एक ज़ोर का शॉट मारा और मेरा लंड 2 इंच अंदर घुस गया. अब दर्द से दोहरी ईशा ओह ओह कहकर चीखने लगी और छटपटाने लगी थी. फिर मैंने उसकी चीखों की परवाह किए बिना एक ज़ोर का धक्का और मारा तो मेरा फनफनाता हुआ लंड उसकी चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ 5 इंच अंदर घुस गया.

अब वो ओह ओह कहकर ज़ोर से चिल्लाने लगी थी और चीखने लगी थी, आआईईईईई रे , मैं धीरे से उसे सहलाने लगा और चूमने लगा और अपना लंड 2 इंच बाहर निकालकर फिर से एक ज़ोर का शॉट मारा तो मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ चूत की जड़ में समा गया. कौमार्य भेदन हो गया था कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर लेटा हुआ उसे चूमता और उसके स्तनों के सहलाता रहा

कौमार्य भेदन के बाद ही सम्भोग का असली आनंद आता है। मतलब, जो बुरा होना था, वो हो चुका। अब वो इस क्षणिक दुःख दर्द को भूल कर उन्मुक्त भाव से सम्भोग के सुख को भोगना चाहती थी। उसको चूमते सहलाते हुए मैं कह रहा था,

“बस बस… हो गया… हो गया… अब और दर्द नहीं होगा।”

यह कह कर मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ ईशा की जाँघें और खुलती जातीं और अंततः उतनी खुल गईं, जितना कि वो खोल सकती थी। कुछ देर के बाद, मैंने धक्कों की गति कुछ और बढ़ा दी। ईशा का दर्द पूरी तरह ख़त्म तो नहीं हुआ, लेकिन कम ज़रूर हो गया था। मैं ईशा को पूरी तरह भोग रहा था - उसके स्तनों को अपने हाथों से; उसके होंठों को अपने होंठों से; और उसकी योनि को अपने लिंग से। ईशा पुनः रति-निष्पत्ति के चरम पर पहुँच गई थी और उसकी देह कांपने लगी।

“आह….”

उधर मैं लयबद्ध तरीके से धक्के लगाए जा रहा था। साथ ही साथ ईशा को चूमता भी जा रहा था। उसने महसूस किया कि ईशा की साँसे उखड़ने लगी और देह थिरकने लगी। ईशा ने महसूस किया कि पहले जैसा ही, लेकिन अधिक तीव्रता से उसकी योनि में उबाल आने लगा। कामोद्दीपन के शिखर पर पहुँच कर कैसा महसूस होता है, आज उसको पहली बार महसूस हुआ था। वो छटपटाने लगी और उसकी योनि से कामरस छूट गया। ईशा ने मैं के होंठों को अपने मुँह में ले लिया, और उसकी कमर को अपनी टांगों में कस लिया। स्खलन के साथ ही ईशा की आहें निकलने लगी - आज अपने जीवन में पहली बार वो इस निर्लज्जता से आनंद ले रही थी। ईशा ने महसूस किया कि सम्भोग में वाकई पर्याप्त और अलौकिक सुख है। वो मुझ से बोली मुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करते रहना अब मैं हमेशा के लिए तुम्हारी ही रहूंगी !

उधर मैं भी कमोवेश इसी हालत में था। मैं जल्दी जल्दी धक्के लगा रहा था। उसकी साँसें और दिल की धड़कन भी बढ़ने लगी थी। आवेश के कारण मेरे चेहरे पर लालिमा आ गई थी और महसूस कर लिया था कि मेरा स्खलन होने वाला है; और मैं अब ईशा को जोर जोर से चूम रहा था और उसके स्तनों को कुचल मसल रहा था। उसी समय मेरा लिंग ने भी अपना वीर्य ईशा की योनि में छोड़ना शुरू कर दिया। आश्चर्य है कि ईशा की योनि स्वतः संकुचन करने लगी कि जैसे मैं के लिंग से निकलने वाले प्रेम-रस का हर बूँद निचोड़ लेगी। मैं ने सात आठ आखिरी धक्के और लगाए, और ईशा के ऊपर ही गिर गया। मैंने ईशा को अपने आलिंगन में कस कर भर लिया, और कुछ देर उस पर ही लेटा रहा।

कहानी जारी रहेगी

दीपक कुमार
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