मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
06-11-2021, 12:25 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
मेरी माँ का यार

हाई मैं देल्ही मैं रहती हूँ मेरा नाम हेमा है. उमर अभी केवल 15 य्र्स. है. मैं एकलौती हूँ मेरी माँ अभी केवल 35 य्र्स की हैं. मेरे छ्होटे मामा अक्सर घर आया करते हैं. वे ज़्यादातर मम्मी के कमरे मैं ही घुसे रहते हैं. मुझे पहले तो कुच्छ नही लगा पर एक दिन जान ही गयी कि मम्मी अपने छ्होटे भाई यानी मेरे मामा से ही मज़ा लेती हैं. मुझे बहुत आश्चर्या हुवा पर अजीब सा मज़ा भी मिला दोनो को देखकर. मैं जान गयी मम्मी अपने भाई से फँसी है और दोनो चुदाई का मज़ा लेते हैं. मामा करीब 25 य्र्स के थे. मामा अब मुझे भी अजीब नज़रो से देखते थे. मैं कुच्छ ना बोलती थी.

घर के माहौल का असर मुझ पर भी पड़ा. मामा को अपनी चूचियों को घूरते देख अजीब सा मज़ा मिलता था. अगर पापा नही होते तो मम्मी मामा को अपने रूम मैं ही सुलाती. एक रात मम्मी के रूम मैं कान लगा दोनो की बात सुन रही थी तो दोनो की बात सुन दंग रह गयी. मामा ने कहा,

"दीदी अब तो शशि भी जवान हो गयी है. दीदी आप ने कहा था कि शशि का मज़ा भी तुम लेना."

"ओह्ह मेरे प्यारे भाय्या तुमको रोकता कौन है. तुम्हारी भांजी है जो करना है करो. जवान हो गयी है तो चोद दो साली को. जब मैं शशि की उमर की थी तो कई लंड खा चुकी थी. 5 साल से सिर्फ़ तुमसे ही चुद्वा रही हूँ. आजकल तो लड़किया 14 य्र्स मैं छुड़वाने लगती हैं." मैं चुपचाप दोनो की बात सुन रही थी और बेचैन हो रही थी.

"वह गुस्सा ना हो जाए."

"नही होगी. तुम गधे हो. पहली बार सब लड़कियाँ बुरा मानती है पर जब मज़ा पाएगी तो लाइन देने लगेगी. ज़रा चूत छातो."

"जी दीदी." वह मम्मी की चूत को चाटने लगा. कुच्छ देर बाद फिर मामा की आवाज़ आई,

"पूरी गदरा गयी है दीदी."

"हां हाथ लगाओगे तो और गदराएगी. डरने की ज़रूरत नही. अगर नखरे दिखाए तो पटक कर चोद दो. देखना मज़ा पाते ही अपने मामा की दीवानी हो जाएगी जैसे मैं अपने भयया की दीवानी हो गयी हूँ. चॅटो मेरे भाई मुझे चटवाने मैं बहुत मज़ा आता है."

"हां दीदी मुझे भी तुम्हारी चूत चाटने मैं बड़ा मज़ा मिलता है." मैं दोनो की बात सुन मस्त हो गयी. मंन का डर तो मम्मी की बात सुन निकल गया. जान गयी कि मेरा कुँवारापन बचेगा नही. मम्मी खुद मुझे चुद्वाना चाह रही थी. जान गयी की जब मम्मी को इतना मज़ा आ रहा है तो मुझे तो बहुत आएगा. ममा तो अपने सगे भाई से चुद्वा ही रही थी साथ ही मुझे भी चोद्ने को कह रही थी. मम्मी और मामा की बात सुन वापस आ अपने कमरे मैं लेट गयी. दोनो चूचियों तेज़ी से मचल रही थी और राणो के बीच की चूत गुदगुदा रही थी. कुच्छ देर बाद मैं फिर विंडो के पास गयी और अंदर की बात सुनने लगी. अजीब सा पुक्क पुक्क की आवाज़ आ रही थी. मैने सोचा कि यह कैसी आवाज़ है. तभी मम्मी की आवाज़ सुनाई दी,

"हाए थोड़ा और. साले बहन्चोद तुमने तो आज थका ही दिया."

"अरे साली रंडी अभी तो 100 बार ऐसे ही करूँगा." मैं तड़प उठी दोनो की गंदी बातें सुनकर. जान गयी की पुक्क पुक्क की आवाज़ चुदाई की है और मम्मी अंदर चुद रही हैं. मामा मम्मी को चोद रहे हैं. तभी मम्मी ने कहा,

" हाए बहुत दमदार लंड है तुम्हारा. ग़ज़ब की ताक़त है मेरी दो बार झाड़ चुकी है. आआअहह बस ऐसे ही तीसरी बार निकलने वाला है. आअहह बस राजा निकला. तुम सच्च मैं एक बार मैं दो तीन को खुश कर सकते हो. जाओ अगर तुम्हारा मंन और कर रहा हो तो शशि को जवान करदो जाकर."

"कहाँ होगी."

"अपने कमरे मैं. जाओ दरवाज़ा खुला होगा. मुझमे तो अब जान ही नही रह गयी है." मम्मी ने तो यह कह कर मुझे मस्त ही कर दिया था. घर मैं सारा मज़ा था. मामा अपनी बड़ी बहन को चोद्ने के बाद अब अपनी कुँवारी भांजी को चोद्ने को तैय्यार थे. मां के चुप हो जाने के बाद मैं अपने कमरे मैं आ गयी. जान गयी कि मामा मम्मी को चोद्ने के बाद मेरी कुँवारी चूत को चोद्कर जन्नत का मज़ा लेने मेरे कमरे मैं आएँगे.

पूरे बदन मैं करेंट दौड़ने लगा. रूम मैं आकर फ़ौरन मॅक्सी पहनी. मैं चड्डी पहनकर सोती थी पर आज चड्डी भी नही पहनी. आज तो कुँवारी चूत की ओपनिंग थी. चूत की धड़कन इनक्रीस हो रही थी और चूचियों मैं रस भर रहा था. मॅन कर रहा था कि कह दूं मामा मम्मी तो बूढ़ी है. मैं जवान हूँ. चोदो मुझे. रात के 11:30 हो चुके थे. दरवाज़ा खुला रखा था. मॅक्सी को एक टाँग से ऊपर चड़ा दिया और एक चूची को गले की ओर से थोड़ी सी बाहर निकाल दी और उसके आने की आहट लेने लगी. मैं मस्त थी और ऐसे पोज़ मैं थी की कोई भी आता तू उसे अपनी चखा देती. अभी तक लंड नही देखा था. बस सुना था.

10 मिनिट बाद उसकी आहट मिली. मेरे रोएँ खड़े हो गये. मुझे करार नही मिला तो झटके से पूरी चूची को बाहर निकाल आँख बंद कर ली. जब 35 साल की चूत का दीवाना था तो मेरी 15-16 साल की देखकर तो पागल हो जाता. तभी वह कमरे मैं आया. मैं गुदगुदी से भर गयी. जो सोचा था वही हुवा. पास आते ही उसकी आँख मेरी बिखरी मॅक्सी पर राणो के बीच गयी. मम्मी के पास से वापस आने पर मज़ा खराब हुवा था पर अब फिर आने लगा था.

वह अपने दोनो हाथ प्लांग पर जमा मेरी राणो पर झुका तो मैने आँखे बंद कर ली. मेरी साँस तेज़ हुई मेरी चूचियों और चूत मैं फुलाव आया. मैं दोनो राणो के बीच 1 फुट का फासला किए उसे 15 साल की चूत का पूरा दीदार करा रही थी. कुच्छ देर तक वह मेरी चूत को घूरता रहा फिर मेरे दोनो उभरे उभरे अनारो को निहारता धीरे से बोला,

"हाए क्या उम्दा चीज़ है, एकदम पाव रोटी का टुकड़ा. हाए राज़ी हो जाती तो कितना मज़ा आता." और इसके साथ ही उसने झुककर मेरी चूत को बेताबी के साथ चूम लिया तो पूरे बदन मैं करेंट दौड़ा. मैं तो बहाना किए थी. चूमकर कुच्छ देर तक मेरी कुँवारी चूत को देखता रहा फिर झुककर दुबारा मुँह से चूमते एक हाथ से मेरी मॅक्सी को ठीक से ऊपर करता बोला,

"हाए क्या मस्त माल है. अब तो माँ के साथ बेटी की कुँवारी फाँक का पूरा मज़ा लूँगा." मैने अपने बहन्चोद मामा के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनी तो और मस्त हुई. चूत पे किस से बहुत गुदगुदी हुई और मन किया की उससे लिपट कर कह दूं की अब नही रह सकती तुम्हारे बिना मैं तैय्यार हूँ लूटो मेरी कुँवारी चूत को मामा. पर चुप रही. तभी मामा बेड पर बैठ गये और मेरी राणो पर हाथ फेर मेरी चूत को सहलाने लगा. उससे चूत पर हाथ लगवाने मैं इतना मज़ा आ रहा की बस मन यह कहने को बेताब हो उठा कि राजा नगी करके पूरा बदन सहलाओ. मम्मी का कहना सही था कि हाथ लगाओ, मज़ा पाते ही लाइन क्लियर कर देगी. तभी उसकी एक उंगली चूत की फाँक के बीच मैं आई तो मैं तड़प कर बोल ही पड़ी,

"हाए कौन?"

"मैं हूँ मेरी जान, तुम्हारा चाहने वाला. हाए अच्छा हुवा तुम जाग गयी. क्या मस्त जवानी पाई है. आज मैं तुमको??.." और किसी भूखे कुत्ते की तरह मुझे अपनी बाँहो मैं कसता मेरी दोनो चूचियों को टटोलता बोला,

"हाए क्या गदराई जवानी है." मैं अपने दोनो उभारों को उसके हाथ मैं देते ही जन्नत मैं पहुँच गयी. वा मेरे चेकने गाल पर अपने गाल लगा दोनो को दबा बोला,

"बस एक बार चखा दो, देखो कितना मज़ा आता है."

"हाए मामा आप छ्चोड़ो यह क्या कर रहे हैं आप. मम्मी आ जाएगी."

"मम्मी से मत डरो. उन्होने ही तो भेजा है. कहा है कि जाओ मेरी बेटी जवान हो गयी है. उसे जवानी का मज़ा दो. बहुत दिनो से ललचा रही हो, बड़ा मज़ा पओगि. मम्मी कुच्छ नही कहेंगी." और इसके साथ ही मेरी चूचियों को मॅक्सी के ऊपर से कसकर दबाया तो मेरा मज़ा सातवे आसमान पर पहुँच गया.

"मम्मी सो गयी क्या?" मैने पूछा तो वह बोला,

"हां. आज तुम्हारी मम्मी को मैने बुरी तरह थका दिया है. अब वे रात भर मीठी नींद सोएंगी. बस मेरी रानी एक बार. देखना मेरे साथ कितना मज़ा आता है." और उसने दोनो निपल को चुटकी दे मुझे राज़ी कर लिया. सच आज उसकी हरकत मैं मज़ा आ रहा था. दोनो निपल्स का नशा राणो मैं उतर रहा था.

"मामा आप मम्मी के साथ सोते हैं. वह तो आपकी बहन हैं."

"आज अपने पास सुला कर देखो, जन्नत की सैर करा दूँगा. हाए कैसी मतवाली जवानी पाई है. बहन है तो क्या हुवा. माल तो बढ़िया है मम्मी का."

"दरवाज़ा खुला है." मैने मज़े से भरकर कहा. मेरी नस नस मैं बिजली दौड़ रही थी. अब बदन पर कपड़ा बुरा लग रहा था. उसने मेरी चूचियों को मसल्ते हुवे मेरे होंठो को किस करना शुरू कर दिया. उसे मेरी जैसी कुँवारी लड़कियों को राज़ी करना आता था. होंठ चुसते ही मैं ढीली हो गयी. मामा मेरी मस्ती को देख एकदम से मस्त हो गये. धीरे से मेरे बदन को बेड पर कर मेरी चूचियों पर झुक कर मेरी रान पर हाथ फेरते बोले,

"अब तुम एकदम जवान हो गयी हो. कब मज़ा लोगि अपनी जवानी का. डरो नही तुमको कली से फूल बना दूँगा. मम्मी से मत डरो, उनके सामने तुमको मज़ा दूँगा बस तुम हां कर दो." हाथ लगवाने मैं और मज़ा आ रहा था. मैं मस्त हो उसे देखती बोली,

"मम्मी को आप रोज़ ??."

"हां मेरी जान तुम्हारी मम्मी को रोज़ चोद्ता हूँ. तुम तैय्यार हो तो तुमको भी रोज़ चोदेन्गे. हाए कितनी खूबसूरत हो. ज़रा सा और खोलो ना. तुमसे छ्होटी छ्होटी लड़कियाँ चुद्वाती हैं." मैं तो जन्नत मैं थी. मामा चूचियों को दबाए एक हाथ गाल पर और दूसरा राणो के बीच फेर रहे थे.

"मुझसे छ्होटी छ्होटी?"

"हां मेरी जान. ज़्यादा बड़ी हो जाओगी तो इसका मज़ा उतना नही पओगि जितना अभी. तुम्हारी एकदम तैय्यार है बस हां कर दो."

"मैं तो अभी बहुत छ्होटी हूँ." और दोनो राणो को पूरा खोल दिया. मामा चालाक थे. पैर खोलने का मतलब समझ गये. मुस्काराकार मेरे होंठ चूम बोले,

"मेरी छ्होटी बहन को तो तुम जानती हो, अभी 16 की भी नही है. उसकी चूचियों भी तुमसे छ्होटी हैं. वह भी मुझसे खूब चुद्वाती है." और चूत के फाँक को चुटकी से मसला तो मैं कसमसकर बोली,

"हाए मामा अपनी छ्होटी बहन को भी मेरी मम्मी की तरह चोद्ते हो?"

"हां यहाँ रहता हूँ तो तुम्हारी मम्मी को यानी अपनी बड़ी बहन को चोद्ता हूँ और घर मे मैं अपनी छ्होटी बहन यानी तुम्हारी मौसी को खूब हचक कर चोद्ता हूँ तभी वह सोने देती है. तुम्हारी चूचियाँ तो खूब गदराई हैं. बोलो हो राज़ी." और मॅक्सी के गले से हाथ अंदर डाला तो मैं राज़ी हो गयी और बोली,

"राज़ी हूँ पर मम्मी से मत बताना." मैं उसे यह एहसास नही होने देना चाहती थी कि मैं तो जाने कब से राज़ी हूँ. उसके पास आते ही पूरा मज़ा आने लगा. मैं अपना 15 साल का ताज़ा बदन उसके हवाले करने को तैय्यार थी. अगर वह मम्मी को चोद्कर ना आए होते तो मेरी कुँवारी चूत को देखकर चोद्ने के लिए तैय्यार हो जाते. पर वह मम्मी को चोद्कर अपनी बेकरारी को काबू मैं कर चूक्के थे. वा मेरी नयी चूचियों को हाथ मैं लेते ही मेरी कीमत जान गये थे. मेरे लिए यह पहला चान्स था. मामा मुझसे ज़बरदस्ती ना कर प्यार से कर रहे थे. अब तक वह मेरी नंगी चूत को देख उसपर हाथ फेर चूम भी चूक्के थे पर मैं अभी तक उनका लंड नही देखा था. मॅक्सी के अंदर हाथ डाल चूचियों को पकड़ और बेकरार कर दिया था. मामा नेदुबारा मॅक्सी के ऊपर से चूचियों को पकड़कर कहा,

"मम्मी से मत डरो. मम्मी ने पूरी छ्छूट दे दी है. बस तुम तैय्यार हो जाओ." और चूचियों को इतनी ज़ोर से दबाया की मैं तड़प उठी.

"मुझे कुच्छ नही आता." मैं राज़ी हो बोली तो उसने कहा,

"मैं सिखा दूँगा." और मेरे गाल काटा तो मैं बोली,

"ऊई बड़े बेदर्द हो मामा." मेरी इस अदा पर मस्त हो गाल सहलाते मॅक्सी पकड़ कर बोले,

"इसको उतार दो."

"हाए पूरी नंगी करके."

"हां मेरी जान मज़ा तो नंगे होने मैं ही आता है. बोलो पूरा मज़ा लोगि ना."

"हां."

"तो फिर नंगी हो मैं अभी आता हूँ." वह कमरे से बाहर चला गया. मैं कहाँ थी, बता नही सकती थी. पूरे बदन मैं चईटियाँ चलने लगी. चूत फुदकने लगी थी. मैं पूरी तरह तैय्यार थी. मैने जल्दी से मॅक्सी उतार दी और पूरी नंगी हो बेड पर लेट गयी. मम्मी तो चुद्वाने के बाद अपने कमरे मैं आराम से सो रही थी और अपने यार को मेरे पास भेज दिया था. मैं अपने नंगे जवान बदन को देखती आने वाले लम्हो की याद मैं खोई थी कि मेरी माँ का यार वापस आया. मुझे नंगी देख वह खिल उठा. पास आ पीठ पर हाथ फेर बोले,

"अब पओगि जन्नत का मज़ा." मेरी नंगी पीठ पर हाथ फेर मज़ा दे उसने झटके से अपनी लूँगी अलग की तो उनका लंड मेरे पास आते ही झटके खाने लगा. अभी उसमे फुल पवर नही आया था पर अभी भी उसका कम से कम 6 इंच का था. मैं ग़ज़ब का लंड देख मस्ती से भर गयी. वह बेड पर आए और पीछे बैठ मेरी कमर पकड़कर बोले,

"गोद मैं आओ मेरी जान." मेरा कमरा मेरे लिए जन्नत बन गया था. अब हम दोनो ही नंगे थे. जब मामा की गोद मैं अपनी गांद रखी तो मामा ने फ़ौरन मेरी दोनो चूचियों को अपने दोनो हाथों मैं ले बदन मैं करेंट दौराया.

"ठीक से बैठो तभी असली मज़ा मिलेगा. देखना आज मेरे साथ कितना मज़ा आता है." नंगी चूचियों पर उसका हाथ चला तो आँख बंद होने लगी. अब सच ही बड़ा मज़ा आ रहा था.

"हेमा."

"जी"

"कैसा लग रहा है?" मेरी गांद मैं उसका खड़ा लंड गड़ रहा था जो एक नया मज़ा दे रहा था. अब मैं बदहवास हो उसकी नंगी गोद मैं नंगी बैठी अपनी चूचियों को मसलवाती मस्त होती जा रही थी. तभी मामा ने चूचियों के टाइट निपल को चुटकी से दबाते पूछा,

"बोलो मेरी जान."

"हाए अब और मज़ा आ रहा है. मामा."

"घबराव नही तुमको भी मम्मी की तरह पूरा मज़ा दूँगा. हाए तुम्हारी चूचियाँ तो दीदी से भी अच्छी हैं." वह मेरी मस्त जवानी को पाकर एकदम से पागल से हो गये थे. निपल की च्छेड़च्छाद से बदन झनझणा गया था. तभी मामा ने मुझे गोद से उतारकर बेड पर लिटाया और मेरे निपल को होंठ से चूस्कर मुझे पागल कर दिया. हाथ की बजाए मुँह से ज़्यादा मज़ा आया. मामा की इस हरकत से मैं खुद को भूल गयी. उसको मेरी चूचियाँ खूब पसंद आई. मामा 10 मिनिट तक मेरी चूचियों को चूस चूस्कर पीते रहे. चूचियों को पीने के बाद मामा ने मुझसे राणो को फैलाने को कहा तो मैने खुश होकर अपने बहन्चोद मामा के लिए जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया. पैर खोलने के बाद मामा ने मेरी कुँवारी चूत पर अपनी जीभ फिराई तो मैं तड़प उठी. वह मेरी चूत को चाटने लगे. चत्वाते ही मैं तड़प उठी. मामा ने चाटते हुवे पूछा,

"बोलो कैसा लग रहा है?"

"बहुत अच्छा मेरे राजा."

"तुम तो डर रही थी. अब दोनो का मज़ा एक साथ लो." और अपने दोनो हाथ को मेरी मस्त चूचियों पर लगा दोनो को दबाते मेरी कुँवारी गुलाबी चूत को चाटने लगे तो मैं दोनो का मज़ा एक साथ पा तड़पति हुई बोली,

"हाए आआहह बस करो मामा ऊई नही अब नही."

"अभी लेती रहो." मुझे ग़ज़ब का मज़ा आया. वह भी मेरी जवानी को चटकार मस्त हो उठे. 10 मिनिट तक चाटते रहे फिर मुझे जवान करने के लिए मेरे ऊपर आए. मामा ने पहले ही मस्त कर दिया था इसलिए दर्द कम हुवा. मामा भी धीरे धीरे पेलकर चोद रहे थे. मेरी चूत एकदम ताज़ी थी इसलिए मामा मेरे दीवाने होकर बोले,

"हाए अब तो सारी रात तुमको ही चोदुन्गा." मैं मस्त थी इसलिए दर्द की जगह मज़ा आ रहा था.

"मैं भी अब आपसे रोज़ चुद्वाउंगी." उस रात मामा ने दो बार चोदा था और जब वह अगली रात मुझे पेल रहे थे तो अचानक मम्मी भी मेरे कमरे मैं आ गयी. मैं ज़रा सा घबराई लेकिन मामा उसी तरह चोद्ते रहे. मम्मी पास आ मेरी बगल मैं लेट मेरी चूचियों को पकड़कर बोली,

"ओह बेटी अब तो तुम्हारी चोद्ने लायक हो गयी है. लो मज़ा मेरे यार के तगड़े लंड का."

"ओह मम्मी मामा बहुत अच्छी हैं. बहुत अच्छा लग रहा है." अब मैं और मम्मी दोनो साथ ही मामा से चुद्वाते हैं.
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06-11-2021, 12:26 PM,
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भाई बहन की दोस्ती या वासना--1

मेरा नाम अदिती है और मै चन्डीगढ की रहने वाली हूं.आज मै आप को अपनी फ़ैमली की एक ऐसी काहानी बताने जा रही हूं जो मैने अबतक किसी से भी शेयर नही करी है. इस काहानी मे कुछ भी झूट नही है हर बात सच सच है लेकिन सिर्फ़ नाम बदल दिये हैं मैने. मै एक मिडल क्लास फ़ैमली से हूं. हमारी फ़ैमली एक बडी फ़ैमली है. मेरे दो भाई और एक बैहन हैं. सब से बडा भाई सुनील २५ साल फिर समीर २२ साल फिर मै २० साल और सबसे छोटी कल्पना १७ साल की है. मेरे पिताजी की एक ट्रांसपोर्ट कम्पनी है. मा ग्रिहणी हैं. बडा भाई शादी शुदा है और वो भी पिताजी के साथ काम करता है. हम सब साथ ही रहते हैं. बाकी बहन भाई शादी शुदा नही हैं. मै और समीर घर मे सब से अच्छे दोस्त हैं. हमारी सिटी मे शायद ही किसी बहन भाई मे इतनी दोस्ती हो जितनी के मेरी और समीर की है. मैने कभी भी ये सोचा ना था के मै ऐसा भी कर बैठूंगी. पता नही समीर के दिमाग मै ऐसी बातें कब से आ गयी थीं. अक्सर हम रात को देर रात तक बातें करते रहते थे. एक रात हम बातें करते करते टीवी भी देख रहे थे और हमारी बातों का टॊपिक लव मैरिज था. उस का कैहना था के शादी हमेशा मा बाप की मरज़ी से करनी चाहिये और मै लव मैरिज को वोट कर रही थी. क्यों के मुझे एक लडके से प्यार था लेकिन समीर को इस बात का पता नही था.. उस रात जब मैने लव मैरिज को इतना वोट किया तो अचानक समीर ने मुझसे एक सवाल किया जिसके लिये मै तय्यार नही थी. उसने काहा: अदिती एक बात तो बताओ. क्या तुम्हे किसी लडके मे इन्टरस्ट है? मेरा मतलब क्या तुम किसी से प्यार करती हो? मै अचानक इस सवाल को सुन कर चुप हो गयी. वो फिर बोला: बताओ तो सही........ .इस मे कोई बुराई तो नही. सब को हो जाता है. हो सकता है तुम को भी हो गया हो, मुझ से शेयर कर लोगी तो शायद मै तुम्हारी मदद कर सकूं. ये सुन कर मेरा कुछ हौसला बढ गया. और मैने सिर्फ़ सर हिला कर उसे हां काहा. वो बोला: कौन है वो? मैने उसे बता दिया के मै अपनी क्लास के लडके रिशी को पसन्द करती हूं. कुछ देर बाद वो बोला: एक बात बताओ..... ......सच सच बताना. क्या तुम दोनो मे कुछ हुआ है? मै ये सवाल समझ नही सकी तो मैने पूछा: क्या मतलब? वो फिर बोला........ .....मेरा मतलब कोई ऐसी वैसी हर्कत की है उसके साथ? अब मै उस का मतलब समझ गयी और बोली : नही. वो कई बार कोशिश कर चुका है. पर मैने कभी भी उसे अपने को छूने नही दिया. वो बोला: वैसे मै जानता हूं उसके बारे में. काफ़ी लडकियां हैं उसके जाल मे तुम्हारी तरह. और बहुतों के साथ तो वो काफ़ी कुछ कर भी चुका है. मै बोली: क्या कर चुका है? वो कुछ देर चुप रहने के बाद बोला........ ...सेक्स कर चुका है और क्या. मै सुन कर हैरान रह गयी और फ़ोरन समीर से लडने वाले अन्दाज़ मे बोली: नही वो ऐसा नही है......... .....हां मुझसे वो ज़रूर छेड छाड करता है मगर उसका किसी और लडकी के साथ चक्कर नही है. वो बोला: अरे तुम चाहो तो मेरे दोस्त की बहन सिमरन से पूछ लेना. वो उसकी शिकार बन चुकी है. ये सुन कर मै बहुत परेशान हो गयी लेकिन मुझे अब भी इस बात का यकीन नही था. एक दो दिन बाद मुझे सिमरन मिली तो मैने उससे रिशी के बारे मे पूछा. सिमरन ने समीर की बात को कन्फ़र्म कर दिया के दो साल पहले रिशी ने उसे पटा के उसके साथ सेक्स किया था. मुझे बहुत बडा धक्का लगा और मैने रिशी से अपना रिशता तोड दिया. उस दिन मै घर आके सारा दिन रोती रही. रात को भी ठीक से नही सोई और रोती रही. अगले दिन सन्डे था. जब मै उठी तो ९ बज चुके थे पर मेरी आंखें अभी भी लाल थी. मा ने देख कर पूछा क्या हुआ अदिती तुम को? मै बोली कुछ नही मा बस रात को नीन्द ठीक से नही आई. वो ये सुन कर दांटने लगी : एक तो तुम दोनो बहन भाई पता नही रात को इतनी देर तक क्या बातें करते रहते हो. कभी जलदी भी सो जाया करो, बीमार हो जायेगी और वो तुम्हारा भाई भी. मै बोली: कुछ नही होता मा. और बाथरूम मे चली गयी. नाश्ता करते हुए मा ने बताया के आज रोहित का मुन्डन है और हम सब जा रहे हैं, नाशते के बाद तय्यार हो जाओ. (रोहित मेरी चाची का दो साल का लडका है) मेरा जाने का मूड नही था इसलिये बोली: मा मेरी तबीयत ठीक नही है. मै नही जाना चाहती. मा ये सुन कर गुस्से मे बोली: और जागो सारी सारी रात, लेकिन तुम घर मै अकेली क्या करोगी? समीर बोला: मा मै भी नही जाना चाह राहा. मै अदिती के पास रहता हूं आप लोग चले जाओ. नाशते के बाद सब लोग तय्यार होने लगे और करीब ११ बजे सब चले गये. अब घर में सिर्फ़ मै और समीर थे. वो टीवी देख राहा था और मै अपने कमरे में थी. कुछ देर बाद समीर मेरे कमरे में आया और बोला : कैसी हो अदिती तुम अब? मै: ठीक हूं समीर. समीर: नराज़ हो क्या मुझसे? मै: नही समीर ये कैसे सोच लिया तुमने? समीर: बात तो करती नही मुझसे तो फिर ऐसा ही सोचूंगा ना. मै: कुछ नही समीर तुम भी ना..... अच्छा चलो कोयी और बात करो. समीर: पहले हंस कर दिखाओ. इस बात पर मै फ़ोरन ही हंस पडी और उसने मुझे हंस्ता हुआ देख कर उसने अपने गले लगा लिया. उसने मुझे माथे पर किस भी किया. ऐसा पहले कभी नही किया था उसने. मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मै और भी चिपक गयी उसके साथ. हम ऐसे ही कोई २ - ३ मिनट तक रहे. फिर मैने भाई से पूछा: समीर एक बात तो बताओ? समीर: क्या? मै: क्या सब लडके हम लडकियों के बारे मै ऐसा ही सोचते हैं? समीर: म्म्म्म्म हां ज़्यादा तर लडके ऐसा ही सोचते हैं आज कल. मै: क्या तुम भी ऐसा सोचते हो किसी के लिये? समीर: म्म्म्म्म्*म्म्म्म्म हां मै: किसके लिये? समीर: हो सकती है कोई भी तुम्हे इससे क्या मतलब? मै : नही....मुझे बताओ ना? समीर: छोडो इस बात को अब..........किस तरह की बातें कर रही हो तुम? मै: तुमने रात को ही काहा था के हम सब कुछ शेयर कर सकते हैं. अब क्यों छुपा रहे हो? समीर:देख लो. तुम जानती हो की मै काफ़ी बोल्ड हूं. अगर कुछ बोला तो किसी को बताना नही. मै: नही बताऊंगी.........अब बताओ ना? समीर: तो सुनो...........मै रीना के बारे मै ऐसा सोचता हूं. (रीना मेरी भाभी हैं) मै ये सुन कर हैरान हो गयी.....और उससे पीछे हट गयी. वो अब मुझे सिर्फ़ मुसकुराता हुआ देखता राहा. मेरी समझ मे नही आ राहा था के अब मै उससे क्या कहूं. फिर मै बोली: क्या मतलब है तुम्हारा? क्या तुम भाभी की बात कर रहे हो? समीर : हां..........उसी की बात कर राहा हूं.........और बात बताऊं तुमको? उसे भी ये पता है और उसे ये सुन कर खुशी हुई थी. अब तो मेरी हैरानगी की कोयी हद नही थी. मेरी समझ मे नही आ राहा था के वो क्या कह राहा है. फिर मै बोली: समीर तुम को पता है ना तुम क्या कह रहे हो? वो तुम्हारी भाभी हैं. कैसे सोच लिया तुमने उसके बारे में? समीर: भाभी हैं तो क्या हुआ. हैं तो एक लडकी ही ना आखिर. खुबसूरत हैं मुझे अच्छी लगती हैं और उसे मै भी अच्छा लगता हूं. इसमे बुराई क्या है? मै: एक बात बताओ...........किस किसम का रिशता है तुम्हारा और रीना भाभी का? समीर: वैसा ही जैसा होता है इस सूरत मे. मै: क्या मतलब.....कैसा होता है इस सूरत मे? समीर: प्यार भरा और क्या मै: क्या तुम उसके साथ कुछ कर तो नही बैठे? समीर: हां थोडा बहुत कर चुका हूं मै: हे भगवान..........भाभी के साथ? समीर तुम पागल तो नही हो गये? किस हद तक गये हो तुम उसके साथ? समीर: हां पागल कर दिया था उसने........मै क्या करता........और रही बात हद की, तो प्यार मे कोई हद नही होती मै: क्या मतलब? समीर: वही जो प्यार करने वाले करते हैं...........कुछ किसिंग.......कुछ हगिंन्ग ...............और कुछ वो भी. मै: वो भी......................? सच सच बताओ..................कहीं सेक्स तो नही क्या तुम ने? समीर: हां हो तो गया है ..........इसमे मेरा क्या कसूर? इतनी खुबसूरत औरत जब पास हो तो आदमी से ये कुछ भी हो सकता है. मै: कसूर.............? क्या मतलब ? अगर कोई भी खुबसूरत औरत हो तुम उसके बारे मे ऐसा ही सोचोगे? चाहे वो तुम्हारी बहन ही क्यों ना हो समीर:म्म्म्म्म्*म्म्म्म्म्*म्म्म.................. ...........हां ................ऐसा ही है.............. ये सुन कर तो मेरा दिमाग खराब होने लगा........कुछ देर तो मै चुप रही...........फिर बोली: क्या तुम मेरे बारे भी इस तरह से सोचते हो? समीर: देखो अदिती..........तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो.........बहन ही..........इस लिये तुमसे कुछ नही छुपाऊंगा..........हां तुम मुझे आकर्शित करती हो.............अगर तुम मेरी बहन ना होती तो मै तुमसे शादी करने की सोचता. मै: समीर!!.....................तुम पागल तो नही हो गये ..... मै तुम्हारी बहन हूं ............कैसे आदमी हो तुम? समीर: बहन तो हो.............पर खुबसूरत भी बहुत हो.............और सेक्सी भी..............अब मेरा क्या कसूर? पता नही क्यों समीर की इन बातों से मज़ा आ राहा था और मै भाभी वाली बात का धक्का भूल गयी थी.अजीब सी हालत थी मेरी.मै सोच रही थी की अब मै इसे क्या कहूं और कैसे कहूं...............दिमाग मै कुछ नही आ राहा था.......लेकिन मै एक बात ज़रूर नोट कर रही थी. वो ये के समीर की ये बातें बुरी नही लगी मुझे. मै अब कुछ नही बोल रही थी और वो मुझ को सिर्फ़ देख राहा था और मुसकुरा राहा था. मै कुछ डर भी रही थी..............पता नही क्या हो राहा था मुझे..................पता नही मै शर्मा कर या डर कर रूम से बाहर चली गयी..............समीर वहीं बैठा राहा....................मेरे अन्दर एक अजीब सी हालत थी..........मेरा भाई और मेरे बारे मै ये सोचता है..............क्या मै सच मे इतनी खुबसूरत हूं?.............अब मुझे क्या करना चाहिये?...........................कैसे हैन्डल करूं इस हालात को? अब मै समीर के बारे मै एक और ही तरह से सोच रही थी. ये बात तो सच थी के समीर है काफ़ी हैन्ड्सम और सेक्सी भी................लेकिन वो मेरा भाई है........................ये बात बार बार मेरे दिमाग मै आ रही थी. उस दिन मैने फिर समीर से इस टॊपिक पर ज़्यादा बात नही की क्योंकी मै पहले ही बहुत शॊक मे थी. मुझे अपने लव अफ़ेयर का सदमा कुछ ही दिन मे भूल गया क्योंकी मै अपने बॊयफ़्रेन्ड पर बहुत ही गुस्सा थी. मैने उससे बिलकुल मिलना छोड दिया और फिर उससे कोई रिशता ना रखने की कसम खा ली. एक दिन रात को टीवी देखते हुए मुझे एक खयाल आया के आखिर समीर ने जो भी मुझको रीना भाभी के बारे मे बताया है क्या वो सच हो सकता है के नही. इसलिये मैने सोचा क्यों ना इस बात का पता लगाया जाये और मै अब समीर से नही बल्के भाभी से इसके बारे में पूछूं. लेकिन कैसे?

अगले दिन मै लन्च के बाद भाभी के पास बैठ गयी और इधर उधर की बातें करने लगी और बातें करते करते मैने भाभी से पूछा की आज कल ज़िन्दगी भर किसी एक के साथ रहना काफ़ी मुश्किल होता है ना भाभी? क्या आप भैया से बोर नही हो जाती? वो मेरी यी बात सुन कर अजीब तरीके से मुसकुरा कर कहने लगी: इस के इलावा कर भी क्या सकते हैं. आखिर ज़िन्दगी भी तो गुज़ारनी है ना. मै: भाभी..... क्या भैया भी तुम से बोर नही होते? क्या तुमको यकीन है के उनका कोई बाहर चक्कर वक्कर नही है? भाभी: लगता तो नही है.....(फिर हंसते हुए बोली) अगर है भी तो मुझे क्या? वापस तो मेरे पास ही आना है ना. मैने फिर भाभी से सवाल किया: भाभी एक बात पूछूं?........... भाभी: हां पूछ क्या बात है? मै: अगर मेरा कोई चक्कर हो तो भैया क्या करेंगे? भाभी: बहुत गुस्सा करेंगे तुझे. अगर ऐसी कोई बात हो तो मुझ तक ही रहने देना. वैसे कोई चक्कर है क्या? मै: नही भाभी...अभी तक तो नही है............लेकिन एक लडका लाईन मार राहा है मुझ पर काफ़ी दिनों से. भाभी: कौन है वो और कैसा है? मै: मेरी क्लास मै पढता है और है भी हैन्ड्सम............. भाभी: तो तेरा क्या खयाल है........? पसन्द है क्या तुझे? मै: है भी और नही भी भाभी: म्म्म्म्म्*म्म ..........अगर तो तुम सीरिअस हो तो बात करूं घर वालों से? मै: नही नही भाभी...........इतना भी पसन्द नही है मुझे. भाभी: तो फिर टाईम पास कर और मज़ा ले के छोड देना. मै ये बात सुन कर हैरान हो गयी के भाभी मुझे क्या कह रही है और भाभी से पूछा: मज़ा लूं?.........इस का क्या मतलब? भाभी हंस्ते हुए आहिस्ता से बोली: अरे जवानी के मज़े ले और क्या. यही तो उमर है ऐश करने की. मै: भाभी अगर मैने कुछ किया तो मेरे होने वाले पती को पता नही चलेगा के मैने क्या कुछ किया हुआ है? भाभी: अरे नही पता चलता............(भाभी ने इधर उधर देखा और आहिस्ता से बोली) अब तुम्हारे भाई को पता चला है क्या मेरे बारे मे? मै: क्या मतलब भाभी? क्या आप भी? कब, कैसे और किस के साथ? भाभी: मै बहुत ही चालाक हूं. मैने एक काम किया की घर की बात घर मे ही रह जाये...................और किसी को शक भी ना हो............ मै: क्या किया आपने? भाभी: मै तो कसम खा सकती हूं के मैने आज तक तुम्हारे भाई के इलावा किसी के साथ सेक्स नही किया..............हां ये बात अलग है के वो सुनील के इलावा भी हो सकता है.............. मै: हे भगवान .भाभी.........समीर के साथ? कब? और कहां? भाभी: अब चुप ही रहो किसी से बात ना कर बैठना. मै: भाभी आप को मुझ पर यकीन नही है क्या? भाभी: है तभी तो इतनी बातें कर रही हूं ना..............वैसे तुम्हारे भाई समीर की क्या बात है..........बहुत ही सेक्सी है............. भाभी से बात करने के बाद मुझे पता चल गया के समीर की बात सच थी. फिर भाभी ने अपनी सारी कहानी सुनाई जो मै आप को किसी और दिन बताऊंगी. फिर मै ने इधर उधर की बातें करके बात खतम कर दी. उसी रात को जब मै और समीर टीवी देख रहे थे और बाकी सब सो चुके थे मैने समीर को बताया के आज मेरी भाभी से क्या बात हुई. वो मेरी बातें सुन कर सिर्फ़ मुसकुराता राहा. मैने समीर से एक सवाल किया : ऐसा करने के बारे मे तुम्हे खयाल कैसे आया? समीर: तुम को पता है मै कम्प्यूटर पर बहुत ज़्यादा टाईम बिताता हूं और नेट से बहुत कुछ पता करता हूं...बस वहीं से मेरा इन बातों पर ध्यान गया. मै: क्या ध्यान गया समीर: चलो अभी दिखाता हूं. वो ये कह कर मुझे कम्प्यूटर पर ले गया और नेट पर देसी सेक्स की कहानियों की एक साईट खोल दी और मुझे काहा लो तुम बैठ कर इन्हें पढो. मुझे अब शरम आ रही थी पर समीर मुझे कम्प्यूटर के समाने छोड कर चला गया. कुछ देर मै इधर उधर देखती रही फिर हिम्मत करके पढना शुरू कर दिया..........और जब मैने काहानियां पढनी शुरू की तो मेरी हैरानी की हद नही थी. इन काहानियों मे तो किसी किसम का भी रिश्ता माफ़ नही किया गया था. कोई अपनी भाभी या साली के साथ, कोई मां या बाप के साथ, कोई अपने कज़न और कोई अपने सगे भाई या बहन के साथ सेक्स की बातें बता राहा था.......मेरे अन्दर एक अजीब सी फ़ीलिन्ग हो रही थी. पता नही मुझे क्या हो राहा था. लेकिन जो भी था अच्छा लग राहा था और मै पढते ही जा रही थी. मुझे पता ही नही चला के कब सुबह के ४:०० बज गये. मैने जल्दी से कम्प्यूटर बन्द किया और सोने चली गयी. उस रात मैने एक सपना देखा की मै अपने बाथरूम में नाहा रही हूं और अचानक समीर बाथरूम मै आ गया और वो बिलकुल नंगा था लेकिन मै उसे देख कर खुश हो रही थी. समीर बाथरूम मै आते ही मुझे चूमने लगा और मुझे बहुत मज़ा आ राहा था. फिर मेरी आंख खुल गयी तो देखा की मेरा हाथ मेरे वैजाईना पर है..........और मै नीचे सी गीली हो चुकी थी. समीर जब नाश्ते पर मिला तो हंसते हुए आहिस्ता से मुझसे पूछा: कैसी रही रात की एन्टरटेनमेन्ट? मै:ठीक थी.........सिर्फ़ एक काहानी पढी और फिर सो गयी. कोई खास मज़ेदार नही थी...... मैने जान बूझ कर समीर से झूट बोला. पता नही क्यों मै उससे सच नही बोल पाई. वो मेरी बात सुन कर मुसकुराता हुआ चला गया. मुझे लग राहा था के मै अब समीर को किसी और नज़र से देख रही हूं पर किस नज़र से? इस का जवाब नही था मेरे पास. उस दिन जब समीर नही था मैने मौक देख कर फिर कम्प्यूटर ऒन किया और फिर से उसी साईट पर चली गयी और मज़े से कहानियां पढने लगी. एक अजीब मज़ा आ राहा था. हां उस काहानी को ज़रूर पढती थी जिस मै भाई और बहन का सेक्स होता था. मुझे वो अच्छी लगती थी. मै फिर से नीचे गीली हो चुकी थी. दो घन्टे तक काहानियां पढती रही. ऐसा कुछ दिनों तक चलता राहा और अब मै अक्सर भाई बहन के सेक्स के बारे में सोचती थी और मेरी पैन्टी गीली हो जाती थी. एक रात को जब मैने समीर से फिर से कम्प्यूटर पर बैठने की इजाज़त मंगी तो वो मुसकुराया और कहने लगा अभी नही.........जब सारे सो जायेंगे तब.........और आज मै भी तुम्हारे साथ बैठूंगा कम्प्यूटर पर. मै चुप हो गयी और टीवी देखने लगी. रात १०:०० बजे के करीब समीर ने काहा जाओ देख कर आओ सब सो गये हैं क्या? मै उठी और देखा के सब सो चुके थे. लेकिन सुनील भैया के रूम की लाईट ऒन थी. मैने समीर को ये बताया तो बोला: चलो आज मै तुम को कहानीयां नहीं बल्के असली चीज़ दिखाता हूं. मै बोली: वो कैसे समीर: जैसे मै कहूं वैसे करती जाओ. फिर देखो क्या होता है. ये कह कर वो मेरा हाथ पकड कर मुझे छत पर ले गया. छत पर सिर्फ़ एक ही कमरा है जिसमे सुनील भैया और रीना भाभी रेहते हैं. उसने जा कर उनके कमरे के दर्वाज़े को खटखटाया. रीना भाभी नाईटगाउन मे बाहर आयी और हमसे पूछा: क्या बात है? समीर ने ऊंची आवाज़ मे काहा: वो आज का अखबार चाहिये. हमे कुछ देखना था उसमे. अन्दर से सुनील भैया की अवाज़ आयी: रीना, यहां पर पडा है अखबार, आके ले जाओ और दे दो इसे. रीना भाभी अन्दर से अखबार लेकर आयीं तो समीर उन्हें खींच कर साईड पर ले गया और दबी ज़ुबान मे बोला: रीना, आज रात को सुनील के साथ सेक्स का प्रोग्रैम है क्या तुम्हारा? रीना बोली: हां, क्यों? समीर: तुम खिडकी पर से परदाआ थोडा हटा देना और थोडी सी लाईट भी आने देना रीन मुसकुराते हुए बोली: "क्यों, क्या करोगे तुम लोग देख कर" समीर: अरे कुछ नही, अदिती की बहुत इच्छा है सच मे सेक्स देखने की, इसकी उत्सुकता शान्त हो जायेगी रीना: समीर, तू इसको भी बिगाड रहा है समीर: अरे नही, इसको ग्यान दे रहा हूं. अच्छा शो दिखाना रीना: अच्छा मै देखती हूं क्या कर सकती हूं फिर भाभी अन्दर गयी और दर्वाज़ा बन्द करके चिटकनी लगा दी. उसने बडी लाईट बुझा कर एक छोटी लाईट ऒन कर दी और परदा खोल कर, खिडकी भी खोल दी. फिर उसने परदा किया, लेकिन पूरी तरह नही. फिर रीना अपने बेड पर बैठ गयी. सुनील भी बेड पर आकर लेट गया और रीना उसके साथ चिपक गयी. उसके दोनो मम्मे समीर के सीने से दबे थे. सुनील उसकी गान्ड को अपने हाथ से सहला राहा था और एक दूसरे को देख दोनो मुसकुरा रहे थे. तभी रीना ने झुक कर सुनील के होंठों पर किस किय. फिर सुनील ने उसके चेहरे को पकडा और उसके होंठों को अपने होंठों से कसकर चूसने लगा. अब वो दोनो एक दूसरे को किस कर रहे थे. ३-४ मिनट बाद रीना हांफ़ती हुई सुनील के ऊपर ढेर हो गयी और समीर ने भी उसे अपने बांहों में कस लिया. हमे कमरे की हल्की रोशनी मे ये सब कुछ साफ़ नज़र आ राहा था. हम चुपचाप खिडकी के पास खडे हो कर परदे की दरार मे से देख रहे थे. मुझे अजीब सा लग राहा था अपने भाई और भाभी को छुप छुप के देखना पर अन्दर ही अन्दर मज़ा भी आ राहा था. कुछ देर सुनील ने रीना की गान्ड को नाईटगाउन के ऊपर से सहलाया और फ़िर हाथ को नाईटगाउन के अन्दर डाल उसकी गान्ड को सहलाने लगा. फिर उसने नाईटगाउन को उठा कर निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में थी. फिर सुनील खडा हुआ और अपना शर्ट और पजामा उतार दिया और अपने अन्डरएयर मे रीना के सामने खडा हो गया. उसका लन्ड उसके अन्डर्वेयर मे तन के खडा था. मैं आंखें फाड फाड के ये नज़ारा देख रही थी. मेरी सांसें तेज़ी से चल रही थी. रीना ने खिडकी की तरफ़ देखते हुए अपने मम्मों को अपने हाथों मे पकड कर बोला: सुनील कैसी लग रही हूं आज? मै समझ गयी की वो असल मे हमे दिखा रही थी और ये सवाल समीर के लिये था. सुनील बोला: अरे तू तो है ही बहुत खूबसूरत यार. चल अब इनको बाहर निकाल. उसने भाभी के मम्मों की तरफ़ इशारा करके काहा. रीना ने अपनी ब्रा खोली और ब्रा हटाई तो मै देखकर दन्ग रह गयी. एकदम गोल और कसे कसे मम्मे थे. फिर वो लेटी और अपने मम्मों को उभार दिया. सुनील उसके ऊपर झुका और पहले दोनो निप्पल को चूमा और फ़िर जीभ निकल दोनो को १०-१५ बार चाटा. जीभ से चाटने के बाद दोनो मम्मों को हाथों से पकड मसला और फ़िर एक को मुंह में लेकर चूसने लगा. मै दोनो का खेल देख उत्तेजित हो गयी थी. मेरे से राहा नही गया और मै अपने मम्मों को पकड के हल्का सा दबाने लगी. मगर फिर मैने देखा की समीर मुझे ये करते हुए देख राहा है तो मैने अपना हाथ जलदी से हटा लिया. रीना सिसकियां ले रही थी और बार बार अपनी चूंचियों को ऊपर की ओर उचका के सुनील के मुंह में घुसेड रही थी. मै सोच रही थी की मम्मे चुसवाने और निप्पल चटवाने में कितना मज़ा आता होगा. सुनील कुछ देर तक मम्मे चूसने के बाद उठा और फ़िर रीना कि पैन्टी को खिसकाया. रीना ने अपनी गान्ड उठा के पैन्टी को उतरवाया और अब वो बिलकुल नंगी बेड पर लेती थी. सुनील ने अपना हाथ रीना की चिकनी टांगों पर रखा और सहलाते हुए चूत तक ले गया और पूरी चूत को हाथ से दबाया. फिर उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा और उसकी क्लिट को अन्गूठे से मसलने लगा. रीना बोली: मुंह से करो ना. सुनील उसकी दोनो टांगों के बीच आया और अपने मुंह को झुका कर उसकी चूत पर रख दिया. चूत से जीभ लगते ही भाभी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गयी. भाभी इस पोस में लेटी थी की हमे सब कुछ साफ़ साफ़ दिखायी दे राहा था. भैया जीभ को पेलकर चाट रहे थे और हाथ से दोनो मम्मों को भी दबा रहे थे. भाभी मज़े से भर करे अपनी गान्ड उछाल रही थी और तेज़ तेज़ अवाज़ में सिसक रही थी. मुझे भी अपनी पैन्टी गीली होने का ऐहसास हुआ क्योंकी मेरी चूत से भी पानी निकलने लगा था. १०-१२ मिनट तक चटवाने के बाद रीना हांफ़्ते हुए बोली: आह बस अब बस करो नही तो मैं झड जाऊंगी. हाय रुको और अब मुझे अपना लन्ड दो. फ़िर वो उठी और सुनील को लिटाया और उसके अन्डर्वेयर को हाथ से निकाल दिया. मै भैया के लन्ड को देख कर दन्ग रह गयी. खूब मोटा और लम्बा था. लन्ड एक्दम सख्त और ऊपर को तना था. उसने झुककर लन्ड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. वो पूरे लन्ड पर चारों तरफ़ जीभ चलाती फ़िर मुंह में लेकर चूसती. मैने देखा की समीर का लन्ड भी पैन्ट के अन्दर तन के खडा है और वो उसे अपने हाथ से हल्के हल्के सहला राहा है. समीर ने देख लिया की मै उसके लन्ड को देख रही हूं और मुसकुरा दिया पर रुका नही. बलकी उसने अपनी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अब उसका लन्ड अन्डर्वेयर के अन्दर तन के दिखने लगा.
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06-11-2021, 12:26 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
भाई बहन की दोस्ती या वासना--2

आज कैसे चोदोगे?" रीना भैया के लन्ड को पकड कर हिलाती हुई बोली. सुनील उसे बेड पर लिटाते हुए बोला, तू लेट जा बस मै चोद लूंगा जैसे मन करेगा. वो लेट गयी. उसकी टांगे हमारी तरफ़ ही थी जिससे उसकी चूत का लाल चेद मुझे साफ़ दिख राहा था. फिर सुनील उसके ऊपर आया और अपने लन्ड को उसकी चूत पर रखा और धीरे धीरे घुसा कर पूरा अन्दर डाल दिया. लन्ड अन्दर जाते ही भाभी के चेहरे पर खुशी देखने वाली थी. उसने हाथों को भैया के कन्धों पर रख लिया था. फिर सुनील ने धीरे धीरे लन्ड अन्दर बहार कर चुदाई शुरू कर दी. मैं अपनी चुदती भाभी को देख बहुत ही गरम हो गयी थी. मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी और पैन्टी नीचे से पूरी भीग गयी थी. समीर ने भी अपने अन्डर्वेयर की मोरी मे से लन्ड निकाल कर उसे मुठ्ठी मे पकड कर ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया था. मुझसे भी अब राहा नही जा राहा था और मैने सल्वार के नाडे को खोल के ढीला किया और अपना एक हाथ अपनी पैन्टी मे डाल दिया और अपनी चूत को रगडने लगी. समीर ने मुझे ये करते हुए देख लिया पर मुझे अब पर्वाह नही थी. फिर समीर ने मेरे एक बूब के ऊपर अपना हाथ रख दिया और उसे थोडा सा दबाया. मैने उसकी तरफ़ देखा और उसने मेरी तरफ़. दूसरे हाथ से वो अपने लन्ड को हिलाता राहा. मैने उसे कुछ नही काहा और उसने अब मेरे मम्मों कोएक एक करके कमीज़ के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया. वहां कुछ देर तक सुनील भाभी को इसी तरह चोदता राहा और फ़िर लन्ड बाहर निकाल दिया. चूत के रस से भीगा लन्ड चमक रहा था. लन्ड बहर कर उसने रीना को उठाया और उसे डॊगी स्टाइल में किया और फ़िर पीछे से उसकी चूत में लन्ड पेल कर चुदायी शुरू कर दी. वो हाथ आगे कर रीना के दोनो मम्मों को पकड के कस कर चुदाई कर राहा था. मै अब पैन्टी मे हाथ डाले ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत और क्लिट को मसल रही थी. फिर समीर ने मेरी कमीज़ के गले के अन्दर अपना हाथ डाला और मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगा. मेरी मस्ती की कोई सीमा नही थी और मै चाह रही थी के वो मुझे पूरी तरह से नंगा कर दे, पर मै कुछ नही बोली. फिर उसने मेरा हाथ पकड कर पैन्टी से खींच के बाहर निकाल दिया और अपने लन्ड पर रख दिया और इससे पहले की मै कुछ बोलती अपना हाथ मेरी पैटी मे डाल दिया. वो मेरी चूत को सहलाने लगा और मै सातवें आसमान पर पहुंच गयी. मैने भी उसके लन्ड को अपनी मुठ्ठी मे लेकर हिलाना शुरू कर दिया जैसे मैने उसे करते देखा था. वहां ५-६ मिनट तक इस तरह से चोदने के बाद सुनील ने फिर लन्ड बाहर निकाला और खुद नीचे लेट गया. जब वो नीचे लेटा तो रीना जल्दी से ऊपर आयी और उसके लन्ड को पकड अपनी चूत से लगा उसपर बैठने लगी. लन्ड जब पूर अन्दर चला गया तो वो खुद ऊपर नीचे हो चुदवाने लगी. सुनील भी नीचे से अपनी गान्ड उठा उठा लन्ड पेल राहा था और हर धक्के पर भाभी ऊ आ ऊ कर रही थी. इस तरह से भी उसने ७-८ मिनट तक रीना को चोदा फ़िर उसे अपने बदन से चिपका लिया और बोला: आह्ह्ह रीना मैं झडने वाला हूं. आह्ह मेरा निकलने वाला है. रीना तेज़ी से एक झटका और देती हुई चिलाते हुए बोली: हां मै भी झड रही हूं. सुनील अब आह आह करता झड राहा था. झडने के बाद उसने रीना के होंठों पर अपने होंठ रखे और चूमने लगा. फिर दोनो एक दूसरे से चिपक कर बेड पर ढेर हो गये. इधर मै भी झड रही थी और अपने होंठों को दांतों मे दबा कर अपनी आवाज़ को रोक रही थी. मेरे हाथ मे समीर क लन्ड भी झटके खाने लगा और एक पिचकारी की तरह उसके लन्ड से वीर्य की धार निकल कर दूर जा गिरी. वहां कमरे से उठ कर सुनील बाथरूम मे चला गया तो रीना ने जलदी अपना नाईटगाउन पहना और भागकर खिडकी पर आयी और धीमी सी आवाज़ में मुझसे बोली: देखा अदिती तेरे भैया मुझे कैसे चोदते हैं? शो देख कर मज़ा आया? मैं शर्मा गयी और सिर्फ़ सर हिला दिया. वो थोडा सा हंसी और बोली: अब तुम दोनो जल्दी से याहां से निकल लो. मै अभी सोने के बिलकुल मूड में नही थी इसलिये मै और ऊपर वाली छत पर चली गयी. वहां पर खाली छत है और हमने सिर्फ़ एक गद्दा डाल रखा है कभी कभी छत पर आकर बैठने या लेटने के लिये. मेरे पीछे पीछे समीर भी छत पर आ गया और आते ही कहने लगा: कहो........ कैसी रही.......? मै: म्म्म..... ......... ....(मै कुछ देर खमोश रही और फिर बोली)....... ..समीर ये हमने ठीक नही किया........ .....हम दोनो बहन भाई हैं समीर: क्यों.. ........तो क्या हुआ?....... ......... .हमने क्या गलत किया? मै: तो क्या ये ठीक था? समीर: हां.. ...ठीक था........ .......अखिर हम दो एक दूसरे से प्यार करते हैं......... इस मे बुराई ही क्या है? मै: समीर मै तुम्हारी बहन हूं......... . समीर:देखो अदिती...... ........तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो.......... जिस के लिये मै कुछ भी कर सकता हूं......... ..अगर तुम को लगता है की मैने गलत किया तो आगे से मै तुमसे दूर रहूंगा. मै: नही समीर....... ...मै ऐसा नही चाहती. समीर: तो फिर ............ मै: तो फिर क्या? समीर: इस खुबसूरत माहौल को मज़ा लो.......... और क्या मै: समीर... ......... ....तुम क्या चीज़ हो.......... .तुम को ज़रा भी शर्म नही आती अपनी बहन से ऐसी बातें करते हुए? समीर:बहन से नही........ ...अपनी दोस्त से.......... ...अपनी जान से भी प्यारी दोस्त से....अच्छा एक बात बताओ. मै: क्या? समीर: सच सच बताना? मै: पूछो तो सही? समीर: मैने जो भी किया........ ...तुम को अच्छा लगा के नही? मै ये सवाल सुन कर चुप हो गयी और समीर को भी समझ आ गया था के मेरा जवाब क्या है. कुछ देर बाद वो खुद ही मेरी तरफ़ बढा और कहने लगा: थोडी देर के लिये भूल जाओ के हम बहन भाई हैं और अपने दिल से पूछो........ ...इस वख्त क्या दिल चाह राहा है तुम्हारा? मै अब समीर की आंखों मे देख रही थी और सोच रही थी अगर सच मे समीर मेरा भाई ना हो तो? ये सोचते ही मेरे मन मे एक लहर सी दौड गयी और मुझे अब समीर एक बहुत ही हैन्डसम लडका लग राहा था और उसे देखते देखते मै मुसकुराने लगी. अब मै थोडी रिलैक्स फ़ील कर रही थी.और समीर के पास जा कर आहिस्ता से उसे गगे लगा कर उससे लिपट गयी. समीर फिर समझ गया.और बोला: चलो आज की रात हम बहन भाई नही बल्की दोस्त और प्रेमी के रिश्ते से गुज़ारते हैं. क्या तुम तय्यार हो? मैने उसकी आंखों की तरफ़ देखते हुए सर हिला दिया. समीर ने मुझे अपने गले लगा लिया और अपने से चिपका लिया. उसका हाथ मेरी कमर पर उपर नीचे चल राहा था. मै उससे और ज़ोर से चिपक गयी.समीर ने कुछ देर बाद मुझे पीछे हटाया और मेरे होंठों को अपने होंठों से टच किया. ओ भगवान ......... .......क्या लम्हा था........ ..जैसे मै हवा मे उड रही हूं. आहिस्ता आहिस्ता मैने भी उसे रिस्पॊन्स देना शुरू कर दिया. अब हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस कर रहे थे.समीर ने अपना एक हाथ मेरे दाहिने बूब पर रख दिया. इस बार मुझे और भी मज़ा आ राहा था इसलिये मैने उसे नही रोका. हमारी किसिन्ग इतनी इनटेन्स हो गयी के हम एक दूसरे के होंठों को काटने लगे. मेरे अब बुरा हाल था.समीर ने अचानक मेरी कमीज़ को उठाना शुरू कर दिया. मै एक दम रुक गयी. और उसकी तरफ़ देखा....... ..उसने मुझे इशारे से ही ना रुकने को काहा. पता नही मुझे क्या हुआ के मैने उसे फिर से किस करना शुरू कर दिया. वो मेरी कमीज़ फिर से उतारने लगा. मैने इस बार उसकी मदद भी की. अब मै सिर्फ़ ब्रा और सलवार मै थी. मै सिर्फ़ चूमने पर ध्यान दे रही थी और वो आहिस्ता आहिस्ता मेरी ब्रा भी खोल राहा था. मुझे पता था के वो क्या कर राहा है लेकिन मैने समीर को इस बार बिल्कुल भी नही रोका. मेरी ब्रा भी उतर चुकी थी अब. समीर ने मेरे होंठों को चूमना छोड दिया और पीछे हो कर मेरे बूब्स को देखने लगा. मुझे अब शरम आ रही थी और मैने अपने दोनो हाथ अपने बूब्स पर रख लिये. वो मुसकुराया और अपनी शर्ट उतारने लगा. मै अब उसे बडे गौर से देख रही थी. इस के बाद उसने पैन्ट भी उतार दी. अब वो सिर्फ़ अन्डर्वेयर मे था और मै सिर्फ़ सलवार मे. मै अब भी अपने हाथों से बूब्स छुपा रही थी. वो मेरे करीब आया और मेरे हाथ छाती से हटाने लगा. मैने रेसिस्ट नही किया और हाथ हटा लिये. अब वो मेरे बूब्स को देख राहा था और फिर आगे बढा और मेरे बूब्स को चूसने लगा. ओ भगवान.....क्या लग राहा था......... मेरी इस बात का अन्दाज़ा सिर्फ़ वो लडकियां ही लगा सकती हैं जिन्होंने ये करवा रखा हो. मैने उसको सर से पकडा हुआ था और मेरी आंखें बन्द थी. समीर अभी भी मेरे मम्मे चूस राहा था और उसके साथ साथ उसने मेरी सलवार का नाडा खोल दिया जिस के साथ ही मेरी सलवार नीचे गिर गयी. अब मै सिर्फ़ पैन्टी मे थी. उसने बूब्स को किस करते हुए अपना अन्डर्वेयर उतार दिया और फिर मेरी पैन्टी भी नीचे खींच कर उतार दी. अब हम दोनो बहन भाई खुले आसमान के नीचे बिलकुल नंगे खडे थे और वो मेरे मम्मों को चूस राहा था. मुझे बहुत ही मज़ा आ राहा था. उसने हम दोनो के कपडे एक साईड पर कर दिये और मुझे गद्दे पर लेटने के लिये काहा और मै लेट गयी. अब समीर मेरे उपर लेट गया. लेकिन एक दम मुझे जैसे कोई करन्ट लगा. क्यों के इस सारे नशे मे मै समीर की वो चीज़ तो भूल ही गयी थी जो अब मेरे वैजाईना के बिलकुल उपर थी. हां उस का लन्ड......... ......हे भगवान......... ..पहली बार किसी का लन्ड मेरे वैजाईना के साथ टच किया था. मै बिल्कुल पागल हो चुकी थी अब. उस का लन्ड बहुत ही सख्त हो चुका था और गरम भी बहुत था. वो मेरे लेटे शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमने लगा. फिर मेरे मम्मों को कुछ देर फिर चूस के आहिस्ता आहिस्ता मेरी चूत तक पहुंच गया. अब तो मै मरने वाली थी. जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान मेरे वैजाईना पर लगायी मेरे मुंह से वैसी ही अवाज़ें निकलनी शुरू हो गयी जो कुछ देर पहेले रीना भाभी के मुंह से निकल रही थी. अब मेरी समझ मे आया के वो इतना क्यों तडप रही थी. अब मै समीर के सर पर हाथ रख कर अपनी चूत की तरफ़ दबा रही थी. मेरा मन कर राहा था की वो ऐसे ही रहे हमेशा के लिये.वो और भी ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाटने लगा. उसकी ज़ुबान ने मेरा बुरा हाल कर दिया था. करीब ८ से १० मिनट तक वो यही करता राहा. अब मै बिलकुल समीर के वश मे थी और उसके कहने पर कुछ भी करने को तय्यार थी. समीर ये जानता था और इसी बात का फ़ायदा उठाया उसने. वो फिर से मेरे ऊपर आ कर लेट गया और लिप किसिन्ग करने लगा लेकिन इस बार एक और काम किया उसने. मेरी दोनो टांगों को खोल दिया और उनके बीच आ गया. मेरे कान मे बोला........ ..अदिती क्या तुम मुझे अपनी सब से कीमती चीज़ दोगी? क्या तुम मुझे इतना प्यार करती हो?

मै: क्या मतलब तुम्हारा..... ......... ? मै सारी दुनिया से ज़्यादा प्यार करती हूं अपने भाई से. अपना सब कुछ तो तुम को दे दिया है अब और क्या चाहिये तुम को? समीर: अच्छा. ......अब मै जो करने वाला हूं उसको बर्दाश्त कर लोगी? मै: क्या करने वाले हो तुम? समीर: अपना लन्ड तुम्हारे वैजाईना के अन्दर डालने लगा हूं. पहली बार थोडी तक्लीफ़ होती है पर कुछ देर के बाद मज़ा आना शुरू हो जायेगा मै: समीर... .....देख लो.......... .कोई गरबड ना हो जाये समीर: मुझ पर भरोसा है ना तुमको? मै: हां पूरा भरोसा है समीर: तो बुस तुम चुपचाप मै जो कर राहा हूं करने दो और थोडी देर के लिये तक्लीफ़ बर्दाश्त कर लेना...... मेरे लिये. मै: समीर तुम जो करना चाहते हो कर लो.......... .मै कुछ नही कहूंगी. मेरी ये बात सुन कर समीर ने मेरी टांगें और खोल दी और उनके बीच सीधा बैठ गया. पहली बार अब समीर का लन्ड नज़र आया मुझे...... ........हे भगवान ......... .वो तो बहुत बडा था........ मै फ़ोरन बोली: समीर ये तो सुनील भैया से भी बडा है. समीर ये सुन कर हंस पडा और उसने मेरा हाथ अपने लन्ड पर रख दिया. पहेले तो मैने पीछे हटाया पर जब उसने फिर पकडाया तो मह्सूस किया के बहुत ही सख्त और गरम था. समीर: अब इस का कमाल देखो सिर्फ़ तुम. ये कह कर वो अपना लन्ड मेरी चूत के ऊपर रगडने लगा. समीर की इस हर्कत से मुझे एक अजीब सा मज़ा आ राहा था. फिर उसने अपने लन्ड को आहिस्ता से मेरी चूत के अन्दर की तरफ़ धकेल दिया जिससे थोडा सा लन्ड मेरे अन्दर चला गया. अब मै आप को क्या बताऊं. इतना दर्द हुआ के बता नही सकती. लेकिन मै समीर से वादा कर चुकी थी इस लिये अपने होंठों को अपने दांतों मे दबा कर चुप रही. समीर मेरी हालत देख कर बोला: अभी तो सिर्फ़ १०% ही गया है. ये सुन कर मेरी तो जान ही निकल गयी. अगर १०% पर ये हाल है तो आगे क्या होगा. लेकिन मै फिर भी चुप रही. समीर अब आहिस्ता आहिस्ता लन्ड को और अन्दर धकेल राहा था और मेरी जान निकल रही थी. फिर उसने एक ज़ोर क धक्का मारा और पूरा लन्ड एक झटके से अन्दर घुसा दिया. मेरी तो चीख निकल गयी. आवाज़ इतनी थी के अगर हम कमरे मे होते तो शायद सब जाग जाते. समीर ने अकलमन्दी की और एक्दम अपने होंठ मेरे होंठों के साथ जोड दिये जिससे मेरी आवाज़ कम हो गयी. अब दर्द मेरी बर्दाश्त के बाहर था. मैने आंसू भरी आवाज़ मे काहा: समीर प्लीज़ निकाल दो नही तो मै मर जाऊंगी. समीर: बस मेरी जान हो गया........ ...कुछ देर मे ही दर्द खत्म हो जायेगा.......... ...बस थोडी देर रुक जाओ........ ......मेरे लिये. समीर की बात ने मुझे मजबूर कर दिया और मै चुप कर के बर्दाश्त करती रही. वो भी बगैर हिले मुझ पर लेटा राहा अपने लन्ड को मेरी चूत मे घुसाये. काफ़ी देर हम ऐसे ही रहे. अब वाकयी मुझे दर्द थोडा कम होता मह्सूस हुआ. मेरे चहरे को देख कर समीर को पता चल गया की अब मै पहले से ठीक हूं. समीर का लन्ड एक गरम सलाख की तरह मेह्सूस हो राहा था. अब समीर आहिस्ता आहिस्ता अपने लन्ड को आगे पीछे करने लगा. पहली ५ या ६ बार आगे पीछे करने पर मुझे फिर दर्द हुआ लेकिन वो भी आहिस्ता आहिस्ता एक अजीब से सरूर मे बदल राहा था. और कुछ देर के बाद मुझे सच मे मज़ा आने लगा. एक ऐसा मज़ा जिसका मुझे अन्दाज़ा भी नही था और मै बता भी नही सकती. मै अपने ही भाई का लन्ड अपने अन्दर ले चुकी थी. मै वो हर लिमिट पार कर चुकी थी जो शायद आज तक किसी देसी लडकी ने नही की थी. अपने भाई की मानो बीवी या लवर बन चुकी थी. समीर अब अपनी स्पीड बढाने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा. अब मै समीर को कमर से पकड कर ज़ोर ज़ोर से अपने अन्दर करवा रही थी. कुछ ही देर मै मेरे अन्दर एक अजीब स तुफ़ान उठा. पता नही क्या हो राहा था मुझे मै पागलों की तरह समीर को नोचने लगी. अब समीर का पीछे हटना भी मन्ज़ूर नही था मुझे. मेरा दिल कर राहा था के वो अन्दर ही अन्दर जाता जाये. मै सरूर की सीमा पर आ चुकी थी. मेरी आह निकली और पूरे शरीर में एक लैहर दौड गयी. मेरा पूरा शरीर अकड गया और मुझे एक इतना ज़बर्दस्त आर्गैस्म आया की मै झटके खाने लगी. फिर एक दम मेरे अन्दर जैसे कोई तुफ़ान थम गया हो. मै बहुत ही ज़्यादा मधोश थी. लेकिन समीर अभी भी लन्ड अन्दर बाहर कर राहा था. फिर पता नही उसे क्या हुआ और उसने अपनी स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और उसके मुंह सी भी अवाज़ें आने लगी. मुझे ये आवाज़ें बहुत ही अच्छी लग रही थी और फिर उसने एक झटके से अपने लन्ड को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ मे पकड कर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगा. फिर एक दम उस के लन्ड से वीर्य की धार निकली जो सीधी मेरी छाती पर जा गिरी. काफ़ी गरम था वो पानी. इस के बाद वो भी वैसे ही शान्त हो गया जैसे कुछ देर पहले मै हुई थी. समीर मेरी साएड पर लेट गया. अब हम दोनों बहन भाई खुले आस्मान की तरफ़ देख रहे थे. काफ़ी देर तक ऐसे ही रहे. फिर मुझे खयाल आया की हम तो नंगे हैं और खुली छत पर अगर कोई आ गया तो क्या होगा. ये सारी बातें पहले नही सोची मैने. ये सोचते ही मैने समीर को काहा: जलदी करो........ ......याहां से चलें अब.......... ...कोई आ गया तो.......... ........मेरे कपडे कहां हैं?....... .......काहां रख दिये तुमने......... .? समीर: वो दीवर के साथ साफ़ जगह पर हैं. उठा लो वहां से और मेरे भी ले आओ. ये सुन कर जैसे ही मै उठने लगी तो मुझे अभी भी वैजाईना पर दर्द हो राहा था जो मै कुछ देर से भूल चुकी थी. मैने समीर की तरफ़ देखा और झूटे गुस्से से कहा ....... .......समीर . ......... ....मेरे वैजाईना को फाड दिया है तुमने......... ऐसा करता है क्या कोई अपनी बहन के साथ?ये सुन कर समीर हंसने लगा. उस समय मेरा एक हाथ मेरे वैजाईना पर था. मुझे कुछ गीला गीला मह्सूस हुआ. मैने हाथ लगा कर जब चेक किया तो मेरी चीख निकलते निकलते रह गयी........ वो तो खून थ.....ये क्या हुआ? मै घबरा के बोली: मै तो ज़खमी हो गयी हूं.....अब क्या होगा? समीर ने बडे प्यार से काहा: कुछ नही होगा बुद्धू ... ......... ऐसा ही होता है पहली बार. अगली बार ऐसा नही होगा समीर की बात सुन कर मुझे कुछ हौसला हुआ और हम दोनों ने अपने अपने कपडे पहने. और वो जगह साफ़ की जहां खून गिरा था और बडे ही आराम से अपने अपने कमरे मै चले गये. किसी को कुछ पता नही चला. अब अपने बिस्तेर पर लेटी हुई उस रात की सारी बातें याद करने लगी. मै बहुत गिल्टी फ़ील कर रही थी पर साथ साथ मुझे ये भी पता था के मै इस बात से इनकार नही कर सकती थी के मुझे बहुत मज़ा भी आया. मुझपर एक अजीब सा सकून छाया हुआ था. मुझे पता था की आज मैने समीर के साथ आखरी बार चुदाई नही की है और चाहे कुछ भी सोचूं, ये फिर से होगा और मै अपने आप को रोक नही पाऊंगी. और हुआ भी और एक दो बार तो रीना भाभी और मैने मिल के समीर के साथ चुदाई की.
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06-11-2021, 12:26 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
दीदी ने मुझे चुदवाया--1

मैं रजनी हूँ इस साल मेरी शादी होने वाली है. मैं छ्होटे एक कस्बे

की सीधी साधी लड़की हूँ. सुंदर और भरे बदन की मालिका. जो भी

देखता बस देखता ही रह जाता. काफ़ी मनचलों ने डोरे डालने की

कोशिश की मगर मैं हमेशा अपना दामन बचा कर चलती थी. मैने

ठान रखा था कि अपना बदन सबसे पहले अपने पति को ही सौंपूँगी.

मगर किस्मत मे तो कुच्छ और ही था.

मेरी एक बड़ी बहन भी है रश्मि. रश्मि दीदी की शादी को चार साल

हो गये थे. मेरा जीजा मुकेश बहुत ही हॅंडसम आदमी है. बातें इतनी

अच्छी करते हैं कि सुनने वाला बस उनके सम्मोहन मे बँधा रह जाता

है. दीदी के मुँह से उनके बहुत किस्से सुन रखे थे. उनकी शादी से

पहले कई लड़कियों से उनके संबंध रह चुके थे. कई लड़कियों से वो

संभोग कर चुके थे.

मैं शुरू शुरू मे उनपर बहुत फिदा थी. आख़िर साली जो ठहरी. मगर

उनके कारनामे सुनने के बाद उनसे सम्हल कर रहने लगी. मैने देखा

था कि वो मुझसे हमेशा चिपकने की कोशिश करते थे. मोका ढूँढ

कर कई बार मुझे बाहों मे भी भर चुके थे. एक दो बार तो मेरी

चूचियो को अपनी कोहनी से दाब चुके थे. मैं उनसे दूरी रखने लगी.

मगर शिकारी जब देखता है कि उसका शिकार चोकन्ना हो गया है तो

उसे पकड़ने के लिए तरह तरह की चाल चलता है. और निरीह शिकार

उसके चालों को ना समझ कर उसके जाल मे फँस जाता है.

मेरे संबंध की बातें चल रही थी. मम्मी पापा को किसी लड़के को

देखने दूर जाना था. दो दिन का प्रोग्राम था. घर पर मैं अकेली रह

जाती इसलिए उन्हों ने दीदी और जीजा को रहने के लिए बुलाया. वैसे

मैने उनसे कहा कि मैं अकेली रह जाउन्गि लेकिन अकेली जवान लड़की को

कोई भी माता पिता अकेले नही छ्चोड़ते.

दीदी और जीजा के आने के बाद मेरे मम्मी पापा निकल पड़े. जैसा मैने

सोचा था उनके जाते ही मुकेशजी मेरे पीछे लग गये. द्वि अर्थी

बातें बोल बोल कर मुझे इशारा करते. दीदी उनकी बातें सुन कर हंस

देती. मैं दीदी से कुच्छ शिकायत करती तो वो कहती कि जीजा साली के

संबंधो मे ऐसा चलता ही रहता है. मुकेश जी पर किसी बात का कोई

असर नही होता था.

मैं उनकी हरकतों से झुंझला उठी थी. उस दिन मैं नहा कर निकली तो

मुकेश जी ने मुझे अपनी बाहों मे भर कर मेरे बालों मे अपना चेहरा

घुसाकर सुगंध लेने लगे. मैं गुस्से से तिलमिला उठी और उन्हे

धकेलते हुए उनसे छितक कर अलग हो गयी.

"आप अपनी हदों मे रहिए नही तो मैं मम्मी पापा से शिकायत कर

दूँगी"

"मैने ऐसा क्या किया है. बस तुम्हारे बालों की महक ही तो ले रहा

था." कहकर मुकेशजी ने वापस मुझे पकड़ना चाहा.

"खबरदार अपने हाथ दूर रखिए. मुझे च्छुने की भी कोशिश मत

करना"

मगर वो बिना मेरी बातों की परवाह किए अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ाए.

मैं अपने को सिकोडते हुए ज़ोर से चीखी"दीदी"

दीदी किचन से निकल कर आई.

"क्या हुआ क्यों शोर मचा रही है"

"दीदी, जीजाजी को समझा लो. वो मेरे साथ ग़लत हरकतें कर रहे हैं."

दीदी ने उनकी ओर देखते हुए कहा, "क्यों रजनी को परेशान कर रहे हो"

"मैं क्या परेशान कर रहा हूँ? पूच्छो इससे मैने ऐसी कौन सी

हरकत की है जो ये बिदक उठी"

"दीदी ये मुझे अपनी बाहों मे लेकर मेरे बदन को चूमने की कोशिश

कर रहे थे."

"ग़लत बिल्कुल ग़लत. मैं तो अपनी इस खूबसूरत साली के बालों पर

न्योचछवर हो गया था. मैं तो बस उसके सुंदर सिल्की बालों को चूम

रहा था. पूच्छो रजनी से अगर मैने इसके बालों के अलावा कहीं होंठ

लगाए हों तो"

इससे पहले की दीदी कुच्छ बोलती मैं बोल उठी, "नही दीदी ये आपके सामने

झूठ बोल रहे हैं. इनकी कोशिश तो मेरे बदन से खेलने की थी."

दीदी ने जीजा जी की तरफ देखा तो वो कह उठे "तुम्हारी कसम रश्मि

मैं रजनी के सिर्फ़ बालों को छू रहा था. देखो कितने सुंदर बाल

हैं"

ये कह कर वो मेरे पास आकर वापस मेरे बालों पर हाथ फेरने लगे.

मैं गुस्से से तिलमिला कर उनको धकेलते हुए उनसे दूर हो गयी.

"रहने दो रहने दो मुझे आपकी सारी हरकतें मालूम हैं. आप बस

मुझसे दूर ही रहिए" मैं रुवासि हो उठी.

" अरे रजनी क्यों इनकी हरकतों को इतना सीरीयस लेती हो. अगर ये

तुम्हारे बालों को चूमना चाहते हैं तो चूम लेने दो. इस से तुम्हारा

क्या नुकसान होज़ायगा." दीदी ने समझाते हुए कहा.

"अरे दीदी ये जितने भोले बन रहे हैं ना उतने हैं नही"

" रजनी अब मान भी जा" दीदी ने फिर कहा.

" ठीक है. लेकिन ये वादा करें कि सिर्फ़ मेरे बालों के अलावा कुच्छ भी

नही छ्छूएँगे" मैने कहा

"ठीक है मैं तुम्हारी दीदी की कसम लेकर कहता हूँ की सिर्फ़ तुम्हारे

बालों को ही चूमूंगा उसके अलावा मैं और किसी अंग को नही छ्छूंगा.

लेकिन अगर तुम खुद ही मुझे अपने बदन को छूने के लिए कह्दो फिर?"

उन्हों ने मुझे छेड़ा

"फिर आपकी जो मर्ज़ी कर लेना मैं कुच्छ भी नही कहूँगी. मैं भी

कसम खाती हूँ कि आप अगर सिर्फ़ बालों को चूमे तो मैं कुच्छ भी नही

कहूँगी"

"देख लो बाद मे पीछे मत हटना" मुकेश जी ने कहा.

"जी मैं आप जैसी नही हूँ. जो कहती हूँ करके रहती हूँ."

"ठीक है जब तुम राज़ी हो ही गयी हो तो ये काम आराम से किया जाए.

चलो बेड रूम मे. वहाँ बिस्तर पर लिटा कर आराम से चूमूंगा तुम्हरे

बालों को" उन्हों ने चहकते हुए कहा. मैने और ज़्यादा बहस नही किया

और चुपचाप उनके साथ हो ली.

हम बेडरूम मे आ गये. मैं बिस्तर पर लेट गयी. और अपने बदन को

ढीला छ्चोड़ दिया.दीदी ने मेरे बालों को फैला दिया.

जीजाजी बिस्तर पर मेरे बगल मे बैठ कर अपने हाथों मे मेरे बाल

लेकर उन्हे चूमने लगे. धीरे धीरे उनके होंठ मेरे सिर तक आए.

मेरे सिर पर बालों को तरह तरह से चूमा फिर मुझे पीछे घूमने

को कहकर मेरे गर्देन मे अपने होंठ च्छुआ दिए. गर्दन पर पहली बार

किसी मर्द की गर्म साँसों के पड़ने से मन मे एक बेचैनी सी होने

लगी. फिर उन्हों ने मुझे सीधा किया और मेरे बालों से उतरकर उनके

होंठ मेरे माथे को चूमने लगे. मैं ये महसूस करते ही चौंक उठी.

"ये क्या कर रहे हो. आपने वादा किया था कि मेरे बालों के अलावा किसी

अंग को नही छ्छूएँगे." मैने उठने की कोशिश की.

"मैं वही कर रहा हूँ जो मैने वादा किया था. मैं तुम्हारे बालों को

ही चूम रहा हूँ. मैने ये कहाँ कहा था कि सिर्फ़ सिर के बालों को

चूमना चाहता हूँ. हां अगर ये साबित कर दो कि तुम्हारे बदन पर

सिर के अलावा कहीं और बाल नहीं हैं तो छ्चोड़ दूँगा."

मुझे सारा कमरा घूमता हुआ सा लगा. मैं अपने ही जाल मे फँस चुकी

थी. सिर, बगल, योनि पर ही क्या रोएँ तो पूरे शरीर पर ही होते

हैं. उफफफ्फ़ ये मैं क्या कसम ले बैठी. लेकिन अब तो देर हो चुकी थी.

उसके होंठ मेरे भोन्हो से सरकते हुए मेरी आँखों के पलकों पर

आगाए. उनकी होंठों का हल्का हल्का स्पर्श मुझे मदहोश कर दे रहा

था. मेरी पलकों पर से घूमते हुए वापस माथे पर आकर ठहरे. फिर

नाक के ऊपर से धीरे धीरे नीचे सरकने लगे. स्पर्श इतना हल्का

था मानो को मेरे बदन पर मोर पंख फिरा रहा हो. मेरे रोएँ उसके

स्पर्श से खड़े हो जा रहे थे. अब उसके होंठ मेरे होंठो के ऊपर

आकर ठहर गये. उनके और मेरे होंठों मे सिर्फ़ कुच्छ मिल्लिमेटेर की

दूरी थी. मैं सख्ती से आँखे भींच कर उनके होंठों के स्पर्श का

इंतेज़ार कर रही थी. ये क्या कुच्छ देर उसी जगह ठहरने के बाद

उन्हों ने अपने होंठ वापस खींच लिए. मैं उनकी इस हरकत से

झुंझला कर आँखें खोल दी. पता नही क्यों आज वो इतने निष्ठुर हो

गये थे. रोज तो मुझे स्पर्श करने का बहाना ढूँढते थे. मगर आज

जब मैं मन ही मन चाह रही थी को वो मुझे स्पर्श करें तो वो दूरी

मेनटेन कर रहे थे.

वो उठ कर बैठ गये.

"इसके कपड़े उतार दो. कपड़ों के उपर से मैं कैसे पूरे बदन के बालों

को चूम सकूँगा." उन्हों ने कहा. दीदी ने मेरी तरफ देखा. मैने

बैठते हुए अपने हाथ ऊपर करके अपनी राजा मंदी जता दी. दीदी ने

मेरी कमीज़ उतार दी. टाइट ब्रा मे कसे मेरे स्तनो को देख कर मुकेश

जी की आँखें बड़ी बड़ी हो गयी. फिर दीदी ने मेरी ब्रा के हुक खोल

दिए. ब्रा लूस होकर कंधे पर झूल गयी. मैने खूद अपने हाथों

से उसे उतार कर तकिये के पास रख दी. मैने अपने स्तनो को अपने

हाथों से धक लिया और शरमाते हुए मुकेश जी की तरफ देखा. वो

मुस्कुराते हुए अपनी मेरे बदन पर आँखें फिरा रहे थे. अब दीदी ने

आगे बढ़कर मेरी सलवार का नाडा खोल दिया. मैने झट पास पड़ी चादर

से अपने बदन को ढक लिया. दीदी ने चादर के अंदर हाथ बढ़ा कर

मेरी सलवार खोल दी फिर मेरी छ्होटी सी पॅंटी को भी पैरों से उतार दिया

मैं बिल्कुल नग्न हो कर लेट गयी. दीदी पास से हट गयी.

क्रमशः............
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06-11-2021, 12:27 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
दीदी ने मुझे चुदवाया--2

गतान्क से आगे.......................

मुकेश जी वापस मेरे पास आकर बैठ गये. मेरे होंठो के ऊपर से

बिना उन्हे च्छुए दो तीन बार अपने होठ घूमकर मेरे कानो की ओर

सरक गये. उनकी गर्म साँसे अब मेरे कानो पर पड़ रही थी. मैं अब

उत्तेजित होने लगी थी. कसम के कारण कुच्छ भी नही कर पा रही थी.

बस अपने तकिये को मुत्ठियों से मसल रही थी. अब उनके होठ गले से

होकर नीचे उतरने लगे. पहले उन्हों ने मुझे पेट के बल सुला दिया.

फिर मेरे बदन पर से चादर हटा कर अपने होंठ मेरे गर्देन से होते

हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगे. रीढ़ की हड्ड़िक़े उपर ऊपर से

लेकर मेरे कमर तक अपने होंठ फिराने लगे. कई बार तो मैं सिहरन

से उच्छल पड़ती थी. मैने अपना चेहरा तकिये मे दबा रखा था. और

दाँतों से तकिये को काट रही थी. उनके होठ पूरी पीठ पर फिरने के

बाद उन्हों ने मुझे सीधा किया. अब मैने अपने बदन को च्चिपाने की

कोई कोशिश नही की. मैं निर्लज्ज होकर अपनी दीदी की मौजूदगी मे ही

उनके हज़्बेंड के सामने नग्न लेटी हुई थी. जीजा जी के होंठ मेरे गले

से होते हुए मेरी चूचियो के पास आकर ठहरे. पहले उनके होठों ने

मेरी चूचियो की परिक्रमा की फिर दोनो चूचियो के बीच की घाटी

की सैर करने लगे. धीर धीरे उनके होंठ मेरे एक चूची पर चढ़

कर मेरे निपल के पास पहुँच गये. मेरे निपल्स उनके आगमन मे

खड़े होकर एकदम सख़्त हो गये थे. मुकेश जी अपने होठ मेरे निपल

के चारों ओर फिराने लगे. हल्के हल्के से निपल के ऊपर भी फिराने

लगे. मैं उत्तेजना से छटपटा रही थी. मुँह से अक्सर "आआहह

ऊऊओह" जैसी आवाज़ें निकालने लगी मेरे पैर भी सिकुड़ने और खुलने

लगे थे. मेरा सिर तकिये पर इधर उधर झटके ले रहा था. जी कर

रहा था जीजा जी मेरे स्तनो को मसल मसल कर लाल कर दें. दोनो

निपल्स को दन्तो से काट काट कर लहुलुहन कर दें मगर मैं किसी

तरह अपने ऊपर कंट्रोल कर रही थी. उन्हों ने अपने होंठ खोले और

उसे निपल के चारों ओर लगा कर गोल गोल फिराने लगे. मगर निपल

पर बिल्कुल भी होंठ नही लगा रहे थे. मैं कतर आँखों से दीदी की

ओर देखी. वो चुप चाप खड़ी हम दोनो की हरकतें देख रही थी.

काफ़ी देर तक मेरे दोनो निपल्स के ऊपर अपने होंठ फिरने के बाद

उनके होंठ मेरी नाभि की ओर बढ़ चले. नाभि के ऊपर काफ़ी देर तक

होंठ फिराने के बाद बाकी पूरे पेट को चूमा. फिर नीचे की ओर सरक

कर बिना मेरी योनि की तरफ बढ़े मेरे पैरों के पास आ गये. मेरे एक

पैर को उठाकर उस पर अपने होंठ फिराने लगे. मुझ से अब रहा नही

जा रहा था. उसके होंठ पंजों से सरकते हुए जांघों के अन्द्रूनि

हिस्सों तक सफ़र करके वापस दूसरे पैर की तरफ लौट गये. मेरी

योनि से रस चू रहा था. पूरी योनि गीली हो रही थी. अब दूसरे

पैर से आगे बढ़ते हुए उनके होंठ मेरे जाँघो से होते हुए मेरी योनि

पर उगे बालों पर फिरने लगे. पहले उन्हों ने मेरी योनि के ऊपर सामने

की तरफ उगे बालों पर काफ़ी देर तक होंठ फिराए. फिर उनके होंठ

नीचे की ओर उतरने लगे. मैने अपने पैरों को जितना हो सकता था

उतना फैला दिया जिससे उन्हे किसी तरह की कोई बाधा महसूस ना हो. जब

उनके होंठ चींटी की गति से चलते हुए मेरी योनि के मुँह पर आए

तो मैं उबाल पड़ी.

"ऊऊऊहह म्‍म्म्ममममाआआअ" करते हुए मैने अपने हाथों से उनके सिर

को मेरी योनि पर दबा दिया. मैं अपनी कसम खुद ही तोड़ चुकी थी. अब

मुझे कोई परवाह नही थी दुनिया की अब तो सिर्फ़ एक ही ख्वाहिश थी कि

जीजा जी मेरे बदन को बुरी तरह नोच डालें. मेरी योनि मे अपना लिंग

डाल कर मेरी खाज मिटा दें. मेरे मुँह से मेरे मन की भावना फुट

पड़ी.

"ऊऊओ जीएजजीीीइ अब और मत सताओ मैईईइ हाआअर गइई.

प्लीईसए मुझे मसल डालो. प्लीईएआसए"

उन्हे मेरी ओर से रज़ामंदी मिल चुकी थी. वो अपनी जीभ मेरी योनि मे

प्रवेश करा दिए. मेरे बदन मे एक बिजली सी दौड़ गयी और मैने

अपनी योनि ऊपर की ओर उठा दी. मेरा डिसचार्ज हो गया . मगर गर्मी

बिल्कुल भी कम नही हुई. मैने हाथ बढ़ाकर पॅंट के ऊपर से उनके

लिंग को भींच दिया. मैने पाया कि उनका लिंग एक दम तन के खड़ा हुआ

था. उन्हों ने मेरी हालत समझ कर अपने चेहरे को मेरी योनि से उठा

कर अपने कपड़े खोल दिए. वो भी बिल्कुल नग्न हो गये. फिर मेरी टाँगों

को अपने हाथो से पकड़ कर फैला दिया और मेरी योनि के मुहाने पर

अपना लिंग रख कर फिराने लगे. मैं अपनी योनि को उनके लिंग की तरफ

उठा रही थी जिससे कि वो मेरे अंदर घुस जाए. मगर वो थे कि मुझे

परेशान कर रहे थे.

"ह्म्‍म्म रजनी रानी बोलो क्या चाहिए." उन्हों ने मुस्कुराते हुए पूचछा.

"ऊऊओ क्यूँ सताते हो. प्लीज़ डाल दो इसे अंदर."

"नही पहले बताओ क्या चाहिए तुम्हे."

"आपका……..आपका लिंग……आपका लिंग"

"क्यों? मेरा लिंग क्यों चाहिए तुम्हे?

"मुझे चोद दो प्लीज़ अपने लिंग से मुझे चोदो खूब चोदो" मैं पूरी

तरह बावली हो गयी थी.

"उन्हु मैं नही देने वाला तुम्हे. तुम्हे अगर इसकी भूख लग रही है

तो खुद ही डाल लो इसे अपने अंदर."

मैं अब रुक नही सकी. मैने एक हाथ की चार उंगलियों से अपनी योनि के

द्वार को खोला औड दूसरे हाथ से उनके लिंग को छेद पर सेट करके अपने

पैरों को उनकी कमर पर लप्पेट दिया और पूरे ज़ोर से अपनी कमर को

उचकाया. उनका लिंग मेरी योनि को छीलता हुआ काफ़ी अंदर तक चला

गया . मैं दर्द से कराह उठी "उईईईईईई माआअ दीईदीईए आआआहह"

दीदी ने मेरे बालो पर हाथ फेरते हुए कहा "बस रजनी थोड़ा सा और

सब्र कर लो बस थोड़ा दर्द और होगा. सुनिए रजनी का ये पहला मौका

है थोड़ा धीरे धीरे करना बेचारी को दर्द ना हो"

अब मुकेश ने मुझे परेशान करना छ्चोड़ कर अपने लिंग को कुच्छ बाहर

निकाला और उसे वापस एक धक्के से अंदर कर दिया. उनका लिंग मेरी

झिल्ली को फाड़ते हुए अंदर प्रवेस कर गया.

मैं "आआआआआअहह हह" कर उठी. उनका लिंग पूरा मेरी योनि मे

फँस चुक्का था. जैसे ही उन्हों ने वापस निकाला तो उसके साथ कुच्छ

तरल प्रदार्थ भी बाहर निकल गया . अब पता नही वो रस था याँ मेरा

खून. मेरी योनि मे लग रहा था मानो आग लगी हुई है. इतनी बुरी

तरह जल रहा था मानो किसी ने उसे चीर के रख दिया हो.

धीरे धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और उसके जगह उत्तेजना ने लेली.

वो मुझे अब ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. मैं भी अपनी कमर उच्छाल उच्छाल

कर उसके लिंग को अपनी योनि मे ले रही थी. काफ़ी देर तक इसी तरह

चोदने के बाद उन्हों ने बिस्तर पर मुझे चौपाया बना कर पीछे से

अपने लिंग को वापस मेरी योनि मे डाल दिया. मैं उनसे चुदती हुए दो

बार पानी छ्चोड़ चुकी थी. काफ़ी देर तक इसी तरह करने के बाद मुझे

महसूस हुआ कि उनका लिंग फूल रहा है. उन्हों ने एक जोरदार धक्का

मारा तो मैं अपने को सम्हाल नही पाई और बिस्तर पर मूह के बल गिर

पड़ी वो भी मेरे ऊपर गिर पड़े और उनके लंड से एक तेज धार निकल

कर मेरी योनि मे समाने लगी. हम दोनो यूँ ही पड़े पड़े हाँफ रहे

थे. काफ़ी देर तक यूँ ही पड़े रहने के बाद वो उठने लगे

"बस…." मैने उन्हे खींचा "इतनी जल्दी हार मान गये. अभी तो मैं

आपके बालों को चूमूँगी"

कहकर मैने उनके हाथ को पकड़ कर अपनी ओर खींचा. वो मेरे नंगे

बदन पर गिर पड़े. मैने देखा दीदी जा चुकी थी. मैने उन्हे बिस्तर

पर दबा कर लिटा दिया

मैं उठकर उनकी जांघों पर बैठ गयी. मैने देखा जहाँ मैं लेटी

थी वहाँ चादर खून से लाल हो रहा था. मैने उनके निपल्स पर

अपनी जीभ फिराने के बाद उनके निपल्स को दाँतों से काटा और उनके

होंठों पर अपने होंठ रह दिए. मैने अपनी जीभ उनके मुँह मे घुसा

दी और उनके मुँह मे उसकी जीभ और दाँतों पर फिराने लगी. काफ़ी देर

तक मैने उनके मुँह का रस पिया फिर उठ कर उनके ढीले पड़े लंड को

देखा. पहले उस लिंग को एक किस किया फिर हाथ से सहलाते हुए उसे

देखने लगी. उनकी लिंग पर अभी भी हमारा रस और कुच्छ कतरे खून

के लगे थे. मैने तकिये के पास रखी अपनी ब्रा उठाकर उनके लिंग को

पोंच्छा. फिर अपनी जीभ निकाल कर उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक

चटा. उनके बॉल्स पर भी अपनी जीभ फिराई. उनका लिंग वापस हरकत

मे आने लगा था. फिर मैने उनके लिंग को अपने मुँह मे समा लिया और

उनके लिंग को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. कुच्छ ही देर मे उनका लिंग पहले

की तरह खड़ा हो गया. अब मैने उठ कर उनके कमर के दोनो ओर घुटनो को

रख कर अपनी चूत की फांकों को अपने हाथों से फैलाया और उनके लिंग

को अपनी योनि पर सटा कर धीरे धीरे उनके लिंग पर बैठ गयी.

मुँह से एक आआहह निकली और उनका लिंग पहली चुदाई से दुख रही

मेरी योनि की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर घुस गया. फिर मैं उनके

लिंग पर बैठक लगाने लगी वो मेरी चूचियो को मसल मसल का लाल

कर रहे थे. करीब पंद्रह मिनूट तक इसी तरह उन्हे चोदने के बाद

मैं उनके सीने पर गिर पड़ी और मेरी योनि मे रस के फव्वारे छूट

गये.

फिर उन्हों ने मुझे लिटा कर मेरी कमर के नीच तकिया लगा कर मेरी

योनि को ऊपर उठाया और मेरी टाँगों की अपने कंधे पर रख कर मेरी

योनि मे अपना लिंग घुसाने लगे. मैं उनके लिंग को अपनी चूत को चीर

कर एक एक इंच अंदर जाते हुए देख रही थी, अपने लिंग को पूरी

तरह अंदर करके वो धक्के मारने लगे. मेरे मुँह से भी "औ ऊहह

उउईई" जैसी आवाज़ें निकल रही थी. मुझे अब मेरी योनि और पेट मे

दर्द होने लगा था. करीब बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद उन्हों

ने अपना माल मेरी योनि मे डाल दिया. उनके साथ साथ मेरा भी वीर्य

निकल गया. हम दोनो बिस्तर पर लेटे लेटे हाँफ रहे थे. दीदी ने आकर

मुझे सहारा देकर उठाया. मेरे पैर बोझ नही सह पा रहे थे.

बाथरूम तक जाते जाते कई बार मेरे पैर लड़खड़ा गये. मुझे नहला

धुला कर बिस्तर के हवाले कर दिया. कुच्छ देर रेस्ट कर के मैं तरो

ताज़ा हो गयी.

उस दिन और अगले दिन हम ने खूब चुदाई की. मेरा तो बस मन ही नही

भर रहा था.

अगले दिन शाम को मम्मी पापा लौट आए. उन्हों ने आकर सूचना दी कि

मेरी शादी पक्की हो गयी है. मैं ये सुन कर मुस्कुरा दी. शादी तो

मेरी अब पक्की हुई लेकिन सुहागरात तो पहले ही मन चुकी थी.

समाप्त
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06-11-2021, 12:28 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
लॉकडाउन में दीदी फिर से चुद गई

मेरी गर्लफ्रेंड है जिसका नाम आँचल है। वो बहुत ही सेक्सी लड़की है। उसकी हाइट बहुत लंबी है और कमर एकदम पतली। उस पर काफी लड़के फ़िदा थे लेकिन वो मेरी ही किस्मत में लिखी थी।

गर्लफ्रेंड की चुदाई करने में मुझे बहुत मजा आता था. आंचल की मुझे एक बात अच्छी लगती थी कि वो मेरी बहन युविका की तरह ज्यादा खुले विचारों वाली नहीं थी. मगर उसकी एक बात मुझे बुरी भी लगती थी कि उसे चुदाई करवाना ज्यादा पसंद नहीं था.

जब भी मैं उसकी चूत चोदने की बात करता या सेक्स करने के लिए रिक्वेस्ट करता तो वो मुझे हमेशा ये सब करने के लिए मना कर देती थी। उसकी इन्हीं हरकतों के कारण मैं उसे इन 2 सालों में सिर्फ 8-10 बार ही चोद पाया था। इतना तो मैं अपनी दीदी को एक दिन में ही चोद दिया करता था।

मैं चाहता तो आंचल को छोड़ सकता था मगर जो मज़ा उसे चोदने में आता है वो किसी और लड़की को चोदने में नहीं है। अगर आप मेरी गर्लफ्रेंड के साथ चुदाई की एक अलग कहानी चाहते हैं तो मुझे मेल या कमेंट जरूर करें। मैं आपको बताऊंगा कि मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई मैं कैसे करता हूं और मेरा क्या अनुभव है उसके साथ।

दीदी और मेरी चुदाई की इस कहानी को समझने के लिए आप मेरी पुरानी सिस्टर ब्रदर इन्सेस्ट कहानियां जरूर पढ़ें।
अब आज की कहानी पर आते हैं।

मेरी दीदी की एक सहेली थी जिसका नाम अरुणा था। किसी कारणवश उसकी मृत्यु हो गयी। उनका घर हमारे शहर में ही था।

ये बात जब युविका दीदी को पता चली तो वो बहुत दुखी हुई और वो अपनी सहेली को अंतिम विदाई देने के लिए हमारे घर आ गयी।

उस दिन मैं घर में नहीं था और न ही मुझे दीदी के आने की खबर थी।

मैं रात को 9 बजे घर आया। मैंने घर की घण्टी बजायी तो दीदी ने दरवाजा खोला। मैं दीदी को देख कर भौंचक्का रह गया।

मैंने दीदी को 2 साल से नहीं देखा था। मुझे यकीन करने में थोड़ा समय लग गया कि क्या ये दीदी ही है?
मेरे मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूं?

फिर दीदी ने ही पहल की और कहा- अंदर आएगा या यहीं खड़ा रहेगा?
उसके टोकने पर मैं अंदर आ गया और दीदी ने दरवाजा बंद कर दिया।

दीदी- कैसा है?
मैंने हिचकिचाते हुआ कहा- ठीक हूँ।
दीदी- इतना डर क्यूँ रहा है, मैं क्या चुड़ैल दिख रही हूँ?

मैंने इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और दीदी को जी भर कर देखता रहा।
इतने में मम्मी ने कहा- आ जा हाथ मुंह धो ले और खाना खा ले।

उसके बाद मैं गया और फ्रेश होकर आया. फिर सब लोग खाना खाने बैठ गए। इतने में कमरे के अंदर से दीदी के बेटे की रोने की आवाज़ आने लगी। तब मुझे याद आया कि दीदी का बच्चा भी हो गया है।

दीदी बच्चे के पास चली गयी और हमने खाना खाया और मैं सीधा अपने कमरे में चला गया। वहाँ मैं सोचने लगा कि वक्त कितनी तेजी से गुजर गया. पहले भाई बहन के बीच इतनी लड़ाई होती थी और फिर सेक्स भी होने लग गया और दीदी की शादी हो गयी और अब देखो, अब दीदी का बच्चा भी हो गया है।

ऐसा सोचते सोचते मैं सो गया। सुबह मैं थोड़ा लेट उठा। मुझे दीदी से बात करने में पता नहीं क्यूँ थोड़ा अजीब लग रहा था। मगर मैंने अपने आप को संभाला और शांत होने की कोशिश की। अब मैंने दीदी की नज़रों में नज़रें मिलाना शुरू कर दिया और कुछ बातें करने लगा।

मैंने दीदी से कहा- तुम तो पूरी बदल गयी हो। लग ही नहीं रहा कि तुम वही पुरानी युविका हो।
दीदी- हाँ, बदल तो गयी हूँ, पर तुम अभी भी वैसे ही हो।

इस तरह हमने बहुत सी बातें कीं और सब कुछ नार्मल हो गया। तभी मुझे पता चला कि पापा-मम्मी मेरी नानी के घर जा रहे हैं जहाँ भागवत चल रहा है। मुझे इसलिए नहीं बताया क्यूंकि मैं ऐसे कार्यक्रमों में नहीं जाता था।

फिर मुझे पता चला कि दीदी भी आज ही चली जायेगी और अपनी सहेलियों से मिलेगी और वहीं से एक हफ्ते बाद वो भी वापस चली जायेगी। ये सुनकर पता नहीं क्यों मुझे बहुत दुःख हुआ।

2 घण्टे बाद सब लोग चले गए और मैं भी बाहर चला गया। शाम को मैं जब घर आया तो सोते हुए मुझे दीदी के ख्याल आने लगे। मेरे दिल में दीदी के लिए फिर से इच्छायें जागने लगीं।

तब मैंने ध्यान दिया कि दीदी का शरीर अब थोड़ा मोटा हो गया है मगर साथ ही अब उनके स्तन और चूतड़ बहुत बड़े बड़े हो गए हैं। लगता है कि जीजा जी ने दीदी को बहुत चोदा होगा। दीदी जब चलती है तो उसके चूतड़ों को देख कर बहुत अच्छी फीलिंग आती है।

दीदी का रंग भी पहले से बहुत ज्यादा निखर गया था और एक लाली सी आ गयी थी उसके बदन पर। ये सोच सोच कर मैं पागल होने लगा और मेरा लण्ड खड़ा हो गया। उत्तेजित होकर मैंने जल्दी से अपनी गर्लफ्रेंड की नंगी फ़ोटो देख कर मुठ मारी और सो गया।

अगले दिन मैं अपनी गर्लफ्रेंड आँचल को बाहर घुमाने ले गया और सारा दिन उसे घुमाया।
बाद में मैंने उसे चुदाई के लिए पूछा तो उसने कहा कि अभी उसके पीरियड्स हैं तो वो चुदाई के लिए तैयार नहीं है।
तो मैंने उसे ज्यादा फोर्स भी नहीं किया और न ही ज्यादा कुछ बोला. फिर हम घूम फिर कर वापस घर आ गये.

ये उन दिनों की बात है जब शुरू शुरू में कोरोना वायरस के चलते दुनिया में चारों और उथल पुथल मचने लगी थी। फिर भारत में भी मामले आने शुरू हो गये.

पहले तो मैं आसानी से बाहर घूम रहा था मगर बाद में घूमने पर प्रतिबन्ध लगने लगा। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू हो गया। इसके चलते दीदी किसी जगह अपने बच्चे के साथ फंस गई।

दीदी अपनी सहेलियों के साथ होटल में ही रही किंतु बाद में होटल भी बंद हो गया. होटल बंद हो जाने के बाद दीदी किसी तरह से हमारे घर तक पहुंच पाई. मगर मम्मी पापा भी बाहर गये हुए थे तो वो भी नहीं लौट पाये.

अब घर में दीदी और मैं ही थे। मेरे मन में दीदी को चोदने के बहुत ख्याल आया रहे थे मगर किसी तरह मैंने इन पर काबू रखा। दीदी ने बताया कि उसका पति 2 दिन बाद उसे लेने आ जायेगा और फिर वो चली जायेगी।

ये सुन कर मेरे अंदर से आवाज़ आने लगी कि मैं दीदी को इन 2 दिनों में चोद सकता हूँ। मगर मेरे सामने मुश्किल ये थी कि मुझे दीदी को सेक्स के बारे में पूछने में डर लग रहा था।

उस दिन मैंने दीदी के बदन को बहुत गौर से देखा। तभी दीदी का बेटा रोने लगा. वो उसे चुप करा रही थी और मेरे सामने ही बैठी हुई थी. वो चुप नहीं हो रहा था इसलिए दीदी ने अपना कमीज उठा कर अपनी चूची को बाहर निकाल लिया और बच्चे के मुंह पर अपना निप्पल लगा दिया.

वो मेरे सामने ही उसको दूध पिलाने लगी. दीदी के स्तन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं गर्म होने लगा. मेरा मन दीदी की चुदाई के लिए मचलने लगा. मैंने निश्चय कर लिया कि आज दीदी से चुदाई के लिए पूछ कर ही रहूँगा।

दीदी बच्चे को दूध पिला ही रही थी कि मैंने दीदी से बातें करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में दीदी का बेटा सो गया और दीदी उसे लिटा कर आ गयी। हमने बहुत बातें की और अब हम दोनों इतने घुल मिल गए थे कि सब पहले की तरह हो गया।

मैंने मौका देखते ही दीदी से कहा- दीदी, मुझे पुराने दिन बहुत याद आते हैं।
ये सुन कर दीदी थोड़ी देर चुप हो गयी और थोड़ी देर में एक लंबी सांस लेकर बोली- वैसे आजकल नीचे वो स्कूल बस नहीं दिखती और न ही दास अंकल?

उसके सवाल पर मैं बोला- हां, आजकल बस स्कूल में ही खड़ी होती है और ड्राइवर अंकल भी वहीं रहते हैं और दास अंकल भी रिटायर हो गए हैं, उनकी जगह उनका बेटा होता है।

दीदी ने हंसते हुए कहा- अच्छा तो मेरी चुदाई की ये सज़ा मिली उन्हें?
इस पर हम हंसने लगे।

दीदी ने फिर कहा- तेरी वो गर्लफ्रेंड अभी भी है या ब्रेकअप हो गया?

मैं- नहीं, अभी ब्रेकअप नहीं हुआ है, वो है अभी। न मैं उसको छोड़ सकता हूँ और न वो मुझे छोड़ सकती है।
दीदी- तो उसके होते हुए तू मुझे फिर से पटाने की कोशिश क्यूँ कर रहा है?

इस पर मैं बोला- दीदी, उसे चुदाई और सेक्स ये सब ज्यादा पसंद नहीं है। इसलिए वो मुझे ज्यादा करने नहीं देती. रही बात आपको पटाने की तो 3 साल हो गए हैं आपके साथ सेक्स किये। उसके बाद इतना मजा कभी आया ही नहीं, तो सोचा 2 साल बाद मिले हैं और परसों तुम चली जाओगी तो एक बार पूछ लेता हूँ।

दीदी थोड़ी देर चुप रही और कुछ देर बाद उसने कहा- ठीक है। आखिर तुम मेरे भाई हो और उस समय तुमने मेरी भी प्यास बुझाई थी, तो ठीक है मैं तैयार हूँ। आज रात और कल पूरा दिन तुम मुझे जितना चोदना चाहते हो चोद लेना, मगर इसके बाद इसके लिए कभी मत पूछना।

ये सुन कर मैं बहुत खुश हो गया।
मैं- अरे दीदी! तुम बहुत अच्छी हो। मैं वादा करता हूँ कि मैं आपको इस समय में बहुत मजे दूंगा।
फिर हम दोनों हंसने लगे।

रात हो चुकी थी और उस समय बाहर जाने पर प्रतिबन्ध लग गया था।
मैं- दीदी! बाहर जाने में बहुत खतरा है लेकिन मैं आपके लिए कोई भी रिस्क लेने के लिए तैयार हूं. मैं बाहर जाकर कॉन्डोम और दवाईयां लेकर आ जाता हूं.

तभी दीदी ने मुझे रोकते हुए कहा- इसकी जरूरत नहीं है। अब मैंने ऑपरेशन करा लिया है. अब तू मुझे बिना कंडोम के भी चोदेगा तो मैं प्रग्नेंट नहीं हो सकती हूं।
ये सुनकर मैं बहुत खुश हो गया।

मैंने दीदी को अपनी ओर खींचा और उसे अपनी बांहों में लेकर जल्दी से किस करना शुरू कर दिया.
मगर दीदी ने मुझे हटा दिया और बोली- पहले खाना बना लेते हैं और उसके बाद सेक्स करेंगे.

मुझे सेक्स करने की जल्दी थी और दीदी की चूत में लंड पेलने की भी बहुत जल्दी थी. मैंने दीदी से कहा कि मुझे भूख नहीं है, अगर तुम्हें भूख लगी है तो मेरा वीर्य पी लेना, उससे तुम्हारी भी भूख कम हो जायेगी.

इतना कह कर मैं दीदी को फिर से किस करने लगा और अब दीदी भी मेरा साथ देने लगी। मुझे तो पुराने दिनों की याद आने लगी। मैं दीदी के ऊपर लेट गया था। किस करते करते हम दोनों बहुत जोश में आ गए थे।

तभी मैं दीदी के ऊपर से उठा और मैंने कहा- दीदी तुम्हारे स्तन और चूतड़ बहुत बड़े बड़े हो गए हैं। मैं उन्हें देखना चाहता हूँ।
दीदी बोली- हां तो देख ले, ऐसे बोल रहा है जैसे पहले तूने कभी मेरे चूतड़ और चूचियां देखी ही नहीं हों.

मैं बोला- देखी हैं लेकिन अब अलग ही मजा है उनको देखने का.
इतना कह कर मैंने दीदी की कमीज़ खोल दी और पाया कि अंदर दीदी ने पिंक कलर की सेक्सी सी ब्रा पहनी थी। मुझसे ज्यादा वेट नहीं हुआ और मैंने ब्रा खोल दी।

ब्रा खोलते ही दीदी के बड़े बड़े स्तन मेरे सामने आ गए। मैंने सोचा भी नहीं था कि दीदी के स्तन इतने बड़े हो गये होंगे।
मैंने दीदी से पूछा- दीदी आप तो किसी को अपने चूचे छूने तक नहीं देती थी, तो अब ये इतने बड़े कैसे हो गए?

दीदी ने कहा- ये तेरे जीजा की करामात है। उनको इनके साथ खेलना बहुत पसंद है। सुहागरात वाले दिन उन्होंने मेरे स्तनों को बहुत मरोड़ा। इतना मरोड़ा था कि इनसे खून निकलने लगा था।

ये सुनकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया और मेरा लण्ड कड़क हो गया। मैं भी दीदी के बूब्स के साथ उसी तरह से खेलना चाहता था इसलिए मैंने युविका के स्तनों को ज़ोर से दबा दिया. मेरी पकड़ कुछ ज्यादा ही टाइट थी जिससे दीदी को दर्द हो गया और दीदी ने मुझे हटा दिया।

मैंने पूछा- क्या हुआ दीदी?
दीदी बोली- तू इनके साथ नहीं खेल सकता। अभी मैं नयी नयी माँ बनी हूँ, इसलिए मेरे स्तनों में दूध है और इतनी जोर से दबाने से इनमें दर्द होता है।

तभी मैंने ध्यान दिया कि मैंने दीदी के स्तन इतनी जोर से दबा दिये थे कि उनसे दूध निकल गया था और निप्पल के आसपास का एरिया और नीचे तक उसके स्तन दूध से सन से गये थे.

मैंने धीरे से दीदी के दूध लगे चूचों पर अपनी जीभ से चाट लिया. दीदी भी थोड़ी कामुक हो गयी और मेरा लंड भी अकड़ कर दर्द करने लगा. अब शायद दोनों ही भाई बहन उन पुराने दिनों की यादों को फिर से ताज़ा करने के लिए तैयार हो गये थे.

मैंने कहा- दीदी मुझे माफ़ करना, मुझे ये पता नहीं था।
मैंने दीदी से पूछा- क्या मैं तुम्हारा दूध पी सकता हूँ दीदी?

दीदी बोली- पी ले, मगर सारा मत निचोड़ लेना, मुझे मेरे बेटे के लिए भी थोड़ा बचा कर रखना है, अगर वो रात में जाग गया तो फिर मैं दूध कहां से लाऊंगी?
मैं बोला- ठीक है दीदी, सारा नहीं पीऊंगा.

मैंने दीदी को सोफे पर फिर से लिटा दिया और दोनों स्तनों को बारी बारी से चूसने लगा। दीदी का दूध बहुत ही गर्म था और बहुत स्वादिष्ट भी। मैंने दोनों स्तनों से थोड़ा थोड़ा दूध पिया और फिर नीचे की तरफ आ गया।

फिर मैंने दीदी की सलवार के ऊपर से उनकी चूत पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया और साथ ही दीदी का दूध भी पीता रहा। बीच बीच में मैं अपने हाथ की रफ़्तार तेज़ कर देता था जो कि दीदी को बहुत रोमांचित कर रहा था।

जब जब मैं ऐसा करता तो दीदी अपनी टांगें थोड़ी सी उठा देती थी और उन्हें सिकोड़ने की कोशिश करने लगती। उसके बाद मैंने दीदी की सलवार खोल दी। अंदर दीदी ने पिंक कलर की पैंटी पहनी थी जो कि मेरे हाथ फेरने से गीली हो गई थी।

मैं दीदी की चूत के दर्शन करने के लिए बेताब हो उठा था। इसलिए मैंने दीदी की पैंटी खोल दी। जैसे ही मैंने दीदी की पैंटी खोली तो देखा कि दीदी की चूत तो एक दम साफ़ थी, मगर अब उस चूत का भोसड़ा बन चुका था।

चूत देख कर मैंने कहा- दीदी, ये क्या हो गया है!
दीदी ने हंसते हुए कहा- “ये भी तेरे जीजा की ही करामात है। वो मुझे बहुत चोदते हैं। ये तो आजकल बच्चा हुआ है तब छोड़ा है नहीं तो पहले तो वो बहुत चोदते थे मुझे। मगर फिलहाल अभी ये चूत तेरी है। तू जो करना चाहता है इसके साथ, कर सकता है।

ये सुनकर मैं फिर से गर्म हो गया। मुझे ख़ुशी थी कि चलो आज दीदी को फिर से चोदने की ख्वाहिश तो पूरी होगी। मैंने जल्दी से दीदी की गीली चूत पर ज़ोर का किस किया जिससे दीदी की एक मादक सी आह्ह … निकल गयी।

तब मैं अपना सिर फिर ऊपर करने लगा मगर दीदी ने मेरे बाल पकड़ कर मुझे फिर नीचे कर दिया। मैंने भी ख़ुशी ख़ुशी दीदी की चूत में नीचे से ऊपर तक पूरे ज़ोर से अपनी जीभ को फेरा।
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06-11-2021, 12:28 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
लॉकडाउन में दीदी फिर से चुद गई-2

बीच बीच में मैं दीदी की चूत के दाने को मसलता और उसे दांतों से काट देता, जिससे दीदी और ज्यादा उत्तेजित हो गयी। मैं ऐसे ही दीदी की चूत को बहुत देर तक चाटता और चूसता रहा। कुछ देर बाद दीदी झड़ गयी।

दीदी ने कहा- चूत चटाने में आज तक इतना मजा नहीं आया। तू तो बहुत बड़ा खिलाड़ी बन गया है रे!
इस पर मैं बोला- देख लो दीदी, मैंने आपकी चूत को कितना अच्छा मजा दिया है, अब मैं भी देखूंगा कि आप मेरे लौड़े को कितना मजा देते हो.

ये बोलकर पहले मैंने अपनी टीशर्ट को उतार दिया. फिर मैंने अपना पजामा भी खोल दिया. मेरा लौड़ा मेरे कच्छे को पूरा उठा कर रखे हुए था. अपने लंड को मैंने कच्छे के ऊपर से ही दीदी के सामने सहला दिया और दीदी देख कर मुस्कराने लगी.

मैंने दीदी से कहा- ये लो आपका सामान तैयार है, इसको अब आप ही संभालो. मेरा कच्छा आप ही खोलो।
मेरा लण्ड इतना कड़ा हो गया था कि अंडरवियर में वो आ ही नहीं रहा था और मुझे इससे दर्द हो रहा था।

दीदी ने जैसे ही मेरा कच्छा खोला तो मेरा 9 इंच का लण्ड स्प्रिंग की तरह ऊपर उठ कर झूलने लगा. दीदी का चेहरा मेरे लौड़े के पास था तो मेरा लंड उसकी नाक पर जोर से जाकर लगा.
हम दोनों की हँसी छूट गयी.

इस पर मैंने दीदी से कहा- देखो दीदी, ये भी कितना बेताब है तुम्हारे मुंह में जाने के लिए।
तो दीदी ने उसे पकड़ कर कहा- अब तो ये और भी बड़ा हो गया है. मगर तूने अपनी झाँटें क्यूँ नहीं काटी?

मैंने कहा- दीदी, किसके लिए काटता? आंचल चुदाई करने देती नहीं और तुम्हारा मुझे पता नहीं था कि तुम मानोगी या नहीं। मगर कोई बात नहीं, अब तुम यहां हो तो ये झांटें भी आप कल खुद ही काट देना।

ये सुन कर दीदी हंसने लगी और बोली- अच्छा, अब सोफे के ऊपर बैठ जाओ।
दीदी के कहने पर मैं सोफे के ऊपर बैठ गया. दीदी मेरी टाँगों के बीच बैठ गयी। दीदी मेरा लौड़ा पकड़ कर पहले आगे पीछे करने लगी. दूसरे हाथ से मेरे टट्टों को सहलाने लगी।

उसके बाद दीदी ने मेरा लौड़ा अपने होंठों पर घिसा और बाद में मेरे लौड़े के टोपे को मुंह में ले लिया और टोपे के छेद पर अपनी जीभ घुमाने लगी।

ये बहुत ही उत्तेजित करने वाला था। इससे मेरी भी हये.. निकल गई। दीदी कुछ देर ऐसा ही करती रही और कुछ देर बाद उसने धीरे धीरे मेरा पूरा लण्ड अपने मुंह में गले तक डाल दिया।

इससे मैं पागल हो गया और मैंने दीदी का सर पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया. इससे दीदी ने मेरे घुटने पकड़ लिए ताकि वो गिर न जाये। दीदी के मुंह से गूं … गूं … गर्र … गर्र … की आवाज़ आने लगी।

मैं ऐसा तब तक करता रहा जब तक कि मैं झड़ नहीं गया। जब मैं झड़ा तो मैंने दीदी के मुंह को बंद कर दिया ताकि दीदी मेरा वीर्य पी ले. दीदी ने किया भी ऐसा ही.

मेरा लंड गले में फंसा होने के कारण दीदी की सांस रुक रही थी और उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे. किंतु ये मज़े के आँसू थे। फिर वीर्य निगलने के बाद दीदी ने लंड को बाहर निकाल दिया. फिर हम दोनों ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगे क्यूंकि हम बहुत थक गए थे।

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे। फिर उसी बीच दीदी का बच्चा जाग गया तो दीदी उसके पास चली गयी और उसे दूध पिला कर सुला दिया।

इसी बीच मैं फिर से चार्ज हो गया था और अपने लौड़े को हिला कर तैयार कर रहा था।

उसके थोड़ी देर बाद दीदी बाहर आने लगी तो मैंने सोचा क्यूँ न दीदी को आज खड़े खड़े ही चोदा जाये। ये सोच कर मैं जल्दी से उठ कर दीदी के पास गया और दीदी को कहा कि वहीं रुक जाए।

मैं दीदी को पकड़ कर दीवार के पास ले गया और दीदी को कहा कि आज मैं आपको खड़े खड़े ही चोदूंगा। दीदी भी चुपचाप दीवार के पास खड़ी हो गयी।

पहले मैंने दीदी के नंगे बदन को अपने नंगे बदन में समा लिया। यकीन कीजिये दोस्तो, इस तरह से नंगे बदन से चिपकने में बड़ा मज़ा आता है। उसके बाद मैंने अपना लौड़ा पकड़ा और दीदी की चूत पर रख कर बाहर से घिसने लगा।

इससे हम दोनों बहुत उत्तेजित हो गए और मैंने एक ही झटके में पूरा लण्ड दीदी की चूत में डाल दिया। लंड घुसने से दीदी ज़ोर से चीख पड़ी मगर गनीमत रही कि बच्चा नहीं जागा वरना सारा मजा खराब हो जाता.

दीदी चिल्ला कर बोली- पागल हो गया है क्या तू? एक बार में कोई ऐसे ठोकता है क्या?
मैंने कहा- दीदी, माफ़ करना मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

मैंने लण्ड को आगे पीछे करना शुरू किया। मुझे तो जन्नत ही नसीब हो गयी जैसे। दीदी अजीब अजीब आवाजें निकालने लगी. खड़े खड़े मैं दीदी को चोदने लगा. बहुत मजा आ रहा था.

मगर जल्दी ही मेरी कमर में दर्द होने लगा इसलिए मैंने दीदी को अपनी गोद में उठाना चाहा। इसके लिए मैंने दीदी के चूतड़ों पर हाथ रखा तो महसूस हुआ कि पहले तो दीदी के चूतड़ मेरे हाथों में आसानी से आ जाते थे लेकिन अब नहीं आ रहे हैं।

फिर मैंने जैसे तैसे दीदी को अपनी गोद में उठाया और उठा उठा कर दीदी को चोदा। ऐसे चोदने में लण्ड पूरी रफ़्तार से और पूरा का पूरा अंदर जाता है। ऐसा करने से दीदी और मैं पागल हो गए थे। दीदी ने मुझे बहुत जोर से पकड़ा था और मैं पूरा जोर लगा के दीदी को चोद रहा था।

इससे सारे कमरे में पट-पट की आवाज़ बहुत जोर से गूंज रही थी और वो आवाज़ शायद बाहर भी सुनाई दे रही थी। किंतु हमें इसकी कोई परवाह नहीं थी।

इस आवाज़ को सुनकर दीदी का बेटा जाग गया और वो रोने लगा।
दीदी ने कहा- छोड़ दे निखिल, बच्चा उठ गया है, मुझे छोड़ दे। बच्चे को चुप कराने के बाद मैं आ जाऊंगी।

मगर मैं उस समय जानवर बन गया था। मैंने कहा- साली रांड चुप कर, अभी मुझे चोदने दे। मैं झड़ने वाला हूँ।

मैं दीदी की चूत को ठोक ठोक कर चोदता रहा. दीदी भी मेरे धक्के झेलती रही और उसके थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया. मैंने सारा माल दीदी की चूत में ही छोड़ दिया। जैसे ही हमारी चुदाई की आवाज़ बन्द हुई बच्चा भी चुप हो गया।

उसके बाद मैं वैसे ही दीदी को उठा कर सोफे तक ले गया और वैसे ही सोफे पर बैठ गया। वहाँ से अंदर देखा तो बच्चा फिर से सो गया था।
मैंने वैसे ही दीदी को अपनी गोद में बिठाये रखा और मेरा लण्ड कुछ देर तक दीदी की चूत में ही था।

दीदी मेरी गोद में ही सो गई। कुछ देर बाद मेरा लौड़ा दीदी की चूत से अपने आप निकल गया। फिर उसके थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को अपने ऊपर से उठा कर सोफे पर सुला दिया और दीदी की पैंटी से अपना लण्ड और दीदी की चूत साफ़ की।

उस रात मैं दीदी को बहुत बार चोद सकता था मगर बच्चा बार बार जाग कर सारा खेल बिगाड़ देता था। इसलिए मैं उस रात दीदी को 3 बार ही चोद पाया।

आखिरी चुदाई के बाद हम दोनों सोने चले गए।
मैंने दीदी से पूछा- दीदी आपकी गांड भी बहुत बड़ी हो गयी है। जीजा जी गांड भी मारते हैं क्या?
दीदी ने कहा- हां, वो जब भी मेरी चूत चोदते हैं, उसके बाद गांड भी जरूर मारते हैं।

मैंने कहा- पहले तो आप गांड भी नहीं मरवाती थी, तो अब क्यूँ?
दीदी ने कहा- पहले तेरे जीजा जबरदस्ती गांड मार लेते थे और बाद में फिर मुझे भी आदत पड़ गयी।

दीदी की गांड चुदाई वाली बात सुनकर मेरे मन में भी लड्डू से फूट पड़े और मैंने दीदी से कहा कि तब तो मैं भी कल आपकी गांड मारूँगा।
दीदी ने कहा- ठीक है मार लेना।

मैंने दीदी से कहा- दीदी आप यहाँ कल के ही दिन रहोगे। तो मैं इस दिन को ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स से रोमांचित बनाना चाहता हूँ।
दीदी ने पूछा- हाँ ठीक है, पर वो कैसे?
मैंने कहा- कल हम दोनों पूरा दिन नंगे ही रहेंगे।

दीदी भी मेरी बात मान गयी. फिर हम सोने लगे. दीदी का बच्चा रात को बार बार जाग जाता था जिससे मैं परेशान हो रहा था, इसलिए मैं रात में ही उठ कर अपने कमरे में चला गया।

सुबह मैं थोड़ी देर से उठा। मैं बाहर गया तो देखा कि दीदी पूरी नंगी है और नीचे बैठ कर टांगें फैला कर पोंछा लगा रही है। जिससे दीदी की चूत का दरवाजा खुला हुआ दिख रहा था.

दीदी की खुली चूत देख कर मेरा लंड एकदम से तनाव में आ गया. मैंने दीदी को वहीं पर फर्श पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसकी चूत में लंड देकर उसे वहीं पर चोद दिया.

उसके बाद दीदी ने पौंछा लगाया और मैं नंगी दीदी को ये सब करते हुए देखता रहा. मैं फिर से गर्म हो गया।
जैसे ही दीदी ये करके फ्री हुई मैं दीदी को अपने साथ बाथरूम में ले गया और दीदी को वहाँ फिर से चोदा।

दिन में दीदी रसोई में लन्च बना रही थी तो मैं पीछे से आ गया और दीदी की गांड बहुत मस्त लग रही थी. उसकी गांड देख कर मुझसे रहा न गया और मैं दीदी की गांड चोदने के लिए चला गया।

मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ से दीदी की चूत में उंगली करने लगा और दूसरे हाथ से धीरे धीरे उसके चूचों को सहलाने लगा। अपना लण्ड उसकी गांड के ऊपर रख कर हिलाने लगा। दीदी को पता चल गया कि मैं अब उसकी गांड मारने वाला हूँ।

फिर मैंने सामने से तेल उठाया और थोड़ा सा अपने लण्ड पर लगाया और थोड़ा सा दीदी की गांड के छेद पर लगाया। उसके बाद दीदी ने अपने हाथ खुद ही शेल्फ पर फैला दिए और अपनी टांगें फैला कर गांड को ऊपर उठा दिया ताकि मेरा लौड़ा आसानी से अंदर जा सके.

पहले मैंने तेल लगा कर अपनी एक उंगली दीदी की गांड में डाली और उसके बाद दूसरी। थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मैंने लण्ड गांड पर रखा और धीरे से अंदर की तरफ ज़ोर लगाया। इससे थोड़ा सा लण्ड अंदर गया।

5-7 बार मैंने ऐसा ही किया और ऐसा करते हुए सारा लण्ड दीदी की गांड में चला गया। फिर मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड अंदर तक डालना और बाहर निकालना शुरू किया। कुछ देर बाद मैंने स्पीड बढ़ा दी और समय के साथ साथ मेरा जोश बढ़ता ही गया।

दीदी अपनी गांड को साइड से पकड़ कर खींचने लगी ताकि उसको दर्द कम हो। मगर मुझे इसमें मज़ा आने लगा था। मैंने ज़ोर ज़ोर से दीदी की गांड चोदना शुरू कर दिया जिससे घर में पट पट… पट पट की आवाज़ें होने लगीं और चारों तरफ दीदी की चीखें ही सुनाई देने लगीं.

इस आवाज को सुन कर दीदी का बच्चा फिर जाग गया और रोने लगा। दीदी मुझसे छोड़ने को कहने लगी पर मैंने अभी ही तो शुरू किया था और मुझसे रुका नहीं जा रहा था। दीदी खुद ही हटने लगी मगर मैंने दीदी के हाथ पकड़ लिए और दीदी को वैसे ही चोदने लगा।

दूसरी तरफ बच्चा और तेज रोने लगा था. फिर मैं दीदी को वैसे ही उठा कर बच्चे तक ले गया. बच्चा बेड पर लेटा था. उसने सुसू कर दी थी.

मैंने दीदी से कहा कि वो बेड पर मेरी ओर गांड करके खड़ी रहे. इससे बच्चे का डायपर भी बदल लेना और मैं पीछे से तुम्हें चोदता भी रहूंगा.

दीदी ने वैसा ही किया। वो मेरी ओर गांड करके खड़ी हो गयी. मैं पीछे से दीदी की गांड चोदने लगा. बच्चा भी दीदी की चुदाई के कारण बड़ी अजीब अजीब शक्लें देख कर हंसने लगा।

उसके बाद दीदी ने उसे एक खिलौना दिया और वो उसके साथ खेलने लगा. अभी भी मैं दीदी को वैसे ही चोदता रहा। बाद में मैं दीदी की गांड में झड़ गया।

उस दिन मैंने दीदी को 5 बार चोदा और रात को 3 बार। हम ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स में इतना व्यस्त थे कि हमें पता ही नहीं चला कि सरकार ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. सुबह जब जीजा जी का फ़ोन आया तो हमें पता चला कि अब 21 दिन हमें वहीं रहना है जहाँ हम हैं।

ये सब सुन कर दीदी को बहुत बुरा लगा क्यूंकि उसका पति रास्ते में कहीं फंस गया था। हालांकि बाद में वो उसी दिन वापिस भी चला गया था। इससे मुझे बहुत ख़ुशी मिली कि अब 21 दिन तक मैं दीदी को चोदता रहूँगा।

उन इक्कीस दिनों में मैंने दीदी को रोज चोदा. भगवान ने भी क्या खूब लिख दिया था किस्मत में। अब मुझे अपनी गर्लफ्रेंड के नंगे फोटोज़ देखकर मुठ मारने की कोई जरूरत नहीं रह गयी थी।

मेरी गर्लफ्रेंड कभी मुझे फ़ोन कर रही थी और कभी वीडियो कॉल कर रही थी. कभी तो उसकी वीडियो कॉल तब आती थी जब मैं दीदी की चूत में लंड डाल कर उसको चोद रहा होता था. इसलिए दीदी को हटाना पड़ता था.

तो दोस्तो, इस तरह से मैंने दीदी के साथ लॉकडाउन में मजे किये. आपको मेरी ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताइयेगा।
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06-11-2021, 12:28 PM, (This post was last modified: 06-11-2021, 12:30 PM by desiaks.)
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
[size=large]मेरी कुंवारी ज़िद्दी बहन की रसीली चुदाई-1

यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो मेरी बहन लगती है रिश्ते में … ये मैं इसलिए दुख के साथ कह रहा हूँ क्योंकि जो कांड इतनी देर से हुआ वो पहले भी हो सकता था। हमें ऐसी रसभरी चुदाई तक पहुंचने में समय नहीं लगता अगर मेरी ज़िद्दी बहन मेरे नमकीन इरादों को बहुत पहले ही समझ जाती तो!

बात 3 महीने पहले की है।

उसकी उम्र 22 वर्ष है … चूचों का आकार 32ब, नटखट कमर 30″ की और सबसे पसंदीदा, सबसे लज़ीज़, सबसे ज़्यादा लड़कों के लंड ढीले करने वाली उसकी मस्तानी गांड … उफ़्फ 36″ के मटके हैं …

जिसको मैंने इतना चाटा है कि क्या बताऊँ … जब हिलती है तो उसका हर एक कूल्हा अपनी औकात पे ला देता है लौंडों को … मलाई से भी गोरी, उसके दोनों छेद इतने कसे हुए हैं कि जीभ मचल उठती है चखने को।

यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब मैं कॉलेज के दूसरे वर्ष में था. हरामी दोस्तों की संगत और फिर कुछ खून का उबाल जीने नहीं देता था। दिन रात बस एक ही सपना कि कब दर्शन होंगे किसी अप्सरा की रसभरी चूत के … कब मिलेगा मुझे भी मौका ऊपर वाले के दिये इस लटकते हथियार को इस्तेमाल करने का!

माता पिता दोनों सरकारी सेवक … कॉलेज से आओ तो घर खाली, जो मर्ज़ी करो। जब से मैं बड़ा हुआ हूँ मेरा पहला प्यार मैंने अपनी बहन को ही माना है … हवस वाला प्यार जिसके आगे कोई रिश्ता नहीं ठहरता.

एक दिन की बात है. दोस्तों के किस्सों ने मुझे बेचैन कर दिया था कॉलेज में … तो मैं घर आकर बिना खाना खाये कंप्यूटर चलाने बैठ गया. जिसमें मैंने अपनी मनपसन्द नंगी सेक्स फिल्में रखी हुई थी. पेपर्स की वजह से मेरी बहन की छुट्टी थी तो वह घर पे ही थी।

जब देर तक मैं लंच करने नहीं गया तो वो मुझे देखने मेरे कमरे में आ गयी. जब वो आयी तो मेरा हाथ मेरा लंड हिला रहा था और सामने स्क्रीन पर चूत चुसाई का सीन चालू था … जिसको उसने कुछ 5-6 सेकंड देखा होगा, फिर वो बिना कुछ बोले चली गयी.
“बोलती भी क्या?”

मैंने अपना काम चालू रखा और माल गिराने के बाद बिना कुछ बोले बाहर चला गया।

शाम को आया तो उसके और मेरे बीच सब नार्मल था … ऐसे ही दिन गुज़रते गए और मेरी वासना उसके लिए बढ़ती गयी।
लेकिन उसको बोलने की हिम्मत कभी नहीं हुई क्योंकि परिवार का डर भी कुछ होता है.
वैसे हमारे बीच सारी बातें होती थी- मूवीज, कपल्स, चुम्बन, सेक्स, पॉर्न … सब कुछ … पर एक हद तक सिर्फ नॉलेज के उद्देश्य से।

फिर दोस्तों ने RSS (RAJSHARMASTORIES.COM ) के बारे में बताया तो मेरा ध्यान सबसे पहले भाई बहन सेक्स की कहानियों पर ही गया. धीरे धीरे दूसरों के प्रसंग पढ़कर हिम्मत आने लगी, नए नए आइडिया पता चलने लगे। उनमें से एक था बाथरूम में नहाते हुए बहन को देखना!
बस मुझे अपनी बहन को किसी भी तरह नंगी देखना था, उसके इस कोमल और लबाबदार जिस्म को आंखों में भरना था. मैंने इसकी शुरुआत कुछ महीने पहले ही की क्योंकि अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

मैं अपनी ज़िंदगी का पहला संभोग अपनी बहन तृप्ति के साथ ही करना चाहता था इसलिए मैं भी कुंवारा था और अब बहन की चूत मुझे किसी भी क़ीमत पे चाहिए थी।

मैंने बाथरूम में झांकना शुरू किया पीछे शाफ़्ट की साइड से … अंदर का नज़ारा बताने लायक नहीं, लौड़ा हिलाने लायक है.
22 साल की कुतिया, पूरी नंगी, हर एक अंग से टपकता यौवन, 32ब के नशीले चुचे, उनपर छोटे भूरे रंग के उसके बादामी निप्पल्स … जिन पर पानी गिरता हुआ सीधे उसकी शहद भरी घाटी में जाता हुआ!

मासूम सी भोली मेरी बहन की चूत पर नादान रेशमी बाल, हल्के सांवले रंग के, चूत के होंठों का चीरा एक दूसरे से चिपका हुआ जिस पर कभी कभी वो भी हाथ फेर रही थी नहाते समय.

जब पीछे घूमी तो बस लौड़ा वहीं दर्द के मारे सूख गया, ऐसी गांड भाइयो … कि तुम लोग देखो तो नोच खाओ उसे … क्या गोलाइयाँ थी यार … मन कर रहा था कि अभी जाकर साली के चूतड़ खोलूँ और पी जाऊं सारा रस आज ही …

कसम से बहनचोद बनने का अपना अलग मज़ा है, ये उस दिन पता चला, सोच लिया कि इसकी नसें ढीली नहीं की तो बर्बाद है जिंदगी … लानत है इसका भाई होने पे … कोई और ठोके उससे पहले मुझे स्वाद चखना है इस घरेलू माल का … भाई बहन सेक्स का!

ये सब मुझे पर्दा हटाकर देखना पड़ता था जिससे कि एक दिन उससे भी शक हो गया क्योंकि जब भी वो नहाने जाती तो कमरे की लाइट जली होती थी लेकिन मुझे तो अंदर झांकना होता था इसलिए मैं बन्द कर देता था ताकि वो अंदर से मुझे न देख सके।

जब उसे शक हुआ तो वो जल्दी से कपड़े पहनकर आ गयी और मेरे पास इतना समय नहीं बचा कि मैं बत्ती जला पाऊँ … तो मैं ऐसे ही जल्दी में बाहर आ गया … गलती ये हो गयी मुझसे कि जिस स्टूल पे चढ़कर मैं उसे देखता था, वो वहीं रह गया शाफ़्ट के पास।

उसने आकर मुझसे पूछा कि मैं कहाँ था अभी, तो मैंने जवाब दिया मैं अपने कमरे में मूवी देख रहा था … वो बिना कुछ बोले वहाँ से चली गयी।
अब मुझे सावधान रहना पड़ता था हमेशा।

मैंने हर वो चीज़ करी जिससे मैं उसके बदन के मज़े ले सकूँ … चाहे उसके कमरे में ताकना झांकना हो. जब वो कॉलेज में होती थी तो मैं उसके रूम में जाकर उसकी पैंटी सूंघता था जो उस वक़्त उसकी खुशबू लेने का मेरे पास एकमात्र ज़रिया था।

हर बार उसकी मटकती गांड मुझे बेचैन कर देती थी जब भी वो कैपरी या शॉर्ट्स पहनती थी घर में … उसके कूल्हे ऐसा वार करते थे कि शायद ही कोई बच पाता होगा उनसे!
तुम सब लोग यक़ीन नहीं करोगे लेकिन मैंने हर वो तरकीब ट्राय की है जिससे मैं उसके ज़्यादा से ज़्यादा करीब रह सकूँ.

अक्सर घर वालों के शादी ब्याह में या सरकारी कारणों से कहीं जाने पर सिर्फ हम दोनों ही घर पे होते थे. उस वक़्त मेरा शैतानी दिमाग लंड से सोचने लगता था.

मैं अपने एक केमिस्ट मित्र से नींद की दवाइयां लाकर अपनी कामुक बहन के खाने में मिलाकर खिला देता. उसके सोने के एक-दो घंटे बाद मेरी वासना चरम पर होती थी. फिर मैं वो सब करता जो इस वक़्त आप अपने लौड़े को खुजाते हुए सोच रहे हो।

उसके होंठों पे अपने होंठ रखना … उसकी आँखें … उसके मोटे मोटे गाल … उसके कानों की पुतलियों को चूमना … उसकी गर्दन से निकलती महक को बेइंतहा सूंघने का अहसास … उसके टॉप के ऊपर से निप्पल्स को छेड़ना … फिर हाथ घुसाकर ज़ालिमों की तरह उन्हें मसलना … सपाट पेट पर जीभ से लार गिराना …

उसके शॉर्ट्स को उतारकर जब मखमली छेद के दर्शन होते तो धड़कन मानो रुक सी जाती … इतनी प्यारी चूत जिसको देखा तो बहुत बार लेकिन हमेशा दूर से …

खज़ाना पास हो तो कुत्ता बनने में समय नहीं लगता, वही हुआ भी … जल्दी जल्दी उसकी पैंटी को उतारा और ध्यान से टांगें खोलकर ताकि वो उठ न जाये. बेशक दवाई थी लेकिन डर भी होता ही है एक मन में … ऐसा लगा मानो दुनिया का सबसे खुशकिस्मत और हरामी इंसान हूँ जो अपनी बहन की टाँगों के बीच बैठा है और अपने शिकार को ललचाई नज़रों से देख रहा है.

मैंने जो करतब दिखाए हैं सारी रात, चूत के दाने को चाट चाट कर पिघला दिया दोस्तो … इतना खोल खोल कर खाया कि साली नींद में भी उठती तो मना ना कर पाती … अब मैं ठहरा गांड का चटोरा लेकिन उसे पलटा तो सकता नहीं तो बस नीचे लेटे लेटे ही पूरी रात गुज़ारी.

उसके भूरे गांड के छोटे से छेद के साथ जो मज़ा आया वो बता नहीं सकता बहनचोद!

असली मज़ा तो घर का चोदू बनने में ही लगा … क्या तो गर्लफ्रैंड, क्या तो रंडियां ऐसा मज़ा दे पाएँगी जो मेरी सोती हुई छमिया ने दे दिया उस रात।

ऐसा मैं अक्सर करने लगा जब भी मौका मिलता … लेकिन अब उसका नशा बढ़ चुका था जो सिर्फ बहन की चुदाई से ही शांत होता … मैंने सोच लिया कि कुछ भी करके इसको अपने मन की बात बोलनी ही है क्योंकि कहीं न कहीं थोड़ा बहुत शक उसे भी होने लगा था मुझ पर!

अब हर लड़के को पता होता है किस लड़की की क्या कमज़ोरी है … चाहे वो बहन ही क्यों न हो, मुझे पता था कि तृप्ति को घूमने का बहुत शौक़ है इसलिए मैंने पिछले साल नवंबर में नीमराणा, राजस्थान जाने का प्लान बनाया क्योंकि वहां की खूबसूरती मुझे अपनी बात आसानी से कहने की हिम्मत देगी और अगर सब ठीक रहा तो मेरे लंड की सोई किस्मत जाग जाएगी.

घर में बताया तो घरवालों ने जाने के लिए हाँ कर दी। कुछ पैसे घरवालों ने दिए, कुछ मैंने जोड़ रखे थे और कुछ दोस्तों से उधार ले लिए ताकि पैसों की कोई कमी ना रहे.

अब मैं और मेरी डार्लिंग निकल पड़े ऐसे सफ़र पे जिसकी शुरूआत तो मैंने की लेकिन अंत मेरी बहन की रसभरी चूत ही करेगी.
दो दिन का टूर था … तीसरे दिन वापस आना था तो हम पहले दिन जल्दी ही निकल गए, दोपहर को होटल पहुँचे।

मैंने सारा प्लान तरीके से किया था सोच समझकर क्योंकि एक भी कमी मुझे मेरी मंज़िल भाई बहन की चुदाई से दूर कर देती … इसलिए होटल भी महंगा किया ताकि पहला इम्प्रैशन अच्छा हो, सारी सुख सुविधाओं से भरपूर जो जो उसे पसन्द है … महँगा कमरा … बाथरूम विद जकूज़ी … बाहर आलीशान स्विमिंग पूल … उसकी खुशी देखने लायक थी, मुझे मेरा काम बनता दिखाई दिया।
हमने लंच किया और फिर आराम करके बाहर घूमने निकल पड़े … उसे खूब शॉपिंग करायी, मनचाहे रेस्तरां में कॉफ़ी … रात का खाना और एक मूवी।

इतना खर्चा उस हसीन चूत को पाने के लिए … देर रात होटल लौटे, वो बहुत खुश दिख रही थी, उसने मुझे ज़ोर से गले लगाया तो मैंने भी गले लगते हुए उसकी कोमल कमर को पकड़ लिया … उसके गालों को चूमते हुए मैं अलग हुआ … ऐसा लगा वो भी मुझसे कुछ कहना चाहती है लेकिन रोक रही है।

पूरे दिन की थकान थी तो नहाना ज़रूरी था … वो बोली- मैं जा रही हूँ नहाने पहले!
वो चली गयी और मैं ये सोचता रहा कि अपनी भाई बहन सेक्स की बात कब और कैसे कहूँ.

वो नहाकर आयी और एक हल्की सी कुर्ती पहनी जो काफी पतले कपड़े की थी, अंदर ब्रा भी आसानी से देखी जा सकती थी. नीचे लेगिंग्स जो हमेशा से मेरी कमज़ोरी है क्योंकि हर हसीन कुतिया लेगिंग्स में बम लगती है. और मेरी बहन की गांड उसमें अलग ही हमले करती है दिलों पर।

खैर, मैं नहाने गया और आकर ऊपर एक बनियान और नीचे लोअर पयजामा पहन लिया … क्योंकि नवंबर में भी वहां गर्मी ही थी और मौसम प्यार का … मैंने नहाते हुए सोच लिया था “अभी नहीं तो कभी नहीं.”
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06-11-2021, 12:29 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
मेरी कुंवारी ज़िद्दी बहन की रसीली चुदाई-2

हमने कुछ देर बातें कीं इधर उधर की, पूरे दिन के बारे में … दोनों की ही आंखों से नींद गायब थी … मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- बहन, मुझे कुछ कहना है तुझसे!
उसने हाँ में सर हिलाया तो मैंने कहा- देख जो मैं बोलने वाला हूँ वो शायद तुम्हें पसंद ना आए और अजीब लगे. लेकिन मैं अब यह बात और नहीं रख पाऊंगा अपने अंदर!

उसने थोड़ी सी टेंशन दिखाते हुए कहा- बोल जो भी बात है, मुझे खुलकर बता क्या परेशान कर रहा है तुझे?
मैंने कहा- फिक्र की कोई बात नहीं है, सब ठीक है … बस जो मैं बोलूँ तुम ध्यान से सुनना और नाराज़ मत होना और गुस्सा तो बिल्कुल भी नहीं। अगर तुम ये वादा करोगी तभी बताऊंगा, वरना नहीं!

अब लड़कियों को तो आदत ही होती है बातें जानने की तो मेरा तीर सही लगा और उसने बोला- साफ साफ बता क्या कहना है? और रही बात गुस्से की … तो चल नहीं होती गुस्सा … लेकिन अब बता जल्दी जो भी बात है?

मैंने उसका हाथ पकड़े पकड़े ही कहा- दीदी, मैं तुम्हें बहुत ज़्यादा पसन्द करता हूँ … जब से मैंने लड़कियों के बारे में जाना है तब से सिर्फ आपकी ही तस्वीर बनाई है अपने दिमाग में … हमेशा से बस आपका ही सपना देखा है और जीया है … कोई भी लड़की मुझे इतना उत्साहित नहीं करती जितना आपका शरीर करता है … आपकी सुंदरता … आपका मन … आपकी बातें … आपका जिस्म, सब पे मर मिटा हूँ मैं और पाना चाहता हूँ आपको … प्लीज दीदी मना मत करना … ये ट्रिप मैंने हम दोनों के लिए बनाई है।

तृप्ति ने मुझे देखा और पूछा- क्या तू मुझे बाथरूम में नंगी नहाती हुई को देखता था?
मैंने बिना रुके ‘हाँ’ बोल दिया.

फिर उसने पूछा- एक बात और बता … मेरे कॉलेज में जाने के बाद कभी तूने मेरी अलमीरा खोली है?
मैंने फिर बिना डरे बोल दिया- बहुत बार!
उसने पूछा- क्यों?
मैं बोला- आपकी पैंटी सूंघने के लिए!

उसने मेरा हाथ छोड़ा और कहा- मेरा आज तक कभी बॉयफ्रैंड नहीं रहा ना मैंने बनाने की कोशिश की … लेकिन मेरे अंदर बहुत सी चीज़ें चलती हैं जो सिर्फ एक लड़का ही पूरा कर सकता है … मैंने सोचा था शादी तक रुक जाऊं लेकिन कोई बात नहीं। मैं गुस्सा नहीं हूँ क्योंकि तुझ पर शक मुझे बहुत पहले से था … सोचती थी कभी न कभी पूछूँगी तुझसे. लेकिन आज तूने ये सब बताकर मेरे अंदर की बहन को मार दिया है … अब तूने इतना सब खर्चा भी किया है मेरे लिए और प्यार भी करता है मुझसे तो ठीक है … मगर इस बात का पता किसी को चला तो जान से मार दूंगी।

उसने जैसे ही ये बोला, मैंने उसे अपनी ओर ज़ोर से खींचा और उसके चूचों को मसलते हुए उसकी जीभ चूसने लगा. मेरे लिए रुक पाना मुश्किल था, ऐसी कामुक बहन का इतनी दूर एकांत जगह में सबसे अलग मेरी गुज़ारिश को ‘हाँ’ बोलना मेरे भीतर ज्वालामुखी ला चुका था.

उसका चुम्बन करने का तरीका साफ़ बता रहा था कि ये सच बोल रही थी कि कोई बॉयफ्रैंड नहीं रहा होगा इसका.
इस बात ने मेरे अंदर दोगुना जोश भर दिया और मैं पागलों की तरह उसके चुचे नोंचने लगा. मैंने उसकी कुर्ती फाड़ दी जिसका बदला उसने मेरी छाती पे काटते हुए लिया.
हम दोनों के मुँह से लार गिर रही थी जो बता रही थी कि हम कितने प्यासे होंगे।

मैंने उसे बिस्तर पे लिटाया और गर्दन पे दाँत गड़ा दिए … उसकी आहें मेरा तूफान बढ़ाने में सहायक हुई और मैंने उसकी ब्रा को अलग करते हुए उसके बेशक़ीमती चूचों को जमकर रगड़ा. उसके निप्पलों को दाँतों के बीच रखकर उसे दर्द दिया, फिर उन्हें जीभ से पुचकारा … फिर दोबारा काटा तो उसकी चीख़ निकल गयी … मुझे यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये वही लड़की है जो राखी बाँधती थी और आज मेरे लौड़े के नीचे पड़ी है।

लगातार उसकी आहें मुझे ज़ोर से उसके आमों को चूसने पे मज़बूर कर रही थी … एकदम गोरे और लचीले … रुई जितने कोमल और नाज़ुक, उन पर ये हल्के हल्के गुलाबी निप्पल शोभा बढ़ा रहे थे. उनको मैंने हाथ से मसला … मुँह से नोचा … दाँतों से कचोटा … जीभ से खाया … फिर भी मन न भरा.

उसके दोनों हाथों को थामकर मैंने जैसे ही उसकी कांख को चाटा तो कुतिया पागल हो गयी. मुझे नीचे गिराकर खुद चढ़ गई और मेरी बनियान फाड़कर मेरे मुँह पे धीरे धीरे अपना थूक गिराने लगी. मैंने भी बड़े प्यार से अपना मुंह खोला और उसके अमृत का रसपान किया।

ठीक मेरे पायजामे के ऊपर अपनी गांड टिकाकर बैठ गयी और हिलने लगी.
मेरे लंड महाराज ने अपना शीश उठाना शुरू किया और उसकी दरार पे आके रुक गया.

हरामज़ादी इतनी नशीली लग रही थी कि मुझे अफ़सोस हुआ उसका भाई होने पर … ऐसी कामुक लड़की को तो रण्डी बनाकर बीच बाज़ार चोद देना चाहिए.

उसने नीचे झुककर मेरे होंठ चूमे और आंख मारते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी. मेरी छाती को लंबी जीभ करके चूमने लगी … हर एक कोना उसने जमकर चूसा.
मेरे लौड़े ने अब तक पूरा आकार ले लिया था.

मेरे पेट पे जीभ घुमाती हुई दोनों हाथों से मेरा लोअर उतार दिया. अंडरवियर न होने की वजह से लंड देवता सीधा उसके मुँह से टकराये … उसने बिना देर किए अपने हाथों में पकड़ा और बड़े प्यार से उसे देखने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ … पसन्द नहीं आया?
मेरी बहन बोली- पहली बार देखा है तो आँखें रुक गयीं अपने आप … कैसे जाता होगा अंदर, ये सोच रही हूँ.
मैंने कहा- अभी तो आप इसे मुँह में लो … चूत को पता है इसका स्वागत कैसे करना है.
इतना बोलकर मैंने भी आंख मार दी.

मेरे मुँह से ‘चूत’ सुनकर वो शर्मा गयी और मेरे लौड़े को जीभ से चाटने की कोशिश करने लगी. फिर उसने थोड़ा खोलकर टोपा चाटा तो बदन में आग लग गयी बहनचोद … मैंने उसका सर दबाते हुए उसको मुँह खोलने का इशारा किया तो लंड अंदर सरका दिया.

क्या गर्मी थी बहन की लौड़ी के मुँह में … मानो लंड अभी पिघल जाएगा. थोड़ा अंदर बाहर किया तो उसे ठीक लगा फिर खुद ही चूसना शुरू हो गयी. मेरी तो साँसें अटक गई ऐसी अप्सरा को अपना लंड खाते हुए देखकर।

कोई बीस मिनट उसने लौड़ा पीया होगा मेरा … लेकिन मज़ा ज़िन्दगी भर का दे दिया. जब मुझे लगा मैं झड़ जाऊँगा तो मैंने उसे रोक दिया और ऊपर आने को बोला.
मेरी प्यारी बहन चुचे हिलाते हुए ऊपर आयी तो उसके कंधों के रण्डी को बिस्तर पर पटक कर उसकी टाँगें खोल दी और टूट पड़ा उसके अनमोल खज़ाने पर!

आज पहली बार बिना डरे दुनिया की सबसे क़ीमती चूत को पाया तो लंड भी रो दिया साला … उसकी चूत पर थोड़े थोड़े बिल्कुल छोटे बाल थे जो उसकी खूबसूरती बढ़ा रहे थे. मैंने बिना वक़्त गंवाए अपने ज़ालिम होंठ उसकी चूत की पलकों पे रखे और चाटना शुरू कर दिया गंदी तरह!

मेरी कुतिया बहन की टाँगें बेकाबू होने लगी और बन्द होने लगी. मैंने अच्छी तरह उन्हें पकड़ा और अपना खाना खाने लगा. जब रण्डी की मासूम चूत अपनी औकात पे आयी तो उससे रुका न गया और बोली- खा जा भाई … पी ले इसको, सारी तेरी है … मुझे नहीं पता था इतना मज़ा आता है इसमें … मत रूकियो उम्म्ह … अहह … हय … ओह … जो भी करना है तुझे आज, कर ले भाई … चोद ले अपनी बहन को, आजा कुत्ते … कर ले मेरी चूत से शादी और बन जा बहनचोद!

अपनी बहन से ये सब सुनकर मुझे अचंभा तो हुआ लेकिन उससे ज़्यादा ख़ुशी हुई की ये ऐसी भाषा भी बोलना जानती है. मुझे लड़की गाली देने वाली ही पसन्द है, उससे उत्साह बढ़ता है और चुदाई अंतहीन हो जाती है।
मैंने उसे बेहताशा चूसना ज़ारी रखा और बीच बीच में उसकी गांड को भी छेड़ देता तो उसकी चीखें वासना भरी हो जातीं.

अपनी उंगली मैंने उसकी गांड में डाली तो लौड़ा तड़प उठा … इतनी गर्मी थी मेरी रांड बहन की गांड में कि मैं बता नहीं सकता. मैंने अपना मुँह खोला और उतार दिया उसकी गांड की गोलाइयों के अंदर … मज़ा आ गया बहन की लौड़ी का स्वाद चखकर … चूत भी भूल गया मैं.

जब जीभ अंदर उसकी गांड में घुसी तो … ऐसे मटकाने लगी गांड को कि कुछ भी चला जाता उस टाइम भीतर तो ज़िन्दगी भर ग़ुलाम बनकर रहती मेरी।

मैंने कुत्तों की तरह उसकी गांड को सूंघा … चूसा … चाटा … प्यार किया कि अब हम दोनों से रुक पाना मुश्किल हो गया.

मैंने जल्दी से लौड़ा उसकी रसीली चूत से टकराया और अंदर डालते हुए उसका चेहरा देखा.
मेरी रण्डी बहन मुझे खरीद चुकी थी उस वक़्त मुझे अपने भावों से …

मैंने हौले से एक झटका दिया और रुक गया … शरारती अंदाज़ में उससे पूछा- कैसा लगा बहना … डालूँ या ज़ोर से डालूँ?
तो बोली- हरामी कुत्ते … घुसेड़ दे अंदर और बन जा बहनचोद।

मैंने फिर भी धीरे धीरे डालना शुरू किया तो उसका दर्द बढ़ता गया … उसने दोनों हाथों से चादर भींच ली और न रुकने का इशारा किया. मेरा आधा लंड जा चुका था और आधा बचा था अभी. मैंने बिना किसी रहम के एक ज़ोरदार झटका दिया और पूरे अंडकोष ठोक दिए उसकी चूत के दरवाज़े पर …

रण्डी बहना ने चादर छोड़ मुझे जकड़ लिया तो मैं भी कुछ समय के लिए रुक गया. धीरे धीरे गति बढ़ाते हुए पेलना शुरू किया तो ऐसा लगा कि बस ये पल यहीं रुक जाए अभी के अभी … सैक्स के अलावा दुनिया में इतना मज़ा ना कभी किसी को आ सकता है, ना कभी आएगा.

यह अलग ही अनुभति थी हम दोनों के जीवन में पहली बार! वो भी भाई-बहन होते हुए … इस रिश्ते ने हमारे अहसास को और ज़्यादा बल दिया और हम बिना रुके इस नशीले समंदर में गोते खाते चले गए.
मैं अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए उसकी चूत पे जानलेवा हमले करता गया और वो भी एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह हर झटका मज़े से सहती गयी.

मैंने उसे बहुत देर तक पेला जिसके बाद अपनी लंड की पिचकारी बाहर उसके मुँह पे चला दी. उसकी ही इच्छा थी ये …
जिस लड़की को मैं इतना भोला समझता था उसके अंदर ऐसी कामुक इच्छाएं भी हो सकती हैं … मुझे तब पता चला।

उसने उंगली से अपने मुँह पे लगा मेरा रस चाटा और मेरे लंड की आखरी बूंदें भी अपने गले में उतार लीं … सच में उसकी अदायें मुझे और पागल कर रहीं थीं।

हमने अपने होंठों से एक दूसरे को साफ किया और शुक्रिया कहा इस चुदाई भरे अवसर का लाभ उठाने के लिए!

इस वाकये को 3 महीने से ज़्यादा बीत चुके हैं … हम दोनों अब एक प्रेमी जोड़े की तरह रहते हैं. हर रोज़ सेक्स का लावा हमें भिगोता है. लेकिन पहली बार का प्यार जीवन भर हमारे मन में एक खूबसूरत याद की तरह रहेगा … हमें अब कोई जुदा नहीं कर पाएगा क्योंकि हमारे अंग नहीं रह सकते एक दूजे के बिना।

यह थी दोस्तो मेरी और मेरी रसीली बहन की अनूठी कहानी … आपको भाई बहन सेक्स स्टोरी पढ़कर कैसा लगा और क्या क्या महसूस किया आपने ये पढ़ते वक्त, मुझे ज़रूर बताएँ … मुझे सुनकर बहुत अच्छा लगेगा।
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06-11-2021, 12:30 PM,
RE: मस्तराम की मस्त कहानी का संग्रह
कोरोना का तोहफा- पार्ट -1

कहानी में पढ़े कि मेरे सामने वाले घर में तीन लड़कियां हैं. सबसे बड़ी बैंक में जॉब करती है दूसरे शहर में. जब वो अपने घर आयी तो मैंने उसे देखा और …

लेखक की पिछली कहानी थी: मां बनी मौसी को सेक्स का मजा दिया

लखनऊ से ट्रांसफर होकर देहरादून आये मुझे तीन महीने हो गये हैं. देहरादून में जो मकान किराये पर मिला उसके सामने सुनील जी का घर है. सुनील जी बैंक से रिटायर्ड हैं, उनकी तीन बेटियां हैं, बड़ी नमिता करीब 32 साल की है, मँझली मनीषा 30 साल की है और छोटी शैली 26 साल की.

नमिता और शैली यहीं रहती हैं और मनीषा बंगलौर में एचडीएफसी बैंक में जॉब करती है. नमिता और शैली सूखी लकड़ी जैसी हैं और बिल्कुल भी आकर्षक नहीं हैं, मनीषा को मैंने कभी देखा नहीं.

पिछले हफ्ते मेरी सास बाथरूम में स्लिप कर गई जिस कारण उसकी हड्डी टूट गई. मेरी पत्नी अपनी माँ का पता करने मायके गई तो मेरा खाना सुनील जी के घर होने लगा.
तभी पता चला कि सुनील जी की मँझली बेटी मनीषा एक हफ्ते के लिए आ रही है.

दूसरे दिन सुबह न्यूज पेपर उठाने के लिए बाहर निकला तो सुनील जी के साथ एक लड़की बातें कर रही थी. उससे नजर मिलते ही मेरा कलेजा धक से हुआ, और वो भी उठकर अन्दर भाग गई.
ऐसा लगा कि चोट उसके कलेजे में भी लगी थी.

मैं बाहर निकला, सुनील जी से राम राम हुई. उन्होंने बताया कि कल शाम को मनीषा आ गई थी.

मैं वापस घर आया. मेरी आँखों के सामने वो दृश्य बार बार आ जाता. मनीषा का मासूम चेहरा, नशीली आँखें मुझे बेचैन कर रहे थे.

नहा धोकर मैं बहाने से सुनील जी के घर पहुंच गया. सुनील जी ने चाय बनाने के लिए कहा. थोड़ी देर में मनीषा ही चाय लेकर आई. पाँच फीट चार इंच का कद, प्रीति जिंटा जैसा भरा बदन, सांवला रंग, नशीली आँखें यह सब मुझे मदहोश करने के लिए काफी था.

टीशर्ट और बरमूडा पहने मनीषा ने मेरे दिल, दिमाग, शरीर में हलचल मचा दी थी. 38 साइज की चूचियां टीशर्ट फाड़कर बाहर आने को आतुर थीं और बरमूडा से बाहर झांकती माँसल जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं.

मैंने बातचीत शुरू करने के मकसद से पूछा- आप एचडीएफसी बैंक में हैं?
“जी, मैं आठ साल से इस बैंक में हूँ और बंगलौर की हेड हूँ.”
“गुड, ये तो बड़ी खुशी की बात है. मेरा एकाउंट भी एचडीएफसी में ही है, कभी जरूरत पड़ी तो आपको कष्ट दूँगा.”
“श्योर, सर. आजकल तो आप किसी भी ब्रांच से बैंकिंग कर सकते हैं.”

“मुझे सर न कहिये. आपका पड़ोसी हूँ, मित्र भी कह सकती हैं. अपना नम्बर दे दीजिये, कभी काम आयेगा.”
मनीषा ने अपना नम्बर दिया, मैंने चाय पी और चला आया.

रोज की तरह दोपहर और रात को खाने की थाली सुनील जी की पत्नी दे गई.

रात को करीब साढ़े ग्यारह बजे मैंने मनीषा को व्हाट्सएप किया:
प्रिय मनु, जब से तुम्हें देखा है, मैं अपने होश खो चुका हूँ. अपनी बाकी जिन्दगी मैं तुम्हारे आँचल के साये में गुजारना चाहता हूँ. किसी भी तरह कल मुझे मिलो, मैं तुमसे बात करना चाहता हूँ.
तुम्हारा विजय

थोड़ी देर बाद जवाब आया:
आपको देखकर कुछ कुछ हुआ तो मुझे भी था लेकिन समन्दर में पत्थर आपने अब मारा है. कल 11 बजे क्वालिटी रेस्टोरेंट पहुंचूंगी.
गुड नाईट.

किसी तरह रात कटी. सुबह होते ही कभी न्यूज पेपर उठाने, कभी पौधों को पानी देने के बहाने बाहर गया ताकि यार का दीदार हो जाये. आखिर दीदार हो ही गया.

ग्यारह बजे रेस्टोरेंट में मुलाकात हुई और साथ जीने मरने की कसमें खा लीं. यह जानते हुए भी कि मैं शादीशुदा हूँ, मनीषा मुझ पर लट्टू हो गई.

रेस्टोरेंट से वापस लौटकर हम घर वापस आ गये. उसी रात प्रधानमंत्री जी टीवी पर आये और कोरोना के कारण कर्फ्यू घोषित कर दिया. अब बाहर जाकर मुलाकात का मौका नहीं मिलना था.
तभी हम दोनों ने एक खतरनाक प्लान बनाया.

मनीषा ने खाँसना शुरू कर दिया और ‘बुखार लग रहा है.’ कहने लगी.
कहीं कोरोना तो नहीं … यह सोचकर घर वाले घबरा गये.

सुनील जी ने मुझे फोन करके बुलाया, मुझे पूरी बात बताई.
मैंने पूछा- मुझे ही बताया है या किसी और को भी?
“नहीं, बस आपको ही बताया है.”
“किसी को बताइयेगा भी नहीं. प्रशासन को पता चल गया तो इसको उठा ले जायेंगे और किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कर देंगे, आप भी नहीं मिल पायेंगे.”

“वो तो ठीक है लेकिन कुछ तो करना पड़ेगा.”
“ज्यादा परेशान न होइये, हो सकता है कि मामूली फ्लू हो. एहतियात के तौर पर मनीषा को बिल्कुल अलग कमरे में रखिये, उस कमरे में और कोई न जाये ताकि अगर कोरोना है तो घर के बाकी लोग संक्रमित न हों.”

“ये कैसे सम्भव हो पायेगा, विजय बाबू? दो कमरे का मकान है, पीछे आँगन में जाने का रास्ता भी कमरे से होकर है.”
“फिर एक काम हो सकता है कि मनीषा को मेरे घर के एक कमरे में शिफ्ट कर दीजिये, आप लोग एक एक करके मिलने भी आ सकते हैं.”

“आपके घर में? ये कैसे हो पायेगा, विजय बाबू. आपको इतना कष्ट कैसे दें?”
“इसमें कष्ट कैसा, सुनील जी? इन्सान ही इन्सान के काम आता है. बस ये ध्यान रखियेगा कि प्रशासन को खबर न लगे, बाकी खाँसी, बुखार की दवा तो मैं दिला दूँगा.”

काफी सोच विचार के बाद सुनील जी और उनका परिवार इस प्रस्ताव पर सहमत हो गया. रात ग्यारह बजे के करीब जब मुहल्ले के सब घरों की लाइट ऑफ हो गई तो मनीषा व उसकी मम्मी दबे पांव मेरे घर आ गईं.
मैंने मनीषा की मम्मी से कहा- मैं उस कमरे में सोता हूँ, यह कमरा खाली ही रहता है, मनीषा को इसी में लिटा दीजिए, आप भी चाहें तो इसी में रूक जाइये.

मुँह पर कपड़ा लपेटी हुई मनीषा बोली- नहीं मम्मी, आप न रूको. मुझे अकेले छोड़ दो, भगवान करेगा तो दो चार दिन में ठीक हो जाऊँगी, मुझे कोरोना नहीं है, बस एहतियात के लिए ऐसा करना जरूरी है.
“ठीक है, मेरी बच्ची. तुझे तो वैसे भी अलग सोने की ही आदत है.” इतना कहकर आंटी अपने घर चली गईं.

आंटी के जाने के बाद बाहर का गेट, दरवाजा बंद करके मैं अन्दर आया तो मनीषा मुझसे लिपट गई और बेतहाशा चूमने लगी.

मैंने मनीषा को गोद में उठा लिया और अपने बेडरूम में ले आया. मनीषा को बेड पर लिटाकर मैंने अपनी टीशर्ट उतार दी और मनीषा पर लेटकर उसके होंठ चूसने लगा, मनीषा भी मेरे होंठ चूसकर जवाब दे रही थी.

मनीषा की साँस धौंकनी की तरह चल रही थी जिस कारण उसकी चूचियां मेरे सीने पर धक्के मार रही थीं. मनीषा के बगल में लेटकर मैंने उसकी टीशर्ट उतार दी, उसने ब्रा नहीं पहनी थीं.

खरबूजे के आकार की चूचियां अपने हाथों में समेट कर मैं चूसने लगा. मनीषा के निप्पल्स पर जीभ फेरने से निप्पल्स टाइट हो गये तो मैंने दाँतों तले दबा लिये. निप्पल्स को दाँतों तले दबाने से मनीषा कसमसाने लगी और मेरी पीठ पर नाखून रगड़ने लगी.

मेरी पीठ पर नाखून रगड़ते रगड़ते मनीषा ने मेरा लोअर नीचे खिसका दिया और मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगी, मेरा लण्ड पूरी तरह से तैयार हो चुका था.

मनीषा ने मेरी तरफ करवट ली और अपनी एक टाँग मेरी टाँग पर रखकर अपनी चूत मेरे लण्ड से सटा दी.
मैंने अपना लोअर नीचे खिसकाकर अपना लण्ड बाहर निकाल दिया और मनीषा को अपने सीने से सटा लिया.

मनीषा के चूतड़ों को अपनी ओर दबाते हुए मैंने अपने लण्ड से मनीषा की चूत को सटा दिया. मनीषा अपने चूतड़ों को हिला डुला कर मेरा लण्ड अपनी चूत पर रगड़ने लगी. मनीषा के होंठ अपने होंठों में दबाकर मैंने अपना और मनीषा का लोअर उतार दिया.

आज दोपहर को ही मैंने अपने लण्ड महाराज और टट्टों की शेव की थी. मनीषा की चूत पर हाथ फेरा तो वहां का हाल भी वैसा ही था, उसने भी आज ही अपनी झाँटें साफ की थीं. मनीषा की चूत को अपनी मुठ्ठी में दबोचकर मैंने उसकी चूत का द्वार बंद कर दिया.

मेरे होंठ चूसते चूसते मनीषा अपनी चूचियां मेरे सीने पर रगड़ रही थी. मनीषा की चूत को अपनी मुठ्ठी से आजाद करके मैंने हौले हौले सहलाना शुरू किया और उसकी चूत के लबों पर उंगली फेरने लगा.
मनीषा लण्ड लेने के लिए बेताब हो रही थी लेकिन मैं उसे यौनेच्छा के चरम तक ले जाना चाहता था.

उसकी टाँगों के बीच अपना चेहरा ले जाकर मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया. मनीषा की चूत से निकलता रस मुझे उत्तेजित कर रहा था लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं थी.

मनीषा की चूत चाटते चाटते मैं 69 की पोजीशन में आ गया. मनीषा की जाँघें फैला कर मैंने अपने होंठ मनीषा की चूत पर रखकर अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दी. मेरा लण्ड मनीषा के मुँह के पास था, मैंने आगे खिसक कर अपना लण्ड मनीषा के होंठों के पास किया तो उसने मुँह खोल दिया.

मेरे लण्ड के सुपारे पर मनीषा की जीभ लगते ही मेरा नाग फुफकारने लगा. मनीषा की चूत तो रस बहा ही रही थी.

मनीषा से अलग होकर मैं बाथरूम गया, पेशाब किया और अपना लण्ड धोकर वापस बेड पर आ गया. अपने लण्ड पर कोल्ड क्रीम चुपड़ कर मैंने अपने लण्ड का सुपारा मनीषा की चूत के मुखद्वार पर रख दिया. मनीषा की कमर पकड़कर मैंने धक्का मारा तो मेरे लण्ड का सुपारा मनीषा की चूत के अन्दर हो गया.

दूसरा धक्का मारने से पहले मैंने मनीषा के चूतड़ उठाकर एक तकिया उसकी गांड के नीचे रख दिया. गांड के नीचे तकिया रखते ही मनीषा की चूत टाइट हो गई. मनीषा की दोनों चूचियां अपने हाथ में लेकर मैंने अपने लण्ड को अन्दर धकेला तो दो धक्कों में पूरा लण्ड मनीषा की चूत के अन्दर हो गया.

पूरा लण्ड चूत में लेकर मनीषा ने अपने दोनों हाथ जोड़कर कहा- विजय, मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं इस तरह अचानक किसी की हो जाऊँगी. मेरी जिन्दगी में कई पुरुष मित्र आये लेकिन कभी शरीर छूने तक की स्थिति नहीं आई. जो भी आये, बस सहपाठी, सहकर्मी या मित्र तक सीमित रहे. अब मैंने तुम्हारे सामने समर्पण किया है तो अब मेरी और मेरे परिवार की इज्ज़त तुम्हारे हाथ में है.

अपना लण्ड मनीषा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने उसके गालों पर हाथ फेरा और कहा- मनीषा, तुम मेरी हो, जीवनपर्यन्त मेरी हो.
मेरे इतना कहते ही मनीषा ने मेरा हाथ चूम लिया और चूतड़ उचकाकर लण्ड का मजा लेने लगी.

मनीषा की टाँगें अपने कंधों पर रखकर मैंने धक्का मारा तो मेरे लण्ड ने उसकी बच्चेदानी के मुँह पर ठोकर मारी. आह आह करते हुए मनीषा मेरे लण्ड की ठोकरें झेलने लगी.

काफी देर तक इस मुद्रा में चुदवाने के बाद मनीषा ने कहा- मेरी टाँगें दर्द कर रही हैं.
मैंने मनीषा की टाँगें अपने कंधों से उतारीं और मनीषा के ऊपर लेट गया.
मनीषा ने पूछा- हो गया?
“नहीं, मनीषा. अभी कहाँ? अब ये जन्म जन्मांतर तक होता रहना है.”

इतना कहकर मैं उठा और मनीषा को घोड़ी बना दिया. मनीषा के पीछे आकर मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं, उसकी चूत के लब खोले और अपने लण्ड का सुपारा रख दिया.

मनीषा की कमर पकड़कर मैंने उसे बैक गियर लगाने को कह तो मनीषा ने अपने चूतड़ों को मेरी ओर धकेला. टप्प की आवाज के साथ सुपारा चूत के अन्दर गया तो मनीषा ने फिर से धक्का मारा और पूरा लण्ड अपनी गुफा में ले लिया.

अपनी कमर आगे पीछे करते हुए मनीषा लण्ड के मजे लेने लगी तो मैंने पूछा- ये सब कैसे सीखा?
“सनी लियॉन की क्लिप्स देखकर!”

काफी देर से अलग अलग आसनों में चोद चोदकर मेरा लण्ड भी अपनी मंजिल तक पहुंचने वाला था. मैंने मनीषा को फिर से पीठ के बल लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया रखकर अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया.

मनीषा की चूचियां चूसते चूसते मैं उसे चोदने लगा.

जब डिस्चार्ज का समय करीब आया तो मेरा लण्ड और मोटा होकर अकड़ने लगा. मैंने मनीषा की जाँघें कसकर पकड़ लीं और राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से चोदने लगा. मंजिल पर पहुंचते ही मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ी और मनीषा की चूत मेरे वीर्य से सराबोर हो गई.

14 दिन तक मनीषा मेरे घर पर रही, इस दौरान हम पति पत्नी की तरह रहे. कोरोना का लॉकडाऊन खत्म होते ही मनीषा बंगलौर चली गई.

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