मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति
08-01-2016, 10:51 PM,
RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति

अपडेट 134



रंजू भाभी : क्या अमित ?? खुद तो सोते रहते हो पर ये हमेशा जागता रहता है ...

मैंने उठकर भाभी को अपनी बाहों में भर लिया ...

रंजू भाभी : क्या करते हो ?? श्वेता भी यही है ....और बड़े घूर घूर कर देख रहे थे उसको ...

मैं : हाँ भाभी माल ही ऐसा है ...बहुत मजेदार है आपके बेटी ...

रंजू भाभी : अच्छा तो उस पर भी नजर है ....

मैं : तो क्या हुआ ...अगर उसको भी लण्ड चाहिए तो इसमें क्या बुराई है ...

मैंने श्वेता की ओर देखा वो सीधी लेटी थी ...
पता नहीं सो रही थी या हमारी बातें सुन रही थी ...

उसने अपनी जीन्स का बटन खोल लिया था ...जहाँ से अंदर का गोरा हिस्सा दिखाई दे रहा था ...

मैं : यार भाभी इसकी चूत के तो दर्शन करा दो ..देखो कैसे झांक रही है झरोके से ...मैंने रंजू भाभी को बाँहों में कसकर उनके लाल लाल होंठो को चूमते हुए बोला ..

और उन्होंने मुस्कुराकर मेरे कान पकड़ लिए ...
रंजू भाभी : हर समय पिटाई वाला काम करना चाहता है ...
अगर जाग गई ना तो हल्ला हो जायेगा ...
चल अब सो जा वैसे ही ..जूली अभी बाहर आती होगी ...

मैंने भाभी के चूतड़ों को कसकर दबाया ..वो मुझे वहीँ छोड़कर कमरे से बाहर चली गई ...

अपने बिस्तर पर आते हुए मैंने एक बार फिर श्वेता की ओर देखा तो वो गहरी नींद में लगी...
उसकी चूत देखने का लालच मैं छोड़ नहीं पाया ...

चुपचाप उसके निकट जाकर मैंने उसकी जीन्स के दोनों सिरे पकड़ विपरीत दिशा में खींचे ...
और उसकी चैन खुलती चली गई ...

पहले तो लगा जैसे की उसने निचे कुछ नहीं पहना है ..
फिर डोरी वाली फैंसी पंतय दिखाई दे गई ...
जो शायद उसके चूत के हिस्से को ही ढके हुए थी ..

उसकी गोरी सफ़ेद चिकनी चूत का ऊपरी हिस्सा दिखाई दे रहा था ...
अब उसके आगे देखने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता ..और फिर जूली के भी बाथरूम से बाहर आने की आवाज आने लगी ...

मैं जल्दी से अपने बिस्तर पर चढ़कर वैसे ही सो गया ..
या फिर सोने की एक्टिंग करने लगा ...

तभी जूली बाहर आई ..
उसने अपनी नाइटी निकाल ...कोई ड्रेस पहनी ...
फिर उसने श्वेता को जगाया ...

जूली : उठ श्वेता मैं जा रही हूँ ...और ऐसे हवा मत लगा ...ले मेरी नाइटी पहकर आराम से सो जा ...

श्वेता : ओह्ह्ह क्या करती हो भाभी ..ठीक है ...आप कहाँ जा रहे हो ...

जूली : रंजू भाभी के साथ ऋतू और रिया को तैयार करने ...तू यहाँ आराम कर ...जब फ्री हो जायेंगे तो तेरे को बुला लेंगे ...

श्वेता : ठीक है भाभी ...आप चिंता मत करो मैं हूँ यहाँ ..

जूली : वो तो है ...और अपने भैया का भी ध्यान रखना ..सब कुछ खोलकर सो रहे हैं ...हा हा ...

श्वेता : धत्त भाभी ...आप भी ना ...वो तो आप ही दिन में उनको परेसान कर रही होंगी ...

जूली : अच्छा बच्चू तो तू जाग रही थी ...चल अब तेरे लिए छोड़े जा रही हूँ ...मेरी नाइटी पहन तू भी उनकी नींद का फ़ायदा उठा लेना ..
वो तो यही समझेंगे की मैं हूँ ...

श्वेता : छीईईईई मैं ऐसी नहीं हूँ ....

और जूली के जाने और दरवाजा बंद करने की आवाज आई ...

मुझे लगा ये सब मजाक में ही दोनों ने कहा होगा ...

मैंने अपनी अधखुली आँखों से देखा ...श्वेता तो उसकी कमरे में ही अपने कपडे उतारने लगी ...

उसने जीन्स ...टॉप और ब्रा भी उतार दी ...
फिर उसने जूली की अंदर वाली शार्ट नाइटी ही पहनी ..
श्वेता की लम्बाई जूली से कुछ ज्यादा होने से वो नाइटी उसकी और ज्यादा ऊपर चढ़ गई ...उसके मोटे चूतड़ों को मुस्किल से ढक पा रही थी ...

श्वेता तो मेरी समझ से भी ज्यादा बोल्ड निकली ...
इतनी सेक्सी ड्रेस पहनकर ..जिसमे वो लगभग पूरी नंगी ही दिख रही थी ...

मेरे पास मेरे बिस्तर पर आ वो फैले हुए मेरे हाथ पर अपना सर रख मेरी ओर पीठ कर लेट गई ...

मैं तो पहले से ही नंगा था ...
मेरा लण्ड पहले से ही आधा खड़ा था ...पर उसके इस कोमल स्पर्श से पूरा तनतना गया ...

मैंने भी अब देर करना उचित नहीं समझा ..
मैंने कुम्भलाते हुए उसकी ओर करवट ले ली ...
उसकी लम्बाई तो मेरे लिए बिलकुल आइडियल थी ..
मेरे खड़े लण्ड का गोल, गरम सुपाड़ा ठीक उसकी फूली हुई चूत पर जाकर टिक गया ...

लण्ड को और मेरी जांघो को उसके नंगे चूतड़ों का ही एहसास हुआ ...
क्युकि नाईटी तो कबकि उसके चूतड़ों से ऊपर सरक गई थी ...

और उसकी छोटी सी पैंटी की डोरी तो शायद उसके गहरे चूतड़ों की दरार में गम हो गई थी ...

मैं : आह्ह्ह्ह्हा जूली कितना प्यारा जिस्म है तुम्हारा ...और तुम्हारी ये मखमली चूत तो हर समय गरम रहती है ...आअह्ह्ह्हाआआआआ देखो कितना पानी छोड़ रही है ...आअह्ह्ह्हाआआ ...
डाल दूँ क्या अंदर ....???

श्वेता के मुहं से बीएस सिसकारी और उन्न्न्ह्हुउउउउउ की आवाज ही निकली ..

मैंने अपने सीधे हाथ नीचे ले जाकर...उसकी चूत के पास हट चुकी पट्टी को पूरी तरह एक ओर सरका दिया ..और लण्ड के सुपाड़े को जैसे ही चूत के मुख पर टिकाया ..
मेरी कमर के साथ साथ श्वेता भी पीछे को खिसकी ..

आह्ह्ह्ह्हाआआआआआ उउउउउउउउउउउउउउ
और मेरा लण्ड गप्प्पाक्क की आवाज के साथ अंदर चला गया ...

करीब ३ इंच अंदर करके ही मैंने ८-१० धक्के लगाए ..
अह्हाआआआआ आअह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआ
ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उउउउउउउउउउउ 
इइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ 

मैंने श्वेता के कैसे हुए मम्मो को टटोला ...और तभी ...

मैं : अर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र ईईईई ये क्या ...??????
ये तो तुमम ...यहाँ कैसे आ गई ...???

मैंने जानबूझकर ऐसी एक्टिंग की ...ओह्ह्ह 
मैंने तो जूली समझा था ....

और श्वेता का चेहरा ...????????
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08-01-2016, 10:52 PM,
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अपडेट 135



आह्ह्ह्ह्हाआआआआआ उउउउउउउउउउउउउउ
और मेरा लण्ड गप्प्पाक्क की आवाज के साथ अंदर चला गया ...

करीब ३ इंच अंदर करके ही मैंने ८-१० धक्के लगाए ..
अह्हाआआआआ आअह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआ
ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उउउउउउउउउउउ 
इइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ 

मैंने श्वेता के कसे हुए मम्मो को टटोला ...और तभी ...

मैं : अर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र ईईईई ये क्या ...??????
ये तो तुमम ...यहाँ कैसे आ गई ...???

मैंने जानबूझकर ऐसी एक्टिंग की ...ओह्ह्ह 
मैंने तो जूली समझा था ....

और श्वेता का चेहरा देखने लायक था ....

श्वेता ने मुझे धक्का सा दिया ....
शायद वो भी पाक साफ़ रहना चाहती थी ...

लण्ड धप्प्प्प से उसकी चूत से बाहर आ गया ....
मैं उसकी बगल में ही लेट गया ...

उसकी नाइटी गोरे जिस्म पर पूरी तरह अस्त व्यस्त थी ...
वो एक पैर मोड़े और दूसरा फैलाये लेटी थी ....
उसने ना तो नाइटी सही की और ना ही कुछ बोली ..

मैं उसकी बगल में लेटा उसको देखे जा रहा था ...

मैं : ओह ये क्या हो गया ...सॉरी श्वेता ...सच मुझे बिलकुल पता नहीं था ...
और तुम तो वहां सो रही थी ना ...फिर अचानक ऐसे यहाँ ...

पहली बार श्वेता बोली ...
श्वेता : जी भैया ...वो बच्चे डिस्टर्ब ना हो इसलिए यहाँ लेट गई थी ...

मैं : ओह सॉरी श्वेता ..प्लीज मुझे माफ़ कर दो ...

श्वेता : अरे कोई बात नहीं भैया ...आप की भी तो कोई गलती नहीं है ...

उसने अभी भी अपने कपडे सही नहीं किये थे ...
उसके मन में चुदाई का बबंडर शोर मचा रहा था ..फिर भी नारी सुलभ लज्जा उसको रोके थी ...

ये बात मुझे बहुत अच्छी लगी ..
मैंने अब दूसरी तरह से तीर चलाना शुरू किया ...

मैं : वैसे श्वेता तम बहुत सुन्दर हो ...लगता ही नहीं कि तुम एक बच्चे की माँ हो ...
तुम्हारा एक एक अंग साँचे में ढला हुआ है ...

श्वेता के चेहरे पर लाली और मुसकुराहट दोनों आ गई ..
नारियों के मामले में मैं खुद को मास्टर समझता था ..मगर हमेशा मैं एक नौसिखिया ही साबित हो जाता था ..

जूली ने तो नाक में दम कर ही रखा था ...हर दिन उसका नया रूप देखने को मिलता था ...
और वैसे भी कई अनोखी लड़कियों से मुलाकात हो जाती है ...

अभी कुछ देर पहले जब श्वेता अपने सभी कपडे उतारकर पूरी नंगी हो जूली की नाममात्र की नाइटी पहनकर जब मेरे पास आकर लेटी थी ..तब ऐसा ही लगा था कि ये तो बहुत चालू माल है ...खूब चुदवाती होगी ...

परन्तु जरासी देर में ही वो अनोखी हो जाती है ...
चूत में गया लण्ड भी निकल देती है और कितना शरमा रही है जैसे पहली बार लण्ड देखा हो ...

श्वेता : भैया मुझे बहुत शर्म आ रही है ....

मैं : वो क्यों पागल ...ये सब तो नेचुरल है ...

श्वेता : वो व्व्व्वो मेरे पति के बाद आप दूसरे हो जिसने मुझे नंगा देखा है ...इसलिए ...

मैं : वाओ फिर तो मैं बहुत खुशनसीब हूँ यार ...जिसने इतनी प्यारी चूत और मम्मे देख लिए ...

अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था ...

मैंने उसकी ओर करवट लेते हुए ..अपना सीधा हाथ श्वेता के पिचके हुए पेट पर नाभि के इतना नीचे रखा कि मेरी उंगलिया उसके बेशकीमती खजाने यानि चूत के ऊपरी हिस्से को छूने लगी ..

श्वेता का उठा हुआ पैर भी फैल गया ...
उसकी सफाचट सफ़ेद चूत मेरी उँगलियों के नीचे थी ..

अब श्वेता बिलकुल चित लेटी थी ...
मैंने हाथ को और नीचे को सरकाया ...

श्वेता : अह्ह्ह्ह्हाआआआ प्लीज मत करो भैया ...

मैं : क्या चल रहा है तुम्हारे मन में ..??
देखो श्वेता अब मैंने सब कुछ देख तो लिया ही है ...और तम्हारी चूत से जो ये इतना रस निकल रहा है ..जब तक ये सब बाहर नहीं आ जाता तुमको भी चैन नहीं मिलेगा ...
मैं नहीं चाहता कि पूरी शादी में तुम बैचेन रहो ...

अचानक श्वेता में ओर घुमी और मेरे सीने से लग गई ..

श्वेता : मैं क्या करूँ भैया ...अगर मेरे पति को पता चल गया तो क्या होगा ..

मैंने हंसकर उसको खुद से चिपका लिया ..चूत के रस से भीगा हाथ श्वेता के नंगे चूतड़ों पर पहुंचे ..

वाह क्या शानदार उभरे हुए चूतड़ थे ...इतने ठोस जैसे पत्थर ...
जूली के बाद मुझे यही चूतड़ उसको टक्कर देते लगे ..
मैं : पागल ...लगता है तेरे पति को महाभारत के संजय जैसी दिव्या दृष्टि है ..हाहा ...अरे वहां बैठे वो यहाँ का कैसे जान पायेगा ...

मेरा लण्ड फिर से तनतना गया था ...उसको नई चूत कि खुसबू मिल गई थी ...

लण्ड श्वेता की चूत को दस्तक देने लगा ...
उसके अपना सर मेरे सीने में छुपाये हुए ही बोला ...

श्वेता : भैया जो भी करना है जल्दी करिये ..वरना कोई आ जायेगा ...
मुझे भी समय का ज्ञान था ...दिन का समय था ...कोई भी आ सकता था ...

और इतना इशारा काफी था....

श्वेता ने उसी हालत में अपने हाथ से मेरे लण्ड को टटोला ...उसके हाथ की कंपकंपाहट उसकी शर्म को दिखा रही थी ...
मगर वो खुद को लण्ड से खेलने को रोक नहीं पा रही थी ...

मैंने उसको फिर से सीधा किया ...
नाइटी उसके मम्मो तक सिमटी थी ...

उठकर निकालने में कुछ आनाकानी हो सकती थी ...
मेरा दिल उसको पूरा वस्त्र विहीन देखने को आतुर था ..

जूली की नाइटी थी तो मुझे पता था कि डोरी के नीचे बटन हैं ...
मैंने बड़े आराम से बटन खोल नाइटी को हटाकर अलग कर दिया ...

वो फिर से शरमाई ...उसने अपने दोनों हथेली मम्मो पर रख ली ...
मुझे अब इसकी चिंता नहीं थी ...

मैं उठकर उसकी टांगो के बीच आ गया ...

बहुत सुन्दर चूत थी श्वेता की...
रस से भीगी हुई उसकी सफ़ेद पंखुरियाँ ...ओस से भीगे फूल जैसी लग रही थी ...

मैं उसको और मजा देना चाहता था ...मैंने अपनी खुरदरी जीभ से सारी ओस को चाट लिया ...

आअह्ह्हाआआआआआ उसके मुहु से सिसकारी पर सिसकारी निकालने लगी ...
अब वो कुछ मना नहीं करने वाली थी ...

५ मिनट में ही वो मुझे अपने ऊपर खींचने लगी ...

मैंने फिर से पोजीशन लेकर इस बार पूरा लण्ड उसकी चूत में प्रवेश करा दिया ...

श्वेता : अह्ह्ह्हाआआआआआआआ इइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ

और मैंने एक लयबद्ध तरीके से धक्के लगाने शुरू कर दिए ...

करीब १५ मिनट के बाद मेरे स्खलन से पहले श्वेता २ बार पानी छोड़ चुकी थी ...

इस चुदाई में दोनों को ही बहुत मजा आया था ...

चुदाई के बाद श्वेता कुछ देर अपने पैरों को मोड़कर करवट से लेटी थी ...

इस अवस्था में उसकी उठी हुई गांड देख मेरा दिल मचलने लगा ...

मगर .....
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08-01-2016, 10:52 PM,
RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति
अपडेट 136



मैंने फिर से पोजीशन लेकर इस बार पूरा लण्ड उसकी चूत में प्रवेश करा दिया ...

श्वेता : अह्ह्ह्हाआआआआआआआ इइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ

और मैंने एक लयबद्ध तरीके से धक्के लगाने शुरू कर दिए ...

करीब १५ मिनट के बाद मेरे स्खलन से पहले श्वेता २ बार पानी छोड़ चुकी थी ...

इस चुदाई में दोनों को ही बहुत मजा आया था ...

चुदाई के बाद श्वेता कुछ देर अपने पैरों को मोड़कर करवट से लेटी थी ...

इस अवस्था में उसकी उठी हुई गांड देख मेरा दिल मचलने लगा ...

मगर उसके कसे हुए चूतड़ और छेद देखकर लग रहा था जैसे उसने कभी अपनी गांड में लण्ड नहीं लिया है ...
वैसे भी मुझे कोई जल्दी नहीं थी ...
अभी किसी के आने का भी डर था ...

इसलिए मैंने ही उससे कहा चलो अब तैयार हो जाओ ..अगर किसी ने हमको ऐसे देख लिया तो गजब हो जायेगा ...

वो शायद बहुत ज्यादा मदहोश हो गई थी ...

ह्म्म्म्म्म्म के साथ बड़े बेमन से उठी और नाइटी वहीँ छोड़ नंगी ही बाथरूम में चली गई ...

मैं भी उठकर अपना लोअर पहन लेता हूँ ...
तभी दरवाजा नोक होता है ...

मैं : कौन .....

अरे ये तो तिवारी अंकल हैं ...
बाहर वो आ गए थे ...
दरवाजा पीट रहे थे और चिल्ला भी रहे थे ...खोलो भाई जल्दी .....

अब दरवाजा तो खोलना ही था ...

तिवारी अंकल : अरे बेटा रोबिन ...ये क्या ..दिन में भी कोई सोता है क्या ..???
चलो भई एन्जॉय करो बाहर सब तुमको पूछ रहे हैं ..

अरे यार ये जूली भी ना सब कपडे फैलाये रहती है ...
और उन्होंने उसकी नाइटी उठाकर एक ओर को रख दी ...

और वो वहीँ बैठ गए ...
तभी उनकी नजर सामने बिस्तर पर गई ...
अच्छा श्वेता बच्चो को यहाँ सुला गई ...गई कहाँ ये ??
जब से आई है सही से मिली ही नहीं ....

ओह इसने भी अपने कपडे ऐसे ही छोड़ दिए ...

वहां श्वेता के पहने हुए कपडे रखे थे ...जो उसने अभी नाइटी पहनने से पहले उतारे थे ...

जैसे ही उन्होंने उसकी जीन्स उठाई ..
उसमे से उसकी काली नेट वाली कच्छी निकल कर नीचे गिरी ...
वो चोंक गए ...सिमटी हुई शर्ट पर ब्रा भी पड़ी थी ...

तिवारी अंकल की आँखे कुछ देर के लिए संकुचित सी हुई ..
फिर मेरा एहसास होते ही वो सटपटा से गए ...
उन्होंने तिरछी नजर से मुझे देखा ..और जल्दी से कच्छी उठाकर वैसे ही जीन्स में रख दी ...
और कपड़ो को वहीँ छोड़ दिया .....

फिर वापस अपनी जगह पर आकर बैठ गए ...
वो श्वेता के कपड़ो को देख ना जाने क्या-क्या सोच रहे थे ...

मैंने बात को सँभालते हुए बोला ...
पता नहीं कौन आया और गया ...मैं तो अभी आपके शोर से जागा ...

अब मुझे डर लगने लगा ...
अरे यार श्वेता बिलकुल नंगी बाथरूम में है ...अगर इस समय वो यहाँ आ गई तो क्या होगा ...??

अपने पिता के सामने उसको कैसा महसूस होगा ...
और तिवारी अंकल मेरे बारे में क्या सोचेंगे ..???

मैं अभी सोच ही रहा था कि श्वेता ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया ...
वो दरवाजे के बीचोबीच पूर्णतया नंगी अपने चेहरे पर साबुन का झाग लगाये खड़ी हुई अपनी आँखे मल रही थी .....
.....

शायद श्वेता अपना मुहं धोने के लिए गई थी और पानी बंद हो गया था ...
उसको कुछ नहीं दिख रहा था ... क्युकि उसकी आँखे साबुन से बंद थी ...
उसके उठी हुई दोनों छातियाँ और निप्पल ...
पतली कमर ...पिचका हुआ पेट ...गहरी नाभि ..
नाभि के नीचे ...उभरे हुए चिकनी चूत के उभार .. चूत के दोनों होंठो के बीच गुलाबी लकीर ...

सब कुछ खुली किताब की तरह सामने था ...
ऊपर से आँखे मलने के कारण उसके हाथो के हिलने से श्वेता की दोनों पूर्ण आकार की गोल गोलाइयाँ बड़े ही रिदम के साथ इधर उधर हिलकर जानमारु शमा बना रह थी ...

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि खूबसूरती की ऐसी मिशाल देख किसी भी मर्द का लण्ड खड़ा हो सकता है ..
अब चाहे वो उसका बाप ही क्यों ना हो ...

श्वेता : अरे रोबिन भैया देखो न यहाँ पानी कैसे खुलेगा ..आ ही नहीं रहा ..उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बहुत मिर्च लग रही हैं ...

मैंने कुछ बोले घबराकर तिवारी अंकल की ओर देखा ...उन्होंने अपने होंठो पर ऊँगली रखकर मुझे चुप रहने को कहा ...
और पानी सही करने का इशारा किया ...

मैं चुपचाप जाकर श्वेता के नंगे जिस्म को एक ओर करके पानी को देखने लगा ....

श्वेता पीछे घूमकर मेरी ओर मुहं करके खड़ी हो गई थी ..
दरवाजा अभी भी पूरा खुला पड़ा था ...

मैंने एक नजर बाहर को देखा ...
अरे ये क्या तिवारी अंकल अभी भी वहीँ खड़े होकर श्वेता के उठे हुए चूतड़ को देख रहे थे ...
और ना केवल देख रहे थे वल्कि उनकी आँखे लाल भी दिखाई दे रही थी ...

वासना भी साली कैसी चीज है ...एक बाप अपनी सगी बेटी के नंगे जिस्म को देखकर भी उत्तेजित हो जाता है ...

फिर शायद उनको पता चल गया था ...
दरवाजा बंद होने की आवाज आई ..वो शायद बाहर चले गए थे ...
अपनी नंगी बेटी को मेरे साथ बाथरूम में छोड़कर ...

गीजर का पानी शायद ज्यादा गर्म हो गया था ...जिससे एयर आ गई थी ...
कुछ देर ओन ऑफ करने से पानी आने लगा ..

मैंने श्वेता का मुहं साफ़ करवाया ...
फिर खुद भी फ्रेश हो गया ....

जब वो मेरे सामने ही तैयार हो रही थी ..

श्वेता : क्या हुआ भैया ...इतने चुप क्यों हो ...कोई और भी था क्या यहाँ ..???

मैं : कब जनम ???

श्वेता : जब मैं आपको पानी सही करने को बोल रही थी ...मुझे लगा आप सामने बेड पर बैठे हो ...
फिर आप इधर से आये ...

मुझे हंसी आ गई ...पहले सोचा था कि इसको कुछ नहीं बताऊंगा ..पर अब तो इसको चोद ही चुका हूँ ..
और जब इसके बाप को देखकर भी ऐसा कर रहा था तो क्यों ना मजे लिए जाए ...

मैं : तुमको पता है ...बोलकुल मुर्ख हो तुम ...ऐसे ही नंगी आकर खड़ी हो गई ...
यहाँ तिवारी अंकल बैठे थे ...

श्वेता : क्याआआआआआ ???पापआआआआ यहाँँँ ओह नो ...??

मैं : जी मैडम जी ...और उन्होंने तुम्हारे सब आइटम खुले देख लिए ...

श्वेता : अरे यार उसकी चिंता नहीं है ....पापा हैं नंगा देख भी लिया तो कुछ नहीं ....पर तुमको यहाँ देखकर तो समझ गए होंगे कि हमने क्या किया होगा ...
मर गई यार ...उनको बहुत बुरा लगा होगा ...
मैं : ओह तो तुमको उसकी चिंता है ...वो तुम मत करो मैं तो ये सोच रहा था कि तुमको नंगा देखे जाने की
चिंता होगी ...

श्वेता : तो उसकी क्यों नहीं ...अब पूछेंगे नहीं कि मैं अकेली तुम्हारे साथ नंगी क्या कर रही थी ...

मैं : अरे कुछ नहीं पूछेंगे ...तुमको पता है ..आजकल उन्होंने जूली को पटा लिया है ...और दोनों खूब मस्ती कर रहे हैं .......

श्वेता : क्याआआआआआ जूली भाभी ....????
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08-01-2016, 10:52 PM,
RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति

अपडेट 137



मैं : तुमको पता है ... मुर्ख हो तुम ...ऐसे ही नंगी आकर खड़ी हो गई ...
यहाँ तिवारी अंकल बैठे थे ...

श्वेता : क्याआआआआआ ???पापआआआआ यहाँँँ ओह नो ...??

मैं : जी मैडम जी ...और उन्होंने तुम्हारे सब आइटम खुले देख लिए ...

श्वेता : अरे यार उसकी चिंता नहीं है ....पापा हैं नंगा देख भी लिया तो कुछ नहीं ....पर तुमको यहाँ देखकर तो समझ गए होंगे कि हमने क्या किया होगा ...
मर गई यार ...उनको बहुत बुरा लगा होगा ...

मैं : ओह तो तुमको उसकी चिंता है ...वो तुम मत करो मैं तो ये सोच रहा था कि तुमको नंगा देखे जाने की
चिंता होगी ...

श्वेता : तो उसकी क्यों नहीं ...अब पूछेंगे नहीं कि मैं अकेली तुम्हारे साथ नंगी क्या कर रही थी ...

मैं : अरे कुछ नहीं पूछेंगे ...तुमको पता है ..आजकल उन्होंने जूली को पटा लिया है ...और दोनों खूब मस्ती कर रहे हैं .......

श्वेता : क्याआआआआआ जूली भाभी ....????

मैं : हाँ यार आजकल दोनों में खूब जम रही है ....जूली और अंकल दोनों को बिना कपड़ों के कई बार देख चुका हूँ ...

श्वेता : तुम्हारा मतलब है कि दोनों आपस में ....

मैं : हाँ यार दोनों खूब चुदाई भी करते हैं ....

श्वेता : छीइइइइइइइइ ये कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे हो ...

मैं : कमाल है यार जो कर रहे हैं उसको बोलने में क्या हर्ज है ...तुम भी क्या यार..?? भाई और बाप के सामने नंगा होने में शर्म नहीं है ...पर चुदाई शब्द बोलने में शर्म है ......
और कौनसा हम किसी के सामने बोल रहे हैं ...
अकेले में ही ना ...और ये भी सुन लो कि तुम्हारे पापा और जूली ऐसे ही शब्द बोलकर खूब चुदाई करते हैं ...

मैंने श्वेता की चूचियों को दबाते हुए उसके कांपते हुए होंठो को चूस लिया ...

श्वेता : मतलब पापा अभी भी ये सब करते हैं ..??

मैं : क्या कह रही हो मेरी जान ...आदमी और घोडा कभी बूढ़ा नहीं होता ...
और तुमको तो पापा के सामने नंगा खड़ा होने में कोई एतराज नहीं था ..
पर वो तुम्हारी इन मदमस्त चूचियाँ और चूत को घूर घूर कर मस्त हो रहे थे ...
हाहाहाहाहाहा .....

श्वेता ने मुझे पीछे को धकेला ...और 
श्वेता : मारूंगी हाँ ...अब ज्यादा ....

तभी कमरे में रंजू भाभी आ गई .......

रंजू भाभी : क्या कर रहे हो तुम लोग ..?? चलो ना ...

श्वेता का बच्चा भी जाग गया था ...

मैं रंजू भाभी के साथ बाहर को आ गया ....

मैं : और सुनाओ भाभी क्या चल रहा है ...

रंजू : कुछ नहीं मैं तो वहां ऋतू और रिया के साथ थी ..अभी जूली आई तो यहाँ आ गई ....

मैं चौंका ...

मैं : क्या मतलब ..??जूली आपके साथ नहीं थी ...
फिर कहाँ थी वो ...

रंजू भाभी मुसकुराने लगी ...

रंजू भाभी : तू तो सोते रहना बस ....
वो मेहता अंकल के दोस्त लोग आ गए हैं ...उन्ही की व्यवस्था में बिजी थी ...

मेरी नजर के सामने उनके वो सभी कमीने दोस्त आ गए ...जो महिला संगीत में जूली से छेड़खानी कर रहे थे ...

मैं : अरे पहेलियाँ मत बुझाओ ना भाभी ...बताओ न क्या हुआ ..??

रंजू भाभी : ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैं उसके साथ थोड़ी थी ...
वैसे उसकी हालत से तो लग रहा था कि कमरे में खूब धमाचौकड़ी करके आई है ...

मैं : क्या भाभी आप भी ना ...अपने कुछ पूछा नहीं ..

रंजू भाभी : अभी नहीं .....ठीक है तू चल नीचे फिर ...बात करती हूँ ...बता दूंगी सब ..ठीक है ...

मैं : अरे क्या हुआ ..??? मुझे भी आने दो ना ...

रंजू भाभी : अरे क्या करता है ...वो ऋतू की वैक्सिंग हो रही है ...
वो नंगी ही थी ..जब मैं गई थी ...

मैं : अरे तो क्या हुआ ...बस एक नजर देखने दो ना ..
इस साली को ही नहीं देखा अभी तक ...

और मैं भी भाभी के साथ कमरे में घुस गया ...

बहुत ही सुंदर दृश्य मेरा इन्तजार कर रहा था ....

एक ओर कोने वाले बिस्तर पर जूली तो सो रही थी ...
सामने सोफे पर ऋतू पूरी नंगी पेट के बल लेटी थी ...
उसके चेहरे और चूतड़ पर कोई लेप लगा हुआ था ...
आँखे बिलकुल बंद थी ...नहीं तो मुझे देखकर जरूर चीख पड़ती ..

ड्रेसिंग टेबल की बेंच पर रिया एक स्लीव लेस पारदर्शी गाउन पहने बैठी थी ....

अपना एक पैर दूसरे घुटने पर रख उसके नेल्स फाइल कर रही थी ...
उसने मुझे देखा और मुसकुरा दी ...

मैंने अपनी उंगली अपने होंठो पर रख उसको चुप रहने का इशारा किया ...

रिया बहुत समझदार थी ...उसने कोई आवाज नहीं की ..

ऋतू : आप आ गई भाभी ...देखो न हिप में बहुत चिरमरहहत हो रही है ...

रंजू भाभी : हाँ मेरी बन्नो ...वो तो होगी ना ... लण्ड जाते हुए भी तो हुई होगी ना ...तब तो खूब ले लिए अंदर ..
दोनों छेद कैसे हो गए थे ....रंग भी गहरा हो गया था ...
अब क्रीम लगाईं है तो कुछ तो करेगी उसको सही करने के लिए ...

मैंने भी देखा ...ऋतू के चूतड़ बहुत गोरे थे ..और उठान भी अच्छी थी ...
उसके चूतड़ के छेद पर कोई पर्पल कलर की क्रीम लगी थी ...
मुझे पता है ये क्रीम चूत और गांड के छेद को फिर से खूबसूरत बना देती है ....

ये क्रीम जूली भी यूज़ करती है ...इसीलिए उसकी चूत एक छोटी बच्ची जैसी कोमल और प्यारी है ...

उसने दोनों पैरों को कस कर सिकोड़ा हुआ था ..इसलिए पीछे से चूत नहीं दिख रही थी ...

मैं रिया के पास जाकर बैठ गया ....और उसके होंठो को एक जोरदार चुम्मा दिया ... साथ ही साथ उसकी चूचियों को भी सहला दिया ...
वो भी बहुत तेज थी ...
उसने अपने पैरों के अंगूठे से मेरे लण्ड को सहला दिया ..

तभी रंजू भाभी की आवाज आई ...
वो हमको नहीं वल्कि ऋतू को ही देख रही थी ...

रंजू भाभी : अभी १० मिनट और ऐसी ही लेटी रह तू ...
वो ऋतू को बोलकर जूली के पास चली गई ...

रंजू भाभी : उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कैसी मरी आई है तुझको ...पहले वहां चली गई ...अब देखो कैसे पड़कर सो गई ...
अरे उठ न ...तुझे कुछ नहीं करना क्या ...चल मेरे चेहरे की मसाज कर दे ...

.... जूली : ओह्ह्ह रुको ना भाभी ...पूरी रात सो नहीं पाई हु ...बस १० मिंनट रुक जाओ ...प्लीज ...

जूली मुझे नहीं देख सकती थी ....
रंजू भाभी हम दोनों के बीच बैठी थी ...और वो वैसे भी दूसरे कोने में लेटी थी ...

तभी रंजू भाभी ने जूली की साडी जो घुटनो तक थी ...उसको जांघो से ऊपर कर दिया ....

जूली : ओह सोने दो न ...क्या कर रही हो ..???

रंजू भाभी : ये सब क्या किया ...कितनी गन्दी हो रही है ....
सब जांघे और ओह्ह्ह्ह ये पेटीकोट तो कितना गन्दा हो रहा है ....
क्या रात से ऐसे ही पहने है ....कितना गन्दा ....ओह ...ये तो कितने सारे धब्बे हैं ....

जूली : ओह्ह्ह नहीं भाभी ....वो मेहता अंकल के दोस्त है ना ...ये .....

और वो कहते कहते रुक गई ...

रंजू भाभी : तो ये सब उन्होंने किया ...ओह्ह्ह ...बता ना क्या क्या हुआ ...और कोई नहीं है ...तू बता ...

जूली : पर वो ऋतू और रिया ....

रंजू : अरे उनकी चिंता मत कर वो सब जानती हैं ...
तू बता ना कि क्या हुआ ....

अब क्या बताओ भाभी मैं तो बस मेहता अंकल के मेहमानो को कमरा ही दिखाने गई थी ...
पर वो तो बहुत ही चालु निकले ...

रंजू भाभी : थे कौन ...वही तीनो रिटायर्ड ना ...

तभी आँखे बंद किये हुए ही ऋतू बोल पड़ी ...

ऋतू : भाभी वो तीनो अनवर, जोजफ और राम अंकल होंगे ना ...बहुत अच्छे दोस्त हैं डैड के ...और उतने ही हरामी भी हैं ..

रिया : हाँ हाँ मुझे पता है ...तीनो ने मॉम को भी नहीं छोड़ा था ...जब मौका मिलता था ...चोद देते थे ...

ऋतू : तू पागल है क्या ...वो सब क्यों बोलती है ..अब तो मॉम जिन्दा भी नहीं है ...

रिया : अरे बस बता ही तो रही हूँ ..उनकी नजर तो हम दोनों पर भी रहती है ...है ना ...

रंजू भाभी : अरे तुम दोनों चुप करो पहले ...जरा जूली की भी तो सुन लो ...इसका तो लगता है तीनो ने एक साथ मिलकर काम तमाम कर दिया है ...
उन्होंने अपने सफर की साडी थकान इसी पैर उतारी है ..हा हा ....

जूली : क्या भाभी आप भी ...वैसे कह तो सही रही हो आप ...
मेरे कमरे में पहुँचते ही ....???

....
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………….
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08-01-2016, 10:52 PM,
RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति
अपडेट 138


रंजू : अरे उनकी चिंता मत कर वो सब जानती हैं ...
तू बता ना कि क्या हुआ ....

अब क्या बताऊँ भाभी मैं तो बस मेहता अंकल के मेहमानो को कमरा ही दिखाने गई थी ...
पर वो तो बहुत ही चालु निकले ...

रंजू भाभी : थे कौन ...वही तीनो रिटायर्ड ना ...

तभी आँखे बंद किये हुए ही ऋतू बोल पड़ी ...

ऋतू : भाभी वो तीनो अनवर, जोजफ और राम अंकल होंगे ना ...बहुत अच्छे दोस्त हैं डैड के ...और उतने ही हरामी भी हैं ..

रिया : हाँ हाँ मुझे पता है ...तीनो ने मॉम को भी नहीं छोड़ा था ...जब मौका मिलता था ...चोद देते थे ...

ऋतू : तू पागल है क्या ...वो सब क्यों बोलती है ..अब तो मॉम जिन्दा भी नहीं है ...

रिया : अरे बस बता ही तो रही हूँ ..उनकी नजर तो हम दोनों पर भी रहती है ...है ना ...

रंजू भाभी : अरे तुम दोनों चुप करो पहले ...जरा जूली की भी तो सुन लो ...इसका तो लगता है तीनो ने एक साथ मिलकर काम तमाम कर दिया है ...
उन्होंने अपने सफर की सारी थकान इसी पर उतारी है ..हा हा ....

जूली : क्या भाभी आप भी ...वैसे कह तो सही रही हो आप ...
मेरे कमरे में पहुँचते ही ऐसे टूट पड़े ..जैसे पहले से ही सब सोचकर आये हों ...और आज से पहले कोई लड़की ही नहीं देखी हो ..

रंजू भाभी : मेरी जान लड़की तो बहुत देखी होंगी ...पर तेरे जैसी मलाई कोफ्ता नहीं देखा होगा ...
हाहाहा 

जूली : आप को तो बस हर समय मजाक ही सूझता है ...वो अनवर अंकल ने मेरी हालत ही खराब कर दी थी ..अभी तक दर्द कर रही है ...

जूली ने शायद अपने चूतड़ों को पकड़ा था ...

रंजू भाभी : अरे इस तरह क्या बताती है ..सब कुछ बता न ..कि क्या क्या हुआ ...
ये साले पठान तो पीछे के ही शौकीन होते हैं ...

ऋतू : हाँ भाभी बिलकुल सही कह रही हैं ...अनवर अंकल का हथियार वाकई बहुत बड़ा और जानदार है ..

रंजू भाभी : तू तो ऐसे बात कर रही है ...जैसे खूब चुदवा चुकी है उससे ...कुछ देर छुओ नहीं बैठ सकती करमजली ...कल शादी है इसकी और कैसे अपने चर्चे फैला रही है ....

ऋतू : ओह भाभी ...ऐसी कोई बात नहीं है ...वो तो मैं जूली भाभी कि बात को सही कर रही थी ...मैंने देखा है तभी तो बता रही हूँ ...

रंजू भाभी : अच्छा तू ये सब फिर कभी बताना ..और अब तो अपने होने वाले खसम को ही बताना ...
चल जूली तू बता क्या क्या हुआ ....

जूली : ओह आप तो भाभी सब कुछ जानकार ही पीछा छोड़ोगी ...तो सुनो ...

मैं वहां पहुंचकर उनक सामान रखवाकर.... बिस्तर ठीक कर रही थी ...

तभी अनवर अंकल ने मुझे पीछे से पकड़ अपनी गोद में उठा लिया ....

मैं छटपटा रही थी कि छोड़ो ना अंकल क्या करते हो ..
उनके दोनों हाथ से मेरी गोलाइयाँ दब रही थी ...

बाकि दोनों अंकल जोर जोर से हंस रहे थे ...

फिर दोनों ने मेरे पैरों को पकड़ लिया और मुझे झूला सा झुलाने लगे ...

मैं सच रोने सी लगी ...और बार बार छोड़ने के लिए बोल रही थी ...

फिर उन्होंने मुझे वहीँ बिस्तर पर उतार दिया ..और माफ़ी भी मांगने लगे ...

इस सबमे मेरी साडी पूरी खुल चुकी थी ...जब मैं बिस्तर से उठकर खड़ी हुई तो साडी हट गई ...

मैंने उन सबको बहुत बुरा भला कहा .. कि देखो आप लोगों ने ये क्या कर दिया ...

वो अभी भी माफ़ी मांग रहे थे ...

तभी जोजफ अंकल बोले ..बेटा बाथरूम में सवेर भी काम नहीं कर रहा है ...जरा देख लो ...हमको तो यहाँ के ये फैंसी टप समझ ही नहीं आते ...

मैं केवल पेटीकोट और ब्लाउज में ही वहां खड़ी थी ..मैंने सोचा कि इस सबके सामने को साडी कहाँ बाँध पाऊँगी ...

मैंने कहा कि आप लोग यहाँ तो बाहर जाओ ..या फिर बाथरूम में ..मैं अपने कपडे सही कर लूँ ...

तभी राम अंकल ने कहा ...अरे हमसे क्या सरमाना बेटी ...हम तो तेरे पिता समान ही हैं ...और मेहता के दोस्त हैं ...
वो हमसे कुछ नहीं छिपाता ...उसने हमको सब बता दिया है ...
और सब फिर से हसने लगे ...

मैं समझ गई कि अब इन तीनो के सामने कोई फिजूल बात करना बेकार है ...
मैं साडी लेकर बाथरूम में चली गई ...

अभी साडी बाँधने के लिए पेटीकोट ही सही कर रही थी ..कि जोजफ अंकल अंदर आ गए ..
बोले अरे बेटी जरा ये भी बता दे कि सवेर कैसे खुलेगा ..
अब मैं क्या करती ...साडी मैंने वहीँ टांग दी थी ..और पेटीकोट का नाड़ा सही कर रही थी ...
मेरी पीठ सॉवॅर की ओर थी ...और उन्होंने ना जाने क्या किया ..कि पानी खुल गया ...और मैं पीछे से पूरी गीली हो गई ...

मेरे हलके रंग के इस पतले पेटकोट से सब कुछ दिखने लगा ..
जोजफ अंकल ने सीधे मेरे चूतड़ों पर हाथ रख दिया ..और बोले अरे बेटी तूने आज भी अंदर कुछ नहीं पहना है ...

इतना सुनते ही वो दोनों भी जल्दी से बाथरूम में आ गए ...
अनवर अंकल तो कहते हुए आये ..क्या जूली ने आज भी पैंटी नहीं पहनी ...

मेरी तो शर्म के मरे बुरा हाल था ...उन सबके सामने मैं भीगी हुई लगभग नंगी ही खड़ी थी ...
पेटीकोट और ब्लाउज दोनों ही पूरे गीले होकर शरीर से चिपक गए थे ...

मैंने सबको बोला ओह ...आप लोग जाओ न प्लीज ...मुझे बहुत शर्म आ रही है ...

राम अंकल मरे पास आ गए ...हमसे क्या शर्माना ...अब तो हमने भी सब कुछ देख लिया है ...

ला जल्दी से ये कपडे निकाल दे ....कुछ और पहन लेना ....
और वाकई वो मेरी ब्लाउज के बटन खोलने लगे ...
मैं उनके हाथ को पकड़ रोक ही रही थी ...
कि पीछे से जोजफ अंकल ने मेरे पेटीकोट का नाद खोलकर उसको नीचे सरका दिया ....

गीला पेटीकोट चूतड़ से नीचे होते ही मेरे तलुवों तक पहुँच गया ...

जोजफ अंकल ने इतना ही नहीं किया ...पेटीकोट उतरते ही वो मेरे नंगे चूतड़ों को अपने दोनों हाथ से सहलाने लगे ....
उनके हाथ नंगे चूतड़ों पर अजीब से लग रहे थे ....

मैंने जोजफ अंकल के हाथो को पकड़ा ...
तो राम अंकल ने मेरे ब्लाउज के हुक खोलकर उसको अलग करने लगे ...

अब मेरी हालत ख़राब होने लगी ...
मेरी समझ नहीं आ रहा था कि कैसे ये सब रोकू ..

राम अंकल अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरी चूत को सहलाने लगे ..
और दूसरे से मेरी ब्रा भी ऊपर कर मेरे चूची को रगड़ने लगे ...

मैं अभी कुछ करती ..कि मैंने देखा अनवर अंकल तो अपने सभी कपडे उतारकर मेरे पास आ गए ..

उनका लण्ड देखकर तो मेरा मुहं खुला का खुला रह गया ...
ये ऋतू जो अभी बोल रही थी ..बिलकुल सच बोल रही थी ...

उनका लण्ड बहुत अजीब सा था ...एक दम चिकना ..उसकी खाल जैसे किसी ने छील दी हो ...
काफी बड़ा और मोटा भी था ....

अब वो मेरे पास आ मेरे बचे हुए कपडे हटाने लगे ..
वो बिलकुल पास खड़े थे ...उनका गरम गरम लण्ड मेरे कमर पर छू रहा था ...

अब मुझे नशा सा होने लगा ...

मुझे उनका लण्ड इतना आकर्षित कर रहा था कि उसको अपने से दूर हटाने के बहाने ही मैंने अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया ...

अपनी मुट्ठी में लेते ही मुझको पता चला ....कि वाकई उनका लण्ड बहुत भारी था ....
एक बार पकड़ने के बाद उसको छोड़ने का दिल ही नहीं किया ...

अब अनवर अंकल ने आराम से मेरी ब्लाउज और ब्रा मेरे शरीर से अलग कर दी ...

और उसको अच्छी तरह से एक ओर फैला दिया ...

अब मैं पूरी नंगी उन तीनो के बीच खड़ी थी ....

इतनी देर में राम और जोजफ अंकल भी अपने कपडे उतार कर आ गए ...

हम चारों उस बाथरूम में नंगे खड़े थे ...
अब जो होना था वो तो होना ही था ....

जोजफ अंकल बोले ..चलो यार बाहर बिस्तर पर ही चलते हैं ...
और सब मुझे उठाकर बिस्तर पर ले आये ……

उन्होंने मुझे बिस्तर पर डाल दिया ....
मैं सोच ही रही थी की क्या करूँ ...

तभी डोर पर कोई आ गया ...
नोक नोक ....


....
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08-01-2016, 10:53 PM,
RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति
अंतिम अपडेट 



अब मुझे नशा सा होने लगा ...

मुझे उनका लण्ड इतना आकर्षित कर रहा था कि उसको अपने से दूर हटाने के बहाने ही मैंने अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया ...

अपनी मुट्ठी में लेते ही मुझको पता चला ....कि वाकई उनका लण्ड बहुत भारी था ....
एक बार पकड़ने के बाद उसको छोड़ने का दिल ही नहीं किया ...

अब अनवर अंकल ने आराम से मेरी ब्लाउज और ब्रा मेरे शरीर से अलग कर दी ...

और उसको अच्छी तरह से एक ओर फैला दिया ...

अब मैं पूरी नंगी उन तीनो के बीच खड़ी थी ....

इतनी देर में राम और जोजफ अंकल भी अपने कपडे उतार कर आ गए ...

हम चारों उस बाथरूम में नंगे खड़े थे ...
अब जो होना था वो तो होना ही था ....

जोजफ अंकल बोले ..चलो यार बाहर बिस्तर पर ही चलते हैं ...
और सब मुझे उठाकर बिस्तर पर ले आये ……

उन्होंने मुझे बिस्तर पर डाल दिया ....
मैं सोच ही रही थी की क्या करूँ ...

तीन अलग अलग तरह के लण्ड मेरे आस पास थे ...
मेरी हालत ख़राब थी कि आज क्या होगा ...

अनवर अंकल तो पूरे उत्तेजित थे ....वो अपने लण्ड को मेरी चूत पर रगड़े जा रहे थे और जोर जोर से पीट रहे थे ...

जोजफ अंकल मेरे सर की तरफ थे ...मेरे मम्मो को दबाते हुए अपने लण्ड को मेरे होठों पर लगा रहे थे ...

तभी डोर पर कोई आ गया ...
नोक नोक ....

और सब घबरा गए ...
मैं तुरंत उठकर बाथरूम में भाग गई ...

उन्होंने जैसे तैसे दरवाजा खोला होगा ...

मैंने आवाज सुनी २-३ लोग थे ....
एक तो मेहता अंकल ही थे ...बाकी उनके साथ पता नहीं कौन थे ...

फिर वो सब बाहर चले गए ...
मैं किसी तरह बाथरूम से बाहर आई ...

मेरे शरीर पर अभी भी कोई कपडा नहीं था ..साडी कुछ सूख गई थी ...
बाहर आकर पंखे की तेज हवा में पेटीकोट और ब्लाउज सुखाये करीब ३० मिनट के बाद दरवाजे पर कोई आया मैंने कपडे पहन ही लिए थे ...
फिर भी दरवाजे के पीछे छिप गई ...

वो राम अंकल थे ....
आते ही हड़बड़ा कर बोले ...

राम अंकल : ओह सॉरी बेटा वो सब लोग आ गये थे ..अच्छा हुआ तुम तैयार हो गई ..मैं बस तुमको बाहर निकलने ही आया था ...

मुझे उनकी हड़बड़ाहट पर हंसी आ गई ....

और फिर मैं यहाँ आ गई ....

रंजू भाभी : ओह इसका मतलब तेरी चुनमुनिया प्यासी ही रह गई ....
चल कोई बात नहीं ...तो तेरी पैंटी कहाँ है ....

जूली : अरे वो तो गीली ही थी ...तो ब्रा पैंटी वहीँ रह गई हैं ...
ले लुंगी बाद में ...

मैं उनकी ये सब बात सुनने के बाद चुपचाप बाहर निकल आया ....
कि कहीं मुझे जूली न देख ले ...

फिर उस शादी में ऐसे ही मजे रहे और हम वापस आ गए ....
एक अफ़सोस रहा कि शादी से पहले ऋतू की चूत नहीं मार पाया ...
हाँ देख तो ली ही थी ...उसी से संतुष्ट हो गया ...

अब आगे देखना था कि और कैसे करना है ...जीवन में अलग सा बदलाव तो आ ही गया था ...

जूली अब मेरे होने के बाद भी सेक्सी मस्ती करने लगी थी ...
मगर एक साइलेंट हमारे बीच अभी ही था ...

न तो मैं ही उससे इस विषय में खुलना चाहता था ...
और न ही वो ही कोई ऐसी बात करती थी ...

हमारे बीच चुदाई अब भी होती थी ...वो पहले से ज्यादा साथ देती थी ...और ज्यादा हॉट हो गई थी ...
मगर दूसरों के प्रति अब भी आकर्षित हो जाती थी ...

जूली मस्ती करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती थी ..

और मैं तो आपको पता ही है कि कितना सीधा सादा हूँ ...

ऐसे ही हमारा जीवन मस्त तरीके से चल रहा था ...

मैंने भी सोचा जैसे चलता है ...चलने दो ...
जब कोई बड़ी परेसानी आई तो देखेंगे क्या करना है ...

प्रथम अध्याय समाप्त ...

.................

आगे की कहानी कुछ नए तरीके और नए रोमांच के साथ प्रेषित होगी थोड़ा संयम रखना होगा ...आजकल काम कुछ ज्यादा है ....जैसे ही समय मिलेगा कहानी नए रूप में बहुत मसाले के साथ मिल जाएगी ..,
आपके प्यार के लिए धन्यवाद ...
....

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