Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
05-24-2019, 12:11 PM,
#61
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
डॉली आँख मारते हुए बोली- तो भाभी क्या मैं ब्रा और पैन्टी में ही ना चली चलूं?
मैंने भी करारा जबाव दिया- तुझे मैंने सिर्फ़ तेरी भाई से चुदवाना है.. पूरे शहर से नहीं..
हम दोनों हँसने लगीं।
मैं- देख सिनेमा हॉल में खुल कर उसे तंग करना है और तड़पाना है.. एक तरफ तेरे हुस्न और शरारत की वजह से उसका लंड अकड़ता जाए और दूसरी तरफ मेरे डर से उसकी फटती जाए बस.. वो कुछ करना चाहे.. मगर कुछ भी ना कर सके..
डॉली- ठीक है भाभी.. ऐसा ही होगा।
फिर मैंने डॉली के लिए एक ब्लैक टाइट लेगिंग सिलेक्ट की… जो कि उसके जिस्म के साथ बिल्कुल ही चिपकने वाली थी। उसके साथ जो टॉप सिलेक्ट किया.. वो एक टी-शर्ट टाइप की थी.. जो कि नीचे तक लंबी थी और उसके चूतड़ों को कवर करती थी। लेकिन सिर्फ़ हाफ जाँघों तक रहती थी। उसका गला भी थोड़ा सा डीप था.. जिसमें से उसका क्लीवेज साफ़ नज़र आता था।
मैंने उससे कहा- चल.. अब इसे पहन ले मेरे सामने..
डॉली थोड़ा शर्मा कर बोली- भाभी आपके सामने.. कैसे?
मैं- वाह भई वाह.. अपने भाई से तो नंगी होकर चुदवाती हो.. और अब भी नंगी होने को तैयार हो.. लेकिन मेरे सामने नंगी होते हुए तुमको शर्म आती है। अभी सुबह ही तो मैंने तेरी मलाई खाई है.. वो भूल गई हो किया?
डॉली भी हँसने लगी और फिर उसने अपनी पहनी हुई शर्ट उतार दी।
नीचे उसने जो ब्रा पहनी हुई थी.. वो भी उसने उतारी और फिर उसकी दोनों खुबसूरत चूचियों नंगी हो गईं। मैंने झट से आगे बढ़ कर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और उनको दबाते हुए चूमने लगी।
मैं- उफफ्फ़.. डॉली.. तेरी चूचियों का शेप कितना सेक्सी है..
डॉली- मैं तो भाभी आप और भैया से बहुत तंग हूँ.. जब भी जहाँ भी मौका मिलता है.. आप लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए मुझ बेचारी को पकड़ लेते हो.. और इसे चक्कर में मेरी प्यास बढ़ा देते हो। 
मैंने हँसते हुए डॉली को छोड़ दिया और वो अपनी दूसरी ब्रा पहनने लगी.. तो मैंने उसे मना कर दिया कि आज तुम बिना ब्रा के ही चलो।
डॉली ने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर अपनी ब्रा वापिस अल्मारी में रख दी और बिना ब्रा के ही वो टी-शर्ट पहन ली। उसकी टी-शर्ट भी बहुत टाइट थी और बिल्कुल उसके जिस्म के साथ चिपक गई हुई थी।
उसकी दोनों चूचियाँ बहुत ही सेक्सी लग रही थीं..
फिर डॉली ने अपनी टाइट्स पहनी तो वो भी उसकी जाँघों और चूत के एरिया में उसके जिस्म के साथ बिल्कुल चिपक गई।
मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा.. तो एक लम्हे की लिए मेरी अपनी नियत भी खराब होने लगी.. लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया। फिर मैंने उसकी चूचियों को सहलाया और उसके निप्पलों पर उंगली फेरीं.. तो उसके निप्पल अकड़ने लगे। कुछ ही पलों बाद उसके निप्पल बिल्कुल साफ़ उसकी शर्ट में से नज़र आ रहे थे। 
उसकी निप्पलों को अपनी उंगलियों के दरम्यान मसलते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसे किस करने लगी। इसी के साथ मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू भी कर दिया।
डॉली भी मस्ती के हाथों मजबूर होकर मेरा साथ देने लगी। 
चंद लम्हों तक एक-दूसरे को किस करने और एक-दूसरे के होंठों चूसने के बाद मैं अलग हुई और बोली- कुछ देर में तुम भी मेरे कमरे आ जाओ और मेकअप कर लेना। 
फिर मैं अपने कमरे मैं चली गई। उधर चेतन बिस्तर पर लेटा हुआ था.. तैयार होकर मैंने भी अपने लिए टाइट्स और एक थोड़ी लूज कमीज़ निकाल ली।
तभी डॉली भी कमरे में आ गई। जैसे ही चेतन की नज़र डॉली पर पड़ी.. तो उसकी आँखें चमक उठीं और मुँह एकदम से खुला रह गया।
मैं दोनों बहन-भाई को थोड़ा प्यार करने का मौका देने के लिए अपने कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई और फिर अन्दर से झाँकने लगी। 
जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ.. तो चेतन जंप लगा कर उठा और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई अपनी बहन के पीछे आ गया। उसने पीछे से ही उसे दबोच लिया और उसकी दोनों टाइट चूचियों को पकड़ कर सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।
डॉली- उफफफ्फ़.. भैया.. क्या हो जाता है आपको.. प्लीज़ छोड़ दो.. अभी भाभी आ जाएंगी.. तो पता नहीं क्या कर देंगी।
चेतन- उफफफ्फ़ ज़ालिम.. क्या हुस्न है तेरा.. अब तो तुझे छोड़ने को नहीं बल्कि चोदने को दिल करता है। तूने तो आज नीचे से ब्रेजियर भी नहीं पहनी हुई है.. क्यों मुझे कत्ल करने का प्रोग्राम बनाया हुआ है तूने..
चेतन ने डॉली की शर्ट को नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और उसके चूतड़ों को नंगा कर लिया और उसकी टाइट्स के ऊपर से उसकी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा। फिर अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चूत को सहलाने लगा।
मैंने अपने कपड़े चेंज किए और फिर थोड़ा सा शोर करके बाहर को निकली.. तो तब तक चेतन वापिस बिस्तर पर लेट चुका था.. लेकिन डॉली ने अपनी टी-शर्ट को अपनी चूतड़ों से नीचे नहीं किया था और उसकी चुस्त लैगी में उसके दोनों चूतड़ बहुत ही सेक्सी अंदाज़ में नंगे दिख रहे थे। 
मैं भी डॉली के पास ही आ गई और मेकअप करने लगी।
मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में कहा ताकि चेतन भी सुन सके- अरे डॉली.. यह तुमने कैसा ड्रेस पहन लिया है.. क्या यह पहन कर जाओगी बाहर?
डॉली अपनी आगे-पीछे देखते हुए बोली- क्यों भाभी इसमें क्या बुराई है?
मैंने चेतन को इन्वॉल्व करती हुए कहा- क्यों चेतन यह ड्रेस ठीक है क्या?
चेतन ने एक नज़र अपनी बहन की तरफ देखा और फिर बोला- हाँ ठीक तो है.. बस अब चेंज करने के चक्कर में देर ना कर.. पहले ही शो के लिए बहुत देर हो रही है। 
मैंने मुस्कुरा कर डॉली की तरफ देखा तो उसने भी मुझे एक आँख मारी और फिर हम लोगों ने अपने मेकअप को फाइनल टच दिया.. और फिर बाहर निकल आईं.. जहाँ चेतन अपनी बाइक लिए तैयार खड़ा था। 
पहले की तरह ही मैंने डॉली को चेतन के बिल्कुल पीछे.. सेंटर में बैठाया और खुद उससे पीछे बैठ गई।
उसे आगे को पुश करते हुई बोली- यार थोड़ा सा आगे होकर बैठो न.. मुझे तो थोड़ी सी जगह और दो ना..
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05-24-2019, 12:11 PM,
#62
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
चेतन को तो पहले ही पता था कि उसकी बहन ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई है और अब जब उसने अपनी चूचियों उसकी पीठ से लगाईं.. तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बहन की दोनों चूचियाँ बिल्कुल ही नंगी होकर उसकी पीठ पर लगी हुई हैं।
डॉली ने अपना एक हाथ आगे किया और उसे चेतन की जाँघों पर रख दिया और फिर हम चल पड़े। 
सड़क पर थोड़ा-थोड़ा अँधेरा हो रहा था.. कुछ ही देर में डॉली का हाथ फिसलता हो अपने भैया के लौड़े पर आ गया। उसने अपने भाई के लंड पर अपना हाथ रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसको सहलाने लगी। पीछे से वो अपने होंठों को चेतन की गर्दन पर टच कर रही थी। कभी-कभी मौका देख कर उसे चूम भी लेती थी। डॉली के चेतन की गर्दन पर चूमने की हल्की सी आवाज़ मेरे कान में भी आई। 
‘ना कर.. तेरी भाभी पीछे ही बैठी है..’
तभी मैंने भी सहारा लेने के लिए अपना हाथ आगे किया और चेतन की जांघ पर रख दिया। 
एक लम्हे के लिए तो चेतन जैसे घबरा ही गया.. लेकिन फिर खुद को सम्भाल लिया। इसी तरह से मैं और डॉली चेतन को तंग करते हुए सिनेमा पहुँच गए। 
रात का लास्ट शो था.. 10 बज चुके हुए थे और हर तरफ अँधेरा हो रहा था। शो शुरू हो चुका हुआ था.. इसलिए ज्यादा रश नज़र नहीं आ रहा था। चेतन ने गैलरी की तीन टिकट ली और हम ऊपर गैलरी में आ गए। वहाँ गैलरी में भी बहुत कम लोग ही बैठे हुए थे.. बल्कि सिर्फ़ दो कपल्स थे.. वो भी सबसे अलग-अलग होकर दूर-दूर बैठे हुए थे। हमने भी एक कॉर्नर में अपनी जगह बना ली। हॉल में बहुत ही ज्यादा अँधेरा था। चेतन को दरम्यान में बैठा कर मैं और डॉली उसके दोनों तरफ बैठ गईं। 
चेतन थोड़ा घबराया हुआ था.. कुछ ही देर गुज़री कि मैंने अपना सिर चेतन के कन्धों पर रख दिया और अपना एक हाथ चेतन की बाज़ू पर रख कर आहिस्ता आहिस्ता उसकी बाज़ू को सहलाने लगी। चेतन भी मेरी तरफ तवज्जो दे रहा था, उसने अपना एक बाज़ू मेरी गर्दन के पीछे से डाला और मेरी दूसरी तरफ के कन्धों पर रख दिया और धीरे-धीरे मेरी बाज़ू को सहलाने लगा। 
मैंने अब अपना हाथ चेतन की जांघ पर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी जाँघों को सहलाने लगी। मेरा हाथ उसके लण्ड की तरफ बढ़ रहा था। दूसरी तरफ से डॉली ने अपना सिर अपने भाई के कंधे पर रखा हुआ था।
जैसे ही मेरा हाथ चेतन के लंड की तरफ बढ़ा.. तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बहुत ही आहिस्ता से मेरे कान में बोला- क्या कर रही हो.. डॉली बिल्कुल साथ में बैठी है.. उसने देख लिया.. तो बहुत बुरा लगेगा। 
लेकिन मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके लण्ड के उभार पर रखा और उसे मुठ्ठी में लेकर हौले-हौले दबाते हुए बोली- बहुत अँधेरा है.. वो नहीं देख पाएगी।
यह कहते हुए मैंने उसके लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया, मेरे हाथ के छूने से उसका लण्ड उसकी पैन्ट के अन्दर अकड़ने लगा।
मैंने उसके चेहरे को अपनी तरफ मोड़ा और फिर अपने होंठ चेतन के होंठों पर रख दिए और आहिस्ता आहिस्ता उसे चूमने लगी। चेतन ने अपनी होंठ पीछे हटाने चाहे.. तो मैंने फ़ौरन ही उसके दोनों होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और अपनी ज़ुबान भी उसके मुँह के अन्दर डाल दी।
चेतन भी मस्त होता जा रहा था और उसकी मस्ती का अंदाज़ा मुझे उसकी पैन्ट के अन्दर उसके अकड़ते हुए लंड से हो रहा था।
मैंने अपना हाथ हटाया और चेतन के सीने पर रख कर उसे सहलाने लगी। उतनी देर में डॉली ने अपना हाथ चेतन के लंड पर रखा और उसे दबाने लगी। 
दो दो खूबसूरत और जवान लड़कियों के साथ मस्ती करते हुए चेतन की तो हालत ही पतली हो रही थी।
चेतन ने अपने हाथ से डॉली का हाथ पकड़ कर अपने लंड से हटाना चाहा.. तो डॉली उसके कान में बोली- भैया क्या बात है.. अपनी बीवी को तो मज़ा दे रहे हो.. लेकिन अपनी बहन को महरूम रख रहे हो? 
जैसे ही मैं अपना हाथ नीचे दोबारा उसके लण्ड पर लेकर गई.. तो फ़ौरन ही डॉली ने अपना हाथ हटा लिया।
मैंने दोबारा से चेतन के लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसे दबाने के बाद उसकी पैन्ट की ज़िप खोलने लगी। 
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05-24-2019, 12:12 PM,
#63
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
चेतन ने कोई मज़हमत नहीं की.. क्योंकि उसे पता था कि मैं उसकी बात नहीं मानूँगी।
मैंने उसके लण्ड को उसकी पैन्ट की ज़िप के रास्ते बाहर निकाला और अब सिनेमा हाल में अपनी बीवी और बहन के दरम्यान में बैठे हुए चेतन का लंड बिल्कुल नंगा हो चुका था। 
चेतन के नंगे लंड को मैंने अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी।
धीरे-धीरे उसका लंड और भी अकड़ता जा रहा था.. दूसरी तरफ से डॉली ने भी अपने भाई का एक हाथ पकड़ा और उसे अपने मम्मों पर रखवा लिया और चेतन भी आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की बिल्कुल स्टिफ और सीधी अकड़ी हुए चूचियों को दबाने लगा। डॉली भी आँखें बंद किए हुए अपने भाई से अपनी चूचियों को दबवाने का मज़ा लिए जा रही थी। 
चेतन का दूसरा हाथ मैंने खींच कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। चेतन ने फ़ौरन ही मेरी चूत को अपनी मुठ्ठी में ले लिया और उसे पहले तो दबाने लगा और फिर आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगा। 
कुछ ही देर में खुद ही से चेतन ने अपना हाथ मेरी पजामी के अन्दर डाला और फिर मेरी नंगी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। 
मेरा भी मजे से बुरा हाल होने लगा हुआ था और मेरी आँखें बंद हो रही थीं। मैंने अँधेरे में ही दूसरी तरफ देखा.. तो उधर भी चेतन ने अपना हाथ अपनी बहन की टाइट्स के अन्दर डाला हुआ था और उसकी चूत को सहला रहा था। 
हाउ मच लकी चेतन वाज़.. कि एक ही वक़्त में अपनी बीवी और अपनी बहन की चूत को सहला रहा था और उनमें अपनी उंगलियाँ डाल कर दोनों को एक ही वक़्त में एक साथ मजे दे रहा था।
!
चेतन की उंगलियाँ मेरी चूत के दाने को सहला रही थीं और मेरी आँखें एक बार फिर से बंद हो चुकी हुई थीं। मैं अपनी मंज़िल के क़रीब पहुँचती जा रही थी और किसी भी वक़्त मेरी चूत पानी छोड़ने वाली थी। 
मेरी भी कोशिश थी कि जल्दी से जल्दी मेरी चूत का पानी निकल जाए और मेरा जिस्म रिलेक्स हो जाए। लेकिन अचानक ही कुछ यूँ हुआ कि फिल्म का इंटरवल हो गया और हाल की तमाम लाइट्स जलना शुरू हो गईं। 
हम तीनों जल्दी से सीधे होकर बैठ गए। चेतन ने मेरी और डॉली की चूत पर से अपना हाथ हटा लिया और फिर जल्दी से अपने लंड को अपनी पैन्ट के अन्दर कर लिया। 
हम तीनों ही घबराए हुए थे और फिर कुछ ही देर में मैं मुस्कुरा कर चेतन की तरफ देखने लगी और वो भी मुस्कुरा दिया। चेतन की नज़र बचा कर मैंने डॉली को आँख मार दी और मुस्कुरा भी दी। 
चेतन थोड़ा शर्मिंदा शर्मिंदा लग रहा था।
कुछ देर बार मैं उठी और टॉयलेट में जाने का कह कर बाहर आ गई.. लेकिन उन दोनों बहन-भाई में से कोई भी मेरे साथ बाहर नहीं आया। जैसे ही मैं टॉयलेट से फारिग होकर बाहर आई और हॉल की तरफ जाने लगी.. तो अचानक से ही किसी ने मुझे पीछे से आवाज़ दी ‘भाभीजान.. भाभी…’ 
मैंने चौंक कर पीछे मुड़ कर देखा तो हमारे मोहल्ले का लड़का मोहन.. पीछे से मेरी तरफ आ रहा था।
उसे अचानक से देख कर मैं थोड़ा परेशान सी हो गई।
मोहन हमारा बिल्कुल लगे हुए मकान में रहता था.. वो हमारा पड़ोसी था। अभी तो वो पूरी तरह से जवान भी नहीं हुआ था और किसी लड़की की तरह ही कम उमर का लगता था। काफ़ी हद तक शर्मीला और सब लोगों से अलग-थलग रहने वाला लड़का था। मोहल्ले में भी कभी उसको किसी के पास खड़े हुए नहीं देखा था और ना कभी उसकी किसी लड़की तो क्या.. किसी दूसरी लड़की के साथ दोस्ती के बारे में भी नहीं सुना था। वो मोहल्ले का एक बहुत ही प्यारा खुबसूरत.. भोला-भाला.. शर्मीला और शरीफ लड़का था। 
मोहन मेरे पास आया और बोला- भाभी आप यहाँ क्या कर रही हो? 
मैंने मुस्कुरा कर उसे देखा और बोली- बस वो हम सब भी फिल्म देखने आए हुए थे.. लेकिन तुम यहाँ सिनेमा में इस वक़्त क्या कर रहे हो.. क्या अपने मम्मी-पापा को बता कर आए हो?
मैंने उसे तंग करने की लिए कहा था.. क्यूँ कि उसको घर में और मोहल्ले में अभी तक बिल्कुल एक बच्चे की तरह से ही ट्रीट किया जाता था और था भी वो कुछ ऐसा ही। 
हमारे साथ वाले घर में वो अपनी मम्मी-पापा.. भाई और भाभी के साथ रहता था। उसके भाई की शादी थोड़ा अरसा पहली ही हुई थी। 
मोहन मुस्कुरा कर बोला- जी भाभी जी.. मैं घर पर सबको बता कर ही आया हूँ कि मैं फिल्म देखने जा रहा हूँ। आइए.. मैं आपको कोल्ड ड्रिंक पिलाता हूँ।
मेरे इन्कार के बावजूद वो भाग कर पास ही की कैन्टीन पर गया और दो कोल्ड ड्रिंक ले आया।
फिर बोला- आइए भाभी.. अन्दर चलते हैं.. इंटरवल खत्म हो चुका है और फिल्म भी शुरू हो चुकी है।
मैंने मोहन से पूछा- तुम्हारे दोस्त कहाँ बैठे हैं? 
वो मुस्कुरा कर बोला- भाभी मेरे तो कोई भी दोस्त नहीं हैं। मैं तो अकेला ही फिल्म देखने आया हूँ.. चलो अब मैं आप लोगों के साथ ही बैठ कर देख लूँगा। 
अब मैं और मोहन कोल्ड ड्रिंक्स सिप करते हुए अन्दर की तरफ बढ़े.. तो अचानक से मुझे ख्याल आया कि मैं मोहन को चेतन और डॉली के पास कैसे ले जा सकती हूँ.. वो पता नहीं अभी किस हालत में बैठे हों।
तो इस तरह से मोहन को सब कुछ पता चल जाएगा और फिर उन दोनों बहन-भाई को भी एंजाय करने का वक़्त नहीं मिलेगा। 
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05-24-2019, 12:12 PM,
#64
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
हम इतनी देर में हॉल में एंटर हुए थे तो अन्दर फिर से बहुत ही अँधेरा हो गया था।
मोहन बोला- भाभी चेतन भाई कहाँ पर बैठे हैं.. उधर ही चलते हैं।
मैंने उससे कहा- नहीं.. बहुत अँधेरा हो रहा है.. हम दोनों एक साइड पर इधर ही बैठ जाते हैं। 
वो बोला- ठीक है भाभी.. फिल्म के बाद उनसे मिल लेंगे और फिर एक साथ ही घर चलेंगे। 
वहाँ गैलरी तो पूरी की पूरी खाली पड़ी हुई थी.. मैंने मोहन को लिया और एक तरफ होकर बैठ गई। मोहन भी मेरे साथ बगल वाली कुरसी पर बैठ गया, हम दोनों फिल्म देखते हुए कोल्ड ड्रिंक पीने लगे। 
मैंने जो कमीज़ पहनी हुई थी.. वो स्लीबलैस थी और मेरे कन्धों से नीचे से पूरी बाज़ू नंगी थी। 
हॉल में स्क्रीन पर चल रही फिल्म की रोशनी में मेरे गोरे-गोरे मुलायम बाज़ू बहुत चमक रहे थे। दूसरी तरफ मोहन ने एक हाफ स्लीव टी-शर्ट पहन रखी थी और साथ में जीन्स पहनी हुई थी। 
कुछ ही देर में मोहन का नंगा बाज़ू मुझे अपनी नंगी मुलायम चिकनी बाज़ू से टच होता हुआ महसूस हुआ। मैंने फ़ौरन से कोई भी रिस्पॉन्स नहीं दिया.. क्योंकि मुझे मोहन का नरम सा.. पतला सा.. बाज़ू का टच बहुत अच्छा फील हो रहा था।
अपनी बाज़ू पर उसके जिस्म का टच मुझे सीधे-सीधे मेरे दिमाग पर असर करता हुआ महसूस हो रहा था। मैंने भी अपनी बाज़ू को हटाने की बजाए उसकी बाज़ू की गर्मी को महसूस करना शुरू कर दिया। 
मोहन को भी शायद अहसास हो गया था कि उसका बाज़ू मेरी बाज़ू से छू रहा है लेकिन मैं हटा नहीं रही हूँ.. तो वो भी चुप करके बैठा रहा और मेरे जिस्म की गर्मी को महसूस करता रहा। 
कुछ ही देर के बाद मोहन अपने होंठों को मेरे गालों की तरफ लाया तो मैं तो जैसे चौंक ही पड़ी और थोड़ा पीछे को हटी लेकिन उसने आगे होकर कहा- भाभी मेरी बात सुनिए..
वो कुछ ऊँचा बोल रहा था.. लेकिन फिल्म की तेज साउंड में उसकी आवाज़ बहुत ही कम आ रही थी। 
मैंने अपना कान उसकी तरफ किया.. तो वो बोला- भाभी चेतन भाई परेशान हो रही होंगे कि आप कहाँ रह गई हो.. हम लोग उनको तो बता देते..
मैं- हाँ यह ठीक कहा तुमने.. मैं उसे कॉल कर देती हूँ। 
तभी मुझे अहसास हुआ कि मैं अपना सेल फोन तो अपनी पर्स समेत वहीं डॉली को दे आई थी।
मैंने मोहन की तरफ मुँह किया और अपने होंठ उसके कानों के क़रीब ले जाकर बताया कि मेरे पास फोन नहीं है। 
मोहन अपने होंठ मेरे कानों के पास लाया और इस बार अपने होंठों को मेरे कानों से छूते हुए बात करने लगा।
‘भाभी.. आप मेरे सेल से कॉल कर लें..’
यह बात मुकम्मल करके जैसे ही वो पीछे हटा.. तो मुझे अहसास हुआ कि जैसे उसने मेरी कान को हौले से चूम लिया हो। लेकिन मैं पक्का नहीं थी.. इसलिए चुप रही। मोहन ने अपना सेल फोन मेरी तरफ बढ़ा दिया.. मैंने उससे सेल फोन लिया और चेतन को कॉल करके पूरे हालाते हाजरा बता दिये।
वो भी शायद खुश ही था कि उसे डॉली के साथ एंजाय करने का टाइम मिल गया था। 
जिस दौरान मैं चेतन से फोन पर बात कर रही थी.. तो मोहन का बाज़ू तब भी मेरी नंगी चिकनी बाज़ू के साथ छू रहा था। 
अब मुझे थोड़ा-थोड़ा अहसास हो रहा था कि यह बच्चा अब इतना भी बच्चा नहीं रहा है.. और उसे औरत के जिस्म से मज़ा लेने का शौक़ शुरू हो गया हुआ है।
मैं धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी.. बिना उसे रोके या बिना उससे दूर हटे हुए।
कॉल करने के बाद भी मैंने उसका सेल फोन उसे नहीं दिया था.. बल्कि अपने हाथ में ही लिया हुआ था। फिर मैं उसकी सेल की ब्राउज़िंग करने लगी। 
मोहन ने मुझे रोकना चाहा और अपने होंठ मेरे कानों से छू कर और अपना हाथ मोबाइल की तरफ बढ़ा कर बोला- भाभी मेरा सेल दे दें.. अन्दर ना देखें.. प्लीज़..
मैंने सेल थोड़ा पीछे किया और बोली- क्यों.. इसमें तुम्हारी गर्ल फ्रेंड्स के नंबर्स हैं क्या?
वो चुप कर गया और फिर बोला- नहीं भाभी.. मेरी तो कोई भी गर्ल फ्रेंड नहीं है। 
मैंने उसकी सेल फोन की गैलरी खोली.. तो उसमें पड़ी हुई इमेजिज को देखने लगी। बहुत साड़ी मुख्तलिफ फोटोज थीं कुछ उसकी.. कुछ घर वालों की थीं। फिर जैसे ही मैंने वीडियो गैलरी खोली.. तो उसने दोबारा फोन लेना चाहा.. लेकिन मैंने हाथ पीछे को कर लिया और उसका हाथ मेरी सीने के आगे से होकर मोबाइल की तरफ बढ़ा.. तो उसकी बाज़ू से मेरी चूचियों दब गईं।
‘ऊवप्प्स.. अरे अरे.. सीधे होकर बैठो.. क्या कर रहे हो.. देखने तो दो तुमने कौन-कौन सी मूवीज इसमें रखी हुई हैं..’
मोहन- नहीं नहीं.. भाभी कुछ नहीं है इसमें.. प्लीज़ मुझे मेरा सेल फोन दे दें। 
यह कहते हुए उसने मेरी एक नंगी बाज़ू पर पहली बार अपना हाथ रखा और फिर मेरी बाज़ू को पकड़ कर दूसरे हाथ से अपने मोबाइल को पकड़ लिया। इस दौरान एक बार फिर से उसकी बाज़ू ने मेरी खूबसूरत तनी हुए चूचियों को मसल सा दिया.. लेकिन इस बार मैंने उसका सेल फोन उसे दे दिया।
मोहन ने अपना सेल फोन अपनी पॉकेट में डाल लिया। मैं भी सीधी होकर फिल्म देखने लगी.. जैसे मैं उसे थोड़ी नाराज़गी दिखा रही हूँ।
मोहन ने दोबारा से अपना हाथ मेरी नंगी बाज़ू पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता मेरी नंगी बाज़ू को सहलाते हुए बोला- भाभी प्लीज़.. आप नाराज़ हो रही हैं क्या? 
यह कहते हुए उसके हाथ की उंगलियों ने मेरी बाज़ू की गिर्द चक्कर पूरा कर लिया। अब उसके हाथ की उंगलियों की बैक साइड मेरी चूचियों को छू रही थीं और जैसे-जैसे वो अपने हाथ को ऊपर-नीचे को मूव करता.. तो उसके हाथ की उंगलियों की बैक मेरी चूचियों को सहलाते जातीं। मुझे भी इसमें मज़ा आ रहा था.. लेकिन मैं अभी भी खामोश बैठी हुई थी। 
वो थोड़ा सा मेरी तरफ दोबारा झुका और अपने होंठों को मेरे नंगे कन्धों पर रख कर बोला- प्लीज़ भाभी नाराज़ ना हों.. मैं आपको सेल फोन दिखा दूँगा.. अभी तो फिल्म खत्म होने वाली है.. लेकिन कल मैं आपके घर आकर आपको दिखाऊँगा.. फिर इसमें से जो दिल चाहे.. देख लीजिएगा। 
मैंने अपना चेहरा मोड़ कर उसकी तरफ देखा.. तो उसके होंठ मेरे होंठों के बहुत क़रीब थे और उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसकी गरम साँसों की वजह से मेरी चूत में कुछ होने लगा था और मुझे थोड़ा गीलापन महसूस होने लगा था। उसकी पतले गुलाबी होंठों को अपने इतना क़रीब देख कर मेरे होंठों पर भी हल्की सी मुस्कान फैल गई। 
मोहन ने मुझे मुस्कुराते देखा तो एकदम से जैसे उसे पता नहीं.. कितनी खुशी हुई कि उसने आगे बढ़ कर अचानक से मेरे गालों को किस कर लिया और बोला- यह हुई ना बात भाभी.. यू आर माय सो स्वीट भाभी..
यह कहते हुए उसने अपना बाज़ू मेरी दूसरे कंधे की तरफ डाला और मुझे अपनी सीने की तरफ खींच लिया। मैं उस लड़के की हरकत देख-देख कर हैरान हो रही थी।
फिर मैं बोली- अरे.. यह क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे.. और तुमने मुझे यह किस क्यों किया?
मोहन थोड़ा पीछे हटा.. लेकिन मेरे कन्धों पर से अपना हाथ नहीं हटाया और बोला- आप भी तो मेरी भाभी की तरह ही हो ना.. तो जब मैं उनसे खुश होता हूँ.. तो उनको भी ऐसे ही किस और हग करता हूँ।
मैं उस पर मुस्कुरा दी।
बाक़ी फिल्म के दौरान भी मोहन मेरा एक हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर बैठा रहा और उसे ना महसूस अंदाज़ में आहिस्ता आहिस्ता सहलाता रहा। 
मुझे भी उसकी इस तरह से सहलाने से मज़ा आ रहा था। मुझे हैरत हो रही थी कि इतना मासूम और भोला भाला नज़र आने वाला लड़का किस क़दर तेज है और उसको जवान और खूबसूरत लड़कियों और औरतों को छूने का कितना शौक़ है। 
कुछ ही देर में फिल्म खत्म हो गई और फिर हॉल की बत्तियाँ जल पड़ीं.. जो चंद लोग हॉल में थे.. वो एक-एक करके बाहर निकलने लगे। सामने ही बैठे हुए चेतन और डॉली पर मेरी नज़र पड़ी तो वो भी खुद को जैसे ठीक कर रहे थे। फिर चेतन ने उठ कर पीछे मुझे तलाश करने की कोशिश की.. तो मैंने फ़ौरन ही हाथ हिलाकर उसे अपनी पोजीशन का अहसास दिलाया और मोहन ने भी हाथ हिला दिया। 
चेतन और डॉली उठे और हमारी तरफ बढ़े। जब वो क़रीब आए तो मैंने मुस्कुरा कर डॉली की तरफ देखा तो वो शरम से लाल हो गई और उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कुराहट फैल गई। चेतन और मोहन दोनों मिलने के बाद आगे-आगे चलने लगे और मैं और डॉली उनकी पीछे हो लिए थे। 
मैंने डॉली से पूछा- तुमने तो आज खूब मज़ा किया होगा अपने भाई के साथ?
डॉली- नहीं भाभी.. हमने तो कुछ भी नहीं किया..
मैं- अच्छा.. कुछ नहीं किया? तो फिर यह अपने ऊपर वाले होंठ के ऊपर से अपने भाई का रस तो साफ़ कर लो.. सबको दिख रहा है कि तुम क्या-क्या करके आ रही हो..
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05-24-2019, 12:12 PM,
#65
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
जैसे ही मैंने यह कहा.. तो फ़ौरन ही डॉली का हाथ अपने होंठों की तरफ बढ़ा और वो अपने होंठों को साफ करने लगी। 
उसकी इस हरकत पर मैं हँसने लगी और बोली- अरी पगली.. कुछ नहीं लगा हुआ हुआ.. सब तो तू चाट गई है.. मैं तो सिर्फ़ यह देखने के लिए ऐसा बोली थी कि मुझे पता चल सके कि वहाँ पर क्या-क्या हुआ है..
डॉली ने शरमाते हुए कहा- भाभी आप भी ना बस..
फिर हम दोनों भी हँसते हुए चलते हुए उन दोनों की पीछे स्टैंड पर आ गए।
वे दोनों अपनी बाइक्स ले आए.. मैं और डॉली दोनों ही चेतन की बाइक पर बैठने लगीं.. तो मोहन बोला- भाभी आप मेरे साथ आ जाओ.. क्या जरूरी है कि आप सबको एक बाइक पर ही बैठना है? मैं भी तो घर ही जा रहा हूँ ना..
चेतन ने मेरी तरफ देखा और बोला- हाँ ठीक है.. तुम मोहन के साथ बैठ जाओ.. मैं डॉली को बैठा लेता हूँ। 
मैंने एक नज़र मुस्कुरा कर डॉली की तरफ देखा और फिर मोहन की तरफ बढ़ी मुझे अपनी तरफ आता हुआ देख कर उसकी भी आँखें चमक उठी थीं।
मैं आगे बढ़ी और फिर मोहन के कंधे पर हाथ रख कर उसकी बाइक पर उसके पीछे बैठ गई और हम सब घर की तरफ चल पड़े।
मोहन के पीछे मैं जानबूझ कर उससे चिपक कर बैठी थी.. मैंने अपनी चूचियों को भी मोहन की बैक के साथ लगा दिया था और जैसे ही मोटर बाइक थोड़ा सा उछलती.. तो मैं अपनी चूचियों को उसकी पीठ के साथ रगड़ देती। इस तरह मुझे इस खूबसूरत और मासूम लड़के को टीज़ करने में बहुत मज़ा आ रहा था। 
घर पहुँच कर मोहन ने अपने घर का दरवाज़ा नॉक किया.. तो उसके पापा ने दरवाजा खोला.. तो हमें अपनी बेटे के साथ देख कर खुश हुए और बोले- चलो अच्छा हुआ कि यह अकेला नहीं था।
फिर मैंने उनको सलाम बोला और अपने घर के अन्दर आ गए।
घर में आकर डॉली अपने कमरे में कपड़े चेंज करने के लिए चली गई और मैं और चेतन अपने बेडरूम में आ गए। अपने कपड़े चेंज करते हुए चेतन मुझे मज़ाक़ करते हुए बोला।
चेतन- उस लड़के के साथ बहुत चिपक-चिपक कर बैठ रही थी।
मैं- नहीं तो.. ऐसी तो कोई बात नहीं है.. तुमको तो पता ही है ना.. कि बाइक पर ऐसे ही बैठा जाता है।
चेतन हँसते हुए- हाहहहहा.. बस करो.. अब मुझे सब कुछ दिख रहा था कि कैसे तुम अपनी यह खूबसूरत चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी।
मैं- अच्छा जी.. मेरा सब कुछ पता है तुमको.. लेकिन अपना नहीं पता.. जो अपनी ही सग़ी बहन को पटा रहे हो..
चेतन एकदम से घबरा गया और बोला- कक्ककया..क्या मतलब है तुम्हारा?
मैं- हाहहहाहा.. देखा ना.. चोरी पकड़ी गई तुम्हारे. मैं सब देख रही हूँ कि कुछ दिनों से कैसे तुम्हारा अपनी ही सग़ी छोटी बहन पर दिल आ रहा है और कैसे तुम उसके लिए बेचैन हो रहे हो। अगर कोई ऐसी बात है ना.. तो मुझे बता दो.. मैं तुम्हारी हेल्प कर दूँगी.. मेरी जान.. मैं आख़िर तुम्हारी दोस्त भी तो हूँ ना..
चेतन घबरा कर इधर-उधर देख रहा था.. मैं और आगे बढ़ी और उसके क़रीब जाकर उसके होंठों को चूम कर बोली- डोंट वरी डियर.. होता है.. ऐसा भी होता है.. वैसे तुम्हारी बहन है बहुत सेक्सी और खूबसूरत.. मैं अगर लड़का होती ना.. तो कब से उसे चोद चुकी होती।
मेरे होंठ अभी भी उसके होंठों को चूम रहे थे और मेरा एक हाथ नीचे जाकर उसके लण्ड को सहला रहा था.. जो कि उसकी पैन्ट में अकड़ रहा था। 
मैंने उसे किस करते हुए उसकी पैन्ट खोल कर नीचे गिरा दी और उसके लण्ड को उसकी अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया।
चेतन का लंड अकड़ा हुआ था और अंडरवियर में कड़क हो रहा था।
मैं उसके लण्ड को सहलाते हुए आहिस्ता आहिस्ता सरगोशियाँ करने लगी- चेतन.. मेरी जान.. डॉली बहुत हॉट लड़की है.. उफ्फ़.. उसकी जवान और चिकनी चमड़ी.. किस क़दर मुलायम और मदहोश कर देने वाली जिल्द पाई है.. इस्स्स.. उसके रसीले होंठ.. उफफ्फ़.. कितने सेक्सी और कितनी रस से भरे हुए हैं.. जैसे सुर्ख गुलाब हों.. मेरा तो दिल करता है.. एक ही बार में उसके होंठों का रस पी लूँ.. आह्ह..
यह कहते हुए मैं चेतन के होंठों को चूस रही थी।
चेतन मेरी कमर में अपनी बाज़ू डाल कर मुझे अपने साथ दबाते हुए बोला- क्या कह रही हो मेरी जान.. उम्माह.. ऐसा मत बोलो.. वो मेरी बहन है..
लेकिन उसका लंड उसके अल्फ़ाजों का साथ नहीं दे रहा था और अकड़ता ही जा रहा था.. जिसे मैंने अब उसकी अंडरवियर से बाहर निकाल लिया था और अपनी मुठ्ठी में लेकर सहला रही थी।
मैं- उफ्फ्फ.. चेतन अगर तुम एक बार अपना यह लंड उसकी कुँवारी चूत में डाल लो ना.. तो ज़िंदगी भर उसके गुलाम बन जाओगे.. काश.. मेरे पास लंड होता.. तो सबसे पहले मैं तुम्हारी बहन की कुँवारी चूत को चोदती..
मैं अपनी ज़ुबान चेतन के मुँह में डालते हुए बोली- बोलो भरना चाहते हो ना अपनी बहन को.. अपनी बाँहों में.. चूमना चाहते हो ना उसके खूबसूरत गालों को… चूसना चाहते हो ना उसके रसीले होंठों को… चोदना चाहोगे ना.. उसकी कुँवारी चूत को.. अपनी इस मोटे लंड से..
चेतन ने जोर से मुझे अपनी सीने से चिपका लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से मसलता हुआ बोला- बस करो.. डार्लिंग.. बस करो..ऊऊऊओहह.. मेरी जान.. कहीं ऐसा ना हो कि मैं अभी उसे चोदने चला जाऊँ.. आह्ह..
इतने में दरवाजे पर नॉक हुई.. तो हम दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए।
डॉली अन्दर आई तो बोली- हैलो गाइस.. कोई मिल्क शेक लेना चाहेगा कि नहीं.. मैं बनाने जा रही हूँ..
मैंने कहा- हाँ.. बना लो सबके लिए लेकिन तुम्हारे भैया तो शायद आज की रात ‘दूध’ ही पीना पसंद करेंगे..
मेरी बात सुन कर चेतन घबरा गया और बोला- नहीं नहीं.. मेरे लिए भी मिल्क शेक ही बना लाओ।
डॉली ने मेरी बात समझ ली थी.. वो हँसती हुई वहाँ से चली गई और फिर मैं भी कपड़े चेंज करने लगी।
मैं जानती थी कि चेतन परेशान है कि वो अब मुझे क्या बताए कि वो तो अपनी बहन को पहली ही चोद चुका हुआ है। लेकिन मैं भी अब तीनों के दरम्यान का यह परदा खत्म कर देना चाहती थी।
चेतन को कमरे में छोड़ कर मैं बाहर रसोई में आई.. तो डॉली मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।
मैंने उसे पीछे से अपनी बाँहों में भरा और बोली- क्यों फिर खूब मजे किए हैं ना.. अपने भैया के साथ सिनेमा में?
डॉली मुझे जवाब देती हुई बोली- भाभी आप भी तो उस लड़के के साथ खूब मजे करके आई हो ना?
मैं- अरे नहीं यार.. ऐसी तो कोई बात नहीं है..
डॉली- भाभी मैंने सब देखा था कि कैसे आप उसकी बैक पर अपनी चूचियों को रगड़ रही थीं।
मैं अब थोड़ी डिफेन्सिव होने लगी- नहीं यार.. वो तो बस बाइक पर बैठने की वजह से ऐसा हो रहा था..
डॉली- लेकिन भाभी इसमें हर्ज तो कोई नहीं है.. वैसे वो है भी खुबसूरत और चिकना लड़का.. मैं तो कहती हूँ कि पटा लो भाभी उसको.. अपनी हुस्न के जादू से..
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05-24-2019, 12:12 PM,
#66
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
मैं डॉली के बाज़ू पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुई बोली- इतना ही अच्छा लग रहा है.. तो तू खुद पटा ले उसको और कर ले उसके लौड़े के साथ मजे..
डॉली- ना बाबा ना.. अभी तो मेरे लिए भैया ही काफ़ी हैं.. आप कर लो उसे क़ाबू में..
मैं शरम से सुर्ख होती हुई बोली- अच्छा चल छोड़ इन बातों को.. और चल मिल्क शेक लेकर चलें.. अन्दर तेरा भैया तेरा इन्तजार कर रहा होगा।
मेरी बात सुन कर डॉली हँसने लगी और फिर हम दोनों रसोई से बेडरूम में आ गए और सबने मिल कर बैठ कर मिल्क शेक पिया। जितनी देर तक हम लोग बैठे.. उतनी देर भी चेतन की नजरें अपनी बहन के जिस्म का ही जायज़ा लेती रहीं।
लेकिन जैसे ही मैं उसे अपने बहन को देखता हुआ पकड़ती.. तो वो शरम से थोड़ा झेंप जाता.. लेकिन मैं उसे शर्मिंदा करने की बजाय मुस्कुरा देती।
मिल्क शेक पीकर मैं और डॉली बाहर रसोई में आ गए और पीछे ही चेतन भी आ गया और टीवी ऑन करके देखने लगा।
रसोई से फारिग होकर मैंने डॉली को पहनने को एक नाईटी दी और कहा- तुम आज यह नाईटी पहन कर हमसे पहले ही जाकर सो जाओ..
वो एक ढीली सी सिल्की शॉर्ट नाईटी थी.. जो कि उसके घुटनों तक आती थी और उससे नीचे उसकी दोनों खूबसूरत टाँगें बिल्कुल नंगी हो जाती थीं। इस नाईटी का गला भी काफ़ी खुला और गहरा था.. जिससे उसका क्लीवेज और चूचियों का बहुत सा दूधिया हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा था। नाईटी थी भी स्लीबलैस जिससे उसकी दोनों खुबसूरत बाज़ू बिल्कुल नंगे दिख रहे थे।
मैं चेतन के पास आकर बिल्कुल उससे चिपक कर बैठ कर टीवी देखने लगी.. थोड़ी देर में डॉली अपने कमरे से निकली तो जैसे ही उसकी सेक्सी ड्रेस पर चेतन की नज़र पड़ी.. तो वो चौंक उठा और उसकी आँखें भी चमक उठीं।
डॉली ने हमारी सामने खड़ी होकर एक जोरदार अंगड़ाई ली और बोली- भाभी मुझे तो नींद आ रही है.. मैं जा रही हूँ सोने के लिए.. आप लोगों ने जब भी आना हो आ जाना..
मैं- हाँ.. ठीक है तुम जाओ.. हम भी थोड़ी देर में आ रहे हैं।
डॉली ने एक मुस्कुराती हुई नज़र अपने भाई पर डाली और फिर अपने चूतड़ों को ठुमकाते हुए अन्दर चली गई।
मैं चेतन के साथ चिपक कर बोली- देखा अपनी बहन को.. मेरी नाईटी में कितनी सेक्सी लग रही थी.. इसे अगर कोई भी ऐसी देख ले ना.. तो कभी भी इसे चोदे बिना ना छोड़े..
चेतन- लेकिन तुमने उसे अपने नाईटी क्यों दी है?
मैं- क्यों उस पर अच्छी नहीं लग रही क्या?
चेतन- अच्छी तो लग रही है.. लेकिन..
मैं- अरे इसलिए तो उसे ऐसी ड्रेस पहनाती हूँ.. ताकि तुम देख सको कि तुम्हारी अपनी सग़ी छोटी बहन किस क़दर खूबसूरत और हसीन है और उसका जिस्म कितना सेक्सी है। तुमने चूचियाँ देखी था ना डॉली की.. उस नाईटी में से झाँकते हुए कितनी खूबसूरत लग रही थीं।
चेतन- प्लीज़ अनीता.. कैसी बातें कर रही हो.. वो बहन है मेरे.
मैं- अरे यार क्या हुआ.. बहन है तो.. तुम मेरा साथ दो ना.. तो मैं उसे तुम्हारे नीचे सुला दूँ..
चेतन चुप कर बैठ गया।
कुछ 15 मिनट के बाद हम दोनों भी उठ कर बेडरूम में आ गए.. तो डॉली आँखें बंद करके लेटी हुई सो रही थी.. उसने करवट ली हुई थी और अपनी एक टाँग आगे को करके मोड़ी हुई थी। जिसकी वजह से उसकी टांग जाँघों तक नंगी हो रही थी। उसके खूबसूरत चूतड़ बाहर को निकले हुए थे।
जैसे ही हम दोनों की नज़र डॉली पर पड़ी.. तो हमारे क़दम वहीं पर ही रुक गए।
हमारी नजरें डॉली की नंगी टाँगों और उसके सेक्सी पोज़ पर थीं।
मैंने मुस्कुरा कर चेतन की तरफ देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर आगे बिस्तर की तरफ बढ़ी। मैंने उसे डॉली की एक साइड पर लेटने को कहा और खुद उसकी दूसरी तरफ बिस्तर की बैक से तकिया लगा कर बैठ गई।
अब मैंने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ डॉली की नंगी जांघ पर रखा और उसे सहलाने लगी। मेरा हाथ डॉली की चिकनी जांघ पर फिसलता जा रहा था।
मैं- लो डॉली को देखो छू कर.. कितनी चिकनी जिल्द है तुम्हारी बहन की..
यह कह कर मैंने चेतन का हाथ पकड़ा और उसे डॉली की जांघ पर रख दिया। चेतन ने अपना हाथ हटाना चाहा.. लेकिन मैंने उसके हाथ को आहिस्ता आहिस्ता डॉली की जाँघों पर सहलवाना शुरू कर दिया। अपनी आँखों के सामने एक भाई को अपनी ही सग़ी बहन की नंगी जांघ पर इस तरह से हाथ फेरते हुए देख कर मेरी अपनी चूत भी गीली होने लगी।
कुछ ही देर में डॉली ने करवट ली और बिस्तर पर सीधी होकर लेट गई। जैसे ही डॉली हिली तो चेतन ने अपना हाथ हटा लिया और इतने में डॉली अपने भाई को दिखाने के लिए दोबारा गहरी नींद में चली गई।
मैंने डॉली के पतले-पतले होंठों पर अपनी उंगली फेरनी शुरू की और बोली- चेतन.. देखो तुम्हारी बहन के कितने प्यारे होंठ हैं..
यह कह कर मैं झुकी और अपने होंठ डॉली के होंठों पर रख दिए और उसको किस करने लगी। फिर मैंने चेतन के सिर के पीछे अपना हाथ रखा और उसके सिर को नीचे डॉली के चेहरे पर झुकाने लगी।
चेतन बिना अपने मुँह से कोई भी लफ्ज़ निकाले हल्की सी मज़ाहमत कर रहा था.. लेकिन चंद लम्हों के बाद ही उसके होंठ अपनी बहन के होंठों तक पहुँच चुके थे। चेतन ने एक लम्हे के लिए ऊपर मेरी तरफ देखा और अगले ही लम्हे उसके होंठ अपनी बहन के होंठों पर आ गए..
चेतन ने मेरी आँखों में देखते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन को किस करना शुरू कर दिया.. हौले-हौले वो अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था और फिर उसने हिम्मत करते हुए डॉली के एक होंठ को अपने दोनों होंठों की गिरफ्त में लिया और उसे चूसने लगा..
मेरे हाथ अब डॉली की छोटी-छोटी चूचियों पर पहुँच चुके थे और मैं उसकी चूचियों को उसकी नाईटी के ऊपर से ही सहला रही थी और हौले-हौले दबा रही थी।
चेतन अभी भी अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था.. तो मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और फिर उसे आहिस्ता से डॉली की चूची पर रख दिया।
एक लम्हे के लिए तो शायद चेतन को सब कुछ भूल गया और उसने आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया।
फिर जैसे उसे अचानक से अहसास हुआ तो उसने अपने होंठ और हाथ दोनों ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे कर लिए..
मैंने दोबारा से चेतन का हाथ पकड़ कर डॉली की चूचियों पर रखा और बोली- देखो.. कितनी सॉलिड हैं.. तुम्हारी बहन की चूचियां.. बिना किसी ब्रा के सपोर्ट के भी.. कितनी तनी हुई हैं..
चेतन ने मेरी तरफ देखा और फिर आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा..
मैंने डॉली की नाईटी के गले को थोड़ा नीचे को खींचा.. तो डॉली की चूचियों का ऊपरी हिस्सा और उसका क्लीवेज नंगा हो गया।
मैंने चेतन को इशारा किया कि झुक कर उसको चूम ले..
चेतन ने आहिस्ता आहिस्ता अपना सिर नीचे झुकना शुरू किया और फिर उसके होंठ अपनी बहन के सीने के ऊपरी नंगे हिस्से पर आ गए और उसने आहिस्ता से डॉली के सीने को चूम लिया। 
फिर आहिस्ता आहिस्ता नीचे को जाते हुए वो डॉली की क्लीवेज को चूमने लगा।
धीरे-धीरे उसकी ज़ुबान बाहर को निकली और उसने अपनी बहन की क्लीवेज को चाटना भी शुरू कर दिया।
मैंने आहिस्ता आहिस्ता डॉली की नाईटी को उसकी पेट पर से ऊपर की तरफ सरकाती हुए उसके पेट को नंगा किया और फिर उसकी नाईटी को उसकी चूचियों से ऊपर कर दिया।
डॉली की दोनों खूबसूरत छोटी.. लेकिन सख़्त और प्यारी गोल-गोल चूचियाँ अपने भाई की नज़रों के सामने नंगी हो गई थीं। उसकी दोनों सफ़ेद चूचियों के ऊपर दोनों गुलाबी रंग के निप्पल बिल्कुल टाइट होकर अकड़े हुए थे।
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05-24-2019, 12:12 PM,
#67
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
चेतन उनको देखता रहा और फिर उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ा और उसने अपनी बहन की चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया। फिर डॉली के निप्पलों को अपनी उंगलियों में लेकर सहलाने लगा। 
मैंने चेतन को इशारा किया और फिर खुद भी नीचे को झुक कर डॉली के एक निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और उसे चूसने लगी।
चेतन भी मुझको देख कर नीचे झुका और अपनी बहन के दूसरे निप्पल को आहिस्ता आहिस्ता अपनी ज़ुबान की नोक से चाटने लगा। 
फिर चेतन ने भी अपने होंठों को खोला और डॉली के एक गुलाबी निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया।
एक ही वक़्त में दो-दो लोगों से अपनी चूचियों चुसवाना डॉली जैसी जवान और कमसिन लड़की बर्दाश्त ना कर सकी.. और एकदम से अपनी आँखें जोर से बंद करते हुए अपने दोनों हाथ मेरे और चेतन के सिर पर रख दिए और हम दोनों के सिर को नीचे अपनी चूचियों पर दबाने लगी और चिल्लाई- उफफ्फ़.. भाभीई.. ईई.. भैया..आआ..हह.. बस कर दो प्लीज़्ज.. यह क्या कर रहे हो.. आह..
चेतन ने अपनी बहन के चेहरे की तरफ देखा और फिर फ़ौरन से ही मेरे चेहरे की तरफ देखने लगा कि यह क्या हो रहा है।
मैं धीरे से मुस्कुराई और बोली- डोंट वरी डार्लिंग.. तुम्हारी बहन मुझे सब बता चुकी है कि कैसे तुम उसे चोद चुके हो।
चेतन ने शर्मिंदा होते हुए अपना सिर नीचे झुका लिया।
मैं- अरे यार.. शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं.. तुम्हारी जगह अगर मैं होती.. तो मैं भी इस डॉली जैसी चिकनी और सेक्सी लड़की को कभी भी हाथ से ना जाने देती और इसे चोद ही डालती.. नाउ जस्ट चिल डाउन.. एंड एंजाय यूअर ओअन सिस्टर्स’ हॉट बॉडी..
चेतन मेरी बात सुन कर मुस्कुराया और एकदम मुझे खींच कर अपनी बाँहों में लेकर मेरे होंठों को चूमते हुए बोला- ऊऊऊऊ ऊऊऊओ यू आर सो स्वीट माय डियर वाइफ.. तुम मुझको कितना समझती हो और कितना मेरा ख्याल रखती हो.. आई लव यू हनी..
मैंने खुद को चेतन की बाँहों में से निकाला और फिर डॉली को उठा कर उसकी नाईटी उतार दी और उसे अपने भाई की आँखों के सामने बिल्कुल नंगी कर दिया। 
डॉली हम दोनों के सामने नंगी होने में थोड़ी शरम महसूस कर रही थी। लेकिन फ़ौरन ही चेतन ने उसकी नंगे बदन को अपनी बाँहों में खींचा और अपने होंठ उसके तपते होंठों पर रख दिए और उसे आहिस्ता आहिस्ता चूमने लगा।
अबकी बार डॉली भी अपने भाई का पूरा-पूरा खुल कर साथ दे रही थी.. वो उसके होंठों को चूम रही थी और चूस रही थी। 
चेतन ने अपनी ज़ुबान डॉली के मुँह के अन्दर दाखिल की.. तो डॉली ने उसे चूसना शुरू कर दिया।
चेतन उसकी चूचियों के साथ खेलते हुए उससे अपनी ज़ुबान चुसवाने लगा।
मैंने चेतन का बरमूडा उतार दिया और उसका लंड नंगा हो गया। उसे मैंने अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। 
ऊपर चेतन के होंठ अभी भी डॉली के होंठों से चिपके हुए थे। 
मैंने डॉली को नीचे खींचा और उसके भाई का लंड उसकी तरफ बढ़ाया। डॉली एक लम्हे के लिए झिझकी.. और फिर अपने भाई के लंड के अगले हिस्से को अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। 
मैं उसके लण्ड के बाक़ी के हिस्से को अपनी ज़ुबान से चाटने लगी।
फिर मैंने डॉली को बिस्तर पर लिटाया और उसकी दोनों टाँगों को खोल दिया और चेतन से बोली- आ जाओ मेरे प्यारे पति जी.. आज अपनी बहन डॉली को मेरी नज़रों के सामने चोदो.. और डाल दो इसकी चूत में अपना लंड..
मैंने चेतन का लंड बड़े ही प्यार से अपने हाथ में पकड़ा और उसे उसकी बहन डॉली की नाज़ुक सी मुलायम गोरी-चिट्टी चिकनी चूत पर रख कर आहिस्ता आहिस्ता सुपारे को चूत की दरार में ऊपर-नीचे रगड़ने लगी। 
डॉली की चूत से पानी निकल रहा था और वो चूतरस चेतन के लंड के ऊपर लग रहा था।
एक भाई का लंड अपनी ही बहन की चूत पर देख कर मुझे अजीब सा मज़ा आ रहा था।
फिर चेतन ने अपना लंड डॉली की चूत के सुराख पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता जोर लगाने लगा।
अगले ही लम्हे चेतन के लंड की टोपी फिसलती हुई डॉली की चूत के अन्दर उतर गई और साथ ही डॉली के मुँह से एक तेज सिसकारी भी निकल गई।
आहिस्ता आहिस्ता चेतन ने अपने लंड को डॉली की सिर्फ़ एक बार चुदी हुई चूत के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। इस तरह धीरे-धीरे चेतन का पूरा लंड डॉली की चूत में उतरने लगा और अन्दर-बाहर होने लगा। 
डॉली भी लज़्ज़त के मारे आँखें बंद करके सिसकारियाँ लिए जा रही थी।
मैंने नीचे झुक कर डॉली की चूत की दाने पर अपनी ज़ुबान की नोक फेरना शुरू कर दी और उसकी चूत को सहलाने लगी। 
उस बेचारी डॉली के लिए एक ही वक़्त में दो दो मजे बर्दाश्त करना बहुत ही मुश्किल हो रहा था। इसलिए चंद लम्हों में ही वो अपनी मंज़िल को पहुँच गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
चेतन ने कुछ देर के लिए अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर किया और फिर अपना लंड अपनी बहन की चूत से बाहर निकाल लिया।
अब उसने मुझे डॉली के ऊपर आने का इशारा किया.. मैं डॉली के ऊपर आ गई और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया।
अब मेरी चूत उसकी चूत के बिल्कुल ऊपर थी।
चेतन ने अब पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाला और अपने लंड को आगे-पीछे करते हुए मेरी चूत चोदने लगा।
उसके धक्कों के साथ मेरी चूत डॉली की चूत के साथ भी रगड़ खा रही थी। जिससे अलग ही लज़्ज़त मिल रही थी।
ऊपर मेरे होंठ डॉली के होंठों के साथ चिपके हुए थे और मैं डॉली को चूम रही थी। उसके होंठों को चूस रही थी। कभी मेरी ज़ुबान उसके होंठों के अन्दर दाखिल हो जाती और उसे वो चूसने लग जाती।
कुछ ही देर मुझे चोदने के बाद चेतन ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और थोड़ा नीचे लिए जाकर दोबारा से अपनी बहन की चूत में डाल दिया।
अब मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर वो डॉली को चोद रहा था।
ऐसे ही अब चेतन ने बारी-बारी हम दोनों को चोदना शुरू कर दिया और आख़िरकार अपनी बहन की चूत के अन्दर अपना पानी गिरा कर फारिग हो गया और हम दोनों की ऊपर ही ढेर हो गया।
काफ़ी देर तक हम तीनों ऐसी ही लेटे रहे.. फिर चेतन हम दोनों के दरम्यान लेट गया और हम दोनों उसकी नंगे जिस्म के साथ अपने नंगे और गोरे जिस्मों को चिपका कर लेट गईं।
चेतन हम दोनों की कमर पर हाथ फिराता हुआ बोला- आज से मेरी दो-दो बीवियाँ हैं.. अब तो डॉली भी मेरी बीवी ही बन गई है।
मैं हँसते हुए बोली- ठीक है.. अगर तुमने डॉली को अपनी बीवी बना लिया है.. तो फिर मैं तुम्हारी बहन बन जाती हूँ और आज से तुमको भैया बोला करूंगी।
इस बात पर हम तीनों हँसने लगे और आगे के हसीन और सेक्स से भरपूर ज़िंदगी के सपने देखते हुए नींद के आगोश में चले गए।
Reply
01-12-2020, 09:39 PM,
#68
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
Nice. Seducing.
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