Antarvasna Sex चमत्कारी
04-09-2020, 02:45 PM,
#1
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नागपुर के पास उम्रेड तालुका मे बाइ पास के नज़दीक मकान नंबर 4 मे रहने वाले मिस्टर. और मिसेज़. राजवंश गर्व से कहते थे ' हम तो सामान्य लोग हैं..

कोई सोच भी नही सकता था कि यह लोग किसी रहस्यमयी या अजीब चीज़ मे उलझ सकते थे.....क्यों कि वे इन बेतुकी बातों से दूर रहते थे.....


मिस्टर. आनंद राजवंश आदित्या इंडस्ट्रीस नाम की कंपनी के डाइरेक्टर थे.....जो ड्रिल बनाती थी..

आनंद राजवंश मोटे तगड़े आदमी थे और उनकी गर्दन तो जैसे थी ही नही, हालाँकि उनकी मुच्छे बहुत बड़ी थी....

उर्मिला राजवंश बेहद खूबसूरत, पढ़ी लिखी हाउस वाइफ थी...उनकी गर्दन सामान्य से दुगुनी लंबी थी...ये गर्दन उनके बहुत काम आती थी....

क्यों कि वो बगीचे की मुंडेर के पार ताक झाँक करने मे और पड़ोसियो की जासूसी करने मे अपना बहुत सा समय बिताती थी....

उनका एक छोटा सा बेटा भी था .... जिसका नाम आदित्या राजवंश था...

आनंद और उर्मिला का मानना था कि दुनिया मे आदित्या से सुंदर बच्चा हो ही नही सकता.....


उनके पास सब कुछ था, जो भी वो चाहते थे......

पर उनकी जिंदगी मे एक रहस्य भी था और उन्हे सबसे ज़्यादा डर इसी बात से लगता था कि कही वो रहस्य किसी को पता ना चल जाए....

वो ये सोच भी नही सकते थे कि अगर किसी को राजवंश परिवार के बारे मे पता चल गया, तो उनका क्या होगा...?

मेघा, उर्मिला की बहन थी लेकिन कयि सालो से दोनो एक दूसरे से नही मिली थी

सच तो ये था कि उर्मिला सबको यही बताती थी कि उनकी कोई बहन ही नही थी...

क्यों कि उसकी बहन और उसका निकम्मा पति उन लोगो से उतने ही अलग थे..जितना होना संभव था...

ये सोच कर ही आनंद और उर्मिला के होश उड़ जाते थे कि अगर मेघा और उसका पति उनकी गली मे आ गये तो उनके पड़ोसी क्या कहेंगे....

वो जानते थे कि उनका एक छोटा सा बेटा भी था पर उन्होने उसे कभी नही देखा था

यह बच्चा भी एक बड़ा कारण था, जिस वजह से वो मेघा के परिवार से दूर रहते थे....वो नही चाहते थे कि आदित्य इस तरह के बच्चे से मिले जुले....

जब आनंद और उर्मिला उस बोझिल मंगलवार को सुबह सो कर उठे, जहाँ से हमारी कहानी शुरू होती है...

उस दिन बादलो से भरे आसमान को देख कर कोई भी ये नही सोच सकता था कि पूरे देश मे अजीबो ग़रीब और रहस्यमयी घटनाए जल्दी ही होने वाली हैं........
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04-09-2020, 02:46 PM,
#2
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*2

आनंद सुबह अपने ऑफीस जाने के लिए रेडी होने लगे ...उर्मिला अपना घरेलू काम करते हुए इधर उधर शरारत कर रहे आदित्य को भी बीच बीच मे खिलाती जा रही थी.......

उनमे से किसी को यह नही दिखा कि एक बड़ा सा भूरा उल्लू उनकी खिड़की के पास से पंख फडफडाते हुए गुजर गया....

कुछ देर बाद ही आनंद ने अपना ब्रीफकेस उठाया, उर्मिला के गाल सहलाए और आदित्या को चूमने की कोशिश की लेकिन वो ऐसा नही कर पाए क्यों कि वो उस समय गुस्से मे अपना नाश्ता छोटे छोटे हाथो से दीवार पर फेक रहा था तो आनंद अपने ऑफीस के लिए निकल गये.....

ऑफीस का दिन ठीक ठाक ही गुजर रहा था. लंच के लिए आनंद ने बेकरी मे जाके कुछ ब्रेड्स खाए....

वाहा से वापिस लौटने टाइम उन्हे कुछ लोगो की काना फूसी करने की आवाज़े सुनाई देने लगी...

उन्होने कुछ देर रुक कर वही अपने कान उनकी बात सुनने मे लगा दिए....

वो लोग किसी ऋषि की बात कर रहे थे.....ऋषि का नाम सुनकर आनंद कुछ बेचैन से हो गये....और अपने ऑफीस के कॅबिन मे आके बैठ गये....

उन्हे आज से दो साल पहले की घटना याद आने लगी थी...

आनंद की चिंता का कारण वो बात करने वाले नही बल्कि जिसका नाम लेकर वो बात कर रहे थे वो नाम था..

ऋषि, मेघा और अजीत का बेटा था...जो दरअसल आज से दो साल पहले खो गया था मेघा और अजीत ने बहुत कोशिश की उसको ढुड़ने की लेकिन उसका कोई पता नही चला

वैसे मेघा और अजीत के ऋषि के अलावा भी एक लड़का संजय और लड़की का नाम श्री है ...ये दोनो ही ऋषि से बड़े हैं....

इन्ही यादो मे आनंद खोए हुए थे की अचानक उनको अपने बेटे आदित्य का ख्याल आया और उन्होने तुरंत घर कॉल लगा दिया

उर्मिला--हेलो...हाँ..जी..आज इतना जल्दी कैसे याद आ गयी...

आनंद--क्यो मैं दिन मे कॉल नही कर सकता क्या...

उर्मिला--मैने इसलिए पुछा क्यों कि आप दिन मे बिज़ी रहते हो...कभी कॉल नही करते बस

आनंद--कुछ नही आज सुबह उस शैतान आदित्य की किस नही ले पाया ना तो उसकी याद आ रही थी...अच्च्छा क्या कर रहा है मेरा बेटा...

उर्मिला--और क्या करेगा...पूरा डिंडहम करता फिरता है....और मुझे परेशान करता है...

आनंद--हाहहाहा...मेरे बेटे जैसा दूसरा कोई नही है....

उर्मिला--हाँ वो तो है...मेरा मन तो उसमे ही लगा रहता है दिन भर...

आनंद--चलो ठीक है..मैं जल्दी आता हू.. और फिर शाम को घूमने चलते हैं..

उर्मिला--सच....

आनंद--मूच...ओके बाइ

उर्मिला--जल्दी आना...बाइ

आनंद के मन को अब शांति मिली की आदित्य घर मे सही सलामत है...

शाम को वो जल्दी घर लौट आया..उर्मिला तो सज धजकर पहले ही तैयार बैठी थी..

आनंद को देखते ही उसका चेहरा खिल उठा

उर्मिला--आप आ गये...लाइए बॅग मैं रख देती हू...आप कार बाहर ही रहने दो...

आनंद--बाहर ही क्यो रहने दूं..

उर्मिला--घूमने जाना है ना...तो जल्दी चलिए...मैं आदि को लेकर आती हूँ...

आनंद--अरे भाग्यवान...थोड़ी देर आराम तो कर लेने दो....कपड़े चेंज कर लूँ..फ्रेश हो जाने दो...एक कप चाय पिला दो..फिर चलते हैं...

उर्मिला--नही नही कपड़े तो ठीक ही पहने हैं...चाय हम बाहर ही पी लेंगे...और फ्रेश वापिस लौटने के बाद होना...हाँ

आनंद--अजीब पागल बीवी है..यार

उर्मिला--क्या कहा...

आनंद--नही..नही..तुम्हे कुछ नही कहा. चलो फिर ...

दोनो आदित्या को लेकर कार से घूमने निकल गये....

उर्मिला ने ढेर सारी शॉपिंग कर डाली.....

आनंद (मन मे)--इसके साथ अगर महीने मे एक दो बार और शॉपिंग करने आ गया तो मुझे कटोरा लेके भीख माँगना पड़ेगा...

किसी तरह उर्मिला की शॉपिंग होने के बाद वो एक पार्क मे कुछ देर जाके बैठ गये..

वो बैठे ही थे की आदित्या शरारत करते हुए पार्क मे बैठे एक शक्स की गोद मे जाके चढ़ गया...

उसका शक्स का चेहरा देख कर आनंद के माथे पर चिंता की लकीरे उभर आई...

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04-09-2020, 02:46 PM,
#3
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*3

आदित्य को उस आदमी की गोद मे देख कर आनंद चौंक गया…क्यों कि वो शख्स और कोई नही अजीत ही था, मेघा का पति….


अजीत भी आनंद को देख कर थोड़ा हैरान रह गया…काफ़ी समय के बाद जो उसने देखा था आज आनंद को..

अजीत—भाई साहब आप……यहाँ…शूकर है भगवान का कि आज आप हमे मिल ही गये….कितना नही खोजा मैने और मेघा ने आप दोनो को…वो आज भी अपनी बहन को बहुत याद करती है…

अजीत जहाँ दोनो को देख कर खुश हो रहा था वही आनंद मंन ही मंन अपनी किस्मत को कोस रहा था कि वो यहाँ आया ही क्यो….उसे उर्मिला की बात माननी ही नही चाहिए थी……

आनंद (बुझे मंन से)—हमने भी तुम लोगो को बहुत पता किया लेकिन कुछ खबर मालूम नही हुई

आनंद ने आदि को जल्दी से अजीत की गोद से उठा लिया....जैसे अजीत की गोद मे काँटे लगे हो और जिनके चुभने का डर हो कि ये काँटे कही आदि को ना लग जाए…..

उर्मिला भी तब तक उन दोनो के पास आ गयी…वो भी अजीत को देख हैरान हुई….

उर्मिला—अजीत जी आप….कहाँ थे अब तक..और मेघा कैसी है…..बच्चे कैसे हैं….?

अजीत—सब ठीक हैं भाभी जी….मेघा भी ठीक हैं…..दोनो बच्चे भी ठीक हैं…और ये आदि ही है ना…..आप लोग तो आदि के होते ही जैसे हम लोगो से नाता ही तोड़ लिया….

उर्मिला और मेघा वैसे तो हैं सग़ी बहने ही…मगर की कभी नही बनती थी बचपन से ही….एक तीर थी तो दूसरी तलवार…..

आनंद (खीझते हुए)—अच्च्छा अजीत अब हम चलते हैं…फिर मिलेंगे….

अजीत—थोड़ी देर रुकिये ना भाई साहब….अभी तो मैने आदि को खिलाया ही नही…….

आनंद—फिर खिला लेना आदि को अभी हम जल्दी मे हैं…..

दोनो ने अपना पता और नंबर. एक्सचेंज किया और फिर मिलने का बोल वहाँ से निकल गये....आनंद अपना अड्रेस और नंबर. देना तो नही चाहता था अजीत को लेकिन मजबूरी मे देना पड़ा……

उसके मंन मे अपने बेटे को खोने का डर सताने लगा था…..
घर पहुच कर फ्रेश होने के बाद दोनो आदि को सुला कर खुद भी सोने लगे…लेकिन आनंद की आँखो से नीद कोसो दूर थी….वो अपने अतीत मे खोता चला गया……
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04-09-2020, 02:47 PM,
#4
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*4


घर पहुच कर फ्रेश होने के बाद दोनो आदि को सुला कर खुद भी सोने लगे…लेकिन आनंद की आँखो से नीद कोसो दूर थी….वो अपने अतीत मे खोता चला गया……


अब आगे……………


आनंद और उर्मिला की शादी को 8 साल से उपर हो चुका था……आनंद की ड्रिल बनाने की छोटी सी फॅक्टरी थी.. कुल मिला के अगर कहा जाए तो धन दौलत की कोई कमी नही थी……


मगर फिर भी दोनो के जीवन मे एक दुख हमेशा रहता था…..और वो दुख था औलाद ना होने का… शादी के इतने साल के बाद भी उनकी कोई औलाद नही थी……


ऐसा नही था कि उर्मिला माँ नही बन सकती थी या आनंद मे कोई खास कमी थी……उर्मिला तीन बार प्रेग्नेंट भी हुई लेकिन हर बार उसका गर्भपात हो जाता था……


बड़े से बड़े डॉक्टर्स को दिखाने के बाद भी कंडीशन वही की वही थी…..उर्मिला की दवाइयाँ चालू थी…

डॉक्टर्स के मुताबिक उर्मिला की बच्चेदानी कुछ कमजोर थी जिसकी वजह से वो बच्चे का वजन संभाल ना सकने के कारण उसका गर्भपात हो रहा है….


इसी दौरान उर्मिला की एक साल छोटी बहन मेघा की उसी शहर मे उसकी भी शादी हुई थी उनके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की हो चुके थे……

आनंद और अजीत दोनो चचेरे भाई थे…लेकिन दोनो के स्वाभाव मे बहुत अंतर था….अजीत एक नंबर. का शराबी था वही आनंद इसके विपरीत पान गुटखा तक नही ख़ाता था….


अजीत की भी कपड़े की दुकान थी…जिससे उनका खर्चा चलता था……खैर जब मेघा को दो बच्चे हो गये और जब भी वो उर्मिला से मिलने आती तो उन बच्चो को देख कर उर्मिला का मन भी माँ बनने के लिए मचल उठता…….


और फिर अपनी किस्मत पर वो रोने लगती….ऐसे ही दिन गुजरने लगे उनके….इस बीच दोनो मंदिर मस्जिद जाकर भी औलाद के लिए अपना दामन फैलाते रहे….उर्मिला का इलाज़ भी चलता रहा……


आख़िर एक दिन उन दोनो की फरियाद एक बार फिर उपर वाले ने सुन ली…..उर्मिला फिर माँ बनने वाली थी….कहीं इस बार फिर गर्भ ना गिर जाए इस डर से उर्मिला अपना अधिकांश समय बिस्तर पर ही लेटी रहती…..


घर के काम काज के लिए आनंद ने नौकरानी रख ली थी जो घर और उर्मिला दोनो का ध्यान रखती…वही मेघा भी तीसरी बार माँ बनने वाली थी……


इतने परहेज के बाद आख़िर उर्मिला का गर्भ इस बार बच गया और वो घड़ी भी करीब आ गयी थी….मेघा ने उर्मिला से एक महीने पहले ही बेटे को जनम दिया……


लड़के का नाम ऋषि रखा गया…..मेघा की डेलिवरी के एक महीने बाद उर्मिला की डेलिवरी हुई…लेकिन इस बार रिज़ल्ट मे बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ……


डॉक्टर ने आनंद को बुला कर सारी बात बताई…..आनंद बेहद दुखी हो गया….उसे अपने से ज़्यादा उर्मिला के दुख की चिंता थी जो फिलहाल इस समय बेहोश थी…….


आनंद डॉक्टर से कुछ बात करके निकल गया हॉस्पिटल से……उसने खिड़की से मेघा के घर मे घुस कर एक महीने के नन्हे से ऋषि को जो बेचारा सो रहा था को उठाकर चुपचाप वहाँ से निकल गया…..


और ऋषि को अपने मरे हुए बेटे की जगह लिटा कर उस बच्चे का अंतिम संस्कार करने चला गया….

उर्मिला को जब होश आया तब तो वो अपने बच्चे (ऋषि) को देख कर बहुत खुश हुई…….कुछ देर मे आनंद भी हॉस्पिटल लौट आया……


उर्मिला प्रेग्नेंट की वजह से घर मे ही रहती थी और मेघा भी डेलिवरी के बाद मिलने नही आई थी जिससे उर्मिला उस बच्चे को नही पहचान पाई…..


आनंद ने पूरे हॉस्पिटल मे मिठाई बाटी खुशी जाहिर करने के लिए….दूसरे दिन डिसचार्ज करवा के आनंद ने वो जगह छोड़ कर उम्रेड आ गया…..जहाँ एक घर खरीद लिया था आनन फानन मे उसने…


इधर मेघा को जब अपना बच्चा नही मिला तो उसने रो रो कर पूरा घर सर पे उठा लिया…..

आसपास पता करने पर भी जब कुछ नही मालूम हुआ था तो उन्होने पोलीस फिर की गुमशुदगी की……मगर कुछ मालूम नही हुआ…..


इधर आनंद के घर उस बच्चे के कदम पड़ते ही उसको खुश खबरी मिली की एक बड़ी कंपनी ने ड्रिल बनाने का करोड़ो का ऑर्डर दिया है……


आनंद के मंन मे भी उसी पल से उस बच्चे के लिए अपनापन आ गया…..दो दिन बाद बच्चे का नामकरण करने के लिए मंदिर के पुजारी को बुलाया गया…..


बच्चे की जनम कुंडली बनाते समय वो बहुत हैरान हुए….उनके चेहरे पर आते जाते भाव को देख कर उर्मिला चिंता करते हुए बोली…..


उर्मिला—पंडित जी सब ठीक तो है ना…..कोई चिंता की बात तो नही है….


पुजारी—नही बेटी….ये बालक बड़ा ही भाग्यशाली और चमत्कारी है…..इसके अंदर अलौकिक तेज़ है जो इसके चेहरे से झलक रहा है….इसमे बहुत सी अद्भुत शक्तियाँ हैं जो अपने समय पर उसे प्राप्त होगी और हर संकट मे उसकी रक्षा भी करेगी…..


पुजारी की बात सुनकर उर्मिला और आनंद दोनो खुश हो गये…..

आनंद—पंडित जी हमारे बेटे का नाम क्या होगा….?


पुजारी (कुछ देर सोच कर)—वैसे तो इसका नाम कुछ और ही है मगर इसमे जो सूरज के समान तेज़ है तो इसका नाम आदित्य रखना ठीक होगा……


आनंद ने पुजारी को ढेर सारी दक्षिणा देकर खुश कर दिया और वो भी खुशी खुशी आशीर्वाद देते हुए चला गया…..


उस दिन से आदित्य उर्मिला और आनंद दोनो की जान बन गया…..इन दो सालो मे आनंद की कंपनी को जमकर मुनाफ़ा हुआ…..एक छोटी सी कंपनी अब बड़ी होकर आदित्य इंडस्ट्रीस बन गयी थी….


लेकिन आनंद को हमेशा ये डर सताते रहता कि कही आदि की सच्चाई किसी को मालूम ना हो जाए….इस डर से वो हमेशा आदित्य के प्रति चौकन्ना रहता था….मेघा और उसके पति से अपना रिश्ता तोड़ लिया कि कही वो आदित्य को पहचान ना ले……


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04-09-2020, 02:47 PM,
#5
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*5


ऐसे ही ख्यालो मे खोए हुए आनंद की नीद कब लग गयी पता ही नही चला……सुबह उठने के बाद फिर वोही भाग दौड़……


समय यो ही बीतने लगा आनंद का बिज़्नेस भी दिन दूनी और रात चौगुनी रफ़्तार मे बढ़ने लगा था….. अपने देश के अलावा भी उसने अब इंग्लेंड मे अपनी कंपनी खोल ली थी……


इस दौरान अजीत और मेघा भी आदित्य को देखने उनके घर आने जाने लगे थे..जिससे आनंद के मंन का चोर घबराने लगा था……


अपने डर की वजह से आनंद ने इंडिया से इंग्लेंड शिफ्ट कर लिया.....और एक बार फिर उनका संबंध मेघा के परिवार से टूट गया....


मगर इससे आनंद बेहद खुश था…उसके मन का डर भी इंग्लेंड आकर ख़तम सा हो गया….उर्मिला अपना अधिकतर समय आदि की देख भाल मे ही बिताती थी……..


आदित्य भी अब स्कूल जाने लगा था….लेकिन उसका स्वाभाव अपने साथ के बाकी बच्चो से काफ़ी अलग था… वो स्टडी के साथ ही साथ स्पोर्ट्स मे भी अव्वल था…..


दिन महीनो मे और महीने सालो मे कब तब्दील हो गये कुछ पता ही नही चला….इस बीच आदित्य के साथ छोटी छोटी घटनाए यदा कदा होती रही..मगर कोई बड़ी घटना नही हुई जिसका उल्लेख करना इतना आवश्यक हो….


आनंद अब इंडिया के साथ ही साथ इंग्लेंड का भी एक नामचीन उद्योगपति बन चुका था….बड़े बड़े लोगो के साथ उसका उठना बैठना था….

लेकिन इन सबके बावजूद वो आदित्य और उर्मिला को पूरा वक़्त देता था…आदि तो आनंद और उर्मिला की आँखो का कोहिनूर था जैसे…..उन दोनो के लाद प्यार ने आदित्य को ज़िद्दी ज़रूर बना दिया था….


आज आदित्य के हाइयर सेकेंडरी बोर्ड के रिज़ल्ट के साथ साथ उसका 18थ बर्तडे भी है……….जिसकी तैयारिया जोरो से हो रही हैं….


बंग्लॉ को किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है एक दिन पहले से ही……..

सुबह के 9 बज चुके हैं आनंद डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करने बैठा है……मगर नाश्ता करे तो करे कैसे नाश्ता अभी तक बना ही नही था


ये केवल आज की बात नही है ये तो बरसो से चला आ रहा सिलसिला है…..जब तक आदित्य ये नही बता देता कि उसे आज नाश्ते मे खाना क्या है तब तक उर्मिला ना तो खुद नाश्ता बनाती और ना ही नौकरानी को बनाने देती


बेचारे आनंद को घंटो नाश्ते के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठ कर इंतज़ार करना पड़ता कि कब ये साहेबज़ादे नीद से उठे और उसे नाश्ता मिले……..


अगर कभी वो ग़लती से भी नाश्ता बनाने को उर्मिला को बोल देता तो उसको उल्टा खरी खोटी सुनने को मिल जाती


उर्मिला साफ शब्दो मे जवाब दे देती कि “जब तक मेरा बेटा उठ के नाश्ता नही कर लेता तब तक कुछ नही मिलेगा, आप को ज़्यादा जल्दी है तो बाहर कही कर लेना…मगर घर मे सबसे पहले मेरा बेटा ही खाएगा”


आनंद भीगी बिल्ली की तरह चुप हो जाता…..वो जानता था कि बहस मे बीवी से कोई नही जीता तो वो क्या जीतेगा और यदि किसी तरह अपनी बीवी से जीत भी गया तो माँ से हरगिज़ नही….वो अपनी औलाद के आगे पति को कुछ नही गिनती…….


आज भी वो वही कर रहा था…इंतज़ार…अपने लखते जिगर के उठने का…….मगर आदित्य है की मस्त सोया हुआ है….उसे कोई फिकर ही नही है……


हर रोज की तरह आज भी उर्मिला ही उसको उठाने आई…..


उर्मिला—आदि बेटा उठ जाओ…देख कितना टाइम हो गया है….उठ जा मेरे नंद गोपाल…..


आदित्य—अभी थोड़ा और सोने दो ना मम्मी…..


उर्मिला—हॅपी बर्तडे मेरे लाल….


आदित्या—वो तो आपने रात मे ही आकर मुझे विश कर दिया था…


उर्मिला—देख आज तेरा रिज़ल्ट भी ओपन होना है ना…..


रिज़ल्ट का नाम सुनते ही उसकी नीद फुर्र हो गयी….मगर फिर भी वो आँखे बंद किए लेटा ही रहा…


उर्मिला मुश्कूराते हुए उसके दोनो गालो पर…फिर माथे पर…दोनो आँखो पर…ठुड्डी पर किस की तब जाके उसने अपनी आँखे खोली…..


आदित्या—गुड मॉर्निंग माइ स्वीट मम्मी….


उर्मिला—गुड मॉर्निंग माइ स्वीट लविंग सन…


आदित्य को उठाने के लिए उर्मिला को रोज ऐसा ही करना पड़ता है….इसमे दोनो की अंतर आत्मा तक खुशनुमा हो जाती है….


उर्मिला—इतना नाटक क्यो करता है उठने मे…


आदित्या—आप को पता है ना मम्मी जब तक आप मुझे ऐसे हग नही कर लेती मेरी नीद ही नही खुलती तो मैं क्या करूँ...


उर्मिला—चल बदमाश...जल्दी जा और फ्रेश हो जा.....और हाँ आज क्या खाएगा मेरा राजा बेटा.....


आदित्या—आज मेरी प्यारी मम्मी की पसंद का खाउन्गा.....


उर्मिला—चल ठीक है....जा फ्रेश हो जा जल्दी....तब तक मैं नाश्ता रेडी करती हूँ....तेरे दादी नीचे तेरे इंतज़ार मे भूखे बैठे हैं......


आदित्या—ओके मोम…बस 10 मिनट….


आदित्य बाथरूम मे घुस गया और उर्मिला किचन मे.....उर्मिला के किचन मे जाते देख कर आनंद समझ गया कुंवर साहब उठ गये हैं.....अब जाके नाश्ता मिलेगा....


नाश्ता तो वो बाहर भी कर सकता था लेकिन इस इंतज़ार के बाद जो प्यार मिलता है वो बाहर कहाँ मिलेगा.... आनंद भी आदित्य को देखे बिना ऑफीस नही जाता था….आदित्य उसकी भी कमज़ोरी था…


करीब 30 मिनट मे आदित्य भी रेडी होकर नीचे आ गया…..नीचे आते ही उसके साथ जो हुआ उससे वो हैरान हो गया…..


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04-09-2020, 02:47 PM,
#6
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*6



करीब 30 मिनट मे आदित्य भी रेडी होकर नीचे आ गया…..नीचे आते ही उसके साथ जो हुआ उससे वो हैरान हो गया…..


अब आगे………….


आदित्य जैसे ही नीचे आया तो देखा पूरी की पूरी उसकी मित्र मंडली आके वही डेरा जमाए हुई हैं सब एक साथ मे ‘हॅपी बर्तडे आदि’ बोल कर उसे विश करने लगे….


आनंद—हॅपी बर्तडे माइ सन………


आदि—(पैर च्छुकर) थॅंक्स डॅड…..


आनंद ने उसे उठकर अपने गले से लगा लिया…


आनंद—ये लो बेटा आज का तुम्हारा गिफ्ट.....


आदि—ये क्या है डॅड…?


आनंद—तुम्हारा गिफ्ट है तुम खुद ही देख लो……


मैने वो पॅकेट खोल कर देखा तो उसमे न्यू कार की चावी थी….मैने बाहर जाकर देखा तो रोल्स राय्स स्वेपटाल कार खड़ी थी ….मेरे फ्रेंड भी इस कार को देख अवाक रह गये…


मैं भी खुश हो गया न्यू कार देख कर वैसे मेरे पास लॅमबर्गीनी पहले से ही है….लास्ट बर्तडे पर मुझे डॅड ने ही दी थी…..


मगर मम्मी मुझे चलाने ही नही देती थी….जब कभी मम्मी या डॅड के साथ कही घूमने जाना होता तब ही चला पाता था…..


मैं—डॅड ये कार तो मार्केट मे है ही नही…फिर कैसे मिली…?


आनंद—अपने बेटे के लिए स्पेशल ऑर्डर देकर 13 मिलियन डॉलर मे बनवाया है….जब पहले किसी एक कस्टमर ने अपने ऑर्डर पर बनवाया था तब ये केवल टू सीटर थी…पर मैने 6 सीटर बनवाई है…


मैं—ओह्ह…थॅंक्स डॅड…..मैं ट्राइयल कर के देखता हूँ…अपने फ्रेंड्स को भी घुमा लाउन्गा…


पर उससे पहले मैं आपको अपने फ्रेंड्स से इंट्रोड्यूस तो करा दूं.......


फ्रॅंक्लिन—लड़ाई मे हीरो....पढ़ाई मे ज़ीरो

डॅनियल—एक नंबर का रंडीबाज...दिल का साफ

मारग्रेट—खूबसूरत अँग्रेज़ी बिल्ली….आदित्य को मंन ही मंन प्यार करती है

जूलीया—अमीर बाप की नाकचॅढी औलाद…गुस्सा नाक पर रहता है

कैत—डॅनियल की गर्ल/फ्रेंड


मैं—कम ऑन फ्रेंड्स…लेट’स गो फॉर टेस्ट ड्राइव…..


उर्मिला—पहले नाश्ता बाद मे कोई ड्राइव..समझा…


मैं—ओह्ह मोम..बस अभी आया…ज़्यादा दूर तक नही जाउन्गा


उर्मिला—नो..नेवेर...पहले नाश्ता उसके बाद पहली टेस्ट ड्राइव मेरे साथ…


मैं भी क्या करता…..मोम की बात भी नही टाल सकता तो चुप छाप मूह लटका के नाश्ता करने बैठ गया…..


उर्मिला—ज़्यादा उदास होने की कोई ज़रूरत नही है….चले जाना….और वैसे भी तुम सब का रिज़ल्ट भी तो आने वाला है आज…..


मैं—ओके मोम…


आनंद—और हाँ..बेटा आज शाम को घर मे पार्टी रखी है तो रेडी रहना टाइम से…..अपने बेटे को सबसे इंट्रोड्यूस कराउन्गा…..और तुम सब भी इन्वाइटेड हो….


मैं—ओके डॅड…जैसा आप कहे…


फिर हम सबने मिल कर नाश्ता ख़तम किया….और मैं टेस्ट ड्राइव पर जाने के लिए जाने लगा तभी मम्मी आ गयी…और मेरे गालो पर हग कर लिया….


उर्मिला—नाराज़ है मुझसे….


मैं—नो मोम…मैं आपसे कभी नाराज़ नही हो सकता…..आप तो मेरी बेस्ट मम्मी हो….


उर्मिला—अच्छा सुन थोड़ा जल्दी आना….मुझे तेरे साथ शॉपिंग पर जाना है…


मैं—ओके मोम…मैं अभी गया और अभी आया....


उर्मिला—और सुन्न...गाड़ी ज़्यादा स्पीड मे मत चलाना....


मैं—ओफफ़फो....मोम...आप इतना क्यो डरती हो...


उर्मिला—क्यों कि तू मेरी जान है....समझा..बड़ी मिन्नतों के बाद तुझे पाया है...इसीलिए हमेशा तेरी ही फिकर लगी रहती है...


मैं—इतना उदास मत हो मम्मी.....आप नही चाहती तो मैं कही नही जाउन्गा....


उर्मिला—चल जा घूम आ और अपने इन आवारा दोस्तो को भी घुमा ला...


मैं अपने दोस्तो के साथ ड्राइव का आनंद लेने निकल गया….मारग्रेट और जूलीया दोनो मेरे बाज़ू की सीट पर मुझसे सट कर बैठ गयी…..


ये दोनो का नियम बन गया था या यू कहूँ कि दोनो मे होड़ लगी रहती थी मेरे बगल मे बैठने की….इसके लिए अक्सर दोनो मे नोकझोक होती रहती थी रोज़ाना ही…..


(अब ये तो हिन्दी जानते नही हैं दोस्तो फिर भी मैं यहाँ जो भी बातचीत हमारे बीच होगी उसे मैं हिन्दी मे लिखूंगा मगर आप लोग इंग्लीश मे ही लिखा है ऐसा समझ के पढ़ लेना)


मारग्रेट (मन मे)—कुतिया मेरे आदि पर डोरे डाल रही है...आदि सिर्फ़ मेरा है...


जूलीया (मंन मे)—पता नही अपने आप को क्या समझती है...मेरे आगे इसकी हैसियत ही क्या है..पता नही आदि भी इस बिल्ली को क्यों फ्रेंड बना लिया... ..


फ्रॅंक्लिन—क्या किस्मत पाई है आदि ने....यहा कोई पूछता भी नही और तेरे दोनो हाथो मे लड्डू है...दो दो सुंदर कन्या तेरे आगे पीछे घूमती हैं....


डॅनियल—तू ना मुझसे गुरु मन्त्र लेले लड़की पटाने का...काम बन जाएगा तेरा..


फ्रॅंक्लिन—वैसे मुझे करना क्या होगा इस गुरु मन्त्र के बदले मे....


डॅनियल—ज़्यादा कुछ नही...तेरे पड़ोस मे जो आंटी हैं ना किसी तरह तू उनकी नहाने की वीडियो बनके मुझे दे दे बस....


फ्रॅंक्लिन—क्याअ.....साले तेरी तो......धिसूं..धिसुम


डॅनियल—अबे मार क्यो रहा है...अफ...तेरा हाथ है की हथोडा...


वो दोनो हसी मज़ाक मे लगे हुए थे जबकि कैत एअर फोन पर म्यूज़िक सुन्न रही थी…


तभी अचानक गाड़ी मे ज़ोर का ब्रेक लगा…..

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04-09-2020, 02:48 PM,
#7
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
अपडेट*7



गाड़ी के सामने एक बड़ा सा उल्लू आ गया था …मुझे लगा कि वो मेरी गाड़ी से दबकर ना मर जाए…इसलिए मैने ब्रेक लगा दिए……


मैं नही चाहता था कि मेरे बर्तडे पर मेरे ही हाथो कोई निर्दोष जीव की हत्या का पाप हो जाए… मैने नीचे उतर के देखा तो वहाँ कोई नही था…..मुझे बड़ा ही ताज्जुब हुआ…


डॅनियल—क्या हुआ यार गाड़ी क्यूँ रोक दी तूने……..


अब मैं उनको बताता भी तो क्या कहता…..खुद का मज़ाक बनने से अच्च्छा है कुछ भी बोल दो….


मैं—अरे कुछ नही यार…..एक बिल्ली आ गयी थी सामने….


फ्रॅंक्लिन—तेरे पास पहले से ही दो इतनी ख़तरनाक बिल्लियो के होते हुए वो भी देख के भाग गयी होगी….हाहाहा

दोनो ने फ्रॅंक्लिन को घूर कर देखा तो वो दूसरी तरफ मूह घुमा के हँसने लगा…..


मैं—चलो आइस-क्रीम खाते हैं...


जूलिया—मुझे आइस्क्रीम बहुत पसंद है…..


मारग्रेट—मुझे भी…..


जूलिया (मूह चिड़ाते हुए)—क्या देखी भी है आइस्क्रीम……फ्री की मिल गयी तो…..मुझे भी…हुहम…….


मारग्रेट—तेरी जैसी नही मैं कि कही भी मूह मारने लगूँ……समझी...


मैं—अपनी बकवास बंद करो दोनो.....और अंदर चलो...


हम अंदर आ गये.....सबने अपना अपना ऑर्डर दिया सिवाय मारग्रेट को छोड़ कर.....


जूलिया—मेरे लिए स्ट्रॉबेरी….


कैत—मेरे लिए ऑरेंज वाली…


मैं—मेरे लिए मलाई आइस क्रीम….


मारग्रेट—मेरे लिए भी मलाई वाली.....


जूलिया (तुरंत)—मेरे लिए भी मलाई वाली ही लाना...वो वाली कॅन्सल...कोई खास नही वो वाली....

मारग्रेट—तू अपनी स्ट्रॉबेरी ही ले समझी....


जूलिया—तुझे क्या करना है...मैं कोई सी भी लू....


वेटर—मलाई वाली केवल दो पीस ही हैं......स्ट्रॉबेरी ले आउ क्या....


मैं—ठीक है….


थोड़ी ही देर मे सब का ऑर्डर आ गया….मारग्रेट और जूलिया मलाई वाली आइस्क्रीम के लिए आपस मे झगड़ने लगी…..


जूलिया—मलाई वाली मैं ही खाउन्गी….तू चाहे तो स्ट्रॉबेरी ले ले….


मारग्रेट—मैं क्यूँ लू...तू ही ले ले...


जूलिया—देख ज़्यादा ज़ुबान मत चला....नही तो ठीक नही होगा....


मारग्रेट—मैं तेरा मूह नोच लूँगी…..


डॅनियल—ले भाई तेरी बिल्लियो की लड़ाई चालू हो गयी.......


मैं—क्या यार तुम दोनो कभी तो शांत रहा करो.....


जूलिया—हाँ तो देख ना तू ही आदि ये मुझे नोचने को बोल रही है….


मारग्रेट—तुझे नोचूँगी भी और कातूँगी भी…..

मैं—एक काम करो…ये लो दोनो मलाई आइस्क्रीम और ये स्ट्रॉबेरी मैं ले लेता हूँ…ओके अब ठीक है…


ये देख दोनो का मूह उतर गया…..


मारग्रेट—तू मलाई वाली ही खा..मैं ही स्ट्रॉबेरी ले लेती हूँ...


जूलिया—अब आई ना अपनी औकात पर.....मुझसे पंगा लेती है...


मारग्रेट—आदि क्या मैं और तुम मलाई वाली आधी आधी शेर कर ले....


मैं—हाँ क्यो नही...ये लो...


मारग्रेट—नही पहले तुम खाओ..फिर मैं...


मैने थोड़ा सा खा उसको दिया....उसने थोड़ा सा खा के मुझे खिलाया और फिर खुद खाया...

ये देख जूलिया का दाव उल्टा पड़ गया...मारग्रेट जूलिया को तिर्छि नज़र से देख मुश्कूराने लगी.....


जूलिया (मंन मे)—इसे तो मैं छोड़ूँगी नही....


जूलिया—आदि मेरी वाली से भी खा ना....


मारग्रेट—तेरी वाली तेरी जूती है...वो तू खुद अकेले खा....


मैं—चल आजा तू भी इधर...दोनो की खा लेता हूँ....


ये सुन उसके चेहरे की मुश्कूराहट वापस लौट आई....तुरंत उठ के मेरे पास आ गयी....मैने बारी बारी दोनो की आइस्क्रीम मे से खाया और उनको भी खिलाया....


कैत—आदि रिज़ल्ट कब तक ओपन होगा..मुझे तो टेन्षन हो रही है...


डॅनियल—मैं हूँ ना…फिर किस बात की टेन्षन डार्लिंग


कैत—इसी बात की तो टेन्षन है….कि तू है


हम सब कैत की बात पर हँसने लगे….डॅनियल का तो पोपट बन गया ….


मैं—होने वाला होगा या हो भी गया हो शायद…मैने देखा नही…..


फ्रॅंक्लिन—तुझे क्या टेन्षन है…तू तो टॉप ही आएगा….मेरा क्या होगा….मेरे डेडी लात मार के घर से निकाल देंगे….मेरी शादी भी नही हो पाएगी…ये भी नही की कम से कम मेरी शादी ही कर दे….


मैं—चिंता मत कर तू भी पास हो जाएगा….


जूलिया—और नही तो क्या....चीटर जो है...कितनी नकल करता है एग्ज़ॅम हॉल मे...


फ्रॅंक्लिन—अब तुम लोगो की तरह ब्रिलियेंट नही हूँ तो कुछ तो करना ही पड़ेगा ना….


ऐसे ही बात करते हुए हम घर लौट आए…मेरे रूम मे सभी आ गये…लॅपटॉप पर रिज़ल्ट कैत चेक करने लगी….जो शायद ओपन हो गया था….


कैत—वाउ..मेरे 72% आए हैं…थॅंक गॉड…वरना इसके चक्कर मे तो मेरी लुटिया डूब ही गयी थी…


जूलिया—हमारा भी रिज़ल्ट बता ना….आदि के कितने हैं…


कैत—मारग्रेट के 89%, जूलिया 82%, डॅनियल 54%, अरे फ्रॅंक्लिन भी पास हो गया 50% से….


फ्रॅंक्लिन—क्याआ….मैं सच मच मे पास हो गया…


कैत—हाँ बाबा हाँ….


फ्रॅंक्लिन—आज मैं भी नारियल फोड़ूँगा गॉड जी को….मुझे लात खाने से….


मारग्रेट—आदि का बता ना यार…..


कैत—रुक ना देखती हूँ……आदि…आदि…आदि….हाँ मिल गया….ऑम्ग….आदि का तो…


मारग्रेट—बता ना क्या हुआ…क्यो टेन्षन दे रही है……


कैत—आदि ने टॉप किया है 98% से...


डॅनियल—हुर्राह...अब हमारी ये टीम कॉलेज मे भी धमाल मचाएगी....


फ्रॅंक्लिन—हाँ मैं भी कॉलेज मे जाउन्गा अब….जो भी रगिन्ग लेने आएगा साले को फोड़ डालूँगा…


मारग्रेट—आदि कंग्रॅजुलेशन्स….


मैं—तुम सब को भी….

ऐसे ही नोक झोक मे शाम कब हो गयी पता नही चला.....इस बीच मोम और डॅड ने भी हम सब को रिज़ल्ट की मुबारकबाद दी....मैं मोम को शॉपिंग करा लाया...


शाम की पार्टी जोरो से चली....डॅड ने मुझे सभी बिज़्नेसमॅन से इंट्रोड्यूस कराया...मेरे सभी फ्रेंड्स और स्कूल टीचर्स भी आए थे....


सभी पार्टी एंजाय कर रहे थे मगर मारग्रेट मुझे ही चोर नज़रों से देख रही थी….


मारग्रेट (मंन मे)—आदि….आइ लव यू…कैसे कहूँ…हिम्मत नही होती…मेरे मोम डॅड की हैसियत तुम्हारे बराबर की नही है…इज़हार करने से डरती हूँ कही तू मुझे ठुकरा ना दे…मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ आदि….


मैने भी उसे घूरते हुए देख लिया….धीरे से उसके पास जाके अपने हाथो से खिला दिया..जिससे उसका चेहरा खिल उठा….


इसी तरह पार्टी आधी रात तक चलती रही…फिर सभी गेस्ट जाने के बाद मैं भी अपने रूम मे आ गया मगर रूम मे आने के बाद मेरे साथ बड़ी ही अजीब घटना घटी…….

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04-09-2020, 02:48 PM,
#8
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
UPDATE*8



Sabhi party enjoy kar rahe the magar Margret mujhe hi chor nazaro se dekh rahi thi….


Margret (mann me)—adi….I Love You…kaise kahu…himmat nahi hoti…mere mom dad ki haisiyat tumhare barabar ki nahi hai…izhar karne se darti hu kahi tu mujhe thukra na de…mai tumhe bahut pyar karti hu adi….


Maine bhi use ghurte huye dekh liya….dhire se uske pass jake apne hatho se khila diya..jisse uska chehra khil utha….


Isi tarah party aadhi raat tak chalti rahi…phir sabhi guest jane ke baad mai bhi apne room me aa gaya magar room me aane ke baad mere sath badi hi ajeeb ghatna ghati…….


Ab Aage……………..


Mai jaise bistar par let kar sone laga to mujhe aisa laga ki kamre ke andar koi moujud hai….maine ankhe khol kar room me charo taraf nazar ghuma kar dekha lekin mujhe kuch bhi nahi dikha….


Mai din bhar ki bhag doud se thak gaya tha to ise apna bhram maan kar phir ankhe band kar ke sone ka prayas karne laga……


Jaldi hi mujhe need aa gayi….magar need me bhi mujhe aisa lagne laga ki koi mujhe awaz e raha hai.. maine apni ankhe khol li…….


Mere samne ki table ke upar vahi subah vala ullu baitha tha….mai use yaha dekh hairat me pad gaya ki ye yaha kaise aaya……..


Mai abhi ye soch hi raha tha ki mere kano me phir se kisi ki awaz gunjne lagi……..


“Shukriya dost tumne aaj meri jaan bacha kar mujh par bahut bada upkar kiya hai…mai tumhara ehsaan mand hu”…….


Awaz sunkar mai hairat se apne charo or baar baar dekhne laga magar koi nahi dikha…..mai ye dekh gahri soch me pad gaya…..ki koun hai jo dikhayi to de nahi raha lekin bolne ki awaz aa rahi hai…


Mai—koun hai..? Jo bhi hai samne aao……


"Ye meri hi awaz hai...apne samne dekho.......aditya "......


Maine ghabrakar samne dekha to mujhe us ullu ke sivay kuch nahi dikha........tabhi vo ullu udkar mere bistar par aa gaya....meri to phat ke hath me aa gayi....


Mai turant kood kar bistar se niche utar gaya.....tabhi mujhe uss ullu ke bolne ki awaz aayi......


"Ghabrao mat aditya......ye mai hi bol raha hu....mere pass aao...daro mat".......


Ab to meri solid phati.....ek ullu kisi insan ki bhasa kaise bol sakta hai....nahi..nahi jarur kuch gadbad hai.. mai yahi soch raha tha aur usko dekhe ja raha tha.......


"Mere pass aao aditya....mai tumhara dost hu....dusman nahi"........


Mai (darte huye)—t..u..m.......y.a.ha.n kaise ......aaye...aur...t..u..m.....hamari bhasa kaise bol sakte ho.... ?


Ullu—Pahle tum mujhse darna band karo tab mai tumhe sab kuch bataunga....mere pass aao....


Mai darte huye bistar ke ek kone par dhire se baith gaya.....kya pata kab mujh par jhapat pade...


Mai—ab bolo......yahan kyo aaye ho.....aur hamari boli kaise bol lete ho.... ?


Ullu—mai to ek maha tapaswi rishi ke shrap se ullu ban gaya.....mera naam munish hai...mai ek dev putra hu....


Mai—shrap.....kaisa shrap..... ?


Munish—Bahut samay pahle ki baat hai....himalay ki tarayi me rishi ashtavakra tapasya kar rahe the… unka sharir kamar se lakwa maara hua tha…jisse vo bade hi bedhange tarike se hilte dulte chalte the ek baar mai dharti lok ghumne ki abhilasa se swarg se prithvi par aa gaya…aur ghumte ghumte himalay ki taraf chala gaya…..


Munish—mai bahut hi sundar tha...jiska mujhe behad abhiman tha apni sundarta par....ghumte huye meri nazar un Ashtavakra Rishi ke upar chali gayi.....unki aisi hirni jaisi chal dekh kar mai koutuhal vash unke piche piche chalne laga....


Munish—unke pichhe chalte huye main baar baar unka mazak udata ja raha tha.....lekin vo mujhe dekhte aur phir aage badh jate....lekin mai unka uphas lagatar karta hi raha.....


Munish—akhir meri aisi uddandata dekh kar unko kroadh aa gaya aur unhone apne kamandal se jal apni hatheli par lekar mujhe shrap de diya......


Ashtavakra (kroadh me)—Uddand abhimani dev putra....ye sharir jaisa bhi hai us parmeshwar ki rachna hai.....tu baar baar mere andekha karne par bhi uss prabhu ki rachna ka uphas udaye ja raha hai.... tu nishchay hi dand ka bhagidar hai....tujhe apni is sundarta par bahut abhiman hai na to ja mai Ashtavakra tujhe abhi isi waqt shrap deta hu ki tu ek Ullu ki yoni me janam lekar yaha vaha dar dar bhatakta rah.......


Aur unhone apni hatheli ka jal mere upar chhidak diya......unke ghor shrap se mai bhaybheet ho gaya aur unke charno me girkar hath jod ke unki anunay vinay karne laga......


Munish—mujhe kshama kar dijiye Rishivar.....mujhse vinodvash bahut bada apradh ho gaya....mujhe maf kare hey maharshi......aap to maharshi hain....aap to daya ke sagar hain....mujhe kshama dan de muni shreshtha...


Meri aisi anunay vinay se un maharshi ka kroadh shant ho gaya......Rishi to hote hi dayalu hain....Pal me Tola aur Pal me Masha...yahi rishi muniyo ka swabhav hota hai......


Ashtavakra—Jis tarah dhanush se nikla teer aur gujra hua samay kabhi vapis nahi aata usi tarah mera shrap bhi atal hai....vo vapis nahi ho sakta......kintu mai tumhari shrap mukti ka upay avashya kar sakta hu......


Munish (hath jod)—kripaya vo upay bataye maharshi......


Ashtavakra—Jab koi nek aur raham dil vala insan tumhari giddho (eagles) se raksha karega…vahi tumhari mukti ka kaaran bhi banega…..vo jaise hi tumhara sparsh karega usi kshan tum mere shrap se mukt ho jaoge…..tumhe shrap mukt karne ke badle me us insan ko kayi adbhut shaktiyo ki prapti hogi jinse vo jan kalyan aur dushto ka sanghar kar sake…….


Munish—apki badi kripa munivar…..


Kuch samay baad mere sharir me tez dard uthne laga aur mai dev yoni se is ullu ki yoni me aa gira…tab se mai in giddho se apni jaan bachane ke liye poora din bhagta rahta hu……aur jyada tar samay kisi na kisi ped ki kandrao me hi vyateet karta hu……

Un giddho se apni jaan bachane ke chakkar me ek baar mai ek jahaz ke andar chhup gaya aur Bharat se yaha aa pahucha…….


Aaj mai bhojan ki talash me bahar nikla tha ki tabhi giddho ka ek jhund mere pichhe lag gaya….mai unse bhagte bhagte thak kar tumhari gadi ke samne ja gira……


Mere upar tumhari gadi chadhne hi vali thi ki tumne achanak brake laga kar use rok liya aur meri jaan bach gayi……


Tabhi mujhe un Ashtavakra rishi ki baat yaad aa gayi …ki tumhi mujhe shrap mukt kar sakte ho….aaj tumne meri jaan bachakar unka kathan satya kar diya…..tum behad nek dil aur raham dil ho….


Mai uss ullu (munish) ki kahani sun kar dang rah gaya….mere liye ye kisi ajoobe se kam nahi thi…jis par mai to kya koi bhi yakin nahi karega aaj ke jamane me….lekin mai to khud hi ek ullu ko insani bhasa me baat karte dekh aur sun raha tha……


Mai—chalo mai maan bhi lu ki tumhari baat sahi hai to phir tum mujhe subah dikhe kyo nahi jab mai gadi se niche utra……


Munish—mai tumhari gadi me chhip kar baith gaya tha,,,,,aur usme hi chhip kar yaha tak aa gaya…ab tum mujhe apne hatho se sparsh kar ke mujhe shrap mukt kar do…….


Mujhe yakin to koi khas nahi tha uski kahani par lekin usse pichha chhudane ki garaj se darte darte uske pass jake pith par apna hath rakh diya……


Uski pith par mera hath touch hote hi jo hua vo sab dekh kar to meri ankhe hairat se khuli ki khuli rah gayi…..
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04-09-2020, 02:48 PM,
#9
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
UPDATE*9


Munish—mai tumhari gadi me chhip kar baith gaya tha,,,,,aur usme hi chhip kar yaha tak aa gaya…ab tum mujhe apne hatho se sparsh kar ke mujhe shrap mukt kar do…….


Mujhe yakin to koi khas nahi tha uski kahani par lekin usse pichha chhudane ki garaj se darte darte uske pass jake pith par apna hath rakh diya……


Uski pith par mera hath touch hote hi jo hua vo sab dekh kar to meri ankhe hairat se khuli ki khuli rah gayi…..


Ab Aage………….

Mere hath lagate hi uske sharir ka prakash badhne laga aur kuch hi der me uska poora sharir ek tez roshni ke ghere me sama gaya………


Lagbhag 10 minute tak ye roshni aise hi tez bani rahi ..meri to ankhe hi band ho gayi…phir jab ye prakash ka aavran dhire dhire ghatne laga tab maine apni ankhe kholi….


Meri ankho ke samne ek 7” lamba nou-jawan khada tha tha jiske sharir me gajab ka tez tha….mai to hairat me pahle se hi tha….ye meri jeevan ki sabse badi aur pahli avishwasniya ghatna thi……


Kuch der tak vo mujhe dekh kar vo yu hi khade halke halke mushkurata raha…..mai bhi bina palak jhapkaye usko hi dekhta raha….


Munish—ye mera asli roop hai….mai tumhara behad shukra gujar hu…tumhari vajah se aaj mujhe punar jeevan ki prapti huyi hai…..agar ye kahu to isme koi atisanyokti nahi hogi…..


Mai (hath jod kar pranam karte huye)—ye to mera ahobhagya hai ki mai kisi devta ki shrap mukti madhyam bana….maine apko bina pahchane na jane manav buddhi vash kya kuch nahi kah diya hoga use meri agyanta samajh kar mujhe kshama karna..


Munish—tum sach much me ek shreshtha manav ho aditya….tumne apna farz nibhaya ab meri bari hai mere karib aao dost…


Mai—dost……


Munish—ha tum vakayi me dosti ke kabil ho….ab mai un maharshi ke kathnaanusar tumhe tumhari shaktiya soupna chahta hu….


Mai—kaisi shaktiya….?


Munish—ye to mai bhi nahi janta dost….ki unme koun koun si shaktiya hai….Rishi Ashtavakra ka yahi adesh tha ki jab mai shrap mukt ho jau to tumhe manav aur jeev kalyan evam papiyo ke nash hetu tumhe kuch shaktiya pradan karu….


Mai—jaisi apki aagya….mujhe kya karna hoga...


Munish ne bina meri baat ka koi jaab diye apna hath mere sar me rakh kar apni ankhe band kar li aur mann hi mann kuch budbudane laga...shayad koi mantra padh raha tha....


Uske hatho se neeli roshni nikalne lagi jo mere sharir me uske hatho ke jariye pravesh karne lagi mujhe apne sharir me bahut tez dard ka ehsaas hone laga..kuch der baad sab normal ho gaya


Uske hatho se neeli roshni nikalni band ho gayi thi magar mujhe dard ab bhi ho raha tha…khade rahne me bhi taklif mahsus ho rahi thi..


Mai—mujhe itna dard kyo ho raha hai


Munish—ye shaktiya tumhare sharir ko majboot bana rahi hain jisse ye unke anukool ho jaye dharan karne ke....thodi der me sab theek ho jayega...


Mai—magar mujhe kaise in shaktiyo ke baare me pata chalega ko kaise kaam karti hain aur kis tarah ki shaktiya hain


Munish—tumhare dhyan lagane se dost....tum jitna adhik samay dhyan lagane me doge utna jyada se jyada inke vishay me jaan paoge….


Phir munish ne mujhe dhyan lagane ka tarika samjhaya...ki kaise kya karna hai mujhe


Munish—mai tumhe kuch aur bhi dena chahta hu dost...ise meri taraf se dosti ka uphar samjho

Mai—jo agya...aapne mujhe apna dost kaha ye mere liye kisi uphar se kam nahi hai


Munish—tum sach me in shaktiyo ke kabil ho aditya....lekin kisi nirdosh par inka prayog mat karna..ab mai jo bhi tumhe dene ja raha hu...usse tum hamesha hum devtao ki tarah jawan rahoge...tumhara chehra aur bhi sundar aur akarshak ho jayega..isse tum kisi ko bhi theek kar sakte ho chahe vo koi asadhya rog ho ya phir koi bhi chot....


Mai—apka bahut bahut dhanyavad is kripa ke liye


Munish ne ek bar phir mere sar pe hath rakh kar roshni ke jariye mere jism me vo shaktiya pravesh karayi……


Munish—in shaktiyo se tum kisi bhi baanjh aurat ke sath sambhog kar ke use aulad bhi de sakte ho… hum devta to bhog vilas ke adi hote hain to ye gun ab tumhare andar bhi aa jayega…bas kisi se jabardasti mat karna….vaise iski jarurat hi nahi padegi…tumhe dekhte hi har stri tumse sambhog karne ko tadapne lagegi


Mai—ye aapne kya mushibat de di…?


Munish (mushkurate huye)—ye mushibat nahi balki isse tumhari shaktiyo ka santulan bana rahega sharir me...kyon ki itni urja sambhalna ek manushya ke sharir ki kshmata me nahi hota....sambhog karte rahne se ye urja ka santulan bana rahega...vaise ab tumhara sambhog ashtra bhi pahle se bahut bada aur bahut mota ho jayega..jisse har stri ko ek aloukik sukh ki prapti hogi aur vo tumhari gulam ban jayegi


Mai—yahi to mushibat hai


Munish—achchha mai ab chalta hu...jab kabhi bhi meri jarurat ho..apne mann me mujhe yaad karna mai hajir ho jaunga...aur ha tum kahi bhi kewal dhyan matra se pahuch jaoge...jaha bhi jana ho us jagah ka ya us admi ka jisse milna ho dhyan karna bas...kisi ke bhi mann ki baat jaan sakte ho


Mai—ji shukriya


Munish—achchha mai chalta hu...mai tumhara hamesha abhari rahunga dost...tumne mujhe ek nayi jindagi di hai....


Iske baad munish vaha se ek jhatke me chala gaya aur mai use aise gayab hote dekh kar but bane dekhta raha...lekin ab itna kuch dekh chuka tha ki isme koi hairangi nahi huyi


Mai bhi dard se tadap raha tha to bistar me girte hi need ki hasin vadiyo me kho gaya....subah meri need jaldi khul gayi...jaise hi meri nazar apne sharir par padi to hairan ho gaya...mere poore kapde jagah jagah se fate huye the....mera sharir bhi bahut majboot lag raha tha


Mujhe apne andar besumar taqat hone ka ehsaas ho raha tha....tabhi meri nazar niche gayi to meri ankhe vo dekh kar shock se phati ki phati rah gayi.......
Reply

04-09-2020, 02:49 PM,
#10
RE: Antarvasna Sex चमत्कारी
UPDATE*10


Munish—achchha mai chalta hu...mai tumhara hamesha abhari rahunga dost...tumne mujhe ek nayi jindagi di hai....


Iske baad munish vaha se ek jhatke me chala gaya aur mai use aise gayab hote dekh kar but bane dekhta raha...lekin ab itna kuch dekh chuka tha ki isme koi hairangi nahi huyi


Mai bhi dard se tadap raha tha to bistar me girte hi need ki hasin vadiyo me kho gaya....subah meri need jaldi khul gayi...jaise hi meri nazar apne sharir par padi to hairan ho gaya...mere poore kapde jagah jagah se fate huye the....mera sharir bhi bahut majboot lag raha tha


Mujhe apne andar besumar taqat hone ka ehsaas ho raha tha....tabhi meri nazar niche gayi to meri ankhe vo dekh kar shock se phati ki phati rah gayi.......


Ab Aage.......


Jaise hi meri nazar niche gayi...mai apne auzar ko dekhkar hi darr gaya.....jo pahle se bahut badal gaya tha...pahle ek samanya manav ka lag raha tha jo ab kisi gadhe ka lag raha tha...


Main kuch der tak usko hi dekhta raha..tabhi mujhe munish ke dhyan wali baat yaad aayi to main dhyan me baith gaya...


Lekin dhyan me mann hi nahi lag pa raha tha…maine bahut prayas kiya magar kamyabi nahi mili…tabhi mujhe kisi ke pairo ki aahat sunayi padi to main apni aisi haalat dekh kar turant bistar se uth bathroom me bhag gaya….


Darwaje par knock hone lagi thi ..main jaldi fresh hokar bahar aaya apne kapde pahanne ki koshish ki lekin sab bekar unki fitting bigad chuki thi….

Maine towel lapetkar hi door khola…samne mummy khadi thi….vo kuch bolne hi wali thi ki unki nazar mere sharir ko dekhte hi shock me doob gayi….


Kuch der ankhe phade aise hi mujhe dekhne ke baad vo andar aayi aur mere body ko touch karke uska avlokan karne lagi…..


Urmila—ye tujhe kya hua hai…teri body aise kyo hai…aur teri peeth aur hath par ye tattoo kab banwaye tune….kal ke khane se koi food poisoning to nahi ho gayi kahi…..


Main bhi mummy ki tattoo wali baat se chounk gaya…maine to jaldbazi me kuch dhyan hi nahi diya apne sharir par aaye badlao par….


Main—(kuch soch kar) ha mummy ye tattoo mujhe pasand aa gaya to maine bhi kal banva liya….aur meri body ko kya hua hai..vaise hi to hai..mujhe to kuch bhi alag nahi dikh raha hai..


Urmila—nahi..nahi kuch to hua jarur hai…kal tak to aisi nahi thi…..aaj mere sath chal kisi badhiya doctor ko dikhati hu….


Main—arey mom kuch nahi hai….vo kya hai na ki main body banane ka course le raha hu….shayad ye uski medicines ka effect hoga..bas..its just normal


Urmila—sgayad aisa hi ho…phir bhi koi chinta ki baat to nahi hai na….


Main—nahi mom…but ye kapde mere fit nahi ho rahe hain…ab kya pahnu…


Urmila—ruk main abhi aati hu………tere papa ke dress lati hu…vo hi pahan le…baad me market se new purchase kar lena…


Mummy kuch hi der me papa ke kuch dress le aayi jo maine try karke pahan liye…vo bhi poori fitting ke to nahi the…lekin kaam chalau the…


Is douran mummy ektak mujhme hi khoyi huyi thi….maine ye dekh kar unhe hila kar unka tandra bhang ki..


Mai—kya hua mummy…kya meri body me kami hai koi…?


Urmila—agar ye real me normal hai to amazing hai….tu bahut handsome lag raha hai….mere bete ko kisi ki nazar na lage….ruk main abhi tere kaala tika lagati hu…


Mai—ye kya mom…aapne poora chehre hi kaala kar diya..


Urmila—mere bete ko kisi ki nazar na lage isliye….aur tu aaj andar se door lock kyo kiya tha


Aamtaur par mere room ka door open hi rahta hai….mummy ki raat me jab bhi need khulti hai vo ek baar mere me jarur aati hain mujhe dekhne…kuch der mujhe niharne ke baad mathe par kiss karke chali jati hain…ye unka bachpan se routine hai…main kal ki ghatna ke kaaran door lock kar diya tha..baad me thakan aur need ki vajah se open karne ka khyal hi nahi aaya….


Khair main kuch der baad jogging ke liye nikal gaya…mujhe sath dad bhi aa gaye…jo roj himorning walk karte the….


Anand—kya baat hai…aaj mera sher bahut badla hua lag raha hai….body shody bana li…itna jaldi aur aaj jogging bhi…kahi koi ladki sharki ka chakkar to nahi…


Mai—nahi dad…koi ladki vadki ka chakkar nahi hai….bas mann ho gaya to aa gaya apke sath


Anand—chal achchha kiya….itna bada business handle karne ke liye body ki fit rahna bhi jaruri hai

Mai—dad…abhi to main bahut chhota hu…..


Anand—ha beta tu abhi bahut chhota hai….kewal 18 saal ka hi to hua hai abhi…..arey nalayak ye umar me to hamari age me log 4-5 g/f bana lete the….ab to jamana aur bhi advance ho gaya hai…


Mai—kya dad …main mom ko batata hu ki apke pith pichhe apke pati kya kya gul khilate hain…


Anand—ye kya beta apne baap ko ghar se tadipar karwayega kya….?


Hum dono aise hi baate karte huye morning walk ka anand utha rahe the….dad to hafne lage the…magar mujhe koi fark mahsus nahi ho raha tha…thakan ka namo nishan nahi tha…..


Raste me ladkiya baar baar mujhe ghur rahi thi….mujhe bhi unme interest aa raha tha…meri nazar unki or jate hi unki body ke private parts ko scan karne lagti thi jo aaj se pahle kabhi mere sath nahi hua tha


Main samajh gaya ki ye sab gandi aadte un shaktiyo ki vajah se hi mujhme aa gayi hain…pakka ye kisi din mujhe joote chappal khilayengi..


Ek ghante ke baad hum vapis lout aaye….main naha dhokar nasta kiya aur market nikal gaya aur kuch shopping karke return aa gaya…


Aaj college ka bhi pata karna tha to maine margret ko call kiya …ek ring me hi uth gaya…jaise vo mere call ke intazar me hi hath me phone liye baithi rahi ho…


Margret—hi adi good morning


Mai—good morning my sweet heart


Margret ka chehra khil utha…aaj pahli baar tha jab aditya ne use call bhi kiya tha aur aise baat ki shuruaat ki thi…..


Margret—wow…aaj suraj pashchim se kaise nikal aaya…itna romantic


Mai—kya kar rahi ho yaar aa na….mai bor ho raha hu….tu to meri sabse best friend hai….college ka disscussion karna hai..


Margret—thanks adi…..tu ruk 10 min…main abhi aayi….


Margret khushi se uchhalte phudakte huye aanann faanan me ready hokar adi ke ghar pahuch gayi….


Urmila—aa ja beta kaisi ho…? Nasta karegi….aa ja….


Margret—Thanks aunty….vo Adi kaha hai….


Urmila (mushkura kar)—Ja uske room me chali ja…vahi milega vo …..


Margret doudte huye aditya ke room ki or badh jati hai…


Urmila (mann me)—pagal hai….mai bhi ek aurat hu…tere mann ki baat bhali bhanti samajhti hu.....


Margret jaise hi adi ke room me enter huyi to samne ka scene dekhkar uski ankhe fati ki fati rah gayi….
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