Antarvasnax दबी हुई वासना औरत की
09-04-2021, 12:28 PM,
RE: Antarvasnax दबी हुई वासना औरत की
कुछ देर तक जब रीमा की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई तो जितेश ने अपने सुपाडे को बाहर खीचा और फिर अन्दर घुसेड दिया | रीमा को उसने पीछे से अपनी बांहों में जकड़ रखा था | रीमा पूरी तरह से उसकी बाहों की गिरफ्त में थी | उसने सोच रखा था अगर रीमा की आँख खुल गयी तो उसे क्या करना है | अगर रीमा जग जाती है तो वो सोने का नाटक करेगा | रीमा को देखेगा कैसे रियेक्ट करती है | वो पहले भी रीमा की चूत में लंड घुसेड़कर सो चूका है | अगर रीमा पूछेगी तो कह देगा, रीमा ने ही उसकी गांड में लंड घुसेड़कर सोने को बोला था | वो तो बस उसकी बात मान कर वही कर रहा है जो वो चाहती थी | उसके अपने लंड के सुपाडे को रीमा की गांड में घुसाए रखा | रीमा की गांड का छल्ला इतनी कुटाई के बाद अब इतना जिद्दी नहीं रहा गया था | वो आराम से जितेश के लंड की बात मानकर फैलकर चौड़ा हो गया था | जितेश ने हौले हौले अपनी कमर हिलानई शुरु कर दी | बमुश्किल इंच डेढ़ इंच ही उसका लंड रीमा की गुलाबी गांड की दूरी तय कर रहा था लेकिन बड़ी मंजिल तय करने का ये छोटा कदम भी बहुत महत्वपूर्ण था | जितेश को इस छोटे कदम की अहमियत पता थी | जितेश थोड़ा निराश था की वो रीमा की कोरी करारी गांड नहीं मार पाया | रीमा की कोरी करारी गांड मारने का सपना पालना तो बेवखूफी थी इसलिए जो मिल रहा था उसी में खुश रहने में भलाई थी | रीमा जैसी कमसिन गोरी जवान अप्सरा की गांड मारने को मिल रहा था ये कहाँ से कम था | उसके शहर में पूछो, कितने मर्दों के दिलो पर सांप लोटते थे रीमा को देखकर | जितेश को तो खुद को किस्मतवाला समझना चाहिए जो उसे रीमा की तीनो सुरंगों का सफ़र करने का मौका मिल रहा है | जितेश दुनिया का वो पहला मर्द था जिसने रीमा के मुहँ चूत और अब गांड तीनो छेदों में अपना लंड पेला था | शायद जितेश को भी अहसास नहीं था उसने क्या हासिल कर लिया है, उसे क्या मिल गया है | रीमा भले ही सो रही हो लेकिन उसका अचेतन इन हलके हलके उसकी गांड में सरकते लंड के धक्को से अनजान नहीं था | उसका अचेतन मन बार बार रीमा के चेतन मन को यह अहसास करा रहा था की उसके शरीर में कुछ हो रहा है | रीमा की आँख तो नहीं खुली लेकिन रीमा फिर से पेल के बल लुढ़ककर बेड से चिपक गयी | जब तक जितेश ने लंड पेलना नहीं शुरू किया था तब तक उसे कसकर बाहों में थामे रखा था लेकिन अब रीमा उसकी बाहों से आजाद होकर फिर से पेट के बल लेट गयी | जितेश का लंड अब हवा में सीधा तना हुआ था |

आखिर जितेश को उठना पड़ा | इस बार जितेश ने रीमा को अपनी बांहों में भरने की कोशिश नहीं की | बल्कि उसके पीछे उसके ऊपर आ गया | उसने रीमा के चुताड़ो के पीछे जांघो के पास दोनों तरफ अपने पैरो को मोड़कर उसके घुटने बेड पर टिका दिए | अब रीमा के उठे हुए चूतड़ और उसकी दरार घाटी बिलकुल उसकी आँखों के सामने थी | रीमा के चुताड़ो को फैलाकर जितेश ने सख्ती से अपने फूले हुए मोटे लंड को थामा और रीमा की पिछली सुरंग पर सटा दिया | उसके जोर लगाते ही उसके तगड़े लंड का फूला सुपाडा रीमा के मांसल नरम चुताड़ो के मांस में गायब हो गया | वो अभी भी किसी जल्दबाजी के मूड में नहीं था | पता नहीं शायद उसे कही डर था अगर रीमा जग गयी तो उसे गांड मारने से मना कर देगी |

लेकिन वो किसी भी हाल में गिरधारी के रीमा की गांड मारने के बाद पीछे नहीं रहना चाहता था | वह चाहता था जैसे गिरधारी ने रीमा की जमकर गांड मार कर जबरदस्कीत मजा लिया है वैस ही कुछ मजा वो भी लुटे | मर्द कितना भी समझदार हो लेकिन औरतो के बारे में सब मर्दों की राय एक जैसी ही होती है | एक बार जब कोई मर्द किसी औरत की जांघे खोल पाता है फिर वो उसे एक अगल नजरिये से ही देखता है | उसे औरत को चोदने में या चोदने के लिए पूछने में कोई झिझक नहीं होती | कई बार तो बिना मर्जी के ही उसे चोद डालता है, उसे लगता है आखिर उससे छिटक के ये जाएगी कहाँ | जितेश के साथ भी कुछ ऐसा ही मनोविज्ञान चल रहा था | जब तक उसने रीमा को नंगा सिर्फ देखा था तब तक वो उसे छूने से पहले भी पूछता था | उसकी चूत चूची देखने में हिचक रहा था | फिर जब उसे एक बार चोद लिया तो उसके अन्दर की वो सारी झिझक हिचक खतम हो गयी, वो समझ गया था रीमा को चोदना आसन है, ये बहुत आसानी से चुदने को राजी हो जाती है | फिर जब उसने गिरधारी को उसकी गांड पर ठोकरे लगाते देखा तब से उसका दिमाग भन्ना रहा है | उसने रीमा के बारे में ऐसा कुछ सोचा नहीं था लेकिन रीमा की हरकतों ने उसके दिमाग की नसे फाड़ दी | अब वो अपने घायल मन को इकठा कर उस हकीकत को अपने दिलो जहन में उतार रहा था की जो हुआ वही सच है हकीकत है लेकिन उसके अन्दर रीमा के जिस्म से बेरोकटोक खेलने की हिम्मत बढ़ गयी | अब उसे रीमा को चुने या चोदने के लिए उससे पूछने की जरुरत महसूस नहीं हो रही थी | बाकि मामलों में भले ही वो रीमा का ख्याल रखे और सवेदनशील रहे लेकिन चुदाई के मामले में रीमा की उन्मुकत्ता ने उसे एक खास केटेगरी में डाल दिया था | मर्दों की खास कटेगरी, एक नंबर की चुद्दकद | जितेश के लिए फिलहाल अभी रीमा का यही वजूद था, आगे चलकर भले ही उसके विचार बदल जाये | हर वो औरत जो अपने लिए सेक्स मांगती है उसे मर्द इसी केटेगरी में डाल देते है | जितेश भी कुछ अलग नहीं था | रोहित इस मामले में कुछ ज्यादा उदार था उसने रीमा की लेबलिंग नहीं की थी क्योंकि उसका अलग अलग औरतो के साथ एक लम्बा अनुभव था इसलिए या शायद वो रीमा से उतना गहरे से अटैच नहीं था या उसको लेकर सेंटीमेंटल नही था | वो बस रीमा जैसी थी उसे वैसे ही देखता था | उसको लेकर अपने दिमाग में कोई अलग इमेज नहीं गढ़ता था |

जितेश की जिंदगी में ज्यादा औरते आई नहीं और रीमा जैसी खूबसूरत तो बिलकुल नहीं | जितेश रीमा को लेकर सेंटीमेंटल हो गया था | वो इस तरह के माहौल में पला बढ़ा नहीं था जहाँ आदमी औरत कौन किसको चोद रहा है ये बात कोई मायने नहीं रखती हो | एक आदमी दो औरत , दो आदमी एक औरत ये सब उसके लेवल से बहुत ऊपर की बाते थी | भले ही उस वक्त वो रीमा को कुछ कह न पाया हो लेकिन उसके मन में मलाल तो था ही रीमा को गिरधारी के साथ शेयर करने का | यही मलाल उसे रीमा की सोते हुए गांड मारने पर मजबूर कर रहा था | वो भले ही रीमा के साथ सामान्य बनने की कोशिश कर रहा था लेकिन ये सब उसके लिए सामान्य नहीं था | उसकी ट्रेनिंग ऐसी थी की वो सब्र कर लेता था और अपने मन के भाव सामने नहीं आने देता था लेकिन रीमा उसके लिए पर्सनल हो गयी थी | वो उसके लिए सेंटीमेंटल हो गया था | यही भाव उसे इस वक्त रीमा की पिछली सुरंग में अपना लंड पेलने पर मजबूर कर रहा था | आखिर कोई कैसे रीमा के साथ वो कर सकता है जो उसने भी नहीं किया | शायद जितेश के अंदर भी यही असुरक्षा थी कि रीमा उसकी है तो कोई दूसरा कैसे मजा ले सकता है आखिर कैसे रीमा ने उसके लीचड़ नौकर को अपनी गांड मारने की इजाजत दे दी थी | उसे तो यह नहीं अच्छा लगा था हालांकि जितेश कुछ कर नहीं सकता था | इसलिए उसने कुछ कहा नहीं लेकिन अब सोती हुई रीमा की गांड मार रहा था |

जितेश ने अपने लंड पर जोर डाला | उसका लंड रीमा की गांड को चीरता हुआ अन्दर धंसने लगा | रीमा के जिस्म में धंसते मुसल लंड का दर्द फिर से जगने लगा | रीमा की गांड फिर से दर्द से सिसकने लगी | उसका ;लंड बस थोड़ा सा आगे बढ़ा था रीमा नीद में भी कसमसा कर रह गई थी शायद वो इतनी गहरी नींद में भी इस बात का एहसास कर गई थी कि उसके साथ कुछ गलत हो रहा है | उसके चेहरे पर दर्द की लकीरे उभर आई | जितेश का आधा लंड रीमा के चुताड़ो की दरार में गायब हो गया था | रीमा के अंतर्मन में कहीं एहसास हो गया था कि कोई नुकीली चीज उसे चीरती हुआ अन्दर धंस रही है | उसकी गांड अभी भी दर्द से भरी हुई थी भले ही अभी उसका शरीर ठंडा पड़ा हुआ था | जितेश जहाँ था वही थम गया | कुछ ही देर में रीमा सामान्य हो गई और फिर से उसकी सांसों की आवाजों से पता चलने लगा वह गहरी नींद में चली गई है जितेश ने अपने लंड को हल्का सा बाहर निकाला लेकिन उसका सुपारा तो रीमा की गांड के कसे छल्ले में अटक गया था | आगे जितेश ने हौले हौले कमर हिलाने में भलाई समझी | रीमा की कमर के ऊपर हल्के हल्के धक्के लगाने लगा था |

जितेश के धक्के अब आगे की तरफ बढ़ने लगे थे, रीमा कब तक गहरी नींद में सोती रहती जब उसके पीछे से कोई मुसल लंड उसके जिस्म में मुसल लंड पेल रहा था | जितेश का मोटा लंड रीमा को गांड के मुहाने को चीर अन्दर तक जा रहा था | आखिर कैसे न उसका जिस्म का अचेतन मन उसके चेतन मन को जगा देता | उसे भी एहसास हुआ, कुछ तो गड़बड़ है, आखिर उसके चुताड़ो में दर्द कैसा उभर रहा है , आखिर क्यों उसकी गांड का दर्द उसे फिर से सिसकने पर मजबूर किये दे रहा है | इधर जितेश था की अपनी सनक में अपनी जिद में रीमा की परवाह किये बिना उसके चुताड़ो को चीरता हुआ उसके जिस्म में घुसा जा रहा था | रीमा की कच्ची नीद टूट गयी जैसे ही उसकी आंख खुली है उसे एहसास हुआ उसके पूरे जिस्म का कोना कोना दर्द के मारे और थकावट से चूर चूर हो रहा है | ऊपर से उसकी गांड में दर्द भी हो रहा था और वह दर्द उसके चूतड़ों और पिंडलियों जांघो में तक महसूस हो रहा था | उसे आँख खुलते ही अहसास हो गया आखिर माजरा क्या है | जितेश उसके चूतड़ थामे अपनी कमर का पूरा जोर उसके चुताड़ो पर लगा रहा है | उसने जिदेस को अपने ऊपर पाया और उसके लंड को अपनी गांड में यह क्या है | आखिर जितेश कर क्उया रहा है बिना उसकी मर्सजी के बिना उसकी सहमती के आखिर जितेश उसके जिस्म में घुस कैसे सकता है | जितेश की तरफ गर्दन घुमाकर कर देखा जो एक हाथ से उसके चूतड़ को और एक हाथ से उसके कंधे को थामे उसके कानों पर अपनी गरम गरम सांसे छोड़ रहा था |
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09-04-2021, 12:28 PM,
RE: Antarvasnax दबी हुई वासना औरत की
जितेश उसके चूतड़ थामे अपनी कमर का पूरा जोर उसके चुताड़ो पर लगा रहा है | उसने जिदेस को अपने ऊपर पाया और उसके लंड को अपनी गांड में यह क्या है | आखिर जितेश कर क्उया रहा है बिना उसकी मर्सजी के बिना उसकी सहमती के आखिर जितेश उसके जिस्म में घुस कैसे सकता है | जितेश की तरफ गर्दन घुमाकर कर देखा जो एक हाथ से उसके चूतड़ को और एक हाथ से उसके कंधे को थामे उसके कानों पर अपनी गरम गरम सांसे छोड़ रहा था |
रीमा हैरान परेशान, हाय जितेश तो मेरी गांड मार रहा है बिना मुझसे पूछे बिना मुझे बताये | आखिर ये हो क्या रहा है | क्या इसने भी मुझे रंडी ही बना दिया | रीमा ये क्या हो रहा है तुमारे साथ |
रीमा - जितेश यह क्या है |
जितेश - वही जो तुम चाहती थी |
रीमा गुस्से से - क्या चाहती थी, प्लीज निकालो इसे मुझे दर्द हो रहा है |
जितेश - वही जो तुम नीद में बडबडा रही थी, मुझे भींच कर अपनी तरफ खीच कर मांग रही थी |
रीमा - आह्ह्ह्हीईईईईईइ जितेश दुःख रहा है |
जितेश - मुझे माफ कर दो, लेकिन नीद में तुम यही तो मुझसे मांग रही थी |
रीमा - बकवास मत करो, प्लीज रुक जावो, निकालो अपने लंड को मुझे दुःख रहा है |
जितेश ने कमर हिलानी बंद नहीं करी | रीमा की गांड सच में दुःख रही थी |
रीमा - जितेश प्लीज .............रुक जावो मान जावो ....................बहुत दुःख रहा है |
जितेश नहीं रुका | उसे पता था अभी रुक गया तो वो रीमा की गांड फिर नहीं मार पायेगा | रीमा अपनी बेबसी लाचारी पर रोने लगी |
रीमा रोते हुए - कब मैंने कहा तुमसे ये करने के लिए |
जितेश - झूठ मत बोलो |
रीमा - तो अब रुकने को कह रही हूँ मान जावो | आआआआअह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है |
उसकी गांड सच में किसी नए जख्म की तरह दुःख रही थी | उसकी आंखे आंसुओं से डबडबा आई | आखिर वो क्या करे, कैसे रोके | लड़ भी तो नहीं सकती, हाथा पाई करे क्या, उसमे भी तो नहीं जीतेगी | आखिर जिसको अपना जिस्म सौंप दिया उससे हाथा पाई का क्या मतलब है | दर्द से सिसकती रीमा जितेश ने नीचे बिस्तर से चिपकी हुई थी |

आखिर जितेश को अपने वासना के नशे में रीमा का ख्याल आया | रीमा की आंसू से भरी आँखे देखा कम से कम उसके अन्दर उससे झूठ बोलने की ग्लानी तो आई |
आखिर वो रीमा से झूठ कैसे बोल सकता है | उसे कम से कम सच तो बताना ही चाहिए |
जितेश - मुझे माफ़ कर दो रीमा बेबी मुझसे रहा नहीं गया था | बहुत कोशिश करी खुद को रोकने की लेकिन तुमारे जिस्म ने मुझे पागल बना दिया | मैंने तुमसे झूठ बोला था की तुमने नीद में अपनी गांड मारने के लिए कहा | प्लीज बेबी मुझे माफ़ कर दो | मुझसे खुद पर काबू नहीं हो रहा था | गिरधारी जब तुम्हारी गांड मार रहा था तो उसे देख मैं पागल हो गया था | उसे देखकर मुझसे रुका नहीं गया |
रीमा - जितेश तुमने मुझसे झूठ भी बोला | आआआआह्ह ओह गॉड ये दुःख रहा है |
जितेश - बेबी बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो , फिर सब ठीक हो जायेगा | मुझे पता है तुम्हे तकलीफ हो रही है लेकिन जितना खुद को रोक सकता था रोकने की कोशिश करी मैंने |

रीमा दर्द सिसकते हुए - आआआऐईईईईइरीईईईई जितेश तुम्हें पता है मेरी गांड कितना दर्द कर रही है |
जितेश - हां बेबी मैं जानता हूं लेकिन गिरधारी जो तुम्हारी गांड मार रहा था तो मुझे लग रहा था शायद कुछ अधूरा रह गया है मैं उसे ही पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं |
रीमा - ओहोहोहो जितेश तुम्हें एहसास भी है मुझे कितना तीखा दर्द हो रहा है, कितना दुःख रहा है |
जितेश - हां जानता हूं बेबी अब इसके बाद में कभी दर्द नहीं होगा | मैं तुमारी गांड के छल्ले को पूरी तरह से खोल दूंगा |
रीमा - आआअईईई रिरिरिरिरिर्नरी नहीं जितेश तुम मेरी पहले से चिरी गांड के जख्मो को और गहरा कर रहे हो | तुम एक औरत के दर्द को कभी नहीं समझ पाओगे |
जितेश - ऐसी बात नहीं है |
जितेश की लगातार कमर हिल रही थी |
रीमा - तुम मर्द हो बस पेलना जानते हो, कितना दर्द हो रहा है ऊहोहोहोहो ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़ गॉड गॉड माआआअय्य्यीईईईईरेरेरेरे |
जितेश - बेबी बस कुछ सेर और बर्दाश्त कर लो |
रीमा - तुम मर्द कुछ नहीं समझते तुम्हे लंड के पेलने से मतलब है , किसी की दुखती गांड का दर्द क्या जानो |
जितेश - अब जो हो गया सो हो गया प्लीज कुछ देर बर्दाश्त करो न | मैं क्या करूं तुमने मुझे पागल कर दिया है तुमने मुझे अपना दीवाना बना लिया है | जब मैंने गिरधारी को तुम्हारी गांड को इस तरह से बेशर्मी से लंड पेलते हुए देखा तो मुझे बहुत दुख हुआ था | इसीलिए मैं प्यार से तुम्हारी गांड मारना चाहता हूं और तुम्हें गांड मारने का सुख देना चाहता हूं जिसकी तुम्हें शायद तलाश थी बेबी |
रीमा - नहीं जितेश मेरी गांड अभी बहुत दुख रही है प्लीज अपना लंड बाहर निकाल लो बेबी |
जितेश - रीमा बेबी अब मैं लंड को तो बाहर नहीं निकाल सकता प्लीज थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो......... तुम्हें भी बड़ा मजा आएगा | मैंने इसीलिए ढेर सारी क्रीम तुम्हारी गांड में उड़ेल दी है ताकि तुम्हें किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो | तुमारे गांड के छल्ले को तो किसी ने किसी दिन फैलना ही था | वर्ना जब ही यदा कदा लंड जायेगा तो ऐसे ही दुखेगी | जब लगातार दो बार मुसल लंड की ठोकरें पड़ेगी तो तुमारी गांड हमेशा के लिए हर तरह का लंड को लेने की आदी हो जाएगी | फिर चाहे जीतनी गाड़ मरवाना कभी नहीं दुखेगी |
रीमा - नहीं जितेश अभी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा है, बहुत दर्द कर रहा है प्लीज मत करो |
जितेश ने और गहराई तक लंड पेलते हुआ - जानता हूं बेबी ....... बस थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो उसके बाद में सब ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा सा |
रीमा - नहीं जितेश प्लीज बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ |
जितेश - बेबी मेरी जान प्लीज बस कुछ देर और बस कुछ देर और दर्द भरी गांड में लंड ले लो , बर्दाश्त कर लो उसके बाद में तुम अपनी गांड में चाहे जितना बड़ा मोटा लंड लेना हो ले लेना बिल्कुल दर्द नहीं होगा | ये बस एक बार की तकलीफ है, एक बार अपनी गांड पूरी तरह से रवां हो जाने दो बस इसके बाद तुम्हारी गांड में कभी कोई तकलीफ नहीं होगी |
रीमा - अभी मुझसे बर्दाश्त के बाहर है प्लीज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज् जितेश हहह्हहहह्हहाईईईईईईईईई रेरेरेरेरेरेरेरे |
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09-04-2021, 12:28 PM,
RE: Antarvasnax दबी हुई वासना औरत की
जितेश हालात को सँभालने की कोशिश बहुत कर रहा था लेकिन रीमा की हालत देखकर अब उसे भी लगने लगा था उसे थमना न पड़ जाए | जितेश ने आखिरी कोशिश करी - बेबी बस एक बार बर्दास्त कर लो, पहली बार जब चूत चुदती है तो उसके फटने पर भी दर्द होता है न | उसके बाद जिंदगी भर के मजे | बेबी मै बोल रहा हूँ थोड़ी सी हिम्मत रखो, बस एक बार तुमारी गांड के कपाट खुल जाये अच्छे से, फिर मनचाहा लंड घोटती रहना | तुम्हे पता है बेबी आर्मी में हमें पहले छ महीने इतना रगड़ के ट्रेनिंग करायी जाती है पूछो मत | लगता है अब निपट गए तब निपट गए | हर दिन किसी नरक की तरह होता है, उन पहले 6 महीनो में हमें रगड़ कर इतना मजबूत कर देते है की पूछो मत | वो शुरुआत की ट्रेनिंग इतनी तकलीफदेह होती है की बर्दाश्त करना मुश्किल होता है | पता है जब हम यहाँ से जाते है तो हमारा शरीर उतना कठिन मेहनत का आदि नहीं होता इसलिए ज्यादा तकलीफ होती है | एक बार वो ट्रेनिंग कम्पलीट हो गयी फिर जिंदगी भर मुश्किलों से जूझने के काम आती है | समझ लो तुमारी गांड की आर्मी स्टाइल ट्रेनिंग हो रही है | जितना ज्यादा दर्द से गुजर अपनी गांड मसलाओगी, उतना ही आगे चलकर तुमारी गांड लंड लेने के लिए मजबूत हो जाएगी |

जितेश - एक बार सह लो इसके बाद तुम्हे गांड मरवाते कभी कोई तकलीफ नहीं होगी, एक बार तुमारी गांड का छल्ला लंड से रगड़ खाकर मजबूत हो गया फिर क्या लंड क्या मुसल लंड सब गपागप लील लोगी | एक बार लंड से रगड़ खाकर अपने गांड के छल्ले को फैलने तो दो ढंग से | फिर तुम मेरा क्या मेरे जैसे दो दो लंड एक साथ घोंट लेना अपनी गांड में |

रीमा दर्द से बिलखती हुई - तुम समझ क्यों नहीं रहे बेबी बहुत दर्द हो रहा है, बहुत दुःख रही है मेरी गांड, पहले से जख्मी गांड की और दुर्गति मत करो प्लीज | प्लीज रुक जावो |

जितेश भी वासना के नशे में बुरी तरह डूबा हुआ था - बेबी बस यह तुम्हारे दर्द की आखिरी घड़ी है उसके बाद तुम्हें कभी कोई दर्द नहीं होगा, बस एक बार अच्छे से मरवा लो....... यह जो भी दर्द हो रहा है बस यह समझ लो तुम्हारे जिंदगी का आखरी दर्द है इसके बाद तुम्हें गांड मरवाने में कभी दर्द नहीं होगा | बेबी बस एक बार.....मेरी प्यारी बेबी स्वीट बेबी प्लीज |
रीमा बिलखती हुई - बेबी मर जाऊंगी......... बेबी बहुत दुख रहा है प्लीज देखो न बहुत दुख रहा है |
जितेश - बस कुछ देर और ...... बेबी थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो नहीं पता है ना तुमने इतना मोटा लंड घोंट लिया है कुछ देर इसे अपनी गांड की मालिश करने दो उसके बाद तुम्हारी कोमल गांड की सारी मांसपेशियां की जकड़न ये दूर कर देगा | तुमारे जिद्दी गांड के छल्ले को रबर की तरह नरम बना रहा हूँ | फिर तुमारी गांड रबर की तरह नरम फ़ैलने वाली और मजबूत हो जाएगी | फिर तुम्हारी गांड किसी भी मोटे से मोटे खूंटे जैसे लंड को लेने के लिए भी पूरी तरह से तैयार हो जाएगी |
रीमा की नाजुक गांड का तीखा दर्द अब बर्दाश्त से बाहर था - कैसे बर्दाश्त करूं इस दर्द को ..... बहुत तकलीफ हो रही है, लग रहा है पहले किसी ने नस्तर चला दिया हो गांड के अन्दर और अब तुम अपने मोटे मुसल से उस कटी फटी गांड को कूट रहे हो | नहीं मै मर जाउंगी जितेश प्लीज रूक जावो .....................ह्हाआआआआआआआआआआआआआ ईईईईईईईइ माआआआआआआ रीईईईईईईईईईए |

रीमा ने तकिये में मुहँ धकेल दिया | जितेश दुविधा में फंस गया, क्या करे, एक तरफ दर्द से तड़पती रीमा और दूसरी तरफ उसकी गांड में धंसा उसका फूला हुआ मोटा लंड | बीच मझधार में जब लंड को थमना पड़ता है तो बहुत खराब लगता है | जितेश हर हाल में रीमा की गांड ही मारना चाहता था | वो भी एक नंबर का जिद्दी था | कुछ देर चूत में डाल कर चोद सकता था लेकिन उसकी भी जिद थी, जब रीमा गिरधारी से अपनी गांड फड़वा सकती है तो फिर उसके लिए थोड़ी दी तकलीफ नहीं बर्दाश्त कर सकती |
जितेश - मै समझ सकता हूँ |

रीमा बिफर पड़ी - तुम कुछ नहीं समझते, तुम्हे सिर्फ अपनी पड़ी है |
जितेश को भी लगा रीमा कुछ ज्यादा ही नाटक कर रही है - ऐसा नहीं है |
रीमा उसी रौ में - तुम्हे मेरी कोई परवाह नहीं, यहाँ दर्द से पूरी गांड रो रही है और तुम उसे कुचले जा रहे हो कुचले जा रहे हो |
जितेश - बकवास मत करो .........परवाह न होती तो इतना आराम से करता, तुमारी गांड को गिरधारी ने कुचला है कूटा है जानवरों की तरह चोदा है, मैंने नहीं | ये दर्द उसका दिया हुआ है मेरा नहीं | क्यों बुलाया था उसे अपने पीछे, क्या जरुरत थी उसकी | तुमारी वो मुराद क्या मै नहीं पूरी कर सकता था | मुझे पता है तुम्हे बहुत तकलीफ हो रही क्योंकि तुमने ही उसे अपनी गांड मारने के लिए बुलाया हुआ था | ......................................................कोई बात नहीं बेबी कभी-कभी दर्द और तकलीफ भी बहुत मजा देते हैं |
रीमा भी ताव में - तुम कुछ नहीं जानते मेरे बारे, मुझे पर रौब झाड़ना बंद करो |
जितेश - मै तुम्हे अच्छी तरह से जान गया हूँ | तुम्हे लगता है परवाह नहीं तुमारी | मुझे ही दुनिया भर के नखरे दिखा रही हो क्यूंकि मै नखरे झेल रहा हूँ, गिरधारी फ्री फंड में तुमारी गांड बुरी तरह कूट के चला गया क्या उखाड़ लिया उसका, उसके दिए दर्द को मै ही तो सहला रहा हूँ |
रीमा - हाँ तो बुला लिया था मेरी मर्जी ....,मेरा जिस्म है मुझे लगा उसे बुलाना चाहिए तो बुला लिया | मेरी मर्जी ने उसने मेरी गांड में लंड घुसेड़ा था तुमारी तरह चोर बनकर सोते समय नहीं |
जितेश - मै चोर हूँ |
रीमा - नहीं असल में तुम जलनखोर हो | मैंने गिरधारी को अपनी गांड सौंप दी ये तुमसे बर्दास्त नहीं हुआ | तुमारे मर्दानगी को ठेस पहुची | इसलिए सोते हुए मेरी गांड मार कर गिरधारी का मुकाबला कर रहे थे क्योंकि तुम्हे पता था अपने होशो हवास में तुम्हे मै ऐसा करने नहीं दूँगी |
जितेश भी उसी ताव में बोल गया - हाँ मुझे बुरा लगा, और लगना भी चाहिए | मुझे तुमारी परवाह है, मै तुमसे प्यार करता हूँ |
रीमा - झूठ सरासर झूठ , कितनी परवाह करते हो वो तो साफ़ दिख रहा है |
जितेश - अच्छा अब मै झूठा भी हो गया, तुम राह चलते किसी से भी गांड मरवा लो तो कुछ नहीं, मै अपनी दिल की ख्वाइश का इजहार भी कर दू तो झूठा, लापरवाह , हवस का दरिंदा |
रीमा - मैंने ये तो नहीं कहा |
जितेश - मतलब तो यही था न |
रीमा - तुम होते कौन हो मुझ पर इस तरह से हुकुम चलाने वाले | मै तुमारी गुलाम नहीं हूँ, मेरी जो मर्जी होगी वो करूंगी, तुम हो कौन तुमारा मेरा रिश्ता क्या है जो इतना हक़ जता रहे हो |
जितेश को ये बात चुभ गयी - ठीक है मै कोई नहीं, अजनबी हूँ फिर तुमारी परवाह क्यों करू, जैसा करोगी वैसा भुगातोगी |

उसने रीमा की कमर ऊपर को उचकाते हुए - अपने चूतड़ ऊपर को उठावो | रीमा को पता था अगर वो उसकी बात नहीं मानती तो जितेश जबरदस्ती करता |
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