Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
12-27-2021, 12:58 PM,
#1
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मेरी कामुकता का सफ़र

मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालो को आखिरी स्वरुप दे रही थी की तभी सासु माँ की आवाज़ आयी की तैयार हुई की नहीं, सब लोग आ चुके होंगे ज्यादा देर नहीं करते अब।

मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली हो गया बस और कमरे से बाहर निकल गयी। सासु जी तैयार थे पडोसी के यहाँ एक रात्री जागरण में जाने के लिए। मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।

सासु जी कुछ बोलते हुए चल रहे थे पर में किन्ही और ख्यालो में थी, पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।

दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे, अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चूका था। एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगो के लिए व्यवस्था थी।

वहाँ की मेरी भाभी सहेलिया दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ, इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।

अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरते बैठी बातों में मशगूल थी, हमारे आते हैं उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए। कुछ औरते बातों में मग्न थी कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी। पता चला पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला हैं।

मैं अपने पुराने दिनों और विचारो में खो गयी और मध्य रात्रि होने वाली थी, अब तक सारी औरते और पुरुष सो चुके थे। शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में, मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी। मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतो के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।

तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था। एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र। जब भी किसी फंक्शन में जाता अपनी बातों से वह शमा बाँध लेता। मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।

पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता। मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।

मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया की मेरे पति कब आने वाले हैं। मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया कुछ और महीने लगेंगे। फिर उसने पूछा की मैं अब तक सोई क्यों नहीं जब की सारे लोग सो चुके थे।

फिर उसने सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया। मैंने उसे समझाया की इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती। उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा। उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया आप अब तक क्यों नहीं सोये।

उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तेर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला की उसके सोने का एक विशेष प्रबंध किया हैं उसने घर की छत पर। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, और पूछा छत पर तो बहुत मच्छर होंगे और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।

वह मेरे सवालो के जवाब के साथ तुरंत तैयार था। उसने बताया की उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया हैं और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।

यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया हैं। मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी। मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।

मैंने मजाक करते हुए कहा आपके अच्छा हैं विशेष इंतेज़ाम हैं, हमारा क्या? यह बात उसकी दिल को लगी। उसमे मुझे सुझाव दिया की मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊ। मुझे लगा वह मजाक कर रहा हैं, पर वह इस बात पर गंभीर था।

उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया की फिर आप कहा सोएंगे। उसने बोला की वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषो के कमरे में।

मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया की यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं मैं वहां अकेले जाउंगी और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।
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12-27-2021, 12:58 PM,
#2
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
उसने बताया की छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ, किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ। मुझे कुछ और नहीं सुझा तो बहाना मार दिया की मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती डर लगता हैं।

कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा। उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी। उसे अहसास हुआ की उसने क्या बोल दिया और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा के सो जाएगा।

मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती। वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा। हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।

उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा कि मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमे दो लोग आसानी से सो सकते हैं और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।

मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा की अगर मैं उसपे थोड़ा सा भी भरोसा करती हु तो हां कर दू। अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी। न हां कह सकती और न ही ना कह सकती। एक तरफ कुआ दूसरी तरफ खाई।

ऐसा नहीं था की मैं उसपे भरोसा नहीं करती। परन्तु यह समाज, अगर किसी को पता चल गया, तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था। अपने पति को क्या जवाब दूंगी।

मैं हां या ना कुछ कह पाती उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दू की मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हु और फिर मैं छत पर आ जाऊ वह मेरा इंतज़ार करेगा। यह कहते हुए वह सीढिया चढ़ते हुए चला गया।

मेरे पाँव अब जम गए, फिर औरतो वाले कमरे की तरफ गयी सासुजी दूसरे कोने में सो रहे थे और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगो को लांघ कर जाना था, फिर सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा। मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमो से बढ़ने लगी।

किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची, वहा वो मेरा इंतज़ार कर रहा था। उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया कि चिंता ना करू और किसी को पता नहीं चलेगा।

उसने अच्छे से गद्दा लगा रहा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे। उसने कही से मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था। शायद फिर किसी के सिरहाने से खिंच कर।

अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे। चांदनी रात थी आसमान साफ़ था तारो से भरा हुआ और बहुत खुशनुमा रात का मौसम था। हलकी सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नही हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था। थोड़ी देर ऐसे ही बातें करते रहे फिर थोड़ी ख़ामोशी और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।
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12-27-2021, 12:58 PM,
#3
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र

अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस कि और मेरी नींद टूट गयी पर आँखें अभी भी बंद ही थी। मैंने मह्सूस किया कुछ उंगलिया मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी। मैं डर से काँप उठी, क्या यह उसी की हरकत हैं।

अब में क्या कर सकती हु। अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे। मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।

तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी। मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी। मैं इंतज़ार करने लगी आगे क्या गलत होने वाला हैं।

अब उसका हाथ मेरे पेट पर था, पुरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पुरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी। कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था। उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमे वह कामयाब नहीं हुआ, शायद मेरे जाग जाने के डर से ज्यादा ताकत नहीं लगाई। मैंने चैन की सांस ली।

अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया शायद मेरे स्तन देखना चाहता था, पर कसे हुए ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया। ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोइ थी इस बात की ख़ुशी थी। वो चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।

कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वो मेरे कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा, फिर जब उसे अहसास हुआ की कुछ होने वाला नहीं तो मेरे हुक वापिस लगा दिए। मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।

मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया, इस बार मैं करवट लेके उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली, अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।

पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे। फिर से डर की लहर कोंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्यों की मैं करवट लेके सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।

कुछ सोच पाती उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चूका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चूका था। मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।

उसके हाथों ने अब मेरा ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरे अब मेरे स्तनों को छू रही थी। उस साये में मैंने मह्सूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी, पर अब वो कामयाब हो चूका था।

मैं अपने आप को कोसने लगी क्यों मैंने करवट ली। और उससे भी पहले क्यू मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए। पर अब क्या हो सकता था, या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।

अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था, मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी। पर कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी। और यह प्रार्थना करने लगी की इससे बुरा कुछ न हो, या शायद अंदर ही अंदर कही से यह चाहती थी की 4 महीने के एकांत वास को टूटने दिया जाये। शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।

कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढे और कुछ सेकंड के जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।

अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे। फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।

मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था। और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।

अब मुझे अहसास हो चूका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्म समर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई। फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरुरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुप चाप लेटी रही।

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12-27-2021, 12:58 PM,
#4
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर निचे रगड़ रहा था। और उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फेरा रहा था।

फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया, मुझे लगा उसका इरादा बदल गया लगता हैं और मैं सुरक्षित हूं, पर मैं गलत थी। फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।

अब मैंने अपने पीछे के निछले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया, मुझे समझते देर नहीं लगी की उसने क्या किया हैं। और अब वो पूरा नग्न था मुझसे पीछे से फिर चिपक गया। इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रिया और सक्रीय हो गयी थी।

उसका लचीला अंग मेरे पुठ्ठो को छु गया। अब शायद कही न कही मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए। उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था। मैं महसुस कर पा रही थी उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था। अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।

कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया। उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगो के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था। शायद अंदर प्रवेश का मार्ग पर मिल नहीं रहा था। एक दो बार वह मेरे योनि द्वार के आस पास भी पंहुचा था।

थोड़े प्रयासों के बाद ही उसे मेरे शरीर पर गीली जमीन मिल गयी और वो रुक गया। उसका लिंग अब मेरे योनि द्वार पर था। मेरी साँसे जैसे रुक गयी। एक भटकते हुए प्यासे राहगीर के होठों पर जैसे किसी ने पानी का गिलास रख दिया था।

उसके लिंग ने थोड़ी ऊपर नीचे हरकत की और थोड़ा सा योनि में अंदर गड़ गया। मैंने आँखें जोर से बंद कर ली अगले क्षणों में जो होने वालो था उसकी तैयारी में। पति के अलावा पहली बार कोई पुरुष मेरी योनि में प्रवेश करने वाला था। इतनी देर की रगड़ से मेरे अंदर पहले ही थोड़ा गीला हो चूका था।

मक्खन की तरह धीरे धीरे उसका लिंग फिसलते हुए अंदर आता गया और उसके मुँह से सिसकी निकलती गयी। मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, सो अपने होठों पर रख मुँह बंद कर दिया। उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।

मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी। जितनी धीमी गति से वो अंदर गया उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला। अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनी की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।

दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया। जितना अंदर वो गया उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी, और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।

काफी समय तक वो ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता थोड़ा रुकता और बाहर आता फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता। हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#5
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रैन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी। उसका लिंग अंदर योनी में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़े आने लगी थी। उसकी झटको की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाज़े काफी तेज हो गयी थी।

अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी। उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।

मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले। रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं। पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनद भी लेती जा रही थी। कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी, जो की अब आपे से बाहर होता जा रहा था। मेरे होठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।

इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकर्ती मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे, जिससे मेरी हलकी चीख निकलने लगी।

अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का। जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीनो से तड़प रही थी वह मिली तो भी इस तरह से और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।

उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था। अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके। पर अब हमें कपड़ो की परवाह नहीं थी, हम इन क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में झूट गए।

हम दोनों की आहे एक ही सुर में छपाको की आवाज़ से ताल मिला रही थी। इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।

मैं अपनी योनी के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था। मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी की मुझसे पहले कही वो छूट ना जाये।

पर शायद इन मर्दो को दूसरी औरतो के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती हैं। मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे, मैं निश्तेज महसूस करने लगी थी, ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।

मैंने अपनी टाँगे अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ। टाँगे खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग ओर गहराई में ड़ाल दिया। शायद एक इंच ओर गहरा वो उतर गया था।

अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे, उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे मैं पूरा छूट गयी, मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तब्दील हो गयी, और उसके बाद मेरी कुछ हलकी चीखे निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।

मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वो भूखे भेड़िये की तरह आवाज़े निकालते हुए झटको पर झटके मारता रहा। मेरे स्तन को वो अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।

फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा की लिंग बाहर नहीं निकला और वही पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा। मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया, उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था। वो कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।

सारी प्रतिक्रियाए शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति। अब भी वह मुझे झकड़े हुए था और उसके शरीर का एक हिस्सा मेरे शरीर में था।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#6
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
कुछ क्षणों के बाद अपनी चेतना को लौटाते हुए उसने अपने आप को मुझसे अलग किया, उसके बाहर निकलते ही ऐसे लगा जैसे मेरे शरीर का कोई हिस्सा मुझसे अलग हो गया, और एक हलके दर्द से मेरी आह निकली।

मुझे में पीछे मुड़ कर उससे आंखें मिलाने की हिम्मत नहीं थी, जबकि सारी गलती उसकी थी, शायद मेरी गलती सिर्फ यह थी की मैंने उसे नहीं रोका। पर क्या मैं उसको रोक सकती थी! इसमें मेरी क्या गलती थी, शायद मेरे पति की गलती थी जो की इतने महीनो तक मुझसे दूर रहा और इस हाल में छोड़ दिया की मैं इस गलती में न चाहते हुए भागीदार बनी।

मैंने एक एक कर फिर से अपने कपडे पहनना शुरू किआ। मुझे यह सुनिश्चित करना था की सुबह उठ कर जब नीचे जाउंगी तो मेरी हालत देख कर किसी को कुछ शक ना हो।

कपडे पहनने के बाद जैसे ही मैं मुड़ी देखा वह काफी पहले ही कपडे पहन चूका था और मेरा इंतज़ार कर रहा था दूसरी और देख कर। शायद कपडे पहनते वक़्त भी उसने मुझे घुरा होगा, पर मैंने मन में सोचा अब उधर देखने का क्या फायदा, सब कुछ को वह पहले ही देख चूका हैं।

क्या उसे अपने किये पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। गलती तो उसने की हैं या फिर मुझे उसको शुक्रिया कहना चाहिए था। उसकी इस जबरदस्ती ने मुझे कई दिनों के बाद एक मानसिक और शारीरिक सुख की प्राप्ति कराई थी। काफी समय के बाद मैं अपने आप को बहुत पूर्ण, तरो ताज़ा और तंदरुस्त महसूस कर थी।

वह मेरे पास चलते हुए आया और पास आकर खड़ा हो गया। मुझे लगा मुझसे माफ़ी मांगेंगा और मैं उसे झूठमूठ गुस्सा करके डाट दूंगी, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

उसने कहा साढ़े चार बज गए हैं और थोड़ी देर में सब लोग उठने लगेंगे अब मुझे नीचे जाना चाहिए। मैंने उसको दबे शब्दों में कहा आप जरा मेरे आगे चलिए और देखिये कोई मुझे सीढ़ियों से उतरते हुए न देख ले।

उसने तुरंत मेरे हुक्म का पालना किया, और करता भी क्यों नहीं, मैंने उसको उसके एक सपना पूर्ण करने में साथ दिया जो नैतिक तौर पर गलत था। मैंने चैन की सांस ली कि सब ठीक हैं और किसीने नहीं देखा मुझे यह पाप करते हुए।

मैं सासु जी के पास बैठी और थोड़ी ही देर में वह उठ गए। मुझसे कहने लगे तू उठ गयी? नींद तो ठीक से आयी ना? मैंने शरमाते हुए हां में सर हिला दिया और एक कुटिल मुस्कान अंदर ही दबा ली।

सुबह के 7 बज रहे थे और सारे कार्यक्रम ख़त्म हो चुके थे और लोग अपने अपने घरो की तरफ जाने के लिए निकल रहे थे। सासुजी ने आंटी से विदा ली और हम लोग उस घर से बाहर निकले।

कुछ कदम चलने के बाद मैंने पीछे मुड़ कर घर की छत को देखा जहां मैंने कभी ना भूलने वाली रात बितायी थी। वह अभी वही छत पर खड़ा था, शायद मौन रह कर माफ़ी मांग रहा था या शायद मुझे शुक्रिया कह रहा था।

तभी उसने ऊपर से जोर से आवाज़ लगायी “मौसी, मंगलवार को दूसरा जागरण भी रखा हैं याद रखना, जरूर आना हैं”। मेरी सासु जी ने मुस्करा कर “हां याद हैं” जवाब दिया और फिर चल पड़े।

मैंने सासुजी को कहा की मम्मी आप मंगलवार के जागरण में अकेले जाओ तो मुझे भी ले जा सकते हो कंपनी देने के लिए। उन्होंने हां में सर हिलाया। मैं मन ही मन एक मुस्कान लिए उनके साथ अपने घर की तरफ चल पड़ी।

आखिर वो मंगलवार के दिन का सूरज उग आया, जिसका मुझे पिछले कुछ दिनों से इंतज़ार था। पर इंतज़ार अभी पुरा ख़त्म नहीं हुआ था। असल इंतज़ार तो आज रात के जागरण का था। मैं एक मीठी मुस्कान के साथ उठी और एक उत्साह के साथ रोज़मर्रा के कामों में लग गयी।

दोपहर को मैं रात की तैयारी में लग गयी, मैंने चेहरे पर उबटन लगाया ताकि मेरा चेहरा ओर खिल जाए। फिर अपने पुरे शरीर का वैक्सीन किया ताकि सारे अनचाहे बाल निकल कर त्वचा चिकनी हो जाये।

आज तो समय भी जैसे धीरे धीरे बीत रहा था। जब किसी का बेसब्री से इंतज़ार होता हैं तो समय ऐसे ही परीक्षा लेता हैं।

शाम का खाना खा लेने के तुरंत बाद ही मैंने सजना सवरना शुरू कर दिया था। जैसे किसी जागरण में नहीं किसी शादी में शिरकत करनी हो।

अभी एक घंटा बाकी था जाने में और मैंने अंदर से अपनी पसंदीदा गुलाबी साड़ी निकाली, फिर पहले ही बनाये प्लान के मुताबिक अंदर से वो महंगे वाले डिज़ाइनर अंतवस्त्र निकाले जो मेरे पति कुछ ख़ास मौको पर उन्हें रिझाने के लिए पहनने को कहते थे।

मैं क्या, कोई भी स्त्री उन खूबसूरत अंतवस्त्रों में बहुत कामुक और हसीन लगती। अब मैंने साड़ी पहन ली। फिर से मैं अपना मेकअप करने लगी। मैं सारी तैयारी ऐसे कर रही थी जैसे जागरण नहीं सुहागरात हो। ओरो के लिए वो जागरण था पर मेरे लिए तो सुहागरात ही थी।

एक बार फिर से सासु जी की चिर परिचित आवाज़ सुनाई दी, तैयार हो गयी क्या। इतनी तैयारियों में ध्यान ही नहीं रहा कि कब वो समय हो गया जिसका मुझे कब से इंतज़ार था।

वहां पहुंच कर मेरी नजरे लगातार मोहित को ढूंढ रही थी, जिसके लिए लिए मैंने आज सुबह से इतनी तैयारियां की थी। पर वो मुझे कही दिखाई नहीं दिया। तभी भाभियो ने अपने कक्ष में बुलाया। आज वहाँ इतनी भीड़ नहीं थी।

अब हम लोग आपस में बातें करने लगे। दोनों भाभियाँ कह रही थी कि आज उनके इस कमरे पर दूसरी औरतों का कब्जा होने वाला हैं। उनके कुछ ख़ास रिश्तेदार दूसरी औरतों से अलग उस छोटे कमरे में सोना चाहते थे।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#7
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
तभी सामने से मोहित ने इठलाते हुए कमरे में प्रवेश किया। मैं ऐसे शरमाई जैसे नई नवेली दुल्हन का पति आ गया हो। उसने अपनी पत्नी को बताया कि उन्होंने जो काम सौपा था वो करके आया हैं। फ़िर वो वापिस बाहर अपने दूसरे कामों के लिए चला गया।

भाभी ने बताया कि वो लोग इस भीड़ में नहीं सोयेंगे बल्कि छत पर सायेंगे। उनका पति उसी इंतज़ाम की बात कर रहा था। मुझे एक गहरा धक्का लगा, अगर यह सब भी ऊपर सोयेंगे तो मेरे अरमानो का क्या होगा।

मुझे अपनी दिनभर की सारी तैयारियां व्यर्थ होती नज़र आयी। मुझे मोहित पर भी बहुत गुस्सा आया, वो ये कैसे कर सकता हैं। क्या इसमें सिर्फ मेरा ही फायदा था, उसका भी तो फायदा था।

उन्होंने मुझसे आग्रह किया की मैं भी इस भीड़ में ना रहु और उनके साथ ही ऊपर सो जाऊ। उन्हें कैसे बताती कि मेरा उनसे भी पहले ऊपर सोने का ही प्लान था।

काफी देर बातें करने के बाद, दूसरी औरतें उस कमरे में आने लगी, तो हम लोग बाहर निकल आये। अब सबके सोने का समय हो चुका था। पिछली बार की तरह इस बार भी सुबह 5 बजे का मुहर्त था।

मैं, दोनों भाभियाँ और उनकी एक सहेली के पीछे पीछे छत पे जाने के लिए सीढिया चढ़ने लगे। तभी मोहित आ गया और मेरे पीछे चलने लगा। इस दौरान उसने बड़ी बेशर्मी से मेरे कमर को छुआ और मेरे पुट्ठो पर हाथ फेरता रहा।

मुझे ख़ुशी तो हो रही थी साथ ही साथ गुसा भी आ रहा था कि उसने मेरे साथ ये धोखा क्यों किया। वो कुछ ओर इंतज़ाम कर सकता था हम दोनों के लिए।

अब हम छत पर पहुंच गए, मोहित ने दरवाज़े पर कुण्डी लगा ली ताकि कोई ओर ना आ सके। वहा तीन मच्छरदानियाँ लगी थी तीन गद्दों के साथ।

बढ़ी भाभी अपनी सहेली जो शायद उनकी बहन थी के साथ एक गद्दे को हथिया लिया। छोटी भाभी जो मोहित की पत्नी भी थी ने मुझे अपने साथ सोने का निमंत्रण दिया।

मोहित ने पीछे से आँख से इशारा करते हुए हुए मुझे ना करने को कहा। मैं अब उसकी बात क्यों मानु? मैं वही करुँगी जो मैं चाहती हूँ। मैं कहना चाहती थी मेरी इच्छा आपके साथ सोने की नहीं बल्कि आपके पति के साथ हैं।

फिलहाल मैंने मना कर दिया, और कहा कि आप अपने पति के साथ सो जाइये, मैं आखिरी गद्दे पे अकेले सो जाउंगी। वो भी शायद यही चाहती थी।

वो लोग अब आपस में कुछ मजाक मस्ती की बातें कर रहे थे। सारे मजाक मोहित की तरफ से ही आ रहे थे और बाकी लोग सिर्फ हंस रहे थे। मैं मन ही मन कुढ़ रही थी इसको तो जैसे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ रहा था।

मैं चुपचाप अपनी किस्मत को कोस रही थी। मैं आसमान को निहारते हुए सोच रही थी कि पुरे दिन भर जो तैयारियां की थी वो सब व्यर्थ हो गयी थी। इतने दिनों के इंतजार का यह फल मिला मुझे।

मैने देखा वो अब उन लोगो को कुछ बाँट रहा था। पता चला हाजमे की गोलियां थी। गोली देते हुए वो मजाक में कह रहा था। मुझे उसके मजाक अब सजा लग रहे थे।

सबको गोली देने के बाद उसने मेरी तरफ भी एक गोली बढ़ा दी। मुझे लगा हाजमे की गोली नहीं बेवकूफ बनाने की गोली दे रहा था। मैंने गोली मुंह में रखी और चूसने लगी। सोचने लगी क्या में फिर नीचे चली जाऊ, अब यहाँ रुकने का क्या फायदा। थोड़ी देर के बाद सारी बातें शांत हो गयी थी। मैं भी अब पलट कर सो गयी और मेरी आँख लग गयी।

अचानक मेरी आँखें खुली, कोई मेरे गद्दे पर था और मुझे पीछे से चिपक कर सोया था। उसके हाथ मेरे वक्षो के ऊपर थे। क्या यह वो ही था, पर ये कैसे हो सकता हैं? इतने लोगो, खासकर अपनी पत्नी के वहाँ होते हुए उसकी ये हिम्मत नहीं हो सकती थी।

मैंने थोड़ा पलटकर देखा वही था। मैं तुरंत उठ बैठी और एक निगाह दूसरे गद्दों पर डाली, सब लोग गहरी नींद में थे। ना चाहते हुये भी मैंने इशारों में उसे समझाया कि वहाँ और भी लोग हैं और उसे वापिस अपनी पत्नी के पास जाना चाहिए।

वो एक शरारती मुस्कान के साथ मुझे नज़रअंदाज़ कर रहा था। अब मुझे खतरा महसूस हुआ, अपनी जिद से वो पिछली बार की सारी पोल खोल देगा।

उसने मुझे फिर से लेटा दिया और धीमे से कहने लगा वो लोग अब इतनी जल्दी नहीं उठेंगे। उसने बताया कि बाकियो के ऊपर छत पर सोने का कार्यक्रम दिन में ही बन गया था इसलिए उसने हाजमे की जगह नींद की गोलिया दी थी फ्लेवर वाली। हम दोनों ने जो गोली गयी वो बिना दवाई की थी।

मैं उसके तेज दिमाग की कायल हो गयी। वो बोला बाकि लोग अगले 3-5 घंटे तक नहीं उठेंगे, क्या मेरे लिए इतना वक़्त काफी हैं। मैंने शरमाते हुए कहाँ आपकी इच्छा हो तो सुबह तक भी कर सकते हैं। इतना सुनते ही उसने मेरे वक्षो को फिर से भींच लिया।

अब मुझे कही न कही यकीन हो गया कि मेरी श्रृंगार की मेहनत फ़ालतू नहीं जाएगी। उसने मेरी साड़ी ऊपर से हटा दी, और एक हाथ से ब्लाउज के हुक खोलने लगा। फिर मेरा ब्लाउज निकाल कर रख दिया। अब वह मेरा डिज़ाइनर ब्रा पर हाथ फिराते हुए मजे ले रहा था।

शायद उसको यह बहुत पसंद आया था। आता भी क्यों नहीं, उसकी डिज़ाइन और रंग ही इतना कामुक था किसी को भी ललचाने के लिए। उसे वो इतना पसंद आया कि उसे खोलने की कोशिश भी नहीं की।

अब उसके हाथ नीचे की और गए और मेरी साड़ी को पेटीकोट से अलग कर दिया। अब तो जैसे उसे महारत हासिल हो गयी थी। अब बारी मेरे पेटीकोट की थी।

उसने नाड़ा खोल कर पेटीकोट निचे खिसकाते हुए पैरो से निकाल दिया। अब वो मेरे नीचे के डिज़ाइनर अंतवस्त्र को घूर रहा था। मेरा पैतरा काम कर रहा था। उसने शायद ऐसे अंतवस्त्र पहले कभी नहीं देखे थे। वह उनपर हाथ फिराने लगा।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#8
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
मुझे लगा वो उन वस्त्रो को मेरे लेटने की वजह से सही ढंग से नहीं देख पा रहा होगा। मैं उठी और मूर्ति की तरह अलग अलग मुद्राये बनाती गयी और अपने बदन को उन अंतवस्त्रों के साथ नुमाइश करके उसको उत्तेजित करने लगी।

उसकी हंसी अब ओर चौड़ी हो गयी और जैसे लार टपकाने लगा। वह तुरंत मेरे समीप आया और घुटनो के बल बैठ गया। अब वो मेरे वेक्स किये हुए टांगो पर अपने हाथ फिराने लगा। मेरी चिकनी टांगो पर उसके हाथ फिसलते जा रहे थे। इन चिकने टांगो के स्पर्श से उसे मजा आने लगा।

मेरी नजर पास के गद्दों पर पड़ी, क्या नींद की दवाई बराबर असर करेगी, इनमे से कोई जाग गया और कुछ देख लिया तो मेरा क्या होगा। तभी उसके दोनों हाथ ऊपर आये और मेरे नीचे के डिज़ाइनर अंतवस्त्र को उतार कर अलग कर दिया। मेरे बिना बालों के नाजुक चिकने अंग को देख कर उसका प्यार उमड़ आया और उसे चूमने लगा।

मैंने भी तुरंत अपनी दोनों टांगो को एक दूसरे से दूर कर उसे थोड़ी ओर जगह दे दी। अब उसका चेहरा मेरे प्रवेश द्वार के नीचे था, उसने अपने होठों और जीभ से मेरे द्वार को चूमना और चाटना शुरू कर दिया।

मेरे शरीर में बिजली दौड़ पड़ी। मैंने अपना शरीर ओर ढीला छोड़ दिया। वह अपनी तीखी जबान से मेरे द्वार के भीतरी दीवारों को रगड़ने लगा। मेरी आहें निकलनी लगी।

कुछ देर इसी तरह वह मुझे आनंदित करता रहा और थोड़ी देर में ही मेरा पानी छूटने लगा। अब मैंने उसे अपने से दूर किया और उसके सामने बैठ गयी।

मैंने उसका टी-शर्ट निकाल दिया, पहली बार किसी पराये मर्द के कपडे खोले थे, शायद उससे बदला लिया मुझे दो बार निवस्त्र करने का। अब मैंने उसकी पैंट भी निकाल दी।

उसके अंतवस्त्र में मुझे उभरता हुआ लिंग दिखाई दिया। मैंने अब तक उसके दर्शन नहीं किये थे। मैंने बिना वक़्त गवाए उसके अंतवस्त्र निकाल दिए, उसका लिंग कुछ उछलते हुए बाहर आ गया, जैसे कब से बाहर आने को तड़प रहा था।

मैंने अपना सर आगे झुकाते हुए उसके लिंग को अपने मुँह में ले लिया। उसकी एक हलकी आह निकल पड़ी। अब मैं अपने होठो और जीभ को आगे पीछे करते हुए उसके लिंग पर रगड़ने लगी। वह सिसकिया मारते हुए आनंदित हुए जा रहा था।

कुछ मिनटों बाद मुझे अपने मुँह में उसके गर्म नमकीन पानी का टेस्ट आया। मुझे लगा वो पूरी तरह कठोर और तैयार हैं। मैंने उसका लिंग अपने मुँह से बाहर निकाला। उसके लिंग से मेरे छेद के बीच चिकने पानी की लारो के तार बन गए।

मैंने उसको धक्का देते हुए लेटा दिया और उस पर सवार हो गयी। मैंने एक बार फिर उसका लिंग हाथ में लिया और अपने शरीर को थोड़ा ऊपर उठाते हुए उसको अपने योनि के आस पास ऊपर नीचे की तरफ रगड़ने लगी।

उसका चिकना अंग फिसल फिसल कर अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। मैंने ज्यादा न तड़पाते हुए इस बार अपने प्रवेश द्वार में घुसा दिया। हम दोनों की एक साथ आहें निकल पड़ी।

अब मैं ऊपर नीचे होते हुए उस क्रीड़ा का आनंद लेने लगी। हम दोनों की सांसें तेज चल रही थी और उस सन्नाटे को चीरती हुई हमारी धीमी आहें थी।

उसने अपने बदन को एक हाथ के सहारे ऊपर उठाया और दूसरे हाथ से मेरे ब्रा का हुक खोल उतार दिया और फिर लेट गया। मेरे वक्ष अब मेरे ऊपर नीचे होने के साथ ही नाचते हुए उछल रहे थे। वह उन दोनों को बड़े ध्यान से देख रहा था।

मैंने उसके हाथों को उठाया और अपने वक्षो को पकड़ने को कहाँ। उसने वैसा ही किया और उनको मसलने लगा। थोड़ी देर बाद मैं झुकी और अपना सीना उसके सीने पर रख दिया। मेरे वक्ष अब दब चुके थे।

वह मेरे कमर पर हाथ फेरने लगा। मेरी गति थोड़ी धीमी हुई तो वह भी नीचे से झटके मारने लगा, जिससे उसका लिंग और भी गहरायी से मेरे अँदर जाने लगा।

मैंने अब अपने पाँव लम्बे कर दिए थे। हमारी आहें और भी तेजी से बढ़ने लगी। बीच बीच मैं हम एक दूसरे को होठों पर चुम्बन देते जा रहे थे।

काफी देर करने के बाद मैं थक कर रुक गयी मगर वह नीचे लेटा हुए भी झटके मार रहा था। उसने मुझे अब अपने ऊपर से हटने को कहा, मैं बिना काम पुरे हुए हटना नहीं चाहती थी पर मुझे पता था वो मेरा काम पूरा करेगा।

उसने मुझे दोनों हाथ के पंजो और घुटनो के बल बैठने को कहा डॉगी स्टाइल में। मेरे डॉगी बनते ही वो घुटनो के बल मेरे पीछे आया और एक झटके में अपना लिंग मेरे अंदर उतार दिया। तेजी से अंदर बाहर झटके मारता हुआ वो आवाज़े निकाल रहा था। वो इतना अंदर घुस गया की मेरी भी सिसकिया निकलने लगी।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#9
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
काफी देर करने के बाद मैं थक कर रुक गयी मगर वह नीचे लेटा हुए भी झटके मार रहा था। उसने मुझे अब अपने ऊपर से हटने को कहा, मैं बिना काम पुरे हुए हटना नहीं चाहती थी पर मुझे पता था वो मेरा काम पूरा करेगा।

उसने मुझे दोनों हाथ के पंजो और घुटनो के बल बैठने को कहा डॉगी स्टाइल में। मेरे डॉगी बनते ही वो घुटनो के बल मेरे पीछे आया और एक झटके में अपना लिंग मेरे अंदर उतार दिया। तेजी से अंदर बाहर झटके मारता हुआ वो आवाज़े निकाल रहा था। वो इतना अंदर घुस गया की मेरी भी सिसकिया निकलने लगी।

थोड़ी ही देर में हमको वही चिर परिचित पानी के छपकने की आवाज़े आने लगी। उसने अब अपनी एक टांग को फोल्ड करके पंजो के बल आ गया और दूसरी अभी भी घुटनो के बल थी।

इससे उसकी झटको की ताकत दुगुनी हो गयी थी जिससे मेरी योनी के अंदर की पहुंच और गहरी हो गयी। थोड़ी ही देर में मेरी योनी के अंदर घमासान शुरू हो चूका था। झील के पानी में जैसे तेजी से बार बार डंडा मारने पर जो आवाज़े आती हैं वैसी आवाज़े मेरे अंदर से आ रही थी।

अब मैं अपने चरम तक पहुंच रही थी, मैं उसका नाम बड़ी कामुकता से लिए जा रही थी, मैं यह भी भूल चुकी थी की उसकी पत्नी पास ही में सोई हुई थी।

मेरे उसका नाम लेने से उसका जोश ओर बढ़ गया था। झटके मारना जारी रखते हुए अपने एक हाथ से मेरा वक्ष दबोच लिया। मैं तो पूरा छूटने ही वाली थी की उसने फिर लिंग बाहर निकाल दिया। मुझे थोड़ा बुरा लगा।

उसने मुझे अब बिस्तर पर सीधा लेटाया और दोनों पाँव चौड़े कर दिए। वो मेरे ऊपर लेट गया। मैंने अपना हाथ नीचे किया और उसका लिंग पकड़ कर अपने अंदर कर दिया। उसकी मशीन एक बार फिर शुरू हो गयी। हम दोनों चरम प्राप्ति की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। मैंने अपनी दोनों टांगो को उठाते हुए उसकी कमर पर लपेट दिया।

वो मेरी अंदर की गहराइयों में डूबता हुआ कही खो गया था पर उसकी गति लगातार बढ़ती जा रही थी। यह संकेत था उसके चरम के नजदीक पहुंचने का। चरम प्राप्ति पर मेरे मुँह से कुछ ज्यादा ही जोर से निकल गया- ओ मोहित ! वो भी तेज आहें निकलते हुआ छूट गया, हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर झकड़ लिया। हम दोनों ऐसे ही निश्चेत पड़े रहे।

अब मैंने उठने की कोशिश की तो उसने फिर मुझे झकड़ लिया। मुझे भी यह पसंद आया। अब हम दोनों एक दूसरे से अलग नहीं होना चाहते थे। अभी तीन घंटो में कुछ समय बाकी था। उसका लिंग अब नरम पड़ कर अपने आप मेरे प्रवेश द्वार से बाहर आ गया था।

अब मैं उठी और अपने बिखरे हुए कपडे सँभालने लगी। मैं अपने नीचे के अंतवस्त्र को पहने लगी, उसने तुरंत मुझसे छीन कर उसे एक तरफ रख दिया और मुझे पीठ के बल लेटा कर अपने मुँह से मेरे निप्पल को चूसने लगा। मुझे मजा आने लगा।

वह अपना एक हाथ बराबर मेरे शरीर पर घुमा रहा था। बारी बारी से अब वो मुझे होठों पर चुम रहा था कभी निप्पल पर। मैं भी उसकी पीठ और पुठ्ठो पर अपने हाथों का प्यारा स्पर्श कर फिरा रही थी। हम कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे के शरीर का आनद लेते रहे।

अब काफी समय हो चूका था और हम नींद की दवाई के साथ और रिस्क नहीं लेना चाहते थे। मैंने खड़े होकर अपने दोनों अंतवस्त्र पहन लिए। वह कपडे पहन चूका था और मुझे फिर घूरने लगा। मैंने पूछा क्या करू, ऐसे ही रहु, उसने शरारत से सर हां में हिला लिया। थोड़ी ही देर में मैंने अपने सारे कपडे पहन लिए थे।

अब मैं फिर से पहले की भांति लेट गयी। वो अभी भी मेरे गद्दे पर ही था। मैंने उसे थोड़ा धक्का लगाते हुए उसके गद्दे की तरफ धकेला। उसने कहा काम निकल गया क्या? मेरी हंसी निकल गयी। मैंने उसका शर्ट गले से पकड़ा और अपनी और खिंच कर उसके होठों पर चुम्बन कर दिया।

हम कुछ सेकंड तक एक दूसरे के होठों का रस लेते रहे। अब मैं पूरी थक चुकी थी, मेरी उबासी निकली और वो मुझे छोड़ कर बाहर निकला और वापिस आकर अपनी पत्नी के साथ गद्दे पर सो गया।
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12-27-2021, 12:59 PM,
#10
RE: Antarvasnax मेरी कामुकता का सफ़र
कब आँख लगी पता ही नहीं चला, एक संतुष्टि की बहुत प्यारी नींद ली मैंने उस रात। सुबह पांच बजे कुछ आवाज़ के साथ मैं जागी। मोहित अपनी पत्नी को उठाने की कोशिश कर रहा था पर वो नींद की दवाई के असर से उठ ही नहीं रही थी।

उसने झकझोड़ते हुए उसको उठाया, फिर दोनों ने मिल कर बाकी के दोनों लोगो को भी उठाया। मैं भी तब उठ खड़ी हुई। अब हम सब नीचे पहुंचे जहां पूजा में सब अपने लिए कुछ मांग रहे थे। मुझे तो मेरा वर मिल चूका था जिसने मेरी सारी मांगे पूरी कर दी थी।

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मैं अपने पति अशोक के साथ रहने दूसरे शहर चली गयी। हमारी शादी को 2 साल हो चुके थे और ससुराल वाले और रिश्तेदारों ने दबाव डालना शुरू कर दिया कि बच्चा क्यों नहीं हो रहा। ऐसा नहीं था कि हम दोनों बच्चा नहीं चाहते थे, पर काफी कोशिशों के बाद भी कुछ हो नहीं पा रहा था।

हमने डॉक्टर से चेकअप करवाने का सोचा, उसके पहले हम दोनों ने वादा किया कि कमी दोनों में से किसी के भी निकले हम बाहर किसी को नहीं बताएँगे।

सारे टेस्ट के बाद डॉक्टर ने पति का स्पर्म काउंट कम बताया। पति ने इलाज शुरू करवा दिया और इस तरह एक दो साल और निकल गए। मेरी यह हिन्दी सेक्स कहानी इसी के बारे में है।

इस बीच लोगो ने मुझे ताने मारना शुरू कर दिया कि मैं बाँझ हूँ। मेरा तो जैसे जीना हराम हो गया था, पर वादे के अनुसार मैं किसी को बता नहीं सकती थी कि कमी पति में हैं।

हम दोनों ने बच्चा गोद लेने की भी सोची पर घर वालों से छिपा कर गोद लेना मुमकिन नहीं था। दूसरा विकल्प स्पर्म डोनेशन का था पर डर था कि पता नहीं किसका स्पर्म हो बच्चे की शक्ल या रंग पति से बिलकुल नहीं मिला तो लोगो को शक हो जायेगा। अब मैं तनावग्रस्त रहने लगी।

एक दिन सास ने फ़ोन पर बहुत खरी खोटी सुनाई और मैं रोने लगी। पति से मेरी हालत नहीं देखी गयी। मुझे सांत्वना देकर झिझकते हुए बोले कि मेरे पास एक उपाय हैं। हम किसी और व्यक्ति की मदद लेंगे तुम्हे प्रेग्नेंट करने के लिए।

मेरे मन में भी कुछ समय से ये विचार था पर पति के डर से बोलने की हिम्मत नहीं थी। फिर भी मैंने उनके प्रस्ताव पर ऐसे रिएक्ट किया जैसे कोई आघात लगा हो और मना कर दिया। पति ने यकीन दिलाया कि इस से बढ़िया उपाय नहीं हो सकता तो मैंने हां कर दी।

इस काम के लिए अगर हम किसी जान पहचान वाले को चुनते तो कल को वो हमे ब्लैकमेल कर सकता था या बच्चे पर हक़ जता सकता था। अगर अनजान को चुनते तो हो सकता हैं उसे कोई छीपी बीमारी हो। हमें ऐसा आदमी भी चुनना था जो दिखने में पति से बिलकुल विपरीत ना हो।

अंत में हमने निर्णय लिया कि किसी जान पहचान वाले को चुनेंगे जिसका मेडिकल बैकग्राउंड हमें अच्छे से पता हो। जहा तक ब्लैकमेल की बात हैं तो हमें कुछ ऐसा करना था जिससे उसको कभी ये पता नहीं चले कि होने वाला बच्चा उसका हैं और हमारा मकसद क्या हैं। वो भविष्य में मुझे मजबूर ना करे इसके लिए हमें कोई ऐसा जाल बुनना था कि सेक्स करने के बाद उसके मन में एक अपराधबोध रहे जिसकी वजह से वो इसका जिक्र किसी से न करे और इस काण्ड को भूल जाये।

हमने हमारी साजिश की रुपरेखा बना ली थी बस एक बकरे की तलाश थी। कुछ दिनों बाद मेरे पति शाम को घर पर बहुत ख़ुशी ख़ुशी लौटे और मुझे बताया की शिकार का इंतज़ाम हो गया हैं।

उनका कॉलेज का एक दोस्त नरेश जो दूसरे शहर में रहता हैं, वो हमारे शहर में कंपनी के काम से दो दिन बाद आने वाला हैं और उसका हमसे मिलने का भी प्लान हैं। पति ने उसको शाम के खाने पर भी बुला लिया हैं। उन्होंने उसका फोटो भी बताया, रंग रूप में मेरे पति से थोड़ा मिलता जुलता था।
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