Antarvasnax शीतल का समर्पण
07-19-2021, 11:29 AM,
#31
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
वसीम ने एक पल के लिए शीतल के होठों को छोड़ा और फिर से चूसने लगा। वो शीतल की जीभ को चूस रहा था। ये सब नया अनुभव था शीतल के लिए और उसका जिम पिघलता जा रहा था।

वसीम ने शीतल के होठों को छोड़ा और गाल गर्दन पे किस करता हुआ बोला- "हाँ शीतल... मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, चूमना चाहता हूँ, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ, मसलना चाहता हूँ, चाहता हूँ की वैसे चोदूं जैसे एक बडी को चोदा जाता है लेकिन कोई गलत नहीं करना चाहता.."

शीतल भरपर साथ दे रही थी वसीम का। उसने अपनी साड़ी की गाँठ को खोल दिया तो साड़ी नीचे गिर पड़ी। शीतल ने पेंटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और वा भी शीतल के कदमों में जा गिरी। 23 साल की शीतल अब पैटी और ब्लाउज़ में थी और 50 साल का वसीम सिर्फ गजी में।

शीतल- "तो देखिए ना, चूमिए, चूसिए, मसलिए, चोदिए मुझे। रंडी की तरह चोदना चाहते हैं तो रडी की तरह चोदिए। मैं आपके लिए रंडी बनने को भी तैयार हैं। आपसे बात करने के लिए और आपको दिखाने के लिए रंडी बनी ही तो घूमती हैं आजकल आपके आगे-पीछ... कहकर शीतल अपने ब्लाउज़ का हक खोलने लगी।

शीतल खुद से अपने कपड़े इसलिए उतार रही थी की वसीम को शमिंदगी का सामना ना करना पड़े। वसीम को ये ना लगे की उसने गलत किया है। शीतल बल्लाउज़ का हक खोल दी और अब उसकी बा चूचियों को कैद किए दिख रही थी। शीतल वसीम के लण्ड को हाथ में लेना चाहती थी लॉकन वो ऐसा कर नहीं पाई। उसे शर्म आ रही थी।

वसीम फिर से शीतल के होंठ चूम रहा था और शीतल के ब्लाउज़ और ब्रा को ऊपर उठा दिया और बाहर आ चुकी नंगी चूचियों को मसलने लगा। दोनों को करेंट जैसा लगा। वसीम कस के चूचियों को मसलने लगा।

शीतल आहह ... करती हुई वसीम के लण्ड को पकड़ ली- "उफफ्फ.. देखने में जितना बड़ा लगता है ये तो उससे बहुत बड़ा है। ये चूत में जा पाएगा क्या?"

वसीम ने शीतल को खड़े-खड़े ही गोद में उठा लिया और बैंड में गिरा दिया। शीतल बैंड पै सीधी लेट गई और वसीम ने भी अपनी गंजी को उतार दिया और शीतल के ऊपर लेट गया। वो शीतल की चूची चूसता हआ उसके गारे चिकने बदन को सहला रहा था। उसने शीतल के ब्रा के हक को खोल दिया और बाउज़ ब्रा को उतार दिया। शीतल अब ऊपर से नंगी थी। वसीम शीतल के पेट जाँघ को सहला रहा था और चूचियों को चस और मसल रहा था। वसीम ने शीतल की पैंटी को भी नीचे खींच लिया तो शीतल ने कमर उठाकर वसीम की हेल्प कर दी। शीतल की पैटी भी उतर गई और उसे भी वसीम ने नीचे फेंक दिया। शीतल और वसीम पूरी तरह नंगे थे और वसीम पीतल के दोनों पैरों के बीच ने बैठकर उसकी चिकनी रसीली चूत को चाट रहा था। वसीम दोनों हाथों से शीतल की चूत को फैला रहा था और जीभ को ऐद के अंदर डालकर चूस रहा था।

वसीम- "आहह.. मेरी रानी, क्या रसीली चूत है तेरी, क्या खुश्बू है, आह्ह... मजा आ जाएगा इसे चादकर मेरी चंडी."

शीतल को बहुत मजा आ रहा था। ये सब पहली बार हो रहा था उसके साथ। वो अपनी कमर उठाकर वसीम का चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी। वसीम की उंगली चूत के अंदर थी और उसने अपनी उंगली में गरम पानी की धार को महसूस किया। रंडी शीतल झड़ चुकी थी। शीतल हौंफ रही थी।

अब शीतल की बारी थी। वो उठी और वसीम को बेड पे लिटा दी और उसकी छाती का चूमती हुई पेट और जाँघ को सहलाने लगी। फिर शीतल ने वसीम के लण्ड को फिर से हाथ में ले लिया। अब वो लण्ड को देख भी रही थी और महला भी रही थी। वसीम के लण्ड के आगे विकास का लण्ड सच में बच्चा था। शीतल लण्ड में हाथ आगे पीछे कर रही थी और कटें हुए स्किन को और चमकते हुए सुपाड़े को देख रही थी।
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07-19-2021, 11:29 AM,
#32
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
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वसीम शांत सा लेटा हुआ था। उसकी चाल का अगला कदम आ गया था। लेकिन वो लालच में रुका हुआ था की शीतल उसके लण्ड को मुँह में लेगी।

शीतल ने सुपाड़े पे किस की तो उसे वही खाब आई, जिसकी वो दीवानी थी। शीतल उस खुश्ब को असरे से सूंघते हुए सुपाड़े पे जीभ लगाई और चाटी। शीतल को अपना मुँह बड़ा सा खोलना पड़ा और वो वसीम के मसल लण्ड के सुपाई को मुँह में लेकर चूसने लगी।

जितना मजा शीतल का आ रहा था, उससे ज्यादा मजा वसीम का आ रहा था। लेकिन अब वक्त आ गया था

शीतल को रोकने का। वसीम ने शीतल को खुद से अलग किया और खड़ा हो गया।

शीतल चकित सी उसे देखती रही की उससे कुछ गलती हो गई क्या?

वसीम ने अपनी लुंगी को लपेट लिया और गंजी पहनता हुआ शीतल को बोला- "शीतल तुम जाओ यहाँ से। ये गलत है और में ये नहीं कर सकता। अपने कपड़े पहनो और चली जाओं यहाँ से, प्लीज..."

शीतल अभी भी चकित ही थी- "क्या हआ वसीम चाचा। मुझसे कुछ गलती हो गई बया? पहली बार लण्ड चूस रही हैं, इसलिए ठीक से चूसना नहीं आया होगा। अब मैं ठीक में करेंगी। आइए वसीम दूसरी तरफ मुँह करके खड़ा था जैसे वो शीतल के नंगे बदन को देखना नहीं चाहता हो। उसकी तरफ बिना देखें हर वसीम बोला- "नहीं शीतल, तुम अच्छे से चूस रही थी। कोई गलती नहीं की तुमनें। लेकिन मैं गलत कर सकता। जितना मैंने किया उसके लिए मुझे माफ कर देना। तुम किसी और की अमानत हो। बीवी हो किसी और की। मैं दूसरे की बीवी के साथ छिपकर ऐसा नहीं कर सकता। ये बहुत बड़ा गुनाह है। तुम जाओ यहाँ से..."

शीतल चिड़चिड़ा गई की उसके जैसी खूबसूरत औरत उसके सामने खुद को पेश कर रही है और ये पागल इंसान मना कर रहा है। शीतल का नंगा जिस्म पूरी तरह गरम था और वो अपनी चूत में वसीम का लण्ड लेने का इंतेजार कर रही थी और ये पागल वसीम फिर से पुराने राग को गाने लगा था।

शीतल बैंड से उठकर वसीम की तरफ आगे बढ़ने लगी। लेकिन क्सीम ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया। वो शीतल की तरफ देख भी नहीं रहा था।

शीतल खड़ी हो गई और उसे समझने के अंदाज में बोली- "आप कुछ गलत नहीं कर रहे वसीम चाचा। मैं खुद आपके पास आई, आपके बदन में सटी, खुद अपने कपड़े उतारी। आपने कोई गलत काम नहीं किया। मैं किसी और की बीवी हैं तो क्या हआ, आपके लिए बस एक रंडी हैं। आप किसी और के बीबी को नहीं, एक रंडी के जिश्म को चूम रहे थे, आप बिकास की बीवी शीतल शर्मा को नहीं, अपनी शीतल रंडी को चाँदिए। इसमें कुछ गलत नहीं है। आपकी कोई गलती नहीं है."

शीतल का जवाब तो लाजवाब था लेकिन अभी वसीम शीतल को चोदने वाला नहीं था। अगर उसने अभी शीतल को चोद लिया तो इसका मतलब उसे छुप-छुपकर शीतल के जिश्म के मजे लेने होंगे। लेकिन वो तो शीतल को अपनी पालतू कुतिया बनाना चाहता था। और इसके लिए शीतल का प्यासी रहना ज़रूरी था।

वसीम बिना शीतल की तरफ देखें ही बोला- "तुम कुछ भी बोलो, लेकिन हम दोनों जानते हैं की ये गुनाह है। तुम अपने पति से छिपकर मेरे से चुदवाओगी तो वो भी गुनाह है। मैं तुम्हारे पति से छिपकर तुम्हें चोद्गा ये गुनाह है। इसलिए मुझे मेरे हाल में छोड़ दो और जाओ। अपने कपड़े पहन लो और मुझे माफ कर दो जो मैंने किया तुम्हारे साथ। ये मेरी गलती थी की मैंने तुम्हारी पटी बा को हाथ में लिया और तुम्हें सोच करके उसमे बीर्य गिराया। ये सच है की इस तरह मैं खुद को हल्का महसूस करता था, लेकिन ये मेरी गलती थी जो आगे से नहीं होगी। प्लीज तुम जाओ..."

शीतल फिर बोली- "एक जवान औरत को नंगी करके प्यासी छोड़ देना भी गुनाह है। अब आपको मुझे चोदना ही होगा..."

वसीम ने कहा- "मुझसे गलती हुई, मुझे माफ कर दो, लेकिन अब मुझसे और गुनाह मत करवाओ.."

शीतल समझ रही थी की वसीम की नजर में ये गलत है, पाप है। उसने खुद पे काबू पा लिया है। अब वो और तड़पेगा। इतना कुछ कर लेने के बाद वो बिना चोदे मुझे यहाँ से भेज तो देगा, लेकिन फिर पागल हो जाएगा। शीतल फिर कुछ बोलने जा रही थी लेकिन वसीम ने उसे मना कर दिया। शीतल जैसी सुंदरी पा समर्पण के
साथ नंगी खड़ी थी, लेकिन वसीम उसे मना कर रहा था। ये बीम की महानता थी शीतल की नजरों में। लेकिन वसीम के लिए ये एक चाल थी। बड़े फायदे के लिए छोटे नुकसान टाइप का।
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07-19-2021, 12:10 PM,
#33
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल बोली- "देख लीजिए वसीम चाचा, ये सब मेरी सुहागन होने की निशानियां हैं और सब आपके वीर्य से सनी हुई हैं। मेरी माँग में आपका वीर्य है। मैंने आपका वीर्य लगा मंगलसूत्र पहना हआ है। तो अब आप भी मेरे पति हए। सुबह जब आपने बाथरूम के पास अपना वीर्य गिराया था, तब अंजाने में मेरा मंगलसूत्र उसमें भीग गया था। अभी में जानबूझ कर आपके वीर्य को हर जगह लगा ली। अब आप मुझे रंडी समझकर चादिए या बीवी समझकर या रखेल समझकर। लेकिन अब मैं आपको ऐसे नहीं छोड़ सकती। अब मैं आपको तड़पने नहीं दूँगी."

शीतल खड़ी हो गई और अपने पैटी बा ब्लाउज़ पेटीकोट को हाथ में ले ली और साड़ी को बस एक बार लपेट कर तेजी से चलती हुई सीढ़ी से नीचे उतर गई और अपने गम में आ गई। उसने दरवाजा बंद कर लिया और साड़ी को उतारकर फेंक दी और सोफे पे निढाल होकर लेट गई।

शीतल सोच रही थी- "अब तो मैं आपसे चुदवाकर ही रहंगी वसीम चाचा। मैं किसी और की हैं, इसलिए आपको गुनाह लगा ना। अब आपकी तड़प और बढ़ जाएगी और अब आप खुद का और रोकगे और अंदर ही अंदर तड़पेंगे। लेकिन मेरी भी जिद है की मैं आपका और नहीं तड़पने दूँगी। जब मैं इतना कुछ की तो और भी बहुत कुछ करेंगी।

शीतल बहुत गुस्से में भी थी और चिड़चिड़ाहट में भी थी। उसे ये उम्मीद नहीं थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था की ऐसा होगा। कहीं तो वो सोची थी की धीरे-धीरे बात करके वसीम को हल्का करने की कोशिश करेंगी, जिष्म दिखाना और फिर खुद को पेश करना तो आखिरी हथियार होगा, और शीतल इसके लिए भी तैयार होकर गई थी। लेकिन उसका ये बम्हास्त्र भी बैंकार हो गया वसीम प? अजीब पागल इंसान हैं। अपनी ही घुटन में मार जाएगा ये। क्या-क्या नहीं की मैं? खुद अपने कपड़े खोली, खुद को पेश कर दी, खुद को रंडी भी बोली। फिर भी असर नहीं हुआ उनपे। यहाँ तो लोग मौका टूटते हैं बात करने का और ये इंसान महानता की मूर्ति बना बैठा है?

शीतल बहुत बुरा महसूस कर रही थी। उसे लग रहा था की जिसके लिए मैं इतना कुछ कर दी, वो मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा। में खुद को रंडी बना ली। वसीम चाचा का लग रहा होगा की में सच में रंडी टाइप की गिरी हुई औरत हैं जो उनपे डोरे डाल रही है। ये शीतल का अपमान था। उसके रूप का उसके हश्न का अपमान था। शीतल ऐसी औरत थी जो अगर किसी को देखकर अच्छे से मुश्का दे तो उसका लण्ड पानी छोड़ दें, और यहाँ नंगी होने के बाद भी किसी ने उसे ठुकरा दिया था। अब शीतल को जिंद हो गई थी वसीम की। अब उसे वसीम से चुदवाना ही था।

शीतल के जाने के बाद वसीम ने दरवाजा बंद कर लिया और बैंड पर लेटकर आराम करने लगा। अभी बहुत तकलीफ में था वो। शीतल जैसी अप्सरा को बिना चोदे वापस भेजना बहुत दिलेरी का कम था। उसे अफसोस भी हो रहा था की चोदता नहीं मैं, लेकिन कुछ देर और तो मजे लेता उसके हश्न का। फिर उसके दिमाग में उसे समझाया की फिर खुद को रोक नहीं पता मैं। और मजा तो मुझे उसकी पूरी जवानी का लेना है। दो दिन भी नहीं रह पाएगी और फिर आएगी अपना नशीला बदन लेकर। अब वो मन से मेरी रांड हैं। मेरे लिए वो कुछ भी कर सकती है। सिर्फ मझें पं ध्यान रखना है की वो लोग घर खाली ना करें। हालौकी जाते वक़्त जो शीतल बोलकर गई तो अब तो नहीं हो जाएगी। आह्ह.... क्या रसीली चूत है साली की। कितना मजा आएगा उसे चोदने में? उम्म्म्म ।

शीतल अपने ख्यालों में खोई थी की उसका फोन बजा। उसकी बहन संजना का काल था की वो कल आ रही है एक हफ्ते के लिए। शीतल चिड़चिड़ाई हई थी तो वो ठीक से बात भी नहीं की और उसे आने से मना भी कर दी। वो नहीं चाहती थी की अभी कोई भी उसे वसीम से चुदवाने में डिस्टर्ब करे।

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थोड़ी देर बाद वसीम के जाने की आहट हुई। शीतल भी अपने ख्यालों से बाहर निकली और रूम में जाकर खुद को आईने में देखने लगी। उसके बाल बिखरे हुए थे और माँग में लगे वीर्य की वजह से सिंदूर पूरा फैला हुआ था। शीतल बाथरूम में जाकर नहा ली और फ्रेश हो ली। उसे अब आगे की तैयारी करनी थी। नहाने के बाद शीतल टाप और शार्टस में थी। वो कोई पैंटी बा नहीं पहनी थी।

विकास आया तो पूछा भी, तो वो बोली "गर्मी की वजह से नहीं पहनी हैं.."

शीतल की हिलती चूची को टाप के ऊपर से देखकर विकास का लण्ड टाइट हो गया था। उसे लगा था की शीतल वसीम के लिए ही बिना ब्रा के होगी और आज दोपहर में शीतल वसीम से चुदवा चुकी है, और तभी इस तरह रंडी बनी घूम रही है। शीतल की वसीम के साथ चुदाई की बात सोचकर ही विकास टाइट हो जाता था।

रात में सोते वक़्त विकास शीतल को सहलाने लगा और पहले टाप के ऊपर से उसकी चूचियों को मसला और फिर टाप को उठाकर चचियों को मसलने चूसने लगा। शीतल उसे बिल्कुल मना नहीं की। विकास ने शीतल के टाप को उतार दिया और फिर शार्टस को भी उतारकर शीतल के चमकते जिश्म को चमने सहलाने लगा। विकास ने अपने कपड़े भी उतार दिए और नंगा होकर शीतल के बदन से चिपक गया।

शीतल विकास का साथ नहीं दे रही थी लेकिन उसे मना भी नहीं कर रही थी। विकास परा मह में था। उसने शीतल की चुदाई स्टार्ट कर दी और दो-तीन मिनट में अपने वीर्य को शीतल की चूत में डालकर हॉफने लगा। वो शीतल के ऊपर ही लेटा हुआ था। अब विकास बगल में लेट गया। दोनों नंगे ही थे।

शीतल अब विकास की तरफ घूम गई। उसे विकास से बड़ी बात करनी थी तो उसके पहले उसे खुश करना जरूरी था। विकास जब चोद रहा था तो शीतल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो बस ऐसे लेटी थी की विकास अपना काम कर ले फिर वो अपना काम करेंगी।

शीतल बड़े प्यार से विकास के गाल पे हाथ रखकर बोली- "एक बात पुछु विकास?"
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07-19-2021, 12:11 PM,
#34
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
विकास- "पूछो..."

शीतल- "जो जो पलंगी उसका जवाब देना। सवाल मत करना प्लीज..."

विकास- "पूछो..."

शीतल- "कितना प्यार करते हो मुझसै?"

विकास- "ये कैसा सवाल हुआ जान? बहुत, बेतहा.."

शीतल- "अगर मैं तुमसे दूर हो जाऊँ तो.."

विकास- "ये कैसी बात कर रही है पागल। मैं तुम्हें दूर होने ही नहीं दूंगा.."

शीतल- "अगर मुझे कुछ हो गया तो तुम क्या करोगे?"

विकास- "क्या पागलों जैसी बातें कर रही हो, हुआ क्या है तुम्हें?"

शीतल- "जो पूछी वो बताओ ना, पलीज..."

विकास- "मैं पागल हो जाऊँगा, मर जाऊँगा। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता जान."

शीतल- "अगर तुम्हें मुझसे दूर होकर रहना पड़े तो कैसे रहोगे?"

विकास- "ये क्या हुआ है तुम्हें?"

शीतल विकास से चिपक गई- "प्लीज जवाब दो ना..."

औरत का नंगा जिस्म मर्द पै असर करता है। भले ही शीतल विकास की बीवी थी। लेकिन उसके विकास से चिपकते ही विकास इमोशनल हो गया था शीतल के लिए। सिर्फ वसीम पे असर नहीं पड़ा था शीतल के नंगे जिस्म का।

विकास- "पागलों की तरह रहूँगा। दुनिया से बेखबर।

शीतल- "और ऐसे में बहुत साल बीत जाने के बाद किसी तरह तुम खुद को सम्हाल चुके होते हो, और काई मेरे में भी खूबसूरत लड़की अपने पति के साथ तुम्हारे आस-पास आती है, उसे देखकर तुम्हें मेरी याद दिलाती है, तो क्या करोगे?"

विकास को कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

शीतल फिर से पूछी- "बोलो ना क्या करोगे?"

विकास- "कुछ नहीं करेगा। करेगा क्या, उनसे दूर रहने की कोशिश करूँगा..."

शीतल- "अगर दूर नहीं रह पाए। वो आस-पास ही रही तो। क्या उस लड़की से मेल मिलाप बढ़ाओगे?"

विकास- "कभी नहीं। मैं उनकी दुनियां क्यों बर्बाद करूगा? अपनी तरफ से भरपूर कोशिश करूगा की उनसे दूर रह, और अगर नहीं रह पाया तो खुद को मिटा लेंगा..."

शीतल की आँखों में संतोष के भाव आ गये। वो फिर से विकास के गाल पे हाथ रखी और बोली- "यही चीज वसीम चाचा कर रहे हैं। वो पहले से ही अकेलेपन की वजह से अंदर ही अंदर घुट रहे थे, हमारे आने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वो खुद को रोकने की कोशिश में खुद को मिटा रहे हैं...

विकास अच्छे से बैठ गया- "मतलब?"

शीतल भी बैठती हुई बोली- "वो बहुत समय में अकेले हैं। अब इतनं सालों के बाद में इस घर में आती हैं। इस शांत घर में रौनक छा जाती है। मेरी हँसी मेरी आवाज सब उन्हें पुराने दिनों में ले जाते हैं। मुझे में सब कुछ पता नहीं, मैं हमेशा जैसे रही वैसे ही रही। इन सब बातों से अंजान की मेरे माइर्न कपड़े, मेरी खिलखिलाहट किसी की जान ले सकते हैं। दिन-ब-दिन उनके लिए खुद को सम्हालना मुश्किल होता जाता है.'

विकास बड़े ध्यान से शीतल की बात सुन रहा था। वो सोचने लगा की "ता तुम चुदवा ली उससे। ये तो मैं जानता ही था। तेरी चूत की खुजली दिख रही थी मुझे। अरें डी, मर्द तो लण्ड हाथ में लेकर तैपार ही रहते हैं, जहाँ मस्त चूत मिले चोदने के लिए तैयार। अब मुझे क्यों बता रही है?" और विकास का लण्ड टाइट हो रहा था ये सब सोचकर। वो ऐसे बैठा की उसका लण्ड शीतल को ना दिखें।

विकास ने पूछा- "फिर? आगे बता अब की तू कैसे उसके लण्ड को अपनी चूत में ली?"

शीतल बोलना स्टार्ट को- "उन्होंने भी हमसे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके लिए बहुत मुश्किल हो रहा था अब। मुझे देखकर उनके मन के अरमान जाग गये थे, लेकिन वो नहीं चाहते की उनकी वजह से हमें कोई परेशानी हो। फिर ये बात मुझे पता चली तो मैंने कोशिश की की उनसे बातें करी, शायद उन्हें ठीक लगे, थोड़ी राहत मिले। लेकिन वो इंसान इतना महान है की मेरी लाख कोशिशों के बावजद मेरी और देखता तक नहीं। तुमने शायद नोटिस भी किया होगा की मैं हाट कपड़े पहनी तो भी, अकेले में उनके सामने गई तो भी, वो देखते भी नहीं मेरी और तो बातें क्या करेंगे? मुझे लगा भी की मैं ऐसे कपड़े पहन रही हैं या उनसे जबरदस्ती बात करने की कोशिश कर रही हैं तो कहीं वही या तुम ही मुझे गलत ना समझ लो। फिर भी मैं ऐसा की की जो भी होगा देखा जाएगा, लेकिन उनकी मदद तो हो जाएगी। लेकिन उन्हें लगता है की वो मेरे जितने करीब आएंगें उनके लिए खुद को रोकना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए वो मुझसे और दूर रहते हैं। लेकिन मैं उनकी तड़प को देख सकती हैं, महसूस कर सकती हैं..."

विकास को शीतल की बात सुनकर बद पे बुरा लगा की वो अपनी बीवी के बारे में क्या-क्या सोचने लगा था।
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07-19-2021, 12:12 PM,
#35
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल फिर बोलना स्टार्ट की- "वसीम चाचा सच में बहुत महान हैं। कहीं तुम भी मुझे गलत मत समझ लो, लेकिन जब में उनसे पूछी की आप मुझसे बात क्यों नहीं करते, करते तो शायद आपको राहत मिलती."

वसीम चाचा बोले- "तुमसे दूर रहता हूँ तब तो इतना मुश्किल है जीना, अगर बातें करी या देखू तो शायद खुद को रोक ना पाऊँ और तुम्हें पकड़ ही लें...
मैं बोली भी की. "ता पकड़ लेते..."

वसीम चाचा बोले- "मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता.."

विकास सोचने लगा की शीतल सही कह रही है। ये तो मैंने खुद देखा है की शीतल की कोशिशों के बाद भी वसीम चाचा उसकी तरफ देखते भी नहीं थे। मेरी बीवी होने के बावजद मेरी आँखें फटी रह जाती थी, लेकिन वो नहीं देखते थे। मैं भी कितना पागल हैं जो क्या-क्या सोचने लगा था। ओहह... शीतल तुम कितनी अच्छी हो।

आई लोव यू। खामखा मैं तुमपे शक कर रहा था और बुरा सोच रहा था। तुम तो किसी की मदद कर रही थी?

फिर विकास ने शीतल से पूछा- "तो अब... अब क्या चाहती हो तुम?"

शीतल- "मैं उनकी मदद करना चाहती हैं। ये सब मेरी वजह से हुआ है। या ता कहीं और घर ले लो, जिससे हम उनसे दूर हो जाएं तो फिर उन्हें ठीक लगेगा या जैसा भी लगेगा मेरे सामने तो नहीं होगा। और नहीं तो फिर कुछ ऐसा करो की हम उनकी मदद कर पाएं। मैं किसी भी तरह उनकी मदद करना चाहती हैं। मैं नहीं चाहती
की कोई मेरी वजह से तड़पता रहे.." कहकर शीतल विकास की गोद में जा गिरी और उसके कंधे पे सिर रख दी।

विकास शीतल को सहलाता हुआ बोला- "इतनी जल्दी घर टूटना आसान नहीं है। और वैसे भी अगर तुमनें उनकी साई तमन्नाओं को जगाया है तो तुम्हारे दूर जाने से भी वा कम नहीं होगा। हाँ ये अलग बात है की तुम्हारी नजरों के सामने नहीं होगा। अब ये बताओं की किस तरह उनकी मदद करना चाहती हो?"

शीतल- "किसी भी तरह। मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से कोई इंसान तड़प..."

क्या लगता है की तमसे बात कर लेने से उनकी घटन कम हो जाएगी? जान तमने उनकी बीवी की यादों को जगाया है। सही कहा है उन्होंने, बात करने के बाद उनके अरमान और जागेंगे। उनके लिए खुद को गोकना और मुश्किल हो जाएगा.."

शीतल- "तो में कुछ भी करूंगी लेकिन उन्हें घुट-घुटकर जीने नहीं दूँगी.."
विकास ने शीतल के सिर को कंधे से उठाया और उसकी आँखों में झाँकता हुआ बोला- "तो फिर एक ही उपाय है। तुम्हें अपना जिश्म उसे सौपना होगा। वसीम चाचा के साथ सेक्स करना होगा.." और बोलते-बोलते विकास का लण्ड टाइट हो गया।

शीतल कुछ नहीं बोली। मन ही मन वो सोची- "बाकी सारे उपाय करके मैं देख चुकी हैं और यही आखिरी उपाय है की मैं वसीम चाचा से चुदवाऊँ। वो मेरे जिस्म को चंडी की तरह रौंद डाले, मसल डालें, मैं तैयार हैं इसके लिए। लेकिन उस देवता समान महान इंसान को तुम्हारी मंजूरी चाहिए। अगर हर इंसान उनकी तरह खुद पे काबू पाना सिख जाए तो ये नियां स्वर्ग बन जाए?"

विकास फिर बोला "बोलो, यही एकलौता उपाय है की तुम उससे उसकी मर्जी के हिसाब से चुदवा लो। तभी वो राहत महसूस कर पाएगा..."

शीतल थोड़ी देर चुप रही फिर बोली- "मैं क्या करेंग। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा। अगर उन्हें कुछ हो गया या कुछ कर लिया तो ये पूरी तरह से मेरा गुनाह होगा.."

विकास भी थोड़ी देर चुप रहा। उसका लण्ड टाइट होने लगा। वो एक लम्बी सांस लिया और बोला- "अगर तुम उसे अपना जिस्म सौंपने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ हैं। मुझे अपनी बीबी पे भरोसा है। अगर तुम्हारे चुदवा लेने से वसीम चाचा जैसा महान इंसान अपनी जिंदगी फिर से जी सकता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं। मुझे खुशी है की तुम अपना तन देकर भी किसी की मदद करना चाह रही हो। तुम मेरी पमिशन से ये कर रही हो ता में हर कदम पें तुम्हारे साथ हूँ.."

शीतल खुश होती हई विकास के माथे को चूम ली- "क्या सच? मुझे पता था आप मेरा यकीन करेंगे। आप समझेंगे मुझे। ये बहुत बड़ी बात है विकास। आप भी बहुत महान हैं..."

विकास ने भी शीतल के माथे पे किस किया, और बोला- "महान मैं नहीं तुम हो। तुम अगर मुझे बिना बताए वसीम चाचा से चुदवा लेती तो मुझे तो पता भी नहीं चलता कुछ। लेकिन तुमने मुझसे सलाह ली, में पमिशन ली ये बड़ी बात है..."

शीतल बोली- "मैं तो ये सोच रही थी की अगर मैं किसी इंसान को एक बार खुद को दे दं, और इससे उसकी जिंदगी बदल जाए तो मुझे में करना चाहिए। अगर मैं अपना जिशम देकर उनकी खोई खुशियां वापस ला पाऊँ तो मुझे खुशी होगी.."

विकास साचने लगा की- "अगर ये बिना मुझे बताए वसीम से चुदवा लेती ता में क्या करता? मैं तो सोच भी
चुका था की दोनों खूब चुद रहे होंगे। तो अब मेरी 23 साल की जवान खूबसूरत हिंदू बीवी 50 साल के बूढ़े मोटे काले से चुदगी.."

शीतल बेड से उत्तरकर बाथरूम जा चुकी थी और विकास अपने टाइट लण्ड को सहलाने लगा था। अब भला विकास को कौन समझाए की शीतल गई तो भी बिना उसके पमिशन के ही चुदबाने। और चुद भी गई होती अगर वसीम ने बड़े शिकार के लिए छोटी कुर्बानी ना दी होती तो।

शीतल बाथरूम में सोचने लगी की- "अब कहाँ बचकर जाओगे वसीम चाचा। अब तो आपको मुझे चोदना ही होगा। बहुत वीर्य बहाया है आपने मेरी पैंटी ब्रा पे, अब तो मेरी चूत में बहाना ही होगा?"

शीतल बाथरूम से आई और नंगी ही सोने लगी। उसकी चूत में चीटियां चल रही थी। विकास ने उसे चोदकर उसकी प्यास को और बढ़ा दिया था। लेकिन विकास में चुदवाना उसकी मजबूरी थी, नहीं तो विकास से वो वसीम से चुदवाने की पर्मिशन नहीं ले पाती। अपने पति को इस बात के लिए मनाना की में किसी और मर्द से चुदवाना चाहती हैं, मामूली काम नहीं था। लेकिन में वसीम के वीर्य का जादू ही था जो शीतल इस काम को भी कर ली। अब शीतल अपने पति की पमिशन लेकर वसीम से चुदवाने बाली थी।

शीतल सोच रही थी- अब तो वसीम चाचा मना नहीं कर पाएंगे। हाय मेरा तो मन कर रहा है की मैं अभी ही इसी तरह उनके रूम में चली जाऊँ। वो तो मुझे नंगी देखते ही बिफर पड़ेंगे और जाने को कहेंगे। फिर मैं हँसती हुई विकास को आवाज दूँगी और विकास कहेगा की वसीम चाचा आप मेरी बीवी को चोदिए। अब ये मेरी बीवी नहीं आपकी रंडी है। फिर मैं वसीम चाचा से लिपट जाऊँगी और तब तो वो मुझे चोदेंगे ही। उफफ्फ... अब उनका बड़ा सा लण्ड मेरी चूत में जाएगा। आह्ह... वसीम चाचा, फाड़ डालना मेरी चूत को अपने मसल लण्ड में। रौद्ध डालना मुझे, कोई रहम मत करना आपनी रंडी पे। जो जो करना हो सब करना। कोई अरमान बाकी मत रखना... शीतल सोचती जा रही थी और उसकी चूत गीली हो गई थी।

शीतल फिर से बाथरूम गई और अच्छे से बैठकर चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगी। उसका जिश्म जल रहा था। शीतल अपनी चूत से पानी निकाल ली। वो थोड़ी देर वहीं बैठी रही। फिर साम नार्मल हाने पे बेड पे आई।

लेटे-लेटे वो सोचने लगी की. "यं क्या हो गया है मुझे? क्या मैं वसीम चाचा से चुदवाने के लिए परेशान हैं। मैं तो उनकी पोशानी देखकर उनकी मदद करना चाहती थी। लेकिन ये क्या हो गया है मुझे जो में चुदबाने के लिए परेशान हो रही हैं। क्या सच में मैं रंडी बन गई हैं। हो, तभी तो में ऐसे कर रही हैं। किसी की मदद के लिए कोई रूपया पैसा देता है, या और कुछ करता है, लेकिन रंडी बनकर चुदवाने नहीं लगता।
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07-19-2021, 12:12 PM,
#36
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
मैं वसीम चाचा का वीर्य सूंघकर और उनका मोटा लण्ड देखकर पागल हो गई हैं। जब से उनका लण्ड देखी हैं तो या तो बिकास से चुदी ही नहीं और अगर चुदी तो मजा बिल्कुल नहीं आया। अगर मुझे चुदवाना नहीं था तो फिर मैं क्यों पागल थी वसीम चाचा को अपना जिश्म दिखाने के लिए? क्यों मैं उनसे चिपट गई और खुद अपने कपड़े उतारी। उसके बाद भी जब उस महान इंसान में नहीं चोदा, तो उनसे चुदवाने के लिये उन्हें कैसे-कैसे समझा रही थी। खुद को रंडी तक साबित कर ली? शीतल का सच उसके सामने आ गया था। इतने दिनों से वो खुद से झूठ कहे जा रही थी।

लेकिन अब जब वसीम से चुदवाने के रास्ता पूरा क्लियर है तो उसके अच्छे मन ने आखिरी आवाज लगाई है उसे "छीः मैं कितनी गंदी जो गई हैं। मैं अपने पति से धोखा करने चली गई थी। निग्लज्ज की तरह खुद को रंडी बनाकर वसीम चाचा के आस-पास मंडरा रही थी की किसी तरह वा मुझे चोद दे। भला हो उस इंसान का की उसने मुझे नहीं चोदा, नहीं तो मैं कहीं की नहीं रहती। उफफ्फ... मैं अपने पति तक को मना ली अपनी ही चदाई किसी और से करवाने के लिए। और विकास को भी तो मना करना चाहिए था। औह विकास सच में आप कितने महान हैं जो अपनी घटिया बीवी में इतना भरोसा करते हैं की उसे किसी और से चुदवाने की भी पमिशन दे दिए। नहीं विकास आपसे पमिशन लेना मेंरी मजबूरी थी, नहीं तो अगर वसीम चाचा ऐसा नहीं करते तो मैं तो उनसे चुद भी चुकी होती। मुझं तो खुद पे घिन्न आ रही है की मैं किसी और से चुदवाने के लिए क्या-क्या कर रही
हैं?"

शीतल पूरी तरह से बैचैन हो गई- "नहीं, मैं ये नहीं कर सकती। शुक है भगवान की मैं अभी तक चुदी नहीं हैं। मेरे लिए गैर-मर्द के बारे में सोचना भी पाप है और मैं यहाँ गैर-मर्द से चुदवाने के लिए इतने जतन कर रही थी। लेकिन अब मुझं खुद को सम्हालना होगा। मैं चुदवा नहीं सकती किसी और से। वसीम चाचा का जो होना है वो हो। मदद करने का मतलब जिस्म सौपना नहीं होता। मैं उनसे बात कर सकती हैं, उन्हें समझा सकती हैं, लेकिन और कुछ नहीं कर सकती। शुक्रिया भगवान जी की आपने मुझे सम्हाल लिया। बचा लिया मुझे अपवित्र होने से..." और शीतल साचते-सोचते सो गईं।

आज विकास की नींद सकें खुल गईं। दरअसल वो रात में चैन से सो ही नहीं पाया था। वो शीतल और वसीम के बारे में अक्सर बहुत कुछ सोचता रहता था और जब भी सोचता था उसे बहुत मजा आता था। और अब तो उसकी उत्तेजना का ठिकाना नहीं था की उसकी 23 साल की बीवी 50 साल के मर्द से चुदेगी।

शीतल अभी तक जंगी ही सो रही थी। विकास उसके चिकने जिश्म को गौर से देखने लगा और सोचने लगा की वसीम कैसे-कैसे क्या करेगा? उफफ्फ... वसीम चाचा तो पागल जो जाएंगे मेरी बीवी को पाकर। कितना रोमांचक होगा जब गौरी शीतल और काला वसीम एक दूसरे में लिपटै चिपतें चुदाई कर रहे होंगे। उफफ्फ.. मुझे कुछ करना होगा ताकी में इस चुदाई का लाइव देख सकूँ। मुझे पता होना चाहिए की ये लोग कहाँ चुदाई करेंगे और कब? उफफ्फ... जिस चीज के बारे में सोचकर मेरा लण्ड टाइट हो जाता था वो अब सच में होने वाला है। मैं इसे मिस नहीं कर सकता।

विकास बाथरूम से फ्रेश होकर आया। तब तक शीतल भी जाग चुकी थी। वो खुद का ऐसे नंगी पाकर शर्मा गई।

वो जब जागती थी तब विकास सोया रहता था, तो कोई बात नहीं थी, लेकिन विकास को जगा हआ पाकर वो शर्मा गई और जल्दी से उठकर अपनी नाइटी पहन ली।

शीतल अपने डेली रुटीन में लग गई। बिकास को जगा देखकर वो परेशान हो रही थी की कहीं विकास इसलिए तो नहीं जाग गयें की मैं आज वसीम चाचा के साथ चुदवाने वाली हैं? और ये बात उन्हें परेशान कर रही होगी। विकास मुझसे बहुत प्यार करते हैं इसलिए मेरे कहने पे पमिशन तो दे दी, लेकिन इस बात को बर्दस्त नहीं कर पा रहे होंगे और परेशान होंगे। अपनी बीवी को किसी और के पास चुदवाने के लिए भेजना मामूली बात है क्या? ये अलग बात है की उन्होंने मुझे आज तक कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया, कभी कोई बंदिश नहीं लगाई मरे पे, फिर भी किसी और में चुदवाने की पमिशन देना तो बहुत बड़ी बात है। नहीं विकास, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपकी बीवी आप ही की रहेगी, किसी और की रंडी नहीं बनेंगी। मैं उनसे चुदवाने नहीं जा रही। और चुदवाने तो क्या मैं उनके आस-पास भी नहीं जाने वाली। आप जल्दी से कोई दूसरा घर देख लीजिए और हम यहाँ से दूर होकर सुकून से अपनी दुनियां में जियेंगे।

शीतल नहाने के बाद पजा करने लगी और वहाँ भी उसने भगवान का शुक्रिया अदा किया की "आपने मुझे बचा लिया प्रभु, मुझे सच्ची राह दिखाना, मुझे और मेरे पति को एक साथ रखना और हमेशा खुश रखना..."

विकास शीतल के लिए चाय लिए तैयार था।

शीतल विकास के हाथ से चाय लेते ही बोल दी की. "मैं वसीम चाचा से नहीं चुदवाऊँगी.."
-
विकास के तो सारे सपने टूटकर बिखर गये, और कहा- "क्यों, अचानक क्या हो गया?" विकास खुद को नार्मल दिखाते हुए ही बोला।

शीतल. "कुछ नहीं, लेकिन मैं उनके पास नहीं जाने वाली... शीतल ने मजबूती से अपना जवाब सुना दिया।

विकास. "रात में खुद इतना कुछ बोली, मुझे इतना समझाई और फिर सोकर जागी तो मूड चेंज। अब वसीम चाचा की हेल्प नहीं करनी क्या?"

शीतल- "मैं अभी भी उनकी हेल्प करना चाहती है, क्योंकी वो मेरी वजह से परेशान हैं, लेकिन इस तरह से नहीं। में किसी गैर-मर्द के साथ सेक्स नहीं कर सकती...' बोलती हई शीतल किचन में चली गई। उसका फैसला मजबूत था। रात में चूत से पानी निकालने के बाद उसके संस्कार पूरी तरह से जाग गये थे।

विकास बेचारा क्या करता? कहा- "जैसी तुम्हारी मर्जी। मैं उस फैसले में भी तुम्हारे साथ था और अभी भी है." कहकर बिकास उदास हो गया था। आज सनडे था तो उसे आफिस नहीं जाना था। विकास सोने चला गया और सो गया।
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07-19-2021, 12:12 PM,
#37
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल वसीम के बारे में सोचना ही नहीं चाह रही थी। वो साची की जितना साचेंगी उतना परेशान होऊँगी। वा अपने कम में बिजी रही। आज सनडे था तो वसीम भी घर में ही था।

शीतल अपने कपड़ों को सूखने देने भी छत में नहीं जा रही थी। फिर काफी हिम्मत करते हए वो छत पे गई की वो भी मुझे नहीं देखते और में भी उन्हें नहीं देंखंगी। वो बाकी कपड़े तो सूखने डाल दी लेकिन अपनी पैटी वा को रूम में ही रखी।

विकास ने भी शीतल से इस टापिक पे चर्चा नहीं की। वो भी बाकी दिन की तरह ही नामल रहा। वो प्रेस तो नहीं कर सकता था शीतल को की वा वसीम से चुदवा ले।

वसीम आज दिन भर घर पे ही था। उसने शीतल को कपड़े रखते हुए देखा था, और ये भी देखा था की आज उसने पैटी ब्रा को सूखने नहीं डाला है। लेकिन वो परेशान नहीं हुआ। बहुत शातिर था वसीम इस मामले में। उसे पता था की मुझे इन लोगों को घर नहीं खाली करने देना है बस। यहाँ रहेंगी शीतल तो उसकी रंडी बनेंगी ही। फिर भी उसके मन में ये ख्याल आया की कहीं वो ज्यादा तो नहीं कर दे रहा कुछ? उसे शीतल को चोद तो लेना ही चाहिए था।

वसीम काफी सोच विचार कर रहा था और सोचते हए ही उसने अपनी गर्दन को झटका दिया- "ना, छप-छपाकर क्या चोदना? शीतल को चोदना है तो मजे से चोदना है। अपने हिसाब से चोदना है। ये नहीं की हड़बड़ी में चोदा और फिर भागना पड़े। क्या होगा, कुछ दिन और इंतजार करना होगा। लेकिन एक बात तो तय है की रांड़ को इस लण्ड के नीचे आना तो होगा ही। अब जब वो इतना कुछ कर चुकी हैं तो आगे भी करेंगी हो?"

वसीम आज इसीलिए दिन भर घर में रहा की उसे शीतल की हलचल पता चल सके, और अगर वो लोग घर चेंज करने की बात करें तो उन्हें रोक सके।

रात को सोने के वक़्त विकास ने शीतल से पूछा "इतनी परेशान क्यों हो? क्या सोच रही हो?"

शीतल- "कुछ नहीं... बोलती हुई दूसरे करवट हो गई।

विकास उसके पास आया और कंधे पे हाथ रखता हुभा प्यार से उसे समझते हुए बोला- "जो फैसला करो, उसमें कायम रहो। उसके बाद सोचने की जरूरत नहीं है। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दो। इतना याद रखो की मैं हमेशा तुम्हारे साथ हैं.." शीतल सीधी लेट गई। वो काफी इमोशनल हो रही थी। क्योंकी उसके मन में ये था की बो वसीम के पास नंगी होकर अपने पति को धोखा दी है।

विकास ने उसके गाल को सहलाया और बोला- "अब मत सोचो ये सब कुछ.."

शीतल विकास की तरफ घूम गई और उससे चिपक गईं। शीतल मन में बोली- "आई लोब यू विकास। मैं तुम्हारी हूँ और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी?"

विकास ने भी उसे खुद से चिपका लिया। दोनों आँखें बंद किए एक दूसरे को बाँहो. में पकड़े सो रहे थे। थोड़ी देर बाद विकास ने शीतल से पूछा- "तुम्हें वसीम चाचा की परेशानी के बारे में कब पता चला?"

शीतल ने आँखें खोली और विकास को देखकर बोली- "पहले बालो की तुम मुझे गलत नहीं समझागे?"

विकास- "तुम्हें लगता है की मैं तुम्हें गलत समझंगा। जब इतनी बड़ी बात में मैं तुम्हारे साथ रहा तो?"
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07-19-2021, 12:12 PM,
#38
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल- "में कपड़े सूखने हमेशा छत पे देती थी। एक दिन मुझे लगा की मेरी पेंटी कुछ टाइट जैसी हैं। देखी तो उसपे कुछ दाग जैसा भी था। कुछ समझ में नहीं आया और बात को इग्नोर कर दी। अगले दिन भी ऐसा ही था। अगले दिन थोड़ा जल्दी कपड़े ले आई तो पैंटी गीली थी और उसपे कुछ लगा था। मैं अच्छे से देखी तो लगा की कुछ है। अगले दिन और जल्दी ले आई। आज पैटी और गीली थी और उसमें सफेद जैसा कुछ दाग भी था। अगले दिन मैं छत पे स्टोररूम में जाकर छिप गई तो देखती क्या हैं की वसीम चाचा आए, रूम में जाकर कपड़े चेंज किए और बाहर आकर मेरी पेंटी में अपना वीर्य गिरा दिया.." कहकर शीतल एक सांस में बोलती जा रही थी।

विकास का लण्ड टाइट हो रहा था, बोला. "तुम उसे अपनी पैटी में वीर्य गिराते देखा?"

शीतल शर्मा गई और उसकी आँखों के सामने वो दृश्य घूम गया, जिसमें वसीम अपने मोर्ट कालें लण्ड से शीतल की पैंटी और ब्रा को बीर्य से भर रहा था।

शीतल बोलना स्टार्ट की- "हाँ, मुझे बहुत गम्सा आया। इस बढ़े इंसान को लाज शर्म नहीं है की अपने से आधे से भी कम उम्र की औरत की पैंटी ब्रा के साथ ऐसा कर रहा है। मैं नीचे आ गई और सोची की तुम्हें बताऊँगी लेकिन फिर तुरंत सीधे-सीधे नहीं बताई की पता नहीं तुम क्या सोचा और क्या करो? इसलिए तुमसे वसीम चाचा के बारे में पूछी तो तुमने बताया की वो यहाँ बहुत साल से अकेले रहते हैं और उनकी वाइफ नहीं है। मुझे तो ये सब कुछ पता था नहीं तो मैं जैसे हमेशा रहती थी उसी तरह रहती रही और इन्हें पागल बनाती रही। मुझे उनसे हमदर्दी हो गई। फिर मैं नोटिस की की वो मुझे देखतें भी नहीं, मरे से बात भी नहीं करते। दो-चार बार ऐसा हुआ की मुझे किसी कम से बात करना पड़ा तो मैं देखी की वो मुझसे बात करने से बचते हैं। फिर मैं सोची तो मुझे लगा की मैंने इनके दिल की घंटी बजा दी है...

विकास- "फिर?"

शीतल आगे बोलना स्टार्ट की- "जब में मैं बड़ी हुई है तब से मैं यही देखतं और महसूस करती आई हूँ की हर कोई मुझसे बात करना चाहता था, और मेरे नजदीक आना चाहता था। मुझे लगा की इन्हें बुरा लगता होगा और अगर मैं उनसे बात करेंग, हँसी मजाक करी तो इन्हें राहत मिलेगी। लेकिन ये मेरे से दूर ही रहते और अंदर ही अंदर तड़पते रहते। तब मैं सोची की मैं इनसे फाइनल बात कर लें, और उन्हें बोल दं की मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है और आप मुझसे बात कर सकते हैं।
लेकिन कमीम ने मना कर दिया और बोले की- "तब तो मैं खुद को और रोक नहीं पाऊँगा और हो सकता है की तुझे पकड़ ही लें..."

विकास- "हौँ। ये तो सही बात है। फिर क्या हुआ?"

शीतल- "देखो प्लीज... मुझे गलत मत समझना। मेरी नजर में सारी गलती मेरी थी और मुझे उनपे बहुत दया आ रही थी। तो मैं बोल दी की तो पकड़ क्यों नहीं लेते? मुझे लगा की उन्हें खुलकर बातें करने की छूट दूँगी तो बो फ्रेश हो जाएंगे। वो कुछ नहीं बोले तो मैं ही आगे बढ़कर उनके गले लग गई। वो पीछे हटने लगे। मैं उन्हें पकड़े रही और बोली की आप मुझसे खुलकर बातें करिए। आप शाइए मत..."

वसीम चाचा बोले- "कैसे तुमसे खुलकर बातें करें? तुम किसी और की हो.."

में भी पता नहीं किस रो में थी की बोली- "आपके लिए मैं और किसी की बीवी नहीं हैं। आप बिंदास मेरे से बात करिए... और फिर से उनके गले लग गई।

शीतल सांस लेने के लिए रुकी। वा सोच रही थी की विकास का ये बताया है या नहीं लेकिन फिर वो सोची की अगर इन्हें बाद में पता चला तो तकलीफ होगी। बैंसें भी अब तो मैं वसीम चाचा के पास जा नहीं बही और विकास तो मुझे उनसे चुदने की पमिशन तक दे चुके हैं।
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07-19-2021, 12:12 PM,
#39
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल फिर आगे बोलना शुरू की- "वो... वो... वो मेरे गले लगते ही वो मझें लिप-किस करने लगे। मैं उन्हें करने दी की चलो ठीक है, उन्हें राहत मिलेगी। तुरंत ही वो फिर मुझे हटाने लगे और मैं फिर उन्हें पकड़ ली तो उनकी लुंगी खुलकर नीचे गिर गई.."

विकास चौंकता हआ बोला- "लुंगी खुलकर गिर गई मतलब? वो सिर्फ चड्डी में बचे या अंदर कुछ नहीं था?"

शीतल में नजरें झका ली। वो अपने पति को किसी और के साथ बिताए पल बता रही थी। बोली- "अंदर कुछ नहीं था। बा लगी पहनते हैं तो अंदर कुछ नहीं पहनते..."

विकास- "मतलब वो लुंगी नीचे से नंगे हो गये, और तुम उनकी बाहों में थी?"

शीतल- "प्लीज विकास। मैं पहले ही बोली थी की मुझे गलत मत समझना। हाँ वो नीचे से नंगे हो गये थे..."

विकास- "तो उनका लण्ड तो पूरा टाइट होगा.."

शीतल- "हो...
विकास- "वो तो होना ही था। जिसकी बाहों में तुम हो और वो नंगा हो तो उसका लण्ड टाइट तो होगा ही। फिर, फिर क्या हुआ?"

शीतल- "बा मुझं लिप-किस कर रहे थे और नीचे से नंगे थे। फिर वो मुझे छोड़ दिए और लंगी उठाने की कोशिश करने लगे। मुझे लगा की उन्हें शर्म आ रही होगी की वो मेरे सामने नंगे खड़े हैं। मुझे लगा की ये अगर अभी हट गये तो फिर मुझसे फेंक नहीं होंगे और घुटते रहेंगे। मैं उन्हें पकड़ ली और लिप-किस करने लगी। मैंने अपनी साड़ी की गाँठ दीली कर दी और पेटीकोट को खोलकर नीचे गिरा दी...

विकास- "तुम भी नीचे से नंगी हो गई वसीम चाचा के साथ?"

शीतल- "मैं पैंटी पहनी हुई थी लेकिन वो फिर भी मुझसे चिपक नहीं रहे थे। तब मैं अपने ब्लाउज़ को ऊपर कर दी और उनसे कस के चिपक गई."

विकास- "कमाल का इंसान है यार। तुम अपनी चूचियों को बाहर करके उनसे चिपक गई?"

शीतल- "प्लीज विकास। सुन तो लो पूरी बात। फिर वो भी मुझसे कस के चिपक गये और लिप किस करने लगे। फिर मुझे बेड पे गिरा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे निपल चूसने लगे। मैं उन्हें चसने देरही थी की अब वो हल्का महसूस करेंगे। लेकिन तुरंत ही वो उठ गये और लंगी पहनकर मझे जाने बोले..."

वसीम बोले- "मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता। इससे अच्छा तो मैं मर जाऊँ। मैं ये गुनाह नहीं कर सकता की किसी और की बीवी के साथ चोरी छिपे संबंध बनाऊँ..."

...
शीतल- "फिर मैं नीचे आ गई। तब मुझे लगा की ये आदमी नहीं देवता है और मुझे इसकी मदद करने के लिए कुछ भी करना पड़े तो करेंगी। इसीलिए फिर मैं तुमसे बात की और तुमनें पमिशन भी दे दी की मैं वसीम चाचा से चुदबा सकती हैं। लेकिन फिर मुझे लगा की नहीं, किसी की मदद करने के नाम पे मैं अपने पति की अमानत उसे नहीं दे सकती। मेरे जिस्म पे बस मेरे पति का हक है, ये हक और किसी को नहीं मिल सकता..."

विकास- "मतलब मेरी बीवी एक 50 साल के बटे आदमी का लण्ड वीर्य गिरते हुए देख चुकी है, उसकी बाहों में जाकर लिप-किस कर चुकी है, अपनी चूचियों को दिखा और चुसवा चुकी है, और सिर्फ पैंटी में उसके साथ लेंट चुकी है..."
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07-19-2021, 12:13 PM,
#40
RE: Antarvasnax शीतल का समर्पण
शीतल- "प्लीज विकास, ऐसे मत कहो। मैं पहले ही कह चुकी है की मुझे गलत मत समझना। मेरा इंटेन्शन सिर्फ उनकी मदद करना था। लेकिन फिर भी मुझे लगा की ये गलत है तो तुम्हारे पमिशन के बाद मैं खुद को रोक ली..."

विकास. "तुम्हें पता है मैंने तुम्हें पर्मिशन क्यों दी थी? क्योंकी तुम वसीम चाचा की मदद करना चाहती थी और सच में बा देकता समान आदमी परेशान हैं। लेकिन अब तो तुमनें उसकी परेशानी और बढ़ा दी..."

शीतल- "कैसे?"

विकास- "तुम्हें देखकर उसके अरमान जागे। उसने खुद को रोकने की बहुत कोशिश की और जब कामयाब नहीं हो पाया तो तुम्हारी पटी बा को हाथ में लेकर और वीर्य गिराकर शांत कर पाया खुद का। फिर तुमने उससे बात करने की ओट खुद को दिखाने की कोशिश की। बेचारे वसीम चाचा की मुश्किल और बढ़ गई होगी। अब तुम उन्हें भी नंगा कर चुकी हो और खुद भी नंगी होकर उनके गले लगकर लिप-किस कर चुकी हो। इतना कुछ होने के बाद अब तुम अचानक ये फैसला करती हो की तुम उनसे दूर रहोगी, और अब तुम अपनी पैटी बा को भी छत पे नहीं डालागी, तो सोचा की अब उस इंसान की मुश्किल कितनी बढ़ गई होगी?"

शीतल कुछ नहीं बोली।
-
-
-
विकास फिर बोला, "वो तो पहले ही परेशान था। अब तो बो शीतल शर्मा के बस भरे होठों का और रसीली चूचियों का टेस्ट भी कर चुका है। नंगी होकर बाहों में उसके नंगे जिश्म में जा सटी हो तुम। भूखें शेर को खून चटा दिया और फिर सब कुछ बंद। अब तो वो पागल हो रहा होगा.."

शीतल- "अब जो भी हो वो उसकी किश्मत? लेकिन मैं इसके लिए उसे अपना जिश्म नहीं दे सकती। मैं किसी गैर-मर्द से चुदबा नहीं सकती। मैं तुम्हारी बीवी हैं, सिर्फ तुम्हारी। किसी और की कुछ नहीं.."

विकास- "अब ये तुम समझो। में तुम्हारा फैसला है। तुम उसकी मदद करो या ना करो। मुझे तो उसकी तकलीफ के बारे में पता भी नहीं है, और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन मैंने बस इतना कहा है की वो अब ज्यादा तकलीफ में होगा..."

शीतल- "मुझे अब ये सब कुछ नहीं सोचना। सोने दो मुझे..' बोलकर शीतल करवट लेकर सोने लगी और विकास भी उसे पकड़कर सो गया।

शीतल सुबह सोकर जागी तो वो विकास की बात सोचने लगी? सही तो कहते हैं विकास। भखें शेर के मुँह में खून लगा दी मैं। लेकिन किसी की मदद के नाम पे किसी और से चुदवाया तो नहीं जा सकता। मैं अभी भी उनकी मदद करना चाहती हैं लेकिन बिना चुदवाए। अगर वसीम चाचा चाहें तो मुझे नंगी देख सकते हैं। वैसे भी वो मुझे नंगी देख ही चुके हैं, यहाँ उपकर बाथरूम में, इसलिए तो वहीं मैं नंगी हो गई थी। वो चाहें तो मैं उनसे खुलकर बात भी कर सकती हैं। अगर वा बालेंगे तो रंडियों टाइप बात भी कर लेंगी। लेकिन उना और चोदना नहीं होगा अब। इससे ज्यादा में आपकी मदद नहीं कर सकती वसीम चाचा?

शीतल नहाकर पूजा करके विकास को जगाई। शीतल गंजी कपड़ा के एक नाइटगाउन में थी। अंदर वो टी-शर्ट बा और पैंटी में थी, तो वा की धारियां नाइटी में नहीं दिख रही थी और उसकी दोनों चूचियां पूरी तरह से दो अलग अलग गोल बाल जैसी दिख रही थीं। विकास चाय पीता हआ शीतल को देख रहा था। उसने शीतल की चूचियों की तरफ इशारा किया और मश्का दिया। शीतल शर्मा गई।

विकास हँसता हुआ बोला- "वसीम चाचा तो क्या, मैं इन गोलाईयों को देख कर खुद को रोक नहीं पा रहा। पता नहीं उनकी बया हालत होगी?"

शीतल भी हँस दी और किचेन में चली गई।

विकास आफिस जा रहा था तो शीतल भी उसे छोड़ने घर के मुख्य दरवाजे तक आई थी। विकास के जाने के बाद वो वापस आ रही थी तभी वसीम नीचे उतर रहा था। शीतल सीधे अपने घर के अंदर आना चाह रही थी, लेकिन पता नहीं क्या हुआ की उसके कदम जैसे ठिठक गये। वो वसीम को देख रही थी लेकिन एक बार देखने के बाद वसीम ने शीतल पे नजर भी नहीं डाला और बाहर चला गया।

11:00 बजे शीतल के पास विकास का काल आया की वो अपने चपरासी मकसूद को भेज रहा है डाइनिंग हाल का फैन लगाने के लिए। मकसद भी लगभग 50 साल का ही था। लेकिन वो आवरेज कद और फिगर का था। वो जब भी शीतल को देखता था तो ऐसे जैसे आँखों में ही शीतल को चोद रहा हो। हालौकी शीतल के लिए ये आम बात थी, लेकिन फिर भी मकसद की नजर उसके जिस्म में चुभती थी। शीतल को बो दिन याद आ गया जब वो यहीं शिफ्ट कर रही थी। वो साड़ी में थी और मकसूद उसे खा जाने वाली नजरों से देख रहा था। शीतल अपने बदन को छिपाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन साड़ी में जिश्म छिपता कहाँ है? एक जगह टकती तो दूसरी जगह दिखने लगता।

शीतल जब वो झकती तो मकसूद अपनी आँखों में उसकी झलती चूचियों को देखने लगता। उसकी फटी आँखें और खला मैंह देखकर ही किसी को भी लग जाता था की ये अपने मन में शीतल को लेकर क्या-क्या सोच रहा होगा? मकसूद दो-तीन बार और आ चुका है घर में और अगर उसका बस चले तो शीतल लो पटक-पटक कर चोदें।

शीतल सोच रही थी को कपड़े बद्दल लेती हूँ की तब तक दरवाजा पे नाक हुआ। शीतल समझ गई की मकसूद हो होगा। उसने डोर-आई से बाहर देखा तो दरवाजे पे 45-50 साल का एक 5.5 इंचुका आवरेज फिगर का इंसान मैंह में पान चबता हआ खड़ा था। शीतल को उसके पान खाने से बहत आलर्जी थी। पता नहीं इसे क्यों भेज देते हैं? जाहिल इसान। अब जितनी देर तक रहेगा अपनी हक्त भरी नजरों से घूरता रहेगा मुझं। शीतल गुस्से में पूछी- "कौन है.."

मममकसूद बोला- "मैडम मैं हूँ, मकसूद, साहब ने भेजा है."

शीतल दरवाजा खोल दी। वही हआ जो शीतल सोच रही थी।

मकसूद उससे कुछ ना कुछ बातें करता रहा और कभी पानी माँगता रहा, तो कभी कोई और सामान। वो नाइटी के अंदर से शीतल की कल्पना करता रहा, और जब भी मौका मिल रहा था उसकी क्लीवेज में झाँक रहा था। दोनों चूचियों को देखकर उसका मन और ललचा रहा था। शीतल आ जा रही थी और वो शीतल की गाण्ड को हिलता-इलता देखता रहा। थोड़ी देर बाद वो फैल लगाकर चला गया।
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