Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
09-05-2020, 02:10 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
नजमा भी चुदवाने के लिए तरसी हुई थी और मेरी बात भी उसकी समझ मे आ गयी इसलिए वो कुछ पूछने की बजाए अब खुद भी मुझ से लिपट कर मेरे होंठो को चूमती हुई जज़्बात से चूर आवाज़ मे बोली, “ठीक है बहेन्चोद पहले अपनी बेहन को चोद ले और चोद चोद के आज
मेरी चूत को फाड़ देना मैं भी चुदवाने के लिए पागल हो रही हूँ.”

हम दोनो जज़्बात मे पागल हो रहे थे इसलिए कुछ बोले बगैर जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतारे और एक दूसरे को प्यार करना, चूसना, मसलना, सहलाना सब कुछ भूल गये. नजमा कपड़े उतारते ही बिस्तर पर अपनी टाँगें खोल कर चित लेट गई और मैं भी फ़ौरन उसपे सवार
हो कर अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा कर टका ठक पूरे ज़ोरशोर से उसे चोदना शुरू कर दिया. हमारी चुदाई ज़्यादा देर नही ठहर
सकी और 10 मिनिट से भी कम वक़्त मे पहले मैं झडा और मेरे झड़ते ही नजमा भी झड गयी.

हम दोनो बहुत दिनो से चुदाई के लिए पागल हो रहे थे, आज जब इतने दिनो के बाद चुदाई का मौका मिला तो कैसा फोरप्ले कहाँ का इंतज़ार बस लंड घुसाया और टका-टक पेलना शुरू कर दिया अब इस हालत मे देर तक कहाँ ठहेर सकते थे फ़ौरन झड गये और हम दोनो का पानी इस तरह और इतना निकला जैसे अब दोबारा कभी नही निकलेगा. झड़ने के बाद हमारी सब गर्मी जब निकल गयी तो हम दोनो का पूरा वजूद एकदम शांत होगया और हम दोनो तक़रीबन 15 तक आँखें बंद करके चुप चाप लेटे रहे. फिर उठ कर वॉशरूम जा कर हम दोनो ने पिशाब किया और धो धूला कर वापस आए तो सब से पहले बिस्तर की चादर को बदला क्यूंकी वो हम दोनो के पानी से बिल्कुल गीला हो रहा था. चादर बदलने के बाद सब से पहला काम यह किया कि हम ने चाय बना कर पिया उसके बाद मैं आराम से बिस्तर के पीछे अपनी कमर
को टीका या और बिस्तर पर अपने पैर लंबे करके आराम से बैठ कर एक सिगरेट सुलगा कर लंबे लंबे दो तीन कश ले कर सारा धुआँ नजमा की तरफ फेंका जो मेरे बराबर बैठी कपड़े से अपनी चूत सॉफ कर रही थी जिस मे शायद मेरे जमा किए हुए पानी का ड्रॉप निकल रहा था. नजमा अपने हाथ को हवा मे हिला हिला कर सिगरेट के धुएँ से बचते हुए मेरे बराबर मेरी तरह बैठ कर अपने सर को मेरी छाती से टिकाती हुई बोली. “आज मम्मी ने जिस तरह का रिएक्ट किया और तुम्हारे लंड को पकड़ कर मुस्कुराते हुए जो कुछ कहा मुझे अभी तक
यक़ीन नही आ रहा है कि वो इतनी जल्दी इतना बदल सकती हैं. इस तरह की बातें और हरकत किसी मर्द से वही औरत करती है जिस से चुदवा चुकी हो और तुम कहते हो कि चुदाई नही हुई. आख़िर मामला क्या है मम्मी मे यह तब्दीली एकदम से कैसे आ गयी ? मुझे सब कुछ बताओ.”

मैने एक गहरा साँस लिया और अपने सिगरेट को आराम आराम से पीते हुए शुरू से आख़िर तक एक एक बात सिवाए मधुबाला की फिल्म देखने और अपने इश्क़ के सब कुछ नजमा को बता दिया.

मेरी बात सुन कर नजमा एक गहरा साँस ले कर बोली. “हम ने मम्मी को शाहजी से चुदवाने का प्लान इसलिए बना कर उनको शाहजी से चुदवाया था ताकि उनको ब्लॅकमेल कर के अपने क़ाबू मे कर लें फिर खोल कर बगैर किसी डर के चुदाई का मज़ा ले सकें. अब जो कुछ हो
रहा है उस से सिर्फ़ हमारा रास्ता ही नही खुला बल्कि मम्मी का भी फ़ायदा हुआ और उनका रास्ता भी खोल गया क्यूँ मैं ग़लत तो नही कह रही हूँ.”

“बिल्कुल ठीक कह रही हो, वो सालो से चुदवाने के लिए तरस रही थी मगर ख़ौफ़ और डर से उनमें इतनी हिम्मत नही थी कि किसी को फँसा कर चुदवा लेती, उन्हें तो हमारा शुक्रिया अदा कर के कुछ इनाम देना चाहिए क्योंकि हमारी वजह से अब फिर से उनको चुदाई का
मज़ा मिलने लगा है.” मैं नजमा को अपनी बाँहो मे ले कर भींचता हुआ बोला.

नजमा एक उंगली से मेरी छाती के निपल को सहलाती हुई बोली, “शहाब थोड़े दिनो के बाद मेरी शादी हो जाएगी और मैं चली जाउन्गी, मैं तुम्हारे बारे मे सोच रही हूँ कि मेरे जाने के बाद तुम बगैर चुदाई के कैसे गुज़ारा करो गे, वैसे तो मैं महीने मे एक दो बार आया करूँगी तो तुम मुझे चोद सको गे. नजमा यह कह कर थोड़ा रुकी फिर कहने लगी, “अगर मेरी मानो तो तुम मम्मी को चोद लो, वैसे भी तुम उनकी चूत
और गान्ड को अपने लंड से ना सही अपनी उंगली से तो चोद ही चुके हो और वो भी तुम्हारे लंड को पकड़ कर तुम्हारी मूठ मार चुकी हैं
फिर बाक़ी क्या बचा अब सिर्फ़ लंड घुसा कर चोदना ही तो बाक़ी है.”

“तुम्हारा दिमाग़ कहाँ है, अरे अभी तो तुम्हें बताया था कि मम्मी ने बिल्कुल सॉफ सॉफ कह दिया है कि वो सब से चुदवा लें गी मगर मुझ से नही अब वो मुझ से चुदवाने के लिए राज़ी ही नही हैं तो उनको कैसे चोद सकता हूँ.” मैं नजमा को मम्मी की कही हुई बात को याद दिलाता हुआ बोला.
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09-05-2020, 02:10 PM,
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“तुम्हारा दिमाग़ कहाँ है, अरे अभी तो तुम्हें बताया था कि मम्मी ने बिल्कुल सॉफ सॉफ कह दिया है कि वो सब से चुदवा लें गी मगर मुझ से नही अब वो मुझ से चुदवाने के लिए राज़ी ही नही हैं तो उनको कैसे चोद सकता हूँ.” मैं नजमा को मम्मी की कही हुई बात को याद दिलाता हुआ बोला.

मेरी बात सुन कर नजमा एकदम मेरे लंड को पकड़ कर हिलाती हुई बोली, “तुम बिकुल ही बुद्धू हो जो इतना भी नही समझते हो कि जो औरत किसी मर्द के लंड को पकड़ ले वो ज़रूर उसे चुदवाती है, मेरे ख्याल मे उनके मना करने की वजाह सिर्फ़ माँ बेटे का रिश्ता है.” यह कह कर वो मेरे लंड को छोड़ कर दो उंगलिओ से मेरी नाक को पकड़ कर हिलाती हुई मुस्कुरा कर बोली. “तुम जब अपनी इस भोली भाली
शर्मीली बेहन को राज़ी करके चोद कर बेहन्चोद बन सकते हो तो मम्मी को भी चोद कर मादर चोद बनना तुम्हारे लिए मुश्किल नही होगा,
मगर सवाल यह है कि तुम खुद मम्मी को चोदना चाहते हो या नही.”

नजमा के इस बात के पूछने पर मैने उसे पूरी तफ़सील से मधुबाला की फिल्म देखने के बारे मे बता कर बोला, “तुम मेरे दिल की हालत नही समझ सकती हो कि मैं फ़िल्मो मे मधुबाला की अदाओं को देख कर उसका दीवाना होगया हूँ और मैं उसे इश्क़ करने लगा हूँ, चूँकि मम्मी बिल्कुल मधुबाला की हमशकल हैं इसलिए वही मेरी मधुबाला हैं यानी मैं मम्मी से इश्क़ करने लगा हूँ और जब उनको देखता हूँ तो वो मुझेमेरी मम्मी नही मेरी महबूबा नज़र आती हैं और मैं किसी भी तरह उनको चोद ना चाहता हूँ, मगर कैसे उनको राज़ी करके चोदु यह समझ मे नही आ रहा है क्यूंकी उन्होने बिल्कुल सॉफ कह दिया है कि उनको चोदना तो दूर की बात है मैं उनको चोदने के बारे मे कभी सोचु भी ना,,,

मेरी बात सुन कर नजमा कुछ सोचने लगी फिर सोचते हुए बोली. “मेरे ख्याल मे तुम अगर कोशिश करो गे तो वो तुम से ज़रूर छुड़वा लें गी,

क्यूंकी तुम ही ने कहा है कि मम्मी को तुम्हारा लंड बहुत पसंद है और वो तुम से कह रही थी कि अगर तुम उनके बेटे नही होते तो वो तुम से ज़रूर चुदवाती यानी उन्हें तुम और तुम्हारा लंड पसंद है और वो तुम से चुदवाना चाहती हैं मगर वही माँ बेटे के रिश्ते की दीवार उन्हें राज़ी नही होने देती है, अब उनको राज़ी करने का एक रास्ता मेरी समझ मे आ रहा है वो ये कि पापा के यूएसए जाने के बाद रात को उन्हें शराब पिला देना फिर शायद नशे मे वो चुदवा लें, बस सिर्फ़ एक बार चुदाई हो जाए उसके बाद तो वो दिन रात तुम से चुदवाती रहे गी.”
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09-05-2020, 02:10 PM,
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नजमा की बात सुन कर मैं सोचता हुआ बोला, “आइडिया तो तुम ने बहुत अच्छा दिया है इस पर मुझे सोच कर कोई अच्छा प्लान बनाना पड़ेगा, खैर अभी सोचने के लिए बहुत टाइम है, वैसे मैने सोच रखा था कि तुम्हारी शादी के बाद करमू से कह कर उसकी बेहन को चोद कर अपने लंड को ठंडा कर लिया करूँगा.”

करमू का नाम सुनते ही नजमा एकदम उठ कर बैठ गयी मैने देखा उसकी आँखें चमकने लगी थी, वो मुझे देखते हुए बोली. “शहाब आज
कल तुम्हारा दोस्त करमू अरबी शैखो को चोदने के लिए लड़किया सप्लाइ का रहा है क्यूँ ?”

नजमा ने अचानक जिस तरह करमू के बारे मे पूछा था मुझे बड़ी हैरत हुई मगर मेरी समझ मे कुछ नही आया, मैं उलझी आवाज़ मे बोला.
“हाँ मगर तुम क्यूँ पूछ रही हो ?”

“मेरी सहेली ने मुझे बहुत सी ऐसी बुक्स पढ़ने को दिया था जिस मे अर्बियन की कहानियाँ थी उसी मे मैने पढ़ा है कि अरबीओ का लंड बहुत बड़ा और मोटा होता है और वो घंटों लड़कियों को ज़बरदस्त और बहुत ही रफ तरीक़े से चोद्ते हैं. अब जब से मैने चुदवाना शुरू किया है मेरे दिमाग़ मे अरबियों का बड़ा और मोटा लंड आ जाता है और मैं किसी ऐसे ही लंड से छुड़वाने के बारे मे सोचने लगती हूँ. करमू तुम्हारा
दोस्त है तुम उस-से बात करके मुझे किसी अरबी के पास चुदवाने भेज दो इस-से एक तो मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी साथ हज़ारों रुपए भी मिल जाएँ गे.”

नजमा की बात सुन कर मैने एक गहरा साँस लिया और बोला, “पागल होगयि हो और तुम करमू को नही जानती हो वो मादर्र्चोद बहुत बड़ा कमीना और पेट का हल्का है वो हर किसी से कहता फिरे गा कि शहाब की बहेन रंडी बन गयी है और यह बात आग की तरह हर तरफ फैल जाएगी, दूसरा सब से बड़ा ख़तरा पोलीस का है वो बराबर ऐसे होटलो मे छापे मारती रहती है अगर तुम पोलीस के हाथ लग गयी तो
दूसरे दिन के अख़बार के फ्रंट पेज पर तस्वीर छप जाएगी साथ साथ सारे शहर के पोलिसेवाले दिन रात चोद चोद कर तुम्हारा वो हाल करें गे के तुम अपना नाम तक भूल जाओ गी समझी.”

मेरी बात सुन कर नजमा डर गयी और फ़ौरन अपने कान पर हाथ रखती हुई बोली, “बाब रे बाप मुझे यह सब थोड़ा ही मालूम था की ऐसा भी हो सकता है.”

मैं नजमा को खैंच कर अपने ऊपर लेता हुआ उसके चुतड़ों को पकड़ कर मसलता हुआ बोला, “अभी भी चुदवा चुदवा कर तुम्हारी चूत बहुत खुल चुकी है और मुझे डर है कि जब सुहागरात मे तेरा मियाँ अपना लंड तेरी खुली चूत मे घुसाए गा तो कही उसे शक ना हो जाए कि तुम
पहले ही से खूब चुदी हुई हो.”

“यह बात मुझे भी फिकर मे डाल देती है वैसे तो जब पहली बार वो अपना लंड मेरी चूत मे घुसाए गा तो मैं इस तरह की आक्टिंग करूँगी कि मुझे बहुत तकलीफ़ हो रही है और खुद को उस से छुड़ाने की कोशिश भी करूँगी ताकि वो यही समझे कि मैं तकलीफ़ के मारे खुद को
छुड़ाने की कोशिश कर रही हूँ.” नजमा ने अपनी सुहाग रात का प्लान बताया.

“जो कुछ तुम ने सोचा है बिल्कुल ठीक सोचा है और ऐसा करना ही होगा साथ साथ मैने तुम्हारी खुली हुई चूत को किसी कंवारी लड़की की चूत की तरह टाइट करने का तरीक़ा भी ढूँढ लिया है,” फिर मैने डीटेल मे उसे चूत को टाइट करने का तरीक़ा बताया और बोला, “तमाम ख़तरे से बचने के लिए ज़रूरी है कि शादी से एक महीने पहले ही से चुदाई बिल्कुल बंद और रोज़ाना दिन मे दो तीन बार फिटकिरी के पानी से चूत को अंदर तक धोना पड़ेगा साथ ही साथ मैने यह भी सोच रखा है कि शादी वाले दिन तुम को एक छोटी बॉटल मे कबूतर का थोड़ा सा खून दे दूँगा जिसे तुम अपने साथ छुपा कर ले जाना और चुदाई के बाद किसी भी तरह अपने मियाँ से छुपा कर बिस्तर पर डाल देना जब तुम्हारा मियाँ बिस्तर पर खून देखे गा तो वो यही समझे गा कि यह खून तुम्हारे कंवारे होने का पक्का सबूत है.” मैने नजमा के लिए जो कुछ सोचा था उसे पूरी डीटेल मे बता दिया.
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09-05-2020, 02:10 PM,
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उस दिन सब के आने तक चार बार हम ने चुदाई की और हर पोज़ मे चोदा, कभी खड़े हो कर तो कभी लेटा कर. हर बार चूत और गान्ड दोनो जगह से दिल भरके चोदा. दूसरे दिन शाम को जब मैं दुकान से आया तो डिन्नर के बाद मम्मी ने मौका पा कर मुझे बताया कि आज ही
शाम को उनका महीना शुरू होगया है. वो अपने रुके हुए महीने के शुरू हो जाने से बहुत खुश थी और प्रेग्नेंट होने का डर उनके दिल से निकल गया था.

दूसरे दिन से वही रुटीन शुरू होगया, सुबह पापा के साथ दुकान जाता मगर शाम को 5 बजे कॉलेज का बहाना करके दुकान से निकल जाता और कॉलेज जाने के बजाए इधर उधर दोस्तों के साथ घूमता रहता. मैने बहुत से लड़को की तरह अपनी अटेंडेन्स के लिए कॉलेज के क्लर्क से मामला फिट कर रखा था जिस के बदले हर महीने उसे 50 रुपया देना पड़ता था.

मैं पढ़ने से ज़रूर भागता था मगर अपने बिज़्नेस मे पूरी दिलचस्पी और हर बात को समझने और सीखने मे अपना पूरा वक़्त देता, मेरी
बिज़्नेस मे इस दिलचस्पी को देख कर पापा मुझ से बहुत खुश थे और वो सनडे के अलावा एक और दिन मुझे छुट्टी देने लगे थे.

भाई और भाभी वापस आ गये थे. वापस आने के बाद दोनो भाई सिर्फ़ दो तीन घंटों के लिए दुकान जाते और अपना बाक़ी वक़्त किसी मेहमान की तरह घूमने फिरने मे गुज़ारने लगे थे. एक शाम सफ्दर अंकल डिन्नर के लिए हमारे यहाँ आए फिर सब ने मिल बैठ कर यूएसए जाने के लिए नजमा की शादी के 15 दिन के बाद की डेट को फाइनल कर लिया और दूसरे दिन ही सफ्दर अंकल ने लुफ़्थांसा एरलाइन से सीट की
बुकिंग करवा कर टिकेट ले लिया. पापा के लाख मना करने के बावजूद सब के टिकेट के पैसे उन्होने अपनी जेब से दिया. नजमा की शादी
की तारीख 01 ऑगस्ट 1981 और 22 ऑगस्ट सुबह 4:50 सॅटर्डे वाले दिन पापा लोगों की फ्लाइट थी.

इस दरमियाँ जब मैं घर पर होता तो मोक़े की तलाश मे रहता और मम्मी को अकेला पा कर कभी उनके चुतड़ों को दबा देता तो कभी उनके मम्मे पकड़ कर मसल डालता, मेरी इस हरहत पर मम्मी घबरा कर इधर उधर देखते हुए हल्की आवाज़ मे सिर्फ़ यह कहती, “तुम पागल तो नही होगये हो घर मे सब लोग हैं क्या तुम्हे ज़रा भी डर नही है कि कोई देख लेगा.” जवाब मे मैं यह कहता, “क्या करूँ आप के खूबसूरत
और सेक्सी चुतड़ों को देख कर सब कुछ भूल जाता हूँ.” यह सब सिर्फ़ मम्मी के साथ ही नही नजमा को भी अकेला पा कर उसे भी दबोच
लेता. इन सब बातों के अलावा हर दूसरे तीसरे दिन शाहजी के पास ज़रूर जाता और जब भी जाता शाहजी मेरी गान्ड ज़रूर मारता.

वक़्त तेज़ी से गुज़रने लगा. चाची और भाभियो के घर पर होने से ना तो मैं नजमा को चोद सकता था ना ही शाहजी और मम्मी की चुदाई का कोई प्रोग्राम बन पा रहा था. एक तरफ शाहजी मम्मी और नजमा को चोदने के लिए पागल हो रहा था तो दूसरी तरफ मम्मी भी चुदवाने के लिए तड़प रही थी. इधर मैं अपने लंड को लंबा और मोटा करने के लिए रोजाना दवा से अपने लंड की मालिश कर रहा था साथ साथ ताक़त
की दवा भी खा रहा था. सिर्फ़ 15 दिनो मे ही मुझे अंदाज़ा होगया कि दवा के बारे मे जो कुछ लिखा था वो बिल्कुल सच है क्यूंकी 15 दिन मे
ही मुझे अपने लंड मे फरक सॉफ सॉफ नज़र आने लगा था.क्यूंकी मेरा लंड थोड़ा मोटा भी होगया था और थोड़ा लंबा भी.
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09-05-2020, 02:10 PM,
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एक दिन सॅटर्डे की रात को डिन्नर करने के बाद सब लोग टीवी लाउंज मे बैठ कर वीसीआर पर मूवी देख रहे थे पापा सोने के लिए जा चुके थे क्यूंकी सुबह की ट्रेन से दो दिन के लिए उन्हें सुखुर जाना था, दोनो भाई भाभियों को ले कर अपने कमरे मे जा चुके थे और सब बच्चे भी सो चुके थे अब टीवी लाउंज मे मैं मम्मी, नजमा, चाचा और चाची ही बैठे थे कि मूवी देखते हुए चाचा अचानक कहने लगे. “आज मैने कुछ ज़्यादा
ही खा लिया है जिस की वजह से सीना कुछ भारी भारी लग रहा है इसलिए सोच रहा हूँ कि बाहर जा कर थोड़ा वॉक करलूँ.”

चाचा की बात सुन कर चाची उठती हुई चाचा से बोली, “खाना खाते ही तुम पसर कर बैठ गये हो इसी लिए तो सीना भारी हो रहा है इसलिए ज़रूरी है के तुम थोडा चल फिर लो, अब बैठे क्यूँ हो उठ भी जाओ और मैं भी तुम्हारे साथ बाहर चल रही हूँ फिर वापस आ कर मूवी देख लें गे…..

दोनो के जाने के बाद हम सब थोड़ी देर बिल्कुल चुप रहे फिर मम्मी उठ कर दरवाज़े की तरफ जा कर दरवाज़े से ही बाहर हर तरफ देख कर वापस आई और मेरे बराबर बैठ कर हल्की आवाज़ मे कहने लगीं, “शहाब मैं चुदवाने के लिए पागल हो रही हूँ, आज कल शाहजी को तो हम घर पर बुला नही सकते अब कल तेरे पापा भी नही होंगे इसलिए मौके का फ़ायदा उठा कर कल शाम को किसी से मिलने का बहाना
करके मैं खुद शाहजी के यहाँ जा कर चुदवा लूँगी वैसे भी सनडे को वो भी अपनी दुकान शाम 6 बजे ही बंद कर देता है.”

अभी मैं कुछ बोलता कि नजमा जो सब कुछ सून रही थी बोल पड़ी, “मम्मी आप अकेली नही मैं भी आप के साथ जाउन्गी, मैं भी तो चुदवाने के लिए तड़प रही हूँ.”

“ठीक है, ठीक है बहाना करके तुझे भी साथ ही ले जाउन्गी.” नजमा से कह कर मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “तुम कल अपने किसी दोस्त के पास मत चले जाना.”

अभी मैं कुछ जवाब देता कि बाहर किसी भाई के कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई जिसे सुनते ही मम्मी उछल कर वापस मुझ से दूर अपनी जगह जा कर बैठ गयी उनके बैठ ते ही करीम भाई टीवी लाउंज मे आ गए और हमारे साथ ही बैठ गये वो यक़ीनी तौर पर आज
रात की पहली चुदाई ख़तम करके आए थे, थोड़ी देर मे चाचा और चाची भी आ गये. उस रात फिर हम कोई बात नही कर सके.

दूसरे दिन सुबह को किचेन मे मैने मम्मी से कह दिया कि शाम का प्रोग्राम पक्का है. नाश्ते के बाद करीम भाई पापा को स्टेशन ड्रॉप करके वापस आ गये. नजमा को चोदने और मम्मी की चुदाई देखने के तसव्वर से पूरे दिन मेरे जिस्म मे लज़्ज़त भरी सनसनाहट होती रही. मैं दिन
भर एक मिनिट के लिए भी घर से बाहर नही निकला, शाहजी को भी शाम के प्रोग्राम की खबर देने नही गया क्यूंकी मुझे मालूम था कि वो
ख़ास कर सनडे को दुकान बंद करने के बाद कही जाने की बजाए वो नहा धो कर अपने कमरे मे बैठ कर शराब पीता है.
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09-05-2020, 02:10 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
दूसरे दिन सुबह को किचेन मे मैने मम्मी से कह दिया कि शाम का प्रोग्राम पक्का है. नाश्ते के बाद करीम भाई पापा को स्टेशन ड्रॉप करके वापस आ गये. नजमा को चोदने और मम्मी की चुदाई देखने के तसव्वर से पूरे दिन मेरे जिस्म मे लज़्ज़त भरी सनसनाहट होती रही. मैं दिन
भर एक मिनिट के लिए भी घर से बाहर नही निकला, शाहजी को भी शाम के प्रोग्राम की खबर देने नही गया क्यूंकी मुझे मालूम था कि वो
ख़ास कर सनडे को दुकान बंद करने के बाद कही जाने की बजाए वो नहा धो कर अपने कमरे मे बैठ कर शराब पीता है.

मैं अपने कमरे मे था कि मम्मी ने मुझे आवाज़ दे कर बुलाया, मुझे मालूम था कि वो टीवी लाउंज मे हो गी इसलिए मैं सीधा उनके पास पहुँच गया, वहाँ दोनो भाई, भाभियाँ, चाचा, चाची और सब बचे बैठे टीवी देख रहे थे. दोनो भाई और भाभी के कपड़ों को देख कर लगता था कि वो
कही जाने वाले हैं, मैं वहाँ पहुँच कर मम्मी की तरफ देखता हुआ बोला, “जी मम्मी आप ने मुझे बुलाया है.”

“मुझे सलमा (मम्मी की दोस्त का नाम) के यहाँ जाना है अब शाम होगयि है मैं अकेले तो नही जाउन्गी तू मेरे साथ चल और मुझे वहाँ छोड़
कर वापस आजाना फिर 2 / 3 घंटे के बाद वहाँ आ कर मुझे वापस ले आना.” मम्मी ने बिल्कुल नॉर्मल लहजे मे बोला.

मेरे कुछ बोलने से पहले करीम भाई बोल पड़े, “मम्मी हम लोग तो सफ्दर अंकल के यहाँ जा ही रहे हैं, हम आप को छोड़ते हुए चले जाएँ गे
और जब आना होगा आप शहाब को बता दीजिए वो आप को लेने पहुँच जाए गा.”

“अरे नही तुम लोग जाओ मैं शहाब को ले कर चली जाउन्गी और इतना दूर भी नही है कि कार मे जाना ज़रूरी हो.” मम्मी ने करीम भाई से कहा.

नजमा फ़ौरन बोल पड़ी, “मम्मी मैं भी आप के साथ जाउन्गी सुबह से घर मे बैठे बैठे बोर होगयि हूँ.”

“पागल होगयि हो तुम भी जाओ गी तो कबीर और आस्मा को कौन देखे गा और तेरे चाचा चाची भी अकेले रह जाएँ गे.” वैसे हमारे इरादे और प्रोग्राम के बारे मे किसी को जर्रा बराबर भी शक नही हो सकता था मगर चूँकि हमारे दिल मे चोर था इसीलिए सब को सुनाने के लिए मम्मी यह सब कह रही थी.

“अरे नही नही हमारी और यहाँ की फिकर मत करें इसे भी ले जाएँ यह तो यहाँ थोड़े दिनों की मेहमान है इसलिए इसकी हर बात मान लिया करें.” मम्मी के इनकार पर नजमा ने सबको दिखाने के लिए अपना मुँह बना लिया था जिसे देख कर चाचा बोल पड़े थे.
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09-05-2020, 02:11 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
Ham dono thodi der isi tarah baten karte rahe phir jab sab wapas aa gaye to main mammi ke liye dawa lene shahji ki taraf rawana hogaya. shahji se dawa le kar wapas aaya our moqa dekh kar dawa mammi ko de diya. baqi ka poora waqt sab ke saath baith kar lahore, ialamabad our idhar udhaar ki batonmen guzar gaya. raat ko dinner ke baad jab ham sab lounge me baith kar gup shup karte hue tv dekh rahe the to neend ka bahana karke tv lounge se nikal gaya taki meri gair maujoodgi me mammi papa se meri kal ki chutti ki baat kar len. main bahar aakar chodi chupe andar ki baat soon-ne laga. thodi der baad mammi ne papa ko kal ka programe bataya to papa ne kaha. “theek hai sab ko chod to dungaa magar ek gaadi me itne log kaise jaaen ge.”

“najma hamare saath nahi jaa rahi hai isliye kal shahab ko dukan mat le jaen taki wo najma ke saath ghar par hi rahe kyunki din bhar najma ka ghar me akela rahna theek nahi hai. jab dono nahi jaaen ge to gaadi me jagah ho jaayegi” mammi ne papa se kaha.

“nahi use roz dukan janaa hoga, agar wo bilawajah chutti karne lage ga to uski aadat kharab ho jaayegi phir kia wo kaak mere baad business ko sambhaal sakee ga.” papa saaf saaf mujhe chutti dene se mana kar diya.

mammi ne shayad pahle hi se sab kuch soch rakha tha isliye wo fauran bolne lagin. “aap samajhte kyun nahi, abhi tak us par kisi zimedari ka boojh nahi tha our wo abhi tak khule saandh ki tarah aazad zindagi guzaarta aaya hai ab agar ekdam use bandh denge to wo baaghi na ho jaaye isliye main to kehti hoon ke jab tak aap america nahi jaate hain hafte me ek aadh baar khud se usko chutti de diya karen iss tarah uska dil khush ho jaayega our wo dil laga kar kam kare ga.”

papa ke kuch bolne se pahle chacha bol pare. “bhaiyya bhabhi bilkul theek keh rahi hain our shahab to bachpan hi se pagal dimaag ka ziddi larka hai agar ek baar patri se utar gaya to use raaste par lana bahut mushkil hoga.” chacha ke kehne se chaachi our nani jan bhi mammi our chacha ke haan me haan milane lagin.

papa ki samajh me shayad yeh baaten aa gaien thi isliye wo sar hilate hue kehne lage. “shayad tum log theek kahte ho ekdam us par sakhti karne se wo bigad bhi to sakta hai.”

main bahar se sab kuch soon raha tha our khush tha ki mammi ne sare maamle ko bahut ache tariqe se handle kar ke papa ko raazi kar hi liya. dusre din subah sab kuch usi tarah hua sab log papa ke saath chale gaye our ghar par sirf main our najma rah gaye. jane se pahle jab sab log jaane ke liye car par baith gaye to mammi kisi cheez ke bhoolne ka bahana karke sab ko car me chod kar akeli hamare paas aa gayi our aate hi najma ke saamne ekdam mere lund ko pakad kar halki aawaaz me muskuraate hue boli. “aaj ka poora din tumhare paas hai ab din bhar khoob dil bhar ke najma ko chod kar apne lund ko thanda kar lena, kyunki phir maaloom nahi kab chudayi ka mouka mile.” yeh kah kar najma ko dekhte hue kehne lagin. “too bhi bahut pyaasi hai kyunki bahut dinoo se tune bhi nahi chudawaya hai ab khoob ache se chudawa kar sari kasar poori kar le.” itna keh kar mammi musurate hue wapas chali gayi.

pichle dinoo jo kuch hua chunki najma usme shamil nahi thi our nahi use kuch batane ka mouka mila tha isliye use kuch nahi maaloom tha. wo bilkul nahi jaanti thi ke main our mammi bikul free ho chuke hain our mammi to ab mera muth bhi maarne lagi hain our main unke mamme wagairah sab kuch pakad kar masalne our sahlaane laga hoon, ab mammi ne aa kar jis tarah mera lund pakda our jo kuch unhone bola woo sab najma ko inteha hairaan karne ke liye kaafi tha, mammi ke jaate hi woo hairat se moorti bani mujhe dekhte hue sirf itna boli. “ki..ki..kiaa tum ne mammi ko chod liya hai ?”

“nahi bikul nahi choda hai, thehro pahle darwaaza band kar ke aajaaoon phir tumhen shuru se aakhir tak sab kuch bataaon ga.” yeh keh kar main jaa kar darwaze ko theek se band karke wapas aaya our najma ko bahunmen le kar pagaloon ki tarah use pyaar karna shuru kar dia.

“ooof cho….chodo pahle sab kuch bataao uske baad main chodane dungi.” najma khud ko chodane ki koshish karte hue boli.

maine najma ko chodne ki bajaye use god me utha kar kamre ki taraf lejata hua bola. “iss duniya me sirf tum hi meri raazdar ho ab tumhen nahi bataaungaa to our kise bataaonga, abhi mere dimaag me sirf chudayi hai aisi haalat me theek se bata bhi nahi paaungaa, isliye pahle chod kar garmi nikal loon uske baad aaram se sab kuch bata sakungaa.”

najma bhi chudawaane ke liye tarsi huyi thi our meri baat bhi uski samajh me aa gayi isliye wo kuch poochne ki bajaaye ab khud bhi mujh se lipat kar mere honth ko choomti huyi jazbaat se chod aawaaz me boli, “theek hai bahenchod pahle apni behan ko chod le our chod chod ke aaj meri choot ko phad dena main bhi chudawaane ke liye pagal ho rahi hoon.”

ham dono jazbaat me pagal ho rahe the isliye kuch bole bagair jaldi jaldi apne kapde utare our ek dusre ko piyar karna, chusna, masalna, sahlaana sab kuch bhool gaye. najma kapde utarte hi bistar par apni taangen khol kar chit let gai our main bhi fauran uspe sawaar ho kar apne lund ko uski choot me ghusa kar thaka thak poore zorshoor se ose chodanaa shuru kar diya. hamari chudayi ziyaada der nahi thaher saki our 10 minute se bhi kam waqt me pahle main jharaa our mere jharte hi najma bhi jhar gayi.

ham dono bahut dinoo se chudayi ke liye pagal ho rahe the, aaj jab itne dinoo ke baad chudayi ka mouka mila to kaisa foreplay kahan ka intzaar bus lund ghusaya our thaka-thuk pelna shuru kar diya ab iss halat me der tak kahan thaher sakte the fauran jhaD gayee our ham dono ka paani iss tarah our itna nikla jaise ab dobaara kabhi nahi niklega. jhadne ke baad hamari sab garmi jab nikal gayi to ham dono ka poora wajood ekdam shaant hogaya our ham dono taqriban 15 tak ankhen band karke chup chaap lete rahe. phir uth kar washroom ja kar ham dono ne pishab kia our dhoo dhoola kar wapas aaye to sab se pahle bistar ke chaadar ko badla kyunki wo ham dono ke paani se bilkul gilaa ho raha tha. chadar badalne ke baad sab se pehla kam yeh kia ke ham ne chae bana kar piya uske baad main aaraam se bistar ke piche apne kamar ko tika ya our bistar par apne pair lambe karke aaram se baith kar ek cigaret sulga kar lambe lambe do teen kash le kar sara dhoonwaan najma ke taraf phenka jo mere baraabar baithi kapde se apni choot saaf kar rahi thi jis me shayad mere jamaa kie hue pani ka drop nikal raha tha. najma apne haath ko hawa me hila hila kar cigaret ke dhoonwe se bachte hue mere baraabar meri tarah baith kar apne sar ko meri chaati se tikati huyi boli. “aaj mammi ne jis tarah ka act kia our tumhare lund ko pakad kar muskuraate hue jo kuch kaha mujhe abhi tak yaqeen nahi aa raha hai ke wo itni jaldi itna badal sakti hain. iss tarah ki baaten our harkat kisi mard se wahi ourat karti hai jis se chudawa chuki ho our tum kehte ho ke chudayi nahi huyi. aakhi maamla kia hai mammi me yeh tabdili ekdam se kaise aa gayi ? mujhe sab kuch bataao.”

maine ek gehra saans liya our apne cigaret ko aaraam aaraam se pite hue shuru se aakhir tak ek ek baat siwae madhubaalaa ki film dekhne our apne ishq ke sab kuch najma ko bata diya.

meri baat sun kar najma ek gehra saans le kar boli. “ham ne mammi ko shahji se chudawaane ka plan isliye bana kar oonko shahji se chudawaya tha taki oonko blackmainl kar ke apne qaboo me kar len phir khol kar bagair kisi dar ke chudayi ka mazaa le saken. ab jo kuch ho raha hai us se sirf hamara raasta hi nahi khula balki mammi ka bhi faida hua our unka raasta bhi khol gaya kyun main ghalat to nahi keh rahi hoon.”

“bilkul theek keh rahi ho, wo saaloon se chudawaane ke liye taras rahi thi magar khauf our dar se unmen itni himmat nahi thi ke kisi ko phansaa kar chudawa le ten, unhen to hamara shukriya asaa kar ke kuch innaam dena chahiye kiuke hamain wajaah se ab phir se oonko chudayi ka mazaa milne laga hai.” main najma ko apne baanhunmen le kar bhaichta hua bola.

najma ek ungli se meri chaati ke nipple ko sahlaati huyi boli, “shahab thore dinoo ke baad meri shaadi ho jaayegi our main chali jaaungee, main tumhare baare me soch rahi hoon ke mere jaane ke baad tum bagair chudayi ke kaise guzaara karo ge, waise to main mahine me ek do baar aaya karungi to tum mujhe chod sako ge. najma yeh kah ker thoda ruki phir kehne lagi, “agar meri maano to tum mammi ko chod lo, waise bhi tum unki choot our gaanD ko apne lund se na sahi apni ungli se to chod hi chuke ho our woo bhi tuhare lund ko pakad kar tumhari muth mar chuki hain phir baaqi kia bachha ab sirf lund ghusa kar chodanaa hi to baaqi hai.”

“tumhara dimaag kahaan hai, are abi to tumhen bataya tha ki mammi ne bikul saaf saaf kah diya hai ke wo sab se chudawa len gi magar mujh se nahi ab wo mujh se chudawaane ke liye raazi hi nahi hain to oonko kaise chod sakta hoon.” maine najma ko mammi ki kahi huyi baat ko yaad dilata hua bola.

meri baat sun kar najma ekdam mere lund ko pakad kar hilati huyi boli, “tum bikul hi budhoo ho jo itna bhi nahi samajhte ho ke jo aurat kisi mard ke lund ko pakad le wo zaroor use chudawati hai, mere khyaal me unke mana karne ki wajaah sirf maa bete ka rishta hai.” yeh kah kar wo mere lund ko chod kar do unglioon se mere naak ko pakad kar hilati huyi muskura kar boli. “tum jab apni iss bholi bhaali sharmili behan ko raazi karke chod kar behanchod ban sakte ho to mammi ko bhi chod kar maadarr chod banna tumhare liye mushkil nahi hoga, magar sawaal yeh hai ke tum khud mammi ko chodanaa chahte ho ya nahi.”

najma ke iss baat ke poochne par maine use poori tafseel se madhubaalaa ki film dekhne ke baare me bata kar bola, “tum mere dil ki haalat nahi samajh sakti ho ke main filmunmen madhubaalaa ki adaaon ko dekh kar uska diwana hogaya hoon our main use ishq karne laga hoon, chunki mammi bilkul madhubaalaa ki hamshakal hain isliye wahi meri madhubaalaa hain yaani main mammi se ishq karne laga hoon our jab onko dekhta hoon to wo mujhe meri mammi nahi meri mahbooba nazar aati hain our main kisi bhi tarah oonko chod na chahta hoon, magar kaise oonko raazi karke chodu yeh samajh me nahi aa raha hai kyunki unhone bilkul saaf kah diya hai ke oonko chodanaa to door ki baat hai main oonko chodane ke baare me kabhi sochon bhi na,,,
meri baat sun kar najma kuch sochne lagi phir sochte hue boli. “mere khyaal me tum agar koshish karo ge to wo tum se zaroor chudawa len gi, kyunki tum hi ne kaha hai ke mammi ko tumhara lund bahut pasand hai our wo tum se keh rahi thi ke agar tum unke bete nahi hoote to wo tum se zaroor chudawaten yani unhen tum our tuhara lund pasand hai our wo tum se chudawaanaa chahti hain magar wahi maa bete ke rishte ki diwaar unhen razi nahi hone deta hai, ab oonko raazi karne ka ek raasta meri samajh me aa raha hai wo ye ke papa ke usa jaane ke baad raat ko unhen sharab pila dena phir shayad nashe me wo chudawa len, bas sirf ek baar chudayi ho jaaye uske baad to wo din raat tum se chudawati rahe gi.”
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09-05-2020, 02:11 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
najma ki baat sun kar main sochta hua bola, “idea to tum ne bahut achha diya hai iss par mujhe soch kar koi achha plan banana padega, khair abhi sochne ke liye bahut time hai, waise maine soch rakha tha ki tuhari shaadi ke baad karmoo se keh kar uski behan ko chod kar apne lund ko thanda kar liya karungaa.”

karmoo ka naam sunate hi najma ekdam uth kar baith gayi maine dekha uski aankhen chamakne lagi thi, wo mujhe dekhte hue boli. “shahab aaj kal tumhara dost karmoo arbi shaikhoon ko chodane ke liye ladkia supply ka raha hai kyun ?”

najma ne achaanak jis tarah karmoo ke baare me poocha tha mujhe badi hairat huyi magar meri samajh me kuch nahi aaya, main ooljhi aawaaz me bola. “haan magar tum kyun pooch rahi ho ?”

“meri saheli ne mujhe bahut si aisi books parne ko diya tha jis me arbioon ki kahaniaan thi usi me maine padha hai ke arbioon ka lund bahut bara our mota hota hai our wo ghanton ladkiyon ko zabardast our bahut hi rough tariqe se chodte hain. ab jab se maine chudawaanaa shuru kia hai mere dimaag me arbioon ka baraa our mota lund aa jata hai our main kisi aise hi lund se chudawaane ke baare me sochne lagti hoon. karmoo tumhara dost hai tum us-se baat karke mujhe kisi arbi ke paas chudawaane bhej do is-se ek to meri khwaahish poori ho jaayegi saath hazaroon rupae bhi mil jaayen ge.”

najma ki baat sun kar maine ek gehra saans liya our bola, “pagal hogayi ho our tum karmoo ko nahi jaanti ho wo maadarrchod bahut bara kamina our pet ka halka hai wo har kisi se kehta phire ga ke shahab ki bahen randi ban gayi hai our yeh baat aag ki tarah har taraf phail jaayegi, dusra sab se bara khatra police ka hai wo baraabar aise hotlunmen chaape marti rehti hai agar tum police ke haath lag gayi to dusre din ke akhbaar ke front page par tasweer chaap jaayegee saath saath sare shahar ke policewale wale din raat chod chod kar tumhara wo haal karen ge ke tum apna naam tak bhool jaao gi samjhi.”

meri baat sun kar najma dar gayi our fauran apne kaan par haath rakhti huyi boli, “bab re baap mujhe yeh sab thodahi maaloom tha ki aisa bhi ho sakta hai.”

main najma ko khainch kar apne oopar letata hua uski chutdon ko pakad kar masalta hua bola, “abhi bhi chudawa chudawa kar tuhari choot bahu khol chuki hai our mujhe dar hai ke jab suhagraat me tera mia apna lund teri khuli choot me ghusae ga to kahen use shak na ho jaaye ke tum pahle hi se khoob chodi huyi ho.”

“yeh baat mujhe bhi fikar me daal deti hai waise to jab pehli baar woo apna lund meri choot me ghusae ga to main iss tarah ki acting karungi ke mujhe bahut takleef ho rahi hai our khud ko us se chodane ki koshish bhi karoongi taki woo yahi samjhe ke main takleef ke maare khud ko chodane ki koshish kar rahi hoon.” najma apne suhag raat ka plan bataya.

“jo kuch tum ne socha hai bilkul theek socha hai our aisa karna hi hoga saath saath maine tumhari khuli huyi choot ko kisi kanwari ladki ki choot ki tarah tight karne ka tariqa bhi dhoondh liya hai,” phir maine detail me use choot ko tight karne ka tariqa bataya our bola, “tamaam khatre se bachne ke liye zaroori hai ke shaadi se ek mahine pahle hi se chudayi bilkul band our rozaanaa din me do teen baar fitkiri ke paani se choot ko andar tak dhona padega saath hi saath maine yeh bhi soch rakha hai ke shaadi waale din tum ko ek choti bottle me kabutar ka thoda sa khoon de dungaa jise tum apne saath chupa kar le jaana our chudayi ke baad kisi bhi tarah apne mia se chupa kar bistar par daal dena jab tumhara mia bistar par khoon dekhe ga to wo yahi samjhe ga ke yeh khoon tumhare kanware hone ka pakka saboot hai.” maine najma ke liye jo kuch socha tha use poori detail me bata diya.

us din sab ke aane tak chaar baar ham ne chudayi ki our har pose me choda, kabhi khade ho kar to kabhi leta kar. har baar choot our gaanD dono jagah se dil bharke choda. dusre din sham ko jab main dukan se aaya too dinner ke baad mammi ne mouka pa kar mujhe bataya ke aaj hi sham ko unka mahina shuru hogaya hai. wo apne ruke hue mahine ke shuru ho jane se bahut khush thi our pregnant hone ka dar unke dil se nikal gaya tha.

dusre din se wahi routine shuru hogaya, subah papa ke saath dukan jaata magar sham ko 5 baje collage ka bahana karke dukan se nikal jaata our collage jaane ke bajaye idhar udhaar doston ke saath ghoomta rahta. maine bahut se ladkoon ki tarah apne attendence ke liye collage ke clerk se maamla fit kar rakha tha jis ke badle har mahine use 50 rupya dena parta tha.

main padhne se zaroor bhaagta tha magar apne business me poori dilchaspi our har baat ko samajhne our sikhne me apna poora waqt deta, meri business me iss dilchaspi ko dekh kar papa mujh se bahut khush the our unhone sunday ke alawa ek our din mujhe choti dene lage the.

bhai our bhabhi wapas aa gaye the. wapas aane ke baad dono bhai sirf do teen ghanton ke liye dukan jaate our apna baqi waqt kisi mehmaan ki tarah ghoome phirne me guzaarne lage the. ek sham safdar uncle dinner ke liye hamare yahaan aae phir sab ne mil baith kar usa jaane ke liye najma ki shaadi ke 15 din ke baad ke date ko final kar lia our dusre din hi safdar uncle ne lufthansa airline se seat ki busking karwa kar ticket le liya. papa ke laakh mana karne ke bawajood sab ke ticket ke paise unhone apni jeeb se dia. najma ke shaadi ki taareekh 01 august 1981 our 22 august subah 4:50 saturday wale din papa logon ki flight thi.

iss darmiyaan jab main ghar par hota to moqe ki talaash me rahta our mammi ko akela paa kar kabhi unki chutdon ko dabadeta to kabhi oonk mamme pakad kar masal daalta, mere iss harhat par mammi ghabra kar idhar udhar dekhte hue halki aawaaz me sirf yeh kehten, “tum pagal to nahi hogaye ho ghar me sab log hain kia tuhen zara bhi dar nahi hai ke koi dekh lega.” jawab me main yeh kehta, “kia karoon aap ki khubsuraan aaue sexy chodaaoon ko dekh kar sab kuch bhool jata hoon.” yeh sab sirf mammi ke saath hi nahi najma ko bhi akela paa kar use bhi dabooch leta. in sab baton ke alawa har dusre tisree din shahji ke paas zaroor jataa our jab bhi jaata shahji meri gaanD zaroor maarta.

waqt teji se guzarne lagaa. chaachi our bhabhion ke ghar par hone se na to main najma ko chod sakta tha na hi shahji our mammi ki chudayi ka koi programe ban paa raha tha. ek taraf shahji mammi our najma ko chodane ke liye pagal ho raha tha to dusri taraf mammi bhi chudawaane ke liye tadap rahi thi. idhar main apne lund ko lamba our mota karne ke liye rojaana dawaa se apne lund ki maalish kar raha tha saath saath taaqat ki dawa bhi kha raha tha. sirf 15 dinoo me hi mujhe andaza hogaya ke dawa ke baare me jo kuch likha tha wo bilkul saach hai kyunki 15 din me hi mujhe apne lund me farak saaf saaf nazar aane laga tha.kyunki mera lund thoda mota bhi hogaya tha our thoda lamba bhi.

ek din saturday ki raat ko dinner karne ke baad sab log tv lounge me bath kar vcr par movie dekh rahe the papa sone ke liye ja chuke the kyunki subah ki train se do din ke liye unhen sukhur jana tha, dono bhai bhabhion ko le kar apne kamre me ja chuke the our sab bache bhi so chuke the ab tv lounge me main mammi, najma, chacha our chaachi hi baithe the ke movie dekhte hue chacha achaanak kehne lage. “ajj maine kuch jyada hi kha liya hai jis ki wajah se sina kuch bhari bhari lag raha hai isliye soch raha hoon ke bahar ja kar thoda walk karloon.”

chacha ki baat sun kar chaachi uthti huyi chacha se boli, “khanaa khate hi tum pasar kar baith gaye ho isi liye to sina bhari ho raha hai isliye zaroori hai ke tum thoda chal phir lo, ab baithe kyun ho uth bhi jaao our main bhi tumhare saath bahar chal rahi ho phir wapas aa kar movie dekh len ge…..

dono ke jaane ke baad ham sab thodi der bilkul chup rahe phir mammi uth kar darwaaze ki taraf ja kar darwaaze se hi bahar har taraf dekh kar waapas aaen our mere baraabar baith kar halki aawaz me kehne lagin, “shahab main chudawaane ke liye pagal ho rahi hoon, aaj kal shahji ko to ham ghar par bolwa nahi sakte ab kal tere papa bhi nahi hoonge isliye mooqe ka faida utha kar kal sham ko kisi se milne ka bahana karke main khud shahji ke yahaan ja kar chudawa lungi waise bhi sunday ko wo bhi apni dukan sham 6 baje hi band kar deta hai.”

abhi main kuch bolta ke najma jo sab kuch soon rahi thi bol padi, “mammi aap akeli nahi main bhi aap ke saath jaaungee, main bhi to chudawaane ke liye tadap rahi hoon.”

“theek hai, theek hai bahana karke tujhe bhi saath hi le jaaungee.” najma se keh kar mammi ne meri taraf dekha our boli, “tum kal apne kisi dost ke paas mat chale jaana.”

abhi main kuch jawab deta ke bahar kisi bhai ke kamre ka darwaaza khulne ki aawaaz aai jise sunate hi mammi uchhal kar wapas mujh se door apni jagah ja kar baith gayi unke baith te hi kareem bhai tv lounge me aa gae our hamare saath hi baith gaye wo yaqini taur par aaj raat ki pehli chudayi khatam karke aae the, thodi de me chacha our chaachi bhi aa gaye. us raat phir ham koi baat nahi kar sake.

dusre din subah ko kichen me maine mammi se keh diya ke sham ka programe pakka hai. nashte ke baad kareem bhai papa ko station drop karke wapas aa gaye. najma ko chodane our mammi ki chudayi dekhne ke tasawwar se poore din mere jism me lazzaat bhari sansanaahat hoti rahi. main din bhar ek minute ke liye bhi ghar se bahar nahi nikla, shahji ko bhi sham ke programe ki khabar dene nahi gaya kyunki mujhe maaloom tha ki wo khaas kar sunday ko dukan band karne ke baad kahen jaane ke bajaae wo naha dhoo kar apne kamre me baith kar sharab pita hai.

main apne kamre me tha ki mammi ne mujhe awaaz de kar bolaya, mujhe maaloom tha ki woo tv lounge me hoon gi isliye main sidha unke paas pahunch gaya, wahan dono bhai, bhabhiyaan, chacha, chaachi our sab bache baithe tv dekh rahe the. dono bhai our bhabhi ke kaproon ko dekh kar lagta tha ki wo kahen jaane waale hain, main whaan pahunch kar mammi ki taraf dekhta hua bola, “ji mammi aap ne mujhe bulaya hai.”

“mujhe salma (mammi ki dost ka naam) ke yahan jana hai ab sham hogayi hai main akele to nahi jaaungee too mere saath chal our mujhe wahaan chod kar wapas aajana phir 2 / 3 ghante ke baad wahan aa kar mujhe wapas le aana.” mammi ne bilkul normal leje me bola.

mere kuch bolne se pahle kareem bhai bol pare, “mammi ham log to safdar uncle ke yahan jaa hi rahe hain, ham ki aap ko chodte hue chale jaaen ge our jab aana hoga aap shahab ko bata dijye wo aap ko lene pahunch jaae ga.”

“aare nahi tum log jaao main shahab ko le kar chali jaaungee our itna door bhi nahi hai ke car me jana zaroori ho.” mammi ne kareem bhai se kaha.

najma fauran bol padi, “mammi main bhi aap ke saath jaaungee subah se ghar me baithe baithe bor hogayi hoon.”

“pagal hogayi ho tum bhi jaao gi to kabeer auur aasma ko kaun dekhe ga our tere chacha chaachi bhi akele rah jaaen ge.” waise hamare irade our programe ke baare me kisi ko zarra baraabar bhi shak nahi ho sakta tha magar chunki hamare dil me chod tha isiliye sab ko sunane ke liye mammi yeh sab keh rahi thi.

“are nahi nahi hamari our yahan ki fikar mat karen ise bhi le jaaen yeh to yahan thore dinoo ki mehmaan hai isliye iski har baat maan liya karen.” mammi ke inkar par najma sabko dekhane ke liye apna munh bana liya tha jise dekh kar chacha bol pade the.
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09-05-2020, 02:11 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
bhai our bhabhiyon ke jaane ke 10 minute baad ham tino nikal pare. raat ka 8 baj chuka tha magar sham ka andhera nahi phaila tha our abhi bhi mausam bahut garam tha. raaste me maine mammi se kah diya tha ki wo aahista aahista shahji ke pichli gaali se uske darwaaze par aayen main pahle se jaa kar darwaaze ko khulwa kar rakhungaa taki wo aate hi fauran sidhe andar ghus saken. main unse alag ho kar tez tez qadmoon se shahji ke darwaaze par pahunch kar knock kia thodi der me shahji ne darwaza khula our mujhe dekh kar khush ho kar bola, “badi lambi umr hai teri main tere baare hi me soch raha tha ki too ……………………… abhi wo apni baat khatam bhi nahi kia tha ki mammi our najma ko andar aata dekh kar hairat ke maare chup hogaya.

main jaldi se darwaaze ko band kar ke shahji ki taraf moor kar dekh jo khaas kar mammi ko apne yahaan dekh kar hairat ke maare moorti bana mammi ko dekhe jaa raha tha, shahji ki haalat dekh kar main hans kar bola, “shahji kia yahen khade khade poora waqt nikal do ge, andar to chaloo.”

meri baat sun kar shahji hush me aa gaya our ekdam mammi our najma ki kamar me haath daal kar dono ko ek saath khud se lipatata hua khushi se chahak kar bola, “dono ko ek saath apne yahan dekh kar yaqeen nahi aa raha hai kair ab andar chal.”

ham sab kamre me gayee to maine dekha ek baalti me beer ke bottles ko ice me thanda karne ke liye rakha gayaa hai our sofe ke saamne table par aath (8) beer ki khaali bottle our ek aadhi bottle rakhi huyi hai, kamre me room cooler ki wajah se garmi bilkul nahi thi, shahji mammi our najma ko le kar bistar par baith gaya tha. main aath khaali bottle ko hairat se dekhta hua shahji se poocha, “shahji aath aath botalen pi chuke ho our tum abhi tak hush me ho.”

“abe nahi yeh sab main akela nahi piya hai, shareef, zahid our rasheed bhi yahen the yeh ham sab ne mil kar piya hai wo tino tum logon ke aane se 15 minute pahle hi to gayee hain,” shahji yeh keh kar mammi our najma ko apne jism se bhaichta hua bola, “agar mujhe maaloom hota ke yeh dono aa rahi hain to tino ko ruk leta oon tino ne jab se teri maa ko dekha hai wo saale ise chodane ke liye lund haath me liye ghoom rahe hain”

shahji ki baat sun kar mammi bol padi, “hamari to mulaaqat bhi nahi huyi phir oon tino ne mujhe kaise dekh liya.”

“pichle hafte tum waterpump ke market me kisi ke saath ek dukan se kuch khareed rahi the us waqt ham charon bhi vahin the phir maine tino ko bataya ke tum kaun ho, wo saale to tuhen dekh kar pagal hogaye our agar unka bas chalta to tuhen vahin patakh kar chod lete, agar tum akele ho ti to main tum ko oon se milwa bhi deta.” shahji mammi ko dekhta hua bola

batunmen jyadah waqt na guzar jaaye yeh soch kar main jaldi se bola “ab jo hona tha wo hogaya agar wo nahi jaate to aaj hi mammi ko chod sakte the, kair aaj na sahi kal wo mammi ko chod hi len ge, ab abhi tum chodanaa shuru kar do hame jaldi jaana hai kyunki ham badi mushkil se bahana bana kar nikle hain.”

phir ham charon kapde utar kar naange hogaye. main najma ke haath ko pakad kar apne paas lana hi chahta tha ki shahji fauran najma ke haath ko mujh se choda liya to main hairat se bola, “shahji ye kia tum mammi ko chodanaa shuru karo main najma ko chodungaa.”

shahji mammi ko chod kar najma ki chaati ko dabata hua bola, “abe saale yeh teri bahen hai too ise jab chahe chod sakta hai, aaj yeh itne dinoo ke baad to mili hai our yeh thore dino me shaadi kar ke chali jaae gi phir maaloom nahi ise kabhi chodane ka mouka mile ya na mile, isliye aaj pahle ise chodungaa phir teri maa ko chodungaa….

mammi shahji ke lund ko haath badha kar pakad liya our lund ko sahlaate hue boli, “theek hai tum najma hi ko pahle chod lo baad me mujhe chodanaa us waqt shahab najma ko chod lega bas jo karna hai jaldi kar lo kyunki ham 10 / 10 ½ baje se ziyaada nahi ruk saken ge.”

shahji najma ko bistar par letata hua kehne laga, “are abhi to 8 hi baja hai abhi bhi 2 ½ ghante ka waqt hamare paas hai, itne waqt me ham charon aaraam se zabardast chudayi ka mazaa le len ge.” shahji yeh kahta hua najma ki dono taangon ko phaila kar jhuka our najma ki choot ko choom kar apna sar utha kar mujh se our mammi se bola, “tum dono chup chaap kyun baithe ho, aisa karo main najma ko choot ko chusungaa our tum dono najma ki ek ek chaati ko masalna our chusna shuru kar do.” yeh kah kar shahji apna sar jhukaya our apna munh najma ki choot par rakh kar uski choot ko chusna shuru kar diya.

shahji ki baat sun kar maine mammi ko our mammi ne mujhe dekha our ek saath sar jhuka kar ham dono ne najma ke nipple ko chusna shuru kar diya our haath me le kar dabane bhi lage.

najma ko yaqinan bahut mazaa aa raha tha kyonki wo machhal rahi thi our siskiaan le le kar baDabaDaa rahi thi, “hoooo hooo haa oooooffff bbbbahut mmmmaza aa raha hai, ooof hai sh…sh..shahji ooof haan haan isi tarrah meri choot ke dane ko zor zor se chuso.”

najma ke ek taraf main tha our dusri taraf mammi thi, main jab najma ki chaati ko chusne ke liye jhuk raha tha meri nazar mammi ki chaati par gayi jo jhuk kar najma ki chaati chusne ki wajah se unki chaati najma ke pet par aa gayi thi main najma ke chaati ko masalte our chuste hue apne dusre haath se mammi ki chaati ko pakad liya our masalne our dabane laga, mere yeh karne se mammi ko yaqinaan bahut mazaa mil raha tha kyunki wo ekdam najma ki chaati ko zor zor se chusna shuru kar diya tha saath saath najma ki chaati ko chuste hue khud bhi halki halki siskari lene lgen thi. mammi ki chaati ka tanaao our sakhti najma ki chaati se jyada tha. shuru me jab najma ne chudawaanaa shuru kia tha to uski chaati bahut tight our tani huyi thi jise shahji our uske tino doston ne khoob daba daba kar, masal masal kar our chus chus kar dhila kar diya tha.

thodi der baad shahji najma ki choot ko chusna band kar diya our najma ko utha kar baitha ya our khud chit let kar mammi our najma se bola, “chup chaap baith kar kia dekh rahi hai kanjrioon, aaja our dono mil kar apne is thookoo ke lund ko chusna shuru kar.” shahji ki baat sun kar main samajh gaya ke shahji ab poori tarah mast hogaya hai kyunki jab wo ghusse me hota hai ya sex ki masti me aa jata hai to uski zabaan se aise hi gaaliaan our nangi baaten nikalni shuru ho jati hain.

mere paas karne ke liye kuch nahi tha isliye main bistar par ek kone main bath kar apne lund ko sahlaate hue sab kuch dekh kar our sun kar maze le raha tha. mammi our najma ne shahji ke lund ko sahlaana our chusna shuru kar diya tha. unke jhuk kar lund chusne se unki chutd oopar uth gayi thi. dono ki goori goori khubsoorat chutdon ko dekh kar main jazbaat se kapkapa gaya our be-ekhtiyaar uth kar shahji ke phaile hue tangon ke paas aa kar apne dono pair shahji ke pair ke dono taraf rakha our ghutnonn ke bal baith kar ek haath najma ki chutd par our dusra haath mammi ki chutd par rakha our dono ki chutdon ko dabate hue apni ungli se unke gaanD ke surakh ko sahlaa na shuru kar diya. dono ki gaanD choot se rasne wale paani se gili ho rahi thi. main gaanD ko sahlaate hue piche se apni ungli dono ki choot me ghusa kar dono ko ungli se chodanaa shuru kar diya. jaise hi maine apni ungli unki choot me andar bahar karna shuru kia dono ekdam shahji ke lund se apna munh hata kar lazzaat our jazbaat ki shiddat se chutd hila ti huyi ek saath bar bara ne lagin. “hooo hooo oooffff han..haan isi tarah zor zor se karo bahut maza aa raha hai.”
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09-05-2020, 02:11 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
भाई और भाभियों के जाने के 10 मिनिट बाद हम तीनो निकल पड़े. रात के 8 बज चुके थे मगर शाम का अंधेरा नही फैला था और अभी भी मौसम बहुत गरम था. रास्ते मे मैने मम्मी से कह दिया था कि वो आहिस्ता आहिस्ता शाहजी के पिछली गली से उसके दरवाज़े पर आई मैं पहले से जा कर दरवाज़े को खुलवा कर रखूँगा ताकि वो आते ही फ़ौरन सीधे अंदर घुस सकें. मैं उनसे अलग हो कर तेज़ तेज़ क़दमों से
शाहजी के दरवाज़े पर पहुँच कर नॉक किया थोड़ी देर मे शाहजी ने दरवाज़ा खोला और मुझे देख कर खुश हो कर बोला, “बड़ी लंबी उम्र है तेरी मैं तेरे बारे ही मे सोच रहा था कि तू ……………………… अभी वो अपनी बात ख़तम भी नही किया था कि मम्मी और नजमा को अंदर आता देख कर हैरत के मारे चुप होगया.

मैं जल्दी से दरवाज़े को बंद कर के शाहजी की तरफ मूड कर देखा जो ख़ास कर मम्मी को अपने यहाँ देख कर हैरत के मारे मूर्ति बना
मम्मी को देखे जा रहा था, शाहजी की हालत देख कर मैं हंस कर बोला, “शाहजी क्या यही खड़े खड़े पूरा वक़्त निकाल दो गे, अंदर तो
चलो.”

मेरी बात सुन कर शाहजी हश मे आ गया और एकदम मम्मी और नजमा की कमर मे हाथ डाल कर दोनो को एक साथ खुद से लिपटाता
हुआ खुशी से चहक कर बोला, “दोनो को एक साथ अपने यहाँ देख कर यक़ीन नही आ रहा है खैर अब अंदर चल.”

हम सब कमरे मे गये तो मैने देखा एक बाल्टी मे बियर के बॉटल्स को आइस मे ठंडा करने के लिए रखा गया है और सोफे के सामने टेबल पर आठ (8) बियर की खाली बॉटल और एक आधी बॉटल रखी हुई है, कमरे मे रूम कूलर की वजह से गर्मी बिल्कुल नही थी, शाहजी मम्मी और नजमा को ले कर बिस्तर पर बैठ गया था. मैं आठ खाली बॉटल को हैरत से देखता हुआ शाहजी से पूछा, “शाहजी आठ आठ बोतलें पी चुके हो और तुम अभी तक हश मे हो.”

“अबे नही यह सब मैने अकेला नही पिया है, शरीफ, ज़ाहिद और रशीद भी यहें थे यह हम सब ने मिल कर पिया है वो तीनो तुम लोगों के आने से 15 मिनिट पहले ही तो गये हैं,” शाहजी यह कह कर मम्मी और नजमा को अपने जिस्म से भींचता हुआ बोला, “अगर मुझे मालूम होता कि यह दोनो आ रही हैं तो तीनो को रोक लेता ऊन तीनो ने जब से तेरी माँ को देखा है वो साले इसे चोदने के लिए लंड हाथ मे लिए घूम रहे हैं”
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