antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
10-23-2020, 02:27 PM,
#21
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
यक़ीनन….गायब होने की वजह क़र्ज़ हो सकती है….
लेकिन
इस्तीफ़ा…..?

मुनासीब यही होगा कि ये सवाल आप मेरे लिए छोड़ दे….

मैं नही समझी….?

बहुतर बातें खावतीनों के इल्म में लाने वाली नही होती….

शाहिद ने बौखला कर इमरान की तरफ देखा….

लिहाज़ा….आप आराम की जिए….इमरान बोला

मैं अपने घर वापिस जाना चाहती हूँ….!

अभी नही….ज़रा हालात को मेरे काबू में आ जाने दी जिए….
वरना
आप देख ही चुकी है कि पोलीस आप का सुराग नही पा सकी थी….
और वो लड़की अब भी आज़ाद है जो आप को हर्लें हाउस ले गयी थी….!

तो….इसका मतलब ये हुआ कि यहाँ क़ानून की हुक्मरानी (शासन) नही है….?

क़ानून की हुक्मरानी तो है….
लेकिन
सियासत भी बहेरहाल एक ठोस हक़ीक़त है….!

क्या इसलिए कि वो सफेद फाम विदेशी है….?

अगर….वो सफेद फॉम विदेशी भी होते तो हालात के तहत यही सूरत होती….क़र्ज़ देने वाले विदेशी बेहद सूरत हराम होते है….
लेकिन इसके बावजूद भी उनके हुस्न की तारीफ करनी पड़ती है….!

मैं समझ गयी….

यही बात है….
तो फिर….
बस जा कर आराम की जिए….!

शुक्रिया….मलइक़ा ने कहा
और उसी कमरे में वापस चली गयी जहाँ से वो गहरी नींद से जागी थी….!

इमरान ने आगे बढ़ कर दरवाज़ा बंद कर दिया….

अगर….आप यहीं सामने आ जाते तो यादश्त खो बैठने का ढोंग ना रचता….शाहिद ने आहिस्ता से कहा….मैं उस खौफनाक आदमी को देख यही समझा था कि वो उन्ही लोगों आदमी है….आप की कॉल रिसीव करने के बाद मैं उनके चन्गूल में फस गया….वो हट की खिड़की तोड़ कर अंदर दाखिल हुए थे….

फिर….तुम्हे बेहोश कर के एक आंब्युलेन्स में डाला था….
और
निकल जाना चाहते थे….

और….मुझे यहाँ होश आया था….इसलिए ग़लतफहमी में मुब्तेला हो गया….!

खैर….अब आ जाओ असल मामले की तरफ….

मैं अभी इस पोज़िशन में नही हूँ कि उसका क़र्ज़ अदा कर सकूँ….

अगर….लाख….दो लाख की बात है तो मैं दे सकता हूँ….इमरान बड़े खूलूस से कहा

पूरे 10 लाख….

दो दिन के अंदर-अंदर इंतेज़ाम कर दूँगा….

आप नही….शाहिद खिसियानी हसी के साथ बोला

हा….हा….क्यूँ नही….बस आप इस्तीफ़ा वापस ले लो….इमरान चहक कर बोला

शाहिद कुछ ना बोला….अहमाक़ाना अंदाज़ में इमरान की सूरत ताकता रहा

जिस शक्श का हुलिया तुम्हारी बहन ने बताया है….वो क़र्ज़ नही देता….
बल्कि
हुकूमतों के तख्ते उलटता है….!

आप क्या जाने….शाहिद उछल पड़ा

अपने बाप के मुक़ाबले में मैने ज़्यादा दुनिया देखी है….आज से दो साल पहले उसने एक अफरीसी मुल्क को जहन्नुम बना दिया था….!

इमरान साहब….मैं एक बेबस चूहे की तरह ख़ौफज़दा हूँ….

अगर….सच्ची बात बता दो तो….
शायद
मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूँ….!

शाहिद ने दोनो हाथों से अपना चेहरा ढांप लिया….
और
भर्राई हुई आवाज़ में बोला….अगर….मैं आप को अपनी बेबसी की वजह बताऊ तो आप मुझ से निराश हो जाएँगे….
लेकिन खुदा की कसम….मुझे कतई याद नही कि मैं कब उन हरकत का दोषी हुआ था….!

तुम जो कुछ भी कहोगे मैं उस पर यक़ीन कर लूँगा….मैं तो सिर्फ़ एक तमाशायी हूँ….मोहब्बत और नफ़रत का हक़ मुझ से छीन लिया गया है….!

मैं नही समझा….शाहिद ने चेहरे से हाथ हटा लिया

एक ऐसा तमाशायी जो जो खुद भी तमाशे ही का एक किरदार है….

अब भी नही समझा….

मैं सिर्फ़ काम करता हूँ….मोहब्बत, नफ़रत करना मेरा मसलक (पंत), (व्यू) नही है….
बल्कि…. उसी दरख़्त (ट्री) की तरह जो सिर्फ़ फल देता है….फल तोड़ने वालों पर पत्थर नही चलाता….!

तालिब-इल्म (छात्र जीवन) के ज़माने में उनके चन्गूल में फस गया था….मेडिसिन आंड सर्जरी का बहुत अच्छा स्टूडेंट था….
और सिलेबस से बाहर निकल कर भी तलाश जूस्तजू की लगन रखता था….मेरे उसी जुनून से उन्हे फ़ायदा उठाने का मौक़ा मिल गया….मेरा एक क्लासमेट जो वहीं के एक बड़े सरमयेदार (कॅपिटलिस्ट) का लड़का था….एक दिन कहने लगा कि मैं तुम्हे एक ऐसी संस्था इंट्रोड्यूस कर सकता हूँ जहाँ क्षमता बढ़ाने के बेहतर मौक़े मौजूद है….मैं उसकी बातों में आ गया….वाक़ई वो अजीब दुनिया थी….मैने वहाँ ऐसे-ऐसे आक्सेसरी देखे जिन का तस्सउूर भी नही कर सकता था….किताबों का एक ऐसा ज़ख़िराह कि आँखें खुल गयी….संस्था का हेड एक मश्फिख आदमी (केरिंग-मॅन) था….उसने मुझे हाथों हाथ ले लिया था….उसका कहना था कि ज़हनीयत की कोई कौमियत (नॅशनॅलिटी) नही होती….खुदा का दान है….इसे सारी दुनिया के काम आना चाहिए….ये आधा तीतर उसी संस्था का निशान और मॉनोग्रॅम का एक हिस्सा है….

लेकिन मेरे लिए ये निशान सोहान रूह (कष्ट-दायक) बन गया है….दो माह से वो लोग किसी ना किसी तरह से ये निशान मुझ तक पहुँचाते रहे है….उसका मक़सद याद दिलाना है कि अब मुझे उनका खिलोना बनना पड़ेगा….!

सवाल तो ये है कि तुम वहाँ अपनी क्षमता बढ़ाते-बढ़ाते क्या करने लगे थे….जिस की बिना पर वो तुम्हे ब्लॅकमेल करने की कोशिश कर रहे है….? इमरान ने सवाल किया

काश मुझे यक़ीन होता कि मैने वो सब कुछ किया होता….जिस के खुले हुए सबूत उन्होने मेरे सामने पेश किए थे….!

डॉक्टर हो कर ऐसी बातें करते हो….? इमरान उसकी आँखों में आँखें डालता हुआ बोला….मैं तुम्हे एक ऐसा इंजेक्षन दे सकता हूँ के तुम सच-मूच अपने बारे में सब कुछ भूल जाओगे….
और इंजेक्षन का असर ख़त्म होने के बाद तुम्हे कतई याद नही रहेगा कि तुम इस दौरान में क्या कर चुके हो….!

आप जानते है….? डॉक्टर शाहिद आनंदित लहजे में चीखा

जानता ही नही हूँ….
बल्कि ऐसे बहुतर तरीके मेरे पास भी है….!

लेकिन….लोगों की बड़ी तादाद इसके बारे में नही जानती….डॉक्टर शाहिद लंबी साँस ले कर बोला….उनके पास मेरी ऐसी बेहूदा तस्वीर है कि मैं उनका तस्सउूर भी नही कर सकता….!

लड़की जान-पहचान वाली होगी….?

हरगिज़ नही….लड़की नही….लड़कियाँ कहिए….
लेकिन मेरे फरिश्तों को भी मालूम नही कि वो कौन थी….या मैं उनसे कब मिला था….!

मुझे यक़ीन है….

वो तस्वीर मुझे दिखाने के बाद कहा गया था कि मैं पूरी तरह उनके गिरफ़्त में हूँ….जहाँ भी रहूँगा उनका पाबंद रहूँगा….!

तो क्या कुछ दिनों तक वहाँ रुके थे….?

6 माह तक….तालीम मुकम्मल करने के बाद वापसी का ख़याल था कि उस संस्था के हेड ने मुझे 6 माह स्पेशल ट्रैनिंग देने का ऑफर दिया….खर्चा संस्था ही के ज़िम्मे होता….
लिहाज़ा मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता था….
और यक़ीन की जिए कि मैं दिल की सर्जरी का स्पेशलिस्ट उसी संस्था में 6 माह के अंदर-ही-अंदर बन गया था….
और उसी दौरान में ही उन्होने मेरे साथ वो हरकत कर डाली जिस का मुझे इल्म ही ना हो सका….
लेकिन मुझे उससे पहले ही शक हो गया था कि मैं ग़लत लोगों के हाथों में पड़ गया हूँ….
और ये उस मुल्क की वही संघटन है जो विकाशील देशों में रेशा किया करती है….!
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10-23-2020, 02:28 PM,
#22
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
किस बिना पर शक हुआ था तुम्हे….? इमरान ने उसे गौर से देखते हुए पूछा

वहाँ मरीज़ भी होते थे….मैं जब वहाँ था उसी दौरान एक अफ्रीकी मुल्क का शहज़ादा अपने किसी मरीज़ का इलाज करने के लिए दाखिल हुआ था….वहाँ के बादशाह का भांजा था….दवाइयों का आदि था….जिन्सी (सेक्स) का शिकार….

और असाधारण शक्ति के केप्सूल का ख्वहिश्मन्द था….वो लोग उसका पोषीदा (छिपा) तौर पर उसका किसी किस्म का ट्रीटमेंट करने लगे….एक दिन वो नशे की झोंक में रोने लगा….

और बोला….कि वो इस बार अपने मामू यानी उस अफ्रीकी मुल्क के बादशाह की सालगिराह के जश्न में शिरकत (भाग) नही कर सकेगा….संस्था के थेरपिस्ट्स ने उसे इतमीनान दिलाते हुए वादा किया कि वो वहीं से सालगिराह के जश्न बरपा कर के उसके लिए संस्कार की आदाएगी का मौक़ा फरहाम कर देंगे….आप यक़ीन की जिए इमरान साहब कि इतनी सी बात के लिए उन्होने बहुत बड़ी रकम खर्च कर दी थी….बा-क़ायदा दरबार का सेट लगाया था….
और एक ऐसा आदमी भी उन्होने ढूंड निकाला था….जो उसके मामू का हमशक्ल था….जश्न सालगिरह हुई….मुबारकबाद देने की रसम के वक़्त शहज़ादा उसके करीब पहुँचा….

और रेवोल्वेर निकाल कर उस पर फाइरिंग शुरू कर दी….कारतूस नकली थे….बात हसी में टल गयी….लोगों ने ज़ोर-ज़ोर से क़हक़हे लगाए थे….
और तालियाँ बजाई थी….
लेकिन
मुझे ऐसा ही लगा था….जैसे उस वक़्त वो शहज़ादा मशीनी तौर पर हरकत करता रहा हो….कुछ सोचे समझे बगैर में उलझन में मुब्तेला हो गया था….दूसरे दिन मौक़ा निकाल कर मैने उससे बात की थी….
यक़ीन की जिए….

वो हैरत से मूह खोले मुझे देखता रहा था….कुछ भी तो याद नही था उसे….फिर वो हँस कर बोला….शायद तुमने ख्वाब देखा था….डॉक्टर शाहिद खामोश हो कर कुछ सोचने लगा….

सालगिराह की बात खुद उसने शुरू की थी….
और रो दिया था….? इमरान ने सवाल किया

नही….उसके मुल्क की रस्मों रिवाज की बातें छिड़ी हुई थी….बादशाह की सालगिराह का भी ज़िक्र शुरू हुआ था….
और
उसने रोना शुरू कर दिया था….खैर अब से एक साल पहले का वक़ीया याद की जिए….आफ्रिका के उसी मुल्क के बादशाह का उसके उसी भानजे ने कत्ल कर दिया था….जिस ने 3 माह पहले उस संस्था में गोया उसके कत्ल का रिहर्सल किया था….बिल्कुल उसी तरह सालगिराह की मुबारकबाद देते वक़्त उसने अपने मामू पर 4 फाइयर किए थे….
और वो उसी जगह गिर कर ठंडा हो गया था….!

हाँ….मुझे याद है….इमरान ने कहा

अब….आप खुद सोचिए मैं कैसे ख़तरनाक लोगों के चन्गूल में फस गया हूँ….!

लेकिन….सवाल तो ये है कि तुमने इस्तीफ़ा क्यूँ दिया….?

क्या आप को मेरी पोज़िशन का इल्म नही है….

हाँ….मैं जानता हूँ कि तुम किन शख्सियतो के थेरपिस्ट हो….!

बस….तो फिर….मेरी मौजूदा पोज़िशन का अंदाज़ा लगा ली जिए….मैं मर जाना पसंद करूँगा….
लेकिन उनका खिलोना नही बनूंगा….!

क्या तुम से उन्होने कुछ करने को कहा था….?

अभी तक तो नही कहा….
लेकिन आप बता दी जिए कि अचानक मुझे मेरी ख़तरनाक पोज़िशन का एहसास दिलाने की कोशिश करना क्या माने रखता है….गोया मुझे पहले ही दिखाना चाहते है कि अगर मैने उनकी कोई बात ना मानी तो वो मेरे सोशियल हैसियत को तबाह करेंगे….!

हुहम….इमरान सर हिला कर बोला….हो सकता है….!

और….मैने इस्तीफ़ा दे कर उन्हे जताना चाहा था कि मैं खुद ही अपनी इस हैसियत को ख़त्म कर देता हूँ….
फिर तुम अड्वरटाइज़ किया करो उन बेहूदा तस्वीर की….उसके बाद उन्होने दूसरा तरीका आज़माया….मलइक़ा को अगवा कर लिया….
और उसे बंधक बना कर इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए दबाव डालने लगे….!

मेरा मशवरा है कि तुम इस्तीफ़ा वापस ले लो….
और देखो कि उनकी माँग क्या है….इमरान ने कहा

ये मुझ से नही हो सेकेगा….!

ऐसा कर के तुम मुल्क-ओ-क़ौम की एक बेहतरीन खिदमत अंजाम दो गे….!

मैं नही समझा….?

वो तुम से जो कुछ भी करना चाहते है….तुम्हारी तरफ से मायूस हो कर किसी और तरह करने की कोशिश करेंगे….हो सकता है कि कामयाब भी हो जाए….क्यूँ कि….तुम अंधेरे में हो गये….!

ये बात तो है….शाहिद कुछ सोचता हुआ बोला

इस्तीफ़ा वापस ले लो….
और इंतेज़ार करो….!

लेकिन….उन्हे अब शक भी तो हो सकता है कि मैने उनका राज़ फ़ाश कर दिया होगा….!

मैं उनका शक भी दूर करने की कोशिश करूँगा….
बहेरहाल ये बहुत ज़रूरी है कि उनका मंसूबा हम पर ज़ाहिर हो जाए….!

जैसी आप की मर्ज़ी….
लेकिन आप उनका शक कैसे दूर करेंगे….?

ढांप….इमरान बाई (लेफ्ट) आँख दबा कर मुस्कुराया

दूसरी सुबह के अख़बारात में डॉक्टर मलइक़ा की वापसी की खबर बड़े हरफो में छपी हुई थी….

पोलीस के बयान के मुताबिक उसने शहर की एक इमारत पर छापा मार कर….ना सिर्फ़ मलइक़ा को बल्कि उसके भाई शाहिद को भी बरामद कर लिया था….वो दोनो ढांप नामी किसी आदमी की क़ैद में थे….इससे पहले उन्दोनो को इस वजह का मक़सद ज़ाहिर होता पोलीस उन तक पहुँचने में कामयाब हो गयी….ढांप गिरफ्तार नही हो सका….ढांप का हुलिया भी छापा था….

पोलीस ने पब्लिक से दरख़्वास्त की थी कि….
अगर कोई ढांप के बारे में किसी किस्म की मालूमात को फरहाम करना चाहे तो किसी हिचकिचाहट के बगैर सामने आए….उसका नाम राज़ रखा जाएगा….
और उस सहायता के सिले में इनाम का हक़दार भी करार पाएगा….!

डॉक्टर शाहिद और मलइक़ा अपने घर पहुच गये थे….आने-जाने वालों का ताँता सा बँधा हुआ था….

रहमान साहब भी ख़ैरियत दरियाफ़्त करने आए थे….

मुझे सब कुछ मालूम हो चुका है….तुम बेफ़िक्र रहो….रहमान साहब ने कहा

इमरान भाई की इनायत है….शाहिद बोला

किसी के सामने उसका नाम भी मत लेना….

सवाल ही पैदा नही होता….

और कल से तुम अपनी ड्यूटी पर जाओगे….!

बहुत बेहतर….!

मुझे हालात से बाख़बर रखना….

ऐसा ही होगा….

मलइक़ा को हिदायत (निर्देश) कर दो के ढांप के अलावा और किसी का नाम ना ले….!

वो भी अच्छी तरह समझ चुकी है कि उसे क्या करना है….!

कुछ देर बैठ कर वो चले गये….

शाहिद आराम करना चाहता था….
लेकिन आने-जाने वालों की वजह से मुमकीन नही हो रहा था….

3 बजे उसने उसी ना मालूम विदेशी की फोन कॉल रिसीव की थी….जो पहले भी उससे फोन पर गुफ्तगू करता रहा था….!
तुम ने बहुत अक़ल्मंदी का सबूत दिया है डॉक्टर….दूसरी तरफ से आवाज़ आई

शुक्रिया….शाहिद का लहज़ा गुस्सैला था

इस्तीफ़ा भी वापस ले लो….!

कल से ड्यूटी पर जाउन्गा….
आख़िर तुम मुझसे चाहते क्या हो….?

बस यही की तुम इस्तीफ़ा वापस ले लो….

और….उसके बाद….?

जल्दबाज़ी नही….तुम तस्सउूर नही कर सकते कि भविष्य में तुम क्या बनने वालो हो….
अगर अपनो ही की तरह सहयोग करोगे तो बड़े मर्तबे पाओगे….तुम्हारे मुल्क में तुम से ज़्यादा दौलतमंद आदमी कौन होगा….!

यक़ीन करो कि मुझसे कोई नापसंदीदा काम नही करा सकोगे….!

तुमने पहले से ये कैसे समझ लिया कि वो काम तुम्हारे लिए नापसंदीदा होगा….?

अगर….तुम ये समझते हो कि डाइरेक्टर-जनरल की बेटी से मेरा रिश्ता हो जाने के बाद मुझसे कोई सरकारी राज़ हासिल कर लोगे तो ये तुम्हारी कम ख़याली है….मैं तुम्हारे हाथों अपनी ज़िल्लत गवारा करूँगा….
लेकिन गद्दारी मुझसे नही हो सकेगी….!

शायद….तुम किसी कदर ज़हनी मरीज़ भी हो गये हो….फ़िज़ूल बातें सोंच रहे हो….हमारे लिए तुम्हारे सरकारी राज़ कोई अहमियत नही रखते….वो सिरे से राज़ ही नही हमारे लिए….!

फिर….क्या चाहते हो….?

कुछ भी नही….

तो फिर….तुम्हे मेरे इस्तीफ़े से क्या सरोकार….?

बहुतर बातें आमने-सामने की जा सकती है….

तो आमने-सामने कर्लो….

अभी वक़्त नही आया….
और हाँ….अपनी बहन से कहे दो कि ढांप के अलावा और किसी की कहानी ना सुनाए….!

पहले ही ताकीद कर दी है….शाहिद ने नाखुशगवार लहजे में कहा

तुम से यही उम्मीद थी….तुमने ख्वांखा बात बढ़ा दी डॉक्टर….
वरना बात कुछ भी ना थी….!

मैं उलझन में मुब्तेला हूँ….

क्या मैं तुम्हारी उलझन अभी दूर नही कर सका….?

नही….बिल्कुल नही….!

इमरान कहाँ है….?

मैं नही जानता….मुलाकात नही हुई….!

अच्छा….खुदा हाफ़िज़….कह कर दूसरी तरफ से सिलसिला ख़त्म कर दिया गया….!
उधर उस विदेशी ने शाहिद से इमरान के बारे में पूछा था….
और इधर इमरान फोन पर हंस के नंबर डाइयल कर रहा था….

दूसरी तरफ से कॉर्निला की आवाज़ सुनाई दी….मैं इमरान हूँ….उसने कहा

ओह….मैने तुम्हे कितना तलाश किया है….कहाँ हो तुम….?

जहाँ भी हूँ….ख़तरे में हूँ….!

क्यूँ….तुम्हे क्या ख़तरा है….?

पता नही क्यूँ….उस दौरान में कुछ ना मालूम लोग मेरे दुश्मन हो गये है….!

मैं नही समझ सकती कि तुम क्या कहे रहे हो….

फ़िक्र ना करो….ये बताओ पोलीस ने तुम्हारा पीछा छोड़ा या नही….?

बेशक छोड़ेगी….क्या तुम ने आज का अख़बार नही देखा….?

मैं वहाँ हूँ जहाँ अख़बारात नही पहुँचते….

कॉर्निला ने उसे मलइक़ा की वापसी की खबर अख़बारात की टिप्पणियों समेत सुनाई….

अजीब नाम है….ढांप….इमरान बोला
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10-23-2020, 02:28 PM,
#23
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
नाम ही से खौफनाक लगता है….
बहेरहाल
अब पोलीस मेरा पीछा छोड़ेगी….
और हाँ….मुझे मालूम हुआ है कि तुम इंटेलेजेन्स-डिपार्टमेंट के सब से बड़े ऑफीसर के बेटे हो….!

तो फिर….क्या सोंच रही हो….मुझसे दोस्ती ख़त्म कर दोगि….?

सवाल ही पैदा नही होता….अब तो मैं तुम से ये दरख़्वास्त करूँगी कि मुझे और मेरे बाप को उस मुसीबत से निजात दिलाने की कोशिश करो….!

ज़रूर….ज़रूर….हर खिदमत के लिए हाज़िर हूँ….!

तो फिर मुझे बताओ….मैं आउ….या तुम मेरे घर आ रहे हो….?

एक घंटे बाद फोन पर बता दूँगा….ओके….इमरान ने फोन काट दिया….वो रहमान साहब से गुफ्तगू करना चाहता था….
लिहाज़ा घर के नंबर डाइयल किया….इस वक़्त वो ऑफीस से वापस आ चुके थे….दूसरी तरफ से कॉल उन्होने रिसीव की….

आप अपने ऑफीस के टेलिफोन एक्सचेंज की खबर ली जिए….इमरान ने कहा

मेरा भी यही ख़याल है….रहमान साहब की आवाज़ आई….शाहिद के हट का नंबर उन लोगों तक इसी तरह पहुँचा होगा….हमारी गुफ्तगू से पहले वो कतई तौर पर अंजान थे….!

लेकिन….आप भी इस सिलसिले की छानबीन ना शुरू कर दी जिएगा….!

क्यूँ….?

इसी तरह हम उन्हे ग़लत रास्तों पर डाल कर बे-नक़ाब कर सकेंगे….!

ख़याल तो ठीक है….अच्छी बात है….फिलहाल उस मामले को ऐसे रखता हूँ….!

क़ादिर ने क्या बताया….?

300 रूपीए के एवज़ उसने खाब में लिफ़ाफ़ा और आधा तीतर रखा था….किसी के बावरची ने ये कह कर के उसे उस काम पर आमादा किया था….वो मेरे एक करीबी दोस्त का बावरची है….
और वो करीबी दोस्त मुझसे एक दिलचस्प मज़ाक़ करना चाहता है….!

किस का बावरची था….?

क़ादिर नशानदेही ना कर सका….
बहेरहाल मैने क़ादिर को निकाल दिया है….!

सुलेमान के लिए क्या है….

क्या वो भी इस मामले में संजीदा है….?

मर जाने की हद तक….

अच्छी बात है….मैं देखूँगा….!

और हाँ….किंग्सटन के थाने के इंचार्ज को हिदायत कर दी जिए….वो हंस की लड़की का पीछा ना छोड़े….इस सिलसिले में पूछ-गाच जारी रखे कि वो कार किस की थी जिस में मलइक़ा को ले गयी थी….!

वो तो होता ही रहेगा….उस गाड़ी की वजह से केस ख़त्म नही हो सकता….!

मैं यही चाहता हूँ….!

फिर दूसरी तरफ से सिलसिला कट होने की आवाज़ सुन कर इमरान ने रिसीवर रख दिया….वो अब भी सेइको मॅन्षन में ही था….

कुछ देर बाद उसने अपने फ्लॅट के नंबर डाइयल किए….

जोसेफ ने कॉल रिसीव की….
शुलैमान को फोन पर बुलाओ….

मेरा उससे झगड़ा हो गया है बॉस….मैं उससे इत्तिला नही नही दे सकता….

किस बात पर झगड़ा हुआ था….?

शादी के मसले पर….

आहा….तो क्या आप भी कॅंडिडेट है….?

सवाल ही पैदा नही होता….

फिर….क्या बात है….?

वो कह रहा था कि अपनी बीवी को भी इस फ्लॅट में ला कर रखेगा….!

अच्छा तो क्या किसी और के सुपुर्द कर के आएगा….?

ये बात नही है बॉस….फ्लॅट में मैं भी रहता हूँ….!

अरे….तो क्या तुझे खुद पर भरोसा नही है….?

क्यूँ नही है….बॉस मैं ऐसी जगह नही रह सकता जहाँ कोई औरत भी रहती हो….!

औरत के पेट में कैसे रहा था….?

अपनी मर्ज़ी से नही रहा था….

अरे….क्या मुझसे भी झगड़ा करोगे….?

देखो बॉस….समझने की कोशिश करो….या यहाँ वो रहेगी या मैं रहूँगा….!

अगर ये बात है….
तो….
पहले ही बता देता….सुलेमान को किसी तरह इस पर राज़ी कर लेता कि तुझसे शादी कर ले….अब तो कुछ भी नही कर सकता उसकी बात पक्की हो गयी है….!

मैं अपना सर दीवार से टकरा कर चकनाचूर कर लूँगा….

रिसीवर रखने के बाद….!

हाऐं….मैं क्या करूँ….?

ज़्यादा बकवास करेगा तो 7 की 4 ही बोतलें रहे जाएँगी….!

मैं तुम से थोड़े ही कुछ कह रहा हूँ….खुदा से फरियाद कर रहा हूँ….!

वाक़ई उसने तुझे औरत ना बना कर बड़ा ज़ुल्म किया है….
और
जोसेफ दहाड़े मार-मार कर रोने लगा….

अबे-ओ-कम्बख़्त….रिसीवर रख दे….रख दे रिसीवर….!

नही….तुम्हे सुनना पड़ेगा….वो रोता हुआ बोला

खुदा गारत करे….इमरान ने रिसीवर पटक कर कहा….खोपड़ी पका कर रख दी नालयकों ने….
और इस तरह सर हिलाने लगा जैसे गर्मी चढ़ गयी हो….!
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10-23-2020, 02:28 PM,
#24
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
एंबसी का ग्रॉबार डगमोरे सामाज़ी ज़िंदगी में ख़ासे रख रखाव वाला आदमी मशहूर था….
और मुकामी संस्कृति सरगर्मियों में इस तरह हिस्सा लेता था….जैसे उसका सामाज़ी भविष्य इसी मुल्क से संबंध हो….कभी-कभी सलवार सूट और खड़ी काली टोपी से भी शौक करता….उर्दू अच्छी ख़ासी बोल लेता था….

लेकिन जब उर्दू में ही संजीदगी पर उतर आने की कोशिश करता तो मज़ाक़िया खैर हो जाता….!

हर्लें हाउस उसकी रेसिडेन्स का नाम था….
लेकिन अंदाज़ा करना दुश्वार था कि उस इमारत में उसके कितने अफ्राद रहते है….रोज़ ही नयी-नयी सूरतें दिखाई देती….!

विदेशी औरतों के साथ-साथ दौलतमंद तबके की मुकामी औरतों में भी लोकप्रिय था….खुश शक्ल, सेहतमंद….
और हट्टा-कट्टा आदमी था….गुफ्तगू के दौरान होंठों पर मुस्कुरहत खिली रहती….उसकी रोशन ख़याली और खुश मिज़ाजी के चर्चे थे….

लेकिन उसकी बीवी अफलिया डगमोरे उतनी ही तंग नज़र, शक्की….
और छिड़-चीढ़ी थी….औरतों में अपने पति की लोकप्रियता उसे एक आँख नही भाती थी….उसका ख़याल था कि वो उसकी आँखों में धूल झोंक रहा है….बाज़ाहेर महेज़ खुश तबी (फोरप्ले) तक सीमित रहने वाला बातुनी औरतों का बहुत बड़ा शिकारी है….कभी-कभी वो दो टुक अपने ख़यालात का इज़हार भी कर बैठती थी….
लेकिन फ़ौरन उसे चॅलेंज कर दिया जाता….साबित करो….

शिकारी चोर होता है….वो कहती….सबूत नही छोड़ता….!

अगर….मैं इतना ही बुरा हूँ तो तुम मुझसे अलग हो सकती हो….डगमोरे का आखरी जुमला होता….
और वो दाँत पीस कर रह जाती….खुद किसी बड़ी हैसियत वाले खानदान से ताल्लुक नही रखती थी….
लहज़ा
मौजूदा सोशियल स्टेटस को ख़तरे में डालना भी कम अखलाखी ही होती….उसका ख़याल था कि वो कभी-ना-कभी उसके खिलाफ कोई पुख़्ता सबूत ज़रूर फरहाम कर के घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी….!

डगमोरे वाक़ई बहुत चालाक था….सच-मूच सबूत नही छोड़ता था….
और वो तमाम औरतें भी उससे सहयोग करती थी….जिन से उसका ताल्लुक होता था…..बेहद सावधान रहती….!

इन दिनों वो अपने एंबसी के फर्स्ट सेक्रेटरी की बीवी से उलझा हुआ था….बहुत दिनो बाद उसे एक ऐसी औरत मिली थी….जो उसकी उम्मीद पर पूरी उतरी थी….वो बहुत खुश था….!

मोनिका भी उस पर टूट कर गिरी थी….
शायद
फर्स्ट सेक्रेटरी उसकी उम्मीद पर पूरा नही उतर सका था….!

डगमोरे की नज़र ही ऐसी औरतों पर रहती थी….जो अपने पति से खुश ना हो….बहेरहाल….वो इस वक़्त भी मोनिका के बारे में सोच रहा था….
अचानक
फोन की घंटी बजी….
और वो चौंक कर फ़ोन को घूर्ने लगा….
फिर हाथ बढ़ा कर रिसीवर को उठाया….हेलो….डगमोरे स्पीकिंग….

बहुत बेहतर….दूसरी तरफ से आवाज़ आई….बहुत अच्छा है कि तुम ही हो….क्या तुम अपनी डाक देख चुके हो….?

नही….उसने गैर इरादि तौर पर कहा….
फिर झल्ला कर बोला….तुम कौन हो….?

तुम्हारी डाक में एक लाल रंग का लिफ़ाफ़ा है….कहीं तुम्हारी बीवी के हाथ ना लग जाए….!

क्या बक रहे हो….? तुम कौन हो….?
लेकिन जवाब मिलने की बजाए सिलसिला कट होने की आवाज़ आई….

डगमोरे की भवें सिकुड़ी और उसने रिसीवर रखता हुए आज की डाक पर नज़र डाली….कयि लिफाफे ट्रे में रखे हुए थे….गैर इरादि तौर पर हाथ उसकी तरफ बढ़ गया….दर हक़ीक़त एक लाल लिफ़ाफ़ा मौजूद था….उसने लिफ़ाफ़ा चाक कर दिया….
और….फिर
उसकी आँखें फटी-की-फटी रह गयी….!

फोन की घंटी फिर बजी….
और उसने चौंक कर चोर नज़रों से चारों तरफ देखा….
और लिफाफे को उस तस्वीर समेत जल्दी से कोट के अन्द्रुनि जेब में रख लिया….जो लिफाफे से बरामद हुई थी….!

फोन की घंटी बजती रही….

उसने खुद को संभालने की कोशिश करते हुए रिसीवर उठाया….हेलो….ब मुश्किल आवाज़ निकल सकी

क्या ख़याल है….दूसरी तरफ से आवाज़ आई

हेलो….कौन है….?

अंदाज़ा लगाने की कोशिश करो….

यह क्या बकवास है….

तस्वीर संभाल कर रखना….कहीं तुम्हारी बीवी की नज़र में ना पड़ जाए….!

त….त….तुम कौन हो….बताते क्यूँ नही….

समझने की कोशिश करो….

मैं नही समझा….

बहुत जल्दी समझ जाओगे….यह तस्वीर कुछ ज़्यादा हैरत अंगेज़ नही है….उससे भी कहीं ज़्यादा सनसनी खेज तस्वीर मेरे कब्ज़े में है….
और सब तुम्हारी ज़ात से तालूक रखती है….
अचानक सिलसिला कट हो गया….

डगमोरे हेलो….हेलो….करता रह गया….रिसीवर रख कर वो अपनी कुर्सी में ढेर हो गया….वो इस तरह हाँप रहा था….जैसे मीलों लंबी दौड़ लगा कर यहाँ तक पहुँचा हो….सारे जिस्म से पसीना छूट पड़ा था….आँखों में ख़ौफ्फ के साथ नफ़रत की झलकियाँ भी थी….!

कुछ देर तक वो ऐसे ही हालत में बैठा रहा….आहिस्ता-आहिस्ता इस हैज कैफियत (टेन्स सिचुयेशन) पर काबू पाने की कोशिश करता रहा

थोड़ी देर बाद उसने रिसीवर उठा कर किसी के नंबर डाइयल किया….
और माउत पीस में बोला….डगमोरे

क्या बात है….? दूसरी तरफ से आवाज़ आई

क्या तुम मुझे अपनी इस हरकत का मतलब समझा सकोगे….? डगमोरे गुस्सैली आवाज़ में बोला

क्या किस्सा है….तुम संजीदा मालूम होते हो….?

आख़िर मुझसे चाहते क्या हो….?

खूल कर बात करो….मेरी समझ में कुछ नही आ रहा….दूसरी तरफ से आवाज़ आई

लाल लिफाफे का क्या मतलब है….?

कैसा लाल लिफ़ाफ़ा….?

तुम आवाज़ बदलने के भी माहिर हो….मैं अच्छी तरह जानता हूँ….क्या तुमने अभी फोन पर मुझे धमकी नही दी थी….?

क्या तुम नशे में डगमोरे….?

फ़ौरन यहाँ पहुँचो….डगमोरे घुर्राया

फिलहाल मैं इसे मुनासीब नही समझता कि अपनी जगाह को छोड़ दूं….!

मैं आमने-सामने गुफ्तगू करना चाहता हूँ….डगमोरे चीख कर बोला

अपना लहज़ा दुरुस्त करो….तुम्हे पता नही क्या हो गया है….?

जिस तरह भी मुमकिन हो यह मुलाकात ज़रूरी है….!

तुम किसी लाल लिफाफे की बात कर रहे थे….?

अंजान बनने की कोई ज़रूरत नही….
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10-23-2020, 02:29 PM,
#25
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
जब तक तुम खूल कर बात नही करोगे….मैं नही आ सकूँगा….
क्यूँ कि तुम पाबंद नही हो….!

संघटन की कोई रणनीति तुम निजी मामलात में इस्तेमाल नही कर सकते….!

मैने कब किया है….? दूसरी तरफ से आवाज़ आई

तो फिर….यह लिफ़ाफ़ा….?

मैं उसी लिफाफे के बारे में पूछ रहा हूँ….?

उसमे ऐसी चीज़ मौजूद है जिससे मुझे ब्लॅकमेल किया जा सकता है….डगमोरे दाँत पीस कर बोला

तब फिर….तुम्हे यक़ीनन ग़लतफहमी हुई है….डगमोरे….मैं भला तुम्हे क्यूँ ब्लॅकमेल करूँगा….?

तुम ही बेहतर जान सकते हो….?

यक़ीन करो….मेरी तरफ से ऐसी कोई हरकत नही हुई…..सवाल ही पैदा नही होता….तुम ने फोन पर धमकी के तालूक भी कुछ कहा था….!

बस….डगमोरे घुर्राया….मैं फोन पर बात आगे बढ़ाना नही चाहता….!

अच्छी बात है….मैं आज ही तुम तक पहुँचने की कोशिश करूँगा….!

अगर….यह ग़लतफहमी है तो इसे रफ़ा करो…..!

मैं कोशिश करूँगा….बशर्ते मुझे ही आरोपी ठहराने पर ना अड़ जाना….!
डगमोरे ने रिसीवर रखा ही था कि फोन की घंटी बजी….हेलो….वो रिसीवर उठा कर दाँत पीस कर घुर्राया

एक मशवराह लेना था तुम से….दूसरी तरफ से आवाज़ आई….
और वो ही आवाज़ थी जिस ने लाल लिफाफे की इत्तेला दी थी….!

क्या तुम अब भी यही कहोगे कि तुम नही हो….डगमोरे दहाडा

मैं कौन हूँ….? दूसरी तरफ से सवाल किया गया

मुझे मालूम है कि तुम अपनी आवाज़ बदल सकते हो….

मुझे कब इनकार है इससे….

पहले क्यूँ इनकार किया था….?

मुझे इससे इनकार है कि मैने पहले कब इनकार किया था….!

खैर….बताओ कि तुम चाहते क्या हो….?

डगमोरे ने गुस्सैली आवाज़ में पूछा

सिर्फ़ एक मशवरा….

जल्दी बको….मैं मसरूफ़ हूँ….!

तुम्हारे साथ मोनिका की यह तस्वीरें उसके पति को दिखाई जाए या तुम्हारी बीवी को….?

मैं तुम्हे जान से मार डालूँगा….डगमोरे दहाडा

मुझे कहाँ पाओगे….? जो जान से मार दो गे….?

अहमाक़ आदमी….डगमोरे ज़हरीले लहजे में बोला….यह महेज़ एक नंबर नही है….मैं जानता हूँ कि वो इमारत कहाँ है….!

तुम यक़ीनन किसी ग़लतफहमी में मुब्तेला हो….मिस्टर.डगमोरे….ओह….मैं समझा
शायद तुम मुझे कोई और समझ रहे हो….!

बकवास बंद करो….

तुमने अभी तक नही बताया कि तस्वीरें किसे दिखाई जाए….!

डगमोरे थूक निगल कर रह गया….

हेलो….दूसरी तरफ से आवाज़ आई

मैं सुन रहा हूँ….
अगर तुम वो नही हो…. तो फिर कौन हो….?

“ढांप”….दूसरी तरफ से आवाज़ आई
और डगमोरे के हाथ से रिसेवर गिरते-गिरते बचा….!
त….त….तू….तुम चाहते क्या हो….? डगमोरे हांपता हुआ बोला

तुम्हारा सहयोग….

किस सिलसिले में….?

तुम अच्छी तरह जानते हो….!

लेकिन….म….म….मैं किसी ढांप को नही जानता….

हालाँके….हर्लें हाउस की मसरूफ़ियत पूरी तरह मुझे मालूम है….

तुम पता नही क्या कह रहे हो….?

वो कहाँ है….?

कौन कहाँ है….?

तुम्हारा वही मेहमान जिस की पैशानि पर क्रॉस की शक्ल में ज़ख़्म का निशान है….?

ओह….वो….डेविड….कब का चला गया….!

बकवास मत करो…
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10-23-2020, 02:30 PM,
#26
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
लेकिन….तुम्हारा उससे क्या मसला हो सकता है….जब कि मोकामी पोलीस को तुम्हारी तलाश है….डेविड एक मोज़ीज़ (सम्मानित) आदमी है….!

मैं भी अपने मुल्क में गैर मोज़ीज़ नही हूँ….

इसलिए पोलीस तुम्हारी तलाश में है….?

यह मेरा मुल्क नही है….

इमरान से तुम्हारा क्या ताल्लुक है….?

कौन इमरान….? मैं किसी इमरान को नही जानता….

डेविड भी तुम्हे नही जानता….

लेकिन….मेरे बॉस से अच्छी तरह वाक़िफ़ है….उससे कहना कि ढांप उस फ्रीलॅनसर एजेंट का आदमी है….जिसे उसने तीन साल पहले ईजिप्ट मे धोका दिया था….!

ऊहह….

मेरा बॉस उसे कभी माफ़ नही करेगा….

लेकिन….मेरा इसमे क्या कसूर है….?

तुम उसके खिलाफ मेरा साथ दोगे….!

नही….

इनकार का सवाल ही पैदा नही होता….मिस्टर.डगमोरे….तुम पूरी तरह मेरी गिरफ़्त में हो….जिस वक़्त चाहूं तुम्हे तबाह कर सकता हूँ….!

ल….ला….लेकिन….मैं डेविड से लाल लिफाफे का ज़िक्र कर चुका हूँ….

और….शायद….उसके खिलाफ शक भी ज़ाहिर कर चुके हो….?

हाँ….यही हुआ है….!

बस तो फिर….तुम निहायत ही आसानी से कह सकते हो कि कोई ख़ास बात नही….तुम अपने मामलात खुद ही देखोगे….!

वो मुझसे लिफ़ाफ़ा दिखाने को कहे तो….?

तुम्हारा निजी मामला है….उसके गुलाम तो हो नही….बस इतना कह देना कि अब तुम्हे उस पर शक नही रहा….!

लेकिन….तुम उसके खिलाफ मुझसे क्या काम लेना चाहते हो….?

हालात पर आधारित है….समय-समय पर तुम्हे फोन पर बताता रहूँगा….!

लेकिन….यह ख़तरनाक बात होगी….डगमोरे ने चारों तरफ देखते हुए कहा….कोई और तरीका अपनाउन्गा….इसे मुझ पर छोड़ दो….फिलहाल मुझे यक़ीन दिलाने की कोशिश करो कि मुझसे सहयोग करोगे….?

अगर….मेरे इंकान (संभावना) में हुआ तो….अब यह बताओ कि डेविड कहाँ है….?

एंबसी की इमारत में….

कितने आदमी उसके साथ काम कर रहे है….?

8 आदमी….

उनके नाम और पते….?

वो सब उसी के साथ आए थे….मेरे लिए अजनबी है….मैं कतई नही जानता कि अब वो कहाँ होंगे….उनमे से एक तुम्हारी गोली से ज़ख़्मी भी हुआ है….!

सुन कर खुशी हुई….

लेकिन….डॉक्टर वाले मामले से तुम्हारा क्या ताल्लुक….?

कुछ भी नही….मैं तो सिर्फ़ डेविड को अपनी मौजूदगी का अहसास दिलाना चाहता था….उसके दोनो कैदियों से यह तक नही पूछा कि डेविड से उनका क्या मामला है….!

देखो ढांप….मेरी पोज़िशन नाज़ुक है….!

मैं समझता हूँ….इसलिए तुम से किसी ऐसे काम के लिए नही कहूँगा कि तुम्हे खुल कर सामने आना पड़े….!

शुक्रिया….अगर….तुम इस कदर सावधान रहे सकते हो तो….
फिर
मुझे भी पीछे नही पाओगे….!

शुक्रिया डगमोरे….दूसरी तरफ से आवाज़ आई
और
सिलसिला कट हो गया….!

उसने भी रिसीवर रख कर लंबी साँस ली….ढांप….वो आहिस्ता से बड़बड़ाया
और
सामने वाली पैंटिंग पर नज़र जमा दी….ज़्यादा देर नही गुज़री थी कि फोन फिर जागा….हेलो….ओह….डेविड….!

मैं नही आ सकूँगा….तुम खुद ही चले आओ….दूसरी तरफ से डेविड की आवाज़ आई

ओह….डेविड….फ़िक्र ना करो….बात सॉफ हो गयी है….!

क्या मतलब….?

किसी ने मज़ाक़ किया था….

कमाल है….
और
तुम इतने संजीदा हो गये थे….? डेविड के लहजे में हैरत थी

बात ही ऐसी थी….
फिर
वो खुद ही राह पर आ गयी….मैं समझा शायद तुम औरत की आवाज़ बना कर मुझे धमकियाँ दे रहे हो….!

औरत की आवाज़….? डविद ने हैरत से कहा….
लेकिन
तुम्हारी गुफ्तगू से यह नही ज़ाहिर हुआ कि वो कोई औरत है….?

ज़ाहिर है कि जब शुरू से तुम ही मेरे ज़हन में थे तो गुफ्तगू से कैसे ज़ाहिर होता….?

तो बात ख़त्म हो गयी….?

कतई….

लेकिन….डेविड की आवाज़ आई….यह खलिश समझो कि तुम ने मुझ पर शक किया था….!

मुझे अफ़सोस है….डेविड डियर

खैर….खैर….सिलसिला कट होने की आवाज़ आई

इमरान अपने फ्लॅट में वापस आया….
लेकिन गाफील नही था….उसके कयि मातहत इस इमारत की निगरानी करते रहे थे….जिस में फ्लॅट था….
और जब इमरान बाहर निकलता था तो….वो रखवाले कुत्तों की तरह उसके दायें-बायें (लेफ्ट-राइट)
और आगे-पीछे मौजूद रहते थे….!

सुलेमान बेहद खुश था….बात पक्की हो गयी थी….
और उसने शादी की तय्यारी शुरू कर दी थी….!

जोसेफ उसे देख कर कबाब होता रहता….कभी-कभी इमरान से कहता….शादी के बाद यह कभी वह और ज़्यादा चिड-चिड़ा हो जाएगा….बॉस….इस वक़्त भी यही जुमला दोहराया था….

तुझे क्या….तुझे तो रहना नही है उसके साथ

शुक्रिया बॉस….
लेकिन मैं वहीं रहूँगा….जहाँ तुम रहोगे….तुम्हे तन्हा नही छोड़ सकता

मैं तो यहाँ रहूँगा….

नही रहे सकोगे….बॉस….मैं अच्छी तरह जानता हूँ

क्यूँ नही रह सकूँगा….?

शादी करेगा तो बच्चे भी होंगे….ज़रा खुद सोचो….बच्चों की चाऊ-मियाओ में कैसे ज़िंदगी बसर कर सकोगे….?

इमरान मूह खोल कर रह गया….
फिर बोला….
अरे….इसका तो ख़याल ही नही आया था….तू ठीक कह रहा है

बॉस तो फिर हम कहीं और चल कर रहेंगे….

बड़ी अच्छी तर्कीब बताई तू ने….उसकी तनख़्वाह (सॅलरी)डाक के ज़रिए पहुँचा दिया करूँगा….
और यह सोच-सोच कर खुश हो लिया करूँगा कि बावरची तो है मेरे पास….अब होटेलों में ख़ाता फिर रहा हूँ तो उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है….!

नही बॉस….मैं अपनी तर्कीब वापस लेता हूँ….इस पर तो गौर ही नही किया था कि खाने का क्या होगा….!

लहज़ा….अब दूसरा तरीका पेश कर….इमरान सर हिला कर बोला

जोसेफ थोड़ी देर सोच कर बोला….क्या यह मुमकिन नही है कि उसकी बीवी कोठी में ही रहे….!

मुमकिन है….
लेकिन
फिर यह भी बता दो कि बच्चे कैसे होंगे….?

मेरी तो अक़्ल ही चौपट हो कर रहे गयी है बॉस….जोसेफ अपने सर पर घूँसा मार कर बोला

शादी उसकी हो रही है….अक़्ल तेरी चौपट हो कर रह गयी है….!

सच-मूच मैं पागल हो जाउन्गा बॉस….

सुलेमान की शादी के बाद….अभी बहुत वक़्त है….!
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10-23-2020, 02:30 PM,
#27
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
जोसेफ ने कुछ कहने के लिए मूह खोला ही था कि किसी ने बाहर से कॉल बेल का बटन दबाया

देखो….इमरान ने दरवाज़े की तरफ हाथ उठा कर कहा

जोसेफ ने दरवाज़ा खोल दिया….
और जल्दी से पलट आया….वही लड़की है बॉस….उसने आहिस्ता से कहा

सुलेमान वाली….? इमरान ने राज़दाराना लहजे में पूछा

नही….वो कॉर्निला….

अरे….बुलाओ….इमरान उठता हुआ बोला….
फिर खुद ही दरवाज़े की तरफ बढ़ गया

हेलो….नीली

हेलो….रन….वो कमरे में दाखिल होती हुई बोली….तुम्हारा बॉडीगार्ड ख़ौफफनाक है….
लेकिन बड़ा मीठा लहज़ा रखता है….!

शुक्रिया नीली….

जोसेफ ने भी दाँत निकाल दिए….पता नही क्यूँ वो उस सफेद फाम लड़की से अलर्जिक नही मालूम होता था….!

इमरान ने उसे वहाँ से चले जाने का इशारा किया….
और उसने खामोशी से तामील की….!

बैठो….तुम खड़ी क्यूँ हो….मेरा घर शानदार नही है….इमरान ने ढीले-ढाले अंदाज़ में कहा

मैने तुमसे तालूक बहुत सी मालूमात हासिल की है….नीली उसे गौर से देखती हुई बोली

ज़रूर….ज़रूर की होगी….बैठो ना….!
कॉर्निला बैठ गयी….
लेकिन इमरान के चहरे से नज़र नही हटा रही थी

क….क्या मेरे सर पर सींग निकल आए है….इमरान ने बौखला कर अपना सर टटोला

क्या तुम इतने ही मासूम हो….जितने नज़र आते हो….?

पता नही….

मैं तुम्हे नही समझ सकती….!

यह आखें है….यह नाक….यह कान….
और शायद….मैं ही बोल रहा हू तुम्हारी ज़ुबान में….ज़रा इधर आ कर देखना कहीं दूम तो नही निकल आई….आब्स्ट्रॅक्ट आर्ट का कोई नमूना लगने लगा हूँ तुम्हे….!

मैं संजीदगी से गुफ्तगू करना चाहती हूँ….

किए जाओ….मेरे पल्ले कुछ नही पड़ रहा….!

तुम ने मेरे बयान की पुष्टि बॅंक मॅनेजर से कराई थी….
हालाँकि उसने लेडी डॉक्टर को मेरे घर से निकलते नही देखा था….!

मैं कब कहता हूँ कि देखा था….?

तुम ने ऐसा क्यूँ किया….?

तुम्हे बचाने के लिए….

आख़िर क्यूँ….? जब कि वो लेडी डॉक्टर एक ऐसे शक्श की बहेन थी….जो तुम्हारी बहेन का मंगेतर है….!

वाक़ई मेरे बारे में तुम्हारी मालूमात बढ़ती जा रही है….

तुम ने मेरे बयान को सही क्यूँ साबित किया था….?

बचपन ही से सुनता आया हूँ कि खूबसूरत लड़कियाँ झूट नही बोलती….

लेकिन….मैने झूट बोला था

हाऐं….इमरान उछल पड़ा

यक़ीन करो….मैने झूट बोला था….!

खुदा की पनाह….इमरान दोनो हाथों से सर थाम कर रह गया

लेकिन….मैं मजबूर थी….
अगर
ऐसा ना करती तो मेरे बाप को तबाह कर देते….!

ख़त्म भी करो….इमरान हाथ हिला कर बोला….लेडी डॉक्टर अपने घर पहुँच चुकी है….अब क़िस्से को छेड़ने से क्या फ़ायदा…..!

किस्सा ख़त्म नही हुआ….कॉर्निला आहिस्ता से बोली

क्या कह रही हो….?
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10-23-2020, 02:30 PM,
#28
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
सच कह रही हूँ….मेरी दास्तान लंबी है….कभी ना बताती अगर मेरे बाप की ज़िंदगी ख़तरे में ना होती….!

तो फिर….जल्दी से बताओ….मैं तुम्हारे बाप का यूनानी के ज़रिए इलाज करने का तय कर चुका हूँ….!

तुम समझते क्यूँ नही….मैं उनके मर्ज़ की बात नही कर रही….किसी ने उन्हे मजबूर किया है कि वो उसके लिए ग़लत किस्म के काम करते रहे….!

ब्लॅकमेलिंग….? इमरान उसे चिंतित नज़रों से देखता हुआ बोला

कॉर्निला ने सर को हाँ में हिलाया….

तो गोया….तुम उन्ही के कहने पर डॉक्टर को ले गयी थी….?

यही बात थी….

कहाँ ले गयी थी….?

हर्लें हाउस….

मशहूर इमारत है….

हाँ….वही….मैने उसे मरीज़ के कमरे में भेज कर कहने के मुताबिक उल्टे पाँव वापस हुई थी….!

अपने घर नही ले गयी थी….?

सवाल ही पैदा नही होता….

अच्छा….तो अब गाड़ी के तालूक भी सच्ची बात बता दो….!

गाड़ी उन्होने मुहैय्या की थी…. मर्सिडीस….उसी रंग और मॉडेल की जैसी हमारी गाड़ी है….
और उस सिलसिले में पोलीस ऑफीसर ने अभी तक हमारा पीछा नही छोड़ा….!

उसकी फ़िक्र ना करो….!
यक़ीन करो….मुझे सिर्फ़ उन लोगों की फ़िक्र है जो मेरे बाप को परेशान कर रहे है….!

उनसे कहो कि उन लोगों की नशानदेही कर लें….!

यही तो मुसीबत है….
अगर उन्हे मालूम हो जाए कि मैने तुम्हे उसके तालूक कुछ बता दिया है तो उनका हार्ट-फैल हो जाएगा….
और सब से ज़यादा चिंता की बात तो मैने अभी तुम्हे बताई ही नही….!

वो भी जल्दी से बता दो….?

मेरे ज़रिए वो तुम पर हाथ डालना चाहते है….

कमाल है….ओह भाई….तो क्या अब मेरा अगवा होगा….?

हो सकता है….

मैं तो बच्चों को दूध भी नही पिला सकता….

मैं नही समझी….?

हमारे यहाँ….सिर्फ़ औरतों का अगवा होता है

इस वहेम में ना पडो कि वो सिर्फ़ तुम्हारी शक्ल करीब से देखना चाहते है….

फिर क्या बात है….?

शायद….यह मालूम करना चाहते है कि तुम ने डॉक्टर के सिलसिले में मेरी हाँ में हाँ क्यूँ मिलाई थी….?

हाँ में हाँ मिलाना मेरी हॉबी है
लेकिन ठहरो क्या उन में से किसी ने तुम से गुफ्तगू की थी….?

सवाल ही पैदा नही होता….मेरे बाप ने मुझे इस पर राज़ी किया था….!

किस पर राज़ी किया था….?

यही कि मैं तुमसे ताल्लुक़ात बढ़ाउ….जब मैं यह जानती हूँ मैं हूँ तो वो क्यूँ ना जाने कि तुम माहेक्मा इंटेलिजेन्स के बहुत बड़े ऑफीसर के बेटे हो….!

इससे क्या होता है….मैं तो इस महेक्मे से तालूक रखता नही….!

शायद….कोई तालूक निकल ही आए….
आख़िर वो लेडी डॉक्टर तुम्हारी बहेन के मंगेतर की बहेन है….!

इस मंगेतर ने तो मुझे घनचक्कर बना कर छोड़ दिया है….

इस पर गौर करो….

गौर बाद में करूँगा….पहले तुम मुझसे ताल्लुक़ात बढ़ाओ….!

मैं नही समझी….?

वही करो जो वो चाहते है….मैं नही चाहते है कि मेरे इलाज करने से पहले ही तुम्हारा बाप दूसरी दुनिया में पहुँच जाए….उनका हलवा बनाना शुरू कर दिया है….!

हलवा क्या….?

जेल्ली को कहते है….

मुझे हिदायत मिली है कि तुम्हे बाहर ले जाउ….ज़्यादा से ज़्यादा दो वक़्त तुम्हारे साथ शहेर की तफरीगाहों में गुज़ार दूं….!

अगर….उन्हे मालूम हो जाए कि तुम मुझे हक़ीक़त से अगवा कर चुकी हो तो….?

जो बात मेरे और तुम्हारे दरमियाँ हुई हो उन्हे कैसे मालूम हो सकती है….

मालूम हो सकती है….
अगर मैं पोलीस को बता दूं कि लेडी डॉक्टर को हर्लें हाउस ले जाया गया था….!

तुम ऐसा नही करोगे….कॉर्निला जल्दी से बोली

क्यूँ ना करूँ….?

बात ख़त्म हो चुकी है….
और लेडी डॉक्टर हर्लें हाउस बरामद नही हुई थी….!

लेकिन….ढांप तो अभी तक नही पकड़ा जा सका….हो सकता है कि वो अभी तक हर्लें हाउस ही में छुपा बैठा हो….!

देखो….मुझ पर रहेम करो….तुम पोलीस को इत्तेला नही करोगे….!

वो फिर कोई बड़ा जुर्म कर बैठेगा….सवाल तो यह है कि उसने वो हरकत किस मक़सद के तहत की थी….?

क्या यह सच है कि वो दोनो मक़सद से अंजान है….?

बिल्कुल….ढांप ने बस उन्हे बाँध कर रखा था कोई वजह बताए बगैर….!

कॉर्निला किसी सोच में पड़ गयी….
और इमरान उसे खामोशी से देखता रहा
फिर कुछ देर बाद बोला….आख़िर उन्हे कैसे मालूम हो सकता है कि मैने झूठी गवाही दिलाई थी….!

मेरा बाप उन्हे पूरी तरह बा-खबर रखता है….वो मजबूर है….!

बहेरहाल….तो तुम इस वक़्त इसलिए आई हो कि मुझसे ताल्लुक़ात बढ़ाओ….?
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10-23-2020, 02:30 PM,
#29
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
कॉर्निला ने इमरान को गौर से देखते हुए सर हिला दिया….

तो फिर बढ़ाओ….

क….क….किस तरह बढ़ाऊ….?

किचन में चली जाओ….
और दोपहर का खाना तैयार करो….!

यह….क्या बात हुई….?

इससे ज़्यादा ठोस बात और कोई हो ही नही सकती….मुझे सबसे ज़्यादा प्यारा वोही है….जो मेरे पेट भरने का ज़रिया बन सके….!

मुझे सिर्फ़ खाने से दिलचस्पी है….पकाने से नही….!

तब तो फिर….तुम किसी और से ताल्लुक़ात बढ़ा लो….मैं बहुत मसरूफ़ हूँ

अभी तो ढंग की बातें कर रहे थे….?

नशे में था….

देखो रन डियर मैं बहुत परेशान हूँ….

इसलिए मुझे अपनी गर्दन कटवा देनी चाहिए….तुम समझती क्यूँ नही हो….वो मेरे दुश्मन हो गये है….कयि बार मेरी ज़िंदगी को ख़त्म कर देने की कोशिश कर चुके है….!

फिर बताओ….मैं क्या करूँ….?

अपने बाप को ब्लॅकमेल होने दो….

पता नही कब से ब्लॅकमेल हो रहे है….अब उन में ताक़त नही रही….!
कुछ भी हो मैं सीधे-सीधे कुँए में नही गिर सकता….

फिर….तुमने मेरे अनुकूलन में झूठी गवाही क्यूँ दिलाई थी….?

मैं नही जानता….!

तुम जानते हो….तुम मुझसे करीब हो कर मामले को समझना चाहते हो….?

अछा….चलो यही सही….

लेकिन….तुम उसकी तह तक नही पहुँच सके….अब मैं खुद तुम्हारे लिए मौक़ा फरहाम कर रही हूँ….!

मुझे सोचने दो….इमरान ने कहा
और नाक मुँह चढ़ाने लगा
फिर
थोड़ी देर बाद बोला….तुम ठीक कह रही हो….जब वो दोनो भी यह ना बता सके कि ढांप ने उन्हे क्यूँ बाँध कर रखा था तो फिर ढांप ही असल मामले से आगाह कर सकेगा….!

इतनी देर से यही तो ज़हें नशीन करने की कोशिश कर रही थी….

चलो….इस हद तक तो बात समझ में आ गयी….
आख़िर
यह किस तरह होगा कि मैं उनसे कुछ मालूम कर सकूँ….वो मुझे पकड़ लेंगे
और सब कुछ उगलवा लेंगे….!

बड़ी मुसीबत है….आख़िर तुम्हे किस तरह समझाऊ….?

जिस तरह मेरी समझ में आ सके….

अच्छी बात है तो सुनो पूरी बात….

यानी अब तक आधी ही बात चल रही थी….?

ढांप उनमे से नही है….कॉर्निला बोली

यह क्या बात हुई….?

यक़ीन करो….वो लेडी डॉक्टर को उनके कब्ज़े से निकाल कर ले गया था….जिस तरह पोलीस को ढांप की तलाश है….उसी तरह उन्हे भी है….!

अब तुम नशे में मालूम होती हो….

मैं जानती थी कि तुम यक़ीन नही करोगे….कॉर्निला बुरा सा मुँह बना कर बोली…. इसलिए मैं तुम्हे यह बात बताने से पारेज़ कर रही थी….!

अक़्ल ख़त्म कर दी तुमने तो….

और अब….मैं तुम्हे वो बात बताने जा रही हूँ जो अपने बाप को भी नही बताई….!

बातों का पिटारा मालूम होती हो तुम तो….

ढांप ने मुझसे मालूम किया था कि लेडी डॉक्टर कहाँ ले जाई गयी है….

इमरान एक बार फिर उछल पड़ा
और उसे घूरता हुआ बोला….तुम ने उन लोगों को डबल-क्रॉस किया है….?
हरगिज़ नही….मेरे फरिश्तों को भी मालूम नही था कि ढांप उन लोगों में से नही है….कॉर्निला ने कहा
और ढांप से ताल्लुक अपनी कहानी दोहराने लगी….
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10-23-2020, 02:31 PM,
#30
RE: antarwasna आधा तीतर आधा बटेर
हैरत अंगेज़….इमरान उसके खामोश होने पर बोला

मेरी जगह तुम होते तो तुम भी यही समझते कि वो उन्ही में से है….!

बिल्कुल….इमरान सर हिला कर बोला….
लेकिन तुम ने अपने बाप को क्यूँ नही बताया….?

ढांप ने मना किया था….
और फिर बाद में तो सवाल ही पैदा नही होता….!

यह भी अक़ल्मंदी ही सर्ज़ाद हुई है तुम से….इस सिलसिले में अपनी ज़ुबान बिल्कुल बंद रखना….
वरना सच-मूच तुम्हारे बाप की गर्दन काट जाएगी….
लेकिन यह तो बताओ कि तुम्हे यह बात किस के ज़रिए से मालूम हुई के ढांप उनमे से नही है….?

मेरे बाप ने बताया है….उन्होने ख़ास तौर पर डेडी को बताया कि ढांप उनसे ताल्लुक नही रखता इसलिए वो होशियार रहे….

अब पूरी बात समझ में आई है….इमरान लंबी साँस ले कर बोला
और कॉर्निला की आँखों में इतमीनान की झलकियाँ नज़र आने लगी….!

*****************************************************

डगमोरे की समझ में नही आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए….मोनिका मिल बैठने की ज़िद पर अडी थी….
और वो उसे ना मिलने की कोशिश कर रहा था….सच्ची बात भी नही बता सकता था….
अगर वो उस सिलसिले में ब्लॅकमेलिंग की भनक भी लग जाती….
तो फिर शायद….उसकी तरफ रूख़ भी ना करती….
लेकिन डगमोरे उस पर भी राज़ी नही था….कि वो उसके हाथ ही से निकल जाए…..बस चन्द दिनों की अहतियात चाहता था….मोनिका ने उसे जिस अंदाज़ से अट्रॅक्ट किया था उसके लिए बिल्कुल ही नया ताजूर्बा था….

एक बेहद ख़ुशगवार ताजूर्बा जिस का वो तसव्वुर भी नही कर सकता था….उसके अपने दृष्टिकोण से ऐसी चीज़ें छोड़ने वाली नही होती….!

ढांप के खिलाफ उसका खून खौलता रहा….
लेकिन अच्छी तरह जानता था कि….
अगर डेविड के कान में उसकी भनक भी पड़ेगी तो खुद उसकी जान के लाले पड़ जाएँगे….पता नही यह ढांप आइन्दा उससे किस किस्म की माँगे करे….!

ब्लॅकमेलिंग का अंदाज़ रखम ऐंठने वाला नही था….वो तो उससे डेविड से ताल्लुक मालूमात चाहता था….इसका मतलब था खुद उसकी खराबी….ढांप को उसका पता तो बता ही बैठा था
हालाँकि उसे उससे भी ला-इल्म (अंजानता) ज़ाहिर करनी चाहिए थी….
लेकिन वो शक्श आसानी से टलने वाला नही मालूम होता था….वैसे उसने किसी फ्रीलॅनसर सेकरीट एजेंट का हवाला दे कर उसे और भी उलझन में डाल दिया था….

और दुश्वारी यह थी कि वो डेविड से उसके बारे में पूछ-गाच भी नही कर सकता था….
लेकिन ढांप शायद यही चाहता था कि डेविड से उसका ज़िक्र किया जाए
वरना वो उसे बताता ही क्यूँ कि वो कौन है
और किस आदमी से ताल्लुक रखता है….!

ओह….मगर….मोनिका….
फिर आ टपकी मोनिका….उसकी तरफ से ध्यान हटा लेना कितना मुश्किल था….यह बात पिछली शाम ही को तय हो गयी थी वहाँ से जज़ीरा (आइलॅंड) मुबारक तक जाते और रात वहीं गुज़ारते….फर्स्ट सेक्रेटरी इन दिनों अंबासडर के साथ दौरे पर था….इसलिए मोनिका कतई आज़ाद थी….वो इस मौक़े से फ़ायदा उठाना चाहती थी जिसस कदर भी मुमकिन हो….
लेकिन यह मरदूद ढांप ना जाने कहाँ से आ कूदा है….खैर देखा जाएगा….डगमोरे सर को हिला कर उठ खड़ा हुआ….!

ठीक उसी वक़्त एक मुलाज़ीम ने कमरे में दाखिल हो कर किसी के आने की खबर दी….

वो अभी उसके बारे में बता ही रहा था कि….

एक आदमी दन-दनाता हुआ कमरे में घूस आया….!

य….ये….यही है….मुलाज़ीम उसकी तरफ देखता हुआ बौखलाया

तुम कौन हो….? यह क्या हरकत है….? डगमोरे दहाडा

पान क्रॉस…..अजनबी की आवाज़ साँप की फुफ्कार जैसी थी

ओह….अच्छा….अच्छा….डगमोरे संभाल कर जल्दी से बोला
और नौकर से कहा….तुम जाओ….सब ठीक है….!

नौकर ने हल्के से पलके झपकाई और चुप-चाप चला गया

लेकिन….यह तरीका ठीक नही है….डगमोरे ने शिकायत अमेज़ लहजे में कहा

एमर्जेन्सी….तक्लीफात की गुंजाइश नही….चीफ़ ने तुम्हे तलब किया है….!

तलब किया है….डगमोरे के लहजे में नागावारी थी

तुम मेरे साथ चलो…..

मैं नही जानता कि तुम कौन हो….
और मेरे रुतबे से वाक़िफ़ हो या नही….!

पान क्रॉस….अजनबी आँखें निकाल कर घुर्राया

मज़ाक़िया खैज….मैं नही जानता था कि उसके आदमी फिल्मी बदमाशों की सी हरकतें भी करते है….!

बात ना बढ़ाओ….तुम्हे मेरे साथ चलना है

मैं कहता हूँ निकल जाओ यहाँ से….वरना….

अजनबी ने इतनी फूर्ति से रेवोल्वेर निकाला कि डगमोरे चकरा कर रह गया

वो ऐसे भी लड़ाई-झगड़े वाला आदमी नही मालूम होता था….वो खामोशी से दरवाज़े की तरफ बढ़ गया

अजनबी रेवोल्वेर होस्टलर में डाल कर उसके पीछे चल पड़ा….वो उसे कॉंपाउंड में खड़ी हुई एक गाड़ी की तरफ ले गया…..गाड़ी के करीब पहुँच कर उसने डगमोरे के लिए पिछला दरवाज़ा खोला….उसके बाद खुद उसी के करीब बैठ गया….ड्राइवर की सीट पर पहले ही एक आदमी मौजूद था….एंजिन स्टार्ट हुआ….
और गाड़ी आगे बढ़ गयी….!
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