bahan sex kahani ऋतू दीदी
08-06-2023, 11:34 AM,
RE: bahan sex kahani ऋतू दीदी
शक का अंजाम

PART 3

Update 50.

( New-14)



मूल लेखक ने ये स्टोरी जिस जगह समाप्त की है. मेरा प्रयास है कहानी वही से को आगे बढ़ाने का और नए मौलिक अपडेट देने की । एक पाठक (जिन्होने अपना नाम नहीं बताने के लिए अनुरोध किया है) और मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस कहानी को और आगे ले कर जाने का . लीजिये पेश है भाग 3 Update 50. ( New-14)


ऋतू : नीरू तू मुझे बुरा मत समझना उस समय जब शादी के कई सालो तक बच्चा नहीं हुआ तो मैं और नीरज घर में जब भी मौका मिलता था सेक्स करने लग जाते थे और मैं सैक्स को लिए पागल हो जाती थी। इस उन्माद को मनोविज्ञान की भाषा में निंफोमेनिया कहते हैं। यह एक ऐसा डिसऑर्डर है जिसमें सेक्स करने की इच्छा बहुत तीव्र होती है। ये स्त्रियों को ऐसी बिमारी हैं जिसमे मुझमें अनितनतरित कामोन्माद पैदा हो जाता था और उस समय मुझे सेक्स चाहिए होता था जिसमें मैं उस समय सेक्स करने के लिए परेशान रहती थी । क्योंकि इसको लेकर मेरा अडिक्शन हद से अधिक बढ़ चुका होता था । मैं चाहकर भी अपनी इस इच्छा पर नियंत्रण नहीं रख पाती थी और सेक्स मेरी नियमित जरूरत बन गया था ।

नीरू : अरे !

ऋतू: नीरु , उन दिनों नीरज ऑफिस के कामो में बहुत बिजी रहता था . रात को भी देर से आता था और सुबह भी जल्दी चला जाता था और थके होने के कारण मेरे साथ सेक्स नहीं कर पाटा था . नीरू, यह जो योनि होती है न… खाती पीती रहे चुदती रहे तो शरीर भी स्वस्थ रखती है और मन भी, लेकिन सूखी रह गयी तो शरीर भी सुखा देती है . चूत को सही चुदाई मिलना शुरू हो जाये तो वह शरीर को खिला देती है और खुद भी खिल जाती है।”

लेकिन कामुकता भरे पलों में प्यासी रहने के कारण से मैं तड़पने लगी और मेरा शरीर गिरने लगा और मैं कमजोर होने लगी.

नीरू : हाँ दीदी आप बीच में काफी कमजोर हो गयी थी

ऋतू : इस दौरान मेरा पेट वजन सब घट गया सौर मेरे सीने पर चूचुक और स्तन जरूर उभरे हुए थे क्योंकि चाहे नीरज कुछ और मेरे साथ नहीं करता था उन दिनों पर मेरे स्तनों को खूब दबाता और निप्पल चूसता था बस उसी से मेरी वासना थोड़ी बहुत शांत होती थी .. पर चूत की अगन तो बहुत भड़की हुई थी जिससे मन में हर वक़्त कामुकता के विचार आते रहते थे ।

बस इसी कारण से जब अविनाश ने उस दिन मुझे छुआ तो मैं तो पहले से ही एकदम हॉट हो चुकी थी और हमने सब कुछ कर लिया

नीरू : ऐसे कैसे सब कर लिया आपने अविनाश के साथ ?

ऋतू : जब उसे मुझे बार बार छुआ तो मैंने आह भरी और अविनाश को नहीं डांटा न मना किया तो वो मुझ से लिपटने का प्रयास करने लगा तो मैं उसे लगभग खींचते हुए अंदर ले गई। बैडरूम में पहुँचते ही अविनाश मेरे को किस करने लगा, लेकिन शर्म के मारे हिचकिचाहट से मैं उसका बिल्कुल भी साथ नहीं दे रही थी और फिर वो किस करते हुए अपने एक हाथ से मुझे अपनी और दबाने लगा जिसकी वजह से मैं धीरे धीरे गरम होने लगी थी और धीरे धीरे मेरा पेट मसलने लगा जिसकी वजह से पहले से गर्म रहने वाली मेरा सब्र टूटने लगा.

वो मेरे होंठो को चूमने लगा और मेरे अंदर तो पहले ही आग लगी हुई थी कुछ ही पलो में फिर मैं जोश में आकर उसका पूरा पूरा साथ देने लगी थी और फिर हम दोनों अब खुल कर किस करने लगे. फिर मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और वह मेरी जीभ को चूसने लगा . फिर मैंने भी उसकी जीभ को चूसा. मेरी जीभ जब उसकी जीभ से मिली तो मेरा शरीर सिहरने लगा. फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठो से अलग किये सांस ली और फिर बेकरारी से लिप्प किस करने लगे और चूमते चूमते हमारें मुंह खुले हुये थे जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। कम से कम 15 मिनट तक वो मेरे लिप्स को किस करता रहा और मैं भी किस में भरपूर साथ दे रही थी.

और फिर उसने मेरे होटों को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। मुझे दर्द हो रहा था मगर मैं उन दिनों बहुत ज्यादा प्यासी थी, मझे उस दर्द में बहुत मज़ा आ रहा था। हम लोग एक दुसरे को किस करने लगे थे. इस बीच अविनाश ने मेरी पींठ, कमर पर अपनी उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दी थीं. मेरे हाथ अविनाश के कन्धों पर थे और मैं उसे अपनी और खींच रही थी.

और उसी बीच उसके हाथ मेरे कंधो पर से होते हुए मेरी पीठ कमर पर होते हुए मेरे स्तनों पर पहुँच गया. उसका हाथ मेरी टी शर्ट के ऊपर से मेरे स्तनों को दबा रहा था. मेरी आँखें पूरी तरह से बंद थी. मैं उसके हर प्रयास को अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मजा ले रही थी.

मैं तो पहले से ही बहुत उत्तेजित थी, तो लगी भरने सिसकारियां .. आअह्ह्ह आअह्ह्ह ओह्ह्ह हयाई ओह्ह्ह हयाई आआआआआआअ ....

वो बोला भाभी आप बहुत सुंदर और हॉट हो .. और मुझे फिर लिप किश करने लगा ..

फिर उसने धीरे से मेरा गोरा माथा चुम लीया और धीरे से मेरे कंधो को सहलाने लगा फिर उसने मेरी दोनों आँखों पर एक चूमा दिया. फिरमेरी नाक को चूमा तो मैं सिहर उठी .. फिर उसने मेरे गालो पर चुम्बन किया और वो हलके हलके खुलने और मुस्कराने लगा और मेरे गालो को चाटा. और बोलै इनका स्वाद तो बहुत मोठा हैं फिर उसने मेरे ऊपरी होंठ पर किस किया और उसको धीरे धीरे चूसा आअह्ह्ह मेरी सिसकी निकल गयी और मेरा शरीर सिहरने लगा फिर मेरा निचला होंठ चूमा और चूसा. फिर मेरे होंठो को चूमने लगा और मैं भी उसका साथ देने लगी . और चूमते चूमते हमारें मुंह खुले हुये थे जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। कम से कम 15 मिनट तक वो मेरी लिप्स किस लेता रहा मैं भी लिप किस में भरपूर साथ दे रही थी फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं उसकी जीभ को चूसने लगी. फिर उसने भी मेरी जीभ को चूसा मेरी जीभ जब उसकी जीभ से मिली तो मेरा शरीर सिहरने लगा. मैं उससे कस कर लिपट गयी..

जारी रहेगी
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08-06-2023, 11:35 AM,
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शक का अंजाम

PART 3

Update 51


( New-15)




मूल लेखक ने ये स्टोरी जिस जगह समाप्त की है. मेरा प्रयास है कहानी वही से को आगे बढ़ाने का और नए मौलिक अपडेट देने की । एक पाठक (जिन्होने अपना नाम नहीं बताने के लिए अनुरोध किया है) और मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस कहानी को और आगे ले कर जाने का . लीजिये पेश है भाग 3 Update 51. ( New-15)

मैं उससे कस कर लिपट गयी.. उसके बाद मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और जैसे ही मैं नंगी हुई, फ़ौरन अविनाश मुझ से आकर लिपट गया तो मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया। और अविनाश के पैंट के बटन और चेन खोल कर उसे नीचे से नँगा कर दिया। अविनाश का लण्ड कड़क होकर सर उठाये खड़ा था। मेरी उंगलियो ने मेरे लण्ड को अपने में लपेट लिया। और मैं लण्ड को रगडने लगी। अविनाश मुँह खोल कर तेज साँसें ले रहा था।

मैंने उसके कपड़े उतारने में देर नहीं लगाई और हम दोनों लगे होकर बेड पर लेट गए । और अविनाश मुझे जहाँ तहँ चूमने लगा और मैं बोली अविनाश .....सस्स.......मेरी काम अग्नि को शांत कीजिए....हह...प्लीज़.. अविनाश .

मेरे मम्मे लटकने के बाद लंबे हो गए। अविनाश मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा... और मैंने अविनाश को मेरे मम्मे चुसने को बोला और वो एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसने मेरे निप्पल रूपी काले अंगूर को अपने होंठों में दबा लिया। .फिर वो मेरे बूब्स पे टूट पड़ा. और मेरे निपल्स को अपने मुंह में ले लिया..... ....अविनाश मेरे निपल्स को कस कस के चूसने लगा.... अविनाश कुछ देर तक मेरे स्तनों को चूसता , चबाता, दबाता और काटता रहा..


अविनाश : ऋतू भाभी .. .. मैंने जब आपको पहली बार देखा था तभी आप मुझे बहुत अच्छे लगी थी , और जब भी मैं आपको देखता था तो सोचता जरूर था कि बिना कपड़ों केआपका बदन कैसा लगता होगा। आज ऐसे स्तिथि बन गयी है जिसकी मुझे कभी भी उम्मीद नहीं थी की मैं आपके ऐसे देख सकूंगा और आप मेरो बाहो में होंगी ”

ऋतू: फिर हम चुंबन करने लगे और इस बीच अविनाश का एक हाथ मेरे स्तन दबाने लगा.

अविनाश: भाभी जी मुझे नहीं पता था आप इतनी प्यासी हैं ..

मैंने उसका लंड पकड़ा तो उसका लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया. मैंने मेरे हाथ को लंड के ऊपर नीचे किया, तो अविनाश भी अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले आया और मेरी चूत को सहलाने लगा. मैं तो पहले से ही गर्म थी अब ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने के साथ आह … ओह … करने लगी. फिर अविनाश ने मेरी टाँगों को फैला दिया और हाथ को चूत के छेद पर रख दिया. और बुर के छेद को सहलाना शुरू किया तो उसमें से पानी निकलने लगा.

अविनाश ने अपनी एक उंगली मेरी बुर में घुसा दी, तो मेरे शरीर ने ज़ोर का झटका लिया. वो उंगली को अंदर बाहर करने लगा, तो मैं अपने चूतड़ हिलाकर उसे जगह देने लगी. फिर उसने दो उंगलियाँ अंदर बाहर करनी शुरू की. अब मेरे शरीर की हरकत बेक़ाबू होने लगी थी. मैं ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होकर अविनाश की उंगलियों को अंदर-बाहर करने लगी. साथ ही मेरे मुँह से काराहे -आह ओह्ह्ह निकलने लगीं.

वो और ज़ोर से मेरी बुर में उंगलियाँ पेलने लगा. थोड़ी देर बाद मैं ज़ोर-ज़ोर के झटके लेने लगी, और फिर शांत हो गई. मेरी चूत से ढेर सारा पानी निकलने लगा जिससे अविनाश की उंगलियों से लेकर मेरी हथेली तक भीग गई. अविनाश के चेहरे पर अजीब सी मुस्कान खिल गई.

अपनी हथेली में उन्होने मेरे लंड को थाम कर हिलाना, सहलाना शुरू किया.

मुझे ऐसी सनसनी हुई उस दिन अविनाश के साथ काफी दिन के बाद हुई थी. मेरे हाथ का स्पर्श अविनाश को भी मदहोश कर रहा था. थोड़ी देर में ही काफ़ी समय से खड़ा, उसका बेचैन लंड बेक़ाबू हो गया और मेरे रोकते रोकते भी मेरे लंड से सफेद वीर्य की पिचकारी निकल गई, जो मेरे शरीर पर गिरी. मैंने लंड को तब तक सहलाना जारी रखा, जब तक कि अविनाश के लंड का एक-एक बूँद रस निकल नहीं गया. पानी को मैं अपनी जीभ से उसे धीरे-धीरे चाटने लगी.

उसके बाद वो मुझे चूमता रहा और मैं थोड़ी देर बाद फिर से सिसकारियाँ लेने लगी, बदन मरोड़ने लगी. थोड़ी देर बाद उसने मेरे स्तनों पर हाथ फिराते हुए मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. मैंने अपनी टाँगें खोल दी . उसने फिर फिर से पहले एक, फिर दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दीं और उन्हें अंदर बाहर करने लगा. मैं तड़पने लगी, आह … ओह करने लगी. काफ़ी देर तक मेरी बुर में उंगलियाँ पेलता रहा और मैं कराहती रही.

फिर उसने अपना सिर मेरी दोनों टांगों के बीच घुसा दिया. उसने अपनी उंगली को मेरे होंठों पर फेरा, और फिर उन्हें मेरी चूत पर रगड़ा. फिर धीरे-धीरे सिर को मेरी जांघों के बीच ऐसे घुसाया कि उसके होंठ मेरी बुर से जा लगे. काम वासना में तड़प रही मैं अपने चूतड़ को उठा कर उसके होंठों पर अपनी चिकनी चूत पर रगड़ने लगी. वो फिर जीभ निकाल कर चूत को चाटने लगा. और मेरी चीख जैसी सिसकारी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकलने लगी और मेरा पूरा बदन थरथरा गया.

मैं ज़ोर-ज़ोर से अपनी गांड को उचकाने लगी और वो अपने मुँह पर मेरी चूत को रगड़ने लगा , उत्तेजित हो मैं अपने दोनों हाथों से उसके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.

वो भी पूरे जोश में आ गया था, हालाँकि मैंने इससे पहले नीरज के सिवा किसी के भी साथ सेक्स नहीं कभी नहीं किया था. पर उस दिन उसके साथ सब कुछ होता जा रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था .

फिर उसने अपनी जीभ से मेरी चूत के ऊपर की घुंडी को सहलाना शुरू किया, तो मैं और ज़ोर-ज़ोर से गांड हिलाने लगी. उसने अपनी जीभ को मेरी बुर के अंदर घुसा दिया. इस बार उनके शरीर ने पहले से भी ज़ोरदार झटका लिया, और उनके गले से ऐसी आवाज़ निकली, जैसे उनकी साँस फँस गई हो.
मैं जीभ से उनकी चूत के अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा. उनकी बुर से झरने की तरह पानी निकलने लगा, जिसे वो पीता गया.

फिर उसने अपनी जीभ से मेरी चूत के ऊपर की घुंडी को सहलाना शुरू किया, तो मैं और ज़ोर-ज़ोर से गांड हिलाने लगी. उसने अपनी जीभ को मेरी बुर के अंदर घुसा दिया. इस बार मेरे शरीर ने पहले से भी ज़ोरदार झटका लिया, और मेरे गले से ऐसी आवाज़ निकली, जैसे मेरी साँस फँस गई हो.

अविनाश जीभ से मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा. मेरी बुर से झरने की तरह पानी निकलने लगा, जिसे वो पीता गया.

फिर अविनाश ने अपने होंठों को गोल करके मेरी मांसपेशियों को अपने मुंह के अंदर खींचा. और बार-बार ऐसे ही करने लगा. अब मैं जैसे पागल हो गई. मैंने अविनाश के सिर को ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी बुर की ओर खींचने के साथ ही अपनी चूत को मेरे मुंह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी. मेरी साँस बंद हो गई, पर अविनाश बदस्तूर मेरी बुर को ज़ोर-ज़ोर से चाटता, चूसता रहा. ऐसे कुछ ही मिनट किया कि मेरे शरीर ने ज़ोर-ज़ोर से झटके लेने शुरू किए, और मेरे मुंह से आ … आह … उम्म्म … ओह्ह … अहा … माँ … ओह्ह … की आवाज़ें निकलने लगीं.

मेरी चूत से गाढ़ा-गाढ़ा पानी निकलने लगा, . अविनाश उसे पीने लगा और फिर अपने ओंठ मेरे ओंठो से लगा दिए मेरी चूत का पानी का स्वाद मुझे बड़ा अच्छा लगा. इधर अविनाश का लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था. कुछ देर झटके लेने के बाद मैं शांत हो गई.

अविनाश ने मेरे गालों को सहलाया, फिर गले को. और मेरी चूचियों को पकड़ लिया. अविनाश ने मेरी चूचियों को दबाना, मसलना शुरू किया तो मैं कसमसाने लगी.

अविनाश ने चुटकी में मेरी निप्पल्स को पकड़ कर मसला तो मैं सिसकारी लेने लगी. अविनाश पहले धीरे-धीरे, फिर ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूचियों को मसलने लगा. मैं मज़े लेने के साथ-साथ सी-सी कर रही थी.
फिर अविनाश ने अपने हाथ को नीचे ले जाते हुए मेरी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया. कुछ देर ऐसा करने के बाद अविनाश ने एक हाथ मेरी चूत पर रख दिया … अविनाश ने मेरी चूत को धीरे-धीरे सहलाने लगा, मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसके मुंह को अपनी चूचियों में दबाने लगी. अविनाश होंठों से मेरी चूचियों को चूमने लगा और मेरा शरीर सिहरने लगा.

अविनाश ने अपनी दो उँगलियाँ मेरी गीली चूत में घुसा दीं, और अंदर बाहर करने लगा. मैं गहरी गहरी सांसें लेने लगीं और सिर इधर-उधर पटकने लगी. अविनाश मेरी चूचियों से खेलता रहा.

मेरी हालात उस समय बहुत ख़राब थी और मैं तड़प गयी मैंने अविनाश को कहा आअहह... अविनाश ये सब तुम बाद में कर लेना पहले मुझे चोदो ..मेरे साथ सेक्स करो....


फिर मैं बेड पर लेट गई और अपनी दोनों टांगों को फैला लिया. अविनाश ने अपने लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर ऊपर नीचे रगड़ा .... और फिर छेद में थोड़ा सा घुसाकर टिका दिया. अविनाश ने धक्का मारकर पूरा लौड़ा मेरी चिकनी, गीली चूत में घुसेड़ दिया.

काफी दिनों से चुदाई न होने और अभी तक कोई बच्चा न होने के कारण मेरी चूत एकदम टाइट हो गयी थी. मेरे गले से एक ज़ोर की आह निकली. अविनाश ने लंड को बाहर खींचा, और दोगुनी ताक़त से फिर से घुसेड़ा. मैं मचल उठी.

अब अविनाश मुझे चोदने वाला था, या यो कहो मैं खुद उससे चुद रही थी। उसका लण्ड अब मेरी चूत की गर्मी का अहसास कर रहा था और आधा मेरी चूत में उतार चुका था। मैंने एक ठंडी आह भरी और अविनाश ने लण्ड पूरा मेरी चूत में घुसा दिया। मुझे प्रेगनेंसी का कोई डर नहीं था बल्कि मैं तो हर हालत एक बच्चा चाहती थी इसलिए मैं अविनाश से खुलकर बिना प्रोटेक्शन के चुद रही थी।

अब अविनाश ने लय बनाकर अपने लंड को मेरी बुर के अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा. मेरी जानी पहचानी सी सिसकिया चालु हो गयी जो तुमने और प्रशांत ने भी सुनी हुई हैं जब हम एक साथ रहे थे और नीरज मुझे चोद रहा था .. मेरी गीली चूत उसे बड़ा मज़ा दे रही थी. थोड़ी ही देर में मेरी चूत की मांसपेशियां सिकुड़ने लगीं और अविनाश के लंड को दबाने लगी.

मेरे गले से अजीब-अजीब आवाज़ें निकलने लगीं. और अपनी गांड को ऊपर उचकाकर उसके लंड की ताल से ताल मिला कर चुदने लगी.

मेरी चूत के जूस की चिकनाई के कारण लण्ड जब जड़ में टकराता था तो ठप ठपपप चप्प्प छप्पप की आवाज आ रही थीi। मेरे आनंद की आज कोई सीमा नहीं थी। मैंने जो नहीं माँगा था वो बिन मांगे मिल रहा था।

फिर मैंने कराहना शुरू कर दिया आअहह...ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ... आअहह.....चीर दो....आआअहह....चीर दो नाआआआआअ .....आआहह “ अविनाश , चोद दो मुझे। प्लीज, मुझे चोद डालो जितना जोर से चोदना हैं, चोद दो ।”

उसने एक दो धक्के लण्ड के मेरी चूत में मारे और तब दो बार मेरी सिसकिया एकदम तेज हुयी। उसने मुझे मेरी कमर और पीठ से कस कर पकड़ लिया और फिर अपना हाथ मेरे नंगे बदन पर घुमाने लगा।

वो लगातार मुझे धक्के मार कर अभी भी चोद रहा था । मैने अब अपने दोनों हाथ अविनाश की नंगी गांड पर रख दिए। उसकी गांड बड़ी तेजी से आगे पीछे हील रही थी, जिस से मेरे हाथ भी आगे पीछे हो हील रहे थे।

मैं अपनी उंगलिया उनकी गांड की दरार से होते हुए नीचे ले जाने लगी । मेरी ऊँगली उसके लंड के नीचे छु गयी, जो की चिकना हो चुका था। लण्ड चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और मेरी ऊँगली वो सब महसूस कर रही थी। मैं खुद आहें भर रही थी और अविनाश का लेते हुए चोदने को बोल रही थी, मुझसे रुका नहीं गया। उसने मेरी चूत में झटका मारा और मैंने एक तेज आह भरते हुए कहा “ओह अविनाश , और मारो”

अविनाश ने रफ़्तार बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में दोनों हांफते हुए एक दूसरे में समा जाने को कसरत कर रहे थे. अविनाश ज्यादा देर टिक न पाया और उसका सारा रस मेरी चूत में गिर गया. न जाने कितनी देर तक दोनों हांफते रहे. मेरा लौड़ा सिकुड़कर खुद मेरी चूत से बाहर निकल आया. मेरी चूत से मेरा गाढ़ा माल भी बहकर नीचे गिरने लगा.

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08-06-2023, 11:36 AM,
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शक का अंजाम

PART 3

Update 52

( New-16) 




मूल लेखक ने ये स्टोरी जिस जगह समाप्त की है. मेरा प्रयास है कहानी वही से को आगे बढ़ाने का और नए मौलिक अपडेट देने की । एक पाठक (जिन्होने अपना नाम नहीं बताने के लिए अनुरोध किया है) और मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस कहानी को और आगे ले कर जाने का . लीजिये पेश है भाग 3 Update 52. ( New-16)

ऋतू: झड़ने के बाद भी अविनाश लुढ़क कर साइड पर आ गया और मेरे नितम्बो और पीठ से चिपका रहा और मेरी चूचिया दबाता रहा

मैं अविनाश के हाथों से मेरी चूचियों के दबने का मैं बहुत मज़ा ले रही थी। उसके ऐसा करने से मेरी चूचियाँ और निपल्स बड़ी जल्दी ही तनकर दुबारा बड़े हो गये और मेरी चूत पूरी गीली ही थी । मैं धीमे-धीमे अपने मुलायम नितंबों को उसके खड़े लंड पर दबाने लगी।

अविनाश ने अब अपना दायाँ चूचियों से हटा लिया और नीचे को मेरे नंगे पेट की तरफ़ ले जाने लगा। मेरी नाभि के चारो ओर हाथ को घुमाया फिर नाभि में अंगुली डालकर गोल घुमाने लगा।

ऋतू: आआआह...उहह!!

उसकी अँगुलियाँ मेरी झांटो को छूने सहलाने लगीं। अपने आप मेरी टाँगें आपस में चिपक गयी लेकिन अविनाश ने पीछे से मेरे नितंबों पर एक धक्का लगाकर जताया की मेरा टाँगों को चिपकाना उसे पसंद नहीं आया। मैंने लेटे लेटे ही फिर से टाँगों को ढीला कर दिया।

अविनाश मेरे होठों को चूमने लगा और मेरे नंगे बदन पर हर जगह हाथ फिराने लगा। अब उसने धीरे से मुझे बिस्तर पे चित्त लिटा दिया।

आआआआहह......" मैं उत्तेजना से सिसकने लगी। अविनाश मेरी पूरी बायीं चूची को जीभ लगाकर चाट रहा था और दायीं चूची को हाथों से सहला रहा था। मैं हाथ नीचे ले जाकर उसके खड़े लंड को सहलाने लगी। फिर वह मेरी दायीं चूची के निप्पल को ज़ोर से चूसने लगा जैसे उसमें से दूध निकालना चाह रहा हो और बायीं चूची को ज़ोर से मसल रहा था, इससे मुझे बहुत आनंद मिल रहा था। जब उसने मेरी चूचियों को छोड़ दिया तो मैंने देखा मेरी चूचियाँ अविनाश की लार से पूरी गीली होकर चमक रही थीं। मेरे निपल्स उसने सूज़ा दिए थे।

फिर अविनाश मेरे चेहरे और गर्दन को चाट रहा था। उस दिन पहली बार मेरे पति की बजाय कोई गैर मर्द मेरे बदन पर इस तरह से चढ़ा हुआ था और मैं सेक्स के लिए इतनी उतावली हो चुकी थी की मुझे इसमें कुछ भी गलत नही लगा । और जो आनंद मेरे पति नीरज ने मुझे दिया था निश्चित ही उससे ज़्यादा मुझे अभी अविनाश से मिल रहा था। और फिर मैं कई दिन से सेक्स के लिए भूखी थी और जब भूख ज्यादा लगी हो तो जो भी मिल जाए वो बहुत स्वादिष्ट लगता है .. नीरू मेरी बहन मेरा भी उस समय बस यही हाल था ..

अविनाश के हाथ मेरी चूचियों पर थे और हमारे होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चबा रहे थे और एक दूसरे की लार का स्वाद ले रहे थे। फिर अविनाश खड़ा हो गया और मेरे निचले बदन पर उसका ध्यान गया।

अविनाश—ऋतू भाभी , प्लीज़ ज़रा पलट जाओl
मैं बेड पर अब नीचे को मुँह करके पलट गयी। अविनाश की आँखों के सामने मेरी गांड नंगी ही थी।
अविनाश : ऋतू भाभी थोड़ा गांड ऊपर उठाओ और कुत्तिया बन जाओ ... ऐसे झुको जैसे कुत्तिया झुकती है कुत्ते के सामने... ठीक है।”

मैंने नीरज से कई बार कुतिया बन कर चुदाई करवाई थी इसलिए कुतिया बन गयी . अपनी गांड को थोड़ा ऊपर को धकेला और अपनी कोहनियों के बल लेट गयी और गांड मटकाने लगी । नीरज को मेरी ये डा बहुत पसंद है । अविनाश ने जब पीछे से मेरे की अपनी गाँड मटकाते हुए देखा तो उसका लंड फुफकारने लगा।

अविनाश: भाभी आपकी गांड तो बहुत शानदार है .. मेरा मन कर रहा है आपकी गांड मारने का
ऋतू : नहीं वहां नहीं अविनाश मैंने कभी गांड नहीं मरवाई है .. चाहो तो पीछे से चूत में लंड डाल लो
अविनाश: ठीक है भाभी आप जैसा कहो

लेकिन मेरी एकदम स्पंजी कमर मांसल यौवन देख कर अविनाश ने मेरी गांड मारने का मन बना लिया और मुझे चूमने चाटने लगा .

अब अविनाश उसका तना हुआ लौडा और साथ ही मैं भी नंगी, मेरे मम्मों पे उसके कसते हुए हाथ, मेरी फुदकती टाइट चूत और कोमल, प्यारी, राजदुलारी गांड. अविनाश अपने हाथों से उसके मम्मे और भी ज़ोरों से रगड़ने लगा, खूब मम्मे दबा के और निप्प्ल चूस चूस के उसके हाथ नीचे खिसके और एक हाथ लगा चूत को सहलाने तो दूसरा मेरी गांड से खिलवाड़ करने लगा. मैंने उसके हाथ अपनी गांड से हटाने के कुछ क्षीण प्रयास किये लेकिन इतने दिनों से वो मेरी ताक में था तो हाथ में आने के बाद इतनी आसानी से थोड़े न छोड़ता.
फिर उसने मेरी जांघों को फैलाया और मेरी गांड की दरार में मुँह लगाकर जीभ से चाटने लगा।
"उूउऊहह! "

मैं कामोत्तेजना से काँपने लगी। मेरी नंगी गांड को चाटते हुए अविनाश भी बहुत कामोत्तेजित हो गया था। पहले उसने मेरे दोनों नितंबों को एक-एक करके चाटा फिर दोनों नितंबों को अपनी अंगुलियों से अलग करके मेरी गांड की दरार को चाटने लगा। वह मेरी गांड के मुलायम माँस पर दाँत गड़ाने लगा और मेरी गांड के छेद को चाटने लगा। उसके बाद अविनाश मेरी गांड के छेद में धीरे से अंगुली करने लगा।
मैं आआआअहह...... ओह्ह कर कराहने लगी .. उसे पता लग गया अब मुझे मजा आ रहा है

उसकी अंगुली के अंदर बाहर होने से मेरी सांस रुकने लगी। उसने छेद में अंगुली की और उसे इतना चाटा की मुझे लगा छेद थोड़ा खुल रहा है और अब थोड़ा बड़ा दिख रहा होगा। मैंने भी अपनी गांड को थोड़ा फैलाया ताकि छेद थोड़ा और खुल जाएl

मैंने थोड़ा और झुक के अपनी गाँड बाहर उघाड़ दी और मेरे मम्मे आगे झूल रहे थे। ऋतू अपना हाथ पीछे ले जा कर अपनी गाँड खोलते हुए बोली, “

ऋतू : यह ले अविनाश तेरी ऋतू कुत्तिया बनके झुकी है तेरे सामने। लेकिन यह बता कि तू मेरी गाँड क्यों मारना चाहता है?”अविनाश ने अपना लंड ऋतू की खुली गाँड के छेद पे रखा और हाथ आगे बढ़ा के उसके झूलते हुए मम्मे पकड़ लिए और अपने लंड को ऋतू की गाँड पे दबाते हुए बोला,

अविनाश : ऋतू भाभी वाह,आप बड़ी समझदार हो ... मेरो को आपकी गाँड भा गयी और मेरा लंड तुम्हारी कुंवारी गाँड की अकड़ निकालने के लिए तड़प रहा है। आपको नहीं पता तेरी गाँड कितनी लाजवाब है। आपके चूत, मम्मे, होंठ, गाँड और पूरा जिस्म, सब लाजवाब है।

फिर उसने मेरी जांघों को फैलाया और मेरी गांड की दरार में मुँह लगाकर जीभ से फिर चाटने लगा।
उसकी अंगुली के अंदर बाहर होने से मेरी सांस रुकने लगी। उसने छेद में अंगुली की और उसे इतना चाटा की मुझे लगा छेद थोड़ा खुल रहा है और अब थोड़ा बड़ा दिख रहा होगा। मैंने भी अपनी गांड को थोड़ा फैलाया ताकि छेद थोड़ा और खुल जाएl


अविनाश ने थोडा सा उंगली घुसेड दी मेरी चूत में और मैं काफी आश्चर्यचकित हो उठी.
ऋतू -क्या कर रहे हो?

अविनाश - कुछ नहीं, मजे ले रहा हूँ.

अविनाश एक ऊँगली चूत में और एक मेरी गांड में अंदर बाहर करने लगा. और दुसरे हाथ से लंड को को अपने हाथों से सहला सहला के त्यार कर रहा था. अब लौडा इतना सख्त हो गया था के फुन्फ्कारें मारने लगा और अविनाश ने आव देखा न ताव, चूत से लंड लगाया और हौले हौले से घुसना शुरू किया. इतनी टाईट चूत के लंड महाराज के घुसते ही मेरे मुंह से सिसकारी निकल पडी. अविनाश ने मुझे घूर के देखा,

अविनाश: क्या हुआ भाभी , मेरा दोस्त नीरज आपकी नहीं लेता क्या जो इतनी टाईट है?

ऋतू : नहीं, आजकल ये थोड़ा ओफिस के काम में बिजी रहते है .

अविनाश : कोई बात नहीं अब आपको कभी कोई कमी नहीं खलेगी भाभी

लंड एकदम फँस के बैठ गया मेरी चूत में तो अविनाश थोडा थोडा अन्दर बाहर करने लगा. मेरे चेहरे पे दर्द और आनंद के मिले जुले भाव थे. अविनाश ने चुदाई थोड़ी तेज कर दी और जोर से गांड यूँ दबोच ली के एक हाथ में एक कुल्हा और ज़ोरों से ऐसे दबाई के बीच में से एकदम चौड़ी हो जाए. उसके धक्के तेज़ होते गए और छूट के गीलेपन के चलते ज़ोरदार “फच्च फच्च” की आवाज़ आने लगी.

फिर अविनाश ने अपने हाथों से उसकी पतली, नाज़ुक और चीकनी कमर पर रेंगते हुए उसकी गांड तक ले आया. फिर मैंने एक उंगली से गांड को थोडा टटोला,

और इससे पहले के ऋतू भांप पाती, मेरा लंड उसकी चूत से बाहर और लंड उसकी गांड के छेद पर लगा दिया

अविनाश - बहुत दिनों से आपकी गांड पे नज़र थी, ऋतू भाभी ”,

अविनाश बोला. ऋतू ने कुछ बोलना चाहा लेकिन बोल न पायी.

अविनाश-- भाभी अब आपको थोड़ा-सा दर्द होगा पर उसके बाद बहुत मज़ा आएगा।

ऋतू -अविनाश प्लीज़ धीरे से करना मैंने कभी अपने पति नीरज को भी अपने गांड नहीं मारने दी है ।

मैंने अविनाश से विनती की। अविनाश ने धीरे से झटका दिया, उसके तेल से चिकने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छेद में घुसने लगा। लंड को गांड में अंदर घुस नहीं पाया। मैं दब कर आगे को झुक गयी और पेट के बल हो गयी और मैंने बेड की चादर को पकड़ लिया । अविनाश ने मेरे बदन के नीचे हाथ घुसाकर मेरी चूचियों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा।

ऋतू: ओह्ह ......बहुत मज़ा आ रहा है!

मैंने अविनाश को और ज़्यादा मज़ा देने के लिए अपनी गांड को थोड़ा ऊपर को धकेला और अपनी कोहनियों के बल लेट गयी । इससे मेरी चूचियाँ हवा में उठ गयी और दो आमों की तरह अविनाश ने उन्हें पकड़ लिया। सच कहूँ तो मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था पर शुक्र था कि अविनाश ने तेल लगाकर चिकनाई से थोड़ा आसान कर दिया था और वैसे भी वह किसी हड़बड़ाहट में नहीं था बल्कि बड़े आराम-आराम से मेरी गांड पर टकरा रहा था। हम दोनों ही धीरे-धीरे से कामक्रीड़ा कर रहे थे। वह धीरे-धीरे अपना लंड घुसा रहा था और मैं अपनी गांड पीछे को धकेल रही थी, अब उसने धक्के लगाने शुरू किए और मैं उसके हर धक्के के साथ कामोन्माद में डूबती चली गयी।

मेरी गांड टाइट थी या अविनाश का लंड बड़ा था पर अविनाश का लंड अंदर नहीं घुस रहा था। कुछ देर तक वह धक्के लगाते रहा और मैं काम सुख लेती रही।

अविनाश: भाभी अब संभालना ।”

अविनाश ने फिर मेरी मर पकड़के अपना लंड मेरी के गाँड के छेद पे दबाया। मेरी साँसें तेज़ हो गयीं और वो धड़कते दिल से अपने होंठ दाँतों के नीचे दबा के अविनाश के लंड के अपनी गाँड में घुसने का इंतज़ार करने लगी। क्योंकि अविनाश का लंड बड़ा तगड़ा था और मैंने कभी गाँड नहीं मरवायी थी कभी। लेकिन मुझे आज बहुत खुशी भी मिल रही थी क्योंकि इतने दोनी बाद ना केवल मेरी चुदाई हो रही थी बल्कि ऐसा बड़ा लंड मिल रहा था।

हाथ पीछे करके मैं अविनाश का लंड पकड़के बोली, “

ऋतू : ओहहहह अविनाश इतनी अच्छी लगी मेरी गाँड तुझे? अविनाश इसिलिए तो हाई हील पहनती हूँ... मुझे पता है कि इनसे मेरी चाल सैक्सी हो जाती है और लोगों का ध्यान मेरी मटकती गाँड की तरफ खिंच जाता है... तुझे मेरी गाँड अच्छी लगी और तूने मेरी गाँड मारने की सोची... तो अब देख अविनाश तुझसे गाँड मरवाने जा रही हूँ और अब बार-बार तुझसे चुदवाके तुझे पूरा मज़ा दूँगी।”

मेरी इस बात सुनके अविनाश खुश हुआ और एक हाथ से ऋतू की कमर पकड़ के और दूसरे हाथ से उसके मम्मे ज़ोर से दबाते हुए लंड ऋतू की गाँड में घुसाने लगा। जैसे ही अविनाश का लंड मेरी गाँड में घुसा तो मैं दर्द से छटपटाती हुई ज़ोर से चिल्लाने लगी,

“आआआआआआहहहहहहह अविनाश ऽऽऽ रह...म खाआआ.... मेरीईईई गाँड गयीईईईई....। बहुत दर्द हो रहा है... प्लीज़ लंड निकाल मेरी गाँड से।”

अविनाश ने लंड धीरे धीरे अन्दर करना शुरू किया और मैंने आँखे बंद कर ली और हलके से सिसकारी ली. अविनाश ने अपना प्रयास ज़ारी रखा. थोड़ी देर में हलके हलके से धक्के लगा लगा के लैंड पूरा अन्दर घुस गया था. उसका तना हुआ सख्त मौत लौड़ा मेरी एकदम टाईट गांड में और मेरी हर सांस के साथ उसके लौड़े पे चारो और से उसकी गांड का कसाव मैं आँखें बंद करके लेती रहे और वो ढ़ाके मारता रहा हाथ से मेरी दोनों चूचों का मर्दन करता रहा. एक एक सेकंड इतना आनंददायी था के लग रहा था पूरे जीवन की खुशियों के बराबर हो.

फिर उसने मेरे मम्मे कस के दबाते हुए हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये. जो धीरे ढीरे तेज हो गए और और उसने जम के मेरी गांड को चौदा . बीच बीच में रुक जाता या लौड़ा निकाल लेता कहीं माल ना निकल जाए. लौड़ा बीच बीच में निकल के घुसाड़ने में बहुत मजा आरा था दोनों को .

ऐसे ही करते करते जब समय आया तो उसने जोर से मेरे चूचे दबाये और लंड को उसकी गांड में जितना घुसता था घुसा के अपनी जांघ को उसकी गांड से एकदम जोर से सटा के पिचकारी मारी. तीन चार पिचकारियाँ कम से कम निकली होंगी. फिरउसने लंड बाहर निकला, मेरे नरम और गोल मांसल कूल्हों से रगड़ के साफ़ किया और बिस्तर में मेरे साथ चिपक कर पड़ा रहा.

साढे ग्यारह बजे से लेकर ढाई बजे तक अविनाश ने लगातार मेरी चुदाई की

ढाई बजे अविनाश चला जाता है और फिर वो रात को खाने पर आता है। रात को मैं अविनाश से नजरें नहीं मिला पा रही थी लेकिन अविनाश बिल्कुल नार्मल लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। नीरज की मीटिंग अच्छी नहीं रही थी। इसलिए वो भी परेशान था। दूसरे दिन एक बार अविनाश फिर 11 बजे आया मैंने उसे रोकने की बहुत कोशिश की। लेकिन नाकाम रही और एक बार फिर वो अपनी मनमानी करके चला गया। ये सिलसिला 15 दिन तक लगातार चलता रहा। अविनाश दोपहर को आता और मेरी चुदाई कर चला जाता है। शुरूआत में दो तीन दिन तो मैंने उसे समझाने की कोशिश की। लेकिन फिर मुझे भी उसका इंतजार रहने लगा। 11 बजे मैं उसका इंतजार करती थी। 15 दिन बाद नीरज मुझसे कहता है कि जो पिछली बार जिस मीटिंग में काम नहीं बन पाया था अब वो मीटिंग फिर हो रही है लेकिन दूसरे शहर में हैं और या तो रात 8 बजे होगी या फिर सुबह 10 बजे इसलिए उसे शाम को ही निकलना होगा और मीटिंग रात को होती है तो रात 2 बजे तक वो घर आ जाएंगा नहीं तो फिर दूसरे दिन शाम तक ही घर आ पाएगा। नीरज के घर से जाते ही अविनाश आ जाता है। अविनाश मुझे बेडरूम में ले आता है और मेरी चुदाई करने के बाद कहता है कि आज शाम को वो मुझे घुमाने ले जाएगा। मैं मना करती हूं लेकिन वो मानता नहीं हैं। रात को अविनाश घूमाने के नाम पर अपने फ्लैट पर ले जाता है जहां उसके तीन विदेशी दोस्त उपस्थित थे और टीवी पर एक मूवी चल रही थी जिसे देख मेरे होश उड जाते हैं कि क्यों ये मूवी मेरी और अविनाश की चुदाई की थी।

ऋतु : अविनाश ये तुमने क्या किया मेरे साथ धोखा किया है तुमने

अविनाश : मैंने कोई धोखा नहीं दिया, तुम ही मेरे विस्तर गर्म करने को तैयार हो गई थी। ये मेरे दोस्त है और रोज मैं दोपहर को गायब रहता हूं जिस कारण से इन्हें मुझे पर शक हुआ। मेरा काम करने की इन्होंने शर्त रखी थी कि ये लोग भी तुम्हारी चुदाई करना चाहता हैं।

ऋतु : देखों अविनाश ये सब नहीं हो सकता मैं ऐसी औरत नहीं हूं।

अविनाश : तो कैसी औरत हो अपने पति के अलावा तुम दूसरे मर्द से चुद रही हो। अब दो से चुदो या 20 से कोई फर्क नहीं पडता। और यदि तुमने मना किया तो इस फिल्म की सीडी तुम्हारे पति को भी भेजी जा सकती है।

ऋतु : अविनाश की धमकी से मैं धबरा गई।

जारी रहेगी
Reply
08-06-2023, 11:38 AM,
RE: bahan sex kahani ऋतू दीदी
शक का अंजाम

PART 3

Update 53

( New-17) 



एक पाठक (सहलेखक. जिन्होने अपना नाम नहीं बताने के लिए अनुरोध किया है) और मेरा मिलजुल कर प्रयास रहा , इस कहानी को और आगे ले कर जाने का . सह लेखक से इस कहानी के अंत पर पहले जो भी चर्चा हुई है उसी के आधार पर अंतिम भाग लीजिये पेश है भाग 3 Update 53. ( New-17)

पिछले भाग ५२ ने आपने पढ़ा की रात को अविनाश घूमाने के नाम पर ऋतू को अपने फ्लैट पर ले जाता है जहां उसके तीन विदेशी दोस्त उपस्थित थे और टीवी पर एक मूवी चल रही थी जिसे देख ऋतू के होश उड जाते हैं कि क्यों ये मूवी ऋतू और अविनाश की चुदाई की थी।जिसे देख ऋतू घबरा जाती है और अविनाश से विरोध करती है ऑटो अविनाष उसको धमकाता है और ग्रुप सेक्स के लिए बोलता है l

ऋतु : अविनाश की धमकी से मैं धबरा गई। और मैंने बोला पर अविनाश ये आज नहीं हो सकता क्योंकि आज मेरी माहवारी हो गयी है .. ये सुन कर अविनाश अपने दोस्तों से बोला दोस्तों अब तीन चार दिन और इन्तजार कारण होगा क्योंकि मैडम थोड़ा बीमार हो गयी हैंl

जब ये ठीक हो जाएंगी तब प्रोग्राम बना लेंगे और ऋतू वापिस अपने घर आ गयी और इसी असंजस में थी अब वो आगे क्या करेl

ऋतू बोली इस तरह से उस दिन मैं बाल बाल बची और मुझे मेरी हालत का एहसास हुआ. तभी मेरी खुशकिस्मती से अविनाश की कंपनी ने उसे और उसकी फ्रांस के मूल के लोगो को वापिस बुला लिया क्योंकि वो प्रोजेक्ट जिसके लिए वो ट्रेनिंग कर रहे थे वो किन्ही कारणों से रद्द हो गया था. जब कंपनी ने वापस बुला लिया तो अविनाश दोपहर को मेरे घर आया तो उसने मुझे एक पैन ड्राइव दी और कहा।

अविनाश : देखों ऋतु हम लोगों का काम आज समाप्त हो गया है और आज रात हम सभी लोग वापस फ्रांस चले जाएंगे। इस पेन ड्राइव में तुम्हारी चुदाई की कुछ मूवियां हैं। मैं चाहता तो मैं खुद इसे नष्ट कर सकता था। लेकिन शायद तुम्हें शक होता। लेकिन ये सच है कि मैंने तुम्हारी चुदाई की सभी फिलमें डिलीट कर दी हैं। सिर्फ इस पेन ड्राइव में हैं जिसें तुम जलाकर समाप्त कर देना। और हां इस शहर में मेरी काफी पहचान हैं यदि तुम्हें कभी भी किसी काम की जरूरत हो तो मुझे फोन कर देना . मेरा नम्बर तो तुम्हारे पास है ही। और हां आज के बाद मैं न तो तुम्हें फोन करूंगा और न ही परेशान करूंगा। इसके बाद अविनाश फ्रांस चला गया। तीन साल से उसका कोई फोन मेरे पास नहीं आया।


नीरू बोली दीदी आप तो गैंग बेन्ग से बाल बाल बच गयीl

ऋतू: उन दिनों मुझे सेक्स न मिले तो मैं पागल सी हो जाती थी। और इसी पागलपन में मैंने प्रशांत के साथ सेक्स किया था। जबकि प्रशांत ने मुझे रोकने की बहुत कोशिश की थी और मैंने प्रशांत को मेरी चुदाई के लिए उकसाया और हमने क्या किया वो तुम्हे सब मालूम है, फिर मैं एक मनोविज्ञानिक डॉक्टर से मिली डॉक्टर ने मुझे कुछ उपाय सुझाये और दवाये दी और फिर तुमने मझे अपना बच्चा भी दे दिया जिससे मेरा ध्यान उस पर चला गया और मेरी अतृप्त वासना थोड़ी नियंत्रित हो गयी .

ऋतू: नीरू, जब नीरज की कारगुजारियां की सच्चाई पता करने के लिए मैंने दो सप्ताह पहले अविनाश को फोन लगाया तो उसी ने मुझे बताया कि कब कहां किससे मिलना है सारी बातें अविनाश ने पहले ही कर लेता था। मुझे सिर्फ वहां जाकर अपना काम बताना होता था।

नीरू : ऋतु की बातें सुनते हुए आश्चर्य दीदी आप इतना झेल रही थीं। और आपने मुझे बताया भी नहीं।
ऋतु : क्या बताती, तुझे , उस समय मेरी हालात ही ऐसी थी अविनाश क्या कोई भी आदमी मेरा फायदा उठा सकता था।

ऋतू बोली हाँ नीरू इसी कारण से जब मैंने अविनाश से संपर्क किया तो अविनाश ने नीरज के फ़ोन की डिटेल निकालने में मेरी मदद की है.

ऋतू बोली नीररू अब मेरी बात ध्यान से सुनो

शक नामक बीमारी जो स्त्री, पुरूषों में प्रायः होती है लाइलाज है। ऊपर वाला न करे कि यह बीमारी किसी में हो। शक यानि संदेह जिसे अंग्रेजी में डाउट भीं कहते हैं एक ऐसी बीमारी है जो स्त्री-पुरूष के रिश्तों में दरार डालकर दोनों का जीवन दुःखद बनाती है।

प्रशांत को भी यही शक नामक बिमारी थी । उस का शक था की नीरज की तुम जरूरत से ज्यादा छूट देती हो और जो की निराधार नहीं था और नीरज ने हमेशा तुम्हारे भोलेपन का फायदा उठाने की और उसके बाद प्रशांत की नीचे दिखाने की कोशिश कीl अगर पति अपनी पत्नी पर, ‘शक’ करने लगे तो इसका मतलब ये भी है की वो तुमसे बेहद प्यार करता हैं और नहीं चाहता कि उसके प्यार के बीच कोई दूसरा आए। वैसे अब तुमसे कुछ भीं अनजान नहीं है, यार शक ‘डाउट’ संदेह आदि सब गुड़ गोबर कर देता है। इसका इलाज भीं नहीं है। तुम्हारी जिंदगी अपसेट हो चुकी हैं। अब उसे समझ आ गया है ‘की अगर वो शक’ करने की आदत को छोड़ दे तो मजे में रहेगा ।

रिश्ते वह भीं स्त्री-पुरूष के बहुत ही नाजुक होते हैं, इनको परखने के लिए मन की आंखे और दिमाग चाहिए। ‘शक’ की बीमारी से दूर रहकर ही प्रेम, प्यार का रिश्ता मजबूर रहेगा वर्ना….. शक एक ऐसी मानसिक बीमारी व विकार है जो मात्र इंसानों पर को ही अपना शिकार बनती है | जानवरों में ऐसी बीमारियां देखने को नहीं मिलती | ये और बात है कि इस बीमारी के चलते मनुष्य में जानवरों से लक्षण दिखने लगते है | इसे कई अन्य नामों से भी पुकारा जाता है जैसे शंकालु , शक्की ,तुनुकमिजाजी आदि |यह बीमारी स्त्री और पुरुष दोनों पर अपना अलग-अलग प्रभाव दिखाती है |

पति-पत्नी और शक एक ऐसा त्रिकोण है, जिसकी कहानी का अंत अक्सर ही दुखद होता है। अगर पति-पत्नी की हंसती-खेलती जिंदगी में शक की दीवार खड़ी हो जाए तो रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है।

ऋतू बोली नीरू प्रशांत की शक करने की बिमारी का परिणाम क्या हुआ ये तुम जानती हो - ‘शक’ की बीमारी आ गई तब तो सब खेल चौपट, जिन्दगी तबाह, बरबाद। पर अभी भी कुछ ज्यादा नहीं बिगड़ा है .. प्रशांत अभी भी तुमसे बहुत प्यार करता है और तुम भी अब उसे माफ़ कर दुबारा अपना लो .

नीरू का मन अब प्रशांत के लिए काफी साफ़ हो चुका था बस अब थोड़ी सी हिचक बाकी थी .

उसके बाद ऋतू अपने घर चली गयी और उसी शाम उसने नीरज को भी उसकी गलती का एहसास करवा दिया और नीरज से साफ साफ कह दिया कि जब तक मैं नीरू और प्रशांत को मिला नहीं देती तब तक नीरज को अपने शरीर से हाथ भी नहीं लगाने देगी और यदि नीरज ने जबरदस्ती की तो वो उसे तलाक दे देगी . यदि नीरज तलाक देना चाहता है तो वो इसके लिए भी तैयार है। ये सब सुन नीरज कसम खाता है कि प्रशांत और नीरू के बीच में अब वो कभी नहीं आएगा।

लेकिन नीरज ने फिर भी कॉल गर्ल्स के साथ होटल में जाना नहीं छोड़ा और कुछ दिन बाद पुलिस स्टेशन से नीरज का फ़ोन आया किसी होटल पर हुई पुलिस की रेड में वो पकडा गया है। होटल में रंगरैलिया मनाते हुए दस लडकीया और 15 युवक पकडे गए। रेड में किसी गैंग के साथ नीरज भी पकड़ा गया इसलिए थाने में नीरज की खूब पिटाई हुई. ऋतू जब थाने में जाती है तो उसे पता लगता है की पुलिस थानेदार प्रशांत का परिचित है .

अब नीरू प्रशांत को फ़ोन लगा कर प्रशांत को बुलवा लेती है और प्रशांत के कहने से थानेदार नीरज को छोड़ देता है और वो सब ऋतू के घर जाते हैं वहां नीरू भी बच्चो को संभालने के लिए आ गयी थी और नीरज ऋतू प्रशांत और नीरू के पैरो पर गिर कर अपने किये के लिए माफ़ी मांगता है .

फिर ऋतू नीरज को, और नीरू प्रशांत को माफ़ कर देते हैंl प्रशांत नीरू और अपने बच्चे निशंक को लेकर विदेश चला जाता हैl



************ समाप्त ***************
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