bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
02-02-2019, 01:02 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वो कुछ पल ऐसे होते हैं जिन्हे सहन करना हर लड़की के जीवन का एक खास हिस्सा होते हैं. उन कुछ पलों मे वो अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द झेलती है. इस दर्द के लिए वो अपनी जवानी मे तड़पती रहती है और जब वो पल आता है तो उस दर्द मे लिप्त वो अपने साथी की ज़िंदगी की ना जाने कितनी दुआएँ माँग लेती है.

जैसे ही गुड़िया के बदन मे थरथराहट कम हुई, वीर ने अपने हाथ झट से गुड़िया के उभारों पर रख दिए और उन्हे मसल्ने लगा. कुछ देर बाद गुड़िया की कमर मे हुई हलचल को भाँप कर वीर ने गुड़िया के निपल्स को अपने होंठो मे ले लिया और उसे जीभ से चुभलने लगा. 

वीरेंदर की इस हरकत से आशना की योनि मे नमी आने लगी और आशना के दर्द मे कुछ राहत हुई. वीरेंदर ने मोका देखते हुए अपनी कमर का दबाव बढ़ाया, करीब आधा इंच ही लिंग और अंदर गया था कि आशना ने वीरेंदर की कमर पर अपने हाथ रखकर उसे रुकने का इशारा किया. आशना: अयाया, ब्बबाअस्स्स भैया, होल्ड ओन्न्णाणन्. 

वीरेंदर एक दम रुक गया और अपने चेहरे को उठाकर आशना के चेहरे की तरफ देखने लगा. आशना के चेहरे पर आए पीड़ा के भाव देखकर वीरेंदर ने उसके गाल को चूम लिया. आशना की आँखो की नमी उसके गालों तक आ चुकी थी. वीरेंदर ने बारी बारी दोनो गालों को चूमा और पूछा बहुत दर्द हो रहा है. 

आशना ने अपनी आँखें छत की तरफ कर रखी थी. वीरेंदर की तरफ बिना देखे ही उसने गर्दन हिलाकर हां मे जवाब दिया. 

वीरेंदर: निकल लू. 

आशना ने इस बार कस कर अपनी बाहें वीरेंदर की कमर से बाँध ली. 

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): अच्छा छोड़ो, बाकी का जो बचा है वो भी तो डालने दो. 

इस बार आशना बोली(सूखे गले से): इस पॉइंट से ठीक आगे आपके लिए एक गिफ्ट है भैया और यह गिफ्ट मैं आपको इस लिए दे रही हूँ क्यूंकी मैं आपसे हद से ज़्यादा प्यार करती हूँ और आपके बिना जी नहीं पाउन्गी. ले लेजिए अपना गिफ्ट और अपनी गुड़िया को अपनी आशना बना लीजिए. 

वीरेंदर ने अपने वज़न को अपनी कोहनियों और घुटनों पर रखा और आशना की आँखो मे देखा. इस वक्त आशना की नज़रें वीरेंदर के चेहरे पर थी. वो अपने देवता के चेहरे पर अपने तोहफे की खुशी देखना चाहती थी. 

वीरेंदर ने कमर को थोड़ा पीछे ले जाते हुए एक ज़ोरदार प्रहार किया और वीरेंदर का ख़ूँख़ार लिंग आशना की योनि के नाज़ुक पर्दे को चीरता हुआ आधे से ज़्यादा उसमें समा गया. प्रहार होते ही आशना की रूह से एक ठंडक भरी आह निकली और उसके गले से एक ज़ोरदार चीख जो इस बात के प्रमाण के लिए काफ़ी थी कि गुड़िया ने अपना कोमार्य अपने भैया को प्रदान कर दिया है. 

इस बार की चीख इतनी ख़तरनाक थी कि उसकी आवाज़ सारे घर मे गूँज उठी. वीरेंदर ने इस बार उसे चीखने से नहीं रोका बल्कि एक और ज़ोरदार प्रहार कर डाला. इस बार के धक्के से आशना की साँस ही अटक गयी और साथ ही उसकी चीख भी गले मे ही दब गयी. एक और धक्के के साथ वीरेंदर जड तक आशना की योनि मे समा चुका था. आशना की योनि के निचले भाग से जैसे ही वीरेंदर के आंडों का जादुई चुंबन हुआ उसके दिल से एक हुंकार निकली और उसकी साँसों की गति एक बार फिर से सुचारू रूप से चलने लगी. आशना की आँखो से मोती झर झर कर बह रहे थे और उसके गले से घुटि घुटि चीखें निकलने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया. वीरेंदर ने आशना की चीखों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया. वो जानता था कि चारो दिशाओ मे उनके प्रेम मिलन का कोई गवाह नहीं है. 


वीरेंदर ने अपने होंठ आशना के उभारों पर रख दिए और उसके निपल्स को मुँह मे लेकर एक छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा. आशना तड़प उठी, उसके हाथ अनायास ही वीरेंदर की पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ाने लगे. वीरेंदर पागलों की तरह आशना के शिखरों से दूध निकालने की असफल कोशिश करता रहा और आशना पागलों की तरह उसकी पीठ नोचती रही. 

बिस्तर पर पड़ी बेडशीट खून के रिसाव सेलाल रंग मे रंगने लगी और दो प्रेमियों के मिलन की गवाही देने लगी. कुछ देर बाद आशना के हाथ सिथिल पड़ गये और उसकी आँखों मे छलकती पीड़ा एक खुमारी का रूप लेने लगी. आशना की कमर मे एक हलचल हुई तो वीरेंदर ने चेहरा उठा कर आशना की तरफ देखा. आशना के चेहरे पर आए नूवर को देख कर वीरेंदर अपनी मर्दानगी पर फूला नहीं समा रहा था. 

आशना की आँखो मे आई खुमारी को देख कर वीरेंदर ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे करके एक झटका दिया तो आशना का मुँह "ओह" करते हुए खुल गया. वीरेंदर ने एक बार फिर से कमर चलाई तो इस बार आशना के मुँह से "आह" निकला. आशना की आँखो मे देखते हुए वीरेंदर ने पूछा: अब ठीक हो???

आशना ने हां मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: दर्द तो नहीं है अब??

आशना ने हां मे सिर हिलाया और धीरे से होंठ खोल कर कहा:थोड़ा थोड़ा है. 

वीरेंदर: तो क्या उठ जाऊ???

आशना ने शरमा कर "ना" मे गर्दन हिलाई. वीरेंदर ने एक बार फिर से कमर हिलाई तो जवाब मे आशना की कमर मे भी हरकत हुई. 

वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): अब क्या करूँ??

आशना की आँखें शरम से बंद हो गयी पर होंठ मुस्कुरा उठे. 

वीरेंदर: अब तो बोलो यार, आइ हॅव टू सम एक्सपेक्टेशन्स फ्रॉम यू. 

आशना ने धीरे से आँखें खोली और अपनी कमर को हिलाकर बोली: फक मी वीर, फक युवर गुड़िया. 

वीरेंदर के पूरे शरीर मे बिजली का संचार हुआ और उसके चेहरे से खुशी झलक उठी. वीरेंदर के चेहरे पर आई नूरानी खुशी को देख कर आशना भी उत्साहित हुई और बोली: फक मी ऐज यू लाइक माइ वीर, माइ जान, माइ हब्बी आंड ऐबव ऑल माइ भैया. युवर गुड़िया ईज़ लॉंगिंग फॉर युवर स्ट्रोक्स. मेक देम हार्ड आंड फास्ट फॉर मी. आइ वॉंट टू मेल्ट इन युवर आर्म्स माइ लव. 

आशना की मदहोश बातें सुनकर वीरेंदर ने अपनी कमर को धीरे धीरे चलाना शुरू कर दिया. हर धक्के के साथ आशना की दर्द भरी आह निकल जाती. धीरे धीरे आशना की दर्द भरी आहें सुकून भरी आह उफ्फ मे बदलने लगी. आशना की कमर मे भी गति आने लगी. आशना की खुमारी बढ़ते ही उसके मुँह से वीरेंदर को उत्साहित करने के लिए शब्दों की भरमार निकलने लगी. वीरेंदर ने आशना की खुमारी को देख कर तेज़ी से कमर चलाना शुरू कर दिया. 

बिस्तर पर तूफान धीरे धीरे उग्र रूप ले रहा था.जिस्मों के टकराने का मधुर संगीत कमरे मे गूँज रहा था.ठप तह्प की आवाज़ के साथ आशना के गले से बीच बीच मे निकलती घुटि घुटि चीखे इस संगीत को और भी मधुर बना रही थी. 

तूफान शुरू हुआ तो अंजाम तक भी पहुँचा. आशना की टाँगे वीरेंदर की कमर से इस कदर लिपटी कि जैसे वो उसमे समा जाना चाहती हो. आशना का जिस्म जैसे ही आकड़ा ठीक उसी वक्त वीरेंदर की बेकरारी भी सैलाब तोड़ती हुई अपनी मंज़िल की ओर बढ़ चली. दो नदियों का संगम समुंदर मे होना शुरू हो गया. संगम इतना कामुक और प्यारा था कि आशना के जिस्म की हर नदी छलक गयी और समुंदर मे आकर मिलने लगी. 

समुंदर के भरते ही सैलाब महासागर तक पहुँचा और आशना की वीरान कोख के महासागर मे एक बार फिर से सन्गमित रस एकत्रित होने लगा. सैलाब इस कदर उफानित था कि उसके छींटे दोनो अपने जिस्म के बाहर भी महसूस कर रहे थे. काफ़ी देर तक नदियाँ बहती रही और जैसे ही बिस्तर पर आया "निस्चल प्रेम" का तूफान थमा, आशना और वीरेंदर का एक जिस्म स्थिल होकर बिस्तर पर सुषुप्त अवस्था मे गिर पड़ा.

पसीने से लथपथ दो बदन एक दूसरे से लिपट कर अपने अपने चरमसुख को भोग रहे थे. इस वक्त वीरेंदर की विशाल देह आशना की नाज़ुक देह को पूरी तरह से अपने आगोश मे लिए हुए थी. अगर आशना की टाँगे वीरेंदर की कमर से लिपटी ना होती तो उसे वीरेंदर के नीचे ढूँढ पाना बहुत मुश्किल होता. उसका सारा जिस्म वीरेंदर के नीचे दबा पड़ा था.

रह रह कर वीरेंदर के नितंबों मे कंपन हो रही थी और वो अपने वीर्य की हर बूँद आशना की प्यासी कोख मे उतार रहा था. जैसे ही वीरेंदर के नितंबों मे सिकुड़न होती, आशना के जिस्म मे एक कंपन उजागर होती और गरम वीर्य का एहसास उसके कोमल बदन को झिकजोड देता. 

साँसों की गति थमते ही आशना ने वीरेंदर के चेहरे को अपने हाथों मे लेकर चूमना शुरू कर दिया. प्रेमावेश मे आकर आशना ने वीरेंदर के गाल को काट लिया. वीरेंदर की भी तंद्रा टूटी. 

वीरेंदर: सस्स्स्स्सिईईईई, जंगली बिल्ली कहीं की. 

आशना ने उसकी बात को अनसुना करते हुए उसे चूमना जारी रखा.. वीरेंदर ने आशना का साथ देने के लिए अपनी कोहनियों के बल होकर अपने चेहरे को उठाया. आशना बंद आँखो से वीरेंदर को लगातार चूमे जा रही थी. वीरेंदर की नज़र आशना के दमकते चेहरे पर पड़ी तो उसे यकीन ही नही हुआ कि यह उसकी गुड़िया है जिसे उसने अभी कुछ देर पहले ही आशना मे परिवर्तित किया है. 

आशना का चेहरा किसी अद्वितीए तेज सा चमक रहा था. आशना के गुलाबी चेहरे पर इस वक्त जो सुकून था वोही सुकून वीरेंदर अपने दिल मे महसूस कर रहा था. कुछ वक्त तक आशना की हरकतों मे उसका साथ देते हुए वीरेंदर ने कोई हरकत नहीं की और फिर धीरे से आशना को पुकारा.
वीरेंदर: आशना. 

आशना ने सर हिलाकर उस से सवाल किया. 

वीरेंदर(बड़ी आत्मीयता से): अपनी आँखें खोलो ना गुड़िया. 

आशना ने शरमा कर ना मे गर्दन हिलाई. 

वीरेंदर: मैं तुम्हारी आँखो मे सुकून देखना चाहता हूँ गुड़िया. तुम्हारी आँखों मे देखता हूँ तो एक अलग ही खुशी मिलती है मुझे. 

आशना( गुड़िया से आशना बनने के बाद पहली बार बोलते हुए): आआहह, वीर, आइ लव यू, आइ लव यू और यह कहते ही आशना ने एक बार फिर से वीरेंदर के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. 

वीरेंदर: खुश हो ना????

आशना ने होंठ खिल उठे. 

आशना ने आँखें खोली और शरमाते हुए बोली: "मेरी आँखो मे झाँक कर खुद ही देख लीजिए". 

आशना की आँखो की चमक देख कर वीरेंदर के पूरे शरीर मे खुशी की एक अजब सी लहर दौड़ गयी. आशना की आँखे ऐसे मुस्कुरा रही थी जैसे उसे दुनिया की सबसे नायाब चीज़ मिल गयी हो. 

वीरेंदर: आइ आम सो हॅपी फॉर अस गुड़िया. 

आशना: मी टू भैया. वैसे आपको गिफ्ट कैसा लगा????

वीरेंदर( आशना की आँखों मे देखते हुए): माइंडब्लोयिंग और बहुत ही प्यारा गिफ्ट था तुम्हारा. बहुत मज़ा आया मुझे उसका रपर फाड़ने मे. लेकिन दुख है कि अब दोबारा उसे फाड़ नहीं पाउन्गा. यह बात वीरेंदर ने शरारती मुस्कान के साथ कही.
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02-02-2019, 01:03 AM,
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आशना ने शरमा कर वीरेंदर की छाती मैं चेहरा छुपा लिया और बोली: काश ऐसा हो सकता भैया तो मैं हर दिन आप को अपना एक नया गिफ्ट देती. 

वीरेंदर: डॉन'ट वरी, अभी एक और गिफ्ट है तुम्हारे पास. 

वीरेंदर का इशारा समझते ही आशना के चेहरे पर एक बार फिर से गुलाबी पन आ गया. वीरेंदर ने नीचे झुक कर आशना के निपल्स को अपने मुँह में ले लिया. 

आशना:आअहह, क्या कर रहे हो?? क्यूँ तंग कर रहे हो अपनी गुड़िया को????

वीरेंदर: अभी दिल ही नहीं भरा तो क्या करूँ????यह कह कर वीरेंदर ने अपने लिंग (जो कि अभी तक आशना की योनि मे ही था) को अंदर की तरफ दबा दिया. 

आशना की आँखें हैरानी से खुल गयी. 

आशना: ओह माइ गॉड, यह तो अभी भी वैसा का वैसा ही है. इसे तो कोई फरक ही नहीं पड़ा. 

वीरेंदर: इसे इतने दिन बाद अपनी प्रेमिका मिली है, यह तो इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा.

आशना: अपनी प्रेमिका का क्या हश्र किया है इसने, यह जानता भी है???

वीरेंदर: यह सब तो एक ना एक दिन तो होना हे था मेरी जान. सच पूछो तो तुम्हारे साथ कुछ ज़्यादा ही मज़ा आया. एक अलग ही रोमांच फील हुआ तुम्हारे साथ. ऐसे लगा कि जैसे कोई कोई............ 

आशना: मेरी भी फीलिंग्स कुछ ऐसी ही हैं वीर. मैं बयान नहीं कर पा रही हूँ इस सुख को, इस एहसास को. दिल करता है कि बस हम दोनो रहे और बाकी दुनिया में कोई ना हो. 

वीरेंदर: सच गुड़िया. 

आशना ने गर्दन हां में हिलाते हुए कहा: जी भैया. 

वीरेंदर ने अपनी कमर को थोड़ा सा झटका दिया. 

आशना: आआहह, वीर बहुत दर्द हो रहा है अभी.

वीरेंदर: रपर भी फट चुका है और एक दूसरे के गिफ्ट का मज़ा भी लूट चुके हैं तो अब कैसा दर्द????

आशना: पता नहीं लेकिन एक दर्द की लकीर अभी भी उमड़ रही है. 

वीरेंदर: कहाँ???

आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली. 

वीरेंदर: बोलो ना यार. 

आशना ने अपना काँपता हुआ हाथ अपने और वीर की टाँगो के बीच मिलन वाली जगह रखा और बोली: यहाँ. 

वीरेंदर: इंजेक्षन लगा दिया है कुछ देर मे दर्द दूर हो जाएगा. 

आशना ने अपने हाथ को वीरेंदर की पीठ पर धीरे से दे मारा. 

आशना: यह इंजेक्षन इलाज का नहीं है जानू यह तो आपने अब एक ऐसा रोग लगा दिया है कि इस इंजेक्षन के बिना एक पल भी गवारा ना होगा. 

वीरेंदर ने अपनी कमर को झटका दिया और बोला: तो चलो एक डोस और ले लो शायद कुछ आराम आ जाए. 

आशना: अया, धीरे वीर. अभी भी थोड़ा सा दर्द बाकी है. प्लीज़ धीरे धीरे से यह दर्द भी ख़तम कर दीजिए. 

यह कह कर आशना की नज़र जैसे ही अपने हाथ पर पड़ी(जिसे अभी कुछ देर पहले उसने अपनी योनि के पास लगाया था), आशना की आँखें फटी की फटी रह गयी. आशना की आँखों मे डर के भाव देख कर वीरेंदर ने तुरंत उस से पूछा: क्या हुआ गुड़िया????

आशना ने बिना कुछ कहे अपनी खून से सनी उंगलियाँ वीरेंदर की आँखों का आगे कर दी. एक पल के लिए तो वीरेंदर भी घबरा गया लेकिन जैसे ही उसे इस बात का अंदाज़ा हुआ कि यह खून कहाँ से निकला है, वो मुस्कुरा कर बोला: एकदम परफ़ेक्ट गिफ्ट था तुम्हारा. 

आशना: वीर उठो उपर से, पता नहीं कितनी ब्लीडिंग हो चुकी है. 

वीरेंदर: घबराओ मत जान, पहली बार में होती है. 

आशना: मैं भी जानती हूँ, बच्ची थोड़े ही हूँ. लेकिन इतना खून!!!! पता नहीं क्या हश्र किया होगा आपने मेरी उसका. 

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): अरे यार जब जानती हो कि ब्लीडिंग होती है तो फिर काहे का डर. चिंता मत करो मैं सुबह उसकी सिलाई कर दूँगा लेकिन अभी मुझे मत रोको. 

आशना: बेदर्दी कहीं के, मेरी जान निकली जा रही है और इन्हे मज़ाक सूझ रहा है. 

वीरेंदर: देखो आशना, तुमने आज तक कभी सुना है कि कोई लड़की अपनी सुहाग रात पर चुदने से दम तोड़ चुकी हो.

वीरेंदर के मुँह से "चुदना" शब्द सुनते ही आशना के बदन मे एक लहर दौड़ गयी और उसकी कमर ने एक झटका खाया. 

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): मैने फील किया है कि तुम्हारे साथ खुलकर बात करने पर तुम्हारी उत्तेजना दौगुनी हो जाती है. 

आशना: प्लीज़, ऐसी बातें मत कीजिए मुझे बहुत शरम आती है वीर. 

वीरेंदर: लंड लेने में शरम नही आती, बात करने/सुनने में शरम आती है. 

आशना के बदन ने एक और झटका खाया. वीरेंदर ने धीरे धीरे कमर चलाना शुरू कर दिया. आशना का दर्द भी खुमारी में बदलने लगा. वीरेंदर ने अपने घुटने आगे करते हुए आशना की कमर के पास रख दिए और खुद घुटनो के बल होकर आशना की जाँघो को पकड़ लिया. इस अवस्था मे वीरेंदर अपने लिंग को आशना की योनि मे चलते हुए देख रहा था. 

वीरेंदर ने जब आशना की योनि मे फसे अपने लिंग की तरफ देखा तो एक पल के लिए उसके भी होश उड़ गये. आशना की योनि से सच मे बहुत ही ज़्यादा मात्रा मे खून निकला था. वीरेंदर की नज़रों मे अजीब सा डर देख कर आशना ने भी अपना सर उठाकर अपनी योनि की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी. 

आशना के चेहरे पर आई मुस्कान देख कर वीरेंदर असमंजस में पड़ गया. 

वीरेंदर: अजीब लड़की हो यार तुम. जिस बात को लेकर मैं परेशान हूँ, तुम्हे उसमे खुशी हो रही है. 

आशना ने वीरेंदर को पास आने का इशारा किया तो वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के उभार पर अपने होंठ रख दिए जिस कारण वीरेंदर का लिंग आशना की योनि मे अंदर तक धँस गया. 

आशना : आआहह वीर आआआहह, धीरे. आपने शायद बहुत अंदर तक घुसा दिया है तभी इतनी पेन हो रहा है. 

वीरेंदर ने चिंता भरे स्वर मे आशना की तरफ देखा और पूछा: आर यू स्योर, यू आर ओके??? 
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02-02-2019, 01:03 AM,
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आशना ने मुस्कुरा कर वीरेंदर के बालों मे उंगलियाँ फसाई और बोली: मेरे भोले सनम, मैं बिल्कुल ठीक हूँ. आपने तो मेरे अंदर वहाँ तक चोट की है जहाँ तक मेरे अंदर जगह भी नहीं थी. सब ठीक है. 

वीरेंदर: एक बात बताओ, तुमने मुझे अपने पास आने को क्यूँ कहा????

आशना: अपना कान लाइए मेरे पास. 

वीरेंदर ने आसमंजस्ता मैं अपना दाया कान आशना के होंठों के पास रख दिया. 

आशना: वीर, आज मैं बहुत खुश हूँ, आपने मेरे जिस्म को एक ऐसा दाग लगा दिया है कि मेरी आत्मा मेरी रूह बेदाग हो गये हैं. मैं ज़िंदगी भर आपकी आभारी रहूंगी. 

वीरेंदर ने उत्तेजित होकर अपने लिंग को आशना के अंदर दबा दिया तो आशना सीत्कार उठी. 

आशना: आह धीरे धीरे मेरे निरदयी भैया, कुछ ही दिनो में यहाँ इतनी जगह बन जाएगी कि आप जितना मर्ज़ी दबा दबा कर अपने लिंग को मेरी गहराइयों मे उतार सकते हैं, मैं उफ्फ तक ना करूँगी. 

आशना के मुँह से पहली बार "लिंग " शब्द सुनकर वीरेंदर के जोश मे बढ़ोतरी हुई. उसने आशना के उपर से उठ कर आशना की जांघे पकड़ ली और धीरे धीरे अपने लिंग को आगे पीछे करने लगा. एक बार के सखलन से अब उसका लिंग आसानी से अपना रास्ता तय कर रहा था.वीरेंदर खास ध्यान रख रहा था कि वो ज़्यादा गहराई में चोट ना करे जिस से कि आशना को तकलीफ़ हो. आशना वीरेंदर की इस भावना से मन ही मन बहुत खुश हुई और उसने अपने बदन को वीरेंदर के हवाले कर ढीला छोड़ दिया. 

वीरेंदर कभी आशना की जाँघो को सहलाता तो कभी उसके उपर गिरकर उसके वक्षों से खलेता और कभी उसके होंठ चूम लेता. आशना के जिस्म को अपने हाथों से सहलाते हुए वीरेंदर उसे उत्तेजना के शिखर तक ले जाता और फिर एक दम अपने हाथों को पीछे खींच कर उसे वापिस धरती पर ले आता. आशना का बदन सखलन के लिए तड़पने लगा. आशना ने अपनी कमर को गति देना शुरू कर दिया. जैसे ही आशना का सखलन करीब आया, उसकी कमर बेड पर ऐसे उछलने लगी जैसे कि वो किसी आलोकिक शक्ति से खुद ब खुद गतिमान हो गयी हो. 


सखलित होते हुए आशना ने अपनी टाँगें वीरेंदर की कमर पर कस ली और उसे अपने उपर गिरा लिया. सखलन शुरू होते ही आशना एक बार फिर से अपने आप पर नियंत्रित ना रख सकी और उसके मुँह से निकला: आअहह, वीर, आइ आम कमिंग, आह फक मी, फक मी वीर. अया आइ आम सो क्लोज़, फक मी हार्ड आंड फास्ट. मेक मी कम माइ मॅन, मेक मी कम. आइ बेग यू जस्ट गिव मी रिलीस. आअहह, आआहह ववीरर, आइ आम सो सो स्ससो क्लोशसीईईईईईईईईईईईईईई, अयाया आआआः अया उउुफ़ुुफ्फुफ्फाहहाहाआआआआआआः, वीएर, कम इन मीईईईईई, कम वीर्ररर कूम्म्म्मम. मेक मी युवर वमेन्न्नन्न्न्न वीएरर.प्लीज़ कम इन म्म्म्म मेमएंमेमएंमेम्मीईईईईईई. 

करीब 2 मिनट तक चले इस सखलन में आशना कई बार सुख के समुंदर मे गोते लगाकर बाहर आई और कई बार उसमे डूबी. आशना के सखलन की प्रक्रिया करीब 2 मिनट तक चली और इस दौरान वो 5-6 बार चरम सीमा पर पहुँची. इस मल्टी-ऑर्गॅज़म के बाद आशना का शरीर निश्चल पड़ गया. वीरेंदर भी उसपर गिर गया और तेज़ तेज़ साँसें लेने लगा. 

आशना को निश्चल पाकर थोड़ी देर बाद वीरेंदर ने अपनी कमर को झटका दिया. 

आशना: अयाया वीर बस करो. मैं मर जाउन्गी. 

वीरेंदर: ऐसे कैसे बस करूँ, 4 दिन की छुट्टी ली है, वसूल नहीं करूँ क्या???

आशना(मरियल आवाज़ मे): आपने तो एक ही रात मे मेरी यह हालत करे दी है वीर, 4 दिन तो क्या मैं तो 4 मिनट भी अब बर्दाश्त नहीं कर पाउन्गी. 

वीरेंदर: तो फिर लगी शर्त. 

आशना: कैसी शर्त?????

वीरेंदर: अभी कुछ ही मिनटों मे तुम फिर से ज़ोर ज़ोर से चिल्लाओगी " फक मी वीर, फक मी".

यह सुनकर आशना का चेहरा लाल हो गया. 
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02-02-2019, 01:04 AM,
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आशना: बड़े बेशरम हैं आप वीर. 

वीरेंदर: अब तो आपका यह इल्ज़ाम भी मज़ूर है बेगम साहिबा. 

वीरेंदर: तो क्या कहती हो, लगाती हो शर्त??? 

आशना(शरमाते हुए): शरत मैं क्या माँगोगे???

वीरेंदर: ज़्यादा कुछ नहीं बस यह 4 दिन मेरे कहने पर चलना होगा. 

आशना: मैं तो सारी उम्र आपके कहने पर चलना चाहती हूँ वीर, 4 दिन क्या चीज़ हैं. 

वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठों को चूमा और फिर अपने होंठ आशना के उभार पर रख दिए. आशना मचल उठी, उसके जिस्म की आग बढ़ने लगी. वीरेंदर ने धीरे धीरे अपनी कमर मे भी हरकत जारी रखी और कुछ ही देर मे आशना एक बार फिर से वीरेंदर को उकसाने लगी. वीरेंदर ने इस बार अपनी गति तेज़ कर दी. 

कमरे मे एक बार फिर से तप थप की आवाज़ गूंजने लगी. फॅक फॅक और थप थप की आवाज़ के साथ वीरेंदर और आशना की कामुक आहों का संगीत सारे वातावरण को कामुक बनाए हुए था. इस बार के सखलन से दोनो प्रेमी इस कदर चूर होकर बिस्तर पर गिरे कि दोनो को कुछ होश ही नहीं रहा. एक दूसरे के जिस्म से रस निचोड़ कर उसे एक अलग रूप मे परिवर्तित करके दोनो सुकून से एक दूसरे को जकडे बिस्तर पर गिर पड़े और गिरते ही बिस्तर के मखमली एहसास ने उन्हे अपनी आगोश मे जकड लिया.


आशना की योनि से मिश्रित द्रव्य रिस रिस कर बिस्तर पर एकत्रित होता रहा और प्यार के अटूट बंधन की तरह समय के साथ और भी सख़्त होता चला गया.

प्यार की खुमारी उतरने के बाद जैसे ही आशना के जिस्म का खून सर्द हुआ उसकी नींद खुली. वीरेंदर की मज़बूत बाहों मे अपने आप को पाकर उसके दिल को सुकून आया. आशना को याद आया कि शरीर पर लेने वाली चद्दर को तो उसने आवेश मे आकर दूर उछाल दिया था. अपने मन मे चददर उठाने का विचार लिया वो जैसे ही बिस्तर से उठने को हुई, उसके शरीर मे दर्द की एक तेज़ लहर दौड़ी और अनायास ही उसके मुँह से निकला "वीर". 

वीरेंदर ने आशना की दर्द भरी आवाज़ सुनी तो वो झट से उठ कर बैठ गया. 

वीरेंदर(बौखलाया हुआ):क्या, क्या हुआ आशना????तुम ठीक तो हो???

वीरेंदर की बौखलाहट देख कर आशना के होंठो पर मुस्कुराहट आ गयी और बोली: इतनी चिंता मत करो जान, मुझे आदत हो जाएगी. 

आशना को नार्मल देख कर वीरेंदर बोला: अब इतनी दर्द भरी आवाज़ मे पुकारोगी तो चिंता तो होगी ही ना, वैसे भी एक ही तो बीवी है मेरी. 

आशना , वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी. 

आशना: तो एक काम करिए, आपकी एकलौती बीवी को ठंड लग रही है, आप प्लीज़ वो चद्दर उठाकर उसे ओढ़ा देंगे.

वीरेंदर: बस इस काम के लिए मुझे जगा दिया. यार यह काम तो तुम खुद भी कर सकती थी. 

आशना ने अपनी योनि की तरफ इशारा करते हुए कहा: इसकी जो हालत की है आपने, मैं तो उठ भी नहीं पा रही हूँ. देखो अभी भी कितना दर्द हो रहा है, मुझे तो लगता है सूजन भी हो गयी है. 

एक दम से यह बात कहकर आशना को अपने नग्न होने का एहसास हुआ. आशना का शरीर सिकुड़ने लगा. 

वीरेंदर भी उसके असमंजस को भाँप गया. 

वीरेंदर: तुमने ही तो कहा था " मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकियगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए".

वीरेंदर के मुँह से यह सब सुनकर आशना एक दम शरमा गयी. आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए दर्द के बावजूद अपने आप को वीरेंदर से दूसरी ओर पलट कर अपनी पीठ वीरेंदर की तरफ कर दी. वीरेंदर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर आशना को वीरेंदर पर गुस्सा आया. 

कुछ देर बाद आशना के ज़हन मे अनायास ही एक ख़याल आया और अपने शक़ की पुष्टि करने के लिए जैसे ही उसने अपने चेहरे को मोड़ कर वीरेंदर की तरफ देखा, वीरेंदर की बाहर को निकल आई आँखो से उसे अपने शक को यकीन मे बदलने में वक्त ना लगा. 

आशना के पलट जाने की वजह से आशना के नितंब वीरेंदर की आँखों के सामने आ गये थे. वीरेंदर पहली बार आशना के नितंबों को निर्वस्त्र देख रहा था. आशना के उभरे हुए भारी नितंब देख कर वीरेंदर मन्तर्मुग्ध हो गया था और उसकी आँखें इस नज़ारे को देख कर बाहर निकलने को उतारू हो गई थी. 

आशना ने झट से टवल उठाकर अपने नितंबो को ढकने का प्रयास किया. अपनी आँखो के आगे त्रिलोकिक नज़र पर परदा पड़ते ही वीरेंदर की तंद्रा टूटी औट उसकी नज़रें आशना से मिली. आशना की आँखों मे शरम और गुस्से के मिले जुले भाव थे. 
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02-02-2019, 01:04 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
आशना: बड़े बेशरम हैं आप वीर. 

वीरेंदर: अब तो आपका यह इल्ज़ाम भी मज़ूर है बेगम साहिबा. 

वीरेंदर: तो क्या कहती हो, लगाती हो शर्त??? 

आशना(शरमाते हुए): शरत मैं क्या माँगोगे???

वीरेंदर: ज़्यादा कुछ नहीं बस यह 4 दिन मेरे कहने पर चलना होगा. 

आशना: मैं तो सारी उम्र आपके कहने पर चलना चाहती हूँ वीर, 4 दिन क्या चीज़ हैं. 

वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठों को चूमा और फिर अपने होंठ आशना के उभार पर रख दिए. आशना मचल उठी, उसके जिस्म की आग बढ़ने लगी. वीरेंदर ने धीरे धीरे अपनी कमर मे भी हरकत जारी रखी और कुछ ही देर मे आशना एक बार फिर से वीरेंदर को उकसाने लगी. वीरेंदर ने इस बार अपनी गति तेज़ कर दी. 

कमरे मे एक बार फिर से तप थप की आवाज़ गूंजने लगी. फॅक फॅक और थप थप की आवाज़ के साथ वीरेंदर और आशना की कामुक आहों का संगीत सारे वातावरण को कामुक बनाए हुए था. इस बार के सखलन से दोनो प्रेमी इस कदर चूर होकर बिस्तर पर गिरे कि दोनो को कुछ होश ही नहीं रहा. एक दूसरे के जिस्म से रस निचोड़ कर उसे एक अलग रूप मे परिवर्तित करके दोनो सुकून से एक दूसरे को जकडे बिस्तर पर गिर पड़े और गिरते ही बिस्तर के मखमली एहसास ने उन्हे अपनी आगोश मे जकड लिया.


आशना की योनि से मिश्रित द्रव्य रिस रिस कर बिस्तर पर एकत्रित होता रहा और प्यार के अटूट बंधन की तरह समय के साथ और भी सख़्त होता चला गया.

प्यार की खुमारी उतरने के बाद जैसे ही आशना के जिस्म का खून सर्द हुआ उसकी नींद खुली. वीरेंदर की मज़बूत बाहों मे अपने आप को पाकर उसके दिल को सुकून आया. आशना को याद आया कि शरीर पर लेने वाली चद्दर को तो उसने आवेश मे आकर दूर उछाल दिया था. अपने मन मे चददर उठाने का विचार लिया वो जैसे ही बिस्तर से उठने को हुई, उसके शरीर मे दर्द की एक तेज़ लहर दौड़ी और अनायास ही उसके मुँह से निकला "वीर". 

वीरेंदर ने आशना की दर्द भरी आवाज़ सुनी तो वो झट से उठ कर बैठ गया. 

वीरेंदर(बौखलाया हुआ):क्या, क्या हुआ आशना????तुम ठीक तो हो???

वीरेंदर की बौखलाहट देख कर आशना के होंठो पर मुस्कुराहट आ गयी और बोली: इतनी चिंता मत करो जान, मुझे आदत हो जाएगी. 

आशना को नार्मल देख कर वीरेंदर बोला: अब इतनी दर्द भरी आवाज़ मे पुकारोगी तो चिंता तो होगी ही ना, वैसे भी एक ही तो बीवी है मेरी. 

आशना , वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी. 

आशना: तो एक काम करिए, आपकी एकलौती बीवी को ठंड लग रही है, आप प्लीज़ वो चद्दर उठाकर उसे ओढ़ा देंगे.

वीरेंदर: बस इस काम के लिए मुझे जगा दिया. यार यह काम तो तुम खुद भी कर सकती थी. 

आशना ने अपनी योनि की तरफ इशारा करते हुए कहा: इसकी जो हालत की है आपने, मैं तो उठ भी नहीं पा रही हूँ. देखो अभी भी कितना दर्द हो रहा है, मुझे तो लगता है सूजन भी हो गयी है. 

एक दम से यह बात कहकर आशना को अपने नग्न होने का एहसास हुआ. आशना का शरीर सिकुड़ने लगा. 

वीरेंदर भी उसके असमंजस को भाँप गया. 

वीरेंदर: तुमने ही तो कहा था " मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकियगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए".

वीरेंदर के मुँह से यह सब सुनकर आशना एक दम शरमा गयी. आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए दर्द के बावजूद अपने आप को वीरेंदर से दूसरी ओर पलट कर अपनी पीठ वीरेंदर की तरफ कर दी. वीरेंदर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर आशना को वीरेंदर पर गुस्सा आया. 

कुछ देर बाद आशना के ज़हन मे अनायास ही एक ख़याल आया और अपने शक़ की पुष्टि करने के लिए जैसे ही उसने अपने चेहरे को मोड़ कर वीरेंदर की तरफ देखा, वीरेंदर की बाहर को निकल आई आँखो से उसे अपने शक को यकीन मे बदलने में वक्त ना लगा. 

आशना के पलट जाने की वजह से आशना के नितंब वीरेंदर की आँखों के सामने आ गये थे. वीरेंदर पहली बार आशना के नितंबों को निर्वस्त्र देख रहा था. आशना के उभरे हुए भारी नितंब देख कर वीरेंदर मन्तर्मुग्ध हो गया था और उसकी आँखें इस नज़ारे को देख कर बाहर निकलने को उतारू हो गई थी. 

आशना ने झट से टवल उठाकर अपने नितंबो को ढकने का प्रयास किया. अपनी आँखो के आगे त्रिलोकिक नज़र पर परदा पड़ते ही वीरेंदर की तंद्रा टूटी औट उसकी नज़रें आशना से मिली. आशना की आँखों मे शरम और गुस्से के मिले जुले भाव थे. 
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02-02-2019, 01:04 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): वाउ, सो एरॉटिक. आइ आम सो लकी यू ऐज माइ वाइफ गुड़िया. तुम नहीं जानती मैं कितना पागल हो गया हूँ तुम्हारे लिए. तुम्हारी गान्ड इतनी मस्त है कि मैं तो बस खो ही गया था. वीरेंदर के मुँह से "गान्ड" शब्द सुनकर आशना की योनि ने एक लहर छोड़ दी. 

आशना, हैरान सी हुई वीरेंदर को देखे जा रही थी. 

वीरेंदर:तुम्हारे जिस्म के हर अंग का एक अलग ही नशा है. मैं इस नशे मे डूब चुका हूँ गुड़िया. जानता हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी मे शायद किसी और मकसद से आई थी लेकिन तुम्हे अपनी बीवी के रूप मे पाकर मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब समझता हूँ. 

वीरेंदर की प्यार भरी बातें सुनकर आशना का गुस्सा काफूर हो गया. 

आशना ने वीरेंदर की तरफ देख कर बड़ी मासूमियत से कहा: मुझे ठंड लग रही है वीर. 

वीरेंदर ने बेड से उतरने की बजाए अपने आप को आशना के करीब किया और उसे अपने आगोश मे ले लिया. वीरेंदर ने आशना को अपनी तरफ पलटा तो दर्द के मारे आशना आह कर उठी. 

वीरेंदर: अभी भी दर्द है क्या???

आशना(क्यूट सा फेस बनाकर गर्दन हिलाते हुए): हुउऊन्ण. 

वीरेंदर ने उसके भोलेपन को देखा तो उसे और कस कर अपने से सटा लिया. 

आशना: आउच. 

वीरेंदर: सो सॉरी जान. तुम सामने होती हो तो कंट्रोल ही नहीं होता. 

आशना मुस्कुरा दी और बोली: अपनी छुट्टी कॅन्सल कर दीजिए. 

वीरेंदर(हैरानी से आँखे फाड़ते हुए): क्यूँ???

आशना(नज़रें झुका कर): मुझे नहीं लगता कि मैं अब 3-4 दिन तक उठ भी पाउन्गी तो आपको सर्विस कैसे दे पाउन्गी.

वीरेंदर: डॉन'ट वरी, तुम्हारे पास अभी एक और गिफ्ट है मुझे देने के लिए और वो गिफ्ट मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेंट रहेगा. 

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा: बेशरम कहीं के. यहाँ मेरी जान निकली जा रही है और इन्हे अपने दूसरे गिफ्ट की पड़ी है. 

वीरेंदर(खुशी से चहकते हुए): तो इतना तो मानती हो ना कि यह दूसरा गिफ्ट भी मेरे लिए है. 

आशना, वीरेंदर की बात सुनकर शरमा गयी.वीरेंदर ने आशना के होंठ चूम कर कहा: वाह सोनिये तेरी यह हामी पाकर तो यह मुंडा बल्लियों उछलने लगा है. 

आशना: प्लीज़ अभी चद्दर ओढ़ा दीजिए ना, सारा बदन दुख रहा है ठंड के मारे. 

वीरेंदर: जो हुकुम बेगम साहिबा, आपके दूसरे गिफ्ट के लिए तो सारी उमर आपकी नौकरो भी कर सकता हूँ और यह कह कर वीरेंदर बेड से उतर कर चद्दर उठा लाया. 

आशना के दिल मैं एक सुकून था कि उसका जिस्म वीरेंदर को रिझाने मे कामयाब हुआ है. 

{ आख़िर हर लड़की यही तो चाहती है कि उसका पति उसके जिस्म का कायल हो जाए }

आशना को बिस्तर पर छोड़कर वीरेंदर वॉशरूम में चला गया. करीब 5 मिनट बाद फ्रेश होकर वीरेंदर वॉशरूम से बाहर निकला तो उसने देखा कि आशना ने अपने बदन को चद्दर से ढका हुआ था और वो उसी की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी. 

वीरेंदर(अपने लिंग की तरफ इशारा करते हुए): कितना देखोगी इसे, क्या अभी तक मन नहीं भरा. 

आशना ने क्यूट सा फेस बनाकर वीरेंदर की तरफ देख कर "ना" मे गर्दन हिलाई. 

आशना की इस मनमोहक अदा से वीरेंदर के लिंग मे एक झटका लगा और वो फिर से फन उठाने लगा. आशना, वीरेंदर के लिंग के बढ़ रहे आकार को देख कर हैरान हो उठी. 

आशना: इसे क्या हुआ???

वीरेंदर: अरे हमारी बेगम साहिबा को इसकी ज़रूरत है तो भला यह कैसे पीछे हट सकता है. 

आशना(शरमाते हुए): इसे कह दीजिए कि अपनी बेगम साहिबा की इसने जो दुर्गति की है उसके लिए इसकी यही सज़ा है कि अब कुछ दिन तो इसे बूखा ही सोना पड़ेगा. 

वीरेंदर: ऐसा ज़ुल्म ना कर इस "नन्हे से प्राणी" पर आए ज़ालिम, यह तुझे बद-दुआ दे देगा. 

आशना की हँसी छूट गयी.

आशना(हँसी को रोकते हुए): यह आपको "नन्हा सा प्राणी" दिख रहा है. आपके इस नन्हे से प्राणी ने मेरी "नन्ही सी चिड़िया" की जो हालत की है वो मैं ही समझ सकती हूँ. 
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02-02-2019, 01:04 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के नितंब के पास हाथ रखा तो आशना की साँस एकदम रुक गयी. वीरेंदर ने आशना के नितंब के पास पड़े टवल को झट से उठा लिया और हाथ पोंछते बोला: यहाँ पर किसी को अपने आप पर गुमान हो गया है और उन्हे लगता है कि हम उनके बिना रह नहीं पाएँगे. 

वीरेंदर की इस हरकत पर आशना मुस्कुरा दी. 

आशना: एक काम बताऊ, करोगे????

वीरेंदर की आँखे चमक उठी. 

वीरेंदर: नेकी और पूछ पूछ. बोलो क्या करवाना हैं, मेरा मतलब क्या करना है????

आशना: मुझे सहारा देकर वॉशरूम तक ले चलिए. 

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए अपनी कमर पर हाथ रख कर): इस काम का मेहनताना क्या मिलेगा??

आशना: तो आप मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाएँगे?

वीरेंदर: ज़रूर उठाउंगा. जब तुम मेरी शराफ़त का भरपूर फ़ायदा उठा रही हो तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि मैं तुम्हारी मजबोरी का फ़ायदा उठाऊ. 

आशना: मैने कब उठाया आपकी शराफ़त का फ़ायदा???

वीरेंदर: यह मेरी शराफ़त ही तो है कि अभी तक तुम्हारे साथ कुछ किया नहीं. अगर अपनी करने पर उतर आउ तो अभी के अभी तुम्हे यहीं दबोच कर अपने अरमान पूरे कर लूँ. 

आशना: ओह, अब बात समझ मे आई, तभी मुझे इस सुनसान जगह लेकर आए हो कि अपने मन की भी कर लो और किसी को मेरी चीखें भी ना सुनाई दे, बड़े आए शरीफ कहीं के. 

वीरेंदर: यही तो चाल थी जानेमन, अच्छा हुआ तुम पहले नहीं समझी वरना आज भी मेरी रात ऐसे ही गुज़रती. 

आशना: प्लीज़ जानू ले चलिए ना वॉशरूम, आइ वॉंट टू रिलीव माइसेल्फ. 

वीरेंदर: तो मुझे कब रिलीव करोगी?

आशना: सोचती हूँ ना. प्रेशर के कारण तो दिमाग़ भी काम नहीं कर रहा. 

वीरेंदर ने झट से आशना के उपर से चद्दर हटाई और पलक झपकते ही उसे अपनी मज़बूत बाहों मे उठा लिया. आशना ने वीरेंदर के मसल्स पर हाथ फेरते हुआ कहा: इंप्रेस्ड. 

वीरेंदर: बहुत ताक़त हैं इन बाज़ुओं मे जानेमन. 

आशना: आइ नो, जब आपने मुझे अपने नीचे दबा रखा था तभी पता चल गया था कि मेरा तो हिलना भी बेकार है. 

वीरेंदर: चलो अच्छा है कि तुम जान गयी कि " तुम्हारा मुझ से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है". 

वॉशरूम के दरवाज़े के पास पहुँचकर वीरेंदर ने पूछा "यहीं उतार दूं या अंदर ले चलूं"?

आशना: शरमा क्यूँ रहे हो जानू, अंदर चलो ना. प्लोमिश, मैं आपके साथ कुछ ग़लत नहीं करूँगी. 

मुस्कुराते हुए वीरेंदर, आशना को लेकर वॉशरूम मे दाखिल हुआ. 

आशना(टाय्लेट सीट के पास): बस यहीं उतार दीजिए, आगे मैं मॅनेज कर लूँगी. 

वीरेंदर ने उसे नीचे उतारा और बोला: आइ आम ऑल्वेज़ अट युवर सर्विस मॅम, और बताइए क्या हुकुम है मेरे लिए.

आशना: ओह, टवल तो मैं बेड पर ही भूल आई हूँ, आप प्लीज़ मेरे लिए टाउल लेकर आइए. 

वीरेंदर: जो हुकुम बेगम साहिबा. आख़िर मेवा खाना है तो सेवा तो करनी ही पड़ेगी. 

वीरेंदर बातरूम से बाहर निकल कर बेड के पास पड़े हुए टवल को उठाकर जैसे ही मुड़ने को हुए, उसके कानो मे क्लिक की आवाज़ आई. वीरेंदर जब तक दौड़ कर दरवाज़े के पास पहुँचा तब तक आशना उसे अंदर से लॉक कर चुकी थी. 

वीरेंदर: तिस इन नोट फेयर गुड़िया. 

आशना: मेरे शरीफ सैयाँ, आप तो सच मे ही बहुते सीधे हैं और यह कहकर वो ज़ोर से हँसने लगी.

वीरेंदर(उखड़े स्वर् मे): यार गाली दे रही हो या तारीफ कर रही हो?

आशना बस खिलखिलाकर हँसती रही. 

वीरेंदर: बाहर तो आओ, जितना हंस रही हो उतना ही ना रुलाया तो मेरा नाम भी वीरेंदर शर्मा नहीं.

आशना: जानू, अब तो मैं आराम से एक डेढ़ घंटे के बाद ही आउन्गि तब तक आप बोर होकर या तो सो जाएँगे या आपकी उत्तेजना आपकी खीज बढ़ने के साथ कम हो जाएगी.

वीरेंदर बुरा सा मुँह बनाकर वापिस मुड़ा ही था कि उसके कदम ठिठक गये. 

वीरेंदर: लेकिन एक डेढ़ घंटे तुम वॉशरूम मे करोगी क्या???

आशना: पानी गरम होने मे आधा घंटा तो लग हे जाएगा ना. 

वीरेंदर: तो????

आशना: इसका जवाब भी अपनी प्यारी साली साहिबा से ही ले लीजिए. 

वीरेंदर: गॉड आइडिया, वाह यार तुम मेरा कितना ख़याल रखती हो. 

आशना बस मुस्कुरा दी.
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02-02-2019, 01:06 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर ने ज़मीन पर पड़ा अपना पाजामा और अंडर शर्ट उठाई और उसे लेकर बेड के पास आगया. पाजामा और अंडर शर्ट पहन कर वीरेंदर ने मोबाइल मे टाइम देखा तो रात के डेढ़ बज रहे थे. वीरेंदर ने अपने मोबाइल से एक नंबर पर टेक्स्ट मेसेज किया और फिर अपने बॅग (जो कि उसने ऑफीस से चलते हुए साथ ले लिया था) से लॅपटॉप निकाल कर उसे ऑन कर लिया. टाटा फोटॉन डोंगल को स्लॉट पर कनेक्ट करके वीरेंदर ने अपना ई-मैल आकाउंट खोला और मेल्स चेक करने लगा. जिस एक मैल का उसे इंतज़ार था वो मैल अभी तक नहीं आई थी. वीरेंदर ने अपना मोबाइल उठाकर एक बार फिर से टेक्स्ट मेसेज किया और फिर थोड़ी देर बाद अपने आकाउंट को रेफ्रेश किया. 


आकाउंट धीरे धीरे रेफ्रेश होने लगा.

वीरेंदर (मन में): यह साले टाटा वालो की भी कितनी घटिया सर्विस हो गयी है आज कल. साला पेज रेफ्रेश होने मे भी इतना टाइम लग रहा है. 

तभी उसके सेल पर एक मेसेज आया. उसने झट से मेसेज ओपन किया. 

मेसेज --> " चेक युवर मैल इन 10 मिनट्स सर". 

वीरेंदर ने मोबाइल को लॅपटॉप के पास रखा और पीठ के बल लेट गया. लेटते ही वीरेंदर की नज़र चद्दर पर लगे खून के धब्बों पर पड़ी तो उसके दिल मे रोमांच की एक लहर दौड़ गयी. आशना के साथ बिताए हुए पल उसके ज़हन मे घूमने लगे. 

आशना का शरमाना, वीरेंदर की असफल कोशिश के बाद उसे उकसाना और फिर असहनीय पीड़ा के बावजूद वीरेंदर को रुकने ना देना यह सब सोच कर वीरेंदर के दिल मे आशना के लिए बेन्तेहा प्यार उमड़ने लगा. अपने ही ख़यालों मे खोए हुए उसे ना जाने कितना वक्त हो गया. 

उसके ख़यालों की ट्रेन तब रुकी जब उसके सेल पर मेसेज बीप बजी. वीरेंदर ने सेल उठाकर मेसेज ओपन किया. "डन सर, यू कॅन चेक इट". 

वीरेंदर ने बेड पर बैठते हुए आकाउंट को एक बार फिर से रेफ्रेश किया और पेज री-ओपन होने का वेट करने लगा. वॉशरूम की तरफ ध्यान जाते ही उसे आशना की याद आई. 

वीरेंदर: गुड़िया पानी गरम हो गया क्या??

आशना: जी भैया, बस थोड़ी देर मे हो जाएगा. 

वीरेंदर: ओके ठीक है, जल्दी करना. आइ आम वेटिंग फॉर यू. 

आशना: जानती हूँ कि आप मेरा वेट क्यूँ कर रहे हैं. 

वीरेंदर: जानती हो फिर भी इतना तड़पाती हो. 

आशना: आपने भी तो इतना तडपाया है, अब थोड़ा सा आप भी तड़प लो. 

वीरेंदर: अब तो यह तड़प तुम ही मिटा सकती हो मेरी जान. 

आशना का चेहरा खिल उठा. वीरेंदर की नज़र स्क्रीन पर पड़ी तो मैल आ चुकी थी. वीरेंदर ने लिंक ओपन किया और बेसब्री से मैल खुलने का वेट करने लगा.

जैसे ही मैल खुली, वीरेंदर की नज़र के लंबी चौड़ी डीटेल पर पड़ी. वीरेंदर ने जैसे ही पढ़ना स्टार्ट किया, उसके दिल की धड़कनें बढ़ने लगी और उसके चेहरे के भाव बदलने लगे.

एक डीटेक्टिव दोस्त द्वारा भेजी गयी इस मैल मे ऐसे कयि सारे खुलासे थे जिन्हे पढ़कर वीरेंदर का सर चकरा उठा. उसे यकीन ही नहीं हुआ कि उसके साथ एक बहुत ही बड़ा षड्यंत्र रचा गया था. पिछले कुछ दिनो से वो जितना कुछ जान पाया था और इस मैल में जो जानकरी थी उन सब को जोड़कर वो एक नतीजे पर पहुँच चुका था मगर अपने अगले कदम के बारे मे वो अभी भी कन्फ्यूज़्ड था. वो जानता था कि बिहारी पर सीधा हमला करना मतलब अपने और आशना के रिश्ते को दुनिया के सामने लाना हो जाएगा. वो बहुत सावधानी से काम लेना चाहता था. इस सिलसिले मे वो किसी दूसरे की मदद भी नहीं ले सकता था. 

इसी उधेड़बुन मे उसका ध्यान आशना की तरफ गया. आशना को वॉशरूम मे घुसे हुए काफ़ी वक्त हो चुका था. वीरेंदर ने देखा के रात के 3:15 हो रहे हैं. 

वीरेंदर ने घबराहट मे आशना को आवाज़ लगाई. 

आशना: आप अभी तक जाग रहे हैं, मुझे तो लगा कि आप सो गये होंगे. 

वीरेंदर: जब तक यह नहीं सोएगा तब तक मुझे भी नींद कहाँ आएगी. 

आशना, वीरेंदर की बात का मतलब समझ गयी. 

आशना: इसे ना तो खुद चैन है और ना ही किसी और को चैन लेने देता है. 

वीरेंदर: जल्दी करो ना जान, और कितना वेट करवाओगी?

आशना: बस हो गया. आप प्लीज़ मुझे वो बॅग पकड़ा दीजिए.

वीरेंदर: खुद ही ले लो, मैं नहीं करता तुम्हारी कोई मदद. 

आशना: प्लीज़ जानू पकड़ा दो ना, मुझे कुछ लेना है उसमे से. 

वीरेंदर: मुझे बता दो क्या चाहिए, मैं निकाल कर देता हूँ तुम्हे. 

आशना: नहीं ना जानू, प्लीज़ मान जाओ. मैं आपको पहन कर दिखाना चाहती हूँ. 

वीरेंदर: तुम कुछ भी पहन लो लेकिन तुम बिना कुछ पहने ज़्यादा हॉट और सेक्सी लगती हो. 

आशना: थॅंक यू माइ लव बट मुझे यह ड्रेस भी आपको पहन कर दिखानी है. 

वीरेंदर ने बॅग उठाया और नॉक किया. आशना ने धीरे से डोर खोलकर अपनी गोरी बाज़ू बाहर निकाली. वीरेंदर ने बिना कोई शरारत किए बॅग उसे थमा दिया. उसके ज़हन मे अभी भी बिहारी से निपटने को लेकर असमंजस था.

आशना को भी हैरानी हुई जब वीरेंदर ने बिना कोई छेड़खानी किए उसे बॅग थमा दिया. आशना ने दरवाज़ा लॉक किया और बोली: वीर, क्या सोच रहे हैं?

वीरेंदर का ध्यान एकदम आशना की तरफ गया. उसने अपने हाथ मे देखा उसे तो याद भी नहीं था कि उसने आशना को बॅग कब पकड़ा दिया. 

वीरेंदर(संभालते हुए): कुछ नहीं बस बोर हो गया हूँ यार. 

आशना:क्या???? इतनी जल्दी मुझसे बोर हो गये???

वीरेंदर: अरे मेरी तोबा, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता. मैं तो बस तुम्हारे बिना बोर हो गया हूँ. 

आशना(झूठा गुस्सा दिखाते हुए): जाइए हम आपसे बात नहीं करते, आप ने तो सुहाग रात पर ही हमारा दिल तोड़ दिया.

वीरेंदर ने एकदम से अपने दिमाग़ मे चल रही सारी परिशानियों को झटका और बोला: ऐसा मत कहो गुड़िया, मैं तो तुम बिन जीने का सोच भी नहीं सकता. मैं तो उसी दिन मर जाउन्गा जिस दिन मेरे कारण तुम्हारा दिल दुखेगा. 
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02-02-2019, 01:06 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर के इतना कहते ही आशना ने झट से वॉशरूम का दरवाज़ा खोला और उस से लिपट गयी. 

आशना: खबरदार अगर कभी आगे से ऐसे मरने की बात की तो. मैं जान दे दूँगी आपको कुछ होने से पहले. 

वीरेंदर ने भी आशना को कस कर गले लगा लिया. 

वीरेंदर: चलो इसी बहाने तुम बाहर तो निकली, मैं तो तुम्हारे बिना एकदम अकेला ही हो गया था. 

आशना(वीरेंदर की आँखों मे देखते हुए): अब तक तो सारी रातें अकेले ही काटी हैं????

वीरेंदर: अब तो ऐसा सोच कर भी डर लगता है. 

आशना: अपने दिल से हर डर निकला दीजिए मेरे सरताज, आज के बाद आपकी कोई भी रात अकेले नहीं कटेगी. 

वीरेंदर ने आशना को अपनी गोद मे उठा लिया. 

आशना: आउच. 

वीरेंदर: ओह सॉरी, मैं तो भूल ही गया था. अब कैसा है तुम्हारा पेन???

आशना(शरमाते हुए): अब काफ़ी आराम है. गरम पानी मे काफ़ी देर तक बैठ कर सेक दिया है, थोड़ा आराम मिला है. 

वीरेंदर: तो गरम पानी का यह राज़ था???

आशना ने मुस्कुरा कर वीरेंदर के गाल पर हल्के से काट लिया. 

वीरेंदर: एक बात तो बताओ यार, क्या तुम मुझे यह ड्रेस दिखाना चाहती थी????

आशना ने इस वक्त डार्क यल्लो कलर का एक टाइट टॉप पहन रखा था जो कि उसकी कमर से थोड़ा उपर तक था. नीचे आशना ने एक ब्लॅक - नेटेड स्टाइलिश पैंटी पहन रखी थी. 

आशना(बुरा सा मुँह बनाते हुए): आपने पूरी ड्रेस पहनने ही कहाँ दी. 

वीरेंदर: चलो अच्छा है, जितनी पहनी है वो भी तो उतारनी ही है. 

आशना ने शरमा कर अपना चेहरा वीरेंदर के सीने मे छुपा दिया और वीरेंदर आशना को लेकर बेड की तरफ बढ़ गया. आशना को बिस्तर पर लिटाकर वीरेंदर उसकी बगल मे लेट गया. वीरेंदर ने अपनी एक टाँग आशना की टाँग पर चढ़ा दी और उसके सर को अपनी बाज़ू पर रख कर उसे अपने से चिपका लिया. 

वीरेंदर के कड़क लिंग को अपनी नाभि से उपर की तरफ महसूस करते ही आशना के बदन मे भी खून का बहाव तेज़ होने लगा. 

आशना(शरारत भरी नज़रों से): क्या चाहिए इसे अब??

वीरेंदर: शायद यह फिर से तुम्हारी गहराइयों मे गोता लगाने को उतावला है. 

आशना: धत्त. कितनी बेशर्मी से आप अपनी बात बोल देते हैं. यह भी नहीं सोचते कि सामने वाला क्या सोचेगा??

वीरेंदर: मेरे आगोश में आकर किसी लड़की के सोचने की ताक़त ही ख़तम हो जाती है. 

आशना: अच्छा जी, तो इतना गरूर अपनी मर्दानगी पर?

वीरेंदर: क्यूँ तुम्हे कोई शक है क्या???

आशना: ना बाबा ना, यह जो चद्दर पर खून के धब्बे है ना उसे देख कर तो कोई शक रहा ही नहीं. 

वीरेंदर: यह तो मुझे तुमपर दया आ गयी वरना आज तुम्हारा सारा जिस्म ही लहू लुहान कर देता. 

आशना: सारी ही आपकी तो हूँ. जब चाहे छल्नी कर दीजिएगा मेरे जिस्म को. 

आशना के समर्पित भाव को देख कर वीरेंदर के लिंग मे तरंगे उठने लगी. 

वीरेंदर: क्या इरादा है???

आशना: इच्छा तो बहुत है मगर डर लगता है आपके नाग से. पता नहीं अंदर कहाँ तक जाकर कितने ज़ख़्म कर दिए हैं इसने. अभी थोड़ी सी राहत मिली है मगर दिल तो कर रहा है कि यह रात कभी ख़तम ही ना हो. 

वीरेंदर: मेरे ख़याल से तुम्हे अब थोड़ी देर रेस्ट कर लेनी चाहिए. 

आशना ने एकदम से वीरेंदर के लिंग को पाजामे के उपर से ही पकड़ लिया और बोली: इस शैतान का क्या करोगे???

वीरेंदर: कुछ देर बाद खुद ही नाराज़ होकर बैठ जाएगा. 

आशना: आए ज़ालिम, ऐसा तो ना बोल. नकाबिल है फिर मेरी यह जवानी, मेरा यह हुस्न अगर मेरा आगोश मे आकर भी इसे बेचैनी ना हो. 

वीरेंदर: तो फिर तुम ही बताओ कि क्या किया जाए?

आशना ने अपने होंठो पर जीब फेरी और बोली: सोचती हूँ कुछ. 

आशना के मन की बात पढ़कर वीरेंदर के लिंग ने ज़ोर से उछाल लिया. 

आशना ने अपने आप को वीरेंदर की पकड़ से छुड़ाया और उसकी कमर के पास बैठ गयी. आशना की नज़र जब वीरेंदर के पाजामे मे बने हुए टेंट पर पड़ी तो आशना के दिल मे खुशी की एक लहर दौड़ गयी. 

सच ही तो है हर लड़की अपने साथी को रिझाने का भरसक प्रयास करती है और जब उसके साथी मे कामोत्तेजना का संचार होता है तो उसे अपने हुष्ण पर गुरूर हो जाता है. 

आशना ने अपने कोमल हाथ से वीरेंदर के लिंग पर एक चपत लगाई और धीरे से मुस्कुरकर बोली: इसे ज़रा भी सबर नहीं है. संभाल कर रखा कीजिए इसे. 

वीरेंदर: जब इसे प्यार करने वाली साथ हो तो भला यह तो खुशी से अंगड़ाई लेगा ही. 

आशना: हां हां क्यूँ नहीं, आज तो इसके लिए बड़ा खुशी का दिन है, एक बेचारी नन्ही सी चिड़िया की जान जो ली है इसने. 

वीरेंदर: जान???? अरे इसने तो उसे जीवन दान दिया है. बेचारी कब से तड़प रही थी, अगर आज यह उसे गले ना लगाता तो बेचारी बिरहा की आग मे जल जाती. 

आशना: बातें बनाना तो कोई आप से सीखे. 

वीरेंदर: मुझे तो और भी बड़ा कुछ आता है, बस सीखने वाली मे श्रद्धा होनी चाहिए. 

आशना: आपकी यह गुड़िया तो आप से आपका हर हुनर सीखने तो तैयार बैठी है, आप बस इशारा करते जाइए मैं आपके नक्श-ए-कदम पर चलकर आपकी हर तमन्ना मे आपका साथ देने को तैयार हूँ. 
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02-02-2019, 01:06 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर ने आशना के टॉप मे हाथ डाल कर उसे उतारने का इशारा किया.

आशना: बड़े चालाक हैं आप, ग्यान देने से पहले ही गुरुदक्षिणा माँग रहे हैं. 

वीरेंदर: तुम गुरु दक्षिणा तो दो, तुम्हे ग्यान अपने आप ही मिल जाएगा. 

आशना: बहुत ही अजीब गुरु जी हैं मेरे. चलो अब अपने आप को इनके सुपुर्द कर ही दिया है तो फिर गुरु दक्षिणा देने से क्या परहेज़. 

यह कह कर आशना ने अपने जिस्म से टॉप को उतार कर एक ओर उछाल दिया. आशना के जिस्म के कटाव देख कर वीरेंदर के बदन मे खून की गति बढ़ गयी. 

वीरेंदर: ऐसी शिष्या को तो एक ही रात मे सारे गुर सीखा देने का मन करता है. 

आशना: गुरुदेव, मैं तन और मन से आपको समर्पित हूँ. आप मुझे जो भी दीक्षा देंगे मैं उसे अपने दिल मे बसा लूँगी. आपकी दी हुई विद्या प्राप्त करने के बदले मैं आपको गुरुदक्षिणा के रूप मे अपना तन सौंपती हूँ.

आशना ने वीरेंदर के पाजामे मे हाथ डाल कर पाजामे की डोरी पकड़ ली और एक ही झटके मे उसे खींच दिया. डोरी के खुलते ही वीरेंदर की कमर से पाजामा ढीला पड़ गया. आशना उठकर वीरेंदर के पैरों के पास चली आई. आशना के मांसल नितंबों की थिरकन वीरेंदर को और भी पागल बना गयी. वीरेंदर ने अपनी टाँगो को खोल कर आशना के लिए जगह बनाई. 

आशना,वीरेंदर की आँखो मे देखते हुए घुटनो के बल उसकी टाँगो के बीच बैठ गयी. शरारती मुस्कान लिए उसने वीरेंदर के पाजामे मे हाथ डाला और उसे नीचे को सरकाने लगी. वीरेंदर ने अपनी कमर उठा कर आशना को सहयोग किया. वीरेंदर की टाँगो से पाजामा उतार कर आशना ने उसे भी दूर उछाल दिया और अपनी गर्दन हवा मे घूमाकर अपने बाल बिखरा दिए. 

वीरेंदर: वाउ, लुकिंग वाइल्ड आंड सेक्सी टाइग्रेस. 

आशना ने एकदम आगे को झुक कर वीरेंदर की अंडरशर्ट पकड़ ली और उसे ज़ोर से खींचने लगी. 

वीरेंदर: हाई दैया, इतना उतावला पन. लगता है आज तो मेरा रेप होकर रहेगा. 

वीरेंदर ने उठ कर आशना को अपनी अंडरशर्ट उतारने मे मदद की. वीरेंदर एक दम नंगा हो चुका था. 

वीरेंदर: यह तो ना इंसाफी है. मुझे पूरा नंगा कर दिया और तुम अभी भी बर्तडे सूट मे नही हो. 

आशना(मदहोश आवाज़ मे):गुरुदेव, आपके लिंग ने मेरी योनि की जो हालत की है उसे देख कर कहीं आपका कलेजा ना फट जाए, इसी लिए उसे आपकी आँखो से छिपा रखा है. 

वीरेंदर: प्रिय, एक ना एक दिन तो उसका यही हाल होना था. तुम चिंता ना करो, अतिक्रमण की वजह से इसका यह हाल हुआ है. सुबह तक यह फिर से अपने आकार मे आ जाएगी. 

आशना(भोला सा चेहरा बनाते हुए): तो क्या गुरुदेव सुबह तक दोबारा इसका भोग ही नहीं लगाएँगे???

आशना का प्रश्न सुनते ही वीरेंदर की आँखों मे चमक आ गयी. 

वीरेंदर: हम तो सारी उमर तुम्हारे जिस्म को अपने लिंग से मथते रहें लेकिन प्रिय तुम्हारा कष्ट देख कर हमारा हृदय पसीज जाता है. 

आशना: कितने निर्दयी हैं आप देव, आपकी दासी आपके सामने निर्वस्त्र होकर आपको सहवास के लिए प्रोत्साहित कर रही है और आप उसकी पीड़ा का सोच कर उसके हृदय को पीड़ित कर रहे हैं. 

वीरेंदर: तो आओ प्रिय मेरे लिंग को अतिउत्तेजित कर दो ताकि हम अपने होश खो बैठें और आपकी योनि का मर्दन कर आपकी पीड़ा को हमेशा हमेशा के लिए दफ़न कर दें. 

आशना, वीरेंदर के लिए एक बार फिर से उत्तेजित हो चुकी थी. आवेश मे आकर उसने वीरेंदर के लिंग को अपने होंठो से चूम लिया और फिर उसे अपने मुँह मे लेकर उसे अधिक से अधिक अपने गले मे उतारने की चेष्टा करने लगी. आशना की जीभ और नरम होंठो के प्रभाव से वीरेंदर स्वर्गिक आनंद मे डूबने लगा. उसके मस्तिष्क मे सिर्फ़ और सिर्फ़ वासना भरने लगी. 

वीरेंदर( अत्यधिक मदहोशी मे): गुड़िया यहाँ मेरे उपर आओ, मैं भी अपने दिल मे तुम्हारे लिए बसे प्यार को जताना चाहता हूँ. 

पता नहीं क्यूँ इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद भी आशना को वीरेंदर के साथ 69 पोज़िशन मे आने मे काफ़ी शरम आ रही थी. वो वीरेंदर को मना कर उसका दिल दुखाना नही चाहती थी मगर आगे के पलों को सोचने मात्र से ही आशना के दिल की धड़कनें बढ़ गयी. 

वीरेंदर ने हाथ बढ़ा कर आशना की पैंटी की डोरियों को खींचा तो वो हवा मे लहराती हुई बिस्तर पर गिर पड़ी. आशना वीरेंदर का लिंग मुँह मे लिए एकदम सकपका गयी. वीरेंदर ने आशना के नितंबों पर हल्की सी चपत लगा कर उसे अपने उपर आने का इशारा किया और अपने हाथों को अपने सर की तरफ कर लिया. 
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