Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
07-28-2018, 12:45 PM,
#11
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
आइस क्रीम ऑर कुलफी खाने के बाद मनीषा ने कहा 


मनीषा- अशोक मेरे मोबाइल मे मेने एक गेम डाउनलोड की है उसकी पज़्ज़ील बोहोत ही डिफिकल्ट है पार ही नही हो रही उसको कंप्लीट कर के दो ना.....

अशोक- दो मोबाइल अपना..

मनीषा- मेरे रूम मे है चलो वही चलते है...

ऑर फिर दोनो रूम की तरफ चल देते है... मनीषा बेड पर बैठ जाती है ऑर उसको भी बिठा देती है अशोक उसका मोबाइल लेता है इतने मे मनीषा कहती है...


मनीषा- तू खेलेगा तो फिर मुझे केसे समझ आएगी कि केसे खेलना है ये गेम.. तू बस मुझे डाइरेक्षन दे मे वैसे वैसे करती जाउन्गी.....


अशोक को भी वो पज़्ज़ील समझ मे नही आती केसे कंप्लीट करे... बोहोत देर बैठे बैठे दोनो थक जाते है फिर वो लोग लेट के खेलने लगते है पर अशोक उसकी दीदी के सर के बोहोत पास अपना सर रखा था तो मनीषा को एक बहाना मिल गया अपने भाई को उकसाने का.... उसने कहा 

मनीषा- अरे भैया तुम अपना पूरा सर घुसा दिए हो मोबाइल मे मुझे कुछ दिख ही नही रहा... रूको मे पेट के बल सो जाती हूँ तुम पीछे से देखना ऑर बताना कि केसे खेलु ये गेम....



अशोक तो खुश हो गया कि चलो कुछ दिन बाद अब जा कर मोका मिला है दीदी के बदन को छूने का....



उसके पलट के सो जाने के बाद अशोक भी हिलते डुलते अपने लंड को मनीषा की गान्ड मे टच कर रहा था थोड़ी देर ऐसा चलता रहा फिर कुछ देर बाद वो अपनी बेहन की कमीज़ को गान्ड से हटा कर अपने लंड को उसकी गान्ड मे चिपका कर रखने लगा.... फिर धीरे धीरे अपने लंड का दबाव देने लगा.... पर उसका लंड उसकी बेहन की गान्ड की दरार मे नही घुस पा रहा था उसकी पेंटी की वजह से.... तो फिर उसने अपना लंड शॉर्ट से बाहर निकाला ऑर उसकी गान्ड पे सुला दिया ऑर वो एकदम चिपक के लेट गया अपनी बेहन के साथ मे ऑर उसको बातो मे उलझा के रख रहा था ताकि उसकी बेहन उसको ऐसे चिपके हुए होने पर कोई सवाल ना करे.... 

मनीषा भी तो लंड लेने के लिए मर रही थी वो भी जानबूज के ऐसा दिखा रही थी जैसे वो उसकी बातो मे उलझी हुई है ऑर उसको होश ही नही है कि उसका भाई उसके साथ क्या कर रहा है....



ऑर फिर धीरे धीरे अपने लंड को वो रगड़ने लगा उसकी गान्ड पे.........
मनीषा- अपने मन मे ( पता होता कि तू मेरी गान्ड की दरारो की बीच अपना लंड ऐसे रगड़ेगा तो मे आज पैंटी ही नही पहनती थी... )धीरे धीरे अपना लंड उसकी गान्ड पर रगड़ते रगड़ते उसके मन मे एक बात आई कि साला ये इतनी बेवकूफ़ तो नही है इसको भी मेरा लंड अपनी गान्ड पे महसूस हो रहा होगा इसका मतलब ये भी मेरा लंड लेना चाहती है....


ऑर फिर अशोक ने अपना एक पैर धीरे धीरे उसके उपेर चढ़ा दिया ऑर अपने शॉर्ट से बाहर निकले हुए लंड को रगड़ने लगा अगर कोई उन दोनो को देख लेता तो यही समझता जैसे कि अशोक अपनी बेहन की गान्ड मार रहा है.... 


मनीषा की पैंटी की वजह से उसका लंड मनीषा की गान्ड की दरारों मे ठीक से नही घुस पा रहा था वो अपने लंड को सुलाए हुए कोशिश कर रहा था कि पूरा लंड उसकी दरार मे फसा कर रगडे ताकि उसकी बेहन भी उसके लंड का भर पूर मज़ा ले सके.....



फिर पज़्ज़ील समझते समझते उसको कपड़ों के उपेर से चोद रहा था ओर जब पानी निकालने वाला था तो वो थोड़ा पीछे हो कर अपने लंड को मुट्ठी मे लेकर हिलाने लगा ऑर अपना पानी दीदी की गान्ड के छेद के यहाँ पूरा पानी छोड़ दिया... 


उसने जानबूझ के ऐसा किया क्यू कि स्टेप बाइ स्टेप वो खुद ऑर उसकी बेहन को बेशरम बना कर उसको एक गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड की तरह चोदना चाहता था... वो नही चाहता था कि जब वो उसकी बेहन को लंड मुँह मे दे तो वो नखरे करे या फिर वो उसके पैरो को अपने दोनो हाथो से खोल कर रखे तो तब उसकी दीदी अपनी चूत को अपनी उंगलियो से फैलाए ऑर अपने दूसरे हाथ मे थूक ले कर उसके सुपाडे पे लगा कर उसका लंड पकड़ के अपनी चूत मे डाले ऑर उससे बेशरम हो कर सेक्स करते वक्त अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस करे कि उसको अपने भाई का लंड चूत मे लेने पर क्या महसूस होता है... वो उसे चुदते वक्त कहे कि भैया तुम्हारा लंड मेरी चूत की दीवारो पे जब रगड़ते हुए अंदर जाता है तो मुझे ऐसा लगता है मुझे वैसे लगता है.........




इतनी देर मे मनीषा की सलवार ऑर पैंटी भीग के उसकी गान्ड पे गीला गीला महसूस कर लिया था... इसका तो काम हो गया था पर मनीषा का अभी बाकी था... तो उसने सोचा कि अब तो इसको यहाँ रोकने का कोई फ़ायदा नही है वो कहती है चलो भाई मे थोड़ी देर सो जाती हूँ आप भी जाओ ऑर अपने रूम मे जा कर आराम कर लो..... 

अशोक उठ कर चला जाता है क्यू कि वो भी चाहता था कि उसके जाने के बाद उसकी बेहन हालात का जाएजा ज़रूर लेगी ऑर उसको पता चल जाएगा कि मेने अपने लंड का पानी उसकी गान्ड पे निकल लिया है......

मनीषा उसके जाने के बाद अपनी गान्ड पे हाथ घुमाती है ऑर अशोक के लंड का चिप छिपा पानी उसके हाथ मे लग जाता है ऑर फिर वो अपनी कमीज़ को नीचे करती है जो अशोक ने उसकी गान्ड से हटा दी थी उससे अपनी गान्ड पे लगा पानी पोछ के पीठ के बल लेट कर अपनी चूत मे उंगली करने लगती है .... कुछ देर बाद उसका पानी निकल जाता है ऑर वो सो जाती है....




शाम को 7 बजे वो चाइ का कप ले कर अपने भाई के रूम मे जाती है ऑर उसे दे कर वो जाने लगती है तो अशोक उसे टोक देता है...


अशोक- कहाँ जा रही हो...?

मनीषा- मे बाल्कनी मे जा कर चाइ पीते पीते बाहर का नज़ारा देखने के लिए जा रही हूँ... तुम भी चलो.....


अशोक भी उठ कर उसके साथ चल देता है दोनो भाई बेहन अगल बगल मे खड़े हो कर चाइ पीते है..... चाइ पी लेने के बाद अशोक उसकी तरफ गुम जाता है ऑर वो अपनी बेहन की तरफ फेस कर के बाते करने लगता है ऑर फिर थोड़ा ऑर करीब आने की कोशिश करता है.... मनीषा को एहसास होता है कि ये अब मेरी गान्ड की साइड मे अपना लंड टच करने की कोशिश करेगा... पर वो सफल नही हो पाएगा क्यू कि उसको मेरे बोहोत करीब आना पड़ेगा.... अब उसको भी मज़ा लेना था तो उसको भी अपनी तरफ से कुछ जुगाड़ लगाना पड़ेगा वरना ये हसी मोका निकल जाएगा... तो उसने अपना हाथ नीचे कर दिया ऑर फिर अपने हाथ को उसके लंड से टच करती हुई वही खड़ी रही....... ऑर फिर चाइ का ग्लास साइड मे रखने लगी ऑर फिसलने का बहाना कर के अशोक के लंड को कस के अपने हाथ मे जकड लिया... मनीषा की एक उंगली ने उसके आंडो को भी दबा दिया था जिसकी वजह से अशोक के चेहरे का हाव भाव चेंज हो गया.... मनीषा ने उसके चेहरे को देख के कहा..

मनीषा- नाख़ून लग गया क्या...?
अशोक के चेहरे की तरफ देखती हुई सॉरी सॉरी कहती हुई उसके लंड को मसल रही थी जैसे वो गिल्टी फील कर रही हो ऑर जहा चोट लगी है वहाँ सहला कर माफी माँग रही हो..... 

मनीषा ने उसका लंड मसल के उसकी मोटाई नाप ली थी... ऑर मन ही मन खुश हो रही थी... उसे जितना मोटा लंड चाहिए था ये उतना ही था..... 

फिर वो वहाँ से चली जाती है ऑर कुछ देर बाद अपना मोबाइल लेके आती है ऑर उसको कहती है 


मनीषा- अशोक ये देखो दिव्या ने ये कोन्सि पिक्स भेजी है......?
अशोक मोबाइल को उल्टा सीधा घुमा के देख के कहता है

अशोक- कुछ समझ नही आ रहा....???? लगता है ये उसके मुँह के अंदर की पिक्स है..... देखो यहाँ आस पास सफेद सफेद थूक नज़र आ रही है.... शायद उसके गले मे इन्फेक्षन हो गया है वो यही दिखाने के लिए तुम्हे अपनी पिक्स व्हाट्स अप पे भेजी होगी..... देखो उसके अंदर की स्किन गुलाबी होनी चाहिए पर वो रेड रेड दिख रही है कुछ जगह से.....


मनीषा-( अपने मन मे अबे साले मेरी चूत की पिक्स है मेने अपनी चूत को फेला कर उसके छेद की क्लोज़-अप मे पिक्स निकाली है चूतिए साले ) हाँ लेकिन गले के अंदर एक छोटा सा दाना होता है ना वो नही है ना इसमे.. 

तब उसकी बत्ती जलती है कि ये तो चूत पिक्स है... फिर उसको मज़ाक सूझता है ऑर वो कहता है..

अशोक- उसका गला ही है... दिव्या को किसने कहा था पूरा केला हलक तक लेने के लिए... देखो केसे उसकी स्किन लाल लाल हो गयी है.... उसके पति को भी समझना चाहिए था ऐसे पूरा केला दिव्या के अंदर घुसा नही देना चाहिए था... [Image: icon_e_smile.gif] 


मनीषा- ( अपने मन मे साले दुपेहर को तूने मेरी चूत गीली कर दी थी तब मे उंगलियो डाल कर तेरे लंड को इमॅजिन कर के ज़ोर ज़ोर से घुसा रही थी इसलिए मेरी चूत लाल हो गयी थी)

रात के 10:45 हो रहे थे मनीषा ऑर अशोक ऑर मंजू खाना खा चुके थे मंजू सो रही थी.. मनीषा ने हॉल मे जा कर अशोक को बुलाया ऑर उसको फिरसे वोही गेम की नेक्स्ट पज़्ज़ील समझने के बहाने अपने रूम मे ले गयी.... दुपेहर की ग़लती दुबारा नही करना चाहती थी इसलिए उसने पाजामे के अंदर पैंटी नही पहनी थी.......
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07-28-2018, 12:46 PM,
#12
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
अशोक भी ये देख कर खुश हो गया ऑर सोचने लगा के मेरे लंड का जादू चल रहा है...

2-3 दिन तक ऐसा ही चलता रहा वो पज़्ज़ील समझते समझते अपना लंड रगड़ता रहा.... फिर 4थ डे को उसको मालूम पड़ा कि अब उसकी दीदी ने उसकी एक ऑर मुश्किल दूर कर दी है... वो अब जानबूज के नीचे से फटी हुई सलवार पहन रही है.... ये देख कर मन मे वो पागल सा हो रहा था उसे उसके अरमान पूरे होते हुए नज़र आ रहे थे......





आज तो वो झड गया था ऑर उसने अपने लंड का पानी ग़लती से डाइरेक्ट उसकी गान्ड पे डाल दिया था क्यू कि उसे पता नही था कि आज उसने नीचे से फटी हुई सलवार पहनी है.... अशोक समझ गया था कि अब कल भी ये फटी हुई सलवार ही पहनेगी.....



नेक्स्ट डे... रात को 11 बजे वो उसके रूम मे जाता है ऑर फिर वो दोनो उसी पोज़िशन मे लेट जाते है ऑर गेम की पज़्ज़ील सॉल्व करते हुए अशोक अपना लंड बाहर निकाल कर उसके लंड की स्किन को पीछे कर के अपने सुपाडे को बाहर निकालता है ऑर उसकी कमीज़ को साइड मे कर के अपना लंड फटी हुई सलवार के अंदर डाल के उसको पहले टच करने लगता है फिर कुछ देर बाद धीरे धीरे अपने लंड पे दबाव दे कर अंदर की ओर घुसाता है......


अब उसका लंड मनीषा की चूत के पास पहुँच जाता है... मनीषा को भी महसूस होता है कि उसके लंड का सुपाडा उसकी चूत के लिप्स खो फेला रहा है.... उसको अपनी चूत का मुँह खुलते हुए महसूस होता है.... अशोक का लंड अपनी चूत पे महसूस कर के उसकी चूत मे एक अजीब सी लहर दौड़ जाती है ऑर ऐसा लगता है जैसे चूत की नसों मे खून की जगह बिजली दौड़ रही हो....

मनीषा का शरीर कप कपाने लगता है.... उसकी चूत मे जो लहर उठ रही थी ऑर जो वो महसूस कर रही थी उसको लफ़्ज़ों मे बयान करना मुश्किल ही नही नामुमकिन है..... 

अगर तुम अपनी बेहन को चोदना चाहते हो या तुम अपने भाई से चुदना चाहती हो तो इमॅजिन करो कि उस जगह पे तुम हो ऑर तुम्हारा भाई या तुम्हारी बेहन ऐसी फटी हुई सलवार पहन कर तुम्हे इशारा दे रही हो कि वो तुमसे चुदना चाहती है ऑर तुम्हारे लंड का सुपाडा उसकी चूत का मुँह खोलते हुए अंदर घुसते जा रहा हो तो तुम्हे केसा लगेगा....??


ऑर अगर तुम्हारी चूत इतने दिन से अपने भाई का लंड लेने के लिए तड़प रही है तो एक पल के लिए तुम भी इमॅजिन करो कि जो लंड को तुम इतने दिनो से इमॅजिन कर के अपनी चूत मे उंगली कर रही थी वो लंड आज तुम्हारी चूत को फैलाते हुए अंदर घुस रहा है....


अब जो लहर ऑर जो बिजली तुम्हारे लंड ऑर चूत मे इमॅजिन कर आई है उससे कही ज़्यादा मनीषा की चूत मे हलचल हो रही थी क्यू कि इस वक्त ना तो वो इमॅजिन कर रही थी ऑर ना ही कोई सपना देख रही थी उसकी चूत मे सचमुच उसके भाई का लंड घुस रहा था......




उसकी चूत की पॅल्को को रगड़ते हुए उसके लंड का सुपाडा अंदर जा रहा था....


अशोक के लंड मे भी एक तूफान उठा हुआ था उसकी उतेज्ना उसके लंड के कठोर पन से नज़र आ रही थी... उसका लंड आजतक कभी इतना ज़्यादा कठोर ऑर तन के खड़ा नही हुआ था जितना कि आज था... उसको तो ऐसा लग रहा था कि अगर मेने अभी दीदी की चूत मे डाल कर इसको चोद कर लंड को शांत नही किया तो ये उतेज्ना के मारे फट जाएगा........

अशोक ने धीरे से अपने लंड को थोड़ा ऑर अंदर घुसाया तो मनीषा की चूत की पॅल्को को रगड़ते हुए उसके लंड का सुपाडा अंदर घुस रहा था ऑर जैसे ही उसका सुपाडा अंदर घुस गया उसकी चूत की पलके उसके सुपाडे की बाउंड्री लाइन पर आ चुकी थी....


ऑर फिर मनीषा की चूत की पलकें अशोक के लंड के सुपाडे से फिसल कर उसके सुपाडे से नीचे आ गयी थी.... उसको देख के लग रहा था जैसे चूत ने लंड को जाकड़ लिया हो... लंड के सुपाडे को क़ैद कर लिया हो.... 




फिर अशोक एक झटके मे उसके ऊपर पूरा चढ़ जाता है ऑर अपना पूरा लंड उसकी चूत की जड़ों तक घुसा देता है मनीषा की चूत मे एक बार फिर तेज़ बिजली दौड़ जाती है ओर उसके लंड का साइज़ महसूस कर के उसके मुँह से निकल जाता है...

मनीषा- आआआआआआहह गधे कही के पूरा वजन मेरे उपेर डाल दिया...


अशोक- अपने मन मे ( वजन नही दीदी बोलो गधे जेसा पूरा लंड डाल दिया मेरी चूत मे) 



अशोक बस हँसता है ऑर वहाँ से हट के उठ जाता है क्यू कि उसने पहले से मन बना के रखा था कि वो अपनी बेहन को केसे चोदना चाहता है ऑर उसकी बेहन चुदते समय नखरे करने की बजाए उसका साथ दे उसके लंड को चूसे ऑर बेशर्मो की तरह उसके लंड के सुपाडे को अपनी जीब ( टंग ) को उसके सुपाडे पे गोल गोल घुमा कर उसे लिक्क करे 


उठते वक्त इस बार वो अपना लंड उंड़र नही डालता है उल्टा वो उसको वैसे ही तना वही बाहर रहने देता है.... उसी की वजह से उसकी टी-शर्ट ने उसका आधा लंड वैसे ही ढक दिया था अब उसका आधा लंड ही तना हुआ बाहर नज़र आ रहा था...... 



तभी घंटी बजती है ऑर मनीषा बेड से उठते हुए
उसके लंड पे एक नज़र मारती है ऑर फिर डोर खोलने के लिए चल देती है....



जाते जाते वो बहुत गालियाँ देती है.... 


कॉन साला मादरचोद अपनी माँ चुदाने यहाँ आया है इनकी माँ का भोसडा अपने घर पे बैठ के अपनी माँ बेहन चुदाओ ना यहाँ आने की क्या ज़रूरत है......?

मनीषा डोर खोलती है तो सामने दीपा मासी थी...

मनीषा मुस्कुरा कर उसको अंदर बुलाती है ऑर सोफा पे बिठा देती है ऑर हाल चल पूछ कर बोलती है...


मनीषा- आप बैठो मासी मे आपके लिए पानी लाती हूँ ऑर मम्मी को भी बताती हूँ कि आप आई हो....

दीपा- रहने दे उसको सोने दे सुबह उसको मिल लुगी.... मे भी थक गयी हूँ ऑर नींद भी आ रही है....

अशोक को चिंता होने लगी कि इतनी रात को कॉन आया होगा ऑर क्यू आया होगा...?


अशोक ने टाइम देखा तो रात के 12 बज रहे थे..... वो अपना लंड जो अब सेमी एरेक्ट था उसे अंदर डाल के हॉल मे आया तो दीपा मासी को देखा.... 



ऑर देखते ही उसकी गान्ड फट गयी क्यू कि उसकी मासी मुँह फट ऑर बिंदास किसम की औरत थी उसके मुँह मे जो भी आता वो बक देती थी.... 



मेरे नानी नाना की बड़ी बेटी थी... मम्मी जब 10 साल की थी तब नाना की मौत हो गयी थी ओर तबसे दीपा मासी ने काम करना शुरू कर दिया जैसे जैसे वो बड़ी होती गयी वैसे वैसे वो औरत से मर्द बन रही थी...
उसकी बाते उसका नेचर 
घर मे उसने सब को दबा के रखा था.... 

इसी वजह से मम्मी उससे नफ़रत करती थी ऑर उसका नेचर भी मम्मी को पसंद नही था.....
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07-28-2018, 12:46 PM,
#13
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
बॅक टू दा स्टोरी 

अशोक झट से बैठ जाता है क्यू कि अगर दीपा ने उसका सेमी एरेक्ट लंड देख लिया तो वो वही उसकी बेज़्जती कर देगी.....


अशोक- ऑर मासी कैसी हो...?

दीपा- कैसी दिख रही हूँ...?

अशोक- अच्छी लग रही हो ..

दीपा- बस अच्छी लग रही हूँ... ऑर कुछ नही....? 
अरे यार बोलो झक्कस लग रही हो....

ऑर ये बात सुन के अशोक हँस देता है 

अशोक- आपने खाना वाना खाया कि नही...? या फिर मनीषा को बोलू बनाने को...?

दीपा- नही बेटा मे खा के आई हूँ 


अशोक- चलो फिर आप मेरे रूम मे सो जाओ सुबह बात करेगे..

दीपा- अशोक के रूम मे सो जाती है ऑर अशोक हॉल मे सोफे पे सो जाता है...... 

सुबह मंजू अशोक को हॉल मे सोते हुए देखती है तो उसे उठाते हुए पूछती है कि यहा अनकंफर्टबल हो कर क्यूँ सो रहे हो तेरे रूम मे जगह नही है क्या..?

अशोक- मासी सो रही है मेरे रूम मे...


मंजू दीपा का नाम सुन के गुस्से मे आ जाती है... अपने मन मे कहती है ये यहाँ क्यूँ आई है साली अपने घर मे जा कर मरे ना.....


मंजू ऑर सबसे छोटा भाई अनिल भी उससे डरता था... 


सुबह के 10 बजे दीपा उठती है ऑर मंजू से मिलती है....

दीपा- क्या हाल बना दिया है अपना....? साला अभी 40 की भी नही हुई ऑर 60 की दिखने लगी हो 

मंजू- नही मे ठीक हूँ दीदी...

दीपा- घंटा ठीक हो... जबसे केला खाना बंद किया है तब से तू बूढ़ी होती जा रही है... 


मंजू- आप भी ना दीदी नही सुधरोगी.... 


दीपा- अगर तेरी तरह अच्छी बच्ची बन कर रहूगी तो मुझे भी तेरी तरह बिना केले खाए जीना पड़ेगा.....

मंजू जानती थी कि वो उसे जितना मना करेगी वल्गर वर्ड ना बोलने को वो उतना ज़्यादा गंदी गंदी बाते करेगी.... इसलिए मंजू उसको गंदी बाते करने से नही रोक रही थी... पर मन ही मन मे उसको बहुत गालियाँ दे रही थी क्यू कि पहले जब वो आई थी तब उसके बच्चे यानी कि अशोक ऑर मनीषा दोनो छोटे थे 12-15 साल के अब तो वो जवान हो गये थे ऑर दीपा की डबल मीनिंग वाली बाते भी समझ रहे थे.....






पूरा दिन दीपा मनीषा के साथ मे ही रह रही थी वो दोनो घुल मिल गये थे.... मासी का ओपन विचार ऑर उनके सेक्सी डाइलॉग सुन कर वो मुस्कुरा देती थी.... 



शाम को 7:45 के करीब अशोक घर आ चुका था ऑर हाथ मुँह धो कर अपना पाजामा ऑर टी-शर्ट पहन कर हॉल मे मासी से बात करने बैठ गया.....


अशोक- सॉरी मासी सुबह आप सो रही थी तो मैं काम पर चला गया....

दीपा- काम पर पहले ध्यान दे अगर अच्छा कमाएगा तभी तू जन्नत की सैर कर पाएगा.....


अशोक- मे कुछ समझा नही मासी....?

दीपा- अबे झन्डु बाम अगर तू अच्छा कमाएगा तो ही तुझे टाकटक आइटम मिलेगी.... 

ये सुन कर अशोक मुस्कुरा देता है.....


फिर कुछ देर वो लोग ऐसे ही बाते वाते करते है फिर खाना पीना खा के सोफा पे बैठ के टीवी देखते है..... 


मंजू को तो टीवी मे पहले से ही इंटेरेस्ट नही था वो तो खाना खाने के बाद सीधा अपने रूम मे जा कर सो जाती है..... 


ऑर फिर 11 बजे तक मनीषा भी समझ जाती है कि अब कुछ दिन तक मज़ा नही मिलेगा अपने भाई से जबतक मासी घर पर है तबतक... तो फिर वो भी टाइम वेस्ट किए बिना अपने रूम मे चली जाती है दोनो को गुड नाइट बोल के....


अब मासी ऑर अशोक ही थे हॉल मे... दोनो एक ही सोफा पे बैठे थे....

दीपा थोड़ा मूड गयी ऑर अशोक के लेफ्ट साइड से उसे फेस करने लगी ऑर अपना एक हाथ उसकी जाँघ पे रख दिया ऑर पूछने लगी....



दीपा- अच्छा ये बता तेरी कोई गर्लफ्रेंड है कि नही....?



अशोक- मुस्कुरा कर... नही है 


दीपा- तो फिर तुम्हारे कालू को शांत केसे करते हो.....?


अशोक शरम के मारे लाल हो जाता है ऑर उसे अजीब भी लगने लगता है.... फिर वो भोला बनते हुए


अशोक- मे कुछ समझा नही....?


दीपा- उसका लंड अपने हाथ मे पकड़ कर... अरे ये कालू को शांत केसे करते हो....?



मासी के लंड पकड़ते ही वो चॉक जाता है ऑर उसका हाथ हटा देता है... इतने मे मासी हँस के बोलती है...

दीपा- अरे शरमा क्यूँ रहे हो...? मेने तो बस एक मज़ाक किया... अपना चेहरा देख मिरर मे ऐसा लग रहा है जैसे तेरी फट क हाथ मे आ गयी है..... 


अशोक नीचे मुन्डी कर के बैठ जाता है.... 
ऑर दीपा उसकी हालत देख कर फिरसे उसको डराने के लिए अपना हाथ बढ़ा कर उसके लंड के पास लाती है... 

अशोक ये देख के झट से उठ जाता है ऑर प्लास्टिक की चेयर पे बैठ जाता है.... ऑर मासी को बोलता है...

अशोक- ऐसा मज़ाक मत करो मासी मुझे एम्बररस्मेंट फील हो रहा है....



ऑर मासी ये देख के हँसने लगती है कि वो कितना डरपोक है.... क्यू कि इस उमर मे अगर कोई लड़की या औरत लंड पकड़ती है तो लड़का डर कर भागने के बजाए वही उसको चोद देता है.....

अशोक को इतना डरते हुए ऑर इतना शरमाते हुए देख कर दीपा को अच्छा नही लगता क्यू कि उसका पति भी ऐसा ही बोंदु है वो अपने पति को चूत चाटने को बोलती तो वो कहता कि मुझे अजीब लगता है ऑर अगर दीपा उसका लंड मुँह मे लेती तो उसका पति मना कर देता कहता कि ये गंदी चीज़ अपने मुँह मे लोगि....?

उसके चेहरे पर तो मुस्कुराहट थी पर अंदर से दीपा तो चिढ़ चुकी थी क्यू कि वो नही चाहती थी कि अशोक की बीवी का भी वोही हाल हो... दीपा के मन मे कोई भी वासना या हवस नही थी उसका नेचर ही बिंदास टाइप का था... वो तो बस उसको चिढ़ाने के लिए ऑर थोड़ा बेशरम बनाने के लिए अपनी लिमिट क्रॉस कर रही थी वो भी समझ रही थी कि उसे इतना वल्गर नही होना चाहिए पर अशोक का बेवकुफो की तरह रिएक्ट करना ऑर उठ के भाग जाना कोने मे जा कर बैठ जाना... एक मर्द हो कर औरतो जेसा रिएक्ट कर रहा था.... इतना तो आजकल की लड़किया भी नखरे नही करती है जितना ये कर रहा है.... 


दीपा- थोड़ा गुस्से से भरी आवाज़ मे.... अबे इतना शर्मा क्यू रहा है.....?? इतना शरमाएगा तो तेरी बीवी पड़ोसियों से मरवाती रहेगी.... 


अशोक- अपने मन मे ( मे आपकी इज़्ज़त करता हूँ वरना बेशर्मी के मामले मे मैं भी नंबर. 1 हूँ..... 


दीपा ने अपने दोनो पैर उपेर उठा दिए ऑर सोफा पे रख दिए ऑर गाउन को नीचे कर के अपनी टाँगे फैला दी उस वजह से उसके अंदर का नज़ारा दिख रहा था उसने पेंटी भी नही पहनी थी.......


अशोक की नज़र वहाँ पड़ती है तो दीपा झट से अपना हाथ चूत के यहाँ ला कर उसकी चूत को अपनी दोनो उंगलियो से फेला देती है.... 


अशोक ये देख कर अपनी मासी का चेहरा देखता है.....


जब मासी की नज़र अशोक से मिलती है तो मासी अपनी लंबी जीब निकाल कर साप की तरह उपेर नीचे कर के अपनी जीब को लहराती है ऑर अपना मुँह भी नीचे उपेर लहरा के उसको चूत चाटने की ऐक्शन कर के बताती है ऑर फिर उसको मुन्डी हिला कर अपने पास बुलाती है......
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07-28-2018, 12:47 PM,
#14
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
मासी के ऐसे रिएक्सन से अशोक के मन मे जो चल रहा था वो कुछ ऐसा था जैसे किसी की शादी हुई ऑर दूल्हा सुहाग रात को दुल्हन को चोदने के लिए मर रहा था ऑर फटाफट रूम मे जा कर दुल्हन का घाघरा उठता है तो उसे पता चलता है कि चूत की जगह पे लंड है... उसने एक गे से शादी की है.... अब दूल्हे को चूत से नही गान्ड से काम चलाना पड़ेगा...


वैसे ही अशोक को महसूस हो रहा था... कहाँ वो 20-22 साल का कहाँ उसकी मासी 46-48 की 


उसको इंटेरेस्ट ही नही था अपनी मासी मे उसको तो कढ़क ऑर तने हुए बूब्स चाहिए थे ना कि झूलते हुए बूब ऑर उसको चूत पसंद थी भोशड़ा नही.....



वो उसके जिसम को देख भी नही रहा था ऑर जो भी उसने देखा उसपे उसने ध्यान भी नही दिया....


हाला कि उसकी मासी इतनी भी गयी गुज़री नही थी जितना वो समझ रहा था.... उसने तो अपने मन मे मानो ठान लिया था कि हर मेच्यूर औरत के बूब्स पिल पिलाए हुए आम की तरह होते है ऑर चूत तो मानो पूरी झुर्रियों से भरी होती है जैसे 90 साल की किसी भी बूढ़ी के चेहरे पे होती है वैसे ही.....



इस वजह से अशोक उनसे दूर भाग रहा था ऑर शरमाने का नाटक कर रहा था.... उसकी मासी के छुने से या उसका लंड अपने हाथ मे पकड़ने से खड़ा नही होगा.... चलो एक बार मान लेते है कि छुने से या लंड को हाथ मे पकड़ के मसल्ने से खड़ा हो भी गया तो तुम्हारी चूत देख के फिर सो जाएगा.....




अशोक अपना मुँह घुमा देता है ऑर टीवी देखने लगता है...



मासी गुस्से मे आ जाती है ऑर कहती है...



दीपा- देख लेना एक दिन ऐसा आएगा जब तू ऐसे ही चेयर पे बैठा होगा ऑर तेरी बीवी चीनी चाइ पत्ति या मसाला लेने के बहाने पड़ोसी के घर जाएगी ऑर चुदवा के आएगी... ऑर फिर वो अशोक के रूम मे सोने चली जाती है 



अशोक को भी गुस्सा आ जाता है ये बात सुन के पर वो कुछ नही बोलता..... 



दूसरे दिन सुबह अशोक काम पे जाने के लिए निकल रहा था कि मनीषा ने कहा कि मासी को आज कुछ काम है तुमसे उसने कहा था कि आज तुम काम पे मत जाना.....

अशोक अपनी बहन से कहने वाला ही था कि दीदी मासी को बोलना कि मेरे कहने से पहले ही वो चला गया था....... कि तभी सामने से दीपा आ कर उसको बोलती है 

दीपा- किधर जा रहा है....? आज छुट्टी कर ले मुझे काम है तेरे से..... 5 बजे हमे बाज़ार जाना है ऑर तू मेरी मदद करना सामान उठाने मे....


अशोक का पहले तो मूड खराब हो जाता है वो सोचता है और कहता है
अशोक- अपने मन मे (साली फिर पीछे पड़ जाएगी ऑर दिमाग़ खाएगी कि तेरा उठता नही तू ऐसा है तू वैसा है.... अब इस साली मे इतना दम नही है कि इसको देख के मेरा खड़ा हो जाए.... साली अगर तू जवान होती थी तो तेरे को दिखा देता कि मेरी बीवी पड़ोसियों से चुदवायेगि या पड़ोसी की बीविया मुझसे चुदवायेगि.....) 


फिर सोचता है कि चलो पूरे दिन मे कभी ना कभी तो मोका मिलेगा मनीषा के साथ मज़ा लेने का....

ये सोच कर अपने मन को दिलासा दे रहा था.....



दुपेहर के 2:30 बज रहे थे सब लोग ने खाना खा लिया था ऑर सब हॉल मे बैठे थे ऑर तीनो लॅडीस गॉसिप करने लग गयी अशोक वहाँ बैठा बैठा बोर हो रहा था.... वो अपने रूम मे चला जाता है ऑर बेड पे लेट के अपनी बहन को चोदने का कोई तरकीब सोचता है.... 



बहुत दिमाग़ लगाने के बाद भी उसको कुछ सूझता नही है ऑर वो पक्क जाता है सोच सोच के.....


फिर वो टाइम देखता है तो 3बज रहे थे... वो सोचता है चलो आखे बंद कर के अपनी बहन को इमॅजिन कर के अपना टाइम पास कर लेता हूँ.....

ऑर फिर सोचने लगता है कि उसकी बहन उसके रूम मे आ कर उसके पैरो के पास खड़ी हो कर उसे देख रही है ऑर फिर झुक के उसके घुटनो के अगाल बगल अपने दोनो हाथ को रख देती है ऑर फिर अपने घुटने उसके पैरो के अगल बगल से रख के बेड पे चढ़ जाती है ऑर बिल्ली ( कॅट ) की तरह चलते हुए उसके लंड पर जा कर धीरे से अपनी चूत उसके उपेर रख देती है ऑर फिर अपने हाथ उसकी छाति ( चेस्ट ) पे हाथ रख देती है ऑर अपनी चूत को उसके लंड पे रगड़ने लगती है ऑर फिर थोड़ा झुक कर उसके कानो मे कहती है भैया आज बहुत मन कर रहा है हॉर्स राइडिंग का.. अपनी छोटी बहन की तमन्ना पूरी करोगे ना...? ऑर फिर अशोक क दोनो हाथो को जाकड़ के उसकी फेली हुई गान्ड पे रख देती है अपने हाथो से उसके हाथो को दबाती हुई कहती है भैया कस के पकडो अपनी बहन को कहीं मे गिर ना जाउ..... 

अशोक- दीदी तुम राइडिंग करते हुए गिर ना जाओ इसलिए मेने एक डंडा लगवाया है तुम उसको डलवा लो ऑर फिर जितनी राइडिंग करनी है करो तुम गिरोगी नही.... मनीषा नीचे हाथ डाल के कहती है मनीषा- कहाँ है डंडा... ऑर उसका तना हुआ लंड पकड़ के कहती है...

मनीषा- मिल गया.... लेकिन भैया मुझे शरम आ रही है आप आखे बंद करो मे जल्दी से अपना पाजामा उतार के डंडा उंधर ले लेती हूँ.... 

ऑर फिर मनीषा अपना पाजामा उतार कर फिर उसके लंड को ज़िप खोल के बाहर निकालती है ऑर उसके लंड की स्किन को नीचे करती हुई उसके सुपाडे को बाहर कर के अपनी चूत मे घुसाने लगती है..... पर वो अंदर नही घुस रहा था.....


मनीषा- भैया तुम्हारा डंडा कहीं फस रहा है अंदर नही जा रहा है..... [Image: icon_e_sad.gif] 


अशोक- डंडे को अंदर लेने का भी एक तरीका होता है... पहले उसे मुँह मे लो फिर अपनी जीब को गोल गोल घुमा के उसको गीला करो फिर अंदर लेना......




अशोक का लंड तो खड़ा हो चुका था इतना सब सोच सोच के ऑर वो अब सोच रहा था कि बहुत हुआ अब मुट्ठी मार कर अपने लंड को शांत कर दूं..... जैसे ही वो आख खोलने वाला था कि उसके लंड पे किसिके हाथ को महसूस करता है अशोक....
अशोक समझ गया था कि ये हाथ किसका हो सकता है....


इतने मे उसको आवाज़ आती है.... 

दीपा- दम है तेरे लंड मे . 

ऑर फिर उसके लंड को मसल कर कहती है... आख़िर तू है किस खानदान का..? हमारे कोहरी ( फेक सरनेम ) खानदान का इतना बड़ा ऑर मोटा तो होना चाहिए तेरे लंड को.....


अशोक कोई प्रतिक्रिया नही करता है क्यू कि वो चाहता था कि उसकी मासी एक बार ये समझ जाए कि वो ना मर्द नही है उसके लंड मे भी दम है... 


उसकी मासी ये जान कर खुश हुई कि अशोक एक नॉर्मल लड़का है.....


क्यू कि भोले पन की वजह से उसका आटिट्यूड ऑर उसका नेचर ऐसा था वरना वो भी बाकी औरतो की तरह होती थी.... सिंपल सीधी सादी.....
जब उसका बाप आइ मीन अशोक का नाना मरा था तो घर का खर्च इन दोनो माँ बेटी पे आ गया था माँ तो उस वक्त कपड़े सिल के या गेहू छान क महीने का 100-150 कमा लेती थी पर घर का खर्च तो 250-300 था उस वक्त जब मंजू 13 की थी ऑर दीपा का 16 वाँ साल चल रहा था..... बड़े पापा ने आइ मीन आड्वोकेट रतन लाल जो दीपा के पापा के बड़े भाई थे उनकी एज लगबग 50 के उपेर ही थी रतन लाल सबसे बड़ा भाई था इन 8 लोगो मे ऑर दीपा के पापा यानी (बीमा रामलाल कोहरी ) सबसे छोटा बेटा था.... सब लोग अलग अलग हो गये थे 8 के 8 अलग अलग रहते थे लेकिन बीमा अपने बड़े भाई से अच्छे से रहता था क्यू कि रतन लाल उसके छोटे भाई को हमेशा से सपोर्ट करता था..... तो उसके भाई के मर जाने के बाद उसने सोचा कि वो अब उनके परिवार की जितनी हो सके उतनी मदद करेगा..... पर कमला यानी कि दीपा की मम्मी को ठीक नही लग रहा था ऐसे मुफ़्त के पैसे लेते हुए तो उसने अपनी बेटी दीपा को अपने बड़े पापा के पास काम पे लगा दिया ये सोच कर कि उसके साथ रह कर वो कुछ वकालत भी सिख जाएगी ऑर काम भी करती रहेगी ऐसे मे सब खुश रहेगे... रतन को भी ऐसा नही लगेगा कि ये परिवार उनके उपेर बोझ है ओर इनको भी पैसे लेते हुए शर्मिंदगी महसूस नही होगी........

रतन लाल ने दीपा को अपने यहाँ टाइपिंग वपिंग के लिए काम पर रख लिया 100 पर मंत पे.... कुछ महीने हो गये वो भी अच्छा काम कर रही थी.... पर रतन लाल पता नही क्यू हमेशा चिढ़े हुए रहते थे.... 



आक्च्युयली वो फ्रस्टरेटेड हो गये थे अपनी सेक्षुयल लाइफ से.... उसकी बीवी को जब वो लाया था तो वो एकदम दुबली पतली थी अब लंड खा खा कर एकदम मोटी ऑर झड़ी हो गयी थी... उसके फिगर की तो पूरी वॉट लग गयी थी... रतन लाल को जब बिल्कुल बर्दाश्त नही होता था तब वो अपनी बीवी का पेटिकोर्ट उपेर कर के बिना अंदर देखे लंड घुसा कर अपनी आखे बंद कर के किसी ऑर के हॉट फिगर को इमॅजिन कर के चोद देता...


उस समय दीपा भी एकदम बोली थी... वैसे आज से 30-31 साल पहले कोई भी कुवारि लड़की भोली ही होती थी शादी के पहले दिन हर लड़की को पता चलता है कि शादी के बाद रात को पति अपनी कोई चीज़ उसके पैरो के बीच मे डाल के उसको गुदगुदी करता है.... शादी के एक मंत बाद उसे पता चलता है कि वो कोई चीज़ नही लंड है ऑर वो गुदगुदी नही करता वो उसे चोद्ता है..... 

रतन लाल को उसके भोले पन ऑर फ्रॅंक बिहेवियर से थोड़ी चिंता हो रही थी... वो पहले ही सेक्स क लिए मर रहा था ऑर ये बेवकूफ़ उसके हमेशा नज़दीक ही रहा करती थी.... ऑर उसकी डेस्क के सामने ही दीपा की डेस्क थी वो जब भी अपनी नज़र डेस्क से हटा कर सामने देखता तो दीपा की साइड से कसी हुई सलवार मे उसकी थाइस ही दिखती थी कभी कभी उसकी काली या सफेद कलर की पेंटी भी दिख जाती थी... वो जानबूज के ऐसा नही करता था पर ग़लती से ऐसा हो जाता था उससे..... 





रतन लाल की सिचुयेशन ऐसी थी कि वो 10-15 दिन मे वो एक बार सेक्स करता था.... उसका मन तो रोज सेक्स करने को करता पर उसकी बीवी का फिगर उसके खड़े लंड को फिरसे सुला देता था 



सेक्स उसपे हावी हो गया था वो बस अपनी भूख मिटाना चाहता था उसने शाम को घर पहुँच कर अपनी बीवी का पेटिकोट उपेर किया ऑर लंड डाल के किसी हॉट लड़की को इमॅजिन कर रहा था पर कोई लड़की उसको सूझ नही रही थी ऑर यहाँ उसका लंड चूत के अंदर ढीला पड़ रहा था... फिर उसको एक लड़की उसके डेस्क पे पूरी नंगी डेस्क की किनारे बैठी थी अपने दोनो पैरो को फेलाए हुए ऑर अपनी चूत का छेद खोलते हुए दिखाई दी वो कह रही थी 


लड़की- आओ रतन मेरी चूत की आगोश मे अपने लंड को खो जाने दो.... रतन को वो आवाज़ जानी पहचानी लग रही थी.....

रतन का लंड अब धीरे धीरे फिर खड़ा हो रहा था..... ऑर वो अपनी बीवी को चोदते हुए इमॅजिन कर रहा था कि वो अपनी ज़िप खोल कर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाल के उस लड़की के पास जाता है जो डेस्क पे अपने पैरो को फेला कर नंगी बैठी थी... रतन की नज़रें उसकी चूत के अंदर के गुलाबी छेद पर ही थी ऑर रतन लाल अपने हाथ मे थूक ले कर अपने सुपाडे पे लगा कर उसकी चूत मे लंड डाल कर चोदने लगता है... ऑर उसका पानी झड़ने वाला ही होता है कि तब वो लड़की कहती है.......



लड़की- ऊओह बड़े पापा आआआआआआहह ऑर चोदो ऑर अंदर तक घुसाओ अपने लंड को..... तब रतन लाल उस लड़की का चेहरा गोर से देखता है तो उसे पता चलता है कि वो जिसको इमॅजिन कर रहा था वो दीपा थी.... तब उसका लंड जो उसकी बीवी की चूत मे था अचानक एकदम तन जाता है.. रतन की बीवी को अपनी चूत मे पति के लंड को एकदम जोश मे आ कर खड़ा होते हुए महसूस कर लेती है.... उसके लंड का कठोर पन ऑर उसके लंड का जोश काफ़ी सालो बाद उसने ऐसा महसूस किया था.... जब नयी नयी शादी हुई थी तब उसके लंड मे यही कठोर पन ऑर यही जोश था... 

रतन लाल का जोश देख के उसकी बीवी के मुँह से निकल ही जाता है.... आए जी ऐसा क्या देख के आए हो कि पप्पू इतने जोश मे है....?


रतन लाल पहले ही अपनी उलजान मे फसा हुआ था वो कहाँ उसकी उलझन सुलझा पाएगा....


रतन लाल का पानी निकलने वाला ही था कि वो अपनी भतीजीी को हटा के किसी ऑर को इमॅजिन करने की कोशिश करने लगा पर उसको कोई ऑर लड़की सूझ ही नही रही थी ऑर यहाँ उसका लंड अब ढीला पड़ने ही वाला था.....



अब उसको कुछ समझ ही नही आ रहा था कि वो क्या करे.....?


उसको अपनी हवस तो मिटानी ही थी केसे भी कर के... उसने सोचा कि इतनी देर से मे भतीजी को इमॅजिन कर के चोद रहा था अब 2 सेकेंड मे मेरा पानी गिरने वाला है... 2 सेकेंड ऑर इमॅजिन कर लेता हूँ किसको पता चलेगा कि मे भतीजी को इमॅजिन कर के अपनी बीवी को चोदता हूँ......



फिर रतन लाल इस बार बेशार्मो की तरह अपनी भतीजी को इमॅजिन करने लगा ऑर उसकी चूत पे थूक लगा कर अपने दोनो अंगूठो से उसकी चूत को फेला रहा था... ऑर दीपा अपने बड़े पापा का लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद पे रख के मदहोशी भरी आवाज़ मे कहती है....

दीपा- ऊओह बड़े पापा आपके लंड की गर्माहट को मे अपनी पूरी चूत के अंदर महसूस करना चाहती हूँ इसे मेरी चूत की जड़ों तक घुसा दो ना...... ऑर रतन लाल अपना पूरा लंड अंदर घुसा देता है ऑर लंड से एक तेज़ धार पानी की निकलती है ऑर दीपा अपने नीचे के होंठो को अपने दातों मे दबाए हुए मदहोशी से रतन लाल को देखती हुई उसके पानी की गर्माहट को महसूस करते हुए आआआआआआहह की आवाज़ कर रही थी.........





अब रतन लाल अपनी आखे खोल देता है ऑर अपना लंड अपनी बीवी की चूत से निकालता है.....


रतन लाल की बीवी- आज तो बड़े जोश मे थे आप....? 


रतन लाल- बहुत दिनो बाद आज की हवस आज निकाल ली ना इसलिए.... अब कुछ महीने ना भी करूँ तो भी चलेगा........
रतन लाल फिरसे अपने काम काज मे बिज़ी हो जाता है ऑर इस बार के सेक्स की वजह से वो थोड़ा रिलीफ भी महसूस करता है ऑर दीपा के कुछ पूछने या ना समझमे आने वाली बातों पे वो चिडता नही है.... कुछ दिन तक उसका मूड ठीक रहता है.... आख़िर क्यू ना रहेगा उसने बहुत सालो बाद ऐसी चुदाई की थी...... 




दीपा भी अपने बड़े पापा का फ्रॅंक नेचर देख कर वो भी ऑर फ्रॅंक हो गयी थी...... 
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07-28-2018, 12:47 PM,
#15
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
इन कुछ दिनो मे बहुत कुछ हुआ था दीपा उसके बहुत नज़दीक आ जाती थी या फिर उसकी थाइस उसको दिख जाती थी या फिर रॅक मे रखे हुए फाइल्स ढूँढते वक्त उसकी गान्ड का उभार दिख जाता था तो वो इग्नोर कर देता था.....



10-12 बाद वो किसी केस की फाइल ढूँढ रहा था रॅक मे ऑर फिर फाइल खोल के पढ़ने लगा ऑर अपनी डेस्क की तरफ जा रहा था.... बीच मे दीपा की भी डेस्क थी वो फाइल मे कुछ इंपॉर्टेंट पढ़ रहा था ऑर उसको डर था कि वो दीपा की चेयर से टकरा कर ना गिर जाए या फिर डेस्क से ना टकरा जाए तो वो डेस्क से कुछ दूर रुक गया ऑर वही खड़े खड़े पढ़ने लगा.... फिर वो फाइल पढ़ कर के आगे बढ़ा तो उसे पता चला कि दीपा अपनी चेयर को साइड मे कर के डेस्क के नीचे देख रही थी ऑर रतन लाल को तब एहसास होता है कि उसने आगे बढ़ क ग़लती कर दी.... उसका लंड अब दीपा की गान्ड से टच होने वाला ही था.... पर जैसे तेसे कर के वो साइड से निकल गया पर उसकी नरम नरम मुलायम गान्ड साइड से छु ली थी उसके लंड ने....... 




एक अच्छा सेक्स कुछ दिन के लिए लंड ऑर चूत को शांत करा सकता है पर जीवन भर के लिए चुप नही करा सकता.... 

अब तो उसे जमके सेक्स किए हुए 15-20 दिन हो गये थे..... 


वो आज के दिन तो अपने आपको गालियाँ देता है कि साला कुछ तो शरम करनी चाहिए मुझे.... वो मेरे भाई की बेटी है.......



जैसे जैसे दिन बीत रहे थे वैसे वैसे उसके अंदर सेक्स करने की इच्छा बढ़ रही थी........ 




जब नज़ारे देखने को मिल जाते तो वो देख लेता फिर घर पे जा कर अपने आपको गालियाँ देता ओर नेक्स्ट डे से वोही सब सुरू कर देता..... उसको देखने का कोई मोका नही छोड़ता ऑर घर पे पहुँचने के बाद अपने आपको कोस्ता.......
अब तो जैसे रतन लाल को आदत पड़ गयी थी दीपा के जिस्म को देखने की.... 




दीपा तो मानो उस वक्त 5 या 6 साल की बच्ची थी उसे कुछ पता ही नही था सेक्स के बारे मे..... 


वो वक्त ही ऐसा था 1985 का जितना आज की 5 या 6 साल की बच्ची को दिमाग़ है उतना उस वक्त की 16 साल की लड़की का होता था......



काफ़ी दिन बीत जाने के बाद रतन लाल पूरे जोश मे आ गया था जब वो दीपा को वाइट कलर की सलवार मे देखा तो.....


उसकी सलवार थोड़ी सी ट्रॅन्स्परेंट थी उसके अंदर की ब्लॅक पैंटी ऑर थाइस बिल्कुल नज़र आ रही थी........



रतन लाल ने अपनी पॉकेट मे हाथ डाला तो उसे एक रुपये का नोट मिला.... उसने वो एक रुपया दीपा को दिया ऑर कहा... 


रतन लाल- ये लो बेटा तुम्हारे लिए....


दीपा तो मानो बहुत खुश हो गयी क्यू कि उस वक्त 1रुपया की कीमत बहुत ज़्यादा थी..... 



रतन लाल ने कहा... लेकिन बेटा तुम्हे एक काम करना पड़ेगा.... 


दीपा को 1रुपये के साइवा कुछ नही दिख रहा था.... वो तो हर काम करने को तैयार हो गयी थी......




फिर रतन लाल ने अपनी ज़िप खोलते हुए अपना लंड बाहर निकाला....


पहले तो दीपा को थोडा अजीब लगा पर 1र रुपये की लालच ने उसे अँधा कर दिया था...... 



अब रतन लाल अपना लंड को उसके मुँह के पास लाते हुए उसे मुँह खोलने को कहता है..... ऑर वो मुँह खोल देती है फिर रतन लाल अपना लंड उसके मुँह मे डाल देता है.........




पर दीपा को तो कुछ पता ही नही था कि बड़े पापा क्या कर रहे है ऑर मुझे क्या करना चाहिए..... 


मुँह मे लंड लेने के बाद उसको कुछ समझ नही आता वो लंड को अपने मुँह मे पकड़े हुए उपर देखती है रतन लाल की आखो मे.... रतन लाल उसको कहता है....



रतन लाल- तुम्हे 1रुपया चाहिए ना...? 



दीपा हाँ मे मुँह हिलाती है...


रतन लाल- तो फिर इसको मुँह मे लेकर चूसो........

दीपा किसी छोटे बच्ची की तरह लंड मुँह मे लेकर चूसने लगती है...... जैसे छोटी बच्ची दूध पी रही है... वो ठीक ठाक चूस तो रही थी उसका लंड पर उसके दाँत रतन लाल के लंड पे लग रहे थे..... उसे मज़ा नही आ रहा था.... उसने जोश मे लंड चूस रही दीपा का सर अपने दोनो हाथो से पकड़ा ऑर अपना लंड उसके मुँह से निकालना चाहा तो दीपा ने उसके लंड को अपने मुँह मे पकड़ रखा था ऑर उसका सुपाडा नीचे ऑर उपेर के दांतो के बीच मे अटक गया था....


उसने दीपा से कहा...


रतन लाल- नही बेटा.. ज़रा प्यार से ऑर ध्यान देके चूसो तुम्हारे दाँत लग रहे है मुझे.......


सिर्फ़ अपने होंठो ओर ज़ुबान से चूसो.... 



ऑर फिर रतन लाल उसके सर को अपने नज़दीक ला रहा था ऑर दीपा अपने बड़े पापा को देखती हुई अपना मुँह खोलती है ऑर लंड मुँह मे ले लेती है..... इस बार दीपा ने वोही किया जो बड़े पापा ने कहा था वो अपने होंठो ऑर जीब से उसका लंड चूसने लगी..... 


कुछ देर रतन लाल को मज़ा आया पर उतना नही आया क्यू कि वो लंड तो चूस रही थी पर अंदर बाहर नही कर रही थी.......



रतन लाल ने फिर उसके मुँह से लंड निकाला ऑर उसको कहा...

रतन लाल- बेटे तुम कर तो ठीक रही हो पर तुम्हे थोड़ा ऑर भी कुछ करना पड़ेगा....


जैसे तुम कर रही थी वैसे ही करो ओर साथ ही साथ इसको अंदर तक लो जितना हो सके उतना ओर फिर थोड़ा बाहर निकालो ऑर वापिस इसे अपनी हलक तक घुसा लो.....



दीपा ने अपना मुँह ऑर खोल दिया ऑर लंड को अंदर तक लेने की कोशिश करने लगी...... ऑर रतन लाल उसके सर को बड़े प्यार से पूचकारता है... दीपा को बहुत अच्छा लगता है जब वो उसे पूचकार रहा था तो फिर वो उपर देखती है तो उसके बड़े पापा के चेहरे पर एक मदहोशी देख लेती है.....


अब वो चाहती थी कि ऑर कुछ करे पर बड़े पापा झट से उसके मुँह से लंड निकाल कर हाथ मे पकड़ के हिलाने लगे ऑर एक पिचकारी निकली ऑर फिर वो हाफने लगे.......

रतन लाल बहुत खुश था.... उसने दीपा को 1 की बजाए 2रुपये दे दिए.... दीपा की तो मानो लॉटरी लग गयी.... वो तो अपनी एग्ज़ाइट्मेंट छुपा ही नही पा रही थी... वो भी बहुत खुश हो गयी... उसने मन मे सोचा कि काश बड़े पापा मुझ से रोज ऐसा करवाए........


रतन लाल उसकी एग्ज़ाइट्मेंट देख के डर गया उसे लगा कि ये मेरी वॉट लगा देगी... तो उसने पैसे वापिस छीन लिए ऑर उसको डराया ऑर धमकाया कि अगर उसने इस पैसे के बारे मे या जो उसने किया उसके बारे मे किसिको बोला तो वो पैसे नही देगा..... 


वो डर गयी उसको लगा अब पैसे नही मिलेगे.... उसने कहा कि वो किसी के सामने पैसे नही निकालेगी ऑर जो हुआ उसके बारे मे भी किसिको नही बताएगी.....
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07-28-2018, 12:47 PM,
#16
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
दीपा घर पे चली जाती है ओर रतन लाल शाम से लेकर टेन्षन मे था... कि अगर उसकी माँ ने पैसे देख लिए तो....? या उसने पूछ लिया कि तुम्हे वो इतने पैसे केसे दे सकता है ज़रूर कुछ गड़बड़ है....


4-5 घंटे बीत गये ऑर वो टेन्षन ले ले कर पक गया उसने मन मे सोचा लंड से अब जो होगा देखा जाएगा....


यहाँ दीपा घर पे नॉर्मल की बजाए थोड़ी खुश लग रही थी.... कमला ने पूछा....


कमला- क्या बात है बेटा आज खुश लग रही हो....?



दीपा- आज बड़े पापा ने आइस क्रीम खिलाई मुझे इसलिए......




दीपा घर का काम करती हुई सोच रही थी कि अब बड़े पापा कब उसे चूसने को बोलेगे..... ऑर कब उसे पैसे मिलेगे इस काम के.....


ऑर वो अपने बड़े पापा को खुश करने के लिए मन मे कुछ सोचती है ओर चुटकी बजाते हुए कहती है...


दीपा- हाँ ये ठीक रहेगा... अबकी बार मे ऐसा ट्राइ करके देखुगी फिर देखते है बड़े पापा को केसा लगेगा... अच्छा लगा तो ठीक वरना सॉरी बोल दुगी......



फिर दूसरे दिन से वो दोनो बहुत घुल मिल गये थे.... रतन लाल ऑफीस मे आता तो उसको अपने पास बुला कर उसको अपनी जाँघ पे बिठा कर उसको नोट्स लिखने को कहता ऑर उसकी पीठ भी सहलाता..... 


रतन लाल बाहर से कुछ लेकर आता तो वो अपनी चेयर पे आगे सरक के बैठ जाता ऑर अपने पैरो को फेला देता ऑर दीपा को अपने पास बुला कर उसको अपने लंड पे बिठा कर ख़िलाता.....



खिला देने के बाद वो रोज की तरह उसके बूब्स भी दबाता था.... दीपा को भी अब समझ आ गया था कि बूब्स मसल रहा है तो अब इसका मतलब है कि 4आने मिलेगे........



कुछ दिन तक वो दीपा को लंड पे बिठाता ऑर उसके बूब्स भी दबाता.... 


ऐसा चलता रहा फिर एक वीक बाद रतन लाल उसके पास गया ऑर अपना लंड बाहर निकाल के उसका सर पकड़ के मुँह मे देने लगा.... दीपा अपने बड़े पापा की आखो मे देखती हुई उसके लंड को मुँह मे ले लेती है ऑर अपने हाथ मे पकड़ कर अपने बड़े पापा की आखो मे देखती हुई लंड के सुपाडे पर अपनी जीब को गोल गोल घुमाती है.... जेसा कि उसने उस दिन सोचा था कि वो बड़े पापा जब उसे चूसने को कहेगे तो वो अपनी जीब को गोल गोल घुमा कर चुसेगी....


रतन लाल के चेहरे पे एग्ज़ाइट्मेंट देख के समझ जाती है कि बड़े पापा को अच्छा लग रहा है.... 



फिर रतन लाल उसके हाथ को पकड़ता है जो दीपा ने लंड पे रखा था ऑर उसको हटा के कहता है 


रतन लाल- बेटा थोड़ा ऑर मुँह मे लो.... ऑर वो पूरा ज़ोर लगाती है लंड अंदर तक लेने का पर उसके लंड का सुपाडा उसके हलक तक पहुँच जाता है ऑर दीपा को हिचकी आती है ऑर उल्टी जेसा महसूस होता है ऑर आँख से आसू भी निकल आते है.....




ये देख कर रतन लाल अपना लंड निकाल लेता है ऑर फिर उसकी पीठ को सहलाते हुए कहता है आराम से आराम से कहीं जाना है क्या....?



दीपा फिर लंड चूसने लग जाती है... रतन लाल अपना लंड बाहर निकालता है ऑर उसको खड़ी कर देता है ऑर डेस्क पे झुक के खड़ी रहने को कहता है.....

रतन लाल ने अब उसकी सलवार का नाडा खोला ऑर पैंटी उतार के उसके पीछे खड़ा हो कर अपना लंड घुसा दिया उसकी चूत मे ऑर उसकी पीठ को बढ़ा कर उसको डेस्क के उपेर लिटा दिया..... ऑर धक्के मारने लगा......



दीपा की चूत मे अजीब सा महसूस हो रहा था उसको लगा बड़े पापा गुदगुदी कर रहे है.... जैसे जैसे रतन लाल अपना लंड अंदर घुसाता वैसे वैसे वो हँसती थी...... 


कुछ दिन ऐसे ही चुदने के बाद उसने गोर किया तो उसे गुदगुदी के बजाए एक अलग आनंद आ रहा था चुदने मे..... 


फिर तबसे उसको लंड लेने की आदत पड़ गयी थी.... पूरा दिन लंड के बारे मे सोचना ऑर जहाँ मोका मिले वहाँ चुद जाती थी.. अबतक उसने बहुत लंड लिए है... तब वो समझ गयी थी कि उसकी चूत ही गोलडेन टिकेट है उसे जो चाहिए वो मिलेगा बस अपनी गोलडेन टिकेट देनी पड़ेगी...... ऑर बड़े पापा का तो 6 साल तक लंड चूसा था उसने.... 




बॅक टू दा प्रेज़ेंट.....


दीपा ने अशोक का लंड पेंट के अंदर तना हुआ देखा तो उसका मन किया कि एक झलक देखु तो सही इसमे कोहरी परिवार वाले गुण है कि नही.........




उसने ज़िप खोली ऑर लंड अंडरवेर से बाहर निकाला...... 



अशोक अपनी बहन को इमॅजिन कर के बहुत गरम हो गया ही था वो वैसे भी मुट्ठी मारने ही वाला था तो उसने मन मे सोचा.....


अशोक- अपने मन मे... लो मासी अब ये लंड तुम्हारा है कुछ देर के लिए जो करना है कर लो.... 


उसे क्या पता कि ऐसे लंड तो वो सुबह चाइ के साथ लेती है... वो इससे बड़े बड़े लंड खा कर बैठी है......




फिर दीपा उसके लंड को बाहर निकाल के उसको चारो तरफ से देखती है... ऑर कहती है....


दीपा- बिल्कुल बड़े पापा जेसा लंड है..... ऑर सोचने लगती है कि इसका टेस्ट केसा होगा....???

ये सोच कर वो लंड अपने पास लाती है ऑर फिर अपने होंठो को 'ओ' शेप मे ला कर उसके सुपाडे को अपने होंठो मे पकड़ लेती है.....

ऑर फिर दीपा अपनी टंग की टिप्स से उसके लंड के होल को सहलाने लगी ऑर फिर एक झटके मे पूरा लंड अपनी हलक तक ले लिया ओर अपनी जीब से उसके लंड की स्किन को मुँह के अंदर से रगड़ने लगी...... पहली बार अशोक का लंड किसी के मुँह मे गया था ऑर जिस तरह वो चूस रही थी अशोक का तो मन कर रहा था कि वो अपनी मासी से शादी कर ले ऑर रोज उससे अपना लंड चुस्वाए...... 


ऑर फिर दीपा ने लंड को बाहर निकाल कर कहा.....

दीपा- म्‍म्म्ममममममम वैसे ही स्वाद है जेसा लंड का होना चाहिए.... ऑर फिर उसके सुपाडे पर एक पॅपी दे कर उसका लंड वापिस अंदर डालने लगी.... 


अशोक- अपने मन मे..... अरे नही नही ऑर चूसो साला वापिस क्या अंदर डाल रही हो.....



दीपा उसका लंड अंदर डाल के चली गयी ऑर अशोक के पास मूठ मारने के अलावा ऑर कोई ऑप्षन नही था वो मूठ मार के फ्रेश होने चला गया... कुछ देर मे उसको मासी के साथ जाना जो था....




अबतक तो बाजी पलट चुकी थी अब अशोक खुद चाहता था कि मासी कुछ करे तो वो उसे लंड चूसने को दे देगा..... पर ऐसा कुछ नही हुआ वो लोग बाज़ार हो कर आ भी गये ऑर खाना पीना खा कर सो भी गये.... नेक्स्ट डे मासी को वापिस जाना था.....




अशोक चाहता था कि मासी जाने से पहले एक बार उसका लंड चूस ले...... 


पर अशोक की मुराद पूरी नही हुई..... ऑर वो चली गयी....... 


उसके जाने के बाद घर मे सबसे ज़्यादा मनीषा खुश थी.... ऑर हो भी क्यू ना....? क्यू कि जो आग उसके भाई ने उसकी चूत मे लगाई थी उस आग को अपने भैया के लौडे से बुझानी थी.....





लेकिन अशोक आज खुश नही था.... मनीषा ने आज उसको बहुत मोके दिए मज़ा लेने के पर अशोक रेस्पॉन्स ही नही कर रहा था वो तो कहीं खोया हुआ था......

दूसरे दिन सुबह से फिरसे वैसे का वैसे हो जाता है..... अब घर मे दो ही लोग थे मनीषा ऑर अशोक.... 

मम्मी मासी के साथ नानी के घर गयी थी.....

अशोक ऑर मनीषा को पूरी आज़ादी मिल गयी थी कुछ भी करने की कोई भी रोकने टोकने वाला नही था घर पे 

अशोक भी अकेले पन का फ़ायदा उठाना चाहता था.... 

शाम को 8बजे घर आ कर उसने अपना पाजामा ऑर टी-शर्ट पहन लिया.... ऑर अशोक अपना लंड बाहर निकाल के घर मे घूमने लगा था.... उसको अपना लंड दीदी को दिखाने मे बहुत मज़ा आ रहा था.... ऑर मनीषा भी उसके लंड को देख देख कर उसकी चूत लंड लेने के लिए तड़प रही थी........

अशोक हॉल मे सोफा पे बैठ कर अपना लंड बाहर निकाले हुए बैठा था ऑर मनीषा हॉल मे उसके सामने ज़मीन पर बैठ कर सब्जी काट रही थी.... ऑर बैठे बैठे लंड को भी देख लेती थी.....



उसकी बहन भी लंड को देख के अनदेखा करने का नाटक कर रही थी........



अशोक को देख कर इसकी चूत मे भी खुजली होने लगी तो इसने पहले से ही फटी हुई सलवार पहनी ही थी तो उसने सोचा अब मेरी बारी... अब मैं अपने भैया को चूत के दर्शन कराउन्गी..... 



ऑर फिर उसने आटा गुथने वाला पतीला लाई ऑर अपने पैरो को पतीले के आस पास फेला कर उसको अपने अंगूठे से पकड़ लिया.... पर उसकी कमीज़ उसकी चूत को ढक के रखी थी तो उसने अशोक की तरफ देखा तो उसका ध्यान नही था अपनी बहन पे.... तो मनीषा ने फटाफट कमीज़ को साइड मे कर के देखने लगी कि उसकी चूत क्लियर दिख रही है कि नही.... मनीषा ने जब अपनी चूत को देखा तो उसकी चूत की पलके खुली हुई थी ऑर चूत के अंदर की गुलाबी दीवारे दिख रही थी.... 
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07-28-2018, 12:47 PM,
#17
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
अशोक ने जब अपनी बहन की तरफ देखा तो वो मुस्कुराने लगा ऑर अपने मन मे कहने लगा....



अशोक... अभी 2 मिनट पहले जब देखा था तो इसकी कमीज़ ने इसकी चूत को ढका हुआ था अब तो कमीज़ भी चूत के यहाँ नही है ऑर सलवार भी फटी हुई है ऑर तो ऑर इसने पैंटी भी नही पहनी...... 


लगता है इसको लंड खाने की जल्दी है.... या फिर मुझे इशारा दे रही है कि आओ भैया डाल दो अपना काला मोटा लंड मेरी चूत मे......




मनीषा उसको अपनी चूत को देखते हुए तिरछी नज़रो से देखती रहती है... 


ऑर फिर अशोक उसे अपना लंड देखने का भी मोका देता है.... वो फिर कुछ देर के लिए टीवी देखने लग जाता है ताकि उसकी बहन को लंड देखने को मिले.....



अशोक शोकेस मे लगे हुए मिरर से उसकी बहन को देखता रहता है जब भी उसकी बहन की नज़र लंड पे पड़ती है वो अपने लंड को झटकता है.....


उसकी बहन को लगता है कि उसकी चूत देखने के बाद उसका लंड उछलने लग गया है... अब तो ये मर रहा होगा मेरी चूत मे जाने क लिए.........
तभी बेल बजती है.... ऑर मनीषा कहती है कि 

मनीषा- भैया देखो वॉचमन आया होगा मेने नमक मँगाया था.... मेरे हाथ मे आटा लगा है प्लीज़ डोर खोल के नमक ले लो न....


अशोक अपना लंड पाजामे मे डाल देता है ऑर दरवाजा खोल कर नमक ले लेता है.... 



मनीषा को इस बात पे कुछ सूझता है.... अशोक जब सोफा पे बैठता है तो मनीषा उठ कर शी शी करती हुई उसके पास आती है ऑर कहती है.....


मनीषा- भैया मेरी थाइस पे चिटी काट रही है उसको पकड़ के मसल दो.......

अशोक- किस थाइस पे...?
अशोक जानता था कि मनीषा नाटक कर रही है.... 


फिर मनीषा ने अपनी एक टाँग को चोडा कर के फैला के उसको अपनी इन साइड की थाइस दिखाते हुए कहती है यहाँ.....


अशोक ने उसके घुटने के थोड़ा उपेर अपना पूरा हाथ रख कर उसको पकड़ते हुए कहा....

अशोक- यहाँ.....???


मनीषा- नही थोड़ा उपेर...


अशोक उसकी थाइस पर अपना हाथ को धीरे धीरे रेंगते हुए उपेर की ओर ले जा रहा था....



मनीषा- ऊहह भैया जल्दी से मसल दो ना.... आहह बहुत जोरो से काट रही है....



ऑर उसकी चूत से थोड़ा ही नीचे मनीषा कहती है.....



मनीषा- हाँ भैया यही.....



अपनी थाइस को थोड़ा ऑर फैला देती है ऑर कहती है....


मनीषा- भैया अब थाइस के थोड़ा अंदर हाथ डाल कर मसल डालो..... 




अशोक- हल्की आवाज़ मे.... तुम्हारी चूत को.....?


मनीषा सुन लेती है अशोक ने जो कहा.....

ओर फिर उसके होश उड़ाने के लिए कहती है....

मनीषा- हाँ भैया मसल दो.......


अशोक चॉक जाता है उसको लगता है कि अब मनीषा तैयार हो गयी है मेरा लंड लेने के लिए ऑर फिर वो कहता है....?


अशोक- क्या...?


मनीषा- अरे मे कह रही हूँ हाँ भैया वो यही पर है अब मसल डालो उसे......




अशोक थोड़ा मायूष हो जाता है... ऑर मन मे कहता है चलो बात अब बहुत दूर तक आ गयी है.... एक ना एक दिन तो चोद ही दूँगा तुझे......


ऑर फिर वो उसकी चूत से 2-3 इंच नीचे उसकी थाइस को अपने हाथो मे पकड़ कर मसल्ने लगता है.......



मनीषा तो ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे वो उसकी चूत को मसल रहा हूँ.........


मनीषा- ऊओह भैया आआआआआआहह अब आनंद मिल रहा है म्‍म्म्ममममममम अब जा के थोड़ा आराम मिला.....



थॅंक यू बोल कर वो अपनी फेली हुई थाइस को सीधा कर के जाते जाते कहती है.... 

.मनीषा- जबतक अगर कहीं खुजली उठ जाती है तो बिना खुज़ाए मन को शांति ऑर सुकून नही मिलता....


अशोक अपने मन मे.... हाँ समझ रहा हूँ कहाँ खुजली उठ रही है तेरे सरीर मे.... 



अशोक- जहाँ तुम नही पहुँच पाती वहाँ मुझसे खुजवा लिया करो......



मनीषा- अपने मन मे..... साले वो खुजली ही ऐसी है कि मुझसे शांत नही होगी तू ही मिटा सकता है उस खुजली को.....
अब मनीषा खाना बनाने के लिए किचन मे चली जाती है ऑर 1-1.5 घंटे बाद दोनो खाना खाने बैठ जाते है.....



कुछ देर बढ़ खाना पीना खा के अशोक चला जाता है नीचे कुछ लेने के लिए ऑर मनीषा सोचती है कि 


मनीषा- उस दिन तो लंड मेरी चूत के अंदर तक घुस चुका था साली मासी नही आई होती तो अबतक तो मे पता नही कितनी बार चुद चुकी होती अपने भाई के लंड से...... इस वक्त तो मैं उसके लंड पर बैठ के उछल के अपनी चूत को थप थप कर के उसके लंड पे मार रही होती ऑर पूरा लंड अपनी चूत की जड़ों तक घुसवा घुसवा के लेती.....
चलो मे अपने रूम मे जाती हूँ फिर इसको बुलाती हूँ ऑर फिर आज आखरी बार इससे पज़्ज़ील सॉल्व करवाती हूँ.....


खुशी के मारे मनीषा अपने आप से ही सवाल करती है कि.....


मनीषा- अपने मन मे.... आखरी बार क्यूँ....?

ओर फिर खुश होते हुए खुद ही जवाब देती है....


मनीषा- आज तो अशोक मेरी चूत मे लंड डाल ही देगा ना.... घर पर भी कोई नही है... आज तो पक्का मेरी चूत को चैन मिलेगा बिचारी भैया के लंड को ऐसे देख देख के लार टपका रही थी... बहुत सालो की भूखी है मेरी चूत.... आज जा कर इसकी भूख मिटेगी......



ऑर फिर मनीषा अपने रूम मे चली जाती है... 


ऑर फिर अशोक आता है ऑर चाबी से दरवाजा खोलता है ऑर बंद करता है मनीषा आवाज़ सुन लेती है ऑर फिर अपने रूम से बाहर आ कर देखने जाती है कि अशोक ही है या कोई ऑर आइ मीन चोर वोर तो नही घुस गया ना...?


इतने मे लाइट बंद हो जाती है....

मनीषा घबरा जाती है ऑर आवाज़ देती है....


मनीषा- अशोक.....?


अशोक- हाँ दीदी....बोलो...?


मनीषा- नही मे बस घबरा गयी थी तो कन्फर्म कर रही थी कि तुम ही हो या कोई चोर घुस आया है.....


अशोक- ओह ओके....... साले दुकानदार के पास चेंज नही था तो ये लोलिगम चिपका दिया.....



मनीषा- लोलिगम....? ये क्या होता है....? लॉलिपोप तो सुना था पर ये पहली बार सुन रही हूँ.......



अशोक- क्या बात कर रही हो दीदी....? तुमने अभी तक लोलिगम नही खाया है....?



मनीषा- नही....


अशोक- ये चूयिंग गम है पर लॉलिपोप के जेसा होता है.... चूयिंग गम को चबाते है फिर टेस्ट निकल जाने के बाद फैंक देते है वैसे ही ये है बस इसको चूसना पड़ता है...... यहाँ आओ तुम्हे चुसाता हूँ......




मनीषा तो पहले से ही तैयार बैठी थी कि कुछ करे वो.... उसका इरादा समझ रही थी उसने भी कॅंडल जलाने की बात ना कर के उसको बोलती है......



मनीषा- मे तो मुँह खोल के बैठी हूँ तू ही डाल कर नही चुस्वा रहा है..... अब डाल भी दे मेरे मुँह मे......

अशोक- अरे पहले सामने तो आ कर बैठो ऑर मुँहे रॅपर तो खोल के निकालने तो दो...
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07-28-2018, 12:48 PM,
#18
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
अशोक अंधेरे मे यहाँ वहाँ हाथ चलाता है ऑर मनीषा भी ऑर दोनो के हाथ टकरा जाते है फिर अशोक मनीषा का हाथ पकड़ के उसकी सीध मे आ कर खड़ा हो जाता है...... ऑर फिर रॅपर खोलने की आवाज़ आती है.... मनीषा सोच मे पड़ जाती है कि साला सच मे ये कोई लोलिगम तो नही लाया है ना.....?


ऑर फिर अशोक कहता है 

अशोक- पहले अपनी जीब बाहर निकालो.....



मनीषा हाँ बोल कर अपनी जीब बाहर निकालती है ओर फिर अशोक उसकी चिन को पकड़ कर उसकी टंग पे कुछ रगड़ता है.....


मनीषा भी अपनी जीब से टटोलने की कोशिश करती है कि वो क्या है.... लंड है या सचमुच का लोलिगम है......



फिर मनीषा के ज़ुबान पर कुछ गोल गोल ऑर चिकना चिकना महसूस होता है ऑर फिर वो हट जाता है.....


ऑर फिर मनीषा अपनी टंग जब वापिस अपने मुँह के अंदर लेती है तो उसे स्ट्रॉबेरी का टेस्ट मिलता है.... ऑर फिर मनीषा अपने मन मे कहती है....



मनीषा- चूत मेरिका साला.... भोसड़ी के को अभी थोड़ी देर पहले इतने हिंट दिए थे अपनी चूत मरवाने के साले को फिर भी समझ नही आया कि मैं चुदने के लिए तैयार हूँ.... अपनी चूत भी दिखा दी अब साला ऑर क्या करूँ....????
मनीषा का मूड खराब हो जाता है.... वो लंड चूसना चाहती थी पर इसका भाई लोलिगम चूसा रहा था..... 


अशोक- केसा है....?

मनीषा- स्ट्रॉबेरी फ्लेवर है......

ऑर फिर अशोक मनीषा को मुँह खोलने के लिए बोलता है 



ऑर फिर उसके मुँह मे लोलिगम डाल देता है......

उसका रॅपर उसके होंठो पे लगता है अंदर डालने के समय



मनीषा को एहसास होता है कि लोलिगम के आगे का रॅपर ठीक से नही निकाला है अशोक ने वो उसको ज़ुबान से टच कर के देखती है कि प्लास्टिक की फीलिंग आती है या नही.... अगर प्लास्टिक होगा तो वो उसे निकाल देगी..... पर उसमे से भी उसको स्ट्रॉबेरी जेसा लगा......

फिर उसने ज़्यादा दिमाग़ ना चला कर अपना मुँह बंद करने लगी..... 

ऑर बंद करते हुए ही उसने महसूस किया कि नॉर्मल लॉलिपोप से ये अलग है...... ये गोल नही था कुलफी की तरह लंबा था...... उसने थोड़ा ऑर अंदर लिया तो उसको लॉलिपोप का एंड नही मिल रहा था..... अब उसकी चूत मे भी धीरे धीरे लहर उठने लगी थी ऑर वो दुआ करने लगी कि ये लंड ही हो.... ऑर फिर उसने अपनी आपको यकीन दिलाने के लिए उसने थोड़ा ऑर अंदर ले लिया ऑर अपनी ज़ुबान से टटोलने लगी......


अपनी ज़ुबान को लोलिगम के चारो तरफ घुमाने लगी.... ऑर थोड़ा अंदर लिया फिर अपने होंठो से पकड़ के ऑर अपने गालो को पिचका कर चूस्ते हुए उसे बाहर निकाला.... अब वो समझ गयी थी कि वो ऑर कुछ नही था वो लंड ही था अशोक ने स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाला कॉंडम पहना था...... 


जैसे ही उसे समझ आ गया कि ये लंड है वैसे ही उसकी चूत छटपटाने लगी..... उसने अपनी चूत को गहरी सास लेते हुए अपनी चूत को अपनी मुट्ठी मे दबा लिया ऑर लंड को चूस्ते हुए अपनी चूत भी सहला रही थी.......
वो अपने भाई को भी मज़ा देना चाहती थी लंड को मुँह मे अंदर बाहर कर के..... पर उसको कुछ सूझ नही रहा था कि वो क्या करे जो उसको भी मज़ा दे पाए....... 


फिर उसने लंड बाहर निकाला ऑर कहा कि भैया ये तो ख़तम हो गया अब टेस्ट नही बचा है इसमे........



तब अशोक ने कहा अभी पीछे का बाकी है पूरा अंदर तक लो..... 


मनीषा भी अपनी चूत को मसल मसल कर पानी गिरने के मुकाम तक ला चुकी थी.... अब तो सेक्स उस पर इतना हावी हो गया था कि वो थोड़ी बींदास हो गयी थी.... उसने अपने एक हाथ से लंड को पकड़ लिया ऑर फिर अपनी उंगली ऑर अंगूठे से पकड़ के लंड मुँह मे ले कर अपने हाथ को आगे पीछे करने लगी.... वो पूरी तरह से अशोक को हिंट दे रही थी कि वो जानती है कि वो लोलिगम नही लंड ले रही है.... ऑर जैसे लंड को चूसा जाता है ठीक उसी तरह लंड चूसने लगी..... 



कुछ देर बढ़ अशोक ने अपना लंड बाहर निकाला ऑर कहा 


अशोक- लगता है अब इसका असर ख़तम हो रहा है...... अब ये तुम्हे रब्बर जेसा लगेगा...... इतना कहने के बाद उसके मुँह मे वापिस डाल दिया...... पर इस बार कॉंडम उतार दिया था.....


मनीषा मुँह मे लेने के बाद....

मनीषा- ह्म्म.... ( ऑर फिर लंड को अपने मुँह मे दबा कर अपने गालो को पिचका कर मुँह मे वॅक्यूम पैदा कर के उसको अंदर खीच रही थी ऑर चूस्ते हुए लंड को मुँह से बाहर निकालती है.... उसके हॉट वॅक्यूम की वजह से उसके सुपाडे पे चिपक गये थे..... ऑर फिर एक पक्क की आवाज़ से लंड का सुपाडा होंठो की पकड़ से छूट गया......ऑर फिर मनीषा कहने लगी) हाँ अब रब्बर जेसा लग रहा है...... 


ऑर फिर उसको मुँह मे ले लिया.... अशोक के लंड की स्किन उसके सुपाडे से नीचे उतर आई थी मनीषा ने फिर बाहर निकाला ऑर उसको हाथ मे पकड़ के उसकी स्किन पीछे करने लगी...... ताकि अशोक को समझ आ जाए कि वो इतनी भी बेवकूफ़ नही है कि लंड ऑर लोलिगम मे फरक ना पहचान पाए..... ऐसा कर के वो अशोक को ये बताना चाहती थी कि वो अंजान बनने का नाटक कर रही है उसे भी पता है ये लंड है.....

अशोक ने भी हालात को समझ कर ऑर उसकी बहन को खुल कर लंड चूस्ते देख वो भी शर्मो हया छोड़ कर उसके मुँह मे ही झड गया......



मनीषा उसके लंड का पानी अपने मुँह मे डाल कर बाथरूम मे जाने के लिए उठ गयी ऑर दीवारो का सहारा ले कर बाथरूम मे पहुँच गयी........




अशोक ने बाहर जाते समय जो मेन स्विच ऑफ किया था लाइट का वो ऑन कर के बैठ गया सोफा पे......



उसकी बहन उसके लंड का पानी उगल के अपने रूम मे जाने लगी तो अशोक ने आवाज़ दी....

अशोक- दीदी यहाँ आओ अच्छी पिक्चर चल रही है......




मनीषा- उसके पास बैठ जाती है.....
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07-28-2018, 12:48 PM,
#19
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
अशोक अपनी बहन का रियेक्शन जानना चाहता था.... क्यू कि अभी अभी उसने उसके मुँह मे अपने लंड का पानी छोड़ा था.....




मनीषा भी ऑक्वर्ड सिचुयेशन मे थी वो अपने भाई को डायरेक्ट फेस टू फेस केसे जता ती कि वो अभी अभी लंड चूस कर बैठी है......



अशोक भी कुछ पूछ नही सकता था क्यू कि उसने लोलिगम का बहाना कर के लंड चूसने के बाद उसके मुँह मे झड के ग़लती कर दी थी.... अगर वो पूछता कि लोलिगम केसा लगा तो ये बात ज़रूर पैदा होती कि लास्ट मे जो नमकीन नमकीन उसके मुँह मे गिरा वो क्या था... तो अशोक उसका जवाब नही दे पाता........




खेर दोनो फिर यहाँ वहाँ की बाते करने लगे.... 



इन दोनो की शरम कुछ हद तक कम हो चुकी थी... भाई बहन की रिश्ते की मारियादा को तोड़ कर वो थोड़ा आगे निकल चुके थे.....

हज़्बेंड वाइफ की तरह बर्ताव करने लगे थे... बस वो चुदाई नही कर रहे थे लेकिन एकदुसरे से चिपकना ऑर गले मिलना ऑर एकदुसरे के बहुत पास रहना.....

काफ़ी देर मूवी देखने के बाद मनीषा सोफे पर ही सो जाती है.... दोनो एकदुसरे से चिपके हुए लेटे थे...... 


रात को 1:30 के करीब मनीषा सोफे पे हिल डुल कर अपनी गान्ड को उसके लंड पे रगड़ देती.... 2-3 बार ऐसा हुआ अशोक ने अच्छा मोका पा कर उसने अपने दिल की तमन्ना जाहिर करना सुरू कर दिया.... उसने अपनी बहन को बाहों मे भर कर तो रखा था पर अब उसने अपने हाथ को सरका कर उसकी बूब्स पे रख के दबाने लगा हल्के हल्के मसल्ते हुए उसकी कमीज़ के उपेर से उसके निपल को अपनी उंगलियो मे पकड़ के धीरे धीरे मसल्ने लगा ऑर उसकी फटी हुई सलवार मे से अपना लंड उसमे डालने लगा पर सफल नही हुआ तो उसने अपनी दीदी की गान्ड की चिक को फेला कर अपने लंड को तानते हुए सीधा अंदर घुसा दिया.... ऑर फिर अपना हाथ वापिस उसकी बूब्स पे रख के उसको अपनी बाहों मे जाकड़ लिया ऑर थोड़ा ज़ोर ज़ोर से झटके मार कर अपनी बहन को चोदने लगा ऑर कहने लगा कि.....

अशोक- देखो दीदी मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी चूत मे जाने के लिए... तुम्हारी चूत की दीवारो से रगड़ खाने के लिए मर रहा है..... इसका कठोर पन ऑर इसकी उत्तेजना तुम्हारी चूत मे इतनी महसूस नही हो रही होगी जितनी तब होगी जब तुम्हारी चूत खुद इसको अपने अंदर समा लेगी..... जब तुम खुद अपनी चूत खोल कर मेरा लंड अपनी चूत मे लोगि तब इसकी तमन्ना ऑर इसकी इच्छा पूरी होगी.... ऑर तुम्हे भी मेरे लंड का इससे कठोर पन ऑर उतेज्ना ज़्यादा महसूस होगी..... प्लीज़ दीदी कुछ जुगाड़ लगाओ कि मे तुम्हे चोद भी दूं ऑर हमें शर्मिंदगी भी महसूस ना हो....... ऑर हमारा भाई बहन का रिश्ता भी बना रहे.......



इतना कह के अशोक ने अपना लंड एक झटका ऑर मार के ऑर बूब्स को दबा के बाहर निकाल दिया ऑर वापिस पाजामे मे डाल कर सोने लगा... 



उसने अपने दिल की बात कर के अपने लिए लाइन क्लियर कर दी थी ताकि सिचुयेशन पड़ने पर दोनो तैयार रहे चुदाई के लिए या फिर इन दोनो मे से कोई एक ऐसी सिचुयेशन पैदा कर दे ताकि चुदाई हो सके......





अब तो हालत ऐसे हो गये थे कि वो एकदुसरे को हिंट दे रहे थे..... 
उसकी बहन उसे बार बार हिंट देती थी कि वो उससे चुदना चाहती है.... ऑर अशोक भी उससे हिंट देने लगा था कि वो उसे चोदना चाहता है.....
अपने भाई के मुँह से उसकी तड़प सुनने के बाद मनीषा को चुदने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था......




आज मनीषा को उसके भाई के लंड से ज़्यादा उसके मुँह से निकले शब्द उसको ललचा रहे थे...... 


अब मनीषा ने भी सोच लिया था कि मुझे भी कुछ करना पड़ेगा वरना हमारा कुछ नही होगा......




वो भी बिचारी क्या करती....? कोई भी बेहन डाइरेक्ट कपड़े उतार कर अपने भाई के सामने नंगी खड़ी हो कर ये तो नही बोल सकती ना.... भैया मुझे चोद डालो.... या भैया मे तुम्हारा लंड लेना चाहती हूँ अपनी चूत मे.....


मान मारियादा भी कोई चीज़ होती है हम इंसान है जानवर नही.... जानवर की तरह बड़े हो जाने पर बिना शर्मो हया के अपनी ही माँ बेहन को चोद दे.......




ऐसे रिश्तो से उबर कर चुदाई के रिश्ते बनाना बहुत मुस्किल होता है.... खास कर वो रिश्ता बहुत करीबी या नज़दीकी होता है तब..... कज़िन ब्रदर होता तो मनीषा को चुदाई करवाने मे इतना टाइम नही लगता......



खेर वो भी समझ रही थी कि मे सोफे पे उसके साथ कितना भी सोऊ या उसके लंड पे अपनी गान्ड रागड़ूं उसका कुछ मतलब नही है..... अशोक की बात मे भी दम है..... जो मज़ा खुल के चुदने मे है वेसा मज़ा नींद मे चुद के नही आएगा.....




मनीषा- अपने मन मे ( अब साला क्या करूँ जो बात आगे बढ़े....? ) 




अब मनीषा ने भी अपना दिमाग़ लगाना सुरू कर दिया...... उसको कुछ सूझा पर वो तोड़ा चिंतित हो गयी.... आइडिया तो ठीक ठाक था पर उसको डाइरेक्ट्ली अमल करने से थोड़ा शर्मा रही थी.... 
अब इसकी चिंता बस ये थी कि वो इसको अमल केसे करे....?





सोचते सोचते कब वो सो गयी उसे पता ही नही चला...... 




नेक्स्ट डे सुबह उठ कर उसने दिमाग़ लगाना सुरू कर दिया...





सनडे का दिन था अशोक भी घर पर ही था.... लगबग 12 बजे मनीषा को कुछ सूझा ऑर उसने अशोक के सामने अपनी बात छेड़ दी... आइ मीन अपना आइडिया को अमल करना सुरू कर दिया...... 





मनीषा- (अफ़सोस जताते हुए ) मेरी सब नाइटी गंदी हो गयी है कल पहन ने के लिए कुछ भी नही था इसलिए सलवार कमीज़ मे ही सो गयी.... एक नाइटी बची है पर....... 


अशोक- पर क्या....?



मनीषा- इधर आ दिखाती हूँ तेरे को....


मनीषा अपने रूम मे ले जा कर उसको अपनी नाइटी दिखाती है.... अशोक नाइटी देख के हँसते हुए बोलता है...... 


अशोक- इसमे तुम पक्की भिखारन लगोगी.....



ऑर फिर हँसने लग जाता है........
चूहो (रॅट) ने पूरा गाउन को कतर दिया था......



मनीषा- हसो मत.... मुझे सलवार कमीज़ मे उलझन होती है सोने मे.... इतने सारे कपड़ों की वजह से मे सो नही पाती ठीक से......


अशोक- हाँ बाबा मालूम है.... ये सिर्फ़ तेरी नही सभी प्राब्लम है.... रुक मे इसको पहनने लायक बनाता हूँ......



अशोक ने अपनी सुविधा के हिसाब से उसको नीचे से काट दिया ऑर दोनो साइड मे सिलाई (स्टिच) कर दी ओर कर्व शेप दे दिया... मनीषा ने देख के कहा....


मनीषा- मेने गाउन बोला था ड्रेस नही.... ये क्या बना दिया है...... अब इसको रख दो कही घूमने या शादी मे जाना होगा तब पहनुगी.....


अशोक-अरे ट्राइ तो करो..... इतनी मेहनत की है मेने... पहले मालूम होता तो इतनी मेहनत नही करता ना



मनीषा- लेकिन मुझे गाउन चाहिए था ड्रेस नही..... 



अशोक- फालतू मे मेरा टाइम वेस्ट किया ना.....



मनीषा- तू क्यू दिमाग़ खराब कर रहा है....? मेने कब मना किया पहनने से...? मे तो ये बोली कि मुझे गाउन चाहिए था ड्रेस नही...



अशोक- अब मेने तो चूहो को नही बोला था ना कि यहाँ यहाँ से खा जाओ गाउन को.... अब उसको जहाँ जहाँ से चूहो ने काटा था वहाँ वहाँ सिलाई कर के मेने इसको बना दिया.......







फिर मनीषा ने गाउन लिया ओर पहनने चली गयी.......
इससे पहले भी उसने ऐसी ड्रेस पहनी थी पर किसी फंक्षन मे जाने के लिए घर मे वो ये सब नही पहनती थी.....




मनीषा ने अपनी सलवार कमीज़ उतार दी अब वो पूरी नंगी थी.... जबसे उसको अपने भाई के लंड का चस्का लगा था तबसे उसने ब्रा पेंटी पहनना छोड़ दिया था...... 


गाउन पहनने के बाद वो उसके बदन से एकदम चिपक गया ऑर वो उसकी गान्ड से बस थोड़ा ही नीचे था.... मनीषा भी समझ गयी कि वो अगर झुकी तो उसका भाई उसकी नंगी चूत के दर्शन आराम से कर पाएगा....... ऑर अगर सामने रहेगा तो उसके तने हुए मोटे निपल भी दिखेगे उसको..... ऑर फिर जब उसने मूड के देखा तो उसको एहसास हुआ कि गान्ड पर भी एकदम कसी हुई है..... जब बाथरूम का डोर खोल कर उसके पास जा रही थी तो उसकी गान्ड के लेफ्ट ऑर राइट साइड के चिक्स झटके मार कर उछल कर कभी उपेर जाते कभी नीचे आते..... ऑर उसकी गान्ड की इस उछाल के वक्त जो लहर उसकी गान्ड पर दिख रही थी मानो हर लंड फिदा हो गया हो उसकी गान्ड पर.........


जिस तरह एक मॉडेल रॅंप वॉक करती है ना बिल्कुल उसी तरह..... बस फरक ये था कि उन मॉडेल ने पेंटी पहनी होती है जिसकी वजह से उनकी गान्ड उतनी नही उछलती..........


वो अपने भाई को गाउन दिखाती है ऑर मॉडेल की तरह गोल घूम कर ऑर अपने हाथो को खोल कर इशारे से कहती है केसी लग रही हूँ मे....?

अशोक- एकदम मक्खन लग रही हो दीदी......


मनीषा- तो फिर चाट लो ना...... [Image: icon_e_smile.gif]



अशोक- कहाँ चाटू....?




मनीषा- ये भी बताना पड़ेगा क्या...? चल अभी छोड़ जाने दे मे जा के कपड़े चेंज कर लेती हूँ.....






अशोक- अरे रहने दो ना.... सही तो है



मनीषा- लेकिन इन कपड़ो मे घर काम केसे करूगी........?




अशोक- अरे बड़ी मेहनत की है मेने.... अगर अनकंफर्टबल लगे तो उतार देना.....




मनीषा- ओके ठीक है.... 





अबतक दुपेहर का एक बज चुका था..... मनीषा किचन मे रोटी बना रही थी ऑर साथ ही साथ भाजी भी बना रही थी..... ऑर अशोक किचन मे आ कर खड़ा हो गया ऑर बाते करने लगा......




मनीषा भी बार बार मिर्च मसाला ऑर आयिल धनिया लाल मिर्च ये सब मसले एक एक कर के थोड़ी थोड़ी देर मे झुक कर उठाने लगी..... ताकि उसका भाई उसकी नंगी गान्ड के दर्शन कर सके.......



पता नही फिर क्या हुआ कि मनीषा ने जो लहसुन छील के रखे थे वो कटोरे मे से गिर गये.... मनीषा उसको उठाने मे काफ़ी टाइम लगा रही थी.... ऑर अपनी गान्ड को भी चोडा कर दिया था.... उसकी गान्ड के चिक्स एकदम फेल चुके थे ऑर उसकी गान्ड की दरार के बीच मे उसकी गान्ड का होल क्लियर नज़र आ रहा था.......... 




अशोक ने कुछ देर देखता रहा ऑर उसके मन मे एक सवाल आया कि वो बस दिखाना चाहती है या फिर वो चाहती है कि मे कुछ हरकत करूँ....?



अशोक कुछ देर उसकी गान्ड की दरारो के बीच मे उसके छेद को देखता रहा.......
उसने अपना लंड बाहर निकाला ऑर उसको हाथ मे लेकर सहलाने लगा.....



अब काफ़ी देर हो चुकी थी मनीषा को अपनी गान्ड ऐसे फेला कर ऑर झुक के खड़ी हो कर.....




अशोक उसके पास जा कर खड़ा हो गया....


जब वो उठने लगी तो उसने उसकी गान्ड की दरार मे अपना लंड घुसा दिया..... उसका लंड सीधा मनीषा की गान्ड के होल पे दबाव देने लग गया..... मनीषा की तो मानो हालत खराब होने लगी..... उसने अपनी गान्ड को ऑर अपने छेद को ज़ोर्से दबा दिया ऑर टाइट कर लिया.......

लंड के सुपाडे की पॉइंट उसके होल को थोड़ा सा खोल चुकी थी...... 


मनीषा ने ये एक्सपेक्ट नही किया था उसे लगा था कि वो चूत मे डालेगा पर ऐसा नही हुआ वो कुछ कहती इससे पहले अशोक ने उसे कहा.....




अशोक- दीदी मुझे रोटी बनाना सिख़ाओ ना........




मनीषा उसे रोटी बनाना सिखाने लगी.... ऑर उसने अपनी गान्ड को इतना कस कर दबा रखा था उसके लंड को ताकि वो उसकी गान्ड मे ना घुस जाए...... 


मनीषा को थोड़ा सा डर लगने लग गया था... क्यू कि जिस तरह से उसने अपनी गान्ड से लंड को दबा रखा था उससे उसकी मोटाई उसे मालूम पड़ रही थी.... वो समझ रही थी कि अगर मेने अपनी गान्ड को ढीला छोड़ा तो ये मोटा लंड मेरी गान्ड मे घुस जाएगा.......

मनीषा ने बोहोत ज़ोर लगा कर अपने गान्ड के छेद को बंद करने की कोशिश की पर उसके लंड के सुपाडे की पॉइंट उसके छेद से बाहर नही निकली......
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07-28-2018, 12:48 PM,
#20
RE: Bhai Behen Sex Kahani साला बहन्चोद कहीं का
ऐसी बाते जान कर किसी के भी लंड ऑर चूत मे एक बिजली की लहर दौड़ जाएगी.... वो फूले नही समाएगा...... 



वैसे ही मनीषा का हाल था....

उसको शक तो हो गया था जब उसने फ़ोन पे लंड की पिक्स देखी तो... 


अगर अशोक ने लंड की पिक्स ना रखी होती तो मनीषा अपनी रियल प्रोफाइल से कभी भी रिप्लाइ नही करती....

उसका लंड मनीषा को जाना पहचाना लग रहा था.... इसलिए उसने मेसेज का रिप्लाइ किया... ऑर एक पॉइंट पे कॉन्वर्सेशन को रोक दिया ताकि कन्फर्म हो जाए कि ये अशोक है या कोई ऑर... अगर कोई ऑर होता तो उसको कहती कि मुझे लंड की ज़रूरत नही है मेरे घर मे है मेरे पति का...... ऑर अगर अशोक ही है... फिर तो अब कॉन्वर्सेशन को हॉट बनाना पड़ेगा मनीषा को.....
अब तो मनीषा उस रात की चुदाई के बारे मे सोच रही थी कि केसे अंजाने मे ये दोनो भाई बेहन एकदुसरे से चुदाई की बातें कर रहे थे.....


मनीषा अपने आप से कहती है कि काश मुझे पहले पता होता कि ये मेरा भाई था तो उस सेक्स चॅट मे ऑर भी मज़ा आ जाता....


जिसे मे अंजान लंड समझ रही थी वो लंड तो मेरे अपने भाई का था......
अगर पता होता तो उसके लंड को मे प्यार से सहलाती ऑर उसको अपने हाथो मे पकड़ के पहले अपनी चूत की गीली पलको से लंड के सुपाडे को रगड़ के लंड के सुपाडे को गीला ऑर चिकना बनाती ऑर फिर अपनी चूत की पलकों को फेला कर लंड बड़े प्यार से अपनी चूत मे लेती.... जब वो मुझे शॉट मारता तो मे भी अपनी चूत उछाल कर उसके लंड पे मारती ऑर उसकी हिप को अपने हाथो से पकड़ के अपनी तरफ दबाती ऑर पूरा लंड अपनी चूत मे ले लेती.....

आआआआआआहह..............





मनीषा अब मूड मे आ चुकी थी... उसने मोबाइल उठाया ऑर रिप्लाइ किया..... 




मनीषा- केसे चुद जाऊ... वो लंड मेरे भाई का है....
मनीषा चाइ बना कर अशोक को जगा कर उसे चाइ देती है ऑर खुद चली जाती है अपने रूम मे..... ऑर वेट करने लगती है अशोक के मेसेज का.....




अशोक फिर मेसेज का रिप्लाइ करता है....

( फ्रॉम नाउ ऑन आइ स्पेल आ आंड म.... आ फॉर अशोक म फॉर मनीषा )

अशोक- लंड ऑर चूत रिश्ते नही मानते हम इंसान रिश्ते को मानते है.....




म- चुप रे चुप... बंद कर ये तेरा इन्सेस्ट स्टोरी का घिसा पिटा डाइलॉग..... अगर लंड ऑर चूत रिश्ते को नही मानते थे तो लंड इतना तंन के खड़ा नही होता था जितना वो अपनी बेहन की चूत के लिए तंन ता है.....
मेरी भी चूत इतनी गीली नही होती थी जितनी वो भाई के लंड के लिए होती है...... तेरे को क्या मालूम... जो कशिश भाई के लंड मे होती है वो कशिश किसी ऑर के लंड मे नही मिलेगी मेरी चूत को..... 
चल छोड़ ये बता तेरी बेहन वहाँ है कि नही....?





आ- हाँ है ना मेरी बेहन... 






म- तेरा लंड लेने के लायक है कि नही....?




आ- अरे वो तो 13 की एज मे ही लंड लेने के लायक हो गयी थी अब तो वो 17 की है....



म- यानी मेरी एज की है...? खेर कभी अपनी बेहन की चूत की प्यास को अपने लंड के पानी से बुझाने का सोचा है....?



आ- सोचा तो बोहोत था पर..... एनीवे तू अपना बता... तेरी सुनता हूँ फिर मे अपनी बताउन्गा.....
म- तू सुन के क्या करेगा...?


आ- अरे यार हम एकदुसरे को हेल्प करेगे ना अपनी अपने भाई बेहन पटाने की....



म- ऊहह.... ठीक है......




आ- तूने कुछ देर पहले बोला था कि तूने अपनी चूत चटवाई उससे.... इतना कुछ हो गया पर अबतक तेरी चूत को लंड क्यूँ नही मिला...?





म- हम लोग अंजान बनने का नाटक कर के वो मेरे मुँह मे लंड दे देता है या फिर मे उससे चूत चटवा लेती हूँ.....




आ- तो फिर उसका लंड पकड़ के अपनी चूत मे क्यू नही ले लेती...?




म- यार मन तो बोहोत करता है.... मेरे भाई के लंड को अपने हाथ मे लूँ उसे सहलाऊ ऑर उसे चुमू..... उसके लंड के सुपाडे को अपने होंठो पे रगडू.... पर नही कर सकती.... 





आ- क्यूँ....?





म- मेरा ऑर मेरे भाई का ऐसा मान ना (वी बिलीव ) है कि अगर शर्मो हया छोड़ कर हम लोगो ने रिश्ता तोड़ कर चुदाई करने लगे तो कुछ वक्त बाद मेरी चूत उसके लिए सिर्फ़ एक आम चूत बॅन जाएगी ऑर उसका लंड भी मेरे लिए आम लंड बॅन जाएगा..... आज जितना तड़प रही है मेरी चूत उसके लंड को लेने के लिए फिर शायद इतना नही तड़पेगी.......

म- उपेर से भोली भाली बेहन बनने का नाटक कर के नीचे से भाई का लंड लेना है..... एक बार नही बार बार भैया के लंड को अपनी चूत की गहराइयो (डीप) तक लेना है.... भैया की आखो मे देखते हुवे बोली बेहन बन कर नीचे से भैया का मोटा लंड अपनी चूत मे घुसाए रखना है.....जब मे उनके साथ चिपक के खड़ी रहूं ऑर वो जब मेरे भोले चेहरे को देखे तो भैया को ऐसा लगना ही नही चाहिए कि उसकी उपेर से भोली भाली बेहन नीचे से अपने भाई का लंड ले रही है.......









आ- तेरी बात मे दम है यार.... साला लंड खड़ा हो गया.... लेकिन तू ऐसा करेगी केसे....?





म- तू बताना कि भाई का लौडा केसे लूँ..... 




आ- तेरी सिचुयेशन बोहोत ही कॉंप्लिकेटेड है.... ये तो मोके पे चोका मारने वाली बात है... अगर मोका हाथ से गया तो फिर पता नही दुबारा कब मिलेगा तुझे तेरे भाई का लंड.....





म- उसमे भी एक परेशानी है.... मेरा भाई चाहता है कि मे उसके साथ खुल के चुदाई करू....





आ- हाँ यार उसकी भी बात सही है.... अगर चुदाई का पूरा मज़ा ना मिले तो फिर फ़ायदा क्या है..... अगर वो चाहे कि तू उसके उपेर चढ़ के उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत मे डाल कर अपने भैया के लंड की राइडिंग करो तो वो फिर केसा होगा.....?
म- अब यार उसने लोलिगम का आइडिया निकाला था ना मुझसे लंड चुसवाने का....? भैया अपने लंड की राइडिंग का भी कोई आइडिया निकाल लेगा....




आ- अरे हाँ... पहले तूने कभी लंड चूसा था....?





म- नही पर पॉर्न मूवी मे देखा है 





आ- हो गया सत्या नाश.... लंड मुँह मे लेने का मतलब लंड सिर्फ़ मुँह मे लेकर छोड़ नही देते लंड को अपनी जीब से सहलाना भी पड़ता है ऑर अपने दाटो से भी चबाना पड़ता है.... वरना तेरे भाई को मज़ा नही आएगा.....अगली बार जब भैया का लंड लोगि तो उसे लंड की तरह ही चूसना लॉलिपोप की तरह नही......




म- मुझे याद नही है कि मेने भैया के लंड को केसे चूसा था.... मे तो बस लंड मिलने की वजह से बोहोत खुश थी ऑर चूसे जा रही थी ऑर उसका पानी भी निकाला था अपने मुँह मे..... पहली बार मेने लंड ऑर उसके पानी का स्वाद लिया था वो भी अपने भाई से.... चलो कोई बात नही आगे से ध्यान रखुगी.... अभी अच्छे से मुँह मे लुगी भैया के लंड को......





आ- अच्छा एक बात बता तेरे भाई ने ऐसा क्या आइडिया लगाया था कि तू उसका लंड देखने के बाद भी उसे लॉलिपोप समझ रही थी....?
म- उस वक्त लाइट बंद हो गयी थी ऑर मे कॅंडल जलाती उससे पहले ही भैया ने पूछ लिया लौडा चुसोगी.... आइ मीन लॉलिपोप..... मे समझ गयी थी कि आज भैया का लंड चूसने मिलेगा.... मेने भी कॅंडल नही जलाई ऑर सोफा पे मुँह खोल के भैया का लंड का मूभ मे आने का वेट करने लग गयी......





आ- ओह्ह.... ऑर तूने क्या आइडिया लगाया था अपनी चूत चटवाने का अपने भैया से....? 




अब मनीषा को मोका मिला था अपने भाई को उसकी दिल की बात बताने का.....





म- मेने परदा उतारने का बहाना कर के स्टूल पे चढ़ गयी थी ऑर भैया स्टूल पकड़े खड़े थे..... भाई ने चूत चाट कर मज़ा तो दिया.... ऑर भी मज़ा आता था अगर मेरा भाई मेरी चूत को फैला कर मेरे दाने को बाहर निकाल के उसपे अपनी जीब घुमाई होती तो ऑर मज़ा आता.....

साला बातों बातों मे पता ही नही चला कब टाइम निकल गया 
चल यार राज बाइ बाद मे बात करती हूँ मुझे रात का खाना बनाने की भी तैयारी करनी है.....





ओर फिर दोनो ऑफलाइन हो जाते है..... 

ऑर फिर मनीषा घर का काम करने लग जाती है........
खाना पीना हो जाने के बाद दोनो भाई बेहन हॉल मे बैठे थे ऑर दोनो अपने अपने मोबाइल मे लगे पड़े थे.... ऑर साथ ही साथ टीवी भी देख रहे थे..... उन्होने लाइट ऑफ कर दी थी ऑर ज़ीरो वॉट का बल्ब चालू कर के रखा था...




अशोक को राज की प्रोफाइल मे ऑनलाइन देख के मनीषा उसे मेसेज करती है.....



म- लगता है आज मेरा फेवोवरिट शो नही चलेगा.... [Image: icon_e_sad.gif]



आ- कॉन्सा.....?



म- ब.ब.एल.डी. 




आ- ये साला कॉन्सा शो है....? पहली बार नाम सुना है..




म- बहना ने भैया के लंड आ दर्शन पयो...... 




आ- हाहाहा..... तेरा भाई तुझे लंड दिखाता है क्या...?





म- दिखता क्या... मेरे सामने लंड को मसल कर ऑर टाइट कर के मेरी चूत की आग को बढ़ा देता है.....




आ- कर क्या रहा है तेरा भाई....?




म- मोबाइल मे कुछ कर रहा है... लगता है मूड बना रहा है बाद मे लंड के दर्शन करवाएगा.....





आ- तू अपनी चूत दिखाएगी तभी तो तेरे भाई का लंड खड़ा होगा.... 




म- उसने तो देखी है....




आ- तो फिर मुझे भी दिखाना...?





म- ये लो...
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