Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
06-18-2017, 11:18 AM,
#1
Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
मैं और मौसा मौसी 
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रजत चाचा और गीता चाची को अमेरिका गये दो महने भी नहीं हुए थे और लीना की चूत कुलबुलाने लगी. क्या चुदैल तबियत पाई है मेरी रानी ने, इसीलिये तो उसपर मैं मरता हूं.

"क्यों वो दीपक मौसाजी के बारे में बोल रही थीं ना गीता चाची! चलना नहीं है क्या उनके यहां?"

"हां जान, जब कहो चलते हैं. वैसे तुमको बताने ही वाला था, आभा मौसी का सुबह ही फोन आया था, तुम नहा रही थीं तब कि अनिल बेटे, गांव आओ बहू को लेकर, हमने तो उसको देखा भी नहीं."

लीना मुस्करा कर बोली "तब तो और देर मत करो, इसको कहते हैं संजोग, यहां हम उनकी बात कर रहे थे और उन्होंने बुलावा भेज दिया. कहीं गीता चाची ने तो उनको नहीं बताया यहां हमने क्या गुल खिलाये उनके साथ"

"क्या पता. वैसे डार्लिंग, गीता चाची ने भी बस संकेत ही दिया था कि मौसा मौसी के यहां हो आओ, उसका मतलब यह नहीं है कि वहां भी वैसी ही रास लीला करने मिलेगी जैसी हमने रजत चाचा और गीता चाची के साथ की. और सच में आभा मौसी को लगा होगा कि हम उनके यहां गांव आयें"

"जो भी हो, बस चलो. वहां देखेंगे क्या होता है" लीना मुझे आंख मार कर बोली.

मैं समझ गया, वहां कुछ हो न हो, लीना अपनी पूरी कोशिश करेगी ये मुझे मालूम था. "ठीक है रानी, अगले ही महने चलते हैं. मैं रिज़र्वेशन का देखता हूं"

दीपक मौसाजी के यहां जाने के पहले वाले दिन मैंने लीना को उनके बारे में बताया. हमारा उनका दूर का रिश्ता है. उनकी पत्नी आभा मौसी, मेरी मां के ही गांव की थीं. मेरी मां से उनकी उमर दो तीन साल बड़ी थी. याने अब सैंतालीस अड़तालीस के आसपास होगी.

"पर दीपक मौसाजी तो चालीस के नीचे ही हैं, शायद छत्तीस सैंतीस साल के. फ़िर ये क्या चक्कर है? उनकी पत्नी उनसे दस साल बड़ी है?" लीना ने पूछा.

"असल में दीपक मौसाजी के बड़े भाई से आभा मौसी की शादी हुई थी. वे जवानी में ही गुजर गये. गांव में रिवाज है कि ऐसे में कभी देवर के साथ शादी कर देते हैं. सो आभा मौसी की शादी अपने देवर से कर दी गयी. बड़ी मजेदार बात है, जब शादी हुई तो मौसी थीं तीस की और दीपक मौसाजी बीस के नीचे ही थे. दीपक मौसाजी अपनी भाभी पर बड़े फ़िदा थे, जबकि वो बड़ी तेज तर्रार थीं, सुना है कि उनसे जब अपनी भाभी से शादी के लिये पूछा गया तो उन्होंने तुरंत हां कर दी. लोग कहते हैं कि उनका पहले से ही लफ़ड़ा चलता था, वैसे गांव में ये अक्सर होता है. खैर शादी कर ली तो अच्छा हुआ. लफ़ड़े नहीं हुए आगे. वैसे दीपक मौसाजी बड़े फ़िदा हैं आभा मौसी पर, बिना उनसे पूछे कोई काम नहीं करते, एकदम जोरू के गुलाम हैं"

"होना भी चाहिये." लीना तुनक कर बोली "अगर जोरू स्वर्ग की सैर कराती हो तो गुलाम ही बन कर रहना चाहिये उसका"

"जैसा मैं हूं रानी" मैं मुस्करा कर बोला.

लीना ने पलक झपका कर कहा "वैसे बड़ी तेज लगती हैं आभा मौसी. अब तो उमर के साथ और तीखी हो गयी होंगी. अगर दीपक मौसाजी को इतना काबू में रखती हैं तो फ़िर वहां क्या मजा आयेगा! दीपक मौसाजी को फंसाने का कोई चांस नहीं मिलेगा मुझे" लीना जरा नाराज सा हो कर बोली.

"डार्लिंग, चाहो तो कैंसल कर देते हैं. उनके बारे में मुझे ज्यादा मालूम नहीं है" मैंने कहा.

लीना एक मिनिट सोचती रही फ़िर बोली "नहीं कैंसल मत करो, गीता मौसी झूट नहीं बोलेंगी. मुझे आंख मारी थी उन्होंने जब ये कहा था कि दीपक मौसाजी के यहां हो आओ. जरूर मजा आयेगा वहां"

हम ट्रेन से दीपक मौसाजी के गांव पहुंचे. वे खुद स्टेशन पर हमें लेने आये. दीपक मौसाजी मझले कद के छरहरे बदन के थे पर बदन कसा हुआ था. कुरता पजामा पहने थे. काफ़ी गोरे चिट्टे हैंडसम आदमी थे. उनके साथ में दो नौकर भी थे, रघू और रज्जू. उन्होंने सामान उठाया. दोनों एकदम जवान थे, करीब करीब छोकरे ही थे, बीस इक्कीस के रहे होंगे. रघू छरहरे बदन का चिकना सा नौजवान था. रज्जू थोड़ा पहलवान किस्म का ऊंचा पूरा गबरू जवान था.

उन सब को देखकर लीना का मूड ठीक हो गया. मेरी ओर देखकर आंख मारी. मैं समझ गया कि मौसाजी, रघू और रज्जू को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी होगी. क्या चुदैल है मेरी लीना! अच्छे मर्दों को देखकर ही उसकी चूत कुलबुलाने लगती है.

हम घर पहुंचे तो आभा मौसी दरवाजे पर खड़ी थीं. साथ में बीस एक साल उम्र की एक नौकरानी भी थी. मौसी ने हमारा स्वागत किया. "आ बहू, बहुत अच्छा किया कि तुम लोग आ गये. मैं तो कब से कह रही थी तेरे मौसाजी से कि शादी में नहीं गये तो कम से कम अनिल और बहू को घर तो बुलाओ. मैंने गीता से भी कहा था जब तीन चार महने पहले मिली थी."

"अच्छा, गीता मौसी आयी थी क्या यहां?" मैंने पूछा.

"हां, वैसे वो कई बार आती है, इस बार भी अकेली ही आई थी. हफ़्ते भर रही. तब तेरे मौसाजी रज्जू के साथ बाहर गये थे, शहर में. राधा और रघू यहीं थे. ये है राधा, रघू की घरवाली. रज्जू की बहन है. रघू और रज्जू खेती का काम देखते हैं, राधा बिटिया घर का काम संभालती है" मैं मौसी की ओर देख रहा था. उमर हो चली थी फ़िर भी मौसी अच्छे खाये पिये बदन की थीं. सफ़ेद बालों की एक दो लटें दिखने लगी थीं. पूरी साड़ी बदन में लपेटी थी और आधा घूंघट भी लिया हुआ था इसलिये उनके बदन का अंदाजा लगाना मुश्किल था. वैसे कलाइयां एकदम गोरी चिकनी थीं.
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06-18-2017, 11:18 AM,
#2
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
राधा दुबले पतले छरहरे बदन की सांवली छोकरी थी, एकदक तीखी छुरी. मेरी ओर और लीना की ओर नजर चुराकर देख रही थी. हम घर के अंदर आये तो वो रसोई में चली गयी. जाते वक्त पीछे से उसकी जरा सी चोली में से उसकी चिकनी सांवली दमकती हुई पीठ दिख रही थी.

हमने चाय पी और फ़िर मौसी बोलीं "चलो, तुम लोग नहा धो लो, फ़िर आराम करो. शाम को ठीक से गप्पें करेंगे" 

हम कमरे में आये तो लीना मुझसे लिपट कर बोली "क्या मस्त माल है डार्लिंग!"

मैंने पूछा "किसकी बात कर रही हो?"

"अरे सबकी, सब एक से एक रसिया हैं. राधा तुमको कैसे देख रही थी, गौर किया? और वो रज्जू और रघू मेरी चूंचियों पर नजर जमाये थे. और तेरे मौसाजी भी बार बार मुझे ऊपर से नीचे तक घूर रहे थे पर मुझे जितना देख रहे थे उतना ही तुम पर उनकी निगाह जमी थी"

"अब तुम जान बूझ कर अपना लो कट ब्लाउज़ पहनकर अपनी चूंचियां दिखाओगी तो और क्या होगा. वैसे तुम ठीक कह रही हो, सब बड़े रसिया किस्म के लगे मुझको, पर मेरे को घूरने का क्या तुक है, पता नहीं क्या बात है"

"अरे आज शाम को ही पता चल जायेगा. मैं जरा भी टाइम वेस्ट नहीं करने वाली. और तुमको घूर रहे थे तो अचरज नहीं है, है ही मेरा सैंया ऐसा चिकना नौजवान" लीना मुस्करा कर मेरे गाल पुचकार कर बोली.

"पर वो आभा मौसी हैं ना, उनके सामने कुछ नहीं करना प्लीज़, जरा संभल कर छुपा कर सबसे ..." मैंने हाथ जोड़कर कहा.

’अरे वो ही तो असली मालकिन हैं यहां की, तुमने गौर नहीं किया कैसे सब उनकी ओर देख रहे थे कि वो क्या कहती हैं. और उनकी उमर के बारे में मैं जो बोली थी वो भूल जाओ. इस उमर में भी मौसी एकदम खालिस माल हैं, यहां जो भी सब चलता होगा, वो उन्हींका किया धरा है, देख लेना, मेरी बात याद रखना"

मैं बोला "अरे ऐसा क्या देखा तुमने, मैं भी तो सुनूं. मुझे तो बस वे सीदी सादी महिला लगीं, साड़ी में पूरा बदन ढका था, सिर पर भी पल्लू ले लिया था. वैसे मैंने बहुत दिन में देखा है उनको, बचपन में एकाध बार मिला था, अब याद भी नहीं है"

"तुमको नहीं पता, मैं जब चाय के कप रखने को अंदर गयी थी तब उनका आंचल सरक गया था. तुम वो मोटे मोटे मम्मे देखते तो वहीं ढेर हो जाते. और वो राधा भी कम नहीं है, तुमको बार बार देख रही थी, लगता है तुम उसको बहुत भा गये हो, चलो, तुमको भी मजा आ जायेगा डार्लिंग" लीना मेरे लंड को सहलाते हुए बोली.

"तुमको कौन पसंद आया मेरी जान? तुमको तो सब मर्द और औरत घूर रहे थे" मैंने लीना के चूतड़ पकड़कर पूछा.

"मुझको तो सब पसंद आये, मैं तो हरेक मिठाई को चखने वाली हूं. पर हां, वो रज्जू काफ़ी मस्त मरद है, लगता है लंड भी अच्छा मतवाला होगा, रजत मौसाजी जैसा" लीना बोली.

"तुमको कैसे मालूम?"

"अरे जब मेरी चूंची को घूर रहा था तब मैंने देखा था. उसकी पैंट फ़ूल गयी थी और ऐसा लग रहा था जैसे पॉकेट में कुछ रखा हो. उसका जरूर इतना लंबा होगा कि उसके पॉकेट के पास तक पहुंचता होगा"

"मैं कुछ चक्कर चलाऊं?" मैंने उसे चूम कर कहा. लीना की मस्ती देखकर मुझे भी मजा आने लगा था. "उन सबके मस्त लंडों का इंतजाम करूं तुम्हारे लिये?"

"हां मेरे राजा, बहुत मजा आयेगा. वैसे तो मुझे लगता है कि कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अपने आप सब शुरू हो जायेगा पर मौका मिले तो रज्जू को जरा इशारा दे कर तो देखो"

हमने नहाया और सफ़र की थकान मिटाने को कुछ देर सो लिये. मेरा मन हो रहा था लीना को चोदने का पर उसने मना कर दिया "अरे मेरे भोले सैंया, बचाकर रखो अपना जोबन, काम आयेगा, और आज ही काम आयेगा, मुझे तो हमेशा चोदते हो, अब यहां स्वाद बदल लेना"

मुझे यकीन नहीं था, कुछ करने का चांस हो तो भी एक दिन तो लगेंगे जुगाड़ को. फ़िर भी लंड को किसी तरह बिठाया और सो गया. शाम को सो कर उठा तो देखा लीना गायब थी. मैं बाहर आया. मौसी के कमरे से बातें करने की आवाज आ रही थी. मैं वहां हो लिया.

मौसी पलंग पर लेटी थीं. कह रही थीं "अब उमर हो गयी है लीना बेटी, मेरे पैर भी शाम को दुखते हैं. राधा दबा देती है, बड़ी अच्छी लड़की है, पता नहीं कहां गयी है"

"कोई बात नहीं मौसी, लाइये मैं दबा देती हूं" कहकर लीना मौसी के पैर दबाने लगी. मौसी मुझसे बोली "अरे अन्नू, मुझे लगता था कि तेरी ये बहू एकदम मुंहफ़ट होगी, शहर की लड़कियों जैसी. ये तो बड़ी सुगढ़ है, कितने प्यार से पैर दबा रही है मेरे. रुक जा बहू, मुझे अच्छा नहीं लगता, तू चार दिन के लिये आयी है और मैं तुझसे सेवा करा रही हूं"
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06-18-2017, 11:19 AM,
#3
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
मैंने कहा "तो क्या हुआ मौसी, आप तो मेरी मां जैसी हो, इसकी सास हो, फ़र्ज़ है इसका" मन में कहा कि मौसी, आप नहीं जानती ये क्या फ़टाका है, जरूर कोई गुल खिलाने वाली है नहीं तो ये और किसी के पैर दबाये! हां और कुछ भले ही दबा ले. फ़िर लीना की की बात याद आयी, मुझे हंसी आने लगी, मौसी भी कोई कम नहीं है, आज अच्छी जुगल बंदी होगी दोनों की.

लीना मेरी ओर देखकर बोली "तुम यहां क्या कर रहे हो, मैं मौसी की मालिश भी कर देती हूं, तुम घूम आओ बाहर. मौसाजी नहीं हैं क्या?"

मौसी बोलीं "अरे वे खेत पर होंगे रघू के साथ. तू घूम आ अन्नू. मिलें तो कहना कि खाने में देर हो जायेगी, आराम से आयें तो भी चलेगा, तू भी आना आराम से घूम घाम कर. ये राधा भी गायब है, वहां कही दिखे तो बोलना बेटे कि बजार से सामान ले आये पहले, फ़िर आकर खाना बना जाये, कोई जल्दी नहीं है. वो खेत पे घर है ना रघू का, वहीं होंगे तेरे मौसाजी शायद"

लगता था दोनों मुझे भगाने के चक्कर में थीं. मेरा माथा ठनका पर क्या करता. वैसे लीना की करतूत देखकर मुझे मजा आ रहा था, जरूर अपना जाल बिछा रही थी मेरी वो चुदक्कड़ बीबी. और मौसी भी कोई कम नहीं थी, बार बार ’बहू’ ’बहू’ करके लीना के बाल प्यार से सहला रही थी.

घर के बाहर आकर मैं थोड़ी देर रुका. फ़िर सोचा देखें तो कि लीना क्या कर रही है. अब तक तो पूरे जोश से अपने काम में लग गयी होगी वो चुदैल. मैं घर के पिछवाड़े आया. मौसी के कमरे की खिड़की बंद थी, अंदर से किसीकी आवाज आयी तो मैं ध्यान देकर सुनने लगा. लगता था मौसी और लीना बड़ी मस्ती में थीं.

"ओह .... हां बेटी .... बस ऐसे ही ... अच्छा लग रहा है .... आह ..... आह ..... और जोर से दबा ना ...... ले मैं चोली निकाल देती हूं .....हां ... अब ठीक है"

"ऐसे कैसे चलेगा मौसी, ये ब्रा भी निकालो तब तो काम बने, ऐसे कपड़े के ऊपर से दबा कर क्या मजा आयेगा" लीना की आवाज आयी. "वैसे मौसी आप ब्रा पहनती होगी ऐसा नहीं लगा था मेरे को. गांव में तो ..."

"बड़ी शैतान है री तू. मैं वैसे नहीं पहनती ब्रा पर आज पहन ली, सोचा शहर से बेटा बहू आ रहे हैं ... मौसी को गंवार समझेंगे ..."

"आप भी मौसी ... चलिये निकालिये जल्दी"

"ले निकाल दी .... हा ऽ य ... कैसा करती है री ..... आह .... अरी दूर से क्या करती है हाथ लंबा कर कर के, पास आ ना ... बहू .... मेरे पास आ बेटी .... मुझे एक चुम्मा दे .... तेरे जैसी मीठी बहू मिली है मुझे .... मेरे तो भाग ही खुल गये .... आज तुझे जब से देखा है तब से .... तरस रही हूं तेरे लाड़ प्यार ... करने को ... और लीना बेटी जरा मुंह दिखाई तो करा दे अपनी ... तू तो बड़ी होशियार निकली लीना ... जरा भी वक्त नहीं लिया तूने अपनी मौसी की सेवा करने को ... हा ऽ य ... आह ... " मौसी सिसककर बोलीं.

लीना की आवाज आयी "अब आप जैसी मौसी हो तो वक्त जाया करने को मैं क्या मूरख हूं! और मुंह देखना है मौसी बहू का कि और कुछ देखना है? ... ठहरिये मैं भी जरा ये सब निकाल देती हूं कि आप बहू को ठीक से देख सकें ... ये देखिये मौसी .... पसंद आयी मैं आपको? ... और लो आप कहती हैं तो पास आ गयी आप के ... आ गयी आप की गोद में ...अब करो लाड़ अपनी बहू के ... जरा देखूं मैं आप को कितनी अच्छी लगती हूं ... बड़े आग्रह से बुलाया है अपने गांव ... अब देखें जरा बहू कितनी अच्छा लगती है आप को" फ़िर सन्नाटा सा छा गया, सिर्फ़ हल्की हल्की चूमा चाटी की आवाजें आने लगीं. मेरा लंड तन गया और मुझे हंसी भी आ गयी. लीना अपने काम में जुट गयी थी.
kramashah.................
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06-18-2017, 11:19 AM,
#4
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
मैं और मौसा मौसी--2
gataank se aage........................
मैं खेत की ओर चलने लगा. मौसाजी का खेत अच्छा बड़ा था, दूर तक फ़ैला था. दूर पर एक छोटा पक्का मकान दिख रहा था. मौसी शायद उसी मकान के बारे में कह रही थीं. मैं उसकी ओर चल दिया. वहां जाकर मैंने देखा कि दरवाजा बंद था. एक खिड़की थोड़ी खुली थी. उसमें से बातें करने की आवाजें आ रही थीं.

न जाने क्यों मुझे लगा कि दरवाजा खटखटाना या अंदर जाना ठीक नहीं होगा, कम से कम इस वक्त नहीं. मैं खिड़की के नीचे बरामदे में बैठ गया और धीरे से सिर ऊपर करके अंदर देखने लगा. फ़िर अपने आप को शाबासी दी कि दरवाजा नहीं खटखटाया.

दीपक मौसाजी पैजामा उतार के चारपाई पर बैठे थे और राधा उनका लंड चूस रही थी. रघू उनके पास खड़ा था, मौसाजी उसका खड़ा लंड मुठ्ठी में पकड़कर मुठिया रहे थे. "मस्त खड़ा है मेरी जान, और थोड़ा टमटमाने जाने दे, फ़िर और मजा देगा" वे बोले और रघू का लंड चाटने लगे. फ़िर उसको मुंह में ले लिया. रघू ने उनका सिर पकड़ा और कमर हिला हिला कर उनका मुंह चोदने लगा.

राधा मौसाजी का लंड मुंह से निकाल कर बोली "भैयाजी, देखो कितना मस्त खड़ा हो गया है, अब चोद दो मुझे" मौसाजी का लंड एकदम गोरा गोरा था और तन कर खड़ा था, ज्यादा बड़ा नहीं था पर था बड़ा खूबसूरत.

रघू बोला "भैयाजी को मत सता रानी, ठीक से चूस, और झड़ाना नहीं हरामजादी" राधा फ़िर चूसने लगी. उसने अपना लहंगा ऊपर कर दिया था और अपने हाथ से अपनी बुर खोद रही थी. मुझे उसकी काली घनी झांटें दिख रही थीं.

मौसाजी ने रघू का लंड मुंह से निकाला और बोले "अरे उसे मत डांट रघू, मैं आज चोद दूंगा उसको पहले, फ़िर गांड मारूंगा, बड़ी प्यारी बच्ची है, चूत भी अच्छी है पर गांड ज्यादा मतवाली है तेरी लुगाई की. अब तू पास आ और बैठ मेरे पास और चुम्मा दे"

रघू मौसाजी के पास बैठ गया. मौसाजी उसका मुंह चूसने लगे. साथ साथ उसका लंड भी मुठियाते जाते थे. रघू ने अपना हाथ उनके चूतड़ों पर रखा और दबाने लगा. मौसाजी थोड़ा ऊपर हुए और रघू ने उनकी गांड में उंगली डाल दी. मौसाजी ऊपर नीचे होकर रघू की उंगली अपनी गांड में अंदर बाहर करने लगे और अपने हाथों में रघू का सिर पकड़कर उसकी जीभ और जोर जोर से चूसने लगे.

"चल रधिया उठ, भैयाजी की गांड चूस" रघू ने चुम्मा तोड़ कर राधा से कहा और फ़िर से मौसाजी से अपनी जीभ चुसवाने लगा. राधा उठी और बोली "खड़े हो जाओ भैयाजी, जरा अपनी गोरी गोरी गांड तो ठीक से दिखाओ"

मौसाजी और रघू एक दूसरे को चूमते हुए खड़े हो गये. राधा मौसाजी के पीछे जमीन पर बैठ गयी और उनकी गांड चाटने लगी. एक दो बार उसने मौसाजी के चूतड़ पूरे चाटे, फ़िर उनका छेद चाटने लगी. मौसाजी ने रघू को बाहों में भीच लिया और बेतहाशा चूमने लगे. दो मिनिट बाद अलग होकर बोले "अब डाल दे राजा"

"रधिया चल लेट खाट पर, फ़िर तेरे ऊपर भैयाजी लेटेंगे" रघू ने कहा.

राधा बोली "रुको ना जी, ठीक से चाटने तो दो, इतनी प्यारी गांड है भैयाजी की" और फ़िर मौसाजी के चूतड़ों के बीच मुंह डाल दिया.

मौसाजी बोले "हाय जालिम, क्या प्यार से चूसती है ये लड़की, जीभ अंदर डालती है तो मां कसम मजा आ जाता है. अब बंद कर राधा बेटी, बड़ी कुलबुला रही है"

राधा उठ कर लहंगा ऊपर करके खाट पर लेट गयी. "भैया जी, आप की गांड तो लाखों में एक है, यहां गांव में किसी की नहीं होगी ऐसी, गोरी गोरी मुलायम, खोबे जैसी, मुझे तो बड़ा मजा आता है मुंह लगाकर. पर आप हमेशा टोक देते हो, अभी तो मजा आना शुरू हुआ था. किसी दिन दोपहर भर चाटूंगी आप की गांड. अब आप मरवाना बाद में, पहले मेरे को चोद दो आज ठीक से मालकिन की कसम, ऐसे बीच में सूखे सूखे ना छोड़ना हम को"

"अरी पूरा चोद दूंगा, पहले जरा अपनी जवानी का रस तो चखा दे, कितना बह रहा है देख" कहकर मौसाजी खाट पर चढ़कर राधा की बुर चूसने लगे. वो उनके सिर को अपनी चूत पर दबा कर कमर हिलाने लगी.

"क्या झांटें हैं तेरी राधा, मुंह डालता हूं तो लगता है किसी की ज़ुल्फ़ें हैं" मौसाजी मस्ती में बोले और फ़िर उसकी झांटों को चूमने लगे.

"होंगी ही भैयाजी, बाई ने दिया है, वो शैंपू से रोज धोती हूं और तेल लगाकर कंघी भी करती हूं." राधा बड़े गर्व से बोली.

उधर रघू जाकर तेल की शीशी ले आया और अपने लंड में चुपड़ लिया. फ़िर राधा को बोला "जरा चूतड़ उठा तो" राधा ने कमर ऊपर की तो रघू उसकी गुदा में तेल लगाने लगा.

"अरे मेरी गांड में काहे लगाते हो? बाबूजी की गांड में लगाओ" राधा अपनी बुर मौसाजी के मुंह पर रगड़ते हुए बोली.

"उनकी गांड तूने तो चिकनी कर दी है ना चुदैल. ऐसे चूसती है जैसे गांड नहीं, मिठाई हो" रघू बोला.

"भैयाजी की गांड बहुत मस्त है राजा, मजा आता है चूसने में, और तुम भी तो रोज मारते हो, तुम्हारी मलाई का भी स्वाद आता है भैयाजी की गांड से" राधा इतरा कर बोली. "अब रुको थोड़ा, मेरा पानी निकलने को है" फ़िर वो अपनी टांगें मौसाजी के सिर के आस पास पकड़कर सीत्कारने लगी. "चोदो ना बाबूजी अब ..... चोद दो मां कसम तुमको .... हाय .... डालो ना अंदर भैयाजी"
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06-18-2017, 11:19 AM,
#5
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
"अरी दो मिनिट रुक ना, ये जो अमरित निकाल रही है अपनी बुर से वो काहे को है" कहकर मौसाजी जीभ निकाल निकाल कर राधा की पूरी बुर ऊपर से नीचे तक चाटने लगे. फ़िर खाट पर चढ़ गये और अपना लंड राधा की बुर में डालकर चोदने लगे. "ले रानी .... चुदवा ले .... और अपनी गांड को कह तैयार रहे .... अब उसी की बारी है .... रघू बेटे .... तू मस्त रख अपने सोंटे को .... बहुत मस्त खड़ा है ... उसको नरम ना पड़ने दे ... मेरी गांड बहुत जोर से पुकपुका रही है"

रघू खड़ा खड़ा एक हाथ से अपने लंड को मस्त करने लगा और दूसरे हाथ की उंगली मौसाजी की गांड में डाल के अंदर बाहर करने लगा. "आप फ़िकर मत करो बाबूजी, आप की पूरी खोल दूंगा आज, बस आप जल्दी से इस हरामन को चोदो और तैयार हो जाओ"

मौसाजी कस कस के धक्के लगाने लगे. रघू ने अपना हाथ मौसाजी के पेट के नीचे से राधा की टांगों के बीच घुसेड़ा और उंगली से राधा के दाने को रगड़ने लगा. वो ’अं ऽ आह ऽ ..... उई ऽ .... मां ऽ " कहती हुई कस के हाथ पैर फ़टकारने लगी और कसमसा कर झड़ गयी. फ़िर रघू पर चिल्लाने लगी "अरे काहे इतनी जल्दी झड़ा दिये मोहे .... बाबूजी मस्त चोद रहे थे ..."

"तू तो घंटे भर चुदवाती रहती, बाबूजी गांड कब मारेंगे तेरी? चल ओंधी हो जा" रघू ने राधा को फ़टकार लगायी. वो पलट कर पेट के बल खाट पर सो गयी. "डालो बाबूजी, फ़ाड़ दो साली की गांड" रघू बोला.

मौसाजी तैश में थे, तुरंत अपना लंड राधा के चूतड़ों के बीच आधा गाड़ दिया.

"धीरे भैयाजी, दुखता है ना" राधा सीत्कार कर बोली.

रघू ने गाली दी "चुप साली हरामजादी, नखरा मत कर, रोज मरवाती है फ़िर भी नाटक करती है"

"बहुत टाइट और मस्त है मेरी जान, न जाने क्या करती है कि मरवा मरवा कर भी गांड टाइट रहती है तेरी" मौसाजी बोले और फ़िर एक झटके में पूरा लंड उन सांवले चूतड़ों के बीच उतार दिया.

"बाबूजी .... हा ऽ य .... आप का बहुत बेरहम है ....मुझे चीर देता है .... लगता है दो टुकड़े कर देगा ..." राधा कसमसा गयी. फ़िर रघु को बोली "अरे ओ मेरे चोदू सैंया ... आज बाबूजी की फ़ाड़ दे मेरी कसम .... तेरी बीबी की गांड रोज फ़ुकला करते हैं ... आज इनको जरा मजा चखा दे"

मौसाजी मस्त होकर बोले "आ जा रघू बेटे ... मार ले मेरी .... मां कसम आज बहुत कसक रही है"

"क्यों नहीं .... आज घर में नयी जवान जोड़ी आयी है ना ... बहू भांजे की" राधा ने ताना मारा.

रघू ने मौसाजी के चूतड़ चौड़े किये और अपना लंड धीरे धीरे उनके बीच उतारने लगा.

"आह ... मजा आ गया .... ऐसे ही .... डाल दे पूरा मेरे राजा .... और पेल मेरे शेर" मौसाजी मस्ती में चहकने लगे.

"बाबूजी आज पूरा चोद दूंगा आप को ... धीरज रखो .... ये लंड आप के ही लिये तो उठता है .... आप की खातिर मैं इस राधा को भी नहीं चोदता ..... आह ... ये लो ... अब सुकून आया?" रघू ने जड़ तक लंड मौसाजी के चूतड़ों के बीच गाड़कर पूछा.

"आहाहा ... मजा आ गया .... वो बदमाश रज्जू भी होता तो और मजा आता .... कहां मर गया वो चोदू" दीपक मौसाजी कमर हिला हिला कर रघू का लंड पिलवाते हुए बोले.
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06-18-2017, 11:20 AM,
#6
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
"आपही ने तो भेजा उसको बजार. अभी होता तो आपके मुंह में लंड पेल देता बाबूजी, आप का मुंह ऐसे खाली नहीं रहता." राधा बोली.

"भैयाजी, वैसे तो रज्जू बहूरानी को घूर रहा था दोपहर को, बहूरानी ने रिझा लिया है उसको" रघू बोला.

"हां लीना भाभी की चूंचियां देखीं होंगी ना उसने! तुमने नहीं देखा जी, क्या मस्त दिख रही थीं ब्लाउज़ के ऊपर से. मेरा तो मन मुंह मारने को हो रहा था" राधा पड़ी पड़ी गांड मरवाते हुए बोली.

"अरी ओ रधिया, मौसी से पूछे बिना कुछ लीना भाभी के साथ नहीं करना. मुंह मारना है तो मौसी के बदन में मार जैसे रोज करती है" रघू बोला, वो अब घचाघच दीपक मौसाजी को चोद रहा था.

"बाबूजी, आप चुप चुप क्यों हो, बहूरानी अच्छी नहीं लगी क्या" राधा बोली.

"अरे जरूर लगी होगी. पर अनिल भैया ज्यादा पसंद आये होंगे भैयाजी को, है ना भैयाजी?" रघू बोला.

मौसाजी कुछ कहते इसके पहले मैं वहां से चल दिया. मेरी इच्छा तो थी कि रुक कर सब कुछ देखूं पर मेरा लंड ऐसे सनसना रहा था कि रुकता तो जरूर मुठ्ठ मार लेता या अंदर जा कर उनमें शामिल हो जाता जो बिना लीना की अनुमति के मैं नहीं करना चाहता था. और रज्जू आ रहा था, दूर से खेत में दिख रहा था, उसकी नीली शर्ट से मैंने पहचान लिया. वो देख लेता तो फ़ालतू पचड़ा हो जाता. इसलिये बेमन से मैंने धीरे से खिड़की बंद की और चल दिया.

रज्जू पास आया तो मुझे देखकर रुक गया और नमस्ते की.

मैंने पूछा "कैसे हो रज्जू? घर जा रहे हो लगता है?"

"हां भैयाजी. आप अकेले ही आये घूमने, भाभीजी को नहीं लाये?" उसने पूछा.

"वो मौसी के साथ है, मैं अकेला ही घूम आया. लगता है मौसाजी तुम्हारे घर पर ही हैं, रघू और राधा के साथ बातें कर रहे थे" मैंने कहा.

रज्जू कुछ नहीं बोला. नीचे देखने लगा.

"वैसे मैं अंदर नहीं गया, बस खिड़की से उनकी बातें सुनीं. तुम्हारा जिक्र कर रहे थे मौसाजी, बोले तुम भी होते तो अच्छा होता" मैंने मुस्करा कर कहा.

रज्जू मेरी ओर कनखियों से देख कर मुस्करा कर बोला "हां अनिल भैया, मौसाजी को बड़ी फ़िकर रहती है हम सब की. हम तीनों मिलकर उनकी सेवा करते हैं जैसी हो सकती है, आज मैं नहीं था तो नाराज हो गये होंगे. मैं जा कर देखता हूं"

"रज्जू, भई तुम्हारी लीना भाभी को खेत में घूमना है, पहली बार गांव आई है, उसको घुमा लाना कभी. गांव को हमेशा याद करे ऐसी खुश होनी चाहिये तेरी लीना भाभी" मैंने कहा.

"हां अनिल भैया, भाभी को तो ठीक से पूरा घुमा दूंगा. आप नहीं चलोगे घूमने? हम तो आप को भी घुमा देंगे आप का मन हो तो" रज्जू ने पूछा.

"हां, देखूंगा. मौसी से जरा पूछ लूं कि क्या प्रोग्राम है. पहले लीना को तो घुमा, ठीक से घुमाया तो मैं भी घूम लूंगा" मैंने उसकी ओर देखा और बोला.

रज्जू मुस्कराकर अच्छा बोला और अपने घर की ओर चल दिया.

मैं गांव में घूमने निकल गया. सोचा घर पर लीना और मौसी का तो अभी चल रहा होगा, क्यों फ़ालतू डिस्टर्ब करूं. दो घंटे बाद वापस आया तो राधा खाना बना रही थी. मौसी और लीना बैठक में सोफ़े पर पास पास बैठी थीं. लगता है काफ़ी चूमा चाटी चल रही थी, क्योंकि जब मैं एक दो बार खांस कर बैठक में दाखिल हुआ तो दोनों एक दूसरे से सटी बैठी थीं और मुस्कराती हुई देख रही थीं. लीना का आंचल ढला हुआ था. ब्लाउज़ के दो बटन खुले थे. मुझे देख कर मौसी संभल कर बैठ गयीं. लीना बोली "अनिल, मौसी तो मुझे काम ही नहीं करने देतीं. यहीं बिठा कर रखा है. बड़ा प्यार करती हैं मुझे" फ़िर अपना आंचल बड़ी शोखी से ठीक करने लगी.

मौसी बोली "अरे शाम को कितना काम करवाया तुझसे, इतनी सेवा की तूने मेरी. अनिल, तेरी ये बहू सच में बड़ी अच्छी है. कुछ घंटे में ही दिल जीत लिया मेरा. तू कहां हो आया?"

"मौसी खेत वाले घर पर गया था. मौसाजी काम में थे, रघू और राधा के साथ. इसलिये रुका नहीं, चला आया."

"अरे तू भी उनकी मदद कर देता. रज्जू नहीं था क्या" मौसीने पूछा.

"वैसे उन तीनों का काम ठीक ठाक चल रहा था इसलिये बस बाहर से देखकर चला आया मौसी. बाद में घर को जाते वक्त दिखा था रज्जू. बोल रहा था कि मौसाजी राह देख रहे होंगे"

"मुझे लगा कि तू भी उनसे गपशप में भिड़ गाया होगा" मौसी शैतानी से मुस्कराकर कर बोलीं. मुझे यकीन हो गया कि उनको पता था कि वहां क्या चलता है और मुझे जान बूझ कर देखने को भेजा था.

"करने वाला था मौसी, फ़िर सोचा कि वे काम में हैं, मैं भी अभी यहां बिलकुल नया हूं, इसलिये थोड़ी देर बगीचा देखा और चला आया" मैंने बात बना दी.

"हां, ये राधा भी देरी से आयी आज. खाने में इसलिये देर हो गयी, खैर अब खाना खाकर सो जाना, तुम लोग थके होगे लंबे सफ़र से"

मौसाजी वापस आये तो मौसी उनके कमरे में चली गयीं. मैंने मौका देख कर लीना को सब बता दिया जो जो देखा था. सुनकर लीना अपनी टांगें आपस में घिसने लगी. "अब आयेगा मजा अनिल. ये सब महा चोदू लोग हैं. मौसी के साथ मैंने क्या मस्ती की आज शाम को मालूम है? बड़ी चालू हैं वो, तुम्हारे जाने के बाद एक मिनिट वेस्ट नहीं किया, सीधा मुझे ले लिया"

"कैसी हैं मौसी? मजा आया" मैंने पूछा.

"अरे माल है माल, खालिस गांव का माल. पर मुझे ज्यादा चखने का मौका ही नहीं दिया मौसीने, बस एक बार मुंह मारने दिया, फ़िर मेरी चखने के पीछे पड गयीं. कहती थीं कि क्या गरम जवानी है तेरी लीना, पहले मुझे मन भर के चख लेने दे"
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06-18-2017, 11:20 AM,
#7
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
तभी राधा खाने पर बुलाये आयी. हमने खाना खाया. राधा परोस रही थी. परोसते परोसते बार बार उसका आंचल गिर जाता. उसकी चोली में से उसके मचलते हुए छोटे छोटे पर सख्त मम्मे और उनकी घुंडियां दिख रही थीं. मुझे देख कर हंस देती और कभी अपनी जीभ अपने होंठों पर फ़ेरने लगती. लीना ने भी देखा पर बस मेरी ओर देखकर आंख मार दी कि लो, माल तैयार है तुम्हारे लिये.

खाने के बाद में राधा साफ़ सफ़ायी करके वहीं गुटियाती रही. शायद जाना नहीं चाहती थी.

"राधा तू अब जा. कल आना. और वो रघू और रज्जू को बोल दे कि आज कोई काम नहीं है, आराम करें. कल बहुत काम है. बोल देना कि मालकिन ने कहा है, समझी ना? कहना सो जायें जल्दी आज रात को, तू भी आराम कर लेना, कल जरूरत पड़ेगी. समझ रही है ना मैं क्या कह रही हूं?" मौसी ने डांट कर पूछा.

राधा थोड़ी निराश दिखी. वह शायद रहना चाहती थी. फ़िर मौसी ने उसके कान में धीरे से कुछ कहा तो उसका चेहरा खिल उठा. काम खतम कर के वह चल दी.

कुछ देर हम गपशप करते रहे, फ़िर दस बजे हम सब सोने चले गये. मौसी ने ही कहा कि गांव में सब जल्दी सोते हैं. हमारा कमरा मौसी के कमरे से लगा था. बीच में दरवाजा भी था, गांव के घरों जैसा. 

मेरा लंड कस के खड़ा था, कमरे में घुसते ही मैं लीना पर चढ़ गया. पर उसने चोदने नहीं दिया, बोली "अरे रुको ना, जरा सबर रखो. क्या इसी लिये मुझे यहां लाये हो अकेले चोदने को? फ़िर बंबई और यहां क्या फरक हुआ?"

"अरे धीरे बोलो रानी, वहां मौसी सुन लेगी" मैंने कहा.

"इसीलिये तो बोल रही हूं. मौसाजी मौसी वहां और हम यहां, कुछ जमता नहीं अनिल" लीना शोखी से आवाज चढ़ा कर बोली, फ़िर मुझे आंख मार कर चुप हो गयी.

मौसी और मौसाजी के बात करने की आवाज आ रही थी.

"क्योंजी, खेत के घर पे मजा कर के आये हो लगता है तभी सोने की फिराक में हो. और यहां मेरी आग कौन बुझायेगा?" मौसी बोलीं.

"अरे आभा रानी, तेरी आग कभी बुझी है जो अब बुझ जायेगी? चल आजा, टांगें खोल के लेट जा, चूस देता हूं. तेरा रस चखने को तो मैं हमेशा तैयार रहता हूं, मेरे को तो तू बचपन से चखाती आयी है" मौसाजी बोले. एक दो मिनिट बस चूमा चाटी की आवाज आ रही थी. फ़िर मौसी तुनक कर बोलीं "अरे ठीक से चूसो ना मेरे सैंया ..... तुम तो बस राधा की चूसते हो ठीक से, वो जवान लड़की है, मैं तो अब बुढ्ढी हो गयी हूं ना .... पहले तो भाभी करके कैसे पीछे पड़े रहते थे ... स्कूल से आते ही मुंह लगा देते थे ... हाय .... आह ... हां ये हुई ना बात ...और थोड़ा मुंह में लो ...हां अब ठीक है"

"अरे नहीं मेरी रानी, बूढ़ी होगी तेरी सास, तेरी चूत तो एकदम जवान है, बहुत मजेदार है मां कसम, और ये मोटे मोटे चूतड़ तेरे, हाय मजा आ जाता है." मौसाजी की आवाज आयी. "चल, तेरी गांड मार दूं? मस्त मारूंगा"

"अरे तुम तो बस गांड के पीछे लगे रहते हो, मेरी बुर का तो खयाल ही नहीं रहता तुमको." मौसी हुमक कर बोली.

"अरे तेरी बुर के दीवाने भी तो हैं, वो रज्जू और रघू तो पुजारी हैं इसके. इसीलिये तो रखा है उनको. और वो राधा भी तो मरती है तेरे पे, उससे चुसवाती हो वो अलग"

"तो जैसे तुमको तो कुछ लेना देना ही नहीं है रघू और रज्जू से. आज शाम को क्या कर आये, मैं भी तो सुनूं जरा. वैसे आज तुमको नहीं डांटूंगी. आज शाम को तो मेरे को भी मजा आ गया. लीना बिटिया ने क्या चूसी थी मेरी .... इतना पानी निकाला था ...."

"अच्छा, शुरू हो गया तुम्हारा? चलो अच्छा हुआ. मैं वोही सोच रहा था, बड़ी सुंदर कन्या है. और वो अनिल भी कम नहीं है" मौसाजी बोले. "तेरे तो वारे न्यारे हैं अब"

"और तुम्हारे नहीं हैं? मुझसे नहीं छुपा सकते तुम. वैसे बाजू वाले कमरे में ही हैं दोनों. अब तक तो दो बार चोद चुके होंगे, आखिर जवान हैं" मौसी जोर से बोलीं जैसे जानबूझकर हमें सुनाना चाहती हों.

लीना सुन रही थी. मेरी ओर देख कर हंसी और जोर से बोली बोली "अनिल .... अभी मत चोदो राजा .... रुक जाओ ... ऐसे ही चूसते रहो ..... मौसी की याद आ रही है ... मौसी की बहुत प्यारी चूत है .... सच ..... तुम देखो तो दीवाने हो जाओगे"
kramashah.................
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06-18-2017, 11:20 AM,
#8
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
मैं और मौसा मौसी--3 gataank se aage........................
मैंने जोर से कहा "मौसाजी का लंड भी जोरदार होगा रानी .... तभी मौसी इतनी खुश लगती हैं"

"अरे ... ऐसा मत कहो अनिल .... मेरी चूत कुलबुलाने लगती है ... वो चोद रहे होंगे मौसी को ....अकेले अकेले .... अरे मौसी को थोड़ा तो खयाल ... करना था अपनी बहू का ... यहां अकेले में वो कैसे तड़प रही होगी ...." लीना शैतानी से और जोर की आवाज में बोली.

दो मिनिट की चुप्पी के बाद मौसी अपने कमरे से चिल्लाई "अनिल ओ अनिल ... लीना बेटी ... वहां क्या कर रहे हो अकेले, आ जाओ इधर अपने मौसाजी मौसी के पास"

लीना तो राह ही देख रही थी. मेरा हाथ पकड़ा और मौसी के कमरे में घुस गयी "लो मौसी, मैं यही सोच रही थी कि आपने अब तक बुलाया क्यों नहीं"

मौसी नंगी होकर टांगें फ़ैलाकर बिस्तर पर सिरहाने से टिक कर बैठी थीं और मौसाजी उनके सामने झुक कर उनकी बुर चाट रहे थे. अच्छी गोरी मोटी मोटी टांगें थीं मौसी की और मस्त पिलपिली लटकती हुई चूंचियां.

मौसी बोलीं "अरी तुझे बुलाने की क्या जरूरत है, तू खुद चली आती. वैसे मेरे को इस अनिल के बारे में पता नहीं था, सोच रही थी कि ये क्या सोचेगा कि मौसी इतनी चालू निकली"

"अरे मौसी, ये तो कब से आप पे आस लगाये बैठा है. आने के बाद मुझे बोल रहा था कि मौसी के मम्मे तो देखो, लगता है पपीते हैं पपीते, रस भरे. शाम को मैंने बताया कि मैंने कैसे आपकी सेवा की तो नाराज होकर बोला कि अकेले अकेले मौसी का माल चख लिया, मुझे भी चखा देतीं"

मौसी मेरी ओर देख कर बोलीं "तो अब आ जा बेटे, बहुत सारा माल है तेरी मौसी के पास. तुझे नहीं दूंगी तो किसे दूंगी! सुनो जी, तुम हटो अब और अनिल को चखने दो"

"हां मौसाजी, आप तो रोज पाते हो ये प्रसाद. आज मेरी और अनिल की बारी है" लीना पलंग पर चढ़ गयी और मौसी के मम्मे दबाते हुई उनके चुम्मे लेने लगी. मौसाजी हट गये और बोले "आओ अनिल, तुम भी पा लो मौसी का प्रसाद. मैं तो कब से पा रहा हूं" वे अब लीना के नंगे गदराये बदन को देख रहे थे. "वैसे तेरी बहू भी मस्त है अनिल, एकदम अप्सरा है अप्सरा. मैं तो देख कर ही खलास हो गया था, कि क्या सुंदर बहू पायी है अनिल ने. तेरे पिछले जनम के पुण्य होंगे बेटे, जैसे मेरे हैं, मुझे भी तो अपनी भाभी मिल गयी थी बचपन से"

"अरे तो ऐसे दूर से क्या देख रहे हो? पास आओ और स्वाद लो, बहू मना थोड़े करेगी. क्यों लीना बेटी?" मौसी लीना के मम्मे दबाते हुए बोलीं.

"हां मौसाजी, आइये ना, आप का तो हक है, आखिर आप की बहू हूं. ये लीजिये" कहकर लीना ने टांगें पसार दीं. मौसाजी टूट पड़े और उसकी बुर में मुंह डाल कर चाटने लगे. मैं मौसी की टांगों में घुस गया और उनकी बुर का स्वाद लेने लगा.

मौसाजी लपालप लीना की बुर चाट रहे थे. फ़िर उंगली से उसकी चूत खोलकर जीभ अंदर डाल दी. लीना बोली "मौसाजी शौकीन लगते हैं मौसी, देखो कैसे मेरी बुर में अंदर तक जीभ से टटोल रहे हैं"

"अरे तेरे जोबन को पूरा चखना चाहते हैं. ऐसा जोबन सबके नसीब में नहीं होता. और तेरा ये अनिल भी कम नहीं है, ये तो पूरा मुंह अंदर डालने की कोशिश कर रहा है." मौसी मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत में दबाकर बोलीं.

"ठीक ही तो कर रहा है मौसी, इतना गाढ़ा जायकेदार बुर का रस सब को थोड़े मिलता है" लीना बोली फ़िर सिर झुकाकर मौसी की चूंची चूसने लगी.

मैंने और मौसाजी ने खूब देर तक दोनों औरतों का रस निकाला. आखिर मौसी ने मुझे पकड़कर अपने ऊपर खींचा और बोलीं "बस कर अनिल बेटे, कितना चूसेगा! अब जरा चोद, कब से मरी जा रही हूं तेरा ये मस्त लंड लेने को. देख कैसा तन कर खड़ा है. लीना, तेरे को तो बहुत मजा देता होगा अनिल का ये लंड, देख कितना जानदार है"

"हां मौसी, जम के चोदता है मुझे, मैंने भी डांट डपट कर रखा है इसे, मुझे तसल्ली दिये बिना झड़ जाये ये बिसात नहीं इसकी"

मैंने मौसी की बुर में लंड डाल दिया और चोदने लगा. चूत ढीली थी पर एकदम तपती हुई मखमली म्यान थी. उधर मौसाजी लीना की बुर चूसते हुए उसकी गांड में उंगली करने की कोशिश रहे थे.

लीना उनका हाथ झटक कर बोली "ये क्या करते हो मौसाजी, चोदना हो तो ऐसे आओ ऊपर, गांड के पीछे क्यों पड़े हो"

"लीना रानी, क्या गांड है तेरी ... एकदम फ़र्स्ट क्लास ... मारने दे ना" मौसाजी मचल कर बोले.

"गांड तो नहीं मरवाऊंगी मैं मौसाजी, हां चोद लो ना, देखो कैसा मस्त खड़ा है आपका लंड. वैसे मेरे खयाल से और जोर से खड़ा होता होगा, इतना मस्त है, बहुत दमखम वाला लगता है पर आज लगता है थोड़ा दम कम है उसमें" लीना बोली.
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06-18-2017, 11:20 AM,
#9
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
"अरे बेटी, मैंने इनको कहा था कि जरा सबर रखो, बहू आने वाली है, उसके लिये अपनी मस्ती बचा कर रखो पर ये मेरा देवर ... वैसे अब मेरा आदमी है महा चोदू, सुनता थोड़े ही है, मस्ती करके आया होगा शाम को. कोई बात नहीं, तू कल देख लेना कैसा तन कर खड़ा होता है." मौसी बोलीं फ़िर मेरा चुम्मा लेने लगीं. मैं उनकी जीभ चूसने लगा.

मौसाजी लीना पर चढ़ गये और उसकी चूंचियां दबाने लगे. "वाह ... क्या मम्मे हैं तेरे लीना .... ठोस कड़ा माल है .... अनिल दबाता नहीं क्या .... मैं होता तो मसल मसल कर पिलपिला कर देता तेरी मौसी की कसम, उसके भी कच्चे आम जैसे थे, अब देखो कैसे पपीते बना दिये मैंने"

लीना को मस्ती चढ़ी थी, उसने खुद ही दीपक मौसाजी का लंड चूत में लगा दिया और बोली "अब डाल दो जल्दी मौसाजी, आप की बहू बहुत बेताब है आपका लाड़ प्यार पाने को" और कस के उनको बाहों में जकड़ कर चूमने लगी.

मौसाजी ने एक झटके में लंड गाड़ दिया और चोदने लगे. "बहुत मस्त चूत है तेरी लीना .... गांड भी मतवाली होगी ..... आज तो तूने नहीं मारने दी .... पर मारूंगा जरूर ... आह .... मेरी रानी .... मेरा लाड़ो ... क्या जवानी है तेरी"

लीना बोली "अनिल ....बहुत मस्त चोद रहे हैं मौसाजी ... धक्का मारते हैं तो अंदर पेट तक जाता है लंड ... तुम मौसी को ठीक से चोदो .... कल से प्यासी है उनकी बुर .... और उनके मुंह की चासनी बहुत चख ली .... जरा मम्मे को मुंह में लेकर देखो ... एकदम डबल रोटी है"

मैंने कहा "पर मौसाजी तो रोज चोदते होंगे मौसी को .... उनकी बुर को प्यासा नहीं रखते होंगे" फ़िर मैंने सिर झुकाकर मौसी का एक मोटा खजूर सा निपल मुंह में ले लिया"

"अरे तेरे मौसाजी तो गांड के पीछे ज्यादा रहते हैं ... गांड मारने को हमेशा तैयार रहता है ये बदमाश देवर मेरा, पर है बड़ा चोदू ... तभी तो शादी कर ली मैंने इससे .... चोदने को बोलो तो ना नुकुर करता है ... अरे अनिल बेटे ... ऐसे क्या जरा सा निपल मुंह में ले कर चूस रहे हो ... पूरा मम्मा मुंह में ले लो अपने ... तूने कभी ऐसा माल नहीं मुंह में लिया होगा" कहकर मौसी ने आधे से ज्यादा चूंची मेरे मुंह में ठूंस दी"

"झूट मत बोलो भाभी .... मेरा मतलब है आभा रानी ... तुम को रोज चोदता हूं मैं .... अब तुम्हारी गांड इतनी मोटी ताजी है तो मैं क्या करूं ... किसी का भी मन होगा मारने को और जब तुम्हारा देवर था मैं तब कितने प्यार से रिझाती थीं मेरे को गांड दिखा दिखा कर" मौसाजी हचक हचक कर लीना को चोदते हुए बोले.

इसी तरह गप्पें लड़ाते हुए हमने दोनों चुदैलों को मन भर के चोदा. दोनों दो तीन बार झड़ीं. आखिर मैं और मौसाजी भी झड़ गये और वहीं मौसी और लीना के बदन पर पड़े पड़े सुस्ताने लगे.

पांच मिनिट के आराम के बाद मौसी बोलीं "मजा आ गया अनिल बेटे ... लीना ... तू चुदी या नहीं ठीक से? इनका कोई भरोसा नहीं, आज कल तेरे मौसाजी गांड ज्यादा मारते हैं, लगता है कहीं चोदने की कला भूल न जायें"

लीना बोली "हां मौसी ... बहुत प्यार से चोदा मौसाजी ने ....वैसे मेरा मन कभी नहीं भरता ... अनिल जानता है .... मैं तो यहां हूं तब तक दिन रात चुदवाऊंगी ... मौसाजी आप लंड को तैयार रखो अपने ... उसको कहना बहू की खातिर में कमी नहीं आनी चाहिये"

मौसाजी बोले "लीना बेटी ... तू फ़िकर मत कर ... यहां लंडों की कोई कमी नहीं है ... कल से देख ... तुझे खुश कर दूंगा ... इतना चुदेगी कि तेरी चूत एकदम ठंडी हो जायेगी"

"अब तुम दोनों हटो और मुझे और लीना को जरा प्यार मुहब्बत करने दो" मौसी मुझे अपने बदन से ढकेलते हुए बोलीं. उधर मौसाजी लीना पर से उतरे और उधर मौसी उससे लिपट गयीं. लीना पर उलटी ओर से चढ़ कर उन्होंने अपनी चूत लीना के मुंह में दे दी और खुद लीना की टांगें फ़ैलाकर उसकी बुर चाटने लगीं.

"मौसी ये क्या कर रही हैं? अभी मन नहीं भरा क्या अनिल से चूत चुसवाकर?" लीना बोली.

"बेटी, ये अलग स्वाद है, ले कर देख, चुदी बुर चाटने का मजा ही और होता है. तू भी जानती है, नाटक कर रही है" मौसी बोलीं.

"हां मौसी .... मैंने बहुत बार किया है .... मैं तो मजाक कर रही थी .... जाना पहचाना स्वाद लग गया है आप की बुर में .... मेरे अनिल डार्लिंग का" लीना चटखारे ले कर बोली.

मैं और मौसाजी बाजू में बैठकर दोनों औरतों के कारनामे देखने लगे. मौसी का मोटा शरीर लीना के जवान तन से लिपटा था, लीना की सुडौल कसी हुई जांघें मौसी के सिर को पकड़े थीं और मौसी की मोटी मोटी थुलथुली टांगें लीना के सिर को कस के जकड़े थीं. दोनों लपालप चाट रही थीं जैसी कब की भूखी हों.

मेरा लंड सिर उठाने लगा. मौसाजी मेरे लंड को देखने लगे "अनिल ... तुझमें तो काफ़ी जोश है लगता है ... इतनी जल्दी सिर उठाने लगा तेरा ये मूसल"

"मौसाजी, जब ऐसी चुदैल मतवाली औरतें आपस में ऐसे करम कर रही हों तो किसीका भी खड़ा हो जायेगा." कहकर मैं लंड हाथ में लेकर मुठियाने लगा.
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06-18-2017, 11:20 AM,
#10
RE: Chudai Kahani मैं और मौसा मौसी
मौसी लीना की चूत से मुंह निकाल कर चिल्लाई "अरे सुनते हो, ये क्या तमाशा है? तुमको शोभा देता है क्या? यहां हम सास बहू इतने मजे कर रहे हैं और उधर तुम्हारा भतीजा सूखा सूखा बैठा है. जरा उसकी मदद करो. तुम लोग भी आपस में कुछ करो, हमसे जरा सीखो"

मौसाजी मेरे पास सरके और मेरा लंड हाथ में ले लिया. "एकदम मस्त है तेरा लौड़ा अनिल. लीना को मजा आता होगा. गांड भी मारते हो क्या उसकी?"

"बस कभी कभी मौसाजी, वैसे बड़ी जालिम है, हाथ भी नहीं लगाने देती.... हां .... अच्छा लग रहा है मौसाजी ... मस्त कर रहे हैं आप" मैं ऊपर नीचे होकर मौसाजी की मुठ्ठी में लंड को पेलते हुए बोला.

"अच्छा लगा ना? फ़िर थोड़ा और मस्त कर देता हूं तुझे, देख" कहकर मौसाजी झुके और मेरा सुपाड़ा मुंह में लेकर चूसने लगे. मैं ऊपर नीचे होने लगा "आह ... ओह... मौसाजी ..... क्या बात है .... ऐसा तो लीना भी नहीं चूसती"

मौसी बोलीं "अब देखो कितना खुश है अनिल. यही तो मैं तुमसे कह रही थी कि अनिल का खयाल रखो. अनिल बेटे, तेरे मौसाजी बड़े शौकीन हैं इस चीज के"

लीना मौसी की चूत में से मुंह उठा कर चिल्लायी "अनिल ... मौसाजी तुमको इतना सुख दे रहे हैं और तुम वैसे ही बैठे हो. जरा उनकी भी सेवा करो."

मैं बोला "हां मौसाजी, बात तो ठीक है. मुझे भी मौका दीजिये"

मौसाजी लेटते हुए बोले "ठीक है अनिल, यहां मेरे बाजू में आ जाओ"

मैं मौसाजी के बाजू में उलटा लेट गया और उनका आधा खड़ा लंड हथेली में लेकर सहलाने लगा. फ़िर जीभ से उसको ऊपर से नीचे तक चाटने लगा. मौसाजी बोले "आह ... बहुत अच्छे अनिल ... ऐसा ही कर" और फ़िर मेरा लंड पूरा निगल कर चूसने लगे. मैंने भी उनका लंड मुंह में ले लिया और जीभ रगड़ रगड़ कर चूसने लगा. मौसाजी ने मेरे चूतड़ पकड़े और सहलाने लगे. फ़िर मेरा गुदा रगड़ने लगे. मैंने उनके चूतड़ दबाये, बड़े मुलायम और चिकने चूतड़ थे. फ़िर गांड में उंगली डाल दी, आराम से अंदर चली गयी, मैंन सोचा बहुत अच्छे मौसाजी, मरवा मरवा कर अच्छी खुलवा ली है आपने अपनी गांड.

मौसाजी और कस के मेरा लंड चूसने लगे और मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी. हम दोनों एक दूसरे की गांड में उंगली करते हुए लंड चूसने लगे.

"मौसी देखो क्या प्यार दुलार चल रहा है मौसा भतीजे में" लीना बोली.

"चलो अच्छा हुआ, मैं भी कहूं कि यहां सास बहू में जब संभोग चल रहा है तो ये लोग क्यों ऐसे बैठे हैं. अब देखना कैसे लंड खड़े होते हैं दोनों के" मौसी लीना के मम्मे दबाते हुए बोलीं.

"मौसी, चलो मजा आ गया, मैं तो अब और चुदवाऊंगी" लीना बोली. मौसी बोलीं "मैं तो बस चूत चुसवाऊंगी बहू, वो भी तुझसे. तू बहुत प्यार से चूसती है"

"आ जाओ, कौन आता है मेरी चूत चोदने?" लीना बोली तो मौसाजी तपाक से उठ बैठे. "मैं आता हूं लीना रानी, तू गांड तो मारने नहीं देगी आज, फ़िर तेरी चूत ही सही, बड़ी मस्त टाइट है"

लीना नीचे लेट गयी. मौसी उसके मुंह पर बैठ कर अपनी बुर चुसवाने लगीं. मौसाजी लीना पर चढ़ बैठे और चोदने लगे. काफ़ी जोश में थे, मेरे लंड चूसने से उनको मजा आ गया था और लंड में काफ़ी जान आ गयी थी. चोदते चोदते वे आभा मौसी से चूमा चाटी कर लेते या झुक कर उनके मम्मे चूसने लगते, मौसी लगातार आगे पीछे होकर अपनी बुर लीना के मुंह पर घिस रही थीं.

"अब मैं क्या करूं? किसको चोदूं? वैसे मेरा भी मन हो रहा है किसीकी गांड मारने का, लीना तो मारने नहीं देगी. मौसी आप जरा ऐसी सरक लें तो ..." मैंने कहा. मौसी तपाक से बोलीं "आज नहीं बेटे, ये तेरे मौसाजी रोज मारते हैं मेरी, आज नहीं मरवाऊंगी, आज मेरी गांड को आराम कर लेने दो"

मौसाजी मुड़ कर बोले "अनिल, अगर सच में गांड मारने का मूड है तेरा तो तू मेरी मार ले"

"मौसाजी, आप को चलेगा? मुझे अजब सा लगता है कि आप की गांड मारूं" मैंने पूछा.

"चलेगा क्या दौड़ेगा! इतना मस्त लंड है तेरा, मेरी तो गांड कब से कुलबुला रही है लेने को. लीना कह ना अनिल से कि मेरी मार ले, तेरा कहना नहीं टालेगा" मौसाजी ने लीना से गुहार की.

लीना कमर उचका उचका कर चुदवाते हुए बोली "अरे मान जाओ ना, तुम भी तो शौकीन हो गांड के. और मौसाजी की भी कम नहीं है, मस्त है. देखा ना कैसी गोरी गोल मटोल गांड है"
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