Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
10-23-2020, 12:53 PM,
#11
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“क्यो तुम नहीं जानते कि उसके मरने से देश को कितना बड़ा नुकसान हो गया है?” विजय से पहले रघुनाथ ने कहना शुरू कर दिया—“इस मुल्क की सबसे बड़ी ताकत का नाम है 'युवा-शक्ति'—वह शक्ति जो यदि तोड़फोड़ पर लग जाए तो एक ही मिनट में सारी दुनिया को तहस-नहस कर दे और यदि निर्माण से जुड़ जाए तो रेगिस्तानों में जल के दरिया बहा दे—हमारे मुल्क की यही शक्ति छिन्न-भिन्न थी, उसे संजय ने एकजुट किया था—न केवल संगठित ही किया था, बल्कि इस शक्ति को अपने नेतृत्व में निर्माण पर जुटा दिया था उसने—ऐसे निर्माण पर, निश्चय ही जिसका अंजाम एक दिन खुशहाली थी—वह एक कारवां लेकर निकल पड़ा था। विकास, युवा शक्ति का एक हुजूम था उसके साथ, बहुत ही तेजी से वह इस मुल्क को खुशहाली नाम की मंजिल की तरफ लेकर बढ़ रहा था—मगर, बीच रास्ते में ही धोखा दे गया कम्बख्त—देश की युवा पीढ़ी ठगी-सी खड़ी रह गई—बेवफाई करके कम्बख्त ने खुद ही सब कुछ बिखेर दिया।”
“देखो अंकल!” विकास के होंठों पर शरारती मुस्कान थी—“कांग्रेस की मेम्बरशिप तो शायद डैडी ने स्वीकार कर ली है, ये उसकी राजनैतिक सूझ-बूझ का पक्ष ले रहे हैं।”
“अपने तुलाराशि की बातों को मद्देनजर रखकर जवाब दो प्यारे, क्या इतने महत्व के आदमी को हर सुबह मौत से आंख-मिचौली खेलनी चाहिए थी, क्या उसकी जान इतनी सस्ती थी?”
“ज्यादा जीकर उसे करना भी क्या था अंकल?”
“वही, जो कुछ वह अधूरा छोड़ गया है।”
“आदमी जब भी मरता है, कुछ-न-कुछ अधूरा जरूर छोड़ जाता है गुरु—कोई नहीं जानता कि वह किस क्षण काल का ग्रास बन जाएगा, परन्तु जरा बचपन से संजय के कैरेक्टर, उसकी गतिविधियों और काम करने के तरीके पर दृष्टिपात कीजिए—उसके जीने के अन्दाज में रफ्तार थी, कार को जैट की-सी गति से चलाता था, कोई भी काम हाथ में लेते ही उसे पूरा करने में जुट जाता था—काम इतनी तेजी से करता था कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते थे—वह हमेशा जल्दी में रहता था, जैसे जानता हो कि इतनी कम आयु में उसे चले जाना है, वह दुनिया में आंधी की तरह आया, भारतीय क्षितिज पर छाया और तूफान की तरह चला भी गया—इन तैंतीस सालों में ही वह इतना सब कुछ कर गया जितना बहुत-से लोग सौ-सौ साल की उम्र मिलने पर भी नहीं कर पाते—हमें यह नहीं सोचना चाहिए अंकल कि वह जीवित होता तो क्या करता, महत्वपूर्ण ये है कि अपने जीवन काल में उसने क्या किया—जब वह उम्र ही तैंतीस साल की लेकर आया था तो चौंतीसवें वर्ष में प्रवेश कर ही कैसे सकता था? मौत इंसान को बहाना बनाकर ले जाती है, अगर वह पिट्स न उड़ाता तो मौत किसी दूसरे बहाने से आती।”
“यही तो हम तुम्हें समझाना चाहते हैं बेवकूफ, कि मौत संजय पर नहीं, बल्कि संजय मौत पर झपटता था, हर सुबह—भला मौत भी कब तक परास्त होती, उसका दांव लगा—संजय को निगल गई।
“हर सुबह वह जीता करता था—उस मनहूस सुबह मौत जीत गई।”
तश्तरी में परांठे लिए उनके नजदीक आती हुई रैना बोली—“तुम भी उसी की तरह जिद्दी हो विकास, बड़ों की बात क्यों मानोगे?”
“उफ्फ मम्मी, ऐसा आखिर क्या हो गया?”
“कुछ भी नहीं, संजय का क्या गया—प्राणों के अलावा मरने वालों का जाता ही क्या है?”
“क्या मतलब?”
“अगर कुछ गया है तो उस मां का जिसके जिगर का वह टुकड़ा था—उस पत्नी का, युवावस्था में ही पहनने के लिए, जिसे सफेद साड़ी रह गई, अगर अनाथ हुआ तो वह वरुण नाम का वह एकवर्षीय मासूम, जिसने ठीक से अभी अपने पिता को देखा भी नहीं था और उसके साथ ही अनाथ हो गए हैं संजय के संगी-साथी, देश की युवा पीढ़ी और ये देश।” भभकते-से स्वर में रैना कहती ही चली गई।
“उफ्फ मम्मी, आखिर तुम लोग व्यर्थ ही तिल को पहाड़ क्यों बना रहे हो?”
“हम कुछ नहीं बना रहे हैं, रहने दो विजय भइया—इसे समझाने की कोशिश करना बेकार है, जो इसके जी में आए करे, यदि कल को इसे कुछ हो गया तो हम भी रो-धोकर रह जाएंगे।” नाराजगी—भरे स्वर में कहने के साथ ही वह मुड़ी और तेजी से अन्दर चली गई।
विकास ठगा-सा देखता रह गया। रघुनाथ, विजय और धनुषटंकार की भी लगभग वैसी ही अवस्था थी। कई क्षण के लिए वहां अजीब-सा तनावपूर्ण सन्नाटा छा गया। सन्नाटे को विकास ने ही तोड़ा—“ये क्या मामला है गुरू, आज अचानक सभी लोग मेरे खिलाफ हो गए हैं?”
“क्योंकि हममें से कोई भी तुम्हें संजय की तरह खोना नहीं चाहता।”
“तो क्या आप अप्रत्यक्ष रूप से मुझे कायर बन जाने की सलाह दे रहे हैं?”
“कायर बनने की नहीं प्यारे—सिर्फ यह कि अनावश्यक रूप से मौत से छेड़छाड़ करनी बन्द कर दो—यदि तुम्हें अभ्यास ही करना है तो ऊंचाई पर किया करो, इतने नीचे नहीं कि एक बार नियंत्रण से बाहर होने पर तुम्हें विमान को नियंत्रित करने का समय भी न मिले।”
“इस बारे में मैं सोचूंगा।” विकास ने जैसे एहसान किया।
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#12
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आलू के परांठों का नाश्ता निपट चुका था, विजय ने तो नाश्ते के नाम पर एक तरह से लंच ही ले लिया था—यह जानकर रैना को खुशी हुई थी कि विकास ने आंशिक रूप से बात मान ली है—एक अन्य चेयर लाकर वह भी वहीं बैठ गई थी, विजय लम्बी-सी डकार लेकर कुर्सी पर पसरा ही था कि एक नितांत अपरिचित युवक ने कोठी में प्रवेश किया, इजाजत लेकर वह नजदीक आया।
युवक के शरीर पर सस्ते-से कपड़े थे, पहनावे और शक्ल-सूरत से ही वह कोई गुण्डा महसूस होता था, उसके निकट पहुंचते ही विजय ने पूछा—“कहो प्यारे, कैसे दर्शन करने चले आए हमारे?”
“ज...जी?” वह थोड़ा बौखलाया—“जी....मेरा नाम मांगे खां है।”
“तो यहां क्या मांगने चले आए?” विजय ने तपाक से पूछा। इस बार मांगे खां कुछ बोला नही, कई पल तक विजय को सिर्फ देखता रहा, फिर स्वयं ही रघुनाथ ही तरफ मुखातिब होकर बोला—
“मुझे मास्टर ने आपके पास भेजा है।”
“कौन-से स्कूल में पढ़ते हो?” विजय ने तुरन्त पूछा।
“ज...जी!” मांगे खां पुनः चकरा गया—“म...मैं कुछ समझा नहीं!”
“इसमें समझने जैसी कोई बात नहीं है प्यारे, तुमने खुद ही कहा कि तुम्हें किसी मास्टर ने भेजा है और मास्टर स्कूल में ही होते हैं, इसीलिए पूछा कि तुम कौन-से स्कूल में...!”
“जी, मुझे किसी स्कूल के नहीं, बल्कि अलफांसे मास्टर ने भेजा है।”
“ल...लूमड़?” विजय अनायास ही कुर्सी से कई इंच ऊपर उछल पड़ा। रैना के कंठ से भी अनायास ही निकला—“अ...अलफांसे भइया?”
एक मिनट के लिए तो वे सभी अचानक अलफांसे का नाम सुनकर अवाक रह गए—फिर अपनी कुर्सी से उठती हुई रैना ने कहा—“बैठो भइया।”
मांगे खां कुर्सी पर बैठ गया।
विजय उसकी भौगोलिक स्थिति का अच्छी तरह से अध्ययन करता हूआ बोला—“तो तुम्हारा नाम मांगे खां है और तुम्हें लूमड़ ने आं...आं...चौंको नहीं प्यारे-तुम्हारे मास्टर को हम लूमड़ ही कहते हैं। तो क्या तुम बता सकते हो कि आजकल हमारा लूमड़ कौन-से खेत में हल चला रहा है?”
“ज...जी!” मांगे खां चकराया। बात विकास नै संभाली बोला—“इनका मतलब है कि आजकल अलफांसे गुरू कहां हैं?”
“लंदन में।”
“तो क्या तुम सीधे लंदन से टपके हो?” विजय ने पूछा।
“जी नहीं, मैं राजनगर ही में रहता हूं—मेरे पते पर मास्टर ने कुछ लिफाफे भेजे हैं और एक पत्र में मुझे निर्देश दिया है कि वे लिफाफे मैं उन पर लिखे पतों पर पहुंचा दूं। उनमें से एक लिफाफा एस.पी. साहब के लिए भी है, मैं वही देने यहां आया हूं।”
“कैसा लिफाफा है प्यारे?”
मांगे खां ने अपने कोट की जेब से कई लिफाफे निकाले, उन पर लिखे नाम पढ़े और फिर रघुनाथ वाला लिफाफा निकालकर रघुनाथ की तरफ बढ़ा दिया, रघुनाथ से पहले ही लिफाफा उसके हाथ से विजय ने झपट लिया—पहले बहुत ही ध्यान से उसने लिफाफे को उलट-पुलटकर देखा, सन्तुष्ट होने के बाद ही उसे खोला...लिफाफे में एक कार्ड तथा पत्र था।
कार्ड पर लिखे मजमून को पढ़ते ही विजय के मुंह से निकला—“ह...हैं!”
और इस ‘हैं’ के साथ ही वह कुर्सी से दो या तीन फीट उछल पड़ा, उछलकर खड़ा हो गया था वह और यदि मैं गलत नहीं लिख रहा हूं तो इस वक्त उसके चेहरे पर चौंकने के ऐसे भाव थे जैसे शायद पिछले जीवन में कभी नहीं उभरे थे।
सचमुच वह पहले कभी इतनी बुरी तरह नहीं चौंका था—हक्का-बक्का-सा कार्ड हाथ में लिए वह खड़ा-का-खड़ा रह गया, खोपड़ी हवा होकर जैसे किसी दूसरे ही लोक में विचरण कर रही थी। उसे इतनी बुरी तरह चौंकता देखकर सभी चकित रह गए।
“क्या हुआ गुरु?” विकास ने पूछा।
विजय कुछ जवाब न दे सका, उसकी दृष्टि कार्ड पर ही स्थिर थी, विकास के बोलने पर तंद्रा तक भंग नहीं हुई थी उसकी, इसीलिए व्यग्रतापूर्वक रैना ने पूछा—“क्या बात है भइया?”
“सारे परांठे एकदम हजम हो गए हैं रैना बहन!” विजय ने हैरत पर काबू पा लिया था।
“ऐसा इस कार्ड में क्या लिखा है?” रघुनाथ ने पूछा।
जवाब देने से पहले विजय ने मांगे खां की तरफ देखा, कई पल तक बड़ी ही अजीब नजरों से उसे घूरता रहा, फिर वापस अपनी कुर्सी पर बैठता हुआ बोला—“इसमें वो लिखा है प्यारे तुलाराशि जो वेदव्यास महाभारत में और तुलसीदास रामायण में भी न लिख सके।”
“ओफ्फो गुरु, आप बेकार ही सस्पैंस बना रहे हैं—इधर लाइए कार्ड ।”
विजय ने कार्ड वाला हाथ कुछ इस तरह पीछे खींच लिया जैसे कोई बच्चा खिलौने वाला हाथ, खिलौना छिन जाने के डर से खींच लेता है—“न...न...ऐसे नहीं प्यारे दिलजले।”
“ओफ्फो, आखिर बात क्या है भइया?”
“अपना लूमड़ शादी कर रहा है।”
“क...क्या?” एक साथ सभी उछल पड़े, धनुषटंकार को तो इतनी हैरत हुई कि उसने उछलकर कार्ड विजय के हाथ से छीन लिया—वह कार्ड को पढ़ने में तल्लीन था जबकि विकास, रघुनाथ और रैना ठगे-से खड़े रह गए थे—उन्हें देखकर विजय अजीब-से ढंग से मटकने लगा और बोला—“कहो प्यारो, दुनिया से न्यारो, क्या हाल है तुम्हारा?”
“ये तुम क्या कह रहे हो विजय?” रघुनाथ कह उठा।
विकास के मुंह से निकला—“असम्भव—एकदम नामुमकिन, ऐसा हो ही नहीं सकता गुरु!”
“कम-से-कम कार्ड तो यही कह रहा है प्यारे!”
“अजीब बात है!” रैना बुदबुदाई।
काफी देर तक उनके चेहरे पर हैरत-ही-हैरत नाचती रही, आश्चर्य के सागर में गोते लगाते रहे वे, और जब काफी देर बाद उभरे तो रैना ने पूछा—“अलफांसे भइया कहां और किससे शादी कर रहे हैं?”
“लंदन में, किसी इर्विन नाम की लड़की से।”
“वह पत्र तो पढ़ो अंकल, देखे तो सही कि अलफांसे गुरु ने क्या लिखा है?”
विजय ने जोर-जोर से पत्र पढ़ना शुरू किया—
प्यारे रघुनाथ और रैना बहन,
नमस्कार।
राजनगर में स्थित मांगे खां नामक मेरा एक शागिर्द तुम्हें यह पत्र और कार्ड देगा—जानता हूं कि कार्ड को देखकर तुम बुरी तरह चौंक पड़ोगे, क्योंकि तुमने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि अलफांसे शादी कर सकता है, स्वयं मैंने भी कभी नहीं सोचा था, मगर ऐसी बहुत-सी बातें इस दुनिया में हो जाती हैं जो हमने पहले कभी नहीं सोची होतीं, इर्वि से मेरी मुलाकात, और फिर मेरे द्वारा उससे शादी का फैसला ऐसी ही एक घटना मानी जा सकती है—ये सच है कि मैं इर्वि से शादी कर रहा हूं, सोचा है कि व्यर्थ की भागदौड़ से भरी जिन्दगी छोड़कर मैं अब घर बसाकर लंदन ही में शान्ति से रहूंगा, जानता हूं कि मेरा ये फैसला किसी अन्य को अच्छा लगे या न लगे, लेकिन मेरी रैना बहन को जरूर पसन्द आएगा—अपनी पिछली निरुद्देश्य जिन्दगी में यदि मैंने किसी से भावनात्मक रिश्ता जोड़ा है तो वह तुम्हारा परिवार है रघुनाथ—रैना मेरी बहुत प्यारी-सी बहन है, मेरी कलाई पर राखी बांधा करती है वह—विकास मुझे अपने बच्चे की तरह अजीज है—इतनी बड़ी दुनिया में केवल आप ही लोग मेरे अपने हैं और यदि आप इस शादी में शरीक नहीं हुए तो मुझे बेहद अफसोस होगा—सही तारीख पर लंदन आकर मुझे प्रसन्नता प्रदान करें—आपको सपरिवार आना है और जानता हूं कि मोन्टो भी आप ही के परिवार का एक सदस्य है, याद रखना रैना बहन, मुझे तुम्हारे आशीर्वाद की बहतु जरूरत है।
पत्र और कार्ड सीधा न भेजकर मांगे खां के हाथ भेज रहा हूं, केवल इसलिए कि मांगे खां राजनगर में सभी कार्ड बांट देगा, मैंने राजनगर के सभी कार्ड मांगे खां के पते पर भेज दिए हैं।
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10-23-2020, 12:53 PM,
#13
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पत्र पूरा होते ही रैना खुशी से मानो नाचने लगी, उसने मांगे खां से कहा—“बैठो भइया, तुम मेरे लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशखबरी लेकर आए हो—मुंह मीठा किए बगैर मैं तुम्हें यहां से नहीं जाने दूंगी।”
“इसकी कोई जरूरत...”
मांगे खां का वाक्य अधूरा ही रह गया, क्योंकि रैना बिना सुने ही मुड़ी, नाचती-सी वह दौड़ती हुई अन्दर की तरफ चली गई। विकास, धनुषटंकार और रघुनाथ अवाक-से खड़े थे।
काफी कोशिश के बाद भी वे अपनी हैरत पर काबू नहीं कर पा रहे थे।
“बैठो मांगे प्यारे, तुमने तो तोते ही उड़ा दिए हैं हमारे!” विजय ने अपनी ही धुन में मांगे खां से कहा, विजय को अजीब-सी नजरों से देखता हुआ मांगे खां एक कुर्सी पर बैठ गया।
तब तक रैना एक तश्तरी में ढेर सारी मिठाई लिए वहां पहुंच गई थी, सबके इनकार करने पर भी रैना ने सभी का मुंह मीठा कराया और जब कुर्सी पर बैठी तो विजय ने कहा—“ तुम्हें बहुत खुशी हो रही है रैना?”
“खुशी की बात नहीं है क्या, मेरे भइया की शादी है।”
विजय केवल बुरा-सा मुंह बनाकर रह गया, जबकि रैना खिलखिलाकर हंस पड़ी—“एक बात मानोगे भइया?”
“कहो मेरी प्यारी बहना!”
“अब तो तुम भी कोई अच्छी-सी लड़की देखकर शादी कर ही लो।”
भोला और उदास चेहरा बनाकर विजय कह उठा—“कोई कन्या मिले तो सही।”
“लड़कियां तो बहुत मिल जाएंगी, अपनी आशा ही है। तुम बस एक बार ‘हां’ कर दो।”
“ग...गोगियापाशा, क्या बात कर रही हो रैना बहन! तुमने शायद उसके पंजे नहीं देखे हैं, चमगादड़ के पंजे तो तुमने देखे होंगे-हां, बिल्कुल चमगादड़ जैसे पंजे हैं आशा के—एक बार जहां चिपकती है, वहीं चिपकी रहती है। एक बार वह मेरी गरदन पर चिपक गई—मैंने चिमटे से पकड़कर छुड़ाया और दूर फेंका, अगले दिन वह मेरी नाक से चिपक...!”
“ब...बस-बस विजय भइया, पेट में दर्द होने लगा है।” बुरी तरह हंसती हुई रैना बड़ी मुश्किल से यह वाक्य कह सकी, उसे देखता हुआ विजय मूर्खों की तरह पलकें झपकाने लगा।
“मैं चलता हूं।” कहने के साथ मांगे खां ने उठने का उपक्रम किया ही था कि विजय ने उसकी कलाई पकड़ ली और बोला—“हमें अकेला छोड़कर अभी कहां जाते हो सैंया, पकड़ लो हमारी बैंया।
“ज...जी?”
“जी हां!” विजय भटियारिन की तरह हाथ नचाकर बोला—“हमारा कार्ड तो दे जाओ।”
“ज...जी, आपका कार्ड—क्या नाम है आपका?”
“विजय दी ग्रेट!”
“क्षमा कीजिए, मेरे पास आपके नाम का कोई कार्ड नहीं है।”
“अजी जाओ भी मियां!” विजय ने अपने ही अन्दाज में हाथ नचाकर कहा—“तुम क्या हमारी साली लगती हो जो हमसे मजाक कर रही हो, भला ऐसा भी कभी हो सकता है कि हमारा लूमड़ शादी करे, राजनगर में कार्ड भी बंटवाए और हमें भूल जाए?”
“मैं मजाक नहीं कर रहा हूं मिस्टर विजय, ये सच है कि मेरे पास आपके नाम का कोई कार्ड नहीं है।”
विकास ने पूछा—“क्या तुम हमें सभी कार्ड दिखा सकते हो?”
“क्यों नहीं!” कहने के साथ ही मांगे खां ने सारे कार्ड जेब से निकाल लिए। विकास और उसके साथ ही रैना, रघुनाथ, मोन्टो और विजय ने भी सभी लिफाफे देखे, लिफाफे ब्लैक ब्वॉय, अशरफ, विक्रम, नाहर, परवेज आशा और ठाकुर साहब के नाम थे—सचमुच विजय के नाम का कोई लिफाफा उनमें नहीं था। केवल एक क्षण के लिए विजय के चेहरे पर अजीब-से भाव उभरे।
“इनमें तो सचमुच आपका कार्ड नहीं है गुरु!”
“लगता है अपना लूमड़ साला हमें भूल गया है।” कहने के साथ ही विजय ने सारे कार्ड मांगे खां को दिए और कहा— “तुम जाओ प्यारे मांगे खां, कहीं दूसरी जगह से मांगकर खाओ।”
मांगे खां सभी कार्ड अपनी जेब में रखकर वहां से चला गया।
सोचती-सी रैना बुदबुदा उठी—“अजीब बात है—अलफांसे भइया ने राजनगर में सभी को कार्ड भेजे हैं, लेकिन भइया को नहीं। ऐसा तो नहीं माना जा सकता कि वे इन्हें भूल गए होंगे।”
“अभी तुम उस साले लूमड़ को जानती नहीं हो रैना, एक नम्बर का छंटा हुआ है वह—उसने जान-बूझकर यह हरकत की होगा, खैर—पहले हम बाथरूम होकर आते हैं, तब सोचेंगे कि ऐसा उसने क्यों किया है।” कहने के बाद किसी का जवाब सुनने की कोई कोशिश किए बिना वह तेजी से अन्दर चला गया, बाथरूम के स्थान पर सीधा फोन पर पहुंचा—गुप्त भवन के नम्बर डायल किए और सम्बन्ध स्थापित होते ही बोला— “हैलो प्यारे काले लड़के।”
“हैलो सर!” पवन का चौकन्ना स्वर!
“मांगे खां नाम का एक व्यक्ति कुछ ही देर पहले सुपर रघुनाथ की कोठी से निकला है, यहां से वह सीधा शायद हमारे बापूजान की कोठी पर जाएगा, अशरफ से कहो कि वह मांगे खां को कैद कर ले।”
“ओ.के. सर, लेकिन आप बता सकेंगे कि चक्कर क्या है?”
“चक्कर नहीं प्यारे, हमें पूरा घनचक्कर नजर आ रहा है—कुछ ही देर बाद मैं गुप्त भवन पहुंच रहा हूं, वहीं बैठकर बातें करेंगे—हां, तब तक झानझरोखे को उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए।”
“क्या आप मांगे खां का हुलिया बता सकते हैं सर?”
विजय धीमें स्वर में मांगे खां का हुलिया बयान करने लगा।
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#14
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अलफांसे ने राजनगर में हम सबको कार्ड भेजे हैं, केवल आप ही को नहीं भेजा—यह तो सरासर आपका अपमान है सर, बहुत ही नीचता-भरी हरकत की है अलफांसे ने, इतना छिछोरा तो मैं उसे नहीं समझता था—छिः—नहीं सर, मैं किसी भी कीमत पर उसकी शादी में शरीक होने लंदन नहीं जाऊंगा!” गुप्त भवन के साउण्डप्रूफ कमरे में, चीफ वाली कुर्सी पर बैठा ब्लैक ब्वॉय अजीब-से भावावेश में कहता ही चला गया।
विजय के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान उभर आई, बोला—“तुम एकदम अलग और गलत लाइन पर सोच रहे हो प्यारे!”
“क्या मतलब सर?”
“सारी रामायण तुम्हें इसलिए नहीं सुनाई है कि तुम मेरे मान—अपमान के बारे में सोचने लगो!”
“मान-अपमान की तो बात है सर!”
“लेकिन हम उस बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं।”
“मैं समझा नहीं।”
“जरा सोचो, क्या तुम कभी कल्पना कर सकते हो कि लूमड़ शादी कर सकता है?”
“अगर आप सच पूछें तो मैं अभी तक इस सूचना पर यकीन नहीं कर पाया हूं।”
“क्यों?”
“अलफांसे के कैरेक्टर को देखकर बिल्कुल अविश्वसनीय बात महसूस होती है, किन्तु...।”
“किन्तु?”
“फिर सोचता हूं किसी अन्य को भला अलफांसे की शादी की अफवाह उड़ाने से क्या लाभ हो सकता है।”
विजय के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान उभर आई, बोला—“सबसे पहले तो यह बात दिमाग से निकाल दो प्यारे काले लड़के कि यह सुचना किसी अन्य ने भिजवाई है—सूचना चाहे सच हो या अफवाह, मगर ये बात पक्की है कि इसे यहां अपने लूमड़ ने भिजवाया है—सबूत है उसकी राइटिंग।”
“तो फिर अलफांसे को अपने बारे में अफवाह उड़ाने से क्या लाभ हो सकता है?”
“अगर वह लाभ ही समझ में आ जाए तो फिर बाकी बचेगा ही क्या प्यारे?” विजय कहता ही चला गया—“दुनिया में लूमड़ ही तो एकमात्र ऐसी चीज है, जिसके पैंतरों को समझने के लिए अक्सर हमारे दिमाग की मशीनरी के स्क्रू ढीले पड़ जाते हैं। उसने लिखा है कि इर्विन बहुत सुन्दर है, इतनी ज्यादा कि जिसे देखते ही वह उस पर फिदा हो गया—फिदा भी इस हद तक कि वह उससे शादी किए बिना नहीं रह सका, बोलो—क्या तुम अपने लूमड़ के लिखे इन शब्दों पर यकीन कर सकते हो?”
“दिमाग के अलावा इंसान के अन्दर दिल भी होता है सर—और इसमें शक नहीं कि यह दिल पता नहीं कब किस पर आ जाए—जब भावनाएं प्रबल होती हैं तो दिमाग को कुन्द कर देती हैं।”
“और ऐसी ही अवस्था में उसने शेष जीवन घर बसाकर शांति से गुजारने का फैसला कर लिया?”
“बहुत-से अपराधियों के साथ ऐसा पहले भी हो चुका है।”
“वे सिर्फ अपराधी रहे होंगे प्यारे, लेकिन लूमड़ अपराधी होने के साथ ही कुत्ते की पूंछ भी है और कुत्ते की पूंछ की विशेषता तो तुम जानते ही होगे—बारह बरस बाद भी जब नलकी से निकालोगे तो टेढ़ी ही निकलेगी—रही दिल की बात, तो हम दावा पेश कर सकते हैं कि अपना खुदा पहलवान लूमड़ के सीने में दिल नाम की वस्तु फिक्स करना भूल गया था, भूल तो उससे भी हो सकती है न?”
“पता नहीं आप क्या कहना चाहते हैं सर, मैं अभी तक नहीं समझ सका हूं?”
“जो कुछ उसने पत्र में लिखा है, भले ही उस पर सारी दुनिया यकीन कर ले, परन्तु हम यकीन नहीं कर सकते।”
“क्या आप इस सूचना को झूठ मान रहे हैं?”
“बिल्कुल नहीं।”
“क्या मतलब?” ब्लैक ब्वॉय लगभग उछल पड़ा।
“कार्ड के मुताबिक आज से पांचवें दिन उसकी शादी है और यदि उसने झूठी सूचना भेजी होगी तो अच्छी तरह जानता होगा कि पांचवें दिन उसका झूठ पकड़ा जाएगा और लूमड़ ‘सॉलिड’ झूठ तो बोल सकता है, ऐसा नहीं जो इतनी जल्दी पकड़ा जाए।”
“तो क्या आप यह मानते हैं कि वह सचमुच शादी कर रहा है?”
“फिलहाल ऐसा ही समझ लो।”
“तब फिर मुझे आपके द्वारा उसके पत्र में लिखी बातों पर सन्देह व्यक्त करने का अर्थ समझ में नहीं आया।”
“मामले के ऊंट की पूंछ पकड़ने की कोशिश करो प्यारे, हमारी बातों का अर्थ केवल इतना ही है कि यदि उसने सिर्फ अफवाह उड़ाई है तो उसे इन पांच दिनों के अन्दर इस अफवाह से कोई बड़ा लाभ होने वाला है और यदि वह सचमुच शादी कर रहा है तो निश्चय ही इस शादी के बाद उसे कोई लाभ होने वाला है—हमारी जानकारी के मुताबिक लूमड़ बेमकसद कोई काम नहीं करता और कम-से-कम शादी तो बेमकसद कर ही नहीं सकता।”
“शादी की खबर फैलाने या शादी करने से उसे क्या लाभ हो सकता है?”
“ऐसा भी हो सकता है कि इस बहाने वह तुम सबको किसी खास मकसद से लंदन बुलाना चाहता हो।”
“तो फिर उसने आपको क्यों नहीं बुलाया?”
“मुमकिन है कि अपना मकसद पूरा करने में उसे विशेष रूप से हमारी ही कोई जरूरत न हो।”
“ऐसा भला क्या मकसद हो सकता है, जिससे उसे हम सबकी, रैना बहन और आपकी मां तक की तो जरूरत है, लेकिन आपकी नहीं?”
“सबसे महत्वपूर्ण यही सवाल है और इसी सवाल का जवाब न मिलने की वजह से हमें इस सारे झमेले में किसी खतरनाक और गहरे षड्यंत्र की बू आ रही है और उसी बू के कारण हम कह रहे हैं, उसके द्वारा हमें कार्ड न भेजने की घटना को मान-सम्मान के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि इस दृष्टिकोण से देखना चाहिए कि ऐसा उसने क्यों किया?”
कुछ कहने के स्थान पर ब्लैक ब्वॉय ने इस बार सिगार सुलगाया।
विजय ने आगे कहा— “तुलाराशि, रैना और दिलजला भी यही कह रहे थे कि अलफांसे ने हमारा अपमान किया है, इसलिए वे लंदन नहीं जाएंगे।”
ब्लैक ब्वाय अजीब-से रोष भरे स्वर में कह उठा—“ठीक ही कह रहे थे वे।”
“तुम फिर बहक रहे हो प्यारे।” विजय मुस्कराया—“मामला लूमड़ का है इसलिए हमें हल्के-फुल्के ढंग से लेने के स्थान पर बहुत ही बारीकी से इसके हर प्वॉइंट पर गौर करना चाहिए।”
“जैसे?” ब्लैक ब्वॉय ने सिगार में एक कश लगाया।
“क्या उसने नहीं सोचा होगा कि यदि उसने हमें कार्ड नहीं भेजा तो हमारे इर्द-गिर्द के वे लोग भी कभी लंदन नहीं जाएंगे जिन्हें उसने कार्ड भेजा है?”
“यही तो दुख है कि उसने ऐसा नहीं सोचा।”
“तुम भूल कर रहे हो प्यारे काले लड़के!” विजय ने कहा—“हम नहीं मान सकते कि लूमड़ इतनी छोटी-सी बात न सोच सके।”
“अगर सोची थी तो उसने कार्ड क्यों नहीं भेजा?”
“क्योंकि दरअसल वह हमारे परिचितों में से किसी को बुलाना नहीं चाहता।”
विजय के इस वाक्य पर ब्लैक ब्वॉय विजय का चेहरा देखता रह गया, कुछ ऐसे अन्दाज में जैसे कुछ समझ न पाया हो, सिगार में एक कश लगाने के बाद बोला—“समझ में नहीं आता सर कि आज आप कैसी उखड़ी-उखड़ी, घुमावदार और विरोधी बातें कर रहे हैं—कभी कहते हैं कि वह किसी विशेष मकसद से आपके अलावा हम सबको वहां बुलाना चाहता है और कभी कहते हैं कि वह हममें से किसी को भी बुलाना नहीं चाहता।”
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#15
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“उसका नाम अलफांसे है प्यारे—एक घुमावदार व्यक्तित्व, इसलिए हमें भी उसके बारे में घुमावदार ढंग से सोचने की आदत पड़ जाती है—इतना तुम तय समझो कि इस शादी या शादी की मात्र खबर के पीछे वह कोई बहुत बड़ा खेल खेल रहा है—हमें कार्ड न भेजने के पीछे केवल उन्हीं दो में से कोई एक मकसद हो सकता है जिनका हम जिक्र कर चुके हैं। फिलहाल हम निर्धारित नहीं कर सकते कि इनमें से उसका मकसद क्या है और न ही यह जान सकते हैं कि वह क्या खेल खेल रहा है—इस खेल के बारे में जानने के लिए हमें चाहिए कि उसके उपरोक्त, सम्भावित दो में से किसी एक मकसद को भी पूरा न होने दें।”
“ऐसा भला आप किस तरह करेंगे?”
“शादी में शरीक होने लंदन हम सब जाएंगे, हम भी...!”
“अ...आप...बिना उसके बुलाए?”
बड़ी ही जानदार मुस्कराहट विजय के होंठों पर उभरी, बोला—
“यही तो वह कच्ची भावना है, जिससे हम सबको फंसाकर वह अपना उल्लू सीधा करना चाहता है।”
“मतलब?”
“वह जानता है कि इस भावना का शिकार होकर क्या तो मैं लंदन नहीं पहुंचूंगा या हममें से एक भी नहीं पहुंचेगा और इन्हीं दो में से किसी एक मकसद से उसने हमें कार्ड नहीं भेजा है!”
ब्लैक ब्वॉय निरुत्तर-सा हो गया, परन्तु फिर भी विजय की बातों से वह पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहा था, जबकि इस बात की कोई परवाह किए बिना विजय ने आगे कहा—“तुम कल सुबह तक हमारी लंदन यात्रा के लिए नकली पासपोर्ट और वीजा का प्रबन्ध करो!”
“क...क्या मतलब?” ब्लैक ब्वॉय उछल पड़ा।
“मतलब सीधा है प्यारे, हम नकली नाम और नकली चेहरे से कल लंदन जा रहे हैं।”
“म...मगर क्यों?”
“तुम लूमड़ की शादी या शादी की सूचना को सिर्फ साधारण ‘शादी’ के नजरिए से देख रहे हो, जबकि हमें यह सूचना या शादी किसी बहुत बड़ी साजिश के लिए गहराई से सोची गई कोई लम्बी और सुलझी हुई स्कीम दिखाई देती है—जो खेल इस सूचना के साथ लूमड़ ने शुरू किया है—उस खेल को समझने के लिए वक्त से पहले ही गुप्तरूप से हमारा लंदन पहुंचना जरूरी है।”
“ओह!” कहने के साथ ही ब्लैक ब्वॉय ने ढेर सारा धुआं उगला।
“दिलजले के अलावा किसी को पता नहीं लगना चाहिए कि हम राजनगर में नहीं हैं, उसके लिए खुद तुम्हें हमारी कोठी में ‘विजय’ बनकर रहना होगा!”
“ओ.के. सर!”
गुड!” विजय अचानक ही फुर्ती में और ज्यादा चौकस नजर आने लगा था, कुछ ऐसी अवस्था में जैसे उसकी समझ के मुताबिक कोई बहुत बड़ा अभियान शुरू हो चुका है, ब्लैक ब्वॉय के कुछ कहने से पहले ही उसने अगला सवाल किया—“अशरफ की रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई?”
“ज...जी—कह नहीं सकता, कुछ देर पहले आपके सामने ही तो उसने फोन पर बताया था कि उसने मांगे खां को पकड़ लिया है और तब मैंने आपके द्वारा बताए गए सवालों जवाब मांगे खां से मालूम करने का हुक्म दिया था!”
सुनकर विजय ने मेज पर रखे फोन का रिसीवर उठाया, नम्बर डॉयल किए और सम्बन्ध स्थापित होने पर पवन के-से भर्राए हुए स्वर में गुर्राया—“पवन हीयर!”
“मैं अशरफ बोल रहा हूं सर!” दूसरी तरफ से अशरफ का सतर्क एवं सम्मानित स्वर उभरा।
“रिपोर्ट।”
“काफी टॉर्चर के बाद भी मांगे खां हर बार यही कह रहा है सर कि कल शाम की डाक से उसे एक पार्सल मिला था, सभी लिफाफे उसके अन्दर थे—अलफांसे का उसके नाम एक पत्र भी था, जिसमें अलफांसे ने उसे सभी लिफाफे उन पर लिखे पत्तें पर पहुंचा देने के लिए लिखा था और उस पार्सल में से विजय के नाम का कोई लिफाफा नहीं निकला!”
विजय ने पवन के-से भर्राये हुए स्वर में ही पूछा— “तुम्हारे ख्याल से वह झूठ बोल रहा है या सच?”
“मेरे ख्याल से तो अगर वह झूठ बोल रहा होता तो इतने टॉर्चर के बाद टूट जाता सर!”
“ठीक है, क्या उसने वह पता बता दिया है, जिस पते पर उसे पार्सल मिला?”
“जी हां, मांगे खां का कहना है कि वह पिछले दस साल से उसी पते पर रहता है।”
एक क्षण विजय ने कुछ सोचने में गंवाया, अगले ही क्षण बोला—
“फिलहाल तुम मांगे खां को कैद किए रहो और उसके द्वारा बताए गए पते पर स्वयं जाकर पार्सल के अवशेष और उसके नाम लिखा गया अलफांसे का पत्र हासिल करने की कोशिश करो!”
“ओ.के. सर।”
“आशा से कहो कि वह पोस्ट ऑफिस जाकर मांगे खां के पते से सम्बन्धित डाकिए से मिले, मालूम करे कि कल शाम की डाक में मांगे खां के नाम कोई पार्सल आया था या नहीं—और यदि आया था तो कहां से, उसमें कितना वेट था, आदि!”
“मैं अभी फोन करके आपका आदेश आशा को दे देता हूं सर!”
“काम पूरा होते ही हमें रिपोर्ट देना और आशा से भी यही कहना!”
आदेश देने के बाद अशरफ की तरफ से किसी जवाब की प्रतीक्षा किए बिना विजय ने सम्बन्ध विच्छेद कर दिया।
इस बीच अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर बैठा ब्लैक ब्वॉय खामोशी के साथ सिगार का धुंआ उड़ाता रहा था, उसकी तरफ मुखातिब होकर विजय ने कहा— “तुम सभी लोगों के कार्ड के मुताबिक सही समय पर शादी में शामिल होने के लिए लंदन पहुंचना है—आज से चौथे दिन मैं लंदन ही से ट्रांसमीटर पर तुमसे सम्बन्ध स्थापित करूंगा, यदि कोई विशेष बात हुई या प्रोग्राम में मैंने किसी किस्म की रद्दोबदल आवश्यक समझी तो सूचित कर दूंगा।”
“ओ.के. सर!”
कुछ कहने के लिए विजय ने अभी मुंह खोला ही था कि मेज पर रखा इन्टरकॉम भिनभिना उटा, रिसीवर उठाते ही उसमें से आवाज आई—“एजेण्ट डबल एक्स फाइव आना चाहता है सर!”
“भेज दो!” कहकर ब्लैक ब्वॉय ने रिसीवर रख दिया और विजय से बोला—“विकास आ रहा है सर!”
“सही समय पर आ रहा है—सारी योजना उसे भी समझा देंगे!”
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10-23-2020, 12:53 PM,
#16
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
पृथ्वी से कई हजार फीट ऊपर, वायु में परवाज करता हुआ जो विमान तीव्र गति के साथ लंदन की तरफ चला जा रहा था, उसके गर्भ में बैठे यात्रियों में से एक भारतीय सीक्रेट सर्विस का भूतपूर्व चीफ विजय भी था, मगर इस वक्त वह जिस भेष में था, उसमें उसे स्वयं उसकी मां भी नहीं पहचान सकती थी।
वह एक गोरा-चिट्टा और हृष्ट-पुष्ट अंग्रेज नजर आ रहा था—चेहरे पर बायीं तरफ एक बड़ा-सा मस्सा, सुनहरे बालों की झुकी हुई मूंछें, सुनहरे रंग की फ्रेंचकट दाढ़ी और गहरी नीले रंग की आंखों वाले इस अंग्रेज की जेब में पड़े पासपोर्ट और वीसा के मुताबिक उसका नाम जेम्स ऐसन था।
मेकअप के प्रति विजय आश्वस्त था यानी उसे विश्वास था कि यदि अलफांसे की दृष्टि उस पर पड़ भी गई तो वह एकाएक ही उसे पहचान नहीं सकेगा—कार्ड पर लिखे पते के मुताबिक वह जानता था कि अलफांसे लंदन में ‘एलिजाबेथ’ होटल के रूम नम्बर सेवन्टी-वन में ठहरा है।
गुप्त भवन में बैठकर ही उसने विकास को भी सारी स्कीम समझा दी थी और इसी बीच आशा और अशरफ ने अपनी-अपनी रिपोर्ट्स गुप्त भवन भेज दी थीं। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, मांगे खां बिल्कुल सच्चा था और उसे पार्सल लंदन से ही मिला था—आश्वस्त होने के बाद उसने अशरफ को मांगे खां को छोड़ देने का हुक्म दिया था।
विजय को पूरा विश्वास था कि वह पार्सल अलफांसे ने ही भिजवाया है, सारे रास्ते वह अनुमान लगाने की भरपूर चेष्टा करता रहा, किन्तु समझ न सका कि आखिर अलफांसे ने किस उद्देश्य से शादी का यह ड्रामा रचा है और केवल उसी को कार्ड न भेजने के पीछे क्या रहस्य है?
तब, जबकि विमान ने लंदन की धरती को स्पर्श किया।
लंदन की घड़ियों में शाम के साढ़े पांच बज रहे थे।
वातावरण मैंनें अभी काफी प्रकाश फैला हुआ था—कस्टम से निपटने के बाद विजय ने टैक्सी पकड़ी और सीधा ‘एलिजाबेथ’ होटल पहुंचा—एलिजाबेथ की इमारत ‘टेम्स नदी’ के किनारे सीना ताने खड़ी बहुत-सी भव्य इमारतों में से एक थी—टैक्सी जिस वक्त ‘वेस्ट्मिनिस्टर’ पुल से गुजर रही थी, तब विजय ने झांककर ‘टेम्स’ के निर्मल जल की तरफ देखा—किश्तियों और स्टीमरों का काफिला वहां से देखने में बहुत ही सुन्दर लग रहा था।
टैक्सी से उतरते ही विजय सीधा काउण्टर पर पहुंचा, रूम के बारे में जानकारी प्राप्त की—काउण्टर क्लर्क ने उसे बताया कि उसे सेकण्ड फ्लोर पर कमरा मिल सकता है, उसने इंग्लिश में पूछा— “क्या फोर्थ फ्लोर पर कोई रूम खाली नहीं है?”
क्लर्क ने रजिस्टर देखने के बाद बताया—“सिक्स्टी सेवन आपको मिल सकता है।”
“चलेगा।” विजय ने कहा।
क्लर्क झुककर रजिस्टर के कॉलम भरने लगा, विजय ने बिना उसके पूछे ही स्पष्टीकरण दिया—“मैं टेम्स के किनारे बने किसी भी होटल का फोर्थ फ्लोर ही पसन्द करता हूं, क्योंकि इस फ्लोर पर स्थित प्रत्येक कमरे की खिड़की से टेम्स बहुत ही खूबसूरत नजर आती है।”
“साइन प्लीज।” क्लर्क ने मानो उसका कोई शब्द सुना नहीं था। विजय ने रजिस्टर में जेम्स ऐलन के नाम से हस्ताक्षर कर दिए।
वेटर के साथ अपने कमरे में पहुंचने के लिए उसे कमरा नम्बर सेवन्टी-वन के सामने से गुजरना पड़ा—विजय ने बहुत ध्यान से देखा, दरवाजे का लॉक बन्द था।
मतलब ये कि अलफांसे इस वक्त कहीं बाहर गया हुआ था।
कमरे में पहुंचने पर उसने वेटर से पन्द्रह मिनट बाद कॉफी लाने के लिए कहा और बाथरूम में घुस गया, नहाकर उसने सफर की थकान से मुक्ति पाई और दस मिनट बाद तैयार होकर उस खिड़की की तरफ बढ़ा जिधर से टेम्स नदी का नजारा देखा जा सकता था।
खिड़की खोलते ही नजारा आंखों के सामने था।
मन्द गति से बहता टेम्स का स्वच्छ जल—नदी किनारे, पिकनिक मनाने आए—रंग-बिरंगे वस्त्र पहने लोग—किनारे के आकर्षक स्टाल्स—खासी भीड़ थी—चौथी मंजिल से देखने पर वह सब बड़ा सुन्दर लगता था।
पिकनिक मना रहे लोगों पर फिसलती हुई विजय की दृष्टि अचानक ही एक जोड़े पर ठिठक गई, क्षणमात्र के लिए उसका दिल धक्क से रह गया और फिर आंखों में एक अजीब-सी चमक उभरती चली गई, वह स्वयं ही बुदबुदा उठा—“तो तुम यहां हो लूमड़ मियां।”
सचमुच वह अलफांसे ही था।
टेम्स की छाती पर एक छोटा-सा स्टीमर चला रहा था वह—बगल में एक लड़की बैठी थी, स्टीमर को बहुत ही मन्द गति से चला रहा था अलफांसे—स्टीमर के साथ-ही-साथ चलती हुई विजय की दृष्टि विशेष रूप से लड़की पर स्थिर हो गई—वह सचमुच लाखों में नहीं, करोड़ों में एक थी।
विजय ने अनुमान लगाया कि वह इर्विन ही होगी। अलफांसे ने अचानक ही अपना बायां हाथ स्टेयरिंग से हटाकर लड़की के गले में डाला, लड़की थोड़ी झुकी—अलफांसे भी झुका और फिर उनके होंठ जुड़ गए।
“उफ्फ लूमड़!” विजय ने झट् अपना हाथ आंखों पर रख लिया—
“अबे ये क्या हो गया है तुझे?”
मगर उसके ऐसा करने से भला अलफांसे या इर्विन पर क्या फर्क पड़ना था, वे काफी देर तक उसी प्रकार प्रेम-क्रीड़ा में मग्न रहे और खिड़की पर खड़ा विजय काठ के उल्लू की तरह उन्हें देखता रहा, चौंका तब जब कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज आई।
विजय घूमा!
कॉफी लिए कमरे में वेटर आया था।
“क्या देख रहे हैं साब?” वेटर ने शीशे की खूबसूरत ट्रे मेज पर रखते हुए पूछा।
“टेम्स नदी पर मौज लेने वालों के नजारे देख रहा हूं!”
“मौज तो आप भी ले सकते हैं सर, जो चाहें—सेवक आपकी सेवा में हाजिर कर सकता है।”
विजय उसका आशय समझ गया और तुरन्त ही उसके दिमाग में अलफांसे के बारे में जानकारी हासिल करने की तरकीब आ गई, उसने स्पष्ट शब्दों में पूछा—“लड़की मिलेगी?”
“क्यों नहीं साब, श्योर!” वेटर उत्साहित होकर बोला—“होटल की अलबम लाऊं?”
“नहीं, एलबम नहीं—इधर आओ!” उसने वेटर को खिड़की के नजदीक बुला लिया और फिर काफी मेहनत के बाद वह वेटर का ध्यान अलफांसे के स्टीमर पर केन्द्रित करने के बाद बोला—
“मुझे वह लड़की चाहिए!”
“राम-राम, ये आप क्या कह रहे हैं साब?” वेटर एकदम घबरा-सा गया—“व...वह तो इर्विन मेम साब हैं, फिर कभी ऐसा न कह दीजिएगा वरना अलफांसे साहब आपकी हालत बोगान से भी बदतर कर देंगे!”
“कौन अलफांसे?”
“आ...आप अलफांसे साहब को नहीं जानते?”
“नहीं तो, कौन है वो जिसे सबको जानना चाहिए?”
“क्या आपने सचमुच कभी अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे का नाम नहीं सुना?”
“हां-हां—वह नाम तो सुना है, देश-विदेश के अखबारों में यह पढ़ता रहा हूं, किन्तु तुम उसी अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे की बात कर रहे हो?”
“हां—वे ही तो वे हैं जो इस वक्त स्टीमर में इर्विन मेमसाब के साथ हैं।”
“ओह!”
विजय स्टीमर की तरफ देखता हुआ बोला—“अलफांसे का नाम तो बहुत सुना था, लेकिन देखने का मौका आज पहली बार ही मिला है लेकिन तुम इसके बारे में इतना सब कुछ कैसे जानते हो?”
“आजकल अपने होटल में ही तो रह रहे हैं ये।”
“ओह!” विजय सिर्फ इतना ही कहकर रुक गया। कमरा नम्बर नहीं पूछा उसने। उसे, मालूम भी था और वैसे भी वह वेटर से केवल ऐसे ही सवाल कर सकता था जैसे एक साधारण आदमी बात चलने पर जिज्ञासावश पूछ सकता है—वह महसूस कर रहा था कि वेटर अलफांसे से बहुत प्रभावित है और यहां हो रही बातों का जिक्र उससे कर सकता है, इसीलिए उसे वेटर से ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं करना था जो अलफांसे को अस्वाभाविक लगे। एक क्षण चुप रहकर उसने अगला सवाल किया—“कमाल है, अखबारों मैं तो अलफांसे के बारे में कुछ और ही पढ़ा था।”
“क्या पढ़ा था आपने?”
“यही कि अलफांसे एक आजाद शेर का नाम है, वह किसी की दासता में नहीं रह सकता—इसलिए उसने भी किसी देश की नागरिकता स्वीकार नहीं की—सारी दुनिया को वह दुनिया नहीं बल्कि इंसानों का जंगल कहता है और खुद को इस जंगल का शेर कहता है, इसके अलावा यह भी सुना था कि लड़कियों में वह बिल्कुल दिलचस्पी नहीं लेता।”
वेटर ने अजीब-सी रहस्यमय मुस्कान के साथ कहा—“आपने ठीक ही पढ़ा और सुना था।”
“मगर मैं स्टीमर में देख तो कुछ और ही रहा हूं और तुम भी कह रहे हो कि...”
“इसका मतलब आपको कुछ भी पता नहीं है।” अति उत्साहित वेटर उसका वाक्य पूरा होने से पहले ही शुरू हो गया—“सारा लंदन जानता है कि ये सब तब्दीलियां इर्विन ने ही उनमें ला दी हैं।”
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10-23-2020, 12:53 PM,
#17
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“क्या मतलब?”
“आपको तो पूरी कहानी ही सुनानी पड़ेगी। आइए, कॉफी ठंडी हो रही है।” कहने के साथ ही वेटर मेज की तरफ बढ़ा, विजय भी उसके पीछे था—वह गद्देदार सोफे में धंस गया—कुछ देर बाद कॉफी का कप विजय को देता हुआ वेटर बोला—“बोगान नामक गुंडे से सारा लंदन आतंकित था—बोगान के गुर्गे उसके आदेश पर इर्विन को किडनैप करके बोगान के लिए उसके अड्डे पर ले जा रहे थे कि मुकद्दर के मारों का रास्ते में ही अलफांसे साब से टकराव हो गया—इर्विन को बचाने के लिए वे बोगान के आदमियों से भिड़ गए। बेचारे गुर्गों को क्या मालूम था कि वे किससे भिड़ रहे हैं—उनकी हड्डी-पसलियां तोड़कर अलफांसे साब इर्विन मेमसाब को उनके चंगुल से निकाल तो लाए, परन्तु साथ में लड़की की तरफ ध्यान न देने वाले इर्विन के हाथों अपना दिल हार बैठे और आप तो जानते ही हैं साहब, इंसान जब दिल हार जाता है तो सब कुछ हार जाता है। जो कभी किसी कैद में नहीं रहा—उसे इर्विन की मुहब्बत की जंजीरें से ने जकड़ लिया।”
बहुत ध्यान से सुनते हुए विजय ने चुस्की ली और बोला—“फिर क्या हुआ?”
“होना ही क्या था, उस वक्त तो हम भी नहीं जानते थे कि ये वही अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे हैं, जिनके बारे में हम तरह-तरह की कहानियां सुनते रहे हैं। इधर अगले दिन इसी होटल में इनकी और इर्विन की मुलाकात हुई और अभी हॉल में बैठे ये बातें ही कर रहे थे कि होटल में गड़गड़ाता हुआ बोगान पहुंच गया। वह बहुत ही गुस्से में था—दस-पन्द्रह गुण्डे भी थे उसके साथ—होटल के अन्दर ऐसे रौद्र रूप में बोगान को देखते ही मैनेजर समेत होटल का सार स्टाफ बौखला उठा, हॉल में मौजूद लोग आतंकित हो गए और उस वक्त तो सारा स्टाफ ही कांप उठा, जब उसने उफनते हुए कहा कि वह हमारे होटल के सेवन्टी-वन नम्बर रूम में ठहरे यात्री को जिन्दा नहीं छोड़ेगा—तभी अलफांसे साहब ने स्वयं बोलकर उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया-उन्होंने बोगान को बताय कि मेरा नाम ही अलफांसे है—बस, फिर क्या था, दोनों में ठन गई-इर्विन सहित हॉल में मौजूद सभी के चेहरे पीले पड़ गए, परन्तु अलफांसे साहब बड़ी ही जानदार मुस्कराहट के साथ मुस्करा रहे थे—हम सबको उन पर तरस आया, क्योंकि हम समझ रहे थे कि अगले ही कुछ पलों बाद इस हॉल में उनकी लाश पड़ी होगी—मैनेजर साहब को अपने हॉल और फर्नीचर की टूट-फूट की फिक्र थी, इसलिए उन्होंने बोगान के कदमों में गिरकर अलफांसे को होटल से बाहर ले जाने की विनती की—मगर बोगाने ने एक न सुनी और मैनेजर साहब के जबड़े पर एक ठोकर मारी, उधर डर के मारे इर्विन का बुरा हाल था, वो बार-बार अलफांसे साहब से कह रही थीं कि वे बोगान से माफी मांग लें—किन्तु अलफांसे साहब ने इर्विन की तरफ संकेत करके बोगान से कह कि यही वह लड़की है जिसे उसके गुर्गे उसके पास ले जा रहे थे—अगर उसमें ताकत है तो खुद इर्विन को हाथ लगाकर दिखाए, अन्त ये कि बोगान और उसके सारे गुण्डे एक साथ अलफांसे साहब पर झपट पड़े, मगर वह दृश्य ऐसा था कि जिसने भी देखा उसी ने दांतों तले उंगली दबा ली-पन्द्रह मिनट बाद हॉल में चारों तरफ बोगान के आदमी बूरी तरह घायल और खून से लथपथ पड़े कराह रहे थे—उन्हीं में से एक बोगान भी था—इस बीच मैनेजर साब पुलिस को फोन कर चुके थे, परन्तु बोगान का नाम सुनकर पुलिस ने वहां आने से साफ इनकार कर दिया—अंत में बोगान बदला लेने की धमकी देकर वहां से चला गया, मगर अब हममे से कोई भी उसकी धमकी से नहीं डरा, हम सभी को वह धमकी बहुत खोखली लगी—यह बात हमारी समझ में आ गई कि वह अलफांसे साहब से कभी बदला नहीं ले सकेगा और वही बात हुई—आज तीन महीने गुजर गए हैं, बोगान को कभी किसी ने होटल के आसपास भी नहीं देखा है।”
“उसके बाद क्या पुलिस ने अलफांसे को नहीं पकड़ा?”
“पुलिस यहां आई थी, उस पर बोगान का काफी दबदबा था और शायद बोगान ने ही अलफांसे साहब को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को भेजा था, परन्तु तभी अलफांसे साहब के हक में मिस्टर गार्डनर स्टेनले का फोन आ गया और पुलिस इन्हें बिना गिरफ्तार किए ही लौट गई।”
“ये गार्डनर स्टेनले कौन हैं?”
“इर्विन मेमसाहब के पिता।”
“ओह, मगर—उनके कहने से भला पुलिस क्यों लौट गई?”
“वे स्वयं सिक्योरिटी विभाग में बहुत बड़े अधिकारी हैं, इस बीच इर्विन मेम साब ने सारा किस्सा, कोठी पर जाकर उन्हें बता दिया था और इसीलिए उन्होंने इनके हक में फोन किया।”
“फिर तो पुलिस ने बोगान को पकड़ लिया होगा?”
“कहते हैं कि गार्डनर साहब तो यही चाहते थे, परन्तु अलफांसे साब ने उनसे मना कर दिया, कहा कि अब वह कभी कम-से-कम इर्विन की तरफ नजर तक नहीं उठाएगा।”
“इस घटना के बाद तो इर्विन अलफांसे को और ज्यादा प्यार करने लगी होगी?”
“जी हां—बहादुर आदमी को भला कौन लड़की न चाहेगी, अलफांसे साहब तो उनसे पहले ही सब-कुछ हार चुके थे—वे हर रोज मिलने लगे, कभी होटल में, कभी होटल के बाहर—उसके बाद से अकसर उन्हें साथ ही देखा जाने लगा—और अब तो उनकी शादी होने वाली है।”
“शादी होने वाली है?”
“जी हां, अब तो केवल चार दिन रह गए हैं।”
“मगर एक अन्तर्राष्ट्रीय मुजरिम की शादी भला इतने बड़े ब्रिटिश अफसर की बेटी से कैसे हो सकती है?
“यह सवाल उठा था और स्वयं गार्डनर साहब ने ही उठाया था, अपनी बेटी से उन्होंने कहा था कि उसकी शादी एक मुजरिम से नहीं हो सकती, उन्होंने साफ इनकार कर दिया था, परन्तु इर्विन मेमसाब बहुत जिद्दी हैं—साथ ही गार्डनर साहब की आंख का तार भी—वे जिद पकड़ गईं, घोषणा कर दी कि अगर वे शादी करेंगी तो सिर्फ अलफांसे ही से—अगर बड़ों के आशीर्वाद से शादी न की गई तो वह बालिग हैं और खुद ही चर्च में जाकर अपनी पसन्द की शादी करने का अधिकार रखती हैं।”
“फिर?”
“बेटी की जिद के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा, परन्तु उन्होंने शर्त रखी कि अलफांसे को शादी से पहले ब्रिटिश नागरिकता स्वीकार करनी होगी और सरकार को यह लिखकर देना होगा कि वह अपराधों से भरी पिछली जिन्दगी को त्याग देगा और भविष्य में कोई ऐसा कृत्य नहीं करेगा जो सम्बन्धित देश के कानून के मुताबिक अपराध हो।”
“तो क्या अलफांसे ने यह शर्त स्वीकार कर ली?”
“इर्विन के कहने से, लेकिन थोड़ी रद्दोबदल करके।”
“कैसी रद्दोबदल?”
“उसने सरकार को केवल यह लिखकर दिया कि वह अपनी पिछली उस जिन्दगी से कोई सम्बन्ध नहीं रखेगा जिसे लोग अपराधों से भरी मानते हैं और कोशिश करेगा कि भविष्य में कोई आपराधिक कृत्य न करे, यदि हो जाए तो आम नागरिकों की तरह वह भी सजा का हकदार है।”
अलफांसे की चालाकी पर विजय का दिल खुलकर ठहाका लगाने को हुआ, किन्तु अपनी इस भावना को दबाकर तेजी से अगला सवाल करने के लिए अपना दिमाग घुमाने लगा, अभी वह कुछ सोच भी नहीं पाया था कि वेटर स्वयं ही बोला— “अब तो ईसा मसीह से यही दुआ है कि जल्दी से शादी का दिन आए, एक तरह से सारा लंदन इस शादी का इन्तजार कर रहा है।”
“ऐसी क्या विशेष बात है?”
“सारे लंदन में, बल्कि कहना चाहिए कि ब्रिटेन में चर्चा है—अलफांसे की शादी में शामिल होने के लिए अपराध जगत के बड़े-बड़े सूरमा यहां आएंगे—सिंगही, जैक्सन और टुम्बकटू की बहुत चर्चा है—सुना है कि सारी दुनिया के हर मुल्क के सर्वोच्च जासूसों से भी अलफांसे के बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं, वे सब यहां इक्ट्ठे होंगे—अमेरिका से जैकी, हैरी और माइक, रूस से बागारोफ, पाकिस्तान से—नुसरत और तुगलक, चीन से हुवांग, बंगला देश से रहमान और भारत से विजय तथा विकास की यहां के नागरिकों को बहुत प्रतीक्षा है।”
“क्या अलफांसे ने इन सबको बुलाया है?”
“सुना तो यही है।”
“तब तो मैं भी इस शादी को देखूंगा।” विजय ने कहा।
“सचमुच ये लाजवाब शादी होगी—वैसी ही लाजवाब जैसी भारतीय ग्रन्थों के मुताविक शंकर की शादी हुई थी।”
“शंकर की शादी?” ये ब्रिटिश वेटर बेचारा शंकर के बारे में क्या जान सकता था?
“छोड़ो!” विजय ने कॉफी समाप्त की, जेब से एक ‘पाउण्ड’ निकाला और वेटर को देता हुआ बोला—“मिस्टर अलफांसे से जिक्र मत करना कि मैंने तुमसे इर्विन के बारे में कुछ चाहत की थी।”
“बिल्कुल नहीं करूंगा सर!” वेटर ने जोरदार सैल्यूट मारा। मुस्कराते हुए विजय ने यह भी कह दिया—“मुझे बोगान की तरह अपनी हड्डियां नहीं तुड़वानी हैं।”
वेटर मुस्करा उठा, फिर जाने के लिए ट्रे उठाई और दरवाजे की तरफ बढ़ता हुआ एकाएक ही ठिठका, मुड़ा और बोला—“सॉरी सर, असली बात तो मैं भूल ही गया! एलबम लाऊं क्या?”
“नहीं, फिलहाल उसकी जरूरत नहीं है।”
वेटर चला गया। विजय ने फुर्ती से उठकर दरवाजा बन्द किया और लपकता-सा खिड़की के नजदीक पहुंचा—काफी देर तक वह टेम्स और उसके किनारे की भीड़ में पैनी नजरों से अलफांसे और इर्विन को तलाश करने की कोशिश करता रहा। लेकिन नाकाम रहा और जब उसे विश्वास हो गया कि अब वे उस भीड़ में नहीं हैं तो बुदबुदाया—‘अब’ कितनी देर तक हमारी तीरे नजर से बचकर रहोगे लूमड़ प्यारे—इस वेटर के आते ही हमने तुम्हारे बारे में सारी जानकारियां एकत्रित कर ली हैं और अब हम दावे के साथ कह सकते हैं कि तुम किसी बहुत ही लम्बे दांव की तैयारी में हो।’
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10-23-2020, 12:54 PM,
#18
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
दिमाग घुमाकर विजय यह सोचने की कोशिश कर रहा था कि अलफांसे आखिर किस चक्कर में हो सकता है। अचानक ही वह चुटकी बजाकर उठ खड़ा हुआ—जैसे कोई जंचने वाला विचार उसके दिमाग में आ गया हो—वह फुर्ती के साथ कमरे से बाहर निकला। उसने लॉक बन्द करके गैलरी पार की। अलफांसे के कमरे के लॉक को ध्यान से देखना वह नहीं भूला था। होटल से बाहर निकलने के बाद उसने सबसे पहले एक प्राइवेट टैक्सी किराए पर ली, पन्द्रह मिनट बाद यह टैक्सी उसने ‘पिकेडिली’ बाजार में स्थित रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान के बाहर रोकी—गाड़ी को लॉक करके दुकान के अन्दर गया और पन्द्रह मिनट बाद जब बाहर निकला तो हाथों में एक बड़ा-सा बण्डल था—बण्डल को उसने अगली सीट पर ही लापरवाही के साथ डाला और ड्राइविंग सीट पर बैठकर गाड़ी स्टार्ट कर दी।
तीस मिनट बाद यह प्राइवेट टैक्सी एक सुनसान सड़क के एक तरफ फुटपाथ पर खड़ी थी और विजय कपड़े चेंज कर रहा था— दस मिनट बाद ही उसके जिस्म पर ऐसे कपड़े थे जैसे अक्सर लंदन के थर्ड क्लास गुण्डे पहना करते हैं।
चुस्त जीन, चमड़े की जैकेट और गले में लाल स्कार्फ!
चेहरे पर उसने कोई परिवर्तन नहीं किया—शीशे में स्वयं को देखकर संतुष्ट हुआ और फिर गाड़ी स्टार्ट कर दी—इस बार बीस मिनट बाद गाड़ी उसने एक रेस्तरां के पार्किंग में खड़ी की।
लॉक करके वो पैदल ही एक तरफ को बढ़ गया।
अब उसकी चाल में बिल्कुल किसी थर्ड क्लास गुण्डे जैसी चाल थी। लापरवाही और आवारगी-से बाहों को झटक-झटककर चल रहा था वह, शीघ्र ही वह ‘डिम स्ट्रीट’ के इलाके में पहुंच गया— विजय जानता था कि यह इलाका लंदन के थर्ड क्लास गुण्डों का गढ़ है—जैसे-जैसे वह स्ट्रीट के अन्दर दाखिल होता गया, वैसे-ही-वैसे उसे इधर-उधर मंडराते अपने ही जैसे लिबास के छोकरे नजर आने लगे, वह अकड़कर अजीब-सी टसन में चल रहा था।
उसकी इस दादागिरी वाली चाल को कई गुण्डों ने देखा भी परन्तु किसी ने कुछ कहा नहीं—एक पनवाड़ी की दुकान पर कई गुण्डों की एक टुकड़ी-सी खड़ी थी, जाने क्या सोचकर विजय उसी तरफ बढ़ गया और दुकान के काउण्टर पर बहुत जोर से घूंसा मारकर बोला—“एक सिगरेट।”
घूंसा उसने इतनी जोर से मारा था कि आसपास खड़े गुण्डे उसे घूरने लगे।
सहमे-से पनवाड़ी ने उसे एक सिगरेट दे दी—विजय ने थर्ड क्लास गुण्डे की तरह ही सिगरेट जलाई और कश लगाने के बाद ढेर सारा धुआं उगला, जेब से एक सिक्का निकालकर काउण्टर पर पटका और घूम गया, गुण्डे उसी को देख रहे थे—उनसे नजर मिलते ही विजय को जाने क्या सूझा कि उसने उनको आंख मार दी।
वे सारे ही सकपका गए।
अपने होंठों पर व्यंग्य भरी मुस्कान बिखेरता हुआ विजय आगे बढ़ गया।
“ऐ मिस्टर!” होश आने पर उनमें से एक ने विजय को पुकारा।
विजय एकदम इस तरह जूते की एड़ी पर फिरकनी के समान घूम गया जैसे, उसके आवाज लगाने ही का इन्तजार कर रहा था, होंठों के बीच सिगरेट लटक रही थी—मुंह से बोलने के स्थान पर उसने उपेक्षित से अन्दाज में ‘भवों’ का उपयोग करके पूछा—“क्या बात है?”
गुण्डे के जबड़े कस गए थे, इलाके में उस नए व्यक्ति की अकड़ और अपने प्रति उसके उपेक्षित अन्दाज ने उसे उत्तेजित-सा कर दिया था, दोनों कूल्हों पर हाथ रखे वह टकराने कै लिए तैयार जैसी स्थिति में विजय के सामने पहुंचा, दाएं-बाएं उनके गुर्गे इशारा मिलते ही झपटने के लिए तैयार खड़े थे।
गुण्डे ने विजय के होंठों से सिगरेट निकालकर एक तरफ फेंक दी। एक पल पहले ही कश लगाने के कारण विजय के मुंह में धुआं था, जिसे उसने पूरी लापरवाही के साथ सामने खड़े गुण्डे के चेहरे पर झोंक दिया, बोला— “साले पनवाड़ी ने कड़वी सिगरेट दे दी।”
गुण्डे की आंखें सुर्ख हो गईं, गुर्राया—“कौन हो तुम?”
“हैमेस्टेड!”
“कौन हैमेस्टेड?”
“जरा-सी गलती होने पर एक कत्ल करता पकड़ा गया, सुबह ही जमानत पर छूटा हूं।”
“इधर क्यों घूम रहे हो?”
“मैं जहां चाहे घूमता हूं—किसी के बाप की सड़क नहीं है।”
विजय का इतना कहना था कि गुण्डे ने झपटकर दोनों हाथों से उसका गिरेबान पकड़ लिया, गुर्राया—“डिम स्ट्रीट पर मैं तुम्हें पहली बार देख रहा हूं।”
विजय आराम से बोला—“इधर पहली बार ही आया हूं।”
“अगर तुम ‘डिम स्ट्रीट’ से जिन्दा वापस जाना चाहते हो तो तुम्हारे लिए मुझे जानना जरूरी है।”
“बता दो।” विजय ने लापरवाही से कन्धे उचकाए।
“मेरा नाम ‘हैम्ब्रीग’ है और ‘डिम स्ट्रीट’ पर वही होता है जो मैं चाहता हूं।”
“मुझे उसकी तलाश थी, जिसकी इस इलाके में सबसे ज्यादा चलती हो।” उसकी बात पर कोई ध्यान दिए बिना विजय ने कहा—“तुम कहते हो तो मान लेता हूं कि यहां तुम्हारी ही चलती है—और इसीलिए पूछ रहा हूं कि बोगान कहां मिलेगा?”
बोगान का नाम सुनते ही हैम्ब्रीग के चेहरे पर चौंकने के भाव उभरे, एक पल के लिए सकपका गया वह—किन्तु अगले ही पल गुर्राया—
“बोगान गुरु का नाम इज्जत से लो।”
“मैंने पूछा है कि बोगान कहां मिलेगा?”
हैम्ब्रीग ने बड़ी तेजी से सिर की टक्कर विजय की नाक पर मारनी चाही, लेकिन उससे पहली ही विजय न केवल झुक चुका था, बल्कि नीचे से एक घूंसा उसने हैम्ब्रीग के पेट में भी जड़ दिया था।
गिरेबान छोड़कर एक चीख के साथ हैम्ब्रीग विजय के ऊपर से होता हुआ पीछे जा गिरा।
दांए-बाएं खड़े गुण्डे अभी भौंचक्के-से ही थे कि विजय के दोनों हाथों के घूंसे उनके चेहरों से टकराए-चीख के साथ वे भी अपनी-अपनी दिशाओं में जा गिरे।
इसके बाद—पनवाड़ी की दुकान के सामने सड़क पर ही मानो फ्री-स्टाइल कुश्ती का अखाड़ा बन गया—विजय के हाथ-पैर बिजली की-सी गति से चलने लगे, हैम्ब्रीग और उसके साथी रह-रहकर विजय पर झपट रहे थे और विजय हर बार उन्हें उछालकर दूर फेंक देता था।
धीरे-धीरे सड़क पर भीड़ जमा हो गई, परन्तु भीड़ में से किसी ने भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया—सपाट चेहरा लिए सभी उस लड़ाई को इस तरह देखते रहे मानो वे बाकायदा रिंग में लड़ रहे हों—मुश्किल से दस मिनट बाद, हैम्ब्रीग और उसके साथी जख्मी अवस्था में इधर-उधर पड़े कराह रहे थे—कुछ देर तक विजय विजेता के-से भाव से चारों तरफ देखता रहा, जैसे कह रहा हो कि यदि कोई और हो तो वह भी आ जाए, किन्तु कोई आगे नहीं आया।
विजय सड़क पर कराह रहे हैम्ब्रीग की तरफ बढ़ा, नजदीक पहुंचा—पूरी निर्दयता के साथ बूट की ठोकर उसकी पसलियों में मारी और बोला—“तुमने बोगान का नाम इज्जत से लेने के लिए कहा था, इससे जाहिर है कि तुम उसके चमचे हो—उससे कहना कि मैं उसे केवल दस मिनट में पांच हजार पाउंड का फायदा करा सकता हूं, अगर चाहे तो कल इसी समय इसी जगह मुझसे मिल ले।”
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10-23-2020, 12:54 PM,
#19
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
‘वाह लूमड़ बेटे, इस बार अजीब ही चक्कर चलाया है तुमने—तुम हसीन, नाजनीन और सुन्दरता की पुड़िया के साथ जाने कहां बैठे इश्क की पैंतरेबाजी झाड़ रहे होगे और हम यहां तुम्हारे इन्तजार का खट्टा-मीठा गुड़ खा रहे हैं।’ जिस वक्त बुदबुदाकर विजय स्वयं ही से कह रहा था, उस वक्त रात का एक बजा था—होटल की गैलरी में पूरी तरह सन्नाटा व्याप्त था।
हां, छत पर लगे फैन्सी बल्ब का प्रकाश गैलरी में जरूर बिखरा हुआ था।
उसका कमरा सेवन्टी-वन से थोड़ा हटकर, सामने वाली ‘रो’ में था—अपने कमरे की लाइट ऑफ कर रखी थी उसने, दरवाजे का एक किवाड़ बन्द तथा दूसरा खुला छोड़ दिया था।
वह खुले किवाड़ के समीप ही कुर्सी डाले बैठा था।
वह स्वयं अंधेरे में था, जबकि यहां से अलफांसे के उस बन्द कमरे का दरवाजा स्पष्ट चमक रहा था—डिम स्ट्रीट से रेस्तरां के पार्किंग में खड़ी कार लेकर वह पुनः एक सुनसान सड़क पर गया था, कपड़े बदलकर जिस वक्त वह होटल में पहुंचा था, उस वक्त दस बज रहे थे।
हॉल में डिनर लेने के बाद वह अपने कमरे में आ गया था।
तभी से वह यहां बैठा अलफांसे के लौटने का इन्तजार कर रहा था, उसके देखते-ही-देखते इस फ्लोर पर ठहरे अधिकांश यात्री अपने कमरों में बन्द हो चुके थे।
उस वक्त सवा बजा था जब गैलरी में पदचाप गूंजी। विजय सतर्क होकर बैठ गया और फिर गैलरी में गूंजी सीटी पर कोई अंग्रेजी धुन, अगले ही पल गैलरी में उसे अलफांसे नजर आया, सीटी बजाता हुआ वह बहुत ही मस्त, चाबी के छल्ले को उंगली में डाले घुमाता हुआ अपने कमरे के दरवाजे पर ठिठका ।
जिस वक्त वह थोड़ा झुककर लॉक खोल रहा था, उस वक्त विजय बुदबुदाया—“लूट लो लूमड़ प्यारे जिन्दगी के शाही मजे, तुम भी लूट लो, हिन्दी फिल्म के रोमांटिक हीरो से ज्यादा अच्छी एक्टिंग कर रहे हो।”
वह बुदबुदाता ही रह गया, जबकि अलफांसे कमरे के अन्दर चला गया, दरवाजा अन्दर से बोल्ट होने की आवाज सुनते ही विजय अपने कमरे से गैलरी में आ गया।
बिल्ली के समान दबे पांव आगे बढ़ा।
गैलरी में पूरी तरह खामोशी की हुकूमत थी।
दरवाजे के समीप पहुंचकर वह झुका और ‘की होल’ से आंख सटा दी—अन्दर की लाइट ऑन होने की वजह से कमरे का दृश्य साफ नजर आ रहा था—विजय के देखते-ही-देखते उसने कपड़े उतारे, बाथरूम में गया और दो मिनट बाद ही टॉवल से चेहरा और हाथ पोंछता हुआ बेड तक आया—टॉवल उसने उछालकर एक तरफ फेंका और दो तकिए बेड की पुश्त से लगाकर अधलेटी अवस्था में बैठ गया।
विजय लगातार ‘की होल’ से आंख सटाए उसे देख रहा था।
अलफांसे ने साइड ड्राअर खोली, उसमें से एक किताब निकाली—किताब के अन्दर से एक फोटो और फिर किताब को एक तरफ रखने के बाद अलफांसे एकटक उस फोटो को देखने लगा, जिसकी केवल पीठ ही विजय को चमक रही थी—सारी दुनिया से बेखबर अलफांसे सिर्फ और सिर्फ उसी फोटो में खोया हुआ था, इस वक्त अलफांसे के चेहरे पर दीवानगी नाच रही था, चेहरे के कोने-कोने पर दीवानगी के असीमित चिह्न थे—ऐसे, जिन्हें देखकर विजय बुरी करह चौंक पड़ा— दिल में विचार उठा कि—“तुम तो सचमुच काम से गए लगते हो लूमड़ बेटे!”
विजय समझ सकता था कि यह फोटो केवल इर्विन का ही हो सकता है!
उस वक्त तो विजय को अपने सारे ही विचारों का महल टूट-टूटकर बुरी तरह से बिखरता हुआ-सा महसूस हुआ, जब उसने अलफांसे को किसी पागल दीवाने की तरह उस फोटो को चूमते देखा।
फोटो पर चुम्बनों की झड़ी-सी लगा दी थी उसने।
इस क्षण विजय को लगा कि अलफांसे इर्विन के प्रति बहुत ही गम्भीर है, वह सचमुच इर्विन से प्यार करता है और सच्चे दिल से उससे शादी करना चाहता है—विजय को लगा कि वह व्यर्थ ही शक कर रहा है, अलफांसे के शादी के फैसले के पीछे कोई स्कीम, कोई साजिश नहीं है।
“इर्वि!” अलफांसे की बहुत ही धीमी आवाज उसके कानों में पहुंची, पूरी दीवानगी में डूबा वह धीमे स्वर में फोटो से कह रहा था—“ये तुमने मुझे क्या कर दिया है इर्वि—मैं, जैसे मैं ही न रहा—जब तुम पास नहीं होतीं, तब कुछ भी तो अच्छा नहीं लगता-खाना, पहनना, उठना—बैठना-नींद तक नहीं आती मुझे—अपने पिछले जीवन में मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कोई लड़की इस कदर मेरी कमजोरी बन जाएगी—मेरी इस दीवानगी पर मेरे पुराने साथी हंसेंगे इर्वि-वे कहेंगे कि नहीं, मैं वह अलफांसे नहीं हूं, मगर...मगर मैं क्या करूं—अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता—तुम्हें गंवाकर एक सांस भी तो नहीं ले सकता मैं.....।”
कहने के बाद वह पुनः फोटो को चूमने लगा।
फिर फोटो को उसने अपने सीने पर रखा, उसके ऊपर दोनों हाथ रख लिए और खुली आंखों से कमरे की छत को निहारने लगा—वह सब कुछ देखकर ‘की होल’ से सटी आंख में जमाने-भर की हैरत उभर आई—इसमें शक नहीं कि विजय की हालत बड़ी अजीब हो गई थी।
काफी देर तक अलफांसे उसी पोज में पड़ा रहा, फिर हाथ बढ़ाकर उसने बेड स्विच ऑफ कर दिया—कमरा अंधेरे में डूब गया। अंतिम बार विजय ने फोटो को अलफांसे के सीने पर ही रखे देखा था।
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10-23-2020, 12:54 PM,
#20
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
अपने कमरे में लौटने और बिस्तर पर लेटने तक विजय के दिलो-दिमाग में अलफांसे के कमरे का दृश्य ही चकराता रहा, दीवानगी से भरा अलफांसे का चेहरा, उसके शब्द आदि सभी कुछ कम-से-कम विजय के लिए एकदम अविश्वसनीय थे—अपनी आंखों से देखने के बाद भी वह उस सब पर यकीन नहीं कर पा रहा था—जेहन में तरह-तरह के विचार और शंकाएं उभरने लगीं।
उसे लग रहा था कि वह व्यर्थ ही अलफांसे के सीधे-सीधे फैसले पर सन्देह करके परेशान हो रहा है—वैसा कुछ भी नहीं है जैसा सोचकर वह यहां आया था—ऐसा भी तो हो सकता है कि सचमुच अलफांसे में चेंज आ गया हो, तर्क के रूप में—किसी लड़की के प्रति प्यार की बहुत-सी कहानियां दिमाग में चकराने लगीं—ऐसी कहानियां जिनमें सुदरियों ने बड़े-बड़े तपस्वियों की तपस्या भंग कर दी थी।
किन्तु फिर उसे अलफांसे के कैरेक्टर का ख्याल आता और बस, यहीं आकर उसे लगने लगता कि यह सब कुछ कोई बहुत गहरा नाटक है, किसी महत्वपूर्ण और बहुत बड़े मकसद को पूरा करने के लिए अलफांसे यह ड्रामा कर रहा है। लेकिन अगर यह ड्रामा है तो बन्द कमरे में अलफांसे की उस दीवानगी को क्या कहा जाए?
जाने कितनी रात तक विजय इन्हीं सब उलझनों में घिरा रहा, परन्तु बिना किसी विशेष परिणाम पर पहुंचे सो गया— सुबह को आंख खुलते ही उसने दरवाजा खोला।
देखकर संतोष हुआ कि अलफांसे अपने कमरे में ही है। वेटर से मंगाकर उसने 'बेड टी' ली, उसके बाद बाथरूम में घुस गया— नित्यर्मों से फारिग होकर अभी वह कमरे में आया ही था कि उसके दरवाजे पर दस्तक हुई।
विजय एकदम सतर्क हो गया।
वेटर को उसने कॉल नहीं किया था और यहां उसके पास किसी अन्य के आने का प्रश्न ही नहीं था, इस बीच दुबारा दस्तक हुई तो सतर्क होकर विजय ने कह दिया—“कम इन!”
दरवाजा खुला, आने वाला होटल का मैनेजर था।
“गुड मॉर्निग मिस्टर ऐलन!” मैनेजर ने मोहक मुस्कान के साथ कहा।
“मॉर्निग, कहिए!”
“यदि बुरा न मानें तो मैं आपसे पूछने आया था कि आप कितने दिन यहां रहेंगे?”
“मतलब?”
“आपने लंदन में सुना ही होगा कि तीन दिन बाद मिस्टर अलफांसे और इर्विन की शादी है!”
विजय ने बहुत ही सतर्कतापूर्वक जवाब दिया—“हां, सुना तो है।”
“मिस्टर अलफांसे शादी यहीं से कर रहे हैं, बात दरअसल यह है कि इस शादी में सारी दुनिया के खूंखार अपराधी और महान जासूस लंदन आ रहे हैं, उन सबके आवास के लिए, परसों से एक हफ्ते तक के लिए सारा होटल मिस्टर अलफांसे ने बुक करा रखा है—यदि आपको यहां ज्यादा दिन तक रहना हो तो हम किसी शानदार होटल में आपके लिए व्यवस्था कर दें?”
“यह बात मुझे पहले तो नहीं बताई गई?”
“सॉरी सर, काउण्टर क्लर्क की इस भूल के लिए मैं आपसे क्षमा चाहता हूं।” सारी बातें मैनेजर ने कुछ ऐसी नम्रता के साथ की थीं कि विजय कुछ न कह सका, वैसे भी—वह कोई असाधारण व्यवहार करके व्यर्थ ही अलफांसे का ध्यान अपनी तरफ खींचने के पक्ष में नहीं था, अतः बोला—“ठीक है, मैं परसों सुबह ही यह कमरा खाली कर दूंगा!”
“थैंक्यू सर, उम्मीद है कि असुविधा के लिए आप हमें क्षमा कर देंगे!” कहने के बाद मैनेजर चला गया, ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ा होकर विजय बाल संवारने लगा।
तीस मिनट बाद वह तैयार होकर कमरे से बाहर निकला।
अलफांसे के कमरे के सामने से निकलते हुए उसने कनखियों से देखा, अलफांसे को तैयार होता देखकर उसने अनुमान लगाया कि कुछ ही देर बाद वह भी कमरे से निकलने वाला है—उसका इन्तजार करने के लिए हॉल में पहुंचकर वह एक सीट पर बैठ गया और नाश्ते का ऑर्डर दे दिया।
कुछ देर बाद अलफांसे भी हॉल में आ गया।
संयोग से एक समीप वाली सीट पर ही वह बैठ गया। हालांकि अलफांसे का ध्यान उसकी तरफ बिल्कुल नहीं था, किन्तु फिर भी विजय कुछ इस तरह बैठ गया कि अलफांसे बहुत गौर से उसका चेहरा न देख सके—वैसे अलफांसे रह-रहकर अपनी कलाई पर बंधी रिस्टवॉच पर नजर डाल रहा था।
विजय ने अनुमान लगाया कि वह इन्तजार कर रहा है, शायद इर्विन का।
समय गुजरने के साथ ही अलफांसे की बेचैनी बढ़ने लगी, अब वह हर दो मिनट बाद समय देखता और फिर हॉल के मुख्य द्वार की तरफ देखने लगता!
उस वक्त अलफांसे का चेहरा खिल उठा जब अचानक ही इर्विन हॉल में दाखिल हुई, अलफांसे एकदम अपनी सीट से खड़ा होता हुआ प्रसन्नता की अधिकता के कारण लगभग चीख पड़ा।
“हैलो इर्वि!”
“हैलो!” वह फुदकती हुई-सी अलफांसे की तरफ बढ़ी। इस वक्त अलफांसे के चेहरे पर जो भाव थे, वे ठीक वैसे ही थे जैसे किसी बच्चे के चेहरे पर मनपसन्द ‘कॉमिक्स’ देखकर उभरते हैं और इन भावों ने विजय के दिमाग में एक बार फिर इस भावना को प्रबल किया कि अलफांसे इर्विन को दिल की गहराइयों से प्यार करने लगा है।
इधर, इसमें भी शक नहीं कि इर्विन को देखते ही विजय जैसे व्यक्ति का दिल भी धक्क से रह गया। इर्विन को दूर से और पास से देखने में बहुत फर्क था!
वह वाकई बहुत खूबसूरत थी।
इतनी ज्यादा कि बहुत देर तक लगातार उसके चेहरे की तरफ देखा भी नहीं जा सकता था, अभी विजय अपने विचारों में ही खोया हुआ था कि—
“आज तुम दस मिनट लेट हो इर्वि।”
“शुक्र मनाओ आशू कि आज मैं आ गई हूं, डैडी तो आने ही नहीं दे रहे थे।”
“क्यों?”
“कह रहे थे कि अब हमारी शादी के सिर्फ तीन दिन रह गए हैं। और शादी के दिन का चार्म बनाए रखने के लिए अब हमें मिलना नहीं चाहिए, बहुत जिद करके इस शर्त पर मिलने आई हूं कि कल से नहीं मिलेंगे—शादी से पहले आज हम आखिरी बार मिल रहे हैं!”
अलफांसे के चेहरे से लगने लगा कि उसका सब कुछ लुट गया है।
विजय बहुदबुदाया—“ये साला इश्क भी क्या चीज है, आदमी का अच्छा-भला नाम भी आधा रह जाता है—प्यार में लोग शायद आधे नाम ही पुकारते हैं—हमने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने लूमड़ का नाम अलफांसे से ‘आशू’ भी हो सकता है और इस लड़की ने तीन ही महीने में लूमड़ का नाम भी बदल दिया और फिर अपना लूमड़ भी तो साला कम नहीं है—इश्क के सभी पैंतरे सीख गया है, अच्छी-भली इर्विन को इर्वि कहता है!”
“तुम इतने उदास क्यों हो गए—आशू डार्लिंग?” इर्विन की आवाज विजय के कानों में पड़ी।
विजय ने कनखियों से अलफांसे की तरफ देखा, उसका चेहरा लटका हुआ था, इर्विन की आंखों में झांकता हुआ वह बोला—“मैं ये तीन दिन कैसे गुजारूंगा इर्वि?”
“पगले!” इर्विन ने प्यार से कहा—“इतने उतावले क्यों हुए जा रहे हो, तीन दिन में मैं भाग तो नहीं जाऊंगी?”
“तुम समझती क्यों नहीं इर्वि?” लगा अलफांसे मानो रो पड़ेगा—“तुम्हारे बिना अब मैं एक क्षण भी गुजारने की कल्पना नहीं कर सकता।”
“आशू!” इर्विन भाव-विभोर हो उठी—“अगर सच पूछो तो मेरी भी यही हालत है, लेकिन...।”
“लेकिन क्या?”
“सोचती हूं कि डैडी भी ठीक ही कह रहे हैं, गोल्डन नाइट का चार्म बनाने के लिए हमें अपने बीच ये तीन दिन की दूरी पैदा करनी ही चाहिए!”
विजय ने अलफांसे के जवाब पर ध्यान नहीं दिया, दरअसल अलफांसे इस वक्त जिस किस्म की बातें कर रहा था, उन्हें विजय सुनना भी नहीं चाहता था—उसे नहीं लग रहा था कि यह वही अलफांसे है जिससे वह परिचित था, विजय को वह कोई दूसरा ही व्यक्ति लगा।
क्या इर्विन ने सचमुच अलफांसे में इतना परिवर्तन ला दिया है?
उनकी प्रेमवार्ता विजय को अजीब-सी लगी, किन्तु आज वह सारे दिन उनका पीछा करके यह टोह लेने का निश्चय कर चुका था कि ये कहां जाते और क्या करते हैं—वे वहां से उठे। विजय पीछे लग गया।
फिर वे ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट गए, वहां से रीजेण्ट स्ट्रीट और पेरीकोट मार्केट—इसके बाद वे ब्रिटेन के बहुत बड़े कवि कीट्स के घर गए। वहां उन्होंने कीट्स का ऐतिहासिक निजी घर—उसके पत्र, पुस्तकें और उससे सम्बन्धित दुर्लभ वस्तुएं देखीं।
इसके बाद के ‘ब्रिटेन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन’ गए और विशाल इमारत के स्टूडियो में घूमने लगे—वे मस्त थे जबकि विजय को लगने लगा था कि यदि वह अब और ज्यादा देर उनके पीछे लगा रहा तो पागल हो जाएगा।
सुबह से ही वह बहुत सावधानी के साथ उनके पीछे था और इस वक्त पांच बज रहे थे, विजय ने अवसर मिलने पर उनकी प्रेमवार्ता सुनने और मूर्खों की तरह सारा लंदन घूमने के अलावा कुछ भी नहीं किया था—और अब उसे लगने लगा था कि वह अपना समय बरबाद कर रहा है।
वे न तो फिलहाल एक-दूसरे से विदा लेने वाले हैं और न ही होटल की तरफ लौटने वाले हैं, दिमाग में यह विचार आते ही जाने उसे क्या सूझा कि उन्हें वहीं छोड़कर बी.बी.सी. की इमारत से बाहर निकल आया और आपनी प्राइवेट टैक्सी को ड्राइव करता हुआ होटल पहुंचा।
फोर्थ फ्लोर की गैलरी बिल्कुल सूनी पड़ी थी।
उसने आगे-पीछे देखा और अलफांसे के कमरे के सामने रुक गया, जेब से ‘मास्टर की’ निकाली और लॉक को खोलने में इस तरह जुट गया जैसे यह उसका अपना कमरा हो।
लॉक खोलने में उसे कठिनाई से दो मिनट लगे।
अन्दर पहुंचकर उसने दरवाजा बन्द कर लिया और फिर बाकायदा कमरे की तलाशी लेने में जुट गया। सबसे पहले उसने बेड की साइड ड्राअर ही खोलकर देखी—ड्राअर में वही किताब रखी थी।
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