Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
10-23-2020, 01:02 PM,
#31
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“धड़ाम!” अचानक ही एक कर्णभेदी विस्फोट ने सारे लंदन को हिला डाला!
हर व्यक्ति कांप उठा, हरेक के जिस्म में मौत कि सिहरन दौड़ गई—जो लोग नशे में धुत थे, उनके नशे हिरन हो गए—बैण्ड बन्द हो गए, बजाने वाले कुछ इस तरह डर गए थे कि उन्हें बजाने की सुध ही न रही—यह धमाका ठीक तब हुआ था, जबकि बारात एक प्रमुख चौराहे पर पहुंची।
अलफांसे ने सेहरा हटाकर ऊपर देखा। उस तरफ, जिधर समूचा जनसमूह देख रहा था—एक बहुमंजिली इमारत की छत पर किसी मिनी तोप की नाल नजर आ रही थी, सशस्त्र पुलिस—बारात और भीड़ में मौजूद ब्रिटिश जासूस अचानक ही सतर्क और सक्रिय नजर आने लगे।
“कौन है वहां!” एक अफसर चीख पड़ा।
जवाब में पहले जैसा ही एक और कर्णभेदी विस्फोट गूंजा। तोप की नाल के सिरे पर भयंकर ज्वाला लपलपाती नजर आई—नाल का मुंह आकाश की तरफ था, इसलिए गोला अन्तरिक्ष में जाकर फटा!
हवा में चिंगारियां बिखर गईं। इस एक ही मिनट में सारा वातावरण आतंक और दहशत से भर गया— सशस्त्र जवानों के शस्त्र तोप की तरफ तन गए थे, इससे पहले कि कोई तोप की तरफ फायरिंग करे, अलफांसे चीख पड़ा— “किसी को घबराने या आतंकित होने की जरूरत नहीं है, ये शायद मेरा कोई मेहमान है!”
उसका वाक्य पूरा होने तक तीसरा धमाका हुआ और इसके बाद जो हुआ उसे दर्शक मंत्रमुग्ध-से देखते रह गए। आकाश में चिंगारियों ने दो नाम लिख दिए थे।
अलफांसे वेड्स इर्विन!
चिंगारियों से बने ये दोनों नाम उसी तरह आकाश में वायु के वेग के साथ बह रहे थे जैसे आतिशबाज के द्वारा छोड़े गए बारूद से आकाश में माला बन जाती है!
चमत्कृत-से दर्शक अभी उन दोनों नामों को देख ही रहे थे कि गन की नाल का मुंह सड़क की तरफ हुआ। कोई चीखा—“बचो, इस बार बम बारात पर दागा जा रहा है!”
मगर उसका वाक्य पूरा होते ही—
‘फट्ट’ की एक जोरदार आवाज!
तोप की नाल से एक गठरी-सी निकलकर सड़क की तरफ लपकी और किसी के कुछ समझने से पहले ही खुलकर सड़क पर आ गई और तब दर्शकों ने किसी चमत्कार की तरह बैण्ड वालों के बीचोबीच लहरा रहे टुम्बकटू को देखा—हां, वह टुम्बकटू ही था—चन्द्रमा का वासी, गन्ने-सा पतला और सांप के समान गोल एवं लचीली हड्डियों का मालिक-जिस्म पर वही टैक्नीकलर कोट था!
ऐसा महसूस होता ता जैसे कोट हैंगर पर जूल रहा हो!
“मुबारक हो अन्तर्राष्ट्रीय मुजरिम, शादी मुबारक हो!”
टुम्बकटू के मुंह से बिगड़े हुए रेडियो की-सी आवाज निकालकर सारे वातावरण में गूंज गई!
“ओह!” बागारोफ चीख पड़ा—“तो ये तू है चिड़ी के छक्के!”
“बिल्कुल हम ही हैं बन्दापरवर!” टुम्बकटू ने अजीब-सी मुसकान के साथ कहा और बैण्ड वालों की तरफ मुखातिब होकर बोला— “बन्द क्यों कर दिया, बजाओ—ये गाना कि आज मेरे यार की शादी है!”
यह गाना तो बैंड वालों को नहीं आता था, लेकिन उन्होंने बैण्ड बजाना शुरू जरूर कर दिया और उस अंग्रेजी धुन पर टुम्बकटू मस्त होकर नाचने लगा—वातावरण पुनः धमाकों से पहले जैसा ही हो गया— उछलते-कूदते बाराती गार्डनर स्टेनले के निवास स्थान की तरफ बढ़ने लगे। अब बारात में एक और शैतान की वृद्धि हो गई थी।
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विचित्र और अपनी किस्म के अलग ही लोगों से भरी बारात गार्डनर स्टेनले के निवास स्थान से एक मोड़ इधर तक ही पहुंच पाई थी कि विजय को कुछ अजीब-सा लगा, बहुत ही ध्यान से उसने किसी आवाज को सुनने की चेष्टा की और कुछ समझते ही उसकी आंखें चमकने लगीं।
वह एक ही जम्प में अलफांसे की घोड़ी पर चढ़ गया तथा घोड़ी की पीठ पर खड़ा होकर जोर से चीखा—“अबे ये ढोल-तबला बन्द कर दो, हमारी मम्मी आ रही है!”
कई बार चीखने पर बैण्ड बन्द हो गया।
वातावरण में संगीत की तरंगें गूंज रही थीं—ऐसा मधुर संगीत कि मुर्दे भी झूम उठें—मदहोश कर देने वाली संगीत ध्वनि—अलफांसे सहित हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध-सा हो गया।
यह संगीत जैक्सन के आगमन का प्रतीक था!
जैक्सन यानी प्रिंसेज ऑफ मर्डरलैण्ड!
संगीत की इन तरंगों में कुछ ऐसा जादू था कि सुनने वाले मदहोश हो जाते थे—इंसान के दिलो-दिमाग में उतर जाती थीं वे धुन—और हर व्यक्ति उस वक्त उसी संगीत की मदहोशी में था जब एकाएक ही टुम्बकटू चीख पड़ा— “आह, आ जाओ मेरी प्यारी स्वप्न सुन्दरी—मैं, तुम्हारा दीवाना भी यहीं हूं!”
सभी दर्शक प्रिंसेज जैक्सन को देखने के लिए बेताब हो उठे।
“व...वो...वो रही प्रिंसेज जैक्सन!” कोई चीख पड़ा। और उस वक्त सभी भौंचक्के रह गए, जब लोगों ने प्रिंसेज जैक्सन को देखा—अलफांसे के ठीक ऊपर हवा में एक मुखड़ा चमक रहा था!
सौन्दर्य को भी लजा देने वाली सुन्दरी का मुखड़ा।
गोल, एवं गोरा चेहरा, बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें, कमानीदार भवें, सुतवां नाक, पतले-पतले गुलाबी होंठ वाली जैक्सन के माथे पर बिंदिया लगी थी, भाल पर मुकुट—अनगिनत हीरों से जड़ा!
दर्शकों को हवा में तैरता केवल उसका मुखड़ा ही चमक रहा था। हरेक व्यक्ति खोया-सा, हवा में तैरते उस मुखड़े को देखता रह गया।
तभी संगीत की लहरों में एक तेज झमाका!
दर्शकों की तंद्रा टूटी।
हवा में ही जैक्सन के हाथ नजर आए और फिर उसके हाथों से निकलकर ताजा गुलाब की बेशुमार पंखुड़ियां हवा में उड़ती हुई अलफांसे के ऊपर आ गिरीं!
घोड़ी अगले पैर ऊपर उठाकर हिनहिनाई।
किसी ने इस पुष्पवर्षा पर ताली बजाई तो मदहोश-सा सारा जनसमूह ताली बजा उठा—तालियों की गड़गड़ाहट से सारा वातावरण गूंज उठा, जब ये गड़गड़ाहट रुकी तो लोगों ने जैक्सन के होंठों को हिलते देखा और साथ ही सुनी जैक्सन की मधुर आवाज—“इर्विन मुबारक हो अलफांसे!”
“शादी में शामिल होने के लिए धन्यवाद प्रिंसेज!” घोड़ी पर बैठे अलफांसे ने ऊंची आवाज में कहा।
एकाएक ही विकास चीख पड़ा— “तुम तो क्राइमर अंकल से मुहब्बत करती थीं न आण्टी, क्राइमर अंकल तो इर्विन से शादी कर रहे हैं—अब आपका क्या होगा?”
प्रिंसेज जैक्सन के होंठों पर अजीब-सी दर्द भरी मुस्कान उभरी, इस मुस्कान को सभी ने देखा और उसके आशय को पहचाना, फिर वहां प्रिंसेज की आवाज गूंजी—“मनचाही हर मुराद कम-से-कम इस दुनिया में पूरी नहीं होती!”
“अरे, उदास क्यों होती हो स्वप्न सुन्दरी!” एकाएक गन्ने की तरह लहराकर टुम्बकटू कह उठा—“हम जो हैं, तुम्हारे दीवाने—एक बार हुक्म करके देखो, आसमान से चांद-तारे तोड़ लाऊंगा!”
जवाब में प्रिंसेज जैक्सन के होंठों से निकलकर एक खनखनाता हुआ कहकहा मानो सारे लंदन में गूंज गया और इस मधुर कहकहे का अंत होते-होते लोगों ने जैक्सन को घोड़ी के नजदीक खड़ी पाया।
दर्शक जाने कौन-सी दुनिया में खोए सिर्फ उसी को देख रहे थे।
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#32
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बारात स्टनले गार्डनर के द्वार पर पहुंच गई—निवास स्थान के सामने बारातियों ने जमकर जश्न मनाया और बैण्ड के बीच से तभी हटे जब थककर चूर हो गए—बैण्ड बन्द हो गया और वरमाला का कार्यक्रम शुरू!
अलफांसे ने इर्विन के गले में माला डालने के लिए हाथ बढ़ाए ही थे कि अचानक एक साथ सारे लंदन की लाइट गुल हो गई—चारों तरफ अंधेरा छा गया!
थोड़े-से गैस के हण्डों का प्रकाश वहां जरूर था। मगर, जितना प्रकाश लाइट जाने से पहले था उसके मुकाबले इस प्रकाश को अंधेरा ही कहा जाएगा—माला डालते हुए अलफांसे के हाथ रुक गए—हर व्यक्ति जहां-का-तहां ठिठक गया!
एक तरफ से थोड़ा-सा शोर उभरा, अफरा-तफरी फैली!
“अरे ये क्या हुआ, कोई लाइट हाउस फोन करो!” अंधेरे में एक आवाज गूंजी और अभी इस आवाज के आदेश का पालन करने के लिए शायद किसी ने एक कदम भी नहीं बढ़ाया था कि वातावरण में अजीब ‘गुआं-गुआं’ की आवाज गूंजने लगी!
डरावनी और भयानक-सी आवाज!
मौजूद व्यक्तियों के जिस्म में झुरझुरी दौड़ गई—लोग भयभीत हो गए, आंतक-सा छा गया चारों तरफ—डरी-सी इर्विन अंधेरे का लाभ उठाकर अलफांसे से लिपट गई।
‘गुआं-गुंआ’ की आवाज तेज होती चली जा रही थी।
इतनी तेज कि कानों के पर्दे तक झनझनाने लगे, हर तरफ एक अजीब-सी दहशत फैल गई—उस वक्त विजय कनातों से बने एक अंधेरे हॉल में खड़ा था, अचानक ही कनात के दूसरी तरफ से उसे किसी की आवाज आई—“कंट्रोलरूम से रिपोर्ट लो ग्राडवे, कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई इस डरावनी आवाज और अंधेरे की आड़ में कोहिनूर तक पहुंचना चाहता हो!”
“ओ.के. सर!” दूसरी आवाज ने कहा।
इतना सुनते ही विजय की आंखें हीरो के समान चमकने लगी थीं, उसने कनात से कान अड़ा दिया और दूसरी तरफ से उभरने वाली आवाजों को सुनने का प्रयास करने लगा, परन्तु दो व्यक्तियों के उपरोक्त दो वाक्यों के अलावा वह कुछ भी नहीं सुन सका—वह ये भी नहीं जानता था कि वे दो वाक्य किस-किसने बोले थे—हां इतना जरूर जान गया था कि उनमें से एक का नाम ग्राडवे था!
विजय ग्राडवे के कहे गए वाक्य का अर्थ समझने की कोशिश कर रहा था, उधर अंधेरे में अलफांसे से लिपटी इर्विन बुरी तरह कांप रही थी। धीरे से अलफांसे उसके कान में फुसफुसाया—“डरो नहीं इर्वि, यह शायद मेरे एक और मेहमान सिंगही के आने की सूचना है!”
“य...ये आपके कैसे-कैसे दोस्त हैं, जो आने से पहले दहशत फैला देते हैं?”
अलफांसे ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था कि भयंकर गर्जना के साथ दाईं तरफ पड़े थोड़े-से खाली स्थान पर नीली-पीली संयुक्त आग का एक शोला-सा लपलपाया!
इर्विन अलफांसे से अलग हट गई।
दाईं तरफ छोटी-सी, आग की लपटें उगलती हुई मीनार नजर आ रही थी—देखते-ही-देखते आग की लपटें छोटी पड़ने लगीं और अन्त में गुम हो गईं और ये लपटें उस इंसानी जिस्म में ही गुम हुई थीं जो इस वक्त अंधेरे के कारण सिर्फ एक परछाईं के रूप में नजर आ रहा था।
उसकी सिर्फ आंखें चमक रही थीं, जैसे लाल रंग के दो छोटे बल्ब टिमटिमा रहे हों और फिर एक झमाके के साथ लाइट जिस तरह गई थी उसी तरह अचानक आ गई।
चारों तरफ दिन का-सा प्रकाश फैल गया। दायीं तरफ खड़े व्यक्ति पर नजर पड़ते ही न चाहते हुए भी इर्विन के कंठ से एक जोरदार चीख उबल पड़ी और ऐसा केवल उसी के साथ नहीं हुआ था, बल्कि सिंगही को देखते ही चीख पड़ने वाले और भी कई व्यक्ति थे।
वह सिंगही था!
हर तरफ से आवाजें उभरने लगीं कि सिंगही आ गया है!
इस वक्त उसके पतले होंठों पर मुस्कान थी।
हाथों में खुशबूदार फूलों के दो गजरे लिए वह मोहक ढंग से मुस्काराने की भरपूर चेष्टा कर रहा था, अब इसमें वह क्या करे कि यह मुस्कान उसे और ज्यादा डरावना ही बना रही थी!
सहमी-सी इर्विन अभी तक उसे देख रही थी।
“घबराओ मत इर्विन बेटी!” सिंगही ने अपनी भयानक आवाज को मधुर बनाने की भरसक, किन्तु असफल कोशिश की, वह कह रहा था— “मैं अलफांसे का दोस्त हूं, उस नाते तो तुम मेरी कुछ और ही लगीं, परन्तु उम्र के हिसाब से तुम मेरी बेटी जैसी हो, इसलिए तुम्हें बेटी ही कहूंगा!”
इर्विन चाहकर भी कुछ बोल न सकी, जुबान मानो तालू में चिपक गई थी।
“ये देखो, मैं तुम्हारे ले गजरे लाया हूं—दिली इच्छा है कि वरमाला बनकर तुम्हारे गलों में यही पड़ें!”
अलफांसे ने इर्विन से कहा— “डरो नहीं इर्वि, सिंगही से गजरा ले लो।”
सिंगही पर ही दृष्टि गड़ाए इर्विन साहस करके आगे बढ़ी—यह बात उसकी समझ में बिल्कुल नहीं आ रही थी कि आग की वे लपटें इस व्यक्ति के जिस्म में समाकर कहां गुम हो गईं?
सिंगही का शरीर, या ये गजरे जलकर राख क्यों नहीं हो गए?
आगे बढ़कर सिंगही ने गजरे अलफांसे और इर्विन को दिए।
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शादी का धूम-धड़ाका लगभग खत्म हो चुका था और अब स्टेनले गार्डनर की लम्बी-चौड़ी कोठी के विशाल हॉल में डिनर चल रहा था, किन्तु विजय के दिमाग में वे ही चन्द शब्द गूंज रहे थे, जो उसने सिंगही के आगमन पर कनात के पीछे से सुने थे।
उन चन्द शब्दों से जितना अर्थ वह निकाल चुका था, उससे संतुष्ट न हो पा रहा था, और जितना वह समझ रहा था उससे ज्यादा समझना चाहता था।
“किन्तु कैसे?
तरकीब उसके दिमाग में नहीं आ रही थी।
“हैलो विजय!” अचानक ही वह जेम्स बाण्ड की आवाज सुनकर उछल पड़ा।
एकदम हड़बड़ा गया विजय, किन्तु शीघ्र ही संभलकर बोला—
“हेलो बाण्ड प्यारे!”
“क्या सोच रहे थे!”
“सोच रहा था प्यारे कि साली हथिनी के पेट से हाथी, शेरनी के पेट से शेर, चुहिया के पेट से चूहा, और औरत के पेट से आदमी पैदा होता है तो मुर्गी के पेट से मुर्गे की जगह अण्डा क्यों पैदा होता है?”
उसकी इस बात पर जेम्स बाण्ड तो केवल मुस्कराकर ही रह गया, जबकि उसके साथ आए अधेड़ आयु के व्यक्ति के मुंह से बरबस ही जबरदस्त ठहाका उबल पड़ा और उसके यूं हंसने पर विजय मूर्खौ की तरह पलकें झपका-झपकाकर उसे देखने लगा!
जी भरकर हंसने के बाद वह बोला—“अजीब दिलचस्प आदमी हैं आप!”
और, इस आवाज को सुनते ही विजय के कानों में घण्टियां-सी बजने लगीं, निस्सन्देह यह उन्हीं दो आवाजों में से एक थी, जो उसने कनात के दूसरी तरफ से सुनी थीं।
“ये ही मिस्टर विजय हैं, भारतीय जासूस—और विजय, ये इर्विन के पिता हैं—मिस्टर स्टेनले गार्डनर!”
विजय ने गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया।
बाण्ड मिस्टर गार्डनर को अगले मेहमान से मिलाने ले गया, परन्तु विजय वहां हक्का-बक्का-सा ही खड़ा रह गया और जब खड़ा भी न रह सका तो धम्म से समीप पड़ी कुर्सी पर गिर पड़ा।
यह बात वह दावे के साथ कह सकता था कि उन दो में से एक आवाज गार्डनर की थी—जिसने ओ.के. सर कहा था, उसका नाम ग्राडवे था—मतलब ये कि ग्राडवे को हुक्म देने वाला गार्डनर ही था।
‘कंट्रोल रूम’ क्या बला है?
‘इस कंट्रोल रूम का कोहिनूर से क्या सम्बन्ध है?’
इसी किस्म के अनेक सवाल उसके दिमाग में चकराने लगे और अचानक ही से यह ख्याल आया कि गार्डनर के मेहमानों में से उसे ग्राडवे को तलाश करना चाहिए!
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10-23-2020, 01:02 PM,
#33
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रात के तीन बजे थे!
फेरे बस खत्म ही होने वाले थे—अब गार्डनर की कोठी पर भीड़ अपेक्षाकृत काफी कम थी—उसके ज्यादातर मेहमान जा चुके थे और अलफांसे के भी अधिकांश मेहमान वहां से जाकर होटल एलिजाबेथ के अपने-अपने कमरों में सो चुके थे। फेरों पर चन्द ही लोग रह गए थे। और वे चन्द लोग थे—विजय, विकास, रैना, हैरी, जूलिया और बागारोफ—गार्डनर की तरफ से बाण्ड अभी तक वहीं नजर आ रहा था।
फेरे समाप्त हुए, इर्विन और अलफांसे फेरों से अभी उठे ही थे कि!
“ख...खून...खून!” एक वेटर हलक फाड़कर चिल्लाता हुआ वहां आया।
सभी चौंक पड़े, गार्डनर ने पूछा—“क्या हुआ, क्यों चीख रहे हो?”
“शा...शाब खून—किसी ने खून कर दिया है!”
“क...क्या बकते हो?” बाण्ड गुर्रा उठा—“कहां खून हो गया है?”
“शाब...शाब—वहां कनातों के पीछे—एक अंधेरे कोने में किसी की लाश पड़ी है!”
बागारोफ चीख पड़ा— “अबे ठीक से बताता क्यों नहीं है। हुड़कचुल्लू—किसकी लाश है?”
“म...मुझे नहीं मालूम शाब!”
“चलो, हमें दिखाओ लाश!” बाण्ड ने कहा और फिर वे सब वेटर के पीछे-पीछे चल दिए, इर्विन हक्की-बक्की-सी वहीं खड़ी रह गई थी, जबकि अलफांसे भी गार्डनर आदि के साथ ही वेटर के पीछे चल दिया था—वेटर कनात और शामियानों से बने हॉलों की बैक साइड से गुजरता हुआ उन्हें लॉन के पिछले हिस्से के एक कोने में ले गया।
इस कोने में प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी, किन्तु ऐसा अंधेरा भी नहीं था कि हाथ को हाथ सुझाई न दे—दूर रोशन बल्बों और ट्यूब्स का बहुत ही धुंधला प्रकाश यहां था।
“व...वो देखिए शाब, वो रही लाश!” सचमुच, लॉन की घास पर एक इंसानी जिस्म चित्त अवस्था में पड़ा था, उसके सीने में धंसे चाकू की मूठ भी नजर आ रही थी, परन्तु प्रकाश कम होने की वजह से शक्ल पहचान में नहीं आ रही थी।
“किसी के पास टॉर्च है?” विजय ने पूछा।
सभी चुप रहे, मतलब साफ था कि टार्च किसी के पास नहीं थी, गार्डनर ने ऊंची अवाज में कहा— “किसी फोकस वाले तेज वॉट के बल्ब की रोशनी इधर घुमवाओ!”
“अभी करता हूं।” कहकर एक व्यक्ति तेजी से वापस भाग गया। काफी देर तक अंधेरे में वे सभी गुमसुम-से खड़े रहे जैसे कहने के लिए किसी को कुछ सूझ ही न रहा हो, अचानक ही बाण्ड को इस समय का सदुपयोग करने की बात सूझी और उसने एकदम डपटकर वेटर से पूछा— “तुम्हें कैसे पता लगा कि इधर कोई लाश पड़ी है?”
“शा....शाब, मैं यहां पेशाब करने आया था!”
“पेशाब करने तुम यहां क्यों आए थे, लॉन में कई जगह टॉयलेट बनाए गए हैं!”
“श...शाब, मैं वहीं—उस हॉल में क्रॉकरी संभाल रहा था!” वेटर ने शामियाने से बने सबसे नजदीक वाले हॉल की तरफ इशारा करके कहा—“मुझे पेशाब आया, टॉयलेट हॉल से काफी दूर था—भीड़ भी कम थी और इधर अंधेरा भी था— मैंने सोचा कि यहीं...।”
“यहां आकर तुमने क्या देखा?”
“श...शाब, यहां पहुंचने के बाद मैं पतलून के बटन खोलने लगा, अभी मुश्किल से एक ही बटन खोल पाया था कि मेरी नजर इस जिस्म और सीने में गड़े खंजर पर पड़ी—बिजली की तरह मेरे दिमाग में यह बात कौंध गई कि किसी ने किसी का खून कर दिया है—यह बात दिमाग में आते ही मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई शाब, मेरे होश उड़ गए और मैं खून-खून चिल्लाता हुआ यहां से भागा!”
वेटर के शब्द पूरे होने तक किसी ने दूर लगे फोकस का रुख इधर घुमा दिया था।
अंधेरे में डूबा सारा बाग एकदम प्रकाश से नहा गया और यही वह क्षण था जब गार्डनर के कंठ से चीख–सी निकल पड़ी—“अरे, यह तो ग्राडवे है!”
“ग...ग्राडवे?” विजय उछल पड़ा— “क...कौन ग्राडवे?”
“ओह माई गॉड!” कहने के साथ ही मिस्टर गार्डनर किसी फिरकनी के समान बड़ी तेजी से घूमे और बिना किसी से एक लफ्ज भी कहे लगभग भागते हुए वहां से चले गए। उनकी इस हरकत पर वहां खड़े अन्य सभी हक्के-बक्के से खड़े रह गए।
“ये आखिर साला चक्कर क्या है, वह चोट्टी का यहां से क्यों भाग गया?” बागारोफ गरजा।
विकास वेटर के सामने पहुंचकर झुका, बहुत ध्यान से उसने वेटर की पतलून के बटन देखे और अगले ही पल सीधा खड़ा होता हुआ बोला—“सबसे निचला बटन खुला है, बाकी सब बन्द!”
“इसका मतलब वेटर सच बोल रहा है।” अलफांसे बुदबुदाया। विजय के चेहरे पर अजीब-से चिह्न थे, ग्राडवे की लाश को अपलक घूरे जा रहा था वह, जबकि बाण्ड बड़ी बारीकी से लाश और उसके आसपास की स्थिति का निरीक्षण करता हुआ लाश की तरफ बढ़ा।
“पता नहीं ये कौन है और इसकी हत्या किसने, किस मकसद से की है?” रैना बुदबुदाई।
“हम चपरकनाती साले जहां भी जाते हैं, वहीं ये चक्कर शुरू हो जाते हैं—अच्छा-खासा खुशी का माहौल था कि इस लाश ने सारा गुड़गोबर कर दिया, अब पता लगाते रहो कि किस पान के इक्के ने इस हुक्म के गुलाम को इस अंधेरे में खींचकर चाकू मार दिया?”
“इसे चाकू यहां नहीं मारा गया है चचा!” लाश का निरीक्षण करते हुए बाण्ड ने कहा।
“क्या बकता है अंग्रेजी दुमछल्ले?” बागारोफ गुर्रा उठा—“अबे चाकू अगर कहीं और मारा गया था तो लाश क्या उड़कर यहां आ गिरी?”
“उड़कर नहीं चाचा, हत्यारा अपने कन्धे पर लादकर लाश को यहां तक लाया!”
“बात समझ में नहीं आई बाण्ड भइया!” जूलिया बोली।
बाण्ड के साथ ही लाश का निरीक्षण करते हुए हैरी ने कहा—
“बाण्ड अंकल ठीक कह रहे हैं, घास पर जख्म से निकले खून का कोई निशान नहीं है, मतलब साफ है कि जब तक लाश यहां पहुंची, तब तक जख्म से खून बहना बन्द हो चुका था—और इस बात से दो नतीजे निकलते हैं, पहला ये कि हत्यारे ने खून आसपास ही कहीं किया और लाश खून करने के काफी देर बाद लाकर यहां डाली या जहां खून किया गया है वह जगह ही यहां से इतनी दूर है कि लाश के यहां पहुंचने तक जख्म से खून बहना बन्द हो गया।”
“पैरों कै निशान बहुत स्पष्ट तो नहीं हैं, मगर जहां-जहां हत्यारे के पैर पड़े हैं, वहां की घास दबकर टूट जरूर गई हा-निशान केवल एक ही व्यक्ति के पैर के हैं—मकतूल के जूतों का यहां कोई निशान नहीं आया—जो पदचिह्न हैं, वे बताते हैं कि हत्यारा लॉन की ये दीवार फांदकर यहां आया, लाश को यहां डालकर वापस उसी रास्ते से लौट गया।”
“लेकिन बाण्ड भइया, क्या कोई व्यक्ति लाश को कन्धे पर डाले लॉन की दीवार फांदकर इधर आ सकता है?”
“कैसी बच्चों जैसी बातें कर रही हो रैना बहन, ये बात अगर तुमने साधारण स्थिति में कही होती तो निश्चय ही वजनदार थी, क्योंकि वाकई किसी साधारण व्यक्ति के लिए लाश को कन्धे पर डालकर ये दीवार फांदना कठिन काम है, परन्तु आज—कम-से-कम आज की रात यह बात कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि...।”
“क्योंकि?”
“सारी दुनिया के चुने हुए अपराधी और जासूस यहां हैं, उनमें से अधिकांश ऐसे हैं जिनके लिए लाश कन्धे पर लादकर दीवार को फांद लेना हंसी-खेल है।”
“उनमें से भला कोई इस अपरिचित की हत्या क्यों करेगा?”
जेम्स बाण्ड के होंठों पर फीकी-सी मुस्कान दौड़ गई, बोला—
“अनजाने में तुम मुझसे इस कत्ल की वजह पूछ रही हो रैना बहन और मैं कोई जादूगर नहीं हूं, जो बिना किसी सबूत के वजह बता दूं—अगर इनवेस्टिगेटर को हत्या की वजह पता लग जाए तो फिर हत्यारा उससे बहुत ज्यादा दूर नहीं रह जाता, मगर जब तक वजह पता नहीं लगती तब तक इनवेस्टिगेटर को अपने इर्द-गिर्द का हर आदमी हत्यारा ही नजर आता है।”
“अगर ये सच है बाण्ड प्यारे कि हत्यारे ने कत्ल कहीं और करके लाश यहां पहुंचाई है तो निश्चय ही इस हरकत के पीछे उसका कोई मकसद होगा, मकसद भी कोई बहुत ही महत्वपूर्ण!” विजय ने पूछा।
अलफांसे ने सवाल किया—“महत्वपूर्ण क्यों?”
“शादी का घर है, माना कि यह कोना सुनसान और अंधेरे में डूबा पड़ा था, किन्तु इस बात की बहुत ज्यादा सम्भावना थी कि वेटर की तरह इधर जाने कब कौन निकल आए और हत्यारा भी यह बात अच्छी तरह जानता होगा यानी वह समझता होगा कि उसे लाश यहां लाते या लाश को छोड़कर जाते कोई भी देख सकता है—फिर भी लाश को यहां पहुंचाने के लिए उसने यह जबरदस्त रिस्क लिया—स्पष्ट है कि लाश को यहां पहुंचाने के पीछे उसका कोई अत्यंत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा होगा।”
“हत्यारे का वह महत्वपूर्ण उद्देश्य क्या हो सकता है?”
“यह तो हत्यारा ही बता सकता है।”
अभी उनमें से कोई कुछ कह नहीं पाया था कि लगभग भागते हुए ही मिस्टर गार्डनर वहां आ गए और आते ही हांफते हुए बोले—“मैंने पुलिस को सूचना दी है, फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट्स एक्सपर्ट्स को लेकर वह यहां पहुंचने ही वाली होगी।”
“सर, क्या आप मकतूल को जानते हैं?” बाण्ड ने पूछा।
“बहुत अच्छी तरह, इसका नाम ग्राडवे था।” गार्डनर ने बताया।
“आपसे इसका क्या सम्बन्ध था?” झोंक में बाण्ड ऐसे लहजे में पूछ बैठा था जैसा अक्सर जासूस मकतूल के किसी परिचित के सामने अपनाते हैं, परन्तु अगले ही पल उसने स्वयं को संभाल लिया और बात को संभालता हुआ बोला— “मेरा मतलब, आपसे यह किस तरह सम्बन्ध था?”
“हमारे अच्छे दोस्तों में से एक था यह।”
“आप इसे पहचानते ही यानी यह जानते ही कि मकतूल ग्राडवे है, यहां से चले क्यों गए थे—क्या मैं जान सकता हूं कि इतनी तेजी से आप गए कहां थे?”
“पुलिस को कत्ल की सूचना देने!”
गार्डनर के इस जवाब से वहां मौजूद एक भी व्यक्ति संतुष्ट नहीं हुआ, लगभग बिल्कुल स्पष्ट ही था कि मिस्टर गार्डनर कुछ छुपा रहे हैं, चाहकर भी बाण्ड ने अगला सवाल नहीं किया, जबकि आगे बढ़कर विजय ने जरूर कहा—“आप कुछ छुपा रहे हैं मिस्टर गार्डनर!”
“हम कुछ नहीं छिपा रहे हैं।” गार्डनर का लहजा निर्णयात्मक-सा था।
“खैर!” विजय ने इस सवाल को टालते हुए कहा—“आप मकतूल को जानते हैं—क्या आप अपना ‘गेस’ प्रस्तुत कर सकते हैं यानी आपके ख्याल से क्या मकतूल की जिन्दगी में कोई ऐसी बात थी जो उसके कत्ल की वजह बन सके?”
“हमें इस बारे में कोई इल्म नहीं है।” मिस्टर गार्डनर ने जब ऐसा कहा तब उनके चेहरे पर जो भाव थे, उन्हें पढ़कर विजय दावे के साथ कह सकता था कि वो झूठ बोल रहे हैं, अगर वे इस कत्ल की वजह ठीक-ठीक नहीं भी जानते हैं तो किसी वजह पर शक जरूर कर रहे हैं।
विजय को लगा कि इस बारे में कम-से-कम गार्डनर से अधिक सवाल करना उसके हित में नहीं होगा, इसलिए वह चुप ही रह गया— इस कत्ल की सूचना कोठी में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच चुकी थी और इस लाश ने शादी के अच्छे-खासे हंसते हुए माहौल में सनसनी व्याप्त कर दी थी।
कुछ ही देर बाद वहां फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट्स विभाग के एक्सपर्ट के साथ पुलिस पहुंच गई—रटे-रटाए ढंग से उन्होंने अपना काम शुरू कर दियाùबाण्ड ने उन्हें कई स्थान विशेषों से चिह्न लेने के लिए कहा, मिस्टर गार्डनर इस वक्त चिंतित जरूर नजर आ रहे थे, परन्तु उतने नहीं जितने इस लाश को पहचानते ही अचानक हो उठे थे।
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10-23-2020, 01:02 PM,
#34
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
सिंगही, प्रिंसेज जैक्सन और टुम्बकटू रात डिनर के बाद ही चमत्कारिक ढंग से गायब हो गए थे, जब यह बात अलफांसे को बताई गई तो वह सिर्फ मुस्कराकर रह गया, कुछ ऐसे अन्दाज में जैसे पहले से ही जानता हो कि ऐसा होगा, बोला— “शुक्र है कि वे डिनर लेकर गए हैं, उन तीनों में से कोई भी इतनी देर तक कहीं ठहरता नहीं है।”
सुबह के पांच बजे तक वे इर्विन को विदा करके एलिजाबेथ होटल में ले आए थे- ग्राडवे के कत्ल के बाद से ही अलफांसे थोड़ा-थोड़ा बुझा और गम्भीर नजर आ रहा था।
अलफांसे के जिस मेहमान को यह बात पता लगी, उसी ने इस घटना पर दुख और आश्चर्य व्यक्त किया-सचमुच यह मनहूस और रहस्यमय घटना शादी के अन्तिम चरण की खुशियों को चाट गई थी।
दोपहर के बारह बजने तक अलफांसे के अधिकांश मेहमान उसे और इर्विन को बधाई तथा आशीर्वाद देकर अपने-अपने मुल्क वापस जा चुके थे और अब विजय आदि भी जाने की तैयारी कर रहे थे।
अचानक ही कमरे के बन्द दरवाजे पर दस्तक हुई।
विजय ने नजर उठाकर उधर देखा, दरवाजे पर जेम्स बाण्ड खड़ा था— उसकी आंखें इस वक्त सूजी हुई-सी और सुर्ख नजर आ रही थीं, बहुत ही कड़ी दृष्टि से वह दरवाजे पर खड़ा विजय को घूर रहा था, जबकि विजय उसे देखते ही चहका—“आओ प्यारे, सुबह-सुबह कैसे दर्शन करने चले आए हमारे?”
बाण्ड ने एक सिगरेट निकालकर सुलगाई और निरन्तर विजय को घूरता हुआ ठोस कदमों के साथ कमरे में दाखिल हुआ, विजय ने अपने ही अन्दाज में कहा—“यूं न घूरो हसीना, हमारा दिल धड़कता है।”
विजय के बिल्कुल नजदीक आकर वह बोला—“मैं रात-भर नहीं सो सका हूं।”
“जहेनसीब!” विजय किसी शेख की तरह बोला—“वह तो हुजूर की आंखें ही बता रही हैं।”
“मैं उस स्थान तक भी पहुंच गया, जहां ग्राडवे का कत्ल किया गया था। ”
“शाबाश, हमें तुमसे यही उम्मीद थी, खैर—कहां किया गया कत्ल?”
“यहां!” बाण्ड ने जेब से एक फोटो निकालकर उसके सामने डाल दिया। फोटो किसी उजाड़ से कमरे का था, दीवारों पर से जगह-जगह से प्लास्टर उधड़ा हुआ था—ध्यान से फोटो को देखने के बाद विजय ने सवाल किया—“ये किसका दरबारे खास है प्यारे?”
“मिस्टर गार्डनर की कोठी के पास ही एक खण्डहर है, बहुत दिन से वह उजाड़ पड़ा है और यह कमरा उसी खण्डहर का एक हिस्सा है।”
“तुमने ये कैसे जाना कि ग्राडवे का क्रियाकर्म हत्यारे ने यहीं किया है?”
“जासूसी करता हूं विजय, घास नहीं खोदता—मैं तो दावे के साथ यह भी कह सकता हूं कि हत्यारे ने कत्ल करने से पहले इस कमरे में ग्राडवे को टॉर्चर भी किया था।”
“टॉर्चर?”
“हां, यदि हत्यारा किसी की हत्या करने से पहले उसे टॉचर्र करे तो जाहिर है कि वह उससे कोई रहस्य उगलवाना चाहता है, टॉर्चर के बाद हत्यारे ने ग्राडवे को मार डाला, स्पष्ट है कि हत्यारा ग्राडवे की जुबान खुलवाने में कामयाब हो गया था।”
“ऐसा भी तो हो सकता है प्यारे, टॉर्चर के बावजूद ग्राडवे ने हत्यारे को कुछ भी न बताया हो और इसी वजह से क्रोधित होकर हत्यारे ने उसे मार डाला हो?”
“मुमकिन है ऐसा हुआ हो, लेकिन आमतौर से ऐसा होता नहीं है।”
“क्या मतलब प्यारे?”
“इस कमरे से मिले चिह्न बताते हैं कि ग्राडवे को बहुत ज्यादा टॉर्चर किया गया है, इसका मतलब है कि वह हत्यारे के द्वारा किए गए सामान्य टॉर्चर से नहीं टूटा—जाहिर है कि जो रहस्य हत्यारा उससे जानना चाहता था वह ग्राडवे ने आसानी से नहीं बताया और जितना टॉर्चर हत्यारे ने किया है उससे स्पष्ट होता है कि वह रहस्य जानने के लिए हत्यारा कटिबद्ध था और हत्यारा किसी महत्वपूर्ण रहस्य को जानने के लिए ही इस हद तक कटिबद्ध हो सकता है—अपराधी किसी ऐसे व्यक्ति को तब तक मारने की मूर्खता नहीं करता, जब तक कि उससे इच्छित रहस्य ज्ञात न कर ले—हां, यदि शिकार रहस्य उगल दे तो फिर हत्यारे की दृष्टि में उसे जीवित छोड़ देना बेवकूफी होती है।”
“तुम्हारी बुद्धि तो ब्लेड की धार से भी कई गुना ज्यादा तेज होती जा रही है बाण्ड प्यारे!”
बड़ी कुटिल-सी व्यंग्य भरी मुस्कान जेम्स बाण्ड के होंठों पर उभर आई, बोला— “तुम यहां से कब जा रहे हो?”
“बस प्यारे, तैयारी कर ही रहे थे, लेकिन तुम यह क्यों पूछ रहे हो?”
जेम्स बाण्ड का सख्त स्वर—“मैं भी यही चाहता हूं कि तुम जल्दी-से-जल्दी मेरे देश से बाहर निकल जाओ।”
बाण्ड के शब्द और विशेष रूप से उसका लहजा सुनकर विजय चौंक पड़ा, आंखें अजीब-से अन्दाज में सिकुड़ती चली गईं उसकी, बोला—“इन शब्दों और इस लहजे का क्या मतलब है बाण्ड प्यारे?”
“वही, जो तुम समझ रहे हो।” बाण्ड ने उसकी आंखों में आंखें डाले कहा।
“कहीं तुम यह तो नहीं सोच रहे हो कि ग्राडवे का कत्ल हमने किया है?”
बाण्ड का लहजा ज्यादा कठोर हो गया—“क्या तुम मुझे कुछ भी सोचने से रोक सकते हो?”
“जरूर रोक लेते प्यारे, बशर्ते कि यहां लूमड़ की शादी के अलावा किसी अन्य मकसद से आए होते।”
जहरीली मुस्कान उभर आई बाण्ड के होंठों पर, बोला—“अलफांसे की शादी—हां, केवल इसी वजह से तो तुम अभी तक सही-सलामत खड़े हो—अगर तुम यहां अलफांसे की शादी के सिलसिले में न आए होते विजय तो यकीन मानो, मैं तुम्हें सिर्फ ब्रिटेन से बाहर निकल जाने के लिए नहीं कहता।”
“क्या करते?”
“इसी वक्त तुम्हें गिरफ्तार कर लेता।”
“किस जुर्म में?”
“अपने देश में जासूसी करने के जुर्म में!”
“जासूसी?”
“तुम ब्रिटेन में जेम्स ऐलिन बनकर दाखिल हुए, इस होटल के एक वेटर से ब्रिटिश नागरिक अलफांसे और इर्विन के बारे में टोह ली—हैमेस्टेड बनकर तुमने डिमस्ट्रीट पर खुलकर गुण्डागर्दी की—इतना ही नहीं, बसन्त स्वामी बनकर तुम मेरे पास भी आए, इण्टरव्यू के बहाने वह सब जाना जो जानना चाहते थे।”
विजय चकित रह जाने वाले अन्दाज में पलकें झपकाने लगा, बाण्ड के चुप होने पर बोला— “कमाल है बाण्ड प्यारे, तुम इतने चालू कब से हो गए?”
“मुझे और मेरी योग्यताओं को न समझ पाने का नाटक मत करो, मैं जानता हूं कि विजय कि तुम जेम्स बाण्ड को मूर्ख मान लेने की मूर्खता कभी नहीं कर सकते—ये मत समझो कि बसन्त स्वामी बनकर तुम मुझे धोखा दे आए थे, हकीकत ये है कि मुझे थोड़ी देर जरूर लगी, परन्तु अपने ड्राइंगरूम में ही पहचान चुका था कि बसंत स्वामी तुम हो, अब तुम कहोगे कि पहचानकर भी मैंने जाहिर क्यों नहीं किया या इण्टरव्यू क्यों दे दिया, जवाब है कि इण्टरव्यू के दौरान मैंने जो कुछ कहा, वह तुम्हें बताना चाहता था।”
“उसी वक्त तुमने गिरफ्तार क्यों नहीं कर लिया हमें?”
“सिर्फ यह सोचकर कि तुम ब्रिटेन के खिलाफ कुछ नहीं कर रहे हो—तुम केवल अलफांसे में आए चेंज के प्रति संदिग्ध हो और हर रूप में केवल उसी सन्देह को मिटाने या विश्वास में बदलने के लिए प्रयत्नशील हो।”
“आज तो तुम वाकई धोती को फाड़कर रूमाल कर रहे हो प्यारे, अगर तुम सब कुछ इतना स्पष्ट जानते हो तो फिर हमें गिरफ्तार करने या इस लहजे में चले जाने के लिए क्यों कह रहे हो?”
“क्योंकि अब ग्राडवे का कत्ल हो गया है।”
“क्या वह हमने किया है?”
“क्या नहीं हो सकता?”
“तुम्हारे पास कोई सबूत है प्यारे!”
“सबूत!” कहने के बाद बाण्ड ने सिगरेट में एक जोरदार कश लगाया, विजय के चारों तरफ एक वृत्त की शक्ल में घूमता हुआ बोला— “सबूत होता तो क्या मैं तुम्हें ब्रिटेन से बाहर निकल जाने देता?”
“अगर तुम पर सबूत नहीं है प्यारे तो हमसे इस लहजे में बात करने का मतलब?”
अपने जूते की एड़ी पर जेम्स बाण्ड बड़ी तेजी से घूमा, दोनों हाथों से झपटकर विजय का गिरेबान पकड़ा और अपना चेहरा उसके चेहरे के बहुत नजदीक ले जाकर दांत पीसता हुआ गुर्राया—“ये मत भूलो विजय कि मेरा नाम जेम्स बाण्ड है—भले ही मैं किसी अन्य व्यक्ति के सामने साबित न कर सकूं, परन्तु समझ सकता हूं कि यह हत्या तुमने की है।”
विजय किंचित मात्र भी उत्तेजित हुए बिना बोला— “वह कैसे प्यारे?”
“चाकू की मूठ पर किसी की उंगलियों के निशान नहीं हैं, ग्राडवे की लाश और इस कमरे में से हत्यारे ने अपने निशान बड़ी खूबी से मिटाए हैं, कत्ल किया गया, ग्राडवे को टॉर्चर किया गया—इतने लम्बे बखेड़े में हत्यारे ने कहीं भी अपना कोई चिह्न नहीं छोड़ा है—कोई सबूत नहीं छोड़ा गया है—इतना बड़ा काम बिना सबूत छोड़े ही कर जाना इस बात का सबूत है कि यह सब कुछ किसी बहुत ही घिसे हुए व्यक्ति का काम है और यहां मौजूद लोगों में से सबसे ज्यादा घिसे हुए तुम हो!”
“भूल रहे हो प्यारे कि रात यहां हमसे ज्यादा घिसी हुई हस्तियां भी थीं।”
“लेकिन उनमें से कोई भी ऐलिन, हैमेस्टेड या बसन्त स्वामी नहीं बना था।”
विजय ने पहली बार कठोर स्वर में कहा— “सबसे पहले तो हमारा गिरेबान छोड़ो प्यारे!”
दांत किटकिटाते हुए बाण्ड ने गिरेबान छोड़ दिया। ऐसा स्पष्ट लग रहा था कि यदि उसका बस चले तो वह अभी विजय को कच्चा चबा जाए, बोला— “इस बार तो केवल ब्रिटेन से बाहर जाने के लिए कहा है, मगर कान खोलकर सुन लो, अब अलफांसे ब्रिटिश नागरिक है, यदि तुमने उसके बारें में जासूसी की तो समझा ये जाएगा कि तुम ब्रिटेन के खिलाफ जासूसी कर रहे हो-भविष्य में अगर तुमने ब्रिटेन की धरती पर इस किस्म की हरकत करने की कोशिश की तो याद रखना—जेम्स बाण्ड के रिवॉल्वर से निकली गोली तुम्हारा भेजा उड़ा देगी।” कहने के बाद उसने सिगरेट फर्श पर पटकी, बूट से उसे कुचलता हुआ तेजी से बाहर निकल गया।
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10-23-2020, 01:03 PM,
#35
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
विजय ने जेम्स बाण्ड से हुई अपनी तनावपूर्ण भेंट का जिक्र किसी से नहीं किया।
रैना और विजय की मां ने इर्विन को बहुत प्यार दिया, इतना कि अब जाकर इर्विन को महसूस होने लगा कि उसके पति के सम्बन्ध बहुत अच्छे लोगों से भी हैं। रैना तो अलफांसे और इर्विन को भारत ले चलने के लिए जिद ही पकड़ गई—वह साथ ही चलने के लिए कह रही थी—अलफांसे बड़ी मुश्किल से उसे समझाने में कामयाब हो सका।
रैना मान तो गई, किन्तु इस शर्त पर कि वह बहुत शीघ्र ही इर्विन को लेकर भारत आएगा।
विदा होते वक्त इधर रैना की आंखें भर आईं और उधर इर्विन की—विमान में भी सारे रास्ते वे सब सिर्फ अलफांसे की शादी और इर्विन के बारे में ही बातें करते चले आए।
किसी को पता ही न चला कि नौ घण्टे कब गुजर गए। होश तब आया जब यह घोषणा की गई कि विमान भारत में ‘राजनगर एयरपोर्ट’ पर लैण्ड करने वाला है। विमान ने भारत की धरती को स्पर्श किया और उसके वक्त विकास चौंके बिना न रह सका जब विजय ने धीमे से उसके कान में कहा— “अपने तुलाराशि और रैना बहन को कोठी पर छोड़कर फौरन गुप्त भवन पहुंच जाओ प्यारे!”
विकास हक्का-बक्का रह गया, उसने तुरन्त ही इस आदेश की वजह पूछनी चाही, किन्तु तब तक अपना सूटकेस संभाले विजय उससे काफी आगे निकल चुका था—विकास के दिमाग में केवल सांय-सांय की रहस्यमय आवाज गूंजकर रह गई।
इतना तो वह समझ सकता था कि कोई माजरा है और माजरा भी अर्जेण्ट है, वरना विजय गुरु तुरन्त ही गुप्त, भवन पहुंचने के लिए बिल्कुल नहीं कहते—घर पहुंचते ही वह वापस रवान हो गया।
तीस मिनट बाद जब वह सीक्रेट रूम में दाखिल हुआ, तब उसने विजय को पहले ही से वहां मौजूद पाया, ब्लैक ब्वॉय चीफ वाली कुर्सी पर बैठा सिगार फूंक रहा था।
“लीजिए सर, विकास थी आ गया है—अब तो बताएंगे कि आखिर बात क्या है?”
“आओ प्यारे दिलजले, बैठो!”
विकास विजय की बगल ही में रखी कुर्सी पर बैठ गया।
“मेरे प्यारो, राजदुलारो—अपने लूमड़ की बारात तो तुम कर आए हो—साले ने शादी भी कर ली है, अब तुम ये बताओ कि इस शादी के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?”
“मेरे ख्याल से तो इस बार आपकी सभी शंकाएं बिल्कुल बेबुनियाद साबित हुई हैं गुरु!” विकास ने कहा—“आप कह रहे थे कि क्राइमर अंकल शादी का ड्रामा तो कर सकते हैं शादी नहीं कर सकते—उन्होंने सचमुच शादी कर ली—काफी बारीकी से देखने पर भी शादी के पीछे कोई षड्यन्त्र नजर नहीं आया अब तो आपको मानना ही पड़ेगा कि इर्विन ने अलफांसे गुरु की जिंदगी में चेंज ला दिया है।”
“बस, यहीं तो हिन्दुस्तान मात खा जाता है प्यारे!”
“क्या मतलब?”
और विजय ने उन्हें जेम्स बाण्ड से अपनी उत्तेजक मुलाकात का विवरण बिना कोई कॉमा, विराम इस्तेमाल किए सुना दिया—विकास का चेहरा बात के बीच में ही कठोर हो गया था तथा बात का अन्त होते-होते तो लड़के का चेहरा भभकने ही लगा और जब विजय चुप हुआ तो वह गुर्रा उठा—“उसने यह सब कहा आपसे, इस लहजे में बात की उसने?”
“खुदा कसम, झूठ नहीं बोल रहे हैं!” विजय ने भोलेपन के साथ कहा।
“क्या हो गया है गुरु आपको, इतने बुजदिल तो नहीं थे आप—क्या आपका खून सफेद हो गया है—जेम्स बाण्ड आपका गिरेबान पकड़े रहा और आपने कुछ नहीं कहा—एक ही घूंसे में उसका जबड़ा तोड़ सकते थे आप?”
विजय का बहुत ही शान्त स्वर—“नहीं!”
“ऊंह!” आवेश में लड़के ने जोर से मेज पर घूंसा मारा और गुर्राया—“काश, उस वक्त मैं वहां होता, काश, आपने लन्दन ही में मुझे उसके व्यवहार के बारे में बता दिया होता—तब मैं उसे बताता कि विकास के गुरु का अपमान करने की सजा क्या होती है—उन हाथों को मैं काटकर फेंक देता जो आपके गिरेबान तक पहुंचे थे, उन आंखों को निकालकर जूते से कुचल देता, जिन्होंने आपको...।”
“रिलैक्स दिलजले, रिलैक्स!”
“क्या खाक रिलैक्स करूं गुरु, लन्दन में आपने मुझे बताया तक नहीं?”
“मैं जानता था कि सब कुछ सुनने के बाद तुम पजामें से बाहर हो जाओगे और फिर बिना किसी की एक सुने, उठा-पटक शुरू कर दोगे—ऐसा मैं नहीं चाहता था।”
“मगर वह सहना भी कहां तक जायज है गुरु, जो आप सहकर चले आए हैं—वह स्पष्ट शब्दों में आपको ग्राडवे का हत्यारा कहता रहा और आप सुनते रहे।”
“कारण था प्यारे।”
“क्या कारण था?”
“केवल यह कि उसके द्वारा कहा गया एक-एक शब्द ठीक था।”
“क...क्या?”
विकास के साथ-साथ ब्लैक ब्वॉय भी इस तरह उछल पड़ा जैसे अचानक ही उसकी कुर्सी गर्म तवे में बदल गई हो—दोनों के चेहरों पर हैरत के असीमित चिह्न उभर आए—वे विजय को इस तरह देखने लगे थे जैसे अचानक ही उसके सिर पर सींग उभर आए हों—जबकि विजय इस तरह मुस्करा रहा था जैसे उन्हें चकित करके उसे हार्दिक प्रसन्नता हुई हो।
विकास तो अभी कुछ बोल ही नहीं पाया था, जबकि ब्लैक ब्वॉय ने कहा—“ये आप क्या कह रहे हैं सर?”
“वही प्यारे काले लड़के जो तुमने सुना है!”
विकास ने पूछा— “तो क्या सचमुच आप ही ने ग्राडवे का कत्ल किया था?”
“कितनी भाषाओं में यह बात कहनी होगी?”
“मगर क्यों, आपका ग्राडवे से क्या मतलब—कम-से-कम आप कोई काम बिना किसी उद्देश्य या लाभ के नहीं करते, ग्राडवे का कत्ल करने से आपको क्या लाभ हुआ या आपके किस उद्देश्य की पूर्ति हुई?”
“हमें अपने लूमड़ की शादी के पीछे चल रहे चक्कर की जानकारी मिल गई।”
“क्या वाकई शादी के पीछे कोई चक्कर है?”
“केवल चक्कर ही नहीं प्यारे, बहुत बड़ा घनचक्कर है।”
“आखिर क्या?”
“सब्र!” विजय हाथ उठाकर बोला— “जरा सब्र से काम लो प्यारे—सब बताएंगे, मगर उसी क्रम में जिसमें हमें पता लगा है, तुम लोग यह तो जानते ही हो कि मिस्टर स्टेनले ग्रार्डनर ब्रिटेन की सिक्योरिटी विभाग के बहुत बड़े अफसर हैं?”
“हां!”
“क्या उनकी पोस्ट बता सकते हो?”
“ऐसा कोई अवसर ही नहीं आया जब उनकी पोस्ट की बात उठी हो।”
“क्या उनके यहां आए हुए मेहमानों से तुम उनकी पोस्ट का अन्दाजा नहीं लगा सकते—लन्दन प्रशासन की बड़ी-से-बड़ी हस्ती वहां थी, जेम्स बॉण्ड जैसा जासूस जिनके यहां कार्यभार संभाले हुए था।”
“हमने इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं दिया।”
जवाब में विजय ने सिंगही के आगमन पर कनात के दूसरी तरफ से सुने हुए वाक्यों से लेकर बाण्ड द्वारा गार्डनर से भेंट कराए जाने तक की घटना सिलसिलेवार बता दी और सांस लेने के लिए रुका। विकास और ब्लैक ब्वॉय बिना पलकें झपकाए उसकी तरफ देख रहे थे।
विजय ने आगे कहा—“उसके बाद हमें ग्राडवे को ढूंढ निकालने में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी, गार्डनर के दूसरे मेहमानों की तरह वह भी बारातियों की आवभगत में व्यस्त था—हम बहाने से उसे लॉन के एक अन्धेरे कोने में ले गए, अचानक ही कनपटी पर वार करके उसे बेहोश किया और समीप के ही खण्डहर में ले गए—होश में लाकर उससे उन वाक्यों का विस्तृत अर्थ पूछा, उसने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया और मजबूरन हमें उसे टॉर्चर करना पड़ा—हम उसे तोड़ पाने में काफी मुश्किल से सफल हुए और जब सफल हुए तो पता लगा कि दरअसल मिस्टर गार्डनर उस विशेष सिक्योरिटी के डायरेक्टर हैं जिसके चार्ज में दुनिया का सर्वाधिक कीमती हीरा कोहिनूर रखा है।”
“ओह!” एजेण्ट डबल एक्स फाइव के मस्तिक पर बल पड़ गए।
“कोहिनूर की हिफाजत के लिए अंग्रेज सरकार ने अलग से एक सिक्योरिटी विभाग का गठन कर रखा है, इस विभाग का नाम है—के.एस.एस.—मिस्टर गार्डनर इस विभाग के डायरेक्टर हैं, उन्हें ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस के चीफ से भी कहीं ज्यादा शक्ति और अधिकार प्राप्त हैं और कोहिनूर आज तक उन्हीं के चार्ज में सुरक्षित रखा है, के.एस.एस. के सभी सदस्य केवल उनका आदेश मानने के लिए बाध्य हैं और ग्राडवे भी के.एस.एस. का ही एक सदस्य था।”
“ग्राडवे ने और क्या-क्या बताया?”
“काफी टॉर्चर के बाद उसने बताया कि अन्तरिक्ष में पृथ्वी के चारों तरफ एक ऐसा उपग्रह निर्धारित कक्षा में चक्कर लगा रहा है, जिसका केवल एक ही काम है, कोहिनूर पर नजर रखना—यह उपग्रह ब्रिटेन ने गुप्त रूप से पांच साल पहले अन्तरिक्ष में भेजा था, उसमें कोई मानव नही हैं—पृथ्वी पर एक कण्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से उसे कण्ट्रोल किया जाता है और उसके द्वारा भेजे गए संकेतों को कैच किया जाता है और तुम दोनों को यह जानकर हैरत होगी प्यारो कि वह कण्ट्रोल रूम ग्रार्डनर की कोठी में ही कहीं है।”
“ये आप क्या कह रहे हैं सर?”
विजय ने कहा— “अंधेरा होते ही गार्डनर को डाउट हुआ कि कहीं कोई शादी के धूम-धड़ाके का लाभ उठाकर कोहिनूर तक तो नहीं पहुंचना चाहता है, इसीलिए उसने ग्राडवे को कण्ट्रोल रूम से रिपोर्ट लेने का आदेश दिया था—क्योंकि अगर कोई व्यक्ति कोहिनूर तक पहुंचना चाहेगा तो उपग्रह फौरन ही कण्ट्रोल रूम में उसकी सूचना भेज देगा।”
“उफ्फ, कोहिनूर की हिफाजत के लिए ब्रिटिश सरकार इतना खर्च कर रही है?”
“वे अंग्रेज हैं प्यारे और जिस जाति में जो गुण हैं, उसकी तारीफ तो करनी ही होगी-अंग्रेज जाति में ये विशेषता है कि वे चीज की कद्र उसके महत्व के बराबर करना जानते हैं—वे हम, यानी भारतीयों जैसे, नहीं, जो अनमोल वस्तुओं की न तो कद्र करते हैं, न् ही ठीक से उनका रख-रखाव करना जानते हैं, सारी दुनिया में कोहिनूर केवल एक ही है, वह बिकाऊ नहीं है और जो चीज बिकाऊ नहीं होती उसकी कोई कीमत ही क्या आंक सकता है—वह अनमोल होती है—कोहिनूर एक शान है, जिसके पास वह है, उसे दुनिया का सबसे धनवान राष्ट्र कहा जा सकता है और इस बात को ब्रिटिश समझते हैं—इसीलिए कोहिनूर का महत्व भी जानते हैं वे—तभी तो इतना खर्चा वहन करके उसे हिफाजत से रखते हैं।”
“कोहिनूर हमारा है गुरु!” विकास कह उठा।
“हमारे से मतलब?”
“भारत का, एक प्रकार से कोहिनूर को यहां से चुराकर ले गए हैं अंग्रेज!”
विजय के होंठों पर बड़ी ही फीकी-सी मुस्कान उभर आई, बोला—
“हम भारतीयों में सबसे बड़ी कमी यही है, जब सांप आता है और काटता है तब हम सो रहे होते हैं और लाठी उठाकर तब लकीर पीटने लगते हैं जब सांप निकल जाता है। हमेशा यही होता है विकास, हम अपनी प्राचीन संस्कृति और उन ग्रन्थों की रक्षा तो कर नहीं सके जिनमें अथाह ज्ञान का भंडार भरा पड़ा। और जब विदेशी उसी ज्ञान के आधार पर कोई नया आविष्कार करते हैं तो हम कहते फिरते हैं कि यह आविष्कार तो भारतीय ग्रंथों की देन है—‘जूडो-कराटे’ की आर्ट को आज जापानी माना जाता है, सचमुच जापान ने ही इस आर्ट को विकसित किया, इसका प्रसार किया तो आज हम कहते हैं कि यह जापानी नहीं भारतीय आर्ट है,नए-नए तर्क देते हैं हम—इतिहासकार तरह-तरह से प्रमाण निकालकर लाते है—इनसे कोई पूछे, जनाब आप तब कहां थे जब जूडो-कराटे को कोई जानता तक नहीं था—कभी हमें सोने की चिड़िया कहा जाता था, आज न सोना है—न चिड़िया, कमी किसकी है? हमारी, भले ही दूसरों पर दोषारोपण करके हम अपनी कमियों को छुपाने की कोशिश करें मगर हकीकत, हकीकत ही रहेगी—दरअसल तब ह्मने अपने सोने की चिड़िया होने का महत्व नहीं समझा था— वैसे ही कोहिनूर के साथ हुआ, तब हमने उसके महत्व को समझा नहीं था और आज रोते हैं कि कोहिनूर हमारा है।”
“क्या किसी की कोई वस्तु चोर के चुरा लेने से चोर की हो जाती है गुरु!”
“क्षमा कीजिएगा सर!” ब्लैक ब्वॉय बीच में टपका—“मुझे लग रहा है कि आप लोग भटक गए हैं, बात ग्राडवे और उसके कत्ल की चल रही थी।”
“वैरी गुड प्यारे काले लड़के, पटरी पर लाकर पटकने के लिए धन्यवाद—हां तो दिलजले, हम बता रहे थे कि ग्राडवे से हमें ‘कंट्रोल रूम’ के बारे में पता लगा और इससे आगे वह हमें कोई जानकारी नहीं दे सका—शायद उस बेचारे को ही जानकारी नहीं थी, अब तुम समझ ही सकते हो कि अपनी इतनी हरकत के बाद हमारे लिए उसका क्रिया-कर्म करना मजबूरी हो गई थी।”
“लेकिन सर, आपने इतना रिस्क उठाकर उसकी लाश को गार्डनर की कोठी के लॉन में क्यों पहुंचाया?”
“लूमड़ भाई को समझाने के लिए कि हम सब समझ गए हैं!”
“ओह!” ब्लैक ब्वॉय के मुंह से यही एक शब्द निकला और फिर उसकी आंखें एक अजीब–से गोल दायरे में सिकुड़ती चली गईं- विकास के चेहरे पर भी आश्चर्य के चिह्न उभर आए थे, जबकि विजय ने कहा—“कहो प्यारे, हम कहते थे न कि लूमड़ की इस शादी के पीछे निश्चय ही कोई लम्बा दावं होगा, कोहिनूर से लम्बा दांव भला और क्या हो सकता था?”
विकास अविश्वसनीय स्वर में बड़बड़ाया—“क्या इस बार अलफांसे गुरु सचमुच कोहिनूर के चक्कर में हैं?”
“क्या तुम्हें अब भी शक है दिलजले?”
“शक तो नहीं है गुरु, लेकिन विश्वास ही नहीं कर पा रहा हूं, अगर आप सही सोच रहे हैं, तो वाकई इस बार गुरु बहुत लम्बे दांव के चक्कर में हैं और इसके लिए उन्होंने बहुत ही बड़ा, मजबूत और न चमकने वाला जाल बिछाया है—ब्रिटिश नागरिकता स्वीकार करके ब्रिटेन को अपने विश्वास में ले लेना, इर्विन पर आसक्त होना और यहां तक कि विधिवत शादी कर लेना भी उनकी स्कीम का ही एक अंग है।”
“लूमड़ जैसे व्यक्ति के लिए कच्चे धागे से बनी शादी नाम की जंजीर को तोड़ देना भला कितने पल का काम है! लूमड़ का मकसद हल होने के कुछ दिन बाद ही इर्विन का एक्सीडेण्ट होगा, वह मर जाएगी और लूमड़ फिर आजाद है—वही, इंसानों के इस जंगल में घूमता आजाद शेर!”
“ओह, सब कुछ कितना ईजी है?”
“कम-से-कम लूमड़ जरूर समझ गया होगा कि ग्राडवे का कत्ल हमने किया है और उसे यही समझाने के लिए हमने लाश को वहां डाला था—ताकि वह इस खुशफहमी में न रहे कि किसी को मालूम ही नहीं है कि वह क्या खिचड़ी पका रहा है, तुमने भी नोट किया होगा कि ग्राडवे की लाश देखने के बाद से वह सीरियस था!”
“क्या आप अपनी शंका को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश कर सकते हैं सर?”
“जैसे?”
“क्या अलफांसे की किसी हरकत से यह सिद्ध होता है, कि उसने कोहिनूर के चक्कर में ही इर्विन से शादी की है, या आप गार्डनर के डायरेक्टर होने की वजह से ऐसी शंका व्यक्त कर रहे हैं?”
“क्या तुम अलफांसे को इतना निर्धन समझते हो कि वो लंदन में अपनी कोठी न खरीद सके?”
“वह इतना धनवान है कि लंदन की कीमती-से-कीमती कोठी जिस क्षण चाहे खरीद ले!”
“फिर अभी तक वह होटल में क्यों पड़ा है?”
ब्लैक ब्वॉय ने चकित भाव से पूछा— “इस बात से आप क्या अर्थ निकालते हैं?”
“शादी के बाद लड़की पिता के नहीं पति के साथ रहती है और इर्विन के पति का कहीं कोई घर नहीं है, वह होटल में रहता है— पति-पत्नी का किसी होटल में स्थायी रूप से रहना आक्वर्ड भी है और अपने स्तर को देखते हुए गार्डनर को यह अच्छा भी नहीं लगेगा— गार्डनर अलफांसे को लंदन में कोई कोठी खरीद लेने की सलाह देगा, अलफांसे कोठी खरीदने में स्वयं को असमर्थ प्रदर्शित करेग—संतान के नाम पर इर्विन गार्डनर की एकमात्र संतान है, जरा सोचो—ऐसी अवस्था में गार्डनर क्या करेगा?”
“गुड, वह कहेगा कि वे दोनों भी उसके साथ कोठी में ही रहें!”
“लूमड़ वहां पहुंच गया, जहां पहुंचना उसका मकसद है, यानी कोठी में।”
ब्लैक ब्वॉय और विकास की आंखें एक साथ किन्हीं चमकदार हीरों की तरह चमकने लगीं—अब उन्हें लग रहा था कि विजय ठीक कह रहा है, सचमुच वह शादी, शादी नहीं थी, बल्कि कोहिनूर तक पहुंचने के लिए अलफांसे द्वारा बनाई गई पूरी तरह सोची-समझी योजना का एक अंश थी।
“मैं क्राइमर अंकल को कोहिनूर तक नहीं पहुंचने दूंगा।” लड़के का चेहरा भभक रहा था।
ब्लैक ब्वॉय बोला— “म...मगर हम इसमें कर ही क्या सकते हैं?”
“म...मैं क्राइमर अंकल का खून पी जाऊंगा, इर्विन का कत्ल कर दूंगा—जब इर्विन ही न रहेगी तो गार्डनर या उसकी कोठी से उनके सम्बन्ध ही क्या रहेंगे-उनकी सारी योजना, सारी स्कीम धरी-की-धरी रह जाएगी, भले ही चाहे जो हो जाए—मुझे चाहे जो करना पड़े, मगर मैं उन्हें कोहिनूर तक नहीं पहुंचने दूंगा!”
“उससे हमें क्या लाभ होगा प्यारे?”
“मैं उसे किसी को उसे चुराने नहीं दूंगा, कोहिनूर हमारा है गुरु!”
“तुम्हारा?”
“किसी चोर के दवारा चुराई गई वस्तु चोर की नहीं हो जाती है।”
“मगर, क्या लूमड़ की स्कीम को बिखेर देने से कोहिनूर हमें मिल जाएगा?”
विकास पर कोई जवाब नहीं बना, उत्तेजित-सा वह केवल विजय के चेहरे को देखता रहा, जबकि विजय ने अपनी सदाबहार मुस्कान के साथ कहा—“इसीलिए कहते हैं प्यारे कि तुम जोश में कम और होश में ज्यादा रहा करो। अगर ऐसा हो जाए तो तुम कोहिनूर से भी ज्यादा कीमती हीरे हो।”
“तो फिर आप ही सोचकर मुझे कुछ हुक्म दीजिए, मैं क्या करूं?”
“कोहिनूर हमारा था, आज ब्रिटिन का है—भरपूर राजनैतिक दबाव के बावजूद भी ब्रिटेन ने कोहिनूर भारत को नहीं दिया है—दिमाग में कई बार यह बात आई कि जिस तरह कोहिनूर को वे ले गए हैं उसी तरह हम भी उसे लंदन से चुराकर लाने की कोशिश करे परन्तु हर बार यह सोचकर रह गए कि ऐसा करना अपने देश की गरिमा के विरुद्ध होगा—अपनी ही चीज को वापस लाने में, देश की गरिमा से डरते हैं हम, परन्तु अगर बारीकी से देखें, तो हमें यह एक सुनहरा मौका मिला है, कोहिनूर को लूमड़ चुराएगा अन्तर्राष्ट्रीय मुजरिम लूमड़ और हमारा काम होगा कोहिनूर को उससे छीन लेना!”
“ग...गुड, वेरी गुड सर!” ब्लैक ब्वॉय की आंखें बुरी तरह चमकने लगी थीं।
विकास का सारा चेहरा विजय की प्रशंसा के भावों से भरा पड़ा था जबकि विजय ने कहा, “गुड तो है प्यारे काले लड़के, लेकिन ये सब कुछ उतना ही कठिन है जितना आसानी से हमने कह दिया है।”
“आपके लिए क्या कठिन है गुरु?”
“हमारे अनुमानानुसार ‘उपग्रह’ कोहिनूर की सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था नहीं बल्कि सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था का एक जरिया मात्र है, यानी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार ने उपग्रह के अलावा भी ढेर सारे प्रबन्ध कर रखे होंगे, इधर अपना लूमड़ पूरी योजना बनाकर कोहिनूर की तरफ बढ़ रहा है। कोई किसी वस्तु को चुराने की योजना तभी बना सकता है जब उसे उस वस्तु के चारों तरफ की गई सुरक्षा-व्यवस्था की पूर्ण जानकारी हो, अतः अलफांसे को सम्पूर्ण जानकारी होगी, हमें भी पहले ही से पूरी स्कीम बनाकर काम करना होगा और इसके लिए सुरक्षा-व्यवस्था तथा लूमड़ की स्कीम जानना जरूरी है।”
“आप ठीक कह रहे हैं सर!”
“कह तो रहे हैं प्यारे किन्तु साथ ही सोच भी रहे हैं कि जो कह रहे हैं वह करना कितना कठिन है—ये सारी जानकारियां हासिल करने हमें न केवल लंदन जाना होगा, बल्कि अपने लूमड़ के आसपास ही कहीं रहना होगा और यह कहने वाली बात नहीं है कि लूमड़ के आसपास रहकर उसकी नजरों से बचे रहना असम्भव की सीमा तक कठिन है और उसके द्वारा पहचान लिए जाना अत्यन्त ही खतरनाक—फिलहाल वह ब्रिटिश नागरिक है और इस वक्त अपनी हैसियत के अनुसार वह लंदन में जो चाहे कर सकता है—सारा ब्रिटेन तो हमारा दुश्मन होगा ही, लेकिन अलफांसे के अलावा एक और खतरनाक दुश्मन जेम्स बाण्ड भी है, मुझे बसन्त स्वामी के रूप में वह तुरन्त पहचान गया था इसी से जाहिर है कि वह कितना काइयां है—उसकी नजरों से बचे रहना बहुत जरूरी है और लंदन में बाण्ड की नजरों से बचे रहकर कोई काम करना असम्भव ही है।”
“क्या आप इन सब अड़चनों से डर रहे हैं गुरु?”
“तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं प्यारे कि हमारी माइनर-सी चूक या बहुत ही छोटा-सा गलत स्टैप भी हमारी सारी स्कीम को तिनके-तिनके करके बिखेर देगा और यदि ऐसा हो गया तो हमारे सभी मनसूबों पर पानी फिर जाएगा, अतः हमें योजना बनाकर हर कदम उसी के अनुसार उठाना है।”
“आप योजना बनाइए गुरु—काम करने के लिए मैं तैयार हूं!”
“लंदन से यहां तक आने के बीच हम अपनी योजना का प्रारम्भिक ढांचा तैयार कर चुके हैं और उस योजना को कार्यान्वित करने में हमें सबसे बड़ी अड़चन तुम नजर आ रहे हो, अगर तुम अड़चन न बने होते तो अब तक हमने अपनी योजना पर काम करना शुरू कर दिया होता।”
“मैं और आपकी योजना में अड़चन—आप क्या कह रहे हैं अंकल?”
“अड़चन है तुम्हारा स्वभाव, भावुक हो उठना, जरा-जरा-सी बातों पर उत्तेजित होकर पजामें से बाहर हो जाना, दरअसल मेरी योजना में किसी भी बड़ी-से-बड़ी बात पर भड़क उठने, विवेक खो देने या आपे से बाहर हो जाने वाले किसी व्यक्ति के लिए कोई स्थान नहीं है, क्योंकि किसी की भी ऐसी हरकत सारी योजना को चौपट कर सकती है।”
मुस्कराते हुए विकास ने कहा— “मैं खुद पर काबू रखने की कोशिश करूंगा गुरु!”
“अच्छी तरह सोच लो प्यारे, मेरी योजना पर काम करने वालों को किसी भी क्षण कोई भी बात सुनने को मिल सकती हैं, वैसे क्षण भी आ सकते हैं जैसे मेरे और बाण्ड के बीच आ चुके हैं और जिन्हें सह लेने को तुम अपमान या बुजदिली कहते हो—तुम्हें कदम-कदम पर ऐसा अपमान सहना पड़ सकता है, बुजदिली दिखानी पड़ सकती है।”
“कोहिनूर के लिए मैं यह सब सह लूंगा।”
“मुझे बिल्कुल बदले हुए कैरेक्टर का विकास चाहिए और तुम्हें वह विकास बनने का वादा करना होगा।”
“मैं वादा करता हूं गुरु, अपने दिमाग या विवेक से कोई काम नहीं करूंगा—हर कदम केवल आपकी योजना के अनुसार ही उठाऊंगा और आपके और सिर्फ आपके आदेशों का पालन करूंगा।”
“हमेशा फायदे में रहोगे!”
“अब आप अपनी स्कीम बताइए!”
“हम पांच व्यक्ति लंदन जांएगे—हम, तुम, अशरफ, विक्रम और आशा!”
“पांच व्यक्तियों का क्या काम है गुरु, मैं और आप ही काफी हैं—सारे लंदन को हिलाकर रख देंगे।”
“तुम अभी से अपना दिमाग लगाने लगे हो प्यारे!”
“ओह, सॉरी अंकल!” विकास मुस्काराया।
“बात को समझने से काम चलेगा दिलजले, सॉरी कहने से नहीं—समझने वाली बात यह है कि हमें लंदन को नहीं हिलाना है बल्कि बहुत ही गुपचुप ठीक उस वक्त लूमड़ को दबोच लेना है जिस वक्त कोहिनूर उसके कब्जे में हो—यदि हमने लंदन को हिलाने की कोशिश की तो हमारी वहां मौजूदगी गुप्त नहीं रहेगी और यही छोटी-सी बात हमें उठाकर हमारे मकसद से बहुत दूर फेंक देगी।”
“क्या हम वहां मेकअप में जाएंगे ?”
“बिल्कुल नए नाम, नए चेहरे और नए व्यक्तियों के साथ—हमारे किसी भी एक्शन से हमारा असली व्यक्तित्व झलका और समझ लो कि उसी क्षण हम गए काम से।”
“मगर सर...!” ब्लैक ब्वॉय बोला— “अगर जेम्स बाण्ड आपको बसन्त स्वामी के मेकअप में पहचान सकता है तो किसी अन्य मेकअप में क्यों नहीं पहचान सकता और यदि किसी तरह आप उसे धोखा देने में कामयाब हो भी जाएं तो अलफांसे का क्या होगा, आप ही का कहना है कि किसी मेकअप से उसे धोखा देना लगभग असम्भव ही है।”
“बसन्त स्वामी मैं बहुत ज्यादा सावधानी के साथ नहीं बना था प्यारे, अब मुझे मेकअप करने की अपनी सम्पूर्ण क्षमताओं का प्रयोग करना होगा—हरेक के चेहरे पर मैं खुद मेकअप करूंगा, फिर भी हर क्षण उनके द्वारा पहचान लिए जाने का खतरा तो रहेगा ही—और अगर सही लफ्जों में कहा जाए तो इस खतरे से गुजरना हमारी मजबूरी ही है।”
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10-23-2020, 01:03 PM,
#36
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“ठीक है अंकल, आप आगे की योजना बताएं!”
“हम जासूस नहीं बल्कि लंदन में अपराधी होंगे, वैसे ही अपराधी जैसे किसी भी मुल्क में चौबीस घण्टे कोई नया क्राइम करने के लिए सक्रिय रहते हैं—अपराधी हमेशा पुलिस और जासूस से दूर रहने की कोशिश करता है—वही हमें करना है—यहां से सब अलग-अलग फ्लाइट से जाएंगे, वहां अपरिचित की तरह अलग-अलग कमरों में एलिजाबेथ होटल में ही रहेंगे—एक-दूसरे को रिपोर्ट देने के लिए हमारी भेंट विशेष अवसरों और स्थानों पर ही हुआ करेगी!”
“एक-दूसरे को रिपोर्ट देने के लिए क्यों न हम ट्रांसमीटर्स का इस्तेमाल करें?”
“भूल रहो हो प्यारे कि हम विजय—विकास नहीं, बल्कि छोटे-मोटे अपराधी है, ट्रांसमीटर स्वप्न में भी हमने कभी नहीं देखा है—न केवल ट्रांसमीटर बल्कि अपने पास में ऐसी कोई भी चीज नहीं रखनी है जो हमारे व्यक्तित्वों के ऊपर की हो या किसी को यह बताए कि हम असल में कौन हैं?”
विकास ने प्रशंसात्मक स्वर में कहा— “आपसे चूक नहीं हो सकती।”
“चूक बड़े-से-बड़ा अपराधी करता है दिलजले और मजे की बात ये है कि अपराधी जितना ज्यादा दिमागदार होता है उससे उतनी ही बड़ी चूक होती है, खैर—अब हमें वे पांच व्यक्तित्व चुनने हैं जिनके पासपोर्ट और वीसा का प्रबन्ध अपना काला लड़का कर सके!”
“लंदन पहुंचने के बाद हमें क्या करना होगा गुरु?”
“सबसे पहला काम कोहिनूर की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूर्ण जानकारी तथा लूमड़ की योजना को बहुत ही बारीकी से जानना होगा।”
“कैसे?”
“सारी रामायण यहीं सुन लोगे या आगे के लिए भी कुछ बचाकर रखोगे?”
“क्या मतलब?”
“अभी इस बारे में झानझरोखे, विक्रमादित्य और अपनी गोगियापाशा को भी सब कुछ समझाना बाकी है, वे भी योजना पूछेगे, उस वक्त तुम भी वहीं होगे, सुन लेना।”
“ठीक है!”
“अब तुम कहो प्यारे काले लड़के, जो बातें हुई हैं, वे तुमने भी सुनीं—जान ही चुके हो कि हम क्या करने जा रहे हैं, अगर तुम्हें कोई आपत्ति हो तो कहो!”
“म...मुझे भला क्या आपत्ति हो सकती है सर—मैं तो यही कहूंगा कि अगर देश की गरिमा पर कोई आंच न आए तो ‘कोहिनूर’ नामक हमारे मुल्क का गौरव हमारे पास होना ही चाहिए।”
“कोई सलाह?”
“अ...आप कैसी बात कर रहे हैं सर, क्या मैं आपको सलाह देने के काबिल हूं?”
¶¶
विजय की सारी बात सुनने के बाद अशरफ, विक्रम और आशा को अजीब-सा लगने लगा—वे सोच रहे थे कि इस बार उन्हें मुजरिम बनकर सारे काम बाकायदा मुजरिमों की तरह ही करने होंगे।
इस वक्त रात के दो बज रहे थे और वे पांचों आशा के फ्लैट के भीतरी कमरे में थे, कमरे के सभी खिड़की-दरवाजे न केवल सख्ती से बन्द थे बल्कि उन पर पर्दे भी खिंचे हुए थे—पांच कुर्सियां एक वृत्त की श्कल में पड़ी थीं और वे पांचों उन पर बैठे थे, उनके बीच में एक छोटी-सी मेज थी और मेज पर एक ऑन टॉर्च पड़ी थी— टॉर्च का अग्रिम भाग कमरे की छत की तरफ था और यही वजह थी कि—छत पर प्रकाश का एक बहुत बड़ा दायरा बना हुआ था।
शेष कमरे में उस प्रकाश दायरे से छिटका हुआ धुंधला प्रकाश।
इस धुंधले प्रकाश में उनके चेहरे बड़े ही रहस्यमय-से नजर आ रहे थे, विजय उन्हें उतनी बातें बता चुका था जितनी उसने गुप्त भवन में विकास और ब्लैक ब्वॉय को बताई थीं—उसके बाद से अभी तक सन्नाटा छाया हुआ था, अचानक ही इस सन्नाटे को विक्रम ने भंग किया—“संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि अपराधी बनकर कोहिनूर लेने हमें लंदन जाना है।”
“बेशक!”
“लेकिन, एक बात समझ में नहीं आई विजय!”
“बोलो प्यारे झानझरोखे!”
“अभी तो हम अभियान पर नहीं निकले हैं और भारत ही में हैं—फिर ये बातें करने के लिए चीफ ने हमारी इस भेंट का आयोजन इतने गुप्त और रहस्यमय ढंग से क्यों किया?”
“इसमें तुम्हें रहस्यमय क्या नजर आया प्यारे झानझरोखे?”
“चीफ ने आज दिन में अलग-अलग हम चारों को फोन पर ये आदेश दिया कि रात के डेढ़ बजे हम अपने-अपने निवास से गुप्त रूप से निकलें और आशा के फ्लैट पर पहुंचे—यह भी कहा गया कि आशा के फ्लैट में हम मुख्य द्वार से दाखिल न होकर पिछले दरवाजे से प्रविष्ट हों। इधर, आशा को हुक्म दिया गया कि डेढ़ बजे वह पिछले दरवाजे पर हमारा इंतजार करे, किन्तु फ्लैट के सभी दरवाजे बन्द करके लाइटें ऑफ रखे—टॉर्च को इस ढंग से रखने का आदेश भी चीफ ही ने दिया है—इस मीटिंग के लिए आखिर इतनी सतर्कता क्यों?”
“केवल इसलिए कि मामला लूमड़ का है।”
“यानि?”
“ग्राडवे की लाश ने उसे यह तो समझा ही दिया था कि हमें उसकी स्कीम की भनक लग चुकी है, सम्भव है कि उसी वजह से उसका कोई गुर्गा हमारी गतिविधियां नोट कर रहा हो—यह सब शायद उस चूहे ने इसी खतरे से बचने के लिए किया है।”
“तुमने चीफ को फिर चूहा कहा विजय?” आशा गुर्राई। विजय ने तुरन्त कहा— “तुम्हें तो चुहिया नहीं कहा मेरी छम्मकछल्लो?”
“विजय तुम...!” आशा दांत किटकिटा उठी—“तुम मानोगे नहीं, मैं सचमुच तुम्हारी शिकायत चीफ से कर दूंगी।”
इस तरह विजय और आशा की नोंक-झोंक शुरू हो गई और अशरफ, विक्रम, विकास होंठों को भींचकर हंसी रोकने का भरपूर प्रयास कर रहे थे—वे जानते थे कि आशा मन-ही-मन विजय से बहुत प्यार करती है, किन्तु खुलकर कभी नहीं कह सकी, कुछ तो सीक्रेट सर्विस के अनुशासन में बंधी होने के कारण और कुछ विजय के कारण—यदि सच लिखा जाए तो सबसे बड़ा कारण स्वयं विजय ही है। स्पष्ट शब्दों में तो नहीं परन्तु सांकेतिक ढंग से, सीक्रेट सर्विस के अनुशासन को ‘ताख’ पर रखकर वह कई बार अपनी मोहब्बत का इजहार कर चुकी है, लेकिन विजय ने ऐसे प्रत्येक अवसर पर खुद को मूर्ख साबित किया है और बेवकूफियों से भरी ऐसी अटपटी हरकतें की हैं कि आशा खिन्न हो उठे।
वह स्वयं भी जानता है कि आशा उससे प्यार करती है और प्यार का यह भूत आशा के सिर पर चढ़कर न बोलने लगे, इसीलिए विजय उसके सामने कुछ ज्यादा ही मूर्ख बन जाता है—आशा के कोमल दिल को उसके इस व्यवहार से ठेस लगती है, यह बात विजय जानता है— जान-बूझकर आशा के दिल को ठेस पहुंचाता है वह—पहुंचाए भी क्यों नहीं, अपना सारा जीवन, अपनी खुशियां, अपने सभी सुख देश को अर्पण जो कर दिए हैं उस दीवाने ने।
आशा और विजय की नोंक-झोंक काफी देर तक चली, तीनों मजा लेते रहे—जानते थे कि जब तक उनमें से कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा तब तक रुकने वाली भी नहीं है इसलिए अशरफ बोला— “अब अगर तुम ये अपनी चबड़-चबड़ बन्द करो तो काम की बातें हो जाएं?”
“लो सुन लो मिस गोगियापाशा—ये साला अपना झानझरोखा समझता है कि हम बेकाम की बातें कर रहे हैं। जरा इसे समझाओ कि मोहब्बत किस चिड़िया का नाम है?”
बिफरी हुई आशा गुर्राई—“यह समझने की जरूरत तुम्हें है निर्दयी।”
“निर्दयी—ये क्या होता है प्यारे विक्रमादित्य?”
मुस्कराते हुए विक्रम ने बताया— “निर्दयी उसे कहते हैं जिसे दया न आती हो।”
“लो सुन लो-तो भला हम निर्दयी कैसे हो सकते हैं। हमारे पास तो दया भी आती है, चम्पा और चमेली भी आती हैं, सारी-सारी रात हमारे साथ इश्क के अखाड़े में प्यार की कबड्डी खेलकर जाती हैं, एक बार तो ऐसा हुआ प्यारे दिलजले कि हम चमेली के साथ कबड्डी खेल रहे थे, उसी समय वहां दया भी आ गई और दे-दनादन—दया और चमेली में फाइटिंग शुरू हो गई, अभी ज्यादा देर नहीं हुई थी कि...!”
“चम्पा भी वहां पहुंच गई!” विकास ने वाक्य पूरा किया।
“अरे, तुम्हें कैसे मालूम?”
“मैं भी वहीं था।” मुस्कराते हुए विकास ने कहा— “खैर मजाक छोड़ो गुरु और अब जल्दी-से बताओ कि हममें से किसको लंदन किस नाम से कब जाना है?”
विजय ने कनखियों से आशा की तरफ देखा, अपने स्थान पर बैठी वह बुरी तरह भुनभुना रही थी— विजय समझ गया कि अब वह इतनी उत्तेजित हो चुकी है कि एक भी शब्द नहीं बोल सकेगी, अतः स्वयं ही लाइन पर आता हुआ बोला— “इस अभियान में मेरा नाम बशीर, झान-झरोखे का चक्रम, विक्रमादित्य का डिसूजा, दिलजले का मार्गरेट और अपनी गोगियापाशा का नाम होगा—ब्यूटी!”
‘ब्यूटी’ शब्द विजय ने कुछ ऐसे ढंग से कहा था कि आशा के अलावा सभी हंस पड़े—बुरा–सा मुंह बनाकर आशा ने खा जाने वाली नजरों से विजय को घूरा था।
“हमारी शक्लें और व्यक्तित्व?” विकास ने पूछा। विजय ने जेब से पांच फोटो निकालकर टॉर्च के समीप ही डाल दिए और बोला— “हर फोटो के ऊपरी सिरे पर फोटो के मालिक का नाम लिखा है, पढ़कर समझ जाओगे कि किसका फोटो कौन-सा है?”
एक फोटो उठाते हुए अशरफ ने पूछा— “किसके फोटो है ये?”
“बशीर, चक्रम, मार्गरेट, डिसूजा और ब्यूटी के!”
“म...मेरा मतलब क्या दुनिया में कहीं इन पांचों का वास्तव में कोई अस्तित्व है?”
“बिल्कुल है प्यारे और फिलहाल इनका अस्तित्व अपने चीफ महोदय की कैद में सिसक रहा है—यानी ये पांचों इस वक्त डैथ हाउस में कैद हैं और कम-से-कम उस वक्त तक कैदी ही रहेंगे, जब तक कि हमें इनकी सूरत और व्यक्तित्व की जरूरत रहेगी।”
“इन पांचों को चीफ ने कहां से पकड़ लिया है?”
“हमने पूछा था किन्तु उस चूहे ने बताने से इनकार कर दिया, बिगड़े हुए रेडियो की तरह गड़गड़ाकर बोला—तुम केवल अपने काम से मतलब रखा करो मिस्टर विजय, अनावश्यक सवालों से हमें नफरत है—हमने भी कह दिया कि चलो नहीं पूछते।”
“खैर, इनके व्यक्तित्व के बारे में कहां से जानकारी मिलेगी?”
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10-23-2020, 01:03 PM,
#37
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
“चीफ ने कहा है कि हमें दो-दो घण्टे के लिए इनसे मिला दिया जाएगा, अपने-अपने शिकार की आदतों, बोलने के ढंग आदि का अध्ययन हमें खुद ही करके उनकी नकल करनी होगी—सीक्रेट सर्विस का जूनियर विभाग इन पांचों के बारे में सम्पूर्ण जानकारियां एकत्रित करके तेजी से हरे की फाइल तैयार करने में जुटा हुआ है, हमें ये फाइलें पढ़कर अच्छी तरह कंठस्थ कर लेनी हैं।”
“फाइलें कब तक तैयार हो जाएंगी?”
“परसों तक, कल हमें डैथ हाउस में इनसे मिलना है।”
“विक्रम कह उठा—“काफी पुख्ता काम किया जा रहा है।”
“केवल इसलिए कि यदि बाण्ड, लूमड़ या अन्य कोई ब्रिटिश जासूस हम पर शक करके हमारी जन्मपत्री जानना चाहे तो उसे हमारे पैदा होने से वर्तमान आयु तक का पक्का रिकॉर्ड मिले।”
“खैर!” विकास बोला— “अब मुख्य प्रश्न उभरकर यह आता है कि लन्दन पहुंचकर कोहिनूर की सुरक्षा व्यवस्था या अलफांसे गुरु की स्कीम पता लगाने के लिए क्या करेंगे?”
“पहले लन्दन पहुंच तो जाएं प्यारे!”
“क्या मतलब?”
“सबसे पहले यानी आज से पांचवें दिन अपना झानझरोखे यहां से सीधा लन्दन पहुंचेगा, उसी दिन हम यहां से पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे—दिलजला न्यूयार्क के लिए, विक्रमादित्य रूस के लिए और मिस गोगियापाशा यहां से सीधी आस्ट्रेलिया जाएंगी—फिर एक-एक दिन के अन्तराल से हम अपने-अपने गंतव्य स्थल से लंदल पहुंचेंगे, पहला नम्बर विक्रम का है, दूसरा हमारा, तीसरा आशा का और पांचवां विकास का—अशरफ तो वहां होगा ही, हम सबको एलिजाबेथ में ही अपरिचितों की तरह रहना है।”
“काफी लम्बा-चौड़ा सिलसिला है।”
“जब काम लम्बा-चौड़ा और टकराव काइयां लोगों से हो तो सिलसिले को लम्बा करना ही पड़ता है—हां, तो अब हम सब एलिजाबेथ में इकट्ठे हो गए हैं और वह सवाल उठता है जो अभी-अभी दिलजले ने किया था—यानी हम काम कहां से शुरू करेंगे—वाकई, यह एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है और फिलहाल हमारे पास इसका कोई भी संतोषजनक हल नहीं है।”
“तो फिर?” एक साथ चारों कह उठे।
“चारों तरफ फैले अंधकार में एक व्यक्ति हमें प्रकाश के हल्के से बिन्दु के रूम में नजर आ रहा है।”
“कौन व्यक्ति?”
“याद करो प्यारे दिलजले, वेटर के पीछे जब हम सब ग्राडवे की लाश के पास पहुंचे थे, तब वहां अंधेरा था और गार्डनर ने किसी फोकसदार बल्ब की रोशनी लॉन के उस अंधेरे भाग की तऱफ घुमाने का आदेश दिया था, तब हम ही में से एक व्यक्ति ने उसके आदेशों का पालन किया था।”
“हां, किया था।”
“एकमात्र वही व्यक्ति मुझे प्रकाश बिन्दु के रूप में नजर आ रहा है।”
“वह भला मामले में हमारी क्या मदद कर सकता है?”
“मेरा अनुमान है कि उसका सम्बन्ध के.एस.एस. से होगा।”
“ओह!” विकास के मस्तक पर बल पड़ गए- “निश्चय ही आपका दिमाग काफी तेज दौड़ रहा है गुरु, परन्तु आपका अनुमान गलत भी तो हो सकता है, मुमकिन है कि के.एस.एस. से उसका कोई सम्बन्ध न हो और मात्र जिज्ञासावश उसने गार्डनर के आदेश का पालन किया हो।”
“इसीलिए तो हमने उसे मात्र प्रकाश बिन्दु कहा है, प्रकाश किरण नहीं।”
“क्या आप उसका नाम जानते हैं?”
“नहीं।”
“इस अवस्था में कहां ढूंढते फिरेंगे आप उसे, किसी से उसके बारे में पूछताछ करने का मतलब होगा व्यर्थ ही खुद को संदिग्ध बनाना और बिना पूछताछ के वह मिलेगा, नहीं, संयोग से यदि मिल भी जाए तो पता नहीं ऐसा संयोग होने में कितने दिन लग जाएं और संयोग होने पर यदि पता लगे कि के.एस.एस. से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है तो हमारी हालत क्या होगी?”
“तुम्हारी सारी बातें ठीक हैं प्यारे दिलजले, मगर क्या करें, इसके अलावा कम-से-कम फिलहाल तो हमारे पास कोई रास्ता ही नहीं, हां—यदि वहां पहुंचने पर कोई रास्ता निकल आए तो बात दूसरी है—कोहिनूर की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पता करना विशेष रूप से कठिन इसलिए है, क्योंकि चन्द लोगों के अलावा बाकियों को तो यह भनक तक नहीं है कि सरकार ने कोहिनूर की सुरक्षा के लिए विशेष विभाग बना रखा है—हमारे ख्याल से खुद जेम्स बाण्ड भी गार्डनर का पद नहीं जानता है, उसे भी सिर्फ इतना ही मालूम है कि गार्डनर सिक्योरिटी विभाग में कोई बहुत बड़ा अफसर है—जरा सोचो, जिस रहस्य को ब्रिटेन का बाण्ड जैसा जासूस भी नहीं जानता है, उसके बारे में किसी ऐसे-गैरे को क्या पता होगा-के.एस.एस. का एक आम सदस्य भी ग्राडबे की तरह व्यवस्था के सिर्फ उसी स्पॉट को जानता होगा जहां वह कार्यरत है।”
“अगर इतनी गोपनीयता है तो भला अलफांसे गुरु को समूची सुरक्षा व्यवस्था का विवरण कहां से मिला होगा?” विकास ने प्रश्न उठाया।”
“उसका नाम लूमड़ है प्यारे, काम करने या अपने लाभ की सूचनाएं एकत्रित करने का उसका अपना एक अलग ही तरीका है—तीन महीने पहले वह इर्विन पर आसक्त हुआ, जाहिर है कि वह तभी आसक्त हुआ होगा जब उसे सारी हकीकत पता होगी—इसका मतलब ये है कि कम-से-कम छः महीने पहले से उसके दिमाग में कोहिनूर को प्राप्त करने की सनक है और तुम समझ ही सकते हो अपना लूमड़ छः महीने की कोशिश में तो यह भी पता लगा सकता है कि दुनिया में पहले मुर्गी आई या मुर्गी का अण्डा?”
“कोई भी योजना बनाने से पहले हमें एक नजर कोहिनूर को देखना जरूर चाहिए।” आशा ने कहा।
“उसके दर्शन करना भी हमारे टाइम टेबल में शामिल है।”
“क्या मतलब?”
“कोहिनूर को लंदन के प्रसिद्ध ‘एवेटा’ नामक म्यूजियम में रखा गया है—‘एवेटा’ मंगलवार के अतिरिक्त प्रतिदिन पब्लिक के लिए दस से चार तक खुलता है—इस म्यूजियम में एक-से-एक विचित्र, नायाब और कीमती वस्तुएं रखी हैं। उन्हीं में से एक कोहिनूर भी है परन्तु कोहिनूर को सबसे अलग विशेष पहरे में रखा गया है— म्यूजियम के उस भाग को पब्लिक के लिए दो से चार तक यानी केवल दो घण्टे के लिए खोला जाता है।”
“यहां भी सख्त सुरक्षा-व्यवस्था होगी?”
“वह तो सर्वविदित है ही—यानी इस ऊपरी सुरक्षा-व्यवस्था के बारे में आम लोग भी जानते हैं।”
आशा ने पूछा—“क्या व्यवस्था है वहां?”
“वह किसी बहुत बड़ी टंकी जैसा गोल हॉल है, हॉल करीब चालीस फीट ऊंचा है और दीवारें सपाट तथा संगमरमर की बनी हैं—हॉल में दो दरवाजे हैं, एक पब्लिक के आने के लिए और दूसरा निकलने के लिए-इनके अलावा गोल हॉल में कहीं कोई खिड़की तक नहीं है— हॉल के बीचोबीच आदमकद शीशे का एक जार रखा है, इस जार की निचली तहें संगमरमर के चिकने फर्श में गुम हैं और कहते हैं कि ये जार ऐसे पारदर्शी शीशे का बना है जो किसी भी तरीके से टूट नहीं सकता है—जार के अन्दर सुर्ख शनील की एक चौकी है और उस चौकी के ठीक बीच में रखा कोहिनूर अपने अन्दर से सात तरह का प्रकाश निकालता हुआ नजर आता है—कोहिनूर की वजह से वह गोल हॉल हमेशा सतरंगी प्रकाश से भरा रहता है, हॉल के बीचोबीच इस जार की स्थिति किसी छोटी मीनार जैसी है और इस मीनार से तीन गज दूर जंजीर का रेलिंग का बना हुआ है, जंजीर के रेलिंग के अन्दर जाना अवैध है यानी दर्शक कोहिनूर को रेलिंग के चारों तरफ घूमते हुए कम-से-कम साढ़े तीन फीट दूर से देखते हैं, उस समय हाल की दीवारों से सटे हुए सशस्त्र सैनिक खड़े रहते हैं, जिनका काम सिर्फ कोहिनूर को देखने आए लोगों पर नजर रखना और उन्हें वॉच करते रहना है—किसी भी किस्म की गड़बड़ होते ही उनके हथियार हरकत में आने के लिए तैयार रहते हैं।”
“अच्छी व्यवस्था है।”
“अभी से तारीफ क्यों कर रहे हो प्यारे, व्यवस्था अभी पूरी कहां हुई है?”
“कुछ और भी रह गया है?”
“बेशक!”
“क्या?”
“प्रवेश द्वार पर एक ‘मैटल डिटेक्टर’ रखा गया है, हॉल में प्रविष्ट होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से, उसके सामने से जरूर गुजरना पड़ता है—और अगर आपकी जेब में कोई शस्त्र है तो वह मैटल डिटेक्टर आपको पकड़ लेगा—इसके अलावा हॉल में प्रविष्ट होते ही दाईं तरफ एक मेज के पीछे कर्नल जैसी रैंक का कोई मिलिट्री अधिकारी बैठा होगा—मेज पर एक रजिस्टर तथा पैन मौजूद है—इस व्यक्ति की ड्यूटी कोहिनूर को देखने आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साइन रजिस्टर में कराते रहना है।”
“साइन?”
“म्यूजियम के विभाग के पास आज तक उतने ही रजिस्टर सुरक्षित रखे हैं जितने साल से कोहिनूर आम जनता के लिए वहां रखा है यानी प्रत्येक साल का अलग रजिस्टर है, प्रत्येक दिन की तारीख आदि डालने के बाद ही हॉल का दरवाजा जनता के लिए खोला जाता है और प्रत्येक व्यक्ति रजिस्टर में साइन करने के बाद ही आगे बढ़ सकता है—ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि किसी ने बिना उस रजिस्टर पर साइन किए कोहिनूर देखा हो।”
“दर्शकों के साइन लेने से उन्हें क्या लाभ है?”
“वे शायद कोहिनूर देखने आने वालों का रिकॉर्ड रखना चाहते हैं ताकि किसी किस्म की गड़बड़ होने पर उन्हें वॉच किया जा सके, दूसरे वह ये देखना चाहते होंगे कि एक ही व्यक्ति अनेक बार तो कोहिनूर को देखने नहीं आ रहा है, यदि एक ही व्यक्ति नाम बदलकर कई बार आएगा तब भी शायद उनके राइटिंग एक्सपर्ट बता देंगे कि साइन एक ही व्यक्ति के हैं और वह व्यक्ति सिक्योरिटी की नजरों में आ जाएगा—सुना है कि रजिस्टर के पास जो अफसर बैठा रहता है वह परले दर्जे का मनोवैज्ञानिक है—वह हमेशा अपनी गहरी नीली आंखों से साइन करने वालों के हाथ देखता रहता है और यदि व्यक्ति अपने अलावा किसी अन्य नाम से साइन करे तो वह ताड़ जाता है।”
“कमाल है, इन लोगों ने तो कोहिनूर को देखना भी एक प्रॉब्लम बना दी है।”
“जो उसे सिर्फ जिज्ञासावश देखने जाते हैं उनके लिए इस सारी प्रक्रिया में कहीं कोई प्रॉब्लम नहीं है परन्तु यदि कोई किसी दुर्भावना से जाए तो उसके लिए सारी प्रक्रिया एक परीक्षा जैसी जरूर है—जैसे हम—हमारे लिए वह प्रक्रिया वाकई एक परीक्षा सिद्ध होगी।”
“कोहिनूर को चुराने की बात भला कोई सोच ही कैसे सकता है?”
“इतना ही नहीं, अफवाह है कि कोहिनूर को देखते वक्त हमारी आंखें जितनी आंखों को देख रही होती हैं, उससे कई गुना ज्यादा ऐसी आंखें हमें देख रही होती हैं जिन्हें हम भरसक कोशिश करने के बावजूद भी नहीं देख सकते, छुपी हुई आंखें—हालांकि सरकारी तौर पर कभी इसकी पुष्टि नहीं हुई—परन्तु कहते हैं कि हॉल के दोनों दरवाजों का सम्बन्ध खुद कोहिनूर से है, कोहिनूर के अपनी जगह से हटते ही दरवाजे बन्द हो जाएंगे और तब तक नहीं खुलेंगे जब तक कि कोहिनूर को उसके स्थान पर न रख दिया जाए—इतना सब कुछ होते हुए भी लूमड़ जैसे लोग कोहिनूर को चुराने के मनसूबे बांध ही लेते हैं।”
आशा ने कहा— “इस स्थिति मैं तो कोहिनूर को एक नजर देखने तक जाना कड़ी परीक्षा देने जैसा है।”
“तुम समझ ही सकती हो, इन इन्तजामों का जिक्र यहां हमने इसलिए किया है, क्योंकि कम-से-कम एक बार तो हमें वहां जाकर कोहिनूर की स्थिति देखनी ही होगी। अगर अप्रत्याशित रूप से ये सब बातें सामने आतीं तो हममें से कोई गड़बड़ा भी सकता था।”
“अब तो वहां हमें काफी सतर्क होकर जाना पड़ेगा।”
“पूरी तरह, हल्की-सी चूक की वजह से ही हम सिक्योरिटी की दृष्टि में संदिग्ध हो सकते हैं—सबसे कठिन काम रजिस्टर के पास बैठे अफसर की आंखों को धोखा देना है—उसके बाद हमें भीड़ में शामिल होकर साधारण दर्शक की तरह ही कोहिनूर को देखना है, दृष्टि में विशेषता आई और समझ लो कि हम किसी छुपी हुई आंख की नजरों में आ चुके हैं।”
“खैर!” आशा बोली— “जब हम वहां जा ही रहे हैं तो इस किस्म के खतरों का सामना तो हर कदम पर करना ही होगा।”
“हां ये हुई न मर्दों वाली बात।”
आशा ने उसे घूरकर देखा और विजय सकपका गया।
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10-23-2020, 01:03 PM,
#38
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
आशा के फ्लैट पर हुई मीटिंग के तेरहवें दिन बाद वे सभी न केवल लंदन बल्कि एलिजाबेथ होटल पहुंचे थे। योजना के मुताबिक उनके नाम बशीर, चक्रम, डिसूजा, मार्गरेट और ब्यूटी ही थे तथा वे पूर्वनिर्धारित स्कीम के मुताबिक ही वहां पहुंचे थे।
न केवल अपने ही बल्कि वे एक-दूसरे के मेकअप से भी पूरी तरह सन्तुष्ट थे, क्योंकि जानते हुए भी एक-दूसरे को देखकर वे विश्वास नहीं कर सके कि वह उनका ही साथी है।
अलफांसे और इर्विन अभी तक उसी यानी सेवन्टी-वन नम्बर कमरे में ही रह रहे थे, उन्हें वॉच करने का काम विजय ने अपने जिम्मे लिया था और उसने उन्हें वॉच किया भी था परन्तु—कोई लाभ नहीं निकला।
वे हनीमून मना रहे, साधारण पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
विकास के जिम्मे उस व्यक्ति को खोज निकालने का काम था, जिसने गार्डनर के हुक्म पर फोकस वाले बल्ब का रुख ग्राडवे की लाश की तरफ किया था।
यह काम विकास को भूसे के ढेर में से सुई ढूंढ निकालने के बराबर कठिन लगा—सारे दिन वह लंदन की सड़कों पर मारा-मारा फिरता, किन्तु शाम के वक्त थक-हारकर वापस लौट आता।
आज दोपहर आशा ने म्यूजियम जाकर एक नजर कोहिनूर को देखने का निश्चय किया, इसमें शक नहीं कि ऐसा निश्चय करते ही उसका दिल असामान्य गति से धड़क उठा।
ब्यूटी एक जापानी लड़की थी, जापान में उसके पिता का बहुत बड़ा कारोबार था और वह अकेली थी, और वह अकेली ही दुनिया घूमने के लिए निकली थी। भारत के बाद उसकी लिस्ट में ब्रिटेन का नाम था—किसी आवश्यक कार्यवश वह भारत से आस्ट्रेलिया गई और वहां से सीधी लन्दन आई है।
फिलहाल संक्षेप में आशा का यही परिचय था।
वह गोरी-चिट्टी तीखे नाक-नक्श नीली आंखों और तांबे से रंग वाले बालों वाली लड़की नजर आती थी, जिस्म पर जापानी पोशाक पहने थी। उस वक्त दो बजने में सिर्फ दस मिनट बाकी रह गए थे, जब वह उस गैलरी में दाखिल हुई जो कोहिनूर वाले हॉल तक जाती थी—अभी वह कुछ ही दूर चली थी कि गैलरी में एक छोटी-सी बुकिंग देखकर ठिठक गई।
बुकिंग के माथे पर लिखा था—“कृपया कोहिनूर देखने के लिए फ्री कूपन यहां से लें।”
बुकिंग के अन्दर मोटी भंवो और चौड़े चेहरे वाला व्यक्ति बैठा सिगरेट पी रहा था, पहली नजर में देखने पर ही वह व्यक्ति बहुत क्रूर-सा नजर आता था—आशा के ठिठकने की वजह वह बुकिंग और उसके मस्तक पर लिखा वाक्य था।
आशा के दिमाग में बड़ी तेजी से विचार कौंधा—‘ये क्या चक्कर है?’
विजय ने तो ऐसी किसी बुकिंग या कूपन का जिक्र नहीं किया था। फिर भी वह स्वयं को नियन्त्रित करके बुकिंग की तरफ बढ़ गई।
“मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?” बुकिग के अन्दर बैठे क्रूर-से नजर आने वाले व्यक्ति ने पूछा।
“मैं कोहिनूर देखना चाहती हूं।” आशा ने नियन्त्रित स्वर में कहा। सिगार को दांतों के बीच फंसाकर उसने कलमदान से पैन उठाया और अपने सामने खुले रखे रजिस्टर पर झुकते हुए प्रश्न किया—
“आपका नाम?”
“ब्यूटी!”
लिखते हुए चौड़े चेहरे के व्यक्ति ने पूछा— “किस देश की नागरिक हैं?”
“जापान की।”
“फिलहाल लन्दन कहां से आई हैं?”
“आस्ट्रेलिया से!”
“यहां किस होटल में ठहरी हैं, कृपया कमरा नम्बर सहित बताएं।”
आशा ने उसके इस अन्तिम सवाल का जवाब भी ठीक-ठाक दे तो दिया, किन्तु सच्चाई ये है कि ढेर सारी आंशकाओं ने उसके मस्तिष्क को बुरी तरह हिलाकर रख दिया—जो सवाल उससे पूछे गए थे वह पहले से उनमें से किसी एक का भी जवाब देने के लिए तैयार नहीं थी। होती भी तो कैसे?
उसे ज्ञात ही नहीं था कि यहां ऐसे सवाल किए जाएंगे और वैसे भी उसने नोट किया था कि क्रूर व्यक्ति ने पृष्ठ के सबसे ऊपर क्रम संख्या एक डालकर उसके जवाब लिखे हैं, इसका सीधा-सा मतलब था, कोहिनूर को देखने वाली आज की वह पहली दर्शक है।
यह सोचकर वह कांप गई कि म्यूजिम के इस सन्नाटेदार भाग में बिल्कुल अकेली है।
“मिस ब्यूटी!” क्रूर व्यक्ति ने उसे चौंकाया।
हड़बड़ाकर वह कह उठी—“य...यस!”
“कहां खो गईं आप?”
“क...कहीं नहीं।”
“आपका कूपन!” उसने पीतल का बना एक गोल कूपन विन्डो के रास्ते से बाहर की तरफ सरका दिया, आशा ने जल्दी से कूपन उठाया और घूम गई—क्रूर व्यक्ति की तरफ अपनी पीठ कर दी थी उसने और कूपन को कसकर मुट्ठी में दबाए हड़बड़ाहट में बुकिंग से कई कदम आगे निकल आई।
आशा महसूस कर रही थी कि उसके मस्तक पर पसीने की ढेर सारी बूदें उभर आई हैं—दिल बेकाबू होकर जोर-जोर से धड़क रहा है और अनजाने में ही वह हांफने लगी है।
वह गोल हॉल की तरफ जाने वाले रास्ते पर बढ़ी थी और उस तरफ सन्नाटा व्याप्त था—जाने क्यों, इस वक्त आशा को यह सन्नाटा बहुत ही भयावह-सा महसूस हुआ।
वह ठिठक गई, जान-बूझकर उसने अपने आगे बढ़ते हुए कदमों को रोक लिया—जाने कहां से यह विचार उभरकर उसके मस्तिष्क से टकराया कि—कहीं वह किसी जाल में तो नहीं उलझती जा रही है?
अनजाने में ही कूपन को उसने मुट्ठी में कसकर भींच लिया। गैलरी का एक मोड़ घूमने के बाद ही उसे गोल हॉल का दरवाजा नजर आया, अभी वह बन्द था और उसके समीप ही एक सैनिक कन्धे पर गन लटकाए सावधान की-सी मुद्रा में खड़ा था।
आशा ने रिस्टवॉच में समय देखा—दो बजने में केवल दो मिनट शेष थे।
दरवाजा उसे चमक जरूर रहा था परन्तु इतना दूर था कि वहां तक पहुंचने में उसे डेढ़ मिनट लग ही जाना था, सो वह धीमे-धीमे कदमों से गैलरी पार करने लगी।
सैनिक किसी स्टैचू के समान मुस्तैद खड़ा था।
आशा उसके निकट पहुंच गई, कुछ कहना तो दूर—वह हिला तक नहीं।
पन्द्रह सेकण्ड बाद ‘घर्र-घर्र’ की एक छोटी-सी आवाज के साथ दरवाजा खुल गया, आशा का दिल बेकाबू होकर जाने क्यों धड़कने लगा।
हॉल में पहला कदम रखते ही नजर एक मेज के पीछे कुर्सी पर बैठे व्यक्ति पर पड़ी, मेज पर एक खुला हुआ रजिस्टर और पेन रखा था, एक तरफ लगे छोटे-से बोर्ड पर लिखा था— “कृपया अपने साइन करें!”
गहरी नीली आंखों वाला व्यक्ति आशा को अपनी तरफ देखता हुआ महसूस हुआ और यही वह क्षण था जब बड़ी तेजी से उसके दिमाग में यह विचार उठा कि—ये व्यक्ति परले दर्जे का मनोवैज्ञानिक है, साइन करते हुए आदमी का हाथ देखकर ताड़ जाता है कि साइन करने वाले का नाम वही है या नहीं?
यह विचार आशा को नर्वस करने लगा।
फिर भी उसने खुद को संभाला और मेज की तरफ बढ़ गई। दिल असामान्य गति से धड़कने लगा था, किन्तु उसने पूरी लापरवाही के साथ पैन उठाया, नीली आंखें उसके हाथ पर जम गईं—ऐसा देखकर आशा के सारे शरीर में सिहरन-सी दौड़ गई, लेकिन हाथ को नहीं कांपने दिया उसने।
पूरे फ्लो में फटाक से साइन किए और घूम गई।
अपनी आंखें वहां उसने कोहिनूर पर जमा दीं—जंजीर से रेलिंग की तरफ बढ़ी—आंखें वहां होने के बावजूद भी वह कोहिनूर को देख नहीं रही थी, मस्तिष्क में सैकड़ों अजीब-अजीब-से विचार घुमड़ रहे थे—अचानाक ही विचार उठा कि कहीं उसने रजिस्टर में आशा के नाम से तो साइन नहीं कर दिए हैं?
वह ठिठक-सी गई।
उसे याद नहीं रहा था कि रजिस्टर में ब्यूटी के नाम से साइन करके आई है या आशा के—दिल चाहा कि घूमे, मेज के पास जाए और अपने साइन को देखे—परन्तु नहीं, यही उसकी सबसे बड़ी और अन्तिम बेवकूफी साबित होगी, नीली आंखों वाले के एक इशारे पर उसे इसी वक्त गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अतः अपना सम्पूर्ण ध्यान उसने कोहिनूर पर एकत्रित कर दिया—दुनिया का वह अकेला और नायाब हीरा दमक रहा था।
सारी स्थिति विजय के बताए मुताबिक ही थी।
रेलिंग के सहारे घूमती हुई आशा कोहिनूर का अवलोकन करने लगी और इसमें शक नहीं कि उसकी खूबसूरती में डूबकर वह सब कुछ भूल गई—उन क्षणों में ठीक से अपना नाम तक याद नहीं रहा था उसे।
थोड़ी आश्वस्त होकर उसने अपने चारों तरफ देखा। हॉल की दीवारों के सहारे खड़े सशस्त्र सैनिकों ने गनें उसी तरह तान रखी थीं—वह अकेली थी— और शायद इसीलिए चारों तरफ खड़े सशस्त्र सैनिक उसी की तरफ देख रहे थे।
उस वक्त उसकी जान में जान आई जब प्रवेश द्वार पर उसने बहुत-से पदचाप और कई व्यक्तियों के आपस में बात करने की आवाजें सुनीं—आशा ने उधऱ देखा, कोई अंग्रेज परिवार अपने मेहमानों को कोहिनूर दिखाने लाया था।
उन सभी ने आगे बढ़-बढ़कर रूटीन के-से अन्दाज में साइन कर दिए।
आशा पुनः कोहिनूर को देखकर सोचने लगी कि यदि वह यहां इस हीरे को देखने आशा के नाम से ही आई होती तो उन लोगों की तरह स्वच्छन्द मस्तिष्क से कोहिनूर की खूबसूरती का आनन्द उठा सकती थी, उस वक्त मेरे पास इस वक्त जैसा तनावग्रस्त मस्तिष्क न होता। अवसर मिलते ही वह निकासी द्वार की तरफ बढ़ गई।
द्वार पर एक सैनिक खड़ा था, जिसने उसके निकट पहुंचते ही हाथ फैला दिया।
“क...क्या बात है?” आशा हड़बड़ा गई।
उसने नम्र स्वर में कहा—“कूपन प्लीज!”
“ओह!” कहती हुई आशा ने अपनी वह मुट्ठी खोल दी जिसमें कूपन था, अनजाने ही में कूपन को सख्ती से भींचे रखने के कारण आशा की कोमल हथेली पर उसकी छाप स्पष्ट बन गई थी जिसे देखकर कूपन लेते हुए सैनिक ने अजीब-सी मुस्कान के साथ कहा—
“कमाल है, आपने कूपन को इतनी सख्ती से क्यों पकड़ रखा था?”
“श...शायद अनजाने में!” कहने के बाद आशा दरवाजा पार कर गई, तेज कदमों के साथ गैलरी से गुजरने लगी वह-आशा जल्दी-से-जल्दी इस म्यूजियम से बाहर निकल जाना चाहती थी—निकासी द्वार पर जो सैनिक खड़ा था, हालांकि उसके द्वारा कही गई बात कोई विशेष नहीं थी परन्तु उसके एक ही वाक्य ने आशा को हिलाकर रख दिया था।
भारतीय सीक्रेट सर्विस की एजेण्ट आशा।
अपने जीवन में वह पहले भी अनगिनत बार खतरों से गुजर चुकी थी, कई बार तो मौत की आंखों में आंखें डालकर उसने बड़े साहस से जंग की थी, ऐसी जंग कि हर बार मौत उसके कदमों में औंधे मुंह गिरी थी, उसी आशा को कोहिनूर देखने की परीक्षा ने हिलाकर रख दिया था।
आज पहली बार उसकी समझ में यह बात आई कि जुर्म करते वक्त चालाक से चालाक मुजरिम आखिर गलतियां कर क्यों जाता है—जुर्म करते वक्त मुजरिम के मन में एक चोर होता है, दिमाग पर एक अजीब-सी नर्वसनेस हावी रहती है—प्रत्येक क्षण उसे याद रहता है कि वह मुजरिम है—जुर्म कर रहा है—आवश्यकता से अधिक सतर्कता के कारण ही वह भूल करता है।
इन्हीं विचारों में खोई आशा गैलरी के कई मोड़ पार कर गई—एक मोड़ पर घूमते ही उसकी नजर एक काउण्टर पर पड़ी—काउण्टर के पीछे एक आकर्षक और युवा अंग्रेज बैठा इण्टरकॉम पर किसी से बातें कर रहा था, आशा ने देखा कि बातें करते हुए अंग्रेज ने उसकी तरफ देखा।
आशा यह तो न सुन सकी कि इण्टरकॉम पर वह क्या बातें कर रहा है, परन्तु उसे लगा कि बातें करते युवक ने उसे विशेष नजरों से देखा है, वह बिना ठिठके—नजरें झुकाकर तेजी के साथ काउण्टर के समीप से गुजर गई।
म्यूजियम से बाहर निकलते ही उसने टैक्सी पकड़ी और एलिजाबेथ चलने के लिए कहकर सीट पर बैठ गई—टैक्सी आगे बढ़ गई—आशा ने आंखें बन्द करके सिर पुश्त से टिका दिया।
उसके कोहिनूर को देखने के क्षण बहुत ही तनाव में गुजरे थे।
ज्यों-ज्यों वह म्यूजिम से दूर होती गई, त्यों-त्यों मन हल्का होता गया और अचानक उसे ख्याल आया कि उसके बाकी साथी भी योजनानुसार एक-एक बार कोहिनूर को देखने जाने वाले हैं, तभी उसे कूपन वाली बुकिंग और उसके द्वारा किए गए सवालों का स्मरण हो आया।
‘ओह, यदि वे सब जाएंगे तो उनसे भी वही प्रश्न पूछे जाएंगे-होटल का नाम और कमरे का नम्बर तक। ओह-सिक्योरिटी विभाग यह जानकर चौंक सकता है कि आजकल एलिजाबेथ में ठहरे विदेशी लोग कोहिनूर को देखने ज्यादा आ रहे हैं।’
‘ख...खतरा!” यह शब्द बिजली की तरह आशा के मस्तिष्क में कौंध गया।
सभी का कोहिनूर देखने जाना खतरनाक है—सिक्योरिटी को शक हो सकता है, वे शक कर सकते हैं कि हम पांचों अपरिचित नहीं हैं और फिर इस शक के आधार पर ही जासूस हम लोगों के पीछे लग सकते हैं।
बैठे-बिठाए यह एक व्यर्थ की मुसीबत गले पड़ जाएगी।
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10-23-2020, 01:03 PM,
#39
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
आशा ने निश्चय किया कि वह ऐसा नहीं होने देगी, अपने साथियों को वह कोहिनूर देखने जाने से रोकेगी—मगर कैसे, विजय का निर्देश है कि जब तक वह संकेत न करे तब तक आपस में मिलने या बात करने की तो बात ही दूर, नजरें तक नहीं मिलानी हैं।
उफ्फ—क्या करे वह, अपने साथियों को म्यूजियम में जाने से कैसे रोके?
अभी आशा कुछ निश्चय भी नहीं कर पाई थी कि टैक्सी एलिजाबेथ होटल की पार्किंग में रुकी, पांच मिनट बाद ही वह हॉल में बैठी कॉफी पी रही थी— वह अपने साथियों को सतर्क करने की तरकीब सोच रही थी, अभी तक उनमें से कोई नजर नहीं आय़ा था।
एकाएक हॉल का दरवाज खुला, आशा की दृष्टि बरबस ही उस तरफ उठ गई और यह सच्चाई है कि वह बुरी तरह चिहुंक उठी।
काफी का मग उसके हाथ से छूटते-छूटते बचा।
जिस्म में मौत की झुरझुरी-सी दौड़ गई, जिस्म के सभी मसामों ने एक साथ ढेर सारा पसीना उगल दिया और अपने सारे जिस्म का रोया, खड़ा हुआ-सा महसूस हुआ उसे।
बहुत संभालते-संभालते भी चेहरा ‘फक्क’ से सफेद पड़ गया था। हॉल में वही आकर्षक युवक दाखिल हुआ था, जिसे उसने इण्टरकॉम पर बातें करते वक्त अपनी तरफ देखते देखा था, आशा पर केवल एक नजर डालकर वह खाली सीट की तरफ बढ़ गया।
आशा के हाथ में मौजूद हौले-हौले से कांप रहा कॉफी का मग उसकी आन्तरिक अवस्था को उजागर किए दे रहा था, आशा ने दांत भींचकर उसे कांपने से रोका।
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विकास पेटीकोट मार्किट में स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक कम्पनी के शो-रूम में प्रविष्ट हुआ।
सबसे पहले उसने बड़ी विनम्रता से साथ काउण्टर पर बैठे अधेड़ आयु के व्यक्ति से ‘हैलो’ की और हाथ बढ़ाता हुआ बोला— “मुझे मार्गरेट कहते हैं।”
“मैं फ्यूज हूं।” हाथ मिलाते हुए अधेड़ के होंठों पर व्यापारिक मुस्कान उभरी, बोला—“कहिए मिस्टर मार्गरेट, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?”
“मुझे केवल अगाथा इलेक्ट्रॉनिक्स का एड्रेस चाहिए!”
“ओह!” फ्यूज के स्वर में कुछ उदासीनता आ गई, फिर भी उसने विकास को अगाथा इलेक्ट्रॉनिक्स का पता बता दिया- हाथ मिलाकर थैक्यू कहते हुए विकास ने उससे विदा ली।
तीस मिनट बाद विकास अगाथा इलेक्ट्रॉनिक्स में दाखिल हुआ, एक विशाल मेज के पीछे बड़ी-सी गददेदार रिवॉल्विंग चेयर पर पतली-दुबली-सी लड़की बैठी थी, ‘हैलो’ के बाद विकास को उसने बैठने के लिए कहा और विकास मेज के इस तरफ पड़ी कुर्सियों में से एक पर बैठ गया।
“कहिए!” लड़की की आवाज मधुर थी।
“मिस्टर स्टेनले गार्डनर की कोठी का लाइट अरेंजमेंट आप ही ने किया था?”
“जी हां।”
“मुझे वह बहुत पसन्द आया था।”
लड़की ने व्यापारिक ‘थैंक्यू’ कहा।
“यदि मैं ‘सेम’ अरेंजमेंट कराना चाहूं तो क्या खर्चा आ जाएगा?”
“दस हजार पाउण्ड!”
“टैन थाउजेन्ड पाउण्ड?” चौंकने की बहुत ही खूबसूरत एक्टिंग की विकास ने—“नो-नो-नो-ये तो बहुत ज्यादा है—टेन थाउजेन्ड—नो-नो कुछ कम कीजिए।”
लड़की ने मुस्कराते हुए कहा—“आपको वही रेट बताए गए हैं जो मिस्टर चैम्बूर से लिए गए।”
“कौन मिस्टर चैम्बूर?”
“वही जिन्होंने, ओह-सॉरी!” लड़की ने इस तरह कहा जैसे अपनी किसी भूल का अहसास हो गया हो, बोली—“दरअसल मिस्टर चैम्बूर मिस्टर गार्डनर के परिचितों में से हैं और बतौर तोहफे के मिस्टर चैम्बूर ने ही उनकी कोठी पर लाइट अरेंजमेंट कराया था, बिल उन्होंने ही पे किया है।”
“ओह!” विकास इस तरह बोला जैसे सारा मामला समझ गया हो, बोला, “मगर मुझे लग रहा है कि आप खर्चा बहुत ज्यादा बता रही है।”
“हम आपको सम्बन्धित बिल दिखा सकते हैं।”
“मैं सोचता हूं कि यदि इस मामले में मिस्टर चैम्बूर से बात कर लूं तो ज्यादा अच्छा रहेगा।”
“ऑफकोर्स!”
“क्या आप मुझे उनका एड्रेस और फोन नम्बर दे सकेंगी?”
“जरूर!” कहने के साथ ही लड़की ने इण्टरकॉम से रिसीवर उठा लिया—इच्छित बटन दबाकर सम्बन्ध स्थापित होने के बाद उसने किसी को मिस्टर चैम्बूर का एड्रेस और फोन नम्बर लिखकर लाने के लिए कहा—दस मिनट बाद जब विकास अगाथा इलेक्ट्रॉनिक्स के ऑफिस से बाहर निकला तो उसकी जेब में चैम्बूर का एड्रेस और फोन नम्बर था।
फिलहाल वह नहीं जानता था कि चैम्बूर वही व्यक्ति है या नहीं जिसकी तलाश में वह भटक रहा है, मगर अंधेरे में उसने यह एक तीर जरूर मारा था, निशाने पर लगने की उम्मीद में।
जब आदमी को अपनी मंजिल या मकसद तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलता तो वह तिकड़म लड़ाता है और यदि देखा जाए तो हाथ पर हाथ रखकर खाली बैठने से तिकड़म लड़ा-लड़कर कुछ करते रहना हर हालत में बेहतर है, कभी-कभी अंधेरे में चलाया गया तीर निशाने पर जा लगता है।
कुछ ऐसा ही विकास के साथ भी हुआ।
पिछले दिन की तरह वह आज भी अपने शिकार की तलाश में मारा-मारा लन्दन की सड़कों पर फिर रहा था और सोच रहा था कि विजय गुरु ने उसे ये क्या बोरियत से भरा असम्भव-सा काम सौंप दिया है।
शिकार की सिर्फ शक्ल देखी है, नाम तक नहीं मालूम, उसके बारे में किसी से सीधी बात करने का हुक्म नहीं है, फिर भला पता कैसे लग सकेगा कि वह कौन है, कहां रहता है?
पेटीकोट मार्केट में घूमते हुए उसकी नजर एक कम्पनी के इलेक्ट्रॉनिक शो-रूम पर पड़ी, एकाएक ही उसके मस्तिष्क पटल पर अलफांसे की शादी में गार्डनर की कोठी के बाहर बना स्वागत द्वार चकरा उठा—लाइट का अरेंजमेण्ट करने वाली कम्पनी ने वहां विज्ञापन हेतु अपना नाम लिखा था।
विकास ने दिमाग पर जोर देकर उस नाम को याद किया, थोड़ी-सी मेहनत के बाद ही उसे नाम याद आ गया— “अगाथा इलेक्ट्रॉनिक्स।”
विकास ने सोचा-सम्भव है कि गार्डनर की कोठी पर लाइट का अरेंजमेण्ट करना उसके शिकार की ही जिम्मेदारी रही हो, आखिर वह गार्डनर का परिचित तो था ही और जब इतना बड़ा काम फैलता है तो प्रत्येक व्यक्ति काम को अपने परिचितों में बांटकर ही हल्का करता है।
ऐसी कल्पना करना सिर्फ अंधेरे में तीर चलाना ही था, जिसे विकास ने सिर्फ इसलिए चला दिया क्योंकि करने के लिए फिलहाल उसके पास कोई काम नहीं था, बस—घुस गया उस शो-रूम में।
और अब, उसकी जेब में चैम्बूर का पता और फोन नम्बर था। वह नहीं जानता था कि तीर निशाने पर लगा या नहीं और इसकी पुष्टि करने के लिए वह एक पब्लिक टेलीफोन बूथ में घुस गया। इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा दिया गया नम्बर मिलाया।
दूसरी तरफ से रिसीवर उठाए जाने के साथ ही आवाज उभरी—
“हैलो!”
“क्या मैं मिस्टर चैम्बूर से बात कर सकता हूं?”
“आप कौन शाब बोल रहे हैं?”
“उनसे कहिए कि स्टेनले गार्डनर बात करना चाहते हैं।”
“जी शाब, होल्ड कीजिए!” दूसरी तरफ से बोलने वाले ने ‘स’ के स्थान पर ‘श’ का प्रयोग किया था, विकास ने इसी से अनुमान लगा लिया कि नौकर रहा होगा।
सच तो ये है कि विकास धड़कते दिल से, रिसीवर कान से लगाए चैम्बूर की आवाज सुनने के लिए बेचैन था, दरअसल आवाज को सुनते ही वह इस निष्कर्ष पर पहुंच सकता था कि चैम्बूर उसके शिकार का नाम है या नहीं—लाइन पर हल्की-सी यान्त्रिक खड़खड़ाहट होते ही वह सतर्क हो गया।
दूसरी तरफ से आवाज उभरी—“यस सर, चैम्बूर हीयर!”
और इन चन्द शब्दों ने ही विकास के सारे जिस्म में सनसनी–सी दौड़ा दी—आवाज को वह पहचान चुका था, तीर बिल्कुल सही निशाने पर लगा था—यह उसी व्यक्ति की आवाज थी, जो गार्डनर का आदेश होते ही अभी कराता हूं’ कहकर फोकस वाले बल्ब की तरफ भागता चला गया था।
“हैलो...हैलो सर!” शत-प्रतिशत वही आवाज।
विकास ने एक शब्द भी कहे बिना सम्बन्ध विच्छेद किया, रिसीवर हैंगर पर लटकाया और दरवाजा खोलकर बूथ से बाहर निकल आया—उसके दिलो-दिमाग पर खुद को मंजिल के इतने करीब जानकर मस्ती-सी सवार हो गई थी।
पतलून की जेबों में हाथ डालकर सीटी बजा उठा वह।
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10-23-2020, 01:03 PM,
#40
RE: Desi Porn Stories अलफांसे की शादी
दूसरी तरफ से बोले गए चैम्बूर के एक ही वाक्य से एक साथ उसके दो मतलब हल हो गए, यह कि चैम्बूर ही उसका शिकार है और यह भी चैम्बूर का सम्बन्ध के.एस.एस. से है—उसके बोलने का ढंग ही बता रहा था कि नौकर के बताए मुताबिक लाइन पर उसने गार्डनर को समझा था और गार्डनर को उसने ‘सर’ कहा था—जाहिर है कि गार्डनर उसका अफसर है।
जेबों में हाथ डाले फुटपाथ पर मस्ती में चला जा रहा विकास सोच रहा था कि अब वह क्या कर—सीधा होटल जाए और विजय गुरु को सफलता की सूचना दे? लेकिन नहीं, फिलहाल यह विचार उसने स्थगित कर दिया, सोचा कि एक नजर चैम्बूर को देख लेना उचित रहेगा।
अपना विचार उसे जंचा, इसलिए तुरन्त टैक्सी पकड़ी और ड्राइवर को एड्रेस बता दिया—पैंतालीस मिनट बाद वह ‘जैकफ स्ट्रीट’ पर स्थित चैम्बूर की कोठी के सामने एक रेस्तरां में बैठा चाय पी रहा था। कोठी का मुख्य द्वार उसे स्पष्ट चमक रहा था। दस मिनट बाद द्वार से एक एक सफेद गाड़ी निकलकर सड़क पर आई, उसे एक साफ वर्दीधारी शोफर चला रहा था और विकास की तेज नजरों से गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति का चेहरा न छुप सका, चैम्बूर को पहचानते ही लड़के की आंखें चमकने लगीं—उसकी इच्छा हुई कि अभी टैक्सी पकड़े, गाड़ी का पीछा करे—किसी सुनसान स्थान पर सफेद गाड़ी को रुकवा ले और झपटकर चैम्बूर की गरदन थाम् ले और एक ही सांस में वह सब पूछ ले जो जानना चाहता है।
मगर, ऐसा कुछ किया नहीं विकास ने क्योकि इस वक्त वह मूल रूप से ब्रिटिश नागरिक मार्गरेट था और लन्दन में उसे ऐसी कोई हरकत नहीं करनी थी जो विकास की सूचक हो।
दिल मसोसकर रह गया वह!
¶¶
“अगर हम और कुछ दिन होटल में ही रहें तो इसमें बुराई क्या है?”
“बुराई है आशू, तुम समझते क्यों नहीं?” इर्विन ने अपनी बात पर जोर देकर कहा—“लन्दन में डैडी की इज्जत है, रैपुटेशन है—लोग उनका सम्मान करते हैं—कल यदि लोग ये कहने लगें कि उनकी बेटी और दामाद के पास घर भी नहीं है, होटल में पड़े वक्त गुजार रहे हैं तो सोचो जरा—डैडी के दिल पर क्या गुजरेगी?”
“वह तो सब ठीक है।” अलफांसे का स्वर दबा हुआ–सा था—“लेकिन, मैं तो सिर्फ इसलिए कह रहा था कि यह अच्छा नहीं लगता, घर-जवांई बनकर आदमी की इज्जत...!”
“ओफ्फो, छोड़ो न आशू—तुम इण्डियन्स की तरह क्यों सोचते हो?”
“इण्डिया हो या अमेरिका, सूरज तो पूर्व से ही उगता है न?”
“अजीब बात कर रहे हो तुम, कितना कहकर गए हैं डैडी—वो ठीक कह रहे थे, हमारे अलावा दुनिया में उनका और है ही कौन, उनका सब कुछ हमारा ही तो है—उसे हम प्रयोग नहीं करेंगे तो वह सब किस काम का?”
“मैंने गलती की इर्वि!”
“कैसी गलती?”
“घर बनाने से पहले शादी करने की, शादी से पहले मुझे घर बनाना चाहिए था।”
“ओफ्फो, तुम फिर वही बोर बात करने लगे—अब छोड़ो भी न आशू, उस घर को तुम पराया क्यों समझ रहे हो, वह तुम्हारा घर है, तुम्हारा अपना।”
“अच्छा!” अलफांसे का स्वर किसी हारे हुए व्यक्ति जैसा था—“मैं तुम्हारी बात मान लेता हूं, लेकिन मेरी एक शर्त होगी।”
“कैसी शर्त?”
“हम हमेशा वहां नहीं रहेंगे, किसी भी तरह मेहनत-मजदूरी करके मैं एक घर बना लूंगा, भले ही बहुत बड़ा न बना सकूं, लेकिन तब तुम्हें मेरे साथ रहने के लिए उसमें आना ही होगा इर्वि!”
“मुझे मंजूर है आशू—बल्कि उस शुभ दिन का मैं इन्तजार करूंगी।”
‘वह दिन कभी नहीं आएगा छम्मकछल्लो, मैं जानता हूं कि कुछ ही दिन बाद लूमड़ कैसा खूबसूरत घर बनाने जा रहा है।’ उनके अन्तिम वाक्य सुनकर विजय मन-ही-मन बड़बड़ाया।
बशीर बना विजय इस वक्त एक होटल के केबिन में बैठा था, और अलफांसे-इर्विन के बीच होने वाली बातों की आवाज उसके पीछे वाले केबिन से आ रही थी, दोनों केबिन्स के बीच प्लाईवुड की दीवार थी, उपरोक्त बातों से स्पष्ट था कि अलफांसे ने एक मंजिल और पार कर ली है।
अलफांसे की नजरों से बचे रहकर उसका पीछा करना या उसे वॉच करते रहना सबसे ज्यादा कठिन काम था, अलफांसे की तेज नजरें किसी भी क्षण ताड़ सकती थीं, कि फलां हुलिए का व्यक्ति उसके इर्द-गिर्द नजर आ रहा है और उसकी नजरों में आने का अर्थ था—सारा गुड़-गोबर हो जाना।
बहुत ही सावधानी से—दूर-दूर और अलफांसे की नजरों से बचे रहकर उसने वॉच किया था—आज सुबह के वक्त गार्डनर अलफांसे के कमरे में ही उससे मिलने आया था।
कोशिश करने के बावजूद विजय उनके बीच होने वाली बातें नहीं सुन सका था।
किन्तु इस वक्त, दांव लगते ही उसने जो बातें सुनी थीं उनसे अनुमान लगा सकता था कि सुबह गार्डनर ने उन्हें घर पर रहने की सलाह दी थी जिसे अलफांसे थोड़े नखरे दिखाकर स्वीकार करना चाहता था।
अब दूसरी तरफ से प्रेम-वार्ता और चुम्बन आदि की आवाजें आने लगी थीं।
बुरा-सा मुंह बनाकर विजय बड़बड़ाया—“पता नहीं, इस साले लूमड़ को कोहिनूर की चोरी के लिए ऐसी खतरनाक स्कीम बनाने की सलाह किसने दी थी, जिसमें ईमान ही भ्रष्ट हो जाए।”
वह उठ खड़ा हुआ।
अब उसे उनके बीच ऐसी किसी बात के होने की उम्मीद नहीं थी जिससे कोई लाभ हो और व्यर्थ ही उनके पीछे लगा रहकर अलफांसे को वह सचेत नहीं करना चाहता था, इसलिए वो न केवल केबिन से बल्कि होटल ही से बाहर निकल आया।
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