Desi Porn Stories बीबी की चाहत
10-02-2020, 12:51 PM,
#21
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा फिर भी भोलेपन से मुझे ताकती रही तब मैंने कहा, "हे भगवान्, मेरी बीबी कितनी बुद्धू है। अरे तरुण यह इशारा कर रहा था की चाहे तुम हो चाहे टीना हो तरुण के लिए दोनों पत्नीयां जैसी ही हैं। वैसे ही तुम्हारे लिए और टीना के लिए भी मैं और तरुण दोनों उसके पति जैसे ही हैं। इसका मतलब है तरुण तुम्हारा पति जैसा है और टीना मेरी पत्नी जैसी है। इसका मतलब साफ़ है की हम एक दूसरे की पत्नियों की अदलाबदली कर सकते हैं। मतलब हम एक दूसरे की पत्नियों को चोद सकते हैं।"

यह सुनकर दीपा एकदम अकड़ गयी और बोली, "यह क्या बात हुई। भाई एक दूसरे की बीबियों के साथ थोड़ा मिलना जुलना, थोड़ी शरारत अथवा थोड़ी सी छेड़खानी ठीक है, पर अदलाबदली की बात कहाँ से आई? बड़ी गलत बात कही तरुण ने अगर उसका यह मतलब समझता है वह तो। पर मुझे लगता है शायद उसका कहनेका वह मतलब नहीं था। यह सब बातें तुमने ही बनायी लगती है। तुम्हारे दिमाग में तो हमेशा सेक्स छाया रहता है। शायद तुम्हारी समझने में भूल हुई है। तरुण ऐसा बोल नहीं सकता। मेरे ख़याल से तो वह बंदा सीधा सादा है।" मैं अपने ही मन में मेरी सरल पत्नी की यह बात सुन कर हंस रहा था। तरुण और सीधा सादा?"

मैंने तीर निशाने पर लगाने के लिए कहा, "तरुण ने और क्या कहा सुनोगी?" दीपा ने अपनी मुंडी हिला कर हाँ कहा।

मैंने कहा, 'तब तरुण ने मुझसे पूछा, अगर तुम्हारी ऐसी आधी नंगी तस्वीरें हों तो मैं उनको तरुण के साथ शेयर नहीं करूँगा क्या? मैं क्या बोलता? मैंने कहा हाँ जरूर करूँगा। तब तरुण ने मुझे एक और बात कही। उसने कहा क्यों ना हम चारों यहीं पर जो पांच सितारा होटल है उसके स्विमिंग पूल मेँ एक बार स्विमिंग करने जाएँ? तब तो तुम और टीना दोनों ही बिकिनी में आधे नंगे दिखोगे?"

दीपा यह सुनते ही एकदम सहम गई। वह मुझ से नजर भी मिला नहीं पा रही थी। शर्म से उसका मुंह लाल होगया था। दीपा सोचमें पड़ गयी और बोली, "यदि मेरी ऐसी तस्वीर तुम्हारे पास होती तो क्या तुम तरुण को दिखाते? यह बात तो ठीक नहीं। पर खैर मेरी ऐसी तस्वीरें कहाँ है, जो तुम तरुण को दिखाओगे? हम तो हनीमून पर कहीं गए ही नहीं। और जहां तक स्विमिंग पूल में बिकिनी पहन कर जाने का सवाल है तो मेरे पास तो कोई बिकिनी है ही नहीं। तो हम तो जा नहीं सकते। भले ही वह दोनों चले जाएँ।" दीपा के चेहरे पर निराशा सी छा गयी।

मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा, " अरे मैं बिकिनी भी ले आऊंगा और मैं भी तरुण को दिखा दूंगा की मेरी बीबी टीना से कम सेक्सी नहीं है। अब तो तुम्हें और मुझे ऐसे तस्वीरें खिंचवानी पड़ेंगी।"

दीपा से पट से बोली, "ताकि तुम मेरी आधी नंगी तस्वीरों को तरुण को दिखा सको?"

मैंने सीधे ही पूछा, "हाँ, वो तो मुझे दिखानी ही पड़ेंगी। मैंने वचन जो दे दिया है तरुण को। भाई तुम्हें तो ऐतराज़ नहीं होना चाहिए। क्यों की वैसे भी तरुण ने तो तुमको आधी नंगी उस दिन देख ही लिया था न, जिस दिन तुम तौलिया में लिपटी हुई तरुण के सामने आयी थी?"

दीपा ने मुझे नकली घूंसा मारते हुए कहा, "चलो हटो, वह तो तुम्हारी ही शरारत थी। तुम क्यूँ चाहते थे की मैं तरुण को उकसाऊँ? मुझे लगता है की तुमने ही वह चाल चली थी, मुझे फँसाने के लिए। तुम क्या चाहते थे? तुम्हारा आईडिया मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा। देखो दीपक, तुम मेहरबानी कर के मुझे गलत सलत चक्कर में मत फाँसो। मेरे जज्बात से प्लीज मत खेलो। आखिर मैं भी एक इंसान हूँ। मेरी भी कमजोरियाँ हैं।"

जब दीपा ने मुझे कहा की उसकी भी कमजोरियाँ हैं, तो मैं समझ गया की दीपा काफी पिघल चुकी है। तरुम की करतूतों का उस पर भी असर हुआ है। दीपा मुझ से एकदम सट रही थी और गरम हो गई थी। उस रात भी हमने खूब जोर शोर से सेक्स किया। अब तो मुझे दीपा को गरम करने की चाभी सी जैसे मिल गयी थी। जब भी दीपा थकान का बहाना करके सोने के लिए जाती और अगर मेरा मूड उसे चोदने का होता तो मैं तरुण की कोई न कोई रसीली बात छेड़ देता। कई बार तो मुझे बाते बनानी पड़ती थी। परन्तु मेरी बुद्धू बीबी यह समझ नहीं पाती थी की मैं उसे चोदने के लिए तैयार करने के लिए यह सब सुना रहा था। या फिर पता नहीं, शायद वह समझ गयी थी की मैं क्या चाहता था पर दिखावा कर रही थी जैसे वह समझ नहीं पा रही थी की मैं क्या चाहता था। खैर हर हालात में अब मुझे इसी बात को आगे बढ़ाने के लिए अग्रसर होना था।

पर मुझे कुछ ज्यादा करने की जरुरत नहीं पड़ी। बात अपने आप ही बनने लग रही थी। एक दिन तरुण घूमते घूमते मुझे मिलने आया। मैं उस दिन टीवी पर मेरा मन पसंद एक खास मैच देख रहा था। तब दीपा ने रसोई में से मुझे आवाज़ दी। वह मुझे ऊपर के शेल्फ से एक डिब्बा उतारने के लिए कह रही थी। मैंने तरुण से कहा की जाओ और दीपा की मदद करो, मैं टीवी देखने में व्यस्त था। यह सुनकर तरुण एकदम रसोई में पहुंचा तो देखा की दीपा को ऊपर के शेल्फ से एक आटे का भरा हुआ डिब्बा उतारना था।

तरुण ने दीपा से कहा, "भाभी आप हट जाओ। मैं दो मिनट में डिब्बा उतार दूंगा।"

दीपा ने जिद पर अड़े रहते हुए कहा, "क्यों? तुम क्यों उतारोगे? तुम्हारे भाई नहीं आ सकते क्या? यह उनका काम है।"

उसके बुलाने पर भी मैं रसोई में नहीं गया उस बात से दीपा चिढ़ी हुयी थी। उसके सर पर एक तरह का जूनून सवार था की या तो मैं जा कर उस डिब्बे को उतारूंगा या तो फिर वह स्वयं वह उतारेगी। किसी और (मतलब तरुण) की मदद नहीं लेगी। जब मैं नहीं पहुंचा तो तरुण ने देखा की दीपा खुद रसोई के प्लेटफार्म के ऊपर चढने की कोशिश करने लगी। प्लेटफार्म की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण वह ऊपर चढ़ नहीं पा रही थी। दीपा ने अपना एक पॉंव ऊपर उठाया और प्लेटफार्म पर रखा तो उसकी साड़ी सरक कर कमर पर आ गयी और उसकी जांघें तरुण के सामने ही नंगी हो गईं।

तरुण की शक्ल उस समय देखने वाली थी। वह दीपा की खूबसूरत जाँघें देख भौंचक्का सा रह गया। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। जब दीपा ने तरुण के चेहरे के भाव देखे तो वह कुछ सकपका कर खड़ी हो गयी। उसने अपनी साडी ठीक की। तरुण ने अपने आप को सम्हाला और दुबारा दीपा को कहा, "भाभी, मुझे उतारने दो। मैं लम्बा हूँ और यह डिब्बा आसानी से उतार लूंगा।"

दीपा ने उसके जवाब में कहा, "देखो यह काम तुम्हारे भैया का है। या तो वही आकर उतारेंगे, या तो मैं खुद ऊपर चढ़ कर उसे उतारूंगी।"
Reply

10-02-2020, 12:51 PM,
#22
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण ने कहा, "तो ठीक है भाभी आप ही डिब्बे को उतारिये। चलिए आप चढ़ जाइये प्लेटफार्म के ऊपर। मैं आपकी मदद करता हूँ।"

यह कह कर अचानक तरुण ने मौक़ा देख कर दीपा के जवाब का इंतजार किये बगैर दीपा के कन्धों को पकड़ कर दीपा को घुमा कर रसोई के प्लेटफार्म के सामने खड़ा किया, और खुद दीपा के पीछे हो गया। दीपा को उठाने के लिए तरुण ने काफी निचे झुक दीपा की साड़ी और घाघरा काफी ऊपर उठा कर दीपा की टाँगों के बिच अपने दोनों हाथ डाल दिए। मुझे पक्का यकीन था की उस समय दीपा की चूत को तरुण की बांहों ने जरूर छुआ होगा और रगड़ा भी होगा। फिर तरुण ने दीपा के कूल्हे में पीछे से अपना सर लगाया और दीपा को पीछे से बड़ी ताकत लगाकर ऊपर उठाया।

बाप रे, मुझे जब बाद में पता लगा तो मेरे लण्ड से जैसे पानी झरने लगा। पीछे जाते समय थोड़ी देर के लिए ही सही, पर उसने अपना लण्ड दीपा के कूल्हे में घुसेड़ कर उसे एकाध धक्का जरूर मारा होगा। एक बार अपना हाथ आगे कर दीपा के बूब्स उसने जरूर दबाये होंगे! दीपा की जाँघों को जकड़ कर अपने हाथ की उंगलियां जरूर दीपा की पैंटी के ऊपर से उसकी चूत में डाली होंगी। यह सब तरुण के लिए कितना रोमांचक होगा! उस समय तरुण का क्या हाल हुआ होगा यह समझना मुश्किल नहीं था। जरूर उसने काफी कुछ शरारत की होगी।

मैं आज भी उस दृश्य की कल्पना करता हूँ तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मेरी बीबी के पीछे उससे सटकर कैसे तरुण खड़ा होगा और उस समय उसका लण्ड कितना सख्त होगा और मेरी बीबी की खूबसूरत गाँड़ और चूत के नीचे कैसे उसने अपने दोनों हाथ डालें होंगें, पिछेसे कैसे धक्का दे रहा होगा यह तो मेरे लिए बड़ा उत्तेजना भरा सोचने का विषय था। वैसे भी इस बहाने उसने दीपा के स्तनों को तो जरूर दबाया होगा। तरुण दीपा के स्तनों पर फ़िदा था और जब भी उसे देखो तो उसकी नजर वहीं टिकी रहती थी।

दीपा तरुण की इस हरकत से भौंचक्की सी रह गयी और कुछ बोल नहीं पायी। वह प्लेटफार्म पर तो चढ़ गयी पर लड़खड़ाने लगी। डिब्बा भारी था। तरुण ने कस कर दीपा के पाँव पकडे और कहा, "दीपा भाभी संभल कर। गिरना मत।"

परन्तु दीपा डिब्बा निचे उतारते लड़खड़ाई और सीधी तरुण पर जा गिरी। तरुण और दीपा दोनों धड़ाम से निचे गिरे। निचे तरुण और उसके ऊपर दीपा। जब मैंने धमाके की आवाज़ सुनी तो भागता हुआ रसोई में गया और देखा की बड़ा रोमांटिक सीन चल रहा था। दीपा तरुण के उपर लेटी हुयी थी और तरुण दीपा को अपनी बाहों में लिए हुए दीपा के निचे दबा था।

आटे के डिब्बे का ढक्कन खुल गया था और दीपा और तरुण के पुरे बदन पर गेहूं का आटा फ़ैल गया था। डिब्बे के ढक्कन का एक कोना तरुण के कपाल पर लगा था और उसमें से खून रिस रहा था। दीपा के बदन को तरुण ने अपनी एक बाँह में घेर रखा था। दीपा की साडी और घाघरा दीपा की जाँघों के काफी ऊपर तक चढ़ा हुआ था और जाँघों को बिलकुल नंगी किये हुए था। ऐसा लग रहा था जैसे तरुण का लण्ड बिलकुल दीपा की चूत में घुसा हुआ था। तरुण दूसरे हाथ से मेरी बीबी के दोनों स्तनों को जकड़े हुए था और वह उन्हें धड़ल्ले से दबा रहा था। मैंने देखा की दीपा अपने आप को सम्हाल नहीं पा रही थी और तरुण को डर और हैरानगी से देख रही थी। दोनों के होठ एक दूसरे के इतने करीब थे की जैसे वह चुम्बन करने वाले थे। तरुण की आँख आटे से भरी हुई थी।

मेरी बीबी की प्यारी सुआकार गाँड़ तरुण के बिलकुल आधी नंगी दिख रही थी। दीपा की साड़ी और उस का घाघरा इतना उठा हुआ था की दीपा की सुडौल जाँघें यहां तक की उसकी पैंटी भी साफ़ साफ़ नजर आ रही थीं। तरुण के पुरे बदन पर आटा फैला हुआ था। दीपा भी आटे से पूरी तरह ढक चुकी थी।

न चाहते हुए भी मैं हंस पड़ा और ताली बजाते हुए बोला, "भाई वाह, क्या रोमांटिक सिन चल रहा है।"

तरुण और दीपा एकदम हड़बड़ाते हुए उठ खड़े हुए। दीपा ने अपनी साड़ी ठीक की और बोली, "मैंने तो तुम्हे बुलाया था। तुम्हे तुम्हारी मैच से फुर्सत कहाँ? तुमने अपने इस मित्र को भेज दिया और देखो क्या हुआ। देखो तुम्हारे दोस्त ने क्या किया? मेरी फजीहत हो गयी ना? और तुम हो की तालियां बजा रहे हो। मैं क्या करती?" दीपा के गाल शर्म के मारे लाल हो रहे थे। वह आगे कुछ बोल नहीं पायी।

तरुण अपनी आँखें मलते हुए बोला, "भाई, मुझे माफ़ कर दो। यह अचानक ही हो गया। मैंने दीपा भाभी को कहा की मैं डिब्बा उतार दूंगा। खैर मैं तो दीपा भाभी को बचाने की कोशिश कर रहा था। यह सब जान बुझ कर नहीं हुआ।"

मैंने मेरी बीबी का तरुण के प्रति कुछ और सहानुभूति बने इस इरादे से मैंने मेरी बीबी दीपा की और घूम कर उसे सख्त नज़रों से देख कर पूछा, "कमाल है! गलती तुम्हारी हुई और तुम दोष तरुण को दे रही हो? क्या यह सब उसने किया? क्या तरुण ने तुम्हें नहीं कहा की तुम ऊपर मत चढ़ो? क्या उसने वह डिब्बा खुद उतार देगा ऐसा तुम्हें नहीं कहा था?"

मेरी बेचारी बीबी मुझे दोषी सी खड़ी चुपचाप लाचार नज़रों से देखती रही। उसे शायद अपने कराये पर पछतावा हो रहा था। मैंने उसे और डाँटते हुए कहा, "तरुण ने बेचारे ने तो तुम्हें गिरने से बचाया। अगर तरुण तुम्हारे निचे ना होता तो तुम फर्श पर गिरती और तुम्हारी हड्डी भी टूट सकती थी। आज अगर तरुण ना होता तो मुझे अभी तुम को लेकर शायद हॉस्पिटल की और भागना पड़ता। देखो बेचारे को कितनी चोट आयी है? उसके सर से कितना खून बह रहा है? ऊपर से उसका सारा ड्रेस तुमने खराब कर दिया। अहसान मानने के बजाय तुम तरुण को दोषी करार दे रही हो?"

मुझे पता नहीं की मेरी बात सुनकर या वाकई में दर्द के कारण; अचानक तरुण ने एकदम कराहना चालू किया। मैंने देखा की तरुण का दाँया हाथ कोहनी के निचे से टेढ़ा हुआ दिख रहा था। तरुण उस हाथ को बाएं हाथ से पकड़ कर कराहने लगा। जब दीपा ने यह देखा तो एकदम डर गयी और तरुण के पास जाकर बोली, "तरुण क्या हुआ? तुम्हें ज्यादा चोट आयी है क्या? तुम ठीक तो हो?"

तरुण ने अपनी आटे से भरी हुई आँखों को मूंदे हुए रखते हुए अपना दायां हाथ आगे करते हुए कहा, "देखो ना दीपा, यह हाथ मूड़ गया है। मुझे वहाँ दर्द हो रहा है।"
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#23
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा ने जब तरुण का मुडा हुआ हाथ देखा तो उसकी जान हथेली में आ गयी। दीपा ने हड़बड़ाहट में मेरी और देख कर कहा, "दीपक चलो तरुण को कोई डॉक्टर के पास ले चलते हैं।"

डॉक्टर का नाम सुनकर तरुण एकदम चौकन्ना हो गया और बोला, "नहीं मैं ठीक हो जाऊँगा। थोड़ी चोट आयी है। बस दिक्कत यही है की मैं अपने हाथ अभी यूज़ नहीं कर पा रहा हूँ, इस लिए मैं खुद अपने कपडे और आँखें साफ़ नहीं कर सकता।"

मैंने देखा की मेरी बीबी की शकल रोने जैसी हो गयी। उसकी आँखें भर आयीं। मैंने फिर भी दीपा को अपना नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "ऐसा तुमने क्यों किया? सिर्फ इस लिए क्यूंकि मैं आ नहीं सका और मैंने मेरे बदले में तरुण को भेज दिया? अपनी गलती का ठीकरा किसी और के सर पर फोड़ना ठीक नहीं।"

मेरी प्यारी बीबी की आँखों में आँसूं भर आये। वह रोनी सी सूरत में बोली, "दीपक तुम ठीक कह रहे हो। यह मेरी ही जिद थी। मेरी जिद के कारण तरुण को चोट भी आयी और उसका ड्रेस भी खराब हो गया।"

फिर दीपा तरुण की और घूम कर बोली, "तरुण आई ऍम सॉरी। लाओ मैं तुम्हे साफ कर देती हूँ।" यह कह कर दीपा ने अपनी साडी का एक छोर ऊपर उठाया और तरुण के चेहरे पर लगा आटा साफ़ करने को तैयार हुई।

मैं मेरे मन के अंदर हँस पड़ा। अचानक मेरे मन में एक बात आयी। मैंने सोचा की अगर मैं चाहूँ तो तरुण को मेरी बीबी को छेड़ने का एक बढ़िया मौक़ा मिल सकता है। मैंने तरुण और दीपा को करीब लाने का एक सुनहरा अवसर देखा। मैंने दीपा को रोका और कहा, "तुम तरुण के कपड़ों को साफ़ करो, पर यहां नहीं। देखो तुमने तरुण के कपड़ों का क्या हाल किया है? वह ऑफिस जाने के लिए आया था। उसकी आँखें और मुंह आटे से ढका हुआ है। यहां तुम उसे साफ़ करोगी तो सारा आटा यहीं फ़ैल जाएगा। वह कुछ भी देख नहीं सकता है। तरुण का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम में ले जाओ और और वहाँ उसकी आँखें और कपडे साफ़ कर दो। उसके बाद उसके कपडे और आटे फैले हुए बाथरूम को धो देना। अब जो हो गया सो हो गया। तुम यह समझो की यही तुम्हारी सजा है। अब अगर तुम लोग मुझे इजाजत दो तो मैं वापस जा कर टीवी पर मैच देखूं। कितना बढ़िया मैच चल रहा था। तुम्हारे आटे के डिब्बे ने मेरे मैच की ऐसी की तैसी कर दी।"

सजा का नाम सुनते ही मेरी प्यारी बीबी ने अपना सर झुकाया और लाचार हो कर चुपचाप तरुण का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम की और ले जाने लगी। मैं ड्राइंग रूम की और चल पड़ा। पर उनके वहाँ से हटते ही मैं दरवाजे के पीछे छुप कर छुपता छुपाता उनके पीछे बाथरूम की और चला। तरुण अपना किरदार बखूबी निभा रहा था। शायद तरुण मेरी चाल भाँप गया था। जैसे उसे कुछ दिख ही नहीं रहा था ऐसे वह मेरी बीबी के हाथ को टटोल रहा था।

चलते हुए तरुण ने लड़खड़ाते हुए पीछे से मेरी बीबी की कमर पर अपने हाथ डाले और उसे पीछेसे खींच कर उसकी गाँड़ को अपने लण्ड से सटाते हुए बोला, "अरे भाभीजी, धीरे चलो ना। मुझे कुछ भी दिख नहीं रहा है।"

दीपा ने थम कर पीछे मुड़कर तरुण की और कुछ सख्ती से देखा। पर तरुण तो आँखें बंद कर जैसे कुछ देख ही नहीं पा रहा था वैसे खड़ा रहा।

दीपा ने असहायता दिखाते हुए अपने कंधे हिलाये और फिर चुपचाप तरुण का हाथ अपनी कमर पर ही रखे रहने देते हुए बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर तरुण के साथ दाखिल हुई।

मैं फुर्ती से बढ़ा और थोड़े से खुले हुए दरवाजे के दो पल्ले के बिच की तिराड़ में से अंदर का सिन देखने लगा। बाथरूम की लाइट दीपा ने जला दी थी जिस कारण मैं उनको देख सकता था। बाथरूम के बाहर जहां मैं खड़ा था वहाँ ज्यादा प्रकाश नहीं था। दीपा हाथ में एक तौलिया लिए हुए बाथरूम के एक कोने में खड़ी हुई थी। छोटे से बाथरूम में खुद को तरुण के साथ खड़े हुए वह अपने आपको कम जगह में सम्हालने की कोशिश कर रही थी। दीपा की सुडौल गाँड़ साड़ी में छिपे हुए मेरी और थी। मैं उनको अच्छी तरह देख पा रहा था और क्यों की मैं अँधेरे में खड़ा था और वह दोनों एक दूसरे में इतने उलझे हुए थे की वह मुझे देख नहीं पा रहे थे।

तरुण मेरी बीबी दीपा के सामने सीधा खड़ा था। उसने अपनी आटे से भरी हुई आँखें बंद कर रखी थीं। उसने दीपा की कमर पर अपने हाथ रखे हुए थे जैसे की वह छोटी सी जगह में लड़खड़ाकर निचे गिरने से डर रहा हो। दोनों के बदन एक दूसरे से काफी सटे हुए थे।

चंद ही मिनटों पहले जब तरुण और दीपा फर्श पर गिर पड़े थे तब तरुण ने साडी के ऊपर से मेरी बीबी की चूत पर अपना लण्ड सटाया हुआ था और वह मेरी बीबी की चूँचियों से उच्छृंखलता ब्लाउज के ऊपर से उन्हें दबा कर मसल कर उनसे खेल रहा था। इस उत्तेजना के कारण उसके पतलून में उसका मोटा और लंबा लण्ड खड़ा हो कर फुंफकार रहा था।
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#24
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
मैंने बाथरूम के बाहर से ही तरुण के पतलून में उसका खड़ा लण्ड देखा जिसको वह मेरी बीबी की दो टांगों के बिच में घुसाने की कोशिश में जैसे लगा हुआ था। शायद मेरी बीबी ने भी उसे महसूस किया होगा। पर उस समय दीपा इतनी घबराई और बौखलाई हुई थी की शायद उसने उस पर ध्यान नहीं दिया।

तरुण के कपाल से थोड़ा खून निकल रहा था। दीपा ने तरुण से कहा, "आओ पहले मैं तुम्हारे वह घाव पर एन्टी सेप्टिक लगा देती हूँ।"

दीपा ने बाथरूम में रखे प्राथमिक दवाई के डिब्बे में से थोड़ी रुई निकाली और खुद चप्पल निकाल कर नहाने के लिए रखे छोटे से स्टूल पर चढ़ गयी ताकि तरुण के सर में लगे घाव को ठीक तरह से देख कर साफ़ कर उस पर दवाई लगा सके। दीपा रुई में एंटी सेप्टिक डालकर तरुण के सर पर लगाने लगी।

दीपा के स्टूल पर खड़े रह कर ऊपर उठने से और तरुण के थोड़े झुकने से दीपा के ब्लाउज में दो टीलों से मदमस्त स्तन बिलकुल तरुण के मुंह के सामने प्रस्तुत हो गए। दीपा के अल्लड स्तनों को उसके ब्लाउज में निकले हुए देख कर तरुण के लिए अपने आप पर नियत्रण रखना काफी कठिन साबित हो रहा होगा। हालांकि तरुण कुछ कुछ देख सकता था पर ऐसे ढोंग कर रहा था जैसे उसे कुछ भी दिखाई नहीं देता हो। दीपा जब तरुण के कपाल पर दवाई लगा रही थी तब तरुण दीपा की मस्त चूँचियाँ जो उसके मुंह के सामने थी उन्हें बड़ी लालच से घूर रहा था।

मौक़ा मिलते ही जैसे वह लड़खड़ा गया हो वैसे तरुण अचानक आगे झुका और निचे की और गिरने का बहाना कर वह दीपा की छाती पर अल्लड खड़े हुए स्तनों पर उसने अपने मुंह चिपका दिया। छोटे से स्टूल पर खड़ी दीपा तरुणके धक्के से लड़खड़ा गयी। दीपा सम्हले और कुछ विरोध करे उसके पहले उसने चूँचि को अपने मुंह में ले कर उसे चूसना शुरू किया। दीपा ने दीवार का सहारा लिया और उसके सपोर्ट से खड़ी रही। तरुण का मुंह दीपा की छाती पर चिपका हुआ था और तरुण दीपा की चूँचियों को ब्रा और ब्लाउज के ऊपर से बड़े प्यार और इत्मीनान के साथ चूस रहा था। तरुण के मुंह की लार दीपा के ब्लाउज को गीला कर रही थी।

कुछ पलों के लिए असावध दीपा भौंचक्की सी रह गयी। तरुण को दीपा की असावधानी और भौंचक्का रहने के कारण कुछ वक्त मिल गया उसमें उसने दीपा की एक चूँचि को ब्लाउज के ऊपर से अपने मुंह में लिया हुआ था जिसे वह प्यार से चबा रहा था।

दीपा जब तक अपने आपको सम्हाल पाए और यह समझ पाए की तरुण क्या कर रहा था तब तक तरुण मजे से दीपा की चूँचियों को चूसता रहा। जब दीपा सम्हली तो दीपा ने तरुण को धक्का मार कर पीछे हटाया और कहा, "तरुण, तुम क्या कर रहे हो? तुम पागल हो गए हो क्या?"

तरुण ने जैसे तैसे अपने आपको सम्हाला और जैसे उसे कुछ समझ ही ना आया हो वैसे बड़ा भोला भाला अनजान बनता हुआ बोला, "माफ़ करना भाभी, मैं ज़रा लड़खड़ा गया। अचानक मेरे मुंह में कुछ नरम नरम सा महसूस हुआ। शायद तुम्हारी साड़ी का एक छोर मेरे मुंह में चला गया। क्या हुआ?"

तरुण ने इतने भोले और सीधे सादे अंदाज में दीपा से यह कहा की मेरी बुद्धू बीबी दीपा ने राहत की साँस ली और सोचा की तरुण को यह पता नहीं चला की जो नरम नरम कपड़ा तरुण के मुंह में था वह दीपा का स्तन था। तरुण को पीछे धक्का मार कर दीपा ने कहा, "नहीं कुछ नहीं। चलो हटो और सीधे खड़े रहो।"

तरुण ने कहा, "सॉरी भाभी।"

दीपा ने तरुण की आँखों से गीले कपडे से आटा पोंछा और पूछा, "खैर कोई बात नहीं। तरुण, क्या अब तुम्हें दिख रहा है?"

तरुण ने अपनी आँखों को पोछते हुए बड़े ही भोले बनते हुए कहा, "मेरी आँखों में काफी आटा चला गया है और आँखें जल रहीं हैं। शायद देखने में थोड़ा वक्त लग सकता है। भाभी आप क्यों तकलीफ कर रहे हो? हालांकि मैं देख नहीं सकता पर फिर भी कोशिश करता हूँ की अपनी कमीज और पतलून को झुक कर साफ़ कर देता हूँ।"

ऐसा कह कर तरुण आगे झुकने का ढोंग करने लगा। दीपा ने तरुण का हाथ थाम कर कहा, "कैसे करोगे? तुम्हारा हाथ भी तो मुड़ गया है। मैं साफ़ कर देती हूँ।" यह कह कर दीपा ने अपने हाथ ऊपर उठा कर तरुण के कॉलर, गले और कमीज पर लगा आटा साफ़ किया। जब यह हो गया तो दीपा ने तरुण को कमीज उतारने को कहा। तरुण ने फ़ौरन अपनी आँखें बंद रखते हुए अपने हाथ ऊपर कर अपनी कमीज उतार दी और बनियान में हाथ ऊपर उठाये वह खड़ा हुआ था।

तरुण का चौड़ा सीना और उसके बाजुओं के शशक्त स्नायु दीपा को दिख रहे थे। दीपा ने तरुण की बाँहों में से आटा साफ़ किया। दीपा उस वक्त पहले से काफी रिलैक्स्ड लग रही थी। जाने अनजाने में ही दीपा ने तरुण के बाजुओं के शशक्त स्नायु पर हाथ फिरा कर उन्हें महसूस किया। तरुण के कसरती फुले हुए बाइसेप्स महसूस कर मेरी बीबी के चेहरे पर प्रशंसात्मक भाव को मैंने छुपकर देखा।

दीपा ने मुस्कराते हुए तरुण के बाजुओं के मसल्स को दबाते हुए कहा, "तरुण, लगता है तुम जिम जाकर अच्छी खासी कसरत करते हो। तुम्हारे बाजू काफी सख्त और फुले हुए हैं।"

तरुण ने मौक़ा देखते ही बोला, "हाँ भाभी कसरत तो करता हूँ। भाभी, एक प्राइवेट बात कहता हूँ। सिर्फ मेरी बाजू ही नहीं, मेरा और भी सब कुछ सख्त, फौलादी, लंबा और फुला हुआ मोटा है।"

दीपा तरुण की बात सुनकर बौखला गयी। वह समझ गयी की तरुण क्या कहना चाहता था। दीपा ने तरुण के बदन से हाथ हटा लिया तब तरुण ने सोचा कहीं दीपा नाराज हो कर वहाँ से चली ना जाए। उसने कहा, "भाभी, मेरा मतलब है, मेरी छाती, पेट, जांघें, सब सख्त और करारे हैं भाभीजी। मेरा कोई और मतलब नहीं था।"
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#25
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा समझ तो गयी थी की तरुण उसका लण्ड कितना बड़ा है यह दीपा को कहना चाहता था। पर शायद उस समय दिपा ज्यादा खिचखिच करने के मूड में नहीं थी सो उसने सेहमी आवाज में कहा, "ठीक है, अब ज्यादा बक बक मत करो और चुपचाप खड़े रहो।"

तरुण ने मन ही मन मुस्कराते हुए कहा, "सॉरी भाभी"

कंधा, बाजू और सीना साफ़ करने के बाद दीपा ने तरुण के बनियान को थोड़ा सा उठा कर उसकी कमर को तौलिये से साफ़ किया। मेरे मन में यह सोच कर कुछ अजीब से रोमांच के भाव उठे की उस समय दीपा के मन में क्या चल रहा होगा। जब तरुण ने महसूस किया की दीपा ने उसके बनियान के ऊपर से सफाई कर चुकी थी तब उसने फुर्ती से अपनी बाजुओं को उठा कर एक झटके में दीपा कुछ समझ पाए उसके पहले अपनी बनियान निकाल कर बाथरूम के एक कोने में फेंक दी।

तरुण उस समय ऊपर से नंगा हो चुका था। उसका चौड़ा सीना शायद वह दीपा को दिखाना चाहता था। तरुण की यह हरकत से दीपा थोड़ी चौंक गयी फिर अपने आपको सम्हालते हुए तरुण के चौड़े और घने काले बालों से भरे हुए सीने को देखने लगी। तरुण के सीने पर भी आटा चिपका हुआ था। दीपा ने तौलिया उठा कर तरुण का सीना साफ़ किया। जब दीपा तरुण के सीने पर उसकी निप्पलोँ के ऊपर पोंछ रही थी तब तरुण ने दीपा का हाथ पकड़ा।

जब तरुण ने उसका हाथ पकड़ा तो दीपा ने घबराहट में नजरें उठा कर तरुण की और देखा। तरुण अपनी आँखें बंद किये मंद मंद मुस्करा रहा था। दीपा को समझ नहीं आया की वह क्या करे। दीपा ने अपना हाथ पीछे खींचते हुए कुछ गभराहट वाले स्वर में धीमी आवाज में पूछा, "तरुण तुम क्या कर रहे हो?"

तरुण ने दीपा का हाथ और सख्ती से पकड़ कर दीपा को अपना हाथ वहाँ से हटा ने नहीं दिया और अपने सीने में अपनी छाती की निप्पलोँ पर दबाये हुए रखते हुए उतने ही धीमे स्वर में कहा, "भाभी मैं आपके कोमल हाथों को मेरे सीने पर महसूस करना चाहता हूँ। प्लीज उन्हें थोड़ी देर के लिए यहां रहने दो ना? मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"

तरुण की हरकत से दीपा झल्ला उठी और हलके स्वर में बोली, "तुम्हें तो बहुत कुछ अच्छा लगता है।" फिर बिना अपना हाथ हटाए जैसे तरुण ने कहा था वैसे और कुछ नहीं बोलते हुए वहाँ बूत की तरह तरुण ने के नंगे सीने पर अपना हाथ रखते हुए वहीं खड़ी रही। कुछ देर ऐसे ही खड़े रहते हुए मुझे ऐसा लगा की बरबस ही दीपा की उंगलियां तरुण की छाती की निप्पलोँ को सहलाने लगीं। अचानक तरुण ने लपक कर दीपा की कमर में हाथ डाला और उसे एक झटके में अपनी और खींचा। तरुण ने झुक कर अपना पेंडू आगे धकेला और दीपा की कमर के निचे दीपा की दो टाँगों के बिच उसकी चूत के ऊपर अपना पतलून के अंदर खड़ा हुआ लण्ड घुसाने लगा।

तरुण की उस नयी हरकत से दीपा और परेशान हो गयी। वह तरुण को दूर धक्का मार कर उससे अलग होने की कोशिश करने लगी। साथ में धीमी आवाज में तरुण से कहने लगी, "बस करो, तरुण यह तुम क्या कर रहे हो?"

तरुण ने फिर ढोंग करते हुए कहा, "माफ़ करना भाभी, मैं फिसल रहा था। आप ने मुझे बचा लिया। आई ऍम रियली सॉरी भाभी।"

दीपा ने कहा, "हर बार कुछ ना कुछ हरकत करते हो और कह देते हो सॉरी। चलो, ठीक है तरुण, अब सीधे खड़े हो जाओ, मैं तुम्हारी पतलून पोंछ देती हूँ।"

तरुण ने पूछा, "पतलून पर भी आटा लगा हुआ है? कहाँ लगा है?"

दीपा ने हिचकिचाते हुए कहा, "हाँ, है थोड़ा आटा लगा हुआ है। वह.... क्या कहते हैं..... उन्ह..... यह.... तुम्हारे...... ओह..... टाँगों के...... बिच में.... "

तरुण ने आँखें बंद रखे हुए मुस्करा कर कहा, "अच्छा! ओह..... मेरे लण्ड के ऊपर?" फिर एकदम झुक कर, अपनी जीभ बाहर निकाल कर, अपने कान पकड़ कर और अपनेही गाल पर एक हलकी सी थप्पड़ मारते हुए दीपा को दो हाथ जोड़कर बोला, "सॉरी भाभी। गलत शब्द मुंह से निकल गए। मुझे माफ़ कर दीजिये। मेरा मतलब है मेरी दो टांगों के बिच में ना?"

दीपा झुंझलाती हुई बोली, "तरुण अब बस करो। तुम बहुत बक बक कर रहे हो। ठीक है, रुको मैं उसे भी पोंछ कर साफ़ कर देती हूँ।"

मैंने देखा की दीपा की झुंझलाहट देख तरुण मंद मंद मुस्कुरा रहा था। दीपा अपने काम में लगी हुई थी। मेरी बीबी तरुण से थोड़ा पीछे हटी और अपनी साड़ी और घाघरा को अपने घुटनोँ के ऊपर तक उठा कर अपनी दोनों टांगों को फैला कर दीपा वह छोटे स्टूल पर अपने सुडौल कूल्हे टिकाकर बैठ गयी। जाहिर था की तरुण का मोटा और लंबा लण्ड जो दीपा के इतने करीब आने से छड़ की तरह खड़ा हो गया था वह तरुण के पतलून में एक तम्बू की तरह बाहर की और निकला हुआ मुझे साफ़ दिखाई देता था तो दीपा को तो अपने बिलकुल करीब दिखाई पड़ना ही था। तरुण के छड़ की तरह खड़े हुए लण्ड को तरुण के पतलून में तम्बू बनाते हुए देख कर दीपा भौंचक्की सी देखती ही रही।

दीपा के बैठ जाने पर तरुण ने अपने पतलून का बेल्ट खोल दिया जिससे दीपा ऊपर के हिस्से की ठीक सफाई कर सके। दीपा ने एक हाथ से तरुण के पिछवाड़ा वाला हिस्सा तो जैसे तैसे साफ कर दिया।
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#26
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा का मुंह तरुण के पतलून में खड़े लण्ड के तम्बू के बिलकुल सामने था। तरुण की कमर के निचे से तौलिये से पोंछते हुए जब दीपा के हाथ की उंगलियां तरुण के खड़े हुए लण्ड के पास पहुंचीं तो दीपा रुक गयी। तरुण के खड़े हुए लंड के तम्बू के ऊपर भी काफी आटा लगा हुआ था। उसे दीपा को साफ़ करना था। मैं समझ सकता था की मेरी असमंजस में पड़ी हुई बीबी के जहन में कितना उथलपुथल चल रहा होगा। वह तरुण के खड़े हुए लण्ड से बने हुए तम्बू के ऊपर से अपनी उँगलियों से छुए बगैर उस को कैसे साफ़ करे।

तरुण के खड़े लंड से बने हुए तम्बू देख कर यह भली भाँती अंदाजा लगाया जा सकता था की तरुण का लण्ड काफी लंबा और मोटा होगा। दीपा कुछ देर तक भौंचक्की सी तरुण के पतलून में लम्बे लण्ड से बने हुए तम्बू को देखती रही। मैं अपनी साँसे रोक कर यह इंतजार करता रहा की मेरी भोली बीबी क्या करती है। दीपा तरुण के लण्ड को छूती है या नहीं?

कुछ देर सोचने के बाद दीपा ने शायद यह फैसला किया की जो काम उसे दिया गया है उसे पूरा तो करना ही पडेगा। मेरी बीबी ने कुछ सहमे हुए कुछ झिझकते हुए जहां तरुण के मोटे और लम्बे लण्ड ने तम्बू बनाया हुआ था वहाँ अपनी उंगलियां रखीं और काफी झिझक के साथ घबड़ाते हुए, दीपा ने तरुण के मोटे, लम्बे और छड़ के समान खड़े हुए लण्ड को सफाई का कपड़ा बिच में रखते हुए उसे अपनी हथेली में पकड़ा।

दीपा की उँगलियों को जैसे ही तरुण ने अपने लण्ड पर महसूस किया की एकदम तरुण के पुरे बदन में एक तेज सिहरन फ़ैल गयी और वह खड़े खड़े मचलने लगा। मैं यह देख कर हैरान रह गया की दीपा कुछ देर तक स्तब्ध सी बैठी हुए अपने हाथोंमें तरुण का तगड़ा लण्ड पकड़ कर खोयी सी कुछ सोचते हुए उसे अपनी हथेली में सहलाती रही। फिर जब अचानक उसे यह समझ आया की उसे तरुण का लण्ड पकडे हुए सहलाते हुए कुछ देर हो चुकी थी तब चौंक कर दीपा ने ऊपर देखा तो पाया की तरुण आँखें मूंदे खड़ा था। धीरे से दीपा ने तरुण के लण्ड को पकड़ रख कर उस के कारण बने हुए तम्बू के आसपास कपडे से सफाई की।

मैंने देखा की दीपा की झुंझलाहट देख तरुण मंद मंद मुस्कुरा रहा था। दीपा अपने काम में लगी हुई थी। मेरी बीबी तरुण से थोड़ा पीछे हटी और अपनी साड़ी और घाघरा को अपने घुटनोँ के ऊपर तक उठा कर अपनी दोनों टांगों को फैला कर दीपा वह छोटे स्टूल पर अपने सुडौल कूल्हे टिकाकर बैठ गयी। जाहिर था की तरुण का मोटा और लंबा लण्ड जो दीपा के इतने करीब आने से छड़ की तरह खड़ा हो गया था वह तरुण के पतलून में एक तम्बू की तरह बाहर की और निकला हुआ मुझे साफ़ दिखाई देता था तो दीपा को तो अपने बिलकुल करीब दिखाई पड़ना ही था। तरुण के छड़ की तरह खड़े हुए लण्ड को तरुण के पतलून में तम्बू बनाते हुए देख कर दीपा भौंचक्की सी देखती ही रही।

दीपा के बैठ जाने पर तरुण ने अपने पतलून का बेल्ट खोल दिया जिससे दीपा ऊपर के हिस्से की ठीक सफाई कर सके। दीपा ने एक हाथ से तरुण के पिछवाड़ा वाला हिस्सा तो जैसे तैसे साफ कर दिया।

दीपा का मुंह तरुण के पतलून में खड़े लण्ड के तम्बू के बिलकुल सामने था। तरुण की कमर के निचे से तौलिये से पोंछते हुए जब दीपा के हाथ की उंगलियां तरुण के खड़े हुए लण्ड के पास पहुंचीं तो दीपा रुक गयी। तरुण के खड़े हुए लंड के तम्बू के ऊपर भी काफी आटा लगा हुआ था। उसे दीपा को साफ़ करना था। मैं समझ सकता था की मेरी असमंजस में पड़ी हुई बीबी के जहन में कितना उथलपुथल चल रहा होगा। वह तरुण के खड़े हुए लण्ड से बने हुए तम्बू के ऊपर से अपनी उँगलियों से छुए बगैर उस को कैसे साफ़ करे।

तरुण के खड़े लंड से बने हुए तम्बू देख कर यह भली भाँती अंदाजा लगाया जा सकता था की तरुण का लण्ड काफी लंबा और मोटा होगा। दीपा कुछ देर तक भौंचक्की सी तरुण के पतलून में लम्बे लण्ड से बने हुए तम्बू को देखती रही। मैं अपनी साँसे रोक कर यह इंतजार करता रहा की मेरी भोली बीबी क्या करती है। दीपा तरुण के लण्ड को छूती है या नहीं?

कुछ देर सोचने के बाद दीपा ने शायद यह फैसला किया की जो काम उसे दिया गया है उसे पूरा तो करना ही पडेगा। मेरी बीबी ने कुछ सहमे हुए कुछ झिझकते हुए जहां तरुण के मोटे और लम्बे लण्ड ने तम्बू बनाया हुआ था वहाँ अपनी उंगलियां रखीं और काफी झिझक के साथ घबड़ाते हुए, दीपा ने तरुण के मोटे, लम्बे और छड़ के समान खड़े हुए लण्ड को सफाई का कपड़ा बिच में रखते हुए उसे अपनी हथेली में पकड़ा।

दीपा की उँगलियों को जैसे ही तरुण ने अपने लण्ड पर महसूस किया की एकदम तरुण के पुरे बदन में एक तेज सिहरन फ़ैल गयी और वह खड़े खड़े मचलने लगा। मैं यह देख कर हैरान रह गया की दीपा कुछ देर तक स्तब्ध सी बैठी हुए अपने हाथोंमें तरुण का तगड़ा लण्ड पकड़ कर खोयी सी कुछ सोचते हुए उसे अपनी हथेली में सहलाती रही। फिर जब अचानक उसे यह समझ आया की उसे तरुण का लण्ड पकडे हुए सहलाते हुए कुछ देर हो चुकी थी तब चौंक कर दीपा ने ऊपर देखा तो पाया की तरुण आँखें मूंदे खड़ा था। धीरे से दीपा ने तरुण के लण्ड को पकड़ रख कर उस के कारण बने हुए तम्बू के आसपास कपडे से सफाई की।

सफाई खतम हुई की अचानक दीपा चौंक गयी जब तरुण ने एक झटके में अपनी पतलून की ज़िप खोल दी और अपना पतलून अपनी टांगों के निचे उतार दिया। तरुण ने पतलून के निचे सफ़ेद सूती की पतले कपडे वाली छोटी निक्कर पहन रखी थी। तरुण की निक्कर में तरुण का लण्ड एकदम खड़ा छड़ की तरह जैसे झंडा फहराता हो ऐसे खम्भे के समान खड़ा साफ़ साफ़ दिख रहा था। जहां तरुण के लण्ड ने तम्बू बना रखा था वहाँ काफी गीलापन था और तरुण के लण्ड से निकली हुई चिकनाहट साफ़ साफ़ दिख रही थी। तरुण का लण्ड काफी लंबा और मोटा और तगड़ा होना चाहिए क्यों की निक्कर के अंदर से वह कम से कम सात आठ इंच बाहर निकला हुआ था। दीपा को तरुण का लण्ड उसकी पतली गीली निक्कर के अंदर चिकनाहट में लोथपोथ होने के कारण साफ़ दिखाई दे रहा था।
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#27
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण का खड़ा इतना लंबा तगड़ा मोटा लण्ड अपने सामने पाकर मेरी बीबी का मुंह आश्चर्य और विस्मय से अनायास ही खुला का खुला रह गया। मैं मेरी बीबी के भाव देख कर दंग रह गया। तगड़ा मोटा लंबा खड़ा लण्ड जो की एक कमजोर पतली निक्कर में ढका हुआ था, उसे अपने मुंह के बराबर सामने देखकर मेरी सीधीसादी बीबी भौंचक्की सी अपने जबड़ों को खुला रखती हुई उसे देखने लगी। मैं पक्का तो नहीं कह सकता पर शायद दीपा का खुल्ला मुंह देख कर एकदम अचानक तरुण ने लड़खड़ाने का नाटक किया और अपने पेंडू को आगे की और एक धक्का दिया और मेरी बीबी के खुले हुए मुंह में अपना खड़े लण्ड वाला तम्बू घुसा दिया।

तरुण का खड़ा मोटा लण्ड जो की निक्कर में छिपा हुआ था वह सीधा अपने मुंह में पाकर दीपा काफी घबड़ायी। निक्कर में फैला हुआ तरुण का इतना मोटा लण्ड अपने थोड़े से खुले हुए मुंह में दीपा कैसे ले पाती? उसका गला रुंध गया और वह चाहते हुए भी खांस ना सकी। दीपा की आँखें यह अचानक हुई घटना से चौक गयीं। वह तरुण के लण्ड के मुंह में घुसने के कारण बोल नहीं पा रही थी। दीपा पर ऐसे धक्का लगने से पीछे की दिवार से सट गयी और पूरी तरह आवाज ना निकलने के कारण चौंकी बौखलाई हुई बड़ी बड़ी आँखों से तरुण को देखने लगी।

तरुण बार बार अपना पेंडू आगे पीछे करता हुआ जैसे मेरी बीबी के खुले मुंह को चोद रहा हो ऐसे करने लगा। दीपा तरुण की चाल समझ चुकी थी। उसने ने जोर लगाकर तरुण को एक धक्का मारा। तरुण पीछे खिसका और उस का लण्ड मुंह में से निकलते हुए ही दीपा हट कर खड़ी हो गयी और तरुण को डांटते हुए खांसते हुए पर बड़े धीमे आवाज में बोली (ताकि उसकी आवाज बाहर ना जा सके), "तरुण, तुमने तो हद करदी। यह क्या तमाशा है? सीधे खड़े रहो।"

तरुण ने एक बार फिर दिखाई ना देने का बहाना करते हुए कहा, "भाभी, सॉरी, मैं कुछ देख नहीं पा रहा हूँ और अचानक अपना संतुलन खो बैठा।" बाहर खड़ा हुआ मैं जानता था की कमीना तरुण अपना शारीरिक नहीं पर मानसिक संतुलन खो बैठा था और दीपा के करीब होने का पूरा फायदा उठा रहा था।

दीपा ने जब यह सूना तो एकदम बगैर कुछ सोचे समझे अनायास ही उसका हाथ तरुण के जांघिये के बेल्ट के ऊपर चला गया। एक पल के लिए मुझे लगा की कहीं मेरी बीबी तरुण के जांघिये के बेल्ट को खिंच कर जांघिए में देखने तो नहीं जा रही? फिर दीपा की समझ में तरुण की चाल आयी। दीपा ने अपना हाथ हटा दिया औरपीछे हट कर खड़ी हो गयी और बोली, "तरुण ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश मत करो। अब मेरा काम हो गया है। अब मैं चलती हूँ।"

तरुणने ऐसे नाटक किया जैसे उसके हाथ अब ठीक हो गए थे। अपने हाथ ऊपर उठाकर तरुण ने कहा, "भाभी, अब मेरे हाथ ठीक लग रहे हैं। अब मैं अपनी आँखें साफ़ कर देता हूँ।" यह कह कर तरुण वाश बेसिन की और मुड़ गया और पानी छिड़क कर उसने अपनी आँखें साफ़ की। बड़ी मुश्किल से खांसती हुई मेरी परेशान बीबी अपने आप को सम्हालते हुए ठीक सीधी खड़ी हुई।

तरुण ने आँखें खोल कर देखा की उसका मोटा लण्ड निक्कर के साथ अपने मुंह में लेनेके कारण दीपा का मुंह शर्म से लाल हो रहा था। दीपा समझ गयी की तरुण यह जान गया था की दीपा ने तरुण का लण्ड अपने हाथों में पकड़ा था, उसे सहलाया था और अपने मुंह में भी डाला था भले ही वह चंद पलों के लिए ही क्यों ना हो।

तरुण ने देखा की दीपा के चेहरे पर और उसकी साडी पर आटा बिखरा हुआ था। बिना कुछ पूर्व सूचना देते हुए, तरुण ने एकदम दीपा के हाथ में से कपड़ा छीन लिया और बोला, "भाभी आपके चेहरे ऊपर और आपकी साडी के ऊपर भी काफी आटा बिखरा हुआ है। अब आप मुझे भी सेवा का मौक़ा दीजिये।" यह कह कर तरुण उस कपडे से दीपा के चेहरे को साफ़ करने लग गया।

दीपा कुछ विरोध करे उसके पहले ही तरुण एक हाथ से तौलिया मेरी बीबी के चेहरे पर, गालों पर, गले पर और धीरे से ब्लाउज में उसके फुले हुए स्तनों पर रगड़ ने लगा और अपना दुसरा हाथ मेरी बीबी के स्तनों पर रख कर वह एक के बाद एक दीपा के फुले हुए अल्लड़ स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। तरुण के उस उद्दंड और उच्छृंखल व्यवहार से दीपा कुछ देर तक बूत की तरह बिना हिले डुले भौंचक्की सी खड़ी रही और तरुण ने उन उद्दंड कारनामों को आश्चर्य से देखती ही रही। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वह इस आदमी का कैसे विरोध करे।

दीपा को आगे से साफ़ करने के बाद तरुण ने अचानक वह तौलिया एक तरफ फेंक दिया और दीपा को घुमा कर दीपा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने आगे कर लिया और खुद मेरी बीबी के पीछे खड़े हो कर अपने फौलादी छड़ से खड़े हुए लण्ड के ऊपर मेरी बीबी दीपा की साड़ी में छिपी करारी गाँड़ को टिका दिया और पीछे से अपने पेंडू से अपने लण्ड को दीपा की गाँड़ में धकेलने लगा। हालांकि मेरी बीबी के स्तन बिलकुल साफ़ थे, तरुण दोनों हाथों को उसने दीपा के ब्लाउज और ब्रा के अंदर हाथ डाल कर उसकी चूँचियों को साफ़ करने का ढोंग करते हुए उद्दण्डता पूर्वक उन्हें दबाने और मसलते हुए बोलने लगा, "भाभी अब मुझे मौक़ा दो आपकी सफाई करने का।"

तरुण के ऐसे आवेग पूर्ण रवैये से दीपा की साँसें फूलने लगीं। दीपा की उभरी हुई छाती जोर से ऊपर निचे होने लगी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था की तरुण उस हद तक जा सकता था। तरुण के ब्रा में हाथ डाल कर मसलने के कारण दीपा के उरोज ऊपर निचे हो रहे थे। पूरा दृश्य मेरे लण्ड को खड़ा कर देने वाला था। मेरी बीबी भयंकर असमंजस में थी। वह सोच रही थी की क्या वह चिल्लाये? क्या वह तरुण को एक जोरदार थप्पड़ मार कर उसकी उद्दण्डता का उसे एहसास दिलाये? वह चिल्लाना नहीं चाहती थी। कुछ ही समय पहले मैंने दीपा और तरुण को एकदूसरे पर चढ़ते हुए देख कर शरारत भरी टिपण्णी की थी। अगर वह चिल्लाई तो मैं भाग कर आऊंगा और फिर उन दोनों की हरकत को पकडूँगा। फिर क्या होगा यह वह सोच कर शायद दीपा घबड़ायी हुई थी।

दीपा तरुण की हरकतों से इतनी घबरा गयी थी की उसकी शक्ल रोने जैसी हो गयी। दीपा की समझ से बाहर था की वह तरुण को रोके तो रोके कैसे? अपनी शेरनी का रूप अगर वह दिखाए तो उसे दहाड़ना पडेगा। और वह चिल्लाई तो मैं वहाँ पहुंचूंगा और फिर दुबारा उन दोनों को उस हाल में देखा तो फिर तो मैं यह मान ही लूंगा की दीपा के उकसाने से ही तरुण ऐसी हरकतें कर रहा था, क्यूंकि दीपा ने तो तरुण को पहले से ही अच्छा कैरेक्टर सर्टिफिकेट दे दिया था। दीपा नहीं चाहती थी की मैं दुबारा उसको तरुण के साथ उस हाल में देखूं। वह मेरे मजाक का विषय नहीं बनना चाहती थी। वह शायद तरुण की ऐसी हरकतों के कारण हमारी दोस्ती को भी तुड़वाना नहीं चाहती थी।

दीपा को धीरे धीरे यह यकीन हो चुका था की उसके चिल्लाने से या दहाड़ने से तरुण उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं था।

दीपा के दिमाग में इतनी उलझनें थी की जब दीपा को कुछ और रास्ता ना सुझा तो तंग आकार आखिर में स्त्रियों का एक कारगर ब्रह्मास्त्र जो उसके पास बचा था उसको मेरी प्यारी बीबी ने इस्तेमाल किया। दीपा रोने लग गयी। उसने अपने हाथ जोड़ कर तरुण से कहा, "तरुण, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ। तुम मुझे इतना तंग क्यों कर रहे हो? प्लीज तुम मुझे जाने दो। प्लीज अभी मुझे और परेशान मत करो। अगर दीपक ने हमें ऐसे देख लिया तो तुम्हें तो कुछ नहीं कहेंगे पर मेरी तो वह ऐसी की तैसी कर देंगे। वैसे ही मेरी बहुत बदनामी हो चुकी है।"
Reply
10-02-2020, 12:51 PM,
#28
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
मेरी बीबी की आँखों से अश्रुधार बहने लगी, जिसे देख कर तरुण स्तब्ध सा हो गया। उसका हाथ जो दीपा की चूँचियों को सेहला रहा था और मेरी बीबी की निप्पलोँ को अपनी उँगलियों में पिचका रहा था, दीपा की ब्रा में ही स्थिर हो गया। उसे पता नहीं था की उसकी हरकतों से दीपा इतनी ज्यादा परेशान हो जायेगी। जब कुछ समय तक ऐसे ही अपने हाथ दीपा की ब्रा में ही रखे दीपा के बॉल को अपनी उँगलियों में जकड़े हुए तरुण खड़ा रहा तब मेरी बीबी ने सोचा की उसे तरुण को कुछ रियायत देनी पड़ेगी जिससे वह उसे जाने दे।

उस समय मेरी प्यारी पत्नी ने एक ऐसी गलती की जो उसे उस एक तरफी रास्ते पर ले गयी, जहां से शायद वापस आना उसके लिए बहुत मुश्किल था। दीपा ने कहा, "तरुण आखिर तुम्हें मुझसे क्या चाहिए? देखो, मैं अभी बहुत परेशान हूँ। अभी मुझे प्लीज जाने दो। बाद में तुम जो कहोगे मैं करुँगी, पर अभी मुझे और परेशान मत करो प्लीज!"

तरुण दीपा की बात सुनकर एकदम गंभीर हो गया। उसने दीपा के ब्लाउज में से अपने हाथ निकाल दिए। और दीपा की और देख कर बोला, "भाभी, क्या आप इतनी नासमझ हैं की आप नहीं जानती की मैं क्या चाहता हूँ? क्या मैं जो मागूंगा वह आप मुझे दोगी? आपने मुझे वचन दे दिया है भाभी। अब मुकरना मत।"

दीपा तरुण की और देखती ही रही। उसे समझ में नहीं आया की कैसे उसके मुंह से वह शब्द निकल गए और कैसे उसने तरुण को वचन दे दिया की बाद में वह जो तरुण चाहेगा वो करेगी? ऐसा करने से तो वह तरुण के चालाकी से बुनी हुई जाल में फँस गयी। अब वह क्या करे? दीपा परेशानी भरी नज़रों से तरुण को बिना कुछ बोले देखती ही रही। उसकी आँखों में एक असहायता का भाव था।

तरुण ने फिर एक और चाल चली और दीपा को रिलैक्स करने के लिए कहा, "अरे मेरी भोली भाभी! आप चिता मत करिये। अभी तो मैं आपसे सिर्फ दिल्लगी कर रहा था। मुझे अभी कुछ नहीं चाहिए। आप जब मेरे पास होती है ना, तो पता नहीं मुझे क्या हो जाता है। मेरा आपको दुःख पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है। आप हाथ मत जोड़िये। चाहो मुझे एक थप्पड़ मार लो पर रोओ मत। आप चाहो तो अभी जा सकती हो। मैं आपको और परेशान नहीं करूंगा। पर भाभी, जब कभी मौक़ा मिला और मैंने आपसे माँगा तो फिर आप अपने वचन से मुकर तो नहीं जाओगे ना?"

दीपा ने जब तरुण से यह सूना की तरुण अब दीपा को परेशान नहीं करेगा, तो दीपा की जान में जान आयी। दीपा ने अपना सर उठा कर कहा, "मैं कभी अपने वचन से मुकरती नहीं हूँ।"

तरुण ने कहा, "तो बस भाभी, आप जा सकती हो। मैं आपको और परेशान नहीं करूंगा। पर जाते जाते बस मेरी इस वक्त एक छोटी सी रिक्वेस्ट है।"

मेरी बीबी का दिमाग फिर घूमने लगा। दीपा ने पूछा, "तुम्हें वचन तो दे दिया अब और क्या रिक्वेस्ट है भाई?"

तरुण ने कहा, "भाभी मेरी एक छोटी सी इच्छा है। ऐसी कोई बड़ी या घबराने वाली बात नहीं है, बस एक छोटी सी इच्छा है। क्या आप पूरी करोगी?"

दीपा अकुलाते हुए सावधानी से बोली, "क्या बात है? और क्या चाहिए तुम्हें?"

तरुण ने कहा, "भाभी जी, गभराइये मत। मुझे और कुछ ज्यादा नहीं चाहिए। पर जब भी मैं आपके रसीले होँठ देखता हूँ तो पता नहीं मुझे क्या हो जाता है? मैंने कई बार आपके सर को और आपके गालों को चूमा है। पर कभी आपके रसीले होंठो को नहीं चूमा। क्या मैं एक सेकंड के लिए ही बस एक ही बार आपके होँठों को चुम सकता हूँ? बस एक सेकंड के लिए ही? प्लीज? मैं फिर कभी दुबारा आपसे ऐसी मांग नहीं करूंगा। आई प्रॉमिस।" यह कह कर तरुण अपने दोनों कान अपने दोनों हाथों की उँगलियों से पकड़ कर बड़ी ही भोली सूरत बना कर खड़ा हो गया।

तरुण का ड्रामा देख कर दीपा बरबस ही हँस पड़ी। कहते हैं ना की हँसी तो फँसी। दीपा ने एक गहरी राहत भरी साँस ली। क्यूंकि दीपा ने तरुण को प्रॉमिस किया था की वह जो तरुण चाहेगा वह करेगी तो मेरी प्यारी दीपा को डर था की कहीं तरुण उसे यह ना कह दे की वह दीपा को चोदना चाहता है। तो चलो एक चुम्मा ही तो देना है, और वह भी कुछ सेकंड के लिए।

तरुण की बात सुनकर दीपा ने कहा, "तरुण बहुत हो गया। मुझे डर है की कहीं दीपक आ गये और हमें देख लिया तो तुम्हें तो कुछ नहीं कहेंगे, पर मेरी फजीहत हो जायेगी। अच्छा, ठीक है। सिर्फ एक सेकंड के लिए ही। ओ के? कोई जबरदस्ती नहीं। चलो जो करना है जल्दी करो और मेरा पीछा छोडो प्लीज!"

तरुण मुस्कराया। मैं वहा खड़ा सब सुन रहा था। बात सुनकर मेरा लण्ड पूर्व रस से रिसने लगा। मैं समझ गया की अगर उसने दीपा को होँठों पर चुम लिया तो समझो उसने बाजी मार ली। दीपा होँठों पर क़िस की मास्टर थी। किस मात्र से वह एकदम उत्तेजित हो जाती थी।

तरुण ने दीपा की कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी और घुमा लिया जिससे मेरी बीबी का चेहरा उसके चेहरे के सामने हो गया और दोनों के होँठ एक दूसरे के आपने सामने हो गए। तरुण ने दीपा को अपने इतने करीब खींचा की तरुण और दीपा के बदन एकदम सट गए। मैं समझ गया की उस समय तरुण की पतली सी निकर में से बाहर निकला हुआ तरुण का मोटा, लंबा और फौलाद की तरह खड़ा लण्ड दीपा की चूत को सारे कपड़ों के होने के बावजूद भी तगड़ी टक्कर मार रहा होगा। मेरी बीबी अब अपने ही जाल में फँस चुकी थी। अब उसे तरुण को किस करने देना ही पड़ेगा।

तरुण दीपा की कमर के निचे दीपा के कूल्हों पर एक हाथ ले जा कर उनको दबाने लगा। इसके पहले की दीपा कुछ बोल पाती, तरुण ने दीपा के रसीले होँठों पर अपने होँठ कस कर भींच दिए। दीपा बौखलाई हुई थी। एक तरफ तरुण दीपा के कूल्हे के गाल दबा रहा था। तो दूसरी और तरुण का लण्ड दीपा की चूत को ताकत से कोंच रहा था। तरुण साड़ी के ऊपर से ही दीपा की गाँड़ के गालोँ बिच की दरार में अपनी उंगलियां घुसेड़कर उन्हें ऊपर निचे कर रहा था।

दीपा बोलने की स्थिति में तो थी नहीं। दीपा के होंठों का तो तरुण के होँठों ने कब्जा कर लिया था। दीपा तरुण की बाँहों में पूरी तरह उलटे खींचे हुए धनुष्य की तरह टेढ़ी खड़ी हुई थी। तरुण का पेंडू दीपा के पेंडू से कस के जुड़ा हुआ था। दीपा की चूत वाला हिस्सा तरुण के लण्ड से कस के भींचा हुआ था। तरुण ने अपने होँठों से दीपा के होँठ खोल दिए। फिर तरुण ने अपनी जीभ दीपा के मुंह में घुसेड़ दी। दीपा की छाती के मस्त दो गुम्बज तरुण की छाती में जुड़े हुए थे।
Reply
10-02-2020, 12:52 PM,
#29
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा ने तरुण को चुम्बन करने की इजाजत तो दे ही दी थी ना? अब वह विरोध कैसे करती? अब उसे तरुण के साथ चुम्बन में तो हिस्सा लेना ही पडेगा। तरुण की जीभ को अपने मुंह में घुस ने की कोशिश करते हुए महसूस करते ही दीपा ने अनायास ही अपने होँठ खोल दिए और अपनी जीभ से उसे सहलाना शुरू किया।

तरुण के मुंह की लार दीपा के मुंह में बहने लगी। दीपा ने पहली बार किसी गैर मर्द को ऐसा चुम्बन किया था। दीपा चुम्बन करने में माहिर थी। उसे मुझसे चुम्बन करने में बड़ा ही आनंद आता था।

उसी दक्षता से दीपा तरुण के साथ चुम्बन में जुड़ गयी। तरुण के चुम्बन की उत्तेजना से दीपा का पूरा बदन रोमांच से भर गया। मैंने देखा की दीपा का अवरोध तरुण के होँठों से होँठों के मिलन से धीरे धीरे टूटने लगा। दीपा का पूरा ध्यान तरुण की जीभ में से बहते हुए रस पर केंद्रित था। दीपा तरुण की जीभ को चूसने लगी। तरुण भी दीपा के सकारात्मक रवैये से एकदम उत्तेजित हो गया। दीपा और तरुण काफी समय तक एक दूसरे के होँठ चूसते रहे और एक दूसरे की जीभ का रसास्वादन करते रहे।

दीपा तरुण के चुम्बन में इतनी खो गयी की उसे चुम्बन करते हुए समय का ध्यान ही नहीं रहा। तरुण ने अपनी जीभ से दीपा के मुंह को चोदना शुरू किया। बार बार अपनी जीभ दीपा के मुंह में घुसेड़ता और फिर बाहर निकालता। यह एक तरह से दीपा को चोदने का संकेत ही था। दीपा का अवरोध पता नहीं कहाँ गायब हो गया। दीपा के मुंह से हलकी सी कामुकता भरी सिसकियाँ और "उँह.... ममम..." की आवाजें निकलने लगी। अपनी मस्ती में शायद वह भूल गयी की उसको किस करने वाला मैं उसका पति नहीं, बल्कि तरुण था। वह तो तरुण को दीपक समझ कर अपना मुंह तरुण की जीभ से चुदवाती रही।

तरुण ने दीपा की गाँड़ को अपने हाथ से जोर से दबाया और दीपा के दोनों टांगों के बिच की चूत को अपने लण्ड की और कस के खींचा और जैसे दीपा को साड़ी पहने हुए ही चोद रहा हो ऐसी हरकत करने लगा। दीपा तरुण के बाहुपाश में और तरुण के होठों के रसास्वादन में ऐसी खोयी हुई थी की उसे समय का और तरुण के उसकी चूत को साडी को बिच में रखते चोदने की एक्टिंग कर रहा था उस का ध्यान ही नहीं था।

तब तरुण ने एक ऐसी हरकत की जिसकी वजह से दीपा एकदम जमीन पर वापस लौट आयी। तरुण ने उत्तेजना में दीपा के ब्लाउज में फिर से अपना एक हाथ डाल दिया और दीपा के उन्नत उरोजों को दबाने और मसलने लगा। तरुण का हाथ अपने ब्लाउज में डालने से ही मेरी बीबी भड़की और उसने तरुण को एक जोरदार धक्का देकर उसे अलग किया। दीपा का मुंह तरुण के चुम्बन से शर्म और उत्तेजना के मारे लाल हुआ था।

दीपा ने अपने आपको सम्हाला और एकदम झपट कर बाथरूम के दरवाजे की और मुडी और दरवाजा खोला। पीछे मुड़ कर दीपा ने तरुण की और देखा और बोली, "मैं तुम्हें दूसरे मर्दों से अलग समझती थी। आई थॉट यू आर नॉट लाइक अधर मैन। पर तुमने मेरी कमजोरी का फायदा उठाया। यह ठीक नहीं है। डु यू थिंक आई ऍम ए ब्लडी स्लट? क्या तुम मुझे कोई छिनाल या वेश्या समझ रहे हो? मैं तुम्हें एक शरीफ आदमी समझती थी जो कभी कभी उत्तेजना में बह कर जुछ अजीब सी हरकतें कर बैठता है। आई डोन्ट लाइक इट। नाउ गेट आउट। आई डोन्ट वोन्ट टू सी यू अगेन। मैं तुम्हें दुबारा मिलना नहीं चाहती।"

दीपा बचपन से मिशनरी स्कूल में पढ़ी थी। वह घरमें हिंदी ही बोलती थी। पर जब उसका पारा सातवे आसमान पर चढ़ जाता था तब वह एकदम इंग्लिश पर आ जाती थी। मैंने मेरी बीबी का महाकाली रूप बहुत कम बार देखा था। उस सुबह मुझे वह देखने को मिला। तरुण ने बेचारे ने तो सोचा भी नहीं होगा की उसे ऐसी फटकार पड़ेगी।

यह कह कर दीपा तरुण को भौंचक्का सा खड़ा हुआ छोड़कर बाथरूम से बाहर निकली। वह बाहर निकले उससे पहले ही मैं वहाँ से हट चुका था और वापस भाग कर टीवी के सामने अपनी जगह आकर क्रिकेट का मैच देखने लगा था।

कुछ ही देर में मेरी बीबी दीपा, हिचकिचाती हुई झिझकती, थकी, हारी; धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आकर खड़ी हुई। मैंने देखा की वह काफी कुछ परेशान सी लग रही थी। मैंने अपनी बीबी से पूछा, "डार्लिंग, क्या हुआ? तुम इतनी परेशान क्यों हो?"

मेरी बीबी की उभरी हुई छाती गजब की खूबसूरत लग रही थी। मैं जानता था की वह तरुण के चुम्बन करनेसे और कपड़ों के ऊपर से जाँघों से जाँघों के रगड़ने से बड़ी उत्तेजित और घबड़ायी हुई थी। और साथ साथ उसे खुद अपराधी होने की फीलिंग परेशान कर रही थी। दीपा मेरे सामने आकर थोड़ी देर मरे सवाल का जवाब दिए बिना खड़ी रही। दीपा की आँखें लाल हुई थीं और उनमें पानी भरा हुआ था।"

मैं दीपा की और ध्यान ना देते हुए टीवी को देखने का बहाना कर रहा था, पर मेरा ध्यान दीपा के चेहरे के भाव परखने में था। दीपा उस समय बड़ी प्यारी लग रही थी। मेरा मन किया की मैं अपनी बीबी को अपनी बाँहों में लेकर उसे चूम लूँ और खूब प्यार करूँ। पर उस समय उसकी हालत ठीक नहीं थी। तरुण की कुछ ज्यादा ही हद पार हरकतों से वह दुखी थी, क्षोभित थी। अगर मैं उस समय उसे गले लगा कर प्यार करता तो यातो खूब रोती, या फिर यह सब शायद मेरी ही करतूत होगी यह सोच कर मुझ पर गरज पड़ती। शायद वह तरुण से भी नफरत करने लगती। वह समय नाजुक था।

मैंने यही बेहतर समझा की उस नाजुक घडी में मेरी बीबी को कुछ देर के लिए अकेले छोड़ दिया जाये। कुछ देर बाद वह सम्हल जायेगी तब फिर मैं उसे प्यार कर के ढाढस दिलाऊंगा।

मैंने पूछा, "बोलो, कुछ हुआ क्या? क्या तुमने तरुण के कपडे साफ़ कर दिए?"

जिंदगी में शायद पहली बार मेरी बीबी ने मुझसे झूठ बोला। दीपा ने कहा, "नहीं कुछ नहीं हुआ। मैंने तरुण के सर पर घाव लगा था, वहाँ दवाई लगा दी। फिर तरुण को तौलिये से साफ़ कर दिया और उसका मुंह बगैरा धो दिया। उसका हाथ अब सीधा हो गया है और उसका खून भी रुक गया है। तुम जल्दी जाकर उसे तुम्हारे कपडे पहनने के लिए दे आओ। बाद में मैं तरुण के कपडे धो दूंगी।"

इतना बोल कर दीपा आननफानन में बैडरूम में चली गयी। उस समय उसकी आँखों से आंसूं बहे जा रहे थे। मुझे लगा की वह बैडरूम में जा कर रो रही थी।

मैंने बाथरूम में नहा रहे तरुण को दरवाजे के बाहर से ही मेरे कपडे दे दिए। कुछ ही देर में तरुण मेरे कपडे पहन कर बाहर आया और उसने मुझसे इजाजत मांगी। तरुण का चेहरा भी लाल था। वह मुझसे आँख नहीं मिला पा रहा था। वह जल्दी जल्दी आया और मुझसे बोला, "दीपक, सॉरी यार, आज का दिन ही कुछ गड़बड़ है। चल मैं चलता हूँ। मुझे घर जाकर कपडे चेंज कर फिर ऑफिस जाना है। आज देर हो जायेगी।"

मैंने उसे "बाई" किया उससे पहले ही वह चलता बना। मैं मैच देखने लगा। पर मुझे मैच में कोई रस नहीं आ रहा था। उस मैच से कई गुना बेहतर मैच मैंने उस दिन तरुण और दीपा के बिच बाथरूम में देखा था।

"मेन ऑफ़ ध मैच" तो चला गया। अब मुझे "वुमन ऑफ़ ध मैच" से बात करनी थी। मैं चुपचाप बैडरूम में गया तो मेरी बीबी दीपा पलंग पर पड़ी रो रही थी। मैंने दीपा को उस समय छेड़ना ठीक नहीं समझा पर मुझे दुःख हुआ की मेरी बीबी ने मुझसे झूठ बोला।

उस सुबह मेरी दीपा से औपचारिक बातों को छोड़ कोई बात नहीं हुई। दीपा काफी अपसेट थी। मैं भी उसे कुछ पूछ कर परेशान नहीं करना चाहता था। मैं ऑफिस चला गया और दीपा घर के कामों में लगी रही।
Reply

10-02-2020, 12:52 PM,
#30
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
रात को जब मेरे लेटने के बाद दीपा कपडे बदल कर बैडरूम में पलंग पर आयी तो मैंने देखा की उसका चेहरा ग्लानि से फीका पड़ा हुआ था। मैं उसे सालों से जानता हूँ। मैं समझ गया की वह कुछ जरुरी बात मुझसे करना चाहती थी।

मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और प्यार जताते हुए पूछा, "मुझे लगता है की तुम कुछ कहना चाहती हो। कहो क्या बात है?"

मेरी बात सुनते ही दीपा की आँखोने में से आंसुओं की धार बहने लगी। वह मेरी छाती पर अपना सर रख कर फफक फफक कर रोने लगी। मैंने कुछ समय उसे रोने दिया। मैं उसके सर को सहलाता रहा। जब वह कुछ शांत हुई तब मैंने कहा, "अब बताओ, क्या बात है। "

दीपा ने कहा, "मैंने सुबह जब आपको यह कहा की सुबह कुछ नहीं हुआ, तो मैंने आपसे झूठ बोला था। असल में सुबह बाथरूम में बहुत कुछ हुआ था।"

मैंने कहा, "क्या हुआ? क्या तरुण ने कुछ किया क्या?"

दीपा ने अपनी नजरें नीच कर अपनी मुण्डी हिला कर कहा, "हाँ। "

मैंने दीपा की और नजरें उठाकर देखा और हँसते हुए पूछा, "क्या उसने तुम्हारे साथ सब कुछ कर लिया क्या? कहीं उसने तुम्हारे कपडे उतार कर वह तुम पर चढ़ तो नहीं गया? तुम तो ऐसा कर रही हो जैसे तरुण ने तुम्हें चोद ही दिया हो। उस छोटे से बाथरूम में तरुण तुम्हें चोद तो नहीं सकता था। क्या उसने तुम्हें चोदा है?"

दीपा मेरी बात सुनकर एकदम गुस्सा हो गयी और बोली, "अपनी बीबी के साथ ऐसी बातें करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती? तुम मर्द लोग समझ ते क्या हो अपने आप को? क्या इस दुनिया में चोदने चुदवाने के अलावा और कुछ नहीं है क्या? सुबह चोदने की बात, शामको चोदने की बात?"

मैंने पूछा, "तो बोलो ना फिर क्या हुआ? बोलो भी? अगर उसने तुम्हें चोदा नहीं तो फिर क्या किया? क्या तरुण ने तुम्हारे बूब्स को मसला?

दीपा के गाल शर्म के मारे लाल हो गए। उसने नजरें नीची कर कहा, "हाँ, उसने मेरे ब्लाउज में हाथ डाला। उसने मुझे होठोँ पर किस भी की। उसने मेरे साथ बड़ी बदतमीजी की।"

उस समय मुझे मेरी बीबी पर वाकई बड़ा गर्व हुआ। उसने मुझसे सच छुपाया नहीं। मैंने पूछा, "क्या? उसकी ये हिम्मत? वह तो चला गया। तुमने मुझे पहले बताया क्यों नहीं? मैं उसकी खबर ले लेता। अगर उसने तुम पर जबरदस्ती की है, तो मैं उससे अभी ही सारे सम्बन्ध तोड़ दूंगा। यह गलत है और तुम्हें मुझे उसी समय बता देना चाहिए था।"

दीपा मेरी बात सुनकर एकदम सकते में आगयी और बोली, "नहीं ऐसा कुछ नहीं है। नहीं तुम उसे कुछ मत कहना। कहीं आप दोनों में बड़ा झगड़ा ना हो जाए। मैंने ही उसको इतना झाड़ दिया है की वह शायद अब हमारे घर नहीं आएगा। मैंने उसे कह दिया की मैं उसकी शकल तक देखना नहीं चाहती। मैंने उसको गेट आउट भी कह दिया। पर अब मुझे अफ़सोस हो रहा है। वैसे तो हम उसे इतने सालों से जानते हैं। वह ऐसी ओछी हरकत कभी नहीं करता। शायद उसे दिखाई नहीं दे रहा था तो वह लड़खड़ा गया और अपने आपको गिरने से बचाने के लिए उसने मुझे पकड़ना चाहा और इसी चक्कर में उसका हाथ मरे ब्लाउज के अंदर चला गया। पता नहीं आज उसे क्या हो गया था।"

दीपा ने फिर रोते हुए मुझे सब कुछ बता दिया जो बाथरूम में हुआ था। बस तरुण का लण्ड मुंह में लेने वाली और दिए हुए वचन की बात नहीं बतायी। मैं जानता था की ऐसी बात दीपा कैसे बताये? उसे शायद अपने आप पर ही घिन आ रही थी।

मैंने दीपा की बातें ध्यान से सुनी और उस पुरे वाकये को सुनते हुए मैं दीपा को अपनी गोद में बिठा कर कभी उसके कंधे को तो कभी बालों को प्यार से सहलाता रहा। मैं चाहता था की उसके अंदर का उफान बाहर निकल जाए।

जब वह कुछ शांत हुई तब मैंने दीपा के ब्लाउज में हाथ डालकर कहा, "जानूं, एक बात कहूं? तुम बुरा तो नहीं मानोगी?"

दीपा ने मेरी और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा। उसके चेहरे पर शांत सौम्य भाव था। मैंने कहा, "देखो, तुम एक स्त्री हो। जाहिर है तुम स्त्री की तरह ही सोचोगी। पर मैं एक पुरुष हूँ। अब जब मैं सोचता हूँ तो मुझे यह समझ में आ रहा है की यह सब तरुण की या तुम्हारी गलती नहीं थी। यह सब मेरी गलती के कारण हुआ है।"

मेरी बात मेरी पत्नी की समझ में नहीं आयी। उसके चेहरे पर उलझन के भाव थे। मैंने कहा, "मैं तुम्हें बताता हूँ की कैसे। जब मैंने तुम्हें कहा की तुम तरुण को लेकर बाथरूम में जाओ, वह मेरी गलती थी। देखो और समझो। तरुण के जैसा शशक्त और वीर्यवान पुरुष जब तुम जैसी ना सिर्फ खूबसूरत परन्तु निहायत ही सेक्सी औरत के साथ एकदम एकांत में बाथरूम में जाए और उस पर भी अगर तुम उसके बदन पर हाथ फिराकर उसे साफ़ करो तो मैं तरुण का दोष नहीं मानूंगा की उसने तुम्हारे साथ ऐसी बदतमीजी की। उसकी जगह कोई भी मर्द होता तो यही करता। हाँ अगर कोई नपुंशक होता तो वह ऐसा ना करता।

तुम मर्दों को कोसती हो। तुम अपनी जगह सही हो। पर भगवान ने हम मर्दों को बनाया ही ऐसा है। हम मर्द कुत्ते की तरह हैं। जैसे ही कोई खूबसूरत या सेक्सी औरत देखि की हमारी जीभ लटपटाने लगती है। यह सही है हम मर्दों के दिमाग में सेक्स काफी छाया हुआ रहता है। गलती तरुण की नहीं है। गलती मेरी है। मुझे यह सब पहले से ही सोचना चाहिए था। यह सब मेरे कारण हुआ है। तुम मुझे माफ़ कर दो प्लीज?" मैं मेरी बीबी को कैसे बताता की वह तो मेरा ही प्लान था?

मेरी बात सुनकर दीपा बरबस हँस पड़ी। उसने कहा, "क्यों अपने दोस्त का इल्जाम अपने सर पर लेते हो? यह क्यों नहीं कहते की तुम तुम्हारे दोस्त को बहुत प्यार करते हो और उसकी गलतियों को नजर अंदाज कर रहे हो? वैसे मुझे तुम्हारी और तरुण की दोस्ती से कोई शिकायत नहीं है। ना ही मैं चाहती हूँ की यह दोस्ती कोई छोटीमोटी गलतियों के कारण आहत हो। एक गहरा अंतरंग करीबी दोस्त होना अच्छी बात है।"

मेरा मन मेरी प्यारी बीबी की हँसी को देख खिल उठा। उसने तरुण की गलती को छोटीमोटी गलती कह कर उसे ज्यादा तूल नहीं दिया यह मुझे अच्छा लगा। मैंने कहा, "बेचारे तरुण को माफ़ कर दो यार।"

दीपा ने मुझे नकली घूंसा मार कर कहा, "भाई, जब मेरा खुदका पति मुझे कहता है की किसी गैर मर्द, जिस ने मेरे साथ छेड़खानी की है, उसे माफ़ कर दूँ, तो मैं बेचारी बीबी क्या कर सकती हूँ?" दीपा ने फिर मुस्कराते हुए अपने गाल फुलाकर जैसे कोई राजा महाराजा बोलता है ऐसी एक्टिंग करते हुए कहा, "जाओ, माफ़ किया तुम्हारे दोस्त को। तुम भी क्या याद करोगे की किसी जानदार बीबी के साथ पाला पड़ा था। पर उसे यह जरूर कह देना की अब ज़रा वह समझदारी से मेरे साथ सलूक करे। जो उसने किया वह गलत था।"

मैं ख़ुशी से और बेतहाशा प्यार से मेरी बीबी को देखता ही रहा। तब मुझे झकझोरते हुए दीपा ने मुझे कहा, "पर जानूं, एक बात ध्यान रहे। मुझे लगता है, तुम तुम्हारे दोस्त को और अपनी बीबी को कुछ ज्यादा ही लिफ्ट दे रहे हो। देखो कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए और फिर बाद में तुम्हें इर्षा से जलन हो और मेरे और तुम्हारे हम दोनों के वैवाहिक जीवन में दरार ना पड़ जाए। जिस रास्ते पर तुम जा रहे हो वह निहायत ही खतरनाक रास्ता है।"

मेरी बीबी मेरी बाँहों में लिपट कर मेरे होँठों पर चूमती हुई बोली, "मैं अपने पति को कोई भी हालत में दुखी नहीं देख सकती। मेरे लिए मेरे पति के अलावा इस दुनिया में कुछ और मायने नहीं रखता।"
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up Thriller Sex Kahani - सीक्रेट एजेंट desiaks 91 3,408 Yesterday, 03:07 PM
Last Post: desiaks
  Behen ki Chudai मेरी बहन-मेरी पत्नी sexstories 21 288,153 10-26-2020, 02:17 PM
Last Post: Invalid
Thumbs Up Horror Sex Kahani अगिया बेताल desiaks 97 6,890 10-26-2020, 12:58 PM
Last Post: desiaks
Lightbulb antarwasna आधा तीतर आधा बटेर desiaks 47 9,388 10-23-2020, 02:40 PM
Last Post: desiaks
Thumbs Up Desi Porn Stories अलफांसे की शादी desiaks 79 4,667 10-23-2020, 01:14 PM
Last Post: desiaks
  Naukar Se Chudai नौकर से चुदाई sexstories 30 328,862 10-22-2020, 12:58 AM
Last Post: romanceking
Lightbulb Mastaram Kahani कत्ल की पहेली desiaks 98 13,292 10-18-2020, 06:48 PM
Last Post: desiaks
Star Desi Sex Kahani वारिस (थ्रिलर) desiaks 63 11,667 10-18-2020, 01:19 PM
Last Post: desiaks
Star bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी sexstories 264 910,349 10-15-2020, 01:24 PM
Last Post: Invalid
Tongue Hindi Antarvasna - आशा (सामाजिक उपन्यास) desiaks 48 19,352 10-12-2020, 01:33 PM
Last Post: desiaks



Users browsing this thread: 4 Guest(s)