Desi Porn Stories बीबी की चाहत
10-02-2020, 12:52 PM,
#31
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
मैंने कहा, "देखो डार्लिंग मैं जानता हूँ की तुम किस और इशारा कर रही हो। मैं अपनी बीबी को बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ। डार्लिंग तुम यह कहना चाहती हो ना की अगर कभी कहीं तरुण तुम्हारे साथ में अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं रख पाया और ऐसी नौबत आ गयी की उसने हद पार कर दी और तुम दोनों एक उत्तेजना में बह कर चुदाई कर बैठे तब मैं क्या आहात हो जाऊंगा या जलन से या गुस्सेसे पागल हो जाऊँगा? तो दीपा डार्लिंग यह समझ लो की अगर तुम मुझसे छुपाये बिना कुछ भी करते हो तो मुझे कतई भी जलन नहीं होगी क्यूंकि मुझे पता है की कुछ भी हो जाए, तुम मेरी ही रहोगी।"

मेरी बात सुनकर दीपा इतनी गरम हो गयी की उस रात मैंने दीपा को नहीं चोदा। उस पूरी रात भर दीपा ने मुझे चोदा और पूरी रात उसने मुझ से सारी पोजीशन में चुदवाया। उस रात को मुझे दीपा को तैयार नहीं करना पड़ा। वह शेरनी की तरह सारे कपडे निकाल कर मुझे चोदती रही और मुझसे चुदवाती रही। उस रात पता नहीं वह कितनी बार झड़ गयी।

मैं खुद मेरी बीबी की रसीली चूत में दो बार अपना माल छोड़ चुका था। सुबह मैं कुछ और करने के लायक नहीं था क्यूंकि मेरा लण्ड सारी रात की भरसक चुदाई के कारण सूझ गया था। शायद दीपा की चूत का भी यही हाल था। हमारी सुहाग रात में भी हमने ऐसी चुदाई नहीं की थी। मैं वाकई में अब तरुण का ऋणी हो चुका था।

पर उधर तरुण का बुरा हाल था। दीपा ने उसे गेट आउट कह दिया और उसे कह दिया की वह उससे मिलना नहीं चाहती थी। तबसे तरुण मन ही मन जल रहा था। एक तरफ उसे दीपसे मिले बगैर चैन नहीं पड़ रहा था तो दूसरी और उसकी हिम्मत नहीं पड़ती थी की वह मुझे या दीपा को फ़ोन करे या मिले। मैंने भी महसूस किया की दीपा भी कुछ बेचैन सा महसूस कर रही थी, क्यूंकि वह हमेशा कुछ ना कुछ सोचती ही रहती थी। उस दिन के बाद वह काफी गुमशुम सी रहती थी। शायद उसे अफ़सोस हो रहा था की उसने तरुण को कुछ ज्यादा ही झाड़ दिया था।

तरुण को यह डर था की दीपा उसकी शिकायत मुझसे करेगी। इस लिए डर के मारे तरुण ने अगले कुछ दिनों तक मुझे फ़ोन नहीं किया। मैं भी कुछ अपने कामों में व्यस्तता के कारण तरुण से बात नहीं कर पाया।

कुछ दिनों के बाद मैंने तरुण को फ़ोन किया और पूछा की क्या बात थी, वह फ़ोन क्यों नहीं कर रहा?

तब तरुण ने मुझसे माफ़ी माँगते हुए कहा, की वह उस दिन की उसकी करतूतों से बड़ा ही शर्मिन्दा है। उसने तुरंत मुझसे माफ़ी मांगी और कहा, "भाई, मैंने सोचा आप और ख़ास तौर पर दीपा भाभी मुझ पर नाराज होंगे। इस लिए मैं आपसे फ़ोन से बात करने में घबरा रहा था।"

मैं हंस पड़ा और मैंने उसको ढाढस देते हुए कहा, "रात गयी और बात गयी। दीपा ने मुझे सब कुछ बता दिया है। हमारी बात हो चुकी है। मेरे कहने पर दीपा ने तुम्हें माफ़ कर दिया है। अब तुम दीपा से बेझिझक मिल सकते हो। वह तुम्हें कुछ नहीं कहेगी। अरे यार ऐसी छोटी मोटी चीजें दोस्तों में तो हुआ करती हैं। मैं जानता हूँ। यह सब अचानक ही हुआ था। और यह कौन सी बड़ी बात है? ठीक है यार, वैसे भी तो कई बार हम एक दूसरे की पत्नियोंसे गले मिलते ही हैं न? यह छोटी मोटी छेड़छाड़ तो चलती रहती है। चिंता मत कर।" यह कह कर जैसे मैंने उसको आगे बढ़नेकी हरी झंडी दे दी।

अब तो तरुण मेरा ऋणी हो गया। वह मुझको अपनी पत्नी से मिलवाने के लिए उतावला हो रहा था। एकदिन जब उसका फ़ोन आया उस समय मैं अपने घर में वाशिंग मशीन में कुछ छोटी मोटी खराबी थी उसे ठीक कर रहा था। मैंने तरुण को कहा , "मैं घर के सारे मशीनों, जैसे वाशिंग मशीन, टीवी, हीटर इत्यादि का छोटामोटा काम घर में ही कर लेता हूँ। सारा बिजली का काम भी मैं ही कर लेता हूँ। तुम्हें या टीना को यदि कोई दिक्कत हो तो मुझे बेझिझक बुला लेना।"

यह सुन तरुण जैसे उछल पड़ा। वह कहने लगा की उसकी पत्नी टीना घर में कोई भी उपकरण काम नहीं करते तो बड़ी गुस्सा हो जाती है और तरुण की जान को मुसीबत खड़ी कर देती है। मेरे प्रस्ताव से वह बहुत खुश हुआ और उसने कहा की वह जरूर मुझे बुलाएगा।

उसी दिन देर शाम को उसने मुझे फ़ोन किया और घर आने को कहा। उसने कहा की उसका टीवी नहीं चल रहा था। मैं तरुण के घर गया। मैंने तुरंत ही उसके टीवी को देखा तो बिजली के प्लग का तार निकला हुआ था। मैंने तार लगाया और टीवी चालू कर दिया। मुझे ऐसा लगा जैसे शायद तरुण ने ही वह तार जान बुझ कर निकाल दिया था ताकि वह उस बहाने मुझे बुला सके।

टीना बहुत खुश थी। उसकी मन पसंद सीरियल तब आने वाली थी। टीना इतनी खुश हो गयी की मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर मेरा धन्यवाद करने लगी। उसने कहा, "दीपक, तरुण इन मामलों में बिलकुल निकम्मा है। वह छोटा सा काम भी कर नहीं पाता।"

मैंने बड़ी नम्रता से कहा, "भाभी, आप निश्चिंत रहिये, यदि कोई भी ऐसी परेशानी हो तो कभीभी, ऑफिस समय छोड़ कर चाहे दिन हो या आधी रात हो, मुझे बुला लीजिए। ज़रा सा भी मत हिचकिचाइए। मैं हाजिर हो जाऊँगा।" यह सुन टीना बहुत खुश हुई और चाय बनाने के लिए जाने लगी।

तरुण ने उसे रोककर कहा, "देखो टीना, दीपक मेरा ख़ास दोस्त है। अगर मैं न भी होऊं और तुम्हें यदि कोई भी दिक्कत हो तो दिन हो या आधी रात, उसे बुलाने में कोईभी झिझक न करना।"

बस अब तो मेरा रास्ता भी खुलता दीख रहा था। टीना ने तरुण के रहते हुए मुझे एक दो बार बुलाया। तरुण ने तब फिर टीना को जोर देते हुए कहा की उस की गैर मौजूदगी में भी वह मुझे बुलाने में झिझके नहीं। तरुण काफी समय टूर पर जाता रहता था।

टीना ने एकबार मुझे रात के दस बजे फ़ोन किया की उसके बाथरूम का नलका ज्यादा पानी लीक कर रहा था। यदि उसको तुरंत ठीक नहीं किया तो उसकी पानी की टंकी खाली हो सकती थी। तरुण उस समय टूर पर था।

जब टीना का फ़ोन आया तब मैंने अपने पास पड़े हुए सामानमें से कुछ वॉशर, प्लास इत्यादि निकाला। जब दीपा ने पूछा तो मैंने सारी बात बतायी। दीपा मेरी और थोड़ी टेढ़ी नजर करके देखा, पर कुछ ना बोली। मैंने उससे पूछा, "तुम चलोगी क्या? तब वह बोली, "बुलाया तो तुमको है। मैं क्यूँ बनूँ कबाब मैं हड्डी?"

जब मैं खिसिया सा गया तो हंस कर बोली, "अरे मियां, तुम जाओ, मैं तो मजाक कर रही थी। मैं बहुत मजेदार सीरियल देख रही हूँ। जाओ अपना काम करके आ जाना।"

फिर थोड़े धीरे शरारत भरे ढंग से बोली, "अगर कुछ बताने लायक हो तो बताना। छुपाना मत। मैं बुरा नहीं मानूंगी।"

मैं भी उसे कहाँ छोड़ने वाला था? मैंने कहा, "हाँ, जरूर बताऊंगा। पर निश्चिंत रहना, मैं टीना को रसोई के प्लेटफार्म पर चढ़ा कर निचे नहीं गिराऊंगा।"

मेरे मजाक से मेरी भोली बीबी झेंप सी गयी। तब मैंने उसके होंठ पर किस करते हुए हंस कर कहा, "जानेमन, मैं मजाक कर रहा था।"
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10-02-2020, 12:52 PM,
#32
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
मैं टीना के घर गया उस समय वह नाईटी पहने हुए थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। मुझे देखकर उसने अपने कंधे पर एक चुन्नी सी डाल दी और बोली, "देखो ना, मैं आपको इतनी देर रात को परेशान कर रही हूँ। पर क्या करूँ? तरुण नहीं है। खैर, वह होता तो भी क्या करता? वह तो दूसरे दिन प्लम्बर को बुलाऊंगा यह कह कर सो जाता। तुमने कहा था की मैं तुम्हे आधी रात को भी बुला सकती हूँ। तब फिर मैंने हिम्मत करके तुम्हे बुलाया। अगर यह अभी ठीक नहीं हुआ तो पूरी रात पानी जाता रहेगा और कल सुबह टंकी खाली हो जाएगी। फिर घर का सारा काम ठप्प हो जायगा।" टीना बेचारी बड़ी परेशान लग रही थी।

मैंने बाथरूम में जाकर देखा की नलके का वॉशर खराब था। मैं जब बाथरूम में घुसा तो टीना भी मेरे साथ बाथरूम में घुसी। मैं एक स्टूल सा लेकर बैठ गया। टीना आकर ठीक मेरे बगल में खड़ी हो गयी। मैं उसकी गरम साँसों को अपने गालों पर महसूस कर रहा था। एक दो बार मैंने अपनी कोहनी हटाई तो उसके बूब्स से टकराई। मेरे शरीर में जैसे एक झनझनाहट सी दौड़ गयी। मेरी धड़कनें तेज हो गयी। मेरा मेरा ध्यान काम पर कहाँ लगना था? वह इतनी करीब खड़ी थी की मेरी कोहनी उसके भरे हुए स्तन को छू रही थी। मेरी तो हालत ख़राब थी, पर टीना को तो जैसे कोई फरक नहीं पड़ता था। मैंने अपने पास से एक वॉशर निकाला और झटसे बदल दिया।

बस नलका टपकना बंद हो गया। टीना ऐसी खुश हुयी जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो। जैसे ही मैं बाथरूम से बाहर निकला तो वह मुझसे लिपट गयी। मैं क्या बताऊँ मेरी हालत कैसी थी। मेरा लण्ड मेरी पतलून में ऐसे खड़ा हो गया था जैसे सैनिक परेड में खड़ा हो। टीना जब मुझसे लिपट गयी तब शायद उसने भी मेरे कड़क लण्ड को महसूस किया होगा। वह थोड़ी झेंप कर अलग हो गयी और बोली, "दीपक, मैं आज तुम्हे बता नहीं सकती की मैं कितनी खुश हूँ। आज शाम से मैं परेशान थी की मैं क्या करूँ। तुम्हें डिस्टर्ब करने के लिए मुझे माफ़ तो करोगे न? पता नहीं मैं तुम्हारा यह अहसान कैसे चुकाऊंगी।" टीना ने फिर मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और उसे सहलाते अपना आभार जताया।

मैंने यह बोलना चाहा की, "बस एकबार मुझसे चुदवालो, हिसाब बराबर हो जाएगा। " पर मैं कुछ बोल नहीं पाया।

मैंने टीना के कन्धों पर अपना हाथ रखा और बोला, "टीना, तरुण ने एक बार मुझसे कहा था की मैं दीपा में और तुम में फर्क न समझूँ, और तुम और दीपा, तरुण और मुझ में फर्क मत समझना। क्या तुम भी तरुण से सहमत हो?"

टीना ने अपनी मुंडी हिलायी और बिना बोले अपनी सहमति जतायी।

मैंने कहा, "तो फिर एहसान कैसा? अगर यही समस्या दीपा की होती तो क्या मैं उसके लिए इतना काम न करता?" मेरी यह बात सुनकर टीना थोड़ी सी इमोशनल हो गयी। वह मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर तक छोड़ने आयी। बाहर जाते जाते एक दो बार टीना के भरे हुए बड़े बडे मम्मे मेरी बाँहों पर टकराये। मैं समझ नहीं पाया की क्या यह टीना जान बुझ कर कर रही थी और मुझे कोई इशारा कर रही थी या चलते चलते चलते हिलते हुए वह अनायास ही मेरी बाहों से टकरा गए थे।

मैंने भी टीना को यह सन्देश दे डाला की वह मुझमें और तरुण में फर्क ना समझे। मैं बाहर जाकर अपनी बाइक पर बैठ कर वापस चला आया।

उसदिन के बाद कुछ दिनों तक कई बार मुझे अफ़सोस होता रहा की यदि उसदिन मैं चाहता तो शायद टीना को अपनी बाँहों में लेकर उसको किस करता उस के गोरे बदन को नंगा कर और शायद चोद भी पाता। परंतु मैं जल्द बाज़ी में हमारे संबंधों को बिगाड़ना नहीं चाहता था।

मैं जब वापस आया तब दीपा बिस्तरमें मेरा इंतजार कर रही थी। मैं जानता था की वह मुझसे वहाँ क्या हुआ यह सुनने के लिए बेताब थी। मैंने भी हाथ मुंह धोया और बिस्तर में उसके पास जाके अपने कपडे निकाल के लेट गया। उसने जब महसूस किया की मैं तो बिल्कुल नंगा बिस्तर में घुसा हुआ हूँ तो बोली, "लगता है आज कुछ तीर मार के आये हो तुम। बोलो, चिड़िया जाल में फँसी या नहीं।"

मैने दीपा को अपनी बाँहों में घेर लिया। मैं उसके नाइट गाउन को उतारने में लग गया। उसके नाइट गाउन को खोल कर उसे बाजू में रख कर फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मुंह पर मुंह लगा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मेरा खड़ा लण्ड उसकी चूत को टक्कर मार रहा था। वह कुछ बोलना चाहती थी, पर चूँकि मैंने उसके होठ होंठ कस कर दबाये हुए थे इसलिए वह कुछ बोल नहीं पायी।

मैंने धीरे से अपने होंठ हटाये और बोला, "चिड़िया जाल में तो फंस सकती थी, पर मैंने उसे नहीं फंसाया। मैं उसे आसानी से फंसा लूंगा अगर तुम सपोर्ट करो तो।"

"तुम्हे मुझसे, अपनी बीबी से सपोर्ट चाहिए, एक दूसरी औरत को फंसाने के लिए?" बड़े आश्चर्य से उसने पूछा।

मैंने उसे सहलाते हुए कहा, "हाँ। मुझे तुम्हारा सपोर्ट ऐसे चाहिए की हम कुछ ऐसा करें की जिससे ऐसा ना लगे की तरुण पर या तुम पर पर कोई ज्यादती हो रही है।"

दीपा बड़ी उत्सुकता से मेरी बात सुन रही थी। मैंने कहा, "अगर में आज टीना के साथ कुछ करता और अगर तुम्हे या तरुण को वह मालूम पड़ता, तो क्या तुम्हें मनमें एक तरह की रंजिश न होती? क्या तरुण इससे आहत न होता?" दीपा मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने अपना सर हिलाके हामी भरी।

मैंने फिर मेरी पत्नी को सारा किस्सा सुनाया। मैंने उससे कुछ भी नहीं छुपाया। मैंने कहा, "शायद यदि मैं चाहता तो टीना को अपनी बाँहों में आज जक़ड सकता था, चुम भी सकता था, और शायद चोद भी सकता था। पर मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। मैं तुम्हे बताये बिना कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिससे तुम्हे चोट पहुंचे। "
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10-02-2020, 12:52 PM,
#33
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मेरी प्यारी बीबी दीपा मुझे कुछ देर तक प्यार भरी नज़रों से एकटक देखती ही रही। उस ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया। फिर थोड़ा सा मुस्करा कर वह अपने घुटनों पर ऊपर उठी और मेरी टांगों के बिच अपना मुंह ले जाकर जो मेरी प्यारी पत्नी ने हमारी शादी के इतने सालों से नहीं किया था, वह आसानी से मुझे खुश करने के लिए करने लगी।

उस रात तक उसने मेरे कई बार कहने पर भी मेरा लण्ड कभी भी अपने मुंह में नहीं डाला था। मेरे आग्रह किये बिना ही मुझे खुश करने के लिए वह मरे लण्ड को न सिर्फ मुंह में लिया। दीपा उसे बड़े प्यार से चूस ने भी लगी। उसे पता था की ऐसे करने से मैं बहुत उत्तेजित हो जाता हूँ। मेरी प्यारी पत्नी के साथ मैं अब वैवाहिक जीवन का वह आनंद उठा रहा था जो मुझे शादी के सात सालों में भी नसीब नहीं हुआथा। कहीं ना कहीं इसमें तरुण का भी योगदान था इसमें कोई शक नहीं था।

मैंने उसे मेरी टांगो के बिच से उठाकर अपने सीने से लगाया और बोला, "डार्लिंग, मैं तुम्हे इतना चाहता हूँ की जिसकी कोई सीमा नहीं। मैं तुम्हें जीवन के सब सुख अनुभव करवाना चाहता हूँ। एक मर्द जीवन में कई औरतों से सेक्स का अनुभव करता है। मैंने भी तुम्हारे अलावा कुछ लड़कियों को और औरतों को शादी से पहले सेक्स का अनुभव कीया है। अगर तुम मुझसे इतना प्यार नहीं करती तो मैंने शादी के बाद भी किसी न किसी औरत से सेक्स कीया होता या करता होता। मैं यह जानता हूँ की तुमने आज तक किसी और मर्द से सेक्स नहीं किया। तुमने सिर्फ मुझ से ही सेक्स किया है। मैं तुम्हें भी ऐसे आनंद का अनुभव करवाना चाहता हूँ पर चोरी से या छुपके नहीं। अपने पति के सामने, उसके साथ, उसकी इच्छा अनुसार। अपनी पत्नी या अपने पति के अलावा और किसीको चोदने में या और किसीसे चुदवाने में कुछ अनोखी ही उत्तेजना होती है। यह मैं जानता हूँ। वही आनंद मैं चाहता हूँ की तुम अनुभव करो।"

मेरी बात सुनकर दीपा कुछ रिसिया गयी। वह मेरा हाथ छुड़ा कर बोली, "जानू, मैं सच बोलती हूँ। मुझे मात्र तुमसे ही सेक्स का आनंद लेना है। मैं तुम से बहुत ही खुश हूँ। पर लगता है तुम मुझ से खुश नहीं हो इसी लिए ऐसा सोचते हो। मैंने तुम्हें पूरी छूट दे रखी है। जहां चाहे जाओ, जिस किसीको चोदना है चोदो। मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी। अगर तुम्हें टीना पसंद है और अगर टीना को इसमें कोई एतराज नहीं है, तो तुम बेशक उसके पास जाओ और उसके साथ खूब मजे करो। पर मैं कतई भी किसी गैर मर्द से सेक्स का आनंद नहीं लेना चाहती।"

फिर मैंने दीपा की चिबुक पकड़ कर कहा, "मेरी प्यारी डार्लिंग मेरी कसम है यदि तुम ज़रा सा भी झूठ बोली तो। सच सच बताना, तरुण ने जब तुम्हे बाँहों में लेकर बदन से बदन रगड़ कर डांस किया था और जब तुम रसोई में तरुण के ऊपर धड़ाम से गिरी और उस समय बाथरूम में जब तरुण ने तुम्हे बाहों में लिया और तुम्हारे बूब्स दबाये और तुम्हें होँठों पर गहरी किस की तो क्या तुम उत्तेजित नहीं हुयी थी? आज सिर्फ सच बोलना।"

दीपा जैसे सहम गयी। उसने कभी सोचा भी नहीं था की इस तरह कभी उसे भी कटहरे में खड़ा होना पड़ेगा। उसके गाल शर्म के मारे लाल हो गये। थोड़ी देर सोच कर वह बोली, "देखो दीपक, मुझे गलत मत समझो। मैं झूठ नहीं बोलूंगी। मेरे साथ डांस करते हुए तरुण का लण्ड जरूर खड़ा हो गया था और मेरी टांगों के बिच में टकरा भी रहा था। उसे महसूस कर के मैं उत्तेजित नहीं हुई थी यह तो मैं नहीं कहूँगी। हाँ उस दिन बाथरूम में भी मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गयी थी। पर देखो मैं भी इंसान हूँ। कभी कभी मुझ से भी उत्तेजना में कुछ गलत हो सकता है। पर मैंने कभी भी उसके या किसी और के साथ सेक्स करने के बारे में कतई भी नहीं सोचा।"

मेरी बीबी की बात सुनकर मैं निराश नहीं हुआ। मुझे तो बात को आगे बढ़ाना ही था। मैंने कहा, "अगर नहीं सोचा डार्लिंग तो अब सोचो ना?"

दीपा मुझे अजीब ढंग से कुछ देर देखती रही और फिर बोली, "कमाल है! मेरा पति मुझसे कह रहा की मैं किसी गैर मर्द से चुदवाऊं? अरे तुम एक बात क्यों नहीं समझते? शादी का बंधन एक नाजुक धागे से बंधा हुआ है। कभी कभी उसे ज्यादा खींचने से वह धागा टूट सकता है। ऐसे पर पुरुष सम्बन्ध का मतलब उस धागे को ज्यादा खींचना। एक बात और। अपनी पत्नी को पर पुरुष से जातीय सम्बन्ध के लिए उकसाना खतरनाक भी हो सकता है। हो सकता है मुझे दुसरे से चुदवाने में मझा आने लगे और मैं बार बार दूसरे मर्द से चुदवाना चाहुँ तो?"

बातों बातों में मेरी सीधी सादी पत्नी ने मुझे वैवाहिक सम्बन्ध की वह बात कह डाली जो एक सटीक खतरे की और इंगित करती थी। मेरी बीबी ने मुझसे तरुण का नाम लिए बगैर यह भी कह दिया की एक बार चुदने के बाद हो सकता है वह तरुण से बार बार चुदवाना चाहे। तब फिर मुझे इसकी इजाज़त देनी होगी। पर मैंने इस बारे में काफी सोच रखा था और मेरी पत्नी के लिए मेरे पास भी सटीक जवाब था। हालांकि मेरी पत्नी की बातों से मुझे एक बात साफ़ नजर आयी की पिछले कुछ दिनों में दीपा और तरुण के थोड़े करीब आने से मेरी पत्नी का तरुण के प्रति जो डर था, वह नहीं रहा था, और वह तरुण की छेड़खानी वाली सेक्सुअल हरकतों को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रही थी। एक बात और थी, अब वह तरुण से चुदवाने की बात सुनकर पहले की तरह भड़क नहीं जाती थी। मतलब वह तरुण से चुदवाने के लिए तैयार भले ही ना हो पर तरुण से चुदवाने के बारे में बात कर रही थी। मुझे अब हमारा रास्ता साफ़ नजर आ रहा था।
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10-02-2020, 12:52 PM,
#34
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तब मैंने कहा, " डार्लिंग, मुझे एक बात बताओ, मानलो जिस दिन तुम तरुण के सामने तौलिये में खड़ी थी तरुण ने तुम्हे यदि चोद दिया होता, तो क्या तुम मुझे छोड़ देती? या क्या मैं तुम्हें छोड़ देता? मैंने जब तुम बड़ी छानबीन कर रही थी और मुझे पूछ रही थी ना, की चिड़िया जाल में फँसी की नहीं? अगर उस दिन मैंने टीना को वाकई में चोदा होता तो क्या तुम मुझे छोड़ कर चली जाती? मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ की सेक्स और प्रेम में बहुत अन्तर है। आज हम पति पत्नी मात्र इस लिए नहीं हैं क्योंकि हम एक दूसरे से सेक्स करते हैं। बल्कि हम पति पत्नी इस लिए भी हैं क्योंकि हम न सिर्फ एक दूसरे से प्यार एवं सेक्स करते हैं पर एक दूसरे की जिम्मेदारियां, खूबियाँ और कमियां हम मिलकर शेयर करते हैं और उसका फायदा या नुक्सान हम क़बूल करते हैं। यदि हम अपने इस बंधन से वाकिफ हैं तो ऐसी कोई बात नहीं जो हमें जुदा कर सके। मैं तो एक सेक्स काअनुभव करने मात्र के लिए ही कह रहा हूँ।"

दीपा कुछ न बोली और चुपचाप मुझे टेढ़ी नज़रों से देखने लगी। पर उसने मेरी बातों का कोई जवाब नहीं दिया।

उस रात को दीपा बहुत खिली हुई लग रही थी। मैंने मेरी पत्नीको इतनी बार झड़ते हुए कभी नहीं देखा। शायद वह हमारी बातों को याद करके अपने ही तरंगों में खोयी हुई थी। एक बार तो मैंने पूछा भी की बात क्या है की मेरी बीबी मुझे सेक्स का वह आनंद दे रही है जो मुझे शादी के कई सालों के बाद मिल रहा है। तब दीपा ने मुझे एक बहुत बड़ी बात कही।

दीपा ने कहा, "दीपक, मुझे तुम्हारी बीबी होने का गर्व है। तुमने हम दोनों के बिच जो अंडरस्टैंडिंग की बात कही और तुमने यहां तक कह दिया की अगर उस दिन तरुण और मैं आवेश में आकर सेक्स कर बैठते और तरुण मुझ पर थोड़ी ताकत लगा कर मुझे चोद देता और मैं उसका साथ दे देती तो भी तुम मुझसे वही बर्ताव करते जो पहले से करते आ रहे थे, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। शायद इस मामले में तुम मुझसे कहीं आगे हो। मैंने तुम्हें कहा तो है की तुम किसी भी औरत से सेक्स कर सकते हो पर हो सकता है की अगर तुम किसी औरत से वाकई में शारीरिक सम्भोग करो और अगर मुझे पता चले तो शायद मैं तुम्हें माफ़ ना कर पाऊं।"

तब मैंने मेरी बीबी का नाक पकड़ कर उसे थोड़ा सा झकझोर कर कहा, "मैं उतना भी उदार नहीं हूँ। अगर तुम मुझे बिना बताये किसीसे चुदवाती हो और तो मुझे भी दुःख होगा। पर अगर यह सब हमारी आपसी मर्जी से होता है, तो मैं तुम्हें उतना ही या शायद उससे भी कहीं ज्यादा प्यार और सम्मान दूंगा जितना पहले से देता आरहा हूँ।"

दीपा ने कहा, "दीपक गलती करके भी मुझसे किसी गैर मर्द से चुदवाने की उम्मीद मत रखना। पर वाकई में एक पति का ऐसा कहना यह एक पत्नी के लिए बहुत बड़ी बात है।"
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10-02-2020, 12:52 PM,
#35
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
हालांकि ऐसा कह कर मेरी बीबी ने मेरे लिए उसको तरुण से चुदवाने की उम्मीद का दरवाजा बंद करने की भरसक कोशिश की, पर मैं जानता था की भारतीय नारी कभी भी ऐसे मामलों में "हाँ" तो कभी कहती ही नहीं है। अगर उसे "हाँ" कहना हो तो वह कहेगी, "ठीक है, मैं सोचूंगी" और अगर वह "ना" कहे तो शायद कुछ उम्मीद है। अगर दीपा को तरुण से चुदवाने में कोई गंभीर आपत्ति होती तो तरुण से चुदवाने की मेरी बात सुनते ही वह ऐसा बवाल मचा देती और मेरा ऐसा बैंड बजा देती की आगे से मैं ऐसी बात करने की हिम्मत ही ना करूँ।

मेरी ज़िन्दगी में बहार सी आ गयीथी। अब मैं पहले से कई गुना खुश था। दूसरी और तरुण भी अपने सपनों में था। उस दिन जब रसोई में और बाद में बाथरूम में वह दीपा के इतने करीब आ पाया था, यह सोचने से ही उत्तेजित हो रहा था। वह इस बात से बड़ा प्रोत्साहित हुआ की बाथरूम में दीपा को इतना छेड़ने के बावजूद और दीपा ने उसे इतने गुस्से में "गेट आउट" और "मैं तुम्हारी शकल भी देखना नहीं चाहती" कहने के बाद भी माफ़ कर दिया था। कहीं ना कहीं तरुण के मन में यह बात घर कर गयी की शायद दीपा भी तरुण के साथ लुकाछुप्पी का खेल खेल रही थी, और इसी लिए शायद सम्बन्ध तोड़ने के बजाय वह पहले की ही तरह फिर से तरुण से बात करने के लिए तैयार थी। शायद दीपा भी चाहती थी की तरुण उसे छेड़े और यह कहानी आगे बढे।

तरुण से अब रहा नहीं जा रहा था। पहले उसने जब दीपा को देखा था तो वह उसे एक मात्र सपनों में आनेवाली नायिका के सामान लग रही थी। वह नायिका जो मात्र सपनों में आती है और जिसके छूने कि कल्पना मात्र करने से पुरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। वह वास्तव में भी कभी इतने करीब आएगी यह सोचने से ही उसके बदन में एक आग सी फ़ैली जा रही थी। अब वह दीपा को चोदने के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध था।

एकदिन शाम को हम दोनों दोस्त एक क्लब में जा बैठे। तरुण उसी दिन अपने टूर से वापस आया था। मैं वास्तव में बहुत खुश था। पिछली रात को दीपा ने मुझे गले लगा कर इतना प्यार कियाथा की मैं उसके नशे में तब तक झूम रहा था। तरुण ने मुझे इतने खुश होने का कारण पूछा।

मैंने उसे कहा "यार इसका कारण तुम खुद ही हो।"

तरुण एकदम अचम्भे में पड़ गया। उस ने पूछा, "वह कैसे?"

मैंने कहा, "तुम जब दीपा को छेड़ते हो ना, तब तो वह तुम पर और कभी कभी मुझ पर भी गुस्से हो जाती है, पर पता नहीं उसके बाद रात को वह इतनी गरम हो जाती है और मुझे इतनी खुश कर देती है की बस क्या कहूं?"

तरुण ने तब कहा, "यह तो बड़ी ही ख़ुशी की खबर है। मुझे लगता है, जल्द ही हमारा मकसद कामयाब हो जाएगा। खैर, मुझे यह बताओ की मेरे घरमें तुम्हारी विजिट कैसी रही? टीना ने मुझे कहा की उसने एक बार तुम्हे रात को घर बुलाया था।"

मैंने फिर वही सारी कहानी पूरी सच्ची तरुण को सुनाई। जब तरुण ने सुना की टीना मुझसे लिपट गयी थी तो वह जोर से हंस पड़ा और बोला, "देखा, मेरी बीबी ने भी यह बात मुझसे छुपाई थी। पर तुमने मुझसे नहीं छुपाई। अरे यार, तुम तो बड़े सच्चे और कच्चे निकले। तुम्हारी जगह अगर मैं होता न तो मैं तो टीना की बजा ही देता।"

मैंने उसके मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, "यार, मैं कोई साधू नहीं। पर तू मेरा पक्का दोस्त है। देख मैंने भी बड़ी मुस्श्किल से संयम रखा था। मन तो मेरा भी उछल रहा था। पर मैं तुम्हें आहत करना नहीं चाहता था।"

तरुण ने तब मुझे एक बात कही। उसने कहा, "यार, तू क्या समझता है? मैं क्या अपनी बीबी को तेरे बारे में बताता नहीं हूँ? मैं टीना को दिन रात तेरे बारे में बताता हूँ। मैंने तो मेरी बीबी से यहां तक कह दिया है, की यदि दीपक तुमसे थोड़ी बहुत छेड़खानी भी करे तो बुरा मत मानना। वैसे सच बताओ यार, तुम्हे मेरी बीबी कैसी लगी?"

मैं यह सुनकर हक्काबक्का सा रह गया। तब फिर मेरी झिझक थोड़ी कम हुई। मैंने तरुण से पास जाते हुए कहां, "तरुण, सच कहूं। जब टीना भाभी मेरे इतनी करीब बैठी ना तो मेरे तो छक्के छूट गए। मैं तो पसीना पसीना हो गया। बाई गॉड यार, भाभी तो कमाल है।"

तरुण ने मुझे एक धक्का मारते हुए कहा, "यह क्यों नहीं कहते की वह माल है। यार वह है ही ऐसी। कॉलेज मैं हम सब उस पे मरते थे। सब लड़के उसे देख कर सिटी बजाते थे। पर आखिर में बाजी तो मैंने ही मार ली। बेटा तू आगे बढ़ मैं तेरे साथ हूँ।"

मैंने भी अपनी झिझक को बाहर निकाल फेंका और बोला, "एक बात कहूं? मैं और दीपा भी तुम्हारे बारेमें बहुत बातें करते हैं। मैं उसे तेरे करीब लाने की कोशिश करता हूँ। वह भी तुझे अच्छा मानती तो है, पर उससे आगे कुछ भी बात नहीं करना चाहती।"

तरुण ने तब मेरा कन्धा थपथपाते हुए कहा, "दोस्त, अब हम एक दूसरे के सामने जूठा ढ़ोंग ना करें। सच बात तो यह है की हम दोनों एक दूसरे की बीवी से सेक्स करना चाहते हैं। शायद बीबियों को भी हम पसंद है। पर वह अपनी कामना जाहिर नहीं कर सकती और चुप रह जाती है। हमारी बीबियाँ एक असमंजस मैं है। तूने जो अब तक किया वही बहुत है। अब इसके आगे मुझे कुछ करने दे। बस मुझे तेरी इजाजत और सपोर्ट चाहिए।"

मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "मैं तेरे साथ हूँ। अब तो आगे बढ़ना ही है। "

पर इस बातचित के बाद काफी समय तक हम एक दूसरे से मिल नहीं पाए, हालांकि हमारी फ़ोन पर बात होती रहती थी। तरुण और मैं अपने ऑफिस के काम में व्यस्त हो गए और एक दूसरे के घर आना जाना हुआ नहीं। कई बार दीपा तरुण के बारेमें पूछ लेती थी, तब मैं मेरी तरुण से हुयी टेलीफोन पर बातचीत का ब्यौरा दे देता था। शायद दीपा के मन में यह पश्चाताप उसे खाये जा रहा था की उस सुबह दीपा ने तरुण को बहुत ही ज्यादा फटकार दिया था। तरुण हमेशा दीपा के बारे में पूछता रहता था। तरुण को भी दुःख हो रहा था की उसने दीपा का दिल दुखा दिया था।

एक दिन जब तरुण का फ़ोन आया और वह मुझे पूछने लगा की कैसा चल रहा है?

मैंने कहा, "यार सब कुछ ठीक है। पर यह बता तुझे तेरी गर्ल फ्रेंड (मतलब मेरी बीबी दीपा) को छेड़ने का मन नहीं हो रहा क्या?"
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10-02-2020, 12:52 PM,
#36
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण ने कहा, "भाई, मैं जान बुझ कर कुछ दिनों की गैप दे रहा हूँ ताकि भाभी भी सोचती रहे की मैं क्यों नहीं आ रहा। आप यह कहना की उस दिन बाथरूम में मैंने जो हरकत की उससे मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ और भाभी के सामने आने से डर रहा हूँ।"

उसी रात को मैंने दीपा से कहा, "आज मैंने तरुण को फ़ोन किया था।"

दीपा एकदम सतर्क हो गयी और उसने बड़ी ही सहजता दिखाते हुए पूछा, "अच्छा? क्या बात हुई?"

मैंने कहा, "मैंने तरुण से पूछा की इतने दिनसे क्यों आ नहीं रहे हो? तो उसने कहा, वह तुमसे डर रहा है। उस दिन बाथरूम में उसकी हरकत के कारण वह शर्मिन्दा है और आने से झिझकता है। उस दिन तुमने उसे झाड़ जो दिया था।"

दीपा ने कहा, "ओह! अच्छा? मैं तो उस बात को भूल ही गयी थी। मैंने तुम्हें कह तो दिया था की मैंने उसे माफ़ कर दिया है। वह आ जाये, मैं उसे कुछ नहीं कहूँगी। मेरे बर्ताव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तरुण ने मेरी बात को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया लगता है। तुम उसको कहना की जो हुआ सो हुआ। अब उसके बारे में ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं। उस उल्लू को कहना की माफ़ी अगर मांगनी है तो खुद यहां आकर मुझसे माफ़ी मांगे। हो सकता है मैं उसे माफ़ कर दूँ।"

मैंने तरुण से मेरी बीबी के साथ मेरी बात हुई वह बतायी तो वह काफी खुश हुआ और बोला, "भाई आप एक काम कर सकते हो? आप दीपा को यह बताओ की मेरे और टीना के बिच कुछ अनबन सी हो गयी है। और टीना मुझसे झगड़ा कर मायके चली गयी है, और मैं इस कारण काफी मायूस हूँ। यह भी कहना की टीना को मेरे और मेरी एक पुरानी महिला दोस्त के बारे में कुछ ग़लतफ़हमी हो गयी है। बस इतना ही बताना।" मैंने कहा वह मैं बता दूंगा।

उस रात को मैंने दीपा से कहा, "मैंने तरुण को फ़ोन किया था। मैंने तुम्हारा मैसेज दे दिया उसको। पर बेचारा काफी मायूस लग रहा था।"

मेरी बीबी ने मेरी और सवालिया नजर से देखा तो मैंने कहा, "कोई बात को लेकर उसके और टीना बिच कुछ खटपट हो गयी है। शायद तरुण की कोई पुरानी गर्ल फ्रेंड को लेकर टीना को कोई ग़लतफ़हमी हो गयी है। गुस्से में टीना कुछ दिनों के लिए मायके चली गयी है।"

दीपा ने पूछा, "क्या तरुण किसी और औरत के साथ भी चक्कर चला रहा है?" ना कहते हुए भी दीपा ने अनजाने में "किसी और औरत के साथ" शब्द इस्तेमाल कर यह कबुल कर लिया की तरुण दीपा के साथ चक्कर चला रहा था।

मैंने कहा, "नहीं यह बात नहीं है। बात कुछ ज्यादा ही गंभीर है। दर असल तरुण की एक पुरानी फ्रेंड उसे कहीं मार्केट में मिली थी। पहले तरुण का उसके साथ कुछ चक्कर था। पर अब तो उसकी शादी भी होगयी है और बच्चे भी हैं। जब तरुण ने टीना को यह बात कही तो टीना ने समझ लिया की तरुण फिर से उसके चक्कर में पड़ गया है। फिर इस को लेकर तरुण और टीना के बिच कुछ बातचीत हुई और टीना अपने मायके चली गयी। पता नहीं पर तरुण और टीना के बिच कुछ और भी झंझट है। तरुण एक बार मनाने गया पर वह नहीं आयी। शायद होली के बाद आ जाये।"

दीपा ने कुछ सोचने के बाद कहा, "तरुण को कहना, की अगर जरुरत पड़ी तो मैं टीना को मना लुंगी। पर एक बार तरुण को हमारे घर आ कर सारी बातें मुझे विस्तार से कहने के लिए कहो।"

दूसरे दिन मैंने जब तरुण को मेरी बीबी के साथ हुई बातचीत कह सुनाई तरुण मेरी बात सुनकर खुश हुआ। तरुण ने कहा, "भाभी को कहना की मेरा स्वभाव एक बन्दर जैसा है। भाभी को देख कर मैं एकदम अचानक ही चंचल हो जाता हूँ। मैं आया और मुझसे कहीं ऐसी वैसी हरकत हो गयी तो भाभी फिर मुझसे लड़ पड़ेगी और नाराज हो जायेगी। एक बात भाभी को आप बता देना की मैं मेरी भाभी को दुखी नहीं देख सकता।"

जब मैंने दीपा से यह कहा तो दीपा ने कहा, "तरुण से कहना, मुझे बन्दर पसंद है। अगर मुझे उसकी कोई हरकत पसंद नहीं आयी तो मैं उसे एक थप्पड़ भी रसीद कर सकती हूँ। पर इसका मतलब यह नहीं की वह आनाजाना बंद कर दे। और मैं उसकी हरकत से दुखी नहीं होउंगी बस?"

जब मैंने तरुण से यह कहा तो वह उछल पड़ा। तरुण ने कहा, "भाई, अब समझो हमारा काम हो गया। अब समझो की दीपा भाभी फिसल गयी।"

मैंने पूछा, "कैसे?"

तरुण ने कहा, "भाई देखते जाओ।"

मैंने कहा, "अरे परसों ही तो होली है। देख साले होली में तू कोई ऐसी वैसी हरकत मत करना।"

तरुण ने कहा, "भाई अब तो जब आपने मुझे चुनौती दे दी है तो होली में ही कुछ करते हैं। मैं होली के दिन ही आऊंगा। बोलिये आप तैयार हो?"

मैंने कहा, "क्या मैंने कभी तुम्हारे काम में रुकावट डाली है?"
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10-02-2020, 12:52 PM,
#37
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
हर साल हम होली के दिन एक दोस्त के वहां मिलते थे। उसका घर काफी बड़ा था और उसमें कई रूम और बरामदा बगैरह था जहां बैठकर हम मौज मस्ती करते थे। सारे दोस्त वहीं पहुँच कर एकदूसरे को और एक दूसरे की बीबियों को रंगते थे।

माहौल एकदम मस्ती का हुआ करता था। थोड़ी बहुत शराब भी चलती थी। दीपा और मैं करीब सुबह ग्यारह बजे उस दोस्त के घर पहुंचे तो देखा की तरुण भी वहां था। हमारे वहाँ पहुँचते ही कुछ महिलाएं होली खेलने के लिए दीपा को पकड़ कर घर में ले गयीं। तरुण और बाकी हम सबने एक दूसरे को अच्छी तरह से रंगा और फिर तरुण और मैं लॉन में बैठ कर गाने बजाने और कुछ पिने पाने के कार्यक्रम में जुड़ गए।

तब मैंने देखा की तरुण बिच में से ही उठकर घर में चला गया। मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। ऐसे ही गाने बजाने में आधा घंटा बीत गया था। तब तरुण वापस आ गया। वह खुश नजर आरहा था। वह निकलने की जल्दी में था। उसने मुझे बाई बाई की और चल पड़ा। थोड़ी ही देर में दीपा और दूसरी औरतें आ गयीं। पहले तो मैं दीपा को पहचान ही नहीं सका। दूसरी औरतों के मुकाबले वह पूरी रंग से भरी हुई थी। खास तौर से छाती और मुंह पर इतना रंग मला हुआ था की वह एक भूतनी जैसी लग रही थी। उसके कपडे भी बेहाल थे।

औरतों के आने के बाद हम सब एक दूसरे की बीबियों के साथ फिरसे होली खेलने में जुट गए। पर दीपा कुछ अतड़ी अतड़ी सी नजर आ रही थी। मेरे मन में विचार भी आया की क्या हुआ की तरुण अचानक ही गायब हो गया। वैसे तो हर साल वह दीपा को रंगने के लिए बड़ा बेताब रहता था।

मैं जब दीपा को रंग लगाने के लिए गया तो उसे देख कर हंस पड़ा। मैंने पूछा, "लगता है मेरी खूबसूरत बीबी को सब लोगों ने इकठ्ठा होकर खूब रंगा है।"

तब दीपा ने झुंझलाहट भरी आवाज में पूछा, "टीना को नहीं देखा मैने। वह आयी नहीं थी क्या?"

मैंने कहा, "मैंने कहा नहीं था, वह मायके चली गयी है?"

तब दीपा एकदम धीरे से बड़बड़ाई, "हाँ सही बात है। तुम ने बताया था। तभी में सोचूं, की जनाब इतने फड़फड़ा क्यों रहे थे। "

मैंने पूछा, "किसके बारेमे कह रही हो?" मेरी पत्नी ने कोई उत्तर नहीं दिया। कुछ और देर में हम सब घर जाने के लिए तैयार हुए। मैं और दीपा मेरी बाइक पर सवार हो कर चल दिए।

घर पहुँच कर मैंने देखा तो दीपा कुछ हड़बड़ाई सी लग रही थी। मैंने जब पूछा तो मुझे लगा की दीपा अपने शब्दों को कुछ ज्यादा ही सावधानी से नापतोल कर बोली, "मुझे एक बात समझ नहीं आती। यह तुम्हारा दोस्त कैसा इंसान है? देखिये, ऐसी कोई ख़ास बात नहीं है। आप उस को कुछ कहियेगा नहीं। पर आपके दोस्त तरुण ने मरे साथ क्या किया मालुम है? तुम्हारे दोस्त के घर में तरुण मुझे कुछ बहाना बना कर पीछे के कमरे में ले गया। पहले तो उसने झुक कर मेरे पॉंव पकडे और खुले दिलसे माफ़ी मांगी। जब तक मैंने उसका हाथ पकड़ कर उठाया नहीं, तब तक वह मेरे पाँव में लेटा रहा। मैंने उसे कहा, "उठो यार। भूल जाओ वह सब पुरानी बातें। मैंने माफ़ कर दिया। अब क्या है? चलो होली खेलते हैं।

बस मेरा इतना कहना था की उसने मुझे अपनी बाँहों में जकड कर ऊपर उठा लिया। पहले तो उसने मुझ पर ऐसा रंग रगड़ा ऐसा रंग रगडा की मेरी साड़ी ब्लाउज यहां तक की ब्रा के अंदर भी रंग ही रंग कर दिया। होली के बहाने उसने मुझसे बड़ी बदतमीज़ी की। मैं आप को क्या बताऊँ उसने मेरे साथ क्या क्या किया। उसने मेरी ब्रैस्ट दबाई और उन पर रंग रगड़ता रहा।

मैंने उसे रोकना चाहा पर मेरी एक ना चली। दीपक, मैं चिल्लाती तो सब लोग इकठ्ठा हो जाते और तरुण की बदनामी होती। मैं धीरे से ही पर चिल्लाती रही पर वह कहाँ सुनने वाला था? मैंने उसे कहा तरुण ये क्या कर रहे हो? पर उसने मेरी एक न सुनी। फिर जब उसने मेरे ब्लाउज के निचे, मेरे पेट पर रंग लगाना शुरू किया और फिर वह झुक मेरे पैर पर रंग रगड़ता हुआ मेरे घाघरे को ऊपर कर मेरी जाँघों पर रंग रगड़ने लगा। जब मैंने उसे झटका दिया तो सॉरी सॉरी कहता हुआ खड़ा हुआ और वह मेरी नाभि और मेरे पिछवाड़े को रगड़ कर रंग लगा ने लगा। जब मैंने उसे रोकना चाहा तो रुकने के बजाय उसने मेरे घाघरे के नाड़े के अंदर हाथ डालना चाहा। तब मेरा दिमाग छटक गया और मैंने उसे ऐसा करारा झटका दिया की वह लड़खड़ा कर गिर पड़ा। फिर वह वहाँ से चला गया। पता नहीं यह बन्दा कभी सुधरेगा की नहीं? आप उसे बताइये की यह उसने अच्छा नहीं किया। वह ऐसी हरकत करता रहेगा तो मुझे कुछ ना कुछ करना पडेगा।"

मैंने जैसे ही यह सूना तो मेरा तो लण्ड अपनी पतलून में फ़ुफ़कार ने लगा। मैंने मन ही मन में सोचा, "अरे वाह, मेरे शेर! तुम ने तो एक के बाद एक गोल गोल दागना शुरू कर दिया।"

दीपा को ढाढस देते हुए मैंने कहा, "देखो डार्लिंग यह होली का त्योहार है। एक दूसरे की बीबियों को छेड़ना उनपर रंग डालना, उनसे खेल खेला करना, मजाक करना और कभी कभी सेक्सी बातें करना होता है। तुमको मेरे और दोस्तों ने भी तो रंग लगाया था। मैंने भी तुम्हारी कई सहेलियों को रंग लगाया है। और ख़ास कर तुम्हारी वह सखी मोहिनी को तो मैंने अच्छी खासी तरह से रंगा था। हाँ, मैंने उसके ब्रा के अंदर हाथ नहीं ड़ाला पर बाकी काफी कुछ रंग दिया था। तुम भी तो वहीँ ही थी। इस पर बुरा नहीं मानना चाहिए। इसी लिए तो कहते हैं की "बुरा ना मानो होली है।

पर तुम तो काफी नाराज लग रही हो। आज तरुण ने कुछ ज्यादा ही कर दिया। यह बिलकुल ठीक नहीं है। मैं आज शाम को उसे महा मुर्ख सम्मलेन में हमारे साथ जाने के लिए आमंत्रित करने का सोच रहा था। अब तो मैं उसको डाँटूंगा तो वह वैसे भी नहीं आएगा। मैं उसको अभी फ़ोन कर डाँटता हूँ। पर एक बात मेरी समझ में नहीं आयी। जब मैं उसे मिला तब पता नहीं तरुण कुछ उखड़ा उखड़ा दुखी सा लग रहा था। मूड में नहीं लग रहा था। क्यूंकि शायद वह कुछ दिनों से घर में अकेला ही है। अनीता उसे छोड़ मायके चली गयी है।"
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10-02-2020, 12:53 PM,
#38
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा मेरी बात सुनकर सोच में पड़ गयी। उसने कहा, "ओह! हाँ तुमने बताया तो था। तो यह बात है! मियाँ अकेले हैं तो सोचा चलो टीना नहीं तो भाभी ही सही। भाभी पर ही हाथ साफ़ कर लेते हैं! पर तुमने यह तो बताया ही नहीं की अगर टीना नहीं है तो वह खाना कहाँ खाता है?"

मैंने कहा, "पता नहीं, मैंने नहीं पूछा।"

दीपा: "कमाल के दोस्त हो तुम! वह अकेला है तो बाहर होटल में ही खाना खाता होगा। तुम्हें हुआ नहीं की चलो उसे हमारे घर खाना खाने के लिए बुलाते हैं? और वह उल्लू का पट्ठा भी कह सकता था की भाभी मैं आपके यहां खाना खाऊंगा?"

दीपा की बात सुन कर मैं हैरान रह गया! अभी तो तरुण को डाँटने की बात थी और अचानक ही उसे खाना खिलाने की बात आ गयी!

मैंने कहा, "उसे छोडो और यह बताओ की मैं क्या करूँ? उसे डाँटू या फिर शाम को साथ में आने के लिए कहूं?" मैंने दीपा से ही उसके मन की बात जाननी चाही।

मेरी भोली भाली पत्नी एकदम सोच में पड़ गयी। वह थोड़ी घबरायी सी भी थी। थोड़ी देर बाद वह धीरे से बोली, "बाप रे, तरुण शाम को भी आएगा? वह भी अकेले? अम्मा, मेरी तो शामत ही आ जायेगी। हाय दैया, मैं अकेली क्या करुँगी?"

फिर दीपा एकदम चुप हो गयी। दीपा की सूरत कुछ गुस्सेसे, कुछ शर्म से और बाकी रंग से एकदम लाल हो रही थी। वह रोनी सी सूरत बना कर फिर दोबारा बोली, "अब मैं आपको क्या बताऊँ की उसको बुलाना चाहिए या नहीं? देखिये, मुझे आप को कहना था सो मैंने कह दिया। अब आगे आप जानो। मुझे आप दोनों की दोस्ती के बिच में मत डालिये। पर जहां तक मैं समझती हूँ, इस बात का बतंगड़ बनाने का कोई फायदा नहीं। मैं नहीं चाहती के इस बात पर आप दोनों घने दोस्तों में कुछ अनबन पैदा हो। बेहतर यही रहेगा की आप तरुण को कुछ भी मत कहिये। उसे डाँटना मत।"

मैं चुपचाप मेरी बीबी की बात सुन रहा था। वह फिर बोलने लगी, "एक तो होली के त्यौहार का जोश, ऊपर से मुझे लगता है की तरुण ने शराब कुछ ज्यादा ही पी ली थी शायद। उसके मुंह से शराब की बू भी आ रही थी। तो बहक गया होगा नशेमें। एक तो बन्दर और ऊपर से नीम चढ़ा। और फिर टीना भी तो नहीं है, उसको कण्ट्रोल करने के लिए। तो यह सब हुआ। मैंने कहीं पढ़ा था की कई वीर्यवान मर्द सेक्सुअली बहुत ज्यादा चंचल होते हैं। ऐसे मर्दों के अंडकोषमें हमेशा उनका वीर्य कूदता रहता है। सेक्सी औरत को देखकर वह सेक्स के मारे उत्तेजित हो जाते हैं और वह बड़े ही तिलमिलाने लगते हैं। मुझे लगता है शायद तरुण का किस्सा भी ऐसा ही है। तुम्ही ने तो कहा था ना की मुझे देखकर पता नहीं उसे क्या हो जाता है की वह मुझे छेड़े बगैर रह नहीं सकता?"

मैंने कहाँ, "हाँ वह तो हकीकत है। तरुण ने खुद मुझसे यह बात कई बार कबुली थी। उसने कहा था की उसे तुम्हें देख कर कुछ हो जाता है और वह तुम्हें छेड़ देता है अपने आप को रोक नहीं पाता। पर फिर बाद में वह बहुत पछताता भी है। तुम्ही तो कह रही थी की उसने तुमसे कई बार माफ़ी भी मांगी है।"

दीपा ने मेरी बात को सुनकर अपनी उंगली से चुटकी बजाते हुए बोली, "हाँ बिल्कुल। बस यही बात है।"

दीपा फिर एक गहरी साँस ले कर बोली, " शायद मेरी तक़दीर में तुम्हारे दोस्त को झेलना ही लिखा है। अब क्या करें? तरुण तो सुधरने से रहा। अगर आप उसे बुलाना चाहते हो तो जरूर बुलाओ। बस आप मेरे साथ रहना, ताकि वक्त आने पर हम उसे कण्ट्रोल कर सकें। जो हो गया सो हो गया। अब आगे ध्यान रखेंगे।"

फिर अचानक दीपा को कुछ याद आया तो मेरी बाँह पकड़ कर दीपा ने कहा, "और हाँ, एक बात और। इस बार मुझे भी तरुण में कुछ फर्क नजर आया। हालांकि उसने मुझे रंग बगैरह तो लगाया और जो करना था वह तो किया पर मुझे लगा की वह कुछ कुछ बुझा बुझा सा मायूस लग रहा था। वो कह रहा था की वह बहुत दुखी है पर जब वह मेरे साथ होता है तो वह दर्द भूल जाता है। मुझे लग रहा है वह टीना को लेकर कुछ अपसेट है। बात करने का मौक़ा नहीं था वरना मैं पूछ लेती। शाम को जब वह आये तो हम उसे उसके बारेमें जरूर पूछेंगे। शायद हम से बात करके उसका मन हल्का हो जाए। शायद हम उसकी कुछ मदद कर सकें।"

मेरी सीधी सादी पत्नी की बात सुनकर मैं मन में हंसने लगा। एक तरफ वह तरुण की शिकायत कर रही थी, उस का सामना करने से डर रही थी तो दूसरी और उसकी हरकतों के लिए कारण ढूंढ रही थी, उसे बुलाने के लिए कह रही थी। यही तो प्यार और गुस्से का अद्भुत संयोग था।

मैं मन ही मन हंसकर लेकिन बाहर से गम्भीरता दिखाते हुए बोला, "अगर तुम इतना कहती हो तो चलो मैं तरुण को नहीं डाँटूंगा और उसे बुला लूंगा। पर एक शर्त है। देखो तुम तरुण को तो जानती हो। वह रंगीली तबियत का है। तुमने ही तो अभी कहा की वह बन्दर के जैसा है। वह तुम्हारे जैसी खूबसूरत बंदरिया को देखते ही शायद उसका लण्ड खड़ा हो जाता है और वह अजीब हरकतें करने लगता है। उपरसे आज होली का त्यौहार है। आज तुम अकेली औरत हो। तो वह तुम्हें छेड़े बगैर तो रहेगा नहीं। जहां तक मेरी बात है, तो तुम तो जानती हो, आज होली है और मैं तुम्हें प्यार किये बगैर रह नहीं सकता। चूँकि उसके छेड़ने से तुम गुस्सा हो जाती हो इसलिए शायद बेहतर यही है की मैं उसको ना बुलाऊँ। इसका एक फायदा यह भी होगा की जब मेरा मन करेगा तो मैं तो मेरी बीबी को प्यार करूंगा और तुम मुझे यह कह कर रोकोगी नहीं की तरुण साथ में बैठा है। यार होली में तो मस्ती होनी चाहिए। ओके? अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो मुझे अभी बता दो, तब फिर मैं तरुण को मना कर दूंगा और हम दोनों ही चलेंगे। मैं तुम्हें होली के मौके पर प्यार किये बिना नहीं रह सकता। तरुण आये तो भी ना ए तो भी। बोलो क्या मैं उसे बुलाऊँ?"

दीपा ने मेरी बात सुनकर बड़े ही असमंजस में कहा, "मैंने कहाँ तरुण को बुलाने से मना किया है? यह सारी बातें तो तुमने कहीं। मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा। तुम बोलो ना क्या तुम तरुण को बुलाना चाहते हो या नहीं? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता तरुण हो या ना हो।"

मैं कहा, "क्या तरुण होगा तो भी तुम मुझे प्यार करने दोगी की नहीं?"

दीपा ने शर्माते हुए कहा, "अगर मैं मना करुँगी तो क्या तुम मुझे प्यार किये बिना रुकोगे?"

मैंने कहा, "और अगर तुम्हें तरुण छेड़ेगा तो?"
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10-02-2020, 12:53 PM,
#39
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा ने कहा, 'यह क्या पहली बार है की तरुण मुझे छेड़ेगा? पता नहीं मैं तो गिनती भी भूल गयी हूँ जब तरुणे ने मुझे छेड़ा था। अब तो मुझे तरुण से छिड़ने की शायद आदत सी ही हो गयी है। अगर वह मुझे नहीं छेड़ेगा तो मैं कहीं सोचने ना लागूं की उस बंदर को हो क्या गया है?"

"तो फिर मैं तरुण को बुलाता हूँ। ओके?"

दीपा ने कहा, "तुम्हारा दोस्त है, भाई है। मुझे क्यों पूछ रहे हो? बुलाना है तो बुलाओ उसे। वह तो जो करना है वह करेगा ही। मेरे कहने से थोड़े ही रुकजाएगा वह?"

मैंने फिर पूछा, "तो उसके होते हुए भी तुम मुझे प्यार करने दोगी ना?"

दीपा ने मेरी और गुस्से से देखा और बोली, "ठीक है, तुमने एक बार बता दिया और मैंने सुन भी लिया ना? ठीक है बाबा मैं जानती हूँ, तुम मुझे प्यार किये बिना नहीं रह सकते, ख़ास कर होली के अवसर पर। मैं जानती नहीं हूँ क्या? ओके, बाबा प्यार करना तुम मुझे, मैं तुम्हें नहीं टोकूँगी बस? एक ही बात बार बार क्यों कह रहे हो?"

मैंने कहा, "ठीक है, सॉरी। पर एक बात और सुन लो। अगर तरुण आया तो तुम तो जानती ही हो, की वह बन्दर है। वह बाज नहीं आएगा। वह तो तुम्हें छेड़े बगैर रह नहीं सकता। तो देख लो। चिल्ला कर मूड मत खराब करना। और हाँ हम ने थोड़ा शराब का भी प्रोग्राम रखा है। तो प्लीज बुरा मत मानना और हंगामा मत करना। मैं चाहता हूँ की हम सब मिल कर खूब मौज करें और होली मनाएं। ठीक है ना? तुम गुस्सा तो नहीं करोगी ना?"

जब दीपा ने भांप लिया की मैं सुबह वाली बात को लेकर तरुण से ऐसी कोई लड़ाई झगड़ा नहीं करूँगा तो उसकी जान में जान आयी। तब वह होली के मूड में आ गयी। दीपा ने आँख नचाते हुए कहा, " एक ही बात कितनी बार कहोगे? मैंने कह दिया ना, की नहीं करुँगी तुम लोगों का मूड खराब। बस? मैं इतना गुस्सा करती हूँ पर क्या तुम्हारे ऊपर और तुम्हारे दोस्त के ऊपर कोई फर्क पड़ा है आज तक? मैंने गुस्सा किया भी तो तुम मेरी सुनोगे थोड़े ही? खैर चलो मैं तुम्हें वचन देती हूँ की मैं गुस्सा नहीं करुँगी बस?"

"और हर होली की तरह बादमें देर रात को फिर तुम मौज करवाओगी ना?" मैंने दीपा को आँख मारते हुए पूछा।

दीपा ने हंसकर आँख मटक कर कहा, "जरूर करवाउंगी। निश्चिंत रहो। अगर नहीं करवाई तो तुम मुझे छोड़ोगे क्या?" मुझे ऐसा लगा की मेरी रूढ़िवादी पत्नी को भी तब होली का थोड़ा रंग चढ़ चूका था। पर उसे क्या पता था की मैं किस मौज की बात कर रहा था और उस रात के लिए हमारे शातिर दिमाग में क्या प्लान पक रहा था?

जैसे की आप में से कई लोगों को पता होगा, जयपुर एक सांस्कृतिक शहर है और उसमे कई अच्छे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। होली के समय रामनिवास बाग़ में एक कार्यक्रम होता था जिसका नाम था "महां मुर्ख सम्मेलन" यह कार्यक्रम रात दस बजे शुरू होता था एवं पूरी रात चलता था और उसमे बड़े बड़े हास्य कवी पुरे हिंदुस्तान से आते थे। वह अपनी व्यंग भरी हास्य रस की कविताएं सुनाते थे और लोगों का खूब मनोरंजन करते थे। कार्यक्रम खुले मैदान में होता था और चारों तरफ बड़े बड़े लाउड स्पीकर होते थे। पूरा मैदान लोगों से भर जाता था।

मैं और मेरी पत्नी हर साल इस कार्यक्रम में जाते थे और करीब करीब पूरी रात हास्य कविताओं का आनंद उठाते थे। मेरी पत्नी दीपा बड़े चाव से यह कार्यक्रम सुनती और बहुत खुश होती थी। इस कार्यक्रम सुनने के बाद मुझे खास वीआईपी ट्रीटमेंट मिलती और उस रात हम खूब चुदाई करते।

दीपा की अनुमति मिलने पर मैंने तरुण को फ़ोन करके पूछा, "क्या तुम रात को दस बजे हमारे साथ महा मूर्ख सम्मलेन में चलोगे? पूरी रात का कार्यक्रम है।"

तरुण ने कहा, "यार नेकी और पूछ पूछ? मैं तो तुम्हारे इनविटेशन का इंतजार ही कर रहा था। मैं घर में अकेला हूँ। मैं अपनी एम्बेसडर कार लेकर जरूर आऊंगा। हम उसी मैं चलेंगे। पर क्या दीपा भाभी को पता है की तुम मुझे बुलाने वाले हो? क्या उन्हें पता है की आज मैं अकेला हूँ?" मैं समझ गया की दुपहर की शरारत का दीपा पर कैसा असर हुआ है वह जानने के लिए तरुण लालायित था।

मैंने कहा, "हाँ भाई। मैंने दीपा को बताया, और उसकी सम्मति से ही मैं तुमको आमंत्रित कर रहा हूँ।" मैं कल्पना कर रहा था की फ़ोन लाइन की दूसरे छौर पर यह सुनकर तरुण कितनी राहत का अनुभव कर रहा होगा।

मैंने तरुण को एक गहरी साँस लेते हुए सुना। फिर तरुण ने धीमी आवाज में बोला, "यार एक बात बुरा न मानो तो कहूँ। क्या आज रात हम दीपा भाभी के साथ कुछ हरकत कर सकते हैं? आज रात को थोड़ी सेक्स की बातें करके भाभी को गरम करने की कोशिश करते हैं।"

तब मैंने तरुण को कहा, "तुम कमाल हो यार। दुपहर को तुमने जब मेरी बीबी को इतना छेड़ा था तो क्या मुझसे पूछा था? और क्या मैंने तुम्हें कभी रोका है? आज होली है। आज तो तुम्हारे पास छेड़नेका, गरम करनेका पूरा लाइसेंस है। तुम दीपा को छेड़ो, गरम करो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। बल्कि मैं भी आज तुम्हारे साथ उसको जरूर छेडूंगा, गरम करूँगा और जीतनी हो सके उतनी तुम्हारी सहायता भी करूँगा। मैं भी देखना चाहता हूँ की तुम तुम्हारी बर्फीली भाभी को कितना गरम कर सकते हो?"
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10-02-2020, 12:53 PM,
#40
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण ने कहा, "भाई अगर आप कहो तो आज मैं भाभी को सिर्फ गरम ही नहीं करूंगा, आग ही लगा दूंगा। आप देखते जाओ। अब जब आपने मुझे चुनौतो दे ही दी है तो फिर देखो मेरा कमाल। आज ही भाभी को बिलकुल सेट करने की कोशिश करते हैं। वैसे भाई, मेरी भाभी बहुत अच्छी हैं। मैं वाकई में उनका मुरीद हूँ।"

मैंने कहा, "वह तो तुम हो ही और वह मुझसे और अच्छी तरह से कौन जानता है? पर तुम्हारी भाभी आज तुम्हारी दोपहर की हरकत से नाराज थी। खैर, मैंने उसे समझाया की होली में सब लोग एक दूसरे की बीबियोँ से थोड़ी सेक्सुअल छेड़छाड़ करते ही हैं। ऐसा करके वह अपने मन की छुपी हुई इच्छाओं का प्रदर्शन करके कुछ संतुष्टि लेते हैं।, ऐसा मौक़ा उन्हें कोई और दिन नहीं मिलता। पर अगर तुम्हारी छेड़छाड़ की वजह से उसका हैंडल छटक गया तो फिर उसको मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा। वह फिर तुम सम्हालना। माहौल बनाने का काम तुम्हारा है।"

तरुण ने कहा, "वह तुम मेरे पर छोड़ दो। बस तुम मुझे सपोर्ट करते रहना बाकी मैं देख लूंगा।"

मैंने फ़ोन रखा और दीपा से कहा, "मैंने तरुण को आने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। वह टीना के मायके जाने से काफी मायूस है। तरुण अकेला है और कुछ दुखी भी है। पर मैंने जब बहुत फ़ोर्स किया तो आखिर में उसने आने के लिए हाँ कह दिया। मैंने उसे अपनी कार ले कर आने के लिए कहा है। हम तीनों साथ में चलेंगे। वह अपनी गाडी में रात दस बजे आएगा और हम उसकी गाडी में ही चलेंगे। हम फिर सुबह ही वापस आएंगे। और हाँ, मैं तरुण का मूड ठीक करने के लिए उस को कुछ सेक्सी बातें करने के लिए उकसाऊँगा। तुम उसे मत रोकना और उससे टीना के बारेमें मत पूछ बैठना। उसका मूड जब ठीक होगा तो आखिर में हम उस बारेमें बात करेंगे। ओके?"

दीपा मुंह बना कर बोली, "कमाल है, तुम मर्दों का मूड बस सेक्स की बातें करने से ही ठीक होता है क्या? ....क्या करें? यह तो साँप और छछूंदर वाली बात हो गयी। ना निगलते बनता है ना उगलते बनता है। मर्दों को झेलना भी मुश्किल है और उनके बिना जीना भी मुश्किल है। फिर गहरी साँस ले कर दीपा बोली, "चलो, यह भी झेल लेंगे।" दीपा ने अपने कंधे हिला कर सहमति दे दी।

मैंने दीपा से कहा, "डार्लिंग आज आप मेरे लिए कुछ ऐसे भड़कीले सेक्सी कपडे पहनो की होली का मझा आ जाए। सारे लोग देखते रह जाए की मेरी बीबी लाखों में एक है।"

मेरी बीबी ने पूछा, "क्यों, क्या बात है? सब लोगोंके सामने तुम मेरे बदन की नुमाईश करवाना चाहते हो क्या? या फिर अब तक तुमने तरुण के सामने मेरा अंग प्रदर्शन जितना करवाया है उससे खुश नहीं हो की और करवाना चाहते हो? क्या तुम तरुण ने मुझे जितना छेड़ा है उससे संतुष्ट नहीं हो की उस को मुझे और छेड़ने के लिए प्रोत्साहन देना चाहते हो?"

मैंने तपाक से जवाब देते हुए कहा, "तुम्हारी बात सच है। मैं सब लोगों के बिच में मेरी बीबी की नुमाइश करना चाहता हूँ। मैं सब को दिखाना चाहता हूँ की मेरी बीबी उन सब की बीबीयों से ना सिर्फ ज्यादा सुन्दर है, बल्कि उनकी बीबियों से कई गुना सेक्सी भी है। उतना ही नहीं, आज होली की शाम को मैं चाहता हूँ की मेरी बीबी ऐसी सेक्सी बन कर सजे की उस को देख कर बूढ़ों का भी लण्ड खड़ा हो जाये।
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