Desi Porn Stories बीबी की चाहत
10-02-2020, 12:53 PM,
#41
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
मैंने तपाक से जवाब देते हुए कहा, "तुम्हारी बात सच है। मैं सब लोगों के बिच में मेरी बीबी की नुमाइश करना चाहता हूँ। मैं सब को दिखाना चाहता हूँ की मेरी बीबी उन सब की बीबीयों से ना सिर्फ ज्यादा सुन्दर है, बल्कि उनकी बीबियों से कई गुना सेक्सी भी है। उतना ही नहीं, आज होली की शाम को मैं चाहता हूँ की मेरी बीबी ऐसी सेक्सी बन कर सजे की उस को देख कर बूढ़ों का भी लण्ड खड़ा हो जाये।

अब बात रही तरुण के छेड़ने की, तो तुम्हें उसके बारेमें तो चिंता ही नहीं करनी चाहिए। वह तुम्हारे मम्मों को पहले भी दो तीन बार तो सेहला ही चूका है। उसको तुम्हें जितना छेड़ना था उसने छेड़ लिया है। वह तुमको और क्या छेड़ेगा? उसने जो देखना था वह देख लिया है, जो कुछ करना था वह तो कर लिया है। उससे ज्यादा और वह क्या देख सकता है और क्या कर सकता है भला? वह क्या देख लेगा जो उसने पहले नहीं देखा? और हाँ। मैं तरुण को भी दिखाना चाहता हूँ की मेरी बीबी दीपा भी उसकी बीबी टीना से कम सुन्दर अथवा कम सेक्सी नहीं है। आज तो आरपार की लड़ाई है। वह क्या समझता है, मेरी बीबी उसकी बीबी से कम सेक्सी है?"

मैंने जब अपना पॉइंट बड़े ही भार पूर्वक रक्खा तो दीपा आश्चर्य से मेरी और देखने लगी। मैंने कहा, "तरुण उस दिन अपनी बीबी की स्विम सूट वाली आधी नंगी फोटो दिखा कर मुझे यह जता ने की कोशिश कर रहा था की उसकी बीबी टीना कितनी सेक्सी है? मैं तरुण को दिखाना चाहता हूँ यह तो मेरी बीबी दीपा की शालीनता है की वह कभी भड़कीले वेश नहीं पहनती वरना वह टीना से भी कहीं ज्यादा सेक्सी है और वह चाहे तो अच्छे अच्छों के बारह बजादे। डार्लिंग, बाकी सबकी बात छोडो। मैं तो तुम्हें अपने लिए तैयार होने को कह रहा हूँ। जानेमन आज ऐसी तैयार हो की मेरी आँखें तुम्हे ही देखते रहें। तुम्हारे अलावा किसी और औरत को ना देखें। मैं तुम्हें आज एकदम सेक्सी ड्रेस में देखना चाहता हूँ।"

इतना कहना ही मेरी पत्नी के लिए काफी था। मेरी बात सुनकर मेरी बीबी को कुछ संतुष्टि हुई। मेरी बात भी सही थी। मैं भी मेरी पत्नी के मन की बात को भली भाँती भांप ने लगा था। तरुण से हुई इतनी मुठभेड़ों के बाद उसे अब तरुण से ऐसा कोई भय नहीं लग रहा था। तरुण को दीपा भली भाँती जान गयी थी। पता नहीं, शायद वह सोच रही होगी की आखिर ज्यादा से ज्यादा क्या कर लेगा तरुण? ज्यादा से ज्यादा वह चोदने की कोशिश ही करेगा ना? अब वही तो बाकी रह गया था? और क्या करेगा?

पर अगर तरुण ने थोड़ी सी भी जबरदस्ती की तो दीपा ने तय किया था वह उसे नहीं छोड़ेगी। तरुण को यह तो मालुम ही था की दीपा इतनी आसानी से तो फँसने वाली नहीं है। फिर मैं दीपा के साथ ही था तो दीपा अकेली तो थी नहीं, की तरुण कोई जबरदस्ती कर सके।

यह सब सोच कर दीपा ने मेरी बात मान ली। शायद कुछ हद तक दीपा को भी अपनी सेक्सी फिगर तरुण को दिखाने का मन तो था ही। टीना और तरुण के हनीमून की सेक्सी फोटोएं देखने के बाद कहीं ना कहीं दीपा के मन में भी था की वह तरुण को एक बार तो दिखा ही दे की वह भी अगर भड़कीले कपडे पहने तो उस उम्र में भी मर्दों के लण्ड में आग लगा सकती है। दीपा यह भी दिखा देना चाहती थी की वह टीना से कम सुन्दर और कम सेक्सी नहीं थी।

उस रात वह ऐसे सेक्स की रानी की तरह सज कर तैयार हुई जैसे मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा। कई सालों के बाद पहली बार मेरी बीबी को उस ब्लाउज में देखा जो वह शर्म के मारे कभी न पहनती थी। वह डीप कट ब्लाउज था जिसमें मेरी रूढ़िवादी पत्नी के भरे और तने हुए मम्मों (स्तनों) का उभार काफी ज्यादा नजर आता था।

उसने स्लीवलेस ब्लाउज पहना था। उसका ब्लाउज चौड़ाई में छोटा था और जैसे वह उसके उरोज को बस ढके हुए था। दीपा के स्तन ब्लाउज में बड़ी कठिनाई से समाये हुए थे। उसने आपनी साड़ी भी अपनी कमर से काफी निचे तक बाँधी थी। ऐसा लगता था की कहीं वह पूरी निचे उतर न जाय और उसे नंगी न करदे। और साड़ी भी उसने ऐसी पहनी की थी की हाथ में पकड़ो तो फिसल जाए। एकदम हलकी पतली और पारदर्शी।

दीपा का ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ था। सिर्फ दो पतली डोर उसके ब्लाउज को पकड़ रखे हुए थे। दीपा की पीठ एकदम खुली थी और ब्रा की पट्टी उसमें दिख रही थी। ब्रा भी तो उसने जाली वाली पहनी थी। ब्लाउज खुलने पर उसके स्तन आधे तो वैसे ही दिखने लगेंगे यह मैं जानता था। दीपा की कमर में उसकी नाभि खूब सुन्दर लग रही थी।

रात दस बजे तरुण अपनी पुरानी अम्बेसडर कार में हमें लेने पहुंचा। जैसे उसने हॉर्न बजाया, दीपा सबसे पहले बाहर आयी। दीपा के घर से बाहर आने के बाद हमारे घर के आँगन में जो हुआ वह मुझे दीपा ने कुछ दिनों बाद सविस्तार बताया था। वह मैं आपसे शेयर कर रहा हूँ।

तरुण तो दीपा को देखते ही रह गया। दीपा की साडी का पल्लू उसके उरोजों को नहीं ढक पा रहा था । उसके रसीले होँठ लिपस्टिक से चमक रहे थे। उसके भरे भरे से गाल जैसे शाम के क्षितिज में चमकते गुलाबी रंग की तरह लालिमा बिखेर रहे थे। सबसे सुन्दर दीपा की आँखे थीँ। आँखों में दीपा ने काजल लगाया था वह एक कटार की तरह कोई भी मर्द के दिल को कई टुकड़ों में काट सकती थीँ। आँखे ऐसी नशीली की देखने वाला लड़खड़ा जाए। उसके बाल उसके कन्धों से टकराकर आगे उन्नत स्तनों पर होकर पीछे की तरफ लहरा रहे थे।

सबसे ज्यादा आकर्षक दीपा की गाँड़ का हिस्सा था जो की साडी के पल्लू में छिपा हुआ था, पर उसकी सुडौल गाँड़ के घुमाव को छिपाने में असमर्थ था। साडी में दीपा के कूल्हे इतने आकर्षक लग रहे थे की क्या बात!!!!

दीपा ने जैसे ही तरुण को देखा तो थोड़ी सहम गयी। उसे दोपहर की तरुण की शरारत याद आयी। तरुण के अलावा किसीने भी ऐसी हिमत नहीं दिखाई थी की दीपा की मर्जी के बगैर इसको छू भी सके। पर तरुण ने सहज में ही न सिर्फ कोने में दीवार से सटा कर उसे रंग लगाया, बल्कि उसने दीपा के ब्लाउज के ऊपर से अंदर हाथ डाल कर उसकी ब्रा के हूको को अपनी ताकत से तोड दिए और स्तनों को रंगों से भर दिए। और भी बहुत कुछ किया।
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10-02-2020, 12:53 PM,
#42
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा को देख कर तरुण तुरंत कार का दरवाजा खोल नीचे उतरा और फुर्ती से दीपा के पास आया। उस समय आँगन में सिर्फ वही दोनों थे। तरुण दीपा के सामने झुक और अपने गालों को आगे कर के बोला, "दीपा भाभी, मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ। आज मैंने बहुत घटिया हरकत की है। आप मुझे मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारिये। मैं उसीके लायक हूँ। दीपा एकदम सहमा गयी और एक कदम पीछे हटी और बोली, "तरुण ये तुम क्या कर रहे हो?"

तरुण ने झुक कर अपने हाथ अपनी टांगों के अंदर से निकाल कर अपने कान पकडे और दीपा से कहा, "दीपा आप जबतक मुझे माफ़ नहीं करेंगे मैं यहां खुले आंगन में मुर्गा बना ही रहूँगा। मुझे प्लीज माफ़ कर दीजिये।"

दीपा यह सुनकर खुलकर हंस पड़ी और बोली, "अरे भाई, माफ़ कर दिया, पर यह मुरगापन से बाहर निकलो और गाडी में बैठो और ड्राइवर की ड्यूटी निभाओ।"

तरुण ने तब सीधे खड़े होकर दीपा को ऊपर से नीचे तक देखा और कहा, "दीपा भाभी, आप तो आज कातिलाना लग रही हैं। पता नहीं किसके ऊपर यह बिजली गिरेगी।"

दीपा हंस पड़ी और बोली, "तरुण कहीं आज तुम ज्यादा ही रोमांटिक नहीं हो रहे हो क्या? ख़ास कर के जब आज टीना भी नहीं हैं।"

तरुण तुरंत लपक कर बोला, "तो क्या हुआ? आप तो है न?"

तरुण की बात सुन कर दीपा कुछ सहम सी गयी। उसने तरुण की बात अनसुनी करते हुए कहा, "देखो तरुण, तुम है मुझे ज्यादा परेशान मत किया करो यार। मैंने तुम्हें माफ़ तो कर दिया पर वाकई में आज तो तुमने सारी हदें पर ही कर दी थीं। मैं अगर हमारे संबंधों का लिहाज ना करती और तुम्हारे भैया से सब कह देती ना तो आज पता नहीं क्या हो जाता। तुम्हारे भैया तुमसे लड़ ही पड़ते और...... ।"

तरुण ने अपने चेहरे पर एकदम दीपा की बात सुन कर डर गया हो ऐसे भाव ला कर फिर तरुण ने एक बार फिर झुक कर दीपा के पाँव पकडे और दीपा के पाँव को साडी के ऊपर से ही दबाने लगा। दीपा तरुण के इस वर्ताव से भड़क गयी और कुछ कदम पीछे हट कर बोली, "तरुण यह क्या कर रहे हो? मैंने कहा ना की तुम्हें माफ़ कर दिया? फिर यह क्या है?"

तरुण ने कहा, "आपने जो गलतियां मैंने की उसे माफ़ किया। पर भाभी आज होली की रात है। आज होली की मस्ती सबके दिमाग पर छायी हुई है। भाई भी आज मस्ती में हैं। आज आप ऐसी सूफ़ियानी बातें क्यों करते हो? साल में एक दिन तो दिल खोल कर मस्ती करो और करने दो ना भाभी? यह उम्मीद क्यों रखते हो की आज की रात और हरकतें नहीं होंगी? मैं अब आप से जो गलतियां आगे चलके कर सकता हूँ या करूंगा उसकी भी अभी माफ़ी मांग रहा हूँ। प्लीज गुस्सा मत करना। प्लीज आज की रात मस्ती मनाइये और मनाने दीजिये। प्लीज?"

दीपा पीछे हट कर बोली, "ठीक है भाई। माफ़ कर दिया,माफ़ कर दिया, माफ़ कर दिया। अब तो तीन बार बोल चुकी हूँ। बस?"
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10-02-2020, 12:53 PM,
#43
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा पीछे हट कर बोली, "ठीक है भाई। माफ़ कर दिया,माफ़ कर दिया, माफ़ कर दिया। अब तो तीन बार बोल चुकी हूँ। बस?"

तरुण अचानक सीरियस हो कर बोला, "भाभी, यह सच है की मैं आपको देखता हूँ तो मेरे सारे गम, मेरे सारे दर्द भाग जाते हैं और मैं रोमांटिक महसूस करने लगता हूँ। भाभी आपको नहीं पता मैं अंदर से कितना दुखी हूँ। इसलिए प्लीज इस होली के त्यौहार में मैं कुछ ज्यादती करूँ तो मुझे माफ़ करना और मुझे फटकारना मत प्लीज? मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूँ। आपको देवी माँ सा समझता हूँ। मैं आपको दुखी नहीं देख सकता। मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ।"

यह सुन कर दीपा बरबस खिलखिला कर हँस पड़ी। उसने तरुण का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा किया और उसके करीब जाकर बोली, "तरुण यार तुम बड़े चालु हो। एक तरफ तुम मुझे देवी माँ का दर्जा देते हो और दूसरी तरफ मुझसे छेड़खानी करते रहते हो? स्त्रियों का दिल कैसे जितना यह तुम बखूबी तरह जानते हो। देखो आज तक मैंने अच्छे अच्छों को अपने करीब नहीं आने दिया। बहोत मर्दों ने मेरे करीब आने की कोशिश की। पर मैंने उन्हें ऐसे फटकार लगाई की वह मेरी तरफ का रास्ता ही भूल गए।

तुम्हें भी मैंने खूब हड़काया, फटकारा और लताड़ा। पर तुम तो बड़े ही ढीट निकले। तुम पर तो कोई भी असर ही नहीं होता। तुम तो बन्दर ही हो । इन्सान को कण्ट्रोल किया जा सकता है, पर बन्दर को कण्ट्रोल करना बहुत मुश्किल है। शायद इसी लिए भगवान ने भी बंदरों को ही सैनिक के रूप में पसंद किया था। पर तुम्हारी एक बात जो मुझे बहुत अच्छी लगी वह यह की तुमने मुझे कभी भी हलकी नजरों से नहीं देखा। मेरे साथ हर तरह की छेड़खानी करते हुए भी तुमने मुझे हमेशा सम्मान भरी नज़रों से देखा। तुमने मुझे हमेशा इज्जत बख्शी। तुमने मेरे पति से छुपाकर कोई हरकत नहीं की। मैं इसी लिए तुम्हारी इज्जत करती हूँ।"

दीपा ने अपनी बात चालु रखते हुए कहा, "तरुण, देखो मैं मर्द नहीं हूँ इसलिए हो सकता है, तुम्हारे दिलोदिमाग के सारे भावों को मैं समझ ना सकूँ। पर तुम्हारे भाई मुझे बार बार मर्दों की कमजोरियां बगैरह के बारे में बताते रहते हैं। वैसे ही देखो मैं भी एक औरत हूँ। मेरी अपनी भी कुछ कमियां और मजबूरियां हैं। तुम्हें भी उन्हें समझना पडेगा। आज तुम और तुम्हारे भाई पर होली का जूनून सवार है। आज छेड़ने के लिए तुम दोनों के बिच में मैं एक अकेली ही औरत हूँ। चलो ठीक है, आज की रात तुम्हारे सारे होने वाले गुनाह माफ़ बस? आज मैं तुम्हें नहीं फटकारूंगी, ना बुरा मानूंगी। अब तो खुश?"

मेरे घर के आंगन में हल्का सा अन्धेरा सा था। राहदारियों की कोई ख़ास आवाजाह नहीं थी। तरुण ने दीपा का हाथ अपने हाथोँ में रखते हुए दीपा के हाथों की हथेली दबाकर कहा, "भाभी, नहीं भाभी, मैं इतने से खुश नहीं हूँ। मुझे कुछ और भी कहना है। मैं आपसे एक गंभीर बात करना चाहता हूँ। आज ज्यादा समय नहीं है। पर फिर भी सुन लो। भाभी, मैं आज आपके सामने एक इकरार करना चाहता हूँ। अभी भैया नहीं है इसलिए मेरी हिम्मत हुई है। मैं उनके सामने बोल नहीं सकता। मैं मानता हूँ की जिसको दिलोजान से चाहते हैं उससे झूठ नहीं बोलते। इसीलिए मैंने तय किया था की मैं आज आपसे सच सच बोलूंगा चाहे आप मुझे इसके लिए बेशक थप्पड़ मारें या नफरत करने लगें।"

तरुण की बात सुनकर दीपा से रहा ना गया। उसने कहा, "तरुण, यूँ घुमा फिरा के मत बोलो। जो कहना है वह साफ़ साफ़ कहो।"

तरुण ने कहा, "बिलकुल भाभी जी। तो सच बात सुनिए। मुझे सब रोमियो के नाम से जानते हैं। बात भी सही है। मैंने अपने जीवन में कई शादीशुदा या कँवारी स्त्रियों को पटाया है और उनके साथ सेक्स किया है। मैंने भी एन्जॉय किया है और उनको भी एन्जॉय कराया है। भाभी गुस्सा होइए, चाहे मुझे डाँट दीजिये; पर यह सही है की आपके साथ भी शुरू शुरू में मेरे मन में सेक्स की ही बात थी। मैं आपके बदन को पाना चाहता था। मैं आपसे सेक्स करना चाहता था। आपके साथ सोना चाहता था।"

तरुण के मुंह से यह शब्द सुनकर दीपा चक्कर खा गयी। उसे यह सुन कर कुछ राहत हुई जब तरुण ने यह कहा की "मैं आपसे सेक्स करना चाहता था।" इसका मतलब तो यह हुआ की अब तरुण सेक्स करना चाहता नहीं है।

दीपा कुछ बोलना चाहती थी पर तरुण ने उसके होँठों पर अपनी उंगली रख दी और कहा, "भाभी, अभी कुछ भी मत बोलिये। मुझे बोलने दीजिये। पहले मेरी बात सुन लीजिये। मेरी और आपकी बात शुरू हुई थी दिल्लगी से। पर भाभीजी अब तो यह बात दिल्लगी नहीं रही। यह तो साली दिल की लगी बन गयी है। भाभी, मैं आपको चाहने लगा हूँ। मुझे गलत मत समझें। मैं आपको भाई से छीनना नहीं चाहता। मैं भाई को भी बहुत चाहता हूँ। पर आपकी सादगी, आपका भोलापन, आपकी मधुरता और आपका दिलसे प्यार मेरे जहन को छू गया है। मैं आपसे दिल्लगी नहीं करना चाहता हूँ। भाभी मैं आपको दिल से प्यार करना चाहता हूँ। मैं आप के साथ सिर्फ सेक्स करना ही नहीं चाहता हूँ, मैं सिर्फ आपके बदनको ही नहीं, आपके दिल को भी पाना चाहता हूँ।"

तरुण की बात सुन कर दीपा भौंचक्की सी रह गयी और तरुण को आश्चर्य भरी नज़रों से देखने लगी।

तरुण ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "भाभीजी, उस दिन सुबह जब मैं मैगी लेकर आया था, तब जब आप तौलिया पहने आधी नंगी बाहर आयी थीं और मैंने जब आपको मेरी बाहों में लिया था तब क्या हुआ था? अगर मैं चाहता तो आपका तौलिया एक ही पल में खिंच डालता और आपको नंगी कर देता। अगर मैं आपको नंगी देख लेता तो फिर मैं क्या मैं अपने आपको रोक पाता? क्या मैं आपको ऐसे ही, कुछ भी किये बगैर छोड़ पाता? भाभी, आप ने ही कहा है ना की साफ़ साफ़ बोलो? तो प्लीज बुरा मत मानिये, पर मैं आपको नंगी देख लेता तो फिर मैं कितनी कोशिश करने पर भी अपने आपको रोक नहीं पाता, और आपसे सेक्स किये बगैर आपको छोड़ता नहीं।

भाभी, मैं जानता हूँ की अगर आप नंगी हो जातीं और मैं अपने कपडे निकाल देता तो फिर मैं कैसे भी करके आपको वश में कर लेता। भाभी, औरतों के नंगे बदन को कहाँ छू कर उनको कैसे उकसाना और सेक्स के लिए कैसे तैयार करना वह मैं अच्छी तरह जानता हूँ। भाभी मैं आपके मन को भी अच्छी तरह जानता हूँ। मुझे कुछ जद्दो जहद जरूर करनी पड़ती पर मैं जानता हूँ की अगर मैं उस समय चाहता तो मैं आपको सेक्स के लिए तैयार कर ही लेता। आप तैयार हो जातीं और मेरी आपसे सेक्स करने की इच्छा पूरी हो ही जाती।

मैं आपका तौलिया खिंच कर आपको नंगी करने वाला ही था। पर उसी समय अचानक मेरे दिमाग में एक धमाका हुआ। मेरे दिमाग ने कहा, 'जिसको प्यार करते हैं उस पर जबरदस्ती नहीं करते'। जब मैंने देखा की आप शायद तब तक पुरे मन से मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार नहीं थे तो मैं आपको जबरदस्ती सेक्स करने के लिए तैयार कर नहीं करना चाहता था। उस दिमागी धमाके से मैं लड़खड़ा गया। मैं आपके धक्के से नहीं लड़खड़ाया। आप का धक्का तो मेरे लिए हवा के भरे गुब्बारे के जैसा था। मैं मेरे दिमाग में जो धमाका हुआ था इसके कारण लड़खड़ाया था।"

दीपा के लिए तरुण की बात वैसे कोई नयी बात नहीं थी। दीपा अपने दिमाग में अच्छी तरह जानती थी की तरुण उसे शुरुआत से ही चोदना चाहता था। इसी लिए वह दीपा के पीछे हाथ धो के पड़ा हुआ था। उसमें मेरा भी हाथ था वह भी दीपा जानती थी। उस दिन तक किसी की दीपा को छेड़ने तक की हिम्मत नहीं हुई थी। पर तरुण ने दीपा को धड़ल्ले से यहां तक कह दिया की वह दीपा को चोदना चाहता था। दीपा बिना कुछ बोले हैरानगी से तरुण को बड़ी बड़ी खुली आँखों से देखती ही रही। पर तरुण अपनी बात को पूरी करना चाहता था।

तरुण ने दीपा का हाथ थामा और बोला, "भाभी जी मैं आप से सेक्स करना चाहता हूँ पर जबरदस्ती नहीं। मैं आपके मन को जित कर सेक्स करना चाहता हूँ। मैं आपको सेक्स करना नहीं, मैं आपको मुझसे सेक्स करवाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप खुद मुझसे सेक्स करवायें। भाभी जी आप ने जब बार बार पूछा की मेरे मन की बात क्या है? तो मैंने आप को बता दिया। क्या आपको मेरी बात का बुरा लगा? मैंने आपसे पहले ही माफ़ी मांग ली है। भाभी साफ़ साफ़ बताइये। इसमें कोई जबरदस्ती नहीं है। आप मुझे दुत्कार देंगे और मेरी शक्ल देखना नहीं चाहेंगे तो मैं आपको कभी नजर भी नहीं आऊंगा। मैं फिर जिऊँ या मरुँ उसकी चिंता आप को करने की जरुरत नहीं है। पर आपसे दूर रहकर भी मैं आपकी दिलो जान से पूजा करूंगा। मैं आपकी बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ और हमेशा करता रहूंगा, चाहे आप मुझे अपनाओ या दुत्कारो। बोलिये भाभी जी प्लीज।"

तरुण ने दीपा को साफ़ साफ़ बता दिया की तरुण दीपा को सिर्फ चोदना ही नहीं चाहता था, वह दीपा को अपनी बना कर चोदना चाहता था। वह दीपा का मन जित कर चोदना चाहता था। मतलब तरुण चाहता था की दीपा उससे प्रेम से चुदवाये।
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10-02-2020, 12:53 PM,
#44
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण की बातें सुन कर दीपा का दिमाग चक्कर खा रहा था। दीपा को समझ नहीं आया की वह तरुण की ऐसी बकवास सुन क्यों रही थी? क्या वह तरुण को एक मिनट में ही "शट अप" नहीं कर सकती थी? दीपा यह सोचने के लिए मजबूर हो गयी की कहीं ऐसा तो नहीं की उसके पति के (मेरे) बार बार कहने से दीपा के मन में ही शायद तरुण से चुदवाने की चाहत जाग उठी थी? कहीं वह खुद ही तो तरुण से चुदवाना नहीं चाह रही थी? तभी तो वह तरुण को इतनी छूट दे रही थी? वरना तरुण की क्या हिम्मत की वह दीपा से इस तरह बात कर सके?

दीपा अपने ही इस प्रश्न का जवाब नहीं दे पायी। तरुण ने अब दीपा को साफ़ साफ़ कह दिया था की वह दीपा को चोदना चाहता था। अब इससे आगे क्या कहने की जरुरत थी? पर दीपाको तरुण को जवाब देना था। दीपा तरुण की बात सुनकर चुप तो नहीं रह सकती थी।

दीपा के पास तीन विकल्प थे। पहला यह की वह तरुण को एक जबरदस्त झटका देकर उसकी बात को एकदम खारिज कर उसकी ग़लतफ़हमी को दूर कर दे। दुसरा यह की वह तरुण की बात का समर्थन करे और उससे चुदवाने के लिए राजी हो जाए। और तीसरा यह की वह उसकी बात का कोई जवाब ना दे, तरुण की गलतफहमी को दूर भी ना करे और उसके सामने घुटने भी ना टेके। मतलब वह तरुण की बात को टाल दे। सब से आसान तरिका तो आखरी वाला ही था। कुछ सोचने के बाद दीपा ने यही बेहतर समझा की फिलहाल तरुण की बात को ज्यादा तूल ना दिया जाए और फिलहाल उसे गोल गोल जवाब दे कर टाल दिया जाए। पर अब लुकाछिपी का भी क्या फायदा जब तरुण ने ही कह दिया था की वह दीपा को चोदना चाहता था?

दीपा ने भी तरुण की हथेली अपने हाथोँ से दबाते हुए कहा, "तरुण, यह क्या दिल्लगी और दिल की लगी की बाल की खाल निकाल रहे हो? ठीक है बाबा तुम क्या चाहते हो यह तुमने कह दिया वह मैंने सूना भी और मैं समझ भी गयी। तुम भी ना सीरियस बातें छोडो यार। आज होली है। तुम ही कह रहे थे ना, की बुरा ना मानो होली है? तुम्हारे भाई मुझे कह रहे थे की आज की रात चलो एन्जॉय करें। तुम्हारे भाई कह रहे थे की वह और तुम आज सेक्स की बातें करना चाहते हो, और वह चाहते हैं की मैं उसमें रोड़ा ना अटकाऊँ। आप मर्दों को तो सेक्स की बातें किये बिना मजा ही नहीं आता। तो ठीक है भाई, चलो, आज की रात तुम दोनों भाई खूब करो सेक्स की बातें। मैं बुरा नहीं मानूंगी। मैं झेल लुंगी। मैं तुम लोगों को नहीं रोकूंगी। खुश? आज की रात कोई सीरियस बात नहीं। ओके?"

जब तरुण ने देखा की दीपा को तरुण की बात सुन कर भी कोई तगड़ा झटका नहीं लगा और उस बात को दीपा ने सुनी अनसुनी कर दी, तो उसका हौसला काफी बढ़ गया।

तरुण ने कहा, "भाभी, आप हमें रोकोगे नहीं ऐसा कहने से काम नहीं चलेगा। आप हमारा साथ भी दोगे ना? भाभी यह मत कहो की आप हमें झेल लोगे? बोलो आप हमारे साथ एन्जॉय भी करोगे ना? प्लीज?"

दीपा ने तरुण से आँखें मिलाकर हिचकिचाते हुए कहा, "भाई यह मुश्किल है। आप दोनों मर्दों का कोई भरोसा नहीं; मौक़ा मिलते ही कहाँ से कहाँ पहुँच जाओ। पर चलो देखेंगे। मैं साथ देने की कोशिश करुँगी। आगे आगे देखिये होता है क्या?" फिर घर की और देख कर दीपा बोली, "तुम्हारे भाई फ़ोन पर लग गए हैं। मैंने उनको उनकी बहन के साथ बात करते हुए सूना। फिर तो उन को काफी कुछ समय लगेगा। चलो कार में बैठ कर बात करते हैं।" ऐसा कह कर अपनी लहराती हुई साड़ी का एक छोर जमीन ना छुए इसलिए अपनी एक बाँह में उठाकर दूसरे हाथ से तरुण का हाथ पकड़ कर कार की और चल पड़ी। दीपा के चेहरे के भाव देख कर तरुण को काफी उम्मीद जगी की भाभी कबुल करे या ना करे पर कहीं ना कहीं तरुण ने दीपा भाभी के मन में सेक्स करने लिए उत्तेजना पैदा कर दी थी। तरुण की चाल काम कर रही थी। मछली जाल में फँसने वाली थी।

तरुण ने कार घर के सामने रास्ते के दुसरी और खड़ी की थी। उस तरफ एक बंजर सा सूना पार्क था। तरुण ने दीपा का दिया हुआ हाथ कस कर थामा और कार के दुसरी और इशारा करते हुए कहा, "भाभी, जब भाई को अभी कुछ समय लगना ही है तो मैं आप से एक और जरुरी बात करना चाहता हूँ। आइये ना उधर चलते हैं। कार के बाहर खुली हवा में कुछ देर बात करते हैं।"

यह कहते हुए की तरुण दीपा को कार की दूसरी और ले गया। शायद वह नहीं चाहता था की मैं जब घर से निकलूं तो एकदम उनको देख पाऊं। दीपा थोड़ी देर के लिए तो असमंजस में रही पर तरुण ने दीपा का हाथ पकड़ उसे हलके से खींचते हुए ले चला तो वह भी चल दी।

कार के दूसरी और जा कर तरुण ने दीपा से कहा, "भाभीजी, मैं बिलकुल सच कहता हूँ की आज आपको इस परिवेश में देख कर पता नहीं मेरे अंदर क्या उथलपुथल हो रही है। भाभी, आप साक्षात कामदेव की पत्नी रति या ऋषि मुनियों का दिल चुराने वाली मेनका लग रही हो। मैं यदि यह कहूं की आप सेक्सी हो तो यह सूरज को दिया दिखाने जैसा होगा। भाभी अंदर से मैं बहुत दुखी हूँ और पता नहीं आप ना मिली होती तो मैं शायद ख़ुदकुशी तक की बात सोचता रहता था। मुझे आपको अपनी दुःख भरी दास्ताँ सुनाकर आज के इस होली के रोमांटिक रूमानी माहौल को खराब नहीं करना।" आखरी शब्द बोलते हुए तरुण कुछ गंभीर हो गया। दीपा को तरुण के चेहरे पर तनाव दिखाई दे रहा था।
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10-02-2020, 12:53 PM,
#45
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा यह सोच कर परेशान हो रही थी की तरुण बार बार यह क्या अपनी दुःख भरी दास्तान के बारे में कह रहा था? जरूर कोई सीरियस बात थी, क्यूंकि तरुण ने यहां तक कह दिया था की वह खदकुशी करने तक की बात सोच रहा था। दीपा का मन किया की वह तरुण को पूछे।

पर तरुण था की अपनी बात पूरी करने पर तुला हुआ था। तरुण ने दीपा की और देख कर कुछ भावावेश में आकर कहा, " मुझे आज के इस होली के रोमांटिक रूमानी माहौल को मेरी परेशानी के चलते हुए खराब नहीं करना था। शायद इसी लिए उपरवाले के आशीर्वाद सामान आप आज की रात मेरे सामने कामिनी, रम्भा और मेनका जैसे इस तरह सेक्सी रूप सजधज कर आयी हो। आपको देख कर मैं अपने वह गहरे दुःख को भूल जाता हूँ। मुझे आप पर इतना प्यार उमड़ रहा है जिसको में बयाँ नहीं कर सकता। भाभी, भाई तो आपको रोज प्यार करते हैं। मुझे पता है आज रात को भी वह आपको ऐसे देख कर अपने आपको रोक नहीं पाएंगे कर मेरे देखते हुए भी आपको प्यार करेंगे, और मैं अपना मन मसोसता रह जाऊंगा। पर इस वक्त जब वह व्यस्त हैं तो बस पांच मिनट आपको प्यार करना चाहता हूँ। प्लीज थोड़ा मुझे भी प्यार करने दो ना? भाई के आने के बाद तो मुझे पता है आप मुझे हाथ भी नहीं लगाने दोगे। यही समझ लो की मैंने आपको थोड़ा और छेड़ दिया।"

तरुण की बात सुनकर दीपा हँस पड़ी और बोली, "यार तरुण तुम भी कमाल हो! तुमने आज दिन में मुझे इतना छेड़ा है, मेरे साथ इतना सब कुछ किया है फिर भी तुम्हारा पैट नहीं भरा? तुम्हारे भाई ने मुझे पहले से ही आगाह कर दिया है की आज की रात तुम लोग मुझे छेड़ोगे और मुझे उसे झेलना पडेगा। तुम्हें मुझे छेड़ने के लिए पूरी रात पड़ी है। यार तुम तो खुद ही अपने आप को बन्दर कहते हो। इतना कुछ करते ही रहते हो और माफ़ी भी मांगते रहते हो? बार बार कहते हो की मैं माफ़ कर दूँ? अगर मैं तुम्हें हाथ नहीं लगाने दूंगी तो तुम रुकोगे क्या? तुमने हर जगह तो हाथ लगा दिया है। अब मुझे और कैसे छेड़ना चाहते हो? कमाल है! अब मुझे छेड़ने के लिए बचा क्या है?"

तरुण ने दीपा के कान के पास अपना मुंह ला कर एकदम धीमे से कहा, "भाभी अभी बहुत कुछ बचा है।"

दीपा ने तरुण की बात सुन कर पलट कर कुछ नकली गुस्सा दिखाते हुए पूछा, "क्या कहा तरुण तुमने?"

तब तरुण ने शरारत भरी मुस्कान देते हुए कहा, "कुछ नहीं भाभी मैं वैसे ही कुछ बड़बड़ा रहा था। भाभी आओ ना? बस पांच मिनट?" यह कह कर तरुण ने दीपा का हाथ पकड़ उसको लगभग खींचते हुए कार के दूसरी तरफ ड्राइवर सीट के दरवाजे के साथ सटा कर खड़ा किया और कहा, "भाभी पहले आप आराम से यहाँ खड़े रहो और मेरी बात सुनो।"

दीपा को तरुण क्या कहना चाहता था और क्या कर रहा था यह समझ नहीं आया। पर वह इतना जानती थी की तरुण कुछ ना कुछ नयी ही खुर्राफत या शरारत जरूर करेगा। वह क्या कहेगा और क्या करेगा वह जानने की जिज्ञासा मेरी कामुक पत्नी रोक नहीं पायी और तरुण ने जैसे खड़ा किया वैसे ही दीपा अपने कूल्हे और पीठ कार के दरवाजे से टिका कर अपने बदन को बैलेंस करने के लिए अपने दोनों पाँव थोड़े से टेढ़े कर और फैला कर कार से थोड़े से दूर रख कर कार के दरवाजे के सहारे खड़ी हो गयी।

जैसे ही दीपा उस कामुक पोज़ में खड़ी हुई की फ़ौरन तरुण ने फुर्ती से दीपा को कोई मौक़ा ना देते हुए अपनी दोनों टाँगों को दीपा के सामने दीपा की साडी को थोड़ा सा घुटनों तक ऊपर उठाकर फैली हुई टाँगों के बिच में घुसा दिया और अपने बदन को दीपा के बदन से एकदम सटा दिया। तरुण ने दीपा के बदन को अपने बदन से कार के दरवाजे पर दबा दिया और अपने पेंडू से दीपा के टाँगों के बिच में जैसे दीपा को खड़े हुए चोद रहा हो ऐसे धक्के मारने लगा। रास्ते पर किसी भी आने जाने वाले को उस अँधेरे में कपडे तो साफ़ दिखेंगे नहीं। शायद दीपा की साडी उसकी टाँगों के थोड़ी सी ऊपर चढ़ी हुई जरूर दिखेगी। उस वक्त तरुण की हरकत देख कर कोई भी आदमी यह सोच सकता था की तरुण जैसे दीपा को खड़े हुए ही चोद रहा हो।

दीपा तरुण की यह हरकत हैरानगी से देखती ही रह गयी। दीपा ने पूछा, "तरुण तुम यह क्या कर रहे हो?"

पर दीपा यह ठीक से बोल पाए उसके पहले तरुण ने दीपा के बदन से अपना बदन कस कर दीपा को कार के दरवाजे पर दबा दिया। तरुण ने दीपा के सर को अपने दोनों हाँथों में पकड़ कर दीपा के होँठों पर अपने होँठ दबा दिए और अपनी जीभ से दीपा के होँठ चूमने और चूसने लगा।

फिर तरुण धीरे से बोला, "भाभीजी, पता नहीं मैं आज होली की इस रात को आप के साथ जो करना चाहता हूँ वह आप मुझे करने देंगे की नहीं। पर कम से कम उस का दिखावा तो करने दो ना, प्लीज?"

यह कह कर तरुण ने अपने दोनों हाथ फैला कर दीपा के कूल्हों को जकड़ा और उन्हें अपनी और दबा कर खींचते हुए दीपा की कोख से अपना पेंडू भिड़ा कर ऐसे करने लगा जैसे वह अपना लण्ड दीपा की चूत में घुसेड़ने की कोशिश कर रहा हो।

दीपा तरुण के ऐसा करने से हड़बड़ाती हुई बोली, "तरुण, तुम्हें कुछ समझ है या नहीं? यार कुछ करने के लिए तुम सही जगह या समय तो देखो। यह कोई जगह है ऐसा कुछ करने की? ऐसे खुले में यह तुम क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा यार?"
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10-02-2020, 12:54 PM,
#46
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण को तब पूरा यकीन हो गया की दीपा भाभी उससे चुदवाने के लिए अब लगभग मानसिक रूप से अपने आप को तैयार कर रही थी। इसी लिए तो उसने तरुण को डाँटा नहीं और ना ही कोई जबरदस्त गुस्सा किया। बल्कि वह तरुण को यह समझाने लगी की ऐसा करने के लिए वह जगह ठीक नहीं थी। मतलब अगर कोई सही जगह होती तो तरुण जो कर रहा था वह ठीक था।

पर तरुण कहा रुकने वाला था? उसने कहा, "भाभी, तुम्हारी बात सही है। ऐसा करने के लिए यह जगह ठीक नहीं है। भाभी मैं ऐसा काम करने के लिए आपको सही जगह पर जरूर ले जाऊंगा। पर अभी ऊपर ऊपर से तो कर लेने दो ना?

दीपा हैरानगी से तरुण के इस उद्दंड कार्यकलाप देखती रही। तरुण ने अपने होँठ से दीपा को उसके होँठ खोलने को मजबूर किया और फिर दीपा के कभी ऊपर के तो कभी निचे के होँठ चूसने लगा। तरुण के इस अचानक आक्रमण या हरकत से दीपा स्तंभित सी रह गयी। उसने आँखें घुमा कर जब घर की और देखने की कोशिश की। यह कोशिश क्या दीपा ने इस उम्मीद में की थी की काश मैं वहाँ जल्द ही पहुंचूं और दीपा को उस त्रास से बचाऊं, या फिर इस डर से की कहीं मैं घर से बाहर निकल कर उन दोनों की उस हरकत को देख ना लूँ? यह दीपा भी समझ नहीं पायी।

पर तरुण ने एक पल के लिए अपने होँठ हटा कर दीपा से कहा, "भाभी, चिंता मत करो। मैं देख रहा हूँ। भाई अभी भी फ़ोन पर ही लगे हुए हैं। अभी उनको निकलने में पंद्रह मिनट से भी ज्यादा लगेंगे। भाभी अभी जब तक भाई आ नहीं जाते तब तक आप मुझे मत रोकिये। प्लीज मुझे आपसे प्यार करने दीजिये। देखिये प्लीज रिलैक्स हो जाइये। कुछ ही मिनटों के लिए। बादमें पता नहीं मुझे आपको प्यार करने का मौका मिलेगा या नहीं?"

ऐसा कह कर तरुण ने फिर अपने होँठ दीपा के होंठों पर कस कर भींच दिए और पुरे जोश से उसे चूमने और चूसने लगा और साथ ही साथ दीपा को चोदने का छद्म प्रयास भी करता रहा। वह अपने लण्ड को कपड़ों के माध्यम से दीपा की चूत में घुसा कर दीपा को चोदने का प्रयास जैसे कर रहा था। दीपा और तो कुछ कर नहीं सकती थी, जब सर ओखल में रख ही दिया है तो मुसल से क्या डरना? पांच दस मिनट का तो सवाल था।

दीपा यह जानती थी की अगर तरुण अपनी जात पर उतर आये तो जबरदस्ती दीपा की साडी पूरी ऊपर उठा कर, उसकी पैंटी नीची कर और अपनी ज़िप खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाल कर दीपा की गीली हुई चूत में अपना लण्ड घुसा कर दीपा को खड़े खड़े चोद भी सकता था। दीपा उसका कुछ भी नहीं कर पाती। दीपा को वहीँ खड़े खड़े उससे कुछ मिनटों के लिए ही सही, पर तरुण से चुदवाना ही पड़ता। दीपा उस वक्त बाहर रास्ते में खड़ी चिल्ला भी तो नहीं सकती थी। पर तरुण ने ऐसा कुछ नहीं किया यह दीपा के लिए एक राहत की बात थी। तरुण का चूमना कोई नयी बात तो थी नहीं तो दीपा ने भी मजबूरी में अपना मुंह खोल कर तरुण को चूमने देना ही ठीक समझा। दीपा को यह भी महसूस हुआ की तरुण की बीबी टीना के पिछले काफी दिन से तरुण के साथ न होने के कारण तरुण का हाल बुरा था। वह सेक्स के लिए तड़प रहा था।

दीपा को तरुण के हाल पर तरस आ गया। अगर वह कुछ मिनटों के लिए दीपा के बदन को कस कर दबा कर और अगर कपड़ों के ऊपर से धक्के मार कर अपनी सेक्स की भूख कुछ हद तक शांत कर सकता है तो दीपा ने सोचा की तरुण को रोकना ठीक नहीं। साथ साथ में जिस तरह तरुण दीपा को चुम रहा था और दीपा के होँठों को चाट रहा था और बार बार दीपा की जीभ को चूस रहा था, दीपा से रहा नहीं गया और बरबस ही उसने भी अपनी जीभ तरुण के मुंह में डाली और आवेश में दीपा भी तरुण का सर पकड़ कर उसे चूमने लगी।

मेरी बीबी की इस तरह की सकारात्मक प्रतिक्रया देख कर तरुण की आग और भड़क उठी। तरुण ने दीपा से थोड़ा हट कर पूछा, "भाभी क्या आप को याद है आपने कभी मुझे एक वचन दिया था?"

तरुण की बात सुन कर दीपा की जान हथेली में आ गयी। दीपा ने कुछ झिझकते हुए कहा, "हाँ याद है। उस सुबह बाथरूम में जब तुम मुझे बहोत परेशान कर रहे थे तब मैंने मजबूरी में तुम्हें वचन दिया था।"

तरुण ने कहा, "भाभी यह गलत बात है। उस टाइम पर तो आपने वचन दे दिया और अब आप कह रहे हो की वह आपने मज़बूरी में दिया था। आपने वचन तो दिया था ना, की मैं जो चाहूँगा या कहूंगा वह आप करोगे?"

दीपा ने घबड़ाते हुए पूछा, "हाँ कहा था। तो तुम्हें क्या चाहिए? तुम क्या करना चाहते हो?"

तरुण ने कहा, "पर भाभी, पहले यह बताओ की क्या आप अपना दिया हुआ वचन पूरा तो करोगे ना?"

दीपा ने कुछ संरक्षात्मक आवाज से पूछा, "मैं कभी अपने वचन से मुकरती नहीं हूँ। पर पहले यह तो बाताओ ना की तुम्हें क्या चाहिए?"

तरुण ने पट से जवाब देते हुए कहा, "भाभी, क्या आप समझ नहीं गए की मुझे क्या चाहिए? भाभी आज की रात हमारी रात है। आज की रात मैं आपको पूरी तरह से पाना चाहता हूँ। आज की रात मैं आपका तन और मन अपना बनाना चाहता हूँ। आज की रात आप मुझे मेरे मन की आस पूरी करने दीजियेगा, मुझे रोकियेगा नहीं। मैं चाहता हूँ की आज की रात आप प्लीज अपनी मर्जी से ख़ुशी से भाई के साथ साथ मुझ से भी चुदवाइये। भाभी आज अपना वचन पूरा कीजिये की आप मुझे कुछ भी करने से रोकोगे नहीं। बोलिये आप अपना वचन पूरा करोगे या नहीं? या यह कह कर मुकर जाओगे की वह वचन मज़बूरी में दिया था।"
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10-02-2020, 12:54 PM,
#47
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
दीपा ने कुछ संरक्षात्मक आवाज से पूछा, "मैं कभी अपने वचन से मुकरती नहीं हूँ। पर पहले यह तो बाताओ ना की तुम्हें क्या चाहिए?"

तरुण ने पट से जवाब देते हुए कहा, "भाभी, क्या आप समझ नहीं गए की मुझे क्या चाहिए? भाभी आज की रात हमारी रात है। आज की रात मैं आपको पूरी तरह से पाना चाहता हूँ। आज की रात मैं आपका तन और मन अपना बनाना चाहता हूँ। आज की रात आप मुझे मेरे मन की आस पूरी करने दीजियेगा, मुझे रोकियेगा नहीं। मैं चाहता हूँ की आज की रात आप प्लीज अपनी मर्जी से ख़ुशी से भाई के साथ साथ मुझ से भी चुदवाइये। भाभी आज अपना वचन पूरा कीजिये की आप मुझे कुछ भी करने से रोकोगे नहीं। बोलिये आप अपना वचन पूरा करोगे या नहीं? या यह कह कर मुकर जाओगे की वह वचन मज़बूरी में दिया था।"

तरुण को पता था की दीपा की यह कमजोरी थी की वह बार बार कहती थी की वह कभी अपने दिए हुए वचन से मुकरती नहीं थी। दीपा ने तरुण की और असहाय नजरों से देखते हुए पूछा, "तरुण, मैंने यह तो नहीं कहा की मैं दिए हुए वचन से मुकर जाउंगी? मैं जानती हूँ तुम मुझसे क्या चाहते हो। पर यह मेरे लिए बहोत ही मुश्किल है। बात सिर्फ मेरी होती तो शायद मैं मान भी जाती। पर देखो यहां बात सिर्फ मेरी नहीं है। मैं शादीशुदा हूँ। मेरे साथ मेरे पति भी हैं। उनके पीछे मैं उनको धोखा नहीं दे सकती। मैं अगर वचन निभाऊंगी तो उनका क्या?"

तरुण समझ गया की अब दीपा उसके चंगुल में फँस चुकी है। उसने कहा, "भाभी आप की बात सौ फीसदी सही है। मैं भी नहीं चाहता की आप भाई को धोखा दो। पर अगर भाई को भी कोई आपत्ति ना हो तो? अगर भाई खुद ही आपको इजाजत दें तो? फिर तो आप मान जाएंगे ना? आप ने ही तो अभी अभी कहा, की बात अगर आप पर आये तो आप मान जाओगे। बोलो भाभी, जवाब दो ना? भाभी आज की रात हम सब भाई के भी साथ मिल कर एम. एम. एफ़. थ्रीसम का आनंद लेते हैं।"

दीपा ने तरुण की और देख कर पूछा, "तरुण, यह क्या नया तुक्का तुमने निकाला है, यह थ्रीसम और एम.एम.ऍफ़ का? यह क्या है भाई?"

तरुण ने कहा, "भाभी मैं प्रॉमिस करता हूँ की यह सब मैं आपको और भाई को थोड़ी देर में ही कार में जरूर बताऊंगा। अभी तो आप बस मुझे थोड़ा आपको छेड़ने दीजिये। प्लीज?"

अब दीपा के पास तरुण की बात का कोई जवाब नहीं था। दीपा समझ गयी की वह फँस चुकी थी। वह चुपचाप खड़ी तरुण की और मायूस सी देखती रही। दीपा की शक्ल और हालात देख कर ऐसा लगता था जैसे एक बकरी अपनी कतल होने वाली ही है यह जानते हुए अपने कातिल के सामने लाचार खड़ी हो।

तरुण ने कहा, "भाभीजी, बोलिये आप चुप क्यों हैं? क्या आप अपना वचन निभाएंगीं, या मुकर जायेंगीं?"

दीपा एकदम सिमटी हुई दयनीय भाव से तरुण की और देख कर बोली, "तरुण तुमने यह ठीक नहीं किया। तुमने मुझे फाँस दिया। मैं क्या करूँ? यह बात तो सही है की मैंने वचन तो मज़बूरी में ही दिया था। पर मैं मुकर तो सकती नहीं, वचन दिया है तो निभाना तो पडेगा ही। अगर तुम्हारे भाई को कोई प्रॉब्लम नहीं हो तो फिर मैं तो फँस ही गयी ना?"

तरुण ने कहा, "भाभी, मैं आपको और कटघरे में खड़ा कर परेशान नहीं करूंगा। भाई को कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं जो भी करता हूँ भाई को पूछ कर करता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप अभी बस थोड़ी देर के लिए चुपचाप खड़े रहिये प्लीज? भाभी, आप घबड़ाइये नहीं। देखिये, आप भी जानती हैं की अगर मैं चाहता तो आप को सिर्फ यहां ही नहीं, कई जगह चोद सकता था। आप कुछ नहीं कर पाते। पर मैं आपको आपकी मर्जी के बगैर चोदना नहीं चाहता था और ना कभी आप की मर्जी के बगैर चोदुँगा। अभी तो मैं बस आपके साथ सिर्फ थोड़ी छेड़खानी, थोड़ी शरारत करना चाहता हूँ। आपने ही आज रात मुझे शरारत करने के लिए इजाजत दे दी है तो कुछ देर मुझे भी तो आपके बदन से मेरा बदन रगड़ लेने दीजिये ना? भाई के आने के बाद तो आप बस उनका ही ध्यान रखेंगी ना? फिर तो आप दोनों ही एक दूसरे के साथ चालू हो जाओगे। आप फिर मुझे कहाँ पूछेंगी?"

अपने ही वचन में पूरी तरह फँसी हुई दीपा बेचारी चुपचाप खड़ी रही और इंतजार कर रही थी की अब आगे तरुण क्या गुल खिलाता है? तरुण ने दीपा को कस कर पकड़ा और उसे चूमने लग गया। दीपा को समझ नहीं आया की वह क्या करे? तरुण ने उसे बड़ी ही चालाकी से अपने चंगुल में फाँस लिया था। वह ना तो हिल सकती थी ना तो चिल्ला सकती थी क्यूंकि चिल्लाने से उसकी चीख सुन कर कोई घर से बाहर निकल कर उनकी यह हरकत देख सकता था। और बदनामी होगी तो सबकी होगी।

दीपा में उतनी ताकत थी नहीं की तरुण को वह धक्का मार कर हटा सके। दूसरे तरुण ने दीपा को स्पष्ट रूप से कह दिया था की वह दीपा को चोदेगा और दीपा ने भी "वचन तो निभाना ही पडेगा" यह कह कर तरुण को साफ़ साफ़ इशारा कर दिया था की वह तरुण से चुदवायेगी। तो अब तरुण जो करेगा उसे झेलना ही पडेगा यह सोच कर लाचारी में दीपा वहीँ खड़ी रही और आगे तरुण क्या करेगा उसका डर के मारे इंतजार करने लगी। दीपा ने यह भी महसूस किया की तरुण का लण्ड उस की पतलून में एकदम खड़ा हो गया था और तरुण उस खड़े लण्ड से दीपा की टाँगों के बिच में जैसे दीपा की चूत को चोद रहा हो ऐसे धक्के मार रहा था।

दीपा यह सोच कर परेशान हो रही थी की तरुण का लण्ड उसकी पतलून और उसके अंडरवियर में बंद था। दीपा ने भी साडी, पेटीकोट और पैंटी पहनी थी। फिर भी दीपा को ऐसे महसूस हो रहा था जैसे तरुण और दीपा ने कोई भी कपडे नहीं पहने हों और तरुण दीपा की चूत में उसका लण्ड डाल रहा हो। क्या तरुण का लण्ड इतना लंबा और फौलादी सा था की इतने सारे कपड़ों के बिच में होते हुए भी दीपा को ऐसे महसूस हो रहा था जैसे की तरुण का लण्ड उसकी की चूत में घुस रहा था?
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10-02-2020, 12:54 PM,
#48
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण के चुम्बन करने से और चुदाई वाली एक्टिंग से दीपा की उत्तेजना भी बढ़ गयी थी। दीपा की चूत गीली हो रही थी। दीपा तरुण के बदन के दबाव के कारण हिल भी नहीं पा रही थी। उनकी बातों से यह तय हो ही चुका था की मौक़ा मिलने पर तरुण दीपा को उसी रात चोदना चाहता था और दीपा उसे रोक नहीं पाएगी। दीपा को तरुण से चुदवाना ही पडेगा।

दीपा ने सोचा की उसने जब तरुण को यह इशारा कर ही दिया था की वह तरुण से चुदवायेगी, तब फिर अगर तरुण उसे कपडे पहने हुए ऊपर से चोदने की एक्टिंग कर रहा था तो अगर ऐसा करने से उसकी सेक्स की भूख कुछ कम होती है तो फिर उसे रोकने से क्या फ़ायदा?

तरुण ने कुछ पल के लिए अपने होँठ दीपा के होँठों से अलग किये और बोला, "भाभीजी, मुझे माफ़ कर देना पर आज आप इतनी कातिलाना लग रही को मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ। मैं कभी से आपके होंठों के रस को चूसने के लिए तड़प रहा था। भाई के आने के बाद मुझे यह मौक़ा कहाँ मिलेगा? फिर तो आप दोनों ही आपस में चिपक जाओगे, मैं तो सिर्फ देखता ही रह जाऊंगा? बस दो मिनट के लिए तो मुझे चूमने दीजिये और कुछ देर अपनी मन मानी करने दीजिये ना प्लीज?"

दीपा और कर भी क्या सकती थी? दीपा ने अपने होँठ खोल दिए और तरुण को उसके होँठ चूसने और चूमने का मौक़ा दे दिया। दीपा असहाय हो कर वहाँ खड़ी तरुण को चूमने लगी और तरुण से कपडे पहने हुए ही कपड़ों के उपर से ही जैसे तरुण उसे चोद रहा हो ऐसे धक्के खाती रही और धक्कों से हिलती भी रही। तरुण भी मौके का फायदा उठा कर दीपा को कपड़ों के ऊपर से ही चोदने में लगा था। दीपा ने तरुण को रोकना चाहा पर जैसे वह तरुण के साथ चूमने में शामिल हुई वैसे धीरे धीरे उसका अवरोध कम होने लगा। फिर दीपा भी यह सोच कर तरुण के बदन से चिपक कर लिपट गयी और तरुण की कमर पर अपने दोनों हाथ लपेट कर तरुण के पेंडू से मारते हुए धक्कों को बिना अवरोध किये हुए जैसे दीपा खुद चुदवा रही हो ऐसे दिखावा करने लगी की अगर चंद मिनटों के लिए तरुण को ऐसे करने से ही सकून मिलता है तो उसे एन्जॉय कर लेने दो।

दीपा ने तरुण के कानों में कहा, "तरुण देखो तुम कहते हो तो सिर्फ पांच मिनट के लिए ठीक है, चलो जो करना है कर लो। मैं तुम्हारा साथ दे देती हूँ। पर देखो प्लीज, कपड़ों को मत खोलना। कपड़े उतरने के बाद में उनको खुले में पहनना बहुत मुश्किल है। प्लीज तुम्हारे भाई आ जायें उससे पहले यह सब ड्रामा बंद करोगे। ओके?" और चुपचाप उसे चूमने लगी।

तरुण कहाँ रुकने वाला था? जब उसे लगा की अभी मुझे निकलने में थोड़ी देर लग सकती है तो तरुण ने दीपा की छाती पर हाथ फिरा कर दीपा के मस्त स्तनोँ को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा। ऐसा करने के लिए उसे दीपा से थोड़ा अलग होना पड़ा। दीपा का ब्लाउज भी तो ऐसा था की दीपा के भरे हुए अनार जैसे स्तनों को उस छोटी सी पट्टी में बांधे रखना नामुमकिन था। तरुण के अंदर हाथ डाल कर ब्लाउज को ऊपर सरका ने से दीपा की गुम्बज तरुण के हाथों में आ गए। तरुण ने उन्हें बेरहमी से मसलना शुरू किया। दीपा की चूत ना सिर्फ गीली हुई थी। तरुण के लण्ड के बार बार दीपा की चूत को कपड़ों के ऊपर से ही ठोकने के कारण वह मचल रही थी।
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10-02-2020, 12:54 PM,
#49
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तरुण कहाँ रुकने वाला था? जब उसे लगा की अभी मुझे निकलने में थोड़ी देर लग सकती है तो तरुण ने दीपा की छाती पर हाथ फिरा कर दीपा के मस्त स्तनोँ को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा। ऐसा करने के लिए उसे दीपा से थोड़ा अलग होना पड़ा। दीपा का ब्लाउज भी तो ऐसा था की दीपा के भरे हुए अनार जैसे स्तनों को उस छोटी सी पट्टी में बांधे रखना नामुमकिन था। तरुण के अंदर हाथ डाल कर ब्लाउज को ऊपर सरका ने से दीपा की गुम्बज तरुण के हाथों में आ गए। तरुण ने उन्हें बेरहमी से मसलना शुरू किया। दीपा की चूत ना सिर्फ गीली हुई थी। तरुण के लण्ड के बार बार दीपा की चूत को कपड़ों के ऊपर से ही ठोकने के कारण वह मचल रही थी।

दीपा इतनी गरम हो रही थी की उसके मुंह से बरबस एकदम धीमी आवाज में कामुकता भरी कराहटें "आह........ ओह........ उफ़....... हाय.... अरे तरुण, क्या कर रहे हो? रुक जाओ ना, प्लीज? कोई देख लेगा" निकल ने लगीं। तरुण की हरकतों से वह इतनी गर्म हो चुकी थी की दीपा को डर लगा की अगर जल्दी ही तरुण रुका नहीं तो दीपा कहीं खुद ही अपना घाघरा ऊपर कर तरुण से चुदवाने के लिए कहने को मजबूर ना हो जाए।

ऐसे ही कुछ देर तक तरुण दीपा के बूब्स को कभी ब्लाउज के ऊपर से तो कभी ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर मसलता रहा और दीपा की निप्पलोँ को उँगलियों में पिचकता रहा। साथ साथ में दीपा को कपड़ों के ऊपर से चोदता रहा। दीपा अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। दीपा भी काम वासना की ज्वाला में जल रही थी। दीपा भी खुद तरुण की कमर पकड़ कर जैसे उससे चुदवा रही हो ऐसे कर रही थी और उसके कारण उसका मन भी शायद तरुण का लण्ड लेने के लिए व्याकुल हो रहा था। एक तरफ वह तरुण को रोकना चाहती थी तो दूसरी और उसके मुंह से बरबस ही दबी हुई आवाज में कामुकता से उत्तेजित आहटें निकल रहीं थीं जो तरुण को और भी उत्तेजित कर रहीं थीं।

कुछ ही देर में जब दीपा ने देखा की उसे तरुण को रोकना ही होगा, वरना गजब हो जाएगा तब मौक़ा देख कर दीपा तरुण से अलग खड़ी हो गयी और तरुण को लाल आँखें दिखा कर बोली, "यह क्या है तरुण? तुम्हें तो ज़रा भी ढील नहीं देनी चाहिए। तुम तो उंगली देती हूँ तो बाँह ही पकड़ लेते हो। कुछ हँसी मजाक छेड़खानी ठीक है, पर तुम तो दानापानी लेकर चालु ही हो जाते हो? अभी तो रात शुरू भी नहीं हुई की तुम तो चालु हो गए?"

तरुण ने कहा, "ठीक है भाभी माफ़ कर देना। अगर आप कहते हो तो ठीक है। शुरुआत के लिए अभी इतना ही काफी है। ओके? भाभी क्या करूँ? आपको देख कर मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा। सॉरी भाभी।"

फिर तरुण ने दीपा के गालों पर हलके से उंगलिया फेरते हुए कहा, "भाभी आप नाराज तो नहीं हो ना? देखो भाभी आज की रात मेरी हरकतों का बुरा मत मानना। प्लीज?"

दीपा ने तरुण का हाथ अपने गालों से हटाते हुए कुछ मज़बूरी में मुस्काते हुए कहा, "चलो ठीक है। तुम्हारे भाई आने वाले हैं। अब चुपचाप चलो और कोई शरारत मत करना। ओके?"

तरुण ने कहा, "भाभी इतने से ही तंग आ गए? यह तो शुरुआत है। शरारत तो अभी बाकी है। आज की रात तो मजे करने के लिए ही है ना?"

दीपा ने चेहरे पर खिसिआनि मुस्कान लाते हुए कहा, "पता नहीं, बाबा और कितनी शरारत करोगे तुम? ठीक है बाबा, रात तो अभी बाकी है ना और शरारत करने के लिए? अभी तो चलो यार।"

तरुण ने बड़े ही नाटकीय ढंग से दीपा के पाँव छुए जैसे वह दीपा को प्रणाम कर रहा हो। दीपा यह देख कर भागी और कुछ बोले बिना तरुण की कार मैं जा बैठी। मैं मेरे पिता और माताजी को प्रणाम कर और मुन्ना को प्यार करके बाहर आया और आगे की सीट में कार की खिड़की की तरफ दीपा के पास बैठ गया। तरुण अपनी पुरानी एम्बेसडर में आया था। उस कार में आगे लम्बी सीट थी जिसमें तिन लोग बैठ सकते थे। तरुण कार के बाहर खड़ा मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं गाडी मैं बैठा, तरुण भी भागता हुआ आया और ड्राइवर सीट पर बैठ गया। दीपा की एक तरफ मैं बैठा था और दूसरी तरफ तरुण ड्राइवर सीट में बैठा था और दीपा बिच में।

मैंने दीपा को देखा की मेरी पत्नी हररोज की तरह चुलबुली नहीं लग रही थी। वह सहमी हुई थी और उसके गाल लाल नजर आ रहे थे। शायद उसके कपडे भी थोड़े इधर उधर हुए मुझे लगे। मुझे शक हुआ की कहीं मेरी गैर हाजरी में तरुण ने दीपा से कोई और शरारत भरी हरकत तो नहीं की? उस समय मुझे तरुण और दीपा के बिच घर के बाहर रास्ते पर पार्क के पास कार के सहारे हुए कार्यकलाप के बारे में कुछ भी पता नहीं था। वह सारी बात मेरी बीबी ने मुझे काफी समय के बाद बतायी थी। खैर, जैसे ही तरुण ने कार स्टार्ट की, उसके फ़ोन की घंटी बजी। तरुण ने गाडी रोड के साइड में रोकी और थोड़े समय बात करता रहा। जब बात ख़त्म हुई तो दीपा ने पूछा, "किस से बात कर रहे थे तरुण?"

तरुण ने दीपा की तरफ देखा और थोड़ा सहम कर बोला, "यह रमेश का फ़ोन था। बात थोड़ी ऐसी है की आपको शायद पसंद ना आये। थोड़ी सेक्सुअल सम्बन्ध वाली बात है।"
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10-02-2020, 12:54 PM,
#50
RE: Desi Porn Stories बीबी की चाहत
तब मैंने दीपा के ऊपर से तरुण के कंधे पर हाथ रखा और बोला, "देखो तरुण, हम सब वयस्क हैं. दीपा कोई छोटी बच्ची नहीं। वह एक बच्चे की माँ है। आज होली का दिन है, थोड़ी बहुत सेक्सुअल बातें तो वह भी सुन सकती है। जब दीपा ने पूछ ही लिया है तो बता दो। ठीक है ना दीपा?" मैंने दीपा के सर पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा।

दीपा ने तरुण की तरफ देखा और सर हिलाते हुए हाँ का इशारा किया।

तरुण ने कहा, "रमेश मेरा पुराना दोस्त है। उसकी पोस्टिंग जब जोधपुर में हुई थी तब उसका एक पुराना कॉलेज समय का मित्र भी वहाँ ही रहता था। वह मित्रकी पत्नी भी कॉलेज के समय में रमेश की दोस्त थी। उस समय रमेश और उसकी होनी वाली पत्नी के बिच में प्रेम संदेशों का आदान प्रदान भी रमेश करता था। यूँ कहिये की उनकी शादी ही रमेश के कारण हो पायी थी। रमेश के दोस्त की पत्नी को रमेश के प्रति थोड़ा आकर्षण तो था पर आखिर में उसने रमेश के मित्र के साथ ही शादी करनेका फैसला लिया।"

मैंने देखा की तरुण अपनी कार को मुख्य मार्ग से हटाकर शहर के बाहरी वाले रास्ते से ले जा रहा था। रास्ते में पूरा अँधेरा था। वह कार को एकदम धीरे धीरे और घुमा फिरा कर चला रह था। मैंने तरुण से पूछा क्या बात है। तरुण ने कहा उसने रात का खाना नहीं खाया था, और वह कहीं न कहीं खाने के लिए कोई ढ़ाबे पर रुकना चाहता था।

यह तो मैं बता ही चूका हूँ की मेरी सुन्दर पत्नी दीपा तरुण और मेरे बिच में सटके बैठी हुयी थी। तरुण की कहानी सुनने के लिए मैं काफी उत्सुक हो गया था। एक तो पुरानी गाडी की धड़ धड़ आवाज और ऊपर से तरुण की धीमी और नरम आवाज को सुननेमें मुझे थोड़ी कठिनाई हो रही थी। मैंने इस कारण दीपा को तरुण की तरफ थोड़ा धक्का दे कर खिसकाया। मेरी बीबी बेचारी मेरे और तरुण के बिच में पिचकी हुयी थी। तरुण ने अपना गला साफ़ किया और आगे कहने लगा।

"शादी के करीब पांच साल के बाद रमेश का मित्र बिज़नस बगैरह के झंझट में व्यस्त था और पत्नी घरबार और बच्चों में। उनके दो बच्चे थे। रमेश का मित्र और उसकी पत्नी में कुछ मनमुटाव सा आ गया था। रमेश का मित्र अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाता था। उसकी पत्नी सेक्स के लिए व्याकुल होती थी तो रमेश का मित्र थका हुआ लेट जाता था। जब रमेश का मित्र गरम होता था तब उसकी पत्नी थकी होने बहाना करके लेट जाती थी। सेक्स में अब उनको वह आनंद नहीं मिल रहा था जो शादी के पहले चार पांच सालों तक था।" तरुण ने बड़ी ही संतुलित भाषा में रमेश के दोस्त और दोस्त की बीबी के बिच में सेक्स को लेकर जो तनाव था उसका बखूबी वर्णन किया।

अब तरुण की कहानी सेक्स के गलियारों में प्रवेश कर चुकी थी। मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया और दीपा का एक हाथ मेरे हाथ में लेकर उसे दबाने लगा। तब मैंने थोड़ा सा ध्यान से देखा की तरुण भी गाडी चलाते चलाते और गियर बदलते अपनी कोहनी दीपा के स्तनों पर टकरा रहा था। थोड़ी देर तक तो ऐसा चलता रहा। दीपा ने शायद इस बात पर ध्यान नहीं दिया, पर फिर एक बार उसने अपनी कोहनी को दीपा के स्तन के उपर दबा ही दिया। अंदर काफी अँधेरा था और मुझे साफ़ दिखने में भी कठिनाई होती थी। मैंने दीपा के मुंह से एक टीस सी सुनी। साथ में ही दीपा ने भी मेरी हथेली जोर से दबायी। उसने अपने स्तन पर तरुण की कोहनी के दबाव को जरूर महसूस किया था। पर वह कुछ बोली नहीं।

तरुण ने अपनी कहानी को चालु रखते हुए कहा, "जब रमेश उनसे मिला तो भांप गया की उन पति पत्नी के बिच में कुछ ठीक नहीं है। रमेश और उसका दोस्त काफी करीबी थे और सारे विषय पर खुली चर्चा करते थे, जिसमें सेक्स भी शामिल था। जब रमेश ने ज्यादा गहराई से पूछताछ की तो दोनों ही उससे शिकायत करने लगे। अपनी फीकी शादीशुदा जिंदगी के लिए एक दूसरे पर दोष का टोकरा डालना चाहा। रमेश ने तब दोनों को एकसाथ बिठाया और बताया की उनके वैवाहिक जीवन का वह दौर आया है जहां जातीय नवीनता ख़त्म हो गयी है और नीरसता आ गयी है। उसने उनको कहा की उनको चाहिए की सेक्सुअल लाइफ में कुछ नवीनीकरण लाये।"

तरुण ने तब कार को एक जगह रोका जहाँ थोडा सा प्रकाश था। उसने अपनी कहानी का क्या असर हो रहा है यह देखने के लिए हमारी और देखा। उसने देखा की मैंने दीपा का हाथ अपनी गोद में ले रखा था। तरुण की कहानी मुझे गरम कर रही थी। दीपा मेरे और तरुण के बीचमें दबी हुई बैठी थी। वह कुछ बोल नहीं रही थी। तरुण मुस्कराया और उसने कार को आगे बढ़ाते हुए कहानी चालु रखी।

"जब उन पति पत्नी ने रमेश से पूछा की वह सेक्सुअल लाइफ में नवीनीकरण कैसे लाएं, तब रमेश ने कहा की कई अलग अलग तरीके होते हैं। पहले तो पति पत्नी अलग अलग पोजीशन में सेक्स कर काफी कुछ विविधता (वेरिएशन) लाते हैं। उसके बाद कुछ समय के बाद वह भी सामान्य हो जाता है और वह बोर हो जाते हैं तो "रोल प्ले" करते हैं, मतलब सेक्स करते समय पति पत्नी को किसी खूबसूरत जानी पहचानी औरत के नाम से बुलाता है और पत्नी पति को उसके पसंदीदा हीरो या किसी गैर मर्द के नाम से बुलाती है और फिर दोनों यह सोच कर सेक्स करते हैं की वह दूसरे आदमी या औरत से सेक्स कर रहे हैं।

कुछ दिनों बाद जब यह अनुभव भी पुराना हो जाता है तब सबसे कारगर पर थोड़ा हिम्मत वाला या कुछ हद तक खतरनाक तरिका है पति पत्नी सामूहिक सेक्स, थ्रीसम, पत्नी की अदलाबदली बगैरह। पति और पत्नी अपने जान पहचान वालों में से ही कोई ना कोई एक कपल को एक साथ एक ही पलंग पर सेक्स करने के लिए पटाने की कोशिश करते हैं। पर यह थोड़ा मुश्किल है। क्यूंकि जब दुसरा पति राजी होता है तो पत्नी तैयार नहीं होती और अगर दूसरी पत्नी राजी होती है तो पति तैयार नहीं होता।
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