Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
01-18-2019, 01:51 PM,
#11
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
लेकिन सुमन के कहने पर जब अपने काँपते हुए हाथ उसने उसकी ब्रा के स्ट्रेप्स पर रखे तो उसका हाथ सुमन के चिकने बदन से छू गया और उसे ऐसा महसूस हुआ की बर्फ के उपर गर्म सरिया रख दिया हो...उसने ब्रा के स्ट्रेप्स को घुमाकर उसके पीछे लिखे नंबर देखने चाहे तो वो खुल ही गयी...और एकदम से छिटककर वो ब्रा भी गाउन के साथ लटक गयी..

सुमन उसकी तरफ घूम गयी और ब्रा के स्त्रेप्स को देखते हुए बोली : "ओहो....तुमने तो इसे उतार ही दिया...कोई बात नही..मैं देखकर बताती हूँ ..''

सुमन तो अपना साइज़ देख रही थी...और राहुल अपनी आँखे फाड़े उसके विशालकाए पर्वतों को देख रहा था...इतनी करीब से उसे अपने बॉस की बीबी के मुम्मे देखने को मिल रहे थे और वो उसका पूरा लुत्फ़ उठा रहा था..

सुमन : "यहाँ देखो ना....वहां क्या देख रहे हो....सबा के भी तो देखते हो ना...वैसे ही तो है...''

और इस बार हिम्मत करके राहुल ने बोल ही दिया : "हा....हाँ .....प...पर ...थोड़े बड़े है ये....''

इतना सुनकर सुमन मुस्कुरा दी...और अपनी ब्रा एक साइड में फेंकती हुई अपनी नंगी छातियाँ अपने हाथ में लेकर उसे दिखाती हुई बोली : "अच्छा जी....तो बताओ...कैसे है ये...सबा से अच्छे ....या उनसे खराब..''



राहुल तुरंत बोला : "नही...नही....खराब क्यो...बहुत अच्छे है....इनफॅक्ट सबा के तो इनके सामने कुछ भी नही....मुझे तो बड़े ही अच्छे लगते है...''

सुमन : "आ...हान .....ओके .....तो बताओ.....अगर ये तुम्हे मिल जाए....तो क्या करोगे....''

राहुल भी बेचारा पजल हो गया 'मिल जाए क्या मतलब....अभी मिलने में वक़्त है क्या...'

पर बेचारा ये बात सोच कर ही रह गया...बोल ना पाया..

सुमन : "बोलो....ये अगर तुम्हे मिल जाए तो क्या -2 करोगे...''

राहुल भी समझ चुका था की सुमन उसे तरसाने के लिए ही ये सब कर रही है...वरना किसी पराए मर्द के सामने इस तरह से नंगी खड़ी होकर भला कोई ऐसी बात करता है क्या...वो भी उसके इस खेल में उतर आया...और उसी तरीके से जवाब देने लगा जिसमे वो पूछ रही थी...

राहुल : "वो तो मैं तब बता पाउँगा जब ये मिलेंगे...''

सुमन भी उसके चालाकी भरे जवाब को सुनकर मुस्कुरा दी...

वो बोली : "अच्छा ...सोच लो....अगर ये तुम्हे मिल चुके है...अब बताओ...क्या करोगे..''

राहुल : "सोचने और मिलने में काफ़ी अंतर होता है भाभी....मैं तो काफ़ी देर से सोच रहा था की ये मिल ही चुके है...लेकिन वो तो सिर्फ़ मेरी सोच थी...ये अभी तक मिले कहाँ है....''

उसकी आँखों में छुपी शरारत अब सुमन ने भी पड़ ली थी और इस बार सुमन ने अपनी हार मान ही ली...वो उसके करीब आकर खड़ी हो गयी...इतने करीब की उसकी छाती के उभरे हुए निप्पल राहुल के दिल के करीब चुभने लगे..

और बोली : "अच्छा बाबा....लो...ले लो इन्हे...और बताओ की क्या करोगे अब...''

राहुल के लिए इतना बहुत था...उसने आव देखा ना ताव और अपने दोनो हाथो से उसके मुम्मो को मसल डाला...

सुमन ने भी उसके सिर को पकड़कर अपनी छाती में दे मारा और ज़ोर से चिल्लाई...

''दिखाओ...मुझे.....क्या कर सकते हो तुम.....''


राहुल ने अपने दांतो से उसके मुम्मो को पकड़ा और ज़ोर-2 से सक्क करके उसका दूध पीने लगा...उसका गाउन भी नीचे गिर चुका था और वो पूरी तरह से नंगी होकर उसकी बाहों में मचल रही थी...राहुल ने बिना कोई देरी किए उसे वही बिस्तर पर लिटाया और उसके पुर जिस्म को बुरी तरह से चूमने लगा...और धीरे-2 करके वो जब उसकी चूत तक पहुँचा तो सुमन ने तड़पकर अपनी टांगे उसकी गर्दन के चारों तरफ लपेट दी और उसे अपनी गुफा के अंदर घुसा लिया...

''आआआआआआअहह ओह माय गॉड .....चूसो इसे.............ज़ोर से...........आआआआअहह....''



राहुल ने अपने बॉस की बीबी की चिकनी चूत से निकल रहे पानी की एक-2 बूँद पी डाली...ऐसा गज़ब का स्वाद तो उसे सबा भी नहीं दे पाई थी..वो भी पागल हुए जा रही थी...राहुल के चूसने के बाद जब वो झड़ी तो उसने राहुल को अपनी जगह लिटाकर उसकी पेंट उसके घुटनो तक खींच ली.

राहुल के लंड को बाहर निकालकर वो उसे किसी सॉफ्टी की तरह चूसने लगी...उसमे से निकल रही आइस्क्रीम अपनी जीभ से चाट-चाटकार खाने लगी...यहाँ तक की उसकी बॉल्स को भी वो अपनी जीभ से किसी बिल्ली की तरह चाट रही थी...आज तक सबा ने भी उसकी बॉल्स को नही चूमा था...

जब से ये सब शुरू हुआ था ,तब से वो सुमन की हर बात को सबा से कंपेयर करके देख रहा था...सबा वैसा करती है और सुमन ऐसा करती है...और हर बार वो सुमन को सबा से उपर ही आंक रहा था...ये शायद इसलिए भी क्योंकि सबा के लिए चुदाई एक रुटीन जैसा कार्य बन चुका था...हालाँकि उनकी शादी की ज़्यादा टाइम नही हुआ था..और वो अपनी चुदाई को एन्जॉय भी करते थे लेकिन दिन ब दिन कुछ कम सा महसूस हो रहा था राहुल को...

और दूसरी तरफ, सुमन का उसके साथ पहली बार था...और शायद इसलिए वो अपनी पूरी ताक़त से उसे खुश करने में लगी हुई थी...और शायद इसलिए भी राहुल को हर बात में सुमन सबा से उपर ही दिख रही थी.
राहुल से अब और बर्दाश्त नही हो रहा था...उसने सुमन को बेड पर धक्का दिया और अपने लंड को सीधा लेजाकर उसकी चूत पर गाड़ दिया...बाकी का काम सुमन ने खुद कर दिया...उसकी कमर के चारों तरफ अपनी टांगे लपेट कर उसने ऐसे अपने शिकंजे में लिया की राहुल का लंबा लंड एक ही बार में दनदनाता हुआ सा उसकी गद्देदार चूत में घुसता चला गया...

इतनी अंदर तक तो आज तक नही भरी थी वो...अपने पति से भी उसे इतनी गहरी चुदाई का सुख आज तक नही मिल पाया था...और ना ही अपने किसी और यार से, लंबे लंड के अपने ही मज़े होते है...और आज ये मज़ा वो जी भरकर लेना चाहती थी.



इसलिए वो राहुल के धक्के के साथ -2 अपनी कमर भी उसी टाइम उचका कर उसके लंड पर अपनी चूत की करारी चोट कर रही थी...ठप्प-2 की आवाज़ों के साथ पूरा घर गूँज रहा था...और आख़िरकार ज़ोर-2 से चिल्लाते हुए दोनो एक दूसरे को चूमते हुए झड़ने लगे..

''आआआआआआआआआआहह.............ओह गॉड .....आई एम कमिंग...........''

राहुल भी चिल्लाया : "आआआआआआआहह भाभी................... मैं भी आया............''

सुमन ने उसे उसका लॅंड बाहर निकालने का मौका ही नही दिया....और उसके लॅंड के गर्म पानी से अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों की सिंचाई करवा ली.

राहुल भी हांफ्ते-2 उसके ऊपर ढेर हो गया..

अचानक उसका मोबाइल बज उठा...उसने साइड में पड़े मोबाइल को उठाकर देखा तो उसके बॉस का फोन था...शशांक का नाम देखकर सुमन भी मुस्कुरा दी, उसने उसे फोन उठाने के लिए कहा

शशांक उससे पूछ रहा था की इतनी देर कहा लगा दी और राहुल उसे समझा रहा था की फाइल ही लेट आई....और इस बीच शरारती सुमन राहुल को चूमे जां रही थी...उसकी गर्दन पर जीभ फेराकार उसे गुदगुदी कर रही थी...राहुल ने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को बदलने से रोका..उसे डर लग रहा था कि कही बॉस को शक़ ना हो जाए

पर वो बेचारा ये नही जानता था की उसके बॉस ने ही ये सब प्लान किया है...और उसे सब मालूम है.

राहुल जल्दी से वहाँ से निकल कर ऑफीस चला गया.
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01-18-2019, 01:51 PM,
#12
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
शाम को वो जब घर आया तो सबा ने उसे शॉपिंग में लाई हुई चीज़े दिखाई...और आँख मारकर ये भी बताया की कुछ समान ऐसा है जो रात को सोते वक़्त दिखाएगी..

राहुल समझ गया की आज उसने अपने लिए अंडरगार्मेंट्स लिए है.

8 बजने वाले थे...डिंपल सरदारनी का फोन 2 बार आ चुका था सबा के पास...सभी लोग पहुँच चुके थे...वो सभी सबा और राहुल का वेट कर रहे थे.
आज सबा ने कल से कुछ ज़्यादा बड़िया कपड़े पहने हुए थे...कल तो वो नाइट सूट में ही चली गयी थी...आज उसने एक नयी और सेक्सी सी टी शर्ट पहनी हुई थी जो वो आज ही लेकर आई थी...जिसपर बड़े-2 शब्दो मे लिखा था ''सेक्सी'' और एक अंग्रेज लड़की आँख मारते हुए बनाई गयी थी...राहुल को वो थोड़ी अजीब सी लगी, पर कपड़ो के लिए वो सबा को कुछ कहकर पिछड़ा हुआ नही कहलाना चाहता था..

वो दोनो सरदारजी के घर की तरफ चल दिए..वो जैसे ही पहुँचे, तीन पत्ति की गेम स्टार्ट हो गयी.

राहुल ने तो नोट ही नही किया की आज किस-किसने कैसे कपड़े पहने है...

पत्ते बाँट जाने के बाद उसकी नज़र सबसे पहले सुमन पर पड़ी, जिसने आज एक ब्लैक ड्रेस पहनी हुई थी , और वो शॉर्ट ड्रेस इतनी सेक्सी थी की उसमे से सुमन की ब्रा के स्ट्रेप्स तक साफ़ चमक रहे थे, और उसका गला खुल्ला था कि उसके दोनों मुम्मे, जिन्हे आज सुबह ही राहुल भरकर चूसा था, बाहर निकलने के लिए मचल से रहे थे



राहुल ने आज सुबह ही उसे चोदा था इसलिए उसके गद्राये गदराये हुए बदन को देखकर उसका लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया...ये सोचकर की वो इन सेक्सी कपड़ो में जिस जिस्म को छुपा रही है, वो उसने आज सुबह ही नंगा देखा है.

अब उसका खेल में मन नही लग रहा था...उसने 2 ब्लाइंड के बाद ही अपने पत्ते देख लिए...गेम नॉर्मल वाली थी...और उसने पास सिर्फ़ इकके को छोड़कर कुछ ख़ास नही आया था...इसलिए उसने पेक कर दिया....और ये पेक उसने इसलिए भी किया ताकि वो आराम से कमरे में मोजूद हर हसीना को देख सके...

शशांक की नज़र भी खेल से ज़्यादा राहुल की नज़रों पर थी...वो देख पा रहा था की किस अंदाज से राहुल उसकी बीबी को देख रहा है...वैसे तो सुमन ने उसे दोपहर को फोन करके सब कुछ बता दिया था की आज राहुल के साथ उसने क्या-2 किया, लेकिन जिस अंदाज से वो अभी सुमन को देख रहा था,उसे अपनी आगे की योजना सही से बनती हुई दिखाई दे रही थी.

राहुल अभी सुमन को देखने मे बिज़ी था ही की उसकी नज़र डिंपल सरदारनी पर गयी....और उसकी तो आँखे फटी की फटी रह गयी..

उसकी तो समझ में नहीं आ रहा था की ये एक ही दिन में सब लेडीज़ को हो क्या गया है, अब तक तो वो सुमन को ही ऐसी समझ रहा था जो अपने बदन की नुमाईश करके खुश होती है, लेकिन आज तो महफ़िल की रंगत ही बदली हुई सी लग रही थी 



डिंपल सरदारनी ने जिस तरह की ड्रेस पहनी हुई थी,वैसी तो फ़िल्मो की हीरोइन्स भी पहनने से कतराए...ऐसी जिस्म की नुमाइश करने वाली ड्रेस पहन कर वो घर वाली पार्टी में खड़ी थी जैसे ये नॉर्मल सी बात हो...

उसने पिंक कलर की ड्रेस पहनी हुई थी...जो उसकी जांघो तक ही आ रही थी, जिसमे साइड से और आगे-पीछे से उसका बदन कपड़े के कटे हुए डिज़ाइन में से सॉफ झलक रहा था...और उसके बदन के उन हिस्सो को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसने अंदर ना तो पेंटी पहन रखी है और ना ही ब्रा...



राहुल तो उसके कूल्हे के साइड के नंगे हिस्से को देखकर उसमे डूब सा गया..

हालाँकि पहले वो सुमन को देख रहा था, लेकिन जब से उसकी नज़र डिंपल पर पड़ी,उसने उसकी तरफ देखा ही नही..और ये बात सुमन को बिल्कुल भी अच्छी नही लगी...एक तो उसका पहले से ही डिंपल के साथ 36 का आँकड़ा था..वो दोनो एक दूसरे से ज़्यादा सेक्सी दिखने की होढ़ में कुछ ना कुछ करती ही रहती थी...हालाँकि दोनो एक दूसरे से काफ़ी अच्छी तरह से बाते करती थी..सबके सामने भी वो यही दिखाती थी की दोनों में अच्छी ख़ासी दोस्ती है...लेकिन दोनो अंदर ही अंदर अपनी ख़ास 'दुश्मनी' निभाने से कभी भी पीछे नही हटती थी..और यही कारण था की कल रात को सुमन की वो सेक्सी रेड ड्रेस देखने के बाद आज डिंपल मार्केट से उससे भी ज्यादा सेक्सी दिखने वाली ऐसी ड्रेस लेकर आई थी...सबा ने जब उसे उस ड्रेस में देखा तो उसे मना करना भी चाहा, लेकिन उसके मामले में वो ऐसे दखल नही देना चाहती थी..इसलिए कुछ ना बोल सकी.

डिंपल जब किचन से कुछ कोल्ड ड्रिंक्स लेने गयी तो सुमन भी उसके पीछे-2 चली गयी.

सुमन : "हाय ...कहना पड़ेगा डिंपल...आज तुम कमाल की लग रही हो...''

डिंपल (मुस्कुराते हुए) : ''थॅंक्स...तुम भी काफ़ी अच्छी लग रही हो...वैसे ये ड्रेस तुम्हारी कल वाली ड्रेस के सामने कुछ नही है...है ना...''

वो शायद अपनी और तारीफ सुनना चाहती थी..

सुमन ने उसके रसीले बदन से झाँक रहे माँस को देखा और मुस्कुरा कर बोली : "नही...ऐसा नही है...शायद पेंटी ब्रा ना पहनने की वजह से कुछ ज़्यादा ही हो गया....लेकिन इसका भी अपना मज़ा है...सभी लोग तुम्हे ही देख रहे है...''

डिंपल : "अच्छा जी...कौन देख रहा है मुझे...जरा मैन्नू वि तो दस्सो ''

सुमन : "वैसे तो सभी...लेकिन ख़ासकर राहुल...वो तो तुम्हे देखकर अपनी नज़र ही नही हटा रहा...''

राहुल का नाम सुनकर डिंपल के चेहरे के एक्सप्रेशन्स ही बदल गये...सोसायटी के सबसे सेक्सी मर्द पर तो सभी की नज़रे थी...शायद डिंपल की भी थी...और इसलिए उसका नाम सुनते ही उसके चेहरे पर अलग ही तरह का गुलाबीपन आ गया...सुमन को समझते देर नही लगी की सरदारनी के दिल में भी राहुल के लिए कैसी भावनाए है..

डिंपल : "अच्छा ...सच में ...वो देख रहा था...आज तक तो उसने देखा नही....अपनी बीबी के पीछे ही लगा रहता है...लल्लू कही का ''

अब तो सुमन पक्का समझ गयी की असली माजरा क्या है....वो राहुल के पीछे पड़ी थी....और इसलिए उसने सबा से ज़्यादा दोस्ती बड़ा रखी थी...ताकि राहुल को पता सके...लेकिन उसकी खुद की बीबी इतनी सुन्दर थी की वो डिंपल को भाव ही नही देता था...शायद इसलिए वो उसे मन ही मन कोसकर कुछ बुदबुदा रही थी , उसे लल्लू बोल रही थी जो उसके दिल की बाते नहीं समझ रहा था

और डिंपल ये बात नही जानती थी की जिस राहुल के पीछे वो पड़ी है, सुमन तो उसके साथ ऑलरेडी मज़े ले चुकी है..और बीबी के प्रति वफ़ादार पति को कैसे अपने जाल मे फँसाया जाता है, यही बताने के लिए शायद सुमन वहां आई थी..

और वैसे भी सुमन जानती थी की जिस महामज़े के बारे में वो और उसके पति प्लान बना रहे है ,उसके लिए डिंपल जैसे खिलाड़ी का बीच में कूदना बहुत ज़रूरी है...एक-2 करके ही वो आख़िर में जाकर सभी को अपने खेल में शामिल कर पाएँगे...और इसके लिए अभी कुछ करना पड़ेगा..

डिंपल : "अगर तुम चाहो तो वो तुम्हारे पीछे भी लग सकता है....इन्फेक्ट तुम उसके साथ वो सब मज़े ले सकती हो जिसके बारे में आजकल सोचा करती हो...मैं उसको बोलूँगी तो वो मेरी बात बिल्कुल नही टालेगा ...''
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01-18-2019, 01:51 PM,
#13
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
सुमन वो सब बाते जैसे उसका दिमाग़ पढ़ते हुए बोल रही थी....सुमन की बात सुनकर आश्चर्य के साथ डिंपल का मुँह खुलता चला गया...वो भी समझ चुकी थी की डिंपल ने ये बात ताड़ ली है की उसके दिल में राहुल के लिए क्या है...इसलिए अब छुपाने का कोई फायदा नही है..

डिंपल : "लेकिन तुम ये कैसे करोगी...वो भला तुम्हारी बात क्यो मानेगा...''

सुमन : "वो तुम मुझपर छोड़ दो...लेकिन उसके बाद तुम्हे वो करना पड़ेगा जो मैं चाहती हूँ ...''

डिंपल ने बिना सोचे समझे बोल दिया : "मंजूर है...''

उसके बाद सुमन ने डिंपल को कुछ समझाकर वापिस बाहर भेज दिया और तभी अंदर आने को कहा जब राहुल अंदर की तरफ आ जाए..और इस बीच उसने सभी लेडीज़ को वोड्का के डबल ग्लास सर्व करवा दिए...ताकि वो पीकर मस्त हो जाए...सुमन ने भी बाहर निकल कर अपने पति को साइड में लेजाकर अपनी योजना समझाई......वो भी अपनी बीबी के दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सका...

अब खेल ऐसा होने वाला था की वहां बैठे ठर्कियों का भी भला होने वाला था और राहुल के प्यार में सुलग रही डिंपल का भी...सुमन ने तो आज सिर्फ़ सूत्रधार का काम करना था बस..

डिंपल जब सभी को वोड्का सर्व कर रही थी तो सुमन उठकर अंदर की तरफ चल दी...और पीछे मुड़कर उसने राहुल को इशारे से अंदर आने के लिए कहा...

राहुल तो पहले से ही काफ़ी उत्तेजित था....डिंपल के कपड़े देखकर उसका लंड बैठने का नाम ही नही ले रहा था...ऐसे में सुमन ने जिस अंदाज में उसे अंदर आने का इशारा किया था तो उससे रहा नही गया...वो उठकर जाने लगा तो शशांक ने उसे टोक दिया : "अरे भाई ....कहाँ चल दिए....अगली गेम शुरू होने वाली है...''

राहुल : "मेरे पेट में कुछ गड़बड़ सी लग रही है...मैं वॉशरूम होकर आता हूँ ...आप खेलिए...''

शशांक : "नही दोस्त...ऐसे नही चलेगा...या तो तुम्हारे आने तक का वेट करेंगे या फिर अपनी जगह सबा को खेलने के लिए बिठाकर जाओ...''

वैसे तो ऐसा ज़रूरी नही था की वो तीन पत्ती का खेल खेले ही...लेकिन सबा का नाम सुनकर वहां बैठे सभी के लंड में एकदम कड़कपन सा आ गया...कपूर साहब भी बोल पड़े : "हाँ भाई....ऐसे तो खेल बीच में ही रुक जाएगा...इससे अच्छा अपनी वाइफ को बोलो की आकर बैठ जाए...जब तुम वापिस आओ तो वहां से आगे तुम खेल लेना ...''

राहुल के साथ सबा अक्सर घर पर भी ये खेल खेला करती थी...इसलिए राहुल को खेल की चिंता नही थी...उसे बस ये डर था की कही इन सब मर्दो के बीच बैठने से वो मना ना कर दे...उसने सबा की तरफ देखा जो उनकी बाते बड़े गौर से सुन रही थी, उसने सर हिलाकर झट से हाँ कर दी ...राहुल को तो विश्वास ही नही हुआ की वो इतनी जल्दी मान जाएगी...

पिछले दो दिनों से इतने पैसे जीतने के बाद उसकी भी इस खेल में रूचि बड़ चुकी थी...और थोड़ा बहुत नशे का असर भी था जो उसे खुलकर खेल खेलने के लिए भी उकसा रहा था...इसलिए उसने खुद ही हाँ कर दी और उठकर उन मर्दों के बीच आकर बैठ गयी.

राहुल भागकर अंदर चल दिया...सुमन पहले से ही अंदर जा चुकी थी...लेडीज़ ने भी तंबोला की गेम खेलनी शुरू कर दी..और साथ में दारू भी चल रही थी...इसलिए सुमन की अनुपस्थिति का किसी को भी एहसास नही हो रहा था.

अंदर पहुँचते ही राहुल ने सुमन को बुरी तरह से दबोच लिया और उसके मुम्मो को जोर-२ से दबाने लगा...सुमन ने भी अपनी टॉप को ऊपर उठाकर अपने बूब्स उसके सामने परोस दिए और वो उन्हे अपने तेज दांतो से नोचने लगा..



सुमन : "अहह......मेरी जान.......क्या बात है.....इतने एक्साइटिड तो सुबह भी नही थे....लगता है डिंपल को देखकर तुम्हारा ये हाल है...''

डिंपल का नाम सुनते ही राहुल ने भी ठीक उसी तरह से चोंक कर उसे देखा जैसे डिंपल ने राहुल का नाम सुनकर उसे देखा था...

सुमन : ''घबराओ मत...ये सब चलता है....इनफेक्ट वो भी तुम्हारे लिए ही वो ड्रेस पहन कर अपने जलवे दिखा रही है...''

राहुल : "मेरे लिए....??''

सुमन : "हाँ ....तुम्हारे लिए.....यकीन नही होता तो पीछे मुड़कर देख लो...''

राहुल पीछे मुड़ा तो उसके चेहरे से पसीने निकलने लग गए ...पीछे डिंपल खड़ी थी...



राहुल के हाथ अभी तक सुमन के मुम्मो पर थे...राहुल की तो हालत पतली हो गयी...उसकी समझ में कुछ भी नही आ रहा था..

अचानक डिंपल उसकी तरफ चलती हुई आई और करीब आकर धीरे से फुसफुसाई : "ओह राहुल............ इधर आओ.....''

इतना कहकर उसने राहुल को अपनी बाहों में क़ैद करके इतनी बुरी तरह से दबोचा की उसकी साँसे एक पल के लिए बंद सी हो गयी....सुमन ने अपने कपड़े ठीक किए और बाहर की तरफ चल दी और बोली : "तुम लोग एंजाय करो...मैं बाहर देखती हूँ ....और हां ...जो भी करना है जल्दी -2 करना....एंजाय....''

इतना कहकर वो बाहर निकल गयी....राहुल समझ गया की ये दोनो की मिलीभगत है...लेकिन जो भी था उस मिलीभगत की वजह से उसके हाथों में आज की सबसे सेक्सी दिखने वाली औरत थी...जो उसकी बाहों में जल बिन मछली की तरह मचल रही थी....और राहुल को अच्छी तरह से पता था की उसकी इस तड़प को कैसे मिटाना है...



डिंपल की तड़प के सामने राहुल का उतावलापन 19 ही था...क्योंकि जैसे ही डिंपल ने राहुल को अपने करीब किया, वो उसके होंठों पर टूट पड़ी...और ऐसे टूटी जैसे जोंबिस अपने शिकार पर टूट पड़ते है...वो उसके होंठों से लेकर उसकी गर्दन तक को बुरी तरह से चूस रही थी....राहुल के हाथ अपने आप उसके मुम्मो पर जा टिके ..और उनके मुलायंपन को महसूस करके वो पहले से ज़्यादा उत्तेजित हो उठा...बिना ब्रा की ड्रेस में जहा-2 पर खाली जगह थी, वो उनमे से अपने हाथ अंदर डालकर उसके नर्म मुलायम जिस्म को स्पर्श करने लगा..डिंपल ने उसका उतावलापन देखा और खुद ही अपनी ड्रेस को कंधे से सरका कर नीचे कर दिया...और फिर जो मुम्मो की शेप राहुल ने देखी, उसे देखकर तो वो भी चकित रह गया...शादी के इतने सालो बाद भी उसकी छातियाँ किसी पर्वत की तरह तनकर खड़ी थी..



राहुल बेचारा अपनी जीभ लपलपाता रह गया और डिंपल ने उसके सिर को पकड़कर अपनी छाती पर दे मारा...और अपना मुम्मा खुद ही उसके मुँह के हवाले करके मस्ती में दबी सिसकारिया मारने लगी...

भले ही राहुल के प्रहार काफ़ी आक्रामक थे, पर डिंपल को तो सरदारजी के हमले की आदत थी...वो तो उसे निचोड़ ही डालते थे...पर राहुल का अंदाज भी काफ़ी निराला था...वो उसे काट भी रहा था और चुभला भी रहा था...

डिंपल जानती थी की अभी उसके पास टाइम कम है...उसने दरवाजा बंद किया और वापिस आकर राहुल के सामने बैठ गयी...राहुल के लंड को मुँह में लेने की तमन्ना उसे ना जाने कब से थी...उसने सबा से कई बार सुना था की उसके लंड को मुँह में लेकर वो घंटो तक खेलती रहती है...पूरी सोसायटी में सिर्फ़ सरदारनी को ही सबा ने ऐसे राज बता रखे थे जिन्हे सुनकर आज सरदारनी का ये हाल हो रहा था ... सबा बेचारी ने खुद ही अपने पति की ऐसी तारीफ कर करके डिंपल को उसके सपने देखने के लिए मजबूर कर दिया था...और तभी से डिंपल अपनी ही सहेली के पति के लिए ऐसी भावनाए रखने लगी थी..

और आज उसका सपना सच होने जा रहा था...उसने तुरंत उसकी पेंट को नीचे किया और राहुल के लंबे और मोटे लंड को बाहर निकाल लिया..

और सच में , जैसी सबा ने तारीफ की थी, ठीक वैसा ही था राहुल का लंड ...

एक दम चिकना...चॉकलेटी कलर का..और तन कर खड़ा हुआ...

उसने बिना एक पल भी गँवाए अपना मुँह आगे किया और उस छोटे सिपाही को अपने मुँह में भर लिया...और जोरों से चूसने लगी...
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01-18-2019, 01:51 PM,
#14
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
राहुल भी अपने पंजो पर खड़ा हो गया, क्योंकि उसके चूसने की शक्ति ही इतनी ज़्यादा थी की उसे तो ऐसा लग रहा था की वो बरसों से प्यासी है..

कुछ देर तक चूसने के बाद उसने राहुल के लंड को बाहर निकाला और खड़ी हो गयी...वो एक-2 पल को पूरी तरह से इस्तेमाल करना चाहते थे...लेकिन अब जो डिंपल ने करने के लिए कहा, उसे सुनकर तो एक पल के लिए राहुल भी सोच में पड़ गया..

वो जल्दी से एक साइड टेबल पर झुकी और अपनी ड्रेस को पीछे से उपर उठा कर अपना पिछवाड़ा नंगा करके बोली : "राहुल...जल्दी आओ...प्लीज़....जल्दी अंदर डालो...''

वो बेचारा क्या बोलता...उसकी तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था...डिंपल ऐसा सोच भी कैसे सकती है...बाहर सब बैठे हुए है...ये चूमा चाटी तो ठीक था, लेकिन उन सभी के बाहर रहते हुए वहां चुदाई करना उसे थोड़ा रिस्की सा लगा...उसकी खुद की बीबी बाहर थी...और तो और सरदारनी का पति भी बाहर था...और साथ में कॉलोनी के दूसरे लोग भी....ऐसे में डिंपल उससे चुदने के लिए बोल रही थी...वो मना तो करना चाहता था लेकिन तभी उसकी नज़र डिंपल की रस टपकाती हुई चूत पर गयी....उसमे से शहद की तरह छूट का रस बूँद - २ करके टपक रहा था , और एक बूँद अभी भी उसकी चूत पर ओस की बूँद जैसी लटकी हुई थी , ऐसी चिकनाई देखकर वो उसकी चूत में लंड डालने से खुद को रोक ही नही सका..



वो आगे बड़ा और उसने उसकी फेली हुई गांड को पकड़ा और ढप्प से अपना लंड एक ही बार में उसकी चूत में सरक दिया...

ये सरदारनियो का पिछवाड़ा कितना सेक्सी होता है...उसे देखकर वो पहले भी कई बार उसकी पीछे से मारने के बारे में सोच चुका था...वो भला क्या जानता था की उसकी मन की आस इस तरह से पूरी होगी..


और जैसे ही उसका कसरती लंड डिंपल की चूत के अंदर घुसा, वो पीछे की तरफ सिर करके हिनहीना उठी...और बाँये हाथ से उसने राहुल के सिर को पकड़कर अपने करीब किया और एक गहरी स्मूच दे डाली.



...दोनो एक गीली वाली किस्स में डूब गये...राहुल ने कुछ पल तक उसके होंठ चूमे और फिर उसने अपना पूरा ध्यान उसकी चुदाई में लगा दिया..

वो उसकी कमर को पकड़कर उसे बुरी तरह से चोद रहा था..

और ऐसा करते हुए उन दोनो ने अपने मुँह बड़ी मुश्किल से बंद करके अपनी चीखे दबा रखी थी...लेकिन इस क़्वीकी में उन दोनो को काफ़ी मज़ा आ रहा था...सिर्फ़ 5 मिनट ही हुए थे अभी तक डिंपल को अंदर आए हुए...और इतनी देर में उसकी चूत में राहुल का लंड था...



लेकिन ज़्यादा देर तक रुककर वो किसी के मन में शक़ नही पैदा करना चाहते थे....इसलिए डिंपल ने खुद ही अपनी चूत के दाने को आगे की तरफ से रगड़ना शुरू कर दिया...दूसरे हाथ से वो अपने स्तन मसल रही थी...राहुल भी अपने घोड़े को पूरी गति से उसकी चूत के हाइवे पर दौड़ा रहा था....और अगले 2 मिनट के अंदर दोनो के मुँह से टूटी - फूटी सिसकारियाँ निकलने लगी....और आख़िर में एक जोरदार शॉट के साथ राहुल ने भरभराकर अपना सारा माल उसकी चूत में उडेल दिया....



राहुल के गर्म पानी को महसूस करके वो भी झड़ने लगी...और दोनो का मिला जुला रस उसकी चूत से बाहर की तरफ बहते हुए उसकी जांघों को गीला करने लगा..

डिंपल ने साइड मे रखा एक टावल उठाया और अपनी चूत को सॉफ किया...और राहुल की तरफ पलटकर बोली : "अब तुम बाहर जाओ... वरना किसी को शक हो जाएगा...आज के लिए इतना काफी है, लेकिन याद रखना , कल तुम्हे नहीं छोडूंगी ''

राहुल ने भी अपने लंड को सॉफ किया... सिर्फ़ 10 मिनट के अंदर उसने अपनी पड़ोसन को चोद डाला था...ऐसी जल्दबाज़ी वाली चुदाई तो उसने आज तक नही की थी... लेकिन इसका भी अपना अलग मज़ा मिला...एक अलग तरहा की एक्साइटमेंट का एहसास हुआ था उसे आज...

और इन दस मिनटों में बाहर क्या हुआ, ये भी देखते है ।

जब राहुल ने सबा को अपनी जगह पर बैठने को कहा था तो उसे अपने बीच बिठाकर सभी ठर्कियों की तो मौज ही हो गयी थी...कारण था उसकी ड्रेस.... आज सबा ने जो ड्रेस पहनी हुई थी , उसका गला काफ़ी खुला था...और बिना दुपट्टे वाला था.. इसलिए जब वो उन हरामियों के बीच बैठी तो उसके आधी से ज़्यादा नंगी छातियों की सफेदी देखकर पत्तो पर तो किसी की नज़र ही नही गयी.... सब उसके मुम्मो को अपनी-2 आँखो से चोदने में लगे थे...

उनमे से सिर्फ़ शशांक को छोड़कर किसी को भी ये अंदाज़ा नही था की राहुल अंदर क्या कर रहा है... सब अपने-2 मन में बस यही दुआ माँग रहे थे की जल्दी बाहर ना निकले... और इन सबसे अंजान, अपनी पहली गेम खेल रही सबा थोड़ा नर्वस सी होकर अपना पूरा ध्यान सिर्फ़ पत्तो पर लगाकर बैठी थी... उसे तो ये भी पता नहीं था की आज की ये गेम उसकी जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव लाने वाली है... और ना चाहते हुए भी वो उन सभी ठर्कियों की उस चाल में फँसने वाली थी जो काफ़ी पहले से शशांक ने उसके बारे में सोचकर रखी हुई थी.



पहली बाजी शुरू हुई और सबके सामने पत्ते आ गये...इस बार का वैरीएशन था मुफ़लिस...यानी सबसे छोटे पत्ते वाला जीतेगा..

सबकी देखा-देखी सबा ने भी 500 की 2 ब्लाइंड चल दी... घर पर राहुल के साथ तो वो फ्री में खेल लेती थी (वो अलग बात थी की जीतने वाला अपनी मर्ज़ी से चुदाई करता था) लेकिन आज करारे नोटों के साथ खेलते हुए सबा को एक अलग ही रोमांच का अनुभव हो रहा था...आज वो खुद पैसे जीतकर राहुल को दिखा देना चाहती थी की वो भी कुछ कर सकती है इस खेल में ...

सबसे पहले कपूर साहब ने अपने पत्ते उठाए...उन्होने कुछ देर तक पत्तो को घूरा और फिर 1 हज़ार की चाल चल दी..

गुप्ता जी ने भी पत्ते देखकर 1 हज़ार की चाल चल दी..सरदारजी ने हर बार की तरह एक और ब्लाइंड चली..और शशांक जो कब से अपने पत्ते उठा कर बैठा था, उसने भी एक चाल चल दी..

यानी सबा का नंबर आते-आते 3 चाल आ चुकी थी...उसने धड़कते दिल से अपने पत्ते उठाए...उसके पास 2,5 और 9 आया था...उसकी समझ में नही आ रहा था की वो क्या करे...उसे तो खुद के पत्ते छोटे ही लग रहे थे...क्योंकि एक बार घर पर भी ऐसी मुफ़लिस वाली गेम खेलते हुए राहुल ने बताया था की 10 के अंदर जो भी पत्ते आते है उनसे ये गेम खेली जा सकती है...लेकिन सबा को थोड़ा डाउट हो रहा था की जब सामने से 3 चालें आ जाए तो क्या तब भी गेम आगे खेलनी चाहिए या नही..

उसने कुछ देर सोचने के बाद चाल चल ही दी...ये सोचते हुए की जो होगा देखा जाएगा , अपनी पहली ही गेम में वो डरपोक नहीं कहलाना चाहती थी

सरदरजी ने भी अपने पत्ते उठा लिए और उन्हे देखकर बड़े ही जोश के साथ 1 के बदले 2 हज़ार की चाल चल दी..

अब आलम ये था की टेबल पर 5 लोग थे और सभी की चाल आ चुकी थी...ऐसा शायद पहली बार हो रहा था...

इसी बीच दूसरे टेबल पर सुमन ने सभी का ध्यान बाँट रखा था...उसने सभी के सामने वोड्का के बड़े-2 ग्लास फिर से भरकर रखवा दिए थे...और साथ ही तंबोला की गेम को भी काफ़ी रोचक मुकाम तक पहुँचा दिया था... इसलिए किसी को भी दूसरे टेबल पर देखने की जरुरत ही महसूस नही हो रही थी.. और ना ही डिंपल सरदारनी और राहुल की अनुपस्थिति का एहसास हो रहा था..जो इस वक़्त अंदर जबरदस्त चुदाई में व्यस्त थे..

सबा ने देखा की सभी की चाल आ चुकी है और वो सोच रही थी की ये अभी ही होना था...काश राहुल वहां होता...लेकिन अब उसे राहुल से ज़्यादा गेम की चिंता थी...

सबने सरदारजी के बाद, उनकी देखा देखी 2-2 हज़ार की चाल चल दी...सबा ने भी सोचा की अब इस गेम में पैर फँसा ही दिया है तो देखी जाएगी...क्योंकि कल के जीते हुए पैसो के बाद कुछ रिस्क तो लिया ही जा सकता था...उसने भी 2 हज़ार की चाल चल दी..

वो जानती थी की जीतना तो किसी एक को ही है...और वो अगर कॉन्फिडेंस से खेलती रही तो शायद वो भी जीत सकती है...

उसने जब 2 हज़ार फेंके तो कपूर साहब बोल पड़े : "आज तो सबा भाभी बड़े तैश मैं है...ये सबको झाड़ कर मानेगी...''

उसने जब 'झाड़ कर' बोला तो सबा की आँखे गोल होती चली गयी...झाड़ने का मतलब तो सेक्स में होता है...लेकिन जिस तरीके से उन्होने वो शब्द बोला था, ऐसा लग रहा था की वो नॉर्मल सी बात है...वो बोलकर हँसे भी नही...इन्फेक्ट कोई भी नही हंसा...इसलिए सबा ने भी कोई रिएक्शन नही दिया...वो समझ गयी की इस शब्द का मतलब ''पैसे झाड़ना'' है...वो सेक्स वाला झाड़ना नही...अपनी गंदी सोच पर वो खुद ही मुस्कुरा दी.

उसकी इस मुस्कुराहट को हर ठरकी तिरछी नज़रों से देख रहा था...उन सभी के बीच ,आँखो-2 में ही, बिना बोले ही, इस बात पर सहमति हो चुकी थी की इस गेम में वो सबा से हर तरह का मज़ा लेंगे...चाहे उसे बुरा ही लगे जाए...क्योंकि आज जैसा मौका वो हाथ से नही जाने देना चाहते थे.

कपूर साहब ने पैसे फेंककर गेम को आगे बढ़ाया ..

गुप्ता जी ने भी 2 हज़ार निकाले और नीचे फेंकते हुए बोले : "लो जी....मेरे कड़क खंबे जैसे कड़क नोट मेरी तरफ से...''
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01-18-2019, 01:51 PM,
#15
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
इस बार सबा का माथा ठनका ....क्योंकि गुप्ता जी ने जिस अंदाज से खड़े खंबे की उपमा दी थी, वो लंड के सिवा कुछ और हो ही नही सकता था... और ना चाहते हुए भी उसकी नज़र गुप्ता जी के लंड की तरफ चली गयी जो उनकी पेंट में मे किसी खंबे जैसा ही खड़ा हुआ था..पराए मर्दों के बीच बैठी हुई सबा अचानक डर सी गयी... वो सोचने लगी की ये कहा फँस गयी वो... लेकिन फिर उसे अंदर ही अंदर एक अलग से रोमांच का अनुभव भी हुआ... ये वो अनुभव था जो वो स्कूल या कॉलेज टाइम में महसूस किया करती थी..

वो हमेशा से ही पढ़ने में अव्वल रही थी, इसलिए उसकी दोस्ती भी ऐसे लोगो से ही होती थी जो उसकी तरह पड़ने में तेज थे.. लेकिन वो जब भी दूसरे बदमाश टाइप के लड़को का ग्रुप देखती तो उसे अंदर ही अंदर ना जाने क्या हो जाता था की वो उनकी तरफ आकर्षित सी हो जाती थी... उन बदमाश लड़को के बोलने के स्टाइल, गाली गलोच के साथ बात करने का तरीका, हर बात में सेक्स से रिलेटेड टॉपिक को बीच में लेकर आ जाना, ये सब उसे अंदर से रोमांचित सा कर देता था...लेकिन समाज के डर से, अपने दोस्तों में अच्छी इमेज को बनाए रखने की वजह से और अपने माँ-बाप का नाम ना खराब हो जाए, इस डर से वो उन सबसे दूर ही रहा करती थी...

इसलिए उसको प्यार भी अपने ग्रुप के सबसे शरीफ लड़के राहुल से हुआ और शादी भी उसने उससे ही की ... और धीरे-2 वो उन सब एहसासों को भूलती चली गयी... लेकिन आज जिस अंदाज से ये सोसायटी के मर्द उसके सामने बैठकर उसी अंदाज में बाते कर रहे थे, जो उसे ना जाने कब से पसंद थी तो उसका शरीर काँप सा उठा...और उसका अंग-2 कड़क सा हो उठा..और धीरे-2 उसके अंदर दबे हुए वो एहसास फिर से कुलबुलाने लगे..

शशांक का पूरा ध्यान सबा के उपर था...वो सामने से बोली जा रही हर बात पर सबा का रिएक्शन बड़ी बारीकी से नोट कर रहा था... और जब उसने देखा की वो बाते सुनकर सबा का सीना तेज गति से उठ-बैठ रहा है, वो बार -2 अपने होंठों पर जीभ फेर रही है...उसका शरीर काँप सा रहा है , तो उसे समझते देर नही लगी की वो सब सुनकर वो एक्ससाइटिड हो रही है...और ये उसने उसके निप्पल देखकर भी जाना, जो उसकी टी शर्ट पर बुरी तरह से उभरकर बाहर झाँक रहे थे..

शशांक समझ गया की अगर वो लोग ऐसी ही बाते करते रहे तो शायद काम बन सकता है....वो अपने तरीके से सोच रहा था, इस बात से अंजान की सबा पर ऐसी बातों का ये असर किसलिए हो रहा है, वो तो बस ये समझ रहा था की एक मर्द के साथ बँधे रहने के बाद,आज इतने मर्द जब सेक्सी बाते कर रहे है तो वो उत्तेजित हो रही है...इसलिए उसने आँखो ही आँखो में सभी को ऐसी ही बाते करते रहने के लिए जारी रहने को कहा...

अगला नंबर शशांक का था...उसने पत्ते फिर से देखे और बोला : "आज तो मेरे पत्तो की माँ चुद कर रहेगी...लेकिन मैं भी हार मानने वाला नहीं हूँ ...ये लो मेरे भी 2 हज़ार...आज सबा ही लेकर रहेगी हम सबकी....''

इतना कहते हुए शशांक ने पैसे बीच में फेंक दिए..

अपने पति के बॉस शशांक के मुँह से ऐसी गाली सुनकर एक पल के लिए तो सबा सकपका सी गयी...वो तो एकदम जेंटलमेन टाइप का बंदा था...आज से पहले तो उन्होने ऐसी कोई बात नही की थी जिसमे वो चीप भाषा का इस्तेमाल करे... लेकिन आज जिस तरीके से उसने ये बात इतनी आसानी से बोल दी, वो सबा ने एक्सपेक्ट नही किया था...किया तो उसके दोस्तों ने भी नही था..वो भी सबा के सामने शशांक को ऐसी गंदी भाषा का इस्तेमाल करते देखकर हैरान रह गये...लेकिन अंदर ही अंदर ये भी समझ गये की जब उनके ग्रुप के बॉस ने ऐसा कह दिया है तो उन्हे तो और भी आगे निकलना पड़ेगा इस मामले में ..और इसके साथ-2 सभी सबा के चेहरे को पढ़ने की कोशिश भी कर रहे थे..

अब चाल चलने की बारी सबा की थी...उसने फिर से 2 हज़ार रुपय निकाले और नीचे फेंक दिए...और साथ ही बड़ी ही धीमी आवाज़ में बोली : "मैं कैसे मारूँगी शशांक जी...वो काम तो मर्दों का होता है...यहाँ तो मेरे पत्ते मारेंगे आप सभी को ...''

शशांक को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नही थी...लेकिन उसकी तरफ से जवाब आता देखकर वो समझ गया की वो भी उनके रंग में रंगना चाहती है...शशांक के साथ-2 सभी उसकी बात सुनकर खुश हो गये...ये सोचकर की चलो इसी बहाने अब वो खुलकर उसके साथ बात तो कर सकते है...यानी अपने-2 दिल की बातें वो खुल कर उसे सुना सकते है..

अगला नंबर सरदारजी का था...वो पैसे फेंकते हुए बोले : "अरे भाभिजी...आप चाहो तो सब कर सकते हो...मारने के लिए मर्द होना ज़रूरी थोड़े ही होता है...हे हे...''

उसकी बात पर सब हंस दिए...और सबा भी....वो साफ़ -2 समझ रही थी की इन शब्दों का मतलब क्या है...और उनकी ये बातचीत किस दिशा में जा रही है....लेकिन ये सब समझने के बावजूद वो कुछ नही बोल रही थी...बल्कि एंजाय कर रही थी...और अब तो वो मन ही मन ये प्रार्थना भी कर रही थी की राहुल जल्दी ना आए...क्योंकि उसके आने के बाद तो कोई भी कुछ नही बोलेगा...और वो अभी ये नहीं चाहती थी की ये बातचीत बंद हो

सुमन भी बीच-2 में उनके टेबल पर देखकर वहां का जायजा ले रही थी...और अपने पति शशांक की आँखो में देखकर मंद-2 मुस्कुरा भी रही थी...

कपूर साहब को तो जैसे खजाने की चाबी मिल गयी थी...सभी को इतने खुले तरीके से बाते करता देखकर, और सबा को भी वैसी ही बातो में जवाब देते देखकर वो घोड़े की तरह हिनहीना उठे , और बोले : "आज तो सबा भाभी मूड में है...काश ये टेबल के बदले बेड होता तो इनके मूड का अच्छे से फायदा उठा लेते हम सभी.... हा हा...''

एक तरह से उसने सबा को सामूहिक रूप से चोदने की बात कह डाली थी....सभी के लंड ये सोचकर ही हिनहीना उठे की सबा उन सबसे चुदवायेगी ...और सबा भी ये सोचकर काँप सी गयी जैसे ये सब असली में होने जा रहा हो... एक बड़े से बेड पर वो बैठी है और उसके चारों तरफ ये सारे मर्द अपने हाथ में लंड लिए उसे ही घूर रहे है और अपने-2 लंड को मसल रहे है... ये सोचते हुए उसकी आँखे एकदम गुलाबी सी हो गयी.... उसकी चूत में अजीब सी खुजली होने लगी...जिसे उसने बड़ी मुश्किल से अपनी जांघे रगड़कर शांत किया....

लेकिन इन सबके बीच जो रोमांच का एहसास वो अपने शरीर पर महसूस कर पा रही थी, ये उन सभी एहसासों से कही ज़्यादा था जो उसने आज तक अपनी जिंदगी में महसूस किये थे..

सरदारजी बोले : "यार, मेरा तो एकदम से मूड कर गया है ये सुनकर, काश ऐसा हो सकता , मई तो सबसे पहले कूद पड़ता बेड पर ... ''

शशांक बीच में बोला : "यार गुरपाल, तुझसे अपनी बीबी की तो ली नही जाती, और तू सबा की लेने में लगा है...''

शशांक की बात सुनकर सरदारजी बोले : "तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे डिंपल ने तुझे आकर बोला है की सरदारजी मेरी ले नही रहे है....मेरा छोटा सिपाही हमेशा तैयार है, चाहे तो अभी कन्फर्म करवा देता हू डिंपल से...''

ये सब मज़ाक में चल रहा था...
शशांक : "भाई, मुझे तो सुमन ने बताया था की कल रात को , घर जाने के बाद उसका बहुत मन था लेकिन तूने ही मना कर दी....''

गुरपाल ये सुनकर झेंप सा गया....बात तो सच थी...कल रात को जुए की पार्टी के बाद वो काफ़ी थक सा गया था...डिंपल के कहने के बाद भी उसका चुदाई का मन नही किया था....

गुरपाल : "साली , इस सरदारनी के पेट में कोई भी बात पचती नहीं है ''

बेचारा खिसियानी हंसी हँसता हुआ ये बोल रहा था

और दूसरी तरफ सबा का चेहरा लाल हो चूका था, क्योंकि उसने भी वाली चुदाई की बात सुमन को बता दी थी , और जब सुमन ये डिंपल की बात उनकी बताई होगी , बेचारी किसी से नजरें भी नहीं मिला पा रही थी

लेकिन शशांक समझ चूका था की उसके दिमाग में क्या चल रहा है

अब इस खेल को दूसरे मुकाम टाइम आ चुका था 



शशांक ने बड़ी ही बेशर्मी से अपने लंड को मसलते हुए कहा : "वैसे एक बात और भी है...जिसे सुनकर आप सभी को काफ़ी मज़ा आएगा...''
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01-18-2019, 01:52 PM,
#16
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
शशांक ने बड़ी ही बेशर्मी से अपने लंड को मसलते हुए कहा : "वैसे एक बात और भी है...जिसे सुनकर आप सभी को काफ़ी मज़ा आएगा...''

सबा का दिल जोरों से धड़क उठा...ऐसा लग रहा था की उसका दिल शरीर से निकलकर टेबल पर ही गिर पड़ेगा...वो सोचने लगी की उसके पति के बॉस ने अगर कल रात वाली इन सबके सामने बता दी तो वो क्या करेगी...इन सभी से वो कभी मुँह उठा कर बात भी नही कर सकेगी...ये सही था की अभी तक की बातों को वो काफ़ी अच्छे से एंजाय कर रही थी...गंदी बाते जब तक दूसरो के बारे में हो तब तक उसे पसंद थी...लेकिन उसके खुद के बारे में और वो भी सेक्स वाली बाते, ये उसके लिए बहुत ज्यादा था...उसे खुद पता नही था की अगर शशांक ने वो सब बोल दिया तो वो कैसे रिएक्ट करेगी..

शशांक ने शरारती हँसी से सबा की आँखो मे झाँका, दोनो की नज़रे मिली और आँखो ही आँखो मे सबा ने उसे ऐसा ना करने को कहा...लेकिन उसके मना करने के बाद भी शशांक ने बात शुरू कर ही दी..

शशांक : "कल रात एक और जगह ब्लास्ट हुआ था...और ऐसा ब्लास्ट जो आज से पहले कभी नही हुआ...''

सबा का शरीर काँप सा गया...उसने अपने पैरों से ज़मीन कुरेदनी शुरू कर दी...

कपूर साहब भी बड़े मज़े लेकर बोले : "तो सूनाओ भी यार....इतना भाव क्यो खा रहे हो...''

शशांक : "कल रात सुमन ने वो किया,जिसके लिए मैं कब से उसे तैयार कर रहा था...''

सबा का चेहरा हैरानी से शशांक की तरफ उठता चला गया...यानी वो उसकी नही बल्कि खुद की कहानी बता रहा था...शायद ये सबा की रीक़ुएस्ट का असर था....सबा ने एक बार फिर से आँखो ही आँखो मे उसे थेंक्स कहा....

शशांक ने धीरे से उसके करीब खिसक कर कहा : "वैसे मुझे तुम्हारी वाली स्टोरी भी पता थी जो तुमने सुमन को बताई थी ...लेकिन वो फिर कभी...लेकिन अभी के लिए इसे छुपाने का टैक्स देना होगा तुम्हे....''

टैक्स देने की बात सुनकर सबा मुस्कुरा दी....वो तो ऐसे बात कर रहे थे जैसे कोई बीएफ अपनी जीएफ को छेड़ते हुए कहता है...ये सोचकर उसकी चूत का पानी एक बार फिर से उभर आया...और वो सोचने लगी की ऐसा हो जाए तो वो क्या करेगी...अपने ही पति के बॉस के साथ....कैसे...

वो ये सोचने मे लगी हुई थी और गुप्ता जी की आवाज़ ने उसे फिर से वापिस खींच लिया, वो बोले : "अब बता भी दो भाई, ऐसा क्या काम था जो सुमन भाभी भी नही कर पा रही थी...वो तो हर काम में माहिर है, ही ही.ही...... ''

गुप्ता के दिमाग में बस यही विचार कोंध रहा था की शायद सुमन ने अपने दूसरे छेद में लंड डालने की इजाजत दे दी है कल शशांक को, तभी उसकी गांड मारकर वो इतना खुश है, लेकिन वो ऐसी बात तो सभी के सामने बताने से रहा , यही सोचकर गुप्ता जी की उत्सुक्तता बढ़ती जा रही थी.

वो लोग शायद समझ रहे थे की आज शशांक को कुछ ज़्यादा ही चढ़ गयी है, इसलिए वो अपनी कहानी इस तरह से सबके सामने सुना रहा है...पर शशांक अच्छी तरह से जानता था की वो ये सब किसलिए कर रहा है.

शशांक ने सुमन की तरफ देखा, जो उन्ही की बाते कान लगाकर सुन रही थी...और बोला : "ओपन में सैक्स ....कल हमने ओपन में सैक्स किया....बाल्कनी में ...''

ये सुनते ही सभी की आँखे बाहर निकल आई....यानी कल शशांक ने अपनी बीबी को बाल्कनी में खड़े करके चोदा ...बिल्कुल नंगा करके....और ये बात वो सभी को इस तरह बता भी रहा है , सैक्स के बारे में सभी के सामने अपने एक्सपेरिएंस शेयर करने का ये पहला वाक्या था

सरदारजी बोल पड़े : "ओह्ह्ह तेरी.....क्या बात है शशांक भ्रा....मेरा फ्लेट तो तेरी बिल्डिंग के बिल्कुल सामने है...काश मुझे पता होता तो मैं भी आकर दर्शन कर लेता भाभी जी के...हा हा ''

इतना कहते हुए गुरपाल की नज़र सुमन की तरफ चली गयी, जो उसे ही देखकर मुस्कुरा रही थी....

सुमन को अपनी तरफ देखते पाकर सरदारजी सकपका से गये और धीरे से बोले : "ओये मॅर गया....भाभिजी तो मेरी तरफ ही देख रही है...कही इन्होने सुन तो नही लिया...''

शशांक : "सुन भी लिया तो कोई बात नही....वो इन बातों का बुरा नही मानती....हम दोनो इस मामले में काफ़ी ओपन है....''

कपूर साहब बोले : "तभी तो आपने कल भाभी जी को खुल्ले में ही....चोद डाला.... हा हा...''

सभी उनकी बात सुनकर हंस दिए....सबा भी.... चुदाई बातें इतने ओपन तरीके से शायद पहली बार हो रही थी

सबा तो शशांक और सुमन की हिम्मत देखकर हैरान हुए जा रही थी....की कैसे उन दोनो ने इतनी बड़ी बाल्कनी में नंगे खड़े होकर सैक्स किया...उसकी कल रात वाली चुदाई की बात तो इसके सामने कुछ भी नही है...

अचानक उसके मन में आया की वो भी ट्राइ करेगी...आज ही करेगी....राहुल के साथ...रात को...अपनी बालकनी में.

और ये सोचकर वो मंद मंद मुस्कुराने लगी....तभी एक बार फिर से शशांक उसके कान के पास आकर बोला : "मुझे पता है तुम क्या सोच रही हो....मुझे थॅंक्स कहने का यही तरीका है की आज तुम बाल्कनी में वो सब करना...और मैं भी सुमन के साथ वो करूंगा ..''

और इतना कहकर वो पीछे हो गया....सबा तो उसे देखती ही रह गयी की कितनी आसानी से इतनी बड़ी बात उसके पति के बॉस ने बोल डाली...उनका फ्लॅट भी गुरपाल वाली बिल्डिंग में ही था...यानी शशांक की बिल्डिंग के बिल्कुल सामने.

गुप्ता जी बोल पड़े : "अर्रे सरजी , सबा भाभी के कान में ही बताते रहोगे...हमे भी तो बताओ...कौनसी पोजीशन में किया सब...''

गुप्ता सोच रहा था की अभी तो इसे चढ़ी हुई है, शायद उकसाने पर और भी बातें उगल डाले

तभी पीछे से आवाज़ आई : "स्टेंडिंग ...डुग्गी स्टाइल "

ये सुमन की आवाज़ थी....जो कुछ ज़्यादा ही खुलकर बोल पड़ी थी अचानक...अपनी मंडली में एक और भाभी की इस तरह से एंट्री होती देखकर सभी बहुत खुश हुए....सबा भी उसकी हिम्मत देखकर हैरान रह गयी...

अचानक सुमन ने सबा की तरफ देखा और बोली : "ये तो तुम्हारी भी फ़ेवरेट पोज़िशन है ना...क्यों सबा''

बेचारी का चेहरा शर्म से लाल हो उठा....हाँ के अलावा वो कुछ बोल ही नही सकी...

सभी खुली आँखों से सुमन और सबा को डुग्गी स्टाइल में चुदते हुए देखने की कल्पना करने लगे

गेम तो जैसे रुक सी गयी थी....वो भी आगे बढ़ानी ज़रूरी थी...

कपूर साहब ने पत्ते पैक करते हुए कहा : "लो जी....मैं तो पेक होता हू.....मुझे नही लगता की इन पत्तो के साथ मैं जीत सकता हूँ ..वैसे भी माहोल इतना गर्म हो चुका है की गेम में तो कोई इंटेरेस्ट ही नही रह गया अब...''

सबने उसके पत्ते देखे...उनके पास 2,3 और बादशाह था....सबा की हिम्मत अब बढ़ चुकी थी...उसके पत्ते तो इनसे काफ़ी बेहतर थे.

2 पत्ते तो उसके भी छोटे थे...पर बादशाह की वजह से मारा गया था बेचारा....

गुप्ता जी ने फिर से चाल चल दी....बीच मे अब करीब 20 हज़ार आ चुके थे...

शशांक के दिमाग़ में जैसे कुछ प्लानिंग चल रही थी...उसका नंबर आया तो उसने एक पल के लिए सबा को देखा और उसे आँख मारते हुए पैक कर दिया..उसके ऐसा करने से पता नही सबा को ये क्यों लगा की उसने ऐसा जान बूझकर किया है और उसके पत्ते सबा से छोटे है...

सबा का नंबर आया तो उसने भी चाल चल दी..

इस बार गुरपाल चाल चलते हुए सोच रहा था...शायद उसके मन में भी दुविधा थी की वो चाल चले या पैक कर दे...

वो सोच ही रहा था की शशांक बोला : "सरदारजी ...आज तो आप पैक कर ही दो...सबा के काफ़ी बड़े और जानदार है...इनसे ना जीत पाओगे आप...''

ये बोलते हुए वो सबा के मुम्मों को घूर कर देख रहा था

एक बार फिर से द्विअर्थी संवाद सुनकर सबा मुस्कुरा दी...ऐसे शब्द उसे अंदर तक झंझोड़ जाते थे..

और इस बार, पता नही क्या जादू था शशांक की आवाज़ में , सरदारजी ने उसकी बात मानकर पैक कर दिया..

सबा का दिल अब जोरो से धड़कने लगा...अब सिर्फ़ वो और गुप्ता जी ही बचे थे....तीन लोग टेबल से पैक कर चुके थे...

गुप्ता जी ने इस बार चाल डबल करते हुए 4 हज़ार की कर दी..

अब तो सबा के माथे पर पसीना आ गया....उसे पक्का विश्वास हो रहा था की गुप्ता जी के पत्ते उससे छोटे ही होंगे...तभी वो इतने कॉन्फिडेंस से चाल को डबल कर रहे है...

वो भी सोचने लगी की चाल चले या पैक कर दे...और तभी राहुल बाहर आ गया... (चुदाई करके)....और उसे देखकर सबा की जान में जान आई...वो सीधा आकर सबा की बगल में बैठ गया...थोड़ी देर में डिंपल भी बाहर निकल आई... दोनो के चेहरे पर ताज़ा चुदाई की लाली सॉफ झलक रही थी ...उस लाली का राज शशांक और सुमन को तो अच्छी तरह से पता था ... लेकिन बाकी के सब लोग अंजान थे..

सबसे पहले तो राहुल ने माहौल का जायजा लिया, किसी को भी उसके उपर शक नही हुआ था...फिर उसने गेम के बारे में पूछा तो सबा ने सब बता दिया...बीच में पड़े पैसों का ढेर देखकर राहुल समझ गया की गेम काफ़ी आगे निकल चुकी है...इस गेम को जीत लिया तो उसके तो मज़े ही हो जाएँगे...लेकिन सामने गुप्ता जी बैठे थे, जो इस खेल के काफ़ी माहिर खिलाड़ी थे...

सबा ने राहुल को अपने पत्ते दिखाए और पूछा की अब वो क्या करे....राहुल ने उसे यही कहा की वो अपने दिल से खेले...पैसों की चिंता ना करे...क्योंकि अभी भी उनके पास काफ़ी पैसे थे, जो उन्होने कल जीते थे...

लेकिन अंदर से सबा को डर सा लग रहा था....एक मन कह रहा था की पैक कर दे और शो ना माँगे, कही ऐसा ना हो की शो माँगने के बाद वो पैसे भी जाए...लेकिन राहुल की बात से उसे थोड़ी हिम्मत मिली, उसने भी हिसाब लगाया कि शो माँगने के बाद भी उनके पास काफ़ी पैसे बचेंगे...इसलिए उसने भारी दिल से पैसे बीच में फेंकते हुए शो माँग लिया...

गुप्ता जी के चेहरे पर हँसी आ गयी...उन्होने अपने पत्ते बीच में फेंकने शुरू किए...

पहला पत्ता था 2

दूसरा था 3

इतने छोटे पत्तो के बाद तो कोई भी पत्ता आ जाए, 10 के अंदर का, वो ही जीतेंगे..

सभी की नज़रें गुप्ता जी पर थी...सबा भी मन ही मन कलमा पड़कर अपनी जीत की दुआ माँगने में लगी हुई थी...

और आख़िरकार थोड़ा सस्पेंस रखने के बाद गुप्ता जी ने अपना आख़िरी पत्ता भी नीचे फेंक दिया..

ये था इक्का...
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01-18-2019, 01:52 PM,
#17
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
यानी की उनके पास 1,2,3 का सीक़वेंस आया था..और वो भी मुफ़लिस वाली गेम में ..यानी वो ब्लफ खेल रहे थे.

उनके पत्ते देखकर राहुल ने खुशी के मारे सबा को गले से लगा लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा...

''ओह सबा.....माय डार्लिंग ....तुम जीत गयी....तुम जीत गयी ....''

सरदारजी ने सबा के पत्ते देखे और बोले : "अच्छा हुआ, मैने पैक कर दिया, वरना बेकार में मारा जाता...''

उन्होने बताया की उनके पास सबसे बड़ा पत्ता J था.

सभी लेडीज़ भी वहीं आ गयी...सभी सबा को उसकी पहली गेम जीतने की बधाई दे रही थी...

पर सबा का सारा ध्यान शशांक के उपर था...जो बड़ी रहस्यमयी मुस्कान के साथ अपने पेग के सीप लगा रहा था...

अब कल की गेम की डिस्कशन होने लगी...डिंपल ने खाना लगा दिया था...सभी खाना खाते हुए अगले दिन की गेम के बारे में बाते करने लगे...जो कपूर साहब के घर पर थी.

सबा के मन में काफ़ी देर से जो सवाल था, उसके लिए वो वापिस टेबल पर गयी और शशांक के पत्ते पलट कर देखे...और उन्हे देखकर वो चकित रह गयी...वो सच में उससे छोटे थे...सबसे बड़ा पत्ता उनके पास 8 आया था...यानी वो चाहते तो आगे खेलकर जीत सकते थे...सिर्फ़ सबा को जिताने के लिए उन्होने पैक कर दिया...वो मन ही मन उन्हे फिर से थेंक्स बोलने लगी..

फिर उसके मन में आया की अब तो उन्हे उनके तरीके से ही थेंक्स बोलेगी, जैसा उन्होने बोला था...पर क्या राहुल इसके लिए तैयार होगा...

सबा को इसके लिए काफ़ी मेहनत करनी थी.


लेकिन वो ये नही जानती थी की शशांक ने उसका भी हल ढूँढ लिया है..उसने पहले से ही अपनी वाइफ सुमन को इस काम पर लगा दिया...इसलिए, जब सभी लोग खाना खा रहे थे तो सुमन चुपचाप उठकर राहुल की तरफ गयी, जो अपनी खाने की प्लेट में कुछ डाल रहा था.

सुमन : "सो, मिस्टर.राहुल, कैसा लगा....मज़ा आया ना एक ही दिन में अपनी सोसायटी की 2-2 भाभियों की चुदाई करने में ...''

राहुल उसे इतने खुले तरीके से बोलता देखकर शरमा सा गया.

सुमन : "मेरे साथ रहना है तो ये शरमाना तो छोड़ ही दो...मुझ जैसे बेशरम बनकर रहोगे तो फ़ायदे में रहोगे...''

राहुल : "कैसा फ़ायदा ...''

सुमन : "अभी तो शुरूवात हुई है राहुल...अभी तो और भी भाभीयां और कुँवारी लड़कियाँ है इस सोसाइटी की,जो तुम्हारे इस लंबे लंड को अपने अंदर लेने के लिए तैयार हो सकती है...बस मेरी तरह बेशरम बन जाओ...''

राहुल तो सोसायटी की दूसरी भाभियो और कुँवारी लड़कियों के बारे में सोचकर ही उत्तेजित हो उठा..

सुमन आगे बोली : "अब काम की बात सुनो...आज रात को तुम अपनी वाइफ के साथ बाल्कनी में आना...''

राहुल : "बाल्कनी में ....वो क्यों ..''

सुमन : "तुम्हे कुछ दिखाना है...11 बजे आ जाना...पता चल जाएगा...''

और वो उसके मन में जिज्ञासा जगा कर वापिस चली गयी...राहुल बेचारा मुँह खोले वहीं खड़ा होकर सोचता रह गया की ऐसा क्या दिखाने को कह रही है सुमन भाभी...

खैर, कुछ ही देर में सभी ने खाना ख़त्म किया और अपने-2 घर चल दिए...

सरदारजी ने तो आज सोच ही लिया था की बाल्कनी में ही चुदाई करेंगे...वो इस मामले में शशांक से पीछे नही रहना चाहता था...

सबा को भी पता था की आज बाल्कनी में क्या होने वाला है...लेकिन वो राहुल को समझाने के लिए परेशान हुए जा रही थी...वो ये नही जानती थी की वो काम सुमन ने पहले ही कर दिया है..

रात को जब कपड़े बदल कर सबा बाथरूम से आई तो उसने फिर से अपनी फ़ेवरेट गुलाबी नाईटी पहन रखी थी...वो ये नाईटी अक्सर तभी पहनती थी जब वो खुद पहले से चुदने की तैयारी करके आई हो...

राहुल भी उसकी दिन ब दिन बाद रही सेक्स की भूख देखकर हैरान हो रहा था....उसके दोस्तो ने बताया तो था की शादी के कुछ टाइम बाद लड़की में चुदासी पूरी तरह से जाग जाती है और वो खुलकर इस खेल में उतर जाती है...यही हाल आजकल सबा का हो रहा था...दिन ब दिन उसका रूप और शरीर निखर रहा था और सेक्स की भूख भी बड़ रही थी...राहुल को इससे कोई परेशानी नही थी..बल्कि उसे तो इसमें बहुत मज़ा आ रहा था...बस उसे इस बात का अंदाज़ा नही था की उसकी बीबी की ये भूख उसे कहां तक ले जाएगी..

राहुल बेड पर बैठकर उसे शीशे के सामने क्रीम लगाते हुए देखने लगा.....11 भी बज चुके थे...सुमन भाभी ने उसे बाल्कनी में बुलाया था और यहाँ सबा चुदने के मूड में थी...राहुल तो दुविधा में पड़ गया...

वो सोच ही रहा था की बालकनी में जाने का क्या बहाना बनाए की तभी सबा बोल पड़ी : "राहुल...चलो ना...बाहर चलते है...बाल्कनी में ...काफ़ी अच्छी हवा चल रही है..''

राहुल तो एकदम खुशी से उछल पड़ा....जो बात वो करने से हिचकिचा रहा था,वो सबा ने खुद ही कर दी...वो तुरंत खड़ा हो गया और सबा के साथ बाहर निकल आया..

बाहर आते ही राहुल की नज़रें सबसे पहले सुमन भाभी के फ्लेट की तरफ गयी...पर वहां तो कोई भी नही था..

सबा ने भी तिरछी नज़रों से देख लिया था...शशांक अभी तक नही पहुँचा था वहां ..

लेकिन अंदर ही अंदर राहुल और सबा तो सैक्स के लिए तैयार ही थे...इसलिए दोनो एक दूसरे से चिपक कर खड़े हो गये ...और बाते करने लगे..राहुल ने सबा को पीछे से पकड़ रखा था...और दोनो नीचे देख रहे थे...पूरे कॉंप्लेक्स में सन्नाटा था...सब सो चुके थे...राहुल के हाथ सबा के उरोजों पर फिसल रहे थे और उसके लंड ने उसकी गांड की घिसाई शुरू कर दी.

सबा: "राहुल...ये दीवाली के जुए की वजह से हमारी फाइनेंशल कंडीशन कितनी अच्छी हो गयी है....इतने पैसे तो पूरा महीना जॉब करके भी नही मिलते तुम्हे ,जितना आज हमने जीत लिया..''

राहुल (उसके निप्पल्स को मसलते हुए) : "हमने नही...ये तो तुमने जीते है....अब हम दोनो वर्किंग कपल बन चुके है...''

दोनो इस बात पर हंस दिए.

राहुल : "लेकिन एक बात तो है...तुम्हारा लॅक काफ़ी अच्छा है...मैं तो कहता हूँ कल भी तुम ही खेलना...मुझे नही लगता की कोई मना करेगा....''

सबा ने मन में सोचा 'वो साले तो मरे जा रहे है मेरे साथ खेलने के लिए...मना करने का तो सवाल ही नही है..'

पर वो बस मुस्कुरा कर रह गयी...वो भी जानती थी की उसके लॅक से ज़्यादा उसे जिताने में शशांक का हाथ है...और उसी के एहसान का बदला चुकाने के लिए तो वो यहाँ खड़ी थी इस वक़्त..लेकिन वो अभी तक आए क्यो नही...

सबा ने एक बार फिर से उनकी बाल्कनी की तरफ देखा..वो अभी तक नहीं आये थे .

लेकिन तभी उन दोनो को गुरपाल सिंह की आवाज़ सुनाई दी...वो उनके नीचे वाले फ्लेट में ही रहते थे...इसलिए वो जब बालकनी में आए तो उनकी बातों की आवाज़ें उन्हे सुनाई देने लगी...राहुल और सबा ने नीचे देखा तो डिंपल भी वहीं थी...और दोनो एक दूसरे से कुछ देर तक बाते करने के बाद एक गहरी स्मूच में डूब गये..

राहुल और सबा ने अपनी हँसी दबाते हुए एक दूसरे को देखा और फिर छुपकर नीचे देखने लगे..

सभी की बाल्कनी में काफ़ी अंधेरा था...लेकिन गौर से देखने पर सब कुछ सॉफ देखा जा सकता था....और वैसे भी ये तो उनके नीचे वाली बाल्कनी में थे...राहुल को ऐसा लग रहा था जैसे वो सिनेमा हॉल में बाल्कनी की टिकट लेकर बैठे है और उन दोनो की चुदाई की फिल्म देखने आए है.

सरदारजी ने एक मिनट के अंदर ही डिंपल का गाउन उतार फेंका और उसे नंगा कर दिया...और अपना पायजामा नीचे करके उसे अपना लंड चूसने बिठा दिया.

सबा ने जब डिंपल को नंगा होते देखा तो उसने मज़ाक में राहुल की आँखे ढकनी चाही , और उसके कान में फुसफुसाई ''गंदे बच्चे ...बंद करो अपनी आँखे...डिंपल भाभी को ऐसे मत देखो तुम....''

राहुल ने अपने होंठ दांतो के नीचे दबाते हुए कहा : "तुम भी तो देख रही हो...सरदारजी को ऐसे ... नंगा ......मैने मना किया क्या...''

उसकी बात सही थी...सबा ने जब सरदारजी के खूंखार लंड को देखा तो एक पल के लिए तो वो साँस लेना ही भूल गयी...कुछ ज़्यादा ही मोटा और लंबा था उनका लंड ...और एकदम काला...जिसे डिंपल सरदारनी बड़े मज़े ले-लेकर चॉकलेट आइस्क्रीम की तरह चूस रही थी..

राहुल का लंड भी एकदम कड़क हो चुका था...वो सरदारनी के लंड चुसाई के तरीके को देखकर अच्छी तरह से अंदाज़ा लगा सकता था की इस वक़्त गुरपाल को कितना मज़ा आ रहा होगा...क्योंकि कुछ समय पहले वही सरदारनी उसके लंड को भी ऐसे ही चूस चुकी थी...

राहुल ने अपना खड़ा हुआ लंड सबा की गांड पर टिका दिया...उसे लग रहा था की सबा उसे मना करेगी..लेकिन उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहा जब सबा ने अपनी शॉर्ट नाइटी को अपनी गांड वाले हिस्से से उपर कर दिया और अपने नंगे कूल्हे राहुल के लंड वाली जगह पर रगड़ने लगी..

मतलब सॉफ था, सबा की चूत में भी वही आग लगी हुई थी जो इस वक़्त राहुल के लंड में थी...राहुल ने भी बिना कोई देरी किए अपना पायज़ामा नीचे खिसका दिया और अपने नंगे लंड को उसकी डनलप गद्दे जैसी गांड के उपर रखकर रगड़ने लगा...

सबा के मुँह से सिसकारी निकल गयी...

आज गुरपाल के साथ-2 उनकी बाल्कनी में भी एक तूफान आने वाला था...और शायद उन दोनो के साथ-2 शशांक और सुमन की बाल्कनी में भी...क्योंकि वो भी अब बाहर आ चुके थे..और वो भी नंगे। 



राहुल ने अपने लंड पर थूक लगाई और उसे सबा की चूत पर रखकर धीरे से धक्का दिया...कुछ धक्का सबा ने भी लगाया ..और दोनो की मेहनत पहले शॉट में ही रंग लाई और वो लंड एक ही बार में सनसनाता हुआ अंदर घुसता चला गया...

''आआआआआआआआहह...........सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......म्*म्म्मममममम....''

मादकता में डूबकर सबा की आँखे बंद होती चली गयी....और जब वो खुली तो उसकी नज़र सबसे पहले शशांक की बाल्कनी में गयी...और वहां शशांक अपनी बीबी के सुमन के साथ बड़े ही मज़े से उन्हे देख रहा था...और सबसे बड़ी बात, वो दोनो भी नंगे थे इस वक़्त और एक दूसरे से चिपककर उन दोनो का खेल देख रहे थे...

ये वो पल था जब सबा अपने आप को किसी वाइल्ड क्वीन से कम नही समझ रही थी....ऐसा ही कुछ करने की ना जाने कब से तमन्ना थी उसके दिल में ..कुछ घरवालों के संस्कार, कुछ लोगो का डर , और बाकी अपनी इज़्ज़त खोने का ख़तरा...

पर इस वक़्त खुले में अपनी चुदाई करवाते हुए उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो सभ्य समाज में नही बल्कि आदिवासी जिंदगी का हिस्सा है...जहाँ सब लोग नंगे होते है, किसी को नंगा होने में या खुले में चुदाई करवाने में शर्म नही आती....

सबा ने राहुल के लंड को अपनी चूत की ओखली में जकड़कर एक जोरदार ढंग से अंगड़ाई ली और अपना टॉप उपर की तरफ खिसका दिया...और इतना खिसकाया की उसके मुम्मे एक पल के लिए नंगे होकर शशांक की आँखो में चमक गये...
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01-18-2019, 01:52 PM,
#18
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
ये वही मुम्मे थे जिन्हे बेपर्दा देखने की उसमें ना जाने कब से इच्छा थी ....राहुल को अपनी सोसायटी में फ्लेट दिलवाना और जुए के खेल में शामिल करने के पीछे इन्ही निगोडे मुम्मो का हाथ था, जिन्हे पहली बार में ही देखकर शशांक का लंड 3 दिन तक अकड़ कर खड़ा रहा था...जैसे छोटा बच्चा ज़िद पकड़ लेता है किसी चीज़ की,ठीक उसी तरह से शशांक के छोटे सिपाही ने उससे ये सब करवा लिया....और आज उसका फल जब सबा ने इस तरह से दिया तो उसके लंड की खुशी का ठिकाना नही रहा..वो सुमन के पीछे गया और उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसे चोदते हुए बोला : "हर औरत में एक रंडी छिपी होती है, बस उसे बाहर निकालने वाला चाहिए...''

सुमन मुस्कुरा दी....क्योंकि वो भी जानती थी की उसके पति की बात बिल्कुल सही है.

नीचे से डिंपल सरदारनी की भी एक मदमस्त भरी सिसकारी गूँज उठी....सरदारजी ने उसे भी घोड़ी बना कर बाल्कनी पर टीका दिया था...अब तीनों बाल्कनी में चुदाई का नंगा खेल चल रही थी...

अचानक गुरपाल ने धीमी पर सुनने लायक आवाज़ में शशांक को पुकारा...

''ये लो पाजी, असी वी आ गये इस खेल विच.....''

गुरपाल की आवाज़ सुनते ही राहुल को झटका सा लगा...वो राहुल के बॉस से बात कर रहा था...उसकी नज़र सीधा अपने बॉस की तरफ गयी, और सुमन के साथ शशांक को भी वहां पाकर वो सकते में आ गया.

उसने तो सोचा था की सिर्फ़ सुमन ही आएगी, लेकिन ये तो अपने पति को भी साथ ले आई...राहुल ने लंड पेलना बंद कर दिया...और जैसे ही अपने लंड को बाहर निकालने लगा,सबा ने उसे रोक दिया और बोली : "क्या हुआ....निकल क्यो रहे हो...करते रहो ना...अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ है...''

राहुल : "वो...वो ......बॉस और उनकी वाइफ भी वहां खड़े है....और मैं नही चाहता की....की ...मेरे बॉस तुम्हे ....इस तरह से.....देखे....''

ये सुनते ही सबा को गुस्सा आ गया,उसने खुद उसके लंड को बाहर निकाल दिया और वो राहुल की तरफ पलटी और बोली : "तुम मर्दों की यही प्राब्लम है....दूसरे की बीबी देखकर तुम्हे मज़ा आता है और तुम्हारी बीबी को कोई देखे तो प्राब्लम है...अभी तुम डिंपल भाभी को भी वो सब करते हुए देख ही रहे थे ना...मैने तो कुछ नही कहा...और वहां भी तो सुमन भाभी नंगी खड़ी है, उन्हे भी तुमने देख ही लिया है...पर तुम्हारे बॉस को मैं इस हालत में दिख रही हू तो तुम्हे मिर्ची लग रही है...''

सबा का ये रूप देखकर राहुल हैरान रह गया....आज से पहले उसने ना तो इस तरह की कोई हरकत की थी और ना ही उसके साथ इतनी तेज आवाज़ में बात की थी...उसकी समझ में नही आ रहा था की वो क्या बोले..

राहुल : "पर....वो .....अलग बात है....कोई तुम्हे देखे ....ये देखकर मुझे शायद यही करना चाहिए...नही करूँगा तो तुम मुझे पता नही क्या समझोगी...''

सबा एकदम से शांत हो गयी और उसकी टोन भी बदल गयी...शायद उसे एहसास हो गया था की उसने कुछ ज़्यादा ही रिएक्ट कर दिया है..

वो राहुल के पास आई और बड़े ही प्यार से उसके गालो पर हाथ रखकर बोली : "तुम ऐसा इसलिए कर रहे हो राहुल क्योंकि शुरू से ही तुम्हे इस माहौल में रखा गया है...और मुझे भी...लेकिन आज मुझे ये सब ओपन में करते हुए ऐसा लग रहा है जैसे मैने बरसो पुरानी जंजीरो को तोड़ दिया है...और तुम मानो या ना मानो, पर मुझे इसमे बहुत मज़ा आ रहा है...''

राहुल अपनी आँखे फाड़े उसे देखता रह गया.

सबा : "हाँ , ये बात सही है की मुझे सेक्स पसंद है, और तुमने शादी के बाद मुझे जिस तरह के एहसास दिए है,उनका कोई मुकाबला नही है...पर ...अब शायद मेरा दिल हर तरह के एक्सपीरिएंस करना चाहता है...जो मेरे मन में चलता रहता था वो सब सही में होते हुए देखना चाहता है....और इसमे मुझे तुम्हारा साथ चाहिए...''

बेचारा राहुल अभी तक बुत्त बना खड़ा था..

सबा : "देखो राहुल, मैं तुम्हारी मर्ज़ी के बिना तो कुछ करूँगी नही...लेकिन तुम अगर मुझे ये खुशी दे सकते हो तो मेरे लिए इससे बढ़कर और कुछ नही होगा...और मैं भी तुम्हारी किसी भी बात के लिए मना नही करूँगी और ना ही तुम्हे कुछ भी करने से रोकूंगी ...''

ये सुनते ही राहुल की आँखे चमक उठी...

आख़िर यही लाइफ तो वो भी चाहता था....और अपनी बीबी से छुपकर वो भी तो ये सब कर ही रहा था...उसे तो खुद ही डर था की सबा को ये सब पसंद नही आएगा, उसे पता चला तो वो क्या सोचेगी...लेकिन उसके मन में भी ये सब चल रहा है, ये सुनकर वो अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ...और उपर से सबा ने लास्ट में ये बात बोलकर उसे वो खुशी दे डाली थी, जिसकी उसे पिछले 6 महीनो से तलाश थी..

जी हाँ दोस्तो, वो खुशी थी सबा की गांड .

वो कब से उसे गांड मरवाने के लिए बोल रहा था, एक-दो बार ट्राइ भी किया था, पर उसे इतना दर्द हुआ था की उसने कभी भी गांड ना मरवाने की कसम खा ली थी.

बस राहुल को एक ही बात खटक रही थी की उसके बॉस अब उसकी बीबी को इस तरह से देखेगा, जैसे वो इस वक़्त सरदारनी को देख रहे थे...वो खुद भी जानता था की उसकी बीबी की सुंदरता और सेक्स का मुकाबला तो सोसायटी की कोई भी औरत नही कर सकती, और अगर वो इन भूखे भेड़ियो के सामने इस तरह से अपने शरीर की नुमाइश करेगी तो वो दिन भी दूर नही जब वो सब मिलकर उसके नाज़ुक जिस्म को नोच खाएँगे...लेकिन जब सबा को खुद ही इन सबमे मज़ा आ रहा है तो वो कौन होता है मना करने वाला, उसे भी तो खुलकर सभी भाभियों की चूत की मलाई खाने को मिलेगी ..

उसने सबा के हाथ को पकड़कर वापिस अपने लंड पर रख दिया और मुस्कुरा कर बोला : "डार्लिंग, अगर तुम्हे इन सबमे खुशी मिलती है तो मुझे भी कोई प्राब्लम नही है...''

राहुल का इतना कहना था की खुशी के मारे सबा ने उसके लंड को पकड़कर मरोड़ डाला...और उछलकर उसके गले लग गयी...

दूर अपनी बाल्कनी में खड़े शशांक और सुमन उनकी इतनी देर से हो रही बहस को देखकर परेशान हो रहे थे की कही उनका प्लान बिगड़ तो नही गया..लेकिन फिर इस मिलन को देखकर वो समझ गये की सबा ने सब संभाल लिया है...

शशांक ने देखा की अब राहुल उनकी ही तरफ देखकर मुस्कुरा भी रहा है..मतलब सॉफ था, उसे अब अपनी बीबी को सरेआम नंगा दिखाने में कोई दिक्कत नही थी...शशांक ने अपना अंगूठा उपर करके उसे ऑल द बेस्ट कहा और एक बार फिर से अपनी बीबी की चुदाई में लग गया...

शशांक को इशारा करते देखकर नीचे वाली बाल्कनी में खड़ा गुरपाल सिंह भी समझ गया की उपर वाले पोरशन में राहुल और सबा भी चुदाई चल रही है...वो बोला : "ओ राहुल भाई....तू भी लगा हुआ है उपर...और वहां शशांक और सुमन भाभी भी....और इत्थे मैं वि ...ऐसा महॉल बड़ी मुश्किल से बनता है हा हा...''

सबा ने मुस्कुराते हुए नीचे देखा और बोली : "ऐसा महॉल अब अक्सर बना करेगा सिंह साहब ...''

सबा के सेक्सी चेहरे को देखकर, उसके मुंह से अपना नाम सुनकर और उसकी आँखो को अपने लंड की तरफ घूरते पाकर, सरदारजी की ठरक आसमान छू गयी और उन्होने अपने लंड पर ढेर सारा थूक मलकर बुरी तरह से एक बार फिर डिंपल की चूत में पेल दिया...

राहुल उसके कंधे पर झुका और फुसफुसाया.. : "तुम्हे ये सब पसंद है ना...तो आज से तुम मेरी सैक्स स्लेव हो....और जो मैं कहूँगा वही तुम करोगी...समझी....''

सबा : "यस मास्टर...''

राहुल ने उसकी गांड के छेद को टटोला और अपनी उंगली उसमे घुसा दी और बोला.. : "मुझे तुम्हारी गांड मारनी है....''

सबा का शरीर उपर से नीचे तक काँप उठा...शायद वो जानती थी की वो यही बोलेगा, लेकिन राहुल को वो अब किसी भी बात के लिए मना नही कर सकती थी...इसलिए धीमी सी आवाज़ में वो बोली : "यस मास्टर....आप मेरी गांड भी मार सकते हो....लेकिन ....यहाँ नही....अंदर जाने के बाद...अभी के लिए तो आप मेरी चूत मारो....देखो....जैसे सरदारजी मार रहे है अपने लंबे लंड से....डिंपल भाभी की....और उधर आपके बॉस भी किसी मशीन की तरह सुमन भाभी को चोद रहे है....मुझे भी ऐसे ही चोदो ...ज़ोर-2 से....दम लगा के....''

डिंपल की जबरदस्त चुदाई देखकर तो राहुल भी उत्तेजना के शिखर पर पहुँच चुका था...सुमन तो अपने मुम्मे भी बाहर की तरफ लटकाकर अच्छे से चुद रही थी...और उपर से सबा की गांड मरवाने की रज़ामंदी ने भी राहुल के लंड को एक अलग ही उँचाई पर पहुँचा दिया था...ऐसे में सबा की लरच रही चूत ने जब उसके लंड को अपनी तरफ बुलाया तो वो किसी पालतू कुत्ते की तरह उसकी तरफ खींचता चला गया...और एक बार फिर से घपप की तेज आवाज़ के साथ वो उसके अंदर दाखिल हो गया.

''उम्म्म्मममममममममममममममममममम...... ओह .....एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....''

इस बार की सिसकारी पहले से काफ़ी तेज थी.....जिसे सरदरजी और डिंपल ने भी सुना...और मुस्कुरा दिए..

सबा ने शशांक की तरफ देखते हुए अपनी एक उंगली को मुँह में रखा और जोरों से चूसने लगी....शशांक को तो ऐसा लगा जैसे वो उसके लंड को चूसने का इशारा कर रही हो...

और फिर सबा ने वो किया जिसकी शायद इस वक़्त राहुल को भी आशा नही थी....उसने अपना टॉप एक ही झटके में उतार फेंका और वो पूरी नंगी होकर अपने मोटे-2 मुम्मे चाँद की तेज रोशनी में सभी को दिखाने लगी...



शशांक तो उसके सफेद तरबूजों को देखकर बेहोश होते-2 बचा....सच में कमाल के थे उसके मुम्मे ....जितने बड़े थे उतने ही कठोरता लिए तनकर खड़े थे वो...

उसकी योजना अब सफल होती दिख रही थी. 
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01-18-2019, 01:52 PM,
#19
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
शशांक थोड़ा सा झुका और उसने अपनी वाइफ सुमन के कान में कुछ कहा..जिसे सुनकर वो मुस्कुरा दी.

और फिर राहुल को देखकर बोली : "राहुल...क्यो ना तुम लोग यहीं आ जाओ...लेट्स हेव पार्टी हेयर ...''

उसका इतना टेंप्टिंग सा ऑफर सुनकर तो राहुल का दिल खुशी से पागल हो उठा...काफ़ी देर से सुमन भाभी की चुदाई देखकर और उनके हिलते हुए मुम्मे देखकर उसके मुँह में भी पानी आ रहा था...उसने सबा की तरफ देखा..शायद राहुल को डर था की वो मना ना कर दे...क्योंकि इस तरह दूर रहकर अपनी सेक्स की फिल्म दिखाना दूसरी बात थी और वहां जाकर एक दूसरे के सामने सब कुछ करना दूसरी बात..

राहुल : "बोलो सबा...क्या कहती हो...चला जाए क्या वहां ...''

वो उसका मन टटोल रहा था..लेकिन वो ये नही जानता था की राहुल से ज़्यादा एक्साइटिमेंट तो सबा को हुई थी ये बात सुनकर...

वो बोली : "जैसा मेरे मास्टर कहेंगे...मैं वैसा ही करूँगी...''

ओ तेरी ....ये मास्टर-स्लेव वाली बात तो राहुल भूल ही गया था....सबा की ये बात सुनकर उसका चेहरा खिल उठा.

उसने तुरंत अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और बोला : "चलो फिर...चलते है....एक और पार्टी में ...आफ्टर पार्टी में ..''

वो भी मुस्कुरा दी और अपने मालिक की आज्ञा का पालन करती हुई बाहर की तरफ चल दी.

शशांक ने गुरपाल और डिंपल को भी अपने घर बुला लिया...दोनो ने कुछ देर तक ख़ुसर फुसर की और फिर वो दोनो भी शशांक और सुमन के घर की तरफ चल दिए...

आज राहुल और गुरपाल ने अपनी लाइफ का ऐसा डिसीज़न लिया था जिसके बाद उनकी सेक्स लाइफ हमेशा के लिए बदलने वाली थी.

सबा ने अपनी वही नाईटी पहने रखी, जिसमें उसका आधे से ज़्यादा नंगा बदन सॉफ दिख रहा था...और वो भी बिना ब्रा और पेंटी के..राहुल ने अपने शॉर्ट्स के उपर एक टी शर्ट डाल ली और वो दोनों शशांक के घर की तरफ चल दिए..

उधर डिंपल ने भी सिर्फ़ एक लंबी सी नाईटी पहनी हुई थी, उसके अंदर कुछ भी नही...वो एकदम ट्रांसपेरेंट थी, जिसके अंदर उसका रसीला बदन सॉफ चमक रहा था.

गुरपाल ने तो अपने बदन पर सिर्फ़ लुंगी और बनियान ही पहन ली और चल दिया उनके घर...

आज राहुल और गुरपाल के मन में एक बात तो काफ़ी क्लियर थी की उनकी बीबी को दूसरे मर्द आज खुलकर देखेंगे...लेकिन इस बात की खुशी भी थी की वो दूसरे की बिबियों को जी भरकर देख भी सकेंगे...

पूरी कॉलोनी में सन्नाटा था...इसलिए ऐसे कपड़ो में उन्हे बाहर निकलते हुए डर भी नही लगा..वो नंगे भी चले जाते तो कोई देखने वाला नहीं था उन्हें।

सबसे पहले सबा और राहुल वहां पहुँचे...दरवाजा सुमन ने खोला, उसने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी पहन रखी थी...राहुल की आँखे उसके इस सेक्सी बदन को देखकर चमक उठी.



वो दोनो अंदर आ गये....अंदर आते हुए राहुल ने उसकी गांड पर अपने हाथ फेर दिए,जिसे महसूस करके सुमन भी मुस्कुरा दी...सबा ने भी अपने पति की ये हरकत कनखियो से देख ली थी, पर वो कुछ बोली नही...और ना जाने एकदम से उसके दिमाग़ में ये बात आ गयी की हो ना हो, सुमन भाभी उसके पति से पहले भी चुदवा चुकी है..

दोनो अंदर आकर बैठ गये...और अगले ही पल गुरपाल और डिंपल भी वहां पहुँच गये...सभी ड्रॉयिंग रूम के सोफे पर बैठ गये..

राहुल और गुरपाल अपनी-2 वाइफ को लेकर थोड़ा चिंतित से हो रहे थे...और उनकी ये परेशानी शशांक ने उनके चेहरे पर पड़ ली.

शशांक : "देखो दोस्तो...आजकल की लाइफ में ये सब चलता है....मीन्स इस तरह से ओपन रिलेशनशिप ...मुझे तो अपनी वाइफ के किसी भी अफेयर से कोई प्राब्लम नही है...और यही छूट उसने भी मुझे दे रखी है...और अभी कुछ देर पहले जो हम सब बाल्कनी में कर रहे थे, उसके बाद मुझे लगा की शायद तुम लोगो के विचार भी हम से मिलते है...इसलिए तुम्हे यहाँ बुला लिया...''

इतनी देर मे सुमन सबके लिए ड्रिंक्स ले आई....ये वोड्का के शॉट्स थे...सभी ने छोटे-2 ग्लास उठाए और एक साथ चियर्स बोलकर बॉटम अप कर दिया और नमक चाट कर हाथ में पकड़ा नींबू चूस डाला...और उस शॉट ने एकदम से सभी के दिमाग़ से वो तनाव दूर फेंक दिया...और सभी हल्के मूड में आ गये...

शशांक जानता था की एकदम से तो कोई भी ग्रूप सेक्स या वाइफ स्वेपिंग के लिए राज़ी नही होगा, इसलिए शुरूवात तो अपनी-2 बीबी से ही करनी पड़ेगी.

उसने सुमन को इशारा किया और वो किसी पालतू कुतिया की तरह उसके कदमो में आकर बैठ गयी...और फिर शशांक ने बड़ी ही बेशर्मी से अपनी शॉर्ट्स को नीचे करके अपना लंबा और मोटा लंड बाहर निकाल लिया...सबा और डिंपल ने अपने होंठों पर जीभ फेरी उसे देखकर...शायद वो भी उसे मुँह में लेने के सपने देख रही थी..लेकिन अभी के लिए तो वो मज़ा सिर्फ़ सुमन के हिस्से में था....

सबसे पहले सबा और राहुल वहां पहुँचे...दरवाजा सुमन ने खोला, उसने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी पहन रखी थी...राहुल की आँखे उसके इस सेक्सी बदन को देखकर चमक उठी.



वो दोनो अंदर आ गये....अंदर आते हुए राहुल ने उसकी गांड पर अपने हाथ फेर दिए,जिसे महसूस करके सुमन भी मुस्कुरा दी...सबा ने भी अपने पति की ये हरकत कनखियो से देख ली थी, पर वो कुछ बोली नही...और ना जाने एकदम से उसके दिमाग़ में ये बात आ गयी की हो ना हो, सुमन भाभी उसके पति से पहले भी चुदवा चुकी है..

दोनो अंदर आकर बैठ गये...और अगले ही पल गुरपाल और डिंपल भी वहां पहुँच गये...सभी ड्रॉयिंग रूम के सोफे पर बैठ गये..

राहुल और गुरपाल अपनी-2 वाइफ को लेकर थोड़ा चिंतित से हो रहे थे...और उनकी ये परेशानी शशांक ने उनके चेहरे पर पड़ ली.

शशांक : "देखो दोस्तो...आजकल की लाइफ में ये सब चलता है....मीन्स इस तरह से ओपन रिलेशनशिप ...मुझे तो अपनी वाइफ के किसी भी अफेयर से कोई प्राब्लम नही है...और यही छूट उसने भी मुझे दे रखी है...और अभी कुछ देर पहले जो हम सब बाल्कनी में कर रहे थे, उसके बाद मुझे लगा की शायद तुम लोगो के विचार भी हम से मिलते है...इसलिए तुम्हे यहाँ बुला लिया...''

इतनी देर मे सुमन सबके लिए ड्रिंक्स ले आई....ये वोड्का के शॉट्स थे...सभी ने छोटे-2 ग्लास उठाए और एक साथ चियर्स बोलकर बॉटम अप कर दिया और नमक चाट कर हाथ में पकड़ा नींबू चूस डाला...और उस शॉट ने एकदम से सभी के दिमाग़ से वो तनाव दूर फेंक दिया...और सभी हल्के मूड में आ गये...

शशांक जानता था की एकदम से तो कोई भी ग्रूप सेक्स या वाइफ स्वेपिंग के लिए राज़ी नही होगा, इसलिए शुरूवात तो अपनी-2 बीबी से ही करनी पड़ेगी.

उसने सुमन को इशारा किया और वो किसी पालतू कुतिया की तरह उसके कदमो में आकर बैठ गयी...और फिर शशांक ने बड़ी ही बेशर्मी से अपनी शॉर्ट्स को नीचे करके अपना लंबा और मोटा लंड बाहर निकाल लिया...सबा और डिंपल ने अपने होंठों पर जीभ फेरी उसे देखकर...शायद वो भी उसे मुँह में लेने के सपने देख रही थी..लेकिन अभी के लिए तो वो मज़ा सिर्फ़ सुमन के हिस्से में था....

गुरपाल ने भी डिंपल के गाउन को पकड़कर उपर खींचना शुरू कर दिया...और धीरे-2 उसके सिर से घूमकर निकल फेंका...और अब वो पूरी नंगी होकर बड़ी ही बेशर्मी से किसी और के घर बैठकर, अपने पति का लंड चूस रही थी...और वो इस बात से अंजान नही थी की उसकी मोरनी की तरह उभरी हुई नंगी गांड को इस वक़्त शशांक और राहुल सॉफ-2 देख पा रहे है...



राहुल भी अब इस खेल में पीछे नही रहना चाहता था...उसने सबा को अपना लंड चूसने से रोका और उसे भी कपड़े उतारने के लिए कहा...

सबा के लिए ये पल ऐसा था जिसमे वो अपनी लाइफ के उन पलों को जी लेना चाहती थी जिसमे वो इस तरह के एग्ज़ोटिक आइडियास सोचा करती थी...वो अपने बदन को मटकाती हुई खड़ी हुई और धीरे-2 अपने शरीर को किसी क़ेबरे डाँसर की तरह लहराते हुए उसने अपनी टॉप को उतार दिया...

उसे इतने करीब से टॉपलेस देखकर एक बार फिर से शशांक कराह उठा...उसका मन तो कर रहा था की अपना लंड इसी वक़्त उसकी चूत में दे मारे...पर उसने बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किया हुआ था...उसके बाद सबा ने अपनी नन्ही सी शॉर्ट भी नीचे गिरा दी...और इस वक़्त वो अपने दमकते हुए नंगे शरीर की नुमाइश बड़ी ही बेशर्मी से करके बड़ी ही शान से खड़ी थी.



गुरपाल ने भी इतनी गोरी और सेक्सी औरत अपनी लाइफ में नही देखी थी....सबा को देखकर अक्सर उसके लंड में भी उम्मीदे जागा करती थी, और उसे अब इतने करीब से नंगा देखकर अंदर ही अंदर उसे चोदने की इच्छा भी बलवंत होने लगी...चाहे इसके लिए उसे अपनी बीबी को राहुल से चुदवाना ही क्यो ना पड़े..

बस उसे डर था की ऐसी अदला बदली उसकी बीबी को पसंद आएगी या नही...और अगर आ भी गयी तो राहुल और सबा भी इसके लिए राज़ी होंगे या नही...

इस तरह से खुलकर सेक्स करने के लिए और वाइफ स्वेपिंग के लिए शशांक ने उसे करीब 6-7 महीने पहले बातों ही बातों में बोला था...उस वक़्त तो गुरपाल ने उसे ये कहकर चुप करवा दिया था की वो इन बातों से दूर ही रहता है..लेकिन आज उसी शशांक के घर बैठकर ये सब करते हुए वो समझ चुका था की शशांक की वो बात कितनी सही थी की इन सबमे बहुत मजा आता है, मियां को भी और बीबी को भी ...और उन दोनो मियाँ बीबी की पहल से ही वो सब वहां इस वक़्त इकट्ठा थे...और उसे इस बात का भी पूरा विश्वास था की शशांक अपनी बीबी की अदला बदली बड़े आराम से कर लेगा..और वैसे भी,सुमन भाभी जैसी सेक्सी लेडी पूरी कॉलोनी में कोई नही थी...
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01-18-2019, 01:52 PM,
#20
RE: Desi Sex Kahani एक नंबर के ठरकी
शशांक ने सुमन की पेंटी उतार दी और उसे भी पूरा नंगा कर दिया...और उसे सोफे पर लिटा कर खुद उसके कदमो में आ बैठा...अब मज़ा लेने की बारी सुमन की थी, उसने अपनी दोनो टांगे शशांक के कंधे पर रख दी और वो अपनी जीभ लपलपाटा हुआ उसकी चूत में मुँह मारने लगा...और अगले ही पल सुमन की गर्म सिसकारियों से पूरा कमरा गूँज उठा..



''आआआआआआआआआआआहह मेरे राजा.............. एसस्स्स्स्स्स्स्सस्स ... चूसो .... मेरी चूत को ....... अहह साअले...............भेन चोद ............... चाट मेरी चूत को पूरा.............. चाट इसको .........''

अपने बॉस को इस तरह से गली का कुत्ता बनकर अपनी बीबी से गाली ख़ाता देखकर राहुल भी हंस दिया.ऑफीस में सभी के उपर हुकूमत चलाने वाला उसका ये बॉस इस वक़्त किसी गली के कुत्ते की तरह अपनी बीबी की चूत भी चाट रहा था और उसकी गालियां भी खा रहा था....सच में , चूत में बड़ी ताक़त होती है..

उसने भी देर करनी उचित नही समझी, और सबा को पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया...और एक बार फिर से अपना लंड उसकी चूत में डालकर उसे चोदने लगा..

गुरपाल ने भी डिंपल को घोड़ी बनाया और खड़ा होकर उसके पीछे से अपना लंड उसके अंदर डाल दिया...



सुमन को भी लंड लेने की ललक उठ खड़ी हुई और वो भी उछलकर सोफे से उतर गयी...और शशांक को बिठाकर खुद अपनी गांड उसकी तरफ करके उसके लंड को अपनी चूत में ले लिया...ऐसा करते हुए उसका चेहरा बाकी की चुदाइयों की तरफ भी था, जिसे वो मिस नही करना चाहती थी.

और इस तरहा से उस कमरे में चुदाई का नंगा नाच शुरू हो गया.

राहुल ने सबा के दोनो मुम्मे पकड़कर उन्हे एक-2 करके चूस डाला....उसे ऐसा करते देखकर शशांक का मन कर रहा था की काश इस वक़्त वो सबा के मुम्मे चूस रहा होता.

सबा भी उसे अपने बच्चे की तरह मुम्मा चुस्वा रही थी, कभी एक निप्पल उसके मुँह में ठूंसती और कभी दूसरा...

गुरपाल तो अपनी धन्नो की गांड को पेलते हुए उसपर चांटे भी बरसा रहा था, क्योंकि वो जानता था की ऐसा करने से डिंपल सरदारनी बहुत उत्तेजित हो जाया करती है..वो तो पहले से ही हो रही थी, राहुल के साथ तो वो चुदाई कर ही चुकी थी, शशांक के साथ चुदाई का सीन बनता देखकर वो घोड़ी की तरह हिनहिनाते हुए अपनी चूत में सरदारजी का लंड पिलवा रही थी...




घचाघच और फका फक की आवाज़ों से पूरा कमरा गूँज रहा था.

और जल्द ही सभी के मुँह से ओर्गास्म की किलकारियाँ निकलने लगी...और एक एक करते हुए सभी एक दूसरे के लंडों और चूतों पर ढेर होने लगे...

सबसे पहले डिंपल सरदारनी झड़ी...

''आआआआआआअहह .......... ओह पााआआआजी........................ उम्म्म्मममममममममम मज़ा आ गया.............''

और फिर सबा की बारी आई...

''आआआआआआआआआआआआअहह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ..... ओह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स .... माय डार्लिंग ...................... आई एम कमिंग...................''

और वो अपना गाढ़ापन उसके लंड पर छोड़कर ढीली पड़ गयी..

शशांक और सुमन तो एक साथ बरसे...



''आआआआआआआआआआआआआआआअहह ....... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... डार्लिंग ................. मजाआाआअ आआआआआआ गय्ाआआआआआआआआ''

और उनके पीछे-2 राहुल और सरदारजी ने भी अपने-2 गन्ने का रस अपनी बिबीयों की चूतों में निकाल दिया...

और पूरे कमरे में गहरी सांसो के साथ -2 सेक्स की ताज़ा खुश्बू तैर गयी..

शशांक का मन अब इस खेल को अगले मुकाम पर ले जाने का था..


रात के 2 बज रहे थे...और शशांक के घर इस वक़्त सभी लोग नंगे लेटकर अपनी-2 साँसे संयम में लाने का प्रयत्न कर रहे थे...

करीब 10 मिनट के बाद शशांक उठा और अंदर से ताश की गड्डी ले आया..

गुरपाल : "ओये शशांक पाजी, ये कोई वक़्त है पत्ते खेलने का....ऐसे नशीले प्रोग्राम के बाद ये खेल तो बोरिंग सा लगेगा...''

राहुल भी बोला : "यस बॉस, मेरा भी इस वक़्त ये खेलने का कोई मन नही है....और वैसे भी हम इस हिसाब से नही आए थे,मेरी जेब में तो पैसे ही नही है...''

गुरपाल : "हांजी भाई, मेरा भी यही हाल है...''

उसने भी अपनी लूँगी उठा कर लहरा दी...

शशांक (मुस्कुराते हुए) : "फ़िक्र मत करो दोस्तो,आज हम पैसो के बदले नही बल्कि किसी और चीज़ के बदले खेलेंगे..''

उसके कहने का तरीका ही ऐसा था की उस कमरे में बैठे सभी लोगो को समझते देर नही लगी की वो क्या कहना चाहता है...आख़िरकार इस वक़्त सभी के दिमाग़ में सैक्स ही तो दौड़ रहा था.

शशांक ने पत्ते फेंटे हुए सभी के चेहरे देखे...सभी के मन में उथल पुथल चल रही थी...लेकिन कोई कुछ बोल नही रहा था.

शशांक : "अरे यारों ...सिंपल सी गेम है...जो जीतेगा, उसकी बात सभी को माननी होगी...अब आप लोग इसे खेलना चाहते हो या नही,ये आपके उपर है...मैं तो पत्ते बाँट रहा हूँ ..''

राहुल ने सबा की तरफ और गुरपाल ने डिंपल की तरफ देखा...सभी ये दाँव खेलना चाहते थे,पर अपनी तरफ से बोलकर कोई भी पहल नही कर रहा था.

अचानक सबा की तेज आवाज़ आई : "मैं तो खेलूँगी...''

और वो उठी और अपनी चिकनी गांड और मोटे मुम्मे मटकाती हुई नंगी ही जाकर शशांक के सामने बैठ गयी..

शशांक की नज़र सीधा उसकी चूत पर गयी,जिसमें से अभी भी राहुल के लंड का सफेद पानी रिस रहा था...और साथ ही साथ उसने उसके गोरे मुम्मे भी ताड़ लिए,जिसके निप्पल ना जाने क्यो शशांक की नज़र पड़ते ही फेलकर अपनी औकात में आकर बड़े हो गये...

सबा की देखा देखी डिंपल भी उठकर आ गयी और सुमन की बगल में बैठ गयी...राहुल और गुरपाल भी अपने-2 ठुल्लु लटकाते हुए सामने आ गये..

शशांक ने बिना कोई भूमिका बाँधे सभी के सामने पत्ते फेंक दिए...

और बोला : "इस गेम में कोई चाल नही चलेगा...क्योंकि उसका कोई फायदा नही है...जिसके पत्ते बड़े होंगे वो जीत जाएगा..और जो जीतेगा,वो अपनी मर्ज़ी करेगा..''

इतना कहकर उसने अपने पत्ते उठाकर सभी के सामने रख दिए..उसके पास बादशाह के साथ 3,7 नंबर आए थे.

राहुल ने अपने पत्ते पलट दिए, उसके पास इकके के साथ 9,10 आया था.

यानी अभी तक राहुल जीत रहा था, उसके इकके को देखकर और राहुल के लटक रहे लंड को देखकर डिंपल के मन से बस यही दुआ निकल रही थी की या तो राहुल जीते या फिर वो खुद,ताकि वो उसके लंड को चूसकर अपनी प्यास बुझा सके.

लेकिन उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया जब सबा ने अपने पत्ते सबके सामने पलटे , उसके पास 9 का पेयर आया था, जिसे देखकर वो खुशी से उछल पड़ी...और साथ ही उछले उसके मुम्मे भी,जिन्हे देखकर गुरपाल और शशांक के लंड धीरे-2 खड़े होने लगे..

अगला नंबर गुरपाल का था, उसके पत्तों की शायद दुश्मनी थी उसके साथ, अभी भी उसके पास सबसे बड़ा पत्ता 10 ही आया था..लेकिन इस वक़्त उसे उतना गुस्सा नही आया जितना सुबह आ रहा था, क्योंकि यहाँ जो भी जीते,उसे उम्मीद थी की जीतने वाली अगर लड़की हुई तो उसके लंड को नजरअंदाज नही कर पाएगी...इसलिए उसने अपने पत्ते साइड में रखकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया...और वो भी इतनी बेशरमी से की सबा की नज़रें जब उसपर पड़ी तो वो भी हँसे बिना नही रह सकी...लेकिन जब उसके खुंखार लंड को देखा तो वो हँसी एक सिसकारी में बदल गयी, जो उसके होंठों से होती हुई उसकी चूत तक पहुँचकर उसे गीला कर गयी.

डिंपल का नंबर आया, उसने भी अपने पत्ते देखे, उसके पास भी पेयर आया था, लेकिन सबा से छोटा, 7 का पेयर...यानी अभी तक तो सबा ही जीत रही थी...और किसी को नही पता था की जीतने के बाद वो किसके उपर मेहरबान होगी.

सुमन ने पत्ते देखे, और सभी को ये देखकर आश्चर्या हुआ की उसके पास भी पेयर आया था, लेकिन 4 का, यानी तीनों लेडीज़ के पास पेयर आए थे,और सबसे बड़े पत्ते लेकर सबा ये गेम जीत चुकी थी.

शशांक ने सबा की तरफ हाथ बढ़ाया और उसके नर्म हाथों को पीसता हुआ उसे बधाई देता हुआ बोला : "मुबारक हो सबा...तुम जीत गयी...अब तुम अपनी मर्ज़ी से कुछ भी कर सकती हो...''

सभी को मालूम था की यहाँ 'कुछ भी' का मतलब सिर्फ और सिर्फ सेक्स ही है

सबा कुछ देर तक चुप रही और फिर बोली : "वैसे देखा जाए तो हम तीनों के पास पेयर आया था और हम तीनो ही जीते हुए माने जाएँगे...''

उसका मतलब समझकर शशांक तपाक से बोला : "हाँ , तो ठीक है ना, आप तीनों ही जीते हुए माने जाओगे, तुम तीनो एक-2 करके अपनी-2 विश बोलो...''

सुमन और डिंपल ने मुस्कुराते हुए सबा को देखा और उसे आँखो ही आँखो में थेंक्स कहा.

सबा (सुमन की तरफ देखकर) : "सुमन भाभी, आप ही शुरू करिए ना...''

उसे शायद थोड़ी झिझक सी हो रही थी...सुमन ने भी मना नही किया, वो तो इस मौके पर झपट ही पड़ी, और बोली : "मैं चाहती हूँ की गुरपाल जी मुझे उपर से नीचे तक सक्क करे...''

सक्क तो सिर्फ कहने की बात थी, असल में उसका मतलब फक्क से था

डिंपल का दिल धक्क से रह गया...आज उसे अपने पति को किसी और के साथ शेयर करना था...ये उसके लिए किसी बड़े धक्के से कम नही था..लेकिन वो भी तो किसी और के साथ मज़े लेगी, ये सोचकर उसने अपनी दिल को थोड़ी तसल्ली दी.

गुरपाल ने डिंपल की तरफ देखा और सबा ने आँखो ही आँखो में उसे इशारा करके सुमन के पास जाने की इजाजत दे दी...

अब सबा का नंबर था, आख़िरकार वो जीती हुई थी,सबसे आख़िर में मौका लेकर वो बचा हुआ माल नही लेना चाहती थी.

और वैसे भी अब चाय्स तो सॉफ ही थी,सामने राहुल और शशांक ही बचे थे, अपने पति से तो वो मज़े ले ही चुकी थी,और अब वो बाहर का मज़ा लेना चाहती थी,उसने शशांक की तरफ देखते हुए कहा : "मैं चाहती हूँ की राहुल के बॉस, यानी शशांक मेरे सामने बैठकर ,एक डॉग की तरह, मेरी पुस्सी को चाटें ...जैसे वो सुमन भाभी की चाट रहे थे...''

अपनी पत्नी के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर राहुल की आँखे भी फैल गयी...आज उसकी बीबी उसके बॉस के साथ सैक्स परफॉर्म करेगी , और उसे वो कुत्ता बनाकर अपनी मीठी चूत चूसने के लिए बोल रही थी..कही शशांक को सबा का ये रवेय्या बुरा लग गया तो उसकी नौकरी पर मुसीबत आ जाएगी...

लेकिन शशांक तो सच में कुत्ता बन गया, क्योंकि सबा की बात पूरी होते ही शशांक अपने घुटनो और हाथों के बल चलता हुआ, भौ-भौ की आवाज करता हुआ, किसी कुत्ते की तरह सबा के पास आया और उसके पैरों को चाटने लगा..

ये देखकर सभी की हँसी निकल गयी...

और आख़िर में डिंपल के हिस्से में आया राहुल, और डिंपल को अगर पहला मौका भी मिलता, तब भी वो राहुल का ही नाम लेती...इसलिए वो राहुल के पास खुद ही चल दी और सीधा जाकर उसकी गोद में बैठ गयी

और बोली : "और मैं चाहती हूँ की राहुल मेरे बूब्स को किसी नन्हे बच्चे की तरह पी डाले, इसमें से निकले या ना निकले, लेकिन दूध निकालने की पूरी कोशिश करे''
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