Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
11-27-2020, 03:53 PM,
#21
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
पिछली कड़ी में अपने पढ़ा कि नानाजी का नौकर हरि,
न सिर्फ उनका नौकर था बल्कि मेरा जैविक पिता भी था.
मेरी मां और हरि के शारीरिक संबंधों का नतीजा थी मैं.
नौकर हरि अर्थात मेरे वास्तविक पिता ने जानते बूझते,
कि मैं उनकी अपनी सगी बेटी हूं,
मुझे अपनी हवस का शिकार बनाया.
मैं खुद पर भी चकित थी कि इतनी बड़ी बात पता लगने के बावजूद मेरे अंदर कोई खास अपराधबोध नहीं था,
बल्कि इसके उलट मुझे एक नये रोमांच का अहसास हो रहा था.
अपने बाप के विशाल व अद्भुत लंड से आरंभिक पीड़ा के पश्चात संभोग का जो आनंद मैं ने प्राप्त किया वह अवर्णनीय था.
मेरे बाप द्वारा बेशर्मी भरी कामलीला के बाद इस रहस्योद्घाटन के दौरान,
कि मैं उनकी सगी बेटी हूं,
उनके चेहरे पर लेशमात्र भी अपराधबोध नहीं था और न ही लज्जा
, बल्कि इसके विपरीत एक खेले खाए वासना के पुजारी औरतखोर की तरह चोद कर तृप्त मुस्कान खेल रही थी.
फिर उनकी जिंदगी में अबतक किस तरह एक एक करके नारियां उनकी कामुकतापूर्ण रासलीला में स्वेच्छा अथवा जोर जबरदस्ती से भगीदार होती गईं,
इसका खुलासा उन्होंने मेरे सामने करना शुरू किया. मेरी मां, नानी, कामवाली बाई और सब्जी वाली औरत,
इन सबसे किस तरह उनका शारीरिक संबंध स्थापित हुआ,
इसका वर्णन उन्होंने किया और साथ ही ड्राईवर करीम किस तरह उनके इस खेल में शामिल हुआ इसका भी खुलासा किया.
जितनी देर उन्होंने उपरोक्त चार स्त्रियों के साथ की गयी विभिन्न मुद्राओं में की गई उत्तेजक कामलीला का विस्तृत वर्णन किया,
उस दौरान धधक उठती उत्तेजना के आवेग में हर घटनाओं के बीच विराम ले ले कर हम कलयुगी बाप बेटी ने
रिश्तों की मर्यादा को शर्मशार करते हुए तीन बार और वासना के समुद्र में डुबकी लगा लगा कर नंगा खेल खेला.

अब आगे की घटनाओं का वर्णन सुनिए.
रात करीब 8:30 बजे नानाजी,
दादाजी और बड़े दादाजी बाजार से वापस आए.
उस समय तक मैंने और मेरे बाप ने अपना अपना हुलिया ठीक कर चुके थे.
दोनों ही अपने अपने हवस की प्यास अच्छी तरह बुझा चुके थे.
हालांकि इस दौरान की धमाचौकड़ी,
गुत्थमगुत्थी और धींगामुश्ती में हम बुरी तरह थक गये थे मगर नहा धो कर काफी हद तक सामान्य दिख रहे थे.
“कैसी हो बिटिया? ठीक से आराम की ना?” नानाजी ने पूछा.

“हां नानाजी, खूब बढ़िया से आराम की” अपने चोदू बाप को आंख मारते हुए मुस्कुरा कर बोली.

पापा भी मुस्कुराहट छिपाते हुए किचन के अंदर गये. इतने में मेरा मोबाइल बज उठा. यह मम्मी का कॉल था.
वह पूछ रही थी कि हम ठीक ठाक पहुंचे कि नहीं.
मैं ने बताया कि हम ठीक ठाक पहुंच गए हैं.
मेरे और मम्मी के बीच हो रही इस वार्तालाप को सभी सुन रहे थे
और सबके चेहरे काले पड़ गये थे,
मगर मैं सहज भाव से बातें कर रही थी.
अब मैं क्या बताती कि बस में उनकी बेटी के साथ पांच पांच बूढ़ों ने क्या क्या कुकर्म किया,
और अभी अभी तीन घंटों के अंदर उनके आशिक हरिया ने (मेरे बाप ने) उनकी बेटी के साथ नाजायज संबंध बनाते
हुए तीन तीन बार वासना का नंगा खेल खेलकर
मनमाने ढंग से अपनी हवस मिटाई और
मुझे छिनाल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा.
यह अलग बात है कि मैं भी इस खेल में स्वेच्छा और पूर्ण समर्पण के साथ बराबर की हिस्सेदार रही
और हर एक पल का लुत्फ लेती हुई अपने ही बाप के अद्भुत लंड और उनकी चुदाई की दीवानी हो गई.

अभी मैं मम्मी से बात कर ही रही थी कि और किसी का कॉल आने लगा.
मैं ने मम्मी को बाय किया और देखा कि यह सरदारजी का कॉल था.
मैं धक् से रह गई. समय देखा तो रात के 9 बज रहे थे.

“हैलो” मैं ने कॉल उठाया.
“हैल्लो मेरी छमिया, क्या हाल है?” उधर से सरदारजी की आवाज आई.

“क्या हुआ बोलिए सरदारजी, कैसे याद किया?” मैं खीझ कर बोली
“बस तेरी मदमस्त चूत की याद आ रही थी इसलिए याद किया मेरी जान,
अभी आ सकती हो तो मेरे घर में आ जाओ,
तेरी बहुत याद आ रही है रानी.”
बड़े घटिया तरीके से बात कर रहा था.
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर गुस्से को बमुश्किल काबू में कर के बोली, “नही, मैं अभी इतनी रात में नहीं आ सकती सरदारजी”

“क्या कहा, मुझे ना कहती है कुतिया.
तेरा वीडियो अपलोड करूं क्या?” सरदार जी फुंफकार उठे.

मेरा भेजा घूम गया. बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू में कर के बोली, “ठीक है सरदारजी आती हूं, मगर जल्दी छोड़ दीजियेगा,”

“अरे मेरी रानी, एक घंटे में छोड़ दूंगा.”
“फिर ठीक है, अपने घर का पता बताईए.” मैं बोली.
“तू लालपुर चौक आ जा, मैं वहीं मिलूंगा.”
“ठीक है, आ रही हूं,” कहकर मैंने फोन काट दिया.

फिर मैंने उन बूढ़े आशिकों से कहा “मैं एक घंटे में उस सरदारजी को निपटा कर आती हूं” फिर मैंने हरी पापा को आवाज दी,

“चाचा जी चलिए जरा सरदारजी को निपटा कर आते हैं.”
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11-27-2020, 03:53 PM,
#22
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
फिर मैं अपने बाप को साथ ले कर नानाजी के कार से ही निकल पड़ी.
तीनों बूढ़े असहाय भाव से मुझे देखते रह गए.
करीम ड्राईवर ही कार ड्राइव कर रहा था.
मैं पीछे की सीट पर पापा के साथ बैठी थी.
मैं ने उनको समझा दिया कि सरदारजी के घर के बाहर मेरा इंतजार करें.
जैसे ही कार स्टार्ट हुआ,
पापा ने मुझे कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच कर सटा लिया.
बांया हाथ मेरी कमर पर था और दाहिने हाथ से मेरी चूचियों पर हाथ साफ करने लगा.
फिर जैसे ही मुझे चूमने को था, मैं ने उन्हें आंख दिखाई.

रीयर व्यू आइने में करीम चाचा ने हमारी हरकतों को देख लिया और बोला,
“यह क्या हो रहा है हरिया? साले अकेले अकेले?”
पापा हड़बड़ा गये.
“अरे कुछ नहीं भाई”.
“क्या कुछ नहीं साले.
मुझे उल्लू समझा है? हमने सब कुछ देख लिया है.
लगता है तूने अकेले अकेले इस पर हाथ साफ कर लिया है.
मुझे भूल गए क्या साले हरामी?
याद है ना, आजतक हम मिल बांट कर खाए हैं.
हां तो कम्मो बिटिया,
हम पर भी थोड़ी मेहरबानी कर देना, नहीं तो मालिक को सब बता दूंगा.”
वह बोला.
मैं घबराकर बोली, “नहीं करीम चाचा,
प्लीज घर में किसी को कुछ मत बताइएगा. मैं आपकी ख्वाहिश पूरी करने को तैयार हूं.”
मुझे पापा पर गुस्सा आ रहा था,
“न जगह देखा न माहौल देखा,
बस शुरू हो गये.” मैं ने पापा को डांटा.
पापा खिसिया कर मुझ पर से हाथ हटा लिए. करीम चाचा को इस बात का ज़रा भी आभास नहीं था कि हरी मेरा सगा बाप है.
पता नहीं इस प्रकार के अनैतिक रिश्ते के बारे में जानकर उनकी प्रतिक्रिया क्या होती.

खैर मैंने बात को दूसरी ओर मोड़ दिया और कहा, “देखिए फिलहाल तो हम उस सरदारजी से निपट लें, उसके बाद आपको जो करना है कर लीजिएगा.”
“ठीक है, तो अभी सरदारजी से निपटने के लिए तुम्हारा प्लान क्या है?”
पापा ने पूछा.
” उसकी टेंशन आप लोग मत लीजिए.
आप लोग केवल बाहर मेरा इंतजार कीजियेगा.
मुझे उससे वह वीडियो हासिल करना है बस.
जरूरत पड़ी तो बुला लूंगी.
जैसे ही मेरा काम हो जाएगा, मैं आ जाऊंगी.
फिर हम वापस लौट चलेंगे,” मैं ने पूरे आत्मविश्वास से कहा.
करीब 15 मिनट में हम लालपुर चौक पहुंचे. चौक के पास एक पेट्रोल पंप के पास ही सरदारजी खड़े थे.
मैं ने करीम चाचा को थोड़ा किनारे कर के कार खड़ी करने को कहा और कार से उतर कर सरदारजी के पास गयी.
जैसे ही उसने मुझे देखा, उसकी बांछें खिल गईं.
वे झक्क सफेद रेशमी चूड़ीदार पाजामा और कुर्ता में थे. लाल पगड़ी में खूब फब रहे थे.

“गुड ईवनिंग सरदारजी” मैं पास पहुंच कर बोली.
“गुड, तुम बिल्कुल समय पर आ गई हो.
चलो यहीं सामने मेरा घर है.” वे प्रसन्नता से बोले.
मैं ने सामने एक आलिशान बंगला देखा,
जिसका गेट खुला था.
गेट पर कोई पहरेदार नहीं था.
मैं सरदारजी के पीछे पीछे गेट के अंदर आई तो सरदारजी ने गेट बंद कर सिटकनी लगा दिया लेकिन ताला नहीं लगाया.
उस सुनसान आलिशान बंगले में लाईट जल रही थी जिसका मुख्य द्वार बंद था किन्तु सिर्फ उढ़का हुआ था.
सामने बरामदा था जिसे पार कर के मुख्य द्वार तक आए.
ढकेलने से ही दरवाजा खुल गया और हम ड्राइंग रूम में आये.
ड्राइंग रूम में पहले से एक काला कलूटा भीमकाय हब्शी बैठा हुआ था.
करीब 50 – 55 की उम्र का. लाल लाल होंठ बाहर की ओर निकले हुए थे,
गोल चेहरा, सर पर अधपके घुंघराले बाल,
नशे से बोझिल आंखों को बड़ा बड़ा करके मुझे वहशी अंदाज में देखने लगा.
टेबल पर विदेशी दारू की आधी खाली बोतल और दो ग्लास आधी खाली थी और सामने एक प्लेट पर काजू और बादाम रखा हुआ था.
इसका मतलब ये लोग पहले से पी रहे थे.
” Come gurpreet, oh so this the girl. So young? She will die if I will fuck her.
(आओ गुरप्रीत, ओह तो यह है लौंडिया.
इतनी कम उमर की? इसको चोदेंगे तो यह तो मर ही जाएगी.)”
उस दैत्य ने अंग्रेजी में कहा,
शायद उसे हिंदी बोलना नहीं आता था.
“डोंट वरी सर, इसे कुछ नहीं होगा.
मैं जानता हूं. आप आराम से जैसे मर्जी चोद सकते हैं.”
सरदार बोला. उसका boss हिंदी समझता था.
उनकी बातें सुन कर पहले तो घबराई,
मगर फिर संभल कर बोली, “यह क्या सरदारजी, आप तो रंडी की तरह किसी के सामने भी मुझे परोसे दे रहे हैं.”
“चुपचाप मेरे boss को खुश कर दे, नखरे न कर.
सर चलिए इसे बेडरूम में ले कर चलते हैं.” सरदार बोला.

“नहीं, आप ये ग़लत कर रहे हैं. आपके पास मेरा वीडियो है तो इसका मतलब आप किसी से भी मुझे चुदवा लीजिएगा?” मैं ने विरोध किया.

“चुप साली रंडी, चुपचाप चल बेडरूम में.”
गाली देता हुआ मेरा हाथ पकड़ा और बड़े से बेडरूम में ले आया.

मैं सोच रही थी कि अगर सरदार अकेला होता तो आराम से उसका मोबाइल छीन लेती और वीडियो डिलीट कर देती,
मगर यहां तो दो दो पहलवान मौजूद थे.
मैं ने फिलहाल चुपचाप उसकी बात ली,
फिर भी मैं उपयुक्त मौके की ताक में थी.
मैं थोड़ी घबराई हुई थी, उस लंबे चौड़े भैंस जैसे पहलवान टाईप हब्शी को कैसे झेल पाऊंगी.
जब वह खड़ा हुआ तो देखा,
उसका कद करीब करीब छः फुट नौ इंच के करीब रहा होगा.

हमारे पीछे पीछे वह हब्शी भी झूमता हुआ अंदर आया और सरदार को बोला,
” Now you stay outside till i am fucking her.
(अब तुम बाहर रुको जब तक मैं इसे चोद रहा हूं.)
Come baby, lets have fun.
(आओ बेबी हम मजा करें).”
सरदार आज्ञाकारी नौकर की तरह चुपचाप बाहर निकल गया.
उसका boss मेरे पास आया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर कर चूमने लगा.
मैं 5 फुट 8 इंच कद की होती हुई भी उसके सामने बच्ची लग रही थी.
मैं ने कोई विरोध नहीं किया और उसकी बांहों में बंधी उससे सहयोग करने लगी.
वह मेरे कपड़े उतारने लगा.
मेरे तन से पूरा कपड़ा उतार कर नंगी कर दिया और आंखें फाड़कर मेरी मदमस्त जवानी का दीदार करने लगा.
(oh so beautiful and sexy)
” ओह इतनी सुन्दर और सेक्सी.” मैं चाहती थी कि जल्दी इसे निपटा कर फारिग हो जाऊं और सरदार की खबर लूं.
मैं खुद ही बेशरम हो कर उस हब्शी के पैंट शर्ट को उतारने लगी.
ज्यों ही उसका पैंट खुला मैं उसकी चड्डी देख कर दंग रह गयी. चड्डी सामने से फूल कर विशाल लंड की चुगली कर रहा था.
डरते हुए जैसे ही उसकी चड्डी नीचे की, भयानक काला और मोटा करीब चार इंच और लंबा करीब दस इंच का लौड़ा उछल कर मेरे सामने आ गया.
मैं घबराकर एक कदम पीछे हट गई.

इससे पहले कि मैं उस हौलनाक दृश्य के सदमे से उबर पाती,
हब्शी ने ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर लिटा कर पागलों की तरह मुझ पर टूट पड़ा.
बड़ी बेरहमी से मुझे चूमना चाटना, मेरी चूचियों को मसलना और चूसना शुरू कर दिया.
डर और घबराहट के बावजूद उसकी उत्तेजक हरकतों से मैं भी उत्तेजित हो गई और,
“ओह आह इस्स्स इस्स्स” करने लगी.
मेरी चूत पनिया उठी थी.
अब उसका ध्यान मेरी चुद चुद कर फूली हुई पनियाई चूत की ओर गया.
उसकी खुशी मैं स्पष्ट देख रही थी.
वह भी समझ गया कि मै बिल्कुल तैयार माल हूं.
मुझे चोदने में उसे कोई समस्या नहीं होगी.
वह पहले अपने लंबे और मोटे जीभ से मेरी चूत चाटना शुरू किया.
मैं बेहद चुदासी के आलम में पूरा पैर फैला कर छटपटाती हूई अपनी कमर नीचे से उछालने लगी और उत्तेजना के मारे मेरी सिसकारियां निकलने लगीं.
बिना यह सोचे कि उसके विशाल लंड से चुदने से मेरी चूत का क्या हाल होगा मैं बड़बड़ाने लगी,
“अब चोद भी लीजिए सर, और मत तड़पाईए.” इस्स्स इस्स्स करने लगी.

“Yes my bitch, now I’m going to fuck your nice cunt, get ready”
(हां मेरी कुतिया, अब मैं तेरी सुंदर चूत को चोदने जा रहा हूं, तैयार हो जाओ.)
उस हब्शी ने जब मेरा यह हाल देखा तो मेरे दोनों पैरों को फैला कर उठाया और अपने कंधे पर रख लिया और अपना गधे सरीखे विशाल लौड़े का सुपाड़ा मेरी चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ना शुरू किया और बोला.

“हां अब चोद भी डालिए सर”, मैं बेताबी से बोली.
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11-27-2020, 03:53 PM,
#23
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
उस ने मेरी कमर को कस के पकड़ा और धीरे धीरे मेरी चूत में डालने लगा.
“yes take it”
(हां ले ले) उसका विशाल सुपाड़ा जब मेरी चूत को फैलाता हुआ अन्दर जाने लगा तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत फट जायेगी.

मैं चीख पड़ी. “ओ्ओ्ओ्ओह धीरे धीरे सरजी, मेरी चूत फट रही है,
अम्म्म्म्म्माआआआआ”. उसने धीरे धीरे दबाव बढ़ाते हुए पूरा 10” मेरी चूत में भोंक दिया.
सरसराते हुए उसका लंड जब घुस रहा था तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत अपनी सीमा से बाहर फैलता जा रहा हो और फटने के कागार पर पहुंच गया हो.
उसका भीमकाय लंड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ता जा रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसका घुसना अंतहीन हो.
मेरे गर्भाशय के अंदर तक घुसता चला जा रहा था.
घुसाने के बाद फिर धीरे धीरे बाहर करने लगा, उसी तरह चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ.
तीन चार बार धीरे धीरे अंदर बाहर करने के बाद दर्द कहां गायब हुआ पताही नहीं चला.
चूत की दीवारों पर उसके मोटे और लम्बे लंड का घर्षण इतना आनंद दायक था कि बयां करना मुश्किल था.
अब मैं जोश में आ गयी थी और अपनी चूतड़ उछालने लगी थी. धीरे धीरे चोदने की रफ़्तार बढ़ाता गया.

मैं आनन्द विभोर हो रही थी, “हां सरजी, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, बहुत मजा आ रहा है राजा”.

“Yes dear, oh my bitch, nice pussy, tight pussy, ah fucking hole, oh my whore”
(हां डियर, ओह मेरी कुतिया, टाईट चूत, चुदाई की छेद, ओह मेरी रंडी)
बोलते हुए चोदे जा रहा था.
ऐसा लग रहा था मानो कोई भैंस किसी बछिया को चोद रहा हो.
मैं खुद चकित थी कि इस दानव जैसे व्यक्ति के दानवी लन्ड से चुदती हुई कैसे इतनी आनंदविभोर हो रही थी?
जब उन्होंने देखा कि मैं भी मस्ती में डूब कर चदाई का पूरा लुत्फ ले रही हूं,
तब उन्होंने चुदाई का आसन बदला, मेरे पैरों को अपनी कमर पर लपेट लिया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया,
मेरी गांड़ के नीचे अपने दोनों मजबूत हाथों का सहारा दिया और खड़े खड़े चोदने लगा.
मैं उसकी गर्दन पर अपनी बाहों को लपेटे हवा में झूलती हुई बड़े आराम से चुद रही थी.
मेरी चूत में उनका फनफनाता भीमकाय लंड नीचे से सर्र सर्र किसी इंजन के पिस्टन की तरह फच्चाफच अंदर बाहर हो रहा था.
मैं उनके बदन से किसी छिपकली की तरह चिपकी हुई चुदाई के इस अद्भुत आनंदमय अनुभव से गुजर रही थी इसी बीच उस हब्शी ने सरदार को आवाज लगाई.
सरदार तुरंत दरवाजा खोल कर अंदर आया और अंदर की गरमागरम कामलीला देख कर मुस्कुरा उठा.

“यस सर” किसी आज्ञाकारी कुत्ते की तरह बोला.

“Bring one more peg”
(एक पैग और लाओ) उन्होंने कहा.

“नहीं, एक नहीं, बोतल में बची सारी ले आओ और ग्लास भी” मैं मस्ती के आलम में चुदती हुई बोली.
मैं चुदने के आनंद में डूबी जरूर थी मगर अपना उद्देश्य नहीं भूली थी.

” Ok, bring the bottle and glass as this sweety said”
(ठीक है बोतल और ग्लास ले आओ जैसे ये स्वीटी बोली) उन्होंने कहा.

सरदार ने तुरंत वैसा ही किया,
बोतल, पानी और ग्लास बेड के साईड वाले टेबल पर रखा और बाहर चला गया.

हब्शी उसी अवस्था में मुझे लिए दिए एक पैग चढ़ाया तो मैं ने दूसरे पैग के लिए उकसाया, “एक पैग और लीजिए ना”.

उसने दूसरा पैग भी चढ़ा लिया. दो पैग ले लेने के बाद वह और आक्रामक ढंग से पूरी रफ्तार के साथ चुदाई में मशगूल हो गया.
मैं ने महसूस किया कि अब वह कुछ ही देर में खल्लास होने वाला है क्योंकि उसका लंड थोड़ा और फूल गया था और चुदाई के चर्मोत्कर्ष का भाव उसके चेहरे पर स्पष्ट देख रही थी.
मैं भी चरम आनंद से कुछ ही पल दूर थी.
फिर क्या था,
उन्होंने मुझे अपने से इतने कस के चिपका लिया मानो मेरी जान ही निकल जाएगी और मेरी कोख में ज्वालामुखी का लावा उगलना शुरू कर दिया.
“yessssss im cumming my bitch ooooooh sweet darling”
(हां मैं झड़ रहा हूं मेरी कुतिया ओह प्यारी)
उसके मुंह से बोल उबल पड़े.
“आआ्आ्आह मैं भी गयी राज्ज्ज्जाओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्हह” अद्भुत था वह स्खलन.
मैं भी स्खलन के उस आनंदमय पलों में अपनी चूत से उनके लंड को दबोच कर उससे निकलते वीर्य के हर कतरे को तबतक चूसती रही जब तक वह पूरी तरह खल्लास हो कर किसी भैंसे की तरह डकारते हुए लुढ़क नहीं गया.

“Oh sweet little fucking bitch, nice body, nice cunt. Entirely enjoyed fucking you.”
(ओह प्यारी छोटी सी चुदक्कड़ कुतिया, सुन्दर तन, सुन्दर चूत.
तुम्हे चोद कर पूरा मजा आया.” वह बोल पड़ा.

“मुझे भी बड़ा मजा आया राजा. आज से पहले किसी ने मुझे ऐसा नहीं चोदा था.
आई लव यू टू.” मैं भी बोली.

मैं भी पूरी तरह तृप्त हो कर कुछ देर के लिए निढाल हो गई थी मगर फिर मैंने अपना होश संभाला और मनुहार करके प्यार से उस हब्शी को तीन पैग और पिला दिया.

उस ने मेरी कमर को कस के पकड़ा और धीरे धीरे मेरी चूत में डालने लगा.
“yes take it”
(हां ले ले) उसका विशाल सुपाड़ा जब मेरी चूत को फैलाता हुआ अन्दर जाने लगा तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत फट जायेगी.

मैं चीख पड़ी. “ओ्ओ्ओ्ओह धीरे धीरे सरजी, मेरी चूत फट रही है,
अम्म्म्म्म्माआआआआ”. उसने धीरे धीरे दबाव बढ़ाते हुए पूरा 10” मेरी चूत में भोंक दिया.
सरसराते हुए उसका लंड जब घुस रहा था तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत अपनी सीमा से बाहर फैलता जा रहा हो और फटने के कागार पर पहुंच गया हो.
उसका भीमकाय लंड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ता जा रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसका घुसना अंतहीन हो.
मेरे गर्भाशय के अंदर तक घुसता चला जा रहा था.
घुसाने के बाद फिर धीरे धीरे बाहर करने लगा, उसी तरह चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ.
तीन चार बार धीरे धीरे अंदर बाहर करने के बाद दर्द कहां गायब हुआ पताही नहीं चला.
चूत की दीवारों पर उसके मोटे और लम्बे लंड का घर्षण इतना आनंद दायक था कि बयां करना मुश्किल था.
अब मैं जोश में आ गयी थी और अपनी चूतड़ उछालने लगी थी. धीरे धीरे चोदने की रफ़्तार बढ़ाता गया.

मैं आनन्द विभोर हो रही थी, “हां सरजी, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, बहुत मजा आ रहा है राजा”.

“Yes dear, oh my bitch, nice pussy, tight pussy, ah fucking hole, oh my whore”
(हां डियर, ओह मेरी कुतिया, टाईट चूत, चुदाई की छेद, ओह मेरी रंडी)
बोलते हुए चोदे जा रहा था.
ऐसा लग रहा था मानो कोई भैंस किसी बछिया को चोद रहा हो.
मैं खुद चकित थी कि इस दानव जैसे व्यक्ति के दानवी लन्ड से चुदती हुई कैसे इतनी आनंदविभोर हो रही थी?
जब उन्होंने देखा कि मैं भी मस्ती में डूब कर चदाई का पूरा लुत्फ ले रही हूं,
तब उन्होंने चुदाई का आसन बदला, मेरे पैरों को अपनी कमर पर लपेट लिया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया,
मेरी गांड़ के नीचे अपने दोनों मजबूत हाथों का सहारा दिया और खड़े खड़े चोदने लगा.
मैं उसकी गर्दन पर अपनी बाहों को लपेटे हवा में झूलती हुई बड़े आराम से चुद रही थी.
मेरी चूत में उनका फनफनाता भीमकाय लंड नीचे से सर्र सर्र किसी इंजन के पिस्टन की तरह फच्चाफच अंदर बाहर हो रहा था.
मैं उनके बदन से किसी छिपकली की तरह चिपकी हुई चुदाई के इस अद्भुत आनंदमय अनुभव से गुजर रही थी इसी बीच उस हब्शी ने सरदार को आवाज लगाई.
सरदार तुरंत दरवाजा खोल कर अंदर आया और अंदर की गरमागरम कामलीला देख कर मुस्कुरा उठा.

“यस सर” किसी आज्ञाकारी कुत्ते की तरह बोला.

“Bring one more peg”
(एक पैग और लाओ) उन्होंने कहा.

“नहीं, एक नहीं, बोतल में बची सारी ले आओ और ग्लास भी” मैं मस्ती के आलम में चुदती हुई बोली.
मैं चुदने के आनंद में डूबी जरूर थी मगर अपना उद्देश्य नहीं भूली थी.

” Ok, bring the bottle and glass as this sweety said”
(ठीक है बोतल और ग्लास ले आओ जैसे ये स्वीटी बोली) उन्होंने कहा.

सरदार ने तुरंत वैसा ही किया,
बोतल, पानी और ग्लास बेड के साईड वाले टेबल पर रखा और बाहर चला गया.

हब्शी उसी अवस्था में मुझे लिए दिए एक पैग चढ़ाया तो मैं ने दूसरे पैग के लिए उकसाया, “एक पैग और लीजिए ना”.

उसने दूसरा पैग भी चढ़ा लिया. दो पैग ले लेने के बाद वह और आक्रामक ढंग से पूरी रफ्तार के साथ चुदाई में मशगूल हो गया.
मैं ने महसूस किया कि अब वह कुछ ही देर में खल्लास होने वाला है क्योंकि उसका लंड थोड़ा और फूल गया था और चुदाई के चर्मोत्कर्ष का भाव उसके चेहरे पर स्पष्ट देख रही थी.
मैं भी चरम आनंद से कुछ ही पल दूर थी.
फिर क्या था,
उन्होंने मुझे अपने से इतने कस के चिपका लिया मानो मेरी जान ही निकल जाएगी और मेरी कोख में ज्वालामुखी का लावा उगलना शुरू कर दिया.
“yessssss im cumming my bitch ooooooh sweet darling”
(हां मैं झड़ रहा हूं मेरी कुतिया ओह प्यारी)
उसके मुंह से बोल उबल पड़े.
“आआ्आ्आह मैं भी गयी राज्ज्ज्जाओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्हह” अद्भुत था वह स्खलन.
मैं भी स्खलन के उस आनंदमय पलों में अपनी चूत से उनके लंड को दबोच कर उससे निकलते वीर्य के हर कतरे को तबतक चूसती रही जब तक वह पूरी तरह खल्लास हो कर किसी भैंसे की तरह डकारते हुए लुढ़क नहीं गया.

“Oh sweet little fucking bitch, nice body, nice cunt. Entirely enjoyed fucking you.”
(ओह प्यारी छोटी सी चुदक्कड़ कुतिया, सुन्दर तन, सुन्दर चूत.
तुम्हे चोद कर पूरा मजा आया.” वह बोल पड़ा.

“मुझे भी बड़ा मजा आया राजा. आज से पहले किसी ने मुझे ऐसा नहीं चोदा था.
आई लव यू टू.” मैं भी बोली.

मैं भी पूरी तरह तृप्त हो कर कुछ देर के लिए निढाल हो गई थी मगर फिर मैंने अपना होश संभाला और मनुहार करके प्यार से उस हब्शी को तीन पैग और पिला दिया.
जब वह पूरी तरह नशे में धुत होकर लुढ़क गया तब मैं कपड़े पहन कर बाहर आगई.
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11-27-2020, 03:53 PM,
#24
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
मैं उठी और कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आई.
सामने सरदार सोफे पर बैठा बेकरारी से इंतजार करता मिला.

बड़ी बेशर्मी से मुस्कुराते हुए बोला,
“अरे तूने इतनी जल्दी कपड़े क्यों पहन लिया लौंडिया,
साहब को खुश कर दिया ना?
अब चल मुझे खुश कर दे.
चल फिर से उतार कपड़े, या मैं खुद उतारूं.”
“नहीं, पहले आप मेरा वीडियो डिलीट कीजिए” मैं बोली.
“ठीक है मैं डिलीट कर दूंगा,
मगर तुझे चोदने के बाद.”
वह धूर्तता पूर्वक मुस्कुराते हुए बोला.

“ठीक है, मगर आप पहले वादा कीजिए.” मैं बोली.

“चल मैंने वादा किया, अब तू जल्दी अपने कपड़े उतार और मुझे चोदने दे.”
उसने बड़ी बेताबी से कहा.
मैं मजबूरी में फिर से कपड़े उतार कर नंगी हो गई, मगर इस बार चुदने के लिए नहीं बल्कि सरदार के कब्जे से मोबाइल हथियाने के लिए.
मेरे नग्न जिस्म को भूखी नजरों से देखते हुए बोला, “अहा मेरी जान,
तू सच में बड़ी धांसू माल है.
मां कसम, आज तुझे चोद चोद कर सारी कसर निकालूंगा.”

“सरदारजी, पहले अपने कपड़े तो उतारिए.
देखिए तो आपका पैजामा फटने को हो रहा है.” मैं उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए बेशर्मी से बोलीं.

“हा हा हा हा, हां री कुतिया,
तुझे चोदने के लिए मेरा लौड़ा अब से फनफना रहा है.
अभी उतारता हूं,” कहते हुए कपड़े खोलने लगा.
जैसे ही वह नंगा हुआ, उसका गधा सरीखा लौड़ा उछल उठा और बंदूक की तरह तन गया.
“देख मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसने को कितना बेकरार है,”
कहता हुआ नंग धड़ंग वह मेरी ओर बढ़ा और जैसे ही मुझे बांहों में लेने को हुआ,
मैं फुर्ती से झुकाई दे कर उसके कुर्ते की ओर झपटी और पलक झपकते उसका मोबाइल मेरे कब्जे में था.

“अब बोल कमीने.” मैं फुंफकार उठी.
सरदार फिर भी बाज नहीं आया.
“साली कुतिया, चुपचाप मोबाइल मेरे हवाले कर वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.”
गुर्रा कर बोलते हुए मेरी ओर बढ़ा ही था कि मेरा एक भरपूर किक उसके पेट पर पड़ा.
प्रहार इतना जबरदस्त था कि वह आह करता हुआ पेट पकड़कर दोहरा हो गया.
अत्यधिक पीड़ा से उसका चेहरा विकृत हो गया. शैतानी, ढिठाई, धूर्तता की जगह उसके चेहरे पर आश्चर्य और अविश्वास का भाव था.
मेरी आंखों में उसने जाने क्या देखा कि सहम सा गया.
मैं ने क्रोध के आवेश में एक जबरदस्त मुक्का उसके जबड़े पर जड़ दिया. फिर तो उसे सम्भलने का मौका ही नहीं दिया और जी भर के लात घूंसों की बरसात कर बेदम कर दिया.
मैं ने उसे अच्छी तरह से ठुकाई करके अपने मन की भंड़ास निकाली.
“भड़वे साले हरामी, हराम का माल समझ रखा है.
ब्लैकमेल करके दलाली करने का इतना ही शौक है तो जा के अपनी मां बहन और बेटी की दलाली कर मादरचोद.
ले मैं वीडियो डिलीट कर रही हूं,
दम है तो उठ और रोक कर दिखा.”
वह कराहता हुआ फर्श पर पड़े असहाय भाव से मुझे वीडियो डिलीट करते देखता रहा.

फिर मैं मैं उसकी ओर मुखातिब हो कर खूंखार नजरों से घूरती हुई पूछी,
“और कहीं वीडियो सेव किया है तो वह भी जल्दी बता दे वरना इससे भी बुरा हाल करूंगी.”
“और कहीं नहीं है मेरी मां, मुझे माफ़ कर दे,” वह बड़ी बेचारगी से बोला.

मैं ने उसके चेहरे को पढ़ा और आश्वस्त हुई कि वह झूठ नहीं बोल रहा है फिर भी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती थी.
मैंने देखा कि यह सब करते हुए करीब 45 मिनट लगा.
मैं दौड़ कर बाहर निकली और करीम चाचा और पापा को अंदर बुलाया.
उन्होंने आकर अंदर का जो नजारा देखा तो देखते रह गए.
बाहर अंधेरे में उन्होंने मुझे ठीक से देखा नहीं मगर अंदर रोशनी में मुझ मादरजात नंगी साक्षात चंडी रूप को आंखें फाड़कर अपलक देखते रह गए.
मेरे पापा मेरे नग्न शरीर का भोग लगा चुकने के बावजूद इस नए रूप को एक टक निहार रहे थे.
करीम चाचा की भूखी नज़रें तो मेरे नग्न जिस्म से ही चिपक गईं थीं.
आंखें फाड़कर कभी मेरे नग्न दपदपाते कामुक शरीर को और कभी मेरे कहर बरसाते चेहरे को और कभी उधर पिट पिट कर बेहाल फर्श पर पड़े कराह रहे नंग भुजंग सरदार को देख रहे थे.

“अब आपलोग देखते मत रहिए, घर की पूरी तलाशी लीजिए,
कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, सब कुछ.
पूरी कहानी मैं बाद में बताऊंगी.”
मैं बोली. सरदार कराहता हुआ बोला,
“अरे मैं बोल रहा हूं, और कहीं कुछ नहीं है.”

मैं ने गौर से उसके चेहरे को देखा और समझ लिया कि वह सच कह रहा है, फिर भी उसे धमकाते हुए कहा,
“अभी तो मैं छोड़ रही हूं, साले हरामी, अगर फिर कभी ऐसी हरकत की तो कसम से मैं तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी.”
मेरी धमकी से वह गिड़गिड़ा कर माफ़ी मांगते हुए बोला, “और कहीं नहीं है मेरी मां.
अब और आगे से फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करूंगा.
मुझे बख्श दो, मैं तेरे पांव पकड़ता हूं.”
“ठीक है, ठीक है, जा माफ किया.”
कहते हुए उसके बेडरूम में गयी और हब्शी के मोबाइल से उसका
नंबर लिया,
वह बेसुध सोया पड़ा था.
फिर सरदार का नंगा फोटो खींच कर उसे कहा, “देख कमीने, तेरा नंगा फोटो मेरे पास है.
फिर कभी मुझ से पंगा मत लेना.” फिर मैंने पापा और करीम चाचा से कहा,
“अब चलिए हमारा काम हो चुका है,”
कहते हुए दरवाजे की ओर कदम बढ़ाई कि पापा ने टोका, “अरे पहले कपड़े तो पहन ले, ऐसी ही नंगी चलने का इरादा है क्या?”

अब मुझे होश आया कि मैं अबतक इनके सामने नंगी ही थी.
शर्म और खीझ के मारे मैं ने सरदार को एक और लात जमा दिया,
“इस हरामी की वजह से मैं होशो-हवास खो बैठी थी” फिर कपड़े पहन कर उनके साथ बाहर निकल पड़ी.
कार से हम करीब 15 मिनट में घर पहुंचे. रास्ते में मैं ने उन्हें संक्षेप में सारी घटना बताती रही.
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11-27-2020, 03:53 PM,
#25
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
करीम चाचा ने मुझे याद दिलाया कि मैं ने आते वक्त क्या वादा किया था, “बिटिया, तूने मुझ पर मेहरबानी करने का वादा किया था,
याद है ना?”
“हां बाबा हां, मुझे सब याद है, भूली नहीं हूं मैं.
मगर आज नहीं, आज मैं बहुत थकी हुई हूं. कल जो मर्जी कर लीजिएगा.”
मैं बोली. एक घंटे पन्द्रह मिनट के बाद फिर से हम नानाजी के घर के अंदर थे.
घर में सब बड़ी बेकरारी से हमारा इंतजार कर रहे थे. जैसे ही हम घर के अंदर घुसे, सबने सवालों की झड़ी लगा दी.
मैं ने पूरी घटना का संक्षिप्त विवरण दिया और अपनी कामयाबी के बारे में बताया.
सुन कर सबने राहत की सांस ली. फिर हमने साथ में खाना खाया और अपने अपने कमरों में सोने चले गए.
मैं दिनभर में सात लोगों से चुद चुद कर सबसे ज्यादा थकी हुई थी और ऊपर से सरदार की मरम्मत करने में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च कर बैठी,
अतः बिस्तर पर पड़ते ही गहरी निद्रा के आगोश में चली गयी

सवेरे करीब 6 बजे मेरी नींद खुली. बाहर से (नौकर हरिया) मेरे पापा की आवाज सुनाई दी,
“बिटिया उठ जाओ, सवेरा हो गया है”.
मैं अलसाई सी उठी, “हां चाचा, उठ गई.” कल दिन भर की भाग दौड़ और चुदाई की थकान से पूरा बदन टूट रहा था.
हब्शी की चुदाई से तो मेरी चूत फूल कर कुतिया की तरह बाहर निकल गई थी.
जोश जोश में कल सरदार की ठुकाई के समय मुझे पता ही नहीं चला,
मगर आज सवेरे महसूस हो रहा था कि हब्शी के लंड से मेरी चूत की क्या दुर्दशा हुई थी.
उस बनमानुष ने मेरी चूचियों का भी बड़ी बेरहमी से मर्दन किया था अतः मेरी चूचियां भी सूज कर लाल हो गई थीं और मीठी मीठी टीस उठ रही थी. सवेरे से लेकर रात तक में सात मर्दों से चुद चुकी थी,
कुल मिलाकर 9 बार, (अपने बाप की तीन चुदाई को मिला कर).
धीरे धीरे मैं पूरी रंडी बनती जा रही थी. मैं आहिस्ता आहिस्ता वासना की गुलाम बनती जा रही थी. मुझे इसका अहसास था किन्तु अब मुझे इसमें मजा आने लगा था.
मेरे साथ जो कुछ घट रहा था इसका मुझे कोई मलाल नहीं था. आज का सवेरा फिर एक नये दिन की शुरुआत थी,
जिसके गर्भ में क्या था यह सिर्फ मेरा भगवान ही जानता था.
मैं आज के दिन को अन्य दिनों की तरह भगवान को समर्पित करते हुए नहा धो कर फ्रेश होकर बाहर आई.
नहाने धोने से कल की थकान में थोड़ी कमी हुई मगर लगता था नींद अब तक पूरी नहीं हुई.
“मालिक, नाश्ता लगा दूं?” हरी चाचा मेरे नानाजी से पूछ रहे थे.
“लगा दो भाई, मैं इन दोनों को भी बुलाता हूं.
अरे रघु, केशू को लेकर नाश्ता करने आ जाओ भाई.” मेरी ओर मुखातिब हो कर बोले, “बिटिया तू ठीक से सोई कि नहीं?”
“मैं ने ठीक से आराम कर लिया नानाजी.” मैं बोली.
“अभी नाश्ता करके हमलोग मार्केटिंग के लिए जाएंगे,
तुम भी साथ चलोगी क्या?.”
नानाजी ने पूछा.
“नहीं मैं नहीं जाऊंगी. यहां आसपास घूमना पसंद करूंगी.” मैं ने कहा.
“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी” नानाजी ने कहा.
नाश्ता करते वक्त नानाजी ने बताया ” आज तेरे दादाजी का जन्मदिन है, सो हम आज शाम को यहां पार्टी करेंगे.”
“ओह, हैप्पी बर्थ डे दादाजी” कहते हुए मैं चहक उठी और दादाजी के गले लग कर चूम उठी.
बाकी लोग ईर्ष्या पूर्ण नजरों से दादाजी को देख रहे थे.
“वाह दादाजी,
आज हम सब दादाजी का बर्थ डे धूमधाम से मनाएंगे” मैं ने उत्साह से कहा.
करीम चाचा ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए वे उनके साथ बाजार नहीं जा पाएंगे.
“ठीक है करीम कोई बात नहीं, तुम आराम करो,
मैं कार चला लूंगा. हम दो तीन घंटे में वापस आएंगे” कहते हुए नानाजी दादाजी और बड़े दादाजी के साथ बाजार निकल पड़े.
ज्यों ही वे बाजार की ओर निकले,
करीम चाचा मेरी ओर मुखातिब हुए और बोले, ” तो बिटिया रानी, अब क्या इरादा है?”
“क्या मतलब?” मैं चकित हो कर बोली. अभी अभी तो उन्होंने नानाजी को कहा था कि तबियत खराब है.
“क्या मतलब क्या? तू खूब समझ रही है मैं क्या कह रहा हूं. अनजान मत बन. मुझे भी थोड़ा मजा लेने दे बिटिया.
चल बेडरूम में.” बड़े अश्लील ढंग से मुस्कुराते हुए बोला.
मेरे पापा असहाय भाव से हमें देखते रहे.
“तू भी चल ना रघु साथ में, बड़ा मजा आएगा.
आजतक तो दोनों मिलकर खूब मज़ा लूटे हैं. आज भी साथ साथ मज़ा लूटेंगे.
क्या बोलती हो बिटिया?” करीम चाचा ने पापा और मेरी ओर बेहद कामुक भाव से देखते हुए कहा.
पापा ने मेरी ओर असहाय भाव से देखा,
लेकिन शायद वे तो खुद भी यही चाहते थे, तुरंत बोल पड़े, “ठीक है, ठीक है, चलो मैं भी चलता हूं.”
इधर मैं सोच रही थी कि मैं ने भी क्या किस्मत पाई है,
एक बार जो वासना के दलदल में उतरी तो मुझसे मिलने वाला हर मर्द मुझे भोगने के लिए लालायित ही मिलता गया.
उसी कड़ी में अभी अभी वैसा ही योग मेरे सामने था जिससे न ही मैं बच निकल सकती थी न ही बचना चाहती थी,
उल्टे मैं रोमांचित हो रही थी उन दो दो मर्दों की सामुहिक भोग्या बनने की कल्पना
मात्र से. अपने पापा के लंड का स्वाद तो चख ही चुकी थी,
अब करीम चाचा का नया अजनबी लंड मेरी चूत का इंतजार कर रहा था और मैं भी तो रोमांचित हो रही थी,
एक तो करीम चाचा का अजनबी लौड़ा और उस पर अपने पापा के साथ सामुहिक मैथुन.
“कितने चालाक हो करीम चाचा, तबीयत खराब होने का बहाना करके मेरे साथ मौज करने का मौका निकाल ही लिया.
चलिए चलिए जो करना है कर लीजिए.
बिना किए आप मानिएगा थोड़ी.” बोलती हुई उनके साथ बेडरूम में चली गई.
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11-27-2020, 03:54 PM,
#26
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
जैसे ही मैंने कमरे में प्रवेश किया,
बड़ी बेताबी से मुझे सामने से बांहों में जकड़ कर करीम चाचा ने चूमना शुरू कर दिया.
करीम चाचा भी मेरे पापा की तरह ही हट्ठे कट्ठे 55 साल के पहलवान से कम नहीं थे.
तोंद थोड़ा निकला हुआ था मगर थे मजबूत कद काठी के. कद करीब 5 फुट 11 इंच होगा.
इधर पापा ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और खुद भी पीछे से मुझे दबोच लिया और मेरी चूचियों को दबाने लगे.
कितने हरामी थे मेरे पापा.
खुद तो रिश्ते को शर्मशार करके मेरे साथ मुंह काला किया और अब पराए मर्द के सामने परोस कर पुनः मेरे साथ सामुहिक संभोग के लिए तत्पर थे.
रिश्ते नाते की मुझे भी कौन सी परवाह थी,
मैं तो खुद भी उनकी कामुकता भरी चेष्टाओं से वासना की अग्नि में झुलसने लगी थी और बड़ी बेकरारी से मेरे साथ होने वाली कामक्रीड़ा का आनंद लेने को लालायित हो उठी थी.
मैं अब वासना के खेल का पूर्ण आनंद लेने के लिए हमारे बीच के नाते रिश्ते के तारों को छिन्न-भिन्न करके
अपने अंदर की सारी भावनाओं को समूल नष्ट कर देने का मन बना चुकी थी और इसके लिए जरूरी था कि हमारे बीच किसी प्रकार का कोई राज़, राज़ न रहे और हम सब एक दूसरे के लिए खुली किताब बन जाएं.
मुझे ही इसकी पहल करनी थी.
“हाय पापा, इतनी बेसब्री और बेरहमी से अपनी बेटी की चूचियों को मत मसलिए ना. मैं कहीं भागी जा रही हूं क्या?
पूरी की पूरी आप लोगों की ही तो हूं.
” मैं ने जानबूझ कर करीम चाचा के सामने हमारे रिश्ते का पर्दाफाश कर दिया.
करीम चाचा अविश्वसनीय नज़रों से आंखें फाड़कर कभी मुझे देखते कभी नौकर हरिया को.
“साले कमीने, तूने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा.
” वे बेसाख्ता बोल उठे.
मेरे पापा करीम चाचा के सामने इस तरह आकस्मिक हुए रहस्योद्घाटन से तनिक लज्जित और किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये, मगर मैं ने मामला संभाल लिया और बोली, “क्या फर्क पड़ता है चाचा, नाना, दादा, पापा, चाचा, भाई या पति सब बाद में, पहले तो सब मर्द ही हैं ना, कभी न कभी किसी न किसी स्त्री को चोदेंगे ही.
मैं बेटी, नतनी, पोती, भतीजी, बहन या पत्नी बाद में हूं, पहले एक स्त्री हूं, जिसकी आज नहीं तो कल किसी न किसी मर्द से चुदाई तो होनी ही है.
” फिर पापा की ओर कनखियों से देखती हुई बोली, “वैसे भी किसी ने मुझसे कहा था, लंड ना चीन्हे बेटी. लीजिए, अब मैं कहती हूं, चूत ना चीन्हे रिश्ते नाते.
पिछले पांच दिनों में नानाजी, दादाजी, बड़े दादाजी और पापा के अलावा चार अजनबी बूढ़ों ने मुझे मनमर्जी ढंग से चोद चोद कर रंडी बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है क्या?
खुद भी बेशरम हो कर मजा लिए और मुझे भी चुदाई का मज़ा लेना सिखा दिया
सच पूछिए तो मैं इन लोगों की शुक्रगुजार हूं और अहसानमंद भी.
अब और ज्यादा दिमाग मत चलाइए, चलिए शुरू हो जाईए,
जो आग आप लोगों ने लगाई है पहले उसे बुझा तो दीजिए.
” मैं बिना लाग-लपेट के बेशर्मी से बोल उठी.
मेरी बातों ने पापा की शर्मिंदगी को खत्म तो किया ही, साथ ही साथ उस गरमागरम माहौल की आग में घी का काम भी किया.
“वाह बिटिया वाह, अब आएगा मज़ा.
” हवस के पुजारी करीम चाचा की आंखों में वासना की भूख चमक उठी. बिल्कुल वहशी जानवर की तरह मुझ पर टूट पड़े और आनन फानन में मेरे शरीर को कपड़ों से मुक्त कर दिया और मेरी नंगी दपदपाती काया को अपलक लार टपकाती नजरों से निहारते हुए अपनी किस्मत पर रश्क करने लगे.
“अब दीदे फाड़ कर क्या देख रहे हैं, पहले कोई नंगी स्त्री नहीं देखी है क्या? अपने कपड़े भी तो उतारिए, कि मैं उतार दूं?
” मैं किसी खेली खाई छिनाल की तरह बोल उठी. मैं वास्तव में वासना की ज्वाला में जल रही थी.
करीम चाचा मानों तंद्रा से जाग उठे और पलक झपकते मादरजात नंगे हो गए. पूरे शरीर पर बाल भरे हुए थे, किसी रीछ की तरह.
सर पर अधपके घुंघराले बाल और लंबोतरे चेहरे पर बेतरतीब लंबी दाढ़ी. दोनों जांघों के बीच सामने झूलता कोयले की तरह काला 9 इंच लंबा लंड, मगर भयानक मोटा, चार इंच के करीब.
लंड के सामने का चमड़ा कटा हुआ, सुपाड़ा चिकना और टेनिस बॉल की तरह गोल.
एक बार तो मैं अवाक रह गई, उनके लंड के दर्शन से.
मेरी तंद्रा भंग हुई जब किसी भूखे भेड़िए की तरह करीम चाचा मुझ पर टूट पड़े. मुझे अपनी मजबूत बांहों में दबोच कर बिस्तर पर गिरा दिया और बेहताशा चुम्बनों की बौछार करने लगे.
इधर मेरे पापा भी मादरजात नंगे हो कर मेरे नंगे जिस्म में पीछे से चिपक गये.
“हाय राम इतनी बेसब्री किस बात की, आराम से कीजिए ना” मैं बोली.
“अब क्या आराम से, इतनी मस्त माल पहली बार मिली है मुझे. अब तो बर्दाश्त नहीं हो रहा है बिटिया.
” कह कर करीम चाचा मेरे मुंह में अपनी जीभ घुसा कर चुभलाने लगे और मेरी चूचियों को बेरहमी से मसलने लगे.
मेरी सिसकारियां उनके मुंह से बंद थीं.
मेरे पीछे मेरे पापा मेरी गांड़ को चाट रहे थे.
मेरी गांड़ को दोनों हाथों सेफैला कर मेरे गुदा मार्ग में जीभ डाल कर चाट रहे थे. मेरी उत्तेजना अपने चरम पर थी.
मैं पागलों की तरह चाचाजी की बांहों में कसमसा रही थी.
अब करीम चाचा ने एक हाथ की उंगली मेरी चूत में भच्च से पेल दिया.
इस आकस्मिक हमले से मैं चिहुंक उठी.
इधर मेरी चूत में करीम चाचा की उंगली घुसी और दूसरे ही पल मेरी गांड़ में मेरे पापा ने उंगली घुसा दी.
इस दोतरफे हमले से मैं छटपटा उठी.
“आह हरामियों, ओ्ओ्ओ्ओह उफ्फ, इस्स्स्स.” मैं सिसक उठी.
मैं दो दो पहलवानों के बीच परकटी पंछी की तरह फड़फड़ा कर रह गई.
मैं दाहिने करवट पर लेटी थी, सामने करीम चाचा बांए करवट ले कर और पीछे मेरे पापा दाहिने करवट लेकर मेरे नग्न शरीर से खेल रहे थे.
मैं पागल होती जा रही थी.
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11-27-2020, 03:54 PM,
#27
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
मेरी सिसकारियां सुन कर दोनों ने समझ लिया कि लोहा गरम है और प्रहार करने का उचित अवसर यही है.
करीम चाचा ने मेरा बायां पैर उठा कर अपने कमर पर चढ़ा लिया और अपना मूसल जैसा लौड़े का सुपाड़ा मेरी गीली चूत के मुहाने पर रखा और एक करारा धक्का दिया.
मैं पीड़ा के मारे चीख उठी, क्योंकि उनका सुपाड़ा इतनी देर में मेरे अनुमान से कहीं अधिक बड़ा हो चुका था.
मेरी चूत को सीमा से बाहर फैला कर उनका मोटा लौड़ा करीब चार इंच घुस चुका था. मेरी आंखें फटी की फटी रह गई.
सांस थम सा गया था.
“हाय मम्मी मर गई. फट गई रे बप्पा मेरी चूत.” मैं चीखी.
“चुप हरामजादी. एकदम चुप्प्प साली कुतिया, इतना लौड़ा खाने के बाद भी मरने की बात करती है.
अभी देख तुझे कितना मज़ा आएगा. हिलना मत.”
कहते हुए उस वहशी दरिंदे ने एक और जबर्दस्त प्रहार कर दिया और मेरी चूत को चीरता हुआ उनका लौड़ा पूरा जड़ तक अन्दर पैबस्त हो गया.
“आ्आ्आ्आ्आह” किसी हलाल होती मेमने की तरह मेरी दर्दनाक कराह निकल गई.
अभी मैं इस दर्दनाक प्रहार की व्यथा से उभरी भी नहीं थी कि पीछे से मेरे पापा ने अपने लौड़े से मेरी गांड़ में हमला बोल दिया.
एक भयानक धक्के से मेरे गुदा द्वार को फैलाता हुआ आधा लंड भीतर ठोंक दिया.
“हाय राम मार डाला रे आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह.” मैं कराह उठी.
अब पापा गुर्राए, “चुपचाप रह और मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में पूरा घुसाने दे कुतिया.”
कहते कहते एक और हौलनाक धक्का मारकर पूरा लौड़ा जड़ तक पेल दिया.
मेरी घुटी घुटी आह निकल पड़ी. ऐसा लगा मानो मेरी गांड़ फट गई और उनका 9″ लंबा लंड मेरी अंतड़ियों को चीर डाला हो.
मैं दांत भींच कर दोनों लौड़ों को बमुश्किल अपने अंदर समाहित कर स्थिर हो गई. उन्होंने भी मेरी स्थिति को समझा और कुछ पल उसी स्थिति में स्थिर रहे.
परंतु आश्चर्यजनक रूप से कुछ ही पलों में दर्द छूमंतर हो गया और मैं खुद ही चुदासी रंडी की तरह बोल पड़ी,
“आह ओह अब ठीक है, अब चोदिए जी.”
उन वहशी भेड़ियों को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई.
पहले धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगे फिर ठापों की रफ़्तार बढ़ाने लगे.
मैं उनके बीच पिसती हुई दोनों लौड़ों से चुदती आनंद के समुद्र में गोते लगाने लगी.
दोनों के धक्के एक साथ लग रहे थे और मुझे हिलने की भी आवश्यकता नहीं थी.
ऐसा लग रहा था मानो दोनों के लंड आपस में मिलने की कोशिश में मेरे गर्भाशय और अंतड़ियों के बीच की दीवार को फ़ाड़ डालने की जद्दोजहद में लगे हों.
“आह मेरी रानी, ओह मेरी बिटिया, ले मेरा लौड़ा, ओह रे कुतिया, ओह मेरी जान, मेरी रंडी चूतमरानी बुर चोदी,” करीम चाचा बोले जा रहे थे और चोदे जा रहे थे.
“ओह मेरी लंड रानी, तेरी गांड़ पहले क्यों नहीं चोदा.
क्या मस्त गांड़ है बेटी, आह बहुत मजा आ रहा है मेरी गांड़ मरानी हरामजादी रंडी.
आह ओह ले लौड़ा, हुम हुम हुं हुं.” गंदे गंदे अल्फाज़ उनके मुंह से उबल रहे थे.
मैं भी कहां कम थी. दो दो पहलवानों के बीच पिसती हुई दो दो लौड़े से चुदती मस्ती के सागर में डूबती उतराती बड़बड़ाने लगी थी, “चोद हरामजादों, बेटीचोदों, नानी को चोदा नानी चोद, मां को चोदा मादरचोद, अब बेटी को भी चोद ले, अपनी रानी बना लें, रंडी बना ले, कुतिया बना ले चुदक्कड़ों, कुत्तों, आह आह ओह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह आ्आ्आ्आ्आह.”
वे दोनों बड़े ही अच्छे साझेदारों की तरह इतनी अच्छी तरह तालमेल बैठा कर चोद रहे थे कि मैं सातवें आसमान पर पहुंच गई.
कभी करीम चाचा और पापा अगल बगल से चोदते,
कभी चाचा नीचे और पापा ऊपर तो कभी पापा नीचे और करीम चाचा ऊपर, मगर मैं हर हाल में उनके बीच पिसती हुई मजे लेती रही.
पूरे बेड को मानो हमलोगों ने कुश्ती का अखाड़ा बना दिया हो.
इस दौरान मैं एक बार उत्तेजना के चरमोत्कर्ष में बेहद हाहाकारी स्खलन से गुजरने लगी, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह अम्म्म्म्म्माआआआआ मैं गई््ई्््ई््ई्््््ई्््ई््ई् ” मेरे निढाल होते शरीर को संभाल कर दोनों खड़े हो गए और मुझे हवा में उठा लिया और आगे पीछे से लगातार चोदते रहे. लगातार होती चुदाई से मैं दुबारा उत्तेजित हो उठी और पूर्ण रूप से अपने आप को उनके सुपुर्द कर दिया कि अब जैसे चाहो चोद लो. वे दोनों जंगली जानवरों की तरह मुझे भंभोड़ रहे थे, झिंझोड़ रहे थे, निचोड़ रहे थे, मेरे शरीर का सारा कस बल निकाल रहे थे.
मैं उनकी चुदाई क्षमता की कायल होते हुए मदहोशी में चुदती हुई अपूर्व सुख के सागर में डूब गई थी.
अंततः करीब 40 मिनट बाद पसीने से लथपथ, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह ले्ल्ल्ले मेरा लौड़ा रस” उन्होंने मुझे कस के मुझे दबोच कर अपना मदन रस मेरी चूत और गांड़ में पिचकारी की तरह छर्र छर्र उंडेलने लगे और उसी समय मैं भी दुबारा झड़ने लगी.
“हाय राज्ज्जा ओह लंड्ड्डराज्ज्जा आह्ह्ह्ह्ह्ह इस्स्स्स्स्स्स मैं गई,” चरम सुख के वे अकथनीय पल, मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं.
अद्भुत, स्वर्गीय, अनिर्वचनीय.
फिर हम तीनों खल्लास हो कर नंग धड़ंग निढाल बिस्तर पर लुढ़क गए.
पूर्ण संतुष्टी की मुस्कान उन बूढ़ों के होंठों पर खेल रही थी.
देर पहले शेर की तरह सर उठाए उनके विशाल लंड बड़ी मासूमियत से चूहों की तरह दुबक गए थे.
मैं ने आज जो सुख पाया उसके लिए उन दोनों की शुक्रगुजार थी. हम निढाल जरूर थे मगर एक दूसरे के नंगे जिस्म से अब भी चिपके हुए थे. मुझे उन पर बहुत प्यार आ रहा था.
मैं उनको बारी बारी से चूम उठी.
“सचमुच मेरे राजाओ, खूब मज़ा दिया आप लोगों ने.
आई लव यू बोथ.” मैं बोल उठी.
करीम चाचा तो निहाल हो उठे.
मेरे गालों को सहलाते हुए बोले, “तू सच में हरिया के लंड की मस्त उपज है रानी.
आज तक इतना मजा नहीं आया जितना आज आया. क्या मस्त बदन है तेरा. चोद के दिल खुश हो गया.
तू सच में मस्त माल है. हरिया तू सही में किस्मत वाले हो, इतनी जबरदस्त खूबसूरत सेक्सी बेटी मिली है तुझे.”
पापा गर्व से बोले, “अरे आखिर बेटी किसकी है.”
“अब बेटी वेटी कुछ नहीं, मुझे सिर्फ कामिनी बोलिए.
बड़े आए बेटी बोलने वाले.
एक लौंडिया आपके लंड से पैदा हुई, आपसे चुदवाने के लिए, बस यही याद रखिए.” मैं बड़ी बेशर्मी से बोली.
“हां हां, तू बस एक खूबसूरत लौंडिया हो, जिसका नाम कामिनी है और हम इस लौंडिया के चुदक्कड़. अब ठीक है?” पापा बोले.
“हां अब ठीक है मेरे चोदू बलमा.” मैं उन दोनों के लंड को सहलाते हुए बोली. “अच्छा कल आपने चार औरतों को चोदने की कहानी सुनाई, बाकी औरतों के बारे में भी तो बताईए.” मैं पूछी.
“करीम, आगे की कहानी तू बता दे भाई”
पापा बोले.
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11-27-2020, 03:54 PM,
#28
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“ठीक है तो सुनो. सब्जी बेचने वाली औरत से हम दोनों साझेदार हो गये थे. एक दिन तेरे बाप को सब्जी वाली के साथ चुदाई करते हुए मैं ने रंगे हाथ पकड़ लिया. दोनों फर्श पर ही चुदाई में बिजी थे. बिल्कुल नंगे. उस दिन मैं मालिक को जल्दी छोड़ कर आ गया था. दरवाजा सिर्फ उढ़का हुआ था. दरवाजा ज्योंही खुला मैं अंदर का सीन देख कर दंग रह गया. यह हरिया सब्जी वाली को कुतिया बना कर चोद रहा था.”
“यह क्या हो रहा है?” मैं जोर से बोला. नंगी सब्जी वाली की बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर मेरा लौड़ा टनटना उठा था. उसकी फूली हुई भैंस जैसी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया था. मैं उसे चोदने के लिए पागल हो गया था. मैं उसे धमकाते हुए बोला, “देख मैं ने तुम दोनों को चुदाई करते हुए रंगे हाथ पकड़ा है. मुझे भी चोदने दे नहीं तो मालिक को बता दूंगा.” मैं ने धमकी दी तो सब्जी वाली गिड़गिड़ाने लगी.
“मालिक को मत बताइएगा बाबूजी, आप चाहो तो हमें चोद लीजिएगा.” सब्जी वाली औरत बोली.
“ठीक है तो हरिया, तू पहले चोद ले फिर मैं इसे चोदुंगा.” ब्लैकमेल कर के सब्जी वाली को मुझसे चुदने के लिए मना लिया.
जब तक हरिया उस औरत को चोदता रहा, मैं कपड़े उतार कर चोदने के लिए तैयार हो गया. हरिया चोद कर उस औरत को छोड़ा, मैं फनफनाता लौड़ा उठाए उसकी ओर बढ़ा, लेकिन उस औरत ने ज्यों ही मेरा लौड़ा देखा, डर के मारे रोने लगी, “बाप रे इतना मोटा लंड, हम तो मर ही जाएंगेे. मेरी बुर फट जायेगी. हमें मत चोदिए ना.” वह रोती हुई बोली.
“चुप साली रंडी, चुपचाप चोदने दे.” कहते हुए झपट कर उसे पकड़ लिया और उसके थल थल करती चूचियों को मसलते हुए उसके दोनों पैरों को फैला कर अपना लौड़ा उसकी झांटों से भरी हुई भैंस जैसी फूली बुर के मुहाने पर रखा और घप्प से एक जोरदार धक्का मारकर आधा लंड घुसा दिया. “ले रंडी हुम्म्म्म”
वह दर्द के मारे बिलबिला कर जोर से चिल्ला उठी, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह फाड़ दिया रे फाड़ दिया मेरा बूर. मार दिया मा्आ्आ्आ.”
मैं ने गुस्से से उसको दो झापड़ रसीद कर दिया और गुर्रा कर बोला, “चोप्प साली बुर चोदी रंडी, चुपचाप चोदने दे.” कहते हुए एक और जोर का धक्का मारकर पूरा लौड़ा उसकी बुर में उतार दिया. वह रो रही थी, छटपटा रही थी मगर मैं ने उसे छोड़ा नहीं, इतने सालों बाद तो चोदने के लिए एक औरत मिली थी, कैसे छोड़ देता. फिर तो दे दनादन चोदने लगा और कुछ ही देर में उसका रोना चिल्लाना बन्द हो गया और खूब उछल उछल कर चुदवाने लगी, “आह ओह राजा चोद साले हरामी फाड़ दो मेरी बुर, आह आह.”
“अब आ रहा है ना मज़ा साली हरामजादी कुतिया बुर चोदी, इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी चूत मरानी” मैं बोला. आधे घंटे की घमासान चुदाई के बाद जब मैं अपना आठ साल से जमा लौड़ा रस उसकी चूत में छोड़ने लगा तो वो कुतिया भी पागल की तरह मुझसे चिपट गई और उसका भी काम तमाम होने लगा. “हाय राजा हम तो गये आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह मां ््आ इस्स्स्स मस्त चुदक्कड़ हो जी. हमको मां बना दो राज्ज्ज्जा आ्आ्आह.”
“हां रे कुतिया आज तुझे पेट से कर देता हूं हर्र्र्र्र्रामजादी रंडी आह ओह आह.” जब तक मेरे लंड का रस अपने बूर से पूरा नहीं चूस लिया, हम से चिपटी रही. उसके बाद तो हम दोनों ने मिलकर उस दिन के बाद ऐसा चोदा कि दो महीने बाद पता चला कि सच में वह पेट से हो गई और हमको बोली, “हम इस बच्चे को जन्म देंगे. आप दोनों ही इस बच्चे के बाप हो. हमरे मरद से तो बीस साल में भी बच्चा नहीं हुआ. अब बच्चा पैदा होने के बाद ही आप लोगों को चोदने देंगे नहीं तो बच्चा खराब हो जाएगा.”
हम घबड़ा गये कि तब तक हम कैसे दिन काटेंगे. हमको चोदने का चस्का लग गया था. बिना चोदे हमें चैन कैसे मिलेगा. फिर भी मन मसोस कर मैं बोला, “ठीक है, आज से हम तुझे नहीं चोदेंगे. मगर तब तक हम कैसे दिन काटेंगे?”
“अरे हम इसका गांड़ तो चोद ही सकते हैं ना. कम से कम पांच छः महीने तो आराम से गांड़ मार सकते हैं.” तेरे पापा बोले.
“नहीं बाबा आप लोगों का लंड बहुत बड़ा है. मेरा गांड़ फाड़ दोगे.” घबराकर वह बोली.
“ठीक है तो चलो अभी देख लेते हैं. अगर तकलीफ होगा तो नहीं चोदेंगे.” मैं बोला.
वह झिझकते हुए राजी हो गई. हमें तो मुंहमांगी मुराद मिल गई. फटाफट कपड़े खोल कर उसे कुतिया बना दिया और पहले हरिया अपने लंड में तेल लगा कर उसकी मोटी मोटी गोल गोल गांड़ को फैलाया और गांड़ के सुराख के पास लंड का सुपाड़ा टिका कर धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा. हरिया के लंड का सुपाड़ा सामने से नुकीला होने के कारण अपने आप रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुसता चला गया. लेकिन कुछ दूर घुसने के बाद वह चिल्ला उठी क्योंकि लंड पीछे की तरफ तो मोटा था. अब एक बार लंड को छेद मिल गया तो तेरा बाप कैसे छोड़ देता. “हाय राम मार डाला रे आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह फाड़ दिया, छोड़ हरामी” वह चिचिया उठी.हरिया कहां मानने वाला था, एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा लंड अन्दर पेल दिया. “मां अम्मा मार दिया मादरचोद, आह” चिल्ला उठी. हरिया कुछ नहीं बोला बस चुपचाप चोदने में लग गया.
दो मिनट बाद ही पारो मस्त हो गई और बोलने लगी, “आह ओह राजा, चोद हरामी चोद मादरचोद हमारा गांड़ चोद बाबू.,” हम समझ गए मामला फिट हो गया. फिर क्या था पहले हरिया चोदा फिर हम चोदे. “बहुत मस्त है रे रानी तेरा गांड़. हम पहले काहे तेरी गांड़ पर ध्यान नहीं दिये.” मैं बोला.उस दिन के बाद हम छः महीने तक उसके गांड़ से काम चलाए. उसकी मोटी मोटी गोल गोल गांड़ को चोद चोद कर हमने और ज्यादा फैला दिया था. जब उसके मां बनने के लिए दो महीने बाकी थे और पेट गुब्बारे जैसा फूल गया था तब हमने उसको चोदना छोड़ा. आखिरी महीने में तो उसका पेट इतना बड़ा हो गया था कि बड़ी मुश्किल से चल फिर सकती थी. फिर उसको 46 साल की उम्र में जुड़वां बच्चे हुए. एक लड़की और एक लड़का. दोनों का वजन लगभग ढाई ढाई किलो था. लड़की का नाम करीम से करिश्मा और लड़के का नाम हरिया से हरीश रखा. बच्चे पैदा होने के बाद तो उसकी चूचियों का साइज़ और बढ़ गया और झूल गया था. चूत तो भोंसड़ा बन गया था. हम तीनों के बीच प्यार तो हो गया था मगर चुदाई में अब वह मजा नहीं रहा.
उसे भी समझ आ गया था कि हमारे बीच अब चुदाई में वह रस नहीं रहा. फिर भी कभी कभी चुदाई हो ही जाता था. हम दोनों अब दूसरी औरतों को चोदने के फिराक में लग गए.
आगे की घटना अगली कड़ी में
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11-27-2020, 03:54 PM,
#29
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह नानाजी के ड्राइवर करीम चाचा ने मेरे बाप के साथ मिलकर मुझसे अपनी वासना की आग बुझाई. उन लोगों के बीच इतना बढ़िया तालमेल था कि जब दोनों मिलकर मुझे भोग रहे थे, उनके गठे शरीर के बीच पिसती हुई और उनके विशाल लिंगों से बिंधती हुई भी मैं संभोग सुख के अपार समुंदर में डूब गई थी. करीम चाचा नौवें व्यक्ति थे जिन्होंने मेरे तन से अपनी काम क्षुधा शांत की. करीम चाचा और मेरे बाप ने बड़ी ही बेरहमी और धमाचौकड़ी मचाते हुए मेरे बदन का उपभोग किया. अभी भी मुझे चोदने के बाद नंग धड़ंग मेरे अगल बगल लेटे मेरे नंगे तन को सहलाते हुए अपने पिछले दिनों की विभिन्न औरतों से हुई चुदाई की कहानी सुना रहे थे. यह मेरी ही जिज्ञासा थी जिसे अब करीम चाचा पूरी कर रहे थे. मैं सोच रही थी कि पिछले पांच दिनों में ही मैं किस तरह अलग अलग परिस्थितियों से गुजरती हुई पूरी तरह छिनाल औरत बन गई थी. इस दौरान मैं ने अपने अंदर एक अजीब तरह का परिवर्तन महसूस किया. मैं जानती थी कि मेरी मर्जी के बगैर कोई मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकता था, केवल सरदार वाले एपिसोड को छोड़ कर, जो कि मैं समझती हूं एक अपवाद था. लेकिन उस घटना के कारण अब मेरे अंदर एक शैतानी कीड़ा कुलबुलाने लगा था, शैतानी विचार सर उठाने लगा था कि साधारण तौर पर बिना किसी विरोध के प्रेममय आपसी सहमति से संभोग क्रिया की तुलना में यदि कोई मेरा बलात्कार करे तो शायद उसका रोमांच और मज़ा कुछ और होगा. बलात्कार करने वाला पूरी शिद्दत से मेरे साथ बलात्कार करे, उसे संतोष हो कि हां उसने जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली और मैं उस दौरान रोती कलपती विरोध करती बलात्कार की शिकार होने का नाटक करती रहूं तो शायद उसका अलग ही लुत्फ होगा. हां यह और बात है कि मेरा बलात्कारी मेरी पसंद का हो.
खैर यह तो मेरे दिमाग में कुलबुलाते कीड़े की बात थी. फिलहाल तो मैं करीम चाचा के मुख से विभिन्न स्त्रियों के साथ हुए उनके शारीरिक संबंधों के बारे में सुन कर मज़े ले रही थी. “आप लोगों का कांटा तो चौथी औरत में ही अटका हुआ है. सब्जी वाली के बाद और कितने औरतों को अपना शिकार बनाए?” मैं पूछी.
“हां तो मैं बता रहा था कि सब्जी वाली के बाद नये शिकार की तलाश में थे. सौभाग्य से बहुत जल्दी दो और औरतें मिली. तेरे नानाजी के घर के पीछे जो घर बना है, जिसमें हम रहते हैं, उस घर के बनते समय कुछ मजदूर काम करने के लिए आते थे. उनमें दो औरतें भी थीं. एक करीब पैंतीस साल की थी और दूसरी करीब चालीस साल की. पैंतीस साल वाली सांवले रंग की करीब पांच फुट लंबी दुबली पतली चुलबुली औरत थी, छोटी छोटी चूचियां किसी 16 साल की लड़की की तरह, हां चूतड़ थोड़ा बड़ा था, नाम था कमला. चालीस साल वाली कोयले की तरह काली मगर भारी बदन वाली गठे शरीर की, भरी भरी बड़ी बड़ी चूचियां, बड़ा सा चूतड़, पांच फुट आठ इंच ऊंची, काली थी मगर देखते ही लंड खड़ा हो जाता था, नाम था उसका हीरा. इन दोनों औरतों को देख कर हम दोनों इन्हें चोदने का प्लान बनाने लगे. इनके साथ दो कुली और दो बूढ़े मिस्त्री भी काम करने आते थे. पीछे एक गोदाम था जिसमें सीमेंट राड वगैरह रखा जाता था. मिस्त्री लोग और एक कुली दोपहर को खाना खाने घर जाते थे क्योंकि उनका घर पास में ही था. दोनों रेजा और एक कुली खाना लेकर आते थे और यहीं गोदाम में खाना खाते थे. कमला थोड़ी हंसमुख स्वभाव की औरत थी और थोड़ी चालाक भी. हम उनसे मेल जोल बढ़ा कर पटाना चाहते थे. बातों ही बातों में हमें पता चला कि कमला का आदमी भी मजदूर है और पास के खदान में काम करता है. उसके दो बच्चे हैं. हीरा का आदमी रिक्शा चालक है और उसका कोई बच्चा नहीं है. कमला दो ही दिन में समझ गई कि हम किस किस्म के आदमी हैं. उसने हमारी नज़रों से ही समझ लिया था कि हम किस चक्कर में हैं. हम उनसे बात करते तो हमारी नजरें उनकी चूचियों और कमर से नीचे ही चिपकी रहती थीं.
हम लोग थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेते थे. पानी वगैरह पीने के लिए वे लोग घर से ही मांग लेते थे. तीसरे दिन एक कुली जो यहीं खाना खाता था, तबीयत खराब होने के कारण नहीं आया. उस दिन दोपहर को खाना खाने के पहले कमला जब पानी लेने आई तो हरिया ने उसे अंदर बुलाया. हमने दरवाजा के अंदर चिकने फर्श पर थोड़ा तेल गिरा दिया था. जैसे ही उसने वहां पांव रखा वह फिसली और गिरने लगी. हरिया तो पहले से तैयार था, उसने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया लेकिन खुद भी संभल नहीं पाया क्योंकि उसका एक पैर फिसलन भरी फर्श पर पड़ा और कमला को लिए दिए फर्श पर गिर पड़ा. वह जानबूझकर ऐसे गिरा कि वह नीचे और कमला उसके ऊपर. हरिया सिर्फ लुंगी पहने हुए था. हरिया का लंड ठीक कमला की चूत पर टिक गया था. कमला उठने की कोशिश में दुबारा गिर पड़ी, इस बार ऐसा लगा जैसे हरिया के लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में कुछ अंदर घुस गया हो.
कमला चिहुंक उठी, “हाय राम ई का?” कमला चौंककर बोली. हरिया को महसूस हुआ कि यहां के गांव देहात की औरतों की तरह कमला ने भी अंदर कुछ नहीं पहना है. बड़ी चालाकी से हरिया ने फर्श पर गिरे तेल से अपने लंड को लसेड़ कर उसे उठाने के बहाने नीचे हाथ डाला और खड़े होने की कोशिश की, इस कोशिश में वह भी जानबूझ कर दुबारा गिरा, मगर इस दुबारा गिरने के बहाने उसकी साड़ी उसकी कमर तक उठा दी और अपने लंड के ऊपर से लुंगी का पर्दा हटा दिया. इस बार वह उसी के ऊपर गिर पड़ा और ऐसा गिरा कि तेल से लिथड़ा उसके लंड का सुपाड़ा कमला की चूत के अंदर फच्च से घुस गया. यह संयोग नहीं था, हमारा पहले से बना बनाया प्लान था. कमला के मुंह से घुटी घुटी आह निकल गई.
“हाय दादा ई का? हटिए.” वह बोल पड़ी. उसका हाथ अनायास ही अपनी चूत की तरफ गया और यह महसूस कर कि हरिया का लंबा और मोटा सा लन्ड उसकी चूत में धंसा हुआ है, घबड़ा गई. लंड के साइज़ का अनुमान करके कांप उठी. भयानक दर्द हो रहा था जिसके कारण वह तड़प उठी थी. वह जितनी बार उठने की कोशिश करती है उतनी बार गिरती और उसी प्रकार हरिया जितनी बार उठने का उपक्रम करता उतनी बार जानबूझ कर गिर जाता और इस क्रम में हर बार थोड़ा थोड़ा करके पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. कमला दर्द के मारे हलकान होती हुई रोने चिल्लाने लगी.
“हाय हाय मर जाएंगे, हाय राम हटिए हटिए फाड़ दिया मेरा बूर”
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11-27-2020, 03:55 PM,
#30
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
"हाय हाय मर जाएंगे, हाय राम हटिए हटिए फाड़ दिया मेरा बूर”

जब हरिया ने देखा कि पूरा लंड घुस गया है तो थोड़ा रुका और बोला, “हम का करें बोलो। उठना चाहते हैं तो गिर पड़ते हैं। तुम ही हटो ना ” उसने तो जीत का झंडा गाड़ दिया था।

“हाय दैय्य्य्याआ्आ्आ्आ हम कैसे हटेंगे, तेरा लंड मेरा बूर में फंसा हुआ है, ओह्ह्ह मर जाऊंगी, जल्दी निकालो न्न्न्न्न्ना” वह रो रही थी। चुदी चुदाई औरतों के लिए भी खौफनाक हरिया का लंबा और मोटा लंड सच में उस दुबली पतली औरत की छोटी सी चूत के लिए किसी क़यामत से कम नहीं था। उसकी चूत फैल कर हरिया के गधे जैसे लंबें और मोटे लंड से फंस कर चिपक गई थी।

हरिया करवट ले कर नीचे आ गया और कमला को अपने ऊपर करके बोला, “चल अब तू ही उठ जा” जबकि वह जानता था कि उसके लिए भी उठना आसान नहीं था। जितनी बार भी उठने की कोशिश करती, हरिया का लंड थोड़ा निकल जाता था लेकिन फिर जैसे ही वह फिसल कर गिरती, फिर घप्प से घुस जाता था।

वह दर्द से हाय हाय कर उठती थी, “हाय राम मार डाला रे बप्पा, फाड़ दिया मेरा बूर”। मगर इसी तरह कुछ ही देर में लंड अंदर बाहर होने से कमला की चूत थोड़ी ढीली हुई और दर्द की जगह अब उसे मज़ा आने लगा था। उसने उठने की कोशिश करना बंद कर दिया और थोड़ी शरमाते हुए हरिया के ऊपर लद गयी, एक प्रकार से अपने आप को हरिया के हवाले कर दिया। हरिया समझ गया कि अब कमला पूरी तरह उसके काबू में आ चुकी है। उसने लुंगी पूरा हटा दिया और धीरे-धीरे नीचे से धक्का लगाने लगा और इधर कमला भी शरमाते हुए अपनी कमर चलाने लगी थी। मैं दरवाजे के बाहर खड़े हो कर सारा नज़ारा देख रहा था।

जब मैं ने देखा कि अब तवा गरम है और दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे हैं, उसी वक्त कबाब मैं हड्डी की तरह वहां पहुंच कर बोला, “यह क्या हो रहा है?”

मेरी आवाज़ सुनकर कमला तो हड़बड़ा गई मगर हरिया उसी तरह नीचे से कमला को चोदता रहा और बोला, “अरे कुछ नहीं भाई, हम फिसल कर गिर पड़े हैं, आकर हमें उठा लो।”

मेरे सामने कमला की चिकनी गांड़ खुली हुई मुझे निमंत्रण दे रही थी। मैं अपने लंड में पहले से तेल लगा कर सिर्फ लुंगी पहने हुए था, उन्हें उठाने के लिए आगे बढ़ा और उठाने के बहाने झुका और सामने से लुंगी हटा कर फिसलते हुए कमला के ऊपर गिर पड़ा। मेरा लंड ठीक कमला की गोल चिकनी गांड़ के सुराख पर था। मैं ने उठाने के बहाने कमला की चूचियों को पीछे से पकड़ कर दबाते हुए जोर लगाया और तेल से चुपड़े लंड का सुपाड़ा उसकी टाईट गांड़ में फच्च से घुसा दिया।

जैसे ही मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी गांड़ में घुसा, कमला चीख पड़ी, “हाय रा्मर्र्र्र्र मेरा गां्ड़्ड्ड् फट्ट्ट गय्य्य्या”।

“अरे चिल्लाती क्यों है, उठा रहा हूं ना।” कहते हुए और जोर लगाया तो उसका गांड़ फैलाता हुआ मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुसा दिया।

उसकी गांड़ का छेद फटने फटने को हो गया जिसमें कारण दर्द के मारे और जोर से चीख पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आह फाड़ दिया रे मेरा गांड़” और रोने लगी।

मैं बोला, “अरे रोती क्यों है, उठा रहा हूं ना”। उठाने के बहाने और एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी गांड़ में पेल दिया।

इस बार उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी सांस कुछ देर के लिए रुक गई, किसी हलाल होती हुई बकरी की तरह उसके मुंह से दर्दनाक आवाज निकल पड़ी। “हाय मां्म््म्म्््म््म्््म््म्म््म््म्््म््म्म्आह, मर जाएंगे, छोड़िए हमको, मेरा गां्ड़ फा्फा्ड़ दिया ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्ह्ह्” मैं उसकी आवाज को अनसुना करते हुए धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। धीरे धीरे उसकी गांड़ थोड़ी ढीली हो गई और दर्द जब खत्म हुआ तो उसे मज़ा आने लगा और शरमाते हुए वह भी क़मर चलाने लगी। अब नीचे से हरिया और ऊपर से मैं कमला को चोदने लगे। कमला की शर्म धीरे-धीरे खत्म होने लगी और आह उह करने लगी। हम लोगों ने किला फतह कर लिया था। अब मैं चोदता हुआ उसका ब्लाऊज़ खोल दिया और उसकी नींबू जैसी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा।

वह अब मस्ती में भर गई थी और बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा, ओह राजा, चोदिए जी, चोद लीजिए, आह मज़ा आ रहा है ओह्ह्ह आह्ह्ह्।”

हम दोनों अब पूरी तरह मस्त हो कर चोद रहे थे, “हां कमला, तेरी चूत बड़ी मस्त है,” हरिया बोला, “हां रानी तेरी गांड़ का जवाब नहीं, ऐसा गांड़ पहली बार चोदने को मिला है, आह साली कुतिया इसी के लिए इतना रोना गाना कर रही थी, साली रंडी,” मैं बोल पड़ा।

” हम सब समझती हूं, साले कुत्ते हरामी, हमको चोदने के लिए इतना ड्रामा किया था मादरचोदो, मगर आह्ह्ह्ह खूब मज़ा आ रहा है, आह मेरा बुर में लौड़ा धांस धांस के चोद, मेरा गांड़ में लंड ठोक ठोक के चोद आह्ह्ह्ह ओ्ह्ह्ह्ह मा्म्म्म्म्मां,” वह पागलों की तरह बड़ बड़ करती हुई मजे से चुदवा रही थी।

यह सब होते हुए करीब 15 मिनट हो चुका था, पानी लाने में देरी होने के कारण कमला को पुकारते हुए हीरा भी आ गई और खुले दरवाजे से उसने जो कुछ देखा तो सन्न रह गई। मुंह खुला का खुला रह गया। कमला आंखें बंद कर मस्ती में हम दोनों से खुल कर चुद रही थी और उसके मुंह से आनन्द के मारे सिसकारियां निकल रही थी।

कुछ देर हीरा बुत बनी हमें चुदाई में मग्न देखती रही, फिर अचानक जैसे नींद से जाग उठी और बोली, “हाय राम इहां ई का हो रहा है?”

हमारी मस्तीभरे चुदाई में बाधा, कमला हड़बड़ा गई, मगर हमने उसको छोड़ा नहीं और हीरा की ओर देख कर मैं बोला, “अरे हम गिर गये हैं, उठ नहीं पा रहे हैं, आकर जरा सहायता कर दो ना, वहां दरवाजा में खड़े खड़े क्या तमाशा देख रही है।” मैं जानता था कि वह जैसे ही आएगी, फिसल कर गिर पड़ेगी और हम उसका भी शिकार कर लेंगे। वैसा ही हुआ, जैसे ही उसने दरवाज़े के अंदर कदम रखा फिसली और सीधे हमारे ऊपर गिरने लगी। हरिया कमला को लिए दिए एक तरफ हो गया और मैं कमला को छोड़ कर पलट गया, मेरा लौड़ा कमला की टाईट गांड़ से फच्चाक से निकल कर हीरा के स्वागत में सर उठा कर खड़ा हो गया था। हीरा सीधे मेरे ऊपर आ गई। मैं इसके लिए पहले से तैयार था इसलिए हीरा को अपनी बाहों में सम्भाल लिया। मेरा टनटनाया लौड़ा साड़ी के ऊपर से ही सीधे हीरा की चूत से टकराया। मैं ने थोड़ा एडजस्ट कर के अपने कमर को हल्का सा धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में थोड़ा सा धंस गया था। मैं समझ गया कि यह यहां की देहाती औरतों की तरह यह भी चड्डी वड्डी नहीं पहनी है। वह चौंक उठी, “हाय राम” उसका हाथ झट से अपनी चूत की तरफ गया तो मेरा तन्नाया हुआ लंड से टकरा गया। मेरे टनटनाए गर्म और मोटे लंड का अहसास कर तुरंत उठने की कोशिश करने लगी मगर फिर गिर पड़ी।

“अरे हट, तू हमें उठाने आई है कि हमारे ऊपर गिरने” कहते हुए मैं उसे उठाने के बहाने नीचे से हाथ लगाया और अनजान बनते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया मानो यह सब उसे उठाने की कोशिश में हुआ हो। कमर से नीचे अब वह पूरी तरह नंगी थी और मेरा गधा सरीखा लौड़ा उसकी काली काली फूली हुई झांट से भरी हुई चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। वह हड़बड़ा गई और फिर उठने की कोशिश की लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश सफल नहीं हुई और मेरे ऊपर गिर पड़ी। इस बार उसका गिरना उसके लिए क़यामत से कम नहीं था क्योंकि इस बार मैं ने अपने लौड़े को ठीक पोजीशन में रखा था, जैसे ही वह गिरी मेरा लौड़ा भच्च से उसकी भैंस जैसी बुर को फाड़ता हुआ सुपाड़ा समेत आधा अन्दर घुस गया। दर्द के मारे उसके मुंह से लंबी चीख निकल पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आ्आआ्आ फट्ट्ट्टट््ट गया मेरा बू््ऊ्ऊऊ््ऊ्ऊर ओ्ओओ्ओ््ओ््ओ मा्मा्मां।”

मैं बनावटी झल्लाहट से बोला, “हट साली, खुद मेरे लौड़े पर गिर रही है और मां मां चिल्ला रही है।” वह जितनी कोशिश करती जा रही थी, मेरा लौड़ा धीरे धीरे उसकी बुर को फाड़ता हुआ घुसता चला जा रहा था।

अंततः मेरा पूरा लंड उसकी बुर के अंदर घुस गया और वह दर्द से बिलबिला उठी, “मईर देले गो, हाय रे फाईड़ देले हमर बूर के ( मार दिया मां, हाय फाड़ दिया मेरा बूर को)” चीख चीखकर रोने कलपने लगी।
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