Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
11-27-2020, 03:55 PM,
#31
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“चुप साली हरामजादी, तू खुद मेरे लंड में गिर रही है और चिल्ला रही है, हट मेरे ऊपर से” मैं ने बनावटी गुस्से से डांटा। उसको भी लगने लगा कि यह एक एक्सीडेंट है, अतः फिर उठने की कोशिश करने लगी लेकिन असफल रही। जितनी बार कोशिश करती उतनी बार मेरा लौड़ा अंदर बाहर होता।

“हाय रे मोय आईज मोईर जाबों (हाय, मैं आज मर जाऊंगी)। माय रे बाप रे” चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी थी। लेकिन यह कुछ ही देर की बात थी, फिर तो उसे भी मजा आने लगा और शरमाती हुई अपने आप कमर चलाने लगी। उसकी सिसकारियां निकलने लगी थी। अब मैं समझ गया कि अब खुल के चोदने का समय आ गया है।

मैं बोला, “अब क्या हुआ? अब काहे हटती नहीं है?”

वह शरमाती हुई कमर चलाती धीरे से बोली, “अच्छा लग रहा है अब”

“ओह तो यह बात है। सीधे बोल ना चुदवाने का मन हो गया है।” मैं बोला और उसको नीचे करके दोनों पैरों को फैलाकर घपाघप चोदना शुरू किया। वह अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर चुदाई का मजा लेने लगी, “आह राजा ओह बाबू खूब मज़ा आ रहा है जी, और जोर से चोदिए राजा, ओह ओह”

अब मैं पागल हो गया था, उसकी ब्लाऊज को खोल कर बड़े बड़े चूचियों को दबाने और मसलने लगा और धकाधक चोदने लगा। “साली रंडी इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी हरामजादी कुतिया अभी देख कैसा मज़ा आ रहा है।” मैं बोल रहा था।

“हां राजा ओह सैंया, ओह चोदू, चोद हरामी चोद, साले कुत्ते हम सब समझते हैं, हमको चोदने के लिए ड्रामा किया मादरचोद, चोद हरामजादा, अपना मोटा लौड़ा से आह ओ्ओ्ओ्ओह” अब वह शर्मोहया को ताक में रखकर चुदने लगी थी।

उधर हरिया कमला को उलट पलट कर चोदने में लगा हुआ था। कमला भी खूब मज़ा ले रही थी। करीब आधे घंटे तक हमने उनको चोद चोद कर पगली कर दिया था और वो दोनों हमारे चुदाई की दिवानी हो गई थी। आधे घंटे बाद जब हम खलास हुए, तब तक तो वे दोनों हमारे लौड़ों की पुजारन बन चुकी थी। चुदाई के बाद जब हम उठे तो हीरा और कमला की हालत देखने लायक थी। उठने के लिए तेल वाले जगह से लुढ़क कर फर्श के भूखे भाग में गये। चुदने के बाद उनकी चूत फूल कर पावरोटी की तरह हो गई थी। खड़े हो कर ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। सबसे बुरी हालत कमला की थी। फिर भी कमला मुझसे बोली, “मेरा गांड़ आधा चोद कर छोड़ दिया ना”

“तू अभी रुक, पांच मिनट बाद तेरी गांड़ की चटनी बनाता हूं।” वह ना ना करती रही मगर मैं उसे उठा कर सोफे पर झुका कर कुतिया बना दिया और उसकी गांड़ चाटने लगा। कुछ ही देर में मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया और वह भी मस्ती में आह ओह करने लगी। उसी समय उसके गांड़ में थूक लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया। “हाय हाय” कर उठी वह। फिर तो पूरी कुतिया की तरह पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद ही उसे छोड़ा। इस दौरान हीरा और हरिया हमारी चुदाई के लिए तालियां बजाते रहे। कमला तो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

उस दिन के बाद से जबतक घर का काम नहीं खत्म हुआ हम दोनों कमला और हीरा को रोज मौका निकाल निकाल कर अदल बदल के चोदने लगे। इसी दौरान पता चला कि हीरा गर्भवती हो गई है। लेकिन तब तक घर का काम भी तकरीबन खतम हो गया था। घर काम खत्म होने के बाद भी हम कमला को चोदने पहुंच जाते थे और पास के जंगल में ले जाकर चोद लेते थे। फिर काम के सिलसिले में कमला का आदमी कमला को लेकर अंडमान चला गया। इधर बच्चा होने के साल भर बाद हीरा एक दिन आई और बोली कि उसे हमारी बहुत याद आती है। हमने उसको बच्चा जो दिया था। वह हमारी अहसानमंद थी। हमारे लंड की दीवानी तो थी ही। हमारे अहसान के बदले उसने हमें कहा कि हम जब चाहें उसे चोद सकते हैं। हमें और क्या चाहिए था। । बच्चा होने के बाद उसकी चूचियों का साइज़ और बड़ा बड़ा हो गया था, दूध से थलथला कर भरा हुआ। उसी समय वहीं पर हम दोनों ने उसे पूरी नंगी करके उसके कोयले जैसे काले बदन को पूरे दो घंटे तक जम के चोदा, उसकी थलथलाती चूचियों को दबा दबा कर चूसा और दूध पिया, बुर चोदा, गांड़ चोदा, लंड चुसवाया। जी भर के मन मुताबिक मजा लिया। फिर धीरे धीरे हमारा मिलना कम हो गया। अभी तो वह भी करीब 55 साल की हो गई है, लेकिन अभी भी कभी कभी मिलते हैं तो उसको चोदने का अलग ही मजा मिलता है।”

इतना सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो उठी थी कि बेसाख्ता बोल पड़ी, “बस बस, अभी इतना ही बताईए। मैं सुन कर बहुत गरम हो गई हूं। आप लोगों का लंड भी टनटना गया है। एक बार फिर से मुझे भी उन्हीं रेजा लोगों के जैसा समझ लीजिए और वही कीजिए जैसे उनके साथ किया था” मैं उत्तेजना के अतिरेक में पागल हो कर बोल उठी। मुझे क्या पता था कि इस तरह मैं ने दो वहशी जानवरों के अंदर के राक्षसों को जगा दिया है। फिर तो क़यामत आ गया। दोनों खुंखार दरिंदे मुझ पर टूट पड़े और करीम चाचा मेरी चूचियों को इतनी बुरी तरह मसलने लगे कि मैं चीख पड़ी। “आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्, धीरे धीरे ओ्ओ्ओ्ओ्ओमार ही डालोगे क्या?” मैं तड़प उठी।

“चुप साली बुर चोदी रंडी, अभी तू हीरा है। अभी तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं” कहता हुआ मुझे पलट दिया और टांगें फैला कर अपना मूसल लंड मेरी पनियायी बुर के मुहाने पर रख कर एक ही झटके में पूरा जड़ तक सर्र से पेल दिया। अचानक एक ही बार में पूरा लंड अन्दर घुसा तो एकबारगी उठे दर्द से बिलबिला उठी। “आह हरामी धीरे”

“बंद कर चिल्लाना हरामजादी कुतिया, तू अभी रेजा है। हरिया तू इसकी गांड़ का भुर्ता बना, आज साली बुर चोदी को सच का रंडी रेजा बना दे।” कहता हुआ बड़ी बेरहमी से मेरी चूत में भकाभक लंड ठोकने लगा। और करवट ले कर ख़ुद नीचे आ गया और मैं उसके ऊपर। मेरी गांड़ जैसे ही ऊपर हुई मेरा बाप अपना फनफनाता लौड़ा भच्च से एक ही करारे धक्के से पूरा का पूरा मेरी गांड़ में उतार दिया। एक ही बार में सड़ाक से जब उसका लंड मेरी गांड़ में घुसा तो मैं दर्द के मारे तड़प उठी। “हाय धीरे करो ना प्लीज”

” कुतिया अब बोलती है धीरे करो चूत मरानी अभी बोल रही थी रेजा जैसे चोदो, साली तू अभी रेजा है, अभी मैं तेरी गांड़ का भुर्ता बनाऊंगा, गांड़ का गूदा निकाल दूंगा रंडी कहीं की” बोलते हुए मेरा बाप मेरी गांड़ का कचूमर निकालने लगा।

मैं ने खुद उनके अंदर के जानवर को जगाया था इसलिए मुझे भुगतना ही था। दांत भींचे चुदती जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा बलात्कार हो रहा हो। धीरे धीरे मुझे इसमें अद्भुत आनंद का अनुभव होने लगा। “ओह आह चोद बेटी चोद, हरामी मादरचोद, कुत्ते, मुझे रंडी बना, कुतिया बना, आह ओह” मैं बोल रही थी। दोनों मुझे पैंतीस मिनट तक जंगली जानवरों की तरह नोचते खसोटते हुए भंभोड़ते रहे और उनकी हर हरकतों और गालियों से मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। सबसे पहले मैं खलास हुई फिर करीम चाचा खलास होने वाले थे, अचानक ही उन्होंने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुंह में ठूंस दिया और फचफचा कर मुझे अपना नमकीन और कसैला वीर्य पिलाने लगे और मैं हलक में उतारने को वाध्य हो गई। जैसे ही करीम चाचा हटे मेरे पापा भी अपना लौड़ा मेरी गांड़ से निकाल कर मेरे मुंह में घुसा दीए और फचफचा कर अपना मदन रस उंडेलने लगे। मैं उनका वीर्य भी पीने को वाध्य हो गई। उनके लंड से निकलने वाले एक एक कतरे को पीना पड़ा क्योंकि पूरे स्खलन के दौरान उनका लंड मेरे मुंह में अड़ा हुआ था।

अब हम थक कर चूर हो गये थे। “हां तो हमारी हीरा, हमारी कमला, हमारी रंडी रेजा, कैसा लगा रेजा बन के?” करीम चाचा पूछे।

“आह पूछिए मत, बहुत मजा आया। आप लोग सचमुच में बहुत हरामी और प्यारे जंगली कुत्ते हो। प्यारे चुदक्कड़ जंगली जानवर।” मैं बोली और उनके नंगे जिस्म से लिपट कर प्यार भरा चुम्बन दे बैठी।

वे दोनों पूर्ण संतुष्टि के भाव लिए मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।

इसके बाद की घटना अगले भाग में।
Reply

11-27-2020, 03:55 PM,
#32
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
जब हरिया ने देखा कि पूरा लंड घुस गया है तो थोड़ा रुका और बोला, “हम का करें बोलो. उठना चाहते हैं तो गिर पड़ते हैं. तुम ही हटो ना ” उसने तो जीत का झंडा गाड़ दिया था.
“हाय दैय्य्य्याआ्आ्आ्आ हम कैसे हटेंगे, तेरा लंड मेरा बूर में फंसा हुआ है, ओह्ह्ह मर जाऊंगी, जल्दी निकालो न्न्न्न्न्ना” वह रो रही थी. चुदी चुदाई औरतों के लिए भी खौफनाक हरिया का लंबा और मोटा लंड सच में उस दुबली पतली औरत की छोटी सी चूत के लिए किसी क़यामत से कम नहीं था. उसकी चूत फैल कर हरिया के गधे जैसे लंबें और मोटे लंड से फंस कर चिपक गई थी.
हरिया करवट ले कर नीचे आ गया और कमला को अपने ऊपर करके बोला, “चल अब तू ही उठ जा” जबकि वह जानता था कि उसके लिए भी उठना आसान नहीं था. जितनी बार भी उठने की कोशिश करती, हरिया का लंड थोड़ा निकल जाता था लेकिन फिर जैसे ही वह फिसल कर गिरती, फिर घप्प से घुस जाता था.
वह दर्द से हाय हाय कर उठती थी, “हाय राम मार डाला रे बप्पा, फाड़ दिया मेरा बूर”. मगर इसी तरह कुछ ही देर में लंड अंदर बाहर होने से कमला की चूत थोड़ी ढीली हुई और दर्द की जगह अब उसे मज़ा आने लगा था. उसने उठने की कोशिश करना बंद कर दिया और थोड़ी शरमाते हुए हरिया के ऊपर लद गयी, एक प्रकार से अपने आप को हरिया के हवाले कर दिया. हरिया समझ गया कि अब कमला पूरी तरह उसके काबू में आ चुकी है. उसने लुंगी पूरा हटा दिया और धीरे-धीरे नीचे से धक्का लगाने लगा और इधर कमला भी शरमाते हुए अपनी कमर चलाने लगी थी. मैं दरवाजे के बाहर खड़े हो कर सारा नज़ारा देख रहा था.
जब मैं ने देखा कि अब तवा गरम है और दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे हैं, उसी वक्त कबाब मैं हड्डी की तरह वहां पहुंच कर बोला, “यह क्या हो रहा है?”
मेरी आवाज़ सुनकर कमला तो हड़बड़ा गई मगर हरिया उसी तरह नीचे से कमला को चोदता रहा और बोला, “अरे कुछ नहीं भाई, हम फिसल कर गिर पड़े हैं, आकर हमें उठा लो.”
मेरे सामने कमला की चिकनी गांड़ खुली हुई मुझे निमंत्रण दे रही थी. मैं अपने लंड में पहले से तेल लगा कर सिर्फ लुंगी पहने हुए था, उन्हें उठाने के लिए आगे बढ़ा और उठाने के बहाने झुका और सामने से लुंगी हटा कर फिसलते हुए कमला के ऊपर गिर पड़ा. मेरा लंड ठीक कमला की गोल चिकनी गांड़ के सुराख पर था. मैं ने उठाने के बहाने कमला की चूचियों को पीछे से पकड़ कर दबाते हुए जोर लगाया और तेल से चुपड़े लंड का सुपाड़ा उसकी टाईट गांड़ में फच्च से घुसा दिया.
जैसे ही मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी गांड़ में घुसा, कमला चीख पड़ी, “हाय रा्मर्र्र्र्र मेरा गां्ड़्ड्ड् फट्ट्ट गय्य्य्या”.
“अरे चिल्लाती क्यों है, उठा रहा हूं ना.” कहते हुए और जोर लगाया तो उसका गांड़ फैलाता हुआ मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुसा दिया.
उसकी गांड़ का छेद फटने फटने को हो गया जिसमें कारण दर्द के मारे और जोर से चीख पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आह फाड़ दिया रे मेरा गांड़” और रोने लगी.
मैं बोला, “अरे रोती क्यों है, उठा रहा हूं ना”. उठाने के बहाने और एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी गांड़ में पेल दिया.
इस बार उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी सांस कुछ देर के लिए रुक गई, किसी हलाल होती हुई बकरी की तरह उसके मुंह से दर्दनाक आवाज निकल पड़ी. “हाय मां्म््म्म्््म््म्््म््म्म््म््म्््म््म्म्आह, मर जाएंगे, छोड़िए हमको, मेरा गां्ड़ फा्फा्ड़ दिया ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्ह्ह्” मैं उसकी आवाज को अनसुना करते हुए धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा. धीरे धीरे उसकी गांड़ थोड़ी ढीली हो गई और दर्द जब खत्म हुआ तो उसे मज़ा आने लगा और शरमाते हुए वह भी क़मर चलाने लगी. अब नीचे से हरिया और ऊपर से मैं कमला को चोदने लगे. कमला की शर्म धीरे-धीरे खत्म होने लगी और आह उह करने लगी. हम लोगों ने किला फतह कर लिया था. अब मैं चोदता हुआ उसका ब्लाऊज़ खोल दिया और उसकी नींबू जैसी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा.
वह अब मस्ती में भर गई थी और बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा, ओह राजा, चोदिए जी, चोद लीजिए, आह मज़ा आ रहा है ओह्ह्ह आह्ह्ह्.”
हम दोनों अब पूरी तरह मस्त हो कर चोद रहे थे, “हां कमला, तेरी चूत बड़ी मस्त है,” हरिया बोला, “हां रानी तेरी गांड़ का जवाब नहीं, ऐसा गांड़ पहली बार चोदने को मिला है, आह साली कुतिया इसी के लिए इतना रोना गाना कर रही थी, साली रंडी,” मैं बोल पड़ा.
” हम सब समझती हूं, साले कुत्ते हरामी, हमको चोदने के लिए इतना ड्रामा किया था मादरचोदो, मगर आह्ह्ह्ह खूब मज़ा आ रहा है, आह मेरा बुर में लौड़ा धांस धांस के चोद, मेरा गांड़ में लंड ठोक ठोक के चोद आह्ह्ह्ह ओ्ह्ह्ह्ह मा्म्म्म्म्मां,” वह पागलों की तरह बड़ बड़ करती हुई मजे से चुदवा रही थी.
यह सब होते हुए करीब 15 मिनट हो चुका था, पानी लाने में देरी होने के कारण कमला को पुकारते हुए हीरा भी आ गई और खुले दरवाजे से उसने जो कुछ देखा तो सन्न रह गई. मुंह खुला का खुला रह गया. कमला आंखें बंद कर मस्ती में हम दोनों से खुल कर चुद रही थी और उसके मुंह से आनन्द के मारे सिसकारियां निकल रही थी.
कुछ देर हीरा बुत बनी हमें चुदाई में मग्न देखती रही, फिर अचानक जैसे नींद से जाग उठी और बोली, “हाय राम इहां ई का हो रहा है?”
Reply
11-27-2020, 03:55 PM,
#33
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
हमारी मस्तीभरे चुदाई में बाधा, कमला हड़बड़ा गई, मगर हमने उसको छोड़ा नहीं और हीरा की ओर देख कर मैं बोला, “अरे हम गिर गये हैं, उठ नहीं पा रहे हैं, आकर जरा सहायता कर दो ना, वहां दरवाजा में खड़े खड़े क्या तमाशा देख रही है.” मैं जानता था कि वह जैसे ही आएगी, फिसल कर गिर पड़ेगी और हम उसका भी शिकार कर लेंगे. वैसा ही हुआ, जैसे ही उसने दरवाज़े के अंदर कदम रखा फिसली और सीधे हमारे ऊपर गिरने लगी. हरिया कमला को लिए दिए एक तरफ हो गया और मैं कमला को छोड़ कर पलट गया, मेरा लौड़ा कमला की टाईट गांड़ से फच्चाक से निकल कर हीरा के स्वागत में सर उठा कर खड़ा हो गया था. हीरा सीधे मेरे ऊपर आ गई. मैं इसके लिए पहले से तैयार था इसलिए हीरा को अपनी बाहों में सम्भाल लिया. मेरा टनटनाया लौड़ा साड़ी के ऊपर से ही सीधे हीरा की चूत से टकराया. मैं ने थोड़ा एडजस्ट कर के अपने कमर को हल्का सा धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में थोड़ा सा धंस गया था. मैं समझ गया कि यह यहां की देहाती औरतों की तरह यह भी चड्डी वड्डी नहीं पहनी है. वह चौंक उठी, “हाय राम” उसका हाथ झट से अपनी चूत की तरफ गया तो मेरा तन्नाया हुआ लंड से टकरा गया. मेरे टनटनाए गर्म और मोटे लंड का अहसास कर तुरंत उठने की कोशिश करने लगी मगर फिर गिर पड़ी.
“अरे हट, तू हमें उठाने आई है कि हमारे ऊपर गिरने” कहते हुए मैं उसे उठाने के बहाने नीचे से हाथ लगाया और अनजान बनते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया मानो यह सब उसे उठाने की कोशिश में हुआ हो. कमर से नीचे अब वह पूरी तरह नंगी थी और मेरा गधा सरीखा लौड़ा उसकी काली काली फूली हुई झांट से भरी हुई चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था. वह हड़बड़ा गई और फिर उठने की कोशिश की लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश सफल नहीं हुई और मेरे ऊपर गिर पड़ी. इस बार उसका गिरना उसके लिए क़यामत से कम नहीं था क्योंकि इस बार मैं ने अपने लौड़े को ठीक पोजीशन में रखा था, जैसे ही वह गिरी मेरा लौड़ा भच्च से उसकी भैंस जैसी बुर को फाड़ता हुआ सुपाड़ा समेत आधा अन्दर घुस गया. दर्द के मारे उसके मुंह से लंबी चीख निकल पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आ्आआ्आ फट्ट्ट्टट््ट गया मेरा बू््ऊ्ऊऊ््ऊ्ऊर ओ्ओओ्ओ््ओ््ओ मा्मा्मां.”
मैं बनावटी झल्लाहट से बोला, “हट साली, खुद मेरे लौड़े पर गिर रही है और मां मां चिल्ला रही है.” वह जितनी कोशिश करती जा रही थी, मेरा लौड़ा धीरे धीरे उसकी बुर को फाड़ता हुआ घुसता चला जा रहा था.
अंततः मेरा पूरा लंड उसकी बुर के अंदर घुस गया और वह दर्द से बिलबिला उठी, “मईर देले गो, हाय रे फाईड़ देले हमर बूर के ( मार दिया मां, हाय फाड़ दिया मेरा बूर को)” चीख चीखकर रोने कलपने लगी.
“चुप साली हरामजादी, तू खुद मेरे लंड में गिर रही है और चिल्ला रही है, हट मेरे ऊपर से” मैं ने बनावटी गुस्से से डांटा. उसको भी लगने लगा कि यह एक एक्सीडेंट है, अतः फिर उठने की कोशिश करने लगी लेकिन असफल रही. जितनी बार कोशिश करती उतनी बार मेरा लौड़ा अंदर बाहर होता.
“हाय रे मोय आईज मोईर जाबों (हाय, मैं आज मर जाऊंगी). माय रे बाप रे” चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी थी. लेकिन यह कुछ ही देर की बात थी, फिर तो उसे भी मजा आने लगा और शरमाती हुई अपने आप कमर चलाने लगी. उसकी सिसकारियां निकलने लगी थी. अब मैं समझ गया कि अब खुल के चोदने का समय आ गया है.
मैं बोला, “अब क्या हुआ? अब काहे हटती नहीं है?”
वह शरमाती हुई कमर चलाती धीरे से बोली, “अच्छा लग रहा है अब”
“ओह तो यह बात है. सीधे बोल ना चुदवाने का मन हो गया है.” मैं बोला और उसको नीचे करके दोनों पैरों को फैलाकर घपाघप चोदना शुरू किया. वह अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर चुदाई का मजा लेने लगी, “आह राजा ओह बाबू खूब मज़ा आ रहा है जी, और जोर से चोदिए राजा, ओह ओह”
अब मैं पागल हो गया था, उसकी ब्लाऊज को खोल कर बड़े बड़े चूचियों को दबाने और मसलने लगा और धकाधक चोदने लगा. “साली रंडी इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी हरामजादी कुतिया अभी देख कैसा मज़ा आ रहा है.” मैं बोल रहा था.
“हां राजा ओह सैंया, ओह चोदू, चोद हरामी चोद, साले कुत्ते हम सब समझते हैं, हमको चोदने के लिए ड्रामा किया मादरचोद, चोद हरामजादा, अपना मोटा लौड़ा से आह ओ्ओ्ओ्ओह” अब वह शर्मोहया को ताक में रखकर चुदने लगी थी.
उधर हरिया कमला को उलट पलट कर चोदने में लगा हुआ था. कमला भी खूब मज़ा ले रही थी. करीब आधे घंटे तक हमने उनको चोद चोद कर पगली कर दिया था और वो दोनों हमारे चुदाई की दिवानी हो गई थी. आधे घंटे बाद जब हम खलास हुए, तब तक तो वे दोनों हमारे लौड़ों की पुजारन बन चुकी थी. चुदाई के बाद जब हम उठे तो हीरा और कमला की हालत देखने लायक थी. उठने के लिए तेल वाले जगह से लुढ़क कर फर्श के भूखे भाग में गये. चुदने के बाद उनकी चूत फूल कर पावरोटी की तरह हो गई थी. खड़े
हो कर ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे. सबसे बुरी हालत कमला की थी. फिर भी कमला मुझसे बोली, “मेरा गांड़ आधा चोद कर छोड़ दिया ना”
“तू अभी रुक, पांच मिनट बाद तेरी गांड़ की चटनी बनाता हूं.” वह ना ना करती रही मगर मैं उसे उठा कर सोफे पर झुका कर कुतिया बना दिया और उसकी गांड़ चाटने लगा. कुछ ही देर में मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया और वह भी मस्ती में आह ओह करने लगी. उसी समय उसके गांड़ में थूक लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया. “हाय हाय” कर उठी वह. फिर तो पूरी कुतिया की तरह पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद ही उसे छोड़ा. इस दौरान हीरा और हरिया हमारी चुदाई के लिए तालियां बजाते रहे. कमला तो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
Reply
11-27-2020, 03:55 PM,
#34
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
उस दिन के बाद से जबतक घर का काम नहीं खत्म हुआ हम दोनों कमला और हीरा को रोज मौका निकाल निकाल कर अदल बदल के चोदने लगे. इसी दौरान पता चला कि हीरा गर्भवती हो गई है. लेकिन तब तक घर का काम भी तकरीबन खतम हो गया था. घर काम खत्म होने के बाद भी हम कमला को चोदने पहुंच जाते थे और पास के जंगल में ले जाकर चोद लेते थे. फिर काम के सिलसिले में कमला का आदमी कमला को लेकर अंडमान चला गया. इधर बच्चा होने के साल भर बाद हीरा एक दिन आई और बोली कि उसे हमारी बहुत याद आती है. हमने उसको बच्चा जो दिया था. वह हमारी अहसानमंद थी. हमारे लंड की दीवानी तो थी ही. हमारे अहसान के बदले उसने हमें कहा कि हम जब चाहें उसे चोद सकते हैं. हमें और क्या चाहिए था. . बच्चा होने के बाद उसकी चूचियों का साइज़ और बड़ा बड़ा हो गया था, दूध से थलथला कर भरा हुआ. उसी समय वहीं पर हम दोनों ने उसे पूरी नंगी करके उसके कोयले जैसे काले बदन को पूरे दो घंटे तक जम के चोदा, उसकी थलथलाती चूचियों को दबा दबा कर चूसा और दूध पिया, बुर चोदा, गांड़ चोदा, लंड चुसवाया. जी भर के मन मुताबिक मजा लिया. फिर धीरे धीरे हमारा मिलना कम हो गया. अभी तो वह भी करीब 55 साल की हो गई है, लेकिन अभी भी कभी कभी मिलते हैं तो उसको चोदने का अलग ही मजा मिलता है.”

इतना सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो उठी थी कि बेसाख्ता बोल पड़ी, “बस बस, अभी इतना ही बताईए. मैं सुन कर बहुत गरम हो गई हूं. आप लोगों का लंड भी टनटना गया है. एक बार फिर से मुझे भी उन्हीं रेजा लोगों के जैसा समझ लीजिए और वही कीजिए जैसे उनके साथ किया था” मैं उत्तेजना के अतिरेक में पागल हो कर बोल उठी. मुझे क्या पता था कि इस तरह मैं ने दो वहशी जानवरों के अंदर के राक्षसों को जगा दिया है. फिर तो क़यामत आ गया. दोनों खुंखार दरिंदे मुझ पर टूट पड़े और करीम चाचा मेरी चूचियों को इतनी बुरी तरह मसलने लगे कि मैं चीख पड़ी. “आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्, धीरे धीरे ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ह्ह्ह्ह, मार ही डालोगे क्या?” मैं तड़प उठी.
“चुप साली बुर चोदी रंडी, अभी तू हीरा है. अभी तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं” कहता हुआ मुझे पलट दिया और टांगें फैला कर अपना मूसल लंड मेरी पनियायी बुर के मुहाने पर रख कर एक ही झटके में पूरा जड़ तक सर्र से पेल दिया. अचानक एक ही बार में पूरा लंड अन्दर घुसा तो एकबारगी उठे दर्द से बिलबिला उठी. “आह हरामी धीरे”
“बंद कर चिल्लाना हरामजादी कुतिया, तू अभी रेजा है. हरिया तू इसकी गांड़ का भुर्ता बना, आज साली बुर चोदी को सच का रंडी रेजा बना दे.” कहता हुआ बड़ी बेरहमी से मेरी चूत में भकाभक लंड ठोकने लगा. और करवट ले कर ख़ुद नीचे आ गया और मैं उसके ऊपर. मेरी गांड़ जैसे ही ऊपर हुई मेरा बाप अपना फनफनाता लौड़ा भच्च से एक ही करारे धक्के से पूरा का पूरा मेरी गांड़ में उतार दिया. एक ही बार में सड़ाक से जब उसका लंड मेरी गांड़ में घुसा तो मैं दर्द के मारे तड़प उठी. “हाय धीरे करो ना प्लीज”
” कुतिया अब बोलती है धीरे करो चूत मरानी अभी बोल रही थी रेजा जैसे चोदो, साली तू अभी रेजा है, अभी मैं तेरी गांड़ का भुर्ता बनाऊंगा, गांड़ का गूदा निकाल दूंगा रंडी कहीं की” बोलते हुए मेरा बाप मेरी गांड़ का कचूमर निकालने लगा.
मैं ने खुद उनके अंदर के जानवर को जगाया था इसलिए मुझे भुगतना ही था. दांत भींचे चुदती जा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा बलात्कार हो रहा हो. धीरे धीरे मुझे इसमें अद्भुत आनंद का अनुभव होने लगा. “ओह आह चोद बेटी चोद, हरामी मादरचोद, कुत्ते, मुझे रंडी बना, कुतिया बना, आह ओह” मैं बोल रही थी. दोनों मुझे पैंतीस मिनट तक जंगली जानवरों की तरह नोचते खसोटते हुए भंभोड़ते रहे और उनकी हर हरकतों और गालियों से मुझे बेहद मज़ा आ रहा था. सबसे पहले मैं खलास हुई फिर करीम चाचा खलास होने वाले थे, अचानक ही उन्होंने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुंह में ठूंस दिया और फचफचा कर मुझे अपना नमकीन और कसैला वीर्य पिलाने लगे और मैं हलक में उतारने को वाध्य हो गई. जैसे ही करीम चाचा हटे मेरे पापा भी अपना लौड़ा मेरी गांड़ से निकाल कर मेरे मुंह में घुसा दीए और फचफचा कर अपना मदन रस उंडेलने लगे. मैं उनका वीर्य भी पीने को वाध्य हो गई. उनके लंड से निकलने वाले एक एक कतरे को पीना पड़ा क्योंकि पूरे स्खलन के दौरान उनका लंड मेरे मुंह में अड़ा हुआ था.
अब हम थक कर चूर हो गये थे. “हां तो हमारी हीरा, हमारी कमला, हमारी रंडी रेजा, कैसा लगा रेजा बन के?” करीम चाचा पूछे.
“आह पूछिए मत, बहुत मजा आया. आप लोग सचमुच में बहुत हरामी और प्यारे जंगली कुत्ते हो. प्यारे चुदक्कड़ जंगली जानवर.” मैं बोली और उनके नंगे जिस्म से लिपट कर प्यार भरा चुम्बन दे बैठी.
वे दोनों पूर्ण संतुष्टि के भाव लिए मंद मंद मुस्कुरा रहे थे.
इसके बाद की घटना अगले भाग में.
Reply
11-27-2020, 03:55 PM,
#35
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
मेरे प्रिय सुधी पाठकों,
अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह मेरे पापा हरिया और करीम चाचा ने मिलकर अपनी हवस मिटाने के लिए दो और औरतों का शिकार किया. दोनों औरतें मजदूर रेजा थीं. उनकी कामुकता भरी कथा सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उत्तेजना के आवेग में उन हवस के पुजारियों के अंदर के जंगली जानवर को जगा बैठी, जिसके परिणामस्वरूप वे दोनों वहशी दरिंदे की तरह बड़े वहशियाना तरीके से मेरी चीख पुकार की परवाह किए बगैर मेरे जिस्म पर अपनी दरिंदगी का नमूना पेश कर डाला. बेरहमी से नोचते खसोटते रौंदते हुए मेरे शरीर को ऐसा भंभोड़ा कि मैं हाय हाय कर उठी. आश्चर्यजनक रूप से उनकी उस दरिंदगी भरी चुदाई के दौरान आरंभिक पीड़ा के पश्चात एक अलग ही प्रकार के आनंद से रूबरू हुई जिसका बयां करना मुश्किल है. करीब दो घंटे के दौरान उनकी चुदाई यात्रा कथा में पांचवीं और छठी औरत के साथ कामोत्तेजक शारीरिक संबंधों के बारे में सुनते हुए दो बार चुदी.
फिर मैंने कहा, “बस अभी का बहुत हो गया, बाकी कहानी बाद में सुनुंगी, अभी मुझे थोड़ा आराम करने दीजिए. नानाजी लोग आते होंगे. शाम को दादाजी का जन्मदिन भी मनाना है. आज मैं उन्हें सरप्राइज गिफ्ट करना चाहती हूं. उसकी तैयारी भी करनी है.” कहती हुई उसी तरह नंगी ही उठी और अपने कपड़े समेट कर अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर धम से गिर गई और करीब एक घंटे तक सोई. करीब बारह बजे नानाजी और बाकी सब लोग बाजार से वापस लौट आए. उन लोगों ने काफी सारी खरीददारी की थी.
“लो बिटिया यह तेरे लिए” कहते हुए नानाजी ने एक कैरी बैग मुझे थमा दिया. मैं ने उत्सुकता से बैग के अंदर देखा तो उसमें सुंदर लाल रंग का लहंगा चोली था.
मैं खुशी से चहक उठी, “थैंक्स नानाजी”. फिर मैंने पूछा, “बर्थडे केक का आर्डर दिया कि नहीं?”
“हां वह शाम को आ जाएगा” नानाजी ने बताया.
“बर्थडे ब्वॉय का नया कपड़ा?” मैं पूछी.
“शाम को पहनेगा तो देख लेना” नानाजी ने उत्तर दिया.
“सजावट के लिए सामान लाए कि नहीं” मैं पूछी.
“बैलूनों का एक पैकेट है” नानाजी ने बताया.
फिर हम दोपहर का भोजन करके अपने अपने कमरे में आराम करने चले गए. शाम को करीब साढ़े चार बजे मैं उठी और मेरे पापा हरिया और करीम चाचा के साथ मिलकर ड्राइंग रूम को अच्छी तरह सजा दिया. मैं ने म्यूजिक के लिए टीवी का ही इस्तेमाल करने का निश्चय किया. स्मार्ट टीवी था इसलिए पेनड्राइव में कुछ खास किस्म के गानों को लोड किया. फिर नहा धो कर सजने संवरने लगी. मेरे उरोजों का उभार पिछले पांच छः दिनों की वासना के नग्न खेल में गुत्थमगुत्थी भरी कामक्रीड़ा के दौरान दब कुचल कर थोड़ा और बढ़ गया था इसलिए ब्रा थोड़ी छोटी पड़ रही थी लेकिन किसी तरह मुश्किल से पहन ही ली. ब्रा मेरे उरोजों को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए था. नया लहंगा चोली पहन कर अच्छी तरह मेकअप वगैरह करके अपने बालों को करीने से संवारा लेकिन बाल खुला ही रहने दिया. चोली लो कट होने के कारण मेरे सीने के उभारों का काफी नग्न हिस्सा चोली के ऊपर से स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था. दोनों उरोजों के बीच की दरार की गहराई भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी. चोली ऊपर से तो लो कट थी ही, नीचे से भी काफी ऊपर थी. मेरे उभारों से बमुश्किल डेढ़ इंच नीचे तक. पीठ का हिस्सा करीब करीब पूरा ही खुला हुआ था. चोली की हालत देख कर मैं ने भी जानबूझ कर लहंगा को नाभी से काफी नीचे पहना, करीब तीन इंच नीचे. मेरे लंबे पांवों के कारण लहंगा जमीन से फिर भी काफी ऊंचा था. आईने के सामने अपने को खूब अच्छी तरह निहारा, क़यामत लग रही थी मैं. आज इन मर्दों पर बिजली गिराने का इरादा था. मैं ठान चुकी थी कि आज इनके मन से सारी ग्लानी (सरदारजी वाले एपिसोड से उपजी, खास कर दादाजी, बड़े दादाजी और नानाजी के) दूर कर दूंगी और इनके अंदर के वही पुराने आत्मविश्वास से भरे मर्दों की मर्दानगी को उभाड़ कर उनके दिल की हसरतों, अरमानों को बिल्कुल बेबाक तरीके से पूरा करने का पूरा अवसर प्रदान करूंगी. अब मैंपूरे शरीर पर खुशबूदार परफ्यूम स्प्रे करके तैयार हो गई.
करीब सात बजे मेरे कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई और मेरे पापा की आवाज आई, “बिटिया नीचे ड्राइंग रूम में आ जाओ, सब आ चुके हैं.”
“ठीक है आप चलिए मैं आती हूं”, कहते हुए मैं दरवाजे की ओर बढ़ी. जब मैं कमरे से निकल कर सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी तो सबकी निगाहें मुझ पर टिक गई थीं. सब आंखें फ़ाड़ कर एक टक मुझे देखते रह गए थे. मैं उनके नज़रों की ताब न ला सकी और तनिक शरम से लाल हो उठी. मैं ने महसूस किया कि सबके कलेजे में छुरियां चल गयीं थीं.सन्नाटा छा गया था जिसे नानाजी की आवाज़ ने भंग किया, “आओ बिटिया हम तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे”.
मैं ने देखा कि नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी एकदम बदले रूप में चमक रहे थे. क्लीन शेव करके नये कपड़ों में खूब फब रहे थे. लंबे चौड़े दादाजी और बड़े दादाजी के बगल में ठिंगने कद के नानाजी भी बुलडोग जैसे चेहरे के बावजूद फब रहे थे. मेरे आते ही जैसे महफ़िल में जान आ गई. मैं ने अपने पापा याने हरिया और ड्राईवर करीम के बारे में पूछा कि वे कहां हैं, उन्हें भी बुला लीजिए. आज की पार्टी में घर के सभी सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है. उनके बिना पार्टी अधूरी होगी. नानाजी ने उन लोगों को भी बुला लिया. अब हमारी महफ़िल में पांच पुरुष और मैं एकमात्र स्त्री थी. सबकी भूखी नजरें मुझ पर थीं जिन्हें मैं बखूबी समझ रही थी. मैं जान बूझ कर अपनी चाल ढाल और नजरों से उन सबके दिलों पर छुरियां चला रही थी. फिर सेन्टर टेबल पर एक बड़ा सा सजा हुआ केक रखा गया. उसपर एक ही बड़ा सा मोमबत्ती जलाया गया क्योंकि दादाजी की उम्र के अनुसार 65 मोमबत्ती जलाना संभव भी नहीं था. दादाजी ने फूंक मारकर उसे बुझा दिया और सबने उन्हें अपने अपने ढंग से जन्मदिन की बधाई दी. मैं ने भी उन्हें बधाई देते हुए सबके सामने ही उनसे लिपट कर एक गरमागरम चुम्बन दिया. सब के सब ईर्ष्या से जल भुन गये. फिर दादाजी ने केक काटा और सबको एक एक टुकड़ा दिया. मैं ने एक टुकड़ा उठा कर दादाजी को खिलाया. करीब तीन चौथाई केक बच गया तो मैंने कहा कि उसे अभी वैसा ही रहने दिया जाए. मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. फिर मैंने दादाजी को बड़े सोफे पर अकेले बैठा दिया.
उन्हें फूल गुच्छा दिया गया, उपहार दिया गया और जब मेरी बारी आई तो मैंने बड़े मादक अंदाज में कहा, “मैं आज दादाजी को खास उपहार देना चाहती हूं लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि आप सब को यह मान लेना पड़ेगा कि यहां आप सब एक ही स्तर के मर्द हैं और मैं सिर्फ एक स्त्री. आपस में कोई नौकर, ड्राईवर मालिक वाली भावना नहीं होनी चाहिए. आपलोग स्वतंत्रता पूर्वक व्यवहार कीजियेगा, इसमें न ही मुझे कोई आपत्ती होगी और न ही आपलोगों के बीच किसी प्रकार की आपत्ती और मतभेद होना चाहिए. छोटे बड़े का लिहाज बिल्कुल नहीं होना चाहिए. यहां जो कुछ भी होगा, इस दौरान हम जो कुछ भी अनुभव करेंगे, अपने अपने लफ्जों में बिना लाग-लपेट के बेहिचक व्यक्त करेंगे. हम सब इस कमरे में अपने मन के अनुसार कुछ भी करने को बिल्कुल आजाद हैं, इस बात का ख्याल रखना है कि दादाजी की इच्छा का भी हमें मान रखना है.”
“ठीक है, ठीक है, ऐसा ही होगा” सब बेसब्री और उत्सुकता से एक स्वर में बोल उठे.
“ठीक है तो आपलोग अपनी अपनी जगह पर बैठ जाईए. आज हम सब खुल कर दादाजी के जन्मदिन में मज़ा करेंगे. आपलोग सिर्फ इतना याद रखियेगा कि आज के मुख्य अतिथि दादाजी हैं और दादाजी की इच्छा का सम्मान हम सब को करना है.” मैं बोली.
“ठीक है बाबा ठीक है, अब तुम्हें जो उपहार देना है जल्दी दो, ज़रा हम भी तो देखें क्या उपहार है.” नानाजी बेसब्री से बोले.
Reply
11-27-2020, 03:55 PM,
#36
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“आप लोग शराब तो अवश्य लाए होंगे?” मैं ने पूछा.
“यह भी कोई पूछने की बात है? राघव का जन्म दिन हम ऐसे ही सूखे सूखे थोड़े मनाएंगे.” नानाजी ने कहा. “तो फिर बोतल निकालिए और सबके लिए ग्लास भी” मैं बोली.
“सबके लिए मतलब? तू भी पिएगी क्या?” नानाजी बोले.
“अरे नहीं बाबा, मैं दारू नहीं पीती हूं. मेरे लिए कोल्डड्रिंक चलेगा.” मैं बोली. नानाजी ने फटाफट शराब की बोतल, पानी, सोडा और ग्लास ला कर सेंटर टेबल पर रख दिया.
“ऐसे नहीं, सबके लिए जाम तैयार कर के रखिए.” मैंने कहा. उन्होंने वैसा ही किया. मेरे लिए एक ग्लास में फैंटा ओरेंज डाला. मैं ने पेनड्राइव म्यूजिक सिस्टम में लगा कर जानी मेरा नाम का गाना,
“हुस्न के, लाखों रंग, कौन सा, रंग देखोगे, आग है, ये बदन, कौन सा अंग देखोगे.” चुना और सबकी ओर मुखातिब हो कर कहा, “अभी मैं इस गीत पर नृत्य प्रस्तुत करूंगी और नृत्य के दौरान मेरे इशारे को समझ कर उसी के अनुसार ठीक वैसा ही आप लोग भी कीजियेगा. ठीक है?”
“ठीक है ठीक है” सबने एक स्वर से कहा. मैंने म्यूजिक सिस्टम चालू कर दिया. मैं जब पेन ड्राइव लगा रही थी उसी दौरान नानाजी ने चुपके से मेरे ग्लास में शराब मिला दिया था जिसका मुझे पता ही नहीं चला और उसका नशा बाद में बहुत धीरे-धीरे मुझ पर होने लगा था. जैसे ही गाना चालू हुआ, मैं ने नृत्य शुरू किया. नृत्य करते करते दो तीन मिनट बाद मैंने हाथ पीछे ले कर चोली की रस्सी खोल दी और धीरे धीरे चोली उतारने लगी. मैं ने उन्हें इशारा किया ऐसा ही करने के लिए. वे भी फटाफट अपने कुर्ते उतारने लगे. कुछ पलों में ही मैं चोली से मुक्त हो गई और चोली दादाजी की ओर उछाल दिया. उधर वे सभी भी कुर्ते उतार कर बनियान में आ गए. मैं ने नृत्य करते करते बारी बारी से सबको जाम थमाया और मैं अपने ग्लास का कोल्डड्रिंक गटक गई, थोड़ा अजीब सा स्वाद लगा लेकिन माहौल की गर्मी और कोल्डड्रिंक की मिठास के कारण मैं ने उस पर ध्यान नहीं दिया. मैं अब कमर से ऊपर सिर्फ ब्रा में थी. कसे हुए ब्रा से बमुश्किल संभले हुए अपने उन्नत उरोजों को मादक अंदाज में हिलाते और अपनी कमर लहराते हुए दो तीन मिनट तक नृत्य करते करते मैं ने एक झटके में लहंगा नीचे गिरा दिया और उन्हें भी ऐसा करने का इशारा किया. उन्होंने फटाफट अपने पैजामे को अवांछित वस्तु की तरह अपने तन से अलविदा कर दिया और बनियान और अंडरवियर में आ गए. नानाजी नें शराब का पहला पैग खत्म होते ही दूसरा पैग बना दिया और उसी तरह मेरे ग्लास में भी शराब मिस्रित कोल्डड्रिंक भर दिया. अब तक वे काफी उत्तेजना में आ चुके थे और सबके अंडरवियर विशाल तंबुओं की शक्ल अख्तियार कर चुके थे. अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में बड़े ही कामुक अदाओं के साथ कमर मटकाते हुए थिरक रही थी. मेरी पैंटी के सामने फूली हुई योनि स्पष्ट नामुदार हो रही थी. मेरे उत्तेजक नृत्य को देखते हुए भूखे भेड़ियों की तरह अपनी आंखों में वहशी जानवरों की चमक लिए हुए सब के सब फिल्म के खलनायक प्रेमनाथ की तरह अपनी जगह पर बैठे बैठे गद्देदार सोफे पर उछल रहे थे. थिरकते हुए मैं ज्यों ही दादाजी के पास पहुची, उन्होंने मुझे खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया और मेरे उरोजों को मसल दिया और चूम लिया. “अब तू मुझे अपने हाथों से पिला” दादाजी बोले. मैं तनिक चिहुंक उठी थी क्योंकि मैं असंतुलित हो कर सीधे उनके विशालकाय तंबू की शक्ल अख्तियार किये हुए सख्त लिंग पर बैठ गई थी. ऐसा लगा मानो मेरी पैंटी और उनके अपने अंडरवियर को फाड़ कर उनका फनफनाता लिंग मेरे नितंबों की दरार में धंस गया हो. मैं गनगना उठी. फिर भी मैं ने उनकी गोद में बैठे बैठे अपने हाथों से दादाजी को दूसरा पैग पिलाया आखिर वे आज के बर्थडे ब्वॉय जो ठहरे. दूसरा पैग पिलाने के बाद उठ गई और फिर से नृत्य करते हुए अपनी कसी हुई ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से अपने उरोजों को ब्रा से मुक्त कर दिया. मेरी नग्न कबूतरियां फड़फड़ा कर उनके सामने तन कर खड़ी हो गयीं. इस बार मेरे इशारे का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं थी, उन्होंंने आनन फानन में अपने अपने बनियान उतार फेंके. उधर सबने दूसरा पैग भी खत्म किया और मैं कोल्डड्रिंक का दूसरा ग्लास भी गटक गई. ड्राइंगरुम के अंदर वासना की गर्मी और उत्तेजना अपने चरम पर थी. बहुत ही अश्लील माहौल बन चुका था. बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने को नियंत्रित कर रखा था. उनके अंडरवियर फट पड़ने के कागार पर थे. अब मैं ने थिरकते हुए पैंटी के ऊपर से ही अपनी उंगली योनि के ऊपर फिराने लगी. वे लोग भी अंडरवियर के ऊपर से ही अपने अपने लिंग सहलाने लगे. मैं एक उंगली से पैंटी को नीचे सरकाने लगी.
Reply
11-27-2020, 03:56 PM,
#37
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“और थोड़ा नीचे, और नीचे” सब एक स्वर में बोल उठे. धीरे धीरे पैंटी से मेरी योनि की दरार दिखने लगी. उनके मुख से सिसकारियां निकलने लगी. फिर मैंने पूरी की पूरी पैंटी एक झटके में निकाल फेंका और मादरजात नंगी हो गई, फिर क्या था वे भी लगभग मेरे ही साथ, या फिर मुझसे भी पहले, पूरे नंगे हो गये, मुझ पर टूट कर भंभोड़ डालने को बेताब. शराब का नशा धीरे धीरे सभी पर चढ़ रहा था और मुझ पर भी कोल्डड्रिंक में मिले शराब ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था. मेरे कहने की आवश्यकता नहीं थी, नानाजी ने तीसरा पैग बना कर सबको दिया और सभी ने एक ही सांस में तीसरा पैग भी अपने हलक में उतार दिया. इधर पहला गीत खत्म हुआ और भोजपुरी में दूसरा गीत चालू हुआ, “हाय बेदर्दी बलमा जरा धीरे धीरे”.
इससे पहले कि वे मेरी ओर बढ़ते, मैं ने उनको रोका और कहा, “अभी थोड़ा सब्र कीजिए, एक खेल बाकी है.” कहते हुए मैं ने केक का एक टुकड़ा लिया और दादाजी के मूसलाकार लिंग पर पोत दिया. फिर मैं झुक कर अपने जीभ से उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक चाट चाट कर साफ़ करने लगी.
मेरे इस उत्तेजक हरकत से दादाजी के मुंह से कामुक आहें निकलने लगी थी. “आह बिटिया.”
मैं ने टोका, ” बिटिया नहीं, कामिनी बोलिए, रंडी बोलिए, कुतिया बोलिए, मगर बिटिया मत बोलिए”.
” हां रे बुर चोदी कुत्ती चाट मेरा लौड़ा, चूस हरामजादी” अब दादाजी जोश में आ गए थे. इसी बीच बाकी लोगों ने बचा खुचा केक मेरे पूरे नंगे बदन पर मल दिया था और मेरे नंगे तन को कुत्तों की तरह चाटने लगे.
जैसे ही मैंने दादाजी का लिंग चाट कर साफ़ किया, दादा जी बोल उठे, “चल अब हम सब इसे एक साथ चोदेंगे.”
“एक साथ? नहीं बाबा नहीं, एक साथ नहीं, मर जाऊंगी, प्लीज.” मैं ने घबराने का नाटक किया और उनसे छूट कर भागने लगी.
“पकड़ साली हरामजादी कुतिया को, आज इसको सब मिलकर कुत्ती बना देंगे” दादाजी बेहद वहशियाना ढंग से बोले.
सब मेरे पीछे भागे, “भाग कर जाएगी कहां साली बुर चोदी,” नानाजी बोले. अंततः मैं जानबूझ कर गिर पड़ी और सबने मिलकर मुझे दबोच लिया. सबने मिलकर मुझे उठाया और सेंटर टेबल पर लिटा दिया.
“नहीं नहीं सब एक साथ नहीं” मैं चिल्लाने लगी मगर अब शुरू हुआ काफी देर से कामोत्तेजना की अग्नि में धधकते नंग धडंग भूखे, शराब के नशे के सुरूर में डूबे, कामुक वहशी जानवरों का कामुकता पूर्ण बेहद वहशियाना खेल. उनको दादाजी की तरफ से हरी झंडी मिल गई, एक साथ मुझ पर टूट पड़े. एक एक उरोजों को नानाजी और बड़े दादाजी आपस में बांट कर बेरहमी से मसलने और चूसने लगे. दादाजी मेरी फूली हुई योनि पर टूट पड़े और पागलों की तरह चाटने और चूसने लगे.
मेरे पापा मेरे मुंह के पास अपना टनटनाया लिंग लाए और बोले, “ले चूस मेरा लौड़ा साली चूतमरानी रंडी”. करीम चाचा मेरे नितंबों को फैला कर गुदा मार्ग में जीभ डाल कर चाटने लगे. मुझमें भी अब तक नशे का असर हो चुका था और मैं पागलों की तरह उनकी कामुकता की पराकाष्ठा को पार करते हुए वासना के इस बेहद घिनौने कृत्य में संलिप्त सिसकारियां भरने लगी थी. पांच मिनट में ही मैं उत्तेजना के चरमोत्कर्ष में पहुंच कर अभूतपूर्व स्खलन में डूब गई. मेरे शरीर की थरथराहट को सबने महसूस किया मगर वे अपने हवस और नशे में डूबे मुझे भंभोड़ने में लगे रहे. उनके सम्मिलित कामकेली से मेरी काम पिपाशा पुनः जागृत हो गई और मैं संभोग के लिए छटपटाने लगी. दादाजी ने तुरंत मुझे उठा कर फर्श के कालीन पर लिटा दिया और मेरे पैरों को फैला कर मेरी योनि में अपना लिंग अड़ाया और एक भीषण प्रहार से पूरा का पूरा लिंग एक ही बार में मेरी योनि में ठोंक दिया.
“ले बुर चोदी हमारा लौड़ा तेरी बुर में” इतनी बेरहमी से उन्होंने प्रहार किया था कि मेरी घुटी घुटी आह निकल पड़ी. उन्होंने मुझे कस के पकड़ा था और मुझे लिए दिए एक करवट हो गये.
पीछे से पहले से तैयार करीम चाचा ने मेरे नितंबों को फैला कर गुदा द्वार में अपना भीमकाय लिंग का सुपाड़ा टिका कर एक ही जोर के झटके से सटाक से पूरा नौ इंच लम्बा लिंग मेरी गुदा में भोंक दिया. “ले साली कुतिया मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में”.
नशे में होने के बावजूद भीषण प्रहार से मैं तीव्र पीड़ा के मारे चीख पड़ी, “हाय मादरचोद, साले कुत्ते, गांड़ फाड़ दिया रे्रे्रे्रे्रेए्ए्ए्ए आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह”.
मगर मेरी चीख पुकार की किसे पड़ी थी, सब के सब जंगली जानवर बन चुके थे. मुझे उसी हालत में लिए हुए दादाजी सोफे पर बैठ गए. सामने मेरी योनि में दादाजी का लिंग घुसा हुआ था, पीछे मेरी गुदा में करीम चाचा का विशाल लिंग धंसा हुआ था, सोफे के पीछे से मेरे पापा अपना खौफनाक लिंग मेरे मुंह में डाल चुके थे और मेरे एक हाथ में नानाजी का लिंग, दूसरे हाथ में बड़े दादाजी का लिंग था. मैं पूरी तरह उन वासना के भूखे भेड़ियों के चंगुल में फंसी अपने तन को पिसते देखनदेखने और किसी हलाल होते हुए मेमने की तरह विवशता में पीड़ा और आनंद मिस्रित स्थिति में खुद को उनके रहमो करम पर छोड़ दिया. अब मैं पांच नशे और उत्तेजना में मदहोश, विभिन्न रंग रूप और शरीर के साथ, हवस के भूखे जंगली जानवरों सरीखे मर्दों से पिसती, उनके विकृत सामुहिक संभोग में लिप्त हो गई. उनके विभिन्न आकार, लंबाई और मोटाई के लिंग, मेरे तन के हर उपलब्ध छिद्रों में या मेरे हाथों की मुट्ठियों में थे और वे अपनी अपनी कामक्षुधा तृप्त करने के लिए जी जान से मुझ पर पागलों की तरह पिल पड़े थे.
Reply
11-27-2020, 03:56 PM,
#38
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“आप लोग शराब तो अवश्य लाए होंगे?” मैं ने पूछा.
“यह भी कोई पूछने की बात है? राघव का जन्म दिन हम ऐसे ही सूखे सूखे थोड़े मनाएंगे.” नानाजी ने कहा. “तो फिर बोतल निकालिए और सबके लिए ग्लास भी” मैं बोली.
“सबके लिए मतलब? तू भी पिएगी क्या?” नानाजी बोले.
“अरे नहीं बाबा, मैं दारू नहीं पीती हूं. मेरे लिए कोल्डड्रिंक चलेगा.”
मैं बोली. नानाजी ने फटाफट शराब की बोतल, पानी, सोडा और ग्लास ला कर सेंटर टेबल पर रख दिया.
“ऐसे नहीं, सबके लिए जाम तैयार कर के रखिए.”
मैंने कहा. उन्होंने वैसा ही किया.
मेरे लिए एक ग्लास में फैंटा ओरेंज डाला.
मैं ने पेनड्राइव म्यूजिक सिस्टम में लगा कर जानी मेरा नाम का गाना,
“हुस्न के, लाखों रंग, कौन सा, रंग देखोगे, आग है, ये बदन, कौन सा अंग देखोगे.”
चुना और सबकी ओर मुखातिब हो कर कहा,
“अभी मैं इस गीत पर नृत्य प्रस्तुत करूंगी और नृत्य के दौरान मेरे इशारे को समझ कर उसी के अनुसार ठीक वैसा ही आप लोग भी कीजियेगा.
ठीक है?”
“ठीक है ठीक है” सबने एक स्वर से कहा.
मैंने म्यूजिक सिस्टम चालू कर दिया.
मैं जब पेन ड्राइव लगा रही थी उसी दौरान नानाजी ने चुपके से मेरे ग्लास में शराब मिला दिया था जिसका मुझे पता ही नहीं चला और उसका नशा बाद में बहुत धीरे-धीरे मुझ पर होने लगा था.
जैसे ही गाना चालू हुआ, मैं ने नृत्य शुरू किया.
नृत्य करते करते दो तीन मिनट बाद मैंने हाथ पीछे ले कर चोली की रस्सी खोल दी और धीरे धीरे चोली उतारने लगी.
मैं ने उन्हें इशारा किया ऐसा ही करने के लिए. वे भी फटाफट अपने कुर्ते उतारने लगे.
कुछ पलों में ही मैं चोली से मुक्त हो गई और चोली दादाजी की ओर उछाल दिया.
उधर वे सभी भी कुर्ते उतार कर बनियान में आ गए.
मैं ने नृत्य करते करते बारी बारी से सबको जाम थमाया और मैं अपने ग्लास का कोल्डड्रिंक गटक गई, थोड़ा अजीब सा स्वाद लगा लेकिन माहौल की गर्मी और कोल्डड्रिंक की मिठास के कारण मैं ने उस पर ध्यान नहीं दिया.
मैं अब कमर से ऊपर सिर्फ ब्रा में थी.
कसे हुए ब्रा से बमुश्किल संभले हुए अपने उन्नत उरोजों को मादक अंदाज में हिलाते और अपनी कमर लहराते हुए दो तीन मिनट तक नृत्य करते करते मैं ने एक झटके में लहंगा नीचे गिरा दिया और उन्हें भी ऐसा करने का इशारा किया.
उन्होंने फटाफट अपने पैजामे को अवांछित वस्तु की तरह अपने तन से अलविदा कर दिया और बनियान और अंडरवियर में आ गए.
नानाजी नें शराब का पहला पैग खत्म होते ही दूसरा पैग बना दिया और उसी तरह मेरे ग्लास में भी शराब मिस्रित कोल्डड्रिंक भर दिया.
अब तक वे काफी उत्तेजना में आ चुके थे और सबके अंडरवियर विशाल तंबुओं की शक्ल अख्तियार कर चुके थे.
अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में बड़े ही कामुक अदाओं के साथ कमर मटकाते हुए थिरक रही थी.
मेरी पैंटी के सामने फूली हुई योनि स्पष्ट नामुदार हो रही थी.
मेरे उत्तेजक नृत्य को देखते हुए भूखे भेड़ियों की तरह अपनी आंखों में वहशी जानवरों की चमक लिए हुए सब के सब फिल्म के खलनायक प्रेमनाथ की तरह अपनी जगह पर बैठे बैठे गद्देदार सोफे पर उछल रहे थे.
थिरकते हुए मैं ज्यों ही दादाजी के पास पहुची, उन्होंने मुझे खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया और मेरे उरोजों को मसल दिया और चूम लिया.
“अब तू मुझे अपने हाथों से पिला” दादाजी बोले.
मैं तनिक चिहुंक उठी थी क्योंकि मैं असंतुलित हो कर सीधे उनके विशालकाय तंबू की शक्ल अख्तियार किये हुए सख्त लिंग पर बैठ गई थी. ऐसा लगा मानो मेरी पैंटी और उनके अपने अंडरवियर को फाड़ कर उनका फनफनाता लिंग मेरे नितंबों की दरार में धंस गया हो.
मैं गनगना उठी.
फिर भी मैं ने उनकी गोद में बैठे बैठे अपने हाथों से दादाजी को दूसरा पैग पिलाया आखिर वे आज के बर्थडे ब्वॉय जो ठहरे.
दूसरा पैग पिलाने के बाद उठ गई और फिर से नृत्य करते हुए अपनी कसी हुई ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से अपने उरोजों को ब्रा से मुक्त कर दिया. मेरी नग्न कबूतरियां फड़फड़ा कर उनके सामने तन कर खड़ी हो गयीं.
इस बार मेरे इशारे का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं थी, उन्होंंने आनन फानन में अपने अपने बनियान उतार फेंके.
उधर सबने दूसरा पैग भी खत्म किया और मैं कोल्डड्रिंक का दूसरा ग्लास भी गटक गई.
ड्राइंगरुम के अंदर वासना की गर्मी और उत्तेजना अपने चरम पर थी.
बहुत ही अश्लील माहौल बन चुका था. बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने को नियंत्रित कर रखा था.
उनके अंडरवियर फट पड़ने के कागार पर थे.
अब मैं ने थिरकते हुए पैंटी के ऊपर से ही अपनी उंगली योनि के ऊपर फिराने लगी.
वे लोग भी अंडरवियर के ऊपर से ही अपने अपने लिंग सहलाने लगे.
मैं एक उंगली से पैंटी को नीचे सरकाने लगी.
Reply
11-27-2020, 03:56 PM,
#39
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
“और थोड़ा नीचे, और नीचे” सब एक स्वर में बोल उठे। धीरे धीरे पैंटी से मेरी योनि की दरार दिखने लगी। उनके मुख से सिसकारियां निकलने लगी। फिर मैंने पूरी की पूरी पैंटी एक झटके में निकाल फेंका और मादरजात नंगी हो गई, फिर क्या था वे भी लगभग मेरे ही साथ, या फिर मुझसे भी पहले, पूरे नंगे हो गये, मुझ पर टूट कर भंभोड़ डालने को बेताब। शराब का नशा धीरे धीरे सभी पर चढ़ रहा था और मुझ पर भी कोल्डड्रिंक में मिले शराब ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। मेरे कहने की आवश्यकता नहीं थी, नानाजी ने तीसरा पैग बना कर सबको दिया और सभी ने एक ही सांस में तीसरा पैग भी अपने हलक में उतार दिया। इधर पहला गीत खत्म हुआ और भोजपुरी में दूसरा गीत चालू हुआ, “हाय बेदर्दी बलमा जरा धीरे धीरे”।

इससे पहले कि वे मेरी ओर बढ़ते, मैं ने उनको रोका और कहा, “अभी थोड़ा सब्र कीजिए, एक खेल बाकी है।” कहते हुए मैं ने केक का एक टुकड़ा लिया और दादाजी के मूसलाकार लिंग पर पोत दिया। फिर मैं झुक कर अपने जीभ से उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक चाट चाट कर साफ़ करने लगी।

मेरे इस उत्तेजक हरकत से दादाजी के मुंह से कामुक आहें निकलने लगी थी। “आह बिटिया।”

मैं ने टोका, ” बिटिया नहीं, कामिनी बोलिए, रंडी बोलिए, कुतिया बोलिए, मगर बिटिया मत बोलिए”।

” हां रे बुर चोदी कुत्ती चाट मेरा लौड़ा, चूस हरामजादी” अब दादाजी जोश में आ गए थे। इसी बीच बाकी लोगों ने बचा खुचा केक मेरे पूरे नंगे बदन पर मल दिया था और मेरे नंगे तन को कुत्तों की तरह चाटने लगे।

जैसे ही मैंने दादाजी का लिंग चाट कर साफ़ किया, दादा जी बोल उठे, “चल अब हम सब इसे एक साथ चोदेंगे।”

“एक साथ? नहीं बाबा नहीं, एक साथ नहीं, मर जाऊंगी, प्लीज।” मैं ने घबराने का नाटक किया और उनसे छूट कर भागने लगी।

“पकड़ साली हरामजादी कुतिया को, आज इसको सब मिलकर कुत्ती बना देंगे” दादाजी बेहद वहशियाना ढंग से बोले।

सब मेरे पीछे भागे, “भाग कर जाएगी कहां साली बुर चोदी,” नानाजी बोले। अंततः मैं जानबूझ कर गिर पड़ी और सबने मिलकर मुझे दबोच लिया। सबने मिलकर मुझे उठाया और सेंटर टेबल पर लिटा दिया।

“नहीं नहीं सब एक साथ नहीं” मैं चिल्लाने लगी मगर अब शुरू हुआ काफी देर से कामोत्तेजना की अग्नि में धधकते नंग धडंग भूखे, शराब के नशे के सुरूर में डूबे, कामुक वहशी जानवरों का कामुकता पूर्ण बेहद वहशियाना खेल। उनको दादाजी की तरफ से हरी झंडी मिल गई, एक साथ मुझ पर टूट पड़े। एक एक उरोजों को नानाजी और बड़े दादाजी आपस में बांट कर बेरहमी से मसलने और चूसने लगे। दादाजी मेरी फूली हुई योनि पर टूट पड़े और पागलों की तरह चाटने और चूसने लगे।

मेरे पापा मेरे मुंह के पास अपना टनटनाया लिंग लाए और बोले, “ले चूस मेरा लौड़ा साली चूतमरानी रंडी”। करीम चाचा मेरे नितंबों को फैला कर गुदा मार्ग में जीभ डाल कर चाटने लगे। मुझमें भी अब तक नशे का असर हो चुका था और मैं पागलों की तरह उनकी कामुकता की पराकाष्ठा को पार करते हुए वासना के इस बेहद घिनौने कृत्य में संलिप्त सिसकारियां भरने लगी थी। पांच मिनट में ही मैं उत्तेजना के चरमोत्कर्ष में पहुंच कर अभूतपूर्व स्खलन में डूब गई। मेरे शरीर की थरथराहट को सबने महसूस किया मगर वे अपने हवस और नशे में डूबे मुझे भंभोड़ने में लगे रहे। उनके सम्मिलित कामकेली से मेरी काम पिपाशा पुनः जागृत हो गई और मैं संभोग के लिए छटपटाने लगी। दादाजी ने तुरंत मुझे उठा कर फर्श के कालीन पर लिटा दिया और मेरे पैरों को फैला कर मेरी योनि में अपना लिंग अड़ाया और एक भीषण प्रहार से पूरा का पूरा लिंग एक ही बार में मेरी योनि में ठोंक दिया।

“ले बुर चोदी हमारा लौड़ा तेरी बुर में” इतनी बेरहमी से उन्होंने प्रहार किया था कि मेरी घुटी घुटी आह निकल पड़ी। उन्होंने मुझे कस के पकड़ा था और मुझे लिए दिए एक करवट हो गये।

पीछे से पहले से तैयार करीम चाचा ने मेरे नितंबों को फैला कर गुदा द्वार में अपना भीमकाय लिंग का सुपाड़ा टिका कर एक ही जोर के झटके से सटाक से पूरा नौ इंच लम्बा लिंग मेरी गुदा में भोंक दिया। “ले साली कुतिया मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में”।

नशे में होने के बावजूद भीषण प्रहार से मैं तीव्र पीड़ा के मारे चीख पड़ी, “हाय मादरचोद, साले कुत्ते, गांड़ फाड़ दिया रे्रे्रे्रे्रेए्ए्ए्ए आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह”।

मगर मेरी चीख पुकार की किसे पड़ी थी, सब के सब जंगली जानवर बन चुके थे। मुझे उसी हालत में लिए हुए दादाजी सोफे पर बैठ गए। सामने मेरी योनि में दादाजी का लिंग घुसा हुआ था, पीछे मेरी गुदा में करीम चाचा का विशाल लिंग धंसा हुआ था, सोफे के पीछे से मेरे पापा अपना खौफनाक लिंग मेरे मुंह में डाल चुके थे और मेरे एक हाथ में नानाजी का लिंग, दूसरे हाथ में बड़े दादाजी का लिंग था। मैं पूरी तरह उन वासना के भूखे भेड़ियों के चंगुल में फंसी अपने तन को पिसतेदेखने और किसी हलाल होते हुए मेमने की तरह विवशता में पीड़ा और आनंद मिस्रित स्थिति में खुद को उनके रहमो करम पर छोड़ दिया। अब मैं पांच नशे और उत्तेजना में मदहोश, विभिन्न रंग रूप और शरीर के साथ, हवस के भूखे जंगली जानवरों सरीखे मर्दों से पिसती, उनके विकृत सामुहिक संभोग में लिप्त हो गई। उनके विभिन्न आकार, लंबाई और मोटाई के लिंग, मेरे तन के हर उपलब्ध छिद्रों में या मेरे हाथों की मुट्ठियों में थे और वे अपनी अपनी कामक्षुधा तृप्त करने के लिए जी जान से मुझ पर पागलों की तरह पिल पड़े थे।
Reply

11-27-2020, 03:56 PM,
#40
RE: Desi Sex Kahani कामिनी की कामुक गाथा
करीम चाचा अपने विशाल लिंग को मेरी गुदा में अंधाधुंध ठोंकते हुए मेरे उरोजों को बेहद वहशियाना तरीके से दबा रहे थे और बोल रहे थे, “गांड़ मरानी कुतिया, आज तेरी गांड़ का भुर्ता कर दूंगा, साली रंडी, ओह तेरी गांड़ का गूदा निकाल दूंगा आह छिनाल”,

इधर दादा जी मेरी कमर को सख्ती से पकड़े हुए मेरी योनि में अपने लिंग को दनादन पेलते हुए बोल रहे थे, “हां मेरी बुर चोदी चूत मरानी कुत्ती, साली हरामजादी, रंडी की औलाद, कुतिया की बेटी, छिनाल चूत मरानी, आज तेरी बुर का ऐसा भोंसड़ा बनाऊंगा कि तेरी मां याद आ जाएगी, आह ओह चूत की चटनी बना दूंगा”।

मेरी हालत की किसे परवाह थी, मैं ने तो खुद उन्हें खुला निमंत्रण दे कर उनके अंदर के जंगली जानवरों को जगाया था।

मेरे पापा मेरे मुंह में अपने लंबे और टेढ़े लिंग से मेरे साथ मुखमैथुन करते हुए बड़बड़ कर रहे थे, “चूस हरामजादी मेरा लौड़ा, खा कुतिया मेरा लंड, आह ओह मां की लौड़ी”।

मैं उनकी अश्लील बातों और कामुक हरकतों से उत्तेजित नानाजी और बड़े दादाजी के फुंफकारते लिंगों को अपनी मुट्ठियों पकड़े उन्हें हस्तमैथुन का सुख प्रदान कर रही थी और वे भी अश्लील गालियों के साथ हस्तमैथुन का मज़ा ले रहे थे। “साली मूठमारनी रंडी, मूठ मार कुतिया की औलाद, रंडी की चूत” बड़े दादाजी दहाड़े।

वे सब अपने अपने ढंग से मेरे तन से अपनी वासना की आग शांत करने में लिप्त हो गये। पन्द्रह बीस मिनट बाद सर्वप्रथम दादाजी ने मेरी कमर को सख्ती से पकड़ कर अपने से चिपका लिया और अपना वीर्य मेरी कोख में छर्र छर्र भरने लगे। ज्यों ही वे स्खलित हो निवृत्त हुए और हटे, उनका स्थान मेरे पापा ने लिया और धकाधक चोदने में मशगूल हो गए। करीब पांच मिनट बाद वे भी अपने वीर्य को मेरी कोख में भरने लगे, “आ्आ्आ्आ्ह बुर चोदी”।

अब मेरा मुंह स्वतंत्र था, मैं भी अपशब्दों की बौछार कर बैठी, “आह मादरचोद, कुत्ते साले हरामी, सूअर की औलाद, रंडी बना दे, अपने बच्चों की मां बना दे कुतिया बना दे हरामी आह मैं गई” कहते हुए मैं भी खल्लास हो गई। मगर जैसे ही मेरे पापा खल्लास हो कर हटे बड़े दादाजी ने मेरी चूत में धावा बोला और धकाधक चोदने लगे।

करीब दो मिनट में ही वे भी मेरी चूत में वीर्य उंडेलने लगे, “आ्आ्आ्आ्आह बुर चोदी आज तुझे हम सब मिलकर पेट से कर्र्र्र्र्र् देंगे आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह्।”

मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी मगर अब मेरे नानाजी और करीम चाचा का लंड अपनी चूत में लेना बाकी था। मैं चाहती थी कि आज सबके सब मेरी चूत में ही वीर्य डालें। आठ दस दिन पहले मेरी माहवारी बंद हुई थी और मुझे लग रहा था कि इस समय संभोग से मुझे गर्भ ठहर सकता है किंतु मुझे इसकी रंच मात्र भी परवाह नहीं थी। इस वक्त तो मैं उन बूढ़ों के सामुहिक चुदाई के अपार आनंद में डूब गयी थी। मैं ने करीम चाचा को मेरी चूत परोस दी। मैं जानती थी कि नानाजी का लौड़ा मेरी चूत में फंस जाएगा अतः सबसे अंत में मैं उनको मौका देना चाहती थी। करीम चाचा ने आव देखा न ताव झट से अपने गधे जैसे लंड को एक ही बार में मेरी चुदी चुदाई बुर में उतार दिया और लगे भकाभक चोदने। “आ्आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह मेरी घुटी चीख निकल पड़ी।

“साली बुर चोदी कुतिया तीन तीन लोगों से चुदवा ली है और अभी मेरे लौड़े से चुदने में तेरी चूत फट रही है रंडी कहीं की, देख मैं तुझे कैसे चोदता हूं,” कहते कहते करीब दस मिनट और भयानक ढंग से पटक पटक कर चोदा और फ़िर अपना वीर्य मेरी कोख में भर कर निढाल हो गया। अब बारी आई नानाजी की। उस बुलडोग बूढ़े ने मुझे कुतिया की तरह झुका कर पीछे से कुत्ते की तरह मेरी चूत में अपना लौड़ा ठोंक दिया और लगे दनादन चोदने।

“हरामजादी बहुत इंतजार कराया, मां की लौड़ी कुतिया।” नानाजी बोले।

“हाय मेरे बूढ़े बलमा। आप ही तो एक कुत्ते हो जिसकी मैं कुतिया हूं। मुझे अपनी कुतिया बना के चोद मेरे कुत्ते रज्ज्ज्ज्जा, मुझे अपने पिल्लों की मां बना दे मादरचोद आ्आ्आ।” मैं बोली।

“हां रे मेरी कुत्ती, अभी मैं तुझे गर्भवती करता हूं साली चुदक्कड़ रंडी, तुझे मेरे कुत्तों की मां बना दूंगा बुर चोदी, आह आह ओह ओह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह,” बोलते हुए करीब दस मिनट चोदते रहे और फिर अपना वीर्य मेरी कोख में फचफचा कर भरने लगे और इसी समय “आह रज्ज्ज्ज्आ्आ्आह्ह्ह् मैं गई रे मादरचोद” मैं भी चुदाई की मस्ती के चरमोत्कर्ष में तीसरी बार छरछरा कर झड़ने लगी। तभी “आ्आ्आ्आह” दर्दनाक चीख निकल पड़ी जब मैं ने अपनी चूत के अंदर विशाल गेंद की शक्ल अख्तियार कर चुके नानाजी के लंड से फंस गई। मैं ने छूटने की हल्की सी कोशिश की लेकिन उनका लंड गांठ इतना बड़ा हो चुका था कि मेरी चूत फटने फटने को होने लगी। मैं पीड़ा के मारे स्थिर हो गई और अपने को उसी हालत में छोड़ दिया।

Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up Maa Sex Story आग्याकारी माँ desiaks 155 395,101 01-14-2021, 12:36 PM
Last Post: Romanreign1
Star Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से desiaks 79 72,194 01-07-2021, 01:28 PM
Last Post: desiaks
Star XXX Kahani अनौखा समागम अनोखा प्यार desiaks 93 52,407 01-02-2021, 01:38 PM
Last Post: desiaks
Lightbulb Mastaram Stories पिशाच की वापसी desiaks 15 17,781 12-31-2020, 12:50 PM
Last Post: desiaks
Star hot Sex Kahani वर्दी वाला गुण्डा desiaks 80 30,996 12-31-2020, 12:31 PM
Last Post: desiaks
Star Antarvasna xi - झूठी शादी और सच्ची हवस desiaks 49 86,343 12-30-2020, 05:16 PM
Last Post: lakhvir73
Star Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत sexstories 26 105,467 12-25-2020, 03:02 PM
Last Post: jaya
Star Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा desiaks 166 243,122 12-24-2020, 12:18 AM
Last Post: Romanreign1
Thumbs Up Hindi Sex Stories याराना desiaks 80 86,621 12-16-2020, 01:31 PM
Last Post: desiaks
Star Bhai Bahan XXX भाई की जवानी desiaks 61 185,297 12-09-2020, 12:41 PM
Last Post: desiaks



Users browsing this thread: 12 Guest(s)