Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
07-25-2020, 01:32 PM,
#21
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
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#20

“ कोई बात नही ……देखो ना मैं भी यहाँ बिल्कुल अकेला ही हूँ ………पर आप जैसे दोस्तो के साथ अपना अकेलापन दूर कर लेता हूँ ……..” मैने उसकी आँखों में देखते हुए कहा…….उसने निगाहें नीचे झुका ली ……..फिर कुछ सेकेंड्स बाद वो उठ खड़ी हुई और बोली ……..

“ अब मैं चलती हूँ राजीव ……..”

मैं भी सीट से उठ गया और पूच्छा “ कैसे जाएँगी ? ………आइ मीन , आपके पास कन्वेयन्स है ?”

“ नही …….पर मैं निकल जाऊंगी “ उसने मुस्कुराते हुए कहा………..

“ चलिए ……..मैं आपको ड्रॉप कर दूँगा………” मैने कहा तो एक बार उसने फिर से मना किया…

“ इट्स ओके राजीव…….आप परेशन ना हों “

“ परेशानी की कोई बात नही है नेहा………. मुझे भी तो घर जाना ही है …..आप जहाँ कहोगी , आपको ड्रॉप कर दूँगा……” मैने कहा और फिर उसका जवाब सुने बगैर अपना कीट कंधे पर उठा कर बाहर की तरफ चल दिया ……..

वो 2 सेकेंड्स मुझे जाते हुए देखती रही ……….फिर मुस्कुराते हुए मेरे पीछे-पीछे बाहर की तरफ चल दी
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07-25-2020, 01:33 PM,
#22
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#21

बाहर पार्किंग मे आकर मैने अपनी गाड़ी का लॉक खोला और फिर जैसे ही पीछे देखने के लिए मूड ही रहा था कि एक हाथ मुझे अपने कंधे पर महसूस हुआ…

मैने चौंक कर पीछे देखा ……..यह कमल था …….चेहरे पर एक मुस्कुराहट के साथ ……..वो बोला “ सॉरी यार , मेरी मोटर साइकल खराब हो गयी है शायद , क्या तुम मुझे मेरे घर तक लिफ्ट दे सकते हो ? “

“ ओह !! श्योर कमल ………प्लीज़ कम “ मैने जवाब दिया और उसको गाड़ी के अंदर बैठने का इशारा किया ….. वो ड्राइवर के साइड वाली सीट की तरफ चला गया ………फिर मैं खुद पीछे मूड कर देखने लगा………..नेहा, अपना बॅग अपने कंधे पर उठाए धीरे धीरे मेरी गाड़ी की तरफ ही आ रही थी ….

वो गाड़ी के पास आ गयी तो मैने पिच्छला गेट खोल कर उसको अंदर बैठने का इशारा किया……वो बैठी और साथ ही मैं भी ड्राइविंग सीट पर बैठ गया …..

अंदर बैठ-ते ही कमल और नेहा ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनो ने एक साथ मेरी तरफ सवालिया निगाहो से देखा …… मैने उन दोनो का आपस में परिचय करवाया और फिर गाड़ी स्टार्ट कर के आगे बढ़ा दी

क्लब से मेरे घर की तरफ जाते समय , रास्ते में पहले कमल का घर पड़ता था और फिर नेहा का …………मैं खामोशी से गाड़ी चला रहा था……..और बाकी दोनो भी बिल्कुल चुप चाप थे ……..एक बात जो मैने गौर की वो यह कि कमल बार बार बॅक व्यू मिरर में नेहा को देख रहा था ………..फिर उसने खामोशी को तोड़ते हुए सवाल किया ……” नेहा जी …….बुरा नही मानीएगा , पर मैने पहले भी कहीं आपको देखा है ? “

नेहा सिर्फ़ मुस्कुरा दी , जवाब मैने दिया “ बहुत पुरानी लाइन बोल रहे हो दोस्त , लड़की से बात शुरू करने के लिए …..वैसे आपने नेहा को
क्लब में भी देखा हो सकता है …कमल.”

उसने एक बार मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और फिर बोला “ नही यार , मैं अभी की बात नही कर रहा हूँ , मुझे ऐसा लग रहा है कि मैने शायद इनको बहुत पहले भी कहीं देखा है ………”

मैने अपने कंधे उचका कर नेहा की तरफ देखा , उसका ध्यान शायद हमारी बातों में ना होकर बाहर की तरफ था....

फिर कोई बात हम तीनो के बीच नही हुई , कमल का घर आ गया और वो उतर गया ……मैने गाड़ी आगे बढ़ा दी

गाड़ी आगे बढ़ते ही नेहा, जो अभी तक बाहर देख रही थी ….थोड़ा सा आगे को सरक गयी और फिर बोली “ कौन था यह राजीव ?”

“ बताया ना ….कमल नाम है इसका ……राज नगर पोलीस में एएसपी की पोस्ट पर है …..और इस से ज़्यादा मैं भी नही जानता इसके बारे में …….कभी कभी सिर्फ़ क्लब में ही मुलाकात होती है हमारी ….” मैने बॅक व्यू मिरर में उसकी तरफ देखते हुए कहा ….

उसने एक बार अजीब सा मुँह बनाया और फिर मुस्कुराते हुए आगे बोली “ तो कल फिर आपसे मुलाकात होगी ना क्लब में ?”

मैने हां में सर हिलाकर उसकी बात का जवाब दिया …..

उसने आगे पूछा “ आपने कभी गोल्फ ट्राइ किया है राजीव ?”

“ नही ……….क्यों ?” मैने सवाल किया …

“ अच्छा गेम है …….और आपकी पर्सनॅलिटी को सूट भी करेगा …एक बार ट्राइ कीजिए ना ? “ उसने मुस्कुराते हुए कहा……

“ पर मुझे तो गोल्फ खेलना भी नही आता नेहा …….” मैने उसकी तरफ देख कर , हंसते हुए कहा………….और गाड़ी रोक दी
……..उसका घर आ चुका था ….

वो गेट खोल कर नीचे उतरी और फिर मेरे से दूसरी तरफ वाली विंडो पर आ गयी और बोली “ सिखा तो मैं भी दूँगी ……..आप एक बार ट्राइ तो कीजिए “

“ ओके ……..आप बताइए कब से कोचैंग स्टार्ट होगी हमारी ?” मैने मानो हार मानते हुए कहा ………उसकी आँखों में देखते हुए ……

“ कल से ही ……..कल सुबह 6 बजे क्लब के गोल्फ कोर्स पर पहुँच जाइएगा ………मैं आपका वेट करूँगी ……….” कह कर उसने हाथ
हिलाया और बाइ करते हुए 3-4 कदम पीछे को हट गयी ………मैने हाथ हिलाकर उसको बाइ किया और गाड़ी आगे बढ़ा दी …………

अपने फ्लॅट पर पहुँच कर ,मैने हमेशा की तरह खाने का ऑर्डर दिया……जितनी देर में खाना आया, उतनी देर में मैं नहा कर निपट गया और फिर खाना खा कर बाल्कनी पर आ गया………..

बाहर दूर दूर तक बिल्डिंग की रोशिनी दिखाई पड़ रही थी ……मानो एक आसमान ज़मीन पर भी बिच्छा हुआ था जिस पर हज़ारों सितारे
टिम-टीमा रहे थे ……..

हमेशा की तरह आज भी धीरे धीरे शहर की लाइट्स बंद होती जा रही थी …..पर मेरे अंदर एक अजीब सा रोमांच अनुभव हो रहा था ……मालूम नही यह क्यों था ? शायद बहुत दिनो बाद काम की ज़िम्मेदारी से मुक्त हुआ था इसलिए ? या फिर अभी जो एक मुलाकात नेहा से हुई
थी उस वजह से ?

मैं बहुत ज़्यादा देर बाहर नही खड़ा रह पाया ………कमरे के अंदर आकर मैं बेड पर लेट गया और टीवी खोलकर चॅनेल्स सर्फ करने शुरू कर दिए ………….मेरी आँखें टीवी पर ही लगी हुई थी , पर दिमाग़ मेरी आँखों का साथ नही दे रहा था………1/2 घंटे यूँ ही टीवी देखने में खराब कर के….मैने लाइट्स ऑफ कर दी और सोने की कोशिश करने लगा…………

मेरी आँखों से नींद बिल्कुल ही गायब थी …….दिल कर रहा था कि जल्द से जल्द सुबह हो जाए और मैं फिर से नेहा के पास पहुँच जाऊं ……………. उसका चेहरा, उसकी मुस्कुराहट , उसकी आँखें ….सब कुछ बार बार मेरे दिमाग़ में दौड़ रहा था ………..सोचते सोचते कब मैं सो गया मुझे मालूम ही नही पड़ा
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07-25-2020, 01:33 PM,
#23
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#21 (2)

सुबह 6 बजे से पहले ही मैं क्लब पहुँच गया था……मैने सुबह उठ कर नेहा का नंबर ट्राइ किया था, पर कोई रेस्पॉन्स नही मिला…….क्लब के पिच्छले हिस्से में एक काफ़ी बड़ा गोल्फ कोर्स बना हुआ था ………जिसका एक सिरा समंदर से सिर्फ़ 500 मीटर ही दूर था ………कुल
मिलाकर एक खुशनुमा मौसम था वहाँ का …….

मैं गोल्फ कोर्स में पहुँचा और वहाँ एंट्रेन्स गेट के पास ही पड़ी एक बेंच पर बैठ गया……..5 मिनिट भी नही बीते होंगे कि नेहा वहाँ पहुँच गयी ………कल से अलग , एक टी-शर्ट और ट्राउज़र में थी वो आज…….चेहरा हमेशा की तरह बिल्कुल ताज़े गुलाब की तरह खिला हुआ और चेहरे पर एक सदा-बहार स्माइल …….

“ हाई राजीव…………काफ़ी देर से वेट कर रहे हो क्या ? “ उसने आते ही कहा ……..

“ नही ………..बस अभी 5 मिनिट पहले ही आया हूँ ……..” मैने जवाब दिया

“ ओके ……………तो फिर आपकी आज की क्लास शुरू करें ? “ उसने धीरे से हंसते हुए कहा ………

“ जैसी आपकी मर्ज़ी …..टीचर जी “ मैने भी हंसते हुए ही जवाब दिया ………….

उसने फिर से हँसी में मेरा साथ दिया और फिर साथ में बनी एक छोटी सी बिल्डिंग में घुस गयी………

5 मिनिट के बाद वो वापस आई ……साथ में एक कॅडी भी थी ……….जिसको एक अटेंडेंट ड्राइव कर रहा था ……………

फिर मेरी ट्रैनिंग शुरू हो गयी ………….सही बताऊं तो मुझे कोई इंटेरेस्ट नही था ,गोल्फ सीखने में …….मैं तो तहे दिल से सिर्फ़ यह चाहता था की मैं नेहा के नज़दीक रह सकूँ ……..और गोल्फ के बहाने ही सही , मेरे दिल की इच्च्छा पूरी हो रही थी ………..

अगले एक घंटे तक वो मुझे गोल्फ सिखाती रही ……….क्लब को सही तरीके से पकड़ना , शॉट लगाना ………….ड्राइवर्स, पट्स एट्सेटरा को यूज़ करना …….टी को यूज़ करना ……..यह सब बातें वो एक-एक करके मुझे सिखा रही थी और मैं बस वही सब करता जा रहा था जो वो मुझ से करने के लिए कह रही थी ………

हर बार , जब भी मैं शॉट लगाने जाता था, तब वो मेरे पीछे आकर मेरी पोज़िशन को अड्जस्ट करती थी और उन कुछ सेकेंड्स के लिए मानो पूरी कायानात थम सी जाती थी ………वो अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बताती थी की मुझे शॉट कैसे लगाना है और उसके बदन की भीनी भीनी खुश्बू मेरी सांसो में समा कर मुझे मदहोश करने लगती थी ………..

बीच बीच में जब हम लोग एक होल से दूसरे होल की तरफ जा रहे होते थे तो मेरी नज़रें चोरी चोरी सिर्फ़ उसको ही निहार रही होती थी ………

मालूम ही नही पड़ा कि कब वक़्त गुज़रता चला गया ………….होश तब आया जब उसने कहा कि अब बाकी की ट्रैनिंग किसी और दिन करेंगे ………

हम दोनो वापस क्लब में आ गये …………साथ साथ बैठ कर हम दोनो ने एक एक कप चाय पी………..

धूप निकलनी शुरू हो गयी थी ……… आसमान का रंग लाल होता जा रहा था और मेरे सामने चेयर पर बैठ नेहा के चेहरे का रंग भी कुछ कुछ गुलाबी सा ही था……. शायद काफ़ी देर तक गोल्फ कोर्स में चलने की वजह से , उसकी साँसे अभी भी तेज़ ही चल रही थी

……………….धड़कने तो मेरी भी बहुत तेज़ थी , पर उसकी वजह कुछ दूसरी ही थी ……………..मैं सिर्फ़ उसको ही देख रहा था और मेरे देखने से बे-खबर वो एक तरफ देखे जा रही थी और …मालूम नही कि मेरे दिल के अंदर चल रही हलचल का उसको पता था या नही
……….वैसे यह बात मुझे तो ना-मुमकिन ही लग रही थी कि मैं उसको लगातार देख रहा था और उसको इस का एहसास भी नही हो रहा था ……………

चाय पीने के बाद मैने उसको चलने के लिए कहा और फिर हम दोनो बाहर निकल कर मेरी गाड़ी में आ गये………………मैने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी ………वो आज मेरे पास वाली सीट पर बैठी थी …………मैने शब्द ढूँढ रहा था उस से बात शुरू करने के लिए कि तभी उसने ही पहले खामोशी को ख़तम किया…

“ आप बहुत जल्दी ही गोल्फ खेलने सीख जाएँगे “ उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा

“ अच्छा ! ऐसा क्यों ? “ मैने उसकी तरफ देख कर कहा

“ बस ……आप बहुत जल्दी सब चीज़ कॅच कर रहे थे …इसलिए मुझे ऐसा लगा “ इसबार उसने सामने देखते हुए कहा..

“ ओह्ह……थॅंक्स नेहा “ मैने उसकी तरफ हल्का सा सर झुका कर कहा ..जवाब में वो सिर्फ़ मुस्कुरा दी ………

“ राजीव…..कल आप बता रहे थे कि आप स्विम्मिंग भी करते हैं ? “ उसने पूछा.

“ हां ……..करता तो हूँ “ मैने जवाब दिया

“ तो फिर मैं आपसे स्विम्मिंग सीखना चाहूँगी ……..” उसने मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा…………

“ इट्स ओके ………पर क्लब में तो प्रोफेशनल ट्रेनर्स हैं ……..तुम मुझसे ही क्यों सीखना चाहती हो ? “ मैने हंसते हुए पूछा ……..

“ कोई ख़ास वजह नही है…….बस ऐसे ही , मुझे लगा कि शायद आप मुझे स्विम्मिंग अच्छि तरह सिखा सकते हैं “ उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर सामने देखने लगी …………….

मैने कोई जवाब नही दिया………सिर्फ़ धीरे से मुस्कुरा कर रह गया……..उसका घर आ गया था ,मैने गाड़ी को साइड में लगा कर रोक दिया……….

वो गाड़ी से उतरी और फिर खिड़की में झुक कर मुझे बाइ किया……….मैने भी उसको बाइ किए और गाड़ी आगे को बढ़ा दी ……………..

मैने अपनी जिंदगी में किसी का साथ पहली बार इतनी शिद्दत से चाहा था………और ऊपर वाला मेरे ऊपर इतना मेहरबान था कि मुझे उस-से मिलने की कोई ना कोई नया रास्ता निकाले जा रहा था………….
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07-25-2020, 01:33 PM,
#24
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#22

सुबह 10.00 बजे मैं ऑफीस पहुँच चुका था…….. टूर पर जाने से पहले यह लास्ट वर्किंग डे था ,इसलिए आज बहुत सारे काम करने थे ………

11 बजे से 2 बजे तक मैं मीटिंग्स में ही बिज़ी रहा ……फिर लंच करने के बाद मैं अपने ऑफीस में आकर बैठ गया ………

ऑफीस के दरवाज़े पर नॉक हुआ , थोड़ा सा दरवाज़ा खुला और फिर कारण ने अंदर झाँका ……..

“ आ जाओ करण …………..प्लीज़ कम” मैने कहा और अपना सर पीछे चेयर के बॅक से लगाकर अढ़लेटा सा हो गया ………

“ आअपके टूर का प्रोग्राम फाइनल करना था …….” वो मेरे सामने चेयर पर बैठ-ता हुआ बोला

करण राजपूत, मेरा असिस्टेंट ……..और लक्ष्मी बॅंक में ऐज एजीएम ( ऑपरेशन) , उमर कोई 32 साल के आसपास , लंबा कद और इकहरा शरीर , अभी तक अनमॅरीड था………..इस कंपनी में वो पिच्छले 10 सालो से काम कर रहा था …….. करण की सबसे बड़ी ख़ासियत थी , काम के प्रति उसका अप्रोच ……..अपने काम से रिलेटेड सारी बातें उसके फिंगर टिप्स पर रहती थी , और मेरे लिए तो मानो वो एक चलता फिरता पीसी था……… शायद ही कभी ऐसा हुआ हो जो किसी ने उसको खुल कर हंसते हुए देखा हो ……….पर उसकी सीरीयसनेस ही उसकी एक बड़ी क़ाबलियत थी

“ टूर का प्रोग्राम तो फाइनल हो चुका था कारण ? “ मैने पूछा

“ जी हां …….वही दिखाना है आपको “ कह कर उसने कुछ पेपर्स खोल लिए और फिर मुझे मेरे टूर के बारे में समझाने लगा ……..

कुल मिलकर 5 अलग अलग शहरो में हमको जाना था ……और ज़रूरत पड़ने पर अगर किसी नियरेस्ट प्लेस पर कोई मीटिंग करनी हो तो उसके लिए भी प्रॉविषन किया गया था ……

“ सर ……आपका टूर मंडे सुबह से स्टार्ट होगा ……….राज नगर से लखनऊ , फिर देल्ही , उसके बाद देहरादून , फिर शिमला और लास्ट में चंडीगढ़ …………कुल मिलाकर 14 दिन का टूर है आपका …….आपके लिए एर टिकेट्स, होटेल बुकिंग सब कल तक हो जाएँगी ………….अलग-अलग सिटीस में कुल 35 मीटिंग्स डिसाइड हुई हैं, जिसमे से अकेले देल्ही में ही आपको 20 मीटिंग्स करनी है……….”

इसके बाद वो मुझे समझाता रहा और मैं सुनता रहा ………….अचानक मेरे इंटरकम की घंटी बजी , मैने फोन उठाया तो उधर से मधुर सी आवाज़ में ‘ हेलो राजीव ’ सुनाई पड़ा ……..

“हां नेहा बोलो ………..” मैने पूछा …….

“ नेहा ? …..मैं निधि बोल रही हूँ राजीव , नेहा नही “ अब मैने पहचाना , उधर से आने वाली आवाज़ निधि की थी …………

“ सॉरी निधि ……….मैने आपकी आवाज़ पहचानी नही “ मैने झेन्प्ते हुए कहा

“ इट्स ओके ……….क्या मैं तुमसे मिल सकती हूँ “ निधि ने पूछा…

“ हां ……….श्योर ………मैं अभी आता हूँ “ मैने तुरंत जवाब दिया

“ नही राजीव ……..मैं ही आ रही हूँ तुम्हारे ऑफीस में “ उसने कहा और फिर फोन रख दिया……….

अगले 5 मिनिट्स तक करण ने मुझे बाकी सारी बातें समझाई और फिर वो चला गया…….उसके बाहर निकलने के 15 मिनिट बाद दरवाज़े
पर फिर से नॉक हुई और इस बार आने वाली निधि थी ……..वो सीधा अंदर आकर मेरे सामने वाली चेयर पर बैठ गयी …….

निधि ,….. हमेशा की तरह खुश-नुमा चेहरा लिए …………उसकी आँखों में एक शरारत का एहसास हमेशा ही दिखाई पड़ता था
……..मालूम ही नही पड़ता था कि वो कब सीरीयस है और कब मज़ाक कर रही है ………
“ तो जनाब किसी और के ख़यालो में गुम थे ?” उसने हंसते हुए कहा …….

“ मैं समझा नही ………क्या कहना चाह रही हैं आप ? “मैने ना-समझ बनते हुए सवाल किया ………………

“ जब तुम्हे हर लड़की की आवाज़ सिर्फ़ नेहा की ही लगने लगे तो इसका मतलब तो यही है कि तुम उसके ही ख़यालो में गुम थे ………..क्यों
? “ वो आगे को झुक कर मेरी आँखों में देखते हुए बोली ………..

“ नही …….ऐसी बात नही है ……..मैं आक्च्युयली उस का ही फोन एक्सपेक्ट कर रहा था , शायद इसलिए ……..” मैने बहाना बनाते हुए कहा ………..

“ चलो छोड़ो यार………….यह बताओ , तुम्हारे टूर की सारी तय्यारी पूरी हो गयी हैं ना ? “

“ हां………कारण सारे इंतेज़ाम कर रहा है “ मैने कहा ………

“ बाइ गॉड , मुझे तो इस नेहा से जलन सी हो रही है ……….यार “ इस बार उसने फिर से एक मज़किये से लहजे में कहा.
“क्यों ? “ मैने पूछा..

“ देखो ना……..इतने बढ़िया बढ़िया टूरिस्ट प्लेसस का टूर , और साथ में तुम्हारे जैसा साथी ……कितना रोमॅंटिक सा मौसम होगा वहाँ और तुम दोनो तन्हा …….लकी है यह लड़की “ उसने फिर से मेरी आँखों में देखा ……..

यह उसकी एक पुरानी आदत थी ………वो हमेशा मुझसे फ्लर्ट करने की कोशिश करती थी ………मालूम नही , वो सीरीयस थी या हमेशा की तरह सिर्फ़ मज़ाक करती थी …….

“ टूर का प्रोग्राम तो आपने ही डिसाइड किया है , और ग्रूप्स भी ……..इस में किसी और की तो कोई ग़लती नही है …………” मैने हंसते हुए जवाब दिया……..

“ यही तो अफ़सोस है यार………” उसने एक लंबी सी साँस ली और फिर कहा “ चलो छोड़ो ……मैं तुम्हारे पास एक दूसरे काम से आई थी “ कह कर उसने अपने हाथ में पकड़ी फाइल को मेरे सामने टेबल पर खोल दिया …………

इस फाइल में कुछ डॉक्युमेंट्स थे , बॅंक के सेक्यूरिटी सिस्टम से रिलेटेड …..वो मुझ से कुछ टेक्निकल पायंट्स समझना चाहती थी ………..अगले 1 घंटे तक मैं उसको सब कुछ डीटेल्स से समझाता रहा , और वो भी पूरी संजीदगी से मेरी बातों को सुनती रही ……….ऐसी ही थी वो ,एक पल में मज़ाक करती थी और एक पल में संजीदा हो जाती थी ……………..

काम पूरा होने के बाद निधि चेयर से उठी और कमरे से बाहर निकल गयी ………जैसे ही वो उठ कर कमरे के दरवाज़े पर पहुँची , कमरे का दरवाज़ा नॉक हुआ और नेहा ने अंदर झाँका………..निधि कमरे से बाहर निकल गयी और नेहा अंदर आ गयी ……….कमरे से बाहर
निकलते समय निधि ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर नेहा की तरफ इशारा करते हुए एक आँख दबा दी और मुस्कुराते हुए कमरे से
बाहर निकल गयी …………….. मैं सिर्फ़ झेंप कर रह गया ……………
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07-25-2020, 01:33 PM,
#25
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#23

नेहा………आज फिर से वो साड़ी में थी ………..ब्लॅक & वाइट का कॉंबिनेशन ………हमेशा की तरह मुस्कुराता हुआ चेहरा …….जो किसी की भी थकान को पल में दूर कर देने की ताक़त रखता था …………वो मेरे सामने वाली चेयर पर आकर बैठ गयी …………..उसके हाथ में उसका लॅपटॉप था जो उसने सामने टेबल पर रख दिया ….

“ सर……..आपका थोड़ा सा टाइम लेना चाहूँगी …..” उसने बैठ कर कहा

“श्योर……..बोलो क्या काम है “ मैने कहा

उसने अपना लॅपटॉप ओपन किया और कुछ फाइल्स खोल कर मुझे दिखाना शुरू कर दिया …..वो बॅंक के नये क्लाइंट्स से रिलेटेड इन्फर्मेशन्स थी , जिसके बारे में वो मुझे कुछ बताना चाहती थी ……….

वो बोलती रही और मैं सिर्फ़ सुनता रहा …………उसकी निगाह लगातार लॅपटॉप की स्क्रीन पर थी , पर मेरी निगाहे बार बार , चोरी से उसके चेहरे पर चली जाती थी ……उसकी आँखें , उसके हिलते हुए होंठ , उसके चहरे पर बार बार गिरते हुए उसके बाल ……सब कुछ एक
अजीब सा रोमांच पैदा कर रहा था….उसको किसी भी कीमत पर पाने की चाहत मेरे अंदर बढ़ती ही जा रही थी ……………

अगले 40 मिनिट तक हमारा यह डिस्कशन चलता रहा और फिर उसने अपना लॅपटॉप बंद किया और उठ कर बाहर जाने लगी …….अभी वो गेट तक ही पहुँच थी कि मैने उसको आवाज़ दी ……..

“ सुनो नेहा ……!!”

उसने पलट कर मेरी तरफ देखा ……..
“ तुम्हारी स्विम्मिंग क्लास कल सुबह से स्टार्ट होगी ………” मैने कहा तो उसने सवालिया निगाह से मेरी तरफ देखा ……..

“ कल मेरी गोल्फ क्लास के बाद , मैं तुम्हे स्विम्मिंग सिखाऊंगा ………..तय्यार रहना ……..” मैने धीरे से हंसते हुए कहा ………

उसने भी मुस्कुराते हुए सर हिलाया और फिर कमरे से बाहर निकल गयी ……………

उसके बाद फिर मीटिंग्स का एक लंबा दौर शुरू हो गया………रात 8 बजे तक मैं वहीं अपने ऑफीस में कुछ ऑफीस स्टाफ के साथ और कुछ क्लाइंट्स के साथ मीटिंग्स में बिज़ी रहा और फिर 8 बजे मैने ऑफीस छोड़ा और बिल्डिंग से नीचे आ गया.........अपनी गाड़ी निकाली और खुद ड्राइव करता हुआ अपने फ्लॅट की तरफ चल दिया

………..हमेशा की तरह , आज मैं थकावट या उदासी महसूस नही कर रहा था ……..एक अजीब सा उत्साह था मेरे अंदर…….. कल सुबह फिर नेहा से मुलाकात होनी है , शायद यही सोच मुझे बार बार रोमांचित कर रही थी...........
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07-25-2020, 01:34 PM,
#26
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#24

सुबह के 6.15 बज रहे थे ………..मेरी गाड़ी तेज़ी के साथ क्लब की तरफ जा रही थी ………नेहा मेरे साथ , मेरे पास वाली सीट पर बैठी हुई थी …….हमेशा की तरह , मुस्कुराता हुआ चेहरा ……आज भी उसने एक ट्राउज़र और टी-शर्ट पहना हुआ था……

कल की तरह ही , पिच्छली रात भी आँखों ही आँखों में कट गयी………ऑफीस से देर से आने के बाद मैं खाना खा कर बिस्तर पर लेट गया था ……और सोने की कोशिश करता रहा ……पर नींद का नामो-निशान भी नही था ………पूरी रात इंतेज़ार में कट गयी कि कब सुबह हो और मैं नेहा का पास पहुँच जाऊं …….

सुबह उठते ही मैने नेहा को फोन किया और बताया कि आज मैं उसको पिक कर लूँगा ……फिर तय्यार होकर मैं उसके घर पहुँच गया …….वो मुझे अपने घर के बाहर ही मिल गयी थी ……….और अब हम दोनो साथ-साथ क्लब जा रहे थे ………

क्लब पहुँच कर मैने गाड़ी पार्किंग में लगाई और फिर हम दोनो गोल्फ कोर्स में पहुँच गये ………..फिर 10 मिनिट के बाद मेरी गोल्फ क्लास शुरू हो गयी …….सब कुछ कल की ही तरह हो रहा था……….वो बार बार मेरे पास आकर मेरी पोज़िशन को सही करती थी …….अपने
हाथो से मेरे हाथ पकड़ कर मुझे सही शॉट लगाना बताती थी ……और फिर हम दोनो एक साथ चलते हुए एक होल से दूसरे होल की तरफ
बढ़ जाते थे ………..उसकी अपने पास मौजूदगी ही मेरे लिए काफ़ी थी ……

1 घंटे तक गोल्फ की प्राक्टिज़ चलती रही ….फिर हम दोनो वापस बाहर की तरफ चल दिए ……….. मैने उसको अपने साथ आने का इशारा किया और क्लब से बाहर की तरफ चल दिया……वो भी मेरे साथ साथ बाहर आ गयी ………मैने क्लब से बाहर आकर अपनी गाड़ी पार्किंग
से निकली और उसके पास ले आया………वो गाड़ी के अंदर आकर बैठ गयी और मैने गाड़ी आगे को बढ़ा दी……

रोड पर आकर जब मैने गाड़ी को टर्न किया तो उसने अचानक मेरी तरफ देखा …सवालिया निगाहो से ……..मैने मुस्कुराते हुए कहा …

“ क्या हुआ ?”

“ यह हम कहाँ जा रहे हैं ?”

“ क्यों ? भूल गयी क्या ? आज तुम्हारी भी तो स्विम्मिंग क्लास शुरू होनी थी ….. “ मैने धीरे से हंसते हुए कहा

“ पर यह कहाँ जा रहे हैं ? स्विम्मिंग पूल तो क्लब के अंदर ही था ?” उसके चेहरे पर असमंजस के भाव थे ……….

“ देखते रहो ……………” मैने कहा और गाड़ी की स्पीड और ज़्यादा बढ़ा दी ……….

5 मिनिट की ड्राइव के बाद हम लोग वहाँ पहुँच गये , जहाँ मैं उसको ले जाना चाहता था ……….राज नगर के साउत-वेस्ट मैं यह एक बाहरी हिस्सा था …….. यहाँ समंदर के किनारे चट्टानो को काट कर एक रोड बनाई गयी थी जो समंदर के किनारे के साथ साथ चलती थी
………..राइट साइड में समंदर और लेफ्ट साइड में चट्टाने……….रोड आगे अभी कंप्लीट नही हुई थी , इसलिए इधर कम ही लोग आते जाते थे …………

थोड़ा आगे जाकर मैने गाड़ी को एक साइड में लगाया और उतर कर नीचे आ गया …….नेहा भी मेरे साथ ही उतर गयी …….हम दोनो ने रोड को क्रॉस किया और फिर समंदर की तरफ आ गये ……………

यह रोड समुंदर से काफ़ी ऊपर थी , कोई 15-20 फीट के आस-पास………..रोड के नीचे , राइट साइड में दूर दूर तक चट्टाने फैली हुई थी …….कुछ जगह जहाँ चट्टाने काफ़ी आगे को बढ़ गयी थी , वहाँ समंदर की लहरे चट्टानो पर टकराती थी ,और बाकी जगह रेत फैला हुआ था
…………यह जगह बिल्कुल एकांत में थी …….सिर्फ़ 4 -5 लोग ही नज़र आ रहे थे ……….. और वो भी हमसे काफ़ी दूर थे …………..

मैने समंदर की तरफ इशारा करते हुए कहा “ देखो ………….यह हैं सही जगह स्विम्मिंग सीखने के लिए “
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07-25-2020, 01:34 PM,
#27
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#25

“ पर इतनी खुली जगह में ? मेरा मतलब हैं कि वहाँ क्लब में कम से कम प्राइवसी तो थी “ उसके चहरे पर अभी भी असमंजस के भाव थे ……….

“ क्लब में तो तुम काफ़ी दिनो से सीख रही थी …….अब कुछ दिन यहाँ खुले पानी में स्विम्मिंग करोगी तो जल्दी सीख जाओगी “ मैने मुस्कुराते हुए कहा और फिर एक तरफ इशारा करते हुए कहा “ उधर देखो , वहाँ भी कुछ लड़कियाँ स्विम्मिंग कर रही हैं ………और अगर अभी 1 घंटे बाद यहाँ आते तो शायद तुम्हे यहाँ जगह भी नही मिलती “

उसने उस तरफ देखा जहाँ मैने इशारा किया था ……….वहाँ 2 लड़कियाँ स्विम्मिंग कर रही थी …………उसने एक बार फिर मेरी तरफ देखा और फिर अपने कंधे उचका कर मुस्कुरा दी …………….

हम दोनो ने अपने बॅग्स गाड़ी से निकाले और फिर हम नीचे उतर कर समंदर के किनारे पर आ गये……….नीचे आकर वो एक चट्टान के
पीछे को चली गयी और मैं भी एक साइड में होकर अपने कपड़े निकालने लगा……..

2 मिनिट बाद ही मैं समंदर के पानी में खड़ा हुआ था ……… मैने देखा , वो चट्टान के पीछे से निकली और मेरी तरफ आने लगी ……
जो उसने पहना हुआ था, उसको स्विम्मिंग सूट कहना तो शायद ग़लत होगा , एक विंटेज स्टाइल बाथिंग सूट की कह सकते थे …… नीले रंग की , एक टाइट्फिट स्लीव-लेस टी-शर्ट और एक हाफ पॅंट …….वो धीरे धीरे मेरे नज़दीक आ रही थी ………..और उसके कपड़ो में से झाँकता हुआ उसका शरीर , धीरे धीरे ही मेरी धड़कने भी तेज़ करता जा रहा था …………

वो आगे को बढ़ती हुई पानी के अंदर आ गयी और मुझसे कुछ दूर पर आकर रुक गयी ……..वो बार बार मेरी तरफ देख रही थी और फिर
नज़रें झुका लेती थी ……उसके चहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कुराहट के साथ आज शर्म की लाली भी दिखाई पड़ रही थी ……….

मैने हाथ बढ़ाया और वो मेरा हाथ पकड़ कर पानी के और अंदर आ गयी ……मैं नही चाहता था कि मेरी किसी ग़लत हरकत की वजह से वो बुरा मान जाए और वो बात जो अभी बन भी नही पाई है , पहले से ही बिगड़ जाए ……..मैने अपना ध्यान उसके शरीर से हटा लिया और फिर हम दोनो थोड़ा आगे जाकर गहरे पानी में तैरने लगे …………

उसने कुछ दिन क्लब में स्विम्मिंग सीखी थी , इसलिए बेसिक तो उसको मालूम ही थे ……आज पहली बार वो खुले पानी में तैर रही थी , इसलिए कुछ घबरा रही थी …..मैं उसके साथ साथ ही तैरता रहा……..और कुछ ही देर में वो खुल कर तैरने लगी …….मेरा पूरा ध्यान था कि वो कहीं गहरे पानी में ना चली जाए ……बीच बीच में जब हम दोनो पास आते थे और हमारे शरीर पानी के अंदर, अंजाने में ही टकराते
थे तो एक लहर सी मेरे पूरे शरीर में दौड़ जाती थी ……. मैं बार बार अपना ध्यान हटाने की कोशिश करता था …..और बार बार , ना चाहते हुए भी मेरा ध्यान उसकी तरफ चला जाता था………..

करीब 40 मिनिट तक स्विम्मिंग करने के बाद हम दोनो पानी से बाहर आ गये …….जैसा कि मेरा अनुमान था, आस पास और भी लोग आ गये थे ……….पर सब ही हम से काफ़ी दूर थे …………..मैने अपने साथ लाया हुआ टवल उठाया और एक तरफ को जाकर अपने कपड़े
चेंज करने लगा ………नेहा अभी भी रेत पर बैठी हुई थी , पानी बार बार आकर उसके शरीर पर चढ़ जाता था …………..और फिर उसको छू कर वापस लौट जाता था …………

मैने कपड़े चेंज किए और फिर उसके पास आया …………..

“ क्या हुआ ? घर नही चलना है क्या ? “

उसने मेरी तरफ देखा और फिर उठ कर खड़ी हो गयी ………….

“ तुम कपड़े बदल लो ……….मैं तब तक गाड़ी को घुमा कर यहाँ सामने ही लगा लेता हूँ …….” मैने कहा और ऊपर सड़क की तरफ को
चल दिया ……..उसने भी अपना बॅग उठाया और एक बड़ी सी चट्टान के पीछे की तरफ चल दी ……….

मैं रोड पर आया………रोड को क्रॉस कर के अपनी गाड़ी मैं बैठा …..और फिर गाड़ी को स्टार्ट कर के आगे को बढ़ा दिया……आगे जाकर
मैने गाड़ी को यू-टर्न दिया और फिर उस जगह पर आकर रोक दी , जहाँ नीचे हम लोग स्विम्मिंग कर रहे थे ……..

नेहा अभी वहाँ नही आई थी …..मैं यूँ ही टाइम काटने के लिए साइड व्यू मिरर्स को अड्जस्ट करने लगा …….और फिर अचानक मेरी निगाह दूसरी तरफ (लेफ्ट साइड) वाले साइड व्यू मिरर पर पड़ी ………जो कुछ दिख रहा था उसने कुछ सेकेंड्स के लिए मेरी साँसे रोक दी थी ……….

सीन ही कुछ ऐसा था ……….मिरर का आंगल कुछ ऐसा था कि उसमें देखने पर नीचे चट्टानो के पीछे का सीन दिखाई पड़ रहा था

…….नेहा , जो वहाँ पर कपड़े चेंज कर रही थी ……उस मिरर में दिखाई पड़ रही थी ……वो इस समय ट्राउज़र पहन चुकी थी और नीचे को झुक कर , अपने बॅग में से कपड़े निकाल रही थी ………हालाँकि उसका चहरा दूसरी तरफ था , फिर भी जो कुछ दिख रहा था , वो किसी का भी ईमान डिगाने के लिए काफ़ी था …….उसकी पूरी नंगी पीठ , और एक साइड से दिखती हुई उसकी दिलकश गोलाइयाँ
…………. मैं एक-टक सिर्फ़ उस ही की तरफ देखे जा रहा था …………..मेरे देखते ही देखते उसने अपने बॅग में से निकाल कर एक ब्रा
पहनी और फिर एक शर्ट ……….फिर उसने अपने कपड़े समेटे और बॅग में डाल कर मेरी तरफ को चल दी ……….

1 मिनिट के अंदर ही वो गाड़ी के पास आ गयी ……..उसने अपनी साइड वाला गेट खोला और गाड़ी में आकर बैठ गयी……………उसने
एक बार मुस्कुरकर मेरी तरफ देखा, और मैने गाड़ी स्टार्ट कर के आगे की तरफ बढ़ा दी ………..

हम दोनो ही बिल्कुल खामोश थे ………….वो खिड़की से बाहर देख रही थी …..तेज़ हवा उसके बालो को उड़ा रही थी और वो बार बार उसके चेहरे पर टकरा रहे थे …………..उसका तो मालूम नही , पर मेरी खामोशी की वजह वो सीन था जो अभी थोड़ी देर पहले मैने देखा था ……….मैं बार बार उसकी तरफ देख रहा था………..

हमें मिले हुए अभी कुल 3-4 दिन ही हुए थे ………..इतने दिनो में ही हम लगातार एक दूसरे के नज़दीक आते जा रहे थे …….ऐसा पहले मेरे साथ कभी नही हुआ था……..बार बार मिलने के बावजूद , हर बार फिर उस से मिलने की चाहत होती थी ………..मालूम नही यह प्यार
था…… या फिर उसको पा लेने की , एक अजीब सी प्यास थी , जो मेरे अंदर बढ़ती जा रही थी …………

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07-25-2020, 01:36 PM,
#28
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#26

मैं अपने फ्लॅट पर पहुँचा और फिर डेली रुटीन वर्क निपटाने लगा……आज जब मैने नेहा को उसके घर छ्चोड़ा था , तब गाड़ी से उतरते समय उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी दिखाई दे रही थी ……..क्या यह इश्स वजह से थी की मैं उसके साथ था ? ……अगर यह सही था तो इसका मतलब जो आग मेरे अंदर थी , वही उसके भीतर भी जलने लगी थी ………

मैं बाथरूम से से बाहर आया तो देखा मेरे मोबाइल की रिंग बज रही थी ……..मैने जल्दी से मोबाइल उठाया और देखा ………यह नंबर मिस्टर.चौधरी का था ……..मैं कॉल रिसीव की …

“ गुड मॉर्निंग सर………..”

“ मॉर्निंग राजीव……….कैसे हो बेटा ? “

“ फाइन सर……….आप बताइए , आप कैसे हैं ? “ मैने पूछा………

“ मैं भी ठीक हूँ राजीव………तुम्हे डिस्टर्ब कर रहा हूँ…. पर क्या करूँ ,बात ही कुछ इतनी इंपॉर्टेंट थी “ उन्होने कहा और फिर रुक गये ……….

“ हाँ …बोलिए सर…?” मैने आगे पूछा…

“ राजीव ……एक गुड न्यूज़ है …कल मेरी मीटिंग कुछ स्टेट मिनिस्टर्स के साथ थी ……हमारी स्टेट गवर्नमेंट हमारे बॅंक के वॉल्ट्स का यूज़ करना चाहती है……अपने गोल्ड रिज़र्व को रखने के लिए …….. इस ही सिलसिले में मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है ………प्लीज़ ऑफीस में आकर मिलो “ उन्होने पूरी बात को शॉर्ट में समझाया……

“ इट्स ओके सर……..मैं अभी एक घंटे में ऑफीस पहुँचता हूँ” कह कर मैने फोन डिसकनेक्ट कर दिया और फिर तय्यार होने लगा…………..

1 घंटे के बाद………करीब 10 बजे होंगे जब मैं ऑफीस पहुँच चुका था……मिस्टर. चौधरी ने मीटिंग अपने ऑफीस में कॉल की थी और हम सभी लोग उनके ऑफीस में बैठे उनका वेट कर रहे थे ……….मैं , शरद , प्रिया , निधि , कारण और 2 और स्टाफ मेंबर्ज़………….. उनके ऑफीस में पड़े एक 10 सीटर सोफा सेट पर हम लोग बैठे हुए थे……………

मिस्टर. चौधरी रूम में आए और हम सभी ने खड़े होकर उनको ग्रीट किया………. वो हम लोगो के बीच में आकर बैठ गये और फिर मीटिंग स्टार्ट हो गयी …….

“ सो फ्रेंड्स……….आज की यह अर्जेंट मीटिंग का सब्जेक्ट क्या है ……यह तो मैने आप सबको बता ही दिया था……..अब डीटेल्स में
बताता हूँ ….” कह कर वो रुके , हम सब के चेहरो को एक-एक करके देखा और फिर आगे बोलना शुरू किया……..

“ मैने कल हमारे स्टेट के मिनिस्टर्स के साथ एक मीटिंग की थी , अपने बिज़्नेस प्लॅन्स के बारे में……वहीं पर हमें यह प्रपोज़ल मिला कि हमारा बॅंक , जो आज की तारीख में इंडिया के सेफेस्ट बॅंक का दर्ज़ा पाता जा रहा है , का यूज़ स्टेट गवर्नमेंट करना चाहती है …….अपने गोल्ड रिज़र्व को रखने के लिए…….”

“ एक अनुमान है कि स्टेट के पास कोई 200 टन गोल्ड रिज़र्व है ……..यानी करीब 400 करोड़ का गोल्ड…………अगर हमें यह कांट्रॅक्ट मिल गया तो यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा अचीव्मेंट होगा …………….और जैसा कि हम जानते है कि सेंटर में भी इस ही पार्टी की
गवर्नमेंट है ……..तो शायद हमें सेंटर गवर्नमेंट से भी इस ही तरह का कोई कांट्रॅक्ट मिल सकता है…………” कहते कहते वो थोड़ी देर के
लिए रुक गये ………..हम सब के चेहरो पर खुशी सॉफ दिखाई पड़ रही थी ………..

उन्होने आगे बोलना शुरू किया “ मेरी मंडे को फिर से उनके साथ मीटिंग है………और फिर एक मीटिंग देल्ही में होगी……..हमें उन लोगो को अपना प्रपोज़ल अपने प्लॅन्स के साथ प्रेज़ेंट करना है ..........राजीव , मैं चाहता हूँ कि तुम आज थोड़ा टाइम लगाकर एक प्लान तय्यार कर
दो , जिस से मैं उन लोगो को इस वॉल्ट की लोकेशन और साइज़ के बारे में समझा सकूँ ………..”

मैने हां में सर हिलाया……….

“ सो फ्रेंड्स……….दिस विल रियली बी आ वेरी बिग अचीव्मेंट फॉर अस……….आंड ऑल क्रेडिट मस्ट गोस टू राजीव" उन्होने मेरी तरफ देखते हुए कहा....

“ नही सर………यह मेरा अकेले का काम नही है…….जो लोग मेरे साथ इस प्रॉजेक्ट में थे , उन सब को बराबर का क्रेडिट मिलना
चाहिए……..” मैं कुछ झेन्पते हुए बोला

“ नही राजीव…….सच तो यही है कि तुम्हारे बगैर यह काम पासिबल ही नही था” ……” उन्होने कहा …….और फिर सबने एक बार मेरी तरफ देखा …..सबके चेहरो पर अलग-अलग भाव मुझे दिखाई पड़ रहे थे ………कुछ खुश थे और कुछ की आँखों में जलन के भाव भी सॉफ दिख रहे थे………..

फिर अगले 10 मिनिट तक आपस में डिस्कशन चलता रहा......वॉल्ट की लोकेशन और साइज़ के बारे में डिसाइड करने के बाद मीटिंग ख़तम हो गयी .......फिर एक आख़िरी बात मिस्टर.चौधरी ने कही .......
“ मंडे से तुम लोग अपने अपने टूर पर जा रहे हो ……….वापस आकर हम लोग एक शानदार पार्टी से इस को सेलेब्रेट करेंगे………नाउ
यू मे गो टू युवर वर्क “

कह कर वो अपनी जगह से उठ गये और फिर अपनी चेयर पर जाकर बैठ गये ……मैं भी वहाँ से उठ कर उनके सेम पहुँच गया …….और
करण को छोड़ कर बाकी सभी लोग रूम से बाहर चले गये ……….

“ सर , मैं करण के साथ मिलकर आज प्लान तय्यार कर देता हूँ और इसको समझा भी दूँगा कि कैसे वर्किंग शुरू करनी है …….फिर जब कांट्रॅक्ट फाइनल हो जाएगा तो करण इस पर काम शुरू कर सकता है…….. क्यों कि मैं कल से टूर पर जा रहा हूँ, बाकी का काम मैं वापस
आकर पूरा करवा दूँगा…..” मैने मिस्टर.चौधरी से कहा……….करण मेरे पास ही बैठा हुआ था……..

“ नही राजीव …….. तुम अभी सिर्फ़ प्लान तय्यार कर दो , मैं उन लोगो से बात कर लूँगा ………काम हम तुम्हारे आने के बाद ही स्टार्ट करेंगे …….” उन्होने कहा ….और फिर करण से बोले “ एक्सक्यूस मी करण………प्लीज़ डॉन’ट माइंड, मुझे राजीव से अकेले में कुछ बात करनी है ……….”

करण ने सर हिलाया और उठ कर कमरे से बाहर निकल गया…….मिस्टर.चौधरी ने आगे बोलना शुरू किया……..

“ देखो राजीव………यह प्रॉजेक्ट हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है……मैं नही चाहता कि इस से रिलेटेड कोई भी टेक्निकल डीटेल किसी को मालूम पड़े ………इस के सेक्यूरिटी पासवर्ड्स सिर्फ़ हम दोनो को मालूम रहने चाहिए …….किसी तीसरे को नही ……इसलिए तुम ही वापस आकर इस प्रॉजेक्ट को शुरू करना ………..”

“ ठीक है सर ……..और अगर आप कहें तो मैं अपना टूर कॅन्सल कर देता हूँ ……..कोई और चला जाएगा मेरी जगह ……..” मैने कहा …

“ नही ……..तुम अपना टूर पूरा कर के आओ ……और फिर मैं भी नेक्स्ट वीक देल्ही आ रहा हूँ…..वहाँ पर ही हम लोग बाकी बातें डिसकस कर लेंगे…….” उन्होने कहा तो मैने सर हिलाकर अपनी सहमति जताई और फिर उठ कर कमरे से बाहर आ गया…………
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07-25-2020, 01:36 PM,
#29
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो

#27

main apne room mein aakar baith gaya………iss samay mera poora dhyan sirf uss project par hi tha…….maine phone kar-ke Karan aur Nidhi ko apne paas bula liya aur fir agle 10 minute baad ham teeno ek saath baith kar iss project ki planning karne lage……

Mr.Chaudhry ka suggestion tha ki iss project par main Nidhi ko apne saath rakhoon ……..jaisa unhone mujh se kaha tha ki wo nahi chahte ki koi baahar ka aadmi iss se related security passwords ko jaane, ham logo ne yahi behtar samjha ki Nidhi ko ismein involve kiya jaaye…………

Agle 3 ghante tak ham teeno ek saath ek kamre mein baith kar saare project ko samjhte rahe……….pehle hamne lay out tayyar kiya aur fir technical details ko discuss kiya ……….fir last mein mine ek list banayi , unn items ki jo hamein iss project mein chahiye they aur Karan ko unke baare mein details mein samjhaya…maine usko bataya ki agar Mr.Chaudhry ka approval mil jaye to wo jald se jald yeh sab samaan arrange kar le aur fir main tour se laut-te hi iss par kaam chaloo kar doonga……..

Karan hamesha ki tarah bahut serious hokar saari details note kar raha tha …….aur Nidhi bhi aaj apne swabhaav ke ulat , kaafi gambheerta se saare discussion mein involve thi ……..

Fir ham logo ne ek baar saare points ko check kiya aur meeting khatam kar di …….Karan uth kar kamre se baahar nikal gaya aur Nidhi aur main kamre mein reh gaye…..

Nidhi , mere same chair par baithi huyi thi aur ek tak meri taraf dekh rahi thi …..uske haath meinek pen tha jiske pichhle hisse ko wo apne munh mein chaba rahi thi ….. main usko aise dekhte huye paakar ek baar to jhenp sa gaya aur fir bola ……

“ Kya hua ? aise kya dekh rahi ho ? “

“ kuch nahi yaar ….. soch rahi hoon ki ham sab hi ek jaise insaan hain , fir tumhara dimaag ham logo se alag kaise hai ? “ usne muskurate huye poochha…..

“ kuch bhi alag nahi hai………tumhe sirf aisa lagta hai “

“ nahi Rajiv ……abhi kitni aasani se tumne poore project ka plan tayyar kar diya …….main hoti to shayad pehle to kar hi nahi paati , aur agar kar bhi leti to hafto ka time lagta “ who boli …..main sun kar muskura diya ……..aur kaha

“ aisi baat nahi hai Nidhi ……….mera aur tumhara job alag-alag hai…isliye shayad jo kaam mere liye aasan hai, wo tumhare liye kathin hoga………aur jo kaam tum kar sakti ho , wo shaayad main na kar paoon ……”
“ chalo theek hai ………..ab chalti hoon Rajiv……..ab to shayad kaafi dino ke baad hi mulakaat hogi …..” keh kar wo uth gayi aur apne saare papers aur laptop utha liya ….fir baahar ki taraf chal di aur achanak peechhe mud kar boli ……….

“ Best of luck for your journey Rajiv ………. I hope , Neha tumhara achchha saath degi , aur meri kami mehsoos nahi hone degi “ keh kar usne ek aankh dabaayi aur hanste huye baahar nikal gayi …………..

main bhi muskuraya aur fir main bhi uth kar kamre se baahar aa gaya……..main seedha Mr.Chaudhry ke paas gaya aur project report unko saunp di …….unhone bataya ki wo abhi kahin baahar nikal rahe hain , iss liye report ko apne sath hi le jaayenge , raaste mein padhne ke liye……..fir main waaps apne room mein aa gaya………..

maine ghadi mein time dekha…..do-pahar ke 2.30 baj rahe they …… maine ab waaps ghar nikalne ke mood mein tha………main apna saaman sametne laga ki darwaaze par fir se knock huyi………maine dekha, yeh Karan tha……wo kamre ke andar aa gaya aur ek packet meri taraf badha diya……….maine packet haath mein lekar uski taraf sawaaliya nigaaho se dekha…..wo bola
“ Aapki tickets aur hotel booking ke papers hain iss mein “

“ Ohhh………thanks Karan ….mujhe to yaad hi nahi tha….. “ maine kaha ….jawaab mein wo bola …….

” Its ok Sir……….” Aur fir baahar ki taraf chal diya ……fir darwaaze par jaakar ruka aur palat kar bola…………” ek kaam tha aapse ? “

“ haan ……….bolo Karan ? “
“ mujhe shaayad kuch dino ke liye apne ghar jaana pade……..mere father ki tabiyat kuch theek nahi chal rahi hai …… “ usne dheere se kaha…

“ its OK……..tum jab chahe ja sakte ho , meri absence mein tum Mr.Chaudhry aur Nidhi ko inform kar dena……” maine usko samjhaya…… “ aur kuch chahiye ho to bataao ? “

“ nahi ……….bas itna hi kaafi hai , thanks “ keh kar wo baahar nikal gaya ……….

Maine apna bag aur wo packet uthaya aur kamre se baahar aa kar neech ki taraf chal diya ……. building se neeche aakar maine driver ko bulaya aur wo meri gaadi lekar aa gaya ……….main gaadi ki pichhli seat par baitha aur usne gaadi aage badha di……

Kuch hi der mein meri soch fir se Neha par pahunch gayi ……..maine tay kar liya tha ki main iss tour par apne dil ki baat uss se kar loonga …….jaisi ki mujhe ummeed thi , wo inkaar to nahi karegi ……..fir waapas aakar main Mr.Chaudhry ko bhi inform kar doonga ………….iss vichar ke aane se hi mere chehre par ek muskaan aa gayi………

Main kuch der baahar dekhta raha fir Karan ka diya hua packet uthaya aur usko khol kar usmein rakhe papers ko check karne laga ……….kuch air tickets, hotel booking ke papers , hamaari meetings ke plans aur kuch aur papers usmein they ………

Maine air tickets nikaale aur unko check karne laga …………pehla ticket khola , wo mere naam se tha …..Lucknow to Delhi , doosra ticket bhi mere naam se hi tha… Raj Nagar to Lucknow ………teesra ticket khol kar dekhte hi main chaunk gaya ……. Aisa laga jaise bijli ka jordaar jhatka mujhe laga ho ……ticket par passenger ka naam likha tha……Mrs. Neha Verma……………mere dil ki dhadkane achanak kayi guna badh gayi thi ………maine jaldi jaldi saare tickets ko check kiya ……………..aadhe tickets par , jo mere nahi they , wahi naam likha hua tha ….Mrs.Neha Verma……..

Maine turant Karan ko phone lagaya ………….. uske phone receive karte hi maine uss se sawaal kiya

“ Karan , tum ne tickets check kiye they na ? “

“ ji haan Sir …….kyon koi galti hai kya ? “

“ Haan ….shaayad …………Neha ke naam mein unhone Mrs laga diya hai……” main dhadakte dil ke saath bola ………

“ Ji …….to sahi hi hai na ………Neha ji married hain Sir ……kyon ? aapko nahi maloom tha kya ? “ udhar se Karan ki awaaz aayi ……….

“ Ohhh……….its ok Karan ………thanks “ keh kar maine phone disconnect kar diya ……..

mujhe apna sar ghoomta hua mehsoos ho raha tha……. maine saare papers waaps packet mein rakh diye aur sar ko peechhe seat se tika diya……...jo kuch abhi hua tha, wo mere liye kisi shock se kam nahi tha…………..
______________________________

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07-25-2020, 01:36 PM,
#30
RE: Desi Sex Kahani वेवफा थी वो
#27

मैं अपने रूम में आकर बैठ गया………इस समय मेरा पूरा ध्यान सिर्फ़ उस प्रॉजेक्ट पर ही था…….मैने फोन कर-के करण और निधि को
अपने पास बुला लिया और फिर अगले 10 मिनिट बाद हम तीनो एक साथ बैठ कर इस प्रॉजेक्ट की प्लॅनिंग करने लगे……

मिस्टर.चौधरी का सजेशन था कि इस प्रॉजेक्ट पर मैं निधि को अपने साथ रखूं ……..जैसा उन्होने मुझ से कहा था कि वो नही चाहते कि कोई बाहर का आदमी इस से रिलेटेड सेक्यूरिटी पासवर्ड्स को जाने, हम लोगो ने यही बेहतर समझा कि निधि को इसमें इन्वॉल्व किया जाए…………

अगले 3 घंटे तक हम तीनो एक साथ एक कमरे में बैठ कर सारे प्रॉजेक्ट को समझते रहे……….पहले हमने ले आउट तय्यार किया और फिर टेक्निकल डीटेल्स को डिसकस किया ……….फिर लास्ट में मैने एक लिस्ट बनाई , उन आइटम्स की जो हमें इस प्रॉजेक्ट में चाहिए थे और
करण को उनके बारे में डीटेल्स में समझाया…मैने उसको बताया कि अगर मिस्टर.चौधरी का अप्रूवल मिल जाए तो वो जल्द से जल्द यह सब समान अरेंज कर ले और फिर मैं टूर से लौट-ते ही इस पर काम चालू कर दूँगा……..

करण हमेशा की तरह बहुत सीरीयस होकर सारी डीटेल्स नोट कर रहा था …….और निधि भी आज अपने स्वाभाव के उलट , काफ़ी गंभीरता से सारे डिस्कशन में इन्वॉल्व थी ……..

फिर हम लोगो ने एक बार सारे पायंट्स को चेक किया और मीटिंग ख़तम कर दी …….करण उठ कर कमरे से बाहर निकल गया और निधि और मैं कमरे में रह गये…..

निधि , मेरे सेम चेयर पर बैठी हुई थी और एक तक मेरी तरफ देख रही थी …..उसके हाथ मेनेक पेन था जिसके पिच्छले हिस्से को वो अपने मुँह में चबा रही थी ….. मैं उसको ऐसे देखते हुए पाकर एक बार तो झेंप सा गया और फिर बोला ……

“ क्या हुआ ? ऐसे क्या देख रही हो ? “

“ कुछ नही यार ….. सोच रही हूँ कि हम सब ही एक जैसे इंसान हैं , फिर तुम्हारा दिमाग़ हम लोगो से अलग कैसे है ? “ उसने मुस्कुराते हुए
पूछा…..

“ कुछ भी अलग नही है………तुम्हे सिर्फ़ ऐसा लगता है “

“ नही राजीव ……अभी कितनी आसानी से तुमने पुर प्रॉजेक्ट का प्लान तय्यार कर दिया …….मैं होती तो शायद पहले तो कर ही नही पाती ,
और अगर कर भी लेती तो हफ़्तो का टाइम लगता “ वो बोली …..मैं सुन कर मुस्कुरा दिया ……..और कहा

“ ऐसी बात नही है निधि ……….मेरा और तुम्हारा जॉब अलग-अलग है…इसलिए शायद जो काम मेरे लिए आसान है, वो तुम्हारे लिए कठिन
होगा………और जो काम तुम कर सकती हो , वो शायद मैं ना कर पाऊँ ……”

“ चलो ठीक है ………..अब चलती हूँ राजीव……..अब तो शायद काफ़ी दिनो के बाद ही मुलाकात होगी …..” कह कर वो उठ गयी और
अपने सारे पेपर्स और लॅपटॉप उठा लिया ….फिर बाहर की तरफ चल दी और अचानक पीछे मूड कर बोली ……….

“ बेस्ट ऑफ लक फॉर युवर जर्नी राजीव ………. आइ होप , नेहा तुम्हारा अच्छा साथ देगी , और मेरी कमी महसूस नही होने देगी “ कह कर उसने एक आँख दबाई और हंसते हुए बाहर निकल गयी …………..

मैं भी मुस्कुराया और फिर मैं भी उठ कर कमरे से बाहर आ गया……..मैं सीधा मिस्टर.चौधरी के पास गया और प्रॉजेक्ट रिपोर्ट उनको सौंप दी …….उन्होने बताया कि वो अभी कहीं बाहर निकल रहे हैं , इस लिए रिपोर्ट को अपने साथ ही ले जाएँगे , रास्ते में पढ़ने के लिए……..फिर मैं वापस अपने रूम में आ गया………..

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