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FFM sex series Part 1 सपना
11-04-2023, 02:59 PM, (This post was last modified: 11-04-2023, 04:45 PM by Popcorn. Edit Reason: Correction in voting choices )
#1
FFM sex series Part 1 सपना
sapna
महारानी सुवर्णा की पीठ अपनी छाती से लिपटाए हुए महाराज भाग्यवर्धन के हाथ महारानी की  बगलों के नीचे से  जा कर, महारानी के चूचको का मर्दन कर रहे थे।  हथेलियों के नीचे  मखमली गुदाज़ स्तनों  की रगड़ और धीरे धीरे तनते हुए  कुचाग्रों का घर्षण महाराज के शिश्न  को  मादकता प्रदान कर रहे थे। कहने के आवश्यकता  नहीं की दोनों के शरीर पर कपड़े की एक चिंदी भी नहीं थी। सामने लगे हुए आदमक़द आईने में, लाजवश और महाराज के सतत चुंबनों की रगड़  से महारानी के सुनहरी रंगत लिए कपोल शनैः शनैः गुलाबी  होते स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे थे। तभी पीछे अपनी पीठ पर स्त्री कपोलों के स्पर्श से चौंक कर पीछे देखने पर महाराज के नयन छोटी महारानी की नटखट चितवन में उलझ कर रह गए।
बड़ी महारानी सुवर्णा जितनी धीर गंभीर लाजवंती, छोटी महारानी आरूषा उतनी ही चपला, चंचल और नटखट। महारानी आरुषा ने महाराज की पीठ पर चुंबनों और दंतक्षत की बौछार कर दी। अब दो दो सुंदरियों के बीच उलझे हुए महाराज ने उत्तेजित हो कर महारानी सुवर्णा को घुमा कर अपने आलिंगन में जकड़ते हुए उनके अधरों का पान आरंभ कर दिया।महाराज के अधर महारानी के अधरों को काफी समय तक पीने के बाद उनके दोनों गालों को बारी बारी से  मुंह में ले कर चूसने लगे। महारानी सुवर्णा की चिबुक भी अछूती नहीं रही।उसका भी स्वाद दशहरी आम की गुठली के समान लिया गया और अंत में उनकी लंबी ग्रीवा से फिसलते हुए महाराज के होंठ महारानी के कोमल किंतु गठे हुए उरोजों पर आ कर थम गए। अपने उरोजों और कुचाग्रों पर महाराज के अधरों और जिव्हा के कुशल घर्षण और चूषण के बावजूद महारानी के मुंह से कभी कभार हल्की सी सिसकारी के अतिरिक्त कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी।वो तो जैसे केवल पत्नी का कर्तव्य ही निभा रही थीं। 
उधर बूटे से कद और छरहरे बदन की मालकिन  छोटी महारानी आरूषा पूरे जोश में महाराज की पीठ पर अपने अधरों जिव्हा और दांतों से चित्रकारी करने के साथ साथ आगे हाथ बढ़ा कर महाराज के दोनों चूषकों को भी अपनी उंगलियों से मरोड़ मरोड़ कर खड़ा करने में व्यस्त थीं। "अब आप दोनों एक दूसरे के साथ कुछ समय बिताइए" बोल कर महाराज भाग्यवर्धन सिंह ने पलंग के एक ओर बैठ कर मदिरा का पात्र अपने होंठों से लगा लिया। 
उधर आरुषा  सुवर्णा को अपने ऊपर खींच कर मखमली गद्दों पर कल्लोल क्रीडा में व्यस्त हो गईं। परस्पर आलिंगन करते हुए आरुषा ने सुवर्णा  के पूरे चेहरे पर चुंबनो की बौछार कर दी। होंठों को देर तक चूसे जाने के बाद आखिर सुवर्णा ने अपना मुंह तनिक खोलते हुए आरुषा की जीभ को अपने मुंह में मार्ग दे ही दिया। फिर क्या था, आरुषा की जिव्हा सुवर्णा के मुंह में स्वच्छंद नृत्य करने लगी। थोड़ा उत्तेजित होते हुए सुवर्णा ने भी संकोच के साथ ही सही किन्तु अपनी जीभ भी आरुषा की जीभ से भिड़ानी और उसके मुंह में घुसानी आरंभ कर दी। आरुषा अपनी जीभ सुवर्णा के मुंह में गोल गोल घुमाती और जब सुवर्णा की जीभ उसके मुंह में प्रवेश पा जाती तो उसे मदमस्त हो कर चूसती। इस दौरान आरुषा के सुडौल उरोज लगातार सुवर्णा की छातियों का मर्दन कर रहे थे। घनिष्ठ चुंबन के साथ साथ दोनों की छातियाँ एक दूसरी की छातियों की मालिश कर रही थीं। महाराज धीरे धीरे मदिरा के घूंट लेते हुए दोनों को दिलचस्पी के साथ निहार रहे थे। 
आहिस्ता से अपने मुख को अलग करते हुए आरुषा ने अब सुवर्णा की गुदाज छातियों पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया और उनका सत्कार अपने हाथों और मुंह से करना शुरू कर दिया। पूरे पूरे स्तनों को मुंह में भर कर चूसा, कुचाग्रों को जीभ से चाटा चूमा और अंगूर की तरह चूसा। साथ ही दूसरी चूचि को हाथ से सहलाना, भींचना और मसलना भी जारी रक्खा। कुछ समय पश्चात सुवर्णा के मुख से निकलती उफ्फ्फ्फ्फफ्फ् श्ह्ह्ह्ह्ह्ह् की हल्की हल्की सिसकारियों से यह अनुमान लगाना कठिन नहीं रहा की अब वो भी कुछ सक्रिय भूमिका निभाना चाह रही हैं। 
आरुषा ने आसन बदला और सुवर्णा के सिरहाने जा कर घोड़ी बनते हुए अपनी एक चूचि उसके मुंह में में दे दी और खुद भी आगे की ओर झुकते हुए उसकी भी एक कुचाग्र अपने मुंह में ले कर चुभलानी शुरू कर दी। महारानी सुवर्णा भी लाज का कुछ कुछ त्याग करते हुए अपने मुंह में जबरन घुसे आ रहे आरुषा के कुचाग्रों पर अपनी जिव्यहा और अधरों से प्रतिदान दे रही थी। आरुषा बारी बारी से अपने दायीं और बाईं चूचि सुवर्णा के मुंह में घुसेड़ रही थी और स्वयं भी उसकी दोनों मांसल स्तन द्वय का बारी बारी आनंद ले रही थीं। महाराज भी अपने निरंतर तनते जा रहे लिंग को सहलाते हुए दोनों सुंदरियों के मध्य चल रही इस अद्भुत काम क्रीडा का आनंद ले रहे थे। 
इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए आरुषा ऐसे ही कोहनी और घुटनों के सहारे  कुचों से आगे पेट पर चुम्मियाँ लेती हुई सुवर्णा की नाभि पर पहुँचीं और अपनी जीभ से नाभि चोदन करने लगीं। अपनी नाभि में जीभ की अठखेलियाँ महसूस करके सुवर्णा ने ज़ोर की फुरफुरी ली और इधर आरुषा अपने मिशन पर आगे बढ़ते हुए अंतिम गंतव्य की ओर अग्रसर हुईं। किन्तु अंतिम आक्रमण से पहले आस पास के भूगोल का जायजा लेना आवश्यक समझ कर सुवर्णा की कदली स्तम्भ के समान गोरी जंघाओं का अपनी जीभ होंठ और गरम साँसों से निरीक्षण किया और फिर योनि की दरार पर जीभ फेरते हुए काम कनिका पर ध्यान केन्द्रित करा। पहले देर तक अपनी काम प्रवीण जिव्हा से कभी कोमल कभी कठोर घर्षण किया तो कभी अपने होंठोंके बीच दबा दबा कर किशमिश की तरह चूसा।छोटी महारानी की काम प्रवीनता और उस पर इस उल्टे-पुलटे आसन के कारण आँखों के सामने लहराती उनकी पानी टपकाती योनि और कंपकंपाती भगनासिका के दर्शन, महारानी सुवर्णा का अपने ऊपर नियंत्रण खो रहा था।उन्होने जतन से बनाई अपनी धीर गंभीर छवि की चिंता भूल कर आरुषा के मांसल नितंब दबोच कर अपनी ओर खीचे और जीभ योनि के अंदर घुसा दी। सुवर्णा की जिव्हा आरुषा की योनि में ऐसे ही अठखेलियाँ कर रही थी जैसे कुछ देर पहले दोनों की जीभें एक दूसरे के मुंह में करी थी। अपनी योनि का भी सत्कार होते देख आरुषा दोगुने उत्साह से सुवर्णा के गुप्तांगों का स्वाद लेने लगी। अब तो दोनों ही एक बदन दो जान की तर्ज़ पर एक दूसरे को  भींच भींच कर पी रही थीं, चाट रही थीं ,चूस रही थी। पूरा कक्ष आःह्हछ उफ्फ्फ्फ्फफ्फ् श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्आह्हह ह्ह्ह मांम्म्म् उहउ उउउ उफ्फ मर गई! जैसी आवाज़ों से गूंज रहा था। इस समय कोई देखता तो दोनों युवतियों को राजपरिवार की गरिमाशील महारानियों के बजाय कामातुर वैष्याएँ ही समझता। 
अब महाराज के लिए भी खुद पर काबू रख पाना कठिन हो गया , कभी अपने शिश्न को ज़ोर ज़ोर से दबाते, कभी अपने निपल्स को उमेठते। अंत में उन्होने भी कामुक क्रीडा में सम्मिलित होने का निश्चय किया और मदिरा का प्याला एक ओर रख कर उन दोनों के पास आ कर आरुषा की पीठ पर हल्के हल्के चुंबन लेने लगे। बीच बीच में दांतों से हल्के से कचकचा भी देते। महाराज की इन सब हरकतों से आरुषा और उत्तेजित हो कर सुवर्णा की कामकणिका का भुरता बनाने लगी और जवाब में सुवर्णा भी ज़ोर  ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए आरुषा की योनि पर अपनी जिव्हया से प्रहार करने लगीं। 
महाराज की आँखों के हल्के इशारे को समझ कर अब आरुषा सुवर्णा के मुख पर उकड़ू बैठ कर उनको अपने गुदाद्वार के भी दर्शन देने लगीं और साथ ही साथ सुवर्णा के स्तन द्वय को भी दबाने मींजने लगीं।  सुवर्णा भी दोनों हाथों में लड्डू समझ कर छोटी महारानी के दोनों छिद्रों का स्वाद अपनी जीभ और होंठों से लेने में व्यस्त हो गईं। तभी सुवर्णा की दोनों जंघाओं के बीच स्थान ले चुके महाराज ने अपना लन्ड सुवर्णा के योनिद्वार पर रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा। इतनी देर की कामुक हरकतों से पानी की झील बनी हुई बड़ी महारानी की चिकनी योनि में महाराज का लौडा बिना किसी प्रतिरोध के घुसता चला गया। इस अप्रत्याशित आक्रमण से चौंक कर सुवर्णा के मुंह से एक ज़ोर की चीख निकलने को हुई लेकिन तभी आरुषा के अपनी गुदा उनके मुंह पर दाब देने के कारण केवल ऊंहउंह ऊंहउंहऊंहउंहउम्म्म की गुंगुआहट में बदल कर रह गई। अब महाराज ने सुवर्णा की मांसल छातियों से खेलते हुए हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिये। साथ ही साथ अपने चेहरे के सामने  झूलती आरुषा की चूचियों को मुंह में ले कर पीने भी लगे। महाराज काफी समय तक कभी आरुषा तो कभी सुवर्णा के उरोजों से खेलते रहे। दो दो जोड़ी उरोजों को कभी सहलाते तो कभी दबाते, कभी भींचते तो कभी चूचकों  को मुंह में ले कर रसगुल्ले की तरह चूसने लगते। 
अपनी चूचियों पर महाराज के कामकौशल और गुदा और योनि पर अपने ही वश के बाहर हुई बड़ी महारानी की जीभ का आक्रमण, छोटी महारानी की हालत बुरी हो रही थी। कभी अपने दूध जबरन महाराज के मुंह में घुसाने का प्रयास करतीं तो कभी योनि और गुदा सुवर्णा के चेहरे पर रगड़तीं। उधर सुवर्णा का हाल तो और बुरा हो रखा था। अपने मुंह , वक्ष और योनि तीनों पर ही काम बाणों के निरंतर प्रहार से उनकी उत्तेजना लाज और गांभीर्य के सारे बंधन तोड़ने को उतावली थी। 
महाराज के धक्के और योनिमार्ग में किसी घोड़े के समान लंबे और मोटे लंड के  घर्षण के साथ साथ सुवर्णा की छटपटाहट बढ़ती जा रही थी। साथ ही साथ महाराज ने पूरे मनोयोग से सुवर्णा की चूचियों को बारी बारी से किसी भूखे बालक के समान जोर जोर से पीना जारी रखा था। अब आरूशा आलथी पालथी मार कर सुवर्णा का सर अपनी गोद में ले कर बैठ गयी। महाराज ने भी बगलों के नीचे से बाहें ले जा कर सुवर्णा को गहरे आलिंगन में भींचा और उनके मुख और कपोलों पर चुपडा हुआ आरूषा का कामरस चाट चाट कर साफ़ करने लगे। फिर सुवर्णा का  गाल अपने मुंह में रसीले सेब की तरह चूसते हुए अंतिम प्रहार शुरू करा। बड़ी महारानी भी अब महाराज के धक्कों का उत्तर अपने कूल्हे उछाल उछाल कर बराबर से दे रही थीं।उनकी ऊऊ ऊऊई ईई आअई ईईईई उफ्फ्फ फ्फ्फ् की आवाज़ें वातावरण को उन्मादित कर रही थीं। महाराज बारी बारी से उनके दोनो कपोलों ठोड़ी और होंठों को  रसीले फलों की भांति चूसते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा रहे थे। अंत में बड़ी महारानी सुवर्णा एक जोर की आह्हह ह्ह्ह मांम्म्म् उहउ उउउ उफ्फ मर गई!की चीख के साथ स्खलित हो गईं।महाराज स्वयं भी स्खलित हो कर उनके ऊपर निढाल लुढ़क गए।
महाराज सुवर्णा के बगल में लेटे हाँफ रहे थे।कुछ संयत होते ही उनकी दृष्टि स्वयं अपने ही हाथों से अपने कुचों को सहलाती और भगनासिका को मसलती महारानी आरुषा पर पड़ी। महाराज ने बूटे से कद वाली छोटी महारानी को एक गुड़िया की भांति उठा कर अपने वक्ष पर खींच लिया और इतनी देर से उनके द्वारा किए गए सहयोग के प्रतिदान स्वरूप उनके उत्तेजना से लाल मुखारविंद पर चुंबनों की बौछार कर दी। आरुषा अपने वक्ष महाराज के चौड़े सीने पर मसल रही थीं।  चूमा चाटी से जरा सी मुक्ति पाते ही, उन्होंने मुंह झुका कर महाराज के एक चूचक को मुंह में ले कर चूसना शुरू कर दिया।कभी उनके कोमल अधर महाराज के निपल्स को चिड़िया के कोमल पंखों के समान सहलाने लगते तो कभी जीभ एक जोरदार रगड़  मार देती। आरुषा के प्रवीण काम कौशल के चलते महाराज के चूचकों के साथ साथ लौड़े में भी हरकत आने लगी। 
अब आरुषा ने नीचे खिसकते हुए महाराज के शिश्न को धीरे धीरे अपने कोमल अधरों से सहलाना शुरू। पूरी लंबाई तक जीभ से चाटा और सुपाड़े को किसी रसगुल्ले के समान चूसने लगीं। अपने लौड़े को छोटी महारानी की देखभाल में छोड़ कर महाराज  बगल में निढाल पड़ी सुवर्णा को अपनी ओर खींच कर उनके वक्षों को मींजते हुए उनके अधरों का पान करने लगे। यह देख आरुषा ने भी अपनी उँगलियाँ महाराज के वीर्य से अब तक लबालब भरी सुवर्णा की भग गुहा में घुसेड़ दीं और उँगलियों से ही उनका चोदन करने लगी। 
अंत में आरुषा  उचक कर महाराज के फिर से कठोर हो चुके शिश्न पर अपना भगद्वार रख कर  बैठती चली गईं और निरंतर काम क्रीडा से गीली और चिकनी हो चुकी चूत में जड़ तक अंदर जा चुके लंड पर उछल उछल कर घुड़सवारी गाँठने लगीं। सुवर्णा ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर आरुषा की  कामकणिका को मसल मसल कर अभी तक अपनी योनि में चल रही उंगली चोदन की क्रिया का प्रतिदान देते हुए उनकी कामोत्तेजना को पराकाष्ठा पर पहुंचाना शुरू कर दिया। महाराज भी अपने एक मुक्त हाथ से आरुषा की गेंदों के समान उछलती चूचियों से खेलने लगे और फिर उनको भी खींच कर अपनी छाती से लिपटा लिया। अब दोनों महारानियाँ महाराज के दोनों अंकों में आलिंगन बद्ध थीं, सुवर्णा की योनि आरुषा की उँगलियों को निचोड़ रही थी तो आरुषा की योनि महाराज के लंड को, और महाराज, वह तो अपने लंड पर आरुषा की चूत, मुंह में कभी सुवर्णा की तो कभी आरुषा की  जीभ और दोनों की ही चूचियों के स्पर्श सुख में स्वर्ग की सैर कर रहे थे। यह तिकड़ी अपने अपने स्वर्गीय आनंद में लीन एक दूसरे का अंग मर्दन करती फुदक रही थी। ऐसी हालत में तीनों ही कितनी बार स्खलित हुए कोई गिनती नहीं, और अंत में निढाल हो कर निद्रा के आगोश में समा गए। 
अचानक अपने दोनों कंधों पर पर दबाव से परेशान हो कर महाराज ने अपनी बाहें मुक्त करने के लिए करवट बदली, तो "लकी क्या कर रहे हो? अब सोने दो ना" की आवाज़ से चौंक कर अपने आपको अपने पेंटहाउस के मास्टर बेडरूम में अपनी दोनों मानस सुंदरियों के आगोश में पाया। तो यह महाराज, महारानी वगैरह क्या कोई सपना था? दोनों के काम शर से उत्तेजित लेकिन कन्फ़्यूज्ड लूक्सको देख कर मैंने पूछा "क्या तुमने भी कोई सपना देखा है?" उनके चेहरों की रंगत देख कर मैं समझ गया की तीनों का एक कॉमन सपना देखना कोई संयोग नहीं, बल्कि किसी सुदूर दिक्काल  की स्मृति की वापसी है।   

अगर कहानी पसंद आई हो तो कृपया इस फोरम पर और मेरी मेल आईडी  [email protected]  पर मेरा उत्साहवर्धन करें। तभी में अगला भाग भेज पाऊंगा। ?
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11-05-2023, 05:39 PM, (This post was last modified: 11-06-2023, 07:10 AM by Popcorn. Edit Reason: Wrong thread name. )
#2
FFM sex stories Part 2 पिंकू के साथ सेक्स का तूफान
पिंकू के साथ कामक्रीड़ा का तूफान-1
लेखक: उन्मुक्त 
मैं हूँ लकी और यह मेरी दो मानस सुंदरियाँ। एक पिंकू, छरहरा  ऐथेलेटिक  बदन,  बूटा सा करीब पाँच फूट का  कद  , नटखट, आँखों से चंचलता बरसाती ,गोद उठाने मे फूल सी हल्की, फाल्गुन के गुलाल सी लाली लिए हुए गुलाबी रंगत,सेक्स को पूरी शिद्दत के साथ एंजॉय करने वाली, कामक्रीड़ा मे सक्रिय सहभागी,खुल कर खिलखिला कर  उन्मुक्त हंसी बिखेरने वाली , तो दूसरी सोनू, मझोले कद , भरे लेकिन गठे हुए बदन की, थोड़ी शर्मीली सी मुस्कान, पूर्व दिशा से उगते सूर्य की पहली किरण जैसा स्वर्ण वरणीय गोरा रंग, सेक्स को गैर जरूरी विलासिता  मानने वाली, कामक्रीड़ा मे अनमनेपन से सहयोग करने वाली या यों कहें की कुछ कुछ  स्नोबिश, कुछ हद तक फ्रिजिड। पिंकू के बाए होठ के नीचे एक  भूरे रंग का छोटा सा मस्सा और सोनू के बाएँ गाल के बीचों बीच मे सामने की ओर एक काला मस्सा ( मुझे चेहरे पर तिल जितने नापसंद है, खास खास स्पोट्स पर मस्से उतने ही सेक्सी लगते हैं,और इन दोनों के मस्से तो कयामत ही ढाते हैं)। 

सोनू के बोबे गोल गोल दो मखमली गेंदों की तरह,अपने ही भार से कुछ नीचे झुके हुए,  पिंकू की चूचियाँ छोटे अनारो की तरह हार्ड और निपल्स बिलकुल बंदूक की तरह सामने तने हुए।  जहां सेक्स के समय पिंकू एक एनेर्जेटिक  जंगली घोड़ी वही सोनू एक पालतू गाय। पिंकू हुमेशा हॉट पैंट और टाइट टॉप मे एक सेक्स बॉम्ब तो सोनू शालीन लेकिन वेल फिटिंग सलवार सूट  और कभी कभार जीन्स और लूज टॉप मे भी एक सेक्सी लुकिंग  सुंदरी कन्या। एक तीखी हरी मिर्च जो खाते समय मुंह से सी सी निकलवा दे, लेकिन अगले भोजन के समय पिछला तीखापन  भुला जाए और फिर से खाने की इच्छा होने लगे। वहीं दूसरी मीठी खीर। चम्मच भर भर के खाओ लेकिन पेट फुल हो जाने पर भी मन ना भरे और पेट में थोड़ी सी जगह खाली होते ही फिर से टूट पडो। 

तो एक सैटरडे की  शाम  मै सोफ़े पर बैठा हुआ व्हिस्की के हल्के हल्के सिप ले रहा था और पिंकू और सोनू मेरे दोनों पहलुओं मे सटी हुई बैठी थीं। मै बीच बीच मे कपड़ो के ऊपर ही से उनके स्तन, और जांघे सहलाता जा रहा था और अपने ही गिलास से उन  दोनों को व्हिस्की सिप भी करवा रहा था, जिसे पिंकू तो मजे  ले कर लेकिन सोनू आदत के मुताबिक नाक भौ सिकोड़ कर गटक रही थी। मुझे याद पड़ता है की पहली बार तो मैंने  ज़बरदस्ती उसकी नाक दबा के दूसरे हाथ से मुंह खोला था और पिंकू ने पूरा पेग ही वहाँ पर उड़ेल दिया था। अब इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती है। खैर  सोनू की यह अदा भी इतनी  दिलकश लग रही थी, की मैंने बोतल से नीट व्हिस्की का एक गहरा घूंट मुंह में भरते हुए, उसे  अपनी गोद मे खींच लिया और देर तक उसके होंठो को अपने मुंह की शराब से तर करता हुआ संतरे की फांक की तरह चूसता रहा। साथ ही साथ उरोजों  को मींजता रहा। । सोनू ने आदत के मुताबिक न कोई सहयोग किया ना ही प्रतिरोध और चुपचाप लेटी लेटी अपने होठ चुसवाती रही। मैंने तो इसका भी लुत्फ उठाया, और दूसरा फायदा यह हुआ की पिंकू भी मूड मे आ कर मेरे ऊपर लद सी गई। अब मैंने सोनू को उसके हाल पर छोड़ा और पिंकू  को किस करना चालू कर दिया। उसने पूरा सहयोग करते हुए पहले अपने होठ चुसवाए, फिर मुह खोल कर मेरी जीभ को भी अंदर जाने दिया। मैंने उसके पूरे मुंह के अंदर जीभ घुमाते हुए चाटा, उसकी जीभ को जी भर कर चूसा और  जीभ को अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ से उसके मुह की देर तक चुदाई की। फिर यही सब काम उसने अपनी जीभ से मेरे मुंह मे भी करे। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह मे घुसा कर चुसवाई और मेरे होठों को भी चूसा।मैं उसका निचला होंठ चूसता तो वो मेरा  ऊपर वाला होंठ चूसती और जब मैं उसका ऊपर वाला होंठ चुभलाता तो वो मेरा नीचे वाला चुभलाती। अब खेल करते हुए मैंने एक डबल लार्ज नीट पेग बनाया और उसमे जीभ डूबा कर  पिंकू से चुसवाई। फिर पिंकू ने अपनी जीभ व्हिसकी  मे तर कर के  कर सोनू के मुंह मे डाली और घूमा घूमा कर उसके  पूरे मुंह को सराबोर करा। इसी तरह सोनू की भी जीभ जाम मे डलवा कर फिर मैंने उसे चूसा। इस तरह हम देर तक एक दूसरे की नशीली डीप किसिंग करते रहे।जाम के खत्म होने तक तीनों ही सुरूर मे आ चुके थे।   इस दौरान पिंकू की आआहह आहह आअहह! जैसी उत्तेजनापूर्ण  सिसकारियाँ माहौल को और उत्तेजक बनाती रही।
आखिर मैंने सीधे बोतल से एक और बड़ा घूंट भरा और पिंकू के होंठों को किस करते करते उसके मुंह में ड्रॉप बाय ड्रॉप दारू ट्रांसफर करते हुए,उसी पोजिशन में मुंह से मुंह मिलाए मिलाए,गोद में उठा कर बेडरूम मे ले गया।

 बेडरूम मे पहुँच कर मैंने खुद बेड पर बैठ कर पिंकू को सामने खड़ा करके जैसे ही उसके टॉप को हल्का सा झटका दिया, उसके गुलाबी बूब्स एक झटके में चिट्पुटिया बटन्स को खोलते हुए स्प्रिंग बाल्स की तरह  उछल कर बाहर आ गए। मैंने  उसका टॉप उतार फेंका, और उस के दोनों स्तनो को सहलाना शुरू करा, निपल्स को उमेठा, बोबों को मुट्ठी मे भर भर कर ज़ोर ज़ोर से भींचा,आटे की तरह माड़ा, गोल गोल मसलते हुए आपस मे रगड़ा और अपने चेहरे को इनके बीच मे घुसा कर अपने दोनों गालो पर उसकी दोनों चूचियों से मालिश करी। बीच बीच मे उसके नशे और उत्तेजना से गरम और लाल हो चुके दोनों गालों को भी चूमा चाटा और दाँतो से हल्के से काटा। उसके हिप्स को भी दबाना, सहलाना, मसलना साथ ही साथ चल रहा था।  वो भी आआहह आहह आअहह !!! का म्यूजिक देती हुई मेरे निपल्स को चुटकी मे ले ले  कर उमेठ रही थी। । 

बता दूँ की मेरा  बेडरूम पूरी तरह साउंडप्रूफ है  और उसमे जगह जगह आईने लगे हुए है। जिनसे हमे सेक्स की किसी भी पोजीशन मे अपने पार्टनर की और अपनी पीछे की पिक्चर भी दिखती रहती है, और अगर कोई उत्तेजना वश मस्ती मे ऊऊ ऊऊई ईई आअई ईईईई जैसी आवाज़े निकाले तो वो अड़ोस पड़ोस मे सुनाई नहीं पड़तीं। यह बात एग्साईटमेंट को दुगना कर देती है। 
 इसके बाद मैंने पिंकू की हॉट पैंट और चड्डी को भी एक झटके मे उतार दियाऔर खड़े होते हुए उसको दोनों बगलो के बीच मे हाथ डाल कर फर्श से इतना ऊपर उठाया की उसकी दोनों चूंची मेरे मुंह के सामने आ गईं। पिंकू के हल्के वज़न और जिमनास्टिक बॉडी  के कारण इसमे कोई दिक्कत भी नहीं थी। उसे मैं  एक कपड़े की गुड़िया की तरह उठा सकता था।झुका पलटा सकता था। सोनू के भरे गुदाज बदन के कारण  इतनी उठापटक संभव नहीं। मैने अब पूरी नंगी हो चुकी पिंकू की चूचियों का  करीब दस मिनट्स तक जी भर के स्तनपान किया, निपल्स को चाटा, पूरी की पूरी टिट्स को मुह मे भर कर चूसा और अपना चेहरा दोनों के बीच मे डाल कर रगड़ा। वो लंबी लंबी साँसे लेती रही और उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्…………आहह हह… सीहह  जैसे सीत्कार भरती रही, जिससे मेरा मज़ा और बढ़ता रहा। पिंकू ने उत्तेजित हो कर अपनी दोनो  टाँगो को किसी तरह उठा कर मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट लिया। मैंने भी अपनी बाहे उसकी बगलों के नीचे से आगे बढ़ाते हुए उसकी पीठ को कस के जकड़ लिया। अब पोजीशन यह थी की उसके हिप्स के बीच की दरार मेरे पेनिस से रगड़ खाती हुई मालिश कर रही थीं और चूचियाँ मेरे सीने की मालिश कर रही थीं, क्यूंकी उसका पूरा बदन उत्तेजना वश काँप रहा था और वो ऐसे हिल रही थी जैसे कोई चुड़ैल उस पर सवार हो गई हो। इस सब मे उसका चेहरा मेरे मुह के सामने आ गया और मैंने उस चाँद से मुखड़े की पूरी खातिरदारी शुरू कर दी। कभी मै उसके  गालो को चूमता, कभी चाटता, कभी ज़ोर ज़ोर से रसीले फलो की तरह चूसता। मैंने उसके होठो को संतरे की फांक की तरह धीरे धीरे चूसा, ठोड़ी को आम की गुठली की तरह और गालो को तो जब मुंह मे भर कर दाँत गड़ाए तो  ऐसा लगा की मानो कश्मीरी सेब का स्वाद ले रहा हूँ। पिंकू ऊह आह हाय, मर गई ऊहह ऊहह यी  जैसी उत्तेजक आवाज़े निकालती हुई अपनी वेजाईना और क्लिटोरिस को मेरे शरीर से रगड़ रही थी। उसके कामरस ने मेरी त्वचा को काफी कुछ गीला ही कर डाला। मैंने उसकी बॉडी को सपोर्ट देने के लिए अपनी दोनों हथेलियाँ उसके हिप्स के नीचे पोसिशन कर दीं, और उन्हे ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा। 

मैंने पिंकू को धीरे से नीचे उतारा और खुद बेड के किनारे बैठ कर उसको घुटनो के बल ज़मीन पर बैठाया और उसकी   चूचियों को मुट्ठियों मे भर कर भींचते हुए उनसे अपने लण्ड का मसाज करने लगा। अपने लण्ड को दोनों उभारों के बीच मे रख कर रगड़ते हुए उसकी बूब फकिंग करी। जब मेरा सुपाड़ा उसके होठों से टकरा जाता तो वो जीभ निकाल कर उसे चाट लेती। 


यह खेल काफी देर चलता रहा। पिंकू ने खुद भी अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स पकड़ कर मेरे लण्ड पर रगड़े। मेरे सुझाव पर सोनू ने भी उसके पीछे बैठ  कर अपने हाथो से पिंकू के बूब्स पकड़ कर मेरे लौड़े की मालिश करी। 

 थोड़ी देर बाद मैंने पिंकू को उठा कर घुमाया और अपनी गोद मे कुर्सी जैसी पोजीशन मे  बैठा लिया। अब उसकी चिकनी और मुलायम पीठ मेरी ओर थी। मैंने पीछे से हाथ बढ़ा कर उसकी  दोनों चूचियाँ अपनी मुट्ठियों मे ले कर मसलते हुए उसकी गुलाबी पीठ पर धीरे धीरे होंठ छुआते हुए चूमना शुरू करा। कभी जीभ से चाटता तो कभी पूरे प्रैशर से दबा दबा के किस करता, तो कभी दाँतो से निशान बनाता। अब तक उसकी पीठ गुलाबी से लाल हो चुकी थी और उस पर मेरे दांतों के निशानों की चित्रकारी के गहरे गहरे निशान बन चुके थे।

इस बीच मेरे हाथ उसकी चूचियों की पूरी आवभगत मे लगे थे। वो उत्तेजना से काँप रही थी और बेचैनी के साथ एक जल बिन मिछली की तरह उछल रही थी। 
 मैंने कनखियों से सोनू को देखा, तो वो हमेशा की तरह बिना किसी उत्तेजना के इधर उधर ताक रही थी। ज़रा इधर आओ और कुछ काम धंधा भी करो, मैंने हंस कर बोला। मैने उसको पिंकू के सामने खड़ा करके एक झटके मे उसके कुर्ते को उसके बदन से अलग कर दिया और उसकी चूचियाँ ज़ोर से मसलते हुए उसके निपल्स को उमेठने लगा। जब मेरी उंगलियों की मेहनत से वो तन कर खड़े हो गए तो उन्हें पिंकू के मुह मे दे दिया। पिंकू ने सोनू की चूचियों को बिना किसी भूमिका के ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। इससे उसका खुद का उछलना कूदना कुछ कम हुआ और मैं आसानी के साथ उसके बदन से खेलता रहा। पिंकू ने सोनू की चूचियाँ चूसते चूसते ही उसकी सलवार का नाड़ा खोल डाला और सलवार और पैंटी नीचे खिसकाते हुए उसकी बुर से खेलने लगी।  अभी तक मैंने पिंकू के  निचले हिस्से को एक बार भी हाथ नहीं लगाया था, लेकिन वो वहाँ पे इतनी तर थी की अनगिनत बार झर चुकी लग रही थी। 

अब पिंकू उत्तेजना से बुरी तरह काँप रही थी और बार बार मेरे पेनिस को पकड़ना चाह रही थी, लेकिन मैंने उसकी बेकरारी को और बढ़ाने की गरज से ऐसा नहीं करने दिया और फिर से उठा कर बेड पर पटक दिया। अब बारी निचले हिस्से की थी। मैने सोनू को इशारा किया, तो वो पिंकू का सर अपनी गोद मे ले के बैठ गई और उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। मैंने पिंकू की जांघों के बीच मे बैठ कर उनका हल्के हल्के मसाज करना शुरू करा और एक लंबे समय तक उसके दोनों छेदों के बीच की जगह की अंगूठे से मालिश करता रहा। और धीरे धीरे उसके वेजाईना के होंठो को खोलता बंद करता रहा। इस बीच वो लंबी लंबी साँसे लेती रही।काफी देर बाद मैंने  उसकी क्लिटोरिस को हल्के से मसला। वो और उत्तेजित हुई। फिर मैंने क्लिटोरिस को मसाज  करना और चुटकी मे लेकर मसलना शुरू करा। उसकी पूरी बॉडी उत्तेजना से काँप रही थी, मुंह से ऊऊ ऊऊई ईई आअई ईईईई उफ्फ्फ फ्फ्फ् जैसी आवाज़े निकल रही थी,ऐसा लग रहा था की जैसे बिस्तर पर किसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर डाल दिया गया हो।भला हो सोनू का की उसने पिंकू के हाथ पकड़े हुए थे और सर को अपनी गोद मे दबा रखा  था। और नीचे मै उसके पैरो के बीच मे बैठ कर उन्हे दबाये हुए था। काफी देर तक क्लिटोरिस से खेलने के बाद मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत मे घुसेड़ ही दी। उसे कुछ राहत मिली। मैंने धीरे धीरे वैजाइना के अंदर मसाज शुरू करा। काफी देर तक धेर्यपूर्वक मसाज करते रहने के बाद उसका जी स्पॉट मिल ही गया। जैसे ही मैंने जी- स्पॉट छूआ , पिंकू को तो माने जूड़ी चढ़ गई हो। वो ज़ोर ज़ोर से उईईईईईई मर गई !गर्रर उईईईईईए ! जैसी आवाज़े निकालते हुए तड़पने लगी। मेरे इशारे पर सोनू ने जल्दी से उसके होंठो को अपने होंठो मे दबा कर चूसने शुरू कर दिया और पिंकू की चीखें केवल धीमी धीमी ऊंहह … गूं … गूं … अम्म … ऊम्म … गूँ गूँ गूँ गूँ गूँ... मे तब्दील हो कर रह गई। उसकी चूत  से तो मानो कामरस के फव्वारे छूट रहे थे।  
अब मैंने पिंकू के पेट को चूमना और चाटना शुरू करा। बीच बीच मे कही पर चूसा तो कहीं पर दाँत गड़ाए। उसकी नाभि मे जीभ की नोक से देर तक मालिश करी और नाभि को मुह मे भर कर ज़ोर ज़ोर से चूसा। नीचे बढ़ते हुए, उसकी  क्लिटोरिस को चाटना और चूमना चालू करा और मुह मे भर कर ज़ोर ज़ोर से चूसा, और दांतों से हल्के से कचकचा भी दिया। । उसकी चूत तो जैसे परनाले का रूप ले चुकी थी। कामरस एक बहती धार की तरह बाहर आ रहा था। आखिर मे मैंने उसकी  चूत की फाँकों को अपनी उँगलियों से फैलाते हुए,अपनी जीभ उसमे घुसेड़ दी, और चारो तरफ घूमाना चालू करा। इस बार जी-स्पॉट ढूँढने मे भी ज्यादा परेशानी नहीं हुई। पिंकू का तो हाल इतना बुरा हो गया की उसकी  उईईईईईई मर गई !गर्रर उईईईईईए !की चीख़ों ने कमरा गुंजा दिया। अब सोनू के लिए उसको काबू मे रखना संभव नहीं रहा। लेकिन मैंने उसके हिप्स को कसके पकड़े रखा और अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। उधर सोनू की पकड़  छूटते ही पिंकू आधी उठ कर अपने हाथों से मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर ज़ोर से दबाने और रगड़ने लगी। थोड़ी देर बाद पिंकू की चूत को चाट चाट कर सुखाने के बाद जब मैंने सर उठाया तो देखा तो पाया की इस सब तमाशे से प्रभावित हो कर सोनू भी थोड़ी थोड़ी उत्तेजित होरही है और एक हाथ से अपनी चूत  हल्के हल्के सहला रही है तो दूसरे से निपल्स उमेठ रही है। मुझसे नजरे मिलते ही वो सकपका गई और जल्दी से अपने हाथ सामान्य मुद्रा मे ले आई। मै केवल मुस्कुरा दिया। सोनू भी अब लाइन पर आ रही थी। 
फिर मैंने पिंकू को पलट कर लिटाया और उसकी टांगों पर बैठते हुए उसके चूतड़ो को मसलना शुरू कर दिया। दोनों चूतड़ो को बिलकुल चूचियों की तरह ही बुरी तरह मसला, सहलाया, आटे की तरह मींजा, आपस मे रगड़ा और फिर मुंह से चूमा,चाटा, चूसा और दाँत भी गड़ाए। मेरी उँगलियाँ उसकी चूत और गांड़ की बकायदा चुदाई कर रही थी। मैंने अपना ध्यान उसके चूतड़ो से ऊपर बढ़ते हुए उसकी माँसल पीठ पर केन्द्रित किया, जहा पर थोड़ी देर पहले की मेरे दाँतो की चित्रकारी अपने जलवा दिखा रही थी। मैंने फिर से अपनी पेंटिंग को अपने दाँतो और जीभ की तूलिका से और सजाना शुरू करा और साथ ही साथ अपने थूक के रंग भरने लगा। साथ ही मैंने अपने हाथ उसकी देह से नीचे ले जा कर उसके बूब्स को मसलना भी चालू रखा। और ऊपर का सफर तय करते हुए मैंने सोनू की गोद मे रखे  पिंकू के गुलाबी कपोलों के साइड पोज़ पर धावा बोला और दोनों गालों पर बारी बारी से चूसने कचकचाने  और चूमने का आनंद लेने लगा। मैंने उसके दोनों कानो को भी नज़रअंदाज़ नहीं करा। उसके कानो की लवों को चूसा, पूरे पूरे कानो को चाटा और कानो के छेदो मे जीभ डाल कर फड़फड़ाई और गोल गोल घुमायी, यानि कानो की भी चुदाई करी । पिंकू तो एकदम नागिन की तरह बल खा रही थी, और अपना सर सोनू की गोद मे होने का फाइदा उठाते हुए उसकी चूत को चाटने की कोशिश कर रही थी। आSSहाSS..आहा...उSSS ऊहूSSSSहू...  पिंकू की सिसकारियों से कमरा गूंज रहा था। 
क्रमशः
पिंकू के साथ कामक्रीड़ा का तूफान-2
लेखक: उन्मुक्त 
अब तक पिंकू के साथ कामक्रीड़ा का तूफान-1 में आपने पढ़ा कि पिंकू और सोनू के साथ नशीली किसिंग और स्मूचिंग करने के बाद मैं पिंकू को गोद मे उठा कर बेडरूम मे ले गया और फोरे प्ले करने लगा। अब आगे...
यहाँ यह बता दूँ की मैं शारीरिक सफाई के बारे मे बहुत गंभीर हूँ। किसी भी सेक्स सेशन से पहले हम तीनों टूथ ब्रुश, माउथ वाश से कुल्ला करते  है,फिर एकट्ठा शावर लेते है और एक दूसरे की  अपनी तसल्ली से शैमपू, फ़ेस वाश,वैजाइनल वाश, बॉडी जेल से सफाई करते है। खास तौर पर मैं  उन दोनों की चूत, गांड, नाभि और कान अपने हिसाब से साबुन से अच्छी तरह रगड़ता हूँ, और वो दोनों भी एक दूसरे को ऐसे ही साफ करती हैं। फिर वो दोनों बारी बारी से मेरे लण्ड , टट्टों, नाभि और कानों की सफाई अपने हाथों से करती है। वीट वगैरह से बालो की सफाई भी हम लोग एक दूसरे की करते हैं। आखिर जिसको चाटना, चूसना है, उसको तसल्ली होनी ही  चाहिए। यह एक तरह से फुल फोर प्ले सेशन हो जाता है और मूड सेटर का काम करता है। 
खैर अब पिंकू अपनी मरवाने के लिए पूरी तरह तैयार और बेताब  थी और मै भी बाहर ही डिसचार्ज होने के खतरे मे आ गया था। मैने अब पिंकू की बगल मे लेटते हुए उसे अपने ऊपर खींचा। वो तो पहले से ही बेकरार थी। तेजी से उठी और मेरे सख्त तने हुए लौड़े पर अपनी चूत की फाँकों को सटा कर तेज धक्का मारा। मेरा लौंडा  खचाक की आवाज़ के साथ अंदर धँसता चला गया। मुझे भी कुछ शांति मिली। अब उसने अपने चूतड़ो को हिलाते हुए ऊपर नीचे उठना बैठना शुरू करा। उसके उरोज, जो मेरे हाथो और मुंह की कृपा से लाल हो चुके थे ,और निपल्स जो लगातार उमेठे जाने से तन चुके थे, दो गुब्बारों की तरह ज़ोर ज़ोर से फुदक रहे थे। करीब पाँच मिनट के बाद मैंने उसके स्तनो से फिर से खेलना शुरू करा।

 पिंकू ने भी आगे की ओर झुकते हुए अपनी चूचियों को मेरे होंठो से छूआना शुरू करा। वो मुझे चिढ़ाते हुए निपल्स को मेरे होंठो से टच करती और जैसे ही मैं मुंह खोलता , दूर हो जाती। मेरी आँखों के सामने झूलती हुई दो दो गुलाबी गेंदें मुझे मदहोश कर रही थीं। आखिर मैंने उसके दोनों बूब्स को अपनी मुट्ठी मे ले कर भींचते हुए उसके दोनों निपल्स एकट्ठा ही अपने मुह मे भर लिए और उनका रसास्वादन करने लगा, और नीचे से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। पिंकू के मुंह से ऊऊ ऊऊई ईई आअई ईईईई उफ्फ्फ फ्फ्फ् जैसी अजीब अजीब आवाज़े निकाल रही थी, जो की माहौल को और उत्तेजक बना रही थी। सच पूछो तो उसकी इसी अदा पर तो मै कुर्बान था। मैंने उसकी चूचियो को छोड़ा और उसके गालो को चूमते हुए प्यार करने लगा। 

अब मैं पिंकू के अंदर लण्ड डाले ही डाले उठ कर आलथी पालथी मार  कर बैठ गया और उसको लोटस पोजीशन मे पेलने लगा। पिंकू भी अपनी दोनों टाँगे मेरी कमर मे और बाहें गले मे लपेट कर मुझसे एक पेड़ के साथ बेल की तरह लिपट गई।उसको कस कर आलिंगन मे भींचते हुए मैंने उसकी गरदन और कंधों को चूमना और चूसना शुरू करा और उसकी चूचियो के  मेरे सीने के साथ घर्षण का आनंद लेने लगा।थोड़ी देर बाद मैने अपने हाथ उसके चूतड़ो पर लगाए और फिर अपनी एक उंगली उसकी गांड मे घुसा दी। वो ज़ोर से चिहुंकी लेकिन मेरे लण्ड पर अपना उठना बैठना जारी रखा।थोड़ी देर तक ऐसे ही चोदने के बाद, मैंने अपनी पकड़ ढीली करी और बिना डिस्कनेक्ट हुए उसको थोड़ा पीछे धकेल के उसके हाथो पर टिका दिया। अब उसकी क्लिटोरिस भी मेरी पहुँच मे आ गई। मैंने मौके का फाइदा उठाते हुए फिर से उसके साथ खेलना शुरू कर दिया। बार बार चुटकी मे भर कर उमेठा, उंगली से रगड़ा और गोल गोल घुमाया। साथ साथ अपने दूसरे  हाथ की उंगली उसकी गांड मे आगे पीछे करता रहा।   पिंकू के मुंह से लगातार सीतकारें निकल रही थीं उईईए मम्मी  उफ्फ्फ सीईई !और वो तेजी के साथ उछल उछल कर धक्के मार रही थी। इस बीच सोनू को कुछ और इनवॉल्व करने के इरादे से मैंने उसे पिंकू के पीछे बैठ  कर उसे सपोर्ट करने के लिए बोला। सोनू ने  पिंकू के पीछे बैठ कर उसका सर अपनी छातियों पर टिका लिया और उसके बूब्स से खेलने लगी। पिंकू के हाथ भी फ्री हो कर कुछ रिलैक्स हो गए और वो उनकी माला बनाकर सोनू के गले मे झूल सी गई और अपने पीछे से उसका सर अपने ऊपर खींच कर उसके होठों का रस पीने लगी। 
मैं अब फिर से चित लेट गया और पिंकू को चूंचीयां पकड़ कर ज़ोर से अपनी ओर खींचा। वो मेरे सीने पर गिर पड़ी और उसकी चूचियाँ एक थपाक की आवाज़ के साथ आ कर मेरे सीने से टकराईं। मैंने उसको बॉडी टु बॉडी पूरी लंबाई मे अपने ऊपर लिटा लिया और उसकी पीठ और कंधो की मसाज करने लगा। पिंकू का मुह मेरे सीने पर था , उसने मेरे एक निपल को धीरे धीरे चाटना शुरू कर दिया। फिर अपने होंठो से हल्की हल्की मसाज करी और काफी देर तक ऐसा करने के बाद मुह मे ले कर गोल गोल घुमाते हुए पहले हल्के हल्के और फिर तेजी के साथ चूसने लगी। अब आहअह आः निकालने की बारी मेरी थी। मैंने उसका सर पकड़ कर दूसरे निपल पर रखा तो वो भूखी शेरनी की तरह उस पर भी टूट पड़ी। एक दो बार तो उसने उत्तेजित हो कर मेरे सीने पर ज़ोर से काट भी लिया। मैं  तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था। काफी देर तक वो बारी बारी मेरे दोनों निपल्स की सेवा करती रही। उसकी निपल्स चूसने की कला के आगे मैं तो बिलकुल नौसिखिया ही महसूस कर रहा था। मेरा लाउडा और फनफनाने लगा। इस सब से उसे भी उत्तेजना आ रही थी, और वो मेरे शरीर पर स्लाइड करती हुई आगे पीछे हिलने लगी, जैसे बॉडी टु बॉडी मसाज दे रही हो। साथ ही साथ अपनी टांगें क्रॉस कर कर के वो मेरे लड को निचोड़े जा रही थी। मैं उसके चूतड़ो को दोनों हाथो से बुरी तरह मसलते हुए उसकी चूत को और टाइट करने की कोशिश कर रहा था। पिंकू जल्दी निकालो जलदी निकालो चिल्ला रही थी। उसके होठो पर एक भरपूर चुंबन देते हुए मैंने उसके कानो मे सरगोशी की – तसल्ली रखो जानेमन, सितारों के आगे जहां और भी हैं.........

मिशनरी पोसिशन मेरी पसंदीदा पोजीशन रही है और मैं अक्सर अपने सेशन का समापन इसी पोजीशन से करता हूँ। इसलिए मैंने अपना लंड उसकी चूत  मे घुसाए घुसाए ही  एक पलटी मारी और उसको पीठ के बल नीचे लिटाते हुए उसके ऊपर आ गया। मैंने उसके नीचे से हाथ लिपटाते हुए उसका ज़ोर से भींचते हुए आलिंगन किया और होठों को चूसते हुए फ़ाइनल अटैक शुरू कर दिया। मैंने उसके गालो के ज़ोर ज़ोर से पुच्च पुच्च की आवाज़ करते हुए अनगिनत चुम्मियाँ लीं और फिर बारी बारी से कभी दायें तो कभी बाएँ गाल तो कभी ठोड़ी को पीते हुए लगातार धक्के मारने शुरू करे। बीच बीच मे गालो को हल्के से कचकचा भी देता। पिंकू ने अपने दोनों बाहों  और टांगों से मेरी गरदन  और कमर को  बुरी तरह जकड़ रखा था और वो उत्तेजना मे आआहह आहह आअहह ! ओह्ह्ह अह्ह्हह्हउईईईईईई माँ...उईईईईईए ! जैसी आवाज़े निकालते हुए धक्के मार रही थी और मेरी पीठ पर अपने लंबे लंबे नाखूनो से चित्रकारी कर रही थी। 
मैंने अपनी टांगें उसके दोनों तरफ फैलाते हुए उसकी टागें अंदर आने दीं। अब उसको अपनी चूत से मेरे लण्ड को दबाने मे आसानी हुई। उसकी चूत तेजी के साथ फूलते  और सिकुड़ते हुए मेरे लौड़े को निचोड़ रही थी। बिलकुल ऐसा लग रहा था जैसे की वो अपने मुंह के होठो से मेरे लौड़े को चूस रही हो। उसकी क्लिटोरिस भी अपनी एक अलग ही अदा से फुरफुरी ले रही थी।  
आखिर एक ज्वालामुखी की तरह मेरा लावा उबल उबल कर निकलने लगा  और उसकी चूत भी फव्वारे छोड़ती हुई हम दोनों के जुसेस से लबालब हो गई।उसने मेरे से कस कर लिपटते हुए मेरे कंधे पर अपने दाँत गड़ा दिये।  एकसाथ ओरगस्म पर पहुँच कर हम दोनों निढाल हो कर उसी पोजीशन मे नीम बेहोशी  के आगोश मे खो गए।
करीब पंद्रह मिनट्स  बाद मेरा वज़न अपने ऊपर महसूस करके पिंकू कसमसाई तो  मेरी आँख खुली। उसका चेहरा बिलकुल बेड के किनारे पहुंचा हुआ था। मैंने धीरे से अपने वीर्य और उसके चूत के पानी, दोनों से सना, ढीला पड़ा लौडा उसकी चूत से निकाला और सिरहाने की तरफ जा कर उसके गालो पर धीरे धीरे छूआने लगा। उसने हल्का सा मुंह खोला तो मैंने लगे हाथों अपना लण्ड उसके मुंह मे प्रवेश करा दिया। वो उसी नीम बेहोशी  की हालत मे रीफ्लैक्स एक्शन से उसे धीरे धीरे चूसने लगी। उस समय पिंकू बिलकुल बोतल से दूध पीते बच्चे की तरह मासूम लग रही थी। लेकिन उसके  मुंह का स्पर्श और उसकी नर्म चुसायी से मेरे लौड़े मे फिर से हरकत आने लगी और वो सख्त होते हुए तनने लगा। अब पिंकू शायद सोने की एक्टिंग ही करते हुए उसको पूरी एक्सपरटीज़ के साथ चूसने चाटने लगी। कभी अगले सुपाड़े को लेमन जूस की तरह चूसती तो कभी उसको जड़ से ले कर पूरी लंबाई तक आइसक्रीम की तरह  जीभ से चाटती, कभी बिलकुल हलक तक ले कर ज़ोर ज़ोर से दबाती। एक बार तो मैंने बाहर निकालने की कोशिश भी करी, लेकिन उसने अपने मुंह की पकड़ ढीली नहीं होने दी, बल्कि अपने हाथ से भी कस कर पकड़ लिया। अब उसने मेरी बाल्स को सहलाते हुए मेरे लौड़े को अच्छी तरह चूसा और मुझे दोबारा झड़ने पर मजबूर कर दिया। वो मेरा पूरा वीर्य पी गई और चाट चाट कर मेरे लौड़े को साफ भी किया। 

मैंने घड़ी देखी  तो रात के नौ बज रहे थे। मतलब हमारा यह धमाकेदार सेशन पूरे तीन घंटे चला था।  मैं गाउन पहन कर किचन मे गया और तीन बड़े बड़े लस्सी के गिलास भर कर अनार का जूस निकाल कर उसमे वोड्का के डबल शॉट्स मिला कर ले आया। सेक्स सेशन के दौरान पेट हल्का ही रहना चाहिए, नहीं तो पेट के दबने से एसिडिटी और डकारे वगैरा आती हैं और नींद भी आती है। हमने जूस के साथ रोस्टेड ड्राइ फ्रूट्स टूँगते हुए अभी के विडियो का आनंद लेना शुरू कर दिया जो की मैं हमेशा बनाता हूँ। मैंने पूरे घर मे इसी परपस से अलग अलग एंगल्स से औडियो विजुअल रिकॉर्डिंग वाले हाइ डेफ़िनिशन केमरे फिट कराये हुए हैं।अभी हम सभी ने गाउन पहन लिए थे, क्यूंकी मेरा मानना है की लगातार एक दूसरे को नंगा देखते रहने से चार्म फीका पड़ जाता है। हाँ पिंकू और सोनू की नाइटीज़ काफी सेक्सी टाइप की थीं जो की मुझे और बेताब कर रही थीं।  मैंने मूवी के दौरान गौर किया था की सोनू बार बार कभी अपनी चूची तो कभी क्लिटोरिस छू रही थी लेकिन अपनी आदत के मुताबिक ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी। यह मूवी खतम होते होते रात के 12 बज गए थे, लेकिन हमारे लिए तो रात अभी जवान थी। अब सोनू की झिझक पूरी तरह खत्म करने का प्रोजेक्ट था। मैंने पिंकू को अलग लेजा कर उसके कानो में आगे का प्लान समझाया। 
क्रमशः

कहानी पसंद आई हो तो कृपया इस फोरम पर और मेरी मेल आईडी  [email protected]  पर मेरा उत्साहवर्धन करें। तभी में अगला भाग भेज पाऊंगा। ?
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11-06-2023, 11:55 PM, (This post was last modified: 11-06-2023, 11:59 PM by Popcorn. Edit Reason: Incomplete )
#3
FFM sex series Part 3 सोनू का कायाकल्प
अगला भाग फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प ( राइट ऑफ पैसेज)-1 
मेरी पिछली कहानी अल्हड़ लड़की  के साथ कामक्रीड़ा का तूफान भाग 1 और 2 में आपने पढ़ा की कैसे दारू के सुरूर मैने और पिंकू ने तूफानी सेक्स का आनंद लिया, लेकिन शर्मीली सोनू ने अनमनेपन से नाम मात्र का ही साथ दिया। इसलिए मैने पिंकू के साथ मिल कर सोनू की झिझक मिटाने का प्लान बनाया। अब आगे..
हम लोग अब सोने के नाम से, क्यूंकी सबको पता था कि असली परपस तो कुछ और ही है, बेडरूम मे आ गए। मेरा बेड 9'X 9’ का बहुत ही मजबूत बना हुआ है, इतना की उसपर तीन लोग कुश्ती करें तो भी चूँ की आवाज़ ना निकले। सिरहाना बिल्कुल एक गद्देदार सोफे की शक्ल में है, जैसे किसी 9'लंबाई के सोफे की सीट को आगे की तरफ 9 फुट बढ़ा दिया गया हो।उसपे सभी शेप्स और साइजेज़ के बहुत सारे रंग बिरंगे कुशन्स और तकिये रखे हुए हैं। तीनों लोग पूरी तरह निर्वस्त्र अवस्था में अपनी अपनी स्टैंडर्ड पोजीशन, मैं बीच मे और पिंकू और सोनू क्रमशः मेरे दायें बाएँ पहलूओं में, सोने की कोशिश करने लगे।  मैंने सोनू की गुदाज छातियों पर हाथ फेरते हुए फुसफुसा कर कहा –तो फिर बजवाने के लिए तैयार हो न मेरी जान? वो तो पहले ही समझ रही थी कि पिंकू के बाद अब उसकी ही चुदाई का नंबर लगेगा। लेकिन उसके लिए तो मरवाने का मतलब बस टांगें फैला कर लेट जाना और दूसरे को ही जो वो चाहे करने देना होता है। अपनी आदत के मुताबिक उसने एक झीनी सी औपचारिक मुस्कान दे कर सहमति मे सर हिला दिया। उसे क्या मालूम की आज का नज़ारा कुछ और ही होने वाला है। ठीक है, मैं ज़रा वाशरूम हो कर आता हूँ , मैंने पिंकू को आँख मारते हुए बोला और उठ कर बाथरूम चला गया।
 इधर प्लानिंग के मुताबिक, मेरे जाते ही पिंकू लाड़ दुलार की एक्टिंग करते हुए सोनू से लिपट गई, और उसे अपने आगोश मे ले लिया, या उसकी  छोटी सी देह को देखते हुए यूं कहे की खुद उसके आगोश मे समा गई। बड़ी चालाकी के साथ पिंकू ने सोनू की दायीं बांह अपने नीचे दबा ली और उसके कंधे पर सर रख कर सोने की एक्टिंग करने लगी। तभी मैं बाथरूम से आया और सोनू के पिंकू की ओर करवट लेने से खाली हुई जगह पर सोनू की बायीं साइड मे लेट गया। मैंने झूठमूठ बुरा मानने की एक्टिंग करते हुए, सोनू की बाई बांह अपने नीचे दबाई और उसके आगोश मे समा गया। अब सोनू की दोनों बाहे हमारे नीचे  दब कर पूरी तरह इम्मोबिलाइज्ड (स्थिर) हो चुकी थी। लेकिन सोनू अभी भी इसे नॉर्मल ही ले रही थी। फिर मैंने अपने बाईं टांग घुटनो से मोड़ते हुए सोनू की बायीं टांग मे हुक की तरह फंसा ली। पिंकू ने भी अपनी दायीं टांग से  ऐसा ही किया। अब सोनू की दोनों टांगें भी इम्मोबिलाइज्ड (स्थिर) हो चुकी थी।उसका सर से लेकर जांघों तक का बदन पूरी तरह एक्स्पोज़ड था। यह एक तरह से विदेशी ब्लू फिल्मों मे दिखायी जाने वाली स्प्रेड ईगल पोजीशन ही थी।वो लोग इसमे मखमली लाइनिंग लगी हथकड़ी और बेड़ी यूज़ करते है।कहते है की ऐसी बेबसी जैसी हालत मे लड़की का एक्सायटमेन्ट दस गुना बढ़ जाता है। लेकिन ऐसे सेक्स ट्वाएज़ इंडिया मे बैन हैं, और मैं गैरकानूनी कामों मे विश्वास नहीं रखता। 

अब सोनू चौंकती हुई बोली- अरे अरे यह तुम लोग क्या साजिश कर रहे हो? देखती जाओ मेरी जान!तुम्हें जन्नत की सैर पे ले चल रहे हैं! मैं उसके गालो को चिकोटी से मसलते हुए बोला। सोनू तो अब फंस ही चुकी थी और जानती थी की अब हम लोग रुकने वाले नहीं थे, इसलिए मुंह फुला कर चुपचाप लेटी रही।  हम देर तक उसकी चूचियों से खेलते रहे। मैंने और पिंकू ने एक एक चूची  आपस मे बाँट ली और उन्हे  निचोड़ना, सहलाना और मींजना शुरू कर दिया। कभी कभी उसके निपल्स को भी उमेठने लगते। कभी अपनी बाहों को कुछ लंबा करके उसकी नाभि की भी मालिश करने लगते। एक साथ एक जनाने और एक मरदाने हाथ का स्पर्श सोनू के लिए एक अलग ही अनभव रहा होगा।  काफी रोकने की कोशिश के बाद भी कभी सोनू के मुंह से हल्की सी ऊह आह निकल जाती तो वो एक झेंपती हुई सी मुस्कान दे देती। 
काफी देर तक उसकी चूचियों और अपनी हथेलियों को स्पर्श सुख देने के बाद, अब हमने सोनू के चेहरे पर ध्यान केन्द्रित किया। हम दोनों ने  ही सोनू के अपनी अपनी साइड के कानो की सेवा शुरू करी। उसकी इयर लोब्स  को चूसा, पूरे कान को चाटा, सामने की घुंडी की क्लिट की तरह ही अपनी जबान से मालिश करी और ईअर केनाल को जीभ से चोदा। पिंकू अभी अभी अपने कान मे यह सब मुझसे  करवा चुकी थी, इसलिए पूरी निपुणता के साथ इस काम मे लगी थी। अपनी बेबसी के चलते, सोनू काफी उत्तेजित हो रही होगी, लेकिन शायद अपनी जिद मे ज्यादा शो नहीं कर रही थी। खैर अब हमने उसके गालों पर धावा बोला और अपने अपने हिस्से के गालों को चाटना चूसना और दांतों से काटना शुरू करा। कभी कभी दाँत ज़ोर से लग जाते तो सोनू चिहुँक पड़ती। तब हम धीरे धीरे उसके गालों को चूस चाट कर उसको मानो तसल्ली देते।उसका काले मस्से वाला गाल मेरी साइड पर ही था , जिसे देख देख कर मैं पागल हुआ जा रहा था। मैंने उसके मस्से के अनगिनत चुंबन लिए और अपनी जीभ रगड़ी।  पिंकू बिलकुल एक प्रोफेशनल की तरह मेरे इन्स्ट्रक्शंस को फॉलो कर रही थीऔर अच्छी शागिर्द की तरह सब सीख रही थी। इस बात पर उसको इनाम के तौर पर  मैं कभी कभी उसके होंठो पर चुंबन दे देता। फिर हमने सोनू के होंठों को चूमना और चूसना शुरू करा। पिंकू चूस कर हटती तो मैं  चूमने  लगता।या फिर कभी एक साथ ही पिंकू ऊपर का और मैं नीचे का होंठ चूसने लगते। एक साथ दो जीभों, दो  जोड़ी होंठों और दो ही जोड़ी दांतों को अपने शरीर पर महसूस करना एक अलग ही आउट ऑफ दिस वर्ल्ड अनुभव रहा होगा। हम दोनों ने अपनी जीभें एक साथ उसके मुंह मे घुसेड़ कर डीप किसिंग का थ्रीसम भी किया। फिर बारी बारी से पहले पिंकू के मुंह मे सोनू और मैंने अपनी जवाने डाल कर यही काम किया, और फिर मेरे मुंह मे उन दोनो ने अपनी अपनी जीभ डाली तो मैं दोनों की जीभों को  एक साथ ज़ोर ज़ोर से चूसता रहा। उम्मीद के मूताबिक ही  सोनू की इस काम मे अधिक दिलचस्पी ना देख, मैंने एक गेम सजेस्ट करा। जिसमे हम तीनों ने ही अपने अधखुले होंठ एक दूसरे के साथ मिलते हुए एक त्रिकोण सा बना लिया और एक दूसरे के मुंह मे अपनी जीभे घुसाने की कोशिश करने लगे। जिसके मुह मे दोनों जीभे घुस जाएंगी उसको -1 और जिनकी घुसी होंगी उन् दोनों को ही  +2, +2  पॉइंट मिलेंगे।। ऐसे दस राउंड के बाद सबसे कम स्कोर वाला हारा माना जाएगा और उसे बाकी दोनों जो सजा देंगे वो मंजूर करनी पड़ेगी। हार के डर से सोनू ने भी बहुत तेजी के साथ अपनी जीभ अंदर बाहर करते हुए हमारे मुंह मे घुसाने की कोशिश शुरू कर दी। हम तो खैर पहले से ही ऐसा कर रहे थे। इससे कार्यक्रम मे एक जान आ गई। आखिर पूरी कोशिश के बाद भी सोनू हार ही गई। पिंकू की एनेर्जी और फुर्ती  का कोई सानी नहीं है। मैंने पिंकू के मुंह को भरपूर चूमते हुए बधाई दी और सोनु के होंठों को चूसते हुए सांत्वना। इस गेम का नाम मैंने “टंग ऑफ वार” रखा। 

फिर मैंने और पिंकू ने सोनू के गले और कंधों के चुंबन लेते हुए उसकी चूचियों की तरफ बढ्ना शुरू करा। इससे सोनू के हाथ हमारे नीचे से छुटकारा पा  गए लेकिन मैंने और पिंकू ने भी अपनी उँगलियाँ सोनू की उँगलियों मे पिरो ली। अब हमने उसकी चूचियों का भी बंटवारा कर लिया और अपने अपने हिस्से की चूची की सेवा शुरू करी। पहले पूरे स्तन पर हल्की हल्की चुम्मियां लीं, फिर जीभ घुमाते हुए उन्हें  चाटा और फिर आखिरकार निपल्स को जीभ की नोक से छेड़ छेड़ कर खड़े करने के बाद मुंह में ले कर चूसने लगे। हम दोनों ही कभी निपल्स को चूसते तो कभी पूरे बोबे को मुंह मे भर भर कर सक्शन पम्प की तरह सक,ब्लो और पम्प करते। सोनू की हमारे हाथों मे पिरोयी हुई उँगलियाँ उसकी उत्तेजना के बैरोमीटर का काम कर रही थीं। कभी वो हमारी उँगलियों को कस कर जकड़ लेतीं तो कभी ढीली पड़ जातीं। दोनों चूचियों पर एक साथ दो दो जीभों और दो दो जोड़ी होंठों का अनुभव उसके लिए पागल कर देने वाला था।उसके मुंह से दबी दबी  उईईए….उफ्फ्फ….सीईई… जैसी आवाजें निकल रही थीं। !
 देर तक उसके स्तनो को चूसने चाटने और दांतों से काटने के बाद मैंने अपने और पिंकू के लिए एक और गेम डिजाइन करा। इसमे हमें अपनी आँखों पर आइ शेड चढ़ा कर सोनू के पेट पर लगातार रैनडम ब्लाईंड  पुचचियाँ  लेनी थी और जिसका भी मुंह उसकी नाभि पर पड़ता उसको नाभि को अपने हिसाब से दो मिनट तक  चाटना और चूसना होता था।सोनू को इस काम मे कितना  मजा आ रहा है यह तो उसकी उँगलियों का बैरोमीटर हमे बता ही रहा था।  इसका जज हमने  सोनू को ही बनाया। इस गेम मे मैंने बाजी मार ली। दस राउंड मे आठ मे मेरा ब्लाइंड निशाना सही बैठा था। सजा मैंने सोच रखी थी लेकिन चुप रहा। अब तक सोनू के मुंह से धीमी धीमी सिसकारियाँ निकलने लगी थीं –बर्फ पिघलना शुरू हो रही थी। 
अब हमने और नीचे का सफर तय करते हुए, सोनू की चूत  का रुख किया। मैंने क्लिटोरिस को चुटकी मे भर कर मसलना और कुचलना शुरू करा तो पिंकू ने उसकी चूत  के लिप्स सहलाने शुरू करे। करीब पाँच मिनट तक ऐसे ही करने के बाद मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत मे डाल कर मालिश शुरू करी। उसका जी स्पॉट मिल ही नहीं रहा था। उसी समय पिंकू ने अपनी उँगलियों पर ढेर सारा थूक लगए कर उन्हे सोनू की गांड़ मे घुसा दिया। अब दोनों छेदों मे एक साथ घर्षण से सोनू काफी उत्तेजित हो रही थी और अपने होंठो को टाइटली बंद करे रहने के बावजूद, आःह्हछ उफ्फ्फ्फ्फफ्फ् श्ह्ह्ह्ह्ह्ह् जैसी आवाज़ों को निकलने से नहीं रोक पा रही थी। मुझे अपनी ओर देखते पा कर उसने एक एम्बरेस्ड सी गिगिल पास करी, लेकिन अभी भी अपने मुंह से खुल कर सेक्स की इच्छा नहीं जताई और ज्यादा दिलचस्पी न होने का दिखावा करती रही। खैर हमारा ट्रीटमेंट भी कहाँ पूरा हुआ था!हमने सोनू की गुदाज  जांघों  से ले कर पंजों तक हज़ार बोसे लिए। हम तीनों ही हाँफ रहे थे। लेकिन बर्फ पिघलने की मंज़िल अभी दूर ही थी। खैर अब सेकंड डोज़ का टाइम था। 
पाँच मिनट यूं ही सुस्ताने के बाद हमने पोजीशन बदलीं। मैंने बेड के सोफे नुमा हेड रेस्ट से पीठ टिका कर बैठते हुए, सोनू को अपनी गोद में खींच लिया और पीछे से  बगलों के नीचे से हाथ बढ़ा कर उसकी चूचियां मसलते हुए उसकी पीठ पर जीभ घुमा घुमा कर चाटने और चुंबन लेने लगा। धीरे धीरे पीठ पर ही ऊपर बढ़ते हुए मेरे होंठ उसकी गर्दन तक पहुंचे। वहां पर जी भर कर चूमने चाटने का मजा लेने के बाद  फिर बारी बारी से उसके दोनो कानों के पीछे और गालों पर अठखेलियां करने लगे।उसके मुंह को पीछे की ओर घुमा कर उसके होंठों के कोनों को भी चूमा चाटा। इस सबके बीच मेरी हथेलियों के नीचे उसके निपल्स में बढ़ता हुआ तनाव उसकी बढ़ती हुई उत्तेजना की गवाही दे रहा था। देर तक उसकी पीठ गर्दन कानों की सेवा करने के बाद मुझे उसके निचले हिस्से का ध्यान आया।
  अब पिंकू सोनू की टांगों को फैला कर उनके बीच मे पेट के बल अधलेटी सी पोजीशन मे उसकी चूत को ताकने लगी और मैंने सोनू के दाईं तरफ आ कर अपनी बाईं बांह के कोहनी जाइंट को उसके सर का  क्रेडल (तकिया) बनाते हुए, हाथों से उसके बाएँ हाथ की उँगलियों मे फिर से अपनी उँगलियाँ पिरो लीं। उसकी दायीं बांह तो मेरे नीचे दबी हुई ही थी।पीछे से मेरे हटने के बाद सोनू फिर से हेड रेस्ट पर अधलेटी मुद्रा में आ गई। क्यूंकी पिंकू का कार्य क्षेत्र नीचे शिफ्ट हो गया था, इसलिए सोनू के पूरे चाँद से रौशन चेहरे और दोनों दूध के लोटों पर मेरा ही अधिकार था। अब योजना  के अनुसार पिंकू ने सोनू की दायीं जांघ के अंदर की ओर बहुत धीमे धीमे, फ़ीदर टच  किस देने शुरू करे। और अपने किस्सियों का दायरा बढाते हुए  चूत और गाँड़ के बीच के हॉट स्पॉट से गुजरती हुई दूसरी जांघ तक पहुंची, फिर वापसी का सिलसिला शुरू हुआ। यह साइकल दस बारह बार चला।  इधर मैं भी कदमताल मिलाते हुए सोनू के गले के ऊपरी भाग से अपनी फ़ीदर टच किस्सियों का काफिला शुरू कर के दायें कपोलों से होते हुए माथे, नाक, आँख, लिप्स, ठोड़ी पर किस्सियों की बौछार  करते हुए बाएँ गाल  पर पहुंचा, अपने फेवरिट मस्से पर थोड़ा ज्यादा देर मंडराया और स्टार्टिंग पॉइंट पर पहुँच कर वापसी के  सफर पर रवाना हुआ।मैंने भी काफी देर तक यह साइकल रिपीट किया। लड़कियों  को उत्तेजित करने के किए यह फ़ीदर टच किस्सियाँ राम बाण साबित होती है। हमारे होंठों का दबाव धीरे धीरे बढ़ते हुए होंठों की सख्त रगड़ मे तब्दील हो रहा था। सोनू का सुनहरा चेहरा लगातार रगड़ और  उत्तेजना से गुलाबी हो चला था। फिर हमने ज़ोर ज़ोर से पुच्च पुच्च की आवाज़े निकलते हुए उसके पूरे चेहरे और जंघाओं पर पुच्चियों की बौछार कर दी।  
अब मैंने अपने होंठों से सोनू के पूरे चेहरे को पहले की तरह ही प्यार से चूसना शुरू करा। पिंकू ने भी मुझे फॉलो करते हुए जंघाओं पर ऐसा ही करना चालू करा। फिर मैंने पूरे चेहरे पर नन्ही नन्ही लव बाइट्स की बौछार की। पिंकू एक अच्छी स्टूडेंट साबित होते हुए बहुत जल्दी पिकअप कर रही थी। उसने ऐसी ही टाइनी लव बाइट्स सोनू की जंघाओं पर बनाई। इससे उत्तेजना के साथ साथ सोनू के चेहरे और जंघाओं पर  छरछराहट भी होने लगी थी। सो मैंने उसके चेहरे को जीभ घूमा घूमा कर चाटना शुरू करा। बीच बीच मे फूँक भी मारता जाता, जिससे सोनू को कुछ ठंडक महसूस होती। पिंकू ने भी मेरी कॉपी करते हुए सोनू की जंघाओं को ऐसे ही चाट चाट कर और फूँ फूँ करके राहत पहुंचाई। कहने कि ज़रूरत नहीं कि मैंने सोनू कि चूचियों को बिलकुल भी नज़रअंदाज़ नहीं किया था। मेरा फ्री वाला हाथ लगातार सोनू कि चूचियों से खेल रहा था। लेकिन खास ध्यान उसके चेहरे पर ही था। बीच बीच में मैं  पिंकू के बालों में उंगलियां फिरा कर या उसके गाल सहला सहला कर उसे भी शाबाशी दे रहा था।
क्रमशः 
अगले भाग में पढ़िए फोरप्ले के बाद सोनू की धुंआधार फकिंग।
फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प ( राइट ऑफ पैसेज)-2
अब तक आपने पढ़ा की मैंने और पिंकू ने सोनू का सेक्स के प्रति अरुचि को खत्म करने के लिए एक योजना बनाई और एकसाथ सोनू के कामोत्तेजक अंगों को  अपने हाथ और मुंह से उत्तेजित करने की कोशिश करने लगे। अब आगे  
अब हम दोनों ने अपने अपने हिस्से के होंठों पर काम चालू करा। पिंकू ने सोनू की वेजाईना के होठों को बिलकुल मुंह के होठों की तरह किस करना चालू करा। कभी उनको चाटती, कभी एक को चूसती कभी दूसरे को, तो कभी दोनों को एकट्ठा अपने होंठों मे दबा कर चूसने लगती। मैं तो सोनू के होंठों पर पिला ही हुआ था। तभी सोनू ज़ोर से चिहुंकी। पिंकू ने उसकी क्लिटोरिस को चूसते चूसते अचानक से दांतों से  ज़ोर से कचकचा दिया था। मैंने उसके गालों को अपने सीने में भींचा और  होठों को चूमते हुए उसे तसल्ली दी। 

फिर  मैंने ऊपर के और पिंकू ने नीचे चूत  के होंठों को पीना शुरू करा।  तभी पिंकू ने एकाएक अपनी जीभ सोनू की चूत के होंठों को फैलाते हुए उसमे घुसा दी। सोनु  ने उह्ह्ह्ह आःह्ह्ह उईईईए  ज़ोर की सिसकी भरी और उसके होंठ थोड़ा खुल गए। मैंने फायदा उठाते हुए अपनी जीभ सोनू के मुह मे घुसा दी। फिर मैंने सोनू के  मुंह और पिंकू ने उसकी चूत की चुदाई अपनी अपनी जीभ से चालू कर दी। सोनू की चीखें निकल रही थीं, लेकिन मुंह मेरे मुंह के साथ सिला होने से गूँ गूँ गूँ गूँ गूँ .... की आवाज़ ही निकाल रही थी। आखिर उसकी झिझक खोलने के लिए मैंने उसके लबों को आज़ाद कर दिया। ओह्ह्ह अह्ह्हह्हउईईईईईई मर गई आःह्हछ उफ्फ्फ्फ्फफ्फ् श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्.....की चीख़ों से कमरा गूंजने लगा। पिंकू का मुंह सोनू के कामरस से पूरा सन गया था। मैंने पिंकू के मुंह को चाट चाट के साफ करा और सोनू के कामरस से भीगी अपनी जीभ सोनू के ही मुंह मे डाल कर उसे उसके ही कामरस का स्वाद दिलाते हुए, उसके  मुंह की जीभ चुदाई करने  लगा। सोनू भी ज़ोर ज़ोर से मेरी जीभ पर लगा पिंकू और मेरे थूक मिश्रित अपना कामरस चूस रही थी। 

पिंकू हाँफती हुई सोनू के बगल मे लेट गई और उसकी चूचियों से खेलने लगी। सोनू अब ऊब कर बोली- अब और क्या करना है? अब तो मेरी चीखें भी निकल गईं। जल्दी से डालो और निबटो। उस के मुंह से यह बात कोई नई नहीं थी । पुरानी आदतें धीरे धीरे ही जाती हैं। हांलांकि अब तक सोनू भी कामक्रीड़ा मे आनंद लेने लगी थी। मैंने उसके बोबे मसलते हुए  हुए कहा की जानेमन अभी तो तुम्हारी निगेटिविटी पूरी तरह खत्म कहाँ हुई है? कुछ कोशिश मरीज को भी करनी चाहिए। ज़रा खुल कर बताओ क्या चीज़ कहाँ डालने को कह रही थीं? सोनू ने शर्माते हुए मेरे पेनिस की तरफ इशारा कर दिया। मैंने उसका हाथ बढ़ा कर अपना  लंड उसके हाथ मे देते हुए पूछा की इसको कहते क्या है?  पेनिस... सोनू फुसफुसाई और शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया। हिन्दी मे ? मैंने और कुरेदा। उसको बहुत शर्म आ रही थी। ल ल ल लंड.... उसने हकलाते हुए बोला। शाबाश शाबाश, मैंने उसे चूमते हुए बोला। और कोई नाम? लौड़ा.... पिंकू ने उसके कान मे फुसफुसाया। इस बार सोनू ने थोड़ा सहज होते हुए इसे दोहराया। अब इसे कहाँ डालना है? चू... चू... चू... चूत सोनू का चेहरा फिर से लाल भभूका हो गया। धीरे धीरे सोनू की झिझक मिटती जा रही थी। और वो ज़ोर ज़ोर से गिगिल करते हुए लंड, लौड़ा, चूत चूचि, बोबे  चूतदाना, कामकणिका, बुर ...... पहाड़े पढ़ रही थी। सोनू और मेरे हाथ उसके उरोजों का लगातार मर्दन कर रहे थे। उसकी चूत की खुजली तो बनी ही हुई थी बल्कि और बढ़ती जा रही थी, जिसको वो नर्वस हंसी से छुपाने की कोशिश कर रही थी।  उसकी गिगलिंग  अभी भी नर्वस सी ही थी। लेकिन यह नर्वस गिगलिंग  उसकी सुंदरता को चार चाँद लगाती है।

मैंने सोच रखा था की जब तक सोनू हाथ जोड़ के नहीं गिड़गिड़ाएगी, मैं अपना लंड उसकी चूत मे नहीं डालूँगा। 
 अब पिंकू  घोड़ी बन कर सोनू के ऊपर सिक्स्टी नाइन कि पोजीशन मे आ गई, लेकिन अपनी चूत को उसके मुंह से कुछ ऊंचाई पर ही रक्खा,जबकि अपना मुंह सीधे उसकी कामकणिका पर टिका कर क्रीज़ सम्हाल ली, और आगे की इन्सट्रकशंस का इंतज़ार करने लगी।बिलकुल ऐसा पोज था जैसे शेरनी शिकार को छलांग लगाने जा रही हो।  पिंकू कि रसीली चूत , क्लिटोरिस,और गांड हम दोनों  को साफ साफ नज़र आ रहे थे। अब मैंने टेलीप्रिंटर कि तरह उसके बटन दबाते हुए इन्सट्रकशंस देनी शुरू करीं। एक तरीके से पिंकू का शरीर टेलीफोन लाइन बन गया। मैं इधर उसके गुप्तांगों पर टाइप करता और उधर वो इन्फोर्मेशन पिंकू के मुंह तक पहूँच जाती।  पहले मैंने पिंकू कि क्लिटोरिस को मसलना, सहलाना उमेठना शुरू करा। उसने बिलकुल इन्ही ऐक्शन को सोनू कि क्लिटोरिस पर अपनी जीभ से दोहराया। मैंने पिंकू की  चूत के होठो को सितार के तारों कि तरह छेड़ा, उसने यही काम सोनू कि चूत कि फाँकों पर अपनी जीभ से किया।मैंने उसकी चूत कि उँगलियों से चुदाई करी, उसने सोनू कि चूत मे अपनी जीभ घूमा घूमा कर चोदा। फिर मैंने अपनी उँगलियों को आराम देते हुए यही हिदायतें अपनी जीभ से देनी शुरू करी। एक तो पिंकू का कला कौशल और दूसरी तरफ मेरी उँगलियों और जीभ कि मेहनत से उसकी कामरस छोड़ती चूत, गांड और क्लिट के भव्य दर्शन, सोनू कि हालत मारे उत्तेजना के पतली होती जा रही थीऔर वो ज़ोर ज़ोर से अपने चूतड़ उछाल उछाल कर आआह्ह्ह्ह्….श्ह्ह्ह्ह्ह्….सीईईई आईईउई ईई ईई ईए आह्ह्ह जैसी आवाज़े निकाल रही थी। “अब तक कैसी छुई मुई बन रही थी, अब देखो बजवाने के लिए कैसी बेताब हो रही है।“ पिंकू खिलखिलाते हुए बोली।सोनू ने शर्माते हुए  आंखें बंद कर लीं,लेकिन कुछ बोली नहीं।  अभी तो बूस्टर डोज़ का आगे का असर देखो, मैंने पिंकू कि गांड मे उंगली करते हुए जवाब दिया। 
अब मैंने पिंकू का रिमोट सोनू को ट्रांसफर कर दिया, कि जैसा मन हो वैसे मजे लो। सोनू को जैसे अपनी चूत, क्लिट वगैरह पर करवाने का मन करता वो अपनी उंगलियों से वही काम पिंकू कि चूत और कामकणिका पर करती और वैसा ही जवाब अपने कामाँगों पर पाती। इधर इस काम से फुर्सत पा कर मैंने अपनी अटेन्शन फिर से सोनू कि चूचियों और मुंह पर केन्द्रित करी। उसकी चूचियों से खेलते हुए उसके मुखड़े के चुंबन लिए, गालों और ठोड़ी को  चूसा, होठों को अपने होंठों से रौंदा, उसके कानों को चाटा। इस बार सोनू ने भी बराबर का सहयोग दिया। उसने भी मेरे पूरे चेहरे के पूरे जोशोखरोश के साथ  दोगुने चुंबन लिए और मेरे होंठों को बार बार चूसा। उसके चेहरे से कामातुरता टपक रही थी। उसके चेहरे का यह कामुक लुक आज तक कि शालीनता से बिल्कुल अलग सा था। फिर सोनू ने भी अपनी उँगलियों को आराम देते हुए अपनी जीभ से मैसेज पास करने शुरू करे और जब चुलबुलाहट ज्यादा बढ़ी तो शर्माना छोड़ कर  पिंकू के चूतड़ो को पकड़ कर अपने मुंह पर गिरा ही लिया और बाकायदा सिक्स्टी नाइन कि पोजीशन मे आ गई। मैं थोड़ा रेस्ट लेते हुए उन दोनों की  जोशीली काम क्रीडा का आनंद लेने लगा। दोनों ही एक दूसरी कि चूतें चाट रही थीं, पी रही थीं ,जीभ से चोद रही थीं , क्लिटोरिस को चूस रही थी। जी -स्पॉट ढूंढो! मैंने सजेस्ट करा। दोनों ने अपनी जीभों को इस मिशन पर लगाया और एक दूसरे की  कन्ट मे अपनी अपनी जीभों से पड़ताल करने लगीं। पहली बाजी सोनू ने मारी। अब पिकू बुरी तरह से उत्तेजित हो कर अपने चूतड़ हिलाने लगी और सोनू कि चूत को भूखी शेरनी कि तरह खाने लगी। तब तक कुशल और अनुभवी  पिंकू ने भी सोनू के जी -स्पॉट को पा लिया। अब तो दोनों के मुंह से सिसकारियाँ निकल रही थीं और  क्यूंकी दोनों ने ही एक दूसरे के चूतड़ो को अपनी बाहों मे जकड़ रखा था और जीभें चूतों मे घुसाई हुई थी ,वोह  बिस्तर पर “एक शरीर- दो जान” कि तरह कलाबाजियाँ खा रही थीं। सेक्स एंजॉयमेंट थेरेपी काम कर रही थी।  खैर उनको उत्तेजना के शिखर पर पहुँचने से पहले ही मैंने रोक दिया।और अलग अलग होने को बोला। अभी तीनों डोजेज़ के पूरे असर की  भी तो जांच करनी थी। 


पिंकू के सोनू के ऊपर से हटते ही सोनू ने मुझे शिकायती अंदाज में घूरा, लेकिन मैं उसकी बगल मे लेट गया और उसको अपने ऊपर लेटने को बोला। वो कामातुर हो कर पूरी उत्तेजना से तड़पती हुई बिना झिझक मेरे ऊपर चढ़ कर काउबॉय पोजिशन में बैठ  गई और बिना समय बर्बाद करे मेरा लौडा पकड़ कर अपनी चूत मे घुसाने की कोशिश करने लगी। लेकिन प्रैक्टिस ना होने से नाकामयाब रही और तीन चार बार कोशिश करने के बाद झेंप कर अपनी चूत और कामकणिका मेरे लंड पर घिसने लगी। उसकी इस हरकत को देख कर पिंकू फिर खिलखिला कर हँसते हुए बोली की देखो कैसी शर्मीली  बनती थी, अब  देखो कैसी चुदासी हो रही है।लकी अब तो इसकी बजा ही डालो।
मैं मुस्कुराते हुए उठ कर आलथी पालथी मार कर बैठ गया और सोनू को लोटस पोजिशन में अपने आगोश में ले लिया। वो उत्तेजनावश अपनी छातियां मेरे सीने से रगड़ रही थी और मेरा लौड़ा हम दोनों के नंगे बदन के बीच में पिस रहा था। उसके गले और कंधे पर मेरी चुम्मियाँ लगातार जारी थीं और हाथ उसकी नर्म और मुलायम पीठ की हल्के हल्के मसाज कर रहे थे।क्योंकि सोनू अच्छे कद की है, इसलिए इस पोजीशन में उसका चेहरा मेरे चेहरे से थोड़ा ऊपर पड़ रहा था। मैं कभी अपना मुंह ऊपर उठा कर उसके अधरों का  स्वाद लेने लगता, तो कभी अपना मुंह थोड़ा नीचे झुका कर उसकी चूचियों को चूसने लगता। इस पोजीशन में उसकी ठुड्ढी भी आम की गुठली की तरह चूसने में भी बहुत मजा आया।
आखिर में फिर से चित लेटते हुए मैने उसको अपने ऊपर खींचा और प्यार से चूमते हुए सोनू के अधर अपने निपल्स की तरफ खिसकाये। सोनू एक शर्मीली मुस्कुराहट के साथ मेरे ऊपर लेट लेटे  नीचे अपनी चूत और क्लिट मेरे लंड से रगड़ने के साथ साथ मेरे निपल्स भी चूसने लगी। पिंकू को देख देख कर उसे मालूम तो सभी कुछ था, लेकिन इच्छा नहीं होती थी, जो की आज सारे बांध तोड़ कर जाग गई थी। सोनू ने पूरे मनोयोग से मेरे निपल्स को चाटा,चूसा, चुम्मियाँ लीं और दांतों से लव बाइट्स भी दीं। मैं प्यार से उसके मुलायम मुलायम कपोल सहलाते हुए उसके कानों में स्वीट नथिंग्स की सरगोशियां कर रहा था। इस बीच पिंकू उसकी पीठ पर गर्दन से लेकर चूतडों तक अपनी जीभ फिरा फिरा कर और धीमी धीमी पुच्चियाँ ले ले कर उसकी कामोत्तेजना को और बढ़ा रही थी। कभी उसके ऊपर लेट कर अपनी  निपल्स से उसकी पीठ को सहलाती तो कभी उसके ऊपर पूरा दबाव डाल कर अपने बोबों से पीठ की जोरदार घिसाई करते हुए मालिश करती।  करीब आधे घंटे  तक सोनू से मजे लेने के बाद आखिर मैंने अपना लंड उसकी चूत  मे घुसा दिया। 

वो एक दम बेकाबू हो कर उसे अपनी चूत की फाँकों से निचोड़ने लगी और तेजी से कभी आगे पीछे तो कभी दायें बाएँ हिल हिल कर अपनी बुर की खुजली मिटाने लगी।मेरे आग्रह  पर अपनी चूत को मेरे लन्ड के चारो ओर गोल गोल भी घुमाया  और फिर उईईईईईई मर गई.......  की एक लंबी सिसकारी लेते हुए मुझसे लिपट गई। उसके ज्वालामुखी की तरह फूटते कामरस के साथ साथ ,सेक्स के प्रति उसका मानसिक अवरोध अब पूरी तरह बह निकला था।उसकी आँखों से आंसुओं की धार बह रही थी, लेकिन होंठों पर एक अजीब संतोष भरी मुस्कान भी थी। मेरा इलाज कामयाब रहा था।मैं सोनू को  उसी पोजीशन मे अपनी बाहों मे भींच भींच कर देर तक प्यार करता रहा।

जैसा की मैं बता ही चुका हूँ की मैं किसी भी सेक्स सेशन का समापन अपनी फेवरिट मिशनरी पोजीशन मे ही करता हूँ। सो मैंने अपना लंड उसकी चूत मे पिरोये पिरोये ही पलटी खाई और अपनी बाहें उसकी पीठ के पीछे ले जा कर उसे अपनी भुजाओं मे ज़ोर से जकड़ते हुए उसकी भयभीत हिरनी के समान बड़ी बड़ी बंद आँखों के आंसुओं को चूम चूम कर सुखाया और फिर आंसुओं से भीगे हुए गालों को चूसते हुए हौले हौले  धक्के मारने शुरू करे।  पूरी तरह झरने के बाद भी सोनू की चूत  के होंठ फुदक फुदक कर मेरे लौड़े को चूस रहे थे।उसने अपनी बाहों से मेरी गर्दन और टांगों से कमर दबोच रक्खी  थी।  मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमते हुए अपनी स्पीड बढानी शुरू करी और उसके संतरे की फांकों जैसे होंठों को अपने होठों से कस कर भींचते हुए फ़ाइनल अटैक करा। अब मेरा गरमा गरम लावा उसके कामकुंड मे अंतिम आहुति दे रहा था। सोनू ने भी मुझे कस कर भींचा और एक बार फिर से स्खलित हो कर मेरा साथ दिया। मैने सोनू की टांगों को अपनी टांगों के बीच में लेते हुए उसकी चूत को मेरे लंड को पूरी तरह दबाने का मौका दिया।उसने भी अपनी टांगों की कैंची बना कर मेरे लौड़े को अच्छी तरह निचोड़ डाला। अब बर्फ पूरी तरह गल चुकी थी ।  मैं देर तक सोनू के बदन पर निढाल हो कर पड़ा रहा। तब तक पिंकू भी सोनू के बगल मे आ कर लेट गई।  मैंने पिंकू को भी मेहनताने और शाबाशी के तौर पर गिन कर एक सौ एक पुच्चियाँ उसके फ़ेस पर दीं। वो एक योग्य ट्रेनिंग असिस्टेंट सिद्ध हुई थी। 
अब तक सुबह के चार बज गए थे। हम लोग निढाल हो कर जहां थे जिस पोजीशन मे थे, नींद के आगोश मे समाते चले गए। बीच मे मेरी आँख थोड़ी सी खुली तो नीले नाइट बल्ब की हल्की रोशनी मे देखा की सोनू एक मासूम बच्चे की तरह नींद मे ही हौले हौले मुस्कुरा रही है। मेरे दिल पर कटारियाँ चल गईं। मैंने अपने जज़्बात पर काबू किया और स्वप्नलोक मे खो गया।  
अब इस कहानी की सीक्वेल “जीत का इनाम “ मे मैं लिखुंगा की कैसे मैंने पिंकू और सोनू से अपनी गेम मे जीतों का इनाम वसूला और उन्होने भी इसका  कैसे भरपूर आनंद लिया। 
Reply
11-08-2023, 12:13 AM,
#4
FFM sex series Part 4 जीत का इनाम
जीत का इनाम
अभी तक मेरी कहानियों अल्हड़ लड़की के साथ कामक्रीड़ा का तूफान और फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प( राइट ऑफ पैसेज) मे आपने पढ़ा की कैसे मैंने पिंकू और सोनू के साथ एक नशीली शाम की शुरुआत करते हुए पहले पिंकू की तूफानी चुदाई के मजे लिये और फिर पिंकू की मदद से  सोनू की भी झिझक मिटवाते हुए उसके साथ भी भरपूर सेक्स के मजे लूटे। वास्तव मे हम तीनों ने ही कामक्रीड़ा का भरपूर आनंद लिया। अब आगे...
जब हमारी सुबह हुई तो दोपहर के बारह बज रहे थे। मैं फिर से किचन मे जा कर वोड्का मिले हुए तीन किंग साइज़ गिलास लस्सी के और कुछ फ्रूट सलाद  तैयार करे,और ट्रे ले कर बेडरूम मे ही आ गया। दोनों ही जग गई थीं और रात की खुमारी से अलसा रही थी। पिंकू तो खैर सदा की तरह प्रसन्नचित्त थी ही लेकिन सोनू के चेहरे पर एक नई ही ताजगी नज़र आ रही थी।इतनी ताबड़तोड़ तूफानी चुदाई और डिनर के नाम पर जूस, तीनों के ही पेट मे चूहे कूद रहे थे । हम फिर से पिछले सेक्स सेशन का विडियो देखते हुए ब्रेकफ़ास्ट या यूं कहिए की ब्रंच करने लगे।
मैंने मौका देख कर बोला जानेमन मेरे दो दो इनाम ड्यू हैं। “हाँ हाँ बोलो कितनी किस्सी चाहिए?” दोनों इकट्ठा ही बोलीं। जीता मैं हूँ तो इनाम भी मैं ही तय करूंगा ना! मैंने जिद की। चलो एक तरीका बताता हूँ, जिससे तुम दोनों इकट्ठा ही फारिग हो जाओगी- मैंने बोला और उन्हे सैंडविच मसाज के बारे मे समझाने लगा। एक दो ब्लू फिल्म भी दिखाईं। लेकिन हमारी भी एक शर्त है की तुम बीच मे अपना कोई हाथ पैर या दिमाग नहीं चलाओगे, और जो हम करेंगी वो करने दोगे। पिंकू ने शर्त रखी। मैंने सहमति दे दी और जब  दोनों ही इंटेरेस्टेड दिखाई दीं, तो मैं फ्रिज से एक बड़े जग मे रखा हुआ आलोए वेरा का पल्प निकाल कर ले आया। (मैंने अपने घर मे आलोएवेरा के कई सारे  पौधे लगाए हुए हैं, और उनके ताज़ा पल्प से रोज़ अपने बदन और चेहरे की मालिश करता हूँ और शेक बना कर पीता भी हूँ।यह एक अच्छा टेम्परेरी लुब्रिकेंट है और चाटने चूसने से किसी और मसाज ऑइल या पाउडर की तरह नुकसान भी नहीं करता। यह हैल्थ के लिए भी अच्छा होता है।इसलिए मेरे फ्रिज मे इसका स्टॉक हमेशा मौजूद रहता है।) 
अब हम तीनों अपनी स्टैंडर्ड पोजीशन्स ले कर लेट गए। दोनों के सर मेरे सीने पर थे। मैं स्पर्श सुख मे लीन था, तभी पिंकू ने सोनू के हाथ को हल्के से दबा कर इशारा सा किया, और उनदोनों ने ही अपनी टांगों को हूक बनाते हुए मेरी दोनों टांगों को इम्मोबिलिलाइज्ड कर दिया। मेरे हाथ तो पहले ही उनके नीचे दबे थे। अब पासा पलट गया था। मैं स्प्रेड ईगल पोजीशन में था और वो दोनों कमांडिंग पोजीशन में। “कभी नाव गाड़ी पे तो कभी गाड़ी नाव पे” पिंकू की खिलखिलाहट भरी आवाज़ मेरे कानों मे पड़ी। वैसे मैं चाहता तो पूरा ज़ोर लगाने पर उनकी गिरफ्त से आज़ाद हो सकता था, लेकिन इससे उनके उत्साह मे कमी आ जाती। इसलिए अपनी मजबूरी का बहाना करते हुए मैं झूठ मूठ कसमसाया और फिर खुद को हालात के हवाले कर दिया।
 अब पिंकू ने मेरे सीने पर सर रखे रखे ही मेरे दायें निपल को जीभ बढ़ा कर चाटना शुरू करा। जैसे इशारा पा कर सोनू ने बाएँ निपल का चार्ज सम्हाल लिया। अब दोनों ही मेरे निपल्स को कभी चुटकी मे लेकर मींजतीं तो कभी पुचचियाँ लेतीं तो कभी चाटतीं, तो कभी मुंह मे ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसतीं। एक मेरा निपल होंठों मे जकड़ कर गोल गोल घुमाती तो दूसरी उसी समय दूसरे निपल को जीभ फुरफुराते हुए चाट रही होती। इस समय कौन ज्यादा कुशल थी,कहना मुश्किल था।
उनकी लटें बार बार उनके चेहरे से होते हुए मेरे सीने पर अठखेलियां कर रही थीं।लेकिन इससे मेरे नयन सुख में बाधा पड़ रही थी और मैं किसी तरह अपने हाथों को लंबा करके बार बार बालो को उनके मुखड़ों से हटाने की कोशिश कर रहा था। आखिर दोनों ने उठ कर अपने बालों को उमेठ कर जूड़ा सा बना लिया।अब उन दोनो के चेहरे और होंठ, जीभ वगैरह मेरे निपल्स पर चलते हुए साफ नजर आ रहे थे। मेरी उत्तेजना का पारावार ना था। आज पता लगा की मेरे निपल्स लड़कियों की तरह ही इतने सेंसिटिव हैं।
 पिंकू ने मेरे लौड़े को हाथ मे ले कर हल्के हल्के दबाना  शुरू करा तो सोनू ने भी पीछे ना रहते हुए मेरी बाल्स को सहलाना शुरू कर दिया। अब आहा आहा उऽऽहू निकालने की बारी मेरी थी।दोनों निपल्स पर एक साथ दो दो जीभों का अनुभव निराला था।  “लकी! तुम्हारा लौड़ा तो तन के खंभा बन गया है!”पिंकू ने फिर कमेंट करा। सोनू की भी धीमी हंसी मेरे कानों मे पड़ी। अभी असली मसाज तो शुरू भी नहीं हुआ था और मैं स्वर्ग की सैर कर रहा था। 
अब उन दोनों ने ऊपर बढ़ कर मेरे चेहरे पर चुम्मियाँ और पुच्चियाँ देनी शुरू करीं।चाटने मे शायद मेरी दाढ़ी उन्हे गड़ती होगी।  मैं भी जब भी मौका मिलता, मुंह बढ़ा कर उनको किस कर लेता। हमने “टंग ऑफ वार” का खेल भी खेला (कृपया मेरी पहले की कहानी “फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प ( राइट ऑफ पैसेज)”  देखें)। इस बार सोनू विजयी रही। धीरे धीरे मजे लेते हुए उन दोनों ने मेरे कानों पर भी धावा बोल दिया। आज वो दोनों पूरा हिसाब बराबर करने के मूड मे लग रही थी। दोनों बिलकुल बर्र और ततैया की तरह अपनी अपनी तरफ के मेरे कानों को चूस,चूम रही थीं चाट रही थींऔर जीभ घुसा घुसा के कर्ण चोदन भी कर रही थीं। उनकी उँगलियाँ लगातार मेरे निपल्स को सहलाने और उमेठने मे लगी थीं। “अब मसाज भी शुरू होगा या इसी सब में टाइम पास होगा। मैंने बनावटी गुस्से से कहा, जबकि असलियत मे तो मैं इसको भी खूब एंजॉय कर रहा था। 
उन दोनों ने हँसते हुए अपनी चूचियों से मेरे चेहरे का मसाज करना शुरू कर दिया। पिंकू की दायीं और सोनू की बाईं चूचियाँ मेरे मुंह पर और आपस में भी रगड़ खा रही थीं। मैंने पास रखे जग से मुट्ठी भर आलोएवेरा जेल ले कर उनकी चूचियों पर मल दिया।अब दोनों गेंदें मेरे मुंह पर आसानी के साथ फिसलने लगीं। उनके निपल्स बार बार मेरे होठों को छूते हुए ऊपर नीचे होते तो मैं मुंह खोल कर उनको अपने मुंह मे लेने की कोशिश करता, कभी कामयाब होता,कभी नहीं। कभी कोई तरस खा कर या एक्साईटेड हो कर अपना निपल मेरे मुंह मे दे देती तो मैं उतावला हो कर चूसने लगता।मेरे मुंह से ओह्ह्ह अह्ह्हह्ह जैसी आवाज़ें गूंज रही थीं। आखिर बेताब हो कर मैंने दोनों की चूचियाँ पकड़ कर पहले कुछ देर उनके निपल आपस मे घिसे और फिर एक साथ ही अपने मुंह मे ले लिए और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। मेरे मुंह मे दो अलग अलग लड़कियों के निपल्स आपस मे रगड़ खाते हुए एक साथ चुस रहे थे। तीनों के लिए ही यह एक नया एक्सपिरियन्स था।“ वाह ! नींबू और संतरे का स्वाद एक साथ!” मेरे मुंह से निकल गया।
मैंने ढेर सारा और आलोएवेरा जेल उनकी चूचियोंऔर जांघों  पर मला और उन्होने अपनी टांगों की कैंची बना कर मेरी एक एक टांग पर अपनी अपनी चूतें टाइट कर लीं। दोनों ने मेरी टांगों पर अपनी चूतें और पेट और सीने, पर अपनी चूचियाँ फिसलाते हुए ऊपर नीचे फिसलना चालू कर दिया। उनकी रस चूआती हुई चूतों को तो वैसे भी किसी लुब्रिकेंट की जरूरत नहीं थी।दोनों बिलकुल मेरे चेहरे की तरह ही अपनी एक एक चूची से मेरे सीने और पेट की मालिश करती रहीं।दोनों ने अपने अपने निपल्स को पकड़ कर मेरे निपल्स पर रगड़ा तो मेरी सीत्कार निकाल गई।  फिर मैंने सोनू की तरफ करवट ले कर उसे हल्की पकड़ से अपनी बाहों मे भर लिया। वो मेरी बाहों के घेरे के अंदर ही रहते हुए अपने दोनों बूब्स मेरे सीने और पेट पर रगड़ती रही। जब भी मुझे ज्यादा दबाव चाहिए होता, मैं अपनी पकड़ टाइट कर लेता और फिर ढीली छोड़ देता। ज्यादा प्यार आता तो उसे टाइटली दबोच कर किस्स करने लगता, होंठों,गालों को चूसने लगता। मेरी पकड़ ढीली होती तो फिर से ऊपर नीचे हिलने लगती। उधर पिंकू मेरी पीठ की साइड पर अपना पराक्रम दिखा रही थी। ऊपर नीचे हो कर अपनी चूचियों से मेरी पीठ मालिश भी कर रही थी और मेरी पीठ पर चूमा चाटी भी कर रही थी। कई बार तो उसने शरारत मे ज़ोर से काट भी लिया। 
थोड़ी देर बाद मैंने करवट बदली और पिंकू की तरफ मुंह कर लिया। अब सोनू मेरी पीठ पर और पिंकू मेरे सीने पर अपनी छातियाँ रगड़ने लगीं। आलोएवेरा जेल जल्दी सूख जाता है। सोनू पिंकू की छातियों पर बार बार जेल मलना पड़ रहा था।अब मैंने वही मज़ा पिंकू को अपनी बाँहों के घेरे मे ले कर लिया। वो तो खुद ही उत्तेजना मे बही जा रही थी, जोरों से मुझसे चिपक चिपक कर अपनी चूचियां मेरे सीने से और पेट से रगड़ रही थी, मानो मेरा मसाज कम बल्कि अपनी चूचियों की खुजली ज्यादा मिटा रही हो। साथ ही साथ पूरे जोश से मेरे मुंह मे जीभ घुसेड़ घुसेड़ के डीप किसिंग कर रही थी। सोनू भी अपनी आदत के विपरीत पूरे जोश से साथ देने की कोशिश कर रही थी। उसकी यह कोशिश देख कर उस पर प्यार भी आ रहा था, लेकिन सेक्स के खेल में पिंकू का मुक़ाबला कर  मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 
अब पिंकू ने उठ कर मुझे चित लिटाते हुए मेरे लंड को अपनी चूचियों के बीच मे दबा दबा कर उसका मसाज करना शुरू करा।मैंने भी सोनू को अपने ऊपर खींच कर उसकी चूचियों को पीना शुरू करा। कभी बाईं को चूसता तो कभी दायीं को। कभी दोनों निपल्स एक साथ मुंह मे ले कर चुभलाने लगता। अब तो सोनू भी अपनी झिझक का लबादा उतार कर काफी फ्रैंक हो कर अपने हाथों से अपनी चूचियाँ पकड़ पकड़ कर मुझे ओफर कर रही थी और ओह्ह्ह अह्ह्हह्ह उईईईईईई  जैसी आवाज़े निकाल रही थी। अब जब चूची चुसायी की कमान सोनू ने सम्हाल ही ली थी , तो मैंने अपने हाथों का उपयोग पिंकू के बोबों की मदद करने मे किया। अपने हाथो से भींच भींच कर उनको अपने लंड पर रगड़ने लगा। 
कुछ देर बाद दोनों ने पोजीशन बदल लीं। अब सोनू के बोबे मेरे लंड पर तो पिंकू की चूचियाँ मेरे मुंह मे थीं। पिंकू अपनी सदाबहार मस्ती मे मेरे मुंह को अपनी चूचियों से रगड़ रही थी। अपनी चूचियों को मेरे मुंह मे ठूँसे दे रही थी और आवाज़े निकाल रही थी उई ईई ईई ईए आह्ह्ह...... उधर सोनू भी भरपूर अपनी तरफ से भरसक अपनी चूचियों को मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैंउसके भरे भरे उरोजों को अपनी मुट्ठियों मे भर के अपने लंड पर रगड़ता रहा।
थोड़ी देर बाद  दोनो मेरी साइड्स में बैठ गईं और ब्लाइंड टारगेट गेम खेलते हुए मेरी नाभि का निशाना लगाना चालू करा।जहां पिंकू निशाना लगते ही पूरे जोश के साथ मेरी नाभि को चूसने लगती और जीभ घुसा घुसा कर रगड़ती, वहीं सोनू अपनी बारी आने पर पूरी नजाकत के साथ पहले अपने होंठों से फीदर टच चुम्बन लेती, फिर हल्के हल्के चाटती और चूमती। में तो जन्नत की सैर कर रहा था। 
अब दोनों अपनी पोजिशन बदल कर उल्टी लेट गईं।उन्होने अपनी चूचियों से मेरी टांगों की और चूतों से मेरे बदन की साइड्स की मालिश शुरू करी। अब उनकी रस छलकाती चूतों और साथ ही साथ गांड़ के छेदों का दर्शन मुझे प्राप्त हो रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों की उँगलियाँ अलोवेरा जेल मे डूबा कर उनके गुदा द्वारों मे प्रवेश करा दीं। दोनों ने उऽऽहू... सीऽऽई जैसी आवाज़ें निकालीं और थोड़ा ठिठक सी गईं। मैंने उन्हें अपना काम जारी रखने को बोला और अपनी उँगलियों से उनकी ऐनल फकिंग करता रहा। थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं उनके हिप्स को भी छातियों के समान ही मींजता, मसलता रहता। 
फिर दोनों ने पोजीशन बदलते  हुए, मेरे लौड़े को अपनी चूचियों के घेरे में ले कर दाएं बाएं हिलना शुरू करा। अब उनकी चूचियां आपस में भी घिस रही थीं और चार चार बोबों के बीच में मेरा लन्ड कुछ कुछ अज़ीम-ओ-शान शहँशाह के अंदाज़ मे खड़ा था।
 अब तो एक दूसरे की चूचियों का स्पर्श और साथ ही साथ मेरे लौड़े का घर्षण इन दोनों को ही डबल उत्तेजना दे रहा था। मेरा तो हाल तो वैसे ही बुरा हो रक्खा था। अब तो उह्ह्ह्ह आःह्ह्ह उईईईए सीईईई आईई हम तीनों की ही सिसकारियां माहौल को मादक बना रही थीं। मेरे लिए अब खुद पर काबू रखना मुश्किल था। मेरे मुंह से  आआह्ह्ह्ह्ह  की तेज आवाज़ के साथ आखिर मेरा लावा एक ज्वालामुखी के समान उबल उबल कर बाहर आने लगा। जोश इतना ज्यादा था की बूंदों ने दोनों की चूचियों के साथ साथ  मुंह और नाक तक सराबोर कर डाले। सोनू और पिंकू ने एक दूसरे की चूचियों और चेहरों को चाट चाट कर साफ किया और फिर दोनों ने मेरे लौंडे और बाल्स को भी चाट चूस कर साफ किया। 
इस तरह मेरी जीत का इनाम वसूल हुआ। 
अब तक शाम के चार बज रहे थे। हम लोगों ने एक साथ शावर लिया और कुछ ही दिनों बाद आने वाली होली साथ साथ मनाने के वादे के साथ एक दूसरे से विदा ली। पिछले करीब 24-30 घंटे के फलाहार और बदन तोड़ मैराथन सेक्स के बाद मैं भी संतुलित डिनर ले कर एक गहरी नींद लूँगा। इस तरह तरोताज़ा हो कर अब हम लोग अपनी अपने प्रॉफेश्नल लाइफ मे व्यस्त हो जाएंगे। 
अब इस कहानी की सीक्वेल “सोनू और पिंकू के साथ पाँसों का खेल “ मे मैं लिखुंगा की कैसे मैंने और पिंकू ने शर्मीली सोनू की कुँवारी गांड का उदघाटन किया और उसने भी इसका  कैसे भरपूर आनंद लिया। 
Reply
11-08-2023, 12:16 AM,
#5
FFM sex series Part 4 जीत का इनाम
जीत का इनाम
अभी तक मेरी कहानियों अल्हड़ लड़की के साथ कामक्रीड़ा का तूफान और फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प( राइट ऑफ पैसेज) मे आपने पढ़ा की कैसे मैंने पिंकू और सोनू के साथ एक नशीली शाम की शुरुआत करते हुए पहले पिंकू की तूफानी चुदाई के मजे लिये और फिर पिंकू की मदद से  सोनू की भी झिझक मिटवाते हुए उसके साथ भी भरपूर सेक्स के मजे लूटे। वास्तव मे हम तीनों ने ही कामक्रीड़ा का भरपूर आनंद लिया। अब आगे...
जब हमारी सुबह हुई तो दोपहर के बारह बज रहे थे। मैं फिर से किचन मे जा कर वोड्का मिले हुए तीन किंग साइज़ गिलास लस्सी के और कुछ फ्रूट सलाद  तैयार करे,और ट्रे ले कर बेडरूम मे ही आ गया। दोनों ही जग गई थीं और रात की खुमारी से अलसा रही थी। पिंकू तो खैर सदा की तरह प्रसन्नचित्त थी ही लेकिन सोनू के चेहरे पर एक नई ही ताजगी नज़र आ रही थी।इतनी ताबड़तोड़ तूफानी चुदाई और डिनर के नाम पर जूस, तीनों के ही पेट मे चूहे कूद रहे थे । हम फिर से पिछले सेक्स सेशन का विडियो देखते हुए ब्रेकफ़ास्ट या यूं कहिए की ब्रंच करने लगे।
मैंने मौका देख कर बोला जानेमन मेरे दो दो इनाम ड्यू हैं। “हाँ हाँ बोलो कितनी किस्सी चाहिए?” दोनों इकट्ठा ही बोलीं। जीता मैं हूँ तो इनाम भी मैं ही तय करूंगा ना! मैंने जिद की। चलो एक तरीका बताता हूँ, जिससे तुम दोनों इकट्ठा ही फारिग हो जाओगी- मैंने बोला और उन्हे सैंडविच मसाज के बारे मे समझाने लगा। एक दो ब्लू फिल्म भी दिखाईं। लेकिन हमारी भी एक शर्त है की तुम बीच मे अपना कोई हाथ पैर या दिमाग नहीं चलाओगे, और जो हम करेंगी वो करने दोगे। पिंकू ने शर्त रखी। मैंने सहमति दे दी और जब  दोनों ही इंटेरेस्टेड दिखाई दीं, तो मैं फ्रिज से एक बड़े जग मे रखा हुआ आलोए वेरा का पल्प निकाल कर ले आया। (मैंने अपने घर मे आलोएवेरा के कई सारे  पौधे लगाए हुए हैं, और उनके ताज़ा पल्प से रोज़ अपने बदन और चेहरे की मालिश करता हूँ और शेक बना कर पीता भी हूँ।यह एक अच्छा टेम्परेरी लुब्रिकेंट है और चाटने चूसने से किसी और मसाज ऑइल या पाउडर की तरह नुकसान भी नहीं करता। यह हैल्थ के लिए भी अच्छा होता है।इसलिए मेरे फ्रिज मे इसका स्टॉक हमेशा मौजूद रहता है।) 
अब हम तीनों अपनी स्टैंडर्ड पोजीशन्स ले कर लेट गए। दोनों के सर मेरे सीने पर थे। मैं स्पर्श सुख मे लीन था, तभी पिंकू ने सोनू के हाथ को हल्के से दबा कर इशारा सा किया, और उनदोनों ने ही अपनी टांगों को हूक बनाते हुए मेरी दोनों टांगों को इम्मोबिलिलाइज्ड कर दिया। मेरे हाथ तो पहले ही उनके नीचे दबे थे। अब पासा पलट गया था। मैं स्प्रेड ईगल पोजीशन में था और वो दोनों कमांडिंग पोजीशन में। “कभी नाव गाड़ी पे तो कभी गाड़ी नाव पे” पिंकू की खिलखिलाहट भरी आवाज़ मेरे कानों मे पड़ी। वैसे मैं चाहता तो पूरा ज़ोर लगाने पर उनकी गिरफ्त से आज़ाद हो सकता था, लेकिन इससे उनके उत्साह मे कमी आ जाती। इसलिए अपनी मजबूरी का बहाना करते हुए मैं झूठ मूठ कसमसाया और फिर खुद को हालात के हवाले कर दिया।
 अब पिंकू ने मेरे सीने पर सर रखे रखे ही मेरे दायें निपल को जीभ बढ़ा कर चाटना शुरू करा। जैसे इशारा पा कर सोनू ने बाएँ निपल का चार्ज सम्हाल लिया। अब दोनों ही मेरे निपल्स को कभी चुटकी मे लेकर मींजतीं तो कभी पुचचियाँ लेतीं तो कभी चाटतीं, तो कभी मुंह मे ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसतीं। एक मेरा निपल होंठों मे जकड़ कर गोल गोल घुमाती तो दूसरी उसी समय दूसरे निपल को जीभ फुरफुराते हुए चाट रही होती। इस समय कौन ज्यादा कुशल थी,कहना मुश्किल था।
उनकी लटें बार बार उनके चेहरे से होते हुए मेरे सीने पर अठखेलियां कर रही थीं।लेकिन इससे मेरे नयन सुख में बाधा पड़ रही थी और मैं किसी तरह अपने हाथों को लंबा करके बार बार बालो को उनके मुखड़ों से हटाने की कोशिश कर रहा था। आखिर दोनों ने उठ कर अपने बालों को उमेठ कर जूड़ा सा बना लिया।अब उन दोनो के चेहरे और होंठ, जीभ वगैरह मेरे निपल्स पर चलते हुए साफ नजर आ रहे थे। मेरी उत्तेजना का पारावार ना था। आज पता लगा की मेरे निपल्स लड़कियों की तरह ही इतने सेंसिटिव हैं।
 पिंकू ने मेरे लौड़े को हाथ मे ले कर हल्के हल्के दबाना  शुरू करा तो सोनू ने भी पीछे ना रहते हुए मेरी बाल्स को सहलाना शुरू कर दिया। अब आहा आहा उऽऽहू निकालने की बारी मेरी थी।दोनों निपल्स पर एक साथ दो दो जीभों का अनुभव निराला था।  “लकी! तुम्हारा लौड़ा तो तन के खंभा बन गया है!”पिंकू ने फिर कमेंट करा। सोनू की भी धीमी हंसी मेरे कानों मे पड़ी। अभी असली मसाज तो शुरू भी नहीं हुआ था और मैं स्वर्ग की सैर कर रहा था। 
अब उन दोनों ने ऊपर बढ़ कर मेरे चेहरे पर चुम्मियाँ और पुच्चियाँ देनी शुरू करीं।चाटने मे शायद मेरी दाढ़ी उन्हे गड़ती होगी।  मैं भी जब भी मौका मिलता, मुंह बढ़ा कर उनको किस कर लेता। हमने “टंग ऑफ वार” का खेल भी खेला (कृपया मेरी पहले की कहानी “फ्रिजिड सोनू का कायाकल्प ( राइट ऑफ पैसेज)”  देखें)। इस बार सोनू विजयी रही। धीरे धीरे मजे लेते हुए उन दोनों ने मेरे कानों पर भी धावा बोल दिया। आज वो दोनों पूरा हिसाब बराबर करने के मूड मे लग रही थी। दोनों बिलकुल बर्र और ततैया की तरह अपनी अपनी तरफ के मेरे कानों को चूस,चूम रही थीं चाट रही थींऔर जीभ घुसा घुसा के कर्ण चोदन भी कर रही थीं। उनकी उँगलियाँ लगातार मेरे निपल्स को सहलाने और उमेठने मे लगी थीं। “अब मसाज भी शुरू होगा या इसी सब में टाइम पास होगा। मैंने बनावटी गुस्से से कहा, जबकि असलियत मे तो मैं इसको भी खूब एंजॉय कर रहा था। 
उन दोनों ने हँसते हुए अपनी चूचियों से मेरे चेहरे का मसाज करना शुरू कर दिया। पिंकू की दायीं और सोनू की बाईं चूचियाँ मेरे मुंह पर और आपस में भी रगड़ खा रही थीं। मैंने पास रखे जग से मुट्ठी भर आलोएवेरा जेल ले कर उनकी चूचियों पर मल दिया।अब दोनों गेंदें मेरे मुंह पर आसानी के साथ फिसलने लगीं। उनके निपल्स बार बार मेरे होठों को छूते हुए ऊपर नीचे होते तो मैं मुंह खोल कर उनको अपने मुंह मे लेने की कोशिश करता, कभी कामयाब होता,कभी नहीं। कभी कोई तरस खा कर या एक्साईटेड हो कर अपना निपल मेरे मुंह मे दे देती तो मैं उतावला हो कर चूसने लगता।मेरे मुंह से ओह्ह्ह अह्ह्हह्ह जैसी आवाज़ें गूंज रही थीं। आखिर बेताब हो कर मैंने दोनों की चूचियाँ पकड़ कर पहले कुछ देर उनके निपल आपस मे घिसे और फिर एक साथ ही अपने मुंह मे ले लिए और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। मेरे मुंह मे दो अलग अलग लड़कियों के निपल्स आपस मे रगड़ खाते हुए एक साथ चुस रहे थे। तीनों के लिए ही यह एक नया एक्सपिरियन्स था।“ वाह ! नींबू और संतरे का स्वाद एक साथ!” मेरे मुंह से निकल गया।
मैंने ढेर सारा और आलोएवेरा जेल उनकी चूचियोंऔर जांघों  पर मला और उन्होने अपनी टांगों की कैंची बना कर मेरी एक एक टांग पर अपनी अपनी चूतें टाइट कर लीं। दोनों ने मेरी टांगों पर अपनी चूतें और पेट और सीने, पर अपनी चूचियाँ फिसलाते हुए ऊपर नीचे फिसलना चालू कर दिया। उनकी रस चूआती हुई चूतों को तो वैसे भी किसी लुब्रिकेंट की जरूरत नहीं थी।दोनों बिलकुल मेरे चेहरे की तरह ही अपनी एक एक चूची से मेरे सीने और पेट की मालिश करती रहीं।दोनों ने अपने अपने निपल्स को पकड़ कर मेरे निपल्स पर रगड़ा तो मेरी सीत्कार निकाल गई।  फिर मैंने सोनू की तरफ करवट ले कर उसे हल्की पकड़ से अपनी बाहों मे भर लिया। वो मेरी बाहों के घेरे के अंदर ही रहते हुए अपने दोनों बूब्स मेरे सीने और पेट पर रगड़ती रही। जब भी मुझे ज्यादा दबाव चाहिए होता, मैं अपनी पकड़ टाइट कर लेता और फिर ढीली छोड़ देता। ज्यादा प्यार आता तो उसे टाइटली दबोच कर किस्स करने लगता, होंठों,गालों को चूसने लगता। मेरी पकड़ ढीली होती तो फिर से ऊपर नीचे हिलने लगती। उधर पिंकू मेरी पीठ की साइड पर अपना पराक्रम दिखा रही थी। ऊपर नीचे हो कर अपनी चूचियों से मेरी पीठ मालिश भी कर रही थी और मेरी पीठ पर चूमा चाटी भी कर रही थी। कई बार तो उसने शरारत मे ज़ोर से काट भी लिया। 
थोड़ी देर बाद मैंने करवट बदली और पिंकू की तरफ मुंह कर लिया। अब सोनू मेरी पीठ पर और पिंकू मेरे सीने पर अपनी छातियाँ रगड़ने लगीं। आलोएवेरा जेल जल्दी सूख जाता है। सोनू पिंकू की छातियों पर बार बार जेल मलना पड़ रहा था।अब मैंने वही मज़ा पिंकू को अपनी बाँहों के घेरे मे ले कर लिया। वो तो खुद ही उत्तेजना मे बही जा रही थी, जोरों से मुझसे चिपक चिपक कर अपनी चूचियां मेरे सीने से और पेट से रगड़ रही थी, मानो मेरा मसाज कम बल्कि अपनी चूचियों की खुजली ज्यादा मिटा रही हो। साथ ही साथ पूरे जोश से मेरे मुंह मे जीभ घुसेड़ घुसेड़ के डीप किसिंग कर रही थी। सोनू भी अपनी आदत के विपरीत पूरे जोश से साथ देने की कोशिश कर रही थी। उसकी यह कोशिश देख कर उस पर प्यार भी आ रहा था, लेकिन सेक्स के खेल में पिंकू का मुक़ाबला कर  मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 
अब पिंकू ने उठ कर मुझे चित लिटाते हुए मेरे लंड को अपनी चूचियों के बीच मे दबा दबा कर उसका मसाज करना शुरू करा।मैंने भी सोनू को अपने ऊपर खींच कर उसकी चूचियों को पीना शुरू करा। कभी बाईं को चूसता तो कभी दायीं को। कभी दोनों निपल्स एक साथ मुंह मे ले कर चुभलाने लगता। अब तो सोनू भी अपनी झिझक का लबादा उतार कर काफी फ्रैंक हो कर अपने हाथों से अपनी चूचियाँ पकड़ पकड़ कर मुझे ओफर कर रही थी और ओह्ह्ह अह्ह्हह्ह उईईईईईई  जैसी आवाज़े निकाल रही थी। अब जब चूची चुसायी की कमान सोनू ने सम्हाल ही ली थी , तो मैंने अपने हाथों का उपयोग पिंकू के बोबों की मदद करने मे किया। अपने हाथो से भींच भींच कर उनको अपने लंड पर रगड़ने लगा। 
कुछ देर बाद दोनों ने पोजीशन बदल लीं। अब सोनू के बोबे मेरे लंड पर तो पिंकू की चूचियाँ मेरे मुंह मे थीं। पिंकू अपनी सदाबहार मस्ती मे मेरे मुंह को अपनी चूचियों से रगड़ रही थी। अपनी चूचियों को मेरे मुंह मे ठूँसे दे रही थी और आवाज़े निकाल रही थी उई ईई ईई ईए आह्ह्ह...... उधर सोनू भी भरपूर अपनी तरफ से भरसक अपनी चूचियों को मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैंउसके भरे भरे उरोजों को अपनी मुट्ठियों मे भर के अपने लंड पर रगड़ता रहा।
थोड़ी देर बाद  दोनो मेरी साइड्स में बैठ गईं और ब्लाइंड टारगेट गेम खेलते हुए मेरी नाभि का निशाना लगाना चालू करा।जहां पिंकू निशाना लगते ही पूरे जोश के साथ मेरी नाभि को चूसने लगती और जीभ घुसा घुसा कर रगड़ती, वहीं सोनू अपनी बारी आने पर पूरी नजाकत के साथ पहले अपने होंठों से फीदर टच चुम्बन लेती, फिर हल्के हल्के चाटती और चूमती। में तो जन्नत की सैर कर रहा था। 
अब दोनों अपनी पोजिशन बदल कर उल्टी लेट गईं।उन्होने अपनी चूचियों से मेरी टांगों की और चूतों से मेरे बदन की साइड्स की मालिश शुरू करी। अब उनकी रस छलकाती चूतों और साथ ही साथ गांड़ के छेदों का दर्शन मुझे प्राप्त हो रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों की उँगलियाँ अलोवेरा जेल मे डूबा कर उनके गुदा द्वारों मे प्रवेश करा दीं। दोनों ने उऽऽहू... सीऽऽई जैसी आवाज़ें निकालीं और थोड़ा ठिठक सी गईं। मैंने उन्हें अपना काम जारी रखने को बोला और अपनी उँगलियों से उनकी ऐनल फकिंग करता रहा। थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं उनके हिप्स को भी छातियों के समान ही मींजता, मसलता रहता। 
फिर दोनों ने पोजीशन बदलते  हुए, मेरे लौड़े को अपनी चूचियों के घेरे में ले कर दाएं बाएं हिलना शुरू करा। अब उनकी चूचियां आपस में भी घिस रही थीं और चार चार बोबों के बीच में मेरा लन्ड कुछ कुछ अज़ीम-ओ-शान शहँशाह के अंदाज़ मे खड़ा था।
 अब तो एक दूसरे की चूचियों का स्पर्श और साथ ही साथ मेरे लौड़े का घर्षण इन दोनों को ही डबल उत्तेजना दे रहा था। मेरा तो हाल तो वैसे ही बुरा हो रक्खा था। अब तो उह्ह्ह्ह आःह्ह्ह उईईईए सीईईई आईई हम तीनों की ही सिसकारियां माहौल को मादक बना रही थीं। मेरे लिए अब खुद पर काबू रखना मुश्किल था। मेरे मुंह से  आआह्ह्ह्ह्ह  की तेज आवाज़ के साथ आखिर मेरा लावा एक ज्वालामुखी के समान उबल उबल कर बाहर आने लगा। जोश इतना ज्यादा था की बूंदों ने दोनों की चूचियों के साथ साथ  मुंह और नाक तक सराबोर कर डाले। सोनू और पिंकू ने एक दूसरे की चूचियों और चेहरों को चाट चाट कर साफ किया और फिर दोनों ने मेरे लौंडे और बाल्स को भी चाट चूस कर साफ किया। 
इस तरह मेरी जीत का इनाम वसूल हुआ। 
अब तक शाम के चार बज रहे थे। हम लोगों ने एक साथ शावर लिया और कुछ ही दिनों बाद आने वाली होली साथ साथ मनाने के वादे के साथ एक दूसरे से विदा ली। पिछले करीब 24-30 घंटे के फलाहार और बदन तोड़ मैराथन सेक्स के बाद मैं भी संतुलित डिनर ले कर एक गहरी नींद लूँगा। इस तरह तरोताज़ा हो कर अब हम लोग अपनी अपने प्रॉफेश्नल लाइफ मे व्यस्त हो जाएंगे। 
अब इस कहानी की सीक्वेल “सोनू और पिंकू के साथ पाँसों का खेल “ मे मैं लिखुंगा की कैसे मैंने और पिंकू ने शर्मीली सोनू की कुँवारी गांड का उदघाटन किया और उसने भी इसका  कैसे भरपूर आनंद लिया। 
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