Free Sex Kahani जालिम है बेटा तेरा
03-28-2020, 12:13 PM,
#71
RE: Free Sex Kahani जालिम है बेटा तेरा
रास्ते में अनीता-- कितनी कड़ाके की ठंडी हैं दीदी, जान ना निकल जाए ऐसी ठंडी में।

सुनीता-- अरे, अनीता जान तो मेरी तब निकाल जाएगी जब मेरा बेटा अगर मुझे देख कर नजरअंदाज करने लगेगा।

अनीता-- अरे दीदी आप भी ना.... ऐसा कुछ नहीं होगा भला एक बेटा अपनी मां से कब तक नाराज़ rahega।

सुनीता-- भगवान करे तेरी बात सच निकले.... क्युकी कल से ही मेरी ममता उजड़ती हुई दिख रही है.... अगर कहीं ऐसा हुआ ना की मेरा बेटा मुझसे अगर नाराज़ रहेगा तो मैं तो जहर खा लूंगी।

अनीता--- तुम भी कैसी बात कर रही हो दीदी ऐसा कुछ नहीं होगा.... सब फिर पहले जैसा हो जाएगा....।
और यही कहते हुए वो दोनो रास्तों पर तेजी से चलने लगते है.....।

03-28-2020, 12:13 PM,
#72
RE: Free Sex Kahani जालिम है बेटा तेरा
सुबह सुबह.... कल्लू उठा तो देखा उसकी मां मालती अभी भी उसके बगल में नंगी लेटी थी.... क्युकी रात भर कल्लू ने मालती की जम कर चुड़ाईई की थी....।
मालती की बड़ी बड़ी चूचियां देख एकबार फिर से कल्लू की लंड में खून की लहर दौड़ती है..... और उसके हाथ सीधा मालती की बड़ी बड़ी चूचियों पर कसते

और इधर मालती भी जैसे ही उसके चूचियों पर कुछ महसूस होता है उसकी आंख खुल जाती है....।

मालती--- आह.... बेशरम। रात भर तो किया अभी मन नहीं भरा तेरा।
कल्लू-- तू चाहती है कि मेरा मन तुझसे भर जाए.... और फिर उसने मालती की चूचियों को कस कर दबा दिया।

मालती--- आ..... नहीं.. रे लेकिन अभी रात भर आई... अम्मा.... तो फाड़ दिया चोद चोद कर।

कल्लू-- तेरी तो मै ऐसे ही फादुंगा.... और जब मन करेगा तब चोदूंगा साली...।

मालती--- आ... मै मना कहा... आ... कर रही हूं, लेकिन थोड़ा आ..... नहीं... नहीं... बेटा दर्द हो... रहा है....।

ये मालती की जो चिखे थी , कल्लू ने अब तक अपना लन्ड उसकी बूर में पेल चुका था और उछल उछाल कर मालती को चोद रहा था।

कल्लू--- साली मुझे पता है, तुझे कोई दर्द वर्द्द नहीं होता.... तू सिर्फ नाटक करती है... ले madarchod अपने बेटे का लंड कूतिया.... फाड़ डालूंगा तेरी बूर चोद चोद कर...।

मालती भी खेली खाई हुई औरत..... दे , बेटा और अन्दर दे अपना लंड मेरी बूर... अा.... ह... चोद दे... बड़ा मज़ा आता है.... जब खुद का बेटा .... आह वहीं बूर में लंड पेले जिसमें से वो निकला है.... आह बेटा... चोद दे जोर जोर से चोद बेटा।

ऐसी बाते सुन कर कल्लू का तो जैसे खून ही गरम हो गया और वो ऐसे झटके देने लगा की मालती की बूर से फाच्च फाच फच की आवाज़ से पूरा कमरा गूंजने लगा....।

कल्लू--- कुति या..... सली तेरी बूर को चोद चोद कर इसका बड़ा भोसड़ा ना बना दिया तो मै असली madarchod nahi सल ई..... गया मै.....।

मालती...- हा ... हा मै भी गई।
और फिर कल्लू का एक जोर का धक्का फिर दोनों जन्नत की सैर करके वापस ज़मीन पर अा गिरते है.... और हाफ्ते हुए एक दूसरे से लिपटे रहते है.....

थोड़ा समय बीतने के बाद........

मालती--- उठिए जनाब.... घर का पूरा काम बचा हैं.... आपको तो सिर्फ चोदना है मुझे दिन रात..... काम तो पूरा मै करू।


कल्लू कुछ बोलता इससे पहले ही उसे बाहर किसी ने आवाज़ दी...।

कल्लू अरे वो कल्लू........।

कल्लू और मालती हड़बड़ आहत में उठ कर अपने कपड़े पहनते हैं और फिर घर का दरवाज़ा खोलते हैं.....।

कल्लू--- अरे, पप्पू तू क्या हुआ...।
पप्पू कल्लू का दोस्त है जो उसके साथ कपड़े विपदे धोने का काम करता है.....

पप्पू-- अरे तेरे लिए खुसखबरी लाया हूं...।

कल्लू-- कैसी खुस्खबरी जल्दी बता...?
पप्पू--- अरे तेरा दुश्मन... जो कभी तेरा जिग्री यार था।
कल्लू-- कौन सोनू?
पप्पू--- हा सोनू।
कल्लू-- क्या बात है बोल?

पप्पू-- बात क्या है.... पड़ा है अस्पताल में....।
ये सुन मालती और कल्लू दोनों की हालत खराब हो जाती हैं....।
03-28-2020, 12:13 PM,
#73
RE: Free Sex Kahani जालिम है बेटा तेरा
कल्लू--- के.. क्या हुआ उसे?
पप्पू-- अरे कुछ भी हो... है तो तेरे लिए खुशी की बात ना....।
कल्लू को इतना सुनना था कि वो गुस्से में लाल एक जोर का तमाचा पप्पू के गाल पे जड़ देता है और अपनी साइकिल उठा कर अस्पताल की तरफ चल देता है.........

इधर सुनिता अनिता के साथ अस्पताल पहुचं चुकी थी, वो सिधा सोनू के वार्ड में जाती जहां सोनू के पास पहले से ही पारूल बैठी उससे बात कर रही थी।

पारुल-- अरे सुनीता जी इतनी सुबह सुबह आ गयी आप?
सुनीता-- जी डाक्टर साहीबा, वो खाना ले कर आना था ना इसलीये।

पारुल-- अच्छा कीया, क्यूकीं सोनू का दवा खाने का टाइम भी हो गया।

सुनीता खाने का डीब्बा खोल कर सोनू को दे देती है, सोनू अपनी मुडीं निचे कीये खाना खाने लगता है, अनीता राजू को खाना देने वार्ड से बाहर राजू के पास थी और पारुर पेशेंट को देखने दुसरे वार्ड में चली जाती है।

सोनू चुपचाप खाना खा रहा था और सुनीता उसके बगल में बैठी उसे निहारे जा रही थी......

सुनीता-- वो.....मुझे लगा तुम्हे आलू के पराठे बहुत पसदं है तो आज यही बना कर लायी......अब पता नही ठीक से बना भी है या नही।

सुनिता अनायास ही ऐसे बोली जबकी खाने में आलू का पराठा था ही नही...

सोनू-- पता नही लोग मुझे चुतीया क्यूं समझते है, शायद मैं हू इसलिये।

सुनीता-- क.....कौन समझता है तुम्हे चुतीया?

सोनू-- अभी तो तू ही समझ रही है।
सुनीता-- हाय रे दइया...भला मैं क्यूं तुम्हे चुतीया समझने लगी?

सोनू-- आलू का पराठा कहां है खाने में दीखा मुझे...अब तू चुतीया नही तो क्या समझ रही है मुझे?

सुनिता-- वो....तो मैं ऐसे ही बोल दीया क्यूंकी तुम मुझसे बात नही कर रहे थे।

सोनू-- क्यूं मैं तेरा मरद हूं क्या जो तुझसे बात करु।

सुनीता-- क्यू क्या एक औरत से उसका मरद ही रुठता है क्या बेटा भी तो रुठ जाता है, तो मनाना तो पड़ता ही है ना..।

सोनू कुछ नही बोलता और चुपचाप खाना खाता है.....

सुनीता-- मुझे पता है मैने गलती की है...और मैने जानबुझ कर नही कीया वो थोड़ा गुस्से में हो गया।

सोनू कुछ नही बोलता और चुपचाप खाना खाता है....खाना खतम कर सोनू वापस बेड पर लेट जाता है तभी पारुल आ जाती है...

पारुल--अरे सोनू पहले दवा खा लो फीर आराम से सोना।
सोनू दवा खाता है और फीर बेड पर लेट जाता है।
सुनीता-- डाक्टर साहीबा सोनू को घर कब ले जा सकते है...
पारुल-- सुनीता जी वैसे तो सोनू अब ठीक है, लेकीन आज यही रहने दो कल सुबह डीसचार्ज कर दुगीं॥
सुनीता-- ठीक है डाक्टर साहीबा...अरे लेकीन आज तो सरपंच के यहा उनकी तेरही है आप नही गयी भोज में॥

पारूल-- अरे सुनीता जी कार्यक्रम तो शाम को है तो शाम को जाउगीं॥
सुनीता-- जी डाक्टर साहीबा.......

अब तक सोनू आराम से सो चुका था। उसका भोला चेहरा देखते हुए सुनीता ने मन ही मन कहा हे भगवान तेरा लाख लाख शुक्र है जो मेरा बेटा मुझसे नाराज नही है.....और फीर वार्ड से बाहर चली जाती है क्यूकीं सोनू सो चूका था......।



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03-28-2020, 10:16 PM,
#74
RE: Free Sex Kahani जालिम है बेटा तेरा
Awesome मजा आ गया but स्टोरी अधूरी मत छोड़ना पूरी जरूर करना


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