Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
12-13-2020, 02:37 PM,
#21
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
अगले दिन, जैसा मैंने सोचा था, उन सभी लड़कियों ने आकर मेरा लंड एक-एक करके चूसा और मेरा वीर्य भी पिया, इसके लिए हमने अलग से दो - दो हजार रूपए चार्ज किये, फिर मैंने उनकी चूत भी चाटी, और हर रोज़ की तरह रात को ऋतू की चूत भी मारी.
अगले एक महीने तक हमने तरह तरह से, कभी मेरे दोस्तों ने ऋतू की चूत चाटकर और कभी मैंने ऋतू की सहेलियों की चूत चाटकर और अपना लंड चुस्वाकर लगभग अस्सी हज़ार रूपए जमा कर लिए...
*****

अब छुट्टियों पर जाने का टाइम आ गया था, हमारे पास काफी पैसे जमा हो चुके थे, इसलिए अब हम एन्जॉय करना चाहते थे, और जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब हम सब एक साथ अपनी कार में बैठे और जंगल कैंप की तरफ निकल पड़े.
हम सब कार में बैठ कर केम्प की तरफ चल दिए , हम सब बड़े अक्साईटेड थे, वहां तक का सफ़र ६ घंटे का था, काफी भीड़ थी वहां, पहाड़ी इलाका था, सभी कारें लाइन में अन्दर जा रही थी, पापा ने गेट से अपने केबिन की चाबी ली और हम आगे चल पड़े, पापा ने बताया की उनके अजय की फॅमिली भी उनके साथ उसी केबिन में रहेगी , वो हमेशा उनके साथ 2 बेडरूम वाले केबिन में ही रहते थे, इस बार हमारी वजह से पापा ने 3 बेडरूम वाला केबिन लिया था, हम अन्दर पहुंचे तो मैं वहां का मैनेजमेंट देख कर हैरान रह गया, एक छोटी पहाड़ी पर बने इस जंगल केम्प में तक़रीबन 90 -100 केबिन बने हुए थे, काफी साफ़ सफाई थी, हर केबिन एक दुसरे से काफी दूर था, इनमे 1 ,2 ,3 बेडरूम वाले कमरे थे, बीच में एक काफी बड़ा stage था, जिसमे शायद मनोरंजन के प्रोग्राम और बोन्फायर आदि होते थे, पहाड़ी इलाके की वजह से काफी ठंड थी, हम अपने काबिन पहुंचे, वहां पहले से ही अजय चाचा की फॅमिली बैठी थी, चाचा की उम्र तक़रीबन ४० के आसपास थी, कान के ऊपर के बाल हलके सफ़ेद थे, गठीला शरीर और घनी मूंछे, उनकी wife आरती की उम्र तकरीबन 36 -37 के आसपास थी, वो काफी भरे हुए शरीर की औरत थी, काफी लम्बी, अपने पति की तरह, इसलिए मोटी नहीं लग रही थी, साथ ही हमारी चचेरी बहन 18 साल की नेहा भी थी, वो शरीर से तो काफी जवान दिख रही थी पर जब बातें करी तो पाया की उसमे अभी तक काफी बचपना है.!
हम सबने एक दुसरे को विश किया और अन्दर आ गए, पापा ने पहला रूम लिया दूसरा अजय अंकल ने..पापा ने मुझे और ऋतू से कहा की तीसरा रूम हमें एक साथ शेयर करना पड़ेगा क्योंकि वहां इससे बड़ा कोई केबिन नहीं था, मैंने मासूमियत से कहा.."नो प्रॉब्लम डैड, हम मैनेज कर लेंगे " और ऋतू की तरफ देख कर आँख मार दी.
हम सबने अपने सूटकेस खोले और कपडे चेंज करके बाहर आ गए, शाम हो चुकी थी , बड़े स्टेज के चारों तरफ खाने का इंतजाम किया गया था, हर तरह का खाना था, हमारा ग्रुप आया हमने पेट भरकर खाना खाया और मैं ऋतू को लेकर टहलने के लिए निकल गया, मम्मी पापा, और अजय अंकल की फॅमिली वहीँ अपने दुसरे दोस्तों से बातें करने में व्यस्त थे.
हमने पूरा इलाका अच्छी तरह से देखा, ठंड बड़ रही थी, इसलिए हम वापिस केबिन की तरफ चल दिए, आये तो पाया की वो सब भी अन्दर आ चुके हैं, और ड्राइंग रूम में बैठे बीयर पी रहे हैं.
मैंने पहली बार मम्मी को भी पीते हुए देखा, पर उन्होंने ऐसा शो किया की ये सब नोर्मल है. हम सभी वहीँ थोड़ी देर तक बैठे रहे और बातें करते रहे,पापा ने हमें बताया की नेहा भी हमारे रूम में रहेगी, दोनों लडकियां एक बेड पर और मैं एक्स्ट्रा बेड पर सो जाऊंगा, हमने कोई रिएक्शन नहीं दिया, नेहा पहले ही जाकर हमारे रूम में सो चुकी थी, फिर तक़रीबन एक घंटे बाद सबको नींद आने लगी और सभी एक दुसरे को गुड नाईट करके अपने-२ रूम में चले गए, रास्ते में मैंने ऋतू से नेहा के बारे में विचार जानने चाहे तो उसने कहा..."बच्ची है...देख लेंगे." और हंसने लगी.
अपने रूम में जाकर मैंने ऋतू से कहा "मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा की इन्होने हमें एक ही रूम में सोने के लिए कहा है , इससे बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता था"
ऋतू : "हाँ...सच कह रहे हो, हम अब एक दुसरे के साथ पूरी रात ऐश कर सकते हैं"
मैं : "पर इसका क्या करें ?" मैंने नेहा की तरफ इशारा करके कहा.
"देख लेंगे इसको भी...पर पहले तो तुम मेरी प्यास बुझाओ..." और वो उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी और अपनी टांगे मेरी कमर के चारो तरफ लिपटा ली और मेरे होंठो पर अपने सुलगते हुए होंठ रख दिए...मैंने अपना सर पीछे की तरफ झुका दिया और उसके गद्देदार चूतडों पर अपने हाथ रखकर उसे उठा लिया, ऋतू की गरम जीभ मेरे मुंह के अन्दर घुस गयी और मुझे आइसक्रीम की तरह चूसने लगी, मैंने उसके नीचे के होंठ अपने दांतों के बीच फ़सा लिए और उन्हें चूसने और काटने लगा,...आज हम काफी उत्तेजित थे, मैंने एक नजर नेहा की तरफ देखा , वो बेखबर सो रही थी, मैंने दरवाजा पहले ही बंद कर दिया था, मैं ऋतू को किस करता हुआ बेड की तरफ गया और पीठ के बल लेट गया, नेहा एक कोने में उसी बेड पर सो रही थी, हमारे पास काफी जगह थी, मैंने अपने हाथ बढाकर ऋतू के मुम्मो पर रख दिए..वो कराह उठी.
आआआआआअह ......mmmmmmm .......दबऊऊऊऊऊऊओ इन्हीईईईई ........aaaaaaaaaahhhhh
मैंने उसकी टी शर्ट उतार दी, उसके ब्रा में कैद चुचे मेरी आँखों के सामने झूल गए, मैंने उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाया, काली ब्रा में गोरी चूचियां गजब लग रही थी, मैंने गौर से देखा तो उसके निप्पलस ब्रा में से भी उभर कर दिखाई दे रहे थे, मैंने अपने दांत वहीँ पर गड़ा दिए और उसका मोती जैसा निप्पल मेरे मुंह में आ गया, ऋतू ने हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा भी खोल दी, वो ढलक कर झूल गयी, मैंने अपना मुंह फिर भी नहीं हटाया, अब उसकी झूलती हुई ब्रा और निप्पल पर मैं मुंह लगाए बैठा था, ऋतू की आँखें उन्माद के मारे बंद हो चुकी थी उसने मेरा मुंह अपनी छाती पर दबा डाला...मेरे मुंह में आने की वजह से उसकी ब्रा भी गीली हो चुकी थी.
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12-13-2020, 02:37 PM,
#22
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
गीलेपन की वजह से ऋतू के शारीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गयी, उसने मेरे मुंह को जबरदस्ती हटाया और बीच में से ब्रा को हटाकर फिर से अपना चुचा पकड़कर मेरे मुंह में ठूस दिया, जैसे एक माँ अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए करती है, वैसे ही उसने अपना निप्पल मेरे मुंह में डाल दिया , मैंने और तेजी से उन्हें चुसना और काटना शुरू कर दिया..
मैंने एक हाथ नीचे किया और पलक झपकते ही उसकी जींस के बटन खोल कर उसे नीचे खिसका दिया, जींस के साथ-२ उसकी पेंटी भी उतर गयी और उसकी चूत की खुशबू पुरे कमरे में फैल गयी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दो, वो ऐसे अन्दर गयी जैसे मक्खन में गर्म छुरी...वो मचल उठी और उसने अपने होंठ फिर से मेरे होंठो पर रख दिए और चूसने लगी, एक हाथ से वो मेरी जींस को उतारने की कोशिश करने लगी, मैंने उसका साथ दिया और बेल्ट खोलकर बटन खोले, वो किसी पागल शेरनी की तरह उठी और बेड से नीचे उतर कर कड़ी हो गयी, अपनी जींस पूरी तरह से उतारी, मेरी जींस को नीचे से पकड़ा और बाहर निकाल फेंका, मेरा लंड स्प्रिंग की तरह बाहर आकर खड़ा हो गया, वो नीचे झुकी और मेरा पूरा लंड निगल गयी और चूसने लगी, उसकी व्याकुलता लंड को चूसते ही बनती थी, मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे अपनी तरफ घुमा कर 69 की अवस्था में लिटा लिया, मेरा मुंह उसके रस से भर गया, उसका एक ओर्गास्म हो चूका था, मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत चाटी, मैं भी झड़ने के करीब था, पर मैं पहले उसकी चूत का मजा लेना चाहता था, मैंने उसे फिर से घुमाया और अपनी तरफ कर के उसकी गीली चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया,.....वो चिल्लाई...आआआआआआआअय्य्य्यीईईइ ......चूत काफी गीली थी पर उसके टाईट होने की वजह से अभी भी अन्दर जाने में उसे तकलीफ होती थी...पर मीठी वाली.
मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू किये, उसकी चूचियां मेरे मुंह के आगे उछल रही थी किसी बड़ी गेंद की तरह, मैं हर झटके के साथ उसके निप्प्लेस को अपने मुंह में लेने की कोशिश करने लगा अंत में जैसे ही उसका निप्पल मेरे मुंह में आया...वो झटके दे-देकर झड़ने लगी...और मेरे दाई तरफ लुडक गयी, मैंने अपना लंड निकाला और अब उसके ऊपर आ गया और फिर अन्दर डालकर उसे चोदने लगा...मैंने नोट किया की इस तरह से स्टॉप एंड स्टार्ट तकनीक का सहारा लेकर आज मेरा लंड काफी आगे तक निकल गया... मैंने करीब 5 मिनट तक उसे इसी अवस्था में चोदा, वो एक बार और झड गयी, मैं भी झड़ने वाला था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकालना चाहा उसने मुझे रोक दिया और अपनी टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट दी और बोली..."आज अन्दर ही कर दो...." मैं हैरान रह गया पर इससे पहले की मैं कुछ पूछ पाता, मेरे लंड ने पानी उगलना शुरू कर दिया, उसकी ऑंखें बंद हो गयी और चेहरे पर एक अजीब तरह का सकूँ फ़ैल गया, मैंने भी मौके की नजाकत को समझते हुए पुरे मजे लिए और उसकी चूत के अन्दर अपना वीर्य खाली कर दिया, और उसके ऊपर लुडक गया.
उसकी टांगे अभी भी मुझे लपेटे हुए थी, मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया, मेरा हाथ बगल में सो रही चचेरी बहन नेहा से जा टकराया, मैंने सर उठा कर देखा तो वो अभी भी सो रही थी, और काफी मासूम से लग रही थी, ना जाने मेरे मन में क्या आया, मैंने अपना एक हाथ बड़ा कर उसके चुचे पर रख दिया, वैसे तो वो सिर्फ १५ साल की थी पर उसके उभार काफी बड़े थे, मुझे ऐसे लगा कोई रुई का गुबार हो, मैंने नोट किया की उसने ब्रा नहीं पहनी थी ये महसूस करते ही मेरे लंड ने ऋतू की चूत में पड़े-पड़े एक अंगडाई ली, मेरे नीचे मेरी नंगी बहन पड़ी थी और मैं पास में सो रही चचेरी बहन नेहा के चुचे मसल रहा था.......
मैं उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गया, ऋतू भी मेरे पीछे आ गयी और मेरे सामने नंगी पोट पर बैठ कर मुतने लगी, वो मुझे लंड साफ़ करते हुए देखकर होले -२ मुस्कुरा रही थी, मैंने टॉवेल से लंड साफ़ किया और बाहर आ गया, मैंने अपनी शोर्ट्स पहनी, टी शर्ट उठाई और पहनकर दीवार पर लगे छोटे से शीशे के आगे आकर अपना चेहरा साफ़ करने लगा, शीशा थोडा छोटा और गन्दा था, मैं थोडा आगे हुआ और अपने हाथ से उसे साफ़ करने लगा, मेरे हाथ के दबाव की वजह से वो हिल गया और उसका कील निकल कर गिर गया, मैंने शीशे को हवा में लपककर गिरने से बचाया, मैंने देखा देखा शीशे वाली जगह पर एक छोटा सा होल है, मैं आगे आया और गौर से देखने पर मालूम चला की दूसरी तरफ भी एक शीशा लगा हुआ है पर शीशे के उलटी तरफ से देखने की वजह से वो पारदर्शी हो गया था , और इस वजह से मैं दुसरे कमरे में देख पा रहा था, वो कमरा अजय चाचा का था. वो खड़े हुए अपनी बीयर पी रहे थे.
अब तक ऋतू भी बाथरूम से वापिस आ चुकी थी, और कपडे पहन रही थी, मैंने उसे इशारे से अपनी तरफ बुलाया, वो आई और मैंने उसे वो शीशे वाली जगह दिखाई, वो चोंक गयी और जब सारा माजरा समझ आया तो हैरानी से बोली..."ये तो चाचा का कमरा है ..क्या वो हमें देख पा रहे होंगे."
मैं :"नहीं, ये शीशे एक तरफ से देखने वाले और दूसरी तरफ से पारदर्शी है...ये देखो" और मैंने उसे अपने रूम का शीशा दोनों तरफ से दिखाया.
उसके चेहरे के भाव बदलते देर नहीं लगी और उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और बोली..."ह्म्म्म तो अब तुम अपनी बहन के बाद चाचा के कमरे की भी जासूसी करोगे...."
"चोरी छुपे देखने का अपना ही मजा है" मैंने कहा!!
वो हंस पड़ी और हम दुसरे कमरे में देखने लगे.
अब चाचा बेड के किनारे पर खड़े हुए अपने कपडे उतार रहे थे, उन्होंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी और सिर्फ अंडर्वीयर में ही बैठ गए, आरती चाची बाथरूम से निकली और चाचा के सामने आकर खड़ी हो गयी, उन्होंने नाईट गाउन पहन रखा था, अजय ने अपना मुंह चाची के गुदाज पेट पर रगड़ दिया और उसके गाउन की गाँठ खोल दी, चाची ने बाकी बचा काम खुद किया और गाउन को कंधे से गिरा दिया, नीचे उसने सिर्फ पेंटी पहन राखी थी, चाची के मोटे-२ चुचे बिलकुल नंगे थे और अजय के सर से टकरा रहे थे, मैंने इतने बड़े चुचे पहली बार देखे थे..मेरे मुंह से वाउ निकल गया.
ऋतू जो मेरे आगे खड़ी हुई थी उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी....और बोली "वाह...आरती आंटी की ब्रेस्ट कितनी बड़ी और सुंदर है..तुम्हारी तो मनपसन्द चीज है न इतनी बड़ी चूचियां..है ना ??" मैंने सिर्फ हम्म्म्म कहा और दोबारा वो हीं देखने लगा.
मेरा लंड अब फिर से खड़ा हो रहा था और ऋतू की गांड से टकरा रहा था.
अजय ने आरती की कच्छी भी उतार दी और उसे पूरा नंगा कर दिया...क्या चीज है यार...मैंने मन ही मन कहा, चाची का पूरा शरीर अब मेरे सामने नंगा था, उसकी बड़ी-२ गांड, हलके बालों वाली चूत और बड़ी-२ चूचियां देखकर मेरा इस कमरे में बुरा हाल था, अजय ने ऊपर मुंह उठाकर चाची का एक चुचा मुंह में ले लिया और उसे चबाने लगा, चूस वो रहा था और पानी मेरे मुंह में आ रहा था.
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12-13-2020, 02:37 PM,
#23
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चाची थोड़ी देर तक अपने चुचे अजय से चुसवाती रही और खड़ी हुई मचलती रही, फिर उसने अजय को धक्का देकर लिटा दिया और उसका अंडर्वीयर एक झटके से निकाल फैंका, उसका लंड देखकर अब ऋतू के मुंह से वाउ निकला...वो काफी बड़ा था, मेरे लंड से भी बड़ा और मोटा, काले रंग का था, उसकी नसे चमक रही थी, चाची ने अजय का लंड अपने मुंह में डाला और उसे चूसने लगी, अजय ने अपनी ऑंखें बंद कर ली और मजे लेने लगा, आरती के मोटे-२ चुचे झटको से ऊपर नीचे हो रहे थे, आधी बैठने की वजह से उसकी गांड बाहर की तरफ उभर कर काफी दिलकश लग रही थी...मैं तो उसके भरे हुए बदन का दीवाना हो गया था.
अचानक अजय के रूम का दरवाजा खुला और मेरी माँ कमरे में दाखिल हुई, मैं उन्हें एकदम देखकर हैरान रह गया, उन्होंने नाईट गाउन पहन रखा था, पर उन्हें आरती को अजय का लंड चूसते देखकर कोई हैरानी नहीं हुई, आरती ने सर उठा कर माँ को देखा तो वो भी बिना किसी हैरानी के उन्हें देखकर मुस्कुरा दी और फिर से लंड चूसने में लग गयी.
जितना हैरान मैं था, उतनी ही ऋतू भी, वो मुंह फाड़े उधर देख रही थी, और फिर हैरानी भरी आँखों से मेरी तरफ देखा और आँखों से पूछा ये क्या हो रहा है ...मैंने अपने कंधे उचका दिए और सर हिला दिया ...मुझे नहीं मालुम कहने के स्टाइल में...
हमने वापिस अन्दर देखा, माँ अब बेड पर जाकर उनके पास बैठ गयी थी, वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे और हमारी माँ, चाची को अजय चाचा का लंड चूसते हुए देख रही थी...मेरा तो दिमाग चकरा रहा था, की ये सब हो क्या रहा है.
अब अजय उठा और मेरी माँ को देखकर मुस्कुराते हुए घूमकर नीचे बैठ गया और आरती को अपनी वाली जगह पर वैसे ही लिटा दिया, मेरी माँ ने भी अजय को निहारा और एक मोहक सी स्माइल दी , चाचा ने अपना मुंह आरती की सुलगती हुई चूत पर लगा दिया...
आआआआआआआआआआआआआअह्ह्ह..म्मम्मम्मम्म ......आआआआआआआह्ह्ह
पूरा कमरा चाची की गरम आह से गूंज उठा...मेरी माँ आगे आई और बेड पर आधी लेट गयी और अपने हाथ से चाची के बालों को सहलाने लगी, अजय पूरी तन्मन्यता से चाची की चूत चाट रहा था, अचानक उन्होंने एक हाथ बढाकर मेरी माँ के गाउन में डाल दिया, मेरी हैरानी की कोई सीमा न रही जब मेरी माँ ने अजय को रोकने के बजाय अपनी टाँगे थोड़ी और चोडी कर ली और अजय के हाथ को अपनी चूत तक पहुचने में मदद की....मैं ये देखकर सुन्न रह गया.
मेरी माँ पूर्णिमा अब चाची के बगल में उसी अवस्था में लेट गयी और अपनी ऑंखें बंद कर ली. और फिर उन्होंने अपने गाउन को खोला और अपने सर के ऊपर से घुमा कर उतार दिया और अब वो भी चाची की तरह बेड पर उनकी बगल में नंगी लेती हुई थी.
मैंने पहली बार अपनी माँ को नंगा देखा था.
मैं उनके बदन को देखता रह गया, अब समझ आ रहा था की ऋतू किसपर गयी है, साफ़ सुथरा रंग, मोटे और गोल गोल चुचे, ऋतू से थोड़े बड़े पर आरती से छोटे, और उनपर पिंक कलर के निप्पल्स, अलग ही चमक रहे थे.
उनका सपाट पेट, जिसपर ऑपरेशन के हलके मार्क्स थे, और उसके नीचे उनकी बिलकुल साफ़ और चिकनी बिला बालों वाली चूत. हालांकि हम दुसरे कमरे में थे पर उनकी चूत की बनावट काफी साफ़ दिखाई दे रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो कर फुप्कारने लगा. जो ऋतू की गांड ने महसूस किया. उसने अपनी गांड का दबाव पीछे करके मेरे लंड को और भड़का दिया.
अजय अपनी पत्नी की चूत चाट रहा था और अपनी भाभी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उन्हें मजा दे रहा था, पुरे कमरे में दो औरतों की हलकी-२ सिस्कारियां गूंज रही थी. फिर अजय ने अपना चूत में भीगा हुआ सर उठाया और अपनी भाभी की चूत पर टिका दिया.
वो एकदम उछल पड़ी और अपनी ऑंखें खोलकर अजय को देखा और उसके सर के बाल हलके से पकड़ कर उसे अपनी चूत में दबाने लगी. अजय दुसरे हाथ से चाची की चूत को मजा दे रहा था. मुझे और ऋतू को विश्वास नहीं हो रहा था की हमारी माँ इस तरह की हो सकती है, मेरे मन में ख्याल आया की पता नहीं पापा को इसके बारे में कुछ मालुम है के नहीं की उनकी बीबी उन्हीके छोटे भाई के साथ मस्ती कर रही है और अपनी चूत चटवा रही है.
पुरे कमरे में सेक्स की हवा फैली हुई थी.
मैंने घडी की तरफ देखा, रात के 11 :30 बज रहे थे, नेहा सो रही थी, मैं और ऋतू अजय चाचा के रूम में बीच से बने रोशनदान से देख रहे थे, और हमारी माँ अपने देवर अजय और देवरानी आरती के साथ नंगी पलंग पर लेटी मजे ले रही थी.
मेरा दिमाग सिर्फ ये सोचने में लगा हुआ था की मम्मी ये सब अजय चाचा के साथ कब से कर रही है, चाची को इससे कोई परेशानी क्यों नहीं है, और पापा को क्या इस बारे में कुछ भी मालुम नहीं है ?
पर मुझे मेरे मेरे सभी सवालों का जवाब जल्दी ही मिल गया.
पापा कमरे में दाखिल हुए, बिलकुल नंगे..उनका लंड खड़ा हुआ था और वो सीधे बेड के पास आये और नंगी लेटी हुई आरती चाची की चूत में अपना लंड पेल दिया..
मेरी और ऋतू की हैरानी की सीमा न रही.
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12-13-2020, 02:37 PM,
#24
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
उनका लंड अपने छोटे भाई की पत्नी जो बहु के सामान होती है की चूत मैं अन्दर बाहर हो रहा था. अब मुझे सब समझ आ रहा था, ये लोग हर साल यहाँ इकठ्ठा होते हैं और ओर्गी करते है, एक दुसरे की बीबी और पति से मजा लेते हैं, मैंने wife /husband स्वेपिंग के बारे में और ग्रुप सेक्स के बारे में सुना था, आज देख भी रहा था, पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था की मैं ये सब अपने ही परिवार के साथ होते हुए देखूंगा.
मेरा लंड ये सब देखकर अकड़ कर दर्द करने लगा था, मैंने अपनी शोर्ट्स गिरा दी और अपने लंड को हाथों में लेकर, माँ की चूत पर अजय चाचा का चेहरा देखकर, हिलाने लगा.
उधर ऋतू के तो होश ही उड़ गए थे, अपने पापा का लम्बा, गोरा और जानदार लंड देखकर...पर जल्दी ही वो भी सब कुछ समझते हुए , हालात के मजे लेने लगी थी और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर जा लगा और दूसरा हाथ घुमा कर मेरे लंड को पीछे से पकड़ लिया और मेरे से और ज्यादा चिपक गयी..
आशु देखो तो जरा, पापा का लंड कितना शानदार है.... वो था भी शानदार, चाचा के लंड जितना ही बड़ा .....पर गोरा चिट्टा.
चाची की चूत में मेरे पापा का लंड जाते ही वो गांड उछाल -२ कर चुदवाने लगी, पापा ने अपने हाथ उसके मोटे-२ चूचो पर टिका दिए और मसलने लगे, फिर थोडा झुके और उनके दायें चुचे पर अपने होंठ टिका दिए....मेरे आगे खड़ी ऋतू ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे पापा वो सब उसके साथ कर रहे है, क्योंकि वो उनके ताल के साथ-२ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी और पापा द्वारा चाची के चुचे पर मुंह लगते ही वो भी सिहर उठी और अपनी चूत से हाथ हटाकर अपने निप्प्ल्स को उमेठने लगी, उसने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और अब वो अपने आगे झूलते हुए मोटे-२ चूचो को एक-२ करके दबा रही थी और लम्बी -२ सिस्कारियां ले रही थी.
मैं समझ गया की उसको पापा का लंड पसंद आ गया है....जैसे मुझे मम्मी का बदन और उनकी चूत पसंद आ गयी है.
मम्मी ने अपनी ऑंखें खोली और उठ कर बैठ गयी, उसने अजय चाचा के चेहरे को पकड़ कर उठाया और बड़ी व्याकुलता से अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए, फिर तो कामुकता का तांडव होने लगा बेड पर...अजय चाचू माँ के होंठ ऐसे चूस रहे थे जैसे उन्हें कच्चा ही चबा जायेंगे, उनके मुंह से तरह-२ की आवाजें आ रही थी, माँ ने चाचा के चेहरे पर लगे अपने रस को सफा चट कर दिया, उनकी घनी मूंछो से ढके होंठो को वो चबा रही थी, बीच-२ में उनकी मूंछो पर भी अपनी लम्बी जीभ फिरा रही थी, अजय से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने माँ को दोबारा लिटा दिया और अपना तन्तनाता हुआ लंड पेल दिया गीली-२ चूत में..आआआआऐईईईइ marrrrrrrrrrr गयीईई ...माँ धीरे से चिल्लाई...
aaaaaaaaaaammmm aurrrrrrrrrrrrrrrr jorrrrrrrrrrrrrr सीईईईईईईईई ajayyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh
मेरा तो बुरा हाल हो रहा था अपनी माँ को चुदते हुए देखकर.
पापा भी अपनी पूरी स्पीड में थे. ऋतू की नजरें पापा के लंड से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी. अचानक चाची ने पापा के लंड को अपनी चूत में से निकाल दिया और बेड पर उलटी हो कर कुतिया की तरह बैठ गयी..
पापा ने अपना चेहरा चाची की गांड से चिपका दिया, मैंने नोट किया की पापा आरती चाची की चूत नहीं गांड का छेद चाट रहे है....मेरी उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी, पापा उठे और अपने लंड को चाची की गांड के छेद से सटाया और आगे की तरफ धक्का मारा..
चाची तो मजे के मारे दोहरी हो गयी....उसकी गांड में पापा का लंड फ़चाआअक की आवाज के साथ घुस गया. वो अब चाची की गांड मार रहे थे, दोनों के चेहरे देख कर यही लगता था की उन्हें इसमें चूत मारने से भी ज्यादा मजा आ रहा है.
ये देखकर ऋतू की सांसे तेज हो गयी और उसने अपने हाथों की गति मेरे लंड पर बड़ा दी और अपनी गांड को पीछे करके टक्कर मारने लगी.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#25
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
उसने अपने दुसरे हाथ से अपनी स्कर्ट उतार दी, नीचे उसने पेंटी नहीं पहनी थी, अब उसके गोल चुतड मेरे लंड के सुपाडे से टकरा रहे थे. वो उत्तेजना के मारे कांप रही थी, ऐसा मैंने पहली बार देखा था, वो थोडा झुकी और अपनी गांड को फैला कर अपने हाथ दीवार पर टिका कर खड़ी हो गयी, और मेरे लंड को पीछे से अपनी चूत पर टिका दिया....मैंने एक हल्का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी रसीली चूत में जा घुसा....mmmmmmmmmmmm......ऋतू ने अपनी ऑंखें बंद करली और पीछे होकर तेजी से धक्के मारने लगी, फिर तकरीबन 5 मिनट बाद अचानक उसने मेरा लंड निकाल दिया और उसे पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर टिका दिया..
मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा...
"प्लीज़ ........मेरी गांड में अपना लंड daaalooooo " मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई उसे ना कहने की.
मैंने ऋतू की चूत के रस से भीगा हुआ अपना लंड उसकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और एक करारा झटका मारा, आआआआआआआअह्ह्ह्ह .......marrrrrrrrrrrrrrrrrrrr गयी.............मैंने उसके मुंह में अपनी उंगलियाँ डाल दी ताकि वो ज्यादा न चिल्ला पाए, वो उन्हें चूसने और काटने लगी. उसके मुंह की लार ने मेरी साड़ी उंगलियाँ गीली कर दी और मैंने वोही गीला हाथ उसके चेहरे पर मल कर उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया.
मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था, मैंने उसे बाहर निकाला और अगली बार और ज्यादा तेजी से अन्दर धकेल दिया....वो पहले झटके से उबर भी नहीं पायी थी की दुसरे ने तो उसकी गांड ही फाड़ दी..वो थोड़ी देर के लिए नम सी हो गयी, उसका शरीर एकदम ढीला हो गया और वो मेरे हाथों में लटक सी गयी...उसका ओर्गास्म हो चूका था.
वहां दुसरे रूम में पापा ने अपनी स्पीड बड़ा दी और जोर से हुंकारते हुए अपना टैंक आरती चाची की चूत में खाली कर दिया...
चाची अपनी मोटी गांड मटका-२ कर पापा का रस अन्दर ले रही थी, उनका चेहरा हमारी तरफ था, और वो अपने मुंह में अपनी उँगलियाँ डाले चूस रही थी,,,जैसे कोई लंड हो.
अजय चाचू भी लगभग झड़ने के करीब थे, उन्होंने एक झटके से मेरी माँ को ऊपर उठा लिया जैसे कोई गुडिया हो और खड़े-२ उन्हें चोदने लगे.
माँ ने अपने हाथ चाचू की गर्दन के चारो तरफ लपेट लिए थे और टांगे उनकी कमर पर.
तभी उन्होंने एक जोर का झटका दिया और अपने रोकेट जैसी वीर्य की धारें मेरी माँ की चूत में उछाल दी. माँ भी झड़ने लगी, हवा में लटकी हुई.
उनकी चूत में से चाचा का रस टपक कर नीचे गिर रहा था. चाचू के पैरों पर..
मैंने माँ को झड़ते देखा तो मेरा लंड भी जवाब दे गया और मैंने भी अपना वीर्य अपनी बहन की कोमल गांड में डाल दिया, अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को पकड़ा और दबा दिया. ऋतू ने अपनी कमर सीधी करी और अपने एक हाथ को पीछे करके मेरे सर के पीछे लगाया और अपने होंठ मुझसे जोड़ दिया, मेरा लंड फिसल कर उसकी गुदाज गांड से बाहर आ गया और उसके पीछे-२ मेरा ढेर सारा रस भी बाहर निकल आया.
हम फ्रेंच किस कर रहे थे.
उसने ऑंखें खोली और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखकर थैंक्स बोली....पर तभी पीछे देखकर वोही ऑंखें फैल कर चोडी हो गयी.
हमारी चचेरी बहन नेहा उठ चुकी थी और हमारी कामुकता का नंगा नाच ऑंखें फाड़े देख रही थी.
मैंने जब पीछे मुड कर देखा तो नेहा हम भाई बहन को नंगा देखकर हैरान हुई खड़ी थी, उसकी नजर मेरे लटकते हुए लंड पर ही थी.
मैंने अपने लंड को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश की पर उसकी फैली हुई निगाहों से बच नहीं पाया
" ये तुम दोनों क्या कर रहे हो....?" नेहा ने हैरानी से पूछा
" तुम्हे क्या लगता है नेहा, हम लोग क्या कर रहे हैं" ऋतू ने बड़े बोल्ड तरीके से नंगी ही उसकी तरफ जाते हुए कहा.
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया, की ऋतू ये क्या कह रही है और क्यों.
"मम्मउ झे sss लगता है की तुम....दोनो ssss ...गन्दा काम कर रहे थे...." नेहा ने हकलाते हुए कहा.
ऋतू : "गंदे काम से तुम्हारा क्या मतलब है .."
नेहा : "वोही जो शादीsss के बाद करतेsss है..." उसका हकलाना जारी था.
ऋतू : "तुम कैसे जानती हो की ये गन्दा काम है...शादी से पहले या बाद में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, ये तो सभी करते है और खूब एन्जॉय करते हैं"
नेहा : "पर तुम दोनों तो भाई बहन हो, ये तो सिर्फ लवरस या पति पत्नी करते है"
ऋतू : "हम्म्म्म काफी कुछ मालुम है तुम्हे दुनिया के बारे में, अपने घर के बारे में भी कुछ मालुम है के नहीं"
नेहा :"क्या मतलब ??"
ऋतू : "यहाँ आओ और देखो यहाँ से.."
ऋतू ने उसे अपने पास बुलाया और ग्लास वाले एरिया से देखने को बोला.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#26
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
नेहा पास गयी और अन्दर देखने लगी, अन्दर देखते ही उसके तो होश ही उड़ गए, उसके मम्मी पापा हमारे मम्मी पापा यानि उसके ताऊ और ताई जी के साथ नंगे एक ही पलंग पर लेते थे.अब तक दुसरे रूम में सेक्स का नया दौर शुरू हो चूका था.
मेरी माँ अब जमीन पर बैठी थी और नेहा के पापा का लम्बा लंड अपने मुंह में डाले किसी रंडी की तरह चूसने में लगी थी.
मेरे पापा भी आरती चाची को उल्टा करके उनकी गांड पर अपने होंठ चिपका दिए और उसमे से अपना वीर्य चूसने लगे.
ऋतू ने आगे आकर नेहा के कंधे पर अपना सर टिका दिया और वो भी दुसरे कमरे में देखने लगी. और नेहा के कान में फुसफुसाकर बोली : "देखो जरा हमारी फॅमिली को, तुम्हारे पापा मेरी माँ की चूत मारने के बाद अब उनके मुंह में लंड डाल रहे हैं और तुम्हारी माँ कैसे अपनी गांड मेरे पापा से चुसवा रही है, इसी गांड में थोड़ी देर पहले उनका मोटा लंड था."
नेहा अपने छोटे से दिमाग में ये सब समाने की कोशिश कर रही थी की ये सब हो क्या रहा है.
उसकी उभरती जवानी में शायद ये पहला मौका था जब उसने इतने सारे नंगे लोग पहली बार देखे थे. मैंने नोट किया की नेहा का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया है.
"जब हमारे पेरेंट्स ये सब एक दुसरे के साथ खुल कर कर सकते हैं तो हम क्यों पीछे रहे" ऋतू ने अपना तर्क दिया.
"पर ये सब गलत है " नेहा देखे जा रही थी और बुदबुदाये जा रही थी.
"क्या गलत है और क्या सही अभी पता चल जाएगा...." और ऋतू ने आगे बढकर मेरा मुरझाया हुआ लंड पकड़कर नेहा के हाथ में पकड़ा दिया. उसके पुरे शरीर में एक करंट सा लगा और उसने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे और ऋतू को हैरानी से देखने लगी.
"देखो मैं तुम्हे सिर्फ ये कहना चाहती हूँ की जैसे वहां वो सब और यहाँ हम दोनों मजे ले रहे हैं, क्यों न तुम भी वो ही मजे लो..." ऋतू बोली और फिर से मेरा उत्तेजित होता हुआ लंड उसके हाथ में दे दिया.
इस बार उसने लंड नहीं छोड़ा और उसके कोमल से हाथों में मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया. उसका छोटा सा हाथ मेरे लम्बे और मोटे लंड को संभाल पाने में असमर्थ हो रहा था , उसने अपना दूसरा हाथ आगे किया और दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया.
मैं समझ गया की वो मन ही मन ये सब करना चाहती है पर खुल के बोल नहीं पा रही है, अपनी तरफ से तो ये साबित कर रही है की इन्सेस्ट सेक्स बुरा है पर अपनी भावनाओ को रोक नहीं पा रही है.
ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैंने आगे बढकर एक दम से उसके ठन्डे होंठो पर अपने गरम होंठ टिका दिए. उसकी आंखे किस करते ही फ़ैल गयी, पर फिर वो धीरे-२ मदहोशी के आलम में आकर बंद हो गयी.
मैंने इतने मुलायम होंठ आज तक नहीं चूमे थे..एकदम ठन्डे, मुलायम, मलाई की तरह. मैंने उन्हें चुसना और चाटना शुरू कर दिया, नेहा ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया.
उसने भी मुझे किस करना शुरू किया, मैं समझ गया की वो स्कूल में किस करना तो सीख ही चुकी है, वो किसी एक्सपर्ट की तरह मुझे फ्रेंच किस कर रही थी, अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर, मेरी जीभ को चूस रही थी..
अब मेरे लंड पर उसके हाथों की सख्ती और बढ़ गयी थी. ऋतू नेहा के पीछे गयी और उसके मोटे-२ चुचे अपने हाथों में लेकर रगड़ने लगी. नेहा ने अपनी किस तोड़ी और अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी, मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर टिका दी, वो सिसक उठी...स्स्सस्स्स्सस्स्सम्मम्मम्म .........नाआआआअ .......
ऋतू की उँगलियों के बीच उसके निप्प्ल्स थे, नेहा मचल रही थी हम दोनों भाई बहिन के नंगे जिस्मो के बीच.
नेहा अपनी छोटो गांड पीछे करके उससे ऋतू की चूत दबा रही थी. नेहा ने आत्मसमर्पण कर दिया था. हम दोनों के आगे और अपनी उत्तेजना के सामने.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#27
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
मैंने अपने हाथ नेहा के चुचे पर टिका दिए. वाउ ...क्या चुचे थे.ये ऋतू से थोड़े छोटे थे पर ऐसा लगा जैसे उसने अपनी टी शर्ट के अन्दर संतरे छुपा रखे हैं, उसने ही बड़े और मुलायम. ऋतू ने नेहा की टी शर्ट पकड़ कर ऊपर उठा दी.
उसने काली रंग की ब्रा पहन राखी थी. गोरे चुचे उसके अन्दर फँस कर आ रहे थे, शायद ब्रा छोटी पड़ रही थी, इन कबूतरों के लिए.
मैंने हाथ पीछे करके उसके कबूतरों को उसकी ब्रा से आजाद कर दिया और वो फडफडा कर बाहर आ गए., वो इतने छोटे भी नहीं थे जितना मैंने सोचा था, बिलकुल उठे हुए, ब्राउन निप्प्ल्स, निप्प्ल्स के चारों तरफ फैला काले रंग का एरोहोल..बिलकुल अनछुए चुचे थे. मैंने आगे बढकर अपना मुंह उसके दायें निप्पल पर रख दिया.
aaaaaaaaaaaahh ये क्याsssssssssssssss उसने मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह को अपने सीने पर दबा दिया. वो अपनी गोल आँखों से मुझे अपने चुचे चाटते हुए देख रही थी, और मेरे सर के बाल पकड़कर मुझे कण्ट्रोल कर रही थी, वो मेरे सर को कभी दायें चुचे पर रखती और कभी बाएं पर...मैंने अपने दांतों से उसके लम्बे निप्प्ले को जकड लिया और जोर से काट खाया.... आआआआआआआह्ह्ह उसने एक दो झटके लिए और फिर वो नम हो गयी,
मेरे चूसने मात्र से ही उसका ओर्गास्म हो गया था, मैंने चुसना जारी रखा. उसके दानो से मानो बीयर निकल रही थी, बड़े नशीले थे उसके बुबे..मैंने उनपर जगह-२ काट खाया, चुब्लाया, चूसा, और उसकी पूरी छाती पर लाल निशाँ बना दिए.
ऋतू ने पीछे से उसकी कैपरी भी उतार दी और नीचे बैठ कर उसकी कच्छी के लास्तिक को पकड़ कर नीचे कर दिया, वो भी अब मदर्जात नंगी थी.
मेरे मन में ख्याल आया की मात्र १० मीटर के दायरे में दो परिवार पुरे नंगे थे. भाई-बहन-चचेरी बहन, जेठ-छोटी भाभी, देवर-भाभी....की जोडियाँ नंगे एक दुसरे की बाँहों में सेक्स के मजे ले रहे थे.
मेरी बाँहों में मेरी चचेरी बहन नंगी खड़ी थी, और उसके पीछे मेरी सगी बहन भी नंगी थी.. मेरा लंड पिछले दो घंटो में तीसरी बार खड़ा हुआ फुफकार रहा था और अपने कारनामे दिखाने के लिए उतावला हुए जा रहा था . उसे कुंवारी चूत की खुशबु आ गयी थी.
मैंने अपना एक हाथ नीचे करके नेहा की चूत पर टिका दिया. वो रस से टपक रही थी, मैंने अपनी बीच की ऊँगली उसकी चूत में डालनी चाही पर वो बड़ी टाईट थी, मैंने उँगलियों से उसका रस समेटा और ऊपर करके उन्हें चूस लिया, बड़ा मीठा रस था, ऋतू ने मुझे ये सब करते देखा तो लपककर मेरा हाथ पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया और बचा हुआ रस चाटने लगी..म्म्म्मस्स्स्स...इट्स tastyyyyyyy ....
नेहा के चेहरे पर एक गर्वीली मुस्कान आ गयी उसने अपनी ऑंखें खोली और मेरा हाथ अपनी चूत पर रखकर रगड़ने लगी, मैं समझ गया की लोंडिया गरम हो चुकी है. मेरी नजर दुसरे कमरे में चल रहे खेल पर गयी.
वहां मेरी माँ तो अपने देवर का लंड ऐसे चूस रही थी जैसे कोई गन्ना..
अजय चाचू ने मेरी माँ को वहीँ जमीन पर लिटाया और लंड समेत उनके मुंह पर बैठ गए...ले साली....चूस मेरे लंड को.......चूस छिनाल भाभी ....मेरे लंड कूऊऊओ.......आआआआआह्ह्ह ....
वो अपने टट्टे मेरी माँ के मुंह में ठुसने की कोशिश कर रहे थे...माँ का मुंह थोडा और खुला और लंड निकाल कर वो अब गोटियाँ चूसने लगी...चाचू का लंड उनकी नाक के ऊपर लेटा हुआ फुफकार रहा था.
उनकी लार से पूरा चेहरा गीला हो चूका था....ले साआआआआली .....चुसे इन्हीईईए.....आआआआआह्ह्ह्ह मेरी माँ की आँखों से आंसू निकल आये इतनी बर्बरता से चाचू उनका मुंह चोद रहे थे.. मेरे पापा अपने छोटे भाई के कारनामे देखकर मुस्कुरा रहे थे, पर अपनी पत्नी को भाई के द्वारा humilate होते देखकर वो भी थोडा भड़क गए.
उन्होने अपना गुस्सा उन्होंने उसकी पत्नी आरती के ऊपर निकाला...उन्होंने आरती की टांगो को पकड़ा और उसे हवा में शीर्सासन की मुद्रा में अपनी तरफ मुंह करके उल्टा खड़ा कर दिया और टांगे चोडी करके उनकी चूत पर अपने दांत गडा, वो अपनी चूत पर इतना हिंसक प्रहार बर्दाश्त ना कर पाई और उसके मुंह से सिसकारी निकल गयी....आआआआआआआआअह्ह्ह...भेन चोद्द्दद्द्द......क्याकर रहा है........आआआआआआह्ह्ह्ह धीईरे ssssssss
आआआआआआह्ह्ह्ह चाअतूऊऊ ..पर वो अपनी गांड हिला रही थी यानि उसको पापा का उनपर भारी पढ़ने से ज्यादा मजा आ रहा था...
तभी मेरे पापा ने अपने लंड को आरती चची के मुंह की तरफ करके पेशाब कर दिया.....उनकी धार सीधे आरती चाची के उलटे और खुले मुंह में जा गिरी....कुछ उनकी नाक में भी गयी और वो खांसने लगी...मुझे ये देखकर बड़ी घिन्न आई...पर मैंने नोट किया की आरती चाची को इसमें मजा आ रहा है...वो खूब एन्जॉय कर रही थी.
अपनी बीबी से बदला लेते देखकर अजय अंकल मेरे पापा की तरफ देखकर हंसने लगे.. और मेरी माँ पर और बुरी तरह से पिल पड़े.
वो दोनों भाई एक दुसरे की बीबियों की बुरी तरह से लेने में लगे हुए थे. मैं और मेरी बाकी दोनों बहने मेरे साथ ये सब देख रही थी और एक दुसरे के नंगे जिस्म सहला रही थी.
अब नेहा के लिए कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया. उसने मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मेरे होंठो को पागलो की तरह चूसने लगी, शायद अपने मम्मी पापा के कारनामे उसे उत्तेजित कर रहे थे.
ऋतू ने नीचे बैठ कर नेहा की लार टपकाती चूत पर अपना मुंह रख दिया..
उसकी चूत की leakage बंद हो गयी... नेहा की चूत पर हलके -२ गोल्डेन कलर के रोंये थे.
वो अभी जवानी की देहलीज पर भी नहीं पहुंची थी और और चूत के रस को अपनी बहन के मुंह में डाल कर मजे ले रही थी. ऋतू चटकारे ले-लेकर उसकी चूत साफ़ करने लगी. वो नीचे से उसकी चूत चूस रही थी और मैं ऊपर से उसके होंठ. ऋतू ने अपनी जीभ नेहा की चूत में घुसा दी, उसकी चिकनाई से वो अन्दर चली गयी, और फिर अपनी दो उंगलियाँ भी उसके अन्दर डाल दी. वो मचल उठी और मेरी जीभ को और तेजी से काटने और चूसने लगी. मैंने अपने पंजे उसकी छाती पर जमा दिए, उसपर हो रहा दोहरा अटैक उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
ऋतू ने धक्का देकर हम दोनों को बेड पर ले जाकर गिरा दिया.
मैंने अब गौर से नेहा का नंगा जिस्म बेड पर पड़े हुए देखा, उसका मासूम सा चेहरा, मोटे-२ चुचे, पतली कमर और कसे हुए चुतड, मोती टांगे और कसी हुई पिंडलियाँ, देखकर मैं पागल सा हो गया और उसे ऊपर से नीचे तक चूमने लगा, मैं चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुंचा और गीली-२ चूत को अपने मुंह से चाटने लगा, उसका स्वाद तो मैं पहले ही चख चूका था, अब पूरी कडाही में अपना मुंह डाले मैं उसका मीठा रस पी रहा था.
ऋतू ने दूसरी तरफ से नेहा को किस करना शुरू किया और उसके होंठो पर अपने होंठ रगड़ने लगी. मुझे कुछ हो रहा है iii .......कुछ करूऊऊऊ............नेहा बद्बदाये जा रही थी.
ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैं समझ गया की वो घडी आ चुकी है. मैंने उठ कर अपना लंड उसके रस से चोपड़ कर उसकी छोटी सी चूत के मुंहाने पर रखा. ऋतू ने मेरा लंड पकड़ा और उसे नेहा की चूत के ऊपर नीचे रगड़ने लगी. और फिर एक जगह फिक्स कर दिया और बोली....भाई...थोडा धीरे करना...छोटी है अभी.. मैंने कुछ नहीं कहा और अपने लंड का जोर लगाकर अपना सुपदा उसकी चूत में धकेल दिया.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#28
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
उसकी तो बुरी हालत हो गयी.....नाआआआआआआअ.......निकाआआआआआआअल्ल्लूऊओ मुझे नहीईइ कर्नाआआआअ.......मैं थोडा रुका, ऋतू ने नेहा को फिर से किस किया और उसके चुचे चुसे, वो थोडा नोर्मल हुई, मैंने अगला झटका दिया, उसका पूरा शरीर अकड़ गया मेरे इस हमले से, मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और उसकी झिल्ली से जा टकराया, वो चीख पड़ती अगर ऋतू ने उसके होंठो पर अपने मुंह की tape न लगाई होती. मैंने लंड पीछे खींचा और दुबारा और तेजी से अन्दर डाल दिया, मेरा लंड उसकी झिल्ली को चीरता हुआ अन्दर जा घुसा , मैंने अपने लंड पर उसके गर्म खून का रसाव महसूस किया, उसकी छोटी सी चूत फट चुकी थी. मैंने सोचा भी नहीं था की चूत इतनी टाईट भी हो सकती है, वो मेरे नीचे पड़ी चटपटा रही थी, ऋतू ने उसके दोनों हाथों को पकड़ा हुआ था और उसे किस करे जा रही थी. मैंने लंड बाहर खींचा और धीरे -२ अन्दर बाहर करने लगा, थोड़ी ही देर में उसके कुल्हे भी मेरे लंड के साथ-२ हिलने लगे.
अब उसे भी मजा आ रहा था...साआले....जान ही निकाआल दी तुने तूऊ....अब देख क्या रहा है...जोर से चोद मुझे भेन चोद.... सालाआआ कुत्ताआआआ ...चोद मुझीईईईए.........आआआआआआआआह्ह्ह्ह उसकी गरम चूत मेरे लंड को जकड़े हुए थी, मेरे लिए ये सब बर्दाशत करना अब कठिन हो गया और मैंने अपना वीर्य अपनी छोटी सी कुंवारी बहन की चूत में उड़ेल दिया....वो भी झटके लेकर झड़ने लगी और मैं हांफता हुआ अलग हो गया.
उसकी चूत में से मेरा रस और खून बाहर आने लगा.
नेहा थोड़ी डर गयी पर ऋतू ने उसे समझाया की ये सब तो एक दिन होना ही था और उसे बाथरूम मे ले गयी साफ़ करने के लिए, और बेड से चादर भी उठा ली धोने के लिए.
मैं भी उठा और छेद से देखा की अन्दर का माहोल भी लगभग बदल चूका है मेरे पापा आरती चाची की चूत में लंड पेल रहे थे और मेरी माँ अजय चाचू के ऊपर उनके लंड को अन्दर लिए उछल रही थी. मेरी माँ ने नीचे झुककर चाचू को चूमा और झड़ने लगी, चाचू ने भी अपने हाथ मेरी माँ की मोटी गांड पर टिका दिए और अपना रस अन्दर छोड़ दिया.
पापा ने भी जब झड़ना शुरू किया तो अपना लंड बाहर निकाला और चाची के मुंह पर धारें मारने लगे, वो नीचे पेशाब वाले गीले फर्श पर लेटी थी, उनकी हालत एक सस्ती रंडी जैसी लग रही थी. शरीर पेशाब से गीला और चेहरा मेरे पापा के रस से...
थोड़ी देर लेटने के बाद मेरी माँ अपनी जगह से उठी और आरती चाची के पास आकर उनके चेहरे पर गिरा मेरे पापा का रस चाटने लगी, बड़ा ही कामुक दृश्य था, आरती का चेहरा चाटने के साथ-२ मेरी माँ उन्हें चूम भी रही थी, फिर चाची ने मेरी माँ को भी किस करना चुरू कर दिया और उनके उभारों को चूसते हुए नीचे की तरफ जाने लगी और उनकी चूत पर पहुँच कर अपनी जीभ अन्दर डाल दी और वहां पड़े अपने पति के रस को खोद खोदकर बाहर निकालने लगी, माँ ने भी अपना मुंह चाची की चूत पर टिका कर उसे साफ़ करना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में दोनों ने एक दुसरे को अपनी-2 जीभ से चमका दिया. फिर मेरे मम्मी पापा अपने रूम में चले गए और चाचू-चाची नंगे ही अपने बिस्तर में घुस गए.
ऋतू और नेहा भी वापिस आ चुकी थी, नेहा थोड़ी लड़खड़ा कर चल रही थी, उसकी मासूम चूत सूज गयी थी मेरे लंड के प्रहार से. ऋतू ने उसे पेनकिलर दी और नेहा उसे ले कर सो गयी, मैं भी घुस गया उन दोनो के बीच एक ही पलंग में और रजाई ओढ़ ली..मजे की बात ये थी की हम तीनो नंगे थे.
*****

सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गयी और मैंने पाया की नेहा वहीँ शीशे वाली जगह से अन्दर देख रही है, मैंने ऋतू की तरफ देखा, वो सो रही थी, नेहा नंगी खड़ी दुसरे रूम में देख रही थी, मैं उठ कर पास गया और उसके गोल-२ चूतडो पर अपना लंड टिका कर उसके पीछे खड़ा हो गया, उसने मुस्कुराकर पीछे देखा और मुझे जगह देते हुए साइड हो गयी, मैंने अन्दर देखा की चाचू और चाची 69 की अवस्था में एक दुसरे को चूस रहे थे, क्या गजब का सीन था, मैंने मन ही मन सोचा - सुबह-२ इनको चैन नहीं है, और नेहा की तरफ देखा, उसकी साँसे तेजी से चल रही थी, अपने मम्मी पापा को ऐसी अवस्था में सुबह देखकर वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उसकी चूत में से रस बहकर जांघो से होता हुआ नीचे बह रहा था... मैंने मन ही मन सोचा कितना रस टपकाती है साली...उसके होंठ कुछ कहने को अधीर हो रहे थे, उसकी आँखों में एक निमंत्रण था, पर मैंने सोचा चलो इसको थोडा और तड़पाया जाए और मैंने उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और वापिस अन्दर देखने लगा.
अन्दर उन्होंने अपना आसन तोडा और चाची उठ कर चाचू के सामने आ गयी और उनका लंड मुंह में डालकर चूसने लगी.
अजय की आँखें बंद होती चली गयी, आरती किसी रण्डी की तरह चाचू का लंड चूस रही थी, मेरा तो दिल आ गया था अपनी रांड चाची पर. जी कर रहा था की अभी अन्दर जाऊं और अपना लोडा उसके मुंह में ठूस दूं...साली कुतिया.
वहां नेहा काफी गरम हो चुकी थी, वो अपना शरीर मेरे शरीर से रगड़ रही थी, अपने चुचे मेरे हाथों से रगड़ कर मुझे उत्तेजित कर रही थी, मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की और अन्दर ही देखता रहा, पर मेरा लंड मेरी बात कहाँ मानता है, वो तो खड़ा हो गया पूरी तरह. जब नेहा ने देखा की मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ तो वो मेरे सामने आई और मेरे लिप्स पर अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने लगी और अपना पूरा शरीर मुझसे रगड़ने लगी. अब मेरी सहन शक्ति ने जवाब दे दिया और मैंने भी उसे रिप्लाई देना शुरू कर दिया और उसे जोरो से चूसने और चाटने लगा, मैंने अपने हाथ उसके गोल और मोटे चूतडो पर टिकाया और अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डाल दी, वो चिहुंक उठी और उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी, और अपनी टाँगे मेरे चारों तरफ लपेट ली, मेरी ऊँगली उसकी गांड में अन्दर तक घुस गयी, वो उसे जोरो से हिलाने लगी, मेरे मन में उसकी गांड मारने का विचार आया पर फिर मैंने सोचा अभी कल ही तो इसने चूत मरवाई है, इतनी जल्दी गांड भी मार ली तो बेचारी का चलना भी दूभर हो जाएगा, इसलिए मैंने अपनी ऊँगली निकालकर उसकी रस उगलती चूत में डाल दी, वो तो मस्ती में आकर मुझे काटने ही लगी और इशारा करके मुझे बेड तक ले जाने को कहा, मैं उल्टा चलता हुआ बेड तक आया और उसे अपने ऊपर लिटाता हुआ नीचे लेट गया, उससे सहन नहीं हो रहा था.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#29
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
उसने मेरे लंड को निशाना बनाया और एक ही बार में मेरे लंड को अपनी कमसिन चूत में उतारती चली गयी, सुर्र्र्रर्र्र्रर्र्र.की आवाज के साथ मेरा पप्पू उसकी पिंकी के अन्दर घुसता चला गया. म्म्म्मम्म्म्मम्म....आनंद के मारे उसकी ऑंखें बंद होती चली गयी.
पास सो रही ऋतू को अंदाजा भी नहीं था की हम सुबह-२ फिर से चूत लंड खेल रहे हैं.
नेहा मेरा लंड अपने तरीके से अपनी चूत के अन्दर ले रही थी, वो ऊपर तक उठकर आती और मेरे लंड के सुपाडे को अपनी चूत के होंठो से रगडती और फिर उसे अन्दर डालती, इस तरह से वो हर बार पूरी तरह से मेरे लंड को अन्दर बाहर कर रही थी, उसकी चूत के रस से काफी चिकनाई हो गयी थी, इसलिए आज कल जितनी तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि उसे आज मजे आ रहे थे.
उसके बाल्स जैसे चुचे मेरी आँखों के सामने उछल रहे थे, मैंने उन्हें पकड़ा और मसल दिया, वो सिहर उठी और अपनी ऑंखें खोलकर मुझे देखा और फिर झटके से मेरे होंठो को दबोचकर उन्हें अपना अमृत पिलाने लगी.
उसके धक्के तेज होने लगे और अंत में आकर वो जोरो से हांफती हुई झड़ने लगी, मैंने भी अपनी स्पीड बड़ाई और 8 -10 धक्को के बाद मैं भी झड़ने लगा...उसकी कोमल चूत के अन्दर ही.
वो धीरे से उठी और मेरे साइड में लुडक गयी, और मेरा लंड अपने मुंह में डालकर चूसने लगी और उसे साफ़ करके अपनी चूत में इकठ्ठा हुए मेरे रस में उंगलियाँ डालकर उसे भी चाटने लगी. फिर वो उठी और बाथरूम में चली गयी.
मैं थोडा ऊपर हुआ और सो रही नंगी ऋतू के साथ जाकर लेट गया, उसने भी अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया और मुझसे चिपककर सो गयी. मैं बेड पर पड़ा अपनी नंगी बहन को अपनी बाँहों में लिए अपनी किस्मत को सराह रहा था.
9 बजे तक ऋतू भी उठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर मेरे होंठो पर एक मीठी सी पप्पी दी और बोली "गुड मोर्निंग जानू"...जैसे कोई नव-विवाहित अपने पति को बोलती है.
मैंने भी उसे जवाब दिया और चूम लिया. मैंने नेहा को भी उठाया और उसे भी उसी अंदाज में गुड मोर्निंग बोला.
हम जल्दी से उठे और कपडे पहन कर बाहर की तरफ चल दिए, बाहर मम्मी पापा, चाचू-चाची सेंट्रल टेबल पर बैठे न्यूज़ पेपर के साथ-२ चाय पी रहे थे.
हमें देखकर पापा बोले : "अरे बच्चो गुड मोर्निंग, कैसी रही तुम्हारी रात, नींद तो ठीक से आई ना ?"
मैं : "गुड मोर्निंग पापा , हाँ हमें बहुत बढ़िया नींद आई, मैं तो घोड़े बेच कर सोया"
ऋतू : "और मैं भी, मुझे तो सोने के बाद पता ही नहीं चला की मैं हूँ कहा.."
नेहा भी कहाँ पीछे रहने वाली थी :" और मेरा तो अभी भी उठने को मन नहीं कर रहा था, कितनी प्यारी नींद आई कल रात" वो हलके से मुस्कुरायी और हम दोनों की तरफ देखकर एक आँख मार दी.
मम्मी : "अरे इन पहाड़ो पर ऐसी ही नींद आती है...अभी तो पुरे दस दिन पड़े है, अपनी नींद का पूरा मजा लो बच्चों..हा हा .."
मैं : "मम्मी-पापा, हमें इस बात की बहुत ख़ुशी है की इस बार आप लोग हमें भी अपने साथ लाये, थैंक्स ए लोट."
पापा : "यू आर वेल्कम बेटा, चलो अब जल्दी से नहा धो लो और फिर हमें बाहर जाकर सभी लोगो के साथ नाश्ता करना है"
हम सभी नहाने लगे, मेरी पेनी नजरें ये बात पता करने की कोशिश कर रही थी की ये दोनों जोड़े कल रात वाली बात का किसी भी तरह से जिक्र कर रहे है या नहीं...पर वो सब अपने में मस्त थे, उन्होंने कोई भी ऐसा इशारा नहीं किया.
तैयार होने के बाद हम सभी बाहर आ गए और नाश्ता किया, हम तीनो एक कोने में जाकर टेबल पर बैठ गए, वहां हमारी उम्र के और भी बच्चे थे, बात करने से पता चला की वो सभी भी पहली बार इस जगह पर आये हैं, और ये भी की यहाँ की असोसियेशन ने बच्चे लाने की छूट पहली बार ही दी है. हम तीनो ने नाश्ता किया और वहीँ टहलने लगे, ऋतू ने नेहा को गर्भनिरोधक गोलियां दी और उन्हें लेने का तरीका भी बताया. वो भी ये गोलियां पिछले 15 दिनों से ले रही थी, और वो जानती थी की नेहा को भी अब इनकी जरुरत है.
नेहा गोली लेने वापिस अपने रूम में चली गयी, मैं और ऋतू थोड़ी और आगे चल दिए, पहाड़ी इलाका होने की वजह से काफी घनी झाड़ियाँ थी थोड़ी उचाई पर, ऋतू ने कहा की चलो वहां चलते हैं, हम २० मिनट की चढाई के बाद वहां पहुंचे और एक बड़ी सी चट्टान पर पहुँच कर बैठ गए, चट्टान के दूसरी तरफ गहरी खायी थी, वहां का प्राकर्तिक नजारा देखकर मैं मंत्रमुग्ध सा हो गया और अपने साथ लाये डिजिकैम से हसीं वादियों के फोटो लेने लगा.
"जरा इस नज़ारे की भी फोटो ले लो" मेरे पीछे से ऋतू की मीठी आवाज आई
मैंने पीछे मुड कर देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी .....ऋतू उस बड़ी सी चट्टान पर मादरजात नंगी लेटी थी. उसने कब अपने कपडे उतारे और यहाँ क्यों उतारे मेरी समझ में कुछ नहीं आया...उसने अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में डाली और अपना रस खुद ही चूसते हुए मुझे फिर बोली "कैसा लगा ये नजारा....?"
"ये क्या पागलपन है ऋतू, कोई आ जाएगा, यहाँ ये सब करना ठीक नहीं है...." पर मेरा लंड ये सब तर्क नहीं मान रहा था, वो तो अंगड़ाई लेकर चल दिया अपने पुरे साइज़ में आने के लिए.
ऋतू : "कोई नहीं आएगा यहाँ...हम काफी ऊपर हैं अगर कोई आएगा भी तो दूर से आता हुआ दिख जाएगा...और अगर आ भी गया तो उन्हें कोनसा मालुम चलेगा की हम दोनों भाई बहन है, मुझे हमेशा से ये इच्छा थी की मैं खुले में सेक्स के मजे लूं, आज मौका भी है और दस्तूर भी"
मैंने उसकी बाते ध्यान से सुनी, अब मेरे ना कहने का कोई सवाल ही नहीं था, मैंने बिजली की तेजी से अपने कपडे उतारे और नंगा हो गया, मेरा खड़ा हुआ लंड देखकर उसकी नजर काफी खुन्कार हो गयी और उसकी जीभ लपलपाने लगी मेरा लंड अपने मुंह में लेने के लिए..
मैंने अपना कैमरा उठाया और उसकी तरफ देखा, वो समझ गयी और उसने चट्टान पर लेटे-२ एक सेक्सी पोस लिया और मैंने उसकी फोटो खींच ली, बड़ी सेक्सी तस्वीर आई थी, फिर उसने अपनी टाँगे चोडी करी और अपनी उँगलियों से अपनी चूत के कपाट खोले, मैंने झट से उसका वो पोस कैमरे में कैद कर लिया, फिर तो तरह-२ से उसने तस्वीरे खिंचवाई. उसकी रस टपकाती चूत से साफ़ पता चल रहा था की वो अब काफी उत्तेजित हो चुकी थी, मेरा लंड भी अब दर्द कर रहा था, मैं आगे बड़ा और अपना लम्बा बम्बू उसके मुंह में ठूस दिया....
"ले भेन की लोड़ी...चूस अपने भाई का लंड...साली हरामजादी....कुतिया....चूस मेरे लंड को....आज मैं तेरी चूत का ऐसा हाल करूँगा की अपनी फटी हुई चूत लेकर तो पुरे शहर में घुमती फिरेगी...आआआआआअह्ह्ह्ह" उसने मेरी गन्दी गालियों से उत्तेजित होते हुए मेरे लंड को किसी भूखी कुतिया की तरह लपका और काट खाया.
उस ठंडी चट्टान पर मैंने अपने हिप्स टिका दिए और वो अपने चूचो के बल मेरे पीछे से होती हुई मेरे लंड को चूस रही थी, मैंने अपना हाथ पीछे करके उसकी गांड में एक ऊँगली डाल दी....
आआआआआआआअह्ह्ह.म्म्म्मम्म्म्मम्म .उसने रसीली आवाज निकाली, ठंडी हवा के झोंको ने माहोल को और हसीं बना दिया था. मुझे भी इस खुले आसमान के नीचे नंगे खड़े होकर अपना लंड चुस्वाने में मजा आ रहा था.
ऋतू काफी तेजी से मेरे लंड को चूस रही थी, चुसे भी क्यों न, आज उसकी एक सेक्रेट फंतासी जो पूरी हो रही थी.
साआआआआले भेन्चोद.....हरामी कुत्ते.....अपनी बहन को तुने अपने लम्बे लंड का दीवाना बना दिया है....मादरचोद...जी करता है तेरे लंड को खा जाऊं ....आज में तेरा सारा रस पी जाउंगी...साले गांडू...जब से तुने मेरी गांड मारी है, उसमे खुजली हो रही है....भेन के लोडे...आज फिर से मेरी गांड मार...."
मैंने उसे गुडिया की तरह उठाया और अपना लंड उसकी दहकती हुई भट्टी जैसी गांड में पेल दिया.....
आआआआय्य्य्यीईई .......आआआआअह्ह्ह ..........
उसकी चीख पूरी वादियों में गूँज गयी, मैंने उसे चुप करने के लिए अपने होंठ उसके मुंह से चिपका दिए.
आज मुझे भी गाली देने और सुनने में काफी मजा आ रहा था, आज तक ज्यादातर हमने चुपचाप सेक्स किया था, घरवालों को आवाज न सुनाई दे जाए इस डर से, पर यहाँ ऐसी कोई परेशानी नहीं थी इसलिए हम दोनों काफी जोर से सिस्कारियां भी ले रहे थे और एक दुसरे को गन्दी-२ गालियाँ भी दे रहे थे.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#30
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
ले साली कुतिया...हरामजादी...मेरे लंड से चुदवाने के बाद अब तेरी नजर अपने बाप के मोटे लंड पर है....मैं सब जानता हूँ...तू अपनी रसीली चूत में अब अपने बाप का लंड लेना चाहती है...छिनाल.....और उसके बाद चाचू से भी चुदवायेगी...है ना.....और फिर वापिस शहर जाकर मेरे सभी दोस्तों से भी जिनसे अभी तक तुने अपनी चूत ही चटवाई है ...बोल रंडी..."
"हाँ हाँ.....चुद्वुंगी अपने बाप के मोटे लंड से और अपने चाचू के काले सांप से...साले कुत्ते.....तू भी तो अपनी माँ की चूचियां चुसना चाहता है और अपने मुंह से उनकी चूत चाटना चाहता है ....और चाची मिल गयी तो उसकी चूत के परखच्चे उदा देगा तू अपने इस डंडे जैसे लंड से..साला भडवा...अपनी बहन को पूरी दुनिया से चुदवाने की बात करता है...तू मेरे लिए लंड का इंतजाम करता जा और मैं चुदवा-२ कर तेरे लिए पैसो का अम्बार लगा दूंगी..."
ये सब बातें हमारे मुंह से कैसे निकल रही थी हमें भी मालुम नहीं था, पर ये जरूर मालूम था की इन सबसे चुदाई का मजा दुगुना हो गया था.
मेरा लंड अब किसी रेल इंजीन की तरह उसकी कसावदार गांड को खोलने में लगा हुआ था, उसका एक हाथ अपनी चूत मसल रहा था, मेरे दोनों हाथ उसके गोल चूचो पर थे और मैं ऋतू के निप्प्ल्स पर अपने अंगूठे और ऊँगली का दबाव बनाये उन्हें पूरी तरह दबा रहा था.
उसके चुतड हवा में लटके हुए थे और पीठ कठोर चट्टान पर, मैं जमीन पर खड़ा उसकी टांगो को पकडे धक्के लगा रहा था.
"ले चुद साली...बड़ा शोंक है ना खुले में चुदने का..आज अपनी गांड में मेरा लंड ले और मजे कर कुतिया..." मैंने हाँफते हुए कहा.
"मेरा बस चले तो मैं पूरी जिंदगी तेरे लंड को अपनी चूत या गांड में लिए पड़ी रहूँ इन पहाड़ियों पर...चोद साले...मार मेरी गांड...फाड़ दे अपनी बहन की गांड आज अपने मुसल जैसे लोडे से....मार कुत्ते.....भेन के लोडे.....चोद मेरी गांड को...आआआआआआआआअह्ह्ह्ह .. हयीईईईईईईईई .......आआअह्ह्ह्ह.......
उसकी चूत में से रस की धार बह निकली....उसका रस बह कर मेरे लंड को गीला कर रहा था, उसके गीलेपन से और चिकनाहट आ गयी और मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी.....
ले छिनाल......आआआआआआआआह......ले मेरा रस अपनी मोटी गांड में..... आआह्ह्ह......हुन्न्न्नन्न्न्न आआआआआआ,,,,... मेरे मुंह से अजीब तरह की हुंकार निकल रही थी..
मेरा लंड उसकी गांड में काफी देर तक होली खेलता रहा और फिर मैं उसकी छातियों पर अपना सर टिका कर हांफने लगा.उसने मेरे सर पर अपना हाथ रखा और होले-२ मुझे सहलाने लगी....
मेरा लंड फिसल कर बाहर आ गया.
मैंने नीचे देखा तो उसकी गांड में से मेरा रस बहकर चट्टान पर गिर रहा था....उसकी चूत में से भी काफी पानी निकला था, ऐसा लग रहा था की वहां किसी ने एक कप पानी डाला हो...इतनी गीली जगह हो गयी थी.
ऋतू उठी और मेरे लंड को चूस कर साफ़ कर दिया, फिर अपनी गांड से बह रहे मेरे रस को इकठ्ठा किया और उसे भी चाट गयी....मेरी हैरानी की सीमा न रही जब उसने वहां चट्टान पर गिरे मेरे वीर्य पर भी अपनी जीभ रख दी और उसे भी चाटने लगी..और बोली "ये तो मेरा टोनिक है.." और मुझे एक आँख मार दी.
उसे चट्टान से रस चाटते देखकर मेरे मुंह से अनायास ही निकला " साली कुतिया..." और हम दोनों की हंसी निकल गयी.
फिर हम दोनों ने जल्दी से अपने कपडे पहने और नीचे की तरफ चल दिए.
हम दोनों नीचे पहुंचे और वापिस टेबल पर आ कर बैठ गए और भीड़ का हिस्सा बन गए, किसी को भी मालुम नहीं चला की हम दोनों कहाँ थे और हमने क्या किया.
टेबल पर मैंने देखा की दो लडकियां बैठी है, एक ही उम्र की... वो शायद जुड़वाँ बहने थी, क्योंकि उनका चेहरा काफी हद तक एक दुसरे से मिलता था, ऋतू ने उनसे बात करनी शुरू की.
ऋतू : "हाय मेरा नाम ऋतू है..और ये है मेरा भाई अशोक"
"हाय ऋतू, मेरा नाम मोनी है और ये मेरी जुड़वाँ बहिन सोनी" एक लड़की ने बोला.
वो दोनों बातें कर रहे थे और मैं अपनी आँखों से उन्हें चोदने में...मेरा मतलब है तोलने में लग गया..दोनों ने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी, दोनों काफी गोरी चिट्टी थीं, एक सामान मोटी-मोटी छातियाँ, पतली कमर, फैले हुए कुल्हे और स्किन टाईट जींस से उभरती उनकी मोटी-२ टांगे. वो देखने से किसी बड़े घर की लग रही थी. सोनी जो चुपचाप बैठी हुई थी, मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी, मैंने भी उसे स्माईल पास की.
फिर हमने काफी देर तक एक दुसरे से बात की, उन्होंने बताया की वो भी पहली बार यहाँ आई हैं, उनके पापा काफी बड़े बिज़नेसमैन है, उनका कॉटेज सामने ही था, मैंने कुछ सोचकर उनसे कहा चलो हमें भी अपना रूम दिखाओ. और हम उनके साथ चल पड़े, अन्दर जाकर देखा तो वो बिलकुल हमारे कॉटेज जैसा ही था, मैंने शीशे के पास जाकर देखा और उसे थोडा हिलाया, दूसरी तरफ का नजारा मेरे सामने था, मैं समझ गया की यहाँ हर कॉटेज ऐसे ही बना हुआ है, जिसमे शीशा हटाने से दुसरे रूम में देख सकते हैं.
हमने थोड़ी देर बातें करी और वापिस लौट आये. मेरे दिमाग में अलग -२ तरह के विचार आ रहे थे.
शाम को हम सभी बच्चो के लिए रंगा-रंग कार्यक्रम था, हम सब वहां जाकर बैठ गए, थोड़ी देर में ही मैंने पेशाब का बहाना बनाया और वहां से बाहर आ गया, और पास के ही एक कॉटेज में जहाँ से रौशनी आ रही थी, चुपके से घुस गया. ड्राविंग रूम में कोई नहीं था, एक बेडरूम में से रौशनी आ रही थी, मैं उसके साथ वाले रूम में घुस गया, वहां कोई नहीं था, मैंने जल्दी से दिवार पर लगे शीशे को हटाया और दूसरी तरफ देखा, मेरा अंदाजा सही था, वहां भी ओर्गी चल रही थी, २ औरतें और २ मर्द एक ही पलंग पर चुदाई समारोह चला रहे थे.
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