Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
12-13-2020, 02:38 PM,
#31
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
दोनों औरतें काफी मोटी और भरी छाती वाली थी, एक की गांड तो इतनी बड़ी थी की मैं भी हैरान रह गया, वो एक आदमी का लंड चूस रही थी, दूसरी उसकी चूत चाट रही थी और उसकी गांड दूसरा आदमी मार रहा था, पुरे कमरे में सिस्कारियां गूंज रही थी, मैंने जींस से अपना लंड बाहर निकला और मुठ मारना शुरू कर दिया, जो औरत लंड चूस रही थी, वो उठी और मेरी तरफ अपनी मोटी सी गांड करके कुतिया वाले आसन में बैठ गयी, वो आदमी पीछे से आया और अपना थूक से भीगा हुआ लंड उसकी चूत में डाल दिया, दूसरी औरत भी उठी और उसके साथ ही उसी आसन मैं बैठ गयी, और दुसरे आदमी ने अपना मोटा काला लंड उसकी गांड में पेल दिया, दोनो ने एक दुसरे को देखा और ऊपर हाथ करके हाई 5 किया , और एक आदमी दुसरे से बोला "यार तू सही कह रहा था, तेरी बीबी मंजू की गांड काफी टाईट है हा हा"
दुसरे ने जवाब दिया "और तेरी बीबी की चूत भी कम नहीं है, शशि भाभी की मोटी गांड को मारने के बाद इनकी चूत में भी काफी मजा आ रहा है" और दोनों हंसने लगे.
मैंने गौर किया की उनकी बीबियाँ, मंजू और शशि, भी उनकी बातें सुनकर मुस्कुरा रही है...मैंने ये सोचकर की वो दोनों कितने मजे से एक दुसरे की बीबीयों की गांड और चूत मार रहे है, अपने हाथों की स्पीड बड़ा दी. वहां चर्मोस्तर पर पहुँच कर मंजू और शशि की चीख निकली और यहाँ मेरे लंड से गाडा-२ वीर्य उस दीवार पर......
मैंने अपना लंड अन्दर डाला और बाहर निकल गया.
मैंने वापिस पहुँच कर ऋतू को इशारे से बाहर बुलाया, उसे भी प्रोग्राम में मजा नहीं आ रहा था, बाहर आकर मैंने ऋतू को सारी बात बताई.
वो मेरी बात सुन कर हैरान हो गयी, उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था की मैं ऐसे किसी और कॉटेज में घुस गया पर जब चुदाई की बात सुनी तो वो भी काफी अक्साईटेड हो गयी, मैंने उसे अपना प्लान बताया, मैंने कहा की यहाँ कुछ ही लोग अपने बच्चे साथ लाये है, बाकी फैमिलीज़ अकेली हैं, और रोज शाम को प्रोग्रामे के बहाने से बच्चो को बाहर निकाल कर वो अपने रूम में ओर्गी कर सकते है, मैंने उसे कहा की हम रोज किसी भी रूम में घुसकर देखेंगे की वहां क्या हो रहा है, और अगर इस खेल को और भी मजेदार बनाना है तो कुछ और बच्चो को भी इसमें शामिल कर लेते हैं.
ये सब तय करने के बाद हम दोनों वापिस अपने रूम की तरफ आ गए, नेहा वहीँ प्रोग्राम में बैठी थी, अन्दर आकर हमने नोट किया की अजय चाचू के रूम की लाइट जल रही है, मेरे चेहरे पर मुस्कान दौड़ गयी, और हम चुपके से अपने रूम में घुस गए.
शीशा हटाकर देखा तो वासना का वोही नंगा नाच चल रहा था, आरती चाची और मेरी माँ पूर्णिमा नंगी लेटी हुई एक दुसरे को फ्रेंच किस कर रही थी, मेरी माँ की गांड हवा में थी जबकि चाची पीठ के बल लेती हुई अपनी टाँगे ऊपर करे, मेरे पापा का मुसल अपनी चूत में पिलवा रही थी...
मैने ऋतू के कान में कहा "देखो तो साली आरती चाची कैसे चुद्दकड़ औरत की तरह अपनी चूत मरवा रही है ...कमीनी कहीं की...कैसे हमारे बाप का लंड अपनी चूत में लेकर हमारी माँ के होंठ चूस रही है कुतिया...."
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12-13-2020, 02:38 PM,
#32
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
ऋतू भी अन्दर का नजारा देखकर गरम हो चुकी थी, मेरी गन्दी भाषा सुनकर वो भी उत्तेजित होते हुए बोली "हाँ भाई देखो तो जरा हमारी कुतिया माँ को, कैसे अजय चाचू के घोड़े जैसे काले लंड को अपनी गांड में ले कर चीख रही है मजे से...उनके चुचे कैसे झूल रहे है और आरती चाची कितने मजे से उन्हें दबा रही है, और पापा का लंड तो देखो कितना शानदार और ताकतवर है, कैसे चाची की चूत में डुबकियां लगा रहा है,....काश मैं होती चाची की जगह..." उसने अपने मन की बात बताई.
मैं समझ गया की अगर ऋतू को मौका मिला तो वो अपने बाप का लंड भी डकार जायेगी..
पापा ने अपनी स्पीड तेज कर दी.
आरती चाची की आवाजें तेज हो गयी, वो लोग समझ रहे थे के घर में वो अकेले हैं, बच्चे तो बाहर गए हैं, इसलिए वो तेज चीखें भी मार रहे थे और तरह -२ की आवाजें भी निकाल रहे थे. आआआआआआआआआह्ह्ह्ह ......माआआआआआआआआआह "चाची चिल्लाई.
जेठ जी.......चोदो मुझे.....और जौर्र्र्रर सीईईईईईई ......aaaaaaaaaaahhhhh..... फाड़ डालो मेरी चूत....
बड़ा अच्छा लगता है आपका लंड मुझीईए......चोदों आआआअह्ह.....उसने एक हाथ से मेरी माँ के चुचे बुरी तरह नोच डाले... मेरी माँ तड़प उठी और जोर से चिल्लायी.......आआआआआआआआअह्ह्ह कुतियाआअ...छोड़ मेरी छाती ....
साली हरामजादी....मेरे पति का लंड तुझे पसंद आ रहा है...हांन्न.....और तेरा ये घोड़े जैसा पति जो मेरी गांड मार रहा है उसका क्या.....बोल कमीनी....उसका लंड नहीं लेती क्या घर में....मेरा बस चले तो मैं अपने प्यारे देवर का लंड ही लूं ....." मेरी माँ चिल्लाये आ रही थी और अपनी मोटी गांड हिलाए जा रही थी.
अजय चाचू ने अपनी स्पीड बड़ाई और मेरी माँ के कुल्हे पकड़ कर जोर से झटके दिए.
"भाभी.......ले अपने प्यारे देवर का लोडा अपनी गांड में....सच में भाभी, आपकी गांड मारकर वो मजा आता है की क्या बोलू....आआआह्ह्ह.....तेरे जैसी हरामजादी भाभी की गांड किस्मत वालों को ही मिलती है...चल मेरी कुतिया.....ले ले मेरा लंड अपनी गांड के अन्दर तक्क्क.......तेरी मा की चुत्त्त.......आआग्ग्ग्गह्ह्ह्ह ///// ." और चाचू ने अपना लावा मेरी माँ की गांड में उडेलना शुरू कर दिया.
मेरी माँ के मुंह से अजीब तरह की चीख निकली.....आय्यय्य्य्यी ....आआआआआआह.......और उन्होंने आधे खड़े होकर अपनी गर्दन पीछे करी और अजय चाचू के होंठ चूसने लगी, चाचू का हाथ माँ की चूत में गया और माँ वहीँ झड गयी..आआआआआआह्ह्ह्ह .... म्मम्मम्मम्म ssssssssssssssssss
वहां मेरे पापा भी कहाँ पीछे रहने वाले थे...."ले आरती.....मेरी जान.....मेरी कुतिया ......अपने आशिक जेठ का लंड अपनी चूत में ले....तेरी चूत में अभी भी वोही कशिश है जो 10 साल पहले थी.....और तेरे ये मोटे-२ चुचे....इनपर तो मैं फ़िदा हूँ...भेन की लोड़ी....तेरी माँ की चूत......" ये कहकर पापा ने झुक कर आरती के दायें चुचे को मुंह में भर लिया और जोर से काट खाया ...
"आआआआआअह्ह्ह कुत्त्त्ते ..........छोड़ मुझे.....आःह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह .....म्म्म्मम्म्म्मम्म " और मेरे पापा का मुंह ऊपर करके उनके होंठो से अपने होंठ जोड़ दिए और चूसने लगी किसी पागल बिल्ली की तरह.
पापा से सहन नहीं हुआ और अपना रस उन्होंने चाची के अन्दर छोड़ दिया.
चाची भी झड़ने लगी और अपनी टाँगे पापा के चारों तरफ लपेट ली.
सभी हाँफते हुए वहीँ पलंग पर गिर गए.
ऋतू ने घूम कर मुझे देखा , उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, उसने अपने गीले होंठ मुझसे चिपका दिए और मेरे हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख दिए, मैंने उन्हें दबाया तो उसके मुंह से आह निकल गयी, मैंने उसे उठा कर पलंग पर लिटाया और उसके कपडे उतार दिए, उसकी चूत रिस रही थी अपने रस से...मैंने अपना मुंह लगा दिया उसकी रस टपकाती चूत पर और पीने लगा....वो मचल रही थी बेड पर नंगी पड़ी हुई, उसने मेरे बाल पकड़ कर मुझे ऊपर खींचा और अपनी चूत में भीगे मेरे होंठ चाटने लगी, अपना एक हाथ नीचे लेजाकर मेरे लंड को अपनी चूत पर टिकाया और सुर्र्र्रर...करके निगल गयी मेरे मोटे लंड को...
आआआआआआआआआह्ह्ह.....उसने किस तोड़ी और धीरे से चिल्लाई, आज वो काफी गीली थी, मैंने अपना मुंह उसके एक निप्पल पर रख दिया...वो सिहर उठी, और प्यार से मेरी तरफ देखकर बोली...."मेरा बच्चा....." ये सुनकर मैंने और तेजी से उसका "दूध" पीना शुरू कर दिया.
उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर आ गयी, बिना अपनी चूत से मेरा लंड निकाले, और अपने बाल बांधकर तेजी से मेरे ऊपर उछलने लगी, मैंने हाथ ऊपर करे और उसके चुचे दबाते हुए अपनी आँखें बंद कर ली, जल्दी ही वो झड़ने लगी, और उसकी स्पीड धीरे होती चली गयी और अंत में आकर उसने एक जोर से झटका दिया और हुंकार भरी और मेरे सीने पर गिर गयी. अब मैंने उसे धीरे से नीचे लिटाया , वो अपने चार पायों पर कुतिया की तरह बैठ गयी और अपनी गांड हवा में उठा ली, मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और झटके देने लगा, मेरी एक ऊँगली उसकी गांड में थी....मैंने किसी कसाई की तरह उसे दबोचा और अपना घोडा दौड़ा दिया, वो मेरे नीचे मचल रही थी, मैंने हाथ आगे करे और झूलते हुए सेब पर टिका दिए, मेरा लंड इस तरह काफी अन्दर तक घुस गया, मेरे सामने आज शाम की घटना और दुसरे रूम में हुई शानदार चुदाई की तसवीरें घूम रही थी, ये सोचते-२ जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने भी अपने लंड का ताजा पानी, अपनी बहन के गर्भ में छोड़ दिया.
बुरी तरह से चुदने के बाद ऋतू उठी और बाथरूम में चली गयी, मुझे भी बड़ी जोर से सुसु आया था, मैंने सिर्फ अपना जॉकी पहना और दरवाजा खोलकर बाहर बने कॉमन बाथरूम में चला गया, अपना लंड निकाला और धार मारनी शुरू कर दी, मैंने मूतना बंद ही किया था की बाथरूम का दरवाजा खुला और आरती चाची नंगी अन्दर आई और जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया, पर जैसे ही मुझे देखा तो वहीँ दरवाजे पर ठिठक कर खड़ी हो गयी, मेरे हाथ में मेरा मोटा लंड था.
"ओह्ह्ह..सॉरी..." आरती चाची ने कहा.
"क्या आपको दरवाजा खड्काना नहीं आता..." मैंने वहीँ खड़े हुए कहा, मेरा लंड अभी भी मेरे हाथ में था.
"सॉरी...मुझे माफ़ कर दो आशु..अन्दर अँधेरा था तो मैंने सोचा अन्दर कोई नहीं है....और वैसे भी तुम लोग तो बाहर प्रोग्राम देख रहे थे न.." आरती चाची ने चर्माते हुए कहा, वो अपने नंगे जिस्म को छुपाने की कोशिश कर रही थी.
"मेरा वहां मन नहीं लगा इसलिए वापिस आ गया.......और..." मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा.
"और ये की...मुझे सुसु आया है..." आरती ने सकुचाते हुए कहा.
"हाँ तो कर लो न..."
"तुम बाहर जाओगे तभी करुँगी न..." उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था.
"तुमने मुझे देखा है सुसु करते हुए तो मेरा भी हक बनता है तुम्हे सुसु करते हुए देखने का..." मैं दीवार के सहारे खड़ा हो गया और अपना लम्बा लंड उनके सामने मसलने लगा.
उन्होंने ज्यादा बहस करना उचित नहीं समझा और जल्दी से सीट पर आकर बैठ गयी, पेशाब की धार अन्दर छुटी और मैंने देखा की उनके निप्प्ल्स कठोर होते चले जा रहे है, सुसु करने के बाद उन्होंने पेपर से अपनी चूत साफ़ करी और खड़ी हो गयी.
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12-13-2020, 02:38 PM,
#33
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
"ठीक है...अब खुश हो.." आरती ने कहा.
"हाँ बिलकुल...मैंने मुस्कुराते हुए कहा..., पर मैं तुम्हे कुछ दिखाना भी चाहता हूँ" मैंने अपनी योजना के आधार पर उन्हें कहा.
"अभी...? तुम्हे नहीं लगता की मुझे कुछ कपडे पहन लेने चाहिए...और तुम्हे भी" उन्होंने अपनी नशीली ऑंखें मेरी आँखों में डालकर कहा.
"इसमें सिर्फ दो मिनट लगेंगे...., आपको हमारे रूम में चलना होगा" मैंने कहा.
"चलो फिर जल्दी करो....देखू तो सही तुम मुझे क्या दिखाना चाहते हो" चाची ने कहा और दरवाजा खोलकर मेरे साथ चल दी...नंगी.
मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला और अन्दर आ गया, ऋतू का चेहरा देखते ही बनता था, जब उसने चाची को मेरे पीछे अपने रूम में घुसते हुए देखा, वो भी बिलकुल नंगी, ऋतू उस समय बेड पर लेटी अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर मुठ मार रही थी.
"चाची मुझे बाथरूम में मिली थी, मैं इन्हें कुछ दिखने के लिए लाया हूँ" मैंने ऋतू से कहा.
चाची भी ऋतू को नंगी बिस्तर पर लेटी देखकर हैरान रह गयी.
मैं जल्दी से शीशे वाली जगह पर गया और बोला "आप इधर आओ चाची...ये देखो "
वो झिझकते हुए आगे आई, वो समझ तो गयी थी की मैं उन्हें क्या दिखने वाला हूँ, जब उन्होंने अन्दर देखा तो पाया की मम्मी ने चाचू का लंड मुंह में ले रखा है और चूस रही है, पीछे से पापा उनकी चूत मार रहे हैं.
"तो तुम लोग हमारी जासूसी कर रहे थे, हमें ये सब करते हुए देख रहे थे. इसका क्या मतलब है, ऐसा क्यों कर रहे थे तुम " उन्होंने थोडा कठोर होते हुए कहा.
"मुझे लगा आपको अच्छा लगेगा की आपकी कोई औडिएंस है, इससे आपको अक्साईटेमेंट आएगी" मैंने कहा.
"अब से हम तुम्हारे परेंट्स का रूम युस करेंगे.." उन्होंने कहा.
"फिर तो मैं उन्हें बता दूंगा की आप बाथरूम में आई और मुझे शीशे वाली जगह दिखाई और हमें अन्दर देखने के लिए कहा." मैंने उन्हें ब्लैक्मेल किया.
चाची का मुंह तो खुला का खुला रह गया मेरी इस धमकी से, उन्होंने हैरानी से ऋतू की तरफ देखा, जो अब उठ कर बैठ गयी थी, पर वो भी उतनी ही हैरान थी जितनी की चाची.
"तुम क्या चाहते हो आशु..."उन्होंने थोडा नरम होते हुए कहा.
"मैं भी कुछ खेल खेलना चाहता हूँ" मैंने कहा और आगे बढकर चाची के मोटे चुचे पर हाथ रख दिया और उनके निप्पल को दबा दिया.
"आआउच ...वो बिदकी..और बोली "तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की इसनी छोटी सी उम्र में तुम ये खेल खेलने के लिए तैयार हो" चाची ने गंभीरता से कहा.
"मुझे ये इस की वजह से लगता है " और मैंने अपना जॉकी नीचे गिरा दिया और अपना पूरा खड़ा हुआ मोटा लंड उनके हाथों में दे दिया.
"तुम्हारी उम्र के हिसाब से तो ये काफी बड़ा है..." उन्होंने मेरे लंड से बिना हाथ और नजरें हटाये हुए कहा, वो जैसे मेरे लंड को देखकर सम्मोहित सी हो गयी थी.
"मेरा लंड चुसो...." मैंने उन्हें आर्डर सा दिया.
"पर ऋतू...वो भी तो है यहाँ.." उन्होंने झिझकते हुए कहा.
"आप उसकी चिंता न करी, वो ये सब होते हुए देखेगी..और उसके बाद आप उसकी चूत को भी चाट देना..वो शायद आपको भी पसंद आएगी" मैंने कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए कहा.
मैंने चाची को घुमा कर बेड की तरफ धकेल दिया, बेड के पास पहुँच कर मैंने उन्हें धीरे से किनारे पर बिठा दिया, मेरा खड़ा हुआ लोडा उनकी आँखों के सामने था , उन्होंने ऋतू की तरफ देखा, वो भी काफी अक्साईटेड हो चुकी थी ये सब देखकर, और उछल कर वो भी सामने आ कर बैठ गयी, फिर उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और धीरे से अपनी जीभ मेरे लंड के सुपाडे पर फिराई. और फिर पुरे लंड पर अपनी जीभ को फिराते हुए उन्होंने एक-२ इंच करके किसी अजगर की तरह मेरा लंड निगल लिया.
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12-13-2020, 02:39 PM,
#34
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
अनुभव नाम की भी कोई चीज होती है, मैंने मन ही मन सोचा, उनका परिपक्व मुंह मेरे लंड को चूस भी रहा था, काट भी रहा था और अन्दर बाहर भी कर रहा था, मेरे लंड का किसी अनुभवी मुंह में जाने का ये पहला अवसर था. मुझसे ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ, उनके गर्म मुंह ने जल्दी ही मुझे झड़ने के कगार पर पहुंचा दिया, मेरे लंड से वीर्य की बारिश होने लगी चाची के मुंह के अन्दर. उन्होंने एक भी बूँद जाया नहीं जाने दी, सब पी गयी.
"तुम यही चाहते थे न.." उन्होंने मेरे लंड को आखिरी बार चूसा और छोड़ दिया.
"हाँ बिलकुल यही...तुम बिलकुल परफेक्ट हो चाची...अब लेट जाओ." मैंने उनके कंधे पर दबाव डाला और उन्हें बेड पर लिटा दिया.
पीछे से ऋतू ने उन्हें कंधे से पकड़ा और चाची के मुंह के दोनों तरफ टाँगे करके उनके मुंह के ऊपर बैठ गयी. आआअह्ह्ह्ह म्मम्मम्मम्म.................. और अपनी गीली चूत उनके मुंह से रगड़ने लगी, मैंने चाची की टाँगे पकड़ी और हवा में उठा ली और उनकी जांघो पर हाथ टिका कर अपना मुंह उनकी दहकती हुई चूत में दे मारा, मैंने जैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत में डाली उन्होंने एक झटका मारा आआआआआआअह्ह यीईईईईईईईईईइ .......
और मेरी गर्दन के चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और अपने चूतड उछाल-२ कर मेरा मुंह चोदने लगी, उनकी चूत ऋतू और उसकी सहेलियों की चूत से बिलकुल अलग थी, वो एक पूरी औरत की चूत थी जिसकी एक जवान लड़की भी थी, और मजे की बात ये थी की मैं उनकी लड़की की चूत भी चाट और मार चूका था, ऋतू भी बड़ी तेजी से अपनी बिना बालों वाली चूत को उनके मुंह में घिस रही थी, मैंने चाची की चूत पर काटना और चुसना शुरू कर दिया.जल्दी ही उनकी चूत के अन्दर से एक सैलाब सा उमड़ा और मेरे पुरे मुंह को भिगो दिया.
उनका रस भी बड़ा मीठा था, मैंने जल्दी से सारा रस पी लिया, उधर ऋतू ने भी अपनी टोंटी चाची के मुंह में खोल दी, और अपना अमृत उन्हें पिला दिया. हम सभी धीरे से अलग हुए और थोड़ी देर तक सांस ली.
चाची का चेहरा उत्तेजना के मारे तमतमा रहा था.
उन्होंने उठने की कोशिश की, उनके पैर लड़खड़ा रहे थे.
"मुझे अब वापिस जाना चाहिए उस रूम में " उन्होंने जाते हुए कहा.
"प्लीज़ दुबारा आना" मैंने उन्हें कहा.
"और अजय अंकल को भी लेकर आना." ऋतू ने कहा "और मोम डैड को मत बताना".
"ठीक है आउंगी ..और तुम्हारे मम्मी पापा को भी नहीं बताउंगी" उन्होंने हँसते हुए कहा और बाहर निकल गयी.
चाची के जाते ही मैंने शीशा हटा कर देखा, वो अन्दर गयी और चुदाई समारोह में जाकर वापिस शरीक हो गयी, पापा ने अपना रस मम्मी की चूत में निकाल दिया था, चाची ने जाते ही अपनी डिश पर हमला बोल दिया और माँ की चूत में से सारी मलाई खा गयी, उन्हें झडे अभी 5 मिनट ही हुए थे, पर जैसे ही चाचू ने उनकी चूत में लोडा डाला वो फिर से मस्ता गयी और अपनी मोटी गांड हिला -२ कर चुदवाने लगी, जल्दी ही चाचू का लंड, जो मम्मी के चूसने की वजह से झड़ने के करीब था, चाची की गीली चूत में आग उगलने लगा. सभी हाँफते हुए वहीँ बेड पर लुडक गए, थोड़ी देर में मम्मी और पापा उठे और अपने रूम में चले गए.
उनके जाते ही मैंने ऋतू को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गीले और लरजते हुए होंठो पर अपने होंठ रख दिए, वो भी दोबारा गरम हो चुकी थी, उसके होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे दबाने शुरू किये और जल्दी ही उसके निप्प्ल्स को अपने होंठो के बीच रखकर चबाने लगा, वो पागल सी हो गयी मेरे इस हमले से..
आआआआआआअयीईईईईईईईईइ .....म्म्म्मम्म्म्मम्म...................वो चिल्लाई चुसूऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊऊऊ औ sssssssssssss.....................इन्हेय्य्य्यय्य्यय्य्य्य....................अयीईईईईईईईईइ थोडा धीरीईईईए............ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह.....
वो बुदबुदाती जा रही थी, जल्दी ही मैं उन्हें चूसता हुस नीचे की तरफ चल दिया, और उसकी रस टपकाती चूत में अपने होंठ रख दिए, ऋतू से भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने पलट कर 69 की पोज़ीशन ली और मेरा फड़कता हुआ लंड अपने मुंह में भर लिया. और तेजी से सुपद-२ कर चूसने लगी.
उधर दुसरे रूम में, मम्मी पापा के जाते ही, थोड़ी देर लेटने के बाद, चाची उठ कर शीशे के पास आई और शीशा हटा कर झाँकने के बाद देखा तो मुझे और ऋतू को 69 की पोज़ीशन में देखा और मुस्कुरा दी, उन्होंने इशारे से अजय को अपने पास बुलाया, वो उठे और नंगे आकर चाची के पीछे खड़े हो गए, अन्दर झांकते ही वो सारा माजरा समझ गए, और मुझे और ऋतू को ऐसी अवस्था में देखकर आश्चर्यचकित रह गए, उन्होंने सोचा भी नहीं था की हम दोनों भाई बहन ऐसा कर सकते है.
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12-13-2020, 02:39 PM,
#35
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
फिर उन्होंने सोचा की जब वो अपने भाई और भाभी के साथ खुल कर अपनी पत्नी को शामिल करके मजा ले सकते हैं तो ये भी मुमकिन है, उनकी नजर जब ऋतू की मोटी गांड पर गयी तो उनका मुरझाया हुआ लंड फिर से अंगडाई लेने लगा.
चाची ने अजय को सारी बात बता दी, की कैसे हम दोनों उनके रूम में देखते हैं, और शायद वोही देख-२ हम दोनों भाई बहन भी एक दुसरे की चुदाई करने लगे हैं.
मेरी एक ऊँगली ऋतू की गांड के छेद में थी और मेरा मुंह उसकी चूत में, वो अपनी गांड को गोल-२ घुमा रही थी और मुंह से सिस्कारियां ले लेकर मेरा लंड चूस रही थी.
चाचू ने जब ऋतू की गोरी, मोटी घुमती गांड देखी तो वो पागल ही हो गए, उन्होंने पहले ऐसा कभी ऋतू के बारे में सोचा नहीं था,
चाची ने बताना चालू रखा, की कैसे वो बाथरूम में गयी और नंगी मुझसे मिली और वापिस उनके रूम में जाकर उन्होंने मेरा लंड चूसा और ऋतू की चूत चाटी, चाचू अश्कार्यचकित से सभी बातों को सुन रहे थे, उनकी नजर ऋतू के नंगे बदन से हट ही नहीं रही थी, और जब चाची ने ये बताया की उन्होंने उन दोनों को अपने रूम में बुलाया है, और खासकर ऋतू ने बोला है की चाचू को भी लेकर आना तो अजय समझ गया की उसकी भतीजी की चूत तो अब चुदी उसके लंड से.... उसने झट से आरती को कहा "तो चलो न देर किस बात की है, चलते हैं उनके रूम में.."
चाची : "अभी....? अभी चलना है क्या"
चाचू " और नहीं तो क्या...देख नहीं रही कैसे दोनों गर्म हुए पड़े हैं."
चाची : "हाँ...! ठीक है, चलते हैं, मुझे वैसे भी आशु के लंड का स्वाद पसंद आया, देखती हूँ की उसे इस्तेमाल करना भी आता है के नहीं."
दोनों धीरे से अपने कमरे से निकले और हमारे रूम में आ गए, हम दोनों एक दुसरे में इतने खो गए थे की हमें उनके अन्दर आने का पता ही नहीं चला, चाचू बेड के सिरे की तरफ जा कर खड़े हो गए, वहां ऋतू का चेहरा था जो मेरा लंड चूसने में लगा हुआ था, उसने जब महसूस किया की कोई वहां खड़ा है तो उसने अपना सर उठा कर देखा और चाचू को पाकर वो सकपका गयी, नजरें घुमाकर जब चाची को देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी आँखों के इशारे से ऋतू को चाचू की तरफ जाने को कहा, वो समझ गयी और अपना हाथ ऊपर करके अपने सगे चाचा का काला लंड अपने हाथों में पकड़ लिया. चाचू के मोटे लंड पर नन्हे हाथ पड़ते ही वो सिहर उठे...आआआअह्ह्ह और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली.
ऋतू थोडा उठी और अपने होंठो को चाचू के लंड के चारों तरफ लपेट दिया.
मैंने जब महसूस किया की ऋतू ने मेरा लंड चुसना बंद कर दिया है तो मैंने अपना सर उठा कर देखा, और अपने सामने चाची को मुस्कुराते हुए पाया, मैं कुछ समझ पाता, इससे पहले ही चाची ने अपनी टाँगे घुमाई और मेरे मुंह की सवारी करने लगी, उनकी चूत काफी गीली थी, शायद दुसरे कमरे में चल रही चुदाई की वजह से और हमें देखने की वजह से भी.
आआआआआआआआह्ह्ह ......चाची ने लम्बी सिसकारी ली.
चाची ने भी झुक कर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने अपनी जीभ चाची की चूत में काफी गहरायी तक डाल दी, इतना गहरा आज तक मैं नहीं गया था, उनकी चूत ओर चूतों के मुकाबले थोड़ी बड़ी थी, शायद इस वजह से. चाची मेरे ऊपर पड़ी हुई मचल रही थी, उन्होंने मेरा लंड एकदम से छोड़ दिया और घूम कर मेरी तरफ मुंह कर लिया, और अपनी गीली चूत में मेरा लंड सताया और नीचे होती चली गयी...म्मम्मम्मम...आआआआआआह्ह्ह मजा आ गया.....वो बुदबुदाई. और अपने गीले होंठ मेरे ऊपर रख दिए, मेरे हाथों ने अपने आप बड़ कर उनके हिलते हुए स्तनों को जकड लिया, बड़े मोटे चुचे थे चाची के, उनके निप्प्ल्स के चारों तरफ लम्बे-२ बाल थे, मैं जब उनके दानो को चूसकर छोडता तो उनके लम्बे बाल मेरे मुंह में रह जाते, जिनको मैं दांतों से दबा कर काफी देर तक खींचता, वो मेरे इस खेल से सिहर उठी, उन्हें काफी दर्द हो रहा था, पर मजा भी आ रहा था, इसलिए वो बार-२ अपने दाने फिर से मेरे मुंह में भर देती.
उधर, ऋतू के मुंह को काफी देर तक चोदने के बाद चाचू ने उसे घुमाया जिससे ऋतू की गांड हवा में उठ गयी, उन्होंने अपना मोटा लंड ऋतू की चूत पर टिकाया और एक तेज झटका मारा, चाचू का लंड अपनी भतीजी की टाईट चूत में उतरता चला गया..
आआआआआआअयीईईईईईईईइ ........आआआआआआआह्ह्ह....चाचू धीरे..................आआआआआह.
ऋतू अपनी कोहनियों के बल बैठी थी, उसका चेहरा मेरे चेहरे के बिलकुल ऊपर था, चाचू के लंड डालते ही उसकी आँखें फ़ैल गयी और फिर थोड़ी ही देर में उत्तेजना के मारे बंद होती चली गयी, वो थोडा झुकी और मेरे होंठ चूसने लगी, उसकी चूत में उसके चाचू का लंड था, और मेरे लंड के चारों तरफ चाची की चूत लिपटी हुई थी, पुरे कमरे में गर्म सांसों की आवाज आ रही थी,
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12-13-2020, 02:49 PM,
#36
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
मेरे लंड पर चाची बुरी तरह से उछल रही थी, जैसे किसी घोड़े की सवारी कर रही हो, उनकी चूत बड़ी मजेदार थी, वो ऊपर नीचे भी हो रही थी और बीच-२ में अपनी गांड घुमा -२ कर घिसाई भी कर रही थी.
जल्दी ही मेरे लंड की सवारी करते हुए चाची झड़ने लगी, आआआआआआअह्ह्ह मैं आयीईईईईईईईईइ ,,,,, उनके रस ने मेरे लंड को नहला दिया.
मेरा लंड भी आखिरी पड़ाव पर था, उसने भी बारिश होते देखी तो अपना मुंह खोल दिया और चाची की चूत में पिचकारियाँ मारने लगा.
ऋतू से भी चाचू के झटके ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुए, वो तो अपने चाचू का लंड अपनी चूत में लेकर फूली नहीं समां रही थी, उसने भी जल्दी ही झड़ना शुरू कर दिया, चाचू ने भी दो चार जोर से झटके दिए और अपना रस अपनी भतीजी की कमसिन चूत में छोड़ दिया, फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकला और ऋतू के चेहरे के सामने कर दिया, ऋतू ने बिना कुछ सोचे उनका रस से भीगा लंड मुंह में लिया और चूस-२ कर साफ़ करने लगी.
चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी, उनकी चूत में से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था, वो थोडा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका दिया, फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर दिया, फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी.
ऋतू ने भी अपनी चूत में उँगलियाँ डाली और चाचू का रस इकठ्ठा करके चाट गयी.
"ये क्या हो रहा है????????????" दरवाजे की तरफ से आवाज आई...
हमने देखा तो नेहा वहां खड़ी थी, अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लिए.
*****

हम सभी की नजर दरवाजे पर खड़ी नेहा पर चिपक सी गयी, मैं, ऋतू, आरती चाची और अजय चाचू सब नंगे हुए एक दुसरे को चाट और चूस रहे थे, और थोड़ी ही देर पहले हम सबने चुदाई भी की थी, ना जाने कब से नेहा ये सब देख रही थी, मेरी और ऋतू की तो कोई बात नहीं पर चाचू और चाची की शक्ल देखने वाली थी, उन्होंने सोचा भी नहीं था की उनकी बेटी उन्हें "नंगे" हाथों पकड़ लेगी.
मैंने गौर से देखा तो नेहा का ध्यान चाचू के लंड पर ही था और उसके चेहरे पर अजीब तरह के भाव थे, मैं समझ गया और उठ खड़ा हुआ.
मैं : "देखो नेहा, तुमने तो वैसे भी अपने मम्मी-पापा को हमारे मम्मी पापा के साथ नंगा देख ही लिया है उस शीशे वाली जगह से, और आज हालात कुछ ऐसे हुए की हमें चाचू चाची को अपने राज में शामिल करना पड़ा." और फिर मैंने सारी बात विस्तार से बता दी नेहा को.
चाचू और चाची ने जब ये सुना की नेहा ने भी उन्हें दुसरे कमरे में रंगरेलियां मानते हुए देखा है तो वो थोडा शर्मिंदा हो गए पर फिर उन्होंने सोचा की जब उसे पता चल ही गया है तो क्यों न उसे भी इसमें शामिल कर लिया जाए. आरती चाची जानती थी की नेहा अपने स्कूल में लड़कों को काफी लिफ्ट देती है और उसने कई बार नेहा को उसके रूम में एक साथ पढाई कर रहे लडको के साथ चुमते-चाटते भी देखा था, उन्होंने अजय की तरफ देखा और आँखों-२ में कुछ इशारे करे, फिर वो आगे आई और नेहा का हाथ पकड़ कर वहीँ बेड पर बिठा लिया.
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12-13-2020, 02:49 PM,
#37
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
नेहा आंखे फाड़े हम सभी नंगे लोगो को देख रही थी, दरअसल उसका भी प्रोग्राम में दिल नहीं लग रहा था, और जब वो वापिस आई तो उसने अपने मम्मी पापा को हमारे रूम में घुसते हुए देखा, वो भी पुरे नंगे, वो समझ गयी की अन्दर क्या होने वाला है, पर अपने मम्मी पापा के सामने वो एकदम से ये नहीं दर्शाना चाहती थी की वो भी मेरे और ऋतू के साथ चुदाई के खेल में शामिल है, इसलिए उसने खिड़की से अन्दर का सारा प्रोग्राम देखा, अपने पापा के द्वारा ऋतू की चुदाई करते देखकर उसकी छोटी सी चूत में आग लग गयी थी, और जब मैंने उसकी माँ की चुदाई की तो उसके बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसने वहीँ खिड़की पर खड़े-२ अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर उसकी अग्नि को शांत किया, पर अन्दर के खेल को देखकर उसकी चूत अभी भी खुजला रही थी, इसलिए उसने तय किया की वो भी अन्दर जायेगी और इसमें शामिल हो जाएगी.
आरती ने नेहा की टी शर्ट उतार दी, नेहा किसी बुत्त की तरह बैठी थी, फिर ऋतू आगे आई और उसने उसकी जींस के बटन खोलकर उसे भी नीचे कर दिया, अब नेहा सिर्फ पर्पल कलर की पेंटी और ब्रा में बैठी थी.
उसका बाप यानी अजय चाचू तो उसके ब्रा में कैद मोटे-२ और गोल चुचे देखकर अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया. वो मुंह फाड़े अपनी छोटी सी बेटी के अर्धनग्न जिस्म को निहार रहा था, और अपनी जीभ अपने सूखे होंठो पर फिर रहा था.
मैं एक कोने मैं बैठा सबकी हरकतें नोट कर रहा था.
चाची उठी और अपने चुचे को नेहा के होंठो से चिपका दिया, नेहा ने कुछ नहीं किया, शायद वो अभी भी दर्शाना छह रही थी की वो ये सब नहीं करना चाहती, पर अन्दर ही अन्दर उसकी चूत में ऐसी खुजली हो रही थी की अपनी माँ को वहीँ पटके और उसके मुंह में अपनी चूत से ऐसी रगड़ाई करे की उसकी सारी खुजली मिट जाए.
थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोले और अपनी आँखें बंद करके अपनी माँ का दूध पीने लगी.
ऋतू ने उसकी ब्रा खोल दी और नीचे से हाथ डालकर उसकी पेंटी भी उतार दी.
ब्रा के खुलते ही उसके दोनों पंछी आजाद हो गए, मैंने देखा उसके निप्प्ल्स एकदम खड़े हो चुके हैं, और चूत से भी रस टपक कर चादर को गीला कर रहा है, यानी वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी. अजय चाचू ने अपनी बेटी को नंगी देखा तो उनकी साँसे रुक सी गयी.
चाची ने इशारे से चाचू को आगे बुलाया, वो तो जैसे इसी इन्तजार में बैठे थे, वो लपक कर आगे आये और अपनी बेटी के दाए चुचे को अपने मुंह में भर कर लगे चूसने किसी बच्चे की तरह.
आआआआआआआआआआह्ह्ह पाआआआआअ पाआआआआआआ ....स्स्सस्स्स्सस्स्स ...अयीईईईईईईई .....उन्होंने उत्तेजना के मारे उसके दाने पर जोर से काट मारा..
नेहा ने अपने पापा के सर को किसी जंगली की तरह पकड़ा और उनकी आँखों में देखकर अपने थूक से गिले हुए होंठ उनसे भिड़ा दिए. उसके पापा के तो मजे आ गए.
अपनी बेटी के इस जंगलीपन को देखकर चाचू का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया, खड़ा तो मेरा भी हो गया था पर लगातार 3 -4 झड़ने के बाद मैं अपने लंड को थोडा आराम देना चाहता था.
बाप बेटी एक दुसरे को ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई गेम चल रही हो और दोनों एक दुसरे से ज्यादा मार्कस लेने के लिए ज्यादा चूसने वाली गेम खेल रहे हैं. चाचू ने अपने हाथ नेहा की गोलाइयों पर टिका दिए और उन्हें मसलने लगे.
आआआआआआअह्ह दबऊऊऊऊऊ इन्हीईईईईए पाआआआआआअ पाआआआआआआ ....
आरती चाची ने नेहा को बेड पर लिटा दिया और उसकी रस टपकती चूत पर हमला बोल दिया, ऋतू ने भी अपनी चाची का साथ दिया और वो दोनों नेहा की चूत के दोनों तरफ आधे लेट गए और बारी-२ से नेहा की चूत चाटने लगे, ऊपर चाचू अपने बेटी के मुंह के अन्दर घुसे हुए उसका रसपान कर रहे थे, उन्होंने किस तोड़ी और थोडा नीचे खिसककर अपने होंठ से नेहा के चुचे चूसने लगे. नेहा ने हाथ बड़ा कर अपने पापा का लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी, फिर उसने लंड को थोडा और खींच कर अपने मुंह के पास खींच लिया, चाचू समझ गए और अपना चेहरा उसकी चूत की तरफ घुमा कर उसके मुंह पर बैठ गए और नेहा ने उनका लंड अपने कोमल मुंह में ले लिया और चूसने लगी, चाचू का चेहरा देखने लायक था, उनके आनंद की कोई सीमा नहीं थी, आज अपनी भाभी से और फिर अपनी भतीजी से चुस्वाने के बाद अब वो अपना लंड अपनी ही बेटी के मुंह में डाले मजे ले रहे थे, वो थोडा झुके और ऋतू और आरती को हटा कर अपना मुंह अपनी बेटी की चूत पर रख कर चाटने लगे उसकी रसीली चूत को.
बीच-२ में वो सांस लेने के लिए ऊपर आते और ये मौका ऋतू और आरती ले लेते और उसकी चूत चाटने लगते, कुल मिला कर नेहा की चूत तीन लोग चाट रहे थे और वो अपने पापा का लंड.
चाचू जब झड़ने वाले थे तो उन्होंने एकदम से अपना लंड नेहा के मुह से निकाल लिया और वापिस ऊपर आ कर उसको चूमने लगे, नेहा से भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने अपने पापा को धक्का दिया और उछल कर उनके ऊपर बैठ गयी, अजय चाचू का फड़कता हुआ लंड नेहा की चूत के नीचे था , नेहा ने अपने पापा के दोनों हाथों में अपनी उंगलियाँ फंसाई और अपनी गांड और अपना सर नीचे झुका दिया, उसके होंठ अपने पापा के होंठो से जुड़े और चूत उनके लंड से, पीछे से आरती चाची ने अपने पति का लंड पकड़ा और अपनी बेटी की चूत में फसा दिया और उसे नीचे की तरफ दबा दिया..
नेहा की कसिली चूत में उसके पापा का लंड उतरता चला गया. आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह उसने थोडा ऊपर होकर लम्बी सिसकारी निकाली...और अपने चुचे को अजय चाचू के मुंह में ठूस दिया...
आआआआआआआआअह्ह्ह्ह पाआआआआआआ पाआआआआआआ म्म्म्मम्म्म्मम्म......
अब चाचू का पूरा लंड उनकी बेटी की चूत के अन्दर था, नेहा ने उछलना शुरू किया और चाचू का लंड अपनी चूत में अन्दर बाहर करने लगी. चाची और ऋतू नीचे बैठी बड़े गौर से इस चुदाई को देख रही थी, चाची ने हाथ आगे करके अपनी उंगलियाँ ऋतू की चूत में डाल दी, और ऋतू ने आरती चाची की चूत में.
फिर उन्होंने अपनी टाँगे एक दुसरे मैं ऐसी फंसाई की दोनों की चूत आपस में रगड़ खाने लगी, और उन्होंने बैठे -२ ही एक दुसरे की चूत को अपनी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया.
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12-13-2020, 02:49 PM,
#38
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
आआआआआह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ssssssssssss......................... अहहहः आहा हाहा हा हा हा हा अ हा हह्ह्ह म्मम्म.
ऋतू और चाची अजीब तरह से हुंकार रही थी. पुरे कमरे में सेक्स का नया दौर शुरू हो चूका था.
मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो चूका था, पर इतनी चुदाई के कारण वो दर्द भी कर रहा था, इसलिए मैंने दूर बैठे रहना ही उचित समझा.
चाचू ने नेहा के गोल चूतड़ों को पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए, नेहा की सिस्कारियां चीखों में बदल गयी और जल्दी ही वो झड़ने लगी..
आआआआआअह्ह अह्ह्ह अहः अहः अ अहः अ आहा हा हा./////पपाआआआअ मैं आयीईईईइ ......ऊऊऊऊओ .....ऊऊऊऊऊऊऊऊऊ......ऊऊऊऊऊऊऊऊ..................................... आआआआआआह्ह..
और उसने अपने रस से पापा के लंड को नहला दिया. और अपने मोटे-२ चूचो को उनके मुंह पर दबा कर वहीँ निढाल हो कर गिर पड़ी.
चाचू ने उसे नीचे उतारा और उसकी टांगो को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया और अपना लंड उसकी चूत में फिर से डाल दिया, और लगे धक्के देने, उनका भी तीसरा मौका था, इसलिए झड़ने में काफी समय लग रहा था, पर जल्दी ही अपने नीचे पड़ी अपनी बेटी के मोटे-२ मुम्मे हिलते देखकर वो भी झड़ने लगे और अपना रस उसकी चूत के अन्दर उड़ेल दिया और उसकी छाती के ऊपर गिर कर हांफने लगे. नेहा ने उनके चारों तरफ अपनी टाँगे लपेट ली सर पर धीरे-२ हाथ फेरने लगी.
चाची और ऋतू की चूत भी आपसी घर्षण की वजह से जल उठी और उनका लावा भी निकल पड़ा और उन्होंने झड़ते हुए एक दुसरे को चूम लिया.
मैं ये सब देखकर बेड के एक कोने में बैठा मुस्कुरा रहा था.
थोड़ी देर लेटने के बाद चाचू और चाची चले गए, उनके जाते ही ऋतू और नेहा ने एक दुसरे की चूत चाटकर साफ़ कर दी और हम तीनो वहीँ नंगे लेट गए, दुसरे कमरे में जाकर चाची ने शीशा हटा कर देखा और अपनी नंगी बेटी को मेरी बगल में लेटते हुए देखकर वो मुस्कुरा दी.
*****

अगले दिन सुबह हम तीनो, यानि मैं, ऋतू और नेहा नाश्ता करने के बाद पहाड़ी की तरफ चल दिए, ऋतू आगे चल रही थी, वो वहीँ कल वाली जगह पर जा रही थी, उस ऊँची चट्टान पर, मैं और नेहा उसके पीछे थे, नेहा ने अपने हाथ मेरी कमर पर लपेट रखे थे और मैंने उसकी कमर पर, बीच-२ में हम एक दुसरे को किस भी कर लेते थे, बड़ा ही सुहाना मौसम था, आज धुप भी निकली हुई थी.
नेहा थोडा थक गयी और सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गयी, मैं भी उसके साथ बैठ गया, ऋतू आगे निकल गयी और हमारी आँखों से ओझल हो गयी.
नेहा ने अपने होंठ मेरी तरफ बड़ा दिए और में उन्हें चूसने लगा, मैंने हाथ बड़ा कर उसके सेब अपने हाथों में ले लिए और उनके साथ खेलने लगा, उसे बहुत मजा आ रहा था, मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, पर तभी मेरा ध्यान ऋतू की तरफ गया और मैं जल्दी से खड़ा हुआ और नेहा को चलने को कहा, क्योंकि वो जंगली इलाका था और मुझे अपनी बहन की चिंता हो रही थी, हम जल्दी-२ चलते हुए चट्टान के पास पहुंचे और वहां देखा तो ऋतू अपने उसी पोस में बैठी थी, अपने कपडे उतार कर, बिलकुल नंगी.
"तुम क्या रास्ते में ही शुरू हो गए थे, इतनी देर क्यों लगा दी ?" उसने हमसे शिकायती लहजे से पूछा.
नेहा ने जब देखा की ऋतू नंगी है तो उसने भी अपनी लोन्ग फ्रोक्क को नीचे से पकड़ा और अपने सर से उठा कर उसे उतार दिया, वो नीचे से बिलकुल नंगी थी और वो भी जाकर अपनी बहन के साथ चट्टान पर लेट गयी, अब मेरे सामने दो जवान नंगी लड़कियां बैठी थी, मेरा लंड मचल उठा और मैंने भी अपने कपडे बिजली की फुर्ती से उतार डाले.
नेहा ने मेरा लंड देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी, वो आगे बड़ी तभी ऋतू ने उसे पीछे करते हुए कहा "चल कुतिया पीछे हो जा, पहले मैं चुसुंगी अपने भाई का लंड"
नेहा को विश्वास नहीं हुआ की ऋतू ने उसे गाली दी, पर जब हम दोनों को मुस्कुराते हुए देखा तो वो समझ गयी की आज गाली देकर चुदाई करनी hai, तो वो भी चिल्लाई "तू हट हरामजादी, अपने भाई का लंड चूसते हुए तुझे शर्म नहीं आती भेन की लोड़ी, कमीनी कहीं की...." और उसने ऋतू के बाल हलके से पकड़ कर पीछे किया और झुक कर मेरे लम्बे लंड को मुंह में भर लिया.
ठन्डे मौसम में मेरा लंड उसके गरम मुंह में जाते ही मैं सिहर उठा.
"अच्छा तो तो इससे चुसना चाहती है, ठहर मैं तुझे बताती हूँ..."और ये कहते ही उसने नेहा की गांड को थोडा ऊपर उठाया और अपनी जीभ रख दी उसके गांड के छेद पर..
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12-13-2020, 02:50 PM,
#39
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
आआआआआयीईईईईईईई ....."वो चिल्ला उठी..और इतने में ऋतू ने एक जोरदार हाथ उसके गोल चुतद पर दे मारा....और अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद में डाल दी...आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह ......नहीईईईईईईईईईईई .....वहान्न्नन्न्न्न नहीईईईईईईईई.....पर ऋतू ने नहीं सुना और अपनी दूसरी ऊँगली भी घुसेड दी...उसकी आँखें बाहर निकल आई. पर उसने मेरा लंड चुसना नहीं छोड़ा...
उनकी लड़ाई में मेरे लंड का बुरा हाल था, क्योंकि अपने ऊपर हुए हमले का बदला नेहा मेरे लंड को उतनी ही जोर से चूस कर और काट कर ले रही थी...
मैंने नेहा के बाल वहशी तरीके से पकडे और उसका चेहरा ऊपर करके उसके होंठ काट डाले, वो दर्द से बिलबिला उठी " छोड़ कुत्ते ......आआआआआआयीईईईईइ ..भेन चोद..भुतनिके...आआआआआह...वो चिल्लाती जा रही थी, क्योंकि उसकी गांड में ऋतू की उँगलियाँ थी जिससे उसकी गांड फट रही थी और ऊपर से उसके उसके होंठ काट-२ कर मैं उसकी फाड़ रहा था, उसके मुंह से लार गिर रही थी और उसके पेट पर गिरकर उसे चिकना बना रही थी, अचानक ऋतू ने अपने दुसरे हाथ को आगे बढाकर मेरी गांड में एक ऊँगली डाल दी, मेरे तन बदन में बिजली दौड़ गयी, मैं उछल पड़ा, पर मैंने नेहा को चुसना नहीं छोड़ा, फिर मैंने अपनी बलशाली भुजाओं का प्रयोग किया और नेहा को किसी बच्चे की तरह उसकी जांघो से पकड कर ऊपर उठा लिया और उसने अपनी टांगे मेरे मुंह के दोनों तरफ रख दी, और अपनी चूत का द्वार मेरे मुंह पर टिका दिया.
ऋतू ने चूसकर उसकी चूत को काफी गीला कर दिया था, मेरे मुंह में उसका रस और ऋतू के मुंह की लार आई और मैं सड़प-२ कर उसे चाटने लगा, उसने मेरे बालों को जोर से पकड़ रखा था और मैं चट्टान पर अपनी गांड टिकाये जमीन पर खड़ा था, नेहा मेरे मुंह पर चूत टिकाये चट्टान पर हवा में खड़ी थी, और ऋतू नीचे जमीन पर किसी कुतिया की तरह अब मेरे गांड के छेद को चाट रही थी.
पूरी वादियों में हम तीनो की सिस्कारियां गूंज रही थी.
मैंने अपना हाथ पीछे करके नेहा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड के छेद में एक साथ दो उंगलियाँ घुसा दी, अब उसे भी अपनी गांड के छेद के द्वारा मजा आ रहा था, पिछले दो दिनों में वो मुझसे और अपने बाप से चुद चुकी थी, आज उसके मन में गांड मरवाने का भी विचार आने लगा, गांड में हुए उत्तेजक हमले और चूत पर मेरे दांतों के प्रहार से वो और भड़क उठी और वो अपनी चूत को ओर तेजी से मेरे मुंह पर घिसने लगी, और झड़ने लगी.......आआआआआआआआअह्ह्ह...ले कुत्ते ....भेन के लोडे.....पी जा मेरा रस......आआआआआआआआह्ह...उसकी चूत आज काफी पानी छोड़ रही थी, मेरे मुंह से निकलकर चूत के पानी की बूंदे नीचे गिर रही थी और वहां बैठी हमारी कुतिया ऋतू अपना मुंह ऊपर फाड़े उसे कैच करने में लगी हुई थी.
झड़ने के बाद नेहा मेरे मुंह से नीचे उतर आई और चट्टान पर अपनी टाँगे चोडी करके बैठ गयी, मैंने अपना फड़कता हुआ लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा ही था की उसने मुझे रोक दिया ओर बोली "आज मेरी गांड में डालो...." मैंने हैरानी से उसकी आँखों में देखा ओर उसने आश्वासन के साथ मुझे फिर कहा "हां...बाबा...चलो मेरी गांड मारो...प्लीस .." मैंने अपनी वही पुरानी तरकीब अपनाई ओर एक तेज झटका मारकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया....वो चिल्लाई..."अबे...भेन चोद..समझ नहीं आती क्या...गांड मार मेरी...चूत नहीं कुत्ते..." पर मैं नहीं रुका ओर उसकी चूत में अपना लंड अन्दर तक पेल दिया ओर तेजी से झटके मारने लगा.....अब मेरा लंड उसकी चूत के रस से अच्छी तरह सराबोर हो चूका था, मैंने उसे निकाला, उसकी आँखों में विस्मय के भाव थे की मैंने उसकी चूत में से अपना डंडा क्यों निकाल लिया, मैंने उसे उल्टा लेटने को कहा, कुतिया वाले पोस में, वो समझ गयी ओर अपनी मोटी गांड उठा कर चट्टान पर अपना सर टिका दिया, ऋतू जो अब तक खामोश बैठी अपनी चूत में उँगलियाँ चला रही थी, उछल कर चट्टान पर चढ़ गयी ओर अपनी टाँगे फैला कर नेहा के मुंह के नीचे लेट गयी, नेहा समझ गयी ओर अपना मुंह उसकी नरम ओर गरम चूत पर रख दिया ओर चाटने लगी..
आआआआआआआआह्ह्ह....ऋतू ने अपनी आँखें बंद कर ली ओर चटवाने के मजे लेने लगी, .म्म्म्मम्म्म्मम्म .....
वो नेहा के सर को अपनी चूत पर तेजी से दबा रही थी...चाट कुतिया....मेरी चूत से सारा पानी चाट ले...आआआआआआअह्ह्ह.....भेन चोद ....हरामजादी....चूस मेरी चूत को....आआआआआह्ह्ह्ह...
नेहा ने उसकी चूत को खोल कर उसकी क्लिट को अपने मुंह में ले लिया ओर चूसने लगी, ऋतू तो पागल ही हो गयी..
ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह अह अह अह अह अह अह अह .......वो बदबदाये जा रही थी ओर चुसवाती जा रही थी.
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12-13-2020, 02:50 PM,
#40
RE: Free Sex Kahani लंड के कारनामे - फॅमिली सागा
पीछे से मैंने नेहा की गांड की बनावट देखी तो देखता ही रह गया, उसके उठे हुए कुल्हे किसी बड़े से गुब्बारे से बने दिल की आकृति सा लग रहा था, मैंने उसे प्यार से सहलाया ओर अपने एक हाथ से उसे दबाने लगा , ....नेहा ने ऋतू की चूत चाटना छोड़ा ओर पीछे सर करके बोली "अबे भेन छोड़.....क्या अपना लंड हिला रहा है पीछे खड़ा हुआ...कमीने, मेरी गांड मसलना छोड़ ओर डाल दे अपना हथियार मेरी कुंवारी गांड में...डाल कुत्ते....." वो लगभग चिल्ला ही रही थी.
मैंने अपना लंड थूक से गीला किया ओर उसकी गांड के छेद पर टिकाया ओर थोडा सा धक्का मारा...
अयीईईईईईईईईईई .........मर गयीईईईईईईईईईईइ .....अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ..............नहीईईईईईईईइ...."मेरे लंड का तोप उसकी गांड के रिंग में फंस गया था....मैंने आगे बढकर अपने लंड का निशाना बनाकर थूक फैंकी जो सही निशाने पर लगी, लंड गीला हो गया, मैंने एक ओर धक्का मारा.... आआआआअह्ह्ह ये चीख काफी लम्बी थी...उसने अपने दांत ऋतू की चूत में गाद दिए, वो भी बिलबिला उठी....."हत्त्तत्त्त्त कुतियाआआआअ.......अपनी गांड फटने का बदला मेरी चूत से ले रही है........आआह्ह्ह्ह ...धीरे चाट........नहीं तो तेरी चूत में लकड़ी का तना डाल दूंगी..."ऋतू ने नेहा को धमकी दी..
मेरा लंड आधा उसकी गांड में घुस चूका था....मैंने उसे निकाला ओर थोड़ी ओर थूक लगाकर फिर से अन्दर डाला..अब मैं सिर्फ आधा लंड ही डाल रहा था, वो अपनी गांड धीरे -२ मटका कर घुमाने लगी, मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है, नेहा की गांड मोटी होने के साथ-२ काफी टायट भी थी, ८-१० धक्के लगाने के बाद मैंने फिर से आगे की तरफ झटका मारा......"तेरी माँ की चूत........भोंसड़ीके ....कमीने....कुते....फाड़ डाली मेरी गांड......आआआआआआआआह्ह्ह्ह ......वो चिल्लाती जा रही थी ओर अपनी गांड मटकाए जा रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था की उसे मजा आ रहा है या दर्द हो रहा है.
उधर ऋतू का बुरा हाल था, चटवाने से पहले उसे बड़े जोर से पेशाब आ रहा था, पर चटवाने के लालच में वो कर नहीं पायी थी, अब जब नेहा उसकी चूत का ताना बाना अलग कर रही थी तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ ओर उसने अपने तेज पेशाब की धार सीधे नेहा के मुंह में दे मारी, पहले तो नेहा को लगा की ऋतू झड गयी है पर जब पेशाब की बदबू उसके नथुनों में समायी तो उसने झटके से अपना मुंह पीछे किया ओर उसकी चूत पर थूक दिया, उसकी चूत का फव्वारा बड़ी तेजी से उछला ओर उसके सर के ऊपर से होता हुआ नेहा की पीठ पर गिरा, मेरे सामने ऋतू अपनी चूत खोले अपने पेचाब से नेहा की कमर भिगो रही थी, उसकी कमर से होता हुआ ऋतू का पेशाब, मेरे गांड मारते लंड तक फिसल कर आ गया ओर उसे ओर लसीला बना दिया, ओर मैं ओर तेजी से नेहा की गांड मारने लगा...
नेहा ने अपना मुंह तो हटा लिया था पर उसके गले से कुछ बुँदे उसके पेट में भी चली गयी थी, उसका स्वाद थोडा कसेला था, पर उसे पसंद आया, आज वो किसी जंगली की तरह बर्ताव कर रही थी, उसने उसी जंगलीपन के आवेश में अपना मुंह वापिस बारिश कर रहे फुव्वारे पर टिका दिया, ओर जलपान करने लगी...ऋतू ने जब देखा की उसकी बहन उसका पेशाब पी रही है तो वो ओर तेजी से झटके दे देकर अपनी चूत उसके मुंह में धकेलने लगी.
मेरा लंड भी अब काफी गीला हो चूका था, थूक, पेशाब ओर नेहा की चूत के रस में डूबकर..
वो किसी पिस्टन की तरह उसकी गांड में अन्दर बाहर हो रहा था, नेहा की गांड का कसाव मेरे लंड पर हावी हो रहा था, मेरे लंड ने जवाब दे दिया ओर उसने नेहा की गांड में उल्टी कर दी.
नेहा ने भी अपनी गांड में गर्म वाला महसूस करते ही, झड़ना शुरू कर दिया, ओर वहां ऋतू की चूत ने भी जवाब दे दिया ओर वो भी रस टपकने लगी, नेहा ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला ओर अपना मुंह ऋतू की चूत की तरफ घुमा कर अपनी गांड उसके मुंह पर टिका दी, ऋतू मेरे लावे को चाटने लगी ओर अपना रस नेहा को चटवाने लगी, मैं जमीन पर खड़ा हुआ अपने मुरझाते हुए लंड को देख रहा था ओर उन दोनों कुतियों को एक दुसरे की चूत चाटते हुए देख रहा था.
सारी चुदाई की महाभारत ख़त्म होने के बाद हम तीनो ने अपने कपडे पहने और नीचे की तरफ चल दिए, नेहा थोडा धीरे चल रही थी, चले भी क्यों न उसकी गांड जो फट गयी थी आज..
हम तीनो नीचे पहुंचे और देखा की टेबल पर मोनी और सोनी एक लड़के के साथ बैठी है और गप्पे मार रही है, मोनी - सोनी को देखते ही मेरे मन में एक प्लान आया, मैंने नेहा और ऋतू को एक कोने में ले जाकर अपना प्लान बताया, ऋतू तो मेरे बारे में जानती थी की मैं कितना कमीना हूँ, नेहा के लिए ये पहला अवसर था इसलिए वो थोड़ी घबरा गयी पर ऋतू और मेरे आश्वासन देने के बाद वो भी मान गयी हमारे प्लान में शामिल होने के लिए.
हम तीनो टेबल पर पहुंचे और हाय - हेल्लो करने के बाद वहीँ बैठ गए.
सोनी : "ऋतू, ये है रेहान, ये भी अपने मोम-डैड के साथ यहाँ आया है..."
हम सबने रेहान को हाय किया.
रेहान बड़े गौर से ऋतू और नेहा को देख रहा था, वो काफी मोटा था, उसका गोल चेहरा था और बिना मूंछ की हल्कि दाड़ी थी.
वो शक्ल से ही बड़ा चोदु किस्म का लग रहा था, उसके पहनावे और टपोरी स्टाइल से पता चलता था की वो ज्यादा अमीर टाइप का नहीं था. ऋतू उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही थी. पर जब मैंने नेहा को देखा तो वो उसे एकटक निहार रही थी, मेरी समझ में नहीं आया की उसे इस उल्लू में क्या दिखाई दे रहा है.
रेहान ने बताया की उसके अब्बा की रिटेल स्टोर की चैन है, जोर देने पर उसने कहा की "नॉन-वेज अयिटम की" मैं समझ गया की साला कसाई की औलाद है.
मैंने बात शुरू की.
"क्या तुम लोग कुछ ऐसी बात जानना चाहते हो अपने पेरेंट्स के बारे में जो तुमने कभी सोची भी न हो.." मैंने सोनी और मोनी की तरफ देखते हुए कहा.
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