Hindi Antarvasna - चुदासी
10-27-2021, 12:19 PM,
#11
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
ये सब बातें मेरे लिए तो क्या किसी कुंवारी लड़की के लिए भी नई नहीं थीं। पर सुनने में मजा आ रहा था। मैं भी अब शरारत के मूड में आ गई थी। मैंने उसके लिंग के छेद में नाखून मारा।

करण के मुँह से आऽs निकल गई, और उसके लिंग ने एक जोर का झटका मारा।

करण ने मेरे होंठों पे किस करके बोला- “किसी का लण्ड चूसो ना तो ये छेद पे जीभ से चाटना, सामने वाला तेरा गुलाम बन जाएगा..."

मैंने कोई प्रतिकिया नहीं दी और उसके लिंग को हिलाने लगी।

करण- “यार ऐसे मेरा पानी नहीं निकलेगा, या तो चूसो या चुदवाओ तो कुछ हो सकता है...” करण ने कहा।

करण की बात सुनकर मैं ठंडी पड़ गई, मेरा जोश हवा हो गया। मैंने डरते हुये कहा- “करण बात तो सिर्फ छूने की हुई थी ना... और तुम हो की...”

मेरी बात बीच में ही काटते हुये करण बोला- “तो एक काम कर ना, पैसे ज्यादा ले लेना...”

मैंने गुस्से में कहा- “तुम मुझे क्या समझते हो?”

करण ने बहुत ही शांति से जवाब दिया- “मैं तो तुझे मेरी फर्स्ट डेट मानता हूँ। तुम चाहो तो मैं तुझे हर रोज मिलना चाहूँगा। मेरा पहला प्यार हो तुम। पर तेरी बातें एक कालगर्ल जैसी ही हैं, ये बात हुई थी, ये बात नहीं हुई थी, ये क्या? जब हम किसी से सेक्स करें तो सिर्फ हमारी पसंद नहीं देखनी चाहिए, थोड़ा सामने वाले का भी खयाल करना चाहिए...”

मैं फिर उसकी बातों के जाल में फंस गई। मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मैं करण को कैसे समझाऊँ? फिर भी मैंने अपना प्रयास जारी रखा- “तुम भी तो मेरी पसंद का खयाल करो, मुझे वो चूसना पसंद नहीं..."

करण- “कोई बात नहीं, चल एक काम करते हैं। मैं तुम्हारी ब्लाउज और ब्रा खोल देता हूँ.” करण ने कहा।

मैं- “नहीं करण..”

करण- “क्या नहीं नहीं यार, तुम शादी मत करना किसी से..” कहकर करण मेरे ब्लाउज के बटन खोलने लगा।

मैंने पूछा- “क्यों ऐसा कह रहे हो?”

करण- "तुम बस ना ना ही करती रहोगी, पति बेचारे को कुछ करने ही नहीं दोगी..” कहते हुये करण ने मेरी ब्रा के हुक भी खोल दिए थे, और- “तेरी चूचियां बहुत मस्त हैं..” कहते हुये करण मेरे उरोजों को मसलने लगा। करण ने मेरे उरोजों को सहलाते-सहलाते निप्पल पकड़ा और दबाया।।

तब मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई।

करण- “तू गरम तो बहुत जल्दी हो गई है.” कहते हुये करण ने झुक के निप्पल को मुँह में ले लिया। फिर करण ने पूछा- “तुझे कभी-कभी तो चुदवाने का मन होता होगा ना?”

मैं बोली- “हाँ..."

करण- “तब क्या करती है?” करण ने फिर पूछा।

मैं... मैं...” मेरी समझ में ये नहीं आया की उसको क्या कहूँ?

करण- “मैं मैं क्या करती है बोल ना... चूत को उंगली से चोदती हूँ..” कहते हुये करण ने निप्पल को काट लिया।

“आहह..” मेरे मुँह से सिसकारी फूट पड़ी।

करण ने अपना हाथ नीचे किया और साड़ी पकड़कर ऊपर की। मेरी विरोध करने की शक्ती अब खत्म हो गई। थी। उसने मेरी जांघ को सहलाकर मुझे थोड़ा उधर होने को कहा। मैं थोड़ा उठी, तो उसने साड़ी को ऊपर करके मेरी पैंटी निकाल दी। पैंटी निकलते ही उसने मेरी योनि को छू, और करण ने पूछा- “कितने महीने पहले सेव किया था?"
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10-27-2021, 12:19 PM,
#12
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
मैं- “क्या?” मैंने सामने सवाल किया।

करण- "ये चूत के बाल कब निकाले थे?”

मैंने कहा- “3-4 महीने पहले...”

करण- “मैं ऊपर के बाल हर रोज निकालूं या ना निकालूं, पर नीचे के तो हर रोज निकालता ही हूँ, हर रोज बाल निकालना चालू कर दे...”

मैंने उसको कोई जवाब नहीं दिया।

करण ने मेरी योनि में उंगली डाली, और कहा- “तेरी चूत तो गीली हो गई है...” कहकर उसने उंगली निकाली और नाक के पास ले गया- “बहुत मस्त खुशबू है...” कहकर फिर से उंगली को योनि में डाल दिया।

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था, मेरा तन सुलग रहा था। मैं चाहती थी की वो जल्दी से मुझे मेरी मंजिल तक पहुँचा दे।

करण- “लण्ड को नहीं तो उंगली को तो चोदने को मिला...” कहते हुये करण मेरी योनि में उंगली अंदर-बाहर करने लगा। वो साथ में मेरे निपल को भी चूस रहा था।

धीरे-धीरे मेरी सांसें तेज होने लगी, मेरे मुँह से सिसकारियां फूटने लगी, और मैं झड़ गई। इतना मजा मुझे आज तक कभी नहीं आया था। मैंने करण को मेरी बाहों के घेरे में ले लिया।

करण- “तुम गरम भी बहुत जल्दी हो जाती हो और ठंडी भी जल्दी पड़ जाती हो...” करण ने मेरे होंठों को उंगली से छेड़ते हुये कहा।

मैंने उसकी बात का कोई जवाब दिए बगैर उसकी उंगली को मुँह में ले लिया।

करण- “अब क्या इरादा है?” उसने पूछा।

मैं- “जो तुम कहो...” मैंने कहा।

करण- “मेरा इरादा तो तुम्हें लण्ड चुसवाने का है...” उसने शरारत से कहा।

मैं- “करण प्लीज़..” मैं शर्माते हुये बोली।

करण- “क्या निशा तुम भी, कोशिश तो करो। मैं नियमित लण्ड की सफाई करके आक्स बाडी स्प्रे लगाता हूँ, फिर भी तुझे बदबू आए तो मत करना...”

मैं- “ओके। मैं कोशिश करती हूँ, पर तेरा पानी निकलने वाला हो तब मुझे बता देना। क्योंकी वो मेरे मुँह में गया ना तो मुझे उल्टी हो जाएगी...” मैंने करण की बात मानते हुये कहा।

करण- "ठीक है निशा, मैं बता दूंगा...”

मैंने झुक के उसका लिंग मुँह में ले लिया।

करण- "वाह... निशा, पूरा मुँह में ले लो और चूसो...”

मैंने करण का लिंग पूरा मुँह में ले लिया।

करण- “अब 3-4 बार सुपाड़े तक लण्ड को बाहर निकालो और फिर पूरा मुँह में लो.”

मैंने उसके कहे अनुसार किया।

करण- “आहह... निशा मेरी जान, उह्ह... अब लण्ड को मुँह में से निकालकर छेद को चूसो आह्ह..” करण धीमीधीमी सिसकारियां लेते हुये बोला।

मुझे भी अब उसका लिंग चूसने में मजा आने लगा था। मैंने उसके लिंग को मुँह से निकाला, हाथ में पकड़कर सुपाड़े को चाटने लगी। उसके बाद मैं छेद को जीभ से सहलाने लगी। करण बहुत ही उतेजित हो रहा था, उसका लिंग झटके मारने लगा था।
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10-27-2021, 12:20 PM,
#13
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
करण- “अया निशा करती रहो..” करण ने कहा।

मैंने और थोड़ी देर उसके लिंग को उसी तरह चाटा। फिर सुपाड़े तक मुँह में लेकर उसके छेद को फिर से सहलाने लगी।

करण- “निशा उह्ह.. पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूसो आहह...”

मैंने करण का लिंग मुँह में ले लिया और मुँह को आगे-पीछे करके बहुत ही मस्ती से चूसने लगी। अब करण कुछ बोल नहीं पा रहा था, मेरे बालों को सहलाते हुये सिसकारियां ले रहा था। मैं लिंग चूसते हुये सोच रही थी कि पूरी रात करण का पानी ना निकले तो कितना अच्छा होगा और पूरी रात चूसने को मिलेगा।

करण- “निशा लण्ड मुँह में से निकाल, मेरा पानी छूटने वाला है...” करण ने कहा।

पर मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। मेरा दिल नहीं मानता था की मैं उसके लण्ड को छोडू।।

करण ने दोनों हाथों के बीच मेरा सिर पकड़ा और खींचकर कहा- “निशा छोड़ यार...”

मैंने उसका लण्ड मुँह से निकालकर ऊपर देखा। करण ने मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिए, और चूसने लगा। उसके लिंग में से वीर्य की पिचकारियां छूटने लगी और उसने मुझे बाहों में भींच लिया। मैंने करण की बाहों से अलग होते हुये कहा- “बैंक्स करण, तुमने मेरे मुँह में पानी नहीं छोड़ा...”

करण- "कैसे छोड़ता? तू उल्टी करती तो मैं कहां बैठता?” करण ने हँसते हुये कहा।

मैं मेरे कपड़े ठीक करने लगी और करण को कहा- “अपने कपड़े ठीक कर लो करण.."

करण ने भी अपने कपड़े ठीक कर लिए।

मैंने घड़ी में देखा तो 2:00 बज रहे थे, मैंने करण के कंधे पर सिर रखते हुये कहा- “मुझे नींद आ रही है करण तुम भी सो जाओ...” मैं कब सो गई मालूम नहीं।।

पर जब जागी तो देखा की मैं सीट में अकेली सो रही थी। मैंने उठकर देखा की बस शहर के अंदर दाखिल हो। गई थी। मैंने चारों तरफ देखा की करण कोई और सीट पे तो नहीं बैठा? मैंने पूरी बस में देख लिया, करण कहीं नहीं था। करण कहां उतर गया होगा? मुझे बताए बगैर कहां चला गया? मुझे कुछ समझ में नहीं आया। तभी मुझे याद आया की मुझे नीरव को फोन करके बुलाना है, वो मुझे लेने आने वाला है।

मैंने नीरव को फोन करके बुला लिया। घर पहुँचते ही मैं बाथरूम में घुस गई, नहाकर बाहर आई तो देखा की नीरव फिर से सो गया था। नीरव को सोते हुये देखकर मुझे थोड़ी शांति हुई। स्टेशन से आते हुये मैंने नीरव से कोई बात नहीं की थी, अभी नीरव यदि जाग रहा होता तो मैं शायद उससे नजरें नहीं मिला पाती।
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10-27-2021, 12:20 PM,
#14
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
सुबह करण के जाने के बाद पूरी रात की हर बात मेरे सामने आ गई, मैं कैसे करण की बातों में आकर बहक गई, वो मुझे याद आया। मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होने लगी। सुबह उठकर मैंने उसको ढूँढ़ा उसका मुझे अफसोस हुवा। दोपहर को रामू के जाने के बाद मैं सो गई, थोड़ी देर बाद डोरबेल बजी। मैंने उठकर दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही मेरी आँखें फट गई, सामने करण खड़ा था।

मेरे मुँह से दबी सी आवाज निकली- “तुम...”

करण- “हाँ, मैं... अंदर आने को नहीं कहोगी?” करण ने आँख मिचकारते हुये कहा।

मैं दरवाजे पर से साइड हुई तो करण अंदर आ गया। मैंने दरवाजा बंद किया और करण की ओर होते हुये कहा तुम यहां क्यों आए हो? तुमने मेरे घर का पता कहां से लिया?”

करण- “प्यार करने वाले कहीं से भी पता हूँढ़ लेते हैं जान...” करण ने शरारत से कहा।

मैंने पूछा- “तुम यहां क्यों आए हो करण?”

करण- “कल रात जो काम हम नहीं कर सके, वो काम करने आया हूँ...” करण ने मेरे नजदीक आते हुये कहा।

मैं- “कल रात जो हुवा उसे भूल जाओ करण, मैं शादीशुदा हूँ, तुम यहां से चले जाओ...” मैंने पीछे होते हुये कहा। मैं ज्यादा पीछे नहीं जा पाई क्योंकी पीछे सोफा था।

करण- “मैं कहां तुमसे शादी करने आया हूँ निशा, मैं तो तुम्हारी प्यास बुझाने आया हूँ...” करण ने कहा।

मैंने गुस्से से कहा- “मुझे कोई प्यास नहीं है, मैं मेरी जिंदगी से बहुत ही संतुष्ट हूँ। करण यहां से चले जाओ तुम..."

करण ने मुझे धक्का देकर सोफे पे गिरा दिया और मुझ पर छा गया- “अपनी प्यास को पहचानो निशा, तुम तुम्हारी वासना की आग को दबा रही हो। उस आग को ठंडा कर दो। नहीं तो जल जाओगी...” कहते हुये करण ने मेरा गाउन ऊपर कर दिया और मेरी पैंटी के इलास्टिक में उंगली फँसा दी।

मैं- “करण छोड़ो और यहां से जाओ, मैं तुम्हारी कोई बात सुनना नहीं चाहती...” मैंने उसको मेरे ऊपर से धकेलने की नाकाम कोशिश करते हुये कहा। मैं करण से बात करके फिर से उसकी बातों में उलझना नहीं चाहती थी।
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10-27-2021, 12:20 PM,
#15
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
करण- “निशा जवानी जलने के लिए नहीं जीने के लिए होती है। जलकर खतम हो जाओ, उसके पहले अपने आपको बचा लो..” कहते हुये करण ने मेरी पैंटी में अपना हाथ डाल दिया। फिर करण ने मेरी योनि पर हाथ से सहलाते हुये पूछा- “तुमने अभी तक बाल नहीं निकाले?”

मैं- "
प्लीज़... करण तुम जाओ...” मुझे अब डर लगने लगा था की मैं फिर से बहक जाऊँगी।

करण ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूसते हुये मेरी पैंटी निकाल दी। मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। मेरे साथ जो हो रहा है वो अच्छा है या बुरा? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे होंठों को । चूसते हुये करण ने अपना हाथ नीचे किया, पैंट की जिप खोलकर लिंग निकाला और मेरी योनि पे रगड़ा, तो मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई।

और तभी डोरबेल बज उठी- “डिंग-डोंग, डिंग-डोंग...”

मैं करण को धक्का देकर खड़ी हो गई। मेरा शरीर पशीने से तरबतर हो गया था। धड़कनें ऐसे बज रही थीं जैसे अभी उसकी आवाज से सीना फट जाएगा। पर ये क्या? मैं सोफे पर नहीं, अंदर बेडरूम में हैं, और करण भी यहां नहीं है। कैसे हो सकता है ये? तभी मेरी समझ में आया की ये एक सपना था। मैं खड़ी हुई और बाहर जाकर दरवाजा खोला, पर कोई नहीं था।

तभी गुप्ता अंकल अपने घर में से बाहर निकले।

मैंने उन्हें पूछा- कोई आया था अंकल?

गुप्ता अंकल- “हाँ, सेल्समैन था, जवान था। मेरे घर में है, तेरी आंटी को दिखा रहा है। तुझे देखना है तो तू भी आ जा..." बूढ़ा बकते ही जा रहा था।

मैंने जोर से दरवाजा बंद कर दिया।

पर उसकी बकबक चालू थी- “तुझे तो मैं भी दिखा सकता हूँ..”

हरामी बूढ़े...” कहते हुये मैं बेडरूम में चली गई। रात को नीरव मेरी योनि में उंगली अंदर-बाहर कर रहा था, आज मुझे हर रोज से दोगुना वक़्त लगा झड़ने में। फिर भी मैं पूरी संतुष्ट नहीं हुई। शायद उसके लिए मैं खुद ही जिम्मेदार थी।

दोपहर से मैं अपने आपको कोष रही थी। मैं कितना गिर चुकी थी की कल रात को पहली बार मिले इंसान के मैं सपने देख रही थी। मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की मैं उसके बारे में इतना क्यों सोच रही हैं, और साथ में हर बार सोचते ही मेरी योनि क्यों गीली हो जाती है।

नीरव सो गया था पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। शाम को सोचा था की नीरव को सब बता दें, फिर सोचा की नीरव जब पूछेगा की करण कौन है? कहां रहता है? तो क्या जवाब देंगी? और करण मुझे कहां परेशान कर रहा है। मैं खुद ही परेशान हो रही हूँ। और फिर बस में जो हुवा वो बताकर तो मैं नीरव की नजरों में गिर ही जाऊँगी।

मैं सुबह के 5:00 बजे तक सोचती रही, फिर नींद आई और 6:30 बजे तो फिर जाग गई। सुबह से मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा है। कल रात नींद नहीं आई इसलिए मैं अपने आपको बहुत ही थकी-थकी महसूस कर रही हैं, और साथ में सिर में भी दर्द हो रहा था। नीरव का टिफिन जाते ही मैंने खाना खा लिया और रामू को बुला लिया। मैं बाहर सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी, मेरी आँखें बहुत भारी हो रही थीं, अंदर रामू बर्तन मांज रहा था। मैं रामू के जाते ही सो जाना चाहती थी। टीवी पर बालिका वधू आ रहा था।

तभी कहीं से करण आ गया।

मैं- “तुम तुम कहां से आए?” मैंने करण से पूछा।

करण- "मैं कहीं भी आ जा सकता हूँ निशा...”

मैं- “तू यहां क्या लेने आए हो? तुम जाओ मुझे परेशान मत करो...” मैंने कहा।

करण- “मैं कहां तुम्हें परेशान कर रहा हूँ निशा.. तेरी परेशानी तुम खुद हो निशा...” करण ने मेरे बाजू में बैठते हुये कहा।

मैं- “मेरी जिंदगी में तुम्हारे सिवा और कोई परेशानी नहीं है..” मैंने कहा।

करण- “मैं नहीं, तुम्हारी परेशानी नीरव है जो तुम्हें संतुष्ट नहीं कर रहा...” कहकर करण ने मेरा गाउन ऊपर किया और मेरे पैरों को सहलाने लगा।
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10-27-2021, 12:20 PM,
#16
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
मैं- “नीरव मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर रहा है और तुम कौन हो मेरी निजी जिंदगी में दखलअंदाजी करने वाले? कोई कमी नहीं मेरे नीरव में, पैसे वाला है, खूबसूरत है और क्या चाहिए मुझे?” मैंने करण को पूछा। करण मेरे पैरों को अभी भी सहला रहा था, मेरी योनि गीली होने लगी थी। मैंने अपनी आँखें मस्ती में बंद कर ली थी।

करण- "औरत को और भी बहुत कुछ चाहिए मर्द से, पेट की भूख मिटने से जिस्म की भूख नहीं मिटती, नीरव तुम्हारी सेक्स लाइफ को संतुष्ट नहीं कर पा रहा, वो तुम खूब अच्छी तरह जानती हो...” कहते हुये करण ने । गाउन मेरी जांघ तक कर दिया।

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मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। दिमाग कह रहा था ये अच्छा नहीं है पर दिल को सकून भी मिल रहा था। मैंने करण को कहा- “तुम यहां से जाओ...”

तब तक तो करण मेरे ऊपर भी आ गया था और मेरे गाउन को मेरे उरोजों के ऊपर तक कर दिया। मेरी योनि को अपनी उंगली से छेड़ते हुये मेरे उरोजों को चूसने लगा।

मैं अब अपने होश गवां बैठी थी। मैं सिसकारियां लेती हुई उसकी पीठ को सहला रही थी। करण मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे किस करने लगा। उसके मुँह से भयंकर बदबू आ रही थी, बदबू से मेरा सिर भारी हो गया। मैंने मेरी आँखें खोल दीं और मेरे मुँह से चीख निकल गई- तुम?

रामू- “हाँ मैं.. मेमसाब, और कौन है यहां?” रामू ने हँसते हुये कहा।

मैं- “तुम यहां से खड़े हो जाओ, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की..” मैंने गुस्से से कहा।

रामू- “देखो मेमसाब जब अपुन का लण्ड खड़ा होता है ना तब अपुन कहीं खड़ा नहीं रहता, जहां चूत देखी ऊपर सो जाता है और ये नाटक क्यों कर रहेली है? थोड़ी देर पहले तो मेरी नंगी पीठ सहला रही थी..” रामू ये सब कहते हुये मेरे अंगों से छेड़खानी कर रहा था।

रामू की बातों से मुझे खयाल आया की मेरा गाउन मेरी गर्दन पर था और रामू भी पूरा नंगा होकर मुझ पर लेटा हुवा था। मैंने नीचे देखा तो वहां रामू की खाकी चड्डी (हाफ पैंट) और सफेद शर्ट पड़ी थी।

मैंने रामू को धमकी दी- “रामू... मैं चिल्लाकर सबको इकट्ठा करूंगी, पोलिस में तुम्हारी शिकायत करूंगी...”

रामू ने मेरे मुँह को अपने हाथ से दबा दिया और बोला- “चिल्लाने से कोई फायदा नहीं, बाजू में आंटी घर पे नहीं है और अंकल आएगा तो वो भी चढ़ जाएगा तेरे ऊपर...” इतना कहकर रामू नीचे झुका और मेरे निपल को मुँह में लेकर चूसने लगा।

मैंने रामू के बाल खींचे तो उसने ऊपर देखा। मैंने उसे मेरे मुँह पर से हाथ हटाने को कहा, मैं समझ गई थी की अब रामू को धमकी से नहीं शांति से समझाना पड़ेगा।

रामू ने अपना हाथ मेरे मुँह पर से हटा लिया।
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10-27-2021, 12:21 PM,
#17
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
मैंने कहा- “रामू प्लीज़... मुझे छोड़ दो नहीं तो मैं बर्बाद हो जाऊँगी, चाहो तो मैं तुम्हें पैसे दे सकती हूँ?”

रामू जोरों से हँसने लगा और बोला- “क्या मेमसाब... पैसे का क्या करेगा अपुन? दारू पिएगा, रंडीबाजी करेगा ना... और वो दोनों चीज आप में है। आप शराब और सबाब दोनों का नशा हो मेमसाब..” कहते हुये रामू ने अपना लिंग मेरी योनि पे टिकाया। रामू ने अपना लिंग मेरी योनि की बाहरी दीवालों पर रगड़ा।

मैं समझ गई थी की अब मेरा बचना मुश्किल है फिर भी मैंने मेरा संघर्ष जारी रखा। मैंने रामू के कंधे पर मुक्के मारे, पर रामू को उसका कोई असर नहीं था। वो तो मेरी चूचियों को चूसने, चाटने में मसगूल था। मैंने सोचा जो भी होगा पर एक बार तो मैं चीखकर सब को इकट्ठा करूं। तभी रामू ने मेरा मुँह उसके हाथों से दबा दिया और मेरी निप्पल को काट लिया मैं दर्द से छटपटा उठी।

मुझे दर्द से छटपटाते देखकर रामू ने कहा- “ये तो कुछ भी नहीं है मेमसाब। दर्द तो अब होगा, पहली बार चुद रही हो ना मुझसे। मजा भी दोगुना आएगा..."

मैं असहाय सी रामू को देख रही थी। मेरे बाजू भी बचाने की हिम्मत ना कर सके, ऐसे इंसान के नीचे मैं दबी हुई थी। रामू ने अपना लिंग मेरी योनि पर टिकाकर धक्का मारा। रामू का हाथ मेरे मुँह पर ना होता तो मैं जरूर चीख पड़ती। दर्द के मारे मेरी आँखों में आँसू आ गये थे।

रामू- “अभी तो आधा ही गया है मेमसाब...” कहते हुये रामू ने अपना लिंग सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर से अंदर डाला। फिर निकाला, फिर डाला। ऐसे 4-5 बार किया, धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा तब रामू ने फिर से एक और धक्का दिया।

पहली बार जितना दर्द तो नहीं हुवा। रामू ने फिर पहली बार की तरह उसका लिंग अंदर-बाहर किया। मेरा दर्द फिर से कम हो गया, ऐसा रामू को लगा तो उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो लयबद्ध अपनी कमर हिलाकर मेरी
योनि में उसका लण्ड आगे-पीछे करने लगा।

रामू- “मेमसाब अपनी टांगों से मेरी कमर को पकड़कर अपनी गाण्ड ऊपर उठा लो ज्यादा मजा आएगा...” रामू ने मेरी कमर पे चुटकी भरते हुये कहा।
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10-27-2021, 12:21 PM,
#18
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
मैंने उसकी बात की कोई प्रितिकिया ना देते हुये उसकी बात को अनसुनी कर दी। रामू की रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी। रामू ने मेरे होंठों पर किस करने की कोशिश की पर मैंने मुँह फेर लिया। वो कोई बिरोध किये बगैर मेरे निपपलों को चूसने लगा।

रामू- “अपने कपड़े तो निकल दो मेमसाब...” कहते हुये रामू ने अपना हाथ मेरे मुँह पर से हटा लिया और मेरी गाउन खींचने लगा।

मैंने भी मेरा सिर उठाकर उसे गाउन निकालने में मदद की। अब मेरा मन मेरे काबू में नहीं रहा था। मेरे ना चाहते हुये भी मुझमें सेक्स का खुमार छाने लगा था। रामू का लिंग जितनी बार अंदर आता था, उतनी बार मेरी योनि उसका स्वागत पानी से करती थी। हर बार रामू का लण्ड बाहर जाकर अंदर आता था, तब ज्यादा टाइट होकर मुझे एक नई अनुभूति देता था। रामू मेरी गर्दन पे चुंबनों की बौछार करते हुये मेरी योनि पे वार कर रहा था। मैं भी मेरी कमर उठाकर जवाबी वार करना सीख चुकी थी। मैंने मेरा एक हाथ रामू की गर्दन के चारों तरफ डाल दिए, और दूसरे हाथ से उसकी पीठ सहलाने लगी।

कितनी देर तक रामू करता रहा वो मालूम नहीं, पर बहुत देर बाद मुझे लगने लगा की मैं अब झड़ने वाली हूँ तो मैंने मेरे हाथ की पकड़ और मजबूत कर दी और मैं झड़ गई। झड़ते ही ग्लानि और शर्म के भाव से मैंने मेरी । आँखें बंद कर ली। मैं झड़ गई हूँ वो रामू को पता चलते ही उसने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में वो भी झड़ गया। रामू ने झड़ते ही मेरी योनि को वीर्य से भर दिया।

रामू- “बहुत करारा माल हो मेमसाब, आपको चोदने में बहुत मजा आया अपुन को...” कहते हुये रामू मेरे ऊपर से उठ गया।

मुझे मन कर रहा था की मैं किचन में से चाकू लेकर उसको मार दें।

रामू- “कपड़े पहन लो मेमसाब..." रामू ने कहा।

तब मैं उठी और गाउन लेकर पहनते हुये मैंने न चाहते हुये भी चोरी-छिपे रामू के लिंग पर नजर डाल दी। रामू ने कपड़े पहने और दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया। रामू के जाते ही मैं उठकर बेडरूम में गई और बेड पर तकिया पड़ा था उसपर मुँह रखकर फूट-फूट के रोने लगी। मेरे साथ जो हुवा और मैंने जो किया उसमें मुझे सिर्फ मेरा ही दोष नजर आ रहा था। रोते हुये मैंने अपने आपको खतम करने का फैसला कर लिया। मैं उठकर गैलरी में गई, पर वहां नीचे देखकर कूदने की हिम्मत नहीं हुई।

मैं फिर से रूम में आकर रोने लगी। अब तो आँसू भी निकलने बंद हो गये थे, पर रोना बंद नहीं हो रहा था। शाम को हर रोज सब्जी लेने जाती थी, पर आज तो घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं था। शाम के 7:00 बज चुके थे, मैं थोड़ी शांत भी हो गई थी। उठकर मुँह धोया और आईने में देखा तो आँखें सूजकर लाल हो गई थीं। मैंने नीरव को फोन लगाया और बताया- “मेरी तबीयत ठीक नहीं है, आते वक़्त सब्जी लेकर आना...”

मेरी बात सुनकर नीरव ने कहा- “डाक्टर के पास जाना है तो घर आ जाऊँ...”

मैंने कहा- “उसकी जरूरत नहीं है, आराम करूँगी तो ठीक हो जाऊँगी। तुम घर जल्दी आ जाना...”
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10-27-2021, 12:21 PM,
#19
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
रात को नीरव के आते ही मैंने उसे बाहों में ले लिया और रोने लगी। नीरव ने भी मुझे बाहों में ले लिया और मेरी पीठ सहलाते हुये मुझे सोफे पर लिटा दिया। जब में शांत हुई तो नीरव ने मुझे पूछा- क्या हुवा?

शाम को रसोई करते वक्त मैंने सोच लिया था की मैं नीरव को करण और रामू के बारे में सब बता देंगी, कोई भी बात छिपाये बगैर जो भी हुवा वो सब बता दूंगी। हो सकता है की नीरव मुझे छोड़ भी दे। पर मैं नीरव को धोखा नहीं दे सकती। फिर भी कहने के लिए हिम्मत नहीं हो रही थी।

तभी नीरव फिर बोला- “बोल ना...”

मैं फिर से उसके सीने पर लगकर रोने लगी।

नीरव ने पूछा- “तुम्हारे पापा की तबीयत ठीक नहीं है क्या?”

मैं उस भोले भाले इंसान की बात सुनकर और जोरों से रोने लगी।

नीरव- “तुम्हारी मम्मी का फोन आया था क्या?” नीरव ने मेरा मुँह ऊपर करते हुये पूछा।

मम्मी-पापा का ख्याल आते ही मेरी हिम्मत टूट गई। नीरव मुझे घर से निकाल देगा तो मेरे मम्मी-पापा तो जीते जी ही मर जाएंगे। ये ख्याल आते ही मैंने नीरव के सामने- “हाँ...” में सिर हिला दिया।

नीरव- “इसमें इतना टेन्शन लेने की क्या जरूरत है?” कहते हुये नीरव ने मुझे फिर से बाहों में ले लिया।

मैं घर पे अकेली रहना नहीं चाहती थी इसलिए दूसरे दिन सुबह मैं नीरव के साथ बड़े घर (मेरे सास-ससुर का घर) चली गई। नीरव का टिफिन भी वहीं से गया। पर मेरे वहां जाते ही मेरी सास का मुँह चढ़ गया, तो मैं दो दिन रहकर घर वापिस आ गई।
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10-27-2021, 12:22 PM,
#20
RE: Hindi Antarvasna - चुदासी
तीसरे दिन मैं खाना खा रही थी की बेल बजी। मैंने दरवाजा खोला तो रामू था। मैंने उसको ना बोल दिया की अब आना नहीं। मैंने उसको निकालकर कामवाली रखने का फैसला कर लिया था। खाना खाकर सारा काम कर तो लिया पर 4:00 बज गये और मैं थक गई। मैं बेड पे जाकर लेटी और करण आ गया।

करण- “कैसी हो जान?” करण ने आते ही पूछा।

मैं- “चले जाओ यहां से उस दिन जो हुवा वो...” मैं बात अधूरी छोड़कर रोने लगी।

करण मेरे नजदीक आया, मुझे बाहों में लेने लगा तो मैं खिसक गई।

मैं- “मुझे छूना मत करण..”

करण- “क्यों इतना गुस्सा कर रही हो निशा, मैंने क्या किया है जो इतना भड़क रही हो?” करण ने आगे बढ़कर मुझे बाहों में ले लिया।

मैं करण के सीने पर सिर रखकर रोते हुये बोली- “करण उस दिन रामू ने जो मेरे साथ किया वो तुम जानते हो, तुमने भी तो रामू को रोका नहीं...”

करण- “मैं रामू को रोकना चाहता था निशा, पर मैंने देखा की तुम भी उसके साथ मजा ले रही हो तो मैं चला गया..." करण ने कहा।

मैं- “क्या मैं उसके साथ मजे ले रही थी? तुम पागल तो नहीं हो गये? चले जाओ, चले जाओ, कभी मत आना अब यहां चले जाओ...” मैंने करण को गुस्से में आकर धकके लगाए और चले जाने को कहा।

करण- “मैं जानता था की निशा सच तुम सुन नहीं सकोगी। और सच ये है की नीरव तुम्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहा, और ये भी सच है की तुम्हें रामू के साथ चुदते वक़्त जो संतुष्टि मिली, वो आज तक नीरव से नहीं मिली।
और सच ये भी है की..."

मैं- “तुम जाओ यहां से करण मुझे तुम्हारी एक भी बात नहीं सुननी...” कहते हुये मैं अपने कानों पर हाथ रखते हुये बेड से उठ गई।

शाम को मैं रसोई में खिचड़ी रखकर टीवी देखने बैठी, पर मेरा ध्यान करण की बातों पर ही था, मुझे उसकी आवाज सुनाई दे रही थी- “तुम रामू के साथ मजे ले रही थी... नीरव तुम्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहा... उस दिन रामू ने तुम्हें जितना संतुष्ट किया उतना आज तक नीरव ने नहीं किया.” हर बात न जाने कितनी बार सुनाई दे रही थी।

तभी मुझे कुछ जलने की बास आई। मैंने किचन में जाकर देखा तो नीचे की तरफ से खिचड़ी जल गई थी। मैंने गैस बंद कर दिया और फिर से बाहर आकर टीवी देखने लगी। रात को नीरव के आते ही हम लोगों ने खाना खा लिया, जल्दी से काम निपटाकर मैं नींद की गोली लेकर सो गई।

दूसरे दिन सुबह उठी तो मैंने अपने आपको थोड़ा फ्रेश महसूस किया। दोपहर को काम निपटाकर अपार्टमेंट में आ रही दूसरी कामवालियों को काम करने को पूछा, पर किसी ने हाँ नहीं बोला। आजू-बाजू के अपार्टमेंट में भी जाकर आई, 3-4 कामवालियों को तो दोगुना पगार देने को भी बोला पर सबने “ना” ही बोला।

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