Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
08-02-2020, 12:36 PM,
#11
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

चमकू से विदा लेकर मैं वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा, मेरे मन में आनंद की लहरे उठ रही थी, क्यूंकि चमकू ने जल्द ही मुझे अपनी अम्मा की चूत दिलाने का वादा जो किया था, मैं तो खुशी के मारे फुले ही नही समा रहा था, इसी खुशी में मेरे कदम अपने आप तेज़ी से घर की तरफ बढे जा रहे थे, कि तभी बिच में सरजू चाचा अपने घर के आंगन में बैठे दिखाई दे गये,

सरजू चाचा पुरे गाँव में अपने नशे की वजह से बदनाम थे, 24 घंटे बस चिलम खिंचा करते, उनका खेत भी हमारे खेत से बस थोडा ही पहले पड़ता था, चम्पक चाचा तो अक्सर अपने खेत में बने कोठियार(घास फूस और पत्थरों से बना कमरा) में ही पड़ा रहता था, रात को भी अक्सर वो वहीं रहता था, उसके घर में उसकी बीवी शांता चाची, और उनकी एक 15 साल की बेटी रानी थी, सरजू चाचा के बारे में ये बात भी पुरे गाँव में फैली थी कि सरजू चरसी होने के साथ साथ रंडीबाजी का शौक भी फरमाता है.. पर उसके मुंह पर ये बात बोलने की हिम्मत किसी में नही थी,

गाँव वाले अक्सर उससे कम ही बातचित करते थे, इसलिए सरजू चाचा भी ज्यादातर वक्त अपने खेत में ही रहते थे, और महीने में कोई 5-6 बार ही अपने घर आता थे,

बापूजी ने भी मुझे उससे दूर रहने को कहा था, पर चमकू की उससे अच्छी बनती थी, इसी वजह से मेरी भी थोड़ी जान पहचान उससे हो गई थी....

इसीलिए मुझे वहां से जाता देख उसने मुझे आवाज़ दी....

सरजू – अरे समीर बिटवा, कहाँ चले जा रहे हो आज?

मैं – कुछ नही सरजू चाचा, बस चमकू से मिलने गया था, अब घर की तरफ जा रहा हूँ वापस...

सरजू – अरे घर कहीं भागत जात है का, तनिक हमरे पास भी आकर बैठो जरा...

मैं – अरे नही चाचा, अभी काफी लेट हो गया है, माँ राह तकती होगी मेरी...

सरजू – अरे बिटवा, बस 5 मिनट की ही तो बात है, आओ जरा

मैं उसके पास नही बैठना चाहता था, पर हारकर मुझे उसकी बात माननी ही पड़ी, मैं जाकर उसकी खाट पर उसके साथ बैठ गया, सरजू हमेशा की तरह ही अपनी चिलम खिंच रहा था...

सरजू – लो बिटवा, तनिक तुम भी खींचकर देखो, कसम से मजा आ जायेगा......

मैं – अरे नही चाचा, तुम तो जानते हो, मुझे नशा करना पसंद नही...

सरजू – अरे बिटवा, बस एक कश लगाकर देखो, फिर देखो कितना हल्का हल्का महसूस होता है....

मैं – नही चाचा.... आप ही पीओ

सरजू – चल ठीक है, तुझे नही करना ना सही, पर सच में, जिन्दगी में मजा सिर्फ दो ही चीज़ में आता है

मैं – किनमे??

सरजू – एक तो चिलम खींचने में ..

मैं – और दूसरा..??

सरजू – और दूसरा चुदाई में.... हा हा हा ...

ये बोलकर सरजू हंसने लगा, पर मुझे बड़ा अजीब लग रहा था, पर मैं भी क्या बोलता, बस चुपचाप उसकी बात सुनता रहा

सरजू – अरे चुप काहे हो, चिलम तो नही पीते तुम, पर चुदाई तो की होगी कभी...

मैं – न....न...नही चाचा

सरजू (हँसते हुए) – अरे,इका मतलब अभी तक अपना हाथ जगन्नाथ ही करते हो... हा हा हा

मैं बस बेमन से मुस्कुरा दिया, बोलता तो भी क्या बोलता

सरजू – पर सच बोलत है समीर बिटवा, चूत मारने में जो मजा है ना, वो किसी और चीज़ में नाही....क्यों सही है ना

मैं – अब मैं क्या बताऊ चाचा, हम तो आज तक कोई चुत देखे ही नही, मारने की बात तो बहुत दूर की है...

सरजू – अरे का बात करते हो ,आज तक कोनो चूत ही नही देखि तुमने????

मैं – नही चाचा...

सरजू – हम्म... लगता है बिलकुल कोरे हो अभी तक, पर फिकर ना करो, जल्द ही कोई ना कोई तुमको भी मिल ही जायेगी,

मैं – देखि जाएगी चाचा ...

सरजू – चलो फिर, आया करो कभी कभी हमरे खेत पर भी, तुमरे खेत के पास ही तो है बिलकुल, हमरा भी तनिक टाइम पास ही हो जायेगा... क्यों... हा हा हा

मैं – ठीक है चाचा...... अब चलता हूँ....

सरजू चाचा से विदा लेकर मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा, आज मैं बहुत ही उत्तेजित था, एक तो चमकू और उसकी अम्मा की चुदाई के बारे में सुनकर, और दूसरा सरजू चाचा की गरम बातो की वजह से .......

अब मेरा लंड बड़ा ही सख्त होकर मेरी पेंट में तम्बू बनाये हुआ था, मैं किसी तरह अपने लंड को एडजस्ट करता हुआ अपने घर पर पहुंचा, मेरी किस्मत अच्छी थी कि माँ अभी तक ताई के घर से वापस नही आई थी, घर पहुंचने के कुछ देर बाद ही पीछे से माँ भी आ गई, दीदी ने आज खुद ही खाना बनाकर रख लिया था, फिर हम सब ने मिलकर खाना खाया, माँ ने मुझे कल भी उनके साथ खेत में आने को बोल दिया, मैंने भी सर झुकाकर उनकी बात मान ली.....

खाना खाने के बाद मैं आकर सीधा अपने बिस्तर में लेट गया, और आज पुरे दिन हुए वाकयों को याद करने लगा कि किस तरह चमकू ने अपने बाप के कहने पर अपनी माँ की फुद्दी मारी, और किस तरह सरजू चाचा उसे चुदाई की गर्म बाते कर रहे थे, वो सब बाते याद आते ही दोबारा उसका लंड बुरी तरह खड़ा होकर तन गया, अब चूँकि मैं निक्कर में और बिना चड्डी के था, इसलिए मेरा लंड मेरे निक्कर में खतरनाक उभार बनाये हुए था,

मैं अभी पड़ा पड़ा अपने लंड को एडजस्ट कर ही रहा था कि नीलू दीदी भी कमरे में आ गई, हमने ज्यादा बात नही की और सीधा सो गये, पर मेरी आँखों में नींद कहाँ थी और बिना मुठ मारे तो मुझे आज नींद आने वाली नही थी, इसलिए मैं चुपचाप दीदी के सोने का वेट करने लगा, ताकि रोज़ की तरह उनके मस्त जिस्म से थोड़ी छेड़छाड़ कर सकूं

अब रात के करीब 12 बजने वाले थे, दीदी मेरी तरह पीठ किये गद्दे पर लेटी थी, मुझे डर तो अब भी लग रहा था, पर बिना मुठ मारे नींद भी तो नही आती, आख़िर में मैंने फैंसला कर लिया…चाहे वो जो भी हों…पर मैं ऐसे मोके को हाथ से नही जाने दूँगा…मैंने अपनी आँखे खोल कर गौर से देखा…मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नही हुआ..नीलू दीदी ने आज क्रीम कलर का पतला सा शलवार कमीज़ पहना हुआ था…..

मेरा तो लंड एक ही पल में खड़ा हो कर झटके खाने लगा…पीछे उसकी गोश्त से भरे गोरे बदन को देख कर मुझसे रहा नही गया…और मैं उसकी तरफ खिसक कर उससे पीछे से चिपक गया…और धीरे -2 अपने और नीलू दीदी के बीच के गॅप को कम करने लगा…और कुछ ही देर में मैं नीलू दीदी के बदन से पीछे से चिपक गया…इस बार मेरा तना हुआ लंड उसकी गांड की दर्रार में धँस गया…

दीदी थोड़ा सा हिली…और अपनी गांड को पीछे मेरे लंड पर दबा दिया…मेरा लंड नीलू दीदी की शलवार को उसकी गांड की दर्रार में आगे सरकता हुआ…उसकी गांड की दर्रार में धँस गया…पर वो ये सब ऐसे कर रही थे…जैसे वो बहुत ही गहरी नींद में हो…इसीलिए मैं कुछ भी खुल कर नही कर सकता था…

मैं धीरे-2 अपनी कमर को हिला कर अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में रगड़ने लगा.. वो बिना हीले डुले वैसे ही पड़ी हुई थी….नीलू दीदी अब तेज़ी से साँसें ले रही थी. पर मैं बिल्कुल श्योर नही था, कि वो जाग रही हैं…या सोई हुई हैं…

पर तब एक मेरे ऊपर वासना के नशे का असर होने लगा था…मैंने धड़कते दिल के साथ अपना एक हाथ उसके पेट पर रख दिया…और कुछ देर लेटे रहने के बाद भी जब कोई हरकत ना हुई…तो मैं धीरे-2 अपने हाथ को दीदी के मम्मो की तरफ बढ़ाने लगा… और कुछ ही मिनिट में मेरा हाथ दीदी की कमीज़ के ऊपर उसके राइट मम्मे पर था..

जैसे ही मेरा हाथ नीलू दीदी की कमीज़ के ऊपर से उनके मम्मे पर पहुँचा… मैं मस्ती में एक दम पागल सा हो गया…उसके सख़्त और गोश्त से भरे मम्मे उनके तेज़ी से साँस लेने की वजह से ऊपर नीचे हो रही थी… मैं उनकी नाक से साँस लेने की आवाज़ को भी सॉफ-2 सुन पा रहा था…

फिर मैं कोई 5 मिनट तक ऐसे ही अपना हाथ उसके मम्मे पर रखे अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में आगे पीछे करता हुआ रगड़ता रहा…फिर मैंने हिम्मत करके धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को अपने हाथ से दबाना चालू कर दिया…

मैं अपना सर उठा कर नीलू दीदी के फेस और आँखों पर नज़र जमाए हुआ था…ताकि अगर वो उठ भी जाए तो, मैं अपना हाथ पीछे खींच लूँ…पर मेरे अंदर वासना का तूफान बढ़ता ही जा रहा था…

और फिर मैंने अपना आपा खो कर धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को दबाना शुरू कर दिया…वो एक पल के लिए थोडा सा हिली…और उनके मूह से उम्ह्ह की हलकी सी आवाज़ निकल गयी…पर वो ऐसे निकली जैसे वो नींद में हो….

मैं एक पल के लिए उसकी आवाज़ सुन कर अपने हाथ को वहीं रखे हुए थम गया… और जब थोड़े से इंतजार के बाद उसकी तरफ से कोई रियेक्शन नही हुआ…तो मैं फिर से अपने हाथ से धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को दबाना शुरू कर दिया…अब मेरे हाथ की सख्ती उसकी मम्मे पर बढ़ाता जा रहा था….

मेरा तना हुआ लंड अब और ज्यादा अकड़ चुका था…मैंने अपने हाथ को नीलू दीदी के मम्मे से हटा कर, उसकी जांघ पर रख दिया…और धीरे जांघ को सहलाते हुए,नीचे आने लगा…जब मेरा हाथ उनके घुटने तक पहुँचा…तो मैंने नीलू की कमीज़ के पल्ले को पीछे से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया…

मेरे हाथ पैर हवस और डर के मारे काँप रहे थे…मैं दीदी के फेस की ओर सर उठा कर देखते हुए…दीदी की कमीज़ को ऊपर उठाने लगा…जैसे-2 उसकी कमीज़ ऊपर उठ रही थी…मेरे दिल की धड़कने और तेज होने लगी…धीरे-2 मैंने उनकी कमीज़ को उसकी कमर तक ऊपर कर दिया…और फिर एक बार दीदी के फेस की तरफ देखा… उसकी आँखे अब भी बंद थी…पर उनके फेस पर अजीब सी तसूर्रत थी…मैंने उसकी जांघ पर धीरे- हाथ फेरना चालू कर दिया...फिर मैं थोडा सा पीछे हुआ पीछे से नीलू की गांड को देखने लगा….”उफ़फ्फ़ मेरी तो जान ही निकल गयी….क्रीम कलर की पतली सी शलवार में से उसकी ब्लॅक पैंटी सॉफ नुमाया हो रही थी…

मैंने अपना सारा कुछ दाँव पर रखते हुए…अपने शॉर्ट को नीचे करके अपने सख़्त खड़े हुए लंड को बाहर निकाल लिया…और उसकी शलवार और पैंटी के ऊपर से अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में रगड़ने लगा…मैं अब पूरी तरह से होश खो चुका था…

मेरा दिल कर रहा था, कि मैं अभी नीलू की शलवार और पैंटी को निकाल कर अपने लंड उसकी गांड के सूराख में डाल दूं…और खूब कस कस के दीदी को चोदु… पर मेरी हिम्मत नही पड़ रही थी… …अब मेरे लंड की नसें फूलने लगी थी…

मेरा लंड अब अपना पानी छोड़ने वाला था…मैं नीलू दीदी के जिस्म से एक दम चिपक गया…मेरे लंड का कॅप दीदी की पैंटी को उसकी गांड के लाइन में फैलाता हुआ…उसकी गांड के सूराख में पैंटी के ऊपर से दब गया….

इस बार फिर उसके मूह से उम्ह्ह की आवाज़ निकल गयी…मैंने अपने हाथ को आगे लेजा कर उसके मम्मे पर कमीज़ के ऊपर से रख दिया…और अपनी कमर को धीरे-2 हिलाने लगा.. अचानक मुझे अपने बदन का सारा खून अपने लंड की नसों में इकट्ठा होता महसूस होने लगा….और मेरे लंड से पानी की बोछार होने लगी…मेरा पूरा बदन काँप गया…

जब मुझे होश आया…तो मेरे डर के मारे गान्ड फटने लगी…मैं जल्दी से पीछे हो गया…और बिस्तर से उठ कर एक कपड़े को उठा कर बिस्तर पर आ गया, और पहले अपने लंड और बिस्तर पर गिरे वीर्य को सॉफ किया…फिर दीदी की जांघ और गांड वाले हिस्से से शलवार को बड़े ध्यान से सॉफ किया....पर मेरे गाढ़े वाइट कलर के वीर्य से दीदी की शलवार कुछ गीली हो गयी थी…मैंने हल्के हाथ से दीदी की कमीज़ के पल्ले को नीचे कर दिया…और बिस्तर पर लेट गया…
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08-02-2020, 12:36 PM,
#12
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

सुबह जल्दी ही मेरी नींद खुल गयी, मैं झटपट खड़ा हुआ और हाथ में लोटा लिए सीधा जंगल पानी के लिए निकल गया, रस्ते में ही चमकू का घर पड़ता था, मैंने देखा कि रोज़ की तरह चमकू आज भी अपने दरवाजे पर खड़ा मेरा ही इंतज़ार कर रहा था, जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा वो भी हाथ में अपना डब्बा लिए बाहर आ गया और हम दोनों सीधा जंगल की और चल पड़े

चमकू – साले हरामी, थोडा जल्दी आया कर, तेरी वजह से कहीं मेरी निक्कर में ही टट्टी ना निकल जाए

मैं – माफ़ करना यार, क्या करूं थोड़ी बहुत लेट तो हो ही जाती है

चमकू – चल ठीक है, पर कोशिश किया कर जल्दी आने की

अब मैं उसको कैसे बताता कि मैं तो रात को अपनी नीलू दीदी की बड़ी सी गांड देखकर मुठ मारता हूँ, इसलिए नींद नही खुलती जल्दी...

चमकू –अच्छा सुन, तूने मेरी और अम्मा की बात किसी से कही तो नही ना

मैं – कैसी बात करता है तू यार, मैं किसी से नही कहने वाला

चमकू – ह्म्म्म... सही है, बस तू ज्यादा चिंता मत कर, थोड़े ही दिनों में मेरी अम्मा तेरे लंड के निचे लेटी होगी,देखना

मैं – काश, ये सच हो जाये...

चमकू – अरे वाह, लगता है लोंडे को चूत की बड़ी जल्दी है, क्यूँ दिल मचल रहा है क्या तेरा,

उसकी बात सुनकर मुझे भी थोड़ी सी हंसी आ गयी, और मुझे हँसता देखकर वो भी हंसने लगा, इसी तरह मस्ती मजाक करते हम दोनों जंगल पानी हो आये, आज शायद वापस घर आने में काफी लेट हो चुकी थी,

जब मैं घर पहुंचा तो देखा कि माँ और दीदी तो खेत जाने के लिए तैयार बैठे है,

सुधिया – अरे समीर बिटवा , आज तो बड़ी देर लगा दी आने में,

मैं – माफ़ करना माँ, वो बस टाइम का पता ही नही चला

सुधिया – कोई बात नही बिटवा, पर मैं और तेरी दीदी तो अभी जा रहे है खेत की तरफ, तू नहाने के बाद सीधा वहीं आ जाना, तेरा नाश्ता भी हम लेकर जा रहे है, ठीक है ना

मैं – ठीक है माँ,

और ये कहकर माँ और नीलू दीदी सीधा खेत की ओर निकल ली, और मैं सीधा बाथरूम की तरफ,

हमारा स्नानघर यानि बाथरूम घर के अंदर ही एक कोने में है, कहने को तो वो बाथरूम है पर है सिर्फ एक टुटा फूटा पत्थरों और घास फूस से जुगाड़ की हुई छोटी सी चार दिवारी , बाथरूम का दरवाज़ा लकड़ी का बना हुआ था, जिसमे भी यहाँ वहाँ दरारे थी और बाहर से अंदर देखने पर साफ साफ देखा जा सकता था,

मैं सीधा बाथरूम के अंदर घुसा, माँ और दीदी ने पहले ही पानी की बाल्टी भर कर रख दी थी, मैंने फटाफट वहां स्नान किया, इच्छा तो थी कि एक बार जल्दी से मुठ भी मार लूँ, पर फिर सोचा कि जो मजा रात को दीदी की गांड देखकर मुठ मारने में है वो ऐसे अकेले में नही , यहीं सोचकर मैंने मुठ मारने का विचार दिमाग से त्याग दिया और फटाफट नहाकर सीधा खेत की और चल पड़ा,

मैं हमारे खेत के करीब पहुंचने ही वाला था कि मुझे रस्ते में सरजू काका दिखाई दे गये,

सरजू – अरे समीर बिटवा, सुबह सुबह कहाँ भागे जा रहे हो, तनिक हमरे खेत में भी बैठो जरा

मैं – नही काका, माँ खेत में मेरी राह तकती होगी,

सरजू – अरे का समीर बिटवा, बस 5 मिनट के लिए आओ ना, जरा हमरा खेत भी देख लो, तुमरा जितना बड़ा तो नही पर ठीक ठाक है

मैं – पर काका

आखिरकार मुझे सरजू काका की बात माननी ही पड़ी, हम दोनों सरजू काका के खेत की तरफ चल दिए, सरजू काका का भी गन्ने का खेत था, खेत में घुसकर थोड़ी देर अंदर चलने के बाद मुझे एक झोपडी दिखी, रस्ते से देखने पर तो झोपडी दिखती ही नही थी सिर्फ और सिर्फ गन्ने ही गन्ने दीखते थे

सरजू – आओ बिटवा , ई देखो, ई हमरी झोपडी है छोटी सी, बस हम तो यही पड़े रहते है सारा दिन खेत की रखवाली खातिर

मैं – अच्छा फसल उगा रखी है काका इस बार तो,

सरजू – चलो आओ बिटवा , तनिक बैठो हमरे साथ

और मैं और सरजू काका झोपडी के बाहर पड़ी खाट पर बैठ गये

सरजू – अरे रानी बिटिया, सुनती हो का

सरजू की आवाज़ सुनकर उसकी 16 साल की जवान छोकरी रानी एक घाघरा चोली पहने झोपडी से बाहर आ गयी, कसम से क्या मस्त माल लग रही थी काका की बेटी, हाय, मस्त नशीला बदन, पतली सी कमर, छोटे छोटे अधपके अनार, मस्त भरी हुई मांसल गांड, एक बार को तो मेरा लंड थोडा सा झटका मार गया उसे देखकर

सरजू – अरे रानी बिटिया, जरा हमरा चिलम तो पकडाना अंदर से

रानी – जी बाबा,

रानी झोपडी के अंदर गयी और चिलम लाकर अपने बाबा को पकड़ा दी, और फिर झोपडी के अंदर चली गयी

सरजू (एक कश खींचते हुए) – लो समीर बिटवा, तुम भी खींचो एक कश, मजा आ जावेगा कसम से,

मैं – अरे नही सरजू काका, हमने आपको बताया था ना, चिलम खींचने का आदत नही हैं मुझे, और वैसे भी मुझे मजा नही आता चिलम खींचने में

सरजू- चलो कोई बात नही बिटवा, पर बिटवा इसको पी कर एक काम मे बड़ा मजा आता है

मैं- वो कौन से काम मे

सरजू (मुस्कुराते हुए) - अरे वही चुदाई के काम मे........ हा हा हा

मैं- काका, अब अपनी उमर का भी लिहाज करो तनिक, 45 साल के हो गये हो, फिर भी मन नही भरा है तुम्हारा

सरजू- अरे बिटवा इन चीज़ो से किसी का कभी मन भरा है भला, अब तुमका देखो इस उमर मे तुमका एक मस्त चूत मिल जाना चाहिए तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ निखार आए, पर तुम हो की बस काम के बोझ के तले दबे जा रहे हो,

मैं - तो काका चोदने के लिए एक मस्त लोंडिया भी तो होना चाहिए, अब तुम ही बताओ हम किसे चोदे

मैं भी अब खुल कर इन बातो का मजा लेने लगा था

सरजू (मुस्कुराते हुए) – अरे तुम्हारे आस पास तो बहुत हरियाली है रे बिटवा, ज़रा अपनी नज़रो से पहले उन माल को देखो तो सही, तुम्हारा मन अपने आप उन्हे चोदने का होने लगेगा,

मैं- अच्छा काका तुम्हारी नज़र मे ऐसी कौन चुत है जो हमारी नज़र में नही है

सरजू (मुस्कुराते हुए) - देखो बिटवा, हम तुमको बहुत मस्त उपाय बता सकते है पर पहले तुमको हमारे साथ दो -चार चिलम मारना पड़ेगी तभी तुमको हमारी बात सुनने मे मज़ा आएगा,

मैं – देखो काका, मैंने पहले ही कहा है, मुझे चिलम विलम का शौक नही है.....

सरजू – चलो ठीक है, हम तुम्हे ऐसे ही बता देते है.....

हमारी बाते अभी चल ही रही थी तभी सरजू काका ने दोबारा अपनी बेटी को आवाज़ दी

सरजू- अरे रानी बिटिया, ज़रा गिलास मे पानी तो भर कर ले आ, बड़ी देर से गला सूख रहा है,

रानी अंदर से एक गिलास पानी लेकर आई और सरजू ने जैसे ही उसके हाथ से गिलास लिया, रानी एक दम से चीखते हुए अपनी चूत को घाघरे के उपर से पकड़ कर चिल्लाने लगी, सरजू काका और मैं एक दम से खड़े हो गये

सरजू- अरी क्या हुआ क्यो चिल्ला रही है

रानी - आह बाबा, लगता है कुछ काट रहा है,

तभी सरजू काका उसका घाघरा उपर करके नीचे बैठ कर देखने लगा, उसके साथ ही मैं भी बैठ कर देखने लगा, निचे बैठते ही जैसे मुझे जबरदस्त करंट सा लगा, रानी की बिना बालो वाली गोरी गट चिकनी चूत देख कर तो मेरे मुँह मे पानी आ गया, वहीं सरजू अपनी बेटी की चूत को अपने मोटे-मोटे हाथो से खूब उसकी फांके फैला-फैला कर देखने लगा, सरजू जैसे ही उसकी फांके फैलाता, मेरा मोटा लंड तन कर झटके मारने लगता, सरजू उसकी चूत के पास से एक कीड़े को पकड़ लेता है जो मसलने की वजह से मर चुका था उसके बाद अपनी बेटी को दिखाते हुए बोला -देख ये काट रहा था तुझे, अब जा आराम से काम कर मैं बाद मे दवा लगा दूँगा,

रानी को जाते हुए सरजू काका और मैं देख रहे थे जो कि अपनी मोटी कसी हुई गान्ड मटका कर जा रही थी, तभी मैंने सरजू की ओर देखा जो अपनी धोती के उपर से अपने मोटे लंड को मसलता हुआ काफ़ी देर तक अपनी बेटी को जाते हुए देखता रहा,

फिर उसकी नज़र जब मुझ पर पड़ी तो वो मुस्कुराते हुए अपने लंड से हाथ हटाकर कहने लगा - मादरचोद ने लंड खड़ा कर दिया, देख ले समीर बिटवा, जब यह चिलम कस कर पी लो ना तब आसपास बस चूत ही चूत नज़र आने लगती है

मैं - पर काका तुम्हारा लंड तो अपनी बिटिया को देख कर ही खड़ा हो गया

सरजू- अरे बिटवा तूने उसकी चूत नही देखी कितनी चिकनी है और उसका गुलाबी छेद, मेरे मुँह मे तो पानी आ गया और तू कहता है आपका लंड खड़ा हो गया, अरे चूत मे का किसी का नाम लिखा होता है कि यह बेटी की है कि माँ की, हम तो जब ऐसी गुलाबी और चिकनी चूत देख लेते है तो फिर बिना चोदे नही रह पाते है, अब देखो हमारे इस मूसल को, जब तक यह कोई चूत पा ना जाएगा तब तक चैन से बैठेगा नही,

मैं – पर काका, ये तो आपकी अपनी बेटी है, आप इसकी चूत मारोगे क्या??? मैं हैरानी से पूछे जा रहा था

सरजू – अरे हमने कहा न तुमसे, अब तो ये लोडा किसी की चूत में जाये बैगैर शांत हो ही नही सकता, तुम देखो अब कैसे हम हमरी रानी बिटिया की चूत फाड़ते है... बोलो देखोगे

मैं (थूक निगलते हुए) – सच में ?????

सरजू – और नही तो का हम झूट बोलत है, तुम एक काम करो हमरी झोपडी के पीछे जाकर छुप जाओ, तुम्हे वहां से सारा नजारा दिखेगा...

मैं एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह चुपचाप खड़ा हुआ और जाकर झोपडी के पीछे छिप गया.... मुझे ये सोचकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजना हो रही थी कि आज मैं पहली बार कोई चुदाई अच्छे से देख पाउँगा, कहने को तो मैंने सुमेर और सरला ताई की चुदाई भी देखी थी पर इतने अच्छे से नही

मेरा मोटा लंड अब पूरी तरह तन चुका था, रानी की चूत का वह गुलाबी छेद मुझे पागल कर चूका था और सच पूछो तो मैं भी अब चूत चोदने के लिए पागल हो उठा था,पर मैं अब छुप कर सरजू काका और रानी को देखने लगा, रानी अब झोपडी से बाहर निकलकर पास ही कुछ काम कर रही थी,

पर जैसे ही मैंने सरजू काका की ओर देखा, मेरा लोडा झटका मार गया, सरजू काका खाट पर पेर फैलाए लेटा हुआ था और अपने हाथो मे अपना मोटा लंड लेकर उसे मसल रहा था और उसकी नज़रे खेत मे काम कर रही अपनी बेटी रानी की ओर थी

रानी बार-बार झुक-झुक कर घास उठा-उठा कर इकट्ठा कर रही थी और सरजू काका अपनी 16 साल की चिकनी लोंड़िया की उठती जवानी देख-देख कर अपना काला मोटा लंड अपने हाथ से खूब मसल रहा था, उसके बाद सरजू काका ने अपनी चिलम मुँह मे लगाकर जब एक तगड़ा कस मारा तो सरजू काका की आँखे एक दम लाल हो चुकी थी और फिर सरजू काका बैठ कर अपने दोनो परो को फैलाकर अपने मोटे लंड को खूब हिलाते हुए अपनी बेटी रानी की मोटी गुदाज गान्ड को देखने लगा,

मैं तो झोपडी के पीछे छुपा हुआ सरजू काका को लंड मसल्ते हुए देख रहा था, वैसे रानी की मटकती गान्ड और कसी जवानी ने मेरा भी लंड पूरी तरह खड़ा कर दिया था,

तभी सरजू काका ने रानी को आवाज़ दी, अरे बिटिया यहाँ आओ,

रानी दौड़ कर अपने बाबा के पास आ कर क्या है बाबा

सरजू- ज़रा दिखा तो बेटी जहाँ कीड़ा काटा था,

रानी- पर बाबा कीड़ा तो निकल गया ना

सरजू (अपने लंड को मसल्ते हुए) - अरे बिटिया हमे दिखा तो कहीं सूजन तो नही आ गया,

रानी - अच्छा बाबा दिखाती हू, और रानी ने अपने बाबा के सामने अपना घाघरा जैसे ही उँचा किया, सरजू ने अपनी बेटी की नंगी गान्ड पर पीछे से हाथ भर कर उसकी मोटी गान्ड को दबोचते हुए जब अपनी बेटी की कुँवारी चूत पर हाथ फेरा तो जहाँ सरजू का लंड झटके मारने लगा वही मेरा मोटा और गोरा लंड भी मेरी पेंट से मैंने बाहर निकाल लिया, मैं अपने लंड को सहला कर उन दोनो को देख रहा था,

सरजू (अपनी बेटी की चूत को अपनी मोटी-मोटी उंगलियो से सहलाते हुए) - अरे बिटिया इसमे तो बहुत सूजन आ गई है,

रानी (अपना सर झुका कर अपनी चूत को देखने की कोशिश करती हुई) - हा बाबा मुझे भी सूजन लग रही है,

सरजू - अच्छा मैं खाट पर लेट जाता हू, तू मेरी छाती पर अपने चूतड़ रख कर मुझे ज़रा पास से अपनी चूत दिखा, देखु तो सही सूजन ही है या दर्द भी है,

रानी- बाबा दर्द तो नही लग रहा है बस थोड़ी खुजली हो रही है,

सरजू- बेटी खुजली के बाद दर्द भी होगा, इसलिए पहले ही देखना पड़ेगा कि कही कीड़े का जहर तो नही चला गया इसके अंदर,

रानी ने अपने बाबा की छाती के दोनो ओर पैर कर लिए और सरजू अपने घुटनो को मोड़ कर अपनी बेटी के सर को तकिये जैसे सहारा देकर उसकी दोनो मोटी जाँघो को खूब फैला कर उसकी चूत को बिल्कुल करीब से अपने मुँह के पास लाकर देखने लगा, रानी का मुंह मेरी तरफ था, इसलिए मुझे उसकी गुलाबी चूत साफ दिखाई दे रही थी, मैं तो रानी की गुलाबी रसीली चूत देख कर पागल सा हो गया,

तभी सरजू ने अपनी बिटिया की गुलाबी चूत की फांको को अपनी मोटी-मोटी उंगलियो से अलग करके उसकी चूत के छेद मे अपनी एक मोटी उंगली पेल दी

रानी - आह बाबा बहुत दर्द हो रहा है,

सरजू- मैं ना कहता था दर्द होगा पर तू सुन कहाँ रही थी अब इसका जहर जो अंदर घुस गया है, उसको बिना चूसे नही निकाला जा सकता है, तू अपनी चूत को थोड़ा और फैला कर मेरे मुँह मे रख मुझे, इसका सारा जहर अभी चूस-चूस के निकालना पड़ेगा,

रानी अपने बाबा की बात सुन कर अपनी गुलाबी चूत को उठा कर अपने बाबा के मुँह के पास ले गई, और सरजू तो अपनी बेटी की गुलाबी कुँवारी चूत को सूंघ कर मस्त हो गया, उसका लंड पूरी तरह तन चूका था, अपनी बेटी की कच्ची गुलाबी चूत देख कर उसकी आँखे लाल सुर्ख हो चुकी थी, और वह अपनी लपलपाति जीभ अपनी बेटी की चूत मे रख कर उसकी गुलाबी चूत को पागलो की तरह चूसने लगा,

रानी (अपने बाबा के सीने पर अपनी गान्ड इधर उधर मटकाते हुए) - आह बाबा आह बाबा बहुत गुदगुदी हो रही है,

सरजू - बेटी तू बिलिकुल चुपचाप ऐसे ही बैठी रहना मैं 10 मिनिट मे सारा जहर चूस-चूस कर निकाल दूँगा,

फिर सरजू अपनी बेटी की रसीली बुर को खूब ज़ोर-ज़ोर से फैला-फैला कर चूसने लगा, रानी की कुँवारी बुर अपने बाबा के मुँह मे पानी छोड़ने लगी थी, सरजू खूब ज़ोर-ज़ोर से अपनी बेटी की चूत चूस-चूस कर लाल करने में लगा था,

रानी - हे बाबा मैं मर जाउन्गि, आह आह ओह बाबा बहुत अच्छा लग रहा है बाबा आह आह बाबा छ्चोड़ दो बाबा मुझे पेशाब लगी है, ओह आ आ

पर सरजू तो जैसे उसकी बात सुन ही नही रहा था, वो तो बस जोर जोर से रानी की चूत चूसने में लगा था, इधर मेरा तो बुरा हाल हो चूका था ये सब देखकर, मैं अब अपने लंड को मुठी में कैद करके उसे मसले जा रहा था, मेरा रोम रोम इस वक्त रोमांचित हो रहा था

रानी (बाबा का मुँह पकड़ कर हटाती हुई) - बाबा छोड़ दो, मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगी है,

सरजू- बेटी यह तुझे पेशाब नही लगी है, उस जहर के निकलने के कारण तुझे ऐसा लग रहा है जैसे तेरा मूत निकलने वाला है, अब अगर ऐसा लगे कि तुझे खूब ज़ोर से पेशाब लगी है तो तू ज़ोर लगा कर यही मेरे मुँह पर कर देना,

रानी (हाफ्ते हुए) - पर बाबा आपके मुँह पर मैं कैसे मुतुँगी

सरजू- पगली मैं कह तो रहा हू, तुझे मूत नही आएगा, बस तेरे जहर निकलने के कारण ऐसा लगेगा कि तुझे पेशाब आ रही है, तब अपनी आँखे बंद करके मेरे मुँह मे ही कर देना बाकी सब मैं सम्भाल लूँगा,

रानी (मस्ती से भरपूर लाल चेहरा किए हुए थोड़ा मुस्कुरा कर) - बाबा अच्छा तो बहुत लग रहा है पर मैं तुम्हारे मुँह मे पेशाब कर दूँगी तो बाद मे मुझे डांटना मत.

सरजू- अरे मेरी प्यारी बिटिया मैं भला तुझे क्यो डाटूंगा, चल अब अपनी चूत अपने दोनो हाथो से फैला कर मेरे मुँह मे रख दे, मैं बचा हुआ जहर भी चूस लू,

उसका इतना कहना था कि रानी ने अपने दोनो हाथो से अपनी चूत की फांको को खूब फैलाकर अपनी रस से भीगी गुलाबी चूत को अपने बाबा के मुँह पर रख दिया और सरजू पागलो की तरह अपनी बेटी की गुलाबी चूत को खूब दबोच-दबोच कर चूसने लगा,

सरजू अपनी बेटी की चूत चूसे जा रहा था और रानी ओह ओह आह बाबा मैं मर जाउन्गी, आह आह कर रही थी

सरजू जब अपनी जीभ को उसकी गुदा से चाटता हुआ उसकी चूत के उठे हुए दाने तक ले गया, तो रानी बुरी तरह अपनी पूरी चूत खोल कर अपने बाबा के मुँह मे रगड़ने लगी, सरजू लपलप अपनी बेटी की रसीली बर को खूब ज़ोर-ज़ोर से पीने लगा

रानी - आह आह ओह बाबा ओह बाबा......... मैं गई मैं आपके मुँह मे मूत दूँगी बाबा ........आह आह

फिर रानी एक दम से अपने पापा के मुँह मे अपनी चूत का सारा वजन रख कर बैठ गयी और गहरी-गहरी साँसे लेने लगी,

कुछ देर तक सरजू और उसकी बेटी साँसे अपनी सांसे सम्भालने लगे और इधर मैं अपने लंड को मुठिया-मुठिया कर लाल कर चूका था पर मेरा पानी अभी नही निकला था,

रानी - बाबा जहर निकल गया कि और भी चूसोगे मेरी चूत को

सरजू- देख बेटी जहर तो निकल गया है पर तेरे अंदर जो दर्द है उसे मिटाना पड़ेगा नही तो यह बाद मे बहुत तकलीफ़ देगा,

रानी (अपने हाथ से अपनी चूत को मसलती हुई) - पर बाबा अब तो दर्द नही हो रहा है,

सरजू - बेटी दर्द ऐसे मालूम नही पड़ेगा देख मैं बताता हू कि तेरे अंदर दर्द भरा है या नही

और फिर सरजू ने अपनी बेटी की चूत को खोल कर उसके अंदर अपनी बीच की सबसे मोटी उंगली डाल कर जैसे ही ककच से दबाया, रानी के पूरे बदन मे एक दर्द की लहर दौड़ गयी और वो अपनी चूत को कसते हुए बोली - आह बाबा बड़ा दर्द है अंदर तो,

सरजू - अपनी उंगली निकाल कर चाटता हुआ, तभी ना कह रहा हू बेटी, इसके अंदर का दर्द अच्छे से साफ करना पड़ेगा, और उसके लिए इसके अंदर कुछ डालना पड़ेगा,

रानी (अपने बाबा को देखती हुई) - क्या डालोगे बाबा

सरजू-बेटी इसमे कुछ डंडे जैसा डालना पड़ेगा तभी इसका दर्द ख़तम होता है,

रानी- बाबा गन्ने जैसा डंडा डालना पड़ेगा क्या

सरजू (मुस्कुराता हुआ) - बेटी गन्ने जैसा ही लेकिन चिकना होना चाहिए नही तो तुझे खरॉच आ जाएगी

रानी- तो फिर क्या डालोगे बाबा

सरजू- जा पहले झोपड़ी मे से तेल की कटोरी उठा कर ला फिर बताता हू क्या डालना पड़ेगा,

रानी तेल लेने के लिए झोपड़ी की तरह आने लगी, मैं फटाक से निचे बैठकर छुप गया ताकि उसे ना दिखूं, इधर बाहर सरजू काका दोबारा अपनी चिलम जलाकर एक शानदार कस मारने लगे

उनकी आँखे पूरी तरह लाल हो चुकी थी, इतनी देर में ही रानी अंदर से तेल की कटोरी उठा लायी, अब सरजू काका अपनी दोनों टाँगे खाट से निचे लटका कर बैठ चुके थे,

सरजू काका (अपनी बेटी को अपनी जाँघ पर बैठा कर) - बेटी मेरे पास जो डंडा है उसे डालने पर बहुत जल्दी तेरा दर्द ख़तम हो जाएगा,

रानी- तो बाबा दिखाओ ना आपका डंडा कहाँ है

सरजू ने अपनी बेटी की तरफ अपनी लाल आँखो से देखा और फिर अपनी धोती हटाकर अपना मोटा काला लंड जैसे ही अपनी बेटी को दिखाया, अपने बाबा का विकराल लंड देख कर रानी के चेहरे का रंग उड़ गया, तभी सरजू ने रानी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया और रानी के हाथो मे अपना लंड थमा दिया,

सरजू- बेटी ऐसे क्या देख रही है पहले कभी किसी का डंडा नही देखा क्या

रानी- अपना थूक गटकते हुए, बाबा देखा तो है पर यह तो बहुत मोटा और लंबा है,

सरजू- बेटी इस डंडे को जितना ज़ोर से हो सके दबा, तभी यह तेरी चूत के अंदर घुस कर तेरा सारा दर्द ख़तम कर देगा,

रानी अपने बाबा का लंड सहलाने लगी, और सरजू अपनी बेटी की कुँवारी गुलाबी चूत को मसलने लगा, रानी की चूत मे खूब चुदास पैदा हो चुकी थी और वो भी अब अपने मनमाने तरीके से अपने बाबा का लंड कभी मसल्ने लगती कभी उसकी चमड़ी को उपर नीचे करके उसके टोपे को अंदर बाहर करती और कभी अपने बाबा के बड़े-बड़े बॉल्स को खूब अपने हथेलियो मे भर कर सहलाने लगती,

इधर रानी को इतना मज़ा आ रहा था कि उसे पता भी नही चला कब उसके बाबा ने अपनी उंगली थुन्क मे भिगो-भिगो कर उसकी चूत मे गहराई तक भरना शुरू कर दिया था,

सरजू- बेटी कभी गन्ना चूसा है कि नही

रानी- हाँ बाबा खूब चूसा है

सरजू - बेटी अपने बाबा का डंडा चूस कर देख गन्ना चूसने से भी ज़्यादा मज़ा आता है

रानी (हस्ते हुए) - क्या इसको भी चूसा जाता है

सरजू- एक बार चूस कर देख फिर बता कैसा लगता है

रानी अपने बाबा की बात सुन कर उसके मोटे लंड को अपने मुँह मे भर कर चूसने लगी, उसके मुँह मे अपने बाबा का मोटा लंड मुश्किल से समा रहा था, वो पहले धीरे-धीरे अपने बाबा का लंड चूसने लगी और फिर जब उसे बहुत अच्छा लगने लगा तो देखते ही देखते अब वो कस कस कर अपने बाबा का लंड चूसने लगी,

रानी के मुंह में उसके बाबा का मोटा लंड सरपट अंदर बाहर होते देख मेरा लंड भी बुरी तरह मचल चूका था, मैं अब जोर जोर से मुठ मारने लगा,

इधर अब रानी ने सरजू काका का लंड चुसना बंद कर दिया

सरजू – बेटी अब इस तेल को मेरे लंड पर अच्छे से मल दे, ताकि ये तेरी चुत में जाकर उसका सारा दर्द दूर कर दे,

रानी भी अब पूरी मस्ती मे आ चुकी थी और वो अपने बाबा के मोटे लंड पर खूब रगड़-रगड़ कर तेल लगाने लगी, जब सरजू का लंड तेल से पूरी तरह भीग गया, तब सरजू अपनी बेटी को खाट पर लेटा कर उसकी दोनो जाँघो को उठा लिया, और अपने लंड को अपनी बेटी की गुलाबी चूत मे लगा कर अपने लंड के टोपे को उसकी चूत के गुलाबी रस से भीगे हुए छेद मे फिराना शुरू कर दिया

सरजू- देख बेटी अब यह जब अंदर घुसेगा तो थोड़ा ज़्यादा दर्द होगा और फिर तुझे एक दम से धीरे-धीरे आराम होने लगेगा, इसलिए ज़्यादा आवाज़ मत करना,

रानी- आप फिकर ना करो, बाबा मैं सब सह लूँगी,

रानी के मुँह से यह बात सुनते ही सरजू ने एक तबीयत से ऐसा झटका मारा कि अपनी बेटी की कुँवारी चूत को फाड़ता हुआ सीधा उसका मोटा लंड आधे से ज़्यादा उसकी चूत मे फस गया और रानी के मुँह से हेय मर गई रे बाबा की ज़ोर से आवाज़ निकल पड़ी

सरजू ने जल्दी से उसका मुँह दबा कर एक दूसरा झटका इतनी ज़ोर से मारा कि उसका पूरा लंड जड़ तक उसकी बेटी की चूत को फाड़ कर पूरा अंदर समा गया और रानी की जोर की चीख निकल गयी, एक बार तो मुझे भी लगा कि उसकी आवाज़ सुनकर कोई इधर ना आ जाये

इधर अब रानी की आँखों में आंसू आ चुके थे, और उसकी चुत से खून की पतली सी धार बहने लगी थी, वो अपनी टाँगे इधर उधर पटक कर छुटने की कोशिश कर रही थी, पर तभी सरजू काका ने उसकी गान्ड के नीचे एक हाथ डाल कर उसे उठा कर अपने सीने से चिपका लिया और धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाते हुए रानी के दूध को दबा-दबा कर उसकी चूत मे झटके मारने लगा

रानी - आह छोड़ दे बाबा ,बहुत दुख रहा है, आह आह ओ बाबा,

सरजू –बेटी, अपने बाबा से खूब कस कर चिपक जा, अब बिल्कुल दर्द नही होगा, अब देखना तुझे कितना मज़ा आएगा,

रानी भी अपने बाबा से पूरी तरह चिपक गई, और सरजू अब कुछ तेज-तेज अपनी बेटी की चूत मे अपने लंड से धक्के मारने लगा, सरजू का लंड अब रानी की चूत मे कुछ चिकनाहट के साथ जाने लगा था, पर उसके लंड को उसकी बेटी की चूत ने बहुत बुरी तरह जकड़ रखा था इसलिए सरजू को अपनी बिटिया रानी को चोदने मे बड़ा मज़ा आ रहा था

उसने रानी की दोनो मोटी जाँघो को थाम कर अब सटासट अपने लंड से पिलाई शुरू कर दी

रानी - आह आह...... ओ ......बाबा आह ......अब ठीक है........ आह आह ओ....... बाबा बहुत अच्छा लग रहा है...... और तेज... मारो बाबा .......तुम बहुत अच्छा मार रहे हो...... थोड़ा तेज मारो बाबा.........

सरजू अपनी बेटी की बात सुन कर उसे खूब हुमच-हुमच कर चोदने लगा था, और इधर मैं जोर जोर से मुठ मारने में लगा पड़ा था,

अब सरजू अपनी बेटी को लिए हुए ही खड़ा हो गया, उसने एक हाथ निचे ले जाकर अपने मोटे लंड को रानी की चूत के गुलाबी छेद पर फिट किया और फिर हुमच हुमच कर उसी अंदाज़ में चोदने लगा, मैं सरजू काका का लंड रानी की चूत में जाते हुए साफ देख पा रहा था, मुझे नही पता था कि कोई इस तरह भी चोदता है, पर ये देखकर मेरे लंड ने अब फुंकारे मारना शुरू कर दिया था,

रानी पूरे आनंद मे अपने बाबा से बंदरिया की तरह चिपकी हुई अपनी चूत मे अपनी औकात से बड़ा और मोटा लंड फसाए हुए मस्त झूला झूल रही थी, करीब 10 मिनट तक सरजू ने अपनी बेटी को अपने लंड पर बैठाकर उसकी चूत मारी

सरजू अपनी बेटी के छोटे छोटे दूध को भी पकड़ कर मसल रहा था,

तभी अचानक रानी का बदन अकड़ने लगा, सरजू काका ने भी अपने धक्के तेज़ कर दिए और देखते ही देखते सरजू काका के लंड से वीर्य की पिचकारी फुट कर अपनी बेटी की चूत को भिगोने लगी, रानी भी अपने बाबा के साथ ही झड चुकी थी, और उन दोनों का पानी रानी की चूत से निकलकर उसकी नंगी जांघो को भिगोने लगा,

मैंने ये नज़ारा देखकर ज्यादा देर टिक ना सका और मेरे लंड ने भी सटासट वीर्य की पिचकारियाँ मारनी शुरू कर दी,

सरजू काका अपने लंड पर उसे बिठाए हुए ही दोबारा खाट पर बैठ गये, और रानी अपने बाबा के लंड पर आराम से अपनी चूत को फसाए हुए बैठी थी,

सरजू अपनी चिलम जला कर फिर से एक तगड़ा काश खीचने लगा,

कुछ देर बाद सरजू ने अपनी बेटी को अपने लंड से उठाया तो उसका लंड रानी की टाइट चूत से पक्क्क की आवाज़ के साथ बाहर निकला,

रानी - आह बाबा.. दर्द तो अभी भी लग रहा है

सरजू (अपनी बेटी के गालो को चूमते हुए) -बिटिया ज़हरीला कीड़ा था न, उसका जहर तो निकल गया पर इस दर्द को पूरी तरह मिटाने के लिए मेरे डंडे से तुझे रोज ऐसे ही अपना दर्द मिटवाना पड़ेगा, तब ही कुछ दिनो बाद बिल्कुल दर्द मिट जाएगा,

रानी (अपने बाबा के मोटे लंड को अपने हाथो मे भर कर दबाते हुए) - बाबा तुम्हारा डंडा तो बहुत मस्त है, मुझे तो बड़ा मज़ा आया, अब तो मैं खुद ही इस डंडे से अपना दर्द रोज मिटवाउन्गि

सरजू (अपनी बेटी की बात सुन कर खुश होता हुआ) - हा बेटी ठीक है पर एक बात ध्यान रखना यह बात किसी को नही बताना अपनी माँ को भी नही, समझी,

रानी- नही बाबा मैं किसी को नही बताउन्गि

सरजू - अच्छा अब जा जाकर झोपड़ी मे थोड़ा आराम कर ले

काका की बात सुनकर रानी धीरे धीरे चलकर झोपडी में आ गई, इधर मैं चुपके से निकलकर वापस सरजू काका के पास आ गया

सरजू काका – क्यूँ समीर बिटवा, कैसन लगी हमरी चुदाई, मजा आया की नाही

मैं – काका, कसम से इतना मज़ा तो जिंदगी भर नही आया मुझे, जितना आज आपकी और रानी की चुदाई देखकर आया है,

सरजू काका – पर ध्यान रहे , ये बात किसी को भी पता ना चले, समझे

मैं – अरे आप चिंता मत करो काका, मैं किसी को ये बात नही बताऊंगा

सरजू काका – ह्म्म्म....

मैं – ठीक है फिर काका, मैं चलता हूँ, माँ इंतज़ार कर रही होगी, वैसे भी काफी देर हो चुकी है,

फिर मैं सरजू काका से विदा लेकर अपने खेत की तरफ चल दिया
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08-02-2020, 12:37 PM, (This post was last modified: 08-02-2020, 12:38 PM by desiaks.)
#13
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
[size=large][b][color=#004000]\r\n\r\nसरजू काका से विदा लेकर मैं सीधा अपने खेतो की ओर चल दिया, मुझे पहले ही काफी लेट हो चुकी थी इसलिए मैं अब और ज्यादा देर नही करना चाहता था इसलिए मैं तेज़ी से चलता हुआ आगे बढ़ने लगा, कुछ ही देर में मैं हमारे खेत में पहुंच गया, माँ और दीदी गन्ने के आस पास उगी झाडिया काटने में मशगुल थी, तभी माँ ने मुझे वहां आता देखा तो मेरी तरफ देखकर बोली\r\n\r\nसुधिया – बेटा, इतनी देर कहाँ लगा दी, कब से तेरी राह देख रहे है हम\r\n\r\nमैं – माँ, वो बस ऐसे ही नहाते नहाते देर हो गयी, और मैं थोडा धीरे धीरे भी चलता हूँ ना इसलिए\r\n\r\nसुधिया – चल अब ये बहाने बाज़ी छोड़ और आकर हमारी मदद कर,\r\n\r\nमैं – क्या करना है माँ मुझे\r\n\r\nसुधिया – ये जो गन्नो के आस पास घास फूस झाड़ियाँ सी उगी हैं, इन सब को आज ही साफ करना है, समझा\r\n\r\nमैं – ठीक है माँ\r\n\r\nऔर ये कहकर मैंने एक कुदाली उठाई और जिधर नीलू दीदी काम कर रही थी, उधर ही पास में घास काटने लगा, कुछ देर काम करते करते मैं और दीदी काफी अंदर तक आ चुके थे, माँ तो अब हमे दिखाई भी नही दे रही थी, मैं भी बस घास काटने में मशगुल था कि तभी नीलू दीदी मेरे पास ही आकर बैठ गयी,\r\n\r\nनीलू दीदी – क्यों रे, क्या बोल रहा था माँ को, इतना वक्त कहाँ लगा दिया\r\n\r\nमैं – दीदी वो बाथरूम में ही नहाने में ज्यादा टाइम लग गया\r\n\r\nनीलू दीदी – “क्यों ऐसा क्या कर रहा था बाथरूम में” नीलू दीदी ने मेरी तरह आँखे मटकाते हुए कहा\r\n\r\nमैं – कुछ नही दीदी, मैं तो वो बस नहा ही रहा था, और क्या करूंगा बाथरूम में\r\n\r\nनीलू दीदी – मुझे क्या पता तू क्या करता होगा अंदर,\r\n\r\nनीलू दीदी की बात सुनकर मैं थोडा सकपका गया, कि कहीं इन्होने मुझे अंदर मुठ मारते हुए तो नही देख लिया, वैसे भी बाथरूम का दरवाज़ा लकड़ी का है और उसमे काफी सारी दरारे भी हैं\r\n\r\nमैं – न...न....नही...तो दीदी मैं तो बस नहा ही रहा था अंदर\r\n\r\nनीलू दीदी – चल ठीक है... अब काम कर\r\n\r\nनीलू दीदी ये कहकर मेरे से बस 3-4 फूट आगे बैठकर ही घास काटने लगी, पर इस बार तो वो बैठकर नही बल्कि खड़ी होकर झुकने के बाद घास काट रही थी, आज दीदी ने घाघरा चोली पहनी हुई थी, जो थोड़ी फटी पुरानी सी थी\r\n\r\nनीलू दीदी झुक झुककर घास काट रही थी, तभी अचानक मेरी नज़र दीदी की मस्त उभरी हुई गांड पर जा टिकी, मुझ पर जैसे बिजली सी गिर पड़ी, एक तो इतनी मस्त फूली हुई गांड आँखों के सामने थी उपर से दीदी घास काटते काटते अपनी कमर और गांड को मस्ती से होले होले हिला भी रही थी, मेरे गले का पानी सुख सा गया ये नज़ारा देखकर, पर मन में थोडा डर था कि कहीं दीदी ने अचानक पीछे मुडकर देख लिया तो,\r\n\r\nमैं बस अभी अपनी नज़रे फेरने ही वाला था कि तभी अचानक मुझ पर जैसे एक और गाज गिर पड़ी, नीलू दीदी का घाघरा पीछे एक घास के डंठल में फस गया पर दीदी का ध्यान इस ओर नही गया, और वो बिना जाने ही थोड़ी सी आगे हो गयी, पर पीछे से घाघरा डंठल में फंसे होने की वजह से थोडा सा उपर उठ गया, और उसी पल मुझे नीलू दीदी की गोरी गोरी मलाई जैसी जांघे नज़र आ गयी,\r\n\r\nमैं तो अपने होश ही खो बैठा ये नज़ारा देखकर, नीलू दीदी की मांसल जांघे और उपर से उनकी काली पेंटी की हलकी सी झलक मेरी आँखों में कैद हो चुकी थी, उसकी मोटी सी मांसल गदरायी गांड पर उस छोटी सी पैंटी को देखकर मेरी सांसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी, मेरा चेहरा गरम होने लगा, मुझे अपने लंड में तनाव महसूस होने लगा, और जल्द ही मेरे लंड विकराल रूप ले लिया जिससे मेरी पेंट में उभार बन गया था ,\r\n\r\nपता नही क्यूँ पर नीलू दीदी अब वहीं खड़ी खड़ी घास काट रही थी, जबकि पीछे से उनका घाघरा आधे से ज्यादा उठा हुआ था, मैं तो दीदी की मस्त मांसल भरी हुई जांघो को ही घूरे जा रहा था, पर तभी अचानक दीदी पीछे मुड गयी,\r\n\r\nमेरी तो जैसे साँस ही रुक गयी, मैंने तुरंत अपना सर दूसरी तरफ घुमा लिया,\r\n\r\n“दीदी ने मुझे देख लिया, दीदी ने मुझे पक्का देख लिया, अब क्या होगा,,,,,, अगर उन्होंने माँ को बता दिया तो, कहीं बापूजी को ये बात पता चली तो मुझे घर से ही ना निकाल दे” मेरे मन में बहुत सारे विचार आ रहे थे और डर के मारे मेरी हालत खराब हो चुकी थी,\r\n\r\nमैंने हिम्मत करके दोबारा दीदी की ओर देखा, और अचानक मेरी नज़रे दीदी की नजरो से टकरा गई, दीदी अजीब तरीके से मुझे देख रही थी, पर कुछ ही देर में उन्होंने अपना ध्यान हटाया और अपना घाघरा उस डंठल से निकाल कर आगे बढ़ गयी, मुझे समझ नही आ रहा था कि दीदी ने मुझे देख लिया या नही,\r\n\r\nमैं बस अभी सोच ही रहा था कि तभी दीदी ने अचानक दोबारा पीछे मुडकर देखा और इस बार उनकी नजर मेरी पेंट में बने तम्बू पर चली गई, मैंने जब उनकी नजरो का पीछा किया तो मैं झट से अपने तम्बू को छुपाने की कोशिश करने लगा, मुझे ऐसा करता देख दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी\r\n\r\nमैं – वो...वो...मुझे....माफ़ कर देना दीदी..... वो मैंने जान बुझकर नही किया, आप माँ को मत बताना\r\n\r\nनीलू दीदी – चल ठीक है नही बताती पर अपने उस पर थोड़ी लगाम रखा कर...\r\n\r\nये बोलकर नीलू दीदी हंसने लगी पर मेरी तो जैसे सिट्टी पिट्टी गूम हो गयी ये सोचकर कि दीदी मुझे अपने लंड पर कण्ट्रोल करने को बोल रही है, पर दीदी को हँसता देख मैं भी झूठी हंसी हंस दिया\r\nउसके बाद हम वापस काम में मशगुल हो गये, और शाम तक हम तीनो ने मिलकर सारी घास काट ली,\r\n\r\nसुधिया – समीर बेटा,\r\n\r\nमैं – हाँ माँ,\r\n\r\nसुधिया – तू और तेरी बहन दोनों सीधे घर चले जाना, मैं जरा सरला के घर होकर आउंगी, तो आने में जरा देर हो जायेगी\r\n\r\nमैं – ठीक है माँ,\r\n\r\nसुधिया – और नीलू तू आज खाना बनाकर रख लेना,\r\n\r\nनीलू दीदी – जैसा आप कहे माँ\r\n\r\nमाँ से विदा लेकर मैं और नीलू दीदी वापस घर की तरफ चल पड़े, रस्ते में नीलू दीदी मेरे मजे ले रही थी\r\n\r\nनीलू – हाँ तो समीर, जरा बताना तो तू मुझसे माफ़ी क्यों मांग रहा था खेत में\r\n\r\nमैं – “वो..वो.... दीदी... आपको पता है, आप मुझे तंग करने के लिए पूछ रही हो” मुझे समझ नही आ रहा था कि दीदी मुझसे ऐसे सवाल क्यों पूछ रही है, पर जो भी हो मुझे तो डर सता रहा था कि दीदी कहीं माँ को ये बात ना बता दे\r\n\r\nनीलू – अरे नही, सच्ची मुझे नही पता, बता ना\r\n\r\nमैं – नही दीदी, आप नाराज़ हो जाओगी मुझसे\r\n\r\nनीलू – अरे मैं तुझसे कभी नाराज़ हुई क्या आज तक, जो आज हो जाउंगी,\r\n\r\nमैं – ठीक है दीदी, अगर आप वादा करो कि आप मुझसे नाराज़ नही होगी, तो मैं बता देता हूँ\r\n\r\nनीलू – हाँ बाबा मैं वादा करती हूँ कि तुझसे नाराज़ नही होउंगी, अब बता\r\n\r\nमैं – वो दीदी, मैं वो ..आपकी.....वो आप आगे थी ना.... इसलिए अचानक.. पर मैंने जानबुझकर नही,,,,,,\r\n\r\nनीलू – अरे क्या बोल रहा है साफ साफ बोल ना\r\n\r\nमैं – वो दीदी आप मेरे आगे थी ना, और झुक कर घास काट रही थी तो मेरी नज़र अपने आप चली गयी, मैंने जानबुझकर नही देखा पक्का\r\n\r\nनीलू – क्या देख लिया तूने\r\n\r\nमैं – वो दीदी आपका घाघरा थोडा उपर को खिसक गया था ना, इसलिए मुझे आपकी जंघे दिख गयी थी, पर मैंने जानबुझकर नही देखा, आप माँ को मत बताना\r\nनीलू दीदी – चल ठीक है नही बताउंगी, पर पहले तू मेरे सवाल का सही सही जवाब देगा\r\n\r\nमैं – “ठीक है दीदी” मेरी तो वैसे ही डर के मारे हालत टाइट थी तो और मैं कर भी क्या सकता था\r\n\r\nनीलू दीदी – अच्छा तो बता, तुझे मेरी जांघे कैसी लगी???\r\n\r\nनीलू दीदी ने तो जैसे अपने सवाल से मेरे उपर बम फोड़ दिया, अब मैं भला कैसे उन्हें बताता कि मुझे तो लगा कि वही घोड़ी बना के अपना लंड दीदी की पनियाई चूत में पेल दूँ, पर उनके सामने मैं कैसे अपने मन की बात बोल देता\r\n\r\nमैं – क....क्या...मतलब......” मैं बड़ी मुश्किल से बोल पाया\r\n\r\nनीलू दीदी – अरे भोंदू, मेरा मतलब है कि तुझे कैसी लगी मेरी जांघे, अच्छी, ख़राब बहुत खराब???\r\n\r\nमैं – अ...अच्छी,,,,,,,\r\n\r\nनीलू – सिर्फ अच्छी...???\r\n\r\nमैं – नही...ब...बहुत..अच्छी...\r\n\r\nनीलू दीदी – अच्छा जी, तभी अपने उसको भरी दोपहर में खड़ा किये बैठे थे, हा हा हा.............\r\n\r\nमैं तो नीलू दीदी की इस बात से पूरी तरह सकपका गया,,, अब बोलता भी तो क्या बोलता भला... पर मेरी समझ में ये नही आ रहा था कि आज नीलू दीदी को हुआ क्या है, पर जो भी हुआ हो आज नीलू दीदी की गरमा गर्म बातें सुनकर मेरा लोडा पेंट में हल्का हल्का सर उठाने लगा था,\r\n\r\nइसी तरह दीदी मुझे रस्ते भर परेशान करती रही, जब भी मैं खेत जाता था वापस आकर नहाता जरुर था, और यहीं नियम दीदी का भी था, इसलिए मैंने दीदी से कहा\r\n\r\nमैं – दीदी, वो मैं नहाने जा रहा हूँ” और ये बोलकर मैं खड़ा हुआ और बाथरूम की तरफ चल दिया...\r\n\r\nनीलू दीदी – रुक.........आज तू नही मैं नहाऊगी पहले.... तू थोड़ी देर इंतज़ार कर\r\n\r\nमुझे उनकी बात सुनकर बड़ी ही हैरानी हुई, क्यूंकि हमेशा सबसे पहले मैं ही नहाता था, और दीदी तो सबसे लास्ट में नहाती थी खेत से आने के बाद, पर आज अचानक दीदी ने नहाने का क्यूँ बोला.... मेरी समझ में बिलकुल नही आ रहा था, पर अब उनको मना भी कैसे करता\r\n\r\nमैं – ठीक है दीदी, पहले आप नहा लो... मैं बाहर ही बैठ जाता हूँ...\r\n\r\nनीलू दीदी – ठीक है..\r\n\r\nये बोलकर दीदी हमारे कमरे में अंदर गई, शायद कपड़े लेने गई थी, और जल्दी ही अपने हाथ मे कुछ कपड़े और तोलिया लिए बाहर आ गई, अभी वो बाथरूम की तरफ जा ही रही थी कि तभी अचानक मेरी नज़र उनके हाथो में रखे कपड़ो पर गयी और मुझे जैसे कोई 440 वोल्ट का झटका सा लग गया हो,\r\n\r\nदीदी के कपड़ो के बिच एक छोटा सा लाल कपड़ा भी था, शायद उनकी पेंटी थी, पर जैसे ही मेरी नजर उस पर गिरी मुझे याद आ गया कि उस रात मैंने जिस लाल कपड़े से अपने लंड को साफ किया था, कहि ये वो ही तो लाल कपड़ा नही, तभी तो अगले दिन दीदी मेरी तरफ अजीब नजरो से देख रही थी, मेरी आँखों के सामने जैसे चक्कर से आने लगे, मुझे समझ नही आ रहा था कि मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हो रहा था,\r\n\r\n“पर अगर दीदी मुझसे नाराज़ होती तो मुझसे ऐसी बाते नही करती, आखिर दीदी चाहती क्या है” मेरी समझ में कुछ नही आ रहा था,\r\n\r\nतभी अचानक दीदी ने जोर से बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लिया, मैं भी आंगन में बैठा सोच रहा था कि थोड़ी देर बाद मुझे अंदर से पानी गिरने की आवाज़ सी आने लगी,\r\n\r\nपानी की आवाज़ ने जैसे मेरे अंदर के शैतान को फिर से जिन्दा कर दिया,\r\n\r\n“दीदी अंदर नहा रही है, शायद कपडे भी उतार दिए होंगे, चल चलकर देखते है” मेरे दिमाग में एक आवाज़ गूंजी\r\n\r\n“नही नही, पागल हो गया है क्या, अगर दीदी ने देख लिया तो शामत आ जानी है, वैसे ही आज दोपहर को तू पकड़ा गया था” एक और आवाज़ मेरे दिमाग में गूंजी\r\n\r\n“पर दीदी ने तुझ पर गुस्सा तो नही किया ना, तो डरता क्यूँ है, देखते है अंदर, शायद दीदी का गोरा बदन देखने को मिल जाये...” फिर से आवाज़ गूंजी\r\n\r\n“पर....” अब शायद मेरी हवास मुझ पर हावी हो चुकी थी, मैं चुपके से खड़ा हुआ, और दबे पाँव जाकर बाथरूम के दरवाजे के पास छुप कर खड़ा हो गया और अंदर झाँकने की कोशिश करने लगा\r\n\r\nमैं बहुत आराम से उठ कर लकड़ी के पट्टो पर कान लगा कर ध्यान से सुन ने लगा, केवल चुड़ियो के खन-खनाने और गुन-गुनाने की आवाज़ सुनाई दे रही थी, फिर पानी गिरने की आवाज़ सुनाई दी, मेरे अन्दर के शैतान ने मुझे एक आवाज़ दी, लकड़ी के पट्टो को ध्यान से देख, मैंने अपने अन्दर के शैतान की आवाज़ को अनसुना करने की कोशिश की, मगर शैतान हावी हो गया था, दीदी जैसी एक खूबसूरत लडकी लकड़ी के पट्टो के उस पार नहाने जा रही थी, मेरा गला सुख गया और मेरे पैर कांपने लगे, अचानक ही पजामा एकदम से आगे की ओर उभर गया, दिमाग का काम अब लण्ड कर रहा था, मेरी आँखें लकड़ी के पट्टो के बीच ऊपर से निचे की तरफ घुमने लगी और अचानक मेरी मन की मुराद जैसे पूरी हो गई, हमारे टूटे फूटे दरवाजे के बिच मुझे एक अच्छी खासी दरार मिल गयी जिससे मैं अंदर का नज़ारा बिलकुल साफ साफ देख सकता था, मैंने लकड़ी के पट्टो के बिच की उस दरार पर अपनी ऑंखें जमा दी,\r\n\r\nदीदी की पीठ लकड़ी की दिवार की तरफ थी, वो घाघरा और चोली में दूसरी तरफ मुंह किये खड़ी थी, फिर दीदी ने अपने कंधो पर रखे तौलिये को अपना एक हाथ बढा कर बगल वाली खूंटी पर टांग दिया, फिर अपने हाथों को पीछे ले जा कर अपने खुले रेशमी बालो को समेट कर जुड़ा बना दिया, फिर दीदी ने बाथरूम के कोने में गड़े एक छोटे से पत्थर पर रखी कटोरी उठाई, उस कटोरी में हम लोग मुल्तानी मिटटी भिगो कर रखा करते थे, चूँकि उस समय साबुन वैगरह तो होती नही थी इसलिए अगर चेहरा या बदन साफ करना हो तो कभी कभी मुल्तानी मिटटी का ही इस्तेमाल कर लिया करते थे, और मुल्तानी मिटटी तो बालो के लिए भी अच्छी होती है,\r\n\r\nदीदी ने वो कटोरी से थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी निकाली और अपने चेहरे पर उसे रगड़ने लगी, पीछे से मुझे उनका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था मगर ऐसा लग रहा था की वो मुल्तानी मिट्टी निकाल कर अपने चेहरे पर ही लगा रही है, लकड़ी के पट्टो के बिच की दरार से मुझे उनके सर से चुत्तरों के थोड़ा निचे तक का भाग दिखाई पड़ रहा था, मुल्तानी मिट्टी लगाने के बाद दीदी ने अपने घाघरे को घुटनों के पास से पकड कर थोड़ा सा ऊपर उठाया और फिर थोड़ा तिरछा हो कर निचे बैठ गई, इस समय मुझे केवल उनका पीठ और सर नज़र आ रहा थे, पर अचानक से सिटी जैसी आवाज़ सुनाई दी, दीदी इस समय शायद वही बाथरूम के कोने में पेशाब कर रही थी, मेरे बदन में सिहरन सी दौड गई, मैं कुछ देख तो सकता नहीं था मगर मेरे दिमाग ने बहुत सारी कल्पनाये कर डाली, पेशाब करने की आवाज़ सुन कर मेरे कुंवारे लण्ड ने झटका खाया, मगर अफ़सोस कुछ देख नहीं सकता था,\r\n\r\nफिर थोड़ी देर में वो उठ कर खड़ी हो गई और अपने हाथो को कुहनी के पास से मोड कर अपनी छाती के पास कुछ करने लगी, मुझे लगा जैसे वो अपनि चोली खोल रही है, मैं दम साधे ये सब देख रहा था, मेरा लण्ड इतने में ही एक दम खड़ा हो चूका था, दीदी ने अपना चोली खोल कर अपने कंधो से धीरे से निचे की तरफ सरकाते हुए उतार दिया, उनकी गोरी चिकनी पीठ मेरी आँखों के सामने थी, पीठ पर कंधो से ठीक थोड़ा सा निचे एक काले रंग का तिल था और उससे थोड़ा निचे उनकी काली ब्रा का फीता बंधा हुआ था, इतनी सुन्दर पीठ मैंने आज तक नही देखी थी, वैसे तो मैंने दीदी की पीठ कई बार देखि थी मगर ये आज पहली बार था जब उनकी पूरी पीठ नंगी मेरी सामने थी,\r\n\r\nकेवल एक ब्रा का स्ट्रैप बंधा हुआ था, गोरी पीठ पर काली ब्रा का स्ट्रैप पीठ को और भी ज्यादा सुन्दर बना रहा था, मैंने सोचा की शायद दीदी अब अपनी ब्रा खोलेंगी मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, अपने दोनों हाथो को बारी-बारी से उठा कर वो अपनी कांख को देखने लगी, एक हाथ को उठा कर दुसरे हाथ से अपनी कांख को छू कर शायद अपने कांख के बालो की लम्बाई का अंदाज लगा रही थी, दीदी अब साइड पोज़ में खड़ी थी,\r\n\r\nमैं सोच रहा था काश वो पूरा मेरी तरफ घूम जाती मगर ऐसा नहीं हुआ, उनकी दाहिनी साइड मुझे पूरी तरह से नज़र आ रही थी, उनका दाहिना हाथ और पैर, पेट और ब्रा में कैद एक चूची, उनका चेहरा भी अब साइड से नज़र आ रहा था, उन्होंने अपने पुरे चेहरे पर मुल्तानी मिटटी लगा ली थी,\r\n\r\nअब दीदी ने दोबारा कटोरी में से मुल्तानी मिटटी अपने बाये हाथ में ली और अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठा लिया , दीदी की नंगी गोरी मांसल बांह अपने आप में उत्तेजना का शबब थी और अब तो हाथ ऊपर उठ जाने के कारण दीदी की कांख भी दिखाई दे रही थी, कांख के साथ दीदी की ब्रा में कैद दाहिनी चूची भी दिख रही थी, ब्रा ने पूरी चूची को अपने अन्दर कैद किया हुआ था इसलिए मुझे कुछ खास नहीं दिखा, मगर उनकी कांख कर पूरा नज़ारा मुझे मिल रहा था,\r\n\r\nदीदी की कांख में काले-काले बालों का गुच्छा सा उगा हुआ था, शायद दीदी ने काफी दिनों से अपने कांख के बाल नहीं बनाये थे, वैसे तो मुझे औरतो के चिकने कांख ही अच्छे लगते है पर आज पाता नहीं क्या बात थी मुझे दीदी के बालों वाले कांख भी बहुत सेक्सी लग रहे थे, मैं सोच रहा था इतने सारे बाल होने के कारण दीदी की कांख में बहुत सारा पसीना आता होगा और उसकी गंध भी उन्ही बालों में कैद हो कर रह जाती होगी, दीदी के पसीने से भीगे बदन को कई बार मैंने रसोई में देखा था, उस समय उनके बदन से आती गंध बहुत कामोउत्तेजक होती थी और मुझे उनके बदन की गंध को सूंघना बहुत अच्छा लगता था,\r\n\r\nये सब सोचते सोचते मेरा मन किया की काश मैं उसकी कांख में एक बार अपने मुंह को ले जा पाता और अपनी जीभ से एक बार उसको चाटता, यही सोचते सोचते ना जाने कब मेरा हाथ मेरे पजामे (पेंट) के अंदर चला गया ,मैंने अपने लण्ड पर हाथ फेरा तो देखा की सुपाड़े पर हल्का सा गीलापन आ गया है, तभी दीदी ने अपने बाएं हाथ की मुल्तानी मिट्टी को अपनी दाहिने हाथ की कांख में लगा दिया और फिर अपने वैसे ही अपनी बाई कांख में भी दाहिने हाथ से मुल्तानी मिट्टी लगा दिया, शायद दीदी को अपने कान्खो में बाल पसंद नहीं थे,\r\n\r\nकान्खो में मुल्तानी मिट्टी लगा लेने के बाद दीदी फिर से मेरी तरफ पीठ करके घूम गई और अपने हाथ को पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का स्ट्रैप खोल दिया और अपने कंधो से सरका कर बहार निकाल फर्श पर डाल दिया और जल्दी से निचे बैठ गई, अब मुझे केवल उनका सर और थोड़ा सा गर्दन के निचे का भाग नज़र आ रहा था, मुझे अपनी किस्मत पर बहुत गुस्सा आया, काश दीदी सामने घूम कर ब्रा खोलती या फिर जब वो साइड से घूमी हुई थी तभी अपनी ब्रा खोल देती मगर ऐसा नहीं हुआ था और अब वो निचे बैठ कर शायद अपनी चोली और ब्रा और दुसरे कपड़े साफ़ कर रही थी,\r\n\r\nपहले तो मैंने पहले सोचा कि अब खड़े रहने से कोई फायदा नही, मगर फिर सोचा की नहाएगी तो खड़ी तो होगी ही, ऐसे कैसे नहा लेगी, इसलिए चुप-चाप यही खड़े रहने में ही रहने में भलाई है, मेरा धैर्य रंग लाया, थोड़ी देर बाद दीदी उठ कर खड़ी हो गई और उसने घाघरे को घुटनों के पास से पकड़ कर जांघो तक ऊपर उठा दिया, मेरा कलेजा एक दम धक् से रह गया, दीदी ने अपना घाघरा पीछे से पूरा ऊपर उठा दिया था, और घाघरे को उठाकर अपनी चुचियो पर अटका लिया था, इस समय उनकी जांघे पीछे से पूरी तरह से नंगी हो गई थी, मुझे औरतो और लड़कियों की जांघे सबसे ज्यादा पसंद आती है, मोटी और गदराई जांघे जो की शारीरिक अनुपात में हो,
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08-02-2020, 12:38 PM,
#14
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
घाघरे के उठते ही मेरे सामने ठीक वैसी ही जांघे थी जिनकी कल्पना कर मैं मुठ मारा करता था, एकदम चिकनी और मांसल, जिन पर हलके हलके दांत गडा कर काटते हुए जीभ से चाटा जाये तो ऐसा अनोखा मजा आएगा की बयान नहीं किया जा सकता,\r\n\r\nदीदी की जांघे मांसल होने के साथ सख्त और गठी हुई थी उनमे कही से भी थुलथुलापन नहीं था, इस समय दीदी की जांघे केले के पेड़ के चिकने तने की समान दिख रही थी, मेरे मुंह में पानी आ गया था, लण्ड के सुपाड़े पर भी पानी आ गया था, सुपाड़े को लकड़ी के पट्टे पर हल्का सा सटा कर मैंने उससे पानी को पोछ दिया और पैंटी में कसे हुई दीदी के चुत्तरों को ध्यान से देखने लगा, दीदी का हाथ इस समय अपनी कमर के पास था और उन्होंने अपने अंगूठे को पैंटी के इलास्टिक में फसा रखा था, मैं दम साधे इस बात का इन्तेज़ार कर रहा था की कब दीदी अपनी पैंटी को निचे की तरफ सरकाती है, दीदी ने अपनी पैंटी को निचे सरकाना शुरू किया पर उसी के साथ ही घाघरा भी निचे की तरफ सरकता चला गया, ये सब इतनी तेजी से हुआ की दीदी के चुत्तर देखने की हसरत दिल में ही रह गई, दीदी ने अपनी पैंटी निचे सरकाई और उसी साथ घाघरा भी निचे आ कर उनके चुत्तरों और जांघो को ढकता चला गया,\r\n\r\nदीदी अपनी पैंटी उतार उसको ध्यान से देखने लगी, पता नहीं क्या देख रही थी, छोटी सी पैंटी थी, पता नहीं कैसे उसमे दीदी के इतने बड़े चुत्तर समाते है, मगर शायद यह प्रश्न करने का हक मुझे नहीं था क्योंकी अभी एक क्षण पहले मेरी आँखों के सामने ये छोटी सी पैंटी दीदी के विशाल और मांसल चुत्तरों पर अटकी हुई थी, कुछ देर तक उसको देखने के बाद वो फिर से निचे बैठ गई और अपनी पैंटी साफ़ करने लगी, फिर थोड़ी देर बाद ऊपर उठी और अपने घाघरा के नाड़े को खोल दिया, मैंने दिल थाम कर इस नज़ारे का इन्तेज़ार कर रहा था, कब दीदी अपने घाघरा को खोलेंगी और अब वो क्षण आ गया था, लौड़े को एक झटका लगा और दीदी के घाघरा खोलने का स्वागत एक बार ऊपर-निचे होकर किया, मैंने लण्ड को अपने हाथ से पकड दिलासा दिया, नाड़ा खोल दीदी ने आराम से अपने घाघरा को निचे की तरफ धकेला, घाघरा सरकता हुआ धीरे-धीरे पहले उसके तरबूजे जैसे चुत्तरो से निचे उतरा फिर जांघो और पैर से सरक निचे गिर गया,\r\n\r\nदीदी वैसे ही खड़ी रही, इस क्षण मुझे लग रहा था जैसे मेरा लण्ड पानी फेंक देगा, मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करू, मैंने आज तक ऐसा नज़ारा कभी नहीं देखा, मेरा 9 इंच लम्बा लोडा अब बुरी तरह फुंकार रहा था, लंड की नसे फटने को तैयार पड़ी थी,क्या खतरनाक जानलेवा था, उफ़ अब दीदी पूरी तरह से नंगी हो गई थी, हालाँकि मुझे केवल उनके पिछले भाग का नज़ारा मिल रहा था, फिर भी मेरी हालत ख़राब करने के लिए इतना ही काफी था, गोरी चिकनी पीठ जिस पर हाथ डालो तो सीधा फिसल का चुत्तर पर ही रुकेंगी, पीठ के ऊपर काला तिल, दिल कर रहा था आगे बढ़ कर उसे चूम लू, रीढ़ की हड्डियों की लाइन पर अपने तपते होंठ रख कर चूमता चला जाऊ, पीठ पीठ इतनी चिकनी और दूध की धुली लग रही थी की नज़र टिकाना भी मुश्किल लग रहा था, तभी तो मेरी नज़र फिसलती हुई दीदी के चुत्तरो पर आ कर टिक गई, ओह, मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा था, गोरी चिकनी चुत्तर, गुदाज और मांसल, मांसल चुत्तरों के मांस को हाथ में पकड दबाने के लिए मेरे हाथ मचलने लगे,\r\n\r\nदीदी के चुत्तर एकदम गोरे और काफी विशाल थे, , पतली कमर के ठीक निचे मोटे मांसल चुत्तर थे, उन दो मोटे मोटे चुत्तरों के बीच ऊपर से निचे तक एक मोटी लकीर सी बनी हुई थी, ये लकीर बता रही थी की जब दीदी के दोनों चुत्तरों को अलग किया जायेगा तब उनकी गांड देखने को मिल सकती है या फिर यदि दीदी कमर के पास से निचे की तरफ झुकती है तो चुत्तरों के फैलने के कारण गांड के सौंदर्य का अनुभव किया जा सकता है,\r\n\r\nतभी मैंने देखा की दीदी अपने दोनों हाथो को अपनी जांघो के पास ले गई फिर अपनी जांघो को थोड़ा सा फैलाया और अपनी गर्दन निचे झुका कर अपनी जांघो के बीच देखने लगी शायद वो अपनी चूत देख रही थी, मुझे लगा की शायद दीदी की चूत के ऊपर भी उसकी कान्खो की तरह से बालों का घना जंगल होगा और जरुर वो उसे ही देख रही होंगी, मेरा अनुमान सही था और दीदी ने अपने हाथ को बढा कर रैक पर से फिर वही मुल्तानी मिट्टी वाली कटोरी उतार ली और अपने हाथो से अपने जांघो के बीच मुल्तानी मिट्टी लगाने लगी,\r\n\r\nपीछे से दीदी को मुल्तानी मिट्टी लगाते हुए देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वो मुठ मार रही है, मुल्तानी मिट्टी लगाने के बाद वो फिर से निचे बैठ गई और अपने घाघरा और पैंटी को साफ़ करने लगी, मैंने अपने लौड़े को आश्वासन दिया कि घबराओ नहीं कपडे साफ़ होने के बाद और भी कुछ देखने को मिल सकता है, ज्यादा नहीं तो फिर से दीदी के नंगे चुत्तर, पीठ और जांघो को देख कर पानी गिरा लेंगे,\r\n\r\nकरीब पांच-सात मिनट के बाद वो फिर से खड़ी हो गई, लौड़े में फिर से जान आ गई, दीदी इस समय अपनी कमर पर हाथ रख कर खड़ी थी, फिर उसने अपने चुत्तर को खुजाया और सहलाया, फिर अपने दोनों हाथों को बारी बारी से उठा कर अपनी कान्खो को देखा और फिर अपने जांघो के बीच झाँकने के बाद फर्श पर परे हुए कपड़ो को उठाया, यही वो क्षण था जिसका मैं काफी देर से इन्तेज़ार कर रहा था कि फर्श पर पड़े हुए कपड़ो को उठाने के लिए दीदी निचे झुके और उनके चुत्तर लकड़ी के पट्टो के बीच बने दरार के सामने आ गए,\r\n\r\nनिचे झुकने के कारण उनके दोनों चुत्तर अपने आप अलग हो गए और उनके बीच की मोटी लकीर अब दीदी की गहरी गांड में बदल गई, दोनों चुत्तर बहुत ज्यादा अलग नहीं हुए थे मगर फिर भी इतने अलग तो हो चुके थे की उनके बीच की गहरी खाई नज़र आने लगी थी, देखने से ऐसा लग रहा था जैसे किसी बड़े खरबूजे को बीच से काट कर थोड़ा सा अलग करके दो खम्भों के ऊपर टिका कर रख दिया गया है, दीदी वैसे ही झुके हुए बाल्टी में कपड़ो को डाल कर खंगाल रही थी और बाहर निकाल कर उनका पानी निचोड़ रही थी, ताकत लगाने के कारण दीदी के चुत्तर और फ़ैल गए और गोरी चुत्तरों के बीच की गहरी भूरे रंग की गांड की खाई पूरी तरह से नज़र आने लगी, दीदी की गांड की खाई एक दम चिकनी थी, गांड के छेद के आस-पास भी बाल उग जाते है मगर दीदी के मामले में ऐसा नहीं था उसकी गांड मलाई के जैसी चिकनी लग रही थी, झुकने के कारण चुत्तरों के सबसे निचले भाग से जांघो के बीच से दीदी की चूत के बाल भी नजर आ रहे थे, उनके ऊपर लगा हुआ सफ़ेद मुल्तानी मिट्टी भी नज़र आ रहा था, चुत्तरो की खाई में काफी निचे जाकर जहाँ चूत के बाल थे उनसे थोड़ा सा ऊपर दीदी की गांड का सिकुडा हुआ भूरे रंग का छेद था, जो किसी फूल की तरह नज़र आ रहा था,\r\n\r\nदीदी के एक दो बार हिलने पर वो छेद हल्का सा हिला और एक दो बार थोड़ा सा फुला-पिचका, ऐसा क्यों हुआ मेरी समझ में नहीं आया मगर इस समय मेरा दिल कर रहा था कि मैं अपनी ऊँगली को दीदी की गांड की खाई में रख कर धीरे-धीरे चलाऊ और उसके भूरे रंग के फूलते पिचकते छेद पर अपनी ऊँगली रख हल्के-हल्के दबाब दाल कर गांड के छेद की मालिश करू, उफ़ कितना मजा आएगा अगर एक हाथ से चुत्तर को मसलते हुए दुसरे हाथ की ऊँगली को गांड के छेद पर डाल कर हल्के-हल्के कभी थोड़ा सा अन्दर कभी थोड़ा सा बाहर कर चलाया जाये ,\r\nपूरी ऊँगली दीदी की गांड में डालने से उन्हें दर्द हो सकता था इसलिए पूरी ऊँगली की जगह आधी ऊँगली या फिर उस से भी कम डाल कर धीरे धीरे गोल-गोल घुमाते हुए अन्दर-बाहर करते हुए गांड के छेद की ऊँगली से हल्के-हल्के मालिश करने में बहुत मजा आएगा, इस कल्पना से ही मेरा पूरा बदन सिहर गया,\r\n\r\nदीदी की गांड इस समय इतनी खूबसूरत लग रही थी कि दिल कर रहा थी अपने मुंह को उसके चुत्तरों के बीच घुसा दूँ और उसके इस भूरे रंग के सिकुडे हुए गांड के छेद को अपने मुंह में भर कर उसके ऊपर अपनी जीभ चलाते हुए उसके अन्दर अपनी जीभ डाल दूँ, उसके चुत्तरो को दांत से हल्के हल्के काट कर खाऊ और पूरी गांड की खाई में जीभ चलाते हुए उसकी गांड चाटू, पर शायद ऐसा संभव नहीं था,\r\n\r\nमैं इतना उत्तेजित हो चूका था कि लण्ड किसी भी समय पानी फेंक सकता था, लौड़ा अपनी पूरी औकात पर आ चूका था और अब दर्द करने लगा था, मैंने अपने टटो को अपने हाथो से सहलाते हुए सुपाड़े को दो उँगलियों के बीच दबा कर अपने आप को नार्मल करने की कोशिश की,\r\n\r\nअंदर अब सारे कपड़े पानी में खंगाले जा चुके थे, दीदी सीधी खड़ी हो गई और अपने दोनों हाथो को उठा कर उसने एक अंगडाई ली और अपनी कमर को सीधा किया फिर दाहिनी तरफ घूम गई, मेरी किस्मत शायद आज बहुत अच्छी थी, दाहिनी तरफ घूमते ही उसकी दाहिनी चूची जो कि अब नंगी थी मेरी लालची आँखों के सामने आ गई, उफ़ अभी अगर मैं अपने लण्ड को केवल अपने हाथ से छू भर देता तो भी मेरा पानी निकल जाता, चूची का एक ही साइड दिख रहा था, दीदी की चूची एक दम सीना तान के खड़ी थी, चोली के ऊपर से देखने पर मुझे लगता तो था की उनकी चूचियां सख्त होंगी मगर इतनी कड़ी होंगी इसका अंदाज़ा नही था, दीदी को शायद ब्रा की कोई जरुरत ही नहीं थी, उनकी चुचियों की कठोरता इतनी मस्त जो थी,\r\n\r\nचूची एकदम दूध के जैसी गोरे रंग की थी, चूची का आकार ऐसा था जैसे किसी मध्यम आकार के कटोरे को उलट कर दीदी की छाती से चिपका दिया गया हो और फिर उसके ऊपर किशमिश के एक बड़े से दाने को डाल दिया गया हो, मध्यम आकार के कटोरे से मेरा मतलब है की अगर दीदी की चूची को मुट्ठी में पकड़ा जाये तो उसका आधा भाग मुट्ठी से बाहर ही रहेगा, चूची का रंग चूँकि हद से ज्यादा गोरा था इसलिए हरी हरी नसे उस पर साफ़ दिखाई दे रही थी, जो की चूची की सुन्दरता को और बढा रही थी, निप्पलों का रंग गुलाबी था, पर हल्का भूरापन लिए हुए था, बहुत ज्यादा बड़ा तो नहीं था मगर एक दम छोटा भी नहीं था, किशमिश से बड़ा और अंगूर से थोड़ा सा छोटा, मतलब मुंह में जाने के बाद अंगूर और किशमिश दोनों का मजा देने वाला, दोनों होंठो के बीच दबा कर हल्के-हल्के दबा-दबा कर दांत से काटते हुए अगर चूसा जाये तो बिना चोदे झड जाने की पूरी सम्भावना थी\r\n\r\nफिर दीदी ने दाहिनी तरफ घूम कर अपने दाहिने हाथ को उठा कर देखा फिर बाएं हाथ को उठा कर देखा, फिर अपनी गर्दन को झुका कर अपनी जांघो के बीच देखा, फिर वापस मेरी तरफ पीठ करके घूम गई और खंगाले हुए कपडो को वही पास बनी एक खूंटी पर टांग दिया और फिर दूसरी बाल्टी में पानी भरने लगी, मैं समझ गया कि दीदी अब शायद नहाना शुरू करेंगी, मैंने पूरी सावधानी के साथ अपनी आँखों को लकड़ी के पट्टो के दरार में लगा दिया, मग में पानी भर कर दीदी थोड़ा सा झुक गई और पानी से पहले अपने बाएं हाथ फिर दाहिनी हाथ के कान्खो को धोया, पीछे से मुझे कुछ दिखाई नहीं पर रहा था मगर, दीदी ने पानी से अच्छी तरह से धोने के बाद कान्खो को अपने हाथो से छू कर देखा,\r\n\r\nअब उन्होंने अपना ध्यान अपनी जांघो के बीच लगा दिया, दाहिने हाथ से पानी डालते हुए अपने बाएं हाथ को अपनी जांघो बीच ले जाकर धोने लगी, हाथों को धीरे धीरे चलाते हुए जांघो के बीच के बालों को धो रही थी, मैं सोच रहा था की काश इस समय वो मेरी तरफ घूम कर ये सब कर रही होती तो कितना मजा आता, झांटों के साफ़ होने के बाद कितनी चिकनी लग रही होगी दीदी की चुत, ये सोच कर ही मेरे बदन में झन-झनाहट होने लगी, पानी से अपने जन्घो के बीच साफ़ कर लेने के बाद दीदी ने अब नहाना शुरू कर दिया,\r\n\r\nमुझे लगा था शायद दीदी अपने बालो को कतरनी(कैंची) से काटेगी तभी उन्हें मुल्तानी मिटटी लगाकर साफ किया होगा, पर मेरा सोचना गलत था, क्यूंकि अब तो दीदी ने नहाना शुरू कर दिया था, शायद वो सिर्फ अपने बालो को साफ करना ही चाहती थी,\r\n\r\nइधर दीदी ने अपने कंधो के ऊपर पानी डालते हुए पुरे बदन को भीगा दिया, बालों के जुड़े को खोल कर उनको गीला करने लगी, दीदी का बदन भीग जाने के बाद और भी खूबसूरत और मदमस्त लगने लगा था, बदन पर पानी पड़ते ही एक चमक सी आ गई थी दीदी के बदन में, दीदी खूब अच्छे से अपने बालों को साफ़ कर रही थी, बालो और गर्दन के पास से मुल्तानी मिटटी से मिला हुआ मटमैला पानी उनकी गर्दन से बहता हुआ उनकी पीठ पर छुकर निचे की तरफ गिरता हुआ कमर के बाद सीधा दोनों चुत्तरों के बीच यानी की उनके गांड की मस्त दरार में घुस रहा था, पर एक बार गांड की दरार में घुसने के बाद वो कहाँ गायब हो जा रहा था ये मुझे नहीं दिख रहा था,\r\n\r\nबालों को अच्छे से धोने के बाद दीदी ने बालों को लपेट कर एक गोला सा बना कर गर्दन के पास छोड़ दिया और फिर अपने कंधो पर पानी डाल कर अपने बदन को फिर से गीला कर लिया, गर्दन और पीठ पर लगा हुआ मटमैला पानी भी अब धुल गया था, फिर उन्होंने एक छोटा सा कपड़ा लिया, और उस से अपने पुरे बदन को हल्के-हल्के रगडने लगी, पहले अपने हाथो को रगडा, फिर अपनी छाती को फिर अपनी पीठ को, और फिर वो निचे बैठ गई, निचे बैठने पर मुझे केवल गर्दन और उसके निचे का कुछ हिस्सा दिख रहा था, पर ऐसा लग रहा था जैसे वो निचे बैठ कर अपने पैरों को फैला कर पूरी तरह से रगड कर साफ़ कर रही थी क्योंकि उनका शरीर हिल रहा था, शायद वो अपनी चूत साफ कर रही थी,\r\n\r\nथोडी देर बाद वो खड़ी हो गई, अब वो अपनी जांघो को रगड रगड कर साफ़ कर रही थी और फिर अपने आप को थोड़ा झुका कर अपनी दोनों जांघो को फैलाया और फिर उस कपड़े को दोनों जांघो के बीच ले जाकर जांघो के अंदरूनी भाग और रान को रगडने लगी, पीछे से देखने पर लग रहा था जैसे वो अपनी चूत को रगड कर साफ़ कर रही थी\r\n\r\nथोड़ी देर बाद थोड़ा वो अपने चुत्तरों को रगडने लगी, मेरी हालत तो अब तक बहुत ही बुरी हो चुकी थी, मेरे माथे पर पसीने की बुँदे भी उभर आई थी, मैं बहुत ज्यादा गरम हो चूका था, मन तो कर रहा था कि बस अंदर जाऊ और दीदी को वहीं घोड़ी बनाकर अपना लोडा उनकी चूत में घुसा दूँ.... मेरे हाथों में खुजली होने लगी थी और दिल कर रहा था की थल-थलाते हुए चुत्तरों को पकड़ कर मसलते हुए खूब हिलाउ... .पर ये सम्भव नही था, इसलिए मैं बस चुप चाप खड़ा अंदर का नजारा देखे जा रहा था,\r\n\r\nकपडे से अपने बदन को रगड़ने के बाद, वापस कपडा रख दिया और मग से पानी लेकर कंधो पर डालते हुए नहाने लगी, मात्र कपडे से सफाई करने के बाद ही दीदी का पूरा बदन चम-चमाने लगा था, पानी से अपने पुरे बदन को धोने के बाद दीदी ने अपने बालों का गोला खोला और एक बार फिर से कमर के पास से निचे झुक गई और उनके चुत्तर फिर से लकड़ी के पट्टो के बीच बने दरार के सामने आ गए, इस बार उनके गोरे चम-चमाते चुत्तरों के बीच की चमचमाती खाई के आलावा मुझे एक और चीज़ के दिखने को मिल रही थी, गांड के सिकुडे हुई छेद से करीब चार अंगुल भर की दूरी पर निचे की तरफ एक लम्बी लकीर सी नज़र आ रही थी, पहले ये लकीर इसलिए नहीं नज़र आ रही थी क्योंकि यहाँ पर झान्ट के बाल थे, मुल्तानी मिट्टी ने जब झांटो की सफाई कर दी तो चूत की लकीर स्पष्ट दिखने लगी, इस बात का अहसास होते ही कि मैं अपनी दीदी की चूत देख रहा हूँ, मुझे लगा जैसे मेरा कलेजा मुंह को आ जायेगा और फिर से मेरा गला सुख गया और पैर कांपने लगे, इस बार शायद मेरे लण्ड से दो बूँद टपक कर निचे गिर भी गई पर मैंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया, लण्ड भी मारे उत्तेजना के काँप रहा था,\r\n\r\nदीदी की दोनों मोटी जांघो के बीच ऊपर की तरफ चुत्तरों की खाई के ठीक निचे एक गुलाबी लकीर सी दिख रही थी, पट्टो के बीच से देखने से ऐसा लग रहा था जैसे सेब या पके हुए पपीते के आधे भाग को काट कर फिर से आपस में चिपका कर दोनों जांघो के बीच फिट कर दिया गया है, कमर या चुत्तरों के इधर-उधर होने पर दोनों फांकों में भी हरकत होती थी और ऐसा लगता जैसे कभी लकीर टेढी हो गई है कभी लकीर सीधी हो गई है, जैसे चूत के दोनों होंठ कभी मुस्कुरा रहे है कभी नाराज़ हो रहे है, दोनों होंठ आपस में एक दुसरे से एक दम सटे हुए दिख रहे थे,\r\n\r\nदोनों फांक एक दम गुलाबी और पावरोटी के जैसे फूले हुए थे, मेरे मन में आया कि काश मैं चूत की लकीर पर ऊपर से निचे तक अपनी ऊँगली चला और हलके से दोनों फांकों को अलग कर के देख पाता कि दोनों गुलाबी होंठो के बीच का अंदरूनी भाग कैसा है\r\n\r\nतभी अचानक दीदी दोबारा खड़ी हो गयी,मुझे लगा कि शायद उनका नहाना हो चूका है, पर तभी मैंने वो नज़ारा देखा जिसे देखकर मैं उत्तेजना के मारे बेहोश सा होने लगा,\r\n\r\nदीदी ने अपने कपड़ो के बिच से एक छोटी सी कैंची निकाल ली थी, इसका मतलब था कि दीदी अपनी कांख और चुत के बाल साफ करने वाली है, पर दीदी ने पहले क्यूँ नही किया, हो सकता है कि शायद मुल्तानी मिटटी लगाने की वजह से बाल थोड़े मुलायम हो गये हों जिससे अब उन्हें काटने में आसानी हो,\r\n\r\nइधर दीदी अब धीरे धीरे अपने कान्खो के बाल काटने लगी थी, करीब 5 मिनट के अंदर ही उनकी कांख के बाल जैसे पूरी तरह से गायब हो चुके थे, और अब उनकी कांखे गोरी मस्त चिकनी नज़र आ रही थी,\r\nफिर दीदी दोबारा निचे बैठ गयी और शायद वो झुककर अपनी झांट के बाल काट रही थी, जब वो दोबारा खड़ी हुई तो उन्होंने कैंची को साइड में रख दिया, मुझे पता चल चूका था कि शायद दीदी ने अपने झांट के बाल भी काट लिए है, इधर अब दीदी दोबारा अपने बदन पर पानी गिराने लगी, और अब जल्दी जल्दी नहाने लगी,\r\n\r\nमुझे लगा कि अब और रुकना खतरे से खाली नही है इसलिए मैं झट से वहां से हट गया और आकर आंगन में बैठ गया, पर मेरा लंड बैठने को तैयार नही था, क्यूंकि वो तो अब भी पूरी तरह तनकर खड़ा था, मैंने आज पुरे दिन में दो दो जवान बदन देख लिए थे वो भी बिलकुल नंगे, एक तो सरजू काका की बेटी रानी और दूसरी मेरी अपनी नीलू दीदी को, मुझे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना महसूस हो रही थी, पर जो नज़ारा मैं अभी अभी देख कर आया था, उसे देखकर मेरा मन गदगद हो चूका था, मैं अपनी किस्मत पर गर्व सा महसूस कर रहा था जो इतना शानदार बदन मुझे इतनी करीब से नंगा देखने को मिल चूका था,\r\n\r\nमैं अभी विचारो में खोया ही था कि दीदी बाथरूम से बाहर आ गयी, कपडे उन्होंने अंदर ही चेंज कर लिए थे, और गिले कपडे साथ में ले आई थी,\r\n\r\nनीलू दीदी – समीर, जा अब तू नहा ले\r\n\r\nमैं – ठीक है दीदी,\r\nनीलू दीदी –अच्छा सुन, सब्जी किसकी बनाऊ आज??\r\n\r\nमैं – जो भी आपको अच्छी लगे, वो ही बना दो....\r\n\r\nनीलू दीदी – चल ठीक है फिर तू जल्दी से नहा ले, मैं आज मस्त सी आलू की सब्जी बना देती हूँ...\r\n\r\nमैं – ठीक है दीदी\r\n\r\nदीदी के अंदर जाने के बाद मैं खड़ा हुआ, क्यूंकि अगर पहले खड़ा हो जाता तो मेरा लंड का उभार उन्हें साफ नज़र आ जाता,\r\n\r\nफिर मैं जल्दी से बाथरूम के अंदर चला गया और कुछ ही देर में मैं नहाने के बाद बाहर आ गया\r\n................................\r\n\r\nमैं तैयार होकर बस आंगन में बैठा ही था कि मुझे घर के बाहर थोड़ी हलचल सुनाई दी, नीलू दीदी जो कोने में बैठकर खाना बना रही थी, उन्होंने भी ये हलचल सुनी\r\n\r\nनीलू दीदी – समीर ,जरा जाकर देख तो कौन है बाहर\r\n\r\nमैं – जी दीदी\r\n\r\nमैं बाहर आ गया और बाहर आते ही मेरे चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी, क्यूंकि बाहर बाड़े में बापूजी अपने बैलो को बाँध रहे थे,\r\n\r\n[/color][/b]
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08-02-2020, 12:38 PM,
#15
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

बापूजी को देखते ही मेरे चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी, मैं भागकर बापूजी के गले लिपट गया....

मैं – बापूजी, इस बार आपने आने में इतने दिन कैसे लगा दिए, मैं तो कब से आपकी राह देख रहा था,

बापूजी – कुछ नही बेटा वो तो सवारी को कुछ जरूरी काम आन पड़ा था, इसलिए मजबूरन मुझे भी रुकना पड़ा, पर इस बार पैसे भी अच्छे मिले है, और मैं तुम लोगो के लिए कुछ लेकर भी आया हूँ शहर से,

मैं – “सच में बापूजी” मेरी ख़ुशी का ठिकाना नही था ये सुनकर कि बापूजी हमारे लिए शहर से कुछ लेकर आये है....

बापूजी – पहले अंदर तो चलो, फिर दिखता हूँ सबको...

मैं और बापूजी अंदर आ गये, तब तक दीदी भी कपडे चेंज कर चुकी थी, बापूजी को देखते ही दीदी भी उनसे आकर गले मिली....

मैं – दीदी, पता है बापूजी हमारे लिए शहर से कुछ लेकर आये है इस बार...

नीलू दीदी – सच में ...जल्दी दिखाओ ना बाबा....

बापूजी – रुको बेटा, पहले तुम्हारी माँ को तो बुला लो... तब तक मैं भी हाथ मुंह धो लेता हूँ...

मैं – पर बापूजी माँ तो ताईजी के यहाँ गयी है....

बापूजी – ठीक है तो तुम जाकर बुला लाओ उसे,

बापूजी की बात सुनकर मैं जल्दी से खड़ा हुआ और सीधा ताईजी के घर की तरफ दौड़ पड़ा, मैं चाहता था कि जल्द से जल्द माँ को बुला लाऊं, ताकि मैं देख सकूं कि बापूजी मेरे लिए क्या लेकर आये है शहर से...

2 मिनट में ही मैं ताईजी के घर के सामने पहुंच चूका था, मैंने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की पर आज भी ताईजी का घर अंदर से बंद था, मुझे बड़ा अजीब लगा, अभी मैं दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला था कि तभी मेरे कानो में एक हलकी सी सिसकारी की आवाज़ पड़ी......मैं बिलकुल चोंक गया....

सिस्कारियो की आवाज़ सरला ताई के कमरे से आ रही थी, जिसमे उस दिन मैंने सरला ताई के भाई और उनकी चुदाई देखी थी, और अब तक तो मैं भी इतना समझ चूका था कि ऐसी आवाज़े चुदाई के दौरान आती है, पर सवाल ये था कि सरला ताई किसके साथ चुदाई कर रही है...

“क्या सरला ताई फिर से अपने भाई के साथ......... पर उनका भाई तो कल ही वापस अपने घर जा चूका है....... फिर वो किसके साथ....... कहीं रामू ताउजी.......नही पर वो तो लाला की दुकान पर ही होंगे अभी तो.....राजू भैया और चंदा भी आज खेत में ही रुकने वाले है रात को फसल में पानी देने के लिए..... तो फिर कौन हो सकता है.” मैं समझ नही पा रहा था कि सरला ताई आखिर किसके साथ चुदाई कर रही है..........

आखिरकार मैंने फैसला लिया कि उस दिन की तरह ही मुझे इस नीम के सहारे चढ़कर अंदर जाना चाहिए पर दिल के एक कोने में डर भी था क्यूंकि पिछली बार भी सुमेर ने मुझे लगभग देख ही लिया था, वो तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि मैं बच गया, वरना सहमत आ जाती

दिमाग कह रहा था कि रहने दे, अंदर जाना खतरे से खाली नही है, अगर पकड़ा गया तो गांड ठुकाई हो जायेगी... पर दिल कह रहा था कि चल अंदर चलकर दोबारा एक बार चुदाई का मस्त नज़ारा देखते है.....
दिमाग और दिल की इस अजीब उहापोह में मैं फंसा हुआ था, पर आखिरकार जीत दिल की हुई, हवस ने मेरे डर पर काबू कर लिया, और मैंने ठान लिया कि अब तो सरला ताई की चुदाई देखनी ही पड़ेगी...

मैं अब दबे पांव एक चोर की तरह नीम पर चढ़ने लगा, और कुछ ही देर में मैं अब नीम के सहारे चढ़कर उनके घर की छत पर पहुंच गया, मुझे पता था कि ताई के कमरे का रोशन दान सीढियों पर है, जहाँ से मैंने पिछली बार भी उनकी चुदाई का नज़ारा देखा था...

मैं धीरे धीरे सीढियां उतरता हुआ उस रोशनदान की तरफ बढ़ने लगा, मेरे दिल की धडकन तेज़ हो चुकी थी, एक अनजाना सा डर मुझ पर हावी हो रहा था, माथे पर पसीने की बूंदे भी चमकने लगी थी... मन कर रहा था कि रहने देते है अगर पकड़े गए तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी...

पर तभी अचानक एक जोर की सिसकारी मेरे कानो में पड़ी.....और मेरी हवस ने दोबारा डर को काबू में कर लिया... अब मैं दबे पांव धीरे धीरे चलता हुआ बिलकुल रोशन दान के करीब पहुँच गया...

अब मैं होले होले अंदर झाँकने लगा, कमरे में थोडा सा अँधेरा था, पर मेरी आँखे सरला ताई को ढूँढना शुरू कर चुकी थी,

पर जैसे ही मैंने अंदर झांक कर देखा मेरे होश ही उड़ गये.... मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मुझे किसी ने जोर का बिजली का झटका दे दिया हो, पांव कांपने लगे, माथे पर पसीना आ गया, शरीर बिलकुल गरमा गया....

मुझे यकीन नही हो रहा था कि जो मैं अंदर देख रहा हूँ वो हकीकत है या कोई सपना.... अंदर चारपाई पर सरला ताई बिलकुल नंगी लेटी हुई थी और मेरी अम्मा सरला ताई की चूत चाटे जा रही थी, मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है..... एक ओरत कैसे दूसरी ओरत के साथ....

मेरी नज़रे अभी भी अंदर गडी हुई थी... सरला ताई का नंगा बदन मेरी आँखों के सामने चमक रहा था पर गनीमत थी कि कम से कम मेरी माँ ने पुरे कपडे पहन रखे थे, पर मेरी अम्मा एक कुतिया की तरह सरला ताई की चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा घुसा के चाट रही थी....

तभी अचानक सरला ताई थोड़ी सी बैठी और फिर पलट कर घोड़ी बन गयी.... मेरी आँखों के सामने उनकी बिलकुल नंगी चुत दिखाई दे रही थी...

इस क्षण मुझे लग रहा था जैसे मेरा लण्ड पानी फेंक देगा, मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करू, मैंने आज तक ऐसा नज़ारा कभी नहीं देखा, मेरा 9 इंच लम्बा लोडा अब बुरी तरह फुंकार रहा था, लंड की नसे फटने को तैयार पड़ी थी

सरला ताई की लपलपाती फूली सी चूत वाकई जानलेवा नज़र आ रही थी, और तभी मेरी अम्मा ने दोबारा उनकी चूत को अपने होठो से चुसना शुरू कर दिया, आज के दिन में मैंने इतना कुछ देख लिया था कि.... सबसे पहले सरजू काका को उनकी बेटी रानी के साथ चुदाई करते हुए, फिर मेरी नीलू दीदी को नंगा नहाते हुए, और अब सरला ताई की नंगी चूत को मेरी माँ के द्वारा चाटते हुए..........

मैं अभी देख ही रहा था कि अचानक जैसे सरला ताई का जिस्म अकड़ने लगा, उनकी जांघे भिचने लगी, अगले ही पल उनकी चूत से ढेर सारा पानी निकलने लगा, और मेरी अम्मा उस पानी को नारियल पानी की तरह चाट रही थी..... ये नज़ारा देखकर मुझे लगा कि मेरा भी पानी निकल जायेगा.. पर यहाँ ऐसा करना खतरे से खाली नही था, इसलिए मैंने खुद पर कण्ट्रोल रखा

कुछ पलो में ही खुद पर काबू करके मैं दोबारा अंदर झाँकने लगा था, अब दोनों ओरते बिस्तर पर सीधी लेटी थी...और लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी....

सरला ताई – वाह सुधिया, तेरी जीभ सच में कमाल की है रे, जब भी अंदर जाती है, ढेर सारा पानी निकाल कर ही बाहर निकलती है... पर चल अब मैं तुझे अपनी जीभ का कमाल दिखाती हूँ..

सुधिया – नही सरला, आज तो काफी वक्त हो चूका है, इसलिए आज नही फिर कभी...

सरला ताई – चल कोई नही, पर यार तू बड़ी कमाल की है रे, क्या मस्त चुसाई करती है.... मुझे तो जन्नत की सैर करवा दी तूने..

सुधिया – कहाँ सरला, जन्नत की सैर तो तभी होती है जब एक बड़ा सा मुसल लंड चूत में घुसकर उसकी धज्जियाँ उडाता है.....

अम्मा के मुंह से ऐसी बात सुनकर मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही ना रहा,

सरला ताई – हाँ री, बात तो तेरी 100 टका सही है, पर हम कर भी क्या सकते है, एक तो मेरा मर्द वैसे ही 4 इंच की छोटी सी लुल्ली लेकर घुमत है और उपर से अब तो वो भी अंदर लिए हुए 2 साल होने को आ गये है, सचमुच बड़े ही बेदर्द है हमरे मर्द

सुधिया – सही कह रही है सरला, समीर के बापू भी महीने में कोई 2-3 दिन ही घर आवत है, और उन दिनों में भी कुछ नही करते है.... मैं तो मन मारकर ही रह जाती हूँ.. पर अब करे भी का करे... लगता है अब तो आदत सी हो गयी है.... 3 साल होने को आये... उन्होंने पिछले 3 साल से अपना वो छोटा सा लंड भी मेरी चुत में नही डाला है...

सरला – हाँ सुधिया, कभी कभी तो लगता है कि राजू के बापू को बोल दूँ कि मेरी चुदाई कर दो, पर फिर शर्म ऐसी चीज़ है कि कहे भी तो कैसे कहे...

सुधिया – सही कहा सरला, पर लगता है अब तो यही हमारी ज़िन्दगी बन चुकी है, घुट घुट कर बिना लंड के जीना

सरला – पर तू चिंता क्यों करती हैं, अगर हमारे मर्द हमारा ख्याल नही रखते तो क्या हुआ, हम एक दुसरे का ख्याल रख लेंगे, और वैसे सुमेर तो है ही..

सुधिया – सुमेर के साथ तो तुम ही चुदाई करो, मुझे उसके साथ कुछ नही करना, वैसे भी दिन भर नशा ही करता रहता है, कहीं कुछ मुंह से निकल गया तो जीना मुश्किल हो जायेगा...

सरला – अरे पर तू चिंता काहे करती है, अब मुझे देख मैं भी तो उससे साल में 4-5 बार चुद ही लेती हूँ, पर आज तक किसी को पता नही चला..... तो मेरी मान एक बार तू भी अपनी चूत में उसका लंड लेले.... कम से कम एक बार के लिए थोड़ी ख़ुशी तो मिलेगी...

सुधिया – पर तू तो कहती है कि उसका लंड तो अब बड़ी मुश्किल से खड़ा होता है.. तो वो चुदाई क्या खाक करेगा..

सरला – हाँ ये तो है, नशे की वजह से अब तो उसका लंड खड़ा ही नही होता, बड़ी मुश्किल से खड़ा किया था अभी परसों...

सुधिया – हाँ वो तो मुझे पता चल ही गया था कि सुमेर आया है तो पक्का एक बार तो चुदाई कर ही लेगी तू...

सरला – यार सुधिया, मेरे दिमाग में एक तरकीब है, जिससे हमारी ये अकेलेपन की समस्या दूर हो सकती है, पर तू बुरा मत मानना

सुधिया – मैं जानती हूँ कि तू क्या कहने वाली है, पर मैं किसी अनजान मर्द से चुदाई नही करने वाली, चाहे मेरी चूत प्यासी ही पड़ी रहे

सरला – हाँ हाँ मैं जानती हूँ तू नही करेगी किसी अनजान मर्द के साथ... पर अगर हम उस मर्द के साथ चुदाई करे जिसे हम जानते है, तो ....

सुधिया – क्या... पर पर कौन ...

सरला – देख सुधिया अब मैं जो कहने वाली हूँ उसे बहुत ध्यान से सुनना, और बुरा मत मानना....

सुधिया – ठीक है, पर तू बता तो सही कि ऐसा कोनसा मर्द है जिससे हम चुदाई कर सकते है.....

मैं वहा सीढ़ियों में खड़ा सोच रहा था कि आखिर ताई किसकी बात कर रही है....

सरला - वो मर्द कोई और नही बल्कि.......बल्कि..

सुधिया – अरे बता ना कौन है वो...

सरला – वो कोई और नही बल्कि तेरा बेटा समीर है...

ताई की बात सुनकर तो जैसे मुझे चक्कर सा आ गया......मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे किसी ने जोर से कस के थप्पड़ मार दिया और मैं वहीँ सुन्न सा हो गया हूँ.... और शायद यहीं हालत अम्मा की भी थी..

सुधिया – सरला, तू पागल तो नही हो गयी है.....कैसी बहकी बहकी बाते कर रही है.. कहीं कोई नशा वशा तो नही कर लिया.....

सरला - नही सुधिया, देख तू मेरी बात तो सुन....

सुधिया – नही नही सरला, पागल मत बन, भला एक माँ अपने बेटे के साथ... छि छि मुझे तो सोचते हुए भी शर्म आ रही है.....

सरला – इसमें शर्म कैसी... वैसे भी समीर तेरा कौनसा सगा बेटा है.... वो तेरे पेट से थोड़े ही ना निकला है.....

सुधिया- नही नही सुधिया..... मैं तो अपने बेटे के साथ ऐसा नही कर सकती.....और वैसे भी वो अभी बच्चा है..

सरला – अरे कहाँ से बच्चा लग रहा है वो तुझे.... एक ओरत की नज़र से देखेगी तो मस्त लंड नज़र आएगा तुझे....

सुधिया – नही नही सरला, मैं ऐसा नही कर सकती....... अगर तुझे आग लगी पड़ी है तो अपने बेटे राजू के साथ कर ले ना....

सरला – अब तुझे क्या बताऊ... सच तो ये है कि मैं तो राजू के साथ ही ये करना चाह रही थी ताकि घर की बात घर में ही रहे... पर

सुधिया – पर क्या...

सरला – राजू भी अपने बाप पर गया है.... उसका लंड तो मुश्किल से तीन साढ़े तीन इंच होगा...

सुधिया – अरे कमीनी, तूने अपने बेटे का लंड भी देख लिया, कब देखा कहाँ देखा...

सरला – वो खेत में एक दिन मैं दोपहर को गयी थी खाना लेकर, तब झाड़ियो के पीछे राजू मुठ मार रहा था, और उसका लंड बहुत छोटा है, लगता है इनके पुरे खानदान में ही छोटे लंड की परम्परा है,

सुधिया – हाँ वो तो है, समीर के बापू का भी मुश्किल से चार साढ़े चार इंच का है...

सरला – तभी तो मैं कह रही हूँ... क्यूँ ना समीर के साथ ही हम दोनों अपनी चुत की खुजली मिटा ले, क्या पता उसका लंड बाकियों से थोडा सा बड़ा हो

सुधिया – पर समीर तो अभी बच्चा है, उसका भी इनके बराबर ही होगा...

सरला – पर अगर वो थोडा बड़ा हुआ तो अपना काम चल जाएगा...

इधर मैं खड़ा सोच रहा था कि अगर इनको पता चला कि मेरा लंड तो साढ़े आठ इंच लम्बा है तो इनका क्या होगा...

सुधिया – नही सरला, मैं ये नही कर पाउंगी......

सरला – चल ठीक है, तू मत कर, पर मुझे तो करने देगी ना

सुधिया – वो....मैं... चल ठीक है, अगर तू चाहती है तो कर लेना... पर तुझे पता कैसे चलेगा कि उसका लंड भी छोटा तो नही है

सरला – इसमें तुझे मेरी मदद करनी होगी..

सुधिया – मुझे ..पर कैसे

सरला – देख सुधिया, तू उसके साथ रहती है, ना की मैं.... इसलिए तेरे लिए ये पता करना ज्यादा आसान है, कि उसका लंड मेरे जैसी खेली खाई ओरत को संतुस्ट कर सकता है या नही

सुधिया – पर अगर उसका लंड भी छोटा हुआ तो..

सरला – तो... हम समझ लेंगे कि हमारी किस्मत में अब चुदाई का सुख नही है....

सुधिया – चल ठीक है.. तेरे लिए मैं ये भी कर दूंगी.... पर मैं अपने बेटे के साथ कुछ नही करूंगी... याद रखना...

सरला – हाँ ठीक है....

मैं तो ये सोच कर ही उत्तेजित हो गया कि मेरी अम्मा मेरा लंड देखने की कोशिश करेगी..

सुधिया – चल तो ठीक है, अब मैं घर जाती हूँ..... काफी समय हो चूका है...

मैं भी अम्मा की बात सुनकर सीढ़ियों से दोडा और नीम से निचे उतरकर थोडा बाहर की तरफ आ गया.. और वापस ताई के घर की तरफ जाने का नाटक करने लगा...

तभी सामने से अम्मा आती हुई दिखाई दी.. मैंने अम्मा को आज तक इस नज़र से नही देखा था जैसे कि अभी देख रहा था... अम्मा वाकई काफी खुबसूरत दिखती थी..... कितनी गोरी थी.....भरा भरा बदन... मस्त बलखाती चूचियां, सांचे में ढली हुई कमर, भारी सी गांड, कुल मिलाकर बेहद जानलेवा बदन था अम्मा का

मैं सोच ही रहा था कि तभी अम्मा मेरे पास आ गयी.....

सुधिया – अरे समीर बेटा, तुम यहाँ क्या कर रहे हो...

मैं – अ...अम्मा वो बापूजी घर आ गये है..... इसलिए आपको बुलाने आया था..

सुधिया – अच्छा.. चल फिर जल्दी चल..

और फिर मैं और अम्मा वापस घर की तरफ चल पड़े....

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08-02-2020, 12:40 PM,
#16
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
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जल्द ही मैं और अम्मा वापस घर की तरफ चल पड़े, सरला ताई और अम्मा की बाते मेरे दिमाग में पुरे रस्ते घूम रही थी, और ये सोच कर तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रहा था कि अम्मा मेरा लंड देखने की कोशिश करेगी, और जब उन्हें ये पता चलेगा कि मेरा लोडा बहुत ही लम्बा और मोटा है तो क्या होगा, ये सोचकर ही मेरे मन में एक झुरझुरी सी पैदा हो रही थी,

अम्मा – समीर बेटा तेरे बापू को आये कितनी देर हो चुकी है??

मैं – लगभग 20 मिनट होने हो आई अम्मा, बापूजी ने आते ही आपको बुलाने भेज दिया था....

अम्मा – पर तू तो अभी अभी आया था ना सरला के घर पे......

मैंने देखा कि अम्मा थोड़ी सी घबरा गई थी मेरी बात सुनकर, मुझे भी अपनी गलती का एहसास हो गया था कि मुझे ये नही बोलना चाहिए था कि बापूजी ने आते ही मुझे ताई के घर भेज दिया, अब मैं माँ को क्या बोलता....कि इतनी देर कैसे लगा दी मैंने ताई के घर आते आते जबकि उनका घर तो मुश्किल से दो तीन मिनट की दुरी पर ही था.... तभी मेरे दिमाग में एक तरकीब आई

मैं – वो अम्मा, वो रस्ते में मुझे चमकू मिल गया था, इसलिए उससे बाते करने में टाइम लग गया...

अम्मा – ओह...अच्छा ठीक है...

मैंने देखा कि मेरा जवाब सुनकर अम्मा थोड़ी सुकून में आई....

जल्द ही हम घर पहुंच गये, बापूजी और अम्मा एक दुसरे को देखकर बड़े खुश हुए, फिर बापूजी ने हम सबको शहर से लाये हुए तोहफे दिए..... बापूजी मेरे लिए शहर से नयी पेंट लाये थे, जबकि दीदी और अम्मा दोनों के लिए रात को सोने से पहले पहनने वाली मैक्सी लाये थे, दरअसल अम्मा कई दिनों से बापूजी को बोल रही थी कि घाघरा चोली में उन्हें सोने में थोड़ी तकलीफ होती है, क्यूंकि उसका कपडा थोडा खुरदुरा था, इसीलिए बापूजी अम्मा और दीदी दोनों के लिए ही मैक्सी ले आये,

मैक्सी देखकर अम्मा और दीदी बहुत खुश हुए, फिर हम सब ने मिलकर खाना खाया, आज दीदी ने खाने में बापूजी के पसंद की चीज़े बनाई थी, खाना खाकर बापूजी ने थोड़ी देर हम सबको शहर के बारे में कुछ बाते बताई जैसा कि वो हर बार अपनी यात्रा से आने के बाद बताया करते थे, वैसे तो बापूजी कई कई शहरो में जाकर आते थे, पर जब भी वो भोपाल के बारे में कुछ बताते ना जाने मुझे ऐसा क्यों लगता जैसे मैं उस शहर को पहले से जानता हूँ, पता नही क्यों ऐसी फीलिंग मेरे मन में आती थी जैसे मेरा उस शहर से कोई पुराना नाता है, मैं अपने दिमाग पर जोर देने की कोशिश भी करता पर सिवाय एक धुंधलाहट के और कुछ नज़र ना आता

बापूजी हमे अपनी यात्रा के बारे में बताते रहे, हम भी बड़े ही आराम से उनकी बाते सुनते, इसी बातचीत में कब दस बज गये हमे पता ही नही चला.....

बापूजी – चलो ठीक है बच्चो अब जाकर तुम दोनों सो जाओ, बाकि कि बाते कल करेंगे... वैसे भी तुम्हे कल खेत में जाना है,
मैं – पर बापूजी कल तो आप भी तो चलोगे हमारे साथ खेत में, सब लोग मिलकर जायेगे ना...

बापूजी – नही बेटा, कल मैं लालाजी के यहाँ जा रहा हूँ, इस महीने का ब्याज जमा करने, पीछे से घर पर तेरी अम्मा हम सब के लिए खाना बनाने को रुकेगी..... इसलिए कल तू और तेरी बहन ही खेत में जाओगे... वैसे भी सुधिया बोल रही है कि खेत में कल ज्यादा काम नही है,

मैं – ठीक है बापूजी, जैसा आप कहे....

बापूजी – चलो ठीक है तो अब तुम दोनों जाओ और सो जाओ...

फिर मैं और दीदी अपने अपने तोहफे लेकर अपने कमरे में चले गये, माँ बापू भी अपने कमरे में जा चुके थे.....

कमरे में आने के बाद हमने दरवाज़ा बंद किया और आकर बिस्तर पर बैठ गये....

मैं – दीदी देखो ना बापू मेरे लिए कितनी सुंदर पेंट लेकर आये है शहर से....

दीदी – हाँ , पर मेरी मैक्सी भी तो कितनी सुंदर है....

मैं – हां दीदी....

कुछ देर हम ऐसे ही बाते करते रहे, और कब रात के 11 बज गये हमे पता ही नही चला...

दीदी - अच्छा चल अब सो जाते है, कल सुबह जल्दी भी उठना है....

अब सोना तो मैं चाहता था पर मुझे तो निक्कर पहनकर ही नींद आती थी, और मैं निक्कर के अंदर अंडरवियर भी नही पहनता था, अक्सर मैं बाथरूम में जाकर ही चेंज कर लेता था, पर आज तो काफी रात हो चुकी थी और अब बाहर जाने से माँ बापू की नींद खुल सकती थी....

दीदी – क्या हुआ, क्या सोच रहा है, सोता क्यूँ नही है तू...

मैं – “पर वो दीदी मुझे अपना निक्कर पहनना है....” मुझे पेंट में नींद नही आती..

दीदी – हाँ तो पहन ले ना...

मैं – पर दीदी अब अगर बाथरूम में गया तो माँ बापू की नींद ना खुल जाए कहीं...

दीदी – हाँ तो अंदर ही पहन ले ना,

मैं – नही दीदी अंदर मुझे आपसे शर्म आती है...

दीदी – “अरे मुझसे क्यों शर्माता है....” दीदी के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी..

मैं – नही दीदी मुझे शर्म आती है... वो मैं अंदर मेरा मतलब है कि निक्कर के अंदर कुछ नही पहनता

मेरी बात सुनकर दीदी को हलकी सी हंसी आ गयी....

मैं – क्या दीदी आप तो मेरा मजाक उड़ा रही हो...

दीदी – अच्छा माफ़ करना... चल एक काम करते है... मैं उधर मुंह कर लेती हूँ... तू जल्दी से निक्कर पहन ले ...क्यों ठीक है ना

मैं – हाँ ये ठीक रहेगा...

दीदी – हाँ तो चल जल्दी से पहन ले अब.. काफी रात हो चुकी है....

दीदी ने दूसरी तरफ मुंह कर लिया और मैं अब जल्दी से अपनी पेंट उतारने लगा, पेंट उतारते ही मेरा लंड जो अभी अर्धसुप्त अवस्था में था, वो चड्डी में उभार बनाकर खड़ा था, मेरे लंड के उभार को साफ़ साफ़ महसूस किया जा सकता था, मैं अब दीदी की तरफ देखने लगा जो मेरी तरफ पीठ करके बैठी थी,

मैं अब धीरे धीरे अपनी चड्डी उतारने लगा

दीदी – “अरे कितनी देर लगाएगा” और दीदी ये कहते हुए पीछे मुड गयी.... “हे भगवान.....” दीदी के मुंह से सिर्फ इतना ही निकला....

मैं भी शर्म के मारे जल्दी से पीछे मुड गया

“दीदी ने पक्का मेरा लंड देख लिया होगा, अब क्या होगा, अगर उन्होंने अम्मा को बता दिया तो...” मेरे मन में अजीब अजीब विचार चल रहे थे, पर मैंने उन सब विचारो को हटाया और जल्दी से अब निक्कर पहन लिया...और फिर आकर बिस्तर पर दीदी के साथ बैठ गया...

मैं – दीदी, आप पीछे क्यों मुड़ी....” मैं थोड़े शिकायत भरे लहजे में बोला

दीदी – अरे तू इतना वक्त जो लगा रहा था....” अब दीदी भी मेरी तरफ मुंह करके बैठ चुकी थी...

मैं –“दीदी...वो आपने कुछ देखा तो नही ना” मैं सकुचाते हुए बोला...

दीदी – “ नही मैंने तो कुछ नही देखा...”

दीदी के बोलते ही मुझे बहुत ही सकूँ सा महसूस हुआ ये जानकर कि दीदी ने कुछ नही देखा...

दीदी –“बस एक बड़ा सा डंडा ही दिखा मुझे तो...हा हा हा” और ये बोलकर दीदी हंसने लगी..

मेरी तो बोलती बंद हो गयी उनकी बात सुनकर......माथे पर हल्का सा पसीना आ गया... और मन में एक अजीब सी घबराहट होने लगी.... अभी मैं इस सदमे से उबरा भी नही था कि दीदी ने मुझ पर एक और बम फ़ेंक दिया...

दीदी – समीर एक बात बता...

मैं – ब....बोलो....दीदी.....

दीदी – आज शाम को तू बाथरूम के अंदर ताक झांक कर रहा था क्या जब मैं अंदर नहा रही थी...

दीदी की बात सुनकर मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे खिंच कर थप्पड़ मार दिया हो, या किसी ने जोर से बिजली का झटका दे दिया हो, मेरी तो डर के मारे हालत ख़राब हो गयी.... मैं बुरी तरह घबरा चूका था, मुझे पसीना आने लगा था....

दीदी – घबरा म़त, बस मुझे सच सच बता दे, मैं वादा करती हूँ कि किसी को कुछ नही बोलूंगी.... बस मुझे सच सच बताना

अब मुझे डर तो लग रहा था पर दिमाग के एक कोने से आवाज़ आई कि दीदी को सच बताने में ही भलाई है वरना अगर झूठ बोलने से कहीं वो नाराज़ हो गयी तो शामत आ जानी है मेरी तो.........

दीदी – अरे बोलता क्यों नही तू, वो तू ही था ना

मैं – दीदी, वो मुझे माफ़ कर देना.... मुझसे गलती हो गयी.... मैंने जानबुझकर नही किया पक्का.... मैं आगे से ऐसा कभी नही करूँगा

मैं चाह रहा था कि दीदी सिर्फ इस बार मुझे माफ़ कर दे, फिर तो कभी भी उनकी तरफ आँख उठाकर भी नही देखूंगा....पर दीदी ने मुझसे जो सवाल पूछा उसकी उम्मीद तो मैंने सपने में भी नही की थी....

दीदी – देख मैं तुझे एक शर्त पर माफ़ कर सकती हूँ...

मैं – हाँ बोलो दीदी, मुझे आपकी सभी शर्ते मंजूर है...

दीदी – तो ठीक है, मैं तुझसे जो भी पूछूँ तू मुझे खुलकर और सब सच सच बतायेगा....बोल मंजूर है ना..

मैं – ठ.....ठीक है दीदी...

दीदी – अच्छा तो ये बता, जब तूने मुझे नहाते हुए देखा तो तुझे कैसा लगा ......???

मैं भला अब क्या जवाब देता.... तो बस चुपचाप दीदी की तरफ देखता रहा..

दीदी – अरे बोलता क्यों नही है..... देख तूने वादा किया है कि मेरे सारे सवालों के सही सही जवाब देगा...

मैं – पर दीदी...

दीदी – पर वर कुछ नही ... अगर तूने जवाब नही दिए तो मैं बापूजी को बता दूंगी कि तू मुझे नहाते हुए देख रहा था...बोल बता दूँ क्या...

मैं – “नही नही दीदी..ऐसा मत करना... अगर बापूजी को पता चला तो वो मुझे घर से निकाल देंगे... मैं आपके सभी सवालों के जवाब देने को तैयार हूँ....” मैं घबरा कर बोला....मुझे लग रहा था शायद मेरे ही पाप है जो मुझे ये सब झेलना पड़ रहा है..... मैंने सोच लिया था कि आज के बाद इन झमेलों में पड़ना ही नही है मुझे...

दीदी – हाँ तो अब बता कि जब तूने मुझे नहाते हुए देखा तो तुझे कैसा लगा....

मैं – अच्छा लग रहा था दीदी....

दीदी – सिर्फ अच्छा या बहुत अच्छा

मैं – बहुत अच्छा ..

दीदी – तूने मेरे बदन में क्या क्या देखा ....

मैं – वो दीदी मैंने तो सब कुछ देखा था....

दीदी – ऐसे नही नाम लेकर बता...क्या क्या देखा.....

मैं – दीदी मैंने वो आपके बाल, चेहरा, पीठ, टांगे... और बाकी सब भी देख लिया था...

दीदी – अरे तो नाम बता ना... ये सब तो तू वैसे भी रोज़ देख लेता है..... और इनके अलावा क्या क्या देखा..

मैं – दीदी वो मैंने आपकी छाती भी देख ली थी...” मुझे समझ नही आ रहा था कि दीदी के सामने चूत , गांड मम्मे जैसे अल्फाज़ कैसे इस्तेमाल करूँ...

दीदी – लगता है तू ऐसे नाम नही बतायेगा, मैं अभी बापूजी के पास जाती हूँ...

मैं – नही नही दीदी... मैं बता रहा हूँ.....

दीदी – हाँ तो बोल.. और क्या क्या देखा था...

मैं – दीदी वो मैंने आपके मम्मे भी देखे थे....

दीदी – हाय राम... मेरे मम्मे भी देख लिए तूने... कैसे लगे तुझे मेरे मम्मे....

मैं (बड़ी मुश्किल से थूक निगलता हुआ) – दीदी, वो आपके मम्मे सच में बहुत खूबसूरत है.....दिल कर रहा था कि...

दीदी – क्या दिल कर रहा था बोल ना...

मैं – नही दीदी, आप नाराज़ हो जाओगी सुनकर...” अब मुझे भी इन सबमे मजा आने लगा था...

दीदी – अरे नही होउंगी....तू खुलकर बता ना...क्या दिल कर रहा था मेरे मम्मे देखकर.....

मैं – वो दीदी मेरा मन कर रहा था कि इन्हें जी भरकर चुसुं.....

दीदी – अच्छा जी.. तो जनाब मेरे मम्मे चुसना चाहते है.......अच्छा और क्या देखा तूने..

मैं – मैंने वो आपके पीछे ...मेरा मतलब है आपकी वो ....गांड भी देखी थी...

दीदी – अरे राम....तू तो बड़ा ही बेशर्म है रे.... मेरी गांड भी देख ली तूने...

इस बार मैं दीदी के बिना पूछे ही बोल पड़ा....

मैं – दीदी, आपकी गांड सच में बहुत ही भारी है... कसम से बहुत ही मस्त गांड है आपकी... कितनी मांसल गोरी गोरी... एकदम चिकनी सी गांड.. मैंने आज तक इतनी सुंदर गांड नही देखी दीदी....

दीदी – मरजान्या....कैसी कैसी बाते करता है.. अपनी दीदी की गांड देखते हुए शरम ना आई तेरे को...” दीदी झूटमूठ का गुस्सा करते हुए बोली...

मैं – पर दीदी आप ही बोल रही थी कि खुलकर बताऊँ सब कुछ.. अगर आप नही चाहती तो मैं नही बताता.....

दीदी - अरे नही नही, तू बता, मैं तो ऐसे ही बोल रही थी....

मैं – और क्या बताऊ दीदी....

दीदी – मम्मे और गांड के अलावा भी कुछ देखा या नही

मैं – “नही दीदी और तो कुछ नही देखा” मैंने झूट बोल दिया..

दीदी – “सच में तूने और कुछ नही देखा...”

मैं – नही दीदी और तो कुछ नही देखा...

दीदी – “ऐसा कैसा हो सकता है... अच्छे से याद कर ना समीर, तूने जरुर कुछ और भी देखा होगा...” दीदी अधीर होती हुई बोली

मैं – “अम्म्म...नही दीदी...और तो कुछ मुझे याद नही...” मैं दीदी के मजे ले रहा था अब

दीदी –“ठीक है तो सोजा, याद नही तो” दीदी गुस्सा करती हुई मेरी तरफ पीठ करके लेट गई....

उन्हें इस तरह गुस्सा करते देख मुझे उन पर बड़ा ही प्यार आ गया.....मैंने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा तो उन्होंने कंधे को झटकते हुए मेरा हाथ हटा दिया....मैंने दोबारा से उनके कंधे पर एक हाथ रखा और उन्हें मेरी तरफ पलट लिया.....

दीदी – क्या है, सोने क्यूँ नही देता अब...

मैं – वो बस मैं तो ये ही बता रहा था कि मैंने एक और चीज़ देखी थी आपकी...

दीदी – “क्या देखी थी....” दीदी नाराज़गी से ही बोली...

मैं – “आपकी ये प्यारी से चुत......”ये कहकर मैंने दीदी की हलके से हाथ फेर दिया.....

दीदी के मुंह से हलकी सी सिसकारी निकल गयी....

मैं – और दीदी सच कहूँ तो आपकी इस प्यारी सी फुद्दी का मैं तो दीवाना हो चूका हूँ.... इतनी खूबसूरत चूत मैंने कभी नही देखी... कितनी प्यारी सी गुलाबी सी गोरी सी चूत है आपकी.....

दीदी – नही तू झूठ बोल रहा है, बस मुझे मनाने के लिए...

मैं – नही दीदी.. मैं आपकी कसम खाकर बोलता हूँ...... मुझे आपकी चूत सच में बहुत अच्छी लगी.....

दीदी – चल ठीक है, मान ली तेरी बात... चल अब सोजा... कल जल्दी उठना है....

मैं – पर दीदी...

दीदी – “पर क्या...” दीदी मुस्कुराते हुए बोली...

मैं –“वो मैं सोच रहा था कि...”

दीदी – सोचना वोचना कल.. अब चुपचाप सोजा......कल जल्दी उठाना है हमे....

अब मैं और क्या बोलता.. कहाँ तो मैं सोच रहा था कि आज रात रंगीन होने वाली है और कहाँ साला अब खड़े लंड पर धोका हो गया

दीदी – सोजा अब....

आखिर हारकर मुझे भी सोना ही पडा....पर एक बात बिलकुल साफ थी कि दीदी भी मुझसे चुदने के लिए तैयार है..... बस थोडा सा शर्मा रही है...... मैंने मन ही मन सोच लिया कि चाहे जो हो आज रात ही दीदी के सोने के बाद उनकी चूत का उद्घाटन मैं कर दूंगा......
मैं अब दीदी के सोने का इंतज़ार करने लगा.......दीदी ने आज एक नाईटी पहन रखी थी.... करीब करीब 1 घंटे बाद मुझे लगा कि शायद अब दीदी सो गयी है... मैंने उनकी तरफ मुड कर देखा....

मेरा लंड खुशी के मारें झटके लेने लगा… सामने वो दिल कश हसीना मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थी…उसकी पीठ मेरी तरफ थी…मैंने गोर से देखा…नीलू की नाइटी उसके घुटनो तक ऊपर चढ़ि हुई थी... जैसे आज वो उसे जान बुझ कर ऊपर उठा कर लेटी हुई हों…

मैं बिना एक पल की देरी किए उसके और करीब आकर लेट गया…और धीरे-2 उसकी तरफ खिसकने लगा…जब मैं दीदी के बिल्कुल साथ हो गया…तो मेरा लंड एक दम अकड़ गया.. और मेरे निक्कर को ऊपर उठा दिया…मुझे लंड को निक्कर में रखने में दिक्कत होने लगी…

मैंने थोड़ा सा पीछे हो कर अपने लंड को निक्कर से बाहर निकाल लिया…और दीदी के पीछे से उनके साथ लग गया…मेरा लंड उनकी नीले रंग की नाइटी को उसकी गांड की दरार में धकेलता हुआ उसकी गांड के सूराख पर जा लगा….

दीदी थोड़ा सा हिली, और पीछे की तरफ अपनी गांड को थोड़ा सा दबा दिया…जैसे वो नींद में ये सब कर रही हो…मैंने दीदी की नाइटी को धीरे-2 ऊपर करना चालू कर दिया…जो पहले से उसके घुटनो तक उठी हुई थी…

मैं बड़े ध्यान से दीदी की नाइटी को ऊपर उठाता रहा…और जब उनकी नाइटी उनकी जाँघों तक ऊपर उठ गयी…मैंने अपने लंड को पीछे करके दीदी की नाइटी को ऊपर उठा दिया…वाउ सामने का नज़ारा देख मेरा लंड की नसें फूलने लगी…

आज दीदी ने पीले रंग की पैंटी पहनी हुई थे…जैसे आज पूरी तैयारी के साथ आई हो…मैं अपने आप पर काबू ना रख सका… पीले रंग की पैंटी दीदी के बड़े-2 गोल मटोल चौड़ी गांड को नही ढक पा रही थे…अब मैं एक दम पागल हो चुका था…

अब मैं बिना किसी बात की परवाह किए बगैर अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसकी गांड के नीचे से उसकी फुद्दि पर लगा दिया…मैं तो मानो जैसे जन्नत में उड़ रहा था…इस बार दीदी फिर से थोड़ा सा हिली पर फिर से शांत पड़ गयी…मैं धीरे-2 अपने लंड को दीदी की पैंटी के ऊपर उसकी फुद्दि के लिप्स पर रगड़ने लगा….

पर दीदी की जांघ आपस में जुड़ी हुई थी…जिससे मेरा लंड गांड की नीचे से थोड़ा ही आगे जा पा रहा था…मैं अपने लंड को धीरे-2 रगड़ता हुआ आगे पीछे करने लगा.. पर हर बार दीदी की जांघ के कारण आधे रास्ते में रुक जाता…दीदी की पीले पैंटी में मुझे अपने लंड पर कुछ-2 गीला सा महसूस हुआ…ओह्ह्ह्ह ये क्या दीदी की फुद्दि तो गीली हो चुकी थे…क्या वो जाग रही हैं….हाँ शायद वो कुछ बोले बिना ही मज़ा लेना चाहती हैं…

मैं अपने लंड को पीछे उसकी फुद्दि पर पैंटी को ऊपर से रगड़ते हुए…और आगे करने की कोशिश करने लगा…फिर वो हुआ जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था…दीदी ने अपनी ऊपर वाली जाँघ को हल्का सा ऊपर कर लिया…जैसे ही दीदी की जाँघ ऊपर हुई…मेरा तना हुआ लंड दीदी की दोनो जाँघों के बीच में से उसकी फुद्दि के होठों के बिल्कुल बीचो-बिच जा कर दब गया….

मेरे पूरे बदन में वासना की लहर दौड़ गयी…दिल उतेजना के मारें तेज़ी से धड़कने लगा…दीदी ने फिर धीरे-2 अपनी ऊपर वाली जाँघ को नीचे वाली जाँघ पर वैसे ही रख दिया…मेरा तना हुआ लंड दीदी की दहक्ती हुई जाँघो और फुद्दि में लगा हुआ था..

मत पूछो मुझे आज तक इतना मज़ा कभी नही आया…अब मेरा हौसला बढ़ चुका था…पर मैं फिर भी थोड़ा सा डर रहा था…मैंने ये सोच लिया…जैसे नीलू दीदी को पसंद हैं…मैं भी बिना कुछ बोले ही उनको सारी दुनिया का प्यार आज दे दूँगा..

मैंने थोड़ी देर लेटने के बाद…अपना हाथ आगे लेजा कर उनकी नाइटी के ऊपर से उनके राइट मम्मे पर रख दिया…ओह्ह्ह्ह क्या नरम और गोश्त से भरे हुए मम्मे हैं दीदी की…मैं धीरे-2 दीदी के मम्मे को ऊपर से दबाने लगा…जैसे-2 मैं दीदी के मम्मे को दबा रहा था… वैसे -2 दीदी अपने गांड को पीछे की ओर हल्के-2 दबा रही थे…ताकि मुझे पता ना चले..पर मैं तो पहले से ही सब महसूस कर रहा था…दीदी की नाइटी भी बेहद पतली सी थे……पीछे दीदी की नाइटी के ऊपर का हिस्सा काफ़ी खुला था….

मैने अपने काँप रहे होंठों को, नीलू की नाइटी के ऊपर के खुले हिस्से पर लगा दिया… जैसे ही मेरे होंठ उसकी नंगी पीठ पर पड़े…वो एक दम से सीईईई करके सिसक उठी…आवाज़ बहुत धीमी थी…पर मुझे सुनाई दे गयी….मैं नीलू दीदी की पीठ पर अपने होंठो को रगड़ने लगा…उसका नतीजा ये हुआ कि, उसने अपनी गांड को धीरे धीरे मेरे लंड पर पुश करना शुरू कर दिया.…

नीलू दीदी की साँसें और तेज़ी से चलने लगी…मेरा हाथ उनकी नाइटी के ऊपर से उसके मम्मे पर था….और मैं उसके मम्मे को धीरे-2 दबा रहा था…दीदी की तेज़ी होते साँसों से उनके मम्मे तेज़ी से ऊपर नीचे हो रह थे…जो मैं अपने हाथ से अच्छी तरह से महसूस कर रहा था…

अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो चला था…मैने अपने होंठो को दीदी के जिस्म पर रगड़ते हुए…उसकी गर्दन पर आ गया…और पीछे से उसके गर्दन को चूमने लगा…मैं दीदी के चेहरे से उठ रही गरमी को साफ महसूस कर रहा था..उसकी नाक से साँस लेने तक की आवाज़ भी मैं साफ-2 सुन पा रहा था….

मैने दीदी के मम्मे से अपना हाथ हटा कर, उनके कंधे की नीचे बाजू पर रख दिया…और अपनी कमर के नीचले हिस्से को पीछे कर अपने लंड को उसकी जांघों के दरम्यान से बाहर निकाल लिया…और थोड़ा सा पीछे हो कर उनके बाजू को पकड़ कर अपनी तरफ करने लगा…

थोड़ी ही देर में दीदी ने धीरे-2 मेरी तरफ करवट बदल ली…अब दीदी पीठ के बल लेटी थे…तेज़ी से चल रही साँसों से उसके 32 साइज़ के एक दम सख़्त मम्मे ऊपर नीचे हो रहे थे, और मैं अपनी वासना से भरी नज़रों से देख रहा था…मैं नीलू के ऊपर झुक गया…मेरा कमर का नीचे का हिस्सा बिस्तर पर था…और बाकी का हिस्सा नीलू दीदी के ऊपर था…पर मैने उन पर वजन नही डाला था…वो अभी भी अपनी आँखे बंद किए हुए थी…उसके होंठ काँप रहे थे…आँखों की पलकें हिल रही थी…और उसके पेट कमर पर कंपन हो रहा था….

ये सब करते हुए मेरा दिल इतने जोरो से धड़क रहा था कि, मुझे पूरा यकीन है कि, नीलू दीदी भी मेरे दिल की धड़कनो की आवाज़ को सुन सकती होंगी…मेरे हाथ पैर अजीब से डर और उतेजना के मारे काँप रहे थे….मैने अपने काँपते हाथो से नीलू दीदी की नाइटी के दोनो स्ट्रॅप्स को पकड़ा और धीरे-2 उनके कंधो से स्ट्रॅप्स को नीचे करने लगा….मुझे पूरा यकीन था कि, नीलू जागी हुई है…पर फिर भी मैं ऐसे नाइटी के स्ट्रॅप्स को नीचे कर रहा था…जैसे मुझे नीलू के जाग जाने का ख़तरा हो…धीरे-2 नीलू की नाइटी के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से उतार कर उसके बाज़ुओं पर आ चुके थे…अब उसकी नाइटी के स्ट्रॅप्स उसकी बाज़ुओं पर कोहानियों के पास थे….और अब मुझे नाइटी के स्ट्रॅप्स को उसकी बाज़ुओं को मोड़ कर उनसे निकालना था….

मैने एक हाथ से नीलू के लेफ्ट बाज़ू को पकड़ा और दूसरे हाथ से नाइटी के स्ट्रॅप को पकड़ कर धीरे-2 नीलू के बाज़ू को कोहनी से मोडते हुए, स्ट्रॅप को बाहर निकालने लगा…इसमे मुझे ज़रा भी मुस्किल नही हुई….सब इतनी आसानी से हो गया…जैसे नीलू खुद मेरी मदद कर रहे हो….फिर मैने ठीक उसी तरह दूसरी तरफ का स्ट्रॅप भी बाज़ू से निकाल दिया…और जैसे ही मैने नीलू दीदी की नाइटी को पकड़ कर उनके मम्मों से नीचे खैंचा….तो सामने का नज़ारा देख मेरे लंड ने निक्कर में जोरदार झटका खाया….नीलू के बड़े-2 32 साइज़ के मम्मे रेड रंग की ब्रा में एक दम फँसे हुए थे…..जैसे ज़बरदस्ती उनको उस छोटी सी ब्रा में क़ैद कर दिया हो….अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो चुका था….

मैने अपने होंठो को नीलू की गर्दन पर रख दिया…और गर्दन को चूमने लगा…मेरे होंठ नीलू के गर्दन के हर हिस्से को चूम रहे थे…मैने नीलू के हाथों की तरफ देखा…नीलू ने अपने हाथों से अपनी कमर के पास बिस्तर को कसकर पकड़ा हुआ था… मैं नीलू की गर्दन को किस करता हुआ नीचे आने लगा…और उसके बूब्स के ऊपर वाले हिस्से को अपने होंठो से चूमने लगा…अब मैं हिम्मत करके उसके ऊपर आ गया…नीलू ने अपने टाँगों को घुटनो से मोड़ा हुआ था…जिससे उसकी नाइटी सरक कर उसकी जांघो की जडो तक आ गयी थी…और उसकी पीले रंग की वीशेप की पैंटी साफ दिख रही थी…उसकी गोरी गोश्त से भरी जांघे एक दम साफ थी

जैसे ही मैं नीलू के ऊपर आया… तो नीलू ने अपनी जाँघों को खोल लिया… मैं नीलू की जाँघों के दरमियान घुटनो के बल बैठ गया…और अपने दोनो हाथों से नीलू की छोटी सी रेड रंग की ब्रा में क़ैद एक दम कसे हुए मम्मो को हाथ में ले लिया….मेरा लंड नीलू की रेड रंग की पैंटी के एक तरफ से उसकी फुद्दि के लिप्स के नज़दीक रगड़ खा रहा था….नीलू का चेहरा एक दम सुर्ख हो चुका था…और वो अपने सर को ऊपर की तरफ उठाए हुए, अपने होंठो और मूह को थोड़ा सा खोल कर ठीक से साँस लेने की कोशिश कर रही थी…

मैने नीलू के मम्मो को दोनो हाथों में लेकर धीरे-2 दबाना चालू कर दिया… उसके नर्म मुलायम मम्मो को दबा कर मैं और गरम हुआ जा रहा था…पर अब वक़्त आ गया था…जब मैं अपने आप को रोक नही सकता था…और नीलू की ब्रा के कप्स को नीचे से पकड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश करने लगा.. पर ब्रा बेहद टाइट थी… और ब्रा के हुक्स नीलू की पीठ पर थे…और नीलू पीठ के बल लेटी हुई थी… अब मेरा दिल नीलू की ब्रा में दिख रहे ब्राउन रंग के आधे इंच के निपल्स को मूह में लेकर चूसने को कर रहा था…

मैं नीलू की पीठ के दोनो साइड से अपने हाथों को नीलू की पीठ के नीचे ले जाने की कोशिश करने लगा…पर नीलू की पीठ नीचे बिस्तर पर दबी हुई थी…और मैं अपने हाथों को नीचे ब्रा के हुक्स के पास नही ले जा रहा था…पर फिर वो हुआ जिससे मेरा लंड और झटके खाने लगा…नीलू ने अपनी आँखों को बंद किए हुए अपनी पीठ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया…मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नही था…मैने जल्दी से अपने हाथों को नीलू की पीठ के पीछे लेजा कर नीलू की ब्रा के हुक्स को खोल दिए, और अपने हाथों को आगे लेजा कर नीलू के ब्रा के कप्स को ऊपर उठा दिया….

मेरा तो जैसे गला ही सुख गया…एक दम सख़्त गोश्त से भरे हुए नीलू के 32 साइज़ के मम्मे मेरी आँखों के सामने थे…मम्मो के निप्पल तन कर एक दम सख़्त हो चुके थे…ब्राउन रंग के निप्पल को देख कर मैं एक दम पागल हो गया….नीलू के वेल शेप्ड बूब्स को देख कर मैं एक दम से पागल हो गया…और नीलू के दोनो मम्मो को अपने हाथों में पकड़ कर दबाने लगा…जिससे नीलू के मम्मो के निप्पल और नुकीले हो कर बाहर की तरफ आ गये….

मैने नीलू के मम्मो के एक निप्पल को मूह में ले लिया…और धीरे-2 चूसने लगा…नीलू ने अपने हाथों से बिस्तर को कस के पकड़ लिया…और उसके मूह से एक हल्की सी आह निकल गयी..अब मैं किसी भी बात पर ध्यान दिए बिना. नीलू के मम्मे की निप्पल को चूस रहा था…नीलू का बदन मस्ती में गरम हो कर काँप रहा था…मैं नीलू के मम्मे को ज़ोर-2 से सक करने लगा….नीलू के मूह से अहह सीयी की बहुत ही धीमी आवाज़ निकल रही थे…और वो अपने होंठो को अपने दाँतों में दबाए हुए अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी

मैं अपने एक हाथ से नीलू के दूसरे मम्मे को धीरे-2 दबा रहा था..नीलू के निप्पल और कड़े हो कर तन चुके थे…मैं नीलू के दूसरे मम्मे के निप्पल को अपने हाथ की उंगलियों में लेकर मसलने लगा, और नीलू और ज़्यादा कसमसाने लगी…
नीलू के बाल बिखर चुके थे…और मैं नीलू के मम्मे को लगतार किसी बच्चे की तरह चूसे जा रहा था…मैं करीब 5 मिनट तक नीलू के एक मम्मे को चूस-2 कर लाल कर दिया था…मैने नीलू के मम्मे को मूह से निकाल कर, नीलू के दूसरे मम्मे को मूह में लेकर चूसना शुरू कर दिया…

और पहले वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाने लगा…नीलू की आँखे अभी भी बंद थी…वो शायद अपनी आँखे खोल कर मेरा सामना नही करना चाहती थे.. मैं भी नीलू को बिना कुछ बोले, नीलू के मम्मे को चूस रहा था…करीब 15 मिनट तक नीलू के दोनो मम्मो को चूसने और दबाने के बाद में धीरे-2 अपने होंठो को नीलू के बदन पर रगड़ता हुआ, नीचे आने लगा….

मेरे होंठ नीलू के बदन के हर इंच को रगड़ रहे थे, और मैं नीलू के बदन पर अपनी ज़ुबान फेर कर चाट रहा था…

मैं अपनी आँखों को ऊपर करके, नीलू के चेहरा को देख रहा था…उनके चेहरे पर पसीना आ चुका था…होंठ थरथरा रहे थे….और बालों की लट माथे और चेहरा पर बिखरी हुई थी… और वो तेज़ी से साँस ले रही थी…

मैं नीलू के जिस्म को अपने होंठों और जीभ से चूमता हुआ, नीलू की नाभि पर आ गया…और अपनी जीभ निकाल कर नीलू की नाभि के चारों तरफ गोल-2 घुमा कर चाटने लगा…नीलू बुरी तरह तड़प कर रह गयी…और अपने हाथों को एक झटके में ऊपर करके सर के नीचे रखे तकिये को दोनो हाथों में कस कर पकड़ लिया…. नीलू के पेट में कंपन के कारण हल्की -2 लहरे उठ रही थी…नीलू के पेट की हल्की चरबी थरथरा रही थी….और वो अपने होंठो को दाँतों में दबाए हल्की आवाज़ में उम्ह्ह्ह्ह्ह उंघ कर रही थी….

मैने अपनी जीभ निकाल कर नीलू की नाभि में डाल कर चाटने लगा…नीलू एक दम से मस्त हो गयी…उसकी कमर झटके खाने लगी….जिसकी वजह से उसकी नाइटी सरक कर उसकी कमर पर आ चुकी थी…और पैंटी फुद्दि के सूराख की जगह से एक दम गीली हो चुकी थे…मैं नीलू की नाभि को 5 मिनट तक चाटता रहा…और फिर नाभि को छोड़ कर नीचे की तरफ आने लगा…जैसे-2 मैं नीचे की ओर आ रहा था…नीलू की साँस लेने की आवाज़ और तेज होती जा रही थी

मैं नीलू के बदन की हर एक इंच को चूमता हुआ, नीलू की पैंटी के ऊपर आ गया…और नीलू की पैंटी के ऊपर से ही अपने होंठो को उसकी फुद्दि के ऊपर रगड़ने लगा…नीलू मेरी इस हरकत से और तड़पने लगी….मैं नीलू की फुद्दि को पेंटी के ऊपर से ही चाटने लगा…नीलू की जांघे मेरे सर पर कसने लगी…जब मुझे थोड़ी दिक्कत होने लगी…मैने नीलू की जांघो को दोनो हाथों से पकड़ कर खोल दिया….और घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा दिया… और नीलू की फुद्दि के सूराख के ठीक ऊपर पैंटी के ऊपर से चाटने लगा….

नीलू की जांघो को ऊपर करने के बाद, मैने अपने हाथों को नीलू की टाँगों से हटा दिया…और नीलू की पैंटी के ऊपर लाकर, नीलू की पैंटी को चाटते हुए, उसकी फुद्दि के धीरे-2 दबाने लगा….नीलू के पैर फिर से धीरे-2 नीचे की ओर आने लगी…मैं समझ गया था, कि नीलू से बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा है…मैने जल्दी से अपना निक्कर उतरा और सीधा होकर उसके जांघ के दरमियाँ घुटनो के बल बैठ गया….और उसकी पैंटी को दोनो हाथों से पकड़ कर नीचे करने लगा….

इस बार नीलू ने बिना कोई देर किए….अपने गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया…मेरे होंठो पर मुस्कान फैल गयी…मैने पैंटी को धीरे-2 नीचे सरकाना चालू कर दिया…जैसे-2 नीलू की फुद्दि मेरी आँखों के सामने आ रही थे…वैसे-2 मेरा लंड हवा में झटके खा रहा था…मैने पैंटी को नीलू की टाँगों से निकाल कर बिस्तर के एक साइड में रख दिया…और नीलू की जांघ को पूरी तरह खोल कर ऊपर कर दिया…जैसे ही नीलू के घुटनो से मूडी हुई टाँगें ऊपर हुई…नीलू के फूली हुई फुद्दि, जो नीलू की फुद्दि से निकले गाढ़े पानी से लबालब थे… मेरी आँखों के सामने थे…

नीलू की फुद्दि के लिप्स आपस में जुड़े हुए थे…और वासना के कारण थोड़े खुल और बंद हो रहे थे…मैने नीलू को घुटनो से पकड़ कर नीलू की टाँगों को और ऊपर करके फैला दिया…जिससे नीलू की फुद्दि के लिप्स थोड़ा सा फैल गये…और उसकी फुद्दि का गुलाबी सूराख जो उसके काम रस से भीगा हुआ था, मुझे थोड़ा-2 दिखाई देने लगा….

मैं नीचे झुक गया…और उसकी फुद्दि के लिप्स को दोनो हाथों की उंगलियों से फैला दिया…नीलू की फुद्दि का गुलाबी सूराख उसके काम रस से भीगा हुआ था…मैने बिना टाइम वेस्ट किए, नीलू की फुद्दि के पानी से लबलबा रहे सूराख पर, अपने मूह को रख दिया…और अपनी जीभ निकाल कर नीलू की फुद्दि के सूराख को चाटने लगा… नीलू बुरी तरह छटपटाने लगी…नीलू की कमर नीचे से झटके खाने लगी…और उसने तकिये को कस कर दोनो हाथों से पकड़ लिया….

मैं अपनी आँखों को ऊपर करके नीलू को देखने लगा…नीलू अपने होंठो को दाँतों में दबाए हुए…अपने सर को इधर से उधर पटक रही थी…और नीलू के मूह से सीईइ अहह सीयी अहह की धीमी-2 आवाज़ आ रही थे…

मैं नीलू की फुद्दि के लिप्स को फैला कर उसकी फुद्दि के गुलाबी सूराख को जीभ से अंदर तक चाट रहा था….बीच-2 में में नीलू की फुद्दि के लिप्स को अपने होंठो में दबा कर खींच देता…नीलू और तड़पने लग जाती….करीब 5 मिनट फुद्दि को चाटने के बाद…मैने नीलू की क्लिट जो उतेजना के मारें काफ़ी फूल चुका था…उसे मूह में ले लिया…

Reply
08-02-2020, 12:40 PM,
#17
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
जैसे ही मैने नीलू के क्लिट को मूह में लिया…नीलू की कमर झटके खाने लगी… और वो और ज़ोर से अपने सर को इधर से उधर पटाकने लगी…पर अभी तक उसके मूह से सिसकारियों के अलावा एक अलफाज़ नही निकला था….

में नीलू की फुद्दि के क्लिट को पागलों की तरह चूस रहा था…मैं नीलू के क्लिट को मूह में भर कर अपनी जीभ से रगड़ने लग जाता…नीलू पूरी तरह गरम हो कर सीयी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह करते हुए, अपनी गांड को हिला रही थे…

मैने नीलू की फुद्दि पर से अपना मूह हटा लिया… और अपने लंड के सुपाडे को नीलू की फुद्दि पर लगा दिया…जैसे ही मेरे लंड का सुपाडा उसकी दहकती फुद्दि के सूराख पर लगा…नीलू के बदन ने एक झटका खाया…और उसके होंठो पर एक हल्की सी मुस्कान फैल गयी…जिससे साफ पता चल रहा था, कि वो चुदवाने के इस खेल का पूरा मज़ा ले रही हैं….

इसीलिए जैसे ही मैने हल्का सा झटका दिया…मेरे लंड का सुपाडा उसकी फुद्दि के सूराख के अंदर घुसने की कोशिश करने लगा.. मुझे उसकी फुद्दि की दीवारें मुझे अपने लंड पर कसी हुई महसूस हो रही थे….और उसकी फुद्दि की दीवारें मेरे लंड की सुपाडा को कभी कस्ति और कभी ढीला छोड़ रही थी….

नीलू की फुद्दि एक दम गरम और गीली हो चुकी थी…मैंने बिना कोई देर किए, एक और झटका मारा…मेरा आधा लंड नीलू की फुद्दि में समा गया…और नीलू के मूह से एक और दबी हुई आहह निकल गयी…और मुझे अपने लंड पर कुछ गिला गिला पानी जैसा महसूस हुआ....

जैसे ही मेरा आधा लंड नीलू की फुद्दि में घुसा…मैं नीलू के ऊपर झुक गया…नीलू के तने हुए एक निप्पल को मूह में लेकर चूसने लगा…और दूसरा हाथ नीचे लेजा कर नीलू के क्लिट को अपने हाथ के अंगूठे से मसलने लगा. जैसे-2 मैं नीलू की फुद्दि के क्लिट को अपने अंगूठे से रगड़ रहा था…वैसे-2 नीलू अपनी कमर को नीचे से हिला रही थी…

नीलू के मम्मो को मैं पागलों की तरह चूस रहा था…फिर थोड़ी देर बाद मैने नीचे से हाथ हटा लिया…और अपने दोनो हाथों से नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए दबाने लगा…

अब नीलू बहुत गरम हो चुकी थी…उसकी साँसे बहुत तेज़ी से चल रही थे…नीलू ने नीचे अपनी फुद्दि को धीरे-2 ऊपर मेरे लंड पर दाबना चालू कर दिया…नीलू की गीली फुद्दि में मेरा लंड फुद्दि की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा… अब मैंने बिना देर किये एक और जोरदार शॉट मारा और कुछ ही पलों में मेरा पूरा का पूरा लंड नीलू की फुद्दि में समा गया…

मैने नीलू के चेहरा की तरफ देखा…नीलू की आँखे अभी भी बंद थी…साँसें तेज़ी से चल रही थी…और वो अपने होंठो को दाँतों में दबाए हुए थी…शायद उसके मुंह से चीख भी निकल जाती पर उसने अपने आपको पूरी तरह कण्ट्रोल किया हुआ था....

मैं - नीलू तुम्हारी फुद्दि बहुत गरम और टाइट है…देखो ना मेरा लंड कैसे तुम्हारी फुद्दि के पानी से भीगा हुआ है…

पर ये बात सुनते ही, नीलू ने अपने होंठो को दाँतों से निकाल लिया….और मेरी बात को सुनते ही उसके होंठो पर हंसी आ गयी…पर ना तो उसने अपनी आँखों को खोला और ना ही वो कुछ बोली….शायद वो बोलना ही नही चाहती थी….मैं अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करने लगा…लंड नीलू की फुद्दि से बह रहे काम रस से चिकना हो कर धीरे-2 अंदर बाहर हो रहा था…नीलू ने एक बार फिर से अपने होंठो को दाँतों से काटना शुरू कर दिया था….

थोड़ी देर बाद ही मैं नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए अपने लंड को पूरा बाहर निकाल-2 कर शॉट मार रहा था… लंड फच-2 की आवाज़ से अंदर बाहर हो रहा था…नीलू ने अपनी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर मेरी कमर के ऊपर रख लिया था… ताकि वो मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में महसूस कर सकें….

मैं - अहह नीलू तुम्हारी फुद्दि सच में बहुत कसी हुई है रे ….मेरे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेकर दबा रही हैं….

मैं नीलू के चेहरा की तरफ देखते हुए…अपने लंड को उसकी फुद्दि के अंदर बाहर कर रहा था…पर नीलू बिना कुछ बोले अपनी आँखों को बंद किए लेटी रही… मैं सीधा हो कर घुटनो के बल बैठ गया….और नीलू की टाँगों को घुटनो से पकड़ कर धीरे-2 अपने लंड को उसकी फुद्दि से बाहर निकालने लगा…मेरे लंड का सुपाडा नीलू की गीली और गरम फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आने लगा….

जैसे ही मेरा लंड सुपाडा तक नीलू की फुददी से बाहर निकला…मैने एक गहरी साँस ली... और अपनी पूरी ताक़त लगाकर एक जोरदार धक्का मारा…लंड का सुपाडा पूरी तेज़ी से नीलू की फुद्दि की दीवारों को फैलाता हुआ. अंदर घुस गया…धक्का इतना ज़बरदस्त था, कि नीलू के मूह से अहह की हल्की सी चीख निकल गयी…

मैं वापिस नीलू के ऊपर झुक गया, और नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए अपने लंड को तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा…लंड फ़च-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा…मेरे हर धक्के के साथ नीलू के मूह से हल्की से उन्घ की आवाज़ निकल जाती…और कभी आह सीईइ की आवाज़ सुन जाती…. लंड अब आसानी से नीलू की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था…

मैने नीलू के मम्मो को छोड़ कर अपने होंठो को नीलू के रसीले होंठो की तरफ बढ़ा दिया…और नीलू ने जैसे ही मेरे होंठो को अपने होंठो पर महसूस किया…नीलू ने अपने होंठो को खोल लिया…मैं नीलू के गुलाबी रस से भरे होंठो को चूसने लगा… नीलू भी मेरा पूरा साथ दे रही थी….मैने धीरे-2 अपने धक्को की रफ़्तार को और बढ़ा दिया…नीलू का बदन अकड़ने लगा…और वो तेज़ी से अह्ह्ह्ह अहह सीईईईईई उंह करने लगी… नीलू फारिघ् होने के करीब थी…मैं और जोश में आकर अपने लंड को और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा…आख़िर कार नीलू का बदन अकड़ गया…और उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करके तेज़ी से साँस लेना शुरू कर दिया….

और फिर नीलू एक दम से तड़पते हुए अकड़ने सी लगी ..मैने भी फुल स्पीड से घस्से मारने शुरू कर दिए…..और ऐसे 2- शॉट मारे कि, पूरा कमरा पक -पक फच-फच की आवाज़ो से गूँज उठा….”ओह्ह्ह दीदी मैं फारिघ् होने वाला हूँ….जल्दी बताओ कहाँ पानी निकालु….जल्दी…” जैसे ही मैने कहा तो, नीलू ने अपने दोनो हाथो को तकिये से हटा मेरी पीठ को अपनी बाज़ुओं में ज़ोर से कस लिया….उसके मम्मे मेरी छाती पर दब गये…और अगले ही पल नीलू ने अपनी टाँगो को उठा कर मेरी कमर पर रखते हुए सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”अंदर फारिघ् मत होना समीर…सीईइ….” नीलू की बात सुनते ही मैंने झट से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे लंड से लंबी-2 पिचकारियाँ निकालने लगी… और मैने नीलू के पेट को अपने गरम लावे से भरना शुरू कर दिया…

मैं भी पूरी तरह थक चुका था…मेरा लंड रह-2 नीलू की फुद्दि के उपर झटके खा रहा था….जिसे महसूस करके बीच-2 में नीलू का जिस्म भी काँप जाता….वो मेरी पीठ पर अपने हाथ फेर रही थी…थोड़ी देर बाद में नीलू के ऊपर से हट कर उसकी बगल में लेट गया…और अपनी साँसों को दुरस्त करने लगा… और सो गया...
[/color][/b]
Reply
08-02-2020, 12:43 PM,
#18
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
Undecided
Reply
08-04-2020, 07:27 PM,
#19
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
मस्त कहानी है,कृपया आगे बढायेँ | धन्यवाद
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