Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
03-19-2020, 12:03 PM,
#31
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 16

दो आंखे हमे घूर रही थी ,मेरी नजर उसपर जम चुकी थी लेकिन मैंने कुछ भी नही कहा,वो नेहा दीदी थी ,नेहा दीदी से मेरी नजर मिली और वो वहां से चुपचाप ही निकल गई , यंहा निशा बिल्कुल ही निढल होकर गिर चुकी थी और ना जाने कब वो नींद के आगोश में चली गई ,

मैं उठाकर सिर्फ एक टॉवेल लपेट कर नेहा दीदी के कमरे के सामने पहुच गया ,दो बार खटखटाने पर उन्होंने दरवाजा खोला,उनकी आंखे लाल थी और बाल भी बिखरे हुए थे,गोरा चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था …

“तूम यंहा क्यो आये हो..???”

मुझे देखते ही वो बोल पड़ी ,उनकी आंखों में आश्चर्य था…

“आपको क्या लगता है की मैं यंहा क्यो आया हु “

मैं कमरे के अंदर बिना बुलाये ही चला गया और कमरे का दरवाजा अंदर से लगा दिया ,वो मुझे ऐसा करते देख कर थोड़ी डर गई थी …

“तुम ये क्या कर रहे हो ??”

वो लगभग चिल्लाई लेकिन मैं उनकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया ..

“किसी के कमरे में बिना इजाजत के नही घुसना चाहिए दीदी ,लेकिन आपने तो ये गलती पहले ही कर दी “

मेरी बात सुनकर वो बहुत ही झुंझला सी गई थी ..

“तुम...तुम अपने आप को समझने क्या लगे हो ,अपनी ही बहन के साथ ...उसके बाद तुम मुझे यंहा धमकाने आये हो या फिर याचना करने की मैं किसी को कुछ ना बताऊ,जानते हो ना की अगर तुम दोनो की करतूत के बारे में घर में किसी को पता चला तो क्या होगा,तुम्हे धक्के मारकर घर से निकाल देंगे..”

उनकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा ..

“ये सब आपके बॉयफ्रेंड ने आपको सिखाया है क्या??लेकिन उस चूतिये ने आपको ये बात तो बताई ही नही होगी की अब मैं अगर चाहू तो किसी को भी इस घर से निकाल सकता हु ,क्योकि ये घर मेरा है ,”

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराई …

“नही राज सिर्फ तुम्हारा तो नही है ,इसमे चन्दू का भी उतना ही हिस्सा है जितना की तुम्हारा “

“ओह तो कहा है चन्दू ,कितना बेशर्म है साला,उसकी माँ की नंगी तस्वीरे उसे भेज दी लेकिन चूहे की तरह बिल में छिपा बैठा है “

मैं बेशर्मी से हंसा

“वो आएगा राज ,वो आएगा और जब वो आएगा तो तुम्हे बिल में छिपना पड़ेगा ,तुम क्या सोचते हो की वो कायर है?? नही ...वो कायर नही है ,वो तुमसे बदला लेने जरूर आएगा “

उनकी बातो से ही लग गया था की वो चन्दू से कितना इम्प्रेस है ,तभी मेरी नजर उनके बिस्तर में गई जंहा उनका मोबाइल पड़ा था ,स्क्रीन की लाइट जल रही थी ,मैंने थोड़ा ही कंसन्ट्रेशन से उसे देखा और जैसे मेरी आंखे किसी फोकस वाली लेंस की तरह ज़ूम करते हुए वंहा तक पहुच गई,अभी वो किसी से बात कर रही थी और मोबाइल ऐसे ही था ,स्क्रीन में एक नंबर था जिसे मैं क्लियर तो नही देख पाया लेकिन इतना जरूर समझ आ गया था की हमारी बात कोई और भी सुन रहा था ,और वो कोई एक ही हो सकता था चन्दू...मैं बिस्तर की ओर बढा और उस मोबाइल को उठा लिया ..स्क्रीन में नाम था ‘मई लव ‘ जिसे देखकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई

“क्यो बे चूतिये कहा छिपा बैठा है तू..”

मोबाइल को अपने कानो से लगते हुए मैंने कहा वही मुझे देखकर नेहा दीदी की संट हो गई थी …..

“बहुत उड़ रहा है ना तू ,देखना साले तेरे सारे पर काट दूंगा,तुझे पता नही है की मेरे साथ कौन है ..??”

सामने से चन्दू की आवाज आयी ,वो बौखलाया हुआ था ,

“तेरे साथ कौन है इससे तेरी माँ की चुद में जाते हुए मेरे लौड़े को तू भूल जाएगा क्या “

मैं बुरी तरह से हंसा वही चन्दू चिल्लाया ..

“मादरचोद मैं तुझे जिंदा नही छोडूंगा एक बार मेरा काम हो जाए तुझे गली के कुत्तो सी मौत दूंगा …”

“पहले बिल से बाहर आ कायर ,फिर मुझे मारने की बात करना,तब तक मैं तेरी माँ को रोज चोदूंगा,फिक्र मत कर तुझे रोज उसके फोटो और वीडियो मिल जाएंगे तू उसे देखकर हिला लिया करना ”

मैं जोरो से हंसा ,

“मादरचोद …”

चन्दू जैसे रोने को हो गया था ,तभी उधर से एक आवाज आयी वो आवाज एक लड़की की थी ..

“तूम पागल हो गए हो क्या, कहा था ना की अपना मोबाइल बंद रखना “

और फिर उधर से काल कट गया लेकिन …….

लेकिन उस आवाज को सुनकर मेरे पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गई थी ,उस आवाज को मैं पहचानता था अच्छे से पहचानता था ,वही तो थी जिसने मुझे इस काबिल बनने में मदद की थी की मैं दम से कुछ बोल पाता ………

वो काजल मेडम की आवाज थी ,मेरे हाथो से फोन ही गिर गया ,मुझे लगा जैसे मैंने कोई बुरा सपना देख लिया हो ,मुझे लगा जैसे मुझसे कोई धोखा हुआ है लेकिन ...लेकिन नही मुझसे ऐसा धोखा नही हो सकता,मैं नींद में भी उस आवाज को पहचानता था ,मैं बेहोशी में भी उस आवाज को पहचान सकता था …

मेरे चहरे की हवाइयां उड़ गई जिसे नेहा साफ साफ देख पा रही थी …..

मेरी उससे नजर मिली..

“चन्दू के साथ कौन लोग है …??”

मेरा पहला सवाल यही था ,लेकिन मेरे सवाल से उसके होठो में मुस्कान आ गई…..

“क्यो फट रही है क्या तुम्हारी …”नेहा दीदी के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई …

“दीदी ये माजक का वक्त नही है जो भी पता हो प्लीज् मुझे बताओ “

वो मुझे घूरने लगी..

“दीदी ????वाह जब खुद की फटने लगी तो दीदी पर आ गए ,”

उसके चहरे की मुस्कान और भी फैल गई …असल में उसे भी नही पता था की हमारी क्या बात हुई है वो बस मेरे तरफ की बातचीत को सुन पा रही थी उसे लगा होगा की चन्दू ने मुझे कुछ ऐसा बोल दिया है जिससे मेरी ये हालत हो गई है लेकिन ऐसा नही था …..

मैंने उनके बांहो को पकड़कर झकझोर दिया

“मेरी बात सुनो हमे कोई बड़े साजिश में फंसा रहा है ,कोई हमारे साथ बड़ा गेम खेल रहा है,चन्दू की जान भी खतरें में है,वो हमे लड़ाना चाहते है पता नही उन्हें हमसे क्या चाहिए “

लेकिन नेहा दीदी के चहरे में अभी भी वही भाव थे …

“तुम मुझे आखिर समझते क्या हो की मैं तुम्हारे बात में आ जाऊंगी ,नही राज तुम गलत हो मैं चन्दू से सच में प्यार करती हु ,और हमे क्या चाहिए तो सुन हमे दादा जी की पूरी संपत्ति चाहिए ..”

उसने गुस्से से कहा ..

“अगर तुम दोनो को संपत्ति चाहिए तो दिया ,जितना हक चन्दू का है वो ले लो ,मुझे पैसे से ऐसे भी कोई प्यार नही है ,ना ही कभी था ,लेकिन मैं अपना हक नही छोड़ सकता,दादा जी की आधी सम्पति पर चन्दू का हक बनता है आधी पर मेरा हक है ,चलो ये लड़ाई खत्म करते है ,अभी फोन लगाओ चन्दू को दादा जी की पूरी जायजाद के दो हिस्से होंगे ,एक चन्दू का दूसरा मेरा …”

मेरी बात सुनकर नेहा दीदी आश्चर्य से मुझे ही देखने लगी …

“उसके आते ही तुम उसे मार दोगो और पूरी जयजाद हथिया लोगे,तुमने वकील साहब को भी मार दिया मैं जानती हु की तुम कितने कमीने हो चुके हो …”

“अच्छा मैं कमीना हो गया हु,मुझे मारने के लिए ही चन्दू ने उन लोगो से हाथ मिलाया है,और मैं कमीना हु,मुझे जयजाद से बाहर करने के लिए मेरे जन्म से पहले से ही साजिश की जा रही है और मैं कमीना ...वाह दीदी वाह,कभी मुझे अपने प्यार से भाई भी नही कहा ,निशा के प्यार का गलत फायदा उठाने वाले आप दोनो हो और मुझे आप कमीना कह रहे हो ..”

मेरा दिमाग भी उनकी बात सुनकर बुरी तरह से खराब हो चुका था ..

“हमने तुझे कभी मारने का प्लान नही बनाया था,हम तो बस ये चाहते थे की चन्दू और सना को उनका हक मिले ,हमारे बाप की गलती की सजा आखिर उन्हें क्यो मिलेगी...मैं बस चन्दू को उसका हक दिलवाना चाहती थी,लेकिन पापा और माँ ये होने नही देते इसलिए तुझे फंसा कर हम घर से बाहर निकलवाना चाहते थे ,लेकिन फिर भी तेरे पास नाना जी की प्रापर्टी होती साथ ही निशा भी तो तेरी ही थी ,और उसे भी तो प्रापर्टी मिलती ,मैं भले ही चन्दू से प्यार करती हु लेकिन मैं तेरी बहन हु,तुझे समझना फिजूल था इसलिए मैंने चन्दू का साथ दिया था ,ऐसे भी दादा जी की प्रापर्टी जब हमारे पास होती तो मैं अपने हिस्से की जयजाद भी तुझे देने वाली थी ताकि तू और निशा एक अच्छी जिंदगी जी सको ,मैं तेरी बहन हु ,तुझे तकलीफ दे सकती हु क्योकि तू था ही वैसा लेकिन तुझे लगता है की मैं तुझे कभी मार सकती हु ,मैं तो बदला अपने बाप से लेना चाहती हु जिस कमीने के कारण ये सब हो रहा है ,जिसने मेरी माँ की ये हालत कर दी है …”

नेहा दीदी रोने लगी थी ,मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू ,आखिर वो कौन है जो सही है और कौन गलत है …

तभी दरवाजे पर एक दस्तक हुई ,नेहा ने अपने आंसू पोछे और दरवाजा खोला सामने माँ खड़ी थी जो मुझे देखकर चौक गई थी …

“तू इतनी रात क्यो यंहा ,और ये क्या नंगा ही घूम रहा है”

उन्होंने अजीब निगाहों से मुझे देखा मैं नंगा नही था लेकिन बस एक तोलिये में ही था …

“वो माँ मैं दीदी से थोड़ी बात करने आया था ,और मैंने तौलिया तो पहन रखा है ना “

मेरी बात सुनकर माँ हंस पड़ी …

“हा वो तो है,अब तूने ऐसी बॉडी जो बनाई है तो दिखायेगा ही क्यो??”

मैं हल्के से हंसा ,लेकिन उस हंसी में कोई खुशी नही थी ,बस एक अजीब सी उलझन थी …..

“ऐसे आप यंहा क्या कर रही हो ??”

मैंने भी प्रश्न दाग दिया ..
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03-19-2020, 12:03 PM,
#32
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
“मैं भी नेहा से बात करने आयी हु और क्या ,अब अंदर आने दोगे या यू ही बाहर ही खड़े रहू ..”

माँ की बात सुनकर नेहा दी जल्दी से सामने से हट गई ,अंदर आते आते दोनो की आंखे मिली ….

“राज क्या नेहा सच कह रही है की तूने विवेक(वकील ) को मरवाया है ..”

माँ आते ही बिस्तर में बैठते हुए बोली ..

“माँ ये आप क्या कह रही हो आप सोच भी कैसे सकती हो की मैंने उन्हें मरवाया होगा,”

मैं उनकी बात को सुनकर और भी आश्चर्य में पड़ गया था ..

उन्होंने एक गहरी सांस छोड़ी ……

“बेटा आजकल जो हो रहा है वो बिल्कुल भी समझ से बाहर है ,तेरा अचानक से अपने बाप के ऊपर कंट्रोल करना,पूरी सम्प्पति में अधिकार की मांग ,और फिर चन्दू और तेरी जानी दुश्मनी ….पहले तो मुझे लगता था की मेरा पति ही कमीना और चालाक है लेकिन अब तो मेरे बच्चे ही एक दूसरे के खिलाफ षड्यन्त्र कर रहे है,मैंने चन्दू को भी अपना बेटा ही माना है और फिर जब मुझे पता चला की नेहा उससे प्यार करती है तो ….तो मैंने भी उसे स्वीकार कर लिया ..”

ये मेरे लिए किसी बम से कम नही था ..

“क्या.???”

“हा बेटा नेहा ने मुझे बहुत पहले ही बता दिया था ,अब तेरे पापा से तो मेरी बात ना के बराबर ही होती है ,मेरी बेटियां ही मेरा सहारा रही है ,तुझे किसी से कोई मतलब ही नही था ,तो मुझे लगा की शायद चन्दू की वजह से हमारा परिवार सम्हल जाएगा और मेरे बच्चों को मेरा हक मिल जाएगा,वरना तेरे पिता जी तो पूरी ही दौलत किसी भी तरीके से अपने नाम करने के फिराक में थे,तुझे तो वो कुछ भी नही समझते थे और ना ही मुझे कभी उन्होंने कुछ समझा ,निशा तो बच्ची है जो प्यार से बोल दे उसके साथ हो जाती है और उसपर तो तेरे बाप का प्यार हमेशा से बरसता रहता है,और निकिता तो अपनी पढ़ाई से फुरसत नही है ...तेरी हालत के पीछे मेरी ही गलती है बेटा,जब तू मेरे गर्भ मे था तो तेरे पिता जी मुझे कई चीजो के लिए धमकाया करते थे ,शायद इसी का असर था की तू भी मेरी ही तरह दब्बू बन गया मुझे माफ कर दे बेटा, लेकिन मैं बहुत खुश हु जो तूने पाया है ,वो आत्मविस्वास लेकिन ...लेकिन तेरा आत्मविस्वास कई लोगो के राह में रोड़ा बन गया,चन्दू को लगने लगा की तू उससे वैसे ही पेश आएगा जैसे तुम्हारे पिता आते थे ,वो हमेशा से उनसे नफरत करता है ,कोई भी बेटा करेगा जब वो अपनी माँ को गुलाम की तरह देखेगा ...तेरे जंगल से वापस आने के बाद से चीजे बदल गई ,लेकिन यकीन मान की नेहा और चन्दू कभी तुझे मारने की नही सोच सकते ……तुम लोग ना लड़ो बेटा ,जो भी जीते लेकिन मैं हार जाऊंगी “

वो रोने लगी थी ,मैं माँ के बाजू में बैठ कर उन्हें अपने बांहो में भर लिया ,इस जंग में उनका बेटा उनकी बेटी के सामने खड़ा था ,सच में कोई भी जीते वो हार ही जाती ……

मैं शांत था ...नेहा भी चुप थी …

“मैं चन्दू को फोन लगाती हु ,हम सुलह कर लेते है ,वो मेरी बात नही टालेगा,लेकिन तुमने जो कान्ता काकी के साथ किया उसके लिए तुम्हे उससे माफी मांगनी होगी ..”

आखिरकार नेहा ने कहा

“कान्ता के साथ तुमने क्या किया “माँ आश्चर्य में बोली ,नेहा और मेरी आंखें मिल गई ,अब इन्हें कैसे बताए की मैंने उनके साथ क्या किया था ,नेहा को शायद चन्दू ने ही बताया था लेकिन अब माँ को नही …

“वो थोड़ी बत्तमीजी कर दी थी उनके साथ “

मैंने नेहा को देखते हुए कहा ..

“अच्छा तो उसे कल माफी मांग लेना और बेटा चन्दू को फोन लगा “

माँ ने मासूमियत से कहा ,लेकिन मेरे दिमाग में कुछ बात आ गई ..

“नही ...नही नेहा अभी नही “

“आखिर क्यो बेटा …..”

माँ और नेहा मुझे आश्चर्य से देखने लगे …

“अभी अगर उसे फोन किया तो कुछ गड़बड़ जरूर हो सकती है ,पहले हालात को समझने दो की आखिर उसके साथ कौन लोग है ,क्योकि उन्होंने ही वकील को मारा है और शायद मेरे और चन्दू के जान के दुश्मन भी वही है ……”

“लेकिन अगर उन्हें मारना होता तो कब का मार चुके होते…”

नेहा बोल पड़ी

“हा वही तो समझ नही आ रहा है की आखिर माजरा क्या है …..”

“तो क्या करू ..”

“कुछ नही जैसा चल रहा है बस वैसे ही चलने दो ,उसे कुछ मत बताना की हमारे बीच क्या बात हुई है ,अगर उसका फोन आये तो उसे बस इतना ही कहना की हमारी लड़ाई हुई और वो धमकी दे कर चला गया ……”

नेहा ने सहमति में सर हिलाया ..

“बेटा तू करने क्या वाला है ..”

माँ इन सब में चिंतित थी ,वो बेचारी भोली भाली सी औरत इन सब लफड़ों में फंस गई थी …..

“कुछ नही माँ सोच रहा हु की कल जल्दी दौड़ाने जाया जाय……”

मैं इतना बोलकर वंहा से निकल गया …….
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03-19-2020, 12:03 PM,
#33
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 17

रात भर मैंने अपना दिमाग घुमाया की आखिर अब मैं करू तो क्या करू…

दिमाग जैसे फट ही गया हो ,फिर मुझे याद आया की मेरे पास तो हर ताले की चाबी है ,मेरा ताबीज क्यो ना फिर से इसे चाटा जाय,मैंने फिर से इसे चाट लिया …

काजल मेडम ने कहा था की इससे मेरी इमेजिनेशन की पॉवर बढ़ जाएगी ,मैं आंखे बंद किये सब कुछ सोचने लगा,कैसे मैं मेडम से मिला था क्या क्या हुआ था ...हर चीज बिल्कुल ऐसे जैसे मैं उसे अभी देख रहा हु मेरे आंखों के सामने चल रही थी ..

फिर वो आखिरी बात जो मेडम ने चन्दू से कहि थी .

मैंने तुरंत आंखे खोली और अपना लेपटॉप चालू करके इस मेडिसिन के बारे में सर्च करने लगा,मुझे कुछ भी नही मिला,आखिर मुझे याद आया की मेरा एक सीनियर था जो फार्मेसी से ग्रेजुएशन कर रहा था ,अभी सुबह के 4 बज चुके थे ,लेकिन जिज्ञासा इतनी थी की मैंने उसे काल कर दिया …

वो साला अपने होस्टल में बैठा हुआ गांजा फूक रहा था ,वो भी अपने समय का टॉपर था और मैं हमेशा से ही क्लास का टॉपर रहा था तो हमारी थोड़ी बातचीत थी…

मैंने उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया उसने मुझे तुरंत ही पहचान लिया …

“ओह तू निशा का भाई है ना,..”

मादरचोद...लेकिन मैंने उसे कुछ नही कहा ,मैंने बस उसे उस ड्रग का नाम बताया जो की मेडम ने मुझे बताया था …

“अबे क्यो नशा फाड़ रहा है मैंने आजतक ऐसा कुछ नही सुना “

उसने एक ही बार में कहा

“लेकिन कुछ तो होगा जो इससे मिलता जुलता हॉगआ “

“तुझे क्या हो गया जो ये सब पूछ रहा है “

अब मैं उससे क्या कहु??

“वो मैंने एक ड्रग के बारे में सुना था जिससे आदमी बहुत ही ताकतवर और दिमागवाला हो जाता है…..”

“ओह तू NZT की बात कर रहा है ,अबे साले वो फिल्मो में दिखाते है की ऐसा होता है वैसा होता है होता कुछ घण्टा नही है ,बस चूतिया बनाते है साले,वो एन्टी डिप्रेशन की दवाई है आदमी को लगता है की वो कुछ बड़ा हो गया है लेकिन वो झांट का झांट ही रहता है…”

मैं NZT के बारे में जानता था लेकिन ये वो नही था ,

“अरे भाई कुछ तो बताओ कहि से तो पता करो “

वो थोड़े देर सोचा ..

“रुक पता करता हु अगर दुनिया में इसपर कोई भी रिसर्च हुई हो या इससे मिलता जुलता रिसर्च हुआ हो तो पता चल जाएगा ..”

वो कुछ देर बाद तक लाइन में ही बना रहा ,अपने रूम मेट्स से बकचोदी करता हुआ और अपने लेपटॉप में कुछ ढूंढता हुआ…

“अबे तूने इसके बारे में कहा से सुना “

“वो किसी ने बताया ..”

“तो सुन तुझे किसी ने अच्छे से चूतिया बना दिया है ,ना ऐसी कोई दवाई है ना ही जो नाम तू बता रहा है वैसा कुछ काम्बिनेशन भी है..

न्यूरोगिला ट्राय बेसाईल फास्फेट हा हा हा..”

वो जोरो से हँसा ..

“लौण्डे तुझे किसी ने बहुत जोरो से चूतिया बना दिया है ,न्यूरोगिला,बेसाईल बायोलॉजी से उठा लिया ,और ट्राय फास्फेट केमेस्ट्री से और एक बायो केमेस्ट्री जैसे लगने वाला नाम तुझे चिपका दिया ….”

वो जोरो से हंस रहा था पता नही साला गंजे के नशे में था की मेरा चुतियापा ही इतना बड़ा था ……

मैं इतना तो समझ गया था की मेरा चूतिया काटा जा रहा है लेकिन साला इसे चाटने के बाद कुछ तो होता है इससे तो मैं भी इनकार नही कर सकता था ……

बातो ही बातो में 5 बज चुके थे ,मैं रात भर से सोया नही था लेकिन फिर भी मैं फ्रेश होकर स्टेडियम की ओर निकल पड़ा …

मुझे यकीन था की मेडम को जब पता चला होगा की मैं चन्दू से बात कर रहा था तो उन्हें ये भी पता चल गया होगा की मैंने उनकी आवाज सुन ली है ,इसलिए छिपाने से कोई मतलब नही था…

नेहा के फोन में वॉइस रिकॉर्डर मौजूद था तो मैंने उसे उस काल की रिकार्डिंग मांग ली ,पूरी बात छोड़ कर उसने भी मुझे लास्ट की ही रिकॉर्डिंग दी क्योकि उसे भी अभी तक मुझपर पूरा भरोसा नही हुआ था …

सामने दो ही संभावना थी या तो मेडम आज मेरे सामने ही नही आएगी और अगर आई और नार्मल विहेब करने लगी तो जरूर उनके दिमाग में कोई बहाना होगा,मेडम भी कुछ वैसा ही सोच रही होगी…

वो भी सोच रही होगी की उनकी आवाज सुनने के बाद या तो मैं आऊंगा ही नही या तो आकर उनपर टूट पडूंगा,कुछ अजीब करूँगा लेकिन मुझे वो नही करना था जो वो सोच रही थी ,मुझे वो करना था जो मुझे करना था……

मैं वंहा पहुचा तो मेडम को हमेशा की तरह ही मझे देखकर मुस्कुराता हुआ पाया जैसे कुछ हुआ ही नही है ,मेरी एक संभावना में ये भी था ,तो मैंने अपनी एक्टिंग चालू कर दी और इशारे से उन्हें दूसरी ओर बुला लिया ……

“क्या हुआ राज तुम परेशान दिख रहे हो …??”

वही प्यारी आवाज वही प्यारी मुस्कान ,वही मासूम सा चहेरा ..

वाह साली या तो तू बहुत बड़ी एक्टर है या मैं ही कोई महा चोदू हु…

दोनो संभावना हो सकती थी ….

मैंने अपनी सूरत रोनी बना ली ,अब तो साला मैं भी एक्टिंग करूँगा …

“अरे क्या हुआ ??”

“मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी मेडम की आप मुझे धोखा दोगे”

उनके चहरे में आश्चर्य के भाव आ गए …

“क्या हुआ बताओ तो तुम ऐसा क्यो बोल रहे हो “

मैंने अपनी मोबाइल निकाल कर वो रिकार्डिंग उन्हें सुना दिया ..

“तुमने चन्दू से बात की कैसे ..”

उनके चहरे में आश्चर्य के ऐसी भाव आये की मुझे लगा जैसे वो सच में कुछ नही जानती ,वाह मेडम वाह …

“उससे आप को क्या बात वो नही की मैंने चन्दू से बात की, बात ये है की जिस औरत ने चन्दू को फोन रखने को कहा उसकी आवाज सुनो ...वो आप ही थी ..”

मेडम ने एक बार फिर से रिकार्डिंग प्ले की जैसे पहली बार में उसे मिस कर दिया हो …

“ओह तो ये भी यंहा है ..”

उन्होने कुछ सोचते हुए कहा …

“कौन ???”

मैं फिर से एक नई कहानी सुनने को तैयार हो गया था ..

“मेरी मारलो ..”

“क्या अभी ???”

मैं उनकी बात से जोरो से चौका ,वो जोरो से हंस पड़ी ..
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03-19-2020, 12:04 PM,
#34
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
“अरे पागल उसका नाम है मिस मेरी मारलो,पहले तो डॉ चूतिया की सेकेट्री हुआ करती थी लेकिन फिर कुछ झगड़ा होने के बाद वो डागा के साथ मिल गई ..”

मेरा दिमाग ने मुझे जोरो की गालियां दी ,अब अगर तू ऐसी चूतिया बातो में यकीन करने लगेगा तो तुझसे बड़ा चूतिया सच में दुनिया में कोई नही होगा,मेरे दिमाग ने ही मुझसे कहा …

“ओह...लेकिन उसकी आवाज ???”

“वही तो उसकी आवाज बिल्कुल ही मेरी तरह ही है “

काजल मेडम ने इतने आत्मविस्वास से कहा की मन किया उनके गालो में एक जोरदार झापड़ मार दु,मादरचोद क्या मैं चहरे से ही चोदू दिखता हु जो ये मुझे कोई भी अनाब शनाब कहानी सुना रही थी …

मेरे चहरे का भाव जैसे उन्होने पढ़ लिया था ,तुम्हे यकीन नही आता ना तो देखो …

उन्होंने अपना मोबाइल और एक वीडियो मेरे सामने खोल दिया …

वीडियो दो साल पहले एक वेबसाइट में उपलोड की गई थी ,एक 30-35 साल की भरी हुई यूरोप जैसे नैन नक्शो वाली महिला मेरे सामने थी ,वो अपने बड़े बड़े मंम्मो को सहला रही थी …

“आइये देखिए मेरे जवानी का जलवा ,कभी देखा है ऐसा ..”

वो ये सब कहते हुए अपने मंम्मो को मसल रही थी ,मेरी सच में फ़टी की फ़टी रह गई जब मैंने उसकी आवाज सुनी वो बिल्कुल ही काजल मेडम की तरह की ही आवाज थी ,एक आवाज की एक पिच होती है ,एक भारीपन या तेज या हल्का एक स्पेशल फ्रीक्वेंसी होती है ,इन्ही सभी चीजो को मिलकर लोग एक्टर्स की मिमिक्री किया करते है हमे लगता है की ये आवाज तो उस एक्टर की है लेकिन वो ऐसा कर पाते है इन्ही छोटी छोटी चीजो को समझकर …

क्योकि मुझे भी कभी मिमिक्री का शौक था (सच में है लेकिन आवाज ही नही निकाल पाता ) मैंने ये बारीकियां सीखी थी …

मुझे समझ आया की असल में उन दोनो की आवाज एक नही है बल्कि बोलने का स्टाइल और उसके साथ पिच ,और गहराई एक सी है इसलिए दोनो की आवाजे एक ही लगती है ,जैसे हमे सभी चाइनीज लोग और उनकी आवाज एक ही लगती है ,,,

वैसा ही कुछ ……

ये देखने के बाद मैं थोड़ा सोच में पड़ गया ,क्योकि वंहा उसके एक नही कई वीडियोस थे,मैंने उस वेबसाइट का नाम अपने दिमाग में ही नोट कर लिया ...तभी मेडम बोली ..

“इसकी इन्ही हरकतों के कारण डॉ से इसका झगड़ा होता रहता था ,इसे पता नही अपने जिस्म को दिखाने का क्या शौक था की ये ऐसे वेबसाइट्स में अपने जिस्म की नुमाइश करती रहती थी ,और इसके चाहने वाले भी बहुत है ,देखो ना कितने viwes है इसके ...इसी के कारण डॉ ने इसे वंहा से निकाल दिया ,और गुस्से में आकर इसने डागा के गैंग को जॉइन कर लिया और हमारे लिए एक मुसीबत बन गई …….”

साला अब मैं क्या करू ,पहले सोचा था की काजल मेडम ही गलत होगी लेकिन इनके पास तो फूल प्रूफ सबूत है इसे नकार भी नही सकता था ….

“तुम्हे अब भी मुझपर भरोसा नही है ..??”

उन्होंने मुझे घूरा ..

“आपने ही तो मुझे इतना काबिल बनाया है अब आप पर भरोसा नही करूँगा तो किसपर करूँगा ,ऐसे ये मेरी मारलो है बहुत सेक्सी .मिलेगी तो जरूर मरूँगा इसकी ..”

काजल मेडम ने मुझे झूठे गुस्से से देखा और मेरे गालो में एक चपत लगा दी ..

“कल रात मन नही भरा तेरा “

“अरे मेडम ये दवाई है की क्या है साला मैं तो पागल ही हो गया था…”अब ये सच में क्या है मुझे भी नही पता लेकिन कम से कम इसे दवाई बोलकर मेडम के शक के दायरे से तो बाहर रहूंगा ..

वो फिर से हंसी ,मैंने कहा था ना की ये तुम्हारे अंदर बहुत ही ज्यादा शक्ति ला देगा जिसे सम्हालना तुम्हारे लिए मुश्किल हो जाएगा ,खैर तुमने नीबू चाटा..”

उन्होने शरारत से कहा …

“जरूरत ही नही पड़ी ,असल में मेरा निकला लेकिन ...लेकिन मूलबन्ध लग जाने के कारण फिर से अंदर चला गया …”

वो थोड़ी देर तक मुझे नॉटी निगाहों से देखती रही साली ये मुझे कब देगी...पहली बार उनके लिए कुछ ऐसा ख्याल मेरे दिमाग में आया उनकी आंखों में ही वो बात थी की ऐसा लगा जैसे भी पकड़कर किस कर दु …..

“वो तुमने इसकी इतनी प्रेक्टिस जो की है ,इसलिए लग गया कोई बात नही ये इंटरलन ओर्गास्म है ,तुम्हारी शक्ति भी बच गई और साथ ही वो फील भी मिल गया ,अब प्रेक्टिस करे “

मैं फिर से उनके साथ हो लिया ….

अब काजल मेडम गलत थी की सही थी ,वो चन्दू के साथ काजल थी की मेरी मारलो ये पता लगाना अभी मेरे दिमाग से बाहर था,मुझे बस इतना पता था की मेडम के साथ मुझे वैसे ही रहना है जैसे मैं पहले रहता था लेकिन अब अपनी आंखे खोलकर ,किसी भी चीज पर इतनी जल्दी भरोसा नही कर सकता था …..

और ये बात उन्हें भी पता होगी की मैं उनके ऊपर नजर रखे हुए हु तो वो भी चीजो को थोड़े हिसाब से ही करेगी ,अगर वो गलत हुई तो वो सावधानी रखने के चक्कर में जरूर ऐसा कुछ करेगी जिससे वो पकड़ में आ जाएगी ,तो भइया जैसे लोहा लोहे को काटता है वैसे ही सावधानी सावधानी को कटेगा,........

खैर अब मेरा हाल ये था की मुझे पता नही था की …

1.काजल मेडम मेरे साथ है की नही …

2. नेहा सच में मेरा साथ देगी या फिर मेरे और उसके बीच हुए समझौते को चन्दू को बता देगी ..

3.वकील साहब को किसने मारा

4.ये डॉ चुटिया बाबा जी ही है या सिर्फ मुझे चूतिया बनाने के लिए बोला गया एक नाम

5.बाबा जी की ये लड़की कोई जादुई लकड़ी है या फिर एक केमिकल फार्मूला ,

6. ये आखिर काम कैसे करता है क्योकी हर बार इसका इफेक्ट ही दूसरा होता है

7.निशा सच में मुझसे प्यार करती है की वो भी इस गेम में कोई पात्र है जो मुझे फंसा रही है (ऐसे मुझे तो लगता है की वो मासूम है)

8,पिता जी का इन सबमे क्या रोल है

9.ये चन्दू मादरचोद आखिर छिपा कहा है

10. अगर काजल मेडम ने ही चन्दू को छिपाया है तो फिर असल में उन्हें चाहिए क्या,अगर उन्हें हमे मारना ही है तो मार ही क्यो नही देते …

11. अगर मेडम सच में चन्दू के साथ है तो फिर मुझे क्यो ट्रेन किया जा रहा है (इतनी मेहरबानी आखिर किस लिए जज साहब …)

12. क्या मुझे फिर से कान्ता और शबीना की लेनी चाहिए(क्योकि सच में खड़ा हो बहुत होने लगा था और मजा भी साला बहुत आ रहा था ….) और क्या उनकी ले कर फोटो चन्दू को भेजना चाहिए क्योकि नेहा और मेरा एक समझौता भी तो हुआ था ...

13. और आखिर में क्या ये सब सोचकर मैं खुद ही पागल हो जाऊंगा ,कही यही तो सालो का प्लान नही है की मुझे पागल करके मेरी जायजाद हड़प ले ... ..

सब सवाल दिमाग में घूमने लगे …..

और

“मैं माँ चुदाये सब “

मैं झल्ला गया था …

“छि इतनी गंदी गालिया देना कहा से सिख लिए “

इस बार मेरे पीछे रश्मि खड़ी थी ,वो भी मेरे साथ क्लास आया करती थी ,उसे देखकर मुझे मेडम की बात याद आयी की उसे प्रपोज कर दु ,और एक चीज और मेरे दिमाग में आई ….

इसकी तो मैंने ली ही नही …..ये मादरचोद मेरा लौड़ा,इतनी टेंशन में फिर के फुंकार मारने लगा ……
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03-19-2020, 12:04 PM,
#35
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 18

रश्मि ……….

पूरा नाम रश्मि सिंह राजपूत,भैरव सिंह राजपूत की इकलौती बेटी ,भैरव सिंह शहर का ट्रांसपोर्ट किंग कहलाता था इसके अलावा भी उसके कई करोगबार थे जिसमे रियल स्टेट का काम मुख्य था ,जिसे उसका भाई भीष्म सिंह देखता था,पैसे और नाम में उनका परिवार हमारे परिवार के ठक्कर का था ,वही हमारी माँ एक दूसरे की सहेली भी थी लेकिन भैरव सिंह सिर्फ पैसे से अमीर नही था बल्कि वो एक बाहुबली भी था ,सामान्य रूप से देखने पर इसका पता नही चलता लेकिन उसका बहुत नाम था ,रियल स्टेट और ट्रांसपोर्ट का काम ही ऐसा था की उन्हें गुंडे पाल कर रखने पड़ते थे,और मैंने सुना था की उसके नाम से ही लोगो की फटती है,शायद कोई कारण उसके पास्ट में छिपा था ,खैर…

उसकी इकलौती बेटी यानी रश्मि मेरी बेस्ट फ्रेंड भी थी और गर्ल फ्रेंड भी ,जो आज मेरे सामने खड़ी थी और मैं उसे अजीब निगगहो से देख रहा था ……..

“ऐसे क्या देख रहे हो ,आजकल तो मुझसे ढंग से बात भी नही करते क्या हो गया है तुम्हे ,मुझसे ज्यादा तो तुम उस काजल मेडम से चिपके रहते हो “

उसका गुस्सा जायज था लेकिन उस बेचारी को क्या बताऊ की मेरे जीवन में क्या चल रहा है ,ऐसे वो ही एक थी जिसपर मैं आंखे बंद करके विस्वास कर सकता था ,उसने जीवन में कभी मुझे अकेला होने नही दिया ,जब मैं चूतिया था तब भी मुझे जी जान से प्यार किया और अब जब मैं फिर से चूतिया बनाया जा रहा हु मुझे उसके प्यार और सहारे की जरूरत महसूस हुई…..

वो मुझे बचपन से जानती थी और मेरे रग रग से वाकिफ भी थी मेरे चहरे को देखकर ही उसे समझ आ गया था की मैं किसी बहुत ही बड़ी मुश्किल से गुजर रहा हु,वो शांत होकर मेरे बाजू में आ बैठी …

“क्या हुआ राज,तू इतने परेशान क्यो हो “

उसने अपना हाथ मेरे हाथो में रख दिया …

“तुम्हे क्या बताऊ रश्मि सोचा था की ताकत मिल जाएगा,आत्मविस्वास आ जाएगा,तो सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन लगता है की आपके पास जितनी ताकत होती है भगवान भी उसी हिसाब से मुशीबत भी भेजता है,कल को मुझे कोई मतलब नही था की मुझे कोई क्या कहता है ,मुझे तुम प्यार के दो लब्ज जो बोल देती थी दिल खुस हो जाता था ,जंगल से आने के बाद मैं दुनिया दारी में इन्वाल्व होने लगा और देखो इसी दुनियादारी ने मुझे कहा लाकर पटक दिया,पहले मेरे परिवार वाले मुझे कुछ नही समझते थे मुझे ऐसा लगता है ,मैं सोचता था की काश परिवार के लोग बाहर के लोग मुझे इज्जत दे ,जब वो मिलने लगा तो जिम्मेदारी भी आ गई …….”

उसने मेरे बालो को बड़े ही प्यार से सहलाया …

“बताओ तो की क्या हुआ “

मैंने आसपास देखा हम स्टेडियम के बाहर बैठे थे ..

“यंहा नही चलो कही चलते है जन्हा हमे कोई डिस्टर्ब ना करे ..”

वो थोड़े देर सोचने लगी ..

“चलो फिर घर चलते है “

“नही वंहा निशा होगी वो हमे अकेले नही रहने देगी ,क्या तुम्हारे घर जा सकते है ??”

मेरी बात सुनकर वो बेहद ही खुश हो गई

“हा बिल्कुल ,जीवन में पहली बार तुम मेरे घर जाओगे …”

उसने उछल कर कहा ……

“हा अब ससुराल कभी ना कभी तो जाना ही पड़ेगा ना..”

“क्या कहा ..”

“कुछ नही चलो “

वो मेरी बात सुन चुकी थी वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,अभी तक मैंने उसे प्रपोज नही किया था लेकिन साला इसकी जरूरत भी तो नही थी,हम दोनो को पता था …

रश्मि का घर घर नही, बंगला भी नही ,बल्कि कोई किले जैसे था ,एक बड़ा सा महल था और इतने पहरेदार की मुझे लगा मैं किसी राजा महाराजा के महल में आ गया…..

“यार तुम्हारे पापा कोई राजा है क्या ऐसे ल लग रहा है जैसे किसी राजा के महल में आ गया हु “

उसने मुझे अजीब निगहो से देखा ..

“क्या तुम्हे सच में नही पता …”

उसकी बात से मैं चौक गया ..

“क्या ???क्या नही पता ..”

वो मुस्कुराई ..

“चलो दिखाती हु “

वो सच में महल ही था,कमरों में बड़े बड़े राजाओ के पोस्टर लगे थे वही बड़ी बड़ी तलवारे और ढाल लटकी थी ..

“ये हमारे पूर्वज है “

मैंने नीचे नाम पढा …

“इसकी माँ की इनका नाम तो मैंने हिस्ट्री में पड़ा था,तुम राजा प्रताप सिंह महाराज की पोती हो ??”

वो जोरो से हंसी

“नही परपोती “

वो दूसरे तस्वीर की तरफ इशारा करने लगी

“ये मेरे दादा है महाराज कुँवर सिंह ……”

मैं पूरी तरह से चौक गया था क्योकि मुझे पता था की रश्मि अमीर परिवार से है लेकिन इतने बड़े खानदान से होगी इसका अंदाज भी मुझे नही था,इनके पूर्वजो की तो मैं कहानिया सुना करता था …

वही रश्मि में मुझे कभी राजाओ वाला एटीट्यूड भी नही दिखा,एक सिंपल सी स्कूटी में वो स्कूल जाया करती थी ,मेरे जैसा चोदू उसके बचपन का दोस्त था ,या उसके तेवर कुछ शाही जरूर थे लेकिन उम्मीद नही थी की वो रॉयल खानदान से होगी ……

“मुझे कभी लगा नही की तुम रॉयल परिवार से होगी “

वो बस मुस्कुराई ..

“पूरी जयजाद तो सरकार ने ले ली ,पेंशन मिलता था वो भी खत्म ,जो बचा था वो बटवारे के भेट चढ़ गया,और फिर शाही लोगो की शाही बाते,इतने नॉकर चाकर सब की आदत सी हो गई है इन्हें ,इतने बड़े महल को भी तो मेंटेन करना होता है ,देखा जाए तो सब कुछ सम्हलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है,मेरे परिवार के अधिकतर लोगो के लिए ये सब दिखावा ही है जिसे हम ढो रहे है ,वो अपने हिस्से का सब बेच कर विदेश में जा बसे,मेरे दादा जी का परिवार ही यंहा बच गया ,और मेरे पापा में वही शाही खून है जिसकी मर्यादा बचाने के लिए वो आज भी संघर्षरत रहते है ,ये सब पहरेदार उसी का नतीजा है ,चलो तुम्हे पिता जी से मिलाती हु ,राजा भैरव सिंह …”

वो थोड़ा मुस्कुराई जिसमे थोड़ी उदासी भी शामिल थी ,रॉयल परिवार के होते है उन बेचारो को ही पता है की वो शान जिनसे उनके पूर्वज रहते है वो कभी वापस नही आ पायेगा ,लेकिन जो बच गया है उसे भी सम्हालना बेहद ही मुश्किल काम है,क्योकि आय का कोई स्रोत नही बचा,बहुत कम शाही परिवार ही है जो आज भी उसी ठाठ से रह रहे है और वो अलग अलग बिजनेस के भरोसे ऐसा कर पा रहे है ,उनमे ही एक इनके पिता भी थे,

बड़ी सी गैलरी से चलते हुए हम पीछे की तरफ पहुचे वंहा एक बड़ा बगीचा था,मैं ये सब ऐसे देख रहा था जैसे राजा महाराजाओ की कहानियों में पहुच गया हु ….

बगीचे में कई मुस्टंडे वर्जिश कर रहे थे,बिल्कुल देशी अखाड़ा स्टाइल में ,वही एक बड़े सिहासननुमा कुर्सी में एक रोबदार इंसान अपने मुछो में ताव देता हुआ बैठा था,रश्मि ने उनकी ओर ही इशारा किया ..

“पिता जी ..”उसने हल्के से कहा ..

,मैं समझ गया था की यही उसके पिता जी है ,सच में किसी राजा से कम नही थे,वो अभी लंगोट में बैठे थे ,एक पहलवान उनके शरीर की मालिस कर रहा था सामने अखाड़े में कुश्ती चल रही थी ,और वो मूंछो में ताव देते हुए बैठे थे …

“पिता जी ये मेरा दोस्त है राज “

“नमस्ते अंकल “

उन्होंने हमे घूर कर देखा ,सच में क्या आंखे थी ,अगर जंगल से आने से पहले मैं इनसे मिलता तो शायद इनकी आंखे देखकर ही मूत देता…

“भइया ये ही वो लड़का है …”

पास ही खड़ा एक आदमी बोल उठा शायद यही रश्मि के चाचा थे,एक पहलवान की तरह बदन वाले और बड़ी बड़ी मूंछो वाले ..

“ओह तो तुम हो हमारी राजकुमारी के खास दोस्त,चंदानी के बेटे …”

मैं कुछ कहता इससे पहले ही रश्मि बोल पड़ी ..

“पिता जी आप भी ना ..”

वो हल्के से हंसा …

“अरे भई अब खास दोस्त ही तो कहूंगा इसे ,जिसके कारण हमारी राजकुमारी स्कूटी से स्कूल जाया करती है ताकि इसे पीछे बिठा कर घुमा सके ,क्यो..और जिसके कारण हमारी फूल सी बेटी अब कराटे सीखने जाया करती है ..”

उनकी बात से मेरी संट हो गई क्योकि इस आदमी को तो सब पता था ,मैं बस मुस्कुराया ..

“अरे बेटे हमे सब पता है ,इसकी स्कूटी के पीछे दो मर्सडीज कार चलती है शायद तुमने कभी देखा नही होगा,ऐसे चंदानी है चूतिया साले ने सभी बेटियों के लिए कार खरीद कर दिया लेकिन उसका इकलौता बेटा पैदल स्कूल जाता है ..”

यानी इन्हें सब कुछ पता था ,लेकिन उससे भी ज्यादा बड़ी बात ये थी की रश्मि मुझे सच में बहुत चाहती थी ,और ना जाने कब से ...मुझे वो दिन याद आये जब मैं उदास होता था और वो मुझे लिफ्ट देती थी तो उसके पीछे बैठने भर से मेरी सारी तकलीफे दूर हो जाती थी ,सच में मैं बहुत ही लक्की आदमी था जो मुझे ऐसी दोस्त मिली थी ……

“राजा साहब ये कराटे वराटे कुछ नही होता सब साला विदेशियों के चोचले है ,असली मजा तो कुश्ती में है, इमने कोई दम नही होता “

वंहा खड़ा एक आदमी बोला,सच में वो कोई दानव सा दिख रहा था ….

“अच्छा ऐसा है तो फिर जाओ दिखाओ की तुमने आजतक क्या सीखा ,हम भी देखे की हमारी बेटी के खास दोस्त में कितना दम है “

उसने रश्मि की ओर देखा और मुस्कुरा दिया,अखाड़े में सभी मुझे ही घूर रहे थे,मैं समझ गया था की ये सीधे सीधे मुझे उस दानव के आगे परोस रहे है ……

मैंने रश्मि की ओर देखा …

“नाक मत कटाना “

वो मस्कुराते हुए बोली ,वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी ,वो भी मेरे मजे ले रही थी ,मुझे देखकर सभी के चहरे में मुसकान आ गई थी ऐसे लग रहा था जैसे ये मुझे बलि का बकरा समझ रहे थे और इन्हें उम्मीद थी की आज मैं इनका पूरा इंटरटेनमेंट करूँगा ….
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03-19-2020, 12:04 PM,
#36
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी

“क्यो बरखुरदार क्या हुआ “

उसके पिता ने फिर से कहा ,मैंने तावीज निकाली हल्के से उसे चाटा और अपनी टीशर्ट उतार कर अखाड़े में चला गया,वंहा की मिट्टी को अपने माथे में लगा लिया और जांघो में एक ताल मार दी ,असल में ये सब मैंने फिल्मो में देखा था ……

“भइया ट्रेलर तो अच्छा लग रहा है ,अब फ़िल्म शुरू करे “

रश्मि के चाचा ने कहा ,और राजा साहब की आज्ञा मिल गई ….

लकड़ी को चाटने के बाद से मेरे नशो में खून का प्रवाह बढ़ गया था ,दिमाग एकदम शून्य हो गया था जैसे सब कुछ एकदम ही धीरे हो गया हो,जब जब मैं अपने को एकाग्र करने की कोशिस करता मैं बहुत ही एकाग्र हो जाता था,मेरे सामने एक हट्टा कट्टा मुस्टंडा खड़ा था वो भी लंगोट में ,उसने अपनी पोजिशन ले ली ,अब साला मुझे कौन सा कुश्ती आती थी ,वो मुझपर झपटा लेकिन मैंने उसके शरीर को ध्यान से देखा मुझे वो सब स्पॉट नजर आ गए जिस पर मैं अपने मार्शल आर्ट के टेक्निक से वार कर सकता था ,बाकी सब मेरी प्रेक्टिस से हो गया,पहला किक उसके पैरो के पास उसका घुटना थोड़ा मुड़ा वो थोडा लड़खड़ाया ,दूसरा वार उंगलियों से सीधे पसलियों पर,एक चीख निकली और तीसरा पंच मुक्के से माथे के साइड में खून दिमाग में जाने से थोड़े देर के लिए रुक गया ,छोटी सी इंजुरी और वो वही धड़ाम…….

ये सब सिर्फ कुछ 5 सेकंड में ही हो गया और मैं फिर से नार्मल स्टेज में आ चुका था …..

“इसकी माँ का ..”

सभी लोग भौचक्के से उस गिरे हुए पहलवान को ही देख रहे थे ,ऐसे ये कोई मार्शल आर्ट का कमाल नही था,क्योकि पहलवान को गिराना कोई बच्चे का काम नही था लेकिन ये कमाल था मेरी उस लकड़ी का और उससे उत्पन्न एकाग्रता का और मेरी थोड़ी सी प्रेक्टिस का …….

मैं रश्मि की ओर देखा वो भी मुह फाड़े ये सब देख रही थी …

“वाओ “उसके मुह से बस यही निकला

भैरव सिंह कभी मुझे देखते तो कभी उस पहलवान को …

उन्होंने फिर से एक दूसरे पहलवान की ओर इशारा किया ,शायद वो और भी बड़ा पहलवान हो ..

वो अखाड़े में आ चुका था ,पहले वाले से दूसरी पोजिशन ले ली ..

वो फिर मुझपर झपटा …

और मेरा दिमाग फिर से शून्य …..

वो मुझे ऊपर से पकड़ना चाहता था इसलिए मैं घटने के बल बैठ कर उसकी ओर घिसटा ..अपने शरीर को झुकाया और उसके पैरो के बीच से निकल गया ,लेकिन इस दौरान एक पंच उसके जांघो के एक स्पेशल नश पर मार दी जिससे उसका पैर थोड़ी देर के लिए लकवाग्रस्त हो गया,वो लड़खड़ाता हुआ जमीन पर गिरा ,लेकिन उसके गिरने से पहले ही मैं खड़ा होकर पीछे से उसके मेरुदंड (स्पाइनल कार्ड) में अपनी उंगलियों से एक वार कर दिया जो की एक नर्व पर किया वार था जिससे उसके कमर से नीचे का शरीर थोड़ी देर के लिए पैरालाइज हो गया था ,

वो वही गिर गया …

ये सब भी कुछ 5 सेकंड से कम के वक्त में हो गया …

सभी फिर से मुह फाडे ये देख रहे थे ……

“वाह बेटा तुम तो कमाल के फाइटर हो यार ,हमारे बड़े बड़े पहलवानो को एक ही वॉर में चीत कर दिया “इस बार रश्मि का चाचा भीष्म बोल उठा……

वही भैरव सिंह उठा और मेरे पास आया,उसने मेरे पीठ पर शाबासी दी ,वो इतना भारी था की मेरा पूरा शरीर ही हिल गया …

“शाबास बेटे...हमे खुशी है की तुम हमारी बेटी के दोस्त हो “

उनकी बात सुनकर रश्मि भी खुस हो गई ,और आंखों ही आंखों में इशारा किया जैसे कह रही हो ‘क्या बात है ‘

उसके घर वालो ने मेरी बहुत खातिरदारी की ,जितना मैंने भैरव सिंह के बारे में सुना था वो असल में उतना भी खतरनाक आदमी नही था खासकर अपने परिवार के साथ,वो रश्मि को बेहद प्यार करता था,रश्मि पूरे घर की चहेती थी ,अपने पिता की एक ही औलाद भी थी ,वही भीष्म का एक बेटा था जो की छोटा था,हमने साथ ही नाश्ता किया,उसकी चाची और माँ ने जबरदस्ती मुझे नाश्ता खिलाया,और साथ ही मेरे परिवार को लेकर भी बाते हुई ,रश्मि की माँ और चाची मेरी माँ के अच्छे दोस्त थे ..

ये सब हो रहा था और डाइनिंग टेबल में मेरे सामने बैठी रश्मि मुझे मस्कुराते हुए देख रही थी …

मुझे ऐसा लगा जैसे जमाई पहली बार ससुराल आया हो……


इन सबके बाद रश्मि मुझे अपने कमरे में ले गई …

आखिर वो राजकुमारी थी तो कमरा भी वैसा ही था,बेहद ही आलीशान …….

“तो मेरे घर वाले कैसे लगे “

उसने आते ही कहा ,हम उसके कमरे में रखे एक सोफे पर बैठ गए थे ….

“यार पहली बार पता चला की लोग बार बार ससुराल क्यो जाते है ,जब इतनी खातिरदारी हो तो क्यो ना जाए “

वो मुझे मुस्करा कर देखने लगी ..

“अच्छा ऐसी बात है,गधे कहि के “

उसने एक पिलो मेरी ओर फेका और हल्के हल्के मुस्कुराने लगी …

“ऐसे तुमने अपने घर वालो को मेरे बारे में बताया क्या है ..??”

“कुछ भी नही ,मैं जन्हा भी जाती हु हमारे गार्ड मेरे साथ होते है ,ये बात मुझे भी पता होती है लेकिन मैंने तुम्हे कभी नही बताया था ,तो तुम्हारे बारे में चाचा और पापा को पहले से पता था, मैं सबकी लाडली हु तो वो मुझे कभी दुखी नही करते,मैंने उन्हें साफ कहा था की तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो ,...”

“सिर्फ दोस्त हु …….”

मैंने रश्मि की आंखों में देखा ,वो भी मुझे ही देख रही थी शमा थोड़ा सुहाना हो चुका था ……

“तो और क्या हो ..??”

रश्मि ने हल्के से कहा,मैं उसके पास सरक गया …

“तुम नही जानती ..??”

अब हमारी सांसे भी एक दूजे से टकरा रही थी …

“तुमने कभी कहा ही नही “

उसने फिर से धीरे से कहा ,उसके होठ फड़फड़ा रहे थे वही उसके दिल की धड़कने इतनी तेज थी की उसकी आवाज मेरे कानो तक भी पहुच रही थी ,मैं अपने होठो को हल्के से उसके होठो के करीब लाने लगा लेकिन उसने अपना चहरा मोड़ लिया ,और मुझे धक्का दे दिया …….

“जुबान से कहने की हिम्मत नही है क्या ...मैं सुनने को बेताब हो गई हु और तुम कुछ कहते ही नही हो ..”

उसने गुस्से से मुझे कहा हालांकि उसका गुस्सा बेहद ही कमजोर था ..

मैंने उसके हाथो को अपने हाथो में थाम लिया..

“अब भी कहने की कोई जरूरत है ??”

“हा है..”

“क्या कहु ..???”

उसनें मुझे गुस्से से देखा

“भाड़ में जाओ “
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03-19-2020, 12:04 PM,
#37
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
वो उठ खड़ी हुई और मुझसे दूर जाने लगी ,मैंने तुरंत ही वंहा रखे एक पिलो को उठा लिया और अपने घुटनो के बल प्रपोज करने वाले स्टाइल में बैठ गया …

“रश्मि मेरी जान ...मेरे दिल की धड़कन...जब जब दुनिया ने मुझे ठुकराया तुमने मुझे सहारा दिया,जब जब दिल में उदासी छाई तुमने मुझे खुशी दी ,मैं तुम्हारा धन्यवाद कैसे करू क्योकि उसके लिए मेरे पास कोई शब्द ही नही है,तुमने मुझे जो प्यार दिया है उसके बयान के लिए कोई शब्द पर्याप्त भी नही है …….आई लव यु मेरी जान….लेकिन याद रखना ये सिर्फ 3 ही शब्द है और मेरा प्यारे को बताने के लिए बिल्कुल ही नाकाफी भी …मैं इससे कही ज्यादा तुमसे प्यार करता हु ,इतना की मैं कह भी नही सकता जता भी नही सकता ,दिखा भी नही सकता …….फिर भी मैं कहता हु आई लव यू रश्मि …”

रश्मि मेरे सामने ही खड़ी थी ,उसकी आंखों में आंसू थे ,उसने वो पिलो पकड़ा और मुझे जोरो से मारने लगी ,और सीधे मेरे गले से लग गई ……

“कान तरस गए थे मेरे ये सुनने के लिए लेकिन तुम्हे तो मेरी कोई फिक्र ही नही है आई लव यू ,आई लव यू माय लव ..“

वो मेरे गालो को बेतहासा चूमने लगी और फिर से मुझे जकड़ लिया

,मैं उसके बालो को सहला रहा था ,

“दीदी आप रो क्यो रही हो इसने आपको कुछ कहा क्या ..”

एक भोली सी आवाज सुनकर हम अलग हुए ये भीष्म का बेटा और रश्मि का चहेरा भाई था ..

उसे देखकर हमारे चहरे में मुस्कान आ गई ,और रश्मि ने उसे अपने गोद में उठा लिया …

“नही बाबु ,ये हमारे बड़े अच्छे दोस्त है हल्लो करो ..”

“हैल्लो हम राजकुमार कुँवर सिंह है और आप ..”

उस बच्चे इन मेरी ओर हाथ बढ़ाया …

“बेटा हम आपकी दीदी के दोस्त है राज ..”

“आप राजकुमार नही हो …??”

“नही बेटे हम राजा है राजा राज चंदानी …”

“ये कैसा नाम हुआ ?”बच्चे ने भोली सी आवाज में कहा

मेरी बात को सुनकर रश्मि हँसने लगी ..

“रहने दो तुम्हारे नाम में ये राजा वाजा फिट नही होता ,बाबू चलो जाओ हमे अपने दोस्त के साथ पढाई करनी है “

“ओके दीदी एक पु दो ना “

मैं अचरज से देख रहा था की ये क्या पु है ,लेकिन रश्मि ने उसके गालो में एक जोर की पप्पी दी ,उसने भी रश्मि को एक पप्पी दी तब समझ आया की ये पु क्या है…..

वो वंहा से भागता हुआ बाहर चला गया …

“पापा इसे बहुत प्यार करते है ,इन्हें अपने पिता का नाम दिया है “

मैं रश्मि को ही घूर रहा था …

“क्या हुआ ..”उसने आंखे बड़ी करके कहा

“मुझे भी एक पु दो ना “

वो खिलखिलाई और मेरे कंधे में जोर का मुक्का मार दिया …
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03-19-2020, 12:04 PM,
#38
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 19

मैंने आगे बढ़ कर रश्मि के कमर में अपना कस लिया ..

उसे उसे अपनी ओर खिंचा…..

वो सीधे मेरे सीने से आ लगी थी ,उसने शर्म से अपना सर झुकाकर मेरे सीने में टिका दिया ….

“तुम तो बोल रहे थे की तुम्हे कुछ बात करनी है ..”

“यार इतने रोमांटिक मूड में प्लीज् वो सब याद मत दिलाओ “

मेरे सामने फिर से वही मंजर आ गया ..

“कठनाइयों से भागने से उनका निराकरण नही होता,उसके लिए उससे जूझना पड़ता है ,उसका सामना करना पड़ता है …”

मेरे दिमाग में एक ही बात चल रही थी क्या मैं रश्मि को सभी चीजो को बता दु या नही ……

मैंने उसे बिस्तर में बिठा दिया ……

“आखरी बोल भी दो की क्या परेशानी है ..??”

मैंने उसे बताने का निर्णय किया ,मैंने शुरू किया केदारनाथ की यात्रा से और बाबा के बारे में बताया,फिर मेरा वापस आना काजल मेडम से मिलना,चन्दू का घर से जाना,वकील का मरना,और फिर जयजाद के प्रॉब्लम्स और फिर चन्दू से बात करते हुए मेडम की आवाज का सुनना…..इन सबमे मैंने कान्ता ,शबीना और निशा की चुदाई को छोड़ दिया था ,मैंने नेहा और चन्दू के बारे में सब बता दिया ……

“ओह तो इस लकड़ी का ही कमाल है जो तुम ये सब कर पा रहे हो ..”

“हा लेकिन फिर भी मुझे पता नही की ये जादुई है की कोई केमिकल फार्मूला ,क्योकि इसका असर मेरे समझ के बाहर है ..”

“ह्म्म्म यार अगर इन सबका सॉल्यूशन चाहते हो तो शुरू से शुरू करो ,बाबा जी से क्यो ना तुम बाबा जी से ही पूछ लो …..”

उसकी बात में दम था लेकिन मुझे फिर से वंहा जाना होगा..

“इतने दूर फिर से जाना,और इसका पता सभी को चल जाएगा “

“नही चलेगा ,तुम तैयार होकर मेरे साथ घर से निकलना,ऐसे भी एग्जाम का समय है और कोई स्कूल नही जा रहा , मैं यंहा पापा से बोलकर कुछ इंतजाम करवाती हु,और निशा को बोल देना की तुम मेरे साथ घूमने जा रहे हो शाम तक आओगे “

उसकी बात से मैं आश्चर्य में पड़ गया

“लेकिन बेबी हमे इतनी दूर जाना है हम इतने जल्दी कैसे वापस आएंगे..”

रश्मि के होठो में मुस्कान आ गई ..

“वो तुम मुझपर छोड़ दो…”

“ओके और पु का क्या “

वो मुस्कुराई

“पहले काम फिर इनाम “

वो इठलाते हुए उठकर खड़ी हो गई और मुझे घर भेज दिया ..

मैं वंहा से वापस आकर तैयार हुआ ,ऐसे भी एग्जाम शुरू होने वाले थे तो लोग स्कूल नही जाते थे ,निशा भी नही जा रही थी मैंने उसे जब उसे रश्मि के साथ घूमने जाने की बात बताई तो वो हँसने लगी ..

“आपके घूमने से कोई फायदा नही होने वाला पहले प्रपोज तो कर लो ऐसा ना हो जाए की कोई दूसरा उसे उठाकर ले जाए ..”

मैंने उसे बताया की मैंने उसे प्रपोज कर दिया है ,वो बहुत ही खुश हुई….रश्मि मुझे लेने आई और हम तैयार होकर निकल गए ,मैंने आज टॉमी को भी अपने साथ ले लिया ,वो फिर से मुझे अपने घर ले आई …..

उसके महल के पिछवाड़े वाले बड़े से गार्डन के बीचो बीचो एक हेलीपैड बना हुआ था जिसमे एक हेलीकॉप्टर खड़ा हुआ था,

“वाओ यार …हम इससे जाने वाले है “

रश्मि मुस्कुराने लगी

“जी हा अब चलिए “

रश्मि ने पायलेट को कुछ इंस्ट्रक्शन दिए ,रश्मि के पिता जी ने वंहा के फारेस्ट अधिकारियों से बात की थी जिन्होंने मुझे रेस्क्यू किया था ,उन्होंने बाबा जी वाली पहाड़ी का लोकेशन पता करवाया और फिर मेप में सेट करके पायलेट के साथ प्लान बना लिया था ,

हम कुछ 2 घण्टे में ही वंहा पहुच गए थे ,मैं पहली बार हेलीकॉप्टर का सफर कर रहा था ,मैं और रश्मि दोनो ही बहुत ही खुश थे …यंहा तक की टॉमी भी बहुत खुस लग रहा था,अब उसकी रश्मि के साथ भी अच्छी बन रही थी ….

“यार अंकल जो तो टू गुड है “

वो हँसने लगी

“हा मेरे लिए वो कुछ भी कर देते है ऐसे भी मैं उनसे कुछ मांगती नही ,कभी कभी तो कुछ मांगती हु “

पायलेट में खुली जगह देखकर हेलीकॉप्टर लेंड किया वो पहले से ही उस जगह को मेप में चिन्हित कर रखा था…
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03-19-2020, 12:05 PM,
#39
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
पहाड़ी वंहा से कुछ ही दूर थी ,जब मैं वंहा से उतरा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने घर वापस आ गया हु ,हर चीज मुझे पहचानी सी लग रही थी,वही टॉमी भी खुशी से इधर उधर उछलने कूदने लगा …….

हम पहाड़ी तक पहुच गए ,रश्मि मेरे साथ ही आयी…

इस समय बाबा जी ध्यान में बैठे हुए थे,कुछ देर के इंतजार के बाद वो उठे ,मैं सीधे जाकर उनके कदमो में गिर गया …..

वो भी मुझे देखकर खुश थे ...हम तीनो बैठा कर इधर उधर की बाते करने लगे..कुछ देर बात बाबा जी ने पूछ ही लिया

“अब बताओगे की तुम यंहा क्यो आये हो “

मैं उन्हें सब कुछ बताना चाहता था मेरे सेक्स एनकाउंटर भी लेकिन वो सब मैं रश्मि के सामने नही बता सकता था ,मेरी दुविधा बाबा जी समझ चुके थे …

“बेटी तुम और टॉमी पहली बार यंहा आये तो जाओ नीचे का बगीचा घूम कर आ जाओ वंहा बहुत अच्छे फूल लगे है……

रश्मि ने एक बार मुझे देखा मैने भी आंखों से हामी भरी और रश्मि टॉमी के साथ निकल पड़ी …..

“अब बताओ की आखिर क्या समस्या आ पड़ी है “

मैंने उन्हें शरू से लेकर आखरी तक सब कुछ बता दिया ,अपनी पूरी दुविधा भी मैंने उनके सामने रख दी ,वो मेरी बात बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे कभी कभी वो थोड़ा मुस्कुरा देते,

“बाबा जी क्या आप ही डॉ है ….??.”

सब बताने के बाद मैंने पूछा ...

वो बस मुस्कुराये और कहने लगे.

“बचपन में मेरी माँ मुझे एक कहानी सुनाया करती थी,कहानी कुछ ऐसी थी की एक बार भगवान को एक गरीब भिखारी पर बहुत दया आती है,वो आदमी उन्हें बार बार अपनी गरीबी के लिए कोसता था,तो भगवान ने सोचा की क्यो ना इसकी मदद की जाए,उन्होंने सोने और जेवरातों से भरी एक पोटली उस गरीब के रास्ते में रख दिया ,लेकिन उसने आदमी ने जब वो पोटली देखी तो सोचा की कचरा होगा उसने उसे मानो अनदेखा ही कर दिया और आगे निकल गया,भगवान ने सोचा की चलो कोई बात नही उन्होंने फिर से उस भिखारी के रास्ते में वो पोटली रख दी लेकिन और इस बार उस भिखारी का पैर उस पोटली में लगा भगवान ने सोचा की अब वो भिखारी पोटली को देखेगा और फिर अमीर हो जाएगा लेकिन उस भिखारी ने ऊपर देखा और चिल्लाया..

‘हे भगवान क्या तूने मुझे कम दुख दिए है जो अब तू मुझे रास्ते में भी चलने नही देना चाहता…’वो भिखारी भगवान को कोसता हुआ आगे बढ़ गया….

इस कहानी का मतलब ये है की जिसे मौके की पहचान नही होती और जिसके पास दिमाग ना हो तो भगवान भी उसकी मदद नही कर सकता ,तुम्हारा भी हाल कुछ ऐसा ही है …मैंने तुम्हे मौका दिया ये ताबीज दी लेकिन तुमने क्या किया ,तुमने औरतो के साथ अपनी हवस निकालने के लिए इसका उपयोग किया,तुम मूर्खो जैसे किसी के भी बात में आ गए,तुम दुसरो पर काबू पाने की कोशिस करने लगे …...और हा मैं कोई डॉ नही हु ,ना ही ये कोई केमिकल से बनी हुई कोई चीज है ,ये सिर्फ एक चंदन की लकड़ी का टुकड़ा है जिसे मैंने अपनी साधना से मंत्रो द्वारा सिध्द किया है ,और ये तुम्हे कोई शाररिक पावर नही देता ये बस तुम्हारी मानसिक शक्ति को बड़ा देता है ,इसे चूमना सिर्फ एक कर्मकांड है असल में इसका तुम्हारे पास होना ही काफी है ,तुम ज्यादा एकाग्र होते हो ,तुम्हारे अंदर ज्यादा सवेदना होती है,और तुम ज्यादा रचनात्मक होते हो ,जिससे तुम कोई भी काम आसानी से कर सकते हो जैसे तुमने बताया की तुमने लड़ाइयां जीत ली ,क्योकि तुम एकाग्र थे...और ये तुम्हारे हवस को नही बढ़ती वो सब उस लड़की की दी हुई दवाइयों का ही नतीजा होगा ,पता नही उसने तुम्हे क्या क्या नही खिला दिया ,मैं तो तुम्हे एक अच्छा इंसान बनाना चाहता था लेकिन तुम एक जानवर बन गए ..”

बाबा जी की बात सुनकर मेरी नजर नीची हो गई थी,मैं उनके चरणों में गिर गया …..

“बाबा जी मुझे माफ कर दीजिये लेकिन मैं ऐसी परिस्थितियों में फंस गया था की मैं समझ ही नही पाया की क्या करू..”

उन्होंने बड़े ही प्यार से मेरे सर में हाथ फेरा…

“उस लड़की ने तुम्हे बहुत ही अच्छी कहानी सुनाई लेकिन वो कुछ गलती कर गई …”

मैं चौका …..

“क्या ??”

“उसने जिस डॉ की बात कही उसे मैं जानता हु ,और उसने भी शायद इसीलिए ये बात कहीं ताकि तुम अगर उसके बारे में पता करो तो तुम्हे शक ना हो …..”

“मतलब …”

“मलतब ये की डॉ चूतिया नाम का शख्स मौजूद है ,वो एक डॉ है साथ ही एक मनोचिकित्सक भी है ,और मिस मेरी नाम की उसकी एक सेकेट्री भी है …”

“क्या ???”

मैं बुरी तरह से चौका ..

“हा ये सभी है,और मेरे ख्याल से तुम्हे उससे मिलना चाहिए क्योकि शायद वो तुम्हारी कुछ मदद कर सकता है…”

उन्होने मुझे दूसरे शहर के एक अड्रेस दिया …

“बाबा जी मैं अपनी जिस्म की हवस का क्या करू…? मैं इससे ग्रसित होने लगा हु ,मैंने आजतक कभी ऐसा फील नही किया था लेकिन अब मैं सच में किसी जानवर की तरह होते जा रहा हु ..”

मैं अब इस बारे में सच में चिंतित था …

“फिक्र मत करो अगर उस लड़की ने तुम्हे ऐसी दवाइयां दी है तो किसी खास मकसद से ही दी होंगी...शायद इसी से कुछ रास्ता मिल जाए ..”

“लेकिन बाबा मैंने अपनी सगी बहन के साथ ..”

बाबा कुछ देर चुप रहे ……

“देखो बेटा जिस्म की भूख जब लगती है तो इंसान को अंधा ही बना देती है वो रिश्ते नाते भी भूल जाता है ,और गलत सही की बात करे तो ये कहना मुश्किल है की क्या गलत है और क्या सही ..अगर इंसान ने सही गलत बनाए है तो इसके कुछ महत्व तो होंगे ही ...मैं तुम्हे ये नही कहूंगा की तुम क्या करो क्या ना करो ,तुम्हारे पास मेरा दिया ताबीज है जो तुम्हे मानसिक ताकत देगा,अब ताकत सही या गलत नही होता वो बस ताकत होता है ,सही या गलत का फैसला तुम्हे खुद से करना होगा…….”

बाबा जी की बात में और उनके सानिध्य में वो जादू था की मैं अपने को बहुत ही हल्का महसूस करने लगा…


जब हम बिदा हुए तो उन्होंने मझे और रश्मि को बहुत ही प्यार से आशीर्वाद दिया ,अब मेरे दिमाग के कई सवालों के जवाब मेरे पास थे,और बहुत के मुझे खुद ही ढूंढने थे,अब मेरा पहला काम था उस शख्स से मिलना जिसे लोग डॉ चूतिया कहते है ...
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03-19-2020, 12:05 PM,
#40
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 20

डॉ चुन्नी लाल तिवारी यरवदा वाले,उर्फ डॉ चूतिया..

उनकी छोटी सी क्लिनिक को देखकर किसी को अंदाज भी नही लग सकता था की ये आदमी आखिर है क्या चीज,क्लिनिक भी ऐसा जन्हा कोई पेशेंट नही होते थे,अजीब बात थी की उस शख्स को रश्मि के पिता भैरव सिंह भी जानते थे ,जब उन्होंने उसका नाम सुना तो उनकी आंखे ही चमक गई ……

“आखिर डॉ साहब से तुम क्यो मिलना चाहते हो ..”

“बस एक काम था अंकल “

हमारे पहुचते शाम हो चुका था ,मैं उनके ही बगीचे में बैठा हुआ उनके साथ चाय पी रहा था ,पास में ही रश्मि भी बैठी थी …

“कोई उनसे मिलने की बात कहे तो समझो की वो कोई बड़ी मुशीबत में है ,वरना ऐसे ही कोई उनसे नही मिलता ..आखिर बात क्या है ..??”

उनकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया था की क्या मुझे उन्हें सब कुछ बताना चाहिए या फिर नही ………

“बस अंकल कुछ ऐसी बात है जिसे मैं आपको नही बताना चाहूंगा “

वो चौक कर रश्मि की ओर देखने लगे,रश्मि ने बस अपना सर हिला कर उन्हें निश्चिंत किया ..

“ठीक है कोई बात नही ,तुम नही बताना चाहते तो मत बताओ लेकिन ….लेकिन अगर तुम्हे मेरी जरूरत पड़े तो मैं सदा तुम्हारे साथ हु ,कभी तुम्हारे पिता मेरे अच्छे दोस्त थे ,और अब तुम मेरी बेटी के दोस्त हो ,तो मैं तुम्हारी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहूंगा ..”

उनकी बात सुनकर मुझे उनकी एक बात खटक गई …

“पहले अच्छे दोस्त थे मतलब ??”

उन्होंने एक गहरी सांस ली ……

“मतलब अगर सब कुछ सही होता तो तुम आज मेरे घर में पैदा होते,”

मेरे साथ साथ रश्मि भी चौक गई थी …..

“ये क्या कह रहे हो पापा ..”

“हा बेटी लेकिन यही सच है ,इसके पिता रतन और मैं अच्छे दोस्त हुआ करते थे ,हमने एक साथ पढाई की ,कालेज में भी हम साथ ही थे .उस समय तुम्हारे दादा के भाई ने अपने हिस्से की जयजाद बेच दी हमारे नाम आया ये महल और कई तरह की परेशानियां ,हम कहने को तो राजा थे लेकिन हमारी आर्थिक स्तिथि उस समय ठीक नही थी ,वही इसके दादा जी का उस समय बिजनेस की दुनिया में एक बड़ा नाम था, रतन ने मेरे बिजनेस को सेटल करने में मेरी मदद की उसके बिजनेस के कांटेक्ट थे वही मेरी राजनीति में पकड़ मजबूत थी ,क्योकि हम लोग यंहा के राजा थे कोई भी नेता हमारे समर्थन के बिना यंहा से आज भी नही जीत पाता,लेकिन हमारी दोस्ती मे दरार उस समय पड़ी जब हम दोनो को ही एक ही लड़की से प्यार हो गया …..”

उनके इतना कहने भर से मैं और रश्मि एक दूसरे को देखने लगे ,मुझे उनकी बात कुछ कुछ समझ आ रही थी की वो किसके बारे में बात कर रहे थे…….

मानो भैरव ने मेरी आंखे पढ़ ली ..

“हा बेटे वो तुम्हारी माँ थी ...और इसी बात में हमारी लड़ाई हो गई ,उसने मेरी बहुत मदद की थी इसलिए उसके लिए मेरे दिल में आज भी इज्जत है ,लेकिन आज भी वो मुझसे बात नही करता,उसके पिता के पास करोड़ो की दौलत थी वो बड़ा नाम थे वही मेरे पिता जी की मौत हो गई और मेरे ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई ,तो अनुराधा(राज की माँ) के पिता ने मेरी जगह रतन को अपना दामाद बनाने का फैसला कर लिया,बस इतनी सी बात है...मैं इस बात से टूट ही गया था लेकिन फिर मेरी जिंदगी में रश्मि की माँ आई और उसने मुझे बेहद ही प्यार दिया और मुझे एक प्यारी सी बेटी भी दे दी ..उसके बाद मैं सब कुछ भूलकर अपनी दुनिया में खुस रहने लगा ”

उन्होंने प्यार से रश्मि की ओर देखा ….

रश्मि भी अपने पिता को बड़े ही प्रेम से देख रही थी ..

“ओह पापा “

वो उनके गले से लग गई …

कुछ देर बाद दोनो शांत हुए ..

“तो बेटा ये थी हमारी कहानी ,तो मेरे ख्याल से तुम्हे मैं कल ही डॉ के पास भेज देता हु ,ठीक है ना ……”

मैंने हा में सर हिलाया …..


********

दूसरे दिन से ही काजल मेडम का अतापता नही थी,पूछने पर पता चला की वो कुछ दिनों की छुट्टी पर गई हुई है ,मुझे समझ आ गया की शायद उन्हें मेरे बाबा से मिलने की बात का पता चल गया होगा लेकिन कैसे ..??

हो सकता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए हो ..

जो भी हो ,मुझे आज डॉ चूतिया से मिलने जाना था,मैं 10 बजे के करीब ही रश्मि के घर पहुच गया वंहा पहले से रश्मि मेरा इंतजार कर रही थी ,हमारे साथ हमारी सुरक्षा के लिए एक गाड़ी और भी थी ,अंकल ने बताया की उन्होंने डॉ से बात कर ली है..

करीब 2 घण्टे के बाद हम डॉ के क्लिनिक के बाहर थे …

उनका नाम पढ़कर ही रश्मि हंस पड़ी ,

“कैसा अजीब नाम है इनका तुम्हे लगता है की ये हमारी कोई मदद कर पायेगा “

रश्मि की ये बात मुझे बड़ी अच्छी लगी उसने ये नही कहा की क्या डॉ तुम्हारी कोई मदद कर पायेगा ,उसने कहा की क्या डॉ हमारी मदद कर पायेगा,अब हम दोनो मैं और तुम नही बल्कि हम हो चुके थे…

“देखते है ..”

हम अंदर गए एक सामान्य सा क्लिनिक था ,सामने रिशेप्शन था और फिर डॉ का केबिन,रिसेप्शन में कोई भी नही था ,जब हम अंदर गए तो वंहा एक पतला दुबला ,सावला आदमी बैठा कम्प्यूटर में कुछ देख रहा था वही उसके बाजू में एक गोरी चिट्टी ,हट्टी तगड़ी,भरी पूरी महिला खड़े हुए उसी कम्प्यूटर में कुछ देख रही थी,मैं उस महिला को पहचानता था ,यही थी जो वेबसाइट में मेरे मम्मे देख लो कर के अपने बड़े बड़े वक्षो को मसल रही थी ,उसे देखने से ही मेरे लिंग में एक सुरसुराहट सी हो गई ….

“नमस्ते डॉ साहब ..”

मुझसे पहले रश्मि ने कहा ..

उसकी आवाज सुनकर दोनो ही चौके ..

“ओह आओ आओ ,शायद तुमको भैरव सिंह ने भेजा है राइट ..”

“जी “

“बैठो बैठो ..”

हम दोनो डॉ के टेबल के सामने की कुर्सी पर बैठ गए …

अब डॉ और मेरी हमारी तरफ मुड़े…

“कहो कैसे आना हुआ ..??”

मैंने उन्हें शुरू से सब कुछ बताना स्टार्ट किया,कैसे मैं,जंगल गया,फिर बाबा से मिला,फिर काजल मेरे जीवन में आयी,फिर वकील आया फिर वकील की मौत फिर चन्दू का गायब होना फिर काजल का मुझे ट्रेन करना और डॉ वाली स्टोरी सुनाना और फिर फिर काजल के बारे में चन्दू से बात करते हुए पता चलना,फिर बाबा से मिलना और अब काजल का गायब हो जाना…

सब सुनकर वो थोड़े देर तक सोच में पड़ गए लेकिन मैरी बोल उठी ..

“वो कमीनी काजल यंहा भी आ गई ,हर जगह आ जाती है लगता है की उसी के कारण कहानी बनती है हमारी तो कोई वेल्यू ही नही है ..”(रीडर्स इसे इग्नोर करे )

उसकी बात से मैं चौका ..

“मतलब आप उसे पहले से जानती हो ,उसने मुझे आपकी वीडियो दिखाई थी लेकिन वीडियो में तो आपकी आवाज उसके जैसी है लेकिन असल जिंदगी में तो आपकी आवाज बहुत ही अलग है ..”

मेरी बात सुनकर मैरी थोड़ा शर्मा गई

“तो तुमने वो वीडियो देखी,क्या है ना की काजल की आवाज बहुत ही सेक्सी है तो मैंने आवाज उसी से डब करवाया था ..ऐसे कैसे लग रही हु मैं उस वीडियो में तुमने अच्छे से देखा ना..”

उसने अपने वक्षो को थोड़ा मेरे ओर झुका दिया ,उसने सफेद कलर का एक एप्रॉन पहना था जैसा डॉ पहनते है,जो की इतना टाइट था की उसके दोनो मम्मे बाहर की ओर झांक रहे थे ,भरे हुए शरीर की मलिका मिस मैरी मारलो पूरी तरह से एक MILF थी ..

उसे देखकर मैंने अपना थूक गटका ,वही रश्मि ने मेरे जांघो पर अपना हाथ मार दिया,मुझे फिर से होश आया …

“जी जी अच्छा था ,और अब मुझे समझ आया की काजल ने मुझे वो वीडियो क्यों दिखाया था ..”

“तुम्हें अच्छा लगा तो तुम्हारे लिए लाइव शो भी रख दूंगी “

उसने अपनी निचली जीभ को अपने दांतो से दबाया जो की इतना सेक्सी था की मेरा तो मुह ही खुला रह गया ,लेकिन रश्मि गुस्से से भर गई …

“डॉ साहब क्या हम काम की बात करे ..”

डॉ जैसे किसी सोच से बाहर आया था ..

“हा हा क्यो नही क्यो नही ...देखो ..क्या नाम है तुम्हारा “

“जी मेरा नाम राज है राज चंदानी और ये मेरी दोस्त भैरव सिंह की बेटी रश्मि ..”

“ओके तुम रतन चंदानी के बेटे तो नही “

“जी….आप मेरे पिता जी को जानते है ??”

“हा बिल्कुल इतने बड़े बिजनेसमेन है कैसे नही जानूँगा ..और कभी वो भैरव का खास दोस्त भी हुआ करता था “

“जी अंकल ने हमे कल ही बताया ..”

“ह्म्म्म अच्छा है ...देखो बेटा ,काजल कभी मेरे ही साथ काम किया करती थी ,वो मेरी ही शागिर्द है और उसे मेरे कनेक्शन का भी अच्छे से पता है ,हमारी राहे अब अलग हो चुकी है लेकिन वो कभ मेरे रास्ते में नही आयी थी ,लेकिन मेरा नाम वो कई जगह पर ले चुकी है तुम्हारे साथ भी उसने ऐसा ही किया,ऐसे वो बाबा जी कौन है …”

“मुझे नही पता …”

“ह्म्म्म जैसा तुमने बताया वो डागा ही होगा ..”

उसकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौका ..

“वाट ...लेकिन वो तो क्रिमिनल था ना “

मेरी बात सुनकर डॉ जोरो से हँसा …
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