Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
07-01-2018, 12:24 PM,
#41
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --43

गतान्क से आगे........................

अगली रात एक बार फिर कल्लो और रूपाली बिस्तर में पूरी तरह नंगे लिपटे पड़े थे.

"नही अंगुली मत डालना, बहुत दर्द हुआ था कल रात" रूपाली ने कल्लो का हाथ पकड़ते हुए कहा

"मज़ा नही आया था?" कल्लो शरारत से मुस्कुराते हुए बोली. रूपाली ने शर्मा कर अपनी आँखें घुमा ली.

"अब कैसी शरम मेमसाहिब" कल्लो ने उसकी एक छाती को चूमते हुए कहा "नंगी पड़ी हो मेरे साथ, शरम हया तो बहुत पिछे छूट गयी. बताओ ना, मज़ा नही आया था?"

"हां" रूपाली शरमाते हुए बोली "पर दर्द भी बहुत ज़्यादा हुआ था"

"शुरू शुरू में होता है पर फिर बाद में बिल्कुल नही होता और सिर्फ़ मज़ा आता है" कहते हुए कल्लो ने अपना हाथ छुड़ाया और एक बार फिर रूपाली की जांघों के बीच ले जाकर अपनी बीच की अंगुली धीरे से चूत के अंदर खिसका दी.

"आआईइ" रूपाली के मुँह से निकला "बस एक ही रखना, दूसरी मत डालना"

कल्लो ने खामोशी से अंगुली को चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया

"मज़ा आ रहा है?"

रूपाली ने हां में सर हिला दिया. अचानक से कल्लो ने अंगुली फिर बाहर निकाल ली.

"क्या हुआ?" रूपाली ने पुचछा

"कल रात से मैं ही सब कुच्छ कर रही हूँ और आप आराम से मज़े ले रही हो. अब आप उपेर आओ" कहते हुए कल्लो बिस्तर पर लेट गयी.

"पर मुझे पता नही के क्या करना है"

"मैं बताती हूँ. यहाँ आओ"

कल्लो ने रूपाली को अपनी बाहों में भर कर धीरे से उपेर खींच लिया. वो आधी बिस्तर पर और आधी कल्लो के उपेर आ गयी.

"अब जैसे मैं आपके चूस्ति हूँ, वैसे ही आप मेरे चूसो"

रूपाली ने धीरे से अपना मुँह खोला और कल्लो का एक निपल अपने मुँह में लेकर धीरे धीरे चूसने लगी. उसे खुद को हैरानी थी के वो काम जिसके करने का सोचके ही उसको उल्टी आ जाती थी, अब उसकी काम को वो आराम से कर रही थी, और मज़े भी ले रही थी"

रूपाली बारी बारी उसके दोनो निपल्स चूस रही थी और कल्लो मज़े में आहें भर रही थी. उसने एक हाथ से रूपाली का सर पकड़ कर अपनी छाती पर दबाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से से रूपाली का हाथ पकड़ कर अपनी टाँगों के बीच ले जाना शुरू कर दिया.

कुच्छ पल बाद ही रूपाली को अपने हाथ पर कुच्छ गीला गीला महसूस हुआ.

"ये क्या हुआ?" उसने कल्लो से पुछा

"अपनी पे हाथ लगाकर देखो" कल्लो बोली तो रूपाली ने हाथ उसकी चूत से हटाकर अपनी चूत पर रखा. उसकी चूत भी उतनी ही गीली थी जितनी कल्लो की.

"ये क्या है" उसने फिर पुछा

"बिस्तर पर जब औरत गरम होती है तो ऐसा हो जाता है"

"क्यूँ?"

"जोश में हो जाता है, ताकि मर्द का लंड आराम से अंदर घुस सके"

लंड शब्द सुनते ही रूपाली के गाल लाल हो गये. कल्लो ने एक बार फिर उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया.

"अंगुली डालो अंदर" कल्लो ने कहा. रूपाली तो जैसे इशारे का इंतेज़ार ही कर रही थी. उसने फ़ौरन एक अंगुली उसकी चूत के अंदर कर दी.

"दूसरी" कल्लो ने कहा और एक और अंगुली चूत के अंदर जा घुसी.

"तीन" कल्लो बोली तो रूपाली हैरानी से उसको देखने लगी. जहाँ 2 अंगुलियों में उसकी हालत खराब हो जाती थी वहाँ कल्लो 3 अँगुलिया अंदर घुसाने की बात कर रही थी.

कल्लो ने उसको अपनी तरफ देखते पाया तो हस्ने लगी.

"अर्रे आप कच्ची हो अभी इसलिए तकलीफ़ होती है. मैने तो घाट घाट का पानी पी रखा है. 3 क्या मैं आपका पूरा हाथ अंदर ले लूँ"

"घाट घाट का पानी मतलब?"

"मतलब लंड. पता नही कितने अंदर जाकर ख़तम हो गये" कल्लो ने रूपाली को देख कर आँख मारी

रूपाली कुच्छ कहने ही लगी थी के चुप हो गयी.

"क्या हुआ?" कल्लो बोली

"इसी को गांद मारना कहते हैं?" रूपाली ने झिझकते हुए पुच्छ लिया.

कल्लो उसकी बात पर ज़ोर ज़ोर से हस्ने लगी.

"हस क्यूँ रही है?" रूपाली ने पुछा

"अरे मेरी गुड़िया रानी ये चूत है तो इसको चूत मारना कहते हैं. या चोदना कहते हैं"

"ओह" रूपाली ने समझते हुए कहा. तभी उसको कल्लो का एक हाथ अपनी कमर पर महसूस हुआ जो धीरे धीरे नीचे को फिसलता हुआ उसकी गांद पर आया.

"अगर मर्द यहाँ पिछे से घुसाए तो उसको गांद मारना कहते हैं"

रूपाली हैरत से उसको देखने लगी.

"यहाँ भी?"

"और नही तो क्या" कल्लो ने कहा

"यहाँ भी मज़ा आता है?"

"औरत औरत की बात होती है. कुच्छ को आता है और कुच्छ को बिल्कुल नही. कुच्छ औरतें एक चूत में लेकर ही काम चलाती हैं और कुच्छ तीनो जगह"

"तीनो?"

"हां. आगे, पीछे और मुँह में"

"मुँह में? यूक्ककककककक. उसमें क्या मज़ा?"

"जब लोगि तो पता चलेगा"

"छ्ह्ह्हीईइ .... कितना गंदा होगा ... मैं तो कभी ना लूं"

उसकी बात सुनकर कल्लो एक पल किए लिए खामोश हो गयी और कुच्छ सोचने लगी.

"क्या सोच रही है?"

"सोच रही हूँ के हम एक दूसरे के साथ आपस मैं हैं तो पर असली मज़ा नही आता"

"असली मज़ा?"

"हां. जो किसी मर्द के साथ में आता है. अगर यहाँ बिस्तर पर कोई एक मर्द हमारे साथ हो तो मज़ा आ जाए"

रूपाली शर्मा गयी.

"तेरा दिमाग़ खराब हो गया है? पापा को पता चला तो जान से मार देंगे"

"अर्रे पता चलेगा तब ना. आप इशारा करो. मैं कर देती हूँ इंटेज़ाम. फिर आप देख लेना के मुँह में ले पओगि या नही" कल्लो ने किसी लोमड़ी की तरह मुस्कुराते हुए कहा

"किसकी बात कर रही है?"

"शंभू"

"शंभू काका के साथ. कभी नही"

अगले एक घंटे तक कल्लो रूपाली को यही समझाती रही के शंभू काका के साथ बिस्तर पर जाने में कोई ग़लत नही है. वो घर के हैं और घर की बात घर में रह जाएगी, किसी को भी पता नही चलेगा. वो रूपाली जिसने पहले एकदम इनकार कर दिया था सोचने पर मजबूर हो गयी.

"ठीक है मैं सोचके बताऊंगी. मुझे बहुत शरम आती है"

और अगले ही दिन वो हुआ जिसने रूपाली के पावं के नीचे से ज़मीन सरका दी. वो अपने कमरे से निकल कर कुच्छ खाने को ढूँढती किचन की तरफ जा रही थी के तभी किचन से किसी के बात करने की आवाज़ आई. उसको ऐसा लगा के उसने अपना नाम सुना है और कोई उसके बारे में बात कर रहा है इसलिए वो चुप चाप बाहर खड़ी सुनने लगी.

"बस तैय्यार ही है" कल्लो कह रही थी "नयी है इसलिए थोड़ा नखरा कर रही है पर बहुत गर्मी है साली में. 2-3 दिन और उसकी चूत को गरम करूँगी तो मान जाएगी"

रूपाली समझ गयी के वो उसी के बारे में बात कर रही है.

"ठीक है" आवाज़ शंभू काका की थी "मैने कॅमरा का इंटेज़ाम कर लिया है. एक बार साली की नंगी तस्वीरें निकल जाएँ, उनके बदले में उसके बाप से इतना पैसे लूँगा के आराम से बैठ कर खाएँगे हम दोनो"

रूपाली का सर घूमने लगा. यानी कल्लो ने शंभू काका को बता रखा था के वो क्या कर रही है रूपाली के साथ. दोनो की मिली भगत थी.

"अगर उसके बाप को पता चल गया तो?" कल्लो ने डरते हुए कहा

"अर्रे पता तो चलेगा ही. हम खुद बताएँगे तभी तो वो अपनी बेटी की नंगी तस्वीरों के बदले में मुँह माँगे पैसे देगा. सारी ज़िंदगी हमने उसकी जी हुज़ूरी की है, फिर भी कुत्तों की तरह समझता है हमें. कुच्छ तो बदला हमें भी मिले. तू बस लड़की को तैय्यार कर. साले की बेटी भी चोद्के जाऊँगा और चोदने के बदले पैसे भी लेके जाऊँगा"

रूपाली का गुस्सा सर च्छुने लगा. उसका बेवकूफ़ बनाया जा रहा था. दोनो मिले हुए थे.

"मुझे चोद्के जाएगा? प्लेट में रखा हलवा हूँ मैं जो उठाया और खा लिया?" वो गुस्से में पावं पटकती अपने कमरे की तरफ वापिस चली "मेरे बाप ने पालतू कुत्तों की तरह रखा है तुम्हें तो अब देख. मैं भी उसी बाप की बेटी हूं. मैं तुम्हें कुत्तों की तरह ही मारूँगी"

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:25 PM,
#42
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खूनी हवेली की वासना पार्ट --44

गतान्क से आगे........................

उस रात रूपाली कल्लो के साथ तबीयत खराब का बहाना करके सोई तो नही पर इशारा कर दिया के वो शंभू के लिए तैय्यार है ......

और अगली रात ही आम तौर पर उस शांत रहने वाले घर में जैसे एक तूफान सा आ गया था.

रात के तकरीबन 2 बजे शंभू रूपाली के कमरे में दाखिल हुआ. कल्लो और रूपाली जैसे दोनो उसी के इंतेज़ार में बैठी थी. शंभू ने एक नज़र रूपाली पर डाली और मुस्कुराया. जवाब में रूपाली शर्मा कर दूसरी ओर देखने लगी.

"कोई बात नही बेटा" शंभू अपने हाथ में थमा बॅग एक तरफ रखते हुए बोला "पहली पहली बार ऐसा लगता है पर मज़ा बहुत आएगा आज रात तुम्हें"

"उस बॅग में क्या है?" रूपाली ने पुछा

"कुच्छ नही. बस तुम्हें मज़ा देने का इंटेज़ाम" शंभू ने कहा पर रूपाली जानती थी के उसमें वो कॅमरा छुपाके लाया था.

"आज की रात मेरी लाडो लड़की से पूरी औरत बन जाएगी" कल्लो ने प्यार से रूपाली के सर पर हाथ फेरते हुए कहा

शंभू चलते हुए रूपाली के नज़दीक आया और उसको बिस्तर से उठाकर खड़ा कर लिया. रूपाली ने आज रात भी एक नाइटी पहनी हुई थी.

"बहुत सुंदर लग रही हो" शंभू ने कहा

"मुझे शरम आ रही है" रूपाली बोली

"कोई बात नही. मैं बहुत प्यार से करूँगा. कल्लो ने बताया मुझे के तुम भी वही चाहती हो जो इस वक़्त मैं चाहता हूँ" कहते हुए शंभू ने एक बार रूपाली का माथा चूमा और उसको अपने गले से लगा लिया.

पसीने की बदबू फ़ौरन रूपाली की नाक में चढ़ गयी और उसको अपने आप से नफ़रत सी होने लगी के उसने इस गंदे आदमी के साथ सोने के बारे में सोचा भी था. शंभू एक हाथ उसकी पीठ पर फिरा रहा था और दूसरा हाथ उसके सर पर.

"मैं ऐसे नही कर पाऊँगी" रूपाली ने अपने आपको शंभू से अलग किया और पलट कर कल्लो से बोली "मुझे पहले की तरह बाँध दो"

उसकी इस बात पर कल्लो हैरानी से उसको देखने लगी पर फ़ौरन मुस्कुराइ

"मेरी बिटिया रानी को अलग तरीके से मज़ा आता है शायद" कहते हुए वो उठी और अलमारी से रूपाली की ही एक चुन्नी निकाल लाई. रूपाली फ़ौरन बिस्तर पर लेट गयी और अपने हाथ उपेर को कर लिए.

"शाबाश" कहते हुए कल्लो बिस्तर पर उसके नज़दीक आई और पहले की तरह ही उसके हाथ बिस्तर से बाँध दिए. शंभू भी बिस्तर पर आकर बैठ चुका था. एक बार हाथ बँध गये तो उसने रूपाली की नाइटी को पैरों के पास से उपेर उठाना शुरू कर दिया.

"पहले आप दोनो अपने कपड़े उतारो" नाइटी जांघों तक आई ही थी के रूपाली बोल पड़ी.

"नयी बच्ची है इसलिए शर्मा रही है" कल्लो ने कहा तो शंभू ने भी हां में सर हिलाया और उठकर खड़ा हो गया.

कपड़े के नाम पर उसके सिर्फ़ एक बनियान और लूँगी बाँध रखी थी. नंगा होने में उसको सिर्फ़ 2 सेकेंड लगे. उधेर कल्लो भी अपनी सारी उतार कर ब्लाउस के बटन खोलने में लगी थी.

नंगे हो चुके शंभू पर रूपाली ने एक नज़र डाली. उसका लंड पूरा खड़ा हुआ था और ये पहली बार था के रूपाली किसी मर्द का लंड इतने करीब से देख रही थी पर इस वक़्त उत्तेजित होने के बजाय उसके दिल में नफ़रत और गुस्सा बढ़ता जा रहा था.

नंगा शंभू रूपाली के करीब आया और हाथ छाती की तरफ बढ़ाया. इससे पहले के वो रूपाली को च्छू पता, रूपाली ने अचानक चीख मारनी शुरू कर दी.

शांत पड़ा घर अचानक से जैसे रूपाली की चीख से गूँज उठा. उसके बाद जो हुआ वो बहुत ही तेज़ी के साथ हुआ. शंभू और कल्लो दोनो हड़बड़ा गये. एक पल के लिए समझ नही आया के क्या करें पर अगले ही पल शंभू ने रूपाली के मुँह पर हाथ रख कर उसको चुप करने की कोशिश की. पर रूपाली भी जैसे इसके लिए तैय्यार थी. उसने फ़ौरन अपना मुँह खोला और दाँत शंभू के हाथ पर गढ़ा दिए.

दर्द से शंभू बिलबिला उठा और उसके कसकर एक थप्पड़ रूपाली के मुँह पर जड़ दिया.

"रांड़ साली"

पर थप्पड़ के जवाब में रूपाली सिर्फ़ मुस्कुराइ और शंभू की तरफ देखा.

"साअलल्ल्ल्लीइीइ कुतिया" उसको मुस्कुराता देख कर शंभू समझ गया के क्या हुआ और फ़ौरन अपने कपड़े पहेन्ने शुरू कर दिए पर तब तक देर हो चुकी थी.

अगले ही पल रूपाली के कमरे का दरवाज़े पर एक ज़ोर का धक्का लगा. दरवाज़ा बंद था इसलिए खुला नही. फिर दूसरा धक्का, फिर तीसरा, फिर चौथा और दरवाज़ा खुल गया.

दरवाज़े पर रूपाली का बाप खड़ा था. उसने एक नज़र कमरे में डाली.

रूपाली बिस्तर पर बँधी पड़ी थी.

थप्पड़ से उसका गाल अब भी लाल था.

बाल बिखरे हुए थे.

कल्लो बिना सारी के खड़ी थी.

शंभू अपनी लूँगी बाँध रहा था और उपेर से नंगा था.

"मदारचोड़" रूपाली का बाप चिल्लाया और कमरे के अंदर आकर शंभू के मुँह पर एक मुक्का मारा. बुद्धा शंभू लड़खड़ा कर गिर पड़ा.

तभी घर के मेन गेट पर खड़ा रहने चौकीदार भागता हुआ कमरे के अंदर आया. उसके हाथ में एक लोडेड राइफल थी.

उस रात घर में 3 गोलियाँ चली. पहली शंभू के सर में लगी, दूसरी कल्लो की टाँग पर और तीसरी कल्लो की बड़ी बड़ी चूचियो के बीच.

"चुड़ैल है वो लड़की, डायन. खून पीने वाली डायन" कहती हुए कल्लो रो पड़ी.

ख़ान ने एक नज़र उसपर उपेर से नीचे तक डाली. वो व्हील चेर पर बैठी थी. घुटने के उपेर से उसकी एक टाँग कटी हुई थी.

"उस रात मैं तो बच गयी पर शंभू नही बच पाया. और मैं बची भी तो क्या, 1 महीने बाद ही मेरी टाँग भी काट दी गयी. गोली का ज़हर फेल गया था"

"ह्म्‍म्म्मम" ख़ान ने हामी भरी

"यही कहते रह गये सारे पोलिसेवाले" कल्लो अब भी रो रही थी "ह्म्‍म्म्मम. बस इतना ही कहा सबने."

कुच्छ देर तक कल्लो, किरण और ख़ान, तीनो चुप बैठे रहे.

"चलते हैं हम" ख़ान ने कहा और उसके साथ ही किरण भी उठ खड़ी हुई.

"उसको चुड़ैल और डायन कह रही हो तो अपने गिरेबान में झाँक कर भी देखो. उस लड़की के साथ तुम लोग जो करने वाले थे उसका सही बदला दिया उपेर वाले ने तुम्हें" किरण ने कहा और पलटकर बाहर की तरफ चल दी. ख़ान मुस्कुराया और उसके पिछे पिछे ही चल पड़ा.

"ओके" कुच्छ देर बाद दोनो एक रेस्टोरेंट में बैठे कॉफी पी रहे थे "आज की कहानी के बाद आइ वुड पुट रूपाली ऑन माइ सस्पेक्ट नंबर 1 प्लेस"

"क्यूँ?" ख़ान ने पुछा

"एक लड़की जो इतनी सी उमर में इस तरह से एक प्लान एक्सेक्यूट करके 2 लोगों की जान लेने की सोच सकती है, क्या लगता है के वो ठाकुर को नही मार सकती?"

"यू आर राइट" ख़ान ने जवाब दिया "पर तुम एक बहुत बड़ा पॉइंट मिस कर रही हो?"

"व्हाट ईज़ दट?"

"के अब तक हमारे पास मोटिव नही है रूपाली के लिए. मान लिया जाए के उसमें ऐसा करने की हिम्मत और अकल दोनो थे, पर फिर भी ऐसा किया तो क्यूँ. वजह क्या थी?"

"ह्म्‍म्म्मम" किरण ने सोचा "ये एक चीज़ अब भी मिस्सिंग है"

वो दोनो चुप चाप कॉफी पीने लगे.

"याद है पहले ये एक छ्होटी सी चाइ की दुकान हुआ करती थी, अब कितना बड़ा रेस्टुअरंट हो गया है" किरण ने मुस्कुराते हुए अपने चारों तरफ देखा

"हां. और कितना फॅन्सी भी" ख़ान भी साथ ही मुस्कुरा उठा

"कुच्छ पुच्छू?" ख़ान हिचकते हुए बोला

"हां पुछो"

"बुरा तो नही मनोगी?"

"नही"

"दिस गाइ यू मॅरीड, युवर एक्स-हज़्बेंड, वो भी इसी शहर में रहता है?"

"क्यूँ जलन हो रही है?"

"अर्रे नही ऐसे ही पुछ रहा था" ख़ान नज़र झुकाता हुआ बोला

"तो सुनो" किरण ने कहा "नही वो अब यहाँ नही रहता. बिज़्नेस में काफ़ी लॉसस हुए थे, काफ़ी कर्ज़ा हुआ और वो बचकर शहर छ्चोड़ भाग निकला. कहाँ, कोई नही जानता. शुक्र तो इस बात का था के मैं डाइवोर्स पहले ले चुकी थी वरना आज तक उसी के साथ फसि बैठी होती"

"ह्म्‍म्म्मम" ख़ान आगे कुच्छ कहने वाला ही था के पहले किरण बोल पड़ी

"मैं जानती हूँ तुम क्या पुच्छना चाह रहे हो. इस वक़्त मेरी लाइफ में कोई नही है मुन्ना, तुम्हारे सिवा"

ख़ान ने मुस्कुरा कर किरण की तरफ देखा और अपना एक हाथ उसके हाथ पर रख दिया.

"कोई शेर सूनाओ ना" अचानक किरण बोल पड़ी

"शेर? ह्म्‍म्म्मममम"

"चलो मैं सुनाती हूँ" किरण बोली "अर्ज़ किया है ....."

"इरशाद"

मेरी निगाहों ने सारा ज़माना देखा है,

पर कहाँ तुझसा कोई दीवाना देखा है.

तड़पना दिल का देखा एक अरसे तक मैने,

मुद्दत बाद फिर अब दिल का लगाना देखा है.

तू रहे कहीं भी, मैं आऊँगी ज़रूर,

के मैने भी तेरा हर ठिकाना देखा है.

इससे पहले के ख़ान कुच्छ कह पाता, उसका फोन बज उठा. नंबर शर्मा का था.

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:25 PM,
#43
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खूनी हवेली की वासना पार्ट --45

गतान्क से आगे........................

"हां बोल" ख़ान ने फोन उठाते हुए कहा

"सर ग़ज़ब हो गया. आप आ जाइए फ़ौरन"

"क्या हुआ?"

"सर नहर से तेज की लाश मिली है"

"तेज?"

"हां सर, ठाकुर तेजविंदर सिंग"

"ओके सो वॉट डो वी नो सो फार?" किरण ख़ान के साथ पोलीस स्टेशन में बैठी थी.

"नोट मच" ख़ान ने कहा "हाइ अमाउंट ऑफ अलचोहोल इन हिज़ ब्लड. देखने से तो यही लगता है के शराब के नशे में नहर में गिरा और ज़िंदा निकल नही पाया"

"यू साइड देखने में ऐसा लगता है. यू थिंक के ऐसा आक्च्युयली है नही?"

"ओह कम ऑन किरण. एक हटता कटता आदमी जो शराब को रोज़ाना पानी की तरह पीता था, वो नशे की हालत में डूबकर मर जाए, मैं मान ही नही सकता"

"ह्म्‍म्म" किरण सोच में पड़ गयी "पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट क्या कहती है?"

"ख़ास कुच्छ नही. कॉस ऑफ डेत ईज़ ड्राउनिंग. मौत उसके लंग्ज़ में पानी भर जाने की वजह से हुई"

"वेल दट डोएसन्थ लीव अस विथ मच टू इन्वेस्टिगेट इन देन" किरण ने कहा

"ओह इट डज़, डोंट यू सी?" ख़ान उत्साह से बोल रहा था "एक रात ठाकुर का खून होता है, ठीक उसी रात उसके बेटे को ज़िंदा देखा जाता है और फिर उसके कुच्छ दिन बाद उसकी लाश भी मिलती है"

"ठीक है चलो मान लिया के इसमें कुच्छ है जो फिलहाल नज़र नही आ रहा. पर सवाल फिर भी यही है के इससे हमारे फेवर में कौन सी बात जा रही है?

"ये के इस वक़्त मैं जै के केस में कुच्छ दिन की टाल मटोल कर सकता हूँ. जो फ़ैसला होने में सिर्फ़ हफ़्ता लगना था, अब तेज की लाश मिलने पर उस फ़ैसले को अट लीस्ट एक महीने के लिए टाला जा सकता है. व्हाट डू यू थिंक?"

"वेल आइ मस्ट से दट यू हॅव ए पॉइंट. सो वेट्स नेक्स्ट?" किरण हां में हां मिलाती हुई बोली

"फिलहाल तो क्यूंकी तेज के केस को साफ साफ आक्सिडेंटल केस कह कर फाइल बंद कर दी है, तो उस मामले में हम कोई इन्वेस्टिगेशन नही कर सकता इसलिए फिलहाल वी विल जस्ट हॅव तो कीप लुकिंग इन हिज़ फादर'स मर्डर"

"ओके. सो व्हाट ईज़ दा नेक्स्ट स्टेप?"

"नेक्स्ट स्टेप ये है के एक बहुत बड़ी बात हम इग्नोर कर रहे है. मुझे उस रात किसी औरत ने फोन करके हवेली आने को कहा था पर बाद में हवेली में मौजूद कोई भी औरत सामने नही आई"

"ओके. ये भी तो हो सकता है के वो डरी हुई हो के हवेली के लोग उसको सुनाएँगे के उसने पोलीस को क्यूँ बुलाया?"

"यस दट ईज़ पासिबल. पहले मैने भी यही सोच कर इस बात को इग्नोर कर दिया था पर अब मुझे लगता है के हमें ये पहलू भी देख ही लेना चाहिए"

"ऑल राइट"

"मैने अपनी फोन कंपनी को कॉंटॅक्ट किया है ये पता लगाने के लिए उस रात जो मुझे कॉल आई थी वो किस नंबर से थी"

"नंबर तो तुम्हारे सेल में आया होगा"

"हां पर मैने ध्यान नही दिया. आंड अब वो नंबर मेरी कॉल लिस्ट में है भी नही. मैने उस वक़्त बस ये मान लिया था के नंबर हवेली में ही कहीं का था"

"ओके"

"दूसरा मैने उस नौकरानी की बेटी पायल को बुलवा भेजा है. लेट्स सी इफ़ शी कॅन टेल अस सम्तिंग न्यू"

"ऑल राइट"

अगले कुच्छ पल तक दोनो यूँ ही बैठे इधर उधर की बातें करते रहे.

"अच्छा एक बात बताओ मुन्ना. जब मैं नही थी तुम्हारे आस पास, तब मिस करते थे मुझे"

"ऑफ कोर्स" ख़ान हंसता हुआ बोला "याद है वो पोवेट्री जो मैं पहले लिखा करता था?"

"हां याद है"

"पहले सब रोमॅंटिक और हस्ती गाती पोवेट्री होती थी. तुम गयी तो सब दर्द भरी शायरी हो गयी"

"तो कुच्छ ऐसा सूनाओ जो मेरी याद में तुमने मेरे लिए लिखा था" किरण इठलाते हुए बोली

"यहाँ पोलीस स्टेशन में नही"

"प्लीज़ ना"

"नही" ख़ान चारो तरफ देखता हुआ बोला

"अच्छा लिख कर तो दे सकते हो?"

ख़ान ने मुस्कुराते हुए एक पेपर उठाया और उसपर कुच्छ लिख कर किरण की तरफ सरका दिया.

चाँद ख्वाबों के आता करके उजाले मुझको

कर दिया वक़्त ने दुनिया के हवाले मुझको

जिन्हे सूरज मेरी चौखट से मिला करता था

अब वो खैरात मे देते हैं उजाले मुझको…

मैं हूँ कमज़ोर मगर इतना भी कमज़ोर नही

टूट जाए ना कहीं तोड़ने वाले मुझको…

और भी लोग मेरे साथ सफ़र करते हैं

कर ना देना किसी मंज़िल के हवाले मुझको..

ये मेरी क़ब्र हे अब मेरा आखरी मकाम है

किस में दम है जो मेरे घर से निकाले मुझको...

ख़ान और किरण बैठे बात कर ही रहे थे के पायल पोलीस स्टेशन आ पहुँची.

"आप मेरे को बुलाए थे साहिब?" उसने ख़ान से पुछा

"हां. कुच्छ बात करनी है तुमसे"

दोनो ने पायल को एक नज़र उपेर से नीचे तक देखा. वो एक गाओं की सीधी सादी सी लड़की थी. सादा सा एक सलवार कमीज़ डाल रखा था.

"बैठो" ख़ान ने वहीं रखी एक कुर्सी की तरफ इशारा किया के तभी किरण ने उसको आँख के इशारे से कहा के यहाँ बात करना शायद ठीक नही है क्यूंकी आस पास काफ़ी पोलिसेवाले थे.

"एक काम करो, अंदर चल कर बैठो" ख़ान ने उसको पोलीस स्टेशन में अपने कमरे की तरफ इशारा करते हुए कहा. उसके पिछे पिछे वो दोनो भी अंदर आ गये.

"कुच्छ लोगि?" उसने पायल से पुछा पर उसने इनकार में सर हिला दिया.

"सीधे मतलब की बात करते हैं" ख़ान ने अपनी डाइयरी और पेन निकाला और लिखने लगा "जिस रात ठाकुर साहब का खून हुआ था तुम उस वक़्त कहाँ थी?"

"जी मैं तो किचन में खाना बना रही थी" पायल बोली

"तो जै को देख कर शोर किसने मचाया था?"

"जी मैने"

"अभी तो तुम कह रही थी के तुम किचन में खाना बना रही थी"

"जी हां"

"तो जै को कैसे देख लिया?"

"जी मैं ठाकुर साहब के कमरे की तरफ आई थी"

"तो मतलब तुम खाना नही बना रही थी?"

"जी नही खाना तो पहले ही बनाकर खा लिया था. मैं तो उनसे बस पुछ्ने गयी थी के कुच्छ चाहिए तो नही"

"तो झूठ क्यूँ बोला?"

"कौन सा झूठ?"

"के तुम खाना बना रही थी?"

"जी मैं सच बना रही थी खाना"

"तुम अभी बोली के खाना बना चुकी थी तुम. झूठ बोल रही हो मुझसे?" ख़ान चेहरा थोड़ा सा सख़्त किए ऊँची आवाज़ में बोला और उसका तरीका काम कर गया.

वो सीधी सी लड़की फ़ौरन टूट गयी और आँखों में पानी भर गया.

"नही मैं सच कह रही हूँ. मैने कुच्छ नही किया. मैं तो बस खाना बनाकर किचन सॉफ कर रही थी और फिर बड़े साहब के कमरे की तरफ गयी पुच्छने के उन्हें कुच्छ चाहिए तो नही और तभी फिर मैने वो देखा"

"क्या देखा?" ख़ान ने चेहरा अब भी सख़्त किया हुआ था

"जी जै बाबू को?"

"क्या कर रहा था वो?"

"बड़े साहिब नीचे गिरे हुए थे और जै बाबू उनपर झुके हुए थे और उनके हाथ में वो पैंच खोलने वाली चीज़ थी"

"तो मतलब तुमने खून होते हुए नही देखा?"

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:26 PM,
#44
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खूनी हवेली की वासना पार्ट --46

गतान्क से आगे........................

"किसका खून?" पायल ने एक झटके से पुछा और फिर ख़ान के घूर कर देखने पे फ़ौरन संभाल गयी "ओह बड़े साहिब का. नही मैं वहाँ पहुँची तो बस मैने उन दोनो को ऐसे ही देखा और शोर मचा दिया"

"और कितने खून देखे हैं तुमने?"

"जी कोई नही" पायल को देख कर ही लग रहा था जैसे अभी रो पड़ेगी

"तो ये क्यूँ पुछा के किसका खून?"

"जी ऐसे ही मुँह से निकल गयी. भगवान की कसम साहिब, मैने कुच्छ भी नही किया"

"तो मैने कब कहा के किया है. तुम खुद ही बोले जा रही हो"

तभी किरण ने उसकी तरफ थोड़ा घूर कर देखा जैसे कह रही हो के बस करो ज़्यादा हो रहा है.

"हवेली में रहने वालो के बारे में तुम क्या बता सकती हो?"

"जी किसके?"

"सबके" ख़ान ने कहा

"सब बोले तो?"

"अर्रे सब बोले तो सब" ख़ान लगभग चिल्ला ही पड़ा.

"रूपाली" उसने अपनी आवाज़ थोड़ी नीचे करते हुए कहा "रूपाली के बारे में क्या बता सकती हो?"

"अच्छी हैं बहुत" पायल बस रो ही देने वाली थी

"और?"

"और बस अच्छी हैं. अभी कुच्छ दिन पहले ही मुझे एक गुलाबी रंग का अपना सलवार कमीज़ दिया. ऐसे कपड़े देती हैं मुझे वो"

"और क्या क्या देती हैं?"

"बस कपड़े देती हैं और बहुत अच्छे से बात करती हैं"

"तेरे से इतना प्यार क्यूँ करती हैं?"

"वो सबसे ऐसे ही प्यार करती हैं. मेरी माँ कहती है के उनको कोई बच्चा नही है ना इसलिए वो मेरे से इतना हँसके मिलती हैं. बच्चो से बहुत प्यार है उनको. बेचारी"

"बेचारी क्यूँ?" ख़ान ने पुछा

"सब उनको बांझ कहते हैं जबकि असल में तो ......" पायल बोलते बोलते एकदम चुप हो गयी

"असल में?" ख़ान ने उसकी अधूरी बात पर ज़ोर डाला.

वो कुच्छ नही बोली

"असल में?" इस बार ख़ान अपनी आवाज़ को थोड़ा और सख़्त किया.

पायल अब भी कुच्छ नही बोली. ख़ान जानता था के वो क्या नही बोल रही है और इस बारे में आगे किससे पता करना है.

"चलो छ्चोड़ो. कुलदीप के साथ क्या रिश्ता है तुम्हारा?"

इस बात ने जैसे गरम लोहे पर हथौड़े का काम किया. पायल ने फ़ौरन आँखें फाडे उसकी तरफ देखा जैसे चोरी पकड़ी गयी हो.

"देखो सब पता है मुझे" ख़ान बोला "के क्या चल रहा है तुम्हारे और कुलदीप के बीच. पुरुषोत्तम को पता है ये बात?"

"नही साहिब नही" पायल रोने लगी "उनको अगर पता चल गया तो मुझे और उनको दोनो को मार डालेंगे और साथ में मेरी माँ को भी"

ख़ान जानता था के उनको से पायल का इशारा किस तरफ था.

"काब्से चल रहा है ये सब?"

"जी 2 साल से"

"किसी और को पता है?"

पायल ने इनकार में सर हिला दिया.

उसी शाम ख़ान और शर्मा दोनो उसके कमरे में बैठे हुए थे के तभी ख़ान का मोबाइल फोन बज उठा. कॉल मोबाइल सर्विस वालो की थी.

"ओके थॅंक्स" एक पेन पेपर पर ख़ान ने एक नंबर लिख लिया.

"क्या हुआ सर?"

"ये वो नंबर है जहाँ से मुझे उस रात फोन आया था. इससे एक सवाल का तो जवाब मिल गया पर दूसरा अभी भी बाकी है"

"कौन सा सवाल सर?"

"जै ने मुझे कहा था के उस रात उसका फोन मार पीट में कहीं हवेली में ही गिर गया था. मैने हवेली में पुछा पर किसी को मिला नही. मुझे फोन उसी के सेल से आया था मतलब जिस वक़्त उसको हवेली में मारा पीटा जा रहा था, किसी ने उसका सेल उठाया और मुझे फोन कर दिया. पर दूसरा सवाल अब भी बाकी है के किसने किया?"

"सर मैं जा रहा हूँ घर. सर में दर्द हो रहा है मेरे. आप लगाओ अपना दिमाग़, मेरे पास इतना है नही"

शर्मा उठकर जाने ही लगा था के पलट कर ख़ान की तरफ देख मुस्कुराया.

"सर एक बात पुच्छू तो बुरा तो नही मानेंगे?"

"नही पुच्छ"

"ये आप और किरण जी के बीच ......" उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी

"बीच क्या ...... ?"

"कोई प्यार व्यार का चक्कर?" शर्मा ने बात को धीरे से कहा. ख़ान ने हां में गर्दन हिला दी.

"बहुत पुरानी कहानी है दोस्त. कभी फ़ुर्सत में सुनाऊंगा" वो हॅस्कर बोला

"सही है सर" शर्मा बोला "एक यही काम मुझसे कभी हुआ नही. प्यार"

"क्यूँ तेरी लाइफ में कभी कोई लड़की नही आई?"

"आई थी ना सर"

"फिर?"

"फिर यूँ हुआ के अर्ज़ किया है .....

जबसे उनसे दिल लगा बैठे,

सुकून की माँ चुदा बैठे,

उनके भोस्डे में लंड किसी और का था,

और हम मुफ़्त में अपनी गांद जला बैठे

हस्ता हुआ शर्मा दरवाज़ा खोल कर कमरे से निकल गया.

"मैं जानता था के आप मुझसे बात करने की कोशिश ज़रूर करेंगे" ख़ान के सामने बैठे कुलदीप ने कहा

"कैसे जानते थे?"

"ओह कम ऑन" कुलदीप ऐसे हसा जैसे मज़ाक उड़ा रहा हो "आपको क्या लगता है. मैने उस दिन शर्मा को देखा नही था?"

"किस दिन?" ख़ान अंजाना बनता हुआ बोला

"उसी दिन इनस्पेक्टर साहब जिस दिन शर्मा ने आकर आपको कहानी सुनाई थी मेरी और पायल की" कुलदीप एकदम सॉफ बोला

ख़ान को समझ नही आया के कैसे जवाब दे.

"देखिए यहाँ जो हो रहा है उससे मेरा कुच्छ लेना देना नही है. मैं तो बस छुट्टियो पर आया हुआ था आंड फ्रॅंक्ली स्पीकिंग आइ डोंट ईवन प्लान टू लिव हियर. मैं लंडन में ही सेट्ल होने जा रहा हूँ और पायल को अपने साथ वहीं ले जाने का प्लान है"

"आप बात तो ऐसे कर रहे हैं जैसे आपको अपने पिता की मौत का ज़रा भी अफ़सोस ना हो" ख़ान बोला

"अफ़सोस है ख़ान साहब" कुलदीप ने जवाब दिया "पर इतना अफ़सोस नही है के मैं उस वजह से अपनी लाइफ खराब कर दूं. देखिए मैने अपनी सारी लाइफ लंडन में ही बिताई है आंड आइ जस्ट वाना गो बॅक देर, गेट अवे फ्रॉम दिस मॅडनेस"

"बोलते रहिए" ख़ान सुन रहा था

"उस दिन जब शर्मा ने हमें देखा तो मैने उसको वापिस जाते देख लिया था. पता नही कब्से देख रहा होगा पर जब आपने पायल को बुलवा भेजा तो मैं समझ गया के उसने वो कहानी आपको भी सुना दी है"

"ऑल राइट दटस ट्रू" ख़ान ने आख़िर मान ही लिया के वो जानता था.

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:26 PM,
#45
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --47

गतान्क से आगे........................

"मुझे तो समझ नही आ रहा के जब जै मौका-ए-वारदात से रंगे हाथ पकड़ा गया तो आप और क्या इन्वेस्टिगेट करना चाह रहे हैं. पर अगर इस सबका नतीजा ये है के केस जल्दी ख़तम होगा और मैं लंडन जा पाऊँगा, तो मैं आपके साथ पूरी तरह को-ऑपरेट करने को तैय्यार हूँ" कुलदीप आराम से कुर्सी से टेक लगाकर बैठ गया.

ख़ान ने एक बार उसको उपेर से नीचे तक अच्छी तरह देखा. वो एक मीडियम बिल्ट का गोरा चिटा हॅंडसम लड़का था. चेहरे और आँखों से समझदारी सॉफ झलकती थी.

"नो" ख़ान बोला "यू आर नोट को-ऑपरेटिंग विथ मी कॉज़ यू वाना गो बॅक टू लंडन. यू आर सिट्टिंग हियर टॉकिंग टू मी कॉज़ यू डोंट वॉंट दा वर्ड अबौट यू आंड पायल टू गो आउट. कॉज़ यू आर टू स्केर्ड ऑफ वॉट यू एल्डर ब्रदर ईज़ गोयिंग टू डू अबौट इट"

"यआः दट ईज़ आ रीज़न टू" कुलदीप ने भी बात मान ली.

"ऑल राइट देन" ख़ान ने एक सिगरेटे जलते हुए कहा "खून के वक़्त आप कहाँ थे?"

"जी मैं अपने रूम में था. टी.वी. देख रहा था और तब नीचे आया जब हवेली में शोर उठा"

"कोई इस बात की गवाही दे सकता है?"

"ओह" कुलदीप ऐसे बोला जैसे कोई बहुत बड़ी बात समझ आ गयी हो "सो आइ आम ऑन दा सस्पेक्ट लिस्ट टू"

"ऑफ कोर्स" ख़ान ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया "नाउ गेटिंग बॅक टू दा क्वेस्चन. कोई इस बात की गवाही दे सकता है?"

"हां" कुलदीप बोला "मेरी भाभी उस वक़्त मेरे कमरे में आई थी"

"रूपाली जी?"

"एस" कुलदीप बोला "मेरे कुच्छ कपड़े बाहर सूख रहे थे. भाभी उनको देने के लिए आई थी. और उसी बीच पायल भी मेरे कमरे में थोड़ी देर के लिए बात करने आई थी. तो वो भी मेरी अलीबी है"

"ओके आंड अपने बड़े भाई की मौत के बारे में आपका क्या ख्याल है?"

"कौन तेज भैया?" कुलदीप बोला "नोट मच आइ हॅव तो कॉँमेंट. ही वाज़ ए ड्रंक आंड ही डाइड कॉज़ ऑफ दट"

"इस पूरे केस से रिलेटेड आप कुच्छ भी ऐसा मुझे बता सकते हैं जो यू थिंक ईज़ विर्द? कुच्छ ऐसा जो आपको अजीब लगा था या कुच्छ ऐसा जो इस केस में हेल्प कर सके?"

कुलदीप सोचने लगा.

"सोचिए. शायद कुच्छ याद आ जाए" ख़ान ने कहा

"नही याद नही कर रहा हूँ. याद तो मुझे है. मैं सिर्फ़ ये डिसाइड करने की कोशिश कर रहा हूँ के बताऊं या नही"

"कुच्छ ऐसा है जो आप जानते हैं"

"यस" कुलदीप बोला "कॅन आइ गेट आ सिगरेट?"

"ओक" ख़ान ने सिगरेट कुलदीप की तरफ बढ़ाई "क्या जानते हैं आप?"

"आइ थिंक ये बात शायद आप भी जानते होंगे बट माइ डॅड हॅड आन इल्लिसिट रीलेशन. नाजायज़ रिश्ता"

"किसके साथ?" ख़ान ने बिंदिया के बारे में सोचा पर फिर अंजान बनते हुए कहा

"दट आइ डुन्नो पर उस रात मैने उनके कमरे से एक लड़की को निकलते हुए देखा था" कुलदीप सिगरेट का काश लगाता हुआ बोला

"कौन लड़की?"

"आइ डुन्नो. पर उस रात थोड़ी देर के लिए लाइट गयी थी. भाभी मुझे कपड़े देने के लिए मेरे कमरे में आई और फिर मैं टीवी देख ही रहा था के लाइट चली गयी. मेरे कमरे में पानी नही था इसलिए मैं नीचे आया"

"ओके और फिर?"

"फिर मैं किचन की तरफ बढ़ ही रहा था के डॅड के कमरे का दरवाज़ा खुला और उसमें से एक लड़की बाहर आई. उसके बिखरे हुए बाल देख कर ही अंदाज़ा हो जाता था के वो अंदर क्या करके आई है"

"कौन थी वो लड़की?"

"एज आइ सेड, आइ डुन्नो. उस वक़्त ड्रॉयिंग हॉल में काफ़ी अंधेरा था और उस लड़की की पीठ मेरी तरफ थी"

"अंधेरा था तो आपको बाल कैसे दिख गये?"

"जब वो बाहर थी तो उसी वक़्त डॅड कमरे से एक सेकेंड के लिए बाहर आए और उन्होने उस लड़की को कुच्छ दिया, आइ डुन्नो वॉट. उनके कमरे से कॅंडल की हल्की सी रोशनी आ रही थी. उसी रोशनी में एक पल के लिए उस लड़की के बॉल दिखाई दिए"

"पर लड़की का चेहरा नही दिखा?"

"नो" कुलदीप गर्दन हिलाता हुआ बोला

"कैसे बाल थे उसके?"

"लंबे बाल थे" कुलदीप हस्ने लगा "ये लंडन नही है ख़ान साहब जहाँ लड़किया बाल अलग अलग तरीके से कटवाती हैं. ये गाँव है जहाँ बालों का एक ही स्टाइल होता है. सीधे लंबे बाल और उस लड़की के भी वैसे ही थे आंड गेस वॉट, हवेली में रहने वाली हर औरत के बॉल ऐसे ही हैं. सो नो, मैं बालों के अंदाज़े से नही बता सकता के वो कौन थी"

"आपको कैसे पता के वो हवेली में रहने वाली ही कोई थी? कोई बाहर की भी हो सकती है?"

"कोई बाहर की औरत? मेरे डॅड इस तरह अपने बेडरूम में लाएँगे? अपनी पूरी फॅमिली के सामने? यू गॉटा बी किडिंग मी"

"ह्म्‍म्म्ममम" ख़ान बोला "गुड पॉइंट. सो लेट्स सी, हवेली में रहती है बिंदिया, पायल, आपकी मोम, रूपाली और आपकी बहेन. सिन्स वो घर की कोई औरत नही हो सकती तो आइ आम गेसिंग के वो घर की कोई नौकरानी ही थी. या तो बिंदिया या पायल ......."

"ऑल राइट स्टॉप इट" कुलदीप तड़प कर बोला "वो पायल नही थी"

"क्यूँ? आप उससे प्यार करते हैं इसलिए?"

"नही कॉज़ वो औरत इन दोनो के सिवा कोई और भी हो सकती है"

"कौन? आपकी मोम जो व्हील चेर पर बैठी हैं? या आपकी बहेन जो ......"

"या मेरी भाभी" कुलदीप ने बीच में बात काट दी

ख़ान अब तक सोच रहा था के नाम बिंदिया का आएगा पर जब अचानक नाम रूपाली का आ गया तो वो भी चौंक पड़ा.

"आपकी भाभी? रूपाली?"

"ओह कम ऑन. डोंट लुक सो सर्प्राइज़्ड. एवेरिवन नोस शी ईज़ ए स्लट आंड आइ आम शुवर यू हॅव हर्ड ऑफ इट टू" कुलदीप ने कहा

"वेल इट विल टेक मोरे दॅन जस्ट ए गॉसिप फॉर मी टू बिलीव दट यू फादर हॅड ए रीलेशन विथ हिज़ डॉटर इन लॉ"

"ओके देन हाउ अबौट दिस" कुलदीप आगे को झुकता हुआ बोला "जब भाभी मेरे कमरे में मुझे कपड़े लौटने आई तो उन्होने एक गुलाबी रंग का सलवार सूट पहेन रखा था और जो औरत डॅड के कमरे से निकली थी, उसने वही गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था. आइ नो लाइट नही थी पर उस हल्की सी रोशनी में मैने कपड़े पहचान लिए थे"

ख़ान चुप चाप कुलदीप की तरफ देख रहा था

"आइ नो के मैं अपने ही घर की इज़्ज़त उड़ा रहा हूँ बट हेल, हू केर्स. वैसे भी इज़्ज़त बची नही है कुच्छ. आंड गेस वॉट, ई वाज़ नोट दा ओन्ली वन हू सॉ इट. माइ ब्रदर ऑल्सो सॉ इट. ही वाज़ स्टॅंडिंग ऑन दा अदर साइड ऑफ दा हॉल"

"कौन पुरुषोत्तम?" ख़ान ने पुछा तो कुलदीप ने हां में सर हिला दिया

दोनो चुप होकर बैठ गये. ख़ान का सर चकराने लगा. उसको सारी बात एक एक करके याद आने लगी.

ठाकुर उस रात किसी के साथ सोया था.

उसने सोचा था के वो बिंदिया थी.

कुलदीप कहता था के वो रूपाली थी क्यूंकी उसने एक गुलाबी रंग का सलवार कमीज़ पहेन रखा था.

कल ही पायल बैठी कह रही थी के रूपाली ने उसको एक हल्के गुलाबी रंग का सलवार कमीज़ दिया था.

"मर्डर की रात आप हवेली में क्या कर रहे थे?" ख़ान ने अपने सामने बैठे हुए इंदर से पुछा

"अम आइ ए सस्पेक्ट?" इंदर की शकल देख कर ही लग रहा था के वो काफ़ी घबराया हुआ था.

इंदर को देख कर ही इस बात का एहसास हो जाता था के उस इंसान को बचपन से किसी चीज़ की कोई कमी नही हुई. जो चाहा, वो मिल गया. रईसी उसके हर अंदाज़ में झलकती थी. शकल सूरत से वो अच्छा था पर अब भी बचपन की कई निशान उसकी पर्सनॅलिटी में रह गये थे. सारी ज़िंदगी कभी अपने माँ बाप तो कभी अपनी बड़ी बहेन का सहारा लेकर चलने वाला इंसान उसकी हर बात में शामिल था.

"नोट एट यू आर नोट" ख़ान ने जवाब दिया "पर आपकी जगह मैं होता तो पोलीस का पूरा साथ देता, ख़ास तौर से तेज की मौत के बाद"

"पर वो तो एक आक्सिडेंट था" इंदर ने बेचैन सा होते हुए जवाब दिया.

"अभी ये कह पाना ज़रा मुश्किल है के क्या आक्सिडेंट था और क्या इंटेन्षनल. फिलहाल मेरे सवाल आपसे ये है ठाकुर के क्या आप कुच्छ भी ऐसा जानते हैं जो मुझे नही पता या जो अगर मुझे बाद में पता लगे तो आप पर शक करने पे मजबूर कर दे?"

"नही ऐसा कुच्छ नही है मेरे पास बताने को" पर इंदर के अंदाज़ में झूठ कूट कूट कर भरा पड़ा था.

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:28 PM,
#46
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --48

गतान्क से आगे........................

"ठाकुर इंद्रासेन राणा" ख़ान ने सीधा उसकी आँखों में देखते हुए सख़्त आवाज़ में कहा

"ऑल राइट ऑल राइट .... मी आंड कामिनी आर गोयिंग अराउंड आंड आइ डोंट थिंक हर फादर अप्रीशियेटेड दट"

"मतलब?" ख़ान का दिमाग़ उलझ कर रह गया

"मतलब ये के मैं और कामिनी प्यार करते थे एक दूसरे से. उसने एक बार अपने पिता से इस बारे में बात करने की कोशिश की पर वो आज भी पुराने ख्याल के थे. उन्हें यही लगा के लड़के का चक्कर अगर लड़की से है तो नो मॅटर के वो लड़का कितने अच्छे घर से है, वो लफंगा ही होगा क्यूंकी उसने लड़की को फँसा रखा है"

"बात आपने की थी?"

"नही मुझे कामिनी ने बताया था. शी वाज़ प्रेटी अपसेट अबौट इट टू. शी लव्ड मी टू मच यू नो"

"ओके" ख़ान ने हामी भरी

"उस रात हवेली मैं उसको भागने के लिए गया था"

और यहाँ ख़ान पर जैसे बॉम्ब सा फूटा.

"क्या?"

"हां" इंदर बोला "हम लोगों का भाग जाने का प्लान था. उस रात हवेली मैं उसी इरादे से गया था"

ख़ान ने अपना पेन और पेपर एक तरफ रख दिया.

"ठाकुर इंद्रासेन राणा. कुड यू प्लीज़ डिस्क्राइब मी दा इवेंट्स ऑफ तट नाइट. कुच्छ भी मत छ्चोड़िएगा, एक एक बारीक चीज़. जैसा आपने देखा वैसा"

"वेल मैं उस दिन शाम को वहाँ पहुँचा था. कामिनी और मैं पहले ही इस बारे में फोन पर बात कर चुके थे. मेरा प्लान तो ये था के हम दोनो बाहर ही कहीं मिल जाएँ पर वो ठाकुर साहब से एक आखरी बार और बात करना चाहती थी आंड ई आम नोट शुवर वाइ बट वो चाहती थी के जब वो इस बारे में बात करे, तो मैं भी उसके साथ वहाँ मौजूद रहूं"

"ओके" ख़ान ने अब सारी बातें लिखनी शुरू कर दी थी "कीप गोयिंग"

"तो उस शाम मैं हवेली पहुँचा. सब कुच्छ नॉर्मल था, जैसा की अक्सर होता है. मैं सबसे मिला पर ठाकुर साहब से उस वक़्त मुलाकात बड़ी कड़वी सी रही. मैने झुक कर उनके पावं च्छुने चाहे थे पर वो मुड़ कर चले गये"

"आपकी बहेन जानती हैं ये सब?"

"रूपाली दीदी? पहले नही जानती थी पर उस शाम जब ठाकुर साहब ने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया तो दीदी को अजीब लगा. मैने उन्हें टालना चाहा पर वो मानी नही और मजबूर होकर मुझे उनको सब बताना पड़ा"

"आंड हाउ डिड शी रिक्ट टू इट?"

"नोट टू गुड. शी वाज़ प्रेटी आंग्री टू सी हर ब्रदर ह्युमाइलियेटेड लाइक दट. बट एनीवेस, मेरी कामिनी से कोई बात हो नही पाई. मैं अपने कमरे में ही रहा और मर्डर के टाइम भी वहीं था"

"यू हॅव आन अलीबी?"

"यआः, माइ सिस्टर. शी केप्ट चेकिंग ऑन मी ऑल ईव्निंग. शी नोस आइ वाज़ इन माइ रूम ऑल ईव्निंग टिल दा टाइम ऑफ दा मर्डर"

"ओके. बोलते रहिए" ख़ान ने कहा

तभी शर्मा ख़ान के कमरे में दाखिल हुआ.

"सर" उसने अंदर दाखिल होए हुए कहा और और कमरे में बैठे इंदर को देख कर अचानक रुक गया.

"ओह्ह्ह्ह. मुझे पता नही था. बाद में आता हूँ" कह कर वो फिर बाहर जा ही रहा था के ख़ान ने हाथ के इशारे से रोक लिया.

"नही कोई बात नही. कहो"

शर्मा ने एक नज़र इंदर पर डाली जैसे सोच रहा हो के उसके सामने बताए या ना बताए.

"किस बारे में बात करनी है?" ख़ान उसकी दुविधा समझते हुए बोला

"वो आपने ठाकुर तेजविंदर सिंग की गाड़ी तलाश करने को कहा था ना" शर्मा बोला

"मिली?"

"हां सर मिल गयी"

"कहाँ?"

"नहर के किनारे ही मिली है एक जगह. लगता है के उन्होने वहाँ बैठ कर शराब पी होगी और फिर नहर में गिर पड़े. बहती हुई उनकी लाश आगे निकल गयी और अगले गाओं में मिली"

"ह्म्‍म्म्मम. और कुच्छ"

"हां" शर्मा बोला "वो अकेले नही थे. कोई लड़की थी वहाँ उनके साथ"

"लड़की?"

"हां सर" शर्मा बोला

"कैसे पता?"

"गाड़ी में से ये मिला है सर" कहते हुए शर्मा ने अपने हाथ में पकड़े प्लास्टिक बॅग से एक काले रंग का ब्रा निकाला.

"लगता है मरने से पहले शराब के साथ साथ शबाब भी लाए थे ठाकुर"

"ह्म्‍म्म्म" ख़ान बोला "इंट्रेस्टिंग. कोई फिंगर प्रिंट्स?"

शर्मा ने इनकार में गर्दन हिला दी.

"इसको चेक कराओ. देखो इस पर कोई फिंगर प्रिंट्स मिलते हैं या नही" ख़ान ने शर्मा के हाथ में पकड़े ब्रा की तरफ इशारा किया

"कहाँ सर. इस पर तो ठाकुर तेज के फिंगर प्रिंट्स ही मिलेंगे. खोला तो उन्होने ही होगा"

ख़ान ने घूर कर देखा तो शर्मा हस्ता हस्ता चुप हो गया.

"अगर कोई लड़की थी तो सवाल ये है के उसने पोलीस को क्यूँ नही बताया जब तेज नहर में गिरा था" इस बार इंदर बोला

शर्मा और ख़ान दोनो ने घूर कर उसकी तरफ देखा जैसे आँखों आँखों में सवाल कर रहे हों के आपकी सलाह किसने माँगी?

"सॉरी" इंदर बोला "जस्ट ए पॉइंट ऑफ व्यू. ऐसा भी हो सकता है के तेज लड़की के जाने के बाद नहर में गिरा हो इसलिए लड़की को पता ही ना हो"

"सवाल ही पैदा नही होता" शर्मा फ़ौरन बोला "गाड़ी गाओं के बाहर जंगल के बीच मिली है. लड़की अगर वहाँ गयी तेज के साथ थी तो पैदल थोड़े आई होगी. तो उसने तो देखा ही होगा"

"पर अगर गाड़ी वहाँ मिली है तो आब्वियस्ली वो पैदल ही आई है. तेज के नहर में गिरने के बाद पैदल आई या पहले, ये सवाल मतलब का है" इंदर भी आगे से बोला

तभी दोनो ने ख़ान की तरफ देखा. ख़ान शर्मा को हैरत से देख रहा था जैसे कह रहा हो के हाउ कुड यू डिसकस दा केस वित सम्वन हू हिमसेल्फ ईज़ ए सस्पेक्ट?

"सॉरी सर" शर्मा मुँह बंद करता हुआ बोला

"इस ब्रा पे फिंगर प्रिंट्स चेक कराओ और देखो के वहाँ आस पास किसी और गाड़ी के टाइयर्स के निशान हैं क्या" उसने शर्मा से कहा. शर्मा गर्दन हिलाता हुआ चला गया.

"हां तो आप कह रहे थे?" उसने इंदर की तरफ घूमते हुए कहा

"फिर मैं पूरी शाम अपने कमरे में ही रहा. थोड़ी देर वॉक के इरादे से मैं खाना खाने के बाद बाहर निकला. ड्रॉयिंग रूम में मैने कामिनी को चाई की ट्रे लिए ठाकुर साहब के कमरे में जाते देखा तो मुझे लगा के शायद वो अब बात करेगी इसलिए मैं बाहर गया नही और फिर अपने कमरे में लौट आया. फिर उसके बाद थोड़ी देर के लिए लाइट गयी तो मैं अपने कमरे की खिड़की खोल कर वहीं खड़ा हो गया कॉज़ गर्मी लग रही थी"

"ओके" ख़ान लिख रहा था

"लाइट थोड़ी देर बाद ही आ गयी पर मैं खिड़की पर ही खड़ा रहा. हवा अच्छी चल रही थी. तभी हवेली के बाहर एक कार आकर रुकी और उसमें से जै निकला. वो अंदर गया और थोड़ी देर बाद ही पायल के चीखने की आवाज़ आई. उसके बाद आप जानते ही हैं के क्या हुआ"

इंदर बोल कर चुप हो गया पर ख़ान अपने सामने रखे उस पेपर को खामोशी से घूरता रहा जिसमें वो इंदर की सारी बातें लिख रहा था.

"सर?" उसको चुप देख फिर से इंदर बोला

"एक बात बताइए. यू सेड आपने कमरे में जाते हुए कामिनी को देख. आपको पूरा यकीन है वो कामिनी थी?"

"बिल्कुल यकीन है"

"आपने चेहरा देखा था कामिनी का?"

"नही चेहरा तो नही देखा कॉज़ उस वक़्त वो ऑलमोस्ट कमरे में दाखिल हो चुकी थी. बस उसके कपड़ो की एक हल्की सी झलक दिखाई दी"

"कपड़े?"

"हां. दीदी अपने और कामिनी के लिए एक हल्के गुलाड़ी रंग का सलवार कमीज़ लाई थी. दोनो बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं. एक दीदी के पास था और दूसरा कामिनी के पास. उस रात कामिनी ने वही सूट पहेन रखा था जिसे देख कर मैं समझ गया था के ये वही है"

"ये भी तो हो सकता है के वो आपकी बहेन हो. उनके पास भी तो वैसा ही सलवार कमीज़ है"

"नही दीदी अपने कमरे में ही थी, मैने उनके कमरे के आगे से निकलते हुए अंदर जीजाजी से उन्हें बात करते सुना था. तो वो लड़की कामिनी ही थी"

"मैं ठाकुर साहब को काहे को मारूँगा साहब?" ख़ान के सामने बैठा चंदर जैसे बिलख कर रोने को तैय्यार था. थोड़ा बहुत वो लिख पढ़ सकता था इसलिए ख़ान ने उसके लिए एक पेन और पेपर का इंटेज़ाम करा दिया था.

"मैने कब कहा के तूने मारा है?" ख़ान ने 2 टुक जवाब दिया

चंदर एकदम चौंक पड़ा.

"अब बता सीधे सीधे, जब ठाकुर साहब का खून हुआ, तब कहाँ था तू?"

"मैं गेट पर ही था साहब" चंदर ने काग़ज़ पर लिखा.

"पूरी बात बता, शुरू से आख़िर तक. क्या क्या देखा?"

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:28 PM,
#47
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --49

गतान्क से आगे........................

"ख़ास कुछ नही सर" चंदर ने तोते की तरह सब रटना शुरू कर दिया. कुच्छ वो काग़ज़ पर लिखता और कुच्छ इशारे से समझाता "मैं उधर गेट पर ही बैठा था शाम से. ख़ास कुच्छ हुआ नही और ना ही कोई आया. फिर रात को जै बाबू गाड़ी लेकर आए और उनके अंदर आने के थोड़ी देर बाद ही शोर उठा तो मैं भागता हुआ अंदर पहुँचा. वहाँ सब जै बाबू को मार पीट रहे थे. वो पूरे खून में सने हुए थे तो मैं समझ गया था के कुच्छ तो हुआ है"

"क्या हुआ था?" ख़ान ने ऐसे पुछा जैसे के कुच्छ जानता ही ना हो

"बड़े साहब के कमरे का दरवाज़ा खुला पड़ा था और वो नीचे ज़मीन पर पड़े हुए थे"

"ह्म्‍म्म्ममम" ख़ान ने कहा "फिर तूने क्या किया?"

"क्या करता साहब. नौकर आदमी हूँ. वहीं खड़ा देखता रहा बस"

ख़ान ने एक नज़र चंदर को उपेर से नीचे तक देखा. उसको देख कर कोई उमर का अंदाज़ा नही लगा सकता था. शकल सूरत से वो अब भी 16 साल का बच्चा ही लगता था. कद काठी भी किसी बच्चे के जैसी ही थी.

"देख चंदर" ख़ान आगे को झुकते हुए बोला "सब कुच्छ साफ साफ बता दे अगर कुच्छ जानता है तो वरना ठाकुर साहब के खून के इल्ज़ाम में मैं तुझे ही फसाने वाला हूं. काफ़ी सबूत हैं मेरे पास"

"मुझे क्यूँ?" चंदर ने इशारे से पुछा. उसकी आँखों में ख़ौफ्फ साफ दिखाई दे रहा था.

"तेरे माँ बाप" ख़ान ने मुस्कुराते हुए कहा "गाओं में हर कोई जानता है के वो ठाकुर की गोली का ही निशाना बने थे"

"वो जलकर मरे थे" चंदर ने काग़ज़ पर लिखा.

"मरे तो ठाकुर की वजह से ही थे ना. पूरे गाओं के ये बात पता है तो तुझसे बेहतर कौन हो सकता है जिसके पास ठाकुर को मारने की वजह हो? अपने मरे हुए माँ बाप का बदला लेने की खातिर घर के नौकर ने मालिक का खून कर दिया, हर कोई मान लेगा"

"मुझे देख कर आपको लगता है के कोई भी ये कहेगा के मैं किसी का खून कर सकता हूँ?" चंदर ने भी काग़ज़ पर लिखा. उसका इशारा अपने अपाहिज होने की तरफ था.

"तुझे देख कर तो बेहेन्चोद कोई ये भी नही कह सकता के तू अपनी माँ के जैसी औरत को चोद रहा है. उस औरत को जिसने तुझे माँ बनकर पाला" ख़ान ने सीधा वार किया.

चंदर के चेहरे का रंग साफ तौर पर उड़ गया. हैरत से उसकी आँखें फेल्ती चली गयी.

"किसने बताया आपको?" उसने इशारा किया

"बिंदिया और उसी ने मुझे बताया के तेरे माँ बाप को ठाकुर ने मारा था" ख़ान झूठ बोल गया और उसका झूठ काम कर गया.

"साली कुतिया" चंदर जैसे फॅट पड़ा और काग़ज़ पर ऐसे लिखने लगा जैसे एग्ज़ॅम में बैठा पेपर दे रहा हो और टाइम ख्तम होने वाला हो "मैने नही चोदा था उसको, मैं तो बच्चा था उस वक़्त. खुद आई थी मेरे पास. और फिर साली हवेली में जाकर ठाकुर से भी चुदी और खुद तो क्या अपनी बेटी को भी ठाकुर से चुदवा दिया"

और अगले ही पल चंदर को एहसाह हो गया के वो गुस्से में बहुत ज़्यादा कह गया गया.

"पायल?" ख़ान ने सवालिया अंदाज़ में उसकी तरफ देखा.

चंदर चुप रहा. ख़ान ने अपना सवाल फिर दोहराया पर चंदर ने फिर भी कोई हरकत नही की.

"शर्मा" ख़ान ने ऊँची आवाज़ में कहा "अंदर डाल दे इस साले को और चार्ज शीट बना ठाकुर साहब के खून के इल्ज़ाम में"

"हां साहब" चंदर ने फ़ौरन फिर से कलम पकड़ लिया "ठाकुर माँ बेटी दोनो को चोद्ता था. पहले बिंदिया को चोद रहा था और फिर जब उसकी नज़र जवान होती पायल पर पड़ी तो माँ ने खुद अपनी बेटी को उसके बिस्तर तक पहुँचा दिया. और आपको क्या पता साहब, साली ने ठाकुर पर एक जवान बच्ची घर में काम करने वाली लड़की को चोदने का दबाव डालकर थोड़ी प्रॉपर्टी भी पायल के नाम करा दी थी. हर रात पायल चाइ की ट्रे लेकर ठाकुर के कमरे में चुदने जाया करती थी और उस वक़्त उसकी माँ बाहर खड़ी पहरा देती थी. अगर किसी ने ठाकुर को मारा है साहब तो उन माँ बेटी ने ही मारा है"

ख़ान की आँखें चमक उठी. यानी बिंदिया प्रॉपर्टी में पायल के हिस्से के बारे में जानती थी और चंदर को भी ये बात बताई थी.

और ठाकुर, उस रात शर्तिया उसके साथ पायल ही सोई थी.

चंदर के जाने के बाद ख़ान ने सेंट्रल जैल फोन मिलाया.

"तुम्हारी गाड़ी कहाँ है?" जै फोन पर आया तो उसने पुछा

"आप भूल रहे हो ख़ान साहब के उस रात के बाद मैं सिर्फ़ पोलीस की गाड़ियों में घूम रहा हूँ. मेरी गाड़ी तो वहीं हवेली के बाहर ही खड़ी है"

"तुम्हें नही लगता के तुम्हें पुरुषोत्तम, पायल और कामिनी से भी बात करनी चाहिए?" किरण ने ख़ान से कहा. वो दोनो फोन पर बात कर रहे थे.

"नही उससे खेल बिगड़ सकता है. उनके खिलफ़्फ़ मेरे पास कुच्छ भी नही जिसको लेकर मैं उनपर दबाव डाल सकूँ और सीधा सीधा बात करने गया तो दबाव मेरे उपेर आएगा के मैं जल्द से जल्द केस ख़तम करूँ"

"ह्म्‍म्म्ममम" किरण बोली "तो किस पर शक है तुम्हें?"

ख़ान आराम से अपने बिस्तर में घुस कर लेट गया. रात के 11 बज रहे थे और अब ये उसका रोज़ का रुटीन था के सोने से पहले 2 घंटे कम से कम वो किरण से बात करता था. वो चंदर के साथ हुई बात के बारे में सब किरण को बता चुका था.

"इस वक़्त तो देखो सब पर है बट इट प्रेटी मच कम्ज़ डाउन टू दीज़ पीपल.

1. पुरुषोत्तम - इसके पास वजह है. अपनी माँ के साथ जो कुच्छ हुआ था वो देख कर इसने ठाकुर से कई साल तक बात नही की. वसीयत ठाकुर बदल रहा था और ऐसा बिल्कुल हो सकता है के पुरुषोत्तम को लगा हो के उसका नाम हटा दिया जाएगा. मौका उस वक़्त सही मिला हो तो इसने खून किया हो सकता है.

2. कुलदीप - घर की नौकरानी के साथ प्यार था और उससे शादी करना चाहता था. ठाकुर ऐसा बिल्कुल ना होने देता. और दूसरे उससे बड़ी बात ये के अगर इसको ये पता है के इसका बाप इसकी प्रेमिका के साथ सो रहा था तो गुस्से में ये सोच कर के ठाकुर ने बेचारी नौकरानी के साथ ज़बरदस्ती की इसने ये काम किया हो सकता है.

3. कामिनी - इंदर से प्यार करती है और भाग जाना चाहती थी. बाप ऐसा होने नही दे रहा था और आइ आम शुवर वो जानती थी के वो भाग कर कहीं भी जाए, ठाकुर जैसा दबंग और रसूख वाला आदमी इसको ढूँढ कर वापिस ज़रूर लाएगा. इंदर के साथ मिल कर इसने ये काम किया हो सकता है.

4. इंदर - वही वजह जो कामिनी के पास थी. प्रेमिका के साथ मिलकर उसके बाप का खून एक आसान रास्ता लगा हो सकता है इसे.

5. बिंदिया - ये चंदर कहता है के इसकी मर्ज़ी से पायल ठाकुर के साथ सो रही थी पर क्या अगर ये हुआ होता के इसको पता ही नही था के ठाकुर इसकी बेटी के साथ सो रहा है? क्या ये गुस्से में ऐसा कर सकती है? मैं इससे पुछ्ना चाहता था पर फिर मैने सोचा के कौन माँ इस बात पर हामी भर देगी के उसने अपनी मर्ज़ी से अपनी बेटी को अपने आशिक़ के बिस्तर पर पहुँचा दिया? ये तो ऑफ कोर्स मना ही करेगी.

6. चंदर - ठाकुर ने इसके माँ बाप को मारा, फिर उस औरत के साथ सोया जिसके साथ ये बचपन से सो रहा था. इससे ज़्यादा वजह क्या हो सकती है?

7. पायल - कुलदीप से शादी करना चाह रही थी पर ठाकुर के साथ भी सो रही थी. इसकी लाइफ में कॉंप्लिकेशन्स बहुत ज़्यादा थे और छुटकारा पाने के आसान रास्ता, ठाकुर का खून.

8. रूपाली - इसके पास सीधी वजह कोई नही है पर थियरीस में सबसे ज़्यादा इसी के पास हैं. अपने भाई की शादी के लिए खून किया हो सकता है, अपने पति की जायदाद के लिए किया हो सकता है और सबसे बड़ी बात, ठाकुर थर्कि था तो हो सकता है के अपनी बहू पर लाइन मारी हो जिसका नतीजा ये निकला.

"ह्म्‍म्म्मम" किरण समझते हुए बोली "और इन सब थियरीस के पिछे की थियरी?"

"गुलाबी सूट" ख़ान ने कहा

"गुलाबी सूट?"

"हां. 2 जोड़ी एक गुलाबी सूट जो एक दूसरे के जैसे ही दिखते हैं. एक रूपाली के पास था जो की उसने पायल को दिया था और दूसरा कामिनी के पास"

"ओके आंड वॉट अबौट इट?"

"पुरुषोत्तम को तो पता होगा ही के उसके बीवी के पास गुलाबी सूट है. उसने उस रात एक लड़की को उस सूट में ठाकुर के कमरे से बाहर आते देखा. सोचो अगर उसको ये लगा हो के कमरे से बाहर आने वाली उसकी बीवी थी"

"तो उसने अपने बाप को मारा हो सकता है" किरण समझते हुए बोली

"सोचो उस सूट में अगर कुलदीप ने पायल को कमरे से बाहर आते देखा हो?"

"ह्म्‍म्म लॉजिक है" किरण बोली "सो वाट्स नेक्स्ट?"

"मुझे एक आखरी चीज़ें पता करनी हैं. एक तो ठाकुर का बाथरूम आखरी बार देखना है और दूसरा पता करना है के हवेली में मौजूद 2 प्रेमी जोड़ो में से किसी ने शादी तो नही कर रखी"

"उससे क्या होगा?"

"अगर शादी ऑलरेडी कर रखी है तो डेस्परेशन में खून किए होने की वजह काफ़ी मज़बूत हो जाती है. अगर कुलदीप और पायल ने शादी कर रखी थी तो प्रॉपर्टी के लालच में दोनो माँ बेटी किसी ने भी खून किया हो सकता है. अगर इंदर और कामिनी ने शादी कर रखी थी और ठाकुर को ये बात पता लग गयी हो तो शायद उनमें से किसी ने कर दिया हो"

"और ठाकुर के बाथरूम में क्या देखने जा रहे हो?"

"बाथरूम का भी एक फंडा है. बताऊँगा बाद में" ख़ान हस पड़ा

"ओके" किरण हस्ते हुए बोली "अब खून और खूनियों को छ्चोड़कर हम अपने बारे में भी कुच्छ बात कर लें?"

"जी बिल्कुल" ख़ान ने फ़ौरन हामी भरी "आक्च्युयली मैं शर्मा के बारे में सोच रहा था. कम्बख़्त को सुबह शहर भेजा था मॅरेज ब्यूरो में पता करने के लिए और अब तक लौटके नही आया. फोन ट्राइ कर रहा हूँ पर वो भी नही लग रहा"

और अगले दिन सुबह जब ख़ान की आँख खुली तो उसके अपने सवाल का जवाब मिल गया. फोन बजा तो वो नींद से जगा. रिसीव किया तो हेडक्वॉर्टर्स से कॉल थी.

खबर शर्मा की मौत की थी.

उसकी लाश शहर में एक गार्डेन में मिली थी.

उसने अपने आपको गोली मारकर स्यूयिसाइड किया था.

शर्मा की मौत को एक हफ़्ता हो चुका थे और पोस्ट मॉर्टेम के बाद उसका क्रिया-करम भी किया जा चुका था. पोलीस ने उस केस को ख़ान के लाख हाथ पावं मारने पर भी स्यूयिसाइड मानकर बंद कर दिया था.

जै के केस की पहली डेट आ चुकी थी. ख़ान के पास ना तो अब वक़्त था और ना ही कोई ऐसा सुराग जिससे वो शर्तिया तौर पर किसी को अरेस्ट कर सके. सस्पेक्ट तो बहुत थे पर पुख़्ता तौर पर ये नही कहा जा सकता था के खून किसने किया.

इस पूरी पहेली में उसके पास एक आखरी सुराग ही बचा था और उसी की आस पर वो सुबह सुबह हवेली जा पहुँचा.

"इसन्त इट ए लिट्ल अर्ली टू विज़िट सम्वन?" पुरुषोत्तम के उसको देखते हुए कहा

"आइ आम नोट हियर टू विज़िट एनिवन" ख़ान उस वक़्त किसी ठाकुर के दबाव में आने के बिल्कुल मूड में नही था. शर्मा की मौत का उसको बहुत सख़्त अफ़सोस था.

"देन वाइ आर यू हियर?"

"इन्वेस्टिगेटिंग ए मर्डर" ख़ान ने सख़्त आवाज़ में जवाब दिया "युवर फादर'स मर्डर"

"मुझे समझ नही आता के खूनी ऑलरेडी पोलीस की हिरासत में है तो इस तरह से हमें परेशान करने का क्या मतलब बनता है?"

और ख़ान के सबर का बाँध जैसे टूट गया.

"लिसन" वो आगे बढ़ता हुआ पुरुषोत्तम के इतना करीब होकर खड़ा हो गया के दोनो एक दूसरे की साँस अपने चेहरे पर महसूस कर सकते थे "कोई तब तक खूनी नही है जब तक के अदालत का फ़ैसला नही आ जाता और अदालत के फ़ैसला सुनने में अभी काफ़ी वक़्त बाकी है. जब तक ऐसा हो, मुझे अपने काम करने दें"

अचानक दोनो के बीच एक तनाव सा आ गया. लग रहा था के कोई एक बस हाथ उठाने वाला ही है.

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:29 PM,
#48
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --50

गतान्क से आगे........................

"कुच्छ लेंगे आप?" बीच में एक औरत की आवाज़ आई तो दोनो ने अपनी नज़र एक दूसरे से हटाई. ख़ान ने पलटकर आवाज़ की तरफ देखा. वो रूपाली थी.

"कुच्छ चाइ वगेरह?" रूपाली ने पुछा. उसके चेहरे की मुस्कुराहट को देख कर ही लग रहा था के बस वो माहौल को नॉर्मल करना चाह रही थी.

"जी नही" ख़ान ने कहा "मुझे बस एक बार ठाकुर साहब का कमरा देखना है"

"प्लीज़ फॉलो मी" रूपाली ने कहा और ख़ान को रास्ता दिखाती आगे आगे चल पड़ी.

कुच्छ देर बाद ही दोनो ठाकुर के कमरे में खड़े थे.

ख़ान चलता हुआ कमरे के बीच पहुँचा और चारो तरफ का जायज़ा लेने लगा.

"आपको ऐसा क्यूँ लगता है के जै ने खून नही किया" रूपाली ने पुछा. वो वहीं खड़ी ख़ान को देख रहे थे.

"आइ हॅव माइ रीज़न्स" ख़ान ने जवाब दिया और चलता हुआ खिड़की तक पहुँचा.

"आप ने बताया के आप उस शाम कपड़े उतारने के लिए हवेली के पिछे आई थी" वो रूपाली की तरफ घूमते हुए बोला

"जी हां" रूपाली ने जवाब दिया

"क्या कपड़े वहाँ सूख रहे थे?" ख़ान ने खुली खिड़की से बाहर की तरफ इशारा किया. कुच्छ दूर पर दो डॅंडो पर एक तार बँधा हुआ था.

"जी हां" रूपाली ने जवाब दिया.

"क्या आपको याद है के उस रात जब आप आई तो खिड़की खुली थी या बंद?"

"खुली हुई थी" रूपाली ने कहा

"मतलब अगर आप वहाँ उस तार के पास खड़ी थी और खिड़की खुली थी तो ये मुमकिन है के आपको कमरे के अंदर नज़र आया हो?" ख़ान ने सवाल किया

"अगर मेरी नज़र कमरे की तरफ होती तो शायद दिखाई दे सकता था"

"मतलब आपकी नज़र कमरे की खिड़की की तरफ नही थी?"

"जी नही" रूपाली ने जवाब दिया

"कमाल हैं. इतनी रात को आप वहाँ से कपड़े उतार रही थी तो अंधेरे में आपकी नज़र किस तरफ हो सकती थी?" ख़ान फिर खिड़की से बाहर झाँकता हुआ बोला

"किसी तरफ भी थी पर मैं कमरे के अंदर नही झाँक रही थी" रूपाली ने फ़ौरन जवाब दिया

ख़ान मुस्कुराता हुआ पलटकर उसकी तरफ आया.

"तो मतलब आपने कमरे के अंदर देखा था? या यूँ कहूँ के झाँका था?"

"मैने ऐसा कुच्छ नही किया था"

"आप बहुत अच्छी तरह से जानती है के मैं क्या पुच्छना चाह रहा हूँ" ख़ान अब भी मुस्कुरा रहा था.

"आइ हॅव नो आइडिया" रूपाली ने मुँह दूसरी तरफ फेर लिए

"देखिए जो बात आप बताना नही चाह रही हैं वो पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट में साफ आ चुकी है. मैं सिर्फ़ आपसे कन्फर्मेशन माँग रहा हूँ"

"जब बात पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट में आ चुकी है तो मेरी कन्फर्मेशन से क्या फायडा?" रूपाली के चेहरे पर गुस्सा नज़र आने लगा था

"पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट ग़लत भी हो सकती है" ख़ान ने जवाब दिया "पायल, राइट?"

रूपाली चुप रही. पर उसकी चुप्पी में ही उसका इकरार भी छुपा हुआ था.

"आप जानती हैं ना के आपका देवर प्यार करता है उससे, शादी करना चाहता है. घर की नौकरानी को आपकी देवरानी बना चाहता है?"

और इस बात ने काम कर दिया.

"बकवास कर रहे हैं आप" रूपाली पलटकर बोली

"आप पुच्छ लीजिए उससे" ख़ान ने कहा

"ज़रा सोचिए, घर की नौकरानी, एक लड़की जो आपके ससुर के साथ ..... अगर वो इस हवेली की छ्होटी बहू बनेगी, आपकी देवरानी बनकर आपके साथ बैठेगी ......"

"क्या चाहते हैं आप?" रूपाली ने बात काटकर कहा

"कन्फर्मेशन" ख़ान ने भी सीधा ही जवाब दिया

"यस इट वाज़ पायल" रूपाली ने आख़िर मान ही लिया

"गुड. बस अब एक आखरी काम और कीजिएगा. प्लीज़ जब तक मैं ना कहूँ, अपने देवर से इस बारे में बात ना करें" ख़ान रूपाली को समझाता हुआ बोला

"क्यूँ?

"आपके क्यूँ का भी जवाब दे दूँगा. प्लीज़ बस फिलहाल मेरी बात मान लीजिए"

"ओके. कितने दिन तक?" रूपाली ने सवाल किया

"सिर्फ़ 2-3 दिन"

"ओके. मैं चुप रहूंगी फिलहाल, पर सिर्फ़ 3 दिन तक"

"डन. थॅंक यू" ख़ान ने कहा

"अरे यू डन हियर? देख लिया आपने जो देखने आए थे?"

"बस एक आखरी चीज़" कहता हुआ ख़ान बाथरूम की तरफ बढ़ गया.

रूपाली भी हैरत में उसको देखती बाथरूम के दरवाज़े के पास आकर खड़ी हो गयी. ख़ान सामने बने सींक को गौर से एक देख रहा था. फिर उसने अपनी जेब से एक लेंस निकाला और सींक को देखने लगा.

"क्या देख रहे हैं?" रूपाली ने सवाल किया पर ख़ान ने जवाब नही दिया. वो बड़ी देर तक कभी सींक और कभी नीचे फ्लोर पर कुच्छ ढूंढता रहा.

"इफ़ यू डोंट माइंड" कहते हुए थोड़ी देर के लिए बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया.

रूपाली को कुच्छ भी समझ नही आ रहा था. तकरीबन 2 मिनट बाद ही ख़ान ने दरवाज़ा खोला और बाहर आ गया.

"नाउ आइ आम डन. थॅंक यू"

जब वो हवेली से निकला तो तस्वीर पूरी तरह सॉफ हो चुकी थी. तस्वीर का हर टुकड़ा अपनी जगह पर आकर फिट हो गया था. उसने अपना सेल निकाल कर पोलीस स्टेशन का नंबर मिलाया.

"थाने में कितने लोग हैं अभी?"

"6 पूरे हैं सर" दूसरे तरफ से एक कॉन्स्टेबल की आवाज़ आई.

"एक काम कर. हेडक्वॉर्टर फोन कर. बॅक अप मॅंगा. बोल के कम से कम 10 आदमी चाहिए और. फ़ौरन"

हवेली के बाहर पोलीस की 2 गाड़ियाँ खड़ी थी. 4 पोलिसेवाले बाहर गेट पर खड़े थे ताकि ना तो कोई अंदर से बाहर जा सके और ना ही कोई बाहर से अंदर आ सके.

अंदर हवेली में सबका पारा चढ़ा हुआ था.

"तू गया इनस्पेक्टर" पुरुषोत्तम बोला "यू हियर मे? तू गया. पहले तेरे जिस्म से तेरी तेरी वर्दी उतरेगी और उसके बाद तेरी खाल. कुत्ते की मौत मरेगा तू. आज तक हवेली के सामने से भी लोग गुज़रते तो अदब से सर झुका कर निकलते थे और तेरी इतनी हिम्मत के तू 15-16 पोलिसेवाले लेके हवेली के अंदर आ घुसा"

ख़ान चुप चाप खड़ा उसकी बात सुन रहा था.

"ये पोलिसेवाले कब तक अपने साथ घुमाएगा? तुझे लगता है के यहाँ हमारे राज में तू 15-16 पोलिसेवालो की मदद से बच जाएगा?" कुलदीप भी गुस्से से लाल था.

"नाउ यू नो वाइ आइ आस्क्ड फॉर सो मेनी कॉप्स? क्यूंकी मुझे पता था के ऐसा होगा" ख़ान अपने साथ खड़ी किरण से बोला. वो अपना नोट पॅड लिए जो हो रहा था सब लिख रही थी

"इमॅजिन के अभी इतना हल्ला मच रहा है. जब मैं बताऊँगा के मर्डरर कौन है और अरेस्ट करूँगा तब कितना बवाल मचेगा"

"यू मीन दा मर्डरर ईज़ हियर नाउ, हवेली में है इस वक़्त?" किरण ने पुछा तो ख़ान ने हां में सर हिला दिया.

"क्या मतलब के मर्डरर यहाँ है?" इस बार रूपाली बोली "हम सब जानते हैं के खून जै ने किया है और वो इस वक़्त जैल में है"

"जानते नही मानते हैं मिसेज़. रूपाली सिंग ठाकुर" ख़ान ने बोलना शुरू किया "जै ने खून किया ऐसा सब मानते हैं और सच कहूँ तो एक पल के लिए मैने भी ये बात मान ही ली थी क्यूंकी जिस तरह से वो पकड़ा गया, उससे कोई बच्चा भी यही कहता के खून जै ने किया है"

"कमाल हैं" इस बार इंदर बोला "बच्चे भी आपसे ज़्यादा समझदार हैं"

"कौन कितना समझदार है अभी पता चल जाएगा मिस्टर. राणा. इस वक़्त मैं रिक्वेस्ट करूँगा के हवेली के सब लोग प्लीज़ ड्रॉयिंग रूम में आ जाएँ"

ख़ान ने कह तो दिया पर कोई अपनी जगह से हिला नही.

"और मैं ये भी रिक्वेस्ट करूँगा के ये काम जितना बिना ज़ोर ज़बरदस्ती के हो जाए उतना अच्छा है" उसने ड्रॉयिंग रूम में खड़े पोलिसेवालो की तरफ इशारा करते हुए कहा.

"इस सबका अंजाम जानते हो ना ख़ान?" पुरुषोत्तम बोला "डर नही लग रहा तुम्हें ये सोचके?"

"मैं सिर्फ़ उपेरवाले से डरता हूँ मिस्टर. ठाकुर" ख़ान ने कहा "अब प्लीज़ ......"

थोड़ी ही देर बाद हवेली के सब लोग ड्रॉयिंग हॉल में जमा थे.

"गुड" ख़ान ने लंबी साँस लेते हुए कहा "एवेरिवन ईज़ हियर"

"सो हू ईज़ थे मर्डरर?" किरण अपने पेन लिए तैय्यार खड़ी थी.

"बताऊँगा" ख़ान ने कहा "फर्स्ट, लेट्स गो ओवर दा हॅपनिंग्स ऑफ दट नाइट. उस रात हवेली में हर कोई मौजूद था, इस पूरे परिवार का हर मेंबर. उनके अलावा इंदर साहब भी यहाँ मौजूद जिनके यहाँ होने का मकसद कामिनी को लेकर उस रात भाग जाने का था"

"क्या?" पुरुषोत्तम फ़ौरन इंदर की तरफ पलटा

"भाई साहब मैं आपको बताने ही वाला था ....." इंदर ने कहना ही शुरू किया था के ख़ान ने बीच में बात काट दी.

"लेट्स स्टे फोकस्ड प्लीज़. आप अपने घरेलू मामले बाद में सुलझा सकते हैं"

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:29 PM,
#49
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --51

गतान्क से आगे........................

"इंदर चाहता तो उसे कामिनी को लेके भागने की कोई ज़रूरत नही थी. वो चाहता तो अपने घर वालो के ज़रिए बात आगे बढ़ा सकता था. बड़ी बहेन इस घर की बहू है, थोड़ी प्राब्लम होती पर बात शायद बन ही जाती. पर इंदर के पास कामिनी को लेकर भागने के सिवाय कोई चारा नही था क्यूंकी जो ठाकुर पहली ही इस शादी के खिलाफ थे, उनको अगर ये पता चल जाता के कामिनी ऑलरेडी 3 महीने की प्रेग्नेंट है, तो इंदर का क्या बनता ये कोई भी सोच सकता है"

जैसे एक बॉम्ब सा फोड़ दिया था ख़ान ने.

"थ्ट्स राइट मिस्टर. ठाकुर" वो पुरुषोत्तम से बोला "आपके पिता कामिनी और इंदर के रिश्ते के बारे में जानते थे और इस शादी के खिलाफ थे. और इंदर, अगली बार जब लड़की की प्रेग्नेन्सी रिपोर्ट्स दिखाने जाना हो तो प्लीज़ किसी फॅमिली डॉक्टर के पास मत जाना. तुम कामिनी की रिपोर्ट्स लेकर ठाकुर के फॅमिली डॉक्टर के पास पहुँचे थे जो कामिनी का तबसे इलाज कर रहा था जबसे वो एक छ्होटी बच्ची थी. वो उस रिपोर्ट को देख कर ही समझ गये थे के जो लड़की प्रेग्नेंट है, वो कामिनी थी"

इंदर हैरत से खड़ा देख रहा था.

"थ्ट्स राइट. डॉक्टर ने ही मुझे बताया था. नाउ मूविंग टू दा नेक्स्ट वन."

"म्र्स सरिता देवी ठाकुर" ख़ान व्हील चेर पर बैठी सरिता देवी की तरफ पलटा "आपको सीढ़ियों से धक्का दिया था ना आपके पति ने?"

ठकुराइन की आँखें हैरत से खुल गयी.

"यस आइ नो" ख़ान ने कहा "और ऐसा करते हुए उन्हें आपके बड़े बेटे ने देख लिया था जिसके चलते पुरुषोत्तम और ठाकुर साहब की उनके मरने तक कभी बात नही हुई. उपेर से पुरुषोत्तम ये बात जानते थे के ठाकुर साहब वसीयत बदलना चाहते थे क्यूंकी आपने अपने फॅमिली वकील से इस बारे में सवाल किया था"

आँखें खोलने की बारी पुरुषोत्तम की थी.

"थ्ट्स राइट, आइ नो दट टू. सो दट गिव्स यू ए पर्फेक्ट रीज़न टू किल यू फादर, डोएसन्थ इट? अपनी माँ का बदला और दौलत का लालच?"

पुरुषोत्तम गुस्से में ख़ान की तरफ बढ़े पर बीच में 2 पोलिसेवालो के आ जाने के कारण रुक गया.

"वाउ" नोट पेड़ में सब लिखती हुई किरण बोली.

"मिसेज़. रूपाली सिंग ठाकुर" ख़ान रूपाली की तरफ पलटा "भाई को अपनी ननद की प्रेग्नेन्सी रिपोर्ट लेकर फॅमिली डॉक्टर के पास ही भेज दिया?"

रूपाली के मुँह से बोल ना फूटा.

"थ्ट्स राइट. ये भी बताया मुझे डॉक्टर ने के जिस दिन इंदर वो रिपोर्ट लेकर उनके पास पहुँचा था, उस दिन सुबह सुबह आपने फोन करके डॉक्टर से अपने लिए अपायंटमेंट ली थी पर उस वक़्त डॉक्टर से मिलने आप नही आपका भाई पहुचा"

सबकी नज़र रूपाली की तरफ ही थी.

"अपने भाई को आपने हर मुसीबत से हमेशा बचाया. एक बड़ी बहेन का रोल बखूबी निभाया. पर मैं ये डिसाइड नही कर पा रहा था के क्या आप मर्डर जैसा बड़ा काम भी अपने भाई को बचाने के लिए अंजान दे सकती हैं? पर फिर मेरी कल्लो से बात हुई और उसने काफ़ी कुच्छ बताया जिससे मुझे यकीन हो गया के ऐसा करने का दिमाग़ भी आप में है और हिम्मत भी"

रूपाली की नज़र अब नीचे झुक चुकी थी. ख़ान ने इस बारे में आगे और कुच्छ नही कहा.

"बिंदिया जी" अब बिंदिया की बारी थी "अजीब माँ हैं आप. दौलत के लालच में पहले खुद ठाकुर साहब के बिस्तर तक गयी और जब कामयाबी हाथ ना लगी तो अपनी बेटी को भी पहुँचा दिया?"

इस बात से झटका बिंदिया और पायल के साथ साथ कुलदीप को भी लगा.

"बेटी के नाम दौलत हो चुकी थी पर ठाकुर साहब वसीयत बदलना चाहते थे. डर तो लगा होगा आपको के कहीं बेटी का नाम वसीयत से निकाल ना दें? आपको और आपकी बेटी दोनो को लगा होना ने के वसीयत बदले, इससे पहले ही कोई कदम उठाया जाए?

किसी के मुँह से आवाज़ तक नही निकल रही थी. सिर्फ़ कुलदीप बोला.

"पायल?"

पायल कुच्छ कहने ही लगी थी के ख़ान ने इशारे से रोक दिया.

"कोई कुच्छ नही बोलेगा जब तक के मेरी बात पूरी ना हो जाए"

सब फिर चुप हो गये.

"कुलदीप जी" ख़ान कुलदीप की तरफ पलटा "वैसे पायल के बारे में मेरी बात सुनकर आपने ऐसा दिखाया है जैसे आपको बहुत सख़्त झटका लगा है पर अगर ये मान लिया जाए के आपको ये बात पहले पता लग गयी थी के आपके पिता आपकी महबूबा के साथ सो रहे हैं तो गुस्सा तो बहुत आया होगा आपको? ख़ास तौर से तब जबकि आप पायल से शादी करना चाहते थे और आपको पता था के आपके पिता इसकी खिलाफत करेंगे?"

कुलदीप ने बोलने के लिए मुँह खोला ही था के फिर ख़ान ने चुप रहने का इशारा किया.

"और चंदर, ज़ुबान से गूंगा पर दिल में बदले की पूरी पूरी भावना. ठाकुर साहब ने ही तेरे माँ बाप को मारा था ये बात तू जानता है. और जहाँ तक मेरा ख्याल है तेरा हवेली में घुसने का कारण भी बदला लेना ही था. और जब ये पता चला के बिंदिया भी ठाकुर के बिस्पर पर पहुँची चुकी थी, गुस्सा तो तुझे भी बहुत आया होगा?

चंदर तो वैसे ही गूंगा था. क्या बोलता, बस खामोशी से देखता रहा.

"तो ये है हवेली के सारे बागड बिल्ले जिनके पास खून करने की वजह भी थी और हिम्मत भी" ख़ान बोला

"तो किसने किया खून?" किरण ने फिर सवाल किया

"अब आते हैं उस शाम पर जब खून हुआ था" ख़ान ने जैसे उसका सवाल सुना ही नही "पर उससे पहले बात करते हैं एक सलवार कमीज़ की. हल्के गुलाबी रंग का एक सूट जो रूपाली जी अपने लिए लाई थी और बिल्कुल वैसा ही अपनी ननद और अपने भाई की माशूक़ा कामिनी के लिए भी लाई"

सब ख़ान को ऐसे देख रहे थे जैसे के उनके सामने भगवान खड़े हों जो सबके दिल की बात जानते थे.

"कामिनी के पास वो सूट अब तक है पर रूपाली जी आपने अपना सूट घर की नौकरानी पायल को दे दिया था, है ना?"

"तो अब उस रात की बात. शुरू से शुरू करते हैं.

1. क़त्ल की रात ठाकुर ने अपने कमरे में ही डिन्नर किया था. उनको अपने कमरे के बाहर आखरी बार 8 बजे देखा गया था, ड्रॉयिंग हॉल में टीवी देखते हुए.

2. 8:15 के करीब वो अपने कमरे में चले गये थे और उसके बाद उनकी नौकरानी पायल खाना देने कमरे में गयी.

3. 8:30 के आस पास नौकरानी ठाकुर के बुलाने पर वापिस उनके कमरे में पहुँची. ठाकुर ने ज़्यादा कुच्छ नही खाया था और उसको प्लेट्स ले जाने के लिए कहा. और जहाँ तक मेरा ख्याल है, तब ही ठाकुर साहब ने पायल को रोज़ की तरह आने का इशारा कर दिया था. एक ऐसा काम करने के लिए जो पायल और उसकी माँ बिंदिया दोनो ही उनके साथ करती थी. सब मेरा इशारा समझ गये होंगे.

4. थोड़ी ही देर बाद पायल चाई देने के बहाने फिर ठाकुर साहब के कमरे में पहुँची. चाई तो सिर्फ़ एक बहाना थी, असली काम तो कुच्छ और ही करना था जो की उस रात हुआ भी. यहाँ गौर तलब बात ये है के पायल ने रूपाली जी का दिया हुआ हल्के वो गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था.

4. इसके बाद 9 बजे के आस पास रूपाली जी आप कपड़े लेने के लिए हवेली की पिछे वाले हिस्से में गयी जहाँ ठाकुर के कमरे की खिड़की खुलती थी. उस रात खिड़की खुली हुई थी और आपने अंदर कमरे में क्या हो रहा है ये देख लिया था. सबसे ज़रूरी बात ये थी के आपने ये भी देख लिया था के ठाकुर साहब के कमरे की खिड़की खुली हुई है. आपके हिसाब से आप वो सब देख कर वापिस अपने कमरे में आ गयी थी पर अगर मैं कहूँ तो आपके पास पूरा मौका था के आप वापिस जाकर अपने ससुर का काम अंजाम दे सकती थी. ख़ास तौर से तब जबकि इसी दौरान थोड़ी देर के लिए लाइट चली गई थी. यू हॅड दा पर्फेक्ट कवर. घुप अंधेरे में आप आसानी से खिड़की के ज़रिए कमरे में घुस सकती थी. एक झटके से आपके पति का वसीयत से बाहर हो जाने का डर और अपने भाई के लिए शादी ना होने का डर, दोनो ही एक झटके में ख़तम किए जा सकते थे"

"बकवास" इस बार रूपाली चिल्ला उठी.

"रिलॅक्स" ख़ान हस्ते हुए बोला "आइ आम जस्ट एक्सप्लेनिंग दा फॅक्ट्स.

5. जब लाइट गयी हुई थी ठीक उसी वक़्त हवेली में दाखिल हुए पुरुषोत्तम जी आप. आपने खुद बताया था के आप नहर के किनारे गये थे और जहाँ तक मेरा ख्याल है, शराब के नशे में वापिस आए थे क्यूंकी जिस जगह आपने बताया के आप बैठे थे, वहाँ से हमें बियर की काफ़ी बॉटल्स हासिल हुई हैं. आप हवेली में दाखिल हुए और अपने कमरे की तरफ जा ही रहे थे के ठीक उसी वक़्त आपके पिता के कमरे का दरवाज़ा खुला और हल्के गुलाबी रंग के सूट में एक लड़की बाहर आई. वो क्या करके आई थी ये बात आप जानते थे और बहुत मुमकिन है के आपने सोचा हो के बाहर आने वाली आपकी अपनी बीवी है. गुस्सा तो बहुत आया होगा"

पुरुषोत्तम सब भूल कर आगे बढ़ा और ख़ान का गिरेबान पकड़ लिया. फ़ौरन कुच्छ पोलीस वालो ने आगे बढ़कर उसको पकड़ा और ख़ान का गिरेबान छुड़ाया.

"रिलॅक्स" ख़ान आगे को झुका और पुरुषोत्तम के कान में हल्के से बोला "एज आइ सेड, आइ आम जस्ट एक्सप्लेनिंग दा फॅक्ट्स. और जिस तरह से आपने रिक्ट किया है, उससे ये तो साबित हो गया के जो मैने कहा वो सच है. यही लगा था आपको के आपकी बीवी ठाकुर के कमरे से बाहर आई है, वो बीवी जो बिस्तर पर आपसे खुश नही थी"

पुरुषोत्तम के चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था.

क्रमशः........................................
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07-01-2018, 12:29 PM,
#50
RE: Hindi Sex Porn खूनी हवेली की वासना
खूनी हवेली की वासना पार्ट --52

गतान्क से आगे........................

6. और ठीक उसी टाइम, इंदर जी आप नीचे आए. चारो तरफ अंधेरा था इसलिए आपने तो पुरुषोत्तम जी को वहाँ खड़े देख लिया पर वो आपको नही देख पाए. आपने देखा के लाइट गयी हुई है और ठाकुर के कमरे के बाहर एक लड़की खड़ी है जो की आपको लगा के कामिनी है. बस आप ज़रा ग़लती यहाँ कर बैठे के आपने सोचा लड़की कमरे में जा रही है जबकि लड़की कमरे से बाहर आई थी. आपने भी वही देखा जो पुरुषोत्तम साहब ने देखा. एक लड़की ऐसी हालत में के कोई भी देख कर कह देगा के वो अंदर क्या करके आई है. अब जबकि आप सोच रहे थे के लड़की कामिनी है, तो जो आपने देखा वो देख कर आप पर क्या बीती होगी वो मैं बस सोच ही सकता हूँ. एक बाप और बेटी के बीच ऐसा रिश्ता, छ्हि छ्हि छ्हि ... गुस्सा तो बहुत आया होगा, नही?"

"आप अपनो हद से बाहर जा रहे हैं" अब तक खामोश बैठी कामिनी बोली

"अपनी औकात में रह ख़ान" पुरुषोत्तम चिल्लाया

"शट अप" ख़ान उससे भी ऊँची आवाज़ में चिल्लाया और कमरे में फिर खामोशी च्छा गयी.

" 7. खैर. कुच्छ देर बाद ही लाइट आ गई. उसके बाद तकरीबन 9.30 बजे तेज ठाकुर अपने बाप के कमरे में उनसे बात करने पहुँचे थे" ख़ान ने बात जारी रखी "वो वसीयत को लेकर झगड़ा करने गये थे. कुच्छ कहा सुनी हुई और इससे पहले के बात आगे बढ़ती, सरिता देवी अपने पति के कमरे में आ पहुँची और तेज ठाकुर गुस्से में पावं पटकते चले गये.

8. 9:40 के करीब सरिता देवी अपने पति के कमरे में पहुँची. उनके आने के बाद ही तेज ठाकुर उनके कहने पर वहाँ गये थे.

9. 9:45 के करीब ठाकुर ने भूषण को बुलाकर गाड़ी निकालने को कहा. कहाँ जाना था ये नही बताया और खुद सरिता देवी भी ये नही जानती थी के उनके पति कहाँ जा रहे हैं.

10. 10:00 बजे के करीब भूषण वापिस ठाकुर के कमरे में चाबी लेने गया. ठाकुर उस वक़्त कमरे में अकेले थे और सरिता देवी बाहर कॉरिडर में बैठी थी.

11. 10:00 के करीब ही जब भूषण ठाकुर के कमरे से बाहर निकला तो पायल कमरे में गयी ये पुच्छने के लिए के ठाकुर को और कुच्छ तो नही चाहिए था. पायल के हिसाब से ठाकुर ने उसको मना कर दिया और वो ऐसे ही बाहर आ गयी. पर ये एक पर्फेक्ट मौका था पायल या बिंदिया दोनो के लिए के ठाकुर साहब का काम तमाम करें. दौलत का जो हिस्सा इतनी मुश्किल से हाथ लगा था, वो अपने नाम ही रहता.

12. चंदर, बेटे तू कहता है के तू हवेली के गेट पर था पर जै के आने से पहले तुझे वहाँ किसी ने नही देखा था. गेट से घूमकर हवेली के पिछे की तरफ आना, ठाकुर साहब का खून करना और वापिस गेट पर पहुँच जाना, ज़्यादा मुश्किल और टाइम खपाने वाला काम नही था.

13. 10:05 के करीब जब भूषण कार पार्किंग की और जा रहा था तब उसने और ठकुराइन ने जै को हवेली में दाखिल होते हुए देखा.

14. 10:15 पर जब पायल किचन बंद करके अपने कमरे की ओर जा रही थी तब उसने ठाकुर के कमरे से जै को बाहर निकलते देखा. वो पूरा खून में सना हुआ था जिसके बाद उसने चीख मारी.

15. उसकी चीख की आवाज़ सुनकर जै को समझ नही आया के क्या करे. वो पायल को बताने लगा के अंदर ठाकुर साहब ज़ख़्मी हैं और इसी वक़्त पुरुषोत्तम और तेज आ गये. जब उन्होने जै को खून में सना देखा और अपने बाप को अंदर नीचे ज़मीन पर पड़ा देखा तो वो जै को मारने लगे.

16. जै भागकर किचन में घुस गया और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया.

17. 10:45 के करीब मुझे फोन आया था के ठाकुर का खून हो गया है जिसके बाद मैं हवेली पहुँचा."

बात पूरी करके ख़ान चुप हो गया.

"ओके" किरण बोली "थ्ट्स वेल एक्सप्लेंड. बट दा क्वेस्चन ईज़ स्टिल दा सेम. खून किया किसने था? विच वन ईज़ दा मर्डरर?

"दट वन" ख़ान ने अपनी अंगुली ड्रॉयिंग हॉल में मौजूद एक इंसान की तरफ उठाई "देर ईज़ अवर मर्डरर, दा वन हू किल्ड ठाकुर"

"इस सारे किस्से में सबसे गौर तलब बात ये है के हर किसी की गवाही किसी ना किसी ने दी है और ठाकुर साहब को उनकी मौत से 10 में पहले तक किसी ने ज़िंदा देखा था, मतलब के खून 10 मिनट में हुआ था. इसी बात ने मुझे सबसे ज़्यादा उलझा रखा था पर आक्च्युयली यही बात सबसे बड़ा क्लू थी" ख़ान ने समझाना शुरू किया

1. सरिता देवी - पूरी शाम अपने कमरे में थी. हर रात सोने से पहले अपने पति के कमरे में जाती थी और थोड़ी देर बात करके वापिस अपने कमरे में ही आकर सो जाती थी. उस रात भी ठाकुर साहब के कमरे में पहुँची और तकरीबन 10 बजे तक रही. इस बात की गवाही घर के 2 नौकर दे सकते हैं. पहले बिंदिया जो ठकुराइन की व्हील चेर को धकेल कर यहाँ से वहाँ ले जाती है. वो ही ठकुराइन को व्हील चेर पर बैठाती और उतारती है. उसने उस रात ठकुराइन को कमरे से ठाकुर के कमरे तक छ्चोड़ा और करीब 15-20 मिनट बाद कमरे से बाहर लाकर कॉरिडर में छ्चोड़ा. दूसरी गवाही भूषण दे सकता है जिसने ठकुराइन को पहले ठाकुर के कमरे में बात करते देखा और फिर बाद में कॉरिडर में बैठे देखा. इस पूरे वक़्त के दौरान ठाकुर साहब ज़िंदा थे.

2. पुरुषोत्तम सिंग - शाम को तकरीबन 6 बजे घर वापिस आए थे. अपने कमरे में गया और रात 8 बजे तक वहीं रहा. उसके बाद वो ऐसे ही थोड़ा घूमने के लिए बाहर निकला, शराब की दुकान से शराब खरीदी, नहर के किनारे बैठ कर पी और 9 बजे के करीब घर वापिस आए. पर इनके अपने कमरे में जाने के बाद भी ठाकुर साहब को ज़िंदा देखा गया था. इनके कमरे में होने की गवाही इनकी बीवी दे सकती हैं.

3. कुलदीप सिंग - इनकी गवाही इनकी बहेन दे सकती हैं जिन्होने इनको कमरे में देखा था. इनके कमरे में होने के वक़्त और बाद में भी ठाकुर साहब ज़िंदा थे.

5. कामिनी - इनकी गवाही इनके भाई देते हैं जिनके साथ ये खून होने के टाइम पर थी.

6. भूषण - रात 9 बजे वापिस अपने कमरे में पहुँचा. ठाकुर के बुलाने पर उनके कमरे में गया और फिर गाड़ी निकाली. इसकी गवाही ठकुराइन और खुद जै दे सकता है जिन्होने इसको खून के टाइम हवेली के बाहर खड़ा देखा.

7. बिंदिया - पूरा दिन ठकुराइन के साथ थी. बस क़त्ल के वक़्त अपने बेटी के साथ थी. इसकी गवाही इसकी बेटी दे सकती है.

8. पायल - बस एक आप मोह्तर्मा ही हैं जिनके बारे में ये कहा जा सकता है के आप ऐसा कर सकती हैं पर आपने ऐसा किया तो बाहर बैठी ठकुराइन को कुच्छ क्यूँ पता नही चला?

9. रूपाली - इनकी गवाही इनके पति देते हैं जिनके साथ ये खून होने के टाइम पर थी.

10. इंद्रासेन राणा - खून के वक़्त ये भी कमरे में ही थे. इसकी गवाही इनकी बहेन दे सकती हैं.

11. चंदर - जिस टाइम जै हवेली में दाखिल हुआ, ये गेट पर था और इसकी गवाही जै खुद दे सकता है.

ठाकुर साहब को आखरी बार ज़िंदा 3 लोगों ने देखा था, सरिता देवी, भूषण और पायल. पायल आखरी थी और भूषण ने उससे पहले पर इन दोनो ने ठाकुर साहब को सामने नही देखा था, सिर्फ़ बाथरूम में उनकी आवाज़ सुनी थी. वो बाथरूम में खड़े इनसे बात कर रहे थे.

"ओके" किरण बोली

"यही सोचकर मैने बाथरूम का जायज़ा लिया. थोड़ी सी अल्ट्रा वायिलेट लाइट डालने से ही वहाँ खून के धब्बे सॉफ दिखाई दे गये"

"आंड?" किरण बोली

"आंड ये के उनपर हमला पहले ही हो चुका था और वो बाथरूम में खड़े बहते खून को रोकने की कोशिश कर रहे थे. हमला करने वाला उनके अपने घर का था इसलिए शोर भी नही मचा सकते थे. बस खामोशी से भूषण को गाड़ी निकालने को कहा क्यूंकी वो डॉक्टर के पास जाना चाहते थे"

"ओह" भूषण बोला "उसको अपने सवाल का जवाब मिल गया के उस रात ठाकुर कहाँ जा रहे थे.

"उस रात ठाकुर साहब के कमरे से लड़की को निकलते देख पुरुषोत्तम जी ने सोचा के रूपाली हैं, इंदर को लगा के पायल है पर वही नज़ारा अगर एक माँ देखती तो उसको क्या लगता?"

कहता हुआ ख़ान ठीक सरिता देवी के सामने जा खड़ा हुआ.

"आपके पति आपके साथ नही सो सकते थे और दूसरी औरतों के साथ सो रहे थे ये बात आप जानती थी. पर उस रात जब पायल कमरे से निकली तो उसको 2 नही, 3 लोगों ने देखा था. पुरुषोत्तम ,इंदर और आपने. आपके गुस्से की अब इंतेहाँ नही रही जब आपको लगा के निकलने वाली आपकी अपनी बेटी है जो अपने बाप के साथ सोकर आई है. गुस्से में तपती आप ठाकुर साहब के कमरे में पहुँची. आपको आया देख तेज ठाकुर अपनी कमरे में चले गये. आप और ठाकुर साहब के बीच झगड़ा हुआ. गुस्से में आपके हाथ में स्क्रू ड्राइवर आ गया और आपने उसी से ठाकुर साहब पर हमला किया. मैं सिर्फ़ अंदाज़ा लगा सकता हूँ के उस वक़्त ठाकुर साहब आपकी व्हील चेर के नज़दीक ही थे इसलिए आप उनपर हमला कर सकी. स्क्रू ड्राइवर उनके सीने के अंदर पेवस्त हो गया और उस पतली सी चीज़ ने उनका लंग पंक्चर किया. ठाकुर साहब सेहतमंद आदमी थे इसलिए फ़ौरन गिरे नही. वो बाथरूम में गये और अपने ज़ख़्म च्छुपाने की कोशिश करने लगे क्यूंकी ये समझाने के लिए के उनकी पत्नी ने उनपर क्यूँ हमला किया उनको बहुत कुच्छ समझाना पड़ता. अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए वो चुप रहे और भूषण को कह कर जल्दी गाड़ी निकालने को कहा. और यही वो वक़्त था जब बिंदिया, पायल और भूषण ने ठाकुर साहब को बाथरूम से बात करते हुए सुना. बिंदिया आपको कमरे के बाहर छ्चोड़ गयी थी इसलिए सबको यही लगा के आपके बाहर आ जाने के बाद तक ठाकुर साहब ज़िंदा थे जो कि असल में वो थे भी पर ज़्यादा देर तक नही रहे. लंग पंक्चर होने की वजह से उनकी साँस ज़्यादा देर नही चली. ठीक उसी वक़्त जै वहाँ पहुँचा और उसको वो ज़मीन पर गिरे पड़े मिले. सबको लगा के खून उसने किया है पर हक़ीक़त तो ये है के वो जानलेवा वार आप 15 मिनट पहले ही करके आ गयी थी"

थोड़ी देर के लिए सब चुप रहे.

"आप सही कह रहे हैं" अब तक चुप चाप सब सुन रही ठकुराइन बोली.

सरिता देवी अपना इक़बाल-ए-जुर्म कर चुकी थी और जै को जैल से रिहा कर दिया गया था.

ख़ान को भी उस छ्होटे से गाओं से वापिस हेडक्वॉर्टर में ट्रान्स्फर करने के ऑर्डर्स आ गये थे.

मीडीया में उस केस को फिर से ज़बरदस्त तरीके से उछाला गया और ख़ान को उम्मीद से कहीं ज़्यादा वाह-वाही मिली.

गाओं में उसकी वो आखरी रात थी. समान वो सारा पॅक कर चुका था.

"ओके आइ विल लीव नाउ" किरण सारा दिन उसके साथी ही थी और समान पॅक करने में उसका हाथ बटा रही थी "आंड आइ विल पिक यू अप टुमॉरो अट 11"

"मत जाओ ना" ख़ान ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा "रात यहीं रुक जाओ. सुबह साथ ही चल लेंगे"

"यू नो आइ कॅंट डू दट" किरण धीरे से उसे नज़दीक आते हुए बोली

"वाइ नोट?"

"बिकॉज़ काम है मुझे कुच्छ" किरण मुस्कुराते हुए बोली

"शाम के 6 बज रहे हैं. घर पहुँचते पहुँचते तुम्हें कम से कम 9 बज जाएँगे. काम तो जो भी है वैसे ही पूरा नही होगा"

"वो तुम मुझपे छ्चोड़ दो. खाना ख़ाके सो जाना, मैं कल सुबह पिक करती हूँ"

किरण के जाने के बाद ख़ान के पास करने को ख़ास कुच्छ नही था. उसने स्टोव पर चाइ रखी और रेडियो ऑन किया. एक गाज़ल की आवाज़ कमरे में फेल गयी.

"पूरी होगी आपकी हर फरमाइश,

एक भी ना हमसे टाली जाएगी,

आ पड़ा है आशिक़ी से वास्ता,

अब तबीयत क्या संभाली जाएगी ....."

क्रमशः........................................

खूनी हवेली की वासना पार्ट --52
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