Incest Kahani Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी 1
10-12-2020, 01:02 PM,
#71
RE: Incest Kahani Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी
दो दो लंड लेते हुए रश्मि पांच मिनट से ज्यादा नहीं टिक पायी और उसकी चूत के गर्म गर्म पानी ने रमेश के लंड को भिगो दिया. अब रमेश का लंड पच-पच करता हुआ उसकी चूत में चोदने लगा.

रवि भी इस आवाज से और ज्यादा जोश में आ गया. वो रश्मि की गांड को फाड़ने लगा. कुछ ही देर में वो दोनों झड़ने के कगार पर पहुंच गये. रवि जोर जोर से उसकी चूचियों को मसलने लगा और उसके निप्पलों को काटने लगा.

इधर रमेश ने उसकी गांड को भींचना शुरू कर दिया. उसके हाथ पर कभी कभी रवि का लंड भी लग जाता था. दोनों रेल के इंजन की तरह आगे और पीछे से रश्मि की चूत और गांड को पेल रहे थे.

फिर दोनों जोर जोर से चीखते हुए झड़ने लगे- आह्हह … ओहह … हाहाहह … आहह्ह्ह … याह्हह … हम्म … हुह … करते हुए दोनों ने ही रश्मि के दोनों छेदों को आगे और पीछे से भर दिया.

उसके बाद तीनों थक कर लेट गये. किसी को होश नहीं रहा. आधे घंटे तक वो पड़े रहे.

उसके बाद रमेश ने फिर से रश्मि की चूत को उंगली से कुरेदना शुरू कर दिया. अब रवि भी शरारत करते हुए अपनी बेटी की गांड के छेद पर उंगली फिराने लगा.

रश्मि की गांड दुख रही थी. फिर भी वो बाप की उंगली का मजा गांड में ले रही थी. थोड़ी देर तीनों एक दूसरे के जिस्मों को सहलाते चाटते रहे और तीनों ही फिर से गर्म हो गये.

रवि उठा और उसने रश्मि के हाथ को खींच कर रश्मि को अपने साथ उठा लिया. उसने रश्मि को दीवार के सहारे लगा लिया और अपना लंड उसके हाथ में दिया. हाथ में लंड आते ही रश्मि उसकी मुठ मारने लगी. रवि उसके होंठों को पीने लगा.

ये देख कर रमेश से रहा न गया. वो उठ कर उन दोनों के पास गया. तब तक रवि ने आगे से रश्मि की चूत में अपना लंड दे दिया था. वो उसकी चूत को चोदने लगा. अब रमेश को जगह नहीं मिल रही थी.

फिर उसने रश्मि को आगे की ओर लाते हुए रमेश को दीवार की तरफ कर दिया. अब रवि की पीठ दीवार से सट गयी और रश्मि का मुंह रवि की तरफ हो गया. पीछे से रमेश ने रश्मि की गांड पर लंड लगा दिया और उसको अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा.

रमेश ने रश्मि को गांड थोड़ी ऊपर उठाने के लिए कहा. रश्मि ने वैसा ही किया और उसकी गांड अब रमेश के लंड के निशाने पर आ गयी. रमेश ने झटके से उसकी गांड में लंड घुसा दिया और उससे चिपक गया.
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10-12-2020, 01:02 PM,
#72
RE: Incest Kahani Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी
अब रवि के लंड के धक्कों के साथ रिदम बनाते हुए रमेश ने रश्मि की गांड की चुदाई शुरू कर दी. आगे से रश्मि रवि के लंड से अपनी चूत चुदवा रही थी और पीछे से रिया के बाप रमेश से अपनी गांड पिलवा रही थी.

दो दो लंड की मस्ती में आकर रश्मि ने खुद ही अपनी एक टांग ऊपर उठा ली. ऐसा करने से अब उसके दोनों ही छेदों में दो मर्दों के लंड ज्यादा अंदर तक जाने लगे. दीवार से लगे हुए रवि का लंड उसकी चूत में घुस कर उसको मजा दे रहा था और पीछे से रमेश का लंड उसकी गांड में मजा दे रहा था.

माहौल इतना कामुक हो गया कि तीनों के मुंह से जोर जोर की सिसकारियां निकलने लगीं.
रवि- आह्ह … फक यू … आह्ह … फाड़ दूंगा तेरी चूत को … ये ले साली रांड … और ले … आह्ह … ऐसे ही चुदती रह मेरे लंड से … तेरी चूत का भोसड़ा कर दूंगा आज मैं … आह्ह ले … और ले साली … रंडी बनने का शौक पूरा कर तू।

रमेश- हाय … रंडी … आह्ह … तेरी गांड … आह्ह् क्या गांड है साली … ऐसी गांड को तो मैं दिन रात चोदता रहूं … आह्हह ले ले पूरा लंड … अपनी गांड में साली … आह्ह चुद मेरे लंड से…. आहह्ह और चुद … लंडखोर रंडी … आह्ह ले चुद … और चुद।

रश्मि- आईई … अहाह … आहह … फक मी … और तेज डैडी. आह्हह रमेश अंकल मेरी गांड … आह्ह मेरी गांड … फाड़ दो मेरी गांड … ये आपका लंड खाना चाहती है … आह्ह … और जोर से चोदो … आह्ह और जोर से। चोद चोद कर फाड़ दो मुझे … मेरे चिथड़े कर दो … आहह्ह मुझे रंडी बना कर चोदो दोनों।

इतने गर्म माहौल में रश्मि ज्यादा देर टिक नहीं पाई और एक बार फिर से उसकी चूत से पानी का फव्वारा निकल पड़ा जिसने रवि के लंड को पूरा सराबोर कर दिया उसकी चूत के रस में।

अब रवि और रमेश भी दोनों झड़ने वाले थे.
रमेश- आआह … रंडी. मैं झड़ने वाला हूँ. नीचे बैठ कर जल्दी अपना मुंह खोल साली कुतिया।

अब रश्मि अपने घुटनों पर बैठ गयी और मुंह खोल कर रश्मि ने अपने होंठों को उन दोनों के लौड़ों के सामने कर दिया.
दोनों मर्द अपने हाथों से अपना-अपना लंड हिलाने लगे.
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10-12-2020, 01:02 PM,
#73
RE: Incest Kahani Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी
कुछ पल के बाद ही रमेश झड़ने लगा- आह्ह … आ गया … आह्ह आया … आह्हह ये ले … रंडी आह्हह … हाह्हह … ओह्ह … करते हुए रमेश ने अपना माल रश्मि के मुंह पर गिराना शुरू कर दिया. रश्मि ने सारा वीर्य अपने मुंह में ले लिया.

अब रवि भी झड़ने लगा और उसने एकदम से अपना लंड रश्मि के मुंह में दे दिया. उसके बालों से उसके सिर को खींच कर अपने लौड़े पर दबा दिया. तभी उसके बदन में झटके लगने लगे.

रवि के वीर्य की पिचकारी रश्मि के गले को भिगोते हुए उसके पेट तक जाने लगी. रश्मि ने अपने बाप का सारा वीर्य अंदर पेट में गटक लिया.
रमेश- साली सच में तू कड़क माल है।
रवि- हां, रिया से भी ज्यादा कड़क.

फिर तीनों आराम करने लगे. कुछ देर आराम करने के बाद रमेश और रवि फिर से रश्मि की चुदाई करने लगे.

इस बार रमेश जानबूझ कर रश्मि को जलील करते हुए पेलने लगा. वो जानता था कि रश्मि रवि की बेटी है और यही उसका मकसद था कि वो रवि की बेटी को रंडी बना कर उसके बाप के सामने ही पेले.

रात के 3 बजे तक दोनों ने पेल पेलकर रश्मि की चूत और गांड फैला दी.

अगले दिन रिया रश्मि से मिली और पूछने लगी- अपने डैड से चुदवा कर कैसा लगा?
रश्मि- क्या बोल रही है? मैं अपने डैड से क्यों चुदवाऊंगी?
रिया- मुझे मालूम है कि कल तुमको मेरे डैड और तुम्हारे डैड ने जी भर कर चोदा है. रतनलाल ने बताया था मुझे। चिंता मत करो। मैं किसी को नही बताऊंगी क्योंकि वो दोनों मुझे भी एक साथ चोद चुके हैं।

रश्मि- क्या मेरे डैड को मालूम है कि तुम उनके दोस्त रमेश की बेटी हो। रिया- नहीं। तुम्हारे डैड को मालूम नहीं लेकिन मेरे डैड को मालूम है कि तुम उनके दोस्त रवि की बेटी हो।

फिर दोनों मिलकर प्लान बनाती हैं कि आज दोनों दोस्तों को भी शर्मिंदा करना चाहिए।
रिया- रश्मि तुम अपने डैड को लेकर ज़ी-मॉल में चलो। मैं भी अपने डैड को लेकर आती हूँ। आज दोनों को सरप्राइज़ कर देते हैं।

कुछ देर बाद रिया अपने डैड को लेकर जी मॉल गयी और एक मोड़ पर रवि और रश्मि मिल गये.
रिया- रश्मि … इनसे मिलो। ये मेरे डैड रमेश हैं।
रश्मि- और रिया … ये मेरे डैड रवि।

रमेश और रवि बुरी तरह चौंक गये और दोनों ने अपनी गर्दन झुका ली. उसके बाद रिया और रश्मि दोनों ही पक्की दोस्त बन गयीं. रिया का चेक भी पास हो गया था. उसने वादे के मुताबिक रेहाना और रतनलाल को उनका इनाम दे दिया.

मगर उस दिन के बाद रश्मि और रिया ने मन बना लिया कि वो अब ये गंदा धंधा नहीं करेंगी और साफ सुथरी जिन्दगी का मजा लेंगी.

दोस्तो, कालगर्ल चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, अपने कमेंट्स के द्वारा जरूर बतायें. आप सभी पाठकों की प्रतिक्रियाओं को बेसब्री से इंतजार रहेगा.


समाप्त
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02-28-2021, 12:40 AM,
#74
RE: Incest Kahani Incest बाप नम्बरी बेटी दस नम्बरी
(10-12-2020, 01:02 PM)हाय प्यारे रीडर्स, मैं महिप (उम्र 30, इन्दोर) में इसका नियमित रीडर्स Wrote: हूँ. लेकिन पहली बार आप लोगो के पास एक सच्ची कहानी भेज रहा हूँ, आशा हैंयह कहानी आप लोगो को पसंद आयेगी. में 6 साल पहले इन्दोरआया तो मैने एक सुशिक्षित परिवार से भरपूर परिवार मे किरायेदार की हेसियतसे रहने लगा. उस परिवार मे मेरेअलावा उनकी बड़ी लड़की पिंकी और पिंकी की मम्मी रुक्मणी और पापा सुरेशअग्रवाल रहते हैं. पिंकी के पापा इन्दोर शहर मे एक कॉटन कम्पनी मे कामकरने के कारण अधिकतर बाहर ही रहते हें. यह परिवार वाले मुझे अपने बेटेजैसा ही मान कर मेरी खिदमत कर ते थे और मुझे अपने परिवार का ही एक सदस्यसमझते थे उनके घर का माहोल शुरू से ही बड़ा खुला हुआ था घर मे पिंकी कीमाँ को में आंटी कहँ कर पुकारता था और पिंकी को दीदी, आमतोर पर पिंकीऐसे कपड़े पहनती थी जो की कोई और लोग शायद बेडरूम मे ही पहनना अच्छासमझे. हालाँकी उसकी माँ रुक्मणी हमेशा साड़ी-ब्लाउज पहनती थी.आंटी और पिंकी दीदी घर मे मेरे सामने ही अपने मासिक (एम.सी) से सम्बधितबाते करती जैसे की आज मेरा पहला दिन है, या पिंकी को बहुत परेशानी महसूसहो रही है या ज़्यादा ब्लडडिंग हो रहा है. आमतोर पर आंटी और पिंकी दीदीमेरे सामने ही कपड़े बदलने मे कोई ज़्यादा शर्म संकोच नही करती थी, एकबार पिंकी दीदी की सभी सहेलियां होली खेलने हमारे घर आई तो मे दुबक करदरवाजे के पीछे छुप गया, तब किसी को नही मालूम था की मे घर मे ही छुपाहुआ हूँ, खेर पिंकी दीदी और उसकी सहेलियो ने वहाँ पर घर के हॉल और बाथरूमके पास मे काफ़ी नंगापन मचाया, एक दूसरे के कपड़े फाड़ते हुये लगभगनगदहड़ंग पोज़िशन मे एक दूसरे के ऊपर रंग लगाया, होली की दोपहर को आंटीभी मोहल्ले वालो के घर से रंग मे सराबोर होकर आई और मुझे बिना रंग के देखपिंकी दीदी से कहने लगी की इस बेचारे ने क्या पाप किया है जो इसे सूखाछोड़ दिया, और पिंकी दीदी को इशारा कर मुझे पकड़ कर गिरा दिया और मेरेपूरे शरीर पर रंग लगा दिया, पिंकी दीदी ने तो रंग कम पड़ने पर अपने शरीरको ही मुझसे रगड़ना शुरू कर दिया. मैं पहले नहा धोकर आया उसके बाद आंटीऔर पिंकी दीदी दोनो एक साथ बाथरूम मे नहाने लगी. मुझसे रहा नहीं गया औरमें चोरी छुपे बाथरूम मे देखा तो दोनों केवल पेन्टी पहन कर एक दूसरे कीचूचियों पर लगा रंग छुड़ा रहे थे यह देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रहगयी.कुछ ही महीनो बाद पिंकी दीदी की शादी रतलाम मे हो गयी और वह अपने ससुरालचली गयी, कुछ महीनो के बाद गर्मियो के महीनो मे पिंकी दीदी कुछ दिनो केलिये अपनी माँ के पास रहने के लिये आई. जीजाजी पिंकी दीदी को छोड़ने केलिये दो दिनो के लिए आये थे. मैने देखा की पिंकी दीदी शादी के बाद अब औरज़्यादा बिंदास सेक्सी और कामुक हो गयी है, और क्यो ना हो अब उसके पासलाइसेन्स जो था, मेने जीजाजी को भी काफ़ी खुले विचारो वाला पाया. शाम कोखाने के बाद उन्होने अपने हनीमून के फोटोग्राफ्स दिखाये जिसमे वह दोनोगोवा के समुन्द्र किनारे बिकनी और स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम्स मे ही नज़रआये. अचानक बिजली गुल हो गयी और काफ़ी देर तक नहीं आई इसलिये उस रात हमनेऊपर छत पर सोने का प्लान बनाया. छत पर एक लोहे का पलंग पड़ा हुआ था जिसपर जीजाजी ने मुझे सुला दिया, और वह दोनो इतनी गर्मी मे अंधेरे मे चिपककर सो गये.थोड़ी देर बाद जब अंधेरे मे दिखने लगा तो मेने देखा की पिंकी दीदी जीजाजीके उनका 7 इंच लंबा लंड पकड़कर मस्ती से हिला रही थी और बार-बार उनकालंड चूस रही थी, उनकी सेक्सी चूमा चाटी और होने वाली खुस्फुसाहट के कारणमेरा 6 इंच लंबा लंड भी तंबू जैसे तना हुआ था, और फट कर बाहर आ जाने कोहो रहा था, तभी दीदी बोली की उसे बाथरूम आ रही है तो जीजाजी ने मुझेआवाज़ लगाई, लेकिन मे आँखें बंद किये हुये नींद आने का बहाना बनाये पड़ारहा तो दीदी बोली की शायद सो गया होगा, तब पिंकी दीदी उठी और बेड पर सेही अपनी पेन्टी को नीचे उतारती हुई छत के कोने मे पेशाब करने बेठ गयी,आसमान की हल्की रोशनी मे उसके गोरे-गोरे और बड़े-बड़े चूतड़ चमक रहे थेजिनको देख कर जीजाजी भी उठे और अपनी लूँगी एक और फेक कर वी शेप की चड्डीमे से अपना लंड निकाल कर पूनम दीदी के चूतडो के ठीक पीछे लंड लगा करपेशाब करने बेठ गये, और अपने दोनो हाथो से सेक्सी दीदी की चूचियों कोदबाने लगे.इसके बाद तो वो दोनो खड़े-खड़े ही अंधेरे मे चुदाई करने लगे पिंकी दीदीकी मदहोशी मे कामुक साँसे और आवाज़े मुझे पागल बना देने के लिये काफ़ीथी, मे अपनी आधी आखें बंद कर यह सब देख रहा था, और ना जाने कब मेरी आंखँलग गयी, सुबह लगभग 5 बजे छत पर ठंडी हवाओं के कारण मेरी आँख खुली तो मेनेदेखा की पिंकी और जीजाजी एक दूसरे पर चढ़ कर सोये हुये थे, शायद सेक्सकरने के बाद उनकी नींद लग गयी और वो अपने आप को सही भी नही कर पाये.पिंकी दीदी की पेन्टी तो पेरो मे पड़ी थी और उसकी नाईटी उसके नंगे कमर परपड़ी हुई थी, जीजाजी भी पूरे नंगे थे और उनका सिकुडा लंड दीदी की हल्केकाले बालो वाली चूत मे से बाहर लटक रहा था, ऐसा सीन देख मेने सबसे पहलेतो लपक कर मूठ मारी और उसके बाद अपनी सेक्सी दीदी की चूचियों को देखने कीकोशिश की लेकिन जीजाजी के सीने से दबे होने के कारण मुझे कुछ ज़्यादा नहीदेखने को मिला.सुबह करीब 9 बजे में उठा तो देखा दीदी और जीजाजी उठ चुके थे मैं नहा धोकरफ्रेश होकर हम सब ने साथ मे नाश्ता किया. दीदी और जीजाजी आने के कारणआंटी जी ने मुझे कहा अंकल नहीं है घर मे तो दीनू तुम एक हफ्ते की दफ़्तरसे छुटी ले लो इसलिये मैने एक हफ्ते की छुटी ले ली थी. सुबह दिन भर हमतीनो ने पिक्चर हॉल मे पिक्चर देखी और कई जगह घूमने भी गये जब शाम को 7बजे हम घर लोटे तो मैने और जीजाजी ने विस्की पीने का प्लान बनाया और जबविस्की पी रहे थे की अचानक जीजाजी के ऑफीस से फोन आया की उन्हे कल किसीभी हालत मे आकर रिपोर्ट करनी है तो जीजाजी ने सुबह जल्दी जाने काप्रोग्राम बना लिया. जब दीदी को पता चला की जीजाजी कल सुबह ही जा रहे हैतो वो उदास हो गई. हम लोग भी जल्दी से खाना खाकर जीजाजी का बेग तैयार करकर छत पर सोने चले गये. कल रात की तरह हम लोगो ने अपना बिस्तर लगा कर सोगये. करीब एक घंटे बाद मैने अंधेर मे मेने देखा की आज भी पिंकी दीदीजीजाजी को ज़्यादा परेशान कर रही थी अपनी नाइटी नंगी जांघो पर चड़ा करपेन्टी उतारकर अपनी रसीली चिकनी चूत को जीजाजी के मुहँ पर रख कर उनका लंडमुहँ मे लेने की ज़िद कर रही थी, लेकिन जीजाजी दिन भर की थकान के कारणसोने के मूड मे थे, और उन्हे सुबह जल्दी जाना भी था, जीजाजी जब सो गये तोदीदी भी अपनी चूत को हाथ से रगडती हुई सो गयी, बेचारी क्या कर सकती थी,अगली सुबह जब आंटी ने मुझे उठाया और कहाँ महिप तुम्हारे जीजाजी को ट्रेनमे बैठा कर आ जाओ तो में जल्दी से फ्रेश होकर नहा धोकर तैयार होकर जबदीदी के कमरे मे गया तो देखा की पिंकी दीदी जीजाजी से एक बार मज़े देनेका कह रही थी और बोल रही थी की आपके बिना मेरा मन कैसे लगेगा तो जीजाजीबोले की तेरे दीनू भाई ने एक हफ्ते की छुटी ले ली है इसीलिये महिप का साथरहेगा तो मुझे किसी बात की फ़िक्र नही रहेगी. और पिंकी दीदी और मेंजीजाजी को ट्रेन मे बैठाने के लिये चल पड़े. जब ट्रेन जाने लगी तो पिंकीदीदी बड़ी उदास सी हो गयी. जब हम घर लोटे तो नाश्ता करने के बाद हम बोरहो रहे थे तो आंटी ने हमे सुझाव दिया की महिप तुम और पिंकी आज कमरे कीसफाई कर लो तब तक में खाना बनाती हूँ इससे तुम्हारा मन भी लग जायेगा.मैनेपजामा और टी शर्ट पहन ली और पिंकी दीदी ने सफ़ेद पतले कपड़े का कुर्तापहन रखा था और नीचे लूँगी जिसमे से उसकी गोरी-गोरी सफेद जाघे दिख रहीथी, वह लंबे वाले स्टूल पर खड़ी हुये थी,और मे नीचे से उससे सामान लेताजा रहा था, दीदी का कुर्ता शॉर्ट स्लीव का था जिसमे से दीदी के मोटे-मोटेस्तन कभी कभी दिख जाते थे, और काली-काली चुचियां बाहर से ही दिखाई दे रहीथी उन्होने ब्रा नहीं पहनी थी ,कभी-कभी वह मुझे देख कर अपने हाथो से अपनीचूत को रगड़ने लगती, जब वो सामान लेने के लिये हाथ उठाकर सामान उतार थीतो, हाथ उठाने से उसकी अंडर आर्म्स के काले-काले घने बाल देख मेरा लंडटनटना शुरु हो गया, गनीमत थी की मेने पजामा पहन रखा था, कई बार भारीसामान होने के कारण दीदी का स्टूल पर बेलेन्स नही बनता तो वह अपने पेरोको चोड़ा कर पास की अलमारी पर पैर रखती तब तो उसकी पेन्टी जो की सफ़ेदकलर की थी ऐसी दिखती मानो अभी उसे खोल कर लंड डाल दूँ, बीच-बीच मे पानीपीते समय दीदी शायद जानबुझ कर अपनी सफेद महीन कुर्ते पर पानी ढोल लेतीजिससे उसकी चूचियों के निपल साफ दिखाई देने लगते खेर किसी तरह हम दोनो नेकमरे में साफ सफाई की और नाहकर खाना खाया. और दोपहर को थोड़ी देर आरामकरके हम शाम के समय हम बाज़ार घूमने निकल पड़े जब हम घर लोट रहे थे तोदीदी बोली दीनू भाई आज तुम्हारे जीजाजी गये तब से मेरा मूड कुछ उखड़ाउखड़ा हुआ है और मूड ठीक करने के लिए क्या तुम मेरे लिए बीयर ला सकते हो.फिर में दुकान जाकर करीब 5 बीयर की बोतल ले आया. और जब हम करीब 7:30 बजेघर पहुँचे तो आंटी खाना बना रही थी और में और दीदी छत पर जाकर बीयर पीनेलगे.करीब एक दो बीयर पीने के बाद दीदी कहने लगी की मुझे ज़ोर से पेशाब आ रहीहै और बिना किसी शर्म या पर्दे के उसने मेरे सामने ही उसने अपनी पेन्टीखोल दी और नाइटी ऊँचा उठा कर अपनी मोटी-मोटी गांड दिखाती हुये वह छत केएक कोने मे जाकर मूतने बेठ गयी, उसके मूतने से जो झर-झर की तेज अवाज़ होरही थी वह सुन मे बहक सा गया और उनकी मोटी-मोटी गांड को एकटक देखने लगाशायद दीदी समझ गयी थी की में उसकी और मुहँ करके उसको मूतते हुये देख रहाहूँ तभी उसने मुहँ घूमाकर मेरी और देखा और एक आँख मारकर सेक्सी अवाज़बना कर कहने लगी की आजा शरमाये मत मेरे पास आकर तू भी मूत ले, मैं जानतीहूँ तुम ने उस रात चोरी चोरी चुपके चुपके मुझे और तेरे जीजाजी को मूततेहुये देखा था यह सुनकर में सकपका गया लेकिन फिर भी हिम्मत करके दीदी केठीक पास मे बेठ गया और अपने खड़े हुये मोटे और लंबे लंड को क़ैद सेनिकाल कर मूतने लगा, दीदी झुक-झुक कर मेरा लंड फटी-फटी आँखों से देखनेलगी और बोली भैया तू तो वास्तव मे पूरे मर्द हो मम्मी और मे तुझे यू हीछोटा समझती थी. तूने अभी तक अपने औज़ार को कहीं काम में लिया है या यूँही तेज़ धारदार हथियार लेकर घूमता रहता है, दीदी की ऐसी बातें सुन मे चुपसा हो गया और इधर -उधर देखने लगा की कही कोई देख तो नही रहा है, लेकिनअंधेरा देख बेफ़िक्र हो मे सीधा खड़ा हो गया, मूतने से बड़ा हल्कापनमहसूस हो रहा था दीदी के मन मे क्या है यह मे अब तक समझ नही पाया था,क्योकि मेरे दिमाग़ ने तो दीदी के मोटे मोटे चूतडो को देख कर ही काम करनाबंद कर दिया था.खेर किसी तरह खाना खाने के बाद वो आंटी को बोली मम्मी आज बड़ी गर्मी हैचलो छत पर जाकर सोते है. तब आंटी बोली नीचे कोई नहीं है में आँगन मे सोतीहूँ तुम भाई बहन ऊपर छत पर सो जाना. फिर हम छत पर आकर दोनो पलंगो को करीबकरीब (तोड़ा सा गेप रख कर) सोने लगे तो दीदी बोली दीनू नींद नही आ रही हैऔर दीदी ने अपना असली जलवा दिखलाना शुरू कर दिया, उसने बड़े सेक्सीअंदाज़ मे मुझे देखते हुये अपने ब्लाउज को खोल दिया, जिसमे से उसके दोनोगरदाये हुये मस्त कबूतर फड़फडा कर बाहर आ गये, उनको हाथो से सहलाते हुयेवह कहने लगी की देख भैया इनको बेचारे ये भी गर्मी के कारण कैसे कुम्हँलागये है, आज तेरे जीजाजी होते तो अब तक तो इन्हे मुहँ मे लेकर एकदम ताजाकर देते, ऐसी बात सुन मेरे को ऐसा करंट लगा की मेने भी सोचा की जब पिंकीदीदी संकोच नही कर रही है तो क्यों ना दिखा दूँ अपनी मर्दानगी.दीदी के दोनो चूचियों पर इतना टाइट ब्लाउज पहनने के कारण लाल रंग कानिशान सा पड़ गया था, दीदी ने धीरे से अपनी साड़ी और पेटीकोट भी खोल दियाऔर नगदहड़ंग नंगी हो फिर से मूतने बेठ गयी, मूतने के लिये उठते बैठतेसमय उसकी चूत का जो नज़ारा मुझे पीछे से हुआ वह वास्तव मे मेरे जीवन काअजीबो गरीब नज़ारा था, जिसके बारे मे बंद कमरे मे आँखें बंद कर अपने लंडको रगडता था आज वही चीज़ मेरे सामने परोसी हुई सी मालूम पड़ रही थी, मेभी शर्म संकोच छोड़ दीदी के बिल्कुल पास जा खड़ा हुआ.अब दीदी पूरी नंगीअवस्था मे अपने पलंग पर आकर और हाथ हिला कर मुझे भी बुलाने लगी, मे जैसेही उनके पलंग के पास गया तो दीदी ने झट से मेरी लूंगी और वी शेप चड्डीखीच निकाली, और मुझे भी अपनी तरह मादरजात नंगा कर पलंग मे खीच लिया, औरकहने लगी की इस बेचारे पर कुछ तरस खा, इतनी गर्मी मे इसे इतने तंग कपड़ोमे रखेगा तो इसका क्या हाल होगा तू नही जानता, इस बेचारे को थोड़ी हवापानी दिखाने की ज़रूरत देनी चाहिये और हँसते हुये दीदी ने मुझे अपने ऊपरगिरा लिया.अब हम दोनो के नंगे जिस्म एक दूसरे से रगड़ा रहे थे, दीदी के कामुक बदनने तो मानो मुज़े सम्मोहित ही कर लिया था, और मे लगभग अंधे के समान वहीकरता जा रहा था, जो वो मुझसे चाहती थी, उसने मेरे दोनो हाथो को पकड़ करअपनी चूचियों पर रख दिया, और कहने लगी की प्लीज़ भैया, जल्दी से इनकबूतरो को मुहँ मे लेकर चूसो नही तो मे मर जाऊँगी, और एक हाथ से अपनी चूतको रगड़ने लगी, कुछ देर उसकी चूचियों को चूसने के बाद मेने भी अपना एकहाथ उसकी चूत पर रख दिया, तो मुझे उसकी चूत की गर्मी महसूस हुई, अपनीउंगलियो को दीदी की चूत मे घुसाते हुये मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, और मेलगभग पागलो की तरह पिंकी दीदी की चूत को रग़ड रहा था, जिस कारण उसमे सेहल्का सा गर्म चिकना मदमस्त रस निकलता सा महसूस होने लगा, मे इस रस कोअपने मुहँ मे पीना चाहता था, लेकिन दीदी को कहने से डर रहा था, तभी दीदीमानो मेरे मन की इच्छा भाप गयी और वह मेरे ऊपर चड़ गयी और मेरे लंड कोमुहँ मे लेकर आईसक्रीम की तरह चूसने लगी, उसने अपनी रस भरी चूत को मेरेमुहँ के पास कर दिया, हम दोनो 69 की पोज़िशन करके में भी पिंकी की चूत कोमुहँ मे लेकर चूसने लगा. वो लंड चूसने मे मस्त थी.करीब 15 मिनिट तक लंड चूसने के बाद मैने पिंकी दीदी से बोला की प्लीज़ ,थोड़ा रुक-रुक कर चूसो, नही तो तुम्हारा मुहँ कही खराब न हो जाये, तो वहज़ोर-जोर से हँसते हुये बोली की तेरे जीजाजी तो रोज़ ही मेरा मुहँ खराबकरते है. खेर कोई बात नहीं जब तेरा दिल चाहे मेरे मुहँ पर लंड से पिचकारीछोड़ देना, कुछ ही देर मे दीदी की मस्त रसीली चूत सिकुड़ने लगी और वोमेरे सिर को चूत पर दबाने लगी और उनकी चूत का मजेदार नमकीन पानी मेरेमुहँ पर छोड़ दिया और अपनी आँखों को बंद कर मुहँ से अजीब सी सिसकारियांलेने लगी थी. मेरे लंड ने अभी तक जवाब नहीं दिया और जब उसका मन चूमा चाटीसे भर गया तो कहने लगी की चल अब जल्दी से अपनी प्यारी दीदी को चोद दे, औरऐसा कह वो अपनी टांगों को फैलाते हुये अपनी चूत को चोड़ा कर बोली फाड़ देभाई अपनी दीदी की चूत को तेरे इस मोटे और लम्बे लंड से, इसके बाद मे मैनेअपना लंड उनकी चूत पर रख कर चूत मे ज़ोरदार घुसाया तो वह बिलबिला उठी औरकहने लगी की ऐसा लंड तो मेने अपने जीवन मे कभी नही खाया, यदि आज यहाँमम्मी होती तो. ऐसा कह वह मस्ती मे आखँ बंद कर चुप हो गयी और उस वक्त तोमे यह सुनकर चुप हो गया क्योकि मे भी इस पल के मज़े को भूलना नही चाहताथा, लेकिन कुछ मिनटों के धक्को के बाद मेने उससे पूछ ही लिया की ऐसा लंडकभी नही खाया और मम्मी होती तो, इसका क्या मतलब है.क्या तुमने जीजाजी के अलावा और भी लंड खाये है, तो वो हँसते हुये बोली कीअब तुझसे क्या छुपाना, मम्मी शुरू से ही पापा की गेर मोज़ूदगी मे अपनीजवानी की गर्मी घर मे मुझे पढ़ाने आने वाले टीचर से और मेरे चचेरे मामासे मिटवाती थी, जब मे यह राज जान गयी तो मम्मी ने मुझे भी खुली आज़ादी देदी और कहाँ की केवल चुनिंदा लोगो से ही मज़ा लो जो की खुद की इज़्ज़तबचाने के साथ-साथ हमे भी बदनाम ना करे, नही तो हम माँ बेटी किसी को मुहँदिखाने के काबिल नही रहेगी, फिर मैने कस कस कर धक्के मार कर उसकी चूत चोदरहा था. वो भी जवाब मे अपनी गांड उठा कर मेरा लंड झाड़ तक अपनी चूत मेलेते हुये बोली हम माँ बेटी की किस्मत ही खराब थी जो की तुम जैसा गबरूजवान मर्द घर मे होते हुये हम दोनो तरसती रही, इसके बाद जब तक दीदी रहीमें रात दिन पिंकी दीदी को चोदता रहा. उसके जाने बाद अब बिना चुदाई एकरात काटना मेरे लिये भी असंभव सा लग रहा था, क्योकि ऐसी मस्त चूत खाकरमेरा लंड भी अब और चूत की चुदाई के लिये तरसने लगा. मैं संकोच के मारेपिंकी की मम्मी यानी की आंटी जी को चोदने से घबरा रहा थाएक दिन पिंकी दीदी का फोन आया, और उसने मुझसे पूछा की तूने अब तक कितनीबार मम्मी को चोदा तो जब मेने कहाँ की मेने तो आंटी की तरफ देखा भी नहीतो उसने माथा पीट लिया, और कहने लगी की अब क्या मे वहाँ आकर तेरे लंड कोपकड़कर मम्मी की चूत मे डालूं ? मे कुछ बोल नहीं पाया, तो उसने कहाँ कीचल मम्मी से बात करा, मेने मम्मी को फोन दे दिया और मे कमरे से बाहर चलागया, मम्मी बहुत देर तक दीदी से बात करती रही. रात मे गर्मी कुछ ज़्यादाही थी, इस कारण मे लूँगी और बनियान पहनकर टी.वी. देख रहा था, की आंटी भीहॉल मे ही आ गयी और बोली की अंदर बेडरूम तो मानो भट्टी सा तप रहा है, मेभी यही कूलर की हवा मे सो जाती हूँ ऐसा कह आंटी ने मेरे बेड के पास हीअपना बिस्तर लगा लिया और सोने लगी.शनिवार नाइट होने की वजह से मे भी काफी रात तक टी.वी. देख रहा था क्योकिअगले दिन रविवार के कारण किसी बात की जल्दी नही होती और मे देर तक सोतारहता हूँ. तभी मेने गोर किया की आंटी जो की मेरे सामने ही ज़मीन परबिस्तर पर सोये हुये थे, ने अचानक करवट ली और मादक अंदाज़ मे अपना हाथअपने ब्लाउज मे डाल कर अपनी साड़ी के पल्ले को अपने सीने से हटा दिया, औरवापस सोने का नाटक करने लगी, जब मेने आंटी की तरफ गोर से देखा तो मेनेपाया की उन्होने अभी जो ब्लाउज पहना था उसका गला इतना छोटा था की उसमे सेउनके आधे से ज़्यादा स्तन बाहर आ रहे थे जब उनका पल्ला सीने से हटा तो मेआंटी के ब्लाउज के हुको को देख अचरज मे पड़ गया उनके ब्लाउज के केवल तीनहुक लगे थे,इसका मतलब आंटी को यह आइडिया पिंकी दीदी ने ही दिया होगा, मेने जब गोरकिया तो पाया की ब्लाउज मे उन्होने ब्रा भी नही पहनी थी, की तभी आंटी नेफिर करवट बदली और इस बार अपने पेरो को ऐसे उठाया की उनकी साड़ी उनकेघुटनो के ऊपर हो गयी और उनकी गोरी गोरी जाघ दिखाई पड़ने लगी.एक तो टीवीपर चलती सेक्सी मूवी और ऊपर से मेरे इतने पास आंटी को इस हाल मे देख मेराहाल बुरा हो रहा था, आंटी भी गर्मी के कारण बेचैन लग रही थी, तभी आंटीबोली की बेटा कूलर भी मानो आग उगल रहा है,पूरे कपड़े पसीने मे भीग रहेहै. नींद ही नही लग पा रही है, तो मे हिम्मत कर के बोला की आंटी एक कामकरो, थोड़े कपड़े उतार लो, रात मे कौन देखता है, आप चाहो तो मे छत पर सोजाता हूँ, तो आंटी बोली की हाँ बेटा यही ठीक रहेगा, और तू भी यही कूलर मेसो जा, तुझसे कैसी शर्म, बस ज़रा लाइट बंद कर दे, तब मेने तुरंत लाइट बंदकर दी और टीवी देखने लगा, तो आंटी उठी और उसने अपनी साड़ी खोल कर एक तरफरख दी और सामने के बाथरूम मे पेशाब करने लगी, शायद उन्होने जानबुझ करबाथरूम का दरवाजा बंद नही किया, मेने तिरछी निगाहों से देखा तो उनकीमोटी-मोटी गांड के दर्शन हो गये, जब वो वापस आई तो वो केवल पेटीकोटब्लाउज मे सोने लगी. और बोली महिप बेटा, ज़रा मेरे पैरो मे तेल तो लगा दोतो में तेल की शीशी ले आया तो देखा उनका पेटीकोट तो पहले से ही घुटनो तकउठा हुआ था, मैने उनके पैरो पर तेल लगा कर मालिश करना शुरु किया तो वोबोली की हाँ अब आराम लग रहा है लेकिन सारा बदन दर्द हो रहा है तो मैनेकहाँ की ऐसा करो आप उलटे लेट जाओं तो में आप की पीठ मे भी मालिश कर देता.उन्होने ब्लाउज के सभी हुको को खोल दिया और उलटे लेट गये, अब में उनकीकमर पर तेल लगा कर मालिश करने लगा और बीच बीच मे मेरी हथेली उनकी चूचियोंके साइड मे भी लग रही थी, इस उम्र मे भी आंटी के स्तन टाइट भरे हुये औरकड़क थे की मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, में तेल लगाते लगाते उनकी कमर तक आगया और फिर मेने उनके मुहँ से हल्की सी मादक आवाज़ सुनाई देने लगी औरउन्होने अपनी आँखें बंद कर रखी थीअब उन्होने कहा दीनू बेटा ज़रा पैरो की पिंडली मे और तेल लगा दो यह कह करवो पीठ के बल लेट गयी मैने देखा जब वो सीधी सोई थी तो उनके ब्लाउज केसारे हुक खुले थे और उनकी चुचियाँ उनकी साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रही थीयह देख कर मेंरा लंड तो खड़ा होकर लूँगी से बाहर आने को बेताब हो गया फिरमेने भी मोका पाकर पैरो की मालिश करते करते पेटीकोट मे हाथ डालना शुरू करदिया, और अपनी उंगलिया उनकी जाघो पर फिराते हुये उनकी टांगों को फैलादिया जिससे उनका पेटिकोट थोड़ा ऊपर सरक गया और मुझे उनकी चूत के दर्शनहोने लगे मैने देखा की चूत पर खूब घने काले-काले बाल दिख रहे थे फिर मैनेहिम्मत करके उनकी चूत तो टच किया तो उन्होंने अपने पूरे बदन को कड़क करहल्की सी उचक गयी लेकिन अपनी आँखें नही खोली. फिर मैने धीरे धीरे उनकीचूत की दरारो को उंगली से सहलाना शुरु किया फिर मेने मोके की नज़ाकत कोभाँप कर अपना एक हाथ उनके स्तनो पर रख उनको ज़ोर-जोर से मुठी मे भिचानेलगा, उनकी दोनो चुचियाँ कड़क होकर फूल गयी थी, और में उनकी अंडर आर्म्सजिसमे घने बाल थे को चूमने लगा. उनकी अंडर आर्म्स से आ रही मादक खुशबु नेमेरा लंड राड जैसा खड़ा कर दिया, अब उन्होंने मुझे अपने करीब सुलाते हुयेमेरी लूँगी खीच कर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और उसे मुहँ मे लेकरज़ोर-जोर से चूसने लगी, मैने भी उनको अपने सीने पर खीच कर उसकी चूत कोखूब चूसा, अब तो सारी मर्यादाये छोड़ के निसंकोच आंटी की चूत चटाई करनेलगा उनकी चूत इतनी टाइट लग रही थी मानो बरसो से प्यासी हो.जब वो गरम हो गयी तो वो बोली महिप बेटा, अब मुझसे रहा नहीं जाता. डाल दोतुम्हारा लोड़ा मेरी प्यासी चूत मे और मैने उनके पैरों को फैलाते हुयेअपना लंड चूत मे डाल कर चोदना शुरू किया और करीब 20-25 मिनिट तक उन्हेचोदता रहा इस दरमियाँ वो 2 बार झड़ चुकी थी आंटी चुदवाते समय बड़ी अजीबसी गंदी-गंदी बातें और गालियाँ बोले जा रही थी, जिसे मे भी अनसुना करचुदाई का मजा ले रहा था, वो बेटी से भी ज्यादा चुदकड़ महिला थी करीब रात4 बजे तक मैने उनको 3 बार कई स्टाइल मे चोदा और 2 बार गांड भी मारी. सुबहजब उठा तो वो मेरे बगल मे बिल्कुलनंगी सोई थी और उनकी चूत मेरे मोटे और लंबे लंड के कारण फूल कर सूज गयी थी.
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