Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
04-29-2020, 01:03 PM,
#11
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
मैं भी बाजी की हालत देख रहा था

वो किस तरह हवस की आग मैं जल रही हैं और उठके बाजी की टाँगों को पूरी तरह खोल के जाघों दरमियाँ मैं आ बैठा
और फिर अपने लण्ड को थूक से पूरी तरह गीला किया और बाजी की चूत पे रख दिया

जो की अपने ही पानी से बुरी तरह गीली हो रही थी

मैने बाजी की चूत से लण्ड लगते ही थोडा से दबया तो मेरा लण्ड थोड़ा सा बाजी की चूत मैं फिसल ने लगा

पर घुसनेने का नाम नहीं ले रहा था. बहुत तिघत चुत थी बाजी...
फिर मेने ..अपना लंड बज्जी की चुत के मुह पे रख के बाजी के मुँह से सस्सिईईईईईईईईईईईई की हल्की आवाज़ निकल गई
लेकिन बाजी ने कुछ नहीं बोला तो

मैने अपनी पकड़ को बाजी पे मजबूत किया ही था की
बाजी ने कहा हाँ भाई एक ही झटके मैं घुसा डालो पूरा जब तक तक काम ख़तम ना हो जाए

मेरी कोई परवा नहीं करना पल्ल्ल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

मैने हाँ न मैं सर हिलाते ही पूरी ताक़त का झटका दिया कि बाजी भी पूरा साथ दे रही थी और

बाजी ने अपना जिस्म भी ढीला छोड़ रखा था तो झटका लगते ही मेरा लण्ड अपनी बड़ी बहिन की चूत को खोलता हुआ पूरी ताक़त से बाजी की चूत मैं जड़ तक घुस गया

लण्ड घुसते ही बाजी की आवाज़ जैसे रुक सी गई और आँखें खुल सी गईं

और फिर कोई 5 १० सेक के बाद अचानक बाजी के जिस्म मैं हरकत सी हुयी और बाजी के मुह से आआईयईईईईई म्म्म्माआमैं मार गैिईईई ऊऊहह विकी पल्ल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

मुझे नहीं करवाना नहीं चुदवाना ...

कुछ भी... बहार निकल जल्दी से अपना लंड ऊऊऊऊओ .. निकालो अपना लण्ड आऊओह

कामीने बहार निकाल लूऊऊऊऊऊऊऊऊ की आवाज़ क साथ ही बाजी की आँखों से पानी निकालने लगा


मेरे दिल मैं एक बार तो ये आया की मैं अभी अपना लण्ड बहार निकल लूँ लेकिन

फिर जैसा की बाजी ने कहा था मैं अपना लण्ड घुसाके बाजी को मज़बोती से पकड़ के लेता रहा और कोई हरकत ना की.
थोड़ी देर तक बाजी चिलाती रही और मुझ से अपने आप से छुड़वाने की कोशिश करती रही

लेकिन फिर आहिस्ता आहिस्ता शांत होने लगी

तो मैने भी अपने लण्ड को बाजी की चूत मैं हल्के से अन्दर बाहर करना शरू कर दिया जिस से बाजी के मुँह बस पल्ल्ल्ल्ल्ल्ल

विकी आराम से करना बहुत दर्द हुआ हाईईईईईईईईई मेरी जान ,

अब मैं बाजी की चुत मैं अपने लण्ड को अंदर बहार करने लगा

और साथ ही अब बाजी की चूचियों को भी आहिस्ता से सहलाने और चूसने लगा जिस से बाजी एक बार फिर से मज़ा लेने लगी


और हाआंन्नणणन् विकिईईईईअब अच्छा लग रहा हाईईईईईई भाईईईईईई
बस इसी तरह आराम से करूऊऊऊओ ऊऊहह भाईईईईईईईईईईईईईईईई कितना अच्छा लग रहा हाईईईई मेरी

चूत मैं तेरा लण्ड ओह ....

ऊऔउन्न्ञनह की आवाज़ मैं सिसकियाँ भरने लगी और अपनी गांड को भी हल्का सा उछाल के मेरा साथ देने लगी

मेरा लण्ड बाजी की चूत मैं ऐसे जा रहा था की किसी चीज़ ने मेरे लण्ड को जकड रखा हो

लेकिन अगर बाजी की चूत अंदर से गीली नहीं होती तो बड़ी मुश्किल हो जाती,

चुत गरम ऐसे थी की मुझे लग रहा था की मेरा लण्ड पिघल जाएगा बाजी की चूत के अंदर ही.

अब बाजी ने अपनी टाँगों की क़ैंची सी बना ली मेरी कमर के गिर्द और अपनी गांड को हिला हिला के

मेरे हर झटके का साथ देने लगी और हाँ भाईईईईअब मज़ा मिल रहा हाईईईईई

थोडा तेज़ करूऊओ मेरा होने वाला हाईईईईई ऊओह भाईईईईईईईईईईईई उनम्म्मह की तेज़ आवाज़ों मैं चिल्लाने भी लगी जिस से मैं भी मज़े की मंज़िल के करीब पूछने लगा... था..

तभी बाजी का शरीर अकड़ने लगा ...और एक जोर की आवाज के साथ बाजी ..का शरीर ढीला पड़ गया ..बाजी अपनी सांसो को कन्टोल करने की कोसिस मै आखें बंद किये लेती रही ,,,

और मैं धक्के पे धक्के लगा के बाजी की मस्त गर्म ..बिना चुदी चुत का उदघाटन.. करने लगा

बाजी अपना एक बार चूत का का पानी निकाल चुकी थी . और अब थोड़ा शांत हो गई थी

जबकि मेरा चोदना अभी चालू था.

मेरा लण्ड जोर जोर से बाजी की चूत के अंदर बाहर जा रहा था ..

करीब ४-५ मिनट के बाद ही बाजी को फिर से मज़ा आने लगा ..

अब वो जोर से चिचलाने लगी .. बोली रीदा..ठीक ही कहती थी ... तेरे बही का लंड बहुत मोटा है...बहुत लंबा है ...
ओह मेरे भाई..आज तुने फाड दी अपनी बड़ी बहन की चुत... बहुत प्यासी थे... ओह्ह्ह

मेरे राजा भाई ..आज से मै तेरे गुलाम हो गयी ...ओह जोर से... कर मेरे बही... भुत मज़ा हेहेहेहे...

तो मने अपने होंठों को बाजी के होंठों पे रख कर उनके होंठों को चूसने लगा ..

बाजी ने अपनी जीभ बाहर निकाल दी ,,और मेरे मुँह के अंदर डाल की जिसे मैं बड़े प्यार से चूस रहा था

अब मैने बाजी की चूत मैं अपना लण्ड पूरी ताक़त से अंदर बाहर करना चालू कर दिया और

आआहह बाजी मेरा भी होने वाला हाईईईईईईईईईईईई उनम्म्मह बाजिीइईईईईईईईई

मेरा लण्ड अपना माल बाजी की चूत मैं डालने को तैयार था

मैं भी और तेज़ झटके मार मार के ८- १० मिनट बाद ही बाजी की चूत मैं... .अपना गर्म गर्म माल निकलने लगा .. मुझे लगा की बाजी भी दूसरी बार मरे साथ की झड रही है.. मुझे उनका ..गर्म गर्म माल अपने लंड उनकी चुत के अन्दर महसूस होने लगा ..

माल निकलने बाद मैं बाजी के ऊपर ही लेट गया तो

उस वक़्त बाजी अपनी आँखों को बंद किए लंबी लंबी भारी साँस ले रही थी

उनके चेहरे पे मुझे एक अजीब सी चमक और खुशी नज़र आ रही थी

जिसे मैं लफ़्ज़ों मैं बयान करना चाहों तो नहीं कर सकता.

थोड़ी देर बाजी के ऊपर रह कर मेने भी अपनी सॉंसों को कंटोल किया और अपनी बाजी को एक प्यार भरा किस देके , उनकी ही साइड मैं लैट गया .

थोड़ी देर तक हम दोनो बहिन भाई आराम से लेते रहे अपने अपने ख्यालों मैं गुम और एक दूसरे से बिना कोई बात किए

फिर बाजी ने ही अपनी आँखों को खोला और मेरी तरफ सर घुमा के देखा और हल्का सा मुस्कुरा दी और पूछी

भाई कैसा लगा.

तुमको मज़ा आया की नहीं .

मैं..... बाजी की बात से शर्मा गया और सर घुमा लिए दूसरी तरफ और बस बाजी.....जी... ही बोल पाया

विकी इधर देखो मेरी तरफ

मैं... बाजी की तरफ सर घुमा क देखते हो बोला जी बाजी

बाजी... भाई क्या बात है अब कयूं इतना शर्मा रहे हो अब तो जो होना था हो गया और अच्छा ही हुआ (स्माइल करते हए )

मैं... लेकिन बाजी फिर भी ऐसा नहीं होना चाहिए था

बाजी... देखो भाई तुम रीदा से मिल ही चुके हो और तुमको पता भी चल चुका है की उस का भाई नॉमी ना सिर्फ़ खुद अपनी बहिन के साथ करता है बल्कि और लोगों से भी करवाता है धन्धा

मैं... ठीक है बाजी

आप जो बोलोगी मैं आपको मना नहीं करूँगा लेकिन क्या आप भी रीदा की तरह मेरे अलावा दूरसे से करना चाहती हो

बाजी.... भाई एक बात तो अपने ज़हन मैं बैठ लो ,
जो भी हो मैं कोई बाज़ारी नहीं हूँ जो थोड़े से पैसों के लिए हर किसी के नीचे लेट जाओं

लेकिन ये भी नहीं की मेरा दिल नहीं चाहता की मैं एक साथ 2 से करूँ

मैं... तो फिर बाजी अगर आप बहार किसी और के साथ भी नहीं करना चाहती होतो फिर 2 लण्ड एक साथ किस तरह ले पाओ गी

बाजी... मेरी बात सुन क मुस्कुरा दी

बिक्की मेरे भाई .. तुने मेरी..तमना पूरी की... मेरे जिस्म की प्यास बुझाई... तुमने ही ..आज मुझे पहली बार चोदा है... मै तुमसे बहुत प्यार करती हूँ मेरे भाई... यह अहसान मै जिंदगी भर नहीं भुलुगी..मरे भाई..

बाजी आप भी ना... मुझे भी आप से बहुत प्यार ही बाजी... अब तक तो मेने सब..बाजारू औरतों के साथ किया था बाजी..
पर आज जो आपने मज़ा दिया है वो मेरे लिए अनमोल है..... मै कभी आपको किस बात के मना नहीं करूँगा..यह वादा है बाजी...


बाजी के बैठते ही बाजी के मुँह से हल्की से सीईईईईईईईईईई की आवाज़ निकल गई

तो मैं भी उठके बैठ गया तो

तब तक बाजी ने अपनी जांघों को खोल लिया था जहाँ जांघों के दरमियाँ बाजी की चूत नज़र आ रही थी

और उस मैं से निकलती मेरी मानी और बाजी की की चूत का पानी मिक्स हो के बहार निकल रहा था

और साथ ही बहुत सी खून निकला हो और उस की लाली भी नज़र आ रही थी

मैने ये सब देख के बाजी से पूछा

बाजी मैने तो सुना है की जब कोई लड़की फर्स्ट टाइम करवाती है तो बहुत ज़्यादा ब्लड निकलता है l चूत से

मैने बाजी की बात सुन के हाँ मैं सर हिला दिया और फिर उठ के अपनी धोती बँधी

और बाजी को भी उन के कपड़े पहना दिए और फिर बाजी को सहारा दे के बहार तलब मैं ले गया बाजी का पूरा बदन दर्द कर रहा था, उनसे चला भी नहीं जा रहा था.

फिर बाजी बोली ... बदन बहुत दर्द कर रहा है भाई.. पर यह सब किस को पता नहीं चलना चाहिये नहीं तो घर पे क़यामत आ जाएगी

मेने हाँ मै सर हिला दिया
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04-29-2020, 01:03 PM,
#12
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
जहाँ हम दोनो ने नहाके अपने आप को साफ़ किया और फिर बाजी को उठा के पास मैं चारपाई बिछाके लिटा दिया. और बाजी का सारा काम मै खुद करने लगा , जबकी बही तक मेने ..यह कुछ भी नहीं किया था

भेंसों को खोल के ले आया और उन्हें भी पानी पीला के और नहला के चारा डॉल दिया

इन सब कामों से फारिग होते मुझे कोई 2 घंटे लगे और फिर मैं वापिस आया और एक बार फिर से नहाया

कयुँकि मेरे जिस्म पे काफ़ी माटी लग चुकी थी और बाजी का दुपटा जिस की मैने धोती बाँध रखी थी उतार के अपने कपड़े पहन लिए और बाजी क पास गया तो देखा की बाजी अभी भी सो रही थी

सोते हई बाजी के चेहरे पे बड़ी प्यारी सी मुस्कान दौड़ रही थी जैसे किसी को दिली सकूँ मिलने के बाद नींद आती है


मैने बाजी को सोने दिया और रूम से चटाई उठा के ले आया और बाजी के करीब ही बिछाके उस पे लेट गया और अभी कुछ देर पहले जो हम दोनो बहिन भाई के बीच हुआ उस के बारे मैं सोचने लगा की

क्या अभी जो मैने किया है अपनी ही बड़ी बहिन के साथ क्या वो किसी भी मज़हब मैं जाइज़ है तो जवाब नहीं मैं आता

लेकिन फिर साथ ही ये भी ख्याल आता की मैने ये सब कर के अपनी बड़ी बहिन की ख़ुशी ही पूरी नहीं की बल्कि उसे जगह जगह मुँह मारने और बदनाम होने से भी बचा लिया है ये सोच आती तो मेरा दिमाग शांत हो जाता और

जब बाजी के साथ गुज़रे लम्हों की याद आती तो पुरे वजूद मे मज़े की लहर दौड़ने लगती जिस के कारण मेरा हाथ खुद ही लैंड पे चला जाता और मैं लैंड को सहलाने लगता

इन सब सोचों मैं कब वक़्त गुज़रा और दोपहर के 2 बज गये पता ही नहीं चला और पता तो तब चला जब बाजी ने मुझे आवाज़ दी विकी क्या सोच रहे हो इतनी देर से तो मैं चौंक सा गया

मैने सर घुमा के बाजी की तरफ देखा जो की करवट के बल चारपाई से थोडा नीचे को मेरी तरफ ही झुकी होई थी

और मुझे देख के हल्का सा मुस्कुरा भी रही थी तो मैं भी हल्का सा हंस दिया और बोला बाजी क्या सोचना है बस
ये ही सोच रहा था की हम ने आज क्या कर डाला

बाजी... भाई अब तो जो होना था हो ही गया है तो इस मैं इतना सोचने की कों सी बात है

बस अब जो हो रहा है चलने दो और लाइफ को पूरी तरह से एंजाय करो और करने दो क्या समझे

मैं... जी बाजी अब और हो भी क्या सकता है कयुँकि जो कुछ आज हमारे बीच हुआ है

उस के बाद हम चाहे भी तो उन लम्हों को वापिस नहीं ला सकते तो फिर आप की बात ही ठीक है

बाजी... अच्छा ज़रा देख तो टाइम क्या हुआ है

मैने अपनी वॉच पे नज़र डाली और टाइम बाजी को बताया की 2 बजे हैं तो बाजी ने कहा कहाँ रह गई ये फ़रीदा भी इतनी देर हो गई लेकिन खाना ले के नहीं आयी लगता है हमें ही जाना पड़ेगा

तू रुक थोडा मैं भैसों को चारा डाल के आती हूँ. और जबरदस्ती उड़ने की कोसिस की

मैने कहा बाजी मेने सब काम कर दिया है.. और भैसों को नहला भी दिया है

बाजी ने मुझे देखा .. और हंस की बोली.. ओह भाई.. तुने .. सच मैं... पहली बार... लव यू भाई ....


आप यहाँ ही रूको मैं चला जाता हूँ और घर से खाना ले के आ जाता हूँ

तभी बाजी जो की खेतों को आने वाले रास्ते की तरफ ही देख रही थी बोली रहने दे अब कोई फाइयदा नहीं फ़रीदा खुद ही खाना ले के आ रही है

और इतना बोलते ही चारपाई से उठी और नोर्मल दिखते हुयी रूम मैं चली गई और वहाँ से अपना दुपटा उठा के कंधों पे डॉल लिया और वहीँ आ गई

फ़रीदा जब खाना ले के हमारे पास पहुंची तो बाजी ने कहा क्या बात है यार,

आज इतनी देर कयूं लग गई खाना बनाने मैं तुम्हे पता भी है यार की मुझे से भूख बर्दाश्त नहीं होती

फ़रीदा ने कहा बाजी वो फ़रज़ाना को मैने खाना बनाने को बोला था लेकिन उस ने भी नहीं बनाया और डाइजेस्ट मैं घुसी रही जिस की वजाह से आज खाना इतनी देर से तैयार हुआ है

फिर फ़रीदा ने भी हमारे साथ ही बैठ के खाना खाया और बर्तन ले के चली गई तो बाजी ने कहा क्यों विकी क्या ख्याल है हो जाए फिर से एक बार ज़रा मौज मस्ती या कोई और इरादा है
मैने कहा नहीं बाजी अभी नहीं रात को कुछ करेंगे तो बाजी ने कहा यार भाई जान तुम्हे क्या हो गया है घर मैं

किस तरह से होगा तो मैने कहा बाजी आज मेरा बिस्तर छत पे लगा देना और खुद भी बहाने से ऊपर ही आ जाना सोने के लिए फिर क्या .... और हंस दिया

बाजी भी मेरी बात मान गई और फिर शाम को अबू के आने के बाद हम लोग घर वापिस आ गए

घर आके हम लोगों ने आपिस मैं थोड़ी देर तक गैप शप लगाई और फिर खाना खाया ,और खाने के बाद

मैने फरी बाजी को आवाज़ दी और कहा की बाजी प्लीज मेरा बिस्तर आज छत पे लगा देना मैं आज ऊपर सोना चाहता हूँ


अम्मी... विकी क्या बात है बेटा खैर तो है ना आज कोई खास बात है जो तुम छत पे सोने का बोल रहे हो

मैं... वो अम्मी आप को तो पता है कितनी गर्मी हो रही ऊपर ज़रा हवा तो लगेगी ही ना इस लिए

बाजी.... अम्मी क्या मैं भी भाई के पास ऊपर ही अपना बिस्तर बिछा लूँ क्या .
अम्मी... हाँ फरी ये ठीक रहेगा विकी का अकेले ऊपर सोना ठीक नहीं है तुम भी ऊपर ही चली जाओ

अम्मी की तरफ से इजाज़त मिलते ही बाजी ने मेरी और अपनी बिस्तर ऊपर छत पे ले गई और बिस्तर लगाके मुझे आवाज़ दे के बोली भाई बिस्तर लगा दिया है आ जाओ ऊपर तो मैं अम्मी के पास से उठा और छत की सीढ़ियाँ चढ़के छत पे बाजी के पास चला गया जो की नीचे बिस्तर पे बैठी थी

मेरे ऊपर जाते ही बाजी ने कहा तुम सो मत जाना आज की रात जाग के गुजारेंगे ,मैं अभी थोड़ी देर तक आ जाओंगी तुम्हारा दूध ले के

मैने अब की बार थोड़ी हिम्मत की और अपना हाथ बाजी के लेफ्ट चूची पे रख के हल्का सा दबा दिया और बोला

बाजी मुझे तो अब ताज़ा दूध ही पीना है क्या आप पिलाओगी मुझे

बाजी ने मेरी गॉल पे प्यार से चुटकी कटी और बोली

भाई मैं तो बस अब तुम्हारी ही हूँ

जब दिल चाहे जितना दिल चाहे दूध पियो मैं भला तुम्हे कयूं मना करने लगी तुम तो अब मेरी जान और जिस्म के भी मलिक हो

बाजी की बात ने मुझे इतना सकून दिया की मैं बता नहीं सकता और फिर बाजी मेरे पास से उठी और नीचे चली गई और मैं चारपाई पे लेट के बाजी की वापसी का इंतजार करने लगा
जैसे बाजी ने कहा था की आज की रात जाग के गुज़ारनी है तो फिर मुझे नींद कैसे आ सकती थी

बाजी कोई 30 मिनट के बाद वापिस आयी तो बाजी के हाथ मैं दूध का गिलास भी था जो बाजी ने मुझे पकड़ा दिया तो मैने एक ही साँस मैं पूरा ग्लास खाली कर के बाजी की तरफ देखा तो बाजी ने कहा

अभी थोडा सब्र करो सब को अच्छी तरह से सो जाने क बाद जो भी दिल चाहेगा करेंगे

हम दोनो अलग अलग बिस्तर पे लेते इंतज़ार की आग मैं जलते रहे

कोई 30 मिनट क बाद बाजी उठी और नीचे चली गई और वापिस आके
सीधा मेरी बिस्तर पे लेट गई तो मैने बड़ी बेताबी से बाजी को अपने साथ लिपटा लिया और बाजी को किस करने लगा और चूची को मसालने लगा

थोड़ी देर तक किस करने के बाद बाजी ने मुझे खुद से अलग किया और बिस्तर से उठ के खड़ी हो गई

अपने कपड़े उतार ने लगी तो मैं भी उठ के बैठ गया और कपड़े उतार के नंगा हो गया
बाजी के कपड़े उतरते ही मैने फिर से बाजी को वापिस अपनी तरफ खींच लिया और फिर से बाजी की ज़ुबान को अपने मुँह मैं भर के चूसने लगा और बाजी की चूचियों को मसालने लगा तो बाजी ने भी अपना हाथ नीचे किया और मेरा लण्ड जो के बाजी की जांघों मैं घुसा जा रहा था अपने हाथ मैं पकड़ लिया और सहलाने लगी जिस से मुझे बहुत अच्छा फील होने लगा और

मैने बाजी की ज़ुबान को अपने मुँह मैं जकड़ लिया और चूसने लगा

कुछ देर बाद जब मैने बाजी को छोड़ा तो बाजी ने लंबी साँस ली और बोली भाई आराम से करो मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही हूँ

और उठ के बैठ गई और मुझे भी सीधा लिटा दिया और मुझे प्यार से चूमना और चाटना चालू किया और फिर मेरे लण्ड सुपाड़े को अपने मुँह मैं भर क चूसने लगी
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04-29-2020, 01:03 PM,
#13
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
अब बाजी कभी मेरे लण्ड के सुपाड़े को और कभी मेरे लण्ड की नीचे गोलियों को मुँह मैं भर के चूस रही थी जिस से मैं मज़े से काँप काँप जाता और बाजी के सर को अपने हाथ से सहलाने लगता

कोई 2 3 मिनट तक मेरे लण्ड को चूसने और चाटने क बाद बाजी ने अपना सर उठाया और आहिस्ता से बोली चलो भाई आ जाओ

अब तुम्हारी बरी है मुझे प्यार करने की और जैसे ही मैं उठा बाजी मेरी जगह लेट गई और अपनी गांड के नीचे एक तकिया रख लिया जिस से बाजी की चुत उभर के सामने आ गई

मैं अब बाजी की टाँगों को खोल के दरमियाँ मैं बैठा और अपना लण्ड बाजी की चुत पे रखा ही था की बाजी ने अपना हाथ मेरे पेट पे रख के मुझे रोक दिया और

बोली कयूं भाई क्या तुजे मेरी चुत पसंद नहीं आयी क्या

मैने हैरानी से बाजी की तरफ देखा जो की चाँद की रोशनी मैं मुझे सॉफ नज़र आ रही तो बाजी ने कहा

भाई तुम भी मेरी चुत चाटो प्लीज बड़ा मज़ा आएगा भाई

कयुँकि मैंने आज तक किसी की भी चुत ना तो चाटी थी और ना ही कभी ऐसा सोचा था

लेकिन बाजी का दिल चाह रहा था इस लिए मैने अपना लंड बाजी की चुत से हटा लिया और थोड़ा पीछे हो के बैठ गया और

फिर अपना सर अपनी बहिन की चुत के सामने झुका दिया और अपने होंठों से बाजी की चुत पे किश किया .फिर अपनी ज़ुबान को बाजी की चुत मैं चलाने लगा

उस वक़्त बाजी की चुत काफ़ी गीली हो रही थी और मेरी ज़ुबान बाजी की चुत पे घूम रही थी जिस से मुझे भी मज़ा आने लगा था और बाजी की चुत से निकालने वाला पानी जो की मेरे मुँह मैं ही जा रहा था
मुझे हल्का नमकीन टेस्ट दे रहा था जिस से मैं और भी ज़ोर से बाजी की चुत मैं अपनी ज़ुबान को घुसा के चाटने लगा और

बाजी मेरे सर को अपनी चुत पे दबाने लगी
रात का वक़्त था और आवाज़ दूर तक जा सकती थी इस लिए बाजी बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को कंट्रोल कर पा रही थी वरना घरवाले जाग जाते

बाजी अब अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चुत पे दबाने लगी और साथ ही अपनी गांड को भी उठा के मेरे मुँह पे रगड़ने लगी थी

जिस से मैं समझ गया की बाजी का होने वाला है और मैने थोड़ा और ज़ोर लगाके अपना सर जैसे ही बाजी की चुत से हटाया बाजी का जिस्म एक बार आकड़ा और

फिर चुत से ढेर सारा पानी निकलने लगा . जिसे मैं पी गया फिर बाजी का शरीर ढीला पड़ पड़ गया.

थोड़ी ढेर बाद बाजी मुझे फिर किस करने लगी
मैं अब की बार हुआ और अपना लण्ड बाजी की चुत पे सेट किया और आहिस्ता से घुसाने लगा

एक तो बाजी की चुत बहुत ज़्यादा गीली थी जिसकी वजह से मेरा लण्ड बड़े प्यार से बाजी की चुत मैं घुसने लगा और बाजी के मुँह से ईईईईईईईईईईईईई की सी आवाज़ भी निकालने लगी

बाजी की चुत जितनी गीली थी उतनी ही टाइट भी थी जिस की वजह से मुझे बाजी की चुत मैं अपना लण्ड घुसाने मैं बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था और

शायद बाजी को भी कयुँकि जैसे ही बाजी की चुत मैं मेरा आधा लण्ड घुसा बाजी ने अपनी गांड को थोड़ा सा पीछे को खिसकाया और फिर से आगे किया तो

मैने भी अब बाजी की टाँगों को पूरा उठा के बाजी के कंधों की तरफ फोल्ड कर के अपना वज़न भी बाजी पे डाला और एक जोर से झटका मार के पूरा लण्ड चुत पे दे दिया .
बाजी के मुँह से आआईयईईईईईईईईईईईईईई विकी आराम से करो अभिईीईईई कहीं मेरी चीख ना निकल जाय ऊऊहह हाआंणन्न् भाईईईईईईईईईईईईईईई बस आराम से करो , तुम्हारा बहुत मोटा और लंबा लण्ड है
मेरे भाई , थोड़ा आराम से चोदो अपनी बहिन को ..
आआआहह उनम्म्ममह मेरी जान अब अच्छा लग रहा हाईईईईई की आवाज निकालने लगी जो की बिल्कुल स्लो थी की कोई सुन नहीं सकता था

अब मैं अपना पूरा लण्ड अपनी बड़ी बहिन की चुत से निकलता और फिर वापिस घुसा देता लेकिन ज़्यादा ज़ोर नहीं लगा रहा था की बाजी को ज़्यादा दर्द ना हो कयूं की उनकी चुत बहुत टाइट थी और

वो दूसरी बार ही चुद रही थी मेरे साथ ही

आअहह बाजी ये आप ने मुझे क्या बना दिया हाईईईईई बाजिीइईईईईईईई की आवाज़ भी निकालने लगा

हम दोनो बहिन भाई कोई 15 20 मिनट तक बड़े प्यार और आराम से चुदाई करते रहे जिस मैं बाजी अब दूसरी बार डिस्चर्ग होने क करीब थी और साथ ही मैं भी तो

बाजी जो की पूरा मज़ा ले रही थी अपनी चुदाई का बोली आअहह विकी मेरे बहनचोद भाई
भाईईईईईईईईईअभी थोडा तेज़ करूऊऊ भाईईईईईई मैं गैिईईईईईईई मेरी जान ओह की आवाज़ करने लगी

तो उस वक़्त पता नहीं की मुझे बाजी के मुँह से अपने लिए बहनचोद लफ्ज़ इतना अच्छा लगा की मैं बाजी को पूरी ताक़त से चोदने लगा और

हा फरी बाजी मैं तेरा बहनचोद भाई हूँ और तू मेंरी रंडी बहिन हाईईईई आआहह ये ले बाजी अपने भाई के लण्ड का पानी ....

ऊऊहह की आवाज़ क साथ एक तेज़ झतका दिया और बाजी की चुत मैंन ही अपने लण्ड का पानी गिराने लगा ...

बाजी भी ..जोर जोर से अपनी गांड को हिला रही थी . और उसने मुझे जकड के पकड़ लिया था

मैं फरी बाजी के साथ,उनके ऊपर ही लेटा रहा . और हम दोनों लंबी लंबी साँस लेने लगे

थोड़ी देर के बाद मेने अपना लण्ड बाजी के चुत से बाहर निकल के बाजी के साइड पे लेट गया .

बाजी ने जो की अपने साथ पहले ही एक कपड़ा लाई थी उससे अपनी चुत को साफ़ की और फिर उठ के मेरे लण्ड को साफ़ करने लगी

बाजी ने हंसते हो कहा भाई मज़ा आया की नहीं

मैं... हंसते हुए हाँ बाजी मज़ा तो बहुत आया अपने ने मुझे गाली कयूं दी भला

बाजी... अच्छा जी ज़रा बताओ तो मैने अपनी जान से प्यारे भाई को ऐसी कौन से गाली दे डाली की उसे बुरा लगा

मैं... बोला .वो बाजी बुरा तो नहीं लगा लेकिन फिर भी भला ये कोई अच्छी बात है की आप मुझे ऐसा बोलो

बाजी....लेकिन मेरी जान बताओ तो सही की भला मैने कौन सी गाली दी और क्या गाली दी

जिस से तुमको बुरा लगा

मैं...बाजी.....वो आप ने मुझे कहा था ना वो

बहनचोद ..बहिन छोड़

बाजी... मेरी बात सुन के मेरी गॉल पे चूंटी काटते हुए बोली भाई

क्या मैने ग़लत कहा था क्या तुम बहनचोद नहीं हो

मेरे प्यारे से बहनचोद भैया क्या तुम मेरी चुत का मज़ा नहीं लेते

मैं... बाजी की बात से शर्मा गया और .वो तो बाजी अपने ,ने ही मज़बूर किया था मुझे इस लिए

बाजी... अच्छा जी तो सारा गुनाह अब मेरे सर दे रहे हो मैं... अरे नहीं बाजी मैं तो बस वो खेतों वाली बात के लिए बोल रहा था अभी के लिए तो नहीं बोला

बाजी... देखो भाई अब जिस तरह तुम मेरे बहनचोद भाई बन चुके हो जो की सच है

तो वेसे ही मैं तुम्हारी . बनी चुकी हूँ जिसे जब दिल करे जहाँ दिल करे तुम चोद सकते हो समझे.

लेकिन छुप के .. किसी को पता न चले .

थोड़ी देर तक हम दोनो बहिन भाई इसी तरह हँसी मज़ाक करते रहे और फिर से बाजी के कहने से एक बार और बाजी को चुत मारी और उस के बाद

हम दोनो अपने अपने बिस्तेर पे सो गये
सुबह जब मेरी नींद खुली तो सुबह हो चुकी थी और हल्का हल्का रौशनी हो रही थी जिस की वजह से

मेरी आँख खुली थी मैने बाजी की बिस्तर की तरफ देखा तो वहाँ कोई भी नहीं था

बाजी उठ के नीचे जा चुकी थी शायद

तो मैं भी उठा और नीचे आ के अपने रूम मैं फिर से सो गया

दोबारा मेरी आँख किसी के हिलने से खुली तो उठ क देखा तो अम्मी थी जो मुझे नाश्ते के लिए जगा रही थी मैं अपनी आँखों को मलता उठ गया और बोला क्या अम्मी आज आप गई नहीं अभी तक खेतों मैं

अम्मी... कयूं मैं यहाँ अपने बेटे के पास घर मैं नहीं रह सकती

मैं... जी कयूं नहीं अम्मी ये तो और भी अच्छी बात है की चलो इस बहाने मुझे अपनी स्वीट सी अम्मी के साथ भी थोडा वक़्त गुज़रने का मोका मिलेगा

अम्मी... ज़्यादा माखन नहीं लगाओ बेटा और उठ क नाश्ता करो नाश्ते मैं ज़्यादा देर नहीं करनी चाहिए समझे

मैं... अच्छा जी उठता हूँ आप भी क्या याद करोगी की किस बेटे से पाला पड़ा था अपका

अम्मी... बड़ी मेहरबानी होगी जी बेटा हज़ूर की अपने ने अपनी अम्मी की बात मान ली वरना

हम तो समझे थे की आप हमारा सर ही क़लम करवा देंगे
इस गुस्ताख़ी पे और इतना बोलते ही हंस पड़ी

मैं भी अम्मी की बात सुन के हंस पड़ा और उठके तौलिया उठाया और बहार बने गुसलखाने मैं नहाने के लिए चल दिया

जब नहाके बहार निकला तो अम्मी क साथ मुझे फ़रीदा बाजी और फ़रज़ाना ही नज़र आयी जो की घर के कामों मैं लगी हुए थी

कयुँकि अम्मी घर पे थी इस लिए वरना अब तक फ़रज़ाना तो पका अपनी सहेली बिलो (नाम तो उसका शमा था लेकिन बिली की तरह की आँखों की वजाह से उस का नाम पुरे गावँ मैं बिलो मसहूर हो गया था) के घर अपने डाइजेस्ट ले के पहुँच चुकी होती और दोपहर की खाने पे ही आती

मैं रूम के बहार बने बरामदे मैं ही बैठ गया तो अम्मी मेरे लिए नाश्ता ले की आयी तो मैने फ़रज़ाना जो की मेरी चारपाई जिस पे मैं नाश्ते के लिए बैठा हुआ था

करीब ही सफाई कर रही थी की तरफ देख के अम्मी से बोला देखा
अम्मी आप यहाँ हो तो ये किस तरह घर क काम कर रही है वरना अभी तक अपनी सहेली के घर बैठी डाइजेस्ट पढ़ रही होती
फ़रज़ाना....भाई कयूं मुझे इल्ज़ाम दे रहे हो बाजी से पूछ लो

अम्मी मैं तो सारा दिन घर मैं ही होती हूँ बाहर भी नहीं जाती काम ही इतना होता है भाई झूट बोल रहा है(मुझे घूर रही थी )

अम्मी... फ़रज़ाना बेटी बुरी बात भाइयों को इस तरह नहीं बोलते और फिर ये तो तुम्हारा एक ही भाई है इस की किसी बात का बुरा नहीं मना
दुबारा ऐसा नहीं बोलना

मैं... फ़रज़ाना की तरफ देख के मुस्कराते हो बोला सुना नही क्या तुम ने अम्मी ने क्या कहा है चलो माफ़ी माँगो मुझ से हो सकता है की मैं तुम्हे माफ़ कर ही दूँ

अम्मी...विकी बेटा बुरी बात अब तुम अपनी बहिन को जान बुझ के तंग कर रहे हो चलो नाश्ता करो जल्दी से बाकी का हँसी मज़ाक बाद मैं होता रहेगा और उठ के पीछे की तरफ चल पड़ी

अम्मी के उठते ही फ़रज़ाना फिर से काम मैं लग गई थी और मैं अभी नाश्ते के लिए हाथ धोने ही लगा था की

मेरी नज़र अम्मी की तरफ गई जो की अब मेरी तरफ अपनी पीठ किया जा रही थी की मेरी नज़र उनकी गांड पे गई जिसमैं की उनकी क़मीज़ फाँसी हुयी थी

और उनकी गांड जब अम्मी चलती तो पूरी तरह हरकत करती हुयी नज़र आने लगी जिसे देख के मेरा हल्क़ सूखने लगा क्योंकि अम्मी की गांड कपड़ों मैं ही इतनी प्यारी लग रही थी की क्या बताऊँ
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04-29-2020, 01:04 PM,
#14
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
अम्मी फ़रीदा बाजी के पास जा के बैठ गई जो की बर्तन धो रही थी तो मेरी नज़र का सामने का तालिस्म टूट गया और मैं जैसे हड़बड़ा गया और सर झुका के नाश्ता करने लगा

लेकिन नाश्ता भी मुझ से ठीक से नहीं किया जा रहा था बार बार मेरी नज़र के सामने मेरी अम्मी की गांड मैं कपड़ा फँसने से जो अम्मी की गांड का हिलना का नज़ारा मिला था बार बार मेरी नज़रों क सामने आ जाता

मेरे नाश्ता ख़तम करते ही फ़रीदा बाजी बर्तन उठाने आयी

तो मैने बाजी से फरी बाजी का पूछा तो बाजी ने कहा वो आज अम्मी की जगा खेतों मैं गई है अबू के साथ काम मैं लगी हो गी

खैर मैं और कुछ नहीं बोला और वहीं लेट गया तो फरजाना जो की अब सफाई कर चुकी थी अम्मी के पास गई और बोली अम्मी मेरा काम ख़त्म हो गया है क्या मैं बिल्लो के घर चली जाओं थोड़ी देर के लिए प्लीज जल्दी वापिस आ जाउंगी

अम्मी ने हाँ मैं सर हिला दिया तो

फ़रज़ाना खुशी से उछालती हुयी अपना डाइजेस्ट उठा के बिल्लो की घर तरफ भाग गई

अम्मी उठी और मेरे पास आ के बैठ गई पैरों की तरफ तो मैं जल्दी से उठने ही लगा था की अम्मी ने कहा नहीं नहीं लेतो आराम से कोई बात नहीं तो मैने फिर से अपनी टाँगों को पहले की तरह फेला दिया

जिस से मेरा दाहिना पावं अम्मी के चूतड़ों से टकरा गया

मेरा पावं जेसे ही अम्मी के चूतड़ों से टच हुआ मेरे जिस्म मैं सनसनी की लहर ही दौड़ गई लेकिन अम्मी मेरे पावं के लगने बावजूद बड़े आराम से बैठी रही तो मैने भी अपना पावं वहीं रखे रहा और वहाँ से हटाया नहीं तो अ

म्मी ने कहा विकी बेटा

शहर मैं तो तुम अपने दोस्तों क साथ घूमने फिरने निकल जाते होगे लेकिन यहाँ

तुमको घर पे रहना पड़ता है तुम तंग तो आ जाते होंगे ना यहाँ आ के कयुँकि यहाँ बस घर पे ही रहना होता है

मैं अम्मी की बात सुन के हल्का सा हंस दिया और बोला नहीं

अम्मी ऐसी तो कोई बात नहीं बात सिर्फ़ इतनी है की अगर किसी भी इंसान को उसे अपने घर पे हर चीज़ मिल जाए तो उसे यहाँ वहाँ फिरने की ज़रूरत ही क्या है (और इतना बोलते ही पता नहीं केसे )

लेकिन अपने पावं को जो के अम्मी की गांड से लगा हुआ था थोडा और ज़ोर से अम्मी की गांड पे दबा दिया)

अम्मी की गांड पे जेसे ही मेरे पावं का दबाव बड़ा अम्मी ने हैरत से मुड़ कर मेरी तरफ देखा और फिर अपना सर और पीछे घुमा के मेरे पावं को देखा जो की

अभी तक अम्मी की गांड से टच था और मैने हटाया नहीं था तो अम्मी के चेहरे पे गुस्सा नज़र आने लगा तो मैने झट से अपना पावं हटा लिया तो अम्मी मुझे बड़े गुस्से और बे यक़ीनी से देखती हुए खड़ी हो गई और

बिना कुछ बोले अपने रूम की तरफ चली गई तो
मैं परेशान सा हो गया की..... अब क्या होगा....
कयुँकि मैने जो अभी किया था अम्मी के साथ वो किसी तरह भी ठीक नहीं था और अब ये सब होने क बाद और अम्मी का चेहरा देखने के बाद मेरी गांड फटने लगी थी
तो मैं उठा और घर से निकल के ऐसे ही आवारा घूमने लगा
दोपहर के कोई 12 बजे मैं डरते डरते घर वापिस आया तो देखा की फ़रीदा जो की खाना बना चुकी थी फ़रज़ाना के साथ मिल के और अब खाना खाने की तैयारी हो रही थी
मुझे देखते ही फ़रीदा बाजी बोली भाई ये क्या अम्मी आप के साथ थोडा वक़्त गुज़रने की खातिर आज खेतों पे भी नहीं गई और आप हो की कुछ पता ही नहीं की कहाँ आवारा गार्दी करते फिर रहे हो
मैने बस वो काम था थोड़ा बोल के रूम की तरफ चला गया तो थोड़ी ही देर के बाद बाजी फ़रीदा मेरे रूम मैं ही खाना ले के आ गई
जिसे देख के मैने हेरनी से बाजी की तरफ देखा और बोला ये क्या बाजी खाना तो 2 लोगों का है
बाजी ने कहा हां
आप को और अम्मी का अम्मी भी तुम्हारे साथ ही खाना खाईंगी और निकल गई तो
मैं अम्मी का सुनते ही घबरा गया और खिसकने के लिए चारपाई से खड़ा ही हुआ था की अम्मी रूम मैं आ गई और मुझे चारपाई से उतरता देख के बोली कहाँ जा रहे हो
मैं वो अम्मी बस शरू करो मैं अभी आता हूँ तो अम्मी ने मुझे घूर के देखा और बोली
विकी आराम से बैठ के खाना खाओ फिर जहाँ घूमना है चले जाना
भला हुमारे मना करने से तुम अब घर मैं थोडा ही रूकोगे इतना बोलते ही अम्मी की आँख मैं आँसू आ गये थे
जिन्हें देख के मुझे दिल से शर्मिंदगी होई तो मैं बैठ गया
खाना हम माँ बेटे ने खामोशी से खाया और फिर अम्मी चारपाई से उतार गई और ज़रा झुक के बर्तन उठाने लगी
तो उनका दुपटा उन के कंधे से फिसल क नीचे जा गिरा तो अम्मी के खुले गिरेबान वाली क़मीज़ मैं से
अम्मी की चूचियां आधे से ज़्यादा नज़र आने लगी जो की किसी भी हसीन और जवान लड़की से भी ज़्यादा बड़ी और सुन्दर और एक काली ब्रा मैं फंसी थी
मुझ पे क़यमत ढा रहे थे और मेरी नज़र उनपे टकटकी की तरह लगी हुयी थी की
तभी अम्मी ने भी शायद महसूस कर लिया था या बस वो बर्तन उठा के सीधी हुई तो मुझे इस तरह घूरता देख के फॉरन समझ गई की मैं क्या देख रहा था
लेकिन अब की बार अम्मी कुछ बोली नहीं और एक अजीब सी नज़र से देखते हो बर्तन उठा के चली गई
अम्मी के जाते ही जैसे मुझे थोड़ा सकून मिला और मैं खुद भी खड़ा हो के खिसकने लगा की फ़रज़ाना आ गई और आते ही बोली अम्मी बोल रही है की तुम कुछ देर के लिए उन की पास आ जाओ गप सप करेंगे

अब मैं खामोश खड़ा सोचता रहा की आख़िर अम्मी ने क्या बात करनी थी मेरे साथ और आ जा की मेरे दिमाग मैं सुबह और अभी थोड़ी देर पहले वाली हरक़त ही नज़र आती की जिस की बारे अम्मी कोई बात करना चाहती हो जिसे सोचते ही मेरी तो हवा टाइट होने लगी थी
मैं थोड़ी देर सोचने के बाद जो तक़दीर होगा होगा ही और अम्मी के रूम की तरफ चल दिया जो की सब से अलग बना हुआ था और जब मैं अम्मी के रूम मैं घुसा तो अम्मी ने मुझे बड़ी अजीब से नज़रों से देखा और बोली आ जाओ यहाँ मेरे पास ही बैठो आज तुम से भी कुछ बातें हो जायँ
मैं अम्मी की आँखों मैं देखता आगे बड़ा और अम्मी की चारपाई जिस पे वो आराम से लेती हुयी थी उस वक़्त जाके अम्मी के पैरों की तरफ बैठ गया तो अम्मी जो की अभी तक मेरी आँखों मैं ही देख रही थी बोली विकी बेटा क्या बात है आज तुम मुझे सुबह से कुछ बदले बदले दिखाई दे रहे हो
मैं... क्या मतलब अम्मी मैं समझा नहीं की मैं भला किस तरह से बदल सकता हूँ
अम्मी... देखो विकी आज सुबह से तुम्हारा रवईया घर मैं अजीब सा नज़र आ रहा है खास तौर से मेरे साथ

मैं... लेकिन अम्मी मुझे तो नहीं लगता की मैने आपके या किसी और के साथ किसी तरह की कोई बदतमीज़ी की हो
अम्मी...(मेरी आँखों मैं गहराई तक देखते हो जेसे वो कुछ सोच रही थी )
बोली बेटा बात ये है की मुझे लगता है की तू अब तो अच्छे से जवान हो गया है और अब तेरे लिए कुछ सोचना चाहिए मैं करती हूँ तुम्हारे अब्बू से बात की वो कोई लड़की देखें
मैं... नहीं अम्मी ये भला किस तरह हो सकता है की घर मैं मेरी जवान बड़ी बहनें बैठी हों और मैं उन से पहले अपने लिए कुछ सोचों प्लीज अम्मी ये बात
सोचना भी मत , अभी मुझसे कुछ और पढ़ाई भी करनी है
अम्मी.... ठंडी आअहह भरते हो बोली देखो बेटा जब जवानी आती है ना तो जवानी के जोश मैं इंसान सब कुछ भूल जाता है और ये ही वजह है की हम ने
तुम्हे बाहर आवारा गर्दी और ज़्यादा दोस्ती की इजाज़त कभी नहीं दी
कयुँकि हम नहीं चाहते थे की हुमारा बेटा बुरी सोहबत मैं गिरफ्तार हो के इतना बिगड़ जाए की हमारा सहारा ना बन सके लेकिन मुझे लग रहा है की यहाँ हम अपनी लाइफ की सब से बड़ी ग़लती कर चुके हैं
मैं... अम्मी अगर आप ने मुझे बुरी सोहबत और बाहर जा के आवारा होने और बिगड़ने से बचाने की कोशिश की है तो इस मैं आप से कोई बड़ी ग़लती नहीं हुयी है जो आप परेशान हो रही हो
अम्मी... बेटा मैं माँ हूँ तेरी और तेरी नज़रों को और तुम्हे बहुत अच्छी जानती हूँ और जो मैं तुम्हारे अंदर इस बार तब्दीली देख रही हूँ ये मुझे ख़ौफ़ परेशान हूँ
मैं... अम्मी आख़िर आप किस बात से इतनी ख़ौफ़ जादा हैं ज़रा मुझे भी तो पता चलना चाहिए
अम्मी... रहने दे बेटा फिर कभी बताऊंगी
अच्छा देख अभी मैने तुम्हे इस लिए बुलाया था की अगर तो बाहर जाना या नहीं दोस्त से मिलाना चाहता है तो आज से तुम पूरी तरह से से इजाज़त है
अब तुम्हे कोई भी मना नहीं किया करेगा बाहर जाने और दोस्त बनाने से
मैं...( हैरानी से अम्मी की तरफ देखने लगा कयुँकि अब मैं समझ गया था की अम्मी कयूं चाहती हैं की मैं बाहर निकल कर और दोस्त भी बनें वो समझ चुकी थी ) की अगर मैने जवानी मैं कोई ग़लत क़दम उठा दिया और वो भी अपने ही घर मैं तो हम किसी को अपना मुँह दिखाने के क़ाबिल भी नहीं रहंगे
लेकिन सच तो ये था की मैं घर का मज़ा ले चुका था तो मैने बस अम्मी की तरफ ना देखते हो इतना ही बोला अम्मी लगता है की
मुझ से कोई ऐसी ग़लती हो गई हैकी जिस की वजाह से आप नाराज़ हो
अगर ऐसी कोई बात है तो प्लीज अम्मी मुझे बता दो अगर मेरी ग़लती हुयी तो हमेशा के लिए इस घर से चला जाऊंगा और कभी किसी को अपनी शकल भी नहीं दिखाऊंगा मैं
अम्मी.... मेरी आख़िरी बात को सुन के तड़प उठी और मुझे अपने सीने से भींच लिया और बोली देखो
विकी बेटा फिर कभी अपने मुँह से ऐसी बात मत निकलना वरना तो मेरा मरा हुआ मुँह देखेगा और रो पड़ी
अम्मी मुझे अपने सीने से भिंचे रो रही थी
और मैं अपनी मा के सीने से लगा उनकी चूचियों की मुलायमता का लुत्फ़ ले रहा था
जिस से मेरा लण्ड भी कड़ा होने लगा और मैने बहुत कोशिश की खुद को अम्मी से थोड़ा दूर रखूं कयुँकि मेरा लण्ड अम्मी की टाँगों से टच ना हो
अम्मी ने मुझे अपनी तरफ खींचा था सीने से लगाने के लिए तो मैं तक़रीबन अम्मी के ऊपर गिरा हुआ था
जैसे ही मेरा लण्ड अम्मी की जांघों को घुटनो से थोड़ा ही ऊपर टच हुआ तो
अम्मी ने मुझे झटके से अलग किया और हेरनी से मेरी तरफ देखने लगी और तिरछी नज़र से नीचे जहाँ मेरा लण्ड अपनी औकात मैं खड़ा हुआ था और मेरी पैंट और क़मीज़ मैं एक तंबू सा बना हुआ था
अम्मी ने थोड़ी देर ये सब देखा तो बोली ठीक है विकी तुम जाओ अभी यहाँ से हम अब बाद मैं बात करंगे तो मैं उठा और अम्मी क रूम से निकल के अपने रूम की तरफ चल पड़ा
अपने रूम मैं आ के मैं अपनी चारपाई पे लेट गया और सोचने लगा की क्या ये जो कुछ हो रहा है और मैं कर रहा हूँ क्या वो सब ठीक है या
मुझे अपने आप कंट्रोल करने की ज़रूरत है
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04-29-2020, 01:06 PM,
#15
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
ये सब सोचते सोचते मैं आख़िर इस फ़ैसले पे पंहुचा की मुझे अब ज़रा सतर्क रहना चाहिए
और फरी बाजी के साथ मेरा जो रीलेशन बन चुका है बस उसी तक मसरूफ रहना चाहिए कयुँकि इसी मैं मेरी और फरी बाजी दोनो की भलाई थी इस फ़ैसले से मैं काफ़ी मुतमान हो गया और फिर सो गया
जुब आँख खुली तो शाम होने वाली थी मैं उठा और हाथ मुँह धोया और बाहर निकला और खेतों की तरफ चल दिया जहाँ अबू और फरी भी काम से निपट हो चुके थे
अब बस भेंसों का दूध निकलना ही बाकी था जो की अबू ने ही निकलना था
मुझे खेतों की तरफ आता देख के बाजी खुश हो गई और उनका चेहरा भी हल्का गुलाबी सा हो गया तो
मैने कहा कयूं बाजी काम कर के ज़्यादा तक तो नहीं थक गई आप जो आपका का फेस रेड हो रहा है
बाजी मेरी बात सुन क हंस दी और बोली
भाई मुझे अभी तुम्हारी तरह शहर की आदत नहीं हुयी जो मैं इतने से काम से थक जाऊं तो
तभी अबू जो की पास ही बैठे थे बोले बेटा आज सारा दिन तुम ने चक्कर ही नही लगाया खेतों का क्या तुम्हे हमारी याद नहीं आती
मैं अबू की तरफ देख के मुस्कुरा दिया और बोला कैसी बात करते हो आप अबू भला मैं और आप को याद ना करूँ
बस आज देर अम्मी की वजाह से हुयी अम्मी ने आज मुझसे से शहर की बातें करती रहीं
थोड़ी देर तक अबू और फरी बाजी से इस तरह की बातें करते हुए वक़्त गुज़ारा
फिर अबू ने भेंसों का दूध निकाला तो मैं बाजी के साथ ही उठाके दूध ले के घर को चल पड़े और
थोड़ा आगे आते ही मैने बाजी को आज होने वाली सारी बातें बता दी तो बाजी भी थोडा परेशान हो गई
और बोली यार भाई ये क्या किया तुम ने अब अम्मी को तुम पे कहीं शक ना हो गया हो
मैं भी थोड़ा परेशान हो गया और बोला बाजी पता नहीं वो सब देख के मेरा अपने पे कण्ट्रोल नहीं रहता अब और ..मेरा लंड करा हो जाता है... मै क्याकरूँ ..कुछ समझ मै नहीं आ रहा है ...
लेकिन बाजी अम्मी को किस तरह शक हो सकता है हम पर
कौनसा किसी को बताने वाले हैं जो अम्मी को कुछ पता चलेगा बस अब ज़रा ध्यान से करना होगा जो भी करंगे
बाजी एक ठंडी साँस भारी और बोली भाई लगता है की मेरी किस्मत मैं ज़्यादा देर तक सकून नहीं है
तुम्हारे साथ तो मैं भी हेरान हो के बोला क्या मतलब बाजी मैं समझा नहीं आपकी बात
बाजी ने मेरी तरफ अजीब नज़रों से देखा और बोली तुम्हे आज ही पता चल जाए गा
अगर मेरा शक सही हुआ था और फिर हम घर तक पहुँच गये और
थोड़ी देर हँसी मज़ाक क बाद मैने बाजी को ऊपर अपना बिस्तेर लगाने का बोला तो बाजी मेरे साथ ही अपना बिस्तेर भी बिछा दिया
लेकिन जब मैं ऊपर सोने के लिए चला गया तो थोड़ी ही देर के बाद फरीदा बाजी एक और चारपाई उठा के ऊपर लाई और बिछाने लगी
तो मैं काफ़ी हेरान हुआ और बोला ये क्या आज तुम भी ऊपर ही सोने आ गई हो क्या तो फ़रीदा ने कहा नहीं भाई ये अम्मी का बिस्तेर बिछा रही हूँ आज वो ऊपर र तुम लोगों के पास ही सोएंगी क्या समझे
फ़रीदा बाजी की बात सुनते ही मुझे बाजी की बात याद आ गई और मैं सच मैं परेशान हो गया की कहीं अम्मी को सच मैं हम दोनो पे शक तो नहीं हो गया
जो आज अम्मी ने अपना बिस्तेर ऊपर ही लगवा लिया है
ये सोच बहुत ही ख़तरनाक थी और अगर इस मैं थोड़ी भी सचाई थी तो अब हमें ज़रा संभाल के चलना था

कयुँकि अगर अम्मी को ज़रा सी भनक भी लग जाती तो हमारी गांड फटना तो यक़ीनी था

फ़रीदा बाजीके जाने के थोड़ी देर बाद ही बाजी फरी ऊपर आ गई

और खामोशी से अपने बिस्तेर पे लेट गई तो मैं उठ के बाजी की तरफ जाने लगा तो बाजी ने हाथ क इशारे से मुझे मना कर दिया और लेते रहने का इशारा किया

मैं कुछ समझा तो नहीं

लेकिन खैर वेसे जी लेता रहा तो तभी अम्मी भी ऊपर आ गई और आते ही बोली....

विकी क्या बात है कहीं तुम दोनो मैं कोई नाराज़गी तो नहीं हो गई.......................

जो इस तरह दोनो चुप चाप लेटे हो

मैने जल्दी से कहा नहीं अम्मी ऐसी तो कोई बात नहीं है बस बाजी आज सारा दिन खेतों के काम से थकी हुई है ना इस लिए मैने कोई बात नहीं की सो जाए ज़रा जल्दी से थकावट ख़तम हो

बड़ा ख्याल है तुम्हे अपनी बहिन का चलो ठीक है होना भी चाहिए और इतना बोल के अपने बिस्तेर पे लेट गई सोने के लिए और

उस के बाद हम सब चुप लेकिन अपनी जगह , पता नहीं ,,,,,,,

कब तक जागते रहे और जब आँख खुली तो पता चला की सुबह हो चुकी है मैं उठा और नीचे आ के फिर से सो गया

दोबारा आँख अम्मी के उठाने से खुली तो अम्मी ने नहा के नाश्ता करने को बोला और बोली पता नही विकी क्या होता जा रहा है तुम्हे भला कोई इतनी देर तक भी सोता है सूरज तो देखो कितना निकल आया है और तुम हो की अभी तक लंबी तान के सो रहे हो चलो जल्दी करो

मैं अपनी आँखें मलता हुआ उठ बैठा और बोला क्या अम्मी कोई काम तो है नहीं तो मैं इतनी सुबह उठ के क्या करूँगा सोने दिया करो ना अम्मी

और ये बोलते ही मैने अपनी आँखें पूरी तरह खोल के अम्मी की तरफ देखा जो की अभी तक मेरी चारपाई के पास ही खड़ी हुयी ई थी और मेरी तरफ ही देख रही थी

लेकिन जब थोड़ा गौर किया तो अम्मी की आँखें मुझे लगा की मेरी तरफ नहीं बल्कि मेरे फेस से थोडा नीचे कुछ देख रही .

जब मैने गौर किया तो मुझे एहसास हुआ की सोते मैं मेरा लण्ड खड़ा हो गया था जो की अभी तक फुल हार्ड था और अम्मी की नज़र मेरे खड़े लण्ड पे ही टिकी हुयी थी

अम्मी का इस तरह मेरे लण्ड की तरफ देखना मुझे अच्छा लगा तो मैने भी मुस्कुराते हो अपने लण्ड को झटका दिया और बोला

कयूं अम्मी क्या बनाया है नाश्ते मैं तो अम्मी ने झट से अपनी नज़र मेरे लण्ड से हटाई और मेरी तरफ देखा तो मुझे अपनी तरफ ही देखते पा कर अम्मी का फेस रेड हो गया और अम्मी ने अपनी नज़र घुमा ली और बाहर की तरफ चल पड़ी और जाते हो बोली क्या
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04-29-2020, 01:07 PM,
#16
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
तुम्हे नहीं पता की सुबह नाश्ते मैं क्या बनता है

अम्मी के जाते ही मैं भी खड़ा हो गया और थोड़ी देर इधर उधर हाथ पावं धोता रहा जिस से मेरा ज़हन बात गया तो खड़ा हुआ लण्ड भी नीचे आ गया तो मैने टवल उठाया और नहाने क लिए बाहर निकला और बात रूम मैं जा घुसा नहाने क लिए. (कयुँकि हम गांव के रहने वाले हैं तो हमारे घर पे बाथरूम था यह बड़ी बात थी और अच्छी बात तो था नहीं बाहर ही नहाना होता सब ने और खड़े लण्ड के साथ मैं रूम से निकल नहीं सकता था कयुँकि अम्मी तो अब मुझ पे शक करने ही लगी थी )

मैं नहा के बाहर निकला तो आज फिर फरी मुझे कहीं नज़र नहीं आयी तो मैं समझ गया की अम्मी ने बाजी को फिर से खेतों मैं भेज दिया होगा और खुद घर पे ही रहेगी

तो मैं खामोशी से बाहर बरामदे मैं ही बैठ गया और अम्मी ने नाश्ता ला के दिया जिसे खाने के बाद मैं उठा और बाहर निकल गया सलीम की तरफ जो मुझे देखते ही बोला सुकर है यार की तू भी घर से निकला और तुझे मेरी याद भी आ ही गई सुना क्या चल रहा है

मैने सलीम की तरफ देखा और बोला यार क्या चलना है बस सारा दिन घर पे पड़ा ख़ाता और सोता रहता हूँ या फिर खेतों पे चला जाता हूँ तो सुना क्या हो रहा है आज कल कोई नहीं चीज़ भी सेट की है या उन्ही पुरानी वालियों के साथ अपना टाइम पास कर रहा है

सलीम थोड़ा हंस दिया मेरी बात पे और बोला बस यार क्या करें तुम्हे तो पता ही है की कोई ना कोई मिल ही जाती है अपनी चुत का रस पिलाने के लिए और फिर हमारा जाता भी क्या है 2 क़तरे पानी क बस

सलीम की बात सुन क हम दोनो हंस दिए और फिर इधर उधर की बातें करने के बाद जब मैं वहाँ से आने लगा तो सलीम ने मुझे रोक लिया और बोला यार मिला नहीं तो कभी उसके बाद रीदा से क्या मज़ा नहीं आया तुम्हे उस क साथ या तेरी गांड फॅटती है

उस देख के अभी भी मैं हंस दिया और बोला .............बस यार

अब क्या ब्ताओं तुम्हे की मुझे डर लगता है घरवालों से की अगर उन्हें पता चल गया की मैं अब ये सब भी करने लगा हूँ तो मेरा कॉलेज ख़तम समझो फिर

सलीम हेरात से मुझे देखता हुआ बोला यार तुम तो इक्लोटे बेटे हो अपने मा बाप के वो भला तुम्हारे साथ कोई सख्ती किस तरह कर सकते हैं बस बात इतनी है की तुम हिम्मत तो करो

मैने बड़ी बेचारगी से सलीम की तरफ देखा और फिर आअहह भरते हो बोला यार दिल तो मेरा भी बहुत करता है

लेकिन क्या करें दिल नहीं मानता कयुँकि घर मैं अम्मी अबू के इलावा मेरी बेहनैन भी मेरा बड़ा ध्यान रखती हैं

और सब इतने अच्छे हैं की मेरा दिल नहीं चाहता की मैं किसी को ज़रा भी दुख दूँ बस इसी वजाह से डरता हूँ यार और कोई बात नहीं है

सलीम भी अब की बार मुझे देखता रहा और फिर जब मैं उठ गया तो इतना बोला देख लो

यार विकी की कहीं आज जिस तरह तुम अपने मा बाप और बहनों की वजाह से फटो बने फिरते हो अपना आप मार के कहीं कल शादी के बाद कहीं तुम्हारी बीवी भी तुम्हारी इस आदत का फाइयदा ना उठाए और तुम हमेशा के लिए एक बुज़दिल और औरतों के पॅलो मैं छुपने वाले ना बन जाओ

सलीम की बात तो सच ही थी लेकिन क्या करता मेरी आदत ही कुछ ऐसी हो गई थी अब की शायद बदल ही नहीं सकती थी लेकिन मैने सलीम से और कोई बात नहीं की और गावँ से बाहर रोड पे आ गया जो की शहर की तरफ जाता था और वहाँ बैठ की अपने बारे मैं सोचने लगा की आख़िर क्या करूँ तभी मुझे शहर की तरफ जाने वाली बस आती नज़र आयी और मैने बिना सोचे उसे हाथ के इशारे से रोक लिया और बस के रुकते ही उस मैं चढ़ गया और शहर चला गया

शहर आ के मुझे ख्याल आया की मैने तो घर मैं या गावँ मैं किसी को बताया भी नहीं की मैं शहर जा रहा हूँ वो परेशान होंगे

मेरे इस तरह आने से की तभी मेरे दिमाग मैं ख्याल आया की मुझे अब कुछ दिन वापिस नहीं जाना चाहिए
कयुँकि अब मुझे ये ही एक हल नज़र आ रहा था की जिस तरह घर वाले मुझे अपने प्यार से ब्लॅकमैल करते आए थे आज तक अब मैं भी उन्हें उन्ही के अंदाज़ मैं ब्लॅक मैल करूँ

शायद मैं भी थोडा सर उठा की चल सकों और लड़कों की तरह घूम फिर सकों एन्जॉय कर सकों

अपनी लाइफ को ये ख्याल जितना परफेक्ट था उतना ही मुझे पसंद आया और मैं अपने एक दोस्त के पास चला गया और उसे जब सारी बात बताई तो वो हंस दिया और बोला चल शूकर है

तुझे भी मर्द बनने का शौक हुआ और मुझे अपने साथ घर ले गया जहाँ उस ने मुझे अपनी बैठक मैं रुकवाया

और इस के साथ मेरे खाने पीने का इंतज़ाम उस ने घर से कर दिया
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04-29-2020, 01:07 PM,
#17
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
मैं कोई 4 दिन तक अपने दोस्त के घर रहा और फिर वहाँ से घर की तरफ रवाना हो गया तो जो पैंट क़मीज़ मैने यहाँ आते हो पहनी थी

मेरे दोस्त के मशवरे के मुताबिक मैं उन्ही कपड़ों मैं ही रहा, वो अच्छी तरह से गंदे हो गए और जब मैं उन्ही गंदे और मैले कपड़ों मैं 4 दिन बाद घर आया तो

मुझे देखते ही

अम्मी की आँखों मैं पानी आ गया और वो रोते हो मेरी तरफ भागी और मुझे लीपेट के ज़ोर से अपने साथ भींच लिया

मेरी अपनी हालत उस वक़्त अम्मी को इस तरह रोता देख के खराब होने लगी थी की

मैने अपने आप को ज़रा संभाला और अम्मी को खुद से अलग किया और अपने रूम की तरफ चल दिया

किसी से भी बात किए बिना बाजी फरी जो की मेरे लिए मेरा सब कुछ बन चुकी थी उन की तरफ भी अपना दिल कड़ा कर की देखे बिना मैं अपने रूम मैं आया और अपने कपड़े निकल के जा के नहाया और फिर से रूम मैं जा घुसा और दरवाजा को अंदर से लॉक कर क लेट गया जो की मैं ये सब जान बुझ के ही कर रहा था

घर वाले जितना मेरे वापिस आने से खुश थे वहाँ उस से भी कहीं ज़्यादा मेरे रविए पे हेरान भी थे

की आख़िर मुझे हो क्या गया है इसी तरह थोडा वक़्त गुज़रा था की मेरे रूम के दरवाजे पे नॉक होने लगी और

जब मैने ना तो दरवाजा खोला और ना ही कुछ बोला तो एक बार फिर से दरवाजा नॉक हुआ और साथ ही अबू की आवाज़ भी सुनाई दी जो की दरवाजा खोलने का बोल रहे थे

अबू की आवाज़ सुन के

मैं थोड़ा घबरा भी गया लेकिन दिल को मजबूत कर के दरवाजा खोल दिया और

जब अबू पे मेरी नज़र पड़ी तो मैं जहाँ था वहीं का वहीं किसी बुत की तरह खड़ा रह गया कयुँकि अबू इन 4 दीनो मैं ही बिल्कुल बूढ़े नज़र आने लगे थे और उनके कंधे भी झुके नज़र आ रहे थे

मैं हेरनी से अबू की ये हालत देखता हुआ सामने से हट गया
अबू मेरे रूम मैं आए और मेरी तरफ देखते हो रो पड़े तो मेरी समझ मैं नहीं आया की आख़िर मैं करूँ

तो क्या करूँ और अबू को कैसे चुप करवाऊं की तभी अम्मी और बाजी फरी रूम मैं आ गई और अबू को संभाल के चारपाई पे बैठा दिया तो

अम्मी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा विकी ये तूने ने क्या किया बेटा आख़िर कहाँ हमारे प्यार मैं तुम्हे कमी नज़र आयी

मैं... पता नहीं उस वक़्त मेरे अंदर इतनी दलेरी कहाँ से आ गई की

मैं अम्मी की आँखों मैं आँखें डॉल के बोला आप को तो प्यार था ही नहीं मेरे साथ तो कमी कहाँ से आ गई

अम्मी... हेरनी से मेरी तरफ देखते हुयी बोली

विकी ये तो क्या बोल रहा है बेटा मैं माँ हूँ तेरी और मैं अपनी सारी औलाद मैं तुम्हे सब से ज़्यादा प्यार भी तुम से ही करती हूँ

मैं... तल्ख़ लहजे मैं अम्मी से बोला की जितना प्यार आप मुझ से करती हैं उस से ज़्यादा शक भी करती हो आप

और अगर आप मुझे प्यार करती ना अम्मी तो शक कभी नहीं करती वो भी इतना घटिया

अबू... जो की अभी तक सर झुका के बैठे हमारी बात सुन रहे थे

झटके से सर उठा के पहले मुझे और फिर अम्मी को देखते ही बोले क्या बात है रहना

ये विकी क्या बोल रहा है किस बात का शक करती हो तुम मेरे बेटे पर की जो ये इस तरह घर से चला गया था

अम्मी... जो की पहले ही काफ़ी परेशान लग रही थी अबू की बात सुन के उन का रंग फीका पड़ गया

लेकिन वो कुछ बोली नहीं बस सर झुका के खड़ी रही

अबू... जब अम्मी की तरफ से कोई जवाब ना मिला तो मेरी तरफ देखते हो बोले विकी तो बता मुझे बेटा की क्या बात है जिस की वजाह से तुम घर से निकल गये थे मैं तेरे साथ हूँ

मैं...अम्मी की तरफ देखता हुआ जो की अभी तक सर झुका के खड़ी अपनी उंगलियाँ मरौदरही थी और उन का फेस पसीने से भीग चुका था बोला

अबू आप अम्मी से ही पूछ लेना हो सकता है की मैं कुछ ग़लत समझा हूँ और बात वो ना हो कुछ और ही हो

मेरी बात सुन के अबू फॉरन खड़े हो गये और अम्मी का हाथ पकड़ के बोले चलो अभी मेरे साथ बताओ

मुझे की क्या बात है और फरी की तरफ मुड़ते हो बोले अपने भाई का ध्यान रखो ये कहीं नहीं जाए

फरी ने अबू की बात सुन के हाँ मैं सर हिलाया तो
अबू अम्मी का हाथ पकड़े हो मेरे रूम से निकल गये तो फरी मेरे पास आयी और जब बोली तो उस की आवाज़ मैं भी आँसू घुले महसूस हो रहे थे

फरी.... भाई तुम कहाँ चले गये थे और क़्यू क्या तुम मुझे भी नहीं बता सकते

मैं... बाजी अब मैं आपके और अपने दरमियाँ कोई दूरी बर्दाश्त नहीं ई कर सकता हूँ और इस के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ

मै आपसे बहुत प्यार करता हूँ बाजी... आप ही मेरा पहला और आखिरी सच्चा प्यार हो...

ओह मेरे बही... फरी आब्जी अवाक् रह गई .. यह सुनके .....

मै तुमसे बहुत प्यार करती हूँ मेरे भाई पर... पर हमरा रिश्ता.. कुछ एस्सा है जिसे हम दोनों.. संभाल के रख सकते थे.. सब से छिप के चोरी से....... सारी जिंदगी...... यहाँ तक की मेरे निकाह के बाद भी...
.

फरी... भाई तुम ने ये कोई अच्छा काम नहीं किया

हम अगर प्यार से, समझ से काम लेते तो हो सकता है अम्मी हमारे दरमियाँ कोई रुकावट ना बनती केलिन......

अब तुम ने सारा काम खराब कर दिया है
मैं... क्या मतलब बाजी मैं आप की बात नहीं समझा
बाजी... अरे पागल तुम अब यहाँ ज़्यादा नहीं रहते लेकिन मैं यहाँ ही रहती हूँ हर वक़्त और सब कुछ और सब को जानती हूँ की कौन क्या है और क्या करता फिर रहा है

इस लिए अगर तुम थोडा सबर और कर लेते तो अम्मी को मैं खुद ही समझा लेती.... किस तरह से...

लेकिन तुम ने बात अबू तक पंहुचा दी है
अब मुझे अम्मी के साथ अबू के बारे मैं भी सोचना पड़ेगा और यह बात बहुत महंगी पड़ेगी मेरे भाई.... अब्बू ... और अब्बू के साथ............ ..कह के ...बाजी , कुछ सोचने लगी

अभी हम ये बताईं कर ही रहे थे की फ़रीदा बाजी रूम मैं आती दिखाई दी तो हम चुप हो गये और फिर फ़रीदा बाजी ने आते ही मेरी तरफ देखा और बोली भाई अबू बुला रहे हैं तुम दोनो को...

फ़रीदा बाजी की बात सुन के मैने फरी की तरफ देखा जो की मेरी तरफ ही देख रही थी और आँखों ही आँखों मैं फरी से पूछा की अब क्या होगा

अबू ने किस लिए बुलाया होगा

तो बाजी ने हल्के से कंधे हिला दिए और रूम से बाहर की तरफ चल दी तो

मैं भी अपना सर झुका के अबू के रूम की तरफ फरी के पीछे ही चल दिया
लेकिन उस वक़्त मैं इसी सोच मैं गुम था की

आख़िर अम्मी ने अबू को ऐसा क्या बता दिया है की........,, अबू ने मेरे साथ फरी को भी बुलवा लिया है
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04-29-2020, 01:07 PM,
#18
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
लेकिन कुछ भी समझ मैं नहीं आया

तो मैं तक़दीर मै जो होगा देखनेग..

अबू की रूम मैं फरी की साथ चला गया जहाँ अबू अम्मी के साथ ही पलंग पे बैठे थे और सामने की चारपाई खाली पड़ी थी जिस पे बैठने के लिए अबू ने हम दोनो को बोला तो हम चुप वहाँ जा बैठे

अबू... थोड़ी देर हम दोनो की तरफ देखते रहे और फिर फरी की तरफ अपना फेस घुमा लिया और बोले

फरी तुम्हारी अम्मी का कहना है की उसे तुम्हारा विकी क साथ ज़्यादा रहना शक मैं डॉल रहा है जिस की वजाह से वो तुम दोनो पे नज़र रखने लगी तो विकी नाराज़ हो गया क्या ये सच है

मेरे साथ साथ फरी भी एस बात पे चोंक गए...

फरी... हेरनी से अबू की तरफ देखते हो बोली अबू विकी मेरा एक ही तो भाई है जो की अब हमारे साथ नही रहता यहाँ गावँ मैं शहर मैं रहता है और अब जब की वो छुट्टियों पे गावँ आया हुआ है तो क्या मैं अपने ही छोटे भाई के साथ हंस बोल भी नहीं सकती

अम्मी... देखो फरी जिस तरह तुम विकी की बहिन हो वेसे ही फ़रीदा और फ़रज़ाना भी तो विकी की बहन हैं क्या वो भी तुम्हारी तरह विकी क साथ चिपकी रहती हैं और ख़ुसर फुसर करती हैं

मैं... अम्मी मुझे लग रहा है की अब मेरा इस घर मैं कोई काम नहीं रहा और मुझे यहाँ से अब हमेशा के लिए चले जाना ही बहेतर है नेमे कुछ शक्त लहजे मै कहा....मेरे आवाज.. कुछ ज्यादा भारी होने लगी थी.. जिसे अब्बू अम्मी और फरी बाजी ने भी महसूस किया... बाजी ने आखंसे इशार किया .. तो मै थोड़े नरम लहजे मै फिर बोला..

कयुँकि जहाँ मेरी माँ ही मुझ पे मेरी बहिन से तालुकात का गंदा इल्ज़ाम लगा दे तो फिर अब मेरे पास बाकी कुछ नहीं बचता

अबू... देखो बेटा तुम बैठो और जो भी बात है वो हम यहाँ बैठ की ख़तम कर सकते हैं

मैं... (गुस्से की आक्टिंग करता हुआ खड़ा हो गया लेकिन मैं ये भी समझ रहा था की अगर घर छोड़ेगा तो दर बदर हो जायेगा कोई असरा नहीं बनता मेरा ) नहीं

अबू अब कोई बात नहीं बची प्लीज अब मुझे यहाँ से जाने से मत रोकिएगा और रूम से निकालने लगा

अबू ने भाग के मेरा हाथ पकड़ लिया और रोते हो बोले ठीक है बेटा मैं समझ रहा हूँ की..........

तुम्हारे साथ ज़्यादती हुयी है जिस के लिए तुम्हारी मा जिम्मेदार है
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04-29-2020, 01:07 PM,
#19
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
अभी वो भी तुम से माफ़ी मांग ले गी लेकिन पल्ल्लज़्ज़्ज़्ज बेटा तुम घर छोड़ के नहीं जाओगे बल्कि कल से तुम मेरे साथ खेतों मैं रहा करोगे

नहीं अबू मुझ किसी से माफ़ी मंगवाने की कोई ज़रूरत नहीं है

कयुँकि अम्मी का बेवजह शक ने मुझे अपनी और फरी बाजी की नज़रों मैं गिरा दिया है तो

अब मेरे पास बस 2 ही रास्ते हैं

एक ये की मैं घर से इतनी दूर चला जाओं की किसी की नज़र मैं भी ना आऊँ ज़िंदगी भर और

दूसरा ये है क मैं अपनी जान ख़तम कर दूँ और अब कोई चारा नहीं बचा

(ये मुझे बाद मैं पता चला क ये सारी हराम ज़दगी फ़रीदा ने ही की थी अम्मी को बताने वाली और शक मैं डालने वाली और बाकी की कसर मैने अम्मी की साथ हल्की फुल्की, अपने रविये से पूरी कर डाली थी)

अम्मी जो की अब तक चुप चाप थी
अचानक.... उठी और मेरे पैरों मैं गिर गई और रोते हुए मुझसे माफ़ी माँगने लगी तो

जेसे मेरा दिल ही फटने लगा हो और मैने जल्दी से अम्मी को कंधों से पकड़ के उठा दिया और बोला नहीं अम्मी पल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ ये आप क्या कर रही हो

अम्मी रो रही थी और बोलती जा रही थी नहीं बेटा अब तो कहीं नहीं जाएगा अपनी मा को छोड़ के बेटा

अब मैं तुम्हे कभी कुछ नहीं कहूँगी पल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ बेटा अपनी मा को माफ़ कर दे

मैने अम्मी को अपने सीने से लगा लिया और बोला नहीं अम्मी मैं कहीं नहीं जाऊंगा आप को छोड़ के भला मैं खुश रह पाउँगा

कहीं इस दुनिया मैं मर ही ना जाओंगा जो आप को और अबू को छोड़ के कहीं जाऊं

मेरी बात सुन के अबू का फीका पड़ा चेहरा भी खुशी से चमक उठा और अम्मी भी खुश हो गईं तो बोली की

तू ठहर मैं ज़रा इस फ़रीदा की बची की खबर लेती हूँ

जिस की बातों मैं आके मैं अपने बच्चे को खोने जा रही थी

अम्मी की बात से मेरे साथ अबू और फरी भी चौंक गये

और फिर अबू ने ही अम्मी से पूछ क्या मतलब फ़रीदा ने ऐसा क्या बोला था जो तुम मेरे बचों के खिलाफ हो गई थी
अम्मी ने हमे फ़रीदा ने जो उस दिन अबू और अम्मी के शहर जाने के बाद मैं और बाजी खेतों मैं गये थे तो फ़रीदा जब खाना ले के आयी तो बाजी को बिना दुपते और क़मीज़ के नीचे बिना ब्रा के बड़े अजीब अंदाज़ मैं लेता देख लिया था

जिस वो शक मैं आ गई और अम्मी को भी बोल दिया था जिस की वजाह से ये सारा हुंगमा खड़ा हुआ था हमारे घर

अम्मी की बात सुन के मेरे साथ बाजी भी हेरान हुयी लेकिन शर्मिंदा भी ,

तो मैने अम्मी को मना कर दिया की वो फ़रीदा से कुछ ना कहे उस ने भी आप को जानबुझ के थोडा ही भड़काया होगा
थोड़ी देर इस तरह हम एक दूसरे से बात करते और अपने दिल का दर्द निकलते रहे तो फिर अबू ने कहा विकी बेटा तो जा अभी आराम कर देख ज़रा क्या हालत बन गई है तेरी चलो जाओ शाबाश

मैं और फरी जब अबू के रूम से निकले तो फरी ने धीमी आवाज़ मैं कहा भाई अब कुछ तो करना ही होगा वरना काम खराब हो जाएगा

मैने कहा क्या करना होगा तो फरी ने कहा थोड़ा सबर करो भाई बताउंगी

ज़रा मुझे सोच लेने दो तो उस के बाद फरी अपने रूम की तरफ चली गई और मैं अपने रूम की तरफ


बाकी का दिन ऐसे ही गुज़र गया और बस सिवाए फ़रीदा के जो मुझे या फरी को जब भी देखती बहुत गुस्से मैं घूरती और कोई खास बात नहीं हुयी

सब कुछ नॉर्मल हो गया तो रात अम्मी भी हुमारे पास ऊपर सोने नहीं आयी लेकिन फिर भी हमने कोई रिस्क नहीं लिया और सो गये

अगली सुबह जब सो के उठा तो देखा की फरी आज भी घर पे नहीं है और अम्मी घर पे ही हैं तो मैं समझ गया की फरी अबू के साथ खेतों मैं ही गई होगी जिस वजाह से अम्मी घर पे हैं

मैं उठा और नहाने चला गया जब नहा के बहार आया तो अम्मी खुद मेरा नाश्ता लायी मेरे रूम मैं ही

मैं नहा की सीधा अपने रूम मैं आ गया था तो अम्मी ने नाश्ता मेरे सामने रख़् दिया और खुद भी करीब ही बैठ गई तो मैं खामोशी से नाश्ता अपनी तरफ खिसका के खाने लगा

अम्मी ने मेरे बलों मैं अपनी उंगलियाँ घुमाते कहा कि ओं बेटा क्या अभी तक तो अपनी अम्मी के साथ नाराज़ है की बात भी नहीं कर रहा

मैने अम्मी की तरफ देखा और बोला ......

नहीं अम्मी ऐसी कोई बात नहीं अब जो होना था हो गया और अब तो बात भी ख़तम हो गई अब भला मैं आप से कयूं नाराज़ होने लगा भला

मेरी बात से अम्मी के फेस पे मुझे सकून की लहर दौड़ती हुयी महसूस हुयी और फिर जब मैने नाश्ता ख़तम किया तो अम्मी उठी और मेरे सर पे प्यार से किस कर के बर्तन उठा के निकल गई

अम्मी के जाने क बाद मैं थोड़ी देर लेटा रहा और फिर उठ के खेतों की तरफ चल दिया ये सोच कर के चलो अगर कोई मोका मिला तो बाजी की फुददी ही मार लूंगा

अबू काम से इधर उधर के साथ वालों खेतों पे भी चले जाया करते थे तो मोका बन सकता था

मैं जब खेतों मैं गया तो अबू उस वक़्त चारा काट रहे थे कयुँकि बाद मैं गर्मी ज़्यादा हो जाती तो चारा नहीं कटा जाता भेंसों के लिए और बाजी इधर उधर से कटा हुआ चारा एक जगह जमा कर रही थी और

खास बात जो मैने देखी वो ये थी फरी उस वक़्त बिना दुपते और बारीक कपड़ों मैं थी और कयुँकि हवा भी चल रही थी तो काम करने की वजाह से उसके कपड़े भी भीगे हुयी थे लेकिन वो बिना शरम किया काम मैं लगी थी
ये नज़ारा देख के मुझे पता नहीं कयूं ऐसा लगा की बाजी ये सब (यानी बिना दुपते और बारीक कपड़ों के साथ पसीने मैं भीगी अबू के इधर उधर झुक के चारा जमा करती ये सब वो जान बुझ के कर रही है)

मुझे आता हुआ अबू और बाजी दोनो ही देख चुके थे लेकिन बाजी ने अपने काम मैं बड़ी मस्ती से लगी होई थी और अबू भी चुप छाप चारा काट रहे थे जिसे बाजी जमा करती जा रही थी

मैं भी जा के करीब ही खेतों मैं निशानी के लिए पगडंडी पे जा के बैठ गया तो अबू ने कहा बेटा घर पे दिल नही लगा जो इतनी सवेरे ही यहाँ चले आए

बस अबू घर पे बौर हो रहा था तो सोचा की चलो खेतों से ही हो आता हूँ इस लिए आ गया

तो अबू ने भी चलो अच्छा किया बेटा ऐसा करो तुम चलो वहाँ रूम के पास दरखतों के नीचे बैठो यहाँ तो काफ़ी तेज़ धूप हो रही है गर्मी लगेगी हम भी बस अभी आ जाते हैं

मैं बिना कोई बात किए उठा और रूम के सामने ही जा के बैठ गया और बाजी और अबू को काम करता देखता रहा फिर अबू ने चारा काटना बंद किया और जमा किया हुआ चारा उठाने लगे जिस मैं बाजी भी

अबू की मदद कर रही थी जिस के लिए बाजी अबू के सामने पूरी तरह से झुक जाती
मुझे इतनी देर से इतना तो ठीक से पता नही चल रहा था की ये सब देख के अबू पे क्या बीत रही होगी या फिर अबू बाजी के सीने मैं तने मम्मो को देख भी रहे हैं या नहीं

थोड़ी देर के बाद अबू और बाजी चारा उठा के क रूम के पास लगी मशीन के पास आ गये और मशीन चला के चारा कटा और फिर बाजी रूम मैं चली गई और अबू साइड मैं लगे ट्यूब वेल को चलाने लगे

ट्यूब वेल के चलते ही अबू ने कहा आ जा बेटा नहा ले ठंडा पानी है मज़ा आ जाएगा

तो मैने अबू को मना कर दिया क मेरे पास कोई लूँगी नही है तो अबू जो की अब खुद भी लूँगी मैं ही आ चुके थे बोले यार कोई भी कपड़ा बाँध लो की तभी बाजी रूम से निकल आयी

वो अभी तक बिना दुपते के ही थी और बोली अबू बड़ी गर्मी लग रही है क्या मैं भी नहा लूँ

अबू ने बाजी की तरफ देखे बिना ही हाँ हाँ बेटी आ जा तू भी नहा ले बोल दिया तो

बाजी मुझे आँख का इशारा करते हुए अबू की तरफ चल दी नहाने के लिए और मैं बाजी को पूरा मोका देने क लिए रूम मैं जा घुसा जहाँ मैं एक कपड़ा ढूंड के लूँगी बंधी और रूम के दरवाजे के पास आ के बाहर झाँकने लगा

जहाँ बाजी अब पूरी तरह भीगी हुयी खड़ी थी अबू के साथ और मुझे ये देख के बड़ी हैरानी हुयी की बाजी यह सब काया कर रही हैं मेरी कीच समझ मै नहीं आ रहा था. पर मुझे बाजी पे भरोसा की वो जो भी करेंगी सोच समझ के ही.....

पर फरी बाजी की हिमत पे रश्क भी आया कि वो की बाजी के कपड़े भीगते ही उस का सारा बदन जैसे बिल्कुल नंगा नज़र आने लगा था और अब ज़रा ध्यान से देखा तो पता चला की बाजी ने ब्रा भी नहीं पहनी हुयी थी

और अबू की आँखें जो की बाजी की तरफ तो नहीं थी लेकिन वो छोड नज़रों से अपनी बड़ी बेटी की जवानी को ही निहारे जा रहे थे

ये सब देख के मैने सोचा की यार ज़रा बाजी को थोडा टाइम और मिलना चाहिए पता नहीं उनके दिमाग मै काया चाल रहा है और बहार नहीं निकला तो बाजी जो की एक बार फिर से पानी के नीचे सर दे के उठी तो अबू की तरफ देख के बोली क्या हुआ

अबू आप नहीं नहा रहे
अबू ने फरी की तरफ देखा और बोले नहीं बेटी पहले तुम नहा लो मैं बाद मैं नहा लूंगा और

फिर दूसरी तरफ देखने लगे तो बाजी साइड से सोप उठा के अपने जिस्म पे रगड़ने लगी कपड़ों के ऊपर से ही(जैसा की अक्सर गावँ मैं होता है) और साथ अबू की तरफ देखे बिना अपने मम्मो , जाँघों और गले दरमियाँ अच्छी तरह से हाथ घुमाती रही

तो अबू की हालत देखने वाली हो जाती अब अबू से ज़्यादा बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो वो वहीं साइड मैं पानी के अंदर ही बैठ गये
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04-29-2020, 01:07 PM,
#20
RE: Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की
फरी ने अच्छी तरह नहाने के बाद अबू की तरफ देखा जो की तिरछी नज़रों से फरी को ही देख रहे थे तो फरी ने कहा अबू मैने तो अच्छी तरह नहा लिया अब आप भी नहा लो जल्दी से

फरी इतना बोलते ही बाहर निकल गयी तो अबू पानी के नीचे आ गये और पानी अबू के सर पे गिरने लगा तभी मैं भी रूम से निकला तो मुझे देख के फरी ने हल्की सी इस्माइल दी और

अबू की तरफ आँख से इशारा कर के आँख दबा दी तो मैं भी फरी की बात समझ के हल्का सा मुस्कुरा दिया और पानी मैं उतार गया

थोड़ी देर तक मैं अबू क साथ मिल के नहाता रहा और फरी अब भी बिना दुपट्टे के रूम से बाहर पड़ी चारपाई पे अपने पावं लटका के बैठी हुमारी तरफ ही देख रही थी

हम दोनो नहा के बाहर निकले तो अबू ने ट्यूब वेल बंद कर दिया और अपने क़मीज़ उठा के पहन ली तो मैं भी रूम मैं गया और अपने कपड़े पहन के बाहर आ गया

तब तक अबू कहीं खेतों की तरफ जा चुके थे

मैं फरी के पास बैठ गया और बोला यार कयूं अबू को परेसान कर रही हो और यह क्या चाल रहा है आपके दिमाग मै.....

हो तो फरी ने कहा भाई अब मेरे अंदर इतनी बर्दाश्त नहीं रही है की मैं ज़्यादा बर्दाश्त करूँ कयुँकि जब तक मैने पूरा मज़ा नहीं लिया था किसी ना किसी तरह बर्दाश्त कर रही थी

लेकिन अब नहीं कर सकती और इस के लिए तुम्हारे साथ के लिए , तुम्हारे प्यार के लिए मुझे जो कुछ भी करना पड़ेगा करुँगी और तुम्हे मेरा साथ देना होगा

मैं फरी की तरफ देखता रहा और फिर एक आह भर के हाँ मैं सर हिला दिया
जब अबू को गये हो काफ़ी देर हो गई और वो वापिस नहीं आए तो मैं थोडा परेशान हो गया और बाजी से बोला यार बाजी अबू अभी तक कयूं नहीं आए

बाजी मेरी बात सुन के हंस पड़ी और बोली अरे मेरे भोले भाई आज अबू ने जो कुछ और जितना भी देखा है वो अबू को कहीं आराम से थोडा ही बैठने दे रहा होगा ज़रा सबर करो अभी खुद ही आ जायेंगे

बाजी की बात तो काफ़ी हद तक ठीक ही थी कयुँकि अगर फरी की जगह कोई और लड़की होती और अबू के सामने इस तरह अपने आप दिखती तो मुझे यक़ीन था की अबू अब तक बिना कुछ सोचे समझे और बिना किसी की परवा किए अब तक 2 3 बार उसकी फुददी मार चुके होते

लेकिन मसाला फरी का था जो की उनकी की सग़ी और बड़ी बेटी थी जिस की उन्हें समझ आ भी रही थी और नहीं भी

मुझे इन सोचों मैं गुम देख के बाजी ने कहा क्या बात है भाई कहाँ गुम हो तो मैं बाजी की बात सुन के चौंक सा गया और फिर बाजी की तरफ देख के मुस्कुराने लगा और बोला कुछ नहीं बाजी भला मैं अब क्या सोचोंगा अब आप ही बता दो की आगे क्या सोचा है अपने

पता नहीं भाई यह अच्छा जी या बुरा .. पर अब मेने सोच लिया है.. तुम्हारे और हमारे रिश्ते को कायम रखना है... कल जो तुमने कहा था ... की तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो...

हाँ भाई मै भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ ... और इसकी लिए.. इसको कायम रखने के लिए मुझे ..चाहे.. बाजारू औरत भी बनना पड़े तो बनुगी...
तुम्हरी कल की बातें मेरे दिल को छु गयी भाई जान..... बस तुम मुझे गलत मत समझ ना.. और इसी तरह प्यार करते रहना ....
मेने बाजी की आखों मै एक अजीब से कसक देखी........
हाँ बाजी... मै सच मै आपसे भुत प्यार करता हूँ... और तुम्हरी लिये..अपनी जान भी दे सकता हूँ...


बाजी ने कहा जो कुछ मैने सोचा है उस मैं तुम्हारा कोई काम नही है.. बस तुम जो मै कहूँ वो करो...


कयुँकि अगर तुम यहाँ खेतों मैं रोज़ाना आने लग गये और सारा सारा दिन यहाँ ही गुज़रोगे तो बात नहीं बनेगी इस लिए अब तुम्हे चाहिए की 2 3 दिन तक घर मैं ही रही यहाँ मत आया करो ओक

मैने हाँ मैं सर हिला दिया और बोला ठीक है बाजी मैं यहाँ नहीं आया करूँगा लेकिन घर पे अकेला पड़ा बौर हो जाओंगा दिल ही नही लगेगा मेरा कयुँकि अब आप भी घर पे नहीं होती हो

बाजी मेरी बात सुन के हंस दी और बोली भाई आप ऐसा करो की किसी ना किसी तरह 2 3 दिन गुज़ारा करो तब तक मुझे उमीद है की मैं अबू को सेट कर लुंगी

फिर तुम भी यहाँ हमारे साथ ही रहा करना

मैने बुरा सा मुह बनाया और ओक बाजी बोलता हुआ घर की तरफ चल दिया

कयुँकि बाजी की बात भी ठीक ही थीकी अगर हमें मज़ा करना है तो उसके लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ना घर पंहुचा तो

दुपेहर के 11 बज रहे थे और अम्मी सामने बरामदे मैं हीबैठी थी जो की मुझे देखते ही मुस्कुरा दी और बोली आ गया मेरा लाल कहाँ गया था तो इतनी सुबह

मैने अम्मी की बात सुन के ज़रा खुश्क लहजे मैं ही जवाब दिया खेतों मैं गया था

और इतना बोलते ही अपने रूम मैं जा घुसा इस से पहले की अम्मी कोई और बात शरू करती मैं रूम में आ गया और अपनी चारपाई पे लेट गया तो

अम्मी भी मेरे पीछे ही मेरे रूम मैं आ गई और आते ही मेरे पास खड़ी हो के मेरी तरफ घूरने लगी और थोड़ी देर ऐसे ही घूरने के बाद अम्मी ने कहा विकी बेटा लगता है तो ने अभी तक अपनी मा को दिल से माफ़ नहीं किया है

मैने भी अम्मी की आँखों मैं झाँका और बोला अम्मी आप को ऐसा कयूं लगता है की मैं आप से नाराज़ हूँ

अम्मी जो की अभी तक खड़ी हुयी थी मेरे साथ ही चारपाई पे बैठ गई और अपना एक हाथ मेरे बलों मैं घूमने लगी और बोली

देख बेटा ग़लती इंसान से ही होती है और मैं भी तो इंसान ही हूँ तेरी मा हूँ तो क्या हुआ लेकिन अगर तू मुझे कोई सज़ा देना चाहता है तो बेटा मैं उस क लिए भी तैयार हूँ

लेकिन बस तो अपनी मा के साथ अब अपनी नाराज़गी ख़तम कर दे मैं अब तुझे अपने साथ नाराज़ नहीं देख सकती

अम्मी की बात सुन क अचानक मेरे दिमाग मैं ख्याल आया की अम्मी तो मेरे साथ सिर्फ़ इस बात से ही नाराज़ हैं ना की , फ़रीदा ने मेरे और बाजी के बारे शक मैं डाला था

इस लिए तो नहीं की मैने उन के साथ भी मस्ती की कोशिश की थी ये सोच आते ही मेरे जिस्म मैं झुनझुनाहट सी होने लगी की अम्मी सिर्फ़ मेरे और फरी बाजी क बारे सुन के नाराज़ होई थी और ये सारा तमाशा हुआ था बाकी जो मस्ती मैने अम्मी क साथ की थी उन्होंने उस बारे मैं कोई बात नहीं की थी

मुझे सोच मैं डूबा देख के अम्मी मेरे ऊपर झुकी और मेरे माथे पे किस कर के फिर सीधी बैठ गई और बोली क्या सोच रहा है मेरा बच्चा

मैने अम्मी की तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुरा दिया और साथ ही अम्मी की तरफ करवट ली और अपना एक हाथ अम्मी की साइड से निकल के रनो पे रख के हल्का सा सहला दिया और बोला नहीं
अम्मी भला मैं आप से किस तरह नाराज़ हो सकता हूँ वो तो आप ही मेरे साथ नाराज़ हो गई थी

इतना बोलते ही मैने अपने हाथ से अम्मी को रान को भी दबा दिया तो अम्मी ने एक बार मेरी तरफ और फिर मेरे हाथ की तरफ जो के उनकी राणो पे था देखा और मुस्कुराने लगी

अम्मी की तरफ से कोई गुस्सा ना देख के मेरा होसला भी बढ़ गया और मैं अपने हाथ को अम्मी की राणो पे ऊपर नीचे आहिस्ता से घूमते हो बोला अम्मी आप बहुत खूबसूरत हो

अम्मी...विक्की बेटा हर बेटा अपनी मा को दुनिया की सब से खूबसूरत औरत समझता है ये कोई नयी बात तो नहीं है

मैं... नहीं अम्मी मैं सच बोल रहा हूँ की आप बहुत ज़्यादा प्यारी हो और ऊपर से इतना प्यार भी करती हो

अम्मी... मेरे हाथों की हरकत जो की उन्हें अब सॉफ बता रही थी की मैं अपनी मा को किस नज़र से देख रहा हूँ

देखो बेटा हम मा बेटा हैं और हर मा अपने बेटे को ऐसे ही प्यार करती है लेकिन उस की कोई लिमेट भी होती है

ये नहीं की अगर मा बेटे से प्यार करती है तो बेटा जिस तरह मर्ज़ी अपनी मा से फाइयदा उठाने की सोचे या अपनी मा को बिना वजह तंग करे

मैं....अम्मी के क इस तरह समझने से समझ गया की अम्मी को मेरा इस तरह उनके साथ करना अच्छा नहीं लग रहा था तो मैने अपना हाथ हटा लिया और थोडा रौखे लहजे मैं बोला

लेकिन अम्मी मैं तो समझा था की जब आप किसी से प्यार का दावा करते हैं तो उस की हर जायज नाजायज बात को भी मानते हैं
कयुँकि प्यार तो क़ुर्बानी माँगता है जो हर कोई नहीं दे सकता (मेने सोचा..मेरी फरी बाजी दे रही हैं अपने जिस्म की कुर्बानी )

अम्मी...हाँ बेटा तुम्हारी बात ठीक है लेकिन जिस प्यार की तुम बात कर रहे हो वो प्यार एक मा बेटे और बहिन भाई मैं नही हो सकता कयुँकि हमरा समाज इस बात की इजाज़त नहीं देता

मैं... लेकिन अम्मी ये मसवरा या बिरदरी कौन सा हमारे साथ हमारे घर मैं हर वक़्त रहती है

जो उन्हें कोई तकलीफ़ होगी हमारे प्यार बहारे घर की

अम्मी... हेरनी से मेरी तरफ देखते हो बोली देखो बेटा मैं नहीं जानती की क तुम क्या चाहते हो और कयुँकि लेकिन एक बात जो मैं जानती हूँ और जहाँ तक समझ सकती हूँ

वो ये है की बेटा अब तुम कोई बचे नहीं रहे बड़े हो गये हो और अब तो गावँ से निकल के बड़े शहरों मैं जाते हो पढ़ने के लिए तुम्हे तो हम से ज़्यादा इस बात का पता होना चाहिए .

ये दुनिया किसी को भी अपनी मर्ज़ी और आज़ादी से जीने नहीं डटी है

बड़ी ज़ालिम है ये दुनिया बेटा और इतना बोल के खड़ी हो गई और इस से पहले की मैं कुछ बोलता रूम से निकल गई

अम्मी के जाने के बाद मैं अम्मी से हुयी बातों को सोचने लगा और पता नहीं कयूं मेरा दिल गवाही देने लगा की अगर मैं थोड़ी सी हिम्मत करूँगा तो अम्मी के साथ जो मर्ज़ी कर लूँ

वो मुझे मना नहीं करेगी और ये सोच ऐसी थी की मेरा पूरा जिस्म अंजनी सी ख़ुशी और मज़े से लर्ज़ उठा और मैने फ़ैसला कर लिया क चाहे कुछ हो जाए मैं कोशिश ज़रूर करूँगा

मैं इन ख्यालों मैं ही गुम था की फ़रीदा बाजी मेरे रूम मैं आ गई खाना ले कर लेकिन बाजी का सर झुका हुआ था और वो मेरी तरफ नहीं रही थी और मैं था की बाजी को ऊपर से नीचे तक घूर रहा था

थोड़ी देर बाजी खाना हाथ मैं पकड़े खड़ी रही और फिर फंसी हुयी से आवाज़ मैं बाजी बोली ,,

वो भाई खाना खा लो

मैने बड़े रूखे से अंदाज़ मैं कहा की खाना लाई हो मेरे लिए

आप को तो मेरे लिए कोई ज़हर लाना चाहिए था की जिसे खाके मैं मर सकूँ कयुँकि जो इल्ज़ाम अपने मुझ पर और अपनी बड़ी बहिन लगाया है उसके बाद तो हमारा ज़िंदा रहना भी जायज़ नहीं रहा .

फ़रीदा बाजी ने अपना झुका हुआ सर उठाया तो मैने देखा की उनके होंठ लहरा रहे थे और आँखें थी की खुदा की पनाह पता नहीं बाजी को कितनी मुश्किल हो रही थी अपने आँसू रोकने मैं और बाजी की आँखों से लग रहा था की पता नहीं कब से रोती रही हैं

कयुँकि बाजी की आँखें लाल हो रही थी उस वक़्त , बाजी की ये हालत देख के मेरा दिल पासीज गया

और मैं जल्दी से चारपाई से नीचे उतार के बाजी के पास खड़ा हो गया और उनके हाथ से खाना ले के चारपाई पे रखा और बाजी से कहा बाजी आप जाओ और हाथ मुँह धो लो,

देखो तो क्या हालत बना रखी है अपने अपनी

बाजी ने एक बार फिर से मेरी तरफ देखा और फिर कुछ बोले बिना ही तेज़ी क साथ रूम से निकल गई तो मैं फिर से चारपाई पे बैठ गया और खाना खाने लगा और साथ ही फ़रीदा बाजी की हालत पे ध्यान देने लगा तो मुझे एहसास हुआ की फ़रीदा अपने किए पे इतनी शर्मिंदा है की बेचारी मैं अब इतना होसला भी ना बचा क वो किसी क सामने आँख उठा के बात भी कर सके

खैर मैने खाना ख़तम किया ही था की फ़रज़ाना रूम मैं आ घुसी और आते ही बोली

भाई अपने ने क्या बोला मेरी इतनी प्यारी सी बाजी को . वो रात को भी रोती रही हैं और अभी आप के रूम से भी रोती हुयी निकली हैं

मैने फ़रज़ाना की तरफ देखा जो की सीना ताने मेरे सामने खड़ी थी और उस का ये अंदाज़ , मेरे अंदर के शैतान को जगाने लगा तो
मैने जल्दी से कहा ज़्यादा बताईं नहीं करो और ये बर्तन उठा के ले जाओ और जा के अपनी बाजी फ़रीदा से खुद ही पूछ लेना की मैने उन्हें कुछ कहा है या नहीं

फ़रज़ाना मुझे बुरी तरह घुरती हुयी बर्तन उठा के चल दी और दरवाजे मैं जा के खड़ी हो गई और बोली देख लेना भाई अगर आप ने बाजी को कुछ बोला होगा ना तो

मैं आप को छोडूंगी नहीं
मैने भी उस को देखते ही मज़ाक मैं कहा यार तुम ऐसा करो की मुझे अभी पकड़ लो बाद मैं अपनी बाजी से पूछ के भी तो मुझे ही पकड़ोगी ना और तो कहीं ज़ोर चलता नहीं है न तुम्हारा बस एक मै ही हूँ

फ़रज़ाना मुझे घूरती हुयी बर्तन ले के चली गई तो मैं अपने आप पे लानत करने लगा की

आख़िर मुझे ये होता क्या जा रहा है की मैं अपनी बड़ी बहिन के साथ तो जो कर ही चुका था

मना की ग़लत था लेकिन वो हो चुका था और अब मैं अपनी अम्मी और बहनों को भी अपनी गंदी नज़रों से देखने लगा था जिस क लिए मेरा मुर्दा ज़मीर मुझे लानत करने लगा
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