Indian XXX नेहा बह के कारनामे
03-04-2021, 10:08 AM,
#11
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
कड़ी_04

जब प्रवींद्र को यकीन हो गया की अब वो रात को अपने पिता के कमरे के अंदर देख सकेगा तो उसको आराम मिला और वो खुश हुआ और बेसब्री से इंतेजार किया की रात हो और वो पिता के कमरे में देखे। पाठकों को समझने के लिए की एक दूसरे के कमरे कहाँ-कहाँ थे और किधर से प्रवींद्र कमरे के अंदर झाँकेगा, मैंने एक स्केच बनाया है जिससे आप सबको अच्छी तरह से समझ में आए।

रात हुई और सब टीवी देखने के बाद अपने-अपने कमरे में चले गये। रवींद्र (नेहा का पति) टीवी बहत कम देखता था। वो हर रात को ठीक 9:00 बजे सोने चला जाता था, एक तो खेत के काम की थकान और उसकी आदत थी जल्दी सोने की बचपन से ही।

प्रवींद्र अपने कमरे में गया और इंतेजार करता रहा, रात के और गहरी होने की। अपने कमरे के अंदर से ही वो सुनने की कोशिश करता रहा की उसको किसी दरवाजे की खुलने या बंद होने की आवाज आए। वो प्रार्थना करता रहा की उसको कुछ दिख जाए इस रात को। पर उसको अभी तक यकीन ही नहीं था की यह सब उसका वहम था? या सच में उसके पिता और नेहा के बीच कुछ था भी की नहीं?

एक घंटे के बाद वो देखने के लिए दो बार बाहर गया, मगर उसे कुछ नहीं दिखा। निराश वापस आया अपने कमरे में- “क्या वह दोनों आज रात को नहीं मिलेंगे? कुछ नहीं होने वाला क्या?" ऐसा खुद से पूछा प्रवींद्र ने,
और यह खयालात उसको बहुत परेशान कर रहे थे।

पाठकों को दिखेगा स्केच में कि मैंने एक रेड (लाल) स्पाट बनाया है जो घर के बाहर है। प्रवींद्र उसी जगह से एक कुर्सी पर चढ़कर अपने पिता के रूम में देखता है। बाकी घर के अंदर किसका कमरा किधर है सब मैंने साफ-साफ बनाया है, इससे आप सबों की समझ में आ जाएगा की कौन किधर सोता है रात को वगैरह-वगैरह। घर का नक्शा बिल्कुल वैसा ही है जो मैंने बनाया है।

रात एक बजे तक 4 बार प्रवींद्र बाहर जाकर कमरे के अंदर झाँक आया मगर कुछ नहीं दिखा उसे। बहुत ही बेचैन था वो और सो नहीं पा रहा था। उसी बेचैनी में अपने बिस्तर पर करवटें बदलता गया की उसको 2:30 बजे कारिडोर में एक दरवाजे का बंद होना सुनाई दिया। (नक्शे में देखिएगा आप लोग) रवींद्र का कमरा ठीक उसके कमरे की उस तरफ है और प्रवींद्र के दरवाजे से दरवाजा भी दूर नहीं है। (नक्शे में मैंने दरवाजे के लिये एक छोटी सी खुली जगह छोड़ी है).. तो आवाज सुनकर झपटते हुए वो कमरे से निकला। अपने रूम के दरवाजे को बहुत ही धीरे से खोला, बिना कोई शोर किए हुए, और बिना किसी लाइट का स्विच ओन किए हुए वो किचेन के दरवाजे से बाहर निकला और कुर्सी जिसे उसने पहले से वहां रखा हुआ था उसपर चढ़कर ए.सी. के पास देखने गया अपने पिता के कमरे में।

उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं, जो नजारा उसकी आँखों ने अंदर देखा। नेहा, उसकी भाभी बिल्कुल नंगी थी, उसके पिता के पास उसके बिस्तर पर, उसकी नाइटी अलमारी पर लटकी हुई थी और नेहा अपने ससुर का लण्ड चूस रही थी, जबकी ससुर पीठ पर लेटा हुआ था, और वो भी नंगा था। नेहा अपने हाथ में ससुर के मोटे लण्ड को थामे जमके चूस रही थी और एकाध बार अपनी जीभ से चाट रही थी, फिर चूसती जा रही थी। बूढा अपनी कमर को ऊपर-नीचे करते हए हौले-हौले नेहा के मुँह में जैसे अंदर-बाहर कर रहा था।

वो दृश्य देखकर प्रवींद्र को गरम और ठंडा दोनों एक साथ लगा। वो सोचने लगा की इतने दिनों से वो नेहा को पाने की कोशिश कर रहा है और नेहा सती-सवित्री बन रही थी और यहाँ अपने ससुर के साथ यह सब कर रही है? 'यह सब कबसे चल रहा है?' प्रवींद्र ने सोचा। पहली बार कब हुआ था? उसके पिता को कैसे नेहा मिल गई?
और रवींद्र.. क्या उसको पता भी है? अगर वो अचानक उठ गया तो क्या होगा? भाभी ने कैसे इतना बड़ा रिस्क ले लिया? इतनी हिम्मत कैसे हुई उसे? यह सब सोचते हुए प्रवींद्र का सर चकराने लगा।

फिर अंदर देखा तो नेहा अपनी पीठ पर लेटी हुई थी और उसका पिता नेहा की चूत को चूस रहा था। नेहा अपने ससुर के सर को हाथों में दबाए हुए बिस्तर पर अपने जिश्म को रगड़ रही थी। उसका खूबसूरत जवान नंगा जिश्म उस वक्त ससुर के कब्जे में था। फिर जल्द ही ससुर ऊपर गया और अपने मजबूत हाथों में नेहा की जवान चूचियों को मसलते हुए उसके खड़े निपल्स पर अपनी जीभ फेरने लगा, 18 साल की जवान बहू के निपल्स।
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03-04-2021, 10:08 AM,
#12
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
प्रवींद्र को बहुत बहुत गुस्सा आया, उसको मन किया की तुरंत जाकर अपने पिता के कमरे के दरवाजे पर जोर से लात मारकर अंदर घुसे और तमाशा खड़ा करे। उस वक्त उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। सोच रहा था की वो वोही करे जो सोच रहा है या वैसा करना गलत होगा? उसका दिमाग कुछ देर के लिए जैसे सुन्न हो गया। प्रवींद्र ने अचानक अपने जिश्म में ठंड और एक कंपन महसूस किया, उसका गला सूख गया, थूक भी नहीं निगल पा रहा था, और फिर उसको गर्मी महसूस हुई जैसे की उसको बुखार हुआ हो। जब फिर से अंदर देखा तो उसका पिता नेहा को चोदने लगा था।

नेहा ने दोनों पैर फैलाए हए थे और अपने ससुर के लण्ड को बड़े मजे से अपने अंदर ले रही थी, और नेहा, साथ-साथ ससुर के गले पर दाँत काट रही थी और चाट रही थी, उसकी बाहें ससुर के जिश्म को लपेटे हुए थी, उसकी बाहों के नीचे से। और नेहा की हथेली ससुर के कांधों पर थी उसको थामे हुए, जकड़े हुए। ससुर की कमर जोरों से हिल रही थी। फिर उसकी हलचल ने और जोर पकड़ा और वो अपने लण्ड को नेहा की जवान चूत के अंदर अंदर-बाहर करता गया, एक के बाद एक जबरदस्त धक्का देते हुए, और उसकी सिसकारियां छूटने लगी। साथ में धीमी-धीमी आवाज में नेहा भी तड़पने लगी।

ससुर हाँफने लगा और तड़पती आवाज में गुर्राते हुए आगघ्गघह' की आवाज की उसने।

और बहुत जल्द नेहा अपनी आवाज को संभालते हुए धीरे से चिल्लाई- “आअहह... इस्स्स्स... उफफ्फ़... आआहह.."

फिर झट से ससुर ने अपने लण्ड को चूत के बाहर निकाला और अपने वीर्य को नेहा के पेट के ऊपर छोड़ा। उसकी चूचियों तक ससुर का वीर्य गया और कुछ कतरे नेहा के गले पर भी पड़े। नेहा ने ससुर के चेहरे में
मुश्कुराते हुए देखकर अपनी हथेली से वीर्य को अपने जिश्म पर मला। फिर नेहा ने उठकर ससुर के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। फिर दोनों एक दूसरे को बाहों में लेकर किस किए और दोनों हाँफते हए बिस्तर पर आराम से लेट गये।

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03-04-2021, 10:09 AM,
#13
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
वो सब देखकर प्रवींद्र का दिल टूट गया क्योंकी वो नेहा से प्यार करने लगा था। वो अंदर वापस गया और रेफ्रीजिरटर के पीछे छुप गया, उस रात की तरह नेहा को अपने पिता के कमरे से बाहर निकलते हुए देखने के लिए। वो उस रात की तरह निकली, इस बार नेहा ने अपने ससुर को हग किया, अपने कमरे में वापस जाने से पहले। (नक्शे में आप लोग देख सकते हैं की रेफ्रेजिस्टर किधर है और प्रवींद्र के पिता के रूम का दरवाजा कहां है
और किधर से प्रवींद्र देख रहा था और कहाँ से कहाँ तक चलकर नेहा वापस अपने कमरे में गई।) तो वो सब प्रवींद्र ने देखा।

जब नेहा ने अपने रूम का दरवाजा बंद कर लिया, तो धीरे से प्रवींद्र वापस अपने कमरे में गया और गुस्से से लाल था वो। उसका मन किया की उसी वक्त नेहा के कमरे में जाकर उसको लात मारने को। फिर प्रवींद्र ने मन ही मन कहा- “रंडी है साली... खुद को बड़ी साफ-सुथरी दिखाती है.."

फिर प्रवींद्र सोचने लगा की इतने दिनों से वो उसको बाहों में जकड़ रहा है अपने लण्ड को उसके जिश्म पर रगड़ रहा है, कैसे उसको किस भी करता है मगर नेहा हमेशा उसको धक्का देकर चली जाती है कभी भी रेस्पांड नहीं
करती। यह सब सोचते हुए उसको यकीन नहीं हो रहा था की वो ऐसा कर सकती है, जो कुछ अभी उसकी आँखों ने देखा।

अब प्रवींद्र सोचने लगा की जिस दिन नेहा ने कहा था की उसके पिताजी को सब कुछ बता देगी तो क्या तब से ही उन दोनों के बीच यह सब चल रहा है? तभी उसने अपने ससुर के साथ सब शुरू कर दिया था क्या? आखिर कब से अपने ससुर से चुदवा रही है वो? यह सोच-सोचकर प्रवींद्र पागल हो रहा था। उसको रात भर फिर से नींद नहीं आई और कुछ ही देर में सुबह हो गई। जब सूरज की किरणें उसके कमरे में आने लगी तब उसको नींद आई।

नेहा कई बार उसको जगाने के लिए गई मगर वो नहीं उठा, गहरी नींद में सोता रहा। आखिरी बार दिन के एक बजे नेहा उसको चौथी बार जगाने गई तब वो उठा। उसका सर दर्द कर रहा था और नहीं उठना चाहता था। तब भी, कैसे भी करके वो उठा और नहाने के बाद उसने नेहा को लाउंज में बुलाया यह कह करके की उसको उससे जरूरी बातें करनी है।

नेहा गई और प्रवींद्र ने शुरू किया- “तो मुझको अपने साथ सोने के लिए एक मौका नहीं दोगी भाभी?"

नेहा- “नहीं, कभी नहीं..."

प्रवींद्र- "मगर क्यों भाभी? हम बड़े आराम से एक रिश्ता बना सकते हैं, किसी को भी पता तक नहीं चलेगा। मैं तुम्हें कितना चाहता हूँ। मैं 18 साल का हूँ और तुम भी, हम एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझ सकते हैं, है ना भाभी?"

नेहा- “नहीं, यह ठीक नहीं होगा प्रवींद्र, तुम मेरे भाई की तरह हो, यह बहुत गंदी बात होगी छी..."

प्रवींद्र- “अच्छा... गंदी कह रही हो... और तुम भाभी साफ और पवित्र हो... मैं और जवान हूँ और तुमको अधेड़ और अनुभवी मर्द पसंद हैं?”
नेहा- “क्या बकवास कर रहे हो? दिमाग ठिकाने है तुम्हारा?" नेहा ने गुस्सा दिखाया और उसका चेहरा लाल हो गया।
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03-04-2021, 10:09 AM,
#14
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
प्रवींद्र नेहा के करीब गया और एक जोर का थप्पड़ मारा उसको।

नेहा को शाक लगा और प्रवींद्र को हैरानी से देखा तो उसने एक और जोर का तमाचा मारा नेहा को। वो बैठकर रोने लगी। फिर प्रवींद्र ने उसको उठाया और एक तीसरा तमाचा जोर से मारा उसके गाल पर, जो बिल्कुल लाल हो गये थे। फिर जोर से प्रवींद्र ने कहा- “सती सावित्री बनने का नाटक बंद करो भाभी। मैंने दो रातों को लगातार तुमको मेरे पिता से चुदवाते हुए देखा है। रंडी साली... तुम तो पक्का रंडी निकली। अपने ससुर से चुदवाती हो। साली कुत्ती कामिनी... और मुझसे साफ सुथरी वाली बात करने चली, कुत्ती कहीं की। मैंने तुमसे प्यार किया था साली समझी तू.. आई लव्ड यू, डम इट। आई रियली लव्ड यू। अगर मेरा भाई तुमको खुश नहीं कर सकता तो मैंने सोचा था की, मैं तुमसे शादी करूँगा। मैं तुम्हारे साथ जीने का सोच रहा था। मगर तुम तो साली रंडी निकली। मैं बच गया रे... बच गया मैं तो... तो बता अब क्या कहना है तुम्हें? है कुछ कहने को बाकी? अब क्या
बहाना बनाएगी तू? बोल?"

नेहा नीचे फर्श पर बैठी एक बच्ची की तरह रो रही थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था की क्या कहे बस रोती जा रही थी।

गुस्से से चिल्लाते हुए प्रवींद्र ने कहा- “नहीं बोलोगी... कुछ कहना भी है की नहीं? चुप रहना है... ओके ठीक है मैं अभी इसी वक्त इस घर को छोड़कर जा रहा हूँ, कभी इस घर में वापस नहीं आऊँगा। अगर मेरे डैड ने पछा की मैं कहाँ हूँ तो बता देना की मुझको तुम दोनों के बारे में सब पता चल गया। मुझे रवींद्र भाई के लिए बहुत अफसोस हो रहा है मगर मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता इस घर में अब..."

प्रवींद्र के कदम घर के बाहर के ओर बढ़ ही रहे थे की नेहा ने जल्दी से उसको पीछे से थामा और रोते हए कहा "रुक जाओ, रुक जाओ प्लीज, भगवान के लिए मत जाओ, कहीं मत जाओ, अब मुझे जो कहना है वो सुन लो, तब डिसाइड करना की क्या करना है तुम्हें? मैं तुमको समझाती हूँ की क्यों और कैसे यह सब हुआ? इन सबके पीछे एक लंबी दास्तान है जिसको सुनकर तुम खुद दंग रह जाओगे। सब जानने के बाद बताना की मेरा सपोर्ट करोगे या छोड़कर चले जाओगे। और क्या कहा तुमने की मुझसे प्यार करते हो... वाह... कैसा प्यार है की छोड़कर जा रहे जब मैं मजधार में हूँ। हाँ... अब सुन लो की मैं भी तुमको शुरू से ही चाहती हूँ, मगर अपने आप पर कितना काबू रखती हूँ यह मैं ही जानती हूँ। प्यार करती हूँ सच में तुमसे, मगर हालात कुछ ऐसे हो गये की मुझको तुमसे नफरत करवानी पड़ी मुझे। कुछ ऐसे हालात पैदा हुए की मेरे कंट्रोल से सब बाहर होता गया, मैं संभल नहीं पाई। सब बेकाबू होता गया..."

प्रवींद्र पिघलने लगा और नीचे से नेहा को बाहों में भरके सोफे तक लेजाकर बैठाया और कहा- “बताओ भाभी, बोलो ऐसी क्या बात हुई? बताओ मुझे, मैं बहुत बेचैन हूँ सब जानने के लिए। मुझे यकीन था की कुछ ना कुछ जरूर हुआ होगा? शुरू से बताओ मुझे कि यह सब कब से शुरू हुआ भाभी। मेरा मतलब है तुम्हारे इस घर में आने के कितने दिनों बाद सब शुरू हुआ पिताजी के साथ? शुरू से बताओ मुझे और मेरा वादा है की अगर मुझे इसमें तुम निर्दोष लगी तो तुमको छोड़कर कभी नहीं जाऊँगा..”

तो नेहा ने अपने आँसू पोंछे और प्रवींद्र को अपने पास बैठने को कहा और उसने बोलना शुरू किया- “मैं बहुत बेचैन रहती थी की तेरा भाई मुझसे संभोग नहीं कर रहा था। पिताजी ने कई बार मुझसे पूछा की हमने सेक्सुअल इंटरकोर्स किया या नहीं?"
*****

Update 4 Pravindra peeps in his dad's room

To dosto, jab Pravindra ko yakeen ho gaya ke ab wo raat ko apne pita ke kamre ke andar dekh sakega to ussko araam mila aur wo hush hua aur besabri se intezaar kiya ke raat uss ke ghar ko visit karen.

Paathakon ko samajhne ke liye ke ek dusre ke kamre kahan kahan the aur kidhar se Pravindra kamre ke andar jhankega, main ne ek sketch banaya hai jiss se aap sab ko achchi tarah se samajh mein aaye. Yeh raha sketch:

Raat hui aur sab TV dekhne ke baad apne apne kamre mein chale gaye. Ravindra (Neha ka pati) TV bahot kum dekhta tha. Wo har raat ko thik 9 baje sone chala jaata tha, ek to khet ke kaam ka thakaan aur usski aadat thi jaldi sone ki bachpan se hi.

Pravindra apne kamre mein gaya aur intezaar karta raha raat ko aur gehri hone ki. Apne kamre ke andar se hi wo sunne ki koshish karta raha ke ussko kissi darwaze ki khulne ya bandh hone ki awaaz aaye ussko. Wo pray karta raha ke ussko kuch dikh jaye iss raat ko. Par ussko abhi tak yakeen hi nahin tha ke yeh sab usska vehem tha ya sach mein usske pita aur Neha ke beech kuch tha bhi ke nahin.

Ek ghante ke baad wo 2 baar baahar gaya dekhne ke liye magar kuch nahin dikha usse. Niraash wapas aya apne kamre mein. “kia weh donon nahin milengue aaj raat ko….. kuch nahin hone wala kia??” Eisa khud se poocha pravindra ne, aur yeh khayaalaat ussko bahot pareshaan kar rahe the……. Paathakon ko dikhega sketch mein main ne ek red (laal) spot banaya hai jo ghar ke baahar hai. Pravindra ussi jagah se ek kursi par chadh kar apne pita ke room mein dekhta hai. Baaki ghar ke andar kisska kamra kidhar hai sab saaf banaya hai main ne iss se aap sabhon ke samajh mein ajaega ke kaun kidhar sota hai raat ko vaghaira. Ghar ka naksha bilkool weisa hi hai jo main ne banaya hai.

Subha 1 baje tak 4 baar Pravindra baahar jaakar kamre ke andar jhank aya magar kuch nahin dikha usse. Bahot hi bechain tha wo aur so nahin paa raha tha. Karwatein badalta gaya apne bistar par ussi bechaini mein ussko 2.30 baje corridor mein ek darwaze ka band hona sunaayi diya. (nakshe mein dekhiyega aap log) … Ravindra ka karma thik usske kamre ke uss taraf hai aur darwaza bhi door nahin hai Pravindra ke darwaze se…. (nakshe mein main ne darwaze ko ek chota sa open space chorra hai)….. To awaaz sunkar jhappatte hue wo kamre se nikla. Apne room ke darwaze ko bahot hi dhire se khola bina koyi shor kiye hue, aur bina kissi light ko switch kiye hue wo kitchen ke darwaze se baahar nikla aur kursi jisse ussne pehle se wahin rakha hua tha uss par chadh kar AC ke paas dekhne gaya apne pita ke kamre mein.

Usske enkhen khule ke khule reh gaye jo nazara usske enkhon ne dekha andar!! Neha, usski bhabi bilkool nangi thi usske pita ke paas usske bistar par. Usski nighty almari par Latki hui thi aur Neha apne sasur ka lund chuss rahi thi jabke sasur peeth par leyta hua tha, aur wo bhi nanga tha. Neha apne haath mein sasur ke mote lund ko thaame jamke chuss rahi thi aur ekaat baar apne jeeb se chaat rahi thi firr chussti jaa rahi thi…. Budha apne kamar ko upar niche kartey hue haule haule jeise push in and out kar raha tha Neha ke munh mein….

Pravindra ko garam aur thand donon laga ek saath wo drisht dekh kar. Wo sochne laga ke itne dinon se wo Neha ko paane ki koshish kar raha hai aur Neha sati savirtri ban rahi thi aur yahan apne sasur ke saath yeh sab kar rahi hai!! ‘yeh sab kabse chal raha hai’ Pravindra ne socha. Pehli baar kab hua tha? Usske pita ko keise Neha mil gayi? Aur Ravindra? Kia ussko pata bhi hai? Agar wo achanak uth gaya to kia hoga? Bhabi ne keise itna bada risk le liya? Itni himat keise hui use? Yeh sab sochte hue Pravindra ka sar chakraane laga.

Fir andar dekha to Neha apni peeth par leyti hui thi aur usske pita Neha ki choot ko chuss raha tha…. Neha apne sasur ke sar ko hathon mein dabae hue bistar par apne jism ko rawnd rahi thi….. usski khubsurat jawaan nangi jism uss waqt sasur ke kabze mein tha…. Aur jald hi sasur upar gaya aur apne mazboot haathon mein Neha ke jawaan chuchiyon ko massalte hue usske erect nipples par apna jeeb ferrney laga…. 18 saal ki jawan bahu ke nipples!!!

Pravindra ko bahot bahot ghussa aya, ussko mann kiya ke turant jaakar apne pita ke kamre ke darwaze par zor se laat maarke andar ghusse aur tamasha khada karein….. uss waqt usska dimaagh ne kaam karna band kar diya, soch raha tha ke wo wohi kare jo soch raha hai ya weisa karna ghalat hoga…. Usska dimaagh jeise blank ho gaya kuch der ke liye….. Pravindra ne achaanak apne jism mein thand aur ek kampan mehsoos kiya, usska gala sookh gaya thook bhi nahin nigal paa raha tha, aur firr ussko garmi mehsoos hui jeise ke ussko bukhaar hua ho…..

Jab fir se andar dekha to usske pita Neha ko chodne laga tha. Neha ke donon peyr feyle hue the aur apne sasur ke lund ko bade maze se apne andar le rahi thi Neha, aur saath saath sasur ke gale par dant kaat rahi thi aur chaat rahi thi, usske baahen sasur ke jism ko lapete hue the usske bahon ke niche se aur Neha ke hatheli sasur ke kaandhon par the ussko thaame hue, jakre hue…. Sasur ke kamar zoron se hill rahe the aur usske movements ne aur zor pakre aur wo apne lund ko Neha ki jawaan choot ke andar andar baahar karta gaya ek ke baad ek zabardast dhaka dete hue aur usske siskariyan chuthne lage saath mein Neha bhi tarapne lagi dheemi dheemi awaaz mein….. sasur hanffne laga aur trapte awaaz mein ghurratey hue “aaaagghgghghghggghhhhh “ ki awaaz kiye ussne…. Aur bahot jald Neha apni awaaz ko sambhaaltey hue dhire se chilaaayi “aaaaaaahhhhhh issssssssshhhhhh ufffffffff…..aaaaaaaahhhhhhhhh” fir jhat se sasur ne apne lund ko choot ke baahar nikaala aur apne veerya ko Neha ke peth ke upar chorra…. Usske boobs tak sasur ka veerya gaya aur kuch katre Neha ke gale par bhi pade… Neha ne apne haatheli se veerya ko apne jism par massla sasur ke chehre mein muskuratey hue dekh kar…. Fir uth kar Neha ne sasur ke lund ko apne muhn mein le liya….. fir donon ek dusre ko bahon mein lekar kiss kiye aur donon araam se leyt gaye bistar par hanfftey hue….

To be continued…………..

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03-04-2021, 10:09 AM,
#15
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
कड़ी_06

फिर नेहा ने प्रवींद्र को बताना शुरू किया की कैसे और कब से सब शुरू हुआ? उसने बताया की एक दिन वो
4जे4 में खेत गई थी ससुर के साथ। नेहा उन दोनों के लिए खाना बनाकर इंतेजार कर रही थी और 11:00 बजे वो नेहा को लेने आया। उस दिन प्रवींद्र घर पर नहीं था। वो शादी के 3 महीने बाद की बात थी। ससुर ने उससे पहले 3 या 4 बार रवींद्र और नेहा के संबंध के बारे में नेहा से बात कर चका था। तो उस दिन गाड़ी में जाते वक्त भी ससुर ने फिर से बात छेड़ी थी, और कुछ दूर जाकर गाड़ी को एक सुनसान जगह पर खेतों के बीच रोक दिया।

और बातें करने के लिए ससुर ने पूछा- “बहू, आखिर कब तक ऐसा चलेगा तुम्हारे और रवींद्र के बीच? तुमने अभी तक उसके साथ सेक्स नहीं किया तो ऐसा कैसे चलेगा बहू? हमें अपना परिवार बढ़ाना है बहू और मुझे अपने पोते पोतियों का मुँह देखना है, वंश को आगे बढ़ाना है। देखो कितने खेत हैं, कितनी जमीन है इन सबके लिए

नेहा ने ससुर को जवाब दिया- “मैं क्या कर सकती हूँ पिताजी? रवींद्र इतना शर्मिला है की मुझको बिल्कुल हाथ भी नहीं लगाता। वो मुझसे पीठ घुमा के सोता है और बिल्कुल हिम्मत नहीं करता मेरे तरफ मुड़ने की। कहता है मेरी इज्जत करता है और मुझको नुकसान नहीं पहुंचा सकता। मैंने उसके करीब जाने की बहुत कोशिश किया जैसे आपने बताया था. मगर कोई फायदा नहीं हआ पिताजी..."

फिर ससुर जी को एक आइडिया आया, तो उसने कहा- “सुनो... तो फिर मुझे लगता है की मुझको खुद रात को तुम्हारे कमरे में आना होगा और रवींद्र से बात करना होगा की क्यों वो अपनी सुहागरात को अंजाम नहीं दे रहा?
क्या खयाल है बहू?"

नेहा ने जवाब दिया- "जैसा आप ठीक समझें पिताजी..."

ससुर ने और कहा- “मेरे खयाल से रवींद्र को थोड़ा सा हौसले की जरूरत है जो शायद मैं दे सकता हूँ, मगर बहू उसके लिए मुझे तुम्हारा साथ भी चाहिए। क्या तुमको एतराज होगा अगर मुझे तुमको छूना पड़े रवींद्र को हिम्मत दिलाने के लिए तो? वो बहुत जरूरी होगा, बहू समझने की कोशिश करो.."

नेहा ने जवाब दिया- “मैं अपनी सुहागरात को कामयाब करने लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ पिताजी, जो भी आप कहोगे मैं करूँगी, क्योंकी मुझे भी लगता है उसको हिम्मत और हौसले की जरूरत है, जो मैं नहीं दे पाती हूँ। मेरे खयाल से आप उसकी मदद जरूर कर पाओगे, क्योंकी जो भी आप उससे कहते हो वो हमेशा करता है..."

तो उस रात को जब नेहा अपने कमरे में जा रही थी तो ससुर ने उसको बुलाया। उस वक़्त प्रवींद्र टीवी देख रहा था। उस वक्त उसको कुछ पता नहीं चला था। और रवींद्र सो चुका था तब तक। ससुर और बहू दोनों ने किचेन में धीरे-धीरे बात की।

ससुर ने कहा- “तुम अपनी सबसे सेक्सी नाइटी पहन लो उसको रिझाने के लिए बहु, मैं अंदर आता हूँ उससे बात करने के लिए, तुम उसको जगाओ तब तक, मैं अभी आया..."

नेहा ने ससुर को जवाब दिया- “ठीक है पिताजी, मगर एक बात है, क्या प्रवींद्र को सुनाई नहीं देगा अगर वो कारिडोर से गुजरा तो? वो अभी तक टीवी देख रहा है और हमारे कमरे के पास से गुजरेगा अपने कमरे में जाने के लिए..."

तो ससुर ने कहा- “तो फिर ठीक है मैं प्रवींद्र को अपने कमरे में जाने का इंतेजार करता हूँ, जब वो सोने चला जाएगा तब आऊँगा तेरे पास, ओके?"

नेहा मान गई और अपने कमरे में चली गई कपड़े बदलने। नेहा ने अपने कपड़े उतारे जो पहनी हुई थी और नाइटी पहन लिया। वैसे तो हर रात वो बिना ब्रा के नाइटी पहनती थी, मगर इस रात को क्योंकी उसका ससुर आने वाला था तो नेहा ने ब्रा नहीं उतरा, ब्रा के ऊपर ही नाइटी पहन लिया। नाइटी पिंक कलर की थी और पतली-पतली स्ट्रैप्स थी कंधे पर और बहुत महीन थी। नेहा खुद को आईने में देखकर सोचने लगी की उसका जिश्म साफ दिख रहा है, उसको ससुर वैसे देखेगा। उसको शर्म आने लगी और सोचने लगी की आइडिया ड्राप कर दे। मगर ससुर तो आने वाला था, वो अब कैसे उसको जाकर कहे नहीं आने को? नेहा एक 18 साल की कुंवारी लड़की थी और ससुर उसके कमरे में आने वाला था उसके पति की सुहागरात मनाने के लिए, मदद करने के लिए।

पति उसके साथ संभोग करेगा ससुर की हाजिरी में। हे भगवान... यह सोचकर नेहा के पूरे जिश्म के रोंगटे खड़े हो गये। मगर नेहा अपने पति से संभोग करना चाहती थी, 3 महीने हो गये थे और उसने कुछ नहीं किया था। नेहा चाहती थी की कुछ भी हो जाए एक बार रवींद्र उससे संभोग कर ले तो उसको सुकून आएगा। नेहा ने फिर सोचा की ससुर ने उससे कहा था एतराज नहीं करने को, अगर उसको उसे छूना पड़ा तो। तो नेहा सोचने लगी की कहाँ छुएगा वो उसे? जिश्म को छुएगा, कहाँ छुएगा?

यह सब सोचते हए नेहा के जिश्म में एक कंपन हई और उसकी रगों में एक लहर दौड़ी। वो खुद के जिश्म को आईने में देख रही थी और अपने ससुर को सोच रही थी की अभी थोड़ी देर में क्या होने वाला है? फिर वो रवींद्र को जगाने लगी। रात के बारह बज
बारह बजे थे. जब ससर ने नेहा के बेडरूम को खोला। नेहा रवींद्र के बगल में लेटी हई थी और रवींद्र गहरी नींद में था, नेहा की नाइटी ऊपर उठी हुई थी और उसकी खूबसूरत दूध की जैसी जांचें दिख रही थीं।

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03-04-2021, 10:09 AM,
#16
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे

ससुर के अंदर आते ही नेहा झट से उठकर बैठ गई। चेहरे पर लाली के साथ उसने अपने ससुर के चेहरे में देखा। कमरे में मद्धिम बेडलैंप जल रहे थे और ससुर अपनी आँखों को नेहा के खूबसूरत जिश्म से नहीं हटा पा रहा था। नेहा की नंगी बाहें, उसकी काँख, कंधे पर पतली-पतली स्ट्रैप्स, और ब्रा भी नजर आ रहे थे, और वो सब देखकर ससुर के मन में कुछ हुआ।

नेहा को अजीब लगा जिस तरह से ससुर उसको देख रहा था तो उस भारी तनहाई को तोड़ने के लिए नेहा ने बात की- “वो नहीं उठ रहा है पिताजी, मैंने बहुत कोशिश की..." नेहा ने फुसफुसाते हुए कहा।

बूढे को बहुत अच्छा लगा जिस तरह से फुसफुसाहट में नेहा ने उससे बात की, जैसे की वो उसका साथ दे रही थी, शुरू से ही। तब उसने अपने बेटे को जगाने की कोशिश की। बाप ने रवींद्र को बहुत जोर से झंझोड़कर हिलाते हुए जगाया और वो मुश्किल से आँखों को खोलते हुए देखा और अपने पिता को अपने बेडरूम में देखकर चिहुँक गया।

रवींद्र आँखों को मसलते हुए बेड पर बैठा और पूछा- “क्या बात है?"

तो बाप ने कहा- “बेटा आखिर कब तक ऐसा चलेगा? तुमने आज तक बहू को छुआ ही नहीं। क्यों, प्राब्लम क्या है तेरा?"

रवींद्र को शर्म आई और उसने सर नीचे झुका लिया। बाप ने बात पर बात किया मगर रवींद्र जमीन पर नजरों को गाड़े रखा, कोई भी जवाब नहीं दिया।

पिता ने कहा- “देखो अगर तुमको शर्म लग रही है और समझ में नहीं आता की कैसे शुरू करोगे तो मैं तुमको सिखाता हूँ, मुझे देखो और जो मैं करूँ वैसा करो.." पिता ने नेहा की बाहों पर अपनी हथेली को फेरा ऊपर से कलाई तक और रवींद्र को वैसा करने को कहा।

जब ससुर ने नेहा के बाजू पर उस तरह से हाथ फेरा तो नेहा के जिश्म में एक आग जैसे लगी और आवाज को थामते हुए एक हल्की सी सिसकारी ली उसने। नेहा थोड़ी घबड़ाई हुई थी और उसका पूरा जिश्म तना हुआ था उस वक्त। बहुत तनाव हो रही थी उसे।

रवींद्र ने वैसा ही किया जैसे उसके पिता ने सिखाया, मगर उसका हाथ थर-थर कांपता रहा, जब तक उसने नेहा के बाजू पर अपनी हथेली को फेरा। उसके पशीने छूट पड़े और चेहरा लाल हो गया।

तब ससुर ने नेहा को बेड पर अपने बिल्कुल करीब बुलाया। वो उसके पास गई, बिल्कुल करीब। तो ससुर ने अपने होंठों को नेहा के गले पर हल्के से फेरा और रवींद्र को वैसा करने को कहा। रवींद्र ने किया बस थोड़ा सा, फिर काँपने लगा था।

तब रवींद्र के पिता ने नेहा को अपनी बाहों में लेकर उसके गाल पर किस किया, गले को चूमा और हल्के से अपनी जीभ को नेहा के कान के पीछे फेरा और रवींद्र को वैसा करने को कहा।

नेहा को उस वक्त अपने आपको ससुर को समर्पित कर देने को मन कर रहा था। मगर अपने आप पर काबू रखते हुए जिस वक्त ससुर अपनी जीभ को उसके कान के पीछे फेर रहा था, नेहा ने कहा- “पिताजी, नहीं.."

तो ससुर ने कहा- “सहयोग करो, प्लीज बहू... मैं यह सब तुम्हारी भलाई के लिए कर रहा हूँ। देखना वो सीख जाएगा और तुमसे संभोग करेगा."

रवींद्र ने नेहा को उसी तरह से बाहों में लिया मगर बहुत ही काँप रहा था और पशीना-पशीना हो गया था।

तब बाप ने पूछा- “कैसा लग रहा है बेटा? अच्छा लग रहा है? तेरा खड़ा हुआ ना?"

रवींद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। पिता ने बेटे की शार्ट पर देखा की उसका खड़ा हुआ या नहीं? मगर कुछ भी नहीं था सब फ्लैट था। तब पिता ने नेहा की नाइटी को ऊपर उठाया और उसकी पूरी जांघे दिखने लगी, और पिता ने नेहा की जांघों को रवींद्र को दिखाते हुए पूछा- “देखो बेटा क्या यह सेक्सी नहीं है? देखो इसकी कितनी सेक्सी जांघे हैं बेटा, तेरी बीवी बहुत ही सेक्सी है रवींद्र बेटा.."

फिर खुद पिता का लण्ड खड़ा हो गया नेहा की खूबसूरत जांघों को देखकर और नेहा को सब दिखा। उसने देखा
की उसके ससुर का खड़ा हो गया उसके कपड़े के अंदर ही। ससुर को आज पहली बार नेहा की जांघों के वो हिस्से नजर आए जो हमेशा छिपे रहते थे। इतने दिनों से वो हिस्से कितने खूबसूरत और सफेद रंग के थे, उसमें गलाबी रंग का मिलावट भी थी, गदराई, गरम, सेक्सी जांघे। ससर के मुँह में पानी आ गया। उसने जांघों पर अपना हाथ फेरा, धीरे-धीरे, हल्के-हल्के, ऊपर तक हाथ बढ़ाता गया, नेहा की नाइटी के नीचे भी।

नेहा ने अपने जिश्म को सीधा करते हुए ससुर के हाथ को आगे बढ़ने से रोका।

तो ससुर ने पूछा- “क्यों, तुमने अपनी ब्रा नहीं निकाली है नेहा? प्लीज उतार दो ब्रा को उसको उत्तेजित करने के लिए, यह जरूरी है बेटी...”

* * * * * * * * * *
Reply
03-04-2021, 10:09 AM,
#17
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
कड़ी_07

उस आज्ञा का पालन करने में नेहा को बहुत ही अजीब लग रहा था। जिश्म काँप उठा उसका और चेहरा एकदम से लाल हो गया। लाज से ससुर के चेहरे में देखा नेहा ने। रवींद्र ने सर झुका लिया और बेड को देखने लागा।
ससुर ने प्यार से कहा- “सुनो नेहा बेटी, देखो वो बहुत शर्मा रहा है, नर्वस भी है, तुमने कहा था की सहयोग करोगी तो करो ना... बस यूँ समझो की मैं यहाँ नहीं हूँ सिर्फ तुम्हारा पति यहाँ है, निकाल दो ब्रा को बेटी, रवींद्र बहुत खुश होगा, है ना बेटा?"
नेहा ने आहे भरते हए उन दोनों मर्दो की तरफ अपनी पीठ करके अपनी ब्रा को निकाल दिया। जब वो अपनी ब्रा को निकाल रही थी तो प्रवींद्र का पिता नेहा की नंगी पीठ देख रहा था और उसका लण्ड खड़ा हो गया वो देखकर।
फिर नेहा ने वापस मुड़कर ससुर को देखते हुए पूछा- “अब क्या पिताजी?"
हु
..
ससुर ने नेहा को अपने करीब लाया और रवींद्र को भी। उसने रवींद्र के हाथ को अपने हाथ में लेकर नाइटी के ऊपर से ही नेहा की चूचियों के ऊपर रखा और रवींद्र की हथेली से नेहा की चूची को हल्के से जरा सा मसला। रवींद्र को शर्म आई और उसने अपने हाथ को खींच लिया। रवींद्र का पिता नेहा के और करीब गया, उसके पैर नेहा की जांघों से टकरा रहे थे जिससे उसका लण्ड हरकत कर रहा था और वो अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था।

इतनी खबसरत जवान बह को ऐसी सेक्सी नाइटी में बिना ब्रा के अपने इतने करीब पाकर, ससर ने अपनी उंगली से हल्के से नेहा के कंधे से एक स्ट्रैप को नीचे सरकाया और नेहा की चूचियां थोड़ी नजर आने लगी तो बाप ने रवींद्र के ठोड़ी को ऊपर उठाकर वो नजारा दिखाया।

और उसी वक्त बाप ने अपनी हथेली को नेहा के कंधे पे हल्के से फेरते हुए उसकी चूची तक फेरा और बेटे को देखते रहने को कहा। तब तक नेहा को उत्तेजना महसूस होने लगी थी और उसका शरीर काँप उठा। फिर उसको समझ में नहीं आया की कैसे उस हालात का सामने करे? और ससुर ने नेहा की नर्म मुलायम चूची को अपने सख्त किसान वाले हाथ से छुआ, सहलाया। जवान कुँवारी 18 साल की अनछुई चूचियों को ससुर सहला रहा था
और बेटा देख रहा था।

नेहा से सहा ना गया और उसने अपना सर और जिश्म को झुकाकर छुपाना चाहा।

और रवींद्र ने अपने चेहरा एक तरफ कर लिया।
ससुर की समझ में नहीं आया की अब कैसे आगे बढ़े? तो कड़क आवाज में अपने बेटे से कहा- “तुमको कुछ नहीं महसूस हो रहा बेटा?"

रवींद्र बिल्कुल खामोश था और और काँपने लगा था और बहुत पशीना छूटने लगा था उसका।

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तो नेहा ने कहा- "पिताजी, रहने दीजिए, वो रेस्पांड नहीं करेगा। वो तो ऐसा ही है आपको पता है, कोई उम्मीद नहीं मेरे खयाल से अब..."

मगर पिता हार मानने वाला नहीं था। उसने नेहा को बिस्तर पर लेटने को कहा और कहा की वो एक आखिरी चान्स लेगा, रवींद्र की उत्तेजना को जगाने के लिए।

नेहा गरम हो चुकी थी मगर उसकी समझ में नहीं आ रहा था की ससुर से क्या कहे? उसको अपने आपको संभालना बहुत मुश्किल पड़ रहा था। वो चाहती थी की अब ससुर वापस चले जाएं ताकी वो अपने मन और जिश्म में बसी आग को ठंडा कर सके।

मगर ससुर तो आग को और भी भड़का रहा था उसको बेड पर लेटाकर।

नेहा अपने ससुर के बगल में बेड पर लेट गई, और ससुर नेहा के ऊपर चढ़ा और उसके गले को चूमा, रवींद्र को दिखाते हुए। फिर अपने मुँह को ससुर ने नेहा की चूचियों की तरफ बढ़ाया, और रवींद्र को बिल्कुल वैसा ही करने
को कहा।

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03-04-2021, 10:10 AM,
#18
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे

नेहा उस वक्त बाप और बेटे के बीच जैसे बलि की बकरी बनी हुई थी। जब ससुर वो आक्सन कर रहा था तो नेहा बहुत मुश्किल से अपनी भावनाओं को काबू में कर रही थी, अपने जिश्म की आग को ना भड़कने देने की बहुत कोशिश कर रही थी। जब ससुर के होंठों ने उसके कंधे की मुलायम चमड़ी को छुवा और वहाँ से धीरे-धीरे ससुर के होंठ उसकी चूचियों तक फेरते हुए बढ़े तो नेहा बेकाबू हो गई और सिसकारियों के साथ उसका जिश्म बेड पर थरथराया और नेहा ने चादर को अपनी मुठियों में जोर से जकड़ लिया और जोर से हाँफने लगी थी। नेहा खुद को गीली होते महसूस करने लगी थी।

ससुर ने उसी वक्त एक हाथ से नेहा की नाइटी को जांघों के बिल्कुल ऊपर उठाया, जिससे नेहा की पैंटी नजर आने लगी थी। हाँफते हुए नेहा ड्रेस को वापस नीचे करके अपने पैंटी और जांघों को ढक रही थी। ससुर का तन्नाया हुआ लण्ड नेहा के पेट के निचले हिस्से से टकराया और उसको अपने जिश्म पर महसूस करके नेहा ने आहह... भरते हुए गहरी साँस लिया।

तब पिता बेड पर नेहा पर से एक तरफ हट गया और रवींद्र को बिल्कुल वैसा करने को कहा जैसे उसने अभी नेहा के साथ किया था। रवींद्र तो काँप रहा था, पशीना-पशीना हो गया था, फिर भी बेचारे ने बाप के डर से वो सब करने की कोशिश किया। मगर जैसे ही उसका शरीर नेहा के शरीर से टकराया तो रवींद्र को जैसे करेंट का झटका लगा और वो कूदकर बेड से उतरा और जल्दी से बेड के नीचे घुस गया जैसे एक बच्चा किसी चीज से डरकर छुपता है।

ये देखकर नेहा की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने अपने चेहरे को तकिये में छुपा लिया।

पिता को बहुत गुस्सा आया, और गुस्से में ही थोड़ा चिल्लाते हुए कहा- “कैसा लुच्चा बेटा है तू.. अबे मैं तेरी पत्नी को चोदने वाला हूँ और तू पलंग के नीचे छप रहा है..."

रवींद्र ने पलंग के नीचे से कहा- “पिताजी, आप नेहा को ले लो, उसे अपना लो, वो आपकी हुई, आप ही मेरी जगह जो करना है कर दो। मुझसे नहीं होगा, मेरा आज तक कभी खड़ा नहीं हुआ है, मैं नामर्द हूँ पिताजी..."

नेहा और उसके ससुर दोनों को जबरदस्त झटका लगा, रवींद्र का जवाब सुनकर। और दोनों खुले हुए मुँह से एक दूसरे के चेहरे में देखते रहे।

फिर नेहा रोने लगी और ससुर ने उसके सर और पीठ पर हाथ फेरते हुए उसको चुप कराने की कोशिश किया। ससुर ने प्यार से नेहा को अपनी बाहों में भर लिया और नेहा ने रोते हुए अपना चेहरा ससुर की नंगी छाती में छुपा लिया। फिर धीरे-धीरे अपनी बहू को सहलाते हुए ससुर ने नेहा को लेटाया, उसके सर पर हाथ फेरते हुए, हौसला देते हुए, उसके गाल को चूमा। जैसे एक बच्चा रोता है तो उसको फुसलाते हुए शांत करते हैं वैसे ही
ससुर उसके जिश्म पर हाथ फेरते हुए नेहा को शांत करा रहा था।

नेहा सिसक रही थी, ससुर उसके आँसू पोंछ रहे थे और उसके आँसूओं को अपने होंठ से ससुर पोंछ रहा था, अपने होठों को नेहा के गाल पर फेर रहा था, और तब ससुर ने अपने होंठों को नेहा के होंठों पर रखा और नेहा ने अपना मुँह खोल दिया और अपने ससुर को किस करने लगी।

दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे को बहुत पैशनेटली किस किया, एक लंबी किस थी वो। फिर नेहा ने ससुर को बहत जोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके कंधे पर अपने दाँतों को गड़ाने लगी और चूसने लगी अपने ससुर के शरीर को। नेहा से संभाला नहीं जा रहा था अब ससुर धीरे से अपनी बहू की नाइटी को निकालने लगा और नेहा ने निकालने के लिए ससुर को पोजीशन दिया। फिर सब कुछ बहत जल्दी-जल्दी होने लगा। ऐसा लगा दोनों बरसों से बहत प्यासे थे और पल भर में दोनों बिल्कुल नंगे हो गये और ससुर नेहा को चोदने लगा।

नेहा कुँवारी थी, और ससुर को एक 18 साल की जवान कुँवारी चूत मिल गई सील तोड़ने को, अपने बेटे के बेडरूम में, बेटे के बिस्तर पर। सुहागरात आखिर में ससुर ने मनाया अपनी बहू के साथ।

नेहा खुशी और दर्द के साथ जोरों से हाँफने लगी, जिस पल का वो 3 महीनों से इंतजार कर रही थी, आज उसकी वो हसरत पूरी हुई, उसके जिश्म में एक लण्ड घुसा और उसकी सील टूटी जिससे नेहा को बहुत खुशी हुई और सुकून मिला। फिर खुशी की बात नेहा को यह हुई की उसको बहुत अच्छा आगंजम हुआ, जिश्म में थरथरी आ गई जिस पल झड़ने लगी थी। अपने ससुर का लण्ड बहुत खुशी से नेहा ने स्वीकार किया बल्की उसकी चूत ने बड़ी आसानी से ससुर के लण्ड का स्वागत किया और ससुर की उस चुदाई से नेहा के पूरे जिश्म में बहुत खुशी और आराम मिला।

दोनों ने रवींद्र को बिस्तर के नीचे खर्राटे लेते हुए सुना। दोनों ससुर बह एक दूसरे को बाहों में लेकर लेट गये,
और पिता को एक किश्म का स्वाभिमान, गर्व, महसूस हुआ की उसने एक जवान कुँवारी को इस उम्र में खुश किया, उसको प्लीज किया।

“अब चादर पर खून के धब्बे आ गये थे, अब सबको नेहा और उसके ससुर खुशी से बिस्तर की चादर दिखा सकेंगे और रिश्तेदारी की औरतें अब बाकी की परंपरा को पूरा कर सकेंगी..” ऐसा सोचते हुए दोनों को नींद लग गई, आराम, सुकून और खुशी से भरी नींद। नेहा बहुत ही खुश थी, उसके सर से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गाया जैसे।
18

उस वक्त नेहा को इसकी कोई फिकर नहीं थी की उसने किसके साथ संभोग किया। उसको इस बात की खुशी थी की उसने सुहागरात मनाई, किसी भी हालत में उसकी सील टूटी और उसने सेक्स किया और एंजाय भी किया, मजा भी आया और खुशी भी मिली और सबको मुँह भी दिखा सकेगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा।

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* * * * * * * ***
Reply
03-04-2021, 10:10 AM,
#19
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
कड़ी_08

अपने और अपने ससुर के साथ उस तालुकात के बारे में प्रवींद्र को बताने के बाद नेहा रोने लगी और जमीन पर बैठ गई। प्रवींद्र ने सारे बयानात गौर से सुने, और हालांकी नेहा वैसे मुश्किल दौर से गुजरी थी। सब सुनते हुए और सुनने के बाद प्रवींद्र बहुत उत्तेजित हो गया और उसका जमके खड़ा हो गया। उसको सब बहुत ही एराटिक और उत्तेजक लगा बहुत उत्तेजना हुई उसको।

O
जब नेहा रो रही थी तो प्रवींद्र भी अपने सर को दोनों हाथों में थामे नीचे बैठ गया। उस पल कमरे में एक तनाव था, भारी और बोरिंग वातावरण था, सब शांत थे। तकरीबन 15 मिनट तक दोनों चुपचाप बिना कोई बात किए वैसे ही खामोश बैठे रहे।

प्रवींद्र नेहा की कहे हुये उन सब दृश्यों को अपनी आँखों के सामने जैसे देख रहा था, रीवाइंड कर करके। और उसने सोचा और समझ गया की उसी तरह से नेहा को हर रात उसका पिता चोदने लग गया और तब से शायद नेहा को भी आदत हो गई, क्योंकी उसको वो खुशी देने वाला कोई और था ही नहीं। तो इसीलिए नेहा हर रात अपने ससुर के कमरे में जाती है और दोनों अपने जिश्म की आग को शांत करते हैं। प्रवींद्र को समझ में नहीं आ रहा था की अब क्या कहे और कैसे नेहा को अप्रोच करे?

मगर अब वो नेहा को और भी चाहने लगा और सेक्स माइंडेड भी हो गया नेहा को लेकर शायद पहले से और भी ज्यादा।

क्योंकी उसके पिता के साथ तो नेहा कर ही रही थी, तो प्रवींद्र ने सोचा अब तो और आसान हो गया उसको नेहा को पाने के लिए। थोड़ा सा मतलबी भी बन गया और सोचा की अब अगर नेहा उसको खुश नहीं करेगी तो वो नेहा को उसी के किए गये गनाह को इश्तेमाल करके उसको एमोशनली ब्लैकमेल भी कर पाएगा। मगर उसके दिल में सच में नेहा के लिए प्यार भी था, तो शायद ब्लैकमेल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर नेहा भी सच में उसको चाहती है तो, ऐसा भी सोचा प्रवींद्र ने।

फिर भी प्रवींद्र सोचता रहा की आखिर क्यों इतने दिनों तक नेहा उसके प्रपोजल को ठुकराती रही? जबकी वो खुद ये सब करने लगी थी। यह सवाल प्रवींद्र को परेशान किए जा रहा था। क्या अब नेहा खुद को प्रवींद्र के हवाले करेगी? अब कैसे प्रवींद्र नेहा की तरफ बढ़ेगा जबकी नेहा ने अभी काफी दर्द भरे हालात को बयान किया? जब उसने देखा के नेहा ने रोना बंद कर दिया है तो कमरे की शांति को भंग करते हुए प्रवींद्र बोला- “अच्छा तो यह बताओ भाभी, तुम पिछले 4 महीनों से पिताजी को खुश कर रही हो, और रवींद्र भाई को इसका पता है ना?"

नेहा ने गहरी साँस लेते हुए कहा- “तुम्हारा भाई किस तरह से सोता है, तुमको मुझसे बेहतर पता होगा ना... उसको एक बार भी पता नहीं की मैं कमरे से निकलकर पिताजी के कमरे में जाती हैं। हाँ पिताजी ने उस पहली रात के बाद हर रात को मुझे अपने कमरे में आने को कहा। और सच कहूँगी तब मुझे पिताजी के साथ ये सब पसंद आने लगा, मुझे उसकी जरूरत महसूस होने लगी और मैं खुद ना चाहते हुए भी सब एंजाय करने लगी धीरे-धीरे, क्या करती मैं? आखिर मैं भी इंसान हूँ और मेरी भी जरूरतें हैं। और एक सच बात बताऊँ? तुम्हारे

पिताजी बहुत मजबूत हैं और मुझको बेहद खुश करते हैं वो, उसकी उम्र के बावजूद अब भी वो पक्का मर्द हैं। वो पहला मर्द है जिसने मुझको चोदा और मुझको एक औरत होने का एहसास दिलाया। उसने मुझको एक मुकम्मल
औरत बनाया, और मुझे खुद अपने आपको उसे सौंप देने का मन करने लगा। उस रात के बाद मैं रात का इंतेजार करने लगी और उसके पास जाने और संभोग करने का बेसब्री से इंतेजार करने लगी हर रात को। और तेरे पिताजी को अपना मर्द समझने लगी मैं तब से..."

प्रवींद्र ने नेहा को दिल लगा के अच्छी तरह से सुना और उसके पास नेहा को देने के लिए जवाब नहीं रहा। कुछ कहने लायक नहीं छोड़ा नेहा ने उसको। वो खड़ा हुआ और अपने पिता के बारे में सोचने लगा।

प्रवींद्र कमरे से निकलने लगा तो नेहा उसके पीछे तेज कदमों से गई और पीछे से प्रवींद्र का हाथ जोर से पकड़कर कर कहा- “प्लीज मत जाओ, प्लीज... क्या यह मेरा कसूर है की तुम मुझे अब छोड़कर जाओ? हालात ऐसे हो गये थे की मुझे वो सब करना पड़ा अब तो समझो तुम...”

प्रवींद्र मुश्कराया और उसको नेहा पर तरस आया, तो उसने कहा- "फिकर मत करो भाभी, मैं कहीं नहीं जा रहा, और नहीं जाऊँगा। मैं तो बाहर हवा खाने जा रहा हूँ, दम घुटने लगा इस कमरे में अब..." यह कहकर प्रवींद्र ने नेहा को अपनी बाहों में जोर से जकड़ा।

तो नेहा की जान में जान आई और अपने सर को प्रवींद्र के सीने पर चिपकाते हुए उसने एक लंबी साँस छोड़ी। दोनों एक दूसरे को बाहों में जकड़े खड़े थे, एक दूसरे के जिश्म की गर्मी को महसूस कर रहे थे। फिर प्रवींद्र ने अपनी भाभी के माथे को चूमा, फिर उसके गालों को चूमा और फिर उसके होंठों को। नेहा ने इस बार विरोध नहीं किया और प्रवींद्र के किस को रेपोन्ड किया और उसने भी प्रवींद्र को खुद किस किया। और जब प्रवींद्र ने देखा
की नेहा मना नहीं कर रही है तो उसने उसके गले को किस किया, फिर धीरे-धीरे नीचे नेहा को चूमते हए चूचियों की तरफ होंठ फेरता गया।

नेहा ने और जोरों से प्रवींद्र को बाहों में जकड़ा, लंबी साँस छोड़ी, और उसकी साँसें तेज होने लगी, तो फुसफुसाते हुए नेहा ने कहा- “प्लीज अब छोड़ो मुझे, छोड़ो ना प्लीज... मैं बहक जाऊँगी, मुझसे कंट्रोल नहीं हो पाएगा प्रवींद्र, प्लीज छोड़ो ना सस्स्स्स ..."

मगर प्रवींद्र और भी और सहलाते और किस करते गया अपने प्यारी खूबसूरत, जवान भाभी को। किस के दौरान उसके हाथ नेहा की पीठ से लेकर गाण्ड तक फेरते हुए मसलते गये। फिर नेहा को प्रवींद्र ने उठा लिया उसी पोजीशन में, नेहा के पाँव जमीन पर नहीं थे, ऊपर थे। क्योंकी प्रवींद्र उसको बाहों में जकड़े हुए उठाया हुआ था, नेहा का पूरा जिश्म प्रवींद्र के जिश्म से लिपटा हुआ प्रवींद्र की बाहों में कैद, और प्रवींद्र के होंठ उसके जिश्म पर चारों तरफ फिर रहे थे चूमते हुए। फिर चलकर प्रवींद्र अपने कमरे तक गया और नेहा को अपने बिस्तर पर
लेटाया।
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03-04-2021, 10:10 AM,
#20
RE: Indian XXX नेहा बह के कारनामे
नेहा के दिल की धड़कन बहत तेज हो गई थी और साँसें और भी तेज चल रही थीं। वो बिस्तर से उतरी और कहा- “नहीं प्रवींद्र, यह ठीक नहीं है, सही नहीं है यह प्रवींद्र...” और वो कमरे से बाहर भाग गई।

प्रवींद्र अपने चेहरे को अपने हाथों में लिए कुछ देर तक बेड पर बैठा रहा। फिर एक लंबी साँस छोड़ते हुए बेड पर लेट गया, उसका लण्ड बिल्कुल खड़ा हो गया था। आधे घंटे के बाद प्रवींद्र रसोई में गया जहाँ नेहा सिंक में बर्तन

मांज़ रही थी। नेहा एक टू-पीस पहनी थी, उसकी कमर दिख रही थी और बाल खुले हुए थे। धीरे-धीरे हवा चल रही थी पास की खुली खिड़की से और नेहा के बाल उड़कर कभी दाएं, तो कभी बाएं हो रहे थे, जिससे कभी उसकी कमर ढक जाती थी और फिर नजर आ रही थी।

पीछे से प्रवींद्र यह नजारा देखकर उत्तेजित हो गया और उसका लण्ड हरकत में आ गया। प्रवींद्र का पीछे से ही
नेहा को जोर से बाहों में लेने का मन किया दोबारा।

नेहा को उसकी मौजूदगी महसूस हुई तो मुड़कर उसको देखा, मुश्कुराई और बैठने को कहा। जो माहौल पहले था वो मिट चुका था और अब दोनों बेहतर महसूस कर रहे थे और दोनों ने बातचीत करना शुरू किया।

बहुत बातें की गईं, एक घंटे तक बातें हुई, मगर सेक्स की बातों को छोड़कर। दोनों फिर से पहले की तरह बात करने लगे जैसे की कुछ हुआ ही नहीं था। प्रवींद्र ने नेहा को कई जोक्स भी सुनाए और नेहा खूब खुलकर हँसी भी। वैसे बातों से माहौल को बिल्कुल बदल गया, हल्का-फुका महसूस करने लगे दोनों और आराम और सुकून मिले दोनों को पहले की तरह।
और आखिर में बात यह पूछा प्रवींद्र ने- “कितनी बार पिताजी के साथ खेत गई हो तुम?"

नेहा ने जवाब दिया- “पाँच बार..."

तो उसने पूछा- “क्या पिताजी ने तुमसे खेत में भी सेक्स किया है?"

नेहा- “हाँ एक बार किया था, और बहुत ही अच्छा महसूस हुआ था उस दिन मुझे.."

प्रवींद्र- “किसी ने तुम दोनों को देखा नहीं... इसका यकीन है तुम्हें?"

नेहा- “मैं बार-बार यही कह रही थी पिताजी को की वैसे खुले में कोई भी हम दोनों को देख सकता है, मगर उसने कहा की वो अपने खेतों को बेहतर जानता है, दिन के उस वक्त कोई भी उस जगह पर नहीं आता.." और एक पल के बाद नेहा ने यह भी कहा- “हम्म्म... हाँ खेत की बात चली है तो कुछ और बताना है तुम्हें, मगर
अभी नहीं, उस बात को तब बताऊँगी जब उसका सही वक्त बताने का होगा तब..."
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