Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र
02-20-2021, 08:57 AM,
#1
Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र
अंतरंग हमसफ़र 01

मेरे  अंतरंग हमसफ़र ये कहानी झट पट शादी और सुहागरात का ही अगला भाग हैl


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दीपक कुमार के जीवन की पहली हमसफर रोज़ी के साथ पहले सम्भोग की कहानी हैंl कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानी।


दोस्तों मैं दीपक कुमार, मैं अठारह साल की उम्र तक पढ़ाई में ही डूबा रहाl मैं हमेशा पढ़ने लिखने में होशियार, एक मेधावी छात्र थाl उस समय तक पढाई में ही डूबे रहने के कारण मेरे कोई ख़ास दोस्त भी नहीं थे और मैं स्कूल में भी अपने अध्यापकों के ही साथ अपनी पढ़ाई में ही लगा रहता थाl

मैं अपने माँ बाप की एकलौती संतान हूँl अठारह साल की उम्र तक मेरी देखभाल करने वाले भी पुरुष नौकर ही थेl हालाँकि, मेरे पिताजी की एक से अधिक पत्निया रही है और मेरी कुछ सौतेली बहने भी हैं, पर मुझे हमेशा उनसे दूर ही रखा गया थाl यहाँ तक की मेरी अपनी माँ के अतिरिक्त किसी महिला से कोई ख़ास बातचीत भी नहीं होती थीl
मेरा स्कूल भी सिर्फ लड़कों का ही था जिसमे कोई महिला टीयर भी नहीं थीl मुझे कभी भी लड़कियों की संगत करने की अनुमति नहीं थी, गर्लफ्रेंड तो बहुत दूर की कौड़ी थीl

स्कूल ख़त्म करने के बाद और फाइनल पेपर देने के बाद, मैं अपनी उपरोक्त परवरिश और स्वभाव के कारण, मैं अपने जीवन की नीरस दिनचर्या से बहुत विचलित हो गया थाl मुझे यक़ीन होने लगा था कि इस तरह मैं अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकताl मुझे दिनचर्या में बदलाव की बहुत सख्त ज़रूरत महसूस हो रही थीl

जब मेरे सब पेपर ख़त्म हो गए तो मैंने अपनी सभी किताबों को एक कोने में रख कर, अपने पहली मंजिल पर स्तिथ अपने कमरे से निकल कर, घर से बाहर घूमने जाने के लिए फटाफट नीचे उतरा, तो दरवाजे पर मुझे मेरे पिता जी मिल गएl

उनके साथ मेरे फूफा रोज़र अपने दो बेटों, रोबोट (बॉब) और टॉम मिलेl दोनों मेरी ही उम्र के थेl उन्हें आया देख, मैं बहुत खुश हुआl मुझे लगा अब इनके साथ मैं अपनी दिनचर्या को बदल कर, खूब खेलूंगा, मस्ती करूंगा. और अपनी बोरियत दूर कर सकूंगाl

उसी दिन, मेरे पिता ने मुझे बताया कि वह और मेरी माँ वह कुछ दिन के लिए कुछ जरूरी काम के सिलसिले में विदेश (इंग्लैण्ड) जा रहे हैं, और उनकी अनुपस्थिति में, मुझे अपने फूफा के साथ यहीं रहना था और एक या दो सप्ताह के लिए हमारे पास यहाँ रहने के बाद मेरे फूफा और फूफेरे भाई गाँव में जाएंगेl

अगले दिन मेरे पिता ने विदेश जाने से पहले, मुझे कुछ जरूरी परामर्श दिए और किन-किन चीजों का ख़्याल रखना हैं, उनके पीछे से क्या करना हैं, क्या नहीं करना हैं, कैसे करना हैं, सब समझायाl मुझे प्यार और आशीर्वाद देने के बाद, मेरे पिता और माँ लंदन रवाना हो गएl

मेरे फूफेरे भाई, रोबोट (बॉब) और टॉम, से मेरी अच्छी बनती थीl मेरे फूफा, रोबोट (बॉब) और टॉम अंग्रेज थेl रोबोट (बॉब) और टॉम दोनों, लगभग हर साल कुछ दिन के लिए हमारे पास रहने लन्दन से आते थे और मुझे उनके साथ खूब मज़ा आता थाl परन्तु बॉब और टॉम की बहने भी, जब हमारे घर आती थी मुझे उनसे दूर ही रखा जाता थाl
बॉब और टॉम दोनों पहले जब भी मिलते थे. तो दोनों बहुत सीधे और सरल लड़के लगते थे, लेकिन इस बार दोनों बहुत शैतान या यूँ कहिये बदमाश हो गए थेl

मुझे अब वह दोनों, दो ऐसे जंगली घोड़ों जैसे लगते थे, जिन्हे सीधे सादे निवासियों पर खुला छोड़ दिए गया होl शैतानी करने के बाद पकड़े जाने पर, सब बात मुझ पर डाल कर, दोनों ख़ुद साफ़ बच निकलते थेl दोनों सभी प्रकार के कुचक्रों बनाने में बहुत निपुण और विद्वान साबित होते थेl

बॉब और टॉम को एक तरह से पूरी छुट मिली हुई थी, क्योंकि मेरे फूफा, जिन्हें कुछ व्यावसायिक और अन्य व्यस्तता के कारण, हमारे आचरण की देखभाल निगरानी करने का समय नहीं था, इसलिए वह दोनों दिन भर उछल कूद मचाते रहते थेl उनकी शरारते देख कर मैं भी मजे लेता रहता था और कभी-कभी उनके साथ मैं भी धमा चौकड़ी मचा लेता थाl

फिर दो दिन बाद फूफाजी, हम तीनो को साथ लेकर गाँव में हमारे पुरानी पुश्तैनी महल नुमा घर चले गएl वहाँ पर भी बॉब और टॉम की उछल कूद जारी रही, क्योंकि फूफा ज़मीन जायदाद के सारे मसले देखने में ही व्यस्त रहते थेl मैं भी उनमें जाने अनजाने शामिल रहता था, इसलिए कोई भी नौकर चाकर डर के मारे बॉब और टॉम की शिकायत नहीं करता थाl अगले दिन फूफा किसी काम से पास के गाँव में अपने किसी मित्र से मिलने चले गए और हमें पता चला वह आज रात वापिस नहीं आएंगेl

हालांकि, पिछले तीन दिनों के दौरान जब मेरे फूफेरे भाई मेरे साथ थे, उन्होंने भद्दे-भद्दे चुटकुले और असभ्य बातचीत करके, लड़कियो के पवित्र होने की जिस अवधारणा के साथ मेरी माँ ने मुझे पाला था, मेरी
सभी उन पूर्वधारणाओं को उखाड़ फेंका थाl

हमारे पुरानी पुश्तैनी महल नुमा घर में हम सब के ठहरने के लिए अलग-अलग, बड़े-बड़े आलीशान कमरे थेl शाम को मैं बॉब की तलाश में मेरे फूफेरे भाई बॉब के कमरे में गया, दरवाज़ा खोलने पर, मैंने जो कुछ देखा, उस पर मैं पूरी तरह से चकित रह गयाl वहाँ बिस्तर पर टॉम लगभग नंगा एक बेहद खूबसूरत भगवान की बनाई हुई लाजवाब मूर्ति के जैसी, गोरी, गुलाबी गालों वाली कमसिन लड़की की बाँहों में खोया हुआ था, जिसके कपड़े हमारी नौकरानियों जैसे थेl

जब मैंने कमरे में प्रवेश किया तो वहाँ बॉब उस खूबसूरत कन्या के ऊपर एक तंग अंतरंग आलिंगन में जकड़ा हुआ लेटा हुआ था l लड़की की लम्बी खूबसूरत सफेद टाँगों का एक जोड़ा उसकी पीठ के ऊपर से पार हो गया थाl उनके शरीर की थिरकन, हिलने और स्पीड को देखकर मुझे लगा कि वे दोनों असीम आनंद ले रहे हैं, जो उनके लिए पूरी तरह से संतोषजनक थाl दोनों उस आनंद दायक क्रिया में इस तरह से डूबे हुए थे, कि उन्हें मेरे आने का कुछ पता नहीं चला, यहाँ तक के ये भी नहीं मालूम हुआ कि कब मैंने उस कमरे में प्रवेश किया हैl

कहानी जारी रहेगीl

आपका दीपक l
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02-21-2021, 11:11 AM,
#2
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 2
Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र भाग 02

अंतरंग हमसफ़र मेरे दोस्त, दीपक कुमार के जीवन की पहली हमसफर रोज़ी के साथ पहले सम्भोग की कहानी हैंl कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानीl

दोस्तों मैं दीपक, आपने मेरी कहानी 'अंतरंग हमसफ़र-1' में पढ़ा, मैंने अपने फूफेरे भाई बॉब को एक लड़की के साथ अंतरंग हालात में देखाl

अब आगे-

बिस्तर पर दोनों को इस तरह से अंतरंग हालात में देखकर मैं इतना चकित हो गया कि, मैं दरवाजे पर खड़ा उन्हें तब तक देखता रहा, जब तक कि बॉब ने हिलना बंद नहीं कर दियाl उसके बाद बॉब कुछ देर शांत होकर उस खूबसूरत लड़की के ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा, फिर उसेने ख़ुद को लड़की से दूर कर लियाl

वह उठा, उसकी पीठ मेरी तरफ थी, जबकि, वह सुन्दर खूबसूरत अधनंगी लड़की अभी भी अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थीl उसका पेटीकोट और कमीज ऊपर की और था, जिससे उसके बड़े-बड़े सुडौल स्तन मुझे ललचा रहे थेl लड़की का बदन, इतना सुन्दर, खूबसूरत, और आकर्षक उत्तेजक होता है, ये मुझे उस दिन ही पता चला था।

उस लड़की की टाँगे खुली हुई थीl वह हिली, और उसने अपनी जाँघों को अलग कियाl मेरी आँखे उसके सुन्दर गोर सुडौल बदन को टकटकी लगा कर देखने लगी, और मैंने उसके गोल सफेद सपाट पेट का मुआयना कियाl लड़की के नीचे के हिस्से और दोनों जाँघों के बीच की जगह को गहरे काले घुँघराले बालों ने छुपाया हुआ था।

मैंने ऐसा अकसर लड़कों से सुना था, लेकिन पहले कभी नहीं देखा थाl मैंने काले घुंघराले बालों के ताले के बीच छीपी हुई योनि की पहली झलक देखी। उसकी जाँघों के खुलने से मैंने घुंघराले बालों के बीच छीपी हुई उस शानदार गुफा, जो की एक गर्म-गर्म भट्ठे की तरह थीl उसके बीच के चीरे के आसपास दो मोटे और रसीले होंठों के बीच थोड़ा-सी खुली हुई थीl योनि मे से थोड़ा-सा सफेद दिखने वाला झाग निकल रहा थाl

मैंने जो कुछ देखा उससे अजीब-सी भावनाएँ, मुझ में जग गई थींl

मैं उस खूबसूरत नज़ारे को और पास से देखने के लिए बिस्तर की ओर आगे बढ़ा। जिस क्षण मेरे क़दम की आवाज़ को सुना गया, उस लड़की ने ख़ुद को बेडकवर के नीचे छुपा लियाl बॉब पलटा और मुझे मिलने आया, और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मुझे बिस्तर तक ले गया, और कहा, -मेरे भाई दीपक तुमने क्या देखा है? आप कितने समय से कमरे में हैं? "

मैंने उसे बताया कि मैंने उनके पूरे पराक्रम और प्रदर्शन को देखा है।

जब तुमने सब देख ही लिया है, तो फिर केसी शर्म, कहते हुए बॉब ने उस लड़की का कवर उतार कर फेंक दियाl लड़की अपने स्तनों को एक हाथ से, तथा दुसरे हाथ से अपने चेहरे को छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी, और मैं उस खूबसूरती के मुजस्मे को घूरता ही रहाl मेरा हाथ अनायास ही मेरे लंड पर चला गया, जो की मुझे कड़ा होता हुआ महसूस हुआl

बाब ने लड़की को बैठे हुए मुद्रा में उठाते हुए, एक हाथ उसकी कमर पर लपेटते हुए कहा-" दीपक भाई!, क्या तुमने कभी किसी लड़की के संग का आनंद लिया है?

मैंने कहा "नहीं कभी नहीं"l

तो बॉब बोला तुमसे बातें करते हुए, मुझे कुछअंदाजा तो था, के तुम इस मामले में बिलकुल अनारी होl

तुमने एक सुंदर लड़की को बांहों में लेकर प्यार करने से प्राप्त होने के लिए सुख का स्वाद कभी नहीं लिया हैंl तुम्हें नहीं पता इस आनंद के आगे दुनिया के सभी सुख और आनंद फीके हैंl तुम ये भी नहीं जानते, कि एक खूबसूरत लड़की की बाहो में खो जाना उसे हासिल कर लेना, उसे प्यार करना, और उसका प्यार पाने के प्रलोभन का विरोध कर पाना, एक पुरुष के लिए कितना कठिन हैl पुरुष अपनी पूरी शक्ति और साधन का उपयोग करके, एक खूबसूरत स्त्री को हासिल करने के लिए अपना सब कुछ भी दाव पर लगा देता हैl इस शारीरिक भूख को रोक सकने की शक्ति बहुत कम लोगों में होती हैl

फिर उस लड़की का हाथ पकड़ कर चूमते हुआ बॉब बोला-ऐसा कौन है, जो ऐसी सुंदर, प्यारी, और आकर्षक हुस्न की मालकिन हसीना को इनकार कर सकता हैl मैं क्या चीज हूँl इन्होंने मुझे कल रात अपने कक्ष में मुझे आमंत्रित किया था, लेकिन मैं इंतज़ार नहीं कर सकाl मैंने आज ही इसे अपने कक्ष में आमंत्रित कर इनके शिष्टाचार का जवाब दिया, जो इन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया, और ये सब उसी का नतीजा हैl "

वह खूबसूरत हसीना जिसे मैंने पहले बार बेपर्दा देखा था, वह रूबी थी l बॉब ने मुझ से पूछा "क्यों भाई ये बहुत आकर्षक और खूबसूरत है न?"

तो मैंने उत्तर दिया, "हाँ, बेशक, ये बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है"l लिंगों के संयोजन से प्राप्त सुखों को प्राप्त करने की इच्छा महसूस करते हुए, मैंने अपने हाथ रूबी के नंगे घुटने पर रखे, जो अभी भी बिस्तर के किनारे पर बैठी थीl उसके कपड़े उसकी योनी और जाँघों को छुपाने की असफल कोशिश कर रहे थेl उसने अपनी क़मीज़ के नीचे खिसका दिया था, जो अपने नीचे उस खूबसूरत योनि की छुपाये हुई थीl

मेरे हाथ धीरे-धीरे उसकी रस भरी योनि की और बढ़ने लगा और मैं धीरे-धीरे रूबी को अपनी और खींचने लगाl

वही पता नहीं मुझे क्या हुआ के अनायास ही मेरे हाथ रूबी के घुटनों पर चले गए, और उसकी योनि की और बढ़ने लगे, लेकिन बॉब ने मुझे रोकते हुए कहा, "मुझे माफ़ कर दो, मेरे भाई, लेकिन रूबी फिलहाल मेरी हैl कम से कम वर्तमान के लिए, लेकिन जैसा कि मैं देख रहा हूँ, कि आप प्रेम की देवी के रहस्यों में ख़ुद को डूबा देने के लिए उत्सुक हैं, तैयार हैंl मुझे लगता है कि रूबी की मदद से मैं आपको रात के लिए एक साथी खोजने में सक्षम हो सकता हूँl उसने रूबी की तरफ़ देखते हुए कहा क्या हम मेरे भाई के लिए एक साथी नहीं ढूँढ सकते?"

तो रूबी वहाँ एकदम से कूद कर अपने पैरो पर खड़ी हो गयी और मुसकुराते हुए बोली, बहुत बढ़िया "हम, महाशय दीपक को मेरी छोटी बहन रोज़ी से मिला देते हैं, और मुझे यक़ीन है कि मेरे ख़ुद की तुलना में रोज़ी बहुत सुंदर लड़की हैl कुमार दीपक, रोज़ी आपको बहुत अच्छी लगेगीl उसकी मुझ से बड़ी सुडौल और गोरे गोरी स्तन हैं"l उसने फुसफुसाते हुए मेरे फूफेरे भाई बॉब के कानों में कुछ कहाl

तो बॉब ने मुझे बधाई देते हुए कहा :मेरे भाई तुम बहुत क़िस्मत वाले हो तुम्हें बहुत बधाई!, अभी मुझे रूबी ने बताया है, तुम्हारी पहली साथी भी तुम्हारी तरह ही कुंवारी हैl मुझे रूबी ने भी मुबारक दी और अपनी गोल सफेद गोलाइयों की जोड़ी को कवर किया कहा, जिन्हे मैं अपनी आँखों से लालच से खा रहा था। "मुझे यक़ीन है, जब हम उसे आज रात लाएंगे तो आप रोज़ी से मिल कर प्रसन्न होंगे", रूबी बोलीl

तो मुझ से बॉब ने पूछा "तुम चुदाई के बारे में क्या जानते हो?" तो मेरा जवाब सुन कर वह बो बोला "तुम्हें बहुत कुछ सिखाना पड़ेगा", और बोला "रूबी मेरी मदद करो दीपक को कुछ सेक्स सीखा देते हैं"l

बॉब बोला तो दीपक, तुम अब ठीक से चुदाई देख और सीख लोl

बॉब रूबी को किस करने लगा और उसके और अपने सारे कपडे उतार डालेl बॉब उसके बूब्स दबाने लगा, और रूबी उसके खड़े लण्ड को सहलाते हुए अपनी चूत पर घिसने लग गयीl

और फिर बॉब अपना लण्ड रूबी की चूत में घुसा कर दनादन धक्के लगाने लग गयाl फिर एक दो आसान बदले और कुछ देर बाद झड़ गया। उसके बाद, रूबी ने मुझ से वादा किया, कि वह रात को अपनी बहन को मेरे कमरे में ले आएगी, तो मैंने भी वादा किया, कि मैं भी उसका और बॉब का राज गुप्त रखूँगा, और जो मैंने देखा था उसका किसी से भी कोई जि़क्र नहीं करूंगाl मैं उन्हें वही छोड़ कर अपने कमरे की और जाने लगाl

बॉब रूबी के कान में कुछ फुसफुसाया और रूबी अपने कपडे उठा कर भाग गयी, और जाते हुए बोली रात के खाने के बाद मैं रोज़ी को ले कर आती हूँl बाद में बॉब ने मुझे सेक्स के बारे में कुछ और हिदायतें दी और सफ़ाई करने की जरूरी हिदायतें दीl उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और नहा धो कर सफ़ाई कर के जल्दी-जल्दी रात का खाना खायाl

रात को जल्दी से अपने कमरे में जाकर मैंने एक घंटा इंतज़ार के बुखार में बितायाl फिर रूबी मेरे कमरे में आयी और मुझ से बोली "आप कुछ देर के लिए अपने भाई बॉब के कमरे में चले जाओ, तब तक मैं आपका कमरा तैयार कर देती हूँl इतनी देर में रोज़ी भी आ जायेगी, फिर जब मैं बुलाऊंगी आप आ जाना"l
लगभग आधे घंटे बाद में रूबी मेरे पास आयी और मुझे मेरे कमरे में ले गयी वहां कमरे का नजारा बदला हुआ थाl बिस्तर फूलों से सजा हुआ थाl मेरे अंदर आते ही रूबी की बहन रोजी कमरे में दाखिल हुईl मैंने रोजी की तरफ हाथ बढ़ाया रोजी एक सबसे खूबसूरत लड़की थीl रोजी ने एक दुल्हन की गुलाबी पोशाक पहन रखी थीl

मैं रोजी को एकटक देखता रहा और जिस पल वह कमरे में दाखिल हुई और दरवाजा बंद किया गयाl मैं आगे की ओर बढ़ गया, उसे अपनी बांहों में पकड़ लिया, और उसे एक सोफे पर ले गया, जहां मैं बैठ गया और उसे अपनी तरफ खींच लियाl रोजी ने एक दुल्हन की पोशाक में अपना चेहरा नक़ाब से ढक रखा थाl मैंने उसका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी जेब से एक अंगूठी निकाल कर उसे तोहफ़े के तौर पर दी, और उसे कहा ये हमारे पहले मिलन की निशानी के तौर पर तोहफा कबूल करो, मेरी रोज! उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और मैंने उसे अंगूठी पहना दीl

मैंने उसका नक़ाब हटाया और उसका खूबसूरत चेहरा देखकर मुझसे रुका न गया, और उसके होंठ चूमने लगाl मैंने वों रुमाल जो उसके स्तनों को ढक रहा था, उसके पिन को खोला, तो उसके बड़े गोल सुडौल उरोज मेरे सामने उजागर हो गएl मैं उसके स्तन चूमते हुए अपनी बांहों में फिर से उसे कस कर जकड़ लियाl मेरी निष्ठुरता और कुछ हद तक, अपने आप को मेरे आलिंगन से मुक्त करने के लिए रोजी संघर्ष करने लगी, और बोली प्लीज मुझे छोड़ दोl तब उस कमरे में मौजूद रूबी जिसे मैं लगभग भूल ही चूका था वह बोलीl

कुमार!! रोजी इससे पहले किसी पुरुष के साथ अंतरंग नहीं हुई है, और कुंवारी है, इसलिए आपको थोड़ी गंवार या अनारी लग सकती हैl लेकिन आपके साथ रहने के लिए बहुत इच्छुक और उत्साहित है, और वों आपको जरूर खुश करेगी, ऐसा मेरा यकीन हैl मुझे पक्का भरोसा है, वह आपकी सारी इच्छाएं पूरी करेगीl आप दोनों बहुत मजे करोगेl ये उसका पहली बार है, इसलिए थोड़ा आराम से और प्यार से कीजियेl

क्यों मेरी बहन रोजी क्या ऐसा नहीं है,?

जिस पर रोजी ने एकदम से जवाब दिया, "ओह! हां," दीदी, और मेरी छाती में अपना चेहरा छिपा लियाl कसम से, उसकी इस अदा पै, मैं एकदम फ़िदा हो गयाl उसका चेहरा ऊपर कर उसके माथे पर एक किस कियाl उसे अपनी छाती से लगा लिया, और बोला "मेरी जान! घबराओ मत अब आराम से करूंगाl. क्या करूँ तुम्हें देख कर मुझ से रुका ही नहीं जा रहा"l

रूबी ने मुझे बताया, चूंकि शराब जोश और हिम्मत को बढाती है, प्रेम की उत्तेजना को भी बढाती है, वह बोली वह मेरे लिए कुछ शराब ले कर आती हैl मैंने कहा रूबी तुम चिंता मत करो शराब हर कमरे में उपलब्ध है, क्योंकि मेरे पिताजी और फूफा सब शराब के शौकीन हैl

फिर वों रोजी से बोली. "कुमार को अच्छे से खुश करो मेरी बहन और उन्हें अच्छी शराब जितनी वों पी सके, उतनी पिलाओ और उनकी सब बात मानो"l फिर वह गयी और एक ट्रे में कुछ शराब के बोतल, केक नमकीन कुछ फल मिठाई इत्यादि ले आयीl मेरे पास आ कर, दो गिलासों में शराब डाल कर, मुझे एक छोटी बोतल देते हुए बोली मेरे कान में फुसफुसाई, "आप रोजी को शराब में इस ख़ास देसी दवा की कुछ बूंदे डाल दें और आपके गिलास में भी मैंने कुछ बूँद डाल दी है इससे आपका आनंद बढ़ जाएगाl फिर मजे करिये", और शुभ रात्रि बोल कर वह दरवाजा बंद कर चली गयीl

जब रूबी चली गयी, तो मैंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया, फिर एक टेबल को बिस्तर का पास खींचा, और रोजी को बिस्तर पर ले गयाl उसके पास बैठ कर, मैंने पहले बिना रोजी के साथ कोई स्वतंत्रता लिए,आगे धीरे- धीरे आगे बढ़ने का फैसला किया, और अपने सभी प्रयास आराम से करने का प्रयास कियाl मैं उसकी प्रशंसा करने लगा मैं उसे कहा,"तुम मुझे बहुत अच्छी लगीl तुम बहुत अच्छी हो!"

तो उसने शर्माते हुए पुछा, "आप को मुझ में क्या अच्छा लगा?", तो मैंने कहा, "तुम्हारे रस भरे ओंठ, मन करता है, बस इन्हें चूसता रहूँl"

वह बोली तो फिर किसने रोका है और मेरे ओंठों पर उसने अपने ओंठ रख दिए, और मैंने उसके रस भरे ओंठों पर चुम्बन कर दियाl ऐसे ही उसकी तारीफ करता रहा, और उसका पूरा चेहरा, गाल, नाक, माथा, और आँखे, धीरे-धीरे सब चूमते-चूमते चाट गयाl

कहानी जारी रहेगीl
आपका दीपकl
Reply
02-22-2021, 11:41 AM,
#3
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 3
Update 3

अंतरंग हमसफ़र भाग 03

'अंतरंग हमसफ़र', मेरे दोस्त, दीपक कुमार के जीवन की पहली हमसफर रोज़ी के साथ पहले सम्भोग की कहानी हैंl कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानीl

दोस्तों मैं दीपक आपने मेरी कहानी मेरे अंतरंग जीवन की हमसफर-1-2 में पढ़ा, किस तरह मैं मैंने अपने फूफेरे भाई बॉब को रूबी के साथ अंतरंग हालात में देखा,और किस तरह मैं रोज़ी से मिलाl

अब आगे:-

मैंने रोज़ी को शराब का गिलास दिया, तो वह बोली मैं शराब नहीं पीती, तो मैंने उसे एक घूँट पीने को कहा तो उसने पी लीl

रोज़ी बोली अब आप पीओ, तो मैं पहले शराब का घूँट भरता फिर अपने होंठ उसके ओंठों से लगा कर, उसे अपने ओंठों से शराब पिलाने लगाl इस तरह मैंने उसको कुछ गिलास शराब पिलाई और उसके साथ मैंने ख़ुद भी शराब पीl

कुछ देर बाद ख़ास उत्तेजक दवा और दारू का दोनों पर असर हो गयाl अब उसके चरित्र की स्वाभाविक जीवंतता, उसके खुले, और मुक्त वार्तालाप में दिखाई देने लगीl

मैंने उससे पुछा 'थकी हुई तो नहीं हो, सोना या आराम करना तो नहीं चाहती?'

तो वो बोली 'इतनी हसीं रात सोने के लिए तो नहीं होगी और फिर इस रात का इंतजार तो हर लड़की को रहता हैl हर लड़की की चाहत होती है, कोई चाहने उसे जी भर कर, बहुत सारा, प्यार करेl '

मैंने फिर उसे कहा, 'रोज़ी! तुम बेहद सुन्दर हो और आज मैं तुम्हे बहुत प्यार करने वाला हूँ 'l

तो उसने कहा 'आपको मेरा क्या सबसे सुन्दर लगता है?' तो मैंने कहा उसका हर अंग बेहद सुन्दर है और मुझे प्रिय है तो वह बोली तो सबसे ज्यादा क्या प्रिय है?

मैंने उसकी कमर और गर्दन के चारों ओर अपनी बाँहों को रखा, और उसकी छाती को अपने छाती के पास दबाने लगा, और एक हाथ उसकी छाती पर फिराते हुए, उसके मुलायम बदन को महसूस करने लगा, और उसके गोल-गोल बूब्स को सहलाने लगाl

तो उसने फिर पूछा कौन-सा अंग सबसे सुन्दर लगा, तो मैंने कहा वही तो जांच रहा हूँl तो वह बोली सिर्फ़ जांचेंगे या देखेंगे भी? उसका ये सुनने के बाद, मेरे ओंठ उसके ओंठों से जुड़ गए, और लगभग 10-15 मिनट मैं उसे किस करता रहाl इस बीच मेरे हाथ, उसकी दुल्हन के पोशाक के ऊपर से ही उसके पूरे बदन को सहला और दबा रहे थे l उसके बड़े-बड़े उरोज मुझे ललचा रहे थे, तो मैंने पीछे से उसकी ड्रेस की डोरिया खींची, और उसके स्तन बाहर निकाल कर उन्हें पहले चूमा, फिर मसला दबाया, और चूस-चूस कर दोनों स्तन लाल कर दिए l वाह! क्या बड़े-बड़े गोल सुडौल स्तन थेl

इस तरह, उसकी स्तन दबाने के बाद मैं रुक गया, और धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ, उसके क़मीज़ के नीचे से एक हाथ डाला, उसके कपड़े उसके घुटनों पर चढ़ा दिए। उसकी टाँगों और जंघा को सहलाते फिर उन्हें निचोड़ने लगाl उसके पैरों के साथ खेला, मैंने अपना हाथ उसकी जाँघ पर तब तक सरकाया, जब तक कि मेरी उंगलियाँ उसकी कुंवारी चुत के द्वार पर नहीं पहुँच गई। उसने पैंटी नहीं पहनी हुई थीl उसके मुँह से इस्सस! निकली और मेरे ओंठ जोर से चूमने लगीl
रोजी की चूत बिलकुल सफाचट थीl बालों का नामों निशान नहीं था, बिलकुल मुलायम, चिकनी और नरमl जब मैंने हाथ फिराया, तो रोज़ी बोली दीदी ने आज ही साफ़ करवाई है, ख़ास आपके लिएl

उसकी रेशमी चूत से खेलते हुए अपनी उंगलियों को घुमाकर चूत के मध्य के लकीर पर फेरते हुए, अपनी उँगली को उनके बीच से घुमाते हुए, मैंने अपनी एक उंगली को थोड़ा नीचे ले जाते हुए, उसकी गांड के छेद को छेड़ते हुए, हलक़े से गांड में पिरो दियाl

वों कराह उठी, आह! आह! प्लीज यहाँ नहीं l दीदी कहती है यहाँ बहुत दर्द होता है l

मैंने फिर दुबारा उसकी योनि के होंठों के बीच उँगली की नोक डालते हुए, उसकी चूत के दाने को ढूँढ लियाl मैंने उसे इतनी अच्छी तरह से छेड़ा कि वह अपनी जगह पर उछलने लगी, और बोली अब इंतज़ार नहीं होता प्लीज अब कुछ करोl मैं इसे अब बर्दाश्त नहीं कर सकती । मैं आग पर था; मेरी नसों में से खून उबल रहा था। मेरा लंड फुल टाइट हो गया था।

मैंने उसे ज़मीं पर पैरों पर खड़ा किया और उसके कपडे उतारना शुरू कर दिया। मैंने जल्दबाजी में उसके कपड़े फाड़ दिए, और उसे पूरी नंगी कर दियाl मेरे लिए किसी लड़की को पूरा नंगा देखने का ये पहला मौका थाl मेरे सामने सचमुच अद्भुत नजारा थाl वाह भगवान्! हुस्न का क्या शानदार नजारा थाl

मेरी आँखे के सामने गोल सुदृढ़ सुडौल स्तन, गोरा मख़मली बदन, पतली बल खाती कमर, सपाट पेट, सुन्दर नैन नक्श, मीठी आवाज़, बड़ी-बड़ी हिरणी जैसी चंचल आँखे, गुलाबी होंठ, हल्के भूरे रंग के लम्बे बाल, नरम चूतड़ और उसका फिगर 34-24-36 का थाl तीखी नुकीली नाक, बड़े गोल नितम्ब, लंबी सुगढ़ टाँगे और सुन्दर हाथ, सब कुछ बेहद सुन्दरl पूरा शरीर सांचे में ढला हुआ, गोल बड़े-बड़े स्तनl मैं उन्हें दबाने लगा, तो कभी चूमने लगा, फिर उसके निपल्स को मुँह में ले कर चूसने लगाl उसे इस हालात में देख कर मैं सब भूल कर उसे जोर से काटने लगा तो वह ओह! आह! करने लगीl

उसकी ऐसे हालत देख मेरे भी लंड का तनाव इतना ज्यादा हो गया, मुझे लगा मेरा लंड, मेरे कपडे फाड़ कर बाहर निकल आएगा और फट जायेगाl
मैंने अपने सब कपडे ऐसे उतार फेंके, जैसे उनमे से कांटे चूभ रहे हो और पूरा नंगा होकर उसे पकड़ कर अपने शरीर से चिपका लियाl मैं उसका पूरा बदन महसूस कर रहा थाl

मेरा लंड उसकी चूत के द्वार पर अपना रास्ता खोजने लगाl

हम दोनों कामाग्नि में जल रहे थे l मैंने अपने हाथों से उसे अपने छाती पर दबायाl उसके स्तन कठोर हो मेरी छाती में चूभ रहे थेl उसने भी अपने हाथों से मेरी पीठ को अपने बड़े-बड़े स्तनों पर दबा दिया थाl तो मैं उसकेओंठों की किश करने लगा और मेरे हाथ उसके उसकी कमर पर फिसलते हुए रोज़ी के नितंबो की अपनी और दबाने लगेl ऐसा लग रहा था दोनों एक दूसरे में समां जाना चाहते होl

आकर्षित, उससे चिपका हुआ उसके नग्न शरीर को महसूस करते हुए, अपने घुटनों पर झुक कर, मैंने उसकी योनि पर प्यार भरे चुंबन कियेl मैं पूर्ण उन्माद में थाl मेरे चूमने से, वह भी जल बिना मछली के तरह तड़पने लगी, और बोली प्लीज अब रुका नहीं जा रहा कुछ करो, मेरे राजा l

और उसके शरीर को मेरा करने के लिए, मैंने कांपती हुई लड़की को अपनी बाँहों में उठाया और उसे बिस्तर पर ले गया।

मैंने आराम करने के लिए एक तकिया उसकी शानदार गोल गांड, नितम्बो के नीचे रखकर लेटा दिया। मैंने उसकी जाँघों को चौड़ा किया और लंड पूरा खड़ा था तो उसने एक बार अपना हाथ लंड पर फेरा, तो लंड जैसे उसके हाथ के छुअन से पूरा भड़क गयाl

रोजी बोली आपका लंड सचमुच काफ़ी बड़ा है l

मेरे लंड का साइज 7 इंच है, और उसकी चूत में जाने को लिए बिलकुल तैयार थाl मैंने उसकी चूत पर लंड को एक बार लगायाl उसकी चूत के दाने पर लंड को दो तीन बार रगड़ा, तो वह बोली प्लीज अब तडपाओ मतl

मुझे बॉब ने बताया था, रोज़ी कुंवारी हैl आराम से करना, थोड़ा दर्द होगा, जब वह पूरी तरह तैयार हो, उससे पूछ कर ही अंदर घुसानाl
मैंने लंड चूत पर घिसते हुए उससे पूछा, तुम तैयार होl

वह बोली हाँ जल्दी करो, अब बर्दाश्त नहीं हो रहाl

मैंने कहा दर्द होगा तो वह बोली 'मैं सब सह लुंगी, तुम अब आ जाओ, मुझ में समा जाओ मैं सब सह लुंगी मुझे भी दीदी ने सब बताया थाl'

अपनी उंगलियों के अग्र भाग की मदद से साथ, मैंने उसकी टाइट चूत के होठों को बहुत मुश्किल से अलग किया और अत्यंत परेशानी के साथ अपने कुँवारे लंड के लुंडमुंड को उसके कुंवारी योनी के प्रवेश द्वार में डालl

जैसे ही मैंने महसूस किया कि लंड ठीक जगह रखा गया है मैंने थोड़ा जोर लगा कर लंड को चूत पर दबाया, लेकिन रोज़ी की चूत इतनी टाइट थी के लंड अंदर जाने की जगह वही से नीचे फिसल गयाl मैंने लंड को पकड़ा फिर चूत के द्वार पर घिसा और थूक लगा कर गीला कियाl मैंने दो तीन बार ऐसा किया पर अंदर जाने में सफलता नहीं मिलीl तो मैंने कहा रोज़ी लगता है, ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी, तुम तैयार हो, तो उसने आँखे झपक कर अपनी स्वीकृति दे दीl

फिर से चूत को हाथो से सहलाया चूत के दाने को लंड से मसला, फिर उंगलियों की मदद से ओंठो को फिर अलग किया, तो रोज़ी ने भी हाथ से मेरा लंड पकड़कर उसे अपनी चूत के छोटे से छेद पर लगा कर, अपने दुसरे हाथ से मेरे नितम्ब दबा कर इशारा किया, तो मैंने भी पूरे ज़ोर से एक धक्का दियाl

इस बार लंड चूत के अंदर जाने में कामयाब हुआl आधा लंडमुंड अंदर चला गया और साथ ही साथ रोज़ी की आह भी निकलीl उसने लंड को छोड़ा नहीं और पकडे रखाl उसने आँखे झपक कर मुझे इशारा कियाl इस बार मैंने लंड पर फिर लम्बे समय तक दबाब दियाl मेरे भयंकर दबाब देने से लंड को चूत के अंदर का रास्ता मिल गया और लंडमुंड का सर पूरा अंदर चला गया, मैंने एक बार फिर ज़ोर से धक्का दिया और मेरा लगभग आधा लंड चूत के झिली को चीरता हुआ रोज़ी का कुंवारापण भंग करता हुआ अंदर चला गयाl

उसकी चीख निकली, लेकिन न मैंने, और न ही रोज़ी ने उसे रोकने की कोई कोशिश करि l

रोजी की चूत बहुत टाइट थीl मुझे लगा कि मेरा लंड उस तंग गुफा में फंस गया हो, और चूत ने लंड को कस कर जकड लिया थाl मेरी भी चीख निकल गयी थीl
रोज़ी ने, न केवलअपने कौमार्य भंग में होने वाले दर्द को पूरी हिम्मत के साथ सहा था, बल्कि बाकायदा मदद करि थीl उसके हाथ मेरे शरीर को उसके पास ले जाते थे, यहाँ तक कि अपने कौमार्य को भंग करने के मेरे जानलेवा इरादों की सहभागी बनते हुए, रोज़ी ने मेरे लंड को भी अपने हाथो से संभाला थाl

वह हो रहे दर्द के मारे, होने वाले रुदन को दबाने के लिए, अपने दांतों के बीच बिस्तर की चादर रखते हुए,इस दर्द को सहने का पूरा प्रयास कर रही थीl

हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे 'ऊह्!, मर गएl' मुझे लंड पर गर्म-गर्म स्राव महसूस हुआl जैसा कि मुझे बॉब ने बताया था ये झिली फटने पर निकलने वाला खून था, इसके साथ ही मेरा भी कुंवारापण भंग हो गयाl इस तरह की रोज़ी की चूत की गुफा में मेरे लंड के लिए रास्ता बन गया थाl मैंने थोड़ा-सा लंड पीछे किया और फिर एक ज़ोर दार शॉट लगा कर पूरा लंड जड़ तक अंदर पैबस्त कर दिया, और प्रेम के जलाशय ने रास्ता दे दिया और बाढ़ आ गयीl रोज़ी झड़ गयी और मेरा लंड रोज़ी के प्रेम के जल से भीग गयाl

उसने चेहरे से ही लग रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा हैl मैंने रोज़ी को धीरे-धीरे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया, तो रोज़ी के आँखों में आंसू आ गएl वह बोली "आराम से धीरे-धीरे नहीं कर सकते थे क्या?" तो मैंने कहा "धीरे करने से अंदर ही नहीं जा रहा था इसलिए ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ा"l मैंने उससे पुछा बहुत दर्द हो रहा है क्या हाँ हो तो रहा हैl

मैं बोला-मेरी रोज़ी मेरी जान, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगाl वह बोली प्लीज अब तब तक मत हिलना जब तक मैं इशारा न करूनl

मैंने उसे लिप किस कियाl मैं उसे लिप किस करता रहाl मैंने उसके लिप्स पर काटा, तो उसने मेरे लिप्स को काट कर जवाब दियाl तो मैंने अपने ओंठ उसके ओंठो से जोड़ कर उसे लिप किश करने लगा, और मेरे हाथ उसके बूब्स के साथ खेलने लगेl एक हाथ उसके निप्पल मसलने लगाl फिर मैंने उसकी चूची सहलानी और दबानी शुरू कर दीl वह सिसकारियाँ ले मजे लेने लगीl वो इस वक़्त इस चूमाचाटी में अपना दर्द भूल चुकीl कुछ देर में रोज़ी का दर्द कम हो गयाl
फिर उसने अपने नितम्ब ऊपर उठा कर, और मेरे नितम्बो को अपने ऊपर दबाया, और पलके झपक कर मुझे इशारा कियाl मैंने धीरे से लंड भहर खींचा और
एक बार फिर ज़ोर लगा कर अंदर घुसा दियाl

मुझे महसूस हुआ, कि मेरे लिंग को रोज़ी ने अपनी योनि रस ने भिगो दिया था, जिसकी वज़ह से लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था।

वह भी मेरा साथ देने लगीl अब उसकी चुदाई में दोनों को जन्नत का मज़ा आ रहा थाl कुछ ही देर में रोज़ी ने भी स्पीड पकड़ ली थीl वह जोश में आ गई थी, और मेरे शॉट के साथ ताल मिलाते हुए, अपने नितम्ब हिलाने लगीl

अब वह मजे से चिल्लाने लगी थी-अहा! ... राजा ... मर गई ... आईसीई ... और ज़ोर से ... और ज़ोर से चोदो ... बहुत मज़ा आ रहा है, आ जाओ, मेरे अंदर समा जाओl मेरी चूत को अपने रस से भर दो, ... आआआआ और ज़ोर से ... उउउईईईई माँ ... आहहहांl

उसकी इन आवाजों ने मुझे जैसे जान दे दी होl मैं पूरी ताकत से रोज़ी को चोदने में लग गयाl कुछ ही मिनट बाद हम दोनों चरम पर आ गए थेl मैंने उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ दियाl

मैंने उसकी फटी हुई कुंवारी चुत जिसमे से खून निकल रहा था, को अपने वीर्य से भर कर चिकनी कर दिया था, और उसके ऊपर ही गिर गयाl वह भी एकदम से झड़ कर मुझसे लिपट गई थीl

मैं झड़ने के बाद भी उसे किस करता रहाlकरीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ चुके थेl दो-तीन झटकों बाद मैंने लंड निकाल लियाl कुछ देर बाद जब हम लोग उठे, और चादर को देखा, तो उस पर खून लगा हुआ थाl वह मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गईl

चूँकि रोज़ी की ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद, जैसे मेरा सारा दम ही निकल गया हो, और मैं रोज़ी पर हांफते हुए तेज-तेज सांस लेते हुए, निढाल हो कर गिर गयाl भयंकर उत्तेजना के साथ चमकते हुए, मेरी आँखें रोज़ी को ही निहार रही थीl वह भी तेज-तेज साँसे ले रही थे, और उसके साथ ही उसके स्तन और निप्पल ऊपर नीचे हो रहे थेl जिन्हे देख कर मेरे लंड की कठोरता जो झड़ने के बाद हट गई थी, फिर से प्रबलता के साथ वापस आ गईl मैंने उसकी योनी के गहरे और संकीर्ण मार्ग में अपना जो लंड घुसा कर रास्ता बनाया था, उसे मेरे वीर्य ने चिकना कर दिया था, और मैंने फिर से उसके लिए रास्ता बनाना शुरू कर दियाl मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गयाl

तो रोज़ी मुझ से लिपट गयी और मुझे मेरे सारे बदन पर बेतहाशा चूमने लगी, और फिर उसके ओंठ मेरे ओंठो से जुड़ गएl रोज़ी मेरे ऊपर आ गई थींl मेरे खड़े लंड पर धीरे-धीरे अपनी चूत दबाकर लंड को अन्दर घुसा रही थींl मुझे उस समय मुझे बेहद मज़ा आ रहा थाl वह मेरे लंड पर धीरे से उठतीं और फिर नीचे बैठ जातीं, जिसकी वज़ह से लंड अन्दर बाहर हो रहा थाlवह ख़ुद अपनी चुदाई मेरे लंड से कर रही थीं और बहुत मज़े कर रही थींlसच कहो तो रोज़ी को मेरे लंड पर उछलते हुए मुझे बहुत सेक्सी लग रही थl मैंने अपने चूतड़ उठा कर उसका साथ दियाl जब मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर पूरा समा जाता था, तो हम दोनों की आह निकल जाती थीl फिर मेरे हाथ उसके हिलते हुए मम्मों को मसलने लग गएl

उसके बाद रोज़ी मेरे ऊपर झुक गयी और हम लिप किस करते हुए लय से चोदने में लग गए. मैं उसको चूमने लगा और चूमते-चूमते हमारे मुँह खुले गए, और मैं उसकी झीभ चूसने लग गयाl

फिर हम दोनों झड़ गए, इसी तरह बार-बार चोदते हुए, मैंने रोज़ी के साथ पूरी रात बिताई, कुंवारेपन के आकर्षण का पूरा आनंद उठाते रहेl हम दोनों ने अपने कुंवारेपन के भंग होने का जश्न, पूरी रात एक साथ पूरे मजे लेते हुए बार-बार लगातार हम चुदाई करते रहेl

कभी मैंने उसे चोदा, कभी उसने मुझेअपनी और खींच कर अलग-अलग आसान में चुदाई की, मानो अपनी कामाग्नि को शांत करना चाहते होl पर हर बार हमारी कोशिश नाकाम ही हुई और उसके बाद बहुत जल्द ही हम दोनों एक दुसरे को चूमते चाटते दुबारा शुरू हो जाते थेl थोड़ा-सा आराम करते, फिर से गले लगाते हुए, एक ख़ुशी के समुद्र में तैरते हुए एक दुसरे में खोये रहे। पता ही नहीं चला इस तरह प्यार करते-करते कब सुबह हो गयीl

सुबह जब उजाला हुआ, तो रोज़ी बिस्तर पर, मुझ से चिपक कर लेटी हुई थीl लगातार बार-बार चुदाई के कारण दोनों बुरी तरह से थक चुके थेl एक दुसरे के लिए आकर्षण और लगाव काम होने की जगह बढ़ गया थाl मुझे लग रहा था, मैं रोज़ी के बिना अब नहीं रह पाऊँगा, और चाहता था रोज़ी हमेशा मेरे पास रहे, और मैं उसे जब चाहू प्यार कर सकूl रोज़ी की आँखों में भी मुझे वही प्यार नज़र आया और मैंने रोज़ी को अपनी और खींचा तो वह मेरी बाहो में समा गयी और अपना चेहरा मेरी छाती में छिपा दियाl

उसने शुरू किया, "पिछली रात बहुत ख़ास थी। मैंने कभी भी किसी से इतना जुड़ाव महसूस नहीं किया हैl अपनी पहली चुदाई की रात से ही आपके के बारे में इतना मज़बूत लगाव महसूस किया है।" मैंने कुछ कहना शुरू किया, लेकिन रोज़ी ने उसे रोकने के लिए अपना हाथ रखाl

"यह कल रात एकदम सही था, कम से कम मेरे लिएl आपने मुझसे ऐसा प्यार किया और मुझे लगा कि हम दो बदन एक जान हैंl उसकी आँखों से आँसू बहने लगे थेl कल रात, जब तुम मेरे पास आए, तो तुमने मेरे भीतर कुछ जागृत कियाl मुझे ऐसा लगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ"l मैंने कहा 'मेरा भी यही हाल हैl अब मैं भी तुमसे दूर नहीं रहना चाहता'l ये कहते हुए रोज़ी के ओंठो पर किश किया, तो उसने भी वापिस किश कियाl

उसके छूते ही लंड महाराज फिर जोश में आने लगेl उसे धीरे से उसे उठाते हुए, लिप किश करते हुए हुए, मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दियाl उसके हाथ का स्पर्श मुझमें नए सिरे से आग लगा रहा थाl रोज़ी ने अपने हाथ में मेरा लिंग ले कर उसे सहलाया, तो मेरी आह निकल गयीl मैंने कहा अभी भी मैं और ये तुम्हे और प्यार करना चाहता हैl उसके छूने भर से मेरा लंड अपने विकराल आकार में आ गयाl

आगे क्या हुआ ये कहानी जारी रहेगी...

आपका दीपक
Reply
02-23-2021, 11:42 AM,
#4
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 04
Update 04- रोज़ी के साथ मानसिक सेक्स.

अंतरंग हमसफ़र भाग 04

अंतरंग हमसफ़र 1-3 ', मेरे दोस्त, दीपक कुमार के जीवन की पहली हमसफर रोज़ी के साथ पहले सम्भोग की कहानी हैंl कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानीl


दोस्तों मैं दीपक आपने मेरी कहानी मेरे अंतरंग जीवन की हमसफर-1-3 में पढ़ा, किस तरह मैं मैंने अपने फूफेरे भाई बॉब को रूबी के साथ अंतरंग हालात में देखा,और किस तरह मैं रोज़ी से मिला और हम दोनों ने एक साथ चुदाई करते हुए अपना कुंवारापन एक दूपसरे को समर्पित कर दिया l

अब आगे :-

रोजी बोली अब मुझ में भी और चुदाई की हिम्मत तो नहीं है मैं भी बुरी तरह से थक चुकी हूँl मेरी चूत भी एक दम से सूज गयी है और बहुत दुःख रही है, पर मन अभी नहीं भरा है और ऐसा ही हाल मेरे लंड का था। लेकिन फिर भी मैं उसे एक बार और चोदना चाहता था और जब मैंने उसे अंतिम बार एक बार मुझे चोदने के लिए सहमत कियाl बार बार लंड को चूत में अन्दर-बाहर करना, जैसे वो आम तौर पर संभोग के दौरान किया जाता है मुश्किल लग रहा था । मैंने सुझाव दिया कि हमें "अपने आप को एक संभोग के लिए सोचने की कोशिश करनी चाहिएl"

तो मैंने कहा ऐसा करते हैं, एक बार लंड अंदर घुसा लेने दोl ये अब तुम्हारी चूत से दूर नहीं रहना चाहता हैl इसके बाद मैंने अपने कठोर हो चुके लिंग को उसकी चूत के छेद पर रखा, और एक झटके पे पूरा का पूरा अंदर उतार कर योनि के अंदर गहराई से दफन कर दिया। और फिर, हम दोनों के शरीर एक दुसरे से लिपट गए और हमारी आँखें बंद थीl फिर मैंने रोजी से कहा, जो हम दोनों ने कल रात किया उसे एक बार फिर सब मानसिक तौर पर महसूस करते हुए मन ही मन दोहराओl फिर मैंने अपने दिमाग (अपनी खुद की यौन कल्पनाओं) का उपयोग करते हुए सब मानसिक तौर पर महसूस कियाl धीरे-धीरे मेरी मानसिक यौन उत्तेजना के उस बिंदु तक बढ़ गयाl जहां मैं संभोग का कारण बन गया मेरे मस्तिष्क की यही तरंगे रोजी ने भी महसूस करिl हम दोनों बिना अपने जननांग को धक्को द्वारा हिलाये सम्भोग करने लगेl

वास्तव में, जब रोजी मेरे साथ इस तरह से सम्भोग कर रही थीl मैं रोजी के साथ अपनी पहली चुदाई के पूरे घटना क्रम को मानसिक तौर पर दोहरा रहा था, और इससे अपनी मानसिक यौन उत्तेजना को इतने उच्च स्तर पर रखने में कामयाब रहाl रोजी से भी मैंने ऐसा ही करने को कहा कि रोजी को मैंने दो बार झड़ते हुए महसूस किया।

हालाँकि मुझे शुरू में अपनी यौन उत्तेजना का निर्माण करने में थोड़ा समय लगा, लेकिन यह पता चला कि मैं वास्तव में "संभोग करने के लिए खुद को" सोच सकता था। और मैं ये सब कुछ देख सोच कर बहुत हैरान थाl

(अब हर चीज पर पीछे मुड़कर, मैं वास्तव में नहीं जानता कि मैं इस तथ्य से इतना हैरान क्यों था कि मेरे पास एक संभोग करने के लिए "खुद को सोचने" की क्षमता थी, क्योंकि मुझे पता था कि सेक्स शोधकर्ताओं ने हमेशा दावा किया था ,कि सेक्स वास्तव में 90% मानसिक और केवल 10% शारीरिक है।)

और आखिरकार उस दिन मैंने उस सुबह रोजी की चूत में अपना लावा जमा कर दिया, वो भी,एक बार भी, अपने लिंग को उसकी योनि में अंदर-बाहर किये बिना। अद्भुत यह मेरे और रोजी के सबसे लम्बे चलने वाले और कामुक यौन अनुभवों में से एक है।

वैसे, इस तरह से मानसिक सेक्स का मतलब का मतलब यह नहीं है पुरुष जानबूझकर योनि के अंदर घुसे हुए (गर्भाशय ग्रीवा के खिलाफ) अपने अन्यथा-स्थिर लिंग के सिर का विस्तार और अनुबंध नहीं कर सकता, जो की आगे लगभग हर बार मानसिक सेक्स करते हुए मैंने रोजी के साथ अक्सर कियाl इसी तरह रोजी भी मेरी हरकतों को महसूस करते हुए अक्सर मानसिक सेक्स के दौरान योनि के अंदर घुसे हुए कठोर लिंग को निचोड़ने और मालिश करने के लिए अपनी योनि में मांसपेशियों का उपयोग करती हैl यहां महत्वपूर्ण यही है की मानसिक सेक्स के दौरान हम जान बूझकर पैल्विक रॉकिंग या जननांग थ्रस्टिंग नहीं करते स्वाभिक तौर पर कुछ हो जाए तो उसे रोकते भी नहीं है।

उसके बाद अपना लिंग रोजी की योनि के अंदर दाल कर ही हम दोनों गहरी नींद में खो गए उसके बाद हमारी नींद तभी खुली जब बॉब ने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी, तो हम मुश्किल से अपने आप को ठीक कर पाए। मैंने दरवाजे को तुरंत खोल दिया, और बॉब और रूबी अंदर आ गए। तो रूबी ने रोजी को बधाई दी और बॉब ने मुझे बधाई दी मैंने भी बॉब और रूबी का शुक्रिया अदा किया, के उनके कारण ही मुझे रोजी का साथ मिल पाया है, और मैं प्रेम की दिव्य कला के रहस्यों को जान पाया थाl

फिर मैंने जब तक गाँव में रहे, तब तक अपनी सारी रातें रोजी के साथ बिताईं, कभी-कभी उसके कमरे में में, फिर से मेरे अपने कमरे में कभी जब रात के इंतजार नहीं हो पाता था तो मैं उसे दिन में अपने कमरे में ले जाताl ये घर के किसी भी कोने में जहाँ हमे कोई नहीं देख रहा होता था और उसके साथ खूब आनंद लेता और रोजी भी हमेशा खुल कर मेरा साथ देती थी।

एक दिन, जब रोजी मेरे साथ मेरे कमरे में, बिस्तर पर लेटी हुई थी , उसके कपड़े ऊपर उठे हुए थे मेरा कठोर लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा थाl अचानक रूबी ने कमरे में प्रवेश किया, क्योंकि मैंने जल्दबाजी में दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया थाl

रूबी को मेरे खड़े लंड का एक अच्छा नज़ारा मिला, और वह इसे देख रहा थी, जाहिर तौर पर मेरे लंड के इसके इतने बड़े होने पर आश्चर्यचकित थी, लेकिन हम जिस हालात में थे उसे देख कर चुपचाप दरवाजा बंद कर चली गयीl

आगे क्या हुआ ये कहानी जारी रहेगी

आपका दीपक
Reply
02-24-2021, 06:15 AM,
#5
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 05
update 05

अंतरंग हमसफ़र 05 - रूबी के साथ संसर्ग, उसके बाद समूह सेक्स.


'अंतरंग हमसफ़र', मेरे दोस्त, दीपक कुमार की  अपने अंतरंग साथियो के साथ सम्भोग की कहानी हैं l कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानीl

दोस्तों मैं दीपक आपने मेरी कहानी मेरे अंतरंग जीवन की हमसफर-1-2 में पढ़ा, किस तरह मैं मैंने अपने फूफेरे भाई बॉब को रूबी के साथ अंतरंग हालात में देखा,और किस तरह मैं रोज़ी से मिला और हम दोनों ने एक साथ चुदाई करते हुए अपना कुंवारापन एक दूपसरे को समर्पित कर दिया l

अभी तक आपने , मेरे अंतरंग जीवन की हमसफ़र 1-4 में पढ़ा

" फिर मैंने जब तक गाँव में रहे तब तक अपनी सारी रातें रोजी के साथ बिताईं, कभी-कभी उसके कमरे में में, फिर से मेरे अपने कमरे में कभी जब रात के इंतजार नहीं हो पाता था तो मैं उसे दिन में अपने कमरे में ले जाता, या घर के किसी भी कोने में जहाँ हमे कोई नहीं देख रहा होता था और उसके साथ खूब आनंद लेता और रोजी भी हमेशा खुल कर मेरा साथ देती थी ।

एक दिन, जब रोजी मेरे साथ मेरे कमरे में, वह बिस्तर पर लेटी हुई थी , उसके कपड़े ऊपर उठे हुए थे मेरा कठोर लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था अचानक रूबी ने कमरे में प्रवेश किया, क्योंकि मैंने जल्दबाजी में दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया था

रूबी को मेरे खड़े लंड का एक अच्छा दृश्य मिला, और वह इसे देख रहा थी , जाहिर तौर पर मेरे लंड के इतने बड़े होने पर आश्चर्यचकित थी लेकिन हम जिस हालात में थे उसे देख कर चुपचाप दरवाजा बंद कर चली गयी "

अब आगे;

अगले दिन दोपहर में, रूबी मेरे कमरे में आयी तो मैंने उससे पुछा वह कल मेरे कमरे में किस लिए आयी थी कुछ ख़ास है क्या? उसने मुझे उसके कमरे में आने का आमंत्रण देते हुए कहा, "मेरे पास आपको दिखाने के लिए कुछ है जो आपको आपकी प्रेमिका रोजी की तुलना में बहुत अधिक खुश और संतुष्ट करेगा।" और फिर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने कमरे की तरफ आने का इशारा करते हुए अपने कमरे को और चली गयीl

मैंने रूबी का उसके कमरे तक पीछा किया, जैसे ही मैं उसमे घुसा उसने ताला लगा दिया। मैं एक खिड़की से बाहर देखने लगा और रूबी से पुछा ऐसा क्या ख़ास है जो मुझे रोजी से भी ज्यादा ख़ुशी और आननद देगा? रूबी बिस्तर के पीछे गयी , जिसके पर्दे खींचे कर थोड़ा उजाला किया। मेरी तरफ बढ़ते हुए एक हलके कदम की आहट सुन मैं पीछे को पलटा तो मैंने वहां देखा रूबी जो पूरी तरह से नग्न होकर मेरे सामने खड़ी थीl वह उछली और मेरी बाहों में में आ गयी और मेरे गले में बाहे डाल कर,, गोल-गोल घुमाती हुई, और मुझे बिस्तर पर ले गई, जिस पर वह खुद बैठ गयीl

मुझे समझ आ गया रूबी मुझे क्या दिखाना चाहती थीl मैंने पहले भी उसकी खूबसूरती को देखाl और महसूस किया थाl और जिसमें उसने मुझे आमंत्रित किया थाl अब उसके साथ सेक्स करने में मुझे कोई हर्ज नहीं दिखाई दियाl और कोई दूसरा रास्ता नहीं होने के कारण, मैंने अपना कोट और कमीज उतार कर फेंक दिया, जबकि उसने मेरी पैंट को नीचे फेंक दियाl मेरे हमेशा तैयार हथियार को उसने बाहर निकाल लिया और उसे सहलाते हुए बोली सच में आपका लंड काफी बड़ा हैl इससे चुदने में तो काफी मजा आएगा और मेरे लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी l ये लंड चुसवाने का मेरा पहला अनुभव थाl रोजी ने कभी लंड नहीं चूसा थाl

रूबी लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी और बोली इतना खूबसूरत बड़ा और मोटा लंड देखकर मैं खुद को रोक नहीं सकीl फिर बिस्तर पर गिरते हुए, उसने मुझे ऊपर खींच लिया फेंक दिया। मैंने अपने जल्द ही अपने लंड की पूरी लंबाई उसकी कुदरती और स्वाभाविक नरम और सुस्वाद म्यान में चला दी, और रेल गाडी बना कर चलाता रहा।

इस बीच मैंने उसको ओंठो को खूब चूसा और और उसके स्तनों को बुरी तरह से दबाने के बाद चूमा चाटा और चूसा । मैंने उसको कई बार काटा। इसके बाद दो बार उसने प्रेम के जलाशय की बाढ़ को खोल दिया, और उसके अंदर अपने ज्वलंत शुक्राणु की एक धारा डाल दी, क्योंकि दोनों बार जब वह मुझसे मिली, तो मैंने बहुत सी क्रीम को उसके शरीर की इतनी गहराई से छोड़ दिया कि हमारी जांघों हमारे प्रेम रस से भीग गए।

इस समय से जब तक मैं और मेरे फूफेरे भाई ने गाँव में रहे तब तक मैं प्रत्येक दिन उसी तरह से रूबी का दिन में और रोजी के साथ रात भर आनंद लेता रहा l

तो प्रीती बोली इस दौरान आपका दूसरा फूफेरे भाई टॉम क्या कर रहा था, प्लीज वह भी बताइये?

तो मैंने कहा इस तरह गाँव में मैं बिना रोकटोक के रूबी और रोजी के साथ मजे करता रहा और वहां हम लगभग दो हफ्ते रहेl दो हफ्ते बाद पिताजी को फ़ोन आया, वो अगले हफ्ते में वापिस आ रहे हैंl

उनके आने के बाद दूसरे सप्ताह के अंत में सुबह सुबह मेरे फूफा ने अगले दिन वापिस शहर के लिए प्रस्थान करने की घोषणा की, और मुझे उनके साथ जाने के लिए पूरी तैयारी करने के लिए कहा। मैंने और मेरे दोनों फूफेरे भाइयो ने फैसला किया की हम अपनी अपनी प्रेमिकाओ के साथ जंगल में एक छोटे से तालाब के किनारे बिताकर दिन का सर्वोत्तम संभव उपयोग करने का निर्धारित किया ।

वह रविवार की सुबह थी, बॉब खुद, मैं और और टॉम (हालांकि मैंने उसका हमारे प्रेम संबंधों के संबंध में उल्लेख नहीं किया है, यह नहीं माना जाना चाहिए कि वह हर समय ऐसी चीजों में लिप्त नहीं था, बल्कि इससे उल्ट, जबकि बॉब और मैं; रूबी और रोजी के साथ मजे ले रहे थे, टॉम ने खुद को मोना की बाहों में सांत्वना दी, मोना हमारी डेयरी की नौकरानियों में से एक थी, बड़ी रसीली और बहुत अच्छी दिखने वाली थी, जिसके साथ वह हररोज हमबिस्तर होता था l) हमने यह बात अपनी प्रेमिकाओ को भी बता दी थी और मिलने की जगह तय की गयीl जिसे तीनो लड़किया अच्छी तरह से जानती थी और अलग अलग हमारे साथ उस जगह पर जा चुकी थी l हम अपने साथ खाने पीने का जरूरी सामान और शराब इत्यादि अपनी कार में भर कर ले कर गए l

मैंने चुपचाप शराब में वह ख़ास देसी दवा जो रूबी में मुझे दी थी मिला दी जिससे सब लोग खुल कर मजे ले सके l

वहां पहुँच कर सुंदरियों को सलाम करने के बाद, हम दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने के लिए आगे बढ़े, और हरे रंग की चटाई पर बैठ गए ,और शराब के कुछ जाम चले जिसे सबने पियाl हमारी प्रेमिकाओ द्वारा हमे प्रदान की गई कुछ अच्छी चीजों और उनके गुणों पर चर्चा कीl सबने अपनी अपनी प्रेमिका की भरपूर तारीफ की, जिसे सुन तीनो की प्रेमिकाए मुस्कुरा रही थीl उसके बाद स्वादिष्ट भोजन करने के बाद संतुष्ट हो गएl दूसरी अच्छी चीजें जो उनके पास थी, लेकिन जो
दिखाई नहीं दे रही थीं, उसे पाने की स्कीम बनाने लगे ।

तदनुसार, शुरूआती तौर पर , हम अपने हाथों को अपनी प्रेमिकाओ की छाती में खिसकाएंगे, और थोड़ी देर के लिए उन्हें जमीन पर लेटा कर उसने प्रेमालाप और आनंद लेने का उपक्रम करेंगेl लेकिन हमारे प्रयासों के बावजूद हम तीनो उनको जांघो की एक झलक पाने से ज्यादा पेटीकोट ऊपर नहीं उठा सके थेl हमारे सभी प्रयासों के मामलों में आगे बढ़ने के लिए, यह कहते हुए, मना कर दिया वे एक दूसरे की दृष्टि में ऐसी शरारती चीजों के लिए वो सहमति नहीं देंगी , और अगर हमने बेहतर व्यवहार नहीं किया तो वे हमे छोड़ कर भाग जएंगी।

इस पर हमने उन्हें कुछ और दारु पिलाई जिससे दारु और दवा के मिले जुले असर से वो खुल कर हमारा साथ देl

मैंने तब प्रस्ताव किया और हमें स्नान करना चाहिए। "हम लड़के पहले अपनी शर्ट उतारेंगे, और फिर अपनी प्रेमिकाओ को निर्वस्त्र करेंगे, और आखिर में मेरे आदेश पर प्रत्येक अपने सारे वस्त्र उतार देगा।"

इसके लिए भी हमारी युवा प्रेमिकाए त्यार नहीं थी, क्योंकि उन्हें एक-दूसरे द्वारा देखे जाने पर कुछ शर्म थी , विशेष रूप से मोना, जिसे न तो बॉब और न ही मैंने खुद ने वर्तमान समय तक देखा थाl उन्होंने अपने आपातिया दर्ज करवाईl यहाँ तक के ये भी बोली हम अपने प्रेमी के साथ अकेले में कुछ भी करने को त्यार हैं, लेकिन सबके सामने नहीं कर सकतीl

हमने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया और लड़को ने अपनी शर्ट को उतार फेंकाl फिर प्रत्येक अपनी प्रेमिका के पास जा कर उनकी ड्रेस की हुँको को खोल, और डोरियों को खोलते हुए उनके ब्लाउज, और पेटीकोट उतार दिए, लेकिन उनके शॉर्ट्स उन पर छोड़ दिए गए थे। मैंने आदेश शब्द दिया, उतारो ।" हमने अपनी पेण्ट भी उतार फेंकी और बिलकुल नंगे हो गए, लेकिन हमारी लड़कियों को देखकर पाया कि वे अभी भी अपनी शॉर्ट्स में खड़ी हैं।

हमे समझ आ गया अभी भी शर्म इन पे हावी है और जैसा हम चाहते थे की वे बारी बारी अपने कपडे उतारे वह नहीं होने वाला पर हम भी आज इन परियों को छोड़ देने के मूड में बिलकुल नहीं थे। मैंने प्रस्ताव दिया अगर वे अपने कपडे उतार कर फेंक दें और नग्न खड़ी हों जाए, और फिर पुरुषों द्वारा उनके शरीर की जांच की जायेगी और उनकी सुंदरता की तुलना की जायेगी और जो ये सबसे पहले कपडे उतारेगी, उसे एक सुंदर हीरे की अंगूठी दी जायेगी, दुसरे नंबर वाली को सोने की अंगूठी और तीसरी को एक चांदी की अंगूठी दी जायेगी।

और इसके बाद कि चूँकि लड़कियों को अपने प्रेमी के साथ एकांत में नग्न होने से कोई इंकार नहीं है, तो इसके बाद सभी प्रेमी अपनी प्रेमिका को एक कोने में कोई एकांत ढूंढ कर वहां उन्हें प्यार करे और बॉब और टॉम को एक आँख मार दीl

इसके बाद रूबी बोली "कि यहाँ पर हम अपने प्रेमियों से मिलने और अपने प्रेमियों के साथ प्रेम का आनंद लेने के लिए आयी हैं, उन्होंने शर्म को त्याग अपने सभी कपड़ो को उत्तर फेंका हैl वो इस खेल को खराब नहीं करेगी, क्योंकि उसे कोई शर्म नहीं थी कि क्योंकि उसे पूरा विश्वास है की वह खूबसूरत हुस्न की मल्लिका है, जो वह सब को दिखा सकती हैl उसे यकीन है कि वह एक खूबसूरत टांगो, छोटे छेद वाली योनि और सुन्दर सुडोल स्तनों की मालकिन है जो दुनिया की किसी लड़की से कम नहीं हैl"

इसके बाद रूबी ने अपने सभी कपडे उत्तर फेंकेl मैंने पलके झपक कर रोजी को इशारा किया तो उसने भी अपने बाकी कपडे निकाल दिएl ये देख के दोनों लड़कियों ने शर्म छोड़ दी है .मोना ने भी धीरे से अपने कपडे उतार फेंके, तो तीनो लड़को ने लड़कियों के लिए तालिया बजाईl फिर मैंने तीनो लड़कियों को एक एक हीरे की अंगूठी देते हुए कहा ये लो आपका इनाम l आप तीनो की कोई तुलना नहीं है तीनो एक से बढ़ कर एक हो कोई किसी से कम नहीं होl

चूँकि मैं रूबी और रोजी को पहले नंगी देख और भोग चूका था, मुझे मोना जो की टॉम की प्रेमिका थी आकर्षित कर रही थीl उसकी अपार बड़ी-बड़ी चूचिया उसके असाधारण बड़े कूल्हों और जाँघों के साथ, और सबसे सुन्दर उसकी योनि थी और जिसमें से दो बड़े लाल थपथपाते होंठ झाँकते थे, जो सबसे लुभावने लगते थेl मैंने प्रस्तावित किया था कि हम अपने पहले स्नान के बाद अपनी प्रेमिका को भोगेl फिर अपनी प्रेमिका को बदल दें, ताकि हर एक को दूसरे की प्रेमिका का आनंद लेना चाहिए।

इस पर रोजी बोली उसे इस प्रेमिका बदलने के प्रस्ताव से ऐतराज है, वो केवल मुझ से ही संसर्ग करेगी और उसने प्रतिज्ञा की है वो किसी अन्य मर्द के साथ नहीं जायेगी lतो मैंने कहा फिर गड़बड़ हो जायेगी, तो रोजी बोली उसके पास इसका उपाय है और रोजी एक तरफ गयी और वापिस आयी तो रोजी के साथ एक नयी लड़की आयी थी, जो किसी भी मामले में कम खूबसूरत और आकर्षक नहीं थीl उसे मुझ से मिलवाया और बताया वो उसकी सहेली थी टीना और मुझ से मिलना चाहती थीl मैंने उसका स्वागत किया और बाकी सबने भी उसका स्वागत किया, और हमारे साथ पिकनिक मनाने के लिए आमंत्रित किया, जिसे वह सहर्ष मान गयी और हमने उससे वादा लिया, की यहाँ जो भी होगा वह उसका चर्चा किसी से नहीं करेगी और राज रखेगीl

फिर रोजी मुझ से कान में बोली, टीना भी कुंवारी हैl अब आप फैसला कर लो पहले उसे कौन चोदेगाl मैं बोलै इसके दो तरीके हैं या तो ये फैसला टीना करे उसे किस्से चुदना है, अगर उसकी कोई ख़ास पसंद नहीं है तो हम लाटरी डाल कर फैसला कर ले l तो मैंने टीना से पुछा गया वह सबसे पहले किस्से चुदना पसंद करेगी l

तो टीना सर झुका कर खड़ी रही और फिर कुछ देर बाद रोजी की तरफ देखने लगीl

आगे क्या हुआ ये कहानी जारी रहेगी

आपका दीपक
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02-25-2021, 06:56 PM,
#6
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र
Update 06

अंतरंग हमसफ़र भाग 06

आपने अंतरंग हमसफ़र भाग 05 में पढ़ा;


"फिर रोजी मुझ से कान में बोली टीना भी कुंवारी है, अब आप फैसला कर लो पहले उसे कौन चोदेगा? मैं बोला इसके दो तरीके हैं या तो ये फैसला टीना करे उसे किस्से चुदना हैl अगर उसकी कोई ख़ास पसंद नहीं है और वह इस खेल का पूरा मजा लेना चाहती है या हम लाटरी डाल कर फैसला कर ले l

मैंने टीना से पुछा  वह सबसे पहले किस्से चुदना पसंद करेगी? तो टीना सर झुका कर खड़ी रही और फिर कुछ देर बाद रोजी की तरफ देखने लगी l

दोस्तों में दीपक आपने मेरी कहानिया मेरे अंतरंग जीवन की हमसफ़र किस तरह मैं रोज़ी और रूबी से मिला और कैसे मेरी और रोजी की पहली चुदाई हुई और उसके बाद कैसे मैंने रूबी को चोदाl हमारे गाँव के प्रवास के आखिरी दिन जंगल में हमने ग्रुप सेक्स और प्रेमिकाओ की अदला बदली का कार्यक्रम बनाया और रोजी ने प्रेमी बदलने से इंकार कर दिया और हमे टीना से मिलवायाl

अब आगे;

रोजी मुस्कराते हुए बोली वैसे टीना तो यहाँ दीपक से ही चुदने आयी है, फिर भी हम सब जो फैसला करेंगे उसे मंजूर होगाl"

तो रूबी बोली ठीक है फिर जैसा टीना चाहती है उसका सबसे पहला मिलन कुमार दीपक के ही साथ होगा l जिस पर सबने सहमति जताई और इसके बाद टीना भी इस अदला बदली के कार्यक्रम में शामिल होगी, तो टीना ने इसपर अपनी सहमति दी l

रूबी बोली चुकी पहली चुदाई हमेशा ख़ास होती है. उसे यादगार बनाने का प्रयास करना चाहिए l आप हमे कुछ समय दे तो हम टीना को त्यार कर देते हैं. और कुछ जरूरी तयारी करके इस मौके को ख़ास बनाने का प्रबंध करते हैंl

तो रूबी. टीना. और रोजी के साथ चली गयी और हम तीनो मोना को पकड़ कर तालाब में चले गए.और उसके साथ खेलने लगेl कोई पानी में उसके स्तनों को धो रहा था, तो कोई उसकी पीठ, और कोई उसकी केले के तने जैसी चिकनी टाँगे धो रहा था l कुछ देर बाद मैं अपने हाथ उसके सारे बदन पर चला रहा था l उसका एक हाथ मेरे खड़े लंड से खेल रहे थे और उसका दूसरा हाथ बॉब की लंड से खेल रहा था l बॉब के हाथ उसकी गांड और चुत पर चल रहे थेl वही टॉम उसके स्तनों से खेल रहा था और दोनों एक दुसरे को बेतहाशा किश कर रहे थेl

कुछ ही देर में रूबी आ गयी, और बोली कुमार दीपक आ जाइये, टीना आपका इंतजार कर रही हैl मैं तालाब से बाहर निकल कर एक साइड में देखाl हरे घास के मैदान में फूलो की एक सेज बना कर उस पर, टीना बड़ा सा घूंघट कर के बैठी हुई थी l सब तालाब से बाहर निकल कर उस तरफ देखने लगेl ये पहला मौका था जब मुझे सब के सामने एक सुन्दर कन्या का कौमार्य भंग करना था l टीना ने दुल्हन के कपडे पहने हुए थे और उसका फूलों से श्रृंगार किया गया था l एक तरफ रोजी बैठी हुई थी l मैंने रोजी की तरफ देखा तो वो मुस्कुराने लगी l

टीना को सिवा इस समय सब नंगे थे ,तो मैंने निश्चय किया टीना को भी हम नंगो के गैंग में जल्द शामिल कर लेना चाहिए l फिर मैं पहले रोजी के पास गया और उसे लिप किश करने लगाl वहीँ रूबी जाकर बॉब के पास बैठ गयी और टॉम और मोना भी जोड़े बना कर बैठ गए l सब अपनी अपनी साथी के साथ थे, तभी रोजी ने लिप किश तोड़ते हुए कहा कुमार टीना मेरी सबसे अच्छी दोस्त है, वो आपका इंतज़ार कर रही हैl आप उसके पास जाइये l

मेरा हाथ पकड़ कर टीना के पास ले गयी, और टीना का हाथ मेरे हाथ में दे कर बोली मजे कीजिये, और एक तरफ हो कर जाने लगीl मैंने उसे कहा थैंक यू रोजी इस खूबसूरत तोहफे के लिए l वह मुस्कुरा कर देखने लगी l तो मैंने अपनी एक अंगूठी उतार कर टीना को देते हुए बोला" टीना हमारे प्यार के पहले नज़राने को कबूल करोl" उसने अपनी ऊँगली आगे कर दी. तो मैंने उसे पहने कर हाथ पकड़ कर खड़ा कर दिया l मैंने देखा उसने साड़ी पहनी हुई थी और उसका फूलो से श्रृंगार किया गया था l

तो रूबी की आवाज़ आयी, हम पहले से तयारी कर कर के आयी थीl मैंने धीरे से उसका घूंघट उठा दियाl टीना का भी रंग गोरा और सुन्दर नैन नक्श थे. और काले लम्बे बाल. बड़ी बड़ी आँखे. गोल चेहरा. कमसिन बदन. और प्यारी सूरत थी l मैंने उससे पुछा क्या मैं आपको किश कर सकता हूँ और उसे गालो पे एक हलकी से किश कर दी l ये उसकी पहली किश थीl

फिर उसके माथे पर किस करि l फिर आँखों पर फिर नाक को चूमा और फिर ओंठो पर एक हलकी सी मीठी सी किश करि, और चेहरा दूर कर उसको देखा. उसने शर्मा कर अपना चेहरा और आँखे झुका ली. पर मुझे उसकी इस अदा में उसकी सहमति दिखी. और मैंने उसके ओंठो पर एक लम्बी गहरी किश कर दीl

मेरे जीभ उसके ओंठ खोलते हुए उसके मुँह में चली गयी और उसके दांतो तो घिस कर चमकाने के बाद, उसकी जीभ से लड़ने लग गयी l फिर टीना ने मेरी किस का जवाब अपनी किश से दिया और वह मेरी जीब चूसने लगी l उधर मेरे हाथ उसकी पीठ पर पहुचं कर उसकी गांड तक पहुंचे और उसके सुडोल स्तनों को दबाने लगेl वहीँ टीना के हाथ भी मेरी पीठ पर जाकर मुझे उसकी छाती की और दबाने लगे l

फिर मैंने उसे अपने गले से लगा कर कुछ देर उसकी पीठ को सहलाया और फिर मेरे हाथ उसको स्तनों पर चले गए और उन्हें दबाने लगेl उसके बूब्स सुडोल और बड़े बड़े थे और उसके निप्पल भी उत्तेजित हो चुके थेl मुझे महसूस हुआ उसने टॉप नहीं पहना हुआ था l और टीना भी उत्तेजित थी तो मैंने उसके कपडे उतारने शुरू किये l

मैंने उसका पल्लू हटाया तो मेरा अंदेशा पक्का हो गया की उसने सिर्फ साडी ही लपेटी हुई थी और उसकी पीठ नंगी हो गयीl मैंने उसकी पीठ पर हाथ फिरायाl

वाह! क्या चिकनी कमर थी मेरा हाथ फिसल कर सीधा उसकी गांड तक पहुँच गयाl मैंने साडी का पल्लू खींचा तो गोल स्तन मेरे आगे सीना तान कर मुझे ललचाने लगे l मैं उसके स्तन पकड़ कर उनकी दृढ़ता को महसूस किया और उनके दवाया l उसके निप्पल उत्तेजना में खड़े हो चुके थे l फिर मैंने उसके स्तनों को चूमा सहलाया दबाया और एक निप्पल को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा, फिर उसके दुसरे निप्पल को चूसा l फिर ऐसे ही एक एक कर दोनों निप्पलों को चूसता रहाl

उत्तेजना के वजह से उसके स्तन और कड़े हो गएl मैंने उसे छाती के साथ चिपका लिया तो उसके गोल सुडोल स्तन और निप्पल मेरे छाती में गड गएl बता नहीं सकता मुझे क्या मजा आया l फिर मैंने उसको सीने से लगा कर रखते हुए उसके ओंठो को दुबारा चूमना शुरू कर दिया l फिर एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी साड़ी की गाँठ खोल कर साडी को उतार फेंकाl वह बिलकुल नंगी हो गयीl बस कुछ फूल जिनसे उसका श्रृंगार किया गया था वही उसके बदन पर थे l मेरे द्वारा उसको नंगा करते ही रोजी बोली टीना हम नंगो के गैंग में तुम्हारा स्वागत है l

मैंने देखा टीना की चुत भी सफाचट थीl उसपे एक भी बाल नहीं थाl मैंने उस पर हाथ फिराया तो टीना धीरे से बोली आज ही रोजी ने साफ करि है ख़ास आपके लिए क्योंकि आपको यहाँ बाल पसंद नहीं हैं l

फिर मैंने एक बार उसके सारे बदन को चूमा, और तभी रूबी बोली चलो अब चुकी सब नंगे हो चुके हैं, तो तालाब में स्नान कर लिया जाएl

मैंने अब तालाब का रास्ता पकड़ा एक हाथ में टीना का हाथ और दुसरे में रोजी का हाथ पकड़, दूसरों का अनुसरण करते हुए हम सब के सब उस छोटे से तालाब में उतर गए। हम सब पानी में हर तरह की तरकीबें कर रहे थे, कभी लड़कियों पर पानी के छींटे डाल कर और कभी तो उनका सिर और कानों को दबाकर, और उन्हें हर संभव तरीके से उकसाया जाता था, और उन्हें धोने के बहाने हमने अपने हाथों को हर आज़ादी दी। हर हिस्से को सहला स्तनों को निचोड़ और उनकी चूचियों , उनकी मुलायम बेलो जैसी टाँगे , उनकी जाँघों, उनके चूतड़ों और दूसरे सभी हिस्सों को रगड़ते हुए उनके साथ खेल रहे थे और लड़किया भी यथा संभव अपने साथियो का साथ दे रही थी l

जहाँ रोजी सिर्फ मेरे साथ थीl वही बाकी तीनो लड़कियों टीना, रूबी और मोना के साथ तीनो लड़के बारी बारी मजे ले रहे थेl l रोजी को तीनो लड़किया भी छेड रही थी, तो वह भी मुस्कुरा कर उनके अंगो पर पानी के छींटे मार देती थी l सच में बहुत मजा आ रहा था l

जैसा कि हम कमर तक की गहराई के पानी में खड़े थेl हमारे इंजन खड़े थे, और अच्छी कामकाजी स्थिति में थेl टीना और रोज़ की कमर के चारों ओर मेरे हाथ के साथ, मैंने अपने इंजन के नोजल को टीना के पानी से भरे भट्टी के मुंह में डालने की कोशिश कीl उस आग को बाहर निकालने के उद्देश्य से जो इसके भीतर भड़की हुई थी, लेकिन मेरी कोशिश सफल नहीं हो सकी, क्योंकि हम पानी में एक दूसरे का समर्थन करने में असमर्थ थे।

तभी मेरा ध्यान पानी की छपाक की आवाजों की तरफ गया, तो मैंने चारो तरफ घूम कर देखा की टॉम और बॉब अपनी प्रेमिकाओ को तालाब के किनारो पर ले गए थे l रूबी और मोना के सर जहाँ किनारे पर आराम कर रहे थे, उनका बदन तालाब में ऐसे था की रूबी और मोना का पेट और पीठ तैर रही थी और पानी की तरंगे उनके ऊपर से बह रही थीl टॉम और बॉब ने उनकी कमर पकड़ रखी थी और उनकी खुली हुई टांगो में घुसे हुए थे और फिर उनकी कमरे हिलने लगी थीl

मैंने यही तरकीब टीना के साथ आजमाने की कोशिश करि. तो रोजी ने आ कर मुझे सहारा दिया और मेरा लंड उसकी योनि पर लगायाl चुकी ये टीना की कुंवारी योनि के लिए पहली बार था, तो मेरा ये प्रयास भी विफल रहा l

रोजी बोली टीना अपनी योनि को ढीला छोड़ो ताकि कुमार का लंड इसमें प्रवेश कर सकेl टीना ने कोशिश करि. मैंने भी जोर लगाया पर कोई ख़ास सफलता नहीं मिली, तो टीना बोली कुमार आप एक बार रोजी के साथ अभ्यास कर लो, फिर हम कर पाएंगे l


उसका ये सुझाव मुझे और रोजी को जच गया और बाकी सब ने भी इसका समर्थन किया l तो मैंने रोजी का भी इस तरह से तालाब के किनारे पर सर टिकायाl उसे पानी में लिटाया, उसकी टांगो को पकडे लंड उसकी योनि के द्वार पर फसाया, और धक्का दे दिया ,और लंड उसकी चुत की जड़ में पैबस्त कर दियाl फिर कुछ देर तक हम दोनों की कमर और चूतड़ों ने हरकत जारी रखीl फिर रोजी हिली और उसने मेरे गले में अपनी बाहे डाल दी, और अपने ओंठ मेरे ओंठो से जोड़ दिए, और वह मेरी गोद में थी मेरा लोढ़ा उसकी चुत में था और वह उछलने लगी l

चुकी हम पानी में थे, तो शरीर पर कोई ज्यादा बजन नहीं थाl हमने पानी में चारो तरफ घुमते हुए चुदाई जारी रखी और फिर मैं उसे दूबरा किनारे पर ले गयाl उसे किनारे के साथ टिकाया और कुछ तेज झटके दे कर उसे गर्भाशय पर अपने वीर्य के धार मार दीl रोजी ने भी अपने जलाशय से अपना प्रेम अमृत छोड़ दिया l

जब हम दोनों एक दुसरे से फारिग हुए तो हमने देखा, बाकी सब तालाब से बाहर आ चुके थे और किनारे पर टॉम और बॉब , मोना और रूबी के चिपके हुए थे और उनके कमर नॉन स्टॉप इंजन की तरह चल रही थीl

उधर ये नज़ारे देख कर उत्तेजना के तूफ़ान ने डूबी हुई टीना मेरे पास आयी और मुझे तालाब में अपनी और खींच कर ले गयीl यह हमारे सामने एक उदाहरण था, जिसे रोजी और मैं विरोध नहीं कर सकते थेl

पानी से बाहर निकलकर हम किनारे एक पेड़ के छाँव ने नीचे तीनो घास पर बैठ गए, रोजी मेरे कान में फुसफुसाई, आप टीना की योनि में प्रवेश यही किनारे पर कर लो, फिर आगे का काम तालाब में कर लेना l मुझे उसका सुझाव पसंद आया मैंने वहाँ टीना को मेरी जांघों पर बिठाया, उसके पैर मेरी पीठ के चारों ओर लिपट गए। उसके नरम, सुंदर सफेद पेट मेरे पेट के खिलाफ रगड़, मैंने उसके गुलाबी निप्पल वाली गोल सुडोल चूचियों को एक हाथ से मजबूती से दबोच लिया, जबकि दूसरे के साथ मैं प्रकृति की अपनी उत्कृष्ट कृति के अंदर अपने छड़ के लिए जगह बनाने के लिए प्रेम के बंदरगाह के प्रवेश द्वार को बनाने की कोशिश कर रहा थाl

मैंने उसकी जाँघों के बीच में लंड को घिसा, और योनि के छेद को महसूस किया, और उसके पेट के खिलाफ जोर से दबाया, और नरम, और सुस्वाद म्यान , जिसकी बेशुमार आपूर्ति प्रकृति ने एक इतनी खूबसूरत महिला को की थी, के भीतर प्रवेश, और आश्रय की मांग करि जिसका रोजी और टीना सबसे प्यारा नमूना थेl

टीना ने भी विनोद करते मजे लेने के लिए मेरे योनि में प्रवेश प्राप्त करने के मेरे प्रयासों को रोकने के लिए बचने का प्रयास किया l उसका ये प्रयास हमारे आनद को लम्बा करने का ही एक उपक्रम था l उसने अपने कमसिन नाजुक बदन को इस तरह की पैंतरेबाजी की, जिससे हम दोनों के अंदर जल रही कामाग्नि, और भड़क जाए, और इसने मेरी उत्तेजना को और बढ़ा दियाl

मैं उसके बदन पर गरमा गर्म चुम्बन किये, जिसका उसने भी उतनी ही गर्मी और उत्तेजना के साथ मुझे चुम कर जवाब दिया l उसकी आँखों भी काम उत्तेजना की आग में लाल हो रही थीl लम्बे काले रेशमी पलकों जो आधी खुली हुई थीl ऐसा लग रहा उसकी आग मुझे पिघला रही थी । हम दोनों घास पर लुढ़क गए , एक दूसरे की बाहों में समाये हुए मैं नीचे था और वह मेरे ऊपर थीl मैंने दुबारा लंड को उसकी योनि के द्वार पर सेट किया l एक धक्का ऊपर को दिया उधर रोजी ने टीना के अपने हाथो से दबाब दिया l

टीना जोर से चिल्लाई है मैं मर गयी मेरी फट गयी और मेरा पूरा लंड उसकी झिल्ली फाड़ता हुआ एक ही झटके में जड़ में जाकर उसके गर्भाशय से टकराया l

उसकी आँखे आंसुओ से भर गयी और वह रोती हुई बोली आराम से नहीं कर सकते थे मुझे बहुत दर्द हुआl मैंने कहा जब आराम से कर रहा था, तो तुम भी सहयोग नहीं कर रही थी, और नाटक करके मजे ले रही थीl तो मुझे लगा थोड़ा ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा तो लगा दिया l हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे और उसे चूमता हुए उसके स्तन दबाता रहा l कुछ देर बाद उसका दर्द कम हो गया, तो उसने चूतड़ उठा कर एक बार नीचे को दबाये, तो मैं समझ गया, अब चुदाई जारी रखने का समय आ गया हैl

फिर मैं लंड अंदर डाले हुआ धीरे धीरे सरकता हुआ, उसे तालाब के अंदर ले गयाl वो मेरे प्यार के औजार को अपने अंदर महसूस कर रही थी l मैंने तालाब के अंदर उसे खड़ा किया, फिर कुछ देर तक हम दोनों की कमर और चूतड़ों ने हरकत जारी रखी, और फिर जैसे रोजी ने किया था, वैसे ही टीना उछलीl उसने मेरे गले में अपनी बाहे डाल दी और अपने ओंठ मेरे ओंठो से जोड़ दिएl वह मेरी गोद में थी मेरा लोढ़ा, उसकी चुत में था और मैं घूमा मेरी पीठ तालाब के किनारे से लग गयी थी l टीना लंड पर उछलने लगी. मेरे हाथो ने उसके चूतड़ों को संभालाl l मैं फिर घूमा उसे तालाब की दिवार से लगाया और स्पीड से धक्के लगाए हमारी स्पीड बढ़ती जा रही हैl हम और उग्र हुए और दोने एक साथ चरम पर पहुंचे और झड़ गएl

अपनी आँखें बंद करके और एक सांस ले कर हमने कंपकंपी के साथ अपने अंगों को तालाब से बाहर निकाला; और घास पर लेट कर आराम करने लगेl मैंने उसे चूमा तो वह बोली तुमने मुझे सबसे बड़े आनंद का अनुभव दिया है जो महिला प्राप्त करने या देने में सक्षम है।

आगे क्या हुआ ...



ये कहानी जारी रहेगी

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02-27-2021, 09:22 PM,
#7
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 07
Update 07

Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र भाग 07

अंतरंग हमसफ़र मेरे दोस्त, दीपक कुमार के जीवन की पहली हमसफर रोज़ी के साथ पहले सम्भोग की कहानी हैंl कहानी में उसके सुन्दर सेक्स जीवन का एक विवरण पेश करने की कोशिश की गयी हैंl पढ़िए, उसकी कहानी उसी की जुबानी।


मैं दीपक कुमार, अभी तक आपने, मेरी कहानी अंतरंग हमसफ़र में पढ़ा:;

" फिर मैं लंड अंदर डाले हुआ धीरे धीरे सरकता हुआ टीना को तालाब के अंदर ले गयाl वो मेरे प्यार के औजार को अपने अंदर महसूस कर रही थीl मैंने तालाब के अंदर उसे खड़ा किया, फिर कुछ देर तक हम दोनों की कमर और चूतड़ों ने हरकत जारी रखीl फिर जैसे रोजी ने किया था, वैसे ही टीना उछली, और उसने मेरे गले में अपनी बाहे डाल दी, और अपने ओंठ मेरे ओंठो से जोड़ दिएl वह पानी मे मेरी गोद में थीl मेरा लोडा उसकी चुत में थाl मैं घूमा मेरी पीठ तालाब के किनारे से लग गयी थीl मेरे हाथो ने उसके चूतड़ों को संभाला और टीना मेरे लंड पर उछलने लगीl मैं फिर घूमा उसे तालाब की दिवार से लगाया और स्पीड से धक्के लगाए lहमारी स्पीड बढ़ती गयी, और हम और उग्र हुए, और एक साथ चरम पर पहुंचे, और झड़ गएl

अपनी आँखें बंद करके और एक सांस ले कर हमने कंपकंपी के साथ अपने अंगों को तालाब से बाहर निकाला; और घास पर लेट कर आराम करने लगेl मैंने उसे चूमा तो वह बोली तुमने मुझे सबसे बड़े आनंद का अनुभव दिया है जो महिला प्राप्त करने या देने में सक्षम है।"

/पने मेरी कहानिया झट शादी पट सुहागरात-1-4 में पढ़ा कैसे मेरी सहयोगी प्रीती एक दिन मेरे रूम में आ गयी शादी का जोड़ा लेकरl उसने अपने दिल की बात मुझसे कही और दुल्हन बन कर सुहागरात मनाने को तैयार हो l उसके बाद मेरी और मेरे घर की देखभाल करने वाली रोजी और रूबी मिली, और मेरी पहली चुदाई के बारे में पूछने लगीl मैंने उसे बताया किस तरह मैं रोज़ी और रूबी से मिलाl कैसे मेरी और रोजी की पहली चुदाई हुईl उसके बाद कैसे मैंने रूबी को चोदा l फिर हमारे गाँव के प्रवास के आखिरी दिन जंगल में हमने ग्रुप सेक्स और प्रेमिकाओ की अदला बदली का कार्यक्रम बनायाl वहां रोजी ने हमे अपनी सहेली टीना से मिलवाया टीना की पहली चुदाई हुईl

अब आगे पढ़िए ;

बेशक टीना की चुदाई करके मुझे बहुत मजा आयाl और टीना भी अपने पहले सेक्स अनुभव से बहुत खुश थी l उसे दर्द हो रहा था पर ये दर्द उसने पूरी हिम्मत के साथ सहा थाl मेरे लंड पर उसके कुंवारे पण का सबूत उसका लहू, उसके जलाशयों का रस और मेरी क्रीम लगी हुई थी l और उसकी योनि से भी तीनो का मिश्रण बह कर उसकी जांघो पर फ़ैल रहा था ,तो टीना ने वही रखा एक रुमाल उठा कर मेरा लंड और अपनी चूत को साफ़ कर दिया l तो टीना ने रोजी से वह रुमाल सभाल कर रखने को कहा और हम दोनों एक दुसरे के आलिंगन बद्ध हो गएl हम दोनों से सांस बहुत तेज चल रहे थे, जैसे कई मील लम्बी दौड़ लगा कर आये हो और जब हमारे सांस सम्मान्य हो गएl तो मैं टीना को नीचे लिटा कर, उसके ऊपर आकर उसे लिप किश करने लगा, और टीना के साथ दुसरे राउंड की तयारी करने लगा l

अभी हम अपनी तपन से ठीक से उबर भी नहीं पाए थे और जैसे ही मैं उसके ऊपर आ कर उसे लिप किश करने लगा, तो कुछ ही देर में मेरे फुफेरे भाइयो ने आकर मेरी नंगी पीठ पर थप्पड़ मारते हुए मुझे मुबारकबाद दीl फिर रोजी ने टीना को मुबारक बाद दीl बाकी लड़कियों ने भी टीना और मुझे मुबारकबाद दी तो हम दोनों अलग हो गए।

तो बॉब बोला दीपक भाई क्या नयी लड़की मिलने के बाद तुमने साथियो की अदला बदली का इरादा बदल लिया है? अगर हां तो कोई बात नहीं, हम दोनों भाई टॉम और बॉब ही अपने साथी बदल लेते हैं l तो मैंने तुरंत भागीदारों का परिवर्तन प्रस्तावित किया।

इसके लिए मेरे फूफेरे भाइयों ने तुरंत अपनी सहमति व्यक्त कीl इसके साथ लड़कियों को भी बहुत खुशी हुई क्योंकि रूबी मेरे साथ एक बार अपनी रसदार सिलवटों और उसकी योनी के अवकाश के भीतर मेरे लंड को दफनाने के लिए बहुत उत्सुक थीl मोना भी बहुत इच्छुक थी, क्योंकि जब मैं उसकी जांच कर रहा था, तो उसने मुझसे फुसफुसाते हुए कहा था कि यद्यपि दिखने में उसकी योनि बड़ी थी, लेकिन उसकी योनि छोटे छेद वाली थीl टॉम का लंड बहुत छोटा था और उसकी चुदाई के कारण मोना की योनि का छेद खींच कर बड़ा नहीं हुआ थाl वही मेरा लिंग टॉम से लगभग दोगुना बड़ा था, और उसे यकीन था कि अगर मैं उसे आजमाने के लिए तैयार हो जाऊं, तो मैं उसे रोजी की तुलना में बहुत बेहतर पाऊँगा।

पानी से बाहर आने के तुरंत बाद हमने साथी बदल लिए, बॉब टीना के साथ टॉम और रूबी, मेरी और मोना की जोडिया बनीl वही रोजी इस अदला बदली से अलग रही और मेरे पास आ कर खड़ी हो गयीl मोना की अपार बड़ी-बड़ी गोल सुडोल गोरी गोरी चूचिया उन पर गुलाबी निप्पल, उसके असाधारण बड़े कूल्हे और चिकनी जाँघें, सब से ऊपर उसकी खूबसूरत आठ इंच लम्बी योनी थीl उसकी योनि के बड़े-बड़े लाल थरथराते होंठ, जो सबसे लुभावना लग रहे थेl मैं उसके खूबसूरत पैरों के बीच लेट गयाl मेरे गाल उसकी चिकनी जांघो पर लग रहे थे और मेरे ओंठ उसकी योनि के फटे होंठों की खुशबू ले रहे थेl उसने तालाब से बाहर निकलने से पहले अपनी चूत को तालाब के पानी में साफ़ कर लिया थाl जिससे उसकी चूत बिलकुल ताज़ी लग रही थी। जिसके अंदर उसका स्वादिष्ट और शानदार प्रवेश द्वार था। मैंने उसकी चूत के आसपास के क्षेत्र को चाटना और चूमना शुरू किया, पर उसे सताते हुए उसकी चूत को छुआ भी नहींl

मैं कुछ देर उसकी जाँघों और चूत के आस-पास के क्षेत्र को छेड़ता रहा। प्लीज मुझे ऐसे मत तड़पाओ वह मिन्नत करने लगी और मेरी छेड़खानी के कारण ही उसका शरीर कांपने लगाl बोली आह क्या कर रहे हो प्लीज मुझे कुछ कुछ हो रहा हैl प्लीज! कुछ करो मेरे बदन में आग लग रही हैl एक मिनट के लिए उसकी फुहार करने के बाद, मैंने उसकी चूत को किश कियाl, तो उसने टाँगे खोल कर मुझे अंदर तक किश करने का जैसे न्योता और रास्ता दिया.पर मैंने सोचा इसे अभी और तड़पाना. ताकि सिर्फ मेरे छूने की कल्पना मात्र से मोना इतनी उत्तेजित हो जाए, चाहिए फिर देखते हैं कैसा मजा आता है l

मैंने फिर घुटनो से शुरू करते हुए उसकी एक जांघ के अंदरूनी हिस्से पर किश करना शुरू करते हुए, धीरे धीरे चूत की तरफ बढ़ना शुरू कियाl तो मोना में अपने घुटना मोड और शरीर को नीचे किया, ताकि मैं उसकी चूत को भी किश कर लूl मैंने भी पैंतरा बदलते हुए उसकी दूसरी जांघ पर किश करते फिर ऊपर बढ़ने लगा, तो उसे फिर कूल्हे और घुटने हिला कर मेरा चुम्बन चूत पर लेने की कोशिश की ,तो मैंने भी चूत पर ना कर ऊपर किश कर दियाl वह बोली अच्छा! तो फिर अपनी मर्जी से ही करोगे, तो ऐसा ही सही, और मोना ने हार मानते हुए अपना बदन ढीला छोड़ दियाl

मैं फिर धीरे-धीरे उसकी टाँगे चूमते हुए उसकी चूत की तरफ बढ़ा, और जीभ निकाल कर चाटने लगाl जब बिलकुल चूत के ओंठो के पास पहुँच गया तो मोना को लगा, अब मैं उसकी चूत को चूमूंगा, पर मैंने उसे तड़पाने का उपक्रम जारी रखाl उसकी चूत को हलकी सी एक किस किया ,तो वह आगे क्या होगा ये सोच कर कांपने लगी मैं अपनी जीभ से चूत को छूते हुए ऊपर की और बढ़ गया और उसके चूत के ऊपर पेट के पास वाले हिस्से को किश किया और उसकी नाभि की और बढ़ गया l

मैंने उसकी नाभि को किस किया और फिर उसे ये बताने के लिए की मैं उसकी चूत को कैसे चूमने चाटने और चूसने वाला हूँl इसका एक नमूना दिखाने के लिए उसकी नाभि को पहले सब जगह चूमाl फिर जीभ निकाल कर नाभि के अंदर चाटा और फिर जीभ को नाभि के अंदर चारो और घुमाया l मेरी इन हरकतों से मोना की हालात बुरी हो गयी l बोली प्लीज जो करना है, जल्दी करो मेरी चूत के अंदर आग लग रही है l पर मैंने उसकी नाभि को चूसाl फिर उसके स्तनों की और बढ़ गया, तो मोना घुटनो के बल हो गयीl

मोना ने मेरे लंड को टटोलते हुए लंड को पहले पकड़ा, फिर सहलाने लगीl उसके हाथ लगाते ही लंड खूंखार होने लगाl उसने लंड को पकड़ कर चूत में छेद पर घिसा, तो मेरा भी मन किया अभी पूरा का पूरा उसके अन्दर घुसा दूँ पर मैंने खुद को रोका की अभी कुछ मजे और ले लूl,

मैंने सब जगह चूमा पर उसके किसी भी अंग को अभी तक हाथ नहीं लगाया थाl उसके बड़े बड़े गोल स्तन ने ऐसा ललचाया के मेरे हाथ पता नहीं, कब उसके स्तनों पर पहुँच गए और उन्हें दबाने लगे l क्या नरम मुलायम लेकिन दृढ स्तन थे, जो बिलकुल लटके हुए नहीं थेl उत्तेजना के मारे उसके निप्पल भी कड़े हो गए थेl मैंने उन पर हाथ फेरा, फिर स्तनों को किश किया और निप्पल को चूमा तो वह फिर कांपने लगीl मैंने निप्पल को जीभ से चाटा, वाह! क्या नमकीन स्वाद था और मुझे नमकीन स्वाद बहुत अच्छा लगाl उसकी कमर बल खाने लगीl उसने मेरा लंड छोड़ मेरे सर पकड़ा और अपनी छाती पर दबा दिया और बोली और जोर से चूसो l बहुत अच्छा लग रहा है l ऐसे ही चूसते रहो l मैंने फिर दांतो से निप्पल को पकड़ा और खींचा, और फिर ऐसे ही दुसरे निप्पल को चूमा चाटा और चूसने के बाद दांतो में दबा कर खींचाl फिर और ऊपर की और बढ़ गयाl

मैंने उसके छाती और गले की बीच के हिस्से को चूमा और चाटाl धीरे धीरे ऊपर की और बढ़ते हुए उसके कंधो को चूमा और चाटा l फिर उसकी गर्दन पर किस करि और उसकी ठोड़ी पर किश कर चाटाl उसके ओंठो पर एक हलकी से किस कर, उसके ओंठो और नाक के बीच के हिस्से को चूमा तो उसने भी मेरे ओंठो को मुझे चूमने की कोशिश करिl पर मैंने उसे तड़पाना जारी रखते हुए उसकी नाक को किश किया, और फिर आँखो को किस करने का बाद उसका माथा चूमा, तो उसने मुझे खींच कर अपनी छाती से चिपका लियाl तो मैंने उसके कानो को बारी बारी से चूमा और कानो के निचले हिस्से को चूसा और कानो में अपनी जाभ घुसा दी और मेरे हाथ उसके स्तन दबाते रहे l मोना की बस उतनी आवाज निकली इस्सस! क्यों इतना तड़पा रहे हो?

प्लीज, अब मुझे पूरा सुख दोl और उसने मेरा सर पकड़ा और मेरे होंठो पर बेतहाशा किस करके बोली प्लीज मुझे किस करोl

मैंने कहा तुम्हे सब जगह किश ही तो कर रहा हूँl

वह बोली नहीं सिर्फ लिप किश करो

मैंने कहा चलो तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो लिप किश ही सही l

उसके बाद मोना ने मुझे पकड़ कर वापिस मेरे होंठो को किस किया. और मेरे सर को जकड़ के अपने मुंह से मुंह लगा दियाl वह मेरा ऊपर का ओंठ चूसने लगीl मैं चुपचाप अपना जीभ चुसवा रहा थाl मैं उसके निचले ओंठ को चूसने लगाl थोड़ी देर बाद वह मेरा निचला होंठ चूसने लगी और मैं उसका ऊपर का ओंठ चूसने लगाl फिर मैंने अपना मुँह थोड़ा खोला और मोना की जीभ मेरे मुंह में चली गयीl

मोना मुझे बेकरारी से चूमने लगी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। कम से कम 20- 25 मिनट तक दोनों ऐसे ही ओंठ चूमते और चूसते रहेl फिर मोना तेज तेज सांस लेनी लगी और उसका पूरा बदन कांपने लगा और वह आह! आह! ओह्ह! करते हुए झड़ गयीl

इस बाद रोजी बोली कुमार मोना, बहन रूबी, टीना, बॉब और टॉम आप सब लोग कुछ देर आराम कर लो कुछ नाश्ता कर लो और शराब के दो गिलास ला कर सब को थमा दिएl इस तरह कुछ समय के लिए अपने साथी की खुबिया सब को बताते हुए सबने, शराब पी नमकीन , बिस्कुट, सलाद और मिठाई खाईl शराब और शराब में मिली दारु ने फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दियाl हमारे जुनून इस तरह से उठने लगे, जिससे उन्हें लंबे समय तक अधीनता में रखना मुश्किल हो गयाl

मेरे फुफेरे भाइ बॉब ने कहा , मुझे लगता है कि पानी में लड़कियों को चोदने के दौरान ज्यादा मजा आया या फिर इस तरह की चुदाई की नवीनता से, हमारे पानी में फिर से जाने का प्रस्ताव है, और हम चाहते हैं हम अपनी इन संगिनीयो के साथ का पानी में आनंद लें। उन्होंने ऐसा किया, लेकिन मैं मोना के साथ पेड़ के नीचे ही रहा। फिर जो सेज मेरे और टीना के लिए लगाई गई थी मैं मोना को उस आरामदायक बिस्तर पर ले गया । मैंने उसे अपनी तरफ खींचकर उसके ओंठो को चूमा और बोला जहाँ पर रुके थे वही से शुरू करते हैं। वह उठकर उस बिस्तर पर लेट गई जिसे टीना की पहली चुदाई के लिए लड़कियों ने तैयार किया थाl

मोना हसते हुए बोली " बिस्तर बिस्तर पे लिखा होता है चुदने वाली का नाम l"

आओ मेरे राजा हो जाओ शुरू और मुझे अपने ऊपर खींच लिया l मैंने उसे एक लम्बी किश करि और फिर चुम्बन तोड़ कर उसके बूब्स चूसने लगा l फिर नीचे होते हुए उसकी नाभि को चूमते हुए जीभ दुबारा नाभि में घुसा दी. फिर और नीचे सरक कर चूत को पहले चूमाl जीभ को बढ़ा के पहले धीरे-धीरे सहलाया और धीरे-धीरे अपनी जीभ को उसकी चूत में डाला थोड़े समय के बाद, मैं अपनी जीभ को उसकी चूत के दाने के पास ले गया और चूत के दाने को चूसता, वो चूत के दाने को छेड़ने से पर पागल होने लगी। मेरी जीभ जबकि उसकी चूत की छेद के पास चल रही थी वो मेरे सिर को अपनी चूत में जोर से दबा देती।

मेरा सिर पकड़ कर वह बोली "ओह माय गॉड्" और ऐसा बार-बार करने लगी l

मैंने अपना मुँह हटा लिया तो वह बोली तुम रुक क्यों गए मुँह क्यों हटा लिया? प्लीज ऐसे हे करते रहो बहुत अच्छा लग रहा हैl

मैंने कहा मोना तुम इस समय नहीं झड़ोगीl जब मैं आपको बताऊंगा तभी चरम पर जाओगी, इसलिए उस बिंदु पर पहुंचने से पहले रुक जाओ। वह बोली प्लीज ऐसे मत तड़पाओl

अपने हाथ से अपनी चूत के दाने को सहलाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर रोक दिया और अपनी एक ऊँगली से उसके दाने तो छेड़ना शुरू कर दियाl फिर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया तो उसने लंड पकड़ कर चूत के दाने पर घिसना शुरू कर दियाl वो झड़ने के कगार पर थी और जोर जोर से चिल्लाने लगी, फ़क मी प्लीज फ़क मी l मैंने अब उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा।

मैंने अपने लंड की योनि प्रवेश के लिए उत्कृष्ट स्थिति में रखा। मैंने खुद को धीरे से उसके ऊपर लेटा दिया, उसने पकड़ लिया और उस की योनि के होठों के बीच लंडमुंड रखाl तब मैंने उसे एक पल के लिए उसकी योनि को लंड के साथ मसल दिया और फिर धीरे से उसे अंदर ले गया, इतना धीरे-धीरे कि यह सब पूरा होने में पांच मिनट से भी ज्यादा समय लगाया l उसकी योनी इतनी तंग थी और छेद इतना छोटा था और मेरा लंड बड़ा और मोटा था l उसकी चूत के ओंठ वे खिंचे हुए थे और पूरी हद तक लंड को जकड़े हुए थे।

मोना की योनी का छेद छोटा था, वास्तव में बहुत छोटा था, उसकी योनि मैंने अब तक जितनी लड़किया को चोदा था, उन सबसे कसी हुई थी, और मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर दबा रहा था और फिर अपने लंड के सिर से बाहर खींच रहा थाl उसकी चूत मेरे लंड को जकड़े हुए थी जकड़न मेरे लंड को जैसे चूस रही थी।

ये जकड़न और मेरा लंड को आगे पीछे करना चूषण पैदा कर रही थीl ऐसा लग रहा तह मानो चूत मेरे लंड को जोर जोर से चूस रही थीl हरेक घक्के में लंड पर दबाब दे कर आगे बढ़ानाl और फिर ढीला कर के बहार खींचना इस तरह से ऐसा बार बार करना फिर इसे शुरू करना l उसे, और फिर से इसे बाहर खींचना, ऐसा मैं तब तक करता रहा जब तक मैंने खुद को इस क्रियाl में मास्टर नहीं कर लिया तब तक शॉट लगता रहाl मेरी गति इतनी तेज और जोरदार हो गई कि लंड पूरा अंदर चला गया और इस चुसन ने पूरे शरीर में सबसे उत्तम खुशी का एक रोमांच भेजाl- हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे और अपनी आत्माओं का सार एक साथ मिलाया और झड़ गए।

यद्यपि मैं रोजी से प्यार करता था, उसके सभी आकर्षण के साथ, उसको चोद कर उसकी बाहो में मुझे बहुत खुशी मिली और हालाँकि मैं उसकी बहन रूबी के पके हुए आम जैसे सौंदर्य का भी आनंद ले रहा था, फिर भी मुझे मोना की प्यारी छोटी सी योनी की चोद कर जो खुशी की अनुभूति हुई थी। वह मेरे हिसाब से उन दोनों से श्रेष्ठ थी ।

मैं दूसरी बार मोना के नमकीन सौंदर्य का स्वाद ले रहा था, जब बाकी पार्टी हम पर टूट पड़ी, लेकिन हमने उन्हें बुरा नहीं माना, और तब तक अपना काम करते रहे जब तक हमने अपना काम पूरा नहीं कर लिया। कुछ समय के लिए आराम करने के बाद, जब हमारी भूख भड़क गयी , हमने अपने नग्न प्रेमिकाओ के साथ फिर से खाना खाने के बाद एक और स्नान करने के बाद, हमने कपड़े पहने और घर के लिए निकल पड़े। रास्ते में मैंने प्रस्ताव दिया के हमें अपना प्रेमिका का विनिमय रात की भी जारी रखना चाहिए या नहीं।

बॉब ने उत्तर दिया कि जैसा कि हमने एक साथ दिन बिताया था, इसलिए हमें रात भी ऐसे ही एक साथ बितानी चाहिए तो टीना को भी पार्टी में आने का न्योता दिया गया, जो उसने तुरंत स्वीकार कर लिया और हम सभी एक कमरे में एक साथ लेट गएl यदि कोई भी लड़की किसी ख़ास लड़के से चुदाई की इच्छा हो, तो उसे ऐसा कहना चाहिए, और इसी तरह से यदि कोई लड़का किसी ख़ास लड़की को चोदना चाहता हो, तो वैसा ही समायोजित किया जा सकता है, जिससे हम सभी सहमत थे l

उस रात हम दस बजे सब मेरे कमरे मे आ गए लड़किया दुसरे कमरे से गद्दे ला कर नीचे लगा कर आराम दायक बिस्तर लगा दिए और तकिये भी रख दिए शराब के गिलास सब को थमा दिएl फिर हमने लड़कियों को खड़ा किया मैंने अपने कपडे निकाल कर नग्न हो गया और रोजी को अपने पास बिठा कर उसे किश करने लगा तो रूबी भाग कर मेरी तरफ आ गयी और मेरे पास लेट गयीl बॉब ने मोना को आजमाने का फैसला किया और टॉम टीना को एक कोने में ले गया ।

जब मैंने रूबी को मेरे भीतर की शक्तियों का प्रमाण दिया और उसके बाद रोजी के साथ रूबी को एकसाथ अपनी साथी बना कर भोगा फिर एक और बदलाव किया गया था, और मुझे गर्मागर्म टीना मिली, दिन के उजाले तक हम सभी अपनी-अपनी खास प्रेमिका के साथ थे और भविष्य की सारी योजनाए बनाने के बाद बॉब और टॉम दोनों सो गए, तो मैं अपनी पसंदीदा स्थिति में, रोजी की टांगों के बीच लेटकर, उन्हें अपने ऊपर फेंके हुए, अपने सिर को अपने नरम गोरे रंग के पेट पर टिका दिया। और टीना मेरे लंड को चुंबन करते हुए लेट गयी।

हमने दस बजे नाश्ता किया, उसके बाद मैं रूबी के कमरे में गया, जहाँ पर रोजी , मोना और टीना पहले से मौजूद थी । प्रत्येक को मैंने सुंदर भेंट और गिफ्ट्स दिए, और उन्हें बताया कि अगर वो मेरे प्रति वफादार रहने का वादा करे तो उन्हें मैं हमेशा के लिए, उन सभी चारो को अपने साथ रखूंगाl उनमें से हर एक मुझसे बिस्तर पर एक बार फिर से उसे चुदने के लिए बेचैन थी, लेकिन समय आभाव के कारण मैं केवल एक के ही साथ सम्भोग कर सकता था, उन्होंने मेरी आखिरी चुदाई के लिए लाटरी डाली जो मोना के पक्ष में गयी। वह पूरे बिस्तर पर लेट गई, और जब मैंने अपनी पैंट उतारी, तो बाकी लड़कियों ने भी अपने कपड़े उतार दिए।

सब एक लाइन में खड़ी हो गयी और प्रत्येक ने एक पैर उठाया, और मैंने अपना प्यार का पिस्टन मोना की स्वादिष्ट पनाहगाहों में डाल कर द्वारा उसे परमानंद में डूबा दिया और तीनो को किश करने के बाद जाने लगा तो रोजी बोली वह मेरे बिन नहीं रह पाएगी और मेरे से दूर रह कर मर जायेगीl रोजी ने मुझ से अभी अपने साथ ले जाने की प्राथना की, तो मैंने माँ से बात करि की गाँव ने मेरी देखभाल रोजी ने अच्छे से की है इसलिए मैं चाहता हूँ ये शहर में भी मेरी देखभाल करे तो माँ ने भी मुझे इसकी इजाजत दे दी l फिर उसकी बहन ने भी कहा इसे आप साथ ले जाओ, तो मैंने कहा कुछ दिन में आप तीनो भी मेरे पास आ जाना. मैं इसका इंतजाम कर दूंगा।

तो मैंने जा कर फूफा को बोला माँ ने मुझे अपनी देखभाल के लिए रोजी को शहर में लाने को कहा है इसलिए उसे शहर ले जाने की अनुमति ले ली हैl फूफा जी ने भी अनुमति दे दी और रोजी फटाफट कुछ जरूरी सामान ले आयी और उसके बाद अपने फूफा और दोनों फूफेरे भाइयो के साथ रोजी को लेकर वापिस शहर रवाना हो गए।

आगे क्या हुआ ... ये कहानी जारी रहेगी

आपका दीपक l
Reply
03-01-2021, 12:37 PM,
#8
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 07
Update 08

अंतरंग हमसफ़र भाग 08- सुन्दर युवती से मुलाकात.

अभी तक आपने , मेरे अंतरंग हमसफ़र 7 में पढ़ा


हमने दस बजे नाश्ता किया, उसके बाद मैं रूबी के कमरे में गया, जहाँ पर रोजी, मोना और टीना पहले से मौजूद थी । प्रत्येक को मैंने सुंदर भेंट और गिफ्ट्स दिए, और उन्हें बताया कि अगर वो मेरे प्रति वफादार रहने का वादा करे तो उन्हें मैं हमेशा के लिए, उन सभी चारो को अपने साथ रखूंगाl उनमें से हर एक मुझसे बिस्तर पर एक बार फिर से उसे चुदने के लिए बेचैन थी, लेकिन समय आभाव के कारण मैं केवल एक के ही साथ सम्भोग कर सकता था, उन्होंने मेरी आखिरी चुदाई के लिए लाटरी डाली जो मोना के पक्ष में गयी। वह पूरे बिस्तर पर लेट गई, और जब मैंने अपनी पैंट उतारी, तो बाकी लड़कियों ने भी अपने कपड़े उतार दिए।

सब एक लाइन में खड़ी हो गयी और प्रत्येक ने एक पैर उठाया, और मैंने अपना प्यार का पिस्टन मोना की स्वादिष्ट पनाहगाहों में डाल कर द्वारा उसे परमानंद में डूबा दिया और तीनो को किश करने के बाद जाने लगा तो रोजी बोली वह मेरे बिन नहीं रह पाएगी और मेरे से दूर रह कर मर जायेगीl रोजी ने मुझ से अभी अपने साथ ले जाने की प्राथना की, तो मैंने माँ से बात करि की गाँव ने मेरी देखभाल रोजी ने अच्छे से की है इसलिए मैं चाहता हूँ ये शहर में भी मेरी देखभाल करे तो माँ ने भी मुझे इसकी इजाजत दे दी l फिर उसकी बहन ने भी कहा इसे आप साथ ले जाओ, तो मैंने कहा कुछ दिन में आप तीनो भी मेरे पास आ जानाl मैं इसका इंतजाम कर दूंगा।

तो मैंने जा कर फूफा को बोला माँ ने मुझे अपनी देखभाल के लिए रोजी को शहर में लाने को कहा है इसलिए उसे शहर ले जाने की अनुमति ले ली हैl फूफा जी ने भी अनुमति दे दी और रोजी फटाफट कुछ जरूरी सामान ले आयी और उसके बाद अपने फूफा और दोनों फूफेरे भाइयो के साथ रोजी को लेकर वापिस शहर रवाना हो गए।

दोस्तों मैं दीपक,अब तक कहानी में आपने पढ़ा आपने मेरी कहानिया झट शादी पट सुहागरात-1-4 में पढ़ा कैसे मेरी सहयोगी प्रीती एक दिन मेरे रूम में आ गयी शादी का जोड़ा लेकरl उसने अपने दिल की बात मुझसे कही और दुल्हन बन कर सुहागरात मनाने को तैयार हो l उसके बाद मेरी और मेरे घर की देखभाल करने वाली रोजी और रूबी मिली, और मेरी पहली चुदाई के बारे में पूछने लगीl मैंने उसे बताया किस तरह मैं रोज़ी और रूबी से मिलाl कैसे मेरी और रोजी की पहली चुदाई हुईl उसके बाद कैसे मैंने रूबी को चोदा l फिर हमारे गाँव के प्रवास के आखिरी दिन जंगल में हमने ग्रुप सेक्स और प्रेमिकाओ की अदला बदली का कार्यक्रम बनायाl रोजी ने हमे अपनी सहेली टीना से मिलवाया और टीना की पहली चुदाई कैसे हुईl फिर छोटे योनि के छेद वाली मोना को मैंने चोदा रात में एकबार फिर सबका एक साथ ग्रुप सेक्स हुआ और रोजी मेरे साथ शहर आ गयीl

अब आगे

इसके बाद मैं चुप हो गया तो प्रीती बोली काफी मजेदार रहा आपका गाँव का ये सफर l क्या मोना ही वो लड़की है जिसके साथ सेक्स करके आपको सबसे ज्यादा मजा आया? क्या मोना आपसे फिर मिली? आगे फिर क्या हुआ ये भी बताइयेl

तो मैं बोला प्रीती तुम्हारे साथ मुझे मोना के साथ सेक्स करने से भी ज्यादा मजा आया, क्योंकि जहाँ मोना की योनि का छेद बहुत छोटा और टाइट है वही तुम और तुम्हारी योनि बिलकुल स्पेशल हैl तुम्हारे साथ जो मजा आया वह मेरे अब तक के अनुभवों में सबसे बेहतरीन रहा हैl तुम्हारे कौमार्य को भंग करने का सौभाग्य भी मुझे मिला हैl जबकि मोना का कौमार्य टॉम ने भंग किया था और रूबी का बॉब ने ,( जो की उन्होंने ही मुझे बताया था ) पर फिर भी मुझे दोनों बहुत प्यारी हैं l और जब भी मौका मिलता है वो मेरी सेवा में उपस्थित हो जाती हैं l

तो प्रीती बोली फिर अपने सभी अनुभवों के बारे में बताइये l

तो मैंने कहा ठीक है फिर आगे सुनो;

मेरे दोनों फूफेरे भाई मुझ से नाराज थे की मैं रूबी, टीना और मोना को साथ क्यों नहीं लायाl यह कहते हुए की तुम केवल अपनी प्रेमिका ही क्यों लाये? हमारा तुमने कोई ख्याल नहीं रखा उन दोनों ने रास्ते में मुझ से ज्यादा बात नहीं कीl

जब हम शहर पहुंचे तो कुछ ही देर बाद फूफा ने बताया मेरी बड़ी बुआ भी मेरी तीनो फूफेरी बहनो के साथ लंदन से दिल्ली आ रही हैं और यही कारण था की हम गाँव से वापिस दिल्ली लौटे थेl गाँव के दौरे ने मेरा लड़कियों की तरफ नजरिया बदल दिया थाl मैंने घर की देखभाल करने वाली प्रमुख सेविका आशा अम्मा से मिल कर पूरे घर का निरीक्षण करने का निर्णय कियाl मैंने आशा अम्मा को रोजी से मिलवाया और उसकी प्रशंसा करते हुए कहा गाँव में रोजी ने मेरी सब जरूरतों का बढ़िया ख्याल रखाl तो उन्होंने रोजी को मेरे कमरे और मेरी देखभाल करने की जिम्मेदारी दे दी l सबसे पहले जहाँ मेरा कमरा था, उसे देखा तो उसमे किताबी फैली हुई थी तो रोजी को उसे व्यवस्थित करने को कहाl

हमारा मुख्यता दिल्ली के दक्षिणी इलाके में फ़ार्म हाउस नुमा घर हैl उसमे मुख्यता तीन बड़े बड़े भवन हैं l सबसे आगे का एक भवन जिसमे बैठक पिताजी का दफ्तर और मेरे पिताजी और माता जी रहते हैंl मेरा भी अपने स्कूल की पढाई के दौरान मेरा कमरा भी उसी भवन की पहली मंजिल पर था आने वाले सभी मेहमान भी इसी पहले मुख्य भवन में रहते हैंl इसमें काफी सारे कमरे थेl

दुसरे हिस्से में मेरे स्वर्गीय दादाजी रहते थे l ये हिस्सा घर मुख्या हिस्से से थोड़ा अलग है l अपने जीवन काल में अधिकतर दादा जी इसी हिस्से में रहते थेl ये हिस्सा मुख्य भवन से थोड़ा सा बड़ा हैl जिसमे एक बहुत बड़ा हाल और कुछ कमरे हैं l घर की देखभाल की प्रमुख आशा अम्मा ने मेरा एकाकी स्वभाव और घर में भीड़ भाड़ को देखते हुए मुझे मेरे दादा का उनके इन्तेकाल के बाद से बंद पड़ा हुआ कमरा दे दिया गयाl उन्हें मेरे स्वभाव में आये परिवर्तन का अभी कुछ अंदाजा नहीं था और रोजी को मेरी और मेरे कमरे की देखभाल की जिम्मेदारी और उसके साथ ही लगता हुआ कमरा दे दिया गया l चुकी घर में काफी मेहमान आ गए थे तो घर की देखभाल के लिए और सहायको की आवश्यकता थी .तो रोजी ने फुर्ती से आशा अम्मा की सहायता करते हुए घर के कुछ काम अपने ऊपर ले लिए तो आशा अम्मा ने उसकी कार्य कुशलता की तारीफ कीl

मैंने सारे कामो को व्यवस्थित करवाने को कहा तो आशा अम्मा ने कहा इसमें थोड़ा समय लगेगा, तो मैंने भी मौके पे चौका मारते हुए कहा गाँव में कुछ और लड़किया थी जो काम अच्छे तरीके सलीके और मेहनत से करती हैं उन्हें बुला लेते हैं, आपकी मदद के लिए l जिसके लिए आशा अम्मा ने सहर्ष सहमति दे दी और मैंने फ़ोन करके रूबी, मोना और टीना को जल्द से जल्द दिल्ली आने को कह दियाl तीनो बोली वह रात की बस पकड़ कल सुबह तक आ जाएंगीl

जिससे आशा अम्मा भी प्रसन्न हो गयी की अब मैं भी समझदार हो गया हूँ और घर की जिम्मेदारी उठाने लग गया हूँ l ये सुन कर की टीना रूबी और मोना भी आ रही हैं टॉम और बॉब भी बेहद खुश हो गए l

इसके इलावा तीसरा भवन था जिसमे पिताजी की कुछ अन्य स्त्रिया अपने बच्चो के साथ रहती थी ( हमारे यहाँ पुरुषो के द्वारा एक से अधिक स्त्रियाँ रखने की प्रथा रही है) l और फिर इसके इलावा चौथे हिस्से में कुछ सेवक सेविकाओं के के कमरे थे जिनमे सेवक सेविकाएं और उनके परिवार रहते थेl

वहां पर मुझे एक बहुत सुन्दर युवती मिली जिसका नाम अलका थाl वह मेरी कजिन ( छोटी बुआ की लड़की) थी l वह मुझे देख कर बोली दीपक आज आप इधर का रास्ता कैसे भूल गए,?

तो मैंने कहा की पिताजी विदेश गए हैंl मुझे घर की देखभाल की जिम्मेदारी दे गए हैं, तो मैं देखने आया हूँ, किसी को कोई दिक्कत तो नहीं है l

फिर अलका ने मुझे वहां हमारे पूरे परिवार से मिलवाया और कइयों से तो मैं पहली बार ही मिला थाl सब मुझ से मिल कर बहुत खुश हुए और मैंने सब बड़ो के पाँव छुए और कुछ फल मिठाईया दी जो हम गाँव से अपने साथ ले आये थेl सबने मुझे आशीर्वाद दिया और मैंने अपने से छोटो को कुछ चॉक्लेट के तोहफे दिए, जिससे वो खुश हो गएl

अलका की माँ, मेरी छोटी बुआ ने कहा मुझ में मेरे बाप दादा के गुण स्वाभविक तौर पर आ गए हैंl मैंने वहां मिली लड़कियों को गाँव से लाये कुछ कपडे तोहफे में दिए जो उन्हें बहुत पसंद आये और सब खश हो गयीl

मैंने सबसे कहा अगर किसी को भी कुछ चाहिए हो तो निस्संकोच मुझ से कह सकता हैl मैं जल्द से जल्द उस जरूरत को पूरा करने की कोशिश करूंगा l पर किसी ने कुछ ख़ास मांग नहीं रखीl

भवनों के पीछे एक बहुत बड़ा सुन्दर बगीचा है l फिर उसके पीछे कुछ खेत और चरागाह भूमि थी और उसके पीछे काफी बड़ा जंगल है l मुझे अलका ने वह सब कुछ दिखाया l तो मैंने अलका को अपनी एक अंगूठी देते हुए कहा मेरी तरफ से ये तोहफा कबूल करो l तो अलका ने उसे ले लिया और बोली मुझे आपसे कुछ और भी चाहिए और मुझे गालो पर किश करके भाग गयी lपहले तो मैंने उसका पीछा करने की सोची, फिर चुकी रात होने लगी थी इसलिए सब विचार छोड़ कर वापिस आ गयाl

रात के खाने के बाद सब काम निपटाने के रोजी मेरे पास आ गयीl हम दोनों एक नहाये और फिर मैंने उसे रात में दो बार चोदा और फिर एक दुसरे के साथ चिपक कर सो गएl
अगले दिन सुबह सुबह जब बड़ी बुआ आयी तो मैं अपनी बुआ से मिला उनके चरण स्पर्श किये, तो उन्होंने मुझे अपने गले लगा कर कहा मेरा भतीजा अब एक सुन्दर बांका जवान बन गया हैl उनसे मिलने के बाद मैं अपनी तीनो फूफेरी बहनो से भी गले मिलाl इस बार उन्हें मिल कर मुझे एक अलग ही आनंद मिला l फिर घर में सबके रहने का इंतजाम किया गया l

तो मैंने एकांत में दोनों फूफेरे भाइयो से कहा भाइयो क्या तुम्हे पता था बुआ आ रही है तो वो बोले हाँ हमें उनका कार्यक्रम पहले से पता थाl तो मैंने कहा अगर आप मुझे भी बता देते तो मैं रूबी टीना और मोना का हमारे साथ दिल्ली आने का प्रबंध पहले ही कर देता. क्योंकि पिताजी ने विदेश जाते हुए मुझे सबका ख्याल रखने की जिम्मेदारी दी थीl चलो कोई बात नहीं आगे से ऐसा कोई राज मत रखना और कभी ये मत सोचना के मैं उनके बारे में नहीं सोचता हूँ l हालात को देख समझ कर ही चलने से सब काम ठीक से हो पाते हैं, तो वह माफ़ी मांगते और शुक्रिया कहते हुए मेरे गले लग गए l

तो मैंने कहा भाई लोगो अब घर में कुछ और लोग भी हैं खासकर महिलाये और लड़किया, इसलिए हमे अपने आगे के प्रेमालाप के कार्यक्रम काफी सावधानी और गुप्त रूप से करने होंगे ताकि हमारे राज खुल न जाएl सबने जरूरी सावधानी रखने का वादा किया और मुझे घर में गुप्त प्रेमालाप के लिए कोई सुरक्षित स्थान ढूंढ निकालने का काम सौंपा गया l जिसमे मैंने रोजी की सहायता लेने का निर्णय किया l

मेरी फूफेरी बहनो का नाम जेन, लूसी और सिंडी , क्रमशः, उन्नीस अठारह, अट्ठारह । दो बहने अठारह सालो की कैसे ये खुलासा कहानी में आगे करूंगा l

मार्च अप्रैल के मस्त महीने हमेशा से ही सेक्स के बारे में अपने कामुक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध रहे हैंl सर्दी ख़त्म हो रही होती है और ज्यादा गर्मी भी नहीं हुई होती हैl कुदरत भी इस समय अपने रंग बदल रही होती है पेड़ो पर नए पत्ते आ रहे होते हैंl तरह तरह के रंग बिरंगे फूल चारो तरफ खिले होते हैं, जिन्हे देख कर मन प्रफुल्लित हो जाता है l

आगे क्या हुआ ... ये कहानी जारी रहेगी

आपका दीपक

Reply
03-02-2021, 12:19 PM,
#9
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 09
Update 09

अंतरंग हमसफ़र भाग 09- फूफेरी बहन से प्रेम का इजहार.



अभी तक आपने , मेरे अंतरंग हमसफ़र 8 में पढ़ा;

"मार्च अप्रैल के मस्त महीने हमेशा से ही सेक्स के बारे में अपने कामुक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध रहे हैं क्योंकि सर्दी ख़त्म हो रही होती हैl ज्यादा गर्मी भी नहीं हुई होती है और कुदरत भी इस समय अपने रंग बदल रही होती हैl पेड़ो पर नए पत्ते आ रहे होते हैं और तरह तरह के रंग बिरंगे फूल चारो तरफ खिले होते हैं जिन्हे देख कर मन प्रफुल्लित हो जाता है। "

दोस्तों मैं दीपक आपने मेरी कहानिया झट शादी पट सुहागरात-1-4 में पढ़ा कैसे मेरी सहयोगी प्रीती एक दिन मेरे रूम में आ गयी शादी का जोड़ा लेकर l मैंने उसके साथ सुहागरात मनाई और उसके बाद मेरी और मेरे घर की देखभाल करने वाली रोजी और रूबी मिलीl प्रीती मेरी पहली चुदाई के बारे में पूछने लगी, तो मैंने उसे बताया किस तरह मैं रोज़ी और रूबी से मिला और कैसे मेरी और रोजी की पहली चुदाई हुईl उसके बाद कैसे मैंने रूबी को चोदाl हमारे गाँव के प्रवास के आखिरी दिन जंगल में हमने ग्रुप सेक्स और प्रेमिकाओ की अदला बदली का कार्यक्रम बनायाl रोजी ने हमे अपनी सहेली टीना से मिलवाया और टीना की पहली चुदाई कैसे हुईl फिर छोटे योनि के छेद वाली मोना को मैंने चोदा रात में एकबार फिर सबका एक साथ ग्रुप सेक्स हुआ और रोजी मेरे साथ शहर आ गयीl उसके बाद मेरी बुआ और उनकी तीन बेटियों लंदन से दिल्ली हमारे घर आयेl

अब आगे

अगले दिन सुबह सुबह टीना रूबी और मोना भी आ गयी और उन्हें देख कर टॉम और बॉब काफी खुश हो गए। उन तीनो को बुआ उनकी बेटियों और मेरे फूफेरे भाइयो बाले भवन की देखभाल की जिम्मेदारी दी गयी।

उस दिन सुबह के नाश्ते के बाद, सफर की थकान के कारण फूफा और बुआ उनकी सभी लड़किया अपने कमरे में जा कर ऊँघने लगेl दोनों बेटे बॉब और टॉम भी जल्दी से अपने कमरे में चले गए ,तो मैं भी भांप गया की वह क्या करने वाले हैं, तो मैंने रूबी को सावधान रहने के लिए कहा क्योंकि यहाँ पर काफी और लोग भी थे। जिस पर रूबी ने भी अपनी सहमति जताई और उसने मोना और टीना को भी सावधान कर दिया।

उसके बाद मैंने एक बार पीछे के मैदान में चहलकदमी करने का निर्णय किया, तो रोजी ने कहा बादल हो रहे हैंl आप छाता ले कर जाए कभी भी बरसात आ सकती हैl मैंने छाता लिया और मैदान की और चल दियाl

वहां पर मुझे अलका दिखाई दी, उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और बगीचे में फूल चुन रही थी। वह बहुत सुन्दर लग रही थी।

उसने काफी झीनी सी गुलाबी रंग की चोली पहन रखी थीl जिसमे से उसके बड़े बड़े उरोज दिख रहे थेl वह फूल चुन चुन कर अपने साडी की झोली में डाल रही थीl तभी उसके नज़र मुझ पर पड़ी और वह एक दम से हैरान हो कर खड़ी हो गयीl ऐसा करने ने उसके सारे फूल जो उसने चुने थे, नीचे गिर गए l

वह मुझ से बोली आप कैसे हो?

मैंने कहा अच्छा हूँl में उसकी तारीफ करते हुए बोला इस साडी में तुम बेहद सुन्दर लग रही ही तो उसने शर्मा कर अपना सर नीचे झुका लियाl

वो नीचे बैठ कर गिरे हुए फूल दुबारा उठाने लगी तो मैं भी नीचे गिरे हुए फूल उठा कर उसके झोली में डालने लगा l ऐसे करते हुए मेरा ध्यान उसके वक्ष स्थल पर जा कर रुक गया, तो वह जब मुझे देखती थीl मैं भी झेंप कर दुबारा फूल उठाने लगता थाl ऐसा करते हुए हमारे हाथ टकरा जाते थेl हमने नीचे से सारे फूल उठाये ही थे की तभी हलकी सी बारिश शुरू हो गयीl तो मैंने कहा आप भीग जाओगी छतरी में आ जाओl वह छतरी के नीचे आ गयीl मेरे हाथ उसके स्तनों को हलके से छु रहे थेl तभी बारिश तेज हो गयीl मैंने कहा ठीक से पास आ जाओ नहीं तो भीग जाओगी और बीमार हो जाओगी, तो वह और नजदीक आ गयी और उसके उरोज मेरे हाथो से दब गए।

वह मुस्कुरा दी और मेरे हाथो की और देखने लगी मैंने भी देखा l न तो उसने पीछे हटने की कोशिस करि, न मैंने हाथ हटायाl वाह! क्या अनुभव था l क्या नरम मुलायम अहसास थाl

वह धीरे से बोली प्लीज ये छाता मुझे दे दीजिये मैं पकड़ लेती हूँl तो मैंने उसे छाता दे दिया और उसके हाथ पर अपना हाथ रखाl तभी एक जोर से बिजली कड़की और अलका डर कर मुझ से लिपट गयीl मैंने अपना दूसरा हाथ उसके कमर में डालते हुए दुसरे हाथ से अपने और खींचाl

मैं बोला जो कल आपने मुझे दिया था उसके बदले मुझे भी आपको कुछ देना है, और उसे अपनी और खींचते हुए उसे उसके ओंठो पर किश कर दियाl तभी दूर से एक आवाज आयी अलका आ जाओ, बारिश आ गयी है और अलका फूल सभालते हुए चुंबन तोड़ कर वहां से भाग गयी।

वहां हवा जोर जोर से चलने लगी मुझे बारिश पर बहुत गुस्सा आयाl ये अभी क्यों आ गयी, पर अलका के लिपटने का अहसास याद आते ही, बारिश अछि लगने लगी, क्योंकि बारिश के कारण ही अलका मेरे से लिपटी थीl मैं भी धीरे धीरे चलता हुआ बारिश के मजे लेता हुआ वापिस अपने कमरे में आ गया। वहां रोजी ने एक डायरी मुझे दी और बोली मुझे सफाई करते हुए कमरे में मुझे ये डायरी मिली है। मैंने डायरी को खोला तो मैं लिखाई से पहचान गया वो मेरे दादा जी की थी।
उसमे पहले पेज पर लिखा था ये डायरी मेरे पोते दीपक के लिए सन्देश हैl इसमें लिखा सन्देश दीपक के लिए है l अगर आप दीपक नहीं है तो ये डायरी आप दीपक को दे दे और दादा जी के हस्ताक्षर थे।

उसके अगले पन्नो पे क्या लिखा था मुझे समझ नहीं आ रही थी l मैंने कहा रोजी दादा जी ने कुछ कोड में लिखा है l मैं डायरी लेकर कमरे में घुमते हुए जहाँ खड़ा हुआ वहां एक शीशा था l रोजी बोली कुमार प्लीज वही रुकिए मैं शीशे में डायरी में जो लिखा है, उसमे से कुछ पढ़ पा रही हूँl तो मैंने भी डायरी को उल्टा कर दिया तो मुझे भी डायरी में जो लिखा है वह समझ आने लगा।

मैंने अगला पेज खोला तो उसमे मुझे आशीर्वाद के बाद लिखा था, ये डायरी दीपक तुम अकेले में पढ़ना । इसमें कुछ राज है। उसमे लिखा था दीपक ये वाला घर का हिस्सा जिसमे मेरे दादू रहते थेl उनके बाद वह मेरे अधीन होगा और गांव की भी सारी जमीं जायदाद कितनी है कहाँ है, सब का व्योरा था। इसके इलावा और भी सारी जमीन जायदाद प्रॉपर्टी बिज़नेस का व्योरा थाl दादू ने डायरी में लिखा था उनके मरने के बाद मुझे भी जा सारी जमीन जायदाद रुपए पैसे की जानकारी होनी चाहिए।

डायरी में कुछ गुप्त रास्तो का भी जिक्र था और दो तहखानों का जिक्र थाl गुप्त रास्तो कहाँ हैं, उनमे जाने का क्या रास्ता है और उनमे क्या छुपा है? इस बारे में डायरी में लिखा थाl यह उन तहखानों और गुप्त रास्तो को जब मैं खोज लूँगा तो वही पता चलेगा।

उस के बाद डायरी में कुछ और राज थे जिनका खुलासा मैं कहानी के अगले उपयुक्त भागो मे करूंगा।

तो मैं और रोजी दोनों उन दोनों तहखानों और रास्तो को खोजने में लग गए, पर वह नहीं मिले इतने में दोपहर के खाने का समय हो गयाl

रोजी बोली बाकी खोज का काम रात में करेंगे, अब आप दोपहर का भोजन कर लीजियेl तब तक हलकी हलकी बारिश हो रही थी ।

सब ने साथ में दोपहर का भोजन किया और चुकी बरसात जारी थी तो सब अपने कमरों में चले गए। हाल में केवल मैं, मेरी बुआ की लड़की जेन, लूसी और बॉब रह गए। हम कुछ देर बारिश को देखते रहे। बॉब पढ़ रहा था, तभी अचानक मौसम बदला और बारिश रुक गयी और धुप निकल आयी।

फिर हम लड़कों और लड़कियों ने मैदान में चहलकदमी की। मुझे विशेष रूप से मेरी फूफेरी बहन जेन जो की रूप में पूर्णतया सुन्दर विकसित गोरी , गहरी नीली आँखों के साथ, लाल होंठ, और एक पूर्ण विकसित बड़ी, गर्म छाती, जो मुझे इछाओ की की एक आदर्श ज्वालामुखी की तरह लग रही थी, ने अपनी और सबसे ज्यादा आकर्षित किया था। मैंने थोड़ा और घूमने का प्रस्ताव किया जिसे लूसी और बॉब ने अस्वीकार कर दिया।

मेरा फूफेरे भाई बॉब एक बहुत ही अशिष्ट साथी साबित हुआ। वह धूम्रपान करना चाहता था, इसलिए मुझे बोला आप जेन के साथ चले जाओ, तब तक मैं एक सिगरेट पी लेता हूँl लूसी बोली वह एक किताब जो उसने घर की लाइब्रेरी में देखि है उसे पढ़ना पसंद करेगी, वही जेन ने कहा वह तीन वर्षो बाद यहाँ आयी है और देखना चाहेगी यहाँ क्या क्या परिवर्तन हुए हैं।

जेन से मुझसे पहले मैदान में हुए बदलाव दिखाने के लिए अनुरोध कियाl मैंने फ्रैंक और लूसी से कहा "मुझे लगता है , साथियो आप दोनों बहुत आलसी हैं, आलस्य छोड़ दीजिये चलिए एक लम्बा चक्कर मार कर आते हैं। "

बॉब बोला इतने बढ़िया मौसम में मैं एक सिगरेट पीना चाहूंगाl सिगरेट का धुआँ आपकी निश्चित अच्छा नहीं लगेगाl इसके अलावा, मेरी बहन काफी अच्छी तरह से, या बेहतर योग्य है इसके लिए। मैं मैदान में बाहर निकलने के लिए बेहद उत्सुक नहीं हूंl मेरी बहन को इन सब में मुझ से ज्यादा शौक हैं। वैसे भी मैंने कभी भी कुछ भी नोटिस नहीं किया हैं।" और उसने एक दूसरी दिशा में जाकर अपनी सिगरेट सुलगा ली और लूसी वापिस हाल में चली गयी और कोई किताब पढ़ने लग गयी।

"आओ, जेन ," मैंने उसका हाथ लेते हुए कहा; " बॉब प्यार में है हम घूम कर आते हैं ।"

"नहीं, मुझे यकीन है कि वह अपनी बहनों को छोड़कर कभी किसी लड़की के बारे में नहीं सोचता," उसका जवाब था। तो मैंने कहा मुझे लगता है शायद उसे अपनी सिगरेट से प्यार है।

हम अब मैदान से आगे निकले। पेड़ो की एक छायादार सैर में, सबकी नज़र से दूर इसलिए मैं थोड़ा खुलते हुए बोला "लेकिन, अगर वह नहीं है तो निश्चित रूप से, आप, प्यार में हैं । मैं इसे आपकी आँखों से आपके लाल होते हुए सुन्दर गालो से और तेज चलती साँसों के कारण तेज धड़कती हुई बड़ी भारी छाती के ऊपर नीचे होने से बता सकता हूं ।"

अपनी बड़ी छाती के जिक्र से जेन का चेहरा एक दम से लाल हो गया पर निश्चित तौर पर उसकी विशेषताओं की प्रशंसा उसके लिए स्पष्ट रूप से मनभावन थी, और बिना नाराज हुए किसी भी आक्रामकता से दूर, वह शर्माते हुए चंचलता से बोली "ओह! आप थोड़ी , शरम कीजिये, दीपक!"

हम इस समय तक एक अच्छी दूरी पर आ गए थे और दूर दुर तक कोई नज़र नहीं आ रहा थाl एक सुविधाजनक स्थान पर एक पेड़ के नीचे खड़े होकर, तो शरमाई हुई जेन के चारों ओर मेरी बाहों को फेंक, मैंने उसके लाल ओंठो को चूमाl

उसे अपने पास खींचते हुए कहा, "अब, प्रिय जेन मैं तुम्हारा कजिन भाई हूँ और तुम्हारा पुराना मित्र और प्रशंसक हूँl तुम एक पूर्णतया सुन्दर युवती के रूप में विकसित हो चुकी होl मैं तुम्हारे इन सुन्दर ओंठो को किश करने से खुद को रोक नहीं सकाl मैं जब आप एक छोटी लड़की और मैं एक छोटा लड़का था तब से आप को पसंद करता हूँl अब यहाँ से जाने से पहले आप सब कबूल करिये और सच सच बताइये, तभी मैं आपको छोडूंगा "।

"लेकिन मेरे पास कबूल करने के लिए कुछ भी नहीं है दीपक।"

"क्या आपने कभी प्यार के बारे में नहीं सोचा हैं। जेन? आप मुझे देखिये. मेरे चेहरे को देखिए, क्या आप कह सकती हैं? कि यह आपके लिए अजनबी है," मैंने अपने बाए हाथ को उसकी गर्दन पर तब तक रखे रखा, जब तक कि मेरा दाहिने हाथ ने उसके हाँफते हुए उरोजों की गोलाइयों का माप नहीं लेने लगा।

मेरे ऐसा करने से वो मेरी तरफ घूमी और मेरी बातो का अर्थ समझने की एक निडर कोशिस करते हुए, उसके चेहरे का रंग सफ़ेद से पहले से कहीं ज्यादा गहरे सुर्ख लाल में बदल गयाl मेरी आँखे ने उसकी गहरे नीले रंग की आँखों से मुलाकात की तो उसमे एक मूक अपील नज़र आयी l लेकिन उसकी मूक अपील के जवाब मे मैंने बोलने की जगह उसे हर्षातिरेक से चूमा, और उसकी मीठी साँसों की खुशबू को में तब तक चूसता रहा, जब तक कि वह उत्तेजित हो कर कांपने नहीं लगी।

शाम होने लगी थी, मेरे हाथ उसकी खूबसूरत सुराहीदार गोरी चिकनी गर्दन को सहला रहे थे, और धीरे-धीरे नीचे की तरफ उसकी छाती की और बढ़ते हुए अपना काम कर रहे थेl आखिरकार मैंने फुसफुसाते हुए कहा, " जब मैंने आपके तीन साल पहले देखा था, उसके बाद से आप बहुत बहुत सुन्दर आकर्षक हो गयी हैं। आपके उरोज बहुत शानदार विकसित हुए हैं, डियर जेन, तुम अपने ममेरे भाई को बुरा तो नहीं मानोगी,? आपको मालूम नहीं मैं आपको कितना पसंद करता हूँ और उसके उरोजों को धीरे धीरे दबाने लगा और दुबारा उसको किस करने लगा। "

आगे क्या हुआ, ये कहानी जारी रहेगी l ।

आपका दीपक



अगला भाग रोजी, रूबी के साथ सामूहिक  सेक्स- अंतरंग हमसफ़र भाग 10
Reply

03-03-2021, 10:55 PM,
#10
RE: Intimate Partners अंतरंग हमसफ़र 10
Update 09

अंतरंग हमसफ़र भाग 10- रूबी और रोजी एक साथ.



अभी तक आपने , मेरे अंतरंग हमसफ़र 9 में पढ़ा;

मेरे ऐसा करने से वो मेरी तरफ घूमी और मेरी बातो का अर्थ समझने की एक निडर कोशिस करते हुए, उसके चेहरे का रंग सफ़ेद से पहले से कहीं ज्यादा गहरे सुर्ख लाल में बदल गयाl मेरी आँखे ने उसकी गहरे नीले रंग की आँखों से मुलाकात की तो उसमे एक मूक अपील नज़र आयी l लेकिन उसकी मूक अपील के जवाब मे मैंने बोलने की जगह उसे हर्षातिरेक से चूमा, और उसकी मीठी साँसों की खुशबू को में तब तक चूसता रहा, जब तक कि वह उत्तेजित हो कर कांपने नहीं लगी।

शाम होने लगी थी, मेरे हाथ उसकी खूबसूरत सुराहीदार गोरी चिकनी गर्दन को सहला रहे थे, और धीरे-धीरे नीचे की तरफ उसकी छाती की और बढ़ते हुए अपना काम कर रहे थेl आखिरकार मैंने फुसफुसाते हुए कहा, "जब मैंने आपके तीन साल पहले देखा था, उसके बाद से आप बहुत बहुत सुन्दर आकर्षक हो गयी हैं। आपके उरोज बहुत शानदार विकसित हुए हैं, डियर जेन, तुम अपने ममेरे भाई को बुरा तो नहीं मानोगी,? आपको मालूम नहीं मैं आपको कितना पसंद करता हूँ और उसके उरोजों को धीरे धीरे दबाने लगा और दुबारा उसको किस करने लगा। "

दोस्तों मैं दीपक आपने मेरी कहानिया झट शादी पट सुहागरात-1-4 में पढ़ा कैसे मेरी सहयोगी प्रीती एक दिन मेरे रूम में आ गयी शादी का जोड़ा लेकर l मैंने उसके साथ सुहागरात मनाई और उसके बाद मेरी और मेरे घर की देखभाल करने वाली रोजी और रूबी मिलीl प्रीती मेरी पहली चुदाई के बारे में पूछने लगी, तो मैंने उसे बताया किस तरह मैं रोज़ी और रूबी से मिला और कैसे मेरी और रोजी की पहली चुदाई हुईl उसके बाद कैसे मैंने रूबी को चोदाl हमारे गाँव के प्रवास के आखिरी दिन जंगल में हमने ग्रुप सेक्स और प्रेमिकाओ की अदला बदली का कार्यक्रम बनायाl रोजी ने हमे अपनी सहेली टीना से मिलवाया और टीना की पहली चुदाई कैसे हुईl फिर छोटे योनि के छेद वाली मोना को मैंने चोदा रात में एकबार फिर सबका एक साथ ग्रुप सेक्स हुआ और रोजी मेरे साथ शहर आ गयीl उसके बाद मेरी बुआ और उनकी तीन बेटियों लंदन से दिल्ली हमारे घर आयेlउसके बाद मेरी बुआ और उनकी तीन बेटियों लंदन से दिल्ली हमारे घर आये और मैं और मेरी बुआ की सबसे बड़ी बेटी जेन के साथ शाम के समय मैदान में घूमने गया और वहां उससे प्रेम निवेदन कियाl ( मेरे अंतरंग जीवन की हमसफ़र -)

अब आगे:-

जब में जेन को चूम रहा था तो वही एक पेड़ के झुके हुए तने पर दोनों बैठ कर चुम्बन करने लगेl जेन भी चुम्बन में मेरा साथ देने लगी थीl उसके बाद जेन ने मुझे पकड़ कर वापिस मेरे होंठो को किस कियाl और मैंने उसके सर को जकड़ के उसके मुंह से अपना मुंह लगा दियाl और वह उसके ओंठ चूसने लगा और वो मेरे ओंठ चूसने लगाl थोड़ी देर बाद वह मेरा निचला होंठ चूसने लगी और मैं उसका ऊपर का ओंठ चूसने लगा lफिर उसने अपना मुंह थोड़ा सा खोला और मेरी जीभ जेन के मुंह में चली गयीl

और जेन ने भी अपने झीभ मेरे मुँह में डाल दी मैं उसकी जीब चूसने लगा, फिर मैं जेन की झीब से खेलने लगाl वह मेरे साथ लिपट गयी, उसका बदन मेरे बदन से चिपक गयाl उसके बड़े बड़े गोल स्तन मेरी छाती में दब गए थेl हम दोनों एक दुसरे को बेकरारी से चूमने लगे और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। कम से कम 15 मिनट हम एक दुसरे के लबों को चूमते रहे, फिर रुक कर सांस लेती हुई बोली अब बस कीजिये ये बहुत हो गयाl

मैंने उसकी ओर देखा और कहा: "ठीक है। बस एक बार, और केवल एक बार! मैं चाहता हूं कि आप यह जान लें कि मैं आपसे प्यार करता हूं और मैं यह कर रहा हूं क्योंकि मैं आपसे और आपसे बहुत प्यार करता हूंl

मैंने उससे कहा कि वह अपने सिर को थोड़ा सा दाईं ओर झुकाए और बस थोड़ा सा मुंह खोले। मैंने अपने हाथ उसके चेहरे के हर तरफ रख दिए और उसे अपने पास खींचने लगा। जैसे ही हम अपने होंठों के मिलन के करीब आए, उसका पूरा शरीर हिल गया। उसी के साथ उसके संपर्क में मेरे होंठ आये , मेरे होंठ उसके होंठ की मालिश करने लगेl वह धीमी गति से और बहुत नरम चुंबन, महसूस कर रही इस युवा किशोरी के साथ होंठो का मिलान बहुत रोमांचक था। मुझे उसके होंठ इतने जवान और इतने मस्त लग रहे थे की मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं अपनी जीभ बाहर लाया और उसके साथ उसके नरम गुलाब की पंखुरियों जैसे होंठों को छुआ और जब मैंने उन्हें बाहर को सहलाया, तो उसने अपने होंठ खुले रखे। जल्द ही उसने अपनी जीभ को वापस वही काम किया। हम एक दूसरे के मुंह, बाहर चुंबन, जीभ को चूमते रहेl

भावनाओं के रोमांच , उत्तेजना के कारण हमारे बदन तप रहे थे और कई क्षणों तक वह मेरी बाहों में लगभग स्थिर थी l उसका एक हाथ मेरी जांघ पर आराम कर रहा था। मेरा लंड जाग गया था और अभिसार के लिए तैयार था, लेकिन उसने अचानक खुद को हिलाते हुए और चुम्बन तोड़ते हुए कहा, "हमें अब यहां और नहीं रुकना चाहिए, हमें तुरंत चलना चाहिए ,कही कोई हम ढूंढ़ता हुआ न आ जाए तो हमें यहाँ इन हालत में देख लेगा या देर होने पर वे कुछ संदेह करेंगे।"

"हम कब फिर से अकेले होंगे, डार्लिंग? हमें वापिस अंदर जाने से पहले उसे व्यवस्थित करना होगा,"मैंने जल्दी से कहा।

अब उसे उस पेड़ पर रोके रखना असंभव था, हमने दुबारा चलना शुरू किया l उसने कहा, "हम कल सुबह-सुबह दोपहर के भोजन से पहले टहलने जा सकते हैं, मां पापा किसी से मिलने जाने वाले हैं बॉब पुस्तक पढ़ रहा है और मुझे लगता है वह कल तक उसे समाप्त नहीं कर पायेगा टॉम बिस्तर पर ही रहता है , और मेरी बहनें सुबह TVl देखने में व्यस्त रहती हैं और मुझे कल कोई ख़ास काम नहीं है। "

मैं उसे गले लगाया और एक और चुंबन दे दिया, फिर मैंने कहा, "ये तो बहुत रमणीय हो जाएगा; प्रिय जेन...आप अत्यंत खूबसूरत होने के साथ विचारशील और समझदार भी हैं ।"

फिर वह बोली "मगर ध्यान दीजियेगा कल आपका व्यवहार संयत होl कल इतना चुम्बन नहीं होगा lनहीं तो मैं आगे से आपके साथ घूमने नहीं आऊँगी"और फिर हम वापिस घर पहुँच गए हमने चाय पि और अपने कमरे में चला गया l"

अपने कमरे में वापिस आया तो रोजी मुझसे पूछने लगी बहुत देर लग गयी आपको आप जेन के साथ lतो मैंने कहा में उसे बाग़ बगीचा दिखाने ले गया थाlतो वह शरारत भरी मुस्कराहट के साथ बोली कुछ ज्यादा ही लम्बा चक्कर लगाने चले गए या कोई और चक्कर चला रहे थे l बताइये तो क्या चक्कर है तो मैं बोला इधर आओ बताता हूँ क्या कर रहा थाl उसके साथ ll जेन के साथ हुए प्यारे चुम्बन को याद करते ही मैं फिर उत्तेजित हो गया और रोजी को पकड़ने उसके पीछे दौड़ा, तो वह बचने के लिए उपक्रम करते हुए पीछे हुई, और कमरे में दाहिने हिस्से में रखे एक मूर्ति से टकराई, तो मूर्ति घूम गयी और मेरे बिस्तर के साथ की अलमारी की साइड में एक गुप्त दरवाजा खुल गया शायद इसी गुप्त दरवाजे का जिक्र दादाजी की डायरी में था l

अब इसमें आगे क्या था l ये जानने के लिए हमारा उसके अंदर जाना जरूरी था पर दरवाजे के अंदर अँधेरा था तो रोजी बोली आप रुकिए मैं टोर्च ले कर आती हूँ तो मैंने कहा रुको मैं मोबाइल में से टोर्च जलाता हूँ lतो हमने मूर्ति को वापिस घुमाया तो दरवाजा बंद हो गया और फिर उसे दूसरी दिशा में घुमाया तो दरवाजा फिर खुल गया l पर दोनों का एक साथ अंदर जाना ठीक नहीं रहेगा मैं अंदर जाता हूँ तुम बाहर रुको अगर अंदर दरवाजा खोलने का रास्ता नहीं मिला तो तुम 5 मिनट बाद दुबारा मूर्ति हिला कर दरवाजा खोल देना l

हमने मोबाइल से टोर्च जला कर अंदर देखा तो वहां लाइट के स्विच नज़र आये उन्हें दबाया तो वहां रौशनी हो गयी और नीचे उतरने की सीढिया नज़र आयी मैं नीचे उतर गया आगे दीवार थी ।

वहां एक हैंडल भी था मैंने उसे घुमाया तो कमरे वाला दरवाजा बंद हो गया और सीढ़ियों के अंत में एक दरवाजा खुल गया मैंने उस हैंडल को उल्टा घुमाया तो कमरे का दरवाजा खुल गया और सीढ़ियों के अंत में खुला दरवाजा बंद हो गया ।

रोजी ने पुछा क्या वह आ जाए तो मुझे लगा चुकी ये एक गुप्त रास्ता है और इसका जिक्र दादाजी की डायरी में है तो सुरक्षित ही होगा मैंने कहा वह डायरी जो तुमने संभल कर रखी है वह ले कर आ जाओ तो रोजी वह डायरी ले कर आ गयी और फिर बोली इसे पढ़ेंगे कैसे शीशा तो मैं लायी नहीं l तो मैंने कहा आगे देखते हैं नहीं तो कोई शीशा ले कर आ जाना और मैंने हैंडल घुमा कर कमरे का दरवाजा बंद किया और आगे का दरवाजा खुल गया l हम उस दरवाजे के अंदर गए तो वहां एक शानदार हाल था l जिसमे बहुत सुन्दर सुन्दर लड़कियों की बहुत कामुक मुर्तिया और कामुक अंतरंग चित्र कलाकृतिया लगी हुई थी l और कमरे के अंदर एक शानदार बिस्तर जिसपर आठ से दस लोग आराम से सो सकते थे ।

किनारो पर शानदार आरामदायक सोफे लगे हुए थे l और हाल में एक बड़ा शानदार बाथरूम भी था ।

मेरे मुँह से अनायास निकला?बहुत शानदार"दादा जी भी पूरे रसिक थे ।

तभी मुझे वहां एक शीशा नज़र आया तो मैं उस पास गया तो उसके पास एक दूसरी डायरी और एक चाबी रखी हुई थी उसमे लिखा था इस कमरे में ऊपर के कमरे जैसी तीन मूतिया रखी हैं जिनको घूमाने से तीन अलग अलग रास्ते खुलेंगे l उनमे से एक से वो दरवाजा खुलेगा जिससे हम कमरे से इस तहखाने वाले हाल में आये थे l दुसरे से रास्ता पहले मुख्या भवन के हाल में खुलता है तीसरे से रास्ता से तीसरे भवन के पास खुलता है और उसी से आगे एक रास्ता मैदान के पास बड़े बरगद का पास पेड़ो के झुण्ड में खुलता हैl बड़ा बरगद उसे पेड़ के पास था जिस पेड़ के पास आज मैंने अपनी कजिन जेन को किश किया था l और चाबी ऊपर रखी अलमारी की थी ।

पूरा हॉल साउंड प्रूफ था उसमे एक बहुत बड़ी टीवी स्क्रीन लगी थी और बाकी भी सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस था l उस डायरी में ये भी लिखा था की इस हाल और मुख्या भवन से रास्ते का राज घर का ध्यान रखने वाली आशा अम्मा को भी मालूम था और वह ही इसकी सफाई और रख रखाव करती थीl उस डायरी में ये भी लिखा था के किस प्रकार से सब दरवाजो कोलॉक किया जा सकता था, जिससे कोई भी दरवाजा खोल न सके और साथ ही ये हिदायत भी थी के सुरक्षा की दृष्टि से ये राज गुप्त ही रखा जाए।

हम दोनों हाल की सब लाइट इत्यादि बंद करते हुए और डायरी में बताये गए तरीके से दरवाजे लॉक करके वापिस मेरे कमरे में आ गए ।
मैंने वापिस आ कर कमरे में देखा तो वहां ऐसी ही दो मूर्तिया और थी l एक मुख्या भवन की और एक बायीं और थी जो की एक गुप्त रास्ता था जो घर के बाहर ले जाता था मैंने दोनों को घुमाया तो दो दरवाजे खुले ।

कमरे के दायी और जो अलमारी थी नीचे जो चाबी मिली थी वो चाबी अलमारी में एक लॉकर की थी और डायरी में लिखा था की दोनों डायरी को उसी लाकर में सुरक्षित रखा जाए जब मैंने अलमारी खोल कर चाबी से लाकर खोला तो उसके अंदर एक इलेक्ट्रॉनिक लाकर था और सके पास ही एक पर्ची पर उसका पास वर्ड लिखा था और साथ ही पससवर्ड बदलने की जरूरी हिफ़ायते थी और साथ ही लिखा था के पासवर्ड बदलने के बाद चबा कर इस पर्ची को खा जाना ।

अलमारी के लाकर में कुछ नहीं था l बस केवल लक्ष्मी जी की एक मूर्ति थी l मुझे समझ नहीं आया इसके लिए इतना झमेला क्यों किया दादा जी ने तो रोजी बोली "आप उस अंदर की मूर्ति को छु कर देखिये जरूर उसमे कोई राज है"l मैंने मूर्ति के चरण छुए तो मूर्ति घूम गयी और अलमारी में एक और गुप्त रास्ता खुल गया और वह रास्ता एक और तहखाने में ले गया जहाँ पर क्या मिला उसे मैं यहाँ गोपनीय रख रहा हूँ और प्रीती को भी एकांत में संक्षेप में बता दिया था ।

दादाजी ने ये भी लिखा था इन गुप्त रास्तो के बारे में घर के सभी सदस्यों को मालूम था केवल अलमारी वाले रास्ते और तहखाने का राज उन्हें और मुझे ही मालूम थाl चुकी मैं पहले पढाई में व्यस्य था तो इन रास्तो के राज को कभी नहीं बताया गया थाl अब चुकी मैं व्यस्क भी हो गया था और मेरी स्कूल की पढाई भी पूरी हो गयी थी तो दादाजी अपने आखिरी समय में सब लिख दिया था ताकि ये राज मुझे भी ठीक समय पर मालूम हो जाए ।

तो हम वापिस कमरे में आ गए और रात का खाना खाने के बाद आपमें कमरे में वापिस आ रहा था तो रास्ते में मुझे रोजी मिली और वह बोली आज रात को रूबी भी उसके साथ सोना चाहती है l जब सब लोग रात में अपने कमरों में चले गए तो मोना चुपके से बॉब के कमरे में और टीना टॉम के कमरे में चली गयी l और आधी रात में रूबी जब मेरे कमरे में आयी तो उससे पहले रोजी और मैं टेलीविजन देख रहे हैं, लेकिन हम ऊब गए थे।

- मैंने नग्न होते हुए कहा हमें साथ में कुछ मस्ती करनी चाहिए? - मैंने रोजी से कहा।

रोजी कहती हैं - रूबी के आने में थोड़ा समय लगेगा और रोजी ने भी अपने सभी कपडे उतार डाले मैं कुछ अच्छे सेक्स का मन नहीं बनाऊँगी, वह मुस्कुराते हुए कहती है। फिर बोली रूबी ने सुझाव दिया है कि आज हम दोनों को तुम्हें चोदना चाहिए। "

रोजी द्वारा मुझे उसके और रूबी को एकसाथ चोदने के लिए कहा गया विचार पूरी तरह से आश्चर्यचकित कर गया। मैंने रोजी से पूछा कि क्या उसकी और रूबी दोनों की एकसाथ चुदाई का विचार किसी तरह का मजाक तो नहीं था । रोजी ने कहा "नहीं, यह मजाक नहीं है।"उसने कहा कि रूबी उन दोनों के साथ मेरे साथ एक थ्रीसम के बारे में बात कर रही थी। रूबी मुझे और रोजी दोनों को अपने बिस्तर पर चाहती थी, और रोजी की भी ये इच्छा थी की मैं एक ही समय में उन दोनों को चोदू।

मेरा मानना है कि लगभग हर पुरुष की दो महिलाओं के साथ थ्रीसम करने की गुप्त इच्छा होती है; मैं कोई अपवाद नहीं था और हां में जवाब देने में संकोच नहीं किया। मैं यह जानकर रोमांचित और उत्साहित दोनों था कि मैं जल्द ही वह पूरा करूंगा जो मेरी सबसे बड़ी यौन फंतासी थी। मेरे दिमाग में मैं उन सभी अलग-अलग चीजों के बारे में सोच रहा था जो मैं दो महिलाओं के साथ कर सकता था।

मैं एक पल भी संकोच नहीं करता, क्योंकि मैं हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहता हूं। तो मैं रोजी को पकड़ कर चूमता हूँ फिर हम गर्म पानी में स्नान करके खुद को तैयार करने के लिए दोनों नग्न ही बाथरूम में जाते हैं। उसे नग्न देख एक दूसरे को छूने नहलाने सहलाने और दूसरे के शरीर को चूमने से मेरा लिंग सर उठाना शुरू कर देता हैं।

हम एक दुसरे को चूमते हुए बेडरूम में जाते हैं। जब रोजी और मैंने बेडरूम में प्रवेश किया, रूबी पर रोशनी थी और वो बिस्तर पर लेती हुई थी पूरी तरह से नंगी हमारा इंतजार कर रही थी । उसने मान लिया होगा कि ऐसा कोई कारण नहीं था कि मैं इस तरह के प्रस्ताव को ठुकरा दूं। पूरे समय जब तक हम कमरे में रहे
किसी ने भी लाइट बंद करने का कोई प्रयास नहीं किया ।

मैं अपने बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और मेरी अपने ऊपरी बांह रूबी के स्तनों को दबा रही थी और फिर रोजी भी अपने शरीर को मेरे साथ लता की तरह लिपट कर दूसरी तरफ लेट गई। तो दूसरी तरफ रूबी भी मुझ से लिपट गयी मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं वास्तव में दो महिलाओं जो मुझे बहुत ज्यादा पसंद थी के नग्न शरीर के बीच नग्न और सैंडविच की तरह रहूंगा।

मैंने कहा आप दोनों ने आज मुझे एक बहुत बड़ा सरप्राइज दिया है मेरा लंड तब तक पूरा उग्र हो चूका था और पूरे ९० डिग्री पर तन गया था रूबी ने जवाब दिया, "शायद आपका मुंह ऐसा कह रहा है, लेकिन कोई और कुछ और कह रहा है कि आप कुछ और करना चाहते हैं।"ये कहते हुए उसने नीचे की और मेरे खड़े लंड को देखा।

तो रोजी ने ये जानने के लिए की रूबी किसके बारे में बात कर रही है नीचे देखा और उसने देखा कि मेरा लंड एकदम सीधा था और हम तीनों हँसने लगे, मुझे थोड़ी शर्मिंदगी हुई।

"क्या तुम उस चीज़ को नियंत्रित नहीं कर सकते,"हँसते हुए रोजी ने कहा।

"क्षमा करें, आप जानते हैं कि इसका खुद का दिमाग है। यह आप दोनों के आसपास होने से अब बिलकुल बेकाबू है।"मैंने जवाब दिया, मैं अपनी असहज भावना को छिपाने की कोशिश कर रहा था।

आगे क्या हुआ ... ये कहानी जारी रहेगी l



आपका दीपक



अगला भाग रोजी, रूबी और रोजी के साथ सामूहिक सेक्स- अंतरंग हमसफ़र भाग 11
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