Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
01-07-2021, 01:13 PM,
#11
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
हरदयाल- कुछ नहीं वही छुट्टी का रोना और पगार बढ़ाने का बोल रहा था।

कमलजीत- इन लोगों का यही इश्यू होता है। छुट्टी दे दो घर जाना है। पगार बढ़ा दो।

हरदयाल- हाँ, वो तो है। पर इतना है की रामू काफी टाइम से काम कर रहा है और सबसे बड़ी बात ईमानदार भी

कमलजीत- हाँ जी यह तो है।

रूबी- डैडीजी, राम की कितनी सेलरी है?

हरदयाल- बहू ₹8000 है?

रूबी- यह अपना घर कैसे चलाता होगा इतनी कम सेलरी में?

हरदयाल- इनकी सेलरी इतनी ही होती है। यह कौन सा डीसी लगा है नौकर ही तो है।

सभी हल्के से हँस पड़ते हैं।

हरदयाल- पर छुट्टी से आने के बाद इसकी पगार बढ़ा दूंगा। काम भी तो अच्छा करता है। इसका एक ही इश्यू है की छुट्टी पे जाने के बाद जल्दी वापिस नहीं आता।

रूबी- रामू कब से काम कर रहा है हमारे जहां?

कमलजीत- “बह, इसको 5 साल हो गये हैं। इसका चाचा करता था पहले काम। वो चला गया और इसको छोड़ गया हमारे यहां पे। तुम्हारे डैडीजी से ही इसने सारा काम सीखा। ट्रेक्टर वगेरा चलाना भी इन्होंने ही सिखाआ था इसको। अकेला काम संभाल लेता है खेतों का..."

रूबी- हाँ, वो तो मैंने देखा है। जब डैडीजी घर पे नहीं भी होते तो अकेला ही ट्रैक्टर लेकर चला जाता है खेतों में। चुपचाप काम करता है और कभी मैंने इसको फालतू में बातें करते नहीं देखा।

कमलजीत- हाँ बहु। सबसे बड़ी बात है इस्पे विश्वाश है। वरना अकेले नौकरों पे विश्वाश नहीं हो पता। कई बार तो खाद वगेरा लानी हो मार्केट से तो तुम्हारे डैडी इसको ही पैसे दे देते हैं लाने के लिए और इसने कभी पैसों में घपला नहीं किया।

रूबी- फिर तो थोड़ी सी सेलरी बढ़ा देनी चाहिए और छुट्टी भी दे देनी चाहिए। इसका तो हक बनता है।

हरदयाल- हाँ बहू ये तो इसका हक है। पहले इसकी छुट्टी का देखता हूँ कब की बनती है।

तीनों बातें करते रहते हैं, और घर की सफाई करने वाली सीमा आ जाती है और हाथ में झाडू पकड़कर सफाई करने लग जाती है।

इधर रूबी हरदयाल का खाना लगा दे देती है, और हरदयाल खाना खाने लग जाता है। खाना खाने के बाद हरदयाल हाथ धोता है और राम को आवाज लगाकर खाने लेने के लिए बोलता है। राम किचेन के बाहर खड़ा हो जाता है हाथ में प्लेट लिए और रूबी एक ही बार में 5 चपाती और दाल पलेट में परोस देती है और राम घर के बाहर बने अपने कमरे में आकर खाना खाने लगता है।

इधर रूबी सीमा से घर की सफाई करवाने लग जाती है। सारे कमरों में सफाई करवाने के बाद रूबी और कमलजीत खाना खाने लगते हैं। हरदयाल और रामू खेतों में चले जाते हैं। इधर कामवाली भी सफाई करने के बाद चली जाती है। खाना खाने के बाद रूबी अखबार में बिजी हो जाती है, और धूप बढ़ने का इंतजार करती है। कुछ देर बाद अपना बाथरूम का गीजेर चालू कर देती है और फिर से अखबार पढ़ने लग जाती है।

इतनी ठंड में रूबी धूप बढ़ने पे ही नहाती थी, क्योंकी नहाने के बाद वो कमलजीत के साथ घर के पीछे बने पार्क में चारपाई और कुस ने धूप में बैठकर काम और बातें करती थी। पंद्रह मिनट अखबार पढ़ने के बाद रूबी अपने कमरे में बने बाथरूम में आ जाती है और पानी चेक करती है, जो की काफी गरम हो गया था।
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01-07-2021, 01:13 PM,
#12
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
इतनी ठंड में रूबी धूप बढ़ने पे ही नहाती थी, क्योंकी नहाने के बाद वो कमलजीत के साथ घर के पीछे बने पार्क में चारपाई और कुस ने धूप में बैठकर काम और बातें करती थी। पंद्रह मिनट अखबार पढ़ने के बाद रूबी अपने कमरे में बने बाथरूम में आ जाती है और पानी चेक करती है, जो की काफी गरम हो गया था।

रूबी तौलिया लेकर वापिस बाथरूम में आ जाती है और बाथरूम का दरवाजा बंद कर लरती है। बाथरूम में लगे बड़े से शीशे में अपने आपको निहारने लगती है। क्या खूबसूरत थी वो। स्वर्ग की अप्सराओं को भी मात दे सकती थी उसकी खूबसूरती। इतना सोचते ही वो खुद से ही शर्मा गई और मुश्कुरा दी। अब उसने धीरे से अपने बालों को खुला छोड़ दिया और कमीज को उतारने लगी। अभी वो ब्रा और सलवार में थी और शीशे में फिर से अपने उभारों को देखने लगी। ब्लैक ब्रा में गोरे सुडौल उभार कहर ढा रहे थे। ब्रा में कैद अपने उभारों को देखकर रूबी को अपने ऊपर गर्व महसूस होता है। धीरे-धीरे अपने हाथ पीठ के पीछे लेजाकर अपनी ब्रा के हक खोल देती है। अब ब्रा सिर्फ कंधों के सहारे ही टिकी थी। धीरे से अपने हाथ ऊपर को लेजाकर रूबी ने अपने उभारों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया। भरे-भरे गोरे उभार और ऊपर ब्राउन निपल किसी भी मर्द को दीवाना बना सकते थे।

लखविंदर भी तो इनका दीवाना था। लखविंदर ने तो इनको पूरा चूसा था। यह सोचते-सोचते रूबी के दोनों हाथ उभारों के ऊपर आ गये और उभारों का जायजा लेने लगे। अपने उभारों की गोलाईयों का जायजा लेते-लेते रूबी ने अपने आपको को शीशे में निहारा। खुले बाल, गोरा जिश्म, नंगे उभार, रूबी की खूबसूरती को चार चाँद लगा रहे थे। अपनी खूबसूरती पे उसे गर्व महसूस हुआ।

अब उसने अपनी सलवार भी ढीली कर दी और सलवार ने ब्रा को फर्श पे जाय्न कर लिया। अब रूबी सिर्फ ब्लैक कलर की पैंटी में थी। क्या गदराया शरीर था रूबी का। काले रंग की पैंटी मानो जैसे रूबी की खूबसूरती को। उसकी अपनी ही नजर से बचा रही थी। अब रूबी ने नल को खुला छोड़ा और गरम पानी से टब को भरने लगी। रूबी ने हाथ लगाकर देखा तो पानी काफी गरम था तो रूबी ने साथ वाले ठंडे पानी के नल को भी खुला छोड़ दिया। इधर पानी भरने लगा, उधर रूबी ने अपनी काले रंग की पैंटी भी उतार दी। पैंटी के अंदर जहां पे चूत का महाना टच होता है वहां पे सफेद रंग का दाग था। रूबी ने कल रात के सूखे अपने रस के दाग को देखा तो हल्का सा मुश्कुरा दी।

रूबी ने पैंटी को अपनी नाक के पास लेकर सूंघा तो पैंटी से रूबी की चूत की खुश्बू आ रही थी। रूबी ने आँखें बंद कर ली और कछ देर पैंटी को ऐसे ही पकड़कर सँघा। आँखें बंद किए-किए उसे प्रीति और हरजीत की चुदाई याद आ गई। प्रीति का सिसकियां लेना उसे अभी भी याद था। यह सब सोचते-सोचते उसके हाथ अपने उभारों को सहलाने लगे और वो सोचने लगी- "प्रीति कितनी किश्मत वाली है जो उसका पति उसके साथ है..."

सहलाने-सहलाते रूबी अपने उभारों को दबाने लगी थी। उसने अपनी दोनों हाथों की उंगलियों से अपने उभारों की ब्राउन निपलों को दबाया। ऐसा करने से अंदर करेंट सा लगा। धीरे-धीरे उसके हाथ तेज चलने लगे और उभारों पे दबाब भी बढ़ गया। नीचे उसकी चूत भी गीली हो गई थी। उसने एक हाथ से अपनी उंगली को चूत में डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगी। रूबी मदहोश होती जा रही थी। अब वो नीचे फर्श पे लेट गई और उंगली की रफ़्तार बढ़ा दी और सिसकियां लेने लगी।

अंदर-बाहर होने से उसकी दोनों उंगलियां चूत के पानी से गीली हो गई थीं। उंगलियों की स्पीड अब और तेज हो गई थी और रूबी के शरीर में अकड़न आ गई थी। थोड़ी देर में उसका रस निकल गया और रूबी का शरीर ढीला पड़ गया।

कुछ देर बाद सांसें नार्मल होने के बाद रूबी खड़ी हो गई और फिर से अपने आपको शीशे में देखा और सोचने लगी- “क्या फायदा ऐसी खूबसूरती का, जिसे भोगने वाला ही उसके पास ना हो। इतना गदराया जिश्म सुडौल जांघे, कोई भी इन पे फिदा हो सकता था। पर इन सबका क्या फायदा? जब इस फूल का रस पीने वाला भँवरा ना हो। प्रीति कितनी लकी सै, उसे भोगने वाला उसके साथ है..." यह सब सोचते-सोचते उसे याद आया टब में पानी भर गया था और बाहर गिर रहा था।
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01-07-2021, 01:13 PM,
#13
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
कुछ देर बाद सांसें नार्मल होने के बाद रूबी खड़ी हो गई और फिर से अपने आपको शीशे में देखा और सोचने लगी- “क्या फायदा ऐसी खूबसूरती का, जिसे भोगने वाला ही उसके पास ना हो। इतना गदराया जिश्म सुडौल जांघे, कोई भी इन पे फिदा हो सकता था। पर इन सबका क्या फायदा? जब इस फूल का रस पीने वाला भँवरा ना हो। प्रीति कितनी लकी सै, उसे भोगने वाला उसके साथ है..." यह सब सोचते-सोचते उसे याद आया टब में पानी भर गया था और बाहर गिर रहा था।

उसने अपने आपको संभाला और नहाने लगी। कुछ देर नहाने के बाद अपनी पैंटी और ब्रा धोई और अपने आपको तौलिया से साफ करके कपड़े पहन लिए और बाथरूम से बाहर आ गई।

दोपहर के टाइम था रूबी अपनी सासू माँ के साथ घर के पिछवाड़े में बनाए पार्क में बैठकर धूप का आनंद ले रही थी और साथ-साथ सास बहू सब्जी वगेरा भी काट रही थी। रूबी का दिल अपने मायके जाने को कर रहा था। उसने पहले भी बात की थी और आज फिर से पूछ रही थी।

रूबी- मम्मीजी मेरा मायके जाने को दिल कर रहा है। काफी टाइम हो गया गये

कमलजीत- चले जाना बेटा, मैंने कब रोका है।

रूबी- पर मम्मीजी आप लास्ट टाइम बोल रहे थे के अभी रुक जा?

कमलजीत- अरे मैंने तो इसलिए बोला था की सीमा ने बोला था कीउसको छुट्टी चाहिए कुछ दिन। अगर वो चली गई तो घर में काम बढ़ जाएगा। मेरे से अकेले कहाँ होने वाला काम।

रूबी- मम्मीजी, वो कब जा रही है छुट्टी पे?

कमलजीत- पता नहीं। उसने बात नहीं रा। वैसे भी इस सनडे को पड़ोस के घर में फंक्सन है। प्रीति आने वाली है फंक्सन में उसके बाद देख लेना। तुम दोनों फंक्सन भी साथ-साथ देख लोगी।

रूबी- ओहह... प्रीति आ रही है क्या? उसने मुझे नहीं बताया।

कमलजीत- अरे उसकी सहेली की शादी है वो क्यों नहीं आएगी?

रूबी- ठीक है उसके बाद चली जाऊँगी। पहले तो मैं प्रीति को पूछती हूँ की मुझे क्यों नहीं बताया उसने इसके बारे में?

कमलजीत- हाँ।

कमलजीत कुछ काम के लिए घर के अंदर आ गई। और रूबी ने फोन प्रीति को लगा लिया और पार्क में टहलते टहलते बातें करनी लगी। बातें करते-करते उसकी नजर ट्यूबवेल की तरफ पड़ी। वहां पे रामू नहा रहा था। रामू सिर्फ अपनी अंडरवेर में था। रूबी उसकी तरफ देखती रह गई। रामू का जिश्म फिट था। सुडौल बाहें चौड़ी छाती। रूबी का ध्यान भटक गया। प्रीति अपनी बातें करती रही, पर रूबी का ध्यान राम के सुडौल जिश्म पे अटक गया था। कुछ देर बाद।

प्रीति- हेलो हेलो... भाभी क्या हुआ? आप वहां पे हो?

रूबी को अचानक प्रीति की आवाज अपने कान में सुनाई दी। रूबी बोली- “हाँ हाँ सुन रही हूँ.."

प्रीति- कहा सुन रही हो भाभी? मैं कब से बोले जा रही हूँ और आप कुछ बोल ही नहीं रहे।

रूबी- अरे मैं सुन रही थी, पर नेटवर्क में कुछ इश्यू आ गया था।

प्रीति- ओके।

रूबी- तो तेरा फाइनल है सनडे आने का?

प्रीति- हाँ पक्का।

रूबी ने अब प्रीति को बातों में उलझा लिया था की वो बातें करते-करते राम को देख सके, और किसी को कोई शक ना हो।

रूबी- ओके और सुनाओ क्या चल रहा है?

प्रीति- “कुछ खास नहीं भाभी, बस वही रूटीन..." और प्रीति जो के बातें ज्यादा करती थी अपनी बातें सुनाने लगी।
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01-07-2021, 01:13 PM,
#14
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
इधर रूबी की आँखें राम के शरीर को निहार रही थी। दोपहर के टाइम काला शरीर चमक रहा था। रूबी का ध्यान रामू की अंडरवेर की तरफ गया तो गीली अंडरवेर में उसके लण्ड की आउट-लाइन नजर आ रही थी। रूबी को धूप में बातें करते-करते पशीना आने लगा।

इधर कमलजीत वापिस आ गई और रूबी और प्रीति की बातें भी खतम हो गई। सास बह फिर से बातें करने लगे। पर रूबी का ध्यान वापिस राम की तरफ ही जा रहा था, और कमलजीत इससे बेखबर थी। आज पहली बार रूबी ने राम को नहाते और सिर्फ अपने अंडरवेर में देखा था। वो तो बस देखती ही रह गई थी। बातें वो कमलजीत के साथ कर रही थी पर उसका ध्यान राम की तरफ था।

राम के नहाने के बाद भी रूबी के माइंड में बार-बार राम के नहाने का दृश्य रूबी के दिमाग में आ रहा था। क्या सुडौल शरीर था राम का। लखविंदर का तो इतना सुडौल नहीं था, थोड़ा सा ढीला और पतला सा था। उस दिन पूरा दिन रूबी रामू के बारे में सोचती रही। उसके शरीर ने पता नहीं क्या जादू कर दिया था रूबी के दिमाग पे। यह सब रामू की तरफ आकर्षण था या फिर उसके पति की कमी के एहसास के कारण था, उसे नहीं पता था।

उस दिन के बाद रूबी राम की तरफ अलग सी नजर से देखने लगी और उसे नोट करने लगी। इससे पहले उसने कभी रामू की तरफ ध्यान ही नहीं दिया था। शायद रूबी के जिश्म की भूख ही उसे अपनी मंजिल की तरफ लेकर जा रही थी। उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। अब उसके लिए अकेले काली ठंडी रातें काटना मुश्किल हो रहा था। रामू के नंगे बदन ने पता नहीं रूबी पे क्या जादू किया था की वो अपनी अंदर की औरत को अपनी जिंदगी एंजाय करने के लिए सोचने पे मजबूर करने लगी थी। उसने एक-दो बार राम के बारे में सोचते हए अपनी चूत की आग भी ठंडी कर ली थी।

कुछ दिन बाद प्रीति अपने मायके आई और रूबी का ध्यान रामू की तरफ से थोड़ा सा भटक गया। रूबी और प्रीति ने उस दिन काफी एंजाय किया। दोनों ने फंक्सन का पूरा लुत्फ उठाया। पूरा दिन एंजाय करने के बाद दोनों काफी थक गई थी। रात को फंक्सन से आने के बाद दोनों ने चेंज किया और फिर कुछ देर बातें की। हरदयाल और कमलजीत भी उनसे बात कर रहे थे। कछ देर बातें करने के बाद रूबी उठी और चलने लगी।

तभी कमलजीत ने उससे बोला- "बहू कहा जा रही हो?"

रूबी- कुछ नहीं मम्मीजी बस थक गई हूँ। नींद आ रही है।

प्रीति- हाँ थक तो मैं भी गई हूँ।
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01-07-2021, 01:14 PM,
#15
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
कुछ दिन बाद प्रीति अपने मायके आई और रूबी का ध्यान रामू की तरफ से थोड़ा सा भटक गया। रूबी और प्रीति ने उस दिन काफी एंजाय किया। दोनों ने फंक्सन का पूरा लुत्फ उठाया। पूरा दिन एंजाय करने के बाद दोनों काफी थक गई थी। रात को फंक्सन से आने के बाद दोनों ने चेंज किया और फिर कुछ देर बातें की। हरदयाल और कमलजीत भी उनसे बात कर रहे थे। कछ देर बातें करने के बाद रूबी उठी और चलने लगी।

तभी कमलजीत ने उससे बोला- "बहू कहा जा रही हो?"

रूबी- कुछ नहीं मम्मीजी बस थक गई हूँ। नींद आ रही है।

प्रीति- हाँ थक तो मैं भी गई हैं।

रूबी- मैं तो सोने जा रही हैं।

प्रीति- ठीक है मैं भी आपके साथ ही सोऊंगी आज।

रूबी- “ठीक है आ जाना..." रूबी इतना कहर चली गई और अपने बेड पे लेट गई।

एक-दो मिनट बाद प्रीति आई और दरवाजा बंद करके रूबी के कम्बल में आ गई।

रूबी- अरे तुम्हारा कम्बल वो है, मेरा क्यों ले रही हो?

प्रीति- अरे भाभी आपने कम्बल गरम कर दिया है और मुझे करना पड़ेगा। थोड़ी देर में चेंज कर लूंगी।

रूबी- अच्छा जी।

प्रीति- अरे भाभी इतनी ठंड में अकेले काफी ठंड लगेगी।

रूबी- तो क्या हुआ, मैं भी तो अकेली ही सोती हूँ।

प्रीति- अरे भाभी आपकी तो मजबूरी है, भईया जो नहीं है यहां पे। अगर भईया यहां पे होते तो कहां आपको अकेला छोड़ते।

रूबी- “धत्...”

प्रीति- और नहीं तो क्या? भाभी आप इतनी खूबसूरत हो, आपको कैसे कोई अकेला छोड़ सकता है।

रूबी- तुम्हारे भईया ने छोड़ा तो है।

प्रीति- सही बात है। इतनी खूबसूरत भाभी है और भईया को पैसे कमाने की पड़ी है। अब मुझे देख लो हरजीत कभी भी मुझे अकेला नहीं छोड़ते।

रूबी- अच्छा ।

प्रीति- और नहीं तो क्या? जब भी मैं यहां पे आती हैं तो पीछे फोन करते रहते हैं की जल्दी आ जाओ, मेरा दिल नहीं लग रहा। इनका तो मेरे से कभी मन ही नहीं भरता।

रूबी- इतनी खूबसूरत बीवी के बिना हरजीत कैसे रह सकता है?

प्रीति- हाँ वो तो है। मेरे बिना नहीं रह पाते यह तो। और एक औरत को चाहिए भी क्या? जब उसका पति उसे पूरा टाइम देता हो और हर पल खुश रखता हो।

प्रीति की इस बात का रूबी के पास जवाब नहीं था और वो चुप हो गई। प्रीति ने रूबी की तरफ देखा और दोनों की नजरें टकराई और रूबी ने अपनी आँखें नीचे कर ली।

प्रीति- क्या हुआ भाभी?

रूबी- कुछ नहीं।

प्रीति ने अपने हाथ को रूबी की ठोड़ी पे रखकर उसके चेहरे को ऊपर किया। पर रूबी नजरें चुरा रही थी। प्रीति ने कहा- “क्या हुआ भाभी? भईया की याद आ रही है?"

रूबी- रूबी ने हल्का सा सिर हिलाया।

प्रीति- ओहह... मेरी स्वीट भाभी उदास मत हो। आप हमेशा मश्कराते अच्छे लगते हो। अगली बार जब भईया आएंगे तो मैं उनकी क्लास लूंगी।

दोनों हँस पड़ी और उसके बाद फिर से शांति हो गई रूम में। रूबी अपने दिल का र्दछपाने की कोशिश कर रही थी और सोच रही थी की प्रीति कितनी किश्मत वाली है, जो उसे पति का पूरा सुख मिल रहा है।

उधर प्रीति लगातार रूबी के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी और सोच रही थी- “भाभी बाला की खूबसूरत हैं, पर भईया के लिए कितना तड़प रही हैं। इतनी खूबसूरत औरत कैसे अपने आदमी की बिना रातें काटती होगी?" उसे रूबी पे तरस अगया और उसने रूबी को अपनी बाहों में प्यार से भर लिया।
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01-07-2021, 01:14 PM,
#16
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
उधर प्रीति लगातार रूबी के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी और सोच रही थी- “भाभी बाला की खूबसूरत हैं, पर भईया के लिए कितना तड़प रही हैं। इतनी खूबसूरत औरत कैसे अपने आदमी की बिना रातें काटती होगी?" उसे रूबी पे तरस अगया और उसने रूबी को अपनी बाहों में प्यार से भर लिया।
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रूबी- क्या हुआ?

प्रीति- कुछ नहीं भाभी। आप बहुत अच्छी हो। दिल कर रहा है की आपको को किस कर लूँ।

रूबी- अच्छा जी।

प्रीति- “सच में भाभी.” और यह कहते हुए प्रीति ने रूबी के गाल पे किस कर लिया।

प्रीति ने कभी भी ऐसा नहीं किया था रूबी के साथ, इसलिए रूबी थोड़ा सा शर्मा गई। प्रीति ने इसके बाद रूबी की कमर को अपनी बाहों में ले लिया और दोनों ऐसे ही लेटे रहे।

प्रीति का चेहरा रूबी के गर्दन के पास था। रूबी को प्रीति की गरम सांसें अपनी गर्दन पे महसूस हो रही थी। कुछ देर ऐसा रहने के बाद अचानक रूबी को अपनी कमर पे प्रीति के हाथ फिराने का एहसास हुआ। रूबी समझने की
कोशिश ही कर रही थी की प्रीति का हाथ उसके चूतरों की गोलाईयों का जायजा लेने लगा। प्रीति के इस वार को रूबी संभाल नहीं पाई, और अपनी आँखें बंद किए प्रीति के हाथ के फिराने का एहसास करने लगी। अभी रूबी अपने अंदर की औरत से लड़ ही रही थी की तभी प्रीति ने चुप्पी तोड़ी।

प्रीति- भाभी एक बात पुडूं?

रूबी आँखें बंद किए हुए- “हाँ.."

प्रीति- लास्ट टाइम कब किया था?

रूबी- क्या?

प्रीति- सेक्स।

रूबी यह सुनकर चकित हो गई। इससे पहले कभी प्रीति और रूबी में ऐसी बात नहीं हुई थी, और आज अचानक प्रीति ने उससे सीधा सवाल पूछ लिया था। रूबी चुप रही।

प्रीति- बताओ ना भाभी। लास्ट टाइम कब किया था सेक्स? भइया के साथ ही किया था?

रूबी- हाँ।

प्रीति- वो तो काफी टाइम पहले हुआ होगा। उसके बाद?

रूबी- उसके बाद?

प्रीति- उसके बाद नहीं किया।

रूबी- उसके बाद लखविंदर था नहीं।

प्रीति- तो?

रूबी- तो क्या?

प्रीति- मेरा मतलब किसी और मर्द से।
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01-07-2021, 01:14 PM,
#17
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी- क्या बात कर रही हो प्रीति? ऐसा हो सकता है क्या? हमारे समाज में यह सब अलोड नहीं है।

प्रीति- हाँ... वो तो है। पर दिल तो करता ही है ना। एक औरत के लिए मर्द का साथ सबसे आनंददाई होता है। आप इतनी अच्छी हो, खूबसूरत हो तो आपके ऊपर गाँव के काफी लड़के मरते भी होंगे।

रूबी- “पता नहीं? मैंने कभी सोचा नहीं." और यह कहने के बाद रूबी चुप हो गई।

कछ देर ऐसे ही रूबी और प्रीति बिना आपस में बात किए पड़े रहे। प्रीति सोच रही थी की भाभी जिश्म की भूख में तड़प रही है पर इस समाज की बंदिशों के कारण वो अपने औरत होने का सुख अच्छे से नहीं ले पा रही है। काफी देर वो रूबी के चेहरे को देखती रही।

रूबी अपनी आँखें बंद किए सोने की कोशिश कर रही थी। मासूम सा चेहरा रूबी का प्रीति को बहुत अच्छा लग रहा था। अचानक प्रीति ने अपने होंठ रूबी के होंठों पे रख दिए और अपने हाथ से रूबी के चूतरों को सहलाने लगी। प्रीति के इस हमले से रूबी चकित हो गई पर उसने पीछे हटने की कोशिश नहीं की। प्रीति ने हल्का-हल्का रूबी के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उधर रूबी जो की अंदर से सेक्स के लिए तड़प रही थी, बिल्कुल भी पीछे नहीं हटी और प्रीति को होंठ चूसने दिए।

कम्बल में गर्मी बढ़ने लगी थी। प्रीति ने सोच लिया था की वो आज अपनी भाभी की अंदर की आग को कम से कम आज की रात तो शांत करेगी। ताकी उसकी प्यारी भाभी आज सुख की नींद सो सके। प्रीति ने अपना हाथ रूबी के चूतरों से हटा लिया और उसे रूबी की नाइटी में लेजाकर उसके बायें मम्मे को पकड़ लिया और धीरे-धीरे दबाने लगी।

प्रीति के इस हमले से अंदर की आग से लड़ रही रूबी ने एकदम सरेंडर कर दिया, और अपने आपको प्रीति को समर्पित कर दिया और आनंद की लहरों में खोने लगी। प्रीति अपने होंठों से रूबी के होंठों का रसपान कर रही थी और हाथ से रूबी के बायें मम्मे को दबा भी रही थी। अब यह बात तो दोनों के सामने खुल गई थी की आज रात ननद और भाभी के जिस्मानी संबन्ध बनेंगे, तो प्रीति ने कम्बल को एक साइड में फेंक दिया और दुबारा से रूबी के होंठों पे टूट पड़ी। रूबी ने भी आगे बढ़कर उसका साथ दिया।
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01-07-2021, 01:14 PM,
#18
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी और प्रीति दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने में मदहोश थी। प्रीति ने रूबी के बदन से नाइटी को उतार दिया और अब रूबी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। इधर प्रीति फिर से उसके होंठों का रस पीने लगी। जिश्म की भूख में तड़प रही रूबी उसका पूरा साथ दे रही थी। अब प्रीति ने अपने एक हाथ को रूबी की ब्रा के अंदर घुसा दिया, और उसके निपल के साथ खेलने लगी। रूबी के अंदर एक करेंट सा लगा और अपनी आँख बंद किए प्रीति के हाथ के घूमने का मजा लेने लगी। प्रीति ने रूबी के होंठों का रस पीते-पीते उसकी ब्रा का हक खोल दिया और ब्रा को एक साइड फेंक दिया, और उसकी चूचियों को अपने हाथों में पकड़कर मसलने लगी। अब धीरे धीरे प्रीति अपने होंठों को रूबी की गर्दन के पास ले गई और रूबी की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया।

रूबी आँखें बंद किये मदहोशी में खोती जा रही थी। प्रीति ने अपनी थूक से गर्दन गीली कर दी थी। अब उसने गर्दन को चूमना छोड़ दिया और रूबी के नंगे उभारों को देखने लगी। गोरे रंग के उभार और ऊपर ब्राउन कलर की निपल कमरे की धीमी लाइट में भी चमक रहे थे। कुछ देर ऐसे ही निहारने के बाद उसकी नजरें रूबी की नजरों से टकराई, तो रूबी ने शर्माकर आँखें बंद कर ली और हल्का सा मुश्कुरा दी। प्रीति अपनी भाभी को मुश्कुराते देखकर खुश थी। उसने आगे बढ़कर रूबी के एक उभार के निपल को अपने दाँतों में लेकर हल्का सा काट लिया। रूबी के बदन में मानो चींटियां रेंगने लगी।

प्रीति ने निपल को चाटा और उभार को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। इससे रूबी के अंदर की आग और भड़क गई थी। उसकी सांसें फूलने लगी थी। प्रीति जितना हो सकता था रूबी के उभार को अपने होंठों में भरकर चूस रही थी। प्रीति के उभार को चाटने और चूसने से रूबी अपने आप पे कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। कुछ देर बाद प्रीति ने दूसरे उभार की तरफ ध्यान दिया और पहले वाले को छोड़ दिया। चूसा हुआ उभार प्रीति के थूक से चमक रहा था।

अब प्रीति ने दूसरे उभार को चूसना शुरू कर दिया और अपने हाथ से पहले वाले उभार को मसलने लगी। रूबी काम की अग्नि में जल रही थी और अपने उभारों को ऊपर को और उठाकर चुसवाने लगी थी। नीचे रूबी की चूत गीली हो गई थी। वो अपना हाथ प्रीति के सिर के पीछे लेजकर अपने उभारों की तरफ दबाने लगी। कुछ देर रूबी के उभारों को चूसने के बाद प्रीति ने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया। उसके बाद प्रीति उठी और रूबी की पैंटी में हाथ डाल दिया और चूत की बाहरी दीवारों के साथ खेलने लगी। रूबी प्रीति के इस वार को सहन नहीं कर पाई और अपने चूतरों को प्रीति की उंगलियों की मूव्मेंट के साथ-साथ घुमाने लगी और सिसकियां लेने लगी। उसकी हालत पतली हो रही थी।

प्रीति- भाभी कैसा महसूस हो रहा है?

रूबी- बहुत मजा आ रहा है। उफफ्फ... उम्म्म... तुमने क्या जादू कर दिया है प्रीती?

प्रीति- भाभी आप बहुत खूबसूरत हो। आज मैं आपकी चूत की आग को ठंडी करूंगी।

रूबी- “हाँ। क्यों तड़पा रही हो... उफफ्फ.."

प्रीति ने अब अपनी एक उंगली को रूबी की गीली चूत में धकेल दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगी। रूबी पूरे मजे में अपनी आँखें बंद किये धीरे-धीरे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी। प्रीति ने देखा की रूबी पर उसका पूरा कंट्रोल है। उसकी प्यारी भाभी अपनी कमर को हिला-हिलाकर उसकी उंगली ले रही थी। प्रीति ने देखा रूबी उसके कंट्रोल में है तो उसने अच्छा मौका देखकर उससे पूछा।

प्रीति- भाभी एक बात पुडूं, बुरा तो नहीं मानोगी?

रूबी- तुम्हारी किसी बात काआ आज तक्क आहह... बुरा माना है मैंने? हम दोनों अच्छी सहेलियां भी तो हैं। पूछ लो उफफ्फ..."

प्रीति- भाभी आपका भईया के इलावा किसी और से सेक्स करने का मन नहीं किया?

रूबी चुप रही और कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद प्रीति की एक और उंगली पहली वाली का साथ रूबी की चूत का पानी निकालने में देने लगी। प्रीति को एहसास हुआ की रूबी की चूत ज्यादा सेक्स ना करने के कारण काफी टाइट है। कुछ देर बाद प्रीति ने फिर से पूछा।

प्रीति- बताओ ना भाभी?
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01-07-2021, 01:14 PM,
#19
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
रूबी ने कुछ नहीं बोला, बस सिसकियां लेती रही। प्रीति ने अब अपनी उंगलियों की रफ्तार तेज कर दी। रूबी ने अपने हाथों से बेडशीट को पकड़ लिया। उसे लगा की वो झड़ने की कगार पे पहुँचने वाली है। तभी प्रीति ने उंगलियों को चूत के अंदर-बाहर करना बंद कर दिया। रूबी ने आँखें खोली और देखा की प्रीति उसकी तरफ ही देख रही थी। रूबी ने फिर से आँखें बंद कर ली और प्रीति को दुबारा करने के लिए बोला।

प्रीति- भाभी मैं आपको शांत कर दूंगी। पर पहले मेरी बात का जवाब दो। इतनी खूबसूरत औरत कैसे बिना चुदवाए रह सकती है?

रूबी को हार माननी पड़ी, और बोली- “अब मर्द घर पे ना हो तो मजबूरी में दिन ऐसे ही काटने पड़ते हैं।

प्रीति- भाभी प्लीज... सच में बताओ की आपका कभी दिल नहीं किया किसी के साथ संबंध बनाना को?

रूबी- तुम यह सब क्यों पूछ रही हो? मेरी अंदर की आग को ठंडा करो।

प्रीति- भाभी मैं इसलिए पूछ रही हूँ, क्योंकी मुझसे आपका ऐसे अंदर ही अंदर घुटकर जीना अच्छा नहीं लग रहा। सेक्स इंपार्टेट पार्ट है लाइफ का, और आप इससे वंचित हो।

रूबी हल्का सा मुश्कुराई और बोली- “तो क्या करूं?”

प्रीति- कुछ नहीं। मैं तो वैसे ही बोल रही थी।

रूबी- तो अब खतम करो खेल को। मेरी जान क्यों तंग कर रही हो?

प्रीति- पहले बताओ कभी गाँव के लड़कों ने आपको ऐसी नजर से देखा है?

रूबी- “यार तुम्हें क्यों लगता है की सिर्फ मुझे देखेंगे ओह्ह.."

प्रीति- वो इसलिए भाभीजी की इतनी खूबूरत औरत बिना मर्द के हो तो आस-पास के मर्द उसे पटाने की कोशिश तो जरूर करेंगे।

रूबी की हँसी निकल पड़ी।

प्रीति- बताओ ना भाभी। कभी आपको लगा है के कोई आस-पास का लड़का आपको देखता हो।

रूबी- ऐसे तो सभी लड़के होते हैं। लड़की देखी नहीं और मुँह में पानी आ जाता है।

प्रीति- आपको देखकर तो आएगा ही, किसे के भी मुँह में पानी। इतनी सेक्सी फिगर वाली औरत जो भोगने को मिलेगी।

रूबी भोगने वाला शब्द सुनकर शर्मा गई।

प्रीति- बताओ ना भाभी किसी ने गाँव में कोशिश नहीं की आपको पटाने की?

रूबी- तुम बहुत जिद्दी हो। मुझे बीच भंवर में छोड़ दिया। कम से कम मंजिल तक तो पहुँचा देती।

प्रीति- हाँ मैं जिद्दी हूँ। पहले बताओ तो मैं आगे बढंगी।
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01-07-2021, 01:14 PM,
#20
RE: Kamukta Story प्यास बुझाई नौकर से
प्रीति- बताओ ना भाभी किसी ने गाँव में कोशिश नहीं की आपको पटाने की?

रूबी- तुम बहुत जिद्दी हो। मुझे बीच भंवर में छोड़ दिया। कम से कम मंजिल तक तो पहुँचा देती।

प्रीति- हाँ मैं जिद्दी हूँ। पहले बताओ तो मैं आगे बढंगी।

रूबी कुछ देर चुप रही और फिर बोली- “हाँ... वैसे तो गाँव के काफी लड़के हैं जो मुझे देखते हैं। पर मैंने कभी उनको घास नहीं डाला। पड़ोस वाला निखिल भी है और भी काफी हैं। लेकिन मैं इंटेरेस्ट नहीं लेती।

प्रीति- आपने कभी उनके बारे में सोच-सोचकर उंगली नहीं डाली चूत में?

रूबी- किया है बाबा... अब कर डालो।

प्रीति- तो रियल लाइफ में क्यों नहीं सोचा?

रूबी- "तुम कैसी ननद हो जो अपनी भाभी को किसी गैर मर्द की बाहों में देखना चाहती हो?" अब रूबी बेचारी उसे क्या बताती की उसके दिल में रामू के लिए कुछ फीलिंग्स आ रही हैं कुछ दिन से। क्या पता उसके बताने से प्रीति को अच्छा ना लगता की उसकी भाभी उसके भाई को धोखा दे सकती है।

प्रीति- अरे नहीं भाभी शारीरिक सुख का हक सबको है। मैं तो सिर्फ यह कहना चाहती हूँ के अगर कभी आपको इस टापिक पे बात करनी हुई तो आप मेरे साथ कर सकते हो।

रूबी- कौन सा टापिक?

प्रीति- अगर आप किसी मर्द में इंट्रेस्टेड हुए। मेरा मतलब किसी मर्द की तरफ आकर्षित हुए तो मुझे बता देना।

रूबी- “धत्... बेशर्म कहीं की..." और इसके बाद कमरे में शांति फैल गई।

प्रीति ने अपना चेहरा रूबी के चेहरे के पास लेजाकर पूछा- “भाभी आपको पहली बार किसने भोगा था?

रूबी- तुम्हारे भईया ने।

प्रीति मुश्कुरा दी और अपने गुलाबी होंठ रूबी के गुलाबी होंठों पे रख दिए।

रूबी भी प्रीति के होंठों का पूरा रसपान कर रही थी। प्रीति ने कुछ देर रूबी के होंठ चूमने के बाद अपनी नाइटी खोल दी और साथ में ही अपनी ब्रा भी खोलकर फेंक दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। अब उसने रूबी की पैंटी को उतार दिया और रूबी अब पूरी तरह नंगी प्रीति के सामने अपने जिश्म की नुमाइश कर रही थी।

प्रीति ने रूबी की जांघों को फैला दिया और चूत के मुहाने को देखने लगी। प्रीति ने रूबी की तरफ देखा और दोनों की नजरें आपास में टकराई। रूबी की आँखों में जैसे रिक्वेस्ट थी। प्रीति नीचे झुक कर अपनी नाक रूबी की चूत के पास लेकर गई तो चूत में से वासना की दुर्गंध आ रही थी। इस दुर्गंध ने प्रीति को पागल कर दिया और उसने अपने होंठ रूबी की चूत के मुहाने पे रखकर चूम लिया और उंगलियों से चूत को रगड़ने लगी।

इसके बाद धीरे-धीरे चूत को चूसना शुरू कर दिया। प्रीति की थूक और रूबी की चूत का रस आपस में मिक्स हो रहा था। प्रीति की जुबान रूबी पे मानो जादू सा कर रही थी। रूबी दुबारा से मदहोशी के आलम में जाने लगी। उसके अंदर काम की उतेजना बढ़ रही थी। अब प्रीति ने अपनी स्पीड थोड़ी सी बढ़ा दी।

इधर रूबी का बुरा हाल था और वो अपनी कमर ऊपर करके के प्रीति के होंठों से चूत चुसवाने लगी। प्रीति ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। अब प्रीति अपनी जुबान को भी चूत के अंदर हल्के-हल्के धकेल रही थी। रूबी प्रीति के हमले का पूरा मजा ले रही थी। अब प्रीति ने भी अपनी पैंटी उतार दी और रूबी की टांगों को फैलाकर उनके बीच में आ गई और फिर से उसकी चूत चूसने लगी।

आज प्रीति ने रूबी के अंदर की औरत जो के काफी टाइम से सोई हई थी, बारा से जगा दिया था। रूबी के अंदर ज्वालामुखी फूटने की कगार पे पहुँच चुका था। रूबी ने अपनी दोनों टाँगें हवा में ऊपर उठा दी और प्रीति के सिर को हाथों से पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगी।

प्रीति रूबी की इस हरकत से समझ गई की भाभी अब चरमसुख की ओर बढ़ रही है और किसी भी टाइम चरमसुख को प्राप्त कर लेगी। भाभी को उसकी मंजिल तक पहुँचाने के लिए प्रीति ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अपने एक हाथ से अपनी चूत को भी रगड़ने लगी।

इधर रूबी के जिश्म में अकड़न सी आने लगी। उसका गला सूखने लगा था। रूबी की चूत अपने रस और प्रीति के थूक से पूरी तरह गीली हो चुकी थी। रूबी प्रीति के होंठों को अपने अंदर समेट लेना चाहती थी- “आअहह... ऊई म्माँ। तभी कुछ पल के लिए रूबी की सांस अटक गई और उसका यौवन रस चूत के रास्ते बाहर निकलने लगा।

प्रीति ने अपनी जुबान से अपनी प्यारी भाभी के रस को पीना शुरू कर दिया। रूबी हल्के-हल्के झटके लगाकर अपना रस छोड़ती जा रही थी, और प्रीति अपनी जुबान से उसे चाट-चाट कर चूत को सुखा रही थी। इधर प्रीति का बदन भी अकड़ने लगा। अब रूबी का जिश्म ढीला पड़ने शुरू हो गया और उसने अपनी टाँगें बेड पे फैला दी। कुछ देर बाद प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया। प्रीति ने अपनी चूत को रूबी की चूत सटा दिया और दोनों की चूत का रास आपस में मिलने लगा।

रूबी ने आँखें खोलकर प्रीति की तरफ देखा, मानो उसका शुक्रिया कर रही हो। दोनों मुश्कुरा पड़ी। प्रीति खुश थी की उसने भाभी की प्यास भुझा दी। कुछ देर बाद दोनों कम्बल में नींद के आगोश में खो गये।

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