Kamukta Story सौतेला बाप
05-25-2019, 11:43 AM,
#21
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--19

अब आगे
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अचानक केतन ने काव्या की टी शर्ट को उपर करना शुरू कर दिया ...काव्या ने भी उसका साथ दिया और अपनी टी-शर्ट के साथ-2 ब्रा को भी उपर खिसका कर अपनी नन्ही सी ब्रेस्ट नंगी करके केतन की भूखी आँखों के सामने परोस दी ...केतन का मन तो कर रहा था की अपना मुँह आगे करे और उसके नुकीले निप्पल को मुँह मे लेकर चूस ले ...पर श्वेता के बीच मे होने की वजह से वो पासिबल नही था ...पर फिर भी उन नंगी ब्रेस्ट पर अपने हाथ फिराते हुए वो उन्हे ज़ोर-2 से दबाने लगा ...जिसकी वजह से काव्या अपनी सीट पर झुकती चली गयी और उसका और केतन का चेहरा एक दूसरे के करीब आता चला गया ...और अगले ही पल दोनो एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे ...बड़ा ही एरॉटिक सीन था...बीच मे श्वेता थी जो केतन के लंड पर झुकी हुई उसको ब्लो जॉब दे रही थी और उपर केतन और काव्या एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रहे थे ..

इतना बहुत था केतन के ऑर्गॅज़म के लिए...उसके लंड से धका धक माल बाहर निकलने लगा ..


जिसे श्वेता ने बड़ी ही कुशलता के साथ अपने मुँह के अंदर लेकर निगल लिया ...एक भी बूँद बाहर नही जाने दी ...

केतन ने भी अपनी हुंकार भरी काव्या के होंठों के अंदर ...जिसे महसूस करके वो भी समझ गयी की केतन झड़ चुका है ...

दोनो ने किस्स तोड़ दी, क्योंकि श्वेता उठने लगी थी ..वो काव्या की तरफ पलटी ..उसके होंठों पर अभी भी सफेद रंग का गाड़ा रस लगा हुआ था केतन का ..और मुस्कुरा दी ..

तब तक काव्या पहले से ही अपने कपड़े नीचे कर चुकी थी ..

काव्या : "साली ..तू तो बड़ी डेयरिंग निकली ...मेरे सामने ही शुरू हो गयी ...''

श्वेता भी हंसते हुए बोली : "तुझसे क्या शरमाना मेरी जान ...''

और दोनो खिलखिलाकर हंस दी ..

श्वेता का चेहरा और बॉल खराब हो चुके थे ..वो उठी और रेस्ट रूम जाने के लिए बाहर निकल गयी ..

उसके जाते ही केतन एकदम से उठा और श्वेता की सीट पर आ बैठा और उसने एक झटके मे काव्या का चेहरा अपनी तरफ घुमाया और बड़े ही रफ़ तरीके से उसको स्मूच करने लगा...उसके फूल की पंखुड़ी जैसे होंठों को बुरी तरह से मसलने लगा...उनका रस पीने लगा...उसके हाथ खिसककर उसकी त शर्ट के अंदर घुस गये और उसके नन्हे नींबुओं को निचोड़ने लगे ...और फिर केतन ने कुछ ऐसा किया जिसकी काव्या को भी उम्मीद नही थी...केतन ने एक ही झटके मे उसके सिर को पकड़कर अपने लॅंड पर झुकाया और अपना गीला लंड उसके मुँह के अंदर धकेल दिया...

उसके अंदर का रस अभी तक रिस रहा था ...और श्वेता ने जिस तरहा से उसका लंड चूसा था उसकी थूक भी पूरी तरह से लिबड़ी पड़ी थी उसके हथियार से ....और झड़ने की वजा से जो ढीलापन उसके लंड मे आया था, काव्या के होंठ उसपर लगते ही वो फिर से अकड़ने लगा और कुछ पल के अंदर ही वो फिर से खड़ा होकर उसके मुँह के अंदर लहलहाने लगा...काव्या को भी मजा आने लगा केतन का काला लंड चूसते हुए

और तभी केतन को श्वेता आती हुई दिखाई दी...और लगभग उसी पल श्वेता की नज़रें भी उनकी तरफ उठ गयी...पर उसे काव्या अपनी सीट पर नही दिखाई दी ... इसी बीच केतन ने जल्दबाज़ी मे उसे उपर उठाया और बड़ी ही मुश्किल से अपने लॅंड को उसके मुँह से छुड़वाया ....काव्या को तो बड़ा मज़ा आ रहा था उसका लंड चूसने मे ...पर एकदम से ऐसी हड़बड़ी मे जब केतन ने उसे धक्का देकर पीछे किया तो वो समझ गयी की श्वेता आ रही होगी वापिस ...

और अचानक श्वेता को काव्या दिखाई दी....जो अपना सिर केतन की गोद से उपर उठा रही थी ...वो एक ही पल मे सब समझ गयी की वहाँ क्या चल रहा था ...उसने तो इस बारे मे सोचा भी नही था की उसकी सहेली उसके बाय्फ्रेंड के साथ वो सब कर सकती है जो वो कुछ देर पहले खुद कर रही थी ..

पर इस बात से उसे कोई प्राब्लम नही थी ...केतन के साथ वो अपनी रिलेशनशीप को सीरियस नही ले रही थी ...वो तो बस अपना टाइम पास कर रही थी ...और ऐसे मे अगर उसकी सहेली भी वो मज़े लेना चाहती है तो इसमे हर्ज ही क्या है ...बल्कि ऐसा करने मे तो उसका भी फायदा है ...और अपने फायदे के बारे में सोचते ही उसकी चूत मे सुरसुरी सी होने लगी ...उसने निश्चय कर लिया की इसके बारे मे वो जल्द ही काव्या से बात करेगी ..

वो मुस्कुराती हुई दोनो के पास पहुँची ...

उसकी सीट पर केतन अभी तक बैठा हुआ था ...उसने अपना लॅंड अंदर कर लिया था ..पर हड़बड़ी मे अपनी सीट पर वापिस जाना भूल गया ..

श्वेता हँसती हुई उसके आगे से निकलती हुई दूसरी तरफ जाकर बैठ गयी ...अब बीच मे केतन था और उसके अगल बगल 2 हसीनाएँ ...

श्वेता ने अपना हाथ फिर से केतन के लंड के उपर रख दिया , जो काव्या के चूसने की वजह से अभी तक खड़ा हुआ था

श्वेता : "वाह मेरे शेर .....इतनी जल्दी दोबारा तैयार हो गया आज तो ...क्या बात है ...''

इतना कहकर वो अपनी जगह से उठी और केतन के पैरों के बीच मे जाकर बैठ गयी ...

सिनेमा हॉल मे घुप्प अंधेरा था ...और उन्हे कोई देखने वाला भी नही था आस पास , सिवाए काव्या के ..जो श्वेता को नीचे बैठे देखकर हैरानी से सोचने लगी की इसको क्या हो गया है एकदम से ..नीचे क्यो बैठ गयी ये ..

पर उसके सवालो का जवाब जल्द ही मिल गया उसको...श्वेता ने केतन की पेंट की जीप खोलनी शुरू कर दी ..और उसका बटन खोलकर पूरी तरह से अंडरवीयर समेत उसको नीचे खिसका दिया ...

केतन की जींस उसके पैरों मे पड़ी थी ..और गोद मे उसका लंड किसी नाग की तरह फन फेला कर लहरा रहा था ...

काव्या की नज़रें उसी तरफ थी ..

केतन चाह कर भी अपनी हॉट गर्लफ्रेंड को मना नही कर रहा था ... ऐसे मौके रोज-2 थोड़े ही मिलते हैं .. उसे सिर्फ़ चिंता थी काव्या की जो अपनी सहेली को ऐसा करते देखकर टकटकी लगाए उन्हे ही देखे जा रही थी ..पर जब श्वेता को कोई प्राब्लम नही थी तो वो क्यो मना करता, वो चुपचाप बैठकर श्वेता का तमाशा देखने लगा ..

अब श्वेता ने एक और डेयरिंग दिखाते हुए अपनी टी शर्ट उतार दी और अपनी ब्रा के स्ट्रेप कंधों से नीचे गिरा कर अपने खरबूजे उसके सामने परोस दिए ..

केतन को तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नही हुआ ...श्वेता ने कितनी बेशर्मी से अपने उपर के कपड़े उतार दिए थे ... ऐसी बेशरम गर्लफ्रेंड अगर किसी को मिल जाए तो उससे खुशकिस्मत इंसान कोई और हो ही नही सकता ...

फिर श्वेता ने अपने मुम्मों को अपने हाथों मे पकड़ा और केतन के लंड को पकड़ कर उसके बीच फँसाया और उसे टिट मसाज देने लगी ..

केतन की गांड अपनी सीट से उपर उठ गयी ...हवा मे ...और वो खुद भी हवा मे महसूस कर रहा था अपने आप को, श्वेता बड़े ही सेक्सी तरीके से उसके लंड को अपने मुम्मों के बीच फँसा कर मज़ा दे रही थी ..पर जगह छोटी होने की वजह से उसका लंड बार-2 फिसल कर बाहर निकल रहा था ..

जिसे देखकर श्वेता ने काव्या से कहा : "काव्या, तू जब इतने गौर से ये सब देख ही रही है तो मेरी मदद भी कर दे ...ज़रा केतन के पेनिस को उपर से पकड़ कर रख ...बार -2 फिसल कर निकल रहा है ये ...''

काव्या और केतन को अपने कानो पर विश्वास ही नही हुआ ...श्वेता खुद काव्या को अपने बाय्फ्रेंड का लंड पकड़ने के लिए कह रही थी, और कोई मौका होता तो शायद काव्या मना कर भी देती या उसके साथ बहस तो ज़रूर करती ..पर पिछले दस मिनट मे जो उसने और केतन ने किया था , उसके बाद तो ऐसे मौके को हाथ से जाने देना बेवकूफी कहलाता, उसने झट से अपना हाथ आगे किया और उसके लंड के सुपाडे को अपनी पतली उंगलियों मे जकड़ लिया ...

उसके ठंडे हाथ का स्पर्श पाते ही केतन एकदम से सिहर उठा ..

ये उसकी जिंदगी का पहला मौका था जब एक साथ दो-दो लड़किया उसके लंड को पकड़ कर खेल रही थी ...

वो मन ही मन भगवान को ऐसी गर्लफ्रेंड देने के लिए धन्यवाद देने लगा ..

काव्या की उंगलियाँ भी धीरे-2 नीचे खिसक आई और उसने अपनी मुट्ठी मे उसके लंड को पकड़ कर उसकी मुट्ठ मारनी शुरू कर दी ...

उसके हाथ श्वेता के नर्म -मुलायम मुम्मों से भी छू रहे थे ...

अचानक श्वेता ने अपना मुँह नीचे किया और केतन के सुपाडे को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी ...

केतन की तो हालत बुरी होने लगी ..

उसका लंड श्वेता के मुम्मों के बीच फँसा हुआ था और साथ ही काव्या ने भी अपनी उंगलियों की पकड़ बनाकर उसे जकड़ा हुआ था और उपर से श्वेता उसके लंड को चूस भी रही थी ...एक साथ 3-3 ट्रीटमेंट मिल रहे थे उसके खुशनसीब लंड को ..

श्वेता ने उसके लंड को चूसते -2 अचानक अपना मुँह थोड़ा और खोला और काव्या के हाथ के अंगूठे को भी अपने मुँह के अंदर ले लिया और उसे भी केतन के लंड की तरह चूसने लगी ...

श्वेता की गर्म जीभ और तेज दांतो के प्रहार से काव्या की चूत भी सुलग उठी ....उसके मुँह से एक हल्की और लंबी सी सिसकारी निकल गयी ...

''अहह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... ओह श्वएतााआआअ म्*म्म्ममममम''

श्वेता और काव्या की नज़रें एक पल के लिए मिली और अचानक दोनो के चेहरे एक दूसरे की तरफ बड़ गये और दोनो एक दूसरे को बुरी तरह से स्मूच करने लगे ...

केतन अपनी आँखे फाड़े उन्हे अपने पैरों के बीच बैठे हुए एक दूसरे को स्मूच करते हुए देख रहा था ..

उसने आज तक ऐसी लेस्बियनशीप सिर्फ़ मूवीस मे ही देखी थी ...पर अपनी आँखो के सामने आज पहली बार ऐसा होता हुआ देखकर उसके लंड की नसों मे और कड़कपन आ गया ...वो अपने हाथों से खुद ही अपने लंड को मसलने लगा ..

अब सीन ये था की केतन के सामने दोनो सहेलियाँ बुरी तरह से एक दूसरे को चूस रही थी ...और केतन अपने लंड को अपने हाथ से मसल रहा था ..

अचानक उसने अपने खड़े हुए लंड को उन दोनो के होंठों के बीच पहुँचा दिया ..बस यही ग़लती की उसने ..

दोनो जंगली बिल्लिया बुरी तरहा से उत्तेजित थी ...उनके होंठों के बीच जैसे ही केतन ने अपना लंड घुसाया, दोनो उसपर भूखे जानवर की तरह टूट पड़ी ...केतन के मुँह से दबी-2 सी चीखे निकलने लगी ..वो दोनो उसके लंड को बुरी तरह से चूस रही थी ...नोच रही थी ...अपनी-२ तरफ खींच रही थी ...

और उन्हे इस खेल मे मज़ा भी आ रहा था ...

अब तक तीनो समझ चुके थे की आपस मे ऐसे करने से श्वेता को कोई फ़र्क नही पड़ रहा है ...इसलिए अब केतन भी खुलकर काव्या के शरीर पर अपने हाथ चला रहा था ...

उसने श्वेता का चेहरा अपने लंड पर झुकाया और उसे अपना लॉलीपॉप चूसने के लिए दे दिया ...और काव्या को उपर की तरफ खींच कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए ...

काव्या की साँसे पूरी तरह से उखड़ी हुई थी ...उसके मुँह से ढेर सारी लार निकल रही थी ..केतन ने उसके गीले होंठों को चूस्कर उसकी मिठास पूरी तरहा से निगल ली ...और अपने हाथों को नीचे करते हुए उसके नींबू फिर से पकड़ कर उन्हे निचोड़ने लगा ...

अब श्वेता की चूत बुरी तरह से भभक रही थी ...उसने उठकर आगे पीछे देखा और एक और डेयरिंग दिखाते हुए अपनी जींस के बटन खोलने शुरू कर दिए ...और एक ही झटके मे अपनी पेंटी और जींस को नीचे खिसका कर पैरों पर गिरा दिया ..

केतन और काव्या ने किस्स करना छोड़ दिया और श्वेता की तरफ हैरत से देखने लगे...जैसे उन्हे विश्वास ही नही था की वो सच मे वो करने जा रही है जो वो सोच रहे हैं ..

चुदाई .

और श्वेता ने निश्चय कर भी लिया था ...उसकी हालत ऐसी हो रही थी की बस किसी भी तरह से लंड उसकी चूत मे घुस जाए ...वो जगह उस काम के लिए उचित और प्रयाप्त नही थी ..पर फिर भी उससे रहा नही जा रहा था ...वो सामने की तरफ मुँह करके घूम गयी और अपनी मोटी गद्देदार गांड को केतन की नज़रों के सामने लहरा दिया ..

उसकी चूत से निकल रही भीनी-2 खुश्बू सूँघकर केतन पागल सा हो गया ..और इससे पहले की श्वेता नीचे बैठकर अपनी चूत मे उसका लंड लेती, केतन ने पागलों की तरह उसकी चौड़ी गांद को अपने हाथों मे पकड़ा और अपना मुँह आगे करते हुए उसकी चूत पर लगा दिया ....

श्वेता का पूरा शरीर अगली सीट के उपर जा गिरा ..और केतन जंगलियों की तरहा सड़प-2 करते हुए उसकी चूत का पानी पीने लगा ...

और अपनी लम्बी जीभ से उसकी चूत के साथ -२ उसकी गांड के छेद को भी कुरेदने लगा

अपने दांतों से वो उसकी गांड में भरी चर्बी को भी चबा रहा था

कोई भी पीछे मुड़कर अगर देखता तो उसे श्वेता उपर से नंगी होकर सीट की बेक पर झुकी हुई दिखाई दे जाती...पर इन बातों से उन्हे अब कोई डर नही लग रहा था ...वो तो ये सब ऐसे बेकोफ़ होकर कर रहे थे जैसे उनके अलावा सिनेमा हॉल मे कोई और है ही नही ..

श्वेता के चेहरे की मांसपेशियाँ सख़्त हो रही थी ..

इसी बीच काव्या फिर से खिसक कर केतन और श्वेता की टाँगो के बीच आ गयी और उसके लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी ...

वो केतन का लंड चूस रही थी ...और केतन श्वेता की रसीली चूत ...और अपनी चूत चुसवाती हुई श्वेता के मुँह से बड़ी ही सेक्सी सिसकारियाँ निकल रही थी ...

''अहह सस्स्स्स्सस्स केतन ......एसस्स्स्सस्स .......उम्म्म्ममममममममम ......चाटो मेरी चूत को .......अहह ....सस्सस्स ........ऐसे ही ........''

पर इंसान की जीभ एक हद तक ही अंदर जा सकती है ....और अब श्वेता को उसकी जीभ से ज़्यादा कुछ चाहिए था अपने अंदर ....उसका लंड ..

पर जैसे ही वो वापिस बैठने लगी उसके लंड के उपर...केतन के लंड ने जवाब दे दिया और वो भरभरा कर दूसरी बार झड़ने लगा .....और इस बार काव्या के मुँह के अंदर ...

और काव्या भी बड़ी कुशलता के साथ उसके लंड की एक-2 बूँद निगल गई ...


श्वेता की चूत प्यासी ही रह गयी ...

उसने अपने नीचे वाले कपड़े उपर किए और अपनी ब्रा और टी शर्ट सही ढंग से पहन कर अपनी सीट पर बैठ गयी ..

काव्या ने भी अपने कपड़े सही कर लिए..

केतन तो सांतवे आसमान पर था ...उसमे इतनी हिम्मत भी नही थी की अपनी पेंट को उपर करके पहन सके ..

अचानक लाइट जल गयी ...मूवी ख़त्म हो चुकी थी ...और केतन नीचे से नंगा होकर बैठा हुआ था ..

उसके लटके हुए लंड को देखकर दोनो सहेलियों की हँसी निकल गयी ...केतन ने हड़बड़ते हुए अपनी पेंट को उपर खींचा और पहन लिया ..

और उसके बाद सभी वापिस चल दिए ..केतन के जाने के बाद दोनो सहेलियों ने एक दूसरे की तरफ देखा और अचानक ज़ोर-2 से ठहाका लगाते हुए हँसने लगी ...

आखिर आज जो काम उन दोनो सहेलियों ने किया था, वो हर कोई तो कर ही नही सकता ना .

श्वेता : "यार...सच मे...इतना एडवेंचर तो मैने आज तक कभी महसूस नही किया ....''

काव्या : "तू इसे एडवेंचर कहती है ...साली बेशरम ...तू तो तैयार थी वहीं हॉल मे चुदने के लिए ...कैसे बेशर्मों की तरह नंगी होकर तू उसका लेने ही वाली थी ...वो तो भला हो केतन का जो अपने आप को तेरी चूत चूसने से रोक नही पाया ...वरना तू तो चुद चुकी होती आज वहीं ....''

श्वेता : "सच मे ....पर वो सब हुआ नही ना ....कुछ अधूरा सा लग रहा है ....''

काव्या ने शरारत से पूछा : "कहाँ ..... "

श्वेता ने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा : "यहाँ ....''

और दोनो सहेलियाँ फिर से ठहाका मारकर हँसने लगी ..

अचानक श्वेता थोड़ा गंभीर होते हुए बोली : "यार ...वो तुझे मैने बताया था ना अपने सीन के बारे मे ...नितिन के साथ ...''

काव्या की आँखे अचानक चमक उठी ...वो बोली : "हाँ ...याद है ....और कुछ भी हुआ क्या तेरा नितिन के साथ ....बोल ना ...''

श्वेता रहस्यमयी हँसी हँसने लगी ....और बोली : "बहुत कुछ हुआ ....आज सुबह ....''

और उसने अपने और नितिन की सुबह वाली बात नमक मिर्च लगा कर सुना डाली ....जिसे सुनते-2 दोनो बुरी तरह से उत्तेजित हो गयी ...

काव्या : "यार. ...तू पता नही किस बात का वेट कर रही है ....जब तू भी वही चाहती है और नितिन भी तो ये ड्रामे करने से क्या मिल रहा है तुम दोनो को ....कर लो ना सब कुछ ...डलवा ले उसका लंड अपने अंदर ...''

श्वेता : "यार ...ये सब इतना आसान नही है ....सब कुछ ठीक हो रहा होता है ...पर आख़िरी वक़्त आते-2 हिम्मत जवाब दे जाती है ...कुछ ज़्यादा करने की हिम्मत ही नही होती ...पर इस समय लग रहा है की अभी के अभी अगर नितिन मेरे सामने आ जाए तो उसके लंड को तो क्या उसको भी अपनी चूत के अंदर घुसेड डालु ...केतन ने तो आग सी लगाकर छोड़ दी है मेरी पिंकी के अंदर ...''

काव्या : "मैं समझ सकती हू यार ....मेरा भी यही हाल है ....हालाँकि मेरी सील अभी तक टूटी नही है ...पर अंदर सिनेमा हाल मे जब केतन और तू वो सब करने ही वाले थे तो मेरा भी मन कर रहा था की काश मेरी भी ....''

इतना कहकर वो शरमा सी गयी ...उसका चेहरा गुलाब की तरह सुर्ख हो उठा ..

श्वेता : "बस ...यही जज़्बा तो होना चाहिए अपने अंदर ....अब देख ....तूने जिस तरह मेरे साथ मिलकर मेरे बी एफ से मज़े लिए हैं ...तेरा भी ये फ़र्ज़ बनता है की मुझे अपने साथ मज़े दिलवा ...''

काव्या समझ गयी की क्यो उसने सिनेमा हाल मे अपने साथ उसे भी शामिल करवा लिया था केतन के साथ मज़े लेने के लिए ...वो उसकी चतुराई की दाद देने लगी ..

पर उससे पहले उसके दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था ...

वो श्वेता से बोली : "एक शर्त पर ...तू मुझे अपने और नितिन का लाइव शो दिखाएगी कल ....बोल मंजूर है तो मैं भी कल ही तुझे अपने घर बुला कर उतने ही मज़े दिलवा सकती हू ...''

दोनो ही सूरत मे फायदा श्वेता का ही था ...नितिन के साथ तो वो भी सब करना चाहती थी ...अगर काव्या वो सब देखना चाहती है तो उसे क्या प्राब्लम हो सकती है ....वो झट से मान गयी.

और अगले दिन सुबह का प्लान बनाकर दोनो अपने-2 घर की तरफ चल दिए .
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05-25-2019, 11:43 AM,
#22
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--20

अब आगे
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श्वेता जब घर पहुँची तो काफ़ी थक चुकी थी ...अपने बाय्फ्रेंड के साथ डेट पर जाना उसको हमेशा थका देता था .. और वैसे भी जो कुछ भी सिनिमा हॉल मे हुआ था उसके बाद तो उसकी हिम्मत भी नही हो रही थी की घर वालों के साथ बैठकर टीवी देख ले या डिनर कर ले ... वो अपने कमरे मे गयी और हल्के गर्म पानी मे 2 घंटों तक लेती रही बाथटब मे...

उसके दिमाग मे सब कुछ चल रहा था ..जो भी सिनेमा हॉल मे हुआ था .. फिर काव्या और केतन के बीच जो हुआ वो भी ...और फिर उसकी उंगलियों की थिरकन अपनी चूत पर ऐसी हुई की सितार बजने लगे उसके अंदर .... और झनझनाती हुई सी वो पानी के अंदर ही झड़ गयी ...

अगली सुबह जब उनके माँ -बाप चले गये तो नितिन ने श्वेता से कहा : "मैं जा रहा हू बाथरूम में ...ओके ...''

उसके जाने के बाद श्वेता ने जल्दी से काव्या को फोन लगाया और पूछा की वो कहा है ..काव्या ने कहा की वो बाहर ही है और अपनी स्कूटी पार्क कर रही है ..

श्वेता ने भागकर दरवाजा खोल दिया ..और काव्या अंदर आ गयी..

दोनो सहेलियों के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी ...दोनो रोमांचित भी थी ..

बाथरूम मे जाकर नितिन ने अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया ..अपने हाथों मे प्लास्टिक लपेट कर वो इंतजार करने लगा श्वेता का . उसका लंड आज पूरी तरहा से खड़ा था ...क्योंकि वो जानता था की आज कुछ स्पेशल मिलने वाला है उसको. पर उसे पता नही था की बाहर काव्या आ चुकी है और दोनो सहेलिया मिलकर उसके लिए क्या प्लान कर रही है ..

उसके बाद श्वेता ने काव्या को अपने पीछे आने को कहा और उपर की सीडिया चड़ने लगी .. और तभी श्वेता ने अपने कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए ...सीडियो पर चड़ते-2 उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए ..

अब उसके जिस्म पर सिर्फ़ एक पेंटी थी ..


काव्या ये देखकर इतनी हैरान थी ..क्योंकि वो जानती थी की श्वेता अपने भाई को नहलाने जा रही है ...जब उसने ये बात बताई थी की उसने टॉपलेस होकर अपने भाई को नहलाया था तो और बात थी, पर अब उसी चीज़ को अपनी आँखो से देखने के बाद उसके अंदर की गर्मी भी बढ़ती जा रही थी ..वो उसके पीछे-2 चल दी .

श्वेता ने काव्या को बाथरूम की खिड़की से देखने की सलाह दी और उसके लिए एक स्टूल भी दे दिया उसको ताकि वो उसपर खड़ी होकर अंदर का नज़ारा देख सके ..

श्वेता ने अपना सेक्सी फिगर दिखाते हुए काव्या से कहा : "वॉच मी ...."

और फिर श्वेता अंदर चली गयी .काव्या झट से स्टूल पर खड़ी हो गयी और उसने खिड़की से अंदर झाँक कर देखा ..

आज श्वेता को पहले से ही टॉपलेस होकर आया देखकर नितिन के लंड ने एक जोरदार सलामी दी , उसके मोटे-2 मुम्मे और खड़े हुए निप्पल देखकर उसके होंठ सूख गये ..वो उनपर जीभ फेरने लगा.

श्वेता अंदर आई और नितिन को टब के अंदर ले गयी ...और अंदर जाने से पहले श्वेता ने एकदम से अपनी पेंटी भी उतार दी और पूरी तरह से नंगी हो गयी ...और नितिन के हैरान हुए चेहरे को देखकर बोली : "अब वैसे इसकी भी ज़्यादा ज़रूरत नही है ..''

और वो पूरी तरह से नंगी होकर अंदर आ गयी.

शावर का पानी दोनो पर पड़ रहा था ..श्वेता ने साबुन लिया और अपने भाई के शरीर पर लगाना शुरू कर दिया ...वो जान बूझकर अपने जिस्म को भी उसके शरीर से रगड़ रही थी ..जिसकी वजह से नितिन के उपर लगा साबुन उसके उपर भी लगता जा रहा था ..और अपने मोटे मुम्मे वो कभी उसकी पीठ पर और कभी छातियों पर रगड़कर उसे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी ..

नितिन ने जब से अपनी बहन की चूत इतने करीब से देखी थी वो तो पलकें झपकना भी भूल गया था ..इतनी चिकनी और बिना बालों की चूत उसने आज तक नही देखी थी ..

उसका मन तो कर रहा था की उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसेड डाले और उसे बुरी तरह से चूस ले ....पर अपनी तरफ से पहल करके वो काम को बिगाड़ना नही चाहता था ..

श्वेता उसकी टाँगो मे साबुन लगाते हुए नीचे बैठ गयी...और फिर उसने उसके लंड को अपने हाथों मे लिया और उसे मसलने लगी ...जैसा की पिछले तीन-चार दिन से चल रहा था ..नितिन ने अपनी आँखे बंद कर ली और लंड मसाज़ के मज़े लेने लगा ..

अचानक श्वेता ने अपना मुँह खोला और उसके खड़े हुए लंड को अपने गर्म मुँह के अंदर निगल लिया और ज़ोर-ज़ोर से सक करने लगी..

नितिन कुछ भी नही बोल पाया...वो तो शॉक ही रह गया...उसने तो आशा भी नही की थी की एकदम से अपनी बहन को नंगा देखने के बाद वो कुछ ही देर मे उसका लंड भी चूसने लगेगी ..वो तो जन्नत की सैर करने लगा ..वो उसके लंड को दशहरी आम की तरहा चूस रही थी ..उसकी बॉल्स को अपने मुँह मे लेकर पूरा भर लेती और उसके लंड को अपने हाथ से हिलाती ...फिर उसके लंड को चूसती और उसकी बॉल्स को अपने हाथ से सहलाती ..

ये सारी हरकतें खिड़की मे खड़ी हुई काव्या देख रही थी और पागल हुए जा रही थी ...उसने एक टी शर्ट और केप्री पहनी हुई थी ...उसने अपनी केप्री की जीप खोली और उसे नीचे खिसका दिया ...और पेंटी को भी अपने घुटनो तक पहुँचा कर अपना निचला हिस्सा पूरा नंगा कर दिया ..और अपनी उंगलियों से अपनी रस टपकाती चूत की मालिश करने लगी ..


कोई उसे ऐसी हालत मे देखता तो हैरान रह जाता ..वो गलियारे वाले हिस्से मे आधी नंगी होकर स्टूल पर खड़ी थी .... कोई भी आकर पीछे से अगर उसकी गीली चूत पर अपना मुँह रख देता तो वो वहीं के वहीं ढेर हो जाती ...

अंदर का तापमान भी बढ़ता जा रहा था ...अब दोनो भाई बहन समझ चुके थे की वो घड़ी आ ही गयी है जिसका वो इतने दीनो से इंतजार कर रहे थे ...

दोनों बाथटब से बाहर आ गए

श्वेता तो पागल सी हो चुकी थी, उसने उत्तेजना में आकर नितिन की छाती पर लगे निप्पल पर जोर से काट लिया , वो बेचारा तड़प सा उठा



नितिन ने श्वेता को खड़ा किया और उसके दहकते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए ...और उसे चूसने लगा...इतने मुलायम होंठों को चूसकर उसकी जन्म -2 की प्यास बुझ गयी ...उसके हाथ उसके मोटे-2 मुम्मो पर फिसलने लगे ..और उन्हे मसलने लगे ...

श्वेता ने उसके लंड को पकड़कर जोरों से उपर नीचे करना चालू रखा ...

नितिन को लगा की श्वेता कुछ देर तक और ऐसे ही करती रही तो वो जल्द ही झड़ जाएगा ...उसने उसके हाथ से अपना लंड छुड़वाया और उसे घुमा कर खड़ा कर दिया ...अब श्वेता की पीठ नितिन की छाती से रग़ड़ खा रही थी और उसकी गांड उसके लंड से ...नितिन के दोनो हाथ उसके निप्पल्स को खींचकर और ज़्यादा उभारने मे लगे थे ..अचानक नितिन ने श्वेता को आगे की तरफ झुकाया और वो वाशबेसन पकड़कर घोड़ी बन गयी ...

नितिन ने अपना लंड उसकी गीली चूत के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा .

''अहह ........... उफफफफफफफफ्फ़ ....नितिन .......''

उसकी चीख के अंदर छुपा एहसास बाहर खड़ी काव्या को अंदर तक गर्म कर गया ..... वो तो वहीं खड़े -2 झड़ने लगी ...

अंदर श्वेता की हालत तो और भी बुरी थी ...इतना मोटा लंड आज उसकी चूत के अंदर जा रहा था वो जब अपनी जगह बनाते हुए अंदर जाने लगा तो उसे ये एहसास हुआ की असली चूत तो अब फटी है उसकी ...क्योंकि मोटे लंड को अंदर लेने का एहसास एक अलग ही तरह का होता है ..उसके अंदर की मांसपेशियाँ और ज़्यादा फेलने लगी ...हर इंच के साथ उसकी साँस घुटी जा रही थी ...ऐसा लग रहा था की आनंद की एक अलग ही चरम सीमा पर पहुँच रही है वो ...दर्द और मस्ती का एक मिला-जुला मिश्रण उसकी चूत को मिल रहा था ...जिसकी वजह से वो उत्तेजना के शिखर पर जा पहुँची और ज़ोर-2 से चीखकर अपनी चुदाई करवाने लगी ..



''अहह नितिन .................. डाल दो पूरा अंदर ...... हाआआआआ ......उम्म्म्मममममम ......... आई एम लविंग .................. यूर कॉक ...................... अहह ....इट्स सओओओओ बिग .................... उम्म्म्मममममममम ............ फाड़ डालो मेरी चूत को ................अहह चोदो अपनी बहन को .................. अहह ...ऐसे ही .....................ओह ..एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स .............. उम्म्म्ममममममममम....''

नितिन ने उसकी रेलगाड़ी बना डाली अगले तीन मिनट मे .....ऐसे धक्के मारे उसकी चूत के अंदर की उसका पूरा शरीर ही हिल गया ....ऐसी चुदाई की उसने सिर्फ़ कल्पना ही की थी .... नितिन अभी ज़ख्मी था, उसके बावजूद उसने उसकी चीखे निकलवा दी थी ...अगर वो पूरी तरहा से ठीक होता तो उसके बदन को नोच खसोट कर उसकी चुदाई करता ...तब उसका क्या हाल होता ...ये सो सोचकर वो अपने मुम्मे खुद ही दबाने लगी , अपने होंठों को अपने दाँतों मे ज़ोर से दबाकर अपने मज़े को और भी बड़ाने लगी ...और खुद ही अपनी गाण्ड को पीछे की तरफ धक्का देते हुए अपनी चूत के अंदर नितिन के लंड को और अंदर तक पहुँचाने लगी ...

आज उसकी चूत के अंदर की उन गहराइयों को भी एक्सप्लोर किया था नितिन ने जहाँ आज तक किसी का लंड, केंडल या उसकी अपनी उंगली भी नही पहुँच पाई थी ...

नितिन ने बाथटब के किनारे पर श्वेता को लिटाया और खुद उसके ऊपर आकर उसकी चूत मारने लगा मारने लगा , हर धक्के से उसकी ब्रेस्ट ऊपर नीचे हो रही थी


अब नितिन का झड़ने का समय आ गया ....श्वेता तो दो बार झड़ चुकी थी ...

नितिन चिल्लाया : "मैं झड़ने वाला हू श्वेता ......आ हह ...... कहाँ निकालु ......''

अंदर एक खामोशी सी छा गयी ....सिर्फ़ नितिन के धक्के ही सुनाई दे रहे थे श्वेता के चूतड़ों पर ...

बाहर खड़ी हुई काव्या बुदबुदाई : "अपने अंदर बोल श्वेता .....अपने अंदर निकलवा उसका माल .....''

शायद उसके दिल की आवाज़ श्वेता ने सुन ली ...वो ज़ोर से चिल्लाई : "मेरे अंदर ही निकालो .....अपनी एक-2 बूँद मेरी चूत के अंदर निकालो और मेरी प्यास बुझा दो ....... अहह .....''

नितिन के लिए ये सुनना ही बहुत था ....उसके लंड ने एक जोरदार आवाज़ के साथ अपना सारा सफेद और गाड़ा रस उसकी चूत के अंदर पहुँचा दिया .....और तभी श्वेता भी तीसरी बार झड़ती हुई अपने भाई के साथ वहीं पस्त होती चली गयी ..

नितिन ने अपना लंड बाहर निकाल लिया, पीछे-२ ढेर सारा रस भी फिसलकर बहार निकल आया


और बाहर खड़ी हुई काव्या दूसरी बार झड़ने लगी और उसकी चूत के रस की बरसात नीचे पड़े हुए स्टूल के उपर फिर से होने लगी ... चिपचिपे पानी की बूँदों से भीगकर स्टूल पूरा गीला हो चुका था ...

नितिन ने श्वेता को खड़ा किया और उसे अपनी तरफ घुमाया ...दोनो के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे ...उन दोनो ने एक दूसरे को फिर से फ्रेंच किस किया और शावर के नीचे चले गये ... श्वेता ने फिर से साबुन लिया और अपने भाई को रगड़ -2 कर फिर से नहलाने लगी ..

काव्या से खड़ा नही हुआ जा रहा था ...वो नीचे उतरी और अपने कपड़ों को सही किया ...और फिर दबे पाँव नीचे उतर गयी ...

फिर दरवाजा खोलकर चुपचाप बाहर निकल कर अपने घर की तरफ चल दी ..

आज उसने जो सीन देखा था उसके बाद उसके दिमाग़ मे सिर्फ़ और सिर्फ़ सेक्स ही चल रहा था ...और टारगेट पर था उसका सोतेला बाप .

पिछले कुछ दिनों से काव्या ने नोट किया था की उसका सोतेला बाप उसके जिस्म को कुछ ज़्यादा ही गौर से देखने लगा है ..शायद ये उसकी बदती हुई चुचियो या फिर उभरती हुई गाँड का कमाल था .. आजकल काव्या हर हफ्ते दीवार के सामने खड़े होकर अपनी उभरती हुई छातियो को मार्क करती थी ... उसने अपनी दीवार पर पेन्सिल से मार्क लगा कर ये नोट किया था की उसकी ब्रेस्ट लगभग एक इंच बड़ चुकी है पिछले दो हफ्तों मे ...शीशे के सामने खड़े होकर वो घूम-घूमकर अपनी गाँड भी देखती थी,और उसमे आ रहे बदलाव भी वो नोट करती रहती थी ..

कुल मिलाकर वो अपनी जवानी के उस पड़ाव पर थी जहाँ उसके साथ-2 दूसरे भी उसके शारीरिक विकास को महसूस कर पा रहे थे .

और जब से उसने नितिन और श्वेता की चुदाई देखी थी, और श्वेता से उसके और केतन के किस्से सुने थे, उसके अंदर की आग एक ज्वाला का रूप ले चुकी थी, अब सिर्फ़ अपनी चूत को सहलाकर वो अपनी राते नही गुजारना चाहती थी..वो भी अपनी सहेलियो की तरह मज़े लेना चाहती थी..अपनी चूत की आग को उंगलियो से नही बल्कि किसी के थरथराते लंड से ठंडा करना चाहती थी ..और इसके लिए उसे अपनी तरफ उठ रही हर उस नज़र पर नज़र रखनी होगी , जो उसकी जवानी को आँखों ही आँखो मे चोदकर उसका रसपान करने मे लगे रहते हैं..लोकेश अंकल से मिले आधे अधूरे मज़े के बाद उसकी ये आग पूरी तरह भड़क चुकी थी ..उनसे मिलना तो संभव नही है क्योंकि उनकी अपनी फेमिली है..और अपने घर पर या उनके घर पर किसी भी तरह की मस्ती संभव नही है ..इसलिए अब उसके सामने सिर्फ़ अपना सोतेला बाप ही बचा था .

काव्या ने जैसे कोई मिशन तैयार कर लिया था ...अपनी चुदाई का ..पर हर कुँवारी लड़की की तरह उसके मन मे भी एक डर था ..चूत फट जाने का....दर्द होने का ...शरीर खराब हो जाने का डर ..शादी के बाद पति को ना पता चल जाए, वो डर ...कुल मिला कर उसके मन मे चल रही उथल पुथल ने उसे परेशान करके रखा हुआ था .

वो गुमसुम सी टेबल पर बैठकर अपनी माँ और बाप के साथ डिनर कर रही थी

उसे ऐसी हालत मे देखकर उसकी माँ रश्मि ने पूछा : "काव्या ...बेटा, क्या हुआ ...ऐसी गुमसुम सी क्यो हो ...खाना क्यो नही खा रही ..''

समीर भी बड़े गौर से उसके चेहरे को पड़ने की कोशिश कर रहा था .... पर उसकी भी कुछ समझ मे नही आ रहा था .

उसने ज़्यादा कुछ नही खाया और उठकर बाहर गार्डन मे चली गयी ..

रश्मि उसके लिए परेशान हो उठी : "पता नही मेरी बच्ची को किसकी नज़र लग गयी है ..आजकल इतना गुमसुम सी रहती है ...कही इसका कोई चक्कर तो ...''

उसने ना जाने क्या सोचते-2 ये बात बीच मे ही छोड़ दी ..समीर भी ये बात सुनकर चोंक गया ...भले ही काव्या उसकी सोतेली बेटी थी ..पर उसके बारे मे ऐसी बात सुनकर वो भी सोच में डूब गया ...अभी उमर ही क्या है उसकी जो ऐसे लफडों मे पड़े ..उसे तो शायद इन बातों की समझ भी नही होगी ..

समीर को लगा की ज़रूर काव्या ने ही कोई हिंट दिया होगा रश्मि को , तभी वो ऐसा बोल रही है .

वो एकदम से उठा और बोला : "मैं ज़रा समझने की कोशिश करता हूँ की माजरा क्या है ...''

रश्मि उसे रोकना चाहती थी, पर रोक ना पाई.

क्योंकि आज पहली बार समीर ने उसकी बेटी की चिंता करते हुए ऐसी बात कही थी ...शायद वो उसे समझा सके ..

वो भी किचन समेटने मे नौकर की मदद करने लगी .
Reply
05-25-2019, 11:43 AM,
#23
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--21

अब आगे
********* 

समीर बाहर पहुँचा, वो झूले पर बैठी हुई थी ...वैसी ही गुमसुम ..उसने एक निक्कर और टी शर्ट पहना हुआ था .

समीर भी उसके साथ जाकर झूले पर बैठ गया

अपने सोतेले बाप को पहली बार ऐसे अपने पास आकर बैठा देखकर वो भी हैरान रह गयी ..

कुछ देर की चुप्पी के बाद समीर बोला : "देखो काव्या, मुझे पता है की तुम क्यो परेशान हो ...''

एक बार फिर से चौंकने की बारी थी काव्या की .... वो सोचने लगी की उसे कैसे पता की उसकी चूत मे जो आग लगी है वो उसे बुझाने के लिए उसके लंड का सहारा लेने की सोच रही है ..वो अपनी गोल-2 आँखो से समीर की तरफ देखने लगी ..

समीर : "देखो काव्या, मुझे अपना दोस्त समझो ...तुम्हे जो भी परेशानी है ..मुझे बताओ ..मैं तुम्हारी मदद करूँगा ..''

वो फिर भी कुछ ना बोली, उसकी समझ मे नही आ रहा था की कैसे बोले की वो क्या चाहती है ..

तभी समीर बोला : "कौन है वो लड़का ...''

काव्या का चेहरा झट से उपर उठ गया, वो समीर की तरफ देखती हुई बोली : "लड़का ??? कौन लड़का ??"

समीर :"देखो , मैने कहा ना की मुझे अपना दोस्त समझो ...बोलो कौन है वो लड़का, जिसके बारे मे सोचकर तुम ढंग से खाना भी नही खा पा रही हो ..''

अब काव्या की समझ मे आ गया, वो उसके गुमसुम रहने की वजह किसी लड़के को मान रहे थे ...जैसा की आजकल के टीनएजर के माँ -बाप को फील होता है, शायद ऐसा ही फील हो रहा होगा रश्मि और समीर को भी ..इसलिए ये दोस्त -वोस्त का नाटक करके उसके दिल की बात जानना चाहते हैं ..

पर वो भी पूरी उस्ताद थी ...एक ही पल मे उसके मन मे योजना की पूरी स्क्रिप्ट तैयार हो गयी ...जिस बात को सोचकर वो परेशान थी, उसका उपाय खुद उसके बाप ने उसके सामने रख दिया था ...

वो सकुचाने की एक्टिंग करती हुई सी समीर की तरफ खिसक आई ...और अपना सिर उसके कंधों पर रखकर धीरे से बोली : "नही पापा....ऐसा कुछ नही है ...''

समीर के शरीर मे करंट सा दौड़ गया, क्योंकि काव्या का दाँया मुम्मा उसकी बाजू से रगड़ जो खा रहा था ..

वो कांपती हुई सी आवाज़ मे बोला : "मुझे बताओ बेटा...एंड डोंट वरी, मैं कुछ नही कहूँगा ...''

उसकी भी हालत खराब होने लगी थी, क्योंकि उसके पयज़ामे मे सोए हुए लंड ने उठना शुरू कर दिया था, काव्या के मुम्मे से टच होते ही ...और रात के समय वो अंडरवीयर भी नही पहनता था ..इसलिए बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करते हुए उसकी आवाज़ मे कंपन आ रहा था ..

एक पल के अंदर पूरी योजना और कहानी तैयार थी काव्या के दिमाग़ मे ...और उसने उसपर अमल भी करना शुरू कर दिया था ..

वो थोड़ा और चिपकती हुई सी बोली : "आप मम्मी को तो कुछ नही बोलेंगे ना ....''

समीर समझ गया की वो अपनी मम्मी से डर रही है शायद, इसलिए उसने काव्या के सिर पर हाथ फेरते हुए सांत्वना दी और बोला : "नही बेटा...मैने कहा ना , आई एम युवर फ्रेंड ...मैं किसी से भी कुछ नही बोलूँगा ...''

काव्या ने अपना चेहरा उपर उठाया...उसके होंठ बिल्कुल समीर के होंठों के सामने थे ...दोनो की गर्म साँसे एक दूसरे के मुँह मे जा रही थी ...काव्या का तो पता नही पर समीर ने बड़ी मुश्किल से अपने होंठों को उसके होंठों से टच होने से बचाया ..उसके पिंक कलर के लश्कारे मार रहे होंठों से आ रही भीनी खुश्बू उसे पागल कर रही थी ..उसके लंड ने सारी सीमाएँ तोड़ते हुए पायजामें मे पूरा टेंट बना लिया था.

काव्या ने एक गहरी साँस ली और बोलना शुरू किया : "एक लड़का है ...हम जहाँ पहले रहते थे ...वहीं रहता था वो भी ...उसका नाम विकी है .... हम अक्सर घूमने भी जाते थे ..पर ऐसा कुछ भी नही था उस टाइम तक ...पर पिछले हफ्ते वो फिर से मिला था ....उसने मुझे मिलने के लिए लवर पॉइंट पर बुलाया है संडे को ..मैं डर गयी थी ..मुझे लगा की ये सब ग़लत है ..मम्मी क्या बोलेगी ...आप क्या सोचोगे मेरे बारे मे .....मैने मना कर दिया ...पर ...पर ...''

समीर : "पर क्या ....''

काव्या : "उसके साथ बिताए हुए पल मुझे बहुत अच्छे लगते हैं ...वो अक्सर मेरे हाथों को अपने हाथ मे लेकर चूमा करता था ...मुझे भी वो सब अच्छा लगता था ..कभी -2 वो आगे भी बढ़ने लगता ...पर मैं मना कर देती ...ऐसे खुले मे वो सब करके मैं अपनी और मम्मी की इज़्ज़त खराब नही करना चाहती थी ...फिर उसने वो सब बोल दिया ....बस ...तभी से मैं परेशान हू ...मुझे उसका साथ अच्छा लगता था ...वो जो भी बाते करता था ...वो जो हरकतें करता था वो सब मुझे पसंद था ...पर एकदम से जो हुआ, उसके बाद मैं सोच रही हू की क्या करू ...वो कहीं मुझे प्रपोज़ तो नही करेगा संडे को ...कही वो मुझे चूमने लगा तो … शायद .... मैं भी मना नहीं कर पाऊँगी उसको … ''

उसने अपनी मनघड़ंत कहानी सुना डाली अपने बाप को ..और इन सबके पीछे उसका एक मकसद था ..

उसने अपनी गली मे रहने वाले आवारा लड़के विक्की का नाम ले दिया , क्योंकि उसके दिमाग़ मे उस वक़्त और किसी और लड़के का नाम आया ही नही...नितिन का वो ले नही सकती थी...वरना उसकी वजह से शायद उसकी सहेली श्वेता का आना भी बंद हो जाता उसके घर ..इसलिए एकदम से उसके दिमाग़ मे विक्की का नाम आ गया,

उसकी योजना के अनुसार वो अपने बाप को ये बताना चाहती थी की उसे ये सब किस्सेस वगैरह अच्छी लगती है ..और वो और भी आगे बड़ना चाहती है ...पर अपनी इज़्ज़त की भी फ़िक्र है उसको ...

और ये सुनकर शायद उसका बाप ही उसका साथ देते हुए उसकी सुलग रही जवानी को अपने लंड के पानी से बुझा डाले ..ये थी उसकी योजना.

पर समीर के दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था .

उसने भी काफ़ी दुनिया देख ली थी ..वो भी जानता था की जवानी के ऐसे मुकाम पर पहुँचकर ऐसी बातें सभी को अच्छी लगती है ...काव्या का भी मन करता होगा वो सब करने का ..वो भी चाहती होगी की उसका भी कोई बीएफ हो, जो उसे प्यार करे ...उसे चूमे ...

उसके दिमाग में तो ऐसे सीन चल रहे थे जिसमे काव्या किसी जवान लड़के को स्मूच है , और ये सब सोचते हुए उसका लंड आज एक अलग ही आकार में पहुँच चूका था

अगर काव्या को सही राह नही दिखाई तो वो अपनी जवानी को गली के ऐसे बदमाश लड़कों के हाथ कुर्बान कर देगी ..

ये तो उसकी माँ की दी गयी अच्छी परवरिश का नतीजा है की वो ये सब करते हुए डर रही है ...घबरा रही है ...वरना आजकल की लड़कियाँ ये सब करने से पहले ऐसे अपने माँ या बाप को वो सब नही बताती ...उसने तो ये सब एक दोस्त बनकर जान लिया है ..वरना वो ऐसे ही घुटती रहती अपनी जिंदगी मे ..

अब उसे भी ऐसे गाइड करना पड़ेगा काव्या को की उसे लगे की वो उसका भला ही चाहता है ..

समीर ने मन ही मन सब कुछ सोच लिया और काव्या से बोला : "इसमे इतना डरने की क्या बात है ...मैं जैसा कहता हू वैसे करती रहो ...कुछ नही होगा...''

इतना कहकर उसने काव्या के माथे को चूमते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया..

काव्या के दोनो हाथ भी उसे हॅग करने के लिए आगे हो गये...और उसके पेट से अपने हाथ लिपटाते हुए उसका हाथ जब समीर के लंड से छू गया तो उसे यकीन हो गया की उसकी योजना कारगार हो रही है ..समीर उसकी बात से और उसके करीब आने से उत्तेजित हो रहा है ..

उसने कुछ और नही पूछा समीर से की क्या करना है ...वो सपनो की दुनिया मे खो सी गयी ..आँखे बंद करते हुए ..

और अपने बेडरूम की खिड़की से रश्मि दोनो बाप बेटी के प्यार को देखकर खुश हो रही थी.... उसके दिमाग़ से इस बात का बोझ उतार गया था की उसके पति और बेटी के बीच जो दूरी थी वो अब कम हो रही है ..

वो गुनगुनाती हुई सी बाथरूम मे गयी और अपनी सैक्सी नाईटी पहन कर वापिस आ गयी...वो आज अपने पति को खुश कर देना चाहती थी पूरी तरह से .... पर उसे क्या पता था की आज समीर की हालत काव्या ने ऐसी कर दी है की वो बुरी तरहा से खूंखार हो उठा है ..

काव्या को छोड़कर जैसे ही समीर अपने बेडरूम मे आया वो रश्मि पर टूट पड़ा ..

रश्मि तो पहले से ही चुदाई के लिए तैयार थी ...उसने तो सोचा था की आज वो अपनी तरफ से पहल करते हुए अपने पति को खुश करेगी ...पर समीर ने कुछ करने का मौका ही नही दिया उसको ...

उसके गाउन को एक ही पल मे उतारकर उसके जिस्म से अलग कर दिया और ज़ोर-2 से चूसने लगा उसके मुम्मों को ...

वो कराह उठी उसके जंगलिपन से .... समीर ने उसके निप्पल को अपने दांतो से काटकर उसे ज़ख्मी सा कर दिया ..

''अहह .....समीईईईईईर .......धीरेएरए .............. उम्म्म्मममममम .....दर्द हो रहा है ...........अहह ......आराअम से करो ................मैं कर तो रही हू ................अहह ....''
पर वो कहाँ मानने वाला था ....उसने रश्मि को बेड पर लिटाया और उसकी टाँगो को दोनो दिशाओं मे फैलाकर अपना सिर अंदर झोंक दिया....

एक घंटे से चुदाई के लिए मचल रही गीली चूत मे जब जीभ जाती है तो क्या हाल होता है, ये आज रश्मि को अच्छी तरह से पता चल गया ...

उसकी लबाबदार चूत मे से रसीला पानी बह-बहकर नीचे तक जा रहा था ...जिसे समीर किसी जंगली कुत्ते की तरह अपनी जीभ से सड़प -2 कर चाटे जा रहा था ...

रश्मि ने समीर के बालों को पकड़ कर पीछे करना चाहा पर वो ना कर पाई...उसके पैने दाँत और खुरदूरी जीभ ने उसकी चूत के फुव्वारे को चालू कर दिया था ..जिसमे से मीठा पानी निरंतर निकल कर बाहर आ रहा था .

समीर ने रश्मि को बेड पर बिठाया और उसके बालों को बेदर्दी से पकड़कर अपना पठानी लंड उसके मुँह के अंदर उतार दिया...

रश्मि भी अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी ...अपनी चूत को मिले मज़े का बदला उतारने का वक़्त अब आ चुका था ...उसने अपना पूरा मुँह खोला और उसके लंड को बड़ी कुशलता के साथ किसी रंडी की तरह पूरा का पूरा अपने मुँह के अंदर उतार लिया.

और उसकी बॉल्स को सहलाती हुई उसका लंड चूसने लगी ..

जैसे ही समीर को लगा की वो झड़ने वाला है, उसने अपना लंड बाहर खींच लिया और फिर से रश्मि को लिटा कर उसके उपर आ गया ...और उसकी आँखो मे देखते हुए अपना हथियार उसकी गुफा मे उतार दिया ...

वो धीरे-2 अंदर जा रहा था ..और रश्मि ज़ोर-2 से सिसक रही थी ..

और उसके बाद तो समीर ने ऐसे झटके दिए उसकी चूत के अंदर की रश्मि का पूरा फर्नीचर हिल गया ...उसके हर झटके से उसकी छातियाँ उपर उछलती और फिर नीचे आती ...

वो बुरी तरह से चिल्ला रही थी

''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह समीर …… येस्स्स्स्स ……… और जोर से करो …… आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म्म्म्म उह्ह्ह्न्न उह्ह्हन्न्न्न हां हां अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मर गयी , चोदो , और तेज मारो …… ''


और अंत मे जब वो झड़ने लगा तो रश्मि ने उसकी कमर पर अपनी टांगे लपेट ली....और दोनो एक दूसरे को स्मूच करते हुए झड़ने लगे ...

दोनो के आनंद की चरम सीमा मिल चुकी थी एक दूसरे को .

रश्मि सोच रही थी की आज क्या हो गया था समीर को...जो वो इस तरह जंगली तरीके से उसकी चुदाई कर रहा था ..

पर ये बात सिर्फ़ समीर और काव्या ही जानते थे ...क्योंकि काव्या ने आज जिस तरह से उससे लिपट कर और अपने दिल की बात उसे बताकर समीर को उत्तेजित किया था, वो सारी उत्तेजना उतारने का सिर्फ़ रश्मि ही ज़रिया थी...पर चुदाई करते हुए उसके दिमाग़ मे सिर्फ़ और सिर्फ़ काव्या ही थी ..

उसने सोचना शुरू कर दिया था की अगले दिन वो काव्या से क्या बात करने वाला है .

अगले दिन समीर सीधा काव्या के रूम मे गया , रश्मि उस वक़्त किचन मे नाश्ते का इंतज़ाम करवा रही थी .

उसने काव्या को अंदर जाने से पहले आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नही आया, वो अंदर चला गया, वो शायद नहा रही थी, क्योंकि बाथरूम से शावर चलने और गुनगुनाने की आवाज़ें आ रही थी .

काव्या का कमरा बिल्कुल सॉफ सुथरा सा था, सलीके से उसने हर चीज़ अपनी जगह पर सजाकर रखी हुई थी ..छोटी-2 पिक्चर्स दीवारों पर थी, जिसमे उसके बचपन से अब तक की जीवनी बयान थी ..वो उन्हे देखते-2 खुली हुई अलमारी के पास पहुँच गया जिसमे काव्या के कपड़े रखे थे, शायद वो उसको खोलकर बंद करना भूल गयी थी, बेड पर उसने एक टी शर्ट और जींस रखी हुई थी, जो वो शायद नहाने के बाद पहनने वाली थी, अचानक उसकी नज़र जींस के नीचे रखे लाल रंग के कपड़े पर पड़ी, उसने जींस को हटाकर उसे देखा तो उसके दिल की धड़कन तेज हो गयी, वो रेड कलर की एक छोटी सी ब्रा थी...और साथ मे मेचिंग कच्छी ….


उस मुलायम कपड़े को हाथ मे लेकर वो उसे मसलने लगा...और उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वो सच मे काव्या की मखमली और मुलायम चूत को अपनी उंगलियों से सहला रहा है..

और अंदर नहाती हुई काव्या ने जब अपने पापा की आवाज़ सुनी तो वो रोमांचित सी हो उठी..उसने मन ही मन सोचा की सच मे ये लड़कियों का जादू भी क्या चीज़ होता है, मर्दों को चैन से नही बैठने देता, इतनी जल्दी थी उसके समीर पापा को बात करने की, सीधा कमरे मे ही घुस आए और वो भी इतनी जल्दी...उसके बाहर नाश्ते की टेबल पर मिलने का भी सब्र नही हुआ..पर आवाज़ देने के बाद काफ़ी समय तक बाहर से कोई और आवाज़ नही आई तो उसने धीरे से अपने बाथरूम का दरवाजा खोलकर देखा की वो बाहर क्या कर रहे हैं..और जो उसने देखा वो देखकर उसके तन -बदन मे आग सी लग गयी..

समीर उसकी ब्रा और पेंटी को अपने हाथ मे लेकर मसल रहा था ..

और उसके देखते ही देखते ना जाने समीर के मन मे क्या आया, वो उसकी पेंटी को अपनी नाक के पास लेजाकर सूंघने लगा..

अब तो काव्या की हालत खराब होने लगी...उसे तो ऐसा लगा की उसका सोतेला बाप सीधा उसकी चूत को सूंघ रहा है, वो उसकी गर्म सांसो को अपनी पुस्सी पर महसूस कर रही थी..और उसे महसूस करते ही उसका बदन अकड़ने सा लगा..उसके गीले जिस्म पर पसीने की बूंदे उभरने लगी...वो गर्म हो उठी एक दम से..

अब वो मूठ तो मार नही सकती थी,कितनी बेबस सी थी वो उस वक़्त..क्योंकि समीर उसके कमरे मे मोजूद था, उसने किसी तरह से अपनी भावनाओ पर काबू किया और वापिस अंदर आकर शावर के नीचे खड़ी होकर अपने बदन की गर्मी को शांत किया..उसने भी बदला लेने की सोची और अपने गीले बदन पर एक टावल लपेट कर बाहर निकल आई..


काव्या : "अरे पापा ....आप....गुड मॉर्निंग.''

समीर एकदम से हड़बड़ा सा गया..क्योंकि वो तो अपनी ही दुनिया मे मस्त होकर उसकी कच्छी को सूंघ रहा था..और जब काव्या ने आवाज़ लगाई तो वो उसकी पेंटी को जीभ लगा कर चख भी रहा था...की शायद ऐसा करने से उसकी कुँवारी बेटी की मसालेदार चूत का स्वाद मिल जाए..

उसने जल्दी से पलटकर उसकी तरफ देखा और अपने हाथ मे पकड़ी हुई पेंटी को अपने पीछे छुपा लिया..

समीर : "उम्म ...गु ...गुड मॉर्निंग .....बेटी. .....काव्या ....''

उसकी हड़बड़ाहट देखकर वो भी हँसने लगी..

उसने नहाने के बाद अपना बदन पोंछा भी नही था..और उसका टावल उसके स्तनों के उपर से लेकर उसकी जांघों तक आ रहा था..बड़ी ही सेक्सी लग रही थी वो उस वक़्त..वो भी ये बात जानती थी..इसलिए बड़े ही सेक्सी स्टाइल मे , इतराकर चलती हुई सी वो अपने पापा के पास पहुँची ...और उनके पास पहुँचकर धीरे से बोली : "ऐसे किसी जवान लड़की के रूम मे बिना पूछे नही आना चाहिए ...''

और उसने अपना हाथ समीर के पीछे लेजाकर अपनी ब्रा पेंटी को पकड़ लिया, जिसे समीर ने अपने हाथों मे पकड़ा हुआ था..

समीर की तो हालत एकदम से खराब हो गयी, ऐसे रंगे हाथों पकड़े जाने से..

और ऐसा करते हुए काव्या का नंगा जिस्म, जो सिर्फ़ एक पतले से टावल से ढका हुआ था, समीर से छू गया..

पर समीर तो अपनी चोरी पकड़े जाने से परेशान था, वो बेचारा तो उसके जवानी की आग मे जल रहे बदन की गर्मी का अहसास भी नही ले पाया..

वो हड़बड़ाते हुए अपनी सफाई देने लगा : "वो ...दरअसल ...तुम कमरे मे नही थी ...तो ...मैने देखा ...की यहा तुम्हारे कपड़े पड़े हैं .......तो मैने सोचा ....की ..... की ..... ''

काव्या बीच मे ही बोल पड़ी : "की देखु तो सही की मेरी ब्रा -पेंटी डिज़ाइन कैसा है ...मम्मी से अलग है या सेम है ....है ना ... हा हा हा ..''
Reply
05-25-2019, 11:43 AM,
#24
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--22

अब आगे
********* 

इतना कहकर वो हंस पड़ी ...उसने खुद ही माहोल को हल्का करने के लिए ऐसा कहा था ..

समीर अपनी बेटी के चेहरे को देखकर उसे समझने की कोशिश कर रहा था की वो उसके ऐसा करने से नाराज़ है या नही ..

काव्या : "ओहो ...मेरे भोले पापा ....ऐसा कोई इश्यू नही है ..आप मेरी ब्रा और पेंटी देख रहे थे तो कोई बात नही...इट्स नॉर्मल ...आई डोंट माइंड ...ये लो ...आराम से देखो ...''

इतना कहकर वो ड्रायर लेकर वहीं शीशे के सामने बैठकर अपने बॉल सुखाने लगी..

और समीर डम्ब सा होकर कभी उसको और कभी अपने हाथ मे पकड़े उसके अंगवस्त्रों को देखता...

वो आराम से बैठी हुई अपने बॉल सूखा रही थी ..

और जब समीर को आश्वासन हो गया की उसे कोई परेशानी नही है तो वो भी थोड़ा नॉर्मल हुआ और वहीं काव्या के पीछे की तरफ, बेड पर बैठ गया..

अब उसने काव्या के शरीर को अपनी आँखो से सेंकना शुरू कर दिया...उसकी सुराहीदार गर्दन ...घने बॉल....गोरे और चिकने कंधे ...और नीचे की तरफ उसकी फैली हुई गांड ..जो गीले टावल मे लिपटे होने की वजह से साफ़ दिखाई दे रही थी ..और वो तिरछी होकर बैठी थी, जिसकी वजह से उसकी मोटी-2 जांघे भी वो देख पा रहा था ...

और अचानक उसकी नज़र सामने शीशे की तरफ चली गयी ...और वहाँ देखते ही उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी ...वो अपनी बेटी काव्या की चूत को साफ़ देख पा रहा था वहाँ से ...बिलकुल चिकनी चूत थी उसकी .....और इतने मोटे-2 लिप्स थे उसकी पुसी के, उसका तो मन किया की उसकी चूत के साथ स्मूच कर ले ...

और काव्या अपनी ही धुन मे अपने बालों को सूखने मे लगी थी ...उसने जब देखा की समीर एकदम से टकटकी लगाकर शीशे मे कुछ देख रहा है तो उसे ये अहसास हुआ की जिस एंगल मे वो बैठी है,उसमे उसकी चूत साफ़ दिख रही होगी उसके बाप को ..वो एकदम से खड़ी हो गयी ..

एक मिनट के लिए ही सही पर उसकी चिकनी चूत को देखकर समीर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ..

काव्या एकदम से पलटी और समीर के आगे हाथ फेला कर बोली : "दो ज़रा मुझे ...''

समीर (चौंकते हुए) : " क ... क ...क्या ?"

काव्या (हंसते हुए) : "मेरी पेंटी ....और क्या ...''

उसने डंब सा बनकर अपने हाथ मे पकड़ी हुई पेंटी आगे कर दी..

और अपनी बेशर्मी का परिचय देते हुए काव्या ने समीर के सामने ही अपनी पेंटी पहननी शुरू कर दी..

पहले तो उसके हाथ मे पेंटी देकर वो बाहर जाने लगा ..पर जब उसने देखा की पेंटी को हाथ मे लेते ही उसने उसे पहनना भी शुरू कर दिया है और उसे बाहर जाने के लिए भी नही बोला तो वो उसे उसकी नासमझी और बचपना समझकर वहीं खड़ा हो गया ...क्योंकि जाने का मन तो उसका भी नही था वहाँ से.

काव्या ने बड़े ही सेक्सी तरीके से अपनी एक टाँग उठाकर पेंटी अंदर डाली और फिर दूसरा पैर भी अंदर डाल लिया...और फिर उसे धीरे-2 उपर खींचकर टावल के अंदर ले गयी...और अपनी कमर मटकाते हुए उसने अंदर ही अंदर पेंटी को एडजस्ट किया और उसे पहन लिया ..फिर उसने घूमकर ब्रा भी ली समीर के हाथों से और उसे पहनकर उसने अपनी ब्रा के कप अपनी छातियों पर एडजस्ट किए और धीरे से टावल की गाँठ खोल दी, और टावल को खींचकर अपनी छातियों से नीचे खिसका दिया..और उसकी जगह पर उसने ब्रा के कॅप्स एडजस्ट कर लिए...समीर ने लाख कोशिश की पर उसकी ब्रेस्ट को नही देख पाया ...और इसी बीच टावल खुलकर पूरी तरह से नीचे गिर गया..

अब थी काव्या अपने सेक्सी रूप मे उसके सामने..सिर्फ़ एक छोटी सी लाल चड्डी और पीछे से खुली हुई ब्रा मे..वो पीछे की तरफ चलती हुई समीर तक पहुँची और बोली : "पापा...प्लीज़ .....इसे बंद कर दो पीछे से ....''

वो बेचारा बड़ी मुश्किल से अपने खड़े हुए लंड को छुपा पा रहा था....वो किसी लंबे डंडे की तरह सामने की तरफ तन कर खड़ा हुआ था...जिसे शायद काव्या ने देख भी लिया था...मज़े लेने के लिए वो एकदम से पीछे हुई और उसने अपने मोटे कूल्हे उसके खड़े हुए लंड पर पिचका दिए ...समीर का खड़ा हुआ लंड उसकी गद्देदार गांड के बीच दबकर रह गया...

समीर भी सोचने लगा की शायद ऐसे खुलेपन मे रहने की आदत है काव्या को, तभी किसी अबोध की तरह उसके सामने ही ब्रा-पेंटी पहन रही है ...और खुद ही उसे ब्रा को बंद करने को भी बोल रही है...कितना भोलापन है उसकी सोतेली बेटी मे..

उसने काँपते हुए हाथों से उसकी ब्रा के स्ट्रेप्स पकड़े और उन्हे आपस मे खींचकर बंद करने लगा..

''अहह .....धीरे पापा .....दर्द होता है ....ये ब्रा थोड़ी छोटी हो गयी है ...इसलिए आराम से करो ...''

समीर : "छोटी हो गयी है तो क्यो पहन रही हो...नयी ले आओ ...''

उसकी उंगलियाँ भी काव्या की पीठ पर नाचने लगी थी अब...वो भी खुलकर मज़े लेने के मूड मे आ चुका था ..

काव्या : "क्या करू पापा...आजकल टाइम ही नही मिलता...मम्मी को भी बोला है कितनी बार..वो भी नही चलती मार्केट ...मुझे अकेले जाने मे शरम सी आती है...सेल्सबॉयस होते हैं ज़्यादातर ...इसलिए ...''

समीर ने क्लिप्स को बंद करते हुए उसे अपनी तरफ घुमा लिया..और बोला : "तुम्हे अगर परेशानी ना हो तो मेरे साथ चलो कभी....मैं दिलवा दूँगा तुम्हे ये सब...''

वो बात तो उससे कर रहा था पर उसकी नज़रें उसकी ब्रा की गहराइयों मे उतरकर उसके मुम्मों का वजन नाप रही थी ..

काव्या : "ओह्ह्ह्ह्ह्ह ...मेरे अच्छे पापा ....''

इतना कहकर वो अपने सोतेले बाप के गले से झूल सी गयी...और अपना लचीला बदन समीर के जिस्म से लपेटकर अपने बदन की गर्मी वहाँ ट्रान्स्फर करने लगी ..

समीर का लंड अब सीधा उसके पेट से टच कर रहा था ....वो भी मचल-2 कर अपने पेट पर खड़े हुए डंडे की गर्मी का मज़ा ले रही थी ..

दोनो को मालूम था की ऐसी परिस्थिति का क्या मतलब होता है...पर दोनो ही अंजान से बनकर, अपने रिश्तों की ओट मे उस अहसास को छुपाने का असफल प्रयास कर रहे थे ..

समीर के हाथ फिसलकर उसके कुल्हों पर जा लगे...तब काव्या को अहसास हुआ की जितना उसने सोचा था ये तो उससे ज़्यादा ही होने लगा है आज ...पर तभी उसका बचाव करते हुए उसकी माँ की आवाज़ गूँजी नीचे से

''काव्या ....... समीर .....कहाँ हो आप दोनो ....जल्दी आओ ...नाश्ता लग चुका है ...''

समीर ने हड़बड़ाकार उसे छोड़ दिया...पर तब तक वो उसके नर्म और मुलायम कुल्हों का मज़ा ले चुका था ....अपनी उंगलियों पर मिले आधे-अधूरे अहसास को अपने दिल मे दबाकर वो भारी मान से नीचे की तरफ चल दिया...

और नाश्ते की टेबल पर आकर बैठ गया..काव्या अपने बाकी के कपडे पहनने लगी तब तक .

इन सबमे तो उसे ये भी याद नही रहा की जिस काम से वो काव्या के कमरे मे गया था वो हुआ ही नही ...उसे तो उस लड़के के बारे मे बात करनी थी काव्या से ...

वो परेशान सा होकर फिर से सोचने लगा की कैसे और कब बात कर सकेगा वो काव्या से ..

समीर को गहरी सोच मे बैठे देखकर रश्मि उसके पास आई और बोली : "क्या हुआ ...आप इतने परेशान से क्यो लग रहे हैं ..''

समीर : "हूँ .... हाँ .... नही तो ...ऐसा कुछ नही है ...''

रश्मि समझ गयी की ज़रूर कोई बात है जो समीर उससे छुपाने की कोशिश कर रहा है ..

रश्मि : " कुछ तो बात है...आप इतना परेशान नही रहते वरना ..कोई बात हुई है क्या ...काव्या ने कुछ कहा ??"

समीर : "अरे नही ...काव्या क्यो कुछ कहेगी ...वो तो इतनी प्यारी बच्ची है ...''

प्यारी शब्द बोलते हुए समीर की आँखों के सामने काव्या नंगी होकर नाच रही थी ..

रश्मि : "फिर आप इतने परेशान क्यो हो.... मुझे बताइए, शायद मैं आपकी कोई मदद कर सकूँ ..''

समीर सोचने लगा की रश्मि सही कह रही है .. हो सकता है रश्मि उस परेशानी का कोई समाधान निकाल सके.

समीर थोड़ा गंभीर सा हो गया और बोला : "रश्मि ... जहाँ तुम लोग पहले रहते थे ...वहाँ कोई विक्की नाम का लड़का भी रहता था क्या ..''

रश्मि उसकी बात को सुनकर सोच मे पड़ गयी ... : "विक्की ..... विक्की ...... ...शायद .....हाँ ..बिल्कुल रहता था... याद आया ...वो हमारी ही गली मे रहता था ...बड़ा ही आवारा किस्म का लड़का है वो तो ...हमेशा आने जाने वालो को गंदी नज़रों से देखकर ....''

उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी, क्योंकि उसके दिमाग़ मे वो वाक़या घूमने लगा जब वो एक दिन ऑफीस से घर जा रही थी और तेज बारिश की वजह से उसकी साड़ी उसके बदन से पूरी तरह से चिपक गयी थी ...वो भागती हुई सी अपने घर की तरफ जा रही थी जब उसने देखा की चौराहे पर विक्की खड़ा हुआ उसके बदन को भूखे कुत्ते की तरह देख रहा है ...वो जानती थी की भीगने की वजह से उसकी छातियाँ साफ़ देखि जा सकती है,और हलकी ठण्ड होने जाने की वजह से उसके सेंसेटिव निप्पल भी खड़े हो गए थे,जिन्हे वो अपनी ललचाई हुई नजरों से घूर रहा था

वैसे ये उसका रोज का काम था, वो जब भी ऑफीस जाती थी , वो रोज सुबह और शाम के समय वहीं गली के बाहर खड़ा होकर उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब सा रहता था ..रश्मि को ये सब अच्छा नही लगता था, वो एक सभ्य समाज मे रहने वाली शरीफ औरत थी, और वो लड़का उसके बेटे की उम्र का था ... पर वो कर भी क्या सकती थी... कुछ बोलकर वो बिना वजह का झगड़ा नही करना चाहती थी .और रश्मि को अपनी जवान हो रही बेटी काव्या की भी चिंता थी..ऐसे आवारा किस्म के लड़कों से पंगा लेकर वो अपनी बेटी के लिए कोई मुसीबत मोल नही लेना चाहती थी .

वो तो अच्छा हुआ की रश्मि की शादी समीर से हो गयी ..और वो लोग वहां से निकल आए ...वरना उसकी गंदी नज़रों का सामना करते हुए तो रश्मि तंग आ चुकी थी ..

पर बेचारी रश्मि को ये बात कहाँ मालूम थी की वो हरामी किस्म का लड़का उसे तो क्या , मोहल्ले की हर औरत और लड़कियों को देखकर अपने लंड को मसलता है ... और ख़ासकर उसकी बेटी काव्या को देखकर, जिसके बारे मे सोचकर वो हर रात मूठ मारा करता था .

रश्मि हैरान थी की समीर को विक्की के बारे मे कैसे पता, वो कैसे जानता है उसको ..

रश्मि : "पर आप क्यो पूछ रहे हैं ...उसके बारे मे ..आप तो उसको जानते भी नहीं । ''

समीर : "देखो ....कल रात को...काव्या ने मुझे उस लड़के के बारे मे बताया ...''

रश्मि का तो सिर घूम गया वो बात सुनकर... भला उसकी बेटी का उस लफंगे से क्या वास्ता ...वो क्यो लेने लगी उसका नाम समीर के सामने ..

समीर आगे बोला : "वो दरअसल ...उस लड़के के साथ उसकी दोस्ती हो गयी थी शायद .... और दोनो एक दूसरे को पसंद भी करने लगे हैं ...''

इस बात को सुनकर तो रश्मि के सिर पर जैसे कोई पहाड़ सा टूट पड़ा ... ऐसा कैसे हो सकता है ... काव्या भला उस लड़के को क्यो पसंद करने लगी .. कहाँ उसकी राजकुमारी जैसी सुंदर काव्या और कहाँ वो गली का आवारा कुत्ता विक्की ...

उसकी तो समझ मे कुछ नही आ रहा था ... उसका सिर चकराने लगा...वो धम्म से वहीं कुर्सी पर बैठ गयी ..

समीर भागकर उसके पास आया ...उसे पानी दिया और उसके पास बैठकर रश्मि के हाथ को अपने हाथ मे ले लिया और बोला : "मुझे पता है की तुम्हे कैसा फील हो रहा होगा इस वक़्त ..वो बच्ची है अभी ..उसको दुनिया की कोई समझ नही है ...तभी शायद वो उस लड़के की बातों मे आ गयी है ...''

रश्मि एक दम से फट पड़ी : "वो लड़का एक नंबर का हरामी है ....हमारे मोहल्ले की हर औरत को छेड़ता था ...उसकी गंदी नज़रों को मैं भी आज तक भूली नही हू .... .. उसने मेरी बेटी को ... कैसे ...... मैं छोड़ूँगी नही उस कमीने को ...आज ही मैं उसके घर जाकर …… ''

समीर बीच मे ही बोल पड़ा : "नही ...तुम ऐसा कुछ नही करोगी ...ऐसा करने मे हमारी बेटी की कितनी बदनामी होगी वो तुम शायद नही जानती ... और तुम काव्या से भी कोई बात नही करोगी इस बारे मे ...उसने मुझपर भरोसा करके ये बात बताई है मुझे ...वो शायद तुम्हे नही बताना चाहती थी ये बात, पर मुझे बताकर उसने एक नये रिश्ते की शुरूवात की है मेरे साथ, और तुम ऐसा कोई काम नही करोगी जिसकी वजह से वो कभी भी मुझपर भरोसा करके कोई बात ना कर सके ...समझी ..''

समीर ने लगभग डाँटते हुए उसे ये बात कही थी .

रश्मि की रुलाई फुट गयी ... वो बिलख-2 कर रोने लगी : "मैने अपनी बेटी को दुनिया की हर बुरी नज़र से बचा कर रखा ...पर आख़िर उसपर दुनिया की बुरी नज़र पड़ ही गयी ... पता नही उस कमीने ने उसके साथ क्या-2 किया होगा ..''

समीर : "उसने मुझे सब बताया है..ऐसा कुछ नही हुआ है दोनो के बीच ...पर अगर हमने अभी कोई कदम नही उठाया तो ज़रूर हो जाएगा ...क्योंकि उस लड़के ने काव्या को लवर पॉइंट पर बुलाया है संडे को ..और यही बात सोच-सोचकर काव्या भी परेशान है ... हमारे पास सिर्फ़ 3 दिन का समय है ...इस बीच हमे कुछ करना होगा ताकि काव्या के सिर से उस लड़के का भूत उतर जाए...''

रश्मि भी अब संभाल चुकी थी ...उसे समीर की बातों मे समझदारी दिखाई दे रही थी ... जो भी करना होगा, सोच समझ कर ही करना होगा..

रश्मि ने एकदम से कुछ सोचा और अगले ही पल बोली : "मैं जाकर मिलूंगी उस लड़के से ...और उसे समझाने की कोशिश करूँगी ..''

समीर उसकी बात सुनकर कुछ देर चुप रहा और बोला : "हाँ ....शायद ये ठीक रहेगा ...तुम उस लड़के को समझाओ ...और मैं काव्या को समझाने की कोशिश करता हू ..''

वो ये बात कर ही रहे थे की काव्या अपने कपड़े पहनकर नीचे उतर आई और बोली : "मुझे क्या समझाना है पापा ...''

उसने बड़े ही भोलेपन से समीर की आँखों मे देखते हुए कहा .

रश्मि अपने आँसू पोछते हुए जल्दी से बाथरूम की तरफ चली गयी.

समीर : "अरे तुम आ गयी .... कुछ नही समझाना ...बस मैं तुम्हारी माँ से कह रहा था की तुम्हे शॉपिंग पर लेकर जाना है मुझे आज ...तो वो मना करने लगी की तुम शायद नही चलोगी ...बस वही कह रहा था की मैं समझा दूँगा तुम्हे ..''

शॉपिंग का नाम सुनते ही काव्या की आँखों मे चमक सी आ गयी, वो समझ गयी की समीर किस शॉपिंग की बात कर रहा है .समीर के साथ ब्रा-पेंटी की शॉपिंग के बारे मे सोचते ही उसकी चूत गीली हो उठी और उसमे से सोंधी सी खुश्बू निकलकर पूरे कमरे मे फैल गई.

काव्या : "मैं भला क्यो मना करने लगी ....आज ही शाम को चलेंगे शॉपिंग करने ...मैं कॉलेज से सीधा आपके ऑफीस आ जाउंगी ...ओके ..''

तब तक रश्मि भी आ गयी ...उसने काव्या की बात सुन ली थी ..वो बिना कुछ बोले किचन मे चली गयी...उसे अंदर ही अंदर काव्या पर गुस्सा जो आ रहा था...कैसी नासमझ है उसकी बेटी जो विक्की जैसे लुच्चे के चुंगल मे फँस गयी है ...

समीर और काव्या किस शॉपिंग के बारे मे बात कर रहे थे, वो बेचारी कुछ भी नही जानती थी ..उसके दिमाग़ मे तो बस ये बात घूम रही थी की कैसे वो विक्की को समझाएगी ...

दिन के समय तो पता नही वो कहाँ मिलेगा...शायद वो भी स्कूल या कॉलेज जाता हो...रश्मि ने तो हमेशा उसे सुबह और शाम के वक़्त चौराहे पर ही खड़ा हुआ देखा था, अपने आवारा दोस्तों के साथ ...सुबह का समय तो निकल ही चुका था अब ...उसने सोच लिया की शाम को वो ज़रूर जाएगी ..

समीर और काव्या भी शॉपिंग के लिए जा रहे हैं ...अच्छी बात है, काव्या को कोई जवाब नही देना पड़ेगा की वो कहाँ गयी थी ..

उसने ये बात समीर को भी बोल दी की शाम को वो उस लड़के से मिलकर उसे समझाने की कोशिश करेगी ...और तुम शॉपिंग के वक़्त काव्या को समझाने की कोशिश करना ...

यही एक तरीका समझ आ रहा था उन दोनो को..
Reply
05-25-2019, 11:44 AM,
#25
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--23

अब आगे
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और वो दोनो ये नही जानते थे की जिस बात को सोचकर वो दोनो इतने परेशान हो रहे हैं, ऐसा कुछ है ही नही...काव्या ने तो बस अपनी झूटी कहानी सुनाकर समीर के मन मे जगह बनानी चाही थी ..वो शायद नही जानती थी की उसका झूठ कितनी बड़ी मुसीबत लाने वाला है.

समीर और काव्या के जाने के बाद रश्मि बड़ी ही बेचैनी से अपने कमरे मे बैठी हुई वही सब सोच रही थी ...अचानक उसे कुछ याद आया .... उसने झट से अपना मोबाइल उठाया और अपनी पुरानी सहेली रीना का नंबर मिलाया, रीना उसके घर के पास ही रहती थी..अभी भी वो वहीं रहती है और दोनो मे अक्सर बातें भी होती रहती है..

वो अपने घर पर ही थी..थोड़ी देर इधर -उधर की बातें होने के के बाद रश्मि बोली : "अच्छा सुन , वो लड़का याद है , विक्की, को अपनी गली मे ही रहता था, कोने वाले घर मे ...वो लोग अभी वहीं रहते हैं क्या ..''

विक्की का नाम सुनते ही रीना आग बाबूला हो उठी : "नाम ना ले उस कमीने का ...सभी का जीना दुश्वार कर रखा है उसने ...तुझे तो पता है, उसकी माँ है नही, घर मे उसका शराबी बाप है,वो उसे कुछ कहता नही है..हर समय चौराहे पर अपने यार दोसों के साथ खड़ा होकर हर आने-जाने वाली औरतों और लड़कियों को छेड़ता रहता है ..लड़कियों की तो समझ आती है, पर हमारे जैसी औरतों मे क्या दिखता है उसको ... मेरी बेटी को भी छेड़ता है कमीना ..और जब मैं निकलती हू तो मुझे भी ..जीना दूभर करके रखा हुआ है ..सुबह शाम वहीं बैठा रहता है..दोपहर मे उसका कॉलेज होता है, वरना इस टाइम भी वहीं मिलता ...साला हरामजादा ...''

रीना ने जी भरकर विक्की को गालियाँ दी ..फिर बोली : "पर तू क्यो पूछ रही है उसके बारे मे ...''

रश्मि : "वो बस ऐसे ही ...अच्छा सुन, अभी मैं रखती हूँ , लंच की तैयारी करनी है ..''

उसने जल्दी से फोन रख दिया....उसे पता तो चल गया था की विक्की कॉलेज जाता है और शाम को ही मिल सकेगा..उसने तो पहले से ही सोचकर रखा था की आज किसी भी हालत मे वो उससे जाकर मिलेगी..

फिर वो अपने दूसरे कामों मे व्यस्त हो गयी..

शाम कब हो गयी उसको भी पता नही चला..

समीर अपने ऑफिस में कुछ काम कर रहा था की रिसेप्शन से फोन आया इंटरकम पर : "सर ...आपकी बेटी आई है ..''

समीर : "तो इसमे पूछने वाली क्या बात है ईडियट, अंदर भेजो उसको...''

रिसेप्शनिस्ट सहम गयी...वो बेचारी तो अपना काम कर रही थी..उसने काव्या को अंदर भेज दिया..

काव्य ने वही सुबह वाली जींस और येल्लो कलर का टॉप पहना हुआ था , वो उसमे बड़ी सेक्सी लग रही थी

कुछ देर तक बैठने के बाद वो दोनो मॉल की तरफ चल दिए..जिसके बारे में समीर ने पहले से ही सोच रखा था

शाम के 6 बज रहे थे ... घर पर बैठी रश्मि भी तैयार होकर विक्की से मिलने के लिए चल पड़ी.

रश्मि का दिल जोरो से धड़क रहा था...वो मन ही मन सोचती जा रही थी की कैसे बात करेगी वो विक्की से...जाते ही उसको डांटेगी ...या थप्पड़ मारेगी...या फिर उसके बाप से उसकी शिकायत करेगी...पर पता भी तो चले की आख़िर मामला कहाँ तक पहुँचा है...उसने निश्चय कर लिया की पहले आराम से ही बात करेगी...अगर नही माना तो फिर पुलिस की धमकी या फिर कुछ और करेगी.

अंधेरा होने को था ..वो अपने पुराने मोहल्ले के बाहर ही उतर गयी..थोड़ी दूर ही था वो चोराहा ,जहाँ वो लुच्चा अपने यार-दोस्तों के साथ खड़ा होता था..

रश्मि को दूर से ही उन लोगो का ग्रूप दिखाई दे गया...हमेशा कि तरह आने-जाने वाली हर औरत को घूर कर गंदी-2 फब्तियाँ कस रहे थे..एक दूसरे के हाथ पर ताली मार रहे थे...हंस रहे थे..

वो धीरे-2 चलती हुई वहाँ पहुँची..और उसकी नज़रें विक्की को तलाशने लगी...सभी लड़के उसको यूँ खड़ा होकर किसी को ढूंढता हुआ देखकर हैरान थे..…रश्मि ने सभी के चेहरे देख लिए पर उसमे विक्की कहीं नही था..ज़्यादातर लड़के उसकी गली के ही थे..जो उसकी आँखों के सामने बड़े हुए थे..और अब देखो ज़रा,बेशर्मो की तरह सभी के हाथ मे सिगरेट है..और चेहरे पर कमीनापन.

एक लड़के सूरज ने उसको फट से पहचान लिया..वो बोला : "अरे ...रश्मि आंटी ... आप ..आज यहाँ कैसे ..?''

उसने झट से अपने हाथ मे पकड़ी हुई सिगरेट फेंक दी.

दूसरे लड़के शायद उसको पहचान नही सके थे..वो उसके कान के पास जाकर फुसफुसाए : "बे कौन है ये माल भाई...हमे भी तो बता दे..''

सूरज उनकी तरफ मुड़ा और बोला : "अरे भूल गया...ये वो पीले वाले मकान मे रहती थी ना..अरे यार...वो ..काव्या की मम्मी ....''

काव्या का नाम सुनते ही सभी को याद आ गया की वो कौन है...रश्मि के तो तन बदन मे आग सी लग गयी, उन लफंगो के मुँह से अपनी बेटी का नाम सुनकर.

वो भड़कती हुई सी बोली : "शरम नही आती तुम लोगो को...ऐसे यहाँ खड़े होकर बदतमीज़ी करते हुए...''

सूरज तपाक से बोला : "अरे आंटी...आप तो ऐसे बोल रे हो जैसे हम यहाँ पहली बार खड़े हैं..हम तो रोज ही यही खड़े होते हैं..अब इसके लिए भी आपकी परमिशन लेनी पड़ेगी क्या ..हा हा हा..''

और वो अपने दोस्तों के हाथ पर ताली मारकर ज़ोर से हंसा.

रश्मि को गुस्सा तो बहुत आया..पर वो कुछ ना बोल पाई..

रश्मि : "वो...वो विक्की कहाँ है ..''

रश्मि के मुँह से विक्की का नाम सुनते ही सारे यार दोस्त एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे...उनमे ख़ुसर फुसर शुरू हो गयी...एक दूसरे से पूछने लगे की विक्की ने ये माल कब फँसाया..

रश्मि भी उनकी बातें सुन पा रही थी..पर दाँत पीसकर रह गयी.

वो एकदम से भड़क कर बोली : "मैने पूछा विक्की कहाँ है..''

तभी पीछे से आवाज़ आई : "तुमने पुकारा और हम चले आए...दिल हथेली पर ले आए रे....हे .....''

और विक्की किसी फिल्मी स्टाइल मे रश्मि के पीछे से प्रकट हुआ..उसके हाथ मे लाल रंग की सिगरेट की डिब्बी थी..जिसे वो दिल की तरह रश्मि के सामने पेश कर रहा था.

रश्मि ने उसके चेहरे को देखा तो उसका गुस्सा सांतवे आसमान पर जा पहुँचा...पर तभी उसके अंदर से आवाज़ आई की जैसा वो सोच कर आई थी उसके अनुसार ही चलना चाहिए..उसने अपनी आँखे बंद की और थोड़ा शांत हुई..

तब तक विक्की बोला : "नमस्ते आंटी ...क्या बात है..आप इतने दिनों के बाद आई यहाँ...हम लोगो को तो भूल ही गयी..आप लोगो के चले जाने के बाद ये मोहल्ला इतना वीरान सा हो गया है''

उसका इशारा काव्या की तरफ भी था.

विक्की की बात सुनकर सभी दोस्त फिर से हँसने लगे.

रश्मि : "मुझे तुमसे कुछ बात करनी है....अकेले में ..''

सूरज ये सुनते ही बोल पड़ा : "वाह गुरु.....सही है...''

विक्की ने उसको घूर कर देखा...वो एकदम से चुप हो गया.

विक्की भी सोचने लगा की ये अचानक रश्मि आंटी उससे क्या बात करने के लिए आई है...वो कुछ ना बोला और उनके साथ एक कोने की तरफ चल दिया.दोनों पास ही बने एक पार्क के बहार एक पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो गए

एकांत मिलते ही रश्मि ने उसके उपर सवालों की बौछार कर दी : "तुम्हारा और काव्या का क्या चक्कर चल रहा है...कब से चल रहा है ये सब ...तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई उस छोटी सी बच्ची को अपने जाल मे फँसाने की ...मकसद क्या है तुम्हारा ...किस हद तक जा चुके हो तुम दोनो ??"

विक्की अपनी फटी हुई आँखों से उसकी बातें सुनता रहा और सोचने की कोशिश करने लगा की आख़िर ये माजरा क्या है...वो सोचने लगा की रश्मि ऐसा क्यो बोल रही है..उसने तो आज तक काव्या को देखने और एक दो बार छेड़ने के अलावा कुछ किया भी नही था...और जब से ये लोग यहाँ से गये हैं, उसने तो काव्या को देखा भी नही ..पर वो ऐसा कुछ बोल रही है इसका मतलब कोई गड़बड़ ज़रूर है...शायद इन्हे कोई ग़लतफहमी हुई है...पर अगर ग़लतफहमी हुई है तो वो काव्या से पूछ कर अपनी ग़लतफहमी दूर कर सकती थी..पर वो सीधा उसके पास आई है..यानी काव्या को पता नही है..

उसका शैतानी दिमाग़ तेज़ी से चलने लगा..उसे वो बात भी याद आ गयी जब काव्या उसको आख़िरी बार मिली थी और उसने कहा था की वो जा रही है यहाँ की गंदगी से दूर जहाँ उसके जैसे कुत्ते ना हो..

अपनी वो बेइजत्ती याद आते ही विक्की की झांटे सुलग उठी..उसने मन ही मन सोच लिया की अब वो दिखाएगा की ये कुत्ता किस हद तक जा सकता है ...

वो एकदम से गरजकर बोला : "साली...मुझपर क्यो चीख रही है....अपनी बेटी से जाकर पूछ ..वो ही बताएगी की हम किस हद तक जा चुके हैं ...''

उसके मुँह से अपने लिए गाली सुनकर रश्मि एकदम से सहम गयी...उसने तो इसके बारे मे सोचा भी नही था की अगर विक्की इस तरह से चोडा हो गया तो वो क्या करेगी..वो उसकी बेटी के बारे मे ऐसे बोल रहा है यानी ज़रूर कुछ ना कुछ बात है..

विक्की : "सोच क्या रही हो आंटी...आपको शायद पता नही है..मेरे ऊपर अँधा विश्वास करती है तेरी बेटी...अगर मैं रात के 2 बजे उसको मिलने के लिए बुलाऊ ना, नंगे पैर भागी चली आएगी...और मैं जो कह दू ना, वो बिना सोचे समझे कर देगी...''

इतना सुनते ही रश्मि का गुस्सा फिर से फुट पड़ा, उसने एक झनझनाता हुआ सा थप्पड़ विक्की के गाल पर दे मारा..विक्की की आँखो के सामने तारे दिखाई देने लगे...पर वो थप्पड़ तो आने वाले मज़े की शुरूवात थी..इसलिए वो कुछ ना बोला और मक्कारों की तरह हँसने लगा.

रश्मि : "तुम्हारी जुर्रत कैसे हुई मेरी बेटी को फुसलाने की...वो तुम्हारे चुंगल मे कैसे फंसी , ये तो मैं नही जानती, पर आज के बाद तुमसे वो नही मिलेगी, इसका मैं भरोसा दिलाती हू तुझे...कमीने..तू मेरी बेटी से दूर ही रह, यही तेरे लिए बेहतर है..वरना मैं पुलिस मे रिपोर्ट करवा कर तुझे अंदर करवा दूँगी..समझा..''

विक्की : "ये पुलिस की धमकी मुझे मत दो आंटी...अगर मैं अपनी औकात पर उतर आया ना तो तेरी और तेरी बेटी की जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद कर दूँगा...तेरे नये पति को तेरे बारे मे ऐसी -2 बातें बोल दूँगा की वो तुझे अपने घर से निकाल कर बाहर करेगा..और फिर तू घूमती रहना अपनी बेटी के साथ सड़कों पर..और तेरी बेटी की कुछ तस्वीरें है मेरे पास, जिनके बारे मे वो खुद भी नही जानती, अगर तूने ऐसी कोई हरकत की तो उन सभी पिक्चर्स को नेट पर डलवा कर तेरी बेटी की ऐसी बदनामी करवाऊंगा की तू जीते जी मर जाएगी..''

उसकी ये बात सुनते ही रश्मि के पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गयी...जिस बात का डर था वही हुआ..उस कमीने के पास काव्या की कुछ आपत्तिजनक पिक्चर्स है..हे भगवान , ये क्या अनर्थ कर दिया काव्या ने, ऐसी नासमझी की उम्मीद नही थी उसको काव्या से..

पर वो बेचारी नही जानती थी की ये सब विक्की की एक चाल थी...ना तो उसका काव्या के साथ कोई ताल्लुक था और ना ही उसके पास उसकी कोई आपत्तिजनक फोटो थी..वो तो बस अंधेरे मे तीर मार रहा था, अगर तीर निशाने पर लगा तो उसके तो वारे न्यारे हो जाने थे..वो गौर से रश्मि के चेहरे पर आ-जा रहे भाव को देख रहा था.

कुछ देर सोचने के बाद रश्मि बोली : "तुम आख़िर चाहते क्या हो...''

विक्की : "ये उमर ही ऐसी होती है आंटी...इसमे तो सिर्फ़ एक ही चीज़ को चाहा जाता है...''

और उसने बड़ी ही बेशर्मी से अपने होंठों पर अपनी जीभ फेरी और उसे पूरी तरह गीला करके चमका दिया.

रश्मि गुस्से से भभक रही थी....उसकी नसों का खून उबल कर बाहर आने को था...पर वो कुछ ऐसा वैसा करके बात को बिगाड़ना नही चाहती थी..

रश्मि समझ गयी की वो अपनी औकात पर उतार आया है...अभी शायद बात उस हद तक नही पहुँची है जितना वो सोच रही है..पर जिस तरह से विक्की का हौसला है,वो समझ रही थी की बात वहाँ तक पहुँचने मे भी टाइम नही लगेगा..

रश्मि : "तुम काव्या से दूर हो जाओ...और मुझे वो फोटोज भी दे दो , इसके लिए मैं तुम्हे मुँह माँगी कीमत देने के लिए तैयार हू..''

अब तो विक्की को पूरा विश्वास हो गया की उसका तीर निशाने पर लगा है...क्योंकि सिर्फ़ उसकी बात मानकर ही रश्मि उसे पैसे देने के लिए तैयार हो गयी है...उसने मन मे ठान लिया की अब रश्मि की इस मजबूरी का फायदा वो ज़रूर उठाएगा..

उसने हिम्मत दिखाते हुए कहा : "आंटी जी...हर चीज़ की कीमत सिर्फ़ पैसों से नही तोली जाती...''

और इतना कहते-2 उसने अपना दाँया हाथ सीधा उसके बाँये मुम्मे के उपर रखकर ज़ोर से दबा दिया.

रश्मि को एक पल के लिए तो समझ नही आया की ये हुआ क्या है...उसने तो विक्की से ऐसी हरकत की कोई उम्मीद भी नही की थी ..और जब तक वो रिएक्ट कर पाती, विक्की ने उसके मुम्मे को बुरी तरहा मसल कर उसके निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच फँसा कर ज़ोर से निचोड़ दिया था..

वो दर्द के मारे चिहुंक उठी..और उसने एक तेज धक्का देकर विक्की को दूर किया ..और ज़ोर से चिल्लाई : "ये क्या बदतंमीजी है...तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ये सब करने की...''

विक्की बेशर्मों की तरह हंसता हुआ बोला : "अरे आंटी ...आप तो नाराज़ हो गयी...ये तो बस मेरी बचपन से तमन्ना थी की किसी दिन आपके मुम्मो को ऐसे पकड़ कर दबा दू ..आज आप इतने पास खड़ी हो तो मुझसे सब्र नही हुआ...इसलिए कर डाला...वैसे एक बात बोलू,आप ऐसी हालत मे नही है की मुझे किसी भी बात के लिए मना कर सको...वरना इसका अंजाम तो आप जानती ही हो...''

उसकी धमकी भरी बात सुनकर वो सहम गयी...एक पल के लिए अपनी बेइजत्ती और दर्द भूल कर वो चुपचाप खड़ी हो गयी और अपनी नज़रें नीचे झुका ली.

विक्की : "हाँ ...ये सही है...ऐसे ही रहा करो मेरे सामने, आगे से अगर तुमने मुझसे उँची आवाज़ मे बोली या मुझे आँखे दिखाई तो ये तेरी बेटी के लिए अच्छा नही होगा...''

रश्मि कुछ ना बोली...उसने हाँ मे सिर हिला दिया.

रश्मि : "देखो विक्की....तुम्हारे मन मे जो भी है...वो मुझे बता दो...आख़िर क्या चाहते हो तुम मेरी बेटी से..''

विक्की : "उसकी कुँवारी चूत मे अपना लंड डालना चाहता हू...सुन लिया...अब खुश है..''

विक्की के मुँह से एकदम से ऐसी बेशर्मी भरी बात सुनकर रश्मि अवाक सी होकर उसे देखती रह गयी...उसकी खुली आँखो के सामने एकदम से पिक्चर सी चलने लगी..जिसमे विक्की और काव्या पूरे नंगे होकर एक दूसरे को चूमने मे लगे हुए थे...और जब चुदाई की बारी आई तो काव्या के मना करने के बावजूद उसने उसकी छोटी सी चूत मे अपना मोटा लंड एक ही झटके मे पेल दिया...उसकी फूल सी बेटी की चूत मे से खून का फव्वारा निकल पड़ा...वो दर्द से छटपटाने लगी...चिल्लाने लगी..पर वो दरिंदे की तरह काव्या की चुदाई करता रहा...और फिर काव्या भी उसका साथ देने लगी...फिर ऐसा रोज होने लगा और धीरे-2 वो उसकी पर्सनल रंडी बनकर रह गयी..
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05-25-2019, 11:44 AM,
#26
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--24

अब आगे
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और ये विचार आते ही वो एकदम से चीख पड़ी...और विक्की के पैरों मे गिरकर रोने लगी : "नहियीईईईईईईईईई......ऐसा मत करना....प्लीस...विक्की, मेरी बेटी की इज़्ज़त बक्श दो...मैं तुम्हारे पैर पड़ती हू.....''

वो उसके पैरों से किसी बेल की तरह लिपट गयी...उसके मोटे-2 मुम्मे जब विक्की को अपनी टाँगो पर महसूस हुए तो उसके आनंद की कोई सीमा ही नही रही...वो अपने घुटनो को उसके उरोजों पर रगड़ने लगा...और ऐसा करते-2 उसका लंड बुरी तरह से खड़ा हो गया.

विक्की : "चुप हो जाओ आंटी...आप ऐसा क्यो सोच रहे हो..मैं आपको या काव्या को कोई तकलीफ़ नही देना चाहता...चुप हो जाओ...''

रश्मि ने रोना बंद कर दिया...उसने रोते-2 जब विक्की के चेहरे की तरफ देखा तो बीच मे उसके खड़े हुए लंड को देखकर उसके तो होश ही उड़ गये...इतने लंबे लंड की तो उसने कल्पना भी नही की थी ...उसने तो सोचा भी नही था की 20 साल के लड़के का लंड इतना लंबा भी हो सकता है...वो मंत्रमुग्ध सी होकर उसके खड़े हुए लंड को निहारने लगी...वो शायद भूल गयी थी की वो वहाँ किसलिए आई थी...विक्की ने रश्मि के कंधों को पकड़ा और अपने शरीर से चिपकाता हुआ उसे उपर की तरफ खड़ा करने लगा...

ऐसा करते हुए रश्मि के चेहरे के बिल्कुल करीब से होकर निकला था विक्की का खड़ा हुआ लंड ..और फिर उसके लकड़ी जैसे लंड से रग़ड़ ख़ाता हुआ उसका गदराया बदन जब उपर तक आया तो वो लकड़ी अपने पूरे आकार मे आ चुकी थी..और ना चाहते हुए भी रश्मि की चूत मे गीलापन आने लगा था..

रश्मि के हर अंग को अपने लंड से टच करवाकर उसे अपने से सटा कर खड़ा कर लिया था विक्की ने.

विक्की के हाथ इस समय रश्मि की कमर पर थे...और दोनो की साँसे एक दूसरे से टकरा रही थी...विक्की ने हिम्मत दिखाते हुए अपने होंठ आगे की तरफ बड़ा दिए...और तभी रश्मि जैसे नींद से जागी...और एकदम से उसे धक्का देकर पीछे हो गयी...और अपनी सांसो पर काबू पाने की कोशिशे करने लगी.

ये क्या हो गया था उसे अचानक ...वो अपने आप को कोसने लगी....पर तब तक विक्की समझ चुका था की वो अब उसके चुंगल मे फँस चुकी है...वो रश्मि के करीब आया..और उसके हाथ को पकड़कर बोला : "अगर आगे से मुझसे कोई बदतमीज़ी की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा...''

और इतना कहते-2 उसने फिर से एक बार उसके मोटे मुम्मे को अपने हाथों मे दबोच लिया....और इस बार रश्मि ने कोई भी विरोध नही किया...शायद वो अब इस हालत मे नही थी की कोई विरोध कर पाती.. वो अपमान का घूँट पीकर रह गयी और विक्की बड़ी बेदर्दी से उसके मुम्मे को मसल-2 कर अपनी ठरक मिटाने लगा..

विक्की को तो ये सब सपने जैसा ही लग रहा था...उसने तो सोचा भी नही था की जिस आंटी के मोटे मुम्मे को देखते-2 वो बड़ा हुआ था और दिन रात जिनके बारे मे सोचकर उसने मूठ मारी थी,वो आज उसके हाथों मे है..वो अपने दोनो हाथों से उसके मुम्मों को मसलने लगा..

रश्मि ने आस पास देखा..उसके दोस्त दूर खड़े हुए सब देख रहे थे..उन्हे शायद दिख भी रहा था की विक्की उसके साथ क्या कर रहा है...वो विक्की के सामने गिड़गिड़ाने सी लगी..:"विक्की, प्लीज़ मुझे छोड़ दो...ऐसा मत करो..देखो वो सब देख रहे हैं...''

विक्की ने अपने दोस्तों की तरफ देखा...इतनी दूर से कुछ साफ़ तो दिखना नही था, पर रश्मि का डरना भी लाजमी था...उसके डरने का फायदा उठाते हुए वो बोला : "तुम्हे फिर अभी मेरे साथ कही चलना होगा...''

शाम के सात बज रहे थे..अंधेरा हो चुका था...इतनी रात को उसके साथ कही भी जाने के बारे मे वो सोच भी नही सकती थी..

वो बोली : "नही, ऐसा नही हो सकता...तुम आख़िर चाहते क्या हो...''

विक्की : "देखो आंटी, अगर आप चाहती हो की आपकी बेटी की इज़्ज़त बाजार मे ना उछले तो मैं जैसा कहता हू, वैसा करती रहो..वरना तुम जानो और तुम्हारा काम, मुझे जो करना है वो तो मैं कर ही लूँगा..''

इतना कहते हुए उसने रश्मि को एक तरफ धक्का दिया और वापिस मुड़कर अपने दोस्तों की तरफ चल दिया..

रश्मि ने एकदम से उसे पीछे से पकड़ लिया और बोली : "ठीक है..ठीक है...जैसा तुम कहो ...बोलो ..कहाँ चलना है...''

रश्मि भी समझ चुकी थी की विक्की उसके साथ मज़े लेना चाहता है...अपनी बेटी के लिए वो ये कुर्बानी देने के लिए भी तैयार हो गयी.

विक्की की तो बाँछे खिल उठी...उसने तो सोचा भी नही था की जो वो चाहेगा वो इतनी आसानी से हो जाएगा..पर अब प्रॉब्लम ये थी की वो उसे लेकर जाए कहाँ, ऐसी कोई जुगाड़ की जगह तो थी नही उसके पास...काफ़ी सोचने के बाद उसके दिमाग़ मे एक जगह आई...रात के समय वहाँ जाना सही नही था पर फिर भी उसने रिस्क लेते हुए वहीँ जाने का निष्चय किया और भागकर अपनी बाइक ले आया...और रश्मि को बैठने के लिए कहा..वो भी बिना कुछ बोले उसके पीछे बैठ गयी और वो दोनो चल दिए..

उसके दोस्त बेचारे देखते और सोचते ही रह गये की आख़िर विक्की के साथ रश्मि इस वक़्त कहाँ गयी है.

रश्मि का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, वैसे आज उसको टाइम की चिंता तो नही थी, क्योंकि समीर और काव्या तो शॉपिंग के लिए गये हुए थे...वो रात को दस बजे से पहले आने वाले नही थे...और वैसे भी समीर को पता था की वो कहाँ गयी है, इसलिए उसकी तरफ से शायद ही कोई फोन आए..

पर वो डर इसलिए रही थी की कही कोई जान पहचान वाला उसको विक्की के साथ जाते हुए ना देख ले...इतने सालों मे उसने सिर्फ़ इज़्ज़त ही तो कमाई थी, उसको ऐसे बदनाम नही करना चाहती थी वो..

अचानक तेज चलती हुई बाइक मे विक्की ने जोरदार ब्रेक मारा..रश्मि अपने ही ख़यालो मे खोई हुई थी..इसलिए संभाल नही पाई और उसकी छाती विक्की की पीठ मे बुरी तरह से घुस कर पिस सी गयी..रश्मि ने गिरने से बचने के लिए विक्की के कंधे को ज़ोर से पकड़ लिया और ऐसा करते हुए उसकी दूसरी चुचि भी उसकी पीठ से रग़ड़ खा गयी..विक्की के तो मज़े हो गये...ऐसा गुदाज एहसास उसने आज तक महसूस नही किया था, उसकी जितनी भी गर्लफ्रेंड्स थी वो स्कूल मे पड़ने वाली ,छोटे-2 मुम्मों वाली अबोध लड़कियाँ थी, आज पहली बार उसने पके हुए फलों को अपनी पीठ पर इस तरह से महसूस किया था.

रश्मि भी एकदम से हड़बड़ा कर बोली : "ये कैसे चला रहे हो...ध्यान से चलाओ..''

विक्की : "क्या करू आंटी ....वो बीच मे कुत्ता आ गया था..''

पर रश्मि को तो कोई कुत्ता नही दिखा...वो समझ गयी की ये उसका तरीका था, उसको अपने शरीर से चिपकाने का...गुस्सा तो उसे बहुत आया पर वो और कुछ ना बोल पाई...

और साथ ही साथ उसने ये भी नोट किया की विक्की की पीठ से रगड़ खाने के बाद उसके निप्पल आश्चर्यजनक रूप से कड़े हो चुके हैं, और ये तभी होता था जब वो समीर के साथ सेक्स करती थी या फिर कभी कभार सेक्स के बारे मे सोचकर उत्तेजित हो जाती थी...पर वो तो इस वक़्त सेक्स के बारे मे सोच भी नही रही थी..फिर ऐसा क्यो हुआ, शायद विक्की की पीठ से टकरा कर उसके शरीर ने अपने आप रिस्पोंड करना शुरू कर दिया था..उसे अपने आप पर बहुत शर्म महसूस हुई...वो अपनी आँखे बंद करके किसी और चीज़ के बारे मे सोचने लगी ताकि उसका ध्यान ऐसी चीज़ो से दूर हो जाए...पर अब विक्की हर थोड़ी देर बाद बाइक को झटके दे-देकर चला रहा था..जिसकी वजह से उसका ध्यान कही और जा ही नही पा रहा था..

उसके ब्लाउस मे से उसके रसीले निप्पल अलग ही चमकने लगे थे..उसने अपनी साड़ी का आँचल आगे करके उन्हे ढक लिया..पर वो तो साड़ी के आँचल से भी नही छुप रहे थे.

खैर,अपने मन को संभालते हुए वो विक्की के पीछे बैठी रही..उसके साथ ज़्यादा चिपकने की वजह से उसे विक्की के शरीर से एक अलग ही तरह की खुश्बू महसूस हुई...शायद उसने कोई बढ़िया वाला डीयो लगा रखा था, जैसा की आजकल के लड़के करते हैं..पर जो भी था, उसकी महक जादुई थी...रश्मि ना चाहते हुए भी उसकी गर्दन के पास अपना चेहरा लेजाकर उसे सूंघ रही थी..और मदहोश सी हो रही थी.

विक्की को भी रश्मि की गर्म साँसे अपनी गर्दन पर महसूस हुई ,उसका तो लंड खड़ा हो गया इतनी गर्म औरत की ऐसी गर्म साँसों को अपने उपर महसूस करके.

थोड़ी देर मे ही विक्की ने बाइक रोक दी...वो एक पुराना किला था..जहाँ अक्सर विक्की अपनी गर्लफ्रेंडस को लेकर आता था और चूमा-चाटी करता था...एक बार तो उसने एक लड़की की चुदाई भी की थी वहाँ..पर वो हमेशा दिन के टाइम ही आया था वहाँ, और दिन मे भी वहां वीरानीयत ही छाई रहती थी...फिर ये तो रात का वक़्त था..ऐसे मे अंदर जाते हुए उसे भी डर लग रहा था, पर अंदर के चप्पे-2 को वो अच्छी तरह से जानता था, इसलिए हिम्मत करके अंदर चल दिया.

रश्मि : "ये तुम मुझे कहा ले आए विक्की....ऐसे वीराने मे आख़िर तुम ...''

विक्की एकदम से गुस्से मे बोला : "देखो आंटी...मेरे साथ ज़्यादा मग़जमारी तो करो मत...अपनी बेटी की खातिर ही आई हो तुम यहाँ...मैने कोई ज़बरदस्ती नही की है...अगर जाना चाहती हो तो चली जाओ..और कल के बाद तुम्हारी बेटी के साथ जो होगा, उसकी ज़िम्मेदार तुम खुद रहोगी..''

रश्मि डर गयी...उसे पता था की ऐसे लड़के अपनी औकात पर आए तो उसकी बेटी की जिंदगी बर्बाद हो सकती है, उसे ही दिमाग़ से काम लेना होगा और सब कुछ प्यार से निपटाना होगा..वो चुपचाप विक्की के पीछे चल दी.

अंदर चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा था, किले के अंदर एक छोटी सी लेक भी थी, जहाँ फॅमिली वाले लोग पिकनिक के लिए आते थे...और कोने-2 पर बने हुए पुराने खंडरों के अंदर प्रेमी-प्रेमिकाए अपनी रासलीला चलाते थे...

पर आज उन खंडहरों के अंदर जाने का कोई मतलब नही था, क्योंकि वहाँ काफ़ी अंधेरा था...

वो रश्मि को लेकर लेक के पास पहुँच गया और एक पेड़ के नीच जाकर खड़ा हो गया..उपर से आ रही आधे चाँद की रोशनी काफ़ी थी एक दूसरे का चेहरा देखने के लिए.

विक्की : "चल यहाँ आ...मेरे पास...''

वो ऐसी बदतमीज़ी से बोला की रश्मि को लगा की वो उसकी लाई हुई कोई बाजारू औरत है..

वो धीरे-2 चलकर उसके पास पहुँची..और बिना किसी भूमिका के विक्की ने उसके चेहरे को पकड़ा और चूमने लगा...रश्मि तो एकदम से हुए हमले से घबरा गयी...उसे पता तो था की विक्की कुछ ऐसे ही करेगा...पर ऐसे एकदम से करेगा, उसने सोचा नही था..

उसने अपने होंठ बंद कर लिए आँखे बंद कर ली..और बुरा सा मुँह बनाते हुए विक्की को धक्का देकर अपने उपर से हटाया..

रश्मि : "ये...ये क्या कर रहे हो तुम....''

विक्की : "ओ आंटी...तुझे कोई स्टोरी सुनाने के लिए नही लाया हू मैं यहाँ...अपनी बेटी को बचाना चाहती है तो मेरे साथ को-ऑपरेट करना होगा...बस थोड़ा सा मज़ा ही तो ले रहा हू..इसमे भी तेरे को मिर्ची लग रही है..''

रश्मि समझ गयी की वो अब खुलकर उसे ब्लॅकमेल कर रहा है..उसकी बेटी की खातिर...

रश्मि धीरे से बोली : "पर ऐसे थोड़े ही करता है कोई...एकदम से जानवर की तरह तुम तो मुझपर झपट ही पड़े...''

विक्की : "ओहो आंटी...बड़ी टीचर जैसी बन रही हो तुम तो...ऐसा ही है तो मुझे कुछ सीखा ही दो ना...कैसे करते हैं...आज तक आप जैसी मस्त माल मिली ही नही, इसलिए तो मन बेकाबू सा होकर टूट पड़ा तुमपर...''

रश्मि को उसकी दिल फेंक आशिक़ वाली अदा पर हँसी सी आ गयी...उसे मुस्कुराता हुआ देखकर विक्की भी समझ गया की वो बोतल मे उतर गयी है...और ये भी समझ गया की उसे प्यार से हेंडल करना होगा....वरना नुकसान उसी का होगा..

उसने धीरे से अपने दोनो हाथों को उसकी नंगी बाजुओं पर फेरना शुरू कर दिया...वैसे तो रश्मि इसके लिए भी तयार नही थी पर ना जाने कैसा जादू था विक्की के हाथों मे, उसके बदन के रोँये खड़े होने लगे...चिकनी बाजुओं मे हल्के-2 दाने उभर आए और खुरदुरापन आ गया उनमे..उसके सुस्ता रहे निप्पल फिर से खड़े होकर हाहाकार मचाने लगे...उसकी साँसे फिर से तेज हो उठी ...और आँखे अपने आप बंद हो गयी...

और ठीक उसी पल रश्मि का आँचल फिसल कर उसके सीने से नीचे गिर गया..और क्रीम कलर के ब्लाउस मे फंसी उसकी मोटी-2 चुचियाँ विक्की की आँखो के सामने उजागर हो गयी...उसकी क्लीवेज़ देखकर तो विक्की के मुँह मे पानी आ गया..इतने मोटे और सफेद रंग के खरबूजे उसने आज तक सिर्फ़ फिल्मी हेरोइनों के ही देखे थे...या ब्लू फिल्म मे..

और उसके मोटे-2 दाने अलग ही चमक रहे थे...ऐसा लग रहा था उसने अपने ब्लाउस मे जामुन छुपा रखे है,इतने मोटे निप्पल है इसके...वो एक हाथ से अपने लंड को मसलने लगा...और साथ ही अपने सूखे होंठों पर जीभ फेर कर उन्हे चूसने के सपने भी देखने लगा.

उसकी तेज साँसों की वजह से उठती -बैठती छातियाँ कयामत लग रही थी..और नीचे उसका हल्का सा निकला हुआ पेट और गहरी नाभि देखकर तो विक्की की रही सही हिम्मत भी जवाब दे गयी...और उसने अपने काँपते हुए हाथ उसकी नाभि पर रख दिए..

रश्मि ने आख़िरी प्रयास किया : "नही विक्की....मत करो...ये सब...मैं एक शादीशुदा औरत हू...तुम्हारी और मेरी उम्र मे भी काफ़ी फ़र्क है....ये सब तुम्हे शोभा नही देता...''

पर विक्की तो एक नंबर का हरामी था, उसके उपर रश्मि की याचना का कोई असर नही हुआ...और उसके हाथ सरकते हुए उसके उरोजों पर आ गये..और उसने उसके दोनो मुम्मे हॉर्न की तरह बजाने शुरू कर दिए...

दर्द और मीठे एहसास से तड़प उठी रश्मि....और उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी..जो वहां के सन्नाटे को चीरती हुई पूरे किले मे गूँज गयी..

''अहहssssssssssssssssssssssssss .......... नहियीईईईईईईईईईईईईईई ......मत करो.................दर्द होता है.......अहह ssssssssssssssssssssssssssssss ....''

पर विक्की को तो जैसे खेलने के लिए दो छोटी-2 फूटबाल मिल गयी थी...वो उन्हे बुरी तरह दबा रहा था...अपने मुँह को उसके क्लीवेज़ पर रगड़कर वहाँ के मुलायमपन का मज़ा उठा रहा था...अपने अंगूठों से उसके उभरे हुए निप्पल्स को कुरेद रहा था..

रश्मि ने बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू रखा हुआ था...वो अभी तक उसका विरोध ही कर रही थी...पर अंदर ही अंदर वो सुलग उठी थी...अगर इस वक़्त समीर होता तो वो उसे कच्चा ही खा जाती..ऐसी कामाग्नी तो उसमे आज तक नही जली थी..उत्तेजना के मारे उसके मुँह से लार निकल कर बाहर गिरने लगी..उसका शरीर काँपने लगा...उसकी चूत से गर्म पानी निकलकर , उसकी पेंटी को भिगोता हुआ, उसकी जांघों से चिपककर नीचे रिसने लगा..उसकी चूत से निकल रही गर्म हवा के भभके उसकी टाँगो को झुलसा रहे थे...पर वो ये सब विक्की के सामने उजागर करके अपनी कमज़ोरी उसे नही दिखाना चाहती थी...

वो तो चाहती थी की विक्की बस ये ही समझे की उसके साथ जो भी हो रहा है, वो ज़बरदस्ती है...वो नही चाहती ऐसा कुछ भी...वरना उसमे और एक बाजारू रंडी मे फ़र्क ही क्या रह जाएगा.

पर विक्की भी पूरा उस्ताद था...वो जान बूझकर उसे उत्साहित करते हुए उसके ऐसे-2 वीक पायंट्स दबा रहा था की जिनसे बच पाना मुश्किल ही नही नामुमकिन था, उसे पता था की लड़कियों को कैसे उत्तेजित किया जाता है...हांलाकि किसी औरत के साथ ये उसका पहला मौका था, पर फंडे तो उनपर भी वही लागू होंगे ना जो जवान लड़कियों पर होते हैं..

वो अपनी जीभ निकाल कर उसकी गर्दन को चाटने लगा...एक हाथ से उसने उसके निप्पल दबाने नही छोड़े..दूसरे से वो उसकी मोटी और फेली हुई गांड को मसलने लगा...और उसे उठा -2 कर अपनी तरफ दबाने लगा, ऐसा करते हुए रश्मि की भभकती हुई चूत उसके खड़े हुए लंड से टकरा रही थी..जिसकी वजह से रश्मि का बचा खुचा विरोध भी जाता रहा...

और अंत मे जब विक्की के होंठ उसकी गर्दन को किसी ड्रेकूला की तरहा चूसते हुए उसके होंठों तक पहुँचे तो रश्मि से सब्र नही हुआ...उत्तेजना की वजह से नर्म पड़ चुके होंठों से उसने विक्की के होंठों को दबोचा और अपने मुँह का मीठा रस उसके अंदर पहुँचाने लगी..

औरत जितनी ज़्यादा उत्तेजित हो जाती है , उसके होंठ उतने ही नर्म और मीठे हो जाते हैं, रश्मि के साथ भी यही हुआ था...विक्की ने तो आज तक ऐसा रसीला माल नही चूसा था...वो दोनो हाथों से उसके मुम्मे दबाता हुआ, उसके होंठों को चूसने लगा...

और तभी पीछे से कुछ आवाज़ आई...और दोनो ने पलट कर उस तरफ देखा... वहाँ 3 लोग खड़े थे...फटे हुए से कपड़े...दाढ़ी बड़ी हुई सी.........दो के हाथ मे सिगरेट थी और एक के हाथ मे शराब की बॉटल..वो लोग नशेड़ी थे..जो अक्सर ऐसी जगहों पर पाए जाते हैं..

विक्की भी उन्हें देखकर डर सा गया...पर फिर भी थोड़ी हिम्मत करते हुए उसने गरजते हुए कहा : "क्या देख रहे हो भोंसड़ीवालों ....चलो भागो यहा से...साले नशेड़ी...''

पर उसकी बात ना सुनते हुए उसने विक्की की आशा के विपरीत अपनी जेब मे हाथ डाला और एक लंबा सा रामपुरी निकाल लिया..और बटन दबाते ही वो खुल गया और उनकी आँखो के सामने लहराने लगा.

अब तो विक्की की सचमुच मे फट गयी...दूसरी तरफ रश्मि अंदर से डर भी रही थी और शुक्र भी माना रही थी की वो लोग आख़िरी वक़्त पर आ गये,शायद वो बच गयी..पर उसका ये ख्याल कितना ग़लत था, वो भी नही जानती थी..

जिस आदमी ने रामपुरी पकड़ा हुआ था वो बोला : "चल बे चिकने...निकल ले यहा से...और इस माल को यही छोड़ दे...चल भाग...''

विक्की की तो गिघी बंध गयी...वो गिड़गिडाया : "नही भाई साहब..ये कोई धंधे वाली नही है...मैं इन्हे जानता हू...ये मेरी पहचान वाली है...हम तो बस यहाँ ऐसे ही...''

उसकी बात पूरी होने से पहले ही उस आदमी ने चाकू लहराया और विक्की के कंधे से उसकी नोक छूती हुई निकल गयी....उसकी टी शर्ट मे छोटा सा छेद हो गया और वहाँ से खून की बूंदे उभर आई..

वो आदमी गरजा : "बोला ना साले , निकल ले यहाँ से...भेन चोद , हमे चूतिया समझता है....इतनी रात को तेरी कौन सी रिश्तेदार आएगी तेरे साथ इस किले मे...चल भाग अब..नही तो तेरी गर्दन काटकर यही फेंक दूँगा..किसी को पता भी नही चलेगा...''

विक्की का दर्द के मारे बुरा हाल था...वो अपने कंधे की चोट को पकड़कर बाहर की तरफ निकल गया..

रश्मि उसे बुलाती रह गयी...पर उसके बस का कुछ होता तो वो वहाँ रुकता ना...वो वहाँ से दुम दबा कर भाग निकला..

और पीछे छोड़ गया बेचारी रश्मि को उन भूखे भेड़ियों के सामने...उसका तो वही हाल था, आसमान से गिरे और खजूर में अटके

रश्मि की तो रुलाई फुट गयी...वो मन ही मन उस पल को कोस रही थी जब उसने विक्की की बात मानकर उसके साथ यहा आने का निश्चय किया था...वो जगह देखकर बाहर से ही उसको मना कर सकती थी...पर उस वक़्त तो वो उसके अनुसार ही चलती रही ...उसे क्या पता था की वो अंदर आकर ऐसे फँस जाएगी...विक्की भी वहाँ से भाग गया..अब क्या होगा उसका...कौन करेगा उसकी रक्षा......

बेचारी अपनी किस्मत को कोसती हुई सुबकने लगी.
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05-25-2019, 11:44 AM,
#27
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--25

अब आगे
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वो तीनो आदमी शक्ल से ही इतने गंदे लग रहे थे की रश्मि को उन्हे देखकर उल्टी सी आने को हो रहि थी ...उनके जिस्म से आ रही दुर्गंध से पता चल रहा था की वो लोग काफ़ी दीनो से नहाए नही है...

एक आदमी जिसके हाथ मे रामपुरी था, और जो शायद उनका बॉस लग रहा था, वो आगे आया..उसका नाम रघु था, रश्मि सहम कर वही की वही खड़ी रही..वो उसके बिल्कुल पास आकर खड़ा हो गया और उसने अपना चाकू उपर लेजाकर उसकी गर्दन पर रख दिया..

रश्मि को आज तक ऐसा खोफ़ महसूस नही हुआ था...उसने तो सिर्फ़ अख़बारों मे और न्यूज़ मे किस्से सुने थे की बदमाशो ने ये कर दिया,वो कर दिया..पर एक दिन वो सब उसके साथ होगा , ये उसने सोचा नही था...वो अपने आप को बड़ी ही बेबस महसूस कर रही थी..इतने बड़े शहर मे कितनी आसानी से ऐसे बदमाश पल रहे हैं, पुलिस वाले क्या करते रहते हैं, उन्हे तो पता होना चाहिए की ऐसी जगहों पर बदमाश छुपकर नशेबाजी करते हैं और उस जैसी अगर कोई पकड़ मे आ जाए तो शायद रेप भी कर सकते हैं..

पर ये सब सोचने से अब क्या फ़ायदा , उसे तो सबसे बड़ा डर अपनी जान का लग रहा था इस वक़्त..जान है तो जहान है..

रघु ने अपने भद्दे से दाँत निकाले और बोला : "माल तो बड़ा शानदार लेकर घूम रहा था वो लौंडा ..बता ,कितने लिए तूने एक रात के...''

रश्मि रोने लगी : "मैं उस तरह की औरत नही हू...वो तो मुझे बहला फुसला कर यहा ले आया...मुझे कुछ नही पता...मैं एक भले घर की औरत हू...''

रघु : "हा हा हा....साली, रंडी....रात के समय यहाँ अपनी माँ चुदवाने के लिए आई थी क्या...तेरे जैसी रंडियां रोज रात को चुदवाने के लिए आती हैं यहाँ...भेन की लौड़ी ...भले घर की औरत बनती है साली कुतिया...''

और उसने अपना हाथ सीधा उसके मोटे मुम्मे पर रखकर ज़ोर से दबा दिया...

वो पीड़ा से तड़प उठी...''अहह sssssssssssssssssssss .......''

रघु : "हा हा हा .....साली ......इसमे तो तुझे मज़े मिलने चाहिए....चिल्ला क्यो रही है कुतिया...''

इतनी बेइजत्ती और जलालत रश्मि ने आज तक कभी महसूस नही की थी...और ना ही इतनी गालियाँ उसने सुनी थी अपने लिए..अपनी बेबसी पर वो ज़ोर-2 से रोने लगी..

रघु ने उसके होंठों पर खून से सना हुआ चाकू रख दिया और गुर्राया : "चुप कर साली...बिल्कुल चुप, अगर तेरी आवाज़ निकली तो यहीं तेरी गर्दन काट कर फेंक दूँगा...अब मेरी बात मानेगी तो जिंदा रहेगी..''

रश्मि ने अपनी रुलाई पर काबू करते हुए , सुबकते हुए हाँ मे सिर हिला दिया..

रघु : "शाबाश ....चल अपना ब्लाऊज़ उतार....''

रश्मि : "नही...मेरे साथ ऐसा मत करो....मुझे छोड़ दो...''

रघु : "मेरी बात मानेगी तो सही रहेगी...वरना मैने ये सारे कपड़े फाड़ देने है...और फिर तू नंगी जाना अपने घर..''

रश्मि ने मौके की नज़ाकत समझी और अपने ब्लाउस के हुक खोलने लगी..नीचे उसने ब्लेक कलर की ब्रा पहनी हुई थी, जिसमे उसके मोटे-2 सफेद खरबूजे ठुँसे हुए थे...उन्हे देखते ही रघु के मुँह से लार निकल कर उसकी दाढ़ी पर गिरने लगी...वो उसपर झपट सा पड़ा और अपना मुँह उसके मुम्मो के बीच दे मारा..

रघु की दाढ़ी की चुभन और उसकी लार अपने सीने पर महसूस करते ही रश्मि को उबकाई सी आ गयी...उसके सिर से निकल रही दुर्गंध भी काफ़ी तेज थी...उसने अपना मुँह फेर लिया...

तब उसने देखा की बाकी के दोनो बदमाश अपने कपड़े उतार कर नंगे हो चुके हैं...और अपने हाथों से अपने लंड को पकड़कर मूठ मार रहे हैं..

उनके काले-2 लण्डों को देखकर रश्मि सहम सी गयी...इतने मोटे और भद्दे लंड उसने आज तक नही देखे थे...उनसे चुदवाने से अच्छा तो वो मारना पसंद करेगी..पर वो बुरी तरह से रघु के चुंगल मे थी..बेचारी कुछ कर भी नही सकती थी..

रघु ने आनन-फानन मे उसकी साड़ी खींच कर निकाल दी..उसके पेटीकोट का नाडा खुला नही तो उसे तोड़ दिया...और उसकी पेंटी को भी नोच कर फाड़ा और एक किनारे फेंक दिया...वो उसकी ब्रा न फाड़ डाले इसलिए रश्मि ने खुद ही अपनी ब्रा के हुक खोल दिए , एक पल मे ही रश्मि उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी..

पहले तो उसने पूरा प्रयास किया अपने कपड़ों को उतारने से बचाने का, पर रघु शायद नशे मे था और उसकी ताक़त काफ़ी बड़ी हुई थी उस वक़्त..

रघु ने अपनी लाल जीभ निकाली और उसके मुम्मे चूसने लगा...उन्हे चाट्ता हुआ वो उपर से नीचे की तरफ आया और उसके पेट को चूमता हुआ उसकी चूत तक जा पहुँचा...


और फिर एक ही झटके मे उसकी एक टाँग उठा कर अपने कंधे पर रखी और उसकी चूत पर अपनी जीभ लगा दी..

''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म ''

ये पहला अवसर था जब काफ़ी देर बाद रश्मि के मुँह से दर्द भरी नही बल्कि उन्माद भरी सिसकारी निकली थी...

पहले ही विक्की ने उसकी चूत को काफ़ी गीला कर दिया था, और अब रघु ने सीधा उसे चाटना शुरू कर दिया...उसकी तो हालत ही खराब होने लगी...उसे समझ नही आ रहा था की वो उसका विरोध करे या मज़े ले..

तब तक उसके दोनो साथी भी पास आ गये और उन्होने उसके एक-2 मुम्मे को पकड़कर अपने मुँह मे लिया और चूसना शुरू कर दिया..

रश्मि के लिए ये पहला मौका था जब तीन आदमी उसके शरीर से खेल रहे थे...ऐसा ग्रूप सेक्स उसने सिर्फ़ एक दो बार समीर के कहने पर ब्लू मूवीस मे देखा था, उसे उस वक़्त तो बड़ी घिन्न सी आई थी...पर आज ना जाने क्यो अंदर से इतना मज़ा मिल रहा था..

उसने ना चाहते हुए भी उन दोनो के सिर अपने हाथों मे पकड़े और उन्हे अपनी छातियों पर ज़ोर से भींच दिया..और अपनी चूत को भी ज़ोर देकर रघु के मुँह पर ज़ोर से दबा दिया..

रघु ने अपना मुँह उसकी चूत से निकाला और बोला : "साली रंडी...अभी बोल रही थी की घरेलू औरत है...अब देखो, कैसे तीन -2 लंड देखकर घोड़ी की तरह हिनक रही है ...साली हरामजादी की चूत सोना उगल रही है...''

इतना कहकर वो खड़ा हो गया और उसने अपना पयज़ामा उतार फेंका.

और फिर जो रश्मि ने देखा, वो देखकर उसे अपनी आँखो पर विश्वास नही हुआ, रघु की टाँगो के बीच जैसे कोई अजगर लहरा रहा था...इतना लंबा और मोटा लंड ..लगभग 9 इंच का होगा...और बिल्कुल काला भूसंड ..उसके अपनी चूत के अंदर जाने की कल्पना से ही वो सिहर उठी..और ज़ोर से चीखी : "नहियीईईईईईईईईई......ये ...ये .......मत करना .....मुझे जाने दो प्लीज़....''

पर अब वो कहा मानने वाले थे...रघु अपने लंड को अपने हाथ मे मसलता हुआ उसकी तरफ बढ़ने लगा...रश्मि फिर से रोने लगी...बाकी के दोनो बदमाशों ने उसके हाथ पकड़े हुए थे..वो भाग भी नही सकती थी..

और तभी रघु के पैर पर किसी ने आकर ज़ोर से एक होक्की मारी..

रश्मि ने देखा तो वो विक्की था...और उसके साथ थे उसके सारे दोस्त...

रश्मि के लिए तो वो उस वक़्त किसी फरिश्ते से कम नही था..

विक्की के साथ उसके चार दोस्त थे..उनके हाथ मे भी होक्कियाँ थी...उन्होने दे दना दन करते हुए बाकी के दोनो बदमाशों पर भी होकीयाँ बरसानी शुरू कर दी...सारे दर्द के मारे तड़पने लगे..पर कोई भी उनपर रहम नही कर रहा था..ख़ासकर विक्की, वो तो रघु के उपर ऐसे बरस रहा था जैसे वो उसको मार ही डालेगा...रघु पूरा लहू लुहान हो चुका था..उसके सिर,पैर और मुँह से काफ़ी खून निकल रहा था...अगर उसके दोस्त उसे ना रोकते तो वो शायद उसे मार ही डालता...

विक्की :"साला...भेन चोद ....मुझे चाकू दिखा रहा था...मुझे गालियां निकाल रहा था...साले तेरे जैसे नशेडियों की गांड मे ये पूरी होक्की डाल देता है ये विक्की....हरामखोर ...मुझसे पंगा लिया तूने..''

अपने दोस्तो की वजह से विक्की काफ़ी चोडा हो रहा था अब...और रश्मि को दिखाने के लिए भी..

रश्मि तो रोते-2 वहीं बैठ गयी थी...पैड के नीचे, पूरी नंगी...पर वो अपनी किस्मत और भगवान का शुक्र मना रही थी की विक्की एन वक़्त पर आ गया और उसकी इज़्ज़त उन नशेडियों के हाथों लूटने से बच गयी..

रघु और उसके साथी दुम दबा कर भागते चले गये...नंगे..उनके कपड़े भी वहीं रह गये..

विक्की ने रश्मि की तरफ देखा...दोनो की नज़रें मिली और अगले ही पल दोनो एक दूसरे की तरफ भागते हुए आए और एक दूसरे से लिपट गये..

रश्मि : "कहाँ चले गये थे तुम....मेरे साथ ये क्या करने वाले थे....मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाती आज....''

पर उसे वहाँ फँसाने वाला भी तो वही था...वही उसे ऐसी जगह पर लेकर आया था..पर वो शायद रश्मि भूल चुकी थी.

विक्की तो उसके नंगे बदन को अपने हाथ मे लेकर फूला नही समा रहा था...उसके उठते हुए लंड को अपने नंगे पेट पर महसूस करते ही उसे एहसास हुआ की वो तो पूरी नंगी है...विक्की के सामने और उसके दोस्तों के सामने भी...वो बेचारी शर्म से दोहरी हो उठी..

विक्की के सारे दोस्त भी उसके नंगे जिस्म को आँखे फाड़े देखे जा रहे थे...उसके भरंवा शरीर की बनावट देखकर सभी के लंड तन्ना गये..सभी सोचने लगे की ये साले विक्की ने इतना मस्त माल आख़िर फँसाया कैसे..

उन्हे आपस मे लिपटा देखकर विक्की का दोस्त सूरज बोला : "विक्की, अभी निकल यहा से...वो लोग कभी भी वापिस आ सकते हैं...शायद और भी लोग आए उनके साथ...यहाँ रुकना ख़तरे से खाली नही है...''

विक्की उसकी बात समझ गया..पर रश्मि अभी नंगी थी...वो सूरज से बोला : "तुम लोग बाहर जाओ...मैं इन्हे लेकर आता हू...''

इतना कहकर वो उसके कपड़े बटोरने लगा..सूरज और उसके बाकी दोस्त बाहर निकल आए..

उनके जाते ही रश्मि ने विक्की को अपनी तरफ घुमाया और फिर से उससे लिपट गयी...और उसके होंठों पर होंठ रखकर जोरों से उसे चूसने लगी...ये शायद उसका तरीका था विक्की को थेंक्स बोलने का..

विक्की का मन तो कर रहा था की अभी अपना लंड निकाले और नंगी खड़ी रश्मि को चोद डाले...और वो जानता था की इस वक़्त वो मना भी नहीं करेगी, पर जैसा की वो जानता था की वहाँ रुकना ख़तरनाक हो सकता था, उसने बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओ पर काबू पाया और रश्मि से बोला : "आंटी...आप जल्दी से कपड़े पहन लो...अभी यहाँ से निकलना है...इन सबके लिए अब काफ़ी टाइम है हमारे पास...''

रश्मि को उसकी बात सुनकर खुद पर ही शरम आ गयी की कैसे वो बेशर्मो की तरहा व्यवहार कर रही है...उसका चेहरा लाल सुर्ख हो उठा...वो अपने कपड़े पहनने लगी..उसकी कच्छी तो मिल नही रही थी..और पेटीकोट का नाड़ा रघु ने तोड़ डाला था...पर फिर भी किसी तरह से उसे पहना और उसपर अपनी साड़ी खींचकर बाँध ली, ताकि पेटीकोट गिर ना पड़े...और दोनो हाथ मे हाथ डालकर बाहर निकल पड़े...

सभी अपनी-2 बाइक्स पर आए थे...रश्मि बिना कुछ बोले विक्की के पीछे बैठ गयी और वो सब वापिस चल पड़े..

विक्की के दोस्त अपने घर की तरफ मूड गये और रश्मि को छोड़ने के लिए विक्की उसके घर की तरफ मुड़ गया.

रास्ते भर दोनो मे कोई बात नही हुई.

घर पहुँचते-पहुँचते 10 बज चुके थे...समीर की गाड़ी अभी तक नही आई थी...यानी वो लोग अभी तक शॉपिंग मे ही मस्त थे...रश्मि ने राहत की साँस ली,क्योंकि उसकी हालत देखकर समीर को समझाना मुश्किल हो जाता की आज उसके साथ क्या हुआ है.

रश्मि को गेट पर छोड़कर विक्की जब जाने लगा तो रश्मि उसकी तरफ पलटी...और उसकी तरफ बड़े ही प्यार से देखने लगी...जैसे कुछ कहना चाहती हो..पर वो बोल ना सकी..

विक्की शायद समझ गया था उसके अनकहे शब्द..वो बोला : "मैं आपको कल फोन करूँगा..बाय ..''

और वो बड़ी ही शराफ़त से वहाँ से निकल गया...रश्मि समझने की कोशिश कर रही थी की ऐसी भी भला क्या जल्दी थी उसको..अगर वो अंदर भी आना चाहता तो शायद वो मना नही कर पाती...चलो अब कल ही बात करेगी वो उसके साथ..

विक्की की बाइक वापिस उसी किले की तरफ दौड़ी चली जा रही थी..जहाँ वो कांड हुआ था.

और वो अपनी बाइक रोककर अंदर चला गया..अब तो उसके दोस्त भी साथ नही थे..

अंदर पहुँचकर उसने ज़ोर से आवाज़ लगाई : "रघु.....ओ रघु.....''
Reply
05-25-2019, 11:44 AM,
#28
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--26

अब आगे
*********

और कुछ ही देर मे रघु अपने दोनो साथियों के साथ वहाँ आ पहुँचा..उन्होने विक्की को अकेला वहाँ देखा और भागकर उसके पास आए..

और अगले ही पल सभी ठहाका मारकर हँसने लगे..वो सभी एक दूसरे से गले मिलकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे...

रघु : "साले ...आज तो तूने मेरा सिर ही फोड़ डालना था...मैने तो अपने सिर पर नकली खून की थेली फोड़ डाली थी..फिर भी तू उसमे से असली मे खून निकालने को लगा था...शायद मेडम को इंप्रेस करने के चक्कर मे अपने दोस्तो की जान सस्ती नज़र आ रही थी तुझे..''

विक्की : "साले, रबड़ की होक्की से भी कभी सर फटता है , हा हा हा ''

दरअसल ये सब विक्की और रघु की चाल थी...विक्की को भी नशे का चस्का था...वो अक्सर रात के समय उनके पास आकर नशा किया करता था, पैसों की कमी हमेशा रही थी विक्की को, इसलिए जब रश्मि उसके पास पहुँची तो उसके दिमाग़ मे ये प्लान बना, और उसने रघु को फोन करके सब समझा दिया..

बाद मे अपने दोस्तो के साथ मिलकर रश्मि को बचाने का नाटक भी किया ताकि वो उससे इंप्रेस हो जाए...पहले भी उसने कई बार ऐसा नाटक किया था..पर ज़्यादातर दिन के समय, क्योंकि कोइ भी भले घर की लड़की उसके साथ रात के समय ऐसी जगह पर नही आती..

पर रश्मि तो ऐसी फंसी हुई थी की वो रात के समय भी उसके साथ वहाँ आने के लिए तैयार हो गयी थी..और फिर वही हुआ जो रश्मि को दिखाया जा रहा था...उसे तो विक्की मे एक हीरो ही दिखा , जिसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर,अपनी जान पर खेलकर, उसकी इज़्ज़त बचाई थी..

एक तो बेचारी पहले से ही अपनी बेटी के चक्कर को लेकर परेशान थी, उपर से विक्की के इस प्लान ने उसे भी अपने चुंगल मे ले लिया.

पर असली प्लान तो कुछ और ही था उनका..

विक्की बोला : "अच्छा , वो मोबाइल दिखा ज़रा, उसकी पिक्चर तो सही आई है ना...''

रघु के एक साथी ने अपना मोबाइल उसे दे दिया, विक्की ने जल्दी से उसकी फोटो गेलरी देखी, और वहाँ की पिक्चर्स देखकर उसका चेहरा खिल उठा...ये उन लोगो ने तब खींची थी जब रघु उसके कपड़े उतरवा रहा था...उसके मुम्मे चूस रहा था...उसकी चूत को अपने मुँह के उपर रखकर उसका रस्पान कर रहा था..

रात के समय भी उस केमरे ने ऐसी पिक्चर ली थी की उसकी क्वालिटी देखकर वो खुद हैरान रह गया..

विक्की : ''साले रघु, तूने तो आंटी को पूरा चूस डाला... ''

रघु खी खी करके हंसा और बोला : "लेकिन एक बात बोलू, साली माल बड़ी गजब की है...ऐसी चूत मैने आज तक नही चखी ...अब जल्दी से इसे अपने नीचे लाने का इंतज़ाम कर...''

विक्की मोबाइल को अपने हाथ मे लहराकर बोला : "अब तू देखता जा...मैं इस आंटी को कैसे नचाता हू...साली अपने साथ -2 अपनी बेटी को भी चुदवायेगी और पैसे भी बरसाएगी हमपर.... हा हा हा ''

और फिर से एक बार सभी दोस्त मिलकर हँसने लगे.

दूसरी तरफ रश्मि नहा धोकर अपने कमरे मे आ गयी...उसे तो रघु की दुर्गन्ध अभी तक अपने शरीर से आ रही थी..वो बिस्तर पर लेटकर सब कुछ दोबारा सोचने लगी...और विक्की के बारे मे सोचकर उसके होंठों पर एक प्यारी सी हँसी भी आ गयी...

तभी बाहर से समीर की कार के रुकने की आवाज़ आई...वो दौड़कर बालकनी मे गयी..दोनो बाप बेटी हाथों मे हाथ डाले , एक दूसरे से चिपके अंदर आ रहे थे...

रश्मि उनके प्यार को देखकर बहुत खुश हुई..

पर उसे क्या पता था की आज शाम से लेकर अब तक उनके बीच क्या - क्या हुआ है..

काव्या जब अपने पापा के ऑफिस पहुँची तो उसके लगभग 20 मिनट के बाद ही समीर अपनी सौतेली बेटी (जो अब उसको जान से प्यारी लगने लगी थी) के साथ अपनी कार मे बैठकर शॉपिंग के लिए निकल पड़ा.

रास्ते मे काव्या के मन मे अपनी सहेली श्वेता की कही हुई बातें गूँज रही थी..

उसके साथ बात करते हुए श्वेता ने उससे कहा था की मर्द को जितना तरसाएगी, उसके साथ चुदाई मे उतना ही मज़ा मिलेगा..उसने जिस तरह अपने भाई नितिन को रोज अपना शरीर धीरे-2 दिखा कर तरसाया था..और जिस तरह से वो धीरे-2 आगे बड़ी थी, वो उसको भी काफ़ी पसंद आया था, क्योंकि जिस तरह लास्ट मे जब दोनो के सब्र का बाँध टूट गया था तो उसके बाद की पहली चुदाई श्वेता को आज तक नही भूली, हालाँकि उसके बाद भी वो अक्सर नितिन से चुदवाती रहती है, पर इतने दिनों तक तरसाने के बाद की वो पहली चुदाई की कसक आज तक नही भूली थी...

और यही कसक काव्या भी महसूस करना चाहती थी..वैसे भी पहली चुदाई की कसक तो हर किसी को याद रहती है, पर अगर वो ललचा कर की जाए तो उसकी बात ही कुछ और होगी...

अपने बाप को अपनी तरफ आकर्षित करने मे तो वो कामयाब ही गयी थी, अब उसको तड़पाना था उसको...सही मायने मे कहा जाए तो उसको सिडयूस करना था...

काव्या ने आज एक छोटी सी स्कर्ट और टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी..इसलिए कार मे बैठते ही वो थोड़ा और उपर जा चड़ी...और उसकी मोटी-2 दूधिया जांघे चमकने लगी..

बेचारे समीर की हालत खराब थी..लेग पीस तो हमेशा से उसकी कमज़ोरी रहे हैं, चाहे वो लेग मुर्गे की हो या किसी लड़की की..

उसकी मोटी-2 जांघे देखकर समीर का मन तो हुआ की उसपर हाथ रखकर ज़ोर से दबा दे...पर इतनी हिम्मत नही थी उसमे अभी..पर उसपर से नज़रे हटा कर वो सही से कार चला ही नही पा रहा था.

धीमी कार मे बैठी काव्या बाहर की तरफ देखकर अपना मुँह छिपा कर हंस रही थी...उसे पता था की वो जो दिखा रही है उसका क्या असर हो रहा है समीर के उपर...

तभी काव्या को एक आइस्क्रीम वाला दिखा और वो किसी बच्चे की तरहा चिल्लाई : "आइस्क्रीम....मुझे आइस्क्रीम खानी है...''

समीर ने मुस्कुराते हुए अपनी कार उस आइस्क्रीम वाले के पास रोक दी..वो काव्या की तरफ ही था, काव्या ने जैसे ही अपनी तरफ का शीशा नीचे किया ,वो आदमी भागता हुआ उनके पास आया..और लगभग अपना सिर उसने कार के अंदर ही डाल दिया,और जैसे ही उसने अंदर देखा, काव्या की मोटी-2 जांघे उसकी आँखो के बिल्कुल सामने थी..

समीर चिल्लाया : "अंदर ही घुस जाएगा क्या...''

वो सॉरी साहब बोलता हुआ बाहर हो गया...काव्या को अच्छा भी लगा, क्योंकि समीर उसके लिए पॉसेसिवनेस दिखा रहा था..और ये बात हर लड़की को पसंद आती है..

काव्या ने एक लंबी और गोल केन्डी आइस्क्रीम ले ली (शायद जान बूझकर) और फिर समीर ने गाड़ी आगे बड़ा दी..

काव्या उस आइस्क्रीम को खाने लगी...चूसने लगी...और उसके मज़े लेने लगी..वो अपनी आँखे बंद करते हुए उसको ऐसे चूस रही थी जैसे वो कोई लंड हो ... और मन ही मन वो उस पल को सोच रही थी जब असली मे उसने लोकेश अंकल का लंड चूसा था उनकी नाव पर...वो पल याद आते ही उसकी चूत मे जमी बर्फ की परत पिघलने लगी और गीलापन निकल कर बाहर आने लगा..

समीर की नज़र जब काव्या के चेहरे पर पड़ी तो वो भी चोंक गया, वो अपनी आँखे बंद करके उस आइस्क्रीम को जैसे चूस रही थी,सॉफ पता चल रहा था की वो लंड चूसने का तरीका है...उसकी जीभ लाल हो चुकी थी...जिसे वो आइस्क्रीम पर नीचे से उपर तक फिरा रही थी..ऐसा तो लंड चूसते हुए किया जाता है...तो क्या इसका मतलब काव्या लंड चूसना जानती है...पर लगता तो नही है...इतनी छोटी सी उम्र मे इसने कैसे इतनी अच्छी तरह से ये सब सीखा होगा...नही नही...ये शायद उसका वहां है...वो शायद आइस्क्रीम ऐसे ही खाती है..

एक साथ कई विचार कौंध रहे थे समीर के दिमाग़ मे...पर उसकी हरकत देखकर उसके लंड ने जो हाहाकार उसकी पेंट मे मचाया था वो सॉफ उजागर हो चुका था..उसने एक हाथ मे स्टेयरिंग पकड़े हुए दूसरे से अपनी पेंट को ठीक किया..

कुछ ही देर मे शॉपिंग माल आ गया, और दोनो कार पार्क करने के बाद अंदर आ गये..काव्या काफ़ी खुश थी आज..वो सीधा एक बड़े से शोरुम मे घुस गयी..और आनन फानन मे ही उसने 3 टी शर्ट्स ले ली...पेमेंट करने के बाद वो बाहर आ गये..और फिर एक जीन्स के शोरुम से काव्या ने अपने लिए एक जीन्स ली..और समीर को भी ज़बरदस्ती करवाकर जीन्स दिलवाई..

फिर कुछ देर के लिए दोनो ओपन मे बने हुए केफे मे बैठ गये और कॉफी पी और संडविच खाए..समीर को तो बस उस वक़्त का इंतजार था जब वो अंडरगार्मेंट्स के शोरुम मे जाएँगे..जो सेकेंड फ्लोर पर था..

वहाँ से निपटने के बाद समीर जल्दी-2 उपर की तरफ चलने लगा...काव्या भी उसकी जल्दबाज़ी देखकर मुस्कुरा रही थी...समीर सीधा अंदर गया और वहाँ खड़ी लड़की से काव्या के लिए कुछ इंपॉर्टेंट ब्रा और पेंटी दिखाने के लिए कहा..

वो लड़की पहले तो दोनो को देखने लगी फिर एकदम से पलटकर दूसरे सेक्षन की तरफ चल दी..समीर पहले भी वहाँ आ चुका था..काफ़ी पहले..अपनी पहली बीबी के साथ..इसलिए उस जगह की अहमियत और फेसिलिटी उसको पता थी..

पीछे की तरफ एक बड़ा सा कमरा था..जहाँ चारों तरफ शीचे लगे थे..और बीच मे एक आलीशान और गद्देदार सोफा...पूरा कमरा एसी चलने की वजह से चिल्ड हुआ पड़ा था..बीच मे एक ग्लास की टेबल भी थी..

समीर और कावा सोफे पर बैठ गये..वो इतना मुलायम था की काव्या की गांड तो पूरी तरह से अंदर धँस सी गयी..वो एक तरफ झुकती चली गयी और समीर के उपर जा गिरी...दोनो ने हंसते हुए एक दूसरे की तरफ देखा..और समीर ने काव्या को अपनी तरफ खींचकर बिठा लिया..काव्या भी अपनी छोटी सी ब्रेस्ट को समीर के बाजू मे घुसा कर चिपक कर बैठ गयी..

कुछ ही देर मे वो लड़की अपने हाथ मे काफ़ी सारी ब्रा-पेंटी के सेट लेकर आई और उन्हे सेंटर टेबल पर रख दिया..

फिर उसने एक रिमोट से सामने लगी बड़ी सी प्रोजेक्टर स्क्रीन चला दी, फिर उसने अपने हाथ मे एक सेट लिया और समीर और काव्या के सामने आकर खड़ी हो गयी..

उस लड़की का नाम कुसुम था, जो लगभग 22 साल की थी..मासूम सा चेहरा और बड़ी-2 ब्रेस्ट थी.

कुसुम : "सर ये इंपोर्टेड पीस है, इसमे टाई करने का और हुक करने का, दोनो ऑप्शन है..''

इतना कहकर उसने रिमोट से स्क्रीन ओन कर दिया और उसमे एक मॉडल ने सेम वही सेट पहना हुआ था, जो घूम-घूमकर उसकी फिटिंग दिखा रही थी..

समीर का लंड तो स्क्रीन पर दिख रही मॉडेल के फिगर को देखकर एकदम से खड़ा हो गया..

काव्या ने वो सेट अपने हाथ मे लिया और उसके कपड़े को अपनी उंगलियों से मसलकर देखने लगी..

कुसुम : "मेम ...हाथों मे लेने से कपड़े का पता नही चलता, हमारी ब्रेस्ट की स्किन ज़्यादा सेंसेटिवे होती है, असली मे तो वहीं लगा कर पता चलेगा की कैसी फील है इस कपड़े की..''

उसकी बात सुनकर काव्या शर्मा सी गयी...

समीर : "शायद ये सही कह रही है...तुम जाकर इसको ट्राइ कर सकती हो...''

काव्या : "अभी नही....और देखते हैं पहले ...''

कुसुम ने फिर से एक और सेट उठाया...ये भी इंपोर्टेड सेट था, जिसमे लाल रंग के दिल बने हुए थे..और पेंटी के बदले थोंग था..यानी पिछली तरफ एक महीन सा कपड़ा जो पहनने के बाद गांड की दीवारों मे घुसकर गायब ही हो जाए..

काव्या ने पहले कभी थोंग नही पहना था...इसलिए वो उसे काफ़ी गौर से देखने लगी..

कुसुम : "मेम आप इसका विसुअल देखिए...''

फिर से उसने स्क्रीन ओन कर दी, उसमे एक दूसरी मॉडेल ने वही सेट पहना हुआ था..समीर ने देखा की उस अँग्रेजन की मोटी सी गांड पूरी नंगी थी..क्योंकि पेंटी के नाम पर सिर्फ़ आगे की तरफ एक छोटा सा पैच ही तो था...

काव्या भी सोचने लगी की वो कैसे लगेगी उसे पहन कर...माना की उसकी ब्रेस्ट ज़्यादा बड़ी नही है..पर उसकी फेली हुई गांड तो पूरी नंगी होकर दिखेगी...

ये सोचते ही उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी..

समीर ने अचानक वो थोंग काव्या के हाथ से ले लिया..और कुसुम को अपने पास बुलाया..और जैसे ही वो समीर के पास आई, समीर ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसकी गांड अपनी तरफ की और उसके पीछे वो थोंग लगा कर दिखाया..

काव्या को उम्मीद नही थी की उसके पापा ऐसी हरकत करेंगे और वो भी एक सेल्सगर्ल के साथ...पर कुसुम पर जैसे कोई असर ही नही हुआ...वो दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी रही..

समीर : "देखो...ये ऐसे लगेगी...इसे भी तुम पहनकर देखना चाहो तो देख लो ...या फिर ये भी तुम्हे दिखा सकती है पहन कर..''

शायद ये उस हाइ प्रोफाइल शोरुम के कस्टमर का रोज का काम था...इसलिए समीर बड़ी ही आसानी से वो सब कर और कह रहा था.

काव्या : "क्या सच मे...ये मुझे पहन कर दिखा सकती है...''

कुसुम : "यस मेम ...पर इन्हे बाहर जाना होगा...''

शायद वो फेसिलिटी सिर्फ़ फीमेल कस्टमर्स के लिए ही थी...

उसकी बात सुनते ही काव्या एकदम से बोली : "ये क्यो जाएँगे...इनके बिना तो मैं कुछ भी नही खरीदूगी...आपने अगर दिखना है तो इनके सामने ही दिखाओ...वरना मुझे नही लेना यहाँ से कुछ..''

वो लड़की एकदम से घबरा गयी...शायद उसे भी अब तक पता चल चुका था की वो किस लेवल के कस्टमर्स है..उन्हे वापिस भेजने का मतलब हज़ारों रुपये का नुकसान और साथ ही उसके इन्सेंटिव का भी..

कुसुम : "ओक मेम ..आप कहती है तो ठीक है...मैं अभी इसे पहन कर आती हू..''

इतना कहकर वो उस सेट को लेकर चेंगिंग रूम मे चली गयी...और कुछ ही पल मे बाहर निकल कर आई..

उसे देखते ही काव्या के मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकला : "वाव ......सो सेक्सी....''

कुसुम को देखकर काव्या के मुँह से तो ये निकला, पर समीर का मुँह तो खुला का खुला ही रह गया...वो कुछ बोल ही नही पाया...कुसुम के मोटे-2 मुम्मे और पतली कमर के नीचे फैले हुए कूल्हे देखकर उसके मुँह से कुछ निकला ही नही..लंड और खड़ा हो गया.

समीर तो बस यही सोचे जा रहा था की ऐसा ही अगर चलता रहा तो वो कब तक अपने आप पर कंट्रोल कर पाएगा...
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05-25-2019, 11:44 AM,
#29
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--27

अब आगे
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कुसुम चलती हुई उसके पास तक आई और बिल्कुल काव्या के आगे खड़ी हो गयी...काव्या ने इतनी खूबसूरत लड़की और वो भी इतने कम कपड़ो मे आज से पहले कभी नही देखी थी...उसने तो सिर्फ़ अपना और अपनी सहेली श्वेता का शरीर ही देखा था...अपना तो उसे पता ही था और श्वेता की ब्रेस्ट कुछ ज़्यादा ही बड़ी थी और गांड भी काफ़ी गद्देदार...पर इस लड़की का हर अंग साँचे मे ढला हुआ था...लगभग 34 की ब्रेस्ट थी...26 के आस पास कमर और 36 की गांड ...

ऐसा ड्रीम फिगर तो उसने हमेशा से अपने लिए सोचा हुआ था...उसके दूधिया मुम्मे देखकर उसका तो मन कर रहा था की अभी उसकी ब्रा खोले और उसके मोटे-2 निप्पल अपने मुँह मे लेकर चूस डाले...उसकी ऐसी हालत है तो समीर का क्या हाल होगा, उसने समीर की तरफ देखा तो वो अपना मुँह और आँखे फाड़े कुसुम को खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था...काव्या ने उसको और तरसाने की सोची..उसने सीधा अपना हाथ आगे किया और कुसुम की पेंटी यानी थोंग के कपड़े को अपने हाथ मे लेकर परखने लगी..उसने महसूस किया की उसका हाथ लगते ही कुसुम के शरीर मे एक अजीब सा करंट लगा था..पर वो खड़ी रही, कुछ नही बोली..

काव्या ने अपनी उंगलियाँ आगे की तरफ बने छोटे से पैच मे घुसा दी और अपनी उंगली और अंगूठे के बीच उस थोंग के कपड़े को रखकर परखने लगी..और ऐसा करते हुए उसकी अंदर वाली उंगली कुसुम की सफाचट चूत से रगड़ खा रही थी..और अंदर से निकल रही नमी को काव्या अपनी उंगलियों पर सॉफ महसूस कर पा रही थी..

काव्या : "आप सही कह रहे थे...ये कपड़ा सचमुच अच्छी फिटिंग दे रहा है...और शायद स्किन पर भी अच्छी फीलिंग दे रहा होगा...''

वो जान बूझकर समीर को पापा नही बोल रही थी अब तक, क्योंकि वो चाहती थी की वहां का स्टाफ बस यही सोचता रहे की शायद कोई अमीर आदमी अपनी जवान गर्लफ्रेंड को शॉपिंग करवाने लाया है...बाप-बेटी के बीच ऐसा खुलापन कोई नही समझ पाएगा ..

कुसुम ने काव्या की बात सुनी और बोली : "येस मेम , ये कपड़ा इंपोर्टेड है, आपको ऐसा फील होगा की आपने कुछ पहना ही नही है...''

उसकी बात सुनकर काव्या हंस पड़ी..और बोली : "आपको शायद पता नही है, मैं अक्सर घर पर बिना पेंटी के ही रहती हू...''

उन दोनो लड़कियों की गर्ल-टॉक सुनकर समीर के लंड की हालत बुरी हो रही थी...काव्या को तो मज़ा आ रहा था समीर को अपनी सीट पर कसमसाते हुए देखकर..वो उसको तरसाने मे कामयाब जो हो रही थी..

काव्या ने कुसुम को घुमा दिया और अब उसकी गांड थी उसके सामने...और थोंग के पीछे की तरफ की महीन सी कपड़े की डोरी कुसुम की गहरी गांड मे फंसकर गायब हो चुकी थी और ऐसा लग रहा था की वो नीचे से नंगी होकर खड़ी है...उसका मोटा और उभरा हुआ पिछवाड़ा देखकर समीर और काव्या दोनो के मुँह मे पानी आ गया...और कोई मौका होता तो काव्या ने अपना मुँह घुसेड देना था उसकी रज़ाई में ..पर अपने पापा के सामने वो कोई सीन नही बनाना चाहती थी.

काव्या : "वाव ....देखो ना...कैसे ये कपड़ा अंदर चला गया है...इट्स सो सेक्सी...आई लव इट ...''

काव्या ने उसकी डोरी पकड़ कर उसकी गर्म गांड से बाहर निकाली, एक हल्की सी सिसकारी निकल गयी कुसुम के मुँह से...और फिर से काव्या ने वो डोरी छोड़ दी, और कुसुम फिर से कसमसा उठी..शायद हर बार वो डोरी उसकी गांड के छेद पर जाकर टिक रही थी..निकल रही थी..

काव्या एकदम से खड़ी हुई और उसने ब्रा के स्ट्रेप्स को पकड़ कर देखा, जैसे हुक की क़्वालिटी चेक कर रही हो...फिर से उसने कुसुम को अपनी तरफ घुमाया और उसके कप्स को अपने हाथों मे लेकर देखने लगी...कुसुम की आँखों मे आ रहा गुलाबीपन काव्या को साफ़ दिख रहा था..

समीर को तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई ब्लू मूवी का लेस्बियन सीन चल रहा हो वहाँ..

काव्या ने ब्रा का फेब्रिक चेक करते-2 अचानक कुसुम की ब्रेस्ट को ज़ोर से दबा दिया...और कुसुम के मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी...

''आाआईयईईईईईईईईईईईई........ में, क्या कर रहे हो आप मेम .....''

उसकी साँसे भी तेज हो गयी, शायद समीर वहाँ ना होता तो वो काव्या को कच्चा ही चबा जाती...इतनी आग निकलने लगी थी उसके अंदर से एकदम से.

काव्या समझ गयी की उसने शायद कुसुम को उत्तेजित कर दिया है...

काव्या : "ओह ...सॉरी ....मुझे पता नही अचानक क्या हो गया था...मैं अपने आप पर कंट्रोल ही नही कर पाई...आप हो ही इतनी खूबसूरत...'' फिर वो समीर की तरफ मूडी और बोली : "है ना ....कितनी अच्छी फिगर है इनकी...''

समीर बेचारा बस अपना सिर हाँ मे हिलाने के सिवाए कुछ नही कर पाया...

काव्या ने देखा की कुसुम के होंठ लरज रहे थे...फड़क रहे थे...शायद वो चाहती थी की उन्हे कोई चूम ले, चूस ले, निचोड़ डाले..पर उस वक़्त ऐसा कुछ भी पॉसिबल नही था..

दोनो की आँखो मे एक दूसरे के लिए उत्तेजना का ज्वार भाटा उमड़ पड़ा था, जिसे शायद समीर नही देख पा रहा था..पर वो दोनो महसूस कर पा रही थी..

कुसुम : "मेम , आप कहें तो कुछ और भी पहन कर दिखाऊ आपको ...या ये फाइनल है ...''

काव्या : "मुझे कम से कम 5-6 सेट लेने है...इसको तो मैं एक बार खुद पहन कर देखना चाहूँगी...''

कुसुम : "ठीक है , आप मेरे साथ चलिए...''

इतना कहकर वो काव्या को लेकर अपने साथ चेंजिंग रूम मे आ गयी...जो एक छोटा सा केबिन था..और उसमे हर तरफ शीशे लगे थे..

एक खूंटी पर कुसुम की ड्रेस और उसकी ब्रा -पेंटी टंगी हुई थी..

कुसुम : "में, आप अपने कपड़े उतार कर यहाँ टाँग दीजिए..मैं आपको ये उतार कर देती हू..''

इतना कहकर कुसुम बिना किसी शरम के अपनी ब्रा खोलने लगी..

काव्या : "रूको, मैं हेल्प करती हू तुम्हारी ...''

इतना कहकर वो कुसुम के पीछे गयी और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए...और नीचे सरकती हुई ब्रा के कप्स को उसने आगे हाथ करते हुए अपनी हथेलियो मे थाम लिया...और फिर उन्हे धीरे-2 उजागर कर दिया..

और जैसे ही कुसुम की नंगी चुचियाँ काव्या को सामने लगे शीशे मे दिखी , काव्या के शरीर का तापमान बड़ सा गया, उसकी गोल-2 चुचियाँ और लंबे निप्पल्स कमाल के थे...उसने इतने लंबे निप्पल्स आज तक नही देखे थे..और उसकी मोटी-2 ब्रेस्ट की जानलेवा शेप...उफ़फ्फ़ ...शायद इसलिए वो वहाँ की सेल्सगर्ल थी..

काव्या उसके कान मे फुसफुसाई : "यू आर ब्यूटिफुल ...."

उसकी साँसे तेज हो चुकी थी...

कुसुम भी उत्तेजना के शिखर पर थी,क्योंकि उसके लगभग एक इंच लंबे निप्पल फटने को हो रहे थे......वो धीरे से बोली : "थेंक्स मेम ...''

सामने के शीचे मे काव्या उसके टॉपलेस हिस्से को देख पा रही थी..

फिर उसने उसकी पेंटी को भी नीचे खिसका दिया...कुसुम की चूत से जैसे चाशनी बह रही थी...जो उस छोटे से कपड़े से चिपक कर एक रेशम के धागे का निर्माण कर रही थी..

कपड़ा तो अलग हो गया पर उस चाशनी से बना धागा टूटने का नाम ही नही ले रहा था...आलम ये था की पेंटी घुटने से नीचे तक आ गयी पर एक गोल्डन से धागे ने उसकी चूत और पेंटी को अभी तक आपस मे जोड़ रखा था..इतना सेक्सी सीन काव्या ने अपनी पूरी लाइफ मे आज तक नही देखा था...

उसने अपना हाथ आगे किया और अपनी उंगली में उस रेशमी और गीले धागे को लपेट कर उसे तोड़ दिया....और अपना पंजा एकदम से कुसुम की चूत पर रखकर ज़ोर से दबा दिया...

बस इतना काफ़ी था उस मासूम सी दिखने वाली लड़की के अंदर का जानवर जगाने के लिए...वो एकदम से पलटी और काव्या के चेहरे को पकड़ कर उसके होंठों पर जोरदार हमला कर दिया....उसके रेशमी होंठों का रस ऐसे चूसने लगी मानो उसके अंदर कोई सकिंग मशीन लगी हो...वो तो पूरी नंगी थी...और आनन फानन मे उसके हाथ चलने लगे और एक मिनट के अंदर ही उसने काव्या को भी अपनी तरह नंगा कर दिया..और दोनो जवान जिस्म एक दूसरे को रोंदने लगे...

उस छोटे से केबिन में मानो एक तूफान सा आ गया..आज काव्या को पहली बार कोई अपनी टक्कर का मिला था..जो उससे ज़्यादा उत्तेजना मे भरकर अपना उतावलापन दिखा रहा था..ठीक ऐसी ही बनना चाहती थी वो भी, ताकि वो जिसके साथ भी सेक्स करे,वो उसके जंगलीपन का दीवाना बन जाए..वो कुसुम को ओब्सर्व करने लगी, अपने आप को उसके हवाले कर दिया और उसकी हरकतों को नोट करने लगी, ताकि कुछ सीख पाए..

कुसुम तो जैसे पागल हो चुकी थी, इतनी देर तक अपने आप पर कंट्रोल करने के बाद वो जैसे फट सी पड़ी थी, काव्या को खा जाने वाली हरकतें कर रही थी वो..उसके होंठ, गर्दन, और गालों को आम की तरह चूस रही थी..और अपनी चूत को उसकी चूत पर रगड़कर मज़ा ले रही थी..

वो पहले से ही उत्तेजित थी, इसलिए लगभग 8-10 घिस्से लगाने के बाद ही वो छूट गयी और उसके अंदर का लावा बहकर उसकी जांघों से नीचे सरकने लगा..

बाहर बैठा हुआ समीर व्याकुल सा हो रहा था...वो उठकर केबिन तक गया और उसने धीरे से दरवाजा खड़काया...

समीर : "काव्या....काव्या...बड़ी देर लगा दी...तुम ठीक तो हो ना...''

अंदर दोनो नंगी खड़ी होकर एक दूसरे को चूम रही थी..कुसुम तो एकदम से घबरा गयी और अपने कपड़े पहन लिए..अब वो डर रही थी की शायद उसे अपने कस्टमर के साथ ऐसा नही करना चाहिए था..

काव्या ने उसे शांत किया और बाहर खड़े समीर से बोली : "जी पापा, मैं ठीक हू...बस फिटिंग चेक कर रही थी...''

समीर वापिस जाकर सोफे पर बैठ गया.

काव्या के मुँह से पहली बार समीर के लिए पापा निकलता देखकर कुसुम के तो होश उड़ गये, वो तो इतनी देर से उसे उसकी गर्लफ्रेंड या नाजायज़ संबंध का नतीजा समझ रही थी..पर ये तो उसका बाप निकला..

पर वो कैसा बाप था वो ये नही जानती थी..

पर अपने बाप के साथ ऐसी शॉपिंग के लिए वो आई थी, ये सोचकर एक बार फिर से कुसुम के अंदर चींटियाँ सी रेंगने लगी..उसने आज तक अपने पापा के बारे मे ऐसा नही सोचा था, पर उनके इस तरह के खुले रिश्ते को देखकर एक दम से उसका ध्यान अपने पापा की तरफ चला गया और वो एक गहरी सोच मे डूब गयी..

तब तक काव्या ने भी वो ब्रा और थोंग पहन लिया था और वो ग़ज़ब की लग रही थी...उसकी ब्रेस्ट छोटी थी, पर कपड़ा स्ट्रेचेबल था , इसलिए वो सिकुड कर उसकी ब्रेस्ट को भी सही से कवर कर पा रहा था...और वो थोंग , जिसपर अभी तक कुसुम की चूत का जूस लगा हुआ था, उसे अपनी मुनिया पर महसूस करते ही एक अजीब सा एहसास हुआ उसको...

कुसुम ने कपड़े पहन लिए थे..और वो बाहर जाने लगी..

कुसुम : "ये बिल्कुल फिट है आपके उपर, में....आप अपने पापा को दिखाना चाहोगी इसको...''

उसने शरारत भरे स्वर मे काव्या से पूछा..

क्योंकि वो जानती थी की वो जितनी भी खुल जाए, पर अपने पापा के सामने ऐसी हालत मे हरगिज़ नही जाएगी..

पर उसकी आशा के विपरीत काव्या बोली : "उन्हे एक बार दिखाना तो होगा ही ना...तुम ऐसा करो, उन्हे यहीं अंदर भेज दो..मुझे ऐसे बाहर निकलने मे शर्म आ रही है..''

उसकी बात सुनकर कुसुम के तो होश उड़ गये..उसने तो सोचा भी नही था की काव्या ऐसा कहेगी...बाप बेटी मे ऐसे खुलेपन का रिश्ता उसने आज तक नही देखा था..और ना ही सोचा था..

पर ये कैसी शर्म है, जो उसके पापा बाहर देखेंगे, वही तो अंदर भी होगा, दोनो मे फ़र्क क्या है..

पर ये बात काव्या ने काफ़ी सोच समझ कर कही थी..क्योंकि वो समीर को जानती थी..बाहर आकर वो सिर्फ़ अपने आप को उसे दिखा सकती थी..पर अंदर के छोटे से केबिन मे वो काफ़ी कुछ कर भी सकती थी उसके साथ..

काव्या की बात मानकर कुसुम बाहर गयी और उसने हकलाते हुए से स्वर मे कहा : "सर ...वो ..आपकी बेटी...आपको अंदर केबिन मे बुला रही है..''

समीर के दिल की धड़कने एकदम से रेलगाड़ी की तरह चलने लगी...वो सोचने लगा की आख़िर क्या दिखाएगी काव्या उसको..

वो लगभग भागता हुआ सा केबिन की तरफ गया..और धीरे से धक्का देकर अंदर आ गया...केबिन का दरवाजा खुला ही हुआ था..

अंदर पहुचते ही जो उसने देखा उसके बाद उसने अपने आप पर कैसे कंट्रोल किया ये तो वो खुद भी नही जानता था...क्योंकि ऐसी सेक्सी लड़की और वो भी सिर्फ़ एक छोटी सी ब्रा और पेंटी मे...और वो भी उसके इतने पास...उसका लंड तो फटने को हो रहा था..

और काव्या भी बड़ी मुश्किल से अपने आप पर कंट्रोल करती हुई सी,नॉर्मल बिहेव कर रही थी..और घूम-घूमकर शीशे मे अपना फिगर चेक कर रही थी..
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05-25-2019, 11:44 AM,
#30
RE: Kamukta Story सौतेला बाप
सौतेला बाप--28

अब आगे
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काव्या : "पापा...देखो ना...कैसी लग रही है...''

समीर बस यही बोल पाया : "हाँ ......अच्छी ...है ..''

उसके मुँह से शब्द ही नही फूटने को हो रहे थे...वो तो अपनी जवान बेटी के सेक्सी फिगर को देखकर पागल हुए जा रहा था...छोटी-2 ब्रेस्ट...पतली कमर...सेक्सी सी नेवल...और फेली हुई गांड के उपर छोटी सी कच्छी ...और पीछे से तो ऐसा लगता था की वो पूरी नंगी है...उसके भरंवा चूतड़ देखकर उसका मन कर रहा था की उन्हे दबोच कर उसका रस निकाल दे...

काव्या : "पर ये मेरी ब्रेस्ट के हिसाब से लूस है...देखो...कितना गेप है...''

वो जैसे समीर को उकसा रही थी..की आओ पापा और ब्रा के कपड़े को पकड़ कर देखो..पर समीर तो जैसे लल्लू सा बन गया था..वो अवाक सा होकर बस उसके सेक्सी शरीर को देखे जा रहा था..

काव्या अपनी उंगलियों से ब्रा के कपड़े को खींचकर उपर नीचे कर रही थी..और ऐसा करते हुए अचानक समीर को उसके निप्पल के दर्शन हो गये...

उफफफफफफफ्फ़ इतना गुलाबी भी कोई होता है क्या ...ऐसा गुलाबी रंग तो उसने अपनी कल्पना मे भी नही देखा था...बेबी पिंक कलर के निप्पल्स....उम्म्म्मममम....उन्हे चूसने मे और उनका जूस पीने मे कितना मज़ा आएगा...

वो अपने ही ख़यालों मे मगन सा होकर एकटक देखता रहा उसकी ब्रेस्ट को...

काव्या को काफ़ी मज़ा आ रहा था उसको टीस करने मे..

काव्या : "फाइनल बोलो पापा...लू या नही...''

ऐसा करते हुए उसने अपनी नंगी गांड समीर की तरफ कर दी...अब ऐसे सीन को देखकर कोई कैसे मना कर सकता था..वो अगर हीरे से बनी हुई होती तो भी ले देता समीर उस वक़्त ..

समीर :"ले लो...काफ़ी सेक्सी...उम्म...अच्छी लग रही है...''

काव्या : "थॅंक्स पापा....''

इतना कहकर वो बिना किसी वजह के उसके गले से लिपट गयी..और उसके गाल पर एक पप्पी दे डाली..

उसकी छोटी-२ सिप्पियां समीर की छाती से टकराकर टूट सी गयी , समीर के हाथ उसकी नंगी कमर पर लिपट गए

समीर के खड़े हुए लंड का एहसास अपनी चूत पर महसूस करते ही वो भी बहक सी गयी एक पल के लिए...और उसने सोचा की जो करना है आज ही कर लेती हू...पर तभी उसे फिर से अपनी सहेली श्वेता के कहे शब्द याद आ गये की जितना तरसाओगी , उतनी ही बेहतर चुदाई होगी...वैसे भी जगह चुदाई के हिसाब से ठीक नहीं थी

वो एकदम से अलग हुई..और समीर से बोली : "ठीक है पापा....आप बाहर जाओ, मैं चेंज करके आती हू..''

और समीर बेचारा ना चाहते हुए भी बाहर आ गया..काव्या ने जल्दी से अपने कपड़े वापिस पहने और अपने हाथ मे वो ब्रा-पेंटी लेकर बाहर आ गयी..

इतनी देर तक दोनो बाप-बेटी अंदर क्या कर रहे थे, ये सोच-सोचकर कुसुम अपनी छोटी सी स्कर्ट के उपर से ही अपनी चूत को रगड़ रही थी..

काव्या : "मुझे ये पसंद आई...और पापा को भी...ये पॅक कर दो..''

दोनों के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी

उसके बाद काव्या ने लगभग 5 जोड़े और लिए, पर उन्हे पहना कर या पहन कर नही देखा, क्योंकि उसके हिसाब से आज के लिए इतना ही काफ़ी था..

घर पहुँच कर गाड़ी से निकलकर काव्या समीर के पास आई और उसकी बाहों को अपने हाथ मे फँसा कर अंदर की तरफ चल दी, जैसे वो उसकी गर्लफ्रेंड हो..और बोली : "पापा, बाकी के सेट्स मैं आपको आराम से पहन कर दिखाउंगी ...''

और दोनो एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ चल दिए..

और उपर बालकनी मे खड़ी हुई रश्मि ये सोचकर खुश हो रही थी की बाप-बेटी मे लगाव होना शुरू हो गया है..

पर वो नही जानती थी की ये लगाव किस तरह का है.

रश्मि बाथरूम मे चली गयी...उसने कुछ अलग ही सोचा हुआ था आज समीर के लिए.

कुछ ही देर मे समीर भी अपने बेडरूम मे पहुँचा,रश्मि को वहाँ ना पाकर वो बाथरूम के पास गया, दरवाजा अंदर से बंद था, वो समझ गया की रश्मि अंदर ही है..उसके लंड की हालत काफ़ी खराब थी आज, उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए..यहाँ तक की उसने अपना अंडरवीयर भी उतार फेंका, क्योंकि काव्या के साथ खरीदारी करते हुए उसके लंड की अकड़ जिस तरह से उस अंडरवीयर मे सिमटी पड़ी थी, उसे आज़ाद करना ज़रूरी था, खुली हवा मे झटके मारते हुए उसको काफ़ी आराम मिल रहा था..अब वो अपने हाथ मे खड़ा लंड लेकर रश्मि के निकलने का इंतजार करने लगा..आज वो उसकी चूत का कीमा बना देना चाहता था..जैसे उसकी चूत को कूटकर वो उसे इतनी सेक्सी लड़की पैदा करने का इनाम देना चाहता हो.

अब समीर से सहन नही हो रहा था, उसने दरवाजा खड़काया : "रश्मि...क्या कर रही हो...जल्दी बाहर आओ...''

अंदर खड़ी हुई रश्मि अपनी चूत पर एक बार और रेजर फेर रही थी...उसकी चूत भी तो सुबह से इतनी बार गीली हो चुकी थी,विक्की के साथ आज जो कुछ भी हुआ था, उसे सोचकर उसके बदन मे अभी तक रोमांच की ठंडक दौड़ रही थी..

कुछ ही देर मे उसने दरवाजा खोल दिया और बाहर निकल आई..

रश्मि को ऐसी हालत मे देखकर समीर एक पल के लिए तो अपनी सोतेली बेटी को भी भूल गया और उसका लंड रश्मि की लदी हुई जवानी के गुणगान करने लगा..

रश्मि ने आज अपने पति के द्वारा लाई हुई एक सेक्सी ब्रा पेंटी का सेट पहना हुआ था, बाथरूम मे उसने अपना गाउन उतार दिया था और सिर्फ़ अपनी ब्रा पेंटी मे ही बाहर निकल आई..

जितना शॉक समीर को लगा था, उतना ही रश्मि को भी लगा समीर को देख कर, वो सिर्फ़ अपनी सैंडो मे था और अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर हिला रहा था..जैसे वो रश्मि का ही इंतजार कर रहा हो की कब बाहर निकले और उसकी चूत मे अपना लंड पेल दे..

दोनो के जिस्म बुरी तरह से सुलग रहे थे...रश्मि का विक्की की वजह से और समीर का काव्या की वजह से..अब समय था दोनो जिस्मों मे लगी हुई आग को बुझाने का..एक दूसरे से रगड़ कर..

दोनो एक दूसरे के गले से ऐसे चिपके जैसे बरसों के बिछुड़े प्रेमी हो..समीर ने अपनी बीबी को बेतहाशा चूमना और मसलना शुरू कर दिया..

रश्मि ने तो सोचा था की बाहर निकल कर समीर को अपने जिस्म के जलवे दिखा कर पहले तो थोड़ा तरसाएगी, फिर धीरे-2 उसके कपड़े उतार कर उसे नंगा करेगी, उसको सीडयूस करेगी , फिर खुद भी नंगी हो जाएगी और आराम से उसका लंड चूसेगी और अपनी चूत भी चुस्वाएगी...पर समीर ने सब गड़बड़ कर दिया था, उसे क्या पता था की वो पहले से नंगा खड़ा होगा और उसपर एकदम से झपटकर सारा प्लान बिगड़ देगा..

कभी-2 इंसान चुदाई के प्लान तो काफ़ी बड़े-2 बनाता है, पर जब करने की बारी आती है तो सब अपने हिसाब से ही होता चला जाता है.

यही हो रहा था आज रश्मि के साथ भी..पलक झपकते ही उसकी ब्रा पेंटी ज़मीन पर थी और वो पूरी नंगी होकर समीर की बाहों मे मचल रही थी..

वो भी पूरा नंगा हो चुका था, उसे रश्मि को धक्का सा देकर अपने पैरों मे बिठा लिया और उसे लंड चूसने के लिए बोला..वो अपने लंबे बालों को संभालती हुई अपने घुटनो के बल बैठकर समीर के लंड को चूसने लगी..

उसके गर्म मुँह मे अपना लंड जाते ही समीर का मुँह उपर की तरफ हो गया और वो उसके रेशमी बालों मे हाथ फेरते हुए अपनी आँखे बंद करके काव्या के बारे मे सोचने लगा..एक पल मे ही उसके दिमाग़ मे शोरुम का सीन आ गया जहाँ काव्या उस छोटे से केबिन मे थी और उसे अंदर बुलाते ही वो पूरी नंगी हो गयी और नीचे बैठकर उसके लंड को चूसने लगी..

रश्मि की चूत मे से पानी रिस रहा था और नीचे ज़मीन पर उसके रस की बूंदे गिरने लगी...वो आज अपनी पसंद का एक काम तो करना ही चाहती थी..उसके लिए समीर के झड़ने से पहले वो उसे बिस्तर पर ले जाना चाहती थी..

रश्मि ने एकदम से समीर का लंड अपने मुँह से निकाला और समीर को पीछे की तरफ धक्का देते हुए बेड पर गिरा दिया..ये समीर पर ज़बरदस्ती करने का उसका पहला मौका था, उसने आज तक समीर के कहे अनुसार ही काम किया था, वो जिस आसन मे उसे चोदना चाहता था, वो उसी आसन मे उसके कहे अनुसार आ जाती थी..वो कहे तो उसकी दासी बनकर उसका लंड चूसती , वो कहता तो कुतिया बनकर अपनी गांड पीछे कर देती..वो कहता तो अपनी टांगे फेला कर उसके सामने लेट जाती और वो कहता तो उछलकर उसके खड़े हुए लंड के उपर बैठकर उछल कूद करती..

पर आज ये पहला मौका था जब वो समीर से कुछ करवाना चाहती थी..समीर भी हैरान था की आज रश्मि को ये क्या हो गया है..पर वो चुप रहा ,क्योंकि उत्तेजना का आवेग ही इतना अधिक था की उस समय तो कुछ भी करवा लो, वो मना नही करता..

उसके लेटते ही रश्मि उछल कर बेड पर चड गयी और उसके शरीर के दोनो तरफ पैर करके खड़ी हो गयी....समीर के लंड के उपर रश्मि की चूत थी..समीर ने सोचा की शायद वो उसके उपर बैठ जाएगी..पर ऐसा नही हुआ..और वो थोड़ा आगे की तरफ खिसक आई...पर आगे आने से पहले उसकी रस टपकाती चूत से एक और मीठे पानी की बूँद निकल कर नीचे गिरी और वो सीधा समीर के खड़े लंड से जा टकराई...समीर का पूरा शरीर झनझना सा गया, उसने वो पानी अपने लंड के उपर चोपड़ लिया..फिर धीरे-2 चलती हुई रश्मि उसके चेहरे के बिल्कुल उपर आकर खड़ी हो गयी...और उसके शरीर की थिरकन से हर बार एक बूँद निकल कर झटके से नीचे भी गिर जाती, इस तरह से समीर के शरीर पर लंड से लेकर गर्दन तक एक गाड़े और मीठे रस की लकीर सी बन गयी....

अब रश्मि की चूत की फांके बिल्कुल समीर के चेहरे के ऊपर थी...समीर को उसकी चूत ऐसे दिख रही थी मानो दो दरारों के बीच से पानी रिसकर गिर रहा हो..रश्मि का दिल ज़ोर से धड़कने लगा..इस पोज़ के लिए वो काफ़ी समय से तरस रही थी...और अब वो करने जा रही थी,ये सोचकर उसकी चूत मे लगी टूटी और तेज़ी से अपने अंदर का पानी बाहर फेंकने लगी..और टप -2 करते हुए समीर के चेहरे पर जैसे उसके रस की बारिश सी होने लगी..एक ही पल मे उसका चेहरा रश्मि के रस से भीगकर पूरा गीला हो गया..आज कुछ अलग ही स्वाद लग रहा था उसकी चूत का , इसलिए समीर भी चटकारे ले -लेकर उसका रस पीने लगा..

और फिर समीर की आँखों मे देखते हुए रश्मि ने धीरे-2 नीचे झुकना शुरू किया,और जैसे ही वो सिर्फ़ एक इंच की दूरी पर रह गयी, समीर ने अपनी लंबी और गर्म जीभ बाहर निकाल ली और उसकी चूत के अंदर घुसेड डाली..

''अहहssssssssssssssssssssssss .......... उम्म्म्मममममममम ......येसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्सस्स्स्स्स्स्स ''

रश्मि धम्म से अपने शरीर के समेत उसकी खड़ी हुई जीभ के उपर बैठ गयी..जीभ तो पता नही कहाँ तक गयी,समीर के होंठ भी उसकी चूत के अंदर फंसकर गायब से हो गये..

बस फिर क्या था, रश्मि ने अपना मोर्चा संभाला और रोड आयरन से बने बेड के सरिऐ को पकड़ कर उसके चेहरे पर अपनी चिकनी चूत को रगड़ने लगी...

उसने भी आनंद से अपनी आँखे बंद कर ली और उसके मुँह से उत्तेजना वश निकल गया : "अहहssssssssssssssssssssssss ....विक्की......चूसो इसको....''

शुक्र था की उसकी आवाज़ इतनी धीमे थी की समीर सुन नही पाया, पर आज पहली बार चुदाई के समय उसको कुछ बुदबुदाते हुए देखकर वो काफ़ी खुश हुआ, क्योंकि वो चुपचाप चुदाई करवाकर सो जाने वाली औरत थी, और आज जिस तरह से वो अपनी चूत चुस्वा रही है, और कुछ बड़बड़ा भी रही है, ये समीर को बहुत अच्छा लगा..वो चाहता था की रश्मि खुल कर बोले, जो फील कर रही है या जो चाहती है वो अपने मुँह से बयान करे..इसलिए वो उसको उकसाने लगा..

"रश्मि...ज़ोर से बोलो....क्या बोल रही थी....बोलो ना...''

समीर ने अपनी जीभ से उसकी चूत और गांड एक ही बार मे चाटते हुए कहा.

रश्मि अपने आप को कोस रही थी की ये एकदम से उसके मुँह से विक्की का नाम कैसे निकल गया, वो इतनी बेवकूफ़ कैसे हो सकती है..अगर समीर ने सुन लिया होता तो पता नही क्या ..

पर अभी के लिए वो बेकार की बहस करके समीर को परेशान नही करना चाहती थी...वो उसी टोन मे ज़ोर से बुदबुदाई : ""अहहssssssssssssssssssssssss ....समीर......चूसो इसको....''

बड़ी चालाकी से उसने अपनी बेवकूफी को छुपा लिया..और उसने ये भी सोच लिया की अब वो ऐसी बेवकूफी दोबारा नही करेगी, इसलिए कुछ देर के लिए उसने विक्की का ख़याल अपने दिल से निकाल दिया और अपनी आँखे खोल कर समीर के बारे मे ही सोचकर मज़े लेने लगी..

अब वो अपनी चूत वाले हिस्से को उसके चेहरे पर बुरी तरह से घिस कर ज़ोर-2 से चिल्ला रही थी : "आआआआआआअहह समीर ........सकककककक करो......अहहस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ज़ोर से ........ उम्म्म्मममममममम ......यस ..................ऐसे ही...... ओह.... तुम्हारी जीभ कितनी अच्छी लग रही है अंदर जाकर .......अआआआहह.... काटो मत प्लीस...... अहह....मेरी क्लिट ......येस .....इसको पकड़ो .....होंठों से ......जीभ से कुरेदो .....अहह ऐसे ही ..... ओह ....समीर......... माय लाइफ ........उम्म्म्मम......आई एम कमिंग...''

और एक जोरदार झटके के साथ उसकी हांड़ी मे से गरम-2 शहद निकल कर समीर के मुँह मे जाने लगा..रश्मि के शरीर के हर जर्क के साथ कुछ बूंदे निकल कर नीचे जाती, जिसे समीर बड़े चाव से निगल जाता..

अब बारी थी समीर की...उसने रश्मि को मोटी-2 जांघे पकड़ी और उसे बेड पर चित्त कर दिया और एक ही झटके मे उसके उपर सवार हो गया..रश्मि अपने झड़ने का स्वाद अभी तक ले रही थी और उसकी आँखे बंद थी, समीर ने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर रखी और अपने हाथ से लंड पकड़ कर उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक आगे की तरफ झुकता चला गया..रश्मि की एक टाँग समीर के नीचे थी और दूसरी उसकी खुद की छाती से आ लगी...और साथ ही साथ समीर भी पूरा उसके अंदर दाखिल हो गया..

''ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् समीर , चोदो मुझे आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह जोर से ''

इतने अंदर तक चुदने का ये पहला एहसास था उसका..आज तक इतनी गहराई मे कभी नही डूबा था समीर..वो भी उसके आनंद सागर मे गोते लगा-लगाकर अपनी इस उपलब्धि का मज़ा लेने लगा..

कभी वो झुकते हुए उसके होंठों को चूम लेता और कभी नीचे झुकते हुए उसके स्तनों को काट लेता..कभी उसके मांसल चूतड़ों पर चांटा मारता
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