Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
05-21-2019, 11:21 AM,
#21
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
रंग तो एक बहाना था. उन्होंने आराम से पहले तो मेरे गालों पे फिर दोनों चूचीयों पे खुल के कस के रंग लगाया, रगडा. मेरा अंग अंग बाकी ननदों ने पकड़ रखा था इस लिये मैं हिल भी नहीं पा रही थी.चूंचियां रगड़ने के साथ उन्होने कस के मेरे निपल्स भी पिंच कर लिये और दूसरे हाथ से पेंट सीधे मेरे क्लिट पे ...बडी मुश्कील से मैं छुडा पायी. लेकिन उस के बाद मैं ने किसी भी ननद को नहीं बख्शा.स सबके उंगली की, चूत में भी गांड में भी.

लेकिन जिस को मैं ढूंड रही थी वो नहीं मिली, मेरी छोटी ननद, मिली भी तो मैं उसे रंग लगा नहीं पायी. वो मेरे भाई के कमरे की ओर जा रही थी, पूरी तैयारी से होली खेलने की. दोनों छोटे छोटे किशोर हाथों मेम गुलाबी रंग पतली कम्र से रंग, पेंट और वार्निश के पाउच, जब मैने पकड़ा तो वो बोली प्लीज भाभी मैने किसी से प्रामिस है की सबसे पहले उसी से रंग डलवाउंगी, उस के बाद आप से चाहे जैसे चाहे जितना लगाइयेगा मैं चूं भी नही करूगीं. मैंने छेडा, “ ननद रानी अगर उसने रंग के साथ कुछ और डाल दिया तो...” वो आंख नचा के बोली, “ डलवा लूंगी भाभी, आखिर कोयी ना कोयी कभी ना कभी तो...फिर मौका भी है दस्तूर भी है.”

एक दम उसके गाल पे हल्के से रंग लगा के मैं बोली और कहा की जाओ पहले मेरे भैया से होली खेल फिर अपनी भौजी से.” थोडी देर में ननदों के जाने के बाद गांव की औरतों भाभियों का ग्रुप आ गया और फिर तो मेरी चांदी हो गयी. हम सब ने मिल के बडी ननद को दबोचा और जो जो उन्होंने मेरे साथ किया था वो सब सूद समेत लौटा दिया.

मजा तो मुझे बहोत आ रहा था लेकिन सिर्फ एक प्राबल्म थी. मैं झड़ नहीं पा रही थी. रात भर उन्होने रगड़ के चोदा था, लेकिन झडने नहीं दिया था. सुबह से मैं तड़प रही थी सुबह सासू जी की उंगलियों ने भी, आगे पीछे दोनो ओर , लेकिन जैसे ही मेरी देह कांपने लगी, मैने झ्डना शुरु ही किया था वो रुक गयी और पीछे वाली उंगली से मुझे मंजन कराने लगी, तो मैं रुक गयी और उसके बाद तो सब कुछ छोड के वो मेरी गांड केही पीछे पड़ गयी थीं. 

यही हालत बेला और बाकी ननदों के साथ हुयी. बेला कस कस के घिस्सा दे रही थी और मैं भी उसकि चूचीयां पकड के कस कस के चूत पे चूत रगड़ रही थी, लेकिन फिर मैं जैसे ही झडने के कगार पे पहुंची बडी ननद आ गयीं. और इस बार भी...मैने ननद जी को पटक दिया था और उनके उपर चड के रंग लगाने के बहाने के उनकी चूंचिया खुब जम के रगड़ रही थी और कस कस के चूत रगड़ते हुए बोल रही थी देख ऐसे चोदते हैं। तेरे भैया मुझको, चूतड उठा के मेरी चूत पे अपनी चूत रगडती वो बोली और ऐसे चोदेंगे आपको आपके ननदोयी. 

मैने कस के क्लीट से उसकी क्लिट रगडी और बोला, हे डरती हूँ क्या उस साले भंडवे से उसके साले से रोज चुदती हूं, आज उसके जीजा साले से भी चुद वा के देख लूंगी. मेरी देह उत्तेजना के कगार पे थी लेकिन तब तक मेरी जेठानी आके शामिल हो गयीं और बोली हे तू अकेले मेरी ननद का मजा ले रही है और मुझे हटा के वो चढ गयीं.


मैं इतनी गरम हो रही थी की....मेरी सारी देह कांप रही थी मन कर रहा था की कोयी भी आ के चोद दे. बस किसि तरह एक लंड मिल जाये, किसि का भी फिर तो मैं उसे छोडती नहीं निचोड के खुद झड के ही दम लेती. इसी बीच में अपने भाई के कमरे की ओर भी एक चक्कर लगा आयी थी. उसकी और मेरी छोटी ननद के बीच होली जबरदस्त चल रही थी. उसकी पिचकारी मेरी ननद ने पूरी घोंट ली थी, चीख भी रही थी सिसक भी रही थी लेकिन उसे छोड भी नहीं रही थी. तब तक गांव की औरतों के आने की आहत पाके मैंचली आयी.
Reply

05-21-2019, 11:21 AM,
#22
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
जब बाकी औरतें चली गयी तो भी एक दो मेरे जो रिश्ते की जेठानी लगती थी रुक गयीं. हम सब बातें कर रहे थे तभी छोती नन्द की किस्मत ...वो कमरे से निकल के सीधे हमी लोगों की ओर आ गयी. गाल पे रंग के साथ हल्के हल्के दांत के निशान, टांगे फैली फैली...चेहरे पे मस्ती लग रहा था पहली चुदायी के बाद कोयी कुंवारी आ रही है. जैसी कोयी हिरणी शिकारियों के बीच आ जाये वही हाल उसकी थी. वो बिदकी और मुडी तो मेरी दोनो जिठानियों ने उसे खदेड़ा और जब वो सामने की की ओर आयी तो वहां मैं थी. मैने उसे एक झटके में दबोच लिया. वो मेरी बाहों में छटप्टाने लगी तब तक पीछे से दोनो जेठानीयों ने पकड़ लिया, और बोलीं,
* हे कहां से चुदा के आ रही है.” दूसरी ने गाल पे लाल रंग मलते हुए कहा,

* चल, अब भौजाइयों से चुदा . एक एक पे तीन तीन...और एक झटके में उसकी चोली फाड के खींच दी. जो जोबन झट्क के बाहर निकले वो मेरी मुट्ठी में कैद थे.
अरे तीन तीन नहीं चार चार...” 

तब तक मेरी जेठानी भी आ गयीं. हंस के वो बोली और उस्को पूरी नंगी कर के कहा, अरे होली ननद से खेलनी है उसके कपड़ों से थोडी ही. फिर क्या था थोडे ही देर में वो नीचे और मैं उपर.रंग, पेंट, वार्निश और कीचड कोयी चीज हम लोगों ने नहीं छोड़ी. लेकिन ये तोशुरुआत थी. मैं अब सीधे उसके उपर चढ़ गयी और अपनी प्यासी चूत उसके किशोर गुलाबी रसीले होंठों पे रगडने लगी. वो भी कम चुदक्कड नहीं थी. चाटने और चूसने में उसे भी मजा आ रहा था.

उसके जीभ की नोक मेरे क्लिट को छेडती मेरे पेशाव के छेद से छू गयी और मेरे पूरे बदन में सुरसुरी मच गयी. मुझे वैसे ही बहोत कस के ‘लगी थी. सुबह से पांच छ: ग्लास ‘शरबत • पी के और फिर सुबह से की नहीं थी ( मुझे याद आया की कल रात मेरी ननद ने छेड़ा था की भाभी आज निपट लीजिये, कल होली के दिन टायलेट में मैं सुबह से ही ताला लग दूंगी, और मेरे बिना पूछे बोला की अरे यही तो हमारे गांव की होली की, खास कर नयी बह के आने पे होने वाली होली की स्पेशलिटी है. जेठानी और सास दोनो ने आंख तर कर उसे मना किया और वो चुप हो गयी.) 

मेरे उठने की कोशिश को दोनो जेठानीयों ने बेकार कर दिया और बोली हे।आ रही है तो कर लो ना इतनी मस्त ननद है होली का मौका जरा पिचकारी से रंग की धार तो बरसा दो छोटी प्यारी ननद के उपर. मेरी जेठानी ने कहा और वो बेचारी तेरी चूत की। इतनी सेवा कर रही तू भी तो देख जरा उस की चूत ने क्या क्या मेवा खाया है. मैने गप्प से उसकी चूत में मोटी उंगलीं घुसेड दी. चूत उसकी लसालस हो रही थी. मेरी दूसरी उंगली भी अंदर हो गयी. मैने दोनों उंगलियां उसकी चूत से निकाल के मुंह में डाल ली..वाह क्या गाढी मक्खन मलायी थी. एक पल के लिये मेरे मन में ख्याल आया की मेरी ननद की चूत में किसका लंड अभी गया था, लेकिन सर झटक के मैं मलायी का स्वाद लेने लगी. वाह क्या स्वाद था.
Reply
05-21-2019, 11:21 AM,
#23
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
मैं सब कुछ भूल चुकी थी की तब तक मेरी शरारती जेठानियों ने मेरे सुरुसुराते छेद पे छेड दिया और बिना रुके मेरी धार सीधे छोटी ननद के मुंह में, दो जेठानीयों ने इतनी कस के उसका सर पकड़ रखा था की वो बिचारी हिल भी नहीं सकती थी, और एक ने मुझे दबोच रखा था. थोडी देर तो मैने बी हटने की कोशिह की लेकिन मुझे याद आया की अभी थोड़ी देर पहले ही, मेरी जेठानी पडोस की उस ननद को और वो तो इससे भी कच्ची थी.

“ अरे होली में जब तक भाभी ने पटक के ननद को अपना खास अस्ल खारा सरबत नहीं पिलाया तो क्या होली हुयी.” एक जेठानी बोली.

दूसरी बोली, “ तू अपनी नयी भाभी की चूत चाट और उस का सरबत पी और मैं तेर्स कच्ची चूत चाट के मस्त करती हूं. मैं मान गयी अपने ननद को वो वास्तव में उसकी मुंह में धार के बावजूद वो चाट रही थी. इतना अच्छा लग रहा था की...मैने उसका सर कस के पकड़ लिया और कस कस के अपनी बुर उसके मुंह पे रगडने लगी. मेरी धार धीरे रुक गयी और मैं झड़ने के कगार पे ही थी की मेरि एक जेठानी ने मुझे खींच के उठा दिया. लेकिन मौके का फायदा उठा के मेरी ननद निकल भागी और दोनो जेठानियां उसके पीछे.

मैं अकेले रह गयी थी. थोडी देर मैं सुस्ता रही थी की उयीइइइइ...की चीख आयी ...उस तरफ से जिधर मेरे भाई का कमरा था. मैं उधर बढ के गयी... मैं देख के दंग रह गयी. उस की हाफ पैंट, घुटने तक नीचे सरकी, और उसके चूतड के बीच में ‘वो' उनका मोटा लाल गुस्साया सुपाडा पूरी तरह उसकी गांड में पैबस्त...वो बेचारा अपने चूतड पटक रहा था लेकिन मैं अपने एक्स्पिरियेस से अच्छी तरह समझ गयी थी की अगर एक बार सुपाडा घुस गया तो ...ये बेचारा लाख कोशिश कर ले, ये मुसल बाहर नहीं निकलने वाला, उसकी चीख अब गों गों की आवाज में बदल गयी थी. 

उसके मुंह की ओर मेरा ध्यान गया तो...ननदोयी ने अपना लंड उसके मुंह में ठेल रखा था. लंबाई में भले वो ‘मेरे उनसे उन्नीस हो लेकिन मुटाई में तो उनसे भी कहीं ज्यादा, मेरी मुट्ठी में भी मुश्किल से समा पाता. मेरी नजर । सरक कर मेरे भाई के शिश्न पर पड़ी. बहोत प्यारा, सुंदर सा गोरा, लंबाई मोटाइ में तो वो मेरे उनके और ननदोयी के लंड के आगे कहीं नहीं टिकता, लेकिन इतना छोटा भी नहीं, कम से कम ६ इंच का तो होगा ही, छोटे केले की तरह और एक्दम खडा. गांड में मोटा लंड होने का उसे भी मजा मिल रहा था ये पता इसी से चल रहा था. 
Reply
05-21-2019, 11:21 AM,
#24
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
वो उसके केले को मुठिया रहे थे और उसका लीची ऐसा गुलाबी सुपाडा खुला हुआ...बहोत प्यारा लग रहा था, बस मन कर रहा था की गप से मुंह में ले लें. कस कस कर चूसूं. मेरे मुंह में फिर से वो स्वाद आ गया जो मैरी छोटी ननद के बुर में से उंगलिया निकाल के चाटते समय मेरे मुंह में आया था. अगर वो मिल जात तोसव मैं बिना चूसे उसे ना छोडती, मैं उस समय इतनी चुदासी हो रही थी की बस...
* पी साले पी...अगर मुंह से नहीं पियेगा तो तेरी गांड से डाल के ये बोतल खाली करायेंगें.


ननदोयी ने दारू की बोतल सीधे उसके मुंह में लगा के उडेल दी. वो घुटुर घुटुर कर के पी रहा था. कडी महक से लग रहा था की ये देसी दारू की बोतल है. उसका मुंह तो बोतल से बंद था ही, उन्होने एक दो और धक्के कस के मारे. बोतल हटा के ननदोयी ने एक बार फिर से उसके गोरे गोरे कमसिन गाल सहलाते हुये, फिर अपना तन्नाया लंड उसके मुंह में घुसेड दिया. उन्होने’ आंख से ननदोयी जी को इशारा किया, मैं समझ गयी क्या होने वाला है. वही हुआ.

ननदोयी ने कस के उसका सर पकड के मोटा लंड पूरी ताकत से अंदर पेल के उसका मुंह अच्छी तरह बंद कर दिया और मजबूती से उसके कंधे को पकड़ लिया. उधर ‘उन्होने भी उसका शिश्न छोड के दोनो हाथो से कमर पकड के वो करारा धक्का लगाया, दर्द के मारे वो गोंगों करता रहा, लेकिन बिना रुके एक के बाद एक वो कस कस के पेलते रहे. उसके चेहरे का दर्द, आंखों में बेचारे के आंस तैर रहे थे. लेकिन मैं जानती थी की। ऐसे समय रहम दिखाना ठीक नहीं और उन्होने भी आल्मोस्ट पूरा लौंडा उसकी कसी गांड में ठूस दिया. वो छटपटाता रहा गांड पटकता रहा, गों गों करता रहा लेकिन बेरहमी से वो ठेलते रहे. मोटा लंड मुंह में होने से उसके गाल भी पूरे फूले, आंखे निकली पड रही थीं.

* बोल साले, मादर चोद, तेरी बहन की मां का भोसंडा मारू, बोल मजा रहा है गांड मराने


में.” उसके चूतड पे दुहथड जमाते हुए वो बोले. ननदोयी ने एक पल के लिये अपना लंड बाहर निकाल लिया और वो भी हंस के बोले,
* आइडिया अच्छा है, तेरी सास बडी मस्त माल है, क्या चूंचियां हैं उसकी. पूछ इस साले से चुदावायेगी वो क्या साइज है उस छिनाल की चूचीयों की.” ।
“ बोल साले क्या साइज है उस की चूचीयों की...माल तो बिंदास है.” उस के बाल खींचते हुए उन्होने उस के गाल पे एक आंसू चाट लिया और कच कचा के गाल काट लिये.

* ३८डी डी...” वो बोला.

“ अरे भोंसडी के क्या...३८ डी डी साफ साफ बोल ...” उस के गाल पे अपने लंड से सटासट मारते ननदोयी बोले.

* सीना छाती.. चूंची.” वो बोला.

* सच में जैसे तेरी कसी कसी गांड मारने में मजा आरहा वैसे उस की भी बडी बडी चूचीया पकड के मस्त चूतडों के बीच...क्या गांड है बहोत मजा आयेगा.” ये बोले उन्होने बचा खुचा लंड भी टेल दिया. मेरे छोटे भाई की चीख निकल गयी.
Reply
05-21-2019, 11:22 AM,
#25
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
मैं सोच रही थी की तो क्या मेरी मां के साथ भी ..कैसे कैसे सोचते हैं ये ...वैसे बात सही भी थी की मेरी मां की चूंचियां और चुतड बहोत मस्त थे और हम सब बहनें बहोत कुछ उन पे गयी थीं. वैसे भी बहोत दिन हो गये होंगे , उनकी बुर को लंड खाये हुए.

क्या मस्त गांड मराता है तू यार मजा गया बहोत दिन हो गये ऐसी मस्त गांड मारे हुए. ८ हल्के हल्के गांड मारते हुए वो बोले.

ननदौयी कभी उसे चूम रहे थे कभी उससे अपना सुपाडा चटवा चुसवा रहे थे. उन्होने पूछा क्या हुआ. जो तुझे इस साल्ले की गांड में ये मजा आ रहा है. वो बोले अरे इसकी गांड जैसे कोयी हाथ से लंड को मुठियाते हुए दबाये वैसे लंड को भींच रही. ये साल्ला नेचुरल गांडू है, और एक झटके में सुपाडे तक लंड बाहर कर के सटासट गपागप उसकी गांड मारना शुरु कर दिया. मैने देखा की जब उनका लंड बाहर आता तो उग्न्के मोटे मुसल पे उसके गांड का मसाला...लेकिन मेरी नज़त सरक के उसके लंड पे जा रही थी. सुंदर सा प्यारा, खडा, कभी मन करता था की सीधे मुंह में ले लें, कभी चूत में लेने का...तभी सुनायी पडा वो बोल रहे थे,

* साले, आज के बाद से कभी मना मत करना गांड मराने के लिए, तुझे तो मैं अब पक्का गंडुआ बना दूंगा और कल होली में तेरी सारी बहनों की गांड मारुंगा चूत तो चोदंगा ही. तुझे तेरी कौन छिनाल बहन पसंद है बोल साले. इस गांड मराने के लिये तुझे अपनी साली इनाम में दूंगा.”

मेरा मन हुआ की इनाम में तो वो उनकी छोटी बहन की मस्त कच्ची चूत की सील तो वो सुबह ही खोल चुका है. वो बोला,
* सबसे छोटी वाली लेकिन अभी वो छोटी है...”
अरे उसकी चिंता तू छोड चोद चोद कर इस होली के मौके पे तो मैं उसकी चूत का भोंसडा बना दूंगा और ...अपनी सारी सालियों को रंडी की तरह चोदुंगा चल तू भी क्या याद करेगा. सारी तेरि बहनों को तूझसे चुदवा के तूझे गांडू के साथ नम्बरी बहन चोद भी बना दूंगा.”
Reply
05-21-2019, 11:22 AM,
#26
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
उन लोगो ने तो बोतल पहले ही खाली कर दी थी नन्दोयी उसे भी आधी से ज्यादा देसी बोतल पिला के खाली कर चुके थे. और वो भी नशे में मस्त हो गया था.

* अरे कहां हो....” तब तक जेठानी की आवाज गुंजी. मैं दबे पांव वहां से बरामदे की ओर चली आयी जहां जेठानी के साथ मेरी बडी ननद भी थीं. दूर से होली के हुलियारों की आवाजें हल्की हल्की आ रही थीं. जेठानी के हाथ में वही बोतल थी जो वो और नन्दोयी पी चुके थे और जबरन मेरे भाई को पिला रहे थे.

मैं लाख ना नुकुर करती रही की आज तक मैने कभी दारू नहीं पिया लेकिन वो दोनों कहां मानने वाली थीं, जबरन मेरे मुंह से लगा कर...ननद बोली भाभी होली तो होती है नये नये काम करने के लिये आज से पहले आपने वो खारा सरबत पिया नहीं होगा जो चार पांच ग्लास गटक गयीं. और अभी तो होली की साथ साथ आपके खाने पीने की शुरुआत हुयी है. जो आपने सोचा भी नहीं होगा वो सब...जेठानी उसकी बात काट के बोली अरे तूने पिलाया भी तो है बेचारी अपनी छोटी ननद को...ले गटक मर्दो की अल्मारी से निकाल के हम लाये हैं. फिर तो...थोडी देर में बोतल खाली हो गई. ये मुझे बाद में अहसास हुआ की आधे से ज्यादा ब्प्तल उन दोनों ने मिलाके मुझे पिलाया और बाकी उन दोनों ने. लग रहा था कोयी तेज ...तेजाब एसा गले से जा रहा हो भभक भी तेज थी लेकिन उन दोनो ने मेरी नाक बंद की और उसका असर भी पांच मिनट के अंदर होने लगा. मैं इतनी चुदासी हो रही थी की कोयी भी आके मुझे चोद देता तो मैं मना नहीं करती. ननद अंदर चली गयीं थी.

थोडी देर में होली के हुलियारों की भीड एक दम पास में आ गयी. वो जोर जोर से कबीरा गालियां और फाग गा रहे थे. जेठानी ने मुझे उकसाया और हम दोनों ने जरा सा खिडकी खोल दी, फिर तो तुफान आ गया. गालियों का, रंग का सैलाब फूट पड़ा. नशे में मारी मैं, मैने भी एक बाल्टी रंग उठा के सीधे फेंका. ज्यादातर मेरे गांव के रिश्ते से देवर लगते थे पर फागुन में कहते हईं ना की बुढवा भी देवर लगते हैं इसलिये होली के दिन तो बस एक रिश्ता होता है लंड और चूत का. रंग पडते ही वो बोल उठे

* हे भौजी खोला केवाडी, उठावा साडी तोहरी बुरिया में हम चलाइब गाडी.”

* अरे ये भी बुर में जायेंगे... लौंडे का धक्का खायेंगे” दूसरा बोला.
Reply
05-21-2019, 11:22 AM,
#27
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
मैं मस्त हो उठी. जेठानी ने मुझे एक आईडिया दिया. मैने खिडकी खोल के उन्हें अपना आंचल लहरा के झटका के, रसीले जोबन का दरसन कराके मैने नेवता दिया. । सब झूम झूम के गा रहे थे,


अरे नक बेसर कागा ले भागा,
सैया अभागा ना जागा.
अरे हमरी भौजी का.. उड उड कागा,
बिंदिया पे बैठा, मथवा का सब रस ले भागा,
उड उड कागा, 
नथिया पे बैठा, होंठवा का सब रस ले भागा,
अरे हमरी भौजी का.. उड उड कागा, 
चोलिया पे बैठा, जुबना का सब रस ले भागा, 
उड उड कागा, 
करधन पे बैठा, कमर का सब रस ले भागा, 
अरे हमरी भौजी का.. उड उड कागा, 
साया में बैठा, चूत का सब रस ले भागा,

एक जेठानी से बोला, अरे नईकी भौजी को बाहर भेजा ना होली खेले कओ वरना हम सब अंदर घुस के...जेठानी ने घबडा के कहा अरे भेजती हूं 

अंदर मत आना. मैं भी बोली,


* अरे आती हूँ देखती हूं कितनी लम्बी मोटी तुम लोगों की पिचकारी है और कितना रंग है। उसमें या सब कुछ अपनी बहनों की बाल्टी में खाली कर के आये हो.”

अब तो वो और बेचैन हो गये. जेठानी ने खिडकी उठेगा दिया. उधर से छोटी ननद मेरी आ गयी. अब हम लोगों का प्लान कामयाब हो गया. हम दोनों ने पकड के उसकी साडी चोली सब उतार दी और मेरी साडी चोली उसे पहना दी ( ब्रा ना तो उसने पहनी थी ना मैने वो सुबह की होली में उतर गयी. उसके कपडे मैने पहन लिये और दरवाजा थोडा सा खोल के धक्के दे के उसे हुलियारों के हवाले कर दिया.

सुबह से रंग पेंट वार्निश इतना पुत चुका था की चेहरा तो पहचाना जा नहीं रहा था. हां साड़ी और आंचल की झलक और चोली । का दर्सन मैने उन सब को इसी लिये करा दिया था की जरा भी शक ना रहे. बेचारी ननद...पल भर में ही वो रंग से सराबोर हो गयी. उसकी साडी ब्लाउज सब देह से चिपके, जोबन का मस्त किशोर उभार साफ साफ झलक रहा था यहां तक की खडे निपल भी. नीचे भी पतली साडी जांघो से चिपकी, गोरी गुदाज साफ साफ दिख रही थी, फिर तो किसी ने चोली के अंदर हाथ डाल के जोबन पे रंग लगाना मसलना शुरु किया तो किसी ने जांघ के बीच, जेठानी ने ये नजारा देख के जोर से बोला , ले लो बिन्नो आज होली का मजा अपने भाइयों के साथ.
Reply
05-21-2019, 11:22 AM,
#28
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
मैं जेठानी के साथ बैठी देख रही थी अपनी छोटी ननद की हालत जो. लेकिन मेरा मन कर रहा था की काश मैं ही चली जाती उसकी जगह. इतने सारे मरद कम से कम,सुबह से इतनी चुदवासी लग रही थी ...सोचा था गांव में बहोत खुल के होली होती है और नयी बहू को तो सारे सारे मर्द कस कस के रगड़ते हैं लेकिन,यहां तो एक भी लंड ...इस समय कोयी भी मिल जाता तो चुदवाने को कौन कहे मैं ही उसे पटक के चोद देती. दारू के चक्कर में जो थोडी बहोत झिझक थी वो भी खतम हो गयी थी. 

तब तक एक किशोर,...चेहरा रंग से अच्छी तरह पुता ...और साथ में मेरी बड़ी ननद. वो हंस के मुझसे बोलीं,

* हे ये तेरा छोटा देवर है. जरा शर्मीला है लेकिन कस के रंग लगाना.” फिर क्या था.

" अरे शर्म क्या मैं इसका सब कुछ छुडा टुंगी बस देखते रहिये और मैने उसे कस के पकड लिया. वो बेचारा कु कू करता रहा लेकिन मेरी ननद और जेठानी इतने जोर जोर से मुझे ललकार रही थीं की मुझे कुछ सुनाइ नहीं पड़ रहा था. उसके चेहरे पे मैने कस के रंग लगाया, 
मुलायम गाल रगडे.

” हे भाभी रंग देवर के साथ खेल रहीं हैं या उसके कपड़ों के साथ अरे देवर भाभई की होली है कस के ...” जेठानी ने चढाया, अरे फाड दे कपडे इस के पहले कपडे फाड फिर इस की गांड” फिर क्या था मैने पहले तो कुर्ता खींच के फाड़ दिया. जेठानी ने उसके दोनो हाथ पकडे तो मैने पाजामे का नाडा भी खोल दिया अब वो सिर्फ चडडी में.

ननद ने भी। उसके साथ मिल के मेरी साडी खींछ दी और ब्लाउज भी फाड़ दिया. अब एक दम फ्री फार आल हो गया था. चडडी उसकी तनी हुयी थी. एक झटके में मैने वो भी नीचे खींच दिया और उसका ६ इंच का तन्नाया लंड बाहर. शर्मा के उसने उसे छिपाने की कोशिस की लेकिन तब तक उसे गिरा के मैं चड़ चुकी थी और दोनो हाथों में कालिख लगा के उसके गोरे लंड को कस कस के मुठिया रही थी. तब तक मेरी ननद ने मेरे भी वही हालत कर दी और कहा भाभी अगर हिम्मत है तो इसके लंड को अंदर ले के होली खेलीये. मैं तो चुदवासी थी थोडी देर चूत मैने उसके लंड के उपर रगदी और एक झटके में अंदर...
Reply
05-21-2019, 11:22 AM,
#29
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
साल्ले ले ये मेरी चूची, रगड, पकड और कस के चोद अगर अपनी मां का बच्चा है. दिखा दे की मर्द है. ले ले चोद और अगर किसी रंडी छिनाल की औलाद है तो...” मैने बोला और हचक हचक के चोदना शुरु कर दिया. इतनी देर से मेरी प्यासी चूत को लंड मिला था.

वो कुछ बोलना चाहता था लेकिन मेरी जेठानी ने उसका मुंह रंग लगाने के साथ साथ बंद कर रखा था. थोड़ी देर में अपने आप वो भी चूतड उछालने लगा और फिर मैने भी अपनी चूत सिकोड के , चूचीया उसके सीने पे रगड़ रगड़ के चोदना शुरु कर दिया. मेरे बदन का सब रंग उसकी देह में लग रहा था.

ननद मेरी चूचियों में रंग लगती और वो मैं उसके सीने पे पोत देती. थोडी देर तक तो वो नीचे रहा लेकिन फिर मुझे नीचे कर खुद उपर चढ के चोदने लगा. नशे में चूर मुझे कुछ नहीं पता चल रहा बस मजा बहोत आ रहा था. कल रात से ही जो मैं झड नही पायी थी, बहोत चुदवासी हो रही थी. वो तो चोद ही रहा था साथ में ननद भी कभी मेरे निपल पे कभी क्लिट पे रंग लगाने के बहाने फ्लिक कर देतीं.

तभी मैने देखा ननदोयी जी...उन्होने उंगली के इशारे से मुझे चुप रहने को कहा और कपड़े उतार के अपना खूब मोटा कडा लंड ...मैं समझ गयी और मेरे पैर जो उसकी पीठ पे थे पूरी ताकत से मैने कैची की तरह कस के बांध लिये. वो बेचारा तिल्मिलाता रहा लेक्न जब तक वो सम्झे उसकी गांड चंच्यार कर उन्होने मोटा खूब लाल सुपाडा उसके गांड के छेद पे लगा दिया. और कम्र पकड के जो करारा धक्का मारा...एक बार में ही पूरा सुपाडा अंदर पैबस्त हो गया. बेचारा चीख भी नहीं पाया क्यों की उसके मुंह में मैने जान बूझ के अपनी मोटी चूची पेल रखी थी.

* हां ननदोयी जी मार लो साले की गांड खूब कस के पेल दो पूरा लंड अंदर भले ही फट जाय साल्ले की. मोची से सिलवा लेगा ( मैं सोच रही थी मेरा देवर है तो नन्दोयी जी का तो साला ही हुआ). छोडना मत.” साथ में मैं कस के उसकी पीठ पकडे हुए थी. तिल तिल कर उनका पूरा लंड समा गया. एक बार जब लंड अंदर घुस तो फिर तो वो लाख । कसमसाता रहा, छटपटाता रहा, वो सटासट सटासट गपागप उसकी गांड मारते रहे.
Reply

05-21-2019, 11:22 AM,
#30
RE: Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में
एक बात और जितनी जोर से उसकी गांड मारी जा रही थी उतना ही उसके लंड की सख्ती और चुदाई का जोश बढ़ गया था. हम दोनों के बीच वो अच्छी तरह सैंड्विच बन गया था. लंड उसका भले ही मेरे उनके या ननदोयी की तरह लंबा मोटा ना हो पर देर तक चोदने और ताकत में कम नहीं था. जब लंड उसकी गांड में घुसता तो उसी तेजी से वो मेरी चूत में पेलता और जब वो बाहर निकालते तो साथ में वो भी...थोडी देर में मेरी देह कांपने लगी. मैं झडने के कगार पे थी और वो भी ..जिस तरह उसका लंड मेरी चूत में हो रहा था...

* ओह्ह ओह्ह हां हाआआआं बस ओहह ..झड्ड्ड रही हूँउउउं... कस कस के मैं चूतड उचका रही थी और उसकी भी आंखे बंद हुई जारही थीं तब तक ननद ने एक बाल्टी पानी हम दोनों के चेहरे पे कस के फेंका और हम दोनों के चेहरे का रंग भी कुछ धुल गया और नशा भी हल्का हो गया.

“ अरे ये ये ...तो मेरा भाई है...” मैने पहचाना लेकिन तब तक हम दोनों झड़ रहे थे और मैं चाह के भी उस को हटा नही पा रही थी. सच पूछिये तो मैं टाना भी नहीं चाह रही थी मेरी रात भर की प्यासी चूत में वीर्य की बारिश हो रही थी. और उपर से ननदोयी अभी भी। कस के उसकी गांड मार रहे थे. हम लोगों के झड़ने क थोडी देर बाद जब झड कर हटे तब वो मुझ से अलग हो पाया.

* क्यों भाभी मेरे भैया से तो रोज चुदवाती थीं कैसा लगा अपने भैया से चुदवाना. चलिये कोयी बात नही बुरा ना मानो होली है अब जरा मेरे सैंया से भी तो चुदवा के देख लीजिये.” ननद ने छेडा.

• चल देख लेंगी उनको भी..." रस भरी निगाहों से ननदोई को देखते हुए मैं बोली. तब तक मेरी छोटी ननद भी आ गई थी. वो और जेठानी जी उसे लेके अंदर चली गयीं और मैं बडी ननद और ननदोइ जी बचे. कसरती देह, लंबा तगडा शरीर और सबसे बढ के लंबा और खूब मोटा लंड, जो अभी भी हल्का हल्का तन्नाया था. तब तक एक और ...ननद ने बताया की ये उनके जीजा लगते हैं इसलिये वो भी मेरे ननदोयी लगेंगें. हंस के मैने चिढाया,


* अरे ननद एक और ननदोयी दो...बडी ना इनसाफी है.”

“ अरे भाभी, आप हैं ना मुकाबला करने के लिये मेरी ओर से...” वो बोली.
* आज तो होली हम लोग अपनी सलहज से खेलने आये हैं.” दोनो एक साथ बोले.

मैने रंग से जवाब दिया, पास रखी रंग खी बाल्टी उठा के सीधे दोनों पर एक साथ और दोनो नन्दोयी रंग से सराबोर हो गये. दूसरी बाल्टी का निशाना मैने सीधे उनके खूटे पे ...पर तब तक वो दोनो भी सम्हल गये तेह. एक ने मुझे पीछे से पकड़ा और दूसरे ने पहले गालों पे फिर मेरी लपेटी देह से चिपकी साड़ी के उपर से ही मेरे जोबन पे रंग लगाना शुरु कर दिया.

“अरे एक साथ दोनो लोग डालियेगा क्या ...” मैने हंस के पूछा.

* मन मन भावे...अरे भाभी मन की बात जुबान पे आ गयी. साफ साफ क्यों नहीं कहती की एक साथ आगे पीछे दोनो ओर का मजा लेना चाहती हैं.” ननद ने हंस के चिढाया.
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up MmsBee कोई तो रोक लो desiaks 263 93,767 8 hours ago
Last Post: Vish123
Lightbulb Thriller Sex Kahani - मिस्टर चैलेंज desiaks 138 4,342 Yesterday, 01:31 PM
Last Post: desiaks
Star Hindi Antarvasna - कलंकिनी /राजहंस desiaks 133 11,745 09-17-2020, 01:12 PM
Last Post: desiaks
  RajSharma Stories आई लव यू desiaks 79 10,064 09-17-2020, 12:44 PM
Last Post: desiaks
Lightbulb MmsBee रंगीली बहनों की चुदाई का मज़ा desiaks 19 6,340 09-17-2020, 12:30 PM
Last Post: desiaks
Lightbulb Incest Kahani मेराअतृप्त कामुक यौवन desiaks 15 4,927 09-17-2020, 12:26 PM
Last Post: desiaks
  Bollywood Sex टुनाइट बॉलीुवुड गर्लफ्रेंड्स desiaks 10 2,992 09-17-2020, 12:23 PM
Last Post: desiaks
Star DesiMasalaBoard साहस रोमांच और उत्तेजना के वो दिन desiaks 89 28,843 09-13-2020, 12:29 PM
Last Post: desiaks
  पारिवारिक चुदाई की कहानी Sonaligupta678 24 250,537 09-13-2020, 12:12 PM
Last Post: Sonaligupta678
Thumbs Up Kamukta kahani अनौखा जाल desiaks 49 18,592 09-12-2020, 01:08 PM
Last Post: desiaks



Users browsing this thread: 2 Guest(s)