Maa ki chudai मॉं की मस्ती
11-24-2017, 02:03 PM,
#51
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
इधर मनु उनकी बातें तो सुन ही रहा था साथ ही साथ उनकी मूवी भी बनाए जा रहा था,अब उसका लंड दुबारा से कड़ा हो चुका था,पर अब तक वो 3 बार झाड़ चुका था,इसलिए कोई जल्दी नही थी,फिर उसको ये तो पता ही था कि ये रास लीला आज सारी रात चलनी है,और आज की रात उसके पास अपना माल निकालने के कई मौके आएँगे,इसलिए वो सिर्फ़ मूवी शूट करने पर ही ध्यान दे रहा था.

अब जब रमण के लंड का सारा पानी आरती की चूत मे गिर गया तो,वो आरती के उपर से हट गया,उसका लंड अब थोड़ा सिकुड के आरती की चूत से बाहर आ गया,वो दोनो के मिले जुले रस से बुरी तरह से भीगा हुआ था.अब दोनो जने बिस्तेर पर साथ-2 लेट कर लंबी-2 साँसे लेने लगे.

थोड़ी देर बाद जब दोनो की साँसें कुछ ठीक हुई तो रमण ने फिर से आरती के मम्मों को पकड़ लिया,आरती ने कहा कि क्या तुम्हारा मन अभी भरा नही.

रमण-अर्रे जिसके पास आपके जैसी हसीना हो उसका कभी मन भर ही नही सकता,मेरा बस चले तो मैं हमेशा ही आपकी चूत मारता ही रहूं,और कभी अपना लंड इस चूत मे से निकालु ही नही.

आरती-अच्छा जी,ऐसा है क्या,मैं तुम्हे इतनी पसंद हूँ क्या?

रमण-और क्या आप तो मुझे शुरू से ही बहुत पसंद हो,और मैं शुरू से ही आपको अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता था.

आरती-ये बात तो पहले मुझे मनु ने भी कही थी,कि तुम मुझसे दोस्ती करना चाहते हो.तो क्या ये सब बाते तुम मनु से भी कर लेते हो,और अब जो हमारे बीच हुआ है ,ये भी क्या तुम मनु को बताओगे.

रमण-अर्रे भाभी जी

आरती-अब तुम मुझे भाभी मत बोलो

रमण-ठीक है मेरी रानी ,सच तो ये है कि इन सब बातों मे मनु मेरा राज़दार है,और आज जो मौका हम को मिला है उसमे भी मनु ने हमारा साथ दिया है,और अगर आगे भी हम को सबसे ये सब छुपा कर रखना है तो उसको तो शामिल करना ही पड़ेगा.

ये सब सुन कर आरती एक बार तो सन्न रह गयी.तब रमण ने कहा कि मेरी जान तुम क्या सोच रही हो?

आरती कुछ देर तो चुप रही,फिर बोली तो इसका मतलब है कि मनु को सब बातों का पता है,अब मैं उस-से आँखें कैसे मिला पाउन्गि,आख़िर वो मेरा बेटा है.

रमण-इसमे कुछ भी दिक्कत नही है,वो तुम्हारा बेटा है तो क्या हुआ,है तो वो भी एक आदमी ही और जैसे तुम्हे देख कर मेरा दिल धड़कता है ऐसे ही उसका भी धड़कता है,तो अगर मैं तुमसे मस्ती कर सकता हूँ तो फिर उस-से क्या दिक्कत है.

आरती बहुत देर तक चुप ही रही,अब वो क्या बोले वो ये ही सोच रही थी,उसकी ज़ुबान उसके तालू से चिपक गयी थी,ये सुन कर कि मनु को पता है कि वो इस समय रमण से चुदवा रही है.

रमण समझ रहा था कि इस समय आरती के दिल मे क्या चल रहा है और वो कह रहा था कि आरती भी ये मान ले कि मनु से उसको कोई प्राब्लम नही है,जिस-से कि वो लोग आगे बेख़टके घर मे चुदाई कर सकें,पर इतनी जल्दी से आरती का ये स्वीकार करना मुश्किल था.

रमण ने आरती का ध्यान वहाँ से हटाने के लिए अब फिर से आरती के जिस्म से खेलना शुरू कर दिया था,पर आरती बहुत ज़्यादा साथ नही दे रही थी

तब रमण ने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया,और फिर उनको चूसने लगा,जब वो इतनी कोशिस कर रहा था,तो कुछ तो असर आना ही था,और अब आरती को फिर से धीरे-2 मस्ती चढ़ने लगी थी और वो भी अब आहें भरने लगी थी और सिसकियाँ लेने लगी थी,अब रमण को समझ आ गया कि आरती अब फिर से मूड मे आ रही है तो वो उसकी चुचियों को और तेज़ी से चूसने लगा था,फिर उसने अपनी दो उंगलियाँ आरती की चूत मे डाल दी,आरती की चूत अभी भी रमण और उसके रस के कॉकटेल से भरी हुई थी और कुछ रस बाहर भी छलक रहा था,जब रमण ने अपनी उंगली उसकी चूत मे डाली तो आरती के मूह से एक ज़ोर की आह निकली और उसकी चूत मे से रस और बाहर को गिर गया.
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11-24-2017, 02:03 PM,
#52
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
फिर रमण ने अपनी उंगलियों को थोड़ा सा उसकी चूत मे घुमाया और फिर निकाल कर आरती के मूह मे ले जा कर डाल दी,आरती को एक बार तो वो कॉकटेल का स्वाद अज्जीब सा लगा और वो बोली कि ये क्या कर रहे हो.

रमण बोला कि जानेमान ये तो तुम्हारी चूत और मेरे लंड के प्रेमरस का कॉकटेल,(यानी कि कॉक का टेल कॉकटेल)इसको चाटो इसका स्वाद अमृत जैसा लगेगा,ये सुन कर आरती ने उसकी उंगलियो को मूह मे ले ही लिया और उसके बाद उसको भी उसमे स्वाद आने लगा और वो उसको चूसने लगी,अब आरती पूरी मस्ती मे आ गयी थी,फिर रमण ने दुबारा से आरती की चूत मे उंगली डाली और इस बार अपनी उंगली पर पहले से बहुत ज़्यादा रस लगा कर उसके मूह मे डाला इस बार आरती ने खुद उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगलियाँ चूसने लगी,जब वो चपड-2 करके रमण की उंगलियाँ चूस रही थी तो रमण ने मनु को इशारा किया कि वो भी बाहर आ जाए,मनु उसका इशारा समझ कर बाहर रमण के पास आ गया,आरती तो उस टाइम रमण की उंगलियो से कॉकटेल ही चूसे जा रही थी,तब रमण ने मनु को उसकी एक चुचि को दबाने का इशारा किया.

अब सीन ये था कि रमण एक हाथ से आरती की चुचि दबा रहा था और उसका दूसरा हाथ आरती के मूह मे था,और मनु अपने दोनो हाथों से अपनी ही मा की चुचि को दबा रहा था,जब आरती को ये समझ मे आया कि अब कोई और भी उसकी चुचि को दबा रहा है तो उसने आँखें खोल कर और पलट कर देखा कि ये तो उसका खुद का बेटा मनु ही है,ये देखते ही उसका शरीर एकदम से ठंडा पड़ गया और उसने सभी तरह की हरकतें बंद कर दी.

रमण ने जब ये देखा तो वो बोला कि जानेमन क्या हुआ?

आरती पहले तो कुछ भी नही बोली,और चुप चाप पड़ी रही,फिर बोली कि मनु तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

रमण-अर्रे जानेमन अब इस-से क्या शरमाना इसको तो सब पता ही है,और अगर हम इसको अपने साथ नही मिलाएँगे तो फिर हम भी मस्ती नही कर पाएँगे.

आरती-पर मैं इसके साथ ये सब नही कर सकती.आख़िर ये मेरा बेटा है.

रमण-तो क्या हुआ,अगर ये तुम्हारा बेटा है तो ,है तो ये भी एक मर्द ही ना,और देखो ये तुम से कितना प्यार करता है,जब इसने खुद ही तुमको मेरे से चुदवाने का मौका दिया है तो फिर इसका भी यो कुछ हक़ बनता है,फिर अगर ये हमारे साथ रहेगा तो घर मे ही तुम्हे दो-2 लंड का स्वाद हमेशा मिलता रहेगा,फिर ये किसी को बताएगा भी नही,और हम मिल कर मस्ती कर सकेंगे.

आरती-पर मेरा दिल नही मानता,कि मैं अपने बेटे के साथ ये सब करूँ.

रमण-तुम समझ क्यों नही रही,तुम एक बार को ये भूल जाओ कि ये तुम्हारा बेटा है,फिर इसके लंड पर नज़र डालो,ये कह कर रमण ने मनु का नंगा लंड निकाल कर आरती के सामने कर दिया,अब लंड महाराज तो जोश मे थे ही और जब उनको अपनी मा की चूत मरने का मौका मिलने वाला था तो वो और भी जोश मे आ गये,तो जैसे ही रमण ने उसको आगे किया और आरती का एक हाथ पकड़ के उसके हाथ को मनु के लंड पर रखा तो वो और भी ज़्यादा फूल गये,अब जब आरती ने अपने बेटे का इतना मोटा लंड देखा तो एक बार तो उसकी आह ही निकल गयी,पर फिर भी उसने कुछ नही बोला,तो रमण बोला जब इतना मोटा लंड घर मे ही मौजूद रहेगा तो तुम जब चाहे इसको अपनी चूत मे ले सकती हो,और किसी को पता भी नही चलेगा.

तब आरती ने अपने दिल मे सोचा कि अब जो होना था वो तो हो ही चुका है,और अब तो मनु ने भी मुझको रमण से चुदवाते हुए देख ही लिया है तो अब छुपाने को तो कुछ बचा ही नही है,फिर अब उसको भी ये मान ही लेना चाहिए कि वो खुद भी तो अब अपने बेटे के इतने मोटे लंड को देख कर अब उस-से चुदवाना ही चाहती है
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11-24-2017, 02:03 PM,
#53
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
आरती ने अब अपने दिल को समझा लिया कि अगर उसको अपनी जवानी के मज़े लेने हैं और घर मे मौज करनी है तो फिर,मनु को तो साथ रखना ही पड़ेगा और वो तो तभी साथ देगा जब उसको कुछ मिलेगा,और वो जो चाहता है वो आरती ही उसको दे सकती है,इसलिए ये तो अब खुद उसपेर ही निर्भर है कि वो क्या करे.

ये विचार दिमाग़ मे आते ही आरती ने अपना मन पक्का कर लिया कि अब वो अपनी जवानी का फुल मज़ा लेगी,और उसके लिए अब अपने बेटे का लंड भी अपनी चूत मे ले लेगी,तब उसने अपने हाथ को मनु के लंड पर धीरे-2 आगे-पीछे करना शुरू कर दिया,जब रमण ने ये देखा कि आरती ने अब हालत को समझ लिया है,और अब वो सब कुछ करने को तैयार है तो ,उसने मनु को कहा कि लो यार अब तुम भी इस जवानी के मज़े लो.

मनु का लंड हालाँकि आरती के हाथ मे था और वो अपनी मा के नरम मुलायम हाथ के स्पर्श से और ज़्यादा उत्तेजना महसूस कर रहा था,पर मन के किसी कोने मे अभी भी थोड़ी सी झिझक मा -बेटे वाली बाकी थी,इसलिए वो इतना खुल कर आरती के साथ वो सब नही कर पा रहा था.

ये बात रमण भी समझता था कि अभी पहली ही बार मे दोनो ही मा-बेटे मे कुछ झीजक तो रहेगी ही,पर जब एक बार बेटे का लंड मा की बुर की सैर कर लेगा तो सारी शरम हया ख़तम हो जाएगी,और फिर खुल कर वासना का खेल होगा.

रमण के लंड मे अब तनाव बढ़ता जा रहा था,और अब वो फिर से आरती की चुदाई करने की तैयारी कर रहा था,अब आरती भी धीरे-2 सब कुछ समझ कर रंग मे आने लगी थी और अब उसका हाथ लगातार ही मनु के लंड पर आगे-पीछे हो रहा था,और उसकी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी.

अब मनु को भी अपनी मा के लंड को मसल्ने से और आहें भरने से जोश बढ़ रहा था,और उसने अपनी मा की चुचियो को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया था,तभी उसने झुक कर अपनी मा के मम्मे को चूसना शुरू कर दिया,जैसे ही मनु ने अपना मूह आरती के मम्मे पर रखा आरती को फिर से करेंट सा लगा,क्यूंकी चुदाई एक अलग अहसास है,पर अपने बेटे से ही चुदाई बिल्कुल ही दूसरा अहसास है.

और ये बात रमण को भी समझ आ रही थी कि अब जो आरती ही नही उसका भी जोश इतना बढ़ गया है,वो मा-बेटे के वासना के खेल के कारण है,और इसमे उसी बात का प्रभाव सबसे ज़्यादा है,कि वो ये देख रहा है कि कैसे एक जवान बेटा अपनी ही माँ के मम्मों को चूस रहा है.

अब जो रमण ने आरती की चूत मे उंगलियाँ डाली तो उसको उसमे पहले से कहीं ज़्यादा गर्मी महसूस हुई,उसने इस बार अपने हाथ के साथ-2 आरती का हाथ भी पकड़ कर उसकी ही चूत मे डाल दिया,एक साथ 4-4 उंगलियाँ जैसे ही आरती की चूत मे गयी वो तो एकदम से पानी ही छोड़ने लगी,और झाड़ गयी.


इस बार रमण ने अपना अंडरवेर जो वहीं पड़ा था उठाया और उसको एक तरफ से पकड़ कर आरती की चूत मे घुसा दिया,और उस-से आरती की चूत के रस को काफ़ी सारी मात्रा मे सोख लिया,फिर उसने वो अंडरवेर उसी साइड से आरती की नाक के पास लगाया,तो वो उसकी खुसबू से मदहोश सी हो गयी,तब रमण ने उस हिस्से को आरती के मूह मे डाल दिया,तो आरती उसको बुरी तरह से चूसने लगी,उसको अब कॉकटेल चाटने मे पहले से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था.जब उसमे से रस आना कम हुआ तो रमण ने आरती का वो वाला हाथ जो उसने चूत मे डाला था पकड़ा और उसकी वो उंगलियाँ उसके मूह मे डाल दी,अब तो आरती वासना के नशे मे पागल हो गयी थी,और अनप-शनाप बोलने लगी थी.अब मेरी चूत को फाड़ दो,इसका भोसड़ा बना दो,आज मैं अपने ही बेटे का लंड अपनी चूत मे लूँगी,आजा मेरे बेटे अपनी माँ की चूत मार ले और मादरचोद बन जा.

ये सब सुन कर मनु का जोश तो सातवें आसमान पर ही जा पहुँचा था ,और अब वो फिर से झड़ने को तैयार था,अब आरती भी उसके लंड पर हाथ तेज़ी से चला रही थी,तभी मनु एक बार फिर झाड़ गया,और उसके रस ने आरती के हाथ को भर दिया,जो कि आरती ने जल्दी से अपनी नाक के पास ले जा कर देखा,तो उसको उसमे से बहुत ही मादक खुसबू आई,फिर उसने अपनी जीभ से अपने हाथ को चाटना शुरू कर दिया,उसको उसका स्वाद बहुत ही अच्छा लग रहा था,और वो मनु के सारे रस को अपनी जीभ से चाट -2 कर सॉफ कर गयी

अब मनु का लंड झाड़ कर ढीला हो गया था,और आज की रात मे वो इतनी बार झाड़ गया था कि अब खुद भी कुछ थकान महसूस करने लगा था,तो इस कारण वो झाड़ कर वहीं अपनी मा के पास ही बिस्तर पर गिर गया,और हाँफने लगा.

पर तब तक रमण का लंड तन कर बहुत कड़क हो गया था,और झटके मारने लगा था,अब रमण से सबर नही हो रहा था,और कुछ-2 यही हाल आरती का भी था,तो अब आरती ने रमण के लंड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया.
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11-24-2017, 02:03 PM,
#54
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
रमण समझ गया कि अब इसको फिर चुदाई की तमन्ना हो रही है,और अब वो भी फिर से चुदाई के लिए तैयार था,इसलिए उसने भी तुरंत ही देर ना करके अपने को आरती के शरीर पर चढ़ा लिया और तब आरती ने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर लगा दिया,इस बार जैसे ही रमण ने धक्का मारा तो आवेश की वजह से उसका लंड साइड मे हो गया और लंड चूत मे ना जा कर बाहर ही रह गया,तब आरती ने दुबारा से रमण का लंड पकड़ा और इस बार अपनी चूत को थोड़ा सा खोल कर उसके लंड का सुपाडा उसने अपनी चूत के खुले हुए मूह पर फिट कर दिया और रमण को बोला कि अब धक्का लगाओ.इस बार रमण ने जैसे ही धक्का लगाया उसका लंड आरती की चिकनी चूत की गहराई मे पूरा उतर गया.

जैसे ही रमण के लंड ने आरती की चूत के आख़िर मे जा कर टक्कर मारी वैसे ही उसकी बहुत ज़ोर की सिसकारी निकल गयी,जैसे ही उसने इतनी तेज़ सिसकारी ली वैसे ही मनु ने उठ कर देखा तो उसकी मा रमण के लंड के नीचे दबी हुई,अपनी चूत मरवा रही थी,ये देख कर मनु को फिर से जोश आ गया,और उसने अपने आप को उठा कर अपनी मा की बगल से सटा लिया.

जैसे ही मनु आरती के बदन से सटा तो आरती ने उसकी तरफ देखा तो वो अपनी मा को बहुत ही प्यार और वासना वाली नज़र से चुदाई करते देख रहा था,ये देख कर आरती का जोश और बढ़ गया,और वो और तेज़ी से अपनी कमर उठाने लगी थी,तभी मनु ने अपना हाथ बढ़ा कर अपनी माँ के मम्मों को पकड़ लिया.

जैसे ही मनु का हाथ आरती के मम्मों पर गया,उसका लंड अब फिर से खड़ा होना शुरू होने लग गया,अब मनु ने आरती की एक चुचि को मूह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया,अब तो आरती के मज़े की इंतेहा ही हो गयी,उपर से उसका प्रेमी उसको हुमच-2 के चोद रहा था,और उसका बेटा उसकी चुचि को चूस रहा था,तो आरती के आनंद का तो कहना ही क्या था,और वो मज़े मे पागल हुई जा रही थी,और बहुत सेक्सी-2 आवाज़ें निकाल रही थी.

जब मनु का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया तो उसने आरती की चुचि को अपने मूह से निकाल दिया पर अभी तो रमण ही उसकी मा को चोदे जा रहा था,इसलिए उसका मौका तो अभी आने वाला नही था,पर उसका लंड तो फिर से तन-तना गया था,और अब की बार वो अपना माल बाहर निकाल कर बर्बाद नही करना चाहता था,इसलिए उसने थोड़ा सा बैठ कर अपने लंड को अपनी मा के मूह के पास किया,फिर उसने आपनी माँ आरती का मूह अपने लंड की तरफ घुमाया.

जब आरती ने मनु के लंड को अपने मूह के इतने पास बिल्कुल खड़ी हुई हालत मे देखा तो वो सब कुछ समझ गयी,पर इस-से पहले कभी उसने कोई भी लंड अपने मूह मे ले कर नही चूसा था,इसलिए उसको थोड़ी सी झिझक हो रही थी,पर फिर उसने सोचा कि आज जब उसने इतनी बार लंड के रस को कई तरह से चाटा है तो इसमे भी कोई परेशानी नही होनी चाहिए,फिर उसके अलावा वो अब अपने बेटे के लंड को देख कर मोहित भी हो रही थी,और सोच रही थी कि अब इसका स्वाद ले ही लेना चाहिए,ये सोच कर आरती ने अपना मूह खोला और मनु के लंड को अपने मूह मे ले लिया

आरती ने अब मनु के मोटे लंड को अपने मूह पर लगाया,तो एक बार तो उसको लगा कि उसके होठ ही जल गये,क्यूंकी मनु का लंड था ही इतना गरम,फिर उसने अपना मूह अच्छी तरह से खोला और उसके लंड के सुपाडे को अपने नरम होठों मे दबा लिया,जैसे ही उसने ये किया तो मनु की भी सिसकी निकल गयी,फिर आरती ने धीरे-2 उसको अपने मूह मे ले कर चूसना शुरू किया ,जैसे की वो कोई आइस कॅंडी वाली आइस्क्रीम चूस रही हो,और उसका फ्लेवर धीरे-2 मज़े ले के ले रही हो,फिर उसने मनु के लंड को अपने मूह से निकाल कर बाहर से चाटना शुरू कर दिया.

इधर रमण के धक्कों की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी,और अब जो अपनी मंज़िल के करीब था,पर आरती का ध्यान तो अपने बेटे के मूसल पर ही था,तो उसने कहा जान इधर भी तो कुछ करो,और अपनी कमर को उछालो,या सिर्फ़ इसके लंड को ही चुस्ती रहोगी,इसको तो तुम जब भी चाहो ले सकती हो,ये तो तुम्हे हर टाइम मिलता रहेगा.

आरती ने कहा कि वो तो ठीक है,पर अभी तो सबर नही हो रहा था,चलो पहले तुमसे ही मज़े ले लूँ,फिर इसको आराम से लूँगी,ये कह कर उसने मनु के लंड को छोड़ दिया और उसके हाथों को अपनी चुचियों पर रख दिया,और खुद रमण के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी.
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11-24-2017, 02:03 PM,
#55
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
थोड़ी ही देर मे दोनो अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच गये,तो रमण ने कहा कि जान मे आ रहा हूँ,आरती बोली मैं भी तुम्हारे साथ ही झड़ने वाली हूँ,और ये कह कर दोनो तेज़ी से धक्के लगाने लगे.

मनु को अपनी माँ की चूत मे लग रहे धक्के बहुत ही अच्छे लग रहे थे,और वो ये सोच रहा था कि कुछ टाइम के बाद उसका खुद का लंड भी इसी प्यारी और चिकनी छूट मे गोते लगाएगा,ये सोच-2 कर ही उसका तन बदन और ज़्यादा रोमांचित हो रहा था,और उसका लंड ज़ोर-2 से झटके लेने लगा था.

तभी वो दोनो जने एक साथ आवाज़ करते हुए झड़ने लगे और एक दूसरे से बुरी तरह से चिपक गये,मनु बिचारा वैसे ही अलग हो गया था,जब उन लोगों ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई थी,तो वो साइड से देख कर ही मज़े ले रहा था.वो दोनो जने पसीने मे लत-पथ एक दूसरे से चिपके हुए थे,और आरती की चूत रमण के वीर्य का एक -2 कतरा अपने अंदर समेट कर चूस रही थी,और उसकी चूत को बहुत ठंडक मिल रही थी.

फिर जब आरती की चूत ने रमण के वीर्य की हर बूँद निचोड़ ली तो वो दोनो अलग -2 हो कर लेट गये,और तेज़-2 साँसें लेने लगे.

पर मनु तो सिर्फ़ अपनी मा को ही देखे जा रहा था,आरती पसीने मे भीगी हुई नंगे बदन उसको किसी जादुई हसीना की तरह से अपनी तरफ खींच रही थी,इस टाइम जो आरती की साँसों के साथ-2 उसके मम्मे उपर-नीचे हो रहे थे मनु तो उनको ही देखे जा रहा था,और अपनी मा के हुस्न की तरफ और ज़्यादा आकर्षित हो रहा था,वो सिफ स्कर्ट और सेन्डेक पहने हुए ही बिस्तर पर पड़ी थी,और उसकी चूत से दोनो जनो के रस की कॉकटेल बाहर आ रही थी,मनु तो सिर्फ़ उसको ही निहारे जा रहा था.

जब आरती की नज़र मनु पर पड़ी और उसने देखा कि मनु ऐसे आसक्ति से उसको देखे ही जा रहा है तो उसको भी अपने बेटे पर बहुत प्यार आया,और उसने इशारे से मनु को अपने पास बुलाया और अपने नंगे शरीर से उसको चिपका लिया,जैसे ही आरती ने मनु को अपने शरीर से चिपकाया मनु को मोटा लंड आरती की चूत पर दस्तक देने लगा,पर आरती अभी और चुदाई नही करवा सकती थी,इसलिए उसने मनु के लंड को अपनी चूत की चुम्मि लेने दी,और उसको अपने शरीर से चिपका कर ही लेटी रही.

थोड़ी देर तो मनु आरती से ऐसे ही चिपका रहा,उसको भी अपनी मा के नंगे बदन से चिपक कर असीम आनंद आ रहा था,पर अब उसको अपने शरीर पर पड़े हुए कुछ कपड़े भी भारी लग रहे थे,क्यूंकी वो अपनी मा के मम्मों को अपने शरीर से ही महसूस करना चाहता था,इसलिए उसने थोड़ा सा अपनी मा से अलग हो कर अपने बचे हुए कपड़े भी उतार दिए,और इस तरह से वो बिल्कुल मदरजात नंगा हो गया,और फिर अपनी मा के नंगे बदन से चिपक गया,अब उसको जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन नही किया जा सकता,अब आरती के मोटे-2 बूब्स उसके सीने मे दबे जा रहे थे,और उसको उनकी गर्मी का अहसास हो रहा था,तब तक आरती की साँसें भी संयंत हो गयी थी,और उसको भी अपने बेटे के नंगे शरीर से चिपक के एक अलग ही रोमांच का अनुभव हो रहा था.

अब मनु का लंड आरती की चूत पर पहले से ज़्यादा ठोकर मारने लगा था,और ये आरती को महसूस हो रहा था,पर अभी वो सिर्फ़ मनु से उप्पेरी मज़े ही लेना चाहती थी और फिर कुछ देर के बाद अपनी चूत उस-से मरवाना चाहती थी,वो खुद अब ये कह रही थी कि आज रात को ही मनु उसको चोद कर सारे बंधन तोड़ दे ,जिस-से कि आगे के लिए कोई शर्मो हया ना रहे,और फिर मा-बेटे हमेशा खुल कर घर मे वासना का नंगा खेल खेल सकें.

फिर मनु ने जोश मे अपने होंठ अपनी मा के नरम और नज़ूक गुलाबी होठों पर रख दिए और धीरे-2 उनको चूसने लगा,आरती भी इसमे उसका साथ देने लगी थी,और फिर उसने अपने मा के मूह मे अपनी जीभ डाल दी और अपनी मा की जीभ का स्वाद लेने लगा.

रमण साइड मे लेटा हुआ ये मा बेटे की नंगी मस्ती देख रहा था,और आज पहली बार ऐसे किसी सगे मा बेटे को अपने ही सामने नंगे हो कर आपस मे यौं चिपका देख कर अपने मे बहुत रोमांचित भी हो रहा था,आज तक ये सब सिर्फ़ उसने किस्से कहानियों मे ही पढ़ा था कि ऐसे इंसेस्ट चुदाई भी होती है,पर अपनी आँखों के सामने अपनी कल्पना को साकार होते देख कर तो उसको विश्वास ही नही हो रहा था. 

अब मनु की जीभ अपनी मा की जीभ के साथ खेल रही थी,और उसका लंड अपनी मा की फुद्दि पर ठोकर मार रहा था,अब दोनो जनो का शरीर फिर से तपने लगा था.अब आरती की चूत फिर से गरम हो रही थी,जबकि मनु का लंड तो पहले ही तना हुआ था,आरती को भी अंदर से एक अलग ही अहसास हो रहा था,आज पहली बार ही वो किसी दूसरे मर्द से चुदि थी,और उसके तुरंत बाद ही वो अब अपने ही सगे बेटे का लंड अपनी चूत मे लेने वाली थी,ये सोच-2 कर ही उसको एक रोमांच का अनुभव हो रहा था,कि अब मनु का मोटा लंड उसकी चूत का बॅंड बजाने वाला है.

फिर दोनो मा बेटे थोड़ा सा अलग हुए तो आरती ने मनु के लंड को अपने हाथ मे ले लिया,और उसको आगे-पीछे करने लगी,मनु अब बोला कि मा अब ऐसे मत करो अब इसको छोड़ दो,नही तो ये आपकी चूत मे जाने से पहले ही झाड़ जाएगा.

आरती बोली कि नही अब मैं ऐसा नही होने दूँगी,अब तो मैं तुम्हारे इस मोटे बंबू को अपनी चूत मे ले कर ही रहूंगी.
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11-24-2017, 02:06 PM,
#56
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
रमण मा बेटे की ऐसे खुली और नंगी बातें सुन कर फिर से तैयार हाने लगा था,जब उसने मा बेटे को ऐसे खुल कर चोदा-चोदि की बातें करते हुए सुना तो उसका लंड भी फिर से खड़ा हो गया,और अब वो तनाव मे आ रहा था.अब उसके लंड को भी दुबारा से खुराक की ज़रूरत महसूस होने लगी थी. 

फिर रमण भी थोड़ा सा नज़दीक हो कर दूसरी तरफ से आरती से चिपक गया,अब तो आरती का हाल बयान करना मुश्किल था,एक तरफ से तो मनु उसका खुद का बेटा उस-से चिपका हुआ था,तो दूसरी तरफ से रमण भी उस-से चिपक गया था,और तीनो ही जने नंगे थे,उस समय कमरे का नज़ारा ऐसा था कि खुद काम देव भी देखे तो वहीं रह जाए.

अब आरती ने मनु के लंड को खींचना शुरू कर दिया था,क्यूंकी अब उसकी चूत बहुत गरम हो गयी थी,और उसको ठुकाइ की ज़रूरत महसूस होने लगी थी,और आरती चाहती थी कि अब एक बार मनु भी उसकी चूत का मज़ा ले ही ले.तो उसने मनु को अपने उपर आने का इशारा किया,मनु अपनी मा के इशारे को समझ कर आरती के उपर आ गया.

पर आरती की चूत तो पहले ही कॉकटेल से भरी हुई थी,तो अब मनु ने रमण की अंडरवेर जो नीचे पड़ी थी,वो उठाई और अपनी मा की चूत मे डाल दी,और उस-से अच्छी तरह से अपनी मा की चूत को अच्छी तरह से सॉफ करने लगा,ये करते हुए उसका मूह एक बार अपनी मा की चूत के बिल्कुल नज़दीक आ गया,तो उसकी नाक को अपनी मा की चूत से निकलती हुई मादक महक महसूस हुई,और वो मादक महक ऐसी थी कि उस-से मनु मदहोश हो कर अपने होश खोने लगा और उसको पता ही नही चला कि कब उसकी जीभ अपनी मा की चूत पर चली गयी,जैसे ही मनु की जीभ ने आरती की चूत को छुआ,तो आरती के शरीर मे करेंट दौड़ गया,और उसने अपना सिर थोड़ा सा उपर करके देखा तो उसका बेटा मनु मदहोश हो कर उसकी चूत को चाट रहा था.

रमण ने जब देखा कि मनु अपनी मा की चूत को ऐसे चाट रहा है तो उसको भी जोश आ गया और वो भी अपनी जीभ निकाल कर आरती की गरम चूत को चाटने लगा,अब तो आरती की हालत देखने वाली थी,2-2 जवान लड़के उसकी चूत को अपनी-2 जीभ से चाटने के लिए आपस मे जीभ से लड़ाई कर रहे थे,और उसकी चूत उन दोनो की जीभ के खुरदारे पन से और ज़्यादा प्यासी होती जा रही थी.

अब आरती अपनी कमर को उपर की तरफ उछालने लगी थी,तब रमण जो कि इस काम का पुराना खिलाड़ी था,उसने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया,जैसे ही रमण की जीभ आरती की चूत के अंदर घुसी उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और वो इतना छोड़ा कि उसकी चूत को भर दिया,तब रमण ने मनु को इशारा किया और अपने साथ आरती की चूत का रस चाटने को कहा,मनु को भी अपनी मा के चूत के रस का स्वाद बहुत शानदार लगा और वो सारे का सारा रस पी गये.

अब आरती तो झाड़ गयी थी,पर वो दोनो के लंड बिल्कुल तन-तनाए हुए थे,और वो दोनो ही अब उसकी चुदाई करना चाहते था,पर ये रमण भी जानता था कि वो अब तक आरती को 2 बार ठोक चुका है तो अब मौका मनु को ही मिलना चाहिए,फिर आरती उसकी माँ भी है तो वैसे भी मौका उसका ही बनता है,तो फिर वो दोनो ही आरती की चूत को फिर भी चाट-ते रहे और थोड़ी और चटाई से आरती मे फिर से जोश भर गया,और फिर वो बोली कि ये तुम दोनो क्या अब मेरी चूत को खा ही जाओगे,अब आ कर मेरी चूत मे अपना लंड डाल कर इसको चोदो भी.
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11-24-2017, 02:07 PM,
#57
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
तब रमण ने मनु को इशारा किया कि अब वो जा कर अपनी माँ की फुद्दि मे अपना लंड डाल दे,तो मनु उठा और आरती के उपर आ गया,पर क्यूंकी उसको ज़्यादा चुदाई का अनुभव नही था,तो नीचे से रमण ने उसके लंड को पकड़ कर आरती की चूत के खुले हुए मूह पर लगाया,और उसके सुपाडे को आरती की चूत मे फँसा दिया,फिर उसने मनु को कहा कि अब धक्का लगा दे यार और अपनी मा की चूत मे अपना लंड डाल कर इसको फ़तह कर ले,इसका भोसड़ा बना दे.

जैसे ही रमण ने मनु को इशारा किया और कहा कि डाल दे ,वैसे ही मनु ने अपना लोड्‍ा अपनी माँ की चूत मे बाड़ दिया,और उसका लंड आरती की चूत के गुलाबी छेद के अंदर जा कर गायब हो गया.

रमण देख रहा था कि कैसे मनु का लंड पूरे का पूरा आरती की चूत के गुलाबी छेद मे जाता है,जैसे ही मनु का लंड उसमे जा कर गायब हुआ,रमण का जोश और बढ़ गया,उधर जैसे ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे गया आरती के मूह से बहुत मादक सिसकारी निकली,और वो मदहोश हो गयी,आज उसके खुद के बेटे ने उसकी चूत मे अपने लंड को बाड कर वहाँ पर अपनी मोहर लगा दी थी,इसलिए उसके आनंद का ठिकाना नही था.

अब मनु ने धीरे-2 अपनी कमर चलानी शुरू कर दी थी,और आरती भी उसका साथ दे रही थी,वो दोनो सब कुछ भूल कर मस्त हो कर चुदाई मे मशगूल हो गये थे,और आपस मे धक्के पर धक्का लगा रहे थे.

तब रमण से सबर नही हो रहा था,क्यूंकी वो दोनो माँ बेटे तो आपस मे चुदाई मे लगे हुए थे,पर वो अलग से बैठा था,तो फिर वो उठा और उसने अपने लंड को अपने हाथ से सहलाया ,जैसे ही उसने ये किया उसका लंड और ज़्यादा तन गया,तब वो आगे बढ़ा और उसने अपने दोनो पैर आरती के मूह के पास करे और फिर धीरे-2 अपने आप को और अपने लंड को आरती के नरम मुलायम होठों के उपर रख दिया,जैसे ही आरती को अपने होठ पर कुछ गरम रखा हुआ महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखें खोल कर देखा तो रमण का मोटा लंबा तना हुआ लंड उसके होठों को छू रहा था,और उसका सुपाडा फूल कर लाल हो रहा था,तो आरती ने अपने होठ खोल दिए,आरती ने जैसे ही आपने होठ खोले रमण ने आपना लंड उसके होठों के बीच मे फँसा दिया.

पर उसका लंड इतना मोटा था कि आरती के होंठो मे समा नही पा रहा था,तो फिर आरती ने अपने मूह को पूरा खोल दिया,तब रमण ने आपने लंड को उसके मूह मे घुसा दिया,लंड मूह मे जाते ही आरती उसको भी चूसने लगी,अब तो आरती का हाल ये था कि नीचे से मनु उसकी चूत मार रहा था,और उपर से रमण उसके मूह को चोद रहा था,और आरती इस सब का मज़ा ले रही थी,आज जैसा मज़ा आरती को आ रहा था वैसा उसको जिंदगी मे कभी भी नही मिला था.

आज तो आरती को अपनी पूरी जिंदगी का सबसे खुशी वाला अनुभव हो रहा था,आज जो मज़ा उसको आ रहा था उसकी उसने कभी भी कल्पना तक नही की थी,और इस-से आगे के भी सारे रास्ते खुल जाने वाले थे.

अब मनु ने उपर से अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी थी,और वो झड़ने के बहुत नज़दीक था,नीचे से आरती भी उसका साथ दे रही थी और अब वो भी उसके साथ ही झड़ने की कोशिस कर रही थी,उपर से उसके मूह मे रमण का लंड भी अब झड़ने को तैयार था.

इस तरह से अब तीनी ही जने अपना-2 पानी छोड़ने वाले थे,और फिर सबसे पहले मनु ने अपने लंड का रस अपनी माँ की चूत मे छोड़ दिया,जैसे ही उसके लंड का गरम रस आरती की चूत के अंदर गिरा,वैसे ही मनु के रस की गर्मी से आरती की चूत ने भी अपना रस छोड़ दिया और इस तरह से दोनो माँ-बेटे एक साथ इकट्ठा ही झाड़ गये.

जब उन दोनो ने अपना-2 रस छोड़ दिया तो आरती ने रमण के लंड को चूसना छोड़ दिया,तब रमण ने अपना लंड आरती के मूह से निकाल लिया और अपने हाथ से ही मूठ मारने लगा और फिर उसने अपने लंड का रस आरती के मम्मों पर गिरा दिया और निढाल हो कर वहीं आरती के दूसरी तरफ गिर गया,अब एक तरफ तो मनु था बीच मे आरती जिसकी चूत और मम्मे लंड रस से भीगे हुए थे और दूसरी तरफ रमण था. 

वो तीनो जने चुदाई से इतना थक गये थे कि वहीं पर उसी पोज़ीशन मे सो गये,आज की रात उन तीनो को कभी भी नही भूलने वाली थी.

सुबह सबसे पहले आँख मनु की खुली उसको पेशाब का प्रेशेर बना हुआ था,तो वो जल्दी से उठ कर वॉशरूम मे चला गया,जब वो वहाँ पर हल्का हो रहा था,तो रात की चुदाई उसकी आँखों के सामने घूमने लगी,और पेशाब करते-2 ही उसका लंड फिर से कड़क होने लगा,और कुछ ही सेकेंड मे मनु का लंड तन कर तैयार था,फिर से चुदाई के लिए.

मनु अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर बाहर आया तो उसने देखा कि उसकी मा आरती बिस्तेर पर बिल्कुल नंगी सो रही है और उसके बगल मे ही रमण भी नंगा सो रहा है,अपनी मा को नंगा देख कर अब मनु का लंड फिर से उसकी चूत मे जाने के लिए कुलबुलाने लगा.मनु फिर अपनी मा के नज़दीक आ गया और उसने देखा कि रात की चुदाई के निशान आरती के जिस्म पर ज्यों के त्यों थे,आरती की चूत रात की चुदाई से थोड़ी सी फूल गयी थी,और उसमे लगी हुई कॉकटेल अब सूख गयी थी और ऐसे ही रात को जो रमण ने अपने लंड का पानी उसके मम्मों पर गिराया था वो सूख कर चमक रहा था.

ये देख कर मनु को पूरी तरह से जोश आ गया और वो बिस्तेर पर चाड कर अपनी मा के पास आ गया फिर उसने आरती के दोनो तरफ अपने पाँव किए और अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का मारा,धक्के से लंड अंदर तो चला गया पर मनु क्यूंकी अभी अनाड़ी था तो उसने लंड को ऐसे चूत मे डालने से पहले बिल्कुल भी चिकना नही किया था और आरती की चूत भी सुखी हुई थी तो उसके लंड को खरोंच सी लगी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ,उसके इस तरह से धक्का लगाने से आरती को भी अपनी चूत मे कुछ रगड़ता हुआ महसूस हुआ और उसकी आँख खुल गयी,उसने देखा कि उसका बेटा मनु उस पर चढ़ा हुआ है और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा रहा है,तो वो समझ गयी कि सुबह-2 उसको ऐसे नंगा देख कर उसको फिर से जोश चढ़ गया है और वो उस पर चढ़ गया है.

उपर मनु फिर से धक्का लगा रहा था,तो आरती ने अपनी टाँगे फेला दी जिस-से कि मनु का लंड आराम से उसकी चूत मे चला जाए,उसके ऐसा करते ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे समा गया,तो उसने नज़र उठा कर देखा तो आरती उसको ही देख रही थी और मुस्करा रही थी.

मनु भी अपनी मा को जगा हुआ देख कर मुस्करा दिया,आरती बोली -अरे तुझे बिल्कुल सबर नही है रात भर तो मुझे चोद्ते ही रहे और सुबह-2 आँख खुलते ही फिर शुरू हो गया,मनु ने कहा कि माँ तुम हो ही ऐसी कि तुम्हे ऐसे सोते हुए देख कर मुझे अपने आप पर बिल्कुल कंट्रोल नही हुआ और मैने अपना लंड तुम्हारी चूत मे डाल दिया.

आरती बोली तो इसका मतलब है कि तुम्हारी जब भी इच्छा करेगी तुम ऐसे ही करोगे


मनु बोला कि जब आपके जैसे सुंदरी घर मे ही हो तो किसका दिल नही करेगा.अब आप ऐसे लेटी थी तो मैने डाल दिया.

आरती बोली चलो ठीक है पर अब जल्दी करो सुबह हो गयी है और उठना भी है,तुम लोग रात भर मेरे को ऐसे ही रगड़ते रहे ,मेरा पूरा बदन दुख रहा है,तभी रमण जिसकी नींद उन लोगों की चुदाई से खुल गयी थी बोला कोई बात नही मेरी जान हम दोनो तुम्हारे बदन की जैसे कहोगी अंदर और बाहर से मालिश कर देंगे,हम हैं ही तुम्हारी सेवा के लिए.

आरती-बस-2 रहने दो मैं जानती हूँ तुम लोग मेरी क्या सेवा करोगे,और अब मनु जल्दी करके हट जाओ मुझे उठना भी है,और कामवाली भी आने वाली होगी. और ये जो तुम लोगों ने रात भर यहाँ पर गंदा किया है उसको भी उसके आने से पहले सॉफ करना ज़रूरी है,नही तो बात बिगड़ सकती है.


ये सुन कर मनु ने अपने धक्को की रफ़्तार तेज़ कर दी और नीचे से आरती भी अपनी कमर चलाने लगी,दिन की रोशनी मे माँ बेटे की चुदाई देख कर रमण का लंड भी फिर से तन गया और अब वो भी तैयार था आरती को चोदने के लिए,तभी मनु ने कहा कि माँ मेरा अब निकलने वाला है,तो आरती बोली कि ठीक है मेरा अभी नही आ रहा तुम अपना गिरा दो,ये सुनते ही मनु ने एक दो तेज़ धक्के लगाए और आरती की चूत के अंदर अपना गरम माल गिरा दिया.

इधर रमण ने अब आरती के मम्मे दबाने शुरू कर दिए थे और उसके मम्मे दबाने से आरती का जोश बढ़ रहा था,पर इतने मे मनु ने अपना रस ही गिरा दिया तो वो भी थोड़ी ठंडी हो गयी.

फिर मनु आरती के उपर से हट गया और वॉशरूम मे चला गया,उसके जाते ही रमण आरती के उपर आ गया,ये देख कर आरती बोली क्या तुम उसके हटने का ही इंतेज़ार कर रहे थे,अब तुम दोनो मुझे छोड़ो गे भी या नही.

रमण-बस मेरी जान अब मेरा काम भी करवा दो फिर मैं तुमको छोड़ दूँगा,ये देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए कितना प्यासा हो रहा है,ये कह कर रमण ने आरती के हाथ को अपने लंड पर रख दिया,और जैसे ही आरती का मुलायम हाथ रमण के लंड पर रखा गया वैसे ही उसने झटके मारने शुरू कर दिए.
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11-24-2017, 02:07 PM,
#58
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
तब रमण ने मनु को इशारा किया कि अब वो जा कर अपनी माँ की फुद्दि मे अपना लंड डाल दे,तो मनु उठा और आरती के उपर आ गया,पर क्यूंकी उसको ज़्यादा चुदाई का अनुभव नही था,तो नीचे से रमण ने उसके लंड को पकड़ कर आरती की चूत के खुले हुए मूह पर लगाया,और उसके सुपाडे को आरती की चूत मे फँसा दिया,फिर उसने मनु को कहा कि अब धक्का लगा दे यार और अपनी मा की चूत मे अपना लंड डाल कर इसको फ़तह कर ले,इसका भोसड़ा बना दे.

जैसे ही रमण ने मनु को इशारा किया और कहा कि डाल दे ,वैसे ही मनु ने अपना लोड्‍ा अपनी माँ की चूत मे बाड़ दिया,और उसका लंड आरती की चूत के गुलाबी छेद के अंदर जा कर गायब हो गया.

रमण देख रहा था कि कैसे मनु का लंड पूरे का पूरा आरती की चूत के गुलाबी छेद मे जाता है,जैसे ही मनु का लंड उसमे जा कर गायब हुआ,रमण का जोश और बढ़ गया,उधर जैसे ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे गया आरती के मूह से बहुत मादक सिसकारी निकली,और वो मदहोश हो गयी,आज उसके खुद के बेटे ने उसकी चूत मे अपने लंड को बाड कर वहाँ पर अपनी मोहर लगा दी थी,इसलिए उसके आनंद का ठिकाना नही था.

अब मनु ने धीरे-2 अपनी कमर चलानी शुरू कर दी थी,और आरती भी उसका साथ दे रही थी,वो दोनो सब कुछ भूल कर मस्त हो कर चुदाई मे मशगूल हो गये थे,और आपस मे धक्के पर धक्का लगा रहे थे.

तब रमण से सबर नही हो रहा था,क्यूंकी वो दोनो माँ बेटे तो आपस मे चुदाई मे लगे हुए थे,पर वो अलग से बैठा था,तो फिर वो उठा और उसने अपने लंड को अपने हाथ से सहलाया ,जैसे ही उसने ये किया उसका लंड और ज़्यादा तन गया,तब वो आगे बढ़ा और उसने अपने दोनो पैर आरती के मूह के पास करे और फिर धीरे-2 अपने आप को और अपने लंड को आरती के नरम मुलायम होठों के उपर रख दिया,जैसे ही आरती को अपने होठ पर कुछ गरम रखा हुआ महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखें खोल कर देखा तो रमण का मोटा लंबा तना हुआ लंड उसके होठों को छू रहा था,और उसका सुपाडा फूल कर लाल हो रहा था,तो आरती ने अपने होठ खोल दिए,आरती ने जैसे ही आपने होठ खोले रमण ने आपना लंड उसके होठों के बीच मे फँसा दिया.

पर उसका लंड इतना मोटा था कि आरती के होंठो मे समा नही पा रहा था,तो फिर आरती ने अपने मूह को पूरा खोल दिया,तब रमण ने आपने लंड को उसके मूह मे घुसा दिया,लंड मूह मे जाते ही आरती उसको भी चूसने लगी,अब तो आरती का हाल ये था कि नीचे से मनु उसकी चूत मार रहा था,और उपर से रमण उसके मूह को चोद रहा था,और आरती इस सब का मज़ा ले रही थी,आज जैसा मज़ा आरती को आ रहा था वैसा उसको जिंदगी मे कभी भी नही मिला था.

आज तो आरती को अपनी पूरी जिंदगी का सबसे खुशी वाला अनुभव हो रहा था,आज जो मज़ा उसको आ रहा था उसकी उसने कभी भी कल्पना तक नही की थी,और इस-से आगे के भी सारे रास्ते खुल जाने वाले थे.

अब मनु ने उपर से अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी थी,और वो झड़ने के बहुत नज़दीक था,नीचे से आरती भी उसका साथ दे रही थी और अब वो भी उसके साथ ही झड़ने की कोशिस कर रही थी,उपर से उसके मूह मे रमण का लंड भी अब झड़ने को तैयार था.

इस तरह से अब तीनी ही जने अपना-2 पानी छोड़ने वाले थे,और फिर सबसे पहले मनु ने अपने लंड का रस अपनी माँ की चूत मे छोड़ दिया,जैसे ही उसके लंड का गरम रस आरती की चूत के अंदर गिरा,वैसे ही मनु के रस की गर्मी से आरती की चूत ने भी अपना रस छोड़ दिया और इस तरह से दोनो माँ-बेटे एक साथ इकट्ठा ही झाड़ गये.

जब उन दोनो ने अपना-2 रस छोड़ दिया तो आरती ने रमण के लंड को चूसना छोड़ दिया,तब रमण ने अपना लंड आरती के मूह से निकाल लिया और अपने हाथ से ही मूठ मारने लगा और फिर उसने अपने लंड का रस आरती के मम्मों पर गिरा दिया और निढाल हो कर वहीं आरती के दूसरी तरफ गिर गया,अब एक तरफ तो मनु था बीच मे आरती जिसकी चूत और मम्मे लंड रस से भीगे हुए थे और दूसरी तरफ रमण था. 

वो तीनो जने चुदाई से इतना थक गये थे कि वहीं पर उसी पोज़ीशन मे सो गये,आज की रात उन तीनो को कभी भी नही भूलने वाली थी.

सुबह सबसे पहले आँख मनु की खुली उसको पेशाब का प्रेशेर बना हुआ था,तो वो जल्दी से उठ कर वॉशरूम मे चला गया,जब वो वहाँ पर हल्का हो रहा था,तो रात की चुदाई उसकी आँखों के सामने घूमने लगी,और पेशाब करते-2 ही उसका लंड फिर से कड़क होने लगा,और कुछ ही सेकेंड मे मनु का लंड तन कर तैयार था,फिर से चुदाई के लिए.

मनु अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर बाहर आया तो उसने देखा कि उसकी मा आरती बिस्तेर पर बिल्कुल नंगी सो रही है और उसके बगल मे ही रमण भी नंगा सो रहा है,अपनी मा को नंगा देख कर अब मनु का लंड फिर से उसकी चूत मे जाने के लिए कुलबुलाने लगा.मनु फिर अपनी मा के नज़दीक आ गया और उसने देखा कि रात की चुदाई के निशान आरती के जिस्म पर ज्यों के त्यों थे,आरती की चूत रात की चुदाई से थोड़ी सी फूल गयी थी,और उसमे लगी हुई कॉकटेल अब सूख गयी थी और ऐसे ही रात को जो रमण ने अपने लंड का पानी उसके मम्मों पर गिराया था वो सूख कर चमक रहा था.

ये देख कर मनु को पूरी तरह से जोश आ गया और वो बिस्तेर पर चाड कर अपनी मा के पास आ गया फिर उसने आरती के दोनो तरफ अपने पाँव किए और अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का मारा,धक्के से लंड अंदर तो चला गया पर मनु क्यूंकी अभी अनाड़ी था तो उसने लंड को ऐसे चूत मे डालने से पहले बिल्कुल भी चिकना नही किया था और आरती की चूत भी सुखी हुई थी तो उसके लंड को खरोंच सी लगी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ,उसके इस तरह से धक्का लगाने से आरती को भी अपनी चूत मे कुछ रगड़ता हुआ महसूस हुआ और उसकी आँख खुल गयी,उसने देखा कि उसका बेटा मनु उस पर चढ़ा हुआ है और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा रहा है,तो वो समझ गयी कि सुबह-2 उसको ऐसे नंगा देख कर उसको फिर से जोश चढ़ गया है और वो उस पर चढ़ गया है.

उपर मनु फिर से धक्का लगा रहा था,तो आरती ने अपनी टाँगे फेला दी जिस-से कि मनु का लंड आराम से उसकी चूत मे चला जाए,उसके ऐसा करते ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे समा गया,तो उसने नज़र उठा कर देखा तो आरती उसको ही देख रही थी और मुस्करा रही थी.

मनु भी अपनी मा को जगा हुआ देख कर मुस्करा दिया,आरती बोली -अरे तुझे बिल्कुल सबर नही है रात भर तो मुझे चोद्ते ही रहे और सुबह-2 आँख खुलते ही फिर शुरू हो गया,मनु ने कहा कि माँ तुम हो ही ऐसी कि तुम्हे ऐसे सोते हुए देख कर मुझे अपने आप पर बिल्कुल कंट्रोल नही हुआ और मैने अपना लंड तुम्हारी चूत मे डाल दिया.

आरती बोली तो इसका मतलब है कि तुम्हारी जब भी इच्छा करेगी तुम ऐसे ही करोगे


मनु बोला कि जब आपके जैसे सुंदरी घर मे ही हो तो किसका दिल नही करेगा.अब आप ऐसे लेटी थी तो मैने डाल दिया.

आरती बोली चलो ठीक है पर अब जल्दी करो सुबह हो गयी है और उठना भी है,तुम लोग रात भर मेरे को ऐसे ही रगड़ते रहे ,मेरा पूरा बदन दुख रहा है,तभी रमण जिसकी नींद उन लोगों की चुदाई से खुल गयी थी बोला कोई बात नही मेरी जान हम दोनो तुम्हारे बदन की जैसे कहोगी अंदर और बाहर से मालिश कर देंगे,हम हैं ही तुम्हारी सेवा के लिए.

आरती-बस-2 रहने दो मैं जानती हूँ तुम लोग मेरी क्या सेवा करोगे,और अब मनु जल्दी करके हट जाओ मुझे उठना भी है,और कामवाली भी आने वाली होगी. और ये जो तुम लोगों ने रात भर यहाँ पर गंदा किया है उसको भी उसके आने से पहले सॉफ करना ज़रूरी है,नही तो बात बिगड़ सकती है.


ये सुन कर मनु ने अपने धक्को की रफ़्तार तेज़ कर दी और नीचे से आरती भी अपनी कमर चलाने लगी,दिन की रोशनी मे माँ बेटे की चुदाई देख कर रमण का लंड भी फिर से तन गया और अब वो भी तैयार था आरती को चोदने के लिए,तभी मनु ने कहा कि माँ मेरा अब निकलने वाला है,तो आरती बोली कि ठीक है मेरा अभी नही आ रहा तुम अपना गिरा दो,ये सुनते ही मनु ने एक दो तेज़ धक्के लगाए और आरती की चूत के अंदर अपना गरम माल गिरा दिया.

इधर रमण ने अब आरती के मम्मे दबाने शुरू कर दिए थे और उसके मम्मे दबाने से आरती का जोश बढ़ रहा था,पर इतने मे मनु ने अपना रस ही गिरा दिया तो वो भी थोड़ी ठंडी हो गयी.

फिर मनु आरती के उपर से हट गया और वॉशरूम मे चला गया,उसके जाते ही रमण आरती के उपर आ गया,ये देख कर आरती बोली क्या तुम उसके हटने का ही इंतेज़ार कर रहे थे,अब तुम दोनो मुझे छोड़ो गे भी या नही.

रमण-बस मेरी जान अब मेरा काम भी करवा दो फिर मैं तुमको छोड़ दूँगा,ये देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए कितना प्यासा हो रहा है,ये कह कर रमण ने आरती के हाथ को अपने लंड पर रख दिया,और जैसे ही आरती का मुलायम हाथ रमण के लंड पर रखा गया वैसे ही उसने झटके मारने शुरू कर दिए.
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11-24-2017, 02:07 PM,
#59
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
आरती ने रमण के लंड को धीरे-2 सहलाना शुरू कर दिया और रमण भी आरती के मम्मों से खेलने लगा,अब दोनो ही जने गरम हो रहे थे और अब आरती को भी जल्दी नही लग रही थी,वो भूल गयी कि अभी तो कह रही थी कि काम वाली आने वाली है पर अब पहले उसको अपनी चूत की आग को ठंडा करना था फिर आगे कुछ और सोचना था.

कुछ देर तक दोनो आपस मे ऐसे ही मस्ती करते रहे ,फिर जब दोनो जाने अच्छे से गरम हो गये तो रमण ने आरती को घोड़ी के पोज मे कर दिया,आरती घबरा गयी कि ये अब उसकी गंद मारेगा,वो बोली कि नही मैं पीछे नही लूँगी.

रमण बोला कि मेरी जान घबराओ मत और देखती जाओ कि अब मैं क्या कर रहा हूँ,तब तक मनु भी बाहर आ गया था और वो भी देख रहा था कि रमण अब उसकी माँ की कैसे लेता है,वो भी आगे के लिए ये सब कुछ सीखना चाह रहा था.

फिर रमण ने अपनी उंगली आरती की चूत मे डाल दी आरती की चूत तो वैसे ही मनु के पानी से चिकनी हो रखी थी तो उसकी उंगली फॉरन अंदर चली गयी,फिर उसने अपनी उंगली निकाली और आरती के पीछे आ कर घुटनो के बल बैठ गया और अपना लंड आरती की पीठ को थोड़ा सा उपर करके उसकी चूत के मूह पर लगा दिया,और फिर एक करारा शॉट मारा ,एक ही बार मे रमण का पूरे का पूरा लंड आरती की चूत मे समा गया,पर इसमे आरती की चीख निकल गयी,वो बोली ये तुमने कहाँ डाल दिया,रमण ने कहा सही तो डाला है तुम हाथ लगा कर देख लो.

तब आरती ने अपना एक हाथ नीचे ले जा कर अपनी चूत पर लगाया तो देखा कि रमण का लंड गया तो चूत मे ही है,वो फिर बोली कि हां गया तो सही जगह है पर फिर इतना दर्द क्यों हो रहा है.

रमण ने कहा कि जान ऐसे पहली बार है ना तो थोडा सा लगता है पर अब ठीक हो जाएगा ये कह कर उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए,अब उसके धक्के लगाने से आरती को दर्द की जगह मज़ा आने लगा था,और वो भी उसका सहयोग करने लगी थी.

उन दोनो की ऐसे पोज मे मस्त चुदाई देख कर मनु का लंड फिर से खड़ा हो गया वैसे भी आरती जो नशीली-2 आवाज़ें निकाल रही थी,उस-से तो किसी का भी लंड टनटना जाए और वो तो अपने सामने अपनी ही माँ को किसी दूसरे से कुतिया की तरह से चुदवाते हुए देख रहा था तो उसका तो खड़ा होना ही था.

जब आरती ने मनु के लंड का ये हाल देखा तो उसने मनु को अपने पास बुलाया और कहा कि मेरे बेटे का लंड फिर खड़ा हो गया ,अब मैं क्या करूँ कि ये मज़े ले सके,फिर उसने मनु से कहा कि ठीक है तुम अपना लंड मेरे मूह मे डाल दो,ये सुनते ही मनु के लंड ने झटके लेने शुरू कर दिए,फिर मनु भी पलंग पर आ गया और उसने अपना तना हुआ लंड आरती के मूह के पास कर दिया.

जैसे ही उसने लंड को आरती के मूह के पास किया आरती ने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके लंड को चाटने लगी,अब रमण उसको पीछे से चोद रहा था और आगे से उसने अपने बेटे मनु का लंड अपने मूह मे ले रखा था और वो दो-2 लंड के मज़े ले रही थी.

कुछ ही देर मे वो तीनो ही जने अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये और झड़ने के नज़दीक आ गये,और उन्होने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी,सबसे पहले मनु बोला कि मा अब मेरा निकलने वाला है,और ये कह कर उसने आरती के मूह मे ही अपने लंड का पानी गिराना शुरू कर दिया,आरती भी मनु के वीर्य को किसी अमृत की तरह से सारे का सारा पी गयी.

फिर मनु वहाँ से हट गया अब वो दोनो हो चुदाई मे लगे हुए थे,इतने मे ही आरती ने कहा कि रमण अब बस करो मेरा होने वाला है,और मैं थक गयी हूँ,रमण ने कहा ठीक है जान मैं भी आ रहा हूँ और फिर वो दोनो भी झाड़ गये और हान्फते हुए रमण ने अपना लंड झाड़ कर आरती की चूत से निकाल लिया और निढाल हो कर बिस्तेर पर गिर गया,आरती भी घोड़ी बनी हुई पोज़ीशन मे ही फैल कर बिस्तेर पर गिर गयी,अब वो तीनो जने पूरी तरह से झाड़ कर संतुष्ट हो गये थे.
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11-24-2017, 02:07 PM,
#60
RE: Maa ki chudai मॉं की मस्ती
कुछ ही देर के बाद जब आरती की साँसें थोड़ी संयंत हुई तो वो सीधी हो कर उठी ,तभी उसकी नज़र अपनी बुर पर पड़ी,रात से जब से चुदाई हो रही थी उसने अपनी चूत को देखा ही नही था,वो तो बस उसमे लंड पे लंड लिए जा रही थी,अब जब उसको थोड़ा आराम मिला तो उसको अपनी चूत मे दर्द महसूस हुआ तो उसने अपनी नज़र अपनी चूत पर डाली,पर अपनी चूत की हालत देख कर उसके तो पसीने छूट गये,उसकी चूत इस टाइम ऐसे लग रहा था कि बुरी तरह से चोदने के कारण फट ही गयी है,वो बहुत फूली हुई नज़र आ रही थी,और उस पर जगह-2 लंड और चूत की कॉकटेल लगी हुई थी,और दाँतों के भी निशान थे,पर सबसे बड़ी बात ये थी कि अब उसमे दर्द की वजह से चीस चल रही थी.

अब आरती को समझ आया कि रात भर जो उसने मस्ती की है उसका फल उसकी चूत को भुगतना पड़ा है,और वो सूज गयी है.फिर उसने उठने की कोशिस की तो उसको पता चला कि चूत के साथ-2 उसका पूरा शरीर भी दुख रहा है और उसकी चीख सी निकल गयी,जब उसकी चीख निकली तो वो दोनो जो बिस्तेर पर पड़े हुए थे उठ कर बैठ गये,और रमण ने पूछा कि क्या हुआ जानेमन.

आरती बोली नही और कराहने लगी,तो रमण ने फिर से पूछा कि हुआ क्या है?तो आरती बोली कि हुआ क्या है ये देखो ये कह कर उसने अपनी चूत की तरफ इशारा किया,इसका तुम दोनो जनो ने क्या हाल कर दिया है.

ये देख कर रमण की हँसी छूट गयी,रमण को ऐसे हंसते देख कर आरती को और ज़्यादा मिर्ची लग गयी,वो बोली यौं हंस क्या रहे हो तुम दोनो जनो ने रात भर मे मेरी चूत को फाड़ डाला,अब मेरे से उठा भी नही जा रहा.

रमण ने कहा ये तो अच्छी बात है ना उठने की ज़रूरत ही क्या है,हम दोनो यहीं पर तुम्हारी सेवा करते रहेंगे.तुम तो बस हमे सेवा का मौका दे दो.

आरती-मैं सब समझती हूँ तुम्हारा इरादा,बस अब उठो यहाँ से और जा कर चेंज करो कभी भी कोई भी आ सकता है,और मैं भी जा कर कोई दवाई वगेरह लेती हूँ,ऐसे लेटी रहूंगी तो तुम्हारा कुछ नही पता है तुम फिर शुरू हो सकते हो.

ये कह कर आरती अपने दर्द को कंट्रोल करती हुई उठ कर वॉशरूम मे चली गयी,और वहाँ जा कर गरम पानी से अपने आप को साफ करने लगी.

इधर ये दोनो भी अब उठे और बारी बारी से फ्रेश हो गये और अपने कपड़े पहन लिए,जब आरती फ्रेश हो कर बाहर आने लगी तो उसने देखा कि उसने कपड़े नही लिए हैं,तो उसने बाहर झाँका तो वो दोनो वहीं थे,तब उसने टवल को ही अपने शरीर से लपेट लिया और बाहर आ गयी,अब इस समय दिन मे वो फ्रेश हो कर टवल मे लिपटी हुई एक गदराई हुई जवान माल लग रही थी और वो टवल भी उसकी मदमस्त जवानी को छुपाने मे असमर्थ था.

उन दोनो जनो की तो आरती को ऐसे देखते ही सीटी बज गयी,अब तो उन दोनो के लंड फिर से तनाव मे आने लगे थे.आरती ने जब देखा कि वो दोनो उसको खा जाने वाली नज़रो से घूर रहे हैं तो उसने जल्दी से कपड़े पहनना ठीक समझा ,क्यूंकी उसको उन दोनो की ही नियत खराब लग रही थी,और हो सकता है कि ये दोनो जने फिर से उसको ऐसे देख कर पेलना शुरू कर दें.

पर अब रमण से उसको ऐसे देख कर रहा नही गया और वो उठ कर आरती की तरफ गया,तो आरती ने कहा कि अब क्या हुआ,रमण ने कहा जान अब तुमको ऐसे मस्त रूप मे देख कर रहा नही जा रहा ,चलो अभी एक बार और हो जाए.

आरती-मैं सब समझती हूँ तुम लोगो को,अब बस करो मेरा शरीर बहुत दुख रहा है,रात भर मे भी तुम लोगों का दिल नही भरा क्या?

रमण-अर्रे जान इस चीज़ से कभी किसी का दिल भरता है क्या,ये तो जितनी मिलती है प्यास उतनी ही बढ़ती जाती है.

आरती-पर अभी नही अभी काम वाली भी आने वाली है और मेरे शरीर मे भी दर्द है.

रमण-पर ये तुम्हारी तूफ़ानी जवानी तो हमे बेचैन कर रही है,तुम इस टवल मे कहर ढा रही हो,मैं एक ही शर्त पर अभी तुम्हें छोड़ सकता हूँ जब तुम वादा करो कि मैं जब भी घर आऊंगा तुम ऐसे ही सेक्सी रूप मे मेरा स्वागत किया करोगी.

आरती-अच्छा भाई ठीक है मैं तुम्हे कम कपड़ों मे ही अच्छी लगती हूँ तो कोई बात नही जब भी तुम आओगे मे कम कपड़ों मे ही रहा करूँगी.

मनु-माँ ये तो कोई फेर बात नही हुई,जब रमण भैया के लिए आप ऐसा करोगी तो मेरे लिए क्यों नही?

आरती-अच्छा भाई जैसे तुम दोनो कहो मैं वैसे ही रहूंगी पर अभी तो मुझे छोड़ो.

जब आरती ने ऐसे कहा तो रमण ने आरती को छोड़ दिया,और अलग हो गया,फिर आरती ने उन दोनो को कहा कि अब तो मैने तुम्हारी बात मान ली है अब तो बाहर जाओ तुम दोनो.
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