Maa Sex Story आग्याकारी माँ
11-20-2020, 12:31 PM,
#21
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
अपडेट 19

ओ अभी भी अपनी नजरे झुकाए हुए बैठि थि, और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल थी....
ड्रिंक के साथ स्नैक्स खाते हुए वो नोर्मल्ली बातें करने लगते है पर भारती अभी भी चुप थी और कनखियों से सतीश को देख रही थी सतीश की नजरे भी बार बार उसकी तरफ चलि जाती...

सागर उन दोनों की हरकतों को देख रहा था...

सागर अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म.करने के बाद...

सागर उठते हुये- “भाई मुझे जरुरी काम से जाना है तू बैठ मे आधे घंटे मे आता हु”...

सतीश- “मे भी साथ चलता हु”..

सागर- “तू बैठ और बाइक की की मुझे दे”.....

सागर सतीश से बाइक की की लेकर बाहर निकल जाता है, अब घर मे केवल भारती और सतीश ही थे....

पूरे घर मे एकदम सन्नाटा फैल गया था... दोनों ही कुछ बोलना चाह रहे थे पर हिम्मत किसी की नहि हो रही थी....
सतीश हिम्मत करके अपनी जगह से उठता है और भारती के पास जाकर बैठ जाता है...

इससे पहले की सतीश कुछ कहता भारती अपनी जगह से उठ कर आगे बढ़ जाती है, सतीश उठ कर पीछे से उसका हाथ पकड़ लेता है....

सतीश- “जान अभी तक नाराज हो क्या?

भारती पलट कर सतीश की तरफ देखति है....

“चटाकककक..... एक थप्पड़ की गुंज से पूरे कमरे मे फैला सन्नाटा ख़तम होता है....

ये थप्पड़ भारती ने सतीश के बाए गाल पर जड़ा था... थप्पड़ की गुंज ख़तम होते ही कमरे मे एक बार फिर से सन्नाटा हो जाता है...

भारती के चेहरे पर अब काफी गुस्सा था जिसे देखकर सतीश के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, और वो अपना दाया गाल आगे बड़ा देता है....

“चटाककक... एक बार फिर से थप्पड़ की आवाज से घर गुंज उठता है....

सतीश भारती की और देखता है, उसकी आँखों मे आँसु थे सतीश अपना बाया गाल फिर से आगे कर देता है....

भारती ग़ुस्से से उसके छाती मे एक के बाद एक कई घुसे मारती है, और फिर उसके सीने से लग कर सुबकने लगती है... सतीश भी उसे अपनी बाँहों मे जकड लेता है...

भारती सुबकते हुये- तुम बहुत बुरे हो सतीश, मुझसे मिलने के लिए भी टाइम नहि है तुम्हारे पास... पता है आज पुरे ५ महीने और ११ दिन और ४ घंटे बाद मिले हो... तुम्हे एक पल को भी मेरी याद नहि आई”...

सतीश- ५ महीने ११ दिन ४ घंटे २० मीनट. और ४० सेकंद. एक्साक्ट्ली.... और मेरी लाइफ का एक भी मिनट ऐसा नहि गया जब मैंने तुम्हे याद न किया हो....

भारती सतीश की आँखों मे देखते हुए – “झुठ मत बोलो अगर तुमने मुझे इतना याद किया तो मिलने क्यों नहि आये ???

सतीश- “यही बात अगर मे तुमसे कहु तो.... अगर इतना ही तुम मुझे.मीस कर रही थी मिलने तो,तुम भी आ सकती थी”.....

भारती अभी भी सतीश के सीने से लगी खड़ी थी और भारती की सांसे उसे अपने चेहरे पर महसूश हो रही थि, अगर भारती की जगह कोई और लड़की सतीश के इतने करीब होती तो बेशक उसका लंड खड़ा हो चुका होता पर भारती के इतने करीब होने के बावजूद भी उसमे कोई हलचल नहि थी... और ये सब प्यार के कारन था सतीश के मन मे भारती के लिए कभी भी कोई गलत ख्याल नहि आया.... बिना एक दूसरे को आई लव यु बोले वो एक दूसरे को बेइन्तेहा प्यार करते थे....

दोनो एक दूसरे के आँखों मे खो गए थे....

भारती- “तो ठीक है अब मैं ही तुमसे मिलने आ जाया करुँगी”....

ओर इतना कहकर भारती वापस अपना चेहरा सतीश की छाती मे छुपा लेती है...

सतीश- “एक बात कहु भारती”...

भारती- “ह्म्म्म”

सतीश- “तुमने थप्पड़ बहुत जोर से मारे थे... अभी तक कान झनझना रहे है”....

भारती हस् देती है...

भारती- “देख लो बच्चू अगर तुमने दोबारा ऐसी ग़लती करी न तो तुम्हारा बैंड बजा दूँगी”....

सतीश- “जब मे आया था तो मुझे गेट पर लगा की तुम मुझे देख कर काफी खुश हो और शायद मुझसे नाराज नहि हो”....

भारती- “हमम, खुश तो मे बहुत.थी पर नाराज भी बहुत थी वो तो उस समय सागर भाईया थे वरना उसी समय तेरा मोड़ देती”....

सतीश- “कोई बात नहि उस समय नहि तो अब तो तोड़ ही दिया ना”....

भारती सतीश से अलग होते हुये- “क्या वाक़ई मे बहुत तेजी से पड़ गया हाथ”....

सतीश अपने चेहरे पर मासुमियत लाते हुये- “बहुत तेज”....

भारती उसके करीब आते हुये- “तो क्यों दिलाते हो मुझे इतना गुस्सा पता है ये तेरे गाल पर पड़ा ६० वा थप्पड़ था”...

ओर भारती अपने पंजो पर खड़े होकर सतीश के लेफ्ट गाल पर अपने होंठ रख देती है, और फिर राईट गाल पर भी अपने होंठ रख देती है...

कब वो अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....
पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....

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11-20-2020, 12:32 PM,
#22
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
अपडेट 20

भारती अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....
पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....

सतीश उसके चेहरे के एक्सप्रेशन से समझ जाता है की वो क्या कहना चाहती है...

सतीश उसे छोड़ते हुये- देखो भारती ये गलत है”....

भारती हैरत से- “पर”

सतीश- “नहि मे अपने दोस्त के विश्वास को नहीं तोड़ सकता, उसने मुझे तुम्हारे साथ अकेला छोडा क्युकी वो जानता है की हम प्यार करते हैं और हम अकेले मे अपने गीले सिक्वे मिटा सकें पर हमे दूरि बनाकर रखणी होगी जब तक की हमारी एंगेजमेंट नहि हो जाति”...

भारती- “सॉरी सतीश वो मैं”....

सतीश- “तुम्हे सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहि है भारती”...

भारती थोड़ी नर्वस हो जाती है इस्लिये भारती के मूड को फ्रेश करने के लिये...

सतीश- “वैसे एक बात तो है तुम्हारे मल्हम ने काम कर दिया अब मेरे गाल दर्द नहि कर रहे..... थोड़ा और मल्हम लगाओगी क्या??

भारती हस्ते हुए उसकी तरफ बढ़ती है- “अब तुम मार खाओगे मेरे हाथ से”...

सतीश- “मारलो जितना मारना है बाद मे मल्हम भी तो तुम्हे लगाना पड़ेगा मेरे जख्मो पर”.....

भारती सतीश के गले लगते हुये- “तुम न बहुत बुरे हो”...

सतीश- “हाँ वो तो मे हु”...

तभी डोरबेल बजती है भारती सतीश से दूर हटके गेट खोलने के लिए बढ़ती है, और सतीश अपनी जगह पर बैठ जाता है....

गेट पर सागर था सागर अंदर आते हुये- “तूने ज्यादा परेशान तो नहि किया ना मेरे दोस्त को”...

भारती- “क्या भाई आप भी ना?

सागर सतीश की तरफ बढ़ जाता है और भारती गेट बंद करके किचन की तरफ...

सतीश-“कहा मराने गया था बे??

सागर- “आरे गया था कहि मराने तुझे इससे क्या? हाँ तुझे मरानी हो तो मुझे बता”...

सतीश सागर के कंधे पर मुक्का मारते हुये-बड़ा हरामी हो गया है तु.”..

सागर- “सब तेरी संगत का असर है”....

ओर दोनों हस देते है....

सागर- “छोड़ इन बातों को और ये बता की तू किस बात को लेकर परेशान था”...

सतीश- “मे और परेशान, भाँग पीकर तो नहि आया है रे छोरे”....

सागर- “बेटा मुझे लौंडिया चोदना मत सिखा, चुपचाप बता की बात क्या है”...

सतीश- “चल तो तेरे कमरे मे चलकर बात करते है”...

सागर- “चल...

दोनो उठकर सागर के कमरे की और चल देते है...

सतीश- सिगरेट है...

सागर सतीश को एक सिगरेट देता है और एक खुद लेता है और दोनों उसे लाइट करके कश लगाने लगते है...

सागर- अब बतायेगा या फिर पैक भी बनाऊ.

सतीश- नहि यार बताता हु...

ओर सतीश उसे शिप्रा और प्रिंस के बारे मे और फिर कैफ़े मे हुई बात के बारे मे बताता है...

बात पूरी होने के बाद कमरे मे शान्ति हो जाती है दोनों एक एक और सिगरेट जला कर कश लगाने लगते है...

सागर- बात तो ये वाकई मे चिंता की है....

सतीश- साले अगर चिंता की बात न होती तो मे इतनी टेंशन क्यों लेता...

सागर- अबे तू कहे तो ठिकाने लगा देते हैं उसके दिमाग को साले के हाथ पैर तोड़ देंगे....

इससे पहले की सतीश कुछ कहता रूम का गेट खुलता है और भारती रूम मे एंटर होती है..

सागर जोकि अभी सिगरेट का कश लगा रहा था उसको देख कर इतना शॉकेड हो जाता है की अपने मुह से सिगरेट निकालना भी भूल जाता है जबकी दूसरी तरफ सतीश भारती को देखते ही उठ कर खड़ा हो जाता है और अपनी सिगरेट पीछे छुपाने की असफल कोशिश करता है....

रूम फ्रेशनर के बावजूद सिगरेट की स्मेल पुरे कमरे मे फैल गयी थी....

भारती ग़ुस्से से सागर की तरफ देखति है और फिर अपनी नजरे सतीश पर टीका देती है और उसे घुरने लगती है... भारती के देखने के तरीके से ऐसा लग रहा था की जैसे वो अभी सतीश को कच्चा चबा जाएगी....

सतीश उसके ऐसे घुरने पर चुतियों की तरह अपनी बत्तीसी दिखा कर हॅसने लगता है...

सतीश- ओ... वो भारती तुम गलत समझ रही हो. .

इससे पहले की वो कुछ और कहता भारती ट्रे को टेबल पर रख कर...बलकी पटक कर कहना ज्यादा बेहतर रहेगा, कप्स मे से थोड़ी कॉफ़ी बाहर छलक कर ट्रे मे गिर गई थी....

ओर ट्रे को रखने के बाद वो ग़ुस्से मे तेजी से रूम से निकलती और गेट को इतनी तेजी से बंद करती है की गेट के बंद होने की आवाज पूरे रूम मे गुंज जाती है....

गेट इतनी तेजी से बंद हुआ था की थोड़ी देर तक सागर और सतीश गेट की तरफ ही देखते रह्ते है...

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11-20-2020, 12:32 PM,
#23
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
ओर फिर सतीश सागर की तरफ बढ़ता है और उसके सर पर एक थपकि लगाते हुये- “भोसडी के तू एक काम भी ठीक से नहि कर सकता ना”,

सागर- सॉरी भाई मे गेट करना भूल गया था....

सतीश- हरामखोर लौंडिया चोदते समय तो ४-४ बार चेक करते हो... तब क्यों नहि भूलते गेट खुला छोड़ना...

सागर- अब ग़लती हो गई भाई, अब क्या जान लेगा मेरी..

सतीश- साले तेरी ग़लती की वजह से मेरी तो बज गई ना... इतनी मुस्किल से तो मनाया था उसे और तूने फिर से अपनी गांड मरा ली.... अब पता नहि कितने खाने पडेंगे....

सागर- खाने तो मुझे भी पडेंगे....

सतीश उसकी बात पर उसकी तरफ देखता है...

सतीश- मतलब तुझे भी उसके हाथ से...

सागर- भाई जब वो ग़ुस्से मे होती है तो किसी को नहि छोड़ती....

ओर फिर दोनों हॅसने लगते है...

सागर- छोड़ वो मान जाएगी... तू प्रिंस का बता, ठोंक दू उसे क्या...

सतीश- अबे अकल क्या तूने बेच दी है.. अगर तू उसके हाथ पैर तोड़ेगा तो शिप्रा को उससे और सिम्पथी हो जायेगी और वो मुझे ही गलत समझेगी...

सागर- बात तो तेरी सही है, तो तू ही बता क्या करना है....

सतीश- यार अभी तो हम कुछ नहीं कर सकते सिवाए उसपर नजर रखने के, हमे बस ये ध्यान रखना है की प्रिंस उसके साथ कोई गलत हरकत न करे...

सागर- ठीक है पर ऐसा हम कब तक करेंगे....

सतीश- जब तक की मे उसके सामने प्रिंस की असलियत ना ला दु... या फिर वो उससे खुद बा खुद दूर न हो जाए...

सागर- चल ठीक है... पर अगर उसने कुछ गलत करने की कोशिश की शिप्रा के साथ तो मे उसे नहीं छोडूंगा....

सतीश- हमं... तब अगर तूने कुछ नहि करा तो मे तुझे नहि छोडूंगा....
ईधर सतीश और सागर अपनी आगे की योजनओं के बारे मे बातें कर रहे थे उधर दूसरी तरफ सतीश के घर मे शिप्रा जोकि बेड पर अपने आँसु बहाते हुए ही नींद के आग़ोश मे चलि गई थि, अपनी नींद से जागति है वो अपने बेड से उठकर वाशरूम मे जाकर फ्रेश होती है और फिर अपने रूम से निकल कर सतीश के रूम की तरफ बढ़ती है....

शिप्रा मन मे सोचते हुये- मुझे भाई से अपनी ग़लती के लिए माफ़ी माँगनी ही होगी कुछ भी हो मुझे उनसे इस तरह बेहेव नहि करना चाहिए था, पर मे उन्हें मना कर ही रहुंगी.....

यहि सब सोचते हुये.जब वो सतीश के रूम तक पहुचती है तो देखति है की रूम का गेट खुला हुआ है और रूम मे कोई नहि है.....

शिप्रा- भाई जरूर निचे होंगे...

ओर वो तेजी मे सीढियाँ उतरते हुए निचे आती है तो देखति है की उसकी माँ सोनाली सोफ़े पर बैठे टीवी देख रही थी....

शिप्रा अपनी माँ के गले मे पीछे से हाथ डालते हुए उनके गाल पर किस करती है....

सोनाली प्यार से उसके बालों मे हाथ फिराते हुये- उठ गई महारानी तुम्...

शिप्रा अपनी माँ के पास आकर बैठते हुये- माँ भाई कहा है कही नजर नहि आ रहा?

सोनाली- वो तो कॉलेज से आने के १५ मीनट. बाद ही निकल गया था खाना भी नहि खाया.... वैसे खाना तो तूने भी नहि खाया.. मैंने तुझे कितनी आवाज लगाई पर तू गेट अंदर से लॉक करके सो गई थी.....

शिप्रा- माँ भाई बता कर गए है की वो कहा गये है?

सोनाली- तू तो जानती है की वो कहा मुझे कुछ बताता है हमेशा अपने मन की करता है.. कहकर गया है की दोस्त के यहाँ जा रहा है शाम को आयेगा.... पता नहि कुछ खाया भी होगा की नहि इस लड़के ने, फ़ोन भी तो उसका स्विच ऑफ जा रहा है...

शिप्रा अपनी माँ की बात से और परेशान हो जाती है... क्युकी वो जानती थी की सतीश उससे नाराज होने के कारन ही घर से बाहर चला गया है...

सोनाली- मे खाना लगा देती हु तू कुछ खा ले, सुबह से तूने भी कुछ नहि खाया...

पर शिप्रा ने तो जैसे कुछ सुना ही न हो और वो अपनी सोचो मे गुम अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है...

सोनाली उसे पीछे से आवाज लगाती रह जाती है, पर वो नहि सुनति...

सोनाली- क्या हो गया है आज दोनों को...
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11-20-2020, 12:32 PM,
#24
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
शिप्रा अपने रूम मे पहुच कर सतीश का नम्बर मिलाती है पर वो स्विच ऑफ था, फ़ोन रखते हुये- पता नहि कहा गया होगा भाई... सुबह से भूखा है मेरी वजह से.... पता नहि कोण से दोस्त के यहाँ गया होगा....

ऎसे ही काफी देर तक वो अपने विचारों मे खो जाती है फिर अचानक उसकी आँखों मे एक चमक आ जाती है और वो तुरंत अपना मोबाइल उठा कर एक नम्बर. डायल करती है...

दूसरी तरफ सागर के घर मे भारती अपने रूम मे बैठि हुई थी और वो अभी भी सतीश और सागर के सिगरेट पिने से ग़ुस्से मे थी...

तभी उसका मोबाइल बजने लगता है वो जब उसे उठा कर देखति है तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है... और वो फ़ोन पिक करके

भारती- तो इतने समय बाद राजकुमारी को इस गरीब की याद आ ही गयी...

दूसरी तरफ से- आरे यार तुझे भूलि ही कब थी जोकि तुझे याद करति... वैसे एक बात बताओ महारानी जी याद तो आप को भी नहि आई इस नाचीज की...

ये फ़ोन किसी और का नहि बल्कि शिप्रा का ही था, शिप्रा और भारती काफी अछि फ्रेंड थी और शिप्रा जानती थी की सतीश और भारती एक दूसरे को प्यार करते है और उसका बेस्ट फ्रंड सागर भारती का ही भाई है इस्लिये वो ज्यादातर इन्ही के यहां आता था क्युकी इस तरह वो अपने बेस्ट फ्रंड से और अपने प्यार दोनों से मिल लेता था, और उसका गेस सही भी था...

भारती उसकी बात सुनकर हस्ते हुये- दोनों भाई बहन एक ही डायलॉग मारते है.... इसके अलावा कोई और डायलॉग नहि आता क्या?

शिप्रा- अरे डार्लिंग आते तो बहुत है पर हर बन्दे के हिसाब से डायलॉग मारे जाते है ताकि उस बन्दे को अपनी बातो से झांसे मे लिया जा सके... अब तू ही देख मेरा भाई भी तुझे यहि डायलॉग मारके पटाता है और मे भी और तू एक ही डायलॉग से दो लोगो के झांसे मे आ गयी....

भारती- मैं किसी के झांसे मे नहि आई और तू यहां होती तो तुझे ये बात अच्छे से समझ आ जाती जब मेरा हाथ की उँगलियाँ तेरे गालो की शोभा बढाती...

शिप्रा- बड़ी आई मेरे गालो की शोभा बढ़ाने वाली.... मैं क्या फिर तुझे छोड़ देती...

ओर फिर दोनों हस् देती है

भारती- वैसे आज कैसे याद आ गई हमारी...

शिप्रा- क्यों ऐसे ही याद नहि कर सकते क्या?

भारती- कर तो सकती है पर तेरी आवाज से से चिंता झलक रही है जल्दी बता क्या बात है

शिप्रा- वो यार मैंने ये पुछने के लिए फ़ोन किया था की भाई तेरे यहाँ है क्या?

भारती- हाँ है तो, क्यों क्या हुआ?

ओर फिर शिप्रा उसे सारी बात बताती है....

शिप्रा- ... और फिर वो बिना कुछ खाए घर से निकल आये इस्लिये थोड़ी टेंशन थी की पता नहि उन्होंने कुछ खाया भी होगा की नहि...

भारती- अब तुझे टेंशन लेने की कोई जरुरत नहि है और थँक्स यार मुझे बताने के लिए की सतीश ने कुछ खाया नहि है....

शिप्रा- थँक्स तो मुझे बोलना चाहिए तुझसे की तूने मेरी प्रोबलम सोल्वे कर दि...

भारती- चल ठीक है मे थोड़ी देर मे तुझसे बात करती है....
ओर फिर भारती कुछ सोच्ने लगती है, उसके माथे पर शिकन थि, जिससे पता चल रहा था की वो किसी बात से परेशान है, फिर वो अपने सर को झटका देकर किचन की तरफ बढ़ जाती है....

दूसरी तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...

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11-20-2020, 12:32 PM,
#25
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
इस तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...

इधर सतीश को भूक तो बहुत तेज की लगी थी पर वो करता भी क्या आज फर्स्ट टाइम था जब वो सागर से कुछ कहने मे झिजक रहा था...

ओर सागर को लग रहा था की उसे शिप्रा की चिंता सता रही है... दोनों ही अब नॉर्मली बात चीत कर रहे थे...

तभी भारती सागर को आवाज लगाती है... और सागर सतीश से वेट करने को कहकर निचे आ जाता है...

सागर की फट रही थी वो सोच रहा था की भारती ने उसकी क्लास लेने के लिए उसे बुलाया है....

ओ भारती के पास पहुचता है तो भारती उसे घुरने लगती है, सागर अपनी नजरे चुराने लगता है..

भारती- तुम्हे कुछ पता भी है की नहि,

सागर- क्या?

भारती-यही की तुम्हारा दोस्त आज सुबह से भूखा है, और तुमने उससे खाने को पूछा भी नही...

सागर- अब मुझे कैसे पता चलता उसे कुछ चाहिए होता है तो वो खुद ही मांग लेता.. पर तू इतने यकीन से कैसे कह सकती है...

भारती- शिप्रा ने बताया मुझे फ़ोन करके... मे खाना लगा देती हु तुम सतीश को बुला लो....

सागर अपने कमरे मे जाकर पहले तो सतीश को सुनाता है क्युकी उसने सागर से ये छुपाया की वो आज सुबह से भूखा है.... और फिर उसे लेकर डायनिंग टेबल पर आकर बैठ जाता है....

सतीश के बैठते ही भारती उसे खाना लगाती है और वो भारती को ही देख रहा होता है, उसे भारती की आँखों मे ग़ुस्से की जगह अपने लिये प्यार और केयर के मिले जुले भाव नजर आ रहे थे...

सतीश के जिद करने पर सागर और भारती न चाहते हुए भी खाना खाने बैठ जाते है...

खाना ख़तम करके सतीश और सागर अपने हैंड वाश करने चले जाते है और भारती बर्तन समेट्ने लगती है....

पहले भारती बर्तन साफ़ करने के बाद सागर के पास आकर बैठ जाती है और फिर तीनो हसि मजाक करने लगते है और अपने बचपन की यादो को ताजा करने लगते है...

टाइम धीरे धीरे कटता जाता है और कब ८ बज जाते है पता ही नहि चलता...

भारती- सतीश अब काफी लेट हो गया है मेरे ख्याल से अब तुम्हे घर जाना चाहिये....

सागर कुछ बोलने को होता है पर भारती उसे इशारे से चुप रहने को कहती है... अब सतीश का मूड भी फ्रेश हो गया था और अब वो अच्छे से सोचने समझने लायक हो गया था, ग़ुस्से ने तो जैसे उसके दिमाग को जाम कर दिया था...

ओर वो जानता था की भारती उससे उसके भलाई के लिए कह रही थी.... वो जाने के लिए खड़ा हो जाता है....

भारती- और सतीश अपना मोबाइल ऑन कर लेना...

सतीश भारती की तरफ देखता है और फिर एक स्माइल के साथ अपने मोबाइल को निकालकर ऑन करता है और फिर उसे अपनी जेब के सुपुर्द करता है...

अब सतीश भारती और सागर को फिर मिलने का कहकर अपने घर की तरफ निकल देता है...

तीस मिनट्स मे सतीश अपने घर पहुच जाता है, बाइक कड़ी करके वो डोर बेल्ल बजाता है... डोर शिप्रा ने ओपन किया था...
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11-20-2020, 12:33 PM,
#26
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
शिप्रा कुछ कहने के लिए मुह खोलती है, पर सतीश उसके साइड से होते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है...

शिप्रा डोर लॉक करके- आरे भय्या सुनो तो...

शिप्रा सतीश के पीछे पीछे उसके रूम मे पहुंच जाती है....

शिप्रा- आई एम सॉरी भइया...

सतीश- मे थक गया हूँ मुझे आराम करने है...
शिप्रा- पर भेया...
सतीश-पर वर कुछ नही...

शिप्रा वहि खड़ी रहती है उसकी आँखे अब नम हो चुकी थी.... और उसकी आँखों से आँसु बहने लगते हैं वो सतीश से बहुत कुछ कहना चाहती थि, पर कुछ कह नहि पाती और वहि खड़े आँसु बहाने लगती है....

सतीश जब गेट की तरफ देखता है तो शिप्रा को रोता हुआ देख वो तुरंत उसके पास आकर उसके कन्धो को पकड़ते हुये

सतीश- अरे पगली तू रो रही है....
शिप्रा उसके गले लगते हुये- प्लीज् भाई मुझे माफ़ कर दो मे जानती हूँ की मैंने आपका दिल दुखाया है, पर आगे से ऐसा नहि होगा और अब मे प्रिंस से भी नहि मिलूँगी पर प्लीज् आप मुझसे नाराज मत होना......

सतीश ने तो सोचा भी नहि था की प्रिंस नाम की प्रॉब्लम से इतनी जल्दी छुटकारा मिल जाएगा,

सतीश- अरे पगली मे तुझसे नाराज नहि हु... वो तो मे थक गया था इस्लिये तेरे से बात नहि कर रहा था.......

शिप्रा सुबकते हुये- सच कह रहे हो ना...

सतीश- एकदम सच्... भला मे तुझसे झुट क्यों बोलूंगा... चल अब टेसुए बहाने बंद कर और अपना मुह धोले जाकर....

शिप्रा उससे अलग होकर अपने रूम मे चलि जाती है और सतीश भी अपना लैपटॉप खोल कर बैठ जाता है.... थोड़ी देर मे ही सोनाली उनको खाने के लिए बुला लेती है.. सतीश जब निचे पहुचता है तो खाने की टेबल पर सोनाली और शिप्रा उसका वेट कर रही थी....
सतीश जैसी ही वह पहुचता है सोनाली उससे सवालो की झड़ी लगा देती है वो चुपचाप उनके जवाब देता है और फिर सब लोग भोजन करके अपने अपने रूम मे चले जाते है...

आज सतीश की आँखों मे नींद नहि थी वो तो बस शिप्रा के सोने का वेट कर रहा था क्युकी उसे आज रात का हॉट लाइव शो देखना था और उस पल के बारे मे सोच कर उसका लंड अभी से जोर मार रहा था......

पर तभी उसके डोर पर नॉक होती है जिससे वो ख्ययालो की दुनिया से बाहर आ जाता है...

सतीश घडी की तरफ देखता है जिसमे १० बज रहे थे- इस समय कोण होगा....

ओर सतीश बेड से उठ कर डोर खोलने के लिए बढ़ जाता है और गेट खोलते ही उसे अपना प्लान चोपट होता हुआ नजर आता है....
गेट खोलते ही सतीश का सारा प्लान चोपट हो जाता है, सामने शिप्रा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी....

सतीश- तू सोयी नहि अभी तक्...

शिप्रा- आपको मे सोयी हुई लगती हूँ क्या...

सतीश- मेरे कहने का मतलब है की तू इतनी रात को यहा क्या कर रही है, जा जाकर सोजा...

शिप्रा- क्या भाई मे आपसे बात करने आई हूँ और आप मुझे भगा रहे हो...

सतीश- हाँ बता क्या बात करनी है...

शिप्रा- क्या भाई अब गेट पर खड़ा रखोगे क्या अंदर नहि बुलाओगे...

सतीश अपने रूम को देखता है की कहि कुछ उल्टा सीधा तो नहि है फिर अपना पूरा गेट खोल कर उसे अंदर बुलाता है...

शिप्रा आकर सतीश के बेड पर टाँगे फैलाकर लेट जाती है और पास मे पड़े रिमोट को उठा कर टीवी ऑन कर लेती है, सतीश भी उसके पास आकर लेट जाता है...

सतीश- तू क्या टीवी देखने आई है यहां पर...

शिप्रा- नहि भाईया मे तो आपसे बात करने आई थी....

सतीश- बता तुझे क्या बात करनी है...

शिप्रा- भाई आप तो भारती से प्यार करते हो न...

सतीश उसकी तरफ देखता है पर शिप्रा अपनी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थी...

शिप्रा- बताओ न भाई...

सतीश- हम्म बहोत प्यार करता हु...

शिप्रा- फिर ये प्रियंका कौन है भाई....

सतीश एक बार फिर से उसे देखता है पर वो अभी भी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थि, सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...

शिप्रा- आप भारती को कही चीट तो नहि कर रहे..

सतीश उसकी बात से बौखलाते हुये- तू पागल है क्या तू जानती है की मे उसे चीट नहि कर सकता...

शिप्रा- तो फिर प्रियंका कोण है....

सतीश- फ्रेंड है...

इस बार शिप्रा सतीश की तरफ देखति है पर वो ऐसे बिहेव करता है जैसे की कितने ध्यान से टीवी देख रहा हो... शायद अब वो शिप्रा से नजरे नहि मिला रहा था...

शिप्रा- तो भारती को तो पता ही होगा ना प्रियंका के बारे मे... क्यों भाईया?

सतीश- नहि... उसे नहि पता...

शिप्रा- यानी की आप उसे चीट कर रहे हो...

सतीश- तू आज कुछ ज्यादा ही सवाल जवाब नहि कर रहि...

शिप्रा- वो तो मे बस ऐसे ही जनरल नॉलेज के लिए ही पूछ रही थी...

सतीश उसके बालो को पकड़ कर धीरे से खीचते हुये- मे बढ़ाऊ तेरी जनरल नॉलेज.

शिप्रा- नही छोड़ो दर्द हो रहा है भाई, आपको नहि बताना तो मत बताओ इसमें इतने नाराज होने की क्या बात है...

सतीश उसके बाल छोड़ते हुये- चल भाग अपने रूम में...
शिप्रा बेड से उठते हुये- अगर आप नहि बता पा रहे है तो मे बात दू भारती को प्रियंका के बारे मे....

सतीश अपने बेड से उठ कर शिप्रा का हाथ पकड़ते हुये- तुझे मेरी कसम है शिप्रा तू भारती को कुछ भी नहि बतायेगि, तुझे पता है मे उसके बगैर नहि जी सकता....

ये बात सतीश ने बहुत सीरियसली कहि थी...

शिप्रा- डोंट वरि भाई मे उसे कुछ नहि बताऊंगी...

सतीश- थँक्स फ़ॉर धिस

शिप्रा- तो अब बताओगे की ये प्रियंका कौन है,

सतीश- सही टाइम आने पर बता दूँगा... अब तू जाकर सोजा मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है, और जाते समय लाइट ऑफ कर जाना...

ओर सतीश आँखे बंद करके ऐसे रियेक्ट करता है जैसे उसे कितनी तेज नींद आ रही हो...

शिप्रा सतीश को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर रूम की लाइट ऑफ करके वो गेट को बंद करके बाहर निकल जाती है....

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11-20-2020, 12:33 PM,
#27
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
गेट के बंद होने की आवाज सुनकर सतीश तुरंत अपनी आँखे खोल देता है... और बेड से उठ कर गेट लॉक करता है, और लैपटॉप खोलके उसपर लिसा अन्न की पोर्न मूवी देखने लगता है और शिप्रा के सोने का वेट करने लगता है...

सतीश उस मूवी को देख कर काफी एक्ससिटेड हो गया था क्युकी लिसा अन्न की उम्र सोनाली के उम्र की ही थी और जो लड़का उसको घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चुत मे अपना मूसल पेल रहा था वो उसके बेटे की उम्र का लग रहा था, वो मूवी मे लिसा अन्न की जगह सोनाली को इमेजिन करने लगता है... और उस लड़के की जगह खुद को इमेजिन करते हुए अपनी माँ की कल्पनिक चुदाई का आनंद लेने लगता है....

अब सतीश इमेजिन करता है की कैसे वो अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर अपना लंड पीछे से उसकी चुत मे कर रहा था.... सतीश अपना लंड टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर पेलकर उसकी चुदाई कर रहा था और साथ ही साथ उसके चूतडो को अपने पंजे से मसल रहा था.... फिर वो उसके चूतडो पर जोर जोर से थप्पड़ मारने लगता है और थप्पड़ मार कर उसके चूतडो को लाल कर देता है उसके हर थप्पड़ पर सोनाली के मुह से दर्द भरी सिसकारी फुट्ने लगती है...

अब सतीश धक्को को रोक कर अपने हाथ बड़ा कर सोनाली के बड़े बड़े बॉब्स दबाने लगता है... और उसकी पीठ पर अपनी जीभ फेरने लगता है....

थोड़ी देर तक उसके बॉब्स के साथ खेल्ने के बाद सतीश अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाल लेता है....

सोनाली तुरंत सीधी होकर उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुसना सुरु कर देती है... और थोड़ी देर मे ही चूसकर उसके लंड को साफ़ कर देती है...

सतीश उसके मुह से लंड को निकालता है और उसे धक्का देकर पीठ के बल लिटा देता है... और उसकी दोनों टांगों से पकड़ निचे की तरफ खीचता है अब सोनाली की चुत बिलकुल बेड के किनारे पर थी और उसके पैर बेड से निचे लटक रहे थे सतीश उसके एक पैर को उठा कर सीधा कर लेता है और उसकी चुत मे अपना लंड पेलकर उसकी धमाकेदार चुदाई करने लगता है... थोड़ी देर मे वो झड़ने के करीब आता है तो वो अपना लंड उसकी चुत से निकलता है और अपना लंड का सारा माल उसके दूध और पेट् पर झाड देता है.... सोनाली उसके माल को अपने दूध से उठा कर अपने मूह मे डालकर चाट लेती है और बाकी माल को अपने दूध पर रगड़ने लगती है..... सोनाली के दूध अब चमकने लगे थे....

उधर मूवी ख़तम हुई इधर सतीश का लंड जिसे वो अपने हाथ से हिला रहा था, ने भी अपना लावा उगल दिया जोकि उसकी बेडशीट पर गिरा... पर सतीश तो आनंद मे खोया हुआ था और जब उसे होश आता है तब वो देखता है की उसका माल उसके बिस्तर पर पड़ा हुआ था... वो तुरंत अपने रुमाल से उसे साफ़ करता है पर बेडशीट पर निशान पड़ चुका था...

सतीश- शीट यार आज ही तो नई बेडशीट डालि थी और आज ही...
सतीश अपना माल झड़ने के बाद जोकि उसकी बेडशीट पर ही गिरा था को अपने रुमाल से बेडशीट साफ़ करता है और फिर अपने लौडे को साफ़ करके उसे अपने शार्ट मे वापस दाल देता है, अब सतीश थोड़ा हल्का महसूश कर रहा था वो घडी की तरफ देखता है जोक ११:३० बजा रही थी

सतीश- ४० मीनट. हो गये शिप्रा को गए हुए यानी की शिप्रा अब तक सो गई होगी....

ओ बेड से उठता है और फिर धीरे से अपना डोर खोल कर बाहर आ जाता है नीचे जाने से पहले वो शिप्रा का डोर चेक करता है जोकि अंदर से लॉक्ड था...

सतीश- लगता है सो गयी...

ओर फिर वो सीडियों से निचे उतरता है तो देखता है की उसके माँ के कमरे की लाइट ओपन थी...

सतीश- लगता है माँ चालू हो गये...

ओर वो धीरे धीरे उनके गेट की तरफ बढ्ने लगता है... जैसे ही वो गेट के नजदीक पहुचता है उसे सिसकारियों की आवाज आने लगती है...

ओर गेट पर पहुचते ही उसके सामने जन्नत का नजारा था....

उसकी माँ यानी की सोनाली बेड पर अपना सर तकिये पर टिकाये नंगी लेटी हुई थी और उसका एक हाथ अपने बॉब्स को मसल रहा था और दूसरे हाथ से वो डिलडो को अपनी चुत मे अंदर बाहर कर रही थी...

उसका बदन एकदम संगेमरमर की तरह चमक रहा था और उसके सेक्सी बदन को और उसकी एक्टिविटी को देख कर सतीश का लंड फिर से उसके शार्ट मे खड़ा हो जाता है....

उधर अब सोनाली अपना हाथ दूध से हटा कर अपनी क्लीट को सहलाने लगती है... सोनाली अपनी सिस्कियों को रोक्ने की भरपूर कोशिश करती है ताकि सतीश और शिप्रा तक उसकी आवाज न पहुचे.... पर फिर भी उसके मुह से सिसकारी फुट रही थी....

सतीश अपने लंड को बाहर निकालकर सहलाते हुये.... आह माँ आप क्या माल हो ये आपको भी नहि पता तभी आप इतना तड़प रही हो वरना आपको इतना तडपना नहि पडता अपनी प्यास बुजाने के लिये....

ह.दी.- भोसडी के यहि खड़ा अपना हिलाते रहियो तु... और तेरी माँ किसी और से चुदवा बैठेगी...

सतीश- नही यार फिर से नहि,

ह.दी.-क्या फिर से नहि बे...

सतीश- तू ऐसे बार बार मुझे डिस्टर्ब नहि कर सकता...
ह.दी.- हरामखोर मे तुझे डिस्टर्ब नहि करता हूँ बल्कि तुझे सच्चाई से और लंड की ख्वाहिश तुजसे जाहिर करता हु... और तेरा लंड इस समय इसकी चुत की गहराई नापना चाह रहा है.... और तू भोसडी के यहा अपना लंड हिला रहा है....

सतीश- तो कर भी क्या सकता हूँ सतीश....

ह.दी.- जाकर अपना लंड पेल दे अपनी माँ की चुत मे और बनजा मादरचोद और इस समय वो इतनी गरम है की बड़ी आराम से तेरा लंड ले लेगी....

सतीश- भोसडी के तू सोचता कहा से है...

ह.दी.- जहा से तू नहि सोचता...

सतीश- जरूर तू लंड से ही सोचता है... पर मुझे तेरी इस बकवास से कोई मतलब नहि...

ह.दी.- ह...

इस पहले की ह.दी. कुछ कह पता सतीश- और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर और मुझे लाइव शो देखने दे...

ओर सतीश वापस अपने लौडे को हिलाते हुए अपनी माँ का लाइव शो देखने लगता है....

सोनाली अपने एक हाथ से अपनी क्लीट को सहलाते हुये अपने दूसरे हाथ से डिलडो अंदर बाहर करती है... और धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ्ने लगती है और थोड़ी देर मे ही उसका शरीर अकड जाता है और उसकी कमर बेड से ऊँची उठ जाती है और उसकी चुत सारा पानी बहा देती है... और उसकी कमर वापस बेड से टिक जाती है उसकी चुत अभी भी रस बहा रही थी....

थोड़ी देर मे ही सोनाली बेड से उठती है और बाथरूम मे चलि जाती है... इधर पता नहीं सतीश को क्या सूझता है वो सोनाली के बाथरूम मे जाते ही अंदर उसके बेड के पास पहुच जाता है और बेड पर पड़े सोनाली की चुत के रस के पास अपनी नाक ले जाकर उसे सूंघता है...

सतीश जैसे ही सांस अंदर खीचता है उसके चुत के रस की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर तक पहुच जाती है और वो मदहोश होने लगता है

सतीश- आह... क्या मदहोश कर देणे वाली खुसबू है, ऐसी खुसबू तो मैंने आज तक नहि सुंघी....

ओर सतीश अपनी जीभ निकाल कर उस बेड शीट पर पड़े रस को चाटने लगता है, उसकी मधहोशी पल पल बढ़ती जा रही थी...

सतीश- क्या स्वाद है माँ की चुत के रस का....

ओर वो किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ निकालकर ज्यादा से ज्यादा रस बेडशीट से चाटने की कोशिश करने लगता है....

तभी उसके कान मे बाथरूम का गेट खुलने की आवाज आती है सतीश हडबडा जाता है उसके पास बाहर निकलने का वक़्त नहि था वो हड़बड़ाहट मे बेड के निचे छुप जाता है....

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11-20-2020, 12:33 PM,
#28
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश की धड़कने बहुत तेज हो गई थी वो बेड के निचे से झांक कर देखता है की सोनाली नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गई थी और फिर वार्ड रॉब से अपनी नाइटी जोकि रेड कलर की थी को निकाल कर पहन लेती है, नाइटी पूरी तरह से पारदर्शी थी और उसके थाय तक ही आ रही थी और ऊपर उसके आधे से ज्यादा दूध नाइटी से बाहर झलक रहे थे...

डर के मारे सतीश का जो लंड सिकुड गया था अब वो पूरी तरह से खड़ा हो चुका था...

ओर उधर सोनाली नाइटी पहनकर लाइट्स ऑफ करती है और नाईट लैंप ऑन करके अपने बिस्तर पर लेट जाती है...
ओर इधर बेड के निचे सतीश बेचारा बुरी तरह फास गया था...

सतीश- यार कहा फस गया आज, वो तो अच्छा हुआ माँ की नजर नहि पड़ी मुझ पर वरना आज तो लौडे लग जाने थे...
ओर अब तो मे जा भी नहि सकता जब तक माँ नहि सो जाती...

सतीश निचे पड़े पड़े ही सोनाली के सोने का वेट करने लगता है... ३० मीनट. बाद सतीश बेड के निचे से निकलता है... अभी वो बाहर की तरफ निकलने वाला था की उसकी नजर सोनाली पे पड़ती है, सोनाली पीठ के बल सो रही थी और सोटे हुए बहुत सेक्सी लग रही थी उसकी नंगी चिकनी टाँगे देख कर सतीश का मन डोलने लगता है वो वापस बेड के किनारे आकर बैठ जाता है और नाईट लैंप की हलकी रौशनी मे अपनी आधी नंगी सोती माँ को देखने लगता है....

सोनाली की नंगी चिकनी टाँगे देख कर उसका लंड पूरी तरह अकड जाता है और उसका मन सोनाली की टाँगो को छूने को मचलने लगता है....

ओर सतीश हिम्मत करके अपना हाथ सोनाली की टाँगो पर रख देता है और फिर अपने हाथ को वहि रख कर अपनी माँ की तरफ देखता है, वो गहरी नींद मे थी उसे सोता देख सतीश की हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की टांगो पर नीचे से ऊपर की तरफ बडाने लगता है अपनी माँ के मख़मली टांगो पर हाथ फिराते हुए उसके पूरे बदन मे सिहरन सी दौड जाती है वो सोनाली की टाँगो पर हाथ फिराते हुए घुटने तक ले आता है... घुटने पर अपने हाथ को रोक कर वो फिर से सोनाली की तरफ देखता है वो अभी भी नींद मे थी... अब सतीश की हिम्मत और बढ़ गई और सतीश अपने दोनों हाथ उसके पैरो पर रख कर उनके घुटनो को.सहलाने लगता है और फिर अपने होंठ उसकी नंगी टाँग पर रख कर निचे से घुटनो तक उसकी टाँग को चूमता है अब वो अपने हाथो को घुटने से आगे बड़ा कर उसकी जाँघ पर रख देता है....
उसे बहोत सुखद अनुभव हो रहा था उसकी मख़मली जाँघो को छूते हुये, सतीश अपनी माँ के शरीर की गर्मी को उनकी जाँघो से ही महसूश कर रहा था....

सतीश अपने माँ की जाँघों पर अपने होंठ रख देता है... और फिर उसे किस करते हुए ऊपर की और बढ्ने लगता है.... और ऐसा ही वो दूसरे को किश करते हुये ऊपर बढ़ता है....

अब सतीश बेड पर अपनी माँ के पैरो के दोनों और अपने घुटने टेक कर बैठे हुये था और उनकी जाँघो को सहला रहा था... अब उसके दोनों हाथ जाँघो पर फिसलते उसकी नाइटी तक पहुंच गए सतीश वहा पर अपनी माँ की चुत की गर्मी को महसूश कर सकता था यानी की उसकी माँ की चुत उससे थोड़ी दूरि पर ही थी पर बीच मे नाइटी दिवार बनकर खड़ी थी उसने हिम्मत करके नाइटी को कमर तक खिसका दिया और अब उसके सामने जन्नत का द्वार था उसकी माँ की चिकनी चुत उसकी आँखों के सामने थी जिसे वो नाईट लैंप की रौशनी मे अच्छे से देख सकता था, जिस चुत ने उसे पागल बना दिया था अब वो उसके सामने थी उसके थोड़ी ही दूरि पर....
सतीश अपने चेहरे को उसके चुत के करीब ले जाता है बहुत करीब और फिर एक गहरी सांस लेकर उसकी चुत की स्मेल को अपने अंदर खींचता है, सतीश का लंड झटके मारने लगता है...

सतीश अपनी माँ की चुत की गर्मी को अपने चेहरे पर अच्छे से महसूश कर रहा था उसका मन तो कर रहा था की वो आगे बड़कर अपनी माँ की चुत को अपने मुह मे भर ले पर वो बड़ी मुस्किल से अपने पर कण्ट्रोल करके अपने चेहरे को जाँघो के बीच से हटा लेता है और ऊपर सोनाली के चेहरे की तरफ बढ़ जाता है, सोनाली गहरी नींद मे थी सतीश उसके चेहरे को देखता है वो किसी एंजेल.की तरह लग रही थी सतीश उसके होंठो की तरफ देखता है बिना किसी लिपस्टिक के ही उसके होंठ काफी गुलाबी थे सतीश अपने पर कण्ट्रोल नही कर पाता और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही हटा लेता है...
सतीश सोनाली के गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही अपने होंठ हटा लेता है, सतीश का मन तो कर रहा था की उसके होंठो को अपने होंठो मे लेकर चुस लु पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी क्युकी उसकी इस हरकत से सोनाली जाग सकती थी...
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11-20-2020, 12:33 PM,
#29
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश सोनाली के होंठो पर २-३ छोटी किस करता है, और फिर उसकी गर्दन पर किश करते हुए नीचे आता है अब सतीश की नजर सोनाली के नाइटी से बाहर झलकते हुए चूचियों पर पड़ती है सतीश का मन सोनाली की चूचियों को नंगा देखने को मचलने लगता है, सतीश हिम्मत करते हुए उसकी नाइटी मे अपनी उँगलियाँ फसा देता है और उसकी नाइटी को चूचियों पर से निचे खिसकाने लगता है ये सब करते हुए सतीश की नजर सोनाली पर ही टीकी हुई थी...

उसकी मेहनत रंग लाती है और थोड़ी देर मे ही सोनाली की चूचियां सतीश के सामने नंगी थि, सतीश तो उन्हें देखते ही रह जाता है सोनाली की चूचियां वेल शेप्ड और एकदम गोरी थी.... इस उम्र मे भी सोनाली ने अपने फिगर को काफी अच्छे से मेन्टेन कर रखा था.... सतीश उसकी चूचियों पर अपने हाथ रख देता है अपनी माँ की मख़मली चूचियों के एहसाश से उसके मुह से सिसकि निकल जाती है....

सतीश- आह्हः माँ क्या माल हो आप, दिल तो करता है की आपकी चूचियों को अपने हांथो मे लेकर मसल दू और आपकी निप्पल्स को मुह मे लेकर चुसू और काटु....

सतीश अपनी माँ की चूचियों पर अपने हाथ हलके हलके फेरने लगता है इस समय सतीश जैसे जन्नत की सैर कर रहा था....
अब वो उसकी दोनों चूचियों पर अपने होंठो से चूमने लगता है और अपने अंगूठो से निप्पल्स को रब करने लगता है और ये सब वो बहुत ही आराम से कर रहा था और बीच बीच मे सोनाली की तरफ भी देखता की कही उसकी माँ की नींद न तूट जाए....

काफी देर तक किश करने के बाद सतीश अपनी जीभ से उसकी दोनों चूचियां बारी बारी से चाटने लगता है... और चूचियों चाटने के बाद वो सोनाली के निप्पल्स को अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगता है थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो दूसरे निप्पल को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है सतीश इतना एक्ससायटेड हो जाता है की वो भूल जाता है की वो कहा और किसके साथ ये सब कर रहा है और निप्पल को हलके से बाईट कर लेता है, उसकी इस हरकत से सोनाली कसमसा उठती है सतीश तुरंत ही बेड से निचे उतार कर उसके निचे छुप जाता है जबकि ऊपर सोनाली हलकी सी कसमसा कर अपनी करवट बदल कर लेट जाती है उसकी नींद अभी भी नहि टुटी थी ऐसा लगा था जैसे आज वो काफी समय बाद इतने सुकून की नींद ले रही हो....

बेड के निचे छुपे सतीश की तो फट कर मुह को आ गई थी उसने सोचा की आज तो उसकी वाट लगनी तय है और डैड तो उसे घर से ही निकल देंगे अगर उन्हें पता चला तो... पर जब वो काफी टाइम तक बेड पर कोई हरकत नहि देखता तो बेड के निचे से बाहर निकल कर देखता है तो उसे अपनी माँ को सोता देख सुकून मिलता है और सोनाली का चेहरा उसकी तरफ ही था और उसके दोनों चूचियां लटक रही थी... और निचे से उसकी नाइटी कमर से भी ऊपर हो गई थी.... ये सीन देख कर सतीश की आँखों मे फिर से हवस के कीड़े रेंगने लगते है, और वो उठ कर सोनाली के नंगे पैरों पर हाथ फिराते हुए ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसकी गांड तक पहुच जाता है सोनाली की मोटी गांड अब उसकी आँखों के सामने थी सतीश उसकी गांड देख कर पागल हो जाता है, मोटी और बड़ी गांडो का तो दीवाना था सतीश, वो बेतहाशा सोनाली की गांड को चूमने लगता है और उसकी गांड को हलके हाथ से मसलने लगता है... उसकी गांड को नंगी देख कर उसपर एक पागलपन सवार हो गया था और उसका लंड उसके शार्ट मे खड़े खड़े दर्द करने लगा था सतीश अपने लंड को बाहर निकाल कर सोनाली के पीछे लेट जाता है और अपना लंड उसकी गांड के पट्टो के बिच मे फसा देता है और धीरे धीरे घस्से मारने लगता है... सतीश अब जन्नत की सैर कर रहा था वो अपना एक हाथ आगे बड़ा कर उसके बॉब्स पर रख देता है और धीरे धीरे उन्हें सहलाने लगता है....
धीरे धीरे सतीश की स्पीड बढ्ने लगती है और वो अपनी कमर को तेजी से आगे पीछे करना लगता है उसका मुसल लंड गांड के बीच मे से होते हुए उसकी चुत से टकरा रहा था...
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मारते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसल रहा था
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मरते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसलने लगता है....

इधर सोनाली अपने सपने मे – आह आह उफ़्फ़फ़ डार्लिंग और जोर से हाँ ऐसे ही करते रहो बहोत अच्छा लग रहा है और जोर से दबाओ आह्ह्ह्ह....

सतीश को समझते देर नहि लगती की उसकी माँ सपने मे डैड से चुद रही है जबकि हक़ीक़त ये थी की उसका बेटा खुद उसे पेल रहा था....

सतीश अब अपनी स्पीड और तेज कर देता है उसका लंड तेजी मे उसकी गांड के बीच से होता हुआ उसकी चुत से टकरा रहा था...

अनजाने मे ही सही पर सोनाली भी इस सबका मजा ले रही थी....

अब सतीश के धक्के और तेज होने लगे थे और वो झड़ने के करीब पहुच गया था की तभी डोर बेल्ल बजती है,
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11-20-2020, 12:34 PM,
#30
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश हडबडा कर अपनी माँ से अलग होता है और तेजी से अपने शॉर्ट्स को ऊपर चड़ा कर गेट की तरफ बढ़ जाता है क्युकी वो दर रहा था की डोरबेल के बार बार बजने से उसकी माँ की आँख खुल सकती थी जोकि वो नहि चाहता था.... वो समझ गया था की गेट पर डैड हैं क्युकी इस समय किसी और के होने का तो चांस ही नहि बनता....

ओ तेजी मे गेट पर पहुच कर गेट को ओपन करता है... बाहर उसके डैड जोकि पूरी तरह नशे मे धुत्त थे और उनका दोस्त दुश्यंत रोज की तरह उन्हें छोड़ने आया था पर आज सतीश को गेट खोलता देख कर उसके सोनाली से मिलने और उसकी एक सेक्सी झलक पाने के अरमाओ पर पानी फिर चुका था वो अविनाश को सतीश को सौपते हुये- हेलो बेटा हाउ आर यु??

सतीश-ठीक हु अंकल और आप?
दुश्यंत- मि टू बेटा और आज मम्मी नहि आई तुम्हारी?

सतीश- माँ की तबियत ठीक नहि है इस्लिये आज वो जल्दी सो गयी...

फिर दुश्यंत उसको गुड नाईट बोलकर चला जाता है और सतीश अपने डैड को उनके बैडरूम मे ले आता है और एंटर होते ही देखता है की उसकी माँ ने फिर से करवट बदल ली है और अब वो पीठ के बल लेट कर सो रही थी...

सतीश अपने डैड को जोकि बेहोषी की हालत मे थे बेड पर साइड पे लीटा देता है और लाइट ऑन करके अपनी माँ के सुन्दर बदन को निहारने लगता है काफी टाइम तक अपनी माँ का चक्षु चोदन करने के बाद सतीश अपने डैड के शूज और शॉक्स उतार देता है...

ओर फिर लाइट्स ऑफ करने के बाद अपने खड़े लंड को हल्का करने के लिए वो वापस बेड पर आ जाता है और अपनी माँ के पैरो को थोड़ा सा फैला देता है अब सोनाली की चूत खुल कर उसके सामने आ जाती है.... सतीश देर न करते हुए उसकी चुत पर एक किस्स करता है और फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके चुत पर रख कर मिशनरी पोजीशन मे उसके ऊपर आता है पर उसकी बॉडी पर अपना वेट नहि ड़ालता और ऊपर से ही उसकी चुत पर घिसाई करने लगता है थोड़ी देर मे ही सोनाली की चुत पानी बहाना सुरु कर देती है और सतीश को धक्के लगने मे आसानी हो जाती है इस समय उसका मजा दोगुना था क्युकी वो अपनी माँ की चुत पर लंड से धक्के लगा रहा था और उसका बाप उसकी माँ के बगल मे लेटा हुआ था इस बात से एक अलग ही रोमाँच आ रहा था उसके अंदर.... और वो इसको ज्यादा बरदास्त नहि कर पाता और झड़ने के करीब पहुच जाता है झड़ने से पहले ही वो अपने लंड का टोपा सोनाली की चुत मे अंदर कर देता है और टोपे के चुत मे घुसते ही वो अपना सारा रस उसमे उडेल देता है....

हल्का होने के बाद सतीश अपना टोपा जोकि चुत के होंठो मे फसा हुआ था को बाहर निकलता है और उसे अपनी माँ की थाय पर रगड कर साफ़ करके अपने शार्ट मे दाल कर रूम बाहर निकल जाता है और अपने कमरे मे चला जाता है उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की उसने ये सब किया तो किया कैसे....

ओ इस बात के बारे मे ज्यादा न सोचते हुए फुल नुड हो जाता है और जानबूझकर अपना दरवाजा खुला छोड़ देता है ताकि अगर उसका शक सही है की उसकी माँ ने उसका लौडा देख लिया है तो वो फिर से देखेंगी... वो अपने मोबाइल मे सुबह ६ बजे का अलार्म लगता है ताकि वो उठ कर अपनी माँ के एक्सप्रेशन देख सके सोने की एक्टिंग करते हुये....

सतीश बेड पर लेट जाता है और थोड़ी देर मे ही नींद के आग़ोश मे चला जाता है....
सूबह जब सोनाली की आँख खुलती है तो वो अपनी हालत देख कर शॉकेड रह जाती है, वो अपने पास अपने पति को लेटा देख कर....

सोनाली अपने आप से बुड़बुड़ाते हुये- ये किस टाइम आ गए इन्होने तो आने को मना कर दिया था इस्लिये मे स्लीपिंग पिल्स लेकर सो गई थि, जरूर इन्होंने मेरी ये हालत होगी क्युकी अपने आप तो बॉब्स नाइटी से बाहर आ नहि सकते....

सोनाली अब अपनी चुत की तरफ देखति है उसे चुत के निचे की चादर पर पड़े निशान दिखाइ देते है....

सोनाली अपने आप से- लगता है कल मेरी चुत ने काफी पानी बहाया है पर ये निशान तो वीर्य के लग रहे है, जरूर अविनाश ने ट्राय करा होगा और हर बार की तरह चुत की गर्मी से बाहर ही अपना माल झाड़ दिया होगा, इस नशे की लत ने तो इन्हे कही का नहि छोडा पहले हम साथ मे कितना एन्जॉय करते थे और अब तो ये आते ही बिस्तर पर लेट जाते है और कभी ट्राय भी करते है तो कुछ करने से पहले ही झड जाते है....

सोनाली बिस्तर से उठ कर बाथरूम मे फ्रेश होने चलि जाती है... आज उसने काफी अच्छी नींद ली थी जिसका असर उसके चेहरे से पता चल रहा था वो काफी फ्रेश लग रही थि, थोड़ी देर मे ही सोनाली फ्रेश होकर वाशरूम से बाहर निकलती है और सबके लिए टी बनाने के लिए किचन मे चलि जाती है....
ईधर सतीश के रूम मे ६ बजे अलार्म बजता है, अलार्म की आवाज से सतीश की नींद तूट जाती है और वो उठ कर अलार्म बंद करता है और फिर बिस्तर पर लेट जाता है, सतीश बेसब्री से अपनी माँ का इन्तजार कर रहा था... और थोड़ी देर मे ही उसके इन्तजार की घडी ख़त्म होने वाली थी क्युकी सोनाली कप्स मे चाय डालकर उसके रूम की तरफ ही बढ़ रही थी.....
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