Maa Sex Story आग्याकारी माँ
11-20-2020, 12:34 PM,
#31
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश के रूम के बाहर पहुच कर सोनाली गेट खोलने ही वाली थी की उसे कल वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और वो रुक जाती है, अब उसके मन मे खलबली मची हुयी थी एक तरफ तो वो सोच रही थी की उसे नॉक करना चाहिए डोर पर..... वहि दुसरी तरफ उसका मन अंदर जाकर उस हसीन नज़ारे के दर्शन करने को कह रहा था...

सोनाली असमंजस की स्थिति मे थि, की तभी उसे कल वाला सीन याद आ जाता है जब उसने सतीश के लंड को देखा था, कितना भयानक लग रहा था वह, कितना बड़ा और मोटा था जिसकी चुत मे भी वो जाता उसे तो जन्नत नसीब हो जाती...

सोनाली अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश कर रही रही पर उसे अपनी जिस्म की आग के आगे झुकना ही पडता है...

सोनाली अपने मन मे- ये जरुरी तो नहि की एक दिन उसका लंड बिना कपड़ो के देखने को मिल गया तो हर बार मुझे वो बिना कपड़ो के.देखने को मिल जायेगा.... पर हो भी सकता है की वो बिना कपड़ो के देखने को मिल ही जाए......

ओर वो बिना गेट पर नॉक करे रूम मे एंटर हो जाती है अंदर सतीश नंगा लेते हुए सोने की एक्टिंग कर रहा था और हलकी सी आँखें खोक कर गेट की ही तरफ देख रहा था....

अपनी माँ को आया देख कर ही उसका लंड और भी अकड जाता है. ...

उधर सोनाली को ये लगता है की सतीश सो रहा है और वो बेखोफ टकटकी लगाये सतीश के लौडे को देखने लगती है...

अपनी माँ को ऐसे लंड घुरता हुआ देख कर उसका लंड और झटके मारने लगता है...

सोनाली की चुत उस मदमस्त लौडे को देख कर पानी बहाने लगती है, सोनाली जिसके एक हाथ मे ट्रे थी अपने दूसरे हाथ से अपनी चुत को अपने नाइटी के ऊपर से रगड देती है.....

सतीश उसकी इस हरकत से चौक जाता है उसे तो यकीन ही नहि होता की उसकी माँ अपने बेटे के लौडे को देख कर इतनी गरम हो गई है की उसे अपनी चुत को शांत करने के लिए मसलना पड़ रहा है....

तभी सोनाली को पता नहि क्या सूझता है की वो पलट कर सतीश का गेट लॉक करती है और फिर सतीश की तरफ बढ़ जाती है, सोनाली ट्रे को बेड के पास पड़े टेबल पर रखती है और फिर सतीश के पैरों के बीच मे आकर बैठ जाती है और उसके लौडे को देखने लगती है.... उसके चेहरे के एक्सप्रेशन पल प्रति पल बदल रहे थे जिन्हे सतीश अच्छे से देख सकता था.....

सोनाली को सतीश के इतने करीब उसकी सतीश के लंड को पास से देखने की प्रबल इच्छा ले आई थी....

सोनाली सतीश के लंड के इतने करीब थी की उसके लंड की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर चलि गई थी....

सोनाली अपने ऊपर से कण्ट्रोल खोती जा रही थी वो अपना हाथ आगे बड़ा कर सतीश के लंड को अपने हाथ मे ले लेती है, सोनाली की इस हरकत से सतीश की बॉडी काँप उठती है बड़ी मुस्किल से वो अपनी सिस्कियों पर रोक लगाता है...

सतीश की बॉडी मे हुए कम्पन से सोनाली डर के अलग हो जाती है और सतीश के चेहरे की तरफ देखति है और उसे सोता देख उस थोड़ी संतुस्टि होती है... और वो ट्रे उठाकर वापस किचन की और चल देती है...

उसे अपने आप पर यकीन नहि हो रहा था की कैसे वो अपने बेटे के साथ ये सब कर सकती है... उसे अपने पर घिन भी आ रही थी और कभी वो उसके बारे मे सोच सोच कर गरम हो रही थी....

ओ दोबारा चाय बना कर कप्स मे दाल कर सतीश के रूम की तरफ बाद जाती है.... सतीश के रूम के बाहर पहुच कर वो डोर नॉक करती है अंदर सतीश जोकि अभी तक अपनी माँ की.हारकत से रोमाँचित था उठ कर एक शार्ट ड़ालता है और थोड़ी देर वेट करता है जब तक सोनाली उसके गेट पर २-३ बार और नॉक नहि करति.... शार्ट मे उसका लंड टेंट बनाये हुए साफ़ पता चल रहा था वो गेट खोलता है और सोनाली को गुड मॉर्निंग बोलता है... सोनाली उसे कप देती है, सोनाली तिरछी नजरो से सतीश के शार्ट मे बने तम्बू को देख रही थी... और सतीश भी उसकी हरकतो को नोट कर रहा था...

सोनाली उसे चाय देकर तेजी से शिप्रा के रूम की तरफ बढ़ जाती है और सतीश के चेहरे पर विजई मुस्कान आ जाती है...
शिप्रा के रूम मे जाकर वो शिप्रा को जगाती है और उसे चाय देकर फ्रेश होकर नीचे आने को बोल देती है और नीचे किचन मे जाकर उनके लिए नाश्ता तैयार करने लगती है, पर अभी भी वो सतीश के लौडे के बारे मे ही सोच रहा थी,

सोनाली अपने मन मे- इतनी सी उम्र मे कितना बड़ा हो गया है इसका पेनिस मुझे तो यकीन ही नहि हो रहा की मैंने जो देखा वो रियलिटी थी या फिर कोई भ्रम्... इतनी सी उम्र मे ही ये तो बड़ी से बड़ी औरत को मजा देणे लायक हो गया है... ये तो खेली खाई रण्डियों को भी चिखा दे फिर मे तो इतने समय से चूदी नहि हूँ और चूदी भी हूँ तो ५ इंच के लौडे से ये तो मेरी चुत का भोसडा बना देगा....

ओर सोनाली की चुत रस बहाने लगती है... सोनाली अपने हाथ से अपनी चुत सहलाते हुये- हाय ये तो बेटे के लंड के बारे मे सोच कर ही पानी बहा रही है, तो जब वो मेरी चुत मे जायेगा तो इसका क्या हाल होगा....

सोनाली अपने मन मे ही- छि छितू ये ऐसा सोच भी कैसे सकती है वो भी अपने बेटे के बारे मे तुझे शर्म करनी चाहिए अपने आप पर सोनाली भला कभी कोई माँ कभी अपने बेटे के बारे मे ऐसा सोचती है कहि....

सोनाली नाश्ता तैयार करके बाहर आकर कुरसी पर बैठ जाती है... और अपने विचारो मे खो जाती है उसे समझ नहि आ रहा था की क्या गलत है और क्या सही है

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11-20-2020, 12:34 PM,
#32
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सोनाली के अंदर अजीब सी कस्मकश चल रही थी... जबकि दूसरी तरफ सतीश बहुत खुश था उसे ऐसा लग रहा था जैसे अब उसकी माँ की चुत मे जलद ही उसका लंड होगा... और रात को लेट सोने के कारण वो वापस अपने बिस्तर पर आकर सो जाता है ...

इधार शिप्रा तैयार होकर नीचे आती है तो अपनी माँ को गुमसुम बैठा देख कर उसकी तरफ बढ़ जाती है और पीछे से उसके गले मे बाँहें दाल कर उसके गाल पर किस करती है उसकी इस हरकत से सोनाली अपनी सोच से बाहर आ जाती है और शिप्रा को देख कर एक फिकी सी स्माइल देती है....

शिप्रा- क्या हुआ माँ क्या सोच रही थी???

सोनाली- कुछ नहि बेटा बस ऐसे ही.. सतीश नहि आया अभी तक्...

शिप्रा-क्या माँ आप जानती हो न की भाई कितना आलसी है, कभी कोई काम टाइम से नहि करता...

सोनाली- उसकी बुराई करना बंद कर और जा उसे बुला कर ले आ मे तुम लोगो का नाश्ता लगा देती हु....

शिप्रा सतीश के रूम की तरफ बढ़ जाती है और डोर खोलते ही वो जो देखति है उसे अपनी आँखों पर विश्वासश ही नहि होता.... वो ग़ुस्से मे सतीश की तरफ बढ़ती है और उसे झिझोड़ कर जगाते हुये-

हद है भाई तू अभी तक सो रहा है कॉलेज नहि जाना क्या....

सतीश- उह्ह्ह सोने दे ना...

शिप्रा-उठ भाई काफी लेट हो गए है ओलराडी... जल्दी उठ दुष्ट...

सतीश- मे कॉलेज नहि जाउँगा आज....

शिप्रा-तो मुझे तो छोड़कर आ....

सतीश- तू ऑटो करके चलि जा... और अब मुझे डिस्टर्ब मत करियो...

शिप्रा मन ही मन सतीश को गाली देते हुए निचे आ जाती है...

सोनाली- सतीश कहा है??

शिप्रा- वो सो रहा है...

सोनाली-तूने उठाया नहि उसे...

शिप्रा- उठाय था पर वो कह रहा है की वो आज कॉलेज नहि जायेगा...

सोनाली-ये लड़का भी ना... चल तू नाश्ता करले....

शिप्रा नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल जाती है...
ओर सोनाली अपने हस्बैंड को उठा कर उसके लिए ब्रेकफास्ट बनाने चलि जाती है...

अविनाश थोड़ी ही देर मे नहा धोकर बाहर आ जाता है सोनाली, अविनाश को नाश्ता लगा देती है और अपने लिए भी नास्ता लगा कर अविनाश के साथ बैठ कर ही नाश्ता करने लगते है....

अविनाश नाश्ता करके अपने हैंड वाश करके रूम मे चला जाता है... और सोनाली सब बर्तन समेट कर उसे ढ़ोने के लिए दाल कर रूम मे चलि जाती है, रूम मे अविनाश ऑफिस जाने की तय्यारी कर रहा था की सोनाली रूम मे पहुचती है....

सोनाली- अविनाश मुझे तुमसे कुछ बात करनी है...

अविनाश- देखो सोनाली मेरे पास इस समय तुम्हारी फालतू की बातो के लिए टाइम नहि है....

सोनाली- देखो अविनाश मे तुम्हारे रोज शराब पिने की आदत से तंग आ चुकी हु... तुम इसे छोड़ क्यों नहि देते मेरे लिए नहि तो बच्चों के लिए ही छोड़ दो...

अविनाश टाय की क्नॉट लगाते हुये- देखो सोनाली आज मेरी बहोत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और मे नहि चाहता की मे तुमसे बहस करके अपना मूड ऑफ करु....
सोनाली- पर....
अविनाश- हम इस टॉपिक पर कभी और बात करेंगे...
ओर अविनाश अपना बैग लेकर ऑफिस के लिए चल देता है...
ओर सोनाली का तो मूड ही ऑफ हो जाता है उसे समझ नहि आ रहा था की अविनाश को हो क्या गया है कहा वो दोनो.एक दूसरे को इतना प्यार करते थे की दोनों मे कोई किसी की बात को नहि टालते थे और जैसे जैसे अविनाश का बिज़नेस आसमान की उचाइयां छूने लगा वो धीरे धीरे अपनी फॅमिली से दूर होता गया और जब से उसे ड्रिंक की लत लगी तब से तो जैसे वो अपने फॅमिली से काफी दूर हो गया था.....

सोनाली अभी अपनी सोचो मे ही खोई हुई थी की डोरबेल बजती है, सोनाली डोर की तरफ चल देती है, सोनाली डोर खोलती है बाहर बसंती खड़ी हुई थि, वो अंदर आकर गेट बंद करती है सोनाली का सर दर्द करने लगा था अभी हुई घटना के कारण, वो बसंती को सारा काम बता कर अपने कमरे मे जाकर लेट जाती है... और थोड़ी ही देर मे वो सो जाती है...

बसन्ती पहले किचन का काम निपटाती है फिर निचे सभी रूम और बारामदे माँ झाड़ू पोचा करने के बाद, ऊपर के रूम की सफाई करने चल देती है...

बसन्ती सतीश के रूम मे सफाई करने के लिए एंटर होती पर हर रोज की तरह आज सतीश कॉलेज नहि गया था और न ही उसने अब तक बिस्तर छोडा था,बसन्ती अपने काम मे मसगुल हो जाती है जब वो बेड के पासा झाड़ू मार रही होती है तभी उसकी नजर सतीश के शार्ट मे बने तम्बू पर पड़ती है.... शार्ट मे बने विशाल तम्बू को देख कर बसंती को अपनी आँखों पर यकीन ही नहि होता, वो अपना एक हाथ अपने मुह पर रखती है

बसन्ती- हे भगवान् इतना बडा.. भला इतना बड़ा भी किसी का हो सकता है...

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11-20-2020, 12:34 PM,
#33
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
ओर बसंती की चुड़क्कड़ चुत पनिया जाती है.... बसंती के अंदर सतीश के लंड को.देखने की प्रबल इच्छा होने लगती है इस्लिये वो सतीश को हिला कर चेक करती है की वो गहरी नींद मे सो रहा है की नही.... सतीश रात को लेट.सोने के कारन गहरी नींद मे था....

बसन्ती हिम्मत करके उसके पैरों की तरफ आती है और उसके लंड को शार्ट के ऊपर से पकड़ कर ही उसका नाप लेने लगती है... उसकी चुत पानी बहाये जा रही थी.... शार्ट के ऊपर से सहलाने के बाद वो अपने दोनों हाथो की उंगलियो को सतीश के शार्ट मे फसा कर निचे खिसका देती है और ये सब करते हुए उसके चेहरे पर जरा भी शिकन नहि थी... अब सतीश का लंड शार्ट से आजाद होकर खुली हवा मे आकर झटके मारने लगता है... बसन्ती का तो मुह खुला का खुला रह जाता है वो आगे बढ़ कर लंड को अपने हाथो मे ले लेती है.....
बसन्ती- आअह्ह्ह्ह कितना लम्बा और मोटा है ये....एक न एक दिन मे जरूर इस लौडे को अपनी चुत की सैर करवाउंगी...

ओर वो अपने हाथ को लंड पर आगे पीछे करके उसकी मुट्ठ मारने लगती है और अपनी साडी, पेटीकोट सहित ऊपर करके अपनी चुत की आग को ठण्डा करने की कोशिश करने लगती है....

लंड की मुट्ठ मारने से लंड के टोपे पर प्रिकम की.बूद छलक आती है.... उस बूँद को देख कर बसंती उसके लंड पर झुक कर उस बूँद को अपनी जीभ से उसके टोपे से चाट कर साफ़ देती है.... प्रिकम का टेस्ट चखने के बाद उसे पता नहि क्या होता है की वो सतीश के लंड को अपने मुह मे भर लेती है और उसे चुसना चालु कर देती है, बसंती ने सोच लिया था की जब इसे अपनी चुत मे लेना ही है तो आज ही क्यु.ना ट्राय किया जाए क्युकी आज सोनाली भी सो रही है तो उसे डिस्टर्ब करने वाला घर मे कोई नहि है.... और ऐसा मौका उसे दोबारा नहि मिलेंगा.... और इतना तो भरोसा था ही उसे अपने जिस्म पर की कोई भी लड़का और आदमी या बुड्ढा जिसका खड़ा होता है वो उस जैसे माल को चोदने से कभी मना नहि करेंगा....
बसन्ती सतीश का लंड चुसना स्टार्ट कर देती है.... सतीश को अपने लंड पर एक कसाव और गिला गिला सा अनुभव होता है और उसकी आँख खुल जाती है वो तेजी से बेड पर उठ कर बैठ जाता है उसकी इस हरकत से उसका लंड बसंती के मुह से बाहर निकल आता है पर उसपर बसंती के दाँतो की रगड लग जाती है, एकदम हुई इस घटना से बसंती चौक जाती है और सतीश की तरफ देखति है सतीश उसे हैरत की नजरो से देख रहा था और अपने लंड जिस पर दाँतो की रगड के कारन दर्द होने लगा था को सहला रहा था....

बसन्ती आगे बढ़ कर बेड पर बैठ जाती है और उसके लंड को सतीश के हाथो से अपने हाथ मे लेकर उसे सहलाने लगती है सतीश उसे ये सब करते देख रहा था.... बसंती उसको अपनी तरफ देखता पाकर एक कामुक स्माइल देती है और उसके स्माइल देख कर सतीश भी मुस्कुरा देता है और उस पल को एन्जॉय करने लगता है थोड़ी देर तक हाथ से मुट्ठ मारने के बाद बसंती उसके लंड को अपने मुह्ह मे भर लेती है और इसी के साथ सतीश के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है.... अब बसंती उसके लंड पर अपना मुह आगे पीछे करने लगती है और बीच मे अपनी जीभ लंड के टोपे पर फिराती और टोपे के छेद को कुरेदने की कोशिश करती सतीश वापस पीठ के बल लेट जाता है और इस आनंद मय पल को एन्जॉय करने लगता है.... बसंती अपनी पूरी कोशिश के बावजूद सतीश का पुरा लंड मुह मे नहि ले पा रही थी पर जैसे सतीश का लंड चुस रही थी वैसा अब तक किसी ने भी चूसा था... सतीश के मुह से एक के बाद एक सिसकारी फुट रही थी...

उसे तो यकीन ही नहि हो रहा था की कभी उसकी मॉर्निंग इतनी हसीं भी हो सकती है और कभी कोई उसे इस तरह से नींद से जगायेगा....
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11-20-2020, 12:35 PM,
#34
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश अपनी आँखे बंद कर लंड चूसाईं का मजा ले रहा था.... जबकि बसंती उसके लंड को बहुत ही मुस्किल से आधे से ज्यादा मुह मे लेकर चुस रही थी... बसंती लंड को मुह से निकालती है और उस पर ढेर सारा थुक दाल कर उसे अपने हाथ को लंड पर आगे पीछे करने लगती है पता नहि बसंती को सतीश के गोटे देख कर क्या सूझता है वो सतीश के लंड की मुट्ठ मरते हुये, दूसरे हाथ मे उसकी बॉल्स ले लेती है और उन्हें मसलने लगती है, सतीश तो अब मस्ती के चरम पर पहुच गया था थोड़ी देर तक उसकी बॉल्स को मसलने के बाद वो अपना सर निचे झुकाती है और उसकी एक बॉल को अपने मुह्ह मे भर लेती है और उसे चुस्ने लगती है साथ ही साथ वो अपने हाथ से लंड को भी आगे पीछे करती रहती है.... एक बॉल को अच्छे से चुस्ने के बाद वो दूसरे को अपने मुह मे भर कर चुसना स्टार्ट कर देती है... सतीश के मुह से सिसकारियां फुट्ने लगती है....

सतीश- आह्हः ऐसे ही चुसो... आह बहोत अच्छा लग रहा है....

बसन्ती थोड़ी देर तक बॉल्स को चुस्ने के बाद उन्हें आजाद करती है और फिर अपना मुह उसके लंड पर झुका कर उसकी टोपी पर निकल आये प्रिकम को अपनी जीभ से चाट लेती है और फिर अपनी जीभ से उसके लंड को ऊपर से निचे और फिर निचे से ऊपर तक चाटने लगती है साथ ही साथ अपने हाथ मे उसकी गोटियों को.भर कर मसलने लगती है.... बसंती लंड को पूरी तरह अच्छे से चाट चाट कर साफ़ कर देती है और फिर उसके लंड को अपने मुह मे भर लेती है और उसको चुस्ने लगती है पर साथ ही साथ उसके खुट्टो को भी अपने हाथ से मसलती रहती है.... सतीश अब अपनी चरम सीमा पर था वो बिस्तर ऊपर उठ कर बैठ जाता है और अपने दोनों हाथ बसंती के सर पर ले जाकर उसके बालो को कस कर पकड़ लेता है... और फिर उसके सर को अपने लंड पर तेजी से आगे पीछे करने लगता है और हर बार वो अपना ज्यादा से ज्यादा लंड बसंती के मुह्ह मे पेल रहा था जिससे बसंती को काफी परेशानी हो रही थी उसके मुह से लार और थुक टपक कर निचे बेडशीट पर गिर रहा था... अब सतीश झड़ने के करीब था और वो कण्ट्रोल भी खो चुका था, वो अब अपबा पूरा लंड बसंती के मुह मे उतार देता है सतीश का लंड उसके गले तक उतर गया था जिससे उसका गला चोक हो रहा था और उसे सांस लेने मे भी परेशांनी हो रही थी बसंती अपने दोनों हाथ उसकी जाँघ पर टीका कर अपना मुह वापस खींचने की कोशिश करती है पर वो सतीश के आगे पूरी तरह से असफ़ल थी... सतीश अब अपने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर उसे वापस अंदर पेल देता वो अपना लंड मुह मे ऐसे दाल रहा था था जैसे वो चुत चोद रहा हो.... अब सतीश की नसे फूलने लगती है और उनसे लावा निकलने को ही होता है... सतीश अपना पूरा लंड उसके गले तक उतार देता है और उसका लंड अपना सारा माल उडेल देता है जिससे उसका सारा माल गले से होता निचे उतार जाता है... अपना सारा माल निकलने के बाद सतीश वापस बिस्तर पर ढेर हो है उसकी आँखे बंद थी उसे आज जितना मजा लाइफ मे कभी नहि आया था...

जब्कि लंड के मुह से निकलते ही बसंती को जैसे फन्दा लग जाता है और वो खाँसने लगती है.... और गहरी गहरी साँसे लेकर नार्मल होने की कोशिश करने लगती है...

नॉर्मल होने के बाद बसंती सतीश से- तू तो बड़ा बेरहम है रे.. अपना इतना बड़ा मुसल मेरे मुह मे दाल दिया तूने... आज तो तूने मुझे मार ही डाला था रे...

सतीश अपनी आँखे खोल कर बसंती की तरफ देखता है और फिर उठ कर बैठ जाता है...

सतीश- अरे कहा आंटी भला मे आपको मार सकता हूँ वो भी तब जब आप मेरा इतना ख्याल कर रही हो...

बसन्ती सतीश के लंड पर अपने हाथ फिरते हुये- तेरा काम तो हो गया पर मेरी मुनिया तो प्यासी ही रह गयी...

सतीश बसंती के कन्धो को पकड़ कर उसके चेहरे के पास अपना चेहरा ले जाता है और उसके कान को अपने होठो मे भर कर चुस लेता है.....

सतीश कान को छोड़ कर उसके कान के पास मुह ला कर- उसकी चिंता आप मत करो देखना अब मे कैसे आपका और आपकी मुनिया का ख़याल रखता हु, पर अगर माँ आपको ढूढ़ते हुए आ गई तो....

बसन्ती- उनकी चिंता मत कर तू वो सो रही है...

ओर इतना सुन कर सतीश अपनी जीभ निकल कर बसंती के कान मे दाल कर फेरने लगता है...

बसन्ती-इसशहह...
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11-20-2020, 12:35 PM,
#35
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
ऐसेही ही वो दूसरे कान के साथ करता है.... उसे भी अपने मुह मे लेकर चूसता है और फिर अपनी जीभ उसके कान मे घुमाने लगता है... फिर वो अपना चेहरा बसंती के चेहरे के सामने ले आता है दोनों एक दूसरे की नजरो मे झाकते है फिर सतीश अपने चेहरा आगे की और बड़ा कर बसंती के होंठो पर अपने होंठ रख देता है और दोनों एक दूसरे के होठो को.चुसने चाटने लगते है... सतीश बसंती के होंठ को अपने होठो मे रख कर चुस्ने लगता है बसन्ती भी उसके होंठो को चुस्ने लगती है... फिर सतीश अपनी जीभ बसंती के मुह मे दाल देता है और बसंती तुरंत ही उसे अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगती है और उसकी जीभ का सारा रस पिने के बाद वो अपनी जीभ सतीश के मुह मे दाल देती है सतीश भी तुरंत उसकी जीभ को अपने मुह मे भर कर उसका रस चुस्ने लगता है.... ५ मिनट की किसिंग के बाद वो दोनों एक दूसरे से अलग होते है और अपनी साँसों पर कण्ट्रोल करने लगते है....

सांसो के कण्ट्रोल मे आते ही सतीश अपनी बनियान उतार देता है.... और बसंती को बेड पर धक्का देकर लीटा देता है और उसके पैरों के दोनों तरफ अपने घुटने टीका कर उसके ऊपर आ जाता है और झुक कर उसके होंठो को चुस्ने लगता है फिर गालो को चूमता हुआ उसके गले को चुमते हुए निचे आने लगता है..

निचे आकर वो बसंती के पल्लू को उसकी छातियों से हटा देता है उसने एक डीप कट का ब्लाउज पहना हुआ था, जिसमे से उसके उभार छलक रहे थे और वो ब्लाउज मे काफी कैसे हुए लग रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे वो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाएंगे...

अब वो उसके बॉब्स जोकि ब्लाउज से बाहर थे को चूमने लगता है फिर सतीश तेजी से उठ कर बैठ जाता है और उसके ब्लाउज के हुक को एक के बाद एक खोलते चला जाता है...

बसन्ती सतीश का उतावलापन देख कर मुस्कुरा देती है....

पर सतीश तो ब्लाउज को अनहुक करने मे लगा था... और थोड़ी देर मे ही बसंती के ब्रा मे कैद बॉब्स उसके सामने आ जाते है...

बसन्ती- लगता है तुम्हे काफी एक्सपीरियंस है ब्लाउज के हुक खोलने का, इतनी जल्दी तो हम भी नहि खोल पाते जितनी जल्दी तुमने खोल दिया...

सतीश बसंती की बात सुन कर कहता कुछ नहि, बस मुस्कुरा देता है....

ओर बसंती के ब्लाउज को साइड मे करके उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही पकड़ कर मसल देता है....

अब सतीश बसंती के दूध को ब्रा के ऊपर से ही मसल रहा था उसके मसलने से बसंती की निप्पल खड़ी हो जाती है... सतीश उसकी निप्पल को अपनी ऊँगली और अँगूठे मे लेकर मसल देता है....

बसन्ती के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है और वो अपनी सिसकारी रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतो तले दबा लेती है....

सतीश- आंटी अब इस ब्रा को तो उतार दो...

बसन्ती उठ कर बैठ जाती है और एक कामुक मुस्कान के साथ- तुम ही उतार दो..

सतीश अपने हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जाता ही और उसको अनहुक कर देता है और थोड़ी देर मे ब्रा को उसके जिस्म से अलग करके फेक देता है....

ओर फिर बसंती के होंठो को.किस्स करते हुए वो उसे वापस लीटा देता है, किस करने के साथ ही सतीश उसके ४० की चूचियों को मसलने लगता है.... फिर किस तोड़ कर निचे आता है और उसकी चूचियों को देखने लगता है.... बसंती की सांवली चूचियां थी और उस पर भूरा निप्पल जोकी उसकी चूचियों की सुंदरता को बड़ा रहा था....

सतीश एक चूचि को किस करने लगता है और फिर उसे जीभ निकालकर चाटने लगता है, साथ ही साथ वो दूसरी चूचि को अपने हाथ से रगड रहा था... फिर वो निप्पल पर अपनी जीभ रगडता है और उसे अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है और काटने लगता है....

बसन्ती की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी वो अपने हाथ उसके बालो मे फिरा रही थी...

फिर सतीश उस चूचि को छोड़ कर दूसरी को चूमने चाटने लगता है... और फिर निप्पल को मुह मे लेकर उसे चुस्ने और काटने लगता है....

बसन्ती- आआह्ह्ह्ह, सतीश बाबू बहुत मजा आ रहा है... ूउम्मम्महहह ऐसे ही और जोर से चुसो....

सतीश अब उसकी चूचियों को उसके पेट् पर किस करते हुए निचे बढ़ने.लगता है और फिर उसकी नाभि पर पहुच कर उसमे जीभ दाल उसे चुस्ने लगता है.... थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो निचे उसके पैरों के पास आता है... और उसकी साड़ी उसके पेटीकोट सहित उसे ऊपर उठता है...बसन्ती अपनी कमर ऊपर उठा देती है और सतीश उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके पेट् तक कर देता है बसंती की सफ़ेद पेन्टी अब उसके आँखों के सामने थी जोकि चुत के रस से भीग कर उसकी चुत से चिपक चुकी थी सतीश उसकी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिरा देता है... बसंती के मुह से सिसकारी निकल पड़ती है....

सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....

सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...
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11-20-2020, 12:35 PM,
#36
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....
सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...
बसन्ती- क्यों तुम्हे पसंद नहीं?
सतीश- नहि मुझे क्लीन चुत पसंद है...
बसन्ती- कल तुम्हे क्लीन ही मिलेगी...
सतीश का मन अब चुत चाटने का नहि हो रहा था झांटो की वजह से और उसका लंड भी अब दर्द करने लगा था.... वो उठ कर आगे जाता है और अपना लंड बसंती के होंठो पर रख देता है... बसंती उसकी इच्छा समझ जाती है और वो तुरंत सतीश के लंड को मुह मे ले लेती है... थोड़ी देर तक लंड चुसवाने के बाद सतीश उठ कर उसकी टाँगो के बिच आ जाता है, बसंती अपने पैर फेला लेती है... सतीश अपना लंड उसकी चुत पर रगडता है और लंड को उसकी.क्लिट पर मसलता है... फिर वो अपने लंड को उसकी चुत के छेद पर टीका देता है और बसंती की आँखों मे देखते हुए एक जोर का झटका देता है उसका लंड चुत को फैलाता हुआ आधा अंदर चला जाता है... बसंती दर्द से तड़प उठती है क्युकी उसकी चुत ने इतना मोटा और लम्बा लंड पहले कभी नहि लिया था... और चुत गिली होने के बावजूद उसका लंड काफी कसा हुआ अंदर जा रहा था उसके मुह से चीख़ निकल जाती है....
बसन्ती-एआईईईई मा.... आराम से सतीश बाबू बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्हह
पर सतीश उसकी एक न सुनते हुए अपना लंड वापस खींचता है और एक जोर का झटका मारता है, इस धक्के से उसका पूरा लंड बसंती की चुत मे चला जाता है और उसके मुह से चीख़ निकलती उससे पहले ही वो अपने होंठ उसके होंठो पर रख देता है... बसंती की चीख़ सतीश के मुह मे ही घुट जाती है और बसंती उसके पीठ को कस कर पकड़ अपने नाख़ून गडा देती है..... आज उसकी चुत वहा तक खुल गई थी जहाँ तक उसे कोई नहि खोल पाया था...

सतीश थोड़ी देर तक बिना हिले डुले ही उसके होंठ चूसता रहता है.... और जब वो नार्मल हो जाती है तो धीरे धीरे अपना लंड आगे पीछे करने लगता है....

थोड़ि देर मे बसंती उसे अपनी कमर हिला कर रिस्पांस देणे लगती है... सतीश समझ जाता है की अब उसे भी मजा आ रहा है...

ओर वो उसके होठो को छोड़ कर उठ जाता है और उसके चूचियों को अपने हाथ मे लेकर मसलते हुए धक्के लगाने लगता है...

बसन्ती- आज तो तुमने मेरी चुत ही फाड़ दि... पता है कितना दर्द हुआ मुझे...

सतीश उसे छोडते हुये- क्या आंटी तुम तो पहले ही काफी बार चूदी हुई हो, आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो...

बसन्ती अपनी कमर उछलते हुये- चूदी हूँ पर इंसान के लन्ड से गधे के लंड से आज पहली बार चुद रही हूँ ना इस्लिये दर्द हो रहा है....

सतीश- अच्छा मे गधा हु... तो अब मे दीखाता हूँ की गधे कैसे चोदते है अपनी गधी को....

ओर सतीश अपने लंड को टोपे तक बाहर निकल कर वापस अंदर पेल देता है और अपने धक्को की स्पीड बड़ा देता है.... बसंती की सिसकियाँ पूरे रूम मे गूँजने लगती है....

सतीश उसके निप्पल्स को अपनी उँगलियों से मसलना शुरू कर देता है... और साथ ही साथ धक्के लगाता रहता है...

सतीश अपना लंड बाहर निकाल लेता है, बसंती जिसकी आँखे मस्ती मे बांध थी वो अपनी आँखे खोल कर आश्चर्य से उसकी तरफ देखति है... सतीश अपना लंड उसके मुह के करीब ले आता है वो तुरंत लंड को मुह मे भर कर चुस्ती है थोड़ी देर बाद सतीश अपना लंड उसके मुह से निकलता है और उसे गधी बन्ने को कहता है...... बसंती घोड़ी की पोजीशन मे आ जाती है और सतीश उसके पीछे आकर उसकी साड़ी जोकि निचे आ गई थी उसको उठा कर उसकी पीठा पर दाल देता है.... अब उसकी बड़ी गांड सतीश के आँखों के सामने थि, बसंती की गांड साँवली कलर की थी और सोनाली से काफी बड़ी थि, सतीश उसके पीछे से उसकी चुत पर अपना लंड टिकाता है और उसे एक ही बार मे अंदर घुसेड देता है.... बसंती की सिसकारी निकल पड़ती है... सतीश अब उसके चूतडो पर एक के बाद एक कई थप्पड़ मारता है.... और उसे तेजी मे चोदता भी जा रहा था... कमरा सिसकारियों से गुंज रहा था और सतीश उसकी कमर को अपने हाथ से पकडे ताबाड तोड़ धक्के मारे जा रहा था.... उसका लंड बसंती की चुत गिली होने के बावजूद काफी कसा हुआ अंदर बाहर हो रहा था.... दोनों ही जन्नत की सैर कर रहे थे, सतीश जब अपने लन्ड को बाहर निकाल कर वापस अंदर ड़ालता है तो बसंती के चुत्तड़ से उसका शरीर टकराने के कारन धप्प धप्प की आवाज हो रही थी.... सतीश तेजी से बसंती क चोदे जा रहा था....
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11-20-2020, 12:35 PM,
#37
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
बसन्ती- आह्ह्ह्ह सतीश बाबू मे झड़ने वाली हु....आह सतीश मैं गयी.......

ओर इसी के साथ बसंती की चुत पानी छोड़ देती है और वो निढाल होकर अपना सर बेड पर टिका देती है..... पर सतीश के धक्के तो थमने का नाम ही नहि ले रहे थे वो १० मिनट तक बसंती को कन्टिन्यूसली चोदता है, अब सतीश का लावा भी उसके गोटियों मे बाहर निकलने को उफान मारने लगा था.... और सतीश अपने धक्को की स्पीड बड़ा देता है.....

सतीश- आआह्ह्ह्हह आंटी मे गया.....

ओर इसी के साथ वो अपना लंड चुत मे घुसेड कर अपना सारा लावा अंदर उडेल देता है..... और निढाल होकर बसंती के ऊपर ही गिर जाता है....

थोड़ि देर मे बसंती नार्मल होकर सतीश को ऊपर से हटा कर उठती है और सतीश के होठ पर किस करके अपने कपडे सही करती है और जाने लगती है....

सतीश- अब कब दोगी आंटि...

बसन्ती- जब टाइम मिलेगा तब, वैसे भी अब ये सब तुम्हारा ही है....

ये बात बसंती अपनी चुत पर हाथ फिराते हुए कहती है और एक कामुक मुस्कान देकर रूम से निकल जाती है और बाकी बचे कमरो की सफाई करने लगती है.... सतीश भी बेड से उठ कर बेड शीट जोकि उनकी रासलीला को बयान कर रही थी को धुलने दाल देता है... और नई बेड शीट बिछा कर फ्रेश होने चला जाता है...
सतीश फ्रेश होकर निचे आ जाता है, उसे बहुत जोर की भूक लगणे लगी थी और लगती भी क्यों न आखिर उसने मेहनत भी तो काफी करी थी... दो-दो बार अपना पानी निकला था उसने और अब उसके पेट् मे चुहे कुदने लगे थे वो सीधे सोनाली के रूम मे जाता है.... सोनाली अभी तक सो रही थि, और सतीश उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहि समझता वो रूम से निकालकर किचन की तरफ बढ़ जाता है और किचन मे जाकर अपने लिए नाश्ता लगा कर बाहर खाने की टेबल पर बैठ कर पेट् पूजा करने लगता है...

अभि वो खाना ही खा रहा था की उसकी नजर सीडियों से नीचे उतरती बसंती पर पड़ती है जोकि ऊपर की सफाई करके आ रही थी.... बसंती की नजर भी सतीश पर पड़ जाती है और वो उसे देख कर मुस्कुरा देती है, सतीश भी उसकी स्माइल के जवाब मे मुस्कुरा देता है..... सतीश खाना खा रहा था पर अब उसकी नजर बसंती पर ही टीकी हुई थी.... बसंती भी ये बात अच्छे से जानती थी सतीश नाश्ता करके बर्तन किचन मे रखता है और हाथ ढो कर सोफ़े पर आकर बैठ जाता है और बसंती की तरफ देखते हुए अपना लन्ड सहलाने लगता है, बसंती ये देख कर एक कामुक स्माईल.देति है और निचे उतर कर सीधे सतीश के पास आती है....

बसन्ती- मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो सतीश बाबु, क्या आज से पहले मुझे कभी देखा नहि है क्या???

सतीश- देखा तो बहुत बार पर जब आज देखा तो पता चला की मैंने तो कभी तुम्हे देखा ही नहि और जो आज देखा है तो अब तो तुमसे.नजर ही नहि हट रही है....

बसन्ती अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुराते हुये- अच्छा आज ऐसा क्या देख लिया...?

सतीश- अजी ये पूछिए की क्या नहि देखा... तुम्हारा ये भरा हुआ जिस्म, ये बड़े बड़े मम्मे, और ये भारी गांड देख कर तो मे ये सोच रहा हूँ की आज तक तुम पर मेरी नजर क्यों नहि पडी.... और अब जब पड़ी है तो मन कर रहा है की तुम्हे नंगा करके पूरे दिन तुम्हारी चुत मे लंड डाले तुम्हे चोदता रहु....

बसन्ती सतीश की बाते सुनकर गरम होने लगती है और उसका चेहरा अपनी तारीफ सुनकर शर्म से लाल.हुअ जा रहा था....

बसन्ती- क्या सतीश बाबू आप भी ना... झूटी तारीफ़ करते हुए आपको शर्म नही आती...

सतीश- झूटी तारीफ़??? तुम्हे ये झूटी तारीफ लगती है... अगर लगती है तो ये देख...

ओर सतीश अपने शार्ट को निचे खिसका देता है और उसका साँप दनदनाता हुआ बाहर आ जाता है......

सतीश- देखो जब से तुमको देखा है बैठने का नाम ही नहि ले रहा, क्या अब भी तुम्हे लगता है की मे झुट बोल रहा हु...

बसन्ती अपने मुह पर हाथ रखते हुये- हाय राम ये फिर से खड़ा हो गया, अभी आधा घंटा पहले ही तो मैंने इसको शांत करा था... पर ये तो फिर से तैयार हो गया, ये कभी बैठता भी है की नहि....

सतीश- जब सामने आप जैसा कड़क माल होगा तो ये कैसे बैठेगा भला... मेरा मन तो अब एक और राउंड लगाने का कर रहा है...

ओर वो बसंती की तरफ बढ़ता है , बसंती पीछे हटते हुये...

बसन्ती- अभी नहि सतीश, तुम्हारी मम्मी उठ सकती है किसी भी समय इस्लिये आज नहि अब कल करना जो जी चाहे...

सतीश अपने लंड की तरफ इशारा करते हुये- फिर इसका क्या करू मैं....

बसन्ती-वहि जो रोज करते थे...
ओर बसंती हंस देती है...

सतीश- मजाक उडालो हमारी हालत का...
ओर सतीश मुह फैला कर बैठ जाता है...

बसन्ती- ओह्ह्ह क्या हुआ मेरा बाबू रूठ गया...

पर सतीश कोई जवाब नहि देता....

बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है... तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा.... और मुझे घर भी जाना है

सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.
Reply
11-20-2020, 12:35 PM,
#38
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है... तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा.... और मुझे घर भी जाना है

सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.
बसन्ती- ठीक है मे इसे मुह मे लेकर चूसूंगी पर केवल चूसूंगी और इससे ज्यादा कुछ भी नहि...

सतीश एकदम खुश होते हुए उठ जाता है और अपना शार्ट निचे करने लगता है... बसंती उसे रोकते हुये- यहां नही..

सतीश- तो फिर कहा...

बसन्ती- तुम्हारे रूम में....

ओर इतना कहकर वो ऊपर की तरफ बढ़ जाती है... सतीश भी उसके पीछे पीछे चल देता है......

दोनो उसके कमरे मे घुस जाती है और सतीश कमरे मे आकर गेट लॉक कर देता है और उसे अपनी बाँहों मे लेकर अपने बेड पर लीता देता है और खुद उसके ऊपर लेट कर उसे किस करने लगता है...

किस ख़त्म होते ही बसंती उसको धक्का देकर अपने ऊपर से हटा देती है और बैठते हुये- ये चादर भी गन्दी करनी है क्या? पुराणी चादर कहा है?

सतीश उसे इशारे से बता देता है, बसंती चादर उठा कर- अब बैठे रहोगे या हटोगे भी...

सतीश खड़ा हो जाता है बसंती नै चादर हटा कर पुराणी चादर बिछा देती है....

सतीश तुरंत अपना शार्ट उतार कर बेड के किनारे से बैठ जाता है, उसका लंड झटके खा रहा था...

बसन्ती उसके पैरों के बिच मे बैठ जाती है और उसके लंड को अपने हाथो मे लेकर उसकी मुट्ठ मारने लगती है... और थोड़ी देर तक मुट्ठ मारने के बाद लंड को अपने मुह मे ले लेती है और उसे चुसना शुरू कर देती है...

सतीश अपने हाथ पीछे बेड पर टीका देता है और लंड चूसाई का मजा लेने लगता है...

बसन्ती उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुस रही थि, वो कभी उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फिराती और उसके लंड को अपने मुह मे लेकर लॉलीपॉप की तरह चुस्ने लगती है...

बसन्ती भी इस चूसाई से गरम होने लगी थी...

सतीश अब अपने हाथो से उसके बालो को पकड़ कर कुछ बड़े स्ट्रोक मारता है और फिर उसके सर को पीछे करके अपना लंड बसंती के मुह से बाहर निकालता है, बसंती उसकी तरफ हैरत भरी निगहाओं से देखति है सतीश बेड से उठता है और बसंती को खड़ा करके उसे पीठ से झुका देता है बसंती अपना हाथ बेड के किनारे पर टीका देती है उसे समझ आ गया था की अब क्या होने वाला है पर वो उसका विरोध नहि करती क्युकी उसकी चुत को भी लंड चाहिए था......

सतीश उसे झुका कर उसकी साड़ी को पेटीकोट सहित उसकी कमर पर दाल देता है... और अपने लंड क उसकी चुत के छेद पर टीका कर एक धक्का देता है... उसका आधा लंड चुत मे था, सतीश अब दूसरा धक्का मरता है और अपना लंड चुत की गेहराई मे उतार देता है...

बसन्ती- हायःआहः सतीश बाबू कितना बड़ा है तुम्हारा... आअह्हह्ह्....और जोर से चोदो....हहह्म्म ऐसे ही...

सतीश उसकी कमर को पकड़ कर ताबाड तोड़ धक्के लगाने लगता है.... और एकबार फिर से रूम का माहोल गरम हो गया था....

सतीश का लंड बसंती की बच्चेदानी पर टक्कर मार रहा था... सतीश और बसंती तो जैसे जन्नत मे थे...

सतीश- आह्ह्ह्ह.... बसंती इतनी उम्र मे भी तेरी चुत कितनी टाइट है.... आअह्हह्ह्... मजा आ गया....

बसन्ती- तो कर दे न तू ढीली.... ऊऊफफफफ.... आह्हः... तेरा लंड मेरी बच्चेदान से टकरा रहा है.... कितना बड़ा है रे तेरा.... आह्ह्ह्हह

ओर सतीश धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.... और फिर २० मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सतीश और बसंती एक साथ झड जाते है...

सतीश बसंती की पीथ से टिक कर अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगता है... और फिर अपना लंड निकाल कर उसके पेटीकोट से पोछ देता है... बसंती की चुत से सतीश और बसंती का मिला जुला रस निचे टपकने लगता है...

बसन्ती अपनी चुत को अपने पेटीकोट से पोछ कर अपनी साड़ी निचे करती है... और फिर निचे पड़े माल को गन्दी चादर से साफ़ करके उसे ढ़ोने के लिए दाल देती है... और नई चादर बिछा कर सतीश को किस करके...
बसन्ती- अब तो खुश्...

सतीश-बहुत...

फिर बसंती उसके रूम से निकलती है और निचे उतर कर अपने घर के लिए चलि जाती है.... और सतीश भी अपने कपडे चेंज करके निचे आ जाता है.... उसकी माँ अभी भी सो रही थी... अब उसे चिंता होने लगती है, क्युकी उसकी माँ कभी भी दिन मे नहि सोती थी और आज तो उसे सोते हुए भी काफी टाइम हो गया था...
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11-20-2020, 12:36 PM,
#39
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
ओ उसके कमरे मे जाता है और उसे आवाज लगाता है... आवाज पर कोई रिस्पांस न देणे से वो उसको हिला कर जगाने के लिए जैसे ही उसके हाथ पर अपना हाथ रखता है वो चौक जाता है, सोनाली का हाथ काफी तप रहा था वो उसके माथे पर हाथ रख कर चेक करता है उसका माथा बहुत तेज तप रहा था सोनाली को बहुत तेज बुखार था और उसका जिस्म बुखार की वजह से तप रहा थ, सतीश अपनी माँ की हालत देख कर बहुत परेशान हो जाता है और तुरंत अपने फॅमिली डॉक्टर को कॉल करता है, और किचन मे जाकर एक बाउल मे पानी ले आता है और अपने रुमाल को पाणी मे भिगो कर उसे निचोडने के बाद वो सोनाली के माथे पर रख देता है.... और नवरत्न आयल से उसके तलवो की मालिश करने लगता है... और बिच बिच मे वो रुमाल को वापस भिगा करा उसके माथे पर रख देता है...

सोनाली को अब थोड़ा आराम मिला था और सतीश के दोबारा गिला कपडा रखने पर उसकी आँखे खुल जाती है... और वो उठने की कोशिश करती है पर सतीश उसे उठने से रोकते हुये- आप लेती रहो मोम, सतीशने डॉक्टर अंकल को बुलाया है वो आते ही होंगे....

सोनाली- पर....

सतीश-पर वर कुछ नहि आप लेटे रहिये चुपचाप और सतीश वापस उसके पैरों की तरफ आकर उसके तलवो.की मालिश करने लगता है....

ओर सोनाली उसे ये सब करते देखति रहती है
सोनाली सतीश को ही देख रही थि, उसे सतीश की आँखों मे अपने लिए केयर और प्यार दोनों नजर आ रहे थे और उसे सतीश पर बहुत प्यार आ रहा था पर इस प्यार मे लस्ट नहि था और न ही सतीश के मन मे इस समय कोई गन्दा ख्याल था अपनी माँ को लेकर, वो तो बस अपनी माँ के दर्द से दुखी था और उसको ख़तम करने की जी तोड मेहनत कर रहा था...

सोनाली- रहने दे सतीश अब मे सही हु...

सतीश- नहि माँ जब तक डॉक्टर अंकल नहि आ जाते तब तक मे आपको नहि छोडूंगा....

तोड़ि देर मे ही डोर बेल्ल बजती है, सतीश सोनाली को लेटे रहने की हिदायत देकर डोर खोलने के लिए चल देता है.... बाहर डॉक्टर अंकल थे सतीश उनके हाथ से बैग लेकर उन्हें अंदर सोनाली के रूम मे ले जाता है.....
डोक्टर सोनाली का चेकउप करते है....
सतीश- अंकल क्या हुआ है मम्मी को......
ड़ोक्टर- कुछ नहि बेटा नार्मल सा बुखार था, लगता है आज कल तुम्हारी मम्मी कुछ ज्यादा ही टेंशन लेती है, जिसके कारन इन्हे ये बुखार हुआ है मे दवाई लिख देता हूँ तुम ले आना पर अगर इन्होने चिंता करना नहि छोडी तो इनकी तबियत और भी ज्यादा सीरियस हो सकती है इस्लिये इन्हे खुश रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है.......

सतीश- उसकी चिंता आप मत करो अंकल मे जानता हूँ की माँ को कैसे खुश रखना है...

ड़ोक्टर उसे दवाई लिख कर देता है और उसे समझा देता है की कब और कैसे उसे दवाई सोनाली को खिलानी है...

सतीश डॉक्टर को बाहर तक छोड़ कर आता है और फिर सोनाली को आराम करने को बोल कर वो दवाई लेने के लिए निकल जाता है...

थोड़ि देर मे ही वो दवा लेकर आजाता है और किचन से हल्का नाश्ता और एक गिलास जूस लेकर सोनाली के पास आ जाता है... और उसे उठा कर बेड से टीका कर बैठा देता है और फिर अपने हाथो से ही उसे नाश्ता कराता है, और नाश्ते के बाद उसे मेडिसिन दे देता है सोनाली पानी से मेडिसिन लेती है और गिलास को सतीश को पकड़ा देती है सतीश उस गिलास को टेबल पर रख कर उसे जूस का गिलास उठा देता है....

सोनाली उसके हाथ से गिलास लेते हुये- क्या बात है आज बड़ी केयर कर रहा है अपनी इस बूढी माँ की...........

सतीश- मे आपकी केयर नहि करूँगा तो भला कौन करेगा आखिर आप मेरी इतनी प्यारी मम्मी हो..... और रही बात बूढ़ी होने की तो ये आप अपने दिमाग से निकाल दो की आप बूढ़ी हो, आपके सामने तो जवान लड़किया भी फेल है और इस उम्र मे भी आपने अपनी बॉडी को काफी फिट रखा है.... अगर आप एक इशारा कर दो तो लड़को की लाइन लग जाएगी.....

सोनाली अपनी प्रसंसा सुन कर खुश हो जाती है और उसके कंधे पर धीरे से हाथ मारते हुये- धत पागल कहि का कुछ भी बोल देता है.... भला मे कहा टक्कर ले लुंगी आज की लड़कियों से....

सतीश- अरे नहीं माँ मे सही कह रहा हूँ आपकी बॉडी इतनी फिट है की जो कोई देख ले देखता ही रह जाए और ऊपर से आपकी सुन्दरत, आपका गोरा बदन आपकी सुंदरता मे ४ नहि बल्कि ४० चाँद लगा देता है.....

सोनाली को अपने बेटे के मुह से अपनी तारीफ सुन्ने मे बहुत रोमाँचित सा फील हो रहा था पर वो अपने एक्सप्रेशन को छुपाते हुये- तुझे अपनी माँ से झुट बोलते हुए शर्म नहि आति, अपनी बूढ़ी का मजाक उड़ा रहा है तू उसकी झूटी तारीफ करके....
सतीश अब खिसिया गया था,- अरे कौन कहता है आपसे की आप बूढ़ी हो गई हो, अभी इस उम्र मे आप इतनी सेक्सी लगती हो की जब आप रोड पर गुज़रती हो तो सब की नजर आप पर ही टिक जाती है, चाहे बच्चा हो या बूढ़ा सब आपको पलट पलट कर देखते है.... आप इतनी उम्र मे भी बहूत हॉट एंड सेक्सी लगती हो, जवानो की तो छोड़ ही दो बुड्ढों का भी आपको देख कर खड़ा हो जाता है....

अनायास ही सतीश के मुह से अपनी माँ के लिए हॉट और सेक्सी जैसे सब्द निकल गए थे और अपनी आखिरी लाइन बोलकर तो उसकी फट गई थी..... और यही हाल सोनाली का भी था वो अपने बेटे के मुह से अपने लिए हॉट एंड सेक्सी जैसे वर्ड सुन कर शर्म से पानी हुए जा रही थी.... और सतीश की आखिरी लाइन ने तो उसकी चुत को भी गिला कर दिया और उसके गाल टमाटर की तरह लाल हो गए थे....

थोड़ी देर तक रूम मे काफी शान्ति हो जाती है किसी को समझ ही नहि आ रहा था की क्या बोले और कैसे बोले....

सतीश- आप आराम करो मे शिप्रा को ले आता हु....

ओर इतना कह कर सतीश शिप्रा को लेने चला जाता है....

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11-20-2020, 12:36 PM,
#40
RE: Maa Sex Story आग्याकारी माँ
जबकि दूसरी तरफ सुबह जब शिप्रा कॉलेज पहुचती है तो वो देखति है की प्रिंस कॉलेज गेट पर अपने फ्रेंड्स के साथ खड़ा हुआ बातें कर रहा था....

प्रिन्स शिप्रा को आते हुए देख कर अपने दोस्तों से- देख बेटा सतीशने नया पंछी फास लिया, क्या गजब का माल है ये शिप्रा दिल तो करता है की यहि इसे नंगी करके इसकी चुत मे अपना लंड डाल दु....

प्रिन्स का दोस्त- अबे साले तुझे पता भी है ये कौन है, ये सतीश की बहन है और अगर उसे पता चल गया ना तो वो तेरी गांड फाड़ देगा....

प्रिन्स उसके गिरेबान को पकड़ कर- साले तमीज़ से बात कर वरना यहि तेरी माँ चोद दूँगा... और मुझे पता है की ये सतीश की बहन है तभी तो मे इसे अपने जाल मे फसा रहा हु, ताकि सतीश को भी पता चले की उसने कितने गलत बन्दे से पन्गा लिया है, इसको एक बार चोद लु फिर देखियो कैसे सतीश को अपने जूति तले रखुंगा....

उसका दूसरा दोस्त- भाई बहोत बढ़िया प्लान बनाया है तूने अगर ये फस गई तो सतीश को कण्ट्रोल करने की चाबी तेरे हाथ मे और फिर से कॉलेज पर अपना राज होगा..... पर भाई जब तू इसका रस चख ले तो थोड़ा हमे भी दे दियो चखने को....

प्रिन्स- है है ह.... सला आ गये अपनी औकात पर चिंता मत कर इसे तो मे बाजारू रंडी बना दूंगा इसकी वीडियो बना कर नेट पर दाल दूंगा तब उस हरामी को पता चलेगा की प्रिंस से टकराने का अन्जाम क्या होता है.... चलो अब तुम लोग खिसको वो यहा पहुचने ही वाली है....

शिप्रा जैसे ही प्रिंस के पास पहुचती है वो उसे एक बड़ी सी स्माइल देता है... पर शिप्रा उसकी और देखति भी नहि और उसके पास से होकर गुजर जाती है... प्रिंस की तो नीचे के बाल ही सुलग जाते है वो उसके पीछे आवाज लगाते हुए बढ़ता है..... और उसके पास आकर उसके हाथ को पकड़ लेता है, शिप्रा पलट कर उसकी तरफ देखति है..

प्रिन्स- क्या हुआ शिप्रा, नाराज हो क्या मुझसे, मे देख रहा हूँ की तुम मुझे इग्नोर मार रही हो, और मेरे आवाज देणे.पर भी तुमने नहि सुना....

शिप्रा अपना हाथ छुड़ाते हुये- देखो प्रिंस मुझे तुमसे कोई बात नहि करनी और आइन्दा मुझे रोक्ने की कोशिश मत करना वरना मुझसे बुरा कोई नहि होगा....

ओर शिप्रा आगे बढ़ जाती है, प्रिंस वहि खड़े उसे आवाज लगाते रहता है पर वो नहि रुकति..... प्रिंस के दोस्त जोकि ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे उसके पास आ जाते है.... और उसका एक दोस्त उसके कंधे पर हाथ रखते हुये- भाई चिड़िया तो उड़ गई फुर्र्र से.... अब तुम क्या करोगे?

प्रिन्स- बहुत पर निकल आये है साली के जरूर सतीश ने इसे मेरे खिलाफ भड़काया होगा.....

उसका दोस्त- भाई सतीश तो आपकी सोच से भी एक कदम आगे निकला अब आप उससे कैसे बदला लोगे.... और आपके हाथसे तो इतना मस्त आइटम भी निकल गया....

प्रिन्स- निकल के जायेगा कहा हमारे हाथ से हमे इस चिड़ियाँ के पर कुतरने ही पडेंगे.....
सतीश शिप्रा को लेने कॉलेज पहुचता है तो देखता है की शिप्रा बाहर कड़ी किसी ऑटो का वेट कर रही थि, सतीश उसके आगे बाइक लगा देता है

सतीश- लिफ्ट चाहिए????

शिप्रा उसे देख कर खुश हो जाती है और बाइक पर बैठते हुये- क्या भाई आज तुम्हे अपनी बहन की याद कैसे आ गई??

सतीश बाइक आगर बड़ा देता है- याद आ गई मतलब...

शिप्रा- मतलब ये की आज तुम मुझे लेने कैसे आ गये, आज से पहले तो कभी नहि आये...

सतीश- खाली बैठा था सोचा की तुझे ही ले आउ...

शिप्रा उसकी कमर मे हाथ दाल कर उसे चिपकते हुये- थँक्स भाई.......

ऐसे ही ही नॉर्मली बात चित करते हुए दोनों घर आ जाते है.... घर आते ही सतीश को अपनी माँ से की गई बाटें ध्यान आ जाती है...

सतीश मन मे- यार पता नहि माँ के सामने कैसे मे वो सब कह गया, पता नहि क्या सोच रही होंगीं मेरे बारे में.... कैसे जाउँगा मे उनके सामणे....

जब्कि दूसरी तरफ सतीश के जाने के बाद सोनाली के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है, सतीश की बाटें रह रह कर उसके जेहन मे गुंज रही थी... उसे तो अभी भी यकीन नहि हो रहा था की उसके बेटे को वो हॉट और सेक्सी लगती है....

सोनाली- मेरा बेटा मेरे बारे मे ऐसी सोच रखता है??? उसने ये सब क्याजुअली कह दिया था या फिर.... कहि वो मेरे बारे मे कुछ गलत सोच तो नहि रखता?? कही वो मेरी तरफ अट्रॅक्ट तो नहि हो रहा??? वो कह रहा था की मुझे देख कर जवान तो क्या बूढों का भी खड़ा हो जाए और जवान तो वो भी है इसका मतलब कही उसका मुझे देख कर खड़ा तो.... नहि... नहि ये मे क्या सोच रही हूँ मे उसकी माँ हूँ भला कोई बेटा अपनी माँ के बारे मे ऐसा सोच सकता है??? ये मेरा ही दिमाग है जो पता नहि क्या क्या गंदे विचार रख रहा है
ओर फिर वो ऐसे ही अपनी सोचो मे खो जाती है....
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