Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
10-12-2018, 01:16 PM,
#31
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
डीएनडी के बटन प्रेस करने का बाद मैं अपने कमरे मे चली आई. थोड़ी देर सोचती रही कि आख़िर ये क्या हुआ मुझ से. कैसे मैने बिना सोचे अपने आप को किसी और औरत के सामने नंगा कर दिया.

क्या मैं एक सस्ती रंडी की तरहा बर्ताव कर रही थी. मुझे अपने से थोड़ी घिन हो गयी. ये अलग बात है कि किसी ने नहाते हुए मुझे बुलाया और मैने इत्तेफ़ाक़ से किसी और नंगी औरत को देखा जैसे साना और अपनी सास को लेकिन यहाँ माजरा दूसरा था. मैं इन्ही ख़यालों मे गुम थी कि डोर पर नॉक हुआ और इनायत की आवाज़ आई, मैने दरवाज़ा खोल कर उसको अंदर आने को कहा. मैं अब भी उलझन मे डूबी हुई थी. मुझे इस तरहा खोया हुआ देख कर इनायत ने मेरे हाल के बारे मे पूछा. दर असल इनायत और शौकत एक हफ्ते बाद का रिज़र्वेशन करवा कर आए थे. अब दिन चढ़ आया था और हमफिर बाहर चलने के लिए तैयार थे. मैने अब सलवार कमीज़ पहना था. कमीज़ काफ़ी लो कट था, ये इतना लो कट था कि ज़्यादा झुकने पर मेरे निपल्स भी नज़र आ सकते थे. मैने यहाँ आकर ब्रा पहेनना छोड़ दिया था. कमीज़ वाइट रंग की थी और ट्रॅन्स्ल्यूसेंट थी यानी अगर इसपर पानी पड़े तो मेरे ब्रेस्ट सबके सामने नुमाया हो जाए. बारिश को कोई मौसम ना था इसलिए मैने ये पहेनना सूटेबल समझा. हम ने एक रेस्टोरेंट के खाना खाया. मैं शौकत के आगे बैठी थी और ताबू के बगल मे. ये एक राउंड टेबल था. शौकत की नज़रे मेरे क्लीवेज पर थी और मुझे ना जाने क्यूँ उसके इस तरहा मेरे क्लीवेज पर नज़र गढ़ाना मुझे रोमांच से भर रहा था. 

इनायत की नज़रें ताबू पर थी, ताबू भी ना जाने उससे नज़रो ही नज़रो मे क्या खेल रही थी. हम ने खाना खाया और एक पार्क मे आकर बैठ गये. ये एक फॅमिली पार्क था. यहाँ बड़े बड़े फूल के पौधे और हरी हरी ग्रास सबको भा रही थी. यहाँ हम लोग थोड़ी ही देर बैठे थे. हम लोग बातों मे इस कदर खोए थे कि कब बादल छा गये, कब अंधेरा हो गया और कब बारिश होने लगी पता ही नही चला. मौसम किस तरहा बदल जाता है, ये यकीन नही होता. हम लोगो ने दौड़ कर टॅक्सी करनी चाही, हम लोगो काफ़ी देर सड़क पर खड़े रहे और मैं बिल्कुल भीग गयी थी, मुझे बाद मे ख़याल आया कि मेरी कमीज़ बिल्कुल ट्रंपारेंट हो गयी है और मेरे बूब्स अब बिकुल सॉफ झलक रहे हैं. 

इनायत मे मुझे काम मे इसके बारे मे बताया. वो मुस्कुरा कर बोला कि क्यूँ शौकत को छेड़ रही हो तो मैने उससे कहा कि मुझे इसका ख़याल ही नही था. फिर एक टॅक्सी आकर रुकी और शौकत टॅक्सी ड्राइवर के साथ आगे की सीट पर बैठ गया.

ताबू मेरे साइड मे थी और मैं बीच में, इनायत मेरी साइड पर था. हम लोग बातें करने लगे. शौकत पीछे मूड कर बात कर रहा था और मेरे सीने पर बार बार चोरी छिपे नज़र रखे था.
थोड़ी ही देर में हम होटेल पहुँच गये. मैने जल्दी से जाकर नहाना ठीक समझा और मैं टॉवेल मे ही बाहर आ गयी. मुझे ऐसे देखकर इनायत के अरमान जाग गये. मैने उससे कहा कि नहा लो और कपड़े चेंज कर लो वरना सर्दी लग जाएगी. वो भी नहाने चला गया. जब वो नहा कर आया तो वो बिल्कुल नंगा ही चला आया. उसने मुझे पकड़ कर मेरी टॉवेल खेंच ली और मुझे नंगा बिस्तर पर फेंक दिया. मैं भी मूड मे थी, शौकत की नज़रो ने मुझे सिड्यूस कर दिया था.इनायत मेरी टाँगो के बीच में आकर मेरी नज़रो मे नज़रे डाले देख कर बोला.

इनायत:"मेरी जान आज तो तुम किसी बिजली की तरहा लग रही थी, शौकत तो बिल्कुल तुम्हारी चूचियो पर ही नज़रे गढ़ाए था"
मैं:"और तुम आज दिन भर ताबू पर नज़रे जमाए थे, क्यूँ क्या हुआ दूसरी औरत देख कर फिसल रहे हो क्या" ये बात मैने मुस्कुरा कर कही
इनायत:"नहीं मेरी जान, लेकिन वो थोड़ा अट्रॅक्ट कर ही लेती हैं पर ना जाने क्यूँ उसमे वो बात हरगिज़ नही है जो तुममे है"
मैं:"टॉपिक बदल रहे हो, ह्म्म्म्म म पकड़े गये तो बीवी की तारीफ़ शुरू कर दी"
इनायत:"नही मेरी जान ऐसा नही है, तुम तो जानती हो मुझे"
मैं:"हां जानती तो हूँ, वैसे वो चीज़ ही कुछ ऐसी है"

फिर मैने सुबह हुए इन्सिडेंट का पूरा डिस्क्रिप्षन उसको दे दिया. उसको यकीन नही हुआ. मैने उससे कहा कि अभी शायद शौकत भी ताबू की चूत मार रहा होगा.

इनायत:"तुम्हे कैसे पता"
मैं:"क्यूंकी बरसात मे शौकत मेरी भी चूत मारता था,उसको बरसात बड़ी रोमॅंटिक लगती है"
इनायत:"ह्म्म्मा तो मेरी जान दोनो के राज़ जानती है "
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10-12-2018, 01:16 PM,
#32
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
मैं:"हां, बिल्कुल अगर तुमको यकीन नही हो रहा तो उसको फोन करके पूछ लो"
इनायत:"चलो ठीक है लेकिन पता कैसे चलेगा कि वो वाकई ताबू की चूत मार रहा है"
मैं:"हाआँ ये तो है, वो फोन पर बात करते वक़्त रुक जाएगा, मैने ताबू को पूँछ लेती हूँ, वो मुझे शायद बता दे"
इनायत:"मैं चाहता हूँ कि मेरा लंड तुम्हारी चूत मे हो तब तुम उससे बात करो"
मैं:"इससे क्या होगा"
इनायत:"इससे ताबू को भी मालूम हो जाएगा कि मैं तुम्हारी चूत मार रहा हूँ"
मैं:"गुड आइडिया"

मैने शौकत को फोन लगाया और स्पीकर ऑन कर दिया, इस वक़्त मैं पीठ के बल लेती थी और शौकत मेरी टांगे हवा मे उठाए मेरी चूत मार रहा था.मेरी मूह से हाफने की आवाज़ आ रही थी.

शौकत ने फोन उठाया.
शौकत:"हेलो, आरा क्या बात है सब ठीक तो है"
मैं:"उम्म हाआँ सब्बब्ब उम्म ठीक है"
शौकत:"तुम हाँफ क्यूँ रही हो क्या बात है"
मैं:"उफ्फ शौकत कुछ नही सब ठीक है, तुम क्या कर रहे हो"
शौकत:"कुछ नही सो रहा था"
मैं:"अच्छा और ताबू वो भी सो रही है क्या"
शौकत:"नही वो मॅगज़ीन पढ़ रही है"
मैं:"उम्म्म अककच्छाअ..... तुम बदल गये हो "
शौकत:"क्यूँ"
मैं:"बरसात के मौसम मे सोने लग गये हो, मुझे यकीन नही होता"
शौकत:"तुम्हे जब मालूम है तो पूंछ क्यू रही हो"
मैं:"मैने सोचा हम दोस्त हैं और दोस्त किसी से कोई बात नही छिपाते
शौकत:"और तुम क्या कर रही हो"
मैं:"वही जो तुम कर रहे हो, बरसात के मज़े ले रही हूँ वो भी गहराई से उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इनायत धीरे"

मेरे मूह से ये निकल गया अब शौकत को यकीन हो गया कि मैं क्या कर रही हूँ वो थोड़ी देर चुप रहा फिर बोला

शौकत:"आज भी तुम्हे धीरे धीरे पसंद है क्यूँ"
मैं:"नही मुझे फास्ट पसंद है लेकिन इतना फास्ट भी,, नही पसंद की उम्म्म आआवाआज़ भी उम्म्म ना पहुँचे"
शौअकत:"अच्छा बोलो क्यूँ फोन किया"
मैं:"ताबू से बात करनी है"
उसने फोन ताबू को दे दिया, ताबू भी शायद समझ चुकी थी क्यूंकी शौकत ने फोन स्पीकर पे डाला था, वाय्स थोड़ी कट सी हो रही थी, मैने अंदाज़ा लगाया.

ताबू:"हेलो, यार कभी टाइम देख लिया करो"
मैं:"अच्छा, चूत मे जब लंड हो तो किसी से बात करना मना है क्या ,हाहाआहा"
ताबू:"तुम्हे कैसे मालूम"
मैं:"तुम्हारे मिया कभी मेरी भी बरसात मे चूत लिया करते थे इसलिए अंदाज़ा लगाया"
ताबू:"अच्छा , जब मालूम है तो फोन काटो ना, क्यूँ कबाब मे हड्डी बन रही हो"
मैं:"मेरी जान तुम्हारी चड्डी मे हड्डी नही गोश्त का टुकड़ा है , हहहाहहाहा"
ताबू:"बड़ी बेशर्म हो, और तुम्हारी चूत मे क्या है"
मैं:"मेरे मिया का लॉडा और क्या"
ताबू:"तो एंजाय करो, अपने मिया का मोड़ा लॉडा"
मैं:"क्यूँ तुम्हे भी चाहिए क्या मोटा लॉडा"
ताबू:"नही मेरे लिए मेरे मिया का ही काफ़ी है,अच्छा फोन कट करो, बेस्ट ऑफ लक"
मैं:"बेस्ट ऑफ लक किस लिए"
ताबू:"इसलिए कि ऑर्गॅज़म तक पहुँच जाओ"
मैं:"ठीक है बाइ"

मैने फोन कट कर दिया, उस शाम इनायत ने मुझे कई बार चोदा और देर रात को जब हम केफे मे मिले तो ताबू आज कुछ कॉन्फिडेंट लग रही थी. आज लगता था जैसे कुछ पी कर आई है.

ताबू:"यार तुम भी ना कभी भी फोन कर देती हो, कुछ प्राइवसी भी दिया करो"
मैं:"ओ.के. बाबा आइ आम वेरी सॉरी अबाउट दट."
ताबू:"ठीक है, इट्स ओ.के."
शौकत:"चलो कुछ ऑर्डर करते हैं"
इनायत:"हां ठीक है, तो क्या खाएगे आप लोग"
मैं:"एक काम करो, कबाब मे हड्डी ऑर्डर करो हाहाहाहाहा"
इनायत:"बस करो आरा, क्यूँ छेड़ रही हो बेचारी को"
शौकत:"जाने दो यार, दोनो एंजाय कर रही हैं"
ताबू:"हां कबाब मे हड्डी ही क्यूँ, कमीज़ मे कबूतर क्यूँ ना ऑर्डर करो, हहाहहहा"

ये बात ताबू ने आज शाम मेरी भीगी ट्रंपारेंट कमीज़ से बाहर झाँकते बूब्स(कबूतर) को देख कर कही थी.
मैं:"यार वो कबूतर नही तरबूज़ थे, क्यूँ शौकत हाआहाहाहा"
शौकत:"क्या वो मैं ,वो मैं समझा नही"
इनायत:"बस करो ना आरा तुम भी क्या बोलती रहती हो"
ताबू:"हां कबूतर तो मेरे पास हैं क्यूँ"
ये कहकर ताबू थोड़ा झेंप सी गयी अपनी ही बात पर, उसको ध्यान ही नही रहा कि बात बात मे क्या बोल गयी

मैं:"हां मुझे मालूम है, क्या खूबसूरत कबूतर हैं"
इनायत:"तुम लोग तो आज रट बातो से पेट भर लोगे"
शौकत:"हां आज इन लोगो को ज़्यादा ही मस्ती आ रही है"
ताबू:"अच्छा बाबा हम चुप हो जाते हैं बस"
शौकत:"अच्छा नाराज़ मत हो यार, चलो बोलो इसी तरहा तुम लोग"
मैं:"ताबू, अपना मूड मत खराब करो, इट्स ओके तुम्हारे कबूतर रियली मे अच्छे हैं, हीहीईहाआआ"
ताबू:"ये कॉंप्लिमेंट है या फन"
मैं:"क्यूँ तुम्हे अच्छा नही लगा, वैसे मेरे मिया आज दिन मे रेस्टोरेंट मे तुम्हारे कबूतर पर नज़र गढ़ाए हुए थे, क्यूँ इनायत"

इनायत ने मेरी तरफ थोड़े बनावटी गुस्से से देखा

ताबू:"हां और शौकत को तुम्हारे तरबूज़ की याद आ रही थी,हिहिहिहिहहिहिहहहहा"
ये कह कर ताबू ने मेरे हाथो मे ताली मारी.
मैं:"ह्म्म्मन मुझे तुम सबने देखा है, शौकत ने, इनायत ने और तुमने भी लेकिन इनायत बेचारा तुम्हारे बारे मे क्या जाने"
इनायत:"क्या बोल रही हो तुम, थोड़ा लिहाज़ तो करो यार"
मैं:"देखो मैं उन लोगो मे से नही हूँ जो अपने दोस्तो से कुछ छिपाए, हो सकता हो शौकत को ये बुरा लगता हो"
ताबू:"हां, हो सकता है, बिल्कुल"
शौकत:"जाने दो ना यार, मैने माइंड नही किया"
मैं:"रियली, सो नाइस ऑफ यू शौकत"
ताबू:"हां मैने भी माइंड नही किया"
ताबू बोल तो गयी लेकिन फिर उसने अपनी ग़लती पर अपनी लंबी ज़बान बाहर निकाली, उसके इस बर्ताव से हम सब हंस पड़े.

हम ने खाना ऑर्डर किया और फिर हम अपने रूम मे चले गये. हर दिन हम एक दूसरे से काफ़ी फ्रॅंक हो रहे थे.
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10-12-2018, 01:16 PM,
#33
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
इनायत जब उस रात बेड मे आया तो हमारे बीच डिन्नर के वक़्त की चर्चा फिर निकल आई
इनायत:"आज तुम कुछ ज़्यादा ही लेबर्टीस ले रही थी, कुछ ज़्यादा ही बोल्ड थी तुम"
मैं:"क्यूँ, किसी ने भी माइंड नही किया, तुमको बुरा लगा क्या"
इनायत:"नहीं लेकिन शौकत को बुरा लगा होगा"
मैं:"जानते हो मर्द की फ़ितरत होती है कि उसको अपनी थाली मे घी कम नज़र आता है और ये बात औरतो के बारे मे उनकी सोच को एक दम सही नज़र से दिखाती है ये कहावत"
इनायत:"तुम क्या कहना चाहती हो"
मैं:"यही की शौकत मेरी तरफ अट्रॅक्टेड है और तुम ताबू की तरफ"
इनायत:"सॉरी बाबा, मैं अपने आप को अबसे कंट्रोल में रखूँगा"
मैं:"नही मुझे बुरा नही लगेगा जब तक हम हर चीज़ एक दूसरे की मर्ज़ी से करेंगे, ताबू काफ़ी खूबसूरत है, अगर तुम्हारे उसकी तरफ घूर्ना उसको और उसके हज़्बेंड को बुरा नही लगता तो मुझे क्यूँ बुरा लगेगा"
इनायत:"सो नाइस ऑफ यू आरा"
मैं:"लेकिन अगर ये बात उल्टी होती तो शायद तुम सो नाइस ऑफ यू आरा नही कहते"
इनायत:"देखो मुझे बिल्कुल बुरा नही लगा कि शौकत तुम्हारी तरफ अट्रॅक्टेड है, तुम उसका पहला प्यार हो और मुझे तो अच्छा लगता है कि मेरी बीबी अभी भी लोगो की अट्रॅक्ट करने मे एफेक्टिव है"
मैं:"अच्छा, एक बात कहूँ"
इनायत::"ह्म्म्मो"
मैं:"शायद ताबू भी तुम्हारी तरफ अट्रॅक्टेड है"
इनायत:"तो"
मैं:"तो, तो कुछ नही, ऐसे ही कह दिया"
इनायत:"अच्छा."
मैं:"क्या सोचते हो, मैने देखा कि शाम को जब तुम उसकी आवाज़ फोन पर सुन रहे थे तो तुम कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड थे, कहीं मेरी चूत मे लंड डाल के ताबू की चूत मे तो नही खोए थे"
इनायत:"क्या बोल रही हो तुम"
मैं:"हां, क्यूंकी शौकत भी मेरी ही चूत के बारे मे सोच रहा होगा हहाहाहा"
इनायत:"ऐसा तुम सोचती हो"
मैं:"अर्रे बाबा, इट्स ओ.के यार, डॉन'ट वरी.हम सब शायद एक दूसरे के पार्ट्नर की बाहों मे आने के बारे मे सोच रहे थे"
इनायत:"तुम भी"
मैं:"हां फ्रॅंक्ली कहु तो इस इमॅजिनेशन ने मुझे बहुत एग्ज़ाइट किया था, मुझे लगता है कि मुझे शौकत और ताबू से इस बारे मे बात करनी चाहिए"
इनायत:"क्या बात करनी चाहिए, क्या करने वाली हो"
मैं:"यही कि हमारी फॅंटसीस क्या हैं"
इनायत:"और ताबू को ये सब बुरा नही लगेगा"
मैं:"ये तुम मुझ पर छोड़ दो"
इनायत:"इससे क्या होगा"
मैं:"इससे ये होगा कि हम खुल कर फोन बार बात किया करेंगे, सेक्स के टाइम पर, और सोचो इससे हम सब कितने नज़दीक आ जायेंगे"
इनायत:"यार हम को किसी पर ये थोपना नही चाहिए"
मैं:"अर्रे यार, हम सब अडल्ट्स हैं और वो भी पढ़े लिखे, इसमे कोई रिस्क नही इन्वॉल्व्ड है, तुम टेन्षन मत लो, ये प्लान बॅक फाइयर नही करने वाला, तुम मुझ पर भरोसा रखो"
इनायत:"ठीक है, जैसे तुम ठीक समझो"

ये कहकर मैने शौकत को बुलाया उसके रूम से बाहर और उससे कह दिया कि मैं ताबू को इसके बारे मे ना बताऊ. मैने उससे कहा कि होटेल के बाहर एक टॅक्सी खड़ी है और मैं उसमे आकर बैठ जाउ.
मैं पहले से ही टॅक्सी मे पिछली सीट पर बैठी थी. मैने टॅक्सी का नंबर और ड्राइवर का चेहरा अपने फोन मे क्लिक कर लिया था, ये इसलिए कि मैं शौकत से मिया बीवी की तरहा मिलना चाह रही थी.
शौकत कुछ देर बाद टॅक्सी मे आकर ड्राइवर के साथ बैठ गया.जैसे ही वो बैठा मैने उससे बीवी वाले अंदाज़ मे बात करनी शुरू कर दी वो उसको टेक्स्ट कर दिया कि वो भी मिया की तरहा मुझसे बात करे

शौकत ने जब वो टेक्स्ट पढ़ा तो वो थोड़ा शॉक्ड था.
मैं:"कहाँ रह गये थे आप, हमेशा लेट कर देते हैं, आपको एक घंटा पहले कहा था आने को, लेकिन बीवी की हर बात आप भूल जाते हो"
शौकत:"थोड़ा टाइम लग गया जान, सॉरी बाबा"
मैने ड्राइवर को उसी पार्क में आने को कह दिया जिसमे हम लास्ट टाइम बैठे थे. थोड़ी ही देर में हम पार्क मे जा पहुचे और एक ऐसी जगह बैठे जहाँ कोई भी ना था. शौकत ने मुझ पर सवालो की बारिश कर दी,
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10-12-2018, 01:17 PM,
#34
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
शौकत:"ये सब क्या है आरा और क्या मज़ाक है ये सब"
मैं:"तुम बैठो तो सही मैं सब बताती हूँ"
शौकत:"क्या बताती हूँ"
मैं:"देखो मुझसे घुमा फिरा कर कहना नही आता इसलिए सीधे पॉइंट पर आती हूँ"
शौकत:"क्या है बोलो जल्दी"
मैने इस बार उधर देखा और फिर तपाक से बोल पड़ी.
मैं:"लास्ट टाइम जब तुम पार्क से जाने के बाद ताबू को चोद रहे थे और मैने फोन किया था, उस वक़्त बात करते करते तुम मेरी चूत के बारे मे सोच रहे थे, क्यूँ? अब झूट मत बोलना बिल्कुल"
शौकत को बिल्कुल यकीन ना था कि मैं ऐसे ही बोल पड़ूँगी इतनी गहरी बात वो थोड़ा सकपका गया और फिर क़ुबूल करते हुए बोला

शौकत:"हां आरा ये तो है लेकिन इससे क्या"
मैने शौकत के कंधे पर हाथ रखा और उसकी आखो मे आँखें डाल कर प्यार से कहा

मैं:"देखो शौकत मैं नही चाहती कि हम लोग अपने पार्ट्नर को धोका दे लेकिन मैं चाहती हूँ कि हम एक दूसरे के ट्रस्ट को बनाते हुए एक दूसरे से बिल्कुल ईमानदार रहें"
शौकत:"तुम कहना क्या चाहती हो"
मैं:"यही कि ताबू को मालूम होना चाहिए कि तुम मेरे बारे मे सोचते हो, इमॅजिन करके ताबू की चूत मारते हो और इनायत और ताबू भी एक दूसरे के बारे मे ऐसा ही सोचते हैं,इनायत तो ये क़ुबूल कर चुका है."
शौकत:"तो"
मैं:"तो यह कि हम को खुल कर ये बात एक दूसरे के बारे मे आक्सेप्ट करनी चाहिए और फ्यूचर मे हम सेक्स करते वक़्त एक दूसरे को फोन करके सेक्स का मज़ा डबल कर सकते हैं"
शौकत:"इनायत और ताबू इस बात के लिए कैसे मान जाएगे"
मैं:"इनायत तो मान चुका है, बस ताबू को मैं मना लूँगी, हम कोई असली मे थोड़े ही किसी की चूत मार लेंगे"
शौकत:"मैं तो मारना चाहता हूँ"
शौकत एक दम से क्या बोल गया उसको इस बात का अंदाज़ा हुआ तो वो चुप सा हो गया
मैं:"मैं जानती हूँ मेरी जान और मैं भी तुमसे एक बार फिर चुदना चाहती हूँ लेकिन अगर ताबू और इनायत राज़ी हो तभी"
मेरी ये बात सुनकर शौकत को जैसे करेंट सा लगा लेकिन मैं अभी भी उसकी आँखो मे देख रही थी. शौकत ने मेरे होंटो को किस करना चाहा लेकिन मैने उसको दूर कर दिया और कहा कि ये पब्लिक पार्क है. हम अलग अलग होटेल पहुँचे. अब ताबू को इस फोन सेक्स के लिए राज़ी करना था. मैने प्लान बना लिया था और मैं आगे बढ़ रही थी.
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10-12-2018, 01:17 PM,
#35
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
मैं होटेल पहुँच कर सीधे इनायत से मिली. इनायत किसी से बात कर रहा था. मेरे पहुँचते ही उसने फोन कट कर दिया. मैने पूछा तो बोला कि ताबू का फोन था. मैं थोड़ा हैरान सी हुई लेकिन फिर मैने गौर नही किया. इनायत मेरी बात सुनने के लिए बेताब लग रहा था. उसने खिड्खी खोली और बाहर की रोशनी अंदर आई. हमारा कमरा होटेल के पिछले हिस्से मे था. यहाँ से पीछे की हरी भारी वादियाँ दिखती थी. इनायत ने मुझसे आते ही सवाल कर दिया.
इनायत:"क्या हुआ, शौकत ने क्या कहा"
मैं:"वो राज़ी है और मेरे ताबू से बात करने के लिए भी"
इनायत:"ताबू को मैने कह दिया है कि तुम उससे कुछ ज़रूरी बात करना चाहती हो, वो अब आती ही होगी"
मैं:"क्या बात है, बड़ी जल्दी में हो और ये ताबू अब सीधे तुमसे बात कर लेती है, बड़ी कॉन्फिडेंट हो गयी है"
इनायत:"हां अब काफ़ी खुल सी गयी है."

इतने ही देर में डोर पर नॉक हुई. मैने पूछा तो बाहर से ताबू की आवाज़ आई. मैने इनायत से कहा कि वो थोड़ी देर के लिए बाहर जाए. ताबू और इनायत की आँखें मिली और फिर झुक सी गयी. मुझे लगा कि इन दोनो मे ज़रूर कुछ खिचड़ी पक रही है. जैसे ही इनायत बाहर गया मैने झट से दरवाज़ा बंद किया और ताबू को बैठने के लिए कहा.

मैं:"क्या बात है, कुछ पक रहा है तुममे और इनायत में ,नज़रो ही नज़रो मे कुछ खेल हो रहा है"
ताबू:"नही यार, ऐसा नही है, खैर तुम बताओ क्या ज़रूरी बात है"
मैं:"ना जाने तुम कैसे रिक्ट करोगी लेकिन मैं तुमसे सिर्फ़ कुछ सवाल पूछना चाहती हूँ और तुम उसका सही जवाब देना"
ताबू:"हां पूछो"
मैं:"लास्ट टाइम जब मैने तुमको कॉल किया था जब तुम और शौकत सेक्स कर रहे थे, ये उस टाइम की बात है"
ताबू:"फिर से सेक्स की बात"
मैं:"हां, मैने अब्ज़र्व किया कि इनायत उस टाइम बहुत एग्ज़ाइटेड था और शौकत भी"
ताबू:"तो"
मैं:"मैने शौकत से इस बारे मे पूछा तो उसने कहा कि वो मुझे इमॅजिन कर के तुमसे सेक्स कर रहा था और इनायत तुम्हे इमॅजिन करके मुझसे सेक्स कर रहा था"
ताबू:"ओह माइ गॉड"
मैं:"तुम शॉक्ड क्यूँ हुई, तुम भी तो कहीं इनायत को इमॅजिन तो नही कर रही थी?"
ताबू:"कम टू दा पॉइंट, कहना क्या चाहती हो"
मैं:"मैं चाहती हूँ कि हम सभी मे एक दूसरे से ईमानदारी की उम्मीद की जाए, अगर शौकत या इनायत दूसरे पार्ट्नर के बारे मे सोच रहा है तो ये खुल कर क़ुबूल करे और अगर हम औरतो मे से कोई किसी दूसरे पार्ट्नर के बारे मे सोचे तो फिर वो अफेन्सिव ना फील करें."
ताबू:""तुमने शौकत से डाइरेक्ट्ली पूछा, लेकिन कब ? और वो मान भी गया, मुझे समझ मे नही आ रहा.
मैं:"देखो ये थोड़ा कॉंप्लिकेटेड है, शौकत अभी भी मेरे लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर रखता है, ये तुमको मानना ही होगा"
ताबू:"ये मैं जानती हूँ, लेकिन ये सब आक्सेप्ट करके क्या होगा"
मैं:"हम खुल कर सेक्स डिसकस कर सकते हैं और ये बहुत एग्ज़ाइटेड भी होगा, मैं चाहती हूँ कि वापस घर मे जाने से पहले हम एक दूसरे से सेक्स के टाइम बात करें, इससे हमारी नज़दीकी बढ़ेगी"
ताबू:"तुमको नहीं लगता कि हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं कहीं फिर हमारे हज़्बेंड्स हमे स्वेप करने की ज़िद ना करने लगे"
मैं:"इनायत ने तो पहले ही ये आज़ादी मुझे दे रखी है लेकिन मैने इसके बारे मे कभी सोचा नहीं, अगर शौकत तुमको ये आज़ादी दे तो क्या तुम इनायत के साथ सोना नहीं चाहोगी?"
ताबू:""शौकत ऐसा कभी नही करेगा और वैसे भी मुझे ये बिल्कुल प्रॅक्टिकल नही लगता.
मैं:"क्यूँ, क्या मैं शौकत से पूछु"
ताबू:"फॉर गॉड'स सेक, प्लीज़ थोड़ा प्राइवसी दो शौकत और मुझ को, प्लीज़ तुम सिर्फ़ एक फ्रेंड की तरहा ही रहो,मुझे तुम्हारा शौकत से चिपकना अक्चा नही लगता"
मैं:"ओ.के बाबा, ओ.के. मैं उससे बात भी नही करने वाली यार"
ताबू:"देखो, आइ आम सॉरी यार, लेकिन ये समझो कि शौकत मेरा हज़्बेंड है और उससे हर चीज़ सबसे पहले मुझसे शेअर करनी चाहिए."
मैं:"यू आर आब्सोल्यूट्ली राइट. मुझे मालूम है, मैं अबसे तुम्हारे और उसके बीच में नहीं बोलूँगी, अच्छा अब तो मुस्कुराओ"
ताबू:"मुझे थोड़ा टाइम दो, मुझे लगता है कि छेड़ छाड़ मे कोई हर्ज़ नही है लेकिन अपने प्राइवेट मोमेंट्स को भी शेअर करना थोड़ा सा अनीज़ी है"
मैं:"वी ऑल आर अडल्ट्स, हम ऐसा कुछ भी नही करने वाले जो किसी और को हर्ट करे"
ताबू:"थॅंक्स, मैं जाती हूँ"

मुझे लगा कि मैने कार स्टार्ट होते ही 5थ गियर डाल दिया था. मुझे थोड़ा पेशेंट होना होगा और खुद भी सोचना होगा कि कहीं मैं किसी ग़लत डाइरेक्षन मे जाकर अपना सब कुछ बर्बाद तो नहीं कर रही.
मैने वापस जाकर इनायत को सब हाल सुना दिया, इनायत ने मुझे वही कहा जो ताबू ने कहा था. अगले दिन हम फिर घूमने गये और इस वक़्त हम मे ज़्यादा कुछ बात नही हुई. मुझे लगा कि मैने जल्दी मे अब कुछ स्पोइल कर दिया है.

रात को जब इनायत मुझे डिप्रेस्ड देख कर समझा रहा था कि तभी ताबू का फोन आया

ताबू:"क्या कर रही हो"
मैं:"सोने जा रही थी, क्यूँ क्या हुआ"
ताबू:"क्यूँ आज मूड ठीक नही है क्या, मेरी वजह से नाराज़ हो, अच्छा यार सॉरी, ये सब तुमने इतना जल्दी जल्दी कहा कि मुझे कुछ समझ मे नही आया"
मैं:"नही इट्स ओके, मैं शायद ज़्यादा जल्दी मे थी और शायद तुमको हर्ट कर गयी"
ताबू:"अच्छा जानती हो मैं क्या कर रही हूँ ?"
मैं:"नही"
ताबू:"मैं इस वक़्त शौकत के लंड का मज़ा ले रही हूँ"
मैं:"अच्छा, इट्स गुड"
ताबू:"चलो अपने गेम शुरू करते हैं"
मैं:"ताबू इस वक़्त मूड नही है"
ये कहकर मैने फोन लाइन कट कर दी और इनायत से भी सोने को कहा.
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10-12-2018, 01:17 PM,
#36
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
अब कुछ ही दिन बचे थे जाने को. मेरा मूड अब कहीं घूमने को जाने को नही करता था. सुबह हम नाश्ते के लिए होटेल के केफे मे जाते थे लेकिन आज मैने ब्रेकफास्ट रूम मे ही मंगवा लिया.
ब्रेकफ़ास्ट खाने जा ही रही थी डोर पर नॉक हुई,इनायत ने डोर खोला और मैने शौकत और ताबू को अंदर आते देखा, फॉरमॅलिटीस के लिए मैने उन्हे ब्रेकफ़ास्ट मे जाय्न होने को कहा. नाश्ता ख़तम करने के बाद मैने टीवी ऑन कर ली और उनसे नज़रे चुराने के लिए मैने टीवी पर ध्यान देना शुरू कर दिया. ताबू ने मेरे हाथ से रिमोट छीन लिया और मेरी तरफ देख कर कहा

ताबू:"मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है"
मैं:"क्या"
ये कहते ही ताबू ने जो टीशर्ट और लेगिंग पहने थे वो एक झटके मे उतार दिया और बिल्कुल नंगी हो गयी,मेरा मूह खुला का खुला रह गया, मैने इनायत की तरफ देखा वो भी मेरी तरहा अपनी आँखो पर यकीन नही कर पा रहा था. और ये जैसे कुछ नही था कि ताबू ज़ोर ज़ोर से खिल खिला कर हंस रही थी. इनायत जैसे किसी नशे मे था.ताबू काफ़ी आगे और कभी पीछे होकर हंस हंस कर सब दिखा रही थी. मैने नोटीस किया कि इनायत बुत बना सॉफ देखा जा सकता था.
शौकत:"कल रात मेरी ताबू से बात हुई और वो आख़िर मान ही गयी कि अब हम लोगो को एक दूसरे से कुछ नही छिपाना चाहिए"
ताबू:"इनायत होश मे आओ, तुम तो लग रहा है कोमा मे चले गये हो"

इनायत सच मच मे कोमा मे ही लग रहा था, उसके हाथ काँप रहे थे मैने उसको झटका दिया तो वो सकपका कर बोला
इनायत:"ये तो मैने कभो सोचा ही नही था"
ताबू:"अच्छा, अब मुझे तो घूर कर नंगा देख लिया, तुम भी तो अपनी गन दिखाओ, बड़ी तारीफ सुनी है आरा के मूह से तुम्हारी गन की"

ताबू इनायत के पास आकर उसकी पॅंट खोल रही थी और शौकत मेरे पास आकर मुझसे बोला
शौकत:"मेडम आप भी कुछ दिखाएँगी या अभी भी नाराज़ ही रहेंगी"
मैने ताबू की हरकत को बिल्कुल भी आंटिसिपेट नही किया था और मैं भी लगभग सिड्यूस ही हो गयी थी, मैने भी बिजली सी तेज़ी दिखाई और झटपट नंगी हो गयी. अब इनायत और ताबू एक दूसरे से लिपट चुके थे और मैं और शौकत भी एक दूसरे के होन्ट चूस रहे थे.

ताबू:"वो देखो दो पुराने प्रेमी कैसे मिल रहे हैं, है आज मेरी चूत मे आख़िर कार इनायत का लंड जाएगा, इनायत आज अपनी भाभी की जम कर चुदाई करो, वैसे भी तुमको भाभी चोदने का ख़ास एक्सपीरियेन्स है, हाहहाहा"

ताबू आज एक दम पागल सी लग रही थी, यकीन करना मुश्किल था कि क्या ये वही तबस्सुम है वो भोली सी खामोश रहने वाली लड़की थी.

इनायत:"हां क्यूँ नही भाभी जी आपका ही हथियार है जब चाहे इस्तेमाल करो"
ताबू:"हां सही कहा, चलो ज़रा बैठ जाओ मैं तुम्हारा हथियार चख लूँ"
मैं:"एक मिनिट ताबू, इनायत तुम बेड पर बेड हेड के सहारे बैठ जाओ, मैं भी वो चूत चखना चाहती हूँ जिसमे मेरे शौहर का हथियार जाएगा"
शौकत:"और मैं, मैं क्या करू"
मैं:"तुम मेरी चाटो यार, चख लो पुरानी वाइन, कहीं टेस्ट तो बदला नही है"
और इस तरहा ताबू इनायत को ब्लो जॉब दे रही थी और मैं ताबू के नीचे उसकी चूत चाट रही थी. मेरी चूत शौकत चाट रहा था.

मैं:"वाह ताबू क्या टेस्ट है यार, तुम्हारी चूत ने ही शौकत का मूड बदला है"
इनायत:"मुझे यकीन नही हो रहा कि इतनी खूबसूरत ताबू मुझे ब्लो जॉब दे रही है"
ताबू:"ब्लो जॉब ही क्यूँ आगे आगे देखो क्या क्या देती हूँ"

इनायत ताबू के बालो मे प्यार से उंगलियो से कंघी कर रहा था और शौकत मेरे चुतडो मे उंगली भी डाल रहा था. इसी तरहा थोड़ी देर तक चूत चाटने के बाद मैं झाड़ सी गयी और मेरे बाद ताबू और इनायत भी झाड़ गये, शौकत मे मुझे लगे से लगा लिया था और ताबू को इनायत ने.

शौकत:"जानती हो मेरी जान, मेरे लंड ने तुम्हारे लिए कितने आँसू बहाए है, अब मैं तुम्हे कहीं नही जाने दूँगा अब तुम मेरे पास भी आया करो"
मैं:"हां मेरी जान, मैं जानती हूँ लेकिन अब तुम चाहे तो मेरा जिस्म इस्तेमाल करो लेकिन मेरी रूह तो इनायत की ही है"
ताबू:"ऑफ ओह क्या बोरिंग सी बात कर रहे हो, चल आज हम औरतें इन मर्दो के टॉप पर हो जाती है"
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10-12-2018, 01:17 PM,
#37
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
ये कहकर ताबू ने खुद को इनायत के ऊपर आकर उसके लंड को अड्जस्ट किया
ताबू:"उफ़फ्फ़, इनायत मेरी जान तुम्हारा लंड तो मेरी चूत को फाड़ देगा, हाआआआआआआआययययययययययययययईई उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी मा, आआर तुमने कैसे इसे अपनी चूत मे लिया है अब तक"
और ये कहकर वो ऊपर नीचे उछलने लगी और उसके मूह से सीईईईईईईईईईईईई अहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मर गयी हाआआआआयययययययययययईईईई. इनायत अब ताबू की चूचिया दबा रहा था और नीचे से धक्के लगा रहा था.

मैं भी अब शौकत की ऊपर बैठ चुकी थी और मेरी गीली चूत मे एक बार फिर शौकत का लंड आ चुका था और मैं भी उछलने लगी थी.

मैं:"उफफफफफफफफफफफ्फ़ शौकत कितने अरसे बाद मेरी चूत मे तुम्हारा लंड आया है, अब तो खुश हो ना मेरी जान अब जब तुम्हारे मन करे मुझे चोद लेना"
शौकत:" ये तो ताबू की वजह से मुमकिन हुआ है अगर वो ना मानती तो शायद ये कभी ना होता"
मैं:"ताबू और इनायत दोनो की वजह से, ताबू सच मे बड़ी अच्छी लड़की है, उसकी खूबसूरती आज मेरे शौहर को मज़ा दे रही है"
ताबू:"ओये इतना सेंटी होने की ज़रूरत नही है, ये तो एक हाथ से ले और एक हाथ से दे का रूल है, मुझे इनायत का लंड चाहिए था और शौकत को तुम्हारी चूत तो फ़ैसला हो गया"

मैं हैरान हो गयी, कहीं ये ताबू का प्रिप्लॅन्न्ड खेल तो नही था.

ताबू मुझे देख कर हंस रही थी.

ताबू:"ये मेरा और इनायत का प्लान था मेरी जान और ये प्लान तो शादी के पहले से "

इस बार तो मैं और शौकत दोनो ही शॉक्ड हो गये थे.

ताबू:"मैं इनायत की गर्ल फ्रेंड थी और उसकी जब ज़बरदस्ती आरा से शादी हुई तो हम ने प्लान किया था कि हम एक दूसरे को दोबारा पाने की कोशिश करेंगे, लेकिन थोड़े दिन बाद इनायत का मूड चेंज हो गया था, वो अब आरा से मोहब्बत करने लगा था और आरा उससे, मैं अपने आप को धोके मे समझने लगी और मेरी फ्रस्टेशन बढ़ने लगी थी, तब मुझे ये रिलाइज हुआ कि मैं शायद इनायत की तरफ फिज़िकली अट्रॅक्टेड थी और कुछ दिनो मे मेरा मूड सही हो गया, फिर मैने फ़ैसला किया कि मैं कैसे भी कर के इनायत के घर मे जाउन्गि और देखूँगी कि वो कौन सी औरत है जिसमे इतना दम है कि मुझसे इनायत को छीन ले,तभी मुझे शौकत की शादी करने के प्लान का पता लगा और मैने हां कर दी लेकिन फिर जब मैने शौकत के साथ कुछ दिन बिताए तो मुझे लगा कि मैं ये क्या कर रही हूँ

और मुझे शौकत से मोहब्बत हो गयी. मुझे मालूम पड़ा कि लुस्ट और लव में ज़मीन आसमान का फ़र्क है. तब मैने ये सोचा क्यूँ ना हम एक बार फिर लुस्ट का मज़ा लें और ऐसे मैने ये प्लान बनाया"


शौकत:"कसम से तुम लोगो ने हम को क्रोस किया और हम को ये लग रहा था कि हम तुम लोगो को क्रॉस कर रहें हैं"

ताबू:"ये सब सच है लेकिन मैं आज भी दिल की गहराई से तुमसे ही मोहब्बत करती हूँ"
शौकत:"मैं तुमसे झूट नही कहूँगा मैं तुमसे और आरा दोनो से प्यार करता हूँ लेकिन तुमसे वादा करता हूँ कि तुम्हारी मर्ज़ी के बिना मैं कभी भी कुछ नही करूँगा"

मैं जो अब चुप चाप बैठी थी, मुझे लगा कि कहीं इन लोगो का मूड ऑफ ना हो जाए इस लिए मैने इनका ध्यान पलटा

मैं:"उफ़फ्फ़ यार ये सब बाद मे कर लेना अब जो कर रहे हो वो करो और मेरा पानी निकालो"

अब रूम मे हम सब की सिसकारििया गूँज रही थी थोड़ी ही देर में मैं फिर झाड़ गयी और मैने फ़ैसला किया कि मैं शौकत को अपने पानी का स्वाद चखाउन्गि इसलिए मैने अपनी चूत शौकत के मूह पर रगड़ दी और मुझे देख कर ताबू ने भी यही किया.

हम लोग इसी तरहा ना जाने कितनी देर तक सेक्स करते रहे और जब और ताक़त ना रही तो हम थोड़ी देर एक दूसरे पर लेटे रहे और फिर फ्रेश हो कर डिन्नर के लिए चल दिए.
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10-12-2018, 01:17 PM,
#38
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
हम लोग आख़िर कार वापस अपने ससुराल आ गये थे. सब बहोत खुश थे लेकिन मैं ना जाने क्यूँ खुश नही थी. मुझे अचानक ही इनायत से नफ़रत सी होने लगी थी, मैने उससे बात करना भी बंद सा कर दिया था. वो भी शायद ये नोटीस कर चुका था. घर पर आकर मेरी सास और मेरी ननद ने हमारा शानदार वेलकम किया. अब मेरी सास पहले की तरहा मुझसे खफा नही दिखती थी लेकिन फिर भी वो थोड़ा रिज़र्व रहती थी. मैने सर दर्द और थकावट का बहाना कर के इनायत से थोड़ी दूरी बनाई थी. दो दिन बाद ही मैने इनायत से अपने घर जाने के लिए इजाज़त माँगी , उसने बिना किसी हिचक के मुझे इजाज़त दे दी.
घर पर आकर मुझे करार आया. घर पर मैने अपनी उलझन और परेशानी किसी को नही दिखाई. घर पर सब खुश थे और अब मेरे भाई आरिफ़ के लिए रिश्ते देखे जा रहे थे लेकिन इस बार मेरी खाला को इन सब मामलो से दूर रखा था. शायद अब उनपर हमारे घर मे किसी को भरोसा ही ना था.
मेरी मा ने फ़ुर्सत निकाल कर मुझसे बात करनी चाही, वो शायद इस बात से ज़्यादा परेशान थी कि शौकत भी अपनी बीवी के साथ मेरे संग घूमने गया था. सुबह जब भाई और बाबा काम पर चले गये तो वो मुझसे मेरे हाल चाल पूछने लगी.

अम्मा: "बेटी कैसा रहा तुम्हारा सफ़र, तुम्हारे साथ वो खबीस भी गया था ना, उसने तुम्हे परेशान तो नही किया?"
मैं:"नही अम्मा बिल्कुल परेशान नही किया, वो तो अब मुझसे काफ़ी अच्छे से पेश आया था, मुझे वहाँ घूम कर बड़ा मज़ा आया"
अम्मा: "अच्छा हुआ बेटी, मैं तो बड़ी फ़िकरमंद थी, लेकिन उससे तुम अभी थोड़ा होशियार ही रहना कहीं उसके भोलेपन में कोई साज़िश ना छुपी हो."
मैं:"आप फिकर ना करो अम्मा, ऐसा कुछ नही होगा, वो ऐसा इंसान नही है , खैर ये सब आप छोड़ो ये बताओ कि भाई की शादी के क्या हाल हैं, उन्हे कोई लड़की पसंद आई कि नही?"
अम्मा:"इसी बात का तो रोना है बेटा हम तो कई लड़किया देख चुके हैं लेकिन ये तो सब को ही नापसंद कर देता है, ना जाने क्या चल रहा है इसके दिमाग़ में?"
मैं:"कहीं किसी लड़की के साथ दिल को नही लगा रखा जनाब ने?"
अम्मा:"अर्रे मैं तो ये भी पूंछ चुकी हूँ लेकिन साहब कुछ कहते ही नही, तुम्हारे बाबा भी साफ साफ पूंछ चुके हैं कि कोई लड़की पहले से पसंद है तो बता दो, हम उसके यहाँ तुम्हारा रिश्ता लेकर चले जाएँगे"
मैं:"तो क्या कहा भाई ने?"
अम्मा:"कहा क्या, कुछ भी नही, ना जाने ये ऐसा क्यूँ कर रहा है, कहता है कि थोड़ा रुक जाओ, अभी मैं शादी नही करना चाहता"
मैं:"तो हर्ज ही क्या है, रुक जाओ ना, लड़को की कोई उमर थोड़े ही ना देखी जाती है"
अम्मा:"वो तो ठीक है बेटा लेकिन हम मिया बीवी भी अरमान रखते हैं, कौन नही चाहता कि वो अपने नाती पोते देखे, और हम भी तो अपनी ज़िम्मेदारियो से फारिघ् होना चाह रहे हैं, ये कोई क्यूँ नही देखता, क्या भरोसा हम बुड्ढे लोगो की ज़िंदगी का, क्या पता कब हमारी शाम ढल जाए"
मैं:"अम्मा ऐसा क्यूँ कहती हो,आप लोगो से सिवा हमारा है ही कौन,किस के सहारे हम जी सकते हैं आप दोनो के सिवा"
अम्मा:"बेटा, कोई ज़िंदगी भर तो साथ नही रह सकता ना, ये कुदरत का उसूल है कि जब चिड़िया के बच्चे अपना खाना ढूँढना और उड़ना सीख लेते है तो उन्हे अपने मा बाप का घर छोड़ना ही होता है, अपनी नयी दुनिया बसाने के लिए, समझी"
मैं:"अम्मा ये सब बातें ना किया करो, मेरा दिल डूबने लगता है"
अम्मा:"अच्छा नही कहूँगी बाबा, लेकिन तू ही बता कि क्या मैं कुछ ग़लत कहती हूँ"
मैं:"ठीक है अम्मा, मैं भी भाई को एक बार समझा कर देख लेती हूँ शायद मेरी बात का कोई असर हो"
अम्मा:"ठीक है बेटी, तुम भी कोशिश कर के देख लो"

इस बात चीत के बाद हम मा बेटी दोपहर का खाना बनाने की तैयारी मे जुट गये. शाम को इनायत का फोन आया लेकिन मैं जितना ज़रूरी था उतनी ही बात की.
मुझे ये बात हर्ट कर गयी थी कि इनायत ने ताबू के बारे मे मुझसे सब छुपा कर रखा, मुझे ऐसा लग रहा था कि उसने मेरा और शौकत का यूज़ किया ताबू को पाने के लिए. मेरे दिल मे जो इज़्ज़त थी इनायत के लिए वो अब जाती रही. मुझे ताबू के वो क़हक़हे अभी भी याद थे कि जब वो मेरा मज़ाक उड़ा रही थी. मुझे अपने आप से घिन सी हो रही थी. मैने फ़ैसला कर लिया था कि जब तब इनायत और ताबू को उनकी इस बेशर्म चालबाज़ी के लिए गिला नही होता मैं उस वक़्त तक उनसे इसी तरहा फॉरमॅलिटी के साथ बात करती रहूंगी.
शाम वो आरिफ़ घर आया. वो अब एक एलेक्ट्रिकल स्टोर चलाता था, हमारे कस्बे मे ये एक ही दुकान थी इसलिए बहुत चलती थी, आरिफ़ ने दुकान को काफ़ी बढ़ा लिया था. वो काफ़ी मसरूफ़ रहता था लेकिन आज कल थोड़ा परेशान सा रहता था. हमारा घर ज़्यादा बड़ा नही था लेकिन ये काफ़ी आरामदेह था. छत पर इन दिनो शाम को बैठना सुकून देता था. हमारी छत आस पास के घरो से जुड़ी थी लेकिन पॅरपेट से घिरी थी. शाम वो जब पंछी झुन्दो मे अपने घरो को लौट रहे होते तो ये नज़ारा बड़ा हसीन लगता. शाम का ढलता सूरज और ठंडी हवा बड़ा सुकून देती थी. आस पास बड़े बड़े पेड़ और चारो तरफ फैली हरियाली एक दिलकश नज़ारा पेश करते थे. छत पर एक चारपाई पड़ी थी जिसपर हम कभी कभी जाकर बैठ जाया करते था. आज कल आरिफ़ छत पर ज़्यादा बैठ_ता था.
मैं भी शाम को छत पर आरिफ़ के लिए चाइ लेकर चली गयी. हम भाई बहेन आपास मे खुल कर बात नही करते थे. आरिफ़ शुरू से ही अलग खामोश रहने वाला लड़का था और मैं भी कुछ ऐसी ही थी.
मुझे छत पर आरिफ़ ने देख कर ऐसा महसूस किया जैसे वो अलग खामोसी से छत पर बैठना चाहता था.
मैं जानना चाहती थी कि क्या वजह है उसके शादी से इनकार करने की.

मैं:"आरिफ़ ये लो चाइ पियो"
आरिफ़:"नही मेरा मंन नही है"
मैं:"मंन क्यूँ नही है, क्या बात है"
आरिफ़:"अच्छा यहाँ रख दो, मंन होगा तो पी लूँगा"
मैं:"क्या बात है, आज कल बड़े रूखे से रहते हो, पता है अम्मा और बाबा कितने परेशान हैं इस बात को लेकर"
आरिफ़:"यार तुम भी अब मेरा दिमाग़ मत चाट उनकी तरहा"
मैं:"ठीक है अगर तुमको ऐसे ही रहना है तो रहो, किसी को क्या पड़ी है तुमसे इसरार करने की"
और ये कहकर मैं नीचे जाने लगी. मुझे नीचे जाता देखकर उसने मुझे आवाज़ दी, मैं पीछे मूडी तो उसने मुझे बुला लिया. मैं भी ना चाहते हुए वापस वही आकर बैठ गयी, फिर उसने मुझसे मेरे शौहर और ससुराल वालो के बारे मे पूछना चाहा

आरिफ़:"तुम अपने ससुराल वालो के बारे मे बताओ"
मैं:"देखो आरिफ़ बात मत बदलो"
आरिफ़:"नही मैं सच मे जानना चाहता हूँ"
मैं:"मैं अपनी नयी ज़िंदगी मे काफ़ी खुश हूँ, मेरी फिकर मत करो, अब मैं फिर से अच्छा महसूस करती हूँ, लगता है कि तकलीफ़ भरे दिन दूर हो गये, इनायत काफ़ी अच्छा इंसान है"
आरिफ़:"सुन कर बड़ा सुकून हुआ, अच्छा लग रहा है ये सब जान कर"
मैं:"हां, ये तो अच्छा हुआ लेकिन अब हम सब तुम्हे खुश देखना चाहते हैं"
आरिफ़:"मैं भी बहोत खुश हूँ"
मैं:"और बाबा और अम्मा, वो तो खुश नही हैं, उनके सर पर ज़िम्मेदारी का बोझ है और वो भी अपने पोते और पोतियो के साथ खेलना चाहते हैं, उनकी ख़ुसी के बारे मे तो सोचो"
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10-12-2018, 01:17 PM,
#39
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
मेरी बात सुन कर आरिफ़ के चेहरे का रंग स्याह सा हो गया, ऐसा लगा कि शायद मैने उसकी कोई दुखती रग छेड़ दी हो. वो खामोश सा हो गया

मैं:"क्या हुआ, क्या मेरी बात तुम्हे बुरी लगी"
आरिफ़:"नहीं"
मैं:"तो फिर खामोश क्यूँ हो गये"
आरिफ़:"कुछ नही"
मैं:"देखो आरिफ़ मुझे बताओ, इस तरहा तो तुम हम सबको दुखी कर रहे हो"

आरिफ़ ना जाने क्यूँ एक दम से झल्ला उठा, उसकी आवाज़ भी जैसे गूँज सी गयी, उसके चेहरे के रंग सुर्ख हो गया
आरिफ़:" क्या बताऊ, क्यूँ तुम लोग मुझे जीने नही देते, नहीं करनी मुझे कोई शादी"

मैं उसका ये रूप देखकर बड़ी हैरान थी, मैं एकदम से चुप सी हो गयी, कुछ देर मैं उसकी तरफ देखती रही फिर मैं उठ कर नीचे जाने लगी, आरिफ़ को एहसास हुआ कि उसने ओवर रिएक्ट किया है इसलिए उसने मेरा हाथ पकड़ना चाहा, लेकिन अब मैं वाकई नीचे जाना चाहती थी.

आरिफ़:"सॉरी यार, मुझे ऐसे रिएक्ट नही करना चाहिए था"
मुझे अभी भी उसपर बहुत गुस्सा आ रहा था तो मैं भी थोड़ा ओवर रिएक्ट कर गयी

मैं:"मैं अब तुमसे इस बारे मे बात नही करूँगी, ये तुम्हारी ज़िंदगी है जैसे चाहे जिओ. क्या फ़र्क पड़ता है चाहे कोई कुछ भी उम्मीद करे तुमसे, आख़िर तुम एक मर्द ही तो हो, तुमसे कौन सवाल कर सकता है"
आरिफ़:"मैं सच में शर्मिंदा हूँ अपनी इस हरकत पर, सॉरी यार अब बैठो यार"
मैं:"क्या करूँ तुम्हारे साथ बैठ कर"
आरिफ़:"चलो और कुछ बात करते हैं"
मैं:"मुझे रात का खाना बनाना है, मुझे जाने दो"
आरिफ़:"बैठो तो सही, खाना बन जाएगा, इतने दिन बाद आई हो, अपने किस्से बताओ"
मैं:"देखो आरिफ़ मुझे अभी कोई बात नही करनी, तुमसे जो पूंछ रही हो उसके बारे में कुछ क्यूँ नही कहता, आख़िर तुम वजह तो बताओ क्या है, हर चीज़ का हल होता है, इस तरहा खामोश रहने से किसी परेशानी का हल नही निकल सकता"
अब मैं थोड़ा ठंडे लहजे मे बात कर रही थी. आरिफ़ ने अब मेरा हाथ छोड़ दिया था लेकिन अब वो बड़ी तकलीफ़ मे नज़र आ रहा था, कुछ देर वो खामोश बैठा फिर धीरे से बोला

आरिफ़:"कुछ परेशानियो के कुछ हल नही होते आरा और हर परेशानी बाँटी भी नही जा सकती"
मैं:"तुम कहो तो सही शायद इसका हल हो"
आआरिफ:"ये मैं तुमसे नही कह सकता, ये मुनासिब नही"
मैं:"मुझसे नही कह सकते, आख़िर क्यूँ? और अगर मुझसे नही कह सकता तो बाबा से या अम्मा से ही कह दो"
आरिफ़:"मैं उनसे भी कुछ नही कह सकता"
मैं:"तो किससे कह सकता है आरिफ़"
आरिफ़:"किसी से भी नही"
मैं:"उफ्फ आरिफ़ तुम मुझे बताओ तो सही, एक दोस्त की तरहा बताओ मैं वादा करती हूँ कि अगर मेरे पास इसका हल ना हुआ तो मैं किसी से इसका ज़िक्र नही करूँगी"
आरिफ़:"तुम दोस्त नही हो तुम मेरी बहेन हो और भाई बहेन मे ऐसी बात नही हुआ करती"
मैं:"उफ्फ फिर वही रट, देखो हम सब पढ़े लिखे लोग हैं,तुम कहो तो सही"
आरिफ़:"किस मूह से कहूँ और वो भी तुमसे"
मैं:"देखो आरिफ़ मैं जिस दौर से गुज़री हूँ तुम नही जानते हो,ये एक अज़ीयत थी जिसका अंदाज़ा कोई नही लगा सकता, अब मुझमे ताक़त है कि हर मुसीबत का हल निकल सकूँ"
आरिफ़:"मैं जानता हूँ लेकिन तुम इसरार ना करो, तुम्हारे पास मेरी परेशानी का हल नही है"
मैं:"एक बार कह के तो देखो"
आरिफ़:"कैसे कहु,वो ... वो ऐसा है कि मुझे लगता है,,,कि मैं ,,,,वो, उम्म्म "
मैं:"आरिफ़ घबराओ मत, डरो मत मैं तुम्हारे साथ हूँ भरोसा रखो"
आरिफ़:"मुझे लगता है कि मैं बाप नही बन सकता"

आरिफ़ ने एक बॉम्ब फोड़ दिया था, मुझे शॉक सा लगा, मुझे उम्मीद नही थी कि ये वजह होगी, मैं आरिफ़ की तरफ देख रही थी, समझ मे नही आ रहा था कि क्या कहा जाए, मुझे लगा कि मुझे ये सब नही पूछना चाहिए था, आरिफ़ की हालत मे होगा ये कहकर और वो भी अपनी सग़ी बहेन से. वो बहुत शर्मिंदा सा लग रहा था. लेकिन फिर मैने सोचा कि जब बात सामने आ ही गयी है तो उसका हौसना बढ़ाया जाए, मैने उसके कंधे पर हाथ रखा , अब वो मेरी तरफ नही देख रहा था.

मैं:"आरिफ़ शायद तुम ठीक कहते हो, मुझे इसरार नही करना चाहिए था, लेकिन क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता है"
आरिफ़:"अब तुम जान ही चुकी हो तो ये भी जान लो कि मैं किसी औरत को देख कर एग्ज़ाइटेड तो होता हूँ लेकिन इस एक्साइटेशन को कायम नही रख पाता"
मैं:"खुल कर बताओ, आरिफ़, शरमाने की ज़रूरत नही है"
आरिफ़:"मैं ज़्यादा देर तक अपने आप को रोक नही पाता और जल्दी फारिघ् हो जाता हूँ"

ना जाने क्यूँ मुझे अब इस बात मे इंटेरेस्ट आ रहा था, मेरे निपल्स सख़्त हो चुके थे और मेरी टाँगो के दरमियाँ सनसनाहट शुरू हो गयी थी.

मैं:"क्या तुम किसी लड़की के साथ सेक्स कर चुके हो"

आरिफ़ मेरे मूह से ये बात सुनकर दंग रह गया लेकिन मैने ऐसा ज़ाहिर किया कि जैसे मैने कोई नॉर्मल सी बात पूछी हो

आरिफ़:"हरगिज़ नही"
मैं:"तो तुम इतना यकीन से कैसे कह सकते हो कि तुम जल्दी फारिघ् हो जाते हो"
आरिफ़:""वो वो मैं,,,मुझे
मैं:"क्या तुम मास्टरबेट करते हो और इसी से अंदाज़ा लगा रहे हो"
आरिफ़:"हां, ना ना नही,, ये वो मेरा ,,, मैं"
मैं:"आरिफ़ रिलॅक्स, तुम घबराओ तो नही, इसमे शर्मिंदा होने की बात नही है, ये नॉर्मल है, अडल्ट्स ऐसा करते हैं, मैं भी शादी से पहले ऐसा करती थी"

मेरी ज़ुबान हमेशा ज़्यादा ही बोल जाती है, मुझे अपनी ग़लती का एहसास हुआ लेकिन आरिफ़ को इस बात से थोड़ा शॉक सा लगा और वो थोड़ा सा और शर्मिंदा सा हो गया, उसको समझ मे नही आ रहा था कि क्या कहा जाए और वो मुझसे कोई आइ कॉंटॅक्ट भी नही कर रहा था.
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10-12-2018, 01:17 PM,
#40
RE: Mastram Kahani यकीन करना मुश्किल है
मैने अब सोच लिया था कि आरिफ़ को थोड़ा कॉन्फिडेन्स दूँगी ताकि वो शर्मिंदा ना महसूस करे
मैं:"हां आरिफ़, मास्टरबेशन से ये अंदाज़ा लगाना ग़लत है, तुमको उल्टी सीधी बुक्स नही पढ़नी चाहिए, अपने बारे मे ऐसी ग़लत सोच मत रखो, तुम हेल्ती हो और ड्रग्स अल्कोहल वगेरा से दूर हो, तुममे कोई कमी नही है, अच्छा मैं तुमसे कुछ सवाल पूछना चाहती हूँ ,बिना डरे और शरमाये इसका जवाब देना"
आरिफ़:"त ..तह ठीक है"
मैं:"क्या तुमको एरेक्षन होता है"
आरिफ़:"हां"
मैं:"मास्टरबेशन के बाद तुम जब एजॅक्यूलेट करते हो तो पानी आता है"
आरिफ़:"हां"
मैं:"तुम मास्टरबेशन कब करते हो, मेरा मतलब कितनी दफ़ा"
आरिफ़:"कभी कभी एक वीक में, कभी एक महीने में"
मैं:"देखो ऐसा होता है कि जब आदमी ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होता है और वो काफ़ी वीक्स के बाद मास्टरबेट करता है तो जो जल्दी एजॅक्यूलेट कर जाते है लेकिन इससे ये अंदाज़ा लगाना कि उसमे कोई कमी है ये बिल्कुल ग़लत है, तुम टेन्षन मत लो और अगर तुमको अभी भी टेन्षन है तो किसी अच्छे सेक्शोलोजिस्ट को दिखा लो"
आरिफ़:"लेकिन अगर मैं इतनी जल्दी फारिघ् हो जाउन्गा तो अपनी बीवी को कैसे सॅटिस्फाइ करूँगा"
मैं:"शुरआत मे लगभग सभी मर्द जो पहली बार सेक्स करते हैं वो जल्दी एजॅक्यूलेट हो जाते हैं, लेकिन फिर धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है,तुम्हारी बातो से ऐसा लगता है कि तुमने सिर्फ़ कही सुनी बातो से सब अंदाज़ा लगाया है"
आरिफ़:"हो सकता है"
मैं:"आरिफ़ सेक्स का मतलब सिर्फ़ बीवी की वेजाइना को पेंट्रेट करना नही होता, तुमको कुछ अच्छी एजुकेशनल बुक्स पढ़नी चाहिए.अगर तुम कहो तो मैं तुमको दे दूं"
आरिफ़:"तुम्हारे पास हैं ऐसी बुक्स"
मैं:"हां क्यूँ नही, इनायत ने मुझे दी थीं, ये वो परवरटेड टाइप की पॉर्न मॅगज़ीन्स नही हैं, अच्छा रूको मैं अभी आती हूँ"

ये कह कर मैं नीचे चली आई और अपनी सूटकेस से एक बुक ले आई, ये एक कामसूत्र बेस्ड मॅगज़ीन थी, जिसमे सेक्स पेशंस और सेक्स से रिलेटेड कयि आर्टिकल्स थे, इसमे कई कोलोरेड पिक्चर्स भी थे, मैं ना जाने क्यूँ ये बुक उठा कर छत पर पहुँच गयी, मैने ये बुक उसके हाथ मे दी, कवर पेज पर ही एक टॉपलेस मॉडेल एक आदमी के ऊपर बैठी थी चेर पर. बुक को देख कर आरिफ़ के हाथ काँपने लगे

मैं:"डरो नही, तुम एक अडल्ट हो, इसमे कई आर्टिकल्स हैं, सेक्स से रिलेटेड. इसको पढ़ो समझे और फालतू के टेन्षन्स से दूर रहो,मुझे में भी कई ग़लत सोच थी लेकिन अब नही है, मैं अपने हज़्बेंड के साथ सेक्स एंजाय करती हूँ, तुम इसको पढ़ो अच्छे से और कोई सवाल हो तो मुझसे बिना हिचक पूंछ सकते हो"

ये कह कर मैं नीचे आ गयी.
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