Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
02-23-2022, 09:17 AM,
#31
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 27

मीठा, नमकीन, खट्टा



उस चुदाई के बाद रातभर हम चारो अलग-अलग पोज़ में चुदाई करते रहे और मेरा तीनो ने मिल कर दम निकाल दिया और सुबह ज़ीनत आपा बोली क्यों सलमान मजा आया? अच्छा बाताओ तुम्हे तीनो बेगमे कैसी लगी?

मैंने कहा आपा आप सभी कजिन बहने कमाल की हो और हरेक का रस और उसकी चुदाई का मजा अलग ही है जैसे खाने के रस होते हैं मीठा, नमकीन, खट्टा वैसे ही आप तीनो के रस है ।

संसार में जितने भी खाने की चीजे है उस सभी में कुछ न कुछ स्वाद है। स्वाद, रंग व आकार-प्रकार के आधार पर ही खाद्य पदार्थों की पहचान होती है। इन रसों से ही भोजन में स्वाद आता है और ऐसे ही आप तीनो की चुदाई का मजा है, और आप तीनो के सामूहिक और अलग-अलग चुदाई बहुत मजेदार और स्वादिष्ट थी और स्वादिष्ट खाना तो सबको अच्छा लगता है। विभिन्न खाद्य पदार्थों व फलों में ऐसा स्वाद होता है, जो याद रहता है, उसे याद करते ही मुँह में पानी भर आता है और उसे खाने का, उसका स्वाद फिर से लेने का मन करता है। उसी तरह मेरा मन आप तीनो को बार बारे चोदने का करता है और सोचता हूँ मैं आप के बिना कैसे रह पाऊँगा ।

जीनत बोली कैसे अच्छा बताओ मेरा स्वाद तुम्हे कैसा लगा?


जीनत आपा आप का स्वाभाव मीठा है आप मेरी सबसे बड़ी कजिन स्वाभाव से मीठी और सीधी है इसलिए जब मैंने आपको चौदा और उस दौरान उसे चूमा चाटा और आपकी चूत के रस को चूसा तो मुझे मुख्यता मीठा ही ज्यादा महसूस हुआ और मीठा हमे ऊर्जा देता है बड़ी आपा जीनत आपकी धुआंदार चुदाई करने के बाद ही मेरे लिए अपने बाकी कजिन बहनो की चुदाई का रास्ता खुला और मुझे आपको देख कर अलग ही मस्ती और नशा होता है ।

अच्छा उन्होंने मुझे किश किया और पुछा जूनि कैसी लगी?

जूनि का स्वाद थोड़ा खट्टा जैसे खाने में खटाई का स्वाद मुँह में पानी ले आता है और खट्टा खाना भूख बढ़ाता है और पाचक रसों का स्राव बढ़ाकर पेट को ठीक रखता है। उसी तरह मेरी सबसे छोटी बेगम जूनि सबसे चंचल और भोली है और कमसिन और सेक्स के बारे में उसे ज्यादा पता नहीं था और मेरी और जीनत आपा आपकी की चुदाई देख उसे कुछ-कुछ समझ आ गया था की शौहर और बीबी के सम्बन्धो में शारीरिक मिलन से क्या मजा मिलता है और फिर उस मासूम कली की चुदाई कर मैंने खट्टे का मजा लिया जिससे मेरी सेक्स की भूख और बढ़ गयी और फिर जब आपके साथ उसे चौदा तो एक साथ खट्टे और मीठे का मजा आया । फिर जब एक साथ ज्यादा मीठा और खट्टा खाने से मेरे मुँह का स्वाद थोड़ा बिगड़ गया तो मैंने नमकीन अर्शी की चुदाई का मन बनाया जिससे मेरी स्वाद-कोशिकाओं और लंड में नई जान आ गयी।

हूँ तो अर्शी? तुम्हे नमकीन लगी ज़ीनत आपा ने पुछा?

नमकीन स्वाद नमक हमारे भोजन का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। इसके बिना न खाने में स्वाद आता है और न ही शरीर ढंग से काम कर पाता है। चिकनाई बनाए रखने और पाचन तंत्र को सुचारु रखने के लिए और तंत्रिका तंत्र, माँसपेशियों की गति और कोशिकाओं में पोषक तत्वों के परिवहन के लिए भी नमक जरूरी है। और मेरी तीसरी बेगम कमसिन अर्शी बहुत फ्रैंक और नमकीन है और उसकी चुदाई ने मुझे बहुत मजे दिए और मैं उस चुदाई में सब कुछ भूल-सा गया था । और अब जो आप तीनो की एक साथ चुदाई की तो मुझे एक साथ नमकीन खाते और मीठे का मजा आया और सच कहूँ आप तीनो ने मेरा दम हो निकाल दिया । अब मेरा मन आप तीनो को बार बारे चोदने का करता है और सोचता हूँ मैं चुदाई के बिना कैसे रह पाऊँगा ।

फिर ज़ीनत आपा बोली सलमान ये मत सोचना तुम्हे मुझे जो तड़पाया है चुदाई के लिए तरसाया है उसकी तुम्हे सजा नहीं मिलेगी मैं तुम्हारी बड़ी बेगम हूँ और में सब से बड़ी हूँ अब तुम चुपचाप देखो मैं तुम्हे क्या सजा देती हूँ । तुम्हे मुझे तड़पाया है अब तुम भी चुदाई के लिए तड़पोगे और तुम्हारी कोई बेगम अब तुम्हे चुदाई नहीं करने देगी अब तुम्हे पता चलेगा की तीखा कैसा होता है?

कहाँ तो मैं सोच रहा था कि अब अगला नंबर रुखसार की चुदाई का होगा मुझसे चुदने का और कहाँ आपा ने चुदाई पर बैन लगा दिया था । आपको रुखसार के बारे में बताता हूँ ।


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रुखसार मेरी चारो कजिन्स में सबसे सुंदर है और मस्त-मस्त रवीना की जैसी स्लीम बॉडी वाली, एनर्जी लेवल और चेहरे पर दिखनेवाला ग्लो दम खिली-खिली और एनर्जी से भरपूर नज़र आती हैं। लेकिन रुखसार रवीना की तरह तेज तरार भी है और सबको खरी-खरी सुना देतीं है । वह गोल और भरी हुई है लेकिन उसे आप मोटी नहीं कह सकते उसका पूरा बदन बिलकुल अनुपातिक है। उसके बड़े और गोल और अनार जैसे स्तन स्पष्ट रूप से अपने मौजूदगी दर्ज कराते है और उसकी गोल गांड कुछ ऐसी है जो मुझे बहुत पसंद है। उसका रंग दूधिया सफेद, स्किन ऐसे जिसपे कोई दाग नहीं है गहरी भूऋ, बड़ी आंखें, तेज नाक और नाजुक लाल होंठ हैं जो पूरी तरह मेल खाते हैं। उसके काले, लहराते बाल और गोरा रंग उसे एक सुंदरता का पूरा रूप देता है। वह वजन बनाए रखने के लिए अक्सर कसरत करती है और अपना बहुत अच्छा ख्याल रखती है।


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खैर मुझे सजा देने के लिए मेरी तीनो कजिन्स बिल्लिया म्याऊँ-म्याऊँ करने लगी थी और मुझे सताने लगी । वह तीनो मुझे अलग-अलग तरीकों से रिझा कर मेरा लंड खड़ा करके चली जाती थी और मैं लंड को सहलाता रह जाता था ।

जूनि जो बहुत ही शरारती और चंचल है मेरे साथ कुछ ना कुछ शरारत करने लगी पर जब मैं उसे पकड़ कर चूमने लगता तो दूर भाग जाती । वह आते जाते मुझे सहला जाती और कभी मेरा लंड दबा जाती कभी फ्लाइंग किश दे कर भाग जाती,

जीनत जो घर में ज्यादातर लेहंगा या साडी ही पहनती थी। मेरे सामने से वह जब जाती तो अपना लेहंगा या साड़ी और पेटीकोट पूरा उठाकर अपनी गांड मुझे दिखाती और हिलाती हुई दूर चली जाती ।



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सुबह उठता तो अर्शी आती और आकर अपने नाइटी खोल कर अपना नीचे का नंगा बदन मुझे दिखाती और फिर अपने मम्मी दबा कर अपनी चूत सहलाती और रात की आकर जब मैं खाना खाने के बाद बिस्तर पर लेटा तो अपने ममे बाहर निकालकर निप्पल मुझे दिखा कर निप्पल मेरे मुँह के पास ले आती और मेरे ओंठो पर रगड़ती और जब मैं मुँह खोल कर उन्हें चूसने की कोशिस करता तो दूर हो जाती ।

फिर सामने आकर ज़ीनत अपनी मोटी गांड रखकर लेट जाती और दोनों पैर उठाकर चुत खोलकर मुझे बुलाती और अपनी उंगलियों से अपनी नाजुक कोमल गुलाबी चुत को मसलने लगती और जब मैं आगे बढ़ता तो जूनि मुझे रोक देती और मेरे सामने सेक्सी ड्रेस पहन कर डांस करने लगती और स्ट्रिप करती हुई अपने कपडे उतारती ।



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जब मैं किसी एक की तरफ बढ़ता तो दूसरी आकर मुझे रोक देती और मैं मन मासोसता हुआ जाता

और कसमसा कर रह जाता और मेरा लंड खड़ा का खड़ा रह जाता ।

तीनो अब एक होकर मुझे सत्ता रही थी । और मैं तड़प रहा था पर इस तड़प में मुझे मजा आ रहा था और महसूस होने लगा की अब जल्द ही कुछ धमाकेदार होने वाला है क्योंकि मुझे मालूम था जितना

मैं तड़प रहा हूँ उतना ही ये तीनो भी तड़प रही है क्योंकि इन तीनो को भी तो लंड से चुदने की लत लग गयी थी ।



कहानी जारी रहेगी
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02-28-2022, 06:17 PM,
#32
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ


भाग 28

दुल्हन बनी चौथी कजिन रुखसार










मैं दो दिन तो बर्दार्श्त करता रहा फिर मैंने-मैंने अर्शी और जूनि से बात की तो उन्होंने भी मुझे ज़ीनत से बात करने को बोला । मैंने जीनता आपा से बात कर माफ़ी मांगने को कोशिश की लेकिन वह नहीं पसीजी । इस दौरान रुखसार भी मुझसे दूर ही रहती थी । मैंने सोचा अम्मी से बात की जाए पर फिर मिया बीबी की हर बात में बड़ो को डालना ठीक नहीं है ये सोच कर फिर मैंने अपनी बहन रुखसाना से बात की तो उसने जीनत को धमकी दी की अगर वह अपनी कजिन के साथ मुझे तरसाना बंद नहीं करेगी तो रुखसाना, सलमा और फातिमा भी उनके भाई रिजवान को हाथ नहीं लगाने देगी । फिर ज़ीनत थोड़ा पसीजी और बोली ये मिया बीबी का मामला है । वह इसमें न पड़े वह जल्द ही अपने हिसाब से मेरे से निपट लेगी।





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जब, मैं खेतो से लौट कर वापिस आया तो उस दिन मेरी कजिन भाई, रिजवान कुछ काम के लिए लखनऊ लौट गया था और रुखसाना ने मुझे अंदर आने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार खोला। मेरी हवेली में प्रवेश करने के बाद, मेरी बहनें रुखसाना और सलमा ने मुझे रात का खाना परोसा जबकि मैं रात का खाना खा रहा था मैं रात के खाने के दौरान रुखसार को नहीं देख सका। जब मैंने पूछा रुखसार कहाँ है। रुखसाना आपा ने मुझे बताया कि वह नहा रही है। आप रात के खाने का आनंद लें। डिनर खास था। रात का खाना खत्म करने के बाद मैं अपने कमरे में जाना चाहता था और मैं अनुमान लगा सकता था कि हवेली के गलियारे में माहौल में भारी बदलाव आया है। जैसे ही मैं अपने शयन कक्ष की ओर बढ़ रहा था। लेकिन मेरी छोटी बहन फातिमा ने मुझे मेरे कमरे में जाने से मना किया।

"भाई, कृपया रुको ... रुको, अपने बैडरूम में मत जाओ। मेरी बड़ी बहन रुखसाना ने मुझसे कहा, भाई तुम अपने आप को बाहरी स्नानघर में ताज़ा कर लो, ठीक से स्नान करो, अपने आप को साफ करो और दूल्हे की इस पोशाक को पहन लो जो हमारे पास है और हमने आपके लिए खरीदी है, आपकी तीन पत्नियाँ आपको तैयार करेंगी और हम आपकी तीन बहनें आपकी चौथी पत्नी को आपकी चौथी दुल्हन के साथ आपकी पहली रात के लिए तैयार कर रही हैं," रुखसाना ने मुस्कुराते हुए कहा।

रात के करीब 8.30 बजे थे। मेरी तीन पत्नियाँ वॉशरूम में मेरा इंतजार कर रही थीं। पहले मैंने शेव की और सब अनछए बाल साफ़ किये और फिर मैंने स्नान किया, उन तीनो ने मुझे नहलाया और मेरे बदन पर तेल और इत्र लगाया और फिर मैंने अपनी नई दूल्हे की पोशाक पहनी। इस बीच मेरी बहनो ने रुखसार के साथ अपने बेडरूम के अंदर डिनर किया। मैं रुखसार को देखने के लिए बहुत उत्सुक था लेकिन मुझे किसी ने भी उसे देखने की अनुमति नहीं दी क्योंकि सब कुछ सस्पेंस और आश्चर्य से भरा था।

इन दो दिनों में ज़ीनत खरीदारी के लिए रुखसार को शहर ले गई थी और उन्होंने रुखसार के लिए सबसे अच्छी दुल्हन की पोशाक और मेरे लिए दूल्हे की पोशाक खरीदी थी। उन्होंने बहुत सारे ताजे सुगंधित फूल भी मंगा लिए। तीन दिनों के-के बाद जूनी, अर्शी और जीनत ने मेरे बेडरूम को फूलों से सजाया। साफ-सुथरे तकियों के साथ ताजी बेडशीट किंग साइज बेड में रखी गई। बेडरूम के अंदर मीठे और सुगंधित इत्र का छिड़काव किया। उस शाम तक मेरे खेत से मेरे आने से ठीक पहले, रुखसार के पूरे शरीर को हल्दी और चंदन का उबटन लगाकर स्नान करवाया। मेरी अन्य तीन कजिन जो मेरी बेगमे भी हैं और मेरे बहनो ने मिल कर उसे दूध से नहलाया और उसकी नई दुल्हन की पोशाक पहनने में उसकी मदद की। ज़ीनत आपा ने उनके चेहरे के मेकअप के लिए उनकी मदद की और उसके पूरे बदन पर सुगन्धित फूलों का इत्र मला और पहले से ही सुंदर और भव्य रुखसार एक शानदार नई दुल्हन रानी लग रही थी। रुखसार बेडरूम के अंदर गई और मेरा इंतजार कर रही थी।

लगभग 9.30 बजे सलमा ने कहा, "भाई अब, आप अपनी नई दुल्हन से मिलने के लिए अपने बेडरूम में प्रवेश कर सकते हैं। हम कल सुबह मिलेंगे। शुभ रात्रि...आप को शुभकामनाएँ कि आज रात अपनी कुंवारी दुल्हन का आनंद लें," सलमा ने शरारत से कहा और अपने कमरे में प्रवेश किया।






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मैंने अपने अंदर दिल की धड़कन महसूस की जो थोड़ा तेज धड़क रहा था और फिर मैंने अपने शयनकक्ष में प्रवेश किया और तुरंत पूरे कमरे में फैली हुई इत्र और फूलो की खुशबू को सूंघ सकता था।











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फिर मैंने अपने बिस्तर को देखा जो सुगंधित फूलों से लदा हुआ था, इसी बीच रुखसार बैठी हुई थी। जैसे ही मैंने उसने देखा मैं उसके पास बैठा और उसे अपने पास खींच लिया और उसके हाथो पर एक चुंबन किया।







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मैंने दुल्हन बनी रुखसार को-को बहुत गौर से देखा, वह बहुत-बहुत गोरी है और मेरी बाकी तीनो बेगमो से और मेरी बहनो से भी बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। वह मेरे से दो साल छोटी थी और उसकी उम्र लगभग 20 की थी। मस्त-मस्त रवीना की जैसी स्लीम बॉडी वाली, एनर्जी लेवल और चेहरे पर दिखनेवाला ग्लो दम खिली-खिली और एनर्जी से भरपूर नज़र आ रही थी लेकिन अब थोड़ा शर्मा रही थी। वैसे रुखसार रवीना की तरह तेज तरार भी है और सबको खरी-खरी सुना देतीं है पर आज थोड़ा शांत थी और श्रमती हुई बहुत सुंदर लग रही थी। वह गोल और भरी हुई है लेकिन उसे आप मोटी नहीं कह सकते उसका पूरा बदन बिलकुल अनुपातिक है। उसके बड़े और गोल और अनार जैसे स्तन स्पष्ट रूप से अपने मौजूदगी दर्ज कराते है और उसकी गोल गांड कुछ ऐसी है जो मुझे बहुत पसंद है।





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उसका, सुंदर मासूम चेहरा, बड़ी अभिव्यंजक, मासूम, चिंतित आँखें, चौड़ा मुँह, पूर्ण कामुक रसदार मोटे होंठ, जेट-काले, लंबे लहराते, बहुत मोटे और विशाल चिकने कूल्हे की लंबाई के बालों को एक मोटी-मोटी चोटी में व्यवस्थित किया गया था चमेली के फूलों से सजी-धजी खिलखिलाती हुई रुखसार को देख मेरा उत्तेजित लंड अकड़ने लगा था। उसके बदन पर उसकी चोटी भारी और मोटी लग रही थी। उसके बड़े गोल सख्त स्तन, पतली मिड्रिफ, तंग कमर, लंबी टांगें और नाशपाती के जैसी आकृति थी। वह पतली, दुबली, नाजुक और नाजुक दिख रही थी, फिर भी बहुत सुन्दर सुडौल थी। उसके कॉलरबोन स्पष्ट रूप से प्रमुख थे जो उसे और अधिक वांछनीय बना रहे थे। उसके गालों के दोनों किनारों पर डिंपल बनाते हुए सुंदर मुस्कान थी। उसके बाएँ कॉलरबोन के ठीक नीचे सुंदर तिल था जो उसे कामुक बना रहा था।





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आज आश्चर्य की सबसे बड़ी बात ये थी की वह आज अपनी शर्म से चुप थी जो उसकी गिरती आँखों से स्पष्ट थी, फिर वह उठी कर उसने दूध का गिलास उठाया, हाथ में दूध का गिलास लेकर वहाँ खड़ी रही, पवन कुमार के उसकी ओर बढ़ने की प्रतीक्षा कर रही थी। (नवविवाहित दुल्हन की भारतीय परंपरा के अनुसार अपने शौहर का पहली रात में मिलने की प्रतीक्षा और स्वागत करती है)


मैं उसे बिस्तर पर ले आया। उसने दूध का गिलास मुझे सौंप दिया। मैंने आधा गिलास पिया और उसे गिलास को उसके होठों से छुआ दिया। उसने अपना मुँह खोला और दूध पी लिया। मैंने अपनी उंगली से उसके होठों से दूध के निशान मिटाए और उसका स्वाद चखा। मैंने रुखसार की ओर देखा, जो युवा, दुबली और सुडौल, सुंदर और सेक्सी थी। मैंने उसके होठों पर अपनी उंगली फिराई और कहा, "" क्या आप अपने नाम रुखसार का अर्थ जानतेी हो? इसका अर्थ है सुंदर चेहरा और। आप सच में बहुत सुंदर हैं। "मैंने कहा। रुखसार, तुम मेरी सबसे खूबसूरत बेगम और कजिन हो और मैं चाहता हूँ कि तुम्हें पता चले कि मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ।"






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एक रानी की तरह। उसने रिच प्योर सिल्क गोल्ड जरी बॉर्डर सिल्क लो हिप साड़ी पहनी हुई थी। वह सिर से पैर तक भारी सोने और हीरे के गहनों से सजी हुई थी, जो उसके सुंदर सुडौल, सेक्सी जलती हुई कामुक शरीर को दिखा रही थी। उसकी चौड़ी अभिव्यंजक बड़ी आँखें काजल के साथ सजी हुई थीं, भारी अतिरिक्त-बड़े, बड़े उछलते हुए, अनार के जैसे विशाल फर्म स्तन उत्तेजक रूप से झूल रहे थे, दुबले फ्रेम और पारदर्शी ब्लॉउज से बाहर निकले हुए फर्म बड़े खड़े निपल्स के साथ इन पहाड़ी जैसे स्तन उजाग थे। चमेली के फूलों के धागों ने उसकी मोटी रेशमी जांघ की लंबाई की लंबी चोटी को सजाया गया था। वह बेशक एक सुंदर और सेक्सी कामुक लड़की थी जो स्त्री रूप और कामुकता का प्रतीक थी।







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रुखसार ने भी एक शुद्ध रेशमी लाल और मलाईदार सफेद मिश्रित कढ़ाई वाली साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें भारी सोने की ज़री का बार्डर था जो उसके पारदर्शी ब्लाउज को कवर करती थी, लेकिन उसकी गहरी और बड़ी दरार दिखा रही थी।

कहानी जारी रहेगी
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02-28-2022, 06:24 PM,
#33
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 29

दुल्हन बनी कजिन रुखसार




जैसे-जैसे मैं करीब आया रुखसार ने अपनी आंखें बंद कर लीं, मेरे होंठ उसके गालो से जुड़े मैंने उसका पूरा फायदा उठाया और पीछे की ओर मैंने उसकी गर्दन और उसके कंधो को चूम लिया। मैं फिर से ऊपर गया और धीरे से अपनी जीभ से उसके गालो को चाट लिया। वह काँप उठी। जैसे ही मैं उसके कान के पास पहुँचा और धीरे से उसके कान के लोब को चूसा, उसकी साँस धीमी हो गई।

"मैं तुम्हें चोट नहीं पहुँचाने जा रहा हूँ, सिर्फ एक चुंबन," मैंने एक हाथ से उ उसका हाथ पकड़े हुए उसके कान में फुसफुसाया।



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मैंने उसे धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर खींच लिया। वह थोड़ा फुसफुसाई मैंने कुशलता से उसके होठों को चूम लिया और उसके ओंठो को चूसने लगा । वह क्या कर रही थी, इसके बारे में एक बार भी विचार किए बिना, उसने अपने शरीर को मेरी ओर झुका लिया और मुझे वापस चूमा।


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मैंने अपने निचले होंठ के साथ अपनी जीभ उनके मुँह में डाल कर उसे मजबूर किया और उसने अपना मुँह खोला और मेरी जीभ उसकी जीभ से मिल गयी। मैंने उसके हाथों को छोड़ दिया और अपने हाथों को नीचे लाया, उन्हें रुखसार की छाती और कंधों पर घुमाया और अंत में उन्हें उसके गले में डाल कर उसे करीब खींच लिया।

अब मेरी बारी थी, उसकी खुशबू, उसके स्वाद से भस्म हो जाने की। मैं अब उसे चखा तो मन किया उसकी मासूमियत लूट लू और उसकी उत्तेजना को जगा कर खुद को उसमे समेट दू।



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रुखसार मेरे मुंह के खिलाफ कराह रही थी मेरे हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ के चारों ओर घूमते रहे, अपना रास्ता बनाते हुए, धीरे से उसके तंग नितंबो को सहलाते रहे। जैसे ही मैंने खुद को उसके खिलाफ दबाया, वह कराह उठी, धीरे से चुंबन से वह दूर हुई और उसने मेरी ओर देखा, उसके गाल फूल गए थे और चूमने से उसके होंठ सूज गए थे और तीव्र जुनून के साथ चमक उठे थे।

वह उसे बिस्तर से खड़ा किया, और गर्दन और कंधों को चूमा, चमेली की सुगंध की सुगंध ली और कहा, "तुम सेक्सी और रोमांचक हो।" मैंने उसे खड़ा किया और उसे घुमा दिया

उसकी साड़ी ने उसकी नाभि से नीचे बंधी हुई थी और उसके पेट और कमर की पूरी त्वचा दिखाई दे रही थी। वह बहुत मोहक लग रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी काजल से सजी अभिव्यंजक सुंदर आमंत्रित करती हुई बड़ी सुंदर आँखें हर जगह घूम रही थीं।



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उसके अतिरिक्त बड़े, गोल और लटके हुए भारी स्तन गर्व से खड़े हुए थे और स्पष्ट रूप से ब्लाउज और साड़ी से बाहर निकले हुए थे। उसके सुंदर लंबे मोटे जेट-काले चमकदार रेशमी चिकने, चमकदार रेशमी बाल बड़े करीने से बीच में बंटे हुए थे, जो एक जांघ की लंबाई की चोटी में बंधे थे और सोने के हेयरपिन सजी थी। साफ-सुथरी छोरों के साथ उसकी चौड़ी मोहक मोटी चोटी उसके उभरे हुए बड़े नितंबों के ठीक नीचे बालों के बैंड के साथ जकड़ी हुई थी और उसकी नितम्बो के नीचे जांघों तक पहुँचती थी और खूबसूरती से बंधे हुए लंबे चमेली के फूलों के धागों से सजी हुई थी और मोहक रूप से जैसे वह चली तो उसके विशाल और बड़े चूतड़ों के साथ झूल रही थी॥

उसने साडी सेक्सी और बोल्ड तरह से पहनी हुई थी। गहने उसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ा रहे थे । वह एक समृद्ध सुंदर सेक्सी लंबे बालों वाली हूर थी जो मेरे बिस्तर पर मुझे मजे देने के लिए जन्नत से आयी थी। वह आकर्षण, सौंदर्य और कामुकता से भरपूर थी। जब उसकी पीठ मेरी और हुई तो मैंने देखा उसका ब्लाउज लगभग बैकलेस था। पतले धागों की सिर्फ दो डोरियों से उसके बदन पर टिका हुआ था और मैं उसकी पीठ को पूरी तरह से तब तक देखता रहा जब तक मेरी आँखे उसकी चूतड़ों की दरार पर जा कर नहीं टिक गयी।

मैंने संगीत रिकॉर्ड बजाया और हलके संगीत की धुन पर मैं रुखसार के साथ नाचने लगा। मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर के चारों ओर डाला, उसके नितंबों तक ले गया; दूसरा हाथ उसकी कांख के नीचे रखकर उसे गले से लगा लेिया। फिर हम नाचने लगे। नाचते-नाचते मैं उसके चूतड़ों को दबाने लगा और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। फिर मैंने रुखसार के मुंह के अंदर उसकी जीभ की जांच की और उसकी जीभ चूसने लगा।

जैसा कि मैंने बताया कि रुखसार बहुत तेज थी और इस तरह के मूड में थी कि उसने मेरे पाजामा के ऊपर मेरे कठोर लंड को छुआ और मालिश की और फिर दबाना शुरू कर दिया और फिर संगीत बदला तो वह मोरनी की तरह संगीत पर झूमने लगी। जब संगीत की धुन फिर बदली तो मैंने उसकी प्रशंसा की आपके डांस मूव्स बहुत ही आकर्षक और मस्त थे। वह अद्भुत था। फिर हमने दुबारा संगीत की धुन में युगल नृत्य करना शुरू कर दिया, मैंने अपना बायाँ हाथ उसकी दाहिनी बगल के नीचे रख दिया और उसे जबरदस्ती अपनी ओर खींच लिया। अपनी दाहिनी हथेली से, मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया और उसके चेहरे और होंठों को चूमने लगा। वह मेरे पायजामा के अंदर मेरे खड़े हुए लंड को छू रही थी और हमने 5 मिनट तक डांस किया।



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वह बहुत मोहक थी। उसने डांस के दौरान अपनी पीठ दिखाई, और फिर मोहक दृष्टि से अपना सिर आगे की ओर कर लिया। उसके स्तन, पतला पेट, संकरी कमर और उसका पिछला भाग उसकी पीठ और उसके नितम्ब दिखाई दे रहे थे और उसके चेहरे और आँखों के भाव इतने मोहक थे और इसने मुझे बहुत मुश्किल में डाल दिया। मेरा लंड कठोर हो गया था और मेरे पायजामा में उभार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मेरा दाहिना कंधा उसके बाएँ कंधे से रगड़ रहा था और मैं उसके करीब झुक कर कहने लगा, "तुम इस पोशाक में कमाल की लग रही हो तुम कमाल हो। तुम कितनी अच्छी और हॉट लग रही हो।"

मुझे उससे हंसी या शर्माने की प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, लेकिन मैंने सपने में भी यह उम्मीद नहीं की थी कि वह-वह वाक्य कहेगी जो मैंने सुना था।

उसने कहा, "हाँ, मैं हूँ।"

यह सुनते ही मैं उसके करीब गया और उसके होठों को चूम लिया। उसने बदले में मुझे चूमा।

मैं उसके करीब हुआ और उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके होठों को बहुत जोश से चूमने लगा। उसके होंठ मेरे मुँह में जेली की तरह लग रहे थे; नरम, और स्वादिष्ट। मैंने उसके होठों को चूमा और मेरे शरीर के अंदर आग जल रही थी। मैं आगे हुआ और अपना दाहिना हाथ उसकी पीठ, गांड और स्तन पर ले गया। मैंने उसके स्तन पकड़ लिए और उसके होठों को चूमते हुए उन्हें दबाने लगा। ऐसा लगा जैसे मैं एक फुटबॉल पकड़ रहा था क्योंकि उसके बड़े स्तन अब और भी बड़े हो गए थे।



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मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमा और उसकी गर्दन को चूमने लगा। मैंने उसके कान को चाटा और धीरे से उन्हें चूमा। मैं उसके स्तनों को चूमने के लिए और नीचे चला गया।

मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया और ब्रा को ढीला कर दिया और उसके स्तनों को उसके कपड़े से चूसा और फिर नीचे उसके पेट पर चला गया। मैंने उसके पेट में नाभि को चूमा और मैं उसकी सांसों को जोर से कराहते हुए सुन सकता था। मुझे उसकी वह आवाज बहुत पसंद आयी। मैंने उसकी नाभि को चाटा और उसी समय मेरे हाथ उसके स्तन दबा रहे थे और मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा।

इस बार उसने मेरी पीठ के चारों ओर मंडराने के लिए मेरे शर्ट के अंदर हाथ डाला, और फिर मेरे चेहरे पर चुंबन करना शुरू कर दिया। उसने मेरी छाती को चूमा और फिर मेरी गर्दन और फिर मेरे कानों को चूमने के लिए ऊपर चली गई। वह शरारती हो रही थी, और मैंने इसे अगले स्तर पर ले जाने का फैसला किया।

कहानी जारी रहेगी

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03-04-2022, 07:50 PM,
#34
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 30

दुल्हन रुखसार



मैंने उसे ऐसे कस कर गले लगाया जैसे दो प्रेमी लम्बे बिछोह के बाद मिले हो। मैं बहुत बेताब था क्योंकि मैंने पिछले कुछ दिनों में चुदाई नहीं की थी और मेरी अन्य तीन पत्नियों ने मुझे बहुत उकसाया , लेकिन वह मुझे उन्हें छूने की भी इजाजत नहीं दे रही थीं, फिर एक पल के लिए भी बिना सोचे-समझे, मैंने मेरे दोनों हाथ रुखसार की कांख के नीचे रख दिए और उसे गोदी में उठा लिया। फिर धीरे-धीरे, मैंने उसकी फिसल कर के कमर के बीचों-बीच आ गए और मैंने उसे कसकर जकड़ लिया। जब से हम व्यस्क हुए थे उसके बाद यह पहली बार था, जब हमारे शरीर इस तरह के आलिंगन में एक साथ जुड़ गए थे। रुखसार ने अपनी टांगों को मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया और उसके हाथ मेरे कंधे के चारों और लिपट गए रुखसार के बड़े स्तनो ने मेरे चेहरे को दबा दिया।

जैसे ही रुखसार के पैर जमीन से छूटे और उसके हाथ मेरी गर्दन पर टेके और फिर मैंने अपने गिरफ्त नीचे की तो उसका शरीर नीचे की ओर खिसकने लगा और हम दोनों के योनि क्षेत्र आपस में रगड़ने लगे। जल्द ही वह नीचे खिसक गई और मुझे अपने सीने में रुखसार के स्तनों का कोमल स्पर्श और दबाव महसूस हो रहा था, जो एक नरम तकिए की तरह थे और मैं अपने चेहरे पर रुखसार की गर्म सांसों को महसूस कर रहा था। मैंने उसके चेहरे और बालों की मीठी सुगंध को सूंघा।

मेरा चेहरा उसके चेहरे से सिर्फ एक इंच की दूरी पर था। तुरंत, मेरा लंड पूरा कठोर हो गया। उसी समय, रुखसार ने भी अपने क्रॉच क्षेत्र में मेरे उभरे हुए कड़े लंड को महसूस किया और बोल्ड रुखसार ने मेरे लंड पर अपना योनि क्षेत्र दबा दिया




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रूखसार शरारती होने के कारण अचानक मुझे छेड़ना चाहती थी इसलिए उसने अपने कुछ बाल मेरे नाक में डाल दिए और मुझे छींक आ गई, जिससे मेरा संतुलन बिगड़ गया। हम दोनों घूमते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। मैं रुखसार के नीचे था।

इस अप्रत्याशित रूप से गिरने के कारण, मेरे दोनों हाथ रुखसार के स्तनों को पकड़े हुए थे क्योंकि उसके ऊपर के शरीर का सारा भार मेरे हाथों पर था और मेरे होंठ रुखसार के होठों से दब गए थे। इस क्षण भर की घटना से सब कुछ बदल गया, एक सनसनी और करंट हमारे दोनों शरीरों में बह गया।

मैंने अपना हाथ हिलाया और स्तनों से हटाया तो वह मेरी छाती से चिपक गयी और मैंने उसे गले से लगा लिया और कस कर भींच लिया और उसके गालों में चूमा और अंत में अपने गर्म होंठों को उसके होठों पर रख दिया। मैंने रुखसार के होठों को अलग किया और अपनी जीभ उसके मुंह के अंदर दाल दी। मेरी जीभ ने उसकी जीभ को छुआ और हम चुंबन करने लगे ।




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मेरे हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ पर घूमते रहे, अपना रास्ता बनाते हुए, धीरे से उसके तंग नितंबो को सहलाते रहे और उसने खुद को मेरे लंड के खिलाफ दबाया, और फिर मुझे अब उसके स्तन थोड़े कठोर महसूस हुए और उसके निप्पल अब मुझे चुभ रहे थे क्योंकि उसका ब्लाउज अस्त व्यस्त हो गया था। मैंने उसकी दुल्हन की पोशाक की बनारसी रेशमी साड़ी का पल्लू हटा दिया, और उसके स्तनों को सहलाया और फिर टॉप को निकाल दिया और दोनों स्तनों को दबाने से खुद को रोक सका। मैंने उसे पलटा, चित्त लिटाया और उसके ऊपर झुक गया और उसके निप्पल उसके खड़े स्तन के ऊपर पहाड़ की चोटियों पर सैनिक तैनात हो। दोनों स्तन गोल आकार में थे और उस पर निप्पल थोड़ा गुलाबी था और छोटे हल्के भूरे रंग के घेरे से घिरा हुआ था। वे चबाने और चखने के लिए बिलकुल त्यार पकी हुई छोटी चेरी के समान लग रहे थे। मैंने उन्हें चूमा, फिर अपनी जीभ को छोटे गुलाबी निप्पल के चारों ओर लपेटा और दूसरे को अपनी उंगली से घुमाया। वे सख्त हो गए थे और थोड़े और बड़े हो गए। मैं एक से दूसरे पर गया। और अपने दोनों स्तनों के बीच मेरे सिर को आगे-पीछे किया।



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वो अपने हाथ मेरी पीठ पर पीछे ले गयी, वह कराह रही थी, "ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, सलमान ओह मेरे दूल्हे।"

मैंने अपनी जीभ उसके पेट को नीचे ले गया, मैंने उसके पेट पर नाभि में अपनी जीभ को घुमाया और फिर मैंने उसकी साड़ी की गाँठ खोल दी और उसे निकाल दिया। अब रुखसार केवल पेटीकोट में थी और ऊपरी हिस्से पर उसने गहने पहने हुए थे ।

रुखसार ने भी मेरा कुरते की डोरियों को खोल दिया और साथ में मेरा पायजामा भी निकाल दिया और फिर मेरा अंडरवियर नीचे किया और मेरा बड़ा लंड एक दम उछाल कर निकल आया। अपने जीवन में, वह पहली बार एक असली लंड को इतने नजदीक से देख रही थी। उसने अर्शी की चुदाई के समय मेरा लंड पहले दूर से देखा था । जब अर्शी लंड को दिखाते हुए बोली थी रुखसार देख रुखसार तेरी चूत भी इसी लंड से फटेगी!!! पर अपने सामने 8" आकार का बड़ा काले रंग का मोटा सांप जैसा लंड देखना एक अलग ही अनुभव था जिसके नीचे दो बड़ी गेंदें लटक रही थीं। मेरी जांघो के बालो को मेरी तीनो बेगमो ने आज ही मुझे नहलाते समय साफ़ किया था और लंड टुनक कर ऊपर और नीचे धड़क रहा था। जिज्ञासा के साथ, वह लंड को करीब से देखने के लिए नीचे झुक गई।

वो गौर से लंड को देख रही थी पर उसने लंड को छुआ नहीं मैंने उसका एक हाथ लिया और अपने लंड के पास ले गया और कहा, "इसे महसूस करो।" फिर मैंने रुखसार के कोमल स्पर्श को लंड पर महसूस किया और मैं मजे से चिल्लाया, "ओह्ह्ह।"

मेरी बगल में होना, चूमना, अपने स्तनों को सहलावाना, रगड़वाना उसे बहुत अच्छा लगा था और मेरे से लिपटना चिपटना बेशक सुखद था लेकिन मेरे लंड को छूना एक अलग ही एहसास था और उसने लंड को छोड़ा तो वह वैसे ही खड़ा रहा तो उसे लंड के कड़ेपन का एहसास हुआ और उसने उसे फिर से पकड़ लिया और एक बार पूरे लंड पर हाथ फिराया। रुखसार लंड को छू कर से सोच कर नर्वस हो गयी की इतना बड़ा उसकी चूत के छेद में जब जाएगा जो उसका क्या हाल करेगा, उसने दुसरे हाथ से अपनी कुंवारी चूत को छुआ तो चूत को उतनी ही गीली और गर्म महसूस किया। उसने उत्साह में भर कर मुझे वापस चूमा। मैंने उठकर अपनी ड्रेस उतार दी और पूरा नंगा हो गया और मेरा लंड पहले से ही खम्भे की तरह खड़ा था और उसे रुखसार पकडे हुई थी।

रुखसार ने लंड को सहलाते हुए कामुक संवेदनाये महसूस की और उसे मेरा लंड अपने के हाथ में होना रोमांचक लगा। रुखसार उस रात पहली बार के सेक्स को लेकर काफी नर्वस थीं। वह न केवल एक कुंवारी थी बल्कि बहुत सुंदर, नाजुक और कमसिन भी थी। मेरे विशाल मोटे लंड की को पास से देख और छु कर और महसूस कर वह हैरान और उत्तेजित थी उसने अर्शी की चुदाई देखि थी और दूर से जितना उसे लगा था वास्तव में मेरा लंड उसकी तुलना में उसे बहुत बड़ा लगा और इस विशाल लंड के अपने शरीर में प्रवेश करने के विचार ने उसके शरीर को झकझोर कर रख दिया।




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फिर रुखसार ने मेरे बड़े और विशाल लंड को देखा उसे अर्शी का पहली चुदाई का किस्सा याद आया की कैसे अर्शी मेरा पूरा लंड लेते हुए चिल्लाई थी और फिर वह मेरे लंड को अपनी छोटी से चूत में जाने की कल्पना करते हुए वह घबरा गई। फिर उसने सोचा की अगर उससे छोटी उसकी कजिन अर्शी कितनी खुशी से मेरा बड़ा लंड पूरा ले पा रही थी और चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी और उससे पहले सबसे छोटी जूनि भी इस लंड का स्वाद ले चुकी थी और उसने उसे कई बार मेरे साथ अपनी चुदाई के किस्से सुनाये थे की उसने मेरे साथ चुदाई में कितने मजे लिए है तो वह भी इसे ले लेगी। वह इस लंड और मेरे साथ चुदाई का अनुभव करना चाहती थी। वह चाहती थी कि अब हमारे शरीर मिलें। लेकिन वह किसी अज्ञात चीज से डरती थी। वह जानती थी कि मैं उसे चोट नहीं पहुँचाउंगा। वह जानती थी कि पहली चुदाई में बड़े लंड में दर्द थोड़ा ज्यादा होगा लेकिन वह मेरे साथ अपना कौमार्य खोने के लिए तैयार थी क्योंकि एक तो उसका निकाह मेरे साथ हुआ था मैं ही उसका शौहर था और ये तय तह की एक न एक दिन उसे मेरे से ही चुदना था दूसरा उसने अपनी कजिन और बहनो को जिनका निकाह भी मेरे ही साथ हुआ था उन्हें मेरे साथ चुदाई के दौरान मजे लेते हुए देखा सुना था।

मेरे पास पहले से ही उसे मूड में लाने के लिए एक प्लान था जिसे मैं अपने तीनो बेगमो के साथ कामयाबी से आजमा चुका था। फिर अपने प्लान के हिसाब से मैंने उसे चूमा और उसे प्यार किया। उसके कान और गर्दन पर चूमा कर जीभ को घुमाया। मैंने उसके-उसके कान के लोब चूसा और उसके कानों के किनारों को चाटा और उसकी गर्दन को चूमा तो वह उत्तेजित हो कर कराहने लगी और मजे से कांप गयी मैं थोड़ा और नीचे चला गया और उसके गहने उतारे और प्यारे स्तनों को चूमा और उसके निप्पलों को चूसा और चाट लिया। वह धीरे से कराह रही थी और मेरी अपनी पीठ और नितम्बो पर अपने नाखूनों का इस्तेमाल कर रही थी। इस बीच मैं उसके खड़े निप्पल को चाटता रहा।



कहानी जारी रहेगी
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03-04-2022, 07:51 PM,
#35
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 31

कुंवारी रुखसार



इस बीच मैं उसके खड़े निप्पल को चाटता रहा।

मैं जानता था कि वह कैसा महसूस कर रही है। फिर भी मैंने बहुत धीरे-धीरे शुरू किया जिससे उसने महसूस करना शुरू कर दिया कि उसकी चुदने की इच्छा बढ़ रही थी क्योंकि मैंने उसके स्तनों को चाटा और निप्पलों को दांतो से हलके से कुतर दिया और उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में उसे चूमा। मैं उसके नग्न शरीर पर अपने गर्म होंठों से प्यार कर रहा था। रुखसार कराह रही थी।

ओह्ह आह, हाय । मुझे कुछ हो रहा है ... हाय!

अपने स्तनों पर कई मिनट ध्यान देने के दौरान मैंने उसका पेटीकोट ढीला किया और उसे खींचा तो रुखसार ने अपने नितम्ब उठा कर सहयोग दिया और मैंने फिर उसका पेटीकोट निकाल दिया और फिर उसके पेट से नीचे किश किया।

"ओह!" उसने सोचा। मैंने जब उसके बाल रहित योनि प्रदेश को छुआ। यह बहुत नरम था और मखमल जैसा महसूस होता था। वह लंड को सहला रही थी। उसकी आँखें मजे में बंद हो गईं।



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मैंने उसकी गुलाबी पैंटी को नीचे सरका दिया और वह उसकी गांड पर लटक गई। उसने अपनी गांड उठाई और उसकी पैंटी आसानी से नीचे फिसल गई। मुझे उसकी मांसल सुगंध का आभास हुआ। ओह्ह! खुशियों का खजाना!

मैंने उसकी टांगें खोल दीं और पहली बार उसकी चूत को देखा। यह नजारा बहुत खूबसूरत था। उसकी चूत के होंठ आपस में चिपके हुए, कड़े और सूजे हुए थे। उसके भीतर के होंठ अभी बाहर भी नहीं निकले थे, एक दम युवा, नाजुक और कुंवारी सील पैक चूत।

और मैंने एक ऊँगली अंदर सरकायी तो मेरी उंगली गीली और फिसलन महसूस कर रही थी। मैंने अपना सिर नीचे किया और साँस ली। मुझे वहाँ से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। मैंने ऊँगली निकाली और चाट ली ।

अब मैंने दो उंगलियों की सहायता से धीरे से चूत के होठों को अलग किया...ओह! ... ... यह अंदर से लाल थी और मैंने ऊँगली उसकी भगशेफ के ऊपर सरका दी। वह उछल गई और हांफने लगी। इसने उसे थोड़ा डरा दिया था। मैंने जो देखा उसने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया। वह बस मुझे देख रही थी, लेकिन रुखसार ने देखा कि अब मैंने जीब निकाली और होंठ उसके स्तनों से नीचे की ओर उसकी योनि की ओर बढ़ा दिए। उसने मुझे अर्शी के साथ मुख मैथुन करते हुए देखा था लेकिन इससे उसे क्या महसूस होगा और उसके अंदर जो भावनाओ का तूफ़ान उठने वाला था उसके बारे में वह बिलकुल अनजान थी पर सोच रही थी कि आगे क्या होगा। वह एक बार फिर उछली जब मेरी जीभ पहली बार उसके सबसे निजी अंगों के गर्म मांस से जुड़ी और मैंने उसकी योनि को बाहर चूमा।



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मैंने योनि के ओंठो को चूमा और चाटा फिर उसके दाने पर लपका। फिर से, वह हांफते हुए उछल गयी लेकिन इस बार मैंने उसे चूसा और चाटा और उसे छेड़ा तो वह ओह्ह अह्ह्ह करके कराहने लगी और फिर उंगलियों की सहायता से चूत के ओंठो को थोड़ा खोला और जीब सरकाने से पहले

"आपको अच्छा लग रहा है?" मैंने पूछा।

"मुझे भी ऐसा ही लगता है?" उसने आश्चर्य से उत्तर दिया।

"आप चाहती हो कि मैं रुक जाऊँ?" मैंने पूछा।

"मुझे ऐसा नहीं लगता," उसने अपने होठों पर एक प्यारी-सी मुस्कान के साथ जवाब दिया।

"क्या यह अच्छा लगता है?" मैंने पूछा।

"मुझे ऐसा ही लगता है," उसने जवाब दिया,

चलो अब और भी बेहतर तरीके से करते हैं, " मैंने कहा।

रुखसार थोड़ी हैरान हुई उसे मजा आरहा था अब इससे बेहतर क्या हो सकता है। उसने मुझे अर्शी की चूत चाटते हुए देखा था परन्तु दूर से केवल ये ही देखा था की मैं चाट रहा हूँ । क्या कहाँ और कैसे ये वह दूर से नहीं देख सकी थी । उसे मुंझ पर भरोसा था इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया

और मुझे चाटना जारी रखने दिया। मैंने उसे फिर से कोमलता से चाटा और उसे कुछ ऐसा शक्तिशाली लगने लगा जो उसने कभी महसूस नहीं किया था।



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मैंने ने धीरे-धीरे जारी रखा, उसकी योनि के ओंठो को उंगलियों से खोला और अपनी जीभ से उसकी चूत की सिलवटों की खोज की, और वह इन तेज संवेदनाओं का पूरा मजा ले रही थी। उसने अंततः दोनों हाथों को नीचे लेजाकर मेरा सिर पकड़कर, अंदर खींचकर, औरयोनि खेत्र को मेरे मुँह पर दबा कर और सही स्थानों पर मार्गदर्शन करके मुझे बता दिया की उसे अच्छा लग रहा है और वह कराहने लगी। है चाटो, चूमे चूसो जोर से चाटो अच्छा लग रहा है ... वाह आपकी जीभ कमाल कर रही है भाई उसकी कराहे मेरे कानों के लिए संगीत था और मेरी जीभ को उसका स्वाद स्वादिष्ट लगा।

मैंने उसे चाटा, चूमा, चूसा, कुतर दिया और फिर से चूमा। उसकी प्यारी, गीली चूत में आग लगी हुई थी और उसका रस बह रहा था। उसकी महक नशीली थी। ये तब तक जारी रहा जब तक कि उसका बदन कांपने नहीं लगा और उसने मेरा मुँह जोर से अपणु चूत पर दबा दिया और फिर वह आह ओह्ह उज्ज्ज करके कराहती हुई झड़ गयीऔर उसने मेरा मुँह अपने रस से भर दिया ।



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रुखसार ने महसूस किया कि जैसे-जैसे मैं चाटता रहा, उसका मजा तेज होता गया। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह कितना जबरदस्त और मजेदार था और उसने ऐसा पहले कभी नहीं महसूस किया था। वह खुद पर और भी ज्यादा हैरान थी। main उसकी चूत चाटता था और उसकी चूत का रस चूसा। यह बहुत ही अद्भुत था।

उसके झड़ने के-के बाद, मुझे पता था कि यह बड़े कमाल का मौका है। मैं धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर ले गया, रास्ते में उसके शरीर को चूमा और चाटा, फिर से उसके स्वादिष्ट स्तनों पर थोड़ा अतिरिक्त समय बिताया।

मैं उसके ऊपर चला गया जिससे अब हम आमने-सामने थे और मैंने उसके ओंठो को चूमा। उसके चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि के भाव थे। मेरा लंड अब पूरा उग्र कठोर और धड़क रहा था और तैयार था। मैंने उसे चूमा और महसूस किया की वह मेरे चंबणो का जवाब दे रही है और मुझे वापिस चूम रही है ।

"आप तैयार हैं?" मैंने पूछा।

"मुझे नहीं पता," उसने जवाब दिया। अब ये सुन कर मेरा दिल थोड़ा डूब गया।

"ठीक है, चलो इसे एक कोशित करते है," मैंने कहा। "मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ूंगा। अगर दर्द होता है, तो आप मुझे बतान और मैं तब तक रुकूंगा जब तक आप ठीक नहीं हो जाती और फिर मैं थोड़ी और कोशिश करूंगा।"

"ठीक है," उसने आशंकित उत्तर दिया।

"वाह!" मैंने सोचा।

उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया, मुझे अपने पास खींच लिया, मेरी आँखों में देखा, फिर वर्णन से परे जुनून के साथ चूमा और जीभ के साथ जीब मिली और उसने मेरी जीभ को चूसा और आँखों में नमि के साथ, धीरे से कहा, "भाई कृपया, आराम से कोमलता से करना। मुझे डर लग रहा है।"

मैंने उसकी आँखों में देखा मुस्कुराया। और उसे उसी जोश के साथ चूमा और कहा, "मैं करूंगा, मेरी जान। मैं करूंगा।"

मैंने अपनेलंड का सिर उसके चूत पर रखा और लंडमुंड अंदर धकेला लंड बड़ा था और चूत टाइट थी और उसका छेद छोटा था लंड अंदर नहीं गया। उसने हांफते हुए, मेरे कूल्हों पर पीछे धकेला और उसे रुकने के लिए कहा। मैं रुका और लंड को योनि और उसकी क्लीट पर रगड़ा वह कराह उठी और मैंने छेद पर थोड़ा दबाब दाल कर थोड़ा अंदर धकेल दिया। उसने फिर से दर्द में हांफते हुए अपने कूल्हों पर पीछे धकेल दिया। लेकिन मैंने लंड छेद पर लगा कर रखा और रुक गया और इंतजार करने लगा। जब लगा अब रुखसार ठीक है, तो थोड़ा और अंदर धकेल दिया। जैसे ही मैं उसके अंदर और बाहर फिसलता था, वह मुझ पर अपनी गर्म सांसें छोड़ती थी।

अब रुखसार का शरीर कस गया। मुझे अपने से दूर धकेलने की उसने जोरदार कोशिश की। दर्द उसे चौंकाने वाला था। उसे लगा योनि का छेद चौड़ा हो गया है और लंड अंदर फस गया। उसकी आँखों से गर्म आँसू आ गए। उसने आँखो से पुछा पूरा अंदर गया मैंने हलके से गर्दन न में हिलायी और इसके साथ ही फिर जोर लगा दिया अब लंड अंदर गया और जाकर उसकी झिल्ली से टकराया ।

रुखसार की आँखों नम हो गयी और लगा वह मुश्किल से सांस ले रही है, लेकिन अब तक तीन कुंवारी बेगमो की चुदाई के बाद मैं अच्छी तरह जानता था कि दर्द जल्द ही बंद हो जाएगा बस कुछ पल इंतजार करना था। उसने अपनी उँगलियों को मोड़ बिस्तर की चार को पकड़ा और धीरे से अपनी आँखें खोलीं मैंने उसके होंठ चाटे। जैसे ही उसने एक और गहरी साँस ली और सिर हिलाया, उसका सीना ऊपर उठा। फिर कई बार सहलाने और चूमने के बाद मैंने केवल कुछ सेकंड के लिए अपना कठोर लंड थोड़ा-सा पीछे किया और मैंने धक्का लगाया और रुखसार की चूत ने अब लंड का स्वागत किया। उसका दिमाग अब इस बात पर केंद्रित नहीं था कि क्या हुआ था, बल्कि क्या हो रहा था।

प्रत्येक धक्के के साथ, वह दर्द में हांफती, मेरे कूल्हों को पीछे धकेलती और मैं कुछ पल के लिए रुक जाता, जिससे वह आराम कर सके ताकि जब वह थोड़ा ठीक हो जाए तो मैं आगे बढ़ सकूँ। प्रत्येक ढ़ाके और फिर दर्द की लहर के साथ, वह अपने पैरों को भी कसती थी जो उसकी चूत को मेरे लंड पर कस देती थी और धक्का देने के लिए अवरोध पैदा कर रही थी। लेकिन फिर भी वह मेरा लंड लेने को उत्सुक थी ।

जैसे-जैसे मेरा लंड अंदर गया, रुखसार की उंगलियाँ मेरी पीठ पर चली गईं। वह मेरे लंड की कठोरता को अपने अंदर महसूस कर रही थी और उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठा लिया।

जब मैं नीचे झुका और लंड फिर से अंदर धकेला तो लंड और गहरा गया और-और मुझे लगा लंड उसकी कुंवारेपन की झिल्ली से टकराया है। मैंने एक ऐसे बिंदु पर धक्का दिया था जो उसके लिए बहुत दर्दनाक था। वह दर्द से चिल्लाई और बोली प्लीज रुको। मैंने उसके निप्पल को अपने दांतों से पकड़ लिया। ओह्ह! भाई! वह कराह उठी। उसके नाखून मेरी पीठ में गढ़ गए मेरी भी कराह निकली


मैंने अपनी स्थिति संभाली और इन्तजार किया। जब दर्द कम हो गया, और उसने पलके झपका कर आगे बढ़ने का इशारा किया । तो मैंने फिर से धीरे से धक्का देने की कोशिश की लेकिन मैं आगे नहीं बढ़ सका। वह फिर दर्द से कराह उठी और मुझे रुकने को कहा। फिर से, मैंने अपनी स्थिति संभाली और फिर मैंने तीन बार हलके धक्के के साथ कोशिश की और तीन बार वह दर्द से चिल्लाई और मुझे रुकने को कहा। तीन बार मैंने उसके दर्द के कम होने का इंतजार किया और फिर इस जगह को पीछे धकेलने की कोशिश की। तीन बार, उसके दर्द ने लंड को चूत में आगे जाने से रोक दिया।

मुझे नहीं पता कि क्या मैं यह कर सकती हूँ भाई, "उसने दर्द से कहा।" प्लीज रुक जाओ । इसे बाहर निकालो। "

कहानी जारी रहेगी


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03-29-2022, 05:28 PM,
#36
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 32

तीखा

रुखसार मुझे धक्का देकर अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी। उसके आंसू मुझे बहुत बुरे लग रहे थे मैंने उसके आँसू चाटे । मैं उसे चोट नहीं पहुँचाना चाहता था, लेकिन जानता था कि यह किसी दिन जरूर होगा और निश्चय किया की अब ही होगा।

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मुझे मालूम था की अगर अब बहार निकाल लिया तो रुखसार इस दर्द भरे अनुभव से दुबारा नहीं गुजरना चाहेगी और फिर कभी नहीं चुदवायेगी।

"रुखसार, बेबी, मेरी जान" मैंने उसके अंदर अपने लंड को जमा कर उसे हाथ पकड़ कर कहा, "तुम्हें पता था कि यह दर्दनाक होगा। हम लगभग वहाँ हैं, बेबी। मेरा विश्वास करो। मैं जितना हो सकता है उतना आराम से कर रहा हूँ। क्या आप मुझ पर भरोसा करती हो?"


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रुखसार बोली आप मेरे सरताज हो मेरे दूल्हे! और वह शांत हो गई, मुझे दूर धकेलना बंद कर दिया, मेरी ओर देखा, मुस्कुराई और कहा, "ठीक है, दूल्हे भाई! मुझे आप पर पूरा भरोसा है," उसने जवाब दिया।

मैंने महसूस किया की उसकी झिल्ली मजबूत है और थोड़ा ज्यादा जोर लगाना होगा और फिर मैंने लंड पीछे किया और चौथे तेज धक्के के साथ ही मुझे एक छोटा "पॉप" महसूस हुआ जिससे मुझे लगा की रुखसार का हाइमन टूट गया है। जब उसकी "चेरी पॉप" हुई, तो मैंने राहत और आनंद की एक बड़ी सांस ली। लेकिन रुखसार की आँखें बंद हो गईं और उसका सिर पीछे की ओर झुक गया उसको दर्द हुआ लेकिन तरल रस उसकी चूत से निकला और मरे लंड को गर्म शहद से ढक दिया। फिर जैसे उसकी योनि से आनंद की लहर बह उठी, उसके पूरे शरीर को बहा ले गयी। उसके हाथ मेरे कूल्हों के चारों ओर गए और वह मुझे अपने अंदर खींचने लगी।

मैंने महसूस किया कि रुखसार के टूटे हुए हाइमन का खून मेरे लिंग पर फैल गया है। यह एक अद्भुत अनुभूति थी जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मेरी प्यारी, सबसे सुंदर दुल्हन ने मुहे अभी-अभी अपना सबसे कीमती उपहार दिया था। और फिर साथ में रस उसकी चूत से मेरे लंड पर बरसा और मेरे लंड को अपने गर्म रस से भिगो दिया।

रुखसार को लगा कि इससे उसे बहुत दर्द हुआ, लेकिन अब यह केवल दबाव की भावना थी, और थोड़ा डंक दबाव ने उसे इतना विचलित कर दिया कि उसका इसके आनंद को महसूस करना मुश्किल था। जब वह दर्दनाक हिस्से को पार कर गयी, तो उसे लगा वह इसे कभी नहीं भूलेगी कि उसे अपने अंदर कैसा महसूस हुआ था। यह हमारे बीच एक ऐसा कनेक्शन था जिसके बारे में उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। वह मुझे अपने ऊपर महसूस करना पसंद कर रही थी, वह मुझ पर अपनी गर्म सांसें छोड़ रही थी। पहली बार इसका अनुभव करना सबसे कीमती चीज थी और मेरे साथ ऐसा करना उसके लिए बहुत ख़ास था।



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कुछ ही क्षण पहले दर्द के साथ, मैंने उसे अपने करीब खींच लिया, मैं अपनी मर्दानगी को रुखसार के मधुर, कुंवारी गीलेपन में और आगे धकेलने में सक्षम था। उसने अपने पैरों को चौड़ा किया और पूरा लंड अंदर डालने की अनुमति दी। उसकी चूत बिलकुल टाइट थी, रस से भरी थी फिर भी लंड बाहर खींचना आश्चर्यजनक रूप से कठिन था और फिर से वापस धकेलना भी मुश्किल था। लेकिन मैं धीरे-धीरे पीछे करने में कामयाब रहा और फिर खुद को उसके सबसे गहरी गहराई में धकेल दिया और पूरा का पूरा लंड अंदर पैबस्त कर दिया। फिर उसने कुइछ देर बाद अपने चूतड़ उठा कर इशारा किया और फिर प्रत्येक स्ट्रोक के साथ, मैंने महसूस किया कि लंड का सिर उसके गर्भाशय से टकरा रहा है को छू रहा है। वह पूरी तरह से भरी हुई थी हम दोनों "एक तन" होते जा रहे थे। प्रत्येक पीछे की ओर निकालने और फिर आगे धकेलने के साथ, मैं उस आनंद और तृप्ति को देख सकता था जो वह अनुभव कर रही थी।

मैंने धीमी और स्थिर शुरुआत की। जैसे ही रुखसार संवेदनाओं का आनंद लेने लगी, मैंने गति बढ़ा दी और जल्द ही हम दोनों अपने कूल्हे हिलाने लगे जिससे दीवार के खिलाफ बिस्तर को हिला रहे थे। फिर मुझे एक संभोग सुख का अनुभव हुआ जिसने मुझे पिचकारियाँ मारने पर मजबूर कर दिया और मैंने अपना बीज उसकी योनि में भर दिया और उसने साथ में झड़ते हुए मेरी हर बूंद को स्वीकार कर लिया।

रुखसार मेरी मर्दानगी में खो गई थी। मेरा लंड उसके अंदर पूरा कठोर था, इतना मर्दाना और इतना बड़ा था। जैसे ही मैंने अपनी मर्दानगी को लंबे, कामुक, प्यार भरे स्ट्रोक में उसके अंदर और बाहर गिराया, वह कांप गई और हांफने लगी। फिर मैंने चुदाई की गति को धीमा कर दिया, अपने नए बंधन में आनंद लेते हुए, उसे गहराई से और जोश से चूमा। वे। हालाँकि मुझे अभी-अभी एक अविश्वसनीय सुख मिला था, लेकिन मेरा लंड कठोर बना रहा और जारी रखने में सक्षम था। हमारे पास एक-दूसरे के लिए प्यार के अलावा कुछ नहीं था। हमे कोई चिंता नहीं थी, कोई परवाह नहीं थी, मजे के लिए नग्न शरीर के अलावा कुछ भी नहीं था। हमने लंबे समय तक प्यार किया। वह सबसे खूबसूरत कुंवारी दुल्हन थी जिसे कोई पुरुष चाहता है

रुखसार ने मेरा हर चुंबन में साथ दिया मेरी जीभ और ओंठो को चूसा, अपने पैरों को जितना संभव हो उतना फैलाया और मुझे अपने ऊपर खींचकर लंड को गहरे ले जाने की कोशिश कर रही थी। उ हरेक ढ़ाके के साथ मेरी बड़ी गेंदे जोर के साथ उसके भगशेफ के खिलाफ टकरा रही थी। हम दोनों शुद्ध कामोत्तेजक मजे लूट रहे थे और कराह रहे थे। मैंने उससे पुछा उसे कैसा लगा वह बोली उसे बहुत अच्छा लगा। रुखसार बहुत खुश थी कि वह अब कुंवारी नहीं रही। उसने अपना सिर मेरी छाती पर रख दिया

रुखसार के सपनों का नवाब उसके अंदर था, उसे वह खुशी दे रहा था जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मैंने उसके साटन दबाबाये तो महसूस किया कि रुखसार की चूत की मांसपेशियों मेरे लंड पर को कस गयी है गया है और फिर उसके सह के गर्म प्रवाह को महसूस किया क्योंकि उसकी कुंवारी छूट जो अब कुंवारी नहीं रही थी वह मेरे लंड से भर गई थी।

रुखसार रोमांच में थी। वह काँप रही थी और अपने अंदर मेरे सख्त लिंग के स्पंदन से काँप रही थी। क्योंकि मैं बहुत दिनों बाद चुदाई कर रहा था इसलिए बहुत उत्तेजित था और मैं अपने संभोग के बाद नहीं रुका। मैं उसकी अतृप्त चूत से अंदर और बाहर फिसलता रहा। वह महसूस कर सकती थी कि हमारा मिला जुला रस बाहर निकल रहा है और उसके नितंब की दरार से नीचे बह रहा है।

मैं रुखसार पर गिर पड़ा, हांफने और कांपने लगा। मुझे पसीना आ रहा था और रुखसार पर टपक रहा था, मेरे धड़कता हुआ लिंग कठोर था और हमारा मीठा मिला जुला रस उसके अंदर था।

कई मिनट रुखसार की सांसों को पकड़ने, चूमने और टटोलने के बाद, मैं उससे लिपट गया। उसने मेरे पूरे शरीर को रगड़ा और मैंने उसके स्तनों को सहलाया।



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मैंने रुखसार की कोमल कराहती आवाज़ों के बीच और उसके नितंबों को रगड़ा वह मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरा लंड अपनी छूट के प्रवेश द्वार पर रख दिया और मेरे कठोर लिंग को अपने अंदर खिसका लिया और अपने पूरे लम्बाई को निगलने के लिए खुद को नीचे कर लिया। फिर से हमने प्यार किया। उसे मुझ पर बैठकर अच्छा लगा। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर उसे जोर से नीचे खींच दिया, उसकी चूत के ओंठो ने मेरी अंडो को रगड़ा और अपने संपूर्ण स्तनों तक पहुँच प्रदान करने के लिए मेरे लंड पर बैठ गई। वह मेरे कठोर लंड पर धीरे-धीरे, ऊपर और नीचे, आगे और पीछे घुमाती थी, अपनी चूत को उत्तेजित करने के लिए मेरे लंड और गेंदों पर पीस रही थी।

मैं अपने मुंह से निकली कराहो को निकलने हीं रोक सका क्योंकि रुखसार की तंग चूत ने मेरे लंड को अपने अंदर मजबूती से जकड़ रखा था। ऐसा लगा जैसे मेरा लंड रेशम के अंदर कैद था और मेरा लंड उसकी मांसपेशियों में दबाब महसूस कर रहा था। अपनी आँखें बंद करके उसने एक नरम कराह भरी और वह मेरे अंडो पर टिक गयी वह पूरी तरह से भरी हुई थी। मैं स्वर्ग में था! जैसे ही उसने धीरे से अपनी आँखें खोलीं, उसने मेरे हाथों को नीचे से ऊपर उठाया और अपने स्तनों पर रख दिया। वे दृढ़ थे और छोटे निप्पल मेरे हाथों की हथेलियों में छोटे स्पाइक्स की तरह थे। मैंने धीरे से दबाया और फिर निचोड़ा और अपने जीवन का आश्चर्य प्राप्त किया। जैसे ही मैं उसके स्तनों को निचोड़ता, रुखसार की चूत की आंतरिक मांसपेशियों सुकड़ने लगी उसकी चूत संकुचन करने लगी और उसकी मांपेशिया मेरे लंड को निचोड़ कर मेरे लंड पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेती थी और मेरी चीखे निकल गयी । वह आगे झुकी और मुझे किश करने लगी मुझे बिलकुल वैसा लगा जैसे तीखा खाने के बाद लगता है । लेकिन मैं उसके स्तन पकड़े हुए चीख रहा था ।मैं इतना जोर से और देर तक चीखता रहा जितना मेरी चारो बेगमे भी अपनी सील टूटने पर नहीं चीखी थी ।


लेकिन यह सबसे शानदार अनुभब था और रुखसार को संकुचन के दौरान एक इंच भी हिलना नहीं पड़ा। वह फिर सीधी हुई और जब मैंने फिर से उसे स्तनों को दबाया और फिर हरेक बार स्तनों को दबाने के साथ, रुखसार की चुत मेरे लंड को निचोड़ती और छोड़ती, मेरे बदन में शानदार आनंद की लहरें भेजती। मैं लगातार चिल्ला रहा था आह ओह्ह उफ़ हाय मर गया लेकिन रुखसार आगे झुक गई और अपने मीठे होंठों से मेरे मुंह को ढँकते हुए मुझे गहरा चूमा। मैंने अपने हाथों को उसके स्तनों को दबा लिया और उसने मुझे दबाया और मेरी पीठ के चारों ओर अपने हाथो को फेंक दिया और कसकर मुझे गले लगा लिया, हमने जोश से चूमा। रुखसार की चूत ने प्रतिक्रिया में मेरे लंड को एक उग्र गति से निचोड़ना और छोड़ना शुरू कर। ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड दूध निकालने वाली मशीन में है। यह शानदार था! उसकी मांसपेशियाँ नीचे से ऊपर तक सिकुड़ रही थी, जो एक लहरदार प्रभाव की तरह लगता है। संवेदनाएँ मेरे लिए बहुत अधिक थीं और मेरे लंड में ऐंठन होने लगी, मेरे सालो से सहेजे गए रस को उसने निचोड़ लिया और फिर शूटिंग हुई। पहली नाड़ी के साथ, रुखसार ने मेरे लंड को अपनी मांसपेशियों के साथ दबा दिया और अपने क्रॉच को नीचे तक ले गयी, मेरे जांघों के किनारों के नीचे अपने पैरों को झुकाकर मेरे लंड को उसने अपनी चुत में बंद कर लिया। वह फिर बस अपनी जगह पर जम गई और उसने वह सब स्वीकार कर लिया जो मुझे उसे देना था, और मैंने जोर से कराहते हुए अपने अंडकोष खाली कर दिए।

जैसे ही मेरे लंड में धड़कन कम होने लगी, रुखसार की चुत ने मेरे लंड को एक बार फिर से निचोड़ना और छोड़ना शुरू कर दिया, जिससे मेरे कामोन्माद की संवेदनाएँ लंबी हो गईं। कई मिनटों के बाद मेरा लंड अपनी कठोरता खोने लगा। एक और अत्यंत कठिन निचोड़ के साथ रुखसार अपने आप को मेरे लंड से उठ गयी और मेरी बगल में लेट गई।

"बहुत खूब , रुखसार !" मैंने अपने बगल में बैठी अपनी प्यारी बेगम को देखते चूमते हुए कहा, "यह अविश्वसनीय था!"

"धन्यवाद," रुखसार ने चूमते हुए जवाब दिया, "अब आप आराम करें।"

रुखसार मेरे ऊपर लेट गई और मैंने उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया। वह बहुत खुश थी कि वह अब कुंवारी नहीं रही और उसे एक मजबूत लंड मिला था चुदाई करने के लिए और मैं भी बहुत खुश था की मुझे ऐसे शानदार चुत चोदने को मिली थी जो संकुचन करती थी। उसने अपना सिर उसकी छाती पर रख दिया और वे फिर हम दोनों गहरी नींद में सो गए। जब हम भोर में उठे, तो हमने एक बार फिर प्यार किया और फिर से चुदाई की। सफेद चादर पर खून लगा था। हम फिर तड़के तक चुदाई करते रहे और सो गए।


तीखा बहुत गरम होता हैं, ये शरीर के ताप को बढ़ा देता हैं, और इसका अलग ही मजा है और रुखसार की चूत के तीखे चूत संकुचन के साथ मुझे बहुत मजा आया ।

कहानी जारी रहेगी

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03-29-2022, 05:30 PM,
#37
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 33

लंड चुसाई



सुबह उठे तो मैंने रुखसार को चूमा और पुछा " आपको यह पसंद आया रुखसार। ?

रुखसार बोली ओह मुझे यह बहुत अच्छा लगा उसने जवाब दिया और मैं यह मानने के लिए तैयार था कि उसकी बहनों की ही तरह उसे चुदाई का मजा आया था। । और आप?

सच रुखसार मुझे सबसे ज्यादा मजा तुम्हारे ही साथ आया मैं उसे चूमते हुए बोला

" अरे, दूल्हे भाई आप इतना क्यों चिल्ला रहे थे । रखसार बोली?

मैंने कहा तुम मेरे लंड तो निचोड़ रही थी तुम्हारी छूट मेरे लंड को चूस रही थी और तुम मुझे धोये जा रही थी। पर सच मजा आ गया मेरी जान और इसे याद करके कमबख्त भी चट्टान की तरह सख्त हो गया है! मेरा लंड बिकुल कठोर हो गया था ।

मम्म, ज़ीनत आपा सही कह रही थी-आपका बहुत बड़ा है! मुझे लगा आपका लंड मेरे गले तक आ गया था! और जल्द ही मैं उसे वहाँ महसूस करने वाली हूँ"रुखसार ने वादा किया और हमारे शरीर के बीच पहुँचकर उसके हाथ मेरे बड़ी गेंदों को सहलाने लगे।" और इस बार ये दूसरी दिशा में पहली बार अंदर जायेगा! "

रुखसार ने इशारा किया की उसे लंड को मुँह में लेने का भी कोई अनुभव नहीं था। मेरे अनुभव से मुझे अंदाजा था को कि महिलाओं को पहले चुदाई के बाद कम से कम एक साल तक उनके मुंह में लंड लेना पसंद नहीं होता है या यह कि उनकी पहली चुदाई के बाद लंड उनमे चूसने की इच्छा पैदा करने में आम तौर पर और भी अधिक समय लगता है। हाँ जो लड़किये चुदने से पहले लंड चूसने लगती हैं वह लंड चूसने के लिए हमेशा त्यार रहती हैं। लेकिन रुक्सार इतनी जल्दी लंड चूसने की बात कर रही थी जिसे सुन कर मुझे काफी हैरानी हुई।



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हालाँकि, युवा रुखसार ने न तो कभी चुदाई करवाई थी न ही लंड चूसा था फिर भी वह मेरे रस के हर निशान को साफ करने के लिए मेरे लंड को चाटने पर पूरी तरह से आमादा थी। मैं एक पल के लिए उसके दृढ़ स्तनों को पुचकारने लगा और मेरा लंड रुखसार की गर्म योनी के अंदर था। मेरी हथेलियों और रुखसार के निपल्स के बीच के संपर्क ने स्वाभाविक रूप से लड़की की चूत को पहले से कहीं ज्यादा गर्म कर दिया और वह मुझे उतनी ही शिद्द्त से चाहती थी, जितनी उसने अपने पूरे जीवन में कभी चाहा था। रुखसार ने अपनी टांगो अपनी जाँघों को पूरी लंबाई में फैला दिया और मैंने उसके लंड को उसकी योनी से बाहर निकालना शुरू कर दिया, जैसे ही मैंने ऐसा किया, मैं सीधे घुटने टेक कर की बैठने की स्थिति में आ गया। रुखसार में मेरी बगल में घुटने टिका दिए और देखने के लिए नीचे झुकी और जैसे ही मेरा लंड अपनी बेगम की चूत से बाहर निकला वह आगे झुकी और लंड को मुँह से चूमने के लिए ओंठो को खोल कर देखने लगी लंड ऊपर उठा हुआ था जिससे वह अपना मुँह लंड के गीले, और हमारे रस में सने सिर पर नीचे सरका सकती थी।

रुखसार को लमेरे लंड पर कामुक आनंद के लक्षण दिखाई दे रहे थे; लंड के सिर से नीचे टपक रहे रस की धार और गाड़ी क्रीम की मोटी बूँदो से लंड के चमड़ी चमक रही थी। वह उपकरण से केवल इंच की दूरी पर अपने होठों के साथ एक पल के लिए झिझक गई। कामुकता की गंध तेज थी-उसकी अपने रस की बूंदों के साथ, कच्ची, अनर्गल वासना की एक प्रबल सुगंध आ रही थी-और उसने महसूस किया कि उस पर एक बार फिर चुदाई का नशा छा रहा था। उसने मुँह आगे कर उन टपकती हुई बूंदी को अपने ओंठो पर लिया और जीभ से उन्हें ओंठो से चाटा और मैं रुखसार की चूत पर हाथ फेरने के लिए नीचे गया और उसे सहलाने लगा। मेरा रसा जो उसकी अंधेरे, युवा भट्ठा के होंठ पर लगा हुआ था और मेरी उंगलियों से चिपक गया। मैंने उस गर्म, चिपचिपी क्रीम को बाहरी सतहों पर फैलाया और


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-और अपनी एक उंगली की नोक को उसकी योनी में खिसका दिया और अतिरिक्त दबाव पर रुखसार ने धीरे से आह भरी-

मैंने निश्चित रूप से उसकी चूत की सभी कोमल संवेदनशीलता को भड़का दिया था। रुखसार अब और इंतजार नहीं कर सकती थी। कामुक वासनाओं से भर कर उसने मेरे लंड को देख और गंध से उत्तेजित होकर, उसने अपना ओढ़ से मेरे लंड के सर को चुमाऔर मुँह खोल कर मोटे लंड के सिर के ऊपर से नीचे गिरा दिया और तुरंत अपने शरीर में जानवरों की कामुकता का एक शक्तिशाली झटका महसूस किया। कर्कश खुशी ने मुझे चीर दिया, जैसे कि बिजली की एक बोल्ट ने उसे मारा हो और उसकी जीभ ने एक ही बार में अपने आप को चौड़े सिरे के चारों ओर लपेटा और सिर को शाफ्ट से अलग करने वाले खांचे में गहरी खुदाई की। उसने अपना मुंह को जितना हो सके तब तक मेरे लंड को नीचे की ओर धकेला, जब तक कि टिप उसके गले में नहीं चली गयी। हालाँकि उसी लंड चूसने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था, लेकिन उसके पास लंड के बड़े हिस्से को अपने गले में लेने की अद्भुत क्षमता थी।


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रुखसार ने अपनी गर्म योनी का स्वाद, साथ में प्रचुर मात्रा में मेरे रस के मजबूत स्वाद के साथ, उसके होश उड़ गए। उसने उमेरे सूजे हुए लंड के चारों ओर अपना चेहरा घुमाया और जितना हो सके उतना जोर से चूसा। मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसे स्थिर रखते हुए, उसके गर्म छोटे मुंह में लंड आगे पीछे करना शुरू किया और वह लंड को चूस रही थी, जैसे ही मैंने लंड आगे पीछे किया, मैं मजे से चिल्ला पड़ा । वह मुझे इस तरीके से अपना मुंह चोदते हुए महसूस कर रोमांचित हो गयी थी। अनुभवहीन होने के बावजूद, वह अंदाजा लगा सकती कि मैं इसका आनंद ले रहा था और वह वास्तव में मेरी अच्छी तरह से सेवा कर रही थी।

मैंने लंड को बार खींच लिया अब केवल लंड मुंड उसके मुँह में था जिस पर रुखसार जीभ घुमा रहा थाई और मैं अपनी उँगलियों को उसकी रसीली चूत के होठों में लगा उसे गौर से देखता रहा। बेशक, रुखसार जानती थी कि मेरा दिमाग बहुत कामोत्तेजक था और लड़की के साथ लंबे समय तक सेक्स करने में मेरी गहरी दिलचस्पी थी। मुझे विश्वास नहीं था कि रुखसार इतनी आसानी से लंड चूसने के लिए त्यार हो जायेगी।

इतनी उत्सुकता के साथ मेरे लंड की चूसने वाली मेरी इस बेगम का नजारा मेरे लिए बेहद रोमांचक साबित हुआ और अब मेरी उंगलियों के छेड़छाड़ के कारण रुखसार की कमर भी हिलने लगी थी जो इस बात का स्पष्ट संकेत था को वह अब चाहती है की मैं फिर से अपना लंड उसकी योनी में घुसा दू।

जब तक मैं कर सकता था मैं लंड चुसवाता रहा। रुखसार खुशी-खुशी मुझे एक बार फिर झड़ने की कगार पर ला रही थी क्योंकि वह यह महसूस कर काफी खुश थी कि उसका शौहर आज उसकी पहली छूट चुदाई के बाद अब पहली बार उसके मुंह में आने वाला है लेकिन मैं अब दूसरे तरीके से झड़ना चाहता था।

"लेट जाओ रुखसार पीठ के बल लेट जाओ!" मैं उस पर झुक गया। "अपने पैरों को फैलाओ और मेरे लंड को तुम्हारी उस गर्म छोटी योनी में जाने दो!" मुझे इसमें कोई संदेह नहीं था मैं उस युवा योनी के अंदर लंड घुसा कर उसकी सील तोड़ने वाला उसका शौहर था। । रुखसार खुद ऐसा होने के लिए काफी तैयार थी और वह तेजी से लेट गयी और अपने पैरों को अलग कर लिया, ऐसा करते हुए अपने घुटनों को ऊंचा कर दिया। मैंने उस युवा योनी की ओर देखा जो उसने मुझे कल रात भेंट की थी; इसके कोमल रूप ने मुझे गर्म कर दिया।

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जिस तरह से रुखसार ने मेरा लंड चूसा था, उसने उससे मुझे अपने लंड को उसके गर्म छोटे छेद में घुसाने का अतिरिक्त कारण दिया था मैं अब महसूस करना चाहता था कि उसके मुँह से लंड चुसवाने के बाद जब उसकी चूत संकुचन करते हुए मेरे लंड को चूसेगी तो कितना ज्यादा मजा आएगा। मैंने लंड से उसकी भगनासा की छुआ और वह कारह उठी और अब मैंने उसकी चूत के छोटे से छेद को मेरे लंड से फैलाने का इरादा किया।

रुखसार ने जोर से कराह उठी जा उसे लगा कि मेरा लंड उसकी चूत के होठों से टकरा रहा है। सेक्स की शक्ति का एक बढ़ता हुआ झोंका उसमे आया और उसकी कमर से स्पंदित हुआ और उसने अनजाने में अपने घुटनों को मेरे धड़ के चारों ओर ले आई। मैंने मेरे लंड के सिर को एक पल के लिए उसके भट्ठे के ऊपर और नीचे किया, उसे समृद्ध, गीले तेलों और लंड पर लगी उसके लार में नहलाया, लार उसकी योनी में बह गयी और धीरे-धीरे उसे उस तनी हुई छोटी दरार के बीच में अपने लंड को लाया।


रुखसार जानती थी कि एक बार फिर मैं उसकी योनी को चौड़ी करूँगा । वह लंड को अपनी योनी के अंदर और अधिक उत्साह के साथ चाहती थी, और इस इच्छा से उसने अपनी एड़ी को मेरी गांड के नितम्बो पर एक साथ बंद कर दिया। मैंने उसके दुबले-पतले, सुडौल शरीर को प्यार किया और वह मुझे देखकर मुस्कुराई, मुझे उसकी मुस्कान में चुदने के इच्छा साफ नजर आयी। जब वह नहीं हिली, तो मैंने अपने कूल्हों को एकहल्का-सा झटका दिया, जिससे उसकी योनी का मुंह मेरे लंड के सिर के चारों ओर कस गया।

इस रगड़ और डबास ने उसकी चूत के बीच से सेक्स और चुदाई की इच्छा का एक और चौंकाने वाला झटका भेजा और उसके होठों पर आश्चर्यजनक खुशी भाई कराह निकली। "अहह! यह करो! अभी करो!" वह कराह रही थी, वह चिल्ला उठी ।मुझे चौदो! और उसने अपनी योनी को ऊपर उठा दी ताकि मुझे इसे चौदने में बेहतर कोण मिल सके। "ऊह, मुझे चोदो, मुझे जोर से चोदो! मैं तुम्हारा लंड हर तरह से महसूस करना चाहती हूँ ।" मैंने उसे-उसे वही करने की मिन्नतें करते हुए सुना जो मैं करना चाहता था। वह मेरा लंड लेने को बेकरार और त्यार थी

मैंने थोड़ा दबाव डाला। उसकी योनी पहले से ही उसकी लार से और साथ ही साथ उसकी तंग छोटी सुरंग के भीतर से निकलने वाले फिसलन वाले तेलों से भीगी हुई चूत ने अब लंड का स्वागत किया। लंड आसानी से थोड़ा अंदर फिसल गया। खिंचाव की अनुभूति से वह कराह उठी। उसने धीरे से अपनी आँखें खोलीं मैंने उसे चूमा और उसके होंठ चाटे। उसने गहरी साँस ली उसका सीना ऊपर उठा। फिर कई बार चूमने के बाद मैंने केवल कुछ सेकंड के लिए अपना कठोर लंड थोड़ा-सा पीछे किया तो उसने अपने एड़ी को मेरे नितम्बो पर दबा दिया और साथ में अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए और मैंने भी ठीक उसे समय धक्का लगाया। उसकी चूत की मासपेशिया फैली और मेरे लंड पर कस गयी और लंड रगड़ कर आगे सरक गया।

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जैसे-जैसे मेरा लंड और अंदर गया, रुखसार की उंगलियाँ मेरी पीठ पर चली गईं। वह मेरे लंड की कठोरता और अपनी चूत के नादर हो रहे खिचाव को अपने अंदर महसूस कर रही थी और उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठा लिया। मैं थोड़ा झुका और उसके निप्पल को अपने दांतों से पकड़ लिया। ओह्ह! वह कराह उठी।

रुखसार की आँखें बंद हो गईं और उसका सिर पीछे की ओर झुक गया पहली बार की ही तरह उसकी योनि से आनंद की लहर उसके पूरे शरीर को बहा ले गयी। उसके हाथ मेरे कूल्हों के चारों ओर गए और वह मुझे अपने अंदर खींचने लगी। वह मुझे अपने ऊपर और अंदर महसूस कर रही थी, वह मुझ पर अपनी गर्म सांसें छोड़ रही थी।

उसकी चूत बिलकुल टाइट थी, फिर मैंने धीरे-धीरे लंड को पीछे किया और एक तेज और फिर खुद को उसके सबसे गहरी गहराई में धकेल दिया और पूरा का पूरा लंड अंदर पैबस्त कर दिया। वह पूरी तरह से मेरे लंड से भर गई। मेरा पूरा लंड पूरा नादर जाते ही मजे से वह कराह उठी । मैंने बेरहमी से उसके मांस में अपना लंड एक दो बार आगे पीछे किया। प्रत्येक स्ट्रोक के साथ, मैंने महसूस किया कि लंड का सिर उसके गर्भाशय से टकरा रहा था। । फिर मैंने धीमी चुदाई की गतिशुरू की और साथ में उसे-उसे गहराई से और जोश से चूमा।

कई मिनट रुखसार को चूमने और सहलाने और टटोलने के बाद वह मेरे से लिपट गयी। उसने मेरे पूरे शरीर को रगड़ा और मैंने उसके स्तनों को सहलाया। मैंने उसके स्तन दबाये तो महसूस किया कि रुखसार की चूत की मांसपेशियों मेरे लंड पर को कस गयी ।

खसार की तंग चूत ने मेरे लंड को अपने अंदर मजबूती से जकड़ रखा था। ऐसा लगा जैसे मेरा लंड रेशम के अंदर कैद था और मेरा लंड उसकी मांसपेशियों का दबाब महसूस कर रहा था। मैं स्वर्ग में था! मैंने अपने हाथ उसके स्तनों पर रख उन्हें धीरे से दबाया तो चूत के मांपेशिया कसने लगी और फिर निचोड़ा और। जैसे ही मैं उसके स्तनों को निचोड़ता उसकी मांसपेशिया तेजी से कस कर लंड को निचोड़ने लगी रुखसार की चूत की आंतरिक मांसपेशियों सुकड़ने लगी उसकी चूत संकुचन करने लगी और उसकी मांपेशिया मेरे लंड को निचोड़ कर मेरे लंड पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेती थी। वह आगे झुकी और मुझे किश करने लगी अब लगा चूत भी लंड को चूसने लगी थी।

अब मुझे मसोस हुआ जब मेरा लंड उसके मुँह में था तो लंड चूसा जा रहा था अब चूत लंड को चूस भी रही थी और उसका मुँह मेरे मुँह पर था और मैं उसके मुँह जीभ और ओंठो को चूस रहा था और

साथ में उसके स्तन दबा और निचोड़ रहा था-था तो उसके कसी हुई चूत मेरे लंड को दबा और निचोड़ रही थी । मैं धीरे-धीरे लंड आगे पीछे करता रहा और फिर स्पीड बढ़ती गयी ।



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कितना मजा आ रहा था की इस मजे के आगे सब मजे बेकार है । मैंने उसके मीठे होंठों को मेरे मुंह को ढँकते हुए चूमा। मैंने अपने हाथों को उसके स्तनों को दबा लिया और उसने मुझे दबाया और मेरी पीठ के चारों ओर अपने हाथो को फेंक दिया और कसकर मुझे गले लगा लिया, हमने जोश से चूमना जारी रखा और मैं लंड आगे पीछे करता रहा। रुखसार की चूत ने प्रतिक्रिया में मेरे लंड को मेरे स्तन दबाने के गति से निचोड़ना और छोड़ना शुरू कर दिया। जल्द ही वह कांपने लगी और उसका बदन ऐंठने लगा और मेरे लंड में भी ऐंठन होने लगी, और फिर मेरा भी बदन काम्पा और मैंने पिचकारियाँ मार दी साथ ही में वह भी झड़ी । मैंने जोर से कराहते हुए अपने अंडकोष खाली कर दिए और उसके बाद भी लंड अंदर बाहर करना जारी रखा और कराहते हुए हांफते हुए उस पर लेट गया।

कहानी जारी रहेगी
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04-03-2022, 04:26 AM,
#38
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 34

बुलंद चीखे



मैं अपने लंड को बड़ा नहीं मानता था, लेकिन वह एक सामान्य पुरुष की तुलना में अतिरिक्त बड़ा था, मेरा लंड पूरी तरह से सीधा होने पर 11 इंच बड़ा हो जाता था लेकिन सोने की स्थिति में, यह 7 इंच से कम नहीं होता था जो की साधारण पुरुष के खड़े लंड से भी लम्बा रहता था। लेकिन चुदाई के बाद जैसे रुखसार ने मुझे निचोड़ दिया था और मेरा लंड बैठ गया और वह थोड़ा हिली और लंड बाहर निकल आया पर लंड जिसे रुखसार की चूत ने निचोड़ा था अभी भी मोटा लग रहा था क्योंकि घमासान चुदाई के कारण थोड़ा सूज गया था।



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तभी वहाँ पर हमारी कराहे सुन कर मेरी अन्य तीनि बेगमे ज़ीनत, जूनि और अर्शी और मेरी तीनो बहने रुखसाना, सलमा और फातिमा भी कमरे में दरवाजा खोल कर आ गयी। उन्होंने देखा की चादर गीली और लाल थी और फिर पहले जीनत ने रुखसार को गले लगा कर कामयाब सुहागरात की बधाई दी, रखसाना, सलमा और फातिमा की आँखे मेरे लंड पैट टिकी हुई थी और मेरे सोते हुए लंड का आकार देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। हाय अम्मी! इस हालत में भी लंड का आकार इतना बड़ा है, खड़ा होने बाद क्या होगा! यह एक विशाल, एक राक्षस होगा और एक पूर्ण विकसित महिला की योनी को आसानी से नुकसान पहुँचा सकता है। यहाँ तक कि उनके शौहर रिजवान के पास भी बड़े आकार का लंड था लेकिन मेरा लंड उससे भी बड़ा था। ये सोचते ही रखसाना के पूरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई।




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मेरी आपा रुखसाना ने मुझे बधाई दी और फिर सब में हम दोनों को मुबारकबाद दी । रुखसाना आपा मेरे सबसे करीब थी और दोस्त जैसे मुझसे सब बात कर लेती थी उसने पुछा सलमान भाई इसमें कोई हैरानी की बात नहीं की सुहागरात में लड़किया चुदाई होने पर आम तौर पर चिल्लाती है। उसी तरह से कल रात में जब रुखसार चिल्ला रही थी तो हमे कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि जब तुम ज़ीनत और अर्शी की सील फाड़ रहे थे तो हमने उनके भी बुलंद चीखे सुनी हैं लेकिन बाद में हमने तुम्हारी भी बुलंद चीखे सुनी। क्यों री रुखसार तुमने भी काट तो नहीं लिया। तुम्हे है आदत सबको काट खाने की।

इस पर ज़ीनत आपा मेरी सबसे बड़ी बेगम बोली बाज़ी आप ठीक कह रही हो जब उसकी चूत इन्होने फाड़ी थी तो मैंने कमसिन और अल्हड़ जूनि की बुरी हालत देखि है तो वह मेरे से भी तेज चिल्ला रही थी लेकिन कल रात तो हमने इनकी भी चिलाने के आवाजे सुनी।

क्यों री रुक्सार! क्या किया तुमने हमारे मिया के साथ? और ज़ीनत आपा ने मेरा लंड पकड़ लिया और घुमाया और उसका मुयायना करने लगी । वह लंड के बड़े लाल मोठे और मांसल सर जो एक जो बेड लैंप के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे बिजली के बल्ब के जैसा लग रहा था उसे देखकर हैरान रह गई. उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। उसने बोलै देखे बाजी ये कैसे सूज गया है और लाल हो गया है इस शैतान रुखसार! ने जरूर इसे काट लिया है तभी दूल्हे भाई भी चिल्ला पड़े थे।

मैंने कहा नहीं आपा इसने कुछ नहीं किया है वह मेरी दर्द भरी चीखे नहीं तेज मजे की कराहे थी। आप बिलकुल बेफिक्र रहो मैं बिलकुल ठीक हूँ और मैंने फिर अपनी बेगमो अर्शी और जूनि को चूमा और बोला आपा सच बोलूं तो रात जैसा मजा पहले कभी नहीं आया और फिर सबके सामने रुखसार को एक लम्बी लिप किश की और चारो बीबियो को गले लगा कर बोला मैंने चारो बिबिया बहुत शानदार, खूबसूरत और मुहब्बत से भरी हुई हैं और जीनत को चूमा।

रुखसार तो नंगी थी ही और उसके इलावा सब लड़कियों ने पारदर्शी और पतली डोरी वाली नाइटी पहनी हुई थी जो कल्पना के लिए कुछ भी नहीं छोड़ती और किसी ने भी ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिससे उनके स्तन पूरी तरह से उपस्थिति दर्ज कर रहे थे और साथ में मैं उनके नितम्ब के गाल भी आसानी से देख सकता था।


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शर्म थी नहीं क्योंकि मुझे मालूम था सबने छुप कर रात में चुदाई का पूरा नजारा देखा है और मेरे से मजे ले रही हैं । रुखसार वैसे ही सबसे बहुत नटखट, तीखी तेज और फ्रैंक थी । अब सामने इतना सारा दूध हो तो बिल्ला कैसे सो सकता है और यही हुआ अपनी बेगमे के शानदार अर्ध नग्न बूब्स और हुस्न को देख मेरा लंड आधा खड़ा हो गया था और थोड़ा बड़ा होने लगा था जिसे देख मेरी तीनो बहनें शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं और मुझे इसे नीचे रखने में समस्या हो रही थी।

सभी लड़किया चुपचाप मुस्कुराईं और उन सभी की आँखे मेरे लंड पर टिक गयी और ये जान कर की लंड पर नजरे जमी हुई है मैंने अपने बदन में एक कंपकंपी महसूस की और लड़किया शायद पहली बार लंड को उठते हुए देख रही थी और हैरान लग रही थी।



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"ओह! जीनत आपा भाई का आपके भाई से बहुत बड़ा है," सबने रुखसाना की बड़बड़ाहट सुनी मैं रुखसाना का सब कुछ देख सकता था। उसके निप्पल बड़े और सख्त थे, जो उसकी छाती पर तने हुए थे। मैं देख सकता था कि उसके स्तन जीनत आपा से थोड़े छोटे थे पर उससे भी मजबूत और गोल लग रहे थे, फिर भी बहुत दृढ मजबूत और बढ़िया लग रहे थे!



कहानी जारी रहेगी
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04-05-2022, 08:15 PM,
#39
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 35

चारो बेगमो के साथ प्यार मोहब्बत 



मेरी तीन बेगमो ज़ीनत अर्शी और जूनि ने पारदर्शी और पतली डोरी वाली नाइटी पहनी हुई थी जो कल्पना के लिए कुछ भी नहीं छोड़ती और जिससे उनके स्तन पूरी तरह से उपस्थिति दर्ज कर रहे थे।

मैंने जीनत को अपनी बाहों में ले लिया और उसे अपने पास खेंच कर कस कर आगोश में लिया और उसकी पतली डोरी वाली नाइटी निकाल दी जिससे उसके नंगे स्तन मेरी छाती से छुए और दब गए और मैंने उसके होंठ पर तब तक चुंबन किये जब तक वह सांस के लिए हाफने नहीं लगी, अब रुखसार की तीखी चुदाई के तीखे स्वाद को चखने के बाद ज़ीनत की मीठी साँसे बहुत सकूंन दे रही थी । और उसकी मीठी साँसों की खुशबू को में तब तक चूसता रहा, जब तक कि वह उत्तेजित हो कर कांपने नहीं लगी। फिर जब मैंने अपनी पकड़ को ढीला किया तो वह शर्माती हुई जूनि की बगल में चली गयी।

रुखसार बिस्तर के एक तरफ थक कर लेटी हुई हमारी प्यार मुहबबत देख रही थी।



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जूनी ने पूरी तरह से नाइटी की डोरियों के अवरोधों से मुक्त होकर और मेरे करीब चली गई, मैंने उसकी नाइटी को हटाकर उसे दूर कर दिया। मैंने, ज़ीनत अर्शी और रुखसार ने उसके नग्न और कमसिन बदन को निहारा और उसकी प्रशंसा करने के लिए देखते रहे । लेकिन जूनी ने जारी रखा, उसने अपने आस-पास हम लोगों की तरफ देखा और अपने स्तन सहलाते हुए अपनी बाजू ऐसे नीचे की और ले गयी जैसे कि एक स्ट्रिप शो में प्रदर्शन कर रही हो। अपने हाथों को अपनी कमर पर लाते हुए, उसने धीरे-धीरे अपने हाथों को अपनी कमर से नीचे कर लिया और अपनी उंगलियों को अपनी पैंटी के अंदर खिसका दिया, क्योंकि वह अकेली थी जिसने पैंटी पहन रखी थी और फिर उसने धीरे-धीरे पेंटी को अपने घुटनों तक खिसका दिया फिर वह झुकी उसके स्तन मेरे सिर के इंच के भीतर थे। अपनी पैंटी को हटाने के लिए अपने पैरों को ऊपर उठाया और उसे भी नाइटी की ही दिशा में फेंक देिया।

मैंने जूनि के चेहरे को देखा और जैसे ही मैंने उसके शरीर को देखा, मेरा लंड फूल गया। हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। वह बड़ी कोमल और कमसिन बदन वाली थी। जब मेरी निगाहें उसके कंधों, बाहों और स्तनों को घूर रही थीं, तो जूनी अविश्वसनीय रूप से सेक्सी महसूस करने लगी। जूनी आगे झुकी और मुझे पहले धीरे से होठों पर चूमा। फिर बिना किसी प्रतिरोध के, उसने मुझे फिर से खुले मुंह और जोर से चूमा जब तक कि मैं सांस के लिए हांफने नहीं लगा। जूनि का स्वाद थोड़ा खट्टा-खट्टा था।

जूनी ने अपने स्तनों को सहलाते हुए एक नरम हाथ को महसूस किया। जूनी ने अपनी आँखें खोलीं और देखा कि अर्शी का हाथ उसे प्यार से सहला रहा था। यह पहली बार था जब जूनी ने अपने स्तनों पर अर्शी के हाथ का कोमल तो जूनी ने अर्शी को मुस्कान के साथ देखा। मैंने उसके एक स्तन को एक हाथ से सहलाया और फिर निचोड़ा और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को निचोड़ा, जूनी अब मुझ पर वापस मुस्कुराई, ज़ीनत और रुखसार, प्रशंसा के साथ जूनी के शरीर को देख रहे थे। मैं उसे चूमने के लिए झुक गया। हम नीचे और नीचे तब तक डूबे जब तक हम एक दूसरे के सामने घुटने नहीं टेके।

हमारे हाथ एक-दूसरे के शरीर पर लगभग भूखे-प्यासे घूमते रहे। मेरे हाथ ने उसकी चूत को स्पर्श किया। जैसे ही मैं आगे हुआ, वह कराह उठी, उसकी योनी मेरी उंगलियों को महसूस करने के लिए तड़प रही थी। मैंने अपना मुँह नीचे किया, मेरी जीभ उसके प्रत्येक निप्पल पर चक्कर लगा रही थी फिर मेरा हाथ उसकी जांघों के बीच फिसल गया था और मेरी एक उंगली उसकी गर्म टपकती सिलवटों के बीच में फिसल गई। मैंने ुक दो बार योनि को सहलाया ओर फिर जूनि पीछे हो गयी ।

अब मैंने अर्शी को अपने पास खींचा और मैंने धीरे-धीरे अर्शी की नाइटी की डोरियों को खींचा और खोलना शुरू किया। मेरे हाथों ने उसकी कोमल चिकनी त्वचा को सहलाया और मैंने उसकी पतली डोरी वाली नाइटी को धीरे-धीरे सरका कर इंच दर इंच उसके बदन को उजागर किया और साथ-साथ उजागर होने वाले अंगो को चूमता रहा। जल्द ही वह मेरे सामने पूरी नग्न बैठी थी। मैं थोड़ा पीछे झुक गया और उसके शरीर को देखने लगा। उसके स्तन गोल और रस से भरे हुए, निप्पल सख्त और धूल भरे गुलाब के रंग के थे, उसका पेट चिकना था, उसके कूल्हे गोल और भरे हुए थे, उसकी चूत बालरहित थी और उसकी मलाईदार जांघें कांप रही थीं। मैं उसके ऊपर झुक गया और मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। ;


ज़ीनत ने अपने हाथों को अर्शी के कूल्हों पर रखा और उसके कान में फुसफुसायी की वह मुझे उसे महसूस करने और तलाशने की अनुमति दे। फिर उसने शर्म से झुक कर मुझे चूमा। अर्शी ने अपना मुँह थोड़ा खोला और उसने धीरे से अपनी जीभ मेरे गर्म, गीले मुँह के अंदर सरका दी। मैं धीरे से कराह रहा था क्योंकि मैं एक बार फिर उसका नमकीन स्वाद चख रहा था जीनत के मीठे स्वाद और अर्शी के मुँह के नमकीन स्वाद का संतर मुझे साफ़ महसूस हुआ। यह वास्तव में मुझे एक बार फिर यह एहसास हुआ कि मैं एक अकेला आदमी हूँ जिसने कभी उसका स्वाद चखा। वह कराह रही थी क्योंकि हमारी जीभ पहले धीरे-धीरे मिल रही थी, फिर और अधिक उत्साह से उसने खुद को मेरे में खो जाने दिया।



[Image: AA.gif]

मैंने उसके गर्म कोमल शरीर को अपनी ओर खींच लिया, उसके स्तन मेरी छाती पर दब गए, उसके निप्पल सख्त थे, मेरी छाती में चुभ रहे थे। अर्शी ने चुंबन तोड़ दिया और वह थोड़ा पीछे हुई, हम दोनों के चेहरे थोड़े से लाल हो गए थे क्योंकि एक दूसरे के लिए हमारी इच्छा धीरे-धीरे मजबूत और मजबूत होती जा रही थी। उसने अपनी आँखों को मेरे शरीर पर घूमने दिया, वह मुस्कुराई क्योंकि उसकी आँखें मेरे बड़े लंड पर जो कि ज़ीनत के हाथों में था टिक गयी थी और जीनत आपा अभी भी मेरा लंड पकड़ कर उसे धीरे-धीरे उसे सहला रही थी । मैं कराह उठा क्योंकि अर्शी ने अपना हाथ नीचे किया और मेरा खड़ा लंड को सहलाते हुए मेरी गेंदों को पकड़ा और सहलाया।

जैसे ही मैंने उसकी आँखों में भूख देखी, मैं मुस्कुराया। मैंने उसे अपने पास खींच लिया, अपने कूल्हों को उसके खिलाफ दबाते हुए, मैंने अपने हाथों को उसके कूल्हों पर सरका दिया। हमारे कूल्हे आपस में दब रहे थे, धीरे-धीरे पीसते हुए मैं उसके कोमल जांघो के ट्रिम किये हुए बालो को अपनी जांघो के क्षेत्र में गुदगुदी करते हुए महसूस किया। मैं उसके ऊपर झुक गया और धीरे से उसकी गर्दन की नमकीन त्वचा को कुतर दिया। वह मेरे खिलाफ चिपकी हुई कांप उठी। अब वह एक भूखे जानवर की तरह थी। उसने अपनी बाहें मेरे चारों ओर सरका दीं, मुझे अपने पास खींच लिया, उसने मुझे जोर से और जोश से चूमा और मैंने भी उसे उसी जुनून से चूमा। मेरे हाथ उसके कूल्हों पर, उसके पेट के ऊपर, उसकी भुजाओं पर और फिर धीरे से उसके पूरे स्तन को सहलाते हुए, धीरे से उन्हें निचोड़ते और सहला रहे थे। अर्शी कराह रही थी क्योंकि मेरी उंगलियों ने उसके सख्त निपल्स को घुमाया और मजबूती से निचोड़ा। उसने मेरे कूल्हों को जोर से दबाया। अर्शी के हाथ मेरी गांड पर फिसल गए, उन्हें मजबूती से पकड़ लिया और निचोड़ते हुए और भी करीब से दबाने की कोशिश की।

अर्शी ने मुझे बिस्तर के किनारे पर बिठाया और मुझे आमने-सामने लेटा दिया। उसने अपनी नंगी चूत को उभार पर रगड़ा जबकि ज़ीनत मुझे किस करने लगी। ज़ीनत ने मेरा चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया और मेरे होठों पर एक बड़ा-सा किस कर दिया। अर्शी ने अपनी बाहों को मेरी कमर के चारों ओर घुमाया और जब उसने अपने स्तनों को मेरी नंगी छाती से दबाया और अर्शी मेरी गोद में इधर-उधर हो गई। जूनी ने अपने स्तन मेरी पीठ पर दबाए। फिर ज़ीनत मेरी पीठ के पास चली गई और अर्शी ने मुझे किस किया।

एक-एक मिनट के बाद, अर्शी मुझसे दूर हो गई और जूनी ने उसकी जगह ले ली। ज़ीनत की तरह, अर्शी मुझे बगल से चूमती रही और जूनी ने उसके स्तनों को उसकी नंगी छाती से रगड़ा। ज़ीनत ने अपने स्तन मेरी पीठ पर दबाए लेकिन वह भी मेरे बट के पीछे पहुँच गई और मेरी गेंदों की मालिश की।

जब ज़ीनत की बारी आई, तो उसने मुझे पटक दिया ताकि वह अपने नंगे स्तनों को मेरे चेहरे पर दबा सके। उसने एक निप्पल को मेरे मुंह में धकेला और स्विच करने से पहले मुझे थोड़ी देर चूसने दिया और दूसरा मुझे दे दिया। मैंने अपना सिर आगे झुकाया और चूसना जारी रखा क्योंकि वह नीचे पहुँची और मेरे लंड को पकड़ लिया। उसने कुछ मिनटों के लिए मेरी गेंदों को खींचा और निचोड़ा और रगड़ा। अंत में, वह मेरी गोद में बैठ गई, मेरे कठोर लंड के सिर के खिलाफ अपनी चूत लगा दी। वह आगे-पीछे हिलती-डुलती, मुझे अपनी भगशेफ के खिलाफ रगड़ती हुई आगे झुकी और मुझे चूमा और मेरे कान में फुसफुसाया। मैंने अपने कूल्हों को उठाना शुरू कर दिया, उसके खिलाफ जोर देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मैं बहुत कुछ करने में सक्षम नहीं था क्योंकि वह मुझे वास्तव में उसे चोदने की अनुमति देने से ज्यादा सता रही थी।

जूनी ने मुझे होठों पर किस किया और अर्शी ने मेरी पीठ पर अपने स्तन दबाए.। कुछ देर बाद, ज़ीनत मेरी जांघों पर, लगभग मेरे घुटनों तक सरक गई। जूनी और अर्शी भी मेरे दोनों तरफ जमा हो गईं।



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ज़ीनत ने मेरे लंड को पकड़ा और उसकी जाँच की यह सबसे सुन्दर, सीधा और लम्बा और मोटा था।

ज़ीनत ने लंड कई बार स्ट्रोक किया। फिर अर्शी झुकी और लंड चूसने लगी। मेरी कराहो से महिलाएँ भी प्रभावित हुईं।


कहानी जारी रहेगी
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04-09-2022, 05:48 PM,
#40
RE: Mera Nikah Meri Kajin Ke Saath
मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 36

बेगमो के साथ प्यार मोहब्बत 



मेरा लंड अर्शी के मुँह में था। अर्शी ने अपने नाजुक होंठों को मेरे टोपे पर लगाएl आह! मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था। अर्शी ने थोड़ी देर ही मेरा लंड चूसा था तभी जूनि ने भी अपना मुझ मेरी गेंदों पर लगा दिया और मेरी गेंदे चाट कर चूसने लगी ।

उधर अर्शी मस्ती से लंड चूसे जा रही थीl उसने तो कुछ ही दिनों में जैसे लंड चूसने में महारत हासिल कर ली थी वह मेरे लंड को मस्ती से चूस रही थी और मेरे लंड को अब तक किसी ने ऐसे नहीं चूसा थाl वह जीभ फिर-फिर कर मेरा लंड चूस रही थी और उसकी लंड चूसने की अदा और कला से मुझे बहुत मजा आ रहा थाl

उसने कभी लंड धीरे से चूसा और कभी तेज चूसा और अपने हाथों को मेरी भीतरी जांघों पर सरका दिया। इस बीच जूनि ने मेरी गेंदों को चूसते हुए उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया। एक पल के अर्शी ने लिए मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकलने दिया और मेरी गेंदे सहलाते हुए बड़बड़ाते हुए बोली, "मम्म...बड़ी गेंदें...बहुत भारी और बड़ी गेंदे इन्हे हमारे लिए मणि और रस से भरा हुआ?"



[Image: HJ1.jpg]
मैं केवल एक घुरघुरा और सिर हिला सकता था क्योंकि उन दोनों मेरी गेंदों को निचोड़ा और फिर अर्शी मेरी गेंदे चूसने लगी और जूनि अब मेरा लंड चूसने लगी।

जूनि ने कुछ देर बाद मुझे चूसना बंद कर दिया और मेरे लंड पर अपने हाथ ऊपर नीचे करने लगी । मैंने जूनि को अपने पैरों पर किया और अपने ऊपर खींच लिया। वह फिर से उठी और फुसफुसायी, "तुम बहुत मेहनत कर रहे हो! अब मैं तुम्हारी सवारी करना चाहती हूँ।"

उसने मुझे बिस्तर के खिलाफ पीछे धकेल दिया। मैं अपनी पीठ के बल लेट गया और वह मेरे ऊपर चढ़ गई, मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और लंड को एक झटके में ही पूरा अंदर ले गई। उनकी चूत बिलकुल गीली थी और वह मुझे ऊपर चढ़ कर उछल-उछल कर चोद रही थी और बीच-बीच में मैं भी अपने चूतड़ ऊपर कर के धक्क्का लगा देता था और वह कराह उठती थी। उधर अर्शी मेरे गेंदे चूसे जा रही थी ।

फिर जूनि ऊपर नीचे उछलती रही और उसने मणि छोड़ी और फिर वह नीचे खिसकी, मेरे लंड को उसके रस ने चिकना कर दिया था। फिर वह मुझ पर से उतारी और मेरे ऊपर सीने के बल लेट गई।

"देखा मेरी चूत कितनी गीली है?" देखो, मैंने तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारे लिए गर्म हूँ। "

मैंने अपनी बाँहों को उसके चारों ओर लपेट लिया और उसे चूम लिया।

तभी बिस्तर हिल गया और अचानक नग्न अर्शी उसकी पीठ पर मेरी बगल में लेट गयी और दूसरी तरफ जीनत लेटी हुई थी ज़ीनत के हाथ अर्शी की जांघों के बीच थे। वह अर्शी मेरी बग़ल में तब तक हिलती रही जब तक उसका सिर मेरे बगल में नहीं आ गया और बायीं कावट हो गयी और उसने फुसफुसाते हुए कहा, "ज़ीनत आपा कह रही थी कि रुखसार के साथ आपको बहुत मजा आया है। मैंने रुखसार की ओर देखा, वह अभी भी गहरे सांस ले रही थी, जूनी ने कहा, उसकी चिंता मत करो। वह ठीक है।" \

"क्या वह आप तीनों के साथ शामिल नहीं होगी?"

"नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता।" अर्शी एक पल के लिए रुक गयी जैसे कि कुछ तय करने की कोशिश कर रहा हो। फिर उसने जारी रखा, "मुझे लगता है कि आज वह अकेली ही चुदेगी। यह उसकी सुहागरात है।"

मैंने एक गहरी सांस ली और जूनि को नीचे उतार कर लिटा दिया और अर्शी को उसकी पीठ पर लिटा दिया। मैं खड़ा हुआ और बिना बताए अर्शी की चुत में लंड डाल दियाl

अर्शी भी लंड के अहसास से मस्त हो गई और लंड लेने में कमर उठा कर सहयोग करने लगीl उसकी कराहें मेरा जोश बढ़ा रही थींl



[Image: BJ1.jpg]

उधर जूनि मेरे अंडकोष चूसने लगीl ताबड़तोड़ चुदाई होने लगीl अर्शी अपनी पूरी टांगें हवा में उठा आकर मेरे लंड का मजा ले रही थीl

मैंने अर्शी की जाँघों के बीच घुटने टेके, उसके स्तनों को निचोड़ा और उसके निपल्स को चूसने लगा।


मैंने अपने घुटनों पर बैठ कर जीनत के होठों पर चूमा। फिर मैंने उसकी गर्दन से एक निप्पल तक और फिर दूसरे को चूमा। मैंने उसकी छाती और पेट के बीच से उसकी चूत तक उसे चूमना जारी रखा।

मैंने उसकी चूत की फिसलन भरी सिलवटों को चाटा और अपनी जीभ से उसकी चूत की जाँच की। जब मैंने अपनी जीभ को उसके अंदर धकेला, तो उसने एक गहरी सांस ली और क्षण भर के लिए मेरे सिर को अपनी जाँघों के बीच दबा लिया। मैंने उसके क्लिट को अपने होठों से चूसा और अपनी जीभ से उसे थपथपाया। और देर किये बिना और उसकी गर्म चुत पर जीभ फेरना चालू कर दियाl वह मस्ती से गांड हिलाते हुए अपनी चूत चटवाने लगी। मैंने भी बहुत जोर-जोर से जीभ से चाट-चाट कर और उंगली डाल-डाल कर उसकी चुत का पानी निकाल दियाl वह झड़ गई तो मैं उसकी चुत का मीठा पानी पूरा पी गया।

ये बिलकुल ऐसा था जैसे तीखा कहने के बाद मीठा बहुत अच्छा लगता है वैसे ही ये ज़ीनत का ये मीठे जैसा रस भी रुखसार की तीखी चुदाई के बाद बहुत सुहाना और मजेदार लगा ।

ज़ीनत अपने शरीर को थोड़ा मोड़ती नजर आईं। मैंने नज़र उठाकर देखा कि वह क्या कर रही है। अब अर्शी के एक स्तन पर उसकी पकड़ थी और वह उसके दूसरे निप्पल को चूस रही थी। ज़ीनत थोड़ा और मुड़ गयी ताकि वह दूसरे निप्पल तक पहुँच सके।

अगले कुछ मिनटों के लिए, मैंने ज़ीनत की क्लिट को चूसा जबकि अर्शी ने जूनि के निपल्स को चूसा। अंत में, ज़ीनत ने मेरे कानों को थपथपाया और कहा, "चलो। अब मुझे चौदो।"

ज़ीनत ने अर्शी के स्तन चूसे। मैंने जीनत पर चढ़कर अपना लंड उस में डाल दिया। उसने अपने घुटनों को ऊपर उठाया और चौड़ा फैला दिया मैंने लंड और गेंदों तक ज़ीनत में घुसा दिया और उस पर लेट गया।

" उसने मुझे गले लगाया और चूमा। फिर वह मुड़ी और अर्शी के कान में फुसफुसायी। अर्शी ने ज़ोर से सिर हिलाया और अपने पेट पर लुढ़क गई। जूनी ने मुझे घुमाया और मेरा लंड खींच कर रुखसार की चुत के होठों पर रख दिया और मैंने उसे एक तेज़ झटके में घुसा दिया।

ज़ीनत मेरी ओर मुड़ी और मुझे किस किया। "अगली बार, हम धीमी गति से करेंगे और अब तुम रुखसार के साथ सारी रात प्यार करो। लेकिन आज रात, रुखसार के साथ मजे करो।"

मैं काफी समय से विस्फोट के कगार पर था, इसलिए इसे ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। मैंने रुखसार को कंधों से पकड़ लिया और तेज गाड़ी चलाने लगा। उसके प्राकृतिक स्तन प्रत्येक स्ट्रोक के साथ उसकी छाती के ऊपर और नीचे तैरने लगे और अर्शी ने मेरे होठों को चूमा और दूसरी तरफ जूनी ने मेरे निप्पल और शरीर को चाटा और जीनत रुखसार के ओंठो चूचियों को चूमने लगी और बहुत जल्द मैंने रुखसार में अपनी मणि का एक बड़ा भार डाल दिया।



[Image: d3.png]

मैंने अपनी गेंदों को रुखसार की गांड के खिलाफ दबाया और मेरा लंड उसके अंदर धड़कता रहा और पिचकारियाँ मारता रहा । हरेक धक्के के साथ उसके अंदर थोड़ा और वीर्य डाला। रुखसार का शरीर एकदम अकड़ा और उसने ज़ीनत का मुंह अपने ओंठो में जकड़ लिया और वो ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगी और चूसते हुए झड़ने लगी ।फिर मैंने उसके होठों पर किस किया और उसके ऊपर ही लेट गया।



कहानी जारी रहेगी
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