MmsBee कोई तो रोक लो
09-09-2020, 12:12 PM,
#11
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उस समय मौसा जी 33 साल के और मौसी जी 30 साल की थी. कीर्ति मेरी ही उमर की थी और कमल उस से 2 साल छोटा था. मौसा जी का खुद का कारोबार था. जो उन ने पापा की मदद से जमाया था. जिसकी वजह से वो पापा को बहुत मानते थे.

समय बीतता जा रहा था और सारे बच्चे बड़े होते जा रहे थे. अब मैं 10थ मे आ गया था और कमल भी मेरी ही स्कूल मे 8थ मे पढ़ रहा था. वो मुझ से सिर्फ़ 2 साल छोटा था. इसलिए हम किसी दोस्त की तरह ही रहते थे.

मगर मौसी जी के लाड प्यार की वजह से कमल बिगड़ता जा रहा था. स्कूल मे भी उसकी संगति कुछ ग़लत तरह के लड़को के साथ हो गयी थी. मैने कमल से उन लड़को से दूर रहने को कहा. मगर उसने मेरी बात को अनसुना कर दिया. इसलिए अब मैं उस से कटा कटा सा रहने लगा था.

एक दिन मैं छ्होटी माँ के साथ मौसी के घर गया. तब मौसी ने हमें रात वही रुकने को कहा तो, हम लोग वही रुक गये. मैं कमल के साथ उसके कमरे मे रुका.
रत को मेरी नींद खुली तो, कमल कमरे मे नही था. मैने सोचा की बाथरूम मे होगा.

लेकिन जब कुछ देर तक इंतजार करने के बाद भी, मुझे बाथरूम मे कोई हलचल समझ मे नही आई तो, मैने उठ कर देखा. मुझे वहाँ कमल नज़र नही आया. मैने सोचा शायद कुछ करने बाहर गया होगा.

मगर जब बहुत देर तक वो नही आया तो, मैने उसे बाहर निकल कर इधर उधर देखा. तब वो मुझे मौसा मौसी के कमरे के बाहर दिखाई दिया. वो दरवाजे के किसी छेद से अंदर झाँक रहा था.

अब मैं बच्चा तो था नही, जो उसके इस तरह अपने मॅमी पापा के कमरे मे झाँकने का मतलब ना समझ पाता कि, वो इतनी रात को अपने मॅमी पापा के कमरे मे क्या देख रहा है.

मुझे उसकी ये हरकत बहुत खराब लगी. लेकिन मैं चुपचाप रूम मे आकर लेट गया. काफ़ी देर बाद कमल लौटा और सीधे बाथरूम मे घुस गया. अब ये समझना मुस्किल नही था कि, वो इस समय बाथरूम मे क्या कर रहा होगा.

बाथरूम से निकल कर उसने एक ठंडी सांस ली और एक नज़र मेरी तरफ देख कर वापस सो गया. मुझे ये तो मालूम था कि, उसकी हरकते खराब है और लड़कियों की बात तो दूर वो स्कूल की मॅडमो को भी गंदी नज़र से देखता है. लेकिन ये बात आज पता चली थी कि, उसकी गंदी नज़रो ने, उसके माता पिता तक को नही छोड़ा था.

तभी मेरे दिमाग़ मे विचार आया कि, कीर्ति भी तो जवान दिखने लगी है और वो देखने मे भी बहुत सुंदर है, तो क्या कमल अपनी सग़ी बहन पर भी बुरी नज़र रखता है.

ये बात सोचते ही मेरे दिमाग़ मे कीर्ति का चेहरा घूमने लगा और ना चाहते हुए भी वो सब सोचने लगा. जो आज से पहले कभी मैने कीर्ति के बारे मे नही सोचा था. मगर ये सब सिर्फ़ एक पल के लिए ही था. अगले ही पल मैने सारे विचारो को परे धकेल दिया और कीर्ति मेरी बहन है, ये सोचते हुए सो गया.

दूसरे दिन मेरी नींद बहुत सुबह खुल गयी. मैने देखा तो कमल बिस्तर पर नही था. मुझे शक़ हुआ कि, ये कमीना फिर कही रात वाली हरकत तो नही कर रहा है. मैं तुरंत छुपते छुपाते मौसा मौसी के कमरे की तरफ चला गया.

मगर कमल वहाँ नही दिखा. मैने सोचा हो सकता है कि, ये कीर्ति के कमरे मे गया हो. लेकिन वहाँ देखने पर भी वो वहाँ भी नही दिखा. अब मेरे मन मे सवाल आया कि, यदि कमल यहाँ नही है, तो फिर वो गया कहाँ.

मेरा मन तो नही था, पर फिर भी मैने छ्होटी माँ के कमरे मे देखना ठीक समझा और जब मैने छ्होटी माँ के कमरे मे देखा तो, मेरा खून खौल गया. क्योकि कमल छ्होटी माँ के साथ उनसे लिपट कर सो रहा था.

रात की उसकी हरकत देख कर, अब वो मुझे बच्चा नही लग रहा था. छ्होटी माँ का तो, मुझे कोई डर नही था, पर मुझे लगा कि, ये कही मेरी बहनो के साथ कोई हरकत ना करे. अब मैं अपनी बहनों के साथ, उसे एक पल के लिए भी अकेला छोड़ना नही चाहता था.

बात कुछ भी नही थी, फिर भी मैं एक अजीब से डर से घिर गया और छ्होटी माँ के पास गया. मुझे सुबह सुबह देख कर छ्होटी माँ बोली “क्या हुआ पुन्नू. क्या तुझे यहाँ नींद नही आ रही.”

मैं बोला “हां छ्होटी माँ, मुझे नींद नही आ रही थी. आप जल्दी उठो. हम घर जाएगे.”

छ्होटी माँ बोली “अरे ये अचानक तुझे क्या हो गया. अभी दिन तो निकलने दे. फिर घर चलेगे.”

मैं अब वहाँ किसी भी हालत मे रुकना नही चाहता था. मगर छ्होटी माँ की बात मानकर मुझे रुकना पड़ रहा था.

मैं बोला “ये कमल यहा आकर कब सो गया.”

छ्होटी माँ बोली “अरे रात को नामिता रो रही थी तो, ये उठ कर आ गया और फिर उसे खिलाते खिलाते यही सो गया.”

मैं सोचने लगा कि, ये तो मेरे सामने ही सो गया था. फिर इसने नामिता के रोने की आवाज़ कैसे सुन ली. कहीं ये साला रात को छ्होटी माँ के कमरे के चक्कर तो नही लगा रहा था.

छ्होटी माँ उठ चुकी थी, इसलिए मैं वापस कमल के कमरे मे आ गया और लेट गया. फिर अचानक मेरे दिमाग़ मे कमल के कमरे की तलाशी लेने की बात आई और मैं उठ कर कमल के कमरे का समान तलाशने लगा.

उसके समान की तलाशी लेते हुए मुझे कुछ सेक्स स्टोरी की बुक्स मिली. ऐसी बुक्स ना मैने कभी देखी थी और ना ही पढ़ी थी. इसलिए मैं उन्हे जल्दी जल्दी देखने लगा. सारी बुक्स इन्सेस्ट स्टोरी और सेक्स पिक से भरी पड़ी थी. मैने सारी बुक्स जहाँ से जैसे उठाई थी, वापस वही वैसे ही रख दी.

फिर कुछ देर बाद मैं फ्रेश होने चला गया और फ्रेश होने के बाद मैं तैयार होने लगा. तब तक कमल भी आ गया. मुझे तैयार होते देख कर बोला “यार तुम तो सुबह बहुत जल्दी उठ जाते हो. क्या आज भी स्कूल जाने का इरादा है.”

मैं बोला “स्कूल नही, अब घर जाने का इरादा है.”

कमल बोला “यार पहली बार तो मेरे घर मे रुक रहे हो. कम से कम दो तीन दिन तो रुकना चाहिए था.”

मैं बोला “नही मुझे घर के सिवा कही अछा नही लगता. मैं तो आज पहली बार अपने घर से बाहर रुका हूँ. अगली बार जब आउन्गा, तब ज़रूर दो तीन दिन रूकुगा.”

कमल बोला “जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. तुम जाना चाहते हो तो जाओ, पर मैं मौसी और अमिता नामिता को अभी नही जाने दूँगा.”

मैं बोला “मुझे तो आज जाना ही है. हां छ्होटी माँ और अमिता, नामिता यदि रुकना चाहती है तो रुक सकती है. मैं उनसे चलने की ज़िद नही करूगा.”

मेरी बात सुनकर कमल खुश हो गया. उसे उम्मीद थी कि, छ्होटी माँ उसकी बात मान कर वहाँ रुक जाएगी. लेकिन वो ये नही जानता था कि, मैं छ्होटी माँ से सुबह उसके जागने से पहले ही घर जाने की बात कर चुका था.

छ्होटी माँ इस बात को भी अच्छे से जानती थी कि, मैं घर के सिवा कही भी रात बिताना पसंद नही करता हूँ और घर मे भी मैं उनके और अमि निमी के बिना नही रह सकता हूँ. इसी वजह से कल मैं यहाँ आ गया था.

मगर अब कल की कमल की हरकत देखने के बाद, मैं वहाँ एक पल भी रुकना नही चाहता था और अब मुझे कमल के छ्होटी माँ के सामने रुकने की ज़िद करने की कोई परवाह नही थी. क्योकि मेरे बिना छ्होटी माँ के वहाँ रुकने का सवाल ही पैदा नही होता था.

मैं अभी इन्ही सोचो मे गुम था कि तभी कीर्ति आई और बोली “पुन्नू चलो, पापा तुम्हे नाश्ते के लिए बुला रहे है.”

कीर्ति उस समय ब्लॅक जीन्स और ब्लू टी-शर्ट पहनी थी. आज पहली बार वो मुझे इतनी सुंदर लग रही थी और मैं ना चाहते हुए भी उसे देखे जा रहा था.

मुझे इस तरह अपने आपको घूरते देख कर कीर्ति बोली “कहाँ खो गये, नाश्ता करने चलना है या नही.”

उसकी बात सुन मैं एक पल के लिए चौका और मेरा ध्यान टूटा.

मैं बोला “तुम चलो, मैं अभी आता हूँ.”

उसके जाने के बाद मुझे अपनी हरकत पर बहुत गुस्सा आया और मैने फिर अपने मन मे कहा “अबे साले वो तेरी बहन है. कमल की तरह, तू क्यो अपनी नियत और नज़र खराब कर रहा है.”

ऐसा सोच कर मैने अपने सर को झटका और फिर नाश्ता करने के लिए कमरे से बाहर निकल आया.
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09-09-2020, 12:13 PM,
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मौसा जी डाइनिंग टेबल पर बैठे नाश्ते के लिए मेरा इंतेजर कर रहे थे. मैं जाकर उनके पास बैठ गया और नाश्ता करने लगा. मौसा जी ने मुझसे मेरी पढ़ाई के विषय मे पूछा और फिर कमल को लेकर बात करने लगे.

मुझे कमल के बारे मे कोई बात करना पसंद नही आ रहा था. क्योकि जो मैं उसके बारे मे जान गया था, वो बोल नही सकता था और कोई दिल बहलाने वाली झूठी बात करना नही चाहता था. इसलिए मैं उनकी बात सुनकर हां या ना मे जबाब दे रहा था.

तभी कीर्ति और छ्होटी माँ भी आ जाते है. मैं छ्होटी माँ से पूछता हूँ “अमि और निमी कहाँ है.”

छ्होटी माँ “निमी तो अभी सो ही रही है और अमि कमल के साथ खेल रही है.”

मैने कीर्ति से पूछा “क्या कमल नाश्ता नही करेगा.”

कीर्ति बोली “कमल तो अपने रूम मे ही नाश्ता करता है.”

फिर सब नाश्ता करने लगे और सब की आपस मे इधर उधर की बातें होती रही. मैं चुप चाप नाश्ता करते हुए सबकी बातें सुनता रहा. नाश्ते के बाद कीर्ति ने मौसा जी से कहा.

कीर्ति बोली “पापा मुझे स्कूल का प्रॉजेक्ट तैयार करना है और उसके लिए कुछ ज़रूरी समान खरीदना है. आप चलकर दिला दीजिए.”

मौसा जी बोले “आज नही बेटी. आज मुझे ऑफीस मे ज़रूरी काम है. कल दिला दूँगा.”

कीर्ति बोली “नही पापा कल तो मुझे अपना प्रॉजेक्ट जमा करना है. अभी समान लेकर आउन्गी, तभी तो उसे आज तैयार कर पाउन्गी.”

तब छ्होटी माँ बोली “बेटी तू इसके लिए क्यो जीजा जी को परेशान कर रही है. हम तो शाम तक यही है. तू ऐसा कर पुन्नू को अपने साथ ले जा. वो तुझे समान दिला देगा और प्रॉजेक्ट तैयार करने मे तेरी मदद भी कर देगा.”

कीर्ति बोली “ठीक है मौसी. मैं पुन्नू के साथ ही चली जाती हूँ.”

फिर वो मौसा जी से पैसे लेती है और मेरी तरफ देख कर चलने का इशारा करती है तो मैं कहता हूँ “एक मिनिट रूको मैं अमि निमी से मिल कर आता हूँ.”

ये कहकर मैं अमि निमी के पास जाता हूँ. कमरे मे पहुच कर देखता हूँ तो निमी नींद से जाग चुकी थी और अमि निमी दोनो कमल के साथ खेल रही थी.

कमल घोड़ा बना हुआ था और निमी उस पर बैठ कर घोड़े की सवारी कर रही थी और अमि गाना गा रही थी “लकड़ी की काठी, काठी का घोड़ा, घोड़े की दुम पे, जो मारा हथौड़ा, दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा, दुम उठा के दौड़ा.”

कमल को इस तरह अमि निमी के साथ प्यार से खेलते देख, मेरे मन मे जो मैल उस के लिए आया था, वो कुछ हद तक कम हो जाता है और मैं मुस्कुराते हुए कमल से कहता हूँ “तुझे घोड़ा बन कर, बड़ा मज़ा आ रहा है. देखना कही ये सच मे तुझे घोड़ा समझ कर ना मारने लगे.”

कमल बोला “यार पहली बार तो घोड़ा बनने का मौका मिला है, नही तो हमेशा स्कूल मे सिर्फ़ मुर्गा बन कर बांग देता ही नज़र आता हूँ. उस मुर्गा बन कर बांग देने से तो, ये घोड़ा बन कर मार खाना ही अच्छा है.”

कमल की ये बात सुनकर मेरी हँसी छूट जाती है और मैं अमि निमी के सर पर प्यार से हाथ फेर कर बाहर आ जाता हूँ.

मैं बाहर आता हूँ तो, कीर्ति मेरा इंतजार कर रही होती है. वो मुझे वापस आते देख कर ताना मारते हुए कहती है “अब चले या फिर कहो तो, अमि निमी को भी अपने साथ ले चलते है.”

उसकी बात सुनकर मैं हंस देता हूँ और कहता हूँ “चलो, मैने कब मना किया. मैं तो बस अपनी बहनो को देखने गया था. इसमे ये ताने मारने की क्या ज़रूरत है.”

कीर्ति बोली “ओके, अब मिल लिया हो अपनी प्यारी बहनो से तो, अपनी इस बहन के साथ भी चलो.”

मैं बोला “चलो, मैने कब मना किया.”

ये कहकर मैं बाहर निकल आया और कीर्ति अपनी स्कूटी निकालने लगी. स्कूटी निकाल कर वो बाहर आई और स्कूटी स्टार्ट कर मुझे पीछे बैठने को कहने लगी तो, मैने उस से कहा.

मैं बोला “तू पीछे बैठ, मैं चलाता हू.”

कीर्ति बोली “क्या तुझे मेरे पीछे बैठने मे शरम लगती है.”

मैं बोला “हाँ मुझे शरम लगती है. अब अपना मूह बंद कर और चुप चाप पीछे बैठ.”

मेरी बात सुनकर, उसने बुरा सा मूह बनाया और मेरे पीछे आकर बैठ गयी. उसके बाद हम लोग बाजार के लिए निकल गये. वहाँ हम ने दो तीन दुकानो से उसके प्रॉजेक्ट का समान खरीदा. जिसमे हमें 3 घंटे लग गये. सारी खरीदी हो जाने के बाद कीर्ति कहने लगी.

कीर्ति बोली “पुन्नू इस समान को खरीदने मे तो दोपहर हो गयी. अब तो मुझे भूख लग रही है. चल किसी रेस्टोरेंट मे चल कर कुछ खाते है.”

मैं बोला “समान तो हम ने खरीद ही लिया है. घर पहुचने मे आधा घंटा ही तो लगना है. अब घर चल कर ही कुछ खा लेना.”

कीर्ति बोली “अरे भूख मुझे अभी लगी है और तू आधे घंटे बाद मुझे खाना खाने की बात बोल रहा है. कैसा भाई है तू. अपनी बहन को कुछ खिला भी नही सकता.”

मैं बोला “तू समझती क्यो नही. आज तक मैं किसी लड़की के साथ कभी किसी रेस्टौरेंट मे नही गया. इसलिए मुझे वहाँ जाने मे बहुत अटपटा सा लग रहा है.”

कीर्ति बोली “मगर किसी दोस्त के साथ तो गया होगा.”

मैं बोला “नही किसी दोस्त के साथ भी नही गया.”

कीर्ति बोली “कैसा भोन्दा भाई है मेरा. इतना बड़ा हो गया और रेस्टौरेंट जाने से डरता है. तुझसे अच्छा तो वो कमल है. जो तुझसे 2 साल छोटा है, लेकिन कही भी जाने से नही डरता. तुझे तो कमल से कुछ सीखना चाहिए.”

मुझे कीर्ति की ये बात सुनकर, कुछ खराब ज़रूर लगा. लेकिन मैं उसकी आदत जानता था. वो अक्सर किसी ना किसी बात पर मुझे छेड़ती रहती थी. इसलिए मैने उसकी इस बात का बुरा ना मानते हुए उस से कहा.

मैं बोला “तुझे मेरा जितना मज़ाक उड़ाना है, तो तू उड़ा ले. मगर जो सच था, वो मैने तुझे बता दिया.”

मेरी बात सुन कर कीर्ति को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उसने फ़ौरन मुझसे माफी माँग कर, मुझे समझाते हुए कहा.

कीर्ति बोली “सॉरी, मैं तेरा मज़ाक नही उड़ा रही. तू मेरा भाई है तो, मुझे किसी भी जगह ले जाने मे तुझे कैसी शरम.”

कीर्ति की ये बात मुझे सही लगी और मैने उस से पूछा.

मैं बोला “तू कभी किसी रेस्टौरेंट मे कभी गयी है.”

कीर्ति बोली “मैं तो रेस्टौरेंट मे जाती ही रहती हूँ. मेरी सहेलियाँ अक्सर रेस्टौरेंट मे ही अपने बाय्फ्रेंड से मिलती है और उस समय मैं भी उनके साथ होती हूँ. क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है.”

कीर्ति की बात सुनकर, एक पल के लिए मैं सकपका गया और उसे गौर से देखने लगा. उसके चेहरे पर वो ही जानी पहचानी मुस्कुराहट थी. मैने उसकी बात का जबाब देते हुए कहा.

मैं बोला “नही मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है. क्या तेरा कोई बाय्फ्रेंड है.”

कीर्ति बोली “इस बात मे तो हम दोनो भाई बहन एक जैसे है. मेरा भी कोई बाय्फ्रेंड नही है. अब तू ज़्यादा समय बर्बाद मत कर. वो सामने जो रेस्टौरेंट दिख रहा है ना, चल वही चलते है. वहाँ खाना अच्छा मिलता है. मैं बहुत बार वहाँ आ चुकी हूँ. वही बैठ कर बात भी कर लेगे और अपनी भूक भी मिटा लेगे.”

मैं उसकी बताई जगह पर गाड़ी रोक देता हूँ और फिर हम लोग अंदर चले जाते है. वो जगह सच मे बहुत अच्छी थी. वहाँ सबके बैठने के लिए कॅबिन बना हुआ था. एक कॅबिन मे जाकर हम लोग भी बैठ जाते है. कीर्ति दोनो के लिए खाना मँगाती है और फिर मुझसे पूछती है.

कीर्ति बोली “क्या सच मे तेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है.”

मैं बोला “मैं तुझसे झूठ क्यो बोलुगा. तू ही तो एकलौती लड़की है, जिसके साथ मैं खुल कर इतनी बात कर लेता हूँ. वो भी इसलिए क्योकि तू मेरी बहन है.”

कीर्ति बोली “क्या किसी लड़की को देख कर, अपनी गर्लफ्रेंड बनाने का तेरा मन नही करता.”

मैं बोला “नही, मुझे किसी लड़की से दोस्ती करने की ज़रूरत ही महसूस नही होती. ना ही मेरे पास इस सब के लिए इतना समय है कि, मैं किसी लड़की के आगे पीछे घूमता फिरता रहूं.”

कीर्ति बोली “क्यो तू ऐसा क्या करता है, जो तेरे पास किसी लड़की के लिए समय ही नही है.”

मैं बोला “मुझे अमि निमी से फ़ुर्सत मिले, तभी तो मैं किसी लड़की के बारे मे सोचु. मुझे अमि निमी से फ़ुर्सत ही नही मिलती और मैं इसी मे खुश हूँ.”

मैं जितना इस बात को टलने की कोसिस कर रहा था. कीर्ति उतना ही इस बात को बढ़ाती चली जा रही थी. मुझे लग रहा था कि, मैने इसके साथ यहाँ आकर बहुत बड़ी ग़लती कर दी. मेरी बात के जबाब मे जब कीर्ति कुछ नही बोली तो, मुझे लगा कि, उसने ये बात ख़तम कर दी. लेकिन अगले ही पल कीर्ति ने मेरे सामने फिर से वो ही सवाल रख दिया.

कीर्ति बोली “तेरे स्कूल मे तो लड़कियाँ पढ़ती है, तो क्या तेरी उनसे भी दोस्ती नही है.”

मैं बोला “स्कूल मे मेरा एक ही दोस्त है मेहुल. जो मेरे बचपन का दोस्त है. उसके रहते मुझे कभी किसी दोस्त की ज़रूरत महसूस नही हुई.”

इसके बाद खाना आ गया और मैने राहत की साँस ली. अब मैं जल्दी से जल्दी यहाँ से निकल जाना चाहता था. इसलिए मैने उससे खाना सुरू करने को कहा और फिर हम दोनो खाना खाने लगे.
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09-09-2020, 12:13 PM,
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मगर कीर्ति पर तो जैसे आज इस बात को जानने का भूत ही सवार हो गया था. उसने खाना खाते खाते फिर से बात को आगे बढ़ाते हुए कहा.

कीर्ति बोली “देख तू चाहे तो मुझे अपनी दोस्त समझ कर सब कुछ बता सकता है. मैं किसी को कुछ नही बताउन्गी.”

कीर्ति की बात सुनकर मैने एक नज़र कीर्ति की तरफ देखा. मुझे समझ नही आ रहा था कि, वो ऐसा क्यो बोल रही है. इसलिए मैने उस से पुछा.

मैं बोला “मैं क्या बता सकता हूँ और तू क्या किसी को नही बोलेगी.”

कीर्ति बोली “यही कि वो लड़की कौन थी. जो मेरे भाई को इतनी पसंद आई कि, उसके बाद उसे किसी लड़की से दोस्ती करने का मन ही हुआ.”

मैं बोला “तू एक ही बात के पीछे क्यो पड़ी है. मैं बोल तो चुका हूँ मेरी जिंदगी मे कोई लड़की नही और तुझे मुझसे ऐसी बात करते हुए ज़रा भी शरम नही आती.”

कीर्ति बोली “आती है तभी तो पूछ रही हू.”

मैं बोला “ये तो बेशर्मी है और तू इसे शरम आना कहती है.”

कीर्ति बोली “हां शरम आती है ना, कि मेरा इतना हॅंडसम भाई है और उसकी कोई गर्लफ्रेंड ही नही है.”

मैं बोला “तू भी तो इतनी सुंदर है, फिर तेरा बाय्फ्रेंड क्यो नही है.”

कीर्ति बोली “मेरा बाय्फ्रेंड है.”

उसके मूह से अचानक ये बात सुनकर मैं चौक गया और अनायास ही मेरे मूह से निकला.

मैं बोला “कौन है वो.? क्या तेरी स्कूल का है.?”

कीर्ति बोली “जब तू अपना राज़ मेरे सामने नही खोलना चाहता तो, मैं अपना राज़ तुझे क्यो बताऊं.”

मैं बोला “मेरा कोई राज़ नही है और मैं तेरा भाई हूँ. मुझे जानने का पूरा हक़ है कि तेरा बाय्फ्रेंड कौन है.”

कीर्ति बोली “अच्छा तू भाई है तो, तुझे सब जानने का हक़ है. अब तू ये जानना चाहता है कि मेरा बाय्फ्रेंड कौन है तो, तुझे शरम नही आ रही. लेकिन यही बात जब मैने पूछी थी, तो मैं बेशर्म हो गयी थी.”

मैं बोला “शरम तो मुझे आ रही है पर जब तूने बेशर्म होकर ये बता दिया कि तेरा बाय्फ्रेंड है तो मुझे भी बेशर्म होकर पूछना पड़ रहा है कि कौन है वो.”

कीर्ति बोली “अच्छा तो तू ये जानकर क्या करेगा.”

मैं बोला “मैं कुछ भी नही करूगा. मैं बस जानना चाहता हूँ कि वो कौन है.”

कीर्ति बोली “क्या तुझे ये जानकार अच्छा लगेगा.”

मैं बोला “जान तो मैं गया हूँ कि तेरा कोई बाय्फ्रेंड है. अब यदि तू नही भी बताएगी, तो भी मैं अपने तरीके से पता कर लूँगा.”

कीर्ति बोली “याने कि तू मेरी जासूसी करेगा या करवाएगा.”

मैं बोला “अब तू नही बताएगी तो, मुझे ये सब करना ही पड़ेगा.”

कीर्ति बोली “पर इस सब की ज़रूरत क्या है. तेरे लिए ये जान लेना ही काफ़ी होना चाहिए कि, मेरा बाय्फ्रेंड है. कौन है.? कैसा है.? इस से तुझे क्या मतलब. ये सब जानकार तुझे क्या फ़ायदा.”

मैं बोला “तुझे इस सब मे कुछ मतलब समझ मे आता हो या ना आता हो. लेकिन मुझे इस सब से मतलब है. माना कि मैं तेरी मौसी का सगा लड़का नही हूँ. फिर भी मुझे, तेरी फिकर तेरे भाई की तरह ही है.”

मेरी बात सुनकर कीर्ति गुस्सा हो गयी और गुस्से मे भड़कते हुए कहने लगी.

कीर्ति बोली “तुझे मैने कब सौतेला समझा है. तुझे तो मैं अपना भाई और दोस्त दोनो मानती हूँ. इसके बाद भी आज तूने ये बात बोल कर मुझे बहुत दुख पहुँचाया है.”

मैं बोला "जो सच है वो ही मैने कहा. यदि ये सच नही है तो, फिर बता तेरा बाय्फ्रेंड कौन है.”

कीर्ति बोली “बात जानने का ये कोई तरीका नही है. यदि मेरी बात जानना चाहते हो तो, पहले मुझे अपनी बात बताओ.”

मैं बोला “तुझे क्यो लगता है कि, मेरी जिंदगी मे कोई लड़की है या फिर कभी कोई लड़की थी.”

कीर्ति बोली “क्योकि ये नामुमकिन है कि, अब तक तेरी जिंदगी मे कोई लड़की ना आई हो और यदि इस बात को मान भी लिया जाए कि, तेरी जिंदगी मे अभी तक कोई लड़की नही आई है, तो भी तू किसी लड़की के तेरी जिंदगी मे आने के सपने तो सजाता होता. इस तरह लड़कियों से दूर नही भाग रहा होता. इसका मतलब तो सॉफ है.”

मैं बोला “क्या मतलब साफ है.”

कीर्ति बोली “यही की पहली बार मे ही प्यार मे धोका मिला.”

कीर्ति की ये बात सुनकर मेरी हँसी छूट गयी और मैने हंसते हुए कहा.

मैं बोला “जैसे तू सोच रही है, ऐसा कुछ भी नही है. तू तो किसी कहानीकार की तरह ज़बरदस्ती मेरे प्यार की झूठी कहानी गढ़ती जा रही है और मुझसे चाहती है कि मैं तेरी इस गढ़ी हुई झूठी कहानी को सच मान जाउ.”

कीर्ति बोली “चल मैं तेरी बात मान लेती हूँ. तू बस एक काम कर दे.”

मैं बोला “क्या.?”

कीर्ति बोली “तू अमि और निमी की कसम खाकर बोल दे कि, जैसा मैं बोल रही हू, वैसा कुछ भी नही है.”

कीर्ति की बात सुनकर मैं अजीब दुविधा मे पड़ गया था और वो मुझे देख कर मेरे अंदर चल रहे मनोभावों का अंदाज़ा लगा रही थी. मुझे कुछ बोलते ना देख कर, उसने अपनी बात को फिर से दोहराया.

कीर्ति बोली “इतना क्यो सोच रहा है. खा ले कसम और इस बात को यही ख़तम कर दे.”

मैं उसकी बात का कुछ जबाब देने की सोच ही रहा था. तभी मेरे मोबाइल की रिंग टोन बजी और मैने देखा तो छ्होटी माँ का कॉल था. मैने फ़ौरन कॉल उठाते हुए कहा.

मैं बोला "जी छ्होटी माँ.”

छ्होटी माँ “पुन्नू बेटा तुम लोग कहाँ हो. क्या तुम लोगों की खरीदी अभी तक नही हुई है.”

मैं बोला “नही छ्होटी माँ हो गयी है. बस हम लोग घर ही आ रहे है.”

छ्होटी माँ “ठीक है बेटा.”

इतना कहकर छ्होटी माँ ने फ़ोन रख दिया और कीर्ति से कहा.

मैं बोला “अब घर चलो बहुत देर हो गयी है. छ्होटी माँ चिंता कर रही है.”

कीर्ति बोली “लेकिन अभी मेरी बात अधूरी है.”

मैं बोला “अब जो भी बात करना है, घर चल कर कर लेना. हमें घर से निकले बहुत देर हो गयी है. इसलिए अब जल्दी से घर चलो.”

कीर्ति अपनी बात को पूरा करना चाहती थी. मगर उसको भी मेरी बात सही लगी. इसलिए इसके बाद उसने मुझसे कोई सवाल जबाब नही किया और फिर हम दोनो वहाँ से घर के लिए चल पड़े.
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09-09-2020, 12:14 PM,
#14
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
घर आने के बाद मैं सीधे अम्मी निम्मी की पास चला गया. वो दोनो छोटी माँ के पास खेल रही थी. ये मेरी आदत थी कि, घर से आते जाते, जब तक एक बार मैं उनको देख नही लेता था, मुझे चैन नही मिलता था. मुझे वापस आया देख कर छोटी माँ ने मुझसे पुछा.

छोटी माँ बोली “तुम लोगों ने वापस आने मे बहुत देर लगा दी.”

मैं बोला “छोटी माँ, वो क्या है कि, कीर्ति को बहुत भूक लगी थी और वो वही पर कुछ खाने की ज़िद करने लगी तो, हम लोग रेस्टौरेंट मे खाना खाने लगे थे.”

मेरी बात सुनकर छोटी माँ के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और उन्हो ने कीर्ति से कहा.

छोटी माँ बोली “ये तो बहुत अच्छी बात है बेटी. इसी बहाने इसने घर से बाहर खाना तो खाया. वरना ये बाहर कुछ भी नही ख़ाता.”

कीर्ति बोली “आप चिंता मत कीजिए मौसी. ये कुछ दिन यहाँ रहेगा तो और भी बहुत कुछ सीख जाएगा.”

छोटी माँ बोली “ठीक है, अब जब अगली बार आएगा तो सिखा देना. अब तू जा और दीदी को बोल कि, तुम लोग वापस आ गये हो.”

कीर्ति बोली “वो तो मैने आते ही बता दिया है मौसी. लेकिन मम्मी बोल रही है कि, आप अभी ही जा रही है.”

छोटी माँ बोली “जाना तो कल ही था, पर दीदी ने रोक लिया तो रुकना पड़ गया. मगर अब रुक पाना मुस्किल है. तेरे मौसा जी भी घर मे अकेले है और फिर पुन्नू और अमि की पढ़ाई का नुकसान भी तो हो रहा है.”

कीर्ति बोली “लेकिन मौसी आप तो कह रही थी कि, मेरे स्कूल का प्रॉजेक्ट बनाने मे, पुन्नू मेरी मदद कर देगा और अब आप लोग जा रहे है. अब यदि पुन्नू चला जाएगा तो, मेरा प्रॉजेक्ट कैसे बनेगा मौसी.”

कीर्ति की बात सुनकर, छोटी माँ को, सुबह कीर्ति से कही गयी, अपनी बात याद आ गयी. लेकिन वो तो खुद मेरी वजह से घर वापस जा रही थी. ऐसे मे वो मुझे वहाँ रुकने के लिए कैसे कह सकती थी.

उन्हे समझ नही आ रहा था कि, वो अब कीर्ति को क्या जबाब दें. वो सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देखने लगी. जैसे पूछ रही हो कि, अब क्या किया जाए. मैने उन्हे इस दुविधा मे पड़ा देखा तो, उनको इस दुविधा से बाहर निकालते हुए कहा.

मैं बोला “छोटी माँ, यदि अमि, निमी यहाँ नही रही तो, फिर मैं भी यहाँ नही रुकुंगा.”

मेरी इस बात का मतलब छोटी माँ के सिवा कोई नही समझ पाया. सबको यही लगा कि, मैं अमि निमी के बिना वहाँ रहना नही चाहता. जबकि मैने छोटी माँ को, अपने वही रुकने की सहमति दी थी. मेरी बात का मतलब समझते ही, छोटी माँ मुस्कुरा दी और उन्हो ने कीर्ति से कहा.

छोटी माँ बोली “जा और अपने मौसा जी को फोन लगा कर बोल दे कि, हम लोग आज भी यही रुकेगे.”

छोटी माँ की बात सुनकर कीर्ति खुशी खुशी फोन करने चली गयी और मैं कमल के कमरे मे आ गया. कमल उस समय अपने कमरे मे नही था. शायद वो बाहर गया हुआ था.

मैं जाकर लेट गया और फिर थोड़ी देर बाद मेरी नींद लग गयी. ना जाने कितनी देर तक मैं सोता रहा. फिर कीर्ति ने आकर मुझे जगाया तो मेरी नींद खुली. उसने मुझे जागते हुए कहा.

कीर्ति बोली “शाम के 5 बज गये है, अब उठ भी जाओ. ऐसे ही सोते रहोगे तो, मेरा प्रॉजेक्ट तैयार करने मे मेरी मदद कब करोगे.”

मैं बोला “तूने इतनी देर तक मुझे सोने ही क्यो दिया, पहले ही जगा देना था.”

कीर्ति बोली “मैं तो जगा देना चाहती थी. लेकिन मौसी ने कहा कि, उसने कभी घर से बाहर रात नही बिताई है. इसलिए उसे यहाँ रात को ठीक से नींद नही आई होगी. अब वो सोया है तो, उसे अपनी नींद पूरी कर लेने दो. अब भला मैं मौसी की बात को कैसे काट सकती थी.”

मैं बोला “चल कोई बात नही. तू अपने प्रॉजेक्ट का समान निकाल, तब तक मैं मूह हाथ धोकर आता हूँ.”

कीर्ति बोली “ठीक है, जल्दी आना.”

ये बोल कर वो चली गयी. उसके जाने के बाद मैं उठा और मूह हाथ धोने लगा. मूह हाथ धोने के बाद, मैं कीर्ति के कमरे मे जाने को हुआ, तभी अमि और निमी आ गयी. दोनो किसी बात पर लड़ रही थी. उनको लड़ते देख कर मैने उनसे पुछा.

मैं बोला “तुम दोनो लड़ क्यो रही हो.”

अमि बोली “भैया निमी ने अपनी डॉल तोड़ दी है और अब मेरी डॉल लेकर यहाँ भाग आई है.”

मैने निमी को देखा तो, वो अपने दोनो हाथ पीछे किए खड़ी थी. तभी कीर्ति भी आ गयी और दोनो की नाटक बाजी देखने लगी. मैने निमी को अपने पास बुलाया और उस से पुछा.

मैं बोला “छोटी, तूने दीदी की डॉल क्यो ले ली.”

मेरी बात के जबाब मे निमी बड़े ही हक़ से अपने हाथ की, डॉल दिखाती हुए कहने लगी.

निमी बोली “भैया दीदी झूठ बोल रही है. ये डॉल मेरी है.”

मैं बोला “छोटी, अच्छे बच्चे कभी झूठ नही बोलते. सच बताओ, ये दीदी की डॉल है ना.”

मेरी बात सुनकर, निमी ने अपना सर हिला कर हां कहा और फिर अपना सर झुका लिया. मैने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा और उसे समझाते हुए कहा.

मैं बोला “छोटी, मैं तुम्हे इस से भी अच्छी डॉल लाकर दूँगा. तुम दीदी की डॉल, दीदी को वापस कर दो.”

मेरी बात सुनकर निमी ने अपना चेहरा रुआंसा सा बना लिया. जैसे अभी ही रो पड़ेगी और फिर डॉल अमि को देने लगी. मगर अमि ने जब उसका रुआंसा चेहरा देखा तो, वो डॉल वापस लेते लेते रुक गयी और कहने लगी.
अमि बोली “मुझे नही चाहिए ये डॉल. अब ये तुम ही रख लो. भैया मुझे इस से अच्छी डॉल लाकर दे देगे.”

उसके मूह से ये सुनते ही निमी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और उसने डॉल को अपने गले से लगा लिया. उसकी हरकत पर अमि ने मूह बनाते हुए मुझसे कहा.

अमि बोली “भैया मुझे अच्छा वाला वीडियो गेम चाहिए. जिसमे 1000 गेम हो. मैं वो गेम इस निमी को नही दूँगी.”

मैं बोला “ठीक है, मैं तुझे अच्छा वाला वीडियो गेम लाकर डुगा. अब तो खुश.”

मेरी बात सुनकर अमि खुश हो गयी. मगर निमी के चेहरे की मुस्कान गायब हो गयी. वो फ़ौरन मेरे पास आई और कहने लगी.

निमी बोली “भैया, मुझे भी वीडियो गेम चाहिए.”

निमी की ये हरकत देख, अब अमि को गुस्सा आने लगा. लेकिन उसके कुछ बोलने के पहले ही मैने बात को सभालते हुए कहा.

मैं बोला “मैं तुम दोनो को ही वीडियो गेम लाकर दूँगा और बेटू को एक सुंदर सी डॉल भी लाकर दूँगा. मगर ये सब तभी लाकर दूँगा. जब तुम दोनो आपस मे नही लड़ोगी.”

मेरी ये बात सुनते ही दोनो के चेहरे की मुस्कुराहट वापस आ गयी और दोनो ने एक दूसरे के कंधे पर हाथ रखते हुए, मुझसे कहा.

दोनो बोली “भैया, अब हम दोनो कभी नही लड़ेंगे. लेकिन आप हमें बहुत सारे गेम वाला वीडियो गेम लाकर देना.”

मैने प्यार से दोनो के सर पर हाथ फेरा और दोनो से कहा.

मैं बोला “ठीक है, अब तुम दोनो बाहर जाकर खेलो. मैं कीर्ति दीदी का काम करके आता हूँ.”

मेरी बात सुनते ही दोनो ने कमरे के बाहर की तरफ दौड़ लगा दी. उनकी ये हरकत देख कीर्ति मुस्कुरा रही थी. दोनो के चले जाने के बाद कीर्ति ने हंसते हुए मुझसे कहा.

कीर्ति बोली “अब मुझे समझ मे आया कि, तुम इन दोनो के बिना क्यो नही रह पाते हो.”

मैने बोला “हां, मेरी दोनो बहने इतनी प्यारी है कि, मैं कभी इनसे दूर नही रह पाता और जब इनके पास रहता हूँ तो, सब कुछ भूल जाता हूँ.”

कीर्ति बोली “हां वो तो मैं देख ही रही हूँ. जैसे अभी मेरा प्रॉजेक्ट भूल गये हो.”

मैं बोला “ओह्ह ये तो मैं सच मे भूल गया, चलो जल्दी चलो.”

कीर्ति बोली “चलो याद तो आया.”

इसके बाद मैं कीर्ति के साथ उसके रूम मे आ गया. उसने बैठने को बोला तो, मैं उसके बॅड पर बैठ गया और कीर्ति भी कुर्सी खींच कर मेरे सामने बैठ गयी.

मैं बोला “तू मुझे यहाँ प्रॉजेक्ट तैयार करने को लेकर आई है या बैठने के लिए लेकर आई है.”

कीर्ति बोली “ना ही मैं तुझे यहाँ प्रॉजेक्ट तैयार करने को लेकर आई हूँ और ना ही बैठने के लिए लेकर आई हूँ.”

मैं बोला “तो क्या तुझे प्रॉजेक्ट तैयार नही करना.”

कीर्ति बोली "वो तो मैने दिन मे तैयार कर लिया था.”

मैं बोला “तो फिर तू मुझे यहाँ क्यो लेकर आई है.”

कीर्ति बोली “दिन वाली अधूरी बात पूरी करने के लिए, अब हमें यहाँ कोई परेशान नही करेगा.”

ये कह कर वो मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगी. लेकिन कीर्ति की इस बात ने मुझे एक अजीब ही परेशानी मे डाल दिया था. मुझे समझ नही आ रहा था कि, मैं उसे अपनी बात का कैसे यकीन दिलाऊ.
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09-09-2020, 12:15 PM,
#15
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
मुझे इस बात पर इतना सोचते देख कर, कीर्ति ने मुझे, मेरी सोच से बाहर निकालते हुए कहा.

कीर्ति बोली “तुझे इतना ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नही है. तुझे तो अमि निमी की कसम खाकर, सिर्फ़ ये कहना है कि तेरी जिंदगी मे कभी कोई लड़की नही आई.”

इतना कह कर वो फिर से मुस्कुराने लगी और मेरी तरफ देखते हुए, मेरे जबाब देने की राह देखने लगी. लेकिन मेरे लिए उसकी इस बात का जबाब देना इतना आसान नही था. इसलिए मैने अभी भी अपनी बात को दोहराते हुए कहा.

मैं बोला “मेरी जिंदगी मे कभी कोई लड़की नही आई. ये ही सच है. अब तुझे मेरी बात पर यकीन करना है तो कर और नही करना तो मत कर. मगर मैं इस बात को सच साबित करने के लिए अमि निमी की कसम खाने की ज़रूरत नही समझता हूँ.”

कीर्ति बोली “तेरा कसम ना खाना ये बताता है कि, तू सच नही बोलना चाहता.”

मैं बोला “कसम ना खाने से सच बात झूठ नही हो जाती.”

कीर्ति बोली “हां ठीक बोला तूने, पर यदि कोई बात सच होती है तो, उसके लिए कसम खाने मे कोई परेशानी नही होती.”

मैं बोला “बात कैसी भी हो, पर मैं कभी अमि निमी की कसम नही ख़ाता.”

कीर्ति बोली “तो फिर मेरी कसम खाकर बोल दे. मैं तेरी बात का विस्वास कर लुगी.”

मैं बोला “खाने को तो मैं तेरी झुटि कसम भी खा सकता हूँ और जब तुझे विस्वास करना ही है तो, ऐसे ही मेरी बात का विस्वास क्यो नही कर लेती.”

कीर्ति बोली “देख अब ज़्यादा नाटक करना बंद कर और जल्दी से मेरी कसम खाकर बोल दे कि, तेरी जिंदगी मे कभी कोई लड़की नही थी. अब तुझे मेरी कसम है.”

मैं बोला “मैं तेरी इस कसम को नही मानता और ना ही मैं तेरी या किसी की, कोई कसम खाने वाला हूँ. अब तुझे जो समझना है, तू समझ सकती है. मुझे तेरे कुछ भी समझने से, कोई परेशानी नही.”

मेरी ये बात सुनते ही कीर्ति की आँखों मे आँसू झिलमिला गये. उसने बहुत ही भावुक होते हुए कहा.

कीर्ति बोली “पुन्नू बात सिर्फ़ मेरी कसम मानने या ना मानने की नही थी. मैने तो तुझे अपनी कसम सिर्फ़ इसलिए दी थी कि, मैं ये देखना चाहती थी कि, मैं तेरे लिए कितनी अपनी हूँ. तेरे लिए मेरी अहमियत अमि निमी की तरह है या नही. ये बात आज मैं अच्छी तरह से जान चुकी हूँ. अब मुझे तुझसे कुछ भी नही जानना है.”

इतना कह कर, वो अपनी नम आँखे लिए कमरे से बाहर निकल गयी. मैने अंजाने मे उसके दिल को जो चोट पहुचाई थी. अब मुझे उसका अफ़सोस हो रहा था. मगर मैं भी मजबूर था और इसलिए ना चाहते हुए भी उसे दुखी कर दिया.

मुझे लगा कि वो मुझे अपने कमरे मे बैठा देख कर, वापस आ जाएगी. इसलिए मैं वही बैठा उसके वापस आने का इंतजार करने लगा और उसके कमरे मे यहाँ वहाँ देखने लगा.

तभी मेरी नज़र उसके, स्कूल के लिए तैयार किए गये प्रॉजेक्ट पर पड़ती है और मैं उठा कर उसको देखने लगता हूँ. कीर्ति ने एक बहुत ही सुंदर आदर्श गाँव का प्रॉजेक्ट तैयार किया था. जिसमे उसने स्कूल, हॉस्पिटल, बस स्टॅंड, पोलीस स्टेशन, रेलवे स्टेशन को बखूबी दर्शाया था.

जब मुझे उसका इंतजार करते बहुत देर हो जाती है तो, मैं उठ कर बाहर आ जाता हूँ. बाहर हॉल मे सब लोग बैठे टीवी देख रहे होते है. कीर्ति मुझे आते देख छोटी माँ से कहती है

कीर्ति बोली “मौसी मैं भी आप के साथ कुछ दिन के लिए चलना चाहती हूँ.”

छोटी माँ बोली “लेकिन तेरे स्कूल का क्या होगा.”

कीर्ति बोली “कल के बाद कुछ दिन की मेरी छुट्टी है. मैं सोच रही थी कि, ये छुट्टियाँ आप के साथ ही मनाऊ.”

छोटी माँ बोली “ठीक है तू अपना समान आज ही पॅक कर ले. नही तो पता चला कि कल फिर जाना टल जाए.”

कीर्ति बोली “ऐसा कुछ नही होगा मौसी. मैं अपना समान आज ही पॅक कर लुगी और फिर स्कूल से आते ही हम निकल चलेगे.”

छोटी माँ बोली “वो तो ठीक है, पर पहले दीदी और जीजा जी से तो पूछ ले.”

मौसी भी वही थी. उन ने छोटी माँ की बात सुनकर उन से कहा.

मौसी बोली “इसमे मुझसे पूछने वाली बात क्या है. ये तेरी भी तो बेटी है. मुझे इसके जाने मे कोई परेशानी नही. कम से कम कुछ दिन तो, इसकी बक बक से फ़ुर्सत मिलेगी. रही इसके पापा की बात तो, वो भला इसे तेरे साथ जाने से क्यो मना करने लगे.”

मौसी की बात सुनकर कीर्ति खुश हो गयी. लेकिन अब वो मेरी तरफ देख तक नही रही थी. मुझे कीर्ति की ये बात अच्छी नही लग रही थी. इसलिए मैं वहाँ से उठ कर कमल के कमरे मे आ गया.

मुझे कीर्ति का बर्ताव कुछ अजीब लग रहा था. जिस वजह से अब मेरा वहाँ मन नही लग रहा था. तभी कमल कमरे मे आ गया. मुझे अकेले कमरे मे बैठा देख उसने कहा.

कमल बोला “क्या बात है.? तुम इस तरह अकेले कमरे मे बंद क्यो बैठे हो. अगर घर मे अच्छा नही लग रहा तो चलो बाहर घूम कर आते है.”

मेरा मन तो पहले ही वहाँ नही लग रहा था. इसलिए कमल की बात मुझे सही लगी. मैने उस से बाहर घूमने चलने के लिए हां कहा और उसके साथ बाहर घूमने चला गया.

हम लोग बहुत देर तक, यहाँ वहाँ घूमने के बाद 9 बजे घर वापस आए. जब हम घर पहुचे तो, मौसा जी भी घर आ चुके थे. सब उनके साथ बैठ कर बातें कर रहे थे.

लेकिन कीर्ति वहाँ नही थी. शायद वो अपने कमरे मे थी. मैं भी सबके साथ बैठ गया और बातें करने लगा. कुछ देर बाद कीर्ति भी वहाँ आ गयी. उसे देखते ही मौसा जी ने उस से पूछा.

मौसा जी बोले “तुम्हारे जाने की सारी पॅकिंग हो गयी या अभी भी कुछ बाकी है.”

कीर्ति बोली “सारी पॅकिंग हो गयी है पापा.”

मौसा जी बोले “ये तो अच्छी बात है. लेकिन 2 दिन बाद तुम्हारा जनमदिन भी आ रहा है. अब तब तो तुम यहाँ रहोगी नही, इसलिए मैं चाहता हूँ कि, तुम अपने जनमदिन का गिफ्ट भी अपने साथ ले जाओ. अब बोलो तुम्हे अपने जनमदिन पर क्या गिफ्ट चाहिए .”

मौसा जी की बात सुनते ही कीर्ति की खुशी का ठिकाना ना रहा. उसने बड़े ही उतावलेपन से कहा.

कीर्ति बोली “पापा मुझे जनमदिन पर एक अच्छा सा मोबाइल चाहिए.”

मौसा जी बोले “अच्छा ठीक है ले लेना. मैं कल तुम्हारी मम्मी को मोबाइल के लिए पैसे दे जाउन्गा. तुम स्कूल से आकर अपनी पसंद का मोबाइल ले लेना.”

मौसा जी की बात सुनकर खुश हो गयी और कमल जो अभी तक चुप चाप उनकी बातें सुन रहा था. अब उस से चुप ना रहा गया और वो भी बोल पड़ा.

कमल बोला “पापा मुझे भी मोबाइल चाहिए.”

मौसा जी बोले “ये तो कीर्ति के जनमदिन का है. तुम चाहो तो अपने जनमदिन पर मोबाइल ले लेना.”

अपने जनमदिन पर मोबाइल मिलने की बात सुनकर कमल भी खुश हो गया. फिर मौसी ने खाना खाने की बात कही तो, सब डाइनिंग टेबल पर आ गये और खाना खाने लगे.
खाना खाने के बाद सब बहुत देर तक बातें करते रहे और फिर 11 बजे अपने अपने रूम मे आ गये.
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09-09-2020, 12:22 PM,
#16
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
निमी सो गयी थी तो, मैने उसे गोद मे उठाया और छोटी माँ के कमरे मे ले जाकर आ गया. निमी को वहाँ लिटाने के बाद, मैं वही बैठा छोटी माँ से बात करता रहा. जिसमे 11:30 बज गये.

इसके बाद मैं कमल के कमरे मे आ गया मगर कमल कमरे मे नही था. मैने सोचा कीर्ति कल जा रही है. इसलिए शायद कमल के साथ कीर्ति से बात कर रहा हो. मैं लेट गया और सोने की कोसिस करने लगा. मगर दिन मे सो लेने की वजह से अब मुझे नींद नही आ रही थी.

इसलिए मैं उठ कर कमरे के बाहर आ गया. मैने देखा कि कीर्ति के कमरे की लाइट जल रही है तो मैं उसके कमरे की ओर आ गया. मगर उसका कमरा खाली था. कीर्ति या कमल दोनो मे से किसी भी कमरे मे नही था.

मैने सोचा हो सकता है कि कीर्ति बाथरूम मे हो, इसलिए मैने कीर्ति को आवाज़ दी मगर कोई जबाब नही मिला तो, मैं समझ गया कि वो यहाँ नही है. मैं उन्हे मौसा मौसी के कमरे मे देखने आया मगर उनके कमरे का दरवाजा बंद था. याने की दोनो वहाँ भी नही थे.

इतनी रात को दोनो के घर से बाहर जाने का सवाल ही पैदा नही होता था. मुझे समझ नही आ रहा था कि, दोनो इतनी रात को कहाँ गायब हो गये. ये ही सोचते सोचते मैं हॉल मे आकर बैठ गया. फिर अचानक मुझे ख़याल आया कि, कही ये दोनो छत पर तो नही है.

ये ख़याल आते ही मैं सीडीयों की तरफ बढ़ चला. वहाँ आकर मैने देखा सीडीयों की लाइट जल रही थी. अब इस बात मे कोई शक़ नही था कि, दोनो छत पर ही है. मेरे कदम खुद ब खुद छत की सीडीयों की ओर बढ़ने लगे. लेकिन छत पर पहुचते ही मुझे जोरदार झटका लगा.

कीर्ति और कमल दोनो छत की फर्श पर दीवार से अपनी पीठ टिकाए बैठे थे. दोनो के हाथ मे एक एक सिगरेट थी और मूह से धुँआ निकल रहा था. मुझे अपने सामने देखते ही, कमल की तो सिट्टी पिटी गुम हो गयी. उसने तुरंत अपनी सिगरेट दूर फेक दी और कीर्ति की तरफ देखने लगा.

मगर कीर्ति ने मुझे देख कर भी अनदेखा कर दिया. वो वाइट टी-शर्ट और लोवर पहने थी. उसका एक पैर फर्श पर सीधा था जबकि दूसरा पैर मोड़ कर वो दोनो हाथ ज़मीन पर टिकाए बैठी थी. उसके एक हाथ मे सिगरेट का पॅकेट था तो दूसरे हाथ मे जलती हुई सिगरेट थी.

उसने मुझे अपने पास आता देख सिगरेट का एक जोरदार कश लगाया और फिर अपनी नाक से धुआँ निकालने लगी. मैं पास पहुचा तो उसने बड़ी बेशर्मी से सिगरेट का पॅकेट मेरी तरफ बढ़ा दिया.

उन्हे सिगरेट पीते देख वैसे ही मुझे गुस्सा आ रहा था. उस पर कीर्ति की इस हरकत ने मेरा गुस्सा ऑर भी ज़्यादा बढ़ा दिया. मैने उसके हाथ पर हाथ मारा और उसके हाथ से सिगरेट का पॅकेट दूर जाकर गिरा.

लेकिन वो जलती हुई सिगरेट वाला दूसरा हाथ मेरी तरफ बड़ा देती है. मैं उस पर भी एक हाथ मारता हूँ और उसके हाथ से छूट कर, सिगरेट दूर जाकर गिरती है. इसके बाद भी कीर्ति मुस्कुरा रही थी. मैं गुस्से मे दोनो को घूर कर देखते हुए कहता हूँ.

मैं बोला “तुम दोनो को ऐसी हरकत करते हुए शरम नही आती.”

लेकिन मेरी बात सुनकर भी कीर्ति मुस्कुरा रही थी. उस पर मेरी इस बात का कोई असर नही था. मेरा गुस्सा बढ़ रहा था और फिर मैने कमल की तरफ अपनी उंगली करते हुए उस से कहा.

मैं बोला “तुझे कल मैने जो हरकत करते देखा था उसको अनदेखा करके मैने बहुत बड़ी ग़लती कर दी. यदि कल मैने तेरी उस हरकत को नज़रअंदाज ना किया होता तो, आज तुझे इसके साथ सिगरेट पीते ना देख रहा होता. ये सिगरेट का पॅकेट कीर्ति तो ला ही नही सकती. समझ ले अब तेरी खैर नही, कल मौसा जी तेरी अच्छे से खबर लेगे.”

मेरी बात सुनकर तो कमल की जान ही निकल गयी. वो समझ गया कि मैं उसकी कल वाली किस हरकत की बात कर रहा हूँ. वो जल्दी से उठ कर मेरे सामने आकर गिडगिडाने लगता है.

कमल बोला “यार इस सिगरेट पीने मे मेरा ज़रा भी हाथ नही है. मेरी मजबूर था, वरना मैं ऐसा कभी नही करता.”

मैं बोला “खुद तो गंदी हरकत करने से बाज नही आता और अब अपने साथ साथ अपनी बहन को भी बिगाड़ रहा है. मैं तेरी इस ग़लती को कभी माफ़ नही कर सकता.”

मेरी बात सुनकर कमल की हालत खराब हो गयी और वो मिन्नत करते हुए कीर्ति से कहने लगा.

कमल बोला “अरे मेरी माँ, तुम चुपचाप क्यो बैठी हो. ये तो मेरी कोई बात सुन ही नही रहा है. अब तुम ही इसको मेरी कुछ सफाई दो. वरना इसने पापा से ये सब बोल दिया तो, तुम्हारा तो कुछ नही होगा, पर मुझे मार भी पड़ेगी और धक्के मार कर घर से भी निकाल दिया जाएगा.”

कमल की बात सुनकर, कीर्ति ने मुझे ताना मारते हुए, कमल से कहा.

कीर्ति बोली “हम इसके सगे भाई बहन होते तो, ये ऐसे हमारी शिकायत थोड़ी करता. बल्कि उल्टा हमें समझाता और पापा की डाँट से भी बचाता. लेकिन तू चिंता मत कर, इसे जो भी करना है, करने दे. मैं पापा से बोल दुगी कि, तूने जो भी किया, मेरे कहने पर किया है.”

लेकिन कीर्ति की ये बात सुनकर, कमल ऑर भी ज़्यादा घबरा गया. उसने कीर्ति को समझाते हुए कहा.

कमल बोला “अरे तुम पागल हो क्या, समझती क्यो नही. छुरी चाहे खरबूजे पे गिरे या खरबूजा छुरि पर गिरे, काटना तो खरबूजे को ही पड़ेगा. ये चाहे मैने तुम्हारे ही कहने पर क्यो ना किया हो. लेकिन किया तो मैने ही है और ऐसा मैने क्यो किया ये जान कर तो, पापा मुझे जान से ही मार डालेगे. तुम इसे पापा के पास जाने से रोक लो, मैं तुम्हारे पैर पकड़ता हूँ.”

कीर्ति बोली “मैं नही रोकूगी, इसे जो करना है कर ले.”

कीर्ति की इस बात ने तो कमल के तोते ही उड़ा दिए. वो मेरे सामने हाथ जोड़ कर अपनी सफाई देने लगा.

कमल बोला “यार मैने इसकी बात मानकर बहुत बड़ी ग़लती की है. लेकिन मैं मजबूर था. इसने मुझे ब्लॅकमेल किया, इसलिए मुझे इसकी बात मानना पड़ी.”

ब्लॅकमेल किए जाने की बात सुनकर, अब चौकने की बारी मेरी थी. मेरी समझ मे कुछ नही आया तो, मैने कमल से पूछा .

मैं बोला “तूने ऐसा क्या किया था. जिस बात को लेकर इसने तुझे ब्लॅकमेल किया.”

कमल समझ चुका था की, अब उसके पास सच कहने के सिवा कोई रास्ता नही है. उसने अपनी बात खुल कर रखते हुए कहा.

कमल बोला “मेरे दोस्त ने मुझे रखने के लिए कुछ सेक्स की बुक्स दी थी और पढ़ने को मना किया था. लेकिन मुझसे रहा नही गया और मैने वो बुक्स पढ़ ली. उसके पिक देखने के बाद मेरा मन, वो सब रियल मे देखने का हुआ और तब पापा मॅमी को सेक्स करते देखने के लिए मैं उनके कमरे मे झाँकने लगा. ऐसा करते एक दिन कीर्ति ने मुझे पकड़ लिया. इसने मेरी बात पापा को बताने की धमकी दी तो, मैं डर गया और रोने लगा. मुझे रोता देख इसको मुझ पर दया आ गयी और इसने मुझे इस शर्त पर माफ़ कर दिया कि, मैं दोबारा ऐसी ग़लती नही करूगा.”

मैं बोला “जब इसने तुझे माफ़ कर दिया था तो, फिर ये सिगरेट पीने वाली बात कहाँ से आ गयी.”

कमल बोला “आज शाम को जब हम लोग घूम कर आए तो सब बैठे थे. लेकिन ये नही थी तो, मैं इसके कमरे मे गया. ये अपने कमरे मे चुपचाप बैठी थी. मैने इस से पूछा कि क्या हुआ तो, इसने मुझे कुछ नही बताया. लेकिन रात को सबके सोने के बाद सिगरेट पीने की बात करने लगी. जब मैने इसे ऐसा करने से मना किया तो, इसने कहा ये मेरा राज़ छुपा कर रख सकती है तो, क्या मैं इसको एक बार सिगरेट नही पिला सकता. इसलिए मुझे इसकी बात मानना पड़ी. प्लीज़ यार सिर्फ़ एक बार मेरी ग़लती को माफ़ कर दो.”

मुझे अब कीर्ति का सारा खेल समझ मे आ गया था. इसलिए मैने थोड़ा नरम बनते हुए कमल से कहा.

मैं बोला “मान लो मैं ये सब भूल भी जाता हूँ. लेकिन इस बात को कैसे मान लूँ कि, तू ये सब ग़लतिया फिर नही करेगा.”

कमल बोला “मैं अब समझ गया हूँ कि, ये सब चीज़े थोड़ी देर का मज़ा है, पर बाद मे बहुत बड़ी सज़ा है. मैं माँ कसम खाकर कहता हूँ कि, दोबारा ऐसी ग़लती कभी नही होगी.”

मैं कमल की बात सुनकर, कुछ सोचने लगा और कमल गौर से मेरा चेहरा देखते हुए, मेरे जबाब का इंतजार करने लगा. तभी कीर्ति खिलखिला कर हंसते हुए कमल से कहने लगी.

कीर्ति बोली “तू चाहे अपनी माँ की कसम खा या अपनी बहन की कसम खा ले. मगर इसे किसी की कसम से कोई फ़र्क नही पड़ेगा. क्योकि ये तो हमें अपना मानता ही नही है. तू बेकार मे इसके सामने रो रहा है. इसे करने दे जो करना है. मैं बोल रही हूँ ना कि, मैं तुझे बचा लुगी, तो मेरा विस्वास कर, मैं तुझे बचा लुगी.”

कमल बोला “क्या उल्टा सीधा बक रही हो. तुम चुप रहो.”

मैं बोला “उसे बोलने दे, जो बोलना है. लेकिन तू याद रख कि, अब दोबारा ऐसी कोई हरकत नही करेगा. अब तू जा, मुझे अभी इस से बात करनी है.”

मेरी बात सुनकर कमल की जान मे जान आ गयी. इसके बाद वो वहाँ एक पल भी नही रुका और वहाँ से ऐसे गायब हुआ, जैसे गधे के सिर से सींग गायब होते है.
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09-09-2020, 12:22 PM,
#17
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
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कमल के जाने के बाद, मैं जाकर कीर्ति के पास बैठ गया. मैं अभी उस से कुछ बोलने ही वाला था कि, तभी कीर्ति वहाँ से उठने लगती है. मैं उसे उठता देख, उसका हाथ पकड़ लेता हूँ.

कीर्ति अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है. लेकिन जब वो मुझसे अपना हाथ छुड़ा नही पाती है तो, फिर गुस्से मे मुझसे कहती है.

कीर्ति बोली “मेरा हाथ छोड़ो. मुझे नींद आ रही है.”

मैं बोला “अभी जब बैठ कर सिगर्रेट पी रही थी, तब तुझे नींद नही आ रही थी. अब जब मैं बात करना चाहता हूँ तो, तुझको नींद आ रही है.”

कीर्ति बोली “मुझे तुझसे कोई बात नही करनी. मेरा हाथ छोड़ो और मुझे जाने दो. वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा.”

मैं बोला “तुझसे जो करते बने, तू कर ले. लेकिन मैं तेरा हाथ नही छोड़ूँगा.”

कीर्ति बोली “मुझे अपना हाथ छुड़ाना अच्छे से आता है. अब तुम सीधे से मेरा हाथ छोड़ते हो या नही.”

मैं बोला “जब तक मेरी बात पूरी नही हो जाती, मैं तेरा हाथ नही छोड़ूँगा.”

कीर्ति बोली “तो अब देखो मैं कितनी आसानी से अपना हाथ छुड़ा कर जाती हूँ.”

मैं बोला “दिखाओ.”

कीर्ति बोली “तुमको अमि निमी की कसम, मेरा हाथ छोड़ो और मुझे जाने दो.”

कीर्ति की ये बात सुनते ही, मैने उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन उसकी ये हरकत मुझे बहुत बुरी लगी. अपना हाथ छुड़ाते ही कीर्ति मेरे पास से उठ कर खड़ी हो गयी. उसने एक नज़र मेरे उपर डाली और फिर मेरी हालत पर हँसती हुई वहाँ से चली गयी.

मैं चुप चाप बैठे उसे जाते हुए देखता रहा और उसके बारे मे सोचता रहा. उसके जाने के बाद, मैने वहाँ पड़ा सिगर्रेट का पॅकेट उठाया और उसे खोल कर देखा. उसमे सिर्फ़ दो सिगर्रेट ही कम थी. जिसका मतलब था कि उन दोनो ने पहली सिगर्रेट ही जलाई थी और तभी मैं आ गया था.

लेकिन अब मुझे दो बातें परेशान कर रही थी. पहली तो ये कि कीर्ति को अचानक ये सिगर्रेट पीने की क्यो सूझी और दूसरी बात ये कि, कीर्ति ने कमल को इस शर्त पर माफ़ किया था कि, वो दोबारा ऐसी हरकत नही करेगा. इसके बाद भी कमल ने अपनी हरकत करना बंद क्यो नही किया.

कुछ देर तक मैं इन दोनो बातों का जबाब तलाश करता रहा. लेकिन जब मुझे इनका कोई जबाब समझ मे नही आया तो, अब मैने नीचे जाना ही ठीक समझा. मगर नीचे आने से पहले, मैने वो दोनो जली हुई सिगर्रेट उठाई और उन्हे उसी सिगर्रेट के पॅकेट मे रख दिया. फिर पॅकेट अपनी जेब मे रखने के बाद, मैं नीचे आ गया.

नीचे आकर मैने देखा कि, कीर्ति के कमरे की लाइट अभी भी जल रही थी और उसकी रोशनी बाहर तक आ रही थी. जिसका मतलब था की, वो अभी भी जाग रही है और उसके कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ है.

मैने उसके पास जाने की सोची, मगर घड़ी मे टाइम देखा तो 1 बज गया था इसलिए फिर मैं सीधे कमल के कमरे मे आ गया. कमल लेटा हुआ था, लेकिन जाग रहा था. उसे अभी तक जागते देख कर, मैने उस से कहा.

मैं बोला “क्या हुआ, तू अभी तक सोया क्यो नही.”

कमल बोला “नींद नही आ रही.”

मैं बोला “आएगी भी कैसे. आज तुझे मौसा मौसी के कमरे मे झाँकने को जो नही मिल रहा है.”

कमल बोला “मैं अब ये गंदा काम दोबारा नही करूगा. मैं सच बोल रहा हूँ.”

मैं बोला “अपने सच को, अपने ही पास रख. तुझे जब कीर्ति ने पकड़ा था तो, तूने उसे भी यही विस्वास दिलाया था. मगर उसके बाद भी तू, ये सब काम करता चला आ रहा है. जब तूने हर समय उसके साथ रहते हुए भी, उस से कही अपनी बात नही रखी. तब तो मैं तेरे घर, आज बस का मेहमान हू. मुझसे कही बात रखने का तो सवाल ही पैदा नही होता.”

कमल बोला “नही उसके बाद मैने ये सब काम बंद कर दिए थे और वो सेक्स बुक्स भी अपने दोस्त को वापस कर दी थी. मगर कल उसने मुझे कुछ और बुक्स रखने को दी थी. मैने उसे मना भी किया था, मगर उसने कहा कि बस इस बार ऑर रख ले फिर मैं तुझसे ये रखने को कभी नही कहुगा. मैने दोस्ती की खातिर उन्हे रख लिया और उनको पढ़ भी लिया. फिर उन्हे पढ़ने के बाद मैं खुद को पापा मॅमी के कमरे मे झाँकने से रोक ना सका.”

मैं बोला “चल जो हुआ उसे भूल जा. अब आगे क्या करने का सोचा है.”

कमल बोला “मैं अच्छा बनने की कोशिश करूगा और जो ग़लतिया कर चुका हूँ अब उन्हे दोहराउन्गा नही.”

मैं बोला “जितना तू सोच रहा है, ये इतना आसान नही है. तुझे इन चीज़ों की लत लग गयी है.”

कमल बोला “तो मैं क्या करूँ. जिस से मेरी ये लत छूट जाए.”

मैं बोला “तेरी वो सेक्स की बुक्स कहाँ है. ला दिखा ज़रा.”

कमल ने कुछ सोचा और फिर सारी बुक्स निकाल कर मेरे सामने रख दी. मैने उन मे से एक स्टोरी की बुक उठा ली. फिर वो बुक उसे देते हुए पूछा.

मैं बोला “इस बुक मे तुझे सबसे अच्छी स्टोरी कौन सी लगी.”

कमल ने बुक खोली और फिर उसमे से एक माँ बेटा सेक्स की स्टोरी खोल कर मुझे दिखाई. मैने थोड़ी बहुत उस स्टोरी को पढ़ा और फिर बुक को बंद कर दिया.

मैं बोला “कमल तू जब अपने मॅमी पापा के कमरे मे झाँकता है तो, तुझे ये नही लगता कि तू कुछ ग़लत कर रहा है.”

कमल बोला “सच कहूँ तो पहले बहुत बुरा लगता था, मगर फिर धीरे धीरे अच्छा लगने लगा.”

कमल की बात सुनकर, मैं कुछ सोचने लगा. फिर मैने उस से कहा.

मैं बोला “तू यदि सच मे ये सब छोड़ना चाहता है तो, तुझे दो काम करना होगे.”

कमल बोला “क्या.?”

मैने कहा “सबसे पहले तू ये बुक्स पढ़ना बंद कर दे और दूसरा ये कि तू अपने दोस्त बदल दे. क्योकि तेरे उपर ये सब ग़लत संगत का ही असर पड़ा है.”

कमल बोला “मैं ये बुक्स पढ़ना तो बंद कर सकता हूँ पर दोस्त नही बदल सकता.”

मैं बोला “क्यो.? क्या वो दोस्त तुझे अपने परिवार से ज़्यादा प्यारे है.”

कमल बोला “नही ऐसी बात नही है. लेकिन वो मेरे सारे राज़ जानते है और यदि मैं उनसे दोस्ती ख़तम करता हूँ तो, हो सकता है वो मेरे साथ कुछ बुरा करे. मुझे बदनाम कर दे.”

मैं बोला “वो सब तू मुझ पर छोड़ दे. यदि तू सच मे उनसे दोस्ती ख़तम करना चाहता है तो बोल. मैं ऐसा कुछ कर दूँगा कि, वो खुद तुझसे दोस्ती ख़तम कर देगे.”

कमल बोला “अगर ऐसा है तो मैं तैयार हूँ.”

मैं बोला “तो ठीक है, कल सबसे पहले तू ये बुक उनको वापस कर और कहना कि मैने तेरे कमरे मे ये बुक देख ली है मगर तूने मुझसे झूठ कह दिया है कि, ये बुक तेरी नही पापा की है. तुझे तो ये बुक सेल्फ़ की सफाई मे मिली है और तू उन्हे सफाई के बाद वापस रखने जा रहा था.”

कमल बोला “इस से क्या होगा. वो तेरे जाने के बाद, फिर कहेगे कि अब तू नही है तो मैं बुक रख लू.”

मैं बोला “इसके लिए तू उनसे पहले ही ये बता देना कि, तेरी एग्ज़ॅम की तैयारी मैं करा रहा हूँ. इसलिए हर दूसरे तीसरे दिन, मैं तेरे पास आता रहता हूँ और तेरे कमरे मे ही रुकता हूँ.”

कमल बोला “हां ये बात काम कर सकती है. वो मेरे पास बुक्स इसीलिए रखवाते है, क्योकि मेरा कमरा अलग है और मेरे कमरे मे मेरे सिवा कोई नही रहता.”

मैं बोला “ठीक है पहले तू इतना कर, फिर इसके बाद मैं तुझे आगे की योजना बताउन्गा.”

कमल बोला “थॅंक्स यार तूने मुझे ग़लत रास्ते पर जाने से बचा लिया.”

मैं बोला “इसमे थॅंक्स की कोई बात नही. तू मेरा भाई है और तुझे ग़लत रास्ते से बचाना मेरा फ़र्ज़ है. चल अब रात बहुत ज़्यादा हो गयी है सो जा.”

इसके बाद कमल ने मुझे गुड नाइट बोला और सोने की कोशिश करने लगा. तभी मुझे कमरे के बाहर दरवाजे पर किसी के होने की आहट सी समझ आई. मैं उठकर गया और दरवाजा खोला तो देखा कोई नही है.

लेकिन तभी कीर्ति के कमरे का दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई और फिर उसके कमरे की लाइट भी बंद हो गयी. मैं समझ गया कि, वो कमल के कमरे के बाहर खड़ी होकर हमारी बात सुन रही थी.

मैं सोचने लगा ये दोनो भाई बहन भी अजीब है. दोनो को ही दूसरो के कमरो मे टांक झांक करने की बुरी आदत है और यही सब सोचते हुए ना जाने कब मेरी नींद लग गयी.

सुबह 6:30 बजे कमल के जगाने पर मेरी नींद खुली. वो फ्रेश हो चुका था और स्कूल के लिए तैयार हो रहा था. मुझे जागते देख उसने कहा.

कमल बोला “गुड मॉर्निंग.”

मैने आँख खोली और उसके गुड मॉर्निंग का जबाब देते हुए कहा.

मैं बोला “गुड मॉर्निंग. लेकिन मुझे इतनी जल्दी क्यो जगा दिया. मुझे आज कौन सा स्कूल जाना है.”

कमल बोला “स्कूल जाना है, तभी तो जगाया है.”

मैं बोला “मैने तो स्कूल की छुट्टी लगाई हुई है. फिर तुझसे किसने कह दिया कि, आज मुझे स्कूल जाना है.”

कमल बोला “तुझे अपने नही. कीर्ति को लेकर उसके स्कूल जाना है.”

मैं बोला “वो किसलिए.?”

कमल बोला “उसे अपने स्कूल मे प्रॉजेक्ट जमा करना है. अब वो प्रॉजेक्ट लेकर स्कूटी तो चला नही पाएगी, इसलिए तुझे साथ ले जा रही.”

मैं बोला “उसके साथ तू क्यो नही चला जाता है.”

कमल बोला “मैने तो उसके साथ जाने की बात बोली थी. लेकिन उसने कहा कि, तू अपनी स्कूल जा. पुन्नू फ्री है, मैं उसे अपने साथ ले जाउन्गी.”

मैं बोला “यार, ये मुझे बेमतलब को तंग कर रही है. ना जाने कल से क्या क्या किए जा रही है और क्या क्या बके जा रही है.”

कमल बोला “ज़रूर तूने उसे किसी बात पर नाराज़ कर दिया है. अब जब तक तू उस से माफी नही माँग लेगा. वो तुझे ऐसे ही परेशान करती रहेगी.”

मैं बोला “मैं तो आज यहाँ से चला ही जाउन्गा. तब कैसे परेशान करेगी.”

कमल बोला “शायद तुम ये भूल गये कि, वो भी आज तुम्हारे साथ ही जा रही है. हो सकता है कि, वो तुम्हे परेशान करने के लिए ही तुम्हारे साथ जा रही हो.”

मैं बोला “तू ये बात इतनी दावे के साथ कैसे कह सकता है कि, वो मुझे परेशान करने मेरे साथ घर जा रही है. ये भी तो हो सकता है कि, उसका मन हो छोटी माँ और अमि निमी के साथ कुछ दिन रहने का.”

कमल बोला “पहले मुझे भी ये ही लगा था. लेकिन कल रात को वो तेरे साथ जिस तरीके से बात कर रही थी. उस से ये बात तो सॉफ हो जाती है कि, कल उसने सिगर्रेट पीने का प्लान भी, तुझे परेशान करने के लिए बनाया था और उसमे पिस मैं गया.”

मैं बोला “मुझे नही लगता कि ऐसी कोई बात है. ये सब तेरे मन का वहम है.”

कमल बोला “ये अगर मेरे मन का वहम है तो, तू ये बता कि कल मेरे नीचे आने के तुरंत बाद कीर्ति भी नीचे क्यो आ गयी. उसने तुझसे बात क्यो नही की. इसका मतलब सॉफ है कि, वो तुझसे नाराज़ है.”

मैं बोला "यदि ऐसी कोई बात है तो, वो भूल जाए. मुझे परेशान कर पाना उसके बस की बात नही है.”

कमल बोला “देखते है क्या होता है. वो तो कल से तुम्हे परेशान करना शुरू कर चुकी है और आज तुम्हे अपने साथ स्कूल ले जाने मे भी कही उसकी कोई चाल ना हो. अब ये तो तुम्हे उसके साथ जाने के बाद ही पता चलेगा.”

मैं बोला “तू मुझे डरा रहा है.”

कमल बोला “डरा नही रहा हूँ, बल्कि बता रहा हूँ. यदि किसी बात पर कीर्ति नाराज़ है तो उसे मना लो, वरना बहुत महगा पड़ने वाला है. क्योकि वो बहुत जिद्दी है और उसने एक बार जो ठान लिया वो करके ही रहती है.”

मैं बोला “ठीक है देखता हूँ कि, वो कितनी जिद्दी है और अपनी ज़िद को पूरा करने को क्या क्या करती है.”

कमल बोला “अब उठो और जल्दी से तैयार हो जाओ. वो अभी आती ही होगी.”

इतना कह कर कमल कमरे से बाहर निकल गया. कमल के जाने के बाद, मैं भी उठ कर फ्रेश होने चला गया.
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09-09-2020, 12:22 PM,
#18
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
18
फ्रेश होने के बाद मैं तैयार हुआ और फिर 7:30 बजे कमरे से बाहर आ गया. मैं कमरे से बाहर आया तो, मौसी मुझसे नाश्ता करने को कहने लगी. लेकिन तभी कीर्ति अपना प्रॉजेक्ट हाथ मे लेकर आ गयी और उसने मौसी से कहा.

कीर्ति बोली “मम्मी पुन्नू ने तैयार होने मे पहले ही देर कर दी है. अब यदि ये नाश्ता करने लगा तो मुझे भी देर हो जाएगी.”

मौसी बोली “अरे उसे नाश्ता कर लेने दे. थोड़ी देर हो जाने मे कुछ नही हो जाएगा.”

कीर्ति बोली “ये एक दिन नाश्ता नही करेगा तो चल जाएगा. लेकिन यदि मुझे देर हो गयी तो, मेरी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी. मेरा प्रॉजेक्ट शामिल नही किया जाएगा. वैसे भी हमें वहाँ ज़्यादा देर नही लगनी हम जल्दी आ जाएगे.”

उसकी बात सुनकर, मौसी भी चुप हो गयी और मैं गौर से कीर्ति का चेहरा देखने लगा. उसने मेरी तरफ देखा और कहने लगी.

कीर्ति बोली “अब यहाँ खड़े खड़े मुझे ही देखते रहोगे या यहाँ से चलोगे भी, चलो जल्दी से स्कूटी निकालो, मुझे स्कूल के लिए देर हो रही है.”

कीर्ति की बात सुनकर, मैं बाहर आ गया. मैने स्कूटी बाहर निकाली, तब तक कीर्ति भी अपना प्रॉजेक्ट लिए आ गयी. उसने स्कूटी मे बैठते हुए कहा.

कीर्ति बोली “ज़रा आराम से चलाना, नही तो ये तेज हवा लगने से टूट जाएगा.”

मैं बोला “ठीक है.”

इतना बोल कर मैने स्कूटी आगे बढ़ा दी. कीर्ति की अभी की हरकत देख कर, अब मुझे कमल की बात सही लग रही थी. अब मुझे भी लग रहा था कि, कीर्ति मुझे जान बुझ कर परेशान कर रही है. इसी बात को सोचते हुए, मैने कीर्ति से कहा.

मैं बोला “यदि तुझे मेरे साथ ही स्कूल जाना था तो, तू मुझसे रात को ही बोल देती. मैं सुबह जल्दी उठ जाता.”

कीर्ति बोली “मुझे तेरे साथ आने का कोई शौक नही था. वो तो कमल आज अपना स्कूल मिस करना नही चाहता था, इसलिए मुझे तेरे साथ आना पड़ा. लेकिन यदि तुझे मेरे साथ आने मे परेशानी थी तो, घर पर ही बोल देता. मैं बेकार मे तुझे परेशान नही करती और टेक्सी मे स्कूल चली जाती.”

कीर्ति का ये सफेद झूठ सुनकर, मुझे हँसी आ रही थी. लेकिन मैने अपनी हँसी दबाते हुए उस से कहा.

मैं बोला “मुझे आने मे कोई परेशानी नही है. मैं तो सिर्फ़ इसलिए बोल रहा था, ताकि तुझे समय पर स्कूल पहुचा सकता.”

कीर्ति बोली “कोई बात नही, अभी भी हम समय पर ही स्कूल पहुच जाएगे. अब फालतू की बात बंद करो और चुप चाप गाड़ी चलाओ.”

उसका बिगड़ा हुआ मूड देख कर, मैं चुप चाप गाड़ी चलाने लगा. स्कूल पहुच कर मैने कीर्ति से पूछा.

मैं बोला “क्या मैं वापस जाउ.”

कीर्ति बोली “नही गाड़ी पार्क कर के मेरे साथ चलो.”

मैने स्कूटी पार्क की और फिर कीर्ति के साथ चल पड़ा. हम लोग एक हॉल मे पहुचे. वहाँ बहुत से लड़के लड़कियाँ अपने अपने प्रॉजेक्ट टेबले पर रखे, उसके सामने खड़े थे.

एक लड़की ने कीर्ति को देखा तो, उसने कीर्ति को अपने पास की टेबल पर आने का इशारा किया. कीर्ति ने अपनी सहेली से हेलो कहा और फिर अपना प्रॉजेक्ट टेबल पर रख कर उस पर अपने नाम की पर्ची चिपका दी और अपनी उस सहेली से बात करने लगी.

कीर्ति की सहेली देखने मे ना तो कीर्ति की तरह सुंदर थी और ना ही इतनी ज़्यादा आधुनिक थी. देखने मे वो बहुत सीधी सादी थी. शायद इसी सादगी की वजह से उसकी कीर्ति से दोस्ती हुई होगी. मुझे भी उसके बात करने का अच्छा लगा था.

कुछ देर बाद, उन लोगों के पास एक मेडम आई. जिनके पास उन लोगों ने अपना नाम और प्रॉजेक्ट नोट करवाया. फिर थोड़ी देर बाद कीर्ति ने मुझे चलने का इशारा किया और वो अपनी सहेली के साथ बाहर आ गयी. मैं भी उनके साथ साथ चलने लगा. कीर्ति ने अपनी सहेली से, मेरा परिचय करवाते हुए कहा.

कीर्ति बोली “नितिका ये मेरा कज़िन पुनीत है और पुनीत ये मेरी सबसे प्यारी सहेली नितिका है.”

मैने नितिका से हेलो कहा और उस से हाथ मिलाया. फिर वो दोनो अपने अपने प्रॉजेक्ट की बातें करने रही. उसके बाद कीर्ति ने मुझे गाड़ी निकालने को कहा तो, मैं गाड़ी निकालने लगा. तब तक कीर्ति भी नितिका को बाइ कह कर आ गयी.

इसके बाद हम दोनो घर के लिए निकल पड़े. कुछ दूर चलने पर कीर्ति ने एक मोबाइल शॉप मे गाड़ी रोकने को कहा तो, मैने मोबाइल शॉप के सामने गाड़ी रोक दी. उस मोबाइल शॉप से एक अच्छा सा मोबाइल और एक सिम खरीदने के बाद हम घर आ गये.

घर आकर कीर्ति सबको अपना नया मोबाइल दिखाती रही. इसी बीच मौसी ने सबके लिए खाना लगा दिया और सब खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद सब बातें करने लगे. लेकिन मेरा सर दर्द कर रहा था और अब मैं आराम करना चाहता था. इसलिए मैं वहाँ से उठ कर कमल के कमरे मे आ गया.

मैं कमल के कमरे मे लेटा रहा. कमल घर आया तो, वो कमरे मे नही रुका और बाहर सबके साथ बातों मे लग गया. सब की बातें चलती रही और इसी मे 3 बज गये. फिर 3 बजे के बाद हम लोग वहाँ से घर के लिए निकल पड़े.

घर पहुच कर छोटी माँ ने कीर्ति को, उपर मेरे कमरे के पास वाले कमरे मे ठहरा दिया. कीर्ति ने अपने कमरे मे समान रखा और अमि निमी के कमरे मे चली गयी.

(यहाँ मैं ये बता देना ज़रूरी समझता हूँ कि, मेरा घर 2 मंज़िला है. जब मैं 9थ मे आया तो फर्स्ट फ्लोर पर बने 5 कमरो मे से एक कमरा मुझे दे दिया गया और एक कमरा अमि निमी को दे दिया गया. ताकि वो मेरी नज़रो के सामने ही रहे. एक कमरे मे स्टोर रूम बना दिया गया और बाकी के दो कमरे महमानो के लिए रखे गये. जिनमे से एक कमरा अभी कीर्ति को दिया गया था.)

मेरे सर मे दर्द था तो, मैं अपने कमरे मे आकर आराम करने लगा. मैं सोना चाहता था मगर नींद भी नही आ रही थी. जब बहुत देर तक मुझे ना तो नींद आई और ना ही मेरा सर दर्द कम हुआ. तो फिर मैं उठ कर छोटी माँ के पास चला गया.

छोटी माँ लेटी हुई थी और अमि निमी के साथ कीर्ति भी वही पर थी. मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर, छोटी माँ समझ गयी कि, मुझे कुछ तकलीफ़ है. उन्हों ने फ़ौरन उठते हुए कहा.

छोटी माँ बोली “क्या हुआ बेटा, तेरा चेहरा इतना उतरा हुआ क्यो है. तेरी तबीयत तो ठीक है ना.”

मैं बोला “छोटी माँ, तबीयत तो ठीक है. मगर सर मे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है और सोने की कोशिश कर रहा हूँ तो, नींद भी नही आ रही है. क्या मैं आपके पास लेट जाउ.”

छोटी माँ बोली “आ मेरे पास आ, मैं तेरा सर दबा देती हूँ.”

मैं जाकर छोटी माँ की गोद मे सर रख कर लेट गया और छोटी माँ मेरा सर दबाने लगी. सर दबाते दबाते उन्हों ने कीर्ति से कहा.

छोटी माँ बोली “कीर्ति बेटा उस बॉक्स मे सर दर्द की गोली है, ज़रा उठा कर दे.”

कीर्ति ने छोटी माँ को सर दर्द की गोली दी और छोटी माँ ने वो गोली मुझे खिला दी. इसके बाद मैं फिर उनकी गोद मे सर रख कर लेट गया. लेकिन अब वो जैसे ही मेरा सर दबाने को हुई, तभी अमि निमी मेरे अगल बगल आ कर बैठ गयी और छोटी माँ से कहने लगी.

अमि निमी “मम्मी, भैया का सर हम दबाएगे.”

छोटी माँ बोली “नही तुम लोग इसे परेशान मत करो. अब तुम अपने कमरे मे जाकर खेलो और इसे आराम करने दो.”

लेकिन उन दोनो मे कोई भी मेरे पास से जाने को तैयार नही हुई. वो दोनो ज़िद करते हुए छोटी माँ से कहने लगी.

दोनो बोली “नही भैया हमारा है तो, सर भी हम ही दबाएगे.”

ऐसा कहकर दोनो ने मेरे सर से छोटी माँ का हाथ अलग किया और दोनो ने मेरा सर दबाना सुरू कर दिया. छोटी माँ जानती थी कि, उनसे बहस करना बेकार है. इसलिए उन्हों ने उन दोनो पर से अपना ध्यान हटाते हुए, मुझसे कहा.

छोटी माँ बोली “लगता है आज तूने सुबह से बिल्कुल चाय नही पी है. जिसकी वजह से तेरा सर दर्द करने लगा है. मैं अभी तेरे लिए चाय बना कर लाती हूँ.”

ऐसा कह कर वो चाय बनाने को उठने लगी तो, मैने उन्हे मना किया. मगर वो नही मानी और चाय बनाने चली गयी. अमि निमी दोनो अपने कोमल हाथों से सर दबा रही थी. जिससे मुझे बहुत सुकून मिल रहा था.

कीर्ति चुप चाप खड़ी खड़ी ये सब देख रही थी. कुछ देर तक वो चुप चाप खड़ी रही. लेकिन जब उस से नही रहा गया तो, उसने मुझसे कहा.

कीर्ति बोली “अगर चाय पीना तेरे लिए इतनी ही ज़रूरी थी तो, क्या तू घर पर नही बोल सकता था. हम लोग क्या तुझे एक कप चाय नही दे सकते थे.”

मैं अभी कीर्ति की इस बात का कोई जबाब दे पाता की, उस से पहले ही अमि ने कीर्ति को फटकार लगाते हुए कहा.

अमि बोली “दीदी बेकार मे झगड़ा मत करो. आप इतनी बड़ी हो गयी हो, मगर इतनी सी बात भी समझ मे नही आती कि, अभी भैया के सर मे दर्द है और वो अभी किसी बात का जबाब नही दे सकते.”

अब जब अमि बोली तो फिर भला निमी कहाँ पीछे रहने वाली थी. उसने अमि से भी दो कदम आगे बढ़ते हुए, कीर्ति से कहा.

निमी बोली “दीदी आप से, ये तो हुआ नही कि, लाओ मैं सर दबा देती हूँ या चाय ही बना देती हूँ. उल्टा लड़ने लगी हो. लड़ाकू कही की.”

अमि निमी की बातें सुनकर, मुझे तो हँसी आ रही थी. मगर मैं अपनी हँसी दबाए चुप चाप लेटा कीर्ति को देखने लगा. कीर्ति तो अमि निमी की बातें सुनकर सन्न रह गयी और हैरानी से उन्हे देखने लगी.

तभी छोटी माँ भी चाय लेकर आ गयी. शायद उन्हों ने भी अमि निमी की कुछ बातें सुन ली थी. इसलिए वो मुझे चाय देते हुए कीर्ति से पूछने लगी.

छोटी माँ बोली “क्या हुआ कीर्ति. ये दोनो तुझसे क्या बोल रही है.”

कीर्ति बोली “मौसी ये दो छिपकलियाँ तो गिरगिट की तरह रंग बदलती है. घर पर थी तो, सारे समय दीदी दीदी कह कर पीछे पड़ी रहती थी और इधर आते ही बड़ी भैया वाली हो गयी.”

ये कहते हुए, कीर्ति ने छोटी माँ को सारी बात बता दी. जिसे सुनकर छोटी माँ ने हंसते हुए, कीर्ति से कहा.

छोटी माँ बोली “क्या तूने घर पर कभी पौंनू को इनके सामने इस तरह कुछ कहा है.”

कीर्ति बोली “नही कभी नही.”

छोटी माँ बोली “तभी तुमको इनका ये रूप उधर देखने को नही मिला. वरना तुम इनका ये रूप उधर ही देख लेती.”

कीर्ति बोली “मौसी ये ग़लत बात है. मैं भी तो इनकी बहन हूँ ना.”

छोटी माँ बोली “तू क्यो इनकी बातों मे आती है. तू तो मेरी सबसे लाडली बेटी है.”

ये कहते हुए, छोटी माँ ने कीर्ति को अपने गले से लगा लिया. लेकिन जब अमि निमी ने ये नज़ारा देखा तो, वो कीर्ति को चिडाने के लिए मेरे गले से लग गयी. मगर अब कीर्ति भी कहाँ हार मानने वाली थी. वो भी अमि निमी के साथ बच्ची बन गयी और अमि निमी को दिखाते हुए, छोटी माँ से लिपट कर कहने लगी.

कीर्ति बोली “मैं तो अपनी प्यारी मौसी की, सबसे प्यारी बेटी हूँ.”

कीर्ति को इस तरह छिड़ाते देख कर, अमि तो चुप रह गयी. मगर निमी से ये सहन नही हुआ और फिर वो गुस्से मे, बिना कुछ सोचे समझे कीर्ति को उल्टा सीधा कहने लगी.

निमी बोली “बड़ी आई मौसी की सबसे प्यारी बेटी. अब आप अपनी प्यारी मौसी के साथ ही रहना. मुझसे, अमि दीदी से और भैया से दूर ही रहना. हमारे या भैया के कमरे मे भी मत आना. अपनी मौसी के कमरे मे ही रहना.”

निमी को जो जो समझ मे आया, वो कीर्ति से बोलती चली गयी. अब उसे कौन समझाता कि, अभी हम कीर्ति की मौसी के कमरे मे ही है. मैं बस ये सोच रहा था कि कहीं कीर्ति भी इस बात को ना पकड़ ले और बिल्कुल ऐसा ही हुआ. कीर्ति ने निमी की इसी बात का फ़ायदा उठाया और उसको चिड़ाते हुए कहने लगी.

कीर्ति बोली “हां मैं तुम्हारे और तुम्हारे भैया के कमरे मे बिल्कुल नही आउन्गी. लेकिन तुम लोग तो अभी मेरी मौसी के कमरे मे हो. यदि तुम लोग मेरी मौसी के कमरे मे रह सकते हो तो, फिर मैं भी तुम्हारे और तुम्हारे भैया के कमरे मे जा सकती हूँ. हिसाब बराबर रहना चाहिए.”

कीर्ति की बात सुनकर, निमी का ध्यान जब इस बात की तरफ आया तो, वो फ़ौरन उठ कर खड़ी हो गयी और अमि को भी खड़ा करने के बाद मुझसे भी उठने के लिए बोलने लगी. मैं उसके ऐसा करने का मतलब समझ तो गया था. लेकिन फिर भी मैने उस से पुछा.

मैं बोला “क्या हुआ.”

निमी बोली “अब हम इस कमरे मे बिल्कुल नही आएगे. ये दीदी की मौसी का कमरा है. हम अपने कमरे मे चलेगे.”

मैं बोला “पर ये तुम्हारी मम्मी का कमरा भी तो है और कीर्ति तुम्हारी दीदी है. उसकी बात का बुरा नही मानते.”

निमी बोली “नही अब ये दीदी की मौसी का कमरा है क्योकि मम्मी ने खुद ही कहा की, दीदी उनकी सबसे प्यारी बेटी है. इसलिए जब तक दीदी यहाँ है. हम मे से कोई भी इस कमरे मे नही आएगा और यदि कोई आया तो मैं उस से कट्टी कर लुगी.”

निमी की इस बात पर मैने उसको समझाते हुए कहा.

मैं बोला “कीर्ति तुम्हारी दीदी है उसे माफ़ कर दो.”

निमी भी मेरी बात को सोचने लगी और फिर कुछ देर सोचने के बाद कहने लगी.

निमी बोली “माफ़ कर दूँगी मगर पहले दीदी से बोलो सॉरी बोले.”

कीर्ति को शायद ये सब बहुत अच्छा लग रहा था. उसने निमी को तंग करते हुए हुए कहा.

कीर्ति बोली “मैं क्यो सॉरी बोलूं. तुम और तुम्हारे भैया मुझे सॉरी बोलो तो, मैं तुम लोगो को माफ़ कर दुगी.”

अमि जो अब तक चुप थी. उसे कीर्ति की इस बात पर निमी को गुस्सा आ गया और उस ने पलटवार करते हुए कहा.

अमि बोली “मेरे भैया क्यो माफी माँगेगे. माफी माँगना है तो आप और मम्मी माफी माँगेगे और यदि माफी नही माँगे तो, अब वैसा ही होगा जैसा निमी ने कहा है.”

कीर्ति बोली “हम लोग माफी नही माँगेगे.”

ये सुनना था कि अमि और निमी दोनो मुझे खीच कर बाहर ले आई. मैने उन्हे समझाने की बहुत कोशिश की, मगर दोनो मेरी कोई बात समझने को तैयार ही नही थी. आख़िर मे हार कर, मैं अमि निमी के साथ अपने कमरे मे आ गया.

मगर अमि निमी और कीर्ति का ये युद्ध अभी ऑर बढ़ना बाकी था. क्योकि अमि निमी अब पापा और चंदा मौसी को अपनी तरफ करने की योजना बना रही थी. जिसका मतलब था कि, वो कीर्ति को झुकाए बिना नही मानेगी.

अब तीन जिद्दी आमने सामने थे. एक तरफ अमि निमी, कीर्ति को हराने की ज़िद पकड़ी हुई थी तो, दूसरी कीर्ति भी हार मानने के लिए तैयार नही थी. ये एक अजब ही तरह की लड़ाई चल रही थी. जिसको जो भी देखता, वो हँसे बिना नही रह सकता था.

अमि निमी अपनी बातों मे मस्त थी और कीर्ति छोटी मा के साथ उनके कमरे मे व्यस्त थी. लेकिन मैं अपने कमरे मे होते हुए भी कहीं ऑर खोया हुआ था.

ना चाहते हुए भी मुझे कीर्ति के ख़यालों ने घेर लिया था. आज दूसरा दिन था, जबकि उसने मुझसे अच्छे से बात नही की थी. उसके इस बात ना करने ने, मुझे उसके बारे मे सोचने पर मजबूर कर दिया था.

मैं उसकी बातों को बहुत ज़्यादा मिस कर रहा था. ना जाने क्यो, पर मैं उसके पास रहना चाहता था और उस से बात करना चाहता था. आज कीर्ति के मेरे सामने होते हुए भी, मुझे उसकी कमी का ऐएहसास हो रहा था.

मैं कीर्ति के ख़यालो मे खोया हुआ था कि, तभी निमी ने मेरा हाथ पकड़ कर हिलाते हुए कहा.

निमी बोली “भैया चलो, नीचे चल कर बैठते है. हम कुछ देर नीचे चल कर, टीवी देखते है.”
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09-09-2020, 12:23 PM,
#19
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
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अमि निमी सोफे पर मेरे अगल बगल बैठी थी. उन्हों ने कीर्ति को आते देखा तो, अमि ने निमी को इशारा किया ऑर फिर दोनो मेरी गोद मे सर रख कर लेट गयी, ताकि सोफे पर कीर्ति ना बैठ पाए.

उनकी हरकत देख कीर्ति ने बुरा सा मूह बनाया और फिर छोटी माँ के साथ दूसरे सोफे पर बैठ गयी. मगर कुछ देर बाद उसे भी अमि निमी को चिडाने का आइडिया आया और वो तुरंत छोटी माँ की गोद मे लेटते हुए कहने लगी.

कीर्ति बोली “मौसी आप की गोद मे मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और आपके हाथ मे तो जादू है. आप जब सर पर हाथ फेरती है तो, ओर भी ज़्यादा अच्छा लगता है. मेरे सर पर हाथ फेरीए ना.”

कीर्ति की बात सुनकर छोटी माँ मुस्कुराते हुए उसके सर पर हाथ फेरने लगी. अमि निमी ने ये देखा तो, उन्हे उस से जलन होने लगी. मगर उन्हों ने इस जलन का इलाज भी तुरंत निकाल लिया. अमि ने निमी के कान मे कुछ फुसफुसाया ऑर कुछ देर चुप चाप लेती रही. फिर कीर्ति को सुनाते हुए, निमी ने अमि से कहा.

निमी बोली “दीदी मेरे सर मे बहुत दर्द हो रहा है.”

अमि बोली “हमारे भैया के हाथों मे मम्मी के हाथों से भी ज़्यादा जादू है. जब वो सर पर हाथ फेरते है तो, बड़े से बड़ा सर दर्द चुटकी मे भाग जाता है.”

निमी बोली “भैया मेरे सर पर हाथ फेरीए ना.”

निमी की बात सुनकर मुझे हँसी आ गयी और मैं उसके सर पर हाथ फेरने लगा. लेकिन फिर अमि ने मुझे टोकते हुए कहा.

अमि बोली “भैया मेरे सर मे भी थोड़ा दर्द है. मेरे सर पर भी हाथ फेरीए ना.”

अमि की बात सुनकर, मैने छोटी मा की तरफ देखा तो, वो अमि निमी की हरकत पर मुस्कुरा रही थी. मैं भी मुस्कुराते हुए अमि निमी दोनो के सर पर हाथ फेरने लगा.

यहाँ अमि निमी के चेहरे पर कीर्ति को चिडाने वाली मुस्कान थी. कीर्ति उनकी मुस्कान का मतलब समझ रही थी और उनको परेशान करने का तरीका सोच रही थी. तभी कुछ सोच कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उन ने छोटी माँ से कहा.

कीर्ति बोली “मौसी आज खाने मे क्या बनाया है.”

छोटी माँ बोली “तेरी पसंद के मलाई कोफ्ते और दम आलू.”

कीर्ति बोली “वाह मौसी आप मेरा कितना ख़याल रखती. अब तो बाकी लोगों को भी मेरी पसंद का ही खाना खाना पड़ेगा.”

इतना कह कर, वो अमि निमी की मुस्कान का जबाब अपनी मुस्कान से देती है. जिसे देख कर मेरी दोनो लाड़लियों की मुस्कान फीकी पड़ जाती है और उनका मूह बन जाता है. दोनो अब किसी गहरी सोच मे पड़ी थी.

शायद वो कीर्ति की बात का जबाब देने के लिए कोई नयी तरकीब ढूँढ रही थी और जल्दी ही उन्हे ऐसा कुछ भी मिल जाता है. क्योकि निमी फुसफुसा कर कुछ अमि के कान मे कहती है. जिसे सुनने के बाद अमि ने मुझसे कहा.

अमि बोली “भैया ज़रा अपना मोबाइल देना. मुझे एक ज़रूरी फ़ोन लगाना है.”

मैं बिना कुछ बोले उसे अपना मोबाइल दे देता हूँ. लेकिन उसकी इस हरकत ने कीर्ति को सोच मे डाल दिया था और अब उसकी अमि निमी को चिडाने वाली मुस्कान गायब हो गयी थी. क्योकि वो ये समझ चुकी थी कि, अब अमि उसकी बात का जबाब देने वाली है.

वो गौर से अमि की तरफ देखने लगती है कि, ये किसको कॉल कर रही है और ये करना क्या चाहती है. इधर अमि एक नंबर मिलाती है और मोबाइल अपने कान मे लगा लेती है. दूसरी तरफ से कॉल उठा लिए जाने पर अमि ने कहा.

अमि बोली “हेलो मौसी, मैं अमि बोल रही हूँ. आप तो बोल रही थी कि, कीर्ति दीदी को मसाले वाली चीज़े खाना मना है. लेकिन वो तो यहाँ मम्मी से मलाई कोफ्ते, दम आलू और भी मसाले वाली चीज़े बनवाकर खा रही है. क्या आपने मम्मी को उनकी तबीयत के बारे मे कुछ नही बताया.”

फिर दूसरी तरफ से कुछ कहे जाने पर अमि ने कहा.

अमि बोली “नही मौसी ये बात आप ही मम्मी के मोबाइल पर कॉल करके बोल दीजिए. नही तो सब समझेगे कि मैं झूठ बोल रही हूँ.”

फिर वो बाइ बोल कर फोन रख देती है. उसके मोबाइल रखने के कुछ ही देर बाद छोटी माँ का मोबाइल बजता है. छोटी माँ कॉल उठाती है और मौसी से बात करती है. मौसी से बात हो जाने के बाद, छोटी माँ कीर्ति से कहती है.

छोटी माँ “सॉरी बेटी, दीदी ने कहा है कि, तुम मसालेदार खाना नही खा सकती. इसलिए मैं तेरे लिए कम मसाले का खाना बना देती हूँ.”

ये कह कर छोटी माँ खाना बनाने चली जाती है और कीर्ति अमि की इस हरकत से सच मे गुस्सा हो जाती है. मगर जिसे अमि देख कर समझ जाती है और बड़ी ही मासूमियत से कहती है.

अमि बोली “दीदी गुस्सा मत हो. सुबह मौसी, आपके लिए अलग से बिना तेल मसाले का खाना बना रही थी तो, हम लोगों ने पूछा कि दीदी के लिए अलग से ये खाना क्यो बनाया जा रहा है तो, मौसी ने बताया था कि ज़्यादा तेल मसाले के खाने से आपकी तबीयत खराब हो जाती है. आपका लिवर कमजोर है. अब आप बेकार मे मेरे उपर गुस्सा मत होइए.”

कीर्ति जानती थी कि, दोनो ने उसकी बात को काटने के लिए ही ऐसा किया है. मगर उनकी बात सही थी. इसलिए वो इस बात के लिए उन्हे कुछ नही कहती. लेकिन कीर्ति इतनी जल्दी हार मानने वाली भी नही थी. उसने मुस्कुराते हुए अपनी दूसरी चाल चलते हुए कहा.

कीर्ति बोली “नही कोई बात नही. मैं तुम पर गुस्सा नही हूँ. क्या हुआ जो आज मैं मसाले वाला खाना नही खा पाउन्गी. मुझे तो जो कल तुम्हारे भैया ने रेस्टौरेंट मे बहुत ही बढ़िया और मसालेदार कहना खिलाया था उसके सामने तो ये खाना कुछ भी नही है.”

ऐसा कह कर कीर्ति हंसते हुए उठ कर छ्होटी मा के पास चली गयी और अमि निमी गुस्से मे मेरी तरफ देखने लगी. उन दोनो को ये लग रहा था कि, वो मेरी वजह से कीर्ति से हार गयी है. अब मरता, क्या ना करता. मैं अपनी दोनो लाड़लियों को नाराज़ तो कर नही सकता था. इसलिए मैने उनके सामने इस बात पर अपनी सफाई देते हुए कहा.

मैं बोला “अरे तुम लोग मुझे ऐसे क्या देख रही हो. क्या तुम लोगों को याद नही है कि, कल मैने खुद छोटी माँ को बताया था कि, कीर्ति की ज़िद की वजह से हमें बाहर खाना खाना पड़ा गया और कीर्ति ने भी तो, छोटी माँ से कहा था कि, यदि मैं उसके साथ रहा तो, वो मुझे बहुत कुछ सिखा देगी. अब मुझे क्या मालूम था कि, वो खुद रेस्टौरेंट मे खाना खाएगी और बाद मे सारी बात मेरे उपर डाल देगी. यदि मुझे ऐसा मालूम होता तो, मैं ऐसी ग़लती कभी ना करता.”

अपनी बात कह कर, मैं अमि निमी के चेहरे की तरफ देख कर पक्का करने लगा कि, उन्हे मेरी बात पर विस्वास हुआ है या नही. दोनो कुछ देर तक सोचती रही. फिर अमि ने निमी से कहा.

अमि बोली “भैया ठीक कह रहे है. खाना खाने की ज़िद तो दीदी ने की थी. फिर वो ये कैसे कह सकती है कि, खाना भैया ने उन्हे खिलाया है.”

अमि की बात सुनकर मुझे शांति हुई की, चलो इसे तो मुझ पर विस्वास हो गया है. मगर निमी का गुस्सा अभी शांत नही हुआ था. उसने अमि की इस बात से जबाब मे उस से कहा.

निमी बोली “लेकिन जब भैया बाहर खाना नही खाते है तो, फिर इन्हे उनके साथ खाना खाने की क्या ज़रूरत थी.”

अमि बोली “तू समझती क्यो नही है. वो भैया का नाम लेकर हमें लड़ाना चाहती है. ताकि हम लोग आपस मे लड़ जाए और वो आसानी से हम लोगों से जीत जाए.”

ये बोल कर अमि ने मेरा काम आसान कर दिया. क्योकि ये बात निमी के नन्हे से दिमाग़ पर असर गयी. उसकी मुझसे नाराज़गी दूर हो गयी और उसने अमि से कहा.

निमी बोली ‘तो दीदी ज़्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश कर रही है. अब हमे उसे सबक सिखाना ही होगा.”

निमी की बात सुनकर मुझे तसल्ली हुई, की चलो इसका मेरे उपर से गुस्सा तो शांत हो गया. लेकिन मेरे लिए अब मुसीबत वाली बात ये थी कि, कीर्ति और अमि निमी की लड़ाई ख़तम होने का नाम नही ले रही थी और इस लड़ाई मे मैं पिस रहा था.

मैं चाह कर भी इस लड़ाई से पीछे नही हट सकता था. क्योकि मेरी दोनो नन्ही बहनें मेरी वजह से ही कीर्ति से लड़ रही थी. ये बात अलग थी की उनकी ये लड़ाई बेमतलब की थी. मगर दोनो समझने को तैयार नही थी और कीर्ति भी उनके साथ बच्ची बन कर इसका मज़ा ले रही थी.

एक तरफ जहाँ कीर्ति इस लड़ाई का मज़ा ले रही थी. वही दूसरी तरफ अमि निमी की नज़र मे ये लड़ाई, उनके भैया के सम्मान की लड़ाई थी और वो हर हाल मे कीर्ति को अपने भैया के सामने झुकना चाहती थी.

लेकिन मुझे इस बात का डर सता रहा था कि, इस खेल खेल की लड़ाई मे कही अमि निमी के मन मे कीर्ति को लेकर कोई ऐसी कड़वाहट पैदा ना हो जाए. जिस से अमि निमी और कीर्ति के बीच दूरियों की दीवार खड़ी हो जाए.

इसलिए मैं इस खेल को यही ख़तम करना चाहता था. लेकिन कीर्ति तो मुझसे कोई बात ही नही करना चाहती थी. ऐसे मे सिर्फ़ एक ही रास्ता बचता था कि, अमि निमी को समझाया जाए. ताकि इस खेल को यही ख़तम किया जा सके.

रात को पापा आए तो मैं अपने कमरे मे आ गया. खाने का टाइम हुआ तो, चंदा मौसी मेरा खाना मेरे कमरे मे देकर चली गयी. सब खाना खाने बैठे तो, कीर्ति ने मुझे खाने पर, ना आया देख कर, छोटी माँ से पूछा.

कीर्ति बोली “मौसी क्या पुन्नू खाना नही खाएगा.”

छोटी माँ कीर्ति की इस बात का कोई जबाब दे पाती, इस पहले ही पापा ने उसकी बात का जबाब देते हुए कहा.

पापा बोले “हमारे लाट साब को हमारी सूरत पसंद नही है, इसलिए जनाब अपने कमरे मे ही खाना खाते है.”

पापा की बात सुनकर, कीर्ति छोटी माँ का चेहरा देखने लगी. छोटी माँ ने बात को संभालते हुए कीर्ति से कहा.

छोटी माँ बोली “ऐसी बात नही है बेटी. तेरे मौसा जी की तो, बातें करने की बात करने की आदत है. असल मे बात ये है कि, उसे सबके साथ बैठ कर खाना खाना अच्छा नही लगता. इसलिए वो अपने कमरे मे खाना ख़ाता है.”

लेकिन छोटी माँ की ये बात सुनकर पापा को गुस्सा आ गया और उन ने गुस्से मे छोटी माँ से कहा.

पापा बोले “हां हां, मेरी तो बेकार की बात करने की आदत है. साहब जादे दिन मे तो सब के साथ खाना खाते है. मगर रात मे उन्हे सबके साथ बैठ कर खाना खाना पसंद नही है.”

छोटी माँ ने पापा को कीर्ति के सामने ये सब बातें उखाड़ते देखा तो, उन्हे रोकते हुए कहा.

छोटी माँ बोली “अब आप ये फालतू की बात बंद कीजिए. कम से कम कीर्ति का कुछ ख़याल कीजिए.”

पापा ने कीर्ति को देखा और हंसते हुए बोले.

पापा बोले “अरे हां, मैं तो भूल ही गया था कि, कीर्ति के लिए मैं कुछ लाया हूँ.”

ये कह कर वो बाहर चले जाते है और फिर बाहर से कुछ पॅकेट लेकर आते है और कीर्ति के हाथ मे थमा देते है.

कीर्ति बोली “ये क्या है मौसा जी.”

पापा बोले “ये तुम्हारे बर्तडे का गिफ्ट है.”

कीर्ति चौुक्ते हुए कहा.

कीर्ति बोली “आपको कैसे पता कि, मेरा जनमदिन आने वाला है.”

पापा बोले “आज मेरी तुम्हारे पापा से बात हुई थी. उन्ही ने बताया कि, तुम घर आ रही हो और तुम्हारा बर्तडे भी आ रहा है.”

कीर्ति बोली “पर मेरा बर्तडे तो परसों है मौसा जी.”

पापा बोले “मुझे मालूम है. लेकिन मैं कल एक बिज़्नेस मीटिंग के सिलसिले मे बाहर जा रहा हूँ, इसलिए तुम्हे पहले ही गिफ्ट दे दिया. लेकिन तुम इन्हे अपने बर्तडे के ही दिन खोलना.”

कीर्ति बोली “थॅंक्स मौसा जी”

फिर पापा ने एक पेकेट खोला उसमे खाने के लिए चॉकलेट्स और मॅनचरियन बगैरह थे. उनने वो डिशस डाइनिंग टेबल पर रख दिए. जिसे देख कर कीर्ति को मेरा ख़याल आया और उसने छोटी माँ से कहा.

कीर्ति बोली “मौसी, ये पुन्नू को भी भेज दीजिए ना. उसने अभी खाना नही खाया होगा.”

लेकिन कीर्ति की बात सुनकर पापा ने गुस्से मे कहा.

पापा बोले “नही कीर्ति बेटा. ये मैं हम सब के साथ खाने के लिए लाया हूँ. अगर वो हम सब के साथ बैठ कर खाना नही खा सकता तो, उसको ये सब भेजने की भी कोई ज़रूरत नही है. तुम खाना खाओ और उसकी चिंता छोड़ दो.”

इसके बाद सब खाना खाने लगे. मगर अमि और निमी ने उन डिशस को हाथ तक नही लगाया तो कीर्ति ने उनको टोकते हुए कहा.

कीर्ति बोली “अमि निमी क्या तुम को ये डिशस पसंद नही है.”

अमि बोली “नही दीदी, मुझे पसंद नही है.”

कीर्ति ने निमी की तरफ देख कर उस से भी यही सवाल करते हुए कहा.

कीर्ति बोली ““निमी क्या तुझे भी पसंद नही है.”

निमी बोली “दीदी मुझे पसंद तो है, पर मेरा पेट भर गया है.”

कीर्ति को कुछ समझ नही आ रहा था. मगर पापा अमि निमी की हरकत का मतलब समझ गये थे. इसलिए उन्हों ने कीर्ति से कहा.

पापा बोले “कीर्ति बेटा, तुम इनकी तरफ ध्यान मत दो. इनको कभी मेरी लाई हुई कोई चीज़ पसंद ही नही आती. वैसे भी मैं ये सब तुम्हारे लिए ही लाया हूँ. तुम तो खाओ.”

अब शायद कीर्ति समझ चुकी थी कि, अमि निमी क्यों नही खा रही है. इसलिए उसका मन भी कुछ खाने का नही था. लेकिन पापा इतने प्यार से उसके लिए ये सब लेकर आए थे. जिस वजह से ना चाहते हुए भी उसे खाना पड़ रहा था.

अमि निमी ने जल्दी जल्दी अपना खाना ख़तम किया और फिर सबको गुड नाइट बोल कर आने लगी. मगर कीर्ति ने उनको थोड़ी देर रुकने को कहा तो, मजबूरी मे उसको वही रुकना पड़ गया. कीर्ति खाना खाने के बाद थोड़ी देर पापा और छोटी माँ से बात करती रही.

लेकिन बात करते करते, उसने देखा कि, जो अमि निमी दिन भर चहचाहती रहती थी. अब वो बिल्कुल शांत बैठी है और बड़ी बेसब्री से, उसके वहाँ से चलने का इंतजार कर रही है. कीर्ति को भी उन्हे और इंतजार करवाना ठीक नही लगा. वो पापा और छोटी माँ को गुड नाइट बोलकर, अमि निमी के साथ उपर आ गयी.

उपर आकर कीर्ति अपने कमरे मे चली गयी और अमि निमी मेरे कमरे मे आ गयी. जब अमि निमी आई तब मैं लेटा हुआ और टीवी देख रहा था. मैने दोनो को आते देखा तो, मैं उठ कर बैठ गया.

दोनो आकर मेरे पास बैठ गयी. ये दोनो का रोज का काम था कि, खाना खाने के बाद, कुछ देर मेरे कमरे मे आकर, यहाँ वहाँ की बातें करती और फिर अपने कमरे मे जाकर सो जाती.

मगर आज बिल्कुल खामोश थी. मुझे समझ मे तो आ गया कि, नीचे कुछ हुआ है. जिस वजह से दोनो इतनी खामोश है. उनकी इस खामोशी की वजह जानने के लिए मैने उनसे पुछा.

मैं बोला “तुम दोनो को क्या हुआ, इतना चुप चुप क्यो हो.”

मेरी बात सुनकर, अमि तो समझ नही पाई कि, वो मुझे क्या जबाब दे. लेकिन निमी ने मेरी बात सुनते ही कहा.

निमी बोली “हम लोग पापा को अपने साथ नही मिलाएगे.”

मैं बोला “क्यो, क्या हो गया. क्या पापा ने तुम दोनो को कुछ कहा है.?”

अमि बोली “पापा कीर्ति दीदी के लिए बहुत सारे गिफ्ट और खाने के लिए डिशस लाए थे. जब कीर्ति दीदी ने मम्मी से कहा कि, ये उपर पुन्नू को भी भेज दो तो, पापा गुस्सा करने लगे और बोलने लगे कि, जब वो नीचे आकर नही खा सकता तो, उसके लिए कुछ भी, उपर भेजने की ज़रूरत नही है.”

मैं बोला “पापा हम से बड़े है और कभी भी अपने पापा की कही बात का बुरा नही माना जाता. इसलिए अपने मन से ये बात निकाल दो.”

अमि बोली “लेकिन भैया, पापा हमेशा आप पर गुस्सा करते है. ये हमें अच्छा नही लगता. पापा आप पर गुस्सा क्यो करते है.”

मैं बोला "पापा मुझ पर गुस्सा इसलिए करते है, क्योकि मैं उनकी बात नही मानता हूँ.”

निमी बोली “तो भैया आप उनकी बात मान लिया करो ना. फिर पापा आप पर गुस्सा भी नही करेगे और मुझे मॅनचरियन भी नही छोड़ना पड़ेगा.”

मैने पूछा “तूने मॅनचरियन क्यो नही खाया.”

अमि बोली “पापा ने आप पर गुस्सा किया तो, इसे अच्छा नही लगा. इसने पापा का लाया कुछ भी नही खाया.”

मैं बोला “तब तो तूने भी नही खाया होगा.”

अमि बोली “जब आप और निमी नही खाओगे तो, मैं कैसे खा सकती हूँ.”

अपनी छोटी बहनों का अपने लिए प्यार देख कर मेरी आँखों मे आँसू आ गये और मैने दोनो को गले से लगा लिया. मुझे रोता देख कर जहा अमि मेरे आँसू पोछने लगी. वही निमी को मेरे आँसू का मतलब समझ मे नही आया तो वो रोने लगी. मैने निमी के आँसू पोंछे और उस से पूछा.

मैं बोला “तुझे क्या हुआ, तू क्यो रो रही है.”

निमी ने रोते हुए मूह बना कर कहा.

निमी बोली “क्योकि आप रो रहे.”

उसकी इस बात से मुझे हँसी आ गयी और मैने उसे समझाते हुए कहा.

मैं बोला “पागल, मैं रो थोड़ी रहा हूँ. ये तो मेरी अमि निमी का प्यार है. जो आँसू बनकर मेरी आँखो से निकल आया.”

ये कह कर मैने दोनो के सर पर प्यार से हाथ फेरा और फिर उनको समझाते हुए कहा.

मैं बोला “देखो, अब तुम लोग अपनी कीर्ति दीदी से भी लड़ना बंद करो. वो हमारे घर मे कुछ ही दिन के लिए आई है. यदि तुम लोग ऐसे ही लड़ती रही तो, फिर वो हमारे घर कभी नही आएगी.”

अमि बोली “भैया हम कहाँ लड़ते है. वो तो कीर्ति दीदी ही लड़ती रहती है और उन्होने ही इस लड़ाई को शुरू किया था.”

मैं बोला “लड़ाई तो तुम दोनो ने शुरू की थी. वो तो सिर्फ़ ये बोल रही थी कि, अगर मुझसे चाय के बिना नही रहा जाता है तो, मैं घर मे उसे बता देता, क्या वो मुझे चाय नही दे सकती थी. मगर तुम लोगों ने उसकी बात नही सुनी और उससे लड़ाई शुरू कर दी.”

निमी बोली “पर भैया वो भी तो, हमे चिडाती है. तभी तो हम लड़ते है.”

मैं बोला “वो तुम लोगों से मज़े लेने के लिए तुम्हे चिडाती है. लेकिन अब तुम दोनो, ना तो उसकी किसी बात से चिड़ना और ना ही उस से लड़ना.”

अमि बोली “ठीक है भैया, अब हम नही लड़ेंगे. लेकिन आप कीर्ति दीदी से भी बोल दीजिए कि, वो हमें ना चिडाए.”

मैं बोला “ठीक है मैं कीर्ति से भी बोल दूँगा. अब तुम्हारे सोने का टाइम हो गया है. अब तुम दोनो अपने कमरे जाओ.”

दोनो उठने को होती है, तभी निमी को कुछ याद आ जाता है और वो मुझसे कहती है.

निमी बोली “पता है भैया, आज पापा कीर्ति दीदी के बर्तडे के लिए बहुत सारे गिफ्ट लाए है.”

मैं बोला “अच्छा, क्या गिफ्ट लाए है.”

निमी बोली “ये तो नही मालूम, क्योकि पापा ने उन्हे अभी खोलने को मना किया है.”

मैं बोला “ठीक है, जब वो बर्तडे वाले दिन उन्हे खोलेगी तो हम देख लेगे.”

निमी बोली “भैया, क्या हमे भी उन्हे गिफ्ट देना चाहिए.”

मैं बोला “हां ज़रूर देना चाहिए, पर तू क्या गिफ्ट देगी.”

निमी बोली “अभी सोचा नही है. मैं कल सोच कर बताउन्गी.”

मैं निमी से बात कर रहा था. तभी बात करते करते, मेरी नज़र कमरे के बाहर दरवाजे के सामने पड़ रही परच्छाई पर पड़ती है. मुझे समझते देर नही लगी, कीर्ति बाहर खड़ी होकर हमारी बात सुन रही है. मैने उस तरफ से अपना ध्यान हटाया और अमि से पुछा.

मैं बोला “और तू क्या गिफ्ट देगी.”

अमि बोली “मैं भी कल सोच कर बताउन्गी, पर आप दीदी को क्या गिफ्ट दे रहे है.”

मैं बोला “मैने भी अभी सोचा नही है. मैं भी कल सोच कर बताउन्गा. अब तुम लोग जाओ और जाकर सो जाओ. नही तो सुबह नींद नही खुलेगी.”

इसके बाद दोनो ने मुझे गुड नाइट कहा और अपने कमरे मे चली गयी. उनके जाने की बात सुनकर कीर्ति भी, उनके बाहर निकलने के पहले, अपने कमरे मे चली गयी थी.

मेरा मन कीर्ति से बात करने का कर रहा था. इसलिए मैने टीवी बंद किया और कीर्ति के कमरे की तरफ बढ़ गया. मैं उसके कमरे के बाहर पहुचा तो, उसके कमरे का दरवाजा और लाइट दोनो बंद थे.

मैं ये जानता था कि, वो अभी अभी अपने कमरे मे आई है. इसलिए अभी वो सोई नही होगी. फिर भी उसके कमरे की लाइट बंद देख कर, मैं सोच मे पड़ गया कि, अभी इस वक्त, उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया जाए या नही.
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09-09-2020, 12:23 PM,
#20
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
मैने टाइम तो 11:15 बज गया था. मुझे इतनी रात गये कीर्ति के कमरे का दरवाजा खटखटाना सही नही लगा और मैं वहाँ से लौट आया. मैं अपने कमरे की तरफ जा ही रहा था कि, तभी मुझे अमि निमी के कमरे से, कीर्ति की आवाज़ सुनाई देती है और मैं वही खड़ा हो जाता हूँ.

एक पल के लिए मेरे मन मे उनकी बातें सुनने का ख़याल आता है. मगर अगले ही पल मुझे कीर्ति की छुप कर, बातें सुनने की हरकत याद आ जाती है और मैं वहाँ से मुस्कुराते हुए, अपने कमरे मे वापस आ जाता हूँ.

कमरे मे आकर मैं लेट जाता हूँ और सोचने लगता हूँ कि, अमि निमी तो मेरे सामने ही अपने कमरे मे गयी थी. तब तो कीर्ति मुझे उन के कमरे मे जाते नही दिखी. फिर ये अमि निमी के कमरे मे कब चली गयी.

ये बात सोचते सोचते मुझे याद आता है कि, कीर्ति के कमरे मे जाने के पहले, जब मैं टीवी बंद कर रहा था, शायद तब ही कीर्ति उनके कमरे मे गयी होगी. इसके बाद मैं कीर्ति के बर्तडे मे देने वाले गिफ्ट के बारे मे सोचने लगता हूँ और यही सोचते सोचते मेरी नींद लग जाती है.

सुबह जब मेरी नींद खुलती है तो, अमि निमी स्कूल के लिए तैयार हो रही होती है. मैं भी फ्रेश होकर स्कूल के लिए तैयार होने लगता हूँ. चंदा मौसी नाश्ता देकर जाती है और फिर अमि निमी मेरे कमरे मे आ जाती है. उन्हे देख कर, मैं उनसे पूछता हूँ.

मैं बोला “क्या कीर्ति कल तुम लोगों के कमरे मे सोई थी.”

अमि बोली “जी भैया, दीदी को उनके कमरे मे नींद नही आ रही थी, इसलिए वो रात को हमारे कमरे मे सोने आ गयी थी.”

मैं बोला “क्या वो सोकर उठ गयी है.”

अमि बोली “वो उठ तो गयी थी. लेकिन अपने कमरे मे जाकर फिर से सो गयी है.”

मैं बोला “ठीक है, अब तुम लोग स्कूल जाओ.”

निमी बोली “भैया आप भूल गये, आज हम को कीर्ति दीदी के लिए गिफ्ट लेने चलना है.”

मैं बोला “नही मुझे याद है. तुम लोगों ने सोच लिया कि, क्या गिफ्ट लेना है.”

निमी बोली “अभी तो नही सोचा है, पर जब हम बाजार चलेगे तो, वही पसंद कर लेगे.”

मैं बोला “ठीक है, हम स्कूल से लौट कर गिफ्ट लेने चलेगे.”

निमी बोली “लेकिन भैया, यदि हम घर से साथ मे चलेगे तो, दीदी भी साथ चलेगी और उन्हे पता चल जाएगा कि, हम उन्हे क्या गिफ्ट देने वाले है.”

मैं निमी की बात का मतलब समझ गया था कि, वो क्या चाहती है. मगर फिर भी मैने नादान बनते हुए पूछा.

मैं बोला “तो फिर हमे क्या करना चाहिए.”

निमी बोली “आप हमारे स्कूल आ जाना. हम वही से गिफ्ट खरीदने चलेगे और फिर अलग अलग घर आ जाएगे.”

मैने फिर अपनी नादानी दिखाते हुए कहा.

मैं बोला “पर जब हम घर आएगे, तब तो वो गिफ्ट देख लेगी.”

निमी बोली “आप तो कुछ भी नही समझते है. हर बात समझाना पड़ता है. अरे हम गिफ्ट को अपने अपने बॅग मे छुपा कर लाएगे.”

निमी की इस बात पर मैं अपनी हँसी ना रोक पाया और उस से कहा.

मैं बोला “चल ठीक है, हम ऐसा ही करेगे. अब तुम लोग स्कूल जाओ."

उन्हों ने मुझे समय पर अपनी स्कूल आ जाने का जताया और फिर वो दोनो स्कूल चली गयी. नाश्ता करने के बाद, मैं भी स्कूल के लिए निकल गया.

दोपहर को स्कूल के बाद, मैं अमि निमी के स्कूल पहुचा. दोनो मेरा ही इंतजार कर रही थी. मैने उनको बाइक बैठाया और फिर हम लोग बाजार के लिए निकल गये. बाजार पहुचने के बाद तो, निमी ने हद ही कर दी.

वो हमें कम से कम एक घंटे तक, इस दुकान से उस दुकान, उस दुकान से इस दुकान घुमाती रही. मगर उसे कोई गिफ्ट ही पसंद नही आ रहा था. जब बहुत देर तक उसे कोई गिफ्ट पसंद नही आया तो, मैने निमी से कहा.

मैं बोला “देख तेरे चक्कर मे, हम भी अभी तक कोई गिफ्ट नही ले पाए है.”

निमी बोली “क्या करूँ भैया, मुझे समझ मे ही नही आ रहा है कि, मैं क्या गिफ्ट लूँ. ऐसा कीजिए, आप लोग अपने गिफ्ट लीजिए, तब तक मैं भी कोई गिफ्ट पसंद कर लेती हूँ.”

फिर मैने और अमि ने गिफ्ट देखना शुरू किया. मैने कीर्ति के लिए ब्रेस्लेट और अमि ने एक हॅंडबॅग लिया. मगर अमि का हॅंडबॅग, निमी को पसंद आ गया और वो कहने लगी कि, वो तो ये ही लेगी.

अमि उसकी आदत को अच्छे से जानती थी. इसलिए उसने वो हॅंडबॅग उसे ही दे दिया और उसने एक मोबाइल कवर पसंद कर लिया. वो मोबाइल कवर सच मे ही बहुत ही सुंदर लग रहा था. जिसे देख कर निमी का मन बदल गया और वो अमि को मस्का लगाते हुए कहने लगी.

निमी बोली “दीदी आप मुझसे बड़ी हो. मुझे लगता है कि, आपको ये हॅंडबॅग देना चाहिए. मैं तो छोटी हूँ, मुझे तो ये मोबाइल कवर भी चल जाएगा. आप ये हॅंडबॅग ले लीजिए और मैं इस मोबाइल कवर से ही काम चला लुगी.”

मगर अमि अब निमी को मोबाइल कवर देने को तैयार नही हुई और उसने निमी से कहा.

अमि बोली “नही, अब मुझे हॅंडबॅग नही लेना. अगर तुझे हॅंडबॅग पसंद नही है तो, तू कोई दूसरा गिफ्ट पसंद कर ले. लेकिन मैं तो, अब ये मोबाइल कवर ही लुगी.”

ये सुनकर निमी गुस्सा हो गयी और अपनी भोहे चढ़ाकर कहने लगी.

निमी बोली “मुझे तो ये हॅंडबॅग बहुत पसंद है. मैं तो सिर्फ़ तुम्हारे भले के लिए ही बोल रही थी. ताकि कीर्ति दीदी को ये ना लगे कि, तुम्हारा गिफ्ट अच्छा नही है.”

निमी की बात सुनकर अमि दुविधा मे पड़ गयी. उसे लगा कि सच मे उसका गिफ्ट अच्छा नही है और यही पक्का करने के लिए, वो मेरी तरफ देखने लगी. मैं उसके इस तरह देखने का मतलब समझ गया और मैने उस से मुस्कुराते हुए कहा.

मैं बोला “ये निमी तुमको बुद्धू बना रही है. ये मोबाइल कवर बहुत ज़्यादा सुंदर है. इसलिए ये तुमको बहका कर, मोबाइल कवर लेना चाहती है. लेकिन ये हॅंडबॅग भी बहुत अच्छा है. तुम ऐसा करो, ये हॅंडबॅग तुम ले लो और निमी को ये मोबाइल कवर दे दो.”

मेरी बात मानकर, अमि ने मोबाइल कवर निमी को दे दिया और हॅंडबॅग खुद ले लिया. गिफ्ट लेने के बाद, हम लोग घर आ गये. घर आकर मैने उनको घर के बाहर ही छोड़ दिया और उनके अंदर जाने के थोड़ी देर बाद, मैं भी अंदर आ गया.

अंदर पहुच कर मैने देखा कि, अमि निमी कीर्ति के साथ बैठी बातें कर रही है. मुझे ये देख कर बहुत खुशी हुई. मैं मुस्कुराते हुए अपने कमरे मे आ गया. कुछ देर बाद मैं, मूह हाथ धोकर नीचे आ गया. तब तक छोटी माँ ने खाना लगा दिया था.

सब लोग खाना खाने बैठ गये और आपस मे बातें करने लगे. कीर्ति सब से बात कर रही थी. मगर मुझसे कोई बात नही कर रही थी. मैं चुप चाप खाना ख़ाता रहा और उन सब की बातें सुनता रहा.

मैं उसकी इस नाराज़गी की वजह जानता था. लेकिन अब वो मुझे बात करने का कोई मौका ही नही दे रही थी. फिर भला मैं उसकी नरजगी को कैसे दूर करता. कीर्ति के मुझसे बात ना करने की वजह से, मुझे उसके पास होते हुए भी, दूरी का ऐएहसास हो रहा था और मुझे ये सब बहुत ज़्यादा आखर रहा था.

अब मुझे मन ही मन कीर्ति पर गुस्सा भी आ रहा था. इसलिए मैने कुछ देर बाहर घूम आने का सोचा. खाना खाने के बाद मैं, अपने कमरे मे आकर तैयार हुआ और फिर नीचे आकर छोटी माँ से कहा.

मैं बोला “छोटी माँ, मैं बाहर जा रहा हूँ. शाम तक वापस आउन्गा.”

मेरी बात सुनकर, कीर्ति मुझे देखने लगी. वही छोटी माँ ने मुझसे कहा.

छोटी माँ बोली “बेटा, कीर्ति घर मे है और तू बाहर जा रहा है. कम से कम जब तक वो घर मे है, तब तक तो बाहर मत जा.”

मैं बोला “छोटी मा बहुत दिन से मेहुल से नही मिला हूँ. वो आज स्कूल भी नही आया था, इसलिए उसका पता करने, उसके घर जा रहा हूँ. कीर्ति तो वैसे भी सारे समय आप और अमि निमी के साथ रहती है. मेरे होना ना होना उसके लिए एक बराबर है.”

मेरी बात सुनकर शायद कीर्ति को गुस्सा आ रहा था. उसने बुरा सा मूह बनाते हुए छोटी माँ से कहा.

कीर्ति बोली “जाने दो ना मौसी. मैं अपनी वजह से किसी को परेशान करना नही चाहती.”

छोटी माँ बोली “अरे तुम दोनो ये कैसी बातें कर रहे हो. तुम भी अमि निमी की तरह झगड़ा करने लगे.”

अपना नाम सुनकर अमि निमी को हँसी आ गयी और अमि कहने लगी.

अमि बोली “मम्मी, भैया को जाने दो. दीदी का ख़याल रखने को, हम दोनो है ना.”

अमि की बात सुन कर छोटी माँ ने उसे फटकार लगाते हुए कहा.

छोटी माँ बोली “चुप कर शैतान. खुद तो उस से लड़ती रहती है और अब उसका ख़याल रखने की बात कर रही है.”

छोटी माँ की इस बात के जबाब मे कीर्ति ने भी अमि की बात की तरफ़दारी करते हुए कहा.

कीर्ति बोली “मौसी अमि ठीक ही तो कह रही है. आप पुन्नू को जाने दीजिए. मेरे साथ अमि निमी तो है.”
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