MmsBee कोई तो रोक लो
09-11-2020, 02:09 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
प्रिया के घर वापस आने से सारे घर मे हँसी खुशी का महॉल बन गया था. सभी बहुत खुश नज़र आ रहे थे. दोपहर का खाना हम लोगों ने प्रिया के घर मे ही खाया. इसके बाद हम लोग यहाँ वहाँ की बातें करते रहे.

इस सब के दौरान प्रिया बहुत खुश नज़र आ रही थी. उसने पहले की तरह अभी भी छोटी माँ का साथ एक पल के लिए नही छोड़ा था. वो पूरे समय छोटी माँ के पास ही उनकी लाडली बनकर बैठी रही.

छोटी माँ उसे बहुत दुलार कर रही थी और बात बात मे उसके सर पर हाथ फेर रही थी. जिस से प्रिया की खुशी और भी ज़्यादा बढ़ गयी थी. मगर ये लाड दुलार का दौर अमि को पसंद नही आ रहा था.

वो मेरा हाथ पकड़ कर मेरे पास बैठी थी और प्रिया को गुस्से मे घूर कर देख रही थी. अमि की इस बात पर मेरे अलावा कीर्ति और निक्की ने भी गौर किया था. मगर इसके बारे मे किसी ने कुछ कहा नही.

ये लाड दुलार का सिलसिला शाम तक यू ही चलता रहा और पूरे समय अमि का मूह बना रहा. फिर शाम होते ही छोटी माँ ने सब से जाने की इजाज़त माँगी तो, प्रिया छोटी माँ से आज उसके घर मे ही रुकने की ज़िद करने लगी.

लेकिन छ्होटी मा ने आज रात की फ्लाइट से वापस जाने की बात कह कर, उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. छोटी माँ की ये बात सुनकर प्रिया की मुस्कुराहट गायब हो गयी और उसका चेहरा छोटा सा हो गया.

प्रिया का उतरा हुआ चेहरा देख कर छोटी माँ ने उसे समझाते हुए कहा कि उनका आज ही वापस जाना ज़रूरी है. लेकिन प्रिया की खुशी के लिए वो मुझे कीर्ति और अमि निमी को 2 दिन के लिए उसके पास ही छोड़ कर जा रही है.

छोटी माँ की इस बात को सुनकर, प्रिया के चेहरे की मुस्कुराहट वापस आ गयी और कहीं ना कहीं मुझे भी छोटी माँ की इस बात को सुनकर सुकून मिला था. छोटी माँ ने सब से इजाज़त ली और फिर हम लोग वापस अजय के बंगलो मे आ गये.

वहाँ आकर छोटी माँ और वाणी दीदी ने अपना बॅग लिया और फिर हम सबको कुछ बातें समझा कर 7 बजे एरपोर्ट के लिए जाने लगी. मैने छोटी माँ से एरपोर्ट तक उनके साथ चलने की बात कही.

मगर छोटी माँ ने इसके लिए मना कर दिया और वो वाणी दीदी के साथ चली गयी. घर पर अब मैं, कीर्ति, अमि निमी और बरखा दीदी थी. हम सब बैठे हेतल दीदी और प्रिया के बारे मे बात कर रहे थे.

इसी बीच 8:30 बजे हम लोगों का खाना आ गया. हम सबने एक साथ बैठ कर खाना खाया और फिर से सब बातें करने लगे. इसके बाद रात को 10:30 बजे सब अपने अपने कमरो मे चले गये और मैं भी अपने कमरे मे आ गया.

अपने कमरे मे आकर मैने कपड़े बदले और फिर कीर्ति के आने का इंतेजार करने लगा. रात को 11 बजे कीर्ति मेरे कमरे मे आई. कीर्ति से मेरी यहाँ वहाँ की बातें चलती रही. कीर्ति की तबीयत अब पहले से बहुत ज़्यादा सुधर गयी थी. इसके बाद भी वो अभी मेरे पास सोना नही चाहती थी.

कीर्ति ने 1 बजे तक मुझसे बात की और फिर अपने कमरे मे सोने चली गयी. उसके जाने के बाद मैं प्रिया के बारे मे सोचने लगा और यही सब बातें सोचते सोचते पता ही नही चला कि, कब मैं गहरी नींद मे चला गया.

सुबह 8 बजे मेरी नींद कीर्ति के जगाने पर खुली. वो मेरी पीठ पर बैठ कर मुझे जगा रही थी. उसकी इस हरकत पर मुझे हँसी आ गयी. मैने मुस्कुराते हुए उस से कहा.

मैं बोला “ये क्या हो रहा है. क्या कोई ऐसे भी किसी को जगाता है.”

मेरी बात पर कीर्ति ने अपना पूरा वजन मेरे उपर रखते हुए कहा.

कीर्ति बोली “क्यो, क्या निमी तुम्हे ऐसे ही नही जगाती है. आज वो नही है तो, उसकी जगह मैं तुम्हे जगा रही हूँ.”

मैं बोला “चल बहुत हो गया तेरा जगाना. अब मेरे उपर से उठ और मुझे भी उठने दे.”

लेकिन कीर्ति मेरे उपर से नही उठी और मेरे उपर अपना वजन ऑर ज़्यादा बढ़ाने की कोसिस करने लगी. जब मुझे सच मे उसका वजन महसूस होने लगा तो, मैं उसे अपने उपर से अलग करने की कोसिस करने लगा.

मगर कीर्ति आज मेरे साथ मस्ती करने के मूड मे थी. उसने जैसे ही देखा कि मैं उठने की कोसिस कर रहा हूँ तो, उसने अपने दोनो हाथों से मेरे दोनो कंधो को पकड़ कर मुझे बिस्तर पर दबाना सुरू कर दिया.

मुझे उसकी ये हरकत अच्छी लग रही थी. इसलिए मैं अब बस छूटने की कोसिस करने का नाटक कर रहा था. मैने जब उठने के लिए ज़्यादा ताक़त लगाई तो, कीर्ति अपना पूरा वजन डाल कर, मेरे उपर ही लेट गयी.

उसकी इस हरकत से उसके स्तन की गोलाइयाँ (बूब्स) का अहसास मुझे अपनी पीठ पर होने लगा. जिसके अहसास से ही मेरा ज़ोर लगाना ख़तम हो गया और मैं ऐसे ही बिना विरोध किए निढाल सा लेट गया.

कीर्ति ने जब मुझे कोई ज़ोर लगाते नही देखा तो, वो अपने दाँत से मेरे कान कतरने लगी. उसकी इस हरकत से मैं थोड़ा तिलमिलाया और उस से कहा.

मैं बोला “ये क्या कर रही है. मुझे दर्द नही होता क्या.”

कीर्ति बोली “तुम कुछ भी कर लो, लेकिन आज मैं तुमको नही छोड़ूँगी. आज बहुत दिन बाद तुम मुझे अकेले मे पकड़ मे आए हो.”

ये कहते हुए उसने फिर से मेरे कान को कतर लिया. मैने उसकी पकड़ से छूटने के लिए उठने की कोसिस की तो, उसने मेरे दोनो हाथों को पकड़ लिया. उसके काटने से बचने के लिए मैं अपना चेहरा दाएँ बाएँ घुमाने लगा.

लेकिन वो मुझे परेशान करती रही. उसके यूँ परेशान करने का सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक कि वो थक नही गयी. जब वो थक गयी तो, खुद ही मेरे उपर से हट कर एक किनारे बैठ गयी.

उसके मेरे उपर से हटते ही, मैं भी अपने दोनो कान सहलाते हुए उठ कर उसके पास बैठ गया और उस से पुछा.

मैं बोला “ये सब क्या था.”

कीर्ति बोली “ये सब इतने दिन मुझसे दूर रहने का बदला था.”

मैं बोला “आज तूने मुझे बहुत परेशान किया है. यदि तेरी तबीयत सही होती तो, मैं भी तुझे मज़ा चखाता.”

कीर्ति बोली “तुमसे कुछ नही होगा. तुम बस मुझे मज़ा चखाने के सपने ही देखते रहो.”

उसकी ये बात सुनते ही, मैने उसका चेहरा अपने दोनो हाथों मे थामा और उसको चूमने के लिए अपना चेहरा आगे किया तो, वो किस ना करने की मिन्नत करने लगी. उसकी इस हरकत पर मुझे हँसी आ गयी और मैने उसे छोड़ते हुए कहा.

मैं बोला “ये अमि निमी और बरखा दीदी कहाँ गयी है.”

कीर्ति बोली “वो लोग बरखा दीदी का घर देखने गयी है और उधर से ही वो अमन के घर चली जाएगी. हम लोगों को भी उन ने वहीं आने का कहा है.”

इसके बाद मेरी कीर्ति से थोड़ी बहुत बात हुई और फिर मैं फ्रेश होने चला गया. फ्रेश होने के बाद मैं तैयार हुआ. तब तक कीर्ति चाय लेकर आ गयी. मैने चाय पी और फिर इसके बाद हम लोग बाइक से अमन के घर आ गये.

अमि निमी वहाँ पहले ही पहुच चुकी थी. हम ने वहाँ सब के साथ नाश्ता किया और फिर कुछ देर रुकने के बाद, हम हेतल दीदी से मिलने हॉस्पिटल चले गये. कुछ देर हम लोग हॉस्पिटल मे रुके. फिर अमि निमी घूमने चलने की बात कहने लगी तो, मैं बरखा दीदी, कीर्ति और अमि निमी घूमने के लिए निकल गये.

दिन का खाना हम लोगों ने रेस्टोरेंट मे खाया और उसके बाद अमि निमी को थोड़ा बहुत घुमाने के बाद शाम को 5:30 बजे हम लोग वापस घर आने के लिए निकले. तभी प्रिया का मेसेज आ गया.

प्रिया का मेसेज
“दिनसे रात होने को आई है.
पता नहीं ये कैसी जुदाई है.
परवाह नहीं करते वो अपने दोस्त की,
ना जाने ये कैसी दोस्ती निभाई है.”

प्रिया का मेसेज देखते ही, मैने अपना मोबाइल कीर्ति को थमा दिया. कीर्ति ने मेसेज देखा तो, बातों बातों मे प्रिया को देखने चलने की बात कहने लगी. जिसके बाद हम सब लोग प्रिया के घर आ गये.

हम लोग जब प्रिया के घर पहुचे तो, मोहिनी आंटी, नितिका, रिया और निक्की बैठी हुई थी. प्रिया उस समय अपने कमरे मे थी. हम लोग मोहिनी आंटी के पास ही बैठ गये. बरखा दीदी उन्हे आज घूमने की बात बताती रही.

बातों बातों मे निक्की ने प्रिया के पास चलने की बात कहीं और फिर हम लोग उठ कर, निक्की के साथ प्रिया को देखने उसके कमरे की तरफ चल पड़े. सीढ़ियों के उपर पहुचते ही राज का कमरा आया.

राज का कमरा आते ही निक्की हमे राज का कमरा दिखने अंदर बुलाने लगी. मुझे कुछ समझ नही आया कि निक्की अचानक हमे राज का कमरा क्यो दिखाने लगी. मगर मैने कुछ नही कहा और चुप चाप सबके साथ राज के कमरे मे आ गया.

राज के कमरे मे पहुचते ही, हम सब की नज़र उसके कमरे मे सजे मेडल और ट्रोफी पर पड़ी. इतने सारे मेडल और ट्रोफी देखते ही, अमि ने चौंकते हुए निक्की से पुछा.

अमि बोली “दीदी ये इतनी सारी ट्रोफी और मेडल क्या राज भैया ने जीते है.”

अमि की बात पर निक्की ने मुस्कुराते हुए कहा.

निक्की बोली “नही, ये सब मेडल और ट्रोफी प्रिया ने जीते है. प्रिया स्विम्मिंग चॅंपियन है. लेकिन अपनी बीमारी की वजह से अब वो किसी टूर्नमेंट मे हिस्सा नही लेती है.”

निक्की की बात सुनकर, अमि बड़े गौर से प्रिया के जीते हुए मेडल और ट्रोफी को देखने लगी. अब मुझे समझ मे आ रहा था की, निक्की हम सब लोगों को राज के कमरे मे क्यो लेकर आई थी.

असल मे अमि निमी दोनो को स्विम्मिंग बहुत पसंद थी. शायद इसी वजह से निक्की ने उन्हे प्रिया के जीते हुए मेडल और ट्रोफी दिखाए थे. जिस से अमि निमी को प्रिया के करीब लाया जा सके. थोड़ी देर सब राज के कमरे मे प्रिया के मेडल और ट्रोफी देखते रहे. फिर प्रिया को देखने उसके कमरे की तरफ चल पड़े.
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09-11-2020, 02:10 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
जब हम प्रिया के कमरे मे पहुचे तो, प्रिया बेड पर लेटी टीवी देख रही थी. उसने हमे आते देखा तो, फ़ौरन टीवी बंद कर दी और उठ कर बैठ गयी. हम सबको एक साथ आया देख कर, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी.

प्रिया की तबीयत अब पहले से बेहतर थी. बस वो थोड़ी कमजोर नज़र आ रही थी. उस समय मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था. इसलिए मैने उसके पास जाकर बैठते हुए कहा.

मैं बोला “तुम यहाँ आराम से बैठ कर टीवी देख रही हो और हम लोग कब से नीचे बैठे तुम्हारे नीचे आने का इंतजार कर थे.”

मेरी इस बात पर प्रिया ने अपने तेवर बदलते हुए कहा.

प्रिया बोली “ओये ज़्यादा झूठ मत बोलो. मैं अभी थोड़ी देर पहले ही नीचे से उपर आई हूँ. सीधे से क्यूँ नही कहते कि, तुम लोगों को मुंबई घूमने से अब फ़ुर्सत मिली है.”

प्रिया की इस बात मे सच्चाई थी. लेकिन वो ये बात मज़ाक मे कह रही थी. इसलिए मैने भी उसी के लहजे मे उस से कहा.

मैं बोला “मैं झूठ नही बोल रहा हूँ. तुम चाहो निक्की से पुछ लो. हम लोग कितनी देर से नीचे बैठे है.”

प्रिया बोली “मुझे किसी से कुछ नही पुच्छना है. तुम अमि निमी को मुंबई घुमा रहे थे. इसलिए मैं तुमसे कोई झगड़ा नही करूगी.”

प्रिया की इस बात पर मैने हंसते हुए कहा.

मैं बोला “चलो किसी भी बहाने सही, तुम्हारी शिकायत तो दूर हुई. अब ये बताओ कि निधि दीदी ने तुम्हे कितने दिन घर पर आराम करने को कहा है.”

मेरी बात सुनकर प्रिया ने थोड़ा उदास होते हुए कहा.

प्रिया बोली “निधि दीदी ने तो मुझे पूरे एक हफ्ते आराम करने को कहा है. लेकिन तुम लोग तो यहाँ सिर्फ़ 2 दिन के लिए हो. तुम लोगों को कब वापस जाना है.”

मैं प्रिया की हालत को समझ रहा था. वो मेरे जाने की बात को लेकर उदास थी. इसलिए महॉल को कुछ हल्का करने की नियत से मैने मुस्कुराते हुए कहा.

मैं बोला “हम लोगों को कल वापस जाना है. लेकिन हमारे जाने की बात से तुम उदास मत हो. तुम जब चाहोगी, मैं तुमसे मिलने चला आउगा.”

मेरी इस बात से प्रिया के चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कान आ गयी. उसने अभी तक मेरे अलावा किसी से बात नही की थी. लेकिन जैसे ही उसकी नज़र अमि निमी पर पड़ी तो, उसने मुस्कुराते हुए अमि निमी से कहा.

प्रिया बोली “तुम लोगों ने मुंबई अच्छे से घूमा या नही.”

प्रिया की इस बात पर अमि तो कुछ नही बोली. लेकिन निमी ने उसकी बात का जबाब देते हुए कहा.

निमी बोली “दीदी हम ने पूरी मुंबई घूम ली है और मुंबई घूम कर हमे बहुत मज़ा आया.”

निमी की इस बात के जबाब मे प्रिया ने कहा.

प्रिया बोली “मेरी तबीयत खराब नही होती तो, मैं खुद ही तुम लोगों को मुंबई घुमाने लेकर चलती. लेकिन चिंता मत करो, अगली बार जब तुम लोग आओगी, तब मैं खुद तुम्हे मुंबई घुमाउन्गी. तब देखना तुम्हे और भी ज़्यादा मज़ा आएगा.”

प्रिया की ये बात सुनकर निमी उसे, हम ने कहाँ कहाँ घूमा बताने लगी. कुछ देर तक प्रिया और निमी की ये ही बातें चलती रही. फिर बाद मे कीर्ति और बरखा दीदी की उस से थोड़ी बहुत बातें हुई.

हम ने समय देखा तो, अब 7:30 बज रहा था. हम सुबह के निकले हुए थे और घूमने फिरने की वजह से अब हमे थकान भी महसूस होने लगी थी. इसलिए हम ने प्रिया से जाने की इजाज़त ली और हम प्रिया के साथ नीचे आ गये.

नीचे आकर हम ने पद्‍मिनी आंटी और दादा जी से जाने की इजाज़त माँगी. मगर पद्‍मिनी आंटी खाना खा कर जाने की ज़िद करने लगी. हम सुबह के निकले थे और हम ने दोपहर का खाना भी बाहर खाया था.

दोपहर का खाना बाहर खाने का तो हम ने शिखा दीदी को बता दिया था. लेकिन शाम का खाना उन ने साथ खाने का जताया था. इसलिए हम वहाँ खाना खाना नही चाहते थे. मगर पद्‍मिनी आंटी ने भी खाना खा कर ही जाने की ज़िद बाँध ली थी.

जिस वजह से हम ने शिखा दीदी को कॉल करके प्रिया के घर खाना खाने की बात बताई. शिखा दीदी ने इस बात का कोई विरोध नही किया और सुबह का खाना साथ खाने की बात कह कर हमे वहाँ खाना खाने की इजाज़त दे दी.

हमारे खाने की बात तय होते ही, पद्‍मिनी आंटी किचन मे चली गयी. उनके जाने के बाद, हमारी दादा जी और मोहिनी आंटी से बात होने लगी. मोहिनी आंटी पहले से बहुत ज़्यादा बदल चुकी थी. फिर भी उनकी पहले की प्रिया को कही कुछ बातें मुझे अभी भी चुभ रही थी. जिस वजह से मेरी उनसे ज़्यादा बातें नही हो सकी.

कुछ देर बाद राज और अंकल भी आ गये. उनसे भी हुमारी थोड़ी बहुत बातें हुई. फिर पद्‍मिनी आंटी ने खाना लगा दिया तो हम सब साथ मे खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद फिर से हम लोगों की बातों का सिलसिला चलता रहा.

फिर 10 बजे हम लोग दादा जी और बाकी लोगों से इजाज़त लेकर अजय के बंगलो जाने के लिए निकल पड़े. सब थके हुए थे, इसलिए घर आते ही सब सोने के लिए अपने अपने कमरे मे चले गये.

मैने अपने कमरे मे आकर कपड़े बदले और कीर्ति के आने का इंतेजार करने लगा. रात को 11 बजे कीर्ति आई. उस से मेरी रोज की तरह ही बातें हुई और फिर 1 बजे वो अपने कमरे मे चली गयी.

कीर्ति के जाने के बाद, मैं कल घर वापस जाने के बारे मे सोचने लगा. मैं कुछ दिन प्रिया के साथ रहना चाहता था. लेकिन अमि निमी के साथ होने की वजह से अभी मेरा यहाँ रुकना सही नही था. यही सब बातें सोचते सोचते पता नही कब मेरी नींद लग गयी.

सुबह मेरी नींद 8:30 बजे निमी के जगाने पर खुली. मैने उस से बाकी सब का पुछा तो, उसने बताया कि सब उठ कर तैयार हो चुके है. बस मैं ही उठने के लिए बाकी था और उसने मुझे भी जगा दिया है.

इसके बाद मैं उठ कर फ्रेश होने चला गया. नहाने के बाद मैं तैयार होने लगा, तभी कीर्ति चाय लेकर आ गयी. मैने चाय पीते हुए कीर्ति से कहा.

मैं बोला “हमारी फ्लाइट शाम को 5 बजे की है. तुम अपना और अमि निमी का समान पॅक कर लो. क्योकि दिन भर सबसे मिलने जुलने मे हमे पॅकिंग का समय नही मिल पाएगा.”

कीर्ति बोली “तुम इसकी फिकर मत करो, दोपहर को शिखा दीदी के पास खाने पर जाने से पहले मैं अपनी और अमि निमी की सारी पॅकिंग कर लुगी.”

अभी मेरी कीर्ति से बात चल ही रही थी कि, तभी बरखा दीदी और अमि निमी भी मेरे कमरे मे आ गयी. बरखा दीदी ने मुझसे घूमने चलने के बारे मे पुछा तो मैने कहीं भी जाने से मना कर दिया.

लेकिन अमि निमी का मुंबई घूमने से मन नही भरा था. वो दोनो कहीं चलने की ज़िद करने लगी. मैने उन्हे समझाया कि, आज हमे घर वापस जाना है और घूमने के चक्कर मे हम यहाँ किसी से मिल नही सकेगे.

मेरी इस बात के जबाब मे बरखा दीदी ने अमि निमी से कहा कि, वो उनके साथ घूमने चलें और मुझे यहाँ सबसे मिलने के लिए छोड़ देते है. अमि निमी को उनकी ये बात सही लगी. लेकिन वो कीर्ति से भी साथ चलने की ज़िद करने लगी.

कीर्ति का मन घूमने जाने का नही था. लेकिन अमि निमी की ज़िद के आगे उसे झुकना ही पड़ा. कुछ ही देर मे अमि निमी, कीर्ति और बरखा दीदी घूमने चली गयी और मैं हेतल दीदी से मिलने हॉस्पिटल चला गया.

मैने हेतल दीदी को आज अपने जाने की बात बताई तो, वो मुझे कुछ दिन रुकने की बात कहने लगी. लेकिन मैने उन्हे किसी तरह से समझा दिया. मैं दोपहर को 12 बजे तक हेतल दीदी के पास रहा.

फिर शिखा दीदी का खाने के लिए कॉल आया तो, मैं वही से अमन के घर के लिए निकल गया. मेरे वहाँ पहुचने से पहले ही अमि निमी, कीर्ति और बरखा दीदी वहाँ पहुच चुकी थी.

हम सबने एक साथ खाना खाया और इसके बाद हमारी यहाँ वहाँ की बातें होती रही. फिर 2 बजे मैं वहाँ से प्रिया के घर आ गया. प्रिया मुझे नीचे ही मिल गयी. शायद उसे किसी से पता चल गया था कि, मैं वहाँ आ रहा हूँ.

मैं जब वहाँ पहुचा तो, वहाँ पद्‍मिनी आंटी, मोहिनी आंटी, नितिका, रिया, निक्की और प्रिया बैठी टीवी देख रही थी. मैने उन लोगों से दादा जी और राज का पुछा तो, उन ने बताया कि वो दोनो अपने कमरे मे है.

इसलिए पहले मैं दादा जी से जाकर मिला. उन्हो ने मुझे आते रहने को कहा और प्रिया की तरफ से बेफिकर रहने को कहा. उनसे मिलने के बाद, मैं राज के कमरे मे गया. राज ने भी मुझसे वही बात बोली, जो दादा जी ने बोली थी.

इसके बाद मेरी राज से यहाँ वहाँ की बातें होती रही. बातों बातों मे मैने राज से हीतू (हितेश) के बारे मे पुछा तो, उसने बताया कि हीतू अभी अपने मामा के घर गया हुआ है. उसे प्रिया की तबीयत के बारे मे कुछ पता नही है.

राज से थोड़ी बहुत बात करने के बाद, मैं उसके साथ नीचे आ गया. मैं नीचे आया तो, प्रिया भी मेरे साथ चलने की ज़िद करने लगी. मैने उसे साथ चलने से मना किया तो, वो मूह फूला कर बैठ गयी.

उसका फूला हुआ मुँह देख कर पद्‍मिनी आंटी ने उसे साथ ले जाने को कहा. इसके बाद मैं थोड़ी देर वहाँ रुका और फिर 3:30 बजे वहाँ से अजय के बंगलो के लिए निकल लिया. मेरे साथ राज, रिया, नितिका, निक्की और प्रिया भी थे.

कुछ ही देर मे हम लोग घर पहुच गये. वहाँ कीर्ति और अमि निमी पहले ही आ चुके थे. हम ने अपना समान लिया और फिर एरपोर्ट के लिए निकल पड़े. कुछ ही देर मे हम एरपोर्ट पहुच गये. वहाँ पर अजय और शिखा दीदी पहले से ही थे.

अभी 4:15 बजा था और हमारी फ्लाइट छूटने मे अभी 45 मिनट का समय बाकी था. मैं एक एक करके सबसे मिल रहा था. शिखा दीदी ने अमि निमी को ढेर सारे गिफ्ट दिए थे और मुझे अपना ख़याल रखने के लिए समझा रही थी.

अजय और शिखा दीदी से मिलने के बाद, मैं राज लोगों से मिला. राज ने मुझे आते रहने का जताया और फिर गले लग कर विदाई दी. राज के बाद, रिया निक्की ने भी हाथ मिला कर मुझे विदाई दी.

निशा भाभी और सीरू दीदी लोगों से मैं घर पर ही मिल चुका था और मैने ही उन्हे एरपोर्ट आने से मना किया था. इसलिए वो लोग नही आई थी. बरखा दीदी ने मुझे गले लगा कर, विदाई दी.

फिर सबसे आख़िरी मे मैं प्रिया से मिला. उस से मैने अपनी तबीयत का ख़याल रखने को कहा और तबीयत ठीक होते ही हमारे घर आने का जताया. प्रिया ने मुझे पिच्छली बात याद दिलाते हुए कहा.

प्रिय बोली “तुम्हे याद है. पिच्छली बार जब तुम जा रहे थे तो, तुमको लग रहा था कि, तुम कुछ भूल गये हो. लेकिन मैने जब घर जाकर देखा तो, मुझे वहाँ कुछ नही मिला था. क्या तुम्हे याद आया कि, पिच्छली बार तुम क्या भूल गये थे.”

प्रिया की इस बात पर मैने मुस्कुराते हुए कहा.

मैं बोला “हां, मुझे याद आ गया था कि, मैं क्या भूल गया था.”

प्रिया बोली “क्या.”

मैं बोला “मैं तुम जैसी प्यारी दोस्त को यही छोड़ कर जा रहा था. इसलिए मुझे लग रहा था कि, मैं कुछ भूल गया हूँ.”

मेरी बात सुनकर प्रिया के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गयी और उसने पिच्छली बार की तरह इस बार भी मुझे मुस्कुराते हुए विदाई दी. कुछ ही देर मे हमारी फ्लाइट की घोषणा हो गयी.

मैं अजय से गले मिला और एक बार सबकी तरफ देख कर हाथ हिलाया. फिर मैं कीर्ति और अमि निमी के साथ मे फ्लाइट की तरफ बढ़ गया. इस बार मुंबई से जाते समय मेरी आँखों मे नमी नही थी.

लेकिन फिर भी मुझे ऐसा लग रहा था कि, मैं बहुत कुछ अपना यहाँ छोड़ कर जा रहा हूँ. यही सब सोचते हुए मैं अपनी फ्लाइट पर पहुच गया. अमि निमी घर वापसी से खुश नज़र आ रही थी.

मगर मैं कुछ उदास सा था और ये उदासी प्रिया को यहाँ छोड़ कर जाने की थी. मैं अपनी इसी उदासी के साथ फ्लाइट पर चढ़ गया और कुछ ही देर बाद हमारी फ्लाइट ने उड़ान भरना सुरू कर दिया.
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09-11-2020, 02:14 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{Update - 224}
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Itna kah kar, mai fresh hone chala gaya. Fresh hone ke bad mai taiyar hua aur kamre se bahar nikla to, chhoti maa aur vaani didi aa chuki thi. Chhoti maa ne bataya ki, aaj chanda mausi ki bhi hospital se chhutti hona hai aur wo abhi mausi ke sath unke ghar me rahegi.

Chhoti maa ki ye baat sunkar, mujhe neha aur durjan ki yaad aa gayi. Maine fauran hi chhoti maa se kaha.

Mai bola “chhoti maa, abhi to durjan mama aur neha bhi wahi par hai. Wo dono abhi kiske pas rah rahe hai.”

Meri baat ke jabab me chhoti maa ne kaha.

Chhoti maa boli “wo dono abhi didi (anu mausi) ke sath hi hai. Isliye chanda mausi ko bhi abhi didi ke pas hi rakha gaya hai.”

Chhoti maa ki ye baat sunkar, mai unse aur bhi baten puchhna chahta tha. Lekin wo uth kar muh hath dhone chali gayi. Unke jane ke bad, vaani didi bhi muh hath dhone chali gayi aur mai nashta karne laga.

Jab tak mera nashta karna hua, tab tak chhoti maa aur vaani didi bhi wapas aa gayi. Iske bad hum sab hospital ke liye nikal gaye. Hospital me sabhi log the. Kuch hi der me priya ki hospital se chhutti ho gayi aur hum sab priya ke sath uske ghar aa gaye.

Priya ke ghar wapas aane se saare ghar me hansi khushi ka mahol ban gaya tha. Sabhi bahut khush najar aa rahe the. Dopahar ka khana hum logon ne priya ke ghar me hi khaya. Iske bad hum log yaha waha ki baten karte rahe.

Is sab ke dauran priya bahut khush najar aa rahi thi. Usne pahle ki tarah abhi bhi chhoti maa ka sath ek pal ke liye nahi chhoda tha. Wo pure samay chhoti maa ke pas hi unki ladli bankar baithi rahi.

Chhoti maa use bahut dular kar rahi thi aur baat baat me uske sar par hath fer rahi thi. Jis se priya ki khushi aur bhi jyada bad gayi thi. Magar ye laad dular ka daur ami ko pasand nahi aa raha tha. Wo mera hath pakad kar mere pas baithi thi aur priya ko gusse me ghoor kar dekh rahi thi.

Ami ki is baat par mere alawa keerti aur nikki ne bhi gaur kiya tha. Magar iske baare me kisi ne kuch kaha nahi. Ye laad dular ka silsila sham tak yu hi chalta raha aur pure samay ami ka muh bana raha.

Fir sham hote hi chhoti maa ne sab se jaane ki ijajat mangi to, priya chhoti maa se aaj uske ghar me hi rukne ki jid karne lagi. Lekin chhoti maa ne aaj raat ki flight se wapas jaane ki baat kah kar, uski saari ummidon par paani fer diya.

Chhoti maa ki ye baat sunkar priya ki muskurahat gayab ho gayi aur uska chehra chhota sa ho gaya. Priya ka utra hua chehra dekh kar chhoti maa ne use samjhate huye kaha ki unka aaj hi wapas jana jaruri hai.

Lekin priya ki khushi ke liye wo mujhe keerti aur ami nimi ko 2 din ke liye uske pas hi chhod kar ja rahi hai. Chhoti maa ki is baat ko sunkar, priya ke chehre ki muskurahat wapas aa gayi aur kahin na kahin mujhe bhi chhoti maa ki is baat ko sunkar sukun mila tha.

Chhoti maa ne sab se ijajat li aur fir hum log wapas ajay ke bungalow me aa gaye. Waha aakar chhoti maa aur vaani didi ne apna bag liya aur fir hum sabko kuch baten samjha kar 7 baje airport ke liye jaane lagi.

Maine chhoti maa se airport tak unke sath chalne ki baat kahi. Magar chhoti maa ne iske liye mana kar diya aur wo vaani didi ke sath chali gayi. Ghar par ab mai, keerti, ami nimi aur barkha didi thi.

Hum sab baithe hetal didi aur priya ke baare me baat kar rahe the. Isi bich 8:30 baje hum logon ka khana aa gaya. Hum sabne ek sath baith kar khana khaya aur fir se sab baten karne lage.

Iske bad raat ko 10:30 baje sab apne apne kamro me chale gaye aur mai bhi apne kamre me aa gaya. Apne kamre me aakar maine kapde badle aur fir keerti ke aane ka intejar karne laga.

Raat ko 11 baje keerti mere kamre me aayi. Keerti se meri yaha waha ki baten chalti rahi. Keerti ki tabiyat ab pahle se bahut jyada sudhar gayi thi. Iske bad bhi wo abhi mere pas sona nahi chahti thi.

Keerti ne 1 baje tak mujhse baat ki aur fir apne kamre me sone chali gayi. Uske jaane ke bad mai priya ke baare me sochne laga aur yahi sab baten sochte sochte pata hi nahi chala ki, kab mai gahri nind me chala gaya.

Subah 8 baje meri nind keerti ke jagane par khuli. Wo meri peeth par baith kar mujhe jaga rahi thi. Uski is harkat par mujhe hansi aa gayi. Maine muskurate huye us se kaha.

Mai bola “ye kya ho raha hai. Kya koi aise bhi kisi ko jagata hai.”

Meri baat par keerti ne apna pura vajan mere upar rakhte huye kaha.

Keerti boli “kyo, kya nimi tumhe aise hi nahi jagati hai. Aaj wo nahi hai to, uski jagah mai tumhe jaga rahi hu.”

Mai bola “chal bahut ho gaya tera jagana. Ab mere upar se uth aur mujhe bhi uthne de.”

Lekin keerti mere upar se nahi uthi aur mere upar apna vajan or jyada badane ki kosis karne lagi. Jab mujhe sach me uska vajan mehsus hone laga to, mai use apne upar se alag karne ki kosis karne laga.

Magar keerti aaj mere sath masti karne ke mood me thi. Usne jaise hi dekha ki mai uthne ki kosis kar raha hu to, usne apne dono hathon se mere dono kandho ko pakad kar mujhe bistar par dabana suru kar diya.

Mujhe uski ye harkat achi lag rahi thi. Isliye mai ab mai bas chhutne ki kosis karne ka natak kar raha tha. Maine jab uthne ke liye jyada takat lagayi to, keerti apna pura vajan daal kar, mere upar hi let gayi.

Uski is harkat se uske stan ki golaiyan (boobs) ka aehsas mujhe apni peeth par hone laga. Jiske ahsas se hi mera jor lagana khatam ho gaya aur mai aise hi bina virodh kiye nidhal sa let gaya.

Keerti ne jab mujhe koi jor lagate nahi dekha to, wo apne daant se mere kaan katarne lagi. Uski is harkat se mai thoda tilmilaya aur us se kaha.

Mai bola “ye kya kar rahi hai. Mujhe dard nahi hota kya.”

Keerti boli “tum kuch bhi kar lo, lekin aaj mai tumko nahi chhodugi. Aaj bahut din bad tum mujhe akele me pakad me aaye ho.”

Ye kahte huye usne fir se mere kaan ko katar liya. Maine uski pakad se chhutne ke liye uthne ki kosis ki to, usne mere dono hathon ko pakad liya. Uske kaatne se bachne ke liye mai apna chehra dayen bayen ghumane laga.

Lekin wo mujhe pareshan karti rahi. Uske yun pareshan karne ka silsila tab tak chalta raha, jab tak ki wo thak nahi gayi. Jab wo thak gayi to, khud hi mere upar se hat kar ek kinare baith gayi.

Uske mere upar se hatte hi, mai bhi apne dono kaan sahlate huye uth kar uske pas baith gaya aur us se puchha.

Mai bola “ye sab kya tha.”

Keerti boli “ye sab itne din mujhse door rahne ka badla tha.”

Mai bola “aaj tune mujhe bahut pareshan kiya hai. Yadi teri tabiyat sahi hoti to, mai bhi tujhe maja chakhata.”

Keerti boli “tumse kuch nahi hoga. Tum bas mujhe maja chakhane ke sapne hi dekhte raho.”

Uski ye baat sunte hi, maine uska chehra apne dono hathon me thama aur usko chumne ke liye apna chehra aage kiya to, wo kiss na karne ki minnat karne lagi. Uski is harkat par mujhe hansi aa gayi aur maine use chhodte huye kaha.

Mai bola “ye ami nimi aur barkha didi kaha gayi hai.”

Keerti boli “wo log barkha didi ka ghar dekhne gayi hai aur udhar se hi wo aman ke ghar chali jayegi. Hum logon ko bhi un ne wahi aane ka kaha hai.”

Iske bad meri keerti se thodi bahut baat huyi aur fir mai fresh hone chala gaya. Fresh hone ke bad mai taiyar hua. Tab tak keerti chay lekar aa gayi. Maine chay pi aur fir iske bad hum log bike se aman ke ghar aa gaye.

Ami nimi waha pahle hi pahuch chuki thi. Humne waha sab ke sath nashta kiya aur fir kuch der rukne ke bad, hum hetal didi se milne hospital chale gaye. Kuch der hum log hospital me ruke.

Fir ami nimi ghumne chalne ki baat kahne lagi to, mai barkha didi, keerti aur ami nimi ghumne ke liye nikal gaye. Din ka khana hum logon ne reataurant me khaya aur uske bad ami nimi ko thoda bahut ghumane ke bad sham ko 5:30 baje hum log wapas ghar aane ke liye nikle. Tabhi priya ka msg aa gaya.

Priya ka msg “Dinse Raat Hone Ko Aai Hai.
Pata Nahin Ye Kaisi Judai Hai.
Parwah Nahin Karte Wo Apne Dost Ki,
Na Jane Ye Kaisi Dosti Nibhai Hai.”

Priya ka msg dekhte hi, maine apna mobile keerti ko thama diya. Keerti ne msg dekha to, baton baton me priya ko dekhne chalne ki baat kahne lagi. Jiske bad hum sab log priya ke ghar aa gaye.

Hum log jab priya ke ghar pahuche to, mohini aunty, nitika, riya aur nikki baithi huyi thi. Priya us samay apne kamre me thi. Hum log mohini aunty ke pas hi baith gaye. Barkha didi unhe aaj ghumne ki baat batati rahi.

Baton baton me nikki ne priya ke pas chalne ki baat kahi aur fir hum log uth kar, nikki ke sath priya ko dekhne uske kamre ki taraf chal pade. Sidiyon ke upar pahuchte hi raj ka kamra aaya.

Raj ka kamra aate hi nikki hume raj ka kamra dikhne andar bulane lagi. Mujhe kuch samajh nahi aaya ki nikki achanak hume raj ka kamra kyo dikhane lagi. Magar maine kuch nahi kaha aur chup chap sabke sath raj ke kamre me aa gaya.

Raj ke kamre me pahuchte hi, hum sab ki najar uske kamre me saje medal aur trophy par padi. Itne saare medal aur trophy dekhte hi, ami ne chaukte huye nikki se puchha.

Ami boli “didi ye itni saari trophy aur medal kya raj bhaiya ne jeete hai.”

Ami ki baat par nikki ne muskurate huye kaha.

Nikki boli “nahi, ye sab medal aur trophy priya ne jeete hai. Priya swimming champion hai. Lekin apni bimari ki vajah se ab wo kisi tournament me hissa nahi leti hai.”

Nikki ki baat sunkar, ami bade gaur se priya ke jeete huye medal aur trophy ko dekhne lagi. Ab mujhe samajh me aa raha tha ki, nikki hum sab logon ko raj ke kamre me kyo lekar aayi thi.

Asal me ami nimi dono ko swimming bahut pasand thi. Shayad isi vajah se nikki ne unhe priya ke jeete huye medal aur trophy dikhaye the. Jis se ami nimi ko priya ke karib laya ja sake. Thodi der sab raj ke kamre me priya ke medal aur trophy dekhte rahe. Fir priya ko dekhne uske kamre ki taraf chal pade.
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09-11-2020, 02:14 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{Update - 225}
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Raj ka kamra aate hi nikki hume raj ka kamra dikhne andar bulane lagi. Mujhe kuch samajh nahi aaya ki nikki achanak hume raj ka kamra kyo dikhane lagi. Magar maine kuch nahi kaha aur chup chap sabke sath raj ke kamre me aa gaya.

Raj ke kamre me pahuchte hi, hum sab ki najar uske kamre me saje medal aur trophy par padi. Itne saare medal aur trophy dekhte hi, ami ne chaukte huye nikki se puchha.

Ami boli “didi ye itni saari trophy aur medal kya raj bhaiya ne jeete hai.”

Ami ki baat par nikki ne muskurate huye kaha.

Nikki boli “nahi, ye sab medal aur trophy priya ne jeete hai. Priya swimming champion hai. Lekin apni bimari ki vajah se ab wo kisi tournament me hissa nahi leti hai.”

Nikki ki baat sunkar, ami bade gaur se priya ke jeete huye medal aur trophy ko dekhne lagi. Ab mujhe samajh me aa raha tha ki, nikki hum sab logon ko raj ke kamre me kyo lekar aayi thi.

Asal me ami nimi dono ko swimming bahut pasand thi. Shayad isi vajah se nikki ne unhe priya ke jeete huye medal aur trophy dikhaye the. Jis se ami nimi ko priya ke karib laya ja sake. Thodi der sab raj ke kamre me priya ke medal aur trophy dekhte rahe. Fir priya ko dekhne uske kamre ki taraf chal pade.

Jab hum priya ke kamre me pahuche to, priya bed par leti Tv dekh rahi thi. Usne hume aate dekha to, fauran Tv band kar di aur uth kar baith gayi. Hum sabko ek sath aaya dekh kar, uske chehre par muskurahat aa gayi.

Priya ki tabiyat ab pahle se behtar thi. Bas wo thodi kamjor najar aa rahi thi. Us samay mujhe us par bahut pyar aa raha tha. Isliye maine uske pas jakar baithte huye kaha.

Mai bola “tum yaha aaram se baith kar Tv dekh rahi ho aur hum log kab se niche baithe tumhare niche aane ka intejar kar the.”

Meri is baat par priya ne apne tevar badalte huye kaha.

Priya boli “oye jyada jhuth mat bolo. Mai abhi thodi der pahle hi niche se upar aayi hu. Sidhe se kyu nahi kahte ki, tum logon ko mumbai ghumne se ab fursat mili hai.”

Priya ki is baat me sachchai thi. Lekin wo ye baat majak me kah rahi thi. Isliye maine bhi usi ke lahje me us se kaha.

Mai bola “mai jhuth nahi bol raha hu. Tum chaho nikki se puchh lo. Hum log kitni der se niche baithe hai.”

Priya boli “mujhe kisi se kuch nahi puchhna hai. Tum ami nimi ko mumbai ghuma rahe the. Isliye mai tumse koi jhagda nahi karugi.”

Priya ki is baat par maine hanste huye kaha.

Mai bola “chalo kisi bhi bahane sahi, tumhari sikayat to door huyi. Ab ye batao ki nidhi didi ne tumhe kitne din ghar par aaram karne ko kaha hai.”

Meri baat sunkar priya ne thoda udas hote huye kaha.

Priya boli “nidhi didi ne to mujhe pure ek hafte aaram karne ko kaha hai. Lekin tum log to yaha sirf 2 din ke liye ho. Tum logon ko kab wapas jana hai.”

Mai priya ki haalat ko samajh raha tha. Wo mere jaane ki baat ko lekar udas thi. Isliye mahol ko kuch halka karne ki niyat se maine muskurate huye kaha.

Mai bola “hum logon ko kal wapas jana hai. Lekin humhare jane ki baat se tum udas mat ho. Tum jab chahogi, mai tumse milne chala aauga.”

Meri is baat se priya ke chehre par thodi si muskan aa gayi. Usne abhi tak mere alawa kisi se baat nahi ki thi. Lekin jaise hi uski najar ami nimi par padi to, usne muskurate huye ami nimi se kaha.

Priya boli “tum logon ne mumbai ache se ghooma ya nahi.”

Priya ki is baat par ami to kuch nahi boli. Lekin nimi ne uski baat ka jabab dete huye kaha.

Nimi boli “didi humne puri mumbai ghoom li hai aur mumbai ghoom kar hume bahut maja aaya.”

Nimi ki is baat ke jabab me priya ne kaha.

Priya boli “meri tabiyat kharab nahi hoti to, mai khud hi tum logon ko mumbai ghumane lekar chalti. Lekin chinta mat karo, agli baar jab tum log aaogi, tab mai khud tumhe mumbai ghumaugi. Tab dekhna tumhe aur bhi jyada maja aayega.”

Priya ki ye baat sunkar nimi use, humne kaha kaha ghooma batane lagi. Kuch der tak priya aur nimi ki ye hi baten chalti rahi. Fir bad me keerti aur barkha didi ki us se thodi bahut baten huyi.

Humne samay dekha to, ab 7:30 baj raha tha. Hum subah ke nikle huye the aur ghumne firne ki vajah se ab hume thakan bhi mehsus hone lagi thi. Isliye humne priya se jaane ki ijajat li aur hum priya ke sath niche aa gaye.

Niche aakar humne padmini aunty aur dada ji se jaane ki ijajat maangi. Magar padmini aunty khana kha kar jaane ki jid karne lagi. Hum subah ke nikle the aur humne dopahar ka khana bhi bahar khaya tha.

Dopahar ka khana bahar khane ka to humne shikha didi ko bata diya tha. Lekin sham ka khana un ne sath khane ka jataya tha. Isliye hum waha khana khana nahi chahte the.

Magar padmini aunty ne bhi khana kha kar hi jaane ki jid bandh li thi. Jis vajah se humne shikha didi ko call karke priya ke ghar khana khane ki baat batayi. Shikha didi ne is baat ka koi virodh nahi kiya aur subah ka khana sath khane ki baat kah kar hume waha khana khane ki ijajat de di.

Humare khane ki baat tay hote hi, padmini aunty kitchen me chali gayi. Unke jaane ke bad, humari dada ji aur mohini aunty se baat hone lagi. Mohini aunty pahle se bahut jyada badal chuki thi.

Fir bhi unki pahle ki priya ko kahi kuch baten mujhe abhi bhi chubh rahi thi. Jis vajah se meri unse jyada baten nahi ho saki. Kuch der bad raj aur uncle bhi aa gaye. Unse bhi humari thodi bahut baten huyi.

Fir padmini aunty ne khana laga diya to hum sab sath me khana khane lage. Khana khane ke bad fir se hum logon ki baton ka silsila chalta raha. Fir 10 baje hum log dada ji aur baki logon se ijajat lekar ajay ke bungalow jaane ke liye nikal pade.

Sab thake huye the, isliye ghar aate hi sab sone ke liye apne apne kamre me chale gaye. Maine apne kamre me aakar kapde badle aur keerti ke aane ka intejar karne laga.

Raat ko 11 baje keerti aayi. Us se meri roj ki tarah hi baten huyi aur fir 1 baje wo apne kamre me chali gayi. Keerti ke jaane ke bad, mai kal ghar wapas jaane ke baare me sochne laga.

Mai kuch din priya ke sath rahna chahta tha. Lekin ami nimi ke sath hone ki vajah se abhi mera yaha rukna sahi nahi tha. Yahi sab baten sochte sochte pata nahi kab meri nind lag gayi.

Subah meri nind 8:30 baje nimi ke jagane par khuli. Maine us se baki sab ka puchha to, usne bataya ki sab uth kar taoyar ho chuke hai. Bas mai hi uthne ke liye baki tha aur usne mujhe bhi jaga diya hai.

Iske bad mai uth kar fresh hone chala gaya. Nahane ke bad mai taiyar hone laga, tabhi keerti chay lekar aa gayi. Maine chay peete huye keerti se kaha.

Mai bola “humari flight sham ko 5 baje ki hai. Tum apna aur ami nimi ka saman pack kar lo. Kyoki din bhar sabse milne julne me hume packing ka samay nahi mil payega.”

Keerti boli “tum iski fikar mat karo, dopahar ko shikha didi ke pas khane par jaane se pahle mai apni aur ami nimi ki saari packing kar lugi.”

Abhi meri keerti se baat chal hi rahi thi ki, tabhi barkha didi aur ami nimi bhi mere kamre me aa gayi. Barkha didi ne mujhse ghumne chalne ke baare me puchha to maine kahi bhi jaane se mana kar diya.

Lekin ami nimi ka mumbai ghumne se man nahi bhara tha. Wo dono kahi chalne ki jid karne lagi. Maine unhe samjhaya ki, aaj hume ghar wapas jana hai aur ghumne ke chakkar me hum yaha kisi se mil nahi sakege.

Meri is baat ke jabab me barkha didi ne ami nimi se kaha ki, wo unke sath ghumne chale aur mujhe yaha sabse milne ke liye chhod dete hai. Ami nimi ko unki ye baat sahi lagi.

Lekin wo keerti se bhi sath chalne ki jid karne lagi. Keerti ka man ghumne jaane ka nahi tha. Lekin ami nimi ki jid ke aage use jhukna hi pada. Kuch hi der me ami nimi, keerti aur barkha didi ghumne chali gayi aur mai hetal didi se milne hospital chala gaya.

Maine hetal didi ko aaj apne jaane ki baat batayi to, wo mujhe kuch din rukne ki baat kahne lagi. Lekin maine unhe kisi tarah se samjha diya. Mai dopahar ko 12 baje tak hetal didi ke pas raha. Fir shikha didi ka khane ke liye call aaya to, mai wahi se aman ke ghar ke liye nikal gaya.

Mere waha pahuchne se pahle hi ami nimi, keerti aur barkha didi waha pahuch chuki thi. Hum sabne ek sath khana khaya aur iske bad humari yaha waha ki baten hoti rahi. Fir 2 baje mai waha se priya ke ghar aa gaya.

Priya mujhe niche hi mil gayi. Shayad use kisi se pata chal gaya tha ki, mai waha aa raha hu. Mai jab waha pahucha to, waha padmini aunty, mohini aunty, nitika, riya, nikki aur priya baithi Tv dekh rahi thi.

Maine un logon se dada ji aur raj ka puchha to, un ne bataya ki wo dono apne kamre me hai. Isliye pahle mai dada ji se jakar mila. Un ne mujhe aate rahne ko kaha aur priya ki taraf se befikar rahne ko kaha. Unse milne ke bad, mai raj ke kamre me gaya. Raj ne bhi mujhse wahi baat boli, jo dada ji ne boli thi.

Iske bad meri raj se yaha wahan ki baten hoti rahi. Baton baton me maine raj se hitu (hitesh) ke baare me puchha to, usne bataya ki hitu abhi apne mama ke ghar gaya hua hai. Use priya ki tabiyat ke baare me kuch pata nahi hai.

Raj se thodi bahut baat karne ke bad, mai uske sath niche aa gaya. Mai niche aaya to, priya bhi mere sath chalne ki jid karne lagi. Maine use sath chalne se mana kiya to, wo muh fula kar baith gayi.

Uska foola hua muh dekh kar padmini aunty ne use sath le jane ko kaha. Iske bad mai thodi der wha ruka aur fir 3:30 baje waha se ajay ke bungalow ke liye nikal liya. Mere sath raj, riya, nitika, nikki aur priya bhi the.

Kuch hi der me hum log ghar pahuch gaye. Waha keerti aur ami nimi pahle hi aa chuke the. Humne apna saman liya aur fir airport ke liye nikal pade. Kuch hi der me hum airport pahuch gaye.

Waha par ajay aur shikha didi pahle se hi the. Abhi 4:15 baja tha aur humari flight chhutne me abhi 45 min ka samay baki tha. Mai ek ek karke sabse mil raha tha. Shikha didi ne ami nimi ko dher saare gift diye the aur mujhe apna khayal rakhne ke liye samjha rahi thi.

Ajay aur shikha didi se milne ke bad, mai raj logon se mila. Raj ne mujhe aate rahne ka jataya aur fir gale lag kar vidayi di. Raj ke bad, riya nikki ne bhi hath mila kar mujhe vidayi di.

Nisha bhabhi aur seeru didi logon se mai ghar par hi mil chuka tha aur maine hi unhe airport aane se mana kiya tha. Isliye wo log nahi aayi thi. Barkha didi ne mujhe gale laga kar, vidayi di.

Fir sabse aakhiri me mai priya se mila. Us se maine apni tabiyat ka khayal rakhne ko kaha aur tabiyat thik hote hi humare ghar aane ka jataya. Priya ne mujhe pichhli baat yaad dilate huye kaha.

Priya boli “tumhe yaad hai. Pichhli baar jab tum ja rahe the to, tumko lag raha tha ki, tum kuch bhool gaye ho. Lekin maine jab ghar jakar dekha to, mujhe waha kuch nahi mila tha. Kya tumhe yaad aaya ki, pichhli baar tum kya bhool gaye the.”

Priya ki is baat par maine muskurate huye kaha.

Mai bola “haan, mujhe yaad aa gaya tha ki, mai kya bhool gaya tha.”

Priya boli “kya.”

Mai bola “mai tum jaisi pyari dost ko yahi chhod kar ja raha tha. Isliye mujhe lag raha tha ki, mai kuch bhool gaya hu.”

Meri baat sunkar priya ke chehre par bhi muskurahat aa gayi aur usne pichhli baar ki tarah is baar bhi mujhe muskurate huye vidayi di. Kuch hi der me humari flight ki ghoshna ho gayi.

Mai ajay se gale mila aur ek baar sabki taraf dekh kar haath hilaya. Fir mai keerti aur ami nimi ke sath me flight ki taraf bad gaya. Is baar mumbai se jaate samay meri aankhon me nami nahi thi.

Lekin fir bhi mujhe aisa lag raha tha ki, mai bahut kuch apna yaha chhod kar ja raha hu. Yahi sab sochte huye mai apni flight par pahuch gaya. Ami nimi ghar wapsi se khush nazar aa rahi thi.

Magar mai kuch udas sa tha aur ye udasi priya ko yaha chhod kar jaane ki thi. Mai apni isi udasi ke sath flight par chadh gaya aur kuch hi der bad humari flight ne udan bharna suru kar diya.
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09-11-2020, 02:15 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
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Priya boli “tumhe yaad hai. Pichhli baar jab tum ja rahe the to, tumko lag raha tha ki, tum kuch bhool gaye ho. Lekin maine jab ghar jakar dekha to, mujhe waha kuch nahi mila tha. Kya tumhe yaad aaya ki, pichhli baar tum kya bhool gaye the.”

Priya ki is baat par maine muskurate huye kaha.

Mai bola “haan, mujhe yaad aa gaya tha ki, mai kya bhool gaya tha.”

Priya boli “kya.”

Mai bola “mai tum jaisi pyari dost ko yahi chhod kar ja raha tha. Isliye mujhe lag raha tha ki, mai kuch bhool gaya hu.”

Meri baat sunkar priya ke chehre par bhi muskurahat aa gayi aur usne pichhli baar ki tarah is baar bhi mujhe muskurate huye vidayi di. Kuch hi der me humari flight ki ghoshna ho gayi.

Mai ajay se gale mila aur ek baar sabki taraf dekh kar hath hilaya. Fir mai keerti aur ami nimi ke sath me flight ki taraf bad gaya. Is baar mumbai se jate samay meri aankhon me nami nahi thi.

Lekin fir bhi mujhe aisa lag raha tha ki, mai bahut kuch apna yaha chhod kar ja raha hu. Yahi sab sochte huye mai apni flight par pahuch gaya. Ami nimi ghar wapsi se khush nazar aa rahi thi.

Magar mai kuch udas sa tha aur ye udasi priya ko yaha chhod kar jaane ki thi. Mai apni isi udasi ke sath flight par chadh gaya aur kuch hi der bad humari flight ne udan bharna suru kar diya.

Lekin meri udasi kam hone ka naam hi nahi le rahi thi. Pichhli baar jab mai yaha se apne ghar wapas ja raha tha. Tab mujhe priya ko akela chhod jaane ka dukh sata raha tha aur mai behatasha ro raha tha.

Magar is baar mai apni ek bahan ko akela chhod kar jaane aur dusri bahan ki uske liye beshumar nafrat ko lekar dukhi tha. Mai chah kar bhi is sab se nikalne ka koi rasta nahi nikal paya tha.

Mai apni is bebasi par aansu to nahi baha pa raha tha. Lekin udas jarur ho gaya tha. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, aage aane wale samay me priya ke sath kya hone wala hai.

Bahut jaldi hi neha ki apne ghar wapsi hona thi. Uske bad neha ka priya ke sath kaisa bartav rahta hai. Is baat ne bhi mujhe soch me daal diya tha. Dusri taraf ami thi ki, priya ke baare me kuch sunna hi pasand nahi kar rahi thi.

Pichhle 12 din me ami ne priya ko lekar apna jo roop dikhaya tha. Usne bhi mujhe dara kar rakh diya tha. Mai to ami se ye tak kahne ki himmat nahi juta pa raha tha ki, priya humari bahan hai.

Aise me mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, ami ke man me priya ke liye jo nafrat hai, use kaise bahar nikalu. Use kaise samjhau ki, priya uski badi bahan hai aur priya ko kabhi na kabhi humare pas aana hai.

Chhoti maa ne hum teeno bhai bahan ke bich kabhi sage sautele ki diwar ko nahi aane diya tha. Lekin ami thi ki, priya ko lekar apne man me na jaane kaun sa vaham paali huyi thi, use jara bhi pasand nahi kar rahi thi.

Ami ki is harkat ki vajah se chhoti maa bhi pareshan thi aur ab to unhe richa aunty se bhi ami ke Mumbai jaane ke pahle ki harkat ka pata chal gaya hoga. Is baat ne bhi mujhe pareshan kar diya tha.

Mai nahi chahta tha ki, koi bhi ami ke sath kisi tarah ki jabardasti kare. Bhale hi priya meri judwa bahan thi. Lekin is baat se inkar nahi kiya ja sakta tha ki, ami nimi me meri jaan basti hai.

Mai ami nimi ko kisi bhi tarah se dukhi hote nahi dekh sakta tha. Mujhe jald se jald ami ke man se priya ke liye nafrat ko nikalna tha. Lekin kaise ye baat mujhe samajh me nahi aa rahi thi.

Mai apne man me aise hi hajaron sawalon me uljha hua tha aur 8 baje humare flight ne udan bharna band kar diya aur humara shahar aa gaya. Mai ami nimi aur keerti ke sath flight se utar kar bahar aa gaya.

Mujhe laga tha ki, hume airport par lene ke liye chhoti maa ya vaani didi me koi aaya hoga. Lekin hume lene ke liye mehul aaya tha. Usne mujhe dekhte hi apne gale se lagate huye kaha.

Mehul bola “kaisa hai tu, priya kaisi hai.”

Mai bola “mai acha hu aur priya ki tabiyat bhi ab thik hai. Lekin chhoti maa kaha hai. Wo hume lene kyo nahi aayi.”

Mehul bola “aunty ghar par hai. Unhe achanak kuch jaruri kaam aa gaya tha. Isliye un ne mujhse kaha ki, mai jakar tum logon ko le aau. Ab der mat kar, jaldi ghar chal. Sab tera intejar kar rahe hai.”

Mehul ki baat sunkar, mai keerti aura mi nimi ke sath bahar aa gaya. Bahar aakar humne apna saman gaadi me rakha aur ghar ke liye nikal pade. Raste me mai mehul se uncle ke baare me puchhta raha.

Kuch hi der me hum ghar pahuch gaye. Ghar me chhoti maa akeli thi. Un ne mujhe dekhte hi gale se laga liya aur fir puchha.

Chhoti maa boli “priya kaisi hai. Use koi pareshani to nahi hai.”

Mai bola “nahi chhoti maa, priya ab bilkul thik hai. Use kisi baat ki koi pareshani nahi hai.”

Chhoti maa boli “chal thik hai. Tu jakar muh hath dho le.”

Lekin mujhe chanda mausi ka khayal aaya aur maine chhoti maa se puchha.

Mai bola “chhoti maa, kya chanda mausi abhi bhi anu mausi ke hi ghar me hai.”

Chhoti maa boli “haan chanda mausi abhi anu didi ke par hi hai.”

Mai bola “chhoti maa, mai jakar chanda mausi se mil kar aata hu. Fir aakar muh hath dho luga.”

Lekin chhoti maa ne mujhe tokte huye kaha.

Chhoti maa boli “nahi, pahle tu muh hath dho le. Fir hum sab wahi chalte hai. Hume raat ka khana didi ke ghar par hi khana hai.”

Chhoti maa ki baat sunkar, mai upar apne kamre me aa gaya. Keerti aur ami nimi bhi taiyar hone ke liye apne apne kamre me chali gayi. Kamre me aakar mai fresh hone chala gaya.

Fresh hone ke bad mai taiyar hone laga. Abhi mai taiyar ho hi raha tha ki, tabhi keerti aa gayi. Wo taiyar ho chuki thi. Use itni jaldi taiyar dekh kar, maine use tokte huye kaha.

Mai bola “tu to badi jaldi taiyar ho gayi.”

Keerti boli “mai hi nahi, ami nimi bhi kab ki taiyar ho chuki hai. Tumhe hi taiyar hone me itna jyada samay lagta hai.”

Mai bola “aisi baat nahi hai. Din bhar ki thakan thi. Isliye thakan door karne kiye nahane laga tha. Warna mai bhi abhi tak taiyar ho chuka hota.”

Keerti boli “chalo koi baat nahi. Lekin ab jaldi karo, niche sab tumhare aane ka intejar kar rahe hai.”

Keerti ki baat sunkar, mai jaldi jaldi taiyar hua aur fir uske sath niche aa gaya. Niche vaani didi baithi thi. Mujhe dekhte hi, wo uth kar khadi ho gayi. Mai unse milne unke pas gaya to, un ne mujhe gale se lagate huye kaha.

Vaani didi boli “tum logon ko aane me koi takleef to nahi huyi.”

Mai bola “nahi didi, waha ajay aur raj logon ke hote huye kisi baat ki koi pareshani nahi hoti hai.”

Vaani didi boli “chalo acha hai. Ab priya ki tabiyat kaisi hai.”

Mai bola “didi, ab priya bhi pahle se bahut achi hai. Lekin nidhi didi ne abhi use ek hafte aaram karne ko kaha hai.”

Vaani didi abhi mujhse iske bad kuch aur pati ki, tabhi chhoti maa ne hume tokte huye kaha.

Chhoti maa boli “vaani beta, apni baten tu anu didi ke ghar par kar lena. Waha sab humara intejar kar rahe hai. Ab hume chalna chahiye.”

Chhoti maa ki is baat par vaani didi ne bhi apni sahmati di aur fir hum sab anu mausi ke ghar jaane ke liye nikal pade. Hum jyada log the isliye vaani didi ne tata safari nikali aur hum sab usi me anu mausi ke ghar aa gaye.

Anu mausi ke ghar pahuchne ke bad, humne doorbell bajayi to, anu mausi ne aakar darwaja khola. Mujhe apne samne dekhte hi, un ne bhi mujhe apne gale se laga liya aur sawalon ki bauchhar karte huye kaha.

Anu mausi boli “kaha tha tu, aane me itni der kyo laga di. Hum kab se tera intejar kar rahe hai. Priya kaisi hai. Wo thik to hai na.”

Anu mausi ke itne saare sawal sunkar, maine sabse pahle unke aakhiri sawal ka jabab dete huye kaha.

Mai bola “mausi, priya ab bilkul thik hai.”

Mai abhi itna hi bol paya tha ki, chhoti maa ne anu mausi ko tokte huye kaha.

Chhoti maa boli “didi, aap ye sab haal chaal bad me le lena. Pahle in logon ko chanda mausi se mil lene dijiye.”

Chhoti maa ki ye baat sunkar, hum sab ghar ke andar aa gaye. Fir anu mausi hume us kamre me le aayi. Jis kamre me aksar chhoti maa ruka karti thi. Waha chanda mausi bed par baithi huyi thi.

Dushyant mausa ji aur neha bhi unke agal bagal khade huye the. Lekin chanda mausi kuch pareshan si lag rahi thi. Hum unke pas pahuche to, mai unke pas jakar baith gaya aur unki tabiyat puchhne laga.

Lekin chanda mausi ne mujhe apne pas dekhte hi, mujhe apne gale se laga liya aur rona suru kar diya. Is samay unki tabiyat sahi nahi thi aur rone se unki sehat par bura asar bhi pad sakta tha.

Isliye unke rone se mujhe unki tabiyat kharab hone ki chinta satane lagi. Mai unke gale se alag hua aur maine unke aanus ponchhte huye kaha.

Mai bola “mausi, ab to sab thik ho gaya. Ab aap kyo ro rahi hai.”

Lekin chanda mausi ne meri baat ko ansuna kar diya aur mujhse lipat kar fir se foot foot kar rona suru kar diya. Ab mujhe unki aur bhi jyada chinta hone lagi thi. Isliye maine unhe samjhate huye kaha.

Mai bola “mausi, abhi aapki tabiyat sahi nahi hai. Aapke is tarah rone se aapko tabiyat aur bhi jyada kharab ho jayegi. Plz aap rona band kijiye.”

Magar chanda mausi par meri is baat ka koi asar nahi pada. Wo abhi bhi pahle ki tarah hi roye ja rahi thi. Un par apni is baat ka koi asar padte na dekh kar, maine ami nimi ko apne pas aane ka ishara kiya aur chanda mausi se kaha.

Mai bola “mausi, aap roye ja rahi hai aur yaha ami nimi kab se aapse milne ke liye khadi hai.”

Meri baat sunkar, chanda mausi kin ajar ami nimi par padi. Maine ami nimi ko unke pas khada kiya to, un ne ami nimi se lipat kar rona suru kar diya. Mujhe unke is tarah se rone ka matlab samajh me nahi aa raha tha.

Abhi tak mujhe lag raha tha ki, mujhe itne din bad dekh kar wo ro rahi hai. Lekin ab mujhe aisa lag raha tha ki, jaise koi baat unhe pareshan kar rahi hai aur wo isi vajah se roye ja rahi hai.

Magar abhi wo baat janne se jyada jaruri mausi ko chup karana tha. Isliye maine ami nimi ko unse door kiya aur unke aanus ponchhte huye kaha.

Mai bola “mausi, aapko meri kasam hai. Ab aap bilkul bhi nahi royegi. Aise rone se sach me aapki taiyat kharab ho jayegi.”

Meri baat sunkar, chanda mausi ek baar fir mujhse lipat gayi. Lekin is baar unka rona kam ho gaya tha. Unka rona kam hote dekh kar, mai unhe samjhane laga aur dhire dhire unka rona band hoga.

Unka rona band hote dekh kar, maine unke rone ki vajah janne ke liye anu mausi ki taraf dekha. Lekin mujhse najar milte hi, anu mausi ne sabse kaha.

Anu mausi boli “jab tak tum log chanda se milo. Tab tak mai sabke liye khana lagati hu.”

Itna kah kar anu mausi bina kisi ka jabab sune hi kitchen ki taraf chali gayi. Mera man unke pas jakar is baat ko janne ka tha. Lekin chanda mausi ko aisi haalat me chhodna bhi mujhe acha nahi lag raha tha.

Isliye mai unke pas hi baitha raha. Tab tak shayad keerti ko bhi waha ke haalat samajh me aa chuke the. Isliye wo bhi chanda mausi ke pas aa gayi aur unhe muambai me ami nimi ki shararaton ke baare me batane lagi.

Ami nimi bhi uske pas hi khadi thi. Apni baat hote dekh kar, wo dono bhi chanda mausi ke pas jakar baith gayi aur unhe is baat me apni safayi dene lagi. Chanda mausi bade dhyan se un logon ki baton ko sun rahi thi.

Kuch der bad ami nimi aur keerti ki is nok jhok ko dekh kar chanda mausi ke chehre par muskurahat aa gayi aur wo ami nimi ko laad karne lagi. Is baat ko lekar keerti chanda mausi se hi ladne lagi.

Chanda mausi keerti ko naraj hote dekh kar, use pyar se samjhane lagi aur mahaul puri tarah se shant ho gaya. Keerti ne apni nok jhok se thodi hi der me waha ka mahaul badal kar rakh diya tha.

Mai khamoshi se khada keerti aur ami nimi ki in harkaton ka maja le raha tha. Kuch der tak keerti aura mi nimi kin ok jhok ka daur aise hi chalta raha. Fir anu mausi aa gayi aur un ne aate hi sab se kaha.

Anu mausi boli “chalo, khana lag gaya hai. Sab chal kar khana kha lo aur ab chanda ko aaram karne do.”

Anu mausi ki ye baat sunkar, maine unhe tokte huye kaha.

Mai bola “mausi, pahle chanda mausi ko bhi khana kha lene dijiye. Fir wo dawa khakar aaram kar legi.”

Meri ye baat sunte hi, anu mausi ne mujhe taana marte huye kaha.

Anu mausi boli “ye lo, chanda ki fikar karne wala aa gaya. Hume to jaise chanda ki koi fikar hi nahi hai. Chanda ki fikar karne ka saara theka jaise isi ne le rakha ho.”

Anu mausi ki ye baat sunkar, maine unhe is baat me apni safayi dete huye kaha.

Mai bola “mausi, meri baat ka ye matlab nahi tha. Mai to sirf itna kahna chahta tha ki, chanda mausi pahle khana aur dawa kha leti. Fir aaram se so jati. Warna fir se unhe khana aur dawa ke liye jagana pad jata.”

Lekin meri is baat par bhi anu mausi ke tevar nahi badle aur un ne fir se mujhe taana marte huye kaha.

Anu mausi boli “haan, haan, hume to kuch aata hi nahi hai. Sab kuch tumhe hi aata hai. Itne din se tum hi to chanda ka khayal rakh rahe the. Humne to kuch kiya hi nahi hai.”

Anu mausi ki is baat ko sunkar, mera chehra chhota sa ho gaya. Mujhse anu mausi se kuch bhi kahte nahi ban raha tha. Chanda mausi ne mujhe is tarah pareshan dekha to, humari baat ke bich me bolte huye kaha.

Chanda mausi boli “punnu baba, aap pareshan mat hoiye. Anu didi mujhe pahle hi khana aur dawa de chuki hai. Wo abhi sirf aap se majak kar rahi hai aur aapko pareshan kar rahi hai.”

Chanda mausi ki baat sunkar, mai anu mausi ko dekhne laga. Ye anu mausi ki suru se aadat thi ki, wo mujhe pareshan karne ka koi bhi mauka apne hath se nahi jaane deti thi.

Shayad unki yahi aadat keerti ne bhi virasat me payi thi aur wo bhi mujhe pareshan karne me kabhi pichhe nahi rahti thi. Anu mausi ne jab chanda mausi ki ye baat suni to, un ne chanda mausi se shikayat karte huye kaha.

Anu mausi boli “chanda ye kya hai. Tum se thodi der bhi chup nahi raha gaya. Jara iska chehra to dekhna tha. Kaisa ho gaya tha.”

Ye kah kar anu mausi hasne lagi. Lekin chanda mausi ne meri tarafdari lete huye kaha.

Chanda mausi boli “nahi didi, mujhse baba ka utra hua chehra nahi dekha jata hai. Baba aise hi haste muskurate ache lagte hai.”

Iske bad chhoti maa ne chanda mausi se kuch jaruri baat karne ki baat kah kar hum sab ko bahar bhej diya. Vaani didi bhi unhi ke pas ruk gayi aur hum sab waha se dining room me aa gaye.

Hum dining room me pahuche to, waha mausa ji ke sath papa bhi the. Papa ko dekh kar, mera man waha se wapas aane ko hua. Lekin tab tak mausa ji kin ajar mujh par pad chuki thi.

Mausa ji mujhse mera haal chaal puchhne lage. Mai unse priya ke baare me baat karne se bachna chahta tha. Kyoki mujhe nahi malum tha ki, chhoti maa ne unhe is baare me kya bataya hai.

Abhi chhoti maa aur vaani didi bhi waha nahi thi. Isliye mai apne baare me hi unse bada chada kar unse baat karne laga aur unhe apni inhi baton me uljhane ki koshish karne laga.

Abhi meri mausa ji se ye hi baten chal rahi thi ki, tabhi chhoti maa aur vaani didi aa gayi. Vaani didi ne abhi bhi mujhe waha par khade hi dekha to, mujhe tokte huye kaha.

Vaani didi boli “kya hua, kya tumhe khana nahi khana hai, jo abhi tak yahi khade ho.”

Vaani didi ki is baat ko sunkar, maine unhe mausa ji ko apna haal chaal dene ki safayi di. Iske bad mai jaise hi khana khane baithne ko hua, waise hi barkha didi ka call aane laga.

Mai barkha didi ka call utha kar, unse baat karne laga. Mujhe barkha didi se baat karte dekh kar, keerti fauran uth kar apne kamre me chali gayi. Thodi der bad wo apne kamre se wapas aayi to, usne mujhe ek hands free pakda di.

Shayad wo barkha didi ka call dekh kar, samajh gayi thi ki, ab meri baat lambi chalne wali hai. Isliye wo mere liye apni hands free le aayi thi. Maine hands free lagayi aur barkha didi se baat karte karte mai bhi khana khane baith gaya.

Ab dining table ka najara kuch aisa tha. Dining table ki bich wali seat par papa baithe huye the. Unke left wali seat par mausa ji, mausi ji, kamal, dushyant mausa ji, neha aur mehul baithe huye the.

Papa ki right wali seat me, chhoti maa, vaani didi, nimi, ami, keerti aur fir mai baitha hua tha. Mujhe dushyant mausa ji ko papa ke sath khana khane baitha dekh kar, bahut tajjub ho raha tha.

Keerti ne mujhe bataya tha ki, dushyant mausa ji ne papa se dushmani ki vajah se hi meri jaan lene ki koshish kit hi aur unki is galti ke liye chanda mausi ne unhe sirf meri vajah se maaf kiya tha.

Lekin mujhe ye baat samajh me nahi aa rahi thi ki, papa aur dushyant mausa ji ke bich sulah kisne karwayi hai. Isi baat ko sochte sochte achanak meri najar papa par padi to, wo bade gaur se mujhe hi dekh rahe the.

Shayad unhe khana khate samay meri kisi se baat karne ki harkat kuch ajib lag rahi thi. Lekin maine papa ki is baat ko andekha kiya aur fir se barkha didi se baat karne laga.

Yadi riya ke ghar me humare khana khane ki baat ko chhod diya jaye to, do saal me ye pahla mauka tha, jab hum bap bête ek sath pure parivar ke sath baith kar khana kha rahe the.

Lekin mere man me mere bap ke liye itni nafrat thi ki, mujhe is baat se jara bhi khushi nahi thi. Mai barkha didi se baat karte huye khana suru karne wala tha ki, tabhi meri najar keerti ke khane par padi.

Uske khane me abhi uble aalu, palak ka soup, methi ki sabzi aur chapati thi. Maine bhi uske samne rakhi aalu aur chapati uthayi aur apni plate me rakh kar unhe khane laga.

Mai Mumbai me bhi jab uske sath khana khata tha to, usi ke liye bana hua khana khaya karta tha. Jiski vajah se keerti ne bhi wo khana khushi khushi khana suru kar diya tha.

Abhi bhi jab usne mujhe ye khana lete dekha to, wo muskurane lagi. Lekin usne kuch kaha nahi aur khamoshi se wo bhi khana khane lagi. Abhi mai aur keerti ye khana kha hi rahe the ki, tabhi ami ne keerti ko tokte huye kaha.

Ami boli “didi, mujhe bhi aalu aur chapati khana hai.”

Ami ki ye baat sunkar, keerti ne use samjhate huye kaha.

Keerti boli “ami, is khane me jara bhi mirch masala nahi hai. Ye tumhe bilkul acha nahi lagega. Tum ise mat khao.”

Keerti ki is baat par ami ne ne us se ulta sawal karte huye kaha.

Ami boli “yadi ye khana acha nahi hai to, fir bhaiya is khane ko kyo kha rahe hai.”

Keerti boli “ami, wo kya hai ki, mujhe ye khana jara bhi acha nahi lagta hai aur mai is khane ko khane me bahut na nukur karti hu. Isliye punnu mere sath dene ke liye ye khana kha raha hai. Taki mai khushi khushi ye khana kha saku.”

Keerti ki is baat ke jabab me ami ne kaha.

Ami boli “thik hai didi, fir mai bhi aapka sath dene ke liye ye khana khana chahti hu. Mujhe bhi ye khana do na.”

Keerti ami ko samjhane ki bahut koshish karti rahi. Lekin jab ami nahi maani to, keerti ne ami ko bhi aalu aur chapati khane ke liye de diye. Lekin ab keerti khana khate huye nimi ko dekh rahi thi.

Kuch der bad, nimi ki najar mere aur ami ke khane par pad gayi. Wo thodi der tak mere aur ami ke khane ko gaur se dekhti rahi. Fir achanak hi uski aankhon me aansu jhilmilane lage aur usne rona suru kar diya.
Reply
09-11-2020, 02:15 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{Update - 227}
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Ami boli “didi, mujhe bhi aalu aur chapati khana hai.”

Ami ki ye baat sunkar, keerti ne use samjhate huye kaha.

Keerti boli “ami, is khane me jara bhi mirch masala nahi hai. Ye tumhe bilkul acha nahi lagega. Tum ise mat khao.”

Keerti ki is baat par ami ne ne us se ulta sawal karte huye kaha.

Ami boli “yadi ye khana acha nahi hai to, fir bhaiya is khane ko kyo kha rahe hai.”

Keerti boli “ami, wo kya hai ki, mujhe ye khana jara bhi acha nahi lagta hai aur mai is khane ko khane me bahut na nukur karti hu. Isliye punnu mere sath dene ke liye ye khana kha raha hai. Taki mai khushi khushi ye khana kha saku.”

Keerti ki is baat ke jabab me ami ne kaha.

Ami boli “thik hai didi, fir mai bhi aapka sath dene ke liye ye khana khana chahti hu. Mujhe bhi ye khana do na.”

Keerti ami ko samjhane ki bahut koshish karti rahi. Lekin jab ami nahi maani to, keerti ne ami ko bhi aalu aur chapati khane ke liye de diye. Lekin ab keerti khana khate huye nimi ko dekh rahi thi.

Kuch der bad, nimi ki najar mere aur ami ke khane par pad gayi. Wo thodi der tak mere aur ami ke khane ko gaur se dekhti rahi. Fir achanak hi uski aankhon me aansu jhilmilane lage aur usne rona suru kar diya.

Nimi ko achanak se rote dekh kar, sabka dhyan uski taraf chala gaya aur sab hairani se nimi ko dekhne lage. Wo vaani didi ke bagal me baithi thi. Isliye vaani didi us se rone ki vajah puchhne lagi.

Nimi ka rona sunkar, mera dhyan bhi barkha didi ki baton se hat gaya. Mai fauran khana chhod kar nimi ke pas aaya aur us se uske rone ki vajah puchhne laga. Lekin wo kuch bol nahi rahi thi aur bas sisakti hi ja rahi thi.

Nimi ki is harkat ne sabko pareshani me daal diya tha. Keerti to nimi ki harkat pahle se hi dekh rahi thi. Usne jab sabko nimi ki vajah se pareshan hote dekha to, usne sabki is pareshani ko door karte huye kaha.

Keerti boli “nimi ko kuch nahi hua hai. Use bas is baat ka bura laga hai ki, punnu aur ami ek sa khana kha rahe hai. Lekin use alag sa khana diya gaya hai.”

Keerti ki baat sunkar, pahli baar mera dhyan ami ke khane ki taraf gaya. Ami ke khane me aalu aur chapati dekh kar, mere sath sath baki sabko bhi saara majra samajh me aa gaya. Maine nimi par thoda gussa karte huye kaha.

Mai bola “chhoti, ye kya hai. Yadi tujhe bhi aalu chapati khana thi to, ami didi ya keerti didi se maang li hoti. Iske liye rone ki kya jarurat thi. Kya hum tujhe ye khane se mana karte.”

Lekin nimi ne meri ye baat sunte hi, mere upar hi gusse me bhadakte huye kaha.

Nimi boli “jao, aap gande ho. Aap ami didi ko bas pyar karte ho, mujhe pyar nahi karte. Mujhe aap se koi baat nahi karni.”

Nimi ki ye baat sunkar, mujhe hansi aa gayi. Maine pyar se use manate huye kaha.

Mai bola “chhoti, tu puri pagal hai. Are maine ami ko ye khana nahi diya hai. Usne khud hi ye khana liya hai. Mujhe to iske baare me kuch pata hi nahi. Lekin tujhe bhi ye khana khana hai to, mai apni pyari nimmo ko khud apne hath se khana duga.”

Ye kahte huye maine aalu aur chapati utha kar nimi ki plate me rakh di. Ye dekhte hi nimi khush hokar muskurane lagi aur usne khana suru kar diya. Uski is harkat par sab hasne lage.

Bachpan se aisi hi thi meri nimmo. Gussa uski naak par, aansu uski aankhon me aur muskan uske hothon par pal bhar me hi aa jaya karti thi. Wo chahe kitni bhi naraj rahe. Lekin mere manate hi faruan maan jaya karti thi.

Aisa hi kuch abhi bhi hua tha. Mere manate hi, wo fauran maan gayi thi. Uski jagah yadi ami kisi baat par mujhse naraj huyi hoti to, fir use manana jara bhi aasan nahi tha.

Ami bachpan se meri chaheti thi aur use apni koi bhi baat manwane ke liye mujhse kabhi dusri baar nahi bolna padta tha. Mai pahli baar me hi uski har baat maan leta tha.

Iski vajah ye thi ki, ami bahut shant swabhav ki hone ke sath sath kabhi koi galat maang nahi karti thi. Uske umar ke bachchon ke muakable me uski har baat me samajhdari jhalakti thi.

Jis vajah se mai khud hi uski baat maan leta tha. Isliye use apni baat manwane ke liye kabhi jid karne jarurat hi nahi padi thi ya yun kah lo ki maine use jid karne ka mauka hi nahi diya tha.

Lekin yadi ami ke muh se kabhi kisi baat ke liye na nikal jaye to, fir uske muh se us baat ke liye haan kahlwana namumkin hi hota tha. Lekin uski sabse badi khasiyat ye thi ki, wo mujhse kabhi naraj nahi hoti thi.

Meri dono bahno me meri jaan basti thi aur mai hamesha unhe khush rakhne ki koshish karta tha. Yahi vajah thi ki, mai chah kar bhi priya ke mamle me ami ko kuch samjhane ki himmat nahi kar pa raha tha.

Yaha nimi ke khana khana suru karte hi baki sab bhi baat karte huye khana khane lage. Mai bhi wapas apni jagah par aakar baith gaya aur khana khate huye barkha didi se baat karne laga.

Barkha didi ne puchha ki, waha kya hua to, mai unhe nimi ki harkat ke baare me batane laga. Barkha didi bhi waha sabke sath khana kha rahi thi. Un ne nimi ki harkat ke baare me suna to, wo waha sabko nimi ki harkat batane lagi.

Jise sunkar waha par bhi sab hasne lage. Aise hi baat karte karte yaha aur waha dono jagah sabka khana khana ho gaya. Humara khana khana pura hote hi papa aur mausa ji uth kar drawing room me chale gaye.

Lekin meri abhi bhi barkha baat chal rahi thi. Fir barkha diid ne shikha didi ko call de diya to mai shikha didi se baat karne laga. Maine unko yaha ke sab logon ka haal chal diya aur fir unse puchha.

Mai bola “didi, priya ki vajah se aapko surat yaha wapas aana pad gaya tha. Lekin ab to priya ki bhi chhutti ho chuki hai aur hetal didi ki bhi surgery ho chuki hai. Ab aap surat kab ja rahi hai.”

Shikha didi boli “bhaiya, abhi jab tak hetal didi hospital me hai. Tab tak mera surat jana mushkil hai. Lekin aaj dhiru uncle ka phone aaya tha. Wo kah rahe the ki, kal ek jaruri meeting hai.”

“Isliye ye jarur kal surat ja rahe hai. Ab ye hetal didi ki dusri surgery ke samay par hi yaha aayege. Waise hetal didi aapko bhi us samay bulane ki baat kar rahi thi. Kya aap bhi unki surgery ke samay par aaoge.”

Mai bola “didi, hetal didi ne bhi mujhse ye baat boli thi aur maine unse aane ka haan bhi kah diya tha. Lekin meri padai ka bahut nuksan ho chuka hai. Isliye ab pata nahi ki, chhoti maa mujhe waha aane ki ijajat deti hai ya nahi deti.”

Shikha didi boli “haan, ye baat to hai. Aapka pura mahina hospital-hospital me hi nikal gaya hai. Fir bhi ho sake to, ek do din ke liye aa jana. Hetal didi ko acha lagega. Aap kahoge to, mai aunty se baat kar lugi.”

Mai shikha didi se ye sab baat karne me is tarah khoya hua tha ki, mujhe yaad hi nahi raha ki, abhi mai sabke sath baitha hua hu. Abhi meri shikha didi se ye baat chal hi rahi thi ki, tabhi vaani didi ne mujhe tokte huye kaha.

Vaani didi boli “kya hua.? Kis baat ke liye kah rahe ho ki, mausi tumhe ijajat deti bhi hai ya nahi deti.”

Vaani didi ki ye baat sunkar, ek pal ke liye mai sakpaka gaya. Lekin fir maine shikha didi ko thoda rukne ko kaha aur vaani didi ko hetal didi ki surgery wali baat batane laga. Jise sunne ke bad vaani didi ne kaha.

Vaani didi boli “thik hai, tum shikha se bol do ki, hetal ki surgery ke samay tum do din ke liye waha aaoge.”

Vaani didi ke muh se is baat ke liye haan sunkar, mujhe ek jhatka sa laga. Kyoki vaani didi in sab mamlo me bahut sakht thi aur mere itne dino ke school ke nuksan ko dekhte huye unke muh se haan nikalna itna aasan nahi tha.

Mujhe abhi bhi is baat par yakin nahi aa raha tha aur mai hairani se vaani didi ko dekh raha tha. Tabhi chhoti maa ne bhi apna sar hila kar, vaani didi is baat ke liye apni sahmati de di.

Chhoti maa ki bhi sahmati pakar meri khushi ka koi thikana nahi raha aur mai khushi khushi ye baat shikha didi ko batane ko hua. Tabhi ami ne mujhe tokte huye kaha.

Ami boli “bhaiya, hum bhi aapke sath mumbai chalege.”

Ami ki ye baat sunkar, mujhe ek aur jhatka laga. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, ami sach me mere sath Mumbai jana chahti hai ya fir wo sirf priya ki vajah se mere sath Mumbai ja rahi hai.

Is se pahle ki mai ami ki is baat me haan ya na kah pata. Vaani didi ne ami ki baat ko sunkar, us se puchha.

Vaani didi boli “tum kyo Mumbai jana chahti ho.”

Ami boli “didi, wo hetal didi ne apni surgery ke samay par hum se bhi Mumbai aane ko kaha tha.”

Ami ki baat sunkar, vaani didi ne muskurate huye kaha.

Vaani didi boli “thik hai, tum log bhi Mumbai chali jana.”

Vaani didi ki ye baat sunkar, ek baar fir mujhe jhatka sa laga. Mujhe to is baat ka dar sata raha tha ki, kahi ami ki baat sunkar, vaani didi us par gussa na karne lage. Lekin yaha to ulta hi ho gaya.

Un ne badi aasani se ami ko bhi Mumbai jaane ke liye haan kar diya. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, vaani didi ye kya kar rahi hai. Un ne itni aasani se mujhe aura mi ko Mumbai jaane ke liye haan kaise kah diya.

Us se bhi badi tajjub ki baat ye thi ki, chhoti maa ne bhi vaani didi ki is baat par apni sahmati de di thi. Un ne ek baar bhi kisi se koi sawal jabab karne ki jarurat nahi samjhi thi.

Mujhe ami ke apne sath jaane se koi pareshani nahi thi. Isliye maine bhi kisi se koi sawal jabab nahi kiya aur shikha didi se bata diya ki, mai aur ami nimi hetal didi ki surgery ke samay par do din ke liye Mumbai aa rahe hai.

Iske bad maine shikha didi se thodi bahut baat karke call rakh diya. Call rakhe ke bad, mai keerti ko uski hands free wapas karne laga. Tabhi vaani didi ne mujhe tokte huye kaha.

Vaani didi boli “maine tumhe baat karne ke liye bluetooth headphones diya tha na. Fir tum use laga kar baat kyo nahi karte ho.”

Vaani didi ki ye baat sunkar, mai keerti ko ghoor kar dekhne laga. Lekin wo is baat se anjan bankar yaha waha dekhne lagi. Ab mai vaani didi ko kaise batata ki, unka diya hua headphones keerti hajam kar gayi hai. Isliye maine vaani didi se bahana banate huye kaha.

Mai bola “didi, mai barkha didi se sirf raat ko hi khane ke samay par baat karta hu aur unke siwa meri kisi se itni der baat nahi hoti hai. Isliye wo headphones ghar par hi hai. Mai raat ko unse wo headphones laga kar hi baat karta hu.”

Meri ye baat sunkar, vaani didi ne kuch nahi kaha. Shayad unhe meri baat sahi lagi thi. Lekin na jaane keerti ko kya sujhi ki usne meri baat sunte hi, fauran bich me kudte huye kaha.

Keerti boli “didi, mai to aapse pahle hi ise headphones dene se mana kar rahi thi. Lekin aapne meri baat suni hi nahi. Ab aapne khud hi apni aankhon se apni di huyi chij ki ijjat dekh li na.”

“Lekin iske liye to aapki di huyi chij ki koi ijjat hi nahi hai. Mujhse aapki chij ki itni beijjti dekhi nahi jati hai. Mujhe dekhiye, mai aapka diya hua bracelet kitne pyar se istemal karti hu.”

Ye kahte huye keerti apna bracelet vaani didi ko dikhane lagi. Ye bracelet Mumbai me mere dene ke bad se hi uske hath me tha. Mujhe keerti ki is harkat par bahut gussa aa raha tha.

Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, maine to iski harkat ko vaani didi se chhupaya hai. Fir ye kyo mujhe vaani didi ke samne fasa rahi hai. Keerti ki is harkat ke bad mujhse vaani didi se apni safayi me kuch kahte nahi bana.

Lekin keerti ki baat sunne ke bad, vaani didi ke kuch na kahne ki ummid karna bekar tha. Aisa hua bhi, keerti ki baat sunne ke bad, vaani didi kuch sochne lagi aur fir un ne mujhe chetavni dete huye kaha.

Vaani didi boli “keerti thik kah rahi hai. Yadi koi tumhe pyar se koi gift de to, tumhe bhi use pyar se istemal karna chahiye. Aainda is baare me mujhe tumhari koi shikayat na mile. Ab iske bad bhi yadi mujhe tumhari aisi koi shikayat mili to, fir tumhare pas baat karne ke liye ye mobile phone nahi rahega.”

Itna bol kar vaani didi chhoti maa, anu mausi aur dushyant mausa ji ke sath chanda mausi ke kamre me chali gayi. Ab yaha par mai keerti, ami, nimi, mehul aur neha bas the.

Keerti ki is harkat ki vajah se ami nimi use gusse me ghoor rahi thi. Lekin unse bhi jyada gussa mujhe keerti ki is harkat par aaya tha. Isliye vaani didi ke jate hi, maine us se kaha.

Mai bola “ye sab kya natakbaji thi. Tune khud hi wo headphones apne pas rakh liya hai aur ab khud hi vaani didi se meri shikayat bhi kar rahi hai. Aakhir tu chahti kya hai.”

Lekin keerti ne meri is baat ko ansuna kar diya aur ami nimi se baat karte huye kaha.

Keerti boli “ami nimi ye apna itna acha bluetooth headphones chhod kar meri is raddi si hands free ko laga kar baat kar raha tha. Mai is se bol bol kar thak gayi ki, ise bluetooth headphones laga kar baat karna chahiye. Lekin ye meri koi baat sunne ko hi taiyar nahi tha.”

“Ab tum hi batao, aise me maine vaani didi se iski shikayat karke kya bura kiya hai. Kya tum dono ko iska itna acha bluetooth headphones ko chhod kar is raddi si hands free ko laga kar baat karna acha lagta hai. Mujhe to bilkul bhi acha nahi lagta hai.”

Keerti ki ye baat sunkar, ami nimi bhi uske jhanse me aa gayi. Ami ne keerti ki tarafdari karte huye kaha.

Ami boli “haan bhaiya, keerti didi thik hi kah rahi hai. Aapko bluetooth headphones laga kar hi baat karna chahiye. Ye hands free bilkul bhi acha nahi lagta.”

Ab jab ami ne kuch kaha tha to, fir nimi kaise pichhe rahti. Usne ami se bhi do kadam aage jate huye kaha.

Nimi boli “haan bhaiya, aap headphones laga kar baat kiya karo. Usme aap bilkul hero lagte ho.”

Ami nimi ki baat sunkar, mai hairani se unko dekhne laga. Kaha to thodi der pahle vaani didi ki baat sunne ke bad wo keerti ko kha jaane wali najro se dekh rahi thi aur kaha ab us baat ko bhool kar keerti ki haan me haan mila rahi thi.

Keerti ne ek teer se do shikar kiye the. Ek taraf to usne vaani didi se meri shikayat bhi kar di thi aur dusri taraf usne khud ko bhi ami nimi ki narajgi se saaf saaf bacha liya tha.

Mai keerti ka safed jhuth dekh kar aur apni dono bahno ki nadani dekh kar muskurane ke siwa kuch na kar saka. Abhi mai keerti aur ami nimi ki baton me uljha hua tha ki, tabhi mehul ka mobile bajne laga.

Usne mobile dekha to, richa aunty ka call aa raha tha. Wo us se khan eke liye puchh rahi thi. Mehul ne unhe bataya ki wo yaha khana kha chukka hai aur wo raat ko der se ghar aayega. Itni baat karne ke bad mehul ne call rakh diya.

Mehul ke call rakhte hi, vaani didi log bhi chanda mausi ke kamre se bahar aa gayi thi. Vaani didi ne hum logon se drawing room me aane ko kaha to, unke pichhe pichhe hum sab bhi drawing room me aa gaye.

Drawing room me papa aur mausa ji pahle se hi baithe huye the. Dushyant mausa ji aur anu mausi jakar mausa ji ke pas baith gaye. Wahi chhoti maa aur vaani didi papa ke pas jakar baith gayi.

Vaani didi ne hum logon se bhi baithne ko kaha to, hum sab bhi unke samne ke sofe par baith gaye. Vaani didi ka hum logon ko is tarah sabke sath baithane se ek baat samajh me aa rahi thi ki, unhe humse koi jaruri baat karna hai.

Lekin hum logon ke baith jaane ke bad bhi sab khamosh hi bathe rahe. Koi bhi kisi se kuch nahi bol raha tha. Tab chhoti maa ne is khamoshi ko todte huye vaani didi se kaha.

Chhoti maa boli “vaani beta, tu hi is baat ko kar, mujhe lagta hai ki, tu inhe is baat ko ache se samjha sakti hai.”

Chhoti maa ki baat sunkar vaani didi ne kaha.

Vaani didi boli “ji mausi.”

Iske bad vaani didi thodi der kuch sochti rahi. Fir un ne apni baat suru karte huye kaha.

Vaani didi boli “aaj humari nisha se baat huyi thi. Nisha ne chanda mausi ke doctor se salah karne ke bad hume bataya hai ki, chanda mausi ab bilkul thik hai aur ab wo kahi bhi aa ja sakti hai.”

Vaani didi ki is baat par maine khush hote huye kaha.

Mai bola “didi, ye to bahut khushi ki baat hai. Hum kal hi chanda mausi ko apne ghar lekar chalte hai.”

Lekin vaani didi ne meri is baat ke jabab me inkar karte huye kaha.

Vaani didi boli “nahi, tum chanda mausi ko kal ghar nahi le ja sakte.”

Mai bola “lekin kyo didi. Abhi to aapne kaha tha ki, wo bilkul thik hai aur kahi bhi aa ja sakti hai.”

Vaani didi boli “haan, maine aisa kaha hai. Lekin fir bhi tum unhe kal ghar nahi le ja sakte ho.”

Vaani didi ki is baat se maine pareshan hote huye kaha.

Mai bola “didi, mai wahi to puchh raha hu ki, aisa kyo.? Jab chanda mausi bilkul thik hai to, hum unhe apne ghar kyo nahi le ja sakte.”

Meri is baat ke jabab me vaani didi ne ek sapat sa jabab dete huye kaha.

Vaani didi boli “tum chanda mausi ko isliye apne ghar nahi le ja sakte. Kyoki wo chanda mausi ka ghar nahi hai.”

Vaani didi ki is baat ko sunkar, mere dil ko ek dhakka sa laga. Aisa hota bhi kyo na. Bhale hi duniya ki najar me chanda mausi meri koi nahi thi. Lekin mere liye wo meri mausi hi thi.

Maine apna hosh unki god me sambhala tha aur un ne mujhe beshumar pyar diya tha. Fir bhala mai is baat ko kaise sah sakta tha ki, mera ghar chanda mausi ka ghar nahi hai. Is baat ko sunkar mujhe dhakka to lagna hi tha. Mai dard se tilmila gaya aur maine bechain hote huye vaani didi se kaha.

Mai bola “didi, aap ye kya kah rahi hai. Aap aisa soch bhi kaise sakti hai.”

Vaani didi boli “isme sochna kya hai. Jo sach hai, mai wahi kah rahi hu.”

Vaani didi ki is baat ko sunkar, mai apni jagah par uth kar khada ho gaya aur maine unhe unki is baat ki safayi dete huye kaha.

Mai bola “nahi didi, ye sach nahi hai. Sach ye hai ki chanda mausi humari ghar ki ek sadasya hai. Mai hi nahi, ami, nimi aur chhoti maa bhi unhe apne ghar ka ek sadasya hi manti hai.”

Lekin vaani didi ne meri is baat ko kaatte huye kaha.

Vaani didi boli “tumhare manne se kya hota hai. Sach ye hai ki, ye unka ghar nahi hai. Unka ghar, unka sasural hai aur unka sasural Mumbai me hai.”

Vaani didi ki is baat ke bad mere pas kahne ke liye kuch nahi bacha tha. Mujhe samajh me aa gaya tha ki, wo kya kahna chahti hai. Isliye mai nidhal sa hokar apni jagah par baith gaya aur maine unse puchha.

Mai bola “didi, mausi kab Mumbai ja rahi hai.”

Vaani didi boli “wo Mumbai nahi ja rahi hai. Wo Mumbai jaane ke liye taiyar hi nahi hai.”

Vaani didi ki is baat ko sunkar, ek baar fir mere chehre par ek chamak aa gayi. Shayad vaani didi mere chehre ki is chamak ko pahchan chuki thi. Isliye un ne mujhe tokte huye kaha.

Vaani didi boli “isme itna khush hone ki baat nahi hai. Maine sirf ye kaha hai ki, wo jaane ke liye taiyar nahi hai. Maine ye nahi kaha ki, wo Mumbai nahi jayegi.”

Vaani didi ki is baat se maine thoda bechain hote huye kaha.

Mai bola “to kya aap unhe jabardasti Mumbai bhejegi.”

Meri is baat par vaani didi ne muskurate huye kaha.

Vaani didi boli “mai nahi, tum unhe Mumbai jaane ke liye taiyar karoge.”

Waise to vaani didi ki kisi baat me palat kar jabab dene ki meri himmat nahi thi. Lekin sawal yaha mausi ke rukne ya jaane ka tha. Isliye maine vaani didi ki is baat se apna palla jhadte huye kaha.

Mai bola “mai kyo unhe is kaam ke liye taiyar karu. Unhe jabardasti Mumbai bhejne ka faisla aapka hai. Aap hi unhe iske liye taiyar kijiye.”

Meri is baat ko sunkar, vaani didi ne gusse me bifarte huye kaha.

Vaani didi boli “ye baar baar chanda mausi ke Mumbai jaane ka iljam mere upar dalna band karo. Ye faisla mera akela nahi, balki hum sabka hai.”

Lekin vaani didi ki is baat se bhi mere upar koi asar nahi pada. Maine fir apni pahle ki baat ko dohrate huye kaha.

Mai bola “thik hai, to aap sab mil kar unhe jabardasti Mumbai bhej dijiye. Lekin mai unhe jabardasti Mumbai bhejne me aapke sath nahi hu.”

Mujhe apni baat samajhte na dekh kar, vaani didi ne thoda naram pad kar, apni baat samjhate huye kaha.

Vaani didi boli “tum samajhte kyo nahi ho. Jitna dukh tumhe chanda mausi ke yaha se jaane se hoga. Utna hi dukh hume bhi unke jaane se hoga. Lekin ek ladki ka sasural hi uska asli ghar hota hai.”

“Aise hi chanda mausi ka asli ghar Mumbai me hai. Unka wo ghar barso se chanda mausi ke aane ka intejar kar raha hai. Hum chanda mausi ko samjha samjha kar thak gaye hai.”

“Lekin wo humari koi baat samajhne ko taiyar hi nahi hai. Wo tumhe aur ami nimi ko chhod kar yaha se jaane ke liye taiyar hi nahi hai. Aise me hume sirf tum se ummid hai.”

“Tum chaho to, chanda mausi ke sasural ke barso ke is intejar ko khatam kar sakte ho. Yadi tum koshish karoge to wo khushi khushi apne sasural chali jayegi aur barso se unki suni padi jindagi me fir se bahar aa jayegi.”

“Waise to ek ladki ko uske sasural bhejne ka kaam uske bap ya bhai ka hota hai. Lekin chanda mausi ka is duniya me humare siwa koi nahi hai. Fir ye kaam hum nahi karege to aur kaun karega.”

“Wo tumhe apna beta hi manti hai. Kya aise me tumhara farz nahi banta ki, apni maa saman mausi ko khushi khushi unke sasural ke liye vida karo. Maine apni taraf se tumhe samjha diya hai.”

“Ab aage tumko faisla karna hai ki, tum unko jindagi bhar apne ghar me hi rakhna chahte ho ya fir unhe unka apna aisa ghar saupna chahte ho. Jis ghar me wo rani ki tarah raj kare.”

Vaani didi ki is baat ne sach me mujhe soch me daal diya tha. Mai apni khushi ke liye chanda mausi ki bhalai ki baat bhool raha tha. Lekin ab mujhe vaani didi ki baat samajh me aa chuki thi. Isliye maine vaani didi se kaha.

Mai bola “thik hai didi, mai chanda mausi ko Mumbai jaane ke liye jarur taiyar karuga. Lekin iske pahle meri chhoti maa se ek request hai.”

Meri aadhi baat sunte hi, sabke chehre khushi se khil gaye the. Lekin meri baat puri hote hi sab gaur se mujhe dekhne lage. Meri request wali baat ne sabko kisi soch me daal diya tha.

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Reply
09-11-2020, 02:16 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{Update - 228}
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“Waise to ek ladki ko uske sasural bhejne ka kaam uske bap ya bhai ka hota hai. Lekin chanda mausi ka is duniya me humare siwa koi nahi hai. Fir ye kaam hum nahi karege to aur kaun karega.”

“Wo tumhe apna beta hi manti hai. Kya aise me tumhara farz nahi banta ki, apni maa saman mausi ko khushi khushi unke sasural ke liye vida karo. Maine apni taraf se tumhe samjha diya hai.”

“Ab aage tumko faisla karna hai ki, tum unko jindagi bhar apne ghar me hi rakhna chahte ho ya fir unhe unka apna aisa ghar saupna chahte ho. Jis ghar me wo rani ki tarah raj kare.”

Vaani didi ki is baat ne sach me mujhe soch me daal diya tha. Mai apni khushi ke liye chanda mausi ki bhalai ki baat bhool raha tha. Lekin ab mujhe vaani didi ki baat samajh me aa chuki thi. Isliye maine vaani didi se kaha.

Mai bola “thik hai didi, mai chanda mausi ko Mumbai jaane ke liye jarur taiyar karuga. Lekin iske pahle meri chhoti maa se ek request hai.”

Meri aadhi baat sunte hi, sabke chehre khushi se khil gaye the. Lekin meri baat puri hote hi sab gaur se mujhe dekhne lage. Meri request wali baat ne sabko kisi soch me daal diya tha.

Sab gaur se mujhe dekh rahe the. Lekin koi kuch bol nahi raha tha. Tabhi chhoti maa ne is khamoshi ko todte huye kaha.

Chhoti maa boli “haan bolo, tumhari kya request hai.”

Mai bola “chhoti maa, mai yaha nahi, aapko akele me apni request batauga.”

Meri is baat ka chhoti maa ne koi virodh nahi kiya aur wo mujhe waha se apni baat kahne ke liye keerti ke kamre me le aayi. Waha aane ke bad chhoti maa ne mujhse kaha.

Chhoti maa boli “yaha ab humare siwa koi nahi hai. Ab tum apni request mere samne rakh sakte ho.”

Lekin ab mujhe chhoti maa se apni request kahne me kuch hichak si ho rahi thi. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki, mujhe chhoti maa se itni badi baat karni chahiye ya nahi karni chahiye.

Mujhe is baat ka dar bhi sata raha tha ki, chhoti maa ko meri ye baat pasand bhi aati hai ya nahi. Bas isi uljhan ki vajah se mai chahte huye bhi, chhoti maa se apni baat kahne ki himmat nahi kar pa raha tha.

Shayad chhoti maa meri is halat ko samajh gayi thi. Isliye un ne mere is dar ko door karte huye kaha.

Chhoti maa boli “mai tumhari maa hu. Apni maa se apne dil ki baat kahne ke liye na to tumhe darna chahiye aur na hi is tarah sochna chahiye. Tumhari kya request hai. Tum behichak hokar bolo.”

Chhoti maa ki ye baat sunkar, mera hausla bada aur maine unse kaha.

Mai bola “chhoti maa, meri request bahut badi hai aur mai nahi janta ki, ye sahi hai ya galat hai. Ho sakta hai ki, ye aapko pasand na aaye. Isliye ise manne ya na manne ka faisla mai aap par chhodta hu.”

Chhoti maa boli “tum meri pasand napasand ki fikar mat karo. Tumhari khushi me hi meri khushi hai. Yadi mujhe tumhari requsest sahi lagi to, mai use jarur pura karugi. Tum nidar hokar apni request bolo.”

Mai bola “ji chhoti maa.”

Ye kahte huye mai chhoti maa ko apni request batane laga. Chhoti maa bade gaur se meri baat sun rahi thi. Meri baat puri hote hi, chhoti maa ke chehre par muskan aa gayi aur un ne mujhe apne gale se lagate huye kaha.

Chhoti maa boli “mai janti thi ki, tu ab bahut samajhdar ho gaya hai aur bahut badi badi baten karne laga hai. Lekin ye to mai bhi nahi janti thi ki, tu apne parivar ke logon ke liye itni gahri soch rakhta hai.”

“Maine bhi bahut kuch karne ke liye socha tha. Lekin ye baat mere dimag me bhi nahi aayi thi. Lekin tu fikar mat kar aur mujhe bas thoda sa samay de. Mai teri ye request jarur puri karugi.”

Chhoti maa ki ye baat sunkar, mera chehra khushi se khil utha aur maine khush hote huye kaha.

Mai bola “thanks chhoti maa, aap sach me duniya ki sabse achi maa ho.”

Meri baat sunkar, chhoti maa muskurane lagi aur un ne mere gaal par pyar se ek chapat lagate huye kaha.

Chhoti maa boli “chal, ab jyada maska lagane ki jarurat nahi hai. Ab jaldi se bahar chal, bahar sab humara intejar kar rahe hai.”

Mai bola “ji chhoti maa.”

Iske bad mai chhoti maa ke sath sabke pas drawing room me aa gaya. Lekin humare waha pahuchte hi, anu mausi ne mujhe gusse me aankh dikhate huye kaha.

Anu mausi boli “to tu ab humara koi kaam karne ke humare samne shart rakhne laga hai.”

Anu mausi ki ye baat sunkar, mai thoda saham gaya. Lekin chhoti maa ne fauran mera bachaw karte huye kaha.

Chhoti maa boli “didi, isne humare samne koi shart nahi rakhi hai. Isne to bas humare samne ek chhoti si request rakhi hai.”

Magar chhoti maa ki ye baat sunkar bhi anu mausi ke tevar nahi badle aur un ne chhoti maa ki baat ko kaatte huye kaha.

Anu mausi boli “iski shart aur request me antar hi kya hai. Isne kaam karne ke badle hi to apni request rakhi hai. Matlab ki ab se hume isse apna koi kaam karwane ke liye iski baat bhi puri karna padegi.”

Anu mausi ki is baat par chhoti maa ne unhe samjhate huye kaha.

Chhoti maa boli “nahi didi, jaisa aap soch rahi hai, waisa kuch bhi nahi hai. Isne humare samne request jarur rakhi hai. Lekin use manna ya na manna humare upar chhod diya hai. Mujhe apne bête ki is baat par garv hai.”

Ye kahte huye chhoti maa ne mere kandhe par hath rakha aur mujhe apne kandhe se laga liya. Wahi anu mausi ne bhi naram padte huye chhoti maa se puchha.

Anu mausi boli “acha, jara mai bhi to sunu ki, iski aisi kaun si request hai, jise sunkar tujhe is par garv hone laga hai.”

Lekin chhoti maa ne unhe meri request batane se inkar karte huye kaha.

Chhoti maa boli “nahi didi, abhi mai iski request aapko nahi bata sakti. Pahle mujhe iski request ko puri kar lene dijiye. Fir mai aap sabko iski request bataugi.”

Anu mausi boli “dekh sonu, ab tu apne bête ki tarah jyada nakhre mat kar aur sidhe tarah se iski request hum sabko bata de.”

Lekin chhoti maa ne anu mausi ko meri request puri hone ke pahle batane se saaf mana kar diya. Chhoti maa ko meri request batate na dekh kar, baki sab bhi request batane ke liye kahne lage.

Magar chhoti maa kisi ki bhi baat sunne ke liye taiyar nahi huyi aur sabse intejar karne ke liye kahti rahi. Aakhir me chhoti maa ki is jid ke aage sabko jhukna pad gaya aur sabne unki baat maan li.

Vaani didi is pure wakye ko badi khamoshi se dekh rahi thi. Un ne chhoti maa se is baare me janne ki koi koshish nahi ki thi. Lekin jaise hi sab shant hokar baith gaye to, un ne mujhse kaha.

Vaani didi boli “ab to mausi ne tumhari request puri karne ki baat kah di hai. Ab tum chanda mausi ko Mumbai jaane ke liye kab taiyar kar rahe ho.”

Mai bola “didi, mai kal hi school se aane ke bad, mausi se is baare me baat karta hu.”

Vaani didi boli “ye to bahut achi baat hai. Yadi tumne kal hi mausi ko Mumbai jaane ke liye taiyar kar liya to, fir mausi bhi Saturday ko tum logon ke sath Mumbai ja sakegi.”

Mausi ke hum logon ke sath Mumbai jaane ki baat sunkar, maine vaani didi se puchha.

Mai bola “didi, hum logon ke sath kaun kaun Mumbai jayega.”

Vaani didi boli “abhi humne is baare me kuch socha nahi hai. Lekin tum aur ami nimi to Mumbai ja hi rahe ho. Yadi chanda mausi bhi taiyar ho gayi to, fir chanda mausi, dushyant mausa ji aur neha bhi tumhare sath hi jayege.”

Iske bad vaani didi sabse isi baare me baten karne lagi. Lekin unki sabse ajib baat ye thi ki, wo bich bich me papa se bhi is baare me salah mashwara kar rahi thi aur papa bade ukhde huye mood se unki haan me haan mila rahe the.

Mujhe vaani didi ki ye baat jara bhi pasand nahi aa rahi thi aur mai samajh nahi pa raha tha ki, vaani didi is baat ke liye us jaise jalil aadmi se koi salah mashwara kyo kar rahi hai.

Is dauran dushyant mausa ji bhi pure samay khamosh hi rahe. Wo bhi bas vaani didi ki har baat me haan me haan mila rahe the. Maine unko papa se ya papa ko unse abhi tak koi bhi baat karte nahi dekha tha.

Mujhe ye baat bhi samajh me nahi aa rahi thi ki, yadi papa aur dushyant mausa ji ke bich sulah ho gayi hai to, fir dono aapas me baat kyo nahi kar rahe hai. Ye baat bhi mere liye ek paheli hi bani huyi thi.

Mere man me is samay hajaron sawal uth rahe the. Jinke jabab mujhe vaani didi, chhoti maa, anu mausi, richa aunty ya chanda mausi hi de sakti thi. Lekin anu mausi se kiye vade ki vajah se mai kisi se koi sawal nahi kar pa raha tha.

Mai apni isi uljhan me uljha hua tha. Tabhi meri najar chhoti maa par padi. Wo gaur se mujhe hi dekh rahi thi. Lekin meri unse najar milte hi, wo vaani didi se raat jyada hone ki baat kah kar ghar chalne ko kahne lagi.

Jiske bad vaani didi ghar chalne ke liye uth kar khadi ho gayi. Un ne papa se bhi sath hi ghar chalne ko kaha to, papa ne kah diya ki, unhe abhi mausa ji se kuch jaruri baten karna hai. Isliye wo aaj raat mausa ji ke ghar par hi rukege.

Mujhe papa ke mausa ji ke yaha rukne se koi pareshani nahi thi. Magar neha ka waha hona mere man me khatak raha tha. Waise to dushyant mausa ji ke waha hone ki vajah se papa ka koi harkat kar pana sambhav nahi tha.

Lekin fir bhi mai nahi chahta tha ki, mere bap ki kisi harkat ki vajah se fir mujhe kisi ke samne sharminda hona pade. Mai riya ki tarah neha ke mamle me koi jokhim lena nahi chahta tha. Isliye maine neha se kaha.

Mai bola “neha, mai abhi yaha nahi tha. Isliye mai tumhe apna ghar dikha nahi paya. Kya tum mere ghar chalna pasand karogi. Chaho to subah wapas aa jana.”

Meri ye baat sunte hi, neha ne khush hote huye kaha.

Neha boli “haan, haan, jarur chalugi.”

Iske bad usne dushyant mausa ji se puchha.

Neha boli “baba, kya mai punnu ke sath uske ghar chali jau. Subah aa jaugi.”

Neha ki is baat par pahli baar dushynat mausa ji ne muskurate huye kaha.

Dushyant mausa ji bole “haan, tum shauk se ja sakti ho. Isme puchhne wali baat kya hai.”

Dushyant mausa ji ki baat sunte hi, neha ne mujhse kaha.

Neha boli “tum 2 min ruko, mai abhi apne kapde lekar aati hu.”

Ye kah kar neha apne kamere me chali gayi. Keerti bade gaur se meri is harkat ko dekh rahi thi. Shayad wo samajh gayi thi ki, maine aisa kyo kiya hai. Lekin mai iske siwa kar bhi kya sakta tha.

Mere pas apne dil ka dar nikalne ke liye aisa karne ke alawa koi rasta bhi to nahi tha. Mai apne bap ki jalil harkaton se bachne ke liye jo rasta apna sakta tha, wo hi rasta apna raha tha.

Kuch hi der me neha apne kapde lekar aa gayi. Iske bad humne sabse ijajat li aur ghar jaane ke liye nikalne lage. Lekin tabhi dushyant mausa ji ne mujhe rokte huye kaha.

Dushyant mausa ji bole “punnu beta, meri galti maafi ke layak to nahi hai. Lekin yadi ho sake to, mujhe maaf kar do.”

Mai bola “mausa ji, aap ye kis galti ki baat kar rahe hai. Mujhe to aapki koi galti yaad hi nahi aati hai. Plz aap mujhse maafi maang kar mujhe sharminda mat kijiye.”

Meri is baat ko sunkar, dushyant mausa ji ne mere samne hath jodte huye kaha.

Dushyant mausa ji bole “nahi beta, ye tumhara badappan hai ki, tum itna sab ho jaane ke bad bhi meri koi galti nahi mante ho. Lekin sach yahi hai ki, maine tumhari jaan lene ki koshish ki thi.”

“Shayad meri is galti ke liye mujhe upar wala bhi maaf nahi karega. Lekin yadi tum mujhe is galti ke liye maaf kar do to, kam se kam mere dil se ek bojh utar jayega aur mai tumhari mausi se najar milane ke layak ho jauga.”

Mai bola “mausa ji, mujhe sach me kisi baat me aapki koi galti najar nahi aati hai. Mujhe to aapki sirf wo achchaiyan yaad aati hai, jo maine shikha didi ke ghar me dekhi thi.”

“Meri chhoti maa kahti hai ki, bado ke hath maafi mangte huye nahi, balki aashirwad dete huye hi ache lagte hai. Isliye aap mere samne hath jod kar meri mausi ko chhota mat kijiye aur mujhe sirf apna aashirwad dijiye.”

Meri baat sunkar, dushyant mausa ji ne mere sar par hath fera aur mujhe apne gale se laga liya. Unse mil lene ke bad, hum sab ghar ke liye nikal pade. Pahle humne mehul ko uske ghar chhoda aur fir hum apne ghar aa gaye.

Hume ghar pahuchte pahuchte 11:30 baj gaye the. Raat jyada ho gayi thi. Isliye sab ghar aate hi apne apne kamre me chale gaye. Chhoti maa ne neha ko chanda mausi ke kamre me thahra diya.

Maine neha se thodi bahut baat ki aur fir apne kamre me aa gaya. Mai kamre me pahucha to, ami nimi dono hi mere kamre me baithi huyi thi. Unhe abhi tak baitha dekh kar, maine unke pas baithte huye kaha.

Mai bola “tum dono aaram se yaha kyo baithi ho. Kya kal school nahi jana hai.”

Meri ye baat sunkar, ami ne bade hi bholepan se kaha.

Ami boli “bhaiya, hum aaj hi to itne lambe safar se aaye hai. Kya humara kal se hi school jana jaruri hai.”

Ami ki baat sunkar, mai dhyan se uska chehra dekhne laga. Mere sath sath unka bhi school ka bahut nuksan ho chuka tha. Aise me mujhe unka apni padai ka aur jyada nuksan karna thik nahi lag raha tha.

Lekin ami ki ye baat bhi bilkul sahi thi. Wo log itne lambe safar se aayi thi. Aise me unhe apne safar ki thakan ko mitane ke liye kam se kam ek din ki chhutti to milna hi chahiye thi.

Mai apni dono masum bahno ko koi kasht dena nahi chahta tha. Lekin unki padai ka nuksan bhi karna nahi chahta tha. Abhi mai apni isi soch me uljha hua tha ki, ami ne fir se apni baat ko dohrate huye kaha.

Ami boli “boliye na bhaiya, kya humara kal se hi school jana jaruri hai.”

Ami ki is baat par maine muskurate huye kaha.

Mai bola “nahi, tumhara kal se hi school jana koi jaruri nahi hai. Tum log parso se school chali jana. Lekin humari padai ka bahut nuksan ho chuka hai. Isliye ab hume man laga kar padai karna hai.”

“Ab tum logon ko apna khelna kudna kam karke padai me apna man lagana hoga. Tum kal aaram karke parso se apni padai suru kar lena. Magar mai to kal se hi school jauga aur ghar aane ke bad bhi padai karuga.”

Meri ye baat sunkar, nimi to bahut khush ho gayi. Lekin ami ne kuch sochte huye kaha.

Ami boli “bhaiya, yadi aap kaho to, hum log bhi kal se hi school jana suru kar dete hai.”

Ami ki ye baat sunkar, nimi ko jhatka sa laga aur uske chehre ki saari khushi gayab ho gayi. Wo fati fati aankhon se ami ko dekhne lagi. Mujhe nimi ki is halat par hansi aa gayi aur maine muskurate huye ami se kaha.

Mai bola “nahi, iski koi jarurat nahi hai. Tum log safar se thaki huyi ho. Tum log parso se hi school jana.”

Meri ye baat sunte hi, nimi ki khush wapas laut aayi aur usne bade hi joshile andaz me kaha.

Nimi boli “bhaiya, aap humari padai ki fikar mat karo. Hum log kal se hi apni padai suru kar dege aur parso se school bhi jaane lagege.”

Nimi ki baat sunkar, mere chehre par muskurahat aa gayi. Mai uski aadat ache se janta tha. Us se bada jhutha duniya me koi dusra nahi tha. Wo apna kaam nikalne ke liye bina soche samjhe kuch bhi kah jati thi.

Magar uski in nadani bhari harkaton ki vajah se kisi tanav me bhi mere chehre par muskurahat aa jati thi. Aisa hi kuch abhi bhi mere sath hua tha. Nimi ki baat sunkar mere chehre par muskurahat aa gayi aur maine un dono se kaha.

Mai bola “chalo thik hai. Ab raat jyada ho gayi hai. Ab tum dono jakar so jao.”

Meri baat sunkar, dono ne mujhe good night kaha aur apne kamre me chali gayi. Unke jaane ke bad, maine kapde badle aur bed par let kar keerti ke aane ka intejar karne laga.

Tabhi meri najar bed par hi pade priya ke mobile par padi. Mai jaldi jaldi taiyar hone ke chakkar me us mobile ko ghar par hi bhool gaya tha. Maine mobile utha kar dekha to, usme priya ke 10-12 call the.

Priya ke is pagalpan ko dekh kar mujhe hansi aa gayi. Aaj bhi usne mere mobile par call na karke sirf apne wale mobile par hi call kiye the. Mera man priya se baat karne ka karne laga.

Lekin maine samay dekha to, 12 baj chuka tha. Isliye maine priya ko call lagane ka apna irada badal diya. Tabhi keerti bhi aa gayi. Usne aate hi darwaja band kiya aur fir mere pas aakar baithte huye kaha.

Keerti boli “yun akele baithe baithe kya soch rahe ho.”

Keerti ki is baat ko sunkar maine use priya ki harkat batate huye kaha.

Mai bola “kuch nahi, ye priya bhi puri pagal hai. Usne apne wale mobile par 10-12 call kiye hai. Lekin mere mobile par ek bhi call nahi kiya. Bas isi baare me soch raha tha.”

Keerti boli “isme sochna kya hai. Use call laga lo aur use bata do ki, tum abhi abhi ghar aaye ho.”

Mai bola “nahi, ab 12 baj gaye hai aur uski tabiyat bhi sahi nahi hai. Aise me use nind se jagana achi baat nahi hai.”

Keerti boli “to fir ek kaam karo. Tum abhi use ek msg kar do. Taki kal tumhare kahne ke liye rah jaye ki, tumne ghar aate hi use msg kiya tha.”

Mujhe keerti ki ye baat sahi lagi aur mai apne mobile me msg dudne laga. Lekin keerti ne meri is pareshani ko bhi hal kar diya aur apne mobile se mujhe ek msg send kar diya. Maine wahi msg priya ko bhej diya.

Mera Sms “Gam Na Ho Waha Jaha Ho Fasana Tera.
Khushiyan Dudti Rahe Aashiyana Tera.
Wo Wakt Hi Na Aaye Jab Tu Udas Ho.
Ye Duniya Bhula Na Sake Muskurana Tera.”

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Reply
09-11-2020, 02:17 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{Update - 229}
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Keerti boli “yun akele baithe baithe kya soch rahe ho.”

Keerti ki is baat ko sunkar maine use priya ki harkat batate huye kaha.

Mai bola “kuch nahi, ye priya bhi puri pagal hai. Usne apne wale mobile par 10-12 call kiye hai. Lekin mere mobile par ek bhi call nahi kiya. Bas isi baare me soch raha tha.”

Keerti boli “isme sochna kya hai. Use call laga lo aur use bata do ki, tum abhi abhi ghar aaye ho.”

Mai bola “nahi, ab 12 baj gaye hai aur uski tabiyat bhi sahi nahi hai. Aise me use nind se jagana achi baat nahi hai.”

Keerti boli “to fir ek kaam karo. Tum abhi use ek msg kar do. Taki kal tumhare kahne ke liye rah jaye ki, tumne ghar aate hi use msg kiya tha.”

Mujhe keerti ki ye baat sahi lagi aur mai apne mobile me msg dudne laga. Lekin keerti ne meri is pareshani ko bhi hal kar diya aur apne mobile se mujhe ek msg send kar diya. Maine wahi msg priya ko bhej diya.

Mera Sms “Gam Na Ho Waha Jaha Ho Fasana Tera.
Khushiyan Dudti Rahe Aashiyana Tera.
Wo Wakt Hi Na Aaye Jab Tu Udas Ho.
Ye Duniya Bhula Na Sake Muskurana Tera.”

Maine priya ko msg bheja aur fir keerti se baat karne laga. Lekin thodi hi der bad priya ka call aane laga. Mai priya ko call uthane laga. Tabhi keerti ne mujhe apni hands free thama di.

Mai uski is harkat ka matlab samajha gaya tha. Maine hands free lagayi to, keerti ne apne ek kaan me hands free laga li. Maine hands free lagane ke bad priya ka call uthate huye kaha.

Mai bola “sorry yaar, maine itni raat ko msg karke tumhe bevajah nind se jaga diya hai.”

Meri is baat par priya ne hanste huye kaha.

Priya boli “tum nind se mujhe tab jagate, jab mai so rahi hoti. Mai to jag rahi thi aur jab tumhara msg aaya, tab mai Tv dekh rahi thi.”

Priya ki ye baat sunkar, maine us par gussa hote huye kaha.

Mai bola “priya ye kya hai. Abhi tumhari tabiyat sahi nahi hai aur jag kar Tv dekh rahi ho. Tumhe to abhi tak so jana chahiye tha.”

Priya boli “are aisi baat nahi hai. Mai airport se aane ke bad hi so gayi thi. Uske bad nikki ke jagane khane ke samay par uthi hu. Isliye ab mujhe nind nahi aa rahi thi to, mai Tv dekhne lagi thi.”

Mai bola “chalo thik hai. Lekin abhi tum par dawaiyon ka asar hai. Yadi tum sone ki koshish karogi to, tumhe nind bhi aa jayegi. Isliye ab tumhe so jana chahiye.”

Priya boli “ok, mai abhi so jaugi. Lekin pls tum thodi der baat karo na.”

Mujhe priya ka dil todna acha nahi laga aur maine us se kaha.

Mai bola “thik hai, mai tumse 10 min baat karta hu. Lekin uske bad tum koi jid nahi karogi aur so jaugi.”

Priya boli “ok, tum 10 min baat karo, uske bad mai tumse koi jid nahi karugi aur so jaugi.”

Mai bola “ahca chalo thik hai. Ab ye batao ki, tumne mujhe apne dusre mobile par 10-12 call lagaye hai. Lekin mere maobile par koi bhi call nahi kiya. Tumne aisa kyo kiya.”

Priya boli “maine tumhare mobile par call isliye nahi kiya tha. Kyoki mai ye dekhna chahti thi, tum mere mobile ko kabhi dekhte bhi ho ya sirf use apne pas rakhe huye hai.”

Priya ki is baat par mujhe aur keerti dono ko hansi aa gayi. Maine hanste huye priya se puchha.

Mai bola “acha to fir tumne kya dekha.”

Priya boli “maine dekha ki, tum mere mobile ko dekhte ho.”

Mai bola “chalo acha hua, tumhe mere upar viswas to aaya. Ab ye batao nikki kaisi hai. Wo to mere yaha aate hi mujhe bhool gayi. Usne to ek call tak karne ki jarurat nahi samjhi.”

Priya boli “nahi, aisi baat nahi hai. Abhi thodi der pahle nikki bhi mere pas thi. Wo bhi tumse baat karna chahti thi. Lekin tum mere itna call lagane ke bad bhi mera call nahi utha rahe the. Isliye nikki ne tumhe call nahi lagaya tha.”

Priya ki is baat par maine chaukte huye kaha.

Mai bola “kya tumne nikki ko bataya tha ki, tum mere dusre number par call laga rahi ho.”

Priya boli “mai use kyo batati ki, mai tumhare dusre number par call laga rahi hu. Yadi mai use ye baat bata deti to, wo tumhe call laga leti aur fir tumhe pata chal jata ki, mai tumhare dusre number par call laga rahi hu.”

Mai bola “tum sach me puri pagal ho. Na to tumne khud mujhse baat ki aur na hi nikki ko mujhse baat karne di. Yadi tumne nikki ko ye baat bata di hoti to, uske sath sath meri tumse bhi tabhi baat ho gayi hoti.”

Priya boli “haan, meri tumse baat ho gayi hoti. Lekin tab mujhe ye kaise pata chalta ki, tum mera mobile dekhte bhi ho ya nahi dekhte ho.”

Mai bola “tumhari ye baat thik hai. Lekin tumko ye bhi to sochna chahiye tha ki, abhi tumhare wale mobile me waha ka sim card hi dala hua hai aur ab wo roaming me hai. Aise me mai tumse us mobile se kaise baat kar sakta hu.”

Priya boli “mujhe kuch nahi sunna hai. Maine tumhe wo mobile apne baat karne ke liye diya hai aur mai kal se tumse usi mobile par baat karugi. Warna mai tumse baat nahi karugi.”

Mai bola “dekho priya, abhi is baat ki jid mat karo. Mai yaha aate hi, ek jaruri kaam me fas gaya hu. Isliye mai chahte huye bhi abhi naya sim card lene ke liye samay nahi nikal pauga.”

“Lekin mai tumse vada karta hu ki, do teen din ke andar mai naya sim card le luga. Tum mujhe bas do teen din ka samay do. Uske bad mai jarur tumse tumhare wale mobile par hi baat karuga.”

Meri ye baat sunkar, priya ko bhi meri pareshani ka aehsas ho gaya aur usne mujhe sim card badalne ke liye samay dete huye kaha.

Priya boli “ok, mai tumhe sim card badalne ke liye teen din ka samay deti hu. Lekin iske bad mai tumari koi baat nahi sunugi.”

Mai bola “thanks, mere liye itna samay kafi hai. Mai tumhe shikayat ka koi mauka nahi duga. Lekin yadi tumhare pas bhi aisa hi sim card hota to, acha hota. Kam se kam hum free me baat to kar sakte the.”

Meri is baat ko sunkar, priya ne hanste huye kaha.

Priya boli “tum mere sim card ki fikar mat karo. Mere pas tumhare jaisa hi dusra mobile bhi hai. Tum bas apna naya number lo, mai bhi tumhe apna dusra number de dugi.”

Priya ki is baat par maine chaukte huye kaha.

Mai bola “jab tumhare pas pahle se hi aisa dusra mobile tha to, tumne ye baat mujhe pahle kyo nahi batayi.”

Priya boli “ab tum itne buddhu ho to mai kya kar sakti hu. Mai to tumhe pahle hi bata chuki thi ki is company ke mobile aapas me free ho jate hai. Tumhe tabhi ye baat sochna chahiye thi ki, jab mere pas is company ka number nahi hai to, fir mai ye mobile tumhe kyo de rahi hu.”

Priya ki ye baat sunkar, mai soch me pad gaya. Uska kahna puri tarah se sahi tha. Jab usne mujhe mobile gift me diya tha. Tab mai uske aur keerti ke ek se mobile dekh kar ulajh gaya tha.

Mai bas is baare me soch raha tha ki, keerti ko dusra mobile lene ki kya jarurat pad gayi thi. Us samay mujhe priya ke pas dusra mobile hone ki baat sujhi hi nahi thi. Lekin ab jab mujhe is baare me pata chala to, maine priya se kaha.

Mai bola “sorry, us samay mai kisi aur soch me uljha hua tha. Isliye mujhe tumhare mobile ke baare me puchhne ka yaad hi nahi raha.”

Meri is baat par priya ne hanste huye kaha.

Priya boli “mujhe pata hai ki, tum us samay kis baat me uljhe the. Tumhe us samay is company ke mobile ke baare me kuch nahi pata tha. Lekin aisa hi ek mobile tumhare pas bhi tha.”

“Tumhare us mobile par tripti ke call aa rahe the. Shayad usne apna mobile free karwa liya tha. Isliye wo tumhare mobile par call kar rahi thi. Tumhe shayad tripti ki yahi baat samajh me nahi aa rahi thi.”

“Isliye tum is baat me ulajh gaye the aur mujhse is company ke mobile ke baare me sawal kar rahe the. Shayad tripti ke dusre mobile ki vajah se hi, tumhe mere dusre mobile ke baare me puchhne ka yaad nahi raha tha.”

Priya ki ye baat sunkar, mai uske dimag ki daad diye bina na rah saka. Usne itne tanav ke samay me hi is baat par gaur kar liya tha. Lekin uski is baat ne mere dimag me kayi sawal bhi paida kar diye the.

Magar mai chah kar bhi priya se is baare me kuch puchh nahi sakta tha aur na hi kuch puchh kar uske man me keerti ke liye shaq paida karna chahta tha. Isliye maine is baat se pichha chhudane ke liye priya se kaha.

Mai bola “chalo acha hai. Ab mai jab bhi naya sim card luga, tab mai us number ko free bhi karwa luga. Fir tum jitna chaho, utna mujhse baat kar sakogi.”

Priya boli “wo to tum nahi bhi kahte, tab bhi mai tumhe pareshan karne se baaj nahi aati.”

Mai abhi priya se baat kar hi raha tha ki, tabhi keerti ne mera dhayan samay ki taraf dilaya aur maine priya se kaha.

Mai bola “thik tum mujhe jitna chaho, utna pareshan kar lena. Lekin ab raat jyada ho chuki hai aur tumhe so jana chaiye. Tumne mujhse 10 min ka kah kar mujhe apni baton me uljha kar 30 min se jyada baat kar li hai.”

Meri ye baat sunkar, priya ne khilkhilate huye kaha.

Priya boli “ye to tumhari galti hai. Tumhe khud hi baton me samay ka dhyan nahi raha. Lekin ab mai tumhe pareshan nahi karugi. Ab mai rakhti hu, tum apna khayal rakhna. Good night.”

Mai bola “ok, tum bhi apna khayal rakhna aur Tv mat dekhna, sidhe so jana. Good night.”

Iske bad priya ne call rakh diya. Priya ke call rakhne ke bad, maine keerti ki hands free use wapas karte huye us se kaha.

Mai bola “tune suna na, priya abhi baat karne ke liye kya kah rahi thi. Mujhe samajh me nahi aa raha ki, mai us se kaise kahu ki, mai raat ko 9:30 baje se 10:30 baje tak barkha didi se aur fir 11 baje se 1 baje tak tujhse baat karta hu.”

Meri is baat ko sunkar, keerti ne mujhe samjhate huye kaha.

Keerti boli “tumhe abhi to kya, kabhi bhi priya se is baare me kuch kahne ki jarurat nahi hai. Tumhare khane ke samay par barkha didi se baat karne ki baat priya bhi ache se janti hai.”

“Isliye wo khud tumhe is samay par pareshan nahi karegi. Rahi mere samay par tumhare us se baat ki baat to, mujhe is baat me koi pareshani nahi hai. Tum jitni der chaho, utni der priya se baat kar sakte ho.”

“Mai is baare me kabhi tumse koi shikayat nahi karugi. Bas tum mera call bas utha liya karna. Tum jitni der priya se baat karoge, utni der mai tumhari aawaj sunkar hi khush rah lugi. Fir uske bad mai tumse baat kar lugi.”

Keerti ki ye baat sunkar, mere dil se ek bahut bada bojh utar gaya tha. Usne mujhe priya ka dil dukhane ki galti karne se rok liya tha. Keerti ki is baat par mujhe us par bahut pyar aaya aur maine jhatke se uske mathe ko chum liya.

Meri is harkat ko dekh kar, keerti mujhe ghoor kar dekhne lagi. Fir usne mujh par gussa karte huye kaha.

Keerti boli “tum apni harkat se baaj nahi aaoge. Maine tumse kaha bhi tha ki, abhi koi kissy vissy nahi lena. Magar tum meri koi baat sunte hi nahi ho.”

Keerti ko naraj hote dekh kar, maine use manate huye kaha.

Mai bola “dekh, ab tu naraj mat ho. Maine kaun sat ere hothon par kissy li hai. Maine mathe par hi to ek chhoti si kissy li hai.”

Keerti boli “nahi, matlab nahi. Jab tak doctor nahi kah deta hai ki, mai puri tarah se thik ho gayi hu. Tab tumhe koi kissy nahi milegi.”

Mai bola “thik hai meri maa. Ab jab tak doctor tujhe thik nahi kah deta. Tab tak mai koi kissy nahi karuga. Ab tu apna mood kharab mat kar.”

Meri ye baat sunkar, keerti ka gussa shant ho gaya. Iske bad wo mujhse neha ke humare ghar aane ke baare me sawal karne lagi. Maine use saaf saaf bata diya ki, mai neha ko kis liye ghar lekar aaya hu.

Meri baat sunne ke bad, wo mujhe isi baare me samjhati rahi aur mai bevajah papa par apna gussa nikalta raha. Kafi der tak hum logon ke bich is baare me baten chalti rahi.

Magar mera mood papa ki taraf se thik hone ko taiyar hi nahi tha. Jab keerti ne mera mood thik hote nahi dekha to, wo mujhse meri chhoti maa se ki gayi request ke baare me puchhne lagi.

Jiske bad mai use apni chhoti maa se ki gayi request ke baare me batane laga. Meri request ke baare me sunkar, keerti ke chehre par bhi muskurahat aa gayi. Iske bad hum log kafi der isi baare me baat karte rahe.

Fir 1 baje ke bad keerti mujhe good night kah kar apne kamre me chali gayi. Keerti ke jaane ke bad, mai usi ke baare me sochte sochte gahri nind ki aagosh me chala gaya.

Fir meri nind subah 6 baje khuli. Aaj se mujhe school jana tha. Isliye mai bina samay barbad kiye fresh hone chala gaya. Fresh hone ke bad, mai school ke liye taiyar hone laga.

Lekin taiyar hote hote achanak hi mujhe chanda mausi ki yaad aa gayi. Itne salon me ye pahla mauka tha ki, mai school ke liye taiyar ho raha tha aur mera nashta nahi aaya tha.

Warna mere fresh hokar nikalne ke bad, mera taiyar hona suru karte hi, na jaane chanda mausi ko kaise pata chal jata tha ki, mai taiyar ho raha hu aur wo nashta lekar mere kamre me aa jati thi.

Itne salon me unka ye niyam kabhi nahi toota tha. Chanda mausi ki ye baat yaad aate hi, mujhe bahut jyada unki kami ka aehsas satane laga aur na chahte huye bhi meri aankhon me aansuon ki nami aa gayi.

Is se pahle ki mai apni aankhon me chhayi is nami ko saaf kar pata. Us se pahle hi keerti mere kamre ka darwaja kholte huye kamre ke andar aa gayi. Use dekhte hi mai apni aankhon me chhayi nami ko saaf karne laga.

Lekin tab tak keerti meri aankhon ki is nami ko dekh chuki thi. Usne fauran hi mere pas aate huye puchha.

Keerti boli “tumhe kya hua hai. Tum subah subah ro kyo rahe ho.”

Tab tak mai apni aankhon ko saaf kar chukka tha. Maine keerti ki baat sunkar, muskurate huye kaha.

Mai bola “mujhe kuch nahi hua hai. Mai ro nahi raha tha, bas meri aankh me kuch chala gaya tha. Isliye tumhe aisa lag raha hai.”

Meri baat sunkar, keerti gaur se mera chehra dekhne lagi. Fir kuch sochte huye usne kaha.

Keerti boli “thik hai, tum taiyar ho. Mai abhi aati hu.”

Itna kah kar wo mere kamre se chali gayi aur mai taiyar hone laga. Taiyar hone ke bad mai apne school ka bag jama raha tha, tabhi keerti nashta lekar aa gayi. Maine nashta kiya aur fir niche aa gaya.

Mai niche aaya to, chhoti maa ami nimi ko aaj school na jaane ke upar se daant rahi thi. Vaani didi aur neha unke pas khadi khamoshi se ye tamasha dekh rahi thi. Ye dekh kar maine ami se puchha.

Mai bola “kya tum dono ne chhoti maa se bataya nahi hai ki, maine hi aaj tum dono ko school se chhutti karne ko kaha hai.”

Meri ye baat sunkar, ami ne mujhse kaha.

Ami boli “bhaiya, humne mummy ko ye baat batayi hai. Lekin fir bhi mummy hum par gussa kar rahi hai.”

Wahi dusri taraf nimi jo abhi tak khamoshi se chhoti maa ki daant sun rahi thi. Mujhe dekhte hi uski aankhon me aansu aa gaye aur usne fauran mere pas aate huye kaha.

Nimi boli “bhaiya, mummy ne hume bahut daanta hai aur hume ghar se nikal dene ka bhi bol rahi hai.”

Ye kahte huye wo bahut jyada sisakne lagi. Na jaane nimi ki siskiyon me kaun sa jahar tha ki, uski siskiyan sunkar mera seena chhalni ho jata tha aur mai uski siskiyon ke samne bilkul bebas sa ho jata tha.

Ye baat to wo khud bhi nahi janti thi ki, uski siskiyan mujh par kitna kahar dhati thi. Maine nimi ko sisakte dekha to, fauran uske pas aaya aur uske aansu ponchh kar, use apne seene se laga kar chup karane laga.

Jab nimi thoda shant huyi to, maine use apne seene se alag kiya aur chhoti maa par is baat ke liye gussa karte huye kaha.

Mai bola “chhoti maa, ye kya hai. Aap in dono ko kyo bekar me gussa kar rahi hai. Maine hi aaj in dono ko chhutti karne ko kaha tha.”

Lekin meri ye baat sunkar, chhoti maa ne mere ulta mere upar hi gussa karte huye kaha.

Chhoti maa boli “tujhe inki jyada tarafdari karne ki jarurat nahi hai. Mai Mumbai se hi inki nautanki dekhte aa rahi hu. Mai waha sirf vaani ki vajah se chup thi. Lekin ab mai inki koi bhi baat sahan nahi karugi. Inhe yadi mere ghar me rahna hai to, mere hisab se hi chalna hoga.”

Mai chhoti maa ki baton se samajh gaya tha ki, wo shayad ami nimi ki priya ko lekar ki gayi harkaton ki vajah se naraj hai. Isliye wo is bahane se un par gussa kiye ja rahi hai. Mai unki is narajgi ko door karna chahta tha.

Isliye unki baat ko khamoshi se sun raha tha. Lekin chhoti maa ki aakhiri me kahi baat mere dil ko lag gayi aur maine jindagi me pahli baar chhoti maa se badtamiji se baat karte huye kaha.

Mai bola “chhoti maa, aap aisa soch bhi kaise sakti hai. Itni chhoti chhoti bachchiyon se ye baat kahte huye aapko jara bhi sharam nahi aayi. Mai sab samajhta hu ki, aap in par kis baat ka gussa nikal rahi hai.”

“Lekin aap bhi meri baat kaan khol kar sun lijiye. Ye ghar inka hai aur is ghar me ye jaise chahe waise rahegi. Mere hote meri bahno se ye haq koi bhi nahi cheen sakta. Fir chahe wo aap hi kyo na ho.”

Mere itna kahte hi saara hall chatakkk ki aawaj se goonj gaya aur mera hath apne aap hi mere gaal par chala gaya. Vaani didi, keerti, neha aur ami nimi sabhi hairani se chhoti maa ko dekh rahe the. Lekin chhoti maa……”
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09-11-2020, 02:18 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
{अपडेट - 230}
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मैं छोटी माँ की बातों से समझ गया था कि, वो शायद अमि निमी की प्रिया को लेकर की गयी हरकतों की वजह से नाराज़ है. इसलिए वो
इस बहाने से उन पर गुस्सा किए जा रही है. मैं उनकी इस नाराज़गी को दूर करना चाहता था.

इसलिए उनकी बात को खामोशी से सुन रहा था. लेकिन छोटी माँ की आख़िरी मे कही बात मेरे दिल को लग गयी और मैने जिंदगी मे
पहली बार छोटी माँ से बदतमीज़ी से बात करते हुए कहा.

मैं बोला “छोटी माँ, आप ऐसा सोच भी कैसे सकती है. इतनी छोटी छोटी बच्चियों से ये बात कहते हुए आपको ज़रा भी शरम नही आई.
मैं सब समझता हूँ कि, आप इन पर किस बात का गुस्सा निकाल रही है.”

“लेकिन आप भी मेरी बात कान खोल कर सुन लीजिए. ये घर इनका है और इस घर मे ये जैसे चाहे वैसे रहेगी. मेरे होते मेरी बहनो से ये
हक़ कोई भी नही छीन सकता. फिर चाहे वो आप ही क्यो ना हो.”

मेरे इतना कहते ही सारा हॉल चटाक़ की आवाज़ से गूँज गया और मेरा हाथ अपने आप ही मेरे गाल पर चला गया. वाणी दीदी, कीर्ति,
नेहा और अमि निमी सभी हैरानी से छोटी माँ को देख रहे थे. लेकिन छोटी माँ……”

छोटी माँ की आँखें गुस्से से लाल थी और वो बहुत ज़्यादा गुस्से मे भरी हुई थी. मेरे गाल पर जोरदार तमाचा जड़ देने के बाद, उन ने गुस्से मे मुझे उंगली दिखा कर, चेतावनी देते हुए कहा.

छोटी मा बोली “मुझसे दोबारा उँची आवाज़ मे बात करने की ग़लती कभी मत करना. मैं तुम लोगों की कोई भी बदतमीज़ी सहन नही करूगी. अब यदि दोबारा ऐसा हुआ तो, मुझसे बुरा कोई नही होगा.”

छोटी माँ को इतना ज़्यादा गुस्से मे देख कर, मुझसे तो अपनी सफाई मे कुछ कहते नही बन रहा था. लेकिन वाणी दीदी ने मेरा बचाव करते हुए कहा.

वाणी दीदी बोली “मौसी, आप भी कहाँ इनकी बातों मे आ रही है. इतनी सी बात मे इन पर इस तरह गुस्सा करना ठीक नही है.”

लेकिन छोटी माँ के गुस्से का पारा अभी कुछ ज़्यादा ही चढ़ा हुआ था. उन ने वाणी दीदी की इस बात पर उनकी ही खिचाई करते हुए कहा.

छोटी माँ बोली “वाणी, मुझे इनके साथ कब कैसे पेश आना है, ये तू मुझे सिखाने की कोशिश मत कर. तेरी वजह से ही मैं मुंबई से
यहाँ तक इन दोनो की हरकतें सहन करती आई हूँ.”

“उपर से आज इस लड़के ने तो हद ही पार कर दी है. इसे ये भी याद नही रहा कि, अपनी माँ से कैसे बात की जाती है. मुझसे इस तरह से बात करने की इसकी हिम्मत भी कैसे हो गयी.”

“क्या मैने इसे ये ही सिखाया है. क्या मैने इसे ये ही संस्कार दिए है. आज इसने अपनी बहनो के सामने बडो की इज़्ज़त उतारने का बड़ा
ही अच्छा उदाहरण पेश किया है. वो भी आगे चल कर इसी की तरह बडो की बेइज़्ज़ती किया करेगी.”

छोटी माँ गुस्से मे मुझे बके जा रही थी. जब वाणी दीदी ने देखा कि, उनके समझाने से भी छोटी माँ का गुस्सा शांत नही हो रहा है तो, उन्हो ने मेरे उपर ही उल्टा गुस्सा करते हुए कहा.

वाणी दीदी बोली “अब तुम यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो. क्या इतना तमाशा करके भी तुम्हे शांति नही मिली है, जो अभी भी बेशर्मो की तरह यहाँ खड़े हुए हो. जाओ, अभी तुम अपने स्कूल जाओ. हम इस बारे मे बाद मे बात करेगे.”

वाणी दीदी की बात सुनकर, मैने अमि निमी की तरफ देखा तो, वाणी दीदी ने अमि निमी से कहा.

वाणी दीदी बोली “तुम दोनो भी अभी अपने कमरे मे जाओ.”

मैने भी अमि निमी को वहाँ से जाने का इशारा किया तो, वो दोनो अपने कमरे मे चली गयी. उनके जाने के बाद मैं भी स्कूल के लिए
निकल गया. मेरे आज के दिन की सुरुआत बेहद ही तनाव भरी हुई थी.

लेकिन मेरे ये तनाव का दौर स्कूल मे भी ऐसे ही चलता रहा. स्कूल मे मेरे जो भी टीचर आ रहे थे, वो मेरे पढ़ाई मे पिछड़ जाने की बात
कह कर, मुझे अपनी पढ़ाई पर ज़्यादा ध्यान देने के लिए कह रहे थे.

उनका ये कहना भी बिल्कुल सही था. पिच्छले एक महीने से स्कूल ना आने की वजह से मेरा पढ़ाई का बहुत नुकसान हो चुका था. फिर भी मुझे इस बात का ज़्यादा टेन्षन नही था.

क्योकि मेरी क्लास का सबसे होशियार स्टूडेंट असलम मेरा दोस्त था और मैं उसके साथ पढ़ाई करके अपने इस नुकसान को पूरा कर सकता था. इसलिए मैने छुट्टी होने के बाद, असलम से इस बारे मे बात करते हुए कहा.

मैं बोला “यार असलम, मेरा पढ़ाई मे बहुत नुकसान हो गया है. मैं कल से तेरे साथ ही पढ़ाई करने की सोच रहा था.”

मेरी ये बात सुनते ही असलम खुश हो गया और उसने खुशी खुशी मुझसे कहा.

असलम बोला “ये तो बहुत अच्छी बात है. तू कल किस समय पढ़ने आएगा.”

मैं बोला “मैं कल शाम को 5 बजे तेरे घर आउगा. लेकिन तू याद से बाजी को भी ये बात बता देना. मैं मुंबई से आने के बाद उनसे भी
नही मिल पाया हूँ.”

असलम बोला “तू फिकर मत कर, मैं बाजी को बता दूँगा कि, तू मुंबई से आ गया है और कल से हमारे घर पढ़ने आ रहा है.”

अभी मेरी असलम से बात चल ही रही थी कि, तभी हुमारे पास राहुल आ गया और उसने असलम के हिप्स पर एक जोरदार चपत लगते हुए कहा.

राहुल बोला “मेरी जान अस्सु, कैसी है.”

राहुल की अचानक की गयी इस हरकत से असलम तिलमिला गया और उसने भन्नाते हुए राहुल से कहा.

असलम बोला “भोसड़ी के, मेरी गान्ड को अपने बाप का गोदाम समझ रखा है क्या, जो जब देखो, तब मेरी गान्ड मे घुसा चला आता है.”

मगर राहुल पर असलम के इस तरह से भन्नाने का कोई असर नही पड़ा और उसने फिर से असलम को छेड़ते हुए कहा.

राहुल बोला “अले ले, मेली जान अस्सु को गुस्सा आ गया. देखो कैसे अपने साजन पर गुस्सा कर रही है.”

राहुल की हरकत बंद ना होते देख कर, असलम ने उसे एक गंदी सी गाली बकि और अपनी बाइसिकल उठाने चला गया. असलम के जाने के बाद मैने राहुल से कहा.

मैं बोला “ये क्या है बे, तू असलम को इतना परेशान क्यो करता है.”

राहुल बोला “यार मैं क्या करूँ. वो मेरे चिडाने पर चिड्ता है तो, मुझे भी उसको चिडाने मे मज़ा आता है.”

मैं बोला “वो तुझे इतनी गालियाँ बकता है. क्या तुझे ये अच्छा लगता है.”

राहुल बोला “अबे दोस्ती मे गालियाँ तो प्रसाद की तरह होती है. इन्हे भी प्यार समझ कर रख लेना चाहिए. फिर असलम तो मेरा लंगोतिया यार है. उसकी किसी बात का बुरा क्या मानना.”

“अब तू उस छुइ मुई की बात छोड़ और मुझे ये बता कि, तू इतने दिन तक मुंबई मे रह कर आया है. तूने वहाँ पर कुछ मज़ा वजा किया या ऐसे ही सूखा सूखा वापस आ गया है.”

मैं बोला “कमिने, मैं मुंबई मे कोई मज़ा वजा करने नही गया था और ना ही मुझे ये सब पसंद है. ये सब हरकतें तू अपने लिए बचा कर रख.”

राहुल बोला “चल जाने दे. मुझे पता था कि, तू वहाँ जाकर भी कुछ नही उखाड़ पाएगा. लेकिन तू अभी मेरे साथ घर चल, मैं तुझे एक
मस्त मूवी दिखाता हूँ. उसे देख कर तुझे मज़ा आ जाएगा.”

मैं बोला “मुझे तेरी कोई मूवी नही देखना. अब मेरे घर जाने का समय हो रहा है. मैं अपने घर चला.”

इतना बोल कर मैं अपनी बिके की तरफ बढ़ गया. लेकिन राहुल ने मेरे पिछे पिछे आते हुए कहा.

राहुल बोला “आबे तू समझा नही. मैं किसी ऐसी वैसी मूवी की बात नही कर रहा हूँ. ये लड़का लड़की के सेक्स की मूवी है. मैने बड़ी
मुश्किल से इस मूवी का जुगाड़ किया है. तू भी देखेगा तो, खुश हो जाएगा.”

राहुल की ये बात सुनकर, मैं हैरानी से उसे देखने लगा. क्योकि कुछ समय पहले उसके बाप ने उसे इसी वजह से बहुत बुरी तरह से
पीटा था. लेकिन अपने बाप से पिटना राहुल के लिए कोई नयी बात भी नही थी.

राहुल का बाप बिल्कुल जल्लाद था और किसी भी बात पर राहुल को कूट दिया करता था. शायद यही वजह थी कि, राहुल अब बिल्कुल कूटेला हो गया था और उस पर अपने बाप की मार का कोई असर नही पड़ता था.

राहुल के बाप की वजह से असलम भी उसके घर जाने से कतराता था. शायद यही वजह थी कि, राहुल ने उस से अपने साथ चलने को
नही कहा था. मैं अभी यही सब सोच रहा था कि राहुल ने मुझे टोकते हुए कहा.

राहुल बोला “क्या हुआ.? तू क्या सोच रहा है.”

राहुल की बात सुनकर, मैने अपनी सोच से बाहर निकलते हुए कहा.

मैं बोला “तू अब ये नयी मुसीबत कहाँ से लेकर आ गया. पिच्छली बार तेरे बाप ने तेरी इन्ही हरकतों की वजह से तुझे कितना मारा था.
लेकिन लगता है की, तुझे उस मार से कोई फरक नही पड़ा है.”

राहुल बोला “अबे तू क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ रहा है. मुझे उस मार की तो याद ही मत दिला. मेरे बाप ने बिल्कुल रूई की तरह मुझे धुना था और महीने भर मेरी चौकीदारी करता रहा था.”

“लेकिन तू मेरे बाप की फिकर क्यो करता है. वो तो अभी अपने ऑफीस मे होगा और मम्मी अपनी सहेलियों के साथ मस्त होगी. हम
दोनो बड़े आराम से मेरे कमरे मे मूवी का मज़ा लेगे.”

“वैसे भी तूने आज तक ऐसी कोई मूवी नही देखी है. तुझे भी कुछ नया देखने और सीखने को मिल जाएगा. बाद मे यही सब तो हुमारे गर्लफ्रेंड के साथ मज़ा करने के लिए काम मे आएगा.”

राहुल की इस बात को सुनकर, मैने उसे फटकारते हुए कहा.

मैं बोला “तू अपना ये बेकार का सेक्स ज्ञान अपने ही पास रख. मुझसे इस सीखने मे कोई दिलचस्पी नही है. मुझे यदि ये सब सीखना
होगा तो, जब मेरी कोई गर्लफ्रेंड बनेगी, मैं उस से सीख लुगा. अब मैं चलता हूँ.”

राहुल बोला “आबे तुझे इतनी जल्दी क्या है. तुझे मूवी नही देखना है तो, मत देख. लेकिन कम से कम मेरे एक फुक्की मारने तक तो मेरे पास रुक जा.”

मैं उसकी इस बात का मतलब समझ गया और मैने उस से कहा.

मैं बोला “चल ठीक है. लेकिन ज़्यादा देर मत करना. मुझे जल्दी घर भी जाना है.”

राहुल बोला “ओके, तू अपनी गाड़ी उठा, तब तक मैं भी अपनी गाड़ी निकाल कर लाता हूँ.”

ये कहते हुए राहुल चला गया. मैं अपनी बाइक पर बैठा राहुल के आने का इंतेजार करने लगा. कुछ ही देर मे राहुल अपनी लुना मोप्ड लेकर आ गया और हम दोनो स्कूल से बाहर निकल आए.

हम दोनो अभी कुछ ही दूर पहुचे ही थे कि, राहुल अपनी लुना को तेज भगाने के लिए तेज़ी से पेडल मारने लगा. उसे ऐसा करते देख कर मैने उस से कहा.

मैं बोला “अबे जब तुझे इस लुना मे भी पेडल ही मारना पड़ते है तो, फिर तू इस खटारा को बेच कर एक अच्छी सी बाइसिकल क्यो नही ले लेता है.”

मेरी इस बात को सुनकर राहुल ने बड़े ही भोलेपन से कहा.

राहुल बोला “भाई, तू मेरी लुना को खटारा मत बोल. तू नही जानता कि, मेरे बाप ने इसी लुना पर ही कच्छे बनियान बेच कर इतना बड़ा बिज़्नेस खड़ा किया है.”

राहुल की इस बात को सुनकर, मैने उसे झिड़कते हुए कहा.

मैं बोला “चल बे, अपनी ये फालतू की एमोशनल स्टोरी सुनाकर किसी और को बेवकूफ़ बनाना. सीधे से क्यो नही कहता है कि, तेरा कंजूस बाप तुझे फूटी कोड़ी भी देने को तैयार नही होता है.”

मेरी इस बात पर राहुल ने खीजते हुए कहा.

राहुल बोला “कमिने जब तुझे सब मालूम है तो, क्यो मेरी लेने पर तुला रहता है.”

ऐसे ही बात करते करते हम स्कूल से थोड़ी ही दूरी पर बने बस स्टॉप के पास के एक पान, सिगरेट के स्टॉल पर पहुच गये. वहाँ पहुच कर हम ने अपनी गाड़ी खड़ी की और फिर स्टॉल पर आ गये. उस स्टॉल पर आकर राहुल बीड़ी खरीदने लगा. उसे बीड़ी खरीदते देख कर मैने उस से कहा.

मैं बोला “अबे ये क्या है.? तू सिगरेट से बीड़ी पर कब आ गया.”

राहुल बोला “मत पुच्छ भाई, ये लोंड़िया बाजी का चक्कर भी बहुत खराब है. जब से मेरा डॉली के साथ रिश्ता जुड़ गया है. तब से साला मेरी जेब का पैसे के साथ रिश्ता ही टूट गया है.”

राहुल की ये बात सुनकर, मैं चौंके बिना ना रह सका. मुझे अभी भी राहुल की इस बात पर यकीन नही आ रहा था. डॉली राहुल के ही पड़ोस मे रहती थी. राहुल ने ही एक बार मुझे डॉली को दिखाया था.

डॉली भी हमारी ही उमर की थी और सुंदर होने के साथ साथ बहुत ही सीधी साधी लड़की थी. वही राहुल की बदनामी का डंका तो
उसके अडोस पड़ोस लेकर हमारे स्कूल तक मे बजा करता था.

ऐसे मे राहुल की डॉली के साथ चक्कर चलने वाली बात मुझे हजम नही हो रही थी. इसलिए उसकी इस बात पर मैने चौंकते हुए कहा.

मैं बोला “अबे ये कब और कैसे हो गया. तूने पहले कभी मुझे इस बारे मे बताया क्यो नही.”

राहुल बोला “भाई, ये इसी महीने की बात है. लेकिन तू मुझे एक महीने से मिला ही कहाँ है. तू बस एक बार मुझे असलम के घर से लौटती समय ही मिला था. तब भी मई तुझे ये बात बताना चाहता था.”

“लेकिन तू जल्दी होने की बात बोल कर चला गया था. उसके बाद तेरे साथ हादसा हो गया. तब भी मैं तुझसे मिलने आया था. लेकिन तब
तू फिर से मुंबई जा चुका था. उसके बाद से अब तू मुझे मिल रहा है. फिर मैं तुझे ये बात कब बता देता.”
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09-11-2020, 02:19 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
अभी मैं राहुल से इस से आगे कुछ और पुच्छ पता की, वो अपनी बीड़ी को खोल कर उसकी तंबाकू बाहर निकालने लगा. मैं उसकी
इस हरकत को गौर से देखने लगा. उसने बीड़ी से तंबाकू निकाली और फिर अपने बॅग मे कुछ ढूँढने लगा.

फिर उसने बॅग मे एक पाउच निकाला और उस पाउच मे से कुछ निकाल कर बीड़ी मे भर दिया. इसके बाद उसने फिर उसमे थोड़ी
सी तंबाकू भरी और बीड़ी को बंद कर दिया. ये देख कर मैने उस से पुछा.

मैं बोला “अबे तूने बीड़ी मे ये क्या भरा है.”

राहुल बोला “भाई, ये भोले बाबा की बूटी है.”

मैं बोला “आबे, ज़्यादा पहेलियाँ मत बुझा और सीधे सीधे बता की, ये तूने बीड़ी मे क्या भरा है.”

राहुल बोला “ये गांजा है.”

राहुल की ये बात सुनकर मैं चौक गया और मैने उस पर भन्नाते हुए कहा.

मैं बोला “साले, मुझसे फुक्की मारने का बोल कर यहाँ गांजा पी रहा है. तेरी इन्ही हरकतों की वजह से तू बदनाम है.”

मगर तब तक राहुल अपनी बीड़ी जला चुका था. उसने वही बैठ कर, बीड़ी का एक लंबा कश लगाने के बाद मुझसे कहा.

राहुल बोला “अबे इसे पीकर हवा मे उड़ने का मज़ा आता है. यदि तुझे यकीन ना हो तो, तू भी एक कश लगा कर देख ले.”

मैं बोला “अपनी ये हरकत तू अपने तक ही रख. मुझे हवा मे उड़ने का कोई शौक नही है.”

मेरी इस बात पर राहुल ने मेरा मज़ाक उड़ाते हुए कहा.

राहुल बोला “जिसने ना चॅखी, गांजे की कली.
उस ळौन्डे से लौंडिया ही भली.”​

उसकी ये बात सुनकर, मैं उसे और भी ज़्यादा बकने लगा. लेकिन वो हंसते हुए बीड़ी के कश पर कश लगाए जा रहा था. उसे अपने मे
मस्त देख कर, मैं भी यहाँ वहाँ देखने लगा.

तभी एक आदमी उस स्टॉल पर मीठा पान लेने आया. उसे मीठा पान लेते देख कर, मुझे याद आया कि, छोटी माँ भी कभी कभी मीठा पान खाती है. लेकिन आज मेरी वजह से उनका मूड सही नही था.

ऐसे मे मेरे मन मे उसका मूड सही करने के लिए मीठा पान लेकर जाने का ख़याल आया. मैं अभी इस बारे मे सोच ही रहा था कि, तभी राहुल ने मुझे टोकते हुए कहा.

राहुल बोला “यार, ये अपने स्कूल का पटाखा माल कौन है. पीछे से देखने मे ये कितनी मस्त लग रही है.”

राहुल की बात सुनकर, मैने भी उस लड़की की तरफ देखा. वो हमारे ही स्कूल की कोई लड़की थी और हमारी तरफ उसकी पीठ थी. इसलिए राहुल उस लड़की का चेहरा नही देख पाया था.

वो लड़की बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतेजार कर रही थी और उसका चेहरा रोड के दूसरी तरफ था. राहुल बीड़ी का कश खीच रहा
था और मैं उस लड़की को पहचानने की कोशिश कर रहा था.

अचानक ही उस लड़की ने रोड की इस तरफ देखने के लिए अपना सर घुमाया और मुझे उसका चेहरा भी दिखाई दे गया. वो लड़की कोई और नही, बल्कि शिल्पा थी. शिल्पा का चेहरा देखते ही, मैने राहुल पर भड़कते हुए कहा.

मैं बोला “कमिने तू क्या पागल हो गया है. जो बिना सोचे समझे कुछ भी बके चले जाता है. वो लड़की कोई और नही, शिल्पा है.”

मेरी बात सुनकर, राहुल फिर से शिल्पा की तरफ देखने लगा. लेकिन तब तक शिल्पा रोड के दूसरी तरफ देखने लगी थी. जिस वजह
से राहुल को उसका चेहरा नज़र नही आ सका. लेकिन फिर भी राहुल ने अपनी ग़लती पर पछ्ताते हुए कहा.

राहुल बोला “सॉरी यार, मैने सच मे शिल्पा को पहचाना नही था. लेकिन तू मज़ाक मे भी ये बात उस हबसी को मत बता देना. वरना वो स्कूल मे मेरा जीना हराम कर देगा.”

“उपर से यदि उसने ये बात इसे बता दी तो, ये बिना देर किए ये बात अपनी मम्मी को बता देगी और इसकी मम्मी मेरे घर मे आकर मेरे बाप से मेरा बेंड बजवाने का पूरा इंतेजाम कर देगी.”

राहुल की ये बात सुनकर, मेरी हँसी छूट गयी और मैं पलट कर छोटी माँ के लिए मीठा पान खरीदने लगा. राहुल का मेहुल से इस तरह
से डरना बेवजह नही था. वो मेहुल की आदत अच्छे से जानता था.

मेहुल आए दिन शिल्पा की वजह से किसी ना किसी लड़के को पीट दिया करता था. इस वजह से सभी लड़के मेहुल से बहुत ज़्यादा ख़ौफ़ खाते थे और कोई शिल्पा के आस पास भी नही फटकता था.

वही राहुल भी कुछ कम नही था. आए दिन राहुल के किसी ना किसी लड़की को छेड़ने के क़िस्से सुनने को मिलते रहते थे. यहाँ तक कि
वो लड़कियों के टाय्लेट मे तान्क झाँक करते हुए भी पकड़ा जा चुका था.

दुनिया भर की सारी कमिनि हरकतें राहुल के अंदर भरी पड़ी थी. यही वजह थी, कि मेहुल उसे ज़रा भी पसंद नही करता था. मेहुल मेरे दोनो दोस्तों मे से सिर्फ़ असलम से ही बात किया करता था.

उसकी राहुल से कभी कोई बात नही होती थी. मेहुल राहुल को पसंद नही करता है. ये बात राहुल से भी छुपि नही थी. लेकिन राहुल के मेरा दोस्त होने की वजह से दोनो के बीच मे कभी कोई तकरार की नौबत नही आई थी.

फिर भी राहुल मेहुल से बहुत डरता था. वही दूसरी तरफ शिल्पा का घर राहुल के घर से कुछ ही दूरी पर था और शिल्पा की मम्मी का
भी राहुल के घर आना जाना था. इसलिए राहुल शिल्पा से भी डर कर रहता था.

मैं अभी राहुल की हरकतों के बारे मे सोचते हुए, पान लगवा ही रहा था कि, तभी राहुल ने मुझे टोकते हुए कहा.

राहुल बोला “अबे, तेरे लिए एक अच्छी खबर है. मैने भी मोबाइल ले लिया है.”

राहुल की इस बात पर के बार फिर मैने चौंकते हुए कहा.

मैं बोला “कमिने तूने मोबाइल ले लिया और मुझे एक कॉल तक नही किया. दिखा ज़रा कौन सा मोबाइल लिया है”

राहुल बोला “मोबाइल अभी मेरे पास नही है. वो मैने सिर्फ़ डॉली से बात करने के लिए खरीदा था. इसलिए उसे घर पर ही रखता हूँ और उसका नंबर भी अभी तक किसी को नही दिया है.”

मैं बोला “अबे तो क्या तू मुझे भी अपना मोबाइल नंबर नही देगा.”

राहुल बोला “भाई, तेरे लिए तो जान हाजिर है. मगर माँग मत लियो, क्योकि आज कल मैं डॉली को अपनी जान कहता हूँ.”

ये कह कर वो हँसने लगा और उसके साथ साथ मैं भी हंस दिया. अभी मैने पान लेकर अपनी जेब मे रखा ही था कि, राहुल ने मुझे टोकते हुए कहा.

राहुल बोला “अबे ये चिरकूट कौन है. लगता है कि, शिल्पा को परेशान कर रहे है.”

राहुल की बात सुनकर, मैं भी शिल्पा की तरफ देखने लगा. शिल्पा के सामने एक वाइट कलर की मारुति वॅन खड़ी थी और उसके पास ही दो लड़के खड़े होकर शिल्पा से कुछ बोल रहे थे.

उनकी बात सुनकर, शिल्पा यहाँ वहाँ देखने लगी. लेकिन उसकी नज़र अभी तक हम लोगों पर नही पड़ी थी. अचानक ही शिल्पा बहुत ज़्यादा गुस्से मे उन लड़को को कुछ बकने लगी. ये देखते ही मैने राहुल से कहा.

मैं बोला “आ चल ज़रा देखते है कि, क्या माजरा है.”

तब तक राहुल का बीड़ी पीना भी हो चुका था. मेरी बात सुनते ही वो उठ कर खड़ा हो गया और हम दोनो फ़ौरन ही शिल्पा के पास
पहुच गये. मैने शिल्पा के पास पहुचते ही, उस से पुच्छा.

मैं बोला “क्या हुआ.? क्या कोई परेशानी है.”

मुझे देखते ही, शिल्पा ने सारी बात बताते हुए कहा.

शिल्पा बोली “ये लोग बहुत देर से मुझे परेशान कर रहे है और बहुत गंदी गंदी बातें बोल रहे है.”

वो दोनो लड़के हम से उमर मे बहुत बड़े थे. लेकिन शिल्पा की ये बात सुनते ही, मुझे गुस्सा आ गया और मैने उन पर भड़कते हुए कहा.

मैं बोला “क्यो बे, क्या तुम्हारे घर मे माँ बहन नही है. जो दूसरों की बहन बेटियों के साथ छेड़ छाड़ करते हो.”

मेरी ये बात सुनते ही, उनमे से एक लड़के ने मुझे गाली बकते हुए कहा.

पहला लड़का “चल बे मादर चोद, निकल यहाँ से हमारे फटे मे टाँग मत अड़ा.”

उसके मूह से गाली सुनते ही, मेरा सबर का बाँध टूट गया और मैने उसके जबड़े पर एक जोरदार घुसा जमा दिया. ये देख कर, दूसरा
लड़का मेरी तरफ बढ़ा. लेकिन तब तक राहुल भी जोश मे आ चुका था.

उस दूसरे लड़के के मेरे पास आते ही राहुल ने उसकी गर्दन मे हाथ डाल कर उसे ज़मीन पर पटक दिया. तब तक पहला लड़का मेरे पास आया. मैने उसका भी वही हाल किया जो राहुल ने दूसरे लड़के का किया था.

दोनो लड़के ज़मीन पर पड़े थे और हम उन पर लात जूतों की बरसात कर रहे थे. तभी मारुति वॅन का दरवाजा खुला और उसमे से तीन लड़के और निकल आए. वो आते ही मेरे और राहुल के उपर झपट पड़े.

उन तीनो ने मुझे और राहुल को पकड़ लिया. तब तक वो दोनो लड़के भी उठ कर खड़े हो गये. उन दोनो लड़को ने हम दोनो के पेट
और चेहरे पर घूसों की बरसात कर दी. हमे पीटते देख कर, शिल्पा किसी को कॉल लगाने लगी.

हम उनकी पकड़ से छूटने की बहुत कोशिश कर रहे थे. लेकिन वो 5 लोग थे और हम पर भारी पड़ रहे थे. उन्हो ने हमे ज़मीन पर पटक दिया और बहुत बुरी तरह से हम दोनो को पिटाई करने लगे.

अभी हमारी पिटाई चल ही रही थी की, तभी हमारे पास एक पोलीस की जीप आकर रुकी. पोलीस की जीप को रुकते देख कर, राहुल ने चीखते हुए कहा.

राहुल बोला “सर हम लोगों को इनसे बचाईए.”

तभी उस जीप मे से प्रीतम दौड़ता हुआ हमारे पास आया और हमे उन लड़को से छुड़ाने लगा. प्रीतम को देख कर, उन लड़को ने हमे
पीटना बंद कर दिया था. लेकिन वो अभी भी गुस्से मे हमे देख रहे थे.

प्रीतम ने मुझे देखते ही पहचान लिया और फिर मुझसे इस झगड़े की वजह पुच्छने लगा. मैं प्रीतम को झगड़े की वजह बताने लगा. प्रीतम
से बात करते करते अचानक मेरी नज़र उसकी जीप की तरफ चली गयी.

प्रीतम की जीप मे वाणी दीदी बैठी हुई थी और हमारी तरफ ही देख रही थी. वाणी दीदी को अपने सामने देख कर, एक पल के लिए तो मेरी जान ही सूख गयी. लेकिन अगले ही पल मेरा हौसला भी दुगना हो गया.

क्योकि भले ही वाणी दीदी किसी से हमारा लड़ना झगड़ना पसंद नही करती थी. लेकिन एक सच ये भी था कि, उनके रहते कोई मुझे एक खरॉच तक नही पहुचा सकता था. फिर आज तो उन ने खुद इन लड़को को मुझे पीटते हुए देखा था.

ऐसे मे वाणी दीदी के गुस्से से इन लड़को के बच पाने की कोई उम्मीद नही थी. बस इसी बात ने मेरे अंदर से भी वाणी दीदी का डर निकाल कर मेरे हौसले को दुगना कर दिया था.
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